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00:00:01:22 हेलो जय श्री राम जय श्रीमन नारायण श्रीमन नारायण मथुरा से जी बात तो उन्हीं से हो रही है बताएं महाराज जी कहां पर हैं स्थित आप मथुरा में नहीं मैं मथुरा नहीं रहता हूं जी अच्छा अच्छा जिनसे बात आपका नंबर प्राप्त हुआ था तो उन्होंने बताया था मथुरा में हां ठीक है किससे प्राप्त हुआ यह बताएं मुझे शिवम से क्या
00:00:33:27 आचार्य करके लिखा था उनके नाम के आगे तो इतना जी नहीं नहीं नहीं आपका कोई गुरुकुल का कार्यक्रम था मैं शिवश नारायण द्विवेदी बात कर रहा हूं आहान से शिवश नारायण द्विवेदी जी अच्छा किससे नंबर मिला आपको आपके कोई पोस्ट में आपका बैनर लगा हुआ था किसी को फोन किया तो उन्होंने नंबर दिया आपका बताया तो ये कुछ मुझे ऐसा लग रहा है कि आप हमारा पक्ष नहीं जानते हैं तो इस कारण से वहां पर जो है विरोधाभासी टिप्पणियां उपहास करना मैं जानना चाह रहा था कि क्या मतलब आपको मुझे लग रहा था कि पता नहीं तो शायद मैं एक बार बात करूं हम तो ये कम टू लाइव वगैरह से आप मजाक उड़ा रहे हो जो तो इस पे क्या है मतलब कम टू लाइव से क्या तात्पर्य जी हमने हां हमने बहुत सारी वीडियो आपके हां
00:01:32:21 हेलो जय हेलो जी जी मैंने बहुत सारे आपके वीडियो देखे हैं जिसमें आप बिल्कुल एकदम छाती ठोक के यही कहते हैं कम टू लाइव चाहे वो जज साहब हो चाहे वकील साहब हो कोई भी हो मैंने बहुतों में आपका ये वीडियो देख रखा है और बहुतों में सुना है अब हर बात पे ये कहते हैं ना कम टू लाइव हम इसलिए आपने लगभग आपके तो मुझे अभी कम टू लाइव के लिए तो आपको वहां भी जाना चाहिए। फिर मुझे ऐसा लगता है कि आपको वहां जरूर जाना चाहिए। नहीं नहीं वो जाना चाहिए। वहां के लिए आपको निमंत्रण प्राप्त वो जाना चाहिए नहीं जाना चाहिए। मगर कम टू लाइव को लेकर आपको आपत्ति तो है ना? नहीं कौन सी आपत्ति भाई? मैं तो अपने हर वीडियो में जय श्री राम भी कहता हूं। कम टू लाइव से ज्यादा कहता हूं। मगर जय श्री राम की परंपरा तो आपने वहां यूज़ नहीं किया। उपहास तो आपने कम टू लाइव का उड़ाया ना। नहीं ऐसा नहीं है। हां। मजाक थोड़ी उड़ाएंगे। क्यों मजाक उड़ाएंगे हम आपका? कम टू लाइव इसलिए करता हूं मैं। पहली बात तो ये है कि आपने शायद सिर्फ भागवतानंद से रिलेटेड बातें ही देखी हैं। जी और कम टू लाइव मैं हर रामपालय को, इसलिए को, समाजी को सबको लिखता हूं क्योंकि वो करते क्या हैं कि
00:02:48:00 वो पूरी बात का निस्तारण चाहते हैं कि उनके कमेंट में जाकर के मैं उनका पूरा निस्तारण करता जाऊं। एक उत्तर दूंगा फिर अगला उत्तर आएगा। फिर उसका उत्तर दूंगा तो फिर और ऐसे मैं जूझ चुका हूं भूतकाल में। हम तो अब निष्कर्ष ये निकला कि भाई कमेंट के माध्यम से चर्चा करना व्यर्थ है। सामने वाले के पास अपना उत्तर नहीं होता है तो वो बिना कोई निस्तारण दिए गायब ही हो जाता है। हम हम और हम यहां पर खूब मेहनत कर करके उसको उस स्थिति तक पहुंचाते जब वो गायब होता है। हम हम उसका भी हमें कोई फल नहीं मिलता। लोगों को पता नहीं चलता कि भाई सामने वाला निरुत्तर हुआ कि नहीं हुआ। हम तो हमारा वहां पर जो चर्चा करना है वहां पर जाकर के जो तर्क और युक्तियां और प्रमाण उपलब्ध कराना है वह सब व्यर्थ हो जाता है। भाई हम किसी एक व्यक्ति को चुप कराने के लिए कार्य तो कर नहीं रहे हैं। हमें जो भी करना है हमारा पक्ष सही है या गलत है हमें जो भी करना है हमें समाज को दिखाना है। समाज को जागरूक करना है। तो इसलिए जब कोई व्यक्ति वहां पर चाहता है निस्तारण कमेंट के माध्यम से तो मैं उसको एक छोटी सी लाइन लिख देता हूं। कम टू लाइव हम सामने आज और बात करो जिससे कि तुम जब निरुत्तर हो जाओगे तुम जब स्पीचलेस हो जाओगे हम तो ये जनता देखेगी कि आपके पास जवाब नहीं
00:04:03:08 था आप चले गए ऑफ करके और ये केवल भागवतानंद के मामले में नहीं है क्योंकि आप भागवतानंद को सपोर्ट करते हो तो आपने केवल उन पोस्ट्स को देखा है जिसमें मैं कमेंट में आकर के कहता हूं और मैं लगभग दो साल से अपने हर वीडियो के अंत में यह पट्टियां चला रहा हूं कि भैया जिसको किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त आप जो है हमें WhatsApp करें और फॉर्म भरे और सामना करें हम क्योंकि मैं इससे पहले ही जूझ चुका हूं भाई बहुत पहले तो मेरा चल रहा था इस वालों से विरोध हुआ रामपाल वालों से विरोध हुआ तो आप उनके भी सेक्शन में जाएंगे अभी भी Facebook पर भी अक्षिता सिंह वगैरह है जो ये रामपाल हां हां अक्षिता रामपाल की है जो रामपाल की फॉलोअ है और उस वो भी अगर आकर के ये करती तो मैं उसको भी लिखता हूं सामने आ जाओ सामना करो दो तीन प दो तीन ऐसी पंक्तियां है कम टू लाइफ सामना करो कोई अभद्र भाषा का उपयोग कर रहा होता है तो उसको कह देता हूं माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया तो सामना करो हम और जब तक कोई सामान्य रहता है तो उसको कम टू लाइफ लिख देता हूं तो ये कम टू लाइफ के पीछे का एक वो है आशय मगर ये इसका उपहास उड़ाने के मतलब है कि आपको इस पे कोई ना कोई आपको ऐसा लगता है कि ये नहीं होना चाहिए
00:05:18:09 इसलिए मैंने ने कहा कि मैं आपको एक बार कम टू लाइव का। अच्छा मुझे ये बताइए कि आपके ऐसे लिखने से कितने लोग आपके पास कम टू लाइव लाइव आए? बहुत सारे आए हैं। जैसे जैसे आप हमारा YouTube चैनल देख लीजिए। बहुत सारे लाइव पड़े हुए हैं। बहुत सारे रामपालिया आए, बहुत सारे इस वाले आए, बहुत सारे आर्य समाजी आए। और बात ये होती है कि वो आ रहा है कि नहीं आ रहा है ये नहीं है। बात ये होती है हमने आपको मौका दिया सामने आकर अपना प्रश्न करने का। जो आप यहां पर कायरता पूर्ण कर पा रहे हो, मुंह को छिपाकर कर पा रहे हो, वह हमने आपको सामने आकर रखने का मौका दिया। सामर्थ्य तो सामने आइए। जैसे हम अपने सत्य की रक्षा के लिए हम सर पर कफ़न बांध के सब पूरे समाज को बताते हुए निकले हैं कि हम कौन है। तो वैसे ही आप भी आइए। यदि आपको लगता है कि सत्य के आप पक्षधर हैं। भागवतानंद ने भी तो अपनी एक वीडियो में कहा है यह बात कि भैया मैं एक एक को जाकर के कमेंट में उत्तर दूं। दूं क्या? यह बात भागवतानंद ने भी कही है। तो उसी उसी भाव को हम इस प्रकार से प्रकट करते हैं कि एक एक को हम उत्तर नहीं दे सकते ना कमेंट में। हजारों लोग कमेंट कर रहे हैं। अभी अभी कल वहां छापा जो पड़ा है रामपाल के अड्डे पर आपको पता नहीं ज्ञात हो कि ना ज्ञात हो। जी। वहां पर जो
00:06:33:10 छापा पड़ा है वहां पर जो है उसमें इतने अब तक 1500 कमेंट आ चुके हैं कि भाई रामपाल ये अच्छा है वो अच्छा है अब मैं हर एक के कमेंट में जाकर के तो ये अब तो मैं कम टू लाइव भी नहीं लिख सकता वहां पर मगर यदि कोई बहुत लंबा और और मुझे लगता है कि भाई यह व्यक्ति थोड़ा सा एक धारा में बात कर रहा है रटी रटाई बातें नहीं कर रहा है तो रामपालियों के सेक्शन में भी जाकर लिख देता हूं कि सामना करो या कम टू लाइव तो मुझे मुझे लगता है कम से कम इस बात का इस बात का क्या कहते हैं विरोध नहीं होना चाहिए आपका नहीं होना चाहिए प्रबुद्ध जनों का बिल्कुल है ना तो और वो बात एक अलग है कि मेरा पक्ष क्या है भागवतानंद का पक्ष क्या है वो उसमें आप किसी एक पक्ष में खड़े हो सकते हैं मगर कम टू लाइव को लेकर के उपहास की स्थिति या विरोध की स्थिति आपत्ति की स्थिति मुझे लगता है नहीं होनी चाहिए इसलिए मैंने कहा क्योंकि आपका जो है वक्तव्य मरदित लगा मुझे और मैंने देखा कि आपकी आईडी वगैरह मेरा क्या है? तो आप भी धर्म के ही उसमें जो है कार्य कर रहे हैं। जागरूकता तो मैंने एक मैंने पोस्टर देखा तो मैंने कहा आपसे बात की जाए। हो सकता है आपके ही माध्यम से उस प्रांगण में मेरी ये बातें जा पाए जो नहीं जा पा रही है। भाई उस वो Facebook
00:07:48:12 पे मुझसे कहीं क्या कहते हैं? काफी दिन पहले से सक्रिय है। हम मैं जिन दिनों वो यहां पर सक्रिय था पूर्ण रूप से उन दिनों मैं YouTube पे शुरुआत कर रहा था। तो मेरा बहुत सा ऐसा पक्ष है जो भागवतानंद को जानने वाले नहीं जान पाए हैं। हम भागवतानंद से मेरी कोई शास्त्रीय सिद्धांतों को लेकर लड़ाई थोड़ी ना है। हम कि भागवतानंद ने कोई व्याख्या की है धर्म की जो मैं गलत बता रहा हूं। हम भागवतानंद के ऐसे असिद्ध आरोप है जिनके सिद्ध ना होने की स्थिति में मैंने उससे शुरुआत में कहा था कि सम्मान पूर्वक हम सम्मान पूर्वक दो से तीन वीडियोस मैंने बता बनाए थे कि भाई इस यह सिद्ध नहीं हो सकते हैं। ऐसी बातों पे हम लोग लड़ ही रहे हैं। आप भी लड़ रहे हो इस वालों से, आर्य समाजियों से। तो ऐसे असिद्ध आरोप ना लगाओ जो सिद्ध नहीं है। उन पे आप बात कर रहे हो। हम जैसे किसी ने कह दिया कि तुम्हारी तुम्हारे घर की कोई स्त्री है वो बाहर घूम रही थी किसी व्यक्ति के साथ। अब मान लो चलो किसी ने कह दिया तो हम इस पर जो तहकीकात करेंगे कि हमारे घर की स्त्री घूम रही थी कि नहीं घूम रही थी? वो क्या पहले हम न्यूज़ में निकलवाएंगे या अखबारों में निकलवाएंगे कि मेरे घर की स्त्री घूम रही है। मैं तहकीकात करने जा
00:09:03:15 रहा हूं। हम हम तो अपने अंदरूनी स्तर पर उसकी तहकीकात करेंगे। स्वयं से करेंगे। बिल्कुल है ना? न्यूज़ में निकलवा के तो करेंगे नहीं। अब जो असिद्ध आरोप है उसको आप सार्वजनिक रूप से बोल रहे हैं। प्रमाण मांगा जा रहा है तो आप प्रमाण नहीं दे रहे। कह रहे हैं कि हमारे पास सुरक्षित हैं। समय आने पर हम दे देंगे। हम और फिर भी अपने वक्तव्य रोक नहीं रहे हैं। हम तो फिर भैया आपको कोर्ट में बुला लिया गया। अब दे दो। अभी कोर्ट में शायद 29 का है। नोटिस भी आया क्या? हां हां नोटिस भी आया है। 29 तारीख का 29 का है। हम तो हमारी उससे कोई धर्म और धर्म की उसको लेकर के शुरुआत में वो नहीं थी। हमारी ये थी कि आप अशुद्ध आरोप नहीं लगा। आप अद्ध आरोप मत लगाइए। आरोप लगा रहे तो प्रमाण दीजिए। हम और बहुत ही मैंने सम्मान पूर्वक पहले तो बिना पहला वीडियो जो बनाया था वो नाम नहीं लिया था। हम सांकेतिक तरीके से कहा था क्योंकि जिसका मैं पक्ष ले रहा हूं मेरी बहन है। मैंने ही उनको शंकराचार्य के साथ आपकी बहन कौन विजयश्री विजय श्री वो लेकिन उनकी तो बहुत सारी सुनिए अब उनकी तो मैंने भी बहुत सारी ऐसी वीडियो क्लिप वगैरह देखी है तो उसमें क्या सत्यता है फिर क्या उनके पहनने के उनके क्या नाम है बहुत सारे उनके शास्त्रीय कृत देखे गए हैं ऐसा तो है नहीं कि नहीं देखे गए नहीं नहीं देखिए अशास्त्रीय कृत की अगर बात
00:10:18:19 करें तो अशास्त्रीय कृत तो उस वकील के भी है जो वकील जो वकील भागवतानंद का केस इस समय लड़ेगा है ना अच्छा हम मगर अगर बात ये है क्या वो वकील अपने आप को आचार्य घोषित कर रहा है? क्या वो अपने आप को मंच पर ले जा रहा है? क्या वो कथा व्यास बन के बैठ रहा है? हम पहली बात। दूसरी बात यह है कि जो वह जो ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो हैं जिनका उपहास उड़ाया जा सकता है या उड़ा रहा है वह उनके भूतकाल के जीवन में जीवन के शंकराचार्य जी के सानिध्य में आने से 5 साल पहले छ साल पहले अच्छा उसके पूर्व के वीडियो उसके पूर्व के वीडियो है और उनके सानिध्य में आने के बाद धीरे-धीरे ज्ञान प्राप्त होते हुए वो आप एक सामान्य व्यक्ति की तरह अपने आप को बदलने का प्रयास कर रही है जितना मालूम पड़ता जा रहा उतना बदल रही है। और जब ये सब बातें हुई थी भागवतानंद ने बाद में उठाई थी। पहले कुछ और लोग थे जिनके द्वारा Instagram इत्यादि पर मौल बनाया गया था। अच्छा मैंने इस विषय के लिए इस विषय को लेकर के मैंने इस पर खंडन पूर्वक वीडियो बनाया। अच्छा पहले Instagram रील बनाई कि भाई आप लोग कोई व्यक्ति सुधर रहा है तो उसकी टांग क्यों खींच रहे हो? हम सही है। इस संबंध में अच्छा अगर सुधरे अगर बिगड़े हुए को नहीं सुधरना
00:11:33:27 है तो क्या सुधरे हुए को सुधरना है? हम जो भी व्यक्ति धर्म का प्रचारक बन के निकलता है वह सुधरे हुए को सुधारेगा या बिगड़े हुए को सुधारेगा? बिल्कुल बिल्कुल तो उस भावना से मैंने वो रील बनाई थी। हम अब अगले ही दिन हुआ क्या कि वो विरोध होते बात यहां तक पहुंच गई इन तक और इन्होंने एक और बहुत तगड़ा वीडियो निर्गत कर दिया कि वो तो मलेच्छराज की दूत हैं। यह हैं वो हैं। ये सब घोषित कर दिया। जबकि इन्होंने कहीं पर भी अपने आप को आचार्य या गुरु इत्यादि नहीं कहा है। एक सामान्य व्यक्ति है जो इंस्टाग्रामर भी था। उसको पता चला कि कोई करपात्री जी महाराज का पूरी के शंकराचार्य जी का शिष्य है जो इस से लड़ रहा है। विरोधियों से लड़ रहा है। शिव की निंदा करने वालों से लड़ रहा है। वो प्रभावित हुई। उन्होंने थोड़ी और बात की तो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की व्याख्या उनको अच्छी लग गई। धीरे-धीरे पूरी के शंकराचार्य जी के प्रति आस्था बढ़ गई। उन्होंने जाकर दीक्षा ले ली और अपने अधिकार की सीमा में रहकर उन्होंने वहां मठ में कुछ दिन जितने दिन वो रही एक दो दिन तीन दिन चार दिन उतने दिन वहां सेवा दे दी वहां पर ऐसा तो नहीं है कि वो मंच पर बैठ गई। इसने जो है भागवतानंद ने जब वीडियो बनाया तो यह भी कह दिया कि वह जो है मंच पर कोई और महिला आई थी उसको विजयश्री के रूप में प्रस्तुत
00:12:49:01 कर दिया कि देखो विजय श्री इतनी जिसका भूतकाल में ऐसा जीवन रह चुका है वो जो है पूरी के शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा कर रही है तो आधी अधूरी जानकारियों के ऊपर आप अिद्ध आरोप लगाते जा रहे हो लगाते जा रहे हो तो और जब आपसे पूछा जा रहा है कि भैया चलो ठीक है तुम जो आरोप लगा रहे हो वो सिद्ध करो तो तुम कह रहे हो कि भैया तुम्हारा हमसे अधिकार नहीं है क्योंकि हम बहुत बड़े आचार्य हम है ना आचार्य अगर आप हैं तो आपसे हमारा धर्म की व्याख्या को लेकर के वो नहीं था हम हमारा था आप असिद्ध आरोप ना लगाएं सार्वजनिक रूप से उनकी जांच परख कर लें तब लगाएं अगर आप दुश्मन है तो और अगर आप घर के हैं तो अगर जांच परख करने पर भी पाया जा रहा है तो घर के तरीके से बात करिए उसका अनुसंधान किया जाएगा तो यदि आप मान लीजिए घर के नहीं है शत्रु भी है तो आप आप जो है फिर सिद्ध आरोप लगाइए। आप जो सिद्ध कर सके वो बोलिए। हम तो ये सब तो खैर उनकी बात रही। अब जब वो स्वयं ये कह चुके हैं अपने वीडियो में भागवतानंद स्वयं कह चुका है कि क्या कहते हैं? विदेश यात्रा करने वाले का मैं सपोर्ट नहीं करता हूं। मगर जिसको जिसने विदेश
00:14:04:12 यात्रा छोड़ दी है और अब विदेश यात्रा की वकालत नहीं करता उसको मैं कह देता हूं कि अपने प्रायश्चित पूर्वक इतराइत तुम अब अपना जीवन जी सकते हो तो वही वही वही वही कार्य तो वो कर रही है मगर उसकी आप लगातार टांग खींच रहे हो उसके भूतकाल के जीवन पर वो प्रायश्चित कर चुकी है। वो आचार्य के सानिध्य में आकर के मार्गदर्शन प्राप्त कर चुकी है। अब वो अपने अधिकार की सीमा में रहते हुए अपना काम कर रही है। जो वो थी वो वो है Instagram पे वो Instagram इन्फ्लुएंसरर थी वो अपना काम वहां पर कर रही अब उसने अपने जीवन को और बदला है धीरे-धीरे और उसको मार्गदर्शन मिलेगा और वो बदलेगी अपने आप को मगर उसने अपने आप को यह घोषित थोड़ी ना किया कि मैं कोई आचार्य बन गई हूं हम या शंकराचार्य के सानिध्य में आकर के मैं जो है ये बन गई हूं वो बन गई हूं जो वो है वह वही बता रही है हम फिर आपको उस पर आपत्ति क्या है अगर पट अगर शास्त्रीय कर्मों पर आपत्ति है तो आप ही बताइए हमारे आसपास कितने परसेंट हिंदू है जो पूर्णतया शास्त्र सम्मत मिलेंगे। बिल्कुल सही है। तो बात क्या आएगी कि भाई अज्ञानता वश अथवा क्या कहते हैं? विवशतावश धर्म का अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में यदि धर्म का अनुकरण ना करने कर
00:15:19:13 पाने का पश्चाताप है आपके अंदर तो आप धर्म के कहलाएंगे। और यह भी बात भागवतानंद ने अपने वीडियो में कह दी है कि शास्त्रों का नाम लेकर आत्महत्या नहीं कर लेनी। यथासंभव उनका निर्वाह करना है। अब उस लेडी वो जो गुरु बहन है हमारी उनके परिवार में जो मुख्य इस समय अर्निंग पर्सन है वो स्वयं है। उनके माता-पिता इस योग्य नहीं है। उनके शरीर की अवस्था ऐसी नहीं है कि वो कुछ धनार्जन कर सकें। उन्होंने अपना पूरा जीवन जो है योग जो व्यायाम स्वरूप योग है उसको सीखने में ही बिताया है और उसी से उनकी आजीव कोपार्जन हो रहा है। अब योग वो यह कह के नहीं सिखाती कि क्या आपको जो है आध्यात्मिक उन्नति पर ले जा रहे हैं। आध्यात्मिक आपको दीक्षा दे रहे हैं या जो है हम आचार्य हैं। वो एक व्यायाम स्वरूप योग के आसन सिखाती हैं। ऐसा और उसी में जो कुछ लोग ये कहते हैं कि भाई वो जो है उपदेश क्यों कर रही है? यह बात तो सच है ना कि धर्म चर्चा तो कोई भी कर सकता है। बिल्कुल बिल्कुल धर्म चर्चा के रूप में वो जो है और यह अच्छी बातें नहीं है कि कोई अच्छी बातें तो कोई बता सकता है। कोई भाई क्या कहते हैं जो जिनका नेटवर्क उससे घिरा पड़ा है मिलेच्छ संस्थाओं से उनके बीच में कोई
00:16:34:14 जाकर के छाती ठोक के व्यक्ति कह रहा है कि भैया गायत्री मंत्र पढ़ना महिलाओं के लिए अच्छा नहीं है। प्रणव का उच्चारण वो अपने हर वीडियो में करती थी। उन्होंने बंद कर दिया। वो खुद वो खुद वो वो हमारा अनुवाद वहां प्रस्तुत करने लगी तो यह हमारे लिए तो गर्व की बात होनी चाहिए कि भाई हमने एक व्यक्ति को यहां से उठा के भी सुधारा इस इस बीच से जहां पर हर आदमी इसी बात से अपना नाम कमा रहा है कि भैया गायत्री मंत्र पढ़ने से महिलाओं को रोक देते हैं ये लोग बहुत बेकार लोग हैं मनुवादी ऐसे ही तो करते हैं हमारा दुष्प्रचार हम हम तो वहां पे ये मीनाक्षीरावत वगैरह है जो आर्य समाज की इन सबसे बराबरी से वो हमारे हमारी ओर से लड़ती हैं। तो ये सब तो अच्छी बातें हैं। प्रणव बोलना बंद कर दिया जो पहले बोलती थी अशास्त्रीय था। महिलाओं को नहीं बोलना चाहिए। उनको एक दिन खुद से पता चला तो उन्होंने बोलना बंद कर दिया। तो ये उनकी शरणागति है सिद्धांतों के प्रति गुरु गोविंद और ग्रंथ के प्रति। अब ऐसे में कोई व्यक्ति आता है उनके पुराने जीवन को लेकर के नाटक करने लगता है। और पहले हम सम्मान पूर्वक कहते हैं। एक दो तीन बार कहते हैं सम्मान पूर्वक नहीं मानता व्यक्ति। फिर कहता है तू हम तो तुझसे ऐसे ही बात करेंगे। तू इसी लायक है। अगर तू हमारी लाइव में आ। अगर तू मुझे लाइव में ले लेता
00:17:49:27 तो हम तेरा करियर खा जाते। तो फिर मैं अब क्या था? ये इस पहली बार गलत तरीके से बात करना इसने शुरू किया। मैं तो जी करके बात कर रहा था। और कारण क्या था कि हम जो भी हो हम वर्णाश्रमी हैं। दूर-दूर रह के इन पाखंडी संस्थाओं से लड़ रहे हैं। अच्छी बात है। हम दोनों एक दूसरे पर चीटाकसी करेंगे तो ये जो है इनको मौका मिलेगा। रील बनाएंगे और वो बनाई है इस वालों ने और आर्य समाज दोनों ने बनाई है। हां हां बिल्कुल। है ना? तो जब जब इस बातों इन बातों के चलते जब ये भागवतानंद ने मुझे अह लाइव के लिए कहा तो मैं मेरी एक दुविधा यह थी कि यह जिन मैं जिनका शिष्य हूं उनका खंडन इसने किया था और अच्छे से किया है। खंडन का प्रयास मेरे हिसाब से ठीक है हम और कई जगह उपहास पूर्ण तरीके से भी बोल चुका था कि भाई चारों शंकराचार्य को बुला लो चार करोड़ दे के ये सब अमाननाएं हैं ये कर चुके थे तो मेरे सामने एक दुविधा थी कि वर्णाश्रमी होने के नाते पाखंडी संस्थाओं का विरोधी ना होने के नाते हम में एकत्व है। ठीक है। हां जी। तो मैं तो हमें
00:19:05:08 ये जो एकत्व है अब जो है हम किसी विरोधी वैचारिक मतभेद के निमित्त मिलते हैं। हां और हम एक दूसरे पर छींटाकसी करेंगे। वहां पर जो है हो सकता है माहौल गर्म भी हो जाए। बिल्कुल बिल्कुल। ठीक है। तो अब मैं विरोधियों से मिल लेता हूं। इसका कहना था तुम अधुक्षानंद से मिल सकते हो। नकली शंख जो नकली शंकराचार्य बन के घूमता है। मैं उसका भी इंटरव्यू लेके आया था। तो तुम उससे मिल सकते हो। तुम मुझसे क्यों नहीं मिल सकते? क्योंकि तुम मेरे भाई हो। हां। मैं तुम्हारे साथ अपने युद्ध को समाज में प्रस्तुत नहीं करना चाहता था। हां। और मुझे वहां पर आकर के मैंने गुरुदेव की बात इसलिए बताई कि मुझे वहां आकर के तुम्हारा विरोध करना ही था। वो मेरा कर्तव्य था। हम क्योंकि तुमने विरोध बोला है विरोध में गुरुदेव के। तो वहां फिर मेरा कर्तव्य है कि वहां प्रतिकार करना है तुम्हारा। अगर मैं तुम्हारे आसपास हूं तो आप ही बताओ आप अगर आर्य समाजियों के यहां होगे और आर्य समाजी वहां पर वो हमने काशी में पंडों को हराया ये हराया वहां बैठे होगे तो वहां आप बोलोगे ना बिल्कुल बिल्कुल कि सुनते रहोगे तो उसी प्रकार से उसी प्रकार से मेरा कर्तव्य हो जाएगा कि अगर मैं आपके आसपास हूं तो मैं आपका प्रतिकार करूं। तो क्योंकि मैं प्रतिकार किए बिना नहीं रह सकता आपके समक्ष आने के बाद इसलिए मैं दूर रहना उचित समझ रहा हूं।
00:20:21:27 हेलो जी जी जी तो मैंने कहा कि क्योंकि मैं प्रतिकार किए बिना आपके समक्ष नहीं रह पाऊंगा इसलिए मैं दूर रहना उचित समझ रहा हूं। दूर ही रह लो भाई ठीक है नहीं विचार मेल खा रहे है कुछ तो रहने दो छोड़ो उन बातों को अपना काम करते रहो जो है हां ये सोचते हुए मैंने उस चर्चा के लिए कहा कि इस इसके लिए व्यक्तिगत चर्चा अपेक्षित है। मैंने मना भी नहीं किया। मैंने कहा इन और एक उसमें बहुत महत्वपूर्ण बात थी कि इन्होंने जो है चारित्रिक आरोप लगाए हैं किसी के ऊपर। ठीक किसके ऊपर? मठ के परिकरों के ऊपर। अच्छा हां। चारित्रिक आरोप लगाए थे। अब बात ये आती है कि चारित्रिक आरोप लगाए हैं। खुद ही कह रहा है मेरे पास कोई वीडियो नहीं है। फिटेज नहीं है जिससे सिद्ध हो जाए वो चारित्रिक आरोप। मगर किसी ने अपने मनगढ़ंत कुछ एडिट करके कुछ स्क्रीन रिकॉर्डिंग बना के ये जो ये फलाने का वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा हूं। इसमें ये सामग्री है। मतलब उससे कुछ भी सिद्ध नहीं हो रहा है। मगर चौवा बन रहा है। बातें हो रही बस हम है ना? तो इन्होंने चारित्रिक आरोप लगाए थे किसी के ऊपर। अब ये चाहते हैं कि मैं लाइव चर्चा करूं आकर के। लाइव चर्चा हम किस पे करते हैं? आपने अगर मेरे वीडियोस नहीं देखे हैं तो मैं भेज दूंगा एक तो हमारे समाजियों के साथ इस के साथ। लाइव चर्चा हम लोग करते हैं कि तुम्हारा ईश्वर बाध्य है।
00:21:37:22 तुम्हारा मोक्ष बाधित है। आश्रम व्यवस्था कैसे? हां। यह सब लाइव चर्चा के विषय है। हम वहां बैठ के करें कि भैया उस समय वो अंडरवियर में था कि नहीं? उस समय वो कपड़े पहने था नहीं। तो यह क्या किसी के चार जो अभी आरोप सिद्ध नहीं है उस पर इस तरीके से सार्वजनिक बातें करना उस व्यक्ति का उस व्यक्ति का चीर हरण नहीं होगा क्या लाइव चर्चा करके। जो अभी सिद्ध नहीं है। भले ही उसका रिजल्ट जो भी निकले उसका मजाक तो बन जाएगा ना वहां। हां हां। हम लोग चाहे किसी के चारित्रिक विषय इसीलिए इस प्रकार के जो आरोप होते हैं उसमें मनुस्मृति में दिया गया है कि आप इस प्रकार के आरोप यदि सिद्ध नहीं कर सकते हैं आपने आपने कहा ये दूषित है स्त्री आप सिद्ध नहीं आपके पास प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है तो आपका यह कहना भी गलत हो जाएगा पाप माना जाएगा हां आरोप लगाना भी पाप है वहां पर और हम जो है उस पर सार्वजनिक चर्चा करें तो ये दो तीन उद्देश्यों के कारण प्रथम दृष्ट्या में मैंने इनको सार्वजनिक चर्चा से मना कर दिया कि पहली बात यह है कि भाई मैं आपके पास अगर आऊंगा तो मेरा वहां कर्तव्य हो जाएगा आपका विरोध करना जो कि मैं करना नहीं चाहता हूं। क्योंकि आप भी अच्छा कार्य कर रहे हैं। ठीक है। अमुक अमुक अंशों में करते रहिए। दूर रह के ही ठीक है। हां। और दूसरी बात ये थी कि किसी का चारित्रिक
00:22:53:06 विषयक चर्चा में जो है ऐसा ना ऐसे जो है मतलब नग्नता के साथ वहां पर मैं मैं नहीं कर सकता। आप शायद कर सकते हो। इन दो तीन तो इन दो तीन कारणों को लेते हुए मैंने उनको मना किया था। ठीक है? और मैंने यह नहीं कहा था सिरे से कि मुझे करनी ही नहीं है। मैंने ये कहा था कि मुझे इस मामले पर जो है व्यक्तिगत चर्चा अपेक्षित है। आप आ जाइए यहां पे बैठ के बात करें। आपको क्या-क्या सबूत मिले हैं। हम भी भैया देखेंगे उस पे काम करेंगे। और वो कोई खास सबूत नहीं। वो पहले ही हमारे बीच में दौड़ चुके थे। वो सबूत और हमने उसकी हमने उसकी जांच की थी। हमें कुछ मिला ही नहीं। जब कुछ सिद्धि नहीं हो रहा तो हम उस पर क्या कारवाई कर ले? हुआ यह है कि कभी इनको मठ से जो है नकारात्मक व्यवहार मिला। इनके अब इनकी गलती थी कि नहीं थी उसप मैं नहीं जाऊंगा। मगर इनको जो है मठ में गुरुदेव से मिलने से रोक दिया गया। तो संभवत इनके अहंकार को ठेस पहुंच गई। हां। तब से जो है ये मठ के परिकरों के बारे में उल्टा सीधा बोलना और कोई भी बात अगर उनसे संबंधित मिल जाएगी तो उसको बढ़ा चढ़ा करके करना इन्होंने चालू स्वामी जी ठीक है स्वामी जी के तो पूज्य शंकराचार्य जी के तो पक्षधर हैं स्वामी जी पक्षधर हैं मगर कई मामलों में उपवास भी उड़ाते हैं आपने देखा नहीं कभी स्वामी जी मुझे
00:24:08:09 लगता है कि ऐसा उनके लिए तो कभी ऐसा अभी अभी एक वीडियो बनाया था शुभांकर मिश्र के उसके बाद ये व्यक्ति जो है आत्म मुग्ध हो गया है और जो है मुझे लज्जा आती है कि कभी मैंने अपना इसको समय दिया ये तू तड़ाक से बात कर रहा है स्वामी जी के लिए पूरी के शंकराचार्य जी के लिए ऐसा हां हां तो और ये पहले भी ऐसी बातें कहीं-कहीं कटाक्ष पूर्वक कर चुका था जिसके कारण मेरा दायित्व बन जाता है एक शिष्य होने के नाते कि मैं चुप नहीं रह सकता जब मैं वहां आपके पास आऊंगा तो इसलिए पास आओ ही मत जो वैसा दृश्य उत्पन्न हो हम फिर जब यह उस बात को खींचता ही गया खींचता ही गया इसने तूतड़ा की भाषा शुरू कर दी इसने मेरी उदारता को कायरता समझना शुरू कर दिया तो मैंने भी तुरंत घोषित कर दिया कि ऐसा ऐसा कोई भय थोड़ी ना है तुमसे तो तुम आ जाओ तब से जब से मैं बुला रहा हूं तब से ये आया नहीं है सामने से चर्चा क्योंकि इसको मालूम है कि जब जब मैं ये कहूंगा कि भैया तू सिद्ध कर तूने जो आरोप लगाए हैं आरोप से शुरू हुई है बात अब किसी स्त्री को वैश्या कह रहा है अब सिद्ध कर अब वैश्या कैसे सिद्ध करोगे बताओ उसके लिए प्रत्यक्ष प्रमाण होने चाहिए जो आपके पास है नहीं बातों से तो सिद्ध होगा नहीं हम तो यह आ नहीं रहे फिर
00:25:23:10 जब आप इतनी बातें कर रहे हो दूसरों के बारे में भाई जो व्यक्ति कार्य करता है जैसे यह कोर्ट गए तो कोर्ट में पतलूून पहनने वालों से इनको सहारा लेना पड़ गया। हम इसी प्रकार से जब आचार्य गण काम करने निकलते तो उनको आज की जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल जो कुछ संसाधन मिल पाते उनका उन्हें उपयोग करना पड़ता। तो उन सब बातों को लेकर के आप समीक्षा करते हो। अभी मैंने इसका वीडियो देखा है। यह माइक पर प्रणव का उच्चारण करा रहा है कि नहीं? जय जगह। अभी इनका जो वहां उमरिया में चल रहा है। हां हां प्रणव का उच्चारण हो रहा है वहां। अब इसी प्रकार के इसी प्रकार की चीजों को लेकर के ये व्यक्ति उसका ये था कि जैसे जो अभी कथा चल रही है आपको पता तो चल ही गया कि मैं स्वामी जी के साथ ही रहता हूं। नहीं मुझे नहीं पता चलेगा। नहीं वीडियो आपने अगर देखी है तो उसमें मैं उपस्थित रहता हूं लगभग। आपको ये ज्ञात है कि मैं साथ में ही हूं। अच्छा नहीं मैंने तो आपका एक रैंडम वो देखा था उसमें कई फोटो आपके थे उनके साथ पर मैं इस बात पर गौर नहीं कर पाया हूं कि आप जो अभी आपने वीडियो देखी उसमें भी सब कुछ जैसा जो अभी ओंकार का ओम जय शिव ओंकारा का आरती हो रही थी उसमें हुआ ऐसा था कि संगीत वाले वहां पर उपस्थित
00:26:38:19 नहीं थे पहले छोटे बच्चे बैठे हुए थे हनुमान चालीसा वगैरह तो वो अचानक से संगीत वाले का अचानक से हुआ हां और उसके बाद स्वामी जी ने मना भी किया कि इनको जाकर के मना कर दीजिए कि ओम का उच्चारण ना करें। तुरंत ही मैंने जाकर के उनको मना किया। लेकिन वो आरती चल गई थी तो इस विषय में इसलिए उसमें ठीक है। वो गलती से हो गया। मैं मान लिया। मगर ये क्या करते हैं कि ये उसी चीज को जो रोक दी गई जो कुछ कर दिया गया। अब भाई जैसे वो पहले ठीक कपड़े नहीं पहनती थी। उसने वो भी तो रोका। उसने सही कपड़े पहनना शुरू कर दिया ना। हम मगर उस बात को तो प्रचारित नहीं किया गया कि यह इसके ऐसे कपड़े हैं। उसको बेचारी को इतना वैश्या कहा गया है कमेंट में हम कोई व्यक्ति के सुधरने की यह सजा मिलती है उसको हम परंपरा प्राप्त आचार्यों के सानिध्य में आने की यह सजा उसको मिलेगी। वर्णाश्रमियों के सानिध्य में आने की यह सजा उसको मिलेगी कि वह आएगी तो उसको जो है उसके पुराने जीवन को आधार बनाकर वैश्या है उल्टा है यह है और हमारे साथ उसका भाई का संबंध है और हम बहन भाई के संबंध पे ही जो है विजय श्री के ये बोलता है व्यक्ति अपने वीडियो में विजय श्री के ऊपर ऐसा ऊपर और नीचे बहुत कुछ ऐसा है जो मेरे पास नहीं है इसलिए शिवश मेरी बात नहीं सुनेगा हम तो अब वो बच
00:27:53:22 गया सो बच गया अच्छा उसके बाद आपके द्वारा वो निर्गत भी किया गया है बज ते हुए हम तो यहां पर यह भी बात आ जाएगी कि भाई अगर वो गलत चीज थी तो उसको निर्गत क्यों किया गया? खैर मैं उस पर नहीं जा रहा हूं। ठीक है वो हो जाता है। मगर इसी प्रकार की चीजों को लेकर के ये भी तो समीक्षा करता है। तो फिर मैंने ये कहा कि अगर तुम इतने समीक्षक बन रहे हो तो कुछ चीजें तुम्हारी भी समीक्षा योग्य है और जिनमें से एक बहुत महत्वपूर्ण चीज है परंपरा। तो मैंने कुछ दो तीन चीजें की कि जो असिद्ध आरोप आप लगा रहे हो उसके लिए अपनी परंपरा के लिए और जो बाकी के आपको लगे उन बातों के लिए आप सामने आ जाओ तो तब से व्यक्ति सामने नहीं आ रहा है। हम और है क्या कि मैं मेरा भागवतानंद से एक बहुत छोटा सा मामला है। मेरा मामला तो रामपाल से चल रहा है। स्कॉन से चल रहा है। आर्य समाज से चल रहा है। और बड़े स्तर पर रामभद्राचार्य जी से रामभद्राचार्य जी से कोई विरोध वाला वैसा मामला नहीं चल रहा कि लगातार चली जी को कई बार बहुत शब्द तो हमने हमने प्रतिकारात्मक वीडियो बनाया था अच्छा बनाया था हां बनाया था हमने हम आपको भेज देंगे जब वो प्राण प्रतिष्ठा में बोला था इन्होंने चारों शंकराचार्य में से कोई संक्षित नहीं बोल सकता हमने उसी समय अभी अभी का उनका कुछ एक वक्तव्य
00:29:09:01 आया था ऐसे कुछ अभी का वक्तव्य आया था तो पहली बात तो यह है जब उसमें राघवाचार्य जी ने इतना अच्छा वक्तव्य दे दिया और हम उसको प्रमोट कर रहे हैं। हमने भी अपने अपने क्या कहते हैं अपने जो जो हमें समय में मिल पाया तो हमने अपनी पोस्ट डाल के विरोध किया था उनका। मगर जब हमने यह देखा कि जब राघवाचार्य जी महाराज का स्वयं से इतना अच्छा वक्तव्य आ गया है। हां तो अब उसमें हमारे वक्तव्य से क्या प्रभाव पड़ जाता है अलग से। या तो किसी का ना आया हो, किसी गद्दावर आचार्य का ना आया हो, किसी बड़े आचार्य का ठोस ठोस कोई वक्तव्य आया ही ना हो, तब तो यह अभाव महसूस होता है कि भैया इनको उत्तर दिया जाना चाहिए। जैसे पुंडरिक जी वाले मामले में सब शांत रहे। क्यों? क्योंकि वो वैष्णव थे। हां कोई नहीं बोला तो उसमें हमने दिया वक्तव्य। हम तो रामभद्राचार्य जी वाले में जब जी रामभद्राचार्य जी वाले में जब वक्तव्य आ गया राघवाचार्य जी महाराज का तो फिर उसमें हमारा बोलना ना बोलना ना बोलना कोई मायने नहीं रखता है। उसमें केवल हमारा बोलना है कि उपस्थिति दर्ज करना उसका कोई उद्देश्य नहीं रह जाएगा। उपस्थिति दर्ज करना कि हमने भी बोला तो हमने तो लेख इत्यादि
00:30:24:07 के माध्यम से बोल ही दिया था। एक साथ सारी लड़ाईयां थोड़ी ना लड़ पाएंगे। भैया हमें तो वहां हाई कोर्ट के लिए भी दौड़ना पड़ रहा है। हमको तो शामली भी जाना पड़ रहा है। हमको इसकी पुस्तकें कहां छप रही है वो भी करना पड़ रहा है। तो हम हर मामले पे थोड़ी ना हम हम जो है वक्तव्य देने बैठ पाएंगे। बहुत सी चीजें हम नहीं कर पाए। इस बीच बहुत सी चीजें हुई। ऋषि उवाच वहां गया था हाइपरकस्ट के चैनल पे। वहां जाकर के आदि शंकराचार्य जी का खंडन करके आया। खंडन का प्रयास तो हम उस पर वीडियो नहीं बना पाए। विज्ञान दर्शन ने करपात्री जी महाराज को बहुत बुरा बुरा बोला। हम उस पर वीडियो नहीं बना पाए हम क्योंकि हमें समय नहीं मिल पाया। लगातार हम जूझ रहे थे और उसमें काफी कुछ समय ऐसा भी है जो भागवत आनंद ने भी हमारा लिया। हम अभी कल ही की बात है जब हमने वो रेड रेड के लिए गई थी पुलिस। वहां रामपाल वाले मामले में पूछताछ के लिए गई थी। वो वीडियो बनने के बाद रामपाल ही हमको फोन करके कह रहे हैं क्यों भागवतानंद से फुर्सत मिल गई। फिर से हमारे पीछे क्यों पड़ गए हो? यह वक्तव्य है रामपालियों का। इसका मतलब जितने विरोधी हैं यह फायदा उठा रहे थे बैठकर के मेरी और रामपाल की या मेरी और भागवतानंद की आपसी उसका कि भैया अच्छा हुआ ये लोग आपस में व्यस्त है।
00:31:39:01 हमें क्या करना है? तो रामभद्राचार्य जी का कोई मैं समर्थक नहीं हूं कि उन्होंने जो है वो शंकराचार्य जी को कुछ कहा है कि नहीं कहा है तो मैं कुछ बोलूंगा। मगर वहां मेरे बोलने की आवश्यकता भी तो होनी चाहिए। जहां पर हमसे बड़े खड़े हुए हैं निर्णय लेने के लिए, प्रतिकार करने के लिए वहां पर मैं उनसे आगे बड़ा बन जाऊं क्या? और फिर उसकी आवश्यकता क्या रह जाएगी? मान लीजिए मैं खड़ा हूं। मेरा छोटा भाई खड़ा है। मेरा बेटा खड़ा है। हां। और सामने वाला कोई हमारे घर पर कोई गरमा भंग करने वाली बात कर रहा है। कुछ कर रहा है। मैंने उसके धर के एक कंटाप मार दिया। एक चांटा मार दिया। हम और उसको अच्छे से जो उसकी दुर्दशा होनी थी वह कर दी। फिर मेरा जो 4 साल 5 साल वाला बेटा है वह भी करे मैं तेरा खून पी जाऊंगा यह करूंगा जबकि वह उसको मार भी नहीं सकता कुछ कर नहीं सकता मगर वो करे खून पी जाऊंगा तो उसका कोई औचित्य रह जाएगा क्या बिल्कुल तो वही तो है यहां राघवाचार्य जी महाराज ने इतना सुंदर वक्तव्य दे दिया तो हम फिर वहां पे क्या करें और भी कई क्या कहते हैं ऐसी राजनीतिक कारण भी हैं अब जैसे भागवत का एक आरोप है कि तुम रामभद्राचार्य के विरोध में इसलिए नहीं बोलते कि मेरे पास चार गुंडे नहीं है। गुंडे
00:32:54:12 तो रामभद्राचार्य से ज्यादा भागवतानंद से ज्यादा रामपाल के पास है। हम उसको तो पकड़ने के लिए ₹27 करोड़ खर्च हुए थे। देशद्रोह का उसके पास मुकदमा चल रहा है। कौन बड़ा गुंडा साबित हुआ? हम वो तो साबित गुंडा है। तो उससे तो हमने लड़ते टाइम ये नहीं सोचा। मगर रामभद्राचार्य से रामभद्राचार्य जी से डायरेक्ट इस तरीके से लड़ने में परेशानी क्या होती है? कि रामभद्राचार्य जी को मानने वाले कौन लोग हैं? वही हिंदू तो हैं जो हमारे घर के बगल में रहते हैं जो मूर्ति पूजक है जो वर्णाश्रमी हैं हां तो सीधे तौर पर और गलत तरीके से बिना सोचे समझे रामभद्राचार्य जी के विरोध में बोलने से जो हिंदू आपका साथ दे सकते हैं मंदिर को बचाने के लिए किसी मोर्चे को निकालने के लिए कहीं पे कोई रामपाल जैसे का स्टॉल लगा है या फिर कहीं पे कोई ईसाई का धर्म परिवर्तन हो रहा है जो आपके साथ जा सकते हैं वो आपसे कटेंगे ना तो वहां पे दर्शन विज्ञान और व्यवहार का सहारा लेकर के काम किया जाता है। अब हम देख रहे हैं कि राघवाचार्य जी महाराज ने इतना अच्छा वक्तव्य दे दिया तब भी हम जबरदस्ती वहां घुसे। उनके ही शिष्यग इसमें रामपाल वाली उसमें पिटीशन में तो 17 पिटिशनर्स में से पार्टी है उनके ही शिष्य रामभद्राचार्य
00:34:09:25 जी के। हां। अब बताइए रामभद्राचार्य जी ने गलत कहा। मगर क्या वो इतना गलत था जो रामपाल ने कहा? तो प्रायोरिटी हम किसको देंगे? हम सही है। रामपाल को हम प्रायोरिटी देंगे। भाई रामभद्राचार्य जी को एक बार बच जाए। ठीक है? उनके खिलाफ हम काम नहीं कर पाए। वहां व्यष्टि का वो सवाल है। मगर रामपाल वाला कार्य तो समष्टि का है ना। हम्म। हम वह नहीं प्रभावित होना चाहिए। तो हमें फिर वहां चुप रहना पड़ता है। ऐसे कार्य यह चुनाव, यह रणनीतिक कार्य वही तो करेगा जो उतरेगा मैदान में। और मैं यही कहता आया भागवतानंद उतरा तो है नहीं आज आप उतरे हो आप जैसे ही ट्रेन पर जाओ ट्रेन रेलवे स्टेशन पर गए आपको वहां के लोगों से अनुमति लेनी पड़ गई ना हम आप जब कहीं पर कथा करते हो तो प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ गई ना हम आप जब मेरे विरुद्ध या एप्लीकेशन लगाने गए या किसी के विरुद्ध एप्लीकेशन लगाने गए तो न्यायपालिका को सम्मान देना पड़ गया ना हम यही रणनीति जैसे ही क्रिया होगी वैसे ही आपके आपकी जो शास्त्र सम्मतता है उसमें कहीं ना कहीं धीरे-धीरे ऐसी चीजें आएंगी जो प्रश्न जिन पर प्रश्न किया जा सकता होगा हम
00:35:25:18 जब तक क्रिया नहीं है केवल मंच है केवल कमरा है तो केवल समीक्षा करते रहो कोई विशेष कार्य था क्या कोई विशेष कार्य था क्या स्वामी जी से अभी थोड़ी देर बाद आप मिल कोई विशेष ऐसा है तो फिर क्या मतलब जैसे मैंने आपको बताया था कि शुरू में एक संकीर्तन होगा और कथा के विश्राम पे वही आरती और एक संकीर्तन बस इतना ही होना है। बाकी कुछ नहीं होना है। कथा के बीच में कोई संगीत नहीं कुछ नहीं। ठीक है? बस यही है। और प्रारंभ में एक आरती कोई सी होगी तो आप इतना ध्यान दीजिएगा कि प्रणव युक्त कोई भी ऐसा ना बोलिएगा। ठीक है? ओम इत्यादि का उच्चारण करके। ठीक? राम का तो कर सकते हैं ना। हां हां हां हां बाकी शायद इनके यहां जो स्वामी जी हैं उनकी कोई आरती है। एक बार उनसे अभी देखो मैं पूछ लूंगा। दिलवा दूंगा। हां
00:36:17:03 अच्छा इनके साथ रहे आप हां तो ठीक है बट तो फिर बस हो गया महाराज जी बोले कि आप एक बार महाराज जी से समझ उसमें केवल इतना ही है एक मिनट भैया अपने को चल रहा है इसलिए ठीक है ठीक है वो आपकी गलती नहीं है ठीक है हां वो समाज का ऐसा हो गया है ठीक है लेकिन ठीक है ठीक है बस इतना ध्यान दीजिए तुरंत चेंज हां ठीक है ठीक है जी तो यही था कि भाई बहुत सी चीजें हैं जो बात करने से ही साफ हो सकती थी और अब वो कहते हैं ना बंदूक से निकली बोली जुबान बंदूक से निकली गोली जुबान से निकली बोली वापस नहीं जाते थे तो अब जो कह दिया है तो अब उसकी रक्षा करेंगे आगे बढ़ते चलेंगे भले ही उसके पीछे अब बुनियाद में कुछ हो या ना हो हम तो वो वाली बात है उस पे चल रहा है मामला तो हमने देखा कि आपने जो है कम टू लाइफ पर टिप्पणी की। तो मैंने कहा भैया कम से कम इस मामले पर कम टू लाइफ पर तो विरोध नहीं होना चाहिए। तो मैंने आपकी फिर प्रोफाइल देखी तो उसमें एक पोस्टर मिला तो मैंने कहा शायद ये आपका नंबर होगा। हां तो मैंने मिलाया मिलाया तो हम आपको दे रहे हैं। तो मैंने आपको कल रात को
00:37:32:04 मिलाया तो सुबह आपका फोन आया तो ऐसे हां रात्रि को आप फोन किए थे तो हम लोग मैं सो गया था। हां ठीक है। ठीक है और बाकी कोई सूचना है तो मुझे बता सकते हैं। मैं स्वामी जी तक पहुंचा दूंगा। अरे सूचना का कुछ बाकी रह ही नहीं गया जब अदालत हम लोग पहुंच गए तो अब उसमें अब क्या सूचना मैंने तो वहां पे अभी थोड़े दिन पहले विद्या भास्कर जी महाराज से भी कहा था। अब इन्होंने एक बहुत बार एक बात कही है कि भैया वो पूरी के शंकराचार्य जी को के जो सचिव जी हैं उन्होंने जो है अंग मर्दन कर करके होली खेली है स्त्रियों के साथ सन्यासी उनकी एक वीडियो तो आई थी शायद इस पर मैंने मैंने इस पर क्या कहते हैं वो किया कि भाई देखिए स्त्रियों के लिए मना है पर यदि स्त्री मातृत्व भाव से है तो जो माताएं होती है उनको देवी स्वरूप कहा गया है माताओं और बहनों को शास्त्रों में उस भाव से यदि और वहां पर उनकी माताएं वो उनका होमटाउन था और वो भी एक बार उनकी माताएं बहने इत्यादि थी जो वो उनको लगा रही थी और वो नहीं कर लगा रहे थे जो मतलब किसी भी बात को प्रस्तुत
00:38:47:10 करने का एक तरीका होता है उसी को आप अच्छे तरीके से भी कह सकते हो कि वहां पे भाई होली खेली गई उनकी माता जैसी स्त्रियों ने आकर के उनको वो लगा दिया और जो है उसी को आप ये भी कह सकते हो स्त्रियों के साथ अंग मर्दन कर करके होली खेल रहा है। तो एक ही बात को अलग-अलग तरीके से केवल भाव बदल जाते हैं। ठीक है? अब तुमने कहा अभी विद्या भास्कर जी महाराज का भी किसी कोई महिला है। देखिए आपका ही पोस्ट आया था शायद। हां स्पर्श हो रहा है उसमें तो उसको भी क्या ऐसे ही कहा जाएगा कि अंग मर्दन कर करके माला पहनाई जा रही है। नहीं कहा जाएगा। ये पक्षपात होता है। हम इन बातों को ले ये वही मैं कह रहा हूं। ऐसी बातों को लेकर के हम अच्छा जो मेरा अकाट्य शब्द था उस उसमें यही बात थी उन बातों को ले लड़िए उन बातों को ले सामने आई जो मतलब जो सिद्ध हो जिनको हमें सिद्ध करने की आवश्यकता ना हो जैसे हम इस कौन से कहते हैं कि भैया तुम जो है तुम्हारा ईश्वर बाधित है क्योंकि वो दूध से दही वो तुम दूध से दही की तुलना करते हो दूध से दही तो बन सकता है दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते पर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते सुना था मैंने अभी सुना तो ये बात तुमने स्वीकार कर रखी है। इस हमें सिद्ध नहीं करना है कि तुम ऐसा कहते हो कि नहीं।
00:40:02:26 तुम स्वीकार करते हो। ईश्वर कृष्ण और अल्लाह एक है। ये हमें सिद्ध नहीं करना है कि तुमने कहा है कि नहीं। तुम्हें स्वीकार है कि हमने कहा। अब हम उस पर लड़ रहे हैं। तो हमने कहा था ऐसी चीजों पर लड़ा करो। अकाट हो जो सिद्ध करने की आवश्यकता ना हो। अब इस में कोई बच्चे के साथ यौन शोषण हुआ। केस चल रहा है जो शोषण सिद्ध करना पड़ेगा कि नहीं हमको अगर हम लड़ने जाएंगे उस बात पे बिल्कुल बिल्कुल तो हम ऐसी बात को लेकर क्यों लड़े जिसमें हमारा ऊर्जा समय नष्ट हो और क्या कहते हैं निर्णय आए 50 साल के बाद के यौन शोषण हुआ था कि नहीं हुआ था लो मुकदमा चल रहा है हम तो उस चीज पर लड़ेंगे ना बिल्कुल सफाचट है कि भैया इस की किताब में ये लिखा हुआ है कृष्ण और अल्लाह एक है क्यों लिखा बताओ हम तो तो यही जो असिद्ध वाली चीजें इनके लिए मैंने अकाट्य शब्द का उपयोग किया। अब उस व्यक्ति ने समझा कि नहीं समझा उस बात को मगर उसका एक अलग छुआ उड़ा दिया। ये बताओ कि चारों शंकराचार्य है कि एक शंकराचार्य है। फिर मैंने इस पर भी प्रश्न किया कि भैया अगर तुम पांचों पंच देवपासना को मानते हो तो फिर उनके उनका खंडन करो जाकर के। फिर खंडन तो खंडन है ना। जब बुद्ध का खंडन कर सकते हैं भगवान का
00:41:18:09 भगवान के अवतार का बुद्ध भगवान का खंडन कर सकते हैं कि वेदों की रक्षा के लिए उन्होंने वेदों का विरोध किया यज्ञों की रक्षा के लिए तो उतने अंश में बुद्ध भगवान का खंडन किया ना तो यदि कोई कह रहा है कि नहीं शिव नारायण ही भगवान है यदि कोई कह रहा है कि शिव नारायण ही भगवान है शिव जी भगवान नहीं तो खंडन क्यों नहीं कर रहे हो फिर हम और जबकि आप तो निग्रह करता हो आपको तो जो भी व्यक्ति गलत बोलेगा जब वेद का तात्पर्य है अद्वैत वेद का तात्पर्य है अद्वैत तो फिर अद्वैत का विरोध करने वाले का खंडन क्यों नहीं कर रहे हो तो वहां पे आपको दर्शन विज्ञान व्यवहार आपको भी साधना पड़ गया और फिर जब आप कह देते हो कि सब अपनेप गुरु अपनेप संप्रदाय की सीमा में मानने वाले अपनेप संप्रदाय की सीमा में जो है उस आज्ञा को मानना जो है वो नहीं है। इन्होंने माना है ना कि मधवाचार वाले मधवाचार को माने उनके लिए वही धर्म है। ठीक तो उसी प्रकार से अपने गुरु की सीमा में रहकर चलने वाला व्यक्ति का धर्म क्यों ना माना जाए हम तो ये सब बातें हैं जो हमने कई अनेक प्रकार से वीडियो बनाए ये हुआ वो हुआ पर अब मैं विद्या भास्कर
00:42:33:13 जी महाराज के पास भी गया था मैंने कहा कि भाई आप ऐसा करिए आप अपने समक्ष उनसे मेरी वार्ता करा दीजिए उनको बुला लीजिए यहां पर तो विद्या भास्कर जी महाराज ने कोई जवाब ही नहीं दिया हम तो विद्या भास्कर जी महाराज से मैंने परंपरा इत्यादि के बारे में पूछा। परंपरा इत्यादि उन्होंने नहीं बताई। उन्होंने मुझको कहा अवश्य कि मैं टेलीग्राम पे आपको भेज दूंगा। पर अभी तक मेरे पास कुछ उन्होंने बहुत सारे मैसेज हमारी बातें भी हुई पर ऐसा कुछ आया नहीं। परंपरा इत्यादि के संबंध में। परंपरा इत्यादि स्वामी जी के। हां। अच्छा ठीक है। तो मैंने मैंने बात करने का संकेत तब भी दिया था जब इन्होंने प्रथम प्रथमतः शुरू किया था ये विवाद। बात करने का संकेत मैंने यहां भी दिया। जब विद्या भास्कर जी के पास मामला लेके गया पूछने गया था कि भाई देखिए जो विरोधाभासी बात है विद्या भास्कर जी महाराज मेरे लिए प्रणम में है वो मेरे समक्ष ऐसी कोई बात बोल रहे हैं जिस पर मुझे प्रश्न उठ रहा है जिसको मैं काट सकता हूं हम तो मैं उन प्रणम्य होने के कारण मैं वहां पे बोल नहीं पाऊंगा बोल नहीं पाऊंगा ठीक है बिलकुल तो इसीलिए मैंने आग्रह किया कि आप जो है स्वयं उससे ही बात करा दीजिए तो वह जब बोलेगा तो मैं उसको वो उत्तर दे पाऊंगा उस बात का। ठीक है?
00:43:48:14 ये सब बातें तो मुझे लगता है कि कम टू लाइफ का उपहास और विपदाना आपत्ति वगैरह आपकी तरफ से नहीं होगी। मुझे नहीं मालूम था। साहब साथ में ही रहते हैं। हम मैंने तो बस रैंडम देखा कि भाई ये व्यक्ति सज्जन लग रहे हैं और लगता है कि इनको हमारा पक्ष नहीं मालूम है। अब एक व्यक्ति आया था भागवतानंद की ओर से ही बात करने के लिए कुछ दिन पहले लाइव स्ट्रीम में आया था। जी वो उनका नाम था तिवारी जी थे कोई तो वो आए तो थे पक्ष लेने और फिर निरुत्तर हो गए। फिर हटा दिए गए। वो सब ठीक है। उसके बाद उनका उसके बाद उनका फोन आया हम और फिर उन्होंने कहा कि मैं आपको जानता नहीं था। आप तो बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और आपका और भागवतानंद जी के बीच का जो भी मामला हो वो उसमें मैं नहीं बोलूंगा मगर मेरे से गलती हो गई। ऐसा कौन था? क्या नाम था उनका? तिवारी जी नाम था। मैं अभी देख के बता दूंगा। चैनल पे लाइव उनका अभी भी पड़ा हुआ है। अच्छा ठीक। और फिर बाद में मैंने उनसे पूछा भी कि आपने जो ये अपने भाव व्यक्त किए हैं इनको मैं जो है निर्गत कर दूं। तो उन्होंने कहा आप कर दीजिएगा। वो समय नहीं मिला मुझे और फिर दूसरे मामले
00:45:03:25 खड़े हो जाते हैं। एकदम से पुलिस जैसा मामला कोई मामला आ गया। चालू हो गया भैया उसी पे बात चालू हो गई। अब एकदम से रामपाल वाला एकदम एकदम से उसमें आ गया क्योंकि जिस दिन हाई कोर्ट से इनको हुआ है भागवतन को नोटिस जारी हुआ है उसके ही अगले दिन बहुत कड़े आदेश हुए रामपाल रामपाल के लिए तो हमारा तो फोकस उस पे ज्यादा रहेगा ना ठीक है ठीक है ठीक है ठीक है फिर ठीक है ठीक है जय श्री राम जय श्री राम
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आप सबको 'Come to Live' क्यों कहते हो? असली कारण जानिए
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