1
00:00:07,120 --> 00:00:11,360
और एक अनाउंसमेंट और कर दूं मैं आपको बहुत जल्द देखिए बहुत

2
00:00:11,360 --> 00:00:15,760
सारे तरीके अपनाए जा रहे हैं रामपाल का

3
00:00:15,760 --> 00:00:20,000
जो उसे रोकने के लिए रामपाल की चीजों का प्रतिकार

4
00:00:20,000 --> 00:00:24,000
कर रहे हैं लोग अपनेप हिसाब से और आधिकारिक रूप से ऑफिशियली

5
00:00:24,000 --> 00:00:28,400
हमने भी कर रखा है हाई कोर्ट में केस अभी चल ही रहा है एफआईआर

6
00:00:28,400 --> 00:00:32,480
दर्ज है वो सब तो है पर अभी एक बहुत बड़ा धमाका हम

7
00:00:32,480 --> 00:00:37,360
लोग करने जा रहे हैं। है ना? आपको बहुत जल्द कुछ

8
00:00:37,360 --> 00:00:41,440
ही दिनों में एक बहुत सारी ऐसी चीजें मिलने वाली है कि आपको भी आनंद

9
00:00:41,440 --> 00:00:45,680
आ जाएगा रामपाल के उसमें कि हां अब कुछ हुआ है।

10
00:00:45,680 --> 00:00:49,760
जैसे हम जब करते हैं तो बिल्कुल 100 सुनार की एक लोहार की वाला काम करते हैं। कुछ वैसा ही

11
00:00:49,760 --> 00:00:54,000
है। अभी डिस्क्लोज नहीं कर रहे हैं। चालू कर देंगे तब आपको आनंदमई

12
00:00:54,000 --> 00:00:59,120
चीजें देंगे। और वो कहते हैं ना वो

13
00:00:59,120 --> 00:01:03,200
झूठे की हद तक और चोर के घर तक कुछ ऐसा ही

14
00:01:03,200 --> 00:01:07,520
है। इसमें जो भी होगा आपको बहुत आनंद आएगा।

15
00:01:07,520 --> 00:01:11,680
बढ़च के आप उसमें पार्टिसिपेट कर सकते

16
00:01:11,680 --> 00:01:15,760
हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] इसके

17
00:01:15,760 --> 00:01:20,160
साथ ही साथ

18
00:01:20,160 --> 00:01:24,240
ये जो वीडियोस होते हैं रामपाल से संबंधित अथवा हमारे चैनल पर

19
00:01:24,240 --> 00:01:28,240
जितने भी पड़े उसका आप जो बिना उसमें मतलब मिलावट के जैसे हमारे

20
00:01:28,240 --> 00:01:32,320
शब्दों को हमारे भाव को बदले बिना जहां भी आप यूज़ करना चाहते हैं कर सकते हैं।

21
00:01:32,320 --> 00:01:36,400
बस ऐसा ना हो कि मैंने बोला यस मैंने बोला यहां से मत जाना। तो

22
00:01:36,400 --> 00:01:40,400
आपने उसका मत काट दिया। यहां से जाना ऐसा नहीं करना।

23
00:01:40,400 --> 00:01:45,920
ठीक है? आप अपने अनुसार उनका उपयोग कर सकते हैं। और इसमें

24
00:01:45,920 --> 00:01:50,000
यह जो सीरीज है इसमें कभी-कभी

25
00:01:50,000 --> 00:01:54,080
बहुत जरूरी मैं ऐसी चीजें बताऊंगा। उसको कह

26
00:01:54,080 --> 00:01:58,160
सकते हैं की पॉइंट्स रामपाल के विषय में। तो वो की पॉइंट्स भी आप अगर

27
00:01:58,160 --> 00:02:02,320
एकत्रित करते रहेंगे ना तो वही पर्याप्त होगा रामपाल का मुंह धुआं कर देना। मुंह

28
00:02:02,320 --> 00:02:06,400
सूख जाए रामपाल। जैसे आज का मैं आपको की पॉइंट एक बताने

29
00:02:06,400 --> 00:02:10,800
वाला हूं।

30
00:02:10,800 --> 00:02:15,040
आप चाहे तो यहां से इसको कट करके और रील के रूप में अपने Instagram

31
00:02:15,040 --> 00:02:19,680
वगैरह जो भी आपका सोशल मीडिया हैंडल हो उस पर आप डाल सकते हैं।

32
00:02:19,680 --> 00:02:23,680
और मुझे कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली है जिसमें ये लोग यही सब बातें कर रहे हैं

33
00:02:23,680 --> 00:02:27,680
कि आप इतने वीडियोस बनाइए। आप आप भगत जी आप इतना बनाइए। एक भगत जी को

34
00:02:27,680 --> 00:02:31,680
10 वीडियोस बनाने हैं। इस तरह की रिकॉर्डिंग्स मेरे पास आई हैं। इनकी लीक हुई है

35
00:02:31,680 --> 00:02:35,840
रिकॉर्डिंग्स। तो यह इस तरह से काम करते हैं। एक-एक व्यक्ति को प्रेशराइज करते

36
00:02:35,840 --> 00:02:39,920
हैं अपने भगत को कि वीडियो बना वीडियो बना क्योंकि यह जो भी कुछ कर सकते

37
00:02:39,920 --> 00:02:44,080
हैं सोशल मीडिया पे ही कर सकते हैं। धरातल पर ये आपको अपने उस

38
00:02:44,080 --> 00:02:48,160
रूप में नहीं मिलेंगे कभी भी जिस रूप पर सोशल मीडिया पर धरातल

39
00:02:48,160 --> 00:02:52,160
पर ये आपको बकरी बकरी बन के मिलेंगे और सोशल मीडिया पर

40
00:02:52,160 --> 00:02:56,240
आपको ये शेर बन के मिलेंगे। ठीक है? तो ये प्रेशराइज

41
00:02:56,240 --> 00:03:00,640
करते हैं कि भाई वीडियो बनाओ वीडियो बनाओ। तो आप लोग भी वीडियो बनाइए।

42
00:03:00,640 --> 00:03:04,640
आप स्वयं नहीं बना सकते तो हम लोग हम लोगों के वीडियोस की कटिंग कर करके एक

43
00:03:04,640 --> 00:03:08,640
एक दोद मिनट के जो भी आपको पार्ट अच्छा लगता है वो करिए और

44
00:03:08,640 --> 00:03:13,520
अभी जो मैं बोलने जा रहा हूं उसको जरूर कट कर लीजिएगा ठीक है

45
00:03:13,520 --> 00:03:17,600
तो रामपाल के अनुसार रामपाल

46
00:03:17,600 --> 00:03:21,680
वेद गीता जो शास्त्र है

47
00:03:21,680 --> 00:03:26,320
शास्त्र सम्मत चीजें बताता है ज्ञान देता है

48
00:03:26,320 --> 00:03:30,400
और रामपाल ने ही बताया है कि हमारे शास्त्रों में शिव शिव

49
00:03:30,400 --> 00:03:34,720
दुर्गा काली की पूजा को निषेध किया गया है। व्रत करने को निषेध

50
00:03:34,720 --> 00:03:38,720
किया गया है। या इस तरह के श्राद्ध इत्यादि

51
00:03:38,720 --> 00:03:42,960
कर्म है जो उनको निषेध किया गया है। है ना? या फिर और ऐसी

52
00:03:42,960 --> 00:03:47,040
जो भक्ति भक्ति विधि विषयक बातें हैं उसमें मना की गई।

53
00:03:47,040 --> 00:03:51,040
गीता का आधार लेकर के या जो भी आधार लेकर के वो बताता है। एक निचोड़ वाली

54
00:03:51,040 --> 00:03:55,360
बात आपको बता रहा हूं। बहुत पॉइंट की बात है। तो हमारे शास्त्रों

55
00:03:55,360 --> 00:03:59,520
ने जो जो चीजें हम कर रहे हैं उनको निषेध

56
00:03:59,520 --> 00:04:03,840
किया है। अगर हम ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा कर रहे हैं भगवान को

57
00:04:03,840 --> 00:04:08,080
उनको परमेश्वर के रूप में स्वीकार करके तो वो उसका निषेध करते हैं हमारे

58
00:04:08,080 --> 00:04:12,160
शास्त्र। तो हमारे शास्त्रों का निचोड़ है कि हम जो जो काम

59
00:04:12,160 --> 00:04:16,480
परंपरागत रूप से करते चले आ रहे हैं वह हमें नहीं करना। ठीक है?

60
00:04:16,480 --> 00:04:21,760
अब बात यह आती है कि यदि हमारे शास्त्र ही ऐसा कह रहे हैं

61
00:04:21,760 --> 00:04:26,000
यदि हमारे शास्त्र ही ऐसा कह रहे हैं तो फिर यह चीजें हमारे

62
00:04:26,000 --> 00:04:30,080
पास आई कहां से? हमने ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करना चालू कहां

63
00:04:30,080 --> 00:04:34,080
से किया? कभी ये सोचा? जब गीता ही मना कर

64
00:04:34,080 --> 00:04:38,480
रही है कि कृष्ण जी भगवान नहीं है। जब गीता जी ही मना कर रही हैं

65
00:04:38,480 --> 00:04:41,520
कि वो इसका

66
00:04:41,520 --> 00:04:45,520
रामपाल के अनुसार हमारे शास्त्रों में ज्यादातर इस बारे में बात की

67
00:04:45,520 --> 00:04:49,600
गई कि क्या-क्या नहीं करना है। समझ रहे हैं कि आपको

68
00:04:49,600 --> 00:04:53,600
ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं करनी है। आपको ये ये नहीं

69
00:04:53,600 --> 00:04:57,840
करना है। नहीं करना बात तब होती है जब कोई कर रहा है। तो क्यों

70
00:04:57,840 --> 00:05:02,080
कर रहे हैं? अब अगर आप यह कहेंगे कि आपने इनहीं शास्त्रों

71
00:05:02,080 --> 00:05:06,160
का गलत मतलब निकाल लिया था। इनहीं शास्त्रों का आपने

72
00:05:06,160 --> 00:05:10,160
गलत मतलब निकाल लिया था। यह शास्त्र तो मना कर रहे थे। गीता तो मना

73
00:05:10,160 --> 00:05:14,560
कर रही है। पुराण तो मना कर रहे हैं। वेद तो मना कर रहे हैं। तो

74
00:05:14,560 --> 00:05:18,560
अगर हमने गलत मतलब निकाल भी लिया और यह शास्त्र वो है जो मना

75
00:05:18,560 --> 00:05:22,720
कर रहे हैं। तो इससे पहले वह कौन से शास्त्र थे जिसमें इनकी पूजा बताई

76
00:05:22,720 --> 00:05:27,040
गई है? उसका प्रमाण क्या है? तुम्हारे हिसाब से इसमें

77
00:05:27,040 --> 00:05:31,040
इनकी पूजा नहीं बताई गई है। इसमें और भी चीजें हैं जो मना की गई

78
00:05:31,040 --> 00:05:35,360
है। यह सारे शास्त्र इसी से ओतप्रोत है। ब्रह्मा

79
00:05:35,360 --> 00:05:39,680
विष्णु महेश की भक्ति नहीं करनी है या कृष्ण जी को परमेश्वर

80
00:05:39,680 --> 00:05:43,760
नहीं मानना है जो भी है निषेध किया है जो

81
00:05:43,760 --> 00:05:47,760
हमारे अकॉर्डिंगली वेद, गीता, पुराण इत्यादि

82
00:05:47,760 --> 00:05:51,920
जो धर्म शास्त्र है उनके अनुसार यह जो चीजें हैं जो हम कर रहे हैं वो बताई

83
00:05:51,920 --> 00:05:55,920
गई है। तुम्हारे अनुसार इनका नाम लेकर के मना किया गया है।

84
00:05:55,920 --> 00:05:56,560
यह यह नहीं

85
00:05:56,560 --> 00:06:00,560
करना है। नाम लेकर के तो यह इन शास्त्रों का जो अस्तित्व है वह

86
00:06:00,560 --> 00:06:04,560
इस बात में है कि हमको ये ये नहीं करना है। तो यह

87
00:06:04,560 --> 00:06:08,640
सब चीजें हमारे पास आई कहां से? इसका प्रमाण क्या

88
00:06:08,640 --> 00:06:11,200
है?

89
00:06:11,200 --> 00:06:15,200
हमारे पास तो यह सब चीजें हैं। हमारे अनुसार तो इनहीं शास्त्रों से आई

90
00:06:15,200 --> 00:06:19,600
है। मगर इन शास्त्रों का सही अर्थ है कि यह शास्त्र

91
00:06:19,600 --> 00:06:23,680
इन शास्त्रों का आविर्भाव ही इसलिए हुआ है

92
00:06:23,680 --> 00:06:27,840
कि आपको यह बता सके कि कृष्ण की भक्ति नहीं करनी है। ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं

93
00:06:27,840 --> 00:06:32,160
करनी है। इसका मतलब है कि हम पहले से इन शास्त्रों के बाहर

94
00:06:32,160 --> 00:06:36,640
से हम लोग ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति कर रहे हैं। क्यों कर रहे थे?

95
00:06:36,640 --> 00:06:40,640
धर्म ही ना पशु भी समाना हमको यह ज्ञान मिला कहां

96
00:06:40,640 --> 00:06:44,720
से उस बात का प्रमाण कहां है अगर इन शास्त्रों ने इनकी पूजा

97
00:06:44,720 --> 00:06:48,720
निषेध की है तो इनकी पूजा का बताने वाला विधान वाला शास्त्र

98
00:06:48,720 --> 00:06:54,320
कहां है यहीं पर टफिस हो जाएगी पूरी

99
00:06:54,320 --> 00:06:59,760
पूरा इनका जो स्ट्रक्चर है सब तबाह हो जाएगा केवल इसी बात से ये दिखाए

100
00:06:59,760 --> 00:07:04,160
अगर तुमने ये घोषित कर दिया कि जो हमारे सनातन शास्त्र

101
00:07:04,160 --> 00:07:08,240
हैं उनमें ये ये ये चीजें नाम ले मना की गई है और

102
00:07:08,240 --> 00:07:12,480
इसी रूप में इनका अस्तित्व है मना करने के रूप में। इसका

103
00:07:12,480 --> 00:07:16,560
मतलब वो चीजें पहले से एक्सिस्ट करती हैं जिसको हम जिसको

104
00:07:16,560 --> 00:07:20,560
हम फॉलो करते हैं। तो जय श्री राम। वो यहां पर

105
00:07:20,560 --> 00:07:24,720
पावर कट हो गया था। लाइव चल रहा है। मैं दिख रहा हूं ना सबको। पावर कट

106
00:07:24,720 --> 00:07:29,120
हो गया था। इन्वर्टर की एक जरूरत है। अगर कोई व्यवस्था

107
00:07:29,120 --> 00:07:33,200
कर सकता है इन्वर्टर की तो देखें। अच्छा

108
00:07:33,200 --> 00:07:39,200
तो मैं बात कर रहा था कि

109
00:07:39,280 --> 00:07:43,520
सीधी बात यह है कि हमारे जो शास्त्र हैं जिनके आधार पर हम ब्रह्मा विष्णु

110
00:07:43,520 --> 00:07:47,600
महेश की भक्ति करते हैं वो बहुत सी चीजें जो रामपाल मना करता है कि

111
00:07:47,600 --> 00:07:51,920
आपके शास्त्रों में इन चीजों को मना किया गया है। ठीक है मना किया गया है। इन शास्त्रों

112
00:07:51,920 --> 00:07:56,000
का स्वरूप ही ये है कि ये चीज मना कर रहे हैं। तो फिर वो कौन से

113
00:07:56,000 --> 00:08:00,160
शास्त्र थे जिनके कारण हमने इन चीज को अपनाया क्योंकि धर्मे हीना पशु

114
00:08:00,160 --> 00:08:04,240
भी समाना मनुष्य अपने आप धर्म नहीं सीखता है। यानी क्या करना है? क्या डूसज

115
00:08:04,240 --> 00:08:08,480
एंड डोंट्स उसके उसके पास अपने आप नहीं आते हैं। तो ये कहां से आए

116
00:08:08,480 --> 00:08:12,480
उसके पास? उसका प्रमाण क्या है? तो इस बारे में इनके मुंह पर लग जाएगा

117
00:08:12,480 --> 00:08:16,720
ताला। उसका कोई प्रमाण नहीं है। वेद शास्त्र इत्यादि से हटकर

118
00:08:16,720 --> 00:08:20,960
कौन से शास्त्र से जिनके कारण हम लोगों ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश

119
00:08:20,960 --> 00:08:25,040
की पूजा करना शुरू किया। जबकि वेद इत्यादि तो वो मना कर रहे हैं। तो यह एक

120
00:08:25,040 --> 00:08:29,280
की पॉइंट है जो आप लोग नोट करिएगा और इस पर आप बहुत लंबी-लंबी बात कर सकते हैं।

121
00:08:29,280 --> 00:08:33,600
ठीक है? और भी है की पॉइंट तो अलग-अलग एपिसोड्स में मैं आपको बताता

122
00:08:33,600 --> 00:08:35,760
चलूंगा।

123
00:08:35,760 --> 00:08:39,840
जैसे पिछले वाले में तत्व ज्ञानी के बारे में बताया था। अच्छा

124
00:08:39,840 --> 00:08:44,000
कुछ लोग हैं जो यह कहते रहते हैं समाज सेवा के बहाने धर्मांतरण

125
00:08:44,000 --> 00:08:50,000
का आधार हां ये तो ठीक है। कुछ लोग यह कहते हैं कि

126
00:08:51,600 --> 00:08:56,080
कुछ लोग यह कहते हैं कि रामपाल जो है वह धरातल पर

127
00:08:56,080 --> 00:09:00,720
मदद कर रहा है। लोगों की सेवा कर रहा है। इसलिए रामपाल अच्छा है। तो रामपाल

128
00:09:00,720 --> 00:09:04,720
लोगों को धरातल पर पाइप बना पाइप बांट रहा है। अनाकोंडा के

129
00:09:04,720 --> 00:09:08,800
बराबर लंबे-लंबे पाइप यदि वह बांट रहा है तो आप सब लोग अपने घर की मातृ शक्तियों

130
00:09:08,800 --> 00:09:12,800
को उसके पास भेज देंगे किसी भी तरह से

131
00:09:12,800 --> 00:09:17,040
उपयोग में लेने के लिए है ना यही है ना क्योंकि

132
00:09:17,040 --> 00:09:21,360
वो पाइप बांट रहा है इसलिए भेज दो अपने घर की मातृशक्तियों को तुम भेज सकते हो

133
00:09:21,360 --> 00:09:25,520
ये नपुंसकता आप लोग दिखा सकते हैं कट्टर मनुवादी

134
00:09:25,520 --> 00:09:29,680
कट्टर सनातनी नहीं चलिए अब हम लोग शुरू करते

135
00:09:29,680 --> 00:09:33,680
हैं जो पिछला वाला एपिसोड था उसका उसके बुलेट पॉइंट्स देख लेते

136
00:09:33,680 --> 00:09:38,800
फटाफट क्या थे? अ

137
00:09:38,800 --> 00:09:42,960
बुलेट पॉइंट्स

138
00:09:42,960 --> 00:09:48,240
[गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे पहली बात है हमने

139
00:09:48,240 --> 00:09:52,320
रामपाल की जो गरिमा गीता की पुस्तक है

140
00:09:52,320 --> 00:09:57,120
उसका 102 नंबर का पृष्ठ है। उसमें हमने बुलेट पॉइंट्स

141
00:09:57,120 --> 00:10:01,280
जो हम बता रहे हैं जिस पर पिछली लाइव में विस्तृत चर्चा

142
00:10:01,280 --> 00:10:05,360
हुई थी। तो उसमें बुलेट पॉइंट क्या-क्या निकले थे? सबसे पहला बुलेट पॉइंट निकला

143
00:10:05,360 --> 00:10:09,680
था कि 5 14 के अर्थ में रामपाल यह कहता है कि परमात्मा

144
00:10:09,680 --> 00:10:13,680
किसी के शुभ कर्मों का फल नहीं देता। और थोड़ी देर बाद उसी पैराग्राफ

145
00:10:13,680 --> 00:10:17,840
में यह भी कह देता है कि परमात्मा उसकी भक्ति। भक्ति यानी

146
00:10:17,840 --> 00:10:21,920
कि क्या है? शुभ कर्म। तो भक्ति करने को भक्ति करने

147
00:10:21,920 --> 00:10:26,080
पर जो रामपाल का ईश्वर है वह क्षमा

148
00:10:26,080 --> 00:10:30,080
कर देता है। तो इधर कह रहा है फल नहीं देता। इधर कह रहा है क्षमा कर देता है। यह

149
00:10:30,080 --> 00:10:34,240
दोहरी बातें दोगली बातें हैं। मूर्खता पूर्ण बातें हैं। दोगली

150
00:10:34,240 --> 00:10:38,240
क्या दोगलेपन के लिए दोगलापन करने के लिए भी अकल चाहिए होती है।

151
00:10:38,240 --> 00:10:42,320
मगर यहां तो फड़ता है। ठस बुद्धि है तो वहां अकल की भी

152
00:10:42,320 --> 00:10:46,320
जरूरत नहीं है। तो ये दोगली बातें हैं। वैसे भी रामपाल खुद ही दावा करता

153
00:10:46,320 --> 00:10:50,400
है। मैं जो है फलाने को करंट से बता बचा के आया। यह आया वो

154
00:10:50,400 --> 00:10:54,480
बात और है कि खुद ही जमानत के लिए रोता रहता हो। अपनी

155
00:10:54,480 --> 00:10:58,640
ढलती हुई उम्र का वास्ता देकर के बाहर आता हो। लिखित में देता हो वह बात और

156
00:10:58,640 --> 00:11:02,960
है मगर वह दावे तो करता है ना कि मेरी भक्ति करने से यह हो जाएगा वह हो जाएगा

157
00:11:02,960 --> 00:11:07,360
मगर यहां पर वह खुद कह रहा है 5 14 में पृष्ठ क्रमांक 102 नंबर

158
00:11:07,360 --> 00:11:11,440
पृष्ठ पर कि परमात्मा किसी के शुभ कर्म का

159
00:11:11,440 --> 00:11:15,600
फल नहीं देता लो भाई इनका तत्व ज्ञान नहीं है इनका ज्ञान

160
00:11:15,600 --> 00:11:19,680
इनका ज्ञान है पंचर ज्ञान क्या ज्ञान है पंचर ज्ञान पांच

161
00:11:19,680 --> 00:11:24,160
16 का अर्थ करते हुए आत्मज्ञान और परमात्म

162
00:11:24,160 --> 00:11:28,320
ज्ञान को तत्व ज्ञान कह रहा है अच्छी बात आत्मज्ञान, परमात्म ज्ञान, तत्व

163
00:11:28,320 --> 00:11:32,880
ज्ञान है। अच्छी बात है। मगर उस उसके बाद थोड़ी देर बाद ही

164
00:11:32,880 --> 00:11:36,960
उसी पैराग्राफ में कह रहा है कि उसका महिमा और नाम

165
00:11:36,960 --> 00:11:41,120
दीक्षा इत्यादि। उसकी महिमा गाना कि उसने यह किया है। उसने वहां फलाने

166
00:11:41,120 --> 00:11:45,200
गांव में यह हो गया था वो किया। वहां डेरा डाल दिया। वहां डेरे में भविता

167
00:11:45,200 --> 00:11:50,800
कांड हो गया। वहां पर यह निकला। इतने सारे वो निकले। सामग्रियां

168
00:11:50,800 --> 00:11:54,800
काम वासना को तृप्त करने में। संतान उत्पत्ति को रोकने

169
00:11:54,800 --> 00:11:59,200
के लिए जो सामग्री होती है ना आजकल जो वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई वो सब सामग्रियां

170
00:11:59,200 --> 00:12:03,440
एक किलो निकली ये निकली तो यह जो इसके ईश्वर की जो इनके

171
00:12:03,440 --> 00:12:07,520
ईश्वर की रामपालियों का ईश्वर रामपाल तो यह जो इसकी महिमा है तो

172
00:12:07,520 --> 00:12:09,600
इस महिमा का बखान करना ही तत्व

173
00:12:09,600 --> 00:12:13,600
ज्ञान है तो पहले कह रहा है आत्मज्ञान और परमात्म ज्ञान तत्व ज्ञान है फिर जो

174
00:12:13,600 --> 00:12:17,840
इस तरह की चीजें हैं उसकी महिमा बखान करना जेल कैसे गया जेल में क्या-क्या

175
00:12:17,840 --> 00:12:21,840
हुआ उसके साथ उसने सफाई की शौचालय की या क्या किया

176
00:12:21,840 --> 00:12:25,840
बगीचा बगीचा संभाला या भंडारी बना वहां का। तो यह सब महिमा गान

177
00:12:25,840 --> 00:12:29,920
इसका जो है वो उसका तत्व ज्ञान है। तो अब एक ही पैराग्राफ में

178
00:12:29,920 --> 00:12:34,000
दो तरह की बातें फिर 57 में कह रहा है तत्व ज्ञान यानी

179
00:12:34,000 --> 00:12:38,320
नाम दीक्षा। मैंने पिछली लाइव में भी चैलेंज किया था। मैं इस

180
00:12:38,320 --> 00:12:42,560
लाइव में भी चैलेंज कर रहा हूं। जिसने भी अपनी मां का निष्ठा पूर्वक दूध पिया

181
00:12:42,560 --> 00:12:46,720
हो। जिसने भी अपनी मां का दूध पिया हो या जिसकी मां ने उसको निष्ठा पूर्वक

182
00:12:46,720 --> 00:12:51,040
दूध पिलाया हो। वह पूरे सनातन शास्त्र वांगमय

183
00:12:51,040 --> 00:12:55,600
में वैदिक वांगमय से दिखा दे कि तत्व का अर्थ होता है नाम दीक्षा।

184
00:12:55,600 --> 00:12:57,920
दिखा

185
00:12:57,920 --> 00:13:02,240
ऐसी चीज बोलते हैं ना कि

186
00:13:02,240 --> 00:13:07,040
अकाट्य चीजों पर बात करते हैं। फालतू की बातें नहीं करते हैं। अकाट्य चीज

187
00:13:07,040 --> 00:13:11,120
व्यर्थ की बातें नहीं करते हम कि अरे तुम्हारा फोटो बिगाड़ दिया। कुत्ते

188
00:13:11,120 --> 00:13:15,680
जैसा मुंह बना दिया। उसकी आवश्यकता ही नहीं है। उसकी आवश्यकता है क्या? आप ही लोग बताओ।

189
00:13:15,680 --> 00:13:20,560
रामपाल का फोटो बिगाड़ करके उसको कुत्ते जैसा दिखा करके या

190
00:13:20,560 --> 00:13:25,120
और कोई प्राणी के रूप में दिखा दिखाने की आवश्यकता है।

191
00:13:25,120 --> 00:13:29,120
आज मैंने एक वीडियो देखा था सुबह-सुबह उसका चेहरा देख लो तो वैसे ही दिन खराब हो जाता

192
00:13:29,120 --> 00:13:33,600
है। तो इस सब की हमें आवश्यकता नहीं है। कट

193
00:13:33,600 --> 00:13:37,760
अकाट बातें बोलते बिल्कुल अकाट उसमें जब

194
00:13:37,760 --> 00:13:41,920
बात आ जाएगी तो खत्म टू स्टॉप द ट्रेन पुल

195
00:13:41,920 --> 00:13:46,400
द चिन। ठीक है? तो क्या है कि जिसने जिसकी

196
00:13:46,400 --> 00:13:50,400
भी मां ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वह यह बता

197
00:13:50,400 --> 00:13:54,480
दे मुझे सिद्ध कर दे शास्त्रों से सनातन शास्त्रों से

198
00:13:54,480 --> 00:13:59,280
कि तत्व का अर्थ होता है तुम्हारे वो जेल

199
00:13:59,280 --> 00:14:03,520
कट्टू रामपाल के द्वारा दी जाने वाली नाम दीक्षा। ठीक है? आगे

200
00:14:03,520 --> 00:14:06,320
चलते हैं।

201
00:14:06,320 --> 00:14:12,160
अच्छा अब जो है यह कहता है 51 18 में तत्वज्ञानी

202
00:14:12,160 --> 00:14:16,160
कि तत्वज्ञानी जो होता है वह समदर्शी होता है। यही तत्वज्ञानी

203
00:14:16,160 --> 00:14:20,240
कहता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने वाले नीच होते

204
00:14:20,240 --> 00:14:24,480
हैं। ये कैसा समदर्शी? समदर्शी मतलब सबको एक समान देखने

205
00:14:24,480 --> 00:14:28,480
वाला। मगर ये तो ऊंचानीचा कर रहा है। अगर हमारा सिद्धांत

206
00:14:28,480 --> 00:14:32,480
है तो उसमें व्यवहार और परमार्थ के भेद से परमार्थ की दृष्टि से देखें तो

207
00:14:32,480 --> 00:14:36,640
सब तत्व की दृष्टि से देखें तो सब उसमें

208
00:14:36,640 --> 00:14:40,320
समदर्शिता आ जाती है। और व्यवहार के जिसके साथ जो जैसा

209
00:14:40,320 --> 00:14:44,880
व्यवहार कर रहा है उसके अनुसार व्यवहार हो जाता है। मगर तुम्हारे यहां तो एक ही एस्पेक्ट

210
00:14:44,880 --> 00:14:49,120
है। एक ही डायमेंशन है। पर व्यवहार परमार्थ का कोई भेद नहीं है। ये सब गढ़

211
00:14:49,120 --> 00:14:53,360
विषय है। तुम्हारे बल्ले नहीं पड़गी। रामपालियों सीधी बात है कि

212
00:14:53,360 --> 00:14:57,360
तत्वज्ञानी वो होता है जो पांच 18 के

213
00:14:57,360 --> 00:15:01,440
अर्थ में ले तत्वज्ञानी जो होता है वो सब में एकता देख एक समान देखता है नहीं

214
00:15:01,440 --> 00:15:05,440
देखता भाई तू बबिता को अलग देखता है और तेरी बेटी जो आकर के

215
00:15:05,440 --> 00:15:09,680
तेरे पैरवैर छूती है उसको तू अलग देखता है अभी कुछ दिन पहले हुआ था कि सौम्य

216
00:15:09,680 --> 00:15:14,000
सौम्या माथुर ने क्या किया था कि वो समझ नहीं पाई थी कि वो इसकी बेटी

217
00:15:14,000 --> 00:15:18,080
क्योंकि इसके पास आकर के महिलाएं ऐसी चीजें करती हैं और

218
00:15:18,080 --> 00:15:22,480
इसका नाम ऐसा उड़ा हुआ है अखबारों के जरिए से बबीता इत्यादि के साथ

219
00:15:22,480 --> 00:15:26,800
तो वो इसकी जब स्वयं की सगी पुत्री ऐसा कर रही थी तो सौम्या

220
00:15:26,800 --> 00:15:31,280
माथुर को गलती हो गई। उसने कहा देखो देखो कि जो

221
00:15:31,280 --> 00:15:35,440
बूढ़ी है अधेड़ उम्र की औरत औरतें हैं उन पर महिलाएं हैं उन पर ये ध्यान नहीं दे

222
00:15:35,440 --> 00:15:39,920
रहा है। मगर जो बिल्कुल थोड़ा क्या कहते हैं

223
00:15:39,920 --> 00:15:43,920
युवावस्था में ज्यादा कम आयु वाली आई हैं तो उन पर ध्यान दे रहा है। इस तरह का

224
00:15:43,920 --> 00:15:48,240
कटाक्ष कर दिया था। बाद में सौम्या माथुर ने उसके लिए क्षमा भी मांगी थी उन्होंने

225
00:15:48,240 --> 00:15:52,800
कि मेरे से गलती हो गई। मैं जानती नहीं थी पुत्री हैं। तो

226
00:15:52,800 --> 00:15:55,440
बबिता में और अपनी पुत्री में अंतर करता है। फिर ये

227
00:15:55,440 --> 00:16:00,000
बता कहां से किया तूने अंतर? इन सवालों का जवाब सिद्धांतवादी आचार्यों

228
00:16:00,000 --> 00:16:04,560
के पास होता है। है ना? तुम्हारे जैसे मूर्ख जेल कट्टू

229
00:16:04,560 --> 00:16:08,720
और खीर पिवैया खीर पिलाने वालों के पास नहीं होता है। जो अपनी खीर पिलाते

230
00:16:08,720 --> 00:16:13,280
हैं। वह खीर कहां-कहां से होकर के आती है? अखबारों के अनुसार अखबारों

231
00:16:13,280 --> 00:16:17,280
की बात यदि सत्य है तो रामपाल के नहाए हुए की खीर पीते

232
00:16:17,280 --> 00:16:21,280
हैं लोग। और वो खीर कहां-कहां से होते हो के आती है। जो अगर नहा रहा

233
00:16:21,280 --> 00:16:25,360
है कोई व्यक्ति तो आप सोच के देखिए शरीर के प्रत्येक अंग से वह

234
00:16:25,360 --> 00:16:31,360
जो दूध है वह बह करके आता है। अब प्रत्येक अंग में आंख, नाक, कान, गला

235
00:16:31,600 --> 00:16:35,600
उधर फिर गुदा द्वार सब आता है। मल त्याग का जो

236
00:16:35,600 --> 00:16:39,600
गुदा द्वार होता है वह भी आता है और वहां से आने वाला जो दूध है वो

237
00:16:39,600 --> 00:16:43,600
निकल के आता है और फिर जो है उसको भक्तगण ग्रहण

238
00:16:43,600 --> 00:16:47,760
करते हैं। जो अपने आप को भगत कहते हैं वो ग्रहण

239
00:16:47,760 --> 00:16:51,840
करते हैं। ऐसा अखबारों के अनुसार बताया गया है। अब बाकी उसमें कितनी सच्चाई

240
00:16:51,840 --> 00:16:55,760
है बाद की बात है। तो

241
00:16:55,760 --> 00:17:00,000
तो समदर्शी की बात हो गई। जिसका मन जो तत्वज्ञानी

242
00:17:00,000 --> 00:17:03,360
होता है वह

243
00:17:03,360 --> 00:17:07,440
समदर्शी होता है। मगर यहां तो ये ऊंचनीच देख रहा है। भविता

244
00:17:07,440 --> 00:17:11,520
में अपनी पुत्री में अंतर कर रहा है। अच्छा और आगे चलते हैं। तो

245
00:17:11,520 --> 00:17:15,680
जिसका मन समदर्शी है वह पूर्ण ब्रह्म में स्थित है।

246
00:17:15,680 --> 00:17:20,000
अब ये पूर्ण ब्रह्म में स्थित होने वाली बात बता दे भाई।

247
00:17:20,000 --> 00:17:24,080
पूर्ण ब्रह्म में स्थित होने वाली बात तू बता पाएगा कभी? नहीं बता पाएगा।

248
00:17:24,080 --> 00:17:28,160
इसकी विवेचना ही नहीं कर पाएगा। पूर्ण ब्रह्म में

249
00:17:28,160 --> 00:17:33,040
स्थित होने की बात है कि जिसका मन

250
00:17:33,040 --> 00:17:37,040
रमा हुआ हो भगवान की भक्ति में

251
00:17:37,040 --> 00:17:41,360
जो अपने विचारों से अपनी आत्मा से भगवान में संलग्न हो

252
00:17:41,360 --> 00:17:45,760
भले ही उस शारीरिक रूप से वो इधर-उधर जाता हुआ दिखाई दे रहा हो

253
00:17:45,760 --> 00:17:49,920
पर मन से सदैव वो भगवान के साथ अटैच्ड हो। यह

254
00:17:49,920 --> 00:17:53,920
तो यह रही बात। मगर तुम जैसे मूर्ख तो यह कहते हो ना कि भगवान ने

255
00:17:53,920 --> 00:17:58,320
भगवान तो अर्जुन के पास ही खड़े थे। 1866

256
00:17:58,320 --> 00:18:02,400
तुम तो वह मूर्ख हो ना जो कहते भगवान तो उसके पास ही खड़े थे। फिर वो कहां जाने को

257
00:18:02,400 --> 00:18:06,560
कह रहे हैं भगवान? अर्जुन से कहां जाने को कह रहे जब

258
00:18:06,560 --> 00:18:10,800
वो उसके पास में है स्वयं तो यानी कि तुम्हारे लिए क्रिया एक ही होती है।

259
00:18:10,800 --> 00:18:15,200
गत्यार्थक भौतिक रूप से ही तुम्हारे क्रिया होती है।

260
00:18:15,200 --> 00:18:18,560
मनन चिंतन वाली क्रिया नहीं होती है। ज्ञानार्थक होती नहीं है। क्योंकि

261
00:18:18,560 --> 00:18:23,360
ये यहां पर ये ज्ञानार्थक क्रिया में लेंगे स्थित होना तो तो चल जाएगा।

262
00:18:23,360 --> 00:18:27,840
वरना कैसे स्थित हो रहा है? घुस रहा है क्या तुम्हारे परमेश्वर के कबीर के अंदर?

263
00:18:27,840 --> 00:18:31,840
तुम्हारे यहां तो अद्वैत भी नहीं है जो घुसने वाली बात हो। कबीर के अंदर घुस

264
00:18:31,840 --> 00:18:35,840
रहा है क्या? कि वही उसी वो जो खीर जहां से होकर आती है उसमें

265
00:18:35,840 --> 00:18:39,840
घुस रहा है। कहां घुस रहा है? यह सोचने वाली बात है। यह

266
00:18:39,840 --> 00:18:44,080
स्थित होने का अर्थ कर पाएंगे तुम्हारे बुऊ। इसी में फंस जाएंगे। दो-तीन

267
00:18:44,080 --> 00:18:48,880
जन्म लग जाएंगे। इसी में इसी में पकड़ लूंगा तो जीभ बिल्कुल सूख जाएगी।

268
00:18:48,880 --> 00:18:53,120
इसलिए अपनी खैर चाहते हो तो कभी भूल

269
00:18:53,120 --> 00:18:57,280
करके शिवश नारायण द्विवेदी के सामने आने की हिम्मत मत करना। ये रामपाल

270
00:18:57,280 --> 00:19:01,440
के लिए उसकी गैंग की तो बात दूं। है ना? मत पड़ो चक्कर

271
00:19:01,440 --> 00:19:05,440
में कोई है नहीं टक्कर में बस अपना वह कपड़े की दुकान जो चलाते हो ना

272
00:19:05,440 --> 00:19:09,680
काउंटर लगा के कपड़े की दुकान चलाते हो खड़े

273
00:19:09,680 --> 00:19:13,680
हो के जैसे आदमी नहीं यहां कौन सी दिखाऊं सिल्क दिखाऊं बनारसी दिखाऊं

274
00:19:13,680 --> 00:19:17,680
काजीवरम दिखाऊं इस तरह से खड़ा हो खड़ा हो जाता है काउंटर के बगल में वो इसका

275
00:19:17,680 --> 00:19:22,080
वो है प्रवचन पॉइंट वहां प्रवचन देता है

276
00:19:22,080 --> 00:19:26,320
तो जिसका मन समदती समदर्शी है वह ब्रह्म में स्थित

277
00:19:26,320 --> 00:19:30,400
है यहां पर ब्रह्म का अर्थ इसने सच्चिदानंद स्वरूप रोक लिया। जबकि

278
00:19:30,400 --> 00:19:33,600
यह ब्रह्म कहते हैं काल को। 520 में जो

279
00:19:33,600 --> 00:19:37,680
सुखदख को परमात्मा की रजा समझता है। 5:20 में इसने

280
00:19:37,680 --> 00:19:41,840
मान लिया है कि तत्वज्ञानी को भी दुख

281
00:19:41,840 --> 00:19:45,920
होता है। जबकि यह दावा करते हैं अपने लोगों को बहकाने के लिए,

282
00:19:45,920 --> 00:19:50,320
अपनी खीर पिलाने के लिए कि

283
00:19:50,320 --> 00:19:54,560
जो अह उसकी शरण में आ जाएगा रामपाल

284
00:19:54,560 --> 00:19:58,560
की शरण में उसको दुख नहीं होगा। जबकि यहां पर क्या है? दुख तो होगा। मगर वो यह समझेगा

285
00:19:58,560 --> 00:20:02,960
कि यह तो सब भगवान की मर्जी है। है ना? तो प्रत्येक आस्तिक

286
00:20:02,960 --> 00:20:07,360
यही समझता है। जो भी आस्तिक है वही समझता है कि भगवान की मर्जी से ही हुआ जो हुआ है।

287
00:20:07,360 --> 00:20:11,520
और उसमें मेरे अपने कर्म है। तो दुख तो होगा। यह बात मान

288
00:20:11,520 --> 00:20:15,520
ली रामपाल ने। नोट कर लेना। ऊपर मान लिया कि परमात्मा किसी शुभ कर्म

289
00:20:15,520 --> 00:20:20,000
का फल नहीं देता। नीचे मान लिया 520 में कि सुखदख

290
00:20:20,000 --> 00:20:24,160
होता है। रामपालियों को भी होता तो है। वो मान रहा है यहां पर लिखित

291
00:20:24,160 --> 00:20:28,400
रूप से। वह तो होता ही है। सुबह संडास जाता ही होगा

292
00:20:28,400 --> 00:20:32,560
रामपाल। गैस बनती ही है उसके। दिख रहा है उसकी शक्ल से।

293
00:20:32,560 --> 00:20:36,560
है ना? पेट में दर्द, ऐंठन इत्यादि होती होगी रोते-रोते आंखों की बीमारी

294
00:20:36,560 --> 00:20:40,720
के लिए तमाम बुढ़ापा दिखाते हुए भीख मांग करके बाहर आया

295
00:20:40,720 --> 00:20:45,920
है। तो दुख तो होता है। अच्छा 524

296
00:20:45,920 --> 00:20:48,320
अ

297
00:20:48,320 --> 00:20:48,820
ब्रह्म

298
00:20:48,720 --> 00:20:52,960
का अर्थ इसने फिर से 52 24 में मान लिया। पूर्ण परमात्मा जबकि ये लोग कहते हैं ब्रह्म अलग

299
00:20:52,960 --> 00:20:57,360
है और सच्चिदानंद जो परमेश्वर है सच्चिदानंद

300
00:20:57,360 --> 00:21:01,680
स्वरूप सच्चिदानंद घन ब्रह्म वो अलग है। परम ब्रह्म अलग है।

301
00:21:01,680 --> 00:21:05,920
तो यहां ब्रह्म का अर्थ फिर मान लिया पूर्ण परमात्मा। अच्छा नाम दीक्षा

302
00:21:05,920 --> 00:21:10,080
से संशय कट जाते हैं। नाम दीक्षा मिलने से संशय

303
00:21:10,080 --> 00:21:14,560
कट जाते हैं। और इसी

304
00:21:14,560 --> 00:21:18,640
5:25 में इसने कहा है नाम दीक्षा जिसको मिल जाती है उसके संशय कट जाते हैं। अब

305
00:21:18,640 --> 00:21:22,720
जरा सोच के देखो इनके जो सूखे हुए छुआारे जैसे चेहरे वाले लोग आते हैं

306
00:21:22,720 --> 00:21:26,960
चर्चा करने उनके संशय कट चुके हैं क्या? कि जो डडियल

307
00:21:26,960 --> 00:21:30,960
युवराज सिंह है और जो सचिन वगैरह हैं गंजा इन लोगों

308
00:21:30,960 --> 00:21:35,040
के संशय कट चुके हैं। क्यों नहीं आते पता है मेरे सामने? इनको मालूम है

309
00:21:35,040 --> 00:21:39,040
यह ऐसी ज्ञानार्थक कुटाई करेगा ना वह सब कोई काम नहीं आएगा पीछे

310
00:21:39,040 --> 00:21:43,520
गन मैन खड़े खड़े करना बिल्कुल ऐसी

311
00:21:43,520 --> 00:21:49,200
ज्ञानार्थक कुटाई कि रात में सोते समय भी मेरे सपने आएंगे

312
00:21:49,200 --> 00:21:53,360
कि वो कौन सा समय था बुरा जो मैंने ये सोच लिया कि मैं शिवाश नारायण द्विवेदी

313
00:21:53,360 --> 00:21:58,000
के सामने चला जाऊं वास्तविक सनातनी के उस सामने चला जाऊं

314
00:21:58,000 --> 00:22:02,400
इसलिए नहीं आते तो इनका संशय कट चुका है तुम्हारे पवन दास से बात हुई थी

315
00:22:02,400 --> 00:22:03,760
बत्ती सी बाहर आ आ गई

316
00:22:03,760 --> 00:22:07,840
थी। संशय संशयात्मक प्रश्न है ना कि कबीर जब

317
00:22:07,840 --> 00:22:12,240
सृष्टि बना रहा है तो कहां खड़ा है? वो सृष्टि किसने बनाई

318
00:22:12,240 --> 00:22:16,320
तो फेल हो गए। फिर तो इस पर कहने लगे भैया ऐसा है आग लगा

319
00:22:16,320 --> 00:22:20,480
दूंगा उसमें देख लेंगे। जिसका परमेश्वर सत्य होगा वो यानी कि संशय नहीं

320
00:22:20,480 --> 00:22:24,640
कटे हैं। अब तो सीधे आस्था की बात है। संशय नहीं कटे

321
00:22:24,640 --> 00:22:28,640
तुम्हारे। ठीक है? तो तत्व

322
00:22:28,640 --> 00:22:32,640
ज्ञान की बात मत करो। तुम पंचल जोड़ो। पंच ज्ञान लोगों

323
00:22:32,640 --> 00:22:36,800
को दो अपना। तो यहां पर 5:25 में इसने कहा नाम दीक्षा

324
00:22:36,800 --> 00:22:40,880
से संशय कट जाते हैं। अच्छा इसी में इसने ये कहा है कि जो काल ब्रह्म

325
00:22:40,880 --> 00:22:45,120
है वो उग्र है। काल ब्रह्म तो उग्र उग्र

326
00:22:45,120 --> 00:22:49,120
है। उग्र। अच्छा ये उग्रता एक्सिस्ट कहां करती थी? काल

327
00:22:49,120 --> 00:22:53,280
ब्रह्म तो था नहीं इस दुनिया में। तो उग्रता भी नहीं थी। तो काल ब्रह्म

328
00:22:53,280 --> 00:22:57,360
निकल के कहां से आया है? किसने बनाया काल

329
00:22:57,360 --> 00:23:01,760
ब्रह्म को? काल ब्रह्म को किसने बनाया? कबीर

330
00:23:01,760 --> 00:23:05,760
ने। तो कबीर के पास काल ब्रह्म नहीं था। यानी कि काल ब्रह्म जो जो चीजें

331
00:23:05,760 --> 00:23:09,840
कर रहा है वह कबीर के पास नहीं थी। अच्छा वो छोड़ो। काल ब्रह्म को जो शक्ति

332
00:23:09,840 --> 00:23:14,080
दी है उग्रता वाली यह कहां था? यह

333
00:23:14,080 --> 00:23:18,080
कहां था? किसने बनाया? काल ब्रह्म के पास अपने आप कुछ आ गया। यानी काल ब्रह्म अपने

334
00:23:18,080 --> 00:23:18,800
आप स्वयंभू

335
00:23:18,800 --> 00:23:22,240
है क्या?

336
00:23:22,240 --> 00:23:26,240
और उत्पत्ति, स्थिति और लय लय

337
00:23:26,240 --> 00:23:30,480
करने में उग्रता नहीं चाहिए। लय कैसे करोगे? प्रलय कैसे

338
00:23:30,480 --> 00:23:35,200
आएगी? सृष्टि समाप्त कैसे होगी? तुम्हारे यहां तो एक ही बार होती है।

339
00:23:35,200 --> 00:23:39,280
वह बात अलग है। काल ब्रह्म बार-बार बार-बार जन्म भी लेता रहता है।

340
00:23:39,280 --> 00:23:43,360
अरे भाई एक बार काल ब्रह्म ने जब गलती कर दी तो फिर क्यों बना रहे हो काल

341
00:23:43,360 --> 00:23:47,360
ब्रह्म को? कि 70 बार जब शिव जी शिव जी के प्राण छूट जाते

342
00:23:47,360 --> 00:23:51,520
हैं उसके बाद एक बार काल ब्रह्म का अंत होता है। तो फिर क्यों बनाता

343
00:23:51,520 --> 00:23:55,520
है कबीर? काल ब्रह्म और उसके मरने के बाद कहां ये लोग कहां जाते हैं? जो

344
00:23:55,520 --> 00:23:59,680
फंसे हुए हैं। उस बीच काल ब्रह्म के मरने से लेकर काल ब्रह्म

345
00:23:59,680 --> 00:24:04,000
के दोबारा जन्म होने के बीच में ये लोग कहां जाते हैं जो काल ब्रह्म ने फंसा रखे हैं।

346
00:24:04,000 --> 00:24:08,720
हम मुंह सूख जाएगा मुंह पांच

347
00:24:08,720 --> 00:24:12,720
26 के अर्थ में इसने कहा है कि परमात्मा इसने मान लिया परमात्मा पहले मान

348
00:24:12,720 --> 00:24:17,040
लिया सर्वव्यापक है। उसके बाद कहता है यानी

349
00:24:17,040 --> 00:24:21,280
उसकी सत्ता सब जगह है। अब यहां पर वही वाला प्रश्न फस जाएगा वह अब्रामिक

350
00:24:21,280 --> 00:24:25,360
आईडियोलॉजी वाला कि सत्ता और उसमें अगर अंतर होगा तो

351
00:24:25,360 --> 00:24:30,560
एक रस नहीं कहलाएगा विकार वाला हो जाएगा

352
00:24:30,560 --> 00:24:34,560
और उसकी यहां पे इसने चतुर ये तो एक

353
00:24:34,560 --> 00:24:38,640
अलग विषय मगर सत्ता जब मान ली तो उसने काल पर भी अपनी सत्ता मान ली

354
00:24:38,640 --> 00:24:42,880
5 26 में काल पर कबीर की सत्ता यानी काल

355
00:24:42,880 --> 00:24:46,960
जो भी कर रहा है जो भी सोच रहा है कुछ भी हो रहा है उस पर सत्ता है उसकी

356
00:24:46,960 --> 00:24:51,840
यानी उसकी अनुमति के सीमा के अंदर है काल ब्रह्म का कुछ भी।

357
00:24:51,840 --> 00:24:54,320
ठीक है?

358
00:24:54,320 --> 00:24:56,960
और

359
00:24:56,960 --> 00:25:01,040
वहीं पे काल को जो है मन कहा गया है। और यह

360
00:25:01,040 --> 00:25:05,200
कहा गया कि काल जो मन को जो जीत लेता है वो पार लग जाता है। तो काल को जीतना

361
00:25:05,200 --> 00:25:09,280
है क्या? क्योंकि मन तो काल है। काल

362
00:25:09,280 --> 00:25:13,720
से जीतेंगे कैसे? काल का तो वैसा घटिया स्वरूप है।

363
00:25:13,720 --> 00:25:17,840
[हंसी]

364
00:25:17,840 --> 00:25:21,840
फड़ पंचर ज्ञान पंचर करने वालों

365
00:25:21,840 --> 00:25:25,920
सीट की पेटी और कमर की बेल्ट बांध एक नंबर का

366
00:25:25,920 --> 00:25:30,000
फड़ ज्ञान है इस ज्ञान को सुनने समझने के लिए भी

367
00:25:30,000 --> 00:25:34,000
गुर्दा चाहिए गुर्दा अच्छा तो ये हो

368
00:25:34,000 --> 00:25:38,000
गई अभी तक अपनी मर्जी आगे चलते हैं अब जो है

369
00:25:38,000 --> 00:25:42,080
मेन कोर्स पे आ जाते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़]

370
00:25:42,080 --> 00:25:46,240
तो इसकी गरिमा गीता का पष्ठ ये अभी तक बुलेट बुलेट पॉइंट्स हो गए।

371
00:25:46,240 --> 00:25:50,240
ठीक है? बुलेट पॉइंट्स आप लोग कट कर करके डाला करिए।
