1
00:00:01,760 --> 00:00:06,000
मैं निग्रचार्य जी का समर्थक हूं। अच्छा

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,000
और जब उड़ीसा में जन्म ही हुआ है

3
00:00:10,000 --> 00:00:15,040
तो शंकर सिद्धांत को तो नहीं मानने की बात नहीं है। हम

4
00:00:15,040 --> 00:00:19,520
लेकिन यदि आप कुछ समय मुझे देंगे तो एक स्वस्थ वार्ता

5
00:00:19,520 --> 00:00:25,520
के साथ एक विषय के ऊपर आपका ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा।

6
00:00:25,600 --> 00:00:29,680
विषय किस विषय में मतलब निग्रचार का मैं भी समर्थन करने लगूं।

7
00:00:29,680 --> 00:00:34,000
नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है बस

8
00:00:34,000 --> 00:00:38,000
सा उपासना के ऊपर थोड़ी बहुत लगी कि आपकी बुद्धि कच्ची

9
00:00:38,000 --> 00:00:42,080
है थोड़ा आपके ऊपर मतलब क्या बोलूं थोड़ा कुछ

10
00:00:42,080 --> 00:00:46,400
आपके क्या बोलते हैं उसको ध्यान केंद्रित

11
00:00:46,400 --> 00:00:50,880
करना चाहिए मुझे परंपरा के अनुसार देखिए

12
00:00:50,880 --> 00:00:55,200
जो विषय आप लेकर आए हैं जी सात तो उपासना में मेरी बुद्धि

13
00:00:55,200 --> 00:00:59,360
कच्ची है जी ये विषय आप इस संबंध में लेकर आए हैं क्योंकि क्योंकि

14
00:00:59,360 --> 00:01:03,360
मैंने भागवतानंद की अप्रामाणिकता को

15
00:01:03,360 --> 00:01:07,360
सिद्ध किया है। नहीं आप सिद्ध किए हो या नहीं

16
00:01:07,360 --> 00:01:11,440
किए हो वह तो समय कहेगा वो उसके विषय को सुनिए पहले एक

17
00:01:11,440 --> 00:01:15,440
बात थोड़े सुनिए भैया हम कुछ हम कुछ अभी

18
00:01:15,440 --> 00:01:16,800
आपसे ये नहीं बोल अगर

19
00:01:16,800 --> 00:01:20,800
आप ये चाहते हैं कि आप जो बोले वो मैं सुनू तो जो मैं बोलना चाह

20
00:01:20,800 --> 00:01:24,960
रहा हूं वो मुझे बोल लेने दीजिए मेरी आप मेरी लाइन आधी हो पाई

21
00:01:24,960 --> 00:01:29,040
उसमें आप टपक से बोल पड़े इस तरीके से तो सौहार्दपूर्ण वार्ता

22
00:01:29,040 --> 00:01:33,920
नहीं हो पाती ना जी जी जी हां अब बात आती है

23
00:01:33,920 --> 00:01:37,920
कि भागवतानंद की जो अप्रामाणिकता

24
00:01:37,920 --> 00:01:42,240
सिद्ध करने के निमित्त जो हमने बातें कही है जी सात

25
00:01:42,240 --> 00:01:46,320
उपासना के संबंध में हम वो शंकर सिद्धांत जो है

26
00:01:46,320 --> 00:01:50,640
ना शंकर परंपरा का जी उसका चश्मा लगाकर देखी गई बातें

27
00:01:50,640 --> 00:01:54,880
हैं क्योंकि क्योंकि वो व्यवहारिक

28
00:01:54,880 --> 00:01:59,360
रूप से शंकर परंपरा से संबंध सिद्ध होता है। जी और काल्पनिक

29
00:01:59,360 --> 00:02:03,360
रूप से स्वप्न की दृष्टि से स्वप्न की दीक्षा से वह कहां से सिद्ध होता है वह अभी

30
00:02:03,360 --> 00:02:07,360
तक पता ही नहीं है। तो इसलिए हम जो भी बात कह रहे हैं

31
00:02:07,360 --> 00:02:11,440
वो शंकर सिद्धांतों को मध्य में रखते हुए कह रहे हैं कि यह बात

32
00:02:11,440 --> 00:02:15,440
जो लिखी हुई है यह बात जो तुम कह रहे हो क्या वो शंकर परंपरा

33
00:02:15,440 --> 00:02:19,600
के द्वारा स्वीकार्य है क्योंकि तुम्हारी जो वेदोक्त परंपरा

34
00:02:19,600 --> 00:02:23,280
है वह शंकर परंपरा ही है।

35
00:02:23,280 --> 00:02:27,600
निश्चित ठीक है निश्चित और कुछ बोलना चाहेंगे तो अगर आप शंकराचार्य

36
00:02:27,600 --> 00:02:31,600
के विरोध में जा रहे हैं विरोध में जाकर के कोई सिद्धांत

37
00:02:31,600 --> 00:02:32,240
प्रतिपादित

38
00:02:32,240 --> 00:02:36,480
कर रहे हैं तो वह स्वीकार नहीं हो सकता परंपरा के विरोध में है जी जी

39
00:02:36,480 --> 00:02:41,360
ठीक है ये हमारा वहां पर दृष्टिकोण है अब अब आप बताएं आप

40
00:02:41,360 --> 00:02:47,200
शक्ति पास जो देवी उपासना के संबंध में आप क्या बात लेकर आए?

41
00:02:47,200 --> 00:02:51,680
पहले तो एक उदाहरण के साथ प्रारंभ करना चाहूंगा। बाद में

42
00:02:51,680 --> 00:02:55,840
एक बात और मैं कह दूं आपको। आपने एक बात कही कि शायद मैं अकल

43
00:02:55,840 --> 00:02:59,920
का कच्चा हूं। नहीं नहीं अकल का कच्चा हूं। ये नहीं बोलना। नहीं नहीं उस शक्ति

44
00:02:59,920 --> 00:03:04,160
उपासना के संबंध में बस थोड़ा कच्ची जानकारी कच्ची है। जी जी

45
00:03:04,160 --> 00:03:09,120
और मैं आपको ये बताना चाहूंगा कि आपने जो शब्द यूज किया है एक स्वषित

46
00:03:09,120 --> 00:03:13,200
व्यक्ति के लिए निग्रहचार्य तो उस संबंध में आपकी जानकारी

47
00:03:13,200 --> 00:03:17,280
कच्ची है। ठीक है वो तो आपकी आपकी जानकारी

48
00:03:17,280 --> 00:03:21,280
लेने के बाद आपसे जो बात है शक्ति उपासना के

49
00:03:21,280 --> 00:03:25,600
संबंध में वह करने के बाद मैं फिर आपको ये भागवतानंद

50
00:03:25,600 --> 00:03:29,600
के निगराचार ना होने के संबंध में जानकारी दूंगा। ठीक

51
00:03:29,600 --> 00:03:33,920
वो तो समय कहेगा क्या है क्या नहीं नहीं नहीं आप वो सुनने में इंटरेस्टेड

52
00:03:33,920 --> 00:03:38,000
है तो अपनी बात बताएं मुझे निश्चित मुझे पहले आप

53
00:03:38,000 --> 00:03:42,000
बता दीजिए मैं सुन लूंगा फिर आपको बता दूंगा थोड़ी तो आप बताइए

54
00:03:42,000 --> 00:03:46,800
कि आपने जो भागवतानंद को निग्रहचार्य कहा तो किस आधार पे कहा बताइए

55
00:03:46,800 --> 00:03:47,440
ये समय

56
00:03:47,440 --> 00:03:51,520
आने पर पता चलेगा भैया ये विवाद ठीक है तो मेरी जानकारी भी आपको समय

57
00:03:51,520 --> 00:03:55,840
आने पर पता चल जाएगी आप फोन रख सकते हैं। नहीं नहीं आपके

58
00:03:55,840 --> 00:04:00,080
कोई बात विवाद नहीं करना चाहता हूं आप ही तो कर रहे हैं। आप आप

59
00:04:00,080 --> 00:04:04,240
किसी को मेरे समक्ष यदि निग्रहचार्य कह रहे हैं तो उसका

60
00:04:04,240 --> 00:04:08,320
निग्रहचार्य तो आप सिद्ध करिए ना। जब आप चाहते हैं कि

61
00:04:08,320 --> 00:04:12,400
मैं आपकी बातें सुनू वो शक्ति उपासना के संबंध में। तो मैं आपकी

62
00:04:12,400 --> 00:04:16,880
बात ये वाली क्यों सुनूं? जब वो आदमी निग्रहचार्य नहीं है तो मैं क्यों सुनू निग्र आचार्य?

63
00:04:16,880 --> 00:04:21,040
वो ये बात छोड़ दीजिए। आप अभी निग्रहचारी जी की बात को

64
00:04:21,040 --> 00:04:25,040
बगल में रखिए। बस आपको थोड़ा ज्ञानवर्धन के लिए कुछ देना

65
00:04:25,040 --> 00:04:29,440
चाहता हूं। तो मैं तो मैं ज्ञानवर्धन क्यों लूं आपसे? मुझे तो आवश्यकता

66
00:04:29,440 --> 00:04:33,600
नहीं है। मेरे पास राम नाम का मंत्र है। मैं अपना मंत्र जप रहा हूं। और मुझे ज्ञान

67
00:04:33,600 --> 00:04:38,080
चाहिए होगा तो मैं शंकराचार्य के पास जाऊंगा। मेरे गुरु हैं वो। शंकराचार्य

68
00:04:38,080 --> 00:04:42,080
जी के पास जाएंगे। ये हम कहां नहीं बोल रहे कि आप नहीं जाएंगे। आप फिर

69
00:04:42,080 --> 00:04:46,560
आप क्यों ज्ञानवर्धन दे रहे हैं आप मुझे बताइए? परिपेक्ष

70
00:04:46,560 --> 00:04:50,880
क्या है? ज्ञानवर्धन देने का प्रयोजन क्या है?

71
00:04:50,880 --> 00:04:54,880
मुझे लगा यह कि आप जो भगवती की उपासना पद्धति जो

72
00:04:54,880 --> 00:04:59,120
सांतर्गत उपासना पद्धति है उस वो सा अंतर्गत

73
00:04:59,120 --> 00:05:03,200
जो उपासना पद्धति है क्या वो शंकराचार्य ने प्रतिपादित की है

74
00:05:03,200 --> 00:05:07,600
निश्चित है मैं जो बता रहा हूं मैं जो बताना चाह रहा हूं वो भगवत

75
00:05:07,600 --> 00:05:11,760
भगवत पाद के द्वारा ही प्रतिपादित पोषित रक्षित है

76
00:05:11,760 --> 00:05:15,920
इसी कारण आपसे बोलना बताइए मैं जो अभी

77
00:05:15,920 --> 00:05:20,320
बताना चाह रहा हूं भगवत पाद भगवत पाद के अरे भाई बताइए

78
00:05:20,320 --> 00:05:24,560
अब वो बताइए आप जो बताना चाह रहे हैं वो लाइन मत दोहराइए अब वो बात बताइए

79
00:05:24,560 --> 00:05:29,200
जो आप बताना चाह रहे हैं। ठीक है पूरी

80
00:05:29,200 --> 00:05:33,200
जगन्नाथ मंदिर जो है वो बोलो वो

81
00:05:33,200 --> 00:05:37,360
किस आचार्य के अधिकार क्षेत्र में आता है? शंकराचार्य

82
00:05:37,360 --> 00:05:42,720
शंकराचार्य जी के अधिकार क्षेत्र में आता है। पूरी

83
00:05:42,720 --> 00:05:47,440
पूर्वाना गोवर्धन पीठा पीठ के जो भगवती है जो मूला

84
00:05:47,440 --> 00:05:51,440
अधिष्ठात्री है वो कौन है? भाई साहब आप मेरा इंटरव्यू मत

85
00:05:51,440 --> 00:05:55,920
लीजिए। आप अपना पक्ष मैं इंटरव्यू नहीं ले रहा भैया। आप आप अपना पक्ष रखिए।

86
00:05:55,920 --> 00:05:59,920
आप मेरे वस्तुनिष्ठ ज्ञान को वो वो मत करिए। एग्जाम मत लीजिए

87
00:05:59,920 --> 00:06:03,920
मेरा। आप अपना पक्ष रखिए। ठीक है।

88
00:06:03,920 --> 00:06:07,920
गोवर्धन पठ के मूलाधीश्वरी भगवती विमलांबा है। ये आप

89
00:06:07,920 --> 00:06:12,480
तो मानते ही होंगे। मानते ही होंगे। हां

90
00:06:12,480 --> 00:06:14,720
तो

91
00:06:14,720 --> 00:06:18,960
जो उत्कड़ी उपासना पद्धति है जो

92
00:06:18,960 --> 00:06:23,280
मूल उपासना पद्धति है। उस उपासना पद्धति के मूलाधार

93
00:06:23,280 --> 00:06:27,360
है दुर्गा माधव उपासना। हां। उत्कड़ी पद्धति

94
00:06:27,360 --> 00:06:31,360
के मूलाधार है दुर्गा माधव उपासना। यह आदि शंकराचार्य जी के किस ग्रंथ

95
00:06:31,360 --> 00:06:35,360
में लिखा है जी जो आप विवरण देने वाले है

96
00:06:35,360 --> 00:06:39,440
जी आदि शंकराचार्य जी के किस ग्रंथ में यह विवरण लिखा है जो

97
00:06:39,440 --> 00:06:43,840
आप देने वाले है भैया बात कट रही है आपके

98
00:06:43,840 --> 00:06:49,520
मैं इस समय यात्रा में हूं फिर से दोहरा दीजिएगा हेलो

99
00:06:49,520 --> 00:06:55,520
आवाज आ रही है नारायण हेलो

100
00:06:55,520 --> 00:06:59,360
बात कट रही है भैया आपकी

101
00:06:59,360 --> 00:07:04,480
हेलो

102
00:07:04,480 --> 00:07:10,480
बताइए हेलो नारायण हेलो जय श्री राम

103
00:07:10,720 --> 00:07:15,040
नारायण हां आप सर्वत्र ये विषय विरल

104
00:07:15,040 --> 00:07:19,280
सुनेंगे कि दुर्गा माधव उपासना कैसे सिद्ध हो गया भाई साहब मैं आपसे

105
00:07:19,280 --> 00:07:23,280
पूछ रहा हूं आप जो भी बात मुझे बता रहे हैं पहले आप ग्रंथ का नाम लेते जाए

106
00:07:23,280 --> 00:07:28,320
आदि शंकराचार्य जी के किस ग्रंथ का रेफरेंस के आधार पर आप बात कर रहे हैं

107
00:07:28,320 --> 00:07:32,800
ग्रंथ के आधार पर अच्छा मतलब आप जो प्रत्यक्ष

108
00:07:32,800 --> 00:07:36,800
में देख रहे हैं जो विमलांबा परमेश्वरी है आप

109
00:07:36,800 --> 00:07:40,960
ये आप खुद मानते हैं कि जगन्नाथ मंदिर के जो अधिकार क्षेत्र

110
00:07:40,960 --> 00:07:46,320
वो नहीं कह रहा हूं आगे जो विवेचना आप देने वाले हैं कि मैं

111
00:07:46,320 --> 00:07:50,480
उपासना के संबंध में जो मैंने कटाक्ष किए हैं यह भागवतानंद

112
00:07:50,480 --> 00:07:54,480
पर वह कटाक्ष जो है आदि शंकराचार्य जी के

113
00:07:54,480 --> 00:07:59,680
किस ग्रंथ के द्वारा उनका निराकरण मिलता अभी

114
00:07:59,680 --> 00:08:03,840
चारों धाम में जो जो मंदिर है जो तीर्थ क्षेत्र

115
00:08:03,840 --> 00:08:07,840
जो भाई साहब ग्रंथ का नाम बताएंगे आप ग्रंथ ये सब भैया ग्रंथ के आधार

116
00:08:07,840 --> 00:08:12,880
पर भगवत शंकराचार्य ने लिखे नहीं है जो अच्छा तो ठीक है

117
00:08:12,880 --> 00:08:14,560
मैं दूसरी बात पूछ रहा हूं

118
00:08:14,560 --> 00:08:18,560
जी जी ग्रंथ नहीं है तो फिर आपने चारों शंकराचार्यों में से

119
00:08:18,560 --> 00:08:22,640
कौन से शंकराचार्य की परंपरा से ज्ञान अर्जित किया है पूरी

120
00:08:22,640 --> 00:08:26,640
क्या शंकराचार्य जी की परंपरा से हमारी क्योंकि उस

121
00:08:26,640 --> 00:08:30,640
परंपरा से दीक्षित है। नहीं दीक्षित नहीं हूं क्योंकि उस परंपरा

122
00:08:30,640 --> 00:08:35,120
से मेरा जन्म है। उनके लिए परंपरा से नहीं ऐसे नहीं होता है ना आपके पास

123
00:08:35,120 --> 00:08:39,120
तो पता है भैया कैसे होता है कुछ वो सब हम नहीं बोल रहे हैं आप झगड़ा के

124
00:08:39,120 --> 00:08:43,440
ऊपर मत जाइए हम आप जो है मुझे अपने मन मुताबिक व्याख्या

125
00:08:43,440 --> 00:08:47,680
प्रस्तुत कर रहे हो जिसका कहीं कोई प्रमाण नहीं है मैं कैसे मान लूं आपकी बात

126
00:08:47,680 --> 00:08:51,680
तो जगन्नाथ मंदिर आपके लिए प्रमाण नहीं है आप मुझे ये प्रमाण दीजिए

127
00:08:51,680 --> 00:08:55,680
ना की भगवती को अपनी पत्नी के भगवती को अपनी पत्नी के रूप

128
00:08:55,680 --> 00:08:59,680
में देखने का प्रमाण दीजिए आदि शंकराचार्य जी के ग्रंथ से। नहीं नहीं

129
00:08:59,680 --> 00:09:04,080
मैं और किस लिए आए हैं यहां पर बात करने के लिए। अरे भैया

130
00:09:04,080 --> 00:09:08,240
क्या बोलना चाहूं यह तो पहले सुन लीजिए बात। आप एक काम करिए, आप एक काम

131
00:09:08,240 --> 00:09:13,360
करिए, पहले हेडलाइन क्लियर करिए कि आप क्या चीज सिद्ध करने वाले हैं?

132
00:09:13,360 --> 00:09:17,520
मैं यह सिद्ध करने वाला हूं कि अभी जो भगवती को आप बार-बार

133
00:09:17,520 --> 00:09:21,520
ये बोल रहे हैं कि निगमंद जी वो भगवती को पत्नी सिद्ध कर दिए,

134
00:09:21,520 --> 00:09:25,600
पत्नी सिद्ध कर दिए, यह गलत है। पत्नी वहां पर सिद्ध नहीं है। साहब, उनके कई ग्रंथों

135
00:09:25,600 --> 00:09:29,600
में यह तक लिखा है कि अभी मैं आने लाने वाला हूं और दूसरे नए ग्रंथों

136
00:09:29,600 --> 00:09:33,600
के उदाहरण। उनके ग्रंथों में यह तक लिखा है कि जो भगवती है

137
00:09:33,600 --> 00:09:38,080
उनको आकर के जो है सुख प्रदान करके जाती थी।

138
00:09:38,080 --> 00:09:42,080
पत्नी के रूप में अरे भैया वो मौलिक ग्रंथ है क्या निगमानंद

139
00:09:42,080 --> 00:09:46,080
जी के? अच्छा ठीक है तो निगमानंद जी के मौलिक ग्रंथ कहां

140
00:09:46,080 --> 00:09:50,240
से छपते हैं? सारस्वत मठ से छपते नहीं। कहां

141
00:09:50,240 --> 00:09:55,360
से छपते हैं? कहां से गए? फस गए देखो फस गए आप फस गए। आप

142
00:09:55,360 --> 00:09:59,600
ऐसे ही फसता है व्यक्ति। तैयारी और करिए आप थोड़ी। हां मैं तो तैयार

143
00:09:59,600 --> 00:10:03,680
तैयार होके आपसे मैंने क्या पूछा है निगमंद के मौलिक ग्रंथ कहां से

144
00:10:03,680 --> 00:10:07,680
छपते हैं? सारस्वत मठ से छपते हैं तो सारसत मठ

145
00:10:07,680 --> 00:10:11,760
से छपे हुए दूसरे ग्रंथ मान्य नहीं होंगे यानी सारसत मठ एक ग्रंथ में

146
00:10:11,760 --> 00:10:15,760
ओरिजिनलिटी देगा और दूसरे ग्रंथ में वो देगा सारस्वत मठ के

147
00:10:15,760 --> 00:10:19,760
एक ग्रंथ पर आपको विश्वास है दूसरे ग्रंथ पर विश्वास नहीं है? अच्छा सारस्वत

148
00:10:19,760 --> 00:10:23,760
मठ के जो प्रतिष्ठा निगवानंद जी थे उनका जो बौद्धिक स्थिति

149
00:10:23,760 --> 00:10:27,760
था वो छपाने वाले बाद में लिखने वाले की बौद्धिक स्थिति

150
00:10:27,760 --> 00:10:31,920
भी वही था। अरे तो वो ये लिखेंगे ना कि भैया ये जो है सच नहीं है।

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00:10:31,920 --> 00:10:36,000
वो ये तो लिखेंगे ना। निगमंद को ये तो विश्वास था कि ये जो

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00:10:36,000 --> 00:10:40,080
11 सदस्य जिनको मैं नियुक्त कर रहा हूं। ये अच्छे हैं या बुरे हैं। अच्छा

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00:10:40,080 --> 00:10:44,240
जो 11 सदस्य परंपरा परंपरा की परिभाषा क्या है? 11

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00:10:44,240 --> 00:10:44,740
सदस्य

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00:10:44,640 --> 00:10:48,800
जो नियुक्त परंपरा की उपयोगिता क्या हैं। परंपरा की उपयोगिता

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00:10:48,800 --> 00:10:53,600
क्या है? परंपरा की उपयोगिता क्या है?

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00:10:53,600 --> 00:10:57,840
ये बात को इधर-उधर मत बोलिए। जहां से आपको सुनिए

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00:10:57,840 --> 00:11:01,920
अगर उनकी बौद्धिक स्थिति सही नहीं थी। लालच वश या द्वेष

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00:11:01,920 --> 00:11:05,920
वश वो गलत बात लिख सकते हैं तो वो निगमंद की जो जिन जिन किताबों

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को आप मौलिक कह रहे हैं, उनको भी बदल सकते हैं। उनमें भी गलत छाप सकते हैं।

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00:11:09,920 --> 00:11:13,920
तो आप उन परे भी विश्वास मत करिए। हाय राम हाय राम भैया मैं क्या बोल

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00:11:13,920 --> 00:11:18,160
रहा हूं वो तो पहले सुन लीजिए। आप इधर-उधर बात को क्यों घुमा दे रहे हैं? आप ऐसा

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00:11:18,160 --> 00:11:24,160
करिए आप भागवतानंद के पक्ष से सामने आइए ठीक है। जय श्री राम।

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00:11:24,160 --> 00:11:28,800
जो हमारा जो नंबर है जिस पर आपने प्रथम बार कॉल किया है।

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00:11:28,800 --> 00:11:32,960
जी जी उस पर एक फॉर्म मिलेगा WhatsApp करने पर।

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00:11:32,960 --> 00:11:37,040
वो फॉर्म आप भर दीजिए। प्रत्यक्ष चर्चा में।

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00:11:37,040 --> 00:11:41,040
ठीक है? जिससे कि हम अपनी जब एनर्जी वेस्ट करें आपके साथ

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00:11:41,040 --> 00:11:45,920
तो उसका कुछ हमें भी लाभ दिखाई दे। भाई

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00:11:45,920 --> 00:11:49,920
लोगों को दिखाई दे कि आपका क्या पक्ष था। अगर वह निरस्त हुआ

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00:11:49,920 --> 00:11:54,160
तो वह दिखाई दे लोगों को और अगर मेरा निरस्त होता है तो वो भी लोगों को दिखाई

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00:11:54,160 --> 00:11:58,400
दे। ठीक है? फोन द्वारा की गई वार्तालाप

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00:11:58,400 --> 00:12:00,720
व्यक्तिगत सुनिए सुनिए।

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00:12:00,720 --> 00:12:04,800
देखिए आप मेरी एक एक बात मैं बोल दूं। आपका कुतर्क

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00:12:04,800 --> 00:12:09,040
कहां से चालू हो गया? जब मैंने आपसे पूछा कि भाई वो जो

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00:12:09,040 --> 00:12:13,840
मौलिक ग्रंथ है वो कहां से छपते हैं? आपने कहा मठ

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00:12:13,840 --> 00:12:17,920
उसके बाद मैंने कहा और यह दूसरी किताबें कहां से छप रही हैं?

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00:12:17,920 --> 00:12:22,080
तो आपने जो है कहा कि भाई वह दूसरी किताबें उनके उनका भौतिक

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स्तर अलग था। वो अपने मन से छाप दी। पहली बात तो उनके मौलिक ग्रंथ में ही बहुत

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सारी आपत्तिजनक चीजें हैं। जिस पर उसने जो है प्रलाप किया है भागवतानंद

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में। दूसरी बात यह है कि अगर मौलिक

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ग्रंथ में उनकी बौद्धिक स्थिति बहुत अच्छी थी। तो वो जो

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छाप रहे है ना वही वहां पर बात अर्ध ज्ञान की या फिर

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ज्ञान को ना समझ पाने की नहीं है। वहां पर दूसरी किताबों में

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आप ये कह रहे हो कि झूठ लिखा हुआ है। सीधे-सीधे झूठा

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कह रहे हैं उनको कहने वाले उनको छापने वाले को तो जब आप उसको झूठा

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कह रहे हो कि वो अपने मन से छाप बात कट रही है। फिर

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यदि आप उनको झूठा कह रहे हो कि वो अपने मन से हेलो

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मैं यह
