1
00:00:01,960 --> 00:00:06,240
[संगीत] जय श्री राम। आपको आपका

2
00:00:06,240 --> 00:00:10,240
मिस कॉल आया हुआ था। आपने मुझे फोन किया ना दूसरे नंबर। अच्छा

3
00:00:10,240 --> 00:00:14,480
अच्छा हां जी। हां जी। हां जी। अच्छा अच्छा ओके ओके ओके हां जी।

4
00:00:14,480 --> 00:00:18,960
आप आर्य समाज से हैं? नहीं नहीं आर्य समाज से नहीं है।

5
00:00:18,960 --> 00:00:23,040
फिर नहीं। मैं सनातन धर्म को फॉलो करता हूं। बहुत अच्छे

6
00:00:23,040 --> 00:00:25,280
से।

7
00:00:25,280 --> 00:00:29,360
आपको हमारी कोई बात गलत लगती है? हां जी उसी पर

8
00:00:29,360 --> 00:00:33,920
बात करनी थी मेरे को। कौन सी बात है? हां एक्चुअली क्या है गौरव

9
00:00:33,920 --> 00:00:38,000
को शायद मेरी बातें समझ नहीं आई। वो थोड़ा छोटा है थोड़ा इस वजह से शायद उसको समझ नहीं

10
00:00:38,000 --> 00:00:42,000
आई मेरी बातें। तो इस वजह से उसने बोला कि आपसे बात

11
00:00:42,000 --> 00:00:46,160
कर लो तो हो सकता है आप मेरे उत्तर दे दो। कौन सी

12
00:00:46,160 --> 00:00:50,320
बात है? था कि जो ब्रह्मा और सरस्वती वाला जो क्या

13
00:00:50,320 --> 00:00:54,640
नाम है प्रसंग है हम ब्रह्मा जी वाला हम

14
00:00:54,640 --> 00:00:58,960
तो कल गौरव ने मेरे को उस पे क्या नाम है एक वो भेजा उसमें वो मेरे को

15
00:00:58,960 --> 00:01:02,960
मतलब उसने मेरे को बताया कि भाई ब्रह्मा जी जब सरस्वती

16
00:01:02,960 --> 00:01:07,040
जी आती हैं मतलब उनके उनके दो भाग हो जाते हैं ब्रह्मा जी

17
00:01:07,040 --> 00:01:11,520
के तो वो उन्हें पहले बेटी बोलता है वो मतलब बोलते हैं

18
00:01:11,520 --> 00:01:15,680
कि पुत्री मतलब आप आपको ये जो पौराणिक

19
00:01:15,680 --> 00:01:17,120
कथाएं हैं। इनको

20
00:01:17,120 --> 00:01:21,200
आप स्वीकार नहीं करते। ये कहना है आपका। हां जी। हां जी। बाकी

21
00:01:21,200 --> 00:01:25,440
आप मूर्ति पूजा करते हैं? नहीं मूर्ति पूजा नहीं करता मैं। हां।

22
00:01:25,440 --> 00:01:29,760
मतलब निराकार को मानते हैं आप। हां जी। निराकार को मानते

23
00:01:29,760 --> 00:01:33,840
हैं। हां जी। हां जी। हां जी। हां जी। अच्छा। हां जी। और

24
00:01:33,840 --> 00:01:37,920
ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ये ये भी मानते होंगे। नहीं मेरा

25
00:01:37,920 --> 00:01:42,480
देखिए मेरा तो ये भाई मूर्ति नहीं मानते।

26
00:01:42,480 --> 00:01:46,720
ईश्वर अवतार ईश्वर ही आ जाए। ईश्वर सब जगह है वो बात अलग है।

27
00:01:46,720 --> 00:01:50,960
ईश्वर ही आ गया। ईश्वर ही आ गया। ईश्वर ईश्वर आ गया

28
00:01:50,960 --> 00:01:55,040
मतलब इसका इसका जरा मेरे को बताइए। मेरे को ये वाली बात थोड़ा समझ नहीं आई।

29
00:01:55,040 --> 00:01:59,280
अरे भाई मूर्ति पूजा नहीं करते तो इसका मतलब ये मानते हैं ना कि ईश्वर

30
00:01:59,280 --> 00:02:03,360
प्रकट नहीं हो सकता। नहीं नहीं देखिए मूर्ति पूजा

31
00:02:03,360 --> 00:02:07,360
नहीं मानने का। ईश्वर के उससे क्यों मेरे को लगता नहीं क्योंकि मैं मूर्ति पूजा

32
00:02:07,360 --> 00:02:11,680
इसलिए नहीं मानता बिकॉज़ मेरे सब हर जगह जगह मतलब परमात्मा

33
00:02:11,680 --> 00:02:15,680
का वास है। तो मतलब आप ये नहीं मानते ना कि ईश्वर किसी एक

34
00:02:15,680 --> 00:02:20,080
रूप में आ सकता है। हां जी मतलब मेरा मानना है किसी

35
00:02:20,080 --> 00:02:24,560
आप ये मानते हैं ना कि ईश्वर किसी एक निश्चित एक रूप में आ सकता है।

36
00:02:24,560 --> 00:02:28,720
यहां से उसका कंधा यहां से उसका कंधा चालू हुआ। दूसरी जगह कंधा खत्म

37
00:02:28,720 --> 00:02:32,160
हो गया। यहां से उसका सर चालू यहां से उसका कंधा लेफ्ट से

38
00:02:32,160 --> 00:02:36,240
चालू हुआ। राइट में खत्म हो गया। इस तरह से आप इस अवतार को नहीं मानते।

39
00:02:36,240 --> 00:02:40,240
प्रकट नहीं हो सकता। इस तरह से ईश्वर। हां जी। हां जी। हां जी। मतलब मेरा मेरा एक्चुअली यह मानना

40
00:02:40,240 --> 00:02:44,480
है कि वो कोई मैं मैं समझ गया। मैं समझ गया। अब आपने

41
00:02:44,480 --> 00:02:48,480
मुझे कहा कि सनातन को आप मानते हैं तो इसमें आप

42
00:02:48,480 --> 00:02:53,920
एक लाइव चर्चा करना चाहते हैं हमारे साथ।

43
00:02:53,920 --> 00:02:58,160
कर सकते हैं। करना है। हां जी। लाइव चर्चा

44
00:02:58,160 --> 00:03:02,720
करेंगे आप? मतलब अभी? अभी नहीं शेड्यूल

45
00:03:02,720 --> 00:03:06,720
कर लेते हैं। आने वाले एकद दिन में कर लीजिएगा। आज कर लीजिए। नहीं देखिए एक्चुअली

46
00:03:06,720 --> 00:03:10,960
प्रॉब्लम थोड़ा ये होता है कि मैं ना थोड़ा सा मतलब मेरे को ना कहीं

47
00:03:10,960 --> 00:03:14,960
पर ऐसे लाइव आना वगैरह मेरे को पसंद नहीं है क्योंकि मैं थोड़ा दुनियादारी से दूर

48
00:03:14,960 --> 00:03:18,960
रह जाता हूं। देखो मैं सही बताऊं आपको। हम नहीं तो धर्म

49
00:03:18,960 --> 00:03:22,960
धर्म की रक्षा के लिए तो आ सकते हैं ना। दुनियादारी से दूर तो सबको रहना था। मगर

50
00:03:22,960 --> 00:03:27,440
द्रोपदी का चीर हरण हो रहा था तो आ गए सब लोग और जो नहीं आए वो दोषी बने।

51
00:03:27,440 --> 00:03:31,520
नहीं नहीं वो आपकी बात ठीक है लेकिन एक होता है ना कि क्योंकि

52
00:03:31,520 --> 00:03:35,600
आपकी मेरी अगर मान लीजिए वीडियो कॉल पे बात होगी हां तो वीडियो कॉल

53
00:03:35,600 --> 00:03:39,680
पे मैं तब आने को तैयार हूं कि उसको फिर कहीं आप लाइव नहीं दिखाएंगे लोग ना

54
00:03:39,680 --> 00:03:44,000
आके सिर्फ आपसे मेरी बात होगी देखिए मैं बता रहा हूं आपको देखिए हां जी मैं आपकी

55
00:03:44,000 --> 00:03:47,280
चीजों का जवाब दे दूंगा मगर फिर भी मैं आपको अपनी बात

56
00:03:47,280 --> 00:03:51,360
बता रहा हूं हमारा कार्य है रोज जो सनातन के मौलिक

57
00:03:51,360 --> 00:03:55,600
सिद्धांत हैं उनके विरोध में सनातन के नाम से

58
00:03:55,600 --> 00:03:59,600
प्रचारित करने वाले वाले जो लोग हैं, तंत्र है इत्यादि जो ऐसी बातें कर

59
00:03:59,600 --> 00:04:04,000
रहे हैं उनकी उस वास्तविकता को कि कितने अंशों में वह सनातन

60
00:04:04,000 --> 00:04:08,160
के विरुद्ध है। उस वास्तविकता को समाज के समक्ष लाना

61
00:04:08,160 --> 00:04:12,240
और समाज को सही रास्ता दिखाना कि भाई देखो

62
00:04:12,240 --> 00:04:16,400
ये इस इस तरह से गलत है। इसलिए हमारा हम कोई भी

63
00:04:16,400 --> 00:04:20,800
अगर प्रयत्न करते हैं तो उसका अभीष्ट

64
00:04:20,800 --> 00:04:24,880
जो फल है या फिर यथोचित जो फल है उसकी

65
00:04:24,880 --> 00:04:28,880
हम कामना करते हैं। कि भैया हम आपको समझाएं हम एक घंटे

66
00:04:28,880 --> 00:04:32,880
आधे घंटे आपसे बात करें आपको समझाएं तो आप अकेले

67
00:04:32,880 --> 00:04:37,520
नहीं हो ना ऐसे समाज में बहुत सारी लोग हैं जो इस तरह की विकृतियां हमारे अनुसार

68
00:04:37,520 --> 00:04:41,680
आप तो सही हो आपकी नजरों में मगर हमारी जानकारी में आप भटके हुए हो तो

69
00:04:41,680 --> 00:04:45,680
समाज में ऐसे एक एक बात नहीं पूरा पूरा सुन

70
00:04:45,680 --> 00:04:49,760
लो तो समाज में कई लोग हैं तो हमारा आप अकेले को

71
00:04:49,760 --> 00:04:53,920
सही करने से हमारा उद्देश्य नहीं है हमारा उद्देश्य सामाजिक

72
00:04:53,920 --> 00:04:58,160
परिवर्तन लाना वैचारिक क्रांति लाना उसके लिए समाज के समक्ष

73
00:04:58,160 --> 00:05:00,880
वो चर्चा जाना

74
00:05:00,880 --> 00:05:02,640
आवश्यक है। तो आप ऐसा अगर

75
00:05:02,640 --> 00:05:06,960
कर सके अगर आप ये करना है तो आप मुझसे बात को ना

76
00:05:06,960 --> 00:05:11,040
क्या क्या क्या नाम है रिकॉर्ड क्या कर लीजिएगा हम

77
00:05:11,040 --> 00:05:15,040
अगर उसमें आपकी बातें सही साबित हो जाती हैं तो फिर आप

78
00:05:15,040 --> 00:05:19,040
डाल दीजिएगा नहीं सही साबित नहीं हुई तब भी हम डाल सकते हैं उसमें क्या

79
00:05:19,040 --> 00:05:23,120
है नहीं नहीं वो आपका पक्ष विजय रहेगा नहीं वो आपका पक्ष विजय

80
00:05:23,120 --> 00:05:27,360
रहेगा नहीं नहीं नहीं वो नहीं होना ना मेरे को नहीं समझिए बात को नहीं नहीं वह

81
00:05:27,360 --> 00:05:31,360
हम लोग तय करेंगे ना कि हम डाल सकते हैं कि नहीं दूसरी बात यह भी हम तय करेंगे कॉल

82
00:05:31,360 --> 00:05:35,520
पे आपको समय देना है कि नहीं? क्योंकि कॉल की बात ऐसी होती है कि

83
00:05:35,520 --> 00:05:39,520
कॉल की रीच कम होती है। जब हम ऑडियो पे बात करते हैं तो उसको

84
00:05:39,520 --> 00:05:43,520
ज्यादा लोग नहीं देखते हैं। रुचि नहीं देखते हैं। जब सबसे

85
00:05:43,520 --> 00:05:47,600
ज्यादा रीच आमने-सामने चेहरे के साथ इस तरह

86
00:05:47,600 --> 00:05:51,680
से जो वार्ता होती है उसकी सबसे ज्यादा रीच होती है। कॉलिंग की उतनी रीच

87
00:05:51,680 --> 00:05:55,680
नहीं होती है। तो फिर वो भी हमें हमें डिसाइड करना होगा। हम आपको कॉल पे

88
00:05:55,680 --> 00:05:59,760
बात करें कि ना करें। अब मुझे एक बात बता दीजिए। आपने कहा कि आप

89
00:05:59,760 --> 00:06:03,920
सनातन से हैं। तो सनातन क्या

90
00:06:03,920 --> 00:06:08,000
चीज है? क्या चीज नहीं है? इस बारे में जो सनातन

91
00:06:08,000 --> 00:06:12,240
का कौन सा शास्त्र है जो आपके लिए प्रमाण है? नहीं

92
00:06:12,240 --> 00:06:17,280
देखिए मैं आपको अब शायद आपको मेरी बातें थोड़ी अजीब सी ना

93
00:06:17,280 --> 00:06:17,780
लगे।

94
00:06:17,680 --> 00:06:21,680
बस और मेरी बात ना बुरा मत मानिएगा बस। ठीक है प्लीज।

95
00:06:21,680 --> 00:06:25,840
हां क्योंकि वो होता है ना अभी थोड़ी देर मैं सुन रहा हूं।

96
00:06:25,840 --> 00:06:30,000
आप अगर टू द पॉइंट बात करेंगे ज्यादा अच्छा होगा इधर उधर की बातें करने

97
00:06:30,000 --> 00:06:34,000
आप सीधे अपना पक्ष रखिए नहीं मैं इसलिए वाली बात बोल रहा हूं कि अभी अरे

98
00:06:34,000 --> 00:06:38,080
भाई अरे भाई तीन चार दिन पहले भी मुझे किसी से बात करवाई थी और उन्होंने फिर वो

99
00:06:38,080 --> 00:06:42,160
वो है ना चले गए थे छोड़कर देखिए आप टू द पॉइंट बात करिए हां

100
00:06:42,160 --> 00:06:46,400
जी आपका सनातन धर्म कहां से स्टार्ट है देखिए देखिए मेरा सनातन

101
00:06:46,400 --> 00:06:50,400
धर्म मेरे हिसाब से जो व्यक्ति खुद जान पाए वो है मेरे

102
00:06:50,400 --> 00:06:54,640
मेरे हिसाब से मतलब बाहरी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है हां जी हां जी हां जी

103
00:06:54,640 --> 00:06:58,880
अच्छा क्योंकि बाहरी प्रमाण में अगर मैं कुछ बात

104
00:06:58,880 --> 00:07:02,880
मानूंगा तो उसमें कुछ ऐसी बातें भी हैं जो जो मानने योग्य नहीं है

105
00:07:02,880 --> 00:07:06,880
मेरे हिसाब से क्योंकि हमारे में इस्लाम धर्म भी है बाकी

106
00:07:06,880 --> 00:07:11,120
धर्म भी है उनमें भी बहुत सारी ऐसी बातें हैं क्योंकि वो कहते हैं भाई हमारा श्रेष्ठ

107
00:07:11,120 --> 00:07:15,360
है। ठीक है मैं आपकी बात समझ गया बाहरी प्रमाण आपके लिए मान्य नहीं है जो आपको अपनी

108
00:07:15,360 --> 00:07:19,440
बुद्धि से सही लगेगा वही आपको मान्य है। हां जी। ठीक है। हां जी।

109
00:07:19,440 --> 00:07:23,440
हां जी। इसका मतलब यह है कि जो भी धर्म आज आप फॉलो कर रहे

110
00:07:23,440 --> 00:07:27,520
हैं, जो भी मानवोचित मानवीय शील आप फॉलो कर रहे हैं, वो सब आपके अंदर से आया है, बाहर

111
00:07:27,520 --> 00:07:31,680
से नहीं आया है। हां जी मेरे हिसाब से। हां जी कि मेरे को अंदर से आवाज

112
00:07:31,680 --> 00:07:32,720
आ रही है कि भाई ये चीज

113
00:07:32,720 --> 00:07:37,360
ये बताइए। अब अब मैं आपसे कुछ प्रश्न कर रहा हूं। ये बताइए

114
00:07:37,360 --> 00:07:41,520
कि आप पहली बार जब बिना कपड़ों के बाहर गए थे तो आप स्वयं

115
00:07:41,520 --> 00:07:45,680
से रुक गए थे या माता-पिता ने रोका था? वो अंदर वो अंदर

116
00:07:45,680 --> 00:07:50,000
से वो अंदर से आया था या माता-पिता ने सिखाया? नहीं

117
00:07:50,000 --> 00:07:54,080
मैं कपड़ों के बाहर कपड़े पहनना कपड़े पहनना माता-पिता ने सिखाया है या

118
00:07:54,080 --> 00:07:58,160
अपने से पहने हैं? कपड़े माता-पिता ने क्या

119
00:07:58,160 --> 00:08:02,160
क्या नाम क्या नाम सिखाए होंगे? ये तो बाहर से आ गया। हां जी। ये

120
00:08:02,160 --> 00:08:07,040
तो बाहर से आ गया ना धर्म। अंदर से नहीं आया ना? बाहर से क्या है ऐसे मतलब?

121
00:08:07,040 --> 00:08:11,200
अरे भैया धर्म का मतलब है मर्यादा। हां मर्यादा ठीक है। क्या

122
00:08:11,200 --> 00:08:15,360
करना है? क्या नहीं करना है जीवन में? यही तो धर्म है। हां। तो मैंने आपको

123
00:08:15,360 --> 00:08:19,920
वही तो बोला तो कपड़े पहनने की मर्यादा बाहर से क्यों ले रहे हैं आप? अंदर से क्यों नहीं आई?

124
00:08:19,920 --> 00:08:24,000
अंदर से तो अंदर से तो आती है। अच्छा आपके माता-पिता ने आपको

125
00:08:24,000 --> 00:08:28,160
मर्यादा नहीं सिखाई। आप अंदर से आइए आपके। नहीं कोई इंसान कुछ गलत

126
00:08:28,160 --> 00:08:32,240
कर रहा है, सही कर रहा है। वो अपने भीतर ही तो से तो आती है ना आवाज। अगर मान लीजिए

127
00:08:32,240 --> 00:08:36,480
मैं किसी को मार रहा हूं। अरे भाई मैंने आपसे अभी अभी

128
00:08:36,480 --> 00:08:40,560
मैंने आपसे क्या पूछा है? हां जी। कपड़े पहनने कपड़े पहनने की

129
00:08:40,560 --> 00:08:44,560
मर्यादा माता-पिता ने दी ना नहीं वह तो एक टाइम टाइम पर

130
00:08:44,560 --> 00:08:48,000
देंगे ना उसके बाद तो मेरे को पहनने नहीं पहना उसके मतलब सारी सारी

131
00:08:48,000 --> 00:08:52,080
मर्यादाएं आपने सीख ली उसके बाद फिर आप उनको अपना नाम दे के कस्टमाइज

132
00:08:52,080 --> 00:08:56,160
करेंगे हमारे अंदर से आई है नहीं नहीं नहीं समझे नहीं मेरी

133
00:08:56,160 --> 00:09:00,160
बात को मर्यादा आई कहां से उद्भाषित कहां से हुई है वो बताओ

134
00:09:00,160 --> 00:09:04,240
सुनिए देखिए एक चीज को ना प्लीज क्रोध क्रोध मत कीजिएगा

135
00:09:04,240 --> 00:09:08,480
नहीं ये क्रोध ये क्रोध नहीं है क्रोध नहीं है ये अंपायर आउट दैट वाली फीलिंग

136
00:09:08,480 --> 00:09:12,560
है जो चिल्लाते हैं ना हाउ इज दैट वो क्रोध नहीं होता है वो

137
00:09:12,560 --> 00:09:16,720
एक्साइटमेंट होता है ठीक है ठीक है हां जी हां तो मेरा कहना ये

138
00:09:16,720 --> 00:09:20,800
है कि जब एक टाइम के बाद में व्यक्ति जीना शुरू करता है खुद

139
00:09:20,800 --> 00:09:24,880
भाई साहब वो बात बाद की है आपके पास उसी पे आ रहा हूं ना आपको हां तो

140
00:09:24,880 --> 00:09:28,880
वो बताइए वो बताइए हां हां उसी पे आ रहा हूं मैं टू द टू द पॉइंट

141
00:09:28,880 --> 00:09:32,960
बात करिए बहुत ज्यादा हमें मैंने आपको बताया ना कॉलिंग पे एक तो बात हम करते नहीं

142
00:09:32,960 --> 00:09:37,040
है फिर भी क्योंकि गौरव जी ने आपसे बात करने को कहा है इसलिए बात कर रहे हैं तो

143
00:09:37,040 --> 00:09:41,360
अब आप टू टू द पॉइंट बात करिए। बहुत इधर-उधर की बात मत करिए। टू देखिए

144
00:09:41,360 --> 00:09:45,680
टू द पॉइंट तो मेरे हिसाब से वो वाली बात हो जाएगी ना कि मैं आपको कुछ बोलूंगा

145
00:09:45,680 --> 00:09:49,680
तो वो तो फिर वो हो जाएगा ना कि उसका कुछ तो वो वो देना पड़ेगा ना इधर-उधर की बात कि

146
00:09:49,680 --> 00:09:53,760
हां भाई मैं जो बात बोल रहा हूं क्यों बोल रहा हूं आपको? हां बताइए बताइए बताइए। हां तो मैं आपसे ये

147
00:09:53,760 --> 00:09:57,760
कह रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि भाई माता पिता ने मेरे को बोला कि मेरे को कपड़े पहनने

148
00:09:57,760 --> 00:10:01,840
हैं। हम आज मैं मैं मान लीजिए 30 साल का हूं।

149
00:10:01,840 --> 00:10:03,120
हम अब मैं

150
00:10:03,120 --> 00:10:07,680
कपड़े पहनूंगा नहीं पहनूंगा वो तो मैं कर रहा हूं ना साइड।

151
00:10:07,680 --> 00:10:11,840
अरे आज आप कर रहे हैं ना शुरुआत कहां से हुई मर्यादा की?

152
00:10:11,840 --> 00:10:15,920
नहीं मर्यादा की शुरुआत तो उन्होंने करी मतलब आप ये मान आप यह

153
00:10:15,920 --> 00:10:19,920
मानते हैं कि आपको मर्यादाएं तो बाहर से मिली है फिर आप उसमें से जज

154
00:10:19,920 --> 00:10:24,160
करते हैं कि इनमें से कौन सी मर्यादा को मुझे आगे पालन करना है किसको पालन

155
00:10:24,160 --> 00:10:28,480
नहीं करना है। हां जब इंसान को खुद को पता नहीं होता तो वो क्या

156
00:10:28,480 --> 00:10:32,960
नाम है पता ही नहीं था कि मेरे को अपने

157
00:10:32,960 --> 00:10:37,200
हां मतलब की हमारे अंदर मर्यादा खुद से नहीं आती है मर्यादा हमको बाहर

158
00:10:37,200 --> 00:10:41,280
से ही लेनी पड़ती है नहीं मेरे हिसाब से वो हां

159
00:10:41,280 --> 00:10:45,440
हिसाब से होती है वो तो आप कहना क्या चाहते हैं बाहर

160
00:10:45,440 --> 00:10:49,520
से बाहर से बाहर से बचपन में मैं कर देता था कहीं हां

161
00:10:49,520 --> 00:10:53,520
हां बिल्कुल बिल्कुल ये भी पूछूंगा मैं बाहर से क्यों आ रही है अब थोड़ी करता हूं

162
00:10:53,520 --> 00:10:57,840
नहीं तो मैं वही तो कह रहा हूं कि भैया आपने बाहर से कुछ क्यों सीखा

163
00:10:57,840 --> 00:11:01,840
कैसे सीखा बाहर से कैसे सीखा हां

164
00:11:01,840 --> 00:11:05,840
क्यों सीखा बाहर से आपके अंदर से आनी चाहिए थी वो मर्यादा भी कह सकते हैं मैं कह रहा हूं क्या नाम

165
00:11:05,840 --> 00:11:09,920
है मेरी बात आप समझ नहीं रहे हो बड़ा क्यों हुआ ये नहीं कह रहा हूं मैं

166
00:11:09,920 --> 00:11:14,080
कह रहा हूं अगर अगर आपके अंदर धर्म और अधर्म का निर्णय लेने

167
00:11:14,080 --> 00:11:18,400
की शक्ति अपने अंदर से आती है तो आपको बाहर से क्यों सीखना

168
00:11:18,400 --> 00:11:22,480
पड़ रहा है? अंदर से आनी चाहिए थी वो आवाज। और अगर आपने अगर

169
00:11:22,480 --> 00:11:27,040
अगर आप ये कह एक मिनट भाई साहब अगर आप ये कह रहे हैं कि माता-पिता

170
00:11:27,040 --> 00:11:31,120
ने जो है माता-पिता ने हमको सिखाया है। अब

171
00:11:31,120 --> 00:11:35,200
हम डिसाइड कर रहे हैं कि उसमें से क्या लेना है, क्या नहीं लेना है। तो इनमें से कई

172
00:11:35,200 --> 00:11:39,280
विषय अती्द्रिय होते हैं। ठीक है? नहीं लेकिन उसमें चॉइस

173
00:11:39,280 --> 00:11:43,360
मेरी बात खत्म नहीं हुई है। मेरी बात खत्म नहीं हुई है। मेरी बात खत्म नहीं हुई है।

174
00:11:43,360 --> 00:11:47,680
अच्छा ओके। तो इनमें से कई विषय अती्द्रिय होते हैं। अती्द्रिय

175
00:11:47,680 --> 00:11:51,840
मतलब जिन्हें हम इंद्रियों से जान नहीं सकते वो सिर्फ हमें शब्द प्रमाण पे ही रहना पड़ता

176
00:11:51,840 --> 00:11:56,240
है। जैसे कि जैसे कि बहन के साथ भोग मत करो।

177
00:11:56,240 --> 00:12:00,320
हम्म। ठीक है? ये अती्द्रिय विषय है। अब इसमें आप इसमें

178
00:12:00,320 --> 00:12:05,120
आपका अनुभव क्या कहता है? शब्द प्रमाण मानोगे या प्रैक्टिकल मानोगे? क्या करोगे?

179
00:12:05,120 --> 00:12:09,200
तो इसमें तो अमेरिका में तो होता ही है सब हम क्या

180
00:12:09,200 --> 00:12:13,760
अमेरिका में तो होता सब कुछ ये बहन के साथ भी हो रहा था तो आप आप भी करोगे

181
00:12:13,760 --> 00:12:17,920
नहीं नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने बोला ना कि आपका धर्म आपका धर्म क्या है

182
00:12:17,920 --> 00:12:21,920
वो मैं पूछ रहा हूं ना आपका धर्म क्या है उनका क्या हुआ फिर धर्म उनका धर्म ये

183
00:12:21,920 --> 00:12:26,080
वो नहीं मान रहे इस मर्यादा को हां तो फिर तो ये ये डिसाइड

184
00:12:26,080 --> 00:12:30,080
कौन क्या नाम कर रहा है कि मर्यादा हमारे तो शास्त्र करते हैं ना शब्द

185
00:12:30,080 --> 00:12:33,440
प्रमाण हमारा तो करते तो इंसान तो वो भी आत्मा तो उनके अंदर भी है

186
00:12:33,440 --> 00:12:38,240
कि मतलब आपके हिसाब से अगर वो कर रहे हैं तो वो ठीक है ना? नहीं नहीं नहीं नहीं

187
00:12:38,240 --> 00:12:42,320
आप कह रहे हो सुनो सुनो मेरी बात आप समझो एक मिनट आप कह रहे हो कि अंदर से

188
00:12:42,320 --> 00:12:46,320
जो आवाज आए उसको मानना चाहिए। उनके अंदर से आवाज आ रही है कि बहन के साथ विवाह

189
00:12:46,320 --> 00:12:50,400
करो। तो वो सही कर रहे हैं आपके अकॉर्डिंग। नहीं आप बताइए ना

190
00:12:50,400 --> 00:12:54,560
ये वाली बात तो भाई मैं तो कह रहा हूं गलत कर रहे क्योंकि अंदर की आवाज ऐसे कि

191
00:12:54,560 --> 00:12:58,720
अंदर से दोनों आवाजें आती है। आत्मा की आवाज भी आती है और जो

192
00:12:58,720 --> 00:13:02,960
भोग की आवाज है अरे सुन लो भाई सुन लो। जी अंदर

193
00:13:02,960 --> 00:13:06,960
से दोनों सूचनाएं प्राप्त होती है। भोग की सूचना भी प्राप्त होती

194
00:13:06,960 --> 00:13:11,040
है और यह जो धर्म की सूचना भी प्राप्त होती है। उसमें से कौन सा धर्म है

195
00:13:11,040 --> 00:13:15,360
ये डिसाइड करने के लिए हमें बाह्य प्रमाण होना चाहिए। तृतीय पक्ष

196
00:13:15,360 --> 00:13:19,440
अब अब ये मैंने अपनी बात कह दी। अब तुम बताओ कि उनके अंदर की आवाज आ

197
00:13:19,440 --> 00:13:23,440
रही है बहन के साथ भोग करने की। तो वो सही कर रहे हैं। नहीं

198
00:13:23,440 --> 00:13:27,520
मैं वही तो आपसे ये वाली बात जानना चाह रहा था कि मुझे बात बताई। मेरा एक ना दोस्त

199
00:13:27,520 --> 00:13:31,600
था। मैं आपको इसी पे आ रहा हूं। इसी वाली बात पे आ रहा हूं। मेरा एक दोस्त था वो ना बहुत सारी लड़कियों

200
00:13:31,600 --> 00:13:35,600
के साथ उस उसने सेट किया हुआ है। हम्म। ठीक है। हम्म। मैंने उससे

201
00:13:35,600 --> 00:13:40,000
एक बार पूछी यह वाली बात जो आप बोल रहे हो ना? हम्म। मैंने कहा भाई एक बात बता।

202
00:13:40,000 --> 00:13:44,000
तेरे अंदर से आवाज नहीं आती कि यार तू इतनी लड़कियों के साथ कर रहा है अलग-अलग।

203
00:13:44,000 --> 00:13:48,240
एक को धोखा दे रहा है। उसको भी धोखा दे रहा है। उसने मेरे को बोला नहीं यार मेरे मेरे

204
00:13:48,240 --> 00:13:48,800
को तो

205
00:13:48,800 --> 00:13:52,800
नहीं आती कोई आवाज। हम्म। तो अगर उसको वो आवाज नहीं आ

206
00:13:52,800 --> 00:13:56,960
रही है। उसका उसका अर्थ आपके हिसाब से क्या है? तो आपने कहा ना अंदर

207
00:13:56,960 --> 00:14:01,120
की आवाज को सुनना है। बाहर से कुछ नहीं लेना है। तो आप बताइए

208
00:14:01,120 --> 00:14:05,200
ना आप इसको उचित मानते हैं। हां। हां तो इसका मतलब अंदर से जो

209
00:14:05,200 --> 00:14:09,200
हमारा हमारा इसका मतलब अंदर से विवेक आना पर्याप्त

210
00:14:09,200 --> 00:14:13,440
नहीं है धर्म और धर्म के निर्णय के लिए अगर पर्याप्त है अगर पर्याप्त

211
00:14:13,440 --> 00:14:17,520
है तो फिर आप उसको सही मानिए कि उसके अंदर से आवाज यदि नहीं आई तो

212
00:14:17,520 --> 00:14:21,920
उसने भोग किया तो सही किया उसको सही कहिए आप बहन के साथ विवाह को सही कहिए

213
00:14:21,920 --> 00:14:26,000
मां के साथ विवाह को सही कहिए हां तो फिर मतलब इसका मतलब ये हुआ कि

214
00:14:26,000 --> 00:14:30,000
हमारे भीतर से कोई आवाज नहीं आती है आती है पहचान पाना

215
00:14:30,000 --> 00:14:34,720
मुश्किल होता है हां तो फिर ये पहचान अंदर अंदर से ही

216
00:14:34,720 --> 00:14:38,800
बाहर से शास्त्र शब्द गुरुजन शास्त्र हा ठीक है

217
00:14:38,800 --> 00:14:42,880
तो मतलब आप ये कह रहे हैं कि मेरे अंदर से हर तरह की आवाज आती है लेकिन मैं वो वो

218
00:14:42,880 --> 00:14:46,960
डिसाइड बाहर से होगा हां दोनों तरह की आवाज आती है किसी को देख के

219
00:14:46,960 --> 00:14:51,040
आकर्षण भी होता है अंदर से मगर क्या करना है और क्या नहीं करना है वो

220
00:14:51,040 --> 00:14:55,200
डिसाइड शास्त्र करने है शास्त्र अच्छा शास्त्र करते

221
00:14:55,200 --> 00:14:59,200
हैं कौन से वाले सनातन शास्त्र सनात सनातन

222
00:14:59,200 --> 00:15:03,440
मतलब कौन से आते हैं सर वेद आएंगे या जो वेद वेद उपनिषद गीता

223
00:15:03,440 --> 00:15:05,120
सब

224
00:15:05,120 --> 00:15:09,200
पुराण भी अब एक एक पहले पहले

225
00:15:09,200 --> 00:15:13,200
तो यह बात क्लियर कर लो कि अंदर के ऊपर हम डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं

226
00:15:13,200 --> 00:15:17,200
निठारी के निठारी के अंदर भावना आई अंदर से कि मैं

227
00:15:17,200 --> 00:15:21,360
कुकर में उबाल के खाऊं बच्चों का यौन शोषण करके हां हां हैं तो वो

228
00:15:21,360 --> 00:15:25,520
सही कहोगे क्या उसको तुम अच्छा तो इसमें एक तो बात मेरे

229
00:15:25,520 --> 00:15:29,680
को पूछनी है आपसे मैंने एक ये ये चीज पहले क्लियर करो अंदर के

230
00:15:29,680 --> 00:15:33,760
ऊपर डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं हां हां वो क्लियर करो। मैं उसी पे

231
00:15:33,760 --> 00:15:38,000
आ रहा हूं। मान लीजिए मैं क्या नाम है? मैं मैं किसी

232
00:15:38,000 --> 00:15:42,240
व्यक्ति को पीट रहा हूं। हां। ठीक है। हां। उससे पहले

233
00:15:42,240 --> 00:15:46,560
मेरे भीतर से आवाज दे रही। नहीं यार मैं जो कर रहा हूं गलत कर रहा हूं। हम

234
00:15:46,560 --> 00:15:50,640
ठीक है। आप ये कह रहे हैं कि जो मेरे अंदर वो भावना आ रही कि मैं गलत कर रहा हूं।

235
00:15:50,640 --> 00:15:55,920
ये बाहर से आती है मेरे अंदर। नहीं नहीं

236
00:15:55,920 --> 00:16:00,000
बाहर से बाहर से निश्चित होता है कि इन दोनों में से कौन सी

237
00:16:00,000 --> 00:16:04,160
चीज मान्य है। अच्छा कौन सी टीम मानने है? क्योंकि क्योंकि हम

238
00:16:04,160 --> 00:16:08,240
लोग एक रूप में सच्चिदानंद स्वरूप भगवान के अंशी भी हैं।

239
00:16:08,240 --> 00:16:12,240
तो हमारे सच्चिदानंद के आकर्षण के कारण धर्म की भावना भी अंदर

240
00:16:12,240 --> 00:16:16,320
से आती है। महाभारत में सिद्धांत लिखा हुआ है। अन्यों के साथ वो व्यवहार

241
00:16:16,320 --> 00:16:20,320
ना करो जो अपने लिए उचित ना लगे। ठीक है।

242
00:16:20,320 --> 00:16:24,320
तो ये जो भावना आती है अंदर से अपने लिए अच्छी भावना भी आती है।

243
00:16:24,320 --> 00:16:28,480
अरे यार अत्याचार नहीं करना चाहिए। मगर यह भी आती है कि चुरा

244
00:16:28,480 --> 00:16:32,880
ले, खा ले, पीट ले, शोषण कर ले, कंजशन कर ले। तो उसमें पहचान

245
00:16:32,880 --> 00:16:37,120
पाना मुश्किल होता है। इसलिए तृतीय सत्ता चाहिए होती है। ये बताने

246
00:16:37,120 --> 00:16:41,280
के लिए इन दोनों में से कौन सा है? अभी हम लोग बात कर रहे हैं क्या हम अंदर की भावना

247
00:16:41,280 --> 00:16:45,280
पे डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं? ये बताइए। इसको बताइए। डिपेंड कर सकते

248
00:16:45,280 --> 00:16:49,280
हैं कि नहीं? हां। तो हां। तो उस पे मेरा जो आपको कहना है

249
00:16:49,280 --> 00:16:53,360
वो ये था कि जो आप बोल रहे हैं कि एक सही कह रहा है। एक कहना है, क्या नाम है

250
00:16:53,360 --> 00:16:57,440
गलत कह रहा है एक बात को। भाई साहब मैं प्रश्न पूछ रहा हूं।

251
00:16:57,440 --> 00:17:01,520
अंदर की भावना पर डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं और यदि करना उचित है

252
00:17:01,520 --> 00:17:05,680
तो निठारी के अंदर से भावना आई कुकर में उबाल के खाने की वो उचित है।

253
00:17:05,680 --> 00:17:09,680
किसी के अंदर भावना आई अपनी मां के साथ विवाह करने की वो उचित है। बहन के

254
00:17:09,680 --> 00:17:14,000
साथ विवाह करने की क्या वो उचित है? यह बताइए। अंदर पे रिलाई करे व्यक्ति

255
00:17:14,000 --> 00:17:18,320
के ना करे। हां तो वहां तो ये फिर मेरे हिसाब से अंदर से होगा डिसाइड

256
00:17:18,320 --> 00:17:22,320
कर लिया जाएगा। ये तो तो मतलब निठारी ने जो किया वो सही किया

257
00:17:22,320 --> 00:17:26,400
आपके अनुसार। उसने उसने अंदर से डिसाइड

258
00:17:26,400 --> 00:17:30,480
किया ना अरे मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम्हारे अकॉर्डिंग नहीं गलत

259
00:17:30,480 --> 00:17:34,480
था कि सही था तबके जो जो जिस जिस

260
00:17:34,480 --> 00:17:35,520
व्यक्ति अरे

261
00:17:35,520 --> 00:17:39,600
आपने ये कहा है ना कि अंदर से डिसाइड होगा तो तो

262
00:17:39,600 --> 00:17:43,600
दुनिया में दुनिया में जो जो व्यक्ति पाप कर रहा है वो सब उसके

263
00:17:43,600 --> 00:17:48,080
अंदर से डिसाइड हो रहा है तो वो सब पाप नहीं है पुण्य है आपके हिसाब से

264
00:17:48,080 --> 00:17:52,080
और जो अच्छा कर रहा है वो जो अच्छा कर रहा है वो तो शास्त्र की

265
00:17:52,080 --> 00:17:56,400
मर्यादा में रह कर रहा है। अच्छा अच्छा मतलब आप ये कह रहे हैं कि

266
00:17:56,400 --> 00:18:00,560
शास्त्र में जो कुछ लिखा है वो सब अच्छा है। देखो विषय मत

267
00:18:00,560 --> 00:18:04,640
बदलो। पहले तो ये क्लियर विषय बदल रहे हो। विषय बदल रहे

268
00:18:04,640 --> 00:18:09,040
हो। विषय ये है विषय बोला था स्टार्टिंग में क्योंकि मैं क्वेश्चन पूछूंगा

269
00:18:09,040 --> 00:18:13,280
आपसे। आप क्वेश्चन आप पूछिए। पहले जो क्वेश्चन चल रहा है उसको खत्म करिए।

270
00:18:13,280 --> 00:18:17,840
अंदर पे डिपेंड हो सकते हैं या नहीं? ये बताइए। अंदर पे

271
00:18:17,840 --> 00:18:22,160
डिपेंड हो सकते हैं। हो सकते तो ठीक किया।

272
00:18:22,160 --> 00:18:26,240
तो उन्होंने उसने किया अरे ने ठीक किया कि गलत किया ये बताओ ना

273
00:18:26,240 --> 00:18:30,240
मेरे भाई हां हां तो उसने किया तो ठीक क्या होगा उसी को होगा नहीं

274
00:18:30,240 --> 00:18:34,240
तुम क्या मानते हो वहां बच्चों का बच्चों का मांस कुकर में उबाल के खाया गया वो

275
00:18:34,240 --> 00:18:38,560
सही हुआ था वो धर्म है हां क्या वो धर्म

276
00:18:38,560 --> 00:18:42,720
है सही हुआ था वो भाई जी मेरे कहने से क्या होता है

277
00:18:42,720 --> 00:18:46,720
अरे भाई तुम बता रहे हो ना कि धर्म अंदर से आता है धर्म की परिभाषा

278
00:18:46,720 --> 00:18:50,560
तुमने दी है ना आप आप समझे नहीं मेरी बात को मेरे मैं सब समझ रहा

279
00:18:50,560 --> 00:18:54,560
हूं भाई आप अब क्विट कर रहे हैं विषय से। मैं आपसे पूछ रहा हूं

280
00:18:54,560 --> 00:18:58,800
जिस व्यक्ति ने माता पे कुदृष्टि डाली, बहन पे कुदृष्टि डाली वो

281
00:18:58,800 --> 00:19:02,800
अच्छे कार्य हैं। धर्म है वो आपका आपके अनुसार तो

282
00:19:02,800 --> 00:19:06,800
भाई जी ये जो ये डिसाइड या फिर या फिर ये या फिर ये

283
00:19:06,800 --> 00:19:10,960
कह दीजिए सबका धर्म अलग-अलग होता है। मेरा धर्म ये है। हां तो ये

284
00:19:10,960 --> 00:19:15,120
कह दीजिए कि मेरे अंदर से आवाज आएगी कि क्या कहते हैं? बहन के साथ विवाह

285
00:19:15,120 --> 00:19:19,120
नहीं करना है वो भी धर्म है और जिसके अंदर से आवाज आएगी कि बहन के साथ विवाह करना है वो भी धर्म

286
00:19:19,120 --> 00:19:23,120
है तो भाई कर ही रहे ना इस्लाम अरे वो कर रहे हैं तो हम आप

287
00:19:23,120 --> 00:19:27,680
उसको पापी क्यों कह रहे हो बुरा क्यों कह रहे हो नहीं मैं कह रहा हूं बुरा

288
00:19:27,680 --> 00:19:31,920
तो तो आपके हिसाब से बहन के साथ विवाह करना बुरा नहीं है हां तो इस्लाम

289
00:19:31,920 --> 00:19:35,920
वाले कर तो रहे हैं मैं पूछ रहा हूं बुरा है कि नहीं यार नहीं

290
00:19:35,920 --> 00:19:39,920
भाई जी आपके हिसाब से दुनिया में कुछ आपके हिसाब से कुछ बुरा

291
00:19:39,920 --> 00:19:44,240
है दुनिया में हैं हां नहीं भाई मैं

292
00:19:44,240 --> 00:19:48,320
दुनिया में मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं दुनिया में कोई चीज

293
00:19:48,320 --> 00:19:52,320
अन्याय है क्या आपके हिसाब से अन्याय अन्याय है ही नहीं

294
00:19:52,320 --> 00:19:56,480
अन्याय एक्सिस्ट करता है क्या दुनिया में नहीं नहीं नहीं होता ना दुनिया में अन्याय

295
00:19:56,480 --> 00:20:00,720
एक्सिस्ट नहीं करता दुनिया में अन्याय एक्सिस्ट नहीं करता दुनिया में

296
00:20:00,720 --> 00:20:04,720
दुनिया में अन्याय एक्सिस्ट करता है कि नहीं करता मैं ये पूछ रहा हूं अन्याय

297
00:20:04,720 --> 00:20:06,000
नहीं नहीं नहीं

298
00:20:06,000 --> 00:20:10,160
करता नहीं करता नहीं करता ठीक है अब ये बताइए आपका धर्म

299
00:20:10,160 --> 00:20:14,720
है कि आपकी पत्नी के साथ कोई व्यभिचार ना करे करे। ठीक?

300
00:20:14,720 --> 00:20:18,720
दूसरे के अंदर से आवाज आ रही। सुनिए दूसरे के अंदर से आवाज आ रही है कि वो

301
00:20:18,720 --> 00:20:22,800
आपकी पत्नी के साथ व्यभचार करे। अब इसमें से किसका धर्म मान्य होगा?

302
00:20:22,800 --> 00:20:26,800
नहीं आप नहीं मेरे को आपकी सॉरी आवाज नहीं आई। फिर से बोलो। मैं बोल रहा हूं

303
00:20:26,800 --> 00:20:31,040
आप शादीशुदा है क्या? नहीं नहीं अनमैरिड हूं मैं। नहीं है। आपकी माताजी

304
00:20:31,040 --> 00:20:35,200
है? नहीं है। अच्छा। देहांत हो गया उनका। अच्छा आपकी घर

305
00:20:35,200 --> 00:20:39,200
में कोई और अन्य स्त्री? नहीं स्त्री तो नहीं है भैया कोई। अच्छा

306
00:20:39,200 --> 00:20:43,200
नहीं है। ठीक है। हां जी। अगर आपका धर्म यह है आप क्या मानते

307
00:20:43,200 --> 00:20:47,200
हैं कि माता जी के साथ या घर की स्त्री के साथ किसी

308
00:20:47,200 --> 00:20:51,520
का कोई और व्यक्ति बलात्कार इत्यादि जैसी हरकत करे या ना करे इस

309
00:20:51,520 --> 00:20:55,520
इस संबंध में आपके अंदर की आवाज क्या है? नहीं अगर उनकी मर्जी है

310
00:20:55,520 --> 00:20:59,600
तो तो कोई इशू नहीं है। मर्जी नहीं है तो तो भाई उनके अंदर की आवाज

311
00:20:59,600 --> 00:21:04,080
क्या है भाई साहब? मैंने वही आपसे कहा ना अगर वो उनकी मर्जी है

312
00:21:04,080 --> 00:21:08,320
तो मैं कह रहा हूं उनकी मर्जी है। आप आप देखना पसंद करोगे, सुनना

313
00:21:08,320 --> 00:21:12,400
पसंद करोगे। आपके घर की स्त्री के साथ किसी और ने बलात्कार किया और मैं

314
00:21:12,400 --> 00:21:16,640
बलात्कार नहीं कह रहा हूं। और सुनो मैंने बलात्कार

315
00:21:16,640 --> 00:21:20,640
कहा है। इसमें मर्जी तो है ही नहीं। अब मैं बलात्कार की बात कर रहा हूं। हां तो भैया बलात्कार

316
00:21:20,640 --> 00:21:21,140
तो

317
00:21:21,040 --> 00:21:26,160
गलत है ना। हां क्यों गलत है? तुमने तो अभी कहा कि दुनिया में कुछ भी अन्याय है ही नहीं।

318
00:21:26,160 --> 00:21:30,160
हां तो भैया अन्याय अब देखिए भैया वही बात आ गई ना ऐसे

319
00:21:30,160 --> 00:21:34,160
ही वाइफ होती है सुनिए मेरी बात। एक वाइफ होती है। हां

320
00:21:34,160 --> 00:21:38,160
एक वाइफ हस्बैंड वाइफ होते हैं। हां अभी कोर्ट का एक ना थोड़े

321
00:21:38,160 --> 00:21:42,160
दिन पहले अरे भाई तुम इतनी लंबी मुझे मैं लेक्चर सुनने नहीं बैठा हूं

322
00:21:42,160 --> 00:21:46,400
आपका। मेरे पास इतना टाइम नहीं है। मैंने बहुत बात कर ली आपसे। आप ये बताइए आपने

323
00:21:46,400 --> 00:21:51,040
आपने अभी क्या कहा? अन्याय है ही नहीं। आप कह रहे हो वो तो गलत है। चलो

324
00:21:51,040 --> 00:21:55,200
तो वो गलत हो। अन्याय होना मैं उसी देखो भैया आप क्या कर रहे हो ना देखो

325
00:21:55,200 --> 00:21:59,280
सुनो भैया आप क्या कर रहे हो अन्याय उठाए वो जो बलात्कार होना है वो

326
00:21:59,280 --> 00:22:03,360
अन्याय नहीं है नहीं नहीं भैया देखो आप क्या कर रहे हो ना आप कह रहे हो मेरे मेरे पास टाइम नहीं है

327
00:22:03,360 --> 00:22:07,440
पहली बात तो आपने वही मेरे को ना बांध दिया अरे तो क्या करूं पूरे दिन आपके साथ

328
00:22:07,440 --> 00:22:11,840
मगजमारी करूंगा आपने

329
00:22:11,840 --> 00:22:16,160
आप अपनी बातों से पलट रहे आप अपनी बातों से पलट रहे हो

330
00:22:16,160 --> 00:22:21,120
नहीं नहीं भैया बात बोलिए हेलो हां बोलिए

331
00:22:21,120 --> 00:22:25,200
आपने भैया फोन काट दिया क्या? फ़ोन इसलिए काट दिया क्योंकि आप अपनी बातों से

332
00:22:25,200 --> 00:22:29,360
पलट रहे हैं। अरे भैया जी मैं तो बात करने में शुरू शुरू भी

333
00:22:29,360 --> 00:22:33,440
नहीं हुआ हूं भैया। नहीं शुरू होइए मगर बातों से मत पलटिए। आपने एक्चुअली

334
00:22:33,440 --> 00:22:36,320
क्या है ना देखिए बातों से मत पलटिए।

335
00:22:36,320 --> 00:22:40,320
बातों से बातों से मत पलटिए। आपने कहा कुछ भी अन्याय नहीं है। फिर कह रहे हो

336
00:22:40,320 --> 00:22:44,640
गलत है। नहीं नहीं। चलो मैं दोबारा पूछ ले रहा हूं। गलत एक्सिस्ट करता है क्या दुनिया

337
00:22:44,640 --> 00:22:48,720
में? भैया मैंने वही तो आपसे बोला ना। मैं मैं पूछ क्या रहा

338
00:22:48,720 --> 00:22:52,880
हूं? देखो ना आप यह बात आप जब मैंने

339
00:22:52,880 --> 00:22:56,880
पहली बार प्रश्न किया था तो आप कह रहे थे आप अपनी बात मत करो आप

340
00:22:56,880 --> 00:23:01,040
उस बात को आगे बढ़ाया ना तो अब जब आगे बढ़ी है आगे बढ़ी है तो उसको छोड़ो

341
00:23:01,040 --> 00:23:05,280
मत नहीं आपने क्या कहा आपने क्या कहा दुनिया में गलत

342
00:23:05,280 --> 00:23:09,280
एक्सिस्ट करता है कि नहीं देखो आप सुनो भैया एक बात

343
00:23:09,280 --> 00:23:13,360
आ रही है देखो आप तो आप विषय पे सब बदल

344
00:23:13,360 --> 00:23:17,440
रहे हो नहीं भैया मैं जो मैं आपसे कह रहा हूं मैं

345
00:23:17,440 --> 00:23:21,440
जब मेरी बात हुई थी

346
00:23:21,440 --> 00:23:25,440
वो मान लो मैं मैं
