1
00:00:01,760 --> 00:00:05,840
जो स्टॉल लगा रहे हैं जिन्होंने स्टॉल लगाया हुआ

2
00:00:05,840 --> 00:00:09,920
था वो आपसे तो कहीं ना कहीं उच्च स्तर पर हैं।

3
00:00:09,920 --> 00:00:12,880
आप क्योंकि एक साधारण

4
00:00:12,880 --> 00:00:17,840
आपसे उच्च मतलब किससे आपसे हमारे से

5
00:00:17,840 --> 00:00:21,840
हां आपने कहा कि आप एक साधारण अनुयाई हैं

6
00:00:21,840 --> 00:00:25,840
और वो जो लोग थे वो बाकायदा प्रचार प्रसार करने के लिए अधिकृत रूप

7
00:00:25,840 --> 00:00:30,480
से प्रचार प्रसार कर रहे थे तो उस रूप में देखा जाए तो वो कहीं ना कहीं अधिकृत

8
00:00:30,480 --> 00:00:35,040
आपसे उच्च स्तर पर हैं। नहीं देखो उच्च और

9
00:00:35,040 --> 00:00:39,440
उसमें कम उच्च या कहने का मतलब ये है कि आप ये मानते हैं

10
00:00:39,440 --> 00:00:43,760
सेवा है। जी आप ये कहने का अर्थ यह है कि आप ये मानते

11
00:00:43,760 --> 00:00:48,400
हैं कि वहां पर वो लोग जो जवाब नहीं दे पाए थे वो आप देंगे।

12
00:00:48,400 --> 00:00:52,480
हां कोशिश करेंगे उनके जवाब देने की। बहुत बढ़िया बहुत

13
00:00:52,480 --> 00:00:55,280
बढ़िया।

14
00:00:55,280 --> 00:00:59,440
तो भाई सभी लोग देख रहे होंगे। अवनीश दीक्षित जी हैं। हां।

15
00:00:59,440 --> 00:01:03,760
सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और भगवान से प्रार्थना

16
00:01:03,760 --> 00:01:08,080
है सैद्धांतिक धरातल पर भी हम शीघ्र अति शीघ्र स्वतंत्रता

17
00:01:08,080 --> 00:01:11,200
को प्राप्त करेंगे।

18
00:01:11,200 --> 00:01:16,400
तो

19
00:01:16,400 --> 00:01:21,520
हां ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर करें जिससे कि

20
00:01:21,520 --> 00:01:25,680
आप जो है ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हम सत्यता को पहुंचा

21
00:01:25,680 --> 00:01:29,920
पाएं। तो दिनेश जी हम लोग सीधे आते हैं मुख्य विषयों

22
00:01:29,920 --> 00:01:34,880
पर। ठीक है? जी पहला विषय है क्या

23
00:01:34,880 --> 00:01:36,800
रामपाल के

24
00:01:36,800 --> 00:01:40,960
द्वारा प्रतिपादित प्रचारित होने वाला जो ईश्वर

25
00:01:40,960 --> 00:01:45,440
है जिसको आप कबीर नाम से जानते हैं। क्या वो सर्वशक्तिमान

26
00:01:45,440 --> 00:01:49,760
है? अनंत है, अबाध्य है। ठीक है। जी।

27
00:01:49,760 --> 00:01:54,160
तो क्या क्या वो अवतार ले सकता है?

28
00:01:54,160 --> 00:01:58,400
कुछ भी कर सकते हैं। अवतार ही नहीं कुछ भी

29
00:01:58,400 --> 00:02:02,400
उनकी डिक्शनरी में असंभव कुछ भी नहीं है। वो अवतार भी

30
00:02:02,400 --> 00:02:06,480
ले सकते हैं। वो सह शरीर भी आते हैं और वेदों में इसका

31
00:02:06,480 --> 00:02:09,440
प्रमाण भी है। जी आगे बताइए।

32
00:02:09,440 --> 00:02:13,520
तो क्या जो कबीर हैं जिस रूप में हम उन्हें जानते हैं

33
00:02:13,520 --> 00:02:17,520
जिन्होंने काव्य रचनाएं की है और आपके अनुसार उन्होंने ब्रह्म

34
00:02:17,520 --> 00:02:21,760
और धर्म का ज्ञान भी दिया है। है ना? जी। तो क्या वो उनका

35
00:02:21,760 --> 00:02:26,160
वास्तविक स्वरूप है या फिर नकली स्वरूप है?

36
00:02:26,160 --> 00:02:30,800
वास्तविक स्वरूप नहीं है। वेदों में उन्होंने कहा है कि वह परमात्मा

37
00:02:30,800 --> 00:02:34,880
अपने शरीर को हल्का तेज पुंज का बना के यहां पर प्रकट होते

38
00:02:34,880 --> 00:02:38,960
हैं। वास्तविक रूप में उसको इस चरम दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।

39
00:02:38,960 --> 00:02:43,040
वह अपने सतलोक में वास्तविक रूप में रहते हैं। जिसमें करोड़

40
00:02:43,040 --> 00:02:47,120
सूर्य करोड़ चंद्रमा की रोशनी उनके एक रूम से निकल रही है।

41
00:02:47,120 --> 00:02:51,120
वास्तविक रूप उनका वो है। अच्छा तो यानी

42
00:02:51,120 --> 00:02:55,120
कि एक तरीके से हम ये माने कि जो रूप

43
00:02:55,120 --> 00:02:59,440
हमने देखा वो उनका वास्तविक रूप नहीं था। अपने रूप को हल्का

44
00:02:59,440 --> 00:03:03,440
तेज पुंज का बना के आते हैं। वो वास्तविक रूप चेहरा वही होता

45
00:03:03,440 --> 00:03:07,920
है लेकिन रूप को हल्का तेज पुंज का बनाकर जो हमारी चरम

46
00:03:07,920 --> 00:03:12,080
दृष्टि जिसको सहन कर सके। अच्छा जी

47
00:03:12,080 --> 00:03:16,160
हल्का बनाकर आते हैं। तो मैं सीधे प्रश्न पर आता हूं। थोड़ा सा हम

48
00:03:16,160 --> 00:03:20,160
लोग नहीं तो फस जाएंगे। इसमें कंफ्यूज होते जाएंगे। क्या

49
00:03:20,160 --> 00:03:24,160
जो कबीर हैं वो

50
00:03:24,160 --> 00:03:24,660
अपने

51
00:03:24,560 --> 00:03:28,560
शरीर को नष्ट कर सकते हैं? अपनी देह का नाश कर

52
00:03:28,560 --> 00:03:32,640
सकते हैं। नहीं वो शरीर कबीर जी का

53
00:03:32,640 --> 00:03:37,120
शरीर अविनाशी है। बाकी जितने भी शरीर है शरीर

54
00:03:37,120 --> 00:03:41,120
पृथ्वी पर फिर से मैं फिर से मैं फिर से एक बात बता दूं।

55
00:03:41,120 --> 00:03:45,280
हमने पूछा क्या रामपाल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

56
00:03:45,280 --> 00:03:49,920
जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान अनंत अबाध्य है?

57
00:03:49,920 --> 00:03:53,920
क्या रामपाल जी के द्वारा प्रचारित प्रचारित होने वाले ईश्वर

58
00:03:53,920 --> 00:03:59,440
पर किसी भी प्रकार का नियम लागू होता है क्या?

59
00:03:59,440 --> 00:04:03,840
देखो नियम की बात आपकी

60
00:04:03,840 --> 00:04:07,840
बात को मैं क्लियर कर दू आपने जो सवाल किया है मैं उसको क्लियर कर देता हूं।

61
00:04:07,840 --> 00:04:11,840
आप ये कह रहे हैं कि भगवान पर कोई नियम लागू होता है या नहीं। आप ये कह रहे

62
00:04:11,840 --> 00:04:15,840
हैं कि आपने पहला प्रश्न किया कि वह भगवान सब कुछ करने में

63
00:04:15,840 --> 00:04:19,920
समर्थ है। मैंने कहा कि उसकी डिक्शनरी में असंभव कुछ नहीं है। वो कुछ भी कर

64
00:04:19,920 --> 00:04:24,080
सकता है। लेकिन वहां पर भगवान पर

65
00:04:24,080 --> 00:04:28,080
भगवान के कुछ खुद असूल होते हैं कि वो गलत नहीं करता।

66
00:04:28,080 --> 00:04:33,280
कर सब कुछ सकता है लेकिन भगवान गलत नहीं करता।

67
00:04:33,280 --> 00:04:37,280
यानी कि वो अपनी देह का है ना यानी कि

68
00:04:37,280 --> 00:04:41,520
यानी कि वो अपनी देह का नाश कर सकता है। मगर मगर वो करता नहीं है।

69
00:04:41,520 --> 00:04:43,840
कर सकता है। कुछ नहीं करता है। असंभव

70
00:04:43,840 --> 00:04:47,840
कुछ नहीं। मैं तो वही जो यानी कि जो जो देह हमें

71
00:04:47,840 --> 00:04:52,000
दिखाई दे रही है कबीर की वो असली नहीं है क्योंकि

72
00:04:52,000 --> 00:04:56,240
वो भी नष्ट हो सकती है। नहीं नहीं ये तो नहीं बोला मैंने। मैंने कहा

73
00:04:56,240 --> 00:05:00,400
अपने ही स्वरूप को वो हल्का तेज पुंज का बना करके आता

74
00:05:00,400 --> 00:05:04,640
है और वह अविनाशी परमात्मा है। उसका

75
00:05:04,640 --> 00:05:09,680
कोई भी नाश करने में समर्थ नहीं है। यही गीता जी में भी

76
00:05:09,680 --> 00:05:13,680
गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि उस परमात्मा का ईश्वर भी ईश्वर

77
00:05:13,680 --> 00:05:17,760
भी अपनी देह का नाश नहीं कर सकता। नहीं कर सकता। वो

78
00:05:17,760 --> 00:05:22,240
समर्थ नहीं है ना? जी तो समर्थ नहीं है ना? सामर्थता

79
00:05:22,240 --> 00:05:26,400
पर प्रश्न चिन्ह लग गया ना? नहीं तो अगर देह

80
00:05:26,400 --> 00:05:30,400
नष्ट मैंने यह कहा कि करते नहीं है कर कुछ नहीं सकता

81
00:05:30,400 --> 00:05:34,480
है वो यानी कि कबीर भी अपनी

82
00:05:34,480 --> 00:05:39,600
अपने अपने आप को नष्ट कर सकते हैं अपनी देह का नाश खत्म कर सकते हैं

83
00:05:39,600 --> 00:05:43,760
करेंगे क्यों आप सवाल रखने का मैं ये नहीं कह रहा वो क्यों करेंगे वो

84
00:05:43,760 --> 00:05:47,840
क्यों करेंगे बाद में जाएंगे कर सकते हैं कि नहीं इसको क्लियर करिए कुछ

85
00:05:47,840 --> 00:05:52,000
भी कर सकता है वो कुछ भी कर सकता है वो तो जिस समय जिस

86
00:05:52,000 --> 00:05:56,160
समय उनकी देह नष्ट हो जाएगी उस समय ईश्वर कौन होगा दुनिया

87
00:05:56,160 --> 00:05:59,360
का नष्ट होती नहीं है ना अविनाशी

88
00:05:59,360 --> 00:06:03,760
है परमा अरे तुम तो कह रहे हो ना वो कर सकते हैं नष्ट एक बात

89
00:06:03,760 --> 00:06:07,840
ना भाई में और करने में अंतर होता है नहीं वो कुछ भी कर सकता है तो

90
00:06:07,840 --> 00:06:11,920
उसका मतलब वो जरूरी नहीं है कि वो देह नष्ट करेगा मैं कहां कह रहा हूं

91
00:06:11,920 --> 00:06:16,240
मैं कह रहा हूं अगर वो कर सकते हैं तो उस स्थिति में उनकी

92
00:06:16,240 --> 00:06:21,760
वो ईश्वर कौन रह जाएगा अगर उन्होंने अपनी देह को नाश कर लिया

93
00:06:21,760 --> 00:06:27,040
अगर उन्होंने अपनी देह का नाश कर लिया तो उस समय ईश्वर कौन होगा?

94
00:06:27,040 --> 00:06:31,280
स्थिति कब कैसी बननी है और स्थिति कैसे

95
00:06:31,280 --> 00:06:35,280
बनती है वो बनाने वाला ही खुद ईश्वर है। तो क्यों

96
00:06:35,280 --> 00:06:40,160
ऐसी स्थिति बनेगी यह चीज आप प्रश्न आपकी सोच है ना?

97
00:06:40,160 --> 00:06:44,160
मेरी सोच नहीं है। मैं तो सिंपल पूछ रहा हूं। यदि वो अपनी देह का नाश कर

98
00:06:44,160 --> 00:06:48,320
सकते हैं तो फिर वो किस रूप में विद्यमान रहेंगे? यानी

99
00:06:48,320 --> 00:06:50,480
कि

100
00:06:50,480 --> 00:06:54,560
यानी कि यह जो देह हमें दिख रही है या हम जिस देह को जानते हैं

101
00:06:54,560 --> 00:06:58,640
वो देह उनका वास्तविक स्वरूप नहीं है। या तो ये

102
00:06:58,640 --> 00:07:02,880
माने और अगर हमने वास्तविक स्वरूप माना है तो हमको ये फिर जानना पड़ेगा कि

103
00:07:02,880 --> 00:07:07,440
इसका नाश कर सकते हैं कि नहीं।

104
00:07:07,440 --> 00:07:13,440
अगर नाश कर सकते हैं तो फिर वो किस रूप में विद्यमान होंगे? ये बताना पड़ेगा।

105
00:07:13,440 --> 00:07:17,680
नाश कर सकते हैं। नाश करेंगे ही क्यों? प्रश्न तो यह है ना कि अरे

106
00:07:17,680 --> 00:07:21,840
भाई मैं मैं शराब नहीं पऊंगा क्योंकि मुझे

107
00:07:21,840 --> 00:07:26,720
पीनी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि मैं पी नहीं सकता। ठीक है।

108
00:07:26,720 --> 00:07:31,440
तो मेरी सुन लीजिए मुझे शराब पीने की कोई आवश्यकता नहीं है।

109
00:07:31,440 --> 00:07:35,440
मगर इसका मतलब ये नहीं है कि उसका एक घूंट भी मैं पी नहीं सकता हूं।

110
00:07:35,440 --> 00:07:39,600
मेरे अंदर क्षमता है कि मैं उसे पी सकता हूं। अब ये बताइए कबीर में अपनी देह

111
00:07:39,600 --> 00:07:43,360
का नाश करने की क्षमता है कि नहीं?

112
00:07:43,360 --> 00:07:47,360
भगवान के गुणों में यह लिखा है कि वह परमात्मा नष्ट नहीं होता।

113
00:07:47,360 --> 00:07:51,360
वो कुछ भी कर सकता है तो फिर यह आप कैसे भी प्रश्न उठा के

114
00:07:51,360 --> 00:07:56,080
नहीं कर सकते ना उस भगवान का कैसे भी प्रश्न हम कुछ

115
00:07:56,080 --> 00:08:00,080
भगवान पे नियम भगवान पे नियम लगता है कि उस पर कैसे भी प्रश्न

116
00:08:00,080 --> 00:08:04,160
नहीं कर सकते। ये नियम लगता है भगवान ये नियम नहीं लगता है।

117
00:08:04,160 --> 00:08:08,320
भगवान के गुण में जो लिखता है कि वह गलत नहीं करता। सही करता

118
00:08:08,320 --> 00:08:12,400
है और अविनाशी है वो सही गलत सही पर भी आ जाएंगे इसको

119
00:08:12,400 --> 00:08:16,480
नोट कर लीजिएगा देखो एक तो गलत सही पर आना है जो दर्शक देख रहे हैं

120
00:08:16,480 --> 00:08:20,720
थोड़ा सा नोट करिएगा एक तो गलत सही को लेंगे हम लोग

121
00:08:20,720 --> 00:08:23,040
और

122
00:08:23,040 --> 00:08:23,840
एक

123
00:08:23,840 --> 00:08:27,920
लेंगे कि आवश्यकता क्या है ठीक है ये दो

124
00:08:27,920 --> 00:08:31,920
चीजें जरा याद दिलाइएगा जब मैं पूछूं तो अब मैं पूछ

125
00:08:31,920 --> 00:08:36,400
रहा हूं दोबारा कि मैं मेरे को आवश्यकता नहीं है मदिरापान

126
00:08:36,400 --> 00:08:41,120
करने मगर इसका मतलब यह नहीं है मैं मदिरापान कर नहीं सकता। अब मुझे बताइए

127
00:08:41,120 --> 00:08:45,120
ईश्वर को अपनी देह का नाश करने की आवश्यकता नहीं है। मैं पूछ रहा हूं कर सकता है

128
00:08:45,120 --> 00:08:49,440
कि नहीं? कर सकता है। है लेकिन उस चीज की आवश्यकता

129
00:08:49,440 --> 00:08:53,440
उसे है ही नहीं। ठीक है। जब वो कर सकता है तो इसका मतलब है जब

130
00:08:53,440 --> 00:08:57,840
उसकी देह ना नष्ट हो जाएगी जिस समय उस समय वो

131
00:08:57,840 --> 00:09:02,640
मौजूद होगा किसी ना किसी रूप में या वो चला ही जाएगा। बिल्कुल

132
00:09:02,640 --> 00:09:06,640
उस भगवान ने ये आगे की कहानी बताई ही नहीं है। कहीं पर प्रदर्शित

133
00:09:06,640 --> 00:09:10,720
की ही नहीं है कि उससे आगे क्या होगा। तो भगवान अपने संविधान में

134
00:09:10,720 --> 00:09:14,720
ही बताकर भेजेगा ना यानी तत्वदर्शी संत रामपाल को ये

135
00:09:14,720 --> 00:09:18,720
नहीं मालूम है। कुछ बातें तत्वदर्शी संत को भी नहीं मालूम है। क्या

136
00:09:18,720 --> 00:09:23,200
क्या कुछ बातें तत्वदर्शी संत को भी नहीं मालूम है ना।

137
00:09:23,200 --> 00:09:27,520
क्या नहीं? जो भगवान जिनको आप भगवान मानते हो रामपाल

138
00:09:27,520 --> 00:09:31,760
को भगवान मानते हो कि नहीं? गुरु भगवान का स्वरूप होता है।

139
00:09:31,760 --> 00:09:35,840
अच्छा भगवान का अवतार तो नहीं मानते। ऐसा भी सुनने में आया कि उसको भगवान ही मानने

140
00:09:35,840 --> 00:09:40,320
कबीर रामपाल के रूप में आ गए। गुरु

141
00:09:40,320 --> 00:09:44,480
गुरु भगवान का स्वरूप होता है वो तो ठीक है। वो ठीक है। मगर ऐसा तो नहीं कि

142
00:09:44,480 --> 00:09:48,480
रामपाल को कबीर ही मानते हो। कबीर का रामपाल जी कबीर

143
00:09:48,480 --> 00:09:52,960
जी के रामपाल जी कबीर जी के अवतार ही है।

144
00:09:52,960 --> 00:09:57,360
रामपाल जी के अवतार है। यही सुनना यही सुनना।

145
00:09:57,360 --> 00:10:01,440
अब मैं पूछ रहा हूं दोबारा कि जब वो कबीर के अवतार हैं तो उनको

146
00:10:01,440 --> 00:10:05,600
यह नहीं पता है कि जिस समय उनकी देह नष्ट हो जाए देह नष्ट होती है ये तो पक्का

147
00:10:05,600 --> 00:10:10,560
है नहीं दे नहीं होती

148
00:10:10,560 --> 00:10:14,720
है कि नहीं हो सकती है कि नहीं हो सकती है

149
00:10:14,720 --> 00:10:19,280
ये तो भगवान को पता होगा नहीं है अच्छा मतलब

150
00:10:19,280 --> 00:10:23,360
मतलब संत रामपाल तत्वदर्शी है उन्होंने आपको बताया उनकी देह

151
00:10:23,360 --> 00:10:28,000
नष्ट हो सकती है कि नहीं किनकी

152
00:10:28,000 --> 00:10:32,000
संत रामपाल ने आपको बताया कि उनकी देह नष्ट हो सकती

153
00:10:32,000 --> 00:10:36,000
है कि नहीं। आपने कहा ये तो भगवान को पता होगा। आपने

154
00:10:36,000 --> 00:10:40,000
कहा ये तो भगवान को पता होगा। यानी आपको नहीं पता है।

155
00:10:40,000 --> 00:10:44,000
नहीं पता है ना? क्या तो नहीं पता है तो तत्वदर्शी जो है

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तत्वदर्शी और वो भी आप कह रहे हो कबीर के ही अवतार है वो रामपाल।

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उनको नहीं पता है ये बात। क्या? जो

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मैं पूछ रहा हूं देह नष्ट हो सकती है कि नहीं? अरे आपका

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सवाल ही गलत है। भगवान ने जिस चीज के मतलब भगवान

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ने यह कहा है अपने गुणों में यह लिखा है उसके कि भगवान मैं जो पूछ

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रहा हूं वो बताइए मैं जो देखिए ऐसे क्या है ना चर्चा जो

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है आगे बढ़ती जाएगी मैं पूछ रहा हूं अभी आपने कहा कि ये तो भगवान

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को पता होगा तो रामपाल भगवान है ना भगवान के अवतार

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है ना हां कबीर जी के अवतार है वो हां तो उनको पता

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है कि नहीं उनकी देह नष्ट हो सकती है कि नहीं उनको सब कुछ पता है

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पता है तो आप पूछ के आइएगा अगली

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बार अभी हम चर्चा को आगे आएंगे। ठीक है आगे अगली बार पूछ लेना।

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ठीक है। ठीक है।

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[संगीत]
