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00:00:04:00 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। कहां से हैं? कैसे हैं? जी मेरे एकदम सही। हम जी पठानकोट पंजाब से हैं। थोड़ा आवाज स्लो आ रही है क्या? हां जी। मेरी आवाज आ रही है आपके पास? हां हां हां जी हम पठानकोट पंजाब से हैं। हां हां हां जी जी तो रामपाल जी से कब से जुड़े हुए हैं आप? रामपाल जी से जुड़े मुझे लगभग मुझे एक साल हो गया है। लेकिन इनसे जुड़ने से पहले मैंने पूरा इनको देखा कि भाई साहब बता क्या रहे हैं ये और बाकी और लोग क्या बता रहे हैं। पहले मैंने उसको पूरा पर उसके बाद मैंने निर्णय लिया कि हां कि यही ज्ञान सच है या फिर और भी जो जितने भी पंथ चल रहे हैं जितने भी धर्म है दुनिया में और लोगों की जितनी आइडियोलॉजी है, सोचने का तरीका है क्या वो भी सही है या फिर जो यह बता रहे हैं और इनमें फर्क क्या है? इन सबको मैंने एक अपने

00:01:19:27 बुद्धि से जितना भी है समझ के फिर निर्णय लिया कि हां मैं चल सकता हूं इस बात पे। अच्छा तो क्या ऐसा देखा आपने रामपाल के ज्ञान में जो विशेष था? देखो सर जी जब हम इनसे जब मुझे इनके बारे में बताया गया परमात्मा के बारे में तब मैंने ध्यान से पहले तुम मैंने इनकी बात को नकार दिया कि भाई जो आप कह रहे हो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पहले तुम्हें बाद में कोई यकीन ही नहीं था कि कोई भाई ब्रह्मा विष्णु महेश जी से कोई ऊपर कैसे हो सकता है कि आप मेरे भगवान के बारे में मेरी बात समझ नहीं पाए। मेरा क्वेश्चन दूसरा है। देखिए जी शास्त्र में कुछ लिखा है और रामपाल का ये दावा करना कि मैं शास्त्र का वो अर्थ बता रहा हूं जो किसी और ने नहीं बताया। सर जी आपसे निवेदन है कि आप प्लीज रामपाल जी कह सकते हो अगर आप कर दो कृपा करके। ठीक है। ठीक है। ठीक है। आप जैसे रामपाल जी का ये निवेद वो है दावा कि मैं शास्त्रों का वो अर्थ बता रहा हूं जो किसी और ने नहीं बताया या फिर मैं तुम्हें ज्यादा सटीक अर्थ बता रहा हूं। ठीक है? इस दावे

00:02:35:06 के अलावा शास्त्रों के अर्थ को करने के अलावा रामपाल जी ने वो कौन सा ऐसा ज्ञान दिया है जो कि आपको बहुत बिरला बिल्कुल दिमाग को खोल देने वाला लगा। भाई शास्त्र जैसे जैसे कोई शास्त्र है ना जैसे इंग्लिश में है हमको इंग्लिश नहीं आती तो कोई शिक्षक आया अंग्रेजी का अच्छा मास्टर उसने इंग्लिश को हिंदी करके बता दिया तो यह हुआ एक किताब के ज्ञान को आपको दे देना बाकी उस किताब में जिस तत्व की व्याख्या हो रही है जैसे ब्रह्म तत्व की माया तत्व की विद्या की जीव की तो इन सभी यह जो प्रतिपाद्य विषय हैं इन शास्त्रों के उनके संबंध में उन्होंने कुछ विशेष ज्ञान दिया है या केवल आप इसी से इसी से आकर्षित हो गए कि उन्होंने शास्त्रों का ऐसा अर्थ किया जो किसी और ने नहीं किया।

00:03:33:20 बिल्कुल जो आपने क्वेश्चन करा ये इतना सिंपल नहीं है जो आपने बहुत मैं आंसर दे दूं। पर मैं इसको सिंपल बनाने की कोशिश कर सकता हूं। आपके लिए बताना चाह रहा हूं। जैसे आपने कहा कि कोई एक टीचर आया उसने हिंदी को इंग्लिश को हिंदी करके बताया। उसने हमारे लिए सिंपल कर दिया। हां जैसे कुछ लोगों ने कुछ लोगों ने क्रो का अर्थ कौआ कर रखा था। तो मान लीजिए किसी ने आकर के क्रो का अर्थ बताया कि क्रो का अर्थ कौआ नहीं है। तोता है। है ना? मान लीजिए सपोज़ करिए। या किसी ने पैरट का अर्थ तोता बताया। तो किसी ने आकर के कहा पैरट का अर्थ तोता नहीं है कौवा है तो केवल इतने से हम मान लिया कि हो सकता है पैरेट का अर्थ उसने जो तोता बता वो कौवा बताया या क्रो का अर्थ उसने तोता बताया हो सकता है वह सही हो क्या केवल इतने से आप आकर्षित हुए हैं या उन्होंने वास्तव में कुछ तात्विक विश्लेषण आपको दिया है हां जी मैं वही कह रहा हूं आपका जो पिछला वो सवाल था ऐसा क्या बताया? वैसे ही कोई टीचर जैसे आपने कहा कि इंग्लिश को हिंदी करके बताएगा। आपने

00:04:49:03 मैं एक बात बताऊं हो क्या रहा है कि आप मेरी बात को रिपीट ना करें। आप अपनी बात बताएं टाइम बचेगा पूरा। हां जी। उसने अनुवाद तो कर दिया हमने कि भाई जो संस्कृत थे पुराने जो पहले जो संस्कृत लगा लो सिर्फ ब्राह्मण लोग पढ़ते थे। बाकी किसी को तो पढ़ नहीं पढ़ने का हक ही नहीं था। तो ये देखिए मैं फिर आपको एक बात याद दिलाऊं केवल वही बात करिए जो हमारे टॉपिक से रिलेटेड हो। अगर आप नया टॉपिक खोलेंगे तो विषयांतर हो जाएगा। फिर हमारा ये टॉपिक छूट जाएगा। ऐसा कोई भी स्टेटमेंट देने से बचिए जिसका जिसके दिए बिना इसका काम चल सकता हो। ऐसा कोई भी स्टेटमेंट देने से बचिए जिसको दिए बिना इस विषय पर बात करने का काम चल सकता हो। कोई भी अनावश्यक स्टेटमेंट यदि आप देते हैं तो फिर मुझे उसे ब्रेक करने उधर जाना पड़ेगा। समझ रहे हैं? जैसे मान लीजिए आपने अभी कहा पहले ब्राह्मण केवल संस्कृत ही पढ़ते थे हम या संस्कृत केवल ब्राह्मणों को ही पढ़ाई जाती थी। तो ये आपने एक क्लेम कर दिया। एक स्टेटमेंट कर दिया। अब हो सकता है मैं इस बात से सहमत ना हूं। तो अब मैं क्या करूं? ये जो अभी जो हमारा विषय चल रहा है इसको छोड़ दूं और फिर मैं आपको उधर क्वेश्चन करने लगूं कि भाई ये स्टेटमेंट तुम्हारा गलत है।

00:06:04:24 आप समझ रहे हैं तो इसलिए अनावश्यक अनावश्यक किसी भी स्टेटमेंट को देने से बचिए। केवल वो बात करिए जो इस जो हमारा टॉपिक चल रहा है उससे रिलेटेड है। जी बताइए। हां जी। तो परमात्मा ने जैसे पहले मैंने खुद भगवत गीता पढ़ी। आप समझे नहीं फिर आप शायद मेरा क्वेश्चन भूल गए। क्वेश्चन मेरा ये है कि किसी ने पैरेट का अर्थ मैं एक बार रिपीट कर दूं क्वेश्चन। किसी ने पैरेट का अर्थ बताया तोता और क्रो का अर्थ बताया कौवा। कोई नया व्यक्ति आया वह बोला पैरेट का अर्थ जो है वह तोता नहीं है कौवा है और क्रो का अर्थ कौआ नहीं है तोता है उसने बता दिया क्या इतने मात्र से हम उसके प्रति आकर्षित होंगे वास्तव में उसने कोई तात्विक विश्लेषण किया होगा कौवे का पैरेट का कुछ तात्विक ज्ञान जो दिया हो ऐसा कुछ तो वो मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या उन्होंने तात्विक विश्लेषण दिया है जिसकी वजह से आप आकर्षित हुए या फिर उन्होंने किसी और का अर्थ गलत बता बता करके अपना अर्थ केवल सही कर दिया है। इतना ही वो है वो रहा जिससे कि आप आकर्षित हो गए। बस मैं यह पूछ रहा हूं। देखो अगर कोई आके मुझे वो कहेगा तो

00:07:19:27 अगर वो तर्क देगा तभी मैं उसको मानूंगा। बिना तार्किक मैं मान ही नहीं सकता कि भाई ये कौवा कैसे तूने तोता कह दिया। सिंपल चीज है। कॉमन सेंस बात है। तो जैसे परमात्मा ने उन्होंने जब ये ज्ञान दिया तो उन्होंने सब तर्क के साथ मैं क्लियर कर दूं। इसका मतलब है उन्होंने तर्क के साथ अच्छे से एक नया अर्थ बताया जो पहले किसी ने नहीं बताया था इसलिए आप उससे आकर्षित हुए हैं। हां जी आप ये मान सकते हो लगा लो हर एक की अपनी तर्क के साथ शास्त्र का नया अर्थ बताया उन्होंने हां जी देखो समझना सर जैसे हर एक की बुद्धि है अपने स्तर की समझने की कि जो एक स्टूडेंट समझ सकता है गुरु उसके ऊपर के लेवल का होगा गुरु ने कह दिया 100 स्टूडेंट्स है। गुरु जो ज्ञान दे रहे हैं 100 स्टूडेंट्स उन उस ज्ञान को कैच कर ले, रिसीव कर ले। ऐसा नहीं हो सकता। हर एक को अलग-अलग समझ आएगा। किसी ने ऐसे लिखा माय बेस्ट फ्रेंड के ऊपर। माय बेस्ट फ्रेंड के ऊपर आप पढ़ोगे। आप किस पर्सपेक्टिव से किस स्टाइल से उसको पढ़ रहे हो। आप उसको हाईलाइट करोगे। सेम नहीं नहीं मैं आपकी बात समझ रहा हूं। देखिए

00:08:35:01 आप देखिए ऐसे तो बहुत सारी एक्सप्लेनेशन चली जाएंगी। सिंपल बात यह है कि उन्होंने आपको धर्म और ब्रह्म इन दो चीजों के गुण अर्थ बताए हैं या नहीं बताएं। वास्तविक स्वरूप क्या है? ये बताया है कि नहीं बताया है। उन्होंने ये तो बता दिया कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है। कबीर भगवान है। ठीक है? ये संज्ञात्मक ज्ञान आपको मिल गया। संज्ञात्मक ज्ञान आपको मिल गया। अब सात्विक सात्विक रूप से व्याख्या मिली है ब्रह्म और धर्म की कि नहीं ये पूछ रहा हूं। हां जी देखो पहली बात जो आपने कहा कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है। वो ऐसा बिल्कुल नहीं कह रहे भगवान है वो उनके बिना ये धरती ये नहीं मैं आपसे कह रहा हूं ना भाई वो बात मत करो जिसको किए बिना काम चल जाए मैं आपको ये सिद्ध करने में लगूं कि आगे ब्रह्मा विष्णु महेश किस किस प्रकार से रामपाल के अनुसार रामपाल जी के अनुसार भगवान नहीं है मैं अपना अब आपका मेरा टाइम वेस्ट होगा ना मैं आपको सिद्ध कर दूंगा। वो पत्थर की लकीर है वो। रामपाल जी के अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है। राक्षस हैं। उनकी पूजा करने वाले बिल्कुल सड़े हुए लोग हैं। तो उस पर मत जाइए

00:09:50:07 आप प्लीज। तो मैं यह कह रहा हूं कि आप जो है यह बताइए कि उन्होंने यह तो बता दिया कि ब्रह्मा विष्णु महेश आपके अनुसार समझ ले कि परम तत्व नहीं है। ठीक है? परमात्मा नहीं है। ठीक है अब चलेगा। अब ठीक है ना? परमात्मा तो नहीं है ना। पूर्ण ब्रह्म तो नहीं है ना। पूर्ण ब्रह्म तो नहीं कहा ना? हां तो रामपाल जी के अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश पूर्ण ब्रह्म नहीं है। कबीर है ठीक है? ये तो उन्होंने बता दिया। अब पूर्ण ब्रह्म की तात्विक व्याख्या उन्होंने आपको दी है या उसे प्राप्त करने की जो विधि है उसकी तात्विक व्याख्या आपको दी है या उसके और जीवात्मा के बीच के संबंध की तात्विक व्याख्या उन्होंने की है। क्या यह सब आपने जाना है या केवल इतने से ही आप आकर्षित हो गए हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश पूर्ण ब्रह्म नहीं है और वो हैं कबीर इतने से ही खुश हो गए हैं या तात्विक तात्विक व्याख्या आपकी आपको मिली है

00:11:06:04 वही तो मैं बताना चाह रहा हूं कि उन्होंने बताया वेदों से उन्होंने भाई साहब वेदों से जब आप बात करते हैं कि उन्होंने वेदों से बताया तो यहां बात आ जाती है कि उन्होंने वेदों के अर्थ को बताया। वह अपने अनुसार बताया। किसी का किसी के अनुसार है। वह सही है, गलत है वो एक अलग बात है। मैं बोल रहा हूं क्या उन्होंने तात्विक व्याख्या भी बताई। वो भले ही वेदों से बताई हो या ना बताई हो। उन्होंने डिफाइन किया परम तत्व जो है उसका तात्विक स्वरूप क्या है? जीव का तात्विक स्वरूप क्या है? उनके बीच का संबंध क्या है? धर्म का तात्विक स्वरूप क्या है? इत्यादि इत्यादि चाहे भले वह वेदों से किया हो या नहीं किया हो आप वेदों से बताया वेदों से बताया वेद को सामने रख के आप प्रभाव डालने का प्रयास कर रहे हैं मैं अलग चीज पूछ रहा हूं मैं ये पूछ रहा हूं कि उन्होंने शास्त्र का आपको जो शाब्दिक अर्थ है उसको अपने अनुसार बताने के अलावा ब्रह्म और ब्रह्म और धर्म के बारे में तात्विक व्याख्या की है क्या? मैं ये पूछ रहा हूं सिंपल मैं आपको व्याख्या समझा देता हूं। आप मुझे लग रहा है समझ नहीं पा रहे हैं। ठीक है। बिना किसी बुक के बिना मैं

00:12:21:08 ये नहीं कह रहा बुक बुक की बुक को लिया या नहीं लिया वो नहीं कह रहा। मैं पूछ रहा हूं समझाया कि नहीं समझाया। बुक को लिया हो ठीक है। अच्छी बात है। नहीं लिया हो तो भी अच्छी बात है। आपको समझाया कि नहीं समझाया? हां जी मुझे समझाया मुझे समझ में भी आया हम समझाया इस तो ठीक है अब मुझे बता दीजिए के धर्म की परिभाषा क्या है किसे कहते हैं धर्म धर्म देखो धर्म अगर आप एक इंसान ह्यूमन शरीर में हो तो आपका धर्म देखो आप जब हम पैदा हुए लगा लो अगर मैं हिंदू हिंदू जो आजकल चल रहा है उसमें अगर मैं पैदा हुआ होता तो मैं उनके धर्म के हिसाब से जो भी क्रियाएं हैं वो मैं करता तो क्या वो धर्म किनके धर्म के हिसाब से सिर्फ हिंदू धर्म के हिसाब से मैं अभी बात कर रहा हूं यानी कि हिंदू के अलावा और भी धर्म है आपके अनुसार धर्म तो सिर्फ एक है वो है ह्यूमैनिटी इंसानियत ऐसे बहुत से धर्म बन चुके हैं वो इसलिए बने धर्म सिर्फ एक है ह्यूमैनिटी इंसानियत उसकी इंसानियत के नाम से कोई बुक छपी है क्या

00:13:36:19 मतलब वो सुनिश्चित कहां से होता है? वो जो धर्म है ह्यूमैनिटी नाम का जो धर्म है वो सुनिश्चित कहां से होता है? लोग वेद के द्वारा कि ह्यूमैनिटी धर्म है। एक तो यानी कि वेद के द्वारा बताया गया धर्म ही धर्म है और सब धर्म धर्म नहीं सर वेद के द्वारा नहीं लोग वेद सुनी सुनाई बातों से कि लोगों ने सुन लिया भाई हां ये चीज अच्छा ठीक है। लोग हां जी लोकवेद अच्छा लोकवेद के अलावा लोकवेद के अलावा भी और कोई वेद है क्या?

00:14:13:21 देखो समझने वाली बात है। ये बहुत सिंपल है। बहुत सिंपल चीज है। आप सिंपल नहीं कर रहे हैं आप। मैंने आपसे धर्म की परिभाषा पूछी है। आप बता रहे हैं कि लोगों ने जो सुना वो धर्म हो गया। लोगों ने जो सुना उसको धर्म कहते हैं। रामपाल जी। रामपाल जी के अनुसार धर्म क्या है? वह बताइए। देखो सर धर्म लगा लो अगर आप आपके सामने किसी का एक्सीडेंट हो गया तो आप उसको बचाने जाओगे। भाई साहब ये धर्म की उदाहरण दे रहे हैं आप। मैं परिभाषा पूछ रहा हूं। धर्म की परिभाषा भी यहीं से निकलेगी फिर। परिभाषा नहीं है। वो वो बोलिए परिभाषा बोलिए। ये मुझे उदाहरण देके मत बताइए। तो धर्म की परिभाषा यही है कि जो उस समय पे जैसे जो सुनो कंप्यूटर की बचपन में मुझे एक परिभाषा सिखाई थी।

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00:15:09:15 कंप्यूटर इज एन इलेक्ट्रॉनिक मशीन व्हिच कैन परफॉर्म आवर इलेक्ट्रॉनिकल एंड ऑपरेशंस एट वेरी हाई स्पीड।

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00:15:23:20 यह कंप्यूटर की एक डेफिनेशन। हां जी। ठीक है। ऐसे एक धर्म की डेफिनेशन होगी ना कि धर्म है क्या? क्या है वो डेफिनेशन? धर्म वो है जो इंसान को बांध के रखता है। जो इंसान को बताया कि सही सही और गलत क्या है? सही और गलत क्या है? तो ये सही और गलत चुनने का आधार क्या होगा? किन चीजों को सही माना जाएगा? किन चीजों को गलत माना जाएगा? जिससे किसी की आत्मा ना दुखे वो सही है। जिससे किसी का नुकसान हो रहा है। मुझे ऐसा लग रहा है कि आपको रामपाल जी ने धर्म की परिभाषा बताई नहीं है। क्योंकि अगर बताई होती तो आप इतनी गलतियां ना करते। अब सुनिए किसी की आत्मा ना दुखे। एक आतंकवादी है जो जेल में बंद है। वो जेल से निकलना चाहता है। सुनिए। जेलर उसको जाने नहीं दे रहा है। जेलर के ना जाने देने की वजह से उसकी आत्मा दुख रही है। अब क्या किया जाए? जेलर का धर्म यह है उसका ताला खोल दे।

00:16:30:19 नहीं ऐसा ऐसा नहीं कह सकता। इसलिए मैं कह रहा हूं परिभाषा सटीक दीजिए। परिभाषा सटीक दीजिए। या अगर नहीं पता है तो बोल दीजिए कि नहीं पता है। छोड़ दीजिए। दूसरा आप यानी कि यानी कि गोपाल जी ने आपको धर्म की परिभाषा नहीं दी मगर आप उससे उनसे आकर्षित है। आप मुझे बता सकते हो कि धर्म क्या होता है फिर आपके हिसाब से मैं बताऊंगा मैं देखिए मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं हो जाता। आपने कहा कि रामपाल जी से आप आकर्षित हुए। है ना? तो मैंने आपसे जब धर्म की परिभाषा जब आपकी धर्म की परिभाषा पूछी तो आप मुझे उदाहरण देने लगे। किसी की आत्मा ना दुखे मान लो एक्सीडेंट हो गया है। हो वहां पे एक आदमी गिर गया उसको बचाना धर्म है। ये उदाहरण देने लगे। मगर आपने मुझे धर्म की परिभाषा नहीं बताई कि धर्म इसे कहते हैं। उससे ये होता है। ये फायदा होता है। ये है वो है। उसकी उपयोगिता आवश्यकता के अनुसार उसका अस्तित्व सिद्ध हो गया। तो तो कहने का मतलब ये है अभी आपको जब धर्म की परिभाषा नहीं पता है तो इसका मतलब यह है कि अभी ये माना जाए कि आपको धर्म की तात्विक व्याख्या रामपाल जी के द्वारा तो नहीं मिली।

00:17:46:24 नहीं तो है आपके हिसाब से क्या होगा आपके हिसाब से क्या होगा नहीं मैं बताऊंगा पहले अभी आप क्लियर तो करिए मैं बता दूंगा और ऐसे ही बताऊंगा आप उसको काट नहीं पाएंगे ये मेरा वचन है मैं अपनी बताऊंगा मगर मैं मान के चलिए मेरे पास है ही नहीं मैं एक रिपोर्टर हूं आपसे पूछ रहा हूं आपके रामपाल दास जी ने आपको धर्म की तात्विक परिभाषा व्याख्या दी है क्या धर्म किसे कहते हैं धर्म धर्म वही है जो हम सही के रास्ते पर चले और सही की परिभाषा क्या है? किस चीज को सही मानेंगे? वही तो पूछा जा रहा है। क्या आधार है सही मानने का किसी चीज को? कर्तव्य और अकर्तव्य कर्म बताती है भगवत गीता में कि भाई तूने क्या कर्म करने हैं। तो शास्त्रों ने जो कर्तव्य और अकर्तव्य बताए होंगे उसका कोई कोई आधार होगा ना कि यह अच्छा है यह बुरा है। आधार क्या है अच्छा बुरा करने का? वही तो हमारी भगवत गीता कह रही है कि तू उस ज्ञान को तत्वदर्शी संत के पास जाकर सुन। तत्वदर्शी के पास आप जा चुके हो ना मेरे भाई। तो वही तो मैं आपको कह रहा हूं कि उन्होंने जो बताया सही और गलत कि हम

00:19:02:02 किसी को शरीर के द्वारा कष्ट दे सकते हैं। आप किसी को कुछ कह भी दो। अगर उसकी आत्मा दुख रही है। आपको ये पता नहीं लगेगा कि उसकी आत्मा दुख रही है नहीं दुख रही क्योंकि ये बहुत सूक्ष्म लेवल पे हो रहा है। किसी के शरीर को चाकू मार दो। वो तो चलो हमें दिख जाता है कि हम उसको कष्ट दे रहे हैं। आतंकवादी गोली मार के किसी को मार रहा है। वो हमें दिख रहा है। वो किसी के शरीर को नष्ट कर रहा है। उसकी आत्मा को कष्ट देना। वो अलग चीज है। तो वो अलग चीज है। मैं ये बोल रहा हूं आत्मा को दुख क्यों नहीं देना है? वो क्या है? वो कारण क्या है? क्योंकि आत्मा परमात्मा का ही एक अंश है। हां आत्मा को क्योंकि वो अलग नहीं है। हम इस शरीर में अरे मैं पूछ रहा हूं मेरे भाई आप मेरी बात समझ नहीं रहे हैं। किसी आत्मा का दिल नहीं दुखाना है या मैं समझता हूं इस बात को कि नहीं दुखाना है। अभी मैं ये पूछ रहा हूं कि क्यों नहीं दुखाना है? क्या अंतर है दुखाने और ना दुखाने में? ये पूछ रहा हूं।

00:20:03:08 भाई शास्त्रों ने आपको बता दिया तुझे यह करना है यह नहीं करना है। मगर यह भी तो है कि उसने किस आधार पे आपको कहा होगा कि तुझे यह करना है और ये नहीं करना है। कुछ उसका कारण होगा ना। वो कारण क्या है? कहने का मतलब यह है अभी आपने थोड़ी देर पहले बताया कि आपको यह चीज नहीं पता है। धर्म की परिभाषा धर्म किसे कहते हैं? नहीं पता है तो क्या मैं ये मान लूं कि रामपाल जी के द्वारा आपको धर्म की परिभाषा प्राप्त नहीं है? एक चीज सुनता आपके हिसाब से धर्म की परिभाषा मुझे एक बात बताइए धर्म की परिभाषा रामपाल जी ने एक मिनट धर्म की व्याख्या रामपाल जी ने की है कहीं पे आपकी जानकारी में देखो आप रामपाल जी परमात्मा के द्वारा धर्म की परिभाषा सिर्फ एक है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है बाकी लोगों ने अपने अपने हिसाब से ियत की व्याख्या की है क्या कहीं पे? इंसानियत देखो ह्यूमैनिटी एक तो सिखाने से नहीं आती। मैंने कहा मैंने आपसे पूछा देखिए एक-एक करके चलिए। देखिए टाइम खामखा जाता है। मैं पूछ रहा हूं क्या इंसानियत की व्याख्या की है किसी ने?

00:21:15:14 देखो वही तो मैं कह रहा हूं। इंसानियत मतलब अपने आप समझ ले ये इंसानियत है। कॉन्शियसनेस जो हमारी आत्मा आगे देखो आप मैं आपसे पूछ रहा हूं सिंपल एक आप छोटे हो मुझसे। मैं छोटे भाई की तरह एक सिंपल क्वेश्चन पूछ रहा हूं। क्या कभी किसी लेक्चर में धर्म का अर्थ बताया है? उन्होंने आपके रामपाल दास जी ने आपकी जानकारी में हो सकता है बताया हो। हो सकता है बताया हो पर आपकी जानकारी में ना हो। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं। आपकी जानकारी में रामपाल जी ने कहीं पर धर्म का अर्थ धर्म की परिभाषा बताई है कि नहीं बताई है? जैसे आज आपसे मेरी चर्चा हो रही है। ठीक है? धर्म धर्म क्या है? तो इस तरह से उनके साथ कोई चर्चा हुई है। धर्म क्या है? धर्म किसे कहते हैं? हुई है कि नहीं हुई है? उनके वचन सुन के जो समझ आया मुझे। भाई साहब मैंने क्या कहा? मैं एक सिंपल क्वेश्चन पूछ रहा हूं। धर्म शब्द पर बात की है उन्होंने या यही बात की है कि अष्टांगी देवी प्रकृति का यह हुआ फिर वह हुआ फिर काल हुआ फिर यह हुआ फिर ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं जी यही है कि धर्म धर्म शब्द पर बात की है धर्म की मीमांसा की है हां जी तो एक ही धर्म है वो मानव धर्म फिर

00:22:30:14 मैंने आपसे क्वेश्चन क्या पूछा है क्या आपकी जानकारी में रामपाल दास जी ने धर्म की व्याख्या कहीं पे लिखी है कहीं बोली है आज हम धर्म की धर्म का अर्थ बताएंगे। धर्म किसे कहते हैं? देखो वही चीज समझने वाली है। जी मैं आपको वही समझा रहा हूं। लेकिन आप इस चीज को मैंने एक-एक करके चलिए ना आप मैं जानता हूं आप मुझे क्या समझा रहे हैं। अभी आप इतना बता दीजिए कि धर्म शब्द पर उन्होंने बात की है कि नहीं की है कि धर्म किसे कहते हैं। हम यहां बता रहे हैं। किसी किताब में, किसी लेक्चर में, किसी प्रवचन में, धर्म शब्द पर बात की है उन्होंने। आपकी जानकारी में हां वही मैं कह रहा हूं मेरी जानकारी में धर्म सिर्फ एक है वो इंसान मैंने क्वेश्चन क्या पूछा है इनका नाम क्या था शिवम जी मैंने क्वेश्चन क्या पूछा है मैं क्वेश्चन पूछ रहा हूं मैंने क्वेश्चन ये नहीं पूछा है कि धर्म क्या है? अब क्वेश्चन यह है क्या आपके रामपाल दास जी ने कहीं पर धर्म शब्द से व्याख्या की है? धर्म किसे कहते हैं? उन्होंने कहा ना हिंदू, सिख, ईसाई कोई धर्म न्यारा नहीं है। सिर्फ इंसानियत मानव धर्म हमारा है। भाई साहब मैंने कहा मानवता वाला जो मानवता

00:23:45:18 वाला जो धर्म है उसकी कोई व्याख्या की है? धर्म कहते किसे हैं? इस पर कोई बात की है? देखिए। जैसे कि हमने बताया कि पल्सर और अपाचे और क्या कहते हैं? अ फज़र FZ ये सब कुछ अलग नहीं है। सब एक ही है। मोटरसाइकिल Pulsar, Apache और क्या कहते हैं आपका? फज़ और एफ जेड ये सब कोई न्यारी नहीं है। ये सब एक ही मोटरसाइकिल मोटरसाइकिल ही है सारी। सब कोई न्यारी नहीं है। ये तो हो गया। क्या उन्होंने कहीं पे ये बताया मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? क्या होती है मोटरसाइकिल? उन्होंने तो ये जो आप बता रहे हो ना हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ये धर्म नहीं कोई न्यारा। ये डेफिनेशन नहीं है। ये तो वस्तुनिष्ठता से उन्होंने बताया कि इन सबको आप जो अलग-अलग धर्म समझ रहे हो वो धर्म एक ही है। मगर धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म किसे कहते हैं? क्यों जाए धर्म के पास? क्यों आवश्यकता है मुझे धर्म की? क्या आवश्यकता है धर्म की?

00:24:56:19 वही कि हम किस समाज में रह रहे हैं? देखिए ये तो आप मत देना जवाब। पहले तो मुझे ये बता दो। आपके जो तत्वदर्शी रामपाल जी हैं, उन्होंने कहीं पर परिभाषा बताई है या नहीं बताई। धर्म शब्द पर बोला है कि भैया धर्म किसे कहते हैं? आज हम आपको यह बताते हैं किसी किताब में, किसी लेक्चर में आपकी जानकारी में बोला है कि नहीं बोला है? कैसे कैसे शिष्य हो यार? अगर नहीं बोला है आपकी जानकारी में तो बोल दो कि भाई बोला होगा पर मेरी जानकारी में नहीं है। सच बोलो ना। सच बोलना भी तो धर्म है। ये किसने कहा? सच बोलना धर्म है। सच बोलना धर्म नहीं है। किसने कहा? सच बोलना है धर्म में धर्म के जो लक्षण है 10 धर्म के उनमें से एक सत्य बोलना है 10 लक्षण किसने बता दिए किसने बनाए 10 लक्ष शास्त्रों ने शास्त्र लिखे किसने ये बताओ मुझे अरे नहीं नहीं सीरियसली बात अभी बात क्या हो रही है मैं अपनी बात वापस लेता हूं नहीं नहीं नहीं विषयंतर नहीं करने दूंगा आपको मैं पूछ रहा हूं रामपाल दास ने आपको कहीं पर बताया है धर्म की परिभाषा क्या है? नहीं आपने अभी 10 धर्म कहे

00:26:11:25 ना 10 लिखे हुए थे। आप मुझे बताइए भाई साहब धर्म की परिभाषा क्या है? रामपाल दास ने बताया है कि नहीं बताया है? मैं आपके सवालों का जवाब दूंगा मगर जो विषय चल रहा है पहले उसको खत्म करिए। चलो जो आप सुनना चाहते हो जहां तक मेरी समझ है मैंने शायद वो लेक्चर मिस कर दिया हो कि मुझे वो पता नहीं। इसका मतलब अभी के अभी हम यह मान लेना कि आपको धर्म की व्याख्या प्राप्त नहीं हुई है रामपाल दास जी से मगर आप आकर्षित हो नहीं मैं आकर्षित सिर्फ इसकी वजह से नहीं हूं। नहीं नहीं मैं मैं वो मैं मैं आपके पास दूसरे कारण हो सकते हैं उनसे आकर्षित होने के। मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैंने बस एक बात पूछी कि धर्म की व्याख्या आपको प्राप्त नहीं है उनसे।

00:26:59:20 लगा लो धर्म क्या है? हर एक का अपने अपने हिसाब से होगा। मुझे जहां तक लगता है किसके हिसाब से शास्त्र के हिसाब से अरे मेरे भाई धर्म धर्म कुछ भी हो आपको उनसे प्राप्त है कि नहीं वो धर्म होगा जो होगा वो अभी बात करेंगे क्या होगा अभी बात हो रही है आपको जिससे आप अट्रैक्ट हुए हो जिसके तत्व ज्ञान प्रकाश से आप आकर्षित हो गए हो क्या आपको उससे धर्म का अर्थ पता चला कि नहीं पता चला मुझे वही तक जहां तक मुझे समझ आया मेरी बुद्धि जहां यहां तक मेरी समझ जा पाई। कहीं पे उन्होंने ऐसी हेडिंग लिखी है क्या कि धर्म किसे कहते हैं? धर्म धर्म किसको कहते हैं? धर्म की व्याख्या या कुछ भी इस तरीके का आपकी जानकारी में। हां वही तो मैं कह रहा हूं कि बस लोगों को दुख ना दो। सबका अरे मैंने आपसे पूछा क्या है भाई? आप यही तो दिक्कत आती है। यही दिक्कत आती है। मैं आपसे परिभाषा नहीं पूछ रहा हूं। मैं आपसे पूछ रहा हूं। पहले कि आपके गुरु जी ने कहीं पर बताया है कि धर्म इसे कहते हैं। चलो अगर ये मान के चलो कि उन्होंने नहीं बताया कौन से गुरु ने

00:28:14:26 आज तक बता दिया। मैं आपको बता दूंगा और आप मेरी परिभाषा से अगर सेटिस्फाइड ना हो तो आप उसमें तर्क करिएगा। और ये मैं ये कह रहा हूं दुनिया में किसी ने नहीं बताया। मैं कह रहा हूं किसी ने नहीं बताया। मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं आपके गुरु ने बताया है कि नहीं बताया। मैं आपसे पूछ रहा हूं। दुनिया में 100 लोग ट्रेन के अंदर 100 लोग बिना टिकट के चल रहे होंगे। इसका मतलब यह नहीं कि आपका बिना टिकट के चलना वो हो गया। जायज हो गया। आप अपनी बात करिए। आपके पास टिकट है कि नहीं है? बिल्कुल टिकट है वो सही बता। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि धर्म की व्याख्या की है आपके गुरु ने कहीं पर? ये

00:28:59:09 देखो। ये देखो। ये पूरा एक ग्रंथ है। ये ग्रंथ है पूरा। इसका नाम पढ़ो। क्या है? क्या है इसका नाम? धर्म मीमासा। धर्म भाषा धर्म मीमांसा धर्म भाषा नहीं। नहीं नहीं मुझे ध्यान से दिख नहीं रहा था। फिर से दिखाना मुझे। केवल छोड़ो। ये ग्रंथ ये ग्रंथ जो है केवल ये धर्म पर है। धर्म क्या होता है? किसे कहते हैं? केवल इस पर बात हुई है। आप जो यह बात बोल रहे हैं ना दुनिया के किस गुरु ने बताई है तो यहां पर आप आपकी जानकारी कम है। दुनिया में बहुत ऐसे आचार्य गण है जिन्होंने धर्म की मीमांसा की है। धर्म शब्द पे ही बात की है। धर्म कहते किसे हैं? और मैं अभी आपको अपनी परिभाषा बताऊंगा। बस पहले आप एक बात क्लियर कर लीजिए। क्या मैं यह मान लूं कि आपको धर्म की परिभाषा रामपाल जी ने रामपाल जी से प्राप्त नहीं हुई है?

00:29:56:07 बिल्कुल जो मैंने आपको कहा वो आपको सच बोलने में बड़ी दिक्कत होती है। अगर आपको सच बोलने से दिक्कत है तो आप आए क्यों हैं? सच बोलना नहीं आपको। मैंने जब आपको कहा सच बोलना धर्म है तो आप बता रहे हैं कि क्या कहते हैं किसने कह दिया? फिर दूसरा टॉपिक आ जाएगा। मैं मैं फिर आपको वो बताऊं ये टॉपिक छूट जाए। आपसे मैं पूछ रहा हूं आपका नाम क्या है? मेरा शिवम यह क्यों बोला पट शिवम? देखो ये वो ये सब बोलना था ना पहले ये सब बोला ना देखो मगर ये आपको रटा हुआ सच है सच्चाई इसलिए आपने बिना धड़क बिना बेरोक टोक आपने तुरंत बोला मेरा शिवम ऐसे आप बताइए मुझे उसमें मिक्सचर मत करिए देखो हां ये सब मत करो। बात को घुमाने का प्रयास मत करो। आपने क्यों बता दिया सच? सच बोलना तो धर्म है नहीं। झूठ बताते हैं। शिवम की बजाय कुछ और बता देते। फिर आप बता दो कि सच क्या है? मुझे नहीं पता। मैं बताऊंगा। पहले आप ये मुझे बताइए कि आपको आपके गुरु से प्राप्त है कि नहीं। या फिर शायद मैंने वो लेक्चर अटेंड ना करा हो तो मुझे ये नहीं पता। ऐसे बोलो ना यार। कितनी देर लगा दी? करीबन

00:31:11:08 32 मिनट हो चुके हैं छोटी सी बात पे। आप सुनो मेरा आप सुनो धर्म किसे कहते हैं? [संगीत] जीव की चाह के वास्तविक विषय जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है। मतलब जो परमात्मा को बताए वो शास्त्र वो धर्म है। आप दोबारा सुनो जीव की चाह का वास्तविक विषय जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है। अभी आप समझ में आ रहा है? मतलब कि जिस विधि के द्वारा जिस विधि के द्वारा जिस काम को करके

00:32:26:12 व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होना है सरल भाषा में कह दे तो व्यक्ति को क्या चाहिए? जीव को क्या चाहिए? एक मिनट जीव को क्या चाहिए? मोक्ष। जीव को क्या चाहिए? मोक्ष की प्राप्ति। हम जीव को चाहिए मोक्ष। तो जो काम करके मोक्ष की ओर बढ़ेंगे वह धर्म है। जो काम करके मोक्ष से दूर जाएंगे वह अधर्म है। अब अरे मैं कह रहा था इसमें बहुत सारी व्याख्या है कि क्या ये सच बोलने को क्यों कहा गया? व्यभचार ना करने को क्यों कहा गया? या चोरी ना करने को क्यों कहा गया? मांस ना खाने को क्यों कहा गया? मगर मांस ना खाना मांस ना खाना धर्म है। मांस खाना अधर्म है। क्यों? क्योंकि मांस ना खाने से आप मोक्ष की ओर आगे बढ़ोगे। मांस खाने से आप मोक्ष से दूर हो जाओगे। ये परिभाषा है धर्म की। जी सर भैया जी मैं आपको यही तो कह रहा था कि जब हम सही और गलत का फर्क यही है कि जो सही है वो आपके पुण्य आपने ये कहां बताया कि सही और गलत का आधार ये है कि कौन सी चीज आपको परमेश्वर की

00:33:41:18 ओर ले जा रही है बताया था क्या आपने क्वेश्चन ऐसे सही और गलत का आधार केवल एक है। जो चीज आपको परमेश्वर की ओर ले जाएगी वो सही है। किसी का दिल दुखाएगी वो सही नहीं है। सही और गलत का आधार यह नहीं है कि किसी का दिल दुखना है कि नहीं दुखना है। सही और गलत का आधार यह है कौन सा कौन सा कार्य आपको परमेश्वर की ओर ले जा रहा है और कौन सा नहीं ले जा रहा है। जो नहीं ले जा रहा है वो धर्म नहीं है। जो ले जा रहा है वो धर्म है। अब ये जो परमेश्वर को प्राप्त करने की विधियां हैं ये कई लोगों ने अपने अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ के भी बताई है। तो वह देखने में लगता है कि वह फलाना धर्म हो गया, वह फलाना धर्म हो गया, फलाना धर्म हो गया। वास्तविकता में जो सनातन धर्म है, वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म है, वही आपको वो विधि और वो परिभाषा बताता है जो ब्रह्म प्राप्ति और ब्रह्म की है। अभी मैं बताता हूं कैसे। ठीक है? जैसे धर्म की बात तो हमने कर ली। अब आप मुझे बताइए कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है? बताया है क्या आपके रामपाल जी ने?

00:34:56:28 [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 35:02 · 08 Jun 2025

रामपाल के अनुयायी धर्म की परिभाषा तक नहीं जानते! एक बड़ा खुलासा! #रामपाल_का_धोखा

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A · Live कबीर जी भगवान क्यों ? #satlokashram #rampalmaharajbooks
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