1
00:00:07,600 --> 00:00:13,600
रेनुधर जी मैं ये थोड़ा सा सीधे विषय पे आना चाहूंगा

2
00:00:13,840 --> 00:00:17,920
आप जैसे ब्रह्मा कुमारीज वाले जब किसी

3
00:00:17,920 --> 00:00:22,080
को अपने से जोड़ते हैं कि भाई हम आपको स्पिरिचुअलिटी देने देना

4
00:00:22,080 --> 00:00:26,480
चाहते हैं तो आप ब्रह्मा

5
00:00:26,480 --> 00:00:30,560
कुमारीज के अनुसार किसी व्यक्ति को स्पिरिचुअल िटी से

6
00:00:30,560 --> 00:00:34,800
या धर्म से या ईश्वर से क्यों जुड़ना

7
00:00:34,800 --> 00:00:38,800
चाहिए? क्या कारण है? क्या आवश्यकता है आ्यात्म

8
00:00:38,800 --> 00:00:42,960
की या धर्म की या ईश्वर की? वो जी अच्छा सबसे पहली

9
00:00:42,960 --> 00:00:47,120
बात तो मैं अगर अपनी बात कहूं [गला साफ़ करने की आवाज़] मेरे को कोई जोड़ने के लिए नहीं कहा

10
00:00:47,120 --> 00:00:51,200
था। मैं स्वयं ही खोज में था। पहले

11
00:00:51,200 --> 00:00:55,440
भक्ति करता था। जैसे गीता अपना हनुमान चालीसा दुर्गा

12
00:00:55,440 --> 00:00:59,520
चालीसा मेरे मुखस्थ है। अभी भी मैं हनुमान चालीसा पूरा कहता

13
00:00:59,520 --> 00:01:04,160
कह सकता हूं। और यही भक्ति चलता था फौज में भी फिर आया तो

14
00:01:04,160 --> 00:01:08,320
टीवी में बहुत सारे संतों को मैंने सुना। मुझे आध्यात्म के प्रति एक रुचि

15
00:01:08,320 --> 00:01:12,400
आने लगी। तो मैं सुना दो तीन जो अच्छे लगे। मैं

16
00:01:12,400 --> 00:01:16,560
थोड़ा सा क्लियर कर दूं। फिर हां तो आप बोले कि वहां पे मैं

17
00:01:16,560 --> 00:01:21,120
खुद ही गया था। मेरा कहने का मतलब मैं खुद ही वहां पहुंचा था। ढूंढ के ब्रह्मा

18
00:01:21,120 --> 00:01:22,720
मैं वो नहीं कह रहा हूं।

19
00:01:22,720 --> 00:01:26,880
मैं कह रहा हूं कि हमें ब्रह्मा कुमारी जो स्पिरिचुअलिटी दे रहा है, बता

20
00:01:26,880 --> 00:01:30,960
रहा है, सिखा रहा है जो भी जो भी ज्ञान जो वहां पर मिल रहा है और

21
00:01:30,960 --> 00:01:35,040
जो जिस ईश्वर की बात की जा रही है तो उसकी आवश्यकता क्यों

22
00:01:35,040 --> 00:01:39,280
है? मतलब एक व्यक्ति को ब्रह्मा के बाद क्यों आना चाहिए?

23
00:01:39,280 --> 00:01:43,520
जी हां मेरे समझ में आवश्यकता यही लगा है 13 साल में कि

24
00:01:43,520 --> 00:01:47,520
अगर मुझे स्वयं को बदलना है स्वयं के अंदर की

25
00:01:47,520 --> 00:01:51,520
कमी कमजोरी को दूर करना है तो खाली ब्रह्मा कुमारी में नहीं

26
00:01:51,520 --> 00:01:55,520
कहता कोई भी आदमी किसी भी स्पिरिचुअल जो भी उसको अच्छा लगे वहां

27
00:01:55,520 --> 00:01:59,680
जाए तो अपने आप को बदल सकता है। यही मेरा विचार है। और मैंने ब्रह्मा

28
00:01:59,680 --> 00:02:03,680
कुमारी को चुना और मैं उसमें अपने आप को बदला हूं। कम से

29
00:02:03,680 --> 00:02:08,400
कम अगर कहूं तो 90% मैं अपने आप को बदल चुका हूं।

30
00:02:08,400 --> 00:02:12,640
उसका उदाहरण आप पूछेंगे तो मैं दे सकता हूं। मैं पूछ रहा हूं कि क्यों

31
00:02:12,640 --> 00:02:16,880
बदलना है? कारण क्या है? हमारा अंत में

32
00:02:16,880 --> 00:02:20,960
कारण यही है। कारण यही कारण यही है कि जो हमारी

33
00:02:20,960 --> 00:02:25,200
कमी कमजोरी ही हमें दुखी करता था। उसी कमी कमजोरी

34
00:02:25,200 --> 00:02:29,280
को दूर करने से हमें सुख की प्राप्ति हुई, आनंद की प्राप्ति हुई, अती्द्रिय

35
00:02:29,280 --> 00:02:33,280
सुख की प्राप्ति होने लगी। और हमारे अंदर की कमी ही हमें दुखी कर

36
00:02:33,280 --> 00:02:37,440
रहा था। ये मेरे विचार है। ठीक ठीक ठीक। इसका

37
00:02:37,440 --> 00:02:38,080
मतलब

38
00:02:38,080 --> 00:02:42,160
हमें दुख के निवारण के लिए अध्यात्म, धर्म और ईश्वर से जुड़ना

39
00:02:42,160 --> 00:02:46,320
चाहिए। जुड़ना चाहिए कहीं भी जो जहां इच्छा लगे।

40
00:02:46,320 --> 00:02:50,960
ठीक ठीक। ठीक। अब इसमें एक एक चीज ये आती है कि

41
00:02:50,960 --> 00:02:55,040
दुख का निवारण यानी कि सुख। सुख की प्राप्ति

42
00:02:55,040 --> 00:02:59,200
तो हमें सिनेमा जाकर भी होती है। सुख की प्राप्ति

43
00:02:59,200 --> 00:03:03,280
हमें घूमने फिरने से भी होती है। जो अन्य बहुत सारी चीजें

44
00:03:03,280 --> 00:03:07,280
हैं प्रपंच रूपी संसार में जहां से हमें सुख मिलता है।

45
00:03:07,280 --> 00:03:11,360
तो फिर मंदिर में जाने से भी मिलता है। हां मंदिर जाने से तो

46
00:03:11,360 --> 00:03:15,440
फिर हम मंदिर को या ब्रह्मा कुमारी को आवश्यकता के रूप में क्यों ले? जब

47
00:03:15,440 --> 00:03:19,440
हमें मिठाई की दुकान पे मिठाई खा के सुख मिल रहा है और टीवी

48
00:03:19,440 --> 00:03:24,160
देख के सुख मिल रहा है, मनोरंजन मिल रहा है। बहुत सी ऐसी इंद्रिय विषय

49
00:03:24,160 --> 00:03:28,480
से हमें सुख मिलता है। तो फिर ब्रह्मा कुमारीज वाला सुख आवश्यक

50
00:03:28,480 --> 00:03:32,960
क्यों? देखिए दुनिया

51
00:03:32,960 --> 00:03:37,680
में कोई भी आदमी किसी भी ऑर्गेनाइजेशन में जाता है, कोई भी धार्मिक संस्था में जाता है।

52
00:03:37,680 --> 00:03:41,760
सबका कुछ ना कुछ खोज होता है। तो मेरे तरफ से मैं कहूंगा कि

53
00:03:41,760 --> 00:03:46,000
क्यों जाना चाहिए ब्रह्मा कुमारी में? तो मैं स्पेशली इसलिए कहूंगा

54
00:03:46,000 --> 00:03:50,160
कि और जगह जाकर मैंने जो देखा कि वो क्षणिक सुख था। जैसे मैंने

55
00:03:50,160 --> 00:03:53,200
पिक्चर देखा बहुत शौकीन था। जैसे कि मैं

56
00:03:53,200 --> 00:03:57,760
क्रिकेट का बहुत शौकीन था। तो उसमें क्षणिक सुख मिलता था मुझे।

57
00:03:57,760 --> 00:04:02,480
उसके बाद फिर जैसे के तैसे हो जाते थे। तो क्षणिक सुख

58
00:04:02,480 --> 00:04:06,640
से मेरे को ऊपर जाने के लिए मेरे शायद परमात्मा ने मुझे वहां पर

59
00:04:06,640 --> 00:04:10,720
लिया खींच के लिया तो मैं गया तो वहां से मेरे को अभी अनवरत सुख मिलता

60
00:04:10,720 --> 00:04:16,720
है। रात्रि दो रात को 2:00 बजे भी उठता हूं तो मैं अपने आप को डांस करता हूं।

61
00:04:16,800 --> 00:04:20,880
अच्छा तो इसका मतलब कि कभी ना खत्म होने वाला सुख हमें

62
00:04:20,880 --> 00:04:24,960
मिलता है अध्यात्म में जाकर के। इसलिए हमें अध्यात्म के मार्ग पर

63
00:04:24,960 --> 00:04:29,200
जाना चाहिए। जाना चाहिए। जी अविनाशी

64
00:04:29,200 --> 00:04:33,360
सुख मिलता है। अविनाशी सुख तो ब्रह्मा कुमारी ये क्लेम

65
00:04:33,360 --> 00:04:37,440
कर रहा है। ब्रह्मा कुमारी ये मानता है कि अविनाशी सुख नाम की कोई चीज है दुनिया

66
00:04:37,440 --> 00:04:41,680
में? बिल्कुल मानता है। नहीं

67
00:04:41,680 --> 00:04:44,960
मानता।

68
00:04:44,960 --> 00:04:48,960
अभी कल ही हमारी एक चर्चा हुई है जिसमें उन्होंने कहा है

69
00:04:48,960 --> 00:04:52,960
कि जब व्यक्ति जो ब्रह्मा कुमारी

70
00:04:52,960 --> 00:04:57,520
को फॉलो करेगा यदि तो वो अगले नेक्स्ट जन्म में देवत्व

71
00:04:57,520 --> 00:05:01,680
को प्राप्त करेगा देवी देवता बन जाएगा और वहां

72
00:05:01,680 --> 00:05:05,920
पर एक निश्चित समय तक निश्चित समय तक सुख भोगने के बाद वो फिर से डाउन

73
00:05:05,920 --> 00:05:10,000
होगा ये पांच वो तो वो तो फिर नहीं वो तो आप पूरी सृष्टि

74
00:05:10,000 --> 00:05:14,000
चक्र की बात कर दिया अगर वो पूछेंगे तो तो मैं उसका जवाब दूंगा। ये तो मैं इस जन्म

75
00:05:14,000 --> 00:05:18,000
की बात कर रहा हूं। मैं इसी जन्म की बात कर रहा हूं।

76
00:05:18,000 --> 00:05:22,480
इस जन्म में आपको अविनाशी सुख मिल गया। मिल गया।

77
00:05:22,480 --> 00:05:26,800
मिल गया। गृहस्थ में रहते हुए अभी मैं थोड़ा सा क्लियर

78
00:05:26,800 --> 00:05:30,960
कर रहा हूं आपको। अभी आपने मुझे बताया था। आपने

79
00:05:30,960 --> 00:05:35,120
मुझे बताया था कि मुझे जब मैं आपसे बोला

80
00:05:35,120 --> 00:05:39,120
था कि आपके शरीर का नीचे का पोर्शन ज्यादा दिख रहा है तो ऐसे

81
00:05:39,120 --> 00:05:43,120
ही अपनी सिंग अरेंजमेंट ऐसी सिंग अरेंजमेंट कर लीजिए कि आपका हाफ पोर्शन

82
00:05:43,120 --> 00:05:47,520
ही दिखाई दे पैरों का हिस्सा वो थोड़ा सा ऑड

83
00:05:47,520 --> 00:05:51,520
ऑड लग रहा है। तो आपने प्रॉब्लम आपने अपनी

84
00:05:51,520 --> 00:05:55,760
एक प्रॉब्लम बताई थी कि मेरे कुछ स्पाइन

85
00:05:55,760 --> 00:05:59,840
में प्रॉब्लम है जिसकी वजह से बहुत ज्यादा एक

86
00:05:59,840 --> 00:06:00,340
एक

87
00:06:00,080 --> 00:06:04,080
मिनट भाई साहब मुझे पूरा तो बोलने दो हां हां बोलिए

88
00:06:04,080 --> 00:06:08,160
हां आपने अपनी एक प्रॉब्लम बताई थी कि मैं बहुत

89
00:06:08,160 --> 00:06:12,240
ज्यादा नीचे नहीं बैठ सकता क्योंकि मुझे स्पाइन का प्रॉब्लम [गला साफ़ करने की आवाज़] है

90
00:06:12,240 --> 00:06:16,320
ना हां मैं बैठ सकता हूं अगर आप बोलोगे तो मैं मैं आप अगर

91
00:06:16,320 --> 00:06:20,320
बोल दूं तो मैं बैठ जाऊंगा मैं ये नहीं कह रहा आप बोल दूं मैं बैठ जाऊंगा

92
00:06:20,320 --> 00:06:24,400
आप नीचे भी बैठ जाऊंगा क्योंकि वो तो जी वेनुधर जी मुझे

93
00:06:24,400 --> 00:06:28,480
बोलने तो दीजिए हां बोलिए मैं कह रहा

94
00:06:28,480 --> 00:06:32,560
हूं आपने कहा ना कि आपको प्रॉब्लम है स्पाइन का?

95
00:06:32,560 --> 00:06:36,560
हां है। प्रॉब्लम है। शरीर का है तो शरीर में हूं तो प्रॉब्लम है।

96
00:06:36,560 --> 00:06:40,640
हां इसका मतलब आपका जो सुख है वो बाधित हो रहा है।

97
00:06:40,640 --> 00:06:44,640
बाधित नहीं हो रहा है। उस सुख उस उस जो दुख से मैं ऊपर

98
00:06:44,640 --> 00:06:49,440
हूं। दुख मेरे को वो दुख नहीं दे सकता मेरे को। मैं उससे ऊपर हूं।

99
00:06:49,440 --> 00:06:53,440
क्योंकि मेरे को तकलीफ नहीं है। मेरे को जो बोला ना मेरे को जो

100
00:06:53,440 --> 00:06:57,440
बोला मेरे शरीर में तकलीफ बोला। मैंने मेरे को नहीं बोला। आप मेरे को बात को ध्यान से

101
00:06:57,440 --> 00:07:01,440
सुनिए। मैंने क्या किया? मेरे शरीर में यानी मेरे बॉडी में स्पाइन

102
00:07:01,440 --> 00:07:05,440
का प्रॉब्लम है। बॉडी में है। मेरे में नहीं है। मेरे में नहीं

103
00:07:05,440 --> 00:07:09,520
है। आप उस चीज को समझिए। मैं क्या बोल रहा हूं? मेरे में नहीं है। मेरे बॉडी में प्रॉब्लम

104
00:07:09,520 --> 00:07:13,760
है। मैं समझ गया। मैं समझ गया। में प्रॉब्लम है।

105
00:07:13,760 --> 00:07:15,120
आप में नहीं है। तो आप

106
00:07:15,120 --> 00:07:19,280
अपने आप को बॉडी से अलग मान रहे हो। है ना? हां। ठीक है। तो

107
00:07:19,280 --> 00:07:23,360
अभी आप तो अभी आपने बताया था कि आप रोज रात के 2:00 बजे जब

108
00:07:23,360 --> 00:07:27,440
जागते हो तो आप नाचते हो। तो नाचने का

109
00:07:27,440 --> 00:07:31,520
किसको मिल रहा है? बॉडी को मिल रहा है कि आपको मिल रहा है? बॉडी

110
00:07:31,520 --> 00:07:35,920
के जरिए ही नाच रहा हूं ना। बॉडी तो साधन है ना इंस्ट्रूमेंट है ना बॉडी मेरा। तो बॉडी

111
00:07:35,920 --> 00:07:40,000
बॉडी जो कर रही है, बॉडी जो जो आचरण हो रहे हैं जो

112
00:07:40,000 --> 00:07:44,000
भी बॉडी संपर्क जो सूचनाएं आदान प्रदान कर रही है वो आपको

113
00:07:44,000 --> 00:07:48,000
मिल रहा है। उसी से आपका सुख है। बाहर है बॉडी।

114
00:07:48,000 --> 00:07:52,880
नहीं दुख नहीं है। दुख से ऊपर हूं। तो आपको जब

115
00:07:52,880 --> 00:07:57,200
क्योंकि मैं बता देता हूं क्योंकि मेरी स्थिति मेरी स्थिति उससे

116
00:07:57,200 --> 00:08:01,280
ऊपर है। भाई साहब एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप कह

117
00:08:01,280 --> 00:08:05,280
रहे हो कि बॉडी से मैं नाच रहा हूं तो बॉडी से नाचने से जो सुख प्राप्त होता

118
00:08:05,280 --> 00:08:09,920
है वो मुझे हो रहा है। मगर बॉडी मैं अगर बॉडी हां

119
00:08:09,920 --> 00:08:14,080
हां मैंने ऐसा कहा क्या कहा कि बॉडी से नाचने से सुख मिलता

120
00:08:14,080 --> 00:08:18,320
है। मैं कहां मैं नाचता हूं? बॉडी से नाचने मैं ऐसे बैठे-बैठे

121
00:08:18,320 --> 00:08:23,280
भी मैं मन से भी नाच सकता हूं। मन से बैठे-बैठे भी मैं नाच सकता हूं।

122
00:08:23,280 --> 00:08:27,440
मन से भी नाचना होता है। मन से हां मन से मन

123
00:08:27,440 --> 00:08:30,240
से नाच सकता है आदमी। तो आप रात के 2:00

124
00:08:30,240 --> 00:08:34,240
बजे जब उठते हैं तो मन से नाचते हैं। बॉडी से नहीं नाचते हैं। हां मन खुश होता

125
00:08:34,240 --> 00:08:38,240
है। तो बॉडी है तो बॉडी है करके नाच लेते हैं। और जिस दिन मैं बेड में अगर मान

126
00:08:38,240 --> 00:08:42,240
लो कर मैं बेड रिटर्न हो जाऊं। मान लो मान लो मैं बेड

127
00:08:42,240 --> 00:08:46,480
रिटर्न हो गया नाच तो नहीं सकता। लेकिन मैं वो शक्ति को आज संचय

128
00:08:46,480 --> 00:08:50,640
कर रहा हूं ताकि मैं बेड में पड़े पड़े भी मैं नाच सकूं। यानी मन से नाच

129
00:08:50,640 --> 00:08:54,640
सकूं और मेरे को कोई दुख ना हो। मैं उसका पुरुषार्थ कर रहा हूं।

130
00:08:54,640 --> 00:08:59,120
वहां तक नहीं पहुंचा हूं। मैं पुरुषार्थ कर रहा हूं। आप ये बताइए

131
00:08:59,120 --> 00:09:03,360
कि जैसे जब देवी देवता बन गए और वापस

132
00:09:03,360 --> 00:09:07,440
पतन होगा। [गला साफ़ करने की आवाज़] वापस पतन होगा। यानी कि जन्म

133
00:09:07,440 --> 00:09:13,280
जन्मांतर में आपको अविनाशी सुख नहीं है। इस जन्म में आपको अविनाशी सुख है।

134
00:09:13,280 --> 00:09:18,320
देखिए जन्म जन्मांतर का सुख के लिए अभी है जो हम कर सकते हैं।

135
00:09:18,320 --> 00:09:22,400
हमारे हाथ में अभी है। हम अभी जो कमाई करेंगे जितना

136
00:09:22,400 --> 00:09:26,480
करेंगे मैंने आपसे ये पूछा। मैं वही कह रहा हूं। वही कह रहा हूं ना। मैं अगर

137
00:09:26,480 --> 00:09:30,640
अभी मैं अगर उतना पुरुषार्थ करूंगा तो जैसे आप सतयुग बोल रहे हो। देवी

138
00:09:30,640 --> 00:09:34,800
देवता देवी देवता 21 जन्म हम बोलते हैं भाई साहब सुनिए

139
00:09:34,800 --> 00:09:39,040
तो मैं पहले आप ना जैसे मैंने आपसे पूछा है

140
00:09:39,040 --> 00:09:43,200
कि जन्म जन्मांतर में अविनाशी सुख है या नहीं तो

141
00:09:43,200 --> 00:09:45,360
आप पहले हां या ना बताइए उसके बाद एक्सप्लेन

142
00:09:45,360 --> 00:09:49,840
कर नहीं जन्म जन्मांतर जन्म जन्मांतर के बाद मैं कैसे बोल दूं अभी

143
00:09:49,840 --> 00:09:54,240
मैं जन्म जन्मांतर की बात कैसे कह सकता हूं वो तो वो तो परमात्मा कह सकता है

144
00:09:54,240 --> 00:09:58,240
तो परमात्मा ने आपको नहीं बताया कि जन्म भैया मैं अगले जन्म की

145
00:09:58,240 --> 00:10:02,480
बात अगले जन्म के जो परमात्मा ने बताया मैं उसकी पुरुषार्थ कर रहा हूं।

146
00:10:02,480 --> 00:10:06,880
मुरली के रूप में बता रहे हैं ना भाई साहब परमात्मा हां बिल्कुल बता रहे हैं। बिल्कुल

147
00:10:06,880 --> 00:10:11,120
बिल्कुल बता रहे हैं। बिल्कुल बता रहे हैं। परमात्मा ये बता रहा है कि नहीं बता रहा है कि आपको जन्म

148
00:10:11,120 --> 00:10:15,280
जन्मांतर में अविनाशी सुख मिलेगा या विनाश वाला सुख मिलेगा।

149
00:10:15,280 --> 00:10:19,520
परमात्मा बता रहे हैं कि अभी संगम पर ही जो जिस समय मैं धरा

150
00:10:19,520 --> 00:10:23,600
पे आया हूं। मैं तुम्हें ज्ञान देके तुमसे पुरुषार्थ करा रहा हूं।

151
00:10:23,600 --> 00:10:27,760
तुम्हें ज्ञान योग धारणा सेवा करा रहा हूं। तो तुम्हें जो राजयोग

152
00:10:27,760 --> 00:10:32,080
हमारे यहां राजयोग कहते हैं हम राजयोग सीख रहे हैं। तो जो राजयोग परमात्मा सिखा

153
00:10:32,080 --> 00:10:36,720
रहे हैं उसमें वो कह रहे हैं कि तुम अभी जितना कमाई कर सकते हो कर लो।

154
00:10:36,720 --> 00:10:40,720
वो तुम्हारी कमाई के हिसाब से तुम वहां जाकर सुख भोगोगे यहां पद मिलेगा।

155
00:10:40,720 --> 00:10:44,720
मैं आपसे ये पूछ रहा हूं क्या परमात्मा ने ये बताया है कि

156
00:10:44,720 --> 00:10:49,120
अविनाशी सुख मिलेगा जन्म जन्मांतर में या नहीं मिलेगा। मैं ये पूछ रहा हूं। ना

157
00:10:49,120 --> 00:10:53,200
ऐसा नहीं कहा उसने। मैं नहीं मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। कैसे मिलेगा?

158
00:10:53,200 --> 00:10:57,600
नहीं वो कहा 21 जन्म सतयुग का जो सतयुग

159
00:10:57,600 --> 00:11:00,480
जो कहते हैं सत्य और त्रेता वहां कोई दुख नहीं होगा। इसलिए

160
00:11:00,480 --> 00:11:04,720
यह कहा परमात्मा ने उसके बाद तो फिर दुख है ही है। वो वो

161
00:11:04,720 --> 00:11:08,960
दुख वहां दुख नहीं होगा पक्का नहीं होगा।

162
00:11:08,960 --> 00:11:14,640
नहीं होगा। अच्छा तो ये जो क्योंकि देवी देवताओं को हम

163
00:11:14,640 --> 00:11:19,280
जैसे आपने शुरू में कहा था कि अध्यात्म के रास्ते पे इसलिए जाना चाहिए

164
00:11:19,280 --> 00:11:23,360
क्योंकि हमें जो सुख मिलता है वो बाधित सुख होता है और अध्यात्म के रास्ते पर

165
00:11:23,360 --> 00:11:27,840
जाकर के वो कभी ना खत्म होने वाला सुख मिल जाता है। ठीक है? हां जी।

166
00:11:27,840 --> 00:11:31,920
हम तो यानी कि जैसे हमारे

167
00:11:31,920 --> 00:11:36,000
अंदर एक दुख है कि हम मरेंगे। एक दुख है मृत्यु होगी या

168
00:11:36,000 --> 00:11:40,000
हमारे अपनों की मृत्यु होगी। तो इस कारण से हम दुख दुखी होते हैं।

169
00:11:40,000 --> 00:11:44,080
जब तक हम अध्यात्म से नहीं जुड़ते हैं। जो वास्तविक अध्यात्म है उससे जब तक

170
00:11:44,080 --> 00:11:48,240
नहीं जुड़ते तो हम तब तक दुखी होते हैं कि हम मरेंगे हमारे प्रियजन मरेंगे।

171
00:11:48,240 --> 00:11:53,280
है ना? तो ये जो मरने वाली बात है

172
00:11:53,280 --> 00:11:57,520
जिससे हम दुखी होते हैं। ये वो देवी देवता का जब हम रूप धारण

173
00:11:57,520 --> 00:12:01,600
कर लेंगे सतयुग में तब ये मरने वाली बात हमारे मन में होगी

174
00:12:01,600 --> 00:12:05,760
कि नहीं होगी? उस समय दुख नहीं होगी मरने का। क्योंकि वहां

175
00:12:05,760 --> 00:12:09,760
अमर बोलते हैं ना देवी देवता अमर बोलते हैं ना वास्तव में अमर नहीं

176
00:12:09,760 --> 00:12:13,920
है वो भी मरते हैं लेकिन वहां मृत्यु नहीं कहा जाता है ना मरते हैं ना

177
00:12:13,920 --> 00:12:15,760
मरते हैं लेकिन लेकिन उनको उनका

178
00:12:15,760 --> 00:12:20,080
मृत्यु नहीं होता है उसको मृत्यु नहीं कहा जाता है वो देह का त्याग करते हैं हंसते

179
00:12:20,080 --> 00:12:24,160
हंसते वो अपने अगले बचपन को देखते हैं उनको पता रहता है कि मैं

180
00:12:24,160 --> 00:12:28,640
एक नया वस्त्र धारण कर रहा हूं वहां से वहां सिर्फ वस्त्र का परिवर्तन होता है

181
00:12:28,640 --> 00:12:33,040
देह का त्याग करते हैं देह का त्याग पहली बात तो उनका उनको भैया

182
00:12:33,040 --> 00:12:37,280
भैया सुनिए सुनिए मेरी मेरी बात थोड़ा सुन लीजिए। पहली बात तो देवी देवता को देह

183
00:12:37,280 --> 00:12:41,440
का भान ही नहीं होता है। वो देह के भान ही खत्म है। उनका नहीं रहता है।

184
00:12:41,440 --> 00:12:45,600
वो आत्मभान में रहते हैं। उनको ये रहता है कि मैं ये वस्त्र खाली

185
00:12:45,600 --> 00:12:49,840
चेंज कर रहा हूं। मेरा जो वस्त्र है आत्मा के ऊपर जो वस्त्र है वो शरीर है। वो

186
00:12:49,840 --> 00:12:53,840
वस्त्र को मैं परिवर्तन करूं। जैसे सांप का मिसाल देते हैं ना सांप क्या करता है?

187
00:12:53,840 --> 00:12:57,840
अपना पुराना खाल छोड़ देता है। बहुत मैं आपकी बात समझ गया। मैं आपकी बात

188
00:12:57,840 --> 00:13:01,840
समझ गया। आपकी बात शॉर्ट में समझ लेता हूं। तो जब देह का

189
00:13:01,840 --> 00:13:05,840
त्याग जो देवी देवता होते हैं देवी देवता वाला सतयुग होता है

190
00:13:05,840 --> 00:13:10,160
उसके बाद वो देह छोड़ते हैं और वो अगली चीज अगली जो

191
00:13:10,160 --> 00:13:14,400
एंटिटी बनते हैं जो अगला जन्म होता है उसमें उनके अंदर वो मरने

192
00:13:14,400 --> 00:13:18,480
का दुख होता है कि नहीं अगले में किनके अंदर किनके

193
00:13:18,480 --> 00:13:23,600
अंदर जब जब सतयुग से वो अगले युग में ट्रांसफर होते

194
00:13:23,600 --> 00:13:27,600
हां सतयुग के बाद मैं समझ गया आप बोल रहे हो

195
00:13:27,600 --> 00:13:30,880
सतयुग के बाद यानी द्वापर से जो जन्म

196
00:13:30,880 --> 00:13:35,120
हां यही पूछ रहे हैं। द्वापर से जो जन्म होगा तो वो जन्म

197
00:13:35,120 --> 00:13:39,600
होगा हमारा 22वा जन्म। हमारे हिसाब से बता रहा हूं। आप उसको

198
00:13:39,600 --> 00:13:43,760
बात समझिए। भाई साहब मेरी बात आप मुझे ना मुझे आंकड़े मत

199
00:13:43,760 --> 00:13:47,760
बताइए। मुझे बताइए कि उस जन्म में मृत्यु की सूचना

200
00:13:47,760 --> 00:13:51,840
होती है कि नहीं कि हम मरेंगे। जैसे आज हमें मृत्यु की सूचना है कलयुग में। नहीं उस

201
00:13:51,840 --> 00:13:55,840
समय नहीं होती। उस समय फिर उस समय फिर हां अकाल त्रेता भी

202
00:13:55,840 --> 00:14:00,000
नहीं होती। त्रेता में भी नहीं होती। नहीं त्रेता सत्य और त्रेता

203
00:14:00,000 --> 00:14:04,000
में जो है देवभान नहीं होगा जैसे कि सत्य में सत्य

204
00:14:04,000 --> 00:14:08,080
में सत्य में हो मैं समझ गया मैं समझ गया द्वापर से

205
00:14:08,080 --> 00:14:12,080
द्वापर से क्या होगा देवभान में आ जाता है आत्मा तो द्वापर

206
00:14:12,080 --> 00:14:16,080
देवभान क्योंकि द्वापर में हमारे मन में सूचना आ जाएगी

207
00:14:16,080 --> 00:14:20,080
कि हम मरेंगे और हमें दुख होगा हां दुख होगा उसमें दुख होगा कि मैं

208
00:14:20,080 --> 00:14:24,320
मर जाऊंगा मेरे घर से कोई मर जाएगा यानी यानी कि देवत्व

209
00:14:24,320 --> 00:14:28,320
को प्राप्त करने के बाद हमें द्वापर में पहुंचने के बाद यह पता लगेगा

210
00:14:28,320 --> 00:14:32,320
कि हम मरेंगे हमें दुख होना चालू हो जाएगा। बिल्कुल बिल्कुल होगा। हां ये

211
00:14:32,320 --> 00:14:36,640
विधि का विधान है। जब तो जब हम सतयुग में होंगे तो हमें यह मालूम

212
00:14:36,640 --> 00:14:41,120
होगा कि नहीं कि हम द्वापर में वो वहां पहुंचेंगे। नहीं

213
00:14:41,120 --> 00:14:45,120
होगा। इसीलिए तो इसीलिए वो सुखी है। इसीलिए देवता

214
00:14:45,120 --> 00:14:45,920
सुखी है।

215
00:14:45,920 --> 00:14:50,080
मैं मैं समझ गया। इसका मतलब कि जो आपके

216
00:14:50,080 --> 00:14:54,160
अनुसार ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो मुक्ति बताई जा रही है वो वास्तव में

217
00:14:54,160 --> 00:14:58,160
व्यक्ति को बेवकूफ बनाया जा रहा है क्योंकि उसको पता ही नहीं है कि उसके साथ

218
00:14:58,160 --> 00:15:02,480
आगे क्या होने वाला है क्योंकि उसको मैं मैं आपको आप पूछिए आप

219
00:15:02,480 --> 00:15:06,480
आप सवाल पूछिए मैं हां पूछिए मैं मैं बता मैं पूछ तो

220
00:15:06,480 --> 00:15:10,480
रहा हूं क्योंकि उसको आप बोल रहे हो कि बेवकूफ बना रहे हैं तो मैं उसको मैं बैठा हूं ना आपको

221
00:15:10,480 --> 00:15:14,880
बताऊंगा भाई साहब मैं मैं बोल तो रहा हूं सुनिए तो आप

222
00:15:14,880 --> 00:15:19,040
देखो आप लैंग्वेज लैंग्वेज आप गलत इस्तेमाल कर रहे हो ना भैया कि बेवकूफ बना रहे हैं। ये

223
00:15:19,040 --> 00:15:23,120
गलत बात आप बोला कि नहीं? मैं उसको मैं आपको बोल दूं कि आप मेरे को

224
00:15:23,120 --> 00:15:27,120
बेवकूफ बना रहे हैं। आपको अच्छा लगेगा कर रहा हूं। नहीं नहीं आप

225
00:15:27,120 --> 00:15:31,680
ये वर्ड को चेंज करें। आप वर्ड गलत शब्द को इस्तेमाल कर

226
00:15:31,680 --> 00:15:35,680
शब्दों के ऊपर होता है। अगर देखिए एक शब्द एक शब्द

227
00:15:35,680 --> 00:15:39,680
देखिए भैया। देखिए भैया देखिए आप मेरा भाई भाई हम चर्चा कर रहे हैं।

228
00:15:39,680 --> 00:15:43,680
एक शब्द के ऊपर ना महाभारत हो गया। एक शब्द के ऊपर महाभारत हो गया था।

229
00:15:43,680 --> 00:15:47,760
पता है भाई साहब एक्स्ट्रा मत बोलिए। मैं मैं यह एक्स्ट्रा क्या

230
00:15:47,760 --> 00:15:51,840
आप ऐसा शब्द का इस्तेमाल मत करिए प्लीज। मैं मैं अभी समझा रहा

231
00:15:51,840 --> 00:15:55,840
हूं ना आपको बेवकूफ बनाने जैसा क्यों लग रहा है? मैंने क्यों कहा? हां तो बोलिए एग्जांपल

232
00:15:55,840 --> 00:16:00,000
दीजिए। हां दे रहा हूं। एग्जांपल दीजिए। मैं मैं जवाब

233
00:16:00,000 --> 00:16:01,120
दूंगा। जवाब सुनना

234
00:16:01,120 --> 00:16:06,240
पड़ेगा। जो जो देवता हैं वो सबसे उत्कृष्ट

235
00:16:06,240 --> 00:16:11,040
स्थिति है किसी भी प्राणी की। आपके हिसाब से। ठीक है? हम

236
00:16:11,040 --> 00:16:15,200
ठीक है। उस समय उससे यह बात छिपाई जा रही है कि तुमको द्वापर में जाना

237
00:16:15,200 --> 00:16:19,840
है और वहां जाके दुख भोगना है। यह छिपाई जा रही है ना बात?

238
00:16:19,840 --> 00:16:23,920
छुपाई क्यों जा रही है? तो छुपाई क्यों जा रही है? छुपा रहा है।

239
00:16:23,920 --> 00:16:28,000
उनको मालूम होगा। उनको मालूम होगा मैं दुख भोगूंगा।

240
00:16:28,000 --> 00:16:33,360
तो आप भैया आपको अगले जन्म का पता आपको अगले जन्म का पता है क्या?

241
00:16:33,360 --> 00:16:37,440
भाई साहब हमें आप बता तो रहे हो। आप बता तो रहे हो मुझे अगले जन्म

242
00:16:37,440 --> 00:16:41,680
में तो इसीलिए तो कह रहा हूं कि देवी देवता सत्य त्रेता में सुख ही सुख होगा वहां

243
00:16:41,680 --> 00:16:45,760
पे दुख का उनको एहसास ही नहीं होगा क्योंकि वो देहभान में नहीं है वो आत्मा

244
00:16:45,760 --> 00:16:49,840
अभिमानी है वही मैं वही तो पूछ रहा हूं कि उनको ये मालूम

245
00:16:49,840 --> 00:16:54,000
होगा कि नहीं कि जाएंगे कि नहीं जाएंगे नहीं होगा इसीलिए क्योंकि

246
00:16:54,000 --> 00:16:58,240
वो आत्म अभिमानी है कोई बेवकूफ नहीं बना रहा है वो आत्म अभिमानी

247
00:16:58,240 --> 00:17:02,320
है मैं उनको देह का भान नहीं है बस मेरा प्रश्न

248
00:17:02,320 --> 00:17:06,480
क्या है मेरा प्रश्न क्या है कि द्वापर में जाने पर दुख मिलना

249
00:17:06,480 --> 00:17:10,480
निश्चित है। आज वो देवी देवता बन के

250
00:17:10,480 --> 00:17:14,560
और सुख भोग रहे हैं। मगर उनकी आगे की कंडीशन ये

251
00:17:14,560 --> 00:17:16,160
आनी है कि उनको दुख मिलना

252
00:17:16,160 --> 00:17:20,320
है। अगर वो उनको पता चल जाए तो अगर उनको पता

253
00:17:20,320 --> 00:17:24,640
चल गया तो वो वहीं पे दुखी हो जाएंगे। इसका मतलब इसीलिए देवी देवता

254
00:17:24,640 --> 00:17:28,720
को दुख नहीं होगा। इसका मतलब वहां पे उनसे सच्चाई छिपाई

255
00:17:28,720 --> 00:17:32,880
जा रही है ना। ये आप कैसे सिद्ध करो कौन छुपा

256
00:17:32,880 --> 00:17:37,120
रहा है मेरे को? ये तो बताओ कौन छुपा रहा है? छुपाने वाला कौन है वहां?

257
00:17:37,120 --> 00:17:41,200
अरे आप ही तो बता रहे हो उनको यह पता नहीं होता है। कोई भी छुपाए।

258
00:17:41,200 --> 00:17:45,280
हम थोड़ी बता रहे हैं भैया। हम नहीं बता रहे हैं। ये आपके गीता आपके गीता

259
00:17:45,280 --> 00:17:49,280
में सब आप जो जो बातें कर रहे हो सब गीता में है। गीता आप पढ़ रहे हो। गीता से

260
00:17:49,280 --> 00:17:53,440
देख लो। गीता का ही ज्ञान है। देखो देखो ऐसा है। गीता पे

261
00:17:53,440 --> 00:17:58,080
आएंगे। प्रमाण पे आएंगे। हां गीता में

262
00:17:58,080 --> 00:18:02,240
अभी बात ये हो रही है अभी बात ये हो रही है कि

263
00:18:02,240 --> 00:18:06,320
जब व्यक्ति देवता होगा तो उसको ये उसको ये मालूम होगा कि नहीं

264
00:18:06,320 --> 00:18:10,400
आगे चलकर के मुझे द्वापर में जाना है दुख भोगना है फिर उसके बाद कलयुग में जाना है दुख भोगना

265
00:18:10,400 --> 00:18:13,200
है जब कलयुग

266
00:18:13,200 --> 00:18:17,280
जब कलयुग के व्यक्ति को यह मालूम है कि उसको पहले देवता बनना है और देवता

267
00:18:17,280 --> 00:18:21,440
के बाद उसको जो है त्रेता में जाना है त्रेता के बाद उसको द्वापर

268
00:18:21,440 --> 00:18:25,440
में दुख भोगना है जब कलयुग के व्यक्ति को मालूम है तो देवता को नहीं मालूम होगा

269
00:18:25,440 --> 00:18:29,920
तो श्रेष्ठ कौन हुआ कलयुग अरे भैया कलयुग कलयुग

270
00:18:29,920 --> 00:18:31,360
को मालूम नहीं है कलयुग

271
00:18:31,360 --> 00:18:35,440
के बाद ये संगम युग चल रहा है जो संगम युग में है जिनको परमात्मा का

272
00:18:35,440 --> 00:18:39,600
ज्ञान मिल रहा है उन्हें परमात्मा गीता का ज्ञान दे रहे है गीता

273
00:18:39,600 --> 00:18:43,680
ज्ञान दाता कौन है आप बता सकते हैं तो गीता ज्ञान दाता कौन

274
00:18:43,680 --> 00:18:47,680
है गीता का ज्ञान किसका है भाई साहब विषयांतर मत करिए

275
00:18:47,680 --> 00:18:51,680
विषयांतर मत करिए इसी नहीं नहीं आप गीता की बात कर रहे भैया यही तो बात है

276
00:18:51,680 --> 00:18:55,680
आप अपनी बात नहीं सुन रहे हो गीता गीता मैंने गीता की बात नहीं की

277
00:18:55,680 --> 00:18:59,680
है भाई साहब तो गीता का ज्ञान यही कह रहा है ना

278
00:18:59,680 --> 00:19:03,840
आप वेद की बात करते तो मैं वेद की बात कर रहा हूं आप दिन में आए

279
00:19:03,840 --> 00:19:07,840
थे जब क्या बोला था भाई साहब मैं शास्त्र नहीं बीके क्या कहती है बताऊंगा

280
00:19:07,840 --> 00:19:11,840
अभी आप बीके तो बीके बीके गीता का ज्ञान

281
00:19:11,840 --> 00:19:15,920
कहती है हमारा ये गीता ज्ञान यज्ञ है ये ब्रह्मा कुमारी में क्या होता

282
00:19:15,920 --> 00:19:19,920
है बता देता हूं यहां गीता आप देखिए जो परिचय चल रहा

283
00:19:19,920 --> 00:19:24,080
है उसको बताइए भाई साहब जो विषय चल रहा है वो बताइए तो हमारा

284
00:19:24,080 --> 00:19:28,080
तो मैं तो वही बोल रहा हूं कि हमारे यहां गीता ज्ञान यज्ञ चलता है। आज

285
00:19:28,080 --> 00:19:32,400
कलयुग में कलयुग में व्यक्ति को ये पता है कि वो देवता बनेगा।

286
00:19:32,400 --> 00:19:36,560
देवता बनने के बाद वो त्रेता में भी सुख भोगेगा और सुख और त्रेता

287
00:19:36,560 --> 00:19:40,800
में सुख भोगने के बाद जो है वो फिर से पतित होगा। वो द्वापर में जाएगा और

288
00:19:40,800 --> 00:19:44,800
कलयुग में जाएगा। आज कलयुग के सभी को मालूम है। मगर जब वो

289
00:19:44,800 --> 00:19:46,800
त्रेता में सुख [गला साफ़ करने की आवाज़] जब वो सतयुग

290
00:19:46,800 --> 00:19:50,800
में सुख भोगेगा तब उसको यह नहीं पता होगा। क्योंकि

291
00:19:50,800 --> 00:19:55,280
अभी जो ज्ञान है ना यह ज्ञान अभी मिल रहा है। सत्य

292
00:19:55,280 --> 00:19:59,520
देवताओं को ज्ञान की फिर जरूरत नहीं पड़ेगी। ना ये ज्ञान सुनेंगे वो वहां

293
00:19:59,520 --> 00:20:03,520
उनके ज्ञान की भी जरूरत नहीं है। यानी कि देवता के पास

294
00:20:03,520 --> 00:20:08,720
ज्ञान नहीं है वो जो कलयुग में जो व्यक्ति के पास ज्ञान है।

295
00:20:08,720 --> 00:20:12,800
हां वो ज्ञान उनको लोप हो जाता है। ये ज्ञान उनको फिर नहीं उनको जरूरत ही नहीं

296
00:20:12,800 --> 00:20:16,960
पड़ती। आप जैसे आप पढ़ाई किया आप आप आईएस बन गए।

297
00:20:16,960 --> 00:20:21,520
आप आपने पढ़ाई किया आईएएस बन गए तो आपको और पढ़ाई की जरूरत है क्या?

298
00:20:21,520 --> 00:20:26,240
आप नौकरी करेंगे तनख्वाह लेंगे। हां तो

299
00:20:26,240 --> 00:20:30,400
अभी जो अभी अभी के अभी के कर्मों का जो फल

300
00:20:30,400 --> 00:20:34,800
है ना आईएएस बनने के लिए जो पढ़ाई की है वो भूल थोड़ी ना गया।

301
00:20:34,800 --> 00:20:38,880
नहीं तो आईएएस की नौकरी कैसे करूंगा? आईएस थोड़ी ना

302
00:20:38,880 --> 00:20:42,880
इस जन्म में तो अगले जन्म में थोड़ी ना उसको आईएएस

303
00:20:42,880 --> 00:20:47,200
का याद रहेगा। तो फिर आईएस से तुलना

304
00:20:47,200 --> 00:20:51,360
तो आईएस से तुलना क्यों कर रहे हो फिर? क्यों नहीं करूंगा भाई? यही

305
00:20:51,360 --> 00:20:55,600
तुलना है कि यहां हम जो कर रहे हैं वो मिलेगा। आईएस के बाद

306
00:20:55,600 --> 00:20:59,680
आईएएस बनने के बाद आईएस बनने से पहले के जीवन का आईएस को

307
00:20:59,680 --> 00:21:02,000
याद रहता है। मगर आप कह रहे हो कि देवता

308
00:21:02,000 --> 00:21:06,000
बनने के बाद देवता बनने से पहले का जीवन याद नहीं रहेगा। तो फिर आईएस से तुलना

309
00:21:06,000 --> 00:21:10,000
क्यों कर रहे हो देवता की? भैया आईएस को पहले

310
00:21:10,000 --> 00:21:14,160
का जीवन याद रहता है। है ना? तो देवताओं को भी उस जन्म का उनको याद

311
00:21:14,160 --> 00:21:18,800
रहेगा पहले का। पिछले जन्म का थोड़ी ना याद रहेगा किसी को

312
00:21:18,800 --> 00:21:22,800
किस जन्म का याद रहेगा पिछले जन्म का ना याद रहेगा ना बाद

313
00:21:22,800 --> 00:21:27,440
के जन्म का याद रहेगा खाली उनको इतना होगा कि भाई ये देह नहीं मैं वस्त्र छोड़ रहा हूं

314
00:21:27,440 --> 00:21:31,440
तो फिर आईएएस से तुलना नहीं हो सकती ना आईएएस बनने से पहले आईएएस

315
00:21:31,440 --> 00:21:35,520
को जो ज्ञान होता है वो आईएएस बनने के बाद भी रहता है तभी वो आईएएस

316
00:21:35,520 --> 00:21:39,760
की नौकरी करता है आईएएस तुलना इसी जन्म के लिए रहता है इसी जन्म

317
00:21:39,760 --> 00:21:43,920
में रहता है अगले जन्म में नहीं रहता मैं ये कह रहा हूं तो अगले जन्म में वो देवताओं

318
00:21:43,920 --> 00:21:48,400
को भी नहीं देता अगले जन्म में वही तो बात कह रहा हूं।

319
00:21:48,400 --> 00:21:52,400
हां तो यहां वो ज्ञान मिल रहा है ना। ज्ञान तो यहां मिल रहा है ना तो

320
00:21:52,400 --> 00:21:56,400
आप ये अभी ना आईएस बनने के बाद भी उसे और और

321
00:21:56,400 --> 00:22:00,480
ज्ञान की जरूरत है कि नहीं? भैया देखो वो आईएएस बनता है। एक एक

322
00:22:00,480 --> 00:22:04,720
जन्म के लिए पढ़ता है वो। ठीक है। वो एक जन्म के लिए आईएएस पढ़ता है। और हम

323
00:22:04,720 --> 00:22:08,720
यहां आपको बोलते हैं कि मैं यहां से आपको अथॉरिटी के साथ बोल रहा हूं कि

324
00:22:08,720 --> 00:22:12,800
मैं यहां 21 जन्म की पढ़ाई पढ़ रहा हूं। बस मैं यहां 21 जन्म के

325
00:22:12,800 --> 00:22:17,120
नहीं पढ़ रहा हूं। मैं पॉइंट पर आ जाता हूं कि कुल मिलाकर

326
00:22:17,120 --> 00:22:21,200
के देवी देवता बनने में भी जो आपका सुख

327
00:22:21,200 --> 00:22:25,200
है वो बाधित है।

328
00:22:25,200 --> 00:22:29,280
किसको बाधित है? देवी देवता बनने पर भी एक दिन उस

329
00:22:29,280 --> 00:22:33,280
सुख से बाहर निकलोगे ना आप तो आना पड़ेगा बोल

330
00:22:33,280 --> 00:22:37,440
रहा हूं ना कोई चीज नहीं रहता परिवर्तन परिवर्तन

331
00:22:37,440 --> 00:22:41,520
का नियम है परिवर्तन इसका मतलब सनातन नहीं है बीके का

332
00:22:41,520 --> 00:22:45,520
ज्ञान सनातन सुख कैसे नहीं है आप

333
00:22:45,520 --> 00:22:50,000
बताइए सनातन क्या है आप बताइए ना सनातन क्या है मुझे

334
00:22:50,000 --> 00:22:54,720
ओके भाई साहब बोल नहीं आप नहीं है बोल रहे तो मैं पूछ रहा हूं सनातन का व्याख्या करिए

335
00:22:54,720 --> 00:22:58,720
तो मैं व्याख्या कर रहा हूं ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी

336
00:22:58,720 --> 00:23:03,280
प्योर सनातन है। मैं व्याख्या कर रहा हूं। देखिए देखिए

337
00:23:03,280 --> 00:23:08,400
आप एग्रेसिव मत होइए। अग्रेसिव मत होइए। डिस्कशन व्याख्या मुझे

338
00:23:08,400 --> 00:23:12,560
व्याख्या कर रहा हूं। मुझे करने दीजिए भाई साहब। अग्रेसिव इसलिए करता हूं क्योंकि आप

339
00:23:12,560 --> 00:23:16,880
ओवरलैपिंग करते हैं। तब मुझे अग्रेशन आएगा। ठीक है? अधर्म

340
00:23:16,880 --> 00:23:20,960
का जहां पर अधर्म हो रहा होगा तो वहां अग्रेशन आ सकता है। तो या तो ओवरलैपिंग आपने

341
00:23:20,960 --> 00:23:25,280
एक बार कह दिया कि सनातन की व्याख्या करिए। उसके बाद आप सुनिए। मैं व्याख्या

342
00:23:25,280 --> 00:23:31,040
करूंगा सनातन की। ठीक है?

343
00:23:31,040 --> 00:23:35,360
हमें नहीं आता। आप करिए सनातन का। मैं आपसे सुनना चाहता हूं।

344
00:23:35,360 --> 00:23:39,360
हां। मैं करिए। अब आप हां कर रहा हूं। चुप रहिए आप।

345
00:23:39,360 --> 00:23:44,000
फिर मेरा भी सुन रहा हूं बाद में। हां। हां। हां। हां।

346
00:23:44,000 --> 00:23:48,000
एक मिनट। ठीक है। दूसरे का नहीं सुनते। ये प्रॉब्लम है।

347
00:23:48,000 --> 00:23:53,200
आप दूसरे का भी सुन लो। देखा? नहीं सुनना है आपको।

348
00:23:53,200 --> 00:23:57,280
सुनाओ। नहीं आप दूसरे का भी सुनो मेरा भी सुनो ये कह रहा हूं मैं आप बोलो

349
00:23:57,280 --> 00:24:01,280
फिर मेरा सुनो ये कहने का ये मेरा रिक्वेस्ट है आपसे ये मेरा रिक्वेस्ट है आपसे

350
00:24:01,280 --> 00:24:05,520
ठीक है ठीक है सुनूंगा अब मैं बोलूं हां

351
00:24:05,520 --> 00:24:09,520
हां ठीक है अभी जब आपसे बातों की शुरुआत हुई थी

352
00:24:09,520 --> 00:24:13,600
तो आपने ये कहा था कि वहां का जो सुख होता है वो

353
00:24:13,600 --> 00:24:17,600
खत्म हो जाता है और जो मुझे ये यहां से ब्रह्मा कुमारी से

354
00:24:17,600 --> 00:24:21,600
जो सुख मिलता है वो खत्म नहीं होता है। फिर मैंने आपसे

355
00:24:21,600 --> 00:24:25,680
जब पूछा कि भाई वो जन्मांतर में वह तो खत्म होने वाला सुख है तो

356
00:24:25,680 --> 00:24:29,920
आपने यह बताया कि जन्मांतर वाला सुख तो खत्म होगा मगर इसी जन्म

357
00:24:29,920 --> 00:24:34,000
वाला सुख खत्म नहीं होगा जबकि

358
00:24:34,000 --> 00:24:38,240
हां भाई साहब बीच में मत बोलिए प्लीज हां बीच में मत बोलिए

359
00:24:38,240 --> 00:24:42,800
ठीक है हां जबकि इस जन्म वाला सुख भी जो है आपका बाधित है

360
00:24:42,800 --> 00:24:46,080
आपकी ओर कोई हाथ घुमाएगा मारने के लिए

361
00:24:46,080 --> 00:24:50,080
तो आपकी पलकें झपकेंग कि नहीं हां यही

362
00:24:50,080 --> 00:24:54,160
प्रश्न आपने और किसी को भी पूछा था मुझे याद आया। ये आप देह की बात

363
00:24:54,160 --> 00:24:58,160
पूछ रहे हैं। ये देह की बात पूछ रहे हैं आप। पहली बात आपको बता

364
00:24:58,160 --> 00:25:02,720
दो शिवश भाई प्रॉब्लम क्या है? प्रॉब्लम क्या है? बता दो। आपके

365
00:25:02,720 --> 00:25:06,720
प्रश्न देखो भैया देखो आपके प्रश्न ही गलत है। प्रश्न ही गलत

366
00:25:06,720 --> 00:25:10,800
है तो मैं क्या उत्तर दूं? ठीक है। ठीक है। आप प्रश्न तो सही पूछो मेरे

367
00:25:10,800 --> 00:25:14,880
भाई। आप देखो एक तरफ देह में जा रहे हो। एक

368
00:25:14,880 --> 00:25:19,440
तरफ देह में जा रहे हो। एक तरफ विदेह में जा रहे हो। आप लोगों को मिस कर दे रहे हो।

369
00:25:19,440 --> 00:25:23,520
आप इस समय देह से नहीं जुड़े हुए। अरे भैया तो देह

370
00:25:23,520 --> 00:25:28,240
की बात कर रहे हो तो देह पे रहो। फिर आत्मा की बात कर रहे हो तो आत्मा में रहो।

371
00:25:28,240 --> 00:25:32,240
मैं पूछ हमें यहां जो पढ़ाई मिलता है देखिए

372
00:25:32,240 --> 00:25:37,040
मैं क्या कहा? मैंने शुरू में क्या कहा कि

373
00:25:37,040 --> 00:25:41,280
भाई साहब अभी आपकी आवाज कोई सुन नहीं पा रहा है। आप म्यूट पे हो। मेरा प्रश्न समझ लो।

374
00:25:41,280 --> 00:25:46,160
मेरा प्रश्न यह है कि क्या आप देह से जुड़े हुए हैं अभी कि नहीं?

375
00:25:46,160 --> 00:25:50,240
आप देह से जुड़े हुए हैं। आत्मा आपकी देह से जुड़ी हुई है या देह से मुक्त है।

376
00:25:50,240 --> 00:25:54,240
अभी फिलहाल अभी मैं आपको वो कर रहा हूं। अनम्यूट आप अपना जवाब

377
00:25:54,240 --> 00:25:58,240
बोले। बोलिए। देह से मैं देह

378
00:25:58,240 --> 00:26:01,440
में होते हुए मैं देह से न्यारा हूं।

379
00:26:01,440 --> 00:26:05,600
ठीक है। वो मैं आत्मा हूं। वो मैं आत्मा हूं। देह में

380
00:26:05,600 --> 00:26:09,760
देह में देह से जुड़े हुए हो कि नहीं जुड़े हुए हो? देह से आने वाले

381
00:26:09,760 --> 00:26:12,400
देह के अंदर

382
00:26:12,400 --> 00:26:16,480
देह मेरा रथ है। ये देह मेरा रथ है। उसी में हूं। एक मिनट

383
00:26:16,480 --> 00:26:20,480
भाई साहब मैं फिर से आपको अभी आप अनम्यूट अभी आप म्यूट है मैं आपको

384
00:26:20,480 --> 00:26:24,720
अपना प्रश्न फिर से बता दूं। देह से आने वाली जो सूचनाएं हैं

385
00:26:24,720 --> 00:26:28,880
वो आत्मा उससे प्रभावित हो रही है कि नहीं हो रही है ये मैं पूछ रहा हूं। जो

386
00:26:28,880 --> 00:26:32,880
देह से आने वाली सूचनाएं हैं कष्ट सुख और दुख की सूचनाएं

387
00:26:32,880 --> 00:26:36,960
वो आपको आपकी आत्मा को प्रभावित कर रही है कि नहीं कर रही है। पूछ रहा हूं।

388
00:26:36,960 --> 00:26:41,200
अभी मैं आपको अनम्यूट करूंगा तब बोलिए आप। बिल्कुल

389
00:26:41,200 --> 00:26:45,280
जी बिल्कुल होती है क्योंकि कान से जो सुनता है तो आत्मा उसको सुन रहा

390
00:26:45,280 --> 00:26:49,600
है। यानी से जो बोल रहा है यानी

391
00:26:49,600 --> 00:26:53,680
कि यानी कि आत्मा प्रभावित हो रही है ना आत्मा

392
00:26:53,680 --> 00:26:57,760
को प्रभावित हो रही है। हां हो रही है। क्यों नहीं हो रहा?

393
00:26:57,760 --> 00:27:02,400
यानी कि आत्मा को दुख हो रहा है। दुख कैसे हुआ इसमें?

394
00:27:02,400 --> 00:27:07,200
दुख कैसे हुआ भाई? ये कौन सी बात हुई? दुख हो रहा है। जबरदस्ती बोल रहा हूं। दुख हो रहा है। मैंने

395
00:27:07,200 --> 00:27:11,760
बोल रहा हूं कि मैं बोल रहा हूं। मैं बोल रहा हूं कि मेरा यह

396
00:27:11,760 --> 00:27:16,000
एक मिनट अभी आप अभी आप फिर से म्यूट है। मैं आपको अपना प्रश्न समझा

397
00:27:16,000 --> 00:27:16,640
दूं।

398
00:27:16,640 --> 00:27:20,800
शरीर को दुख पहुंच रहा है। टांग टूट रही है। आंख आंख फूट

399
00:27:20,800 --> 00:27:24,880
फूट रही है। आपके स्पाइन में प्रॉब्लम है। आप शरीर को

400
00:27:24,880 --> 00:27:28,880
आपके शरीर को दुख हो रहा है। ठीक है। ठीक है ना। अब ये

401
00:27:28,880 --> 00:27:32,880
जो दुख हो रहा है। आत्मा इससे दुख से प्रभावित हो रही

402
00:27:32,880 --> 00:27:37,040
है कि नहीं हो रही है? अन म्यूट कर रहा हूं। जो भी शरीर में होता

403
00:27:37,040 --> 00:27:41,120
है आत्मा को इंफॉर्मेशन जाता है। प्रभावी जिसको बोल

404
00:27:41,120 --> 00:27:45,280
रहे हो उसको हम कहते हैं इंफॉर्मेशन जा रहा है। यानी मेरे टांग में दर्द है।

405
00:27:45,280 --> 00:27:50,160
उसका इंफॉर्मेशन आत्मा को आएगा क्योंकि स्नायु शक्ति के जरिए वो आत्मा में आता है।

406
00:27:50,160 --> 00:27:54,240
आत्मा में जो आता है आत्मा पहली बात तो मैं बताऊं शिवश आत्मा क्या आपको

407
00:27:54,240 --> 00:27:58,240
मालूम नहीं है। पहले तो आप सीधा जा रहे हो कहां चले?

408
00:27:58,240 --> 00:28:02,320
भटकाओगे तो मुझे आपको म्यूट करना पड़ेगा। भाई साहब भटकाओगे तो

409
00:28:02,320 --> 00:28:06,400
म्यूट करना पड़ेगा प्लीज। आप अपनी बात कहिए। आत्मा मालूम है कि नहीं मालूम

410
00:28:06,400 --> 00:28:11,920
है वह अलग बात है। अलग चैप्टर है। अभी बात हो रही है। आपको दुख होगा कि नहीं होगा? ठीक है।

411
00:28:11,920 --> 00:28:16,000
हां। आप अपने आप को हार मान रहे हो।

412
00:28:16,000 --> 00:28:20,000
आप अपने आप को हार मान रहे हो। फिर आप फिर आप फालतू की बात बोल रहे हो। आप

413
00:28:20,000 --> 00:28:24,080
चैप्टर अगर अच्छा कैसे फालतू? अच्छा आप आपने बोल दिया ब्रह्मा

414
00:28:24,080 --> 00:28:29,760
कुमार आप जा सकते हैं। भाई साहब

415
00:28:29,760 --> 00:28:32,000
मैं फिर आपसे निवेदन कर रहा हूं। आप

416
00:28:32,000 --> 00:28:36,160
जब आप विषय मत बदलिए। विषय मत बदलिए। मैं आपसे निवेदन पूर्वक

417
00:28:36,160 --> 00:28:42,160
बात कर रहा हूं। मैं आपसे निवेदन पूर्वक बात कर रहा हूं। विषय मत बदलिए।

418
00:28:43,600 --> 00:28:48,000
अनम्यूट करूं आपको? अनम्यूट करूं?

419
00:28:48,000 --> 00:28:52,560
अनम्यूट करूं? विषय मत बदलिए। भाई साहब विषय यह चल रहा है

420
00:28:52,560 --> 00:28:56,720
कि जो शरीर के माध्यम से हमें सूचनाएं प्रदान आदान प्रदान

421
00:28:56,720 --> 00:29:00,720
हो रही हैं तो उसके कारण आपको दुख कष्ट

422
00:29:00,720 --> 00:29:04,800
पहुंच रहा है कि नहीं पहुंच रहा है इस समय अविनाशी दुख है या

423
00:29:04,800 --> 00:29:08,800
अविनाशी सुख है आपको क्या है आप अगर

424
00:29:08,800 --> 00:29:12,800
इधर-उधर की बातें करेंगे कि आपको आपको जो है वो नहीं पता है आत्मा

425
00:29:12,800 --> 00:29:16,880
नहीं पता है आप ये कहेंगे आप अगर यह कहेंगे आपको कोई सुन नहीं

426
00:29:16,880 --> 00:29:20,960
पा रहा है मैं भी नहीं सुन रहा हूं आप आप म्यूट है इस समय

427
00:29:20,960 --> 00:29:25,040
इस समय म्यूट है। इसलिए म्यूट है क्योंकि आप विषयांतर कर रहे हैं।

428
00:29:25,040 --> 00:29:30,000
विषयांतर करने से निष्कर्ष पूर्ण चर्चा नहीं होती है। ठीक है?

429
00:29:30,000 --> 00:29:34,240
ठीक है? नहीं करनी है आपको चर्चा। मैं मैं आपसे

430
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लास्ट बार पूछ रहा हूं। आपको करनी है कि नहीं करनी है। करनी है तो विषय पर रहिए। हां या

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ना बता दीजिए मुझे। विषय पर रहकर करनी है चर्चा। विषय

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पर मैं हां या ना बताइए। विषय पर रहेंगे।

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यह सब मत यह सब मत करिए। आप विषय पर रहेंगे?

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विषय पर रहकर बात करेंगे। भाई साहब निवेदन है मेरा।

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हां ठीक है। विषय पर रहिएगा। गुड

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हां तो मेरा प्रश्न ये है। आप क्यों भाग रहे हैं? हां। मेरा प्रश्न

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ये है। भाई साहब अब आपने एक भी बार ये सब बोला ना भाग। आपको मैंने

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बोला था ना कि आपको मैंने बोला था ना भैया कि कट नहीं करना वीडियो को। तो आप कट कर

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आप जा सकते हैं भाई साहब

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लिंक दे दीजिए कोई और आना हो तो आ सकता है किसी और को आना हो तो
