1
00:00:02,000 --> 00:00:06,160
वो जो लिखा हुआ है ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है? कहां पर लिखा है? ये देखिए इसे क्षु

2
00:00:06,160 --> 00:00:10,160
ज्योति निरंजन का पास जाना जाता है। ब्रह्मा इसी ब्रह्म का जेष्ठ पुत्र है। विष्णु मध्य

3
00:00:10,160 --> 00:00:14,160
वाला पुत्र है। शिव अंतिम पुत्र है। दुर्गा के पति कौन है? ये जो पूरा सृष्टि रचना आप ये

4
00:00:14,160 --> 00:00:18,160
ब्रह्म ही है। इसमें जो ज्ञान है ये किस परंपरा से प्राप्त हुआ है? भगवत गीता चार् भगवान

5
00:00:18,160 --> 00:00:22,240
कह रहे हैं एवं परंपरा प्राप्तिमम। परंपरा से प्राप्त होने वाला ज्ञान प्रमाणिक पाया गया है। तो

6
00:00:22,240 --> 00:00:26,400
हम लोग ज्ञान लेने किसके पास जा रहे इस दुनिया में जितने भी गुरु हैं शंकराचार्य आचार्य

7
00:00:26,400 --> 00:00:30,320
हैं उनको किसी को भी वो यथा्ञान नहीं पता है। अथर्ववेद 11 16 में लिखा है ब्रह्मचारी

8
00:00:30,320 --> 00:00:34,480
आचार्य बनता है। मनुस्मति में 12 अध्याय 12 में लिखा है धर्म में संशय होने पर ब्रह्मचारी

9
00:00:34,480 --> 00:00:38,800
की बात है। इसको मानेंगे कि नहीं? इसको मानेंगे कि नहीं? इसको नहीं मानेंगे। मैं

10
00:00:38,800 --> 00:00:43,120
आपको गीता लाके दूंगा मान लोगे क्या? मैं गीता ला के दूंगा मान लोगे? तो

11
00:00:43,120 --> 00:00:49,120
ये किस पर निर्धारित होगा? कितना मानने के लायक है?

12
00:00:53,050 --> 00:00:55,520
[संगीत]

13
00:00:55,520 --> 00:00:59,680
लखनऊ महोत्सव में हिंदुओं को अपना ब्रेन वाश कराना है तो लखनऊ महोत्सव में

14
00:00:59,680 --> 00:01:04,000
आइए अपने बच्चों को लेकर के ब्रेन वाश कराइए [संगीत] इसमें

15
00:01:04,000 --> 00:01:09,280
वो जो लिखा हुआ है ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है कहां पर लिखा है

16
00:01:09,280 --> 00:01:13,280
ये आप ये सृष्टि रचना है ये सृष्टि रचना है ना तो

17
00:01:13,280 --> 00:01:18,080
जब पूरा सृष्टि रचना समझेंगे तब है देखो जैसे ब्रह्म है

18
00:01:18,080 --> 00:01:22,080
ये किस ब्रह्मांड के स्वामी हैं। इसे छर पुरुष या

19
00:01:22,080 --> 00:01:26,240
ज्योति निरंजन काल आदि नाम से उपमा से जाना जाता है। यह

20
00:01:26,240 --> 00:01:30,320
तथा इसके सर्व ब्रह्मांड नाशवान है। ब्रह्मा इसी ब्रह्म

21
00:01:30,320 --> 00:01:34,480
का जेष्ठ पुत्र है। ठीक है। विष्णु मध्य वाला पुत्र है

22
00:01:34,480 --> 00:01:38,480
तथा शिव अंतिम पुत्र है। ये तीनों ब्रह्म के पुत्र केवल एक

23
00:01:38,480 --> 00:01:42,480
ब्रह्मांड में एक विभाग नहीं वो कहां है? इनके पिता

24
00:01:42,480 --> 00:01:46,480
लिखा नहीं ब्रह्मा? ये ब्रह्मा है। ब्रह्म के ये तीनों कौन है? ब्रह्म

25
00:01:46,480 --> 00:01:49,760
जो है किस ब्रह्मांड के स्वामी है? वो कौन है?

26
00:01:49,760 --> 00:01:53,920
ब्रह्म। ब्रह्म का नाम कबीर है। नहीं नहीं ब्रह्म जो है

27
00:01:53,920 --> 00:01:57,920
ये जो गीता बोल रहे हैं ना काल काल काल

28
00:01:57,920 --> 00:02:02,000
इनको काल कहते हैं। ज्योति निरंजन कहते हैं। कबीर देखिए ब्रह जो कबीर

29
00:02:02,000 --> 00:02:06,240
साहब तो परमात्मा हैं। हां हां है ना? तो वो वो तो वो तो सबके पिता हैं।

30
00:02:06,240 --> 00:02:10,320
अच्छा उस हिसाब से हां वो तो हम सबके पिता है ना। अच्छा तो सृष्टि रचना जब हम

31
00:02:10,320 --> 00:02:14,320
पूरी पढ़ेंगे जैसे उस परिचय में लिखा है ना ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है? यही

32
00:02:14,320 --> 00:02:18,480
है। यह ब्रह्म है। यह काल यह अलग है। हां, यह ब्रह्म मतलब

33
00:02:18,480 --> 00:02:22,480
सबके पिता तो यह कबीर साहब हुए। अच्छा। यह इन्होंने सृष्टि रची। और

34
00:02:22,480 --> 00:02:26,560
दुर्गा के पति, दुर्गा के पति कौन है? ये जब पूरा सृष्टि

35
00:02:26,560 --> 00:02:30,880
रचना आप ये ब्रह्म ही हैं। ब्रह्म दुर्गा के पति हां हां वो दुर्गा

36
00:02:30,880 --> 00:02:35,520
के पति शिव जी नहीं है। ब्रह्म। अच्छा मैं ये जो

37
00:02:35,520 --> 00:02:39,760
इसमें जो ज्ञान है ये किस परंपरा से प्राप्त हुआ है?

38
00:02:39,760 --> 00:02:43,760
ये देखिए कबीर साहब जो है ना ये आके जब बताए हैं यहां पे

39
00:02:43,760 --> 00:02:47,760
धर्मदास को ये पूरा बताए हैं ये

40
00:02:47,760 --> 00:02:51,760
किस परंपरा से कबीर साहब तो अभी आए थे ना मतलब000 600 साल

41
00:02:51,760 --> 00:02:55,840
पहले तो वहां तक वो ज्ञान आया कैसे वही ज्ञान है ना इसमें जो

42
00:02:55,840 --> 00:03:00,000
कबीर साहब ने दिया हां जो कबीर साहब ने दिया कबीर साहब तक वो ज्ञान कैसे आया था नहीं कबीर

43
00:03:00,000 --> 00:03:04,080
साहब जो है वो परमात्मा है ये हमेशा आते हैं तो उन्होंने कहा कि जैसे जैसे

44
00:03:04,080 --> 00:03:05,280
उन्होंने कहा कि सतयुग

45
00:03:05,280 --> 00:03:09,360
में सत्सु सुकृत नाम से आए त्रेता में सुनिए तो परमात्मा है

46
00:03:09,360 --> 00:03:13,360
ना तो वो तो हमेशा आता है ना तो जैसे जैसे सत्य

47
00:03:13,360 --> 00:03:17,520
कहना पूछा है कि कबीर साहब के कोई गुरु थे जिन्होंने उनको ये ज्ञान दिया नहीं कबीर

48
00:03:17,520 --> 00:03:21,680
साहब के गुरु ने तो जगतगुरु है कबीर साहब ना वो तो हमेशा आते

49
00:03:21,680 --> 00:03:26,080
हैं वो ये ज्ञान देने ही आते हैं मेरी मैं ये कह रहा था

50
00:03:26,080 --> 00:03:30,480
कि जो हमारा ईश्वर है वो तीनों गुणों से व्याप्त है सत तम

51
00:03:30,480 --> 00:03:34,960
तो तम का अर्थ है कि ईश्वर जो है तम वाले कार्य भी कर सकता है

52
00:03:34,960 --> 00:03:39,120
यानी कि वो बुराई भी बुराई को भी जन्म दे सकता है।

53
00:03:39,120 --> 00:03:43,120
ऐसा मानते हैं आप कि नहीं नहीं ये हम बताएं आपको जब आप सृष्टि रचना

54
00:03:43,120 --> 00:03:47,120
को इसको पूरा पढ़ेंगे मैं पूछ रहा हूं मैं

55
00:03:47,120 --> 00:03:51,360
मनवा नहीं रहा हूं पूछ रहा हूं देखो हम बता रहे हैं ना जैसे जैसे आपने

56
00:03:51,360 --> 00:03:55,520
कहा कि भाई कबीर साहब को ये ज्ञान कहां से आया आपका ये कहना है ना तो

57
00:03:55,520 --> 00:03:59,520
कबीर जैसे परमात्मा है वो तो देखिए वो उन्होंने किसी स्कूल में नहीं

58
00:03:59,520 --> 00:04:03,680
गए लेकिन वेदों का ज्ञान मैं वही तो पूछ रहा हूं जो

59
00:04:03,680 --> 00:04:08,160
ज्ञान जो है वो परंपरा से प्राप्त होता है भगवत गीता चार दो में लिखा है छंद

60
00:04:08,160 --> 00:04:12,320
उपनिषद में लिखा है। राम भी जब जन्म लेते हैं तो परमा वो एक गुरु

61
00:04:12,320 --> 00:04:16,560
के पास जाते हैं। श्री कृष्ण जब जन्म लेते हैं तो गुरु के पास जाते हैं। तो कबीर

62
00:04:16,560 --> 00:04:20,400
जी के गुरु का नाम क्या था? कबीर जी ने गुरु केवल सांसारिक

63
00:04:20,400 --> 00:04:24,560
दृष्टि से बनाया रामानंद जी को। तो कहा कि

64
00:04:24,560 --> 00:04:28,880
लोग देखो जब उनको हम लोक मर्यादा के लोक मर्यादा को

65
00:04:28,880 --> 00:04:32,960
दिखाने के लिए कि अगर हम गुरु नहीं बनाएंगे

66
00:04:32,960 --> 00:04:36,960
तो लोग यह कहेंगे कि कबीर का कौन गुरु था? नहीं तो अपने

67
00:04:36,960 --> 00:04:41,120
आप लोग गुरु बन जाएंगे। इसलिए इस परंपरा को बनाए रखने के

68
00:04:41,120 --> 00:04:45,200
लिए उन्होंने दिखावटी में उनको रामानंद जी को हम उनकी ये शिक्षा माने

69
00:04:45,200 --> 00:04:49,280
कि ना माने कि गुरु होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? तो फिर कबीर जी के गुरु क्यों

70
00:04:49,280 --> 00:04:53,440
नहीं है? तो कबीर जी के रामानंद जी को बनाया ना तो सांसारिक दृष्टिकोण

71
00:04:53,440 --> 00:04:57,440
से बनाया है। ठीक है। उनके गुरु से उन्हें जो ज्ञान प्राप्त हुआ था वो क्या ज्ञान था? यही

72
00:04:57,440 --> 00:05:01,440
था। नहीं उनके गुरु ने देखो कई रामानंद जी

73
00:05:01,440 --> 00:05:05,680
क्या करते थे कि उन्होंने 1400 शिष्य बना रखे थे

74
00:05:05,680 --> 00:05:09,680
लेकिन उस भैया थोड़ा दूर रखो उन्होंने वो सिर्फ आवाज

75
00:05:09,680 --> 00:05:13,680
नहीं आएगी अच्छा वे सिर्फ ब्राह्मणों को ही शिष्य

76
00:05:13,680 --> 00:05:18,000
बनाते थे तो अब कबीर साहब आए तो वो वो उनको तो रामानंद

77
00:05:18,000 --> 00:05:22,080
जी को शिष्य नहीं बना सकते थे तो अब उनको ये परंपरा डालना

78
00:05:22,080 --> 00:05:26,160
था कि अगर हम ऐसे ही ये परंपरा हट जाएगी तो

79
00:05:26,160 --> 00:05:30,240
गुरु बनाने के लिए उन्होंने लीला की। उन्होंने क्या किया कि सीढ़ियों पे

80
00:05:30,240 --> 00:05:35,120
लेट गए। हां आप करना चाहते हैं तो हमारे

81
00:05:35,120 --> 00:05:35,620
जहां पे

82
00:05:35,600 --> 00:05:40,800
है आप नहीं बताएंगे। नहीं हम बताएंगे। यहां पे सुनिए

83
00:05:40,800 --> 00:05:45,040
तब बात कर पाएंगे। ये जो सच्चाई आपने देखी

84
00:05:45,040 --> 00:05:49,200
है, जो वीडियो आपने देखा है, यह हमें दो बार में बनाना

85
00:05:49,200 --> 00:05:53,360
पड़ा क्योंकि पहले हम इनके पास जब बात करने गए थे, तो हम सिर्फ दो लोग थे।

86
00:05:53,360 --> 00:05:57,520
हम लोगों हम कम संख्या में थे वहां पर तो इन्होंने हमारा वीडियो दबाव

87
00:05:57,520 --> 00:06:01,600
डाल के बंद करवा दिया था और बाद में हम लोग जब काफी लोगों

88
00:06:01,600 --> 00:06:05,680
को मैंने आवाहन किया कि आप लोग भी साथ में चलिए ऐसा-सा हो रहा है जब कुछ और

89
00:06:05,680 --> 00:06:09,840
लोग मेरे साथ वहां पहुंचे तब इस तरह की बातचीत सामने आ पाई जो हमने आपके

90
00:06:09,840 --> 00:06:13,840
सामने प्रस्तुत की है। ये परमात्मा के स्टार्टिंग

91
00:06:13,840 --> 00:06:17,440
में जब सृष्टि का रच

92
00:06:17,440 --> 00:06:22,080
था। ये चारों युग नहीं बने थे। ठीक है?

93
00:06:22,080 --> 00:06:26,080
जी अरे [हंसी] ऐसा नहीं ऐसा नहीं ठीक

94
00:06:26,080 --> 00:06:30,240
नहीं है आप या तो प्रश्न नहीं प्रश्न मिल जाएगा नहीं

95
00:06:30,240 --> 00:06:35,280
YouTube पे बात है देखिए बात ये होती है कि हमारे मन में जब कोई प्रश्न

96
00:06:35,280 --> 00:06:39,280
हमारे मन में कोई प्रश्न उठता है जब हमारे

97
00:06:39,280 --> 00:06:45,280
मन में जब कोई प्रश्न उठता है तो YouTube पे हम क्वेरी नहीं कर सकते

98
00:06:46,160 --> 00:06:50,320
नहीं गली गांव यहां तो आपने स्टॉल लगाया हुआ है ना ऐसा

99
00:06:50,320 --> 00:06:54,400
तो गलीगली पुस्तक सेवा भी होती है हम लोगों वही हम हर जगह नहीं

100
00:06:54,400 --> 00:06:58,560
ऐसा भी सिद्धांत है कोई सत्य है तो आपको बताने में क्या

101
00:06:58,560 --> 00:07:02,640
दिक्कत हो रही है तो आपको भी भाई रिटन

102
00:07:02,640 --> 00:07:07,760
में उसी पे हम पूछ रहे हैं ना काउंटर उसी पे कर रहे हैं

103
00:07:07,760 --> 00:07:11,840
रिकॉर्ड इसलिए कि लोग भी देखें लोग भी जाने चलिए फिर हमारे गुरु जी के

104
00:07:11,840 --> 00:07:16,160
यहां पे चलिए आपको रिकॉर्ड वहां वहां भी चलेंगे आप

105
00:07:16,160 --> 00:07:21,040
यहां फिलहाल आपका स्टॉल लगा है तो यहां नहीं पूछ सकते कोई गलत बात लिखी है क्या इसमें

106
00:07:21,040 --> 00:07:25,040
रिकॉर्ड या वीडियो बना करके आप नहीं जी ऐसा नहीं

107
00:07:25,040 --> 00:07:29,120
करिए आप उसको YouTube या Facebook पे लाइव करें

108
00:07:29,120 --> 00:07:33,680
या कुछ भी करें कि लोग जाने हमने कर रखा है

109
00:07:33,680 --> 00:07:37,680
हमने पहले से दे रखा है जब आपकी चीजें ओरिजिनल है सतलोक की बात हो रही है

110
00:07:37,680 --> 00:07:41,760
सात्विक बातें हो रही है छुपाना क्या छुपाना है ही नहीं छुपाना

111
00:07:41,760 --> 00:07:45,840
नहीं आपका प्रॉपर जवाब मिलेगा मेरा प्रश्न यह नहीं है कि आपका ज्ञान गलत

112
00:07:45,840 --> 00:07:50,160
है मैं निचला हूं आप कुचले हैं यह सब नहीं है मेरा प्रश्न यह है

113
00:07:50,160 --> 00:07:54,240
आप मेरा प्रश्न प्रश्न बस इतना है। आप कह रहे हो कि हिंदू मुस्लिम सिख

114
00:07:54,240 --> 00:07:58,400
ईसाई अलग-अलग नहीं है। सिख मुस्लिम और ईसाई हिंदू के साथ कैसे जुड़ सकता है?

115
00:07:58,400 --> 00:08:01,200
जबकि हिंदू धर्म में कहा जा रहा है कि यदा यदाई धर्मस

116
00:08:01,200 --> 00:08:05,360
ग्लानि भवती भारत अभत्तानं धर्मस तदात्मानं सजामयं जब जबजब

117
00:08:05,360 --> 00:08:09,680
धरती पर पाप होगा मैं प्रकट हो जाऊंगा। मैं स्वयं को प्रकट करूंगा। अच्छा

118
00:08:09,680 --> 00:08:13,760
इस्लाम का जो ईश्वर है वह यह कह रहा है छ 101 में कि मेरी संतान नहीं हो

119
00:08:13,760 --> 00:08:17,840
सकती। ऐसा कोई कार्य नहीं है जो सनातन ईश्वर नहीं कर सकता।

120
00:08:17,840 --> 00:08:21,840
मगर इस्लाम का ईश्वर यह कह रहा है मेरी मूर्ति पूजा नहीं हो सकती। मैं जन्म नहीं

121
00:08:21,840 --> 00:08:26,960
ले सकता। मैं अवतार नहीं ले सकता। तो क्या आप मानते हैं सनातन ईश्वर अवतार नहीं ले सकता?

122
00:08:26,960 --> 00:08:30,960
नहीं इसमें प्रश्न ये है कि पहली बात तो आप इस प्रश्न पे आइएगा

123
00:08:30,960 --> 00:08:35,200
कि हम सब कहते हैं कि परमात्मा एक है। तो पहले यह पता चला जो एक

124
00:08:35,200 --> 00:08:39,360
परमात्मा है वो साकार रूप में है। वो निराकार नहीं है। वो

125
00:08:39,360 --> 00:08:43,440
अवतार ले सकता है या नहीं? निश्चित रूप से लेता है। अनंत अवतार।

126
00:08:43,440 --> 00:08:47,520
इस्लाम का ईश्वर तो मना कर रहा है। मैं नहीं ले सकता अवतार। वो वो सनातन परमात्मा

127
00:08:47,520 --> 00:08:51,680
नहीं वह सनातन परमात्मा नहीं है। आप कह रहे हो कि वह दोनों धर्म एक हैं।

128
00:08:51,680 --> 00:08:55,680
परमात्मा के यह तो कुरान में लिखा हुआ है। अरे आप

129
00:08:55,680 --> 00:08:59,920
तो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो धर्म है कुरान के द्वारा प्रतिपादित

130
00:08:59,920 --> 00:09:04,000
होने वाला जो ईश्वर है वो दोनों हमारी चीजों को मैच नहीं करते। हमारे सनातन

131
00:09:04,000 --> 00:09:08,000
से मैच नहीं करते। जब आप एक गुरु जी द्वारा एक लिखित पुस्तक है।

132
00:09:08,000 --> 00:09:12,080
मुसलमान नहीं समझे ज्ञान कुरान वो आप पढ़िएगा। उसमें दोनों सिमिलरिटी क्या मोहम्मद साहब

133
00:09:12,080 --> 00:09:16,640
भी नहीं समझे? मोहम्मद साहब जिस तरीके से जो गीता ज्ञान दाता है

134
00:09:16,640 --> 00:09:20,800
गीता ज्ञान दाता जो समझे होते तो अलग क्यों होते मतलब

135
00:09:20,800 --> 00:09:24,960
मोहम्मद साहब नहीं समझे उस ज्ञान को उसे आपने नहीं गीता ज्ञान

136
00:09:24,960 --> 00:09:29,200
जैसे गीता ज्ञान दाता ने श्री कृष्ण जी के शरीर का उपयोग

137
00:09:29,200 --> 00:09:33,280
किया था ज्ञान बोलने के लिए ऐसे ही मोहम्मद साहब का शरीर यूज हुआ था

138
00:09:33,280 --> 00:09:37,360
ब्रह्म ने अपना ज्ञान उनके माध्यम से दिया था है कि मोहम्मद साहब नहीं समझे थे ना

139
00:09:37,360 --> 00:09:41,520
वो ज्ञान नहीं मोहम्मद साहब ने तो वो जो ज्ञान है वो ब्रह्म ने दिया उनके

140
00:09:41,520 --> 00:09:46,000
शरीर में प्रवेश कर तो वो वो समझ गए थे कि नहीं समझे थे? बिल्कुल नहीं। हां।

141
00:09:46,000 --> 00:09:50,320
यानी कि जो मुस जो मुसलमान जो जो मुसलमान जो धर्म

142
00:09:50,320 --> 00:09:54,400
है वह यह कह रहा है कि हम वो हैं जो रसूल को मानते हैं

143
00:09:54,400 --> 00:09:58,400
मोहम्मद को मानते हैं। तो आपके अनुसार वो जो रसूल को मानने वाला धर्म है वो

144
00:09:58,400 --> 00:10:02,400
मुसलमान नहीं है। वो जो कुरान की जो शिक्षा आई है जो जो कोई आपके

145
00:10:02,400 --> 00:10:06,800
अनुसार जो ब्रह्म है उसने जो शिक्षा दी है उसको मानने वाला मुसलमान है। मगर वो मुसलमान

146
00:10:06,800 --> 00:10:10,800
अपने आप को ये मानते हैं। रसूल के माध्यम से जो हमें प्राप्त हो रहा है वो ज्ञान जो

147
00:10:10,800 --> 00:10:14,880
हो रहा है जो ज्ञान की चर्चा हो रही है हम वो मुसलमान हैं। तो आपके अनुसार यह वाले

148
00:10:14,880 --> 00:10:18,880
जो दूसरे वाले मुसलमान हैं, यह क्या कहीं और एक्सिस्ट करते हैं?

149
00:10:18,880 --> 00:10:23,200
यह बाद में हम लोग डिवाइड हुए हैं। मैं वही कह रहा हूं कि कि इस्लाम

150
00:10:23,200 --> 00:10:27,360
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो धर्म है उसकी एक प्रकृति है कि

151
00:10:27,360 --> 00:10:31,360
वह बदलता है। जैसे कि 1887 में उन्होंने कहा

152
00:10:31,360 --> 00:10:31,860
कि अब

153
00:10:31,760 --> 00:10:37,120
तक यह नियम नहीं था। मगर आज हम यह नियम लागू कर रहे हैं। 2187 में

154
00:10:37,120 --> 00:10:41,280
रोजों के दिनों में स्त्री संग करने पर प्रतिबंध था। पहले उसके बाद रोजों

155
00:10:41,280 --> 00:10:45,360
की रात में पत्नी के संग संग कर सकते हैं। इसकी अनुमति दे दी गई। तो यह क्या

156
00:10:45,360 --> 00:10:49,360
हुआ? एक नियम पहले नहीं था। आज हो गया। तो यह हो गया कि यह सनातन

157
00:10:49,360 --> 00:10:53,440
नियम नहीं है। फिर सनातन नियम तो जो था है और रहेगा। सनातन

158
00:10:53,440 --> 00:10:57,520
तो वो हुआ ना। जैसे सेम जैसे आप जाएंगे कि गीता ज्ञान दाता

159
00:10:57,520 --> 00:11:01,680
ने एक जगह कहा उत्तम पुरुष तो और परमात्मा इति उधारते। अध्याय नंबर 15 श्लोक नंबर

160
00:11:01,680 --> 00:11:05,680
17 ये कहता है। फिर उसने नीचे पीछे कहा अध्याय दो के श्लोक नंबर

161
00:11:05,680 --> 00:11:09,840
12 में हे अर्जुन तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं। है ना? तो अविनाशी और

162
00:11:09,840 --> 00:11:13,840
जन्म ये दो चीजें हो गई तो यह जब जो कोड वर्ष वो

163
00:11:13,840 --> 00:11:18,160
चीजें हो गई यह तो तब है ना जब हम लोग अगर गीता से वो ज्ञान ले रहे हैं

164
00:11:18,160 --> 00:11:22,400
तो गीता को हमें पूरा फॉलो करना पड़ेगा अगर पूरा फॉलो करना है तो भगवत गीता

165
00:11:22,400 --> 00:11:26,720
चार दो में भगवान कह रहे हैं एवं परंपरा प्राप्तिमम परंपरा

166
00:11:26,720 --> 00:11:30,880
से प्राप्त होने वाला ज्ञान प्रमाणिक कहा गया है तो हम लोग ज्ञान लेने किसके

167
00:11:30,880 --> 00:11:34,960
पास जा रहे हैं गीता का ज्ञान लेने किसके पास जा रहे हैं जो परंपरा प्राप्त आचार्य

168
00:11:34,960 --> 00:11:39,440
उनके पास तो जा नहीं रहे हैं परंपरा प्राप्त आचार्य कौन शंकराचार्य

169
00:11:39,440 --> 00:11:43,520
उनके पास जा नहीं रहे हैं। हम लोग अपने मन से गीता का ले रहे हैं। आप पहले जो आपको

170
00:11:43,520 --> 00:11:47,680
जो क्वेरी हो रही है दो अर्थ एक एक मिनट 1 मिनट जो

171
00:11:47,680 --> 00:11:51,680
दो क्वेरीज हो रही हैं आपकी अलग-अलग वो क्वेरी मिटाने के लिए आप पहले परंपरा

172
00:11:51,680 --> 00:11:55,680
प्राप्तिमम अगर गीता से आपको लेना है कुछ तो पूरी गीता लोगे कि आधी अधूरी

173
00:11:55,680 --> 00:11:59,680
लेगा? पूरा लेंगे। पूरा लेंगे तो एवं परंपरा प्राप्तिमम का क्या करें?

174
00:11:59,680 --> 00:12:03,680
नहीं। तो जो देखिए जब भी कोई एक संत होता है या गुरु होता

175
00:12:03,680 --> 00:12:08,160
है जो आप कह रहे हैं वह परंपरा से ही उसको अधिकार होता है नाम दान देने का। है ना

176
00:12:08,160 --> 00:12:12,480
जैसे ज्ञान की या फिर जो गुरु की पदवी है वो एक परंपरा है। परंपरा

177
00:12:12,480 --> 00:12:16,640
के थ्रू हम लोग उसको फॉलो करते हैं। सेम ऐसे ही यह ज्ञान जो संत रामपाल जी महाराज

178
00:12:16,640 --> 00:12:20,720
तक पहुंचा हुआ या परंपरा से है। नहीं आप आपने कहा कबीर दास जी

179
00:12:20,720 --> 00:12:24,960
के जो गुरु कबीर दास जी के जो गुरु थे वो थे

180
00:12:24,960 --> 00:12:29,040
रामानंद क्या नाम था? रामानंद जी। ठीक है वो और अब आपका

181
00:12:29,040 --> 00:12:33,280
कहना यह है कि कबीर जी ने उनका ज्ञान नहीं दिया। अपना ज्ञान यहां पर दे दिया।

182
00:12:33,280 --> 00:12:37,280
गुरु से प्राप्त ज्ञान आगे नहीं बढ़ाया ना। नहीं उन्होंने तो सिर्फ उनको इसलिए गुरु बनाया

183
00:12:37,280 --> 00:12:41,360
था जिससे परंपरा जो तो तो जब चलती

184
00:12:41,360 --> 00:12:45,520
रहे तो फिर आप इसको क्यों तोड़ रहे हैं? नहीं हम कहां तोड़ रहे हैं? तो आप तोड़

185
00:12:45,520 --> 00:12:49,520
तो रहे हैं जब वह चाहते हैं कि लोग परंपरा प्राप्त आचार्यों के पास जाएं

186
00:12:49,520 --> 00:12:53,760
तो आप क्यों कह रहे हैं शंकराचार्यों के पास ना जाए। नहीं शंकराचार्य जो हैं उनको

187
00:12:53,760 --> 00:12:57,920
अधिकार तो हो नाम देने का। अधिक जो परंपरा आती है वो

188
00:12:57,920 --> 00:13:02,320
अधिकार आता है। जिस तरीके से एक सद्गुरु इससे पहले नानक देव जी हुए थे।

189
00:13:02,320 --> 00:13:03,040
मेरा प्रश्न

190
00:13:03,040 --> 00:13:07,280
यह है कि गुरुओं से ज्ञान लें। परंपरा प्राप्त गुरुओं से कि ना लें? हां बिल्कुल

191
00:13:07,280 --> 00:13:11,280
लें। बिल्कुल लें। जिनको नाम दान देने का अधिकार होना चाहिए उनसे आप

192
00:13:11,280 --> 00:13:15,360
ज्ञान ले लीजिए। कोई ऐतराज नहीं है उसमें। आप इसमें यह कह रहे हैं ना

193
00:13:15,360 --> 00:13:21,040
आप इसमें यह कह रहे हैं आप उनके बिल्कुल विरुद्ध विरुद्ध

194
00:13:21,040 --> 00:13:25,200
आप इधर आइए। आप इधर आइए। नहीं ये

195
00:13:25,200 --> 00:13:29,200
गलत है। बात वो कर रहे हैं। जब हम परमिशन के बगैर अभी आप हमने क्या

196
00:13:29,200 --> 00:13:33,280
कहा? अभी हमारी आपकी बात होगी। आप ये क्या कर रहे हैं? नहीं तो मैं

197
00:13:33,280 --> 00:13:37,360
आपसे बात कर हमसे पूछा आपने हो रही है ना? गलत बात नहीं हो रही है। भाई साहब यह पूछ रहे हैं गलत

198
00:13:37,360 --> 00:13:41,440
बात हो रही है। डिस्कस करना किसी भी ज्ञान चर्चा आप डिस्कस करना सेटिस्फाइड

199
00:13:41,440 --> 00:13:45,600
हो करके आराम से बैठिए बात करेंगे। भाई साहब भाई साहब ये कोई

200
00:13:45,600 --> 00:13:49,600
गलत बात है क्या? ये आप ये गलत है। आप मुर्जबानी बात कर

201
00:13:49,600 --> 00:13:53,840
रहे हैं। आप सद ग्रंथों को लेकर के रखिए और प्रमाणित करके बताए थे।

202
00:13:53,840 --> 00:13:58,720
सद ग्रंथों को लेकर ही तो बात कर रहे हैं। टाइम और समय

203
00:13:58,720 --> 00:14:02,720
फिक्स कीजिए। चलिए बैठते हैं आपके साथ में जितना समय लगेगा।

204
00:14:02,720 --> 00:14:06,960
ठीक है। सभी आप टाइम और डेट नोट कर लीजिए बता दीजिए बैठते

205
00:14:06,960 --> 00:14:10,960
हैं प्रमाणों के साथ में आपका शुभ नाम आपका

206
00:14:10,960 --> 00:14:15,120
शुभ नाम आपका शुभ नाम जितना समय उतना कर लीजिए

207
00:14:15,120 --> 00:14:18,480
आपका शुभ नाम नहीं ग्रंथ लेके ही तो बात कर रहे हैं मैंने बोला

208
00:14:18,480 --> 00:14:22,560
मैंने बोला एवं काम जवानी क्या एक भी ग्रंथ की

209
00:14:22,560 --> 00:14:26,800
बात रही क्यों मैंने कहा ना एवं परंपरा प्राप्तिम मैंने कहा चार दो भगवत

210
00:14:26,800 --> 00:14:30,800
गीता अपने परंपरा हिसाब से जो बोला वो बोल दिया परंपरा में ही

211
00:14:30,800 --> 00:14:34,800
गुरु गुरु प्रणाली चलती है हां क्या आपको यह पता है कि यथार्थ

212
00:14:34,800 --> 00:14:38,880
गीता का ज्ञान देने वाला संत कौन है? यथार्थ

213
00:14:38,880 --> 00:14:42,960
गीता ज्ञान देने वाला गीता का वास्तविक और सच्चा ज्ञान देने वाला संत कौन है?

214
00:14:42,960 --> 00:14:46,960
सच्चा ज्ञान देने वाला हां ज्ञानेश्वर महाराज जी नहीं है आप ये आप

215
00:14:46,960 --> 00:14:51,200
कह रहे हो आप कह रहे हैं मैं नहीं कह रहा हूं गुस्सा क्यों हो रहे हो गुस्सा नहीं हो गुस्सा क्यों हो रहे हो रुकिए शांत

216
00:14:51,200 --> 00:14:55,200
क्रोधित क्यों हो रहे हैं शांत इनकी आंखें दिखाओ जरा कैमरे में पहले

217
00:14:55,200 --> 00:14:59,200
ये मैं इसलिए कह दिया कि आपने गीता पढ़ी है ना जी पढ़िए का ज्ञान

218
00:14:59,200 --> 00:15:03,280
किस भगवान ने दिया भगवान श्री कृष्ण कृष्ण जी ने कृष्ण जी ने गीता अध्याय

219
00:15:03,280 --> 00:15:07,280
चार का श्लोक 34 में क्या बोला है तत्व ज्ञानश्वर ज्ञान तत्व ज्ञानश्वर ने ही

220
00:15:07,280 --> 00:15:12,640
तत्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए बोला है तत्वदर्शी संत कौन है अथर्वेद

221
00:15:12,640 --> 00:15:16,640
अब हम प्रमाण पे बात कर रहे हैं ना अब मैं बात कर रहा हूं ना तत्वदर्शी संत की सुन लो

222
00:15:16,640 --> 00:15:20,160
आप अथर्ववे अथर्व अथर्व भैया

223
00:15:20,160 --> 00:15:24,320
सबसे पहले सन्यासी होना चाहिए अच्छा भगवत गीता चार दो तीन 16

224
00:15:24,320 --> 00:15:28,560
जो तत्वदर्शी तत्वदर्शी तत्वदर्शी जो संत

225
00:15:28,560 --> 00:15:32,640
है वो वो परंपरा से होना चाहिए और मत्स्य पुराण 145

226
00:15:32,640 --> 00:15:36,640
वां अध्याय मत्स्य पुराण 145 वां अध्याय 52

227
00:15:36,640 --> 00:15:40,800
वा श्लोक तत्वदर्शी संत वो जो समस्त स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य

228
00:15:40,800 --> 00:15:41,920
की शिक्षा दे उसके

229
00:15:41,920 --> 00:15:46,880
उसके बाद उसके बाद उसके बाद

230
00:15:46,880 --> 00:15:51,280
उसके बाद उसके बाद देखिए आप आप मानते ना हो तो बात

231
00:15:51,280 --> 00:15:55,280
आप मानते नहीं है वो बात नहीं हो रही है। तो ऐसा है ना आपसे

232
00:15:55,280 --> 00:15:59,600
क्षमा चाहते हैं। मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं वो नहीं मैं अगर मैं एक जिज्ञासु

233
00:15:59,600 --> 00:16:05,120
बनके सवाल कर रहा हूं। तो आप मेरी जिज्ञासा शांत करिए। बुरा क्यों मान रहे हैं?

234
00:16:05,120 --> 00:16:09,200
जिससे कि लोग नहीं तो आप गलत कर रहे हैं ना। तब गीता में लिखा हुआ

235
00:16:09,200 --> 00:16:13,680
है कि उल्टा अर्जुन उल्टा पहचान

236
00:16:13,680 --> 00:16:17,200
गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा तत्वदर्शी संत की पहचान मैं प्रमाण

237
00:16:17,200 --> 00:16:21,840
सहित आपको दे रहा हूं आप मान रहे हो अथर्ववेद 116 खोलो ब्रह्मचारी

238
00:16:21,840 --> 00:16:23,360
ही आचार्य बनेगा

239
00:16:23,360 --> 00:16:27,600
वेदों का ज्ञान अरे भैया खोलो ना अथर्ववेद अथर्ववेद 117 16

240
00:16:27,600 --> 00:16:31,680
अभी आपने श्लोक क्रमांक बोला अथर्ववेद में 117 16 में

241
00:16:31,680 --> 00:16:37,680
लिखा हुआ है भैया देखो ब्रह्मचारी आप यही तो बात है गीता में क्या लिखा

242
00:16:39,040 --> 00:16:43,120
तो आचार्य तो वही बनेगा प्रमाणिक आचार्य वही बनेगा अंतिम निर्णायक वही

243
00:16:43,120 --> 00:16:47,200
होगा यही है तो तो वो आप

244
00:16:47,200 --> 00:16:51,360
देखिए ना ब्रह्मचारी की परिभाषा क्या होनी चाहिए हां हम नहीं बता

245
00:16:51,360 --> 00:16:55,760
रहे उसके बाद उसके बाद परमात्मा को ये देखिए

246
00:16:55,760 --> 00:16:59,760
मैं ये मैं नहीं मैं मैं आपको ये बोल रहा

247
00:16:59,760 --> 00:17:03,840
हूं जैसे अभी ये गीता अध्याय 15 श्लोक 16

248
00:17:03,840 --> 00:17:07,920
17 अभी उन्होंने बोला अभी मैंने जो बोला अथर्वेद 11

249
00:17:07,920 --> 00:17:12,000
16 सुना आपने चारों सुना मैंने जो बोला सुना उसका क्या करें

250
00:17:12,000 --> 00:17:15,040
उसका क्या करें बोला है भाई ये भी तो मुजबानी

251
00:17:15,040 --> 00:17:19,200
बोला है अरे तो ये लिखा है आपकी किताबों में लिखा है किसने

252
00:17:19,200 --> 00:17:23,280
छापी है अरे तो मैं भी मैं भी तो वेद का क्रमांक

253
00:17:23,280 --> 00:17:27,840
आप चेक तो करो मैं भी तो वेद का क्रमांक बता रहा हूं वेद खोलो आप

254
00:17:27,840 --> 00:17:32,080
किसको लाइए आप इंटरनेट पे अभी वेद खोल लो 117 16

255
00:17:32,080 --> 00:17:36,240
भी खोल लीजिए नेट पर तो मैं तो मैं कहां इनको डिनाई कर रहा हूं। मैं डिनाई का कर रहा हूं। आपने उसका

256
00:17:36,240 --> 00:17:40,320
अर्थ गलत लिया इसलिए मैं कह रहा हूं आचार्य कौन होगा? हम राइटर

257
00:17:40,320 --> 00:17:44,560
तो नहीं है उस बुक के। इस बुक के राइटर हम तो नहीं हैं। तो आपकी

258
00:17:44,560 --> 00:17:48,560
आपका दायित्व है ना कि ये क्या है? क्या नहीं है? हां तो उसको

259
00:17:48,560 --> 00:17:52,880
समझने के लिए आराम से प्यार से बैठिए। यहीं बैठ जाइए।

260
00:17:52,880 --> 00:17:57,280
समझ लेते हैं। बताइए चलिए बैठ जाते हैं। हमारा क्वेश्चन ये था।

261
00:17:57,280 --> 00:18:01,520
कि तत्वदर्शी संत थे पे हमारी आपकी बातचीत हुई। तत्वदर्शी संत कौन है? हां जी।

262
00:18:01,520 --> 00:18:05,600
गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा जी अध्याय चार के श्लोक 34 32 34

263
00:18:05,600 --> 00:18:09,920
में भैया ऐसे ही आगे नहीं क्यों सुनिए क्यों क्योंकि मैं कह रहा हूं आप सुनिए

264
00:18:09,920 --> 00:18:14,000
तो भाई साहब जब मैंने पूछा तो वो क्यों नहीं बोला आपने चलिए

265
00:18:14,000 --> 00:18:18,720
चलिए ठीक है रुक जाओ बोलो जब आप बोलते हैं हम सुनते हैं बहस का मुद्दा यही बनता है

266
00:18:18,720 --> 00:18:22,960
बोलिए बोलिए उसके बाद में अर्जुन उनसे क्वेश्चन करता है

267
00:18:22,960 --> 00:18:26,960
करते हैं कि वो तत्वदर्शी संत कौन है मैं उसकी पहचान कैसे कर

268
00:18:26,960 --> 00:18:31,120
पाऊंगा ठीक है तो क्या बोले हैं हां बोलिए बोलिए आगे

269
00:18:31,120 --> 00:18:35,200
बोलिए कि अध्याय 15 श्लोक 16 एक से चार में उस तत्वदर्शी संत

270
00:18:35,200 --> 00:18:39,440
की पहचान जो इस उल्टा संसार रूपी लटके हुए संसार

271
00:18:39,440 --> 00:18:43,280
रूपी वृक्ष की जड़े तना टहनियां

272
00:18:43,280 --> 00:18:48,080
और पत्तों तक की विधिवत जानकारी जब आपकी बात पूरी हो जाए तो मुझे बता दीजिएगा।

273
00:18:48,080 --> 00:18:52,160
अभी तो आप सुन ही रहे हैं। इसीलिए बीच में आपको याद दिला रहा हूं। जब आपकी बात पूरी हो जाए तो मुझे

274
00:18:52,160 --> 00:18:56,160
बताइएगा कि मुझे कब बोलना है। कट कर रहे हैं। तर्क कर रहे हैं। यह कोई मतलब नहीं

275
00:18:56,160 --> 00:19:00,160
है। भैया अथातो धर्म जिज्ञासा अधातो ब्रह्म जिज्ञासा जब मैं कह रहा हूं

276
00:19:00,160 --> 00:19:04,160
ना ये लिखा है। अभी आप अब भैया लिखा हुआ मैं भी तो बताऊंगा। बस

277
00:19:04,160 --> 00:19:06,720
मुझे यह बता दीजिएगा कि अब आप बोल सकते हैं। में

278
00:19:06,720 --> 00:19:11,040
देखिए एक से चार में जब यह लिखा हुआ है कि यह संसार उल्टा

279
00:19:11,040 --> 00:19:15,360
लटका हुआ एक पीपल रूपी वृक्ष है जिसकी जड़े तो ऊपर की ओर हैं

280
00:19:15,360 --> 00:19:19,360
और तना और डाल और टहनियां ये तीन ये तीन शाखाएं हैं।

281
00:19:19,360 --> 00:19:23,360
पत्ते रूप संसार है। जो इस उल्टा लटके लटके हुए

282
00:19:23,360 --> 00:19:27,520
वृक्ष की जो विधिवत जानकारी बता दे वो हां

283
00:19:27,520 --> 00:19:31,920
सह वेद वित्त उसमें लिखा है। ठीक है तो वो पूर्ण संत तत्वदर्शी

284
00:19:31,920 --> 00:19:36,080
संत है। ठीक है ना? तो उनकी शरण में जाने के लिए बोला है। तो अब

285
00:19:36,080 --> 00:19:38,640
यह यह जानकारी क्या हमने गलत लिख दी या

286
00:19:38,640 --> 00:19:42,640
गीता ज्ञान दाता बोलने वाला प्रभु ने गलत दे दिया? फिर अब मैं आपसे पूछ

287
00:19:42,640 --> 00:19:46,960
रहा हूं। अब मैं ये कह रहा हूं कि जैसे मैं बोल सकता हूं कि नहीं? बोल सकते हैं। हां

288
00:19:46,960 --> 00:19:51,040
चारों वेदों का ही ज्ञान गीता जी में बोला गया। मैं कब बोलूंगा बस ये बताइए। ना आप

289
00:19:51,040 --> 00:19:55,280
बोलिए। हां। तो आप ये बताइए गीता में कुछ ऐसा लिख दिया जाए

290
00:19:55,280 --> 00:19:59,600
अगर ऐसा अर्थ निकाला जाए जो वेदों के विरुद्ध हो तो आप मानेंगे उसे। वेद विरुद्ध

291
00:19:59,600 --> 00:20:03,600
अगर गीता का अगर मैं मैं देखिए मैंने आपसे जो प्रश्न पूछा वह

292
00:20:03,600 --> 00:20:07,600
बताइए अगर गीता में कुछ ऐसा अर्थ निकाला जाएगा गीता के

293
00:20:07,600 --> 00:20:11,600
श्लोक का जो वेद विरुद्ध होगा तो आप मानेंगे उसे मैं पूछ रहा हूं

294
00:20:11,600 --> 00:20:15,920
मानेंगे तो अथर्ववेद 11 सात 16 में लिखा है ब्रह्मचारी आचार्य

295
00:20:15,920 --> 00:20:20,080
बनता है मनुस्मृति में 12वें अध्याय के 114 से 12 वे अध्याय के 112

296
00:20:20,080 --> 00:20:24,480
से 114 में लिखा है धर्म में संशय होने पर ब्रह्मचारी के पास जाएं अधिष्ठाता

297
00:20:24,480 --> 00:20:29,120
ब्रह्मचारी को बनाएं इसको मानेंगे कि नहीं इसको मानेंगे कि नहीं

298
00:20:29,120 --> 00:20:33,280
इसको नहीं मानेंगे वेद को नहीं मान रहे आप इसलिए नहीं मानेंगे कहीं-कहीं

299
00:20:33,280 --> 00:20:37,600
पर ब्रह्म ज्ञान है और उस पूर्ण ब्रह्म के ज्ञान से अलग है उसका

300
00:20:37,600 --> 00:20:41,680
अपना मनमाना आचरण है इसलिए नहीं मानेंगे उसको हम किसका ब्रह्म

301
00:20:41,680 --> 00:20:45,680
ज्ञान ये मेरा मत गीता में दो प्रकार का ज्ञान है आत्मज्ञान

302
00:20:45,680 --> 00:20:49,680
और ब्रह्म ज्ञान ठीक है ना आत्मान आत्मज्ञान से हमारा आत्म

303
00:20:49,680 --> 00:20:53,840
कल्याण होता है जो परमपिता परमात्मा परम अक्षर पुरुष की भक्ति

304
00:20:53,840 --> 00:20:58,000
करने से प्राप्त होता है और ब्रह्म ज्ञान उसी के स्तर का है इसलिए वो हमें नहीं माने मान्य

305
00:20:58,000 --> 00:21:02,000
है तो नहीं मेरा मत नहीं यह मत उन्होंने कहा यह मेरा मत है यह

306
00:21:02,000 --> 00:21:06,000
मेरा मत है तो आप यहां पर अथर्ववेद की शिक्षा को नहीं मान रहे ना मान

307
00:21:06,000 --> 00:21:10,000
रहे हैं कि नहीं मान रहे हैं अरे आप एक कार्य करिएगा ऑलरेडी पहले से रिक्वेस्ट की जा

308
00:21:10,000 --> 00:21:14,080
चुकी थी कि यह ज्ञान चर्चा का बहस यहां पे नहीं होगा दूसरी बात आप यह बताइए

309
00:21:14,080 --> 00:21:18,160
हम सबके अंदर ईश्वर है कि नहीं बैठेंगे उसका टाइम डेट मिक्स

310
00:21:18,160 --> 00:21:22,160
कीजिए तब करेंगे क्वेश्चन हमारे आपके अकॉर्डिंग होंगे

311
00:21:22,160 --> 00:21:26,320
लेकिन यहां नहीं होंगे आपने यह गलत किया ये सब कर रहे हैं यह गलत

312
00:21:26,320 --> 00:21:30,320
कर रहे हैं आप यह गलत गलत क्यों है? यह गलत क्यों है? भाई साहब

313
00:21:30,320 --> 00:21:34,240
यह गलत क्यों है? कोई मतलब नहीं है। क्यों?

314
00:21:34,240 --> 00:21:38,400
आप बताओ ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता कौन है? ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता

315
00:21:38,400 --> 00:21:42,560
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के रूप में उत्पन्न होते हैं। ब्रह्मा

316
00:21:42,560 --> 00:21:46,720
विष्णु महेश के माता ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता सच्चिदानंद स्वरूप

317
00:21:46,720 --> 00:21:52,560
परमेश्वर जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के रूप में हां प्रमाण

318
00:21:52,560 --> 00:21:57,280
भागवत में दुर्गा जी के बच्चे हम देंगे हम देंगे

319
00:21:57,280 --> 00:22:01,360
हम हम देंगे हम दे तो रहे हैं अब सुन लो आपने प्रश्न पूछा

320
00:22:01,360 --> 00:22:05,760
विष्णु पुराण में विष्णु भगवान ही स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में जब सम्महार

321
00:22:05,760 --> 00:22:09,040
करते हैं हां तो तो यही तो यह

322
00:22:09,040 --> 00:22:13,200
नहीं सब कुछ खत्म कर दो आप आप यह बता दो क्या ईश्वर हम सबके

323
00:22:13,200 --> 00:22:17,200
अंदर है या नहीं नहीं नहीं देवी महापुराण के अंदर है हम सबके अंदर ईश्वर

324
00:22:17,200 --> 00:22:21,200
है या नहीं शक्ति अंदर है परमात्मा की रूप में हां ठीक ठीक अब ये अच्छा

325
00:22:21,200 --> 00:22:25,920
अब ये आया अब ये आया इसप हम लोग बात कर सकते हैं तसल्ली से हमारे अंदर ईश्वर है कि नहीं

326
00:22:25,920 --> 00:22:29,920
हमारे अंदर परमेश्वर की शक्ति है हां जैसे

327
00:22:29,920 --> 00:22:34,240
उसने शब्द रूप में वो जो समर्थ

328
00:22:34,240 --> 00:22:38,240
है वो शब्द रूप सब में व्यापक है। फिर

329
00:22:38,240 --> 00:22:42,560
भी वह संपूर्ण तरीके से पूछ रहा हूं हमारे अंदर ईश्वर

330
00:22:42,560 --> 00:22:46,640
है या नहीं? हम जो हम जो बता रहे हैं वो समझिए कि

331
00:22:46,640 --> 00:22:50,640
ईश्वर की शक्ति भाई मैं हां या ना मैं पूछ रहा हूं। ईश्वर है या नहीं हमारे ईश्वर

332
00:22:50,640 --> 00:22:54,960
हमारे अंदर अपने शक्ति नहीं है और ईश्वर

333
00:22:54,960 --> 00:22:59,040
अच्छा ईश्वर की शक्ति और ईश्वर में अंतर है हां बिल्कुल अंतर है बिल्कुल

334
00:22:59,040 --> 00:23:03,120
अंतर है उस संपूर्ण मालिक असंत

335
00:23:03,120 --> 00:23:07,360
ब्रह्मांड का राजा के समान वो सतलोक में बैठा हुआ है ईश्वर की शक्ति और उसमें

336
00:23:07,360 --> 00:23:11,360
अंतर है हम सभी जीवों के साथ में है। हम सभी आत्माओं

337
00:23:11,360 --> 00:23:15,600
के साथ में है और सब कण-कण में वो व्यापक भी शब्द रूप में है।

338
00:23:15,600 --> 00:23:19,600
लेकिन फिर भी वो राजा के समान सतलोक में विराजमान है। अच्छा हां

339
00:23:19,600 --> 00:23:23,840
ईश्वर की शक्ति और उसमें अंतर है ना? बिल्कुल। अच्छा। इसका मतलब शक्ति

340
00:23:23,840 --> 00:23:24,340
कहीं

341
00:23:24,080 --> 00:23:28,160
ना कहीं ईश्वर से थोड़ी कम होती है। शक्ति भाई वो जितनी देगा सभी जीवों को

342
00:23:28,160 --> 00:23:32,240
उतनी प्राप्त होगी ना। शक्ति और ईश्वर में अंतर है ना? अंतर

343
00:23:32,240 --> 00:23:36,320
मीन संपूर्ण तरीके से वो जो गॉड है, वह फिर भी

344
00:23:36,320 --> 00:23:40,400
बैठा। वह अपनी शक्ति जितनी जीवों को देगा उतने में रहना पड़ेगा। यह प्रश्न

345
00:23:40,400 --> 00:23:44,400
का उत्तर अभी आप नहीं दे पाओगे। हम जो बता रहे हैं यह यह

346
00:23:44,400 --> 00:23:48,480
सिर्फ और सिर्फ फंसाने का मात्र मैटर है। तर्क वितर्क अच्छा मुझे ऐसा

347
00:23:48,480 --> 00:23:52,560
लग रहा था कि मुझे ऐसा लग रहा था कि हम यहां पे कुछ ज्ञान लेने आए हैं। भाई सतलोक का

348
00:23:52,560 --> 00:23:56,720
ज्ञान लिखा हुआ है। अगर ज्ञान लेने आते तो हमारे बताने के हिसाब से जितना

349
00:23:56,720 --> 00:24:01,120
हम कह रहे हैं उतना ही पर्याप्त जो आप बता दो वो मान लें। नहीं हम नहीं बताएंगे।

350
00:24:01,120 --> 00:24:05,280
हमको जो है ना वीडियो भेज देंगे। हां गुरु जी के जो ज्ञान वो देखिए

351
00:24:05,280 --> 00:24:09,440
गुरु जी आपके लिए गुरु जी हैं वह ठीक है वह एक बात अलग है वह एक बात अलग

352
00:24:09,440 --> 00:24:13,520
है नहीं सटीक उत्तर सटीक उत्तर यह मैं आपको मिला कि नहीं उनसे

353
00:24:13,520 --> 00:24:17,680
ज्ञान यह बताइए हमें मिला आपको मिला जो आपको मान्य उसको आप

354
00:24:17,680 --> 00:24:22,640
मैं कहा मान्य नहीं मैं नहीं कह रहा मैं नहीं कह रहा टारगेट आपने मुझे किया

355
00:24:22,640 --> 00:24:26,880
नहीं मैंने ऐसा नहीं कहा मैं आपसे समझना चाह रहा हूं कि यह हिंदू मुस्लिम

356
00:24:26,880 --> 00:24:30,880
सिख ईसाई एक कैसे जिज्ञासु होता और प्यार से बैठकर समझ लेता बहस का

357
00:24:30,880 --> 00:24:35,200
मुद्दा नहीं बनाता मैंने कहा बहस का मुद्दा आपने बना दिया। आपने बना दिया। क्रोधित

358
00:24:35,200 --> 00:24:39,120
तो आप हुए। आपको कहा वीडियो आप क्यों बना रहे? मान ही नहीं रहे। आप रिकॉर्डिंग किए जा रहे हैं। वह वीडियो

359
00:24:39,120 --> 00:24:43,280
बनाए जा रहे हैं। अच्छी चीज को आप अच्छे समझ लीजिए। ये तो अच्छी चीज है ना।

360
00:24:43,280 --> 00:24:47,280
तो ये तो ये तो ये तो अच्छी चीज है। तो लोगों को देखना

361
00:24:47,280 --> 00:24:51,360
चाहिए। जब आपको पहले रिक्वेस्ट करके मना किया गया। ये नहीं करना है।

362
00:24:51,360 --> 00:24:55,360
क्यों कर रहे हैं आप? मैं इसलिए कर रहा हूं लोग जाने। आप अच्छा

363
00:24:55,360 --> 00:25:00,000
आप तो आप जो आप जो सोचोगे वही अंत है। आपको

364
00:25:00,000 --> 00:25:04,640
जो सोचेंगे वही अंत है। क्या हो सकता है? चैनलों पे सारा

365
00:25:04,640 --> 00:25:08,640
तो एक और पे आ जाएगा तो नहीं जानेंगे नहीं आपके माध्यम से नहीं आना है

366
00:25:08,640 --> 00:25:12,720
सनातन सिद्धांत है सनातन सिद्धांत समझना हमारे वहां पे आइए तो फिर आपका

367
00:25:12,720 --> 00:25:16,800
क्यों माना जाए आपका क्यों माना जाए आप मत मानिए मैं आपको मना नहीं रहा हूं आप क्यों

368
00:25:16,800 --> 00:25:20,880
कह रहे हैं कि आपने हमारी बात नहीं मानी हमने आपको कोई मनाने का वो नहीं लिया है

369
00:25:20,880 --> 00:25:25,040
जिम्मेदारी नहीं ली है आपने आप कह रहे हैं ना आपने वीडियो बंद नहीं किया नहीं इन्होंने अपना

370
00:25:25,040 --> 00:25:29,120
कोई नहीं किया इन्होंने जो भी कहा ग्रंथों का तो मैंने मैं लड़ने

371
00:25:29,120 --> 00:25:33,680
नहीं आया हूं मैं यह जानने आया हूं कि यह जो मुस्लिम

372
00:25:33,680 --> 00:25:37,680
चैनलों पे आ रहा है ईश्वर टीवी पे सुबह 6:00 बजे नेपाल वन

373
00:25:37,680 --> 00:25:41,760
पे सुबह 6:00 बजे उसमें जब उसमें जब कोई क्वेरी होगी तो फिर

374
00:25:41,760 --> 00:25:45,600
मैं किससे पूछूं?

375
00:25:45,600 --> 00:25:50,320
कब आऊं? अच्छा बताइए। मैं आपसे नंबर फोन कर लूं। ठीक है। ठीक।

376
00:25:50,320 --> 00:25:54,400
ठीक है। तो यह फिलहाल हम लोग महोत्सव में आए हैं

377
00:25:54,400 --> 00:25:59,440
और यहां पर यह जो सतलोक आश्रम का लखनऊ

378
00:25:59,440 --> 00:26:03,440
यह यहां पर स्टॉल लगा हुआ है। हमने आकर के कुछ इनसे प्रश्न पूछे जैसे

379
00:26:03,440 --> 00:26:07,600
कि यहां पर कहा जाता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता जो है वो

380
00:26:07,600 --> 00:26:11,760
कोई और है। मतलब एक और एक और एक एंटिटी है

381
00:26:11,760 --> 00:26:15,840
जिसको यह ब्रह्म कहते हैं और उनके ऊपर भी वह कबीर है जिन्हें हम यह

382
00:26:15,840 --> 00:26:20,080
जानते हैं कि जो कबीर थे वो रामानुजाचार्य परंपरा से दीक्षित थे और विष्णु

383
00:26:20,080 --> 00:26:24,080
भगवान की पूजा करते थे। मगर यहां पर यह सिखाया जा रहा है कि वो विष्णु की

384
00:26:24,080 --> 00:26:28,160
पूजा नहीं करते थे। वो स्वयं परमेश्वर थे। वो सिखा के गए कि मैं परमेश्वर हूं। मेरी जो

385
00:26:28,160 --> 00:26:32,400
है पूजा करिए। इसके साथ ही साथ यहां पर यह भी सिखाया जाता है कि

386
00:26:32,400 --> 00:26:36,480
जो दुर्गा माता है उनके जो पति है वास्तविकता में वो वो ब्रह्म

387
00:26:36,480 --> 00:26:40,640
है। वो शिव जी नहीं है। शिवजी अलग है, शिवजी अलग है, ब्रह्म अलग

388
00:26:40,640 --> 00:26:44,800
है, काल अलग है। दूसरी बात यह भी सिखाया जाता है कि इस्लाम के द्वारा

389
00:26:44,800 --> 00:26:48,800
प्रतिपादित होने वाला धर्म और जो सनातन धर्म ग्रंथ है उनके द्वारा प्रतिपादित

390
00:26:48,800 --> 00:26:52,880
होने वाला धर्म एक ही है। तो यह सारी चीजों पर जब हमने यहां पर आकर के

391
00:26:52,880 --> 00:26:57,040
बात की तो यहां पर जो अंतिम उत्तर प्राप्त हुआ है वो यह हुआ है कि आप समय

392
00:26:57,040 --> 00:27:01,200
ले लीजिए। समय ले लीजिए और फिर आप आइएगा।

393
00:27:01,200 --> 00:27:06,080
रिकॉर्ड भेज रहे हैं ना। नहीं तो आप आपने क्या कहा है अभी अंत में क्या कहा आपने?

394
00:27:06,080 --> 00:27:10,400
का एक ही है। जो परमेश्वर आता है वो सबका

395
00:27:10,400 --> 00:27:14,400
पिता है। उनका धर्म एक है। तो इस्लाम क्या है? यह बताइए। इस्लाम ये सब

396
00:27:14,400 --> 00:27:18,640
काल ने पैदा किया है। सब तमाम धर्म बहुत से धर्म पंथ जो पूरे विश्व में चल

397
00:27:18,640 --> 00:27:22,720
रहे हैं। सैकड़ों इस्लाम क्या है? हो चाहे

398
00:27:22,720 --> 00:27:27,120
कुछ भी हो कोई हो वो सब काल ब्रह्म द्वारा प्रतिपादित हैं। और परमात्मा

399
00:27:27,120 --> 00:27:31,120
का धर्म एक है। उसमें हिंदू मुस्लिम नहीं होता। परमात्मा का धर्म एक है। वो सनातन

400
00:27:31,120 --> 00:27:35,360
है। इस्लाम क्या है? तो है लेकिन वह सनातन को खोजना है।

401
00:27:35,360 --> 00:27:39,920
मुस्लिम धर्म है सिख ईसाई धर्म है। अरे यार इसका

402
00:27:39,920 --> 00:27:44,160
कोई मतलब नहीं निकल रहा भगत जी ये सब कोई ठीक है। धर्म बताने

403
00:27:44,160 --> 00:27:48,160
परमात्मा स्वयं आते हैं। ये इस टाइम ये बहस नहीं हो पाएगी।

404
00:27:48,160 --> 00:27:52,320
ठीक है ना? अंत का आपको जब भी समय मिलता है डेट समय फिक्स करके

405
00:27:52,320 --> 00:27:56,320
आइए। बैठते हैं। बता दें। ठीक है ना? और जैसे

406
00:27:56,320 --> 00:28:00,720
देखिए हमारा जो आपसे ज्ञान चर्चा या आप जो जानकारी

407
00:28:00,720 --> 00:28:05,920
ठीक है ना? मतलब मतलब यह जो मनुष्य की चाह हैित की चाह वो

408
00:28:05,920 --> 00:28:10,080
इसी में कंप्लीट हो जाएगी इसी में आप सीमित कर रहे हैं ना आप सीमित

409
00:28:10,080 --> 00:28:14,560
कर रहे हैं हम हम सीमित नहीं कर रहे हैं हम सीमित नहीं कर रहे हैं

410
00:28:14,560 --> 00:28:16,480
ये जो क्वेश्चन इसमें 13 प्रश्न

411
00:28:16,480 --> 00:28:20,480
है इसी में आप जो पूछ रहे हैं इसी में कंप्लीट आंसर आ जाएगा अगर इसके

412
00:28:20,480 --> 00:28:24,480
बाहर का मेरा प्रश्न हुआ तो आप देंगे जवाब अगर मेरे पास बाहर का प्रश्न हुआ तो जवाब

413
00:28:24,480 --> 00:28:28,880
मिलेगा बाहर का प्रश्न यदि हमारे इन चारों धर्मों के पवित्र शास्त्रों

414
00:28:28,880 --> 00:28:32,880
के आधार पर अलग होगा उसमें उसमें प्रमाणित नहीं होगा तो वो मान्य

415
00:28:32,880 --> 00:28:36,880
नहीं होगा उसको हम नहीं मानेंगे। अच्छा बस तो ये कौन

416
00:28:36,880 --> 00:28:41,120
तय करेगा कि इसमें शास्त्र में दिया है कि नहीं दिया है? हमारे

417
00:28:41,120 --> 00:28:45,520
सद ग्रंथ तो ये तो आपके है ना मैं आपको ब्रह्मसूत्र से बता रहा हूं। अथातो

418
00:28:45,520 --> 00:28:49,520
ब्रह्म जिज्ञासा इसको मानेंगे कि नहीं? नहीं हमारे क्यों आपके नहीं

419
00:28:49,520 --> 00:28:53,680
है। तो फिर हमारे क्यों कह दिया आपने? हमारे आप सबके हैं ना? यह आपके

420
00:28:53,680 --> 00:28:57,680
हैं। यह हमारे नहीं है। यह आपके हैं। हमारे यह यह नहीं

421
00:28:57,680 --> 00:29:01,840
यह यह देखिए देखिए ऐसे मैं भी आपको गीता लाके दूंगा।

422
00:29:01,840 --> 00:29:06,640
आप मान लोगे उसको जो गीता मैं ला के दूंगा उसको मान लोगे आप?

423
00:29:06,640 --> 00:29:11,040
मैं आपसे पूछ रहा हूं। मैं आपको लाके दूंगा गीता है। मैं

424
00:29:11,040 --> 00:29:15,040
आपको गीता ला के दूंगा मान लोगे क्या? मैं गीता ला के दूंगा मान लोगे?

425
00:29:15,040 --> 00:29:19,200
कितना मेरे मानने के तो ये ये किस परिमाप पे निर्धारित होगा?

426
00:29:19,200 --> 00:29:23,520
कितना मानने के लायक है? इसका पैरामीटर क्या है?

427
00:29:23,520 --> 00:29:27,600
मतलब भाई किसी किताब से कितना मानना है कितना

428
00:29:27,600 --> 00:29:31,600
नहीं मानना है किस पे आधारित है प्रैक्टिकल पर क्या प्रैक्टिकल है जिस

429
00:29:31,600 --> 00:29:35,760
चीज का प्रैक्टिकल हो वही सही है ना सब तो प्रैक्टिकल के नियम क्या है प्रैक्टिकल

430
00:29:35,760 --> 00:29:39,920
के नियम उसी में दिए हैं उसी में दिया है नियम क्या नियम

431
00:29:39,920 --> 00:29:43,920
किस में दिया है आपकी में गीता में रामायण में हां तो

432
00:29:43,920 --> 00:29:48,080
प्रैक्टिकल के नियम तो यह है कि राम जब जन्म लेगा तो वशिष्ठ के पास जाएगा उसके अनुसार

433
00:29:48,080 --> 00:29:52,080
भ्रमण मिलेगा कबीर अपने गुरु का ज्ञान नहीं दे रहे हैं आपके हिसाब से वो अपना

434
00:29:52,080 --> 00:29:56,080
ज्ञान दे रहे हैं तो इसका अर्थ क्या हुआ? प्रैक्टिकल का नियम खारिज हो गया।

435
00:29:56,080 --> 00:30:00,080
है श्रेष्ठ के रचयता अपना ज्ञान तो देंगे ही। उन्होंने स्वयं कहा वेदों में भी कहा है

436
00:30:00,080 --> 00:30:05,280
कि मैं अपने द्वारा रचित श्रेष्ठ ज्ञान स्वयं आकर देता हूं। ठीक है।

437
00:30:05,280 --> 00:30:08,240
ठीक है।

438
00:30:08,240 --> 00:30:12,720
इस दुनिया में जितने भी गुरु हैं, शंकराचार्य हैं, आचार्य हैं।

439
00:30:12,720 --> 00:30:16,880
उनको किसी को भी वो यथार्थ ज्ञान नहीं पता है जो कबीर साहब ने बताया है, दिया

440
00:30:16,880 --> 00:30:20,960
है दुनिया को। आपने जो अंत में कहा है ना यह जो क्या

441
00:30:20,960 --> 00:30:25,440
कहते हैं कि उन्होंने दिया परिचय मेरा नाम शिवश नारायण द्विवेदी मैं परिचय

442
00:30:25,440 --> 00:30:29,600
मैं अभी बताता हूं अभी बताता हूं मेरा कहना बस यह है कि आप यह

443
00:30:29,600 --> 00:30:33,600
कह रहे हैं कि रामानुजाचार्य परंपरा से रामानंद चार चार तक जो

444
00:30:33,600 --> 00:30:37,680
ज्ञान आया वो कबीर जी ने नहीं दिया अपने पास से नया ज्ञान दिया क्योंकि वह

445
00:30:37,680 --> 00:30:41,920
स्वयं परमेश्वर हैं। अब बात कही इसमें बहुत सारी बातें आ जाती है।

446
00:30:41,920 --> 00:30:46,080
दूसरी बात आप बनारस चले जाओ और रामानंद जी के आश्रम

447
00:30:46,080 --> 00:30:50,080
चले जाओ। वहां पता कर लो देखिए कि उनकी गद्दी रामानंद

448
00:30:50,080 --> 00:30:54,080
जी के बाद उनकी गद्दी पर कौन बैठा बस वो खुद कबीर

449
00:30:54,080 --> 00:30:58,160
साहब को बताएंगे अरे अरे कबीर साहब को बताएंगे वो ठीक है

450
00:30:58,160 --> 00:31:02,320
मगर ज्ञान अगर बदल गया तो वो सनातन ज्ञान कहां से रहा बदला ही नहीं गया ना

451
00:31:02,320 --> 00:31:06,400
जो जिन्होंने बदला वो गलत किया तो कह रहे हो जो गुरु ने जो ज्ञान दिया था परंपरा

452
00:31:06,400 --> 00:31:10,480
से वो ज्ञान कभी उन्होंने नहीं दिया है यही तो कह रहे हो अरे मैंने नहीं कहा परंपरा अभी भी चली

453
00:31:10,480 --> 00:31:14,560
अभी आप लोग परसों कह रहे थे ना आपने आपका रिकॉर्ड है वो परमात्मा है तो परमात्मा

454
00:31:14,560 --> 00:31:18,560
आपने ज्ञान नहीं रिकॉर्ड है नहीं नहीं मानेंगे नहीं हम नहीं मानते

455
00:31:18,560 --> 00:31:22,640
क्योंकि हमने है कि गुरु ने जो ज्ञान उनको दिया था वो गुरु का ज्ञान उन्होंने आगे

456
00:31:22,640 --> 00:31:23,360
नहीं बढ़ाया उन्होंने

457
00:31:23,360 --> 00:31:27,520
अपना ज्ञान दिया है फिर नहीं तो परमात्मा तो अपना देगा ना परमा गुरु

458
00:31:27,520 --> 00:31:31,840
का ज्ञान आगे नहीं बढ़ाया ना जब परमात्मा मैं पूछ रहा हूं गुरु का ज्ञान आगे बढ़ाया

459
00:31:31,840 --> 00:31:35,920
कि नहीं आप वहां चले जाओ रामानंद जी के आश्रम में कोई मतलब नहीं चलिए

460
00:31:35,920 --> 00:31:41,040
खैर हमारा कहना बस इतना था

461
00:31:41,040 --> 00:31:45,440
मेरा परिचय है शिवश नारायण द्विवेदी पूरी शंकराचार्य

462
00:31:45,440 --> 00:31:49,760
पूरी के शंकराचार्य जी का शिष्य हूं और और मेरा

463
00:31:49,760 --> 00:31:53,840
कार्य बस इतना है कि जो तथाकथित विचारधाराओं

464
00:31:53,840 --> 00:31:57,920
के आधार पर जो सनातन धर्म बट रहा है वो जो इस तरह का शोधन

465
00:31:57,920 --> 00:32:01,920
कार्य है वो कर करके लोगों को एक मत किया जाए इकट्ठा किया जाए जिससे

466
00:32:01,920 --> 00:32:06,240
कि लोग संगठित हो सुरक्षित हो विभिन्न विचारधाराओं के कारण अलग-अलग

467
00:32:06,240 --> 00:32:10,320
मत पंथ बन जाने के कारण हमारा समाज बढ़ चुका है जिसकी

468
00:32:10,320 --> 00:32:14,480
वजह से हां अब आप लोग अब आप

469
00:32:14,480 --> 00:32:18,480
नहीं होगा क्योंकि आपकी जो विचारधारा है आपने अभी कहा

470
00:32:18,480 --> 00:32:22,800
मैं वेद को नहीं मानूंगा आपने कहा आपने कहा अथर्ववेद 11

471
00:32:22,800 --> 00:32:28,800
7 16 मैंने कहा गीता का ऐसा अर्थ आपको

472
00:32:31,040 --> 00:32:35,120
तो ये ये जो सार है ये आप मान रहे हो मुझे सिद्ध तो करो इसको

473
00:32:35,120 --> 00:32:39,440
कि ये सार है उसका किसका अरे

474
00:32:39,440 --> 00:32:42,720
क्या सामने लेके आऊं

475
00:32:42,720 --> 00:32:47,680
अच्छा आप आप ले इसमें जो लिखा है वो लेके आइए ले आएंगे आप लाइए

476
00:32:47,680 --> 00:32:51,680
तो फिर बात तो वही हो गई जो जैसे आप किताब में छपा हुआ दे रहे हो मैं अपने

477
00:32:51,680 --> 00:32:56,000
मुंह से बोल रहा हूं में आए हो इमरजेंसी में भाई आपने स्टॉल लगाया

478
00:32:56,000 --> 00:33:00,000
हुआ है इमरजेंसी है क्या ये आप अपनी मनमर्जी से

479
00:33:00,000 --> 00:33:04,160
व्यवस्था करने के लिए आए अरे बैठ के ही बात करने आए थे अब ये गरम होने लगे

480
00:33:04,160 --> 00:33:08,160
ये वाले भैया ये इनका इनका सीन है ये

481
00:33:08,160 --> 00:33:12,160
गरम हुए थे इनका आप इनकी आप रिकॉर्डिंग इनकी रिकॉर्डिंग देखिएगा आप

482
00:33:12,160 --> 00:33:16,320
चलो आश्रम वहां हरियाणा चलिए मेरे साथ आप चलेंगे जहां मैं ले जाऊंगा।

483
00:33:16,320 --> 00:33:21,200
आपको मैं तो आपके स्टॉल तक आया हूं। आप चलेंगे मेरे साथ।

484
00:33:21,200 --> 00:33:25,440
तो फिर वही बात हो गई ना? भाई साहब आप आना अपने

485
00:33:25,440 --> 00:33:29,680
पवित्र सदग्रंथ लेकर के तो मैं तो मैं तो अपना बोल रहा हूं ना कोट

486
00:33:29,680 --> 00:33:33,680
कर तो रहा हूं। अगर ये सदग्रंथ तो आप ये सद ग्रंथ है

487
00:33:33,680 --> 00:33:38,560
आपका। चलिए ना मेरे जनता को भी दिखाना पड़ेगा।

488
00:33:38,560 --> 00:33:43,200
पवित्र सदग्रंथ लेके आइए। तो यह सदग्रंथ पवित्र है। यह सिद्ध करो ना।

489
00:33:43,200 --> 00:33:46,320
यह कैसे समय तो दीजिए तो यानी आपके पास भी इस समय सिद्ध

490
00:33:46,320 --> 00:33:50,800
नहीं हो रहा है नहीं चलिए

491
00:33:50,800 --> 00:33:54,800
ठीक है लखनऊ महोत्सव में हिंदुओं को अपना ब्रेन वाश

492
00:33:54,800 --> 00:33:58,800
कराना है तो लखनऊ महोत्सव में आइए अपने बच्चों को लेकर

493
00:33:58,800 --> 00:34:03,120
के और ब्रेन वाश कराइए माननीय योगी जी से मैं यह कहना चाहूंगा

494
00:34:03,120 --> 00:34:07,120
कि अगर वो महादेव की पूजा करते हैं मां भगवती की पूजा करते

495
00:34:07,120 --> 00:34:11,280
हैं महाकालेश्वर में मंदिरों के निर्माण करवाते हैं तो ऐसे स्टॉल

496
00:34:11,280 --> 00:34:15,440
क्यों लगने देते हैं महोत्सव में। मैं यह कहना चाहूंगा माननीय योगी जी से

497
00:34:15,440 --> 00:34:19,440
कि उनको क्यों अनुमति दी जाती है? जब वह कहते हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश के पिता कोई और

498
00:34:19,440 --> 00:34:23,600
है। और दुर्गा दुर्गा के जो पति हैं वो शिव जी नहीं है। वो

499
00:34:23,600 --> 00:34:27,680
कोई और है जिसका नाम ब्रह्म है। ये वो ब्रह्म नहीं है। जो खुद ही जीव जगत और

500
00:34:27,680 --> 00:34:31,840
जगदीश्वर के रूप में प्रकट होता है। वो ब्रह्म नहीं है। ध्यान रखिएगा। और सबसे बड़े वाले जो

501
00:34:31,840 --> 00:34:36,000
परमेश्वर है वो कबीर जी है। कबीर जी कौन? जो खुद गोविंद के पुजारी थे।

502
00:34:36,000 --> 00:34:40,240
तो ऐसे स्टॉल आप लोग लगवाते हैं अनुमति बढ़ता है और इनकी

503
00:34:40,240 --> 00:34:44,480
जो पहली लाइन पे जो ये सब भ्रामक शिक्षाएं लिखी हुई है जिसकी

504
00:34:44,480 --> 00:34:48,960
वजह से समाज में विकृति आती है।

505
00:34:48,960 --> 00:34:54,960
भाई साहब अपना कोई प्रमाण कार्ड देंगे कोई कार्ड का

506
00:34:56,880 --> 00:35:00,960
दोहरे अर्थ वाली बातों के आधार पर सनातन को इस्लाम

507
00:35:00,960 --> 00:35:05,040
के साथ नहीं मिलाया जा सकता है। जो इन्होंने बात कही है

508
00:35:05,040 --> 00:35:09,360
भगवान एक जगह कह रहे हैं कि मैं अजन्मा अविनाशी हूं। दूसरी जगह कह रहे हैं तेरे

509
00:35:09,360 --> 00:35:13,360
मेरे कई बार जन्म हो चुके हैं। तो एक जगह परमार्थ की बात हो रही है

510
00:35:13,360 --> 00:35:17,520
कि हां ईश्वर वो है जिसका जिसका जिसको किसी ने जन्म नहीं दिया जिसका कभी जन्म

511
00:35:17,520 --> 00:35:21,600
नहीं होता। मगर व्यवहार में ईश्वर का जन्म होता है। ईश्वर जन्म लेता है, अवतार

512
00:35:21,600 --> 00:35:25,920
लेता है, प्रकट होता है। और भगवान ने यह बात कही भी है कि मैं अजन्मा

513
00:35:25,920 --> 00:35:30,640
अविनाशी होते हुए भी सभी भूतों का ईश्वर होते हुए भी

514
00:35:30,640 --> 00:35:34,800
योग माया को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं। मैं अपना सृजन

515
00:35:34,800 --> 00:35:38,960
करता हूं। तो इसके आधार पर क्या सनातन

516
00:35:38,960 --> 00:35:43,120
को इस्लाम के साथ समतुल्य बताया जा सकता है? नहीं बताया जा सकता।

517
00:35:43,120 --> 00:35:47,200
इसके अलावा यह जो बात है यह भगवान के बारे में ब्रह्म के स्वरूप के बारे

518
00:35:47,200 --> 00:35:51,360
में है और धर्म क्या है जिससे कि ब्रह्म को प्राप्त किया जाता है।

519
00:35:51,360 --> 00:35:55,520
तो धर्म और ईश्वर में अंतर है। मैं माननीय योगी जी से भी

520
00:35:55,520 --> 00:35:59,520
कहना चाहूंगा कि वह इसे संज्ञान में लें। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं

521
00:35:59,520 --> 00:36:03,680
है कि वह संत कबीर दास जी को ईश्वर कहें। इससे कोई आपत्ति नहीं

522
00:36:03,680 --> 00:36:07,840
है। मगर यह शिक्षा देते समय वह वेद, उपनिषद, पुराण

523
00:36:07,840 --> 00:36:11,920
इनका संदर्भ ना लें। अपने ग्रंथ स्वयं लिखें। उसके आधार पर

524
00:36:11,920 --> 00:36:16,000
वो उन्हें अगर ईश्वर मानते हैं तो माने हमें कोई आपत्ति नहीं है। मगर वो

525
00:36:16,000 --> 00:36:20,240
इन ग्रंथों के आधार पर जो परंपरा प्राप्त हमारे जो धर्म ग्रंथ हैं इनके आधार

526
00:36:20,240 --> 00:36:24,320
पर वो ब्रह्मा विष्णु महेश के समतुल्य या उससे श्रेष्ठ किसी और

527
00:36:24,320 --> 00:36:28,560
को बताने की चेष्टा करते हैं। जबकि संत कबीर दास जी स्वयं भगवान

528
00:36:28,560 --> 00:36:32,560
विष्णु के भक्त थे। यह हम सभी जानते हैं। कितने सारे उनके

529
00:36:32,560 --> 00:36:36,560
दोहे हैं विष्णु भगवान की भक्ति को समर्पित और आज संत कबीर दास जी

530
00:36:36,560 --> 00:36:40,880
की आड़ में अपने मंतव्यों की पूर्ति हेतु भ्रामक शिक्षा का प्रचार प्रसार

531
00:36:40,880 --> 00:36:45,040
किया जा रहा है। इसीलिए मैं माननीय योगी जी से कहना चाहूंगा कि इसे

532
00:36:45,040 --> 00:36:49,200
संज्ञान में ले और इस पर कार्रवाई करें और जो लोग इस वीडियो को देख रहे हैं मैं

533
00:36:49,200 --> 00:36:53,200
उनसे भी कहना चाहूंगा कि आप भी अपने आसपास जब ऐसी शिक्षा

534
00:36:53,200 --> 00:36:57,200
का प्रचार प्रसार होते हुए देखें जहां पर ईश्वर को बाधित किया जा रहा है

535
00:36:57,200 --> 00:37:01,200
सनातन धर्म ग्रंथों के साथ जहां पे ऐसे धर्म के बारे में बात

536
00:37:01,200 --> 00:37:05,200
की जा रही है जो बदलता है सनातन धर्म ग्रंथों के साथ या फिर जहां

537
00:37:05,200 --> 00:37:09,280
पर ऐसा ज्ञान दिया जा रहा है जो परंपरा प्राप्त आचार्यों से नहीं मिला है

538
00:37:09,280 --> 00:37:13,280
तो वहां पर तुरंत ऐसे प्रचार प्रचार प्रसार को रोकिए। ऐसी शिक्षा का

539
00:37:13,280 --> 00:37:17,280
प्रतिकार करिए।
