1
00:00:03,520 --> 00:00:08,400
ब्रह्मा कुमारीज का कंक्लूजन क्या है? धर्म क्या है? वह बता दीजिए।

2
00:00:08,400 --> 00:00:12,640
ठीक है? डायरेक्ट पॉइंट की बात करेंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] चलो ठीक है।

3
00:00:12,640 --> 00:00:17,040
तो ब्रह्मा कुमारी के संस्था से धर्म का

4
00:00:17,040 --> 00:00:23,040
मतलब ये है कि हमारा स्वधर्म ही धर्म है।

5
00:00:23,120 --> 00:00:27,600
मैं लक्षण नहीं रूप नहीं। मैं मैं पूछ रहा हूं

6
00:00:27,600 --> 00:00:32,480
कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार धर्म की आवश्यकता क्यों है

7
00:00:32,480 --> 00:00:36,880
किसी को? वही तो मैं धर्म धर्म के ब्रह्मा कुमारी के

8
00:00:36,880 --> 00:00:41,280
ज्ञान के मुझे जो मुझे जितना ज्ञान समझ में आया है उसी अनुसार आपसे बात कह रहा हूं

9
00:00:41,280 --> 00:00:45,840
कि मुझे धर्म की व्याख्या यही समझ में आई है कि

10
00:00:45,840 --> 00:00:51,840
आत्मा का जो स्वधर्म है वही हमारा सत्य धर्म है।

11
00:00:52,560 --> 00:00:56,720
आत्मा का जैसे कोई आपसे पूछ रहा हूं। एक व्यक्ति सामने आपके खड़ा

12
00:00:56,720 --> 00:01:01,680
हुआ है। अभी तक तो वो यह भी नहीं जानता है कि मैं आत्मा हूं या क्या हूं।

13
00:01:01,680 --> 00:01:06,000
आप जी वो आपकी बातों को या आपके द्वारा आत्मा

14
00:01:06,000 --> 00:01:10,000
के अनुसार बताई जाने वाली बातों को क्यों सुने और क्यों माने? उसको

15
00:01:10,000 --> 00:01:14,080
क्या फायदा है उससे? वो फायदा क्या है? क्यों?

16
00:01:14,080 --> 00:01:18,240
क्या आवश्यकता? फायदा यही है। हां। ये जैसे गीता में जैसे

17
00:01:18,240 --> 00:01:24,240
कहा है कि स्वधर्म सुख देता है। पर धर्म दुख देता है।

18
00:01:24,800 --> 00:01:30,480
यानी कि धर्म को पालन करने हमारे

19
00:01:30,480 --> 00:01:34,560
हां तो हमारे निजी स्वरूप में हम जब टिकते हैं तो हम अपने

20
00:01:34,560 --> 00:01:38,640
स्वधर्म में टिकते हैं। तो हमारा जो जो

21
00:01:38,640 --> 00:01:43,440
बाकी जो मनुष्य ने जो बनाए धर्म है वो तो अपने

22
00:01:43,440 --> 00:01:47,680
लेकिन धर्म का पालन करने धर्म का पालन करने धर्म

23
00:01:47,680 --> 00:01:52,720
का पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है?

24
00:01:52,720 --> 00:01:56,720
जी जी जी सत्य धर्म से वो सत्य का है कि आत्मा का

25
00:01:56,720 --> 00:02:01,120
निज गुण में हमें समझ गया मुझे दूसरी बात पूछनी है

26
00:02:01,120 --> 00:02:05,360
ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो सत्य धर्म है उसके उसका पालन करने से

27
00:02:05,360 --> 00:02:09,680
सुख की प्राप्ति होती है तो प्रश्न यहां पर ये आता है कि सुख की प्राप्ति फिल्म

28
00:02:09,680 --> 00:02:13,920
देख के भी होती है सुख की प्राप्ति स्वादिष्ट भोजन करने से भी होती

29
00:02:13,920 --> 00:02:17,920
है तो फिर कौन सा अंतर आ रहा है जिस सुख की प्राप्ति होती

30
00:02:17,920 --> 00:02:23,120
है ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो धर्म का पालन करने से होती है

31
00:02:23,120 --> 00:02:27,200
जी स्वधर्म यानी मैं तो बोल रहा हूं कि जो आत्मा का

32
00:02:27,200 --> 00:02:31,280
निजी गुण है उसी के आधार पर हम जो स्थित होंगे उसी के हमें

33
00:02:31,280 --> 00:02:35,280
सुख अनुभव होता है। वो भौतिक सुख की बात अलग है कि खाने पीने की बात अलग

34
00:02:35,280 --> 00:02:40,080
है? तो अंतर बताइए ना दोनों में क्या अंतर है?

35
00:02:40,080 --> 00:02:44,240
दोनों में जैसे कि जी हमारा सत्य सनातन धर्म

36
00:02:44,240 --> 00:02:48,240
जो है वो आत्मा से निजी गुणों के

37
00:02:48,240 --> 00:02:53,280
आधारित धर्म है जो सनातन धर्म है। आप आप

38
00:02:53,280 --> 00:02:57,600
यहां से शुरू करिए कि मैं ब्रह्मा कुमारीज आकर के स्पिरिचुअल

39
00:02:57,600 --> 00:03:01,680
सेशन क्यों लूं और उसके बाद उसको फॉलो क्यों करूं

40
00:03:01,680 --> 00:03:05,760
जबकि मुझे पहले से ही अमुक अमुक जगह पर सुख की

41
00:03:05,760 --> 00:03:10,560
प्राप्ति हो रही है और ब्रह्मा कुमारी भी यही कह रहा है कि हमारे पास भी आओगे तो सुख मिलेगा।

42
00:03:10,560 --> 00:03:14,720
तो दोनों सुख में अंतर क्या है वो बताइए। आत्मा की बात

43
00:03:14,720 --> 00:03:18,720
जब आप करने लगते हैं आत्मा की बात जब आप करने लगते हैं वो तो तब की

44
00:03:18,720 --> 00:03:22,800
बात है जब आप उसको सेशन दे दे और ये सिद्ध

45
00:03:22,800 --> 00:03:26,880
कर दे उसको ये बता दें कि आत्मा हो तुम। तुम्हारी

46
00:03:26,880 --> 00:03:30,960
ये चीजें हैं। वो तो सेशन की बात है। मगर प्रायोरिटी में हम उसको क्या

47
00:03:30,960 --> 00:03:35,120
बताएंगे आने के लिए कि वो आत्मा की वो जो डेफिनेशन है वो सुने। जी

48
00:03:35,120 --> 00:03:37,760
जी

49
00:03:37,760 --> 00:03:41,840
सर मैं यही इसीलिए बता रहा हूं कि ब्रह्मा कुमार से जुड़ा तब तक तो मुझे

50
00:03:41,840 --> 00:03:45,920
धर्म के आयु तो मुझे जैसे भौतिक धर्म है हम जानते हैं कि हिंदू मुस्लिम ये सब इनको हम

51
00:03:45,920 --> 00:03:50,080
धर्म ही कहते थे पहले मैं एक आप मेरी

52
00:03:50,080 --> 00:03:54,080
बात समझिए तो थोड़ा सा क्या है ना बहुत चर्चा

53
00:03:54,080 --> 00:03:55,200
हो भी चुकी है मैं ये

54
00:03:55,200 --> 00:03:59,280
पूछ रहा हूं कि एक सामान्य व्यक्ति है अभी वो ब्रह्मा कुमारी आया नहीं है

55
00:03:59,280 --> 00:04:03,520
ठीक है उसको मालूम है कि मैं रसगुल्ला खाऊंगा तो मुझे मिठास जो मीठा

56
00:04:03,520 --> 00:04:07,760
सुख मीठे का स्वाद मिलेगा सुखी होऊंगा। उसको मालूम है मैं फिल्म देखने

57
00:04:07,760 --> 00:04:12,400
जाऊंगा धुरंधर पार्ट टू मैं उसको देख के सुखी हो जाऊंगा। ठीक है?

58
00:04:12,400 --> 00:04:16,720
तो उसको सुख मिल रहा है तो ब्रह्मा कुमारी क्यों आए? वहां

59
00:04:16,720 --> 00:04:22,720
वहां मिलने वाले सुख में और यहां मिलने वाले सुख में अंतर क्या होगा?

60
00:04:22,880 --> 00:04:27,040
हां जी। तो मैं इसीलिए कहूंगा कि ब्रह्मा कुमारी में आके जब हमें सत्य

61
00:04:27,040 --> 00:04:31,040
ज्ञान का परिचय मिलता है। सत्य ज्ञान अर्थात

62
00:04:31,040 --> 00:04:35,360
हमें स्वयं का परिचय मिलता है। स्वयं के आधार से हमें ईश्वर का परिचय

63
00:04:35,360 --> 00:04:40,640
मिलता है। ईश्वर के पूरा ड्रामा का मिलता है।

64
00:04:40,640 --> 00:04:44,720
समझ में आता है कि कैसे क्या होता है। अरे भैया सुख सुख

65
00:04:44,720 --> 00:04:50,720
में अंतर क्या आया वो तो बताओ। सुख में क्या अंतर आया?

66
00:04:50,960 --> 00:04:54,960
यहां मिलने वाले सुख में आप मेरी बात समझिए जो

67
00:04:54,960 --> 00:04:59,200
परमेश्वर का परिचय है जो अपना परिचय है इस सबका पर्यावसान

68
00:04:59,200 --> 00:05:03,280
इसमें है ना कि मुझे सुख प्राप्त होगा तो सुख तो बाहर

69
00:05:03,280 --> 00:05:07,280
भी प्राप्त हो रहा है इन परिचय के बिना तो अंतर क्या

70
00:05:07,280 --> 00:05:10,720
है दोनों प्रकार के सुख में

71
00:05:10,720 --> 00:05:11,220
हां

72
00:05:11,040 --> 00:05:15,440
जी तो मैं इसीलिए वही बात कह रहा हूं कि जब हमें

73
00:05:15,440 --> 00:05:19,600
स्वयं का परिचय पता होता है तो हमें सुख का अनुभव समझ में आता

74
00:05:19,600 --> 00:05:23,600
आता है और जो हम खुद को देह समझने लगते हैं तो वो भौतिक सुख

75
00:05:23,600 --> 00:05:27,680
का अनुभव होता है तो भौतिक सुख का अलग बात है देह का सुख

76
00:05:27,680 --> 00:05:31,920
अलग है वो वो अलग आत्मा का सुख अलग है वो अलग है

77
00:05:31,920 --> 00:05:36,400
वही निर्भयता हमारे हमारे अंदर वही निर्भयता

78
00:05:36,400 --> 00:05:40,400
पैदा होती है कि आत्मा अगर अविनाशी है तो दुख की चिंता

79
00:05:40,400 --> 00:05:44,480
तो अलग होती है हर इंसान को सुख की अपेक्षा होती है तो सुख

80
00:05:44,480 --> 00:05:48,640
कैसे प्राप्त किया जाता है सच्चा सुख आज हम कोई भी

81
00:05:48,640 --> 00:05:52,640
इस दुनिया मुझे लगता है मुझे लगता है आप ये मुझे लगता है आप

82
00:05:52,640 --> 00:05:56,800
यह कहना चाहते हैं मैं भी आपकी मदद कर देता हूं शायद आपको वो शब्द

83
00:05:56,800 --> 00:06:00,800
एग्जैक्ट नहीं मिल रहा है कि ये जितने भी सुख है ना भौतिक संसार

84
00:06:00,800 --> 00:06:04,800
वाले ये इन सभी सुखों का अरे

85
00:06:04,800 --> 00:06:08,880
भाई साहब बोलने तो दो बोलने दो मैं आपकी मदद कर रहा हूं

86
00:06:08,880 --> 00:06:11,390
फिलहाल

87
00:06:11,390 --> 00:06:16,240
[गला साफ़ करने की आवाज़] कि ये जितने भी भौतिक सुख हैं भौतिक संसार वाले

88
00:06:16,240 --> 00:06:20,480
ये सभी सुख बाधित हैं इनका अंत हो जाता है।

89
00:06:20,480 --> 00:06:25,040
अगर हमने फिल्म अगर हमने फिल्म देखी तो फिल्म खत्म हो जाती है। रसगुल्ला

90
00:06:25,040 --> 00:06:26,080
खाया तो एक खाया

91
00:06:26,080 --> 00:06:30,240
दो खाया तीसरे रसगुल्ले में खराब लगने लगता है। यहां भौतिक

92
00:06:30,240 --> 00:06:34,400
संसार से जितने भी सुख हमें मिल रहे हैं उनका अंत होता है। तो

93
00:06:34,400 --> 00:06:38,480
हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय यानी कि आपके आपके अनुसार जो

94
00:06:38,480 --> 00:06:42,640
ब्रह्मा कुमारी है वहां इसलिए जाते हैं कि वहां का सुख अनंत

95
00:06:42,640 --> 00:06:45,440
सुख होता है।

96
00:06:45,440 --> 00:06:49,440
ऐसा है अनंत सुख अनंत सुख होता है। ऐसा

97
00:06:49,440 --> 00:06:54,640
है कभी ना खत्म होने वाला हम अनुभव करने

98
00:06:54,640 --> 00:06:59,840
हम अनुभव करने लगते हैं। कह रहा हूं जैसे हम ज्ञान के आधार पर

99
00:06:59,840 --> 00:07:05,840
मैं कह रहा हूं ब्रह्मा कुमारी जाने पर अनंत सुख मिलेगा ना

100
00:07:06,320 --> 00:07:10,640
जी अनुभव होने लगता है। अनंत सुख मिलेगा

101
00:07:10,640 --> 00:07:14,720
ना? मैं प्रैक्टिसिंग में अनुभव की बात ही नहीं कर रहा।

102
00:07:14,720 --> 00:07:19,120
हां जी। मैं जो मैं जो दूसरा डायमेंशन है

103
00:07:19,120 --> 00:07:23,120
जो दूसरा डायमेंशन है पारलौकिक मैं कह रहा हूं

104
00:07:23,120 --> 00:07:27,280
ब्रह्मा कुमारी जाने पर वहां की चीजों को फॉलो करने पर उसमें स्थित

105
00:07:27,280 --> 00:07:31,360
होने पर अंतत गतत्वा वहां पर अनंत सुख की प्राप्ति

106
00:07:31,360 --> 00:07:34,160
होती है।

107
00:07:34,160 --> 00:07:38,800
हां जी जी ठीक है तो ये बताइए

108
00:07:38,800 --> 00:07:44,720
अनंत सुख की प्राप्ति होती है और जो

109
00:07:44,720 --> 00:07:48,880
इसलिए ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो नियम और अविनाशी

110
00:07:48,880 --> 00:07:53,200
सुख अब यहां पहली बात आ जाती है कि ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो

111
00:07:53,200 --> 00:07:57,360
नियम और सिद्धांत है ठीक है ब्रह्मा कुमारीज

112
00:07:57,360 --> 00:08:01,520
के यहां पे जो भी नियम और सिद्धांत है यानी कि वो

113
00:08:01,520 --> 00:08:06,080
धर्म है जी है ना क्योंकि ब्रह्मा कुमारी

114
00:08:06,080 --> 00:08:10,240
अविनाशी सुख अरे भाई आप मेरी

115
00:08:10,240 --> 00:08:14,560
बात समझने का प्रयास तो करो हां क्यों क्योंकि

116
00:08:14,560 --> 00:08:18,880
ब्रह्मा कुमारी मैं बाद में पढ़ता हूं। क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज

117
00:08:18,880 --> 00:08:21,360
अनंत सुख प्रोवाइड करवा रहा है। इसलिए

118
00:08:21,360 --> 00:08:25,600
ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बचा बताए जाने वाले जो आचरण है

119
00:08:25,600 --> 00:08:29,920
वो धर्म है। वो नियम है। क्योंकि ब्रह्मा कुमारी अनंत सुख

120
00:08:29,920 --> 00:08:34,000
दिलवा रहा है। ठीक है। ठीक है।

121
00:08:34,000 --> 00:08:38,960
जी। जी। अब यह बताइए कि ब्रह्मा कुमारीज

122
00:08:38,960 --> 00:08:43,040
इस्लाम को, बाइबल को, कुरान को इनको धर्म

123
00:08:43,040 --> 00:08:47,120
क्यों कहता है? क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज का जो

124
00:08:47,120 --> 00:08:51,440
आचरण है वो तो अलग है और कुरान का जो आचरण

125
00:08:51,440 --> 00:08:55,440
है वो अलग है। बाइबल का जो आचरण है वो अलग है। तो फिर इनको धर्म क्यों

126
00:08:55,440 --> 00:08:58,400
कहता है?

127
00:08:58,400 --> 00:09:02,400
अगर अगर ब्रह्मा अगर ब्रह्मा कुमारी अगर ब्रह्मा

128
00:09:02,400 --> 00:09:06,720
कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो व्यवहारिक

129
00:09:06,720 --> 00:09:10,720
आचरण है वो धर्म है तो उसके ठीक विपरीत कुरान

130
00:09:10,720 --> 00:09:14,880
के द्वारा बताया जाने वाला या बाइबल के द्वारा बताया जाने वाला

131
00:09:14,880 --> 00:09:20,720
वो फिर आचरण धर्म कैसे है उसको धर्म क्यों कहता है ब्रह्मा कुमारी

132
00:09:20,720 --> 00:09:24,720
जी बताता हूं [गला साफ़ करने की आवाज़] ब्रह्मा कुमारी

133
00:09:24,720 --> 00:09:30,000
में जो हम धर्म स्थापित करने की प्रयत्न में है।

134
00:09:30,000 --> 00:09:34,000
समझ में आ रहा है कि हमारे अंदर पहले वो धर्म स्थापित करने का वो

135
00:09:34,000 --> 00:09:38,080
प्रयास है। हम प्रयासरत है। तो हम प्रयासरत में

136
00:09:38,080 --> 00:09:42,240
जो हमें नियम कुछ धारणाएं उस पर चलने का प्रयत्न

137
00:09:42,240 --> 00:09:46,400
करते हैं। तब जाके हमारे अंदर वो धर्म स्थापित होगा। क्योंकि हम

138
00:09:46,400 --> 00:09:50,560
बहुत काल का अभ्यास करेंगे। तब आत्मा में वो एक

139
00:09:50,560 --> 00:09:54,640
मिनट भाई साहब। भाई साहब मैंने पूछा क्या है? आप मुझे बता रहे हो कि हम ऐसा करेंगे तो

140
00:09:54,640 --> 00:10:00,480
ये मिलेगा। ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। मेरा प्रश्न क्या है कि ब्रह्मा कुमारी

141
00:10:00,480 --> 00:10:04,480
एक मिनट भाई साहब आप गलत चीजें बोलते हो ना एक्स्ट्रा तो उसमें भी टाइम लगता है थोड़ा

142
00:10:04,480 --> 00:10:08,800
ज्यादा मैंने प्रश्न ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारीज की जो नियमावली

143
00:10:08,800 --> 00:10:12,800
है डूज एंड डोंट्स वो बिल्कुल ठीक विपरीत है कुरान

144
00:10:12,800 --> 00:10:13,520
के डूज

145
00:10:13,520 --> 00:10:17,520
एंड डोंट से तो फिर ब्रह्मा कुमारी कुरान को धर्म क्यों कह रहा है

146
00:10:17,520 --> 00:10:21,600
इस्लाम को धर्म क्यों कह रहा है ये पूछा है क्या करने से क्या

147
00:10:21,600 --> 00:10:26,000
मिलेगा ये मेरा प्रश्न नहीं है ब्रह्मा कुमारी

148
00:10:26,000 --> 00:10:30,080
जो भी है जो भी है अगर वो धर्म है तो

149
00:10:30,080 --> 00:10:34,080
कुरान के द्वारा मिलने वाला जो आचरण है या बाइबल के द्वारा मिलने वाला

150
00:10:34,080 --> 00:10:38,080
जो आचरण है वो धर्म कैसे क्योंकि दोनों चीजें अलग है ब्रह्मा कुमारी की

151
00:10:38,080 --> 00:10:42,560
डस एंड डोंट्स अलग है हां अलग है

152
00:10:42,560 --> 00:10:46,560
अब बताइए तो अलग इसीलिए है अलग इसीलिए है

153
00:10:46,560 --> 00:10:51,040
कि ब्रह्मा कुमारी अलग अलग अलग

154
00:10:51,040 --> 00:10:55,120
अलग इसलिए नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं यदि ब्रह्मा कुमारी का डस एंड

155
00:10:55,120 --> 00:11:00,000
डोंट है धर्म तो फिर कुरान का

156
00:11:00,000 --> 00:11:04,000
एंड डोंट्स है वो धर्म क्यों उसको धर्म क्यों कह रहा है ब्रह्मा कुमारी

157
00:11:04,000 --> 00:11:08,160
वही सब जब मुझसे कुछ सुनेंगे मुझे बात करने दोगे तो आपको

158
00:11:08,160 --> 00:11:12,160
पता चलेगा ना आपने बताया है आप आप देखिए

159
00:11:12,160 --> 00:11:16,160
आपने अभी क्या बोला आपने बोला कि वो अलग इसलिए मैं नहीं पूछ रहा

160
00:11:16,160 --> 00:11:20,240
हूं कि वो अलग क्यों है मुस्लिम जो कुरान है वो

161
00:11:20,240 --> 00:11:24,240
अलग क्यों मैंने नहीं पूछा मैं पूछ रहा हूं वो अलग है तो फिर उसको आप

162
00:11:24,240 --> 00:11:30,240
धर्म क्यों कह रहे हो यह पूछ रहा हूं जैसे कि ईमान

163
00:11:31,600 --> 00:11:36,080
एक्स मैं एक एग्जांपल दे दे रहा हूं जो सिविलाइज्ड है जी

164
00:11:36,080 --> 00:11:40,240
जो जिसके पास मर्यादा है वो मनुष्य है

165
00:11:40,240 --> 00:11:44,560
ठीक है और जिसके पास मर्यादा नहीं है वो पशु है

166
00:11:44,560 --> 00:11:48,880
यानी कि मान लो कुत्ता बिल्ली इन सबके पास मर्यादा

167
00:11:48,880 --> 00:11:53,120
नहीं है ये ये जानवर है और जिसके पास मर्यादा है

168
00:11:53,120 --> 00:11:57,360
वो मनुष्य है ठीक ठीक है? तो अब मैं ये पूछ रहा हूं कि जब उस

169
00:11:57,360 --> 00:12:01,520
फलाने किसी के पास मर्यादा नहीं भी है। यहां पे मैं इस्लाम

170
00:12:01,520 --> 00:12:05,520
की बात नहीं कर रहा हूं। नहीं बाइबल की बात। अब मैं क्योंकि यहां मैंने उदाहरण दिया तो

171
00:12:05,520 --> 00:12:09,600
मैं एक एग्जांपल दे रहा हूं कि जिसके पास मान लीजिए धर्म नहीं भी है।

172
00:12:09,600 --> 00:12:14,800
जिसके पास नियम नहीं भी है उसको हम क्यों कह रहे हैं कि वो मनुष्य है।

173
00:12:14,800 --> 00:12:18,800
समझ में आया आपको? जिसके पास नियम है

174
00:12:18,800 --> 00:12:23,040
वो मनुष्य है। तो जिसके पास नियम नहीं है उसको हम मनुष्य क्यों कह रहे हैं?

175
00:12:23,040 --> 00:12:27,120
हां। अब अब आप समझ गए अब मैं आपकी बात और मेरे ख्याल से

176
00:12:27,120 --> 00:12:31,120
मैं 14 बज के 14 मिनट की लाइव हो चुकी है। मैं

177
00:12:31,120 --> 00:12:35,360
लगभग दो मिनट तक सिर्फ सुनूंगा आप मेरे मेरे सवाल का आप आंसर जी जय

178
00:12:35,360 --> 00:12:38,160
श्री राम

179
00:12:38,160 --> 00:12:43,840
बाकी जो धर्म है वो देह के आधार पे आधारित धर्म है।

180
00:12:43,840 --> 00:12:46,640
देह के गुणों के आधारित धर्म है और

181
00:12:46,640 --> 00:12:50,960
हमारा सत्य धर्म जो है वो आत्मा के निजी गुणों के स्थापित

182
00:12:50,960 --> 00:12:55,120
किया हुआ धर्म है। यानी अपना स्वरूप में स्थापित है।

183
00:12:55,120 --> 00:12:59,200
तो वो बाकी भी धर्म है लेकिन देह के आधार पर धर्म है। इसलिए हम उनको धर्म नहीं

184
00:12:59,200 --> 00:13:03,440
कहते हैं। लेकिन उनका स्वरूप अलग है। उनका भष

185
00:13:03,440 --> 00:13:07,440
अलग है। हमारा भस अलग है। क्योंकि ईश्वर ने जब ज्ञान देकर

186
00:13:07,440 --> 00:13:11,440
जो धर्म आत्मा के निजी धर्म पर जो सनातन

187
00:13:11,440 --> 00:13:15,600
धर्म स्थापित किया है। वो आत्मा के ज्ञान के आधार स्थापित किया हुआ है।

188
00:13:15,600 --> 00:13:19,680
और उनका जो धर्म है देह में आने के बाद यानी

189
00:13:19,680 --> 00:13:24,240
जब त्रेता युग के बाद जो बाकी धर्म स्थापित हुए हैं

190
00:13:24,240 --> 00:13:28,480
यानी द्वापर से द्वापर युग से तो

191
00:13:28,480 --> 00:13:32,640
पिछले अा हजार साल में हम मनुष्य देहिक बन गए

192
00:13:32,640 --> 00:13:36,640
हैं तो उसके आधार पे उनके धर्म जो स्थापित हुए हैं उनके में

193
00:13:36,640 --> 00:13:42,080
तो त्रुटियां आएंगी जो स्वधर्म में और उनमें तो अंतर होगा ही जरूर

194
00:13:42,080 --> 00:13:46,160
यानी आत्मा के आधार पे जो हमारे में अंदर जो पांच विकारों

195
00:13:46,160 --> 00:13:50,320
ने प्रवेश किया उसी के आधार पर उनके धर्म है। हमारा

196
00:13:50,320 --> 00:13:54,800
जो धर्म है वो संपूर्ण निर्विकारी धर्म था। यानी हमारे

197
00:13:54,800 --> 00:13:58,880
सत्य धर्म में यानी सनातन धर्म में कोई भी विकार नाम की

198
00:13:58,880 --> 00:14:01,920
अंश मात्र चीज नहीं थी। यही फर्क

199
00:14:01,920 --> 00:14:05,920
है कि वो देह के आधार पर स्थापित धर्म

200
00:14:05,920 --> 00:14:10,240
है और हमारे निज गुणों के आधार पर स्थापित धर्म यानी आत्मा स्वधर्म

201
00:14:10,240 --> 00:14:14,240
में वही सच्चा स्वधर्म सुख देता है और पर धर्म

202
00:14:14,240 --> 00:14:18,400
दुख देता है यानी बाकी में हमारे अंदर जब ये काम क्रोध ये

203
00:14:18,400 --> 00:14:22,400
सब पैदा होते हैं वो तो दुखी दायक दुखी संसार हो जाता

204
00:14:22,400 --> 00:14:26,000
है

205
00:14:26,000 --> 00:14:30,160
यही फर्क है दोनों धर्म में सनातन धर्म में और इस्लाम और बाकी

206
00:14:30,160 --> 00:14:34,640
धर्म निर्विवाद रूप से मैंने आपको दो मिनट तक सुना।

207
00:14:34,640 --> 00:14:40,640
आपने मुझे मोटी मोटी बातें जो बताई है मैं उनको बताऊं कि

208
00:14:40,960 --> 00:14:45,040
जो ब्रह्मा कुमारी जो धर्म बता रहा है वो देह का नहीं आत्मा का धर्म

209
00:14:45,040 --> 00:14:49,120
है। ठीक है और धर्म क्या था? धर्म भाई

210
00:14:49,120 --> 00:14:53,280
साहब बीच में मत बोलिए। अब ठीक अब बीच

211
00:14:53,280 --> 00:14:58,160
में मत बोलिए। मैंने आपको सुना। अब मैं बोल रहा हूं समझिए। अच्छा

212
00:14:58,160 --> 00:15:00,800
तो

213
00:15:00,800 --> 00:15:04,880
हां ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म

214
00:15:04,880 --> 00:15:09,120
है वह आत्मा का धर्म है और बाकी ये सब जो धर्म है ये देह के ऊपर आधारित

215
00:15:09,120 --> 00:15:13,280
धर्म है। ठीक है और मेरे ख्याल से आपने ये भी कहा ये भी आपने

216
00:15:13,280 --> 00:15:16,960
ये भी कहा है कि देह के ऊपर आधारित धर्म से सुख

217
00:15:16,960 --> 00:15:21,040
की प्राप्ति नहीं होती है। पर आत्मा के ऊपर आधारित धर्म से ही

218
00:15:21,040 --> 00:15:25,280
सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है? ये दो बातें मोटी मोटी आ गई। ठीक?

219
00:15:25,280 --> 00:15:29,440
अब पहली बात क्या है? जब हम शुरू से चले थे तो हमने यह देखा था कि धर्म उसे

220
00:15:29,440 --> 00:15:34,880
कहते हैं जिसमें कि अनंत सुख प्राप्त हो।

221
00:15:34,880 --> 00:15:38,960
तो यह वाली बात तो खारिज ही हो गई। या तो आप यह कहो कि उसको भी धर्म

222
00:15:38,960 --> 00:15:43,040
कहते हैं जिसमें अनंत सुख प्राप्त ना हो। फिर तो फिल्म जाना भी धर्म है।

223
00:15:43,040 --> 00:15:47,120
फिर तो मीठा रसगुल्ला खाना भी धर्म है। क्योंकि अनंत सुख नहीं मगर सुख तो प्राप्त

224
00:15:47,120 --> 00:15:51,280
हो ही रहा है। अनंत सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है।

225
00:15:51,280 --> 00:15:55,360
उसको हम धर्म नहीं मान रहे थे शुरू में। अब आपने कहा मान रहे हैं। हां उसको दहिक

226
00:15:55,360 --> 00:15:59,680
धर्म कह रहे हैं। तो यानी कि फिल्म जाना भी धर्म है।

227
00:15:59,680 --> 00:16:03,840
तो दुख तो उसके है नहीं। इसलिए तो मैं बता रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं

228
00:16:03,840 --> 00:16:08,800
कि मैं अभी एक चार पांच चीजें लिख दूंगा। शिवशु नारायण द्विवेदी

229
00:16:08,800 --> 00:16:12,800
ने ये कहा है और फिल्म जाना है और मीठा खाना है,

230
00:16:12,800 --> 00:16:16,880
रसगुल्ला खाना है, छोले भटूरे खाने हैं, नान खानी है,

231
00:16:16,880 --> 00:16:21,040
कुलचा खाना है और यह धर्म है। मैंने कह दिया। तो आप इसको धर्म

232
00:16:21,040 --> 00:16:24,400
कहने लगोगे क्या?

233
00:16:24,400 --> 00:16:28,400
सुख धर्म इसीलिए कहेंगे कि हम नहीं हम

234
00:16:28,400 --> 00:16:33,680
बोलचाल व्यवहारिक प्रयोग करने के लिए हम धर्म तो कहेंगे जरूर

235
00:16:33,680 --> 00:16:39,200
है नहीं वो ये कहूंगा है नहीं है नहीं वो

236
00:16:39,200 --> 00:16:43,280
जब नहीं नहीं नहीं हमें हो या ना हो वो उसका आधार

237
00:16:43,280 --> 00:16:47,680
अलग है जैसे कि पानी का गुणधर्म भाई साहब आप

238
00:16:47,680 --> 00:16:51,680
भाई साहब आप सत्य बोलने आए ना सत्य बोलने आए ना ये मत बताओ कि हो

239
00:16:51,680 --> 00:16:56,720
या ना मैंने पूछा वो अधर्म है कि नहीं कुरान और बाइबल

240
00:16:56,720 --> 00:17:01,040
फिर मैं दो थोड़ा सा तो समझा दो समझाने दो थोड़ा सा कि जैसे

241
00:17:01,040 --> 00:17:05,360
पानी का गुणधर्म है तो पानी का भी कुछ धर्म है ठंडक देना अग्नि

242
00:17:05,360 --> 00:17:09,600
का धर्म है ऊर्जा देना गर्मी देना तो

243
00:17:09,600 --> 00:17:14,160
हर अपना अपना हर कुछ धर्म ही होता है

244
00:17:14,160 --> 00:17:18,400
वैसे ही पर्सनली उसका गुण होता है जैसे अभी

245
00:17:18,400 --> 00:17:24,080
हर कुछ धर्म है हर एक का गुण धर्म है।

246
00:17:24,080 --> 00:17:28,160
गुणों के आधारित वो धर्म है। सुनो किसी का स्वभाव क्या है?

247
00:17:28,160 --> 00:17:32,720
मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। आपके हिसाब से सुनो

248
00:17:32,720 --> 00:17:36,720
भैया भैया सुन लो सुन लो। यानी कि स्वभाव के आधार पर

249
00:17:36,720 --> 00:17:40,160
धर्म बदल जाता है। ये बात है।

250
00:17:40,160 --> 00:17:44,320
जी यानी कि उनका स्वभाव के आधार पर उनका धर्म

251
00:17:44,320 --> 00:17:48,880
है और हमारे स्वभाव के आधार पर हमारा धर्म है। जी।

252
00:17:48,880 --> 00:17:53,200
उनका धर्म हिंसा सिखाता है। हमारा धर्म हिंसा नहीं सिखाता है।

253
00:17:53,200 --> 00:17:57,200
भाई साहब मैं प्रश्न क्या कर रहा हूं आप? मैं प्रश्न कुछ और कर रहा हूं।

254
00:17:57,200 --> 00:18:00,240
भाई साहब मुझे करने दो।

255
00:18:00,240 --> 00:18:04,560
धर्म की डेफिनेशन यह है कि धर्म का पालन करने से अनंत

256
00:18:04,560 --> 00:18:08,800
सुख मिलेगा या धर्म की डेफिनेशन यह है कि जिसके स्वभाव

257
00:18:08,800 --> 00:18:12,800
के अनुसार उसने जिन बातों को मान लिया कि मुझे यह करना है, यह नहीं करना है, वह वो

258
00:18:12,800 --> 00:18:18,560
धर्म कही जाएंगे। इसमें से धर्म की डेफिनेशन कौन सी है?

259
00:18:18,560 --> 00:18:22,800
अपने मूल स्वधर्म से आधारित ही धर्म को स्वधर्म कहेंगे।

260
00:18:22,800 --> 00:18:26,880
बाकी तो परधर्म कहेंगे।

261
00:18:26,880 --> 00:18:30,560
तो ये बताइए कि

262
00:18:30,560 --> 00:18:34,560
शरीर मैंने पूछा ना आपसे कि शरीर के आधार पर शरीर के

263
00:18:34,560 --> 00:18:38,880
आधार पर अनंत सुख तो नहीं मिल रहा है। और धर्म तो वो है जिससे अनंत

264
00:18:38,880 --> 00:18:42,960
सुख मिले। और यदि थोड़ा सा सुख मिलने वाला भी धर्म है

265
00:18:42,960 --> 00:18:48,960
तो फिर गोलगप्पा खाना भी धर्म है।

266
00:18:49,120 --> 00:18:51,760
इंसान के लिए

267
00:18:51,760 --> 00:18:56,240
वही धर्म है जो इंसान के लिए वही धर्म है ना वो

268
00:18:56,240 --> 00:19:00,240
ठीक है ठीक है ठीक है इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी का जो धर्म है

269
00:19:00,240 --> 00:19:04,320
उसके अलावा भी दुनिया में और भी धर्म हो सकते हैं उसको उससे

270
00:19:04,320 --> 00:19:08,320
मुक्ति मिल जाएगी गुणों के धर्म है हां उनके गुणों के उनको

271
00:19:08,320 --> 00:19:14,320
मुक्ति उसको मुक्ति अनंत सुख मिलेगा या नहीं मिलेगा उसको

272
00:19:15,120 --> 00:19:19,360
अभी अभी उनका धर्म बताएगा। मुझे थोड़ी मालूम है कि उनका तो वो मिलेगा कि नहीं।

273
00:19:19,360 --> 00:19:23,360
आप ठीक है। ठीक है। चलो ये भी ले लेते हैं। अनंत तो आप आपको यदि

274
00:19:23,360 --> 00:19:27,360
नहीं मालूम है तो ब्रह्मा आप कह क्यों रहे हो? आपको यदि नहीं मालूम है तो

275
00:19:27,360 --> 00:19:31,360
उसको धर्म कह क्यों रहे हो? धर्म तो वही है ना जहां अनंत सुख प्राप्त

276
00:19:31,360 --> 00:19:35,440
हो। मैंने क्या कहा? एक मिनट भाई साहब। धर्म वो है जहां अनंत सुख

277
00:19:35,440 --> 00:19:39,600
प्राप्त हो। तो क्यों कह रहे हो कि कुरान में भी धर्म है। क्यों कह रहे हो? वो

278
00:19:39,600 --> 00:19:43,680
आप कहते हो आप यही कह रहे हो कि अनंत सुख की बात

279
00:19:43,680 --> 00:19:48,800
अलग है वो तो हम अपने स्वी

280
00:19:48,800 --> 00:19:52,800
यानी कि धर्म धर्म की परिभाषा ये नहीं है कि जिसको करने से अनंत सुख

281
00:19:52,800 --> 00:19:58,720
प्राप्त हो ये नहीं है ना धर्म की परिभाषा

282
00:19:58,720 --> 00:20:03,920
वो परिभाषा नहीं है तो क्या है धर्म के लिए वो व्याख्या नहीं है

283
00:20:03,920 --> 00:20:08,000
यानी परिभाषा वही है हम यानी एक मिनट

284
00:20:08,000 --> 00:20:12,160
धर्म इसका मतलब मतलब यह हुआ कि आप कुछ भी करो

285
00:20:12,160 --> 00:20:17,520
उसको आप धर्म का नाम दे दो तो ब्रह्मा कुमारी कहने लगेगी यह भी धर्म है।

286
00:20:17,520 --> 00:20:21,600
यही हुआ ब्रह्मा कुमारी उनके लिए धर्म धर्म इसीलिए क्योंकि व्यवहार

287
00:20:21,600 --> 00:20:25,680
में समझने के लिए हम धर्म की बात करते हैं उनको धर्म मानते हैं। अरे

288
00:20:25,680 --> 00:20:29,840
उसका आधार क्या है भाई? जब हम धर्म कह रहे हैं वो है जिससे अनंत

289
00:20:29,840 --> 00:20:34,560
सुख मिलेगा। अभी आपने शुरू में कहा था अनंत सुख मिलेगा वही धर्म है।

290
00:20:34,560 --> 00:20:38,560
अब आप कह रहे हो वो धर्म नहीं है। इसको कहते है झूठ बोलना। नहीं इसको इसको कहते

291
00:20:38,560 --> 00:20:42,720
है झूठ जी नहीं जी भाई साहब नहीं सुनिए सुनिए सुनिए हम उसका उनको धर्म

292
00:20:42,720 --> 00:20:46,800
कहते इसका मतलब ये नहीं कहते कि हम अपने स्वधर्म छोड़कर अपना धर्म

293
00:20:46,800 --> 00:20:51,120
छोड़कर उनके धर्म में जाओ मैंने ये कहा मैंने मैंने मेरा

294
00:20:51,120 --> 00:20:55,120
प्रश्न पूछा है मैंने कहा उसको धर्म क्यों कह रहे हो जब वो धर्म नहीं है

295
00:20:55,120 --> 00:20:59,280
तो उसको धर्म क्यों कह रहे हो बोलचाल के लिए कहते हैं हम

296
00:20:59,280 --> 00:21:03,440
धर्म जब हमारे संविधान भी कहता है धर्म मतलब मतलब यूं ही

297
00:21:03,440 --> 00:21:04,000
कहते हो

298
00:21:04,000 --> 00:21:08,560
ना तो यूं ही कहते

299
00:21:08,560 --> 00:21:12,640
अच्छा संविधान का आपने नाम लिया संविधान संविधान वो सारे

300
00:21:12,640 --> 00:21:18,640
रूल्स एंड रेगुलेशन मानता है जो ब्रह्मा कुमारी मानता है

301
00:21:19,440 --> 00:21:23,440
नहीं नहीं मैं क्या बता रहा हूं कि वो मानते हैं नहीं मानते तो हर

302
00:21:23,440 --> 00:21:27,680
एक अपना तो संविधान तो संविधान को बीच में मत लाइए आप ब्रह्मा

303
00:21:27,680 --> 00:21:31,920
कुमारीज के अनुसार जो धर्म है एक मिनट भाई साहब ब्रह्मा कुमारीज

304
00:21:31,920 --> 00:21:35,920
के अनुसार जो धर्म है यदि वही धर्म है जो नियम और कानून ब्रह्मा

305
00:21:35,920 --> 00:21:39,920
कुमारी ने बनाए यदि वही धर्म है तो कुरान और बाइबल को धर्म कहना बंद करिए

306
00:21:39,920 --> 00:21:42,480
ना फिर आप

307
00:21:42,480 --> 00:21:47,280
हम धर्म को संवाद मुझसे संवाद करने के लिए धर्म का उच्चार करते हैं।

308
00:21:47,280 --> 00:21:51,680
हम उनका धर्म नहीं है ये बात नहीं कि उनका जैसे जैसे

309
00:21:51,680 --> 00:21:55,760
आप आप मैं पूछ रहा हूं आप किसी को भी

310
00:21:55,760 --> 00:21:59,920
धर्म क्यों कहोगे जब वो धर्म नहीं है तो आप सत्य बोलते

311
00:21:59,920 --> 00:22:05,040
हो कि झूठ बोलते हो और चलो कभी मुख से निकल जाए

312
00:22:05,040 --> 00:22:09,040
चलो कभी मुख से निकल जाए कभी इधर उधर हो जाए जीभ सिसल गई

313
00:22:09,040 --> 00:22:14,000
कुछ हो गया भैया बोलचाल में है इसलिए कहते हैं आप तो उसको सदैव

314
00:22:14,000 --> 00:22:18,320
आप आप तो उसको सदैव लगा के रखे हो हां

315
00:22:18,320 --> 00:22:19,200
तो और

316
00:22:19,200 --> 00:22:23,280
चलो ठीक है चलो ये वाली बात चलो ये वाली बात भी मान ली

317
00:22:23,280 --> 00:22:26,240
भैया

318
00:22:26,240 --> 00:22:30,400
एक मिनट एक एक मिनट चलो मान लिया कि यूं ही कहते हैं

319
00:22:30,400 --> 00:22:34,560
तो यूं ही कहने वाली बात आपकी किसी दीदी ने कही है सार्वजनिक मंच पर

320
00:22:34,560 --> 00:22:38,560
कि वो धर्म है नहीं हम यूं ही कहते हैं बोलचाल की भाषा में कही

321
00:22:38,560 --> 00:22:42,960
है बोलचाल में यूं ही नहीं कहते यूं ही नहीं कहते हैं हम उनको धर्म मानते

322
00:22:42,960 --> 00:22:47,040
हैं लेकिन धर्मों का अंतर बताते हैं अंतर

323
00:22:47,040 --> 00:22:51,040
बताते हैं कि उनका धर्म कैसे स्थापित हुआ है। उनके धर्म में कितना

324
00:22:51,040 --> 00:22:55,200
सुख मिलता है और हमारे स्वधर् में कितना सुख मिलता है। तो फिर आप ये तो

325
00:22:55,200 --> 00:22:59,360
फिर आप इस बात को छोड़ दो कि धर्म वो है जिससे अनंत सुख प्राप्त हो। इस बात को छोड़

326
00:22:59,360 --> 00:23:03,440
दो। फिर आप यह बोलो कि किसी व्यक्ति ने अपने जीने के लिए

327
00:23:03,440 --> 00:23:07,440
कुछ सिद्धांत प्रचारित कर दिए तो हम उसको कहने लगते हैं यह भी धर्म

328
00:23:07,440 --> 00:23:11,840
है।

329
00:23:11,840 --> 00:23:15,920
भाई साहब हम इसीलिए उनको बात करते हैं कि जब हम हमसे उनको बात

330
00:23:15,920 --> 00:23:20,000
करना है तो धर्म के ही बात भाषा में ही बात करेंगे ना। साहब आप सत्य

331
00:23:20,000 --> 00:23:25,200
बोल धर्म बोलने से हमको नहीं पूछ रहा हूं। सत्य

332
00:23:25,200 --> 00:23:29,680
धर्म धर्म बोलने से हमको तकलीफ क्यों होनी चाहिए?

333
00:23:29,680 --> 00:23:35,200
इसलिए क्योंकि वो धर्म नहीं है।

334
00:23:35,200 --> 00:23:39,520
जो मानता है जो मानता है तो है

335
00:23:39,520 --> 00:23:43,680
आप नहीं है वो भी नहीं मानता वो कहां अपने आप को धर्म कहता है वो तो मजहब कहता

336
00:23:43,680 --> 00:23:48,160
है अपने आप को दीन कहता है अपने आप को

337
00:23:48,160 --> 00:23:52,320
मैं जब गीता में लिखा है गीता में लिखा है कि मैं सत्य धर्म

338
00:23:52,320 --> 00:23:56,320
की स्थापना करता हूं बाकी धर्मों का विनाश करता हूं

339
00:23:56,320 --> 00:24:00,400
आप दूसरी बात धर्म का विनाश करता हूं बातें मत करिए। इस चीज

340
00:24:00,400 --> 00:24:04,880
को प्रश्न पूछिए। यदि ब्रह्मा दीदियों से

341
00:24:04,880 --> 00:24:09,200
आप आप दीदी से जाकर के पूछिए। यदि ब्रह्मा

342
00:24:09,200 --> 00:24:13,360
कुमारीज के द्वारा बताई गई नियमावली धर्म है तो फिर जो जो उस

343
00:24:13,360 --> 00:24:17,600
चीज को नहीं मान रहे हैं उसको धर्म कहना बंद करें। झूठ है ये।

344
00:24:17,600 --> 00:24:21,760
अब अब आ जाते हैं ब्रह्मा कुमारीज के धर्म पर। ठीक है? अब ब्रह्मा

345
00:24:21,760 --> 00:24:27,760
कुमारी पर आ जाते।

346
00:24:32,460 --> 00:24:36,460
[संगीत]
