1
00:00:01,960 --> 00:00:06,240
[घंटी की आवाज़] दीदी सबसे पहले मैं

2
00:00:06,240 --> 00:00:10,480
जानना चाहूंगा कि जो ये हम सुनते हैं मुरली

3
00:00:10,480 --> 00:00:14,640
ब्रह्मा कुमारीज जब हम जाते हैं तो ये मुरली क्या है?

4
00:00:14,640 --> 00:00:18,720
आपने ना शुरुआत में ही बहुत लास्ट वाला क्वेश्चन पूछ लिया। बहुत अच्छा

5
00:00:18,720 --> 00:00:22,880
लगा मुझे कि आप मुरली जानते हैं। जी। हमारे यहां जब

6
00:00:22,880 --> 00:00:27,280
भी कोई आता है तो उसका एडमिशन जो होता है वो सेवन डेज मेडिटेशन

7
00:00:27,280 --> 00:00:31,680
बेसिक कोर्स होता है। एक जो मेडिटेशन कोर्स होता है सेवन डेज का हम आफ्टर

8
00:00:31,680 --> 00:00:35,840
सेवन डेज हम लोग भगवान के महावाक्य सुनते हैं। उसे

9
00:00:35,840 --> 00:00:39,920
ही मुरली कहते हैं। सेवन डेज का जो बेसिक कोर्स है वो भी हम

10
00:00:39,920 --> 00:00:44,000
लोग में से किसी ने कोई रिसर्च थीसिस नहीं किया। कैसे भगवान

11
00:00:44,000 --> 00:00:48,000
आकर के ज्ञान देते हैं? भैया

12
00:00:48,000 --> 00:00:52,000
लोगों को लगता है कि जब भगवान आएंगे तो कुछ मिरेकल हो जाएगा। वो कोई जादू

13
00:00:52,000 --> 00:00:56,480
की छड़ी लेकर के आएंगे, घुमाएंगे और सब कष्ट दूर हो जाएंगे। हम पर भगवान

14
00:00:56,480 --> 00:01:00,800
विधि विधाता है। वो विधि से स्टेप बाय स्टेप चलने वाले हैं।

15
00:01:00,800 --> 00:01:04,960
अच्छा। वो हमें जीवन को प्रैक्टिकल जीना सिखाते हैं। तो

16
00:01:04,960 --> 00:01:09,040
वो जब आते हैं तो वो आकर के हमें स्टेप बाय स्टेप आप आप

17
00:01:09,040 --> 00:01:13,440
कौन हो? आपका सत्य परिचय। अभी आपने कहा कि आप अपना परिचय दीजिए।

18
00:01:13,440 --> 00:01:17,200
तो मैंने तो इस कॉस्ट्यूम का परिचय दिया। जी। इसके पहले भी मेरा अस्तित्व

19
00:01:17,200 --> 00:01:21,200
है। तो डे बाय डे फर्स्ट चैप्टर, सेकंड चैप्टर नो योर

20
00:01:21,200 --> 00:01:25,360
रियल सेल्फ। फिर आपका सोलमेट कौन है? हम तो ये सारा ज्ञान भी

21
00:01:25,360 --> 00:01:29,440
ईश्वर ने ही दिया। जी। भगवान ने अर्जुन को पढ़ाया

22
00:01:29,440 --> 00:01:33,680
था। हनुमान जी ने श्री राम जी की भक्ति नहीं की थी। आरती

23
00:01:33,680 --> 00:01:37,760
नहीं उतारी थी। लेकिन वो जब कहते थे तो वो कहना मानते थे।

24
00:01:37,760 --> 00:01:41,840
हम तो ईश्वर आकर के पढ़ाते हैं। भगवान समझ देते हैं। आप

25
00:01:41,840 --> 00:01:45,920
देखिएगा भैया घर में अगर हमारे कोई दुखी परेशान होता है ना वो

26
00:01:45,920 --> 00:01:50,080
पता है क्या कहते हैं? बार-बार उस तंग करता है। तो हम कहते हैं हमारे घर में कोई एक व्यक्ति

27
00:01:50,080 --> 00:01:54,320
समझदार बन जाए ना तो मेरे घर में सुख शांति आ जाए। तो सुख

28
00:01:54,320 --> 00:01:58,320
शांति खुशी का आधार क्या है? समझदारी चीजों की प्राप्ति नहीं।

29
00:01:58,320 --> 00:02:02,400
तो ज्ञान के सागर परमात्मा जो हमें ज्ञान देते हैं जो हम रोज

30
00:02:02,400 --> 00:02:07,040
उनकी वाक्यों को पढ़ते हैं उसी को हम मुरली कहते हैं। आज अगर

31
00:02:07,040 --> 00:02:11,200
9 तारीख है आज 9 तारीख है ना जी तो नाइंथ जनवरी की

32
00:02:11,200 --> 00:02:15,360
मुरली हमारे विश्व के जितने सेंटर्स हैं सब पर एक ही चैप्टर

33
00:02:15,360 --> 00:02:19,440
और हर व्यक्ति उसी चैप्टर से समझता है कि आज भगवान ने मुझे क्या इशारा दिया

34
00:02:19,440 --> 00:02:23,440
है करने के लिए जो मेरी कल की समस्या थी उसका कैसे सॉर्ट

35
00:02:23,440 --> 00:02:27,440
आउट करना है उसकी भी तरीका उसमें बताया जाता है तो उसी को मुरली कहते हैं

36
00:02:27,440 --> 00:02:31,520
यानी ज्ञान के अस्त्र शस्त्र अच्छा यानी कि एक ईश्वर [गला साफ़ करने की आवाज़]

37
00:02:31,520 --> 00:02:32,240
के विषय में

38
00:02:32,240 --> 00:02:36,560
ज्ञान ईश्वर के विषय ईश्वर कैसा है क्या है और दूसरा यह कि

39
00:02:36,560 --> 00:02:40,560
हमें अब ईश्वर को प्राप्त कैसे करना है? ईश्वर फिर हमसे क्या चाहते

40
00:02:40,560 --> 00:02:45,120
हैं? जी भैया अभी हम जब मंदिर गए, हमने भगवान को प्रेयर किया

41
00:02:45,120 --> 00:02:49,600
तो मंदिर में भगवान हमसे बात करते हैं। हम भगवान की सुन के आते हैं क्या?

42
00:02:49,600 --> 00:02:53,600
हम तो सिर्फ मंदिर में अपना बोल के आते हैं। सुन के तो नहीं आते।

43
00:02:53,600 --> 00:02:57,680
और हम कहते यह है कि हम भगवान की मर्जी से चल रहे हैं या सब कुछ भगवान

44
00:02:57,680 --> 00:03:01,680
की मर्जी से हो रहा है। हम हमें तो भगवान की मर्जी का पता भी नहीं है ना कि भगवान

45
00:03:01,680 --> 00:03:05,760
की मर्जी क्या है? तो मुरली मतलब भगवान की मर्जी। तो एक है

46
00:03:05,760 --> 00:03:09,760
भगवान के बारे में जानना। फिर मुरली मतलब भगवान अब कह रहे हैं कि आपको

47
00:03:09,760 --> 00:03:13,760
अब डे टू डे लाइफ में करना क्या है? कैसे चलना है? यानी कि भगवान की

48
00:03:13,760 --> 00:03:17,840
वाणी ही मुरली है। तो ये मतलब वाणी किसी शास्त्र में लिख

49
00:03:17,840 --> 00:03:21,840
के आपके पास है या आकाशवाणी जैसा कुछ है जो होता

50
00:03:21,840 --> 00:03:25,840
है। क्या है ये? भगवान जो अपना ज्ञान सुनाते हैं।

51
00:03:25,840 --> 00:03:30,320
भैया ये मतलब ऐसा चैप्टर है ना कि हम इसको लास्ट डे बोलते हैं।

52
00:03:30,320 --> 00:03:34,560
हमारा जो सिलेबस में है ना सबसे लास्ट चैप्टर आपने पूछ लिया। मुझे मुझे आपने मुरली

53
00:03:34,560 --> 00:03:38,640
सुना कहां से? किसके बारे किससे सुना ये वर्ड? मुरली आपके कई सारे YouTube

54
00:03:38,640 --> 00:03:43,040
चैनल्स वगैरह उस पर बात होती है। जी एक महावाक्य

55
00:03:43,040 --> 00:03:47,280
है भगवान के मुझे अपना रथ नहीं है।

56
00:03:47,280 --> 00:03:51,440
कौन सा रथ? घोड़ेगाड़ी वाला रथ नहीं। मुझे अपना शरीर रूपी

57
00:03:51,440 --> 00:03:55,520
रथ नहीं है। मैं अजन्मा हूं। अकाया हूं। लेकिन

58
00:03:55,520 --> 00:03:59,520
मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए मुझे पर काया प्रवेश करना पड़ता

59
00:03:59,520 --> 00:04:03,600
है। पर काया मतलब किसी और की काया में। और जिसकी कथा

60
00:04:03,600 --> 00:04:07,840
में प्रवेश करता हूं वह साधारण बुजुर्ग रथ होता है। तो इसी

61
00:04:07,840 --> 00:04:12,000
कारण मुझे कोटों में कोई विरला पहचान पाते हैं। तो भगवान ने ये महावाक्य

62
00:04:12,000 --> 00:04:16,080
बोले तो जिस शरीर में आकर के भगवान जी ज्ञान सुनाते हैं उस वक्त

63
00:04:16,080 --> 00:04:20,320
कुछ नहीं हो रहा होता भैया। आज के समय में प्रिंट मीडिया आ गया तो उधर

64
00:04:20,320 --> 00:04:24,480
भगवान वाणी चलाते हैं और इधर हम तुरंत तुरंत प्रिंट मीडिया से सब जगह

65
00:04:24,480 --> 00:04:28,560
पहुंच जाते हैं। अच्छा जब पहले के समय में दादियां वगैरह थी तब तो कुछ भी नहीं

66
00:04:28,560 --> 00:04:32,560
था। हम तो कार्बन कॉपी उधर भगवान के महावाक्य चल रहे होते

67
00:04:32,560 --> 00:04:36,560
थे और दादियां बैठकर के कार्बन लगा के लिख रही होती थी तो मतलब किसी

68
00:04:36,560 --> 00:04:40,720
के शरीर में भगवान को प्रादुर्भाव होता है और फिर वो जो

69
00:04:40,720 --> 00:04:44,800
बोलते हैं वो हमारा धर्म ब्रह्म का निर्णय होता है जी

70
00:04:44,800 --> 00:04:49,120
अच्छा चलिए अब एक उस पे आते हैं कि जो हमने

71
00:04:49,120 --> 00:04:54,000
मुरली की जो व्याख्या सुनी अभी

72
00:04:54,000 --> 00:04:58,320
ये जैसे हम कहते हैं कि सनातन सिद्धांत धर्म

73
00:04:58,320 --> 00:05:02,320
की बात नहीं कर रहा क्योंकि आप आपने जो डेफिनेशन बताई उसमें शायद आप इस्लाम को भी

74
00:05:02,320 --> 00:05:06,400
धर्म कहते हैं और उसको भी धर्म कहते ही हैं। सब दैहिक धर्म हो गया।

75
00:05:06,400 --> 00:05:10,400
सब धर्म है। तो अभी मैं इसलिए मैं उसको धर्म नहीं

76
00:05:10,400 --> 00:05:14,400
कह रहा हूं। तो ये

77
00:05:14,400 --> 00:05:18,400
जैसे हमने कहा कि सनातन सिद्धांत हमारे सिद्धांत सनातन है कि

78
00:05:18,400 --> 00:05:22,480
नहीं? हम सनातनी है कि नहीं? ये आप मुझे बताइए।

79
00:05:22,480 --> 00:05:26,480
सनातन का मतलब एवरलास्टिंग जो कभी खत्म नहीं होने वाला। जो कभी

80
00:05:26,480 --> 00:05:30,560
शुरू भी नहीं हुआ है। जी। ठीक है? तो जो कभी शुरू नहीं हुआ और जो कभी

81
00:05:30,560 --> 00:05:34,800
खत्म नहीं होने वाला वह सनातन चीज क्या है? सुख, शांति, पवित्रता,

82
00:05:34,800 --> 00:05:38,880
खुशी। ये सारी चीजें हमें एवरलास्टिंग चाहिए ही चाहिए। जो

83
00:05:38,880 --> 00:05:43,280
नास्तिक जैसे अभी आपने कितना सुंदर कहा आप उनको भी ऐसे काउंटर कर ले तो चाहिए ना।

84
00:05:43,280 --> 00:05:47,280
तो ये चीजें कभी खत्म होने वाली नहीं। जी। हमारे देवी देवताएं, देव

85
00:05:47,280 --> 00:05:51,520
आत्माएं कभी चैतन्य में थे। आज उनकी जड़

86
00:05:51,520 --> 00:05:55,680
मूर्तियों की भी पूजा हो रही है। यानी उनका यादगार हमेशा रहेगा। क्यों?

87
00:05:55,680 --> 00:05:59,760
वैल्यूस के आधार पर, मूल्यों के आधार पर, चरित्र के आधार

88
00:05:59,760 --> 00:06:03,840
पर उनका जीवन था। तो सनातन मतलब जो आत्मा से जुड़ा हुआ है,

89
00:06:03,840 --> 00:06:07,840
वह हमेशा के लिए हो जाएगा। शरीर से जुड़ा हुआ मेरा पोस्ट, मेरा

90
00:06:07,840 --> 00:06:09,200
पोजीशन तो

91
00:06:09,200 --> 00:06:13,440
लोगों को याद करना पड़ता है और कुछ समय के बाद हमको भुला भी दिया जाएगा। लेकिन वैल्यूस

92
00:06:13,440 --> 00:06:17,680
के आधार पर देव आत्माओं से लेकर के चाहे विवेकानंद जी को तक को देख लीजिए।

93
00:06:17,680 --> 00:06:21,920
जिन्होंने अपने जीवन को वैल्यूस पर स्टैंड किया वो एवरस्टिंग

94
00:06:21,920 --> 00:06:26,080
हो जाते हैं। नहीं नहीं ये तो आप सही कह रही हैं। मैं एक्चुअली मेरा जो प्रश्न

95
00:06:26,080 --> 00:06:30,160
था थोड़ा सा अलग था। जैसे हर हम यह

96
00:06:30,160 --> 00:06:34,560
जानते हैं कि आत्मा को कभी मारा नहीं जा सकता। नैन चिंदती शस्त्राण

97
00:06:34,560 --> 00:06:38,800
नैन धति पाव ना चैनम क्ले शोष मारता। आत्मा

98
00:06:38,800 --> 00:06:42,960
को कभी नहीं मारा जा सकता और ना ही आत्मा कभी जन्म लेती है।

99
00:06:42,960 --> 00:06:47,040
और क्या कहते हैं? प्रकृति वह भी सनातन

100
00:06:47,040 --> 00:06:51,120
है और परमेश्वर भी सनातन है। तो यह तो हो गया कि हम हम

101
00:06:51,120 --> 00:06:55,520
सनातन हैं। मगर आज के टाइम में जैसे हमारे जो सिद्धांत

102
00:06:55,520 --> 00:06:59,600
हैं जिनको हम फॉलो कर रहे हैं। यह करना है। यह नहीं करना

103
00:06:59,600 --> 00:07:03,680
है। यह सिद्धांत ब्रह्माकुमारीज के सनातन है। यानी कि

104
00:07:03,680 --> 00:07:07,760
सनातन सिद्धांत को मानता है या ऐसे सिद्धांतों को मानता मानता

105
00:07:07,760 --> 00:07:12,080
है जो बदलते हैं जिनका कहीं पे चालू हो रहा है, कहीं पे खत्म हो रहा है। सनातन

106
00:07:12,080 --> 00:07:16,240
सिद्धांत है। ब्रह्माकुमारी के या सनातन सिद्धांत नहीं है। देखिए ये हर जगह दो

107
00:07:16,240 --> 00:07:20,400
चीजें होती है। एक होता है जो हमेशा वही चलते हैं और एक होता है टाइम के अकॉर्डिंग

108
00:07:20,400 --> 00:07:24,240
हमको फ्लेक्सिबल होना पड़ता है। टाइम के अकॉर्डिंग अब फॉर एग्जांपल अगर

109
00:07:24,240 --> 00:07:28,800
आप सनातन सिद्धांत का कह रहे हैं सुबह उठने की इसको सिद्धांत मानते हैं आप?

110
00:07:28,800 --> 00:07:33,360
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। उठना ये सिद्धांत ही है। सिद्धांत अमृतवेला

111
00:07:33,360 --> 00:07:37,360
इसे हम लोग अमृतवेला कहते हैं। तो अमृतवेला उठना खानपान

112
00:07:37,360 --> 00:07:41,760
की शुद्धता हमारे खानपान की शुद्धता होनी चाहिए। स्पेशली

113
00:07:41,760 --> 00:07:45,760
हम लोग जो यहां पर रहने वाले जो हम लोग अनमैरिड हैं सेलबसी की

114
00:07:45,760 --> 00:07:49,760
पालना ब्रह्मचर्य व्रत की पालना यह हम लोगों को जो यहां रहते हैं उनके

115
00:07:49,760 --> 00:07:54,640
लिए है क्लास में हमारे आने वालों को बताया सब कुछ जाता है जितना

116
00:07:54,640 --> 00:07:58,640
जितना कर सकते हैं तो ये कुछ चीजें बाकी गुण शक्तियां

117
00:07:58,640 --> 00:08:02,640
है टाइम के अकॉर्डिंग जैसे आप भी कहते हो कि कई बार हमारा

118
00:08:02,640 --> 00:08:06,720
झूठ अगर किसी को बचाने के लिए हो रहा है तो सत्संग वो आपातकालीन धर्म

119
00:08:06,720 --> 00:08:11,600
वो वो तो ये ये दोनों चीज़ ऐसी उसकी व्यवस्था भी कर दी गई यस

120
00:08:11,600 --> 00:08:15,600
तो जैसे आपने भैया ये कहा ना कि आज के यूथ्स क्यों नहीं मानते हैं? भगवान को

121
00:08:15,600 --> 00:08:20,080
क्यों नास्तिक है? तो मुझे अभी एक थॉट और आया कि कहीं ना कहीं हम लोगों ने स्पिरिचुअलिटी

122
00:08:20,080 --> 00:08:24,080
को बहुत टिपिकल बना दिया। मतलब बहुत ज्यादा हम लोगों ने क्या कर दिया

123
00:08:24,080 --> 00:08:28,240
कि एक तो है कि बच्चों को वैल्यूस बताना कि ये नहीं करना नहीं ये नहीं करना

124
00:08:28,240 --> 00:08:32,240
तुमने पूजा नहीं किया तो ऐसा हो गया। आज तुमने ये नहीं किया। तो उनको ऐसा लगता है कि

125
00:08:32,240 --> 00:08:36,480
एक तो लाइफ ऐसे ही इतनी डिफिकल्ट इतनी टफ है। उसमें से एक चीज यह भी इतनी टफ

126
00:08:36,480 --> 00:08:39,360
टफ बता दी जाती है। तो कहीं ना कहीं मुझे ऐसा लगता

127
00:08:39,360 --> 00:08:43,600
है कि हम लोगों ने भगवान को बहुत मुश्किल पाना बता दिया है। भगवान

128
00:08:43,600 --> 00:08:47,600
तो बहुत ऊंची चीज होती है। उनको पाना ही मुश्किल है और अगर उनको पा लिया

129
00:08:47,600 --> 00:08:51,600
तो वो ये ये करना करने के लिए कह देंगे जो शायद तुम कर भी नहीं पाओगे। तो

130
00:08:51,600 --> 00:08:55,760
मुझे ऐसा लगता है कि आजकल युवक इसीलिए भाग रहा है कि वो अपने रोज के काम तो कर नहीं

131
00:08:55,760 --> 00:09:00,560
पा रहा है। उसको लग रहा है भगवान से जुड़ गए तो मुझे चार काम और एक्स्ट्रा बता दिए जाएंगे।

132
00:09:00,560 --> 00:09:04,720
हमें यहां क्यों हमने इसको ज्वाइन किया भैया? अभी आपने देखा एक छोटा भैया वो भी यहां पर

133
00:09:04,720 --> 00:09:08,960
कर रहा था। हम हम लोग बचपन से क्यों आ गए यहां पर? बहुत इजी

134
00:09:08,960 --> 00:09:13,040
तरीका बताया गया। स्पिरिचुअलिटी को बहुत इजी हमें सुबह कभी उठने

135
00:09:13,040 --> 00:09:17,120
के लिए भी फोर्स नहीं किया गया। हमें कहा गया आपको दिन में जब

136
00:09:17,120 --> 00:09:21,280
मौका मिले आप 1 मिनट के लिए भगवान जी से बात कर लो। सिर्फ हमको ये

137
00:09:21,280 --> 00:09:25,360
आप जब जगे हो तब आप 1 मिनट के लिए भगवान जी से बात कर लो।

138
00:09:25,360 --> 00:09:29,840
आप चार्ज हो जाओगे। फिर जो अच्छा होगा वो अपने आप करने लगोगे।

139
00:09:29,840 --> 00:09:34,480
और ये हमने फील किया भैया हमने क्या फील किया? हम करते थे एक मैगनेट का मेडिटेशन।

140
00:09:34,480 --> 00:09:38,560
आज की डेट में पिछले 25 सालों से एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ

141
00:09:38,560 --> 00:09:42,720
जब हम सुबह 3:30 बजे नहीं उठते और विलिंगली उठते हैं। जैसे पहले

142
00:09:42,720 --> 00:09:46,800
पिक्चर देखने का क्रेज होता था ना। अब ब्रह्म मुहूर्त का क्रेज होता है। तो इजी हो

143
00:09:46,800 --> 00:09:51,440
गया। वो एक्चुअली भगवान ने कहा ना कि तू मेरी शरण में आजा। मैं देखूंगा

144
00:09:51,440 --> 00:09:55,600
तेरी प्राप्ति और प्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। तो

145
00:09:55,600 --> 00:09:59,600
एक्चुअली मैं ये कहना चाह रहा था कि आपकी जो ये जो जो मुरली है

146
00:09:59,600 --> 00:10:03,920
जो धर्म ब्रह्म की व्याख्या करती है जो डेली आती है ये

147
00:10:03,920 --> 00:10:08,160
आ रही है इसका प्रादुर्भाव हो रहा है और ईश्वर आकर के दे रहे हैं

148
00:10:08,160 --> 00:10:13,680
तो फिर ये जो आपका जो यह चीज है यह सनातन तो है नहीं

149
00:10:13,680 --> 00:10:17,680
भैया मैं ये तो कह रही हूं ना कि आपने प्रश्न ऐसा पूछ लिया ये ऐसे चल

150
00:10:17,680 --> 00:10:22,160
रहा है सर्किल में तो हमने एक चक्र तो समझा ही नहीं है एक रेपुटीशन

151
00:10:22,160 --> 00:10:26,400
भी है हम इसीलिए इसीलिए हम लोग चैप्टर वन चैप्टर टू डे बाय डे कराते

152
00:10:26,400 --> 00:10:30,400
हैं। आपने मतलब क्योंकि आप YouTube पे देख करके आए हो ना तो आपने पहला प्रश्न

153
00:10:30,400 --> 00:10:34,480
ही वह वाला पूछा है जो नहीं नहीं ऐसा है वह नाम बड़ा अट्रैक्ट करता है मुरली मुरली

154
00:10:34,480 --> 00:10:38,480
और कोई बात नहीं चाहिए भैया मुरली का मतलब है जो मन को हल्का कर दे

155
00:10:38,480 --> 00:10:42,560
आज के समय में कौन सा ऐसा एडवाइजर है जो मेरे मन को हल्का करे हम

156
00:10:42,560 --> 00:10:46,720
मैं आपको अपना दुखड़ा सुना के शेयरिंग करके मुझे लगता है कि हल्का हो गया

157
00:10:46,720 --> 00:10:50,720
लेकिन मेरा गम तो कम नहीं कर दिया ना आपने इवन कई बार तो मुझे ये भी टेंशन हो जाता है कि

158
00:10:50,720 --> 00:10:54,880
देखो ये मेरा कहीं फैला ना दे मैंने इसको बता तो दिया अपनी इतनी प्राइवेट बातें एक चार

159
00:10:54,880 --> 00:10:59,040
लोगों को सुनाना दे जी मुरली मुरली का मतलब भगवान से बातें भगवान हमें

160
00:10:59,040 --> 00:11:03,120
गाइड कर रहे हैं कि आपकी इस प्रॉब्लम का सशन ऐसे हो जाएगा तो मन

161
00:11:03,120 --> 00:11:07,520
हल्का हो गया हम तो इसीलिए जो आपने पूछ लिया ना प्रादुर्भाव ये एक्चुअल में सनातन

162
00:11:07,520 --> 00:11:10,640
है ये आपको लग रहा है अभी आ रहा है नहीं ये पहले

163
00:11:10,640 --> 00:11:14,640
भी आ चुका है अभी फिर आ रहा है हिस्ट्री रिपीट्स

164
00:11:14,640 --> 00:11:18,880
इटसेल्फ कहते हैं ना भैया हम तो इसी तरीके का कुछ है कि भगवान

165
00:11:18,880 --> 00:11:23,120
ने कहा एक चीज है जो रिपीट हो रही है एक आइडेंटिकली रिपीटीशन अच्छा

166
00:11:23,120 --> 00:11:27,200
उस रेपीटीशन के अकॉर्डिंग अभी आपको लग रहा है कि अभी आ रहा यह बार-बार आया और

167
00:11:27,200 --> 00:11:31,360
आता रहेगा। तो यह जो पहले आया है मतलब यह जो इसका कोई

168
00:11:31,360 --> 00:11:35,360
प्रमाण कि जैसे [गला साफ़ करने की आवाज़] प्रूफ

169
00:11:35,360 --> 00:11:39,440
कि जैसे पहले भी आ चुका है। आज आपने पहले ही शो में

170
00:11:39,440 --> 00:11:43,920
ऐसा प्रश्न पूछा है तो मैं आपसे यही कहूंगी क्योंकि

171
00:11:43,920 --> 00:11:48,240
हम इसको इस प्रश्न का उत्तर जब हमारे क्लास वाले भी जब हमारे कोर्स करने वाले आते हैं ना

172
00:11:48,240 --> 00:11:52,320
और वो पूछते हैं तो हम उनसे कहते हैं आज नहीं 7 दिन के बाद आपको अपने आप इसका

173
00:11:52,320 --> 00:11:56,320
आंसर मिलेगा। लेकिन क्योंकि आप हमसे पूछ रहे हैं तो मैं सिर्फ आपसे एक

174
00:11:56,320 --> 00:12:00,320
प्रश्न का प्रश्न पूछ रही हूं कि क्या आपने कभी ऐसा फील किया है? कई बार आपको

175
00:12:00,320 --> 00:12:04,560
ऐसा लगा है कि कोई सीन हमारी लाइफ में ऐसा हो रहा है। बहुत जरूरी नहीं कि बहुत विशिष्ट

176
00:12:04,560 --> 00:12:08,640
हो। सिंपल चीजें कुछ ऐसी चीज ऐसा लगता है जैसे पहली बार भी

177
00:12:08,640 --> 00:12:12,720
ऐसे हो चुका है। ऐसा पहले भी मेरे साथ हुआ है। पर्टिकुलर कोई कपड़े

178
00:12:12,720 --> 00:12:16,960
की ड्रेस, कोई एक डायलॉग मैं मान लेता हूं। हां हुआ होगा। बिल्कुल

179
00:12:16,960 --> 00:12:21,040
तो इसीलिए मैं आपको ये बता रही हूं। प्रमाण आपने कहा ना तो इसका पहला प्रमाण

180
00:12:21,040 --> 00:12:25,200
अभी के आपके क्वेश्चन के हिसाब से सिर्फ इतना ही है कि अगर मुझे कभी यह लगा

181
00:12:25,200 --> 00:12:25,840
है कि

182
00:12:25,840 --> 00:12:29,840
नहीं ये वाली चीज तो मैंने पहले भी कभी देखी है कब देखी है मगर मत

183
00:12:29,840 --> 00:12:33,840
जाइए वो mp3 घूम गई है ये सॉलिड है इसलिए सॉलिड नहीं है भैया क्योंकि

184
00:12:33,840 --> 00:12:37,840
मैंने कहा ना आपने लास्ट क्वेश्चन पहले दिन ही पूछ डाला है इसको फर्स्ट

185
00:12:37,840 --> 00:12:41,920
शो में हमने ये पूछ लिया आपने अब अगर हम इसको हम चैप्टर वाइज डे बाय डे

186
00:12:41,920 --> 00:12:45,920
शुरू करेंगे ना तो आपको ये प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी इसका आंसर आपको खुद ब

187
00:12:45,920 --> 00:12:50,000
खुद मिलेगा जी हम लोग जब बात करते हैं समय की मतलब

188
00:12:50,000 --> 00:12:54,320
हम शास्त्रों पर बहुत ज्यादा रिलाई नहीं करते वेद है जो वेद आयते

189
00:12:54,320 --> 00:12:58,400
हैं जो वेदों से चला हमारा फिर क्यों नहीं करते

190
00:12:58,400 --> 00:13:02,480
हैं शास्त्रों ने ही तो हमको बांध करके रखा तो शास्त्र में तो दिया गया है ये सब पहले

191
00:13:02,480 --> 00:13:06,480
रिपीट हो चुका है दोबारा आ रहा है सिंपल बस मगर उसमें ये नहीं दिया है जो मुरली आती है इस

192
00:13:06,480 --> 00:13:11,360
तरह से जो आज आ रही है जो इस तरह से ये देखो भैया देखो शास्त्र

193
00:13:11,360 --> 00:13:15,520
लिखा किसने भगवान ने नहीं लिखा है लिखा इंसान ने तो

194
00:13:15,520 --> 00:13:19,600
इंसान ने और हर व्यक्ति ने अलग-अलग लिख डाला है नहीं कुछ आपने लिखा कुछ

195
00:13:19,600 --> 00:13:23,600
मैंने जो वेद है उसको तो श्रुति कहते हैं ना ईश्वर की वाणी वाणी तो है लेकिन लिखा फिर

196
00:13:23,600 --> 00:13:27,760
किसने उस समय तो प्रिंट मीडिया नहीं था ना किसी ने तो लिखा होगा ये ऐसे

197
00:13:27,760 --> 00:13:32,000
है जैसे आपकी जैसे जिसे आप मुरली कह रहे हैं यहां

198
00:13:32,000 --> 00:13:36,080
से हजारों किलोमीटर दूर जहां मतलब यहां पे शायद माउंट आबू

199
00:13:36,080 --> 00:13:40,080
में मुरली आती है तो वहां पे जो जिस शरीर में आ

200
00:13:40,080 --> 00:13:41,120
रही है जी उसके

201
00:13:41,120 --> 00:13:45,280
अलावा किसी व्यक्ति ने उसको नोट किया है जी तो उनके लिए वो

202
00:13:45,280 --> 00:13:49,280
ये कह सकते हैं कि ये भगवान की वाणी है कि नहीं जी जी वो भी ये कह सकते

203
00:13:49,280 --> 00:13:53,280
हैं कि भगवान की वाणी तो आपने प्रश्न क्या किया कि उसमें लिखा हुआ

204
00:13:53,280 --> 00:13:57,440
है वेद में कि ऐसा पहले भी हो चुका है। जब शास्त्र पे हम लोग जाते

205
00:13:57,440 --> 00:14:01,520
हैं तो उसमें क्या कहते हैं उसमें ये सब चीजें हैं कि

206
00:14:01,520 --> 00:14:05,920
जो हमारी सृष्टि है वो एक बार नहीं कई बार बनी है। इसीलिए

207
00:14:05,920 --> 00:14:10,080
कभी सृष्टि का निर्माण देवी तत्व के द्वारा हुआ, कभी विष्णु

208
00:14:10,080 --> 00:14:14,560
तत्व के द्वारा हुआ, कभी शिव तत्व के द्वारा हुआ। वो भगवान की अपनी मर्जी कि किस रूप में

209
00:14:14,560 --> 00:14:18,640
किस रूप में अपने आप को ख्यापित कर रहे हैं। तो ये तो ये बात हो गई।

210
00:14:18,640 --> 00:14:22,640
फिर आपने ये कहा ना कि मगर वो ईश्वर ने नहीं लिखे

211
00:14:22,640 --> 00:14:26,800
हैं। वो लिखे तो इंसानों ने ही है। तो ये मुरली भी तो इंसानों ने ही लिखी है। वो

212
00:14:26,800 --> 00:14:30,880
मैंने कहा ना कार्बन कॉपी से एज इट इज वहां पर क्या

213
00:14:30,880 --> 00:14:34,960
हुआ भैया? वहां पर अमेरिका में जो व्यक्ति नहीं वहां पर समय का डिफरेंस नहीं हुआ। तुरंत तुरंत चल

214
00:14:34,960 --> 00:14:39,120
रहा है। इधर आप डिक्टेट करो। इधर मैं लिख रही हूं। कितना भी कर ले। किसी ना किसी को किसी ना किसी

215
00:14:39,120 --> 00:14:43,200
पे विश्वास तो करना ही पड़ेगा। बिल्कुल करना पड़ेगा। ये नहीं कह रहे हैं। जैसे आपने कहा ना व्हाट इज

216
00:14:43,200 --> 00:14:47,360
द डिफरेंस? नहीं आप कह रहे हो उसमें भी लिखा हुआ है वह भी इंसान ने लिखा और

217
00:14:47,360 --> 00:14:51,440
आपके यहां भी जिन्होंने लिखा वह भी इंसान ने लिखा तो फिर वह भी ऐसा कह सकते हैं उसमें

218
00:14:51,440 --> 00:14:55,440
यह समय का डिफरेंस है आज से इधर सुनाया जा रहा है और इधर लिखा जा रहा है समय का

219
00:14:55,440 --> 00:14:56,240
डिफरेंस ऐसे है

220
00:14:56,240 --> 00:15:00,320
कि आज से 10 साल पहले जो मुरली आई होगी वो हो गया समय का

221
00:15:00,320 --> 00:15:04,480
डिफरेंस उनके लिए भाई उस समय में तो कई लोग ऐसे होंगे जो हाथ जोड़ रहे हैं

222
00:15:04,480 --> 00:15:08,480
मगर वो 10 साल पहले की मुरली भी उनको माननी होगी लेकिन लिखा तो किसी और जिसने जिसने

223
00:15:08,480 --> 00:15:12,480
ये हमको पता है कि ये तभी लिखा गया जब सामने बैठा था सामने

224
00:15:12,480 --> 00:15:16,880
सामने विश्वास करना पड़ेगा। पड़ेगा। करना विश्वास पड़ेगा। वहां विश्वास करना पड़ेगा।

225
00:15:16,880 --> 00:15:20,880
जैसे हम लोग वहां पर क्योंकि क्वेश्चन उठा रहे हैं। ये बात बहुत समय पहले की

226
00:15:20,880 --> 00:15:24,880
नहीं है। नहीं नहीं हमारे सामने भी ऐसे लोग हैं जिन्होंने लिखते हुए

227
00:15:24,880 --> 00:15:28,960
देखा। मगर उन्होंने बोलते हुए देखा। मगर मैं कह रहा हूं कि

228
00:15:28,960 --> 00:15:33,040
अगर इस दुनिया में अगर 10 लाख लोग भी ब्रह्माकुमारी से जुड़े हैं।

229
00:15:33,040 --> 00:15:37,280
उन 10 लाख ने नहीं देखा तो जो बाकी रह जाएंगे जिन्होंने नहीं देखा

230
00:15:37,280 --> 00:15:41,440
है वो ये क्वेश्चन कर सकते हैं कि भाई देखा तो वो जो है वहां

231
00:15:41,440 --> 00:15:45,440
पर ट्रस्ट ही आएगा। आस्था ही आएगी। तो तो जैसे हम ये काउंटर कर रहे हैं कि वो

232
00:15:45,440 --> 00:15:49,440
लिखा तो इंसानों ने। देखिए भैया अगर मैं आपसे कहूं कि

233
00:15:49,440 --> 00:15:53,520
वेदों को आपने किसी को लिखते हुए बोलते हुए नहीं देखा होगा। हम इतना

234
00:15:53,520 --> 00:15:57,520
कह सकते हैं कि हमने भगवान को बोलते हुए इन्हीं आंखों से देखा है। तो

235
00:15:57,520 --> 00:16:01,600
किसी शरीर में आके ना होता है ना कि मैंने देखा। मैंने देखा। किसी शरीर में आके किसी

236
00:16:01,600 --> 00:16:05,600
ने देखा होगा। उन्होंने मुझे बताया था मैंने विश्वास कर लिया। नहीं जैसे आपने मुझे कहा ना

237
00:16:05,600 --> 00:16:09,920
मैंने देखा। आप पर मुझे विश्वास होना चाहिए। नहीं तो विश्वास करने की मार्जिन

238
00:16:09,920 --> 00:16:11,280
थोड़ी तो बढ़ जाती है ना भैया।

239
00:16:11,280 --> 00:16:15,360
एक है कि आपने भी नहीं देखा, मैंने भी नहीं देखा। हमें किसी ने बताया था। नहीं लेकिन अभी

240
00:16:15,360 --> 00:16:19,360
मैं सामने बोल रही हूं कि नहीं मैंने जो वेद जो वेद शास्त्र है हमारे वेद या

241
00:16:19,360 --> 00:16:23,440
जो भी शास्त्र है वो आते हैं गुरु शिष्य परंपरा से। तो

242
00:16:23,440 --> 00:16:27,760
गुरु ने अपने शिष्य को दिए शिष्य ने फिर अपने शिष्य को दिए। तो जो

243
00:16:27,760 --> 00:16:31,760
ले रहा है पिछले वाले से उसको इस पर विश्वास है। और ये ले रहा है इससे

244
00:16:31,760 --> 00:16:36,080
तो इसको इस पर विश्वास है। ऐसे ही आपकी भी कर रहे हैं। ऐसे ही मुरली

245
00:16:36,080 --> 00:16:40,240
भी होती है। भाई जो बहुत सारे ऐसे होंगे जो

246
00:16:40,240 --> 00:16:44,240
सिर्फ उनके पास पहुंच रहा है। वो देख नहीं रहे हैं। मगर वो उनको ट्रस्ट अभी जो आ

247
00:16:44,240 --> 00:16:48,240
रहे हैं वो ऐसे ही आ रहे हैं। अभी जो आ रहे हैं तो वो तो कुछ नहीं देख रहे हैं। लेकिन ट्रस्ट पे ही

248
00:16:48,240 --> 00:16:52,480
आ रहा है और एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। पहले हम पर ट्रस्ट किया फिर जो सुनाया उसको एक्सपेरिमेंट

249
00:16:52,480 --> 00:16:56,640
किया और उनको अच्छा लगा तो समझ में आ गया दिस इज राइट। तो अब यह

250
00:16:56,640 --> 00:17:00,640
बात आती है कि हम यह काउंटर नहीं करना चाहिए कि वो किसी भगवान ने

251
00:17:00,640 --> 00:17:04,880
नहीं बोले वो तो नोट डाउन किए हैं। अच्छा मैं ये कह रहा था

252
00:17:04,880 --> 00:17:09,200
एक क्वेश्चन यहां पे और पुट अप होता है और यह बड़ा इंटरेस्टिंग क्वेश्चन

253
00:17:09,200 --> 00:17:13,200
है कि ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया

254
00:17:13,200 --> 00:17:17,200
है। इस दुनिया में अच्छाई है तो उसका कारण ईश्वर

255
00:17:17,200 --> 00:17:21,440
है और इस दुनिया में अगर बुराई है तो उसका कारण भी ईश्वर है।

256
00:17:21,440 --> 00:17:26,080
अगर कुछ अच्छा हो रहा है तो उसका कारण भी ईश्वर है। अंततोत्वा बिल्कुल फाइनली

257
00:17:26,080 --> 00:17:26,580
जो

258
00:17:26,400 --> 00:17:30,560
बेस है तो ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया है। अगर बकरी

259
00:17:30,560 --> 00:17:35,680
को ईश्वर ने बनाया है तो शेर को भी ईश्वर ने ही बनाया है।

260
00:17:35,680 --> 00:17:39,760
तो की रचना प्रकृति की रचना अच्छा

261
00:17:39,760 --> 00:17:42,320
मैं मैं इसको बाद में ले लूंगा। ये यहां

262
00:17:42,320 --> 00:17:46,400
से हो जाएगा। जैसे कि हमने ये जाना ना कि व्यक्ति जब

263
00:17:46,400 --> 00:17:50,480
अपने जो ये साइंस है विज्ञान है इससे जब वो

264
00:17:50,480 --> 00:17:54,720
पार नहीं पा पाता है अपने जीवन में सुख और इसकी तभी उसके जीवन

265
00:17:54,720 --> 00:17:59,360
में यहां पर आ रहा है कि भाई ईश्वर है। है ना? तो

266
00:17:59,360 --> 00:18:03,360
यहां से हुआ यह कि एक सर्वशक्तिमान सत्ता है।

267
00:18:03,360 --> 00:18:07,360
जहां सब कुछ फेल हो जाता है मगर वो सब कुछ भी कर सकती है। उसी

268
00:18:07,360 --> 00:18:11,520
के होने के कारण उसको एक संतोष रहता है कि मैं भाई ईश्वर को भज लूंगा

269
00:18:11,520 --> 00:18:15,520
तो मेरा जो है कल्याण चाहे बिल्कुल विपदा बिल्कुल खड़ी

270
00:18:15,520 --> 00:18:19,520
हो आपने आप प्रलय खड़ी हो सामने मगर उसको वो ईश्वर जो है वो

271
00:18:19,520 --> 00:18:23,600
इस प्रलय को भी रोक सकता है। है ना? इसीलिए आपने जैसे कहा कि उसको

272
00:18:23,600 --> 00:18:27,840
थैंक गॉड निकला निकल जीतने के बाद जैसे हम जो नास्तिक को संतुष्ट कर पाते

273
00:18:27,840 --> 00:18:31,920
तो इससे करते हैं कि तेरे अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान

274
00:18:31,920 --> 00:18:36,000
है। तो इस अगर तेरे अंदर सतचित आनंद की चाह है तो

275
00:18:36,000 --> 00:18:40,000
इसका मतलब कोई दुनिया में सतचित आनंद है। अगर तेरे मन में भी ये आ

276
00:18:40,000 --> 00:18:44,320
रहा है कि बारिश थोड़ी कम हो जाए। नास्तिक के मन में भी आता है मुझे जाना है जल्दी तो बारिश

277
00:18:44,320 --> 00:18:48,480
थोड़ी कम हो जाए। यानी वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है। उसके

278
00:18:48,480 --> 00:18:52,720
मन में भी आता है धूप थोड़ी कम हो जाए। यानी वह धूप को भी कंट्रोल करने वाला बन

279
00:18:52,720 --> 00:18:56,720
कभी-कभी आता है मैं भविष्य देख लूं। नास्तिक भी सोचता है कल इंडिया पाकिस्तान में कौन

280
00:18:56,720 --> 00:18:57,520
जीतेगा? ऐसा

281
00:18:57,520 --> 00:19:01,600
नास्तिक भी सोच लेता है। यानी कि वो भविष्य देखने वाला ही बन बनना चाहता है। तो

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00:19:01,600 --> 00:19:05,760
हम जब यह ईश्वर को ईश्वर के एकिस्टेंस को प्रूव ही इससे कर पा रहे हैं

283
00:19:05,760 --> 00:19:10,400
कि वो व्यक्ति हर तरह के प्राकृतिक नियमों से

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00:19:10,400 --> 00:19:14,480
परे हो जाने का सोच रहा है। तो उसकी इस चाह का जो सब्जेक्ट है

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00:19:14,480 --> 00:19:18,000
वो वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान है। सच्चिदानंद स्वरूप

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00:19:18,000 --> 00:19:22,240
परमेश्वर। जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर की वाणी

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00:19:22,240 --> 00:19:26,320
मुरली के रूप में डेली आती है तो जो हमारे वेदादी

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00:19:26,320 --> 00:19:30,320
शास्त्र है वो यह नहीं कहते कि उनको ईश्वर ने रचा है। हमारे

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00:19:30,320 --> 00:19:34,400
वेदादी जो शास्त्र हैं वो यह कहते हैं कि हम अपौरुषय हैं। हमको ईश्वर

290
00:19:34,400 --> 00:19:38,400
ने रचा नहीं है। हम ईश्वर की सांस के रूप में सदैव विद्यमान थे।

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00:19:38,400 --> 00:19:43,040
इसका कारण मैं बताऊंगा आपको। क्योंकि जो

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00:19:43,040 --> 00:19:47,680
हम दो तरह के कार्य करते हैं। एक चाहकर और एक बिना चाहकर।

293
00:19:47,680 --> 00:19:51,760
तो जब हम चाह के कुछ करते हैं तो उसमें हमारी बुद्धि इन्वॉल्व हो जाती है।

294
00:19:51,760 --> 00:19:55,760
तो हम निर्णय ले सकते हैं हम क्या करें? ऐसे करें कि ऐसे करें। जैसे मुझे

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00:19:55,760 --> 00:20:00,000
आपको कुछ बोलना है मेरा नाम तो मैं चाहूं तो सच्चा नाम बताऊं।

296
00:20:00,000 --> 00:20:04,400
मैं चाहूं तो झूठा नाम बताऊं। तो इसी तरीके से जो ईश्वर है

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00:20:04,400 --> 00:20:08,400
वो वो यदि चाह करके आपको कुछ कर रहा है। जैसे आपने कहा वो चाहता है

298
00:20:08,400 --> 00:20:12,480
अच्छा करना चाहता है और वह आपको आकर के वाणी दे रहा है मुरली के रूप

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00:20:12,480 --> 00:20:16,480
में। तो क्योंकि ईश्वर देखिए ईश्वर सिद्ध ही नहीं होगा। अगर हम

300
00:20:16,480 --> 00:20:20,560
उसको सब कुछ करने वाला सब कुछ बनाने वाला नहीं मानेंगे तो वो

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00:20:20,560 --> 00:20:24,640
वो जो मनुष्य की चाह है ना उसका विषय नहीं बनेगा और जब विषय नहीं

302
00:20:24,640 --> 00:20:29,280
बनेगा तो उसको नकारना बहुत आसान होगा। नास्तिकता परचम अपना लहराएगी।

303
00:20:29,280 --> 00:20:33,040
ये जो आपकी जो ये चीज है ना ये तब तक है जब तक नास्तिकता

304
00:20:33,040 --> 00:20:37,040
का खंडन होता रहे। उनको रोका जाता रहे और लोग

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00:20:37,040 --> 00:20:41,200
मानने वाले दुनिया में बनते रहे। भगवान उसके बाद आप भगवान की चीजें उनको

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00:20:41,200 --> 00:20:45,360
दे दो। मतलब उस घेरे के अंदर की नास्तिकता को हरा

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00:20:45,360 --> 00:20:49,360
दिया। उस घेरे के अंदर रहते हुए आप मतलब सर्वाइव कर सकते

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00:20:49,360 --> 00:20:53,440
हो। अगर आप इसी को आपने घेरा बना दिया तो ये सर्वाइव

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00:20:53,440 --> 00:20:57,600
ही नहीं हो पाएगा क्योंकि इम्युनिटी वहां मुझे एक ऐसा आ रहा है जैसे

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00:20:57,600 --> 00:21:01,600
छोटा बच्चा होता है। मैं मैं एक पेट भरा होता है। मैं एक चीज पूरी कर

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00:21:01,600 --> 00:21:05,600
लूं। तो जो यह है कि

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00:21:05,600 --> 00:21:09,600
ईश्वर ने सब कुछ बनाया तभी हम उसको ईश्वर को ईश्वर मान सकते हैं। ईश्वर ही

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00:21:09,600 --> 00:21:13,680
सब कारण है हर चीज का। तो क्या है कि कोई व्यक्ति अगर

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00:21:13,680 --> 00:21:17,840
झूठ भी बोल रहा है उसका भी उसको भी वो भी ईश्वर ही सत्ता

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00:21:17,840 --> 00:21:21,920
से बाहर नहीं है। जैसे मैं अपने यहां पे झूठ बोल रहा हूं। तो यहां पर ईश्वर

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00:21:21,920 --> 00:21:26,240
की शक्ति है ना। वो चाहे तो मुझे रोक सकता है। मेरी जुबान लड़खड़ा जाए,

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00:21:26,240 --> 00:21:30,240
कुछ हो जाए अभी कभी बत्ती बंद हो जाए। कुछ कर सकता है ईश्वर। मगर वह नहीं

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00:21:30,240 --> 00:21:34,720
कर रहा है। इसका मतलब उसकी सत्ता में है। है

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00:21:34,720 --> 00:21:39,280
ना? कहीं पर कुछ भी हो रहा है तो उसकी सत्ता के अंदर ही है। उसकी शक्ति तो हर जगह आपने भी मानी

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00:21:39,280 --> 00:21:43,280
तो उसकी शक्ति की सीमा के अंदर सब कुछ है। इसलिए ईश्वर यदि

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00:21:43,280 --> 00:21:47,360
चाहकर आपको कुछ बताएगा तो उस पर हमारा विश्वास नहीं

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00:21:47,360 --> 00:21:48,640
हो सकता।

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00:21:48,640 --> 00:21:52,720
क्योंकि ईश्वर ने चाहा जब मैं आपको चाह के जब ईश्वर चाह

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00:21:52,720 --> 00:21:56,960
के कुछ बताएंगे तो क्योंकि ईश्वर दूसरी चीजें भी कर रहा है। ऐसी ऐसी

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00:21:56,960 --> 00:22:01,040
चीजें भी हो रही है। तो इसलिए जो सनातन के द्वारा जो माने

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00:22:01,040 --> 00:22:05,200
जाने वाले शास्त्र हैं और वो जो शास्त्र है वो अपौरुष है।

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00:22:05,200 --> 00:22:09,200
उनको कभी ईश्वर ने रचा नहीं। तो इसलिए उस पर बिलीव है।

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00:22:09,200 --> 00:22:13,200
ईश्वर भी स्वयं बुद्ध के रूप में आए। बुद्ध के रूप में ईश्वर आते हैं तो सनातन

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00:22:13,200 --> 00:22:17,200
धर्मी जो होते हैं मना कर देते हैं हम बुद्ध को नहीं क्योंकि वह वेदों को मना

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00:22:17,200 --> 00:22:21,200
करते हैं और वेद कौन से शास्त्र है जिनको ईश्वर ने भी रचा नहीं है

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00:22:21,200 --> 00:22:25,360
जैसे सांस लेना होता है ना हमारा जैसे मैं बोल रहा हूं तो ये मेरी चाह

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00:22:25,360 --> 00:22:29,600
है कि मैं बोलूं तो इस पर मेरा कंट्रोल है मगर सांस शुद्ध है

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00:22:29,600 --> 00:22:33,600
एक बच्चा भी जन्म ले रहा है उसकी कोई चाह नहीं है वो जो है

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00:22:33,600 --> 00:22:37,600
सांस ले रहा है तो इसलिए ये परम प्रमाण जो है श्रुति को कहा

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00:22:37,600 --> 00:22:41,760
गया अपुषय वेद तो अब हम जब वो सारी बातें तो खैर उसमें

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00:22:41,760 --> 00:22:45,920
आपने उसमें आपने गए नहीं है तो मुझे लगा कि शायद आपको

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00:22:45,920 --> 00:22:51,920
मालूम हो 25 साल से आप हैं तो आपने चीजें की

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00:23:08,620 --> 00:23:12,620
[संगीत]
