1
00:00:00,800 --> 00:00:04,240
सभी को जय श्री राम।

2
00:00:04,240 --> 00:00:07,440
कुतर्कों से ओतप्रोत

3
00:00:07,440 --> 00:00:11,680
एक वीडियो मैंने देखा इस विषय में

4
00:00:11,680 --> 00:00:15,760
उसमें वैसे वीडियो का टाइटल इस व्यक्ति ने

5
00:00:15,760 --> 00:00:21,760
डाला है कि क्या शक्ति संगम तंत्र में

6
00:00:21,760 --> 00:00:26,320
अ निग्रह तंत्र को पाखंड कहा गया है

7
00:00:26,320 --> 00:00:30,640
हम तो इस व्यक्ति ने यह टाइटल डालते हुए वीडियो बनाया

8
00:00:30,640 --> 00:00:34,720
मगर मैंने देखा कि उसमें आधे से ज्यादा भाग में इस व्यक्ति ने

9
00:00:34,720 --> 00:00:38,800
प्रलाप किया है। किस विषय में जो रामभद्राचार्य जी द्वारा नोटिस भेजा

10
00:00:38,800 --> 00:00:42,880
गया राघवाचार्य जी महाराज को कि नहीं या ज्योति पीठ वाले महाराज को कि नहीं इन

11
00:00:42,880 --> 00:00:46,960
सब विषयों में जो हमने जो अपना कुछ वक्तव्य निर्गत किया

12
00:00:46,960 --> 00:00:51,760
था इसने उसको लेकर के बहुत सारी नीचता बहुत सारी धूर्तता

13
00:00:51,760 --> 00:00:55,840
बहुत सारे प्रलाप कुतर्क प्रस्तुत किए हैं

14
00:00:55,840 --> 00:01:00,160
और इनके कुछ लोग होते हैं जो

15
00:01:00,160 --> 00:01:04,240
कहते हैं कि भागवतानंद जो है जो भी बात

16
00:01:04,240 --> 00:01:08,320
बोलता है शास्त्र सम्मत बोलता है। जबकि हमारे और उसके बीच की

17
00:01:08,320 --> 00:01:12,480
जितनी भी जितना भी जो संघर्ष है उसमें

18
00:01:12,480 --> 00:01:15,920
ऐसी कोई बात नहीं है जो उसने शास्त्र सम्मत शास्त्रों के द्वारा सिद्ध

19
00:01:15,920 --> 00:01:20,400
की हो। वह अपने कुतर्क जो देता है

20
00:01:20,400 --> 00:01:24,400
उन कुतर्कों को लेकर के दिक्कत है। वह जो अपने मन

21
00:01:24,400 --> 00:01:30,160
से बात कहता है जैसे कि अगर

22
00:01:30,160 --> 00:01:34,320
उसके जो परंपरा जो उसने तथाकथित बताई है निगमानंद

23
00:01:34,320 --> 00:01:39,360
वो अगर अपने देश किसी देश काल परिस्थिति में

24
00:01:39,360 --> 00:01:43,440
एनीबिसेंट से जुड़े हुए थे या थियोसफिकल सोसाइटी से जुड़े

25
00:01:43,440 --> 00:01:47,520
हुए थे तो वह साधना मार्ग में आने के बाद जो है अगर

26
00:01:47,520 --> 00:01:52,000
आ गए तो वह दोष मुक्त हो गए। थियोसफिकल सोसाइटी से जुड़े होने वाला दोष

27
00:01:52,000 --> 00:01:56,240
मुक्त हो गए उससे। परंतु वही पर दूसरा कोई व्यक्ति यदि शंकराचार्य

28
00:01:56,240 --> 00:02:00,720
की शरण में आ गया और वह थियोसफिकल सोसाइटी केवल एक दिन के लिए थियोसफिकल

29
00:02:00,720 --> 00:02:04,720
सोसाइटी में जुड़े हुए व्यक्ति के द्वारा

30
00:02:04,720 --> 00:02:08,800
स्टार्ट की गई कोई और संस्था के साथ जुड़ा हुआ मिल गया तो वो दोषी

31
00:02:08,800 --> 00:02:13,120
है वो फ्री मिशन का एजेंट है ये सब तर्क है और ये सब तर्क उसके शास्त्र

32
00:02:13,120 --> 00:02:17,120
सम्मत है इनहीं सब चीजों को लेकर के तो लड़ाई है ये सब

33
00:02:17,120 --> 00:02:21,120
चीजें उसकी शास्त्र सम्मत है क्या तो इनके जो इसके जो अंधे

34
00:02:21,120 --> 00:02:25,120
फॉलोअर्स हैं कुछ दो दो चार नाम है। एक कुर्मी है,

35
00:02:25,120 --> 00:02:29,680
एक कोई दीपम है, एक कोई शर्मा है,

36
00:02:29,680 --> 00:02:30,960
एक कोई चरवा की

37
00:02:30,960 --> 00:02:35,040
आवाज है। ये सब घुमा फिरा करके कुर्मी तो ऐसा है जो

38
00:02:35,040 --> 00:02:39,040
मुझको बोला था कि मैं आऊंगा आपसे चर्चा करने के

39
00:02:39,040 --> 00:02:43,120
लिए और वो कहते हैं ना

40
00:02:43,120 --> 00:02:47,120
कि शिवश की मार की बात ही निराली गूंगा भी गाए कबवाली। तो

41
00:02:47,120 --> 00:02:51,360
दूर से ही कब वाली अब गा रहा है। सामने आने की हिम्मत नहीं है। खैर

42
00:02:51,360 --> 00:02:55,680
कम टू द पॉइंट क्विकली। तो इस धूर्त व्यक्ति ने इतनी

43
00:02:55,680 --> 00:02:59,760
धूर्तता की है अपने वीडियो में और क्या है? इसके पास सबसे

44
00:02:59,760 --> 00:03:04,080
इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट क्या है? मैंने आप लोगों को कई बार बताया है। इसका

45
00:03:04,080 --> 00:03:08,160
सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है कि ये हर बात पे

46
00:03:08,160 --> 00:03:12,240
बोलेगा जो इसकी मतलब की होगी या नहीं भी होगी।

47
00:03:12,240 --> 00:03:16,240
और अगर वो बात ट्रेंडिंग होगी तो भी बोलेगा। अगर इससे जुड़ा

48
00:03:16,240 --> 00:03:20,320
हुआ कोई मसाला इसको मिलने मिलना होगा तो भी बोलेगा। वहां इसके बोलने

49
00:03:20,320 --> 00:03:24,400
की भूमिका होगी या नहीं होगी तो भी बोलेगा। बस वो

50
00:03:24,400 --> 00:03:28,720
मामला किसी तरीके से ऐसा होना चाहिए जो कि मसालेदार बन सके।

51
00:03:28,720 --> 00:03:33,120
धार्मिक जगत का कैरी मिनाटी बन सके।

52
00:03:33,120 --> 00:03:37,280
तो निकालते हैं इसका कैरी मिनाटीपन। तो हम लोग इसकी बात सुन सुन

53
00:03:37,280 --> 00:03:41,360
कर ही इसको जवाब देंगे। शंकराचार्य सरस्वती जी के शिष्या

54
00:03:41,360 --> 00:03:45,520
है ज तक मुझे जानकारी है क्योंकि उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर इस प्रकार से मेरे गुरुदेव मेरे गुरुदेव ऐसा

55
00:03:45,520 --> 00:03:46,080
करते हुए लिखा है

56
00:03:46,080 --> 00:03:51,040
तो मुझे लगता है कि वो सरस्वती जी की शिक्षा है और लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की

57
00:03:51,040 --> 00:03:55,280
लेकिन शिवश के चैनल पर वो ससुती जी की शिक्षा बनकर नहीं आई थी या उनके उत्तराधिकारियों

58
00:03:55,280 --> 00:03:59,440
की शिक्षा या वकील बनकर नहीं आई थी वो क्या बनकर आई थी की पक्ष

59
00:03:59,440 --> 00:04:03,760
होकर आई थी के वकील की हैसियत से वो बात कर रही थी तो अब

60
00:04:03,760 --> 00:04:09,280
यहां पर ये रंजना अग्निहोत्री जी के बारे में बात कर रहा है जिन्होंने

61
00:04:09,280 --> 00:04:13,280
रामपाल के विरुद्ध हमारी ओर से याचिका लगाई है जिस पर शासन

62
00:04:13,280 --> 00:04:17,440
ने संज्ञान लिया है। उचित कारवाईयां हो रही हैं। रामपाल

63
00:04:17,440 --> 00:04:21,520
का तंत्र नष्ट होने के कगार पर है। रामपाल का

64
00:04:21,520 --> 00:04:25,760
जो यहां का जो फील्ड वर्क है वो नष्ट हो चुका है। यहां के उसके सेंटर्स

65
00:04:25,760 --> 00:04:29,760
क्लोज हो चुके हैं। यहां पर पुस्तक वितरण बंद हो चुका है। यहां से

66
00:04:29,760 --> 00:04:33,760
जो इस अभियान का केंद्र केंद्र में रहने वाली

67
00:04:33,760 --> 00:04:37,760
जो भूमि है यानी लखनऊ उत्तर प्रदेश लक्ष्मणपुरी वहां

68
00:04:37,760 --> 00:04:42,000
से रामपाल के पैर उखड़ चुके हैं और बहुत जल्द

69
00:04:42,000 --> 00:04:46,000
भगवान ने चाहा तो पूरे राष्ट्र में इस युद्ध

70
00:04:46,000 --> 00:04:50,320
की गूंज पहुंचे। ऐसे केस में निशुल्क

71
00:04:50,320 --> 00:04:54,320
रूप से हमारी ओर से हमारी अगवाई करने वाली रंजना अग्निहोत्री जी के

72
00:04:54,320 --> 00:04:58,480
बारे में बात कर रहा है। और क्या कह रहा है कि शिवश के चैनल

73
00:04:58,480 --> 00:05:02,320
पर वो रामभद्राचार्य की वो

74
00:05:02,320 --> 00:05:06,560
स्वरूपानंद जी की महाराज जी की अधिवक्ता बन के नहीं आई थी।

75
00:05:06,560 --> 00:05:10,560
वो रामभद्राचार्य की अधिवक्ता बन के आई थी। मगर

76
00:05:10,560 --> 00:05:16,240
रामभद्राचार्य की अधिवक्ता बन के आई थी। तो किस

77
00:05:16,240 --> 00:05:20,560
किस प्रकरण क्या रामभद्राचार्य की और

78
00:05:20,560 --> 00:05:24,560
ज्योतिष पीठ के बीच में चलने वाला कोई संघर्ष है

79
00:05:24,560 --> 00:05:29,600
क्या उस संघर्ष में वो रामभद्राचार्य जी की ओर से बोलने आई थी

80
00:05:29,600 --> 00:05:34,000
हम या फिर किसी और संघर्ष में जिस संघर्ष

81
00:05:34,000 --> 00:05:38,320
में रामभद्राचार्य जी के विरुद्ध कोई ऐसा व्यक्ति है जो सनातन

82
00:05:38,320 --> 00:05:42,640
से निकटता की बजाय या सनातन के मौलिक सिद्धांतों से निकटता की बजाय दूरी

83
00:05:42,640 --> 00:05:46,640
रखता है या कोई राजनीतिक पार्टी है या कोई राजनीतिक

84
00:05:46,640 --> 00:05:50,640
पार्टी से जुड़ा हुआ गिरोह है जो कि हमारे संतों

85
00:05:50,640 --> 00:05:54,720
हमारे धर्म ग्रंथों के बारे में बोलने से पहले एक मिनट नहीं सोचता है

86
00:05:54,720 --> 00:05:58,720
या फिर जो मर्यादा का ध्यान नहीं रखता है किसके विरोध में खड़ी हुई

87
00:05:58,720 --> 00:06:02,800
थी रामभद्राचार्य जी के पक्ष में अब जब उसको ऐसे कहा जा सकता

88
00:06:02,800 --> 00:06:06,880
है कि रामभद्राचार्य जी की वकील बन के आई थी तो क्या

89
00:06:06,880 --> 00:06:11,200
उसको ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि वो जो अधर्मी लोग हैं

90
00:06:11,200 --> 00:06:15,440
जो रामभद्राचार्य की टिप्पणी के कारण जो विप्लव

91
00:06:15,440 --> 00:06:17,440
फैला हुआ वातावरण था उसके बीच में

92
00:06:17,440 --> 00:06:21,520
जिन्होंने रामभद्राचार्य के ऊपर ऐसे अश्लील आरोप लगाए थे जो कि कहीं

93
00:06:21,520 --> 00:06:25,600
से भी मर्यादा के सीमा में नहीं आते क्या

94
00:06:25,600 --> 00:06:29,840
तुम जिन लोगों के साथ बैठते हो मंच साझा करते हो जिन आचार्यों

95
00:06:29,840 --> 00:06:34,240
के साथ जो आचार्य तुम्हें प्रश्रय देते हैं विद्या भास्कर जी महाराज

96
00:06:34,240 --> 00:06:38,560
क्या विद्या भास्कर जी महाराज उन अश्लील आरोपों की पुष्टि करते हैं

97
00:06:38,560 --> 00:06:42,560
और यदि करते हैं तो क्या उन्होंने रामभद्राचार्य जी के साथ मंच साझा नहीं किया

98
00:06:42,560 --> 00:06:46,720
है। क्या राघवाचार्य जी महाराज ने मंच साझा नहीं किया

99
00:06:46,720 --> 00:06:50,720
है? क्या वो रामभद्राचार्य जी पर इस बात

100
00:06:50,720 --> 00:06:54,800
की पुष्टि करते हैं जो बेधड़क खबर वाले चैनल

101
00:06:54,800 --> 00:06:59,200
ने अपने उस आपत्तिजनक

102
00:06:59,200 --> 00:07:03,440
वीडियो में सब आरोप लगाए हैं। अश्लील आरोप चारित्रिक

103
00:07:03,440 --> 00:07:07,520
आरोप यह सब तुम्हारी प्रज्ञा शक्ति में घुसने वाला तो है नहीं।

104
00:07:07,520 --> 00:07:11,920
तुम्हारा तो सब मुंह लिया गया है परी के द्वारा है ना परी

105
00:07:11,920 --> 00:07:16,560
चाहिए तुमको तो उस परी के मुंह में वो सब मोह लिया गया है

106
00:07:16,560 --> 00:07:20,640
इसलिए तुम्हें ये सब नहीं समझ में आएगा कि रामभद्राचार्य की ओर से

107
00:07:20,640 --> 00:07:24,640
अगर वो आई थी तो कब आई थी किस प्रकरण में आई थी क्या

108
00:07:24,640 --> 00:07:28,720
रामभद्राचार्य जी और ज्योतिष पीठ वालों के बीच में चल रहे संघर्ष में वो

109
00:07:28,720 --> 00:07:32,800
रामभद्राचार्य जी की ओर से खड़ी थी या किसी और संघर्ष में वो रामद्राचार्य

110
00:07:32,800 --> 00:07:36,800
जी की ओर से खड़ी अच्छा अभी इस व्यक्ति ने एक वीडियो

111
00:07:36,800 --> 00:07:41,600
बनाया था जिसमें वो जो गवई है जिसमें कि विष्णु भगवान की मूर्ति

112
00:07:41,600 --> 00:07:45,600
को पुन स्थापना करनी थी उसका जो है जीर्णोद्धार करना करने की याचिका

113
00:07:45,600 --> 00:07:49,600
लगाई थी जिसमें कि गवई ने अपने आदेश में यह

114
00:07:49,600 --> 00:07:53,600
कह दिया कि भैया विष्णु भगवान से ही जाकर प्रार्थना करो हम नहीं कुछ

115
00:07:53,600 --> 00:07:57,600
कर पाएंगे। ठीक है? उस संबंध में जो इस व्यक्ति ने वीडियो बनाया था

116
00:07:57,600 --> 00:08:01,840
उस वीडियो में इसने अजीत भारती या

117
00:08:01,840 --> 00:08:06,160
हर उस व्यक्ति का अभिनंदन किया था जो इस विषय में बोला है सुप्रीम

118
00:08:06,160 --> 00:08:10,160
कोर्ट के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के विरुद्ध जिसज व्यक्ति जो

119
00:08:10,160 --> 00:08:14,640
जो व्यक्ति खड़ा हुआ है वो भले ही ये

120
00:08:14,640 --> 00:08:18,960
उसकी विचारधाराओं से सहमत होता हो या ना होता हो इसने अजीत भारती

121
00:08:18,960 --> 00:08:22,960
की ओर से अजीत भारती और इस तरीके के कई अन्य तत्वों को

122
00:08:22,960 --> 00:08:26,960
अभिनंदन किया जो कि बिल्कुल उचित है। हमारी दृष्टि में भी उचित है। मगर अगर

123
00:08:26,960 --> 00:08:31,120
मैं यह कहूं कि ये अजीत भारती का पक्षधर बन के आया था उस दिन तो कैसा

124
00:08:31,120 --> 00:08:35,120
रहे? अजीत भारती का वक्ता बन के आया था उस दिन तो कैसा

125
00:08:35,120 --> 00:08:39,200
रहे? अजीत भारती का चापलूस बनकर आया था तो कैसा रहे? अजीत

126
00:08:39,200 --> 00:08:44,240
भारती का पालतू बनकर आया था उस दिन तो कैसा रहे?

127
00:08:44,240 --> 00:08:47,920
तो यदि

128
00:08:47,920 --> 00:08:52,240
आप किसी के बारे में बात कर रहे हैं कि रामभद्राचार्य जी की वकील बनकर आई थी

129
00:08:52,240 --> 00:08:56,480
तो आपको ये देखना होगा ना किस प्रकरण में वो वकील है। करपात्री

130
00:08:56,480 --> 00:09:00,720
जी महाराज ने आर्य समाजियों का जब विधर्मी

131
00:09:00,720 --> 00:09:05,360
इस्लाम को मानने वाले लोग आर्य समाजियों का

132
00:09:05,360 --> 00:09:09,360
खंडन कर रहे थे। परेशान कर रहे थे। आर्य समाजियों के पास कहीं निस्तारण नहीं

133
00:09:09,360 --> 00:09:13,520
था। उस समय करपात्री जी ने आर्य समाजियों का साथ दिया था। तो करपात्री जी आर

134
00:09:13,520 --> 00:09:17,520
समाज के पक्षधर हो गए तुम्हारे हिसाब से उनके वकील हो गए तुम्हारे हिसाब से उनके वक्ता हो गए

135
00:09:17,520 --> 00:09:21,600
तुम्हारे हिसाब से यह तो इनके कुतर्क है और इन

136
00:09:21,600 --> 00:09:25,760
कुतर्कों पर यदि हम प्रतिकार करते हैं तो इनके अंधे

137
00:09:25,760 --> 00:09:29,760
अनुयाई अंधे वो कहते हैं कि अरे भागवतानंद जो

138
00:09:29,760 --> 00:09:33,840
भी बोलते हैं शास्त्र से बोल अरे भाई भागवतानंद ने शास्त्र से बोला है

139
00:09:33,840 --> 00:09:38,400
बोला है मगर शास्त्र से बोलने वाले विषय में हमारी उससे कोई

140
00:09:38,400 --> 00:09:41,840
कोई संघर्ष नहीं है

141
00:09:41,840 --> 00:09:45,920
और जो एक दो बातों को लेकर है हमारा कोई अडी की बात नहीं थी कि उसने अगर सबरी

142
00:09:45,920 --> 00:09:50,080
में करपात्री जी का विरोध कर दिया मर्यादा में रह के अगर किया होता तो कोई अडी

143
00:09:50,080 --> 00:09:54,080
की बात नहीं थी अगर मर्यादा में रह के बुद्ध का विरोध भी किया था तो कोई

144
00:09:54,080 --> 00:09:58,960
अडी की बात नहीं थी कर दिया भाई ठीक है वर्णाश्रमी तो हो परंपरा को तो मानते हो

145
00:09:58,960 --> 00:10:03,040
परंतु तुमने मर्यादा को लागा तू तड़ाक की उपास बनाया

146
00:10:03,040 --> 00:10:07,040
और असिद्ध अश्लील आरोप लगाए तब हमने तुम्हारे हर वीरों

147
00:10:07,040 --> 00:10:11,200
से लेकर के हर चीज पर कुछ बात की समीक्षा की तुम्हारी सभी चीजों

148
00:10:11,200 --> 00:10:15,440
क्योंकि तुम समीक्षा सभी चीजों की कर रहे हो। तो खैर बैक

149
00:10:15,440 --> 00:10:19,760
टू द पॉइंट। तो यह कहना गलत

150
00:10:19,760 --> 00:10:24,160
है कि वो रामभद्राचार्य जी की वकील है। इस तरह से प्रस्तुत करना

151
00:10:24,160 --> 00:10:28,320
कि वो उनके हर मामले में उनके समर्थन में खड़ी है।

152
00:10:28,320 --> 00:10:32,640
चाहे वो कुछ भी बोल रहे हो। ये तो उन्होंने नहीं कहा था। किस मामले

153
00:10:32,640 --> 00:10:36,640
में उनकी ओर से खड़ी थी? हमें भी अच्छा लगा था। क्योंकि हाई कोर्ट

154
00:10:36,640 --> 00:10:40,960
ने उसमें एक आदेश दिया था। जब हमें पता चला कि रामभद्राचार्य

155
00:10:40,960 --> 00:10:44,960
जी की ओर से रंजना अग्निहोत्री जी के द्वारा एक याचिका लगाई गई है। उस

156
00:10:44,960 --> 00:10:49,200
याचिका में हाई कोर्ट ने आदेश दिया है। क्या आदेश दिया है

157
00:10:49,200 --> 00:10:53,760
कि भाई YouTube और सोशल मीडिया जैसी

158
00:10:53,760 --> 00:10:57,840
जैसे प्लेटफॉर्म्स है जिस पर व्यक्ति कुछ भी हो के निर्भीक रूप से बोल

159
00:10:57,840 --> 00:11:02,080
रहा है। शासन इसमें संज्ञान ले और कानून बनाए और उन कानूनों

160
00:11:02,080 --> 00:11:06,080
का कड़ाई से पालन करवाए और यदि YouTube सोशल मीडिया

161
00:11:06,080 --> 00:11:10,160
इसमें कोपरेट नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ भी आप याचिका लगाइए। उनके खिलाफ केस

162
00:11:10,160 --> 00:11:14,800
दर्ज करिए। क्या ये हमारे सनातन के लिए अच्छी न्यूज़ नहीं है?

163
00:11:14,800 --> 00:11:18,640
भाई उसमें मामला जो प्रकरण है वो पर्टिकुलर किसी वस्तुनिष्ठता

164
00:11:18,640 --> 00:11:22,320
है। उसमें कि रामभद्राचार्य जी ने

165
00:11:22,320 --> 00:11:26,480
किसी के विरुद्ध याचिका लगाई और उस पर यह मामला आया। एक

166
00:11:26,480 --> 00:11:30,560
व्यक्ति या एक गिरोह के विरुद्ध कारवाई हो गई वो तो कर दी उसका

167
00:11:30,560 --> 00:11:34,560
चैनल जो उसके चैनल पर कारवाई हो गई उसके विरुद्ध सरकारी जो

168
00:11:34,560 --> 00:11:38,720
अन्य कानूनी कारवाईया होती है वो भी होने वाली है 8 अक्टूबर को अगली सुनवाई

169
00:11:38,720 --> 00:11:43,040
है मगर इसमें ये जो पैराग्राफ आया कि सोशल मीडिया का सहारा लेकर के

170
00:11:43,040 --> 00:11:47,200
लोग कुछ भी बोल रहे हैं अभी वो दुर्गा दुर्गा माता

171
00:11:47,200 --> 00:11:51,360
के लिए बोलने वाली वो कितना गलत सलत बोल रही थी वो गायिका कुछ भी बोल रही

172
00:11:51,360 --> 00:11:55,760
थी तो यह जो पैराग्राफ उसमें लिखा गया उस आर्डर में

173
00:11:55,760 --> 00:12:00,080
कि भाई हाई कोर्ट ने ऐसा आदेश

174
00:12:00,080 --> 00:12:04,560
दिया है जिसमें उसने शासन को कहा है कि वह कानून बनाए

175
00:12:04,560 --> 00:12:08,800
और जब हाई कोर्ट आदेश देती है ना तो उस पर कारवाई होती है तो

176
00:12:08,800 --> 00:12:12,800
क्या ये हमारे लिए एक अच्छा संदेश नहीं है अच्छा

177
00:12:12,800 --> 00:12:16,880
आदेश नहीं है अच्छा अब इस आदेश को मैं कैसे बताऊं आप लोगों को

178
00:12:16,880 --> 00:12:21,280
बताइए जरा कैसे बताऊं बताना पड़ेगा ना कि

179
00:12:21,280 --> 00:12:25,920
हम इस समय रंजना अग्नि जी के पास बैठे हैं जिन्होंने अमुक केस इसमें रामभद्राचार्य

180
00:12:25,920 --> 00:12:30,000
जी की ओर से याचिका लगाई थी। उस याचिका में हाई कोर्ट ने इतना अच्छा

181
00:12:30,000 --> 00:12:34,000
आर्डर दिया है। इसमें कहां से आ गया कि हम राघवाचार्य जी महाराज

182
00:12:34,000 --> 00:12:38,080
के या ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के या भागवतानंद

183
00:12:38,080 --> 00:12:42,560
के ही सही विरोधी हैं। इस वीडियो को बनाते समय अरे हमें तो एक खुशखबरी

184
00:12:42,560 --> 00:12:46,720
देनी थी भाई कि भैया ऐसा ऐसा हो रहा है। इस कारण

185
00:12:46,720 --> 00:12:50,880
से यह आदेश हमें प्राप्त हुआ है और आगे इसमें हम और कुछ कारवाई भी

186
00:12:50,880 --> 00:12:55,200
करने वाले हैं क्योंकि रामपाल जैसे लोग उसके समर्थक बौद्धों के लोग उनके समर्थक

187
00:12:55,200 --> 00:12:59,200
या आर्य समाजियों को ही मान लो ये लोग कितना अनर्गल प्रलाप करते

188
00:12:59,200 --> 00:13:03,440
हैं वृंदावन को वैश्यावन बोलते हैं तब नहीं इसको

189
00:13:03,440 --> 00:13:07,680
याद आता है जब वो लोग ऐसा बोल रहे होते हैं तब नहीं इसके पास वीडियो बनाने

190
00:13:07,680 --> 00:13:12,800
का टाइम होता है आगे इसमें बात करूंगा तो

191
00:13:12,800 --> 00:13:16,880
वहां पर वह रामभद्राचार्य जी के वकील बन के नहीं आई वो न्याय की

192
00:13:16,880 --> 00:13:20,880
वकील बन के आई थी। धर्म की वकील बन के आई थी और

193
00:13:20,880 --> 00:13:25,120
सत्य की वकील बन के आई थी। सत्य का बल क्या था वहां पर?

194
00:13:25,120 --> 00:13:29,120
कि जिन लोगों ने वो चारित्रिक आरोप लगाए थे। चारित्रिक खंडन करने का

195
00:13:29,120 --> 00:13:33,760
प्रयास प्रयास किया था। अरे भाई कुछ तो शर्म कर लो। रामभद्राचार्य

196
00:13:33,760 --> 00:13:38,160
जी का हमारे ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के साथ है।

197
00:13:38,160 --> 00:13:42,320
मानता हूं पूरी वाले शंकराचार्य जी के लिए मानना किया है और उस विषय में

198
00:13:42,320 --> 00:13:46,480
हमारे आचार्यों ने रामभद्राचार्य जी को तरह-तरह से अनेक

199
00:13:46,480 --> 00:13:49,360
प्रकार से उत्तर भी दिया है। प्रतिकार भी किया है और

200
00:13:49,360 --> 00:13:53,360
उस उस प्रतिकार में मैं उनकी तरफ खड़ा हूं। मगर रामभद्राचार्य जी

201
00:13:53,360 --> 00:13:57,600
ऐसे व्यक्ति थोड़ी ना है कि उनको हरा नूरा आ के तू तड़ाक

202
00:13:57,600 --> 00:14:01,680
बोले और फिर चारित्रिक गालियां दे उल्टे सीधे एडिट करके फोटो

203
00:14:01,680 --> 00:14:05,760
बनाए और उन फोटो को रिलीज करे कुछ भी बोलता रहे क्योंकि हमारी उनसे

204
00:14:05,760 --> 00:14:10,720
लड़ाई है इसलिए उनके बारे में कोई कुछ भी बोलता रहे हम ये होने दें

205
00:14:10,720 --> 00:14:15,520
अगर आपके पड़ोसी के साथ आपका मनमुटाव है

206
00:14:15,520 --> 00:14:19,600
और आपका विचार नहीं मिल रहा है इसका मतलब यह है कि अराजक तत्व आकर के

207
00:14:19,600 --> 00:14:23,600
पड़ोसी के घर में घुसकर उसके पत्नी के साथ उसके घर की

208
00:14:23,600 --> 00:14:27,680
महिलाओं के साथ अश्लीलता कर

209
00:14:27,680 --> 00:14:31,760
रहे होंगे। उनका चीर हरण कर रहे होंगे। उनकी गरिमा भंग कर रहे होंगे।

210
00:14:31,760 --> 00:14:36,240
आप वहां खड़े होंगे और आप कुछ कर सकते होंगे तो नहीं करेंगे।

211
00:14:36,240 --> 00:14:40,080
इतने निर्लज्ज है हम लोग।

212
00:14:40,080 --> 00:14:44,080
दुर्भाग्य से जो ये बोल रहा है ना दुर्भाग्य से हम दोनों

213
00:14:44,080 --> 00:14:48,240
नहीं है। तो सौभाग्य से मैं ऐसा निर्लज्ज नहीं हूं। मेरे

214
00:14:48,240 --> 00:14:52,320
सामने तो अगर भागवतानंद से मेरी बहुत दुश्मनी है ना

215
00:14:52,320 --> 00:14:56,320
सामान्य जनों की नजरों में मेरे समक्ष मेरे संज्ञान

216
00:14:56,320 --> 00:15:00,880
में अगर इसके घर की स्त्रियों पर भी कोई हमला कर रहा होगा कुछ कर रहा होगा

217
00:15:00,880 --> 00:15:04,640
मैं तो यहां तक कहता हूं कि इसके विरुद्ध भी

218
00:15:04,640 --> 00:15:08,640
कोई मर्यादा को लांगते हुए कोई कारवाई अगर हो रही होगी मुसलमान

219
00:15:08,640 --> 00:15:12,640
ही अब अगर इस पर हमला कर देंगे या और कोई ऐसा विरोधी

220
00:15:12,640 --> 00:15:16,800
तत्व इस पर हमला कर देगा तो वहां तो मैं खड़ा हऊंगा ना क्या

221
00:15:16,800 --> 00:15:20,480
करूंगा छोड़ इसको अकेला

222
00:15:20,480 --> 00:15:26,480
ये सिखाया है करपात्री जी ने यह सिखाया है जगतगुरु शंकराचार्य ने

223
00:15:26,640 --> 00:15:30,640
कि आपका धर्म क्या होना चाहिए आपका कर्तव्य क्या होना चाहिए जो विरोधी

224
00:15:30,640 --> 00:15:34,640
है उसको पूर्ण रूप से विरोधी मान लो चाहे वो

225
00:15:34,640 --> 00:15:40,640
कोई भी विषय हो चाहे वो कोई भी प्रकरण हो

226
00:15:41,360 --> 00:15:45,440
नेवाचार्य को पुलिस नहीं दी जो कि एक अंश सत्य भी है कि यह सत्य

227
00:15:45,440 --> 00:15:50,160
वैसा नहीं जैसा होना चाहिए राम राम भद्राचार्य अपने नाम से नोटिस नहीं भेजते हैं।

228
00:15:50,160 --> 00:15:54,320
रामभद्राचार्य अपने चेलों के माध्यम से नोटिस भिजवाते हैं। और अगर तुम इस बात को नहीं समझ

229
00:15:54,320 --> 00:16:00,080
पाओगे तो या तो तुमको या फिर उन्हीं के समर्थक हो दोनों

230
00:16:00,080 --> 00:16:04,080
रामभद्राचार्य जी स्वयं नोटिस नहीं भेजते हैं। अपने चेलों के

231
00:16:04,080 --> 00:16:08,240
माध्यम से नोटिस भिजवाते हैं। तो इसका अर्थ

232
00:16:08,240 --> 00:16:12,560
यह है कि अगर वह ऐसा करते हैं कि तो दुनिया के अगर हजार

233
00:16:12,560 --> 00:16:16,560
लोग उनके नाम से नोटिस भिजवा देंगे और हमें ज्ञात भी हो

234
00:16:16,560 --> 00:16:21,360
जाए कि भैया रामभद्राचार्य से जुड़े हुए प्रामाणिक लोग ये कहने लगे

235
00:16:21,360 --> 00:16:25,600
कि भैया नोटिस उन्होंने नहीं भिजवाया है तब भी हम ये कहे क्योंकि नोटिस वो भिजवाते

236
00:16:25,600 --> 00:16:30,080
हैं चेलों के नाम से तो अभी भी भिजवाया। ये कहां का सनातन सिद्धांत

237
00:16:30,080 --> 00:16:32,560
है?

238
00:16:32,560 --> 00:16:36,640
अगर किसी व्यक्ति ने 10 बार कोई कार्य किया है तो 12वीं बार

239
00:16:36,640 --> 00:16:40,640
स्पष्ट होने पर भी उसने नहीं किया है 11वीं बार हम ये बिना सोचे समझे

240
00:16:40,640 --> 00:16:44,880
मान ले कि उसी ने किया है। अरे भैया रामभद्राचार्य जी

241
00:16:44,880 --> 00:16:48,960
अपने चेलों के माध्यम से लगवा करवाते हैं। नोटिस भिजवाते हैं। ठीक है।

242
00:16:48,960 --> 00:16:53,040
रामभद्राचार्य जी रंजना अग्निहोत्री के द्वारा भी तो केस लगवाते हैं। का सबूत

243
00:16:53,040 --> 00:16:56,480
है हमारे पास। प्रमाण है। तो

244
00:16:56,480 --> 00:17:00,560
फिर यहां तो राम राम भद्राचार्य जी ने इनके द्वारा नहीं भिजवाया। फिर क्या करोगे? हो गया

245
00:17:00,560 --> 00:17:04,880
तर्क खंडित रामभद्राचार्य जी जो सदैव करते हैं

246
00:17:04,880 --> 00:17:08,880
तुम्हारे हिसाब से वही सदैव करते हैं बदल के नहीं करते

247
00:17:08,880 --> 00:17:12,880
तो रामभद्राचार्य जी ये भी तो सदैव करते हैं कि अपने कानूनी मामले रंजना अग्निहोत्री जी

248
00:17:12,880 --> 00:17:17,040
के द्वारा करते है यहां तो नहीं किया इसका मतलब

249
00:17:17,040 --> 00:17:21,280
परिवर्तन को तुम स्वीकार कर रहे हो ना तो तुम्हारे ही तर्क से तुम्हारी

250
00:17:21,280 --> 00:17:26,480
बात गलत हो रही है क्या है यहां पर शास्त्र प्रमाण बताओ

251
00:17:26,480 --> 00:17:32,480
बेवकूफी और कुछ नहीं है केवल प्रलाप

252
00:17:35,360 --> 00:17:39,520
और सुनो यदि तुम इन

253
00:17:39,520 --> 00:17:43,680
बातों को समझ नहीं पा रहे हो तो या तो तुम मूर्ख हो और यदि

254
00:17:43,680 --> 00:17:48,240
समझना नहीं चाहते हो तो फिर तुम द्वेषी हो धूर्त हो

255
00:17:48,240 --> 00:17:52,320
सौभाग्य से हम दोनों नहीं है। ठीक है? तो

256
00:17:52,320 --> 00:17:56,320
वहां पक्षकार बन जाएंगे। वहां उनकी व्यक्तिगत थाने लाभ रुचि इत्यादि का दर्शन होने लगेगा। वो

257
00:17:56,320 --> 00:18:00,400
बिना सामने स्वयं को रखे अपने राजनीतिक और न्यायिक परिचयों का प्रयोग करते हुए अपने

258
00:18:00,400 --> 00:18:04,400
विपक्षी को कागजनी पत्रों में फसाना चाहते हैं। जानते हैं और यही उनकी पुरानी प्रवृत्ति रही चाहे

259
00:18:04,400 --> 00:18:08,560
वर्तमान का प्रकरण देखो चाहे इससे पहले का प्रकरण देखो तो जो बात

260
00:18:08,560 --> 00:18:12,880
हमने अपने मुझसे कही हमने अपने वीडियो में ये तो नहीं कहा था कि रामद्राचार्य ने भेजी

261
00:18:12,880 --> 00:18:17,760
रामभद्राचार्य के शिष्य कथित शिष्य समर्थक इत्यादि ने भेजी इस प्रकार से भी हमने कहा था

262
00:18:17,760 --> 00:18:22,160
रामभद्राचार्य के लिए तुमने नहीं कहा था कि भाई रामभद्राचार्य

263
00:18:22,160 --> 00:18:26,160
ने भेजी है रामभद्राचार्य के कथित शिष्य ने भेजी है परंतु

264
00:18:26,160 --> 00:18:30,160
इस बात को आधार बना करके आधे घंटे तक एक घंटे तक वहां

265
00:18:30,160 --> 00:18:35,120
पर रामभद्राचार्य को पॉइंट आउट कौन कर रहा था। रामभद्राचार्य

266
00:18:35,120 --> 00:18:39,280
के लिए नकारात्मक बातें कौन बोल रहा था? तुम बोल रहे थे। अब तुम

267
00:18:39,280 --> 00:18:43,760
कहोगे कि रामभद्राचार्य के लिए नकारात्मक बातें क्यों नहीं बोली जा सकती? मतलब

268
00:18:43,760 --> 00:18:47,840
अगर किसी ने कोई कार्य किया है तो अगली बार जब

269
00:18:47,840 --> 00:18:50,560
उसका कोई दोष सिद्ध हो या ना हो मगर उसको

270
00:18:50,560 --> 00:18:54,720
बार-बार वही प्रताड़ना देते रहना चाहिए। तुम्हारे

271
00:18:54,720 --> 00:18:59,120
हिसाब से यदि उसका कहीं पर एक बार दोष सिद्ध हुआ है

272
00:18:59,120 --> 00:19:03,200
तो क्योंकि तुम तो यह कह रहे हो कि रामभद्राचार्य ने तुम स्वयं मानते हो कि उन्होंने नहीं भिजवाया हमने

273
00:19:03,200 --> 00:19:07,280
तो खुद कहा कि उसके शिष्य ने भिजवाया तो शिष्य को पॉइंट आउट करो वहां

274
00:19:07,280 --> 00:19:11,360
तुम जो नकारात्मक भाषण दे रहे हो प्रज्वलनशील

275
00:19:11,360 --> 00:19:15,440
कैरी मिनाटी वाला वो किसके विरुद्ध दे रहे हो के

276
00:19:15,440 --> 00:19:19,840
ये किया था वो किया था इसके लिए ये कहा था वो कहा था किसके

277
00:19:19,840 --> 00:19:23,920
लिए दे रहे हो रामभद्राचार्य के विरुद्ध तो

278
00:19:23,920 --> 00:19:28,320
तुमने भले ही नहीं कहा कि रामभद्राचार्य ने नोटिस भिजवाया

279
00:19:28,320 --> 00:19:32,640
है। तुमने यह कहा उनके कथित शिष्य ने भिजवाया। मगर उसका जो दोष

280
00:19:32,640 --> 00:19:36,640
के अनुसार परिणाम स्वरूप प्रतिकार स्वरूप तुम बोल किसके विरुद्ध रहे हो?

281
00:19:36,640 --> 00:19:40,720
रामभद्राचार्य जी के विरुद्ध और लोग ये कहते हैं कि जी

282
00:19:40,720 --> 00:19:44,720
हो गए। जी हो गए। रामभद्राचार्य जी हो गए। जिनका प्रशय इनको प्राप्त

283
00:19:44,720 --> 00:19:48,960
है क्या वो जी नहीं लगाएंगे? वो अभी फिर मिलेंगे। वो फिर मंच

284
00:19:48,960 --> 00:19:52,960
पर आएंगे। वो जी लगाएंगे। वो क्यों

285
00:19:52,960 --> 00:19:57,440
लगाएंगे और हम क्यों ना लगाएं

286
00:19:57,440 --> 00:20:01,520
तो उनहीं से सीखा है ना भाई आचार्य है ना वो उन्होंने ही सिखाया

287
00:20:01,520 --> 00:20:06,880
है मर्यादा सिखाई है ना तुम्हारा तो कोई

288
00:20:06,880 --> 00:20:12,560
तुम्हारा तो कोई बाप है नहीं तुम तो अनाथ हो बिन बाप के हो

289
00:20:12,560 --> 00:20:16,800
तुम्हारे बाप का तो पता ही नहीं है धार्मिक जगत में धार्मिक

290
00:20:16,800 --> 00:20:20,880
जगत में गुरु जो होता है वो पिता होता है तो इनके गुरु का तो पता ही नहीं है

291
00:20:20,880 --> 00:20:25,040
कौन तो इसलिए ये तो किसी के लिए भी तूत करने

292
00:20:25,040 --> 00:20:29,040
के लिए स्वतंत्र घूम रहे हैं। हमारे तो पिता है

293
00:20:29,040 --> 00:20:34,240
ना कौन पिता है? श्रीमद् जगतुगुरु शंकराचार्य

294
00:20:34,240 --> 00:20:38,400
हमारे पिता है वो धार्मिक जगत तो हमें तो मर्यादा

295
00:20:38,400 --> 00:20:42,400
मालूम है ना कि किसके लिए तू तड़ा करना करना है कि करना नहीं है।

296
00:20:42,400 --> 00:20:46,720
और हम ज्यादातर तो कोशिश यही करते हैं कि तुम्हारे जैसों के लिए भी ना करते। मगर तुमने

297
00:20:46,720 --> 00:20:50,800
खुद आगे से कहा भाई तेरे जैसे से हम यही ऐसे ही बात करेंगे

298
00:20:50,800 --> 00:20:54,800
तू तड़ाक से तो हम करेंगे मगर इसमें तुम्हारे समर्थक जो अज्ञानी है

299
00:20:54,800 --> 00:20:59,040
अंधे हैं जिनको कुछ मालूम नहीं है वो आधी रोटी विदाल लेने आते हैं शिवश नारायण

300
00:20:59,040 --> 00:21:03,360
द्विवेदी भागवत आनंद के लिए कठोर शब्द बोलता है अरे भैया तुम्हारा

301
00:21:03,360 --> 00:21:07,360
व्यक्ति बना ही कठोर शब्द बोल बोल कर है उसका अस्तित्व ही कठोर शब्दों के लिए

302
00:21:07,360 --> 00:21:11,600
तो अब जब उस पर कठोर शब्दों की बरसात हो रही तो तुम्हें

303
00:21:11,600 --> 00:21:12,640
क्यों होना चाहिए

304
00:21:12,640 --> 00:21:16,800
दुखी तुम्हें तो कष्ट नहीं होना चाहिए तुम्हारे हिसाब से तो कठोर शब्द बोलना

305
00:21:16,800 --> 00:21:20,800
सामान्य है। हां जो बात कठोर शब्दों के अंतर्गत

306
00:21:20,800 --> 00:21:25,200
बोली जा रही है वो गलत है अथवा सही है उस पर आप बात करो।

307
00:21:25,200 --> 00:21:29,520
खैर चलो

308
00:21:29,520 --> 00:21:33,520
प्रेरणा स्वीकृति सब है। इतनी समय जिन लोगों को नहीं वो भी इस विषय

309
00:21:33,520 --> 00:21:37,600
में काम के लिए आ गए। अब इसका जवाब मैंने दे ही दिया है। सबसे बड़ी

310
00:21:37,600 --> 00:21:42,160
बात है कि अभी अभी मेरे सामने एक मामला आया है कि भैया यह कार्य रामभद्राचार्य

311
00:21:42,160 --> 00:21:46,320
जी का इन्होंने किया और उस पर ये रिजल्ट आया। जब वही वकील

312
00:21:46,320 --> 00:21:50,480
ये कहेगा जब वो मुझे बताएगा और हम लोग साथ

313
00:21:50,480 --> 00:21:54,560
में मिलकर के और रामभद्राचार्य जी की ओर से भी उसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है।

314
00:21:54,560 --> 00:21:59,360
अभी तक मुझे तो नहीं मालूम है कोई पुष्टि कर दी गई हो कि नोटिस उनके ही द्वारा भिजवाए गए।

315
00:21:59,360 --> 00:22:03,360
मगर तो मगर उनका जो अधिवक्ता है

316
00:22:03,360 --> 00:22:07,440
वह जब यह कह रहा है कि नहीं भिजवाए गए उनके माध्यम से नहीं भिजवाए गए तो फिर हम क्यों

317
00:22:07,440 --> 00:22:11,760
जबरदस्ती उनको रगड़े उनको क्यों घसीटे उस मामले में अच्छा घसीटना

318
00:22:11,760 --> 00:22:15,760
क्यों नहीं चाहता हूं इसमें भी प्रकाश डालूंगा मैं आगे बात

319
00:22:15,760 --> 00:22:20,720
आएगी क्योंकि ये मुझे अवसर देगा ये बातें बताने का भी तो अभी

320
00:22:20,720 --> 00:22:26,720
भी बता सकते हैं मगर आगे प्रश्न के उत्तर में बताएंगे तो थोड़ा मेहनत बच जाएगी

321
00:22:26,880 --> 00:22:30,960
रामक्राचार्य का अगर मान इसमें समति समर्थन स्वीकृति का भाग नहीं है तो उनको अपने शिक्षा को

322
00:22:30,960 --> 00:22:35,520
रोकना चाहिए था कि तुम ऐसा क्यों देखो कितना बेवकूफ व्यक्ति है

323
00:22:35,520 --> 00:22:39,680
रामभद्राचार्य का अगर अपना कोई स्वीकृति समर्थन नहीं

324
00:22:39,680 --> 00:22:43,920
है तो उनको रोकना चाहिए यह व्यक्ति के

325
00:22:43,920 --> 00:22:48,000
लिए व्यक्ति के समर्थन से इसके अनुयाई

326
00:22:48,000 --> 00:22:52,240
वैश्या व्यभचारिणी और कितनी गंदी गंदी

327
00:22:52,240 --> 00:22:56,480
गालियां विजय श्री के लिए मुझे उनसे जोड़ करके कितनी

328
00:22:56,480 --> 00:22:59,600
गंदी गंदी गालियां बकते

329
00:22:59,600 --> 00:23:03,760
जब इससे पूछा जाता है कि ऐसा क्यों कर रहे हैं तो यह हाथ खड़े कर देता है। भाई मैंने

330
00:23:03,760 --> 00:23:08,000
किसी को नहीं कहा है। वह अपनी स्वतंत्र रूप से कह रहे हैं। मतलब अगर

331
00:23:08,000 --> 00:23:12,080
इसके अनुयाई इसका इसको स्वयं को इसका समर्थक कहने वाले

332
00:23:12,080 --> 00:23:16,640
किसी को कुछ कहे तो वहां पर ये कहेगा मैंने थोड़ी ना उनसे कहा है।

333
00:23:16,640 --> 00:23:20,800
वो मुझसे जुड़े ही नहीं है। वो अपने स्वतंत्र रूप से कह रहे हैं। मगर दूसरा कोई अज्ञात

334
00:23:20,800 --> 00:23:25,120
व्यक्ति या अज्ञात व्यक्ति स्वयं को इसके विरोधी

335
00:23:25,120 --> 00:23:29,120
जिसका यह विरोध करता है उसकी ओर से उसका समर्थक स्वयं को कहते हुए

336
00:23:29,120 --> 00:23:34,400
किसी को कुछ भी कह दे तो वो हो गया कि उसने रोका क्यों नहीं तुमने क्यों नहीं रोका?

337
00:23:34,400 --> 00:23:38,400
तुमने क्यों नहीं रोका गाली गलौज देने से जो तुमने पुलिस में बयान दिए हैं दिए

338
00:23:38,400 --> 00:23:42,320
हैं ना तुमने गाली गलौज देने से अपने समर्थकों

339
00:23:42,320 --> 00:23:46,400
को क्यों नहीं रोका? वास्तविकता यही है कि भैया समर्थकों को कहां

340
00:23:46,400 --> 00:23:50,560
तक रोक सकते हैं? हां एक एक स्टेटमेंट दे सकते हैं और यह

341
00:23:50,560 --> 00:23:54,720
कैसे पता है कि नहीं दिया भाई उनका काम करने का तरीका कैसा

342
00:23:54,720 --> 00:23:58,720
है कैसा नहीं है इस पर आप लगाम लगा सकते हो कि तुमने अगर सोच लिया कि

343
00:23:58,720 --> 00:24:02,880
वीडियो बनाना चाहिए कि नहीं गवाही के विरोध में वीडियो पूरी पीठ ने नहीं बनाया अरे भैया

344
00:24:02,880 --> 00:24:07,760
पूरी पीठ जब ये कह रही है हिंदू राष्ट्र तो उसमें तो सबका विरोध हो गया

345
00:24:07,760 --> 00:24:11,840
जब संविधान लोकतांत्रिक है और पूरी पीठ वाले बार-बार हिंदू राष्ट्र कह रहे

346
00:24:11,840 --> 00:24:16,160
हैं तो उसमें सबका विरोध नहीं हो गया। मगर तुम्हारे ही अनुसार जब वो गवाई

347
00:24:16,160 --> 00:24:20,480
का नाम लेकर के वह वीडियो बनाएंगे तुम्हारे अनुसार जब चलेंगे पूरी

348
00:24:20,480 --> 00:24:24,480
पीठ वाले तभी तुमको ये होगा कि वो भी धर्म का अनुसरण वहां पर उस विषय में

349
00:24:24,480 --> 00:24:30,480
कर रहे हैं अन्यथा नहीं कर रहे तुम सिखाओगे तुम सिखाओगे

350
00:24:33,920 --> 00:24:37,920
तो वो कहते हैं ना बरसात से बचने की हैसियत नहीं गोलीबारी की बात करते

351
00:24:37,920 --> 00:24:42,160
हैं आप लोग वो वाली बात है शंकराचार्यों को यही मार्गदर्शन देंगे

352
00:24:42,160 --> 00:24:46,320
जो प्रशय दिया है वो उसी का नतीजा है जो

353
00:24:46,320 --> 00:24:50,320
ये व्यक्ति इतना बोलता है आचार्यों को

354
00:24:50,320 --> 00:24:54,480
अभी मार्गदर्शन देगा कि भैया गवाही के मामले में तुम्हें बोलना है और वीडियो बना के

355
00:24:54,480 --> 00:24:59,200
बोलना है कि मैंने तय किया है ना प्रशय देना है

356
00:24:59,200 --> 00:25:03,200
गवाही का विरोध करना है भाई मैंने स्टेटमेंट जारी कर दिया है मैं फतवा जारी

357
00:25:03,200 --> 00:25:07,200
कर रहा हूं सारे आचार्य वीडियो बना दो गवाही के विरोध में नहीं बनाओगे

358
00:25:07,200 --> 00:25:11,280
तो तुमने बोला क्यों नहीं अरे भैया सब लोग अपनेप तरीके से काम कर रहे तुम होते

359
00:25:11,280 --> 00:25:15,600
कौन हो ये बताने वाले कि वीडियो बना के विरोध करो।

360
00:25:15,600 --> 00:25:21,600
शास्त्र में लिखी है बात कि वीडियो बना करके विरोध किया जाएगा

361
00:25:26,000 --> 00:25:30,000
और फिर लोग कहते हैं कि शास्त्र सम्मत बात करता है। जितनी बातें इसने

362
00:25:30,000 --> 00:25:34,080
मेरे विरोध में बोली है एक बात इसने नहीं कोई शास्त्रों से बोली कोई

363
00:25:34,080 --> 00:25:38,240
बात नहीं। और जहां शास्त्रों की बात मैं लेकर

364
00:25:38,240 --> 00:25:42,880
के आया वहां इसने उत्तर में कुतर्क किए।

365
00:25:42,880 --> 00:25:47,360
मत या करना होगा तो हम अपने तरीके से करवाएंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।

366
00:25:47,360 --> 00:25:51,520
अच्छा ये कह रहा है कि भाई इन्होंने रोका क्यों नहीं करना हो

367
00:25:51,520 --> 00:25:55,600
तो मत करो या तो या फिर हम अपने तरीके से करवाएंगे। अरे पहले सिद्ध

368
00:25:55,600 --> 00:25:59,760
तो हो जाए कि वो व्यक्ति उस व्यक्ति ने जो कारवाई की है वो

369
00:25:59,760 --> 00:26:04,080
उनके संज्ञान में की है और तू इतना परेशान क्यों है?

370
00:26:04,080 --> 00:26:08,080
तू इतना परेशान क्यों है? यदि राघ रामभद्राचार्य जी

371
00:26:08,080 --> 00:26:12,240
की जो अधिवक्ता है वह यह कह रही हैं कि भाई उन्होंने नहीं करवाया तो एट द एंड

372
00:26:12,240 --> 00:26:16,720
उनकी उनके स्टेटमेंट के बिना उनके सपोर्ट के बिना

373
00:26:16,720 --> 00:26:21,040
क्या कोर्ट कौन सी कोर्ट और कौन सी अदालत इस प्रकरण

374
00:26:21,040 --> 00:26:25,360
को एक्सेप्ट करेगी ये भी बता दे भाई तू

375
00:26:25,360 --> 00:26:29,600
उनके स्टेटमेंट के बिना एक्सेप्ट हो जाएगा हां जितना लॉ

376
00:26:29,600 --> 00:26:34,480
मैं जानता हूं जितना कानून मैं जानता हूं यदि कोई ऐसे

377
00:26:34,480 --> 00:26:39,120
ऐसा व्यक्तित्व विभूति है जो अब इस संसार में ना हो

378
00:26:39,120 --> 00:26:41,120
और यदि उसके प्रति कोई ऐसी बात

379
00:26:41,120 --> 00:26:45,120
बोल दे तो स्वतंत्र रूप से उसमें आस्था रखने वाला कोर्ट की कारवाई कर सकता

380
00:26:45,120 --> 00:26:49,280
है। परंतु यदि वो जीवित है तो कोर्ट के पास जाते समय कोर्ट

381
00:26:49,280 --> 00:26:53,280
का पहला मतलब होता है कि भैया यदि वो जीवित है और जिनके विरोध में किया गया

382
00:26:53,280 --> 00:26:57,280
है उन्हें आना होगा कोर्ट स्वतंत्र रूप से कर ही नहीं सकते। तो

383
00:26:57,280 --> 00:27:01,280
जब उनकी प्रामाणिक वकील जो है अधिवक्ता जो है वो यह कह रही है जिन्होंने

384
00:27:01,280 --> 00:27:05,600
उनका अभी अभी एक मुकदमा लड़ा है वो यह कह रही है उनकी

385
00:27:05,600 --> 00:27:09,760
ओर से कानून कानूनी प्रक्रिया देखने वाली वह यह कह रही है कि नहीं किया

386
00:27:09,760 --> 00:27:13,920
गया है तो फिर यह क्यों ना माना जाए कि उन्होंने नहीं किया है। फिर

387
00:27:13,920 --> 00:27:17,920
क्यों इस बात को हवा दी जाए कि उन्होंने ही करवाया है। नहीं यह

388
00:27:17,920 --> 00:27:21,920
सब नहीं सोचना है। मगर जब बात इसकी आ जाएगी कि उसने फलाने ने तेरे

389
00:27:21,920 --> 00:27:26,320
अनुयाई ने गाली क्यों दे दी? उसने ऐसा क्यों कर दिया? या तेरे वो निगमंद

390
00:27:26,320 --> 00:27:30,320
वालों ने ऐसा क्यों कह रहे हैं? तो भाई मैं मेरा उससे इतना सा संबंध है

391
00:27:30,320 --> 00:27:34,480
मेरा उस बाकी का क्या संबंध है? वो क्या बोलते? मुझे क्या करना है? जबकि तेरी

392
00:27:34,480 --> 00:27:38,560
तेरा मंत्र तेरी परंपरा प्रमाण एक वही से होनी है। तो यह

393
00:27:38,560 --> 00:27:44,160
होता है त्रयाचरित्र दोगलापन। चलिए

394
00:27:44,160 --> 00:27:48,320
जिनको नोटिस प्राप्त हुई उनसे हमने दो बार निजी संवाद किया और आज भी दो बार माइक फोन में इस वीडियो को रिकॉर्ड करने से पहले

395
00:27:48,320 --> 00:27:52,640
बात करी हमसे कुछ इन विषयों पर भी कुछ अन्य धार्मिक विषयों पर भी तो राघवाचार्य

396
00:27:52,640 --> 00:27:56,160
जी से निजी रूप से जुड़ा हुआ है वो राघवाचार्य जी से जाकर क्यों नहीं पूछा क्या राघवाचार्य जी के वकील से क्यों

397
00:27:56,160 --> 00:28:00,160
नहीं पूछा वो रामचार्य से पूछ रहा है कि भैया तुमने कराया कि नहीं कराया नोटिस ये बता दो और

398
00:28:00,160 --> 00:28:04,480
वो भी बेवकूफ व्यक्ति है क्या राघवाचार्य

399
00:28:04,480 --> 00:28:08,480
जी से हमें क्या पूछना है? हमें जब हम इस बात को मान के चल रहे

400
00:28:08,480 --> 00:28:12,800
हैं कि उनके पास हालांकि तुम नहीं पूछा यह भी तेरी बेवकूफी है।

401
00:28:12,800 --> 00:28:16,960
सनातन के कौन से सिद्धांत के अनुसार तूने मान लिया बिना सोचे समझे कि हमने उनसे

402
00:28:16,960 --> 00:28:20,960
पूछा नहीं। बता है बेवकूफ ये व्यक्ति। हमने उनसे पूछा

403
00:28:20,960 --> 00:28:25,760
है बेवकूफ। अब वो पूछना भी क्या रिकॉर्ड करूं क्या मैं?

404
00:28:25,760 --> 00:28:29,920
हमने उनके जो मुख्य परिकर हैं जो उनके साथ सदैव रहते हैं उनसे पूछा।

405
00:28:29,920 --> 00:28:34,000
उन्होंने कहा हां प्राप्त हुआ है। हमने इस बात को ग्रहण किया। प्राप्त हुआ है। अब हमारा अगला कार्य

406
00:28:34,000 --> 00:28:38,000
क्या होना चाहिए? अगला कार्य ये होना चाहिए कि जहां से वो आने की बात कही जा

407
00:28:38,000 --> 00:28:42,080
रही है वहां जाकर पूछे करवाया है कि नहीं? अब हमारा इसमें इंटरेस्ट क्यों आया?

408
00:28:42,080 --> 00:28:46,320
इंटरेस्ट इसीलिए आया कि सबसे पहली बात हम यह बात सामने लाने वाले

409
00:28:46,320 --> 00:28:50,480
थे कि रामभद्राचार्य जी की ओर से एक ऐसी कारवाई हुई जो सभी हिंदुओं

410
00:28:50,480 --> 00:28:54,560
के लिए अच्छी है जिसके परिणाम स्वरूप जो आदेश

411
00:28:54,560 --> 00:28:58,640
आया है हाई कोर्ट का वो सभी हिंदुओं के लिए अच्छा है आए दिन राम भगवान सीता

412
00:28:58,640 --> 00:29:02,640
माता को गालियां दे रहे हैं अश्लील वीडियो बना रहे हैं बद्ध बौद्ध वाले

413
00:29:02,640 --> 00:29:06,640
लोग विधर्मी लोग तो इन विषयों में

414
00:29:06,640 --> 00:29:10,960
अगर ऐसा ऑर्डर आता है और इस पर क्रियान्वित होता है सुचारू

415
00:29:10,960 --> 00:29:11,600
रूप से

416
00:29:11,600 --> 00:29:15,600
तो यह हम हिंदुओं के लिए अच्छी बात नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी

417
00:29:15,600 --> 00:29:19,680
के बारे में अश्लील बातें बोल देता है। किसी भी देवी देवता का अपमान कर

418
00:29:19,680 --> 00:29:24,320
देता है। इसीलिए हम इस चीज को बाहर लाना चाह रहे थे। और

419
00:29:24,320 --> 00:29:28,400
जो इसमें आधार बना है जिस पर कारवाई कोर्ट ने वस्तुनिष्ठता के साथ की

420
00:29:28,400 --> 00:29:32,640
है। वो गिरोह जिसने चारित्रिक दोष लगाए थे, अश्लील आरोप लगाए थे रामभद्राचार्य

421
00:29:32,640 --> 00:29:36,640
जी पर उस गिरोह पर कारवाई होके रहे।

422
00:29:36,640 --> 00:29:39,680
वो एक उदाहरण बने।

423
00:29:39,680 --> 00:29:43,680
इसलिए भी हमको यह बात इस बात में हमारी रुचि आई कि भैया हम

424
00:29:43,680 --> 00:29:48,480
इसको होने से रोके। क्यों? क्योंकि यदि रामभद्राचार्य जी ने ये

425
00:29:48,480 --> 00:29:52,560
नोटिस नहीं भिजवाए अपने द्वारा नहीं। उनका समर्थन प्राप्त नहीं है।

426
00:29:52,560 --> 00:29:56,640
उनका ही शिष्य है। मगर स्वतंत्र रूप से उसने कर दिया। बिना पूछे बिना आज्ञा लिए कर

427
00:29:56,640 --> 00:30:00,640
दिया। अब वो तो बाद में करेंगे ना। अगर बिना आज्ञा लिए कर देगा कोई।

428
00:30:00,640 --> 00:30:04,800
तू कह रहा है कि भाई रोका क्यों नहीं? तो क्या उनके साथ रहते हैं।

429
00:30:04,800 --> 00:30:09,040
जो रोका नहीं कि बिल्कुल 24ों घंटा साथ में भैया तू क्या कर रहा तुल ले हाथ

430
00:30:09,040 --> 00:30:13,360
पकड़ लूंगा तेरा। अरे भैया जब वो भेज देगा अगर उसने बिना संज्ञान

431
00:30:13,360 --> 00:30:17,840
के किया है वो नोटिस को भेज देगा उसके बाद ही तो वो कुछ करेंगे।

432
00:30:17,840 --> 00:30:21,920
हां यह कहा जा सकता है कि रामभद्राचार्य जिस दिन इस नोटिस

433
00:30:21,920 --> 00:30:25,920
के समर्थन में आकर के कोर्ट में गवाही दे दे तो माना जा सकता है।

434
00:30:25,920 --> 00:30:26,640
या फिर उनकी

435
00:30:26,640 --> 00:30:30,720
उनका जो प्रामाणिक वकील है जो उनकी ओर से वहां कोर्ट में खड़े होने वाला है वो ये

436
00:30:30,720 --> 00:30:34,880
कह दे हां इसमें रामचार्य जी का स्टेटमेंट है हमारे पास तो

437
00:30:34,880 --> 00:30:39,040
माना जा सकता है। हम इसमें रुचि क्यों ले रहे हैं? क्योंकि यह

438
00:30:39,040 --> 00:30:43,120
भी हो सकता है हमने ये बात बताई भी थी। हमने इसमें इस

439
00:30:43,120 --> 00:30:47,440
मामले में रुचि इसलिए ली थी। हमें मालूम है कि रामभद्राचार्य जी ने पूरी के शंकराचार्य

440
00:30:47,440 --> 00:30:51,440
जी के लिए क्या बोला, शंकराचार्यों के लिए क्या बोला, आदि शंकराचार्य जी के लिए

441
00:30:51,440 --> 00:30:56,320
क्या बोला? मगर उसमें कोई अश्लीलता नहीं थी। और

442
00:30:56,320 --> 00:31:00,400
जो उन्होंने बोला उसके परिणाम स्वरूप यथोचित रूप से पूज्य राघवाचार्य

443
00:31:00,400 --> 00:31:04,400
जी महाराज ने कितना अच्छा उत्तर दिया। जब वह दे रहे हैं

444
00:31:04,400 --> 00:31:08,400
उत्तर जहां हमसे श्रेष्ठ जन खड़े हुए हैं निर्णय करने के लिए बोलने

445
00:31:08,400 --> 00:31:12,400
के लिए वहां क्या अपनी केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हम बोले कि देखो देखो हम भी

446
00:31:12,400 --> 00:31:16,400
विरोध करते हैं। खैर तो हम

447
00:31:16,400 --> 00:31:20,480
इसमें रुचि इसलिए ले रहे थे कि यह जो कारवाई हुई थी हाई कोर्ट से और जो

448
00:31:20,480 --> 00:31:24,720
सिंधुओं के लिए अच्छी थी यह प्रकाश में आए और जो व्यक्ति उसमें दोषी बना

449
00:31:24,720 --> 00:31:28,800
है उसको सजा मिले वो इस आधार पर

450
00:31:28,800 --> 00:31:34,000
कि भैया रामभद्राचार्य जी ने भेजा हो या ना भेजा हो नोटिस

451
00:31:34,000 --> 00:31:38,400
आधी अधूरी बात पर ही तुम्हारे जैसे लोगों के आग लगा देने पर

452
00:31:38,400 --> 00:31:41,920
जो अन्य आचार्य गण है वो रामभद्राचार्य जी के विरोध में

453
00:31:41,920 --> 00:31:45,920
ऐसे स्टेटमेंट निर्गत करना चालू ना कर दे जिसकी वजह से एक माहौल क्रिएट

454
00:31:45,920 --> 00:31:50,000
हो जाए और रामभद्राचार्य जी के विरोध में अच्छा खासा एक संतों

455
00:31:50,000 --> 00:31:54,080
की चीजें आने लगे और कुछ ऐसा हो जाए जिसका समर्थन

456
00:31:54,080 --> 00:31:58,320
जिसका जिससे कि उस व्यक्ति को थोड़ी सुरक्षा प्रदान हो जाए।

457
00:31:58,320 --> 00:32:02,480
कोर्ट में जाकर के वो इस तरीके की चीजें दिखाए। देखिए सभी संत प्रताड़ित

458
00:32:02,480 --> 00:32:05,280
है इनसे तो

459
00:32:05,280 --> 00:32:09,600
यह सब बुद्धि तुझे नहीं सोचनी है। यही तो मूर्खता है इसकी। आयु

460
00:32:09,600 --> 00:32:13,840
कम है। अभी मैच्योरिटी नहीं है इसके अंदर। बलबरी सवार आ रहा है। और

461
00:32:13,840 --> 00:32:17,920
इसको जो है इसके जो लोग हैं वह फकों पर चढ़ाते रहते हैं। आ वाह

462
00:32:17,920 --> 00:32:22,080
वाह वाह वाह ये चढ़ता रहता है। और उसी के कारण यह एक ना एक दिन

463
00:32:22,080 --> 00:32:26,160
मुकी खाएगा खा गया। उसी के कारण उसी वाही के कारण

464
00:32:26,160 --> 00:32:30,320
ये मुक्की खा गया। गलत व्यक्ति से टकरा गया। हमसे टकरा गया। हम अपनी ती चाल

465
00:32:30,320 --> 00:32:34,480
चल रहे थे। मगर इसने कुछ ऐसा कर दिया कि उस युद्ध में हम कूद

466
00:32:34,480 --> 00:32:38,560
गए। इसके समक्ष आ गए। हम जानते थे कि ये व्यक्ति तूत करता है

467
00:32:38,560 --> 00:32:42,560
आचार्यों के लिए। हम जानते थे कि अमुक अमुक विषय में करपाती जी का

468
00:32:42,560 --> 00:32:46,800
खंडन करता है। हम जानते थे कि अमुक अमुक विषय में पूरी शंकराचार्य

469
00:32:46,800 --> 00:32:50,880
जी का भी खंडन करता है। इसके कुछ ऐसे वक्तव्य भी सुने थे जिससे कि ये विश्वास पात्र

470
00:32:50,880 --> 00:32:54,960
भी नहीं सिद्ध हुआ। परंतु उस समय की बात

471
00:32:54,960 --> 00:32:57,120
जब हम इसे जानते दूरूर दूर तो हम

472
00:32:57,120 --> 00:33:01,280
यह सोचते थे भाई जब तक जब तक हम पूरे समूचे बौद्धों का

473
00:33:01,280 --> 00:33:05,600
बौद्धों के लिए नहीं बोल देते हैं समूचे रूप से आर्य समाजियों से नहीं निपट लेते हैं

474
00:33:05,600 --> 00:33:09,840
समूचे रूप से इस से नहीं निपट लेते हैं तो उस उससे पहले

475
00:33:09,840 --> 00:33:15,040
ये जो एक मैद्धांतिक खंडन का प्रयास कर भी रहा है तो करने दो

476
00:33:15,040 --> 00:33:19,040
बोल लोगे मर्यादा में रहकर के कुछ

477
00:33:19,040 --> 00:33:23,280
ऐसी बातें बोल भी रहा है जो विरोध में है तो बोलने दो भाई उससे

478
00:33:23,280 --> 00:33:27,520
पहले बहुत से लोग बोल रहे हैं। आचार्य प्रशांत बोल रहा है।

479
00:33:27,520 --> 00:33:31,600
तमाम सारे लोग वीडियो बना करके बोल रहे हैं। तो इसलिए हमने

480
00:33:31,600 --> 00:33:37,600
छोड़ा नहीं ध्यान दिया। खैर

481
00:33:37,680 --> 00:33:41,760
तो हम इसीलिए कूदे थे कि जो व्यक्ति जिस पर कारवाई हो रही

482
00:33:41,760 --> 00:33:46,880
है हमारा मोटिव रामभद्राचार्य जी का पक्ष लेना नहीं था। पहली बात

483
00:33:46,880 --> 00:33:51,040
हमारा मोटिव था रामभद्राचार्य जी का विरोध

484
00:33:51,040 --> 00:33:55,200
करने के संबंध में जो शक्ति जो गिरोह जो

485
00:33:55,200 --> 00:33:59,760
सामने खड़ा हुआ व्यक्ति है वो एक माध्यम है एक सामाजिक संरचना

486
00:33:59,760 --> 00:34:03,840
बनाने का कि हमारे देवी देवताओं के लिए हमारे आचार्यों के लिए हमारे

487
00:34:03,840 --> 00:34:08,480
ग्रंथों के लिए कोई भी व्यक्ति बोलने से पहले ठिटके आज बच्चा-बच्चा

488
00:34:08,480 --> 00:34:12,880
भी अपमान कर दे रहा है ठीक है

489
00:34:12,880 --> 00:34:16,880
चलो इसकी और सुनते हैं बकवास असामाजिक तत्व जो

490
00:34:16,880 --> 00:34:20,880
है ये दुख प्रचार कर रहे हैं रामचार्य के रामद्राचार्य जी के लोगों ने प्रश्न

491
00:34:20,880 --> 00:34:24,880
किया भाई रामचार्य तुम्हारे गुरु को गाली देते हैं तुम कैसे करोगे गाली

492
00:34:24,880 --> 00:34:28,960
दी तुम्हारे गुरु को गाली देते हैं या विरोध करते

493
00:34:28,960 --> 00:34:33,520
हैं विरोध करते हैं या गाली देते हैं पहले तू ये समझ ले

494
00:34:33,520 --> 00:34:37,520
विरोध करते हैं ऐसी बातें बोलते हैं ऐसे

495
00:34:37,520 --> 00:34:42,400
आक्षेप लगाते हैं जिनमें कोई सत्यता भी नहीं है मगर मर्यादा नहींते

496
00:34:42,400 --> 00:34:46,400
हैं तेरी तरह ऊपर ऊपर और नीचे ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास नहीं है।

497
00:34:46,400 --> 00:34:50,480
सब नहीं बोलते हैं। भाई बहन के संबंधों में वो नहीं लगाते हैं अनैतिकता

498
00:34:50,480 --> 00:34:54,880
का आरोप। कितने चारित्र खंडन वाले स्टेटमेंट दे दिए रामभद्राचार्य

499
00:34:54,880 --> 00:34:59,520
जी ने शंकराचार्यों पर केवल इस व्यक्ति को

500
00:34:59,520 --> 00:35:03,680
बड़ी-बड़ी बातें करके और जो है लोगों का समर्थन

501
00:35:03,680 --> 00:35:08,400
प्राप्त करना है। कोई सिर पैर है इन बातों का गाली देते हैं।

502
00:35:08,400 --> 00:35:12,640
स्वयं के द्वारा कही गई गालियों को भी यह व्यक्ति कहता है कि हम हमारी वाणी

503
00:35:12,640 --> 00:35:16,640
थोड़ी कठोर है। देख रहे हो गालियों को कहेगा हम

504
00:35:16,640 --> 00:35:20,640
तो कठोर वाणी बोलते हैं तो उनसे आपत्ति हो जाती है। दूसरा व्यक्ति कठोर वाणी

505
00:35:20,640 --> 00:35:24,640
है। कठोर वाणी बोल रहा है गाली नहीं दे रहा है उसको कहेगा वो गाली देते हैं। ये है

506
00:35:24,640 --> 00:35:29,440
इसका दोबलापन। चलो फिर

507
00:35:29,440 --> 00:35:33,440
और अगर गाली देते हैं या कठोर वाणी बोलते हैं

508
00:35:33,440 --> 00:35:37,440
तो क्या हम उस विषय में समर्थन करते हैं? हमने वीडियो नहीं बनाया

509
00:35:37,440 --> 00:35:41,440
संस्कृत वाली बात पे आज जब वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाला मामला चल रहा था तभी

510
00:35:41,440 --> 00:35:45,840
वीडियो बना दिया था। जो अपने सामर्थ अनुसार कर सकते हैं करते हैं

511
00:35:45,840 --> 00:35:50,240
और आगे भी करेंगे और इस बार भी करते अगर

512
00:35:50,240 --> 00:35:54,320
राघवाचार्य जी महाराज का वो बिल्कुल एक संतुष्टि जनक

513
00:35:54,320 --> 00:35:58,640
वीडियो में प्राप्त ना होता हो गया और उसी को हमने खुद भी इधर उधर

514
00:35:58,640 --> 00:36:02,880
काफी प्रचारित प्रसारित किया हमारे अपने चैनल पर भी डालते हम लोग

515
00:36:02,880 --> 00:36:06,960
मगर इसलिए नहीं डाल पाए क्योंकि वो उससे पहले कई चैनल से हो गया था तो फिर

516
00:36:06,960 --> 00:36:11,040
वह एक री रीयज कंटेंट का

517
00:36:11,040 --> 00:36:15,040
एक होता है YouTube में वो आ जाता है। बहुत एक

518
00:36:15,040 --> 00:36:19,600
ही वीडियो अगर बहुत बार लोग अपने अपने YouTube से डाल ले तो उसमें

519
00:36:19,600 --> 00:36:24,160
आपत्ति आ जाती है YouTube की तरफ से और इसके साथ ही साथ क्या रामभद्राचार्य

520
00:36:24,160 --> 00:36:28,320
जी के विषय में हमने जो रामचरितमानस वाला जो खंडन जो

521
00:36:28,320 --> 00:36:33,040
पूरी के शंकराचार्य जी ने किया था वो किया नहीं उला अपने से रामभद्राचार्य

522
00:36:33,040 --> 00:36:38,560
जी ने अपनी बुक में लिखा था कि क्या कहते हैं

523
00:36:38,560 --> 00:36:42,560
मुझे अपने संस्कृत होने पर बड़ा वो था पर मैंने जब करपात्री जी

524
00:36:42,560 --> 00:36:44,480
महाराज की हिंदी पढ़ी तो मुझे अपने

525
00:36:44,480 --> 00:36:48,640
संस्कृतज्ञता पर भी वो आ गया। मतलब ऐसा कुछ भाव था वहां पर लिखा है उन्होंने

526
00:36:48,640 --> 00:36:52,880
बुक में उसको दिखाया भाई शंकराचार्यों की आप जो है

527
00:36:52,880 --> 00:36:56,960
संस्कृत के ऊपर आप वो उठा रहे हो। जबकि आप खुद मानते हो कि करपात्री जी महाराज

528
00:36:56,960 --> 00:37:01,360
की हिंदी कैसी अब वो बात अलग है कि भाई तूने कैरी मिनाटी

529
00:37:01,360 --> 00:37:06,320
बनने की सोची तो तेरे अनुसार तेरे तरीके से हम बात ना करें।

530
00:37:06,320 --> 00:37:10,400
इससे क्या मतलब है? तेरा तुझे अगर कॉपी नहीं

531
00:37:10,400 --> 00:37:14,560
कर रहा है कोई तेरा अनुकरण अनुसरण नहीं कर रहा है कोई तो बस वो हो गया रामभद्राचार्य

532
00:37:14,560 --> 00:37:18,640
का विरोध ना करने वाला या रामभद्राचार्य जी का समर्थन हो गया उन विषयों में जो

533
00:37:18,640 --> 00:37:22,640
जिन विषयों में वो हमारे गुरुदेव का विरोध करते हैं ऐसा

534
00:37:22,640 --> 00:37:26,880
नहीं होता है ना इन सब विषयों में सनातन सिद्धांत बोलते जाओ फटाफट फटाफट यहां ये लिखा

535
00:37:26,880 --> 00:37:31,120
है तुमने ये नहीं किया यहां ये लिखा है इससे सिद्ध होता है रामभद्राचार्य जी इस दंड के

536
00:37:31,120 --> 00:37:35,280
इस दंड इस दंड के वो है उपयुक्त इस दंड के लिए

537
00:37:35,280 --> 00:37:40,080
बोलते जाओ फिर लोग कहेंगे शास्त्र से बोल बोलते हो कहां शास्त्र है इसमें

538
00:37:40,080 --> 00:37:46,080
बेवकूफी है और कुछ नहीं है रोता चना बाजे घनाचार्य

539
00:37:47,120 --> 00:37:51,120
इस व्यक्ति के लिए आंतरिक हो गए और हो गए आज तक हमने आदि शंकराचार्य को गाली दी कभी नहीं अपने

540
00:37:51,120 --> 00:37:55,440
लिखने में आदि शंकराचार्य जी का अपमान किया कभी नहीं क्या हमने आदि शंकराचार्य के सिद्धांत को शास्त्रीय

541
00:37:55,440 --> 00:37:59,520
कहा कभी नहीं ये सब काम किसने किया रामद्राचार्य ने किया क्या हमने स्वयं को कभी

542
00:37:59,520 --> 00:38:03,600
एकमात्र धर्म गुरु बताया नहीं ये काम किस आदि शंकराचार्य को

543
00:38:03,600 --> 00:38:07,680
गाली नहीं दी आदि शंकराचार्य को गाली मैंने बताई

544
00:38:07,680 --> 00:38:11,680
दिया गाली नहीं दी। फिर इसने बोला कि सिद्धांत को अशास्त्रीय

545
00:38:11,680 --> 00:38:15,760
बताया। तो भाई सिद्धांत को अशास्त्रीय बताने

546
00:38:15,760 --> 00:38:19,840
वाली बात है। तो वो तो सभी आचार्यों ने एक दूसरे के सिद्धांत को

547
00:38:19,840 --> 00:38:24,000
कहा ही है। सब परंपरा के अनुसार तो सबका सिद्धांत अशास्त्रीय एक दूसरे के अनुसार।

548
00:38:24,000 --> 00:38:29,360
अगर नहीं कहेंगे अशास्त्रीय तो अपने मत की पुष्टि कैसे होगी?

549
00:38:29,360 --> 00:38:34,000
क्या रामानुजाचार्य जी ने अपने श्री भाष्य में

550
00:38:34,000 --> 00:38:37,440
ज्ञान मार्गियों को

551
00:38:37,440 --> 00:38:41,280
प्र नहीं कहा क्या

552
00:38:41,280 --> 00:38:45,360
और क्या विद्या भास्कर जी महाराज श्री वास को नहीं मानते एस इट

553
00:38:45,360 --> 00:38:49,760
इज तुम हो तुम हो ऐसे दोगले जो निगमानंद

554
00:38:49,760 --> 00:38:53,840
से परंपरा निगमानंद को परम अपने परंपरा वाले

555
00:38:53,840 --> 00:38:57,920
गुरु बताते हुए भी कह सकते हो कि भाई निगमंद जी का लिखा हुआ मैं जो है इतना

556
00:38:57,920 --> 00:39:01,920
मानूंगा इतना नहीं मानूंगा तुम ऐसे दोगले हो ना प्रामाणिक आचार्य

557
00:39:01,920 --> 00:39:02,420
ऐसे

558
00:39:02,160 --> 00:39:06,560
नहीं होते श्री वास की वो लाइन नहीं मानते क्या वो प्रचन्न

559
00:39:06,560 --> 00:39:10,640
तो ये जो परंपराएं हैं जो अलग-अलग संप्रदाय हैं

560
00:39:10,640 --> 00:39:14,880
तो कहीं ना कहीं किसी ना किसी एक पॉइंट पर जाकर के ये कहते

561
00:39:14,880 --> 00:39:19,200
ही है कि भैया वो अशास्त्रीय है संप्रदाय तभी

562
00:39:19,200 --> 00:39:23,280
तो संप्रदाय अलग है बेवकूफ इसीलिए मूर्खता

563
00:39:23,280 --> 00:39:27,440
है और कुछ नहीं तो सिद्धांत को शास्त्री तो सब कहते

564
00:39:27,440 --> 00:39:32,880
हैं एक दूसरे के तू भी कह ले हमने तो तुझे भी कहा है ना चल

565
00:39:32,880 --> 00:39:37,360
रामचार्य ने किया क्या हमने स्वयं को स्वर्ग के गुरु बताया सर्वज्ञ गुरु

566
00:39:37,360 --> 00:39:41,600
इसी वीडियो में ये बोल रहा है कि क्या मैंने स्वयं को सर्वज्ञ गुरु बताया?

567
00:39:41,600 --> 00:39:45,760
इसी वीडियो में ये आगे कहेगा कि भैया मैं तो वैष्णवाचार्यों के पैरों में गिरने

568
00:39:45,760 --> 00:39:50,720
को तैयार हूं। उनकी शरण में लेट जाने को तैयार हूं। पर पहले कोई वैष्णव हो वैसा

569
00:39:50,720 --> 00:39:55,120
आज तक इसको कोई वैष्णव नहीं मिला। ऐसा

570
00:39:55,120 --> 00:39:59,280
यह बोलता है कि मुझसे मिलने बड़े-बड़े लोग आए मगर मैंने वह चीजें निर्गत नहीं की

571
00:39:59,280 --> 00:40:03,360
अपने चैनल से। हां, मैंने उनके साथ सत्संग किया विद्या

572
00:40:03,360 --> 00:40:07,360
भास्कर जी महाराज के साथ। तो मैंने वह

573
00:40:07,360 --> 00:40:11,760
लोगों को बताया क्योंकि मुझे उनके साथ सत्संग करना अच्छा लगा। सत्संग किया इसने सानिध्य

574
00:40:11,760 --> 00:40:15,760
दिन में नहीं आया विद्या भास्कर जी महाराज के राघवाचार्य जी महाराज

575
00:40:15,760 --> 00:40:17,440
इसके अनुसार जो

576
00:40:17,440 --> 00:40:22,160
जटिल मुद्दे होते हैं प्रासंगिक उनमें लीपापोती करके निकल जाएंगे।

577
00:40:22,160 --> 00:40:26,480
रामभद्राचार राघवाचार्य जी महाराज ने जो

578
00:40:26,480 --> 00:40:30,720
स्टेटमेंट दिया रामभद्राचार्य जी को लेकर के इतना ठोस उसकी

579
00:40:30,720 --> 00:40:34,720
हमें अपेक्षा नहीं थी मगर फिर भी उन्होंने दिया तो उनका अभिनंदन है ये ये

580
00:40:34,720 --> 00:40:39,200
समीक्षक बैठे हुए भाई हमारे जो बड़े-बड़े आचार्य गण है ना उनके जनाब

581
00:40:39,200 --> 00:40:43,200
समीक्षक बैठे हुए हैं उनकी समीक्षा करने वाले है ये किसी के अनुगत

582
00:40:43,200 --> 00:40:47,360
नहीं हो सकते और कहते क्या है क्या मैंने अपने

583
00:40:47,360 --> 00:40:51,440
आप को सर्वज्ञ गुरु बताया अरे भाई जब तू ये कह रहा है कि मैं सबका निग्रह करने आया

584
00:40:51,440 --> 00:40:55,760
हूं हूं। जब तू यह कह रहा है कि ऐसा कोई है ही नहीं। तेरे अनुसार कोई परफेक्ट

585
00:40:55,760 --> 00:40:59,760
है ही नहीं। और क्या तूने अपना दोष बताया? तो

586
00:40:59,760 --> 00:41:04,000
जब तू अपने आप को दोष रहित बता रहा है। जब तू

587
00:41:04,000 --> 00:41:08,000
अन्यों को दोष युक्त बता रहा है तो तू बिना कहे

588
00:41:08,000 --> 00:41:12,080
बिना कहे यही तो कह रहा है कि एक मात्र मैं ही हूं। सबसे प्रमाणिक सबसे

589
00:41:12,080 --> 00:41:16,400
शास्त्रोक्त बात बोलने वाला।

590
00:41:16,400 --> 00:41:20,480
स्वयं कोई तो सबसे बड़ा बता रहा है तू। फिर

591
00:41:20,480 --> 00:41:24,800
कह रहा है क्या मैंने अपने आप को एकमात्र गुरु बताया? बताया तूने यह

592
00:41:24,800 --> 00:41:28,960
ठीक ऐसे है जैसे इस्लाम वाले कहते हैं कि भैया हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है।

593
00:41:28,960 --> 00:41:33,200
आर्य समाज जी कहते हैं हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। मगर आगे जाकर के कहते

594
00:41:33,200 --> 00:41:37,200
थे कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। मूर्ति पूजा नहीं हो सकती। उसी

595
00:41:37,200 --> 00:41:41,360
प्रकार से तू ये कह रहा है कि भैया मैंने अपने आप को सर्वज्ञ नहीं बताया। एक मात्र गुरु नहीं

596
00:41:41,360 --> 00:41:45,520
बताया। मगर आगे जाकर के तू जितने प्राप्त गुरु

597
00:41:45,520 --> 00:41:50,000
हैं प्रामाणिक आचार्य हैं उनका खंडन कर दे रहा है। अपना खंडन तो नहीं किया

598
00:41:50,000 --> 00:41:54,560
उनका खंडन तू कर दे रहा है।

599
00:41:54,560 --> 00:41:58,640
तो बिना कहे जिस प्रकार से उनका

600
00:41:58,640 --> 00:42:02,640
ईश्वर शक्ति उनका जो सर्व विशेषण है वो

601
00:42:02,640 --> 00:42:07,280
हट जाएगा ना। अगर वो जन्म नहीं लेगा अवतार नहीं लेगा तो तो सर्व विशेषण

602
00:42:07,280 --> 00:42:11,840
हट जाएगा। उसी प्रकार से जब तू ऐसा करता है कि कोई भी वैष्णवाचार्य

603
00:42:11,840 --> 00:42:15,840
है ही नहीं जिसके तू अधीन हो सके। कोई है ही नहीं जो तेरा गुरु गुरु बन

604
00:42:15,840 --> 00:42:20,000
सके। जिसके प्रति तेरा गुरु भाव हो। सब बड़े-बड़े आचार्यों

605
00:42:20,000 --> 00:42:24,240
के साथ तू सत्संग करता है। भाई और समीक्षा

606
00:42:24,240 --> 00:42:28,240
करता है उनके शिष्यों की। विद्या भास्कर जी महाराज ने इस व्यक्ति को

607
00:42:28,240 --> 00:42:32,640
कह दिया कि भैया वो हमारे मित्रवत है। तो वो उनके शिष्यों को उसी दृष्टि

608
00:42:32,640 --> 00:42:36,640
से देखने लगा। यह व्यक्ति उन्होंने तो बड़प्पन में कहा इसने

609
00:42:36,640 --> 00:42:41,600
मान लिया राघवाचार्य जी मेरे शिष्य के समान है तो उनकी समीक्षा ऐसे ही करवा लो इससे

610
00:42:41,600 --> 00:42:46,240
और फिर कहता है कि मैंने क्या मैंने अपने आप को एक मात्र गुरु बताया हां बताया तूने

611
00:42:46,240 --> 00:42:50,240
निग्रह करने वाला होने के रूप में ही तूने अपने आप को बता दिया तू कौन होता

612
00:42:50,240 --> 00:42:54,320
है शंकर परंपरा में पिछले गुरुओं ने क्या बताया क्या नहीं बताया वो वैसा

613
00:42:54,320 --> 00:42:59,760
का वैसा ही बता रहे हैं बता जब तूने परंपरा से उनके अध्ययन नहीं किया तो

614
00:42:59,760 --> 00:43:03,760
उनके गुरु ने क्या कहा था पीछे वालों ने ये वो बताएंगे आएंगे तू वहां

615
00:43:03,760 --> 00:43:07,920
निर्णायक कैसे हो जाएगा? और अगर निर्णायक हो जाएगा तो परंपरा का मतलब क्या

616
00:43:07,920 --> 00:43:09,600
है? बता क्या मतलब

617
00:43:09,600 --> 00:43:13,840
है परंपरा का? परंपरा का मतलब ये है कि शिष्य वो ज्ञान देगा

618
00:43:13,840 --> 00:43:17,840
जो उसके गुरु ने दिया था। वो वो ज्ञान देगा जो उसके गुरु ने दिया था। ये

619
00:43:17,840 --> 00:43:22,000
होती है परंपरा। ये है उपयोगिता परंपरा। जब तू अपने मन

620
00:43:22,000 --> 00:43:28,000
से ज्ञान दे रहा है तो फिर परंपरा के मतलब क्या रह गया?

621
00:43:30,640 --> 00:43:34,800
प्रमाणिक गुरु बनाया। ये सब काम किसने किया? रामद्राचार्य की तो हमारी दृष्टि में शंकराचार्य का सम्मान

622
00:43:34,800 --> 00:43:38,800
है किंतु रामद्राचार्य की दृष्टि में नहीं हमारी दृष्टि में शंकराचार्य जी का सिद्धांत शास्त्र सम्मत है किंतु राम

623
00:43:38,800 --> 00:43:42,880
भद्राचार्य की दृष्टि में नहीं हमारी दृष्टि में आदि शंकराचार्य जी का मार्ग अनुकूल है कल्याणकारी

624
00:43:42,880 --> 00:43:47,120
है किंतु रामद्राचार्य की दृष्टि में वह उपत है तापस है तो

625
00:43:47,120 --> 00:43:51,200
ये स्थिति हो गई हमने कभी कहा की कोई शंकराचार्य मेरे मेरे सामने का संस्कृत नहीं बोल सकता नहीं ये रामद्राचार्य

626
00:43:51,200 --> 00:43:55,280
ने कहा क्या हमने कहा की मैं एक मात्र जगत गुरु हूं और बाकी सारे नकली आचार्य है नहीं ये रामद्राचार्य ने कहा

627
00:43:55,280 --> 00:43:59,360
तो हमारी दृष्टि में तुम्हारे गुरु प्रामाणिक है और हम हो गए रामद्राचार्य की दृष्टि

628
00:43:59,360 --> 00:44:03,360
में तुम्हारे गुरु नकली है और तुम्हारे गुरु नहीं है तुम्हारी पूरी परंपरा नकली और वो

629
00:44:03,360 --> 00:44:07,680
हो गए आंतरिक। चलो ये समझो

630
00:44:07,680 --> 00:44:11,680
ये व्यक्ति निष्ठा नहीं है। ये निर्लता है ये हो सकता है। ये मूर्खता है।

631
00:44:11,680 --> 00:44:16,000
अब समझना आगे पुत्र की हालत और अब देखिए भाई अब

632
00:44:16,000 --> 00:44:20,400
प्रमाणिकता की बात आ जाते हैं। इसकी दृष्टि में क्या शंकराचार्य प्रामाणिक

633
00:44:20,400 --> 00:44:24,560
है। अच्छा इसने कहा प्रामाणिकता

634
00:44:24,560 --> 00:44:25,060
की

635
00:44:24,720 --> 00:44:28,800
परिभाषा वैसे इसको आती नहीं है। प्रामाणिक कहते किसे? जो

636
00:44:28,800 --> 00:44:32,960
शास्त्र में लिखा है वही जो आचरण

637
00:44:32,960 --> 00:44:36,960
है उसकी स्थापना जो अपने शिष्यों में करता है वह आचार्य

638
00:44:36,960 --> 00:44:40,960
कहलाता है। शास्त्र की वाणी है ना ये तो इसने भी अपनी बुक में मानी है इस बात

639
00:44:40,960 --> 00:44:44,960
माना है इस बात को आचार्य तो हो गया। अब जब ये कह

640
00:44:44,960 --> 00:44:49,120
रहा है कि अमुक अमुक जगह पर जो शंकराचार्य हैं वर्तमान

641
00:44:49,120 --> 00:44:53,200
पूरी पीठाधीश्वर इत्यादि या अमुक आचार्य अमुक आचार्य उनका

642
00:44:53,200 --> 00:44:57,600
आचरण शास्त्र सम्मत नहीं है। तो उनके आचार्यत्व पर इसने

643
00:44:57,600 --> 00:45:01,600
प्रश्न चिन्ह उठा दिया ना। प्रामाणिकता पर अगर बात की जाए

644
00:45:01,600 --> 00:45:05,760
तो तूने उनकी प्रामाणिकता पर खूब प्रश्न चिन्ह उठाया है। दिव्याभूति

645
00:45:05,760 --> 00:45:09,920
पढ़ के उनका उपस उड़ा रहा है। उनकी बातों को उनको तू झूठा कहने वाला सिद्ध

646
00:45:09,920 --> 00:45:14,160
करने का प्रयास कर रहा है। उनको तू अपने परिकरों के मुंह में आसक्त

647
00:45:14,160 --> 00:45:19,120
होने वाला सिद्ध करने का प्रयास कर रहा है। तो तू अनेकानेक

648
00:45:19,120 --> 00:45:23,280
सिर्फ मुंह से ये नहीं कह रहा है कि तुम प्रामाणिक नहीं हो। बाकी सब

649
00:45:23,280 --> 00:45:27,520
तो तू कर रहा है। जब तुझसे कहा जाएगा तूने कालिया जिन का मंत्र क्यों दिया तो तू कहेगा

650
00:45:27,520 --> 00:45:31,600
भैया शंकराचार्य तो मुसलमानों के हित का ध्यान रखते हैं।

651
00:45:31,600 --> 00:45:35,680
ये सब आरोप लगाएगा या शंकराचार्य ने उनको वैष्णव वैष्णव क्यों

652
00:45:35,680 --> 00:45:39,920
कह दिया जीसस को? है ना? तो जब ये सब तू आरोप

653
00:45:39,920 --> 00:45:44,080
लगा रहा है तो यहां यहां पर अब जीसस को किस रूप में वैष्णव कहा?

654
00:45:44,080 --> 00:45:48,400
बाइबल ना लिखने वाले जीसस को उन्होंने वैष्णव कहा। बाइबल लिखने

655
00:45:48,400 --> 00:45:52,800
वाले बाइबल देने वाले जो बाइबल आज प्रासंगिक है वो बाइबल जो सनातन विरोधी

656
00:45:52,800 --> 00:45:57,040
है उस बाइबल को देने वाले जो जीसस है उनको उसने उन्होंने

657
00:45:57,040 --> 00:46:01,520
वैष्णव नहीं कहा मगर तूने क्या मिर्च मसाला लगा के प्रस्तुत किया

658
00:46:01,520 --> 00:46:06,160
कि भैया वो वैष्णव कह रहे हैं। है ना? तो

659
00:46:06,160 --> 00:46:10,160
उन्होंने ये माना कि ये जो बाइबल जीसस के नाम से प्रसारित की जा रही है।

660
00:46:10,160 --> 00:46:14,480
ये बाइबल जीसस ने नहीं लिखी है। जीसस तो वैष्णवों

661
00:46:14,480 --> 00:46:18,560
के अनुगामी थे। उन्होंने तो यह कहा

662
00:46:18,560 --> 00:46:22,640
वास्तविक जीसस जो थे मगर जीसस के नाम पर जो प्रचार किया जा रहा है वो

663
00:46:22,640 --> 00:46:26,880
गलत किया जा रहा है अगर वास्तव में जीसस के प्रति निष्ठा है तो ईसाइयों हिंदू

664
00:46:26,880 --> 00:46:30,960
हो जाओगे ये उन्होंने कहा ना मगर इसने क्या कहा जीसस वैष्णव कैसे हो गए ये

665
00:46:30,960 --> 00:46:35,440
है वो है तो यानी कि तुम्हें उनकी

666
00:46:35,440 --> 00:46:39,440
अच्छा अगर बात की जाए क्या वो परंपरा से प्रामाणिक है कि नहीं

667
00:46:39,440 --> 00:46:43,680
तो इसने उनकी परंपरा वाली बात पर भी उंगली उठाई उन्होंने कहा कि तुम इसका

668
00:46:43,680 --> 00:46:47,840
मान इसका ये कहना है हालांकि वो बात मान्य नहीं है क्योंकि किसकी परंपरा

669
00:46:47,840 --> 00:46:52,000
में पीछे वाले गुरुओं ने क्या बताया है वो उस परंपरा

670
00:46:52,000 --> 00:46:55,120
का जो प्रामाणिक उत्तराधिकारी है वही कहेगा

671
00:46:55,120 --> 00:46:59,280
वही बता सकता है ना तो इसने बौद्ध और शबरी के विषय

672
00:46:59,280 --> 00:47:04,000
में पूरी के शंकराचार्य जी को अपने पूर्व

673
00:47:04,000 --> 00:47:08,000
जो पूर्वाचार्य है उनका विरोध करने वाले बता दिया यानी परंपरा

674
00:47:08,000 --> 00:47:12,000
से प्रमाणिक नहीं आचरण से आचार्य नहीं और जो

675
00:47:12,000 --> 00:47:17,600
यह झूठ बोलने वाले या आसक्त

676
00:47:17,600 --> 00:47:22,080
है ना गप्पे मारने वाले सब बोला इसने मुसलमानों

677
00:47:22,080 --> 00:47:26,080
का पक्ष लेने वाले इन सब रूपों में इसने उनके सन्यासी होने पर

678
00:47:26,080 --> 00:47:30,160
भी आरोप प्रश्न उठा दिया तो तूने कहा नहीं मुंह से कि वो

679
00:47:30,160 --> 00:47:34,160
अप्रामाणिक है मगर तूने वो सारी चीजें कर दी जिससे कि उनकी अप्रामाणिकता

680
00:47:34,160 --> 00:47:39,200
सिद्ध हो प्रयास वो सारे प्रयास तूने कर लिए

681
00:47:39,200 --> 00:47:43,760
और तेरे अनुसार अगर बात आए प्रामाणिकता

682
00:47:43,760 --> 00:47:48,080
की तो मेरे मेरे संज्ञान में तो आज तक नहीं है कि शब्द अगर यूज़ करने की बात है

683
00:47:48,080 --> 00:47:52,080
कि यूज़ किया है कि नहीं ये शब्द प्रामाणिक अप्रामाणिक वाला तो रामभद्राचार्य

684
00:47:52,080 --> 00:47:56,400
जी ने कहा पे किया मेरे संज्ञान में तो नहीं है अगर हो तो बता देना तू

685
00:47:56,400 --> 00:48:00,480
भाई तूने एक अलग तरीके से उनको अप्रामाणिक सिद्ध करने का प्रयास किया बस आज तू

686
00:48:00,480 --> 00:48:05,040
चिल्ला रहा है कि नहीं मैं तो प्रामाणिक मानता हूं बस इतना है और उसी तरीके से अप्रामाणिक

687
00:48:05,040 --> 00:48:09,120
अलग तरीके से उन्होंने सिद्ध करने का प्रयास किया और अगर बात रही छोड़ने

688
00:48:09,120 --> 00:48:10,160
की

689
00:48:10,160 --> 00:48:16,080
तो तो जैसे कहीं पहले उनके विरोध में हम वीडियो बना चुके

690
00:48:16,080 --> 00:48:20,400
तो फिर इसको व्यक्ति निष्ठता नहीं कहते हैं। इसको

691
00:48:20,400 --> 00:48:24,560
कहते हैं तेरा दोगलापन कायरता कि

692
00:48:24,560 --> 00:48:28,560
औरों के लिए कोई और नियम मेरे लिए अलग नियम। अरे भैया पहले

693
00:48:28,560 --> 00:48:33,040
बात बोलने से पहले थोड़ी जांच पड़ताल की। तुझसे कहीं

694
00:48:33,040 --> 00:48:37,360
साल कई समय बहुत समय पहले हम रामभद्राचार्य जी के विरोध में

695
00:48:37,360 --> 00:48:41,680
वीडियो बना चुके हैं। बेवकूफ पहले देख जाकर के रिसर्च

696
00:48:41,680 --> 00:48:45,840
कर थोड़ी जैसे वो की थी ना अपने सपनों की दुनिया में परी कालिया

697
00:48:45,840 --> 00:48:50,880
जिन मलिच्छराज की ऐसे रिसर्च कर थोड़ी वास्तविक धरातल

698
00:48:50,880 --> 00:48:53,440
तो

699
00:48:53,440 --> 00:48:56,320
हां

700
00:48:56,320 --> 00:49:00,480
पूरी शंकराचार्य जी का या प्रामाणिक आचार्यों का मर्यादा

701
00:49:00,480 --> 00:49:04,480
में रहकर विरोध करने वालों का हम बहुत जल्दी विरोध नहीं

702
00:49:04,480 --> 00:49:08,800
करते हैं। कब तक? जब तक वह आवश्यक ना हो। एक

703
00:49:08,800 --> 00:49:12,800
जब तक वह करने पर ही उस पर प्रभाव पड़ना हो। दो

704
00:49:12,800 --> 00:49:16,800
ऐसा भी नहीं है कि अगर पूरी शंकराचार्य जी स्वयं बोल रहे हैं तो हम उसमें कूद

705
00:49:16,800 --> 00:49:20,800
पड़े। राघवाचार्य जी स्वयं बोल रहे हैं तो हम उस कूद पड़े। विद्या भास्कर जी स्वयं

706
00:49:20,800 --> 00:49:24,800
बोल रहे हैं तो हम उस कूद पड़े। ऐसा भी नहीं है। और तीसरा

707
00:49:24,800 --> 00:49:28,960
कि वो वर्णाश्रमी हो, मूर्ति पूजक हो।

708
00:49:28,960 --> 00:49:33,280
तुझको भी तो छोड़ा हुआ है। मूर्ख तू अपने को क्यों नहीं देखता है?

709
00:49:33,280 --> 00:49:37,280
तुझको नहीं छोड़ा था। तूने ये सब आज किया क्या? यह असिद्ध व्यक्तिगत

710
00:49:37,280 --> 00:49:41,520
अमर्यादित आरोप तूने अब लगाए हैं। तुझको भी तो छोड़े

711
00:49:41,520 --> 00:49:45,520
हुए थे। यही सब चीजें थी तुझ में भी। तो इससे तू क्यों नहीं सीख लेता

712
00:49:45,520 --> 00:49:49,520
है कि हमें क्यों छोड़ा था? क्यों नहीं सवाल करता है? मुझे क्यों छोड़ा था? तो आंसर

713
00:49:49,520 --> 00:49:53,600
आ जाएगा। तूने जब मर्यादा को लागा जब सीधे तौर पर

714
00:49:53,600 --> 00:49:57,600
तूने कुछ ऐसा किया जो मुझसे जुड़ा हुआ था तो मैंने

715
00:49:57,600 --> 00:50:01,600
तुझ पर संज्ञान लेना चालू किया कि सीधे तौर पर तो मुझे वो बातें

716
00:50:01,600 --> 00:50:05,600
भी पता चली तेरे बारे में जो मुझे नहीं ज्ञात बड़ी-बड़ी मोटी मोटी बातें तेरे बारे

717
00:50:05,600 --> 00:50:09,760
में ज्ञात थी और उस पर भी मैं चुप इसलिए था कि भैया जैसे और सारे

718
00:50:09,760 --> 00:50:11,600
लोग विरोध करते हैं तो ये भी कर ले

719
00:50:11,600 --> 00:50:15,600
अपना भाई है वर्णाश्रमी है मूर्ति पूजक है परंपरावादी है मुझे

720
00:50:15,600 --> 00:50:19,600
नहीं पता था तेरी परंपरा काल्पनिक है कपोल है ये सब है वो तो आज तक तेरे लोगों

721
00:50:19,600 --> 00:50:23,600
को नहीं पता तुझे नहीं पता अभी तो तू कहानियां गढ़ रहा होगा वो ला कहानियां

722
00:50:23,600 --> 00:50:26,560
तब बात पता चलेगी

723
00:50:26,560 --> 00:50:32,560
तो ठीक अब आगे चलते हैं

724
00:50:32,800 --> 00:50:36,800
पक्षी मानसिकता है जो देखने को मिलता है ज्योति का अधिकारी

725
00:50:36,800 --> 00:50:41,040
अब देखिए नीच कितना व्यक्ति है जिसने इसके बारे में कोई

726
00:50:41,040 --> 00:50:45,040
तू तड़ाक करके बात नहीं की मगर ये कैसे बात कर रहा है उनके लिए इससे

727
00:50:45,040 --> 00:50:49,040
डबल उम्र की है वो हां कैसे बात कर रहा है उनके बारे में ये

728
00:50:49,040 --> 00:50:53,200
स्त्री ऐसी लगती है वैसी लगती है ये इसकी तमीज

729
00:50:53,200 --> 00:50:58,320
है यही इसके संस्कार है

730
00:50:58,320 --> 00:51:02,640
सुन ले लिखता है किंतु जी के पत्र लड़की

731
00:51:02,640 --> 00:51:06,720
है बताता है और रंजना पुत्र के साक्षात्कार से लगता है कि आचार्य के वकील है। मुझे

732
00:51:06,720 --> 00:51:10,880
नहीं पता कि रंजना अग्नि की पुत्र की उम्र कितनी है। लेकिन मुझे इनके शरीर को या इनके मानसिकता

733
00:51:10,880 --> 00:51:14,880
को या इनके व्यक्तित्व को देखकर विश्वास है कि इनकी अवस्था साल से अधिक कितनी होगी। मुझे लगता है 204

734
00:51:14,880 --> 00:51:19,040
में ही 25 में जन्म लिया होगा और इन्हें अब देखो ये

735
00:51:19,040 --> 00:51:23,120
क्या किस चीज पे बात कर रहा है? इसके पास एक तो बात का पतंगड़ बनाने का समय कितना

736
00:51:23,120 --> 00:51:26,640
है? क्या एक व्यक्ति एक जो अधिवक्ता

737
00:51:26,640 --> 00:51:31,760
है वह क्या एकमात्र व्यक्ति का ही वकील होता है पैरवी करता है उसी की

738
00:51:31,760 --> 00:51:37,760
क्या दो लोगों की एक से ज्यादा लोगों की पैरवी नहीं कर सकता है

739
00:51:37,760 --> 00:51:41,760
क्या उन्होंने अगर वो हिंदुओं की ओर से लड़ने वाली वकील

740
00:51:41,760 --> 00:51:46,560
है तो क्या वो

741
00:51:46,560 --> 00:51:51,040
अगर वो हिंदुओं की ओर से लड़ने वाली अधिवक्ता है हाई कोर्ट इत्यादि में या

742
00:51:51,040 --> 00:51:55,120
सर्वोच्च न्यायालय में उच्च न्यायालय में तो क्या वो

743
00:51:55,120 --> 00:51:59,200
किसी मामले में मुक्तेश्वर जी का केस या किसी मामले में रामभद्राचार्य जी

744
00:51:59,200 --> 00:52:03,360
का केस या किसी मामले में पूरी के शंकराचार्य जी का केस नहीं लड़ सकती और अगर लड़ेंग

745
00:52:03,360 --> 00:52:08,240
तो तुम ये कहोगे अरे भाई ये लोग तो तीनों एक दूसरे के विरोधी है

746
00:52:08,240 --> 00:52:12,240
हां हां ये हो सकता है कि संभवत

747
00:52:12,240 --> 00:52:16,480
तेरे संपर्क में जितने भी वकील हो वो निठल्ले टाइप के हो संभवत

748
00:52:16,480 --> 00:52:20,560
ऐसा हो सकता है जिनके पास एकमात्र तू जो कालिया जिनका पुजारी है वही

749
00:52:20,560 --> 00:52:24,880
क्लाइंट हो इसीलिए तेरे को यह सब दिखता कि भैया सामने वाले के

750
00:52:24,880 --> 00:52:29,440
सामने वाले का भी एक ही क्लाइंट होना चाहिए। कि उनका जो मुवकील

751
00:52:29,440 --> 00:52:33,920
कहते हैं क्या क्लाइंट कहते हैं वो होना चाहिए जिनकी वो पैरवी करता है जिनकी

752
00:52:33,920 --> 00:52:37,920
ओर से वो पक्ष को रखता है ये बेवकूफी है

753
00:52:37,920 --> 00:52:41,760
कि नहीं कि शिवश कहता है वो रामभद्राचार्य अरे भैया किसी

754
00:52:41,760 --> 00:52:45,840
केस में वो रामभद्राचार्य की वकील है किसी केस में वो मुक्ति जी हां

755
00:52:45,840 --> 00:52:49,840
तू तब आपत्ति उठा सकता है कर सकता है धर्मनिष्ठता पर आरोप लगा

756
00:52:49,840 --> 00:52:53,840
सकता है जब किसी एक प्रकरण में वो

757
00:52:53,840 --> 00:52:57,920
अपने वो जो पहले दोनों की पैरवी कर चुकी है किसी एक प्रकरण में वो

758
00:52:57,920 --> 00:53:02,320
किसी एक की तरफ से खड़ी हो जाए और जिसमें दोनों पक्ष एक दूसरे के विरोधी

759
00:53:02,320 --> 00:53:06,400
हो तो ये कह सकता है कि हां भैया यहां इन्होंने क्या किया पहले तो ये

760
00:53:06,400 --> 00:53:10,400
एक एक करके धर्म की बात को रख रही थी वो भले ही रामभद्राचार्य जी की ओर

761
00:53:10,400 --> 00:53:14,480
से कही जा रही हो या वो भले ही जी की बात से कही जा रही हो मगर जब दोनों

762
00:53:14,480 --> 00:53:18,640
लोग आपस में एक दूसरे के सामने खड़े हैं तब वो किस पक्ष में खड़ी हो गई

763
00:53:18,640 --> 00:53:22,640
तो तुझे वहां पर सवाल हो सकता था कि भैया ये तो अजीब

764
00:53:22,640 --> 00:53:26,720
और या फिर तेरी जो एक तेरा जो प्रश्न उठ रहा है ये दोनों दोनों तरफ

765
00:53:26,720 --> 00:53:30,880
है तो दोनों तरफ है एक ही केस में यदि वो दोनों तरफ खड़ी हो जाती तब तू

766
00:53:30,880 --> 00:53:35,280
कर सकता था तब ये सब तब कन्फ्यूजन अपनी दिखा सकता था बात का भतंगड़

767
00:53:35,280 --> 00:53:39,840
बनाना है इस व्यक्ति को

768
00:53:39,840 --> 00:53:44,240
होने के कारण इतनी अच्छी बात कर ली अब देखो ये क्या कह रहा है

769
00:53:44,240 --> 00:53:48,560
कि शरीर से एक मिनट इसकी गिद्ध जैसी नजरें

770
00:53:48,560 --> 00:53:52,640
देखो स्त्री के शरीर पर कैसे जाती है चाहे वो अधे उम्र की हो

771
00:53:52,640 --> 00:53:56,960
प्रौढ़ अवस्था में हो युवा में हो किशोर हो इसकी जो

772
00:53:56,960 --> 00:54:00,960
इसकी नजरें है ना जो इसने बाइपोलर इत्यादि में कहा था ना वो देखिए

773
00:54:00,960 --> 00:54:05,120
किस प्रकार से सिद्ध होता है जो इसकी कामुकता है इसके अंदर जो लष्ट है स्त्री

774
00:54:05,120 --> 00:54:09,200
के शरीर के लिए और जो इसकी बेशर्माई है स्त्री के शरीर को लेकर

775
00:54:09,200 --> 00:54:13,600
के क्यों क्योंकि जो विजय

776
00:54:13,600 --> 00:54:17,600
श्री साड़ी पहन कर के वीडियो बना रही है ये उसको वो

777
00:54:17,600 --> 00:54:21,600
नहीं दिख रहे हैं। शंकराचार्य के शरण में आने से पहले

778
00:54:21,600 --> 00:54:25,680
उसने कुछ अज्ञानता वश जो फोटो खिचा ली उसको वही दिखते हैं और फिर

779
00:54:25,680 --> 00:54:29,680
वहां पर स्त्रियों के अंतर वस्त्रों का नाम सार्वजनिक रूप से लेने में

780
00:54:29,680 --> 00:54:33,920
तो रस आता है ना मुख में रस आता होगा कि उसने ये पहन करके फोटो खिं

781
00:54:33,920 --> 00:54:37,920
रखी है पहन करके और यही नहीं फिर और रस आता है कि विजयश्री के पास ऊपर

782
00:54:37,920 --> 00:54:41,920
और नीचे ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास नहीं है ये सब रस आता

783
00:54:41,920 --> 00:54:46,080
है मन करता है व्यक्ति का इन सब बातों पर चर्चा करने का और वो किसी ना किसी

784
00:54:46,080 --> 00:54:50,160
माध्यम से अपनी जो प्रवृत्ति है वो बाहर निकालता है।

785
00:54:50,160 --> 00:54:54,160
वो दिखाता है लोगों को किसी तरीके से मैं वो बातें कर पाऊं इन सब

786
00:54:54,160 --> 00:54:54,960
से जो मैं

787
00:54:54,960 --> 00:54:59,200
अंदर से करना चाहता हूं। ऊपर और नीचे ये अंग वस्त्र

788
00:54:59,200 --> 00:55:03,360
ये अंतर्वस्त्र इसका शरीर ये सब रस फूटता

789
00:55:03,360 --> 00:55:07,600
है ना जो कामुक जो वो होता है ना क्या कहते हैं स्त्री

790
00:55:07,600 --> 00:55:11,600
लोलुपता होती है जो उसका वो रस फूटता है जब वो इन सब बातों

791
00:55:11,600 --> 00:55:15,600
को करता है बड़ा सुख मिलता है तो शरीर की बात करेगा गद

792
00:55:15,600 --> 00:55:19,760
की तरह अब आप बोलेंगे ये क्या बात हुई रंजना

793
00:55:19,760 --> 00:55:23,920
तो प्राउड स्त्री है वो एक साल की कैसे हो सकती है अच्छा नहीं है क्या मतलब 2024 में वो

794
00:55:23,920 --> 00:55:29,120
धरती पर थी 2023 में वो धरती पर थी जीवित थी या अपनी स्वस्थ शारीरिक मानसिक स्त्री में थी

795
00:55:29,120 --> 00:55:33,440
रामद्राचार्य ने कहा था रामद्राचार्य के शब्दों में मैं ये नहीं कह रहा ये रामचार्य

796
00:55:33,440 --> 00:55:37,440
का बयान है बिंदु में अवक्तानंद ने अपने गुरु की हत्या करके गद्दी कब्जा कर ली इस

797
00:55:37,440 --> 00:55:42,000
तरह का भाव रामचार्य का था मतलब रामद्राचार्य दृष्ट अवक्तानंद सरस्वती ना केवल नकली शंकराचार्य

798
00:55:42,000 --> 00:55:46,080
तो अपने गुरु के हत्या आर्य भी है लज्जा नहीं आई रंजना

799
00:55:46,080 --> 00:55:50,800
अच्छा अब पहली बात यह है

800
00:55:50,800 --> 00:55:54,800
कि धूर्त व्यक्ति एक वर्ष पूर्व या जितने भी वर्ष पूर्व

801
00:55:54,800 --> 00:55:59,040
जिसने बताया तू उस समय पृथ्वी पर था धरती पर था

802
00:55:59,040 --> 00:56:03,120
मुक्तेश्वर जी से धार्मिक संसर्ग में जुड़ा हुआ था ना बहिष्कार तो तूने

803
00:56:03,120 --> 00:56:07,200
अभी किया है ना तू तो बड़ा हो गया है विद्या भास्कर

804
00:56:07,200 --> 00:56:10,160
जी के साथ हम सत्संग करते हैं। विद्या भास्कर जी

805
00:56:10,160 --> 00:56:14,160
ने अगर तुम्हें मित्रवत बता दिया है तो उनके शिष्यों को अपने शिष्य के रूप में देखते हुए

806
00:56:14,160 --> 00:56:18,240
उनकी समीक्षा करते हैं। उनके लिए अनग प्रलाप करते हैं। वो लीपापोती करके

807
00:56:18,240 --> 00:56:22,320
निकल जाएंगे। और एक वर्ष पूर्व तू भी था ना पृथ्वी पर धरती

808
00:56:22,320 --> 00:56:26,480
पर था। अच्छा उस समय तू मुक्तेश्वर जी से जुड़ा हुआ था कि नहीं जुड़ा

809
00:56:26,480 --> 00:56:30,560
हुआ था? तब जब रामभद्राचार्य जी ने उनके विरोध में कह

810
00:56:30,560 --> 00:56:34,720
दिया था ऐसी बात तो तेरे हिसाब से क्या होना चाहिए था? अब

811
00:56:34,720 --> 00:56:38,720
मुक्तेश्वर जी को केस कर देना चाहिए था न्यायालय में। क्यों नहीं कर

812
00:56:38,720 --> 00:56:42,800
दिया? अच्छा वही वाली बात कि

813
00:56:42,800 --> 00:56:47,840
तुमने जापान नहीं देखा है तो इसका मतलब यह है कि इस दुनिया में कोई जापान नहीं है।

814
00:56:47,840 --> 00:56:52,000
रंजना अग्निहोत्री जी ने इस बात को लेकर के रामभद्राचार्य जी का विरोध किया था कि

815
00:56:52,000 --> 00:56:56,080
नहीं किया था? इस बात को तूने कैसे सिद्ध किया? जो तू विरोध

816
00:56:56,080 --> 00:57:00,640
कर रहा है कैसे सिद्ध किया? तेरे सीसीटीवी कैमरे लगे हैं क्या?

817
00:57:00,640 --> 00:57:05,280
भाई अपनी विद वाली आंखों से लगातार देखता है क्या तू? स्त्रियों को

818
00:57:05,280 --> 00:57:09,600
कल्पनाओं में देखता होगा। यही काम है तेरा

819
00:57:09,600 --> 00:57:13,680
वो परी इत्यादि में तो कल्पना कर ही रखी है वो निगनंद तो दे ही

820
00:57:13,680 --> 00:57:17,760
गए हैं कि वो भगवती जो पत्नी के रूप में

821
00:57:17,760 --> 00:57:21,760
वही कल्पना तेरी चलती रहती होंगी सदैव स्त्रियों पर थर्ड आई रखना गिद्ध

822
00:57:21,760 --> 00:57:24,400
के जैसी

823
00:57:24,400 --> 00:57:25,920
नीच

824
00:57:25,920 --> 00:57:30,000
अरे भैया उन्होंने किया था कि नहीं किया था ये तू पहले देख तो

825
00:57:30,000 --> 00:57:34,160
ले दूसरों को तू नपुंसक कह रहा है स्त्री के शरीर की बात कर रहा

826
00:57:34,160 --> 00:57:37,360
है

827
00:57:37,360 --> 00:57:41,520
उन्होंने अगर क्या उन्होंने एक स्टेटमेंट दिया है रंजना अग्निहोत्री जी के इस

828
00:57:41,520 --> 00:57:45,520
बार इस मामले में मैं रामद्राचार्य जी के साथ खड़ी हूं। तू तू खुद

829
00:57:45,520 --> 00:57:49,680
कहता है मूर्ख व्यक्ति कि हम जो है व्यक्ति का नहीं उसके द्वारा किए

830
00:57:49,680 --> 00:57:53,920
जा रहे गलत कृत का विरोध करते हैं तो फिर तू यहां पर क्यों नहीं ध्यान देता

831
00:57:53,920 --> 00:57:58,560
है कि रंजना अग्निहोत्री जी किस मामले में रामभद्राचार्य की ओर से खड़ी हुई है

832
00:57:58,560 --> 00:58:02,800
यही है तेरी मूर्खता और धूर्तता तुझे केवल तुझे धर्म से कोई मतलब

833
00:58:02,800 --> 00:58:06,800
नहीं है और मैं तुझे फिर बता रहा हूं मैं तुझे फिर बता रहा हूं

834
00:58:06,800 --> 00:58:12,320
प्रलय आने से पहले तक अगर मैं जीवित रहा तो

835
00:58:12,320 --> 00:58:16,640
तेरा इंतजाम मैं जरूर कर दूंगा मैं तुझे फिर बता रहा हूं तू मेरे

836
00:58:16,640 --> 00:58:20,640
शब्दों को अभी तुझे वो प्रभाव नहीं डाल पा रहे होंगे होता

837
00:58:20,640 --> 00:58:24,640
है जो रावण होता रावण था ना उसको भी अहंकार था

838
00:58:24,640 --> 00:58:28,960
कोई कुछ नहीं कर पाएगा ध्वस्त कर दी थी लंका श्री राम जी ने उसकी

839
00:58:28,960 --> 00:58:33,440
तो ऐसे ही तुझे भी इस समय अपने अहंकार में कुछ समझ में नहीं आ रहा होगा

840
00:58:33,440 --> 00:58:37,440
मगर इतना निग्रह तो तेरा कर ही दिया तेरी भाषा शैली बहुत हद तक

841
00:58:37,440 --> 00:58:41,040
बदल गई अब तुझे वो स्त्रियों का ऊपर नीचे वाला बातें अब

842
00:58:41,040 --> 00:58:45,040
याद नहीं आती आजकल तुझे है ना उतना निग्रह तो हमने तेरा

843
00:58:45,040 --> 00:58:49,120
कर दिया। मगर मैं तुझे फिर बता रहा हूं कि प्रलय आने

844
00:58:49,120 --> 00:58:53,120
से पहले तक यदि मैं जीवित रहा तो मैं तेरा इंतजाम जरूर कर दूंगा। तेरी

845
00:58:53,120 --> 00:58:57,520
ये जो पाप की लंका तूने बनाई है ना ये जो ये जो गप्प सड़ाके

846
00:58:57,520 --> 00:59:01,520
मार मार के मलेचराज ये सब तूने जो दुनिया अपनी बनाई है ये

847
00:59:01,520 --> 00:59:05,760
सारी फेंटसी तेरी नष्ट कर दूंगा। जला

848
00:59:05,760 --> 00:59:10,720
दूंगा सब कुछ। बस

849
00:59:10,720 --> 00:59:14,720
करता रहे तू आगे बढ़ अपने वो पुख्को पर चढ़ता रहे वो

850
00:59:14,720 --> 00:59:18,720
जो तुझे वाह वाह वाह वाह वाले हैं कोई काम नहीं आएगा जो तुझे वाह वाह

851
00:59:18,720 --> 00:59:22,720
वाह वाहवा कर रहे हैं ना जो कमेंट में आ के कर रहे हैं

852
00:59:22,720 --> 00:59:27,040
वाह वाह वाह वाह वो कोई काम नहीं आएगा तेरा जो

853
00:59:27,040 --> 00:59:31,280
तेरा अंत निश्चित है तूने इतना सब करके रख दिया अपने लिए

854
00:59:31,280 --> 00:59:35,360
तेरा अंत निश्चित है तूने जो पाप की पाप का

855
00:59:35,360 --> 00:59:39,520
साम्राज्य अपना बनाने की कोशिश की तटपुंजिया वो भी कोई साम्राज्य

856
00:59:39,520 --> 00:59:43,520
साम्राज्य नहीं मगर तूने जो अपना Facebook या यूबरिया अपना बनाया

857
00:59:43,520 --> 00:59:47,520
ना छोटा सा दुनिया वो नष्ट होने पे है नष्ट होगा वो

858
00:59:47,520 --> 00:59:52,720
ठीक है कर तू अपनी गिद्ध वाली हरकतें

859
00:59:52,720 --> 00:59:56,800
स्त्री का शरीर तब ये धरती पर थी अरे विरोध किया था

860
00:59:56,800 --> 01:00:00,960
कि नहीं किया था तूने कैसे तय कर लिया भाई अच्छा तूने क्यों नहीं

861
01:00:00,960 --> 01:00:05,440
मुक्तेश्वर जी का धार्मिक संसर्ग छोड़ दिया कि तुम क्यों नहीं इन पर केस कर रहे हो

862
01:00:05,440 --> 01:00:09,680
और तो और चलो लोग केस नहीं कर रहे हो जो जो मातृ

863
01:00:09,680 --> 01:00:13,680
शक्ति तुम्हारी गुरु बहन है रामभद्राचार्य जी से पूछ उनसे जाकर के उस समय तो तू

864
01:00:13,680 --> 01:00:17,840
साथ में था ना जो मातृ शक्ति इनसे जुड़ी हुई है रामभद्राचार्य जी से भी जुड़ी

865
01:00:17,840 --> 01:00:22,000
हुई है तेरे तेरी जानकारी में और समर्थन करती रामभद्राचार्य जी का तो तुम क्यों

866
01:00:22,000 --> 01:00:26,400
उसको अभी भी अपने गुरु बहन मान रहे हो क्यों अभी अभी भी बात हो रही है ज्योतिष

867
01:00:26,400 --> 01:00:30,480
पीढ़ वाले महाराज जी से कोई क्या बैर है क्या बेवकूफ

868
01:00:30,480 --> 01:00:34,480
व्यक्ति कहीं ना कहीं तू और मैं भी आपस में एक दूसरे की मदद करते मिल

869
01:00:34,480 --> 01:00:38,640
जाएंगे बहुत ज्यादा ज्यादा दूर है तो अप्रत्यक्ष रूप से और बहुत पास

870
01:00:38,640 --> 01:00:42,720
है तो प्रत्यक्ष रूप से ये क्यों नहीं तू समझता

871
01:00:42,720 --> 01:00:46,800
है क्योंकि तू समझ अब वही वाली बात है कि

872
01:00:46,800 --> 01:00:51,440
नहीं समझ पा रहा है तो या तो तू मूर्ख है और या फिर तू

873
01:00:51,440 --> 01:00:55,520
समझना ही नहीं चाहता है अब प्रत्यक्ष रूप से सब लोग एक

874
01:00:55,520 --> 01:00:59,680
दूसरे से कहीं ना कहीं कनेक्टेड मिल जाएंगे देखा जाएगा

875
01:00:59,680 --> 01:01:04,400
कि प्राथमिकता से क्या है और गौण रूप से क्या है

876
01:01:04,400 --> 01:01:07,760
गुरुजनों के लिए माता माता-पिता के लिए भी भगवान शब्द आ जाता

877
01:01:07,760 --> 01:01:11,920
है उपयोग में मगर गौण रूप से प्राथमिकता से तो भगवान

878
01:01:11,920 --> 01:01:15,920
के लिए ही उपयोग है विष्णु पुराण उसी प्रकार

879
01:01:15,920 --> 01:01:19,920
से तेरा और मेरा भी कहीं ना कहीं एक दूसरे का सहयोग निकल आएगा

880
01:01:19,920 --> 01:01:23,920
मगर गौण रूप से प्राथमिकता से तो विरोध ही है तो ये

881
01:01:23,920 --> 01:01:29,920
गौण और विरोध की परिभाषा को समझ थोड़ा

882
01:01:32,160 --> 01:01:36,320
परिस्थिति होंगी शारीरिक मानसिक स्वस्थ स्त्री होगी आई थी जब उनके ही

883
01:01:36,320 --> 01:01:40,480
गुरु और गुरु भाई उस प्रकार से कहा जा रहा था और रामचार्य की वकील बनकर बैठी है और वहीद्राचार्य नोटिस

884
01:01:40,480 --> 01:01:44,640
भिजवा रहा है अपने चेलों के द्वारा किसको जी को और पेट प्रसारित

885
01:01:44,640 --> 01:01:48,720
कर रहा है कि रंजना के वकील हमारी वकील बता रहा है रामद्राचार्य के वकील ये क्या रिश्ता है

886
01:01:48,720 --> 01:01:52,800
भाई ये रिश्ता क्या बताता है बस यही इसकी ओछी

887
01:01:52,800 --> 01:01:56,880
गिरी है इसी के कारण ये देखो ऐसा नहीं है जनता होती

888
01:01:56,880 --> 01:02:00,880
है सबके सबके श्रोता मिल जाते हैं रामभद्राचार्य जी को भी अपने

889
01:02:00,880 --> 01:02:04,960
श्रोता मिल जाते हैं तात्विक व्याख्यान करने वाले पूरी शंकराचार्य

890
01:02:04,960 --> 01:02:09,360
जी को भी अपने श्रोता मिल जाते हैं। भागवत कथा कहने वाले जो कथाकार आचार्य

891
01:02:09,360 --> 01:02:13,360
गण है उनको भी अपने श्रोता मिल जाते हैं। और इस प्रकार की जो छिछाई करता

892
01:02:13,360 --> 01:02:17,760
है ना है ना छिछलाई गिरी जो करता है Facebookिया

893
01:02:17,760 --> 01:02:22,080
गिरी जो करता है ऐसे लोगों को भी उसके स्तर के श्रोता मिल ही जाते हैं।

894
01:02:22,080 --> 01:02:22,800
तो क्या है

895
01:02:22,800 --> 01:02:26,880
इसको हर जगह यही सब दिखाई देता है। रिश्ता क्या कहलाता है? है ना?

896
01:02:26,880 --> 01:02:30,880
वो उसके पास ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास यही सब इसको दिखता है तो

897
01:02:30,880 --> 01:02:35,040
इसको इसके तरीके के वो जो श्रोता है मिल जाते

898
01:02:35,040 --> 01:02:39,120
हैं तो स्वामी दत्तात्रेय जी को नकली शंकराचार्य बताने वाले पीएम का विरोध करेगा

899
01:02:39,120 --> 01:02:42,640
कि नहीं करेगा इसका भी मान

900
01:02:42,640 --> 01:02:46,720
इतनी बार इन बातों का मैं जवाब दे चुका हूं मेरे भाई हमें

901
01:02:46,720 --> 01:02:51,120
चुनना पड़ता है कि 2000 लोग अगर करपात्री

902
01:02:51,120 --> 01:02:55,120
जी के विरुद्ध कोई बात कह रहे हैं तो उनमें से कौन सी बात पर हमको

903
01:02:55,120 --> 01:02:59,120
प्रतिक्रिया देनी क्यों नहीं समझ पाता उसी

904
01:02:59,120 --> 01:03:03,440
बात का रट्टा लगाए हुए है तू हर दिन

905
01:03:03,440 --> 01:03:07,440
करपात्री जी पूरी के शंकराचार्य शंकराचार्य का विरोध होता है हर

906
01:03:07,440 --> 01:03:11,440
दिन कितने लोग कर रहे हैं देखना पड़ता है कि किस पर बात करें किस पर ना

907
01:03:11,440 --> 01:03:15,520
करें किस पर मौन रह के कार्य कर दे किसका शोधन बिना बोले कर दे

908
01:03:15,520 --> 01:03:19,280
किसका शोधन बोल करके करें

909
01:03:19,280 --> 01:03:23,360
मगर तूने अगर निर्णय लिया है कि इसमें जो है वीडियो बना करके

910
01:03:23,360 --> 01:03:27,520
ही बोले तो यह सनातन सिद्धांत दिखा

911
01:03:27,520 --> 01:03:31,600
और मैं तुझे दिखाता हूं कि जिनको तू प्रणम

912
01:03:31,600 --> 01:03:35,840
में मान रहा है जिनको जिनका प्रश तुझे प्राप्त है जो तेरे अनुसार प्रामाणिक है उनका कितना

913
01:03:35,840 --> 01:03:38,000
खंडन हो रहा है तूने सब पर वीडियो बना

914
01:03:38,000 --> 01:03:42,480
दिया क्यों बनाया भाई तेरे अनुसार वीडियो

915
01:03:42,480 --> 01:03:45,280
कौन है तू

916
01:03:45,280 --> 01:03:49,280
अब तू कहेगा मेरे ऊपर क्यों बनाया तेरे ऊपर भी नहीं बना रहे

917
01:03:49,280 --> 01:03:53,440
थे ऐसे ही तू भी विरोध कर रहा था करपात्री जी का पूरी के शंकराचार्य जी का

918
01:03:53,440 --> 01:03:57,600
कि चारों शंकराचार्यों को उसमें बुला बुला लो चार करोड़ देकर के

919
01:03:57,600 --> 01:04:01,680
करा था ना तूने भी बकवास किया था तेरा विरोध

920
01:04:01,680 --> 01:04:06,000
नहीं किया जब तूने मर्यादा लांग दी जब तूने मर्यादा

921
01:04:06,000 --> 01:04:10,000
लांग दी अश्लील असिद्ध अमर्यादित आरोप लगाए तूने चारित्रिक दोष

922
01:04:10,000 --> 01:04:12,320
वाले

923
01:04:12,320 --> 01:04:16,400
आचार्यों पर या फिर उनसे जुड़े हुए उनके परिकरों पर उनके परिकों

924
01:04:16,400 --> 01:04:20,960
के कंधे पर बंदूक रखकर के तूने क्या-क्या बातें नहीं बोली वैश्याओं को पूरी के शंकराचार्य

925
01:04:20,960 --> 01:04:24,960
से मिलवाया जा रहा है किसी और स्त्री की

926
01:04:24,960 --> 01:04:29,120
फोटो दिखा के तू बोल रहा है कि वो विजयश्री देखो पूरी के शंकराचार्य जी के साथ

927
01:04:29,120 --> 01:04:33,280
मंच साझा कर रही है जो कुत्ते के साथ मुख से मुख लगा के चुम्मा

928
01:04:33,280 --> 01:04:37,920
करती है। कितनी घटिया बातें बोली तूने तब

929
01:04:37,920 --> 01:04:42,080
तेरा विरोध किया है। अगर तू उतने पे भी रहता तो तेरा विरोध नहीं किया था।

930
01:04:42,080 --> 01:04:46,080
समय नहीं था तेरा विरोध करने का। और नीचता करवा लो

931
01:04:46,080 --> 01:04:49,600
बस

932
01:04:49,600 --> 01:04:53,840
हुआ। तो मेरा अधिकार अब सुनाधिकार के विषय में का विरोध करेगा कि नहीं करेगा। लेकिन सिवांश

933
01:04:53,840 --> 01:04:58,480
जैसे लोग नहीं हो पाए। अरे भैया

934
01:04:58,480 --> 01:05:02,480
अगर हमने वर्णाश्रम का विरोध पक्ष ले लिया तो उसमें

935
01:05:02,480 --> 01:05:06,560
अगर वर्णाश्रम का कोई विरोध कर रहा है तो उसका विरोध नहीं हो गया। अगर

936
01:05:06,560 --> 01:05:11,440
हमने जवाला वाले मामले में बहुत बड़ा धूत

937
01:05:11,440 --> 01:05:15,520
आचार्य प्रशांत जो अपने आप को कहता है स्वषित आचार्य उसका हमने

938
01:05:15,520 --> 01:05:19,840
विरोध किया जवाला वाले मामले में उसको जो है मुंह तोड़ उत्तर दिया तो

939
01:05:19,840 --> 01:05:23,840
यदि कोई जवाला वाले मामले में उस आचार प्रशांत वाली बात ही बोल रहा है

940
01:05:23,840 --> 01:05:27,920
तो क्या उसको उत्तर नहीं मिल गया तेरे अनुसार क्योंकि तुझसे उस व्यक्ति का

941
01:05:27,920 --> 01:05:32,320
झगड़ा चल रहा है तो हम उत्तर दें ये आवश्यक नहीं है अभी

942
01:05:32,320 --> 01:05:36,480
10 चूर्ण चाटने वाले बच्चे बाहर से निकलेंगे और कुछ ना कुछ कहते

943
01:05:36,480 --> 01:05:40,880
हुए चले जाए तो हम सबके ऊपर वीडियो बनाए क्या

944
01:05:40,880 --> 01:05:45,920
हमें जब आवश्यक लगेगा तो हम वीडियो बनाएंगे करपात्री

945
01:05:45,920 --> 01:05:50,160
अब तेरे विरोध में तेरा पता नहीं तेरा

946
01:05:50,160 --> 01:05:56,160
समर्थन करते हुए एक व्यक्ति है वो लड़का कौन है

947
01:05:57,600 --> 01:06:01,760
धर्मादीपम वाला हम तेरा समर्थन करते

948
01:06:01,760 --> 01:06:05,760
हुए उसने हमारे डायरेक्टली हमारे विरोध में बहुत वीडियो बनाए हमने तो उसके विरोध में

949
01:06:05,760 --> 01:06:09,680
वीडियो नहीं बनाए। फिर

950
01:06:09,680 --> 01:06:14,000
तो क्यों नहीं बनाए? क्योंकि हमें चयन करना पड़ता है कि किसको प्राथमिकता

951
01:06:14,000 --> 01:06:18,000
देनी है, किसको नहीं देनी है और यह स्वतंत्र रूप से हमारा निर्णय है। या फिर इसमें

952
01:06:18,000 --> 01:06:22,080
कोई हस्तक्षेप कर सकता है तो वो कर सकता है जिनके जिनकी

953
01:06:22,080 --> 01:06:26,160
अधीनता हमने स्वीकार कर रखी है। जिनके हम अनुगत है वो इसमें

954
01:06:26,160 --> 01:06:30,240
हस्तक्षेप कर सकता है। हमारे निर्णयों में तू दिखा सनातन सिद्धांत

955
01:06:30,240 --> 01:06:34,240
कि तूने 10 लोगों को क्यों छोड़ा? और जब तूने भी 10 लोगों

956
01:06:34,240 --> 01:06:38,240
को छोड़ा तो हमसे क्यों चाहता है कि जिसका विरोध तेरे से चल रहा है

957
01:06:38,240 --> 01:06:42,320
उसका विरोध हम भी वैसे ही करें जैसे तू कर रहा है।

958
01:06:42,320 --> 01:06:46,480
सा द्वीपीय वाले मामले में जब पूरी के शंकराचार्य जी का वक्तव्य आया तो क्या हमने

959
01:06:46,480 --> 01:06:52,480
उसको अपने वीडियो अपने चैनल से निर्गत नहीं किया

960
01:06:54,240 --> 01:06:58,320
गोपाल आज अगर मैं स्वामी को शुक्राचार्य की पत्र

961
01:06:58,320 --> 01:07:02,400
या आप सारे लोग आपको धर्म घोषित करने आ जाएंगे तो अगर आप

962
01:07:02,400 --> 01:07:06,560
तुम प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से उनके विरोध में बहुत सी बातें कह

963
01:07:06,560 --> 01:07:10,800
चुके हो और हमने तुम्हारा विरोध जो यथोचित हो सकता है वह किया भी है। हां

964
01:07:10,800 --> 01:07:14,960
मैं तुम्हारी तुम्हारी तरह नीचता करने की आदत नहीं है कि स्त्रियों के

965
01:07:14,960 --> 01:07:19,360
ऊपर नीचे की बात करें। अंतर वस्त्रों की बात करें। ठीक है?

966
01:07:19,360 --> 01:07:23,680
वो आदत नहीं है। फिर हम फिर अपना दूसरा इंतजाम करते हैं कि ठीक है अब

967
01:07:23,680 --> 01:07:27,760
मर्यादा को लांग ही रहा है। मान ही नहीं रहा है। तो ठीक है भाई दूसरे तरीके से कार्य करते

968
01:07:27,760 --> 01:07:30,880
हैं।

969
01:07:30,880 --> 01:07:34,880
ऐसा है ये लोग आपको अपना पिता मानकर प्रणाम करेंगे। आप विरोध नहीं जाने पर क्यों लगाते स्वामी इसको

970
01:07:34,880 --> 01:07:38,960
जाना था? ये कार्य तू करता है। इसलिए तुझे औरों से उम्मीद रहती है कि पिता

971
01:07:38,960 --> 01:07:43,520
मानकर कौन कार्य करेगा कौन नहीं करेगा? किस स्थिति में करेगा? क्योंकि तूने किया है

972
01:07:43,520 --> 01:07:47,520
लोगों को अपना पिता बना बना करके चापलूसी कर करके पत्ते चाटी

973
01:07:47,520 --> 01:07:51,600
करके तूने अपना ये जो जो भी थोड़ा बहुत जो धार्मिक

974
01:07:51,600 --> 01:07:55,680
दुनिया का जो अंदर का बिना किसी से सामना किए हुए जो कैरी मिनाटी

975
01:07:55,680 --> 01:07:59,680
तू बना है वो तूने पिता बना बना करके किया होगा इसीलिए तू

976
01:07:59,680 --> 01:08:04,080
हमारे लिए ऐसी भविष्यवाणिया कर रहा है

977
01:08:04,080 --> 01:08:08,800
आने वाले करने के लिए ये सिद्धांत

978
01:08:08,800 --> 01:08:13,280
नहीं देखने का

979
01:08:13,280 --> 01:08:18,160
फूफा मानते है ये लोग रंजना ने बहुत सहायता की है किसकी शिवम

980
01:08:18,160 --> 01:08:22,480
देख रहे हो सीनियर पीएम मिश्रा ने बहुत सहायता की किसकी और

981
01:08:22,480 --> 01:08:27,360
देख रहे हो अब देखो धूर्तता क्या है ये व्यक्ति

982
01:08:27,360 --> 01:08:31,440
जब जाएगा कोर्ट तो क्या दिखाएगा कि भाई मैंने जो है शाक

983
01:08:31,440 --> 01:08:35,600
द्वीपीय ब्राह्मणों के लिए वहां केस लगाया ठीक है ये नहीं दिखाया

984
01:08:35,600 --> 01:08:39,680
लगाया कि मैंने अपना केस लगाया किसका केस लगाया शाक

985
01:08:39,680 --> 01:08:43,680
द्वीपीय ब्राह्मण की प्रतिष्ठा के लिए जो कि जितने

986
01:08:43,680 --> 01:08:47,760
लोग इस मैटर से जुड़े हुए हैं सबको मालूम है अपनी लड़ाई लड़ रहा है। इसने

987
01:08:47,760 --> 01:08:51,840
अगर अपेक्षा की कि सब लोग बोले तो इसलिए की कि मेरा पआ हाई हो

988
01:08:51,840 --> 01:08:55,840
जाए जबकि पीएन मिश्र के टाक रूपीय ब्राह्मणों को

989
01:08:55,840 --> 01:08:59,920
ब्राह्मण ना मानने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर कोई

990
01:08:59,920 --> 01:09:03,920
व्यक्ति वर्णाश्रमी नहीं है तो वह उनको मानता है उनकी

991
01:09:03,920 --> 01:09:08,240
बात मानेगा जिन संस्थाओं से आर्य समाज इस इत्यादि से वो जुड़ा हुआ है और

992
01:09:08,240 --> 01:09:12,240
यदि कोई व्यक्ति वर्णाश्रमी है गुरु निष्ठ है परंपरा निष्ठ है तो वो

993
01:09:12,240 --> 01:09:16,320
उन गुरुओं को जाकर के सुनेगा जिनसे पीएन मिश्र भी जुड़े हुए हैं

994
01:09:16,320 --> 01:09:19,120
और जब वो वहां जाकर के सुनेगा तो उनकी वो

995
01:09:19,120 --> 01:09:25,120
चीज क्लियर हो जाएगी शाकपियों के विषय में जो भी बात मगर

996
01:09:25,760 --> 01:09:29,760
इसका एक अपना एक वर्चस्व की दुनिया दुनिया कि भैया

997
01:09:29,760 --> 01:09:33,840
मेरे से सीधा-सीधा सामना है पीएन मिश्र का तो अब मैं क्या करूं अपने पक्ष में

998
01:09:33,840 --> 01:09:38,640
क्योंकि पीएन मिश्र ने यहां पर ऐसी कोई बात बोली है जो अशास्त्रीय है

999
01:09:38,640 --> 01:09:42,640
और अब मैं जो है पीएन मिश्र जिन जिन लोगों से जुड़ा हुआ है उन्हीं से बुलवा दूं

1000
01:09:42,640 --> 01:09:46,800
कि वो अशास्त्रीय है और सब लोग ये चूर्ण चटनी की लड़ाई

1001
01:09:46,800 --> 01:09:50,960
में अपना कामधाम सारा छोड़ के आ के इनको जीत दिलाए भाई

1002
01:09:50,960 --> 01:09:55,120
फिर ये मूछे ताने देखा शंकराचार्य ने बोल दिया

1003
01:09:55,120 --> 01:09:59,200
तेरे पक्ष में ये ये चाहता है अब दूसरी बात

1004
01:09:59,200 --> 01:10:04,560
आती है कहता है कि रंजना जी किसकी लड़ाई लड़ रही है? शिवश की।

1005
01:10:04,560 --> 01:10:09,280
तो घोर निर्लज्ज व्यक्ति शिवश

1006
01:10:09,280 --> 01:10:13,360
का कौन सा केस लड़ रही है? रंजना अग्निहोत्री जी कोर्ट में वर्तमान

1007
01:10:13,360 --> 01:10:17,440
में तो रामपाल के विरुद्ध शिवांश का केस लड़ रही है। वो

1008
01:10:17,440 --> 01:10:21,520
मेरा अकेले का केस है। यही है दूरता। ये

1009
01:10:21,520 --> 01:10:25,520
ये है तेरी सिद्धांत निष्ठता कि मेरी

1010
01:10:25,520 --> 01:10:29,520
मेरा विरोध करने के चक्कर में मेरा जो रामपाल के विरोध में जो केस

1011
01:10:29,520 --> 01:10:34,400
लड़ रही है रजनागिनीत्री जी उसको लेकर के तू कह रहा है कि वो मेरा केस लड़ रही है।

1012
01:10:34,400 --> 01:10:38,960
धर्म का केस नहीं लड़ रही है। मां दुर्गा का केस नहीं लड़ रही है।

1013
01:10:38,960 --> 01:10:43,200
सनातन धर्म ग्रंथों का केस नहीं लड़ रही है। वो वो किसका

1014
01:10:43,200 --> 01:10:47,280
केस लड़ रही है? शिवश। और

1015
01:10:47,280 --> 01:10:51,520
अगर कोई व्यक्ति अपमान कर रहा है किसी

1016
01:10:51,520 --> 01:10:56,080
आचार पीठ पर बैठने वाले व्यक्ति का या गलत तरीके से अमर्यादित

1017
01:10:56,080 --> 01:11:00,080
रूप से कार्य कर रहा है विरोध है मर्यादा गुलाम करके कर

1018
01:11:00,080 --> 01:11:04,560
रहा है तो इसमें वो धर्म के पक्ष से नहीं खड़े हो रहे हैं पीएन मिश्र

1019
01:11:04,560 --> 01:11:09,120
राम मंदिर का केस पीएन मिश्र धर्म के लिए नहीं लड़ने जा रहे हैं। स्वरूपानंद

1020
01:11:09,120 --> 01:11:13,200
जी के लिए लड़ने जा रहे हैं। कितना नीच व्यक्ति है ये। देख रहे उसकी

1021
01:11:13,200 --> 01:11:17,200
नीचता कौन सा ऐसा वर्णाश्रमी हिंदू होगा जो रामपाल के

1022
01:11:17,200 --> 01:11:21,840
विरुद्ध जो हमने जो लड़ाई लड़ी है उसको कह देगा कि वो हमारी व्यक्तिगत लड़ाई है।

1023
01:11:21,840 --> 01:11:26,400
उन कुछ नीचों में से नीच यही नीच

1024
01:11:26,400 --> 01:11:32,400
जो भाई और बहन के ऊपर कहता है कि इनमें अनैतिक संबंध है।

1025
01:11:33,280 --> 01:11:37,440
उसके लीजिए इतने दुबे हुए हैं कि अपने गुरु की निंदा सुना स्वीकार है। अपने परम गुरु की निंदा

1026
01:11:37,440 --> 01:11:41,840
सुनना स्वीकार है। अबे बेवकूफ व्यक्ति अपने गुरु की निंदा

1027
01:11:41,840 --> 01:11:45,920
स्वीकार तब है जब हमारे पास तुझसे बड़े-बड़े और 30 मार

1028
01:11:45,920 --> 01:11:50,160
खान बैठे हुए हैं। तू कुछ नहीं है। नगण्य व्यक्ति है।

1029
01:11:50,160 --> 01:11:54,400
इसलिए तेरे मुख से भी गुरु की निंदा सुनकर के शांत थे। नहीं बनाया

1030
01:11:54,400 --> 01:11:59,200
था उस दिन वीडियो जिस दिन सुना था चारों शंकराचार्य चार करोड़

1031
01:11:59,200 --> 01:12:03,280
नहीं बनाया था उस दिन वीडियो जिस दिन सुना था कि शंकराचार्य जो

1032
01:12:03,280 --> 01:12:07,600
है वो मैं पहले उनहीं के मठ में रहता था। फिर जो है शंकराचार्य

1033
01:12:07,600 --> 01:12:11,600
की ओर से मैं ही उत्तर देता था। लोगों को पता नहीं होता था। मैं मैं

1034
01:12:11,600 --> 01:12:15,840
शंकराचार्य जी की ओर से उत्तर दे रहा हूं। जब ये सब धूर्तता

1035
01:12:15,840 --> 01:12:20,240
पूर्ण तूने निर्गत किए थे ना उस समय नहीं बोला था।

1036
01:12:20,240 --> 01:12:24,400
तो हां गुरु की निंदा भी हम सुन रहे हैं। मगर समष्टि के लिए अपने

1037
01:12:24,400 --> 01:12:28,480
व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं। अन्यथा हर एक व्यक्ति

1038
01:12:28,480 --> 01:12:32,560
एक लाख मुख से गुरु की निंदा हो रही है। एक लाख मुख का खंडन

1039
01:12:32,560 --> 01:12:36,560
करने के लिए व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से हम सामर्थवान नहीं है। तू

1040
01:12:36,560 --> 01:12:40,720
अवश्य होगा क्योंकि तेरे पास कालिया जिन और परी की ताकत है। कालिया जिन दिन

1041
01:12:40,720 --> 01:12:46,720
में देता होगा ताकत और परी परी साधना से रात को ताकत मिलती होगी तुझे।

1042
01:12:48,800 --> 01:12:52,960
मानना स्वीकार है। किंतु ये उन एहसासान्ताओं के उपकर्ताओं

1043
01:12:52,960 --> 01:12:58,400
के विरुद्ध जाने का साहस नहीं रख सकते। इतना खोखला व्यक्तित्व लोगों को ये

1044
01:12:58,400 --> 01:13:02,480
शंकराचार्य जी उनके भी शब्दों के अनुसार उनके अनुय के शब्दों में और पूरी शंकराचार्य

1045
01:13:02,480 --> 01:13:06,480
जी के उन वकीलों ने जो पीएन मिश्र का खंडन करेंगे अवक्तेश्वर आनंद

1046
01:13:06,480 --> 01:13:10,560
जी का पक्ष कौन रखा है पीएन मिश्र और पीएन मिश्र के खिलाफ पूरी के वकील वहां

1047
01:13:10,560 --> 01:13:14,560
लगे हैं कि नहीं लगे हैं और पूरी शंकराचार्य जी के उन वकीलों ने जो पीएन मिश्र का

1048
01:13:14,560 --> 01:13:18,960
खंडन करेंगे अंतेश्वरंद सरस्वती का प्रकरण पीएन मिश्र की जूनियर रंजना अग्निपुत्री

1049
01:13:18,960 --> 01:13:23,120
क्या शिवांश के साथ मिलकर ये कार्य नहीं कर रही है कर रही है सबका आपस बन रहा है विश्व

1050
01:13:23,120 --> 01:13:27,120
हिंदू एकता क्या चाहिए तुमको तो तूने क्यों अजीत भारती का नाम

1051
01:13:27,120 --> 01:13:31,200
लिया था? मैं उनके उनका अभिनंदन करता हूं। मान के चल कि पहली बात

1052
01:13:31,200 --> 01:13:35,200
तो ये सिद्ध करके पूरी के शंकराचार्य जी के वकील लगे हुए हैं। अब

1053
01:13:35,200 --> 01:13:39,360
मुक्तेश्वर जी के खंडन में अगर इस तरीके से वकीलों का उपयोग करना होता

1054
01:13:39,360 --> 01:13:43,600
ना तो अब तक तुझे जूतों से मार मार कर भगाया जा रहा होता। जो तूने

1055
01:13:43,600 --> 01:13:47,680
न्यायाधीशों के लिए बताया था ना अपने एक वीडियो में कहा था ना कि जूतों

1056
01:13:47,680 --> 01:13:51,920
से मार मार करके अपान से लेकर मुख तक मुखल तक लाल हो जाएगा।

1057
01:13:51,920 --> 01:13:56,000
ऐसी मार पड़ती तेरी। भगा भगा कर जूतों से तूने अपने

1058
01:13:56,000 --> 01:14:00,880
एक वीडियो में बोला है ना न्यायाधीशों के लिए न्यायपालिका के लिए

1059
01:14:00,880 --> 01:14:03,920
कि अपान से लेकर ऐसा न्यायाधीशों को ऐसा भगा

1060
01:14:03,920 --> 01:14:08,000
भगा के जनता मारेगी कि अपान से लेकर मुखमंडल तक लाल हो

1061
01:14:08,000 --> 01:14:12,000
जाएगा वही हाल होता तेरा अगर पूरी के शंकराचार्य जी वकीलों का उपयोग कर रहे

1062
01:14:12,000 --> 01:14:16,480
होते पहले तो सिद्ध कर दूसरी बात अगर कर भी रहे हैं तो इसलिए

1063
01:14:16,480 --> 01:14:20,560
क्योंकि वहां पर दो पक्ष हैं जो आपस में एक दूसरे के विरोध में

1064
01:14:20,560 --> 01:14:24,640
इसलिए माता को गाली देने वाली बात आ जाए किसी एक

1065
01:14:24,640 --> 01:14:28,800
पक्ष के व्यक्ति के सामने और उसमें लड़ने वाला व्यक्ति इधर

1066
01:14:28,800 --> 01:14:33,200
का हो तो इसलिए वो ना लड़े। अरे भैया तू पहले सिद्धांत तय तो कर ले।

1067
01:14:33,200 --> 01:14:37,200
अधर्मी की सबसे बड़ी पहचान यही होती है। उसका कोई सिद्धांत ही नहीं

1068
01:14:37,200 --> 01:14:41,360
होता है। अपना सिद्धांत तय कर ले। पहले तो खुद भी कहेगा कि

1069
01:14:41,360 --> 01:14:45,520
हालांकि तू व्यक्ति विरोधी है। तू व्यक्ति निष्ठ है। मगर कम से कम

1070
01:14:45,520 --> 01:14:49,520
कहता तो है ना यह बात कि भैया मैं व्यक्ति का विरोध नहीं करता हूं। उसके द्वारा अमुक

1071
01:14:49,520 --> 01:14:53,760
कार्य का विरोध करता हूं। तो जब तू ऐसा मान रहा है, जब तू ऐसी शिक्षा

1072
01:14:53,760 --> 01:14:58,000
दे रहा है, तो किसी एक कार्य में विरोधी होने के बावजूद भी किसी अच्छे कार्य

1073
01:14:58,000 --> 01:15:02,960
में जब कोई व्यक्ति सहयोगी हो रहा है तो उस पर प्रश्न क्यों उठा रहा है तू?

1074
01:15:02,960 --> 01:15:08,960
नीच व्यक्ति

1075
01:15:09,680 --> 01:15:13,760
और क्यों उठा रहा है? क्योंकि तुझे ये सब अपशब्दों से भरी

1076
01:15:13,760 --> 01:15:18,080
हुई जब तेरी जो चीजें हैं उस पर कोई अंकुश जिसने लगा दिया जिसने

1077
01:15:18,080 --> 01:15:22,400
तेरा निग्रह कर दिया तो तेरे अंदर का ये ईगो हर्ट हो गया जयकांत

1078
01:15:22,400 --> 01:15:28,160
सिगरेट

1079
01:15:28,160 --> 01:15:32,240
तमाशा धर्म का नाम है गांधी देवता लेकिन बी आर ग्रुप कुछ नहीं बोल पाए पूरी

1080
01:15:32,240 --> 01:15:36,320
ना पूरी बोल पाए और छोड़ो जी ने लिखा भी विरोध में तो उनके वकील

1081
01:15:36,320 --> 01:15:40,960
कुछ नहीं कर पाए ब्रह्म हम जैसे कोर्ट के अधिवक्ता हो आप कुछ नहीं बोल

1082
01:15:40,960 --> 01:15:45,040
देखने को मिल रही है प्रकरणों में सबसे अधिक प्रभाव एक नास्तिक जल

1083
01:15:45,040 --> 01:15:49,040
का और उस नास्तिक जल के विरुद्ध टकराने का साहस एक ऐसा सामान्य हिंदू रखता है जिसको भले

1084
01:15:49,040 --> 01:15:53,200
धर्म का ज्ञान नहीं हो लेकिन धर्म के गौरव का अनुभव करता है

1085
01:15:53,200 --> 01:15:57,520
देख रहे हो ये टकरा रहे हैं नास्तिक

1086
01:15:57,520 --> 01:16:01,600
जज से और वो भाई वो पूरी वो संरचना हिल गई है इनके वक्तव्य

1087
01:16:01,600 --> 01:16:04,800
से

1088
01:16:04,800 --> 01:16:08,880
तत्व के विषय में शास्त्री बोल सकता हो लेकिन हमारे आराध्य तो रामभद्राचार्य के

1089
01:16:08,880 --> 01:16:13,360
रचना भी इसी बिंदु देखने को मिलती है तो रामभद्राचार्य

1090
01:16:13,360 --> 01:16:17,760
के वो चीजें रजना क्यों नहीं गई थी बिहार के विरुद्ध या पीएम मिस्टर क्यों नहीं गए

1091
01:16:17,760 --> 01:16:21,840
विरुद्ध या ये जो ये सब जो है पूरी पीठ के जो है अधिवक्ता गए ये सब द्विवेदी और

1092
01:16:21,840 --> 01:16:25,840
पांडे जी ये सब क्यों नहीं गए वहां पर सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध क्यों क्योंकि पूरी

1093
01:16:25,840 --> 01:16:30,400
पीठ की ओर से अरे तू बेवकूफ व्यक्ति है क्या अगर

1094
01:16:30,400 --> 01:16:34,560
कोई व्यक्ति एक अगर कोई टिकट काटने टिकट

1095
01:16:34,560 --> 01:16:38,720
चेक करने वाला किसी एक को नहीं पकड़ पा रहा है तो जिसको पकड़ा है वो भी ना पकड़े ये क्या

1096
01:16:38,720 --> 01:16:43,200
बेवकूफ है क्या तू फिर वो तेरा कहां गया मतानुज्ञान

1097
01:16:43,200 --> 01:16:47,440
एक स्थान अगर गवाही

1098
01:16:47,440 --> 01:16:51,600
का विरोध नहीं किया इसलिए तेरा विरोध ना किया जाए तेरा विरोध किया है तो सबका

1099
01:16:51,600 --> 01:16:55,840
विरोध होना चाहिए एट ए टाइम सेम टाइम तू कर रहा है क्या सेम टाइम सबका

1100
01:16:55,840 --> 01:16:58,000
विरोध

1101
01:16:58,000 --> 01:17:02,000
कितने वीडियोस पड़े हैं साइंस जर्नी का विरोध कितनी बार किया तूने

1102
01:17:02,000 --> 01:17:06,400
बता

1103
01:17:06,400 --> 01:17:10,560
खुद व्यक्ति निष्ठ है खुद जो है सिद्धांत निष्ठ नहीं और दूसरा

1104
01:17:10,560 --> 01:17:14,640
सिद्धांत निष्ट है तो उसको व्यक्ति निष् सिद्ध कर रहा है। एक

1105
01:17:14,640 --> 01:17:20,080
साथ सबके खिलाफ मोर्चा खोल दे क्या एक व्यक्ति

1106
01:17:20,080 --> 01:17:24,160
क्या पागल व्यक्ति से है सामना हुआ है पगला कहीं का

1107
01:17:24,160 --> 01:17:30,160
और इसके वो समर्थक भी पगले

1108
01:17:30,240 --> 01:17:34,240
की सरस्वती के खिलाफ उसने भी हम सारा कंट्रोल तो गाली भगवान सुन रहे हैं

1109
01:17:34,240 --> 01:17:38,240
गाली का स्वामी सुन रहे हैं अपनी गलती तो बच रही है हमारी अपने शत्रु को नीचा दिखा रहे हैं इतनी

1110
01:17:38,240 --> 01:17:42,320
नीच और इतनी तुच्छ मानसिकता से युक्त होता धर्म का देख रहे हो

1111
01:17:42,320 --> 01:17:46,640
नीच और तुच्छ मानसिकता हम तेरे ऊपर नहीं बोल सकते दुर्गा

1112
01:17:46,640 --> 01:17:49,840
माता के साथ बलात्कार

1113
01:17:49,840 --> 01:17:54,160
वो जो है बेशर्म पूजा हिंदुओं की खोल के दिखाऊं तुझे रामपाल

1114
01:17:54,160 --> 01:17:58,240
के वक्तव्य तू क्यों नहीं कर रहा जाकर के विरोध हमने तो

1115
01:17:58,240 --> 01:18:02,240
किया है तू नहीं कर रहा है तो तेरे ऊपर दोष हो गया क्योंकि तूने गवई का विरोध किया हमने

1116
01:18:02,240 --> 01:18:06,320
नहीं किया इसलिए हमारे ऊपर हम दोष युक्त हो गए क्या बेवकूफ व्यक्ति है क्या

1117
01:18:06,320 --> 01:18:12,320
तू कोई तर्क है तेरी बातों का

1118
01:18:12,720 --> 01:18:17,920
और विरोध नहीं किया ये पहले सिद्ध कर कैसे नहीं किया

1119
01:18:17,920 --> 01:18:22,000
क्या अच्छा और किस किस ने विरोध नहीं किया बहुत लोगों ने नहीं किया

1120
01:18:22,000 --> 01:18:26,080
तो सब लोग क्या अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए विरोध करते हैं उसकी

1121
01:18:26,080 --> 01:18:30,160
आवश्यकता उसकी उपयोगिता उसका प्रभाव भी तो देखना है तेरी तरह थोड़ी ना है

1122
01:18:30,160 --> 01:18:34,240
हमें तो वीडियो बनाना है वीडियो जिंदाबाद हो गया विरोध भाड़

1123
01:18:34,240 --> 01:18:38,400
में जाए प्रभाव होना है कि नहीं होना है आउटपुट कुछ निकलना है कि नहीं निकलना

1124
01:18:38,400 --> 01:18:43,440
है तेरी तरह कार्य करें

1125
01:18:43,440 --> 01:18:47,600
तो सही माना जाए। हां तो यह बताओ कब आए उंगली ना उठाए तो इस स्थिति में

1126
01:18:47,600 --> 01:18:51,680
इस प्रकार की मानसिकता से आप सत्य का साथ कैसे दे पाएंगे? और जब रंजना की शक्ति है कि पूरे विश्व में सत्य

1127
01:18:51,680 --> 01:18:55,760
बोलने का साहसानंद सरस्वती जी का जैसा कि Facebook पर रंजना ने लिखा था तो यह बताओ कि

1128
01:18:55,760 --> 01:18:59,760
जिस मामले में स्वामी जी को नोटिस मिली है जब से उस मामले में उन्होंने सत्य बोलने

1129
01:18:59,760 --> 01:19:03,840
का साहस किया था या तिरस्कार दुर्भावना और असत्य बोला रामद्राचार्य का पक्ष सही माना जाएगा कि

1130
01:19:03,840 --> 01:19:09,840
उनका पक्ष सही माना जाएगा कोई कहीं के तो अच्छा

1131
01:19:10,560 --> 01:19:14,720
रामभद्राचार्य जी ने नोटिस भेजा कि

1132
01:19:14,720 --> 01:19:18,960
नहीं भेजा इस बात से अगर रंजना अग्निहोत्री जी किसी

1133
01:19:18,960 --> 01:19:23,120
अमुक विषय में अब मुक्तेश्वर जी के लिए

1134
01:19:23,120 --> 01:19:27,440
बात कह रही हैं कि भैया पूरे विश्व में सत्य बोलने का जो

1135
01:19:27,440 --> 01:19:31,760
सामर्थ्य है वो उनको प्राप्त है तो वो बात गलत हो गई क्योंकि

1136
01:19:31,760 --> 01:19:35,920
रामभद्राचार्य जी ने नोटिस भेजा है तुम्हारी जानकारी में अब मुक्तेश्वर

1137
01:19:35,920 --> 01:19:40,080
जी को और मुक्तेश्वर जी क्या गलत बोल रहे हैं उसमें रामभद्राचार्य

1138
01:19:40,080 --> 01:19:44,560
जी की ओर से नोटिस अगर मिला है तो क्या गलत बोल रहे हैं भैया रामभद्राचार्य

1139
01:19:44,560 --> 01:19:48,800
जी का नाम लेकर के किसी ने नोटिस भेजा है तो भेजा है और क्या बोले

1140
01:19:48,800 --> 01:19:52,800
इसमें इसमें कौन सी झूठ बात हो गई जिसका कि विरोध करना है रामभद्राचार्य जी

1141
01:19:52,800 --> 01:19:57,360
का या फिर मुक्तेश्वर जी का हां इतना अवश्य है कि

1142
01:19:57,360 --> 01:20:01,760
रामभद्राचार्य जी से इस इस बात की स्पष्टता लेनी है

1143
01:20:01,760 --> 01:20:06,080
स्पष्टीकरण लेना है कि उन्होंने भिजवाया कि नहीं भिजवाया अभी तक तो मेरे

1144
01:20:06,080 --> 01:20:10,080
जानकारी में ऐसी कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है कि भिजवाया है

1145
01:20:10,080 --> 01:20:14,480
और जब तक रामभद्राचार्य जी का लीगल रूप से बयान

1146
01:20:14,480 --> 01:20:18,880
स्टेटमेंट उस नोटिस भेजने वाले को नहीं मिलेगा तब तक वो क्या कर

1147
01:20:18,880 --> 01:20:22,880
कोर्ट में अगर पहुंचेगा भी पहुंच गया तो पहुंच जाए तो बड़ी बात

1148
01:20:22,880 --> 01:20:26,320
है तो क्या तेरे सवाल होते हैं

1149
01:20:26,320 --> 01:20:30,400
कि राघवाचार्य जी को फोन करके क्यों नहीं पूछा क्यों पूछू भाई जब मैं इस बात को मान रहा हूं

1150
01:20:30,400 --> 01:20:34,400
कि उन्हें कोई पत्र मिला है हां नोटिस मिला है उनको नोटिस के

1151
01:20:34,400 --> 01:20:38,640
नाम से एक पत्र मिला है तो मैं उनको क्या करने के लिए पूछू अब पूछा कि नहीं पूछा

1152
01:20:38,640 --> 01:20:42,480
कैसे सिद्ध हुआ

1153
01:20:42,480 --> 01:20:46,880
और अब बात यही आ जाती है क्या वैष्णव संप्रदाय वाले

1154
01:20:46,880 --> 01:20:50,880
कॉल संप्रदाय को प्रामाणिक मानते हैं। राघवाचार्य जी

1155
01:20:50,880 --> 01:20:55,040
का वीडियो है। कौन संप्रदाय को आप प्रामाणिक बता रहे हैं। तो

1156
01:20:55,040 --> 01:20:59,120
पहले तुम भी तो डिसाइड कर लो। अब तुम तो शिष्य के रूप में

1157
01:20:59,120 --> 01:21:03,280
देखते हो राघवाचार्य जी महाराज को। इतने वरिष्ठ जो हमारे आचार्य हैं उन्हें

1158
01:21:03,280 --> 01:21:07,280
तो तू भैया उनसे डिसाइड कर ले कि तेरा कॉल संप्रदाय प्रामाणिक

1159
01:21:07,280 --> 01:21:13,280
है कि नहीं? तू क्यों नहीं डिसाइड कर लेता?

1160
01:21:14,000 --> 01:21:18,160
शब्द होता है लजा। कहीं तो लिखो लिखो उसे अब अपने

1161
01:21:18,160 --> 01:21:22,400
लिए अच्छी बात बोल रहा है। लज्जा शील शील

1162
01:21:22,400 --> 01:21:26,480
हां कहीं तो टिक जा अपनी कही हुई बात पर हर तर्क

1163
01:21:26,480 --> 01:21:30,560
का हर बात का तेरी का खंडन तुझसे ही होता है। कहीं और

1164
01:21:30,560 --> 01:21:34,560
जाने की आवश्यकता ही नहीं है। व्यक्ति को हम शुक्राचार कर इसके चक्कर

1165
01:21:34,560 --> 01:21:39,120
में नास्तिक जजों की चापलूसी चल रही है। अमृत व्यक्ति को हम नीचा

1166
01:21:39,120 --> 01:21:43,520
हे भगवान अब इसकी बोली कहां तक चली जाती है? नास्तिक जजों की चापलूसी

1167
01:21:43,520 --> 01:21:47,600
हो गई। अगर कोई व्यक्ति किसी मामले में

1168
01:21:47,600 --> 01:21:51,680
इसके अनुसार नहीं बोला तो चापलूस हो गया।

1169
01:21:51,680 --> 01:21:55,680
कहां सनातन सिद्धांत है इसमें कि गवाही के मामले गवाही

1170
01:21:55,680 --> 01:21:59,760
जैसे मामले में अगर कोई व्यक्ति नहीं बोला है तो उसका चापलूस है। अगर वो अपना और

1171
01:21:59,760 --> 01:22:04,000
कोई रण संभाल रहा है तो वो जिसका जिसका सामना नहीं कर रहा तो चापलूस

1172
01:22:04,000 --> 01:22:08,000
है। अगर राम जी अगर रावण को मार रहे हैं और

1173
01:22:08,000 --> 01:22:12,320
लक्ष्मण जी अगर मेघनाथ को मार रहे हैं तो वहां पर वो मेघनाथ

1174
01:22:12,320 --> 01:22:16,320
को मारने वाले तो हैं बल्कि मेघनाथ को भी नहीं मार रहे हैं। वो तो सीता

1175
01:22:16,320 --> 01:22:20,560
माता का युद्ध लड़ रहे हैं। अपने भाई का युद्ध लड़ रहे हैं। वहां पर जो है धर्म का

1176
01:22:20,560 --> 01:22:24,720
युद्ध नहीं लड़ रहे हैं और तो और वो उसी समय रावण

1177
01:22:24,720 --> 01:22:28,880
के चापलूस सिद्ध हो जाएंगे क्योंकि वो रावण को नहीं मार रहे हैं।

1178
01:22:28,880 --> 01:22:29,380
रावण

1179
01:22:29,360 --> 01:22:33,440
वाले मामले में वो शांत है। क्या बेवकूफ घटिया व्यक्ति है एक।

1180
01:22:33,440 --> 01:22:37,840
पता नहीं इसके घर वाले कैसे झेलते होंगे इसको। कोई

1181
01:22:37,840 --> 01:22:41,920
तर्क ना बार-ब मुंह चलाना है।

1182
01:22:41,920 --> 01:22:47,920
सूखा हुआ खा लिया जिनका मुंह है उसको चलाते रहना है।

1183
01:22:47,920 --> 01:22:51,920
चक्कर में अपने वकील और पत्रकार का

1184
01:22:51,920 --> 01:22:56,000
व्यक्ति जो है हमको तकलीफ नहीं देगा। इस चक्कर में अपने ही गुरु इससे अधिक

1185
01:22:56,000 --> 01:23:00,000
सम्मानित नहीं तो होता है। उन्हें अधिक गौरव होता है। ये क्या है लोगों का

1186
01:23:00,000 --> 01:23:04,160
भाई? हिंदू एकता का नाम लेते हो बना दिया का सम्मान कर रहा है

1187
01:23:04,160 --> 01:23:08,320
और सम्मानित करने के लिए जाता है उस श्रद्धा के कारण कर रहा है क्या प्लानिंग के कारण कर रहा है सुप्रीम कोर्ट का संरक्षण पाकर

1188
01:23:08,320 --> 01:23:12,480
मुख्य अतिथि बन कर आएगा और नहीं होगा तो घर वापसी के नाम पर हिंदू बनकर तुम्हारे यहां नहीं आएगी हिंदुओं को एक मुसलमान

1189
01:23:12,480 --> 01:23:16,640
शाही ने बहुत पैसा बटवा हिंदुओं से क्या हुआ कल वापस इस्लाम अपना लिया उसने जिंदा

1190
01:23:16,640 --> 01:23:20,640
पकड़ के नाचते रहो तुम अरे भैया अपने मौलिक परंपरा को ना कि यार तुम लोग को अलग से सुख

1191
01:23:20,640 --> 01:23:24,720
प्राप्त हो जाता है जैसे अरे ये मुसलमान ने प्रशंसा कर दी इस ईसाई ने प्रशंसा कर दी उस फ्रांसीसी ने कर दी उस अमेरिका ने कर दी

1192
01:23:24,720 --> 01:23:28,800
उस ब्रिटिश ने कर दी उस जर्मन ने कर दी यहां पर वापसी के नाम पर गुप्तचारी भी करेगा और

1193
01:23:28,800 --> 01:23:32,880
उसकी मूर्खता पूर्ण अनुमति तुमने ही दी है जिनको तुम हिंदू चेतना और पुनर्जागरण

1194
01:23:32,880 --> 01:23:37,040
बता रहे हो। अभी एक कोई व्यक्ति था ना वो प्राण गोपाचार्य का लड़का क्या नाम है उसका संजय

1195
01:23:37,040 --> 01:23:41,120
सलीम वाले मन में जाकर क्या कहा था भगवान कृष्ण जी रोड़ के लड़की बुला रहे उसको शब्दावली

1196
01:23:41,120 --> 01:23:44,400
देख रहे हो उसकी और अगर इसको तो कहीं हिंदू एकता तोड़ रहे हो तो देखता

1197
01:23:44,400 --> 01:23:49,120
है तुम्हारी ऐसीता को हां ये तूने अच्छी बात कही

1198
01:23:49,120 --> 01:23:53,440
ये तूने अच्छी बात कही विद्या भास्कर जी महाराज का तूने

1199
01:23:53,440 --> 01:23:57,680
जो है क्या कहा था इस व्यक्ति ने पूरी पीठ के

1200
01:23:57,680 --> 01:24:01,760
जो परिकर हैं उनकी मां समान माता के समान

1201
01:24:01,760 --> 01:24:05,840
जो मातृ शक्तियां थी। यह बैठे हुए थे पूरी पीठ

1202
01:24:05,840 --> 01:24:09,920
जो उनके निजी सचिव हैं पूरी पीठ के शंकराचार्य के ये बैठे हुए

1203
01:24:09,920 --> 01:24:14,000
थे और वो इन इन पर इनके साथ होली खेल रही है। ये कुछ नहीं कर रहे बैठे हुए

1204
01:24:14,000 --> 01:24:18,000
हैं। वो जो है इनको रंग गुलाल जो भी है लगा रहे हैं। और यह

1205
01:24:18,000 --> 01:24:22,000
वीडियो दो-ती साल पहले का और ये व्यक्ति बार-बार अपने वीडियोस में बोला

1206
01:24:22,000 --> 01:24:26,000
कि सन्यासी होते हुए कैसे होली खेल ली? कैसे स्पर्श हो गया?

1207
01:24:26,000 --> 01:24:30,000
रगड़ रगड़ के अंग मर्दन करके होली खेली जा रही है।

1208
01:24:30,000 --> 01:24:34,080
अब अभी दो तीन दिन पूर्व मैंने पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज

1209
01:24:34,080 --> 01:24:38,160
का वीडियो देखा जिसमें कि कोई मात शक्ति है वो उन्हें माला पहना रही है और

1210
01:24:38,160 --> 01:24:42,160
इसमें उसमें स्पर्श भी हो रहा है

1211
01:24:42,160 --> 01:24:46,160
विद्या भास्कर जी महाराज को। अब इसकी

1212
01:24:46,160 --> 01:24:50,400
भाषा में अगर यह व्यक्ति अगर विद्या भास्कर जी महाराज का प्रश्र

1213
01:24:50,400 --> 01:24:54,400
इसको प्राप्त नहीं होता तो ये कैसे बोलता ना पता है ना आप लोगों को ये

1214
01:24:54,400 --> 01:24:58,480
दोगला व्यक्ति कैसे बोलता कि अंग मर्दन करके रगड़ रगड़

1215
01:24:58,480 --> 01:24:59,680
के मालाएं पहनाई

1216
01:24:59,680 --> 01:25:04,080
जा रही है किसी भी बात को बोलने का बस तरीका है शैली बदल दो

1217
01:25:04,080 --> 01:25:08,320
अंग मर्दन कर करके मालाएं पहनाई जा रही है और इसने

1218
01:25:08,320 --> 01:25:12,320
क्या बात कही एक व्यक्ति है जो कृष्ण भगवान जो है

1219
01:25:12,320 --> 01:25:16,480
कृष्ण भगवान के लिए जो है ऐसा बोला जीवी रोड पे ये करो वो करो हां गलत

1220
01:25:16,480 --> 01:25:20,800
बोला बिल्कुल गलत बोला और तुम मर्यादा में रह के उसका खंडन करो

1221
01:25:20,800 --> 01:25:24,800
अगर कोई और मर्यादा का मर्यादा को लांग कर कार्य कर रहा है तो इससे

1222
01:25:24,800 --> 01:25:28,800
तुम्हें मर्यादा को लांगने का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता

1223
01:25:28,800 --> 01:25:32,880
यही है धर्म यही है सनातन मुसलमानों से कहा जाता है कि भैया

1224
01:25:32,880 --> 01:25:36,880
तुमको स्त्रियों को किडनैप करने की बात की गई है तुम्हारे यहां तो मुसलमानों से कहा

1225
01:25:36,880 --> 01:25:41,120
जाता है मुसलमान जवाब देते हैं भैया जंग है जंग में जब तुम्हारे यहां तुम्हारे

1226
01:25:41,120 --> 01:25:45,200
यहां की स्त्रियों को वो लोग ले जाते तो हम ना ले जाए तो उनके यहां पर कानून

1227
01:25:45,200 --> 01:25:49,360
किस हिसाब से बनता है? संविधान स्थितियों के हिसाब से हमारे

1228
01:25:49,360 --> 01:25:54,960
यहां पर राम नहीं सिखाते कि तुम जब रावण से जीत जाना तो वहां की स्त्रियों को ले आना।

1229
01:25:54,960 --> 01:25:58,960
कब्जा कर लेना उस पर। ठीक है? ये राम नहीं सिखाते। विद्या भास्कर जी

1230
01:25:58,960 --> 01:26:03,360
महाराज के एक शिष्य हैं। मैं नाम नहीं लूंगा। अजीब

1231
01:26:03,360 --> 01:26:07,520
तरह की आकृतियां, कलाकृतियां बनाते हुए स्टेज

1232
01:26:07,520 --> 01:26:11,600
पर आते हैं। स्टेज पर बैठकर के फिल्मी धुन बजा बजा के

1233
01:26:11,600 --> 01:26:15,360
कथा करते हैं। कथा में

1234
01:26:15,360 --> 01:26:19,600
इस तरह से रोते भी हैं। स्त्रियों वाला रोल भी निभाते हैं। चूड़ियां वगैरह

1235
01:26:19,600 --> 01:26:24,160
भी पहन दिखाते हैं कि तोड़ रहे हैं। सब करते हैं।

1236
01:26:24,160 --> 01:26:28,160
और इसका जो है ऐसे आचार्यों ने

1237
01:26:28,160 --> 01:26:32,240
मर्यादा में रह के जो है अपने अनुसार प्रतिकार

1238
01:26:32,240 --> 01:26:36,800
भी किया उनका। उस व्यक्ति को हमने भी फोन किया क्योंकि

1239
01:26:36,800 --> 01:26:40,880
उनसे उनके परिों से वहां जो उनके साथ वाले थे उनसे बात हुई तो उन्होंने

1240
01:26:40,880 --> 01:26:46,720
बताया कि क्या अ

1241
01:26:46,720 --> 01:26:50,800
क्यों कर रहे हैं हम ऐसा हमने सवाल किया उससे फोन करके तो

1242
01:26:50,800 --> 01:26:54,960
उन्होंने बोला कि भाई उनको जो है अमुक अमुक जो

1243
01:26:54,960 --> 01:26:58,960
कला है उसमें जो है सर्टिफिकेट मिला है राष्ट्रीय स्तर का

1244
01:26:58,960 --> 01:27:03,360
तो मैंने कहा कि कला तो ये निशानेबाजी भी होती है अगर आपको सर्टिफिकेट

1245
01:27:03,360 --> 01:27:07,440
मिला है किसी चीज में बहुत पारंगत है योग्यता है तो ऐसा थोड़ी ना

1246
01:27:07,440 --> 01:27:11,680
है कि बिना सोचे समझे उस योग्यता का उपयोग कहीं भी करने लगे

1247
01:27:11,680 --> 01:27:15,840
क्या आप अगर बहुत अच्छे निशानेबाज होंगे तो क्या आप वहां

1248
01:27:15,840 --> 01:27:20,080
भागवत में बैठकर के गोलियां चलाने लगेंगे क्या तो अगर आप अमुक

1249
01:27:20,080 --> 01:27:24,160
अमुक कला में बहुत अच्छे पारंगत है तो इसका अर्थ ये थोड़ी

1250
01:27:24,160 --> 01:27:28,240
ना कि भागवत के मंच पर आओगे तो वो सब करोगे पहली बात फिर उन्होंने

1251
01:27:28,240 --> 01:27:30,480
कहा कि विद्या भास्कर जी महाराज का भी फोन आया था कहा

1252
01:27:30,480 --> 01:27:34,560
था कि आगे से ना करना तो उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे ऐसे नहीं करेंगे। मैंने कहा

1253
01:27:34,560 --> 01:27:38,960
मैंने भी इसीलिए फोन किया है कि आप ना करें ऐसा। इससे हमारी बात

1254
01:27:38,960 --> 01:27:43,040
हमारे जो कथा का मंच है उसका अपमान होता है और इस बात का फायदा विरोधी तत्व भी उठाते

1255
01:27:43,040 --> 01:27:47,040
हैं और वो फिर उपहास उड़ाते हैं इन सब चीजों का। मैंने इस व्यक्ति ने

1256
01:27:47,040 --> 01:27:51,200
उस पर वीडियो क्यों नहीं बनाया? पर नहीं जिनसे

1257
01:27:51,200 --> 01:27:55,360
इसको प्रश्रय प्राप्त है उनके लिए कैसे बात करेगा कि संभवत

1258
01:27:55,360 --> 01:27:59,920
वो इसलिए मौन रहे होंगे। उनको ऐसा करना चाहिए था। पूर्ण बहिष्कार

1259
01:27:59,920 --> 01:28:04,160
होना चाहिए था मुरारी का। जिनसे प्रश्र

1260
01:28:04,160 --> 01:28:08,480
प्राप्त है उसके लिए इसकी शैली रहेगी और जो विरोधी है जिनसे इसको प्रशय

1261
01:28:08,480 --> 01:28:12,640
प्राप्त नहीं है उनहीं विषयों में जिन विषयों में इसने बहुत ही आदर पूर्वक और मर्यादा

1262
01:28:12,640 --> 01:28:16,880
पूर्वक बात की है उनहीं विषयों में दूसरों के लिए लथोर तू तड़ाक आत्म

1263
01:28:16,880 --> 01:28:20,880
मुग्ध मुझे लज्जा आती है कि मैं ऐसे व्यक्ति के मैंने कभी अपना

1264
01:28:20,880 --> 01:28:25,040
समय व्यर्थ किया ऐसे व्यक्ति के लिए इस तरह की भाषा उपयोग करेगा

1265
01:28:25,040 --> 01:28:29,520
के चार दे के चारों शंकराचार्य को बुला लो

1266
01:28:29,520 --> 01:28:33,120
या फिर वह जो है

1267
01:28:33,120 --> 01:28:37,120
ढेर सारी वैश्याएं मिल रही है पूरी के शंकराचार्य जी से

1268
01:28:37,120 --> 01:28:41,200
पूरी के शंकराचार्य जी के मठ में वैश्याओं का आना जाना है। वैश्या भक्ति हो रही है।

1269
01:28:41,200 --> 01:28:45,360
ये सब नीचता नीच हरकतों

1270
01:28:45,360 --> 01:28:45,860
पर उतर

1271
01:28:45,680 --> 01:28:49,840
आएगा। हम विद्या भास्कर जी महाराज अभी कुछ ही दिनों

1272
01:28:49,840 --> 01:28:53,920
पहले अभी अभी की बात है आदित्यनाथ योगी

1273
01:28:53,920 --> 01:28:58,160
जी के साथ मंच साझा उन्होंने किया है और

1274
01:28:58,160 --> 01:29:02,320
जब मंच साझा किया है तो जाहिर सी बात है वहां पर उन्होंने उनका

1275
01:29:02,320 --> 01:29:06,800
एक दूसरे के साथ जो सामंजस्यपूर्ण व्यवहार होता है वो भी किया

1276
01:29:06,800 --> 01:29:10,800
हम इस बात को समझते हैं कि हां भैया ये उनकी मर्यादा उनके अधिकार क्षेत्र में आता

1277
01:29:10,800 --> 01:29:14,960
है कि वो मंच पर साझा हो रहे हैं पर तेरे हिसाब

1278
01:29:14,960 --> 01:29:19,280
से तो भाजपा के जो समर्थक हैं वो तूने गुप्तांग अपना गुप्तांग

1279
01:29:19,280 --> 01:29:23,760
का नाम दिया था ना भाजपा के समर्थकों को

1280
01:29:23,760 --> 01:29:28,000
तो तेरे अनुसार तो विद्या भास्कर जी महाराज पर भी वही बात लागू

1281
01:29:28,000 --> 01:29:32,160
हो रही तो तू कब वीडियो बनाएगा इस विषय में कि विद्या

1282
01:29:32,160 --> 01:29:36,240
भास्कर जी महाराज आदित्यनाथ योगी जी के साथ क्या कर रहे हैं यह

1283
01:29:36,240 --> 01:29:40,480
है दोगलापन यह व्यक्ति विद्या भास्कर जी महाराज के बारे में कब बोलने

1284
01:29:40,480 --> 01:29:44,800
वाला है अंग मर्दन कर करके रगड़ रगड़ करके जो है वह माला

1285
01:29:44,800 --> 01:29:48,960
पहनाई जा रही कब बोले हमारे अनुसार तो भैया यदि आप

1286
01:29:48,960 --> 01:29:53,040
किसी में देवी स्वरूप होती है माता बहन ये सब देवी

1287
01:29:53,040 --> 01:29:57,200
स्वरूप होती है और जो ये मर्यादा लागू है

1288
01:29:57,200 --> 01:30:00,800
शास्त्रों के अनुसार वो उन स्त्रियों के लिए

1289
01:30:00,800 --> 01:30:05,120
लागू है जिनको हम भोग की दृष्टि से देख सकते हैं।

1290
01:30:05,120 --> 01:30:09,200
खैर कुल मिलाकर के इसने पूरी पीठ

1291
01:30:09,200 --> 01:30:13,360
के उस वीडियो के रिगार्डिंग बहुत प्रलाप किया। तो विद्या भास्कर

1292
01:30:13,360 --> 01:30:17,360
जी महाराज के लिए कब करने वाला है? उनके शिष्य के लिए कब करने वाला है?

1293
01:30:17,360 --> 01:30:21,600
या फिर उनहीं के विरोध में करता है या उसी उसी ओर इसकी निगाह

1294
01:30:21,600 --> 01:30:25,600
जाती है जहां से इसको प्रश्रय प्राप्त नहीं होता। जहां

1295
01:30:25,600 --> 01:30:29,840
ये मंचस्थ नहीं होता है। जिनके साथ जो इसकी हुकूमत को स्वीकार

1296
01:30:29,840 --> 01:30:34,000
करने से मना कर देते हैं। जो इसके ढोंग को स्वीकार करने से मना कर देते हैं। अथवा

1297
01:30:34,000 --> 01:30:38,160
जो मौन रह जाते हैं अथवा जो दूर रह जाते हैं। ये क्या उनहीं

1298
01:30:38,160 --> 01:30:42,480
का ये निग्रह करने के लिए इसने जन्म लिया है। दूसरों

1299
01:30:42,480 --> 01:30:46,800
की जो कठोर वाणी है वह तेरे लिए गाली है और तेरी जो गाली

1300
01:30:46,800 --> 01:30:51,280
है वह अन्यों के लिए कठोर वाणी है। क्या बात है।

1301
01:30:51,280 --> 01:30:57,280
बहुत बढ़िया।

1302
01:30:58,400 --> 01:31:02,560
बताओ कितना बना? मंदिर के बारे में बोल नहीं सकता।

1303
01:31:02,560 --> 01:31:06,640
बहुत ज्यादा चिंता होता है। कभी गिर जाए कभी लोग बात कहते भी है कि

1304
01:31:06,640 --> 01:31:11,120
बाबा इसमें मत रहो। मत भरो। ऐसे टीका माफी वाले

1305
01:31:11,120 --> 01:31:15,600
ने क्या करवा दिया मुसलमान लड़के को एक घंटा बुलाकर हिंदू से विवाह करवा दिया

1306
01:31:15,600 --> 01:31:19,840
उसके नहीं लेकिन अगर सोचना चाहिए तो फिर इस मामले एक बात और है

1307
01:31:19,840 --> 01:31:24,000
ये जीबी रोड में कह दिया और ये मुसलमान से विवाह करा दिया ये

1308
01:31:24,000 --> 01:31:28,320
सब इस तरह से क्यों प्रस्तुत कर रहा है भैया कि इन सब चीजों को हमसे प्रश्र प्राप्त

1309
01:31:28,320 --> 01:31:32,320
है शंकराचार्य से प्रशय प्राप्त है क्यों कर रहा है हम

1310
01:31:32,320 --> 01:31:36,880
भी तो ऐसी चीजों का विरोध करते हैं क्यों कर रहा है ये सब प्रस्तुतीकरण

1311
01:31:36,880 --> 01:31:42,080
है किस चीज का उपयोग कैसे किया जाए। प्रस्तुतीकरण है।

1312
01:31:42,080 --> 01:31:46,080
चलो कोई तार्किक बात होगी कुछ तर्क तर्क से जिसका

1313
01:31:46,080 --> 01:31:51,520
उत्तर देना आवश्यक होगा उस पर बात करेंगे।

1314
01:31:51,520 --> 01:31:56,000
लेकिन ऐसा भी वो आपस में नहीं लड़ना चाहिए। सही बात है। संत है कि नहीं ये तो देखो तीन चैतन्य

1315
01:31:56,000 --> 01:32:00,000
भी तो संत ही थन और करोली सकार पिट जाता है तो ज्योतिष पीठ के मुंह पर बैठकर आज कुर बना घूम रहा

1316
01:32:00,000 --> 01:32:04,000
है। और पूर्ण तीन चैतन्य भी तो संत ही था। और सरकार संत ही बना घूम रहा है।

1317
01:32:04,000 --> 01:32:08,160
संत पूर्ण बना घूम रहा है। और पूर्ण जब पूरी बन जाता है तो पूरी माला बनाते हैं। अब

1318
01:32:08,160 --> 01:32:12,640
देखो ये क्या कह रहा है? देखो पॉइंट टू बी नोटेड क्या कह रहा है

1319
01:32:12,640 --> 01:32:16,960
कि वो भी तो संत ही था ना मतलब इससे जब ये कहा जा रहा है तुम संतों की निंदा

1320
01:32:16,960 --> 01:32:21,120
करते हो। यानी कि पूरी के शंकराचार्य जी की निंदा करता है या जितने

1321
01:32:21,120 --> 01:32:25,440
भी आचार्य उनकी निंदा करता है जब ये तो और ये ये भी कहता है जो राजेंद्र

1322
01:32:25,440 --> 01:32:29,440
दास जी का कोई शिष्य है जो हमारे पास फोन करता है तो हम उसको ये नहीं बताते कि उसका

1323
01:32:29,440 --> 01:32:34,560
गुरु अप्रामाणिक है। ठीक है? अब ध्यान दीजिए इसकी बात पर।

1324
01:32:34,560 --> 01:32:38,560
इसको जब यह कहा जा रहा है कि संतों की निंदा करता है तो उसमें उत्तर क्या दे रहा है कि

1325
01:32:38,560 --> 01:32:42,640
भैया जो चैतन्यनंद जो सरस्वती जो पकड़ा गया है जिस

1326
01:32:42,640 --> 01:32:46,720
पर जो है बहुत शोषण और शारीरिक शोषण इत्यादि के

1327
01:32:46,720 --> 01:32:50,880
आरोप इस समय चल रहे हैं। प्रासंगिक है मामला। उनका उदाहरण

1328
01:32:50,880 --> 01:32:55,120
देते हुए कह रहा है कि वो भी तो संत ही थे ना। इसका मतलब जिनके

1329
01:32:55,120 --> 01:32:59,600
लिए जिन संतों के लिए इससे कहा जा रहा है कि तुम संतों की निंदा करते हो

1330
01:32:59,600 --> 01:33:03,840
उन संतों की तुलना किससे कर रहा है? उन्रामाणिक लोगों से

1331
01:33:03,840 --> 01:33:06,720
जिन्होंने अश्लील चारित्रिक चीजें बहुत

1332
01:33:06,720 --> 01:33:10,880
सारी की है। गलत कार्य किए उनसे तुलना

1333
01:33:10,880 --> 01:33:15,040
कर रहा है। फिर क्या कहता है कि मैं जो है पूरी के शंकराचार्य जी को प्रामाणिक मानता

1334
01:33:15,040 --> 01:33:21,040
हूं। कितना बड़ा दोगला है तू।

1335
01:33:21,120 --> 01:33:25,760
ज्योति पीठ के मुंह पर बैठकर शंकराचार्य के प्रति रूप में जो शंकराचार्य बैठे हैं

1336
01:33:25,760 --> 01:33:30,400
उस भाग से बैठे हुए जी के सामने भगवती राधा केश्वरी बातें

1337
01:33:30,400 --> 01:33:34,480
कहता है और उसके बाद भी शंकराचार्य जी उसका विरोध नहीं उसका संपूर्ण नहीं है पूर्ण वो संतों करो

1338
01:33:34,480 --> 01:33:38,560
हम संतों का सम्मान करो हम संतों के नित्य श्री

1339
01:33:38,560 --> 01:33:42,720
वैष्ण हमने तो वैष्णव के चरणों को अपने मस्तक पर रखने की घोषणा की है लेकिन आप उस वैष्णव में दिखे

1340
01:33:42,720 --> 01:33:46,800
तो इसने क्या कहा क्या मैं अपने आप को एक शुरू में कहा था मैंने

1341
01:33:46,800 --> 01:33:51,040
कहा था आगे वैष्णव वैष्णव के लिए इसने बात कही सुन लीजिए अच्छी तरीके से सुना

1342
01:33:51,040 --> 01:33:57,040
देता हूं

1343
01:34:02,640 --> 01:34:06,720
उस शास्त्री सिद्धांत के अंतर्गत श्री वैष्णवा कहते हैं कि निग्र

1344
01:34:06,720 --> 01:34:10,720
आचार्य संतों की निंदा कर रहे हैं। निग्रचार संतों का सम्मान नहीं करते। हम संतों

1345
01:34:10,720 --> 01:34:14,720
का उदाहरण देकर के यह उन संतों

1346
01:34:14,720 --> 01:34:18,880
की निंदा को सही बताने का प्रयास कर रहा है। जिन संतों

1347
01:34:18,880 --> 01:34:23,200
के लिए दावा करता है कि मैं उन्हें प्रामाणिक मानता हूं। समझ रहे हो? मतलब

1348
01:34:23,200 --> 01:34:27,280
की कहने का मतलब यह है जिन संतों को तू प्रमाणिक मानता है। उनकी निंदा तू

1349
01:34:27,280 --> 01:34:31,360
क्यों करता है? तो ये क्या कह रहा है? वो भी तो संत था। यानी कि जैसे

1350
01:34:31,360 --> 01:34:35,520
वह संत प्रामाणिक नहीं है जिनको यह कह रहा है उसी तरीके

1351
01:34:35,520 --> 01:34:40,080
से यह संत भी प्रामाणिक नहीं है जिनकी निंदा कर रहा है। हो गया

1352
01:34:40,080 --> 01:34:44,800
ये है क्लेरिटी और अभी

1353
01:34:44,800 --> 01:34:48,880
देखिए वो मैंने बात कही थी ना ये अपने आप को क्या एकमात्र गुरु बताता है जब

1354
01:34:48,880 --> 01:34:54,640
ये किसी को मानता ही नहीं है। देखिए क्या कह

1355
01:34:54,640 --> 01:34:57,600
संतो के

1356
01:34:57,600 --> 01:35:01,920
नित्य श्री वैष्ण पदे कहकर हमने तो वैष्णवों के चरणों

1357
01:35:01,920 --> 01:35:06,000
को अपने मस्तक पर रखने की घोषणा की है। लेकिन आप पहले उस वैष्णवता में दिखे तो उस

1358
01:35:06,000 --> 01:35:10,880
लक्षण में इसको वैष्णवता के लक्षण में कोई दिखता ही नहीं है।

1359
01:35:10,880 --> 01:35:15,360
नहीं दिखता है। बेवकूफों यह

1360
01:35:15,360 --> 01:35:17,840
अपने आप को एकमात्र निग्रह करने वाला

1361
01:35:17,840 --> 01:35:21,840
सबके सबका निग्रह करने वाले के रूप में ख्यापित करने का प्रयास करने

1362
01:35:21,840 --> 01:35:27,520
वाला सब में दोष दिखाने वाला

1363
01:35:27,520 --> 01:35:31,920
अभियान के कारण धर्म रक्षा के कारण रणनीति

1364
01:35:31,920 --> 01:35:35,120
का उपयोग करने के चलते

1365
01:35:35,120 --> 01:35:39,200
उनकी ऐसी बातों का उपयोग करना जिनका

1366
01:35:39,200 --> 01:35:43,440
उपयोग करते हुए उनमें दोष दृष्टि दिखा सकता

1367
01:35:43,440 --> 01:35:47,760
उत्पन्न कर सकता है उनके लिए। ठीक है? देख लो मूर्खों

1368
01:35:47,760 --> 01:35:51,760
जो सोचते हो कि वैष्णवाचार्य मानता है किसी को। पहले वैष्णव बनो तो

1369
01:35:51,760 --> 01:35:55,840
इसके लिए कोई वैष्णव है ही नहीं। इसलिए इसके अनुसार कोई संत है ही नहीं।

1370
01:35:55,840 --> 01:36:00,480
इसलिए सबकी निंदा कर सकता है क्योंकि कोई संत किस प्रकार से नहीं जिस प्रकार से चैतन्य

1371
01:36:00,480 --> 01:36:04,560
सरस्वती नहीं है। तो इसका एक कितना दावा खोखला था कि मैं पूरी

1372
01:36:04,560 --> 01:36:08,640
के में शिवश के गुरु को प्रमाणिक मानता हूं। इसकी

1373
01:36:08,640 --> 01:36:12,720
तो बैंड बजेगी अभी। चलो

1374
01:36:12,720 --> 01:36:17,760
खैर

1375
01:36:17,760 --> 01:36:21,760
तो शास्त्रीय सिद्धांत के अंतर्गत आपका चरित्र दिखे तो आपका व्यक्तित्व दृढ़ता

1376
01:36:21,760 --> 01:36:26,560
उसके साथ में आ रहा दर्शन तो हो

1377
01:36:26,560 --> 01:36:30,560
विचारों से अड्डे भर गए हैं मठों के वहां ध्यान नहीं पॉलिटिकल पैसा

1378
01:36:30,560 --> 01:36:35,120
छाछ कर बुद्धि कुंठित हो गई है वहां ध्यान नहीं हम सहिष्णता

1379
01:36:35,120 --> 01:36:39,120
नाम की कोई चीज नहीं और सहिष्णों तो सही मामले में यही लोग पहले खूब

1380
01:36:39,120 --> 01:36:43,120
गाली दो कभी देवताओं को गाली दो कभी दूसरे संप्रदाय आचार्य को गाली दो फिर हम उस शास्त्रीय

1381
01:36:43,120 --> 01:36:47,360
सिद्धांत की मर्यादा में तुम्हारा विरोध करने आए तो भागवत तुम्हारे यहां हो जाएगी तो बाहरी तत्व का विरोध

1382
01:36:47,360 --> 01:36:51,360
करने के लिए अंदर हमको एक पांच होना पड़ेगा कौरव पांडव खड़ा है मतलब कहा जाए बाहरी है भगवान है और ये दोनों अपने

1383
01:36:51,360 --> 01:36:55,840
अंदर के हैं तो बाहरी तत्व का विरोध करने के लिए अंदर हमको एक पांच होना पड़ेगा कौरव पांडव को कौरव कौन सा पांडव

1384
01:36:55,840 --> 01:37:00,480
देव हट

1385
01:37:00,480 --> 01:37:04,560
अगर हम रामभद्राचार्य जी के साथ खड़े हो रहे हैं तो किस मामले में खड़े हो

1386
01:37:04,560 --> 01:37:09,920
रहे हैं तुझे उस उस मामले में बाहर कहां कर दिया बेवकूफ

1387
01:37:09,920 --> 01:37:14,000
घिना कहीं का नपुंसक कहता है ना हम लोगों

1388
01:37:14,000 --> 01:37:18,160
को तू तो सुन तू गिना है किस स्थिति में

1389
01:37:18,160 --> 01:37:22,080
तुझे बाहर का कह दिया बता

1390
01:37:22,080 --> 01:37:26,080
केवल सुर्खियां बटोरनी है तुझे नीच कहीं का

1391
01:37:26,080 --> 01:37:29,840
स्त्रियों का शरीर देखता है

1392
01:37:29,840 --> 01:37:33,920
लज्जा नहीं आती ऊपर नीचे अंग वस्त्रों का नाम लेता है तेरे घर की स्त्रियों

1393
01:37:33,920 --> 01:37:37,680
के बारे में बात करे ऐसे ही

1394
01:37:37,680 --> 01:37:42,400
तब तू कोर्ट पहुंच जाएगा मिल मे लॉर्ड

1395
01:37:42,400 --> 01:37:46,560
वही में लॉर्ड जो नपुंसक है जो कायर है

1396
01:37:46,560 --> 01:37:50,640
तेरे अनुसार ना व्यभचारी वैश्यागामी

1397
01:37:50,640 --> 01:37:54,640
दुराचारी समलैंगिक मानसिक रोगी

1398
01:37:54,640 --> 01:38:00,640
विक्षिप्त

1399
01:38:01,600 --> 01:38:05,600
किस विषय में किस विषय में किसको भारी कह रहे हैं

1400
01:38:05,600 --> 01:38:11,600
बेवकूफ

1401
01:38:11,840 --> 01:38:16,240
तेरे तेरे ऊपर कोई बाहरी व्यक्ति जब आक्रमण करेगा तो मैं

1402
01:38:16,240 --> 01:38:20,240
मैंने कहा ना कि मैं तेरे साथ खड़ाऊंगा। मैंने कब कह दिया कि तू बाहरी हो

1403
01:38:20,240 --> 01:38:23,520
गया।

1404
01:38:23,520 --> 01:38:27,520
मतलब जो कहावत एज इट इज हम पर लागू हो रही है कि तेरे और

1405
01:38:27,520 --> 01:38:31,600
मेरे बीच की बात है तो तू 100 में पांच।

1406
01:38:31,600 --> 01:38:35,680
और कोई बाहर का आ जाएगा तो हम और तू मिलकर के 105 कहां

1407
01:38:35,680 --> 01:38:38,880
गलत हो गई यह कहावत?

1408
01:38:38,880 --> 01:38:43,360
रामभद्राचार्य से तेरी लड़ाई चल रही है कोई उसमें मैं रामभद्राचार्य

1409
01:38:43,360 --> 01:38:47,680
जी के पास साथ में जाकर के खड़ा हुआ हूं तो कैसे कह दिया तूने कि

1410
01:38:47,680 --> 01:38:52,000
जो है वो बाहरी है और हां तू मर्यादा को लांग करके रामभद्राचार्य

1411
01:38:52,000 --> 01:38:56,080
जी के विरोध में जाएगा अगर उनसे जोड़ जोड़ करके स्त्रियों इत्यादि

1412
01:38:56,080 --> 01:39:00,160
को लेकर के चारित्रिक वाले दोष लगाएगा जो कि मुझे दिखाई देंगे नहीं है तो खड़ा

1413
01:39:00,160 --> 01:39:04,480
हऊंगा उनके साथ क्योंकि तूने तो मर्यादा मांगी होगी

1414
01:39:04,480 --> 01:39:08,720
किस लड़ाई में रामभद्राचार्य के साथ हूं है जो

1415
01:39:08,720 --> 01:39:12,880
पार्टीवादी लोगों से लड़ी जा रही है। बेधड़क खबर वाले ने जो चारित्रिक

1416
01:39:12,880 --> 01:39:18,880
खंडन किया था ना परंपरा से ना वर्णाश्रमी है।

1417
01:39:23,440 --> 01:39:29,440
आधी रोटी पे डाल लेना बेवकूफ कहीं का।

1418
01:39:33,360 --> 01:39:37,600
और पांडव जब वापस मार रहा था तो माता पिता को पता चलता

1419
01:39:37,600 --> 01:39:42,400
है कि मेरी आने वाली बेटी या बेटा

1420
01:39:42,400 --> 01:39:46,880
कुछ विकलांगता के साथ तो हम श्राचार्य

1421
01:39:46,880 --> 01:39:50,880
शंकराचार्य को प्रामाणिक मानते नहीं हम मानते हो तुम भी नहीं

1422
01:39:50,880 --> 01:39:55,440
मानते अगर बात प्रामाणिक मानने की तो तुम भी नहीं मानते

1423
01:39:55,440 --> 01:39:59,440
शंकराचार्य के सन्यासत्व पर तुम प्रहार करते हो क्योंकि तुम उन्हें

1424
01:39:59,440 --> 01:40:04,000
झूठा द्वेषी लोभी आसक्त बनाते बताते हो तो उनका उनकी जो विरक्तता

1425
01:40:04,000 --> 01:40:08,240
है तुम्हारे अनुसार विरक्तता नहीं है आचारत में दोष उठाते हो क्योंकि

1426
01:40:08,240 --> 01:40:12,640
उनके कई आचरण ऐसे हैं जो शास्त्र सम्मत नहीं है तो आचरण

1427
01:40:12,640 --> 01:40:17,360
भी नहीं हो गए शिक्षाओं पर तुम दोष हटाते हो तो परंपरा प्राप्तिक

1428
01:40:17,360 --> 01:40:22,080
भी नहीं हुए तो तुम भी प्रामाणिक नहीं मानते हो ठीक है

1429
01:40:22,080 --> 01:40:26,240
केवल कह देने से सर्वशक्तिमान नहीं होता है आगे उसको जन्म भी लेना पड़ता है ईश्वर

1430
01:40:26,240 --> 01:40:32,240
को

1431
01:40:32,640 --> 01:40:36,640
के बारे में कहा के बारे में कह दिया और वो भी तुम्हारे कम से कम थे इसके बाद

1432
01:40:36,640 --> 01:40:40,080
इस बात का लेकिन क्या है

1433
01:40:40,080 --> 01:40:44,240
हमारे गुरु ने नाम लिया था विजय श्री का जब

1434
01:40:44,240 --> 01:40:48,480
तू बिना नाम लिए अभियुक्तेश्वरानंद जी के लिए कहेगा कि भैया

1435
01:40:48,480 --> 01:40:53,040
जो इस मामले में बोल नहीं रहे हैं वो अपनी माता का भ्रूण खाने वाले राक्षस है

1436
01:40:53,040 --> 01:40:57,040
और अभिवुक्तेश्वरानंद जी उसको जब कैच कर लेंगे कि भैया ये मेरे लिए बोल रहा है

1437
01:40:57,040 --> 01:41:01,200
व्यक्ति तो तू क्या कहेगा मैंने नाम लेकर के बोला था क्या मगर कोई

1438
01:41:01,200 --> 01:41:05,200
और तेरे विरोधी जिस तुझे अपनी रोटियां सेकनी होंगी पूरी के

1439
01:41:05,200 --> 01:41:09,360
शंकराचार्य जी बिना नाम लिए वहां आने वाली किसी महिला के लिए बहुत सी महिलाएं आती

1440
01:41:09,360 --> 01:41:13,440
है। मगर किसी महिला का नाम लिए बिना बोल देंग कि एक योगाचार आती है वो अपने आप

1441
01:41:13,440 --> 01:41:17,280
को योगाचार्य कहती है।

1442
01:41:17,280 --> 01:41:21,280
मगर वहां पर बिना नाम लिए तेरे अनुसार चीजें मान लेनी चाहिए।

1443
01:41:21,280 --> 01:41:25,440
क्योंकि तू नेता है। तेरा नेतापन खत्म करूंगा। और

1444
01:41:25,440 --> 01:41:29,520
अगर उन्होंने बोल दिया कि योगाचार्य स्त्री है तो उसी से वो मलेच्छराज की एजेंट सिद्ध

1445
01:41:29,520 --> 01:41:33,680
हो गई। वो वैश्या हो गई। उसके बारे में तुझे अधिकार मिल गया कि उसके अंडर गमेंट

1446
01:41:33,680 --> 01:41:37,760
के अंडर गमेंट की बात करेगा तू उसके बारे में तुझे अधिकार मिल गया कि तू उसके

1447
01:41:37,760 --> 01:41:43,760
ऊपर नीचे के अंगों का नाम लेकर के उसका नाम उसके गुरु भाई से तोड़ेगा नीच व्यक्ति

1448
01:41:50,880 --> 01:41:54,880
और उसे जान होगा कम से कम अभी गंगा मोहम्मद का अभी तो चल रहा है

1449
01:41:54,880 --> 01:41:59,200
मोहम्मद से आधार क्या है पूरे धरती पर इस्लाम का राज जिस व्यक्ति की विचारधारा

1450
01:41:59,200 --> 01:42:03,200
के कारण भारत समय पूरे विश्व में इतना से फैला लाखों बच्चे करोड़ों बच्चे अनाथ हुए लाखों करोड़ बलात्कार हुए

1451
01:42:03,200 --> 01:42:07,200
हत्या हुई और हो रही है और आगे होंगी अगर तुम्हारी मोहब्बत इसका माहौल खराब किया जा सके

1452
01:42:07,200 --> 01:42:11,200
और अगर ना विरोध करे तब उसके माध्यम से अपने और एक संस्था करो पाओ कि हम अभी तक इतने पहुंचे हैं

1453
01:42:11,200 --> 01:42:15,360
और हमको डायरेक्ट समझेंगे और अगर मेरी बुद्धिया नहीं होगी तो जान लो तुमको ही समझ में नहीं देंगे तो रामदेव

1454
01:42:15,360 --> 01:42:19,360
बिस्मिल्लाह करके मंगलाचरण करेंगे भास्कर जी या राघवाचार्य जी या रत्नेश जी कभी

1455
01:42:19,360 --> 01:42:24,000
मनुष्य करेंगे उसी मंच पर का सम्मान करने पहुंच जाएंगे विद्या भास्कर जी या राघवाचार्य जी या रत्नेश्वरी

1456
01:42:24,000 --> 01:42:28,080
जबकि इन लोगों का कर्तव्य था कि ऐसे तत्व का पूर्ण किया जाए रामदेव का या बोला या इस प्रकार

1457
01:42:28,080 --> 01:42:32,320
लोगों का पूर्ण भविष्य अरे भैया देखो देखो इसकी मूर्खता

1458
01:42:32,320 --> 01:42:36,480
देखो मुरारी जी का मुरारी का

1459
01:42:36,480 --> 01:42:40,480
पूर्ण बहिष्कार होना चाहिए ठीक है और नहीं किया किसने विद्या

1460
01:42:40,480 --> 01:42:44,560
भास्कर जी ने तो तू उनका पूर्ण बहिष्कार क्यों नहीं कर रहा है क्यों

1461
01:42:44,560 --> 01:42:48,560
नहीं कर रहा है अबे कितना बड़ा दोगला है भाई

1462
01:42:48,560 --> 01:42:52,560
तू कर दे पूर्ण बहिष्कार धार्मिक संसर्गों से मैं हटा रहा

1463
01:42:52,560 --> 01:42:58,560
हूं

1464
01:42:59,760 --> 01:43:04,080
आम का या इस प्रकार के लोगों का पूर्ण भविष्य हा खाएंगे

1465
01:43:04,080 --> 01:43:08,240
हमारे ठाकुर जी हमारी आस्था है आपसे ये हमारा निवेदन है अपने श्रम और वरिष्ठ तीनों भाषा में

1466
01:43:08,240 --> 01:43:12,320
लगता है लेकिन असंभव नहीं है क्या हो क्या वो आपके शास्त्री वर्ण सिद्धांत

1467
01:43:12,320 --> 01:43:16,400
जिसके कारण आपके आचार्य जड़े बड़े पटे और अपने सिद्धांत को बचाए उसका आज आप अनकर चिंतन करें कि

1468
01:43:16,400 --> 01:43:20,400
जहां वर्ण श्रम की बात आएगी आपके पूर्वचार्य के समर्थन की बात आएगी जहां शास्त्री काम के संरक्षण की बात आएगी

1469
01:43:20,400 --> 01:43:24,400
वहां रामदेव मुरारी मोहन भागवत जैसे लोग साथ देंगे या उसमें आपको संसाधन भौतिक दृष्टि से होने

1470
01:43:24,400 --> 01:43:28,480
के बाद भी हम ही सम्मान पूर्वक समर्थन करते दिखेंगे तो ये बात अगर तू संत

1471
01:43:28,480 --> 01:43:32,800
तू अगर भौतिक दृष्टि से समर्थन करते हुए दिखेगा तो तू हमारे घर की स्त्रियों

1472
01:43:32,800 --> 01:43:37,040
के बारे में वैश्या बोले तो हम सुन ले। अगर तू

1473
01:43:37,040 --> 01:43:41,280
समर्थन करता दिखेगा तो तू जो है आचार्यों के लिए तू

1474
01:43:41,280 --> 01:43:47,280
तड़ाक बोले लतखोर बोले तो हम उसको सुन ले। हम

1475
01:43:47,600 --> 01:43:48,100
तो

1476
01:43:47,920 --> 01:43:52,640
फिर यहां पर तेरा तू तू भी ऐसा ही करता है क्या?

1477
01:43:52,640 --> 01:43:56,960
यदि कोई तेरा समर्थन कर रहा है तो उसके लिए तेरी स्त्रियों को लेकर के जो निषेधता

1478
01:43:56,960 --> 01:44:01,280
होनी चाहिए तेरे घर की वो उसको तू नहीं लागू करता है क्या ऐसा

1479
01:44:01,280 --> 01:44:05,840
है क्या

1480
01:44:05,840 --> 01:44:09,920
कितनी नीचता है भाई तेरे अंदर अगर तूने अगर कोई अच्छा कार्य

1481
01:44:09,920 --> 01:44:13,920
कर दिया तो तुझे हम स्वीकार कर ले एज इट इज चाहे भले ही तू हमारे घर की स्त्रियों को

1482
01:44:13,920 --> 01:44:18,560
मां बहन की गाली करता रहे हमारे लिए वैश्या गामी बोलता रहे वैश्या

1483
01:44:18,560 --> 01:44:22,800
वैश्या बोलता रहे हमारी बहनों को ऐसा नहीं होगा ना

1484
01:44:22,800 --> 01:44:27,040
दमयंती को वो अजगर निगल जाने वाला था

1485
01:44:27,040 --> 01:44:31,040
रक्षा की उसकी व्याध ने उसको मार दिया अजगर को वो दृष्टि हो गई

1486
01:44:31,040 --> 01:44:35,280
दोबारा दमती पर तो इसलिए क्योंकि प्राण की रक्षा की इसलिए

1487
01:44:35,280 --> 01:44:39,840
उसकी गरिमा को भंग कर देने दे

1488
01:44:39,840 --> 01:44:45,840
या उसकी हत्या कर देने दे दमती की

1489
01:44:45,920 --> 01:44:50,160
अब्राचार्य ने नोटिस नहीं भेजी तो किसने भेजी वही उनके चेलों ने भेजें तो चेलों ने भेजे तो अपने व्यक्तिगत

1490
01:44:50,160 --> 01:44:54,640
से भेजे की गुरु जी के कारणों से भेजे और गुरु ने उस कारण का समर्थन किया निवारण किया और अगर नोटिस भेजी तो रामचार्य

1491
01:44:54,640 --> 01:44:58,720
अरे हम तो केवल ये कह रहे हैं ना कि अगर सम अगर तुझे

1492
01:44:58,720 --> 01:45:02,720
अभी ये स्थितियां मालूम नहीं है तो शांत रह जब मालूम पड़ जाए कि

1493
01:45:02,720 --> 01:45:06,240
वो समर्थन दे रहे हैं तो बोल

1494
01:45:06,240 --> 01:45:10,400
हमने तो केवल इतना कहा ना क्योंकि हम कोई दूसरी अच्छी और

1495
01:45:10,400 --> 01:45:15,040
दूरगामी दृष्टि रखते हुए कुछ प्राप्त करने वाले हैं। मगर नीच

1496
01:45:15,040 --> 01:45:19,040
तुझे अपने कैरी मिनाटी बनने और YouTube चलाने के अलावा कुछ दिखाई नहीं

1497
01:45:19,040 --> 01:45:25,040
देगा। स्त्रियों की बात करता है। ऊपर नीचे यह है वह है।

1498
01:45:25,120 --> 01:45:29,120
गिद्ध जैसी नजरों वाला स्त्रियों का शरीर दिखता है। शरीर से

1499
01:45:29,120 --> 01:45:33,280
वो ऐसी दिखती है। रिश्ता क्या कहलाता है? विजय श्री के पास बहुत कुछ

1500
01:45:33,280 --> 01:45:37,520
ऐसा है जो ऊपर नीचे है जो मेरे पास नहीं है। इसलिए शिवश विजयश्री का सपोर्ट

1501
01:45:37,520 --> 01:45:43,120
करता है। ये नीचता भरी हुई। कहां गई आजकल तेरी वो नीचता?

1502
01:45:43,120 --> 01:45:47,120
थोड़ी कम हो गई है। निग्रह कर दिया क्या तेरा? या आजकल

1503
01:45:47,120 --> 01:45:51,360
परी में बिजी है तू? विरुद्ध जो कथन जी का याचार्य

1504
01:45:51,360 --> 01:45:54,960
जी का था वो कथन सही था कि गलत या रामद्राचार्य धारण सन्यास पूर्वक

1505
01:45:54,960 --> 01:45:59,120
धारण करने में शारीरिक और शारीरिक रूप से अवता हो जाती है और वहां पर ये भी नकली नहीं होगा

1506
01:45:59,120 --> 01:46:03,200
नहीं होगा क्यों नहीं होगा क्योंकि वहां पर पंचायत विकास वाली बात लागू हो जाती है और वहां पर ये

1507
01:46:03,200 --> 01:46:07,280
भी नकली गठबंधन करने की योजना चल रही है ये बता दो कश्मीर

1508
01:46:07,280 --> 01:46:11,600
हो जाती नकली गठबंधन की बात करें तो चल

1509
01:46:11,600 --> 01:46:15,600
तेरी बात कर लेते हैं तेरे अनुसार पट पहनने वाले

1510
01:46:15,600 --> 01:46:20,080
राक्षस है खड़े होकर के मूत्र त्याग करने वाले

1511
01:46:20,080 --> 01:46:22,400
जिन

1512
01:46:22,400 --> 01:46:26,800
जिनका जो तेरा केस लड़ रहे हैं वो नकली गठबंधन

1513
01:46:26,800 --> 01:46:30,960
नहीं है वहां पर तेरा। अच्छा जिनको तू

1514
01:46:30,960 --> 01:46:36,960
अनेकानेक पता नहीं कितनी सारी चीजें मैं बताऊं।

1515
01:46:37,200 --> 01:46:43,200
न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए तूने क्या-क्या लिखा है?

1516
01:46:46,640 --> 01:46:50,960
वर्तमान में भारत में सनातन धर्म के लिए सबसे बड़ा खतरा जो है

1517
01:46:50,960 --> 01:46:55,120
सबसे अधिक सनातन धर्म को तोड़ने में जिसका योगदान है उसे हम भारतीय

1518
01:46:55,120 --> 01:46:59,360
न्यायपालिका के नाम से जानते हैं। भारत को उसका गौरव

1519
01:46:59,360 --> 01:47:03,520
जिसके माध्यम से वापस दिला मिल सकता है सनातन धर्म उन सभी

1520
01:47:03,520 --> 01:47:07,520
मान बिंदुओं का हनन करने का संकल्प जिस संस्था ने लिया है उसे हम

1521
01:47:07,520 --> 01:47:11,680
भारतीय न्यायपालिका के नाम से जानते हैं। न्यायाधीशों

1522
01:47:11,680 --> 01:47:15,680
के इनके किडनी में लीवर में गुर्दे में एसी लगवा

1523
01:47:15,680 --> 01:47:21,680
दो फिर भी इनको गर्मी की छुट्टियां चाहिए। न्यायाधीशों न्यायाधीश

1524
01:47:24,480 --> 01:47:28,480
न्यायाधीश तो इनको मैं स्वीकार नहीं करता। न्यायाधीश शब्द पर

1525
01:47:28,480 --> 01:47:33,280
भी आपत्ति है मुझे। क्यों आपत्ति है? क्योंकि ये निर्णय करते हैं। न्याय नहीं करते।

1526
01:47:33,280 --> 01:47:37,520
अब पहले यह बता भाई कि जब तू कोर्ट में गया है साग द्वीप वाले मामले

1527
01:47:37,520 --> 01:47:41,600
में हमारे विरुद्ध तो तू वहां पर इनको न्यायाधीश कह रहा है कि दूसरा शब्द लिख कह

1528
01:47:41,600 --> 01:47:45,680
रहा है और अगर कह रहा है न्यायाधीश तो नकली गठबंधन है कौन सा वाला गठबंधन

1529
01:47:45,680 --> 01:47:50,000
है बता सुप्रीम कोर्ट में भी न्याय हो रहा है क्या कितने

1530
01:47:50,000 --> 01:47:54,400
विषयों में सुप्रीम कोर्ट न्याय करती है यानी कि न्याय की तो उम्मीद है ही नहीं तो तू अपना प्रकल्प

1531
01:47:54,400 --> 01:47:58,400
लाना शास्त्रों शस्त्रों को लेकर गया फिर तो जिनका तुझे विरोध करना है

1532
01:47:58,400 --> 01:48:02,560
क्यों गया भाई तो न्याय मिलता नहीं है क्यों गया है अच्छा

1533
01:48:02,560 --> 01:48:06,640
पर्याप्त पैसा हो, पर्याप्त पावर हो, जज के सामने हो, जज

1534
01:48:06,640 --> 01:48:10,720
के सामने ही अपने मन मुताबिक निर्णय हस्तक्षेप व्यक्ति करा सकता है। तो तेरे अनुसार

1535
01:48:10,720 --> 01:48:14,720
तो भैया तेरे जितने भी विपक्षी हैं वो पर्याप्त पैसे वाले हैं।

1536
01:48:14,720 --> 01:48:18,720
तो फिर तू वहां क्यों जा रहा है? व्यर्थ जा रहा है। संपूर्ण व्यवस्था

1537
01:48:18,720 --> 01:48:23,120
की ओर दृष्टिपात करें। संपूर्ण व्यवस्था की ओर दृष्टिपात

1538
01:48:23,120 --> 01:48:27,680
करूं तो विश्व की सबसे भ्रष्ट निर्लज्य और संवेदनहीन

1539
01:48:27,680 --> 01:48:33,680
अगर कोई संस्था है तो वह भारतीय न्यायपालिका ही हो सकती है।

1540
01:48:33,760 --> 01:48:37,760
ठीक है? ये न्यायपालिका के लिए इसके अंदर इसके अंदर का

1541
01:48:37,760 --> 01:48:39,520
भाव है। तो इसका पूर्ण बहिष्कार

1542
01:48:39,520 --> 01:48:43,520
नहीं होना चाहिए था इसकी ओर से। फिर ये क्यों पहुंच गया? मिल लॉर्ड मिल मुझे

1543
01:48:43,520 --> 01:48:47,600
ब्राह्मण शाक दयियों को ब्राह्मण नहीं मान रहे। शिवश नारायण द्विवेदी जो

1544
01:48:47,600 --> 01:48:52,480
है मेरे ऊपर वो जो है वो जोधपुर वाले डॉक्टर के यहां जाकर के मेरे बारे में

1545
01:48:52,480 --> 01:48:56,480
इंटरव्यू ले रहा है प्रश्न पूछ रहा है मिलॉर्ड मिल लॉर्ड वहां पर तूने

1546
01:48:56,480 --> 01:49:00,560
बताया कि आप गर्मियों की छुट्टियों में मत जाना

1547
01:49:00,560 --> 01:49:04,720
बोला है उनसे तू तूने वहां पर बोला कि न्यायाधीश नहीं हो तुम निर्णय

1548
01:49:04,720 --> 01:49:08,880
करता हो बताया नकली गठबंधन और

1549
01:49:08,880 --> 01:49:11,440
क्या है

1550
01:49:11,440 --> 01:49:16,320
न्यायपालिका के समान क्रूर और संवेदनहीन संस्था दूसरी नहीं

1551
01:49:16,320 --> 01:49:20,320
उसी क्रूर के पास गया ना तू शरण मांगने। न्यायपालिका के

1552
01:49:20,320 --> 01:49:24,480
समान स्वार्थी और पक्ष पूर्ण व्यवहार करने वाली संस्था दूसरी नहीं है।

1553
01:49:24,480 --> 01:49:28,720
पक्षपाती है न्यायपालिका तो न्याय कहां से मिलेगा? अच्छा अब और थोड़ा स्तर

1554
01:49:28,720 --> 01:49:33,280
बढ़ जाएगा। इनके गुर्दों में खुजली मच जाती है। जब

1555
01:49:33,280 --> 01:49:37,280
मतलब ऐसी चीजें जो जिनका यह चाहता

1556
01:49:37,280 --> 01:49:41,360
है एक जगह पे ये भी कहा इनके गुर्दों में खुजली मच जाती है। तो ये सब बातें तूने

1557
01:49:41,360 --> 01:49:45,600
वहां बताई कि तुम्हारे गुर्दों में खुजली कम मचती है। क्या है? नकली

1558
01:49:45,600 --> 01:49:49,680
गठबंधन पत्ते चाटी। अच्छा आगे

1559
01:49:49,680 --> 01:49:54,000
क्या है? जिसका यानी न्यायाधीश का चरित्र सही नहीं है।

1560
01:49:54,000 --> 01:49:54,560
मतलब एक

1561
01:49:54,560 --> 01:49:58,560
बोल रहा है न्यायाधीश का चरित्र सही नहीं है। वो और जो व्यभचार

1562
01:49:58,560 --> 01:50:03,200
का समर्थन करता हो ऐसा व्यक्ति क्या न्याय करेगा? क्यों गया भाई तू न्यायाधीश के पास?

1563
01:50:03,200 --> 01:50:07,600
पूरे देश को वैश्यालय बनाने में तुम लोग तुल गए हो। तो न्यायाधीश

1564
01:50:07,600 --> 01:50:11,840
न्यायालय जहां पर तू पहुंचा है वो तो वैश्यालय बना रहा है सनातन धर्म को

1565
01:50:11,840 --> 01:50:15,920
देश को स्वयं जो व्यक्ति वैश्यागामी हो जाता है स्वयं व्यभचारी हो

1566
01:50:15,920 --> 01:50:19,920
जाता है स्वयं जिसके अनैतिक संबंध है वह व्यक्ति दूसरे को तो चाहेगा ही कि

1567
01:50:19,920 --> 01:50:25,920
वो शराबी हो कबाबी हो जुारी बन जाए

1568
01:50:26,240 --> 01:50:30,560
तुम लोग काला कोट पहनकर जो आते हो उससे अच्छा पेटीकोट क्यों नहीं पहन

1569
01:50:30,560 --> 01:50:34,880
लेते हो ये सब न्यायाधीशों के लिए बोल रहा है व्यक्ति जो न्यायाधीश

1570
01:50:34,880 --> 01:50:38,960
स्वयं व्यभचार में डूबा हुआ है। मदिरा पान में डूबा हुआ है।

1571
01:50:38,960 --> 01:50:44,000
वह दूसरों को क्या नैतिकता की शिक्षा देगा?

1572
01:50:44,000 --> 01:50:48,160
जो न्यायाधीश स्वयं समलैंगिकता का शिकार है। जो मानसिक

1573
01:50:48,160 --> 01:50:52,880
रोगी है। वह दूसरों को नैतिकता और न्याय की शिक्षा देगा।

1574
01:50:52,880 --> 01:50:56,880
जज बनने के लिए या बने रहने के लिए विवेक, बुद्धि, निर्णय, दया,

1575
01:50:56,880 --> 01:51:00,880
सहनशीलता नहीं चाहिए। अब मर्दाना ताकत की गोली खाकर जज बन रहे

1576
01:51:00,880 --> 01:51:04,960
हैं। जिसके पास गया है वह मर्दाना ताकत की गोली खाकर के जज बने हैं

1577
01:51:04,960 --> 01:51:09,200
ना। उनहीं को तू कह रहा है ना मिल मुझे न्याय दिलवा दो व्या

1578
01:51:09,200 --> 01:51:13,440
पुत्र के समान ही न्यायालय की अवमानना भी मिथ्या है क्योंकि अवमानना

1579
01:51:13,440 --> 01:51:18,880
होने से पहले सम्मान का होना आवश्यक है। सम्मान है कहां आपका?

1580
01:51:18,880 --> 01:51:22,880
कोर्ट दो कोर्ट तो कम काला है। जितना काला इन लोगों का

1581
01:51:22,880 --> 01:51:26,960
चरित्र है। हमारी बहू बेटियों सबको वैश्या बनाने पर

1582
01:51:26,960 --> 01:51:31,120
तुला हुआ है। न्यायपालिका का संस्थान। यह

1583
01:51:31,120 --> 01:51:35,120
तो हत्यारे हैं। कसाई भरे पड़े हैं। भाई इनको न्यायाधीश

1584
01:51:35,120 --> 01:51:39,440
कौन कहता है भाई? यह तो कसाई है।

1585
01:51:39,440 --> 01:51:43,760
अच्छा आगे क्या है? यहां तो

1586
01:51:43,760 --> 01:51:48,240
यानी कहां? न्यायालय में केवल शराबी, कबाबी, घूसखोर, वैभचारी,

1587
01:51:48,240 --> 01:51:52,320
वैश्यामी भरे पड़े हैं। तो भाई तू जहां गया है, तूने जहां पे एप्लीकेशन

1588
01:51:52,320 --> 01:51:58,000
लगाई है, व्यवहार न्यायालय रांची वहां पे कौन से टाइप के हैं बता दे जरा।

1589
01:51:58,000 --> 01:51:59,200
और अगर तू इनको

1590
01:51:59,200 --> 01:52:03,280
ऐसा ही मानता है जो तूने अभी तक लिखा है तो

1591
01:52:03,280 --> 01:52:07,840
फिर तू उनको मिलो जो कह रहा है वह क्या है नकली गठबंधन है क्या है

1592
01:52:07,840 --> 01:52:11,840
न्यायपालिका तो गुलाम बनी हुई है न्यायपालिका तो अलग न्यायपालिका

1593
01:52:11,840 --> 01:52:15,920
तो अलग नशा करके बैठी नशेड़ियों से न्याय मांग रहा है इन

1594
01:52:15,920 --> 01:52:20,160
लोगों ने इस गिरोह ने न्यायपालिका ने स्वयं

1595
01:52:20,160 --> 01:52:24,240
को न्याय का ठेकेदार तो बनाया बना दिया लेकिन अन्याय करने पर हमें क्या दंड

1596
01:52:24,240 --> 01:52:28,960
मिलेगा इसकी कोई व्यवस्था नहीं बताई

1597
01:52:28,960 --> 01:52:33,040
जिस दिन यह व्यवस्था बनेगी, जिस दिन यह

1598
01:52:33,040 --> 01:52:37,120
व्यवस्था बनेगी ना, सड़क पर जूते मारकर इनका किनका

1599
01:52:37,120 --> 01:52:41,840
न्यायाधीशों का अपान से लेकर मुख मंडल तक लाल कर दिया जाएगा।

1600
01:52:41,840 --> 01:52:46,400
उनहीं के पास गया ना। तुम जिसको अपना

1601
01:52:46,400 --> 01:52:51,040
रक्षक समझ रहे हो न्यायाधीशों को वो तुम्हारा भक्षक है।

1602
01:52:51,040 --> 01:52:55,440
तुम्हारा पहला कर्तव्य बनना चाहिए कि जो तुम्हारी

1603
01:52:55,440 --> 01:52:59,440
शिकायत दर्ज नहीं कर रहा है उस जज को उस प्रशासन को समाप्त कर दो,

1604
01:52:59,440 --> 01:53:03,520
नष्ट कर दो। मार दो। तो भैया न्यायाधीश को तूने लिखा है ना?

1605
01:53:03,520 --> 01:53:08,480
नहीं करोगे तो नष्ट कर दूंगा। दोगलापन तो नहीं निभाया ना तूने?

1606
01:53:08,480 --> 01:53:13,760
नकली गठबंधन तो नहीं किया।

1607
01:53:13,760 --> 01:53:18,000
यह न्यायाधीश कोई न्याय देने नहीं बैठे हैं। यह दलाल बैठे हैं। दलाल

1608
01:53:18,000 --> 01:53:22,240
है भाई। वहां तू कहां पहुंच गए? दलालों के दलालों को कहला मिल वैश्यालय

1609
01:53:22,240 --> 01:53:26,400
के जो दलाल थे ना कोर्टों के वही अब यहां पर बहाल हो के आए हैं। क्या बनकर आए? न्यायाधीश

1610
01:53:26,400 --> 01:53:30,480
बन के आए। ये सब तूने बताया क्या उनको उनके बारे में? अच्छा तू नहीं बताएगा

1611
01:53:30,480 --> 01:53:34,960
तो हम बता देंगे। चिंता मत कर।

1612
01:53:34,960 --> 01:53:38,880
चलिए

1613
01:53:38,880 --> 01:53:43,200
खरीदने गए। को मिला तो जल भैया एकत्र रामचार्य

1614
01:53:43,200 --> 01:53:48,720
बाकी सब नग का क्या काम उनके जगह नहीं है या

1615
01:53:48,720 --> 01:53:53,280
एकमात्र

1616
01:53:53,280 --> 01:53:58,160
परम तत्व के रूप में विष्णु भगवान है इस पर तेरा क्या कहना है बोल

1617
01:53:58,160 --> 01:54:02,240
क्या कहना है तेरा और अगर केवल वैष्णव

1618
01:54:02,240 --> 01:54:06,240
केवल विष्णु भगवान ही भगवान है तो तू क्यों नाव में बैठकर के

1619
01:54:06,240 --> 01:54:10,400
पांचो तत्वों की दीक्षा दे रहा है इस पर तेरा क्या कहना है?

1620
01:54:10,400 --> 01:54:14,640
कर असहज असहज असहज

1621
01:54:14,640 --> 01:54:18,880
प्रश्न क्या केवल तेरे पास ही है? हमारे पास नहीं है क्या?

1622
01:54:18,880 --> 01:54:22,880
तू ही बंद हो जाएगी। गिग्गी बंध जाएगी मुख की जो तू असहज

1623
01:54:22,880 --> 01:54:28,880
स्थितियों की सोचता है ना कि भैया असहज प्रश्न कर देंगे। इसमें सामने वाला बोल नहीं पाएगा।

1624
01:54:30,240 --> 01:54:34,240
भाई अगर वो कुछ कह रहे हैं तो तू भी तूने

1625
01:54:34,240 --> 01:54:38,320
भी तो बहुत कुछ कहा था। तब हम शांत थे। तू भी तो अपने आप

1626
01:54:38,320 --> 01:54:44,320
को सबका निग्रह करने वाले के रूप में एकमात्र गुरु के रूप में स्थापित कर रहा है।

1627
01:54:44,320 --> 01:54:48,480
तो हम शांत थे ना नहीं बोलते थे ना। क्यों? क्योंकि

1628
01:54:48,480 --> 01:54:52,480
हमें दिख रहा है कि हमें अपना अपनी एनर्जी अपनी ऊर्जा किस

1629
01:54:52,480 --> 01:54:57,120
विषय में किस व्यक्ति के विरोध में लगानी है। और एकमात्र

1630
01:54:57,120 --> 01:55:01,360
जगत गुरु एकमात्र जगतगुरु जो है

1631
01:55:01,360 --> 01:55:06,880
रामभद्राचार्य जी हैं। यह देखो इसका

1632
01:55:06,880 --> 01:55:12,880
इसको ऐसे देखो सिद्धांत की दृष्टि से देखो शास्त्रों की बात ये तो नहीं करता हम करते

1633
01:55:12,960 --> 01:55:17,120
श्री राम जी के पास जब वैष्णो माता आई विवाह

1634
01:55:17,120 --> 01:55:22,160
का प्रस्ताव लेकर के तो श्री राम जी ने क्या कहा मैं एक पत्नी व्रत

1635
01:55:22,160 --> 01:55:26,640
वाला व्यक्ति हूं और उनको मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया मर्यादा

1636
01:55:26,640 --> 01:55:30,720
के रूप में जो सर्वश्रेष्ठ मर्यादा तय की वो ठीक है अमुक अमुक स्थितियों में एक

1637
01:55:30,720 --> 01:55:35,600
से अधिक विवाह हो सकता है ठीक है परंतु जो श्रेष्ठतम

1638
01:55:35,600 --> 01:55:39,760
मर्यादा हुई वो क्या हुई कि

1639
01:55:39,760 --> 01:55:44,080
एक नारी सदा ब्रह्मचारी श्री राम जी तो अपने पिता के विषय में क्या

1640
01:55:44,080 --> 01:55:48,080
वो था उनका उन्होंने खंडन क्यों नहीं किया अपने पिता का खंडन

1641
01:55:48,080 --> 01:55:52,080
करें तो अगर अच्छा उन्होंने

1642
01:55:52,080 --> 01:55:56,080
एक पत्नी व्रत को सर्वश्रेष्ठ मर्यादा के रूप में

1643
01:55:56,080 --> 01:56:00,240
स्थापित करके क्या यह निर्णय नहीं दे दिया कि हां एक

1644
01:56:00,240 --> 01:56:04,480
पत्नी व्रत सर्वश्रेष्ठ है जो इसको नहीं माने वो जो है कहीं

1645
01:56:04,480 --> 01:56:08,560
ना कहीं इससे बाहर है इसकी सीमा से उसको मर्यादा पुरुषोत्तम तो नहीं कहा जाएगा।

1646
01:56:08,560 --> 01:56:12,800
कहा गया क्या किसी को बेवकूफ व्यक्ति अगर

1647
01:56:12,800 --> 01:56:16,960
उन्होंने रामभद्राचार्य जी के ये कह देने के बाद कि

1648
01:56:16,960 --> 01:56:21,520
वो वो एकमात्र जगतगुरु है और ये कह देने के बाद भी उन्होंने

1649
01:56:21,520 --> 01:56:22,400
शंकराचार्यों

1650
01:56:22,400 --> 01:56:26,640
को जगतगुरु कह दिया तो उन्होंने बिना बोले ही उनका खंडन कर दिया

1651
01:56:26,640 --> 01:56:30,640
मगर तू एक पुत्र के द्वारा पिता का खंडन चाहता है तू श्री राम जी से भी कह देगा

1652
01:56:30,640 --> 01:56:35,520
कि अपने पिता का खंडन कर कि तुम मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं हो

1653
01:56:35,520 --> 01:56:39,680
ऐसा ही निर्लज्ज व्यक्ति है ना तू कोई बात नहीं तेरे को तेरी

1654
01:56:39,680 --> 01:56:43,760
दुनिया में आके मारेंगे जैसी बातों

1655
01:56:43,760 --> 01:56:48,480
से तू समझ सकता है उसी से मारेंगे तो बता

1656
01:56:48,480 --> 01:56:52,480
वैष्णवाचार्यों के बारे में तेरा क्या वो है शिव जी

1657
01:56:52,480 --> 01:56:58,480
का भक्त का भक्ति करें कि ना करें वो तो बताते शिवजी भगवान नहीं है वैष्णवाचार्य

1658
01:56:58,480 --> 01:57:02,640
असहज स्थितियां उत्पन्न करेगा ना श्री भाष सही है या शंकर

1659
01:57:02,640 --> 01:57:06,720
भाष इस विषय में तू क्यों कहता मैं तो सब में एक दृष्टि रखता हूं। अगर सब

1660
01:57:06,720 --> 01:57:10,800
में एक दृष्टि तू रख सकता है तो वो नहीं रख सकती। अगर कह रहे हैं तो एक

1661
01:57:10,800 --> 01:57:14,960
सन्यासी दूसरे सन्यासी को कह रहा है। एक परंपरा से व्यक्ति दूसरी परंपरा वाले

1662
01:57:14,960 --> 01:57:19,280
को कह रहा है। दूसरी बात जहां पर स्वयं बड़े विद्यमान

1663
01:57:19,280 --> 01:57:23,680
है जिन विषयों में बोलने के लिए और बोल भी रहे हैं। वहां पर हम क्यों बोले?

1664
01:57:23,680 --> 01:57:27,760
हां। हम उनकी इस बात का समर्थन करने यदि खड़े हो जाए तब तो तू बोल

1665
01:57:27,760 --> 01:57:31,840
आ करके तू इस बात को कैसे समर्थन कर रहा है भाई? मौन हो गए। वहां

1666
01:57:31,840 --> 01:57:36,640
बड़े लोग बोल रहे हैं। राघवाचार्य जी ने बोला खूब अच्छा कौन थे हम नहीं बोले

1667
01:57:36,640 --> 01:57:37,520
हमने समर्थन

1668
01:57:37,520 --> 01:57:41,520
तो नहीं कर दिया कि रामद्राचार्य जी ने सही स्टेटमेंट दिया है। उल्टा

1669
01:57:41,520 --> 01:57:46,320
राघवाचार्य जी का ही समर्थन किया और कर रहे हैं।

1670
01:57:46,320 --> 01:57:50,800
मगर ऐसा बड़ी बात तुझे नहीं घुसेगी। तुझे तभी घुसेगी जब तेरी भाषा में तुझसे सवाल किए जाए।

1671
01:57:50,800 --> 01:57:55,520
आ जाना। हवेली पे आ जाना हवेली पे।

1672
01:57:55,520 --> 01:57:59,520
चलो

1673
01:57:59,520 --> 01:58:04,080
उनके लेकिन अपने गुरु को नीचा निष्ठा गजब

1674
01:58:04,080 --> 01:58:08,080
अर्थात शंकराचार्य बनाते थे हो गए वो बड़ा हो

1675
01:58:08,080 --> 01:58:12,160
गया वही सबसे प्रामाणिक आचार्य है वही सबसे बड़ा है ना और वही रजना

1676
01:58:12,160 --> 01:58:16,160
इनका खोखला है वो रामद्राचार्य वो अपना हो गया हम

1677
01:58:16,160 --> 01:58:20,160
है ना और वही रजना होते हैं जो स्वरूपानंद जी के शिष्य है वो रामद्राचार्य बने घूम रही

1678
01:58:20,160 --> 01:58:24,240
और वही गुरु शंकराचार्य का पोषण करताना ये इनका खोखला अवसर मानता

1679
01:58:24,240 --> 01:58:28,720
की पुष्टि करता है। हो रहा है जितना है उसके अनुसार ये सब उत्तर हमने पहले ही दे दिए।

1680
01:58:28,720 --> 01:58:32,800
किस विषय में कौन किसका पक्ष ले रहा है कौन किसका वकील है यह देखोगे कि

1681
01:58:32,800 --> 01:58:36,960
नहीं देखोगे और यदि तुम अजीत भारती जैसे और आरएसएस जैसे जिन

1682
01:58:36,960 --> 01:58:40,960
जिन्होंने भी गवाही के विरुद्ध बोला और जिनकी विचारधारा से तुम संतुष्ट

1683
01:58:40,960 --> 01:58:45,040
नहीं हो जब तुम उनका किसी किसी मामले में पक्ष ले सकते हो तो हम अगर किसी

1684
01:58:45,040 --> 01:58:49,120
मामले में जो कि ना सनातन के विरोध में वर्णाश्रम के विरोध में

1685
01:58:49,120 --> 01:58:52,560
है किसी मामले में धर्म की रक्षा करने के लिए धर्म की

1686
01:58:52,560 --> 01:58:56,560
प्रतिष्ठा के लिए किसी मामले में रामद्राचार्य जी के साथ खड़े हो जाएंगे तो तुम सवाल

1687
01:58:56,560 --> 01:59:00,560
करने वाले कहा से हो गए

1688
01:59:00,560 --> 01:59:04,720
और की अपेक्षा और कोई आते रहे तो जो है मेरा वर्तमान

1689
01:59:04,720 --> 01:59:09,120
पीता यह प्रवत्त रहे तो वही बाकी पीठों का भविष्य हो ये बात याद रख आचार्य शास्त्र पर

1690
01:59:09,120 --> 01:59:13,440
हो जाए शास्त्र विमुख हो जावे और व्यक्ति प्रमुख हो जावे तो बहुत समस्या

1691
01:59:13,440 --> 01:59:17,600
है तो ये वक्त हुआ आप तो ये सारा तमाशा चल रहा है प्रपंच चल रहा है

1692
01:59:17,600 --> 01:59:23,280
धर्म कहीं नहीं है इसमें शास्त्र क्या है तमाशा बन गया है क्योंकि इसी वीडियो के आगे आपको एक साथ

1693
01:59:23,280 --> 01:59:28,320
क्या है इसके विषय में जन समुदाय को पता ही नहीं लोगगी नहीं समझते

1694
01:59:28,320 --> 01:59:34,320
अब देखो इसने इससे आगे शक्ति संगम तंत्र के बारे में जो बात की है

1695
01:59:35,840 --> 01:59:40,000
सबसे पहली बात तो मैं ये बता दूं कि निग्रह निकासिका जो हमने लिखी है

1696
01:59:40,000 --> 01:59:44,160
जिसमें कि ये सिद्ध किया है प्रयास नहीं किया है खंडन किया है

1697
01:59:44,160 --> 01:59:48,640
उसमें इसकी अप्रामाणिकता को लेकर के मेरे ख्याल से हमने कम से कम

1698
01:59:48,640 --> 01:59:51,760
कुछ नहीं तो

1699
01:59:51,760 --> 01:59:55,920
50 या मतलब 30 से 50 के बीच में मोटे मोटे बहुत सॉलिड

1700
01:59:55,920 --> 02:00:00,080
प्रश्न किए होंगे उसमें कहीं भी हमने यह नहीं कहा कि शक्ति संगम

1701
02:00:00,080 --> 02:00:04,960
तंत्र के अनुसार जो

1702
02:00:04,960 --> 02:00:08,960
ये वाला जो पॉइंट है ना कि 108 वे श्लोक में लिखा है कि अब मैं पाखंड तंत्रों की बात

1703
02:00:08,960 --> 02:00:14,240
करूंगा। तो शक्ति संगम तंत्र के अनुसार निग्रह

1704
02:00:14,240 --> 02:00:18,400
तंत्र या निग्रह आगम पाखंड आगम है। यह हमने निग्रह

1705
02:00:18,400 --> 02:00:22,400
निकासिका में नहीं लिखा। हमने अपनी किसी

1706
02:00:22,400 --> 02:00:26,960
और विषय में चलती हुई जो लाइव थी विषय

1707
02:00:26,960 --> 02:00:31,120
इसी का था। उसमें ही अंत में जब वो लाइफ समाप्त हो रही थी तो हमने

1708
02:00:31,120 --> 02:00:35,280
कहा कि भैया 108 श्लोक में लिखा है कि इसके बाद पाखंड

1709
02:00:35,280 --> 02:00:40,240
तंत्रों की बात हो रही है। ठीक है? और उसके आने उसके आने के बाद

1710
02:00:40,240 --> 02:00:44,320
उसके आगे के विषय में पाखंड तंत्रों के रूप में जो अन्य जो

1711
02:00:44,320 --> 02:00:48,640
आगे तंत्र दिखाए गए हैं वो दिख रहे हैं। प्रतीत हो रहा है। ये आप देख लीजिएगा

1712
02:00:48,640 --> 02:00:51,920
जब हमने पहली बार यह बात कही थी।

1713
02:00:51,920 --> 02:00:55,920
और उन्होंने कहा था कि इसके बारे में स्पष्टीकरण आना चाहिए कि यहां

1714
02:00:55,920 --> 02:01:00,000
पर जो चीज आ रही है उसके बारे में क्या स्पष्टीकरण। इसके बाद

1715
02:01:00,000 --> 02:01:03,600
इस व्यक्ति से किसी ने

1716
02:01:03,600 --> 02:01:07,680
वहां लखनऊ जब ये आया था तो किसी ने या तो इसी ने कहा होगा कि

1717
02:01:07,680 --> 02:01:11,680
पूछना तो मैं बोल दूंगा या किसी ने पूछा। उसने वो सब नहीं पूछा

1718
02:01:11,680 --> 02:01:16,240
कि जब देवी वरदान दे के गई है तो वाकलन कैसे हो गया?

1719
02:01:16,240 --> 02:01:20,320
उसने यह नहीं पूछा कि निग्रह जैसे शंकर संप्रदाय के बारे

1720
02:01:20,320 --> 02:01:24,560
में शंकर परंपरा के बारे में परंपरा या संप्रदाय लिखा है। अन्य प्रमाणिक

1721
02:01:24,560 --> 02:01:28,960
संप्रदायों के बारे में लिखा है। निग्रह या

1722
02:01:28,960 --> 02:01:33,200
अन्य प्रमाणिक संप्रदायों के बारे में लिखा है। परंपरा या संप्रदाय

1723
02:01:33,200 --> 02:01:37,200
तो वैसे ही निग्रह परंपरा के बारे में क्यों नहीं लिखा? निग्रह संप्रदाय

1724
02:01:37,200 --> 02:01:41,840
के बारे में क्यों नहीं लिखा? क्योंकि वहां पर निग्रह आगम

1725
02:01:41,840 --> 02:01:47,840
शब्द है। निग्रह आगम एक मिनट खोल लूं जरा।

1726
02:01:48,480 --> 02:01:52,960
निग्रह आगम शब्द है। संप्रदाय क्यों नहीं है? अच्छा

1727
02:01:52,960 --> 02:01:57,200
आगम में तो विधि भी आती है। तंत्र भी आते हैं। खैर

1728
02:01:57,200 --> 02:02:01,440
उसको एक संप्रदाय के रूप में कहां पे लिखा है? शक्ति संगम

1729
02:02:01,440 --> 02:02:05,440
तंत्र में कि वो एक संप्रदाय है। निग्रह संप्रदाय तो वो तो नहीं लिखा है। इसने

1730
02:02:05,440 --> 02:02:10,640
ये वाली बात नहीं बोली। अच्छा दूसरी बात यह भी है कि इसमें

1731
02:02:10,640 --> 02:02:14,640
ना जाने कितने सारे पाखंडी तंत्रों के

1732
02:02:14,640 --> 02:02:18,640
नाम दिए गए जैन आगम बौद्ध आगम चीन आगम तो ये कैसे समझा जाए कि

1733
02:02:18,640 --> 02:02:22,800
निग्रह आगम जो है पाखंडी तंत्र नहीं है जबकि एक जगह इसने घोषणा भी की

1734
02:02:22,800 --> 02:02:26,800
है कि इसमें कई जगह पर पाखंडी तंत्रों का नाम भी दिया गया है ऐसी घोषणा

1735
02:02:26,800 --> 02:02:30,880
भी अलग से भी की है इस श्लोक के अलावा भी इसमें ये

1736
02:02:30,880 --> 02:02:34,800
घोषणा की गई है कि

1737
02:02:34,800 --> 02:02:38,800
पाखंड तंत्रों पाखंड तंत्र भी होते थे बहुत सारे उनका

1738
02:02:38,800 --> 02:02:43,040
नाम नहीं दिया मगर बताया मतलब इस इस ग्रंथ में वैदिक

1739
02:02:43,040 --> 02:02:47,040
और अवैदिक दोनों तरह के जो विधियां तंत्र इत्यादि प्रसिद्ध

1740
02:02:47,040 --> 02:02:51,040
है लोक में उनके बारे में बताया गया है तो फिर

1741
02:02:51,040 --> 02:02:55,120
ऐसे में बिना किसी अन्य समर्थन के अन्य ग्रंथ के

1742
02:02:55,120 --> 02:02:59,440
समर्थन के जहां पर स्वतंत्र रूप से निग्रह संप्रदाय को सबसे

1743
02:02:59,440 --> 02:03:03,840
पहले तो आगम की जगह संप्रदाय लिखा हो परंपरा लिखा हो फिर वहां पर कहा गया हो

1744
02:03:03,840 --> 02:03:08,000
कि ये जो है वैदिक है। तो

1745
02:03:08,000 --> 02:03:12,080
इस ग्रंथ के आधार पर इसको इसकी पुष्टि नहीं होती कि ये वैदिक

1746
02:03:12,080 --> 02:03:16,160
है। पहली बात तो इसकी पुष्टि नहीं होती कि ये संप्रदाय है। आगम नहीं है मात्र

1747
02:03:16,160 --> 02:03:20,160
ये संप्रदाय परंपरा है और इसकी पुष्टि नहीं होती। फिर उसके बाद

1748
02:03:20,160 --> 02:03:24,480
ये वैदिक है। इस ग्रंथ से तो नहीं होती। तो

1749
02:03:24,480 --> 02:03:28,880
ऐसे ऐसे भर भर के जो हमने प्रश्न किए थे पूरे निग्रह निकासिका

1750
02:03:28,880 --> 02:03:33,440
में वो किसी को नहीं याद आए। मगर हमने जो एक यह कहा कि इसमें इसका स्पष्टीकरण

1751
02:03:33,440 --> 02:03:37,440
आना चाहिए क्योंकि जो पाखंड तंत्र बताए जा रहे हैं। इसका स्पष्टीकरण

1752
02:03:37,440 --> 02:03:41,440
आना चाहिए तो इसने उस पर बात नहीं की है। अच्छा दूसरी बात ये

1753
02:03:41,440 --> 02:03:45,680
है कि जब इसने अब ये

1754
02:03:45,680 --> 02:03:49,760
जो बात की है इसने कि क्या कहते

1755
02:03:49,760 --> 02:03:53,760
हैं? इसने अपने वीडियो में यह कहा है

1756
02:03:53,760 --> 02:03:58,320
कि यहां पर स्वतंत्र रूप से संज्ञात्मक रूप से पाखंड

1757
02:03:58,320 --> 02:04:03,040
तंत्रों की बात बताई गई है। यहां पर यह नहीं बताया जा रहा है

1758
02:04:03,040 --> 02:04:07,200
कि भैया अब यहां से आगे पाखंड तंत्रों के नाम बताए जा रहे हैं। तो इसमें

1759
02:04:07,200 --> 02:04:11,200
तो किसी संस्कृत संस्कृतज्ञ व्यक्ति की बात आवश्यक

1760
02:04:11,200 --> 02:04:15,600
हो गई कि कोई संस्कृतज्ञ व्यक्ति बैठकर के बताए कि यहां पर जो है

1761
02:04:15,600 --> 02:04:18,880
अब भाई तू तो हमारा विरोधी है। तुझे और हमारे

1762
02:04:18,880 --> 02:04:23,120
हमारी जानकारी में तुझे तो अपना मत सिद्ध करना है। तो इसमें

1763
02:04:23,120 --> 02:04:27,200
किसी तेरे पूर्वाचार्यों का तेरी परंपरा के जो प्रामाणिक

1764
02:04:27,200 --> 02:04:31,200
आचार्य पहले जिनसे तू संबंध अपने आप को बताता है तो जो जिनसे तू अपने

1765
02:04:31,200 --> 02:04:36,400
आप को संबद्ध बताता है उनका तो इसमें कोई गति है नहीं मेरी जानकारी

1766
02:04:36,400 --> 02:04:40,400
अगर है तो वो लोग प्रामाणिक नहीं है अगर निगमन से होते हुए आ रहे

1767
02:04:40,400 --> 02:04:44,560
हैं तो पहली बात तो इसमें किसी प्रामाणिक संस्कृतज्ञ का जो परंपरा

1768
02:04:44,560 --> 02:04:48,880
प्राप्त आचार्य हो उसका निर्णय आवश्यक है ये मनवाने

1769
02:04:48,880 --> 02:04:53,040
के लिए कि यहां पर स्वतंत्र रूप से

1770
02:04:53,040 --> 02:04:57,280
पाखंड संज्ञात्मक रूप से पाखंड तंत्रों को कहा जा रहा है कि इसके

1771
02:04:57,280 --> 02:05:02,720
बाद पाखंड तंत्रों में आठ त पांच तंत्र

1772
02:05:02,720 --> 02:05:06,800
तीन तंत्र और पांच उपतंत्र है। पहली बात तो ये है

1773
02:05:06,800 --> 02:05:10,880
अगर संस्कृत की बात आ गई प्रामाणिक रूप से संस्कृत है कि नहीं।

1774
02:05:10,880 --> 02:05:15,200
दूसरी बात यह है कि अगर तूने

1775
02:05:15,200 --> 02:05:20,400
इस व्यक्ति ने इसी वीडियो में आगे एक बात और कही है कि भाई अगर इसमें पाखंड

1776
02:05:20,400 --> 02:05:24,480
तंत्रों के नाम भी हैं तो फिर तुम शंकराचार्य को क्यों मानते हो? तुम

1777
02:05:24,480 --> 02:05:28,560
वैष्ण क्या कुतर्क किए इसने व्यक्ति ने वीडियो में। सोच के देखिए।

1778
02:05:28,560 --> 02:05:32,640
भैया शंकराचार्य को इसलिए हम शंकराचार्य को शक्ति

1779
02:05:32,640 --> 02:05:33,920
संगम तंत्र के आधार

1780
02:05:33,920 --> 02:05:38,160
पर नहीं जानते हैं। स्वतंत्र रूप से शंकराचार्य

1781
02:05:38,160 --> 02:05:42,480
के बारे में ऐसी बहुत से प्रमाण और तर्क हमें प्राप्त है कि वो प्रामाणिक

1782
02:05:42,480 --> 02:05:47,120
सिद्ध होते हैं। और अन्य वैष्णवाचार्य भी स्वतंत्र

1783
02:05:47,120 --> 02:05:51,360
रूप से हां शक्ति संगम तंत्र में भी उनका वो मिल जाता है। मतलब

1784
02:05:51,360 --> 02:05:55,600
यह नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अगर शंकराचार्य को हम प्रमाणिक

1785
02:05:55,600 --> 02:05:59,680
मानते हैं और शंकराचार्य के बारे में कोई ऐसा व्यक्ति बात करने लगे जो

1786
02:05:59,680 --> 02:06:03,840
कि गलत बातें भी करता हो और सही बातें भी करता हो तो क्योंकि किसी ऐसे व्यक्ति

1787
02:06:03,840 --> 02:06:07,840
ने बात की है शंकराचार्यों को प्रमाणिक कह दिया है। किसी ऐसे

1788
02:06:07,840 --> 02:06:12,080
व्यक्ति ने जो गलत और सही दोनों का कहता है तो इसलिए शंकराचार्य अप्रामाणिक

1789
02:06:12,080 --> 02:06:17,120
सिद्ध हो गए। ये कहां का न्याय है भाई?

1790
02:06:17,120 --> 02:06:21,120
अब वो वाली बात थी आर्य समाजियों

1791
02:06:21,120 --> 02:06:25,440
ने एक बार आरोप लगाया कि जो गॉड

1792
02:06:25,440 --> 02:06:29,760
पाद थे वो किसी राक्षस का अवतार थे या गॉड पाद या गोविंद गोविंद

1793
02:06:29,760 --> 02:06:34,160
पाद जी आर्य समाजियों की ही किताब उनका

1794
02:06:34,160 --> 02:06:38,320
कोई आचार्य लिखते हैं पता नहीं नाम नहीं आ रहा है। उसने

1795
02:06:38,320 --> 02:06:42,320
ये माना कि जो गॉड पाद थे वो राक्षस नहीं थे।

1796
02:06:42,320 --> 02:06:46,480
यह कहानी किसी और के बारे में यह आर्य समाजियों

1797
02:06:46,480 --> 02:06:50,560
ने ही माना तो जब हम यह बात उनसे कहने गए तो आर्य

1798
02:06:50,560 --> 02:06:54,880
समाजी बोले कि इसको तुम पूरा मानते हो अगर पूरा

1799
02:06:54,880 --> 02:06:59,200
मानते हो तो इसकी ये बात मानो। अरे भैया गड

1800
02:06:59,200 --> 02:07:03,440
पाद को राक्षस ना मानने के लिए स्वतंत्र रूप से हमारे पास

1801
02:07:03,440 --> 02:07:07,600
व्याख्याएं और प्रमाण और तर्क हैं। हम तुम्हें तुम्हारे

1802
02:07:07,600 --> 02:07:11,600
आचार्य का नाम केवल इसलिए बता रहे हैं क्योंकि तुम्हारी इनमें निष्ठा भले ही ना

1803
02:07:11,600 --> 02:07:15,840
हो मगर उसमें तो निष्ठा होगी ना। इसलिए तुम्हें तुम्हारा उत्तर दे रहे। हमारे

1804
02:07:15,840 --> 02:07:20,000
पास तो पर्याप्त तर्क प्रमाण है मानने के लिए कि आचार्य गड पाद जो है राक्षस नहीं है।

1805
02:07:20,000 --> 02:07:24,640
उसी प्रकार से जब तुम अगर ये कह रहे हो कि इसमें शंकराचार्य

1806
02:07:24,640 --> 02:07:28,960
जो है शंकराचार्यों को भी तो प्रमाणिक कहा गया है। शंकराचार्यों की

1807
02:07:28,960 --> 02:07:32,240
बात की गई है। तो अगर इसमें कहीं पर भी किसी को भी अवैदिक

1808
02:07:32,240 --> 02:07:36,400
मत को भी बता दिया गया है। तो फिर शंकराचार्य को तुम क्यों नहीं मानते? क्योंकि स्वतंत्र

1809
02:07:36,400 --> 02:07:40,400
रूप से हमें शंकराचार्यों के बारे में उनकी प्रामाणिकता भरभर के प्राप्त

1810
02:07:40,400 --> 02:07:44,400
है। हम इस ग्रंथ के आधार पर शंकराचार्यों को नहीं जानते हैं।

1811
02:07:44,400 --> 02:07:48,640
अन्य ग्रंथों से जानते हैं। हां इस ग्रंथ से भी पुष्टि हो जाती है और ऐसे

1812
02:07:48,640 --> 02:07:52,720
ग्रंथों के लिए हमारे यहां देवी भागवत में कहा गया है कि आगम ग्रंथों

1813
02:07:52,720 --> 02:07:56,800
के केवल उसी अंश को लेना है जो वैदिक हो और

1814
02:07:56,800 --> 02:08:00,880
वैदिक जो हमारी स्मृतियां है उनके अनुगत हो के जो

1815
02:08:00,880 --> 02:08:06,880
उसमें बातें कही गई हो वो मान्य है। उनकी बस उनका विरोध ना हो।

1816
02:08:07,120 --> 02:08:11,600
तो इस व्यक्ति से हमने इतने ढेर सारे सवाल पूछे कि जब गाली शास्त्री

1817
02:08:11,600 --> 02:08:15,600
है और तू गाली बकता है और गाली बकेगा तो तू आचार्य कैसे हो गया आचार्य

1818
02:08:15,600 --> 02:08:19,680
तो वो है जो शास्त्र सम्मत आचरण करे भैया हमने

1819
02:08:19,680 --> 02:08:23,760
तेरे को सारी चीजें तर्क प्रमाण सहित उपस्थित की निग्रह निकास लिख

1820
02:08:23,760 --> 02:08:28,000
की उस पर तू बात नहीं करेगा उस पर तू वीडियो नहीं बनाएगा जिसमें हमने केवल स्पष्टीकरण

1821
02:08:28,000 --> 02:08:32,320
मांग लिया हमने एक आक्षेप नहीं लगा दिया

1822
02:08:32,320 --> 02:08:36,400
हम तेरी तरह नहीं है हमने कहा इस पर स्पष्टीकरण आना चाहिए कि यहां पर ऐसा हो रहा है।

1823
02:08:36,400 --> 02:08:40,640
फिर भी उसके संबंध में जो तूने बातें कही है वो सब

1824
02:08:40,640 --> 02:08:44,880
खंडनीय है। खंडन हो सकता है। क्या बात कही है कि भैया

1825
02:08:44,880 --> 02:08:47,440
इसमें तो शंकराचार्य को भी नाम बताया गया तो शंकराचार्य

1826
02:08:47,440 --> 02:08:51,520
को तो अप्रामाणिक मानते हो नहीं मानते। क्यों नहीं मानते? क्योंकि शंकराचार्य की

1827
02:08:51,520 --> 02:08:55,840
स्वतंत्र रूप से व्याख्या हमें प्राप्त है। फिर ही नहीं प्राप्त। तो इसमें

1828
02:08:55,840 --> 02:09:00,080
सवाल आ गया कि अगर इसमें अवैदिक मतों को व्यापारे में भी बताया गया है

1829
02:09:00,080 --> 02:09:04,560
तो फिर निग्रह भी तो अवैदिक हो सकता है। निग्र आगम

1830
02:09:04,560 --> 02:09:08,640
उसको कैसे मान लिया जाए? तो स्वतंत्र व्याख्या कहां है? संप्रदाय क्यों नहीं

1831
02:09:08,640 --> 02:09:13,360
कहा गया? और अगर तेरे अनुसार वेद का अर्थ

1832
02:09:13,360 --> 02:09:19,040
तात्विक अर्थ जो है वो अव्यक्ता द्वत है अद्वैत है

1833
02:09:19,040 --> 02:09:23,200
तो फिर तेरे अनुसार तुझे उन लोगों का निग्रह करना चाहिए जो वेदों जो

1834
02:09:23,200 --> 02:09:27,040
अद्वैत के विरोधी है।

1835
02:09:27,040 --> 02:09:31,200
तेरे अनुसार अगर पंचदेव उपासना प्रामाणिक है तो तुझे उन लोगों का विरोध करना

1836
02:09:31,200 --> 02:09:36,320
चाहिए। उनका निग्रह करना चाहिए। जो पंच देव उपासना नहीं कर रहे हैं।

1837
02:09:36,320 --> 02:09:40,400
और तूने कहा कि मैं सबके सब लोग अपने अपने

1838
02:09:40,400 --> 02:09:44,800
जो परंपराएं हैं उसमें सब लोग अपने परंपराओं के अनुसार चल रहे हैं कि नहीं।

1839
02:09:44,800 --> 02:09:48,880
इस इस आधार पर तुझे पहली बात सबका ज्ञान होना चाहिए सब परंपराओं

1840
02:09:48,880 --> 02:09:52,880
का। और दूसरी बात यह है कि तू उन परंपराओं का ज्ञान प्रामाणिक रूप

1841
02:09:52,880 --> 02:09:57,600
से लेने जाएगा तो उनके उत्तराधिकारियों से लेगा। उनके उत्तराधिकारियों

1842
02:09:57,600 --> 02:10:01,760
से लेगा तो उनके उत्तराधिकारियों में यदि तेरी दोष दृष्टि

1843
02:10:01,760 --> 02:10:02,480
होगी तो प्रमाण

1844
02:10:02,480 --> 02:10:06,480
बुद्धि होना सिद्ध नहीं होगी तो तुझे मालूम कैसे पड़ेगा कि उस परंपरा का सिद्धांत

1845
02:10:06,480 --> 02:10:10,720
क्या है वो एज इट इज बता रहे हैं कि नहीं बता रहे हैं ये सब तार्किक

1846
02:10:10,720 --> 02:10:15,200
और तात्विक सवाल हमने इतने सारे किए उस पर व्यक्ति ने वीडियो नहीं बनाया

1847
02:10:15,200 --> 02:10:19,280
मगर एक इस बात पर वीडियो बनाया कि पाखंड तंत्र कहा गया है कि नहीं कहा

1848
02:10:19,280 --> 02:10:23,520
गया है अभी भी तो सिद्ध नहीं कर पाया क्यों नहीं कर पाया

1849
02:10:23,520 --> 02:10:27,600
क्योंकि पहली बात तो ये है कि इस पर फिर इसका विवेचना होनी चाहिए। जो तूने

1850
02:10:27,600 --> 02:10:31,840
यहां पर जो इस संस्कृत की जो हिंदी की है उसकी विवेचना करा

1851
02:10:31,840 --> 02:10:36,000
किसी आचार्य से प्रामाणिक आचार्य से उसकी विवेचना होगी।

1852
02:10:36,000 --> 02:10:40,000
हम कराएंगे जाकर कि भैया यहां आगे के सभी तंत्रों की बात हो रही

1853
02:10:40,000 --> 02:10:44,720
है चैप्टर बदलने तक या फिर पाखंड तंत्रों को अपने आप में पाखंड

1854
02:10:44,720 --> 02:10:48,800
संज्ञात्मक रूप से कहा गया है। इसके साथ ही साथ यह भी बात आती

1855
02:10:48,800 --> 02:10:53,200
है कि यदि इसके आगे के हैं तो यहां पांच पंच पांच

1856
02:10:53,200 --> 02:10:57,920
आगम को भी और इसने क्यों कहा है ये? स्वतंत्र रूप से क्यों कहा है?

1857
02:10:57,920 --> 02:11:02,160
यह जो इसका जो निग्रह आगम वाला मामला है अगर

1858
02:11:02,160 --> 02:11:06,960
श्लोक के अनुसार देखें तो आठवा श्लोक निग्रह आगम का श्लोक है।

1859
02:11:06,960 --> 02:11:11,200
है ना? तो यहां पर यह भी देखा जा सकता है कि एक ही आगम के

1860
02:11:11,200 --> 02:11:15,280
एक ही आगम में दूसरे आगम को भी अनुगत हो के दिखा

1861
02:11:15,280 --> 02:11:17,600
रहे हैं। वो फिर भाष्य की बात आ जाएगी। अर्थ करना

1862
02:11:17,600 --> 02:11:21,600
पड़ेगा। खैर अगर श्लोक के अनुसार देखा जाए तो यहां पर

1863
02:11:21,600 --> 02:11:25,760
आठवा श्लोक है। अच्छा दूसरी बात यह है कि अगर

1864
02:11:25,760 --> 02:11:29,920
इसमें यह कहा गया है कि अब जो है पाखंड तंत्रों की बात हो रही है

1865
02:11:29,920 --> 02:11:33,920
तब तो अगले ही चरण में पंच पांच

1866
02:11:33,920 --> 02:11:38,400
आगम जो है यानी कि वैष्णवाचार्यों का पांचत्र वो यहां पर पाखंड

1867
02:11:38,400 --> 02:11:42,400
तंत्र सिद्ध हो रहा है। तो इसलिए भी हो सकता है इस व्यक्ति ने इसको संज्ञात्मक बना

1868
02:11:42,400 --> 02:11:46,720
दिया हो। भले ही इसका निग्रह जो है वह इसकी जो आठ की संख्या है

1869
02:11:46,720 --> 02:11:50,800
वो उससे बाहर निकल रहा है भले ही मगर पांच रात्र

1870
02:11:50,800 --> 02:11:54,800
को सुरक्षित रखने के लिए हो सकता है इसने इसकी संस्कृत में

1871
02:11:54,800 --> 02:11:58,800
भाई एक ही वाक्य का अर्थ जो है

1872
02:11:58,800 --> 02:12:04,480
अलग-अलग आचार्यों ने अलग-अलग तरीके से किया कि नहीं किया जैसे कि वो

1873
02:12:04,480 --> 02:12:08,720
932 की बात है कि पाप

1874
02:12:08,720 --> 02:12:12,880
योनि वाली बात जो हुई है उसमें अलग-अलग आचार्यों ने शाब्दिक वेद से अलग-अलग भाष्य किया

1875
02:12:12,880 --> 02:12:16,960
है, अर्थ किया है, अनुवाद भी किया है। तो अगर तुम्हारा यह

1876
02:12:16,960 --> 02:12:21,200
कहना है कि ये संस्कृत जो है गलत लिखी है अनुवादक ने तो हम किसी अपने

1877
02:12:21,200 --> 02:12:25,760
जानकारी के अनुसार प्रामाणिक अनुवादक से इसका अनुवाद करवाएंगे। उसको सामने रखेंगे

1878
02:12:25,760 --> 02:12:30,320
और यदि यह सिद्ध होता है कि आगे पाखंड तंत्रों की बात की गई है तो पांच

1879
02:12:30,320 --> 02:12:32,800
आगम भी पाखंड तंत्रों में आएगा। शक्ति संगम

1880
02:12:32,800 --> 02:12:36,880
तंत्र के अनुसार और यदि कोई ऐसा शक्ति संगम तंत्र

1881
02:12:36,880 --> 02:12:42,160
के अनुसार कोई ऐसी बात कही जा रही है जो वेदों के विरुद्ध है तो हम उसको वेदों के विरुद्ध मानेंगे।

1882
02:12:42,160 --> 02:12:46,480
दूसरी बात यह है कि कई विषयों में श्री संप्रदाय

1883
02:12:46,480 --> 02:12:50,560
वालों ने शंकराचार्य संप्रदाय वालों को और शंकराचार्य संप्रदाय वालों ने श्री

1884
02:12:50,560 --> 02:12:54,640
संप्रदाय वालों को अशास्त्रीय कहा ही है जो हम शुरू में ही कह

1885
02:12:54,640 --> 02:12:59,120
आए हैं। किंतु दो बातें निर्वाद रूप से सिद्धों

1886
02:12:59,120 --> 02:13:03,680
ने पाखंड के ही अंतर्गत रखा है। बात

1887
02:13:03,680 --> 02:13:08,080
अब देखो यहां पर इसने एक बात कही है कि निर्वाद

1888
02:13:08,080 --> 02:13:12,400
रूप से सिद्ध है कि जैन आगम को बौद्ध आगम को पाखंड तंत्रों के अंतर्गत

1889
02:13:12,400 --> 02:13:16,640
ही रखा है। इसका मतलब यह माना जाना

1890
02:13:16,640 --> 02:13:20,640
चाहिए कि यदि कोई प्रामाणिक आगम होगा या प्रामाणिक संप्रदाय

1891
02:13:20,640 --> 02:13:24,720
पहले तो वो संप्रदाय सिद्ध नहीं है। बात ध्यान रख के चल। अब आगम की बात करते

1892
02:13:24,720 --> 02:13:28,960
हैं। दुर्जन न्याय से आगे चलते हैं कि अब आगम वो जो निग्रह आगम

1893
02:13:28,960 --> 02:13:33,120
है वो प्रामाणिक है कि नहीं? तो प्रामाणिकता के लिए बता रहा है कि सभी

1894
02:13:33,120 --> 02:13:37,600
शास्त्रों ने निर्विवाद रूप से जैन आगम और बौद्ध आगम को

1895
02:13:37,600 --> 02:13:41,600
वेद विरुद्ध ही कहा है। तो इसका मतलब उस

1896
02:13:41,600 --> 02:13:45,680
उस तंत्र को प्रामाणिक रूप से स्वीकारा जा सकता है जिसको

1897
02:13:45,680 --> 02:13:47,920
किसी शास्त्र ने अगर पाखंड

1898
02:13:47,920 --> 02:13:52,320
कह भी दिया हो तो दूसरे दूसरे शास्त्र ने उसको प्रामाणिक भी कहा हो।

1899
02:13:52,320 --> 02:13:56,560
तो फिर यदि यहां पर निग्रह आगम को लेकर के यह शंका उत्पन्न

1900
02:13:56,560 --> 02:14:00,720
हो रही है कि वह अवैदिक हो सकता है तो किसी शास्त्र ने उसको

1901
02:14:00,720 --> 02:14:05,120
वैदिक भी तो कहा हो किसने कहा है?

1902
02:14:05,120 --> 02:14:09,200
निग्रह आगम वैदिक है। किसने कहा है? प्रामाणिक

1903
02:14:09,200 --> 02:14:13,680
शास्त्र ने परंपरा प्राप्त प्रमाणिक वो

1904
02:14:13,680 --> 02:14:16,560
वो वाला नहीं

1905
02:14:16,560 --> 02:14:20,880
वो सावर मंत्र के नाम पर काली जन का मंत्र ले आओ। पर साधना

1906
02:14:20,880 --> 02:14:26,000
ले आओ। तो ऐसा नहीं चलो अब सुनते हैं आगे

1907
02:14:26,000 --> 02:14:30,000
जो नवते हैं ब्राह्मण पाखंडी है वो जो स्वयं स्वतंत्रता देखने को मिलती है

1908
02:14:30,000 --> 02:14:34,240
जिसमें एक होने के बाद भी किसी शब्द को पकड़ कर उसका पूरा का पूरा संदर्भ बिगाड़ते हुए

1909
02:14:34,240 --> 02:14:38,720
उसको एक नई बात में प्रस्तुत कर देना ये शिवा संदीप जैसे लोगों की दृति है यही परिवार

1910
02:14:38,720 --> 02:14:42,720
तुम्हारी दुर्बुद्धि नहीं है हमने तो शब्द पकड़ा है तुमने

1911
02:14:42,720 --> 02:14:46,720
क्या नहीं पकड़ा है दुर्बुद्धि किसी और महिला का चित्र

1912
02:14:46,720 --> 02:14:52,240
दिखा के वैश्या तक बोल रहे हो तुम किसी को तुम्हारी दुर्बुद्धि नहीं है

1913
02:14:52,240 --> 02:14:57,680
और तमाम सारी जगह

1914
02:14:57,680 --> 02:15:01,760
पूज्य जगतुगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी ने किस

1915
02:15:01,760 --> 02:15:06,080
संदर्भ में किस तरीके से जीसस को वैष्णव स्वीकार किया तुमने

1916
02:15:06,080 --> 02:15:10,400
उनकी बात को कैसे तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जैसे वो वैष्णव

1917
02:15:10,400 --> 02:15:14,480
वो जो है वही इस वाली बातें कर रहे हैं। हम तुम्हारी दुर्बुद्धि

1918
02:15:14,480 --> 02:15:17,120
नहीं है।

1919
02:15:17,120 --> 02:15:21,360
और हमने कैसे प्रस्तुत किया इसका स्पष्टीकरण होना चाहिए पहले देख

1920
02:15:21,360 --> 02:15:25,600
लेना जाकर तुम्हारी यही तो सबसे बड़ी बात है तुम देखते नहीं हो रिसर्च

1921
02:15:25,600 --> 02:15:29,760
नहीं करते हो क्या कहा गया है तुम्हारे जो कान्हा पूसी करने वाले लोग होंगे

1922
02:15:29,760 --> 02:15:34,400
वो जो तुम्हारे कान में डाल देते हैं वही तुम सुन लेते हो तो

1923
02:15:34,400 --> 02:15:38,800
उस शब्द का उसका और कला ये कथा जो है ये सब में नहीं ये तो कदाचित

1924
02:15:38,800 --> 02:15:42,800
कोई ये तो बात का विषय है उसमें बताए तभी इतनी बड़ी परिभाषा उसको प्राप्त हो कितने तंत्र

1925
02:15:42,800 --> 02:15:47,520
है कितने तंत्र है इसमें भी प्रकरण बताए तंत्र में जो बताए कला के मंत्र के एक श्लोक याद

1926
02:15:47,520 --> 02:15:52,800
पहली बात पहले हम आते हैं इस विषय पर की निग्र तंत्रण

1927
02:15:52,800 --> 02:15:56,880
महाग पर सिद्ध हुआ प्रकाश ये श्लोक सबसे पहले सोशल मीडिया इत्यादि के माध्यम

1928
02:15:56,880 --> 02:16:01,200
से किसने ग्रंथ में तो पहले से है लेकिन उस ग्रंथ में इसका हमारा पारंपर ये बढ़ता था ये किसने बताया

1929
02:16:01,200 --> 02:16:05,680
हमने ही बताया और उस समय जब हमने बताया तो हमारे विरोधियों का क्या दावा था पहले तो हमारे

1930
02:16:05,680 --> 02:16:09,760
विरोधियों का दावा था कि नहीं अरे भाई और विरोधियों का अगर कोई गलत दावा था

1931
02:16:09,760 --> 02:16:12,800
तो उससे हमारे दावा कमजोर हो जाता है या पुष्ट

1932
02:16:12,800 --> 02:16:16,800
नहीं है ये कहां से सिद्ध होता है मुद्दे की बात करना

1933
02:16:16,800 --> 02:16:20,800
भाई तेरे दुनिया में किसी ने भी विरोध किया और वो

1934
02:16:20,800 --> 02:16:24,880
गलत साबित हो गया इसलिए मैं भी गलत तो उस हिसाब से तो तू भी गलत

1935
02:16:24,880 --> 02:16:28,880
है फिर क्योंकि रामपाल गलत सिद्ध हो गया इस कौन

1936
02:16:28,880 --> 02:16:33,680
सिद्ध हो गया तो तू भी अपने आप को गलत मान ले बेवकूफ

1937
02:16:33,680 --> 02:16:38,640
क्या सुनू मैं इसका

1938
02:16:38,640 --> 02:16:42,720
ये क्या करेगा कि अपना बात को वजन डालने के लिए

1939
02:16:42,720 --> 02:16:46,720
चार पांच ऐसी और बातें जरूर बोलेगा अपनी बात का

1940
02:16:46,720 --> 02:16:50,800
वजन बढ़ाने के लिए जिनका कोई वहां औचित्य नहीं होगा। जैसे अगर

1941
02:16:50,800 --> 02:16:54,800
मान लीजिए इसके ऊपर आरोप लगा कि भैया तुमने जो है

1942
02:16:54,800 --> 02:16:58,960
कालिया जिनका मंत्र क्यों जपा? या इसके ऊपर आरोप

1943
02:16:58,960 --> 02:17:03,120
लगा कि तुमने कालिया जिनका मंत्र क्यों दिया? अब

1944
02:17:03,120 --> 02:17:07,120
क्यों दिया? इस इस पर बात करने से पहले बताया था

1945
02:17:07,120 --> 02:17:11,200
कि मेरे लिए एक ने यह भी कहा था कि शिवश ने यह भी कहा था कि जानवी पर मैंने गाना

1946
02:17:11,200 --> 02:17:15,280
गाया रैप सॉन्ग और उस पर अपनी उल्टी सीधी कुतर्क करेगा

1947
02:17:15,280 --> 02:17:20,080
और भी कुछ ऐसे मिथ्याजनक कुछ बातें बोलेगा

1948
02:17:20,080 --> 02:17:24,400
जो इस पर किसी ने कटाक्ष किया हो या आरोप लगाया हो जो सिद्ध नहीं हो पाया हो

1949
02:17:24,400 --> 02:17:28,000
फिर ये बताएगा कि मैंने जपा नहीं था मैंने तो दिया था

1950
02:17:28,000 --> 02:17:32,400
हालांकि देना भी अपराध है उस बात को गण कर

1951
02:17:32,400 --> 02:17:36,480
इतना पहले से प्रीफिक्स तैयार करेगा तब अपने उस अपराध को

1952
02:17:36,480 --> 02:17:40,480
छुपाएगा बड़ी बारीकी से भाई देना भी तो अपराध

1953
02:17:40,480 --> 02:17:44,480
है तू क्यों दे रहा है तू तो अवैदिक आचार्य है तू अवैदिक आचार्य क्यों बन

1954
02:17:44,480 --> 02:17:48,480
रहा है अच्छा कोई मुझसे बहुत मांग रहा था बहुत मांगने पर तू

1955
02:17:48,480 --> 02:17:52,480
क्या किसी को दारू दे देगा पीने के लिए मदिरापान

1956
02:17:52,480 --> 02:17:56,560
करा देगा बहुत मांगने पर तू क्या वैशालय खोल

1957
02:17:56,560 --> 02:18:00,880
देगा उसके लिए नहीं खोलेगा ना तो क्यों दिया

1958
02:18:00,880 --> 02:18:04,880
हम अगर तूने जितने लोगों पर आरोप लगाया है कि उसने ये

1959
02:18:04,880 --> 02:18:08,880
कार्य किया गवई के खिलाफ नहीं बोला या शिवश ने ऐसा कर दिया रंजना अग्निहोत्री

1960
02:18:08,880 --> 02:18:13,120
ने ऐसा कर दिया पीन मिश्र ने ऐसा कर दिया अगर वो यह कह दे कि उसने बहुत पीछे पड़ा

1961
02:18:13,120 --> 02:18:17,200
हुआ था इसलिए मैंने उसका नहीं सा मैंने उसका आलंबन स्वयं नहीं लिया

1962
02:18:17,200 --> 02:18:21,440
उसको ये कह दिया बस बहुत पीछे पड़े हुए

1963
02:18:21,440 --> 02:18:26,080
थे इसलिए तुम गलत चीज उसको दे सकते हो

1964
02:18:26,080 --> 02:18:31,680
और उसके बाद भी स्वयं को वैदिक कह सकते हो

1965
02:18:31,680 --> 02:18:35,920
तो ये प्रीफिक्स तैयार करता हां ये गलत होता है। खामखा की बातें बोल रहे हैं

1966
02:18:35,920 --> 02:18:40,000
कि उसने ये कहा पहले मेरे विरोधियों ने ये कहा भाई सीधी सिंपल सी बात

1967
02:18:40,000 --> 02:18:44,080
है। हमने निग्रह निकासिका में ये वाली बात नहीं बोली है। 108 में उसमें

1968
02:18:44,080 --> 02:18:48,080
इसको पाखंड तंत्र कहा गया। ये बात जरूर कही है कि शक्ति संगम तंत्र ये

1969
02:18:48,080 --> 02:18:52,080
कहता है। शक्ति संगम तंत्र के अनुसार शक्ति संगम तंत्र

1970
02:18:52,080 --> 02:18:56,640
में पाखंड तंत्रों के बारे में भी बताया गया है। और जैन आगम

1971
02:18:56,640 --> 02:19:00,800
चीन आगम जैसे तंत्रों के सन्यासियों की रूपरेखा क्या होती है? यह सब बताया गया

1972
02:19:00,800 --> 02:19:05,040
है। ऐसे में पहली बात तो शक्ति संगम तंत्र में वर्णित

1973
02:19:05,040 --> 02:19:09,280
निग्रह आगम को स्वतंत्र रूप से प्रामाणिक संप्रदाय कहे जाने

1974
02:19:09,280 --> 02:19:13,760
के अभाव में यहां से उसको प्रामाणिक क्यों माना जाए?

1975
02:19:13,760 --> 02:19:17,840
और यदि मान यदि ये भी हल हो जाती है समस्या

1976
02:19:17,840 --> 02:19:22,400
तो फिर दूसरी समस्या ये है जब जैन आगम और चीन आगम जैसे अप्रामाणिक

1977
02:19:22,400 --> 02:19:26,480
चीजों के लिए शक्ति संगम तंत्र में उसका वर्णन लिखा हुआ है तो यदि

1978
02:19:26,480 --> 02:19:30,720
ये भी संप्रदाय है तो इसका क्यों नहीं लिखा है? इससे सिद्ध होता है कि कोई संप्रदाय

1979
02:19:30,720 --> 02:19:34,960
नहीं है। क्योंकि संप्रदाय शब्द भी नहीं आया है यहां पर परंपरा भी नहीं आई है।

1980
02:19:34,960 --> 02:19:39,120
तो अगर तुम अपने आप को शक्ति संगम तंत्र से ख्यापित कर रहे हो तो सशक्ति

1981
02:19:39,120 --> 02:19:43,120
संगम तंत्र से वहां पर संदिग्धता

1982
02:19:43,120 --> 02:19:47,440
है कि वहां तुम्हें वैदिक के रूप में बताया गया है कि अवैदिक के रूप

1983
02:19:47,440 --> 02:19:51,600
ये की जिन जिन मतों का बौद्ध आगमन आगम तीन आगम

1984
02:19:51,600 --> 02:19:55,600
इत्यादि का पाखंड रूप में वर्णन चिंतन कर सकते है कन्यानी ग्रंथों के संदर्भ से भी उनको कहीं भी

1985
02:19:55,600 --> 02:19:59,680
पाखंड खंड के रूप में नहीं लिखा है सनातन शास्त्र में जैसे की पाथ पांच इत्यादि के

1986
02:19:59,680 --> 02:20:03,920
लिए वेद समत बाते भी उनके उनके आगमों में वर्णित है वो स्वयं को वेद संस्कृत बताते है शगम

1987
02:20:03,920 --> 02:20:08,160
में कहा है वैशगम किंतु उनके में ही रखा वहां क्या इसका पुनः परिवर्तन

1988
02:20:08,160 --> 02:20:12,320
की बात है उस समय तंत्र और सात होता था आठ कोथान तीन हतंत्र

1989
02:20:12,320 --> 02:20:18,320
को और यहां पर नीलेश्वराम लिखूं पाखंड में आएंगे तो वही

1990
02:20:20,000 --> 02:20:24,000
कितना होता था आठ कोथान तीन हतंत्र और पांच तंत्र को तो यहां से गणना प्रारंभ

1991
02:20:24,000 --> 02:20:28,160
करो पाखंड के बाद तीन का वर्णन है पांच रात्र आगम अघोर आगम बंजुघर प्लेस

1992
02:20:28,160 --> 02:20:32,160
आगम लिया बाद में तीन भी आगम है अब हम ये कहते हैं कि इन आगमों

1993
02:20:32,160 --> 02:20:36,240
के बाद निघा आगम का नाम है तो कितने संस्थापन यह देख नीलेश्वरागम तो नीगम तक तो हम पहुंच गए

1994
02:20:36,240 --> 02:20:40,480
आठ अब आगे देखो मंत्र सिद्धागम मृत्युंजयागम माया देखो

1995
02:20:40,480 --> 02:20:44,640
यहां कन्फ्यूजन की बात ये है कि ये बात सही है अगर एक ही श्लोक

1996
02:20:44,640 --> 02:20:49,280
में दो तंत्रों के नाम दिए गए हैं

1997
02:20:49,280 --> 02:20:53,760
तो उस हिसाब से निग्रह आगम उन पाखंड

1998
02:20:53,760 --> 02:20:57,920
तंत्रों के अंतर्गत नहीं आता है। यदि हमारी यह बात मान भी ली जाए कि

1999
02:20:57,920 --> 02:21:02,160
अब यहां से आगे पाखंड तंत्रों की बात हो रही है जिनमें तीन तंत्र एवं

2000
02:21:02,160 --> 02:21:02,660
पांच

2001
02:21:02,560 --> 02:21:06,560
उपतंत्र हैं। अब यहां पर यह भी तो हो सकता है कि इसके आगे

2002
02:21:06,560 --> 02:21:10,560
पाखंड तंत्रों की बात हो रही है। जिनमें तीन तंत्र प्रकार

2003
02:21:10,560 --> 02:21:14,640
के हैं और पांच उपतंत्र प्रकार के हैं। यह भी तो हो सकता है ये

2004
02:21:14,640 --> 02:21:19,120
क्लियर हो। दूसरी बात यह है कि

2005
02:21:19,120 --> 02:21:24,560
श्लोक दृष्टि से अगर एक माना जाए कि एक एक श्लोक में

2006
02:21:24,560 --> 02:21:28,560
एक तंत्र के अंतर्गत ही दूसरे तंत्र की बात हो रही है तो श्लोक

2007
02:21:28,560 --> 02:21:33,040
दृष्टि से आठवें तंत्र के रूप में वो आ जाएगा। निग्रह

2008
02:21:33,040 --> 02:21:36,320
आगम और

2009
02:21:36,320 --> 02:21:40,320
जो पाखंड तंत्रों की बात हो रही है शक्ति संगम तंत्र के अनुसार उसी

2010
02:21:40,320 --> 02:21:44,480
में पांचगम भी आएगा। ठीक है? तो ये

2011
02:21:44,480 --> 02:21:48,960
कंफ्यूजन वाली बात है। फिर इसमें परंपरा प्राप्त भाष्य चाहिए होगा इसका।

2012
02:21:48,960 --> 02:21:52,960
114 में शंकराचार्य की परंपरा के विषय में कर रहे हैं। फिर वह परंपरा आगे विचिन्न होने

2013
02:21:52,960 --> 02:21:56,960
वाली है। पुनः शिव जी की कृपा से भविष्य में स्पष्ट हो। तो हमारी परंपरा लुप्त है कि नहीं ये तो

2014
02:21:56,960 --> 02:22:01,120
छोड़ो तुम्हारी परंपरा का क्या हाल है? ये देखो। अब देखो इस व्यक्ति ने कहा

2015
02:22:01,120 --> 02:22:05,360
लुप्त होने वाली है तो यह लुप्त होने वाली है वाली

2016
02:22:05,360 --> 02:22:09,440
बात क्या शक्ति संगम तंत्र अभी कल परसों में तेरे हिसाब से लिखा गया है

2017
02:22:09,440 --> 02:22:13,760
अच्छा लुप्त होने का मतलब क्या है कि वहां के बाद वो ज्ञान परंपरा

2018
02:22:13,760 --> 02:22:18,240
से आगे नहीं बढ़ेगा तो परंपरा लुप्त नहीं होती है। परंपरा

2019
02:22:18,240 --> 02:22:23,120
थोड़ी देर के लिए कहीं कहीं पर कुछ कुछ अंशों में निष्क्रिय

2020
02:22:23,120 --> 02:22:27,200
सक्रिय ना होने की स्थिति या प्रभाव कम होने की स्थिति को ही लुप्तता

2021
02:22:27,200 --> 02:22:31,200
कहा जा सकता है। लुप्त होने को यह नहीं लुप्त होने को यह नहीं

2022
02:22:31,200 --> 02:22:35,280
माना जा सकता है। वहां पर ज्ञान जो परंपरा से आ रहा था वह आगे बढ़ना बंद हो

2023
02:22:35,280 --> 02:22:39,280
गया। अगर बंद हो गया मान लेंगे तो वो नष्ट हो नष्ट हो गई मान लेंगे। तो लुप्त

2024
02:22:39,280 --> 02:22:43,280
होने का अर्थ तो यह भी माना जा सकता है कि प्रभाव कम हो गया। सक्रियता कम

2025
02:22:43,280 --> 02:22:47,360
हो गई। अच्छा मुगल काल में या अब से पहले बीत चुके

2026
02:22:47,360 --> 02:22:51,280
काल में क्यों ना माना जाए।

2027
02:22:51,280 --> 02:22:55,280
कि वो सब हो चुका है। अच्छा आज इसे 2000 वर्ष बाद क्यों ना

2028
02:22:55,280 --> 02:22:59,520
माना जाए कि वो ऐसा होगा। अभी क्यों माना जाए? क्योंकि निग्रह बाबा

2029
02:22:59,520 --> 02:23:03,600
जी आए हैं निग्रह करने वीडियो बना के रात भर परी परी के साथ

2030
02:23:03,600 --> 02:23:07,600
साधना करेंगे मिलकर के और फिर दूसरे दिन वीडियो बनाएंगे और फिर वो

2031
02:23:07,600 --> 02:23:11,920
बताएंगे परंपरा विच्छिन्न होने वाली है। और फिर वो सिद्ध करने का प्रयास देखो

2032
02:23:11,920 --> 02:23:17,360
वहां लिखा था ना विच्छिन्न होने वाली है। वैसे ही दिख रहा है।

2033
02:23:17,360 --> 02:23:21,360
भाई तुम्हें ये भी तो शास्त्रों से सिद्ध करना पड़ेगा कि वो विच्छिन्नता क्या है?

2034
02:23:21,360 --> 02:23:25,360
वो लुप्तता क्या है? और अगर तुम आज के

2035
02:23:25,360 --> 02:23:29,440
समय को ही उसके लिए सही ठहरा रहे हो कि इसी के बारे में कहा गया है तो फिर तुम्हें

2036
02:23:29,440 --> 02:23:33,440
प्रमाण लाना पड़ेगा। ठोस ये देखो यहां लिखा है

2037
02:23:33,440 --> 02:23:39,360
इस ईवी में होना था। ये देखो हो रहा है।

2038
02:23:39,360 --> 02:23:43,440
चुप ऐसा करते हो तो सुन हमारे जन्म से ही इसका इसका

2039
02:23:43,440 --> 02:23:47,440
वर्णन गोपीनाथ कविराज जी ने तो नहीं। अब देखो आज ये क्या

2040
02:23:47,440 --> 02:23:52,080
कह रहा है? इसका वर्णन गोपीनाथ इत्यादि ने भी किया है। वो तो खैर बाद की बात करेंगे।

2041
02:23:52,080 --> 02:23:55,440
उन्होंने वही वाला

2042
02:23:55,440 --> 02:23:59,440
वर्णन किया है कि नहीं जो तुम करते हो। पहली बात। दूसरी बात यह है कि

2043
02:23:59,440 --> 02:24:03,440
यह व्यक्ति क्या कहता था भैया हमारे से ही मालूम पड़ा है। हमको तो स्वप्न

2044
02:24:03,440 --> 02:24:07,520
में आके कहा ये क्यों ना माना जाए कि तुमको गोपीनाथ से मालूम पड़ा। ये क्यों ना

2045
02:24:07,520 --> 02:24:11,680
माना जाए जिसका दूसरा नाम तुम ले रहे हो तो उससे मालूम पड़ा। क्योंकि भागवत आनंद ने कहा है।

2046
02:24:11,680 --> 02:24:15,680
जिसने ना देखी हो निग्रह निकास का वो देख लेना। ऑलरेडी

2047
02:24:15,680 --> 02:24:19,760
इस पर हमने बहुत मोटे मोटे प्रश्न कर रखे हैं। उस विषय में आज तक नहीं बोला कि

2048
02:24:19,760 --> 02:24:23,840
वाक स्कलन कैसे हो गया? बनाना वीडियो वाह विसलन कैसे हो गया।

2049
02:24:23,840 --> 02:24:28,400
अगर शक्ति संगम तंत्र में स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि निग्रह संप्रदाय

2050
02:24:28,400 --> 02:24:32,720
वैदिक है तो उसके वैदिक होने के लिए स्वतंत्र प्रमाण की आवश्यकता

2051
02:24:32,720 --> 02:24:36,720
होगी। निग्रह संप्रदाय की प्रमाणिकता वैदिक होने के संबंध में शक्ति

2052
02:24:36,720 --> 02:24:40,720
संगम तंत्र से सिद्ध नहीं हो सकती। क्यों? क्योंकि उसमें वैदिक

2053
02:24:40,720 --> 02:24:45,200
और वैदिक दोनों की जानकारियां दी गई है। यह सब बात थी।

2054
02:24:45,200 --> 02:24:51,200
सभी को जय श्री राम।

2055
02:24:54,320 --> 02:24:58,320
[संगीत]
