1
00:00:01,310 --> 00:00:04,800
[संगीत]

2
00:00:04,800 --> 00:00:09,680
आवाहन में फॉर्म आया था एक लिंक मेरे पास मैंने भरा था कि

3
00:00:09,680 --> 00:00:13,680
मुझे बस देखिए मुझे इतना

4
00:00:13,680 --> 00:00:17,680
जो है ना हमारे जो वेद शास्त्र पुराण इसके बारे में उतना जानकारी तो नहीं

5
00:00:17,680 --> 00:00:21,760
है तो बस

6
00:00:21,760 --> 00:00:26,080
और मुझे बस वही जानना है कि वह कैसे

7
00:00:26,080 --> 00:00:30,320
थी कि नहीं ऑथेंटिकेशन उसमें है कैसे

8
00:00:30,320 --> 00:00:34,880
है वही जानना है। नहीं नहीं वो जानने की बात अलग हो गई।

9
00:00:34,880 --> 00:00:39,360
हमारा जो फॉर्म है वो इस बारे में है कि आइडियोलॉजिकल

10
00:00:39,360 --> 00:00:44,000
डिस्कशन ऑन डिसए्रीमेंट हम

11
00:00:44,000 --> 00:00:48,000
है ना तो आपका कोई डिसए्रीमेंट है हमारे

12
00:00:48,000 --> 00:00:52,400
बातों से कुछ जी जैसे जैसे कि मैंने आपका

13
00:00:52,400 --> 00:00:56,480
वीडियो भी देखा हूं। तो जैसे उसमें आप लोग परंपरा की बात करते हैं

14
00:00:56,480 --> 00:01:00,800
ना हां तो वो मुझे उसमें

15
00:01:00,800 --> 00:01:05,120
मुझे थोड़ा सा समझ में नहीं आया। आप सनातनी है नास्तिक हैं या विधर्मी

16
00:01:05,120 --> 00:01:08,000
हैं?

17
00:01:08,000 --> 00:01:14,000
जी मैं मतलब सनातनी हूं लेकिन

18
00:01:14,800 --> 00:01:18,960
मतलब बिलीव नहीं है। बोल किस पे बिलीव

19
00:01:18,960 --> 00:01:23,040
नहीं है? मतलब हमें मुझे देखिए ऑनेस्टली

20
00:01:23,040 --> 00:01:27,360
अगर मैं बताऊं तो मुझे अब हमारे जो सनातन धर्म के जो वेद शास्त्र

21
00:01:27,360 --> 00:01:31,520
है उस पे उतना मतलब 100% बिलीव नहीं होता है। यानी

22
00:01:31,520 --> 00:01:36,160
आप नास्तिक हैं। जी नास्तिक ही है ना?

23
00:01:36,160 --> 00:01:40,160
जी। तो भगवान और वेद शास्त्रों का खंडन करने के लिए आप आना चाहते हैं

24
00:01:40,160 --> 00:01:44,240
चर्चा में। नहीं मैं मुझे खंडन किसी

25
00:01:44,240 --> 00:01:48,640
का नहीं करना है। मुझे बस ज्ञान चाहिए। ज्ञान

26
00:01:48,640 --> 00:01:52,800
चाहने के लिए आप समझ नहीं रहे। की पहली बात जो आपने फॉर्म

27
00:01:52,800 --> 00:01:57,040
भरा है वह डिसए्रीमेंट के निमित्त है। डिसए्रीमेंट मतलब कि आप

28
00:01:57,040 --> 00:02:01,040
आपत्ति आप सहमत नहीं है। आपका कुछ और पक्ष है वो आप

29
00:02:01,040 --> 00:02:05,120
रखने के लिए आना चाहते हैं। ज्ञान लेना है। वो इसलिए मैंने फॉर्म भरा

30
00:02:05,120 --> 00:02:09,120
दिया एक मिनट एक मिनट ज्ञान लेना है। जानना

31
00:02:09,120 --> 00:02:14,720
है जिज्ञासा है तो आप कोर्स का फॉर्म भर सकते हैं। उसमें आप आ सकते हैं।

32
00:02:14,720 --> 00:02:18,960
वाले में जब आप आएंगे तो YouTube पर चर्चा होगी। कोर्स का फॉर्म भरेंगे

33
00:02:18,960 --> 00:02:22,960
तो Google पर हमारी क्लासेस होती है। वहां पर आप अपना प्रश्न रखेंगे।

34
00:02:22,960 --> 00:02:23,680
जी

35
00:02:23,680 --> 00:02:27,680
YouTube डिसए्रीमेंट पर जो चर्चा होगी उसमें आपको अपनी आइडेंटिटी के

36
00:02:27,680 --> 00:02:31,760
साथ में आना होता है। और Google में जो चर्चा होती है वो जो

37
00:02:31,760 --> 00:02:35,920
क्लासेस में होती है उसमें आपको अपनी आइडेंटिटी दिखाते हुए सामने नहीं बैठना

38
00:02:35,920 --> 00:02:40,160
है। यद्यपि फॉर्म भरना पड़ेगा तो उसमें आपको आइडेंटिटी जरूर हमें

39
00:02:40,160 --> 00:02:44,240
हमारे साथ शेयर करनी होगी। समाज के समक्ष आपकी आइडेंटिटी गुप्त रखी

40
00:02:44,240 --> 00:02:48,320
जाएगी। परंतु डिसए्रीमेंट के समय आपको अपनी आइडेंटिटी रिवील

41
00:02:48,320 --> 00:02:52,320
करते हुए आना होता है। आप बताइए आपको जिज्ञासा है या डिसए्रीमेंट

42
00:02:52,320 --> 00:02:56,480
है? नहीं मुझे डिसए्रीमेंट नहीं है। मुझे जिज्ञासा है। मुझे आप मैंने

43
00:02:56,480 --> 00:03:01,040
इसलिए फॉर्म भरा था ताकि आपसे कांटेक्ट हो सके। ताकि इस बहाने आप

44
00:03:01,040 --> 00:03:05,040
इसलिए आपने हां इसलिए आपने और मुझे कॉल किया।

45
00:03:05,040 --> 00:03:10,800
इतना मोटा कोई डिसएग्रीमेंट अभी आपका दूर कर देता हूं। बताइए कोई बात है?

46
00:03:10,800 --> 00:03:14,800
जी बस इतना बता दीजिए कि भगवान को हम कैसे

47
00:03:14,800 --> 00:03:18,800
मतलब मान सकते हैं कि वह है

48
00:03:18,800 --> 00:03:23,040
जैसे हमारे राम जी हैं श्री कृष्ण है हम

49
00:03:23,040 --> 00:03:27,120
यह सब है आप यह बताइए

50
00:03:27,120 --> 00:03:31,120
जब आप भगवान को नहीं बिलीव कर रहे हो तो इसका अर्थ यह है ना

51
00:03:31,120 --> 00:03:35,280
कि आप जो है जो आधुनिक विज्ञान है उसके द्वारा

52
00:03:35,280 --> 00:03:38,720
दिए जाने वाले जो प्रत्यक्ष प्रमाण

53
00:03:38,720 --> 00:03:43,680
है उन पर आधारित जो सिद्ध चीजें हैं केवल उन्हीं को आप एक्सेप्ट करते हो।

54
00:03:43,680 --> 00:03:47,760
जी हां ठीक है। तो अब मुझे आप ये

55
00:03:47,760 --> 00:03:51,840
बताइए कि आप माता बहन और पत्नी में अंतर

56
00:03:51,840 --> 00:03:55,920
किस आधार पर करते हैं?

57
00:03:55,920 --> 00:03:58,640
जी ये तो

58
00:03:58,640 --> 00:04:02,640
ये तो संस्कार है ना जो हमें घर से मिलता है। कहां से आया

59
00:04:02,640 --> 00:04:06,880
वो संस्कार? साइंस ने दिया है क्या? नहीं साइंस नहीं

60
00:04:06,880 --> 00:04:11,120
यह तो माता-पिता सिखाते ही है। माता-पिता नास्तिक है।

61
00:04:11,120 --> 00:04:15,120
नहीं नहीं माता-पिता भी नहीं है। नहीं

62
00:04:15,120 --> 00:04:19,440
माता-पिता नास्तिक नहीं है। तो इसका मतलब कि आपके घर में धर्म

63
00:04:19,440 --> 00:04:23,760
है। ईश्वर को मानने वाले लोग हैं। हां। उन्होंने

64
00:04:23,760 --> 00:04:27,840
ही आपको यह संस्कार दिए हैं ना। जी। हां। तो धर्म

65
00:04:27,840 --> 00:04:32,000
से ही आते हैं। दूसरी बात अब यह है कि

66
00:04:32,000 --> 00:04:36,000
आपने कहा मैं जो है वैज्ञानिक आधार पर जो प्रत्यक्ष

67
00:04:36,000 --> 00:04:40,240
प्रमाण है उनके आधार पर ही किसी भी चीज को अपने जीवन में एक्सेप्ट

68
00:04:40,240 --> 00:04:44,400
करता हूं। ठीक है? जी

69
00:04:44,400 --> 00:04:50,400
आपने अमरता को अमरता को अभी विज्ञान ने खोज लिया है क्या?

70
00:04:50,400 --> 00:04:53,920
नहीं अभी खोजा तो नहीं है। खोजा नहीं। तो फिर

71
00:04:53,920 --> 00:04:59,920
आप आज के टाइम में अमरता क्यों ढूंढ रहे हैं?

72
00:05:01,280 --> 00:05:05,440
आज के टाइम में आपके माता-पिता किसी के भी आपके नहीं किसी

73
00:05:05,440 --> 00:05:09,520
के भी माता-पिता 200 साल की आयु भी हो जाएगी तब भी वह

74
00:05:09,520 --> 00:05:14,640
अगर अस्पताल जाएंगे तो हमारी कोशिश रहेगी वो बच जाए।

75
00:05:14,640 --> 00:05:18,800
तो अमरता ही तो खोज रहे हैं हम। जी हम ही क्या

76
00:05:18,800 --> 00:05:22,960
सिर्फ जितने भी मतलब जीव जंतु हैं वो भी मरना नहीं चाहिए। प्राणी मात्र

77
00:05:22,960 --> 00:05:27,120
प्राणी मात्र अमरता खोज रहे हैं। इसका अर्थ क्या हुआ?

78
00:05:27,120 --> 00:05:31,120
हमने अपने जीवन में ऐसी चीज को ग्रहण कर रखा है जो विज्ञान ने अभी

79
00:05:31,120 --> 00:05:35,280
तक सिद्ध नहीं किया है। हां ठीक है अब

80
00:05:35,280 --> 00:05:39,440
बात यह आती है कि यदि हम हमारे मन में ऐसा कोई

81
00:05:39,440 --> 00:05:43,600
ऐसी कोई इनबिल्ट प्यास नहीं है

82
00:05:43,600 --> 00:05:47,600
जिसका निवारण इस दुनिया में ना हो। हमारे अंदर भूख से ही

83
00:05:47,600 --> 00:05:51,760
भोजन का अस्तित्व सिद्ध है। हमारे अंदर प्यास से ही पानी का अस्तित्व

84
00:05:51,760 --> 00:05:55,760
सिद्ध है। हमारे अंदर अमरता की प्यास से ही दुनिया में अमरता

85
00:05:55,760 --> 00:06:00,320
का अस्तित्व सिद्ध है। ठीक है जी।

86
00:06:00,320 --> 00:06:04,640
तो इसी जो इसी गंतव्य स्थान को ही सच्चिदानंद स्वरूप

87
00:06:04,640 --> 00:06:08,800
परमेश्वर भगवान कहते हैं। जो यात्रा हम लोग ढूंढ रहे है ना जाने

88
00:06:08,800 --> 00:06:09,360
अनजाने

89
00:06:09,360 --> 00:06:13,680
में। हम लोग तीन चीजें ढूंढ रहे हैं। जाने अनजाने

90
00:06:13,680 --> 00:06:17,680
में हम भले ही उस पर उसको टेली करें या ना करें। हम लोग तीन चीजें

91
00:06:17,680 --> 00:06:21,840
ढूंढ रहे हैं। सत चित आनंद सत

92
00:06:21,840 --> 00:06:25,840
का मतलब मैं सत स्वरूप होकर रहना चाहता हूं। चित का मतलब कि

93
00:06:25,840 --> 00:06:29,840
मैं अखंड ज्ञान चाहता हूं। मैं कहीं मूर्ख मूर्खता

94
00:06:29,840 --> 00:06:33,840
विहीन जीवन। सत का मतलब मृत्यु विहीन जीवन

95
00:06:33,840 --> 00:06:38,000
और आनंद का मतलब दुख विहीन जीवन। इन तीनों चीजों को हम

96
00:06:38,000 --> 00:06:42,080
ढूंढ रहे हैं। इसीलिए कोई नास्तिक भी होता है वह भी यह सोचता है कि बारिश

97
00:06:42,080 --> 00:06:46,080
ज्यादा हो रही तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए। क्यों सोच

98
00:06:46,080 --> 00:06:50,080
रहा है? अभी तो ऐसा नहीं है। विज्ञान ने प्रत्यक्ष आपको

99
00:06:50,080 --> 00:06:54,240
प्रमाण दे दिया कि आपके मन में सोच लेने से केवल बारिश कम

100
00:06:54,240 --> 00:06:58,560
हो जाएगी। मगर आप यदि ऐसी इच्छा कर रहे हैं। बार-बार वैज्ञानिक नियमों

101
00:06:58,560 --> 00:07:02,800
के विरुद्ध जाकर के उसी से सिद्ध हो रहा है कि इस दुनिया में एक परम तत्व

102
00:07:02,800 --> 00:07:07,040
है जिसकी इच्छा मात्र से बारिश कम ज्यादा हो सकती है। हमारे

103
00:07:07,040 --> 00:07:11,440
अंदर वो इनबिल्ट इच्छा है। हम चाह के भी उससे अलग नहीं हो पा रहे हैं।

104
00:07:11,440 --> 00:07:15,600
ठीक है? जी तो इस इनबिल्ट इच्छा से सिद्ध

105
00:07:15,600 --> 00:07:19,760
होता है कि इस दुनिया में क्योंकि हम कोई सच्चिदानंद को ढूंढ

106
00:07:19,760 --> 00:07:24,320
रहे हैं तो इसका मतलब इस दुनिया में सच्चिदानंद है।

107
00:07:24,320 --> 00:07:24,820
तो

108
00:07:24,640 --> 00:07:28,640
यहां से शुरू यहां से हुआ ईश्वर का

109
00:07:28,640 --> 00:07:32,720
अस्तित्व सिद्ध। ठीक है उसके बाद फिर आगे क्रम

110
00:07:32,720 --> 00:07:36,880
में है कि अब हमने देखा कि भैया हमें हम किसी

111
00:07:36,880 --> 00:07:41,760
ऐसे को ढूंढ रहे हैं जो अबाध्य हो अनंत सर्वशक्तिमान हो।

112
00:07:41,760 --> 00:07:45,760
फिर वहां से निकल के आया कि फिर मनुष्य की चाह का जो ईश्वर है

113
00:07:45,760 --> 00:07:49,840
विषय है वह कौन हो सकता है कि वह वही हो सकता है जो

114
00:07:49,840 --> 00:07:54,160
सर्वशक्तिमान हो अनंत हो अबाध्य हो तो फिर दूसरा कॉलम

115
00:07:54,160 --> 00:07:58,320
आ जाएगा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है सब कुछ कर सकता है इसलिए

116
00:07:58,320 --> 00:08:02,320
अवतार भी ले सकता है ठीक है तो

117
00:08:02,320 --> 00:08:06,320
ईश्वर का अवतार लेना भी सिद्ध हो गया अवतार नहीं ले पाएगा तो

118
00:08:06,320 --> 00:08:12,320
वो नहीं है जिसके कारण हमारी सच्चिदानंद की प्यास बुझ पाए

119
00:08:12,320 --> 00:08:17,200
और फिर अगर वो वो नहीं है तो वो ईश्वर नहीं है। ठीक

120
00:08:17,200 --> 00:08:21,600
बाकी आप अब फॉर्म भर दीजिए और कोर्स

121
00:08:21,600 --> 00:08:25,760
कोर्स में कोर्स का फॉर्म आप भर सकते हैं। हां एक बात पूछना है जैसे आपने

122
00:08:25,760 --> 00:08:30,880
सतद आनंद बताया तो सत्य का मतलब तो सदा होता है ना।

123
00:08:30,880 --> 00:08:35,280
सत स्वरूप ही तो कह रहा हूं और क्या कहा? सत स्वरूप जो बदला ना जा सके। सनातन

124
00:08:35,280 --> 00:08:39,360
सत्य। हां। हां। और चित का मतलब क्या पता है?

125
00:08:39,360 --> 00:08:39,920
अखंड

126
00:08:39,920 --> 00:08:44,240
ज्ञान ऐसा दुनिया में कुछ ना हो जो हमें ना ज्ञात हो

127
00:08:44,240 --> 00:08:48,720
जी अखंड ज्ञान अनंत ज्ञान

128
00:08:48,720 --> 00:08:52,880
और चित वो आनंद अनंत सुख यही तीन चीजें

129
00:08:52,880 --> 00:08:57,520
खोज रहे हैं हम अपने जीवन के हर घटक में और

130
00:08:57,520 --> 00:09:01,600
इन्हीं तीन चीजों का विषय है ईश्वर

131
00:09:01,600 --> 00:09:05,680
और ये परंपरा क्या होता है अब परंपरा ये सब चीजें

132
00:09:05,680 --> 00:09:10,480
आपको मैं व्यक्तिगत समय नहीं दे सकता आप यदि चर्चा में आते उसमें

133
00:09:10,480 --> 00:09:14,640
डिस्कशन में तो मैं आपको समय देता और आप

134
00:09:14,640 --> 00:09:18,640
कोर्स में आइए क्लासेस में आइए मतलब समझाया जाएगा हां मुझे कोर्स में

135
00:09:18,640 --> 00:09:22,800
ही आना है आप WhatsApp करिएगा मेरा दूसरा नंबर है जिस पर आपने

136
00:09:22,800 --> 00:09:26,960
पहले WhatsApp किया होगा हां वहां WhatsApp करिएगा आहान कोर्स

137
00:09:26,960 --> 00:09:31,040
का लिंक मिलेगा आपको वो भर दीजिएगा

138
00:09:31,040 --> 00:09:37,040
अच्छा ठीक है जय श्री जय श्री राम

139
00:09:38,400 --> 00:09:42,480
मतलब मैं एग्नोस्टिक हूं अभी पता नहीं है मुझे। प्रूफ ऑफ गॉड पे बात

140
00:09:42,480 --> 00:09:46,480
कर रहे हैं आप। नहीं प्रूफ मिल जाएगा तो मेरे मान लेंगे

141
00:09:46,480 --> 00:09:51,200
ना। अच्छा तो उस पर आप डिस्कशन करना चाहते हैं।

142
00:09:51,200 --> 00:09:55,360
जी जी ठीक है। तो आपने फोटो

143
00:09:55,360 --> 00:09:59,360
दी है अपनी? फोटो फोटो देना जरूरी है

144
00:09:59,360 --> 00:10:04,000
क्या? फोटो के बिना तो नहीं करते हम लोग डिस्कशन।

145
00:10:04,000 --> 00:10:10,000
आप तो आ चुके हैं शायद एक बार। नहीं नहीं मैं तो नहीं आया।

146
00:10:10,640 --> 00:10:14,720
आपने जो फोटो दी है वो तो ऐसा लग रहा है कि आ चुके हैं ये।

147
00:10:14,720 --> 00:10:18,080
तो फोटो दी थी क्या मैंने?

148
00:10:18,080 --> 00:10:24,080
नहीं नहीं मैं तो नहीं आया अभी डिस्कशन में पहले कभी।

149
00:10:24,160 --> 00:10:28,960
वैसे जानना चाहता हूं मैं। ऐसा नहीं है कि थोड़ा नाचिक सीन है। मैं जानना चाहता हूं।

150
00:10:28,960 --> 00:10:33,440
देखिए जानना चाहते हैं तो बहस में मत आइए।

151
00:10:33,440 --> 00:10:36,400
ठीक है?

152
00:10:36,400 --> 00:10:40,800
तो बहस में जानना चाहते हैं तो क्लासेस में आइए।

153
00:10:40,800 --> 00:10:45,040
अभी हमारा नया बैच स्टार्ट होने वाला है। दूसरा फॉर्म भर दीजिए आप।

154
00:10:45,040 --> 00:10:49,120
और यदि आपको बहस वो इस एग्रीमेंट में वो

155
00:10:49,120 --> 00:10:54,480
करनी है डिबेट तो आप आ सकते हैं।

156
00:10:54,480 --> 00:10:58,800
अच्छा। वहां पर कोर्स जब आप करते हैं तो उसमें आपको

157
00:10:58,800 --> 00:11:02,800
आपकी फोटो आवश्यकता नहीं आवश्यक नहीं होती है। यद्यपि हम

158
00:11:02,800 --> 00:11:06,960
लोग वेरीफाई जरूर करेंगे आपको मगर वो सबको दिखाने के लिए नहीं

159
00:11:06,960 --> 00:11:10,960
होता है। वो यहां आपको अपनी आइडेंटिटी के साथ ही

160
00:11:10,960 --> 00:11:15,200
आना होगा और वो लाइव जरूरी नहीं है कि लाइव जाए या ना जाए

161
00:11:15,200 --> 00:11:21,200
पर यह तो लाइव ही होगा।

162
00:11:22,000 --> 00:11:25,920
एक बार मैं डिबेट में तो आना चाहता हूं।

163
00:11:25,920 --> 00:11:30,480
डिबेट में इस बात को लेकर कि आप भगवान को नहीं मानते। नहीं

164
00:11:30,480 --> 00:11:34,800
मुझे नहीं पता कि मैं नहीं मैं मतलब मैं मुझे नहीं पता है कि भगवान

165
00:11:34,800 --> 00:11:38,880
है कि नहीं। तो ये डिबेट थोड़ी ना है। डिबेट तो

166
00:11:38,880 --> 00:11:42,960
तब होगी ना जब आप आप कुछ आपका अपना

167
00:11:42,960 --> 00:11:48,160
कोई मत हो। आप तो अभी जिज्ञासु है बस।

168
00:11:48,160 --> 00:11:52,800
नहीं मेरा यह मत है कि भगवान है कि नहीं हमें नहीं पता। यह मेरा [संगीत] मत है।

169
00:11:52,800 --> 00:11:58,800
भगवान है कि नहीं हमें नहीं पता। हां यह मेरा मत है।

170
00:12:00,480 --> 00:12:04,480
तो जब आपको नहीं पता है कि भगवान है कि नहीं तो जो मान रहा है कि

171
00:12:04,480 --> 00:12:08,560
भगवान है उससे आपको क्या दिक्कत है? उसका विरोधी कहां हो गए आप?

172
00:12:08,560 --> 00:12:12,560
विरोध इस प्रकार से क्योंकि अगर हम नहीं मान रहे

173
00:12:12,560 --> 00:12:16,560
तो फिर तो क्लियर कट हो गया कि आपका क्लेम है कि और फिर आप क्लेम करते हैं कि हम

174
00:12:16,560 --> 00:12:20,720
मानते हैं तो उस क्लेम के पीछे आपके पास सपोर्ट भी तो होना चाहिए

175
00:12:20,720 --> 00:12:25,040
कि क्यों मान नहीं वो तो इसका मतलब आप ये कहो ना कि मुझे जो है काउंटर

176
00:12:25,040 --> 00:12:28,320
करना है क्लेम्स को।

177
00:12:28,320 --> 00:12:32,480
नहीं नहीं मतलब आप जो क्लेम कर रहे हैं मैं उसको बोल रहा हूं। देखिए आप जब ये

178
00:12:32,480 --> 00:12:36,640
जानते ही नहीं हो कि भगवान है कि नहीं तो जो ये

179
00:12:36,640 --> 00:12:41,760
कह रहा है कि भगवान है उसको आप काउंटर किस आधार पे करोगे?

180
00:12:41,760 --> 00:12:45,760
नहीं काउंटर ये है कि अगर आप मानते हैं कि भगवान है तो इसका

181
00:12:45,760 --> 00:12:50,800
प्रूफ भी होना चाहिए।

182
00:12:50,800 --> 00:12:54,960
मैं जो कह रहा हूं उसको आप समझिए। आपको आपके पास

183
00:12:54,960 --> 00:12:58,960
आपकी एक धारणा है कि हम नहीं जानते भगवान है कि नहीं। ठीक है?

184
00:12:58,960 --> 00:13:03,200
हां। अब कोई दुनिया में है जो यह कह रहा है कि भगवान है।

185
00:13:03,200 --> 00:13:07,680
आप उसके विरोधी तब सिद्ध होगे जो जिस आधार पर वो कह रहा है

186
00:13:07,680 --> 00:13:11,840
वो आधार गलत हो। तो आप आप ये मानते हैं कि

187
00:13:11,840 --> 00:13:16,400
जिस आधार पे वो लोग ये कहते हैं कि भगवान है वो आधार गलत है।

188
00:13:16,400 --> 00:13:20,560
हां तो नहीं वो आधार क्या है? मैं यही जानना चाहता हूं। अगर जानना

189
00:13:20,560 --> 00:13:24,640
चाहते हैं तो तब आपको क्लास में आना होगा। गलत

190
00:13:24,640 --> 00:13:28,640
करना चाहते हैं तो आपको वहां आना होगा डिबेट में। समझ

191
00:13:28,640 --> 00:13:32,640
रहे हैं मेरी बात? जब हमारी इस बात को आप गलत कह

192
00:13:32,640 --> 00:13:36,720
रहे हो तो आप डिबेट में आओगे। आपके क्वेश्चंस हैं तो आप क्लास

193
00:13:36,720 --> 00:13:41,120
में आओगे।

194
00:13:41,120 --> 00:13:45,360
तो फिर ये आधार के बारे में क्लास में डिस्कशन होगा सर। आप क्लास

195
00:13:45,360 --> 00:13:50,800
में ये पॉइंट रखिएगा कि भाई क्या आधार है ईश्वर को मानने के पीछे?

196
00:13:50,800 --> 00:13:54,960
और उससे सेटिस्फाई ना हो तो तब क्वेश्चन करेंगे आगे। हां

197
00:13:54,960 --> 00:13:58,400
आगे क्वेश्चन करेंगे और क्या?

198
00:13:58,400 --> 00:14:02,480
ठीक है। तो आप क्लास का लिंक दे सकते हैं। आप इसी नंबर पर WhatsApp

199
00:14:02,480 --> 00:14:06,160
करिए। आान कोर्स का फॉर्म भर दीजिए।

200
00:14:06,160 --> 00:14:10,240
ठीक है। हम जय श्री राम। जय

201
00:14:10,240 --> 00:14:14,400
श्री राम। नमस्ते। जी मैं वही हां जी

202
00:14:14,400 --> 00:14:18,720
बताइए। जी मेरे को ये मेरे को ये पूछना था। बस ये थोड़ा सा

203
00:14:18,720 --> 00:14:22,800
सवाल है। ये ज्यादा बड़ा सवाल नहीं है। मैं कल या

204
00:14:22,800 --> 00:14:26,960
सर परसों एक लाइव स्ट्रीम में था। तो उसमें आपका

205
00:14:26,960 --> 00:14:31,280
जो है यह मूर्ति पूजा और अवतार के रिगार्डिंग

206
00:14:31,280 --> 00:14:35,360
या फिर परमात्मा वगैरह इसके रिगार्डिंग लाइव होने वाला है। तो फिर ये

207
00:14:35,360 --> 00:14:39,840
कब होने वाला है?

208
00:14:39,840 --> 00:14:43,920
साथ-साथ निर्भय के साथ जो बातचीत हुई थी वो हां हां वही

209
00:14:43,920 --> 00:14:48,320
उन्हीं के होने वाला है। उन्होंने बताया था कि मैं हमारे और इनके

210
00:14:48,320 --> 00:14:53,200
आपकी वो होगी एक न्यूट्रल चैनल पे। मैंने कहा कि

211
00:14:53,200 --> 00:14:57,200
मुझे भी जानना है कि कहां होने वाला है ये। अभी तक कोई डिसाइड

212
00:14:57,200 --> 00:15:01,360
नहीं है। मुझसे कोई डिसाइड नहीं है क्योंकि एक्चुअली में मैं भी आना चाहता

213
00:15:01,360 --> 00:15:05,520
हूं। मेरा भी यही उद्देश्य है। आपके लिए तो हम बैठे

214
00:15:05,520 --> 00:15:09,680
हैं आज ही आ जाऊं। आज नहीं हो पाएगा क्योंकि आज हम बिजी हैं।

215
00:15:09,680 --> 00:15:13,840
जब मैंने पहले भी बोल रहा था ना कि दिवाली के बाद कॉल करूंगा बट

216
00:15:13,840 --> 00:15:18,000
दिवाली के आज ही मेरे को बस थोड़ा सा ही समय मिला। बाकी मेरे पास तो परिवार

217
00:15:18,000 --> 00:15:22,080
का ही तो जब आपको समय हो तब आ जाना। ठीक है जी

218
00:15:22,080 --> 00:15:26,720
मैं जरूर करूंगा लेकिन आप मुझे बता दीजिएगा मैं आपको YouTube

219
00:15:26,720 --> 00:15:32,080
डिस्कशन अरेंज करके आपको लिंक दे दूंगा आप जुड़ जाना

220
00:15:32,080 --> 00:15:36,240
और हमने अपनी ओर से ऐसा कुछ नहीं कहा है कि हम किसी न्यूट्रल चैनल पे

221
00:15:36,240 --> 00:15:40,240
जाने वाले हैं हम हम अगर उनको ऐसा लगेगा

222
00:15:40,240 --> 00:15:44,240
कि हमारे चैनल पर आने में वो सहज है तो हमारे ही चैनल पर होगी नहीं तो नहीं

223
00:15:44,240 --> 00:15:48,400
होगी। ठीक है जी क्योंकि मैं एक्चुअली में मैं

224
00:15:48,400 --> 00:15:52,560
उनके साथ भी आना चाह रहा था ना सभी के साथ मैं अकेले आके भी कोई

225
00:15:52,560 --> 00:15:54,880
खास इतना कोई फायदा नहीं है जितना सभी के

226
00:15:54,880 --> 00:15:58,880
साथ आता है क्योंकि काफी सारे मेरे भी कुछ सवाल है जो उनसे भी नहीं

227
00:15:58,880 --> 00:16:03,520
ऐसा होता है ना जब दो लोग जब दो लोग आपस में बात कर रहे होते हैं तो उसमें

228
00:16:03,520 --> 00:16:07,520
बहुत सारे लोगों का उसी समय इन्वॉल्वमेंट सही नहीं होता है क्रम से हो

229
00:16:07,520 --> 00:16:12,320
जाए कि एक की बात एक से हो गई बात अब अगला करे

230
00:16:12,320 --> 00:16:17,520
क्योंकि समझ गए हां जिससे जिससे कि खिचड़ी नहीं पके।

231
00:16:17,520 --> 00:16:21,600
एक ही बात को लेकर के कई लोग अलग-अलग तरह की बातें बोलने लगते हैं।

232
00:16:21,600 --> 00:16:25,680
उससे खिचड़ी पकने लगेगी। एक ही दो लोगों में ही बात

233
00:16:25,680 --> 00:16:30,160
होने में अगर कई पॉइंट्स हो जाते हैं तभी दिक्कत तो भी दिक्कत आने लगती है।

234
00:16:30,160 --> 00:16:35,280
हां और फिर कई पॉइंट्स के साथ-साथ कई लोग होंगे।

235
00:16:35,280 --> 00:16:39,280
फिर तो और भी ज्यादा खिचड़ी पकेगी। तो इसलिए वन ऑन वन ठीक रहता

236
00:16:39,280 --> 00:16:43,280
है। वन बाय वन। ठीक है जी।

237
00:16:43,280 --> 00:16:47,920
मैं देखता हूं। जैसे ही टाइम मिल जाएगा क्योंकि मैंने पहले भी बताया था कि मेरे पास परिवार के

238
00:16:47,920 --> 00:16:52,160
अब आपने इतने उस समय जब WhatsApp पे हमसे बात की थी तो हमने इतना

239
00:16:52,160 --> 00:16:56,240
पूछते रहे कि भाई आपकी सीधी समस्या बताओ तो आप ये नहीं लिखे कि

240
00:16:56,240 --> 00:17:00,240
भाई मूर्ति पूजा नहीं मानता मैं और सब लिखते

241
00:17:00,240 --> 00:17:04,320
गए आप। वह सब इसलिए लिखा था दीदी देखिए पहली बात

242
00:17:04,320 --> 00:17:08,640
हमारे पास आप देखिए हम पहले तय करेंगे ना कि हम किसको

243
00:17:08,640 --> 00:17:10,000
पढ़ें

244
00:17:10,000 --> 00:17:14,400
बहुत मैसेजेस आते हैं ना बहुत सारे मैसेजेस

245
00:17:14,400 --> 00:17:19,200
आते हैं तो हम यह कैसे चूस करें कि हमें यह मैसेज पढ़ना है

246
00:17:19,200 --> 00:17:23,360
बात यह है ना कि देखिए तो आप मुख्य बात हमें मूर्ति पूजा

247
00:17:23,360 --> 00:17:27,600
को नहीं मानते या हम आर्य समाज ही हैं। इस तरह की बात मेरा मतलब

248
00:17:27,600 --> 00:17:31,760
नहीं है। मैं आर्य समाज ही हूं या नहीं मेरा उससे कोई लेना देना नहीं आर्य मूर्ति

249
00:17:31,760 --> 00:17:36,400
पूजा को नहीं मानते आप मूर्ति पूजा गलत है यही लिख देते

250
00:17:36,400 --> 00:17:40,480
मैं बार-बार पूछा कि आपको हमारी कौन सी चीज पर आपत्ति है तो आपने ये नहीं बोला कि

251
00:17:40,480 --> 00:17:44,800
मूर्ति पूजा गलत है आप इधर बहुत सारे बड़े-बड़े लंबे-लंबे मैसेज भेजते

252
00:17:44,800 --> 00:17:48,880
रहे आपने जो है वो YouTube वीडियो के लिंक आपको क्या क्या लगता

253
00:17:48,880 --> 00:17:53,120
है हम लोग मैंने खोल के भी नहीं देखे आपके वो वीडियोस इसके लिंक

254
00:17:53,120 --> 00:17:57,280
क्योंकि मैंने जो लिंक भेजी हैं क्योंकि आपको सुनिए आपको

255
00:17:57,280 --> 00:18:01,840
लगता है कि आप आपके एंड से आप देख रहे हो कि मैं और आप बात कर रहे हैं।

256
00:18:01,840 --> 00:18:05,920
मगर यहां से मैं देख रहा हूं कि मैं बहुत सारे लोगों से उसी समय बात कर

257
00:18:05,920 --> 00:18:09,600
रहा हूं।

258
00:18:09,600 --> 00:18:15,360
तो आपको लगता है कि अरे ये तो बहुत आसान सी चीज है। पढ़ लेना मैसेज।

259
00:18:15,360 --> 00:18:19,680
आसान नहीं है। तो आप आइए

260
00:18:19,680 --> 00:18:23,760
जब आपको ठीक लगे। जी जी खाली

261
00:18:23,760 --> 00:18:27,920
देखिए मैंने लिंक वैसे अगर देखिए लिंक मैंने भेज भी दिया है

262
00:18:27,920 --> 00:18:32,160
इससे आपका भी एक फायदा रहेगा क्योंकि मैं बार-बार लाइव स्ट्रीम में

263
00:18:32,160 --> 00:18:36,320
लिंक नहीं देता फिर रहूंगा पहली बात जो मैंने मतलब लाइव स्ट्रीम

264
00:18:36,320 --> 00:18:40,480
में अगर देखिए मैं आ गया हूं हम चर्चा कर रहे हैं लाइव स्ट्रीम में

265
00:18:40,480 --> 00:18:44,640
तो वहां पे ले मैं लिंक के माध्यम से ये थोड़ी दिखाऊंगा कि मैंने ये जो प्रैक्टिकल

266
00:18:44,640 --> 00:18:48,720
करके रखा है मूर्ति पूजा या जो बलि प्रथा या परमात्मा के रिगार्डिंग जो ये

267
00:18:48,720 --> 00:18:53,200
सब मैंने प्रैक्टिकल आप केवल बोल के बताइएगा कि ऐसासा मैंने किया है।

268
00:18:53,200 --> 00:18:57,360
आवश्यकता पड़ेगी तो हमारे जो ऑपरेटर होंगे आप जितने लिंक

269
00:18:57,360 --> 00:19:01,440
भेजेंगे वो सारे लिंक जो है लिंक वन लिंक टू लिंक थ्री ऐसे

270
00:19:01,440 --> 00:19:05,520
करके एक मैसेज बना दीजिए। वो मैसेज मैं अपने ऑपरेटर को दे दूंगा

271
00:19:05,520 --> 00:19:09,760
पहले ही तो जब आवश्यकता पड़ेगी आप कहेंगे कि मेरा लिंक नंबर थ्री दिखाइए

272
00:19:09,760 --> 00:19:14,400
तो वो लिंक नंबर थ्री में प्रदर्शित कर देंगे ऑन स्क्रीन। अच्छा अच्छा

273
00:19:14,400 --> 00:19:18,400
इस तरह से हां यह भी एक आसान रहेगा। पर लेकिन चक्कर ये है ना ये जो

274
00:19:18,400 --> 00:19:22,640
प्रैक्टिकिटी मैंने करके रखी हुई है ये कई घंटों की है

275
00:19:22,640 --> 00:19:24,880
यानी कि एक एक दोद घंटा आधा घंटा

276
00:19:24,880 --> 00:19:29,280
मैंने तभी तो कहा कि ये बहुत ज्यादा टाइम की है इनको थोड़ा ताकि

277
00:19:29,280 --> 00:19:33,360
इसमें हम क्या कर सकते हैं वो बताइए बस यही मैं कह रहा हूं कि

278
00:19:33,360 --> 00:19:37,600
आपको फ्री टाइम पे जितना हो सके आप थोड़ा थोड़ा करके

279
00:19:37,600 --> 00:19:41,680
देखिए जिससे कि ये मेरा ये आसान रहेगा कि आपको समझाना

280
00:19:41,680 --> 00:19:45,680
पड़े मतलब देखिए मतलब इस चीज के ऊपर जो चर्चा करेंगे ना पहले

281
00:19:45,680 --> 00:19:50,160
बताइएगा आप अपनी बात बताइएगा उससे संबंधित

282
00:19:50,160 --> 00:19:54,320
जो आपने बहुत लंबी वह होगी तो उसमें आप आप टाइम

283
00:19:54,320 --> 00:19:58,320
स्लॉट बहुत लंबी वो प्रैक्टिकल्टी है ना तो

284
00:19:58,320 --> 00:20:02,480
उसमें आप टाइम स्लॉट डाल के मैसेज भेजिएगा

285
00:20:02,480 --> 00:20:06,480
इस टाइम अच्छा वो तो पुरानी हो गई पुरानी वीडियो

286
00:20:06,480 --> 00:20:12,000
में मुझे चेक करना नहीं आप समझ नहीं रहे मैं क्या कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं

287
00:20:12,000 --> 00:20:18,000
कि

288
00:20:18,400 --> 00:20:21,040
आप

289
00:20:21,040 --> 00:20:23,760
जब

290
00:20:23,760 --> 00:20:27,760
वीडियोस की लिस्ट भेजेंगे ना तो हर वीडियो की

291
00:20:27,760 --> 00:20:32,000
लिस्ट में अपने अनुसार जो टाइम स्लॉट आपको पसंद आए जैसे कि

292
00:20:32,000 --> 00:20:36,000
भाई इस वीडियो में 25 मिनट से लेके मुझे 30 मिनट तक का मेरे लिए महत्वपूर्ण

293
00:20:36,000 --> 00:20:40,640
है तो वो आप डाल दीजिएगा। तो जब आप वहां पर कहेंगे कि भाई

294
00:20:40,640 --> 00:20:44,800
मेरा वीडियो नंबर थ्री दिखाइए और वीडियो

295
00:20:44,800 --> 00:20:49,040
नंबर थ्री में उसका जो मैंने इंपॉर्टेंट टाइम स्लॉट है वो दिखाइए। तो ऑपरेटर

296
00:20:49,040 --> 00:20:53,280
क्या करेंगे? वहां 25 पे ही पहुंच जाएंगे सीधे। अच्छा अच्छा वही

297
00:20:53,280 --> 00:20:57,680
टाइम स्लॉट मैं वही समझ रहा हूं। मतलब जो इसमें एक्चुअली में मैंने उसमें टाइम स्लॉट

298
00:20:57,680 --> 00:21:01,680
कराया नहीं है। आपने अरे कुछ नहीं आप अब दोबारा से

299
00:21:01,680 --> 00:21:05,680
देखो और ले लो लिख लो अपने नोटबुक में लिख लो उसको फिर

300
00:21:05,680 --> 00:21:09,680
मैसेज करते टाइम मैसेज करते समय हर लिंक के साथ उसके इंपॉर्टेंट

301
00:21:09,680 --> 00:21:13,920
टाइम स्लॉट भेज देना मगर मैसेज एक ही भेजिएगा

302
00:21:13,920 --> 00:21:18,160
अलग-अलग नहीं एक ही मैसेज वीडियो नंबर वन लिंक ये टाइम स्लॉट

303
00:21:18,160 --> 00:21:22,240
ये वीडियो नंबर टू लिंक ये टाइम स्लॉट ये तो वो

304
00:21:22,240 --> 00:21:26,240
तो मैं नोट बना करके आपको फोटो ही ना भेज दूं नहीं फोटो में दिक्कत

305
00:21:26,240 --> 00:21:31,120
है ना वहां से कॉपी पेस्ट नहीं होगा ना लिंक से लिंक थोड़ी ना ओपन होगा उससे।

306
00:21:31,120 --> 00:21:33,520
नहीं टाइम स्लॉट की बात कर रहा हूं ना। टाइम स्लॉट

307
00:21:33,520 --> 00:21:38,960
की तो फोटो भेज तो फिर वो अलग से उन्हें पेपर लेके बैठना पड़ेगा ना।

308
00:21:38,960 --> 00:21:43,040
आप जो लिख के भेजेंगे फोटो खींच कर वही उसमें टाइप कर दीजिएगा

309
00:21:43,040 --> 00:21:47,040
लिंक के नीचे टाइम स्लॉट। अच्छा अच्छा

310
00:21:47,040 --> 00:21:51,360
ठीक है जी। मैं समझ गया आपकी बात। हां। जी जी।

311
00:21:51,360 --> 00:21:55,600
क्योंकि एक्चुअली में मैंने पता है क्या जब वीडियो बना के जब अपलोड करी थी ना

312
00:21:55,600 --> 00:21:59,600
उसमें मैंने टाइम वगैरह वो सब देखा ही नहीं बिल्कुल भी भाई साहब

313
00:21:59,600 --> 00:22:03,600
अब आप दोबारा देखिए ना आपने कहां पे क्या किया है जैसे

314
00:22:03,600 --> 00:22:07,840
आप हमसे चाह रहे हैं कि हम उसे देख लें थोड़ा-थोड़ा करके आप उसको देखिए

315
00:22:07,840 --> 00:22:11,920
थोड़ा-थोड़ा करके उसमें टाइम ढूंढ लीजिए कि कौन से टाइम पे आपकी इंपॉर्टेंट चीजें

316
00:22:11,920 --> 00:22:16,160
हैं और उसको नोट कर लीजिए। नोट करने के बाद जब आप मुझे मैसेजेस

317
00:22:16,160 --> 00:22:20,160
भेजेंगे कि वीडियो नंबर 1 2 3 4 5 6 तो उसमें वीडियो नंबर 1

318
00:22:20,160 --> 00:22:24,160
2 3 4 5 6 के टाइम स्लॉट्स भी आपने नोट कर रखे होंगे वो भी टाइप करके वहां

319
00:22:24,160 --> 00:22:28,240
लिख दीजिएगा तो देखिए फिर टाइम स्लॉट अगर मैंने दे

320
00:22:28,240 --> 00:22:32,400
दिया तो वो लाइव स्ट्रीम में तुरंत करेंगे या लाइव स्ट्रीम से पहले ही सारी चीजें देखेंगे

321
00:22:32,400 --> 00:22:36,560
नहीं नहीं तुरंत जब आप कहेंगे तभी वो चलेगा अच्छा

322
00:22:36,560 --> 00:22:40,800
अच्छा मतलब वो लाइव में आएगा ठीक है वैसे क्या प्रैक्टिकल है एक छोटा

323
00:22:40,800 --> 00:22:44,800
सा मुझे बता दीजिए क्या प्रैक्टिकल है देखिए पहली बात तो यह है कि

324
00:22:44,800 --> 00:22:48,640
मैं सही बताऊं अगर आसान तरीके जैसे कि परमात्मा की मूर्ति बन सकती

325
00:22:48,640 --> 00:22:53,200
नहीं बन सकती। मैंने वहां पर प्रैक्टिकल करके दिखा रखे हैं कि नहीं बन सकती। 100%

326
00:22:53,200 --> 00:22:57,200
अरे तो उसमें आपने क्या किया है जो नहीं कर नहीं बन सकती।

327
00:22:57,200 --> 00:23:01,280
वो तो देख के ही पता चलेगा। देखिए वो चीजें मेरे शब्दों में नहीं आएगी। वो सीधी

328
00:23:01,280 --> 00:23:05,280
सीधी बात है। वो तो देख के ही पता चलेगा। अगर मैंने कॉल पे बता दिया तो आपके

329
00:23:05,280 --> 00:23:09,520
एक तो पहली बात तो सर के ऊपर जाएगी। क्योंकि वो प्रैक्टिकल चीज है। पहली

330
00:23:09,520 --> 00:23:13,520
बात तो ये वो सर के ऊपर जाएगी। एकदम से समझ नहीं आएगी क्योंकि वो प्रैक्टिकल चीज

331
00:23:13,520 --> 00:23:17,520
है। अब प्रैक्टिकल चीज पहली बात तो बुक में चलो ठीक है सामान्य जो नॉर्मल

332
00:23:17,520 --> 00:23:21,760
बुक होती है उनमें लिख तो देते हैं लेकिन स्टेप बाय स्टेप क्या सामान्य व्यक्ति

333
00:23:21,760 --> 00:23:25,840
को समझ आता है क्या नहीं वो तो किसी एक टीचर के माध्यम से जो

334
00:23:25,840 --> 00:23:30,000
होता है तो आपका टीचर कौन है टीचर तो देखिए मेरा

335
00:23:30,000 --> 00:23:34,000
टीचर तो नहीं मैं टीचर तो मैं एग्जांपल बता रहा हूं ना मैं नहीं टीचर के

336
00:23:34,000 --> 00:23:38,400
माध्यम से समझ में आता है जब जब हम बुक को पढ़ते तो आप आपका

337
00:23:38,400 --> 00:23:42,560
टीचर कौन है आपको कैसे समझ में आया

338
00:23:42,560 --> 00:23:46,720
मैं मतलब आपका आपका सवाल नहीं समझा थोड़ा आपने अभी ये स्वीकार किया ना कि

339
00:23:46,720 --> 00:23:50,960
टीचर से समझ में आती है चीजें खुद से नहीं आती है।

340
00:23:50,960 --> 00:23:55,920
हां हां एक तो आपका टीचर कौन है? अरे

341
00:23:55,920 --> 00:24:00,160
आप समझे नहीं मैंने अभी एग्जाम ये एग्जांपल है। अरे एग्जांपल

342
00:24:00,160 --> 00:24:03,760
में आपने ये कहा ना कि भाई हम एक बुक से सीधे नहीं समझ पाते।

343
00:24:03,760 --> 00:24:08,000
हमें टीचर से समझना पड़ता है। तो यानी कि आप ये कह रहे हैं कि हम किसी

344
00:24:08,000 --> 00:24:12,080
चीज को अपने से नहीं समझ पाते। हमें बाहरी रूप से किसी ना किसी गुरु की आवश्यकता

345
00:24:12,080 --> 00:24:16,080
होती है। तो आपने जो भी कुछ समझा है वो आपने किस गुरु से

346
00:24:16,080 --> 00:24:20,160
समझा है? देखिए मेरे तो गुरु अगर मैं अगर असलियत

347
00:24:20,160 --> 00:24:24,400
में बताऊं तो मैं मैं अपना गुरु जो है वो यूनिवर्स

348
00:24:24,400 --> 00:24:28,640
जो मेरे मेरे आसपास जो प्रकृति है उससे मानता यानी कि दूसरा भी अपने

349
00:24:28,640 --> 00:24:32,640
से सीख सकता है अपने अनुभव से प्रकृति के द्वारा ना हां हां वो भी तो

350
00:24:32,640 --> 00:24:36,720
आपकी ये लाइन गलत है कि उसको गुरु की आवश्यकता समझना है तो वो प्रकृति से सीख

351
00:24:36,720 --> 00:24:40,720
सकता है अपनी बुद्धि लगा करके हां तो यानी वो अपने अनुभव से अपना सीख

352
00:24:40,720 --> 00:24:44,800
सकता है ना हां अपने आप भी सीख सकता है पर लेकिन मैं टीचर को अगर

353
00:24:44,800 --> 00:24:49,600
यदि रूप में देखा जाए टीचर तो अलग इंसान के रूप में भी दे सकते हैं।

354
00:24:49,600 --> 00:24:53,680
वो ठीक है। जैसे आपने कहा ना कि बुक से समझ में नहीं आता है। टीचर

355
00:24:53,680 --> 00:24:58,320
से समझना पड़ता है। तो बुक भी तो प्रकृति है।

356
00:24:58,320 --> 00:25:02,400
बुक बुक प्रकृति का एक वो है क्या? मतलब तो हम हम जब भी

357
00:25:02,400 --> 00:25:06,480
प्रकृति की किसी चीज को समझेंगे किसी भी उसके कार्य से वो प्रकृति

358
00:25:06,480 --> 00:25:10,800
का एक अंश होगा। संपूर्ण प्रकृति नहीं होगी। जब भी हम कुछ समझेंगे

359
00:25:10,800 --> 00:25:14,880
प्रकृति से तो जैसे मान लीजिए हवा चलने से हमारे बाल हिल रहे

360
00:25:14,880 --> 00:25:18,880
हैं। तो हमने समझा कि हवा चलने से मूवमेंट होता है। चीजें खिसकती

361
00:25:18,880 --> 00:25:22,960
है उसकी फोर्स लगती है हवा की। तो ये हमने प्रकृति के एक अंश

362
00:25:22,960 --> 00:25:27,120
से ही सीखा है। संपूर्ण प्रकृति से नहीं सीखा है।

363
00:25:27,120 --> 00:25:31,680
तो फिर अगर प्रकृति की बात है तो प्रकृति तो फिर किताब भी है।

364
00:25:31,680 --> 00:25:35,840
तो फिर किताब प्रकृति किताब पूर्णत है नहीं है ना। मैम मेरा प्रकृति

365
00:25:35,840 --> 00:25:40,000
का मतलब कुछ और है। आप प्रकृति का मतलब कुछ और ही समझ रहे हैं। मेरा जो

366
00:25:40,000 --> 00:25:45,360
प्रकृति का मतलब मतलब हां मेरा प्रकृति का मतलब ये है जो

367
00:25:45,360 --> 00:25:49,360
यूनिवर्स कह रहा हूं। ये जो आसपास से मैं रह करके मैं

368
00:25:49,360 --> 00:25:54,000
अपनी बुद्धि लगा करके या फिर प्रकृति के जितने भी आसपास

369
00:25:54,000 --> 00:25:58,240
पूरी बात सुनिए नहीं पूरी बात तो सुनिए। तो यहां पे आप बीच

370
00:25:58,240 --> 00:26:02,560
में बोल देते फिर वो चीज समझने में बहुत ज्यादा परेशानी हो जाती है।

371
00:26:02,560 --> 00:26:06,560
मेरा प्रकृति का ये मतलब आसान भाषा में मैं कर रहा हूं। प्रकृति

372
00:26:06,560 --> 00:26:10,560
का मतलब ये है कि जो मेरे एनवायरमेंट में जो कुछ भी हो रहा है

373
00:26:10,560 --> 00:26:14,720
जितनी मेरी बुद्धि मेरे को मतलब मिली है।

374
00:26:14,720 --> 00:26:18,960
मतलब होने वाली गतिविधियों होने वाली गतिविधियों को

375
00:26:18,960 --> 00:26:23,120
गतिविधियों को आप प्रकृति कह रहे हैं ना कि पर्टिकुलर

376
00:26:23,120 --> 00:26:27,200
ना कि पर्टिकुलर कुछ पड़ी हुई चीजों को। अगर वो गतिमान है

377
00:26:27,200 --> 00:26:31,520
कुछ मूवमेंट्स हो रहा है कुछ क्रिया हो रही है तो उससे आप समझते हैं

378
00:26:31,520 --> 00:26:33,920
गतिमान भी और साथ के साथ

379
00:26:33,920 --> 00:26:38,000
जो लोग इन्हें गतिमान के साथ-साथ और बहुत सारी ऐसी चीजें उनको

380
00:26:38,000 --> 00:26:42,000
हम गतिमान कह भी नहीं सकते पर वो प्रकृति का हिस्सा भी है तो फिर प्रकृति का

381
00:26:42,000 --> 00:26:46,000
हिस्सा तो बुक भी है ना बुक भी है मैं जानता हूं बुक

382
00:26:46,000 --> 00:26:50,080
से भी मैं लिटरली बताऊं अगर यदि आप वैसे गुरु की बात करें

383
00:26:50,080 --> 00:26:54,160
जिनसे मैं बुक के माध्यम से समझा भी हूं तो वो आचार्य नहीं ना बता

384
00:26:54,160 --> 00:26:58,160
रहा हूं आचार्य एक एक मिनट पहले क्लियर एक चीज क्लियर हो

385
00:26:58,160 --> 00:27:02,320
पहले आपने ये कहा है ना कि भाई बुक्स से नहीं समझ में आता है टीचर

386
00:27:02,320 --> 00:27:06,320
चाहिए होता है तो आप इस बात पे 100% नहीं समझ

387
00:27:06,320 --> 00:27:10,320
आता है टीचर भी कहीं ना कहीं चाहिए होता है तो आप तो मैंने आपसे बार-बार

388
00:27:10,320 --> 00:27:14,400
पूछा कि आपका टीचर कौन है तो आपने कहा प्रकृति है फिर आप जब मैं प्रकृति

389
00:27:14,400 --> 00:27:18,480
को बुक बुक कहने लगा तो अब आप आए बोले कि मेरा कोई आचार्य गुरु

390
00:27:18,480 --> 00:27:22,720
है तो ये तो बात बदल रहे है ना पूरी बात आप पूरी बात समझे

391
00:27:22,720 --> 00:27:27,120
ही तो नहीं मैं यही तो कह रहा हूं आप प्रकृति बुक को ही क्यों बता रहे हैं? जब आप प्रकृति

392
00:27:27,120 --> 00:27:31,120
बुक को बताएंगे तो फिर वो नहीं है। नहीं ऐसा

393
00:27:31,120 --> 00:27:35,200
नहीं है। जैसे हम अब मैंने आपको वो भी बताया ना कि हम

394
00:27:35,200 --> 00:27:39,200
जब भी प्रकृति की किसी भी चीज से हम कुछ

395
00:27:39,200 --> 00:27:43,200
सीखेंगे तो संपूर्ण प्रकृति से नहीं सीखेंगे। प्रकृति

396
00:27:43,200 --> 00:27:47,200
के किसी अंश से ही सीखेंगे। और यदि अंश से हम सीखना स्वीकार कर

397
00:27:47,200 --> 00:27:49,120
रहे हैं तो बुक भी प्रकृति

398
00:27:49,120 --> 00:27:53,520
का एक अंश है। उससे सीखना स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं? यहीं

399
00:27:53,520 --> 00:27:57,600
पर मैं आपको बता तो रहा था। आप बीच में बोल दे रहे हैं। मैं लिटरली वही बता रहा

400
00:27:57,600 --> 00:28:01,680
हूं कि आप थोड़ा आसानी से थोड़ा ध्यान दीजिएगा। इसमें मेरे कहने

401
00:28:01,680 --> 00:28:05,680
का मतलब यह है मैं मेरे जो प्रकृति का मतलब

402
00:28:05,680 --> 00:28:09,760
यह है कि मेरे आसपास की जितनी भी चीजें हैं जहां पर मैंने खुद से

403
00:28:09,760 --> 00:28:13,760
कुछ भी किया है और प्रकृति अपने इनडायरेक्ट या डायरेक्ट तरीके से

404
00:28:13,760 --> 00:28:17,920
समझाती है और बुक जो है यानी कि वेद या

405
00:28:17,920 --> 00:28:22,240
वेद के वेदांग वेदांत ये जो है इसको भी समझाने के लिए हमें दीक्षा

406
00:28:22,240 --> 00:28:26,240
लेनी तो पड़ती है और मैंने दीक्षा अभी भी मैं ले रहा हूं। बात

407
00:28:26,240 --> 00:28:30,240
ये है कि मैं ले रहा हूं। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मैं ले चुका हूं। मैं अभी

408
00:28:30,240 --> 00:28:34,560
भी ले रहा हूं और किनसे ले रहा हूं मैं वो भी बता रहा हूं। मेरा मेरा

409
00:28:34,560 --> 00:28:39,280
देखिए आप एक साथ बहुत सारे चैप्टर खोल देंगे तो बात हो नहीं पाएगी क्लियर।

410
00:28:39,280 --> 00:28:43,680
अभी अभी आप इस पे मत अभी आप इस पे क्यों जा रहे हैं कि मैं बता रहा हूं मैं किनसे

411
00:28:43,680 --> 00:28:47,840
ले रहा हूं। अभी बात ये है कि अगर आप प्रकृति से

412
00:28:47,840 --> 00:28:51,840
सीखते हैं आपके आसपास की चीजें तो क्या उसमें बुक नहीं आती है

413
00:28:51,840 --> 00:28:56,080
प्रकृति में? प्रकृति के हिस्से में आती है। मैं जानता हूं प्रकृति

414
00:28:56,080 --> 00:29:00,240
के अंदर तो फिर आप उसको आपके द्वारा आप जिन चीजों से सीख रहे

415
00:29:00,240 --> 00:29:05,120
हैं हम तो उसके लिए आप कह रहे हैं कि मेरे लिए प्रकृति ये है

416
00:29:05,120 --> 00:29:09,680
और बुक को उससे अलग कर रहे हैं तो वो किस आधार पे कर रहे हैं?

417
00:29:09,680 --> 00:29:13,840
वही तो मैं आपको समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि देखिए प्रकृति का बुक आप आगे बढ़

418
00:29:13,840 --> 00:29:18,160
जा रहे हैं ना कि मैं बता रहा हूं मेरे आचार्य कौन है? तो आप आगे बढ़ जा रहे हैं।

419
00:29:18,160 --> 00:29:23,120
वो नहीं समझा रहा। वही तो बता रहा हूं। आचार्य भी कौन है? मैं वो भी बता रहा हूं।

420
00:29:23,120 --> 00:29:27,200
मैं कहां पूछ रहा हूं आपसे अभी आचार्य जी कौन है? या तो आपने शुरू में कहा होता कि हां

421
00:29:27,200 --> 00:29:31,440
मेरा टीचर है। आपने कहा मेरा टीचर प्रकृति है।

422
00:29:31,440 --> 00:29:35,600
हम हमने देखिए मैं बताऊं मेरा जो सबसे मेजर

423
00:29:35,600 --> 00:29:39,920
जो है मेजर पॉइंट जिनसे सीखता हूं मैं वो है प्रकृति मतलब पूरा

424
00:29:39,920 --> 00:29:44,160
आसपास [संगीत] का एरिया या मेरे प्रैक्टिकल। ठीक है? और जो जो सेकेंडरी

425
00:29:44,160 --> 00:29:48,320
है सेकेंडरी मैंने आपको नहीं बताया। सेकेंडरी भी मैं बता ही रहा था। सेकेंडरी

426
00:29:48,320 --> 00:29:52,400
मेरे आचार्य अग्निव्रत जी हैं और जो मतलब समझने के लिए और

427
00:29:52,400 --> 00:29:56,560
सपोर्टिव के लिए वो भी प्रकृति का हिस्सा ही है। ठीक है। आपने मान लिया

428
00:29:56,560 --> 00:30:00,560
कि गुरु गुरु की आवश्यकता पड़ती है। आपका भी कोई

429
00:30:00,560 --> 00:30:05,600
गुरु है। है ना? हम ये आपने मान लिया ना

430
00:30:05,600 --> 00:30:09,840
जी जी मेरा भी कोई गुरु है मतलब जो आप जो प्रकृति रूपी

431
00:30:09,840 --> 00:30:13,920
एक गुरु को कह रहे थे उसके अलावा मानुष मनुष्य रूप

432
00:30:13,920 --> 00:30:17,920
में बुद्धिमान एक व्यवहारिक आचार्य गुरु हैं

433
00:30:17,920 --> 00:30:20,160
आपके हां दो है

434
00:30:20,160 --> 00:30:24,240
उसकी आवश्यकता पड़ती है आपने इतना मान लिया जी जी मैं मानता

435
00:30:24,240 --> 00:30:28,240
हूं मैं वही तो मैं पहले से ही बोल रहा था आपने बार ये

436
00:30:28,240 --> 00:30:32,560
कहा था ना कोई मेरी प्रकृति गुरु है तब मैं समझ नहीं पाया था प्रकृति मैंने

437
00:30:32,560 --> 00:30:36,800
मैंने आपको क्या बोला मैंने अगर सच बताऊं मेरे मेरे जो आपने काफी

438
00:30:36,800 --> 00:30:40,880
देखिए आपने काफी देर बाद आपने बोला कि आचार्य हैं मेरे मैं उनका नाम

439
00:30:40,880 --> 00:30:44,960
बता देता हूं मगर काफी देर तक आप प्रकृति को

440
00:30:44,960 --> 00:30:49,040
वो करते रहे थे एक्सप्लेन जब आप प्रकृति को एक्सप्लेन नहीं कर पा रहे थे बुक

441
00:30:49,040 --> 00:30:53,040
से अलग करते हुए तब आपने आचार्य का नाम लिया कि मेरे आचार्य भी हैं।

442
00:30:53,040 --> 00:30:57,280
एक मिनट आपकी आवाज कट कट के आ रही थी थोड़ा। अच्छा ठीक है। अब आप जो है दिवाली

443
00:30:57,280 --> 00:31:01,440
के बाद समय बताइएगा तब हम लोग बात करेंगे चर्चा करिए। ठीक है जी

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जी आपने अभी जो बोला था वो थोड़ा सा दोबारा से बता दीजिए दोबारा से

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यह बोला कि आपने अपने प्रकृति से सीखने को काफी देर तक

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डिफाइन किया जबकि मैं आपसे पूछता रहा कि जब मैंने आपसे ये

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पूछा कि बुक प्रकृति से अलग कैसे है तो आपने काफी देर

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तक प्रकृति को डिफाइन करने की कोशिश की बुक से अलग करते हुए कि

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भाई बुक बुक एक अलग चीज हो गई प्रकृति अलग चीज हो गई और जब काफी

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देर तक आपने किया उसके बाद आपने आचार्य का नाम लिया कि भाई मेरे आचार्य

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भी है। लो तो पहले प्रकृति पे आप डटे रहे, डटे रहे।

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कुछ देर बाद आपने

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प्रकृति के साथ-साथ आचार्य का सहारा भी लिया। वो मैं आपको कह

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रहा हूं। अब आपने ये मान लिया है कि गुरु भी आवश्यक है। है

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ना? अब हम लोग बात करेंगे आगे वहां पर। चर्चा में जब

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आपके पास होगा। बस यही समझाना था मुझे। ये थोड़ा सा देखिए प्रकृति का

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मैंने इसलिए लिया था। उसका बस आप वही समझाइएगा।

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आप वही समझाइए। ठीक है। ठीक है। जी समझ गया आपकी बात। मैं जरूर बताऊंगा।

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जी जी धन्यवाद।

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[संगीत]
