1
00:00:06,240 --> 00:00:10,480
क्या गीता जी का 5% ज्ञान काल ने दिया है? 95%

2
00:00:10,480 --> 00:00:14,800
भगवान आपके अनुसार कबीर ने दिया है। इस बात को आप मानते हैं कि नहीं मानते हैं?

3
00:00:14,800 --> 00:00:18,800
100% 100% ज्ञान ब्रह्म काल ने बोला

4
00:00:18,800 --> 00:00:23,040
है। श्री कृष्ण जी में प्रवेश होगा। क्या गीता जी का पांच%

5
00:00:23,040 --> 00:00:27,040
ज्ञान उसके विरोध में है। भगवान के ईश्वर के विरोध में है।

6
00:00:27,040 --> 00:00:31,120
पांच% कौन सा? गीता

7
00:00:31,120 --> 00:00:35,200
जी का 5% ज्ञान आपका जो परबह्म

8
00:00:35,200 --> 00:00:39,440
है उसके विरोध में है कि नहीं है? मेरा आपका

9
00:00:39,440 --> 00:00:44,800
मैंने प्रश्न को समझ लिया है। पहले मेरी भी बात सुनो मेरा उत्तर सुनिए।

10
00:00:44,800 --> 00:00:48,960
मैंने मैं आपको ठीक कर दूं। आपकी जो ज्ञान गंगा

11
00:00:48,960 --> 00:00:53,040
जो पुस्तक है उसमें यह दावा किया गया है कि गीता जी

12
00:00:53,040 --> 00:00:57,120
में 5% ज्ञान जो है वह काल ने अपने मन से बोल

13
00:00:57,120 --> 00:01:01,200
दिया है और 95% ज्ञान जो है वो वही

14
00:01:01,200 --> 00:01:05,200
जो परमेश्वर है उसका ज्ञान है उसमें बोला काल नहीं है।

15
00:01:05,200 --> 00:01:09,200
आपकी बात मैं मान रहा हूं। बोला काल नहीं है। मगर 5% अपने मन

16
00:01:09,200 --> 00:01:13,280
से बोला है। 5% अपने मन से बोला है। 95%

17
00:01:13,280 --> 00:01:17,440
परमेश्वर की जो ज्ञान है वो दिया है। क्या ये सही है? आप इसको

18
00:01:17,440 --> 00:01:21,280
सही मानते हैं? बिल्कुल सही मानता हूं। ज्ञान धंधा में

19
00:01:21,280 --> 00:01:26,000
लिखा है 100% सही है। ठीक है? अब मुझे ये बताइए

20
00:01:26,000 --> 00:01:30,640
यदि कोई व्यक्ति झूठा है तो

21
00:01:30,640 --> 00:01:34,800
उसकी हमें एक बात पर विश्वास और दूसरी बात पर अविश्वास

22
00:01:34,800 --> 00:01:38,240
कैसे सिद्ध होता है? बताइए।

23
00:01:38,240 --> 00:01:42,400
अगर गीता में 5% झूठ लिखा है तो

24
00:01:42,400 --> 00:01:47,120
फिर वो बाकी के 95% छूट नहीं है। ये कैसे सिद्ध होता है?

25
00:01:47,120 --> 00:01:52,320
इसका आधार क्या है? जी बिल्कुल होता है। देखिए

26
00:01:52,320 --> 00:01:57,120
गीता जी में 95% जो आपका कहना मतलब है 95%

27
00:01:57,120 --> 00:02:01,840
वो तो सही है जो 5% उसने अपने मन से बोल दिया उसमें और 95%

28
00:02:01,840 --> 00:02:05,840
में सही और गलत कैसे पता चलेगा? हां वो झूठ है

29
00:02:05,840 --> 00:02:10,000
या तो पूरा या वो पूरा सत्य है। बिल्कुल

30
00:02:10,000 --> 00:02:14,320
गीता जी का ज्ञान प्रथम आपका मैं उसी पे ले चलूंगा

31
00:02:14,320 --> 00:02:18,480
ज्यादा टाइम नहीं लूंगा इस चीज में। आपने कहा कि प्रथम जब मैंने

32
00:02:18,480 --> 00:02:24,480
पूछा गीता का ज्ञान किसने बोला? तो आपके मुताबिक श्री कृष्ण जी ने बोला। राइट?

33
00:02:25,840 --> 00:02:30,240
श्री कृष्ण ने बोला है। मैं बता दूंगा कैसे बोला है। मैं उसको प्रमाण सहित बताऊंगा।

34
00:02:30,240 --> 00:02:34,720
अभी आप अपनी बात रखिए। मैं भी प्रमाण सहित बता दूंगा। संत रामपाल

35
00:02:34,720 --> 00:02:39,040
जी महाराज ने जो सच्चाई बिल्कुल प्रमाणित करके भाष करके दिखाया। तुम्हारे संस्कृत

36
00:02:39,040 --> 00:02:43,520
के मंत्र नहीं बोले। काल ने बोला है। 5% जो ज्ञान

37
00:02:43,520 --> 00:02:47,680
ब्रह्म ने बोला है अपने मन से वो किस

38
00:02:47,680 --> 00:02:51,920
उद्देश्य से बोला है और क्या उसका बोलने का तरीका है? आपको पता

39
00:02:51,920 --> 00:02:55,920
कैसे चला कि यहां पर ब्रह्म सच बोल रहा है। यहां पर झूठ बोल रहा है। इसका आधार क्या

40
00:02:55,920 --> 00:03:00,000
है? जब कोई व्यक्ति एक जगह झूठ बोल सकता है तो वह हर जगह

41
00:03:00,000 --> 00:03:04,160
झूठ बोल सकता है। जी बिल्कुल अब अब बिल्कुल आपकी बात

42
00:03:04,160 --> 00:03:08,160
मेरे समझ में आ गई हां यहां पर बहुत अच्छा आपने प्रश्न कर

43
00:03:08,160 --> 00:03:12,320
दिया कि वो पता कैसे चल गया बिल्कुल पारखी

44
00:03:12,320 --> 00:03:16,320
होता है पारखी एक तरफ अब सुन लेना ना बाद में चिंगारी भरने लग जाओ तो

45
00:03:16,320 --> 00:03:20,560
बाद में अभी मैं काट देता हूं हटा देता हूं सुन लेना पारखी होता है

46
00:03:20,560 --> 00:03:24,640
एग्जांपल नहीं दे रहा हूं कोई लोकतंत्र कथा नहीं सुना रहा हूं पारखी होता

47
00:03:24,640 --> 00:03:28,880
है एक में तो लाल ले चलता हूं एक में लालड़ी ठीक है और

48
00:03:28,880 --> 00:03:33,040
जोरी के पास चलते हैं जो लालड़ी होंगी उसे तो जोरी अलग

49
00:03:33,040 --> 00:03:37,120
निकाल के फेंक देगा और जो लाल होगा हीरा उसे रख लेगा। तो यह

50
00:03:37,120 --> 00:03:41,040
परख है ना पारखी को होगी कि ये सही कहां पर है और

51
00:03:41,040 --> 00:03:45,200
कहां पर गलत है। ये तो जोरी ही बता सकता है जो उसके जानने वाला है।

52
00:03:45,200 --> 00:03:50,320
उसके सारे ब्रह्मांडों का पर्दाफाश कर देता है। वह जानता है इस चीज को। मेरा

53
00:03:50,320 --> 00:03:54,560
यानी कि यानी कि भगवत गीता आपके लिए अंतिम प्रमाण

54
00:03:54,560 --> 00:03:58,640
नहीं है। कोई और चीज आपके लिए प्रमाण है जिसके आधार पर

55
00:03:58,640 --> 00:04:02,960
आप ये देखते हो कि भगवत गीता में कौन सी बात हमारे लिए है और कौन सी बात हमारे

56
00:04:02,960 --> 00:04:08,000
लिए नहीं है। आपके लिए अंतिम प्रमाण के रूप में भगवत गीता नहीं है।

57
00:04:08,000 --> 00:04:13,040
बिल्कुल है। अंतिम भाई वो जोरी है एक मिनट।

58
00:04:13,040 --> 00:04:17,200
मैं आपसे ये पूछ रहा हूं। मैं आपसे ये पूछ रहा हूं। आपने जहरी का उदाहरण दिया

59
00:04:17,200 --> 00:04:21,520
कि जहरी जो है वो जो खनिज होता है उसमें देख लेता है कौन सा पारकी

60
00:04:21,520 --> 00:04:25,920
है और कौन सा रखने लायक है। बोलने दो बोलने दो बोलने दो। अभी आपने

61
00:04:25,920 --> 00:04:30,000
पूरा बोला ना नहीं बोला। तो जोरी जो होता है वो देख लेता है ये

62
00:04:30,000 --> 00:04:34,000
हीरा है और ये हीरा नहीं है। वो हटा देता है। मगर उसके पास हीरे

63
00:04:34,000 --> 00:04:38,400
को पहचानने के पैरामीटर्स होते हैं। अलग से

64
00:04:38,400 --> 00:04:42,480
उसके पास हीरे को पहचानने के अलग से पैरामीटर होते

65
00:04:42,480 --> 00:04:46,720
हैं। तब वो हीरे में वो कर पाता है कि ये रखना है। एक मिनट पूरा बोलने

66
00:04:46,720 --> 00:04:50,720
दो। बोलो। तब वो ये फैसला कर पाता है कि कौन सा हीरा

67
00:04:50,720 --> 00:04:55,040
है कौन सा हीरा नहीं है। अब आपने ये कह दिया कि भैया

68
00:04:55,040 --> 00:04:56,400
जो भगवत गीता

69
00:04:56,400 --> 00:05:00,560
है उसमें क्या सही है और क्या गलत है इसका आधार इसका

70
00:05:00,560 --> 00:05:04,720
जो है हमारे जो तत्वदर्शी तथाकथित रामपाल जी है वो तय करते हैं।

71
00:05:04,720 --> 00:05:08,880
ठीक है ठीक है कथा नहीं बिल्कुल ऐसे नहीं बोल सकते

72
00:05:08,880 --> 00:05:12,880
पहले तो आप किसी संत के विषय में जिस तरीके

73
00:05:12,880 --> 00:05:16,880
से आप पिछली डिबेटों में संत ऐसे रामपाल जी

74
00:05:16,880 --> 00:05:20,960
रामपाल रामपाल ठीक है ठीक है मैं अपनी मैं मैं

75
00:05:20,960 --> 00:05:25,040
जो है इस समय तथाकथित तथाकथित पे नहीं अडूंगा मैं अभी ये

76
00:05:25,040 --> 00:05:29,040
पूछ रहा हूं कि अगर हम गीता को प्रमाण मानते हैं

77
00:05:29,040 --> 00:05:33,600
तो हमें अन्य प्रमाण के आधार पर गीता को जांचने की वो नहीं है

78
00:05:33,600 --> 00:05:37,760
और अगर अगर अन्य कोई प्रमाण है तो गीता हमारे लिए अंतिम प्रमाण नहीं है। तो आपको पहले

79
00:05:37,760 --> 00:05:41,760
ये सीखना होगा कि गीता आपके लिए अंतिम प्रमाण है कि नहीं

80
00:05:41,760 --> 00:05:45,760
है। जी अब आपने अपनी बात कह ली मैं कहूं।

81
00:05:45,760 --> 00:05:50,000
हम बोलिए गीता जी मेरे लिए अंतिम

82
00:05:50,000 --> 00:05:54,080
प्रमाण है। हां तो जो अंतिम प्रमाण है। इसका मतलब

83
00:05:54,080 --> 00:05:58,320
उसमें जो लिखा है वो सच है। और अगर उसमें सच झूठ का आप फैसला

84
00:05:58,320 --> 00:06:02,720
कर पा रहे हो। अगर उसमें सच झूठ का फैसला कर पा रहे। यानी कि उसको जांचने

85
00:06:02,720 --> 00:06:06,720
के लिए भी आपके पास कोई और प्रमाण है। जी ये मेरा

86
00:06:06,720 --> 00:06:11,760
प्रमाण है। गीता में ही प्रमाण है उसे जांचने का।

87
00:06:11,760 --> 00:06:16,080
अब पूरी बात कहने दोगे जभी तो आप तो अपनी पूरी कह लोगे हमें रोक दो। गीता

88
00:06:16,080 --> 00:06:20,240
जी में उसे जांचने का वास्तविक जो वास्तविक

89
00:06:20,240 --> 00:06:24,400
उसने रास्ता दे रखा है ना कि ये लिखा है। वो बताया

90
00:06:24,400 --> 00:06:28,560
है। गीता अध्याय 15 श्लोक एक से चार में तत्वदर्शी संत बताएंगे।

91
00:06:28,560 --> 00:06:32,880
अच्छा क्या बताया है बताओ जरा गीता

92
00:06:32,880 --> 00:06:36,960
जी में स्पष्ट कहा है कि जो गीता जी

93
00:06:36,960 --> 00:06:40,960
ये बता रही है गीता जी ने ये बताया है कि मैंने कहीं-क पे जहां पर झूठ

94
00:06:40,960 --> 00:06:45,120
बोला है उसको पहचानने के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ जहांजहां मैंने झूठ

95
00:06:45,120 --> 00:06:49,120
बोला है पूरी बात सुनो पूरी बात सुनो हां

96
00:06:49,120 --> 00:06:53,360
सुनाओ है जहांजहां मैंने सच बोला है ये नहीं ये तो

97
00:06:53,360 --> 00:06:57,360
बात क्या होती है ये तो टॉपिक चेंज करने वाली बातें हैं कि सामने वाले को किसी

98
00:06:57,360 --> 00:07:01,600
भी तरीके तोड़ मरोड़ के और बिल्कुल गलत साबित कर दे। पवित्र गीता

99
00:07:01,600 --> 00:07:06,080
जी में स्पष्ट 15वा अरे भैया जब उसमें एक%

100
00:07:06,080 --> 00:07:10,240
भी गंदगी है तो पवित्र कहां से हो गई? भाई

101
00:07:10,240 --> 00:07:14,560
साहब गंदगी तो गंदगी अरे आपने बोला ना 5%

102
00:07:14,560 --> 00:07:18,560
ज्ञान वो वो वो नहीं है परमेश्वर का ज्ञान। ओनली वन मिनट सुन

103
00:07:18,560 --> 00:07:22,720
लीजिएगा। इस पर मैं उत्तर देता हूं। मैंने ये किताब

104
00:07:22,720 --> 00:07:26,880
ये किताब है। ठीक है। मैं इसका राइटर

105
00:07:26,880 --> 00:07:31,040
हूं। 95% परमेश्वर का ज्ञान लिखा है। पांच परस मैंने इसमें

106
00:07:31,040 --> 00:07:35,040
अपने बारे में लिख दिया तो क्या गलत लिख दिया ये बताइए मुझे। झूठ

107
00:07:35,040 --> 00:07:39,200
लिखा ना झूठ झूठ एक मिनट

108
00:07:39,200 --> 00:07:43,360
रुक जाइए। इसमें ये पुस्तक है और ये मैंने लिखी है

109
00:07:43,360 --> 00:07:47,360
कोई पुस्तक उसमें 95% के सिलेबस की जानकारी दे रहा

110
00:07:47,360 --> 00:07:51,600
हूं। इसमें क्या हो रहा है? विज्ञान क्या कर रहा है? यहां पे जीके

111
00:07:51,600 --> 00:07:55,680
में क्या हो रहा है? बाहर क्या हो रहा है? अंदर क्या हो रहा है? 5% मैंने

112
00:07:55,680 --> 00:07:59,760
उसमें अपना मन मनगढ़ंत ज्ञान लिख दिया अपना मन माना कुछ लिख

113
00:07:59,760 --> 00:08:04,080
दिया कोई नया टॉपिक बना के और वो बिल्कुल निराधार उतरता

114
00:08:04,080 --> 00:08:08,080
है उसका कोई अर्थ नहीं निकलता तो 100% पढ़ने वाला उसे

115
00:08:08,080 --> 00:08:12,240
पढ़ाने वाला टीचर बता देगा कि इस राइटर ने यहां गलती कर रखी है।

116
00:08:12,240 --> 00:08:16,240
इसमें कोई दो इसका मतलब जो टीचर है वो आपका अंतिम

117
00:08:16,240 --> 00:08:20,400
प्रमाण है। गीता आपका अंतिम प्रमाण नहीं है। मैंने

118
00:08:20,400 --> 00:08:24,480
कल भी आपकी एक डिबेट सुनी थी जिसमें संत संत

119
00:08:24,480 --> 00:08:28,880
रामपाल जी महाराज के शिष्य से आप सवाल पूछ रहे थे कि क्या

120
00:08:28,880 --> 00:08:33,120
गीता को आप पूर्ण तरह से पूर्णतया सत्य मानते हैं वेद

121
00:08:33,120 --> 00:08:38,480
को आप पूर्णतया सत्य मानते हैं प्रमाण रूप में या नहीं

122
00:08:38,480 --> 00:08:42,480
अगर उसकी कुछ बातों को आप सत्य मानते हैं तो

123
00:08:42,480 --> 00:08:46,800
फिर वो प्रमाण कैसे है तो शिवंश

124
00:08:46,800 --> 00:08:51,120
भाई संत रामपाल जी महाराज को कोई जरूरत नहीं थी वेद

125
00:08:51,120 --> 00:08:55,440
और गीता को खोलने या 18 पुराणों को खोलने

126
00:08:55,440 --> 00:09:00,160
के मैं इसको चालू करने से पहले आपसे पहले

127
00:09:00,160 --> 00:09:04,320
प्रमाण की परिभाषा पूछ रहा हूं। प्रमाण

128
00:09:04,320 --> 00:09:08,560
का क्या है? प्रमाण का अर्थ जिससे सिद्ध किया

129
00:09:08,560 --> 00:09:12,640
जाए। जिसे ये सिद्ध कर दिया जाए। प्रमाण का अर्थ

130
00:09:12,640 --> 00:09:16,720
ये है अगर हम किसी चीज को प्रमाण मानते हैं तो उसको हम कहीं

131
00:09:16,720 --> 00:09:22,240
पर भी उस पर डाउट नहीं कर सकते। की सारी चीजें हमारे लिए सत्य हैं।

132
00:09:22,240 --> 00:09:26,320
आपके लिए बात आपके लिए संत रामपाल की जो वाणी है वो प्रमाण

133
00:09:26,320 --> 00:09:30,320
है कि नहीं? बिल्कुल वाणी उनकी प्रमाण है। एक एक वाणी

134
00:09:30,320 --> 00:09:34,400
प्रमाण प्रमाण है। अब क्या हम उसमें बुद्धि रख सकते हैं? क्या इसकी भी कोई बात गलत

135
00:09:34,400 --> 00:09:38,560
हो सकती है? ना मानने योग्य हो सकती है। नहीं हो सकती। तो

136
00:09:38,560 --> 00:09:42,640
ऐसी बुद्धि अगर है आपकी किसी ग्रंथ में वो ग्रंथ

137
00:09:42,640 --> 00:09:46,720
आपके लिए प्रमाण है। अगर ऐसी बुद्धि नहीं है तो जिस

138
00:09:46,720 --> 00:09:50,720
बुद्धि के आधार पर आप ये जांच कर रहे हो कि इसमें कहां सही है कहां गलत

139
00:09:50,720 --> 00:09:53,680
है वो बुद्धि प्रमाण है। वो ग्रंथ आपके लिए प्रमाण

140
00:09:53,680 --> 00:09:58,000
नहीं है। ठीक है? तो जब आप ये कहते हो

141
00:09:58,000 --> 00:10:02,000
ये बात क्यों उठाई मैंने? जब आप ये कहते हो कि हम जो

142
00:10:02,000 --> 00:10:06,720
है शास्त्र सम्मत भक्ति बता रहे हैं लोगों को। समझना मेरी बात?

143
00:10:06,720 --> 00:10:10,800
जी तो और हम लोग शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं कर रहे हैं।

144
00:10:10,800 --> 00:10:14,800
मगर आप भी शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं कर रहे हो। आप रामपाल

145
00:10:14,800 --> 00:10:18,960
जी सम्मत भक्ति कर रहे हो या आपकी कोई सूक्ष्म वेद होगा उसके सम्मत

146
00:10:18,960 --> 00:10:23,040
भक्ति कर रहे हो। मगर शास्त्र सम्मत भक्ति आपकी भी नहीं है क्योंकि आप भी

147
00:10:23,040 --> 00:10:27,120
कुछ चीजें अपने मन से डिसाइड कर रहे हो। यहां से रामपाल दास जी के अनुसार

148
00:10:27,120 --> 00:10:31,520
या कबीर वाणी इत्यादि के अनुसार आप भी डिसाइड कर रहे हो अपने मन से।

149
00:10:31,520 --> 00:10:35,600
तो आपका ये कहना गलत हुआ कि आप शास्त्र सम्मत भक्ति दिखा रहे हो। गीता वेद पुराण

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00:10:35,600 --> 00:10:39,840
अगर आपके साथ है शिवश भाई मैं ये जानना चाहता हूं शिवश

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00:10:39,840 --> 00:10:44,080
भाई मैं ये जानना चाहता हूं कि शास्त्र कितने हैं एक चीज क्लियर

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00:10:44,080 --> 00:10:48,320
कर लीजिए पहले अच्छा ठीक है हम

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00:10:48,320 --> 00:10:53,600
क्लियर कीजिए आप आपकी भक्ति शास्त्र सम्मत है कि नहीं

154
00:10:53,600 --> 00:10:57,840
है इसीलिए तो मैंने आपसे ये सवाल पूछा था कि क्या

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00:10:57,840 --> 00:11:01,920
आप ये बताइए कि शास्त्र कितने हैं भक्ति आपकी है आपके

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अनुसार कौन-कौन से शास्त्र प्रमाण है प्रमाण

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देखिए जैसे रामपाल

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जी की वाणी शास्त्र जैसे रामपाल जी की वाणी प्रमाण है

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00:11:12,960 --> 00:11:17,440
वैसे ही कौन से शास्त्र आपके लिए प्रमाण है

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हमारे लिए अगर आप अगर आप शास्त्र की बात करें तो

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00:11:21,680 --> 00:11:25,840
हमारे लिए सिर्फ एक ही है जो प्रमाणित है कबीर सागर

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00:11:25,840 --> 00:11:30,560
या कबीर साहब से रिलेटेड जितने भी ग्रंथ हैं वो रिलेटेड

163
00:11:30,560 --> 00:11:36,240
ठीक है आगे सही बात एक बार एक आगे सुन तो लीजिए

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बिलकुल बोलेंगे हमारे लिए सिर्फ एक कबीर सागर प्रमाण है कबीर सागर कबीर

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सागर कबीर सागर
