1
00:00:01,960 --> 00:00:07,200
[घंटी की आवाज़] हम आपका YouTube में वीडियो देखते हैं गुरु जी।

2
00:00:07,200 --> 00:00:11,520
देखिए वो तो देखते हैं मगर इस समय कोई अगर हम लोगों ने

3
00:00:11,520 --> 00:00:15,920
लाइव स्ट्रीम रखी है वैचारिक मतभेद के निमित्त रखी है। इसको आप समझिए।

4
00:00:15,920 --> 00:00:20,080
मैं आपका आभारी हूं। आप आप समर्थक होंगे। हो सकता

5
00:00:20,080 --> 00:00:24,400
है अगर कोई मतभेद है तो आप बताइए तुरंत। हां मुझे मतभेद

6
00:00:24,400 --> 00:00:28,720
है। जैसे आप गीता को मानते हैं गुरु जी।

7
00:00:28,720 --> 00:00:32,800
यह पहली बात तो यह है कि मैं आपका गुरु नहीं हूं। यदि मतभेद है।

8
00:00:32,800 --> 00:00:36,800
इसको सही करिए। गुरु का अर्थ क्या है? ठीक है। गुरु का अर्थ है

9
00:00:36,800 --> 00:00:41,040
जो अंधकार को नाश करे। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] तो आपका नाश

10
00:00:41,040 --> 00:00:45,280
नहीं किया ना मैंने बल्कि आप तो काउंटर कर रहे हो मेरी चीजों को।

11
00:00:45,280 --> 00:00:49,360
विरोध है। गुरु जी जब गुरु जी जब पहले इसको एक-एक

12
00:00:49,360 --> 00:00:53,440
करके चलेंगे। एक-एक करके चलेंगे। पहले इसको क्लियर करो। आपने गुरु जी कह

13
00:00:53,440 --> 00:00:57,440
दिया ये कह दिया वो मिथ्यावाद मत करो चलिए

14
00:00:57,440 --> 00:01:01,440
आप बताइए अपना हां मैं कहता हूं जैसे गीता में लिखा है चातुर

15
00:01:01,440 --> 00:01:05,760
वर्णम नया सिस्टम आप किसकी तरफ से आए हैं ये बताइए आप आप किसकी

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00:01:05,760 --> 00:01:10,080
तरफ से आए हैं रामपाल नहीं नहीं रामपाल

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00:01:10,080 --> 00:01:14,240
की तरफ से नहीं आए किसकी तरफ से आए हैं हम किस हम ऐसे आए

18
00:01:14,240 --> 00:01:17,120
हैं विषय क्या है हम

19
00:01:17,120 --> 00:01:21,280
विषय यही है कि आप आप जो बोलते हैं कि जो हम लोग का वन

20
00:01:21,280 --> 00:01:25,680
व्यवस्था हम लोग जन्म से जातिवाद होता है। उसके वही है।

21
00:01:25,680 --> 00:01:29,760
देखिए पहली बात तो यह है एक गलतफहमी है परंपरा प्राप्त आचार्यों के

22
00:01:29,760 --> 00:01:34,240
बारे में कि वो मतलब ब्राह्मणवाद

23
00:01:34,240 --> 00:01:38,400
या क्षत्रियवाद ऐसा नहीं है। उसको समझिए सूत्रात्मक जन्म

24
00:01:38,400 --> 00:01:42,800
से नामांकन कर्म से चयन

25
00:01:42,800 --> 00:01:46,800
अगर कोई ब्राह्मण का जैसे यज्ञ कराना है तो

26
00:01:46,800 --> 00:01:50,880
हम किसी ब्राह्मण को ढूंढने जाएंगे। मगर यदि वह ब्राह्मण मदिरापान

27
00:01:50,880 --> 00:01:54,960
करता होगा, मांसाहार करता होगा तो उसको त्याग भी कर देंगे, फिर भी

28
00:01:54,960 --> 00:01:59,040
कर देंगे। फिर किसी शुद्ध ब्राह्मण को जो ब्राह्मण कर्म से भी हो, जन्म

29
00:01:59,040 --> 00:02:03,360
से भी हो उसको लेके आया जाएगा। पहली बात तो ये है। अब अगर हम मान

30
00:02:03,360 --> 00:02:07,600
ले कि जो ये वर्ण व्यवस्था है

31
00:02:07,600 --> 00:02:11,920
ये जो है कर्म से होती है। ठीक है? तो

32
00:02:11,920 --> 00:02:16,000
इसका लाभ क्या है? यह बताइए मुझे। इसका लाभ

33
00:02:16,000 --> 00:02:20,080
यही है क्या? जैसे कि देखिए हॉस्पिटल में डॉक्टर का बेटा भी

34
00:02:20,080 --> 00:02:24,160
क्लर्क बन सकता है। वहां पर क्लर्क का बेटा भी उसमें डॉक्टर बन सकता है। लेकिन अरे

35
00:02:24,160 --> 00:02:28,320
भाई हमने सुनो हमने कहा चार लोगों में ये

36
00:02:28,320 --> 00:02:32,160
ब्राह्मण है। ये क्षत्रिय है। कर्म के आधार पर। कर्म के

37
00:02:32,160 --> 00:02:36,400
आधार पर कहा। ये ब्राह्मण है। ये क्षत्रिय वैश्य है, शूद्र है। इसका

38
00:02:36,400 --> 00:02:40,880
फायदा क्या है? ये क्यों बताया जा रहा है?

39
00:02:40,880 --> 00:02:45,360
इसलिए बताया जा रहा है कि हम लोग का जो समाज है वो व्यवस्थित से चले।

40
00:02:45,360 --> 00:02:50,160
यानी कि जब हमें ब्राह्मण की आवश्यकता हो तो हम ब्राह्मण को ढूंढ सके ना।

41
00:02:50,160 --> 00:02:54,240
हां ढूंढ सके ना। तो अगर हम कर्म के

42
00:02:54,240 --> 00:02:58,320
आधार पर ये वर्ण व्यवस्था को मान लेते हैं तो

43
00:02:58,320 --> 00:03:02,480
यह भी तो होगा कि हम ब्राह्मण को जब ढूंढने जाएंगे तो ब्राह्मण कहेगा भैया मैंने अपना वर्ण बदल

44
00:03:02,480 --> 00:03:06,960
लिया अभी-अभी। उसका क्या करें? तो वो तो क्षत्रिय

45
00:03:06,960 --> 00:03:11,120
बन जाएगा। मान लो युद्ध करने चला गया तो क्षत्रिय बन गया। इसका मतलब

46
00:03:11,120 --> 00:03:15,200
व्यवस्था कहां रही? लेने गए ब्राह्मण को 5 कि.मी. का सफर किया। वहां

47
00:03:15,200 --> 00:03:19,280
पे वो कह रहा है भैया मैं क्षत्रिय बन गया। भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं

48
00:03:19,280 --> 00:03:23,840
अर्जुन से यानी कि कर्म के आधार पर

49
00:03:23,840 --> 00:03:28,000
वर्ण कर्म के आधार पर प्राप्त होने वाली जो वर्ण व्यवस्था है, उसके

50
00:03:28,000 --> 00:03:32,160
द्वारा हम किसी को उसके धर्म के लिए, वर्णाश्रम धर्म के लिए बाध्य

51
00:03:32,160 --> 00:03:36,240
नहीं कर सकते। जबकि श्री कृष्ण वाध्य कर रहे हैं अर्जुन से तू

52
00:03:36,240 --> 00:03:40,480
क्षत्रिय है तेरा धर्म है रक्षा करना तो बाध्य

53
00:03:40,480 --> 00:03:44,640
कैसे कर सकते हैं क्योंकि वह तो कभी भी बदल सकता है वो कहेगा अर्जुन मैंने

54
00:03:44,640 --> 00:03:47,280
अभी-अभी जो है कथा कथा

55
00:03:47,280 --> 00:03:51,360
करने का सोच लिया सत्यनारायण की कथा करने जा रहा हूं मुझे युद्ध नहीं लड़ना क्या

56
00:03:51,360 --> 00:03:55,600
करोगे फिर वर्ण बदल गया मगर वर्ण नहीं बदल सकता इसीलिए भगवान

57
00:03:55,600 --> 00:03:59,600
कहेंगे ऐसी बात के भाई तू जन्म से क्षत्रिय है तू इसको बदल

58
00:03:59,600 --> 00:04:03,840
नहीं सकता है लड़ तेरा काम है तो हम हम मैं पूछना चाहता

59
00:04:03,840 --> 00:04:08,800
हूं कि क्या उसका बेटा भी जब ब्राह्मण नहीं होगा क्या अगर वो

60
00:04:08,800 --> 00:04:13,440
क्षत्रिय का काम करता है तो उसका बेटा क्षत्रिय बन जाएगा। सुनो

61
00:04:13,440 --> 00:04:17,440
उसके अंदर उसके अंदर गुणवत्ता होगी क्षत्रिय बनने की

62
00:04:17,440 --> 00:04:21,680
मगर जब वो उन गुणवत्ताओं का यूज़ करेगा जीवन में तब उसे सेलेक्ट किया जाएगा।

63
00:04:21,680 --> 00:04:25,760
मैंने कहा ना नॉमिनेशन बनेगा तो क्षत्रिय

64
00:04:25,760 --> 00:04:30,160
बन जाएगा वो। अगर मान ले उसके अंदर क्षत्रिय क्षत्रिय गुण होगा तो क्षत्रिय बनेगा।

65
00:04:30,160 --> 00:04:35,760
अगर क्षत्रिय से जन्मा है और फिर उसने क्षत्रिय आचरण को

66
00:04:35,760 --> 00:04:40,400
ब्राह्मण लेकिन क्षत्रिय जैसा गुण है उसके अंदर वो हमेशा लड़ना चाहता तो क्षत्रिय बनेगा

67
00:04:40,400 --> 00:04:44,400
वो ब्राह्मण ही कहलाएगा देखिए आपातकालीन स्थितियों में

68
00:04:44,400 --> 00:04:48,640
तो हम लोग आलंबन ले सकते हैं वैकल्पिक ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य

69
00:04:48,640 --> 00:04:52,880
शूद्र आदि का मगर जो परफेक्ट तरीका है कि अगर

70
00:04:52,880 --> 00:04:57,600
रोटवेलर है और हमें फैक्ट्री की रक्षा करवानी है और हमें रोटवेलर

71
00:04:57,600 --> 00:05:01,600
प्राप्त है जन्म से तो तो फिर हम किसी लेब्राडोर को रोटवेलर की

72
00:05:01,600 --> 00:05:03,840
ट्रेनिंग क्यों दें?

73
00:05:03,840 --> 00:05:08,160
जब हमें ब्लड से प्राप्त है जिसके अंदर खून भी रोटवेलर

74
00:05:08,160 --> 00:05:12,160
का हो उसी को ट्रेनिंग दें। वो रक्षा करने वाली

75
00:05:12,160 --> 00:05:16,640
जबरदस्ती हम लेब्राडोर को रोटवेलर क्यों बनाएं? उसमें समय भी जाएगा।

76
00:05:16,640 --> 00:05:21,200
उसमें उसमें श्रम भी जाएगा और एट दी एंड हमें शुद्ध रोटवेलर

77
00:05:21,200 --> 00:05:25,440
तो कभी नहीं मिलेगा। जितना रोटवेलर जो खतरनाक होता है उतना

78
00:05:25,440 --> 00:05:29,520
खतरनाक लेब्राडोर को हम फिर भी नहीं बना पाएंगे। है ना?

79
00:05:29,520 --> 00:05:33,520
तो इसलिए वर्ण व्यवस्था अब जैसे अब जैसे हमने स्वीकार कर लिया कर्म से

80
00:05:33,520 --> 00:05:37,520
वर्ण व्यवस्था को स्वीकार कर लिया तो माना जाता है कि

81
00:05:37,520 --> 00:05:41,680
जो अंतर अंत वर्ण विवाह होगा तो उसमें वर्ण संकरता आती है। प्रज्ञा

82
00:05:41,680 --> 00:05:45,760
शक्ति गिरती जाती है। चेतन शक्ति तो क्या है कि ब्राह्मण

83
00:05:45,760 --> 00:05:50,080
ब्राह्मण मान लो कर्म से ही मानना है। ठीक है? तो

84
00:05:50,080 --> 00:05:54,080
ब्राह्मण की बिटिया का विवाह ब्राह्मण से हो। क्षत्रिय की बिटिया का विवाह

85
00:05:54,080 --> 00:05:58,080
क्षत्रिय से हो जिससे आने वाली जो नस्ल है उसकी प्रज्ञा शक्ति बची रहे।

86
00:05:58,080 --> 00:06:02,240
ठीक है? अब हम लोगों ने जब कर्म से माना है तो जब हम

87
00:06:02,240 --> 00:06:06,240
अपने घर की बिटिया का विवाह करने निकलेंगे तो हम

88
00:06:06,240 --> 00:06:10,240
क्या पैरामीटर सेट करें वहां पे? किसके यहां सबसे पहले

89
00:06:10,240 --> 00:06:14,320
जाएं? ये जो सबसे पहले जाने वाली बात है इसी के लिए जन्म से है

90
00:06:14,320 --> 00:06:18,320
बस और कुछ नहीं है। भाई हम रोड पर उतर के हर व्यक्ति के गुण और

91
00:06:18,320 --> 00:06:18,880
कर्म तो चेक

92
00:06:18,880 --> 00:06:23,120
नहीं करेंगे। ए भाई रुक मेरी बहन से विवाह करेगा क्या? रुक जा भाई तेरे घर गुण

93
00:06:23,120 --> 00:06:27,120
कर्म बता। हम लोग अपने माइंड में एक पैरामीटर सेट करेंगे कि भाई कोई

94
00:06:27,120 --> 00:06:31,120
अच्छा घर हो। अब यह जो मैंने अच्छा घर हो कहा ना

95
00:06:31,120 --> 00:06:35,200
अच्छा घर हो। तो अब यहां पर सवाल ये बनता है कि जिसका अच्छा घर

96
00:06:35,200 --> 00:06:39,360
होगा क्या उसका बेटा अच्छा होगा क्या? जैसे आपने मुझसे कहा ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण

97
00:06:39,360 --> 00:06:43,520
नहीं। हम अच्छे घर से शुरुआत कर रहे हैं ढूंढाई करने की। उसी

98
00:06:43,520 --> 00:06:47,600
प्रकार से ब्राह्मण घर से शुरुआत करते हैं ढूंढने की। उसके

99
00:06:47,600 --> 00:06:51,600
बाद भी उसे चेक किया जाएगा कि वो ब्राह्मण वाले आचरण है कि नहीं। मगर

100
00:06:51,600 --> 00:06:55,920
शुरुआत कहां से करें? उसके लिए जन्म से वर्ण व्यवस्था है। हां

101
00:06:55,920 --> 00:07:00,560
उसके लिए शुरुआत से वर्ण व्यवस्था केवल

102
00:07:00,560 --> 00:07:04,720
केवल एक बन सकता है। केवल एक प्रारंभिक पैरामीटर

103
00:07:04,720 --> 00:07:08,880
लेने के लिए जन्म से वर्ण व्यवस्था स्वीकार किया जाता है कि प्रारंभ कहां

104
00:07:08,880 --> 00:07:13,120
से करें? कहीं ना कहीं से तो प्रारंभ करेंगे। अगर हमने कुछ भी कहा। हमने

105
00:07:13,120 --> 00:07:17,360
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र नहीं कहा। ठीक है? तो हम ये कहेंगे कि

106
00:07:17,360 --> 00:07:21,600
भाई ऐसा घर देखें जहां पर दिन और रात भगवान की भक्ति होती हो। तो यह भी हमने

107
00:07:21,600 --> 00:07:25,680
क्या कह दिया कि जहां दिन और रात भगवान की भक्ति भक्ति होती होगी तो

108
00:07:25,680 --> 00:07:30,000
उससे सिद्ध नहीं होता कि उसका लड़का भी भगवान की भक्ति करता होगा। नहीं

109
00:07:30,000 --> 00:07:34,080
फिर भी हमें उसको चेक करना पड़ेगा। मगर प्रारंभिक पैरामीटर हमने लिया ना

110
00:07:34,080 --> 00:07:38,160
तो उसी प्रारंभिक पैरामीटर पर ये ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र है। बस

111
00:07:38,160 --> 00:07:42,240
कि नॉमिनेशन कहां से आए? हम लोग अपनी बहन का विवाह करने के लिए सड़क पे तो नहीं

112
00:07:42,240 --> 00:07:46,800
उतर जाएंगे। चल मेरे साथ और हर हर व्यक्ति का कॉलर पकड़ के दिखा अपने गुणकर्म।

113
00:07:46,800 --> 00:07:51,040
दिखा अपने गुणकर्म। ये तो नहीं कर सकते। तो प्रारंभ कहां से करें

114
00:07:51,040 --> 00:07:55,120
कि भाई किसी ब्राह्मण का अगर ब्राह्मण से विवाह कराना है तो किसी ब्राह्मण

115
00:07:55,120 --> 00:07:59,200
के घर से प्रारंभ करें। फिर उनके बेटों से हां अगर ब्राह्मण का

116
00:07:59,200 --> 00:08:03,200
घर बचा ही नहीं तो आप आपातकालीन स्थिति हो गई। वैसे तो इस बारे

117
00:08:03,200 --> 00:08:07,600
इसके लिए भगवान ने कहा ना कि मैं क्यों आता हूं

118
00:08:07,600 --> 00:08:11,760
मैं क्यों आता हूं? की रक्षा के लिए आता हूं। धर्म की रक्षा

119
00:08:11,760 --> 00:08:16,160
के लिए आगे भी एक लाइन है। आगे भी एक लाइन है। अधर्म की नाश के लिए।

120
00:08:16,160 --> 00:08:20,240
साधु भक्तों के उद्धार के लिए साधु भक्त तो जब हम

121
00:08:20,240 --> 00:08:24,320
ये कह रहे हैं कि ब्राह्मण जब रहेंगे नहीं तो वो आना भगवान उस चीज को आने

122
00:08:24,320 --> 00:08:28,320
ही नहीं देते हैं उससे पहले ही वो आ जाता है कि यदा यदा

123
00:08:28,320 --> 00:08:32,320
धर्मस भवती भारत तो ये सब हमारी अपनी

124
00:08:32,320 --> 00:08:36,400
बात को रखने के लिए की जाने वाली कल्पनाएं मात्र है कि जब ब्राह्मण नहीं होंगे

125
00:08:36,400 --> 00:08:40,400
तो किससे करेंगे या क्षत्रिय नहीं होंगे तो किससे करेंगे जिस दिन ब्राह्मण

126
00:08:40,400 --> 00:08:44,560
नहीं होगा क्षत्रिय नहीं होगा वैश्य शूद्र नहीं होंगे परंपरा प्राप्त उस दिन धर्म

127
00:08:44,560 --> 00:08:48,560
नष्ट हो चुका होगा और भगवान धर्म धर्म को नष्ट होने नहीं देते हैं।

128
00:08:48,560 --> 00:08:49,360
जैसे ही नष्ट

129
00:08:49,360 --> 00:08:54,240
होने के कगार पर आता है उससे पहले आ जाते हैं। तो यह ऐसा है।

130
00:08:54,240 --> 00:08:59,120
मेरा एक प्रश्न आया आपसे कि क्या शूद्र का बेटा ब्राह्मण बन सकता है?

131
00:08:59,120 --> 00:09:03,200
कई जन्मों के जन्मांतर के बाद उसी जन्म में भगवान बना सकते

132
00:09:03,200 --> 00:09:08,480
हैं। भगवान प्रकट हो जाए। भगवान कोई ऐसी

133
00:09:08,480 --> 00:09:12,480
मान लीजिए वो चारों वेदों ज्ञाता है तो वो ब्राह्मण कहलाएगा। वो

134
00:09:12,480 --> 00:09:16,480
सुदुल का बेटा मैंने आपको पूछा ना कि आप एक लेब्राडोर को

135
00:09:16,480 --> 00:09:20,800
रोटवेलर की ट्रेनिंग दे दो। बहुत बढ़िया। क्या वो ओरिजिनल रटलर

136
00:09:20,800 --> 00:09:24,800
बन जाएगा? नहीं बनेगा। बस उतना ही अंतर

137
00:09:24,800 --> 00:09:28,880
है। उतना सा ही अंतर है। दूसरी बात चलो हम चलो हमारे

138
00:09:28,880 --> 00:09:33,280
अंदर हमारे अंदर यह है कैपेसिटी कि हम उसको ट्रेनिंग देंगे और 99%

139
00:09:33,280 --> 00:09:37,280
उसको बना देंगे। ठीक? क्यों करें? जिस दिन रटवेलर मर

140
00:09:37,280 --> 00:09:41,520
जाए सारा का सारा नस्ल खत्म हो जाए तब करें ना। हमारा उद्देश्य

141
00:09:41,520 --> 00:09:45,600
है भगवान की भक्ति करना, भगवान को प्राप्त करना। हम अपनी एनर्जी

142
00:09:45,600 --> 00:09:50,240
कहां यूज कर रहे हैं? लेब्राडोर को रोडवेलर बना के छोड़ेंगे। और रवेर

143
00:09:50,240 --> 00:09:55,120
को ये वाल्मीकि जी शूद्र से दो ब्राह्मण बने।

144
00:09:55,120 --> 00:09:59,120
वाल्मीकि जी के जो पिता हैं उसका वर्णन पढ़ लीजिएगा। वाल्मीकि रामायण

145
00:09:59,120 --> 00:10:03,440
जो गीता से प्रकाशित है। उसी को पढ़ लीजिएगा। उसी में बताया गया है।

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उसमें रेफरेंस दिया

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00:10:04,480 --> 00:10:08,720
गया है मनुस्मृति के आधार पर। उनके पिता जो थे ब्राह्मण थे। उनके बारे में गलत धारणा

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फैलाई गई है। लेकिन ये तो पक्का है ना कि उन्होंने उंगली

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00:10:13,440 --> 00:10:17,440
डाकू बन गए थे। हां हो सकता है। ये

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00:10:17,440 --> 00:10:21,440
सब वस्तुनिष्ठ प्रश्न है। इस पर तो आगे बात हो सकती है। ठीक है। डाकू

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जब बने तो वो शूद्र कहलाएंगे कि क्या आप ये बताओ मैं आपसे पूछता हूं।

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00:10:26,160 --> 00:10:30,480
मैं आपको बताता हूं। मैं आपको बताता हूं। पतित हुए उन्होंने पश्चाताप

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किया। ये सब चीजें हैं हमारे कि मान लो एक

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ब्राह्मण जो है वो शराब पी ले तो उसमें बताया गया कि वो जलती

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हुई सलाख का आलिंगन करे अगर तो ऐसे जो दोष हो जाते हैं

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तो उसके लिए पश्चाताप है। उसके बाद बहुत सारी प्रैक्टिसिंग है। उसके बाद

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वो दोबारा अपनी जगह वापस आता है। जो लोग ये कहते हैं कि भैया

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00:10:51,680 --> 00:10:55,920
जन्म से सब लोग शूद्र होते हैं। जन्म ना जाते शूद्रा का बहुत उपयोग किया जाता है।

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उसका वास्तविक अर्थ है कि शद्रवत होते हैं। शूद्र नहीं होते हैं।

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00:10:59,920 --> 00:11:03,920
शद्रवत होते हैं। शद्रवत होते हैं। अच्छा अब

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बात यह आती है कि कुछ लोग कहते हैं कि भाई कुछ

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कर्म ऐसे हैं जिनको करके वो जो शूद्र है वो ब्राह्मण बन जाएगा। क्षत्रिय

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है जो ब्राह्मण बन जाएगा। वो कौन से कर्म है एक्सजेक्टली और कहां लिखे हैं?

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और कौन घोषित करेगा? और

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कौन घोषित करेगा? कौन घोषित करेगा कि ये बन गया?

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ये भी बात है। कौन घोषित करेगा? और बहुत सारी उसमें चीजें हैं।

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00:11:29,360 --> 00:11:33,360
मनुष्य के जीवन का उद्देश्य कहीं पर ये लिखा हो कि

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00:11:33,360 --> 00:11:37,360
तुम्हारे जीवन का उद्देश्य ब्राह्मण बनना। अगर तुम कहीं भी जन्म लिए

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हो ब्राह्मण बनना, क्षत्रिय बनना, शूद्र बनना ये तुम्हारे जीवन का उद्देश्य

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00:11:41,680 --> 00:11:45,920
है तो आप दिखाइए लाके। अथातो धर्म जिज्ञासा, अथातो

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ब्रह्म जिज्ञासा आपके जीवन का उद्देश्य नहीं है। ब्राह्मण कहलाना। यह

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आपके मन में डाला गया है। इंजेक्ट किया गया है

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कि तुमको वेद पढ़ोगे डायरेक्ट जिस रूप में वेद विद्यमान है

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उनकी रिचाएं हैं। उसको जब पढ़ोगे वही तुम्हारे जीवन का उद्देश्य है। भगवत भक्ति

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को भूल जाओ। उसी में सारी लड़ाई लगा दो।
