1
00:00:06,240 --> 00:00:10,320
भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने की। हां भगवान को आवश्यकता

2
00:00:10,320 --> 00:00:14,560
है या पूर्ण है। उसको किसी चीज का अभाव नहीं होता ना। वो अपनी

3
00:00:14,560 --> 00:00:18,880
पूर्णता को अपने अंदर ही पूर्ण कर सकता है ना। सामग्री की आवश्यकता

4
00:00:18,880 --> 00:00:23,120
नहीं थी। क्रिया की आवश्यकता थी ना। भगवान को उसकी आवश्यकता

5
00:00:23,120 --> 00:00:27,200
है और नहीं भी है। दोनों एक साथ ट्रू है। जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता

6
00:00:27,200 --> 00:00:31,360
नहीं है तो वो सच्चिदानंद है। जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता है

7
00:00:31,360 --> 00:00:35,520
तो वो सच्चिदानंद नहीं है। तो यानी कि भगवान भगवान नहीं भी है और है भी है।

8
00:00:35,520 --> 00:00:39,600
टाइम क्योंकि भगवान ने बनाया भगवान टाइम के अंदर भी है और भगवान टाइम के बाहर भी है। जब आउट

9
00:00:39,600 --> 00:00:43,840
ऑफ टाइम गॉड को लेते हैं तो उनको क्रिया की आवश्यकता

10
00:00:43,840 --> 00:00:47,840
नहीं पड़ती। क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। टाइम

11
00:00:47,840 --> 00:00:52,000
के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन होता है। एक्सपेंशन होता

12
00:00:52,000 --> 00:00:56,080
है। मगर वो एक्सपेंशन होते समय भी एक्सपेंशन होते

13
00:00:56,080 --> 00:01:00,720
समय भी वो अपने आप में पूर्ण शाश्वत है। है

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00:01:00,720 --> 00:01:04,800
हां भगवान होना तब सिद्ध होगा जब वो भगवान

15
00:01:04,800 --> 00:01:08,800
है और नहीं है। एक साथ हो सके। ये मान लीजिए भगवान है। अब

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00:01:08,800 --> 00:01:12,800
इन्होंने अपने इस स्वरूप को नष्ट कर दिया। यह दिखा

17
00:01:12,800 --> 00:01:16,880
दिया मैं नष्ट भी होता हूं। टाइम के बाहर कुछ नष्ट नहीं होता। मैंने टाइम बताया

18
00:01:16,880 --> 00:01:20,960
ना नष्ट ना होने का भाव है। एक मिनट फिर नष्ट ना होने का भाव है।

19
00:01:20,960 --> 00:01:21,460
आपके

20
00:01:21,280 --> 00:01:25,440
लॉजिक को ले लेता हूं। बाहर है इसलिए हां पर नष्ट यानी कि भगवान

21
00:01:25,440 --> 00:01:29,440
में जो चेंजेस आ रहे हैं वो अंदर आ रहे हैं। उनका जो परम रूप है वो

22
00:01:29,440 --> 00:01:33,600
बना हुआ है लगातार टाइम के बाहर। हां। तो भूख तो वही

23
00:01:33,600 --> 00:01:38,320
हो गई। उसी को मैं लीला कह रहा हूं। उसी को आप टाइम टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो।

24
00:01:38,320 --> 00:01:42,640
उसी को तो मैं लीला कह रहा हूं भाई। हां मैं भी उसी को

25
00:01:42,640 --> 00:01:46,640
उसी को आप टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो। कृष्ण का रूप शाश्वत

26
00:01:46,640 --> 00:01:50,960
है। क्या दिक्कत है? शाश्वत है। हो गया। परम रूप शाश्वत

27
00:01:50,960 --> 00:01:55,440
है। हो गया। क्लियर है? बदलता नहीं है। बदलता

28
00:01:55,440 --> 00:01:59,520
नहीं है। वो स्वरूप से चेंज नहीं होता है। हां।

29
00:01:59,520 --> 00:02:03,920
तो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है। वो हां।

30
00:02:03,920 --> 00:02:07,920
ऐसा कोई स्टेज ही नहीं है कि भगवान। ठीक है नहीं जाता है तो अब बात ये आ गई अगर

31
00:02:07,920 --> 00:02:12,160
वो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो सच्चिदानंद है तो

32
00:02:12,160 --> 00:02:16,160
उसको संसार बनाने की आवश्यकता आप क्यों कह रहे हैं

33
00:02:16,160 --> 00:02:20,160
आवश्यकता है रस यानी रस नहीं था ना

34
00:02:20,160 --> 00:02:22,960
उनके पास

35
00:02:22,960 --> 00:02:27,120
आप कहो ना अभाव था

36
00:02:27,120 --> 00:02:31,120
रस का अभाव था तो उससे साबित क्या होता है

37
00:02:31,120 --> 00:02:35,280
अगर आवश्यकता थी तो उससे साबित ये होता है कि आपकी फिलोसोफी के अनुसार

38
00:02:35,280 --> 00:02:40,000
भगवान सच्चिदानंद सिद्ध नहीं हो रहे हैं। आपने कहा था अकाट है हमारी। सच्चिदानंद

39
00:02:40,000 --> 00:02:44,240
को आवश्यकता से नहीं जोड़ना है। इसलिए यह नहीं कहना है कि भगवान ने किसी

40
00:02:44,240 --> 00:02:48,240
कारण से दुनिया बनाई है। भगवान ने अकारण ये दुनिया

41
00:02:48,240 --> 00:02:52,480
बनाई है। हमको ये मानना पड़ेगा कि ये जो दुनिया है

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00:02:52,480 --> 00:02:56,480
वो भगवान की शक्ति का परिणाम मात्र है। अगर

43
00:02:56,480 --> 00:03:00,560
हम ये अस्यूम करें कि भगवान को सृष्टि बनाने

44
00:03:00,560 --> 00:03:04,640
की जरूरत नहीं है सेटिस्फाई होने की तो ये भी भगवान के अंदर एक

45
00:03:04,640 --> 00:03:08,640
कमी हो जाएगी। एक भी अभाव नहीं है। यह भी तो अपूर्णता हुई

46
00:03:08,640 --> 00:03:13,040
ना। इनकंप्लीट होना भी उनकी कंप्लीटनेस को एक्चुअली ग्लोरिफाई

47
00:03:13,040 --> 00:03:17,360
करता है। भगवान में अभाव होना ये भी भगवान की कंप्लीटनेस

48
00:03:17,360 --> 00:03:21,440
है। भगवान में ऐसी कोई चीज नहीं है दुनिया में जिसका भगवान में अभाव नहीं है।

49
00:03:21,440 --> 00:03:25,920
ये भगवान को इनकंप्लीट बनाता है। एक कमी होनी चाहिए। क्योंकि

50
00:03:25,920 --> 00:03:29,920
अगर एक भी कमी नहीं है। यह भी तो अपने आप में कमी है। अगर मैं यह मानू कि

51
00:03:29,920 --> 00:03:34,000
भगवान ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है।

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00:03:34,000 --> 00:03:38,320
तो भी ये भी तो एक कमी हुई। भगवान का भगवान ना होना ये उसकी कंप्लीटनेस

53
00:03:38,320 --> 00:03:42,240
है। एक्चुअली हां भगवान के अंदर

54
00:03:42,240 --> 00:03:46,960
अभाव होना ये उनकी पूर्णता है।

55
00:03:46,960 --> 00:03:51,600
वाह बहुत बढ़िया। भगवान के अंदर अभाव होना

56
00:03:51,600 --> 00:03:55,600
भगवान के अंदर अभाव होना वो उनकी पूर्णता है। वाह बहुत

57
00:03:55,600 --> 00:03:59,840
बढ़िया बहुत अच्छा बहुत बढ़िया बहुत अच्छी बात है। बिल्कुल

58
00:03:59,840 --> 00:04:03,840
सही है। अब आप ये बता दीजिए कि भगवान के अंदर अभाव होना ये

59
00:04:03,840 --> 00:04:08,000
उनकी एक मिनट एक मिनट। अब अब आप मैं बता मैं पूछ रहा हूं। भगवान

60
00:04:08,000 --> 00:04:12,000
के अंदर अभाव होना ये उनकी पूर्णता है। ये शास्त्र में कहां लिखा

61
00:04:12,000 --> 00:04:16,000
है? भगवान के अंदर ये जो पूर्ण वाला

62
00:04:16,000 --> 00:04:20,000
श्लोक था एक बार निकालिएगा। निकालता हूं। एक मिनट रुकिए। बहुत ज्यादा

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00:04:20,000 --> 00:04:26,000
टाइम हो गया सर। मैं जल जाता हूं।

64
00:04:34,450 --> 00:04:38,450
[संगीत]
