1
00:00:07,120 --> 00:00:11,360
आप कौन भाई बोल रहे हो? हिमांश नारायण द्विवेदी

2
00:00:11,360 --> 00:00:16,320
नाम है मेरा। हां नमस्कार भाई।

3
00:00:16,320 --> 00:00:20,400
सुभाष [गला साफ़ करने की आवाज़] भाई मेरा ये सवाल है कि जो निराकार शक्ति

4
00:00:20,400 --> 00:00:24,480
है ठीक है। तो निराकार शक्ति

5
00:00:24,480 --> 00:00:29,520
सर्वशक्तिमान है या साकार सर्व शक्तिमान है।

6
00:00:29,520 --> 00:00:33,600
व्यवहार में ना आ सकने वाला जो ईश्वर होता है वही निराकार शक्ति भी

7
00:00:33,600 --> 00:00:37,680
उसको कहते हैं जो सर्वत्र व्याप्त है और वही ईश्वर जब

8
00:00:37,680 --> 00:00:42,080
व्यवहार में आ सकने वाला होता है तो वो साकार हो जाता है

9
00:00:42,080 --> 00:00:46,160
तो फिर जो व्यवहार में जो ईश्वर नहीं है क्या वह शक्तिमान

10
00:00:46,160 --> 00:00:49,200
कहा जाएगा

11
00:00:49,200 --> 00:00:54,560
ये ठीक इस प्रकार से है कि जो पूर्ण होता है ना पूर्ण

12
00:00:54,560 --> 00:00:58,560
वो अपने हर रूप में पूर्ण ही होता है पूर्ण

13
00:00:58,560 --> 00:01:02,640
में समझ यानी कि वो शक्तिमान है। निराकार स्थिति में भी

14
00:01:02,640 --> 00:01:06,800
वो शक्तिमान है। आपका ये कहने का वो शक्तिमान का अर्थ

15
00:01:06,800 --> 00:01:11,440
पहले समझ लो क्या है? सभी कार्यों को करने में

16
00:01:11,440 --> 00:01:15,600
जिसकी गति हो वो सर्वशक्तिमान हो गया। तो जो वो

17
00:01:15,600 --> 00:01:19,680
जो साकार आपको दिखाई दे रहा है अगर आप

18
00:01:19,680 --> 00:01:24,160
उससे कहोगे कि भैया इसी समय आप अमेरिका में प्रकट होकर दिखाओ मुझे।

19
00:01:24,160 --> 00:01:28,160
तो वो दिखा देगा। अगर आप उससे कहोगे भैया पहाड़

20
00:01:28,160 --> 00:01:32,640
को उठा के दिखाओ इसी समय कहीं दूसरी जगह पर पहाड़ को उठा के दिखाओ तो देगा

21
00:01:32,640 --> 00:01:36,880
इससे सिद्ध होगा कि वो सर्वशक्तिमान है तो निराकार जो

22
00:01:36,880 --> 00:01:40,880
शक्ति है निराकार रूप में जो परमात्मा है

23
00:01:40,880 --> 00:01:45,120
जो ईश्वर है क्या व्यवहार में ना आने वाले रूप व्यवहार

24
00:01:45,120 --> 00:01:49,120
में ना आने वाले

25
00:01:49,120 --> 00:01:53,440
का विषय नहीं है व्यवहार में जो ना आने आने वाला जो

26
00:01:53,440 --> 00:01:59,200
ईश्वर है वो वो शक्तिमान है। आप इससे सहमत हो

27
00:01:59,200 --> 00:02:01,680
वो

28
00:02:01,680 --> 00:02:05,680
मौलिक स्वरूप है।

29
00:02:05,680 --> 00:02:09,840
कालिक स्वरूप है। मौलिक स्वरूप यानी प्रथम

30
00:02:09,840 --> 00:02:15,840
स्थिति परमात्मा की परमेश्वर की निराकार है। यही है ना?

31
00:02:16,800 --> 00:02:20,960
उसके बाद तो परमात्मा साकार में व्यवहार में न आ

32
00:02:20,960 --> 00:02:24,960
सकने वाला। मैं यही कह रहा हूं। प्रथम स्थिति ना निराकारी मान

33
00:02:24,960 --> 00:02:30,720
ले या कुछ उसके बाद सबसे पहले परमा

34
00:02:30,720 --> 00:02:35,600
जब वो व्यवहार में ना आ सकने वाला प्रवचनीय हो गया ना

35
00:02:35,600 --> 00:02:39,840
अगर हम कुछ ये भी शब्द दे रहे हैं तो ये भी तो वचन दे रहे है ना उसको वचन वचन

36
00:02:39,840 --> 00:02:44,160
के व्यवहार में आ रहा है तो इसलिए उसको कहते हैं व्यवहार में ना आ सकने वाला

37
00:02:44,160 --> 00:02:48,160
इंद्रियोंत है जो इंद्रियों का विषय नहीं मैं आप मैं आपकी

38
00:02:48,160 --> 00:02:52,160
बात को सुन चुका हूं आप वही बात कह रहे हो मैं ये कह रहा हूं

39
00:02:52,160 --> 00:02:56,160
जो परमात्मा निराकार स्थिति में है। यानी कि उसकी प्रथम

40
00:02:56,160 --> 00:03:00,240
स्थिति मूल स्वरूप उसका निराकार है। ये बात दूसरी

41
00:03:00,240 --> 00:03:04,240
है कि वो अन्य रूप बनाकर वो व्यवहार में आ जाता है। वो

42
00:03:04,240 --> 00:03:08,320
तो सेकंड स्थिति होगी। तो प्रथम स्थिति निराकार स्थिति

43
00:03:08,320 --> 00:03:12,400
है ना। मैं ये पूछ रहा हूं आपसे। हां बिल्कुल है।

44
00:03:12,400 --> 00:03:17,600
तो प्रथम स्थिति निराकार शक्तिमान है।

45
00:03:17,600 --> 00:03:21,680
बिल्कुल है। तो मुझे ये बताइए शक्तिमान

46
00:03:21,680 --> 00:03:25,920
का अर्थ ये होता है वो सब कुछ कार्य कर सकता है। तो गीता ज्ञान

47
00:03:25,920 --> 00:03:30,240
दाता ने गीता ज्ञान दाता ने ये

48
00:03:30,240 --> 00:03:34,560
गीता जी ने बोला है कि मैं जब धर्म की हानि होती है तो मैं प्रकट

49
00:03:34,560 --> 00:03:39,040
होता हूं। राम के रूप में या श्री कृष्ण के रूप में। आप

50
00:03:39,040 --> 00:03:43,440
ये इस बात को मानते हो आप? हां हां तो मैं

51
00:03:43,440 --> 00:03:45,760
मैं ये सवाल आपसे मेरा यह सवाल है क्या

52
00:03:45,760 --> 00:03:50,080
गीता ज्ञान दाता राम कृष्ण रूप में आकर वो अपनी शक्ति दिखा

53
00:03:50,080 --> 00:03:54,320
सकता है तो निराकार में क्यों नहीं दिखाई उसने इसका इसका सीधा

54
00:03:54,320 --> 00:03:58,400
सा अर्थ ये बनता है कि वो निराकार शक्ति समर्थ नहीं

55
00:03:58,400 --> 00:04:02,480
है क्योंकि उसको आकार में एक मिनट एक मिनट एक मिनट आपने आप देखो आप

56
00:04:02,480 --> 00:04:06,640
रिजल्ट मत दो आपने कहा क्यों नहीं दिखाई ठीक है

57
00:04:06,640 --> 00:04:11,680
क्यों नहीं दिखाई कहा है ना आपने वो क्यों क्यों नहीं

58
00:04:11,680 --> 00:04:15,840
क्यों नहीं दिखाई का मुझसे उत्तर ले लो क्यों

59
00:04:15,840 --> 00:04:19,920
नहीं दिखाई का उत्तर ले लो वो कैसे उन्होंने

60
00:04:19,920 --> 00:04:24,160
कहा मैं आपका प्रश्न मैं समझ गया आपका

61
00:04:24,160 --> 00:04:28,640
प्रश्न मैं समझ गया बार-ब आपका प्रश्न मैं समझ गया

62
00:04:28,640 --> 00:04:32,720
उत्तर ले लो पहली बात वो निराकार रहते हुए नहीं कर

63
00:04:32,720 --> 00:04:36,880
सकता ये कहां कहा उन्होंने निराकार रहते हुए

64
00:04:36,880 --> 00:04:41,360
नहीं कर सकता यह तो कहीं नहीं स्वीकार किया गया दूसरी कहीं

65
00:04:41,360 --> 00:04:45,440
पर दुष्टों का नाश हो रहा है, कहीं पर कुछ हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है,

66
00:04:45,440 --> 00:04:49,440
कोई मर रहा है। कोई बच्चों का शोषण करने वाला मर गया। उसको ये हो गया, वो

67
00:04:49,440 --> 00:04:53,440
हो गया। ये कौन सी शक्ति ने किया? निराकार रह

68
00:04:53,440 --> 00:04:57,600
के तो वो लगातार काम कर ही रहा है भाई सारे जो उसके करने

69
00:04:57,600 --> 00:05:01,200
के हैं। तो दुष्टों के लिए उसका सगुण

70
00:05:01,200 --> 00:05:05,200
साकार होकर प्रकट होना आवश्यक नहीं है। मगर वो धर्म की

71
00:05:05,200 --> 00:05:09,520
हानि के लिए सगुण साकार होकर प्रकट इसलिए होते हैं कि वो अपना एक ऐसा

72
00:05:09,520 --> 00:05:13,600
रूप प्रदान कर पाए जिस जो हमारी इंद्रियों की सीमा में

73
00:05:13,600 --> 00:05:17,840
आ पाए। मैंने कहा था ना व्यवहार में ना आ सकने वाला है पहला रूप तो तो

74
00:05:17,840 --> 00:05:21,840
हमारी इंद्रियों का जो विषय बन पाए जिसके कारण हम उसके प्रति आकर्षित

75
00:05:21,840 --> 00:05:26,160
हो पाए और जिसके कारण उसकी भक्ति करके हम मुक्ति पथ पे आगे बढ़ पाए

76
00:05:26,160 --> 00:05:30,640
तो साधु भक्तों के उद्धार के लिए उसमें क्या लिखा है

77
00:05:30,640 --> 00:05:34,800
अगली लाइन क्या लिखी है साधु भक्तों के उद्धार के लिए मैं

78
00:05:34,800 --> 00:05:38,800
प्रकट होता हूं तो वो जो अपना सगुण साकार स्वरूप

79
00:05:38,800 --> 00:05:43,040
बनाते हैं वो केवल यही नहीं है कि उससे किसी को किसी का अंत

80
00:05:43,040 --> 00:05:47,200
करना अंत तो वो केवल मन में शक्ति कर दे और हो जाए तब भी हो

81
00:05:47,200 --> 00:05:51,280
सकता है। केवल मन में संकल्प करे हो जाएगा। उसके

82
00:05:51,280 --> 00:05:55,840
लिए उसको प्रकट होने की जरूरत थोड़ी ना है। मगर वो ऐसी लीलात्मक गतिविधि

83
00:05:55,840 --> 00:06:00,080
में इनवॉल्व होता है जिससे कि व्यक्ति की चाह का विषय बन सके। इंद्रियों

84
00:06:00,080 --> 00:06:04,160
की सीमा में आ सके। जिससे कि व्यक्ति उसके बारे में बात कर सके। उसके बारे

85
00:06:04,160 --> 00:06:08,160
में सोच सके। उसके बारे में चिंतन कर सके। क्योंकि भगवत गीता

86
00:06:08,160 --> 00:06:12,560
में ही लिखा हुआ है कि जब हम किसी चीज का चिंतन करते हैं तो उसके प्रति हम आसक्त

87
00:06:12,560 --> 00:06:16,320
होते हैं और आसक्त होते हैं तो जब वो आसक्ति पूर्ण

88
00:06:16,320 --> 00:06:20,400
नहीं होती है तो हमें क्रोध आता है। जब क्रोध आता है तो हमारी जो

89
00:06:20,400 --> 00:06:24,880
निर्णायक क्षमता है वो प्रभावित होती है। गलत निर्णय होते हैं जिसका परिणाम दुष्परिणाम

90
00:06:24,880 --> 00:06:28,880
हमारे जीवन में हमें झेलना पड़ता है। तो जब हम ईश्वर का चिंतन

91
00:06:28,880 --> 00:06:32,960
नहीं करेंगे तो हम किसका करेंगे? माया का भौतिक पदार्थों का। जिन

92
00:06:32,960 --> 00:06:36,960
पदार्थों का चिंतन करने के लिए गीता में मना किया गया है कि जिसको कहा गया है

93
00:06:36,960 --> 00:06:41,040
कि जो जो है त्रिगुण त्रिगुण तीन गुणों की जो

94
00:06:41,040 --> 00:06:45,200
भक्ति करते हैं जिसके नाम पर आपके जो गुरुदेव है वो

95
00:06:45,200 --> 00:06:49,200
ये कहते थे कि भैया यहां तो ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने का मना कर

96
00:06:49,200 --> 00:06:53,920
दिया गया। वहां पर कहा गया जो भौतिक पदार्थ होते हैं सतज और तमोगुणी

97
00:06:53,920 --> 00:06:57,920
कुल मिलाकर के सत रज या तम से बने होते हैं। तो भौतिक पदार्थों की भक्ति

98
00:06:57,920 --> 00:07:02,160
जो करने हैं वो नहीं करनी चाहिए। तो ये

99
00:07:02,160 --> 00:07:06,400
यहां पर उसी चीज की काट है। काट क्या है? कि जब हम

100
00:07:06,400 --> 00:07:10,480
ईश्वर का चिंतन नहीं कर रहे हैं तो हम किसका कर रहे हैं? ईश्वर का

101
00:07:10,480 --> 00:07:14,560
चिंतन तो लगातार करेंगे। जैसे गीता में यह बात भी कही गई

102
00:07:14,560 --> 00:07:18,720
है कि भैया आप एक क्षण के लिए भी बिना कुछ कर्म

103
00:07:18,720 --> 00:07:22,720
किए नहीं रह सकते। इसलिए शास्त्र सम्मत कर्म सदैव करते रहो। ये

104
00:07:22,720 --> 00:07:26,720
क्यों कहा गया है? क्योंकि अगर हम चिंतन भी अगर ईश्वर का नहीं करेंगे तो

105
00:07:26,720 --> 00:07:30,800
हम किसी ना किसी का तो करेंगे। और यदि करेंगे तो फिर हम

106
00:07:30,800 --> 00:07:31,440
उसके प्रति

107
00:07:31,440 --> 00:07:35,520
आकृष्ट होंगे, आकृष्ट होंगे, आसक्ति आएगी और प्राप्त ना हो पाने की

108
00:07:35,520 --> 00:07:39,760
स्थिति में क्रोध आएगा। क्रोध से निर्णायक क्षमता प्रभावित हो जाएगी। यह

109
00:07:39,760 --> 00:07:43,920
सारी चीजें हैं। इसलिए भगवान ऐसा स्वरूप धारण करते हैं जो

110
00:07:43,920 --> 00:07:47,920
कि हमारे चिंतन का विषय बन सके। हम उनकी घटनाएं याद कर सके। ऐसे

111
00:07:47,920 --> 00:07:51,920
मारा था, वैसे मारा था, ऐसे हुआ था, वैसे हुआ था। इस कारण से सत

112
00:07:51,920 --> 00:07:56,080
का चिंतन करने के कारण हमारी उसके प्रति आसक्ति हो। आसक्ति होने

113
00:07:56,080 --> 00:08:00,080
के कारण भौतिक पदार्थों के चिंतन से हम बचे और मुक्ति पथ पर आगे

114
00:08:00,080 --> 00:08:04,160
बढ़ सके। तो आप यह बताइए कि क्या

115
00:08:04,160 --> 00:08:09,040
हमें निराकार परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए? उसमें

116
00:08:09,040 --> 00:08:13,760
श्रद्धा होनी चाहिए या साकार में होनी चाहिए? साकार

117
00:08:13,760 --> 00:08:18,160
निराकार में यदि श्रद्धा में फलदायक है या साकार में फलदायक

118
00:08:18,160 --> 00:08:22,480
है? वो गीता में आंसर दिया गया है निराकार की भक्ति कठिन है।

119
00:08:22,480 --> 00:08:25,840
फलदायक दोनों है।

120
00:08:25,840 --> 00:08:30,000
इंद्रियों इंद्रियातीत होने के कारण वो भक्ति कठिन है।

121
00:08:30,000 --> 00:08:34,240
फलदायक दोनों है। तो इसका मतलब ये बताइए गीता ज्ञान

122
00:08:34,240 --> 00:08:38,560
दाता ये कह रहा है कि परम शांति की खोज कर वो परम शांति यानी कि

123
00:08:38,560 --> 00:08:43,040
अरे यार पहले तुम सर्व शक्तिमान का सही करो ना। तुम क्या मानते हो? सर्वशक्तिमान

124
00:08:43,040 --> 00:08:46,800
सर्व शक्तिमान नहीं है। सर्व शक्तिमान

125
00:08:46,800 --> 00:08:51,120
है। पहली बात तो हां पहले सही करो

126
00:08:51,120 --> 00:08:55,440
निराकार स्थिति में सिद्ध नहीं हो रहा बताओ

127
00:08:55,440 --> 00:08:58,160
ना

128
00:08:58,160 --> 00:09:00,400
शक्तिमान

129
00:09:00,400 --> 00:09:04,560
भाई मेरी बात सुनो सुनो निराकार शक्ति में वो सर्वशक्तिमान सिद्ध

130
00:09:04,560 --> 00:09:08,720
नहीं हो रहा क्योंकि उसको रूप बनाना पड़ रहा है और जो कि

131
00:09:08,720 --> 00:09:12,800
मुझे बनाना पड़ रहा है बिना बनाए भी तो मैं प्रकट

132
00:09:12,800 --> 00:09:16,320
हो रहा हूं बिना बनाया

133
00:09:16,320 --> 00:09:20,400
मैं प्रकट हो रहा हूं एक मिनट

134
00:09:20,400 --> 00:09:24,400
एक मिनट एक मिनट एक मिनट उसमें उसमें यह लिखा

135
00:09:24,400 --> 00:09:28,480
है क्या कि मैं जो है प्रकट हुए बिना कोई काम नहीं कर सकता भाई

136
00:09:28,480 --> 00:09:33,520
मैं जब देखता हूं धर्म की हानि देखता हूं तो मैं प्रकट होता हूं पूछ रहा हूं ना

137
00:09:33,520 --> 00:09:37,520
देखो मैं पूछ रहा हूं साकार रूप में आकर उन्होंने कार्य

138
00:09:37,520 --> 00:09:41,760
किए रामकृष्ण के रूप में राक्षसों को भी मारा और भक्तों का भी उद्धार किया

139
00:09:41,760 --> 00:09:45,840
तो मैं आपसे ये पूछ रहा हूं निराकार स्थिति में ऐसे कौन से कार्य किए जो हम

140
00:09:45,840 --> 00:09:49,920
भी माने कि हां ये कार्य निराकार स्थिति में भी कर सकता है। यानी कि वो

141
00:09:49,920 --> 00:09:53,920
सर्वशक्तिमान अर्जित हो सकता है। ये बताओ आज तक आज तक

142
00:09:53,920 --> 00:09:59,280
कोई व्यक्ति अपनी मौत मरा है क्या? दुष्ट व्यक्ति

143
00:09:59,280 --> 00:10:01,920
कोई व्यक्ति अपनी मौत मरा है क्या? आज तक

144
00:10:01,920 --> 00:10:06,000
तुम्हारी जानकारी में जिसमें भगवान भगवान मौत नहीं

145
00:10:06,000 --> 00:10:10,160
मरा तो उसको मारने के लिए साकार उद्धारण तो करना पड़ा ना निराकार को। अरे

146
00:10:10,160 --> 00:10:14,240
मैं मैं पूछ तो रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं ना भाई कि आज तक

147
00:10:14,240 --> 00:10:19,280
कोई व्यक्ति अपनी मौत मरा है क्या? बिना भगवान के आए।

148
00:10:19,280 --> 00:10:23,440
अरे भाई बिल्कुल मरा मरा है।

149
00:10:23,440 --> 00:10:27,600
कैसे मरा? वो कैसे मरा वो विषय

150
00:10:27,600 --> 00:10:31,680
अलग है। बात इसकी अरे अलग कैसे भाई? अलग कैसे हो गया? अलग

151
00:10:31,680 --> 00:10:35,760
कैसे हो गया? अलग कैसे? जब भगवान साकार स्वरूप में नहीं आए तब भी

152
00:10:35,760 --> 00:10:39,760
वो मरा ना। कोई दुष्ट व्यक्ति वो कैसे मरा? बताओ। कौन सी शक्ति थी वहां

153
00:10:39,760 --> 00:10:44,400
पे? तो वो भगवान आकर उसको मारे गया क्या?

154
00:10:44,400 --> 00:10:48,640
अरे तुम अब तुम बातें मत घुमाओ। मुझे ये बताओ कोई भी दुष्ट व्यक्ति आज तक मरा

155
00:10:48,640 --> 00:10:53,920
है भगवान के आए बिना साकार स्वरूप के बिना कि नहीं मरा है?

156
00:10:53,920 --> 00:10:58,000
बिल्कुल मैं अब हो गया आपका हो

157
00:10:58,000 --> 00:11:03,040
गया। अब हो गया इसका जवाब दो पहले।

158
00:11:03,040 --> 00:11:07,040
अरे तुमने दुष्ट व्यक्ति अपने मरा। दुष्ट व्यक्ति जैसे

159
00:11:07,040 --> 00:11:11,040
उदाहरण ले लिए ना। रावण दुष्ट व्यक्ति था। मैं रावण की

160
00:11:11,040 --> 00:11:15,360
बात नहीं कर रहा हूं। रावण वगैरह को सबको छोड़ दो। मैं कह रहा हूं

161
00:11:15,360 --> 00:11:19,440
मैं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं तुम्हारी जानकारी में आधुनिक काल

162
00:11:19,440 --> 00:11:23,440
में आज के टाइम में कोई दुष्ट व्यक्ति बिना भगवान के प्रकट

163
00:11:23,440 --> 00:11:27,440
हुए मरा कि नहीं मरा? बहुत मरे भी है और नहीं भी मरे।

164
00:11:27,440 --> 00:11:31,760
मरे हैं तो जो मरे हैं उनमें कौन सी शक्ति से मरे हैं वो? तो यहां पर यहां पर

165
00:11:31,760 --> 00:11:35,920
परमात्मा को कैसे सिद्ध कर दिया कि उसे निराकार ने वो कार्य कर रहे हैं।

166
00:11:35,920 --> 00:11:40,640
अच्छा तो मतलब की अपने आप अपने आप को ही एक और शक्ति मानते हो तुम।

167
00:11:40,640 --> 00:11:45,200
एक और शक्ति मानते हो परमात्मा के अलावा उसका

168
00:11:45,200 --> 00:11:49,280
जो लोगों को मार रही है वो निराकार शक्ति जो आप कह

169
00:11:49,280 --> 00:11:53,360
रहे हो जिस शक्ति के आधार से वो दुष्ट व्यक्ति मर रहा है अब इनका

170
00:11:53,360 --> 00:11:57,360
हो गया इनका हो गया ये ये जो है अब ये कह रहे हैं कि हम

171
00:11:57,360 --> 00:12:01,520
लोग हम लोग जो जो दुनिया में और मौतें हो रही हैं

172
00:12:01,520 --> 00:12:05,600
जो कुछ हो रहा है जो संहार हो रहा है दुष्टों का पाप का अंत हो

173
00:12:05,600 --> 00:12:09,600
रहा है कर्मों के फल की सजा मिल रही है वह तो यह सिद्धि नहीं हो रहा कि भगवान कर

174
00:12:09,600 --> 00:12:15,280
रहे समझ गए? अरे भाई निराकार

175
00:12:15,280 --> 00:12:19,280
मतलब इसका मतलब इसका मतलब एक मिनट एक मिनट एक

176
00:12:19,280 --> 00:12:25,280
मिनट इसका मतलब आप सर्वाधार नहीं मानते हो भगवान को।

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00:12:25,440 --> 00:12:28,560
हेलो

178
00:12:28,560 --> 00:12:32,640
क्या? हां इसका मतलब मानते हो

179
00:12:32,640 --> 00:12:36,800
भगवान को। मैं कह रहा हूं

180
00:12:36,800 --> 00:12:40,800
मैंने मैंने अपना उत्तर दे दिया मैं पूछ रहा हूं

181
00:12:40,800 --> 00:12:44,560
अब मैं पूछ रहा हूं

182
00:12:44,560 --> 00:12:48,560
अरे मैं इसीलिए पूछ रहा हूं सर्धार है

183
00:12:48,560 --> 00:12:52,560
भगवान की नहीं है मतलब की दुनिया में

184
00:12:52,560 --> 00:12:55,360
होने वाली हवा

185
00:12:55,360 --> 00:13:01,280
उसका कंट्रोलर है उसका कंट्रोलर है जैसे का

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00:13:01,280 --> 00:13:05,520
राजा तो साकार हुआ ना यानी कैसे यानी

187
00:13:05,520 --> 00:13:09,600
कि जो दुष्ट मरा उसके कंट्रोल में मरा उसकी

188
00:13:09,600 --> 00:13:14,160
पाप से बिल्कुल मरा पर वो साकार में तो बैठा है ना तो निराकार कैसे करेगा

189
00:13:14,160 --> 00:13:18,560
अरे तुम तो कह रहे हो उससे नहीं मरा

190
00:13:18,560 --> 00:13:23,360
साबित कैसे होता है तुम कह रहे हो कि हो गया अब उसी से मारा नहीं

191
00:13:23,360 --> 00:13:29,360
अरे ये पागल हो गया है ये व्यक्ति पागल हो गया हटाओ इसको

192
00:13:30,960 --> 00:13:35,040
अभी कह रहा था कि ये सिद्ध कैसे होगा कि भगवान ने किया। अब खुद ही कह

193
00:13:35,040 --> 00:13:39,040
रहा था भगवान के कंट्रोल से हुआ। तो भगवान अपने सारे

194
00:13:39,040 --> 00:13:43,040
कार्य बिना सगुण साकार रूप में प्रकट होते हुए भी

195
00:13:43,040 --> 00:13:47,360
करते हैं। कर सकते हैं। और गीता में उन्होंने ये नहीं कहा मैं विवश

196
00:13:47,360 --> 00:13:51,680
हूं। धर्म की हानि होने के टाइम पर प्रकट होने के लिए मैं विवश हूं। मगर

197
00:13:51,680 --> 00:13:55,840
मैं मैं प्रकट होता हूं। साधु भक्तों के उद्धार के लिए जिससे कि

198
00:13:55,840 --> 00:14:00,160
उसका चिंतन करके व्यक्ति पद पर आगे बढ़ सके।

199
00:14:00,160 --> 00:14:04,160
इच्छा से प्रकट होता नहीं है वो मन में संकल्प

200
00:14:04,160 --> 00:14:08,480
ले लेंगे तब भी हो जाता

201
00:14:08,480 --> 00:14:12,720
प्रेरणा भी करनी है ना लोगों को ये पगलू क्या है

202
00:14:12,720 --> 00:14:16,720
ये पगलू ये पगलू फस कहां पे रहे मालूम है इनका पागलपन क्या है इनका

203
00:14:16,720 --> 00:14:20,800
पागलपन यहां पे है कि ये कह

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00:14:20,800 --> 00:14:24,800
रहे हैं कि कबीर की शक्ति सर्वत्र व्याप्त है जो काम करती रहती है अगर कबीर

205
00:14:24,800 --> 00:14:28,800
सगुण साकार में प्रकट हो भी ना तब भी मतलब कबीर अगर यहां पे नहीं

206
00:14:28,800 --> 00:14:31,600
है तो उसकी

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00:14:31,600 --> 00:14:36,000
है। मगर वहीं पर अगर हम यह कहे कि भाई निराकार

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00:14:36,000 --> 00:14:40,000
शक्ति के रूप में सारे काम कर रहा है तो ईश्वर का काम नहीं

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00:14:40,000 --> 00:14:44,240
है। ये तो अपनी मौत मर गया। समझ रहे हो? ये पागलपन इनका और

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00:14:44,240 --> 00:14:48,240
अगर हम ये कहेंगे कि उसकी शक्ति सब

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00:14:48,240 --> 00:14:52,240
जगह फैली है और सब काम हो रहे हैं। तो ये कहेंगे हां ये कबीर का काम

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00:14:52,240 --> 00:14:56,320
है। समझ रहे हो? भले ही अगर कबीर एक

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00:14:56,320 --> 00:15:00,400
जगह बैठा हुआ है, तो फिर उसके आसपास की जगह किसने बनाई?

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00:15:00,400 --> 00:15:04,480
अगर कबीर एक जगह बैठा हुआ है, क्या उसका पूरा

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00:15:04,480 --> 00:15:08,640
नियंत्रण पूरे संसार पर नहीं है? बातों को रिपीट करने से बातें सही

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00:15:08,640 --> 00:15:12,720
नहीं सिद्ध हो जाती है। जी बिल्कुल।

217
00:15:12,720 --> 00:15:18,720
जी।

218
00:15:24,870 --> 00:15:28,870
[संगीत]
