1
00:00:02,320 --> 00:00:06,400
तो एक काम कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का नक्शा लीजिए और मार्क कीजिए कि रिलजन कहां-कहां

2
00:00:06,400 --> 00:00:10,800
जाता है। कहां-कहां चाहे वह लैटिन अमेरिका हो या मिडिल ईस्ट हो या

3
00:00:10,800 --> 00:00:14,960
फार ईस्ट हो या हिंदुस्तान के वह इलाके जहां मजहबी रख

4
00:00:14,960 --> 00:00:19,680
दीजिए नक्शा अलग अब दूसरा नक्शा कि कहां-कहां [संगीत] नाइंसाफी रिप्रेशन

5
00:00:19,680 --> 00:00:23,920
औरतों के हुकूक की पामाली जुल्म डिक्टेटरशिप कहां है

6
00:00:23,920 --> 00:00:28,160
नक्शा यही होगा [प्रशंसा] तो आप मुझे

7
00:00:28,160 --> 00:00:33,040
ये बताएं के जो इसका तरकीब इस्तेमाल क्या है

8
00:00:33,040 --> 00:00:37,360
पहले आप इसके मूल में जाइए कि दुनिया में लड़ाई किन दो पार्टियों के बीच में लड़ाई

9
00:00:37,360 --> 00:00:41,600
किन दो पार्टियों के बीच में एक पार्टी है जो

10
00:00:41,600 --> 00:00:45,760
कंजपशन करना चाहती है जो केवल भोग करना

11
00:00:45,760 --> 00:00:50,160
चाहती है और वो अपने से आसपास

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,480
वालों के साथ भी मतलब अत्याचार करना चाहती है

13
00:00:54,480 --> 00:00:59,040
और अपने स्वार्थ को देख रही है वो भी भौतिक वादिता के चश्मे से

14
00:00:59,040 --> 00:01:03,840
क्योंकि वो ये नहीं मान रही है कि नहीं भैया हमारी आत्मा को भी सुख देना है

15
00:01:03,840 --> 00:01:07,920
अंतत तो कतवा हमारा कारण ईश्वर है वो इन सब पर ध्यान नहीं दे रही तो उसने यह बना

16
00:01:07,920 --> 00:01:12,080
रखा है कि हमको भोग करना है लस्ट इन सब चीजों को हमें पूर्ति

17
00:01:12,080 --> 00:01:16,080
करनी है और उसके कारण हमें अत्याचार करने हैं।

18
00:01:16,080 --> 00:01:17,600
अत्याचार करने के बीच

19
00:01:17,600 --> 00:01:21,840
में क्या चीजें हैं जो हमारी बाधा बन रही है? ठीक

20
00:01:21,840 --> 00:01:26,000
है? यह नास्तिकता है यहां से। सबसे पहला क्या है? नास्तिकता। तो

21
00:01:26,000 --> 00:01:31,600
बाधा क्या बन रही है? बाधा बन रही है वह

22
00:01:31,600 --> 00:01:35,760
बातें जो ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करती हैं। वह मान्यताएं जो ईश्वर

23
00:01:35,760 --> 00:01:39,760
को मानती है जिनके कारण हमें धर्म प्राप्त होता है।

24
00:01:39,760 --> 00:01:43,760
जिनके कारण हमें क्या सही है और क्या गलत है यह बातें प्राप्त होती

25
00:01:43,760 --> 00:01:47,760
है। डूस एंड डोंट्स। और जब डूस एंड डोंट्स आ जाते हैं ईश्वर के

26
00:01:47,760 --> 00:01:51,760
कारण कि अगर हमें ईश्वर को प्राप्त करना है तो हमें यह

27
00:01:51,760 --> 00:01:56,080
करना है और यह नहीं करना है। यह डूस एंड डोंट्स। यही धर्म है। यही मर्यादा है।

28
00:01:56,080 --> 00:02:00,480
ठीक है? और इसी को आप मोरालिटी भी कह सकते हैं।

29
00:02:00,480 --> 00:02:04,640
लड़ाई किन दो पक्षों के बीच में पहले इसको आप समझ लीजिए। एक जो यह मानता

30
00:02:04,640 --> 00:02:08,800
है कि ईश्वर है और वो होने के

31
00:02:08,800 --> 00:02:12,800
कारण वो डूस एंड डोंट्स अप्लाई कर रहा है। तो जब ये डूस एंड

32
00:02:12,800 --> 00:02:16,960
डोंट्स अप्लाई होते हैं ना तो जिन लोगों को भोग में

33
00:02:16,960 --> 00:02:21,040
ज्यादा जिनकी वृत्ति है यह व्यवहारिक सत्ता है। सत्य है

34
00:02:21,040 --> 00:02:25,040
अब फिर आप मेरे पारमार्थिक सत्य को बीच में मत ले आना। तो जिन

35
00:02:25,040 --> 00:02:29,360
लोगों के अंदर भोग की चीजें ज्यादा हैं, वह उनको

36
00:02:29,360 --> 00:02:32,720
तकलीफ होती है ईश्वर के अस्तित्व

37
00:02:32,720 --> 00:02:37,040
से और ईश्वर को प्राप्त कराने वाली विधा अर्थात धर्म से।

38
00:02:37,040 --> 00:02:41,120
तो पहली नंबर बात तो वो सीधे खंडन करते हैं। ईश्वर है ही नहीं तो मुझे धर्म को नहीं

39
00:02:41,120 --> 00:02:45,120
मानना पड़ेगा। जब इससे दाल नहीं गलती है तब दूसरे

40
00:02:45,120 --> 00:02:50,960
दूसरे धर्म स्थापित किए जाते हैं। जिसे हम कहते हैं धर्माभास।

41
00:02:50,960 --> 00:02:54,960
ठीक है? तो जहां पर भी यह धर्म के नाम पर जो युद्ध हो रहा है ना

42
00:02:54,960 --> 00:02:59,280
वह युद्ध धर्म के लिए नहीं हो रहा है। वह युद्ध हो रहा है कंजशन के लिए।

43
00:02:59,280 --> 00:03:03,440
फॉर एग्जांपल किसी व्यक्ति को अपनी बहन से विवाह

44
00:03:03,440 --> 00:03:07,520
करना है। धर्म उसके आड़े आ रहा है। मां से विवाह करना है। धर्म उसके

45
00:03:07,520 --> 00:03:11,520
आड़े आ रहा है। क्या करें? मेरे पास तो भैया

46
00:03:11,520 --> 00:03:15,920
आ गया। ईश्वर का एक भेजा हुआ मैसेंजर।

47
00:03:15,920 --> 00:03:19,920
उसने बता दिया कि भैया फलानी

48
00:03:19,920 --> 00:03:24,000
फलानी बहन से विवाह कर सकते हैं। है ना? यह

49
00:03:24,000 --> 00:03:28,000
सब चीजें हैं। तो किस में हो

50
00:03:28,000 --> 00:03:32,480
रही है लड़ाई? एक जो कंजशन करना चाहता है अत्याचार

51
00:03:32,480 --> 00:03:36,640
करके भी किसी भी तरह से एनी हाउ दूसरी जो लिविंग बींग्स है उनको खत्म करके

52
00:03:36,640 --> 00:03:40,960
उन पर उनका शोषण करके और दूसरा जो ईश्वर

53
00:03:40,960 --> 00:03:45,200
को मानने के कारण धार्मिक बाधाओं में बंधे होने के कारण ये जो शोषण

54
00:03:45,200 --> 00:03:48,000
वाली चीजें हैं उनसे वह कम हो रहा है। शोषण तो सभी

55
00:03:48,000 --> 00:03:52,320
लोग कर रहे हैं। पेड़ों का शोषण तो शाकाहारी भी कर रहा है। कर रहा है ना?

56
00:03:52,320 --> 00:03:57,040
मगर उसमें एक कहीं ना कहीं वो क्या कहते हैं उसको?

57
00:03:57,040 --> 00:04:01,120
अनुशासन है जिसके कारण धीरे-धीरे वह शोषण से मुक्त हो रहा है। जैसे

58
00:04:01,120 --> 00:04:05,120
हमारे यहां जो सबसे वरिष्ठ जो आश्रम

59
00:04:05,120 --> 00:04:09,120
कहा गया वो सन्यास आश्रम सन्यासी इस सृष्टि

60
00:04:09,120 --> 00:04:13,600
का सबसे कम शोषण करता है। जो कंजपशन है

61
00:04:13,600 --> 00:04:17,600
धर्म के कारण वो कंजशन जो है नियंत्रित होता है,

62
00:04:17,600 --> 00:04:21,840
अनुशासित होता है। और क्या है कि अगर हम नियंत्रित और अनुशासित

63
00:04:21,840 --> 00:04:26,240
नहीं करेंगे उस कंजशन को तो उससे

64
00:04:26,240 --> 00:04:30,560
उसके गर्भ से और कंजशन निकलता जाएगा। तो धर्म उसको

65
00:04:30,560 --> 00:04:34,800
क्योंकि अनुशासित करता है तो वह बढ़ने की बजाय कैंसर की तरह वो कम

66
00:04:34,800 --> 00:04:39,040
होता है। जैसे कि आध्यात्म

67
00:04:39,040 --> 00:04:43,200
मार्ग में आने के बाद मैं अपनी बात करूं तो मेरा जो कंजशन को लेकर के कंजपशन

68
00:04:43,200 --> 00:04:47,280
को लेकर के पर्सपेक्टिव था वो कम हुआ है। और हो सकता है आने वाले सालों में और कम होता

69
00:04:47,280 --> 00:04:51,360
चला जाए। तो यह हो रहा है। जब धर्म को मानेंगे तो कंजप्शन और

70
00:04:51,360 --> 00:04:55,440
जो है नियंत्रित होंगे। हमारे पास धर्म होगा। बहन से विवाह नहीं करना है। माताओं को दृष्टि से

71
00:04:55,440 --> 00:04:59,440
नहीं देखना है। और जब हमारे पास धर्म नहीं होगा तो हम लोग इनमें भी हम

72
00:04:59,440 --> 00:05:03,440
अपने लिए छूट स्वतंत्र होकर के सबको देखेंगे। और फिर

73
00:05:03,440 --> 00:05:07,440
जो ये प्रवृत्ति है नग्न देखने की

74
00:05:07,440 --> 00:05:11,440
कामना है जो पुरुष के मन में स्त्री को वो

75
00:05:11,440 --> 00:05:15,600
जो प्रवृत्ति है उस प्रवृत्ति से कभी मुक्त नहीं हो पाएंगे। मुक्त

76
00:05:15,600 --> 00:05:19,680
नहीं हो पाएंगे तो फिर हमारा अटैचमेंट माया रूपी संसार से बना रहेगा।

77
00:05:19,680 --> 00:05:24,240
माया रूपी संसार से बना रहेगा तो सदा दुखी रहेंगे। वह सारे कॉन्सेप्ट आपको मैंने क्लियर किए।

78
00:05:24,240 --> 00:05:29,040
तो कहने का मतलब यह है कि

79
00:05:29,040 --> 00:05:33,760
अह किन दो लोगों के बीच में लड़ाई है? एक

80
00:05:33,760 --> 00:05:38,320
जो भोग करना चाहते हैं। दूसरे जो मुक्त होना चाहते हैं। जो

81
00:05:38,320 --> 00:05:42,480
जो इस चीज को स्वीकार कर रहे हैं। भैया इस संसार से हमें अंतिम सुख नहीं

82
00:05:42,480 --> 00:05:46,480
मिलेगा। और दूसरे जो इस अंतिम सिख को मना कर रहे हैं वह नास्तिक

83
00:05:46,480 --> 00:05:50,480
है। अब क्या होता है? नास्तिक चोला ओढ़ते हैं या उनकी दाल नहीं गलती

84
00:05:50,480 --> 00:05:54,800
है। वह नए-नए ईश्वर खड़े करते हैं और उनको कहते हैं धर्माभास।

85
00:05:54,800 --> 00:05:59,040
वो रियल धर्म नहीं बनाते बताते। रियल ईश्वर नहीं बताते। ईश्वर

86
00:05:59,040 --> 00:06:03,120
जैसा कुछ बताते हैं। तो सनातन के पर्सपेक्टिव से जब हमने पूर्ण

87
00:06:03,120 --> 00:06:07,520
ईश्वर को ख्यापित किया, सर्वशक्तिमान को ख्यापित किया, सर्वज्ञ

88
00:06:07,520 --> 00:06:11,520
को ख्यापित किया, सर्व्यापक को ख्यापित किया। हां।

89
00:06:11,520 --> 00:06:16,160
तो उस पर्सपेक्टिव से जब यहां पर इस्लाम भी उसी कैटेगरी में दिखाई देगा

90
00:06:16,160 --> 00:06:18,720
जब आप देखेंगे तो

91
00:06:18,720 --> 00:06:22,800
तो फिर क्या होता है कि अब भैया हमने अपना एक

92
00:06:22,800 --> 00:06:26,800
नया कांसेप्ट बना लिया कि ईश्वर ये कर सकता है ये नहीं कर सकता पूर्ण नहीं है यहां

93
00:06:26,800 --> 00:06:31,040
बैठा वहां नहीं बैठा और ज्यादा गहराई में जाकर बातें मत करो है ना जैसे

94
00:06:31,040 --> 00:06:35,200
कि एक जगह बोला गया मुफ्ती जी के द्वारा हमारे यहां सवाल करने के लिए मना नहीं किया गया है किया

95
00:06:35,200 --> 00:06:39,200
गया है कुरान 5 101 कहती है कि ज्यादा सवाल मत

96
00:06:39,200 --> 00:06:43,280
करो वरना ना जो तुमसे पहले भी कुछ

97
00:06:43,280 --> 00:06:47,440
लोगों ने ऐसे ही सवाल किए गए थे तो उनके लिए वो आयतें भी खोल दी गई थी जिनका निर्वाह

98
00:06:47,440 --> 00:06:52,160
करना बहुत कठिन होता है तो तुम्हारे लिए भी खोल दी जाएंगी

99
00:06:52,160 --> 00:06:57,040
हम इस पर भी आगे बात करेंगे कि अगर

100
00:06:57,040 --> 00:07:01,200
लोगों को जो कठिन लग रहा है उसके हिसाब से ईश्वर को प्राप्त

101
00:07:01,200 --> 00:07:07,120
होने वाली विधा में परिवर्तन किया जा रहा है

102
00:07:07,120 --> 00:07:11,120
तो फिर यह ईश्वर जो है बदल रहा है

103
00:07:11,120 --> 00:07:15,200
तो एटरर्नल कैसे उसको प्राप्त कराने वाली जो विधा है वह तो बदल रही

104
00:07:15,200 --> 00:07:19,200
है तो पहले वह किसी और विधा से प्राप्त हो सकता था अब वो किसी और विधा से प्राप्त

105
00:07:19,200 --> 00:07:23,680
हो रहा है तो तो बदल रही है दो 187 में कहा जा रहा है कि भैया

106
00:07:23,680 --> 00:07:27,760
अभी तक जो है रोजे की रात में अपनी स्त्रियों के साथ जो है संग स्त्री संग

107
00:07:27,760 --> 00:07:31,840
कर लेना जो है पाप नहीं था पाप था आज से पाप नहीं

108
00:07:31,840 --> 00:07:36,000
होगा यह क्या है ऑन द स्पॉट हो रहा है पहले से नहीं था पहले से तो कुछ और था पाप था

109
00:07:36,000 --> 00:07:40,080
आज से पाप मुक्त हो गए तो क्या बदल रहा है आपके यहां चीजें

110
00:07:40,080 --> 00:07:44,080
चेंज हो रही हैं। तो अगर ईश्वर को प्राप्त कराने

111
00:07:44,080 --> 00:07:48,080
वाली चीजें चेंज हो रही हैं तो फिर वह ईश्वर भी तो चेंज हो रहा है जिसको प्राप्त करना है।

112
00:07:48,080 --> 00:07:52,160
वो नहीं हो रहा चेंज। भाई पहले कुछ और तत्व था तभी तो

113
00:07:52,160 --> 00:07:56,800
उसके लिए विधा दूसरी थी। अब कुछ और तत्व है तभी तो उसके लिए विधा दूसरी है।

114
00:07:56,800 --> 00:08:02,240
विधा चेंज हो रही है तो ईश्वर का भी चेंज होना उससे परिलक्षित हो रहा है।

115
00:08:02,240 --> 00:08:06,480
अब आप यह समझ गए कि किन दो लोगों के बीच में लड़ाई

116
00:08:06,480 --> 00:08:10,480
है। भोग करने वाले और मुक्ति के मार्ग पर चलने वाले

117
00:08:10,480 --> 00:08:14,720
जो मुक्ति के मार्ग पर चलने वाले लोग हैं। वही साधु

118
00:08:14,720 --> 00:08:19,120
कहलाते हैं। साधु मेरा मतलब अच्छे लोग सज्जन लोग वही साधु कहलाते हैं।

119
00:08:19,120 --> 00:08:22,160
और वही जो है धर्म पद पर आगे बढ़ते हैं।

120
00:08:22,160 --> 00:08:26,160
तो वही अनुशासित होते हैं। अब आप कहोगे भैया मैं तो धर्म को नहीं मानता मगर मैं

121
00:08:26,160 --> 00:08:30,400
भी जो है उन चीजों का पालन करता हूं। तो यह ठीक इस तरीके से है

122
00:08:30,400 --> 00:08:35,760
जैसे आप थॉमस अलवा एडिसन को नहीं जानते मगर आपके घर में बल्ब जल रहा है।

123
00:08:35,760 --> 00:08:39,760
बल्ब बल्ब के जितने हिस्से में आपके जीवन में

124
00:08:39,760 --> 00:08:44,000
बल्ब है ना उतने हिस्से में आप थॉमस अलवा एडिसन से कनेक्टेड हो। उसी

125
00:08:44,000 --> 00:08:48,160
प्रकार से जितने हिस्से में आपके यहां पर मर्यादा है नास्तिक

126
00:08:48,160 --> 00:08:52,160
के अंदर उतने हिस्से में आप आस्तिकता से कनेक्टेड हो। और

127
00:08:52,160 --> 00:08:56,320
उसी प्रकार से जितने हिस्से में जो इस्लाम इत्यादि

128
00:08:56,320 --> 00:09:01,440
जो सनातन के विपरीत धर्म है जितने हिस्से में वो

129
00:09:01,440 --> 00:09:05,520
सनातन के साथ सामंजस्य देखा जाता है उनमें

130
00:09:05,520 --> 00:09:10,080
तो उतने हिस्से में उनका भी कनेक्शन हो जाता है सनातन से।

131
00:09:10,080 --> 00:09:14,160
ठीक है? आज हम पहली बात तो आपका एक तर्क था कि आज जो है यह वाली बहस करने का हमें

132
00:09:14,160 --> 00:09:18,240
अवसर प्राप्त हो रहा है। तो यह भी बात एक

133
00:09:18,240 --> 00:09:22,320
बहुत गलत बात है। हिरण्यकश्यप ने भी यह सब बातें कही थी कि अगर

134
00:09:22,320 --> 00:09:26,640
ईश्वर है तो इस खंभे से निकल के दिखाए। तो ये सारे तर्क तो हमारे यहां जाने कब से हैं।

135
00:09:26,640 --> 00:09:30,720
बौद्धों ने भी तो नास्तिकता ही फैली। 2 हजार साल पहले तो तर्क था।

136
00:09:30,720 --> 00:09:35,840
ईश्वर के ना होने में ऐसेसे भयंकर तर्क किए गए। जाइए पढ़िए बुद्ध दर्शन।

137
00:09:35,840 --> 00:09:37,440
मेरे ख्याल से अगर आप बुद्ध

138
00:09:37,440 --> 00:09:42,000
को पकड़ लेंगे तो कम से कम इस्लाम को मानने वाले जो

139
00:09:42,000 --> 00:09:46,080
यह जो मुफ्ती जी हैं आपके समकक्ष खड़े हुए हैं यह तो आपको परास्त नहीं कर पाएंगे।

140
00:09:46,080 --> 00:09:50,080
इतनी बात तो मैं कह रहा हूं। उस नास्तिकता को वो जो बुद्ध की नास्तिकता

141
00:09:50,080 --> 00:09:54,640
है ना उसको हराने के लिए सनातनी को आना पड़ेगा। मनुवादी

142
00:09:54,640 --> 00:09:59,200
को आना पड़ेगा। शंकर परंपरा के व्यक्ति को आना पड़ेगा।

143
00:09:59,200 --> 00:10:03,600
ठीक है? वहां तब काम नहीं चल पाएगा। ये इस्लाम को मानने वाले जो

144
00:10:03,600 --> 00:10:07,760
मुफ्ती इत्यादि हैं। खैर तो दो लोगों के बीच में युद्ध

145
00:10:07,760 --> 00:10:11,840
है। एक कंजशन भोग वाली पार्टी है और एक जो है मुक्ति

146
00:10:11,840 --> 00:10:15,920
पाने की चाह रखने वाली पार्टी जो उसके प्रति क्रिया उसने स्वीकार किया

147
00:10:15,920 --> 00:10:19,920
है कि मेरे अंदर वो भूख है वो स्वीकार करके उसके अनुसार वो चल रहे हैं।

148
00:10:19,920 --> 00:10:23,920
अब क्या है कि पहली नंबर बात ये जो नास्तिक पार्टी है वो अपना चोला ओढ़ती

149
00:10:23,920 --> 00:10:28,080
चोला ओढ़ती है धर्म का दूसरे धर्म का विधर्मी तो वहां युद्ध

150
00:10:28,080 --> 00:10:32,080
होता है। ठीक है? युद्ध कैसे होता है कि जो जो

151
00:10:32,080 --> 00:10:36,080
जिसने चोला ओा है धर्म का जिसने ईश्वर जैसा ईश्वर आभास फैलाया है

152
00:10:36,080 --> 00:10:40,160
तो फिर वहां उसके साथ जो वास्तविक धर्म है और जो कल्पित धर्म

153
00:10:40,160 --> 00:10:44,160
है उसके बीच में आपको दिखाई देता है युद्ध

154
00:10:44,160 --> 00:10:48,240
और क्यों हो रहा है युद्ध क्योंकि हमें उन सिद्धांतों को बचाना

155
00:10:48,240 --> 00:10:52,480
है जहां पर एक मां को मां कहा जाए ईश्वर के अस्तित्व

156
00:10:52,480 --> 00:10:56,480
को बचाना है असतो मा सद्गमयात सो ज्योतिर्गमया

157
00:10:56,480 --> 00:11:01,040
मृत्युमा मृतम गमया को बचाना है ईश्वर को सर्वशक्तिमान

158
00:11:01,040 --> 00:11:05,440
सिद्ध कर सकने वाले इन सिद्धांतों को बचाना है। इसलिए

159
00:11:05,440 --> 00:11:09,520
वह युद्ध हो रहा है। मानवता के लिए युद्ध

160
00:11:09,520 --> 00:11:13,680
हो रहा है। ठीक है ना? क्योंकि

161
00:11:13,680 --> 00:11:17,680
अगर धर्म नहीं है तो मानवता नहीं है। पशुता है। धर्मणी

162
00:11:17,680 --> 00:11:21,680
ना पशु भी समाना। अब वो आगे बात करेंगे कि मोरल्टी आपने जो

163
00:11:21,680 --> 00:11:25,680
कुतर्क किए वो तो उन कुतर्कों का खंडन तो उन्होंने कर ही दिया मुफ्ती जी

164
00:11:25,680 --> 00:11:29,440
ने। तो

165
00:11:29,440 --> 00:11:33,440
एक बात अब अब एक चीज और बताता चलूं जब धर्माभास

166
00:11:33,440 --> 00:11:37,600
की भी दाल नहीं गलती है तो वह फिर बन जाता है सनातनाभास जिनके

167
00:11:37,600 --> 00:11:41,920
शोधन के लिए हम कार्य कर रहे हैं वो सनातनाभास क्या है जो हमारे दर्शक

168
00:11:41,920 --> 00:11:46,720
हैं वो जानते हैं इस आर्य समाज रामपाल ब्रह्माकुमारी

169
00:11:46,720 --> 00:11:52,240
ये सब सनातनास है। पहले था धर्माभास अब हो गया सनातनाभास

170
00:11:52,240 --> 00:11:56,480
और फिर इसके इन इस ये भी और आगे थोड़ा सा एक्सप्लोर हो जाते हैं। तो इनसे

171
00:11:56,480 --> 00:12:00,480
वैचारिक युद्ध चलता है। वह युद्ध आपको युद्ध जैसा नहीं दिखेगा।

172
00:12:00,480 --> 00:12:04,480
वैचारिक युद्ध चलता है कि भैया तुम सनातन के नाम से जो जो गलत बातें फैला रहे हो मत

173
00:12:04,480 --> 00:12:08,800
फैलाओ। वैचारिक युद्ध चलता है। और वहां पर जो है व्यवहारिक

174
00:12:08,800 --> 00:12:13,280
युद्ध भी दिख जाता है सीधे-सीधे वालों में। और अंतत

175
00:12:13,280 --> 00:12:17,280
गतवा किस किस चीज के लिए लड़ाई हो रही है? आपने कहा ना कि बच्चों को मारा ना

176
00:12:17,280 --> 00:12:21,440
जाए। बच्चे ना मरे, बच्चों के साथ अत्याचार ना हो। यह भी

177
00:12:21,440 --> 00:12:25,600
एक धर्म है, नैतिकता है। अगर आप

178
00:12:25,600 --> 00:12:29,600
ईश्वर के अस्तित्व को हटा देंगे तो लोग आपसे क्वेश्चन करेंगे कि भैया तुम्हारे अंदर इन बच्चों

179
00:12:29,600 --> 00:12:34,560
को ना मारने का भाव है। हमारे अंदर तो खाने का भाव है। निठार ही हैं। हम तो

180
00:12:34,560 --> 00:12:38,800
क्या कर लोगे? कैसे सिद्ध करोगे वही धर्म?

181
00:12:38,800 --> 00:12:42,960
और ये बात मुफ्ती जी ने भी आगे कही है। ज्यादा लोगों के कह देने से वही धर्म

182
00:12:42,960 --> 00:12:44,880
हो जाएगा क्या?

183
00:12:44,880 --> 00:12:49,280
मुफ्ती यह जो अलवजदी है ना जो इसमें आए हुए हैं इनके

184
00:12:49,280 --> 00:12:53,680
ही यहां पर इनहीं की टीम थी वहां पर आया था एक व्यक्ति इन्होंने प्रश्न किया

185
00:12:53,680 --> 00:12:57,840
कि भाई फिर बहन को अगर तुम ईश्वर को नहीं मानते धर्म को नहीं मानते तो बहन

186
00:12:57,840 --> 00:13:01,840
के साथ बहन के साथ वो जो संबंध बना

187
00:13:01,840 --> 00:13:06,000
रहा है उससे आपका आपको आपत्ति है उसने कह दिया नहीं आपत्ति

188
00:13:06,000 --> 00:13:08,240
लो

189
00:13:08,240 --> 00:13:12,320
अगर हम ईश्वर के अस्तित्व को हटा देंगे भाई साहब तो यह जो

190
00:13:12,320 --> 00:13:16,880
धार्मिक मर्यादा आपको दिख रही है ना छिन्नभिन्न हो जाएगी और ऐसा हो भी चुका है। हिस्ट्री पढ़ लीजिएगा।

191
00:13:16,880 --> 00:13:22,400
डार्विन ने जब कह दिया था कि वो नहीं है। कोई ईश्वर नहीं है।

192
00:13:22,400 --> 00:13:26,480
वहां का वहां की हिस्ट्री जान लीजिए आप। अच्छा दूसरी बात

193
00:13:26,480 --> 00:13:31,440
क्या है कि आजकल आपने कहा कि मेजॉरिटी के पीपल

194
00:13:31,440 --> 00:13:35,440
तो आजकल जो हां आपने आधुनिक आधुनिकता से जोड़ा कि आधुनिकता हो

195
00:13:35,440 --> 00:13:39,520
रही है इसलिए आपको आज ये मंच मिल रहा है। आप बताइए संस्कार कम

196
00:13:39,520 --> 00:13:44,000
हुए हैं पहले से या ज्यादा हुए हैं। आप ही के परिवेश में बता दीजिए। संस्कार

197
00:13:44,000 --> 00:13:48,000
पहले से कम है या ज्यादा है? फॉरेन इंडस्ट्री जो आज की डेट

198
00:13:48,000 --> 00:13:52,000
में है व्यभचार का अड्डा वह पहले ज्यादा सशक्त थी

199
00:13:52,000 --> 00:13:56,240
या आज ज्यादा सशक्त है या क्या कहते हैं आज से आने वाले भविष्य में तो जिसको

200
00:13:56,240 --> 00:13:59,920
आप आधुनिकता का नाम दे रहे हैं वहां मानवता का गला

201
00:13:59,920 --> 00:14:04,560
घोटा जा रहा है। समझ रहे हैं? और यदि हम लोग

202
00:14:04,560 --> 00:14:08,640
हम जैसे लोग इतने हिस्से में मुफ्ती जी को भी साथ में लूंगा। वो

203
00:14:08,640 --> 00:14:12,800
बात और है फिर उनका ईश्वर सिद्ध नहीं होता। धर्मास सिद्ध होता बात अलग है मगर इतने हिस्से

204
00:14:12,800 --> 00:14:16,880
में तो उनको साथ में लूंगा। हम जैसे लोग अगर नास्तिकता को काउंटर नहीं

205
00:14:16,880 --> 00:14:20,960
करेंगे तो ये जो रेशियो अभी थोड़ा-थोड़ा दिख रहा है ना आपके घर के बगल में वैश्यालय नहीं

206
00:14:20,960 --> 00:14:25,120
है या आपके घर की स्त्रियों को जो है गलत कुदृष्टि से नहीं देख

207
00:14:25,120 --> 00:14:29,200
रहा है कोई या आपके घर में ही ऐसी संताने नहीं उत्पन्न हो रही हैं। हमारे

208
00:14:29,200 --> 00:14:33,280
आपके घर में ऐसी संताने उत्पन्न नहीं हो रही है जो बहन के ऊपर कुदृष्टि डालें, मां के ऊपर

209
00:14:33,280 --> 00:14:37,280
कुदृष्टि डालें। अगर हम जैसे लोग मैं और मुफ्ती जैसे लोग अगर खड़े नहीं होंगे

210
00:14:37,280 --> 00:14:41,280
नास्तिकता के विरोध में तो वहां पर आपको यह दृश्य भी देखने को मिल

211
00:14:41,280 --> 00:14:46,800
जाएंगे तब सोचोगे कारण दो ना उसको

212
00:14:46,800 --> 00:14:51,440
मां को मां मानने का कारण दो बहन को बहन मानने का कारण दो नहीं दे पाओगे आप

213
00:14:51,440 --> 00:14:55,680
तो मेजॉरिटी क्या कर रही है सम सेक्स चेंज ऑपरेशन करा रही है तो आपको तो पसंद

214
00:14:55,680 --> 00:14:59,760
होंगे आपने कहा था ना फतवे जारी हो गए थे विज्ञान के कारण यह है वो है वो

215
00:14:59,760 --> 00:15:04,080
हुए होंगे गलत भी होंगे मगर भाई विज्ञान के

216
00:15:04,080 --> 00:15:08,400
नाम पे आप गला घोट रहे हो कि नहीं घोट रहे हो? प्रकृति

217
00:15:08,400 --> 00:15:13,360
का हनन कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो? विज्ञान के नाम पे

218
00:15:13,360 --> 00:15:17,360
अब आप यह कह दोगे कि उसी विज्ञान का सहारा लेकर के क्यों बोल रहे हो? इसके इसमें भी तर्क

219
00:15:17,360 --> 00:15:21,520
ले लो। धरती पर गिरा हुआ इंसान धरती का ही सहारा लेकर के उठ

220
00:15:21,520 --> 00:15:24,240
खड़ा होता है।

221
00:15:24,240 --> 00:15:28,240
जिस वायुजयान को आकाश में उड़ना है वह धरती का

222
00:15:28,240 --> 00:15:32,480
ही पहले सहारा लेता है। तब जो है अपने आप को उस योग्य बनाता है कि जो आकाश में धरती को छोड़कर

223
00:15:32,480 --> 00:15:36,560
के आकाश में उड़े। तो उसी प्रकार से यह जो विज्ञान के

224
00:15:36,560 --> 00:15:40,560
कारण विज्ञान के आधार पर जो मानवता का गला घोटा जा रहा

225
00:15:40,560 --> 00:15:44,560
है। इन परिस्थितियों से निकलने के लिए इन्हीं परिस्थितियों का सहारा

226
00:15:44,560 --> 00:15:48,800
ले रहे हैं हम लोग। ठीक है?

227
00:15:48,800 --> 00:15:52,960
अगर आप कहते कि मोरल्टी अपने अंदर से आती है तो

228
00:15:52,960 --> 00:15:57,200
क्या निठारी लोगों की मोरल्टी उनके अंदर से नहीं आई थी? सेट

229
00:15:57,200 --> 00:16:01,440
कैसे करेंगे? निठारी कहेगा मुझे कुकर में उबाल करके बच्चों को खाना

230
00:16:01,440 --> 00:16:07,440
है। कैसे करोगे मोरल्टी सेट?

231
00:16:12,690 --> 00:16:16,690
[संगीत]
