1
00:00:00,480 --> 00:00:04,560
आप जो वीडियो अभी देखने जा रहे हैं इन वीडियोस में आहान के द्वारा आयोजित की जाने

2
00:00:04,560 --> 00:00:08,800
वाली जो ऑनलाइन मीटिंग्स हैं उसमें आने वाले लर्नर्स के भाव

3
00:00:08,800 --> 00:00:12,800
भी व्यक्त किए गए हैं। तो

4
00:00:12,800 --> 00:00:17,040
इन वीडियोस को स्वाविवेक के द्वारा ही देखें। कही

5
00:00:17,040 --> 00:00:21,040
जाने वाली किसी भी बात को आह्वान के द्वारा निर्गत बात समझकर ही

6
00:00:21,040 --> 00:00:25,040
ना देखें। यह देखें कि उस मीटिंग में वह बात किसके द्वारा कही जा

7
00:00:25,040 --> 00:00:29,040
रही है। क्या मेरे द्वारा कही जा रही है या फिर वहां मीटिंग से जुड़ने वाले

8
00:00:29,040 --> 00:00:33,200
किसी ऐसे व्यक्ति के द्वारा कही जा रही है जो अभी केवल लर्नर है जो अभी-अभी जुड़ा

9
00:00:33,200 --> 00:00:37,280
है या फिर जिसे अभी सार्वभौम सिद्धांतों में जिसकी

10
00:00:37,280 --> 00:00:41,360
बहुत ज्यादा गति नहीं है। तो इन वीडियोस को आप प्रेरणा

11
00:00:41,360 --> 00:00:45,360
के लिए अवश्य देखें। परंतु कही जाने वाली सभी बातों को प्रमाण्य बुद्धि

12
00:00:45,360 --> 00:00:49,440
से ना देखें। उसमें देखें कि कौन सी बात आवाहान के द्वारा कही जा

13
00:00:49,440 --> 00:00:53,680
रही है और कौन सी बात वहां पर जुड़ने वाले किसी सामान्य व्यक्ति के द्वारा कही

14
00:00:53,680 --> 00:00:57,680
जा रही है। इन वीडियोस में सामान्य चर्चाएं हैं जिनको बिना किसी

15
00:00:57,680 --> 00:01:01,680
फिल्ट्रेशन के आप तक पहुंचाया जा रहा है जिससे कि उन्हें देखकर

16
00:01:01,680 --> 00:01:05,840
के जन सामान्य प्रेरित हो और उन अभियानों से जुड़े

17
00:01:05,840 --> 00:01:10,000
जिनसे जुड़कर के सामान्य जन आत्म कल्याण व धर्म

18
00:01:10,000 --> 00:01:13,680
उत्थान में दोनों में अपनी भूमिका प्रस्तुत कर सकता है। जय श्री

19
00:01:13,680 --> 00:01:19,680
राम। वाले थे वो आ गए हैं।

20
00:01:20,480 --> 00:01:24,560
प्रारंभ करते हैं। फिर है नहीं इसको प्रारंभ करते हैं।

21
00:01:24,560 --> 00:01:29,600
ठीक है। एक भगवत नाम का स्मरण फिर से कर लेता हूं मैं।

22
00:01:29,600 --> 00:01:33,920
श्रीमते रामचंद्राय नमः ओम नमः परम हंसा स्वादित

23
00:01:33,920 --> 00:01:38,000
चरण कमल जन्म करंदाय भक्त जनमान मानस निवासाय

24
00:01:38,000 --> 00:01:42,160
श्री रामचंद्राय श्री राम जय राम जय

25
00:01:42,160 --> 00:01:46,640
जय राम श्री राम जय राम

26
00:01:46,640 --> 00:01:51,200
जय जय राम श्री राम जय राम

27
00:01:51,200 --> 00:01:55,360
जय जय राम श्री राम जय

28
00:01:55,360 --> 00:01:59,360
राम जय जय जय राम श्री राम

29
00:01:59,360 --> 00:02:03,360
जय राम जय जय राम श्री

30
00:02:03,360 --> 00:02:08,000
राम जय राम जय जय राम जय राम

31
00:02:08,000 --> 00:02:11,600
धर्म की

32
00:02:11,600 --> 00:02:14,800
अधर्म का

33
00:02:14,800 --> 00:02:19,120
प्राणियों में सद्भावना हो

34
00:02:19,120 --> 00:02:23,280
विश्व का हो कल्याण हो गौ

35
00:02:23,280 --> 00:02:29,280
माता की कल्याण हो गौ हत्या

36
00:02:29,600 --> 00:02:33,920
बंद हो भारत अखंड

37
00:02:33,920 --> 00:02:39,920
हो हर हिंदू सेना हो

38
00:02:40,640 --> 00:02:45,360
हर हिंदू

39
00:02:45,360 --> 00:02:50,400
अब भारत भव्य बनाएंगे हिंदू राष्ट्र बनाएंगे

40
00:02:50,400 --> 00:02:54,800
राष्ट्र बनाएंगे हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की जय हो

41
00:02:54,800 --> 00:03:00,240
जय हो हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की

42
00:03:00,240 --> 00:03:04,400
ऋग्वेदीय पूर्वामनाय श्री गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर अनंत

43
00:03:04,400 --> 00:03:08,800
श्री विभूषित श्रीमद् जगतगुरु शंकराचार्य गुरुदेव भगवान की

44
00:03:08,800 --> 00:03:13,040
जय हो प्रातः स्मरणीय ब्रह्म विभूत परम

45
00:03:13,040 --> 00:03:17,760
तपस्वी अभिनव शंकराचार्य पदवाक्य प्रमाण पारावरीण

46
00:03:17,760 --> 00:03:21,760
अदुष्य वैदुष्य संपन्न यति चक्र चूड़ामणि

47
00:03:21,760 --> 00:03:27,200
धर्म सम्राट स्वामी श्री कृपात्री जी महाराज की जय हो

48
00:03:27,200 --> 00:03:31,440
पंच परमेश्वर ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश की

49
00:03:31,440 --> 00:03:35,520
जय सब बोलिए हाथ उठाकर नमः पार्वती

50
00:03:35,520 --> 00:03:41,520
पतय हर हर महादेव [प्रशंसा]

51
00:03:43,040 --> 00:03:48,000
चलिए तो कैसे प्रारंभ करना है जी से

52
00:03:48,000 --> 00:03:52,000
हां बहुत ही उत्तम जो है यहां पे मंगलाचरण करवा दिया गया श्वेतांग

53
00:03:52,000 --> 00:03:56,480
जी के द्वारा तो अब हम यहां से अपना सत्र जो है इसको प्रारंभ

54
00:03:56,480 --> 00:04:00,560
करेंगे। सर्वप्रथम जैसे कि पहले सत्र में हुआ था

55
00:04:00,560 --> 00:04:04,560
वैसे ही हम उसी विधा से चलेंगे। यहां पे सबसे पहले

56
00:04:04,560 --> 00:04:08,800
मैं सभी सदस्यों को सूचित कर दूं कि हमारे यहां पे

57
00:04:08,800 --> 00:04:12,880
प्रशासनिक समिति के व्यवस्थापन के जो भी बैकग्राउंड में काम करने वाले

58
00:04:12,880 --> 00:04:16,880
यहां के सदस्य हैं सभी उपस्थित हैं और मैं एक-एक करके सभी से

59
00:04:16,880 --> 00:04:20,960
परिचय भी करवाऊंगा। लेकिन उससे पहले मैं चाहूंगा कि यहां पर

60
00:04:20,960 --> 00:04:25,040
श्वेतांग जी उपस्थित है तो कुछ दो शब्द जो है कहे इस पर जो है

61
00:04:25,040 --> 00:04:30,800
अपना परिचय देते हुए नाम और नाम अभियान पर इन सब पे कुछ बोले

62
00:04:30,800 --> 00:04:33,280
कोई

63
00:04:33,280 --> 00:04:37,680
मैं तो अल्पज्ञ क्या बोलूं मैं लेकिन कोशिश

64
00:04:37,680 --> 00:04:41,680
करता हूं देखिए जैसा कि आप सब जानते हैं कि मेरा नाम

65
00:04:41,680 --> 00:04:46,160
श्वेतांग शशिकांत पांडे है। मैं सामवेदीय

66
00:04:46,160 --> 00:04:50,160
गौतम शाखाध्याय से ब्राह्मण वर्ण से आता हूं

67
00:04:50,160 --> 00:04:53,840
और मैं

68
00:04:53,840 --> 00:04:57,920
पूरी पीठाधीश्वर श्रीमद् जगदगुरु शंकराचार्य गुरुदेव भगवान का एक

69
00:04:57,920 --> 00:04:58,420
बहुत

70
00:04:58,320 --> 00:05:02,560
ही मतलब चींटी से भी छोटा अल्पज्ञ

71
00:05:02,560 --> 00:05:07,200
शिष्य हूं उनका और जो भी उनके

72
00:05:07,200 --> 00:05:11,520
और भगवत पाद आदि गुरु शंकराचार्य भगवान से लेकर

73
00:05:11,520 --> 00:05:15,600
गुरुदेव तक की परंपरा तक जो भी ज्ञान

74
00:05:15,600 --> 00:05:19,920
जो मिल रहा है मुझे बस मैं उनको फॉलो करने की अपनी तरह से पूरी कोशिश करता हूं।

75
00:05:19,920 --> 00:05:23,920
मैंने अपनी पूरी पढ़ाई जो है वो क्या बोलते हैं अंग्रेजी माध्यम से ही की

76
00:05:23,920 --> 00:05:28,320
है और लेकिन भगवत कृपा से और माता-पिता

77
00:05:28,320 --> 00:05:32,720
के आशीर्वाद से उनके संस्कार से क्या बोलते हैं मैं जितना हो सकता है अपने

78
00:05:32,720 --> 00:05:36,880
रूट्स से जुड़ने की कोशिश करता रहता हूं और उसी के

79
00:05:36,880 --> 00:05:41,040
उसी को चलते-चलते जब मैंने गुरुदेव को फॉलो करना शुरू किया था तो उसके

80
00:05:41,040 --> 00:05:45,360
बाद ही मैं एक आध वीडियोस वगैरह जब मैं गुरुदेव के क्योंकि गुरुदेव

81
00:05:45,360 --> 00:05:49,520
के तो जो भी क्वेश्चंस मेरे माइंड में होते थे तो मैं बस वो सर्च करता

82
00:05:49,520 --> 00:05:53,600
था गुरुदेव का नाम डालकर या पूरी का मतलब मठ का नाम

83
00:05:53,600 --> 00:05:58,480
डालकर और मुझे वो मोस्ट 99% सिनेरियो में मुझे मेरे जो जितने भी फिलॉसफिकल

84
00:05:58,480 --> 00:06:03,520
जो मेरे पॉइंट ऑफ व्यूज थे या फिर जो मेरे क्वेश्चंस थे वो क्या बोलते हैं

85
00:06:03,520 --> 00:06:07,520
उसके मुझे सशंस मिल जाते थे। लेकिन ऐसे

86
00:06:07,520 --> 00:06:11,760
चलते-चलते मैं मेरे पास एक दो रिकमेंडेशन आई थी आह्वान

87
00:06:11,760 --> 00:06:13,440
की भी और उसके बाद से क्या बोलते हैं

88
00:06:13,440 --> 00:06:17,520
मैं आहान से एक तरह से जुड़ गया। तो तो यह एक छोटी सी

89
00:06:17,520 --> 00:06:21,760
जर्नी रही है मेरी। रही बात नाम की तो क्या है कि

90
00:06:21,760 --> 00:06:26,160
देखिए भगवान यह मेरे मन में ना मतलब बात

91
00:06:26,160 --> 00:06:30,160
डाली गई है कूट-कूट कर कि भगवान के नाम का जप जो है वो

92
00:06:30,160 --> 00:06:34,320
करते रहना चाहिए और यह चीज ऐसा है कि

93
00:06:34,320 --> 00:06:38,480
मेरे ध्यान में हमेशा हर समय क्या

94
00:06:38,480 --> 00:06:42,560
बोलते हैं भगवान भगवान के नाम का जप या फिर उनका नाम का जो उच्चारण है वह होता

95
00:06:42,560 --> 00:06:48,560
ही रहता है होता ही रहता है एक मिनट दीजिएगा

96
00:06:48,720 --> 00:06:53,280
हम तो

97
00:06:53,280 --> 00:06:57,360
होता ऐसा है कि दिमाग में क्या बोलते

98
00:06:57,360 --> 00:07:01,520
हैं जब जबभी भी है ना जब भी समय मिलता है मुझे तो भगवान के नाम चलता रहता

99
00:07:01,520 --> 00:07:05,760
है वो आदत कैसे बनी वो आदत ऐसे बनी कि मेरी माता जी मुझे बचपन

100
00:07:05,760 --> 00:07:10,000
में बैठा के ना नाम जप करवाती थी ठीक है और वो

101
00:07:10,000 --> 00:07:14,240
क्या करती थी कि मुझे देती थी बादाम हो गया या मूंगफली

102
00:07:14,240 --> 00:07:18,240
हो गई या चने हो गए ठीक है वो वो देकर मुझे एक कटोरी में दे देती

103
00:07:18,240 --> 00:07:22,240
थी और बोलती थी ये नाम लो और इसको इधर रखो इधर रखो तो उस बहाने खेल भी होता था

104
00:07:22,240 --> 00:07:26,480
मेरा मेरे साथ लेकिन और मुझे बढ़िया भी लगता था और उस समय भगवान के नाम का उच्चारण

105
00:07:26,480 --> 00:07:30,560
भी होता था ऐसे करते करते जब चीजें बढ़ती गई बढ़ती

106
00:07:30,560 --> 00:07:34,640
गई बढ़ती गई तो फिर बाद में जब माला पकड़ाई तो माला पे करने बैठ

107
00:07:34,640 --> 00:07:38,800
गए उससे पहले कर माला पे सीख सीखा और ये सब चीजें करते-करते आज

108
00:07:38,800 --> 00:07:42,960
के समय भगवत कृपा से मैं कोशिश करता हूं कि कम से कम 16 माला भगवान के नाम

109
00:07:42,960 --> 00:07:47,200
का जप कर सकूं अपना जो भी गुरु गुरु प्रदत्त मंत्र उसके अलावा

110
00:07:47,200 --> 00:07:51,280
तो उसकी वजह से यह होता है कि अब भगवान का नाम जो है वो हर

111
00:07:51,280 --> 00:07:55,520
समय चलता रहता है। जब से मेरा विवाह हुआ है तब से

112
00:07:55,520 --> 00:07:59,520
मेरी जो धर्मपत्नी है वो भी अब क्या बोलते हैं मेरे साथ-साथ नाम लेने लग गई हैं। कभी-कभी

113
00:07:59,520 --> 00:08:03,680
ऐसा होता है कि मैं जोर-जोर से बोल-बोल के नाम लेता हूं। तो पीछे से वो चाहे किचन

114
00:08:03,680 --> 00:08:04,180
में

115
00:08:03,760 --> 00:08:07,840
होंगी या इधर-उधर कहीं होंगी अपना कुछ कार्य कर रही होंगी तो वो भी पीछे से बोलने लग जाती हैं।

116
00:08:07,840 --> 00:08:11,840
तो तो उसकी वजह से एक अच्छा यह रह गया। माहौल बना रहता

117
00:08:11,840 --> 00:08:16,480
है कि भगवान का जो नाम का है वह जप चलता रहे। अब

118
00:08:16,480 --> 00:08:20,480
इसका नाम काेंस इतना ज्यादा इसलिए है क्योंकि हम जिस कलिकाल में हम रह

119
00:08:20,480 --> 00:08:24,720
रहे हैं ना उस समय हम क्या होते हैं कि शास्त्र सम्मत

120
00:08:24,720 --> 00:08:28,800
अपनी जीवन शत प्रतिशत तो कर ही नहीं सकते मतलब हम अपने जीवन

121
00:08:28,800 --> 00:08:33,120
में बस हम कोशिश करते हैं लेकिन लेकिन एक बात है कि हमें हमें हमेशा कोशिश अवश्य

122
00:08:33,120 --> 00:08:37,760
करती रहनी चाहिए कि कि हम जितना शास्त्र संवत जीवन जो है वो जी सके

123
00:08:37,760 --> 00:08:41,840
लेकिन उसके बाद भी त्रुटियां हो जाती है ना उसके लिए भी बहुत सारी चीजें होती

124
00:08:41,840 --> 00:08:46,240
हैं अपने अपने वर्णाश्रम अनुसार मतलब मतलब जैसे होता है कभी-कभी

125
00:08:46,240 --> 00:08:50,240
होता है जैसे गायत्री जप हुआ ये सब हुआ कुछ भी प्रायश्चित हुआ तो उसके लिए गायत्री जप हो गया

126
00:08:50,240 --> 00:08:54,240
या फलाना फलाना बहुत सारी ऐसी चीजें विधियां होती हैं लेकिन क्या होता है

127
00:08:54,240 --> 00:08:58,480
उसको भी करने के लिए भी अपनी एक विधि होती है तो उन सबको और

128
00:08:58,480 --> 00:09:02,720
छोटा और छोटा और छोटा बनाकर महादेव की कृपा से कलयुग

129
00:09:02,720 --> 00:09:06,960
के लिए बस ये बोल ये हमें बताया गया कि

130
00:09:06,960 --> 00:09:10,960
कुछ ना हो तो कम से कम भगवान के नाम का जप तो अवश्य हो। ठीक

131
00:09:10,960 --> 00:09:15,360
है? गुरुदेव यह बात अवश्य बोलते हैं कि मान लीजिए जब जब गुरुदेव

132
00:09:15,360 --> 00:09:19,200
मंत्र देते दिया था जब उन्होंने तब हमें यह कहा था कि जब

133
00:09:19,200 --> 00:09:23,360
कभी इस समय नहीं कर पाए या सूतक पातक पड़ जाए ऑफ कोर्स उस समय आप ये सब

134
00:09:23,360 --> 00:09:27,600
चीजें नहीं कर सकते तो भगवान के नाम का जप उस समय भी चलते रहना

135
00:09:27,600 --> 00:09:31,680
चाहिए और इसकी इतनी अच्छी बात है मतलब ये इतना ई ऑफ

136
00:09:31,680 --> 00:09:35,680
लाइफ है आपके लिए कि आप हर अवस्था में इसको किसी भी अवस्था में भगवान के

137
00:09:35,680 --> 00:09:39,680
नाम का जप कर सकते हैं किसी भी अवस्था में चाहे आप घर में हो घर से

138
00:09:39,680 --> 00:09:43,920
बाहर हो इधर हो उधर कुछ भी कैसा भी कार्य कर रहे हो आप हमेशा

139
00:09:43,920 --> 00:09:48,160
हरनिश भगवान के नाम का जप कर सकते हैं। ठीक है? मतलब ऐसा

140
00:09:48,160 --> 00:09:52,160
उसमें कुछ मतलब बीज नहीं कोई प्रणव नहीं कुछ नहीं। केवल

141
00:09:52,160 --> 00:09:56,240
नाम आपका जो भी ईस्ट है राम कृष्ण शिव सांभ सदा शिव

142
00:09:56,240 --> 00:10:00,240
कुछ भी है हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण जो भी जपना है आप वो जपिए लेकिन

143
00:10:00,240 --> 00:10:04,320
भगवान के नाम का जप जो है वो चलता रहे। अब उससे अच्छी बात ये क्या है कि

144
00:10:04,320 --> 00:10:08,720
जो मेरे लिए जो पर्सनली अगर मैं बोलूं तो मेरा गोल क्या है?

145
00:10:08,720 --> 00:10:12,720
मेरा गोल है वो ज्ञान की प्राप्ति

146
00:10:12,720 --> 00:10:17,440
करना या वो चीज को प्राप्त करना जिससे सच्चिदानंद

147
00:10:17,440 --> 00:10:21,600
वाला जो एसेंस है वो मुझे प्राप्त हो जाए मिल जाए। ठीक है? तो उसके

148
00:10:21,600 --> 00:10:24,720
लिए एक बार मैंने

149
00:10:24,720 --> 00:10:29,840
मुझे अभी आचार्य का नाम नहीं याद आ रहा है। हमारे ही परंपरा के थे।

150
00:10:29,840 --> 00:10:33,920
उनके बहुत अच्छे-अच्छे ग्रंथ भी है। अष्टावक्र गीता पे भी उन्होंने बहुत अच्छा लेक्चर

151
00:10:33,920 --> 00:10:34,420
दिया था। मुझे

152
00:10:34,400 --> 00:10:38,400
उनका अभी नाम बिल्कुल ध्यान नहीं आ रहा है। मेरे दिमाग से उतर गया है। तो उन्होंने

153
00:10:38,400 --> 00:10:42,640
बहुत अच्छा बहुत अच्छी एक बात कही थी जब उनसे किसी ने प्रश्न पूछा था कि

154
00:10:42,640 --> 00:10:46,800
क्या भगवान के नाम का नाम लेने से सारे पाप

155
00:10:46,800 --> 00:10:50,960
मुक्त हो जाते हैं और आदमी जो व्यक्ति है वो मुक्त हो जाता है? तो

156
00:10:50,960 --> 00:10:54,960
उन्होंने बोला था कि हां बिल्कुल हो जाता है। लेकिन उसमें बस एक

157
00:10:54,960 --> 00:10:59,360
छोटा सा मतलब करेक्शन है। यह है कि आपके नाम

158
00:10:59,360 --> 00:11:03,760
लेने के बाद और आपकी मृत्यु तक कोई भी जी

159
00:11:03,760 --> 00:11:07,760
परमानंद जी जी बिल्कुल सही कह रहे हैं आप तो आपके नाम

160
00:11:07,760 --> 00:11:11,840
लेने के बाद और आपकी मृत्यु तक कोई भी पाप ना हो ऐसा हो नहीं सकता। यह

161
00:11:11,840 --> 00:11:15,840
बात गुरुदेव ने भी बताई थी कि अभी आपने राम का नाम ले लिया। आपके सारे

162
00:11:15,840 --> 00:11:20,080
सारे जीवन मतलब आप मुक्त हो गए। बिल्कुल आपकी आपने सारे जो पाप हैं वो आपने काट दिए।

163
00:11:20,080 --> 00:11:24,160
लेकिन अब से लेकर अभी तक जो भी आपने श्वास लिया या कुछ भी लिया तो उसकी वजह

164
00:11:24,160 --> 00:11:28,160
से आपसे अनजाने अनजाने में बहुत सारे पाप हो जाते हैं। बहुत सारी जीव हत्याएं

165
00:11:28,160 --> 00:11:32,160
हो जाती हैं। चाहे वो शरीर के अंदर ही सही। ठीक है? तो ऐसा

166
00:11:32,160 --> 00:11:35,840
तो ऑलमोस्ट 99.99%

167
00:11:35,840 --> 00:11:40,000
प्रोबेबिलिटी है कि ऐसी कि आपसे पाप होगा ही होगा जाने अनजाने

168
00:11:40,000 --> 00:11:44,080
में भी। तो इसलिए फिर आप इस कर्म के चक्कर

169
00:11:44,080 --> 00:11:48,320
में बंधे रहते हैं। जन्म और कर्म के चक्कर में बंधे रहते हैं। तो उन्होंने बोला था कि एक ही

170
00:11:48,320 --> 00:11:49,520
तरीका है और वो है कि

171
00:11:49,520 --> 00:11:53,600
जैसे ही आपकी मृत्यु हो रही हो मृत्यु होने और आप भगवान के नाम

172
00:11:53,600 --> 00:11:57,920
लेने के बीच का में कोई भी पाप ना हो तो मुक्ति हो जाएगी।

173
00:11:57,920 --> 00:12:02,000
अब यह होगी कैसे? इसका अर्थ यह हुआ कि बिल्कुल फ्रैक्शन ऑफ

174
00:12:02,000 --> 00:12:06,000
सेकंड में ही आपके भग मृत्यु होने से पहले कोई पाप हो ना हो

175
00:12:06,000 --> 00:12:10,080
और उससे पहले नाम निकल जाए। ठीक है? और जो नेक्स्ट इंपॉसिबल

176
00:12:10,080 --> 00:12:14,080
होता है। इसीलिए हम क्या करते हैं? करत करत

177
00:12:14,080 --> 00:12:18,160
अभ्यासते जड़ मत होत सुजान रसरी आवत जात सिल

178
00:12:18,160 --> 00:12:22,240
पर निशान। यानी कि हम अभ्यास करते रहते हैं नाम के जप करने का।

179
00:12:22,240 --> 00:12:26,320
इतना जप करते हैं, इतना नाम के जप करते हैं, इतना अभ्यास करते हैं। इतना अभ्यास करते हैं कि

180
00:12:26,320 --> 00:12:30,400
उस समय भी जाने अनजाने में गलती से ही सही एक बार भगवान के

181
00:12:30,400 --> 00:12:34,400
नाम का नाम का उच्चारण हो जाए या उनका उनका नाम निकल जाए

182
00:12:34,400 --> 00:12:38,400
और क्या पता क्या पता प्रोबेबबली कि क्या पता

183
00:12:38,400 --> 00:12:42,480
कि उसके बीच में कोई पाप ना हो और चांस हो जाए तो हम क्या बोलते हैं मुक्त

184
00:12:42,480 --> 00:12:46,560
हो जाएं। ठीक है? तो अब इसके अब इसको देखने के दो

185
00:12:46,560 --> 00:12:51,200
तरीके हैं। पहला यह है कि ऐसा तो होगा ही नहीं। अगर आप यह भी सोच सकते हैं कि भाई

186
00:12:51,200 --> 00:12:55,440
अब तो पाप तो होना ही है। अब जब आप कह रहे हो कि फ्रैक्शन ऑफ सेकंड में पाप हो जाता है। सांस

187
00:12:55,440 --> 00:12:59,440
ले रहे हैं। बहुत सारी चीजें हो रही हैं। ठीक है? हमारे आसपास हमारे किसी और कारण की

188
00:12:59,440 --> 00:13:03,680
वजह से पाप हो गया। जैसे कि मान लीजिए मेरे ही किसी कर्म के कारण उससे

189
00:13:03,680 --> 00:13:04,560
प्रभावित होकर

190
00:13:04,560 --> 00:13:08,720
अब क्या बोलते हैं कोई कष्ट में हो गया उस समय किसी

191
00:13:08,720 --> 00:13:12,960
दुनिया के दूसरे कोने में तो भी वो मेरे पाप में मैं भागी हो जाऊंगा उसका। ऐसा

192
00:13:12,960 --> 00:13:17,360
भी हो सकता है। तो तो ऐसे तो फिर पॉसिबल ही नहीं है। तो देखिए

193
00:13:17,360 --> 00:13:21,440
इसका उत्तर ये होता है कि अगर आपने कोशिश नहीं की तब

194
00:13:21,440 --> 00:13:25,520
तो गारंटी है कि क्या बोलते हैं आप मुक्त नहीं होंगे। अगर आप कोशिश कर

195
00:13:25,520 --> 00:13:29,840
रहे हैं तो कम से कम कुछ तो चांस है ना कि मतलब

196
00:13:29,840 --> 00:13:33,920
कि हो सकता है कि आप मुक्त हो जाएं। जब आप कर ही नहीं रहे हैं तो फिर तो 100% आप

197
00:13:33,920 --> 00:13:37,920
नहीं होंगे। लेकिन अगर 1% ही सही लेकिन 1% चांस तो है ना। तो उसी

198
00:13:37,920 --> 00:13:42,560
तरह से अगर आप भगवान के नाम का जप जो है वह हर्नेस करते रहेंगे।

199
00:13:42,560 --> 00:13:46,560
और यह मैं नहीं कह रहा हूं। यह ऐसा मतलब मैंने बहुत बड़े-बड़े संतों

200
00:13:46,560 --> 00:13:50,560
को सुना है। ठीक है? एक बार मैं राजेंद्र दास जी महाभाग

201
00:13:50,560 --> 00:13:55,280
को सुन रहा था और वो कल ही करपात्र स्वामी भगवान की

202
00:13:55,280 --> 00:13:59,280
जयंती थी। उनका प्राकट्य उत्सव था। तो उसके उपलक्ष में मतलब

203
00:13:59,280 --> 00:14:03,280
मैं उससे पहले ही मैं वीडियो उनके सुनता रहता हूं। उनके

204
00:14:03,280 --> 00:14:07,360
लेक्चर देखता रहता हूं। उनकी कथाएं सुनता रहता हूं। तो मैं उनको सुना रहा था। उन्होंने बोला

205
00:14:07,360 --> 00:14:12,240
था कि करपात्र स्वामी महाभाग अहरणिस

206
00:14:12,240 --> 00:14:16,480
राम के नाम का जप करते रहते हैं। अहरिस अहरिस का अर्थ समझते हैं हर

207
00:14:16,480 --> 00:14:19,600
समय हर अवस्था में राम के नाम का जप करते रहते

208
00:14:19,600 --> 00:14:23,680
हैं। राम राम कुछ भी बोलो राम श्री राम जय राम जय जय राम

209
00:14:23,680 --> 00:14:27,920
और जो भी जयघोष आपने सुना है जो ये पूरा हिंदू समाज

210
00:14:27,920 --> 00:14:31,920
जो ये गाता है आप किसी मंदिर में आज चले जाइए हर

211
00:14:31,920 --> 00:14:36,080
मंदिर की आरती के बाद धर्म की जय हो धर्म का नाश हो या घोष होगा ही

212
00:14:36,080 --> 00:14:40,800
होगा ये भी उन्हीं का दिया हुआ है ठीक है तो वो इतने

213
00:14:40,800 --> 00:14:45,360
एनग्रेव्ड हो चुके हैं हमारे मतलब कि ब्लड लाइन के रूट्स में

214
00:14:45,360 --> 00:14:49,600
एक धार्मिक ब्लड लाइन के रूट्स में कि मतलब कि आप उनको अलग नहीं कर सकते

215
00:14:49,600 --> 00:14:54,080
ठीक है। करपात्री जी महाभाग की बात कर रहा हूं मैं। तो

216
00:14:54,080 --> 00:14:58,080
उनसे उनसे भी मैंने सीखा बहुत कुछ तो वो भी बहुत नाम जप

217
00:14:58,080 --> 00:15:02,080
करते थे। ठीक है। गुरुदेव तो बोलते ही हैं राम की महिमा है। उन्होंने बहुत सारी बहुत

218
00:15:02,080 --> 00:15:06,080
सारी बताई ही हैं। मेरे माता-पिता जी रामानंद संप्रदाय से दीक्षित

219
00:15:06,080 --> 00:15:10,240
हैं। वृंदावन से वो माता

220
00:15:10,240 --> 00:15:14,320
जी मेरी बताती हैं कि राम की कितनी राम के नाम का ही जप करती रहती हैं। वह हमेशा और

221
00:15:14,320 --> 00:15:18,880
उनकी कृपा से मैं भी राम के नाम का जप अब

222
00:15:18,880 --> 00:15:22,880
करता रहता हूं। कब जब निकले नारायण नारायण निकलता रहता है या श्री

223
00:15:22,880 --> 00:15:27,120
राम जय राम जय जय राम निकलता रहता है। जो तो इस तरह से चलता

224
00:15:27,120 --> 00:15:31,200
रहता है। तो उसके बाद तो और बस मेरी कोशिश यही होती है जो मैंने आपको थोड़ी देर पहले बताया

225
00:15:31,200 --> 00:15:34,800
कि कि मुझे भी मुक्त

226
00:15:34,800 --> 00:15:38,960
होना है। तो मुक्त होने के लिए मैं बस एक कोशिश कर रहा हूं। अब ठीक है? मैं इस

227
00:15:38,960 --> 00:15:43,040
प्रैक्टिस को इतना इनहेरिट कर रहा हूं अपने जीवन में कि मैं जितना नाम जप

228
00:15:43,040 --> 00:15:47,120
करूं इतना नाम जप करूं कि अभी नहीं तो अगले

229
00:15:47,120 --> 00:15:51,200
कुछ सैकड़ों जन्मों में तो मुक्ति मिल ही जाए। ठीक है? और क्या पता

230
00:15:51,200 --> 00:15:55,200
गलती से ही सही अगर भगवान की कृपा रही तो क्या पता अंतिम समय में

231
00:15:55,200 --> 00:15:59,360
मेरे भी भगवान मेरे भी मुख से राम का नाम निकल जाए। तो मुझे

232
00:15:59,360 --> 00:16:03,440
भी महादेव तारक मंत्र दे दे। ठीक है

233
00:16:03,440 --> 00:16:07,840
तो इसी से इसी को बोल के मैं अपने आप को विश्राम देता हूं।

234
00:16:07,840 --> 00:16:11,920
ठीक है ना बहुत उत्तम बहुत ही सुंदर शतांग भैया बहुत अच्छा

235
00:16:11,920 --> 00:16:16,000
लगा अब मैं आग्रह करूंगा माननीय दीक्षित जी से कि वे भी कुछ

236
00:16:16,000 --> 00:16:20,400
अपनी ओर से कहें यहां पर उपस्थित है दीक्षित जी हमारे बहुत ही विशेष

237
00:16:20,400 --> 00:16:24,480
सदस्य हैं कर्मकांड आदि विषयों में इनकी अच्छी पहुंच

238
00:16:24,480 --> 00:16:28,560
है जानकारी है और जितने भी कर्मकांड संबंधी

239
00:16:28,560 --> 00:16:32,560
हमारे प्रश्न शंकाएं अभी आते रहते हैं उनका समाधान दीक्षित जी के द्वारा

240
00:16:32,560 --> 00:16:36,880
ही किया जाता है तो एक बार मैं उनसे आग्रह करूंगा कि अपनी

241
00:16:36,880 --> 00:16:40,400
ओर से जो भी वो कहना चाहे

242
00:16:40,400 --> 00:16:45,200
सभी को जय जगन्नाथ जी गुरुदेव

243
00:16:45,200 --> 00:16:49,760
के श्री चरणों में प्रणाम करते हुए जी

244
00:16:49,760 --> 00:16:50,260
आपकी

245
00:16:50,000 --> 00:16:55,120
आवाज थोड़ी सी कम आ रही है आप कृपया एक सेकंड ये

246
00:16:55,120 --> 00:16:59,360
बात क्या मैं घर से बाहर हूं उसमें प्रयाग आया हूं तो ये एक

247
00:16:59,360 --> 00:17:03,600
प्रकार से अपने गुरु भाई है उसको ऑफ

248
00:17:03,600 --> 00:17:08,560
करिए

249
00:17:08,560 --> 00:17:13,120
अब आ रही होगी आवाज साहब हां जी आ रही है अब आ रही है साहब

250
00:17:13,120 --> 00:17:17,280
यहां पर जहां मैं रुका हूं ये बहुत ही

251
00:17:17,280 --> 00:17:21,280
अच्छे साधक हैं अपने गुरु भाई हैं तो उनके कक्ष में हूं तो

252
00:17:21,280 --> 00:17:27,200
कूलर चल रहा है छोटा सा वही आवाज कर रहा था तो

253
00:17:27,200 --> 00:17:31,440
विषय को आगे बढ़ाते हुए

254
00:17:31,440 --> 00:17:35,600
बहुत अच्छा विचार रखा जो है श्वेता जी ने

255
00:17:35,600 --> 00:17:39,680
और उसी को हम आगे बढ़ाना चाहेंगे कि नाम जप

256
00:17:39,680 --> 00:17:43,840
से क्या हम मुक्त हो जाएंगे? क्या हमारे पाप जो भी हमने

257
00:17:43,840 --> 00:17:48,000
अभी तक पाप किए हैं सब नष्ट हो जाएंगे? एक बहुत अच्छा प्रसंग हमको याद

258
00:17:48,000 --> 00:17:52,080
आ गया कि पुराणों में

259
00:17:52,080 --> 00:17:56,640
या जो भी हमारे आचार्य गण हैं महापुरुष

260
00:17:56,640 --> 00:18:00,800
हैं। वह एक बात बोलते हैं मतलब लगभग सभी यह बात

261
00:18:00,800 --> 00:18:06,240
बोलते हैं कि भगवान के

262
00:18:06,240 --> 00:18:10,880
नाम लेने से मतलब भगवान के नाम लेने से 1000

263
00:18:10,880 --> 00:18:16,320
एक लाख ऐसा मतलब लाखों पाप कट जाते हैं एक नाम लेने से

264
00:18:16,320 --> 00:18:20,400
तो इसके पीछे जो कारण

265
00:18:20,400 --> 00:18:24,560
है वो बहुत बड़ा एक कारण है वो तो अलग दीक्षित

266
00:18:24,560 --> 00:18:28,640
जी मैं दीक्षित जी मैं कह रहा था कि आप ईयरफोन है ना

267
00:18:28,640 --> 00:18:32,800
उसको हटा के बोलेंगे तो शायद ज्यादा बेहतर अब आ रही है आवाज आवाज

268
00:18:32,800 --> 00:18:36,880
जी बिल्कुल बिल्कुल तो हुआ

269
00:18:36,880 --> 00:18:41,040
यह कि एक बंधु हैं। उन्होंने ऐसे प्रश्न किया कि भाई अगर

270
00:18:41,040 --> 00:18:45,040
ऐसी बात है तो हमारे पाप तो मतलब हम

271
00:18:45,040 --> 00:18:47,040
तो हजारों बार नाम ले चुके

272
00:18:47,040 --> 00:18:51,600
तो हजार को मल्टीप्लाई करिए लाख से तो इतने

273
00:18:51,600 --> 00:18:56,160
पाप तो हमारे कट ही गए तो हमको तो मुक्त हो जाना चाहिए।

274
00:18:56,160 --> 00:19:00,160
लेकिन गुरुदेव एक बात कहते हैं कि अगर

275
00:19:00,160 --> 00:19:04,240
हमें ऐसा अवसर मिले कि हमारे द्वारा जो

276
00:19:04,240 --> 00:19:08,800
छोड़े गए शरीर हैं अब तक उनको देखने का अवसर मिल जाए

277
00:19:08,800 --> 00:19:12,880
तो यह पृथ्वी नहीं यह लोक नहीं कोटि-कोटि

278
00:19:12,880 --> 00:19:16,960
मतलब न जाने कितने करोड़ यह जो लोक हैं

279
00:19:16,960 --> 00:19:21,840
पट जाए हमारे शरीर से यानी जो हमने शरीर त्यागे हैं हमारे त्यागे गए शरीरों से

280
00:19:21,840 --> 00:19:27,520
तो इतने शरीर हमने त्याग दिए उन शरीरों उससे न जाने कितने

281
00:19:27,520 --> 00:19:31,680
पाप हुए होंगे क्योंकि अंतःकरण तो पूरा पूरा

282
00:19:31,680 --> 00:19:35,840
हमें हर जीव का अंतःकरण जो होता है वो

283
00:19:35,840 --> 00:19:39,920
पूरा ट्रांसफर यानी पूरा मतलब पिछले जन्म से

284
00:19:39,920 --> 00:19:43,920
लेके और उसके पहले से पूरा वो तो वही है ना वो तो नहीं

285
00:19:43,920 --> 00:19:48,000
बदलता। यह जो स्थूल शरीर है यह बदल जाता है। तो अब उसी हिसाब

286
00:19:48,000 --> 00:19:52,240
से पाप का आकलन हम कर सकते हैं। तो ऐसे में अगर भगवान के एक

287
00:19:52,240 --> 00:19:56,320
नाम से लाखों पाप कटते हो तो 10 रे टू फाइव

288
00:19:56,320 --> 00:20:00,320
यानी 10 में पांच की पावर है। लेकिन पाप में

289
00:20:00,320 --> 00:20:02,080
जो 10 की पावर है वह

290
00:20:02,080 --> 00:20:06,160
न जाने कितनी है। इसलिए इसीलिए निरंतर

291
00:20:06,160 --> 00:20:10,640
नाम जप चलता रहे। इसीलिए कहा गया है कि नाम जप चलता ही रहे।

292
00:20:10,640 --> 00:20:15,200
अब सबके पापों का की संख्या अलग-अलग है। तो

293
00:20:15,200 --> 00:20:19,200
मैं जो कहना चाह रहा हूं आप लोग समझ पाए होंगे कि यह प्रश्न अक्सर

294
00:20:19,200 --> 00:20:23,360
लोग कर देते हैं कि भाई पुराणों में लिखा है कि एक नाम लेने से 1000 पाप कटते हैं। 1

295
00:20:23,360 --> 00:20:27,440
लाख पाप कटते हैं। तो क्या हमने इतने पाप कर दिए?

296
00:20:27,440 --> 00:20:31,680
हम तो हजार बार नाम ले चुके हैं। तो भैया पाप भी तो उतने हिसाब उसी

297
00:20:31,680 --> 00:20:35,680
हिसाब से हुए हैं हमसे। हमारे इस अंतःकरण से माने

298
00:20:35,680 --> 00:20:40,320
जो हमारा सूक्ष्म शरीर है वो उसका पूरा प्रमाण है ना।

299
00:20:40,320 --> 00:20:44,480
तो खैर एक ये विषय था। दूसरा काफी

300
00:20:44,480 --> 00:20:48,480
कुछ रख दिया सुतांग जी ने विषय और

301
00:20:48,480 --> 00:20:52,880
दूसरा एक बात और है कि राम के नाम में कितनी शक्ति

302
00:20:52,880 --> 00:20:57,040
है। भगवान के एक तो नाम हो गया नाम

303
00:20:57,040 --> 00:21:01,360
को हम उच्चारण करें। दूसरा जैसे भगवान

304
00:21:01,360 --> 00:21:05,840
राम का ही नाम है तो गुरुदेव एक युक्ति बताते हैं कि

305
00:21:05,840 --> 00:21:11,360
दीर्घ स्वर से यानी दीर्घ उच्चारण एक होता है जैसे राकार

306
00:21:11,360 --> 00:21:16,240
को बढ़ा दिया हमने तो इस प्रकार के कई

307
00:21:16,240 --> 00:21:17,200
विधाओं से हम नाम

308
00:21:17,200 --> 00:21:21,200
लें अगर भगवान का तो अंत में इसी शरीर में जैसे अभी बोला

309
00:21:21,200 --> 00:21:25,600
सुधांग जी ने कि यह प्रयास करना चाहिए कि जो फ्रैक्शन

310
00:21:25,600 --> 00:21:29,760
ऑफ टाइम है मतलब उसमें जो पाप होता है। मतलब पाप तो कभी

311
00:21:29,760 --> 00:21:33,840
भी हो सकता है शरीर से श्वास ले रहे हैं, बोल रहे हैं। बोलने से भी

312
00:21:33,840 --> 00:21:38,800
जीव कुछ मर जाते हैं। तो नाम जप चलता रहे

313
00:21:38,800 --> 00:21:42,960
तो ऐसी भी अवस्था आ जाती है कि आप जीवन मुक्त मतलब इसी शरीर के

314
00:21:42,960 --> 00:21:47,040
रहते आप जीवन मुक्त हो सकते हैं। नाम जप में ऐसी शक्ति

315
00:21:47,040 --> 00:21:51,440
है। मतलब आप एकदम जो

316
00:21:51,440 --> 00:21:56,000
कहते हैं ना कि एकात्म हो गए ईश्वर से एकदम। इस शरीर से

317
00:21:56,000 --> 00:22:00,400
यह संभव है नाम जप के द्वारा। ऐसे एक एक संत हैं। वह

318
00:22:00,400 --> 00:22:04,400
गुरुदेव उनका प्रसंग सुनाते हैं कि समुद्र के

319
00:22:04,400 --> 00:22:08,400
किनारे वो लेटे थे सायम में संध्या के समय में तो कोई

320
00:22:08,400 --> 00:22:12,400
साधक गया वो कहा कैसा ये व्यक्ति है कि

321
00:22:12,400 --> 00:22:16,400
लेटा है संध्या के समय में और पता नहीं

322
00:22:16,400 --> 00:22:20,640
कैसा व्यक्ति है। क्या इसके दिमाग में चल रहा है। इसको बैठ के साधना

323
00:22:20,640 --> 00:22:24,880
करनी चाहिए। लग तो रहा है कि साधक है। तो क्योंकि

324
00:22:24,880 --> 00:22:29,040
वो क्या था कि अब यह सब यम नियम तो हमारे लिए है ना। अब

325
00:22:29,040 --> 00:22:32,320
जो ईश्वर से एकात्म

326
00:22:32,320 --> 00:22:36,320
जिसका पूरा हो गया जो जिसका अंतःकरण ईश्वर

327
00:22:36,320 --> 00:22:40,480
से जाकर मिल गया कहते हैं लीन हो जाना ब्रह्म लीन ब्रह्म में जाकर लीन

328
00:22:40,480 --> 00:22:44,560
हो गया तो अब उसके लिए क्या सायम क्या प्रातः तो वो लेटे हुए

329
00:22:44,560 --> 00:22:48,560
थे तो जब वो साधक पास में गए उन महात्मा के जो समुद्र के किनारे लेटे

330
00:22:48,560 --> 00:22:52,880
थे तो और कान लगाया तो उनके रोम रोम से राम राम राम

331
00:22:52,880 --> 00:22:56,880
ऐसा उच्चारण सुनाई पड़ा उनको तो नाम जप में ऐसी

332
00:22:56,880 --> 00:23:00,960
महिमा है यानी नाम को अलग-अलग विधा से लेने का भी

333
00:23:00,960 --> 00:23:05,120
विधान है। सतगुरु देव की कृपा से ऐसा

334
00:23:05,120 --> 00:23:09,280
हमें जो है ऐसी दीक्षा मिल सकती है। देते हैं दीक्षा

335
00:23:09,280 --> 00:23:13,360
मतलब राम या कोई भी नाम उसको किस प्रकार से हम और भी ले सकते

336
00:23:13,360 --> 00:23:17,600
हैं। उसके उच्चारण की विधा अलग-अलग प्रकार से अगर हम जप करें।

337
00:23:17,600 --> 00:23:21,600
गुरुदेव तो बता चुके हैं राम के नाम के द्वारा किस प्रकार से

338
00:23:21,600 --> 00:23:25,680
लेना है। भगवान राम का नाम कि हम इस शरीर के

339
00:23:25,680 --> 00:23:30,560
रहते जीवन मुक्त हो जाए। ऐसा भी उपाय है और

340
00:23:30,560 --> 00:23:35,040
क्योंकि मन से ही मनुष्य बनता है तो मन को साधने

341
00:23:35,040 --> 00:23:39,600
का मन बुद्धि चित्त अहंकार

342
00:23:39,600 --> 00:23:43,680
ये सूक्ष्म शरीर के जो घटक हैं इन सभी को साधने के लिए अलग-अलग प्रकार

343
00:23:43,680 --> 00:23:47,440
के उपाय हैं। तो मन को साधने के लिए नाम

344
00:23:47,440 --> 00:23:51,440
जप ही एक मात्र उपाय है और

345
00:23:51,440 --> 00:23:55,440
मन ही जो है हमको नरक ले जाता है

346
00:23:55,440 --> 00:23:59,680
और यही मन हमको भगवान से मिला भी देता है। भगवान के श्री चरणों

347
00:23:59,680 --> 00:24:03,920
की प्राप्ति भी करा देता है। तो मन तो ऐसा है कि एक

348
00:24:03,920 --> 00:24:07,920
बहुत अच्छा मतलब कहते हैं ना कि यह हमारा

349
00:24:07,920 --> 00:24:11,920
सबसे बड़ा वैरी भी है और सबसे बड़ा मित्र भी है। दोनों है ये।

350
00:24:11,920 --> 00:24:16,000
अब इससे हम क्या कर लें? भाई मित्रता कर लें तो भगवान

351
00:24:16,000 --> 00:24:20,000
के पास जाकर छोड़ देगा और वर कर लें। वर का मतलब कि इसको बेलगाम एकदम छोड़

352
00:24:20,000 --> 00:24:24,240
दें। तो फिर यह क्या करेगा? वह तो सबको पता ही है। कितने

353
00:24:24,240 --> 00:24:28,560
कितने पाप करा देता है यह। तो मन को साधने का एकमात्र

354
00:24:28,560 --> 00:24:32,880
विकल्प सिर्फ भगवान का नाम है। नाम जप

355
00:24:32,880 --> 00:24:35,120
है।

356
00:24:35,120 --> 00:24:39,760
और इतना ही कह के मैं अपनी वाणी को विराम दूंगा। बाकी

357
00:24:39,760 --> 00:24:45,440
वक्ताओं को भी समय मिले। नारायण जय श्री जगन्नाथ।

358
00:24:45,440 --> 00:24:49,440
धन्यवाद दीक्षित जी। बहुत ही सुंदर वक्तव्य है। बहुत ही अच्छा लगा। अब मैं

359
00:24:49,440 --> 00:24:55,440
माननीय शिवश भैया से आग्रह करूंगा कि वह अपना वक्तव्य यहां प्रदान करें।

360
00:24:56,800 --> 00:25:00,560
तो सभी को जय श्री राम।

361
00:25:00,560 --> 00:25:05,280
जय श्री राम। जय श्री राम। सभी जय श्री राम।

362
00:25:05,280 --> 00:25:09,360
और सभी को यहां देख के बहुत अच्छा लग रहा है।

363
00:25:09,360 --> 00:25:13,440
सबसे पहले तो मैं इस आयोजन के बारे में थोड़ा

364
00:25:13,440 --> 00:25:18,480
सा बात कर लूं। यह जो आयोजन है

365
00:25:18,480 --> 00:25:23,680
जो आह्वान की जो कार्यकारिणी जो टीम है

366
00:25:23,680 --> 00:25:27,680
तो उसकी अथक प्रयासों के बाद इस तरह का एक आयोजन है जो

367
00:25:27,680 --> 00:25:32,080
हम लोग कर रहे हैं और सबसे

368
00:25:32,080 --> 00:25:36,080
पहली बात तो कि लगन के साथ इसका आयोजन किया

369
00:25:36,080 --> 00:25:40,880
गया है और काफी परिश्रम किया है हमारे प्रथम प्रताप सिंह जी ने।

370
00:25:40,880 --> 00:25:45,120
इसके साथ ही साथ अन्य महानुभाव भी हैं जो इसमें गुप्त अथवा प्रकट

371
00:25:45,120 --> 00:25:49,200
रूप से जुड़े हुए हैं और नामास्त्र इस तरह से आगे बढ़

372
00:25:49,200 --> 00:25:53,520
रहा है। एक क्रांति के रूप में उद्भाषित हो रहा है धीरे-धीरे और इसमें जुड़ने

373
00:25:53,520 --> 00:25:57,760
वाले जितने भी यहां पर महानुभाव है उनको भी मैं आदर उनके

374
00:25:57,760 --> 00:26:01,920
प्रति प्रकट करता हूं कि आपने अपने लिए इस सत्र

375
00:26:01,920 --> 00:26:07,040
के लिए समय निकाला अपना बहुमूल्य समय दिया और

376
00:26:07,040 --> 00:26:11,040
साथ ही साथ क्योंकि यह आप सबका दायित्व भी

377
00:26:11,040 --> 00:26:11,840
है कि किस तरीके

378
00:26:11,840 --> 00:26:16,080
से सनातन समाज को संगठित किया जाए और उस उसमें आपने अपनी

379
00:26:16,080 --> 00:26:20,320
अग्रणी भूमिका निभाई तो इसके लिए भी आपका आपका अभिवादन है। आपका

380
00:26:20,320 --> 00:26:23,040
अभिनंदन है।

381
00:26:23,040 --> 00:26:27,840
जैसे अभी यहां पर मेरे दो गुरु भाइयों ने अभी

382
00:26:27,840 --> 00:26:31,840
जो अपनी बातें अपने विचार नाम के नाम के विषय

383
00:26:31,840 --> 00:26:36,080
में प्रस्तुत किए और यद्यपि एक सेशन

384
00:26:36,080 --> 00:26:40,560
हो चुका है परिचय सत्र का जिसमें कि

385
00:26:40,560 --> 00:26:44,560
अ काफी संख्या में लोग एकजुट हुए थे वहां

386
00:26:44,560 --> 00:26:48,720
पर भी और उसमें भी काफी कुछ जानने

387
00:26:48,720 --> 00:26:52,880
को मुझे भी मिला था और वहां जुड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ना कुछ वहां से सीख देखने

388
00:26:52,880 --> 00:26:56,880
को जानने को मिला। तो उसी के बाद यह सोचा गया कि क्यों

389
00:26:56,880 --> 00:27:00,960
ना फिर इसको एक और थोड़ा सा भव्य रूप देकर के एक

390
00:27:00,960 --> 00:27:05,120
बार और आयोजित किया जाए और अन्यों को भी प्रेरित किया जाए

391
00:27:05,120 --> 00:27:09,200
और इसको थोड़ा सा लोगों तक पहुंचाया जाए कि नामास्त्र

392
00:27:09,200 --> 00:27:13,600
क्या है? नाम नाम जप की क्या महिमा है और किस तरह से हम

393
00:27:13,600 --> 00:27:18,000
नाम जप के द्वारा अपने जीवन के प्रत्येक

394
00:27:18,000 --> 00:27:22,240
अ कष्ट से मुक्ति पा सकते हैं निवारण पा सकते

395
00:27:22,240 --> 00:27:26,320
हैं। तो ये सारी चीजें हैं। इसके लिए सबका

396
00:27:26,320 --> 00:27:27,120
मैं हृदय

397
00:27:27,120 --> 00:27:31,760
से अभिनंदन करता हूं। सबका स्वागत भी करता हूं। जो भी

398
00:27:31,760 --> 00:27:35,760
किसी भी मत पंथ संप्रदाय से हैं। मैं जानता हूं

399
00:27:35,760 --> 00:27:39,920
कि इसमें बहुत से ऐसे भी लोग हैं हमारे नामास्त्र में नाम जप जो करते हैं। कोई

400
00:27:39,920 --> 00:27:44,880
इस से भी है। कोई आर्य समाज से भी है। कोई

401
00:27:44,880 --> 00:27:49,120
मेरे ख्याल से रामपाली भी है जो नाम जप करने के लिए जुड़ा हुआ है।

402
00:27:49,120 --> 00:27:53,200
जिसके मन में कहीं ना कहीं राम की महिमा जागृत हो गई है।

403
00:27:53,200 --> 00:27:57,280
कोई आर्य समाजी भी है जिसके मन में नाम की महिमा

404
00:27:57,280 --> 00:28:01,360
जागृत हो गई है। और कोई इस कौन से भी है जो ठीक है श्री कृष्ण भगवान

405
00:28:01,360 --> 00:28:05,360
का ही नाम जप करना है तो कहीं भी करो तो उसने भी सहयोग

406
00:28:05,360 --> 00:28:09,600
दिया तो इसके लिए भी सबका ऐसे जो लोग हैं जो कि अभी

407
00:28:09,600 --> 00:28:13,680
वैचारिक मतभेद रखते भी हैं कहीं कहीं कुछ कुछ अंशों में या नहीं भी रखते

408
00:28:13,680 --> 00:28:18,720
हैं वो भी जुड़े तो उसके लिए भी उन सबका भी स्वागत और उनका भी अभिनंदन

409
00:28:18,720 --> 00:28:22,800
क्योंकि सनातन समाज को वैदिक समाज को

410
00:28:22,800 --> 00:28:27,040
एकजुट करने की इस मुहिम इस अभियान में आपने भूमिका निभाई

411
00:28:27,040 --> 00:28:30,160
इसके लिए आपका सम्म सम्मान

412
00:28:30,160 --> 00:28:34,240
अब नाम जप मेरे दो गुरु भाइयों ने बहुत अच्छी सी व्याख्या कर ही दी है तो मेरे पास

413
00:28:34,240 --> 00:28:38,400
कुछ बचता नहीं है बताने को हां पर

414
00:28:38,400 --> 00:28:42,320
कुछ अंश जो मुझे लगता है कि जो जो

415
00:28:42,320 --> 00:28:47,200
प्रासंगिक भाषा में बताना आवश्यक है प्रासंगिक

416
00:28:47,200 --> 00:28:51,600
रूप में बताना आवश्यक है तो वो मैं थोड़ा सा बता देता हूं

417
00:28:51,600 --> 00:28:55,600
जैसे मेरे मेरी जानकारी में अभी तक नाम जप की जो व्याख्या हुई

418
00:28:55,600 --> 00:28:59,680
है वह आधिदैविक आध्यात्मिक रूप से जो

419
00:28:59,680 --> 00:29:03,680
व्याख्या होती है वह दोनों हो गई। तो अब थोड़ी सी वैज्ञानिक

420
00:29:03,680 --> 00:29:07,680
व्याख्या भी कर ले। यद्यपि मैंने पिछली बार भी वैज्ञानिक व्याख्या पर ही जोर दिया था। मुझे ऐसा

421
00:29:07,680 --> 00:29:12,240
कुछ स्मरण आ रहा है। तो परंतु फिर भी

422
00:29:12,240 --> 00:29:16,400
अभी जो जुड़े हुए महानुभाव है एक बार और संभवत जिनको

423
00:29:16,400 --> 00:29:20,560
उस समय ठीक से जिन्होंने नहीं सुन पाए होंगे तो उनको उनके

424
00:29:20,560 --> 00:29:25,760
लिए रिपीट हो जाएगा और जिनका पहली बार है उनके लिए तो है ही।

425
00:29:25,760 --> 00:29:29,760
तो सबसे पहली बात यह समझ लीजिए कि

426
00:29:29,760 --> 00:29:33,840
अगर हम नाम

427
00:29:33,840 --> 00:29:38,720
जप को ऐसे समझना चाहिए कि इट्स ऑल अबाउट योर कॉन्शियसनेस।

428
00:29:38,720 --> 00:29:43,120
आपकी कॉन्शियसनेस जो कि बंधन में है

429
00:29:43,120 --> 00:29:47,440
जो कि प्रपंच रूपी संसार को देख रही है। उससे बंधी हुई है।

430
00:29:47,440 --> 00:29:52,320
उससे मुक्ति दिलाने का एक साधन है नाम जप।

431
00:29:52,320 --> 00:29:57,360
अब नाम जप के लिए कुछ चीजें बताई गई है। जैसे कि एक बात अभी कही कि

432
00:29:57,360 --> 00:30:02,000
शरीर छोड़ते समय यदि आपको भगवान का स्मरण हो गया

433
00:30:02,000 --> 00:30:06,000
तो उसके कारण आप मुक्त हो जाते हैं। मगर शरीर छोड़ते

434
00:30:06,000 --> 00:30:10,000
समय आपको नाम याद आ जाए भगवान का। ये

435
00:30:10,000 --> 00:30:14,240
बहुत टेढ़ी थी। क्योंकि जिस समय व्यक्ति कष्ट में होता है या फिर

436
00:30:14,240 --> 00:30:18,400
द्वैत भाव को प्राप्त होता है या फिर प्रपंच रूपी संसार

437
00:30:18,400 --> 00:30:22,400
से ग्रसित होता है तो वो क्या करता है जब वो जा रहा

438
00:30:22,400 --> 00:30:26,400
होता है कि मेरी पत्नी का क्या होगा मेरे बच्चों का क्या होगा वो

439
00:30:26,400 --> 00:30:30,480
मकान बेचना था वो चाय की केटली खुली रखी है वो फैल ना जाए

440
00:30:30,480 --> 00:30:34,480
वो फन ना जाए मैं गैस पर रख के आया था हम तो

441
00:30:34,480 --> 00:30:38,560
यह सब चीजें भी होती है और यह भी कहा जाता है कि मरते

442
00:30:38,560 --> 00:30:42,880
समय जिस मृत्यु के समय जिसका आप ध्यान करोगे उसी का आपको शरीर

443
00:30:42,880 --> 00:30:47,120
मिल जाएगा अगले जन्म में। तो सबसे पहली बात तो है कि जो नाम

444
00:30:47,120 --> 00:30:51,520
जप है वह आपकी कॉन्शियसनेस में रोम रोम में

445
00:30:51,520 --> 00:30:55,920
आपके हर छिद्र में प्रत्येक

446
00:30:55,920 --> 00:31:00,080
अंश में शरीर के हर अंश में नाम जप यदि आप

447
00:31:00,080 --> 00:31:04,160
लगातार करते जा रहे हैं तो वो आपके अंदर भगवान का

448
00:31:04,160 --> 00:31:08,240
स्मरण व्याप्त करा देता है। अर्थात आप कुछ भी कर रहे हैं

449
00:31:08,240 --> 00:31:12,240
मगर आप भगवान का ही ध्यान कर रहे हैं। लगातार आपके मन में राम की

450
00:31:12,240 --> 00:31:13,280
कुछ

451
00:31:13,280 --> 00:31:17,360
चिंतन चल रहा है। शिव का चिंतन चल रहा है। कृष्ण का चिंतन कर चल

452
00:31:17,360 --> 00:31:21,600
रहा है। तो यह नाम जप से होता है और कंटिन्यू आप जब उसमें

453
00:31:21,600 --> 00:31:26,320
प्रैक्टिस करते रहते हैं। लगातार नाम जप करते ही रहते हैं। करते ही रहते हैं।

454
00:31:26,320 --> 00:31:30,480
सवा घंटे आपने यदि रियली करना चालू किया तो यहां से आपकी जर्नी

455
00:31:30,480 --> 00:31:34,480
स्टार्ट हो जाती है। क्योंकि

456
00:31:34,480 --> 00:31:38,560
आपका शरीर ही आपको इस प्रपंच रूपी संसार

457
00:31:38,560 --> 00:31:43,360
से जोड़ता है। शरीर शरीर की जो इंद्रियां है वह

458
00:31:43,360 --> 00:31:47,520
और मन उसको स्टोर कर लेता है सारी सूचनाओं को और

459
00:31:47,520 --> 00:31:52,560
आपको बता देता है और संसार

460
00:31:52,560 --> 00:31:56,720
आपको हर क्षण प्रत्येक क्षण यही बताने में जुटा

461
00:31:56,720 --> 00:32:00,720
हुआ है कि संसार में कोई मोक्ष

462
00:32:00,720 --> 00:32:04,960
नाम की चीज नहीं है। संसार में कोई सत स्वरूप

463
00:32:04,960 --> 00:32:08,960
नहीं है। कोई सच्चिदानंद नहीं है। वह यही

464
00:32:08,960 --> 00:32:13,120
बताने में जुटा हुआ है आपको। परंतु फिर भी आपके अंदर की

465
00:32:13,120 --> 00:32:17,120
जो सच्चिदानंद स्वरूप की अंश आपकी आत्मा है

466
00:32:17,120 --> 00:32:21,120
जो स्वयं सच्चिदानंद है वो आपको याद दिला रही है

467
00:32:21,120 --> 00:32:25,600
मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्यमया

468
00:32:25,600 --> 00:32:28,400
वो आपको खींच रही है वो आपको कह रही है कुछ है जो

469
00:32:28,400 --> 00:32:32,400
तेरा बाकी है तू इस टीवी को तू इस फ्रिज को तू इस मोटरसाइकिल को

470
00:32:32,400 --> 00:32:36,480
तू इस कार को तू इस बिल्डिंग को तू इस भवन को तू इस महल को तू इस

471
00:32:36,480 --> 00:32:40,640
एरोप्लेन को हेलीकॉप्टर को हाथी को चीते को बाघ को

472
00:32:40,640 --> 00:32:44,800
शेर को इसको अंत मत समझ इसके परे

473
00:32:44,800 --> 00:32:48,160
एक सत स्वरूप है

474
00:32:48,160 --> 00:32:52,240
जो व्यवहार में हमारा भगवान है ईश्वर है हमारे जिनका

475
00:32:52,240 --> 00:32:56,480
भजन करके जिनका नाम जप करके हमारी वो जो कॉन्शियसनेस

476
00:32:56,480 --> 00:33:01,040
है जो बंधन में है वो मुक्त हो सकती है तो

477
00:33:01,040 --> 00:33:05,120
यह एक प्रणाली होती है कि आपके मस्तिष्क में

478
00:33:05,120 --> 00:33:09,200
आपके मन में फिर आपके शरीर में आपके शरीर के रोम रोम

479
00:33:09,200 --> 00:33:13,440
में हर हर अंश में हर टुकड़े में जीवन के हर क्षेत्र में कहीं

480
00:33:13,440 --> 00:33:17,600
ना कहीं राम को कृष्ण को

481
00:33:17,600 --> 00:33:22,960
शिव को मां जगदंबा को भगवती को गणेश को

482
00:33:22,960 --> 00:33:27,120
भगवान सूर्य को स्थापित कर दे आपके जीवन में आपके

483
00:33:27,120 --> 00:33:31,120
शरीर में तो अभी जो एक बात कही जा रही थी

484
00:33:31,120 --> 00:33:35,600
कि समुद्र के किनारे कोई महानुभाव कोई महापुरुष थे जो लेटे हुए थे संत

485
00:33:35,600 --> 00:33:39,600
तो क्या हुआ उनके रोम रोम से उनके हर कण से हर

486
00:33:39,600 --> 00:33:43,680
अंश से राम की आवाजें भगवान का चिंतन की अनुभूति

487
00:33:43,680 --> 00:33:47,680
हो रही थी तो वो कैसे हुआ क्योंकि उन्होंने वो नाम जप या

488
00:33:47,680 --> 00:33:51,680
अपना जिस प्रकार से भी उन्होंने भक्ति की भगवान की उसका परिणाम था

489
00:33:51,680 --> 00:33:56,080
वो अच्छा इसमें यहां पर क्योंकि बात आई है तो एक

490
00:33:56,080 --> 00:34:00,240
भ्रामक तथ्य भी यहां से हो सकता है तो उसको मैं क्लियर

491
00:34:00,240 --> 00:34:05,040
करता चलूं कि वो जो महानुभाव

492
00:34:05,040 --> 00:34:09,360
वहां पर लेटे हैं समुद्र के किनारे जो जो करना चाहिए शास्त्रों

493
00:34:09,360 --> 00:34:13,360
के अनुसार वो नहीं कर रहे हैं। यदि उनसे भी पूछा

494
00:34:13,360 --> 00:34:17,440
जाएगा कि आप यहां शास्त्रों के अनुसार आपको इस समय यह करना

495
00:34:17,440 --> 00:34:21,680
चाहिए। मगर आप तो यहां लेटे तो वो ये कहेंगे मेरे मुझे फॉलो मत करो। शास्त्र

496
00:34:21,680 --> 00:34:26,240
को फॉलो करो। शास्त्र सही कह रहे हैं। तो सामर्थ्य

497
00:34:26,240 --> 00:34:31,200
के कारण जो हमारे सामर्थ्यवान

498
00:34:31,200 --> 00:34:35,520
महापुरुष होते हैं यदि सामर्थ्य के कारण वो शास्त्रों

499
00:34:35,520 --> 00:34:39,600
के परे चले भी जाते हैं तो उनको फॉलो नहीं किया जाता है। ये वो स्वयं

500
00:34:39,600 --> 00:34:43,680
कहते हैं। सामर्थ्य के कारण वो परे चले गए। तो

501
00:34:43,680 --> 00:34:47,760
इस इन बातों का फायदा उठा के अरे जिसके पास भगवान का भजन आ

502
00:34:47,760 --> 00:34:51,760
गया वो तो अब कुछ भी करे। कुछ भी करे का क्या मतलब है? क्या बहन से विवाह करने

503
00:34:51,760 --> 00:34:55,760
लगे? नहीं कर सकते ना। तो

504
00:34:55,760 --> 00:34:58,960
जब भी यह पूछा जिसको अनुभूति होगी वो पूछने

505
00:34:58,960 --> 00:35:03,120
नहीं जाएगा कि आप ये कैसे कर रहे हो? जिसको अनुभूति होगी जिसके

506
00:35:03,120 --> 00:35:07,120
अंदर सामर्थ्य आ जाएगा वो इन बातों में नहीं पड़ेगा कि वो ये कैसे कर

507
00:35:07,120 --> 00:35:11,120
रहा है? वो वो कैसे कर रहा है। ठीक है? पूछने कौन

508
00:35:11,120 --> 00:35:15,280
जा रहा है? जो अभी साधक है जो अभी पहुंचा नहीं है गंतव्य तक। और

509
00:35:15,280 --> 00:35:19,920
किससे पूछने जा रहा है? जो गंतव्य तक पहुंच चुका है तो उनका अनुसरण

510
00:35:19,920 --> 00:35:24,400
उनका अनुकरण उनका अनुसरण किया जाता है वहां पर अनुकरण

511
00:35:24,400 --> 00:35:28,400
नहीं किया जाता है कि अगर वो संध्या काल में वो लेटे तो हम भी उनका

512
00:35:28,400 --> 00:35:32,480
नाम लेकर के संध्या काल में हम भी समुद्र के किनारे लेट जाए हम भी

513
00:35:32,480 --> 00:35:36,560
महापुरुष हो गए ठीक है यह बात वो स्वयं

514
00:35:36,560 --> 00:35:40,560
बोलेंगे जो वहां लेटे इस बात का ध्यान रखें

515
00:35:40,560 --> 00:35:44,640
इसका एक गलत उदाहरण लेकर के अपने जीवन में अप्लाई ना

516
00:35:44,640 --> 00:35:48,720
कर दे कि हम भी महापुरुष हो गए ठीक है। महापुरुष

517
00:35:48,720 --> 00:35:52,880
बना नहीं जाता है। महापुरुष बनने के लिए प्रयास नहीं

518
00:35:52,880 --> 00:35:57,040
किया जाता है। महापुरुष स्वतः व्यक्ति कोई

519
00:35:57,040 --> 00:36:01,360
बन जाता है। कोई उसके लिए जैसे सन्यास

520
00:36:01,360 --> 00:36:05,440
सन्यास या अन्य कई अध्यात्म की

521
00:36:05,440 --> 00:36:09,760
जो अध्यात्म का जो अध्ययन होता है उसमें कई बार ऐसा है

522
00:36:09,760 --> 00:36:14,000
कई ऐसे वो है पर पॉइंट्स जिसमें कि आपको उस

523
00:36:14,000 --> 00:36:18,240
चीज के लिए प्रयास नहीं करना है। वो तो स्वतः मिलने वाली चीजें हैं।

524
00:36:18,240 --> 00:36:23,600
जैसे जैसे कि आपको चाहिए कैलोरी

525
00:36:23,600 --> 00:36:27,840
आपकी इंटेस्टाइन जो है आते हैं जो आपकी अंतड़ियां उनकी

526
00:36:27,840 --> 00:36:32,800
जो फूंख है वो कौन शांत कर सकता है

527
00:36:32,800 --> 00:36:36,960
वो शांत करने वाले तत्व का नाम है कैलोरी साइंटिफिक भाषा

528
00:36:36,960 --> 00:36:40,960
में तो क्या कैलोरी को प्राप्त करने आप घर से

529
00:36:40,960 --> 00:36:44,960
बाहर निकलते हैं क्या घर में लाकर के कहते हैं मुझे इतनी

530
00:36:44,960 --> 00:36:50,000
कैलोरी दे दो मां से पिता पिता से,

531
00:36:50,000 --> 00:36:54,320
पत्नी से, कभी भी घर के किसी व्यक्ति से कहते हैं कि मुझे इतनी कैलोरी

532
00:36:54,320 --> 00:36:58,480
चाहिए। क्या कहते हैं? मुझे इतनी रोटी चाहिए। मुझे

533
00:36:58,480 --> 00:37:02,880
इतना चावल चाहिए। तो चावल क्या है? साधन।

534
00:37:02,880 --> 00:37:07,440
और कैलोरी क्या है? स्वतः मिल जाने वाली चीजें। तो ये जो वैराग्य

535
00:37:07,440 --> 00:37:12,480
है जीवन में और जो

536
00:37:12,480 --> 00:37:16,720
क्या कहते हैं? ये वैराग्य हो गया या फिर आपका

537
00:37:16,720 --> 00:37:20,720
ये महापुरुष वाली जो स्थितियां हो गई इन सब के लिए प्रयास नहीं

538
00:37:20,720 --> 00:37:25,360
किया जाता है। यह सारी स्थितियां आपको स्वतः मिलने वाली होती है।

539
00:37:25,360 --> 00:37:29,440
ऐसी ही स्थितियों के कारण भगवान श्री कृष्ण ने

540
00:37:29,440 --> 00:37:33,520
अपने महान गीत में कहा था।

541
00:37:33,520 --> 00:37:37,520
अपने महान गीत में कहा था अर्जुन को क्या कहा था?

542
00:37:37,520 --> 00:37:41,600
कर्मण्यवादी कारस्ते मा फलेशु कदाचना।

543
00:37:41,600 --> 00:37:45,600
मेरे पास भी मैं अपनी ग्रस्त जीवन का ही उदाहरण

544
00:37:45,600 --> 00:37:49,760
दे दूं। तो जब एक साधारण जीवन से

545
00:37:49,760 --> 00:37:53,760
एक भटके हुए दिशाहीन हिंदू वाले जीवन से

546
00:37:53,760 --> 00:37:58,080
जब मैं शंकराचार्य और प्रामाणिक गुरु शिष्य परंपरा के सानिध्य

547
00:37:58,080 --> 00:38:02,080
में उसके अध्ययन की ओर बढ़ने लगा था तो जीवन में

548
00:38:02,080 --> 00:38:06,640
आने वाले बदलावों के कारण जो मेरी

549
00:38:06,640 --> 00:38:10,720
जीवन संगनी है भार्या है ये बात आज मैं पहली बार बता रहा हूं।

550
00:38:10,720 --> 00:38:14,720
उन्होंने मुझसे कहा था कि अब तुम कहीं वो घर

551
00:38:14,720 --> 00:38:19,360
बार छोड़ने तो वाले नहीं हो। यह उनका ये उनकी शंका थी।

552
00:38:19,360 --> 00:38:23,680
आजकल जो जो शंकर परंपरा के अंतर्गत

553
00:38:23,680 --> 00:38:27,760
या प्रामाणिक परंपराओं के अंतर्गत रहने वाले जो भी द्विज है

554
00:38:27,760 --> 00:38:32,080
वो जब संध्या करते हैं तो एक साधारण सामान्य शहरी जीवन

555
00:38:32,080 --> 00:38:36,160
नगरीय जीवन अथवा ग्रामीण जीवन जो परंपराओं से दूर है उन

556
00:38:36,160 --> 00:38:40,320
लोगों की दृष्टि से देखें तो एकदम से उनको लगता है यहां क्या सन्यास तो नहीं है कुछ। यह

557
00:38:40,320 --> 00:38:44,960
व्यक्ति तो सन्यासी लग रहा है। संध्या वंदन वाला गेटअप कैसा होता है?

558
00:38:44,960 --> 00:38:49,040
अगर सामान्य जनजीवन की दृष्टि से देख तो सन्यासियों वाला गेटअप ही होता है। उनको नहीं

559
00:38:49,040 --> 00:38:53,280
मालूम है वो सन्यासियों का गेटअप कैसा होता है? क्या नहीं? क्या अंतर है इस व्यक्ति में जो संध्या

560
00:38:53,280 --> 00:38:57,840
कर रहा है और सन्यासी में ठीक है। तो ऐसा ही प्रश्न

561
00:38:57,840 --> 00:39:00,080
वैसे

562
00:39:00,080 --> 00:39:04,240
इस नाव पे इस नाव पे मैं भी बैठ चुका हूं। हां।

563
00:39:04,240 --> 00:39:08,480
तो जब मेरा ये रूप देखा धोती बांध के और लंगोट

564
00:39:08,480 --> 00:39:12,560
धारण करके और धोती बांध के और अचला लेकर के और त्रिपुण

565
00:39:12,560 --> 00:39:16,640
लगा के और बैठ के और विधि विधान से संध्या वंदन

566
00:39:16,640 --> 00:39:21,040
करते हुए देखना शुरू किया। जब उन्होंने जब मुझे देखा

567
00:39:21,040 --> 00:39:24,080
तो उन्होंने

568
00:39:24,080 --> 00:39:28,080
मतलब उनके मन में शंका उत्पन्न हो गई कि तुम कहीं वो

569
00:39:28,080 --> 00:39:32,080
सन्यासी तो नहीं बनने वाले हो। तो मेरे पास क्या उत्तर था? और मुझे लगता है

570
00:39:32,080 --> 00:39:36,320
कि जो भी व्यक्ति संध्या वंदन कर रहा होगा आज के दिन

571
00:39:36,320 --> 00:39:40,640
वर्तमान में और वो यदि गस्त गृहस्थ होगा तो उसकी

572
00:39:40,640 --> 00:39:44,880
पत्नी ने उसकी भार्या ने कहीं ना कहीं कभी ना कभी उनसे

573
00:39:44,880 --> 00:39:48,880
प्रश्न कर दिया होगा या फिर वो नाम जप ही बहुत ज्यादा कर रहा

574
00:39:48,880 --> 00:39:52,960
होगा नाम जप भी अगर वो कर रहा होगा तो उसके घर में उसकी

575
00:39:52,960 --> 00:39:57,200
पत्नी ने यह सवाल कर दिया होगा कहा होगा कि कहीं

576
00:39:57,200 --> 00:40:01,280
तुम बैरागी तो नहीं बनने वाले बाबा तो नहीं बनने वाले परेशान चिंता जताई

577
00:40:01,280 --> 00:40:05,280
हो बता दो हम अपनी बुद्धि गोभी से थोड़ा प्रिपेयर तो कर ले अचानक से

578
00:40:05,280 --> 00:40:09,440
झटका दोगे क्या है ना तो मेरे पास

579
00:40:09,440 --> 00:40:13,440
उस समय क्या उत्तर होना चाहिए था आप लोगों के अनुसार क्या उत्तर होगा

580
00:40:13,440 --> 00:40:17,920
मैंने उनसे यही कहा था भाई मुझे नहीं मालूम मैं वैरागी बनूंगा कि नहीं बनूंगा

581
00:40:17,920 --> 00:40:22,160
मुझे नहीं मालूम कि मैं सन्यास आश्रम लूंगा कि नहीं लूंगा मुझे

582
00:40:22,160 --> 00:40:26,160
यह मालूम है कि कर्मवादी कार माले सुदाना भगवान

583
00:40:26,160 --> 00:40:30,400
ने कहा है संध्या वंदन कर तो मैं करता रहूंगा

584
00:40:30,400 --> 00:40:34,400
भगवान ने कहा है कि ऐसे ऐसे तुझे विधि विधानों का पालन करना है।

585
00:40:34,400 --> 00:40:38,720
मैं करता रहूंगा। तुझे सन्यास देना है कि नहीं देना है? और सन्यास देते

586
00:40:38,720 --> 00:40:39,280
समय

587
00:40:39,280 --> 00:40:43,280
तेरे घर की कैसी व्यवस्था करनी है? क्या सोचना है तेरे

588
00:40:43,280 --> 00:40:47,360
विषय में? वो मेरा काम है। क्योंकि तू मेरी शरण में

589
00:40:47,360 --> 00:40:51,360
आ जा। तेरी प्राप्ति की रक्षा और आप प्राप्ति की चिंता मैं

590
00:40:51,360 --> 00:40:56,240
करूंगा। यह दो अच्छा मेरी एक जो

591
00:40:56,240 --> 00:41:00,240
है उनके साथ एक अंडरस्टैंडिंग ठीक रहती है कि यदि

592
00:41:00,240 --> 00:41:04,320
मैं शास्त्रों का संदर्भ दे के उनको कोई सिद्धांत जब बता देता हूं

593
00:41:04,320 --> 00:41:08,640
तो उसके बाद फिर उनकी ओर से कोई भी आपत्ति नहीं आती वहां पर

594
00:41:08,640 --> 00:41:13,040
तो ये एक सपोर्टिव हो जाता है। मुझे एक उनकी तरफ से सामंजस्य

595
00:41:13,040 --> 00:41:17,200
मिल जाता है। तो इसके लिए मैं उनका आभारी हूं कि

596
00:41:17,200 --> 00:41:21,200
वो फिर शास्त्रों को शास्त्र हमारे लिए अंतिम प्रमाण है। हमारे

597
00:41:21,200 --> 00:41:25,280
परिवार में इस बात का जो है इस बात के लिए मैं

598
00:41:25,280 --> 00:41:29,680
उनके लिए आभारी हूं क्योंकि आजकल तो ऐसा है ना वातावरण कि

599
00:41:29,680 --> 00:41:33,840
शास्त्र भी आपने अरे ये सब किताबी बातें हैं। अब नगर नगरीय क्षेत्र

600
00:41:33,840 --> 00:41:38,000
में या ग्रामीण क्षेत्र में तो शास्त्र पढ़ना बताना बहुत

601
00:41:38,000 --> 00:41:42,080
मुश्किल है। ज्यादातर लोगों को पहले कनेक्ट करना पड़ेगा शास्त्र और

602
00:41:42,080 --> 00:41:46,080
सारी चीजों से। मगर तो आजकल एक वातावरण ऐसा

603
00:41:46,080 --> 00:41:50,080
भी बन गया है कि शास्त्रों के प्रति कोई निष्ठा नहीं है। व्यक्ति चिल्ला रहा है हिंदू हिंदू

604
00:41:50,080 --> 00:41:55,040
हिंदू तो वो निष्ठा नहीं है। मगर इतना मुझे उनसे मिलता है

605
00:41:55,040 --> 00:41:59,040
कि जब भी कभी इस तरह से कोई शास्त्र का सिद्धांत यदि रख के बात

606
00:41:59,040 --> 00:42:03,120
करते हैं तो उसमें हमें जो है फिर सहमति अवश्य मिल जाती

607
00:42:03,120 --> 00:42:08,480
है। अब इससे अगर बात चल ही रही है तो मैं आप लोगों के

608
00:42:08,480 --> 00:42:12,800
क्या कहते हैं प्रेरणा के लिए प्रोत्साहन के लिए एक वाक्य और बता देता हूं छोटा सा

609
00:42:12,800 --> 00:42:16,960
संभव हो सकता है कि किसी को कुछ मिल जाए यहां से तो

610
00:42:16,960 --> 00:42:20,960
क्या हुआ एक बार दीपावली मनानी थी

611
00:42:20,960 --> 00:42:24,960
दीपावली हमारे हमारे माता-पिता हमसे दूर कहीं पर उस

612
00:42:24,960 --> 00:42:28,960
समय निवास कर रहे थे और हमारे भाई

613
00:42:28,960 --> 00:42:33,200
भी हैं जो दीपावली पर वहां पहुंचने वाले थे तो माता-पिता ने कहा

614
00:42:33,200 --> 00:42:37,440
कि बेटा आप सब यहीं आ जाओ यहीं पर आकर के दीपावली

615
00:42:37,440 --> 00:42:41,520
मना ली जाए तो

616
00:42:41,520 --> 00:42:45,760
मैंने अपनी भार्या से कहा

617
00:42:45,760 --> 00:42:49,920
कि भाई चलना है माता-पिता के पास वही चलकर के दीपावली

618
00:42:49,920 --> 00:42:54,160
मनाएंगे तो जो आजकल का वातावरण है उसके अनुसार

619
00:42:54,160 --> 00:42:58,320
सोचिए कि एक जो गणी है उसका क्या जवाब आएगा

620
00:42:58,320 --> 00:43:02,480
साधारण वो जवाब यही आएगा ज्यादातर जो सामान्य

621
00:43:02,480 --> 00:43:06,480
है जो अभी बहुत ज्यादा शास्त्रों को नहीं जानती, परंपरा के सिद्धांतों को

622
00:43:06,480 --> 00:43:10,320
नहीं जानती, उनका जवाब आएगा कि भैया अपना घर छोड़ के अपने यहां दीपक

623
00:43:10,320 --> 00:43:14,400
ना जलाएं। अपने मंदिर में पूजा ना करें और वहां

624
00:43:14,400 --> 00:43:18,400
चले जाए। यहां पर भी दीपक जलना जरूरी है। लक्ष्मी माता

625
00:43:18,400 --> 00:43:22,400
कैसे आएंगी फिर अंदर? अब मैं परेशान हो गया इस बात को लेकर

626
00:43:22,400 --> 00:43:27,040
के। तो क्या करूं? तो फिर उसमें यही हुआ। मुझे

627
00:43:27,040 --> 00:43:31,200
वो वो याद आया सिद्धांत। मैंने कहा तुमको

628
00:43:31,200 --> 00:43:35,440
याद है। कि गणेश जी और कार्तिकेय भगवान में एक बार

629
00:43:35,440 --> 00:43:39,440
प्रतियोगिता हुई थी कि हां हुई थी क्या प्रतियोगिता थी

630
00:43:39,440 --> 00:43:43,520
कि कौन इस संसार का पूरा चक्कर एक बार में लगा देगा जो

631
00:43:43,520 --> 00:43:47,600
जल्दी लगा देगा वो विजेता होगा उसको फल क्या मिलेगा उस पर मत जाइए

632
00:43:47,600 --> 00:43:51,680
मगर विजेता कौन होगा जो पूरे संसार का चक्कर एक बार में लगा देगा बोले हां

633
00:43:51,680 --> 00:43:55,760
सही बात है तो मैंने कहा फिर गणेश जी ने वो प्रतियोगिता कैसे जीती थी

634
00:43:55,760 --> 00:43:59,920
कि कैसे कि उन्होंने अपने माता पिता का चक्कर ही लगा दिया था केवल और माता

635
00:43:59,920 --> 00:44:03,920
पिता संसार है तो वहां संसार है। तो इस प्रकार से यदि

636
00:44:03,920 --> 00:44:08,160
हम अपने माता-पिता के पास जाकर के दीपावली मनाएंगे तो पूरे

637
00:44:08,160 --> 00:44:12,400
संसार के द्वारे पर दीप जला देंगे तो क्या बेहतर

638
00:44:12,400 --> 00:44:16,480
है? अब वो सिद्धांत आ गया, शास्त्र आ गए, भगवान

639
00:44:16,480 --> 00:44:20,560
आ गए तो उन्होंने फिर सहमति दे दी अपनी। तो इस तरह से जो

640
00:44:20,560 --> 00:44:24,720
शास्त्र होते हैं वो हमारे जीवन में शांति भी लाते हैं।

641
00:44:24,720 --> 00:44:25,760
इसीलिए शास्त्रों

642
00:44:25,760 --> 00:44:29,840
की आवश्यकता है। नहीं तो विप्लव है संसार में। जहां शास्त्र नहीं है वहीं

643
00:44:29,840 --> 00:44:33,840
विप्लव है और जहां शास्त्र है वहां शांति है। एट द एंड

644
00:44:33,840 --> 00:44:38,080
एनी हाउ ग्रह क्लेश वगैरह सब खत्म हो जाएंगे। यदि वहां

645
00:44:38,080 --> 00:44:42,480
के लोग शास्त्र निष्ठ होंगे क्योंकि शास्त्र की लिखी हुई बातों को सब

646
00:44:42,480 --> 00:44:46,800
मानेंगे। फिर वैचारिक मतभेद मिट जाएगा। इसीलिए ज्यादा से ज्यादा शास्त्रों का प्रचार

647
00:44:46,800 --> 00:44:50,960
करना चाहिए जिससे कि एक छत्र हो समाज एक छत्र एक निष्ठ

648
00:44:50,960 --> 00:44:55,200
हो के समाज रहना सीखे। अच्छा अब नाम

649
00:44:55,200 --> 00:44:59,680
से जुड़ी हुई एक बात और है और उसको बता करके मैं विराम दूंगा

650
00:44:59,680 --> 00:45:03,680
कि कर्पात्री जी महाराज ने जैसे अभी शतांग जी ने भी बहुत

651
00:45:03,680 --> 00:45:08,160
अच्छा व्याख्यान दिया और विजय दीक्षित जी ने भी एक दृष्टिकोण बताया

652
00:45:08,160 --> 00:45:12,480
उसमें एक भाव कहीं आप लोगों को परेशान ना कर दे कि मुक्ति

653
00:45:12,480 --> 00:45:16,480
मिलेगी कि नहीं मिलेगी। ये जो चिंता है ना

654
00:45:16,480 --> 00:45:20,480
ये चिंता आपको परेशान ना कर दे तो उसको मैं उसका समाधान करके अपनी वाणी

655
00:45:20,480 --> 00:45:24,400
को विराम दूंगा। तो देखिए

656
00:45:24,400 --> 00:45:28,560
यहां पर भी वही लॉ लागू होता है। कर्मवादी

657
00:45:28,560 --> 00:45:32,880
कारस्ते मा फले सुदा भगवान शंकराचार्य ने अपनी भगवत गीता में

658
00:45:32,880 --> 00:45:36,880
इस श्लोक का अर्थ करते हुए यही लिखा है कि तुम अपने आप को ये

659
00:45:36,880 --> 00:45:40,800
भी मत कहो कि मैं मुक्ति के लिए कर रहा हूं। ये ना मैं क्यों

660
00:45:40,800 --> 00:45:44,880
कर रहा हूं? भगवान ने कहा है, शास्त्र ने कहा है। यह सोचने

661
00:45:44,880 --> 00:45:49,680
में जो आनंद है और यह सोचते हुए जो आपकी परफॉर्मेंस है

662
00:45:49,680 --> 00:45:53,680
अपनी लाइफ में यदि आप तेंदुलकर हैं तो क्रिकेट की पिच

663
00:45:53,680 --> 00:45:57,920
पर यदि आप और कोई हैं यदि आप अमुक अमुक किसी

664
00:45:57,920 --> 00:46:01,920
भी कार्य क्षेत्र में है और जब आपकी भावना में यह है कि मैं सिर्फ

665
00:46:01,920 --> 00:46:06,000
इसलिए कर रहा हूं कि शास्त्र ने कहा है तो आपका परफॉर्मेंस, आपकी

666
00:46:06,000 --> 00:46:10,080
लाइफ, आपका जीवन, आपके जीवन का हर क्षेत्र इतना इजी हो

667
00:46:10,080 --> 00:46:14,240
जाएगा। इतना सरल हो जाएगा, इतना सुखमय हो जाएगा, सुखद

668
00:46:14,240 --> 00:46:18,320
हो जाएगा जिसकी आप अभी कल्पना नहीं कर सकते। यदि आप इस भाव के साथ नहीं

669
00:46:18,320 --> 00:46:22,560
चल रहे तो इस भाव के साथ चलना सीखिए। मैं

670
00:46:22,560 --> 00:46:26,560
कोई भी कार्य जो कर रहा हूं वो इसलिए कर रहा हूं क्योंकि शास्त्र ने कहा

671
00:46:26,560 --> 00:46:30,640
है। इसलिए कर रहा हूं क्योंकि ईश्वर ने कहा है। ये अपने मन को

672
00:46:30,640 --> 00:46:34,640
बताते रहिए। मन जो है ना बार-बार आपको भटकाता है। कई बार ऐसा

673
00:46:34,640 --> 00:46:38,640
होता है कि हम लोग जब जाप कर रहे होते हैं तो आपका मन आपको बता रहा होता है।

674
00:46:38,640 --> 00:46:42,720
अरे उसका WhatsApp मैसेज आया होगा। अरे उसको फोन करना है। उससे पैसे लेने

675
00:46:42,720 --> 00:46:46,720
हैं। 500 10 5000 अरे उसका फोन उसको फोन करना है।

676
00:46:46,720 --> 00:46:51,280
जल्दी नाम जब पूरा हो तो आप उस समय अपने मन को हराइए।

677
00:46:51,280 --> 00:46:56,320
वहां क्या है? क्षणिक विचार हार का क्षण में तू वो छांट दे।

678
00:46:56,320 --> 00:47:00,720
क्षणिक विचार हार का क्षण में तू वो छांट दे। बाधा

679
00:47:00,720 --> 00:47:04,880
बना वो वृक्ष है जड़ से तू उखाड़ दे अपने

680
00:47:04,880 --> 00:47:08,960
मन को ही हराना है आपको घातक तो तू ही जय को तेरा

681
00:47:08,960 --> 00:47:12,960
नाश चाहिए घातक तो तू ही जय को तेरा नाश

682
00:47:12,960 --> 00:47:18,160
चाहिए मुझे तेरा अंतिम वही प्रयास चाहिए

683
00:47:18,160 --> 00:47:23,040
कोमल जी म्यूट कर लीजिए म्यूट कर लीजिए

684
00:47:23,040 --> 00:47:28,000
किसी की आवाज रिपीट आ रही है

685
00:47:28,000 --> 00:47:30,240
तो बैरी

686
00:47:30,240 --> 00:47:34,320
बड़ा तू आपका तू शीश धड़ से काट दे क्षणिक विचार हार का है क्षण

687
00:47:34,320 --> 00:47:38,240
में तू वह छाट दे डाल डाल पात पात वन घना

688
00:47:38,240 --> 00:47:42,720
है पाट दे बाधा बनाना वृक्ष है जड़ से तू उखाड़ दे घातक

689
00:47:42,720 --> 00:47:46,880
तो तू ही जय को तेरा नाश चाहिए मुझे तेरा अंतिम वही

690
00:47:46,880 --> 00:47:50,880
प्रयास चाहिए तो सबसे पहली बात तो है नाम जप करते समय भगवान

691
00:47:50,880 --> 00:47:55,200
का चिंतन करते समय आपका मन जो आपको बार-बार हराने

692
00:47:55,200 --> 00:47:59,280
आता है उसको आपको हराना है और उसको हराना बहुत सरल होता बहुत

693
00:47:59,280 --> 00:48:03,360
ही सरलतम उपाय होता है। बस उस सरलत सरलतम उपाय

694
00:48:03,360 --> 00:48:07,600
को स्मरण रख पाना कठिन होता है। उपाय बहुत सरल

695
00:48:07,600 --> 00:48:12,000
है। केवल जब भी आपको कोई दुर्वसन याद कर रहा है, दुर्वसन

696
00:48:12,000 --> 00:48:16,080
अपनी ओर खींच रहा है। आपको कोई बुराई आपकी अच्छाई की ओर खींच

697
00:48:16,080 --> 00:48:20,160
रही है। है ना? आपकी बुराई अच्छाई से दूर आपको

698
00:48:20,160 --> 00:48:24,240
खींच रही है। तो केवल दो मिनट शांति से अपनी

699
00:48:24,240 --> 00:48:28,320
मन से बात कर लीजिए। यह कहिए अपने मन को

700
00:48:28,320 --> 00:48:32,400
कि तू मुझे हराने आया है। जैसे ही आप अपने मन को थोड़ा समय

701
00:48:32,400 --> 00:48:36,400
दे देंगे वह हार जाएगा। जो प्रपंच रूपी संसार से जो आपको आ रही है ना

702
00:48:36,400 --> 00:48:40,800
बुलावे वो हार जाएंगे और आप वहां टिक पाएंगे। अपनी अच्छाई पर,

703
00:48:40,800 --> 00:48:44,880
अपनी सच्चाई पर, अपने सत्य पर आप टिक पाएंगे।

704
00:48:44,880 --> 00:48:49,280
अपने मन से बातें करना सीखिए। छोटी छोटी सी जीवन में आदतें

705
00:48:49,280 --> 00:48:53,280
होंगी जो आपको बार-बार खींचती होंगी। किसी का प्याज लहसुन नहीं छूट

706
00:48:53,280 --> 00:48:57,520
रहा होगा तो वह खींचता होगा और किसी के कुछ वसन होंगे तो वह खींचते

707
00:48:57,520 --> 00:49:01,680
होंगे तो वहां पर अपने अपने आप को टाइम देना शुरू करिए चिंतन कर

708
00:49:01,680 --> 00:49:05,840
लीजिए बस जैसे आपको मान लीजिए किसी को कोई

709
00:49:05,840 --> 00:49:09,920
अल्कोहलिक है और मदिरा पान उसको बार-बार बुला रहा है तो जैसे ही उसने

710
00:49:09,920 --> 00:49:14,240
मदिरा का वो देखा केंद्र वैसे ही उसने क्या किया उसकी ओर ललायित

711
00:49:14,240 --> 00:49:18,480
हुआ जब वो जाए थोड़ा सा बात करें अपने मन में कि तुमने

712
00:49:18,480 --> 00:49:22,640
क्या निर्णय लिया था मदिरा को लेकर आप देखना कि आपकी

713
00:49:22,640 --> 00:49:26,800
विजय अवश्य होगी। ठीक है? तो यह नाम जप नाम जप

714
00:49:26,800 --> 00:49:30,880
में यह कुछ बाधाएं आती तो इससे आप ऐसे निकले और जो चिंता है कि

715
00:49:30,880 --> 00:49:35,600
हमें मुक्ति मिलेगी नहीं मिलेगी कि नहीं? तो आप मुक्ति के लिए नाम जप मत करिए।

716
00:49:35,600 --> 00:49:39,600
आप इसलिए करिए क्योंकि आप ईश्वर से प्रेम करते हैं। आप इसलिए

717
00:49:39,600 --> 00:49:43,680
करिए कि ईश्वर ने कहा है तो वो चिंता से भी मुक्त हो जाएंगे। और भगवान

718
00:49:43,680 --> 00:49:47,920
ने तो कहा ही है कि तू मेरी शरण में आजा। तेरी प्राप्ति की रक्षा

719
00:49:47,920 --> 00:49:51,920
और अप्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। तू दिमाग चलाना बंद कर दे मेरे भाई।

720
00:49:51,920 --> 00:49:56,080
भगवान ने यही तो कहा है तो चिंता भी आपके

721
00:49:56,080 --> 00:50:00,080
उसमें बाधाक आएगी। इसलिए चिंता भी नहीं होनी चाहिए। और सुख क्या

722
00:50:00,080 --> 00:50:05,360
है? कृपात्री जी महाराज भक्ति सुधा में बताते हैं

723
00:50:05,360 --> 00:50:08,320
कि नाम जप भगवान का नाम

724
00:50:08,320 --> 00:50:12,480
स्मरण चिंतन मनन करते ही आपको सुख मिलने लगता है। मोक्ष जैसा

725
00:50:12,480 --> 00:50:16,480
बिल्कुल सुख मिलने लगता है। समत्व पुरुष बनने को कहा था ना भगवान ने।

726
00:50:16,480 --> 00:50:20,800
वो समत्व पुरुष क्या है? मुक्त पुरुष ही तो है। जीवन

727
00:50:20,800 --> 00:50:24,800
जीते जीते भी आप वहां पर मुक्ति का अनुभव करने लगते हैं।

728
00:50:24,800 --> 00:50:29,120
समत्वता आ जाती है आप में। समत्व पुरुष कौन है?

729
00:50:29,120 --> 00:50:33,360
है ना? समत्व पुरुष वही तो है जो

730
00:50:33,360 --> 00:50:37,680
जीत हार में भेद ना करे। राग द्वेष में भेद ना करे। जो अच्छे

731
00:50:37,680 --> 00:50:41,840
बुरे में परेशान ना हो, विचलित ना हो, वही तो है समत्व पुरुष। और पूरी भगवत

732
00:50:41,840 --> 00:50:45,920
गीता भगवान ने वही बनने को कहा है अर्जुन को। तो आप समत्व पुरुष की ओर आगे

733
00:50:45,920 --> 00:50:49,920
बढ़ेंगे। जब आप शास्त्र को पीछे रखेंगे, ईश्वर को पीछे रखेंगे,

734
00:50:49,920 --> 00:50:54,240
नाम जप का साधन लेंगे, नामास्त्र का साधन लेंगे तो अपने जीवन की बुराइयों

735
00:50:54,240 --> 00:50:58,400
को हराते जाएंगे। उनकी पराजय होती रहेगी। भक्ति सुधा

736
00:50:58,400 --> 00:51:02,480
में कृपात्री जी महाराज यही लिखते हैं कि

737
00:51:02,480 --> 00:51:07,040
नाम जप ऐसे है जैसे किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एकत्रित

738
00:51:07,040 --> 00:51:11,120
किया जाने वाला धन। कैसे? नाम जप आपको सुख कैसे

739
00:51:11,120 --> 00:51:15,120
देने लगता है? जैसे कि मान लीजिए आपको एक कार खरीदनी है

740
00:51:15,120 --> 00:51:19,520
नई कोई नई कार आ रही हो तो उसका अगर चिंतन हो किसी के मस्तिष्क

741
00:51:19,520 --> 00:51:23,520
में तो उसका वर्ण मतलब उसका स्मरण कर लीजिए तो आपको एक

742
00:51:23,520 --> 00:51:27,600
कार लेनी है या और कोई धन से जुड़ी हुई जो कोई आवश्यकता हो जो धन के

743
00:51:27,600 --> 00:51:31,680
कारण बाधित हो अब मान लीजिए आपको

744
00:51:31,680 --> 00:51:35,920
कोई कार लेनी है अमुक अमुक कुछ भौतिक संसाधन लेना है

745
00:51:35,920 --> 00:51:40,160
आपके पास धन नहीं है उसको लेने का तो जब आप धन

746
00:51:40,160 --> 00:51:44,160
ले जब अब आपका क्या टारगेट है? आपका टारगेट

747
00:51:44,160 --> 00:51:48,160
कार लेना नहीं है। जैसे आपका टारगेट कैलोरी लेना नहीं

748
00:51:48,160 --> 00:51:52,400
है। आपका टारगेट रोटी, चावल, अनाज यह

749
00:51:52,400 --> 00:51:56,560
सब लेना है। उसी प्रकार से आपका टारगेट कार

750
00:51:56,560 --> 00:52:00,560
लेना नहीं। आपका टारगेट है धन एकत्रित करना कार का। जिस

751
00:52:00,560 --> 00:52:04,960
दिन वह धन एकत्रित हो जाता है। यानी कि अगर कार लाख

752
00:52:04,960 --> 00:52:09,520
की है और आपके पास लाख आ गए तो आप

753
00:52:09,520 --> 00:52:13,920
आराम से जिस कार के लिए आप व्याकुल थे दोद तीन मतलब

754
00:52:13,920 --> 00:52:19,920
हर सुबह उठते ही आप डेली उसी का चिंतन कर रहे थे तो

755
00:52:19,920 --> 00:52:24,000
वो धन आने के बाद आप ये सोच आप ठहर

756
00:52:24,000 --> 00:52:28,240
भी सकते हो धन आने के बाद आप इतने संतुष्ट हो जाते हो कि चलो ठीक है धन

757
00:52:28,240 --> 00:52:32,560
आ गया कार हम दो दिन बाद उठा लेंगे तीन दिन बाद उठा लेंगे

758
00:52:32,560 --> 00:52:36,560
धन आ जाए यदि उसी प्रकार से भगवान की भक्ति

759
00:52:36,560 --> 00:52:38,960
है भगवान का नाम जप

760
00:52:38,960 --> 00:52:43,120
यदि आपने इसको पकड़ लिया तो आपके पास वो सुख आ जाता है कि अच्छा ये हमारे

761
00:52:43,120 --> 00:52:47,280
पास आ गया नाम जप भक्ति आ गई भगवान तो मिल ही जाएंगे वो स्वतः सिद्ध

762
00:52:47,280 --> 00:52:51,440
बात है उसके लिए चिंतन नहीं करना है उसके लिए आपको परेशान

763
00:52:51,440 --> 00:52:55,680
नहीं होना है और आप जितना नाम जप करते हैं उससे

764
00:52:55,680 --> 00:52:59,680
आपके रक्त में संचित जो पाप कर्म है उनका

765
00:52:59,680 --> 00:53:03,840
शोधन होता है तीर्थ इत्यादि में स्नान करने से भी वही होता है।

766
00:53:03,840 --> 00:53:08,000
आपके आपके रक्त में संचित आपके जो संस्कार

767
00:53:08,000 --> 00:53:12,160
है गलत गलत वाले संस्कार उनका शुद्धिकरण होना चालू होता है। आपकी

768
00:53:12,160 --> 00:53:16,160
कॉन्शियसनेस तीव्र होती जाती है। आपकी निर्णायक क्षमता तीव्र होती

769
00:53:16,160 --> 00:53:20,160
जाती है। आप मोटरसाइकिल चलाते समय सही निर्णय लेते हैं कि मुझे

770
00:53:20,160 --> 00:53:24,240
गड्ढे से किस प्रकार से बचना है। और जिसकी प्रज्ञा शक्ति वीक

771
00:53:24,240 --> 00:53:28,240
होती जाती है इन संचित कर्मों की वजह से वही निर्णय नहीं ले पाता

772
00:53:28,240 --> 00:53:32,640
है कि मैं कहां ले जाऊं अपनी गाड़ी को। नहीं तो जिसका भी आज तक कभी मोटरसाइकिल

773
00:53:32,640 --> 00:53:36,800
वगैरह का एक्सीडेंट हुआ हो छोटा-मोटा या बड़ा जो भी है वो

774
00:53:36,800 --> 00:53:40,880
कितना भी लोगों को बताए कि मेरी गलती नहीं थी मगर वो एक बार जरूर ये सोचता है

775
00:53:40,880 --> 00:53:44,880
कि लास्ट मोमेंट पर मैंने इधर किया होता तो मैं बच जाता। तो हमारे

776
00:53:44,880 --> 00:53:48,960
जीवन में जितनी भी घटनाएं घटित हो रही है वो हमारे गलत निर्णय हमारी

777
00:53:48,960 --> 00:53:53,040
कॉन्शसनेस की कमी हमारी प्रज्ञा शक्ति की कमी के कारण हो रही है।

778
00:53:53,040 --> 00:53:54,080
और यह प्रज्ञा

779
00:53:54,080 --> 00:53:58,080
शक्ति बढ़ती है तो हमारी निर्णायक क्षमता बढ़ती है। हमारे कार्य सब कुछ

780
00:53:58,080 --> 00:54:02,240
सटीक होने लगते हैं। यह वैज्ञानिक जो विवरण है उसका तो

781
00:54:02,240 --> 00:54:06,400
प्रज्ञा शक्ति के ऊपर आधारित है। प्रज्ञा शक्ति के ऊपर इसी कारण से प्रज्ञा

782
00:54:06,400 --> 00:54:10,560
शक्ति के अनुसार हमें बुद्धि मिलती है अच्छी और बुद्धि प्राप्त

783
00:54:10,560 --> 00:54:14,880
होने की वजह से हमारे निर्णय अच्छे होते हैं। तो जीवन में भी सुख ही सुख होता है।

784
00:54:14,880 --> 00:54:19,680
तो आपकी प्रज्ञा शक्ति बहुत मैटर करती है। तो

785
00:54:19,680 --> 00:54:24,080
ये कुछ चीजें हैं जो मुझे आपको बतानी थी। बाकी आप सबका बहुत-बहुत

786
00:54:24,080 --> 00:54:29,120
आभार कि आप सब लोग नाम नामास्त्र में जुड़कर के और इसके इसमें

787
00:54:29,120 --> 00:54:33,680
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और एक इतिहास रच रहे हैं।

788
00:54:33,680 --> 00:54:37,840
सभी को जय श्री राम। अब मैं श्रोता बन के आप लोगों के वक्तव्यों को सुनूंगा।

789
00:54:37,840 --> 00:54:43,840
अन्यों को सुना जाए। वाणी को विराम देता हूं।

790
00:54:45,440 --> 00:54:49,440
धन्यवाद भैया। बहुत ही बहुत ही सुंदर वक्तव्य इस

791
00:54:49,440 --> 00:54:53,520
बार आपने दिया। भाई वैज्ञानिक दृष्टि से हमें लगता है उचित ही रहता है क्योंकि

792
00:54:53,520 --> 00:54:57,520
आजकल वैसे भी सब विज्ञान संबंधित ही हो गया है। थोड़ा सा हम

793
00:54:57,520 --> 00:55:01,680
विज्ञान जहां कहीं भी जोड़ दें व्यक्ति थोड़ा सा उसको चीज को मानने लग जाता है। समझने

794
00:55:01,680 --> 00:55:05,840
लग जाता है। जैसा कि एक बार आपने समझाया था कि तीन दृष्टिकोण होते

795
00:55:05,840 --> 00:55:10,240
हैं किसी भी चीज को देखने के तो उसमें एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

796
00:55:10,240 --> 00:55:14,080
भी होता है। दर्शन और

797
00:55:14,080 --> 00:55:18,480
जो व्यवहार है वो तो दृष्टिकोण रहते ही हैं। परंतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण

798
00:55:18,480 --> 00:55:22,480
इसमें बहुत आवश्यक होता है। आपने कहा कि जो भी संध्या आदि

799
00:55:22,480 --> 00:55:26,560
करने लगे, पूजन करने लगे तो बड़ा ही इन सब बातों के विषय

800
00:55:26,560 --> 00:55:30,560
में बहुत ही कम जानकारी आज हिंदू समाज में है। तो नाम जप जो

801
00:55:30,560 --> 00:55:34,720
अभियान है हमारा माध्यम है कि कम से कम नाम से

802
00:55:34,720 --> 00:55:39,040
व्यक्ति जुड़े। इस ग्रुप में व्यक्ति जुड़ता है, आता है, नाम जप करता है,

803
00:55:39,040 --> 00:55:43,040
परस्पर संवाद होता है। आगे चलकर उसको धीरे-धीरे और भी बातें पता

804
00:55:43,040 --> 00:55:47,360
चलती है। शास्त्र के बारे में ज्ञान होता है। उसका चित्त जब अपने आप शुद्ध होता है तो धीरे-धीरे

805
00:55:47,360 --> 00:55:51,680
उसका मन उसका चित्त उसी चीज की ओर आकृष्ट

806
00:55:51,680 --> 00:55:55,920
होता है जहां होना चाहिए था। चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की ओर और उसको

807
00:55:55,920 --> 00:56:01,360
हर साधन प्राप्त होने लगते हैं जिसके माध्यम से वह उन तक पहुंच सके।

808
00:56:01,360 --> 00:56:05,840
अब मैं यहां पर सत्र को आगे बढ़ाऊंगा और सर्वप्रथम

809
00:56:05,840 --> 00:56:09,840
मैं एक बार यहां पर जितने भी सदस्य प्रथम बार

810
00:56:09,840 --> 00:56:13,920
आ रहे हैं पहले हमसे नहीं जुड़े हैं या कोई सत्स उन्होंने नहीं किया है

811
00:56:13,920 --> 00:56:18,720
या कभी भी हमसे नहीं जुड़े हैं और वीडियो आदि देखते थे तो

812
00:56:18,720 --> 00:56:22,880
उनको मैं सबसे पहले यह सूचित कर दूं कि नामास्त्र अभियान है क्या किस माध्यम

813
00:56:22,880 --> 00:56:27,360
से कैसे एक मैं संक्षिप्त सा परिचय दूंगा यहां पर नामास्त्र

814
00:56:27,360 --> 00:56:31,360
अभियान पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में आरंभ

815
00:56:31,360 --> 00:56:35,440
के साथ शुरू किया गया था और इसमें

816
00:56:35,440 --> 00:56:39,440
हम पांच सत्र आयोजित करते हैं 15-15 मिनट के

817
00:56:39,440 --> 00:56:43,680
जो कि जैसे गुरुदेव ने निर्देशित किया है कि सवा घंटे की भक्ति प्रत्येक हिंदू को करनी

818
00:56:43,680 --> 00:56:48,080
चाहिए और दिन में पांच बार ही सही 15-15

819
00:56:48,080 --> 00:56:52,160
मिनट करके वो कर लें और एक जो

820
00:56:52,160 --> 00:56:56,240
हमारा विशेष सत्र होता है सवा घंटे का इसको अगर किसी को लगातार करना हो

821
00:56:56,240 --> 00:57:00,320
तो वह सुबह 5:00 बजे से होता है। तो ये ग्रुप है हमारा

822
00:57:00,320 --> 00:57:04,320
इसमें हमारे सत्र संचालक हैं। इनके द्वारा सत्र संचालित किए

823
00:57:04,320 --> 00:57:08,400
जाते हैं। सर्वप्रथम सवा घंटे का सत्र होता है जो कि 5:00 बजे आरंभ होता

824
00:57:08,400 --> 00:57:12,640
है। इस सत्र में अपनेप ईस्ट के नाम का जाप होता है। तत्पश्चात

825
00:57:12,640 --> 00:57:16,480
6:00 बजे से हम अपने 15 मिनट वाले सत्र आरंभ

826
00:57:16,480 --> 00:57:21,440
करते हैं। इसमें जो 6:00 बजे वाला सत्र है जो प्रथम सत्र है दिन का उसमें

827
00:57:21,440 --> 00:57:25,440
भगवान श्रीमन नारायण का स्मरण किया जाता है। तत्पश्चात दूसरा जो

828
00:57:25,440 --> 00:57:28,800
सत्र होता है उसमें

829
00:57:28,800 --> 00:57:33,280
श्री गणेश जी का स्मरण होता है। तत्पश्चात दोपहर 2:00 बजे वाले में

830
00:57:33,280 --> 00:57:37,600
भगवान श्री सूर्यनारायण जी का स्मरण होता है। शाम को 6:00 बजे

831
00:57:37,600 --> 00:57:41,840
मां दुर्गा माता का स्मरण होता है और रात्रि को 10:00 बजे

832
00:57:41,840 --> 00:57:46,000
शिव जी के साथ सत्र का समापन हम दिन का समापन करते हैं।

833
00:57:46,000 --> 00:57:50,160
अपना 10:00 बजे ये सत्र होता है शिव जी का। तो यहां पर हमारे क्षेत्र संचालक

834
00:57:50,160 --> 00:57:54,320
आदि और अन्य भी प्रबंधन समिति आदि के सदस्य

835
00:57:54,320 --> 00:57:58,480
उपस्थित हैं। मैं उन सभी से आपका एक बार परिचय अवश्य

836
00:57:58,480 --> 00:58:02,560
करवा दूं। यहां पर आशतोष धर द्विवेदी जी उपस्थित होंगे। मैं आग्रह

837
00:58:02,560 --> 00:58:08,000
करूंगा कि एक बार अपना परिचय सभी को दे दें और कुछ भी उनको कहना हो तो अवश्य

838
00:58:08,000 --> 00:58:13,200
आशुतोष द्विवेदी

839
00:58:13,200 --> 00:58:17,440
सभी को जय श्री राम। जय श्री राम जी जी

840
00:58:17,440 --> 00:58:23,440
सबको प्रणाम करता हूं और थोड़ा विनम से आने के लिए क्षमा चाहता हूं। कुछ

841
00:58:23,920 --> 00:58:28,080
देखिए नामास्त्र सत्र ओरिएंटेशन सत्र जो है

842
00:58:28,080 --> 00:58:33,520
वहां पे यहां पे हम लोग सभी लोग उपस्थित हैं। तो

843
00:58:33,520 --> 00:58:37,520
सबसे पहले यही कहना चाहूंगा कि हम लोगों का ये परम सौभाग्य है कि यहां पर

844
00:58:37,520 --> 00:58:43,520
हम लोग

845
00:58:45,280 --> 00:58:51,280
आवाज कट गई आशुतोष जी कुछ आवाज में समस्या हो

846
00:58:51,680 --> 00:58:56,560
आवाज आ रही है? जी जी बोलिए बोलिए अशोक जी आवाज आ रही है बहुत

847
00:58:56,560 --> 00:58:58,720
जी

848
00:58:58,720 --> 00:59:02,720
सबसे पहले मैं यहां पे हमारे बड़े

849
00:59:02,720 --> 00:59:06,720
भाई शिवश भैया हैं उनका धन्यवाद करना चाहूंगा

850
00:59:06,720 --> 00:59:10,960
क्योंकि आज यहां पे हम लोग जितने लोग भी उपस्थित हैं वो उनका

851
00:59:10,960 --> 00:59:15,200
ही कारण है कह सकते हैं कि हमारा प्रारब्ध भी उसके पीछे

852
00:59:15,200 --> 00:59:19,280
है परंतु व्यवहारिक दृष्टिकोण से उनका ही ये सब कुछ

853
00:59:19,280 --> 00:59:23,680
है और पूज्य गुरुदेव का दिया हुआ सब कुछ है जो है क्योंकि

854
00:59:23,680 --> 00:59:27,920
मैं अपने बारे में सबको बताना चाहता हूं कि मैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हूं

855
00:59:27,920 --> 00:59:28,420
जिसके

856
00:59:28,400 --> 00:59:32,480
घर में परंपरा से कोई वैदिक वांगमय की शिक्षा

857
00:59:32,480 --> 00:59:36,480
या फिर अपना जो सनातन सिद्धांत है उसकी शिक्षा दी गई हो

858
00:59:36,480 --> 00:59:40,720
या इस तरह के कार्यों को हम लोगों को सिखाया

859
00:59:40,720 --> 00:59:44,960
गया हो ये जरूर था कि प्रारब्ध वसात जो है

860
00:59:44,960 --> 00:59:49,040
अपना उपनयन जो है वह समय पर हुआ 11 वर्ष की आयु पर हुआ

861
00:59:49,040 --> 00:59:53,280
कुछ ऐसे संस्कार तो बहुत अच्छे नहीं मिल पाए लेकिन इतना जरूर

862
00:59:53,280 --> 00:59:57,680
है कि भैया के वजह से जीवन में बहुत ही

863
00:59:57,680 --> 01:00:02,000
बहुत बदलाव हुआ। अभी बहुत कमियां है अपने अंदर और इसके साथ प्रयास

864
01:00:02,000 --> 01:00:06,000
होता है। और भैया से जुड़ने का जो सबसे बड़ा सौभाग्य हमको

865
01:00:06,000 --> 01:00:10,320
प्राप्त हुआ वो समझिए कि YouTube

866
01:00:10,320 --> 01:00:14,480
पे एक वीडियो देख रहे थे। पूज्य संत थे अमुक नाम नहीं लूंगा।

867
01:00:14,480 --> 01:00:18,880
पूज्य संत थे। उन्होंने कहा नाम जब करना चाहिए हमको कुछ समस्या

868
01:00:18,880 --> 01:00:23,200
थी। समस्या यह थी कि हम एक बीमारी से जूझ

869
01:00:23,200 --> 01:00:27,200
रहे थे जिसको एंजाइटटी नाम की बीमारी कही जाती है। चंद्रमा

870
01:00:27,200 --> 01:00:31,440
जो है उससे संबंधित बीमारी होती है। उस बीमारी से जूझते

871
01:00:31,440 --> 01:00:36,000
जूझते हमने आज से ढाई वर्ष पूर्व नाम जब शुरू किया

872
01:00:36,000 --> 01:00:40,000
दो वर्ष पहली बात तो ये मैं यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि नाम

873
01:00:40,000 --> 01:00:43,520
की महिमा को मैं बता नहीं पाऊंगा। लेकिन जितना मैं

874
01:00:43,520 --> 01:00:47,520
समझ पाया हूं वो मैं बता रहा हूं आप लोगों से कि दो

875
01:00:47,520 --> 01:00:51,680
वर्ष जब बीत गया दो महीने जब बीत गए नाम जप करते हुए

876
01:00:51,680 --> 01:00:55,680
तो अपने जीवन में एक बार YouTube चैनल पर

877
01:00:55,680 --> 01:00:59,680
आवाहन कॉल ऑफ धर्मा नामक एक चैनल था जिस पर भैया

878
01:00:59,680 --> 01:01:03,680
थे और एक शब्द गुरुदेव से पूछते थे कि

879
01:01:03,680 --> 01:01:07,920
गुरुदेव आपकी हिंदी बहुत जटिल है तो उसको

880
01:01:07,920 --> 01:01:12,080
लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए इस प्रकार का कुछ था वीडियो जो मुझे आज भी

881
01:01:12,080 --> 01:01:16,160
याद है और मैंने देखा मुझको कुछ आकर्षण

882
01:01:16,160 --> 01:01:20,320
महसूस हुआ और फिर मैं उनके वीडियोस देखने लगा आर्य समाज और

883
01:01:20,320 --> 01:01:24,480
यह तमाम जो समाज है और तमाम पंथ संप्रदाय हैं

884
01:01:24,480 --> 01:01:28,560
इनके खंडन का तो मुझे लगा कि कहीं ना कहीं कुछ कमी

885
01:01:28,560 --> 01:01:32,720
है लोगों में मतलब कुछ समस्याएं हैं और

886
01:01:32,720 --> 01:01:37,120
मतलब भैया के आशीर्वाद से और पूज्य गुरुदेव की कृपा से आज

887
01:01:37,120 --> 01:01:41,200
मतलब मैं यह कहना चाहूंगा कि मतलब यह मेरा घमंड नहीं है और

888
01:01:41,200 --> 01:01:45,520
जो भी थोड़ा बहुत थोड़ा बहुत जो भी पांच सिद्धांत जो हमने पकड़ा है भैया के आशीर्वाद

889
01:01:45,520 --> 01:01:49,840
से वो उसके वजह से हम मतलब सामने बैठे

890
01:01:49,840 --> 01:01:53,840
किसी का भी खंडन कर सकते हैं। मतलब मैं अपने लिए बता रहा हूं कि

891
01:01:53,840 --> 01:01:58,000
मैं पर्याप्त हूं। इतना तो है कि मैं पर्याप्त मैं ही उनका

892
01:01:58,000 --> 01:01:58,560
खंडन कर

893
01:01:58,560 --> 01:02:03,360
लेता हूं। भैया की आवश्यकता पड़ती ही नहीं है वहां। और बाकी

894
01:02:03,360 --> 01:02:09,280
नाम की महिमा बहुत है। अनंत है। पूज्य

895
01:02:09,280 --> 01:02:13,440
संतों का सानिध्य नाम के ही बल पर प्रार प्राप्त

896
01:02:13,440 --> 01:02:17,520
होता है। गुरुदेव जो है सदगुरुदेव भगवान जीवन में वो नाम के ही

897
01:02:17,520 --> 01:02:21,680
बल पर प्राप्त होते हैं। जीवन में कुछ भी बुरा घटित होता है या अच्छा

898
01:02:21,680 --> 01:02:26,320
घटित होता है। हम लोग गृहस्थ हैं तो हमको इसका भी लालच

899
01:02:26,320 --> 01:02:30,800
होता है कि हमारे साथ सब कुछ बुरा क्यों हो रहा है? सब कुछ अच्छा क्यों हो रहा है?

900
01:02:30,800 --> 01:02:35,200
तो अच्छा जो है वो तो सब कोई प्राप्त करना चाहता है लेकिन जो बुरा प्रारब्ध

901
01:02:35,200 --> 01:02:39,280
है उसको सभी काटना चाहते हैं। तो बुरे प्रारब्ध को काटने के लिए

902
01:02:39,280 --> 01:02:43,280
भी हम नाम का ही सहारा लेते हैं। और अंतत इतना ही कहना

903
01:02:43,280 --> 01:02:47,440
चाहेंगे कि नाम के बिना जीवन में कुछ भी नहीं है। नाम से भी

904
01:02:47,440 --> 01:02:51,920
मतलब नाम के बराबर और भी कुछ साधन है।

905
01:02:51,920 --> 01:02:56,080
लेकिन अपने लिए वो सुलभ नहीं है। इसलिए अपने लिए सबसे सुंदर

906
01:02:56,080 --> 01:03:00,080
कार्य नाम है। और एक बार अंतिम में यही कहना

907
01:03:00,080 --> 01:03:04,400
चाहूंगा कि यह कोई शिवश भैया का अपना व्यक्तिगत

908
01:03:04,400 --> 01:03:08,720
प्रकल्प नहीं है। ये यहां पर उपस्थित जितने भी

909
01:03:08,720 --> 01:03:12,960
100 150 200 250 लोग हैं ये पूरे हिंदू समाज

910
01:03:12,960 --> 01:03:13,680
का

911
01:03:13,680 --> 01:03:17,680
अपना प्रकल्प है। यह पूज्य गुरुदेव का प्रकल्प है और पूज्य गुरुदेव

912
01:03:17,680 --> 01:03:21,840
के माध्यम से शिवश भैया को दिया हुआ जो प्रकल्प चल रहा है

913
01:03:21,840 --> 01:03:25,920
वो समझिए कि हमारे परम पूज्य गुरुदेव करपात्री जी

914
01:03:25,920 --> 01:03:30,240
महाराज धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज ही करा कर रहे हैं।

915
01:03:30,240 --> 01:03:34,400
लोगों के मन में बैठकर के ऐसी भावना हमको रखनी चाहिए। सबको प्रणाम

916
01:03:34,400 --> 01:03:39,120
करता हूं। भैया को भी प्रणाम करता हूं। जय श्री राम। एक

917
01:03:39,120 --> 01:03:43,920
एक बात मैं बस कहूंगा। बहुत अच्छा बोला आशुतोष जी ने। बहुत बढ़िया बोला।

918
01:03:43,920 --> 01:03:47,920
आशुतोष जी के वक्तव्य में जो आशुतोष

919
01:03:47,920 --> 01:03:52,240
जी ने कहा है उस उसमें जो उन्होंने खंडन शब्द का उपयोग

920
01:03:52,240 --> 01:03:56,240
किया है उसका अर्थ इसमें ले कोई भी कि

921
01:03:56,240 --> 01:04:01,680
इन्होंने ये ये कहना चाहते हैं कि सामने वाले सामने बैठे किसी भी व्यक्ति के

922
01:04:01,680 --> 01:04:05,680
का सामने बैठे किसी भी व्यक्ति के किसी व्यक्ति

923
01:04:05,680 --> 01:04:09,760
को मैं नीचा दिखा सकता हूं। खंडन का अर्थ केवल स्वमत की पुष्टि

924
01:04:09,760 --> 01:04:13,760
में है। यदि कोई व्यक्ति हमारे सार्वभौम सिद्धांतों पर आघात

925
01:04:13,760 --> 01:04:18,240
कर रहा है तो वहां पर किया जाने वाला जो वाचिक प्रतिकार है

926
01:04:18,240 --> 01:04:22,320
उसको यहां पर खंडन के रूप में आशुतोष जी ने उपयोग में लिया है।

927
01:04:22,320 --> 01:04:27,520
इसको अन्यथा इस रूप में ना देखें कि अपनी वर्चस्वता के लिए की जाने वाली कोई लड़ाई

928
01:04:27,520 --> 01:04:28,960
को खंडन के रूप में प्रस्तुत

929
01:04:28,960 --> 01:04:33,440
किया गया है। है ना? जी भैया बिल्कुल यही मैं कह रहा हूं कि व्यक्तिगत

930
01:04:33,440 --> 01:04:37,680
अपना कुछ नहीं जो है सब शास्त्रों का और सिद्धांत का जी जी बस

931
01:04:37,680 --> 01:04:41,840
अपने मत की पुष्टि जिसमें हो रही है सिद्धांत की रक्षा के लिए कही गई

932
01:04:41,840 --> 01:04:45,840
बात उसको ही इन्होंने यहां पर खंडन कहा है और बहुत

933
01:04:45,840 --> 01:04:50,320
अच्छा वक्तव्य दिया अनुज है हमारे बहुत प्रेरणादाई

934
01:04:50,320 --> 01:04:54,320
आपके शब्द रहे आपका अभिनंदन

935
01:04:54,320 --> 01:04:58,720
एक हमारे एक महत्वपूर्ण सदस्य और हैं दिनेश शर्मा जी जो अभी

936
01:04:58,720 --> 01:05:02,960
संभवतः मीटिंग में थे और मैं चाहता था कि उनको

937
01:05:02,960 --> 01:05:06,960
भी सुने हम लोग पर वो संभवत छोड़ अभी किसी कारण

938
01:05:06,960 --> 01:05:11,280
से लेफ्ट हुए हैं। तो यदि कोई उनसे जुड़े हो तो उनको मैसेज

939
01:05:11,280 --> 01:05:15,440
कर दें कि वो भी यहां पर जुड़े रहे। उनका अभिवादन बहुत महत्वपूर्ण है हमारे

940
01:05:15,440 --> 01:05:19,840
लिए। वो भी अत्यंत प्रेरणादाई कार्य कर रहे हैं आह्वान के लिए।

941
01:05:19,840 --> 01:05:24,080
तो दिनेश शर्मा जी को किसी प्रकार से अगर संपर्क स्थापित

942
01:05:24,080 --> 01:05:28,240
किया जा सके तो अवश्य करें। जी प्रथम जी आप

943
01:05:28,240 --> 01:05:32,240
जी भैया हम एक बार उनको मैसेज कर रहे हैं। जी बाकी आप

944
01:05:32,240 --> 01:05:37,280
सत्र को आगे संचालित करें।

945
01:05:37,280 --> 01:05:41,440
तो आशुतोष भैया ने यहां पे बहुत ही उत्तम जो है वक्तव्य दिया। बहुत ही अच्छा

946
01:05:41,440 --> 01:05:45,760
लगा। तत्पश्चात हम आगे बढ़ते हैं। हमारे एक और बहुत महत्वपूर्ण सदस्य

947
01:05:45,760 --> 01:05:49,840
हैं। नामास्त्र का इस समय अधिकतर कार्यभार उन्हीं के ऊपर

948
01:05:49,840 --> 01:05:54,080
है। समय पे सारा कार्य पूर्ण कर देते हैं। हमको कहीं शिकायत का अवसर

949
01:05:54,080 --> 01:05:58,160
नहीं मिलता। गौतम पांडे जी से मैं चाहूंगा कि यदि उनका नेटवर्क इस समय

950
01:05:58,160 --> 01:06:02,240
सही हो तो अवश्य अपना परिचय दें। नहीं कोई बात नहीं है। बहुत

951
01:06:02,240 --> 01:06:06,320
उनके नेटवर्क की समस्या है। कुछ अभी उन्होंने मैसेज किया है। बारिश

952
01:06:06,320 --> 01:06:10,480
बहुत हो रही है। इस कारण वहां समस्या है। और गौतम भैया के बारे में बता दूं

953
01:06:10,480 --> 01:06:14,640
कि कभी-कभी ऐसा होता है कि नेटवर्क आदि की समस्या होती है। तो घर

954
01:06:14,640 --> 01:06:18,880
पे ना रुक करके क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। तो घर पे ना रह

955
01:06:18,880 --> 01:06:22,880
के ये बाहर कहीं खेत में भी चले जाते हैं। रात भी रात हो रही है तब भी चले जाते हैं

956
01:06:22,880 --> 01:06:27,120
नेटवर्क के लिए केवल कि वहां पर टावर पास में है हमारे खेत में तो वहां पे नेटवर्क

957
01:06:27,120 --> 01:06:31,280
आएगा। हम इनसे जुड़ सकेंगे। इसलिए अवश्य वो जुड़ जाते हैं। तो बहुत ऐसे

958
01:06:31,280 --> 01:06:35,680
कर्मठ हमारे कर्मठ बहुत जुड़े हुए हैं।

959
01:06:35,680 --> 01:06:41,600
यदि गौतम भैया आपको संभव हो तो अवश्य आप एक बार परिचय अपना दे दे बहुत अच्छा लगेगा।

960
01:06:41,600 --> 01:06:45,920
कि गौतम पांडे जी

961
01:06:45,920 --> 01:06:50,240
मेरी जानकारी में कर्मठता का अह विग्रह

962
01:06:50,240 --> 01:06:52,640
है। कर्मठता का विग्रह

963
01:06:52,640 --> 01:06:56,800
अगर आपको देखना है तो गौतम पांडे जी को देखिए। क्योंकि मैं उनको ऑब्सेर्व करता

964
01:06:56,800 --> 01:07:00,800
हूं। मेरी जानकारी है ना

965
01:07:00,800 --> 01:07:03,840
जी

966
01:07:03,840 --> 01:07:08,000
गौतम भैया भैया मुझे लगता है सह नहीं जुड़ पाएंगे उनका हमें लगता है नेटवर्क वाला प्रॉब्लम जा

967
01:07:08,000 --> 01:07:12,080
रहा है कुछ सुनाई दे रहा है कि नहीं उनके

968
01:07:12,080 --> 01:07:16,560
जो अथक प्रयास हैं नामास्त्र को संचालित करने में एक बैकबोन

969
01:07:16,560 --> 01:07:20,720
की तरह वो कार्यरत हैं और हम सभी मिलकर के उनका

970
01:07:20,720 --> 01:07:25,040
अभिवादन करते हैं। सब की तरफ से मैं अभिवादन करता हूं आपका सम्मान आपको

971
01:07:25,040 --> 01:07:29,200
आपकी निष्ठा को आपकी कर्मठता को आपने

972
01:07:29,200 --> 01:07:33,360
बहुत अच्छा कार्य किया है और आगे भी हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं प्रभु श्री राम

973
01:07:33,360 --> 01:07:37,360
से प्रार्थना करते हैं कि आप उत्तरोत्तर प्रगति करें अपने मार्ग

974
01:07:37,360 --> 01:07:41,280
में

975
01:07:41,280 --> 01:07:45,440
अब आगे बढ़ते हुए मैं अपने एक और बहुत हमारे महत्वपूर्ण

976
01:07:45,440 --> 01:07:49,520
सदस्य हैं बैकग्राउंड में उनका वर्क बहुत रहता है। अधिकतर कार्य बैकग्राउंड का

977
01:07:49,520 --> 01:07:53,680
ही उनका रहता है और बहुत अच्छा कार्य रहता है। अनिरुद्ध तिवारी जी यहां पे उपस्थित

978
01:07:53,680 --> 01:07:57,680
हैं। अनिरुद्ध भैया यदि आवाज आपको आ रही हो तो अपना एक बार परिचय अवश्य दें और कुछ भी

979
01:07:57,680 --> 01:08:03,680
जो आप कहना चाहे यहां पे अनिरुद्ध भैया

980
01:08:06,400 --> 01:08:10,320
अनिरुद्ध जी आवाज आ रही है आपको?

981
01:08:10,320 --> 01:08:16,080
भैया मेरी आवाज आपको तो आ रही है? जी आ रही है आ रही है बिल्कुल आ रही है

982
01:08:16,080 --> 01:08:20,240
अनुज जी संभता उनको आवाज नहीं जा पा रही है हमें लगता है अनु भैया कुछ भी आप मैसेज

983
01:08:20,240 --> 01:08:26,240
करें या कुछ रिएक्शन यदि आवाज आ रहा हो आपको

984
01:08:31,440 --> 01:08:36,240
दिनेश आवाज दिनेश जी आ गए हैं

985
01:08:36,240 --> 01:08:40,240
दिनेश शर्मा जी मेरे ख्याल से जुड़ रहे हैं जय श्री

986
01:08:40,240 --> 01:08:44,240
राम सभी को जय जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

987
01:08:44,240 --> 01:08:48,800
राम जय श्री राम जय श्री राम जी

988
01:08:48,800 --> 01:08:52,800
दिनेश जी आप अपना परिचय दें सब अपना

989
01:08:52,800 --> 01:08:56,880
परिचय देते हुए थोड़ा सा अपना जो अनुभव है वो हमारे साथ साझा करें जिससे कि

990
01:08:56,880 --> 01:09:01,040
हम और अन्य कुछ प्रेरणा प्राप्त कर सकें

991
01:09:01,040 --> 01:09:05,200
जी मेरा जुड़े और पूरा जो है एक बार जी जी मेरा

992
01:09:05,200 --> 01:09:09,760
नाम दिनेश शर्मा है मैं हरियाणा से रहने वाला हूं तो

993
01:09:09,760 --> 01:09:13,840
मैं शिव मैं गुरुदेव देव के साथ जुड़ा हुआ था पहले अपने गुरु

994
01:09:13,840 --> 01:09:18,000
भाइयों के साथ चर्चा में रहता था और जो धर्म की जो ख्याति हो रही

995
01:09:18,000 --> 01:09:22,320
थी उसके खिलाफ मेरे दिल में बड़ी विचलित तरह के

996
01:09:22,320 --> 01:09:26,320
मेरे दिल में बड़ा रोष था उसके खिलाफ लेकिन उस समय पर

997
01:09:26,320 --> 01:09:30,320
कोई समझने वाला नहीं था इस चीज को तो जब मैं गुरुदेव से

998
01:09:30,320 --> 01:09:34,480
जुड़ा गुरुदेव ने मेरे सारे प्रश्नों का उत्तर दिया उसके बाद मैंने जब

999
01:09:34,480 --> 01:09:38,720
देखा शिवश भैया को तो शिवश जी की मैंने वीडियोस

1000
01:09:38,720 --> 01:09:42,960
देखी मैंने कहा कि यार यह जो ये हमारे

1001
01:09:42,960 --> 01:09:47,040
गुरु भाई हैं ये किस तरह से लड़ रहे हैं मतलब बगैर डर के

1002
01:09:47,040 --> 01:09:51,200
गुरु जी को गुरुदेव के आशीर्वाद से किस तरह से लड़ रहे हैं धर्म के विरुद्ध

1003
01:09:51,200 --> 01:09:56,080
उससे हमें प्रेरणा मिली और उसी से मैं नामास्त्र अभियान में जुड़ा

1004
01:09:56,080 --> 01:10:00,160
जब मुझे नामास्त्र अभियान में जुड़े हुए मेरे ख्याल से दो ढाई साल हो चुके हैं

1005
01:10:00,160 --> 01:10:04,160
जिस पर हम लोग सुबह का सेशन लिया करते थे पहले डेढ़ और

1006
01:10:04,160 --> 01:10:08,560
पहले तो हम जो है एक घंटे फिर डेढ़ घंटे पे भी आए

1007
01:10:08,560 --> 01:10:12,560
तो शिवश भैया ने हमें बताया कि नम नाम जप करने

1008
01:10:12,560 --> 01:10:16,640
के क्या-क्या क्या-क्या फायदे होते हैं और जीवन में बहुत

1009
01:10:16,640 --> 01:10:20,640
ज्यादा परिवर्तन हुआ। जैसे कि शुरुआत में

1010
01:10:20,640 --> 01:10:25,280
जो एक तो शुरुआत में जो है मतलब आपकी

1011
01:10:25,280 --> 01:10:30,800
जो वृद्धि है वो बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

1012
01:10:30,800 --> 01:10:34,800
आपकी निष्ठा बढ़ जाती है भगवान में। प्रीति आपकी बढ़ जाती है भगवान

1013
01:10:34,800 --> 01:10:38,800
में। तो जो जो एक गैप था जो मेरे दिल में एक गैप

1014
01:10:38,800 --> 01:10:43,680
था वो नाम जप भगवान का नाम जप करते करते पूर्ण हो गया।

1015
01:10:43,680 --> 01:10:47,760
बस मैं यही कहना चाहूंगा कि आप सभी लोगों को भी कि आप लोग भी

1016
01:10:47,760 --> 01:10:53,120
नामास्त्र सेशन में जुड़े और और जो है

1017
01:10:53,120 --> 01:10:57,120
और जो है बस बस इतना ही कहना चाहूंगा मैं आपसे सभी लोगों को।

1018
01:10:57,120 --> 01:11:01,440
बहुत बढ़िया। जी बहुत ही उत्तम बहुत उत्तम

1019
01:11:01,440 --> 01:11:02,160
दिनेश भैया

1020
01:11:02,160 --> 01:11:06,160
ने इतना अच्छा वक्तव्य दिया। अब इसी के साथ हम आगे बढ़ते

1021
01:11:06,160 --> 01:11:10,240
हुए यहां पे नरेंद्र सिंह जी से अनुरोध करेंगे कि अपना वो परिचय

1022
01:11:10,240 --> 01:11:14,320
दें। नरेंद्र भैया भी बैकग्राउंड आदि का बहुत कार्य करते हैं। सत्र आदि भी

1023
01:11:14,320 --> 01:11:18,640
उनके द्वारा संचालित किए जाते रहते हैं और उनकी एक विशेष

1024
01:11:18,640 --> 01:11:22,880
बात जो मैं हर बार साझा करता हूं। आज भी करूंगा वो यह है कि

1025
01:11:22,880 --> 01:11:27,040
कर्मठता का परिचय इस प्रकार से वो देते हैं कि ड्राइव करते हुए भी वह हमारे

1026
01:11:27,040 --> 01:11:31,200
मीटिंग हो सत्र हो कुछ आवश्यक कार्य हो अवश्य जुड़ जाते हैं। वो तो एक बहुत बड़ी

1027
01:11:31,200 --> 01:11:35,280
बात है कि जब व्यक्ति कोई जो आलस करना होता है वो हजारों

1028
01:11:35,280 --> 01:11:39,360
बहाने बनाता है। यहां पे एक व्यक्ति ऐसा भी है जो कार चला रहा

1029
01:11:39,360 --> 01:11:43,440
है और बाइक चला रहा है जो भी है तो उसने जो है तभी भी हमसे जुड़ा हुआ है। एक बार

1030
01:11:43,440 --> 01:11:49,440
हम आग्रह करते हैं नरेंद्र भैया आपको आवाज आ रही है तो अपना परिचय अवश्य दे दे।

1031
01:11:53,440 --> 01:11:58,400
जी नरेंद्र भैया आप बोलिए

1032
01:11:58,400 --> 01:12:02,480
मुझे लगता है कोई टेक्निकल इशू आ रहा है हां आवाज आई है आवाज

1033
01:12:02,480 --> 01:12:06,560
आई बोलिए बोलिए जय श्री बोलिए जय श्री राम इंटरनेट खत्म हो रखा

1034
01:12:06,560 --> 01:12:10,640
है मेरे पास आज अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अभी इस वक्त आप अभी इस समय आप कहां

1035
01:12:10,640 --> 01:12:14,640
पर है मैं हूं तो घर अच्छा

1036
01:12:14,640 --> 01:12:20,640
अच्छा अच्छा जी छोटा सा दे दीजिए एक मिनट

1037
01:12:29,360 --> 01:12:33,840
नरेंद्र भैया एक छोटा सा एक वक्तव्य दे दे अगर संभव हो तो नहीं तो कोई बात नहीं है।

1038
01:12:33,840 --> 01:12:37,840
यदि आप नहीं उनके यहां नेट नेट की प्रॉब्लम आ रही है। तो

1039
01:12:37,840 --> 01:12:42,160
नरेंद्र जी आपकी धर्मनिष्ठता के लिए

1040
01:12:42,160 --> 01:12:46,400
आपका सम्मान हम सब करते हैं। आहान की ओर से मैं आपका

1041
01:12:46,400 --> 01:12:50,880
सम्मान करता हूं। दिनेश जी ने भी बहुत अच्छे प्रेरणादाई शब्द बोले।

1042
01:12:50,880 --> 01:12:55,280
आपका भी बहुत सम्मान और धर्म के प्रति जो आपकी लगन है नरेंद्र

1043
01:12:55,280 --> 01:12:59,520
जी जिस तरह से प्रथम जी ने बताया कि आप चलते फिरते भी

1044
01:12:59,520 --> 01:13:03,600
मतलब किसी भी तरह से जितना भी आप कर सकते हैं यथा सामर्थ्य करते

1045
01:13:03,600 --> 01:13:07,760
हैं। तो यह गुरुदेव के वो वचन है जो संभवत गुरु

1046
01:13:07,760 --> 01:13:08,880
गुरुदेव के

1047
01:13:08,880 --> 01:13:13,040
सानिध्य में आने से पहले। गुरुदेव

1048
01:13:13,040 --> 01:13:17,360
का सानिध्य तो हम लोगों को तभी से प्राप्त है जब से हम जीव भाव को प्राप्त

1049
01:13:17,360 --> 01:13:21,600
है। तो ईश्वर के रूप में हमें वह गुरु प्राप्त है।

1050
01:13:21,600 --> 01:13:25,600
तो गुरुदेव का सानिध्य हमें सदा से है।

1051
01:13:25,600 --> 01:13:29,920
गुरुदेव का सानिध्य जो है वो सनातन है हम सभी के लिए।

1052
01:13:29,920 --> 01:13:33,920
बस यह है कि उसको कौन स्वीकार कर रहा है, कौन स्वीकार नहीं कर रहा है। इतनी सी

1053
01:13:33,920 --> 01:13:38,000
बात है। जैसे वह है ना कि प्रत्येक नास्तिक भी स्वयं को

1054
01:13:38,000 --> 01:13:42,160
नास्तिक कहने वाला भी सच्चिदानंद स्वरूप को ही ढूंढ रहा है। बस

1055
01:13:42,160 --> 01:13:46,320
वो वाणी से स्वीकार नहीं करता है। तो गुरुदेव का सानिध्य में आते

1056
01:13:46,320 --> 01:13:50,640
समय जो व्यवहारिक रूप से लक्षण है उस समय आते समय जो मैंने गुरुदेव

1057
01:13:50,640 --> 01:13:54,880
के कुछ वचन सुने थे कि यदि हिंदू

1058
01:13:54,880 --> 01:13:58,880
जब उनसे किसी ने पूछा था कि अमुक अमुक वर्ग के लोगों को अगर

1059
01:13:58,880 --> 01:14:03,440
हमने नहीं मारा तो हमें मार देंगे। तो गुरुदेव ने उस समय कहा था यदि हिंदू

1060
01:14:03,440 --> 01:14:07,440
यथा सामर्थ्य अपने धर्म का पालन करने

1061
01:14:07,440 --> 01:14:11,600
लग जाए। यथासामर्थ अपने धर्म का पालन कर जाए तो जितने

1062
01:14:11,600 --> 01:14:15,920
भी हिंदू विरोधी तंत्र हैं उन तंत्रों में ही ऐसे क्रांतिकारी

1063
01:14:15,920 --> 01:14:20,320
उत्पन्न हो जाएंगे जो अपने तंत्रों का शोधन कर देंगे। बहुत

1064
01:14:20,320 --> 01:14:24,080
महत्वपूर्ण पंक्ति थी ये। तो ऐसा

1065
01:14:24,080 --> 01:14:30,080
ही कुछ आपको देखकर के हमें प्रेरणा मिलती है। बहुत आभार आपका।

1066
01:14:30,640 --> 01:14:34,720
इसी के साथ हम पुनः सत्र को आगे बढ़ाते हैं। यहां पर प्रतीक

1067
01:14:34,720 --> 01:14:38,960
साहू जी उपस्थित हैं। प्रतीक साहू जी हमारे नामास्त्र

1068
01:14:38,960 --> 01:14:43,360
के जो सत्र हैं उनके संचालन में सहयोग करते हैं। सत्र चलाते हैं और

1069
01:14:43,360 --> 01:14:47,360
अपना भी उद्धार कर ही रहे हैं। दूसरों को भी इसमें जो है जुड़े हुए हैं।

1070
01:14:47,360 --> 01:14:51,520
साथ में उनके लोग तो उनका भी नाम जप के प्रति प्रोत्साहन

1071
01:14:51,520 --> 01:14:55,680
बढ़ा रहे हैं। उनके कार्यकारी सामाजिक आदि वृत्तों

1072
01:14:55,680 --> 01:15:00,000
में तो प्रतीक साहू जी एक बार आप अगर आवाज जा रही हो आप तक तो अपना परिचय अवश्य

1073
01:15:00,000 --> 01:15:04,080
प्रक जी भैया जी आवाज आ रही है क्लियर

1074
01:15:04,080 --> 01:15:08,320
हां अवश्य अवश्य स्पष्ट आवाज आ रही है जय

1075
01:15:08,320 --> 01:15:12,480
श्री राम सभी को जय श्री राम जी जी

1076
01:15:12,480 --> 01:15:16,640
मैं प्रतीक सा हूं छत लोकेशन

1077
01:15:16,640 --> 01:15:21,120
तो मना किया बताने के लिए मैं करीब

1078
01:15:21,120 --> 01:15:25,280
बोल कोई बात नहीं आप बोलिए

1079
01:15:25,280 --> 01:15:29,920
राज्य बता देंगे तो कोई जान नहीं पाएगा छत्तीसगढ़ है बहुत बड़ा राज्य है

1080
01:15:29,920 --> 01:15:35,680
बहुत बड़ा राज्य है इतने लोग नहीं है वहां वहां ढूंढ नहीं पाएंगे आपको

1081
01:15:35,680 --> 01:15:40,800
जी बोलिए बोलिए प्रदीप जी बहुत अच्छा बोलिए हां

1082
01:15:40,800 --> 01:15:46,160
करीब छ महीने से ज्यादा हो गया मुझे भी झेल लेंगे

1083
01:15:46,160 --> 01:15:50,400
क्षमा चाहते हैं हां कहिए कहिए छ महीने

1084
01:15:50,400 --> 01:15:54,400
से जी 6 महीने से अधिक समय

1085
01:15:54,400 --> 01:15:57,680
हो गया होगा आहान से जुड़े

1086
01:15:57,680 --> 01:16:02,240
स्टार्टिंग में तो पूरी वाले शंकराचार्य जी को सुनते थे YouTube पर

1087
01:16:02,240 --> 01:16:06,240
फिर आगे चलकर शिवश भैया जी

1088
01:16:06,240 --> 01:16:12,240
से भी जुड़ना हुआ YouTube पे उनके वीडियो देखते थे फिर

1089
01:16:12,320 --> 01:16:16,320
उस समय आवाान का इच्छा हुई कि नहीं ग्रुप में

1090
01:16:16,320 --> 01:16:20,960
नाम जप करने चाहिए क्योंकि उससे डिसिप्लिन भी आता है

1091
01:16:20,960 --> 01:16:25,120
और एक कहते हैं ना अच्छे लोगों का संग मिलता है सत्संग टाइप

1092
01:16:25,120 --> 01:16:31,120
का तो प्रेरणा हुई फिर उसको जॉइ किया

1093
01:16:31,440 --> 01:16:35,520
इससे मुझे मुझे मदद यह मिला है कि निरंतरता

1094
01:16:35,520 --> 01:16:39,680
आ रही है थोड़ी कि नहीं कम से कम एक या दो दो में तो जुड़ना

1095
01:16:39,680 --> 01:16:43,840
ही है अभी भले प्रत्यक्ष रूप से जुड़

1096
01:16:43,840 --> 01:16:47,840
नहीं पाता नेटवर्क के कारण लेकिन खुद से तो कर ही

1097
01:16:47,840 --> 01:16:52,480
लेता हूं

1098
01:16:52,480 --> 01:16:58,480
जी आवाज क्लियर है मेरी? जी जी हां बस स्पष्ट

1099
01:17:00,240 --> 01:17:04,240
और जो गुरुदेव भगवान ने जो

1100
01:17:04,240 --> 01:17:09,040
अलग-अलग आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया हम लोग को उससे जो

1101
01:17:09,040 --> 01:17:13,040
जीवन में कष्ट आते हैं, प्रॉब्लम्स आते हैं उसके

1102
01:17:13,040 --> 01:17:17,040
प्रति दृष्टिकोण ही बदल गया है। काफी सहजता से

1103
01:17:17,040 --> 01:17:20,880
निपट जाते हैं सभी चीजें।

1104
01:17:20,880 --> 01:17:25,200
और जो उद्देश्य होना चाहिए हमारा कि नहीं करना क्या है जीवन में

1105
01:17:25,200 --> 01:17:29,600
क्या लक्ष्य होना चाहिए हम हमारी खोज का स्वरूप

1106
01:17:29,600 --> 01:17:33,840
क्या है दार्शनिक दृष्टि से

1107
01:17:33,840 --> 01:17:38,400
वो काफी क्लियर हो गया है

1108
01:17:38,400 --> 01:17:42,480
तो इससे इससे जो है क्लेरिटी है कि नहीं क्यों करना है नाम

1109
01:17:42,480 --> 01:17:47,360
जब उसका भी उद्देश्य क्या है वो सब

1110
01:17:47,360 --> 01:17:51,440
शंकराचार्य जी की कृपा से समझ में आने लगा है अब। तो इसके

1111
01:17:51,440 --> 01:17:55,440
लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आह्वान ने तो काफी शोधन

1112
01:17:55,440 --> 01:17:59,760
किया इस क्षेत्र में, क्योंकि काफी कई

1113
01:17:59,760 --> 01:18:04,000
तरीके के लोग हैं। इसमें डाइवर्ट भी कर देते हैं लोगों को। लेकिन

1114
01:18:04,000 --> 01:18:07,600
आह्वान आह्वान से हमें जो है

1115
01:18:07,600 --> 01:18:13,600
नई दिशा प्राप्त हो रही है। हो रही है जो कि एकदम ऑथेंटिक है।

1116
01:18:14,160 --> 01:18:18,160
जी भैया धन्यवाद। जी जी बहुत ही सुंदर सुंदर

1117
01:18:18,160 --> 01:18:22,320
बहुत अच्छा वक्तव्य अब आगे बढ़ते हुए गौतम पांडे जी

1118
01:18:22,320 --> 01:18:26,640
और आप ने जैसा बताया कि परिस्थितियां विपरीत

1119
01:18:26,640 --> 01:18:30,720
है परंतु संघर्षत होते हुए भी आप यथा

1120
01:18:30,720 --> 01:18:34,960
सामर्थ्य कार्य कर रहे हैं और नरेंद्र इंदु जी भी उसी तरह से चल रहे हैं

1121
01:18:34,960 --> 01:18:39,040
तो कुछ पंक्तियां थी कुछ मैंने लिखी थी जो मुझे स्मरण

1122
01:18:39,040 --> 01:18:43,440
हो रही है कि परम तत्व

1123
01:18:43,440 --> 01:18:47,840
द्वारा निर्मित तुझ में हर भाव है परम तत्व

1124
01:18:47,840 --> 01:18:52,000
द्वारा निर्मित तुझ में हर भाव है अहम क्रोध मोह

1125
01:18:52,000 --> 01:18:56,160
प्रेम आदि तेरा चुनाव है बल मारुति

1126
01:18:56,160 --> 01:19:00,320
से ले तू ऋण निहित जो छल हो कृष्ण का रख राम

1127
01:19:00,320 --> 01:19:05,760
की मर्यादा को कर अंत तू और शत्रु का

1128
01:19:05,760 --> 01:19:09,760
है युद्ध में जो रह रहा है युद्ध में जो

1129
01:19:09,760 --> 01:19:14,240
रह रहा पराजित भी तू ही श्रेष्ठ है आकाश

1130
01:19:14,240 --> 01:19:18,240
कह रहा हे भक्त तू ही श्रेष्ठ है। है युद्ध

1131
01:19:18,240 --> 01:19:22,400
में जो रह रहा पराजित भी तू ही श्रेष्ठ है।

1132
01:19:22,400 --> 01:19:22,900
है

1133
01:19:22,640 --> 01:19:28,640
आकाश कह रहा ए भक्त तू ही श्रेष्ठ है।

1134
01:19:30,240 --> 01:19:34,480
बहुत सुंदर भैया। फिर से हम अपने सत्र को वापस आते

1135
01:19:34,480 --> 01:19:38,480
हुए हम आगे बढ़ाएंगे। यहां पे प्रवीण कोहली जी उपस्थित हैं।

1136
01:19:38,480 --> 01:19:43,120
रात्रि का सत्र नियमित रूप से शिव जी की आराधना करते हैं। तो

1137
01:19:43,120 --> 01:19:47,120
प्रवीण जी से मैं कहूंगा कि एक बार अपना परिचय अवश्य दें। एक विशेष

1138
01:19:47,120 --> 01:19:51,280
बात उनके बारे में यह है कि इतना अब उनका अभ्यास हो चुका

1139
01:19:51,280 --> 01:19:55,280
है नाम का कि हमें ऐसा सुनने में आया कि प्रवीण जी ने

1140
01:19:55,280 --> 01:19:59,440
बताया कि रात्रि का सत्र ना ले तो उनको नींद नहीं आती है। उनको

1141
01:19:59,440 --> 01:20:03,520
लगता है कि हम सो नहीं पाएंगे। तो प्रवीण भैया आप तक आवाज जा रही हो तो एक बार

1142
01:20:03,520 --> 01:20:07,520
अवश्य जो है अपना परिचय यहां पर देने का कष्ट करें। जी जय श्री

1143
01:20:07,520 --> 01:20:11,760
राम सभी को नारायण। जय श्री राम जय श्री राम।

1144
01:20:11,760 --> 01:20:15,920
मैं प्रवीण महाराष्ट्र का निवासी हूं मैं। जी

1145
01:20:15,920 --> 01:20:19,920
तो भगवान की कृपा से मैं दो समय का सत्र ले पा

1146
01:20:19,920 --> 01:20:23,920
रहा हूं और आवाहन धर्म रक्षा समिति को अपना

1147
01:20:23,920 --> 01:20:28,080
समय दे पा रहा हूं और मुझे बहुत खुशी है कि मैं अपना कार्य

1148
01:20:28,080 --> 01:20:32,640
अच्छी तरह से निभा रहा हूं और ज्यादातर हमारा

1149
01:20:32,640 --> 01:20:36,640
भगवत के भगवत प्राप्ति की और हमारा

1150
01:20:36,640 --> 01:20:37,680
जो कार्य

1151
01:20:37,680 --> 01:20:41,760
है वो अच्छी तरह से निभा पा रहे हैं तो यही अच्छा है मेरे

1152
01:20:41,760 --> 01:20:45,840
लिए तो कि जो हमारे हमारे भगवान है

1153
01:20:45,840 --> 01:20:50,160
जो हमारे शिव है विष्णु है ब्रह्मा विष्णु शिव महेश

1154
01:20:50,160 --> 01:20:54,160
जो भी है वो हमारे भगवान है तो उनके प्रति हमारी

1155
01:20:54,160 --> 01:20:58,320
आस्था महत्वपूर्ण है इसलिए नामस्त्र के

1156
01:20:58,320 --> 01:21:02,400
माध्यम से हम जुड़े हैं आपके साथ और नाम जप कर पा रहे

1157
01:21:02,400 --> 01:21:06,400
हैं और हमारे जो गुरु भगवान है

1158
01:21:06,400 --> 01:21:11,280
जो गुरुदेव है उनके प्रति हमारी आस्था अतिशय महत्वपूर्ण

1159
01:21:11,280 --> 01:21:15,360
बढ़ती रहती है नाम जप के माध्यम

1160
01:21:15,360 --> 01:21:19,920
से जो हमारे नाम जप करते हैं

1161
01:21:19,920 --> 01:21:24,080
मन की शांति और पापों का नाश और आध्यात्मिक धार्मिक

1162
01:21:24,080 --> 01:21:26,640
और उन्नति

1163
01:21:26,640 --> 01:21:32,320
बहुत हमारा जो कार्य है वो के प्रति

1164
01:21:32,320 --> 01:21:38,320
करना अति आवश्यक है। इसी कारण

1165
01:21:38,640 --> 01:21:42,880
है कि नाम सत्र में जुड़ने का प्रयास करें। सभी लोग लोग

1166
01:21:42,880 --> 01:21:48,880
धन्यवाद

1167
01:21:52,560 --> 01:21:56,880
आवाज में कुछ समस्या है प्रवीण जी के नहीं नहीं वो

1168
01:21:56,880 --> 01:22:01,360
यही बोलना चाह रहे थे कि सब लोग भी इस नाम जप में जुड़ने का प्रयास करें अंत में

1169
01:22:01,360 --> 01:22:07,040
है ना जी तो और वो उसकी महिमा बता रहे थे तो ठीक है मैं समझने का प्रयास कर

1170
01:22:07,040 --> 01:22:11,120
रमेश सैनी जी कुछ बोलना चाह रहे हैं रमेश सैनी जी का अगला

1171
01:22:11,120 --> 01:22:15,120
नंबर है। अभी बोलना चाह रहे हैं। बोलिए रमेश

1172
01:22:15,120 --> 01:22:19,760
भैया। रमेश भैया भी हमारे जो है बैकग्राउंड के कार्यकर्ता हैं। और

1173
01:22:19,760 --> 01:22:23,840
यश नाम है इनका अकाउंट जो है छोटी सी बात में ध्यान दिलाता

1174
01:22:23,840 --> 01:22:28,080
चलूं। जैसे अभी एक बात हो रही है कि आहान से जुड़ा या आहान धर्म

1175
01:22:28,080 --> 01:22:32,560
रक्षार्थ सेवा समिति को समय दिया। तो इसका भी एक अपार्थ

1176
01:22:32,560 --> 01:22:36,800
निकाला जा सकता है। तो इसका अपार्थ ना निकाला जाए तो हमें

1177
01:22:36,800 --> 01:22:40,800
ध्यान रखना चाहिए कि हम कौन है। हमारी सबसे बड़ी पहचान जो

1178
01:22:40,800 --> 01:22:44,880
हो सकती है सबसे अच्छी पहचान वो यही है कि हम श्रीमद

1179
01:22:44,880 --> 01:22:49,360
जगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी के शिष्य हैं और

1180
01:22:49,360 --> 01:22:53,360
प्रभु श्री राम के अपने ईष्ट के साधारण भक्त हैं। और

1181
01:22:53,360 --> 01:22:53,860
यह जो

1182
01:22:53,760 --> 01:22:58,640
सारे प्रकल्प दिख रहे हैं आहान के द्वारा आहान के नाम से जो संचालित हो रहे हैं

1183
01:22:58,640 --> 01:23:02,800
यह जो गुरुदेव भगवान की जो सेना है आदित्य वाहिनी

1184
01:23:02,800 --> 01:23:07,120
ये उसके ही प्रकल्प है बस आप ऐसा मान सकते हैं कि निर्गुण

1185
01:23:07,120 --> 01:23:11,280
निराकार रूप में जो आदित्य वाहिनी सेना है उसका सगुण साकार

1186
01:23:11,280 --> 01:23:15,280
स्वरूप इस तरह से आपको भिन्न-भिन्न प्रकल्पों के माध्यम से प्राप्त हो

1187
01:23:15,280 --> 01:23:19,280
रहा है। परंतु एट द एंड ये सारी सेना

1188
01:23:19,280 --> 01:23:23,520
इस सारे अभियान का पर्यावसान किस में है? जिस दिन हमारी आदित्य

1189
01:23:23,520 --> 01:23:28,480
वाहिनी सेना आदित्य वाहिनी के सेनापति आदित्य वाहिनी

1190
01:23:28,480 --> 01:23:32,560
के महामहिम शंकराचार्य अथवा

1191
01:23:32,560 --> 01:23:36,720
उनके द्वारा नियुक्त सेनापति आहान करें हमारी सेना

1192
01:23:36,720 --> 01:23:40,800
का इस अभियान का इन सारे अभियानों का इन सारे प्रकल्पों का

1193
01:23:40,800 --> 01:23:44,800
पर्यावसान एकमात्र उसी में है कि शंकराचार्य जी के लिए जैसे

1194
01:23:44,800 --> 01:23:48,880
कि एक बार जो हमारे पूज्य ऋषिकेश

1195
01:23:48,880 --> 01:23:52,960
ब्रह्मचारी जी महाराज है उन्होंने कहा कि जिस दिन

1196
01:23:52,960 --> 01:23:57,920
इस देश का 100 करोड़ हिंदू

1197
01:23:57,920 --> 01:24:02,160
यह समझने लगेगा, यह कहने लगेगा कि शंकराचार्य की आवाज

1198
01:24:02,160 --> 01:24:06,160
इस देश के 100 करोड़ हिंदुओं की आवाज है। उस दिन एक उस

1199
01:24:06,160 --> 01:24:10,480
दिन एक दिन के अंदर पूरी भारत की पूरे सनातन

1200
01:24:10,480 --> 01:24:14,720
समाज की सारी समस्याएं सब कुछ सही हो जाएंगी। तो बस वही दिन

1201
01:24:14,720 --> 01:24:19,120
है। हमें वही दिन लाना है कि जिस दिन हमारे शंकराचार्य

1202
01:24:19,120 --> 01:24:23,440
हमारे जो श्रीमद जगुरु शंकराचार्य हैं वो आहान

1203
01:24:23,440 --> 01:24:27,600
करें अपनी सेना का तो उस दिन वहां हम उनको रिपोर्ट सके

1204
01:24:27,600 --> 01:24:31,760
कि हम आपकी सेवा में आपके निर्देश निर्देश अनुसार

1205
01:24:31,760 --> 01:24:36,320
हर यथा सामर्थ स्थिति में खड़े हुए हैं।

1206
01:24:36,320 --> 01:24:40,560
है ना? तो इन सारी चीजों का परसान एकमात्र उसी में है। इस बात का ध्यान

1207
01:24:40,560 --> 01:24:44,800
रखें। धर्म और ईश्वर के साथ हम लोग जुड़ रहे हैं और किसी व्यक्ति

1208
01:24:44,800 --> 01:24:48,960
विशेष का कोई अपना कोई ऐसा प्रकल्प नहीं है। किसी कोई यह एक

1209
01:24:48,960 --> 01:24:53,120
औपचारिक आवश्यकताएं हैं जो नाम रखना पड़ रहा है। इन सब में कहीं

1210
01:24:53,120 --> 01:24:59,120
ना कहीं राम है। इन सब में कहीं ना कहीं शंकराचार्य हैं। जी

1211
01:24:59,680 --> 01:25:03,760
बहुत सुंदर भैया बहुत ही अच्छा। आगे जो है हम

1212
01:25:03,760 --> 01:25:07,840
रमेश भैया तक आवाज जा रही हो तो हम आग्रह करेंगे। यश

1213
01:25:07,840 --> 01:25:11,840
भैया इनका नाम है रमेश तो ये अकाउंट पर जो है इस पर लिखा रहता

1214
01:25:11,840 --> 01:25:16,000
है एक उद्बोधन कर रहा था एक उद्बोधन कर रहा था

1215
01:25:16,000 --> 01:25:20,160
मैं किसी सभा में उसमें भी मैंने कहा था वही आज भी

1216
01:25:20,160 --> 01:25:24,560
कह रहा हूं हर वो व्यक्ति आदित्य वाहिनी का सैनिक है हर वो व्यक्ति शंकराचार्य

1217
01:25:24,560 --> 01:25:28,960
का सैनिक है जो अपने सार्वभौम सिद्धांतों

1218
01:25:28,960 --> 01:25:33,120
की रक्षा के लिए चिंतन करता है चिंतित हर

1219
01:25:33,120 --> 01:25:39,120
वो व्यक्ति शंकराचार्य का सैनिक है इस बात को कभी ना भूलें

1220
01:25:39,520 --> 01:25:44,000
जी रमेश जी

1221
01:25:44,000 --> 01:25:47,520
सभी को जय श्री राम

1222
01:25:47,520 --> 01:25:50,400
जय श्री राम

1223
01:25:50,400 --> 01:25:55,120
तो जय श्री राम

1224
01:25:55,120 --> 01:26:01,120
हम बोलिए जय श्री राम बोलिए

1225
01:26:02,240 --> 01:26:05,120
तो पिछले

1226
01:26:05,120 --> 01:26:09,200
आठ सात महीने से हम आवान के प्रकल्प से जुड़े

1227
01:26:09,200 --> 01:26:13,280
हुए हैं और भगवान की कृपा से और जगतगुरु

1228
01:26:13,280 --> 01:26:17,520
शंकराचार्य महावाक की कृपा से जो आह्वान

1229
01:26:17,520 --> 01:26:20,800
से जुड़ने के बाद जीवन

1230
01:26:20,800 --> 01:26:24,800
जो परिवर्तन आया है उसका हम शब्दों के शब्दों में नहीं

1231
01:26:24,800 --> 01:26:29,200
बयान कर सकते उस चीज को वो चीज हमने अनुभव किया है

1232
01:26:29,200 --> 01:26:35,120
और जब से आवाहन से जुड़े हैं तो एक

1233
01:26:35,120 --> 01:26:39,280
मिली जीवन को देश के

1234
01:26:39,280 --> 01:26:45,280
लिए करने के लिए

1235
01:26:46,880 --> 01:26:52,880
एक उत्साह और देश में कुछ एक सच्ची

1236
01:26:53,120 --> 01:26:58,960
दीक्षा और एक सच्चा मार्गदर्शन

1237
01:26:58,960 --> 01:27:03,360
यहां पर कभी विश्वासघात हो ही नहीं सकता क्योंकि

1238
01:27:03,360 --> 01:27:07,360
यहां पर धर्म और ईश्वर और गुरुदेव की कृपा से हर चीज होती है। गुरु ग्रंथ

1239
01:27:07,360 --> 01:27:11,600
और गोविंद के आधार पर ये पूरे प्रकल्प चलते हैं तो इनमें विश्वासघात कुछ हो ही नहीं सकता।

1240
01:27:11,600 --> 01:27:15,760
हम पिछ दो तीन साल से राजीव दीक्षित जी को सुना और देश

1241
01:27:15,760 --> 01:27:19,760
के प्रति कुछ करने का भाव भी जगाता और बहुत सारे संगठनों से भी जुड़े और थोड़ा

1242
01:27:19,760 --> 01:27:23,760
बहुत मतलब थोड़ा बहुत कुछ किया हमने या फिर ना

1243
01:27:23,760 --> 01:27:28,000
किया वो बात है लेकिन इतने संगठन जुड़ने

1244
01:27:28,000 --> 01:27:32,560
के बाद सब में बस एक यही चीज थी कि आखिरी में जाके वहां पे विश्वास

1245
01:27:32,560 --> 01:27:36,560
होता है दिशाहीन हो जाते हैं क्योंकि गुरु ग्रंथ और गोविंद से विमुख होते हैं वो

1246
01:27:36,560 --> 01:27:40,640
सब सिद्धांत से विमुख होते हैं गुरु से विमुख होते हैं और यहां ये

1247
01:27:40,640 --> 01:27:45,280
जो प्रकल्प है यह गुरु और गोविंद के आधार पर चलता है। इसलिए

1248
01:27:45,280 --> 01:27:50,000
भगवत कृपा से यही है कि यह प्रकल्प कभी खत्म हो ही नहीं सकता।

1249
01:27:50,000 --> 01:27:50,500
इसका

1250
01:27:50,400 --> 01:27:54,400
कभी हो ही नहीं सकता। इसी सिद्धांत को आगे चलाते हुए भगवत

1251
01:27:54,400 --> 01:27:58,480
कृपा से हम जुड़े हैं और अब यह मन में निष्ठा है और भैया का कार्य

1252
01:27:58,480 --> 01:28:02,720
देख के मन में बहुत उत्साह रहता है कि अब परमार्थ में और आलस्य

1253
01:28:02,720 --> 01:28:06,720
में जीवन को नहीं बिताना है। अब देश के लिए और धर्म के लिए और गुरुदेव के इस

1254
01:28:06,720 --> 01:28:11,120
प्रकल्प को आगे बढ़ाने के लिए जीवन को समर्पित करना है और

1255
01:28:11,120 --> 01:28:15,360
ज्यादा से ज्यादा धर्म का प्रचार करना है। अपने को ज्यादा से ज्यादा

1256
01:28:15,360 --> 01:28:19,520
धर्म में कितना अपने लिए कुछ भी नहीं करना। सारा सब कुछ देश

1257
01:28:19,520 --> 01:28:24,560
के लिए और धर्म के लिए समर्पित करना है। क्योंकि अपना तो कुछ है ही नहीं ना।

1258
01:28:24,560 --> 01:28:28,720
तो इसी बात को लेते हुए सभी का धन्यवाद। जय

1259
01:28:28,720 --> 01:28:32,720
श्री राम। जय श्री राम। रमेश भैया जय श्री राम। बहुत ही

1260
01:28:32,720 --> 01:28:36,720
अच्छा बहुत सुंदर वक्तव्य है। थोड़ा सा बीच में नेटवर्क का समस्या हुआ लेकिन यदि कोई

1261
01:28:36,720 --> 01:28:40,720
सदस्य ना सुन पाए हो तो रमेश जी का वक्तव्यव यही था कि

1262
01:28:40,720 --> 01:28:44,800
उनको जुड़कर अच्छा लगा और आगे जो है वह कार्य भी

1263
01:28:44,800 --> 01:28:48,880
करेंगे करना भी चाहेंगे सभी को उन्होंने प्रोत्साहित भी किया कि सभी सदस्य

1264
01:28:48,880 --> 01:28:54,080
धर्म के कार्य करें धर्मार्थ कार्य करें और यहां पे मैं ये कहूंगा कि

1265
01:28:54,080 --> 01:28:58,080
रमेश तो अकाउंट का नाम है यश जी नाम है जो बोल रहे

1266
01:28:58,080 --> 01:29:02,240
थे यश सैनी जी उनका नाम है और पीछे से इनके भ्राता श्री है गौरव

1267
01:29:02,240 --> 01:29:05,440
भैया उनकी भी आवाज आ रही थी वो पीछे से प्रोत्साहन देते रहते हैं

1268
01:29:05,440 --> 01:29:09,520
और बताते रहते हैं कैसे क्या बोलना है तो वो भी बहुत अच्छा

1269
01:29:09,520 --> 01:29:13,520
लगता लगता है दोनों भाई लोग साथ मिलके कार्य करते हैं। बहुत उत्तम लगता है। तो बहुत

1270
01:29:13,520 --> 01:29:17,760
ही अच्छा। इसके बाद मैं आग्रह करूंगा अभिषेक अवस्थी जी से। अभिषेक

1271
01:29:17,760 --> 01:29:21,920
अवस्थी जी यहां पे उपलब्ध हो। आवाज आ रही हो तो अपना परिचय एक बार अवश्य दें। अभिषेक

1272
01:29:21,920 --> 01:29:27,920
भैया

1273
01:29:29,360 --> 01:29:33,520
जी सुना हमने रमेश जी। और एक बात और सुनी हमने आपकी

1274
01:29:33,520 --> 01:29:37,760
रमेश जी कि जहां गुरु गोविंद ग्रंथ

1275
01:29:37,760 --> 01:29:42,400
होता है वहां पर विश्वासघात नहीं होता है और विश्वासघात

1276
01:29:42,400 --> 01:29:46,560
होने का अर्थ है कि वहां पर कहीं ना कहीं गुरु ग्रंथ

1277
01:29:46,560 --> 01:29:50,720
अथवा गोविंद में से कोई ना कोई एक घटक जो है या तीनों ही घटक का

1278
01:29:50,720 --> 01:29:54,800
अभाव है। जैसे जहां रोशनी होती है वहां अंधेरा नहीं हो सकता। जहां अंधेरा

1279
01:29:54,800 --> 01:29:58,800
है तो उसका अर्थ है कि वहां रोशनी नहीं है। आपने ये बात बहुत अच्छी कही

1280
01:29:58,800 --> 01:30:02,880
है। इस बात से संबंधित बात ही आपने संभता शुरू में जो मैंने

1281
01:30:02,880 --> 01:30:06,960
कुछ बोला था कि गुरु ग्रंथ और गोविंद

1282
01:30:06,960 --> 01:30:10,960
जिस घर में होते हैं वहां पर जो चीजें होती है बहुत

1283
01:30:10,960 --> 01:30:15,440
ज्यादा अटकती नहीं है। क्लश नहीं होते हैं। ग्रह क्लेश नहीं होते हैं।

1284
01:30:15,440 --> 01:30:19,520
क्या हुआ भाई? ये मतभेद हो रहा है। ठीक है? भगवत गीता में क्या लिखा है देख लेते

1285
01:30:19,520 --> 01:30:20,560
हैं। तो

1286
01:30:20,560 --> 01:30:24,640
वो गुरु ग्रंथ और गोविंद जहां पर होते हैं वहां पर ये मतभेद नहीं आते। भाइयों

1287
01:30:24,640 --> 01:30:28,720
में पति पत्नी में माता पुत्री में पिता पुत्र

1288
01:30:28,720 --> 01:30:32,880
में जो ये क्लेश इत्यादि है इनका कारण है कि वहां पर शास्त्र

1289
01:30:32,880 --> 01:30:38,880
नहीं है। गुरु गोविंद ग्रंथ नहीं है। बिल्कुल सही बात कही आपने। जी

1290
01:30:40,480 --> 01:30:44,480
जी अभिषेक भैया से जी। माइक अपना

1291
01:30:44,480 --> 01:30:49,760
ऑफ कर कोई सदस्य जो इनका माइक

1292
01:30:49,760 --> 01:30:53,840
अभिषेक भैया से मैं आग्रह करूंगा आवाज जा रही हो तो अपना परिचय

1293
01:30:53,840 --> 01:30:59,840
कर दें। अभिषेक भैया

1294
01:31:03,200 --> 01:31:07,200
संभलता उनका आवाज नहीं जा रही।

1295
01:31:07,200 --> 01:31:11,280
तत्पश्चात यहां पर आदित्य चतुर्वेदी जी उपस्थित है।

1296
01:31:11,280 --> 01:31:15,680
मैं उनसे आग्रह करूंगा एक बार कि वे अपना परिचय दें। चतुर्वेदी

1297
01:31:15,680 --> 01:31:19,760
जी हमारे बहुत ही कर्मठ और पुराने सदस्य हैं। अनेक

1298
01:31:19,760 --> 01:31:24,480
कार्यों में सहयोग करवाते हैं और लेखन से लेकर के बहुत से

1299
01:31:24,480 --> 01:31:28,880
अन्य प्रकल्पों में हमारे इनका सहयोग हमें प्राप्त होता रहता है। आदित्य

1300
01:31:28,880 --> 01:31:32,960
चतुर्वेदी जी यदि आपको आवाज जा रही हो तो एक बार अपना परिचय सभी के सदस्यों को दे

1301
01:31:32,960 --> 01:31:36,960
दें और जो भी आपको कहना हो अपना अनुभव कुछ साझा करना हो

1302
01:31:36,960 --> 01:31:41,120
अवश्य यहां पे बोले। जी हर जी भैया सभी

1303
01:31:41,120 --> 01:31:45,440
को जय श्री राम। सभी जय श्री राम। जय श्री राम। नाम

1304
01:31:45,440 --> 01:31:49,680
जप की महिमा के बारे में तो पहले ही सब महानुभाव बता चुके

1305
01:31:49,680 --> 01:31:53,760
हैं। नाम जप की महिमा कितनी अनंत है और सुभाष भैया

1306
01:31:53,760 --> 01:31:57,840
ने भी बताया उसका वैज्ञानिक जो रूप है स्वरूप है वो भी बताया आशतोष

1307
01:31:57,840 --> 01:32:02,640
भैया बाकी अन्य महानुभावों ने भी नाम जाप की महिमा के बारे में सब बता दिया है

1308
01:32:02,640 --> 01:32:06,640
बाकी नाम जाप तो सभी जीवों का हित करने वाला है।

1309
01:32:06,640 --> 01:32:11,680
कल्याण करने वाला है। यह तो सबको पता ही है। इसके अतिरिक्त

1310
01:32:11,680 --> 01:32:15,680
जो हमारे गुरुदेव हैं वह आदेश करते हैं कि प्रत्येक

1311
01:32:15,680 --> 01:32:18,320
हिंदू को सवा घंटे भजन का बल आवश्यक

1312
01:32:18,320 --> 01:32:22,320
है। और इसके साथ साथ वह एक और चीज कहते हैं कि

1313
01:32:22,320 --> 01:32:26,320
उनको कई बार कहते हुए सुना गया है कि आगे भविष्य

1314
01:32:26,320 --> 01:32:30,320
में एक भीषण युद्ध की घाटी है जो हमारी प्रतीक्षा कर

1315
01:32:30,320 --> 01:32:34,480
रही है। तो उसके लिए हिंदुओं को तैयार होने के लिए भी वो जोर

1316
01:32:34,480 --> 01:32:38,480
देते हैं और सैन्य प्रशिक्षण के लिए तो वो कहते ही हैं। लेकिन उसके

1317
01:32:38,480 --> 01:32:42,880
अतिरिक्त उनका मानना है कि प्रत्येक हिंदू के पास आध्यात्मिक

1318
01:32:42,880 --> 01:32:47,280
बल आध्यात्मिक ऊर्जा अवश्य होनी चाहिए और आध्यात्मिक

1319
01:32:47,280 --> 01:32:52,400
बल की प्राप्ति के लिए सबसे अधिक जरूरी है नाम जाप

1320
01:32:52,400 --> 01:32:56,560
और उसी के लिए उन्होंने ऐसा आदेश किया है कि प्रत्येक हिंदू कम से कम

1321
01:32:56,560 --> 01:33:00,640
कम से कम एक दिन में सवा घंटे भजन करें। नाम का जाप करें

1322
01:33:00,640 --> 01:33:04,640
जिससे कि प्रत्येक हिंदू आध्यात्मिक ऊर्जा को आध्यात्मिक

1323
01:33:04,640 --> 01:33:08,640
बल को प्राप्त कर पाए। तो उसी कड़ी

1324
01:33:08,640 --> 01:33:12,800
में मेरा सभी से निवेदन है कि सभी नाम जाप

1325
01:33:12,800 --> 01:33:17,280
करते रह और अपना हित भी करें सामाजिक हित भी करें जो गुरुदेव

1326
01:33:17,280 --> 01:33:21,680
का प्रकल्प है राष्ट्रत्कर्ष अभियान है जो उनका स्वप्न है गौ हत्या

1327
01:33:21,680 --> 01:33:25,840
को बंद करने का गौ रक्षा का अखंड हिंदू राष्ट्र भारत का

1328
01:33:25,840 --> 01:33:29,840
जो स्वप्न है उसको पूर्ण करने के लिए हम सभी हिंदू भाई

1329
01:33:29,840 --> 01:33:33,600
एक साथ जब जुट जाएंगे और नाम जाप का इतना आध्यात्मिक

1330
01:33:33,600 --> 01:33:38,080
बल हमारे पास होगा तो गुरुदेव कहते हैं कि केवल 40 लाख हिंदू भी

1331
01:33:38,080 --> 01:33:42,320
नाम जाप करके और हिंदू

1332
01:33:42,320 --> 01:33:47,360
राष्ट्र के लिए गौ माता के लिए समर्पित कर देंगे तो ईश्वर उनकी अवश्य सुनेगा।

1333
01:33:47,360 --> 01:33:51,520
तो मेरा सभी से आग्रह है, विनती है कि सभी हिंदू

1334
01:33:51,520 --> 01:33:55,680
भाई एकजुट हो और आगे इस नाम जप को

1335
01:33:55,680 --> 01:33:59,840
अपने तक सीमित ना रखें बल्कि एक ऐसे अन्य

1336
01:33:59,840 --> 01:34:04,000
हिंदू को भी जोड़ने का प्रयास करें इस नामास्त्र से अभियान

1337
01:34:04,000 --> 01:34:08,160
से कि जैसे इस नामास्त्र के बारे में नाम जाप के बारे में या हमारे प्रकल्प

1338
01:34:08,160 --> 01:34:12,320
के बारे में या गुरुदेव के बारे में गुरु गोविंद ग्रंथ से जो दूर है जैसा अभी गुरु

1339
01:34:12,320 --> 01:34:16,640
गोविंद ग्रंथ की बात चल रही थी। ऐसे भी हिंदू भाई हैं जो दूर हैं उनको भी जोड़ने

1340
01:34:16,640 --> 01:34:20,720
का प्रयास करें ताकि अधिक से अधिक संख्या में हिंदू भाई हमारे एकत्रित हो सके

1341
01:34:20,720 --> 01:34:24,960
जागृत हो सके बस मेरी इतनी ही प्रार्थना है और सभी

1342
01:34:24,960 --> 01:34:29,040
को जय श्री राम जय श्री राम

1343
01:34:29,040 --> 01:34:33,360
बहुत सुंदर व्याख्यान दिया आदित्य जी हमारे प्रिय अनुज

1344
01:34:33,360 --> 01:34:37,520
हैं और यद्यपि कई बार इनकी जो दिल

1345
01:34:37,520 --> 01:34:43,120
हृदय को छू लेने वाली जो इनकी अपनी एक आपबीती है

1346
01:34:43,120 --> 01:34:47,280
अचुत नमः अनताय नमः गोविंदाय नमः के जप के द्वारा ही एक

1347
01:34:47,280 --> 01:34:50,560
बहुत बड़ी लालाज

1348
01:34:50,560 --> 01:34:54,800
जो इनको बीमारी थी उससे वापस लौटकर हमारे बीच में आज हमें प्राप्त

1349
01:34:54,800 --> 01:34:59,280
है और ये कहीं ना कहीं गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा ही है। तो

1350
01:34:59,280 --> 01:35:03,280
यह भी एक जो जोरदार तमाचा है जो

1351
01:35:03,280 --> 01:35:07,360
हमारे सनातन सिद्धांतों के द्वारा प्राप्त होने

1352
01:35:07,360 --> 01:35:11,760
वाले जो भगवत स्वरूप है भगवान नाम है उनका जो मजाक उड़ाते

1353
01:35:11,760 --> 01:35:15,840
हैं तो आप कभी वृतांत सुनेंगे अगर आदित्य

1354
01:35:15,840 --> 01:35:20,000
जी का तो आपकी ऐसे लोगों को उत्तर देने के लिए बहुत

1355
01:35:20,000 --> 01:35:26,000
सारी सामग्री आपको अवश्य प्राप्त हो जाएगी। तो

1356
01:35:26,240 --> 01:35:30,240
अत्यंत प्रेरणादाई इनकी जो कहानी है वो

1357
01:35:30,240 --> 01:35:34,320
पिछले सत्रों में हम सुन सुन भी चुके हैं तो आप

1358
01:35:34,320 --> 01:35:39,520
लोग उससे प्रेरणा ले सकते हैं। बहुत अच्छा व्याख्यान

1359
01:35:39,520 --> 01:35:43,760
धन्यवाद। गुरुदेव का ही आशीर्वाद है। ईश्वर की ही कृपा है।

1360
01:35:43,760 --> 01:35:49,520
हम सबके ऊपर मेरे ऊपर जो हम यहां उपस्थित हैं आज

1361
01:35:49,520 --> 01:35:55,520
बहुत-बत धन्यवाद। जय श्री राम।

1362
01:36:03,680 --> 01:36:09,680
प्रथम जी

1363
01:36:10,480 --> 01:36:15,200
आवाज आ रही है आपको प्रथम जी

1364
01:36:15,200 --> 01:36:20,080
प्रथम जी आपकी आवाज नहीं आ रही हमारे पास

1365
01:36:20,080 --> 01:36:25,200
आवाज नहीं आ रही है आपकी

1366
01:36:25,200 --> 01:36:31,200
आपका म्यूट है शायद।

1367
01:36:38,160 --> 01:36:42,320
यहां से म्यूट हो गया क्या? नहीं नहीं वो शायद डिस्कनेक्ट हो गए हैं क्या? आवाज

1368
01:36:42,320 --> 01:36:48,320
नहीं आ रही है उनकी। है तो सही। म्यूट है। म्यूट है। म्यूट

1369
01:36:48,400 --> 01:36:53,200
अब आ रही है भैया। हां अब आ रही है। अब आ रही है। अरे वो कुछ नहीं

1370
01:36:53,200 --> 01:36:57,200
यहां पे गलती से कॉल लग गया था लेकिन उसमें डिस्कनेक्ट भी नहीं हुआ और

1371
01:36:57,200 --> 01:37:01,200
वो भी बीच में कुछ अटक गया। कुछ ग्लच हो गया उसका टेक्निकल। तो मैं

1372
01:37:01,200 --> 01:37:05,280
वही कह रहा था कि आदित्य भैया हमारे साथ आज जुड़े और उन्होंने इतना

1373
01:37:05,280 --> 01:37:09,680
सुंदर वक्तव्य दिया। बहुत ही अच्छा लगा। आदित्य भैया का मैंने देखा है अधिकतर

1374
01:37:09,680 --> 01:37:13,680
कोई भी मीटिंग हो कोई कार्य हो तो छोड़ते नहीं है पूर्ण करने का प्रयास करते

1375
01:37:13,680 --> 01:37:17,760
हैं जुड़ने का उसमें प्रयास करते हैं उसमें जहां भी बुलाया जाता है जिस भी आयोजन में अवश्य

1376
01:37:17,760 --> 01:37:22,000
आते हैं तो बहुत ही अच्छा लगता है ये बात ऐसे ही हमारे कर्मठ सदस्य जिनके

1377
01:37:22,000 --> 01:37:25,760
द्वारा इतना बड़ा हम प्रकल्प संचालित कर पा रहे हैं आज चला पा रहे हैं आज

1378
01:37:25,760 --> 01:37:29,760
और ये सब हमको भगवत कृपा से सुलभ है तब मुझे तो यही प्रतीत होता

1379
01:37:29,760 --> 01:37:33,760
है कि सब भगवत कृपा से ही सुलभ है यहां पे और हमारे कोई अन्य सदस्य यहां पे

1380
01:37:33,760 --> 01:37:37,920
उपस्थित हो तो क्योंकि मैंने तो सबके नाम अभी यहां पे चेक किए ऐसा मुझे

1381
01:37:37,920 --> 01:37:42,080
नहीं ध्यान आ रहा कि कोई और कई है जो विलंब के कारण लेफ्ट भी

1382
01:37:42,080 --> 01:37:46,240
हुए हैं। तो मतलब हम यही प्रार्थना

1383
01:37:46,240 --> 01:37:50,560
करते हैं कभी ना कभी उनका जो है वक्तव्य इत्यादि दृष्टिकोण में प्राप्त हो जाएगा।

1384
01:37:50,560 --> 01:37:54,800
तो अभी आयुष जी आप कुछ कहे जिससे कि प्रेरणा

1385
01:37:54,800 --> 01:38:00,400
मिले। आयुष जी

1386
01:38:00,400 --> 01:38:05,200
जय श्री राम भैया नारायण।

1387
01:38:05,200 --> 01:38:10,080
भैया मेरी वॉइस आ रही है क्या? जी आ रही है।

1388
01:38:10,080 --> 01:38:14,080
भैया मैं ज्यादा तो कुछ नहीं कहूंगा। मैं ज्यादा तो कुछ नहीं

1389
01:38:14,080 --> 01:38:18,080
कहूंगा। मैं बस ये कहूंगा मैं ज्यादा तो कुछ नहीं

1390
01:38:18,080 --> 01:38:22,560
कहूंगा। मैं बस ये कहूंगा कि आप के

1391
01:38:22,560 --> 01:38:26,560
थ्रू मतलब आपके चैनल के थ्रू और पूरी शंकराचार्य जी

1392
01:38:26,560 --> 01:38:30,720
के थ्रू मतलब जब थोड़ा बहुत जाना है कि सिद्धांत क्या-क्या होते

1393
01:38:30,720 --> 01:38:34,880
हैं उससे जीवन में बहुत चेंजेस आए और पिछले भी

1394
01:38:34,880 --> 01:38:39,360
सत्र में मैंने आपको बताया था कि मैं

1395
01:38:39,360 --> 01:38:43,440
पूर्णत तो पालन नहीं कर पाता हूं और मुख्यत तो

1396
01:38:43,440 --> 01:38:47,760
मैं अभी मतलब अभी मैं पतित हूं तो

1397
01:38:47,760 --> 01:38:52,320
उस वजह से कोशिश यह करता हूं कि आपको ज्यादा से ज्यादा स्लू। शंकराचार्य

1398
01:38:52,320 --> 01:38:56,560
भगवान को ज्यादा से ज्यादा स्लू और नाम जप इत्यादि के

1399
01:38:56,560 --> 01:39:00,960
मतलब प्रभाव से भगवत कृपा से अगर हो सके तो

1400
01:39:00,960 --> 01:39:05,280
मतलब हमें भी सद्गति मिले और मतलब गुरुदेव

1401
01:39:05,280 --> 01:39:10,000
का आशीर्वाद मिले। तो मतलब उसके बाद जो है अच्छे से

1402
01:39:10,000 --> 01:39:14,000
संध्या इत्यादि हम भी कर सके। तो अभी तो भैया ये है

1403
01:39:14,000 --> 01:39:16,160
थोड़ा

1404
01:39:16,160 --> 01:39:20,400
बहुत आपकी लाइफ में कुछ चेंजेस आपने बताए थे यदि संभव

1405
01:39:20,400 --> 01:39:24,400
हो आपके पास समय हो तो वो भी थोड़ा सा क्योंकि आज काफी लोग हैं जो

1406
01:39:24,400 --> 01:39:28,640
पहली बार जुड़ रहे हैं तो जी भैया मैंने जैसे

1407
01:39:28,640 --> 01:39:32,800
जब आपके साथ लाइव पे भी चर्चा हुई थी तो मैंने बताया था आपको

1408
01:39:32,800 --> 01:39:38,080
कि मैं इससे पहले इस इत्यादि से जुड़ा हुआ था और

1409
01:39:38,080 --> 01:39:42,080
उसके बाद जैसे नाम जब वहां पे भी मैं करता तो मुझे

1410
01:39:42,080 --> 01:39:46,240
कोई दिक्कत नहीं होती थी 16 माला जपने में।

1411
01:39:46,240 --> 01:39:50,320
तो जब से जैसे आपके थ्रू सिद्धांत को जाना

1412
01:39:50,320 --> 01:39:54,640
और मतलब पूरी शंकराचार्य जी के वक्तव्य

1413
01:39:54,640 --> 01:39:58,880
को सुना तो ये पता चला कि जैसे

1414
01:39:58,880 --> 01:40:03,040
मतलब अंधों की तरह एक तरह से बस भेड़ चाल में हम जप

1415
01:40:03,040 --> 01:40:07,200
रहे थे। आपकी आवाज बीच-बीच में थोड़ी सी गायब हो रही है।

1416
01:40:07,200 --> 01:40:11,200
जी जी कुछ आवाज आपका धीमी हो जाती है फिर वैसा कुछ नेटवर्क

1417
01:40:11,200 --> 01:40:15,200
का जी भैया भैया वो वाईफाई

1418
01:40:15,200 --> 01:40:20,560
दिक्कत है या तो कोई हेडफोन वगेरा लगाया हो तो उसको एक बार हटा के देख लीजिए

1419
01:40:20,560 --> 01:40:23,420
एक मिनट भैया

1420
01:40:23,420 --> 01:40:28,400
[संगीत]

1421
01:40:28,400 --> 01:40:33,600
जी भैया अब आ रही है वॉइस बिल्कुल क्लियर है जी

1422
01:40:33,600 --> 01:40:38,000
भैया यही कह रहा था कि जैसे उस समय मैं इस से जुड़ा था

1423
01:40:38,000 --> 01:40:42,000
तो इतना सिद्धांत के बारे में मुझे ज्ञान नहीं था और इंजीनियरिंग

1424
01:40:42,000 --> 01:40:46,480
कॉलेज में रहने के बाद यह था कि कोई गाइडेंस

1425
01:40:46,480 --> 01:40:50,560
भी नहीं हुआ मुझे कि कैसे-कैसे धर्म का पालन करना है। पर

1426
01:40:50,560 --> 01:40:54,640
जोश तो था दिल में कि हां कुछ सही रास्ते पर चलना

1427
01:40:54,640 --> 01:40:58,800
है। तो उसके बाद

1428
01:40:58,800 --> 01:41:02,960
ये था कि नाम जप इत्यादि तो मैं करता था बट जैसे सिद्धांत की जहां

1429
01:41:02,960 --> 01:41:08,720
बात आती थी वहां पे मेरा नेल बट्टे सन्नाटा हो जाता था

1430
01:41:08,720 --> 01:41:13,040
तो तो पर आपकी सबसे पहली

1431
01:41:13,040 --> 01:41:17,200
वीडियो ही मैंने देखी कि जब आप इस लखनऊ

1432
01:41:17,200 --> 01:41:21,360
के शायद दो चार प्रभु जी थे तो उनसे आप चर्चा कर रहे

1433
01:41:21,360 --> 01:41:25,920
थे भगवत गीता के ऊपर तो

1434
01:41:25,920 --> 01:41:30,080
उसको सुना और उससे पहले

1435
01:41:30,080 --> 01:41:32,240
जैसे

1436
01:41:32,240 --> 01:41:36,720
पूरी शंकराचार्य जी की एक वीडियो आई थी मेरे सामने तो

1437
01:41:36,720 --> 01:41:41,280
उसमें मुझे ज्ञात नहीं था तो मैंने उन्हें थोड़ा ऊटपटांग

1438
01:41:41,280 --> 01:41:43,760
शब्दों से मतलब बोल दिया तो

1439
01:41:43,760 --> 01:41:48,720
उसको लेकर के अभी भी मैं बहुत ज्यादा ग्लानी महसूस करता हूं

1440
01:41:48,720 --> 01:41:52,880
और जब से ही मैं मतलब धर्म का पालन कर रहा हूं तो उससे

1441
01:41:52,880 --> 01:41:56,960
यह है कि थोड़ी मतलब शांति एक तरह

1442
01:41:56,960 --> 01:42:01,280
से बहुत ज्यादा महसूस होती है क्योंकि अथक प्रयास

1443
01:42:01,280 --> 01:42:05,600
करने के बावजूद भी फेलियर्स बहुत ज्यादा हाथ लग रहे थे।

1444
01:42:05,600 --> 01:42:09,680
तो मुझे यह लगा कि यह सब जो धर्म कर्म

1445
01:42:09,680 --> 01:42:13,920
की चीजें हैं ये सब बेकार है। तो मैं

1446
01:42:13,920 --> 01:42:17,920
थोड़ा डिप्रेशन टाइप में चला गया था। और

1447
01:42:17,920 --> 01:42:22,640
जब से जैसे थोड़ा बहुत नाम जप किया और सिद्धांतों को जाना

1448
01:42:22,640 --> 01:42:27,040
तो मतलब मटेरियलिस्टिकली भी यह हुआ कि

1449
01:42:27,040 --> 01:42:31,200
मुझे बिना किसी मतलब जैसे आप कहते हैं कि स्वत ही सारी

1450
01:42:31,200 --> 01:42:35,600
चीजें पूर्ण होने लगती हैं। तो बिना किसी ज्यादा प्रयास के ही

1451
01:42:35,600 --> 01:42:39,760
वो सारी चीजें धीरे धीरे धीरे-धीरे मुझे मिलती चली गई और आज के डेट

1452
01:42:39,760 --> 01:42:44,000
में मैं एक मल्टीीनेशनल कंपनी में हैदराबाद में जॉब करता हूं भैया।

1453
01:42:44,000 --> 01:42:48,080
बहुत जी तो जब

1454
01:42:48,080 --> 01:42:52,160
जैसे आपसे जिस समय मेरी बात हुई थी तो आपको मैंने

1455
01:42:52,160 --> 01:42:56,240
बताया भी था कि उस लाइव वाले दिन ही मेरा अपॉइंटमेंट लेटर मेरे पास

1456
01:42:56,240 --> 01:42:59,040
आया था। तो वो

1457
01:42:59,040 --> 01:43:03,200
वो दिन एक एक तरह से मेरे लिए बहुत मतलब महत्वपूर्ण दिन

1458
01:43:03,200 --> 01:43:07,360
बन गया मेरे जीवन का। जी जी भैया

1459
01:43:07,360 --> 01:43:12,080
बस यहीं पे विराम देना चाहूंगा। बिल्कुल बहुत ही

1460
01:43:12,080 --> 01:43:16,480
बहुत सुंदर आयुष भैया आपने दिया बहुत अच्छा और इसमें

1461
01:43:16,480 --> 01:43:20,560
यही बात है कि देखिए कितनी बड़ी गुरुदेव की कृपा ऐसे रामचरितमानस

1462
01:43:20,560 --> 01:43:24,720
में कहा गया है कि संत का स्वभाव यही है कि कोई उसका बुरा

1463
01:43:24,720 --> 01:43:29,280
भी चाहे तो वो उसका अच्छा ही चाहते हैं। तो आप देखिए कैसे कहीं आपने

1464
01:43:29,280 --> 01:43:33,360
भूलवश कभी आपने गुरुदेव के प्रति कुछ ऐसे शब्द जाहिर कर दिए तो आज

1465
01:43:33,360 --> 01:43:37,520
आप देखिए उन्हीं की शरण में आ गए आप वो जो है वह

1466
01:43:37,520 --> 01:43:41,680
आपका ही भला चाहते हैं। आपका भला जैसे भी होगा वो उस साधन पर ही आपको ला

1467
01:43:41,680 --> 01:43:45,760
के छोड़ जाएंगे। है नहीं? तो बात ऐसी है कि समस्याएं

1468
01:43:45,760 --> 01:43:50,000
सभी के जीवन में आती हैं। बहुत कुछ होता है तो रोज ही होता है। तो

1469
01:43:50,000 --> 01:43:54,240
ऐसा हम समझे कि यदि इसमें भगवान का दोष है तो ये तो हमारी

1470
01:43:54,240 --> 01:43:58,240
जो है संकीर्ण विचारधारा है। हमें ये समझना चाहिए कि

1471
01:43:58,240 --> 01:44:02,400
हो सकता है ये हमारी परीक्षा ली जा रही हो और इस

1472
01:44:02,400 --> 01:44:06,960
परीक्षा में हम क्या खरे उतर पा रहे हैं कि नहीं। कि एक बार ये विचार हम मन में करेंगे

1473
01:44:06,960 --> 01:44:11,440
तो शायद हम आगे बढ़ने की शक्ति हमको मिलेगी और

1474
01:44:11,440 --> 01:44:14,240
हम आगे बढ़ेंगे अवश्य बढ़ेंगे। नाम जप

1475
01:44:14,240 --> 01:44:18,560
के माध्यम से आप सभी यहां जुड़े हुए हैं। इतने अच्छे-अच्छे

1476
01:44:18,560 --> 01:44:22,960
आप सभी लोग अपने प्रसंग यहां पे बता रहे हैं। ये कितना अच्छा प्रकल्प

1477
01:44:22,960 --> 01:44:26,960
यहां पे चल रहा है। आप समझिए इसको। तो इसी में हम आगे बढ़ते हुए आप

1478
01:44:26,960 --> 01:44:31,040
सभी से हम यहां कहेंगे कि देखिए यहां पे सदस्यों की संख्या कम हो

1479
01:44:31,040 --> 01:44:35,280
गई है। ये इसलिए कम हो जाती है कि थोड़ा सा हम परिचय मांग लेते हैं तो

1480
01:44:35,280 --> 01:44:39,280
लोग कुछ हड़बड़ा जाते हैं। मैं चाहूंगा ऐसा ना हो। अपना अपना परिचय अवश्य

1481
01:44:39,280 --> 01:44:43,360
दें। वीडियो ऑन करने की आवश्यकता नहीं है। कोई बहुत विशेष यहां पे

1482
01:44:43,360 --> 01:44:47,600
कुछ ऐसा नहीं कहा जा रहा है। अपना एक छोटा सा परिचय केवल दे दे। उतना

1483
01:44:47,600 --> 01:44:51,840
जो है परिचय में घर द्वार का पता नहीं देना जिससे रामपाली मां डंडा

1484
01:44:51,840 --> 01:44:55,920
ले। रामपाली अगर किसी को इस प्रकार

1485
01:44:55,920 --> 01:45:00,160
का वो हो उसके लिए उसके लिए अंडर कवर एजेंट है

1486
01:45:00,160 --> 01:45:04,160
अंडर कवर एजेंट है हमारे देखिए ये अनिरुद्ध भैया इस समय

1487
01:45:04,160 --> 01:45:08,160
परिचय नहीं दे रहे हैं इनके पास भी कुछ समस्या है समस्या है तो कोई

1488
01:45:08,160 --> 01:45:12,160
बात नहीं आप लोग सभी लोग संदेश में अवश्य सूचित कर दें इन कॉल मैसेजेस की सुविधा हमें प्राप्त

1489
01:45:12,160 --> 01:45:16,400
है वहां पर बता दें कि कोई समस्या है जिस कारण से आप नहीं बोल पाएंगे नहीं तो

1490
01:45:16,400 --> 01:45:20,560
मैं अभी चाहूंगा कि यहां पे जितने भी सदस्य उपस्थित हैं सभी अपना अपना एक संक्षिप्त

1491
01:45:20,560 --> 01:45:24,560
सा परिचय देने का प्रयास करें थोड़ा हमें लगता है समय भी ज्यादा हो हो गया। अभी 11:00 बज

1492
01:45:24,560 --> 01:45:29,360
रहा है तो सभी को कहीं ना कहीं जाना होगा और ये सब है। बिल्कुल बिलकुल इसको

1493
01:45:29,360 --> 01:45:33,440
आज जो रह जाएंगे और अगले इस सत्र से और अगले सत्र

1494
01:45:33,440 --> 01:45:37,440
के बीच में जो नए नवीन सदस्य जुड़ेंगे तो उनको लेकर के

1495
01:45:37,440 --> 01:45:41,600
अगले सत्र में भी उनका प्राप्त किया जा सकेगा और संभवत जो आज किसी

1496
01:45:41,600 --> 01:45:45,680
कारणवश नहीं बोल पाए हैं नहीं बोल पाएंगे अथवा

1497
01:45:45,680 --> 01:45:50,160
विलंब के कारण या किसी समस्या के कारण वो पहले हट गए तो

1498
01:45:50,160 --> 01:45:54,720
उन वो भी जब आज के इस डिस्कशन को देखेंगे सत्र को देखेंगे

1499
01:45:54,720 --> 01:45:58,800
तो संभवत अगली बार उनके अंदर बोल बोलने का साहस या अपनी चीजें

1500
01:45:58,800 --> 01:46:04,080
रखने का रखने की प्रेरणा इत्यादि ये सब

1501
01:46:04,080 --> 01:46:06,720
जी

1502
01:46:06,720 --> 01:46:10,880
तो यहां पे हम आरंभ करेंगे व्सल भट्ट

1503
01:46:10,880 --> 01:46:15,040
जी को बोलने देते हैं अच्छा जी को बोलने देते हैं बोलिए व्सल भैया

1504
01:46:15,040 --> 01:46:19,040
बोलिए जय श्री राम शिवश भैया जय श्री राम प्रद भैया

1505
01:46:19,040 --> 01:46:23,120
जय श्री राम जय श्री राम भैया आपको अगर याद हो तो पिछले

1506
01:46:23,120 --> 01:46:27,200
सत्र में मैंने आपको बताया था कि मैं एक मतलब मेरा जो एक्सपीर

1507
01:46:27,200 --> 01:46:32,240
अनुभव है वो मतलब आपके साथ शेयर करना चाहता हूं।

1508
01:46:32,240 --> 01:46:36,800
आप कर लीजिए सर मतलब उसके रिलेटेड ही

1509
01:46:36,800 --> 01:46:40,800
मैं भी मतलब मैंने आपको पिछली बार बताया था कि ये

1510
01:46:40,800 --> 01:46:46,160
मतलब जो राजनीतिक दल लोग उसमें ज्यादा बिलीव करता था जो हमारे

1511
01:46:46,160 --> 01:46:50,240
प्रामाणिक आचार्य गण है उनप तो मतलब मैंने वहां पर

1512
01:46:50,240 --> 01:46:54,240
कदम ही नहीं रखा था वो उस बेस पे तो फिर मतलब

1513
01:46:54,240 --> 01:46:58,400
जब जब आगे आगे बड़ा मेरा जो स्टार्ट हुआ था तब मैं प्रेमानंद

1514
01:46:58,400 --> 01:47:02,560
जी महाराज वृंदावन एक प्रसिद्ध संत है। उनके वक्तव्य में बहुत

1515
01:47:02,560 --> 01:47:06,560
सुनता था। तब अब अगर बोले कि भक्ति

1516
01:47:06,560 --> 01:47:10,960
की शुरुआत हुई तो गलत नहीं होगा। और करते करते

1517
01:47:10,960 --> 01:47:15,040
मैं पूरी शंकराचार्य जी तक मतलब पहुंचा

1518
01:47:15,040 --> 01:47:19,360
हूं और उनसे ही मतलब उनसे ही तब मतलब प्रेरणा

1519
01:47:19,360 --> 01:47:23,520
मिलती और उनके कुछ बात होती है जो समझ

1520
01:47:23,520 --> 01:47:27,680
में नहीं आती। लेकिन शिवंत भैया की जो भी मतलब वीडियोस देखते

1521
01:47:27,680 --> 01:47:31,680
हैं तो एक जोश आ जाता है कि भाई नहीं

1522
01:47:31,680 --> 01:47:35,680
वो हो जाएगा हो जाएगा नीचे नहीं पीछे नहीं हटना है पीछे नहीं

1523
01:47:35,680 --> 01:47:40,080
हटना है शिव भैया आपको शायद याद होगा कि मतलब ऐसी परिस्थिति

1524
01:47:40,080 --> 01:47:44,160
बहुत आई है कि मैंने मतलब कॉल किया है आपको कहीं-कहीं बात जैसे आप

1525
01:47:44,160 --> 01:47:48,160
भी इस व्यूअर्स से अपने कार्य में मेरा मन भी बुरा वो विकसित

1526
01:47:48,160 --> 01:47:52,240
हो गया था तो भी सबको मैं ये बता दूं कि मतलब भैया ने

1527
01:47:52,240 --> 01:47:56,560
मेरी बहुत मदद से बहुत ही बहुत अगर भैया नहीं होते ना

1528
01:47:56,560 --> 01:48:00,640
तभी आज कोई ऐसा स्त्रिय कार्य मैंने कर दिया होता कि मैं

1529
01:48:00,640 --> 01:48:04,640
सबके सामने यह डिस्क्लोज कर भैया ने अपना समय निकाल

1530
01:48:04,640 --> 01:48:09,040
कर मेरी मदद की और मेरे मतलब मन को राह दिखाई

1531
01:48:09,040 --> 01:48:13,200
और एक अनुभव दूसरा ये था भैया कि एक मेरा दोस्त

1532
01:48:13,200 --> 01:48:17,440
है और वो जो दोस्त है ना भैया वो मेरा मतलब वो ये ऑनलाइन

1533
01:48:17,440 --> 01:48:21,520
गेमिंग और उससे बहुत जुड़ा हूं तो उसके कोई उसके उसके

1534
01:48:21,520 --> 01:48:26,000
पापा का ही मतलब एक गेम टोन चलता था। अभी तो नहीं चलता है। और

1535
01:48:26,000 --> 01:48:30,000
वो व्यक्ति मतलब बहुत ज्यादा बोले ना कि माया में रथ रहता है।

1536
01:48:30,000 --> 01:48:34,080
वो वो टाइप का था। मतलब तब मतलब उनसे हम ये बात एक्सपेक्ट ही

1537
01:48:34,080 --> 01:48:34,580
नहीं कर

1538
01:48:34,400 --> 01:48:38,560
सके कि वो भगवान की भक्ति करें या सुने। तो मतलब

1539
01:48:38,560 --> 01:48:42,640
अभी तो क्या है कि वो पढ़ाई कर रहे हैं और वो सब तो उसकी भी

1540
01:48:42,640 --> 01:48:46,640
मतलब मेरे जैसी मतलब वो थी कि उन उसने भी श्री

1541
01:48:46,640 --> 01:48:50,640
प्रेमानंद जी महाराज के वक्तव्य सुनकर ही उनका ये उसका ये सब शुरू हुआ

1542
01:48:50,640 --> 01:48:54,800
था। तो एक मतलब मैं तो बहुत टाइम से जुड़ा

1543
01:48:54,800 --> 01:48:58,880
आान से वो तो अभी थोड़ा ही टाइम हुआ उसको आान आहान से जुड़े

1544
01:48:58,880 --> 01:49:02,880
हुए तो मतलब मैंने है ना मैं अक्सर स्टोरी में

1545
01:49:02,880 --> 01:49:06,880
शायद आपको याद होगा कि मैं आपको मेंशन करता हूं पूरी शंकराचार्य जी के

1546
01:49:06,880 --> 01:49:10,880
कोई कोट होते हैं या कुछ होते हैं उनके फोटो या कुछ उनके मतलब

1547
01:49:10,880 --> 01:49:14,960
वक्तव्य होते तो एक दिन उसने अचानक सामने से बोला कि

1548
01:49:14,960 --> 01:49:18,960
भाई ये कौन है और मतलब उसने शंकराचार्य जी का परिचय

1549
01:49:18,960 --> 01:49:23,040
मुझसे मांगा और धीरे धीरे-धीरे बात होती रही होती रही। फिर मैंने उसको

1550
01:49:23,040 --> 01:49:27,200
बताया कि ये ये है मतलब भैया मतलब आप भगवान की ये

1551
01:49:27,200 --> 01:49:31,680
देखिए कि जो व्यक्ति मतलब इसको हम सोच नहीं सकते कि ये व्यक्ति भी

1552
01:49:31,680 --> 01:49:35,680
संत के चरण का आश्रय लेगा। शंकराचार्य जी के चरण का आश्रय लेगा

1553
01:49:35,680 --> 01:49:39,920
वो व्यक्ति भी मतलब ये मतलब मतलब उनका आश्रय

1554
01:49:39,920 --> 01:49:44,240
ले रहा है। अभी तो मतलब उसके घर में तो जो संप्रदाय है वल्लभाचार्य

1555
01:49:44,240 --> 01:49:48,480
जी महाभारत का उसका मतलब फॉलो होता है। लेकिन उसको भी उसमें

1556
01:49:48,480 --> 01:49:49,680
ही जाना है वल्लभ संप्रदाय

1557
01:49:49,680 --> 01:49:53,680
में। लेकिन ये मतलब जो क्लेरिटी उसको चाहिए थी

1558
01:49:53,680 --> 01:49:57,840
हमारे धर्म के बारे में वो उसको शंकराचार्य जी से बहुत अच्छी

1559
01:49:57,840 --> 01:50:01,840
तरह से प्राप्त और आपके वीडियो से भी बहुत अच्छी तरह से

1560
01:50:01,840 --> 01:50:06,000
हम अक्सर जब भी भैया मैं आपको बता दूं कि हमारी बात होती है ना तो

1561
01:50:06,000 --> 01:50:10,480
उसमें एक तो कोई टॉपिक ऐसा निकलता ही है हम पूरी

1562
01:50:10,480 --> 01:50:14,560
जी की कोई बात का मतलब डिस्कशन कर रहे हैं या कोई

1563
01:50:14,560 --> 01:50:18,560
एक बात तो आपकी होती भैया की बात हो हमारे में

1564
01:50:18,560 --> 01:50:22,560
क्या आपके कोई बात को लेके हम टॉपिक पे बात करते हैं। जो

1565
01:50:22,560 --> 01:50:26,960
आपका ये केस चल रहा है रंजना दीदी वाला और हरिशंकर जैन

1566
01:50:26,960 --> 01:50:31,200
जी वाला मतलब उसमें उसकी भी बात मैंने उससे की अभी रिसेंटली

1567
01:50:31,200 --> 01:50:35,440
कल या परसों ही बात की थी उसके बारे में तो मतलब भैया आपने

1568
01:50:35,440 --> 01:50:39,920
जो कार्य किया है ना मुझे लगता है कि मेरे मेरी नजर में मतलब

1569
01:50:39,920 --> 01:50:43,920
मैं बोल नहीं सकता हूं मतलब हृदय में बहुत है वो है

1570
01:50:43,920 --> 01:50:48,000
कि मतलब क्या बोलूं समझ रहे है ना भैया आप

1571
01:50:48,000 --> 01:50:52,160
मतलब एक भाव बहुत वो है कि मैं समझ रहा हूं मगर

1572
01:50:52,160 --> 01:50:58,080
करने वाले हम नहीं है। पीछे हैं गुरु गोविंद ग्रंथ।

1573
01:50:58,080 --> 01:51:02,240
जी जी भैया लेकिन यही सब करवा

1574
01:51:02,240 --> 01:51:05,200
रहे हैं

1575
01:51:05,200 --> 01:51:09,680
और भैया मतलब अभी क्या हुआ कि अक्सर अभी

1576
01:51:09,680 --> 01:51:13,680
एक मैं कॉलेज में पढ़ पढ़ता हूं अभी और कॉलेज में अक्सर

1577
01:51:13,680 --> 01:51:17,680
ऐसे मतलब जो लोग होते हैं ना भैया वो जो ये कार्ल मार्क्स

1578
01:51:17,680 --> 01:51:21,840
हो गया और अन्य जो मतलब वेस्टर्न फिलोस वेस्टर्न थिंकर्स

1579
01:51:21,840 --> 01:51:26,160
हो गए उसको ज्यादा मतलब डीप में पढ़ा होता है कुछ लोगों ने और वो

1580
01:51:26,160 --> 01:51:30,560
लोग ज्यादातर एथिस्ट नास्तिक ही होते हैं। तो मतलब ऐसे

1581
01:51:30,560 --> 01:51:34,560
लोग भी बहुत सारे भटके कि ये मतलब सेुलर लोग

1582
01:51:34,560 --> 01:51:38,640
भी और अलग-अलग लोग ऐसे भटकते थे मुझे। तब मेरे पास कोई आंसर

1583
01:51:38,640 --> 01:51:42,640
नहीं था उनके पास तो हृदय में एक पीड़ा सी होती थी कि भाई क्या करें? क्या

1584
01:51:42,640 --> 01:51:46,880
करें? फिर मैंने शायद आपको कॉल करके ये बात पूछी

1585
01:51:46,880 --> 01:51:50,960
थी और आपने बताया था कि भजन बल बढ़ाओ। सवा घंटा का भजन करो।

1586
01:51:50,960 --> 01:51:54,960
तब मैंने सवा घंटे का भजन प्रारंभ किया

1587
01:51:54,960 --> 01:51:58,960
और तभी से भैया मेरा अनुभव मैं बता रहा हूं कि मतलब जो जो लोग

1588
01:51:58,960 --> 01:52:03,040
जो खंडनार्थ और वो सब होता है ना अब ऐसे लोग आजू-बाजू भी नहीं

1589
01:52:03,040 --> 01:52:08,560
मतलब फरकते मेरे सब मतलब वो चल रहे हैं दूर मतलब

1590
01:52:08,560 --> 01:52:12,720
चलिए बहुत अच्छा बहुत अच्छा उत्तम जी प्रथम जी आप आगे बहुत बढ़िया

1591
01:52:12,720 --> 01:52:16,720
जय श्री राम भैया

1592
01:52:16,720 --> 01:52:21,040
जी बहुत ही उत्तम बहुत सुंदर उत्तर दिया बहुत ही अच्छा आपने वक्तव्य

1593
01:52:21,040 --> 01:52:25,040
दिया। अब आगे बढ़ते हुए मैं यहां पे आशतोष शर्मा जी उपस्थित हैं।

1594
01:52:25,040 --> 01:52:29,040
मैं उनसे आग्रह करूंगा कि वे कृपया यहां पे अपना वक्तव्य

1595
01:52:29,040 --> 01:52:34,400
प्रदान करें। अपना परिचय प्रदान करें। आशतोष शर्मा जी

1596
01:52:34,400 --> 01:52:38,560
नमस्कार मैं शर्मा

1597
01:52:38,560 --> 01:52:42,880
छत्तीसगढ़ से बोल रहा हूं। आशतोष जी अगर आप

1598
01:52:42,880 --> 01:52:47,280
हेडफोन से बात कर रहे हो तो हेडफोन हटा के एक बार ट्राई करें।

1599
01:52:47,280 --> 01:52:53,280
आपका आपकी आवाज बहुत कम आ रही है।

1600
01:52:55,120 --> 01:52:58,880
हो गई है।

1601
01:52:58,880 --> 01:53:01,600
हेलो

1602
01:53:01,600 --> 01:53:06,000
जी अब आवाज ठीक आ गई है।

1603
01:53:06,000 --> 01:53:10,400
जी जी थोड़ी सी बढ़ी है। अभी आप एक बार फिर से कुछ प्रयास करिए कि

1604
01:53:10,400 --> 01:53:14,560
बढ़ गई आवाज आपकी। अब बोले हां बोलिए बोलिए। जी मैं आशुतोष

1605
01:53:14,560 --> 01:53:18,560
शर्मा छत्तीसगढ़ से। जी मैं जगतगुरु

1606
01:53:18,560 --> 01:53:22,640
पूरी पीठाधीश्वर का शिष्य हूं और आपसे

1607
01:53:22,640 --> 01:53:27,520
पहली बार जुड़ा हूं। मैंने आपकी YouTube में कुछ वीडियोस देखी हैं।

1608
01:53:27,520 --> 01:53:31,920
आपके नामास्त्र के बारे में मुझे पहले से पता तो था पर जुड़ा

1609
01:53:31,920 --> 01:53:36,080
मैं अभी ही हूं। अच्छा अच्छा बहुत सुंदर

1610
01:53:36,080 --> 01:53:40,160
जी। बहुत सुंदर। बाकी

1611
01:53:40,160 --> 01:53:44,480
तो ज्यादा कुछ बता नहीं पाऊंगा।

1612
01:53:44,480 --> 01:53:48,560
बस वही गुरुदेव द्वारा गदत मंत्र जपते हैं और नाम

1613
01:53:48,560 --> 01:53:51,520
का जप करते हैं।

1614
01:53:51,520 --> 01:53:56,160
अरे आप गुरुदेव की शरण में है तो

1615
01:53:56,160 --> 01:54:00,640
जो है इस युद्ध के एक योद्धा है।

1616
01:54:00,640 --> 01:54:04,960
जी जी जी आगे बढ़ते हुए यहां पे अमित

1617
01:54:04,960 --> 01:54:09,040
गिल्डियाल जी उपस्थित हैं। मैं उनसे आग्रह करूंगा एक बार अपना परिचय और कुछ भी वो

1618
01:54:09,040 --> 01:54:10,320
बताना चाहे तो प्रयास

1619
01:54:10,320 --> 01:54:14,400
करें संक्षिप्त ही रखें क्योंकि और भी सदस्य हैं हम चाहेंगे कि आज सबका

1620
01:54:14,400 --> 01:54:18,400
हो जाए। बहुत लोग नहीं है यहां पे और पिछली बार जिन्होंने

1621
01:54:18,400 --> 01:54:22,480
अपना परिचय ऐसा दिया हो कुछ तो उनको हम

1622
01:54:22,480 --> 01:54:26,720
थोड़ा बाद में रखेंगे यदि समय नहीं होगा तो उनका अगली बार भी

1623
01:54:26,720 --> 01:54:30,880
बात हो सकेगा अनुभव उनके साझा हो सकेंगे जो लोग नए हो वे पहले अपने

1624
01:54:30,880 --> 01:54:34,880
हाथ यहां पे रेज कर ले एक बार मैं आग्रह करूंगा जो लोग प्रथम बार यहां पे

1625
01:54:34,880 --> 01:54:39,120
आए हो अपने अपने हैंड एक बार रेज कर ले जिससे कि मुझे ज्ञात

1626
01:54:39,120 --> 01:54:43,600
हो जाए और मैं उनको पहले ही उनका नाम ले लूंगा

1627
01:54:43,600 --> 01:54:48,240
जी बहुत अच्छा सभी लोग अपने हैंड रेज कर ले जो भी पहली बार आ रहे हैं।

1628
01:54:48,240 --> 01:54:53,280
जी गिल्डियाल जी एक बार आप आपसे कहा ही गया बाकी आपसे ही

1629
01:54:53,280 --> 01:54:57,440
जी बोलिए जी जय श्री राम भैया जी मेरी आवाज आ रही है जय श्री राम

1630
01:54:57,440 --> 01:55:01,520
हाँ आ रही है बहुत कम आ रही है किसी और का माइक बंद हो तो अपना माइक कुछ

1631
01:55:01,520 --> 01:55:05,600
और कर ले किसी और का माइक बंद खुला हुआ

1632
01:55:05,600 --> 01:55:09,440
हो तो उसको बंद कर ले

1633
01:55:09,440 --> 01:55:15,120
एक बैकग्राउंड नॉइस आ रहा है अच्छा

1634
01:55:15,120 --> 01:55:19,920
अभी ठीक है। अभी कम आ रहा होगा शायद। हां जी।

1635
01:55:19,920 --> 01:55:24,160
हां जी। तो उमेश जी मैं भी पहले जैसे आप जिसको

1636
01:55:24,160 --> 01:55:25,600
कह सकते हैं ना सेुलर

1637
01:55:25,600 --> 01:55:29,680
हिंदू टाइप सेुलर ही बोलता हूं मैं उनको मैं वैसा ही था

1638
01:55:29,680 --> 01:55:33,920
जिसको मतलब जो नाम के हिंदू और धर्म कर्म से कुछ ज्यादा

1639
01:55:33,920 --> 01:55:38,160
लेना देना नहीं और ऐसा तो बाद में मेरा धर्म

1640
01:55:38,160 --> 01:55:42,160
की ओर झुकाव बढ़ा। इसका श्रेय भी धर्म विद्रोहियों को ही जाता

1641
01:55:42,160 --> 01:55:46,240
है। जिन्होंने मुझसे मतलब मेरे धर्म के बारे में ही उल्टा सीधा

1642
01:55:46,240 --> 01:55:51,360
बोलना शुरू किया और मेरे पास उसका कुछ भी जवाब नहीं होता था।

1643
01:55:51,360 --> 01:55:55,520
लेकिन मैं यह जरूर कहता था कि मैं अपने धर्म के बारे में तुम्हारी बात क्यों

1644
01:55:55,520 --> 01:55:59,520
सुनूं? मैं खुद ढूंढूंगा और खुद जाके सीखूंगा। तुम कौन

1645
01:55:59,520 --> 01:56:03,520
होते हो मुझे बताने वाला है। तो उसके बाद मैंने

1646
01:56:03,520 --> 01:56:07,520
धीरे-धीरे करके थोड़ा पढ़ना शुरू किया। थोड़ा देखना

1647
01:56:07,520 --> 01:56:12,160
शुरू किया और इसी क्रम में ढूंढते-ढूंढते मैं आह्वान से जुड़ गया

1648
01:56:12,160 --> 01:56:16,560
और जुड़ा तो मैं आहान से मार्च से हूं नामास्त्र अभियान से

1649
01:56:16,560 --> 01:56:20,560
लेकिन मेरे मतलब जो काम है उसकी टाइमिंग कुछ

1650
01:56:20,560 --> 01:56:24,880
एकदम ही अलग है तो इस वजह से मैं सारे सत्र जॉइ

1651
01:56:24,880 --> 01:56:28,960
नहीं कर पाता। दिन में एक दो ज्वाइन कर लेता हूं। लेकिन कोशिश करता हूं कि अपनी भक्ति

1652
01:56:28,960 --> 01:56:32,960
का जो टारगेट है सवा घंटे का वह पूरा कर सकूं। तो बस

1653
01:56:32,960 --> 01:56:37,920
संक्षिप्त ही रखूंगा भैया जी। धन्यवाद बहुत बहुत

1654
01:56:37,920 --> 01:56:40,720
ही सुंदर मैं आगे आग्रह करूंगा

1655
01:56:40,720 --> 01:56:44,880
यहां पे ऋषु राज जी है अपना परिचय और कुछ भी जो कहना चाहे

1656
01:56:44,880 --> 01:56:49,360
ऋषु राज जी जय श्री राम भैया सब सभी को

1657
01:56:49,360 --> 01:56:53,680
जय श्री राम जय श्री राम जी मैं

1658
01:56:53,680 --> 01:56:57,840
मेरा परिचय तो बेसिकली मैं बिहार से हूं

1659
01:56:57,840 --> 01:57:01,920
और मेरा ये शिवश भैया से जुड़ना

1660
01:57:01,920 --> 01:57:06,080
पिछले साल हुआ था और मैं मेरा परिचय

1661
01:57:06,080 --> 01:57:10,640
मतलब मैसेज देना चाहेंगे कि बेसिकली जो हिंदुत्व के

1662
01:57:10,640 --> 01:57:14,800
सिद्धांत थे जैसे जो भी हिंदुत्व के सिद्धांत रहे शास्त्रों का पढ़ना बचपन

1663
01:57:14,800 --> 01:57:18,800
से हुआ क्योंकि ब्राह्मण परिवार में जन्म हुआ तो शास्त्रों का पढ़ना

1664
01:57:18,800 --> 01:57:23,280
राम कथा महाभारत वगैरह का तो बचपन से श्रवण या पठन हुआ।

1665
01:57:23,280 --> 01:57:27,440
उसके बाद फिर मैंने समय के साथ-साथ मैंने ओसो

1666
01:57:27,440 --> 01:57:31,600
को भी पढ़ना शुरू किया। एक क्यूरोसिटी थी कि जानने की कि क्या है क्या नहीं

1667
01:57:31,600 --> 01:57:35,760
है। उस क्रम में मैंने बहुत सारे ग्रंथों को

1668
01:57:35,760 --> 01:57:39,840
बहुत सारे लोगों को सुना पढ़ा। फिर जैसे जैसे मैं मतलब आगे

1669
01:57:39,840 --> 01:57:43,920
बढ़ता गया तो बहुत सारे मत मतंतर से मेरा मतलब मत मतंतर

1670
01:57:43,920 --> 01:57:48,320
के लोगों से जो उनसे जुड़े लोगों जैसे आर्य समाज इस वगैरह हो ब्रह्मकुमारी

1671
01:57:48,320 --> 01:57:52,400
वगैरह हो या जितने भी तथाकथित मतंतर उनके

1672
01:57:52,400 --> 01:57:55,840
लोगों से जुड़ना सामना हुआ तो वो लोग आकर के

1673
01:57:55,840 --> 01:57:59,920
मुझे मैनिपुलेट करने की कोशिश करते थे कि मतलब तुम उनसे जुड़ जाओ

1674
01:57:59,920 --> 01:58:04,000
उनसे जुड़ जाओ ये करो तो उनका खंडन तो मैं उस वक्त कर दिया करता

1675
01:58:04,000 --> 01:58:08,960
था मतलब मेरे पास कुछ बेसिक बेसिक सिद्धांत मेरे पास रहते थे। जैसे

1676
01:58:08,960 --> 01:58:13,280
इस वालों को मैं कह दिया करता था कि वाले आके कहते थे कि मतलब

1677
01:58:13,280 --> 01:58:17,360
कृष्ण शिव ये सब ये सब में भेद है। तो हम बोलते थे कि

1678
01:58:17,360 --> 01:58:21,600
भाई इतने सारे ऋषि मुनि कर्मकांड या ये सब क्यों किया आखिर मतलब या राम

1679
01:58:21,600 --> 01:58:25,840
जी शिव जी की पूजा नमामि शमी ये सब क्यों रचना किए थे। दूसरी

1680
01:58:25,840 --> 01:58:29,920
बात आर्य समाज वग लोगों को मैं ये कह दिया करता था कि मतलब बोलते

1681
01:58:29,920 --> 01:58:34,000
थे कि मूर्ति पूजा ये सब गलत है तो बोलते थे कि तुम इतने मंदिर मतलब जो चल रहे हैं वो

1682
01:58:34,000 --> 01:58:38,320
सब मतलब गलत है और जो लोग इतने पूजा करा रहे है सब चीज

1683
01:58:38,320 --> 01:58:42,320
तो बचपन से मानते है तो यह सब चीजें चलती आई थी तो उनको उनका खंडन

1684
01:58:42,320 --> 01:58:47,120
मैं इस तरह से मतलब करते जा रहा था फिर सबसे बड़ी बात ये थे कि

1685
01:58:47,120 --> 01:58:51,200
मैं उस समय मेरे पास कोई गुरु नहीं थे कि मतलब कोई जिनसे मैं

1686
01:58:51,200 --> 01:58:55,360
उनके खंडन करते करते मैं कई बार खुद फ्रस्टेटेड या मतलब परेशान

1687
01:58:55,360 --> 01:58:59,840
हो जाए कहता था कि आखिर सही क्या है क्योंकि इतने लोग ये भी मान रहे हैं एक्चुअली

1688
01:58:59,840 --> 01:59:03,840
एक्चुअली में हिंदुत्व का मतलब जो रियलिटी में मतलब है वो क्या है क्योंकि गुरु

1689
01:59:03,840 --> 01:59:08,000
असल में जो हिंदुत्व के गुरु वो मिल नहीं पा रहे थे कि मुझे लगता था कि जैसे इस

1690
01:59:08,000 --> 01:59:11,120
कोन में आर्य समाज में यही जगह पे एक्चुअली में

1691
01:59:11,120 --> 01:59:15,200
हिंदुत्व के बारे में ज्ञान मिलता है। बाकी कहीं जगह होगा नहीं। लेकिन

1692
01:59:15,200 --> 01:59:19,440
अंदर से एक बेचैनी थी कि मतलब ऐसा नहीं हो सकता है। कुछ ना कुछ तो जरूर

1693
01:59:19,440 --> 01:59:23,520
होगा ऐसा। तो इसी क्रम में मतलब उनका खंडन

1694
01:59:23,520 --> 01:59:27,520
तो करते जा रहा था। फिर मतलब कुछ और इस तरह से

1695
01:59:27,520 --> 01:59:31,760
मिल नहीं पा रहा था कि फिर क्या हुआ? फिर मुझे लगता था कि नहीं ये वो

1696
01:59:31,760 --> 01:59:35,920
सारे लोग कुछ कुछ बात तो बोल रहे हैं। कुछ कुछ सही बात तो बोलते बोल रहे हैं।

1697
01:59:35,920 --> 01:59:39,920
सभी लोग मतलब सही कुछ ना कुछ सही बोल रहे हैं। पर फिर भी इनमें आपस में ही क्यों

1698
01:59:39,920 --> 01:59:44,400
लड़ाई? जैसे आर्य समाज और इसको में भी आपस में मत मतंतर भेद था। मतलब

1699
01:59:44,400 --> 01:59:48,720
उनकी आपस में लड़ाई थी। बहुत सारे लोगों में तो या फिर जो

1700
01:59:48,720 --> 01:59:52,720
अन्य आचार्य प्रशांत हो गए हैं। अभी जो जो स्पिरिचुअल बातें जो जो

1701
01:59:52,720 --> 01:59:57,040
बोलते हैं वो आपस में ही मतभेद क्यों करते हैं? आखिर उनमें ऐसा मतलब क्या है? अगर सब स्पिरिचुअल

1702
01:59:57,040 --> 02:00:01,200
बातें कर रहे हैं तो एक जैसी बातें बोलनी चाहिए। एक मंच पर बैठ के सभी लोग साझा कर

1703
02:00:01,200 --> 02:00:05,200
ले कि आखिर क्या बात है और फिर इसी बात हम लोग को बताएं हम इतने कंफ्यूज क्यों

1704
02:00:05,200 --> 02:00:09,200
है आखिर तो इसी क्रम में जब शिवश है वीडियो मैंने देखा कि

1705
02:00:09,200 --> 02:00:13,280
ये एक क्रम से जितने भी मतमतांतर है उन सबका खंडन करने

1706
02:00:13,280 --> 02:00:17,920
वो कर किए और वो कोई अपना मतमतांतर मतलब अपना कोई

1707
02:00:17,920 --> 02:00:22,160
एक नया बाकी सारे जितने में खंडन करते थे लेकिन वो कुछ अपना सिद्धांत

1708
02:00:22,160 --> 02:00:26,720
दिया करते थे जैसे अपना तो ये देखा है कि नहीं हिंदुत्व

1709
02:00:26,720 --> 02:00:31,360
का एक्चुअली शास्त्र ग्रंथों को लेकर के मतलब उनका खंडन किया तो उनसे जो

1710
02:00:31,360 --> 02:00:35,360
मतलब ये हुआ कि नहीं मतलब अगर बाकी सारे लोगों में अगर जुड़े इस में

1711
02:00:35,360 --> 02:00:39,440
आर्य समाज में तो मुझे वहां पर अपना परिचय बदलना पड़ेगा कि मतलब

1712
02:00:39,440 --> 02:00:43,440
मैं किसवादी हूं या मैं आर्य समाजी हूं मैं ये नहीं मानता मैं

1713
02:00:43,440 --> 02:00:47,760
वो नहीं मानता पर अगर मैं शिवश भैया ने मुझे पहली बार शंकराचार्य

1714
02:00:47,760 --> 02:00:52,000
के बारे में जब बताया उसके बाद मुझे पता चला कि नहीं मतलब

1715
02:00:52,000 --> 02:00:56,320
ये अपने ही सिद्धांतों के बारे में बता रहे हैं मुझे कुछ भी नहीं बदलना मेरा नाम

1716
02:00:56,320 --> 02:01:00,320
मेरा परिचय वो तो और उल्टा करें कि तुम्हारे जो अपने सिद्धांत है उन्हीं

1717
02:01:00,320 --> 02:01:04,640
का पालन करो। तो इससे मैं धीरे-धीरे आवाहन भी जुड़ा। फिर भैया से मैंने

1718
02:01:04,640 --> 02:01:09,680
सर भी भैया से मैंने भी कुछ कुछ प्रश्न किया ये जानने के लिए कि मतलब

1719
02:01:09,680 --> 02:01:13,840
मेरे जैसा मैं इसका आंसर सोच रहा हूं वैसा है भैया देते

1720
02:01:13,840 --> 02:01:17,840
हैं तो 95% जैसा मेरा एक्सपेक्टेड आंसर था भैया ने वैसा ही दिया

1721
02:01:17,840 --> 02:01:22,000
और मुझे मतलब लगा कि नहीं ये मतलब सही जगह फिर धीरे-धीरे जुड़ता आया

1722
02:01:22,000 --> 02:01:26,560
कि नाम जप वगैरह और अब मेरे जीवन मतलब स्पिरिचुअलिटी

1723
02:01:26,560 --> 02:01:30,800
मतलब काफी जो परेशानियां रहती थी कि मतलब

1724
02:01:30,800 --> 02:01:35,040
ओवरथिंकि क्या सही क्या गलत है धीरे धीरे धीरे महादेव की कृपा से

1725
02:01:35,040 --> 02:01:39,360
सब कुछ ठीक है तो यही मेरा परिचय था उत्तम

1726
02:01:39,360 --> 02:01:42,080
बहुत ही बहुत ही सुंदर जो है आपने वक्तव्य

1727
02:01:42,080 --> 02:01:46,160
दिया ऋषु जी अब मैं आगे आग्रह करूंगा

1728
02:01:46,160 --> 02:01:50,240
यहां पे यहां मनीष बदोला जी हैं मनीष बदोला जी

1729
02:01:50,240 --> 02:01:54,400
हमसे कई समय से कुछ बहुत समय से जुड़े हुए हैं यहां पे और

1730
02:01:54,400 --> 02:01:58,400
जिन्होंने स्वयं के कार्यकारी वृत्त में भी एक अपना एक ग्रुप बना करके

1731
02:01:58,400 --> 02:02:02,560
हमारे वीडियो आदि और हमारे संदेश आदि करते रहते हैं जो बड़ा अच्छा लगता

1732
02:02:02,560 --> 02:02:07,120
मनीष भैया एक बार अपना परिचय जय श्री राम सभी को

1733
02:02:07,120 --> 02:02:11,360
जी जय श्री राम जी मतलब

1734
02:02:11,360 --> 02:02:15,920
पहले क्या था कि हम जैसे हमारे गली में काफी आमपालीय

1735
02:02:15,920 --> 02:02:19,920
लोग रहते हैं उस टाइम तो मैं इतना शास्त्र वगैरह कोई पढ़ता नहीं था उस टाइम पूजा

1736
02:02:19,920 --> 02:02:24,000
पाठ भी इतना वगैरह मैं नहीं करता था तो ये मन

1737
02:02:24,000 --> 02:02:28,000
में हमेशा संदेह रहता था जब वो बोलते थे कुछ तो हमारे पास जवाब नहीं होता

1738
02:02:28,000 --> 02:02:32,000
था तो फिर धीरे-धीरे फिर हम क्या करते थे कि कहीं की भी

1739
02:02:32,000 --> 02:02:36,080
किसी की भी बात सुन के जैसे सोशल मीडिया पे हम सुनते ही हैं

1740
02:02:36,080 --> 02:02:40,080
तो वही उस उनको बोल देते थे तो लेकिन फिर भी मन में

1741
02:02:40,080 --> 02:02:44,160
अपने संदेह रहता था कि यार ये सही है सही बोला है कि नहीं

1742
02:02:44,160 --> 02:02:48,160
बोला तो जब से हम आवाहन से जुड़े हैं तो अब ये लगता है कि मन

1743
02:02:48,160 --> 02:02:52,240
में कोई संदेह नहीं है। हम जो सुन रहे हैं वो हमें अपने अंदर से यकीन होता

1744
02:02:52,240 --> 02:02:56,640
है कि हां ये सत्य है। तो बस यही चीजें हैं। बाकी

1745
02:02:56,640 --> 02:02:57,280
तो ज्यादा कुछ

1746
02:02:57,280 --> 02:03:01,280
नहीं है। बहुत बढ़िया। उत्सव बहुत ही

1747
02:03:01,280 --> 02:03:05,280
अच्छा लगा मनीष भैया यहां पे विवेक जी हमारे साथ आज उपस्थित

1748
02:03:05,280 --> 02:03:09,360
है विवेक भैया आपसे आग्रह है कुछ अपनी सबसे बोले परिचय दे दीजिएगा

1749
02:03:09,360 --> 02:03:13,600
अपना आपको जो बताना जी आप भी थोड़ा सा मैं

1750
02:03:13,600 --> 02:03:17,920
कहूंगा कि हेडफोन हटा के बोले कुछ गड़बड़ आ रही है आपकी भी आवाज

1751
02:03:17,920 --> 02:03:23,920
अभी अभी सही आ रही है भैया

1752
02:03:25,600 --> 02:03:30,720
अभी बोले जी आप बोलिए

1753
02:03:30,720 --> 02:03:36,720
विकास विवेक जी बोले विवेक जी बोले जी जय जगन्नाथ

1754
02:03:36,720 --> 02:03:40,880
जय श्री जगन्नाथ जय श्री जगन्नाथ सभी भाइयों को

1755
02:03:40,880 --> 02:03:44,960
सभी को प्रणाम सभी को नमस्कार

1756
02:03:44,960 --> 02:03:49,520
अभी मैं अपना परिचय क्या दूं आप

1757
02:03:49,520 --> 02:03:53,680
एक से एक मुरधन्य यहां पर व्यक्तित्व उपस्थित है उनके बीच

1758
02:03:53,680 --> 02:03:57,680
मुझे तो लगता है कि मैं बहुत गॉड हूं

1759
02:03:57,680 --> 02:04:01,760
यही लगता था कि कहीं जैसे नहीं भगवान शंकराचार्य

1760
02:04:01,760 --> 02:04:06,320
को सुना और एक जो कभी-कभी जो पीड़ा

1761
02:04:06,320 --> 02:04:10,640
थी उनकी कि अपने को जो

1762
02:04:10,640 --> 02:04:15,760
भगवान शंकराचार्य की सेना का सैनिक मानते हैं वैसे हमें

1763
02:04:15,760 --> 02:04:18,160
लोग चाहिए

1764
02:04:18,160 --> 02:04:23,600
तो मैं अपने अंदर वह योग्यता तो नहीं देखता

1765
02:04:23,600 --> 02:04:28,720
पर जो उनकी प्रेरणा है जो कॉज

1766
02:04:28,720 --> 02:04:33,280
उसमें मेरा जो भी भगवत कृपा से

1767
02:04:33,280 --> 02:04:37,440
जो भी मेरी मैं कर सकूंगा मैं सोचता हूं कि

1768
02:04:37,440 --> 02:04:41,520
करूं। अभी तो वस्तुतः यह

1769
02:04:41,520 --> 02:04:46,160
कहने में भी वो लगता है कि

1770
02:04:46,160 --> 02:04:50,800
कि कैसे अपनी बात को रखूं। पर अभी एक भैया बता रहे थे कि

1771
02:04:50,800 --> 02:04:54,960
यह एकमात्र वह बात यह मत लगा जहां

1772
02:04:54,960 --> 02:04:59,600
हमें अपनी पहचान नहीं बदल बदलती हुई दिखाई दी

1773
02:04:59,600 --> 02:05:02,720
तो

1774
02:05:02,720 --> 02:05:06,880
मैं इस समय से आगे अभी क्या बोलूं और भी लोग हैं

1775
02:05:06,880 --> 02:05:11,040
जी जय श्री राम अच्छा लगा विवेक जी जय श्री राम और आपने

1776
02:05:11,040 --> 02:05:15,600
कहा कि मैं अपने अंदर कोई योग्यता नहीं देखता परंतु

1777
02:05:15,600 --> 02:05:20,080
जो हमारे सिद्धांत है वो यह कहते हैं कि स्वयं

1778
02:05:20,080 --> 02:05:25,040
के अंदर योग्यता ना देखना ही सबसे बड़ी योग्यता है।

1779
02:05:25,040 --> 02:05:29,200
यह अचीव कर पाना बहुत मुश्किल होता है। कर्तापन

1780
02:05:29,200 --> 02:05:33,200
कर्तापन से मुक्त होने की बात ही तो कही है भगवान ने। मैं करता हूं।

1781
02:05:33,200 --> 02:05:37,200
यानी कि मेरे अंदर कुछ करने की योग्यता को मैं देख रहा हूं। और जब

1782
02:05:37,200 --> 02:05:41,200
व्यक्ति यह कहने लग जाए कि मेरे अंदर कुछ करने की योग्यता ही नहीं है। मैं कुछ कर ही

1783
02:05:41,200 --> 02:05:45,200
नहीं सकता। तो यह सबसे बड़ी योग्यता है। तो आप तो गुरु भाई

1784
02:05:45,200 --> 02:05:50,160
भी हैं। और एक वो जो बात है ना कि कैसे

1785
02:05:50,160 --> 02:05:54,240
गुरुदेव का वो जो वचन है ना कि जो भगवत गीता का सारांश बताते हुए

1786
02:05:54,240 --> 02:05:59,680
गुरुदेव कहते हैं कि मत हो जा निमित्त। तेरे बस की बात है क्या?

1787
02:05:59,680 --> 02:06:01,520
जिसके जन्म का जो प्रयोजन

1788
02:06:01,520 --> 02:06:05,840
है अन्यों की तो बात क्या वो स्वयं भी चाहे तो उस प्रयोजन

1789
02:06:05,840 --> 02:06:09,840
को टाल नहीं सकता। तो जिसकी जहां उपयोगिता होती

1790
02:06:09,840 --> 02:06:13,840
है वह करा ही लेते हैं। हम हो या आप है

1791
02:06:13,840 --> 02:06:19,840
ना

1792
02:06:20,000 --> 02:06:24,560
जी बहुत बहुत ही बहुत ही सुंदर बहुत ही अच्छा लगा।

1793
02:06:24,560 --> 02:06:28,880
इसमें भैया के बीचबीच में हमको जो इनपुट प्राप्त हो रहे हैं इतने सुंदर वक्तव्य

1794
02:06:28,880 --> 02:06:33,040
प्राप्त हो रहे हैं। ये सब कल को प्रसारित होंगे और लोगों को

1795
02:06:33,040 --> 02:06:37,040
मध्य जाएंगे वो लोग देखेंगे तो धर्म का ही प्रचार प्रसार

1796
02:06:37,040 --> 02:06:41,120
होगा। भगवान की भक्ति का ही प्रचार प्रसार होगा। अन्य किसी पीयूष

1797
02:06:41,120 --> 02:06:45,360
जी कुछ कहना चाह रहे थे। पीयूष जी कुछ पीयूष जी कुछ कहना चाह रहे थे। बस पीयूष

1798
02:06:45,360 --> 02:06:49,600
भैया आप अवश्य बोले। मुझे लगता है जितने नए लोग थे उन सभी का हो गया। उन्होंने हैंड रे किए

1799
02:06:49,600 --> 02:06:53,600
थे। हम पीयूष भैया से करते हैं। जय श्री राम।

1800
02:06:53,600 --> 02:06:58,080
सभी गुरु भाइयों को मेरा प्रणाम। जय श्री राम।

1801
02:06:58,080 --> 02:07:02,160
शिवश भैया अभी थोड़ा टाइम पहले काफी दुखद एक वो

1802
02:07:02,160 --> 02:07:06,400
पढ़ा था मैंने न्यूज़। अभी क्रिकेट तो हम सब खेलते ही आ रहे हैं बचपन

1803
02:07:06,400 --> 02:07:10,560
से। तो क्रिकेट की जो गेंदे हैं इसमें गाय

1804
02:07:10,560 --> 02:07:15,200
के चमड़े का इस्तेमाल होता है और व्यक्तिगत

1805
02:07:15,200 --> 02:07:16,880
व्यक्तिगत अनुसंधान मैंने

1806
02:07:16,880 --> 02:07:21,120
नहीं किया है परंतु राजेंद्र दास जी महाराज जी ने भी इसी

1807
02:07:21,120 --> 02:07:25,360
शैली में कहा था कि सुनने में आ रहा है तो व्यक्तिगत रूप से अनुसंधान

1808
02:07:25,360 --> 02:07:29,600
नहीं किया है। परंतु यदि उसमें प्रयोग हो रहा है गाय गौ

1809
02:07:29,600 --> 02:07:33,840
माता का तो बिल्कुल हमारे ओर से उसे त्याग देना चाहिए। किसी

1810
02:07:33,840 --> 02:07:37,920
भी प्रकार से उसका प्रमोशन, किसी भी प्रकार से उसका प्रोत्साहन

1811
02:07:37,920 --> 02:07:41,920
हमारे द्वारा नहीं होना चाहिए। यदि हम स्वयं को सनातन वैदिक आर्य हिंदू कहते

1812
02:07:41,920 --> 02:07:45,920
हैं। लेकिन अब हमारे ही घरों के छोटे-छोटे बच्चे भी

1813
02:07:45,920 --> 02:07:51,040
खेलते ही हैं जाके क्रिकेट और गेंदे तो वही इस्तेमाल होती है सारी।

1814
02:07:51,040 --> 02:07:55,040
नहीं बच्चे लेदर की बॉल से नहीं खेलते। देखिए सब

1815
02:07:55,040 --> 02:07:59,120
गेंदों में नहीं होता। से खेलते हैं। जी जो जो क्रिकेट की गेंदे

1816
02:07:59,120 --> 02:08:03,360
अलग होती है समस्या वो नहीं है। समस्या उनके

1817
02:08:03,360 --> 02:08:07,600
खेलने से नहीं है। समस्या क्रिकेट के प्रोत्साहन से है।

1818
02:08:07,600 --> 02:08:11,600
तो ऐसा वातावरण बनाए जिससे कि क्रिकेट के प्रति उनकी रुचि कम

1819
02:08:11,600 --> 02:08:15,840
हो और ऐसा वातावरण बनाने के लिए

1820
02:08:15,840 --> 02:08:20,320
स्वयं को ऐसा बनाएं कि आप ऐसा वातावरण बना पाने के योग्य हो पाए

1821
02:08:20,320 --> 02:08:24,480
और स्वयं को ऐसा बनाने के लिए गुरुदेव

1822
02:08:24,480 --> 02:08:28,800
का मार्ग है नाम जप। नाम जप

1823
02:08:28,800 --> 02:08:32,000
करेंगे तो प्राप्ति की रक्षा और अप्राप्ति की चिंता

1824
02:08:32,000 --> 02:08:36,400
भगवान करेंगे। है ना? बहुत-बत

1825
02:08:36,400 --> 02:08:42,080
धन्यवाद भैया बस यही जी

1826
02:08:42,080 --> 02:08:46,320
अब इसमें बात ऐसी है कि गुरुदेव कहते हैं कि

1827
02:08:46,320 --> 02:08:50,400
समस्याएं बहुत है समाधान ये है कि मूल जो है हमें उस

1828
02:08:50,400 --> 02:08:54,560
पर ध्यान देना है। एक भेड़ है यदि उस भेड़ को हमें काटना है तो उनको जड़

1829
02:08:54,560 --> 02:08:58,800
के प्रहार करना होगा ना कि उसकी शाखाओं पर आप शाखाएं काटते रहिए। आप

1830
02:08:58,800 --> 02:09:02,960
तना यदि काट देंगे तो वहां से भी वो पुनः उगा आएगा। लेकिन आपको जो है जड़

1831
02:09:02,960 --> 02:09:07,120
के प्रहार करना होगा। आपको वहीं से आपको हटाना पड़ेगा। तो यह समस्याएं

1832
02:09:07,120 --> 02:09:11,280
एक्सिस्ट बहुत प्रकार की करती है। क्रिकेट की बॉल से लेकर के मंदिरों में होने वाली

1833
02:09:11,280 --> 02:09:15,600
वीआईपी व्यवस्था तक और इसी से मुझे ध्यान आता है कि आज

1834
02:09:15,600 --> 02:09:19,760
मुझे लगता है बहुत बड़ी दुर्घटना हो गई है। देवभूमि हरिद्वार

1835
02:09:19,760 --> 02:09:23,760
में मनसा देवी जी में आठ श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई

1836
02:09:23,760 --> 02:09:28,560
है। जो कि भगदड़ की वजह से हुआ है। तो मैं चाहूंगा कि

1837
02:09:28,560 --> 02:09:32,720
थोड़ा सा सुभाष भैया आप जो है कुछ शांति पाठ है ऐसा

1838
02:09:32,720 --> 02:09:37,040
कुछ यहां पे अवश्य हमें इस बारे में तो अभी आप ही के

1839
02:09:37,040 --> 02:09:41,200
द्वारा जानकारी प्राप्त हो रही है हमें दोपहर में

1840
02:09:41,200 --> 02:09:45,280
दोपहर में हमको भी जानकारी हुई थी अपने मित्र के द्वारा उसने मुझे बताया देहरादून में रहता

1841
02:09:45,280 --> 02:09:47,120
है तो उसने जानकारी दी मुझे तो

1842
02:09:47,120 --> 02:09:51,360
मुझे अभी अचानक से याद आ गया इन सब बातों से तो मैंने कहा कि एक बार जो है आठ

1843
02:09:51,360 --> 02:09:56,560
लोगों का अभी मैंने अभी चेक किया है आठ लोगों की इसमें मृत्यु का

1844
02:09:56,560 --> 02:10:00,800
बहुत दुखद है ऐसा होना मंदिर प्रांगण में ऐसा होना श्रद्धालुओं

1845
02:10:00,800 --> 02:10:04,960
के साथ ऐसा होना बहुत दुखद है पीड़ादायक है बिल्कुल

1846
02:10:04,960 --> 02:10:10,240
भी ऐसा नहीं होना चाहिए था और यदि कोई

1847
02:10:10,240 --> 02:10:14,480
व्यक्ति वस्तु स्थिति इसके

1848
02:10:14,480 --> 02:10:18,720
लिए जिम्मेदार है जिसके कारण किसी के

1849
02:10:18,720 --> 02:10:23,200
लोभ के कारण स्वार्थ के कारण ऐसी कोई घटना घटित हुई है

1850
02:10:23,200 --> 02:10:27,760
तो उसको भगवान का श्राप अवश्य लगेगा उसको दंड

1851
02:10:27,760 --> 02:10:32,320
अवश्य मिले अवश्य ही मिलेगा और यह तो आपने

1852
02:10:32,320 --> 02:10:36,560
बहुत कहूंगा कि हृदय को विदर्ण कर देने वाली

1853
02:10:36,560 --> 02:10:40,880
आपने जानकारी दी अभी-अभी मंदिर प्रांगण

1854
02:10:40,880 --> 02:10:45,120
में श्रद्धालु ये सोच कर जा रहा है कि वो अपने ईष्ट के दर्शन

1855
02:10:45,120 --> 02:10:49,280
करेगा और वहां पर ऐसी भक्तदड़ ऐसी अवस्था हो

1856
02:10:49,280 --> 02:10:55,280
जाना ये बिल्कुल भी अह

1857
02:10:56,560 --> 02:11:01,040
ग्रहण करने योग्य बिल्कुल भी सहन करने योग्य स्थिति नहीं है

1858
02:11:01,040 --> 02:11:05,280
और सभी जितने भी लोग वहां पर प्रभावित हुए हैं उस जगह से

1859
02:11:05,280 --> 02:11:09,280
उस घटना से जितने भी लोग प्रभावित हुए हैं हम सब की भावनाएं

1860
02:11:09,280 --> 02:11:13,440
हम सबकी प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। ईश्वर प्रभु श्री राम

1861
02:11:13,440 --> 02:11:18,480
से हम प्रार्थना करेंगे कि वो

1862
02:11:18,480 --> 02:11:22,960
इस कष्टप्रद और कठिन स्थिति

1863
02:11:22,960 --> 02:11:27,440
से अ संघर्ष करने का बल

1864
02:11:27,440 --> 02:11:32,960
उस घटना से प्रभावित परिवारों को दें और जितनी भी

1865
02:11:32,960 --> 02:11:37,040
पुण्य आत्माएं हैं जो वहां पर

1866
02:11:37,040 --> 02:11:41,120
जिनका स्वर्गवास हुआ है या

1867
02:11:41,120 --> 02:11:45,360
जिन्होंने अपनी देह का त्याग किया है वहां पर उन सभी को

1868
02:11:45,360 --> 02:11:49,600
प्रभु श्री राम अपने श्री चरणों में स्थान दे ऐसी हम उनके लिए प्रार्थना

1869
02:11:49,600 --> 02:11:53,600
करते हैं।

1870
02:11:53,600 --> 02:11:56,560
और

1871
02:11:56,560 --> 02:12:00,640
सभी से मेरी निवेदन है आप अपने नाम जप नाम नाम जप वाले

1872
02:12:00,640 --> 02:12:04,880
सत्र में भी उन ग्रुप्स में भी डाल दीजिएगा कि कल प्रातः

1873
02:12:04,880 --> 02:12:09,360
काल का जो पहला सत्र हो नाम जप का वो

1874
02:12:09,360 --> 02:12:13,360
वहां पे जो श्रद्धालुओं के साथ जो दुर्घटना घटित हुई

1875
02:12:13,360 --> 02:12:17,360
है उनको सद्गति प्रदान करने की भावना से कल

1876
02:12:17,360 --> 02:12:21,520
सुबह का पहला सत्र करें। गौतम भैया गौतम भैया उपस्थित

1877
02:12:21,520 --> 02:12:25,760
है। उन्होंने बात ये नोट कर ली है। गौतम भैया ने बात लिया

1878
02:12:25,760 --> 02:12:29,840
उचित है। तो यही बहुत ही हृदय विदारक घटना जो है वहां पे

1879
02:12:29,840 --> 02:12:34,480
घटित हो गई। इसकी जानकारी मुझे भी मिली तो मुझे भी बड़ा धक्का सा लगा और

1880
02:12:34,480 --> 02:12:38,480
बड़ी मुझे भी वैसी बात लगी कि पता नहीं क्यों कल अचानक

1881
02:12:38,480 --> 02:12:42,480
से मुझे पहली में जो बांध बना है उसके विषय में कुछ

1882
02:12:42,480 --> 02:12:46,560
बात करते अचानक से मनसा देवी माता का स्मरण हो आया था। और

1883
02:12:46,560 --> 02:12:50,720
मुझे याद आ गया मैं बहुत पहले गया था वहां और इस प्रकार से और पता

1884
02:12:50,720 --> 02:12:54,800
नहीं क्या आज ऐसी घटना सुनने को मिल गई जो बड़ा ही खराब लगा इसको सुनकर के और आठ

1885
02:12:54,800 --> 02:12:58,800
श्रद्धालुओं की मृत्यु बताई जा रही है और ऐसा आशंका है कि हो

1886
02:12:58,800 --> 02:13:02,880
सकता है ये बढ़ जाए तो क्योंकि मैं नहीं चाहूंगा कि बढ़े

1887
02:13:02,880 --> 02:13:07,120
और किसी और को भी पीड़ा पहुंचे तो आठ श्रद्धालु नहीं ये आठ परिवार

1888
02:13:07,120 --> 02:13:08,800
है आप एक बार सोच करके देखिए

1889
02:13:08,800 --> 02:13:12,800
एक परिवार में जब कोई मृत्यु होती है तो क्या होता है तो आठ परिवारों के

1890
02:13:12,800 --> 02:13:17,120
बहुत बड़ी बात तो जी

1891
02:13:17,120 --> 02:13:21,120
इस कमलेश जी मैं संभता पहली

1892
02:13:21,120 --> 02:13:25,600
बार देख रहा हूं इन्हें हमारे बीच में या इन्हें सुन चुके हैं

1893
02:13:25,600 --> 02:13:30,000
नहीं कमलेश भैया मुझे लगता है आए कमलेश जी आप पिछली बार आ चुके हैं

1894
02:13:30,000 --> 02:13:34,240
अच्छा अच्छा अगर कुछ वक्तव्य देना चाहे कमलेश जी अथवा कमलेश

1895
02:13:34,240 --> 02:13:39,600
भैया

1896
02:13:39,600 --> 02:13:43,840
जी सभी को मेरा नमस्कार मेरी आवाज आपको सुनाई दे रही है

1897
02:13:43,840 --> 02:13:47,920
जी आ रही है आ रही है। बहुत बहुत अच्छे से आ रही है। जी मैं कमलेश कुमार झा हूं।

1898
02:13:47,920 --> 02:13:50,320
मैं

1899
02:13:50,320 --> 02:13:54,480
मिसल से ओरिजिनली बिलोंग करता हूं। अभी फिलहाल

1900
02:13:54,480 --> 02:13:58,640
मैं देहरादून में स्थित हूं। लास्ट

1901
02:13:58,640 --> 02:14:02,640
सेशन में मैं आया था। तो

1902
02:14:02,640 --> 02:14:08,160
अपने को भाग्यशाली समझता हूं कि इतने अच्छे ग्रुप के साथ मेरा जुड़ाव हो सका।

1903
02:14:08,160 --> 02:14:12,160
ये अवश्य ही मैंने कुछ सात कर्म किए

1904
02:14:12,160 --> 02:14:18,160
होंगे जिसकी वजह से मुझे यह लाभ मिल रहा है।

1905
02:14:18,240 --> 02:14:23,040
ये ये बहुत लंबी यात्रा है मेरे लिए।

1906
02:14:23,040 --> 02:14:27,040
अ मैं धर्म कर्म के

1907
02:14:27,040 --> 02:14:31,280
मार्ग पे वैसे तो ब्राह्मण

1908
02:14:31,280 --> 02:14:35,280
परिवार से बिलोंग करता हूं।

1909
02:14:35,280 --> 02:14:39,600
तो धार्मिक कर्म वगैरह होते रहते

1910
02:14:39,600 --> 02:14:43,840
थे हमारे घर घरों में। लेकिन उसका जो क्या

1911
02:14:43,840 --> 02:14:47,840
औचित्य है उसका क्या अहमियत है

1912
02:14:47,840 --> 02:14:53,120
मतलब हमारे जीवन के साथ उसका क्या लेना देना है

1913
02:14:53,120 --> 02:14:57,200
ये ताना बुना बुना जो है हमें कभी मतलब एहसास

1914
02:14:57,200 --> 02:15:01,040
नहीं हुआ लेकिन

1915
02:15:01,040 --> 02:15:06,080
ये हमेशा से क्वेश्चन दिमाग में रहा है

1916
02:15:06,080 --> 02:15:10,080
और जैसे इस ग्रुप के साथ जुड़ना हुआ है तो मुझे इस बात का

1917
02:15:10,080 --> 02:15:14,160
बहुत यकीन है और ये ये जुराब भी

1918
02:15:14,160 --> 02:15:17,920
बहुत लंबी यात्रा के बाद हुआ है।

1919
02:15:17,920 --> 02:15:22,400
शंकरा शंकराचार्य जी को मैं बहुत दिनों से

1920
02:15:22,400 --> 02:15:26,560
उनके वीडियोस वगैरह देखता रहा हूं। उससे पहले

1921
02:15:26,560 --> 02:15:30,800
भी उनसे उनके वीडियो देखने से पहले भी

1922
02:15:30,800 --> 02:15:35,360
मैंने कई और

1923
02:15:35,360 --> 02:15:39,840
जैसे एक जग्गी वासुदेव जी है

1924
02:15:39,840 --> 02:15:43,920
सद्गुरु कहते हैं अपने आप को उनसे भी जुड़ाव हुआ

1925
02:15:43,920 --> 02:15:48,320
है। उनके भी वचनों को सुनके

1926
02:15:48,320 --> 02:15:52,560
लेकिन उनके वचनों में और

1927
02:15:52,560 --> 02:15:56,560
शंकराचार्य जी के वचनों में इतना अंतर है कि हमेशा

1928
02:15:56,560 --> 02:16:00,720
ये शास्त्र को प्रमाण देते हैं और उनके वचनों में यह रहता

1929
02:16:00,720 --> 02:16:04,240
है कि नहीं

1930
02:16:04,240 --> 02:16:08,480
वो उनका जो भी है पिछले जन्मों से उनको

1931
02:16:08,480 --> 02:16:12,560
इतना ज्ञान था ये वो करके लेकिन अता

1932
02:16:12,560 --> 02:16:16,560
ये है कि हमें अपने आप को जानने की जो प्रवृत्ति है

1933
02:16:16,560 --> 02:16:20,560
उसको जागृत रखनी है और इस क्रम में यह

1934
02:16:20,560 --> 02:16:25,840
मेरा एक बहुत अच्छा

1935
02:16:25,840 --> 02:16:29,840
जुड़ा हुआ है इस ग्रुप से और इसके लिए मैं सबको धन्यवाद देना चाहता हूं।

1936
02:16:29,840 --> 02:16:35,840
धन्यवाद। बहुत ही बहुत ही सुंदर

1937
02:16:36,000 --> 02:16:40,000
अब मैं आग्रह करूंगा यहां विश्वजीत जी उपस्थित है। एक बार यदि सुन रहे

1938
02:16:40,000 --> 02:16:44,000
हो तो अवश्य अपना परिचय दे। जी भैया नमस्ते

1939
02:16:44,000 --> 02:16:48,320
राम राम। नमस्ते राम राम जय श्री राम। विश्वजीत का नंबर

1940
02:16:48,320 --> 02:16:52,480
आपने काफी लास्ट में डाल दिया। हां बहुत देर

1941
02:16:52,480 --> 02:16:57,040
से जो है बोल रहे थे जुट चुका था भैया लेकिन

1942
02:16:57,040 --> 02:17:01,040
जो मैं कहना चाहता था तब तक आप चले गए थे फिर भी मैंने कोई बात

1943
02:17:01,040 --> 02:17:05,120
नहीं कोई बात नहीं आप धन्यवाद कहना चाहता हूं क्योंकि

1944
02:17:05,120 --> 02:17:09,120
जब से मैं जुड़ा हूं गुरुदेव के जो वचन है उनको सरल भाषा में हम

1945
02:17:09,120 --> 02:17:13,200
लोगों को समझा देते हैं तो उस दिन यही कहना

1946
02:17:13,200 --> 02:17:17,360
चाहते थे भैया और जब से आह्वान से जुड़े भैया हमको बहुत कुछ सीखने

1947
02:17:17,360 --> 02:17:21,600
को मिला और उसके बाद नाम जाप में

1948
02:17:21,600 --> 02:17:25,680
सुबह के समय 5:30 बजे पहला शिव जी का तो उस

1949
02:17:25,680 --> 02:17:29,840
समय भैया सवा घंटे का चलता है तो उसमें भी भैया मेरे

1950
02:17:29,840 --> 02:17:33,920
जिंदगी में बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है जब से मैं जुड़ा हूं नाम जप अभियान

1951
02:17:33,920 --> 02:17:37,200
से और

1952
02:17:37,200 --> 02:17:41,840
भैया मैं भी कोशिश कर रहा हूं कि मैं भी दीक्षा ले लूं गुरुदेव से

1953
02:17:41,840 --> 02:17:46,080
तो जितना जल्दी हो सके और भैया बस

1954
02:17:46,080 --> 02:17:51,120
अंत में यही कहूंगा आपसे बहुत कुछ सीखने के लिए मिला मिला है और

1955
02:17:51,120 --> 02:17:55,200
जो भी मेरे जिंदगी में अच्छा प्रभाव पड़ेगा वह आपके और

1956
02:17:55,200 --> 02:17:58,800
गुरु जी के वजह से ही पड़ेगा।

1957
02:17:58,800 --> 02:18:02,400
धन्यवाद भैया।

1958
02:18:02,400 --> 02:18:06,800
बहुत बढ़िया। बहुत सुंदर है। बहुत ही बहुत ही उत्तम

1959
02:18:06,800 --> 02:18:10,800
भैया। बहुत अच्छा कविता भी आप लिख लेते हैं। हमने ये भी पता

1960
02:18:10,800 --> 02:18:14,880
चला हमको टैलेंट है। हां मेरे मेरी जानकारी में दो तीन

1961
02:18:14,880 --> 02:18:18,880
अच्छी-अच्छी कविताएं मैंने पढ़ी। बड़ी प्रेरणादायक और

1962
02:18:18,880 --> 02:18:23,120
बड़ा गदगद भी किया उन पंक्तियों ने। आपका आभार बहुत-बहुत सम्मान आपका।

1963
02:18:23,120 --> 02:18:27,120
नहीं अच्छा है। अवश्य ऐसा टैलेंट होना चाहिए। कविता कविता जब लिखते

1964
02:18:27,120 --> 02:18:31,280
है ना भैया तो वहां पे तू या फिर तुम शब्द का उपयोग

1965
02:18:31,280 --> 02:18:35,440
करने से हम देखते नहीं भैया है तो उनके लिए आप शब्द लिखेंगे चाहे कविता

1966
02:18:35,440 --> 02:18:41,440
सोच समझ के जितना भी लिखते भैया

1967
02:18:41,840 --> 02:18:45,920
आगे बढ़ते हुए हम देखेंगे यहां मनीष दुबे जी

1968
02:18:45,920 --> 02:18:49,920
उपस्थित है। मनीष दुबे जी आपका आवाज आ रही है तो प्लीज आप मनीष दुबे जी भी हैं

1969
02:18:49,920 --> 02:18:54,080
और संभवत अभिषेक जी भी हैं। हां अभिषेक गौर

1970
02:18:54,080 --> 02:18:58,160
जी भी यहां पर उपस्थित है हमारे साथ दो लोग ये बचे हुए हैं। आप दोनों में पहले मनीष

1971
02:18:58,160 --> 02:19:02,240
जी अगर आवाज जा रही हो तो परिचय दे दें। अभी समस्या हो तो अभिषेक जी आप

1972
02:19:02,240 --> 02:19:08,000
अगर कुछ बोलना चाहे

1973
02:19:08,000 --> 02:19:12,000
जी जी मेरा नाम अभिषेक कौर है। मैं वाराणसी का रहने वाला

1974
02:19:12,000 --> 02:19:14,560
हूं।

1975
02:19:14,560 --> 02:19:19,440
अभी मैं प्रथम भैया के से जुड़ा हुआ हूं।

1976
02:19:19,440 --> 02:19:23,600
तो अभी मैं अभी मेरा पहला दिन है तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा

1977
02:19:23,600 --> 02:19:28,000
कि यहां धर्म के बारे में अच्छी-अच्छी बातें होती हैं। गाय

1978
02:19:28,000 --> 02:19:32,400
गाय रक्षक भी होते हैं। ऐसे चीजें

1979
02:19:32,400 --> 02:19:36,560
और मुझे बहुत दुख की बात से कहना पड़ रहा है कि कुछ हम ही

1980
02:19:36,560 --> 02:19:41,680
लोग जैसे हिंदू हैं जो अपना ग्रंथ नहीं पढ़ते हैं।

1981
02:19:41,680 --> 02:19:43,840
जी

1982
02:19:43,840 --> 02:19:47,840
जैसे मैं मतलब अभी मतलब अभी मैं मतलब तीन-चार दिन से मैं पूजा कर रहा हूं।

1983
02:19:47,840 --> 02:19:51,920
वजह से मैं प्रथम भैया से भी जुड़ा हुआ हूं मैं मतलब तो अभी प्रथम भैया मुझे मतलब

1984
02:19:51,920 --> 02:19:55,920
गाइड कर रहे हैं एक सहयोग की वजह से तो मैं आजकल

1985
02:19:55,920 --> 02:20:00,000
मैं पूजा पाठ कर रहा हूं भगवान के मंत्र स्टेप कर रहा हूं तो मुझे बहुत

1986
02:20:00,000 --> 02:20:03,600
अच्छा फीलिंग हो रहा है

1987
02:20:03,600 --> 02:20:07,840
बहुत बढ़िया सब भैया आपका ही प्रभाव

1988
02:20:07,840 --> 02:20:13,120
है कि मित्र हैं हमारे अभिषेक जी मित्र हैं यहां पे हमारे साथ में है तो

1989
02:20:13,120 --> 02:20:17,120
आपका ही प्रभाव है कि इसे गुरुदेव कहते हैं कि मनोवादी जहां

1990
02:20:17,120 --> 02:20:21,120
एक पहुंच पहुंच जाता है। वो चारों तरफ अपना प्रभाव बिखेर देता

1991
02:20:21,120 --> 02:20:25,360
है क्योंकि उसके आगे कोई भी जो है नतमस्तक हुए बिना नहीं रहेगा। यदि कोई सच्चा

1992
02:20:25,360 --> 02:20:29,760
मनुवादी होगा। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि धर्म जो है

1993
02:20:29,760 --> 02:20:34,080
सब चीजों का सार वही है। सब चीजों को सभी चीजों का जो मूल तत्व वही है।

1994
02:20:34,080 --> 02:20:38,080
यदि कहीं पर कुछ भी भव्य है दिव्य है तो धर्म के कारण है। धर्म

1995
02:20:38,080 --> 02:20:42,160
के गुणों के कारण जैसे एक अग्नि की चिंगारी भी छोटी सी

1996
02:20:42,160 --> 02:20:46,160
चिंगारी होती है। जंगलों में जंगल के जंगल राख कर देती

1997
02:20:46,160 --> 02:20:50,640
है। तो ऐसे ही धर्म भी होता है। एक भी गुणधर्म का

1998
02:20:50,640 --> 02:20:54,960
हमें जो है भव्यता और दिव्यता का अनुभव करा देता।

1999
02:20:54,960 --> 02:20:56,880
यदि आज बुद्धिस्ट लोग और बौद्ध

2000
02:20:56,880 --> 02:21:00,960
लोगों का जो बहुत हमने देखा इतना नाम है इतना बेस्ट में इतना उनका जो है

2001
02:21:00,960 --> 02:21:05,280
प्रभाव क्यों है क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं बस महर्षि पतंजलि

2002
02:21:05,280 --> 02:21:09,280
के योग दर्शन में जो नियम और यम की जो बात हुई है उसमें से पांच वो

2003
02:21:09,280 --> 02:21:13,360
नियम उठा लिए अहिंसा शौच सत्य परिग्रह वाले

2004
02:21:13,360 --> 02:21:17,440
इस कारण से उनका इतना प्रभाव ये देखा ये इस छोटी सी चिंगारी के कारण वहां

2005
02:21:17,440 --> 02:21:21,600
पे इतना उनका प्रभाव जहां पे भी कहीं भी जापान में बड़ों

2006
02:21:21,600 --> 02:21:25,760
की बहुत सेवा की जाती है बड़ों को बहुत आदर दिया जाता हमारे यहां भी वृद्ध जनों को

2007
02:21:25,760 --> 02:21:29,840
धर्म का ये गुण है। तो इसलिए जापान का जो है थोड़ा उसके कल्चर को लेकर के

2008
02:21:29,840 --> 02:21:33,920
वेस्ट में बहुत जो है सम्मान होता है। बहुत मान होता है। तो जहां कहीं भी धर्म

2009
02:21:33,920 --> 02:21:38,000
का छोटा सा भी गुण होगा। इसमें वत्सल जी उस समय कह रहे थे कि कम्युनिस्ट

2010
02:21:38,000 --> 02:21:42,160
होते हैं ये सब होते हैं। तो ये सब भी कुछ नहीं है। ये सब भी मात्र आकर्षण इसीलिए

2011
02:21:42,160 --> 02:21:46,160
है। वो दिव्यता वहां पर इसीलिए है क्योंकि वहां धर्म का एक छोटा सा है। कार्ल

2012
02:21:46,160 --> 02:21:50,160
मार्क्स जो थे अपने जमाने के एक परोपकारी व्यक्ति थे।

2013
02:21:50,160 --> 02:21:54,240
उनके मन में यह विचार आया कि यह देखकर कि फैक्ट्री में जो बच्चे काम करते

2014
02:21:54,240 --> 02:21:58,400
हैं बड़े उनके समस्या होती है उनको प्रकार की यातनाएं

2015
02:21:58,400 --> 02:22:02,560
झेलनी पड़ती है तो इस कारण उन्होंने बहुत कुछ लिखा इसलिए मुझे भैया का एक बहुत पुराना वक्तव्य

2016
02:22:02,560 --> 02:22:06,560
याद आ गया कि चार्ल्स डार्विन जी भैया ने बोला था कि बाइबल को

2017
02:22:06,560 --> 02:22:10,640
पढ़ करके उनका मन बड़ा उछड़ गया धर्म आदि से और उन्होंने अपना जो पूरा सिद्धांत

2018
02:22:10,640 --> 02:22:11,920
अभी प्रकाशित किया बाद में जो

2019
02:22:11,920 --> 02:22:16,240
बहुत प्रसिद्ध भी हुआ तो भैया का इसपे ये कहना था कि यदि चार्ल्स डार्विन ने एक बार सात सिद्धांत

2020
02:22:16,240 --> 02:22:20,320
को जाना होता जो कि आज उस तरीके से प्रसारित प्रसारित नहीं हो पाए आ रहा है

2021
02:22:20,320 --> 02:22:24,480
और जो हम करना चाहते हैं जो हमारा लक्ष्य है तो शायद वो ऐसा ना

2022
02:22:24,480 --> 02:22:28,560
करें। एक बार मैं भैया से कहूंगा कि एक बार फिर से आप जो है उसको थोड़ा सा

2023
02:22:28,560 --> 02:22:32,800
विस्तृत रूप से समझा दें कि आपने क्या कहा था वो एक सिद्धांत था।

2024
02:22:32,800 --> 02:22:37,120
चार्ल्स डार्विन ने ईश्वर

2025
02:22:37,120 --> 02:22:41,440
के अस्तित्व का खंडन कर दिया था। और जहां

2026
02:22:41,440 --> 02:22:45,680
पर ये हुआ वहां पर ऐसा हो गया था। था। यद्यपि

2027
02:22:45,680 --> 02:22:49,760
हमारे जो प्रथम चैप्टर है ना जो आहान का कोर्स है उसमें पहले चैप्टर में

2028
02:22:49,760 --> 02:22:54,000
यही है। तो चार्ल्स डार्विन ने जब खंडन कर दिया था तो

2029
02:22:54,000 --> 02:22:58,560
क्या हुआ था कि चर्च बंद होने लगे वहां के। भाई

2030
02:22:58,560 --> 02:23:04,160
नास्तिकता से बेहतर तो है ना कि चर्च

2031
02:23:04,160 --> 02:23:08,320
जहां पे नियम तो जब चर्च ही बंद होने लगे तो यह होने लगा कि सारे रिश्ते

2032
02:23:08,320 --> 02:23:12,320
सारी मर्यादाएं सब कलंकित होने लगी। ना कोई मां है ना

2033
02:23:12,320 --> 02:23:16,400
कोई बहन है ना कोई पत्नी है कुछ नहीं है कुछ तो जब ऐसा

2034
02:23:16,400 --> 02:23:22,240
हुआ था तो चार्ल्स डार्विन ने ईश्वर का खंडन किया क्यों था

2035
02:23:22,240 --> 02:23:26,800
चार्ल्स डार्विन ने ईश्वर का खंडन इसीलिए किया था क्योंकि

2036
02:23:26,800 --> 02:23:27,360
उसके

2037
02:23:27,360 --> 02:23:31,600
पास समय रहते सनातन सिद्धांत पहुंचे ही नहीं थे उसने बाइबल

2038
02:23:31,600 --> 02:23:35,680
के अनुसार ईश्वर को जानने की प्रयास किया था बाइबल की जो चीजें

2039
02:23:35,680 --> 02:23:39,920
हैं सृष्टि रचना इत्यादि वो सब उसको मजाक लगी तो

2040
02:23:39,920 --> 02:23:44,000
उसने खंडन जो के आधार पर हमारी जो

2041
02:23:44,000 --> 02:23:48,400
व्याख्या है यदि उसने पढ़ ली होती और आज भी जितने भी नास्तिक

2042
02:23:48,400 --> 02:23:52,560
बने हैं वो नास्तिक या तो पहले बन चुके हैं तब शंकराचार्य को जान

2043
02:23:52,560 --> 02:23:56,880
रहे हैं तब सनातन के सिद्धांतों को जान रहे हैं तो पहले से अपनी एक मेंटालिटी

2044
02:23:56,880 --> 02:24:01,440
है कि मैं नास्तिक हूं मैं तो सुनूंगा ही नहीं

2045
02:24:01,440 --> 02:24:05,600
वरना कोई भी व्यक्ति जो जो शंकराचार्य को न्यूट्रल होकर

2046
02:24:05,600 --> 02:24:09,760
के सुन ले न्यूट्रल हो के मेंटालिटी अपनी पहली ना

2047
02:24:09,760 --> 02:24:13,920
पहले ना लेकर के वो ईश्वर के अस्तित्व को धर्म को माने

2048
02:24:13,920 --> 02:24:18,000
बिना नहीं रह सकता। आप देख लो आर्य

2049
02:24:18,000 --> 02:24:22,160
समाज के गर्भ से दिव्य क्या नाम है उनका? आईएस

2050
02:24:22,160 --> 02:24:28,160
कोचिंग वाले क्या नाम है?

2051
02:24:28,640 --> 02:24:33,120
समाज के गर्भ से दिव्य कीर्ति निकलते हैं। बताओ कितने

2052
02:24:33,120 --> 02:24:37,200
शंकराचार्य के अनुगत रहने वाले कितने घर है जहां पे नास्तिक हो

2053
02:24:37,200 --> 02:24:42,080
गया व्यक्ति? बताइए। है कोई जवाब वहां

2054
02:24:42,080 --> 02:24:46,160
से एक कदम आगे भक्ति और ज्ञान और वैराग्य सब निकलेगा

2055
02:24:46,160 --> 02:24:50,400
दिव्य कीर्ति जैसे नहीं जन्म लेंगे वहां ठीक है

2056
02:24:50,400 --> 02:24:54,400
तो यहां बात क्या है पूरे संसार

2057
02:24:54,400 --> 02:24:58,480
में केवल सनातन सिद्धांत के पहुंचने की देर

2058
02:24:58,480 --> 02:25:02,560
है अखिलेश यादव तब तक सनातन का खंडन

2059
02:25:02,560 --> 02:25:06,800
कर रहे हैं जब तक वह किसी सनातनी से

2060
02:25:06,800 --> 02:25:11,520
मनुवादी से बैठकर बात नहीं कर रहे हैं। अन्यथा मुंह में

2061
02:25:11,520 --> 02:25:15,760
बिल्कुल जो शब्द होंगे मुख से वो उड़

2062
02:25:15,760 --> 02:25:19,760
जाएंगे। वो केवल बात नहीं हो रही है। वो

2063
02:25:19,760 --> 02:25:23,840
वहां पर मीडिया में बयानबाजी हो रही है। यहां से हो रही है। अभी असतो

2064
02:25:23,840 --> 02:25:28,480
मा सद्गमया तमसो मागया मृत मृतम गमया से बात करना

2065
02:25:28,480 --> 02:25:34,480
तो अभी या तो वो ये बोलने लग जाएंगे कि हां राजनीति में भी धर्म है।

2066
02:25:34,560 --> 02:25:38,640
ठीक है? या तो उन्हें यह मानना पड़ जाएगा कि वह सनातन को मानने वाले नहीं

2067
02:25:38,640 --> 02:25:42,640
है। या उन्हें यह मानना पड़ जाएगा जब वो सनातन को ना

2068
02:25:42,640 --> 02:25:43,760
मानने वाले हो जाएंगे

2069
02:25:43,760 --> 02:25:47,840
तो उन्हें यह मानना पड़ जाएगा कि वो जो है ईश्वर

2070
02:25:47,840 --> 02:25:52,000
को मानने वाले नहीं है। और यदि वो या फिर और

2071
02:25:52,000 --> 02:25:56,000
एक स्टेप आगे जब वो ईश्वर को ना मानने वाले सिद्ध हो जाएंगे तो थोड़ी देर

2072
02:25:56,000 --> 02:26:00,240
बाद वो नास्तिक होते हुए स्वयं को मनुष्य

2073
02:26:00,240 --> 02:26:04,320
भी सिद्ध नहीं कर पाएंगे। अगर सैद्धांतिक तौर पर विवेचना की

2074
02:26:04,320 --> 02:26:08,400
जाएगी तो और यह सब उनके ही मुख से होगा। हम ऐसा कुछ

2075
02:26:08,400 --> 02:26:13,040
नहीं करेंगे। हम तो केवल उनके समक्ष वस्तु स्थिति को रखेंगे

2076
02:26:13,040 --> 02:26:17,040
और फिर वो या तो निरुत्तर होंगे और या बोलेंगे कि हां इस हिसाब से तो

2077
02:26:17,040 --> 02:26:21,840
मैं मनुष्य सिद्ध नहीं होता। या वो बोलेंगे इस हिसाब से तो मैं नास्तिक सिद्ध

2078
02:26:21,840 --> 02:26:25,840
ईश्वर को मानने वाला सिद्ध नहीं होता। या वो बोलेंगे इस हिसाब से तो

2079
02:26:25,840 --> 02:26:30,320
मैं सनातनी सिद्ध नहीं होता। हिंदू सिद्ध नहीं होता। या वो बोलेंगे

2080
02:26:30,320 --> 02:26:34,400
कि इस हिसाब से तो मैं जो है एक मनुष्य भी

2081
02:26:34,400 --> 02:26:38,560
सिद्ध नहीं हो सकता वस्तु स्थिति रख देने से तो ये केवल

2082
02:26:38,560 --> 02:26:42,880
सनातन सिद्धांत के पहुंचने मात्र की देर है जिस दिन

2083
02:26:42,880 --> 02:26:46,960
पहुंच गया अब ये क्या करते हैं आर्य समाजियों को देख

2084
02:26:46,960 --> 02:26:51,200
लीजिए शास्त्रार्थ शास्त्रार्थ करके व्यक्ति की आवाज को दबाने

2085
02:26:51,200 --> 02:26:55,280
का प्रयास करेंगे है ना शास्त्रार्थ कर लो मैं तुम्हें

2086
02:26:55,280 --> 02:26:59,040
चुनौती देता हूं शास्त्रार्थ की अरे भैया पूछा जा रहा है

2087
02:26:59,040 --> 02:27:03,040
ईश्वर अवतार क्यों नहीं ले सकता और अगर नहीं ले सकता तो उसके

2088
02:27:03,040 --> 02:27:07,760
सामने से अनंत सामर्थन का टैग लगा लो तो व्यक्ति को

2089
02:27:07,760 --> 02:27:11,920
भाई सामान्य व्यक्ति है उसको कहीं शास्त्रार्थ के लिए बुलाता हूं मैं तुम्हारा

2090
02:27:11,920 --> 02:27:16,240
चुनौती देता हूं व्यक्ति एक बार को सोचे यार कहीं मेरे लेखन ना हो जाए लेना

2091
02:27:16,240 --> 02:27:20,480
ना देना दो तो उनको इससे मतलब नहीं

2092
02:27:20,480 --> 02:27:24,720
है कि संशय कैसे संशय का निवारण क्या हो इस प्रश्न

2093
02:27:24,720 --> 02:27:28,880
का उत्तर क्या हो अरे ये जो कह रहा है ना सर्वशक्तिमान ईश्वर इसको हमने

2094
02:27:28,880 --> 02:27:33,120
शास्त्रार्थ के लिए तीनतीन बार चुनौती दी। अरे भैया तुम्हारे

2095
02:27:33,120 --> 02:27:37,120
यहां पर पता नहीं क्या क्या होता रहता है। रामपाल जैसे लोग तुम्हारे गर्भ से

2096
02:27:37,120 --> 02:27:41,360
निकले हैं। और क्या क्या हुआ है क्या क्या नहीं हुआ है। तो

2097
02:27:41,360 --> 02:27:45,520
तुम जब भी कहो बस मुंह उठा के चल दे आपके कहने पर। जाओ

2098
02:27:45,520 --> 02:27:50,000
जाके वहां के एसपी डीआईजी से लेटर लिखवा करके हमें संतुष्ट करो। हमारी सुरक्षा

2099
02:27:50,000 --> 02:27:54,000
सुनिश्चित करो। आएंगे आपके कहने पर। हम

2100
02:27:54,000 --> 02:27:58,000
ऐसे कैसे चले आए भाई? और या फिर हम अपने जीवन का एक समय

2101
02:27:58,000 --> 02:28:02,160
निकाले फिर आपके बारे में पता करें कि आप कहां बुला रहे हो वहां क्या

2102
02:28:02,160 --> 02:28:06,240
है क्या नहीं है इतना समय होगा तो करेंगे अन्यथा आप आ

2103
02:28:06,240 --> 02:28:10,720
सकते हैं ना आवश्यक क्यों है कि हम ही आए आप आ जाइए

2104
02:28:10,720 --> 02:28:14,080
नहीं हमने शास्त्रार्थ के लिए इस सवाल का जवाब नहीं

2105
02:28:14,080 --> 02:28:18,080
दिया हमने और जब शास्त्रार्थ के लिए होने लगा डिसाइड

2106
02:28:18,080 --> 02:28:22,160
तो क्या हुआ कि नहीं ईश्वर सर्वशक्तिमान पर बात नहीं होगी

2107
02:28:22,160 --> 02:28:26,400
जो मूल चाह का विषय है उस पर बात ही नहीं होगी दूसरे

2108
02:28:26,400 --> 02:28:30,400
विषयों में बात होगी क्योंकि हमारा प्रयोजन धर्म को

2109
02:28:30,400 --> 02:28:35,040
सिद्ध करना नहीं है। हमारा प्रयोजन आर्य समाज

2110
02:28:35,040 --> 02:28:39,280
का विरोध करने आर्य समाज की कुछ चीजों का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति

2111
02:28:39,280 --> 02:28:43,440
का व्यक्ति की आवाज को दबाना है। हमारा प्रयोजन

2112
02:28:43,440 --> 02:28:47,440
ये नहीं हमारा उद्देश्य ये नहीं धर्म की स्थापना हो। ईश्वर का अस्तित्व की

2113
02:28:47,440 --> 02:28:51,440
स्थापना हो। तो क्या हुआ कि जो मैसेज

2114
02:28:51,440 --> 02:28:55,600
जिस जहां पर सिद्धांत के पहुंचने की बात थी

2115
02:28:55,600 --> 02:28:59,600
वो पहुंचने ही नहीं दिया गया कि ईश्वर वही

2116
02:28:59,600 --> 02:29:03,680
है जो कुछ भी कर सकता है इस बात पर बात ही नहीं करेंगे हम तो शास्त्रार्थ

2117
02:29:03,680 --> 02:29:08,000
का चौआ करेंगे अच्छा एक व्यक्ति ने फोन किया शास्त्रार्थ कर लो मीडिया बुलाएंगे

2118
02:29:08,000 --> 02:29:12,080
ये करेंगे इतना तामझाम बता दो व्यक्ति को कि वो साधारण

2119
02:29:12,080 --> 02:29:16,720
सा जो प्रश्न है वो गायब ही हो जाए दुनिया से इतना

2120
02:29:16,720 --> 02:29:20,800
बड़ा चोला उड़ा दो उसको शास्त्रार्थ के रूप में और

2121
02:29:20,800 --> 02:29:24,960
हां आज्ञा मिली होती तो अवश्य कर लेते

2122
02:29:24,960 --> 02:29:29,520
है ना कुछ पीछे से व्यवस्थाएं हैं

2123
02:29:29,520 --> 02:29:33,280
इसलिए तो खैर

2124
02:29:33,280 --> 02:29:37,280
हमने सभी चीजें यहां प्रस्तुत कर दी और मेरे ख्याल से सबके वक्तव्य हो

2125
02:29:37,280 --> 02:29:41,920
गए हैं और मैं इस तरह से कार्यक्रम को थोड़ा सा विराम दूंगा

2126
02:29:41,920 --> 02:29:46,480
अंत में प्रथम जी बात करेंगे है ना पर

2127
02:29:46,480 --> 02:29:50,480
सबसे पहले लास्ट वाला जो लास्ट वाला कार्य है वो कर लिया जाए। यहां

2128
02:29:50,480 --> 02:29:54,560
आशुतोष शर्मा जी कुछ पूछना चाह रहे थे एक बारे। मैं मैं एक बात कह दूं इसके बाद

2129
02:29:54,560 --> 02:29:59,040
फिर मैं वाणी को विराम ही दूंगा प्रॉपर कि गुरुदेव

2130
02:29:59,040 --> 02:30:04,240
ने एक बात कही थी कि भाई अ

2131
02:30:04,240 --> 02:30:08,240
स्वयं को स्वयं के अंदर आत्म का बल जो है

2132
02:30:08,240 --> 02:30:12,320
सवा घंटे की भक्ति का बल जो है अर्जित करें और

2133
02:30:12,320 --> 02:30:16,320
उसके माध्यम से संघ का बल अर्जित करें और एक

2134
02:30:16,320 --> 02:30:20,320
एक व्यक्ति ऐसा तैयार हो जो अन्य 10

2135
02:30:20,320 --> 02:30:24,400
को तैयार कर सके और देखिए मेरे जीवन का मैंने

2136
02:30:24,400 --> 02:30:28,480
कई बार बताया कि मेरे जीवन का कोई उद्देश्य बचा नहीं है। कार,

2137
02:30:28,480 --> 02:30:32,640
मकान, गाड़ी ऐसा ऐसा नहीं कि मैंने वो प्राप्त कर लिया। मतलब मुझे अपने जीवन

2138
02:30:32,640 --> 02:30:36,640
में कोई उद्देश्य नहीं मिलता है। मुझे गुरुदेव की वाणी, हिंदू राष्ट्र धर्म

2139
02:30:36,640 --> 02:30:41,360
स्थापना, भगवान श्री कृष्ण के वचन और

2140
02:30:41,360 --> 02:30:44,960
प्रभु श्री राम की मर्यादा ये सब मेरे जीवन के उद्देश्य

2141
02:30:44,960 --> 02:30:49,200
हैं। तो जो आज मैंने देखा कि आज कुछ

2142
02:30:49,200 --> 02:30:53,200
लोगों ने कहा कि मैं जो है उनके जीवन में आने वाले परिवर्तन

2143
02:30:53,200 --> 02:30:57,200
के परिवर्तन में या उनकी शंकराचार्य भगवान तक

2144
02:30:57,200 --> 02:31:01,200
पहुंचने की यात्रा में आह्वान का निमित्त मात्र भी उन्होंने नाम

2145
02:31:01,200 --> 02:31:05,200
लिया तो इससे ऐसा लग रहा है कि आज मेरा जीवन सार्थक हुआ और

2146
02:31:05,200 --> 02:31:09,200
जो गुरुदेव भगवान ने एक आदेश दिया था कि अन्य द अन्य द

2147
02:31:09,200 --> 02:31:13,200
को योग्य बनाइए बस एक एक व्यक्ति में इतना वो हो

2148
02:31:13,200 --> 02:31:17,280
जो अन्य द लोगों को योग्य बनाए और आज मेरे सामने इतने सारे योग्य

2149
02:31:17,280 --> 02:31:21,440
व्यक्ति है जो आज यहां पर बता रहे हैं कि उन्होंने

2150
02:31:21,440 --> 02:31:25,440
अन्य को भी योग्य बनाया। आज कितने सारे आप

2151
02:31:25,440 --> 02:31:29,680
सब के रूप में मैं शिवश को ही देख रहा हूं। अभी मैं अपने चेहरे

2152
02:31:29,680 --> 02:31:33,680
को देख कर के जब मैं ये आप लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंस में

2153
02:31:33,680 --> 02:31:37,680
बात कर रहा हूं। तो मुझे मेरा चेहरा भी दिख रहा है ना। तो मैं अपने चेहरे

2154
02:31:37,680 --> 02:31:41,840
को देख कर के एक समय पर यह अभी इसी मीटिंग के दौरान

2155
02:31:41,840 --> 02:31:46,000
ये चिंता कर रहा था कि आज ये

2156
02:31:46,000 --> 02:31:50,000
चेहरा है। आज ये चेहरा है। किसी शत्रु के

2157
02:31:50,000 --> 02:31:54,160
गढ़ में घुसकर जो है आक्रमण करने

2158
02:31:54,160 --> 02:31:58,400
के लिए आज ये चेहरा उपस्थित है। कल क्या होगा? कल कौन लाउडस्कर लेकर के आहान

2159
02:31:58,400 --> 02:32:00,480
करेगा? कल कौन करेगा?

2160
02:32:00,480 --> 02:32:04,640
कौन करेगा? कल तब मुझे तब मुझे ध्यान आया गुरुदेव

2161
02:32:04,640 --> 02:32:08,800
का वो वक्तव्य और इतने सारे चेहरे जो मेरे सामने हैं। ये करेंगे

2162
02:32:08,800 --> 02:32:12,800
आहान। ये हाथ में लेंगे लाउडस्कर। है

2163
02:32:12,800 --> 02:32:16,800
ना? जब यह चेहरा नहीं होगा तो आवाान का आप लोगों आप

2164
02:32:16,800 --> 02:32:20,800
लोग आहान के चेहरे होगे तो वो मुझे दिखाई

2165
02:32:20,800 --> 02:32:25,520
दिया अभी अभी मैं उस चिंता में पड़ा था तो

2166
02:32:25,520 --> 02:32:29,600
वो आहान सबकी ओर से है आप लोगों के रूप में आहान

2167
02:32:29,600 --> 02:32:33,600
ही है और मेरे रूप में आप सब है भगवत गीता का 435 वाला

2168
02:32:33,600 --> 02:32:37,840
श्लोक है कि शंकराचार्य भगवान से ज्ञान

2169
02:32:37,840 --> 02:32:43,280
क्या प्राप्त हुआ 434 में क्या कहा भगवान ने उस तत्वदर्शी के पास जा

2170
02:32:43,280 --> 02:32:47,360
वो क्या ज्ञान देगा आपको? तत्वदर्शी संत वो

2171
02:32:47,360 --> 02:32:51,360
ज्ञान ऐसा ज्ञान होगा जिसके कारण पहले तू समस्त

2172
02:32:51,360 --> 02:32:55,600
संसार को स्वयं में और पीछे मुझ में देखेगा भगवान

2173
02:32:55,600 --> 02:32:59,600
और वही आज हो रहा है। देखिए एक इस मीटिंग के चलते चलते

2174
02:32:59,600 --> 02:33:05,280
ही ये मुझे चिंता आई कि कल कौन होगा जो घर में घुसकर

2175
02:33:05,280 --> 02:33:09,280
लोगों के निडर होकर के निर्भीकता के साथ पहुंचेगा

2176
02:33:09,280 --> 02:33:13,440
आहान करने के लिए उठाएगा लाउडस्कर सड़क पर उतरेगा कौन होगा

2177
02:33:13,440 --> 02:33:15,920
कल अगला तो मैंने देखा इतने

2178
02:33:15,920 --> 02:33:20,160
इतने सारे आहान तो आज ही खड़े हो चुके हैं। अभी खड़े हैं। इतने

2179
02:33:20,160 --> 02:33:24,320
सारे आहान तो मुझे चिंता करने की क्या आवश्यकता है? गुरुदेव का वचन

2180
02:33:24,320 --> 02:33:29,360
सार्थक हो रहा है। तो इसी के साथ वाणी को विराम दूंगा। जी

2181
02:33:29,360 --> 02:33:35,360
जी आशुतोष भैया आप प्रश्न कुछ पूछना चाह रहे हैं। वैसे पूछ

2182
02:33:38,880 --> 02:33:43,200
नहीं मैं अपना अनुभव बताना चाह रहा हूं। जैसा शिवंश

2183
02:33:43,200 --> 02:33:47,280
भाई ने अभी बताया मैं भी अपने जीवन के लंबे समय के लिए तो

2184
02:33:47,280 --> 02:33:51,360
था नास्तिक ही तब आहान चैनल नहीं था तो

2185
02:33:51,360 --> 02:33:56,960
मैं जाकर सीधा भिड़ गया था गुरुदेव से अच्छा

2186
02:33:56,960 --> 02:34:01,280
और जैसे ये लोग बोलते हैं कि शास्त्रार्थ के लिए आ जाओ गुरुदेव

2187
02:34:01,280 --> 02:34:05,280
एक 12 साल 13 साल 14 साल के बच्चे का भी पूरी तरह से

2188
02:34:05,280 --> 02:34:09,440
जवाब देते हैं उसका भी एक-एक शब्द सुनते हैं

2189
02:34:09,440 --> 02:34:15,360
इनमें अगर हिम्मत हो तो यह जाके सीधा वहां

2190
02:34:15,360 --> 02:34:20,080
जी बस इतना बोलना चाहता था धन्यवाद

2191
02:34:20,080 --> 02:34:24,400
वहां जाके ना वहां शक्ति खींच जाती है बाली वाला जुकाम

2192
02:34:24,400 --> 02:34:29,440
नहीं होता था वो हो जाता है वहां जाते वहां कोई नहीं है केवल

2193
02:34:29,440 --> 02:34:33,680
यद्यपि उन लोगों ने छात्र की चुनौतियां भेजी है हमने कहा भी है कि

2194
02:34:33,680 --> 02:34:37,680
ठीक है आपके वहां आने का हमारे पास समय नहीं है तो आप यहां आ जाइए

2195
02:34:37,680 --> 02:34:41,760
आपके ज्यादा वो चिंगारी फड़की हुई है उनके बस तरीके हैं।

2196
02:34:41,760 --> 02:34:45,760
आप ऐसा कुछ हम जब नीति की बात करेंगे समझाएंगे तो यहां

2197
02:34:45,760 --> 02:34:49,840
जब यहां आने का तय हो गया लखनऊ में व्यवस्थित होने का तय हो गया सब

2198
02:34:49,840 --> 02:34:54,320
हो गया तो वो कह रहे हैं कि ईश्वर पर बात नहीं होगी दूसरी चीजों पर बात होगी

2199
02:34:54,320 --> 02:34:58,400
अरे भाई दूसरी ऐसी कौन सी चीज है जिसका खंडन हो जाने के बाद अब आप

2200
02:34:58,400 --> 02:35:02,400
हमारी सारी चीजें मान भैया वहां पर पैसों पे बात होगा पैसों

2201
02:35:02,400 --> 02:35:06,640
पे है ना हां जी

2202
02:35:06,640 --> 02:35:10,640
तो दूसरी एकमात्र ईश्वर ऐसी चीज है जिसको आप सिद्ध कर

2203
02:35:10,640 --> 02:35:14,720
दो जिसके पास ईश्वर है उसके पास धर्म है। आप हमें ले

2204
02:35:14,720 --> 02:35:19,200
चलो। ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो। ले चलो। कहां

2205
02:35:19,200 --> 02:35:24,800
कहां चल के नारे लगाने निराकार ईश्वर के? बताइए।

2206
02:35:24,800 --> 02:35:29,360
तो खैर वो उन्हें इससे मतलब नहीं है। धर्म संस्थापना और ईश्वर के

2207
02:35:29,360 --> 02:35:33,440
चर्चा देख रहे थे। उसमें जो सवाल आपने पूछा था एक व्यक्ति से उसका

2208
02:35:33,440 --> 02:35:37,440
जवाब ना देकर के कुछ और ही जवाब दे रहे थे। उसके बाद जब उन्होंने सवाल

2209
02:35:37,440 --> 02:35:41,520
किया तो आपका एक जवाब आया अंगूर। उस समय भैया हमको

2210
02:35:41,520 --> 02:35:46,000
बहुत अच्छा लगा था कि जैसे ही जवाब देना चाहिए।

2211
02:35:46,000 --> 02:35:50,160
वो वीडियो बहुत बढ़िया और भैया जैसे आपने कहा ना कि वो

2212
02:35:50,160 --> 02:35:54,240
लोग शास्त्रार्थ के लिए बुलाते हैं। पहले मीडिया आएगा ये आएगा। अरे

2213
02:35:54,240 --> 02:35:59,280
आपके पास है उतना क्षमता तो आप दो सवालों के जवाब दे दीजिए ना।

2214
02:35:59,280 --> 02:36:03,840
दुनिया भी देखेगा और किसी के साथ दुर्व्यवहार आडंबर करना है। पहले

2215
02:36:03,840 --> 02:36:08,000
आडंबर से दबाना है। पहले तो भटकाएंगे ये लोग

2216
02:36:08,000 --> 02:36:12,000
कि किसी भी दूसरे टॉपिक पे भटका देते हैं। और

2217
02:36:12,000 --> 02:36:16,720
भैया अभी तो ऐसा प्रतीत होता है ना कि ये लोग हार चुके हैं।

2218
02:36:16,720 --> 02:36:20,720
बस दुनिया में मीडिया बुला ली चाहिए। YouTube लाइव पर चर्चा होगा भैया।

2219
02:36:20,720 --> 02:36:24,880
किसी के जान के साथ दुर्व्यवहार भी नहीं होगा। सेफ्टी भी रहेगा सबका।

2220
02:36:24,880 --> 02:36:28,960
यह सब नहीं देख के इन लोगों को व्यवस्था पहले करना है।

2221
02:36:28,960 --> 02:36:33,920
वो इसीलिए करना है कि व्यक्ति उसमें जो है भय खाए आने से लोग इसीलिए

2222
02:36:33,920 --> 02:36:38,400
दूसरी बात है और चिंता की बात नहीं है। बात ये भी है कि समय भी तो होना चाहिए।

2223
02:36:38,400 --> 02:36:39,920
हम आपकी जांच कर सके

2224
02:36:39,920 --> 02:36:43,920
कैसे क्या है मामला व्यवस्था या फिर ये

2225
02:36:43,920 --> 02:36:48,400
लेटर जब भेजते हैं तो वहां के डीएम से वहां के एसपी से

2226
02:36:48,400 --> 02:36:52,400
जो वहां के वो हो जिनका नेतृत्व हो जिनके ऊपर

2227
02:36:52,400 --> 02:36:56,400
दायित्व हो वहां का वहां से लिखवाए क्या आपकी सुरक्षा हम सुनिश्चित करते हैं आप आइए

2228
02:36:56,400 --> 02:37:00,640
यहां हम क्यों चल भाई एक चीज और देखते हैं आप इतने सारे

2229
02:37:00,640 --> 02:37:04,800
ब्रांच जो होते हैं इतने सारे शाखा होते हैं सभी शाखा में चाहे ईॉन के हो चाहे आर्य

2230
02:37:04,800 --> 02:37:08,880
समाज के हो हर जगह आप गए तो वहां पे तो इन लोगों आपको विद्वान व्यक्ति को

2231
02:37:08,880 --> 02:37:12,880
ही उस पद पर बैठाना चाहिए ना। जब चर्चा कर लेते हैं ना आप तो फिर यह

2232
02:37:12,880 --> 02:37:17,040
विदुषी हो चाहे विद्वान हो उसका मुंह बंद हुआ। फिर उसके बाद आप उसको

2233
02:37:17,040 --> 02:37:21,040
विद्वान नहीं कह रहे। कहना क्या चाहते? और अगर उसका मुंह बंद नहीं हुआ

2234
02:37:21,040 --> 02:37:25,040
था तो फिर आप शास्त्रार्थ किस आधार पर कर रहे हैं? किस

2235
02:37:25,040 --> 02:37:29,120
आधार पे? इसका मतलब है वो, या तो वो विद्वान नहीं था और या फिर

2236
02:37:29,120 --> 02:37:33,200
उसका मुंह बंद हुआ। आप लोगों ने या तो वो लोग मूर्खों को बैठा के रखा है उस

2237
02:37:33,200 --> 02:37:38,640
पद पे। दो आज के इस

2238
02:37:38,640 --> 02:37:42,800
क्या कहते हैं ये जी संकल्प वाला कार्य

2239
02:37:42,800 --> 02:37:47,520
करा दे फिर इसको संपन्न करते हैं दो मिनट का कार्य उसको करा

2240
02:37:47,520 --> 02:37:51,760
दीजिए सबसे पहले मैं बस एक अंतिम मैं पूछना चाहूंगा किसी से नाम

2241
02:37:51,760 --> 02:37:56,000
शास्त्र को लेकर के अभियान को लेकर के कोई भी शंका किसी की हो कोई प्रश्न

2242
02:37:56,000 --> 02:38:00,000
हो अभी तत्काल पूछ ले नहीं तो हम इसको आगे बढ़ाते अभी किसी का

2243
02:38:00,000 --> 02:38:04,000
कोई भी प्रश्न हो अपने अनुभव आदि कुछ ना साझा करें मैं कहूंगा बहुत

2244
02:38:04,000 --> 02:38:08,000
लंबा गया है। प्रशांत जी का बहुत-बहुत सम्मान, बहुत-बहुत आभार।

2245
02:38:08,000 --> 02:38:12,080
वो भी यहां पर उपस्थित हैं और उनकी जी भी आए हैं। जी पिछली बार

2246
02:38:12,080 --> 02:38:16,080
भी आए थे। अपना परिचय भी दिया था उन्होंने। प्रशांत भैया ने उनकी उपस्थिति हमारे लिए

2247
02:38:16,080 --> 02:38:20,720
सदैव अतुलनीय है। सदैव सम्माननीय है।

2248
02:38:20,720 --> 02:38:24,800
सभी लोगों को जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। भैया जय

2249
02:38:24,800 --> 02:38:28,080
श्री राम भैया।

2250
02:38:28,080 --> 02:38:32,240
जी जो है मुझे लगता है किसी की कोई शंका

2251
02:38:32,240 --> 02:38:36,560
ऐसी है नहीं। मैंने सूचित कर ही दिया है कि पांच सत्र होते हैं भगवान श्रीमन

2252
02:38:36,560 --> 02:38:40,640
नारायण तत्पश्चात गणेश जी फिर सूर्य भगवान दुर्गा

2253
02:38:40,640 --> 02:38:44,720
माता और शिव जी का उसमें नाम स्मरण होता है इनकी लिंक ग्रुप में समयसमय पर

2254
02:38:44,720 --> 02:38:48,800
साझा हो जाती है आधे घंटे पहले एक घंटे पहले और पांच मिनट पहले जाइन करना होता

2255
02:38:48,800 --> 02:38:52,960
है पांच मिनट तक प्रतीक्षा आदि होती है कि सभी लोग आ जाए और तत्पश्चात उसको आरंभ

2256
02:38:52,960 --> 02:38:57,040
करके 15 मिनट का वो सत्र संचालित होता है कभी कभी उसमें सत्र के

2257
02:38:57,040 --> 02:39:01,040
समाप्ति के बाद परस्पर संवाद भी हो जाता है अभी के लिए सत्र बहुत अच्छे से

2258
02:39:01,040 --> 02:39:05,120
उतना भव्य रूप से नहीं संचालित हो रहे हैं पर आगे हमारे बहुत से उसमें प्रयास हम उसमें

2259
02:39:05,120 --> 02:39:09,360
करने का करेंगे और इसी के साथ मैं चाहूंगा

2260
02:39:09,360 --> 02:39:13,840
कि आप सभी लोग जो भी यहां पे उपस्थित हैं और आगे

2261
02:39:13,840 --> 02:39:17,840
नए लोग भी जो आए हैं पहले जो आए होंगे उन्होंने तो लिया ही होगा जो नए लोग आगे

2262
02:39:17,840 --> 02:39:22,240
आज आए हैं और वो आगे नामास्त्र में जुड़ेंगे और नाम जप करेंगे वो कुछ संकल्प

2263
02:39:22,240 --> 02:39:26,320
एक ले ले कि वो अवश्य जो है यह कार्य करेंगे यहां पर गौतम

2264
02:39:26,320 --> 02:39:30,320
भैया उपस्थित है मुझे लगता है गौतम भैया आप सभी के स्क्रीनशॉट ले लीजिएगा आप

2265
02:39:30,320 --> 02:39:34,400
लोग अपना नाम और नंबर इन कॉल मैसेजेस में डाल दीजिए। जो लोग आज संकल्प

2266
02:39:34,400 --> 02:39:38,400
ले रहे हैं आप सभी को सर्टिफिकेट शीघ्र जारी कर दिए जाएंगे। तो जो भी

2267
02:39:38,400 --> 02:39:42,800
यहां नवीन सदस्य उपलब्ध हो वो मेरे साथ यहां पे

2268
02:39:42,800 --> 02:39:43,300
संकल्प

2269
02:39:43,280 --> 02:39:47,360
को दोहराएंगे। ध्यान दें संकल्प में आपको संकल्प संकल्प का जो

2270
02:39:47,360 --> 02:39:51,440
मीटिंग है आप एक अलग से छोटी सी एक अलग मीटिंग रख ले

2271
02:39:51,440 --> 02:39:55,440
संकल्प की तो मेरे ख्याल से ज्यादा उचित रहेगा।

2272
02:39:55,440 --> 02:39:59,440
अथवा WhatsApp कॉल इत्यादि के माध्यम से रख ले। दो ही

2273
02:39:59,440 --> 02:40:03,440
मिनट लगेगा भैया मुझे लगता है तो ज्यादा लंबा नहीं खींचेगा। फिर

2274
02:40:03,440 --> 02:40:06,720
उसके बाद समापन है।

2275
02:40:06,720 --> 02:40:11,040
जैसा आप कह दो दो मिनट बस लगेगा। नहीं

2276
02:40:11,040 --> 02:40:15,200
संकल्प किस भाषा में है? हिंदी में हिंदी में भैया। अच्छा अच्छा

2277
02:40:15,200 --> 02:40:19,680
अच्छा ठीक है। ठीक करिए। जी जी। तो मैं

2278
02:40:19,680 --> 02:40:23,840
यहां सभी सदस्यों से जो है आग्रह करता हूं कि जो नवीन सदस्य जो भी संकल्प

2279
02:40:23,840 --> 02:40:27,840
लेना चाहते हैं वो संकल्प ले ले। संकल्प में एक बात ध्यान रखें कि आपको यथाशक्ति

2280
02:40:27,840 --> 02:40:32,000
नामास्त्र में जुड़ना और उसके नाम जप उसके माध्यम से करने

2281
02:40:32,000 --> 02:40:36,000
का संकल्प लेना है और मिनिमम या तो आप किसी भी

2282
02:40:36,000 --> 02:40:40,560
एक दिन सवा घंटे का कोई जाप करें

2283
02:40:40,560 --> 02:40:44,640
अथवा आप आठ 15 मिनट वाले सत्र करें। महीने में एक

2284
02:40:44,640 --> 02:40:48,800
महीने का मैं बता रहा हूं। ये आपका मिनिमम है। न्यूनतम इतना आपका होना चाहिए। मुझे लगता है इतना

2285
02:40:48,800 --> 02:40:52,800
सभी के लिए संभव है कि महीने के आठ सत्र 15 मिनट की मात्रा आप

2286
02:40:52,800 --> 02:40:56,880
कर सकते हैं। नहीं तो आप केवल सवा घंटे वाला कोई एक सत्र तो कर ही सकते हैं।

2287
02:40:56,880 --> 02:40:58,480
संडे तो चार होते हैं महीने में।

2288
02:40:58,480 --> 02:41:02,480
उन चार में से किसी एक को आप कर सकते हैं। सवा घंटे वाला सत्र नहीं तो आठ

2289
02:41:02,480 --> 02:41:06,800
सत्र भी आपके पास उपलब्ध है। उन आठ में से आप कोई कर सकते हैं। महीने में बहुत सत्र होते हैं।

2290
02:41:06,800 --> 02:41:12,320
तो मैं चाहूंगा जो मैं बोल रहा हूं आप सभी लोग पीछे पीछे दोहराए।

2291
02:41:12,320 --> 02:41:16,720
मैं आप सभी अपना अपना नाम लेंगे।

2292
02:41:16,720 --> 02:41:21,040
यह संकल्प लेता हूं या लेती हूं। यह संकल्प

2293
02:41:21,040 --> 02:41:26,480
लेता हूं। मैं

2294
02:41:26,480 --> 02:41:31,040
नाम जप सत्रों में नामों

2295
02:41:31,040 --> 02:41:35,360
में नियमित रूप से सहभागी बनूंगा या बनूंगी

2296
02:41:35,360 --> 02:41:39,760
बन बनूंगी नियमित रूप से सहभागी बनूंगा

2297
02:41:39,760 --> 02:41:42,160
बनूंगा

2298
02:41:42,160 --> 02:41:46,880
मैंने यह संकल्प पूर्ण श्रद्धा एवं निष्ठा से लिया है कि

2299
02:41:46,880 --> 02:41:51,280
मैंने यह संकल्प पूर्ण श्रद्धा निष्ठा से लिया है कि

2300
02:41:51,280 --> 02:41:55,440
मैं यथाशक्ति नाम जप करूंगा या करूंगी

2301
02:41:55,440 --> 02:42:00,400
मैं

2302
02:42:00,400 --> 02:42:04,560
यदि मुझसे कभी भूलवश नाम जप नहीं हो पाएगा

2303
02:42:04,560 --> 02:42:08,800
तो मैं बाद में प्रायश्चित स्वरूप यदि

2304
02:42:08,800 --> 02:42:12,880
मुझसे कभी नाम नहीं हो पाएगा तो

2305
02:42:12,880 --> 02:42:15,760
स्वरूप

2306
02:42:15,760 --> 02:42:21,760
उस जप को पूर्ण करने का प्रयास करूंगा या करूंगी उस

2307
02:42:22,560 --> 02:42:26,720
करूंगा इसके अतिरिक्त इसके

2308
02:42:26,720 --> 02:42:31,360
अतिरिक्त इसके अतिरिक्त मैं नाम जप को मैं नाम

2309
02:42:31,360 --> 02:42:35,600
को आध्यात्मिक आध्यात्मिक आध्यात्मिक तथा

2310
02:42:35,600 --> 02:42:39,840
धार्मिक विकास का माध्यम मानूंगा या मानूंगी तथा

2311
02:42:39,840 --> 02:42:45,040
धार्मिक विकास का माध्यमिक

2312
02:42:45,040 --> 02:42:51,040
मैंने यहां संकल्प केवल अपने लिए नहीं मैंने संकल्पित

2313
02:42:52,080 --> 02:42:54,800
सर्वजन कल्याण

2314
02:42:54,800 --> 02:43:00,160
सर्व कल्याण उत्थान

2315
02:43:00,160 --> 02:43:04,480
सृष्टि में शांति सृष्टि में सृष्टि में शांति

2316
02:43:04,480 --> 02:43:08,800
तथा पूज्य गुरुदेव भगवान के तथा पूज्य गुरुदेव

2317
02:43:08,800 --> 02:43:13,520
भगवान के सनातन वेद शास्त्र सम्मत

2318
02:43:13,520 --> 02:43:19,520
सनातन वेद शास्त्र हिंदू राष्ट्र

2319
02:43:20,320 --> 02:43:24,480
के स्वप्न को पूर्ण करने के लिए लिया है। श्लोकों

2320
02:43:24,480 --> 02:43:30,480
को करने के लिए लिया है। अद

2321
02:43:31,200 --> 02:43:35,840
मैं इस नाम साधना को मैं इस नाम साधना को

2322
02:43:35,840 --> 02:43:40,160
अपने जीवन का अपने जीवन का जीवन का अभिन्न

2323
02:43:40,160 --> 02:43:44,320
अंग बनाने का अभिन्न अंग बनाने का

2324
02:43:44,320 --> 02:43:50,080
अखंड संकल्प लेता हूं या लेती हूं। दृढ़ संकल्प लेता हूं।

2325
02:43:50,080 --> 02:43:54,480
धन्यवाद आप सभी यहां आए उपस्थित हुए बहुत अच्छा लगा आपने

2326
02:43:54,480 --> 02:43:58,480
संकल्प लिया बहुत सुंदर जी और ये जी

2327
02:43:58,480 --> 02:44:02,560
का लिखा हुआ संकल्प है थोड़ा सा मैंने इसमें अपनी ओर से भाषा का परिवर्तन अभी

2328
02:44:02,560 --> 02:44:06,640
किया है संकल्प है बहुत-बहुत बधाई हो

2329
02:44:06,640 --> 02:44:10,880
आप सभी को जिसज महानुभाव ने भी अभी-अभी संकल्प लिया है आपका

2330
02:44:10,880 --> 02:44:15,200
बहुत-बहुत अभिनंदन स्वागत और बधाई

2331
02:44:15,200 --> 02:44:19,200
आप शुभकामनाओं के पात्र हैं आप सम्मान के पात्र हमारी ओर से

2332
02:44:19,200 --> 02:44:23,200
और अत्यंत ऊर्जावान आपने संकल्प दिलवाया प्रथम जी आपको भी

2333
02:44:23,200 --> 02:44:27,840
इसके लिए आपका बहुत-बहुत अभिनंदन और सम्मान

2334
02:44:27,840 --> 02:44:32,960
भैया छोटा सा मंगलाचरण करा के संपन्न करवा दीजिए

2335
02:44:32,960 --> 02:44:35,520
ठीक है श्री

2336
02:44:35,520 --> 02:44:39,680
राम जय राम जय जय राम

2337
02:44:39,680 --> 02:44:45,200
श्री राम श्री राम जय राम जय जय राम

2338
02:44:45,200 --> 02:44:49,680
श्री राम जय राम जय जय राम श्री

2339
02:44:49,680 --> 02:44:54,000
राम जय राम जय जय राम राम

2340
02:44:54,000 --> 02:44:58,400
श्री राम जय राम जय जय राम

2341
02:44:58,400 --> 02:45:02,640
श्री राम जय राम जय जय

2342
02:45:02,640 --> 02:45:06,720
राम धर्म की जय हो

2343
02:45:06,720 --> 02:45:12,720
अधर्म का हो प्राणियों में

2344
02:45:13,600 --> 02:45:17,760
विश्व का हो गौ माता माता

2345
02:45:17,760 --> 02:45:23,120
की जय हो गौ हत्या

2346
02:45:23,120 --> 02:45:26,720
हो भारत

2347
02:45:26,720 --> 02:45:28,720
हो भारत

2348
02:45:28,720 --> 02:45:33,360
अखंड हर हिंदू

2349
02:45:33,360 --> 02:45:36,800
सेना हो हर हिंदू

2350
02:45:36,800 --> 02:45:41,180
सनातनी हो हर हिंदू

2351
02:45:41,180 --> 02:45:45,440
[संगीत]

2352
02:45:45,440 --> 02:45:51,440
हम भारत भव्य बनाए [संगीत]

2353
02:45:51,440 --> 02:45:56,560
भारत भव्य बनाएंगे

2354
02:45:56,560 --> 02:46:01,040
अखंड हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की

2355
02:46:01,040 --> 02:46:07,040
जय हो अखंड हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की

2356
02:46:07,600 --> 02:46:12,320
नमः पार्वती पतय हर

2357
02:46:12,320 --> 02:46:15,520
महादेव

2358
02:46:15,520 --> 02:46:20,800
सभी का आने के ढेर सारा साधुवाद और आभार

2359
02:46:20,800 --> 02:46:23,760
जय श्री राम

2360
02:46:23,760 --> 02:46:27,760
जय श्री राम जय श्री राम भैया [संगीत]
