1
00:00:02,560 --> 00:00:07,280
तो किसका पक्ष रखने आप आज आए हैं? किसके पक्ष से बात करने आए हैं?

2
00:00:07,280 --> 00:00:11,280
श्री भगवतानंद गुरु जी के लिए तो हमें सबसे पहली बात यह है

3
00:00:11,280 --> 00:00:15,280
कि हमें उनका पक्ष प्रमाणित लगता है कि यदि उनके द्वारा कोई बात की जा रही है

4
00:00:15,280 --> 00:00:19,680
तो ये प्रमाणित बात है। वो अपने आप को निग्रहचार्य

5
00:00:19,680 --> 00:00:24,320
लिखते हैं। क्या यह बात प्रमाणिक है? प्रमाणिकता का पैमाना

6
00:00:24,320 --> 00:00:28,480
यही है कि जो व्यक्ति शास्त्र उसकी करनी है, शास्त्रतर उनकी

7
00:00:28,480 --> 00:00:33,120
रहनी है और शास्त्र उनकी कथनी है तो उससे उनका आचार्यत्व

8
00:00:33,120 --> 00:00:37,760
सिद्ध होगा। निग्रचार्यत्व सिद्ध नहीं होगा।

9
00:00:37,760 --> 00:00:41,920
निग्रचार्यत्व के लिए तो निग्रचार से निग्र निग्रह परंपरा

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00:00:41,920 --> 00:00:46,000
जो तथाकथित उन्होंने बताई है उस परंपरा का प्रमाण चाहिए

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00:00:46,000 --> 00:00:50,160
होगा। फिर उसके अंतर्गत आने वाले किस तरीके से उन तक वो पद पहुंचा।

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00:00:50,160 --> 00:00:54,240
इन सब चीजों में प्रमाण चाहिए होगा कि अगर आपको कुछ

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00:00:54,240 --> 00:00:58,560
लक्षण ऐसे दिख रहे हैं जो कि शास्त्र सम्मत है। आपकी

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00:00:58,560 --> 00:01:02,880
बात अगर दुर्जन तो न्याय से मान भी लूं तो मैं आपको ठीक विपरीत

15
00:01:02,880 --> 00:01:07,680
लक्षण दिखा देता हूं आचार्य के जो ठीक विपरीत है।

16
00:01:07,680 --> 00:01:11,840
भागवतानंद ने अपने खुद के वीडियो में कहा है कि मैं गाली देता

17
00:01:11,840 --> 00:01:16,000
हूं और गाली देना अशास्त्रीय है। ये मैं मानता हूं। मैं गालियां

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00:01:16,000 --> 00:01:18,080
देता हूं और मैं गालियां दूंगा

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00:01:18,080 --> 00:01:22,080
तो गाली देना शास्त्रीय है। बिल्कुल सही बात। गाली देना

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00:01:22,080 --> 00:01:26,400
अशास्त्रीय है किसी भी स्थिति में।

21
00:01:26,400 --> 00:01:30,560
अब बात दूसरी आती है कि अगर हमको कोई गाली देगा तो हम उसको गाली देंगे। अगर

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00:01:30,560 --> 00:01:35,200
राम जी की पत्नी का हरण करेगा तो राम जी उसकी पत्नी का हरण करेंगे।

23
00:01:35,200 --> 00:01:39,440
ये ये एआई का जमाना है।

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00:01:39,440 --> 00:01:43,520
ये इस पर हम भरोसा नहीं कर पाएंगे। प्रश्न में यह कह रहा हूं कि

25
00:01:43,520 --> 00:01:47,520
यह जो ज्ञान है परिसाधना कालिया जिन का जो कि वेदों के

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00:01:47,520 --> 00:01:51,760
विपरीत है। यह ज्ञान उसको किस परंपरा से मिला?

27
00:01:51,760 --> 00:01:56,080
निग्रह परंपरा से मिला। कैसे मिला? जैसे जानकारी के लिए

28
00:01:56,080 --> 00:02:00,240
किसी साधना के विषय में आपको जानकारी है। लेकिन वो हमने किसी

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00:02:00,240 --> 00:02:05,120
को दिया उसने का मंत्र दिया ना?

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00:02:05,120 --> 00:02:09,200
नहीं दिया है। वैभव ने अपना अपने मुंह

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00:02:09,200 --> 00:02:13,200
से बोला है कि उसने अमुक अमुक लोगों को यह साधना दी

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00:02:13,200 --> 00:02:17,440
है। एक व्यक्ति ने मुझे बहुत परेशान कर रखा था कि मुझे साधना दीजिए,

33
00:02:17,440 --> 00:02:21,680
सिद्धि दीजिए, साधना दीजिए, सिद्धि दीजिए। उनको कालिया जिन का मंत्र चाहिए था।

34
00:02:21,680 --> 00:02:25,680
तो कालिया जिन का मंत्र किससे लेकर गए? हमसे लेकर गए। अरे उस लाइन का

35
00:02:25,680 --> 00:02:29,680
हम आपको साक्ष्य दे देंगे। प्रमाण दे देंगे। हम उसको कैसे बोला? पूरा वीडियो

36
00:02:29,680 --> 00:02:34,080
आपको दिखा देंगे। लेकिन दोगे उस लाइन का। क्या साक्ष्य दोगे?

37
00:02:34,080 --> 00:02:38,160
उसका पूरा नहीं पूरा वीडियो आपको उस निर्गत

38
00:02:38,160 --> 00:02:42,240
करेंगे। पूरा चल पूरा वीडियो चलाइए। हमारा हमारा यही

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00:02:42,240 --> 00:02:46,720
कहना है कि वो अपने वीडियो के माध्यम से कई बार अनेकों

40
00:02:46,720 --> 00:02:51,040
आप आप उस वीडियो का पक्ष बता दीजिए। आप उस वीडियो का पक्ष

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00:02:51,040 --> 00:02:55,040
बता दीजिए। उसमें उसने क्या पक्ष दिया है। उसमें हमसे बेहतर उसमें हमसे

42
00:02:55,040 --> 00:02:59,040
बेहतर आपको जानकारी है क्योंकि उसने कई बार कहा है कि मैंने दिया

43
00:02:59,040 --> 00:03:03,280
है पर मैंने खुद के लिए उपयोग नहीं किया। यह बात मैं मानूंगा।

44
00:03:03,280 --> 00:03:07,520
तो जो उसने एक्सप्लेनेशन बनाया था बहुत लंबा चौड़ा उसमें उसने ये नहीं कहा था कि मैंने कालिया

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00:03:07,520 --> 00:03:11,680
जिन का मंत्र नहीं दिया। उसने ये बताया था कि कालिया जिन का मंत्र तो

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00:03:11,680 --> 00:03:15,680
मैंने दिया है। ये तो बात सही है। मगर उसके नाम

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00:03:15,680 --> 00:03:19,920
पर जो एडिटिंग करके स्क्रीनशॉट दिखाए जा रहे हैं वो

48
00:03:19,920 --> 00:03:24,160
सब नकली है। उसमें मिलावट है। उसमें आधी बात सच है। आधी बात गलत है।

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00:03:24,160 --> 00:03:28,240
स्वामी राघवाचार्य और विद्या भास्कर के प्रति आपकी श्रद्धा है कि

50
00:03:28,240 --> 00:03:32,720
नहीं है? बिल्कुल है। वो

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00:03:32,720 --> 00:03:36,720
दोनों आचार्य अपनेप पीठों से वीडियो भी निर्गत कर

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00:03:36,720 --> 00:03:40,960
चुके हैं। बता भी चुके हैं। निग्रचार्य जी के पक्ष को निग्रचार

53
00:03:40,960 --> 00:03:45,280
जी निग्रचार्य जी के पक्ष से सहमत भी हैं। कई जगह पर सहमत

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00:03:45,280 --> 00:03:49,280
पाए गए हैं। हां अच्छा अच्छा। तो उससे

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00:03:49,280 --> 00:03:53,280
उससे किसी व्यक्ति की क्या प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होती है कि राघवाचार्य

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00:03:53,280 --> 00:03:56,720
जी महाराज और

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00:03:56,720 --> 00:04:00,720
विद्या भास्कर जी महाराज उन्होंने लोकाचार की दृष्टि से यदि

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00:04:00,720 --> 00:04:04,960
इस व्यक्ति को जो नाम ये लिखता है मैं भी कई बार आचार प्रशांत

59
00:04:04,960 --> 00:04:09,360
को आचार्य प्रशांत बोल देता हूं जबकि वो तथाकथित है तो लोकाचार

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00:04:09,360 --> 00:04:13,600
की दृष्टि से बोलते हैं बोला जाता है भाई

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00:04:13,600 --> 00:04:17,600
हमने भी लोकाचार की दृष्टि से बोला था इसको निग्राचार क्योंकि अपने अपने

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00:04:17,600 --> 00:04:21,760
लिए निग्रचार लिखता था। मुझे कई लोग आहान लिखते हैं। तो मेरा नाम क्या

63
00:04:21,760 --> 00:04:26,000
आान है? जी महाराज यद्यपि राघवाचार्य जी और विद्या भास्कर जी महाराज

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00:04:26,000 --> 00:04:30,000
ने उनकी परंपरा पर कभी प्रकाश नहीं डाला है। उन्होंने ये नहीं कहा हम मानते

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00:04:30,000 --> 00:04:34,240
हैं भाई इनकी परंपरा प्रामाणिक परंपरा है। ऐसा कुछ नहीं बोला है। निग्रचार

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00:04:34,240 --> 00:04:38,240
नाम से संबोधन करते हैं। बस अब

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00:04:38,240 --> 00:04:42,320
यदि बोला भी है तो फिर ऐसे भी आचार्य है जो उसको नहीं मानते तब

68
00:04:42,320 --> 00:04:46,320
क्या करोगे? बाद इस व्यक्ति ने क्या कहा? शव हूं मैं। कहीं

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00:04:46,320 --> 00:04:50,400
ना कहीं कुछ ना कुछ अंतर है ना तो वहां पर क्या यह रामानुजाचार्य

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00:04:50,400 --> 00:04:56,400
जी का विद्या भास्कर जी का खंडन करता है

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00:04:59,120 --> 00:05:05,120
क्या सुन लिया

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00:05:08,000 --> 00:05:14,000
अरे क्या हुआ

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00:05:19,760 --> 00:05:23,840
हम लेकिन इसके विषय में वो अपने वक्तव्य निर्गित

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00:05:23,840 --> 00:05:27,840
कर चुके हैं। ये उनका विषय है। ये हम सिद्ध करने के लिए नहीं आए हैं।

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00:05:27,840 --> 00:05:32,080
उनकी परंपरा के विषय में हमसे बेहतर वो जानते होंगे ना। उनके संप्रदाय

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00:05:32,080 --> 00:05:36,160
के उनके संप्रदाय के विषय में हमारा उतना गहन अध्ययन नहीं

77
00:05:36,160 --> 00:05:41,940
है।

78
00:05:41,940 --> 00:05:45,940
[संगीत]
