1
00:00:01,040 --> 00:00:05,200
अब यह बताइए मुझे कि जिन श्लोकों का अर्थ आप

2
00:00:05,200 --> 00:00:09,600
लेते हैं कि हमारे वेदों से मेल खा रही है। यानी वेद आपके लिए प्रमाण

3
00:00:09,600 --> 00:00:13,680
है। अच्छा ये वेद आपको मिले कैसे? मिले

4
00:00:13,680 --> 00:00:18,000
कैसे? वेद तो मोबाइल में अभी आपके

5
00:00:18,000 --> 00:00:23,520
में अरे मोबाइल में कहां से आए? मार्केट में कहां से आए?

6
00:00:23,520 --> 00:00:27,840
गोरखपुर से प्रकट कहां से हुए? तो आप तक कैसे आए?

7
00:00:27,840 --> 00:00:32,240
आपको सपने में आके दिए। या आपने कहीं किसी पुस्तक में पढ़ा,

8
00:00:32,240 --> 00:00:36,640
किसी किताब में देखा कैसे आया? वेद हमने

9
00:00:36,640 --> 00:00:40,720
टीवी पे देखे हैं। संत रामपा जी उनको खुल खुल के जो दिखाते उनके पास वो

10
00:00:40,720 --> 00:00:44,800
जो खोद के दिखा रहे हैं जो किताबें वो कहां से आई हैं? मार्केट से

11
00:00:44,800 --> 00:00:49,120
आई हैं और कहां से आई? मार्केट तो इसका मतलब है आप मार्केट को प्रमाण मानते

12
00:00:49,120 --> 00:00:53,280
हैं। मार्केट प्रमाण मानते हैं।

13
00:00:53,280 --> 00:00:57,360
मार्केट को प्रमाण नहीं मानते। लेकिन जो वेद आपको मिले।

14
00:00:57,360 --> 00:01:01,680
वेद आपको मिल कैसे रहे हैं? जो उन्होंने खोल के दिखाया

15
00:01:01,680 --> 00:01:05,920
कि देखो यहां वेद में लिखा हुआ है। वह वेद उन तक कैसे

16
00:01:05,920 --> 00:01:10,080
आया? वो श्लोक जिसका अर्थ आप ले रहे हो कि कबीर भगवान है

17
00:01:10,080 --> 00:01:14,320
वो श्लोक आप तक कैसे आया? सृष्टि की शुरुआत हुई आज से दो करोड़

18
00:01:14,320 --> 00:01:16,160
साल पहले मान लो या आपके अनुसार

19
00:01:16,160 --> 00:01:20,400
कुछ और समय होगा। तो वो शुरुआत से लेकर आप तक वो श्लोक

20
00:01:20,400 --> 00:01:24,480
कैसे आया? यह बताइए। तो इसका मतलब अभी जो मार्केट में जो किताबें जो बिक रही

21
00:01:24,480 --> 00:01:28,560
है जो वेद है कुरान शरीफ है गीता है ये सब बेकार है नहीं

22
00:01:28,560 --> 00:01:32,720
बेकार नहीं है मुझे मालूम है मुझे मालूम है वो कहां से आया मैं आपसे

23
00:01:32,720 --> 00:01:36,960
सुनना चाह रहा हूं क्या आपको पता है वो कहां से आया कहां से आया

24
00:01:36,960 --> 00:01:41,040
क्या आपको पता है वो कहां से आया वेद हां

25
00:01:41,040 --> 00:01:45,200
मुझे पता है कि मार्केट में वो जो किताबें छप रही किस आधार पे छप रही है क्या

26
00:01:45,200 --> 00:01:49,200
आपको पता है किस आधार पे छप रही हैं नहीं पता हां वह छप रही

27
00:01:49,200 --> 00:01:53,200
हैं गुरु शिष्य परंपरा के आधार पे जब वेद प्रकट होते

28
00:01:53,200 --> 00:01:57,440
हैं तो उसके बाद गुरु अपने शिष्य को वेद रटाते हैं

29
00:01:57,440 --> 00:02:01,440
और उसका अर्थ भी रटाते हैं। फिर वह अपने शिष्य को रटाता है तो

30
00:02:01,440 --> 00:02:05,520
ऐसे शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के द्वारा आज तक वो वेद

31
00:02:05,520 --> 00:02:09,840
व्याप्त हैं। रटे हुए ब्राह्मण हैं जो उनको रटते हैं और छपवाते

32
00:02:09,840 --> 00:02:14,080
हैं। उस छपवाने के द्वारा आपको वेद प्राप्त होते हैं। ठीक?

33
00:02:14,080 --> 00:02:18,960
तो अब यह समझ में आया कि गुरु परंपरा के द्वारा अब तक वेद आया।

34
00:02:18,960 --> 00:02:23,120
तो यह जो ज्ञान है उसका अर्थ वह उससे लोगे

35
00:02:23,120 --> 00:02:27,200
जो परंपरा से आया जिससे श्लोक आया है उससे उसका अर्थ लोगे

36
00:02:27,200 --> 00:02:32,080
या अपने मन से लोगे मन से क्यों लेंगे

37
00:02:32,080 --> 00:02:36,240
जो वेद है जो आए हैं कैसे भी आए हो जो वेद हम दोनों कैसे

38
00:02:36,240 --> 00:02:40,320
भी नहीं गुरु परंपरा से आया है अगर अगर आज आप उठा

39
00:02:40,320 --> 00:02:44,640
के देखें वेदों का सबसे पुराना भाष्य है तो वो सायन भाष्य

40
00:02:44,640 --> 00:02:48,720
जो रामपाल अपने उसमें खोलते हैं तो सायन की किताब होती है तो जब

41
00:02:48,720 --> 00:02:53,760
सायन के आप श्लोक ले रहे हो तो सायन का अर्थ क्यों नहीं ले रहे हो?

42
00:02:53,760 --> 00:02:58,240
वो सायन का अर्थ ले रहे हैं नहीं ले रहे हैं? साइन के स्लो ले रहे हैं। इन चीजों से

43
00:02:58,240 --> 00:03:02,400
इन चीजों का हमें कोई ज्ञान नहीं है इन चीजों का। तो आपको कुछ भी जब ज्ञान नहीं

44
00:03:02,400 --> 00:03:06,720
है तो आप क्यों लोगों को भ्रमित करते हैं? कबीर भगवान है।

45
00:03:06,720 --> 00:03:10,720
अब अब ये जो हमारे जो वेद है आप जैसे जो बता

46
00:03:10,720 --> 00:03:15,840
रहे हो कि गुरु प्रणाली के द्वारा आए हुए हैं।

47
00:03:15,840 --> 00:03:20,080
मेरा कहने का मतलब यह है। सुनिए मैं जो कहना चाह रहा हूं। मैं

48
00:03:20,080 --> 00:03:24,080
वो वही वही मैं कह रहा हूं। देखिए वह जो खोल के दिखा रहे हैं

49
00:03:24,080 --> 00:03:28,160
वह जहां से श्लोक आए हैं वहीं से

50
00:03:28,160 --> 00:03:32,240
अर्थ भी आया है। अगर आपको किसी व्यक्ति के ऊपर विश्वास नहीं है

51
00:03:32,240 --> 00:03:36,240
कि यह भुदू है। मान लो यह बुद्धि बुद्धू है ये तो उसके

52
00:03:36,240 --> 00:03:40,240
श्लोक पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए। बुद्धू है। गलत श्लोक बता

53
00:03:40,240 --> 00:03:44,720
सकता है ना? और अगर उसके अर्थ और अगर उसके श्लोक पर विश्वास है

54
00:03:44,720 --> 00:03:47,200
तो यानी कि आपके लिए वह बुद्धिजीवी

55
00:03:47,200 --> 00:03:51,200
है और अगर उसके श्लोक पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर भी विश्वास

56
00:03:51,200 --> 00:03:55,360
होना चाहिए। मगर आप श्लोक उससे ले रहे हो अर्थ अपना दे रहे हो।

57
00:03:55,360 --> 00:03:59,520
हां तो रामपाल जी के पास वो वेद के श्लोक

58
00:03:59,520 --> 00:04:03,840
कहां से आए हैं? मार्केट से ही तो उठा रहे हैं। और वो कौन सी किताब

59
00:04:03,840 --> 00:04:08,000
खोल रहे हैं? सायन भाष्य। आप दोबारा देखना कौन सा भाष्य पढ़ते हैं वो?

60
00:04:08,000 --> 00:04:12,160
तो मेरा कहने का अर्थ यह है कि अगर आप जैसे मान

61
00:04:12,160 --> 00:04:16,800
लीजिए भाई इधर आना जरा। जैसे मान लीजिए यह मेरा छोटा भाई है।

62
00:04:16,800 --> 00:04:20,880
अब अगर मैं इसको बुद्धू मानता हूं तो इसके द्वारा दी जाने

63
00:04:20,880 --> 00:04:24,960
वाली श्लोक को भी मैं नहीं मानूंगा कि यह वास्तविक है। ठीक?

64
00:04:24,960 --> 00:04:28,960
और अगर मैं इसको यह मानता हूं कि बुद्धिमान है। तो जो यह श्लोक जितना

65
00:04:28,960 --> 00:04:33,040
विश्वास मुझे इसके श्लोक पर होगा उतना ही विश्वास मुझे इसके अर्थ पर भी

66
00:04:33,040 --> 00:04:37,200
होना चाहिए। मगर आपने

67
00:04:37,200 --> 00:04:41,520
क्या किया है कि श्लोक तो इससे ले रहे हो मगर अर्थ अपना दे रहे हो बताओ

68
00:04:41,520 --> 00:04:45,840
नहीं संत राम जो दयानंद सरस्वती जी के द्वारा

69
00:04:45,840 --> 00:04:50,400
जो वेदों का जो जो वेदों की जो व्याख्या की गई है उस व्याख्या को

70
00:04:50,400 --> 00:04:54,480
खोल के दिखा दयानंद सरस्वती जी के पास वेद कहां से आए उन्होंने

71
00:04:54,480 --> 00:04:58,480
रटे हुए थे उनके पास सपने में आए थे या फिर पीछे से गुरु परंपरा

72
00:04:58,480 --> 00:05:02,800
के द्वारा जो रटंत विद्या आती है आप आपको शायद मालूम नहीं होगा

73
00:05:02,800 --> 00:05:06,960
यजुर्वेद में अष्टा विककृति नाम का श्लोक है कि इन

74
00:05:06,960 --> 00:05:11,360
वेदों को कैसे-कैसे कौन-कौन याद करेगा। अगर उसको सरल

75
00:05:11,360 --> 00:05:15,360
भाषा में आप लोगों को बताऊं तो वेद के मंत्रों को याद करने का

76
00:05:15,360 --> 00:05:19,600
तरीका होता है दाएं से मध्य तक एक आदमी रटेगा।

77
00:05:19,600 --> 00:05:23,920
मध्य से बा मतलब बाएं से मध्य तक एक आदमी रटेगा।

78
00:05:23,920 --> 00:05:28,000
मध्य से दाएं तक एक आदमी रटेगा। ऐसे ही नीचे वाली पंक्ति को रटा

79
00:05:28,000 --> 00:05:32,080
जाएगा। इस प्रकार से आठ उल्टे सीधे तरीकों से वह मेद का मंत्र याद

80
00:05:32,080 --> 00:05:36,160
किया जाता है। आठ तरीकों से जब वो वेद का मंत्र याद किया जाता है तो उसको

81
00:05:36,160 --> 00:05:40,480
आठ परंपराएं वो उल्टे सीधी वाली तरीके से वेदों

82
00:05:40,480 --> 00:05:44,560
को रटाती हैं अपने शिष्यों को और वो ऐसे करके प्राचीन काल से आज

83
00:05:44,560 --> 00:05:48,640
तक विद्यमान है जिससे कि वेदों में कोई मिलावट ना कर पाए क्योंकि

84
00:05:48,640 --> 00:05:52,720
जिस दिन भी कोई एक श्लोक बढ़ाएगा वो आठों आठों परंपराओं

85
00:05:52,720 --> 00:05:56,800
के लोग आएंगे वहां पर और वो अपने श्लोकों अपने उल्टे सीधे

86
00:05:56,800 --> 00:06:01,200
तरीकों से उस श्लोक को लिखेंगे और उससे जो मैच नहीं खा रहा होगा वो हटा दिया जाएगा

87
00:06:01,200 --> 00:06:05,600
ये है वेदों का प्रमाण अब सुनिए मैं यह कह रहा था कि

88
00:06:05,600 --> 00:06:10,400
आपके रामपाल जी को वेदों के सारे मंत्र याद हैं क्या?

89
00:06:10,400 --> 00:06:14,640
उनको याद नहीं याद है पर वो खोल खोल के दिखाते। हां तो खोल के वो दिखाते

90
00:06:14,640 --> 00:06:17,840
किसको हैं? जो पहले से गुरु परंपरा के द्वारा

91
00:06:17,840 --> 00:06:22,000
श्लोक आ चुके हैं उनको। अर्थ किसका देते हैं?

92
00:06:22,000 --> 00:06:26,000
जो है उसमें उस किताब जिस किताब को

93
00:06:26,000 --> 00:06:30,160
वो खोलते हैं उसका अर्थ लेते हैं क्या ना? यह झूठ है।

94
00:06:30,160 --> 00:06:34,480
वो अर्थ अपना सुनिए। दयानंद सरस्वती ने कहा क्या कबीर भगवान

95
00:06:34,480 --> 00:06:38,560
है? नहीं कहा। अब आगे चलते हैं। अब अंतिम

96
00:06:38,560 --> 00:06:42,720
प्रश्न मैं इनसे करूंगा। अब आप मुझे बता दीजिए।

97
00:06:42,720 --> 00:06:46,720
आपने कई जगह यह बात कही कि उसमें एक जगह काल अपने मन का ज्ञान दे रहा है।

98
00:06:46,720 --> 00:06:50,960
वह तो भगवत गीता का आप हट जाओ।

99
00:06:50,960 --> 00:06:55,200
आप हट जाओ। भगवत गीता का जो आपने किताब छापी

100
00:06:55,200 --> 00:06:59,200
है गीता तेरा ज्ञान अमृत। उसमें आपने ऊपर लिखा है गीता तेरा ज्ञान

101
00:06:59,200 --> 00:07:03,360
अमृत। अंदर 38वें नंबर के पृष्ठ पर आपने लिखा है कि गीता

102
00:07:03,360 --> 00:07:07,600
का 95% ज्ञान मानने लायक है। 5% ज्ञान व्यर्थ

103
00:07:07,600 --> 00:07:11,760
है क्योंकि वह काल ने अपने मन से दे दिया है। तो आपने अपने मेन

104
00:07:11,760 --> 00:07:15,760
पृष्ठ पर यह क्यों नहीं लिखा गीता तेरा 95%

105
00:07:15,760 --> 00:07:20,000
ज्ञान अमृत

106
00:07:20,000 --> 00:07:24,400
पता नहीं जी। यह तो धोखा है ना।

107
00:07:24,400 --> 00:07:28,800
जैसे किसी को अपने पास बुलाना है तो अच्छी बात उसको दिखा दी। बड़ी-बड़ी

108
00:07:28,800 --> 00:07:32,880
जब वह आ गया उसके बाद आप उसको बता रहे हो अंदर की चीज कि

109
00:07:32,880 --> 00:07:37,120
हम पूरी गीता को नहीं मानते 5% गीता को हम बेकार कहते

110
00:07:37,120 --> 00:07:41,200
हैं सिर्फ 95% गीता को हम प्रमाण मानते हैं और

111
00:07:41,200 --> 00:07:45,520
ऊपर क्या लिखा है गीता तेरा ज्ञान अमृत तो कोई भी हिंदू होगा तो उसके मन में तुरंत झुकाव

112
00:07:45,520 --> 00:07:49,680
आएगा भाई गीता को मानता है ये तो मगर आप मानते नहीं है आप 5% को व्यर्थ

113
00:07:49,680 --> 00:07:53,680
मानते हैं अब बात करते हैं आगे क्यों मानते हैं अब मान अब अब मैं उस पर आ

114
00:07:53,680 --> 00:07:57,920
रहा हूं आपका वह काल तो आपके अनुसार उसका 5%

115
00:07:57,920 --> 00:08:01,920
ज्ञान काल ने अपने मन से दिया है और बाकी 95%

116
00:08:01,920 --> 00:08:06,000
परमेश्वर का ज्ञान है। वो भी काल ही दे रहा है। कोई और दे रहा है। अच्छा वो भी काल दे

117
00:08:06,000 --> 00:08:10,240
रहा है। हां जी। अब आप ये बताइए कि काल जो 5%

118
00:08:10,240 --> 00:08:14,880
ज्ञान गलत दे रहा है। उसके क्या कारण है?

119
00:08:14,880 --> 00:08:18,960
क्या कारण है? वो भटकाना चाहता है या

120
00:08:18,960 --> 00:08:24,560
तो या फिर वो अज्ञानी है। तो दो में से एक कारण होगा। क्या कारण है?

121
00:08:24,560 --> 00:08:28,800
सुनो बैठो बैठो। क्या कारण है भाई साहब? क्या कारण

122
00:08:28,800 --> 00:08:31,600
है?

123
00:08:31,600 --> 00:08:35,760
वो अज्ञानी भी और भ्रमित भी करना

124
00:08:35,760 --> 00:08:39,840
चाहता है। तो जो व्यक्ति भ्रमित करना चाहता है वो सब

125
00:08:39,840 --> 00:08:44,080
जगह करेगा ना। हम जो व्यक्ति अज्ञानी

126
00:08:44,080 --> 00:08:48,080
है वो अज्ञानता सब जगह देगा ना। फिर 95% क्यों नहीं देगा? उस

127
00:08:48,080 --> 00:08:53,760
पर कैसे भरोसा?

128
00:08:53,760 --> 00:08:57,920
उस पर कैसे भरोसा? हम्। जो व्यक्ति अज्ञानी है, वह अपनी अज्ञानता

129
00:08:57,920 --> 00:09:02,000
हर जगह देगा। जो व्यक्ति भ्रमित करना चाह रहा है, वह हर जगह करेगा। फिर बाकी की

130
00:09:02,000 --> 00:09:06,160
चीज पर भरोसा कैसे? लेकिन उसे ऊपर का

131
00:09:06,160 --> 00:09:10,320
लेकिन उसको ऊपर की जो जो बातें बताएं, वह तो जो बताएगा ही वो भ्रमित

132
00:09:10,320 --> 00:09:13,840
करना चाहता है कि नहीं?

133
00:09:13,840 --> 00:09:18,000
बिल्कुल कर रहा है भ्रमित। वो अज्ञानी है कि नहीं? अज्ञानी भी है। तो फिर

134
00:09:18,000 --> 00:09:24,000
95% ज्ञान उसका परफेक्ट है। यह कैसे? 9%

135
00:09:24,000 --> 00:09:28,080
परफेक्ट है। चाहे तो चाहे तो

136
00:09:28,080 --> 00:09:32,080
परमात्मा ने अपने रिमोट से जो बुलवाया हो उस पे

137
00:09:32,080 --> 00:09:37,120
तो परमात्मा का 5% नियंत्रण नहीं था क्या उसके ऊपर पता नहीं

138
00:09:37,120 --> 00:09:41,280
बस पता नहीं तो ये है कबीर पंत की सच्चाई ये

139
00:09:41,280 --> 00:09:45,440
रामपाल तो यह रामपाल की सच्चाई रामपाल को फॉलो करने

140
00:09:45,440 --> 00:09:46,720
वाले लोगों का यह हाल होता

141
00:09:46,720 --> 00:09:50,960
है जो अंत में कहते हैं पता नहीं पता नहीं पता नहीं पता नहीं

142
00:09:50,960 --> 00:09:55,040
कबीर भगवान है क्यों पता नहीं वह नियमित है बाधित है जन्म नहीं ले सकता

143
00:09:55,040 --> 00:09:59,120
क्यों क्यों पता नहीं वो अल्लाह के समान है पर उसकी शिक्षाएं

144
00:09:59,120 --> 00:10:03,200
मैच नहीं खाती सनातन की शिक्षाएं उनकी शिक्षाएं अलग है पर क्यों

145
00:10:03,200 --> 00:10:08,880
पता नहीं अंत में कहते हैं प्रमाण है

146
00:10:08,880 --> 00:10:13,440
26 की बात कह रहा है यह आपका

147
00:10:13,440 --> 00:10:17,680
यह आपका अर्थ है यह सुनिए

148
00:10:17,680 --> 00:10:21,680
यह सुनिए चिल सुनिए आपकी आवाज इसमें आएगी नहीं अगर बिना

149
00:10:21,680 --> 00:10:25,760
माइक के बोलोगे आप सोच रहे हो कि मैं चिल्ला के कह दूं उसमें नहीं आएगी जी ठीक है। मैं

150
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एक मैं माइक दे रहा हूं आपको। देखिए हम तो

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एक बात आप वेद को प्रमाण मानते हैं

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तो प्रमाण मानते हैं। वेद आपको कहां से मिले? फिर कहां से मिले?

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रामपाल से मिले या कहीं और से मिले। आपके पास में जो शास्त्र है वो आपको

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कहां से मिले? गुरु गुरु शिष्य परंपरा

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से। गुरु शिष्य परंपरा से। मैं शंकराचार्य जी

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का शिष्य हूं। मिले होंगे किन्हें? होंगे। वह तो मार्केट से

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खरीद के ला रहे हैं ना। वह दयानंद सरस्वती के भाष्य को लाकर

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दिखा रहे हैं ना। तो दयानंद सरस्वती

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के कितना अर्थ को क्यों नहीं मान रहे? दयानंद सरस्वती ने कहा कि वह ईश्वर साकार

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है। दयानंद सरस्वती ने कहा है। [हंसी]

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मैं कह रहा हूं दयानंद सरस्वती ने जो अर्थ दिया है क्या निरा

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परमात्मा ने अपने भाई?

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परमात्मा परमात्मा को साकार हम भी मानते हैं।

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जो जी

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[संगीत]
