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00:00:02:21 एक बहुत महत्वपूर्ण बात है जो अभी पिछले कुछ दिनों भगवतानंद इत्यादि से बात करते समय उठी है कि शंकराचार्य जो है अकाट्य होते हैं। यह बात उठी कि तुम यह क्यों कहते हो कि शंकराचार्य अकाट्य है। उनके मुख से निकलने वाला वाक्य जो है ब्रह्म वाक्य। ये क्यों कहते हो? पहली बात तो मेरी बात सुनो। ब्रह्म वाक्य भी प्रमाण नहीं है। सोच के देखो हमारे यहां क्या हुआ? परंपरा प्राप्त जो ज्ञान विज्ञान है उसके विरोध में बोलने आए ब्रह्म बुद्ध अवतार ब्रह्म ही थे ना। ब्रह्म वाक्य वाक्य भी प्रमाण नहीं है। किसके आगे? परंपरा प्राप्त गुरु गोविंद और ग्रंथ के जो सामंजस्य से जो ज्ञान प्राप्त है उसके विरोध में ब्रह्म स्वयं भी आ गए अवतरित हो गए कहने लगे मत मानो वेद को तो माना क्या उसको बात को किसकी बात मानी गुरुओं की बात मानी परंपरा प्राप्त आचार्यों की बात मानी ना मान लेते तो बन जाओ आज बौद्ध तुम भी तो जो लोग ये कह रहे हैं कि ये मत कहो कि शंकराचार्य
00:01:17:25 अकाट होते हैं वो ये सुन ले बहुत जरूरी चीज है सुनने की मैं इस दुनिया में ये वाली जो दुनिया है ना इस दुनिया में ऐसे ही नहीं आया हूं सामान्य तरीके से मैं पहले अधर्म से विधर्मियों से रामपालियों से अपने जीवन में भिड़ा जी और एक जो सामान्य सा जीवन जी रहा होता है जिसके जीवन का लक्ष्य केवल होता है कंजपशन कंजपशन वैसा जीवन जीने वाला व्यक्ति मालूम ही नहीं है कि जीवन का उद्देश्य मोक्ष है। जीवन का उद्देश्य भगवत प्राप्ति है। भक्ति है। यह सब कुछ नहीं मालूम। केवल कमाना है खाना है। कमाना है खाना है। कमाना है खाना है। हां मगर यह सवाल जरूर होता था मन में तम ज्योतिया जिसके कारण आज मैं यहां आ गया। ये बात अच्छी है कि प्रारब्ध में कुछ ऐसे कर्म किए थे कि किसी ऐसे घर में जन्म मिल गया जहां पर राम के बारे में मुझे बचपन से बताया गया। जहां मुझे हनुमान चालीसा दी गई पढ़ने को। यह एक भाग्य था, प्रारब्ध था। तो मैं जो है इस रूप में नहीं आया कि मैं जो एक वंश परंपरा से मेरे यहां पर जो है शंकराचार्य को माना जा रहा हो या
00:02:32:28 वो हमारे कुलगुरु रहे हो। इस कारण से मैं अभी उनके यहां आ गया और आज जो है शंकराचार्य का अगर कोई विरोध करेगा तो मैं जो है उसके पीछे पड़ जाऊंगा। उसका विरोध करने लगूंगा क्योंकि शंकराचार्य को शंकराचार्य के प्रति मेरी अंधभक्ति है। सुनो मैं कैसे आया। जब एक मुसलमान से मेरी धर्म और अधर्म को लेकर के चर्चा होने लगी। जब मेरा धर्म, मेरे धर्म का अस्तित्व, मेरे धर्म का पक्ष मुझे रखना था तो एक सवाल अटका। वो व्यक्ति भी कौन था? इसको भी समझो। क्षत्रिय कुल में उत्पन्न और मेरे साथ व्यायाम करता था, वर्कआउट करता था। हालांकि उससे पहले भी मैं ऐसी स्थितियां से जूझ रहा था। मगर एक होता है ना कि जैसे घड़ा भर जाता है। तो वो घड़ा भरने वाली जो स्थिति थी वो यह था। यह व्यक्ति वो मेरे साथ व्यायाम करता था। एक दिन वह मेरे घर पर आया। मैंने उसे भोजन के लिए बुलाया था। भोजन पा लेने के बाद हम लोग जब बैठे बात करना शुरू किया
00:03:48:19 तो मैंने उससे उसका जो आध्यात्मिक दृष्टिकोण है वो पूछ लिया सौभाग्य से मेरा सौभाग्य था कि मैंने पूछ लिया तो जब मैंने इससे ऐसा पूछा तो वो बोलता है मुझे इस्लाम बहुत पसंद है। अच्छा तब मेरे लाइफ अच्छा एक टर्निंग पॉइंट और है जो इस से जुड़ा हुआ है। वो कभी और बताऊंगा। एक यह टर्निंग पॉइंट है। तो मेरा एकदम से यह हुआ यह क्या तो उसके बाद से मेरी खोज शुरू हुई उसके बाद उसके पहले जो अध्ययन था वह था मगर उसके बाद से खोज शुरू हुई तो फिर उससे तर्क वितर्क चालू हुए कि नहीं क्यों सनातन इज बेस्ट वो बोल रहा है इस्लाम इज बेस्ट तो ये सब चीजें चालू हुई उससे जूझते समय एक समय आया जब वो मुझे वेद के भाष्य अपने अनुरूप बता रहा था है ना? वेदों का अर्थ वो अपने अनुरूप मुझे बता रहा था। तो समस्या यह आई मैंने कहा तुम्हारे नहीं माने जाएंगे। उसने कहा तुम्हारे क्यों माने जाएंगे? क्या जवाब था इसका? बताओ। अगर हमने परंपरा को छोड़ दिया। परंपरा प्राप्त गुरुओं को छोड़ दिया तो वेद के इस मंत्र के कई अर्थ निकल सकते हैं।
00:05:03:22 यही अर्थ क्यों माना जाए? इसका क्या जवाब होगा? यह जो मूर्ख लोग हैं, धूर्त लोग हैं, मूर्ख वो जो आज भगवतानंद के चक्कर में शंकराचार्य की अकाटता को चुनौती दे रहे हैं। और धूर्त वो जो अपने संगठन बनाने के चक्कर में आर्य समाज जैसे लोग वो परंपरा प्राप्त आचार्यों पर जब गण में जाओगे तो तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा इस बात का कि तुम्हारा क्यों माना जाए। एक समय आएगा जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकल रहे होंगे तब तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा ऐसा उत्तर दोगे जिसको जो मानना है वो मान यही उत्तर तो दोगे बहुत बड़ी बात है यही समय आया था मेरे पास उस मुस्लिम से जूझते हुए कि मेरा उत्तर क्यों मान्य तो मैंने कहा कि इसलिए मान्य क्योंकि यह परंपरा प्राप्त आचार्य बता रहा है। यह वह बता रहा है जिसने अपने गुरु से यह वेद लिए थे। ये वेद जाकिर नायक के पास आए कैसे? मुस्लिमों के पास आए कैसे? जिससे आए उस
00:06:18:24 पर अविश्वास नहीं कर सकते ना। तो वेद किसी ना किसी प्रकार से यहां पर आ रहे हैं ना। परंपरा से आ रहे हैं ना। तो परंपरा को हम मना नहीं कर सकते। परंपरा प्राप्त आचार्यों को हम मना नहीं कर सकते। उन पर अविश्वास प्रकट नहीं कर सकते। अविश्वास प्रकट कर दिया परंपरा प्राप्त आचार्य पर तो उससे प्राप्त होने वाले हमें वेदों पर भी अविश्वास हमारा सिद्ध हो जाएगा। और फिर तुम धर्म की रक्षा कैसे करोगे? फिर तो यही करोगे कि जो तुम्हारे विरुद्ध खड़ा है तुम्हारे पास भले ही उसका कोई वैचारिक उत्तर हो ना हो बस तुम उससे तलवार से लड़ोगे बस। मैं सही क्यों हूं? तुम ये नहीं सिद्ध कर पाओगे। केवल तुम लड़ पाओगे हथियार लेकर के। फिर तुम्हारे साथ कौन खड़ा हो कौन नहीं खड़ा हो बातें बात की है। तुम्हारे पास वैचारिक उत्तर नहीं होगा। तो मैं हिंदुओं का ध्यान दिलाना चाहता हूं। क्या कि वेद और ईश्वर के वेद और ईश्वर के संबंध में प्रमाण क्या है? प्रमाण वेद और ईश्वर के संबंध में कि हां कृष्ण ईश्वर है। हां वेद ही धर्म है। क्या प्रमाण है इसके संबंध में तुम्हारे
00:07:33:27 पास? मैं आज उन हिंदुओं से पूछ रहा हूं जिन्होंने भगवतानंद के चक्कर में यह कहा कि शंकराचार्य अकाट नहीं होते। यह कहना गलत है। सिद्ध करो शंकराचार्य अकाट होते हैं। तो तो भाई वेद और ईश्वर के संबंध में जो प्रमाण है ना वह प्रमाण है शब्द प्रमाण। किसी ने तुमको कहा है कि यह ईश्वर की वाणी है तो वह ईश्वर की वाणी है। अगर कहने वाले के प्रति तुमने अविश्वास खड़ा कर दिया तो फिर वो शब्द प्रमाण तुमने अपना खत्म कर दिया। कर दिया। तो फिर तुम्हारे पास कोई प्रमाण नहीं है कि वह वेद ईश्वर की ही वाणी है। राम ईश्वर है। कृष्ण ईश्वर है। वेद के द्वारा बताया गया धर्म धर्म है। तो अपने एक शब्द प्रमाण को तो तुम्हें बचा के रखना ही होगा ना। अगर तुमने सब पर झूठ झूठा होने का आरोप लगा दिया तो तुम्हारा वो शब्द प्रमाण खत्म। तुमने हिंदू धर्म को वैचारिक रूप से नष्ट कर दिया। और जब विचार ही नहीं है हिंदू धर्म का तो व्यवहार कहां से बचेगा? कहां से बचेगा? इसलिए कहता हूं इसलिए लड़ता मरता हूं शंकराचार्य की
00:08:48:28 अकाटता के पीछे। क्योंकि जिस दिन तुमने अपने परंपरा प्राप्त सभी गुरुओं में दोष दृष्टि रख के और उनके प्रति अविश्वास प्रकट कर दिया उस दिन तुमसे तुम्हारा शब्द प्रमाण छीन लिया जाएगा छीन जाएगा तुम्हारी अपनी वाणी के द्वारा तुम देखो शंकराचार्य झूठ बोलते हैं शंकराचार्य ने यहां ये झूठ बोला ये वो किया ये उनकी अकाष्टता की रक्षा के लिए प्रयास मत करो तुम उनकी दोष दृष्टि रखो और उनहीं की नहीं जितने आचार्य परंपरा प्राप्त सब पर तुमने दोष दृष्टि डाल ली। वैसे भी गिने चुने कुछ बचे हैं और उनकी सब पर तुमने विश्वास अविश्वास प्रकट कर दिया तो तुम्हारे पास क्या क्या शब्द प्रमाण रह जाएगा? वेद को वेद मानने के लिए वेद को धर्म मानने के लिए वेद को अपारुषय मानने के लिए क्या शब्द प्रमाण रह जाएगा? कैसे कहोगे ये वही वेद है जो वहां ऋषियों से चल के आए हैं। कैसे अपना धर्म सिद्ध करोगे? और जब सिद्ध नहीं कर पाओगे तो ये व्यवहारिक ये तो आनी है। फिर आगे और नाश करोगे। इसलिए शंकराचार्य की अकाटता इसलिए परंपरा प्राप्त आचार्यों की अकाटता की रक्षा करनी होगी। अपने शब्द प्रमाण को बचाने के लिए ये इसमें डालो इस बात को वेद वेद अपश्य है। ये ये गुरु शिष्य परंपरा
00:10:04:09 ने ही बताया। यही चीज यही चीज ना मुझे भी समझ में आई थी। और आर्य मां जी इस चीज को समझते नहीं है कि भाई तुम वेद में तो कहीं स्पष्ट रूप से लिखा नहीं हुआ कि वेद अपष है। बताया किसने? परंपरा प्राप्त आचार्यों ने अच्छा वहां से तुमने वो तो ले लिया कि वेद अपोरष है वो तुम बताते फिर रहे हो लेकिन तुम उस परंपरा को नकार दे रहे हो जैसे कि आपने कहा कि जो परंपरा को नकार दिया तो फिर वेद अपष है ये तुम तक कैसे आया तुम्हें वो सिद्ध करना पड़ेगा तो ये बहुत बड़ा सिद्धांत आपने जो पांच सिद्धांत बताए हैं ये मैं तो कह रहा हूं लिख लेने चाहिए जो भी वीडियो को इसको अभी देख रहे हैं या आप बाद में देखेंगे वो इन पांच सिद्धांतों को अगर लिख के रख लेंगे तो आपको कोई भी डाउट डाउट होगा ही नहीं। कोई संशय होगा ही नहीं। धर्म को लेकर के सनातन धर्म मूल रूप से है क्या? जी। तो कहने का अर्थ यह है कि आपको अपने शब्द प्रमाण की रक्षा करनी होगी। अपने शब्द प्रमाण के प्रति इस प्रकार से अविश्वास अनास्था प्रकट करते रहोगे तो तुम पर ही हावी होगा ना सामने वाला के। वेद का अर्थ तू क्यों करेगा? मैं क्यों नहीं करूंगा? करूंगा मैं वेद का अर्थ निकालूंगा भैंसे की बलि गाय की बलि वेदों से
00:11:20:09 मैं करूंगा ना अर्थ मैं करूंगा मैं निकालूंगा चचेरे में मेरे फुफेरे भाइयों भाइयों से शादी करने का अर्थ मैं निकालूंगा तू क्यों निकालेगा तो आप अपने धर्म की रक्षा नहीं कर पाएंगे अगर आपने अपने शब्द प्रमाण पर हमला कर दिया उसके प्रति अविश्वास प्रकट कर दिया तो इसलिए जो मेरे जीवन में जो शंकराचार्य के लिए जो अकाट्य शब्द आया है ना वो ऐसे नहीं आया कि मैं जो मेरे कुल परंपरा में शंकराचार्य पद की पूजा होती है या किसी कारण से मुझे वह अच्छे लगे और मैं उनके अनुगत हो गया। भाई जब तर्क करने जाओगे ना जब कहीं निकलोगे किसी से सामना होगा ना तब यही सिद्धांत काम आएंगे जिनका आज तुम पीछे पड़े हो यही शंकराचार्य काम आएंगे जिनको आज तुम कह रहे हो कि नहीं ये है वो है और अगर ये लोग जो ऐसा कर रहे हैं प्रश्न शंकराचार्य को अकाट्य क्यों कह दिया हंसी कर रहे हैं। यह लोग चाहे तो शंकराचार्य के उन वाक्यों का बहुत अच्छा समाधान है जिसको लेकर के लोग आवाजें मतलब ये खिचड़ी पका रहे हैं। ती तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र और ये सब बातों ये जो भगवत आनंद ने अपने YouTube वीडियोस में वही वही अगर चाहे तो इन पंक्तियों की रक्षा वो स्वयं कर सकता है। मुझे मालूम है उसमें इतना सामर्थ है।
00:12:36:02 वो अगर तर्क करने पर आएगा। वो इन सिद्धांतों की ये जो वाक्य है शंकराचार्य के इन वाक्यों की रक्षा वह स्वयं कर सकता है। मगर वह क्या कर रहा है? ऐसी चीजों का फायदा उठा रहा है जिस पर कि कोई कुछ बोला नहीं जा रहा है। हालांकि हमने अपने वीडियोस में भी बता दिया। मगर बात यह है कि यदि आपने अपने शब्द प्रमाण को ही खंडित कर रखा है तो अंतत गत्वा आप अपने धर्म के दुश्मन कहलाएंगे। आपको अपने शब्द प्रमाण को बचाना होगा। और अगर तुम शंकराचार्य को छीन रहे हो समाज से। परंपरा प्राप्त आचार्यों को छीन रहे हो समाज से और तुम स्वयं को सनातनी और हिंदू कहते हो तो दो ना उन्हें दूसरा विकल्प विकल्प तो दो कि ये हमारा शब्द प्रमाण है और वो होना चाहिए शब्द प्रमाण परंपरा प्राप्त आचार्य होना चाहिए लक्षण संपन्न सन्यासी होना चाहिए वैदिक वांगमय का गाता होना चाहिए संशय दूर कर सकने वाला होना चाहिए दो विकल्प तब तुम्हारे हाथ हाथ खड़े हो जाएंगे। अरे औरों की छोड़ो। अपनी परंपरा नहीं बता पा रहे हो। और शब्द सनातन धर्म के शब्द प्रमाण तुम हमला कर रहे हो। गुरु क्या है? गुरु शब्द
00:13:51:06 प्रमाण है। शंकराचार्य क्या है? शंकराचार्य शब्द प्रमाण है। वो कह रहा है ये वेद है। यह आया है वहां सृष्टि के प्रारंभ से अब तक और तुम अपने शब्द प्रमाण के विरोध में आसानी से आवाजें उठा लोगे कि नहीं वह अकाट नहीं होते यह है वह है तो जरा सोचो जब मुस्लिमों से नास्तिकों से विधर्मियों से सामना होगा तब यही शब्द प्रमाण तुम्हारे काम आएगा जब आर्य समाजियों से बात होती है तो यही तर्क तो प्रस्तुत किया जाता है कि जहां से तुम्हारे पास वेद आए जहां से तुम्हारे पास मंत्र आए वहां से अर्थ भी आया अर्थ क्यों नहीं मान रहे हो अर्थ नहीं मान रहे हो तो वेद क्यों मान रहे हो वेद मान रहे हो तो अर्थ क्यों नहीं मान रहे हो तो अगर तुम उसके प्रति अविश्वास प्रकट कर दोगे अपने अकाट उनकी अकाट्यता पर आप जब उंगली उठा दोगे तो आप अपने धर्म का नाश करोगे। ठीक है? और मैं इसलिए अकाट्य बोलता हूं। मेरे उनकी अकाट्यता के लड़ने का कारण ये है क्योंकि मुझे आगे लड़ना है। तुमसे नहीं लड़ना है। जी। मुझे आगे जाना है। आगे युद्ध खड़ा है। युद्ध की घड़ी आगे है। वहां लड़ना है।
00:15:06:19 वहां मैं इन चीजों को अगर सुरक्षित नहीं रखूंगा अपने शब्द प्रमाण को तो वहां नहीं लड़ पाओ। तुम लोग इन इस दूर दृष्टि को नहीं देखोगे। तुम्हारे पास इतनी दूर दृष्टि नहीं है। ना भगवतानंद के पास है। भागवतानंद तुम्हारे लिए भी मैं कह रहा हूं। तुम्हारे पास भी वह दूर दृष्टि नहीं है। तुम अपने सनातन धर्म के जो साक्ष्य है तुम्हारे पास उन पर हमला कर रहे हो। और जबकि तुम्हारे पास इतना सामर्थ्य है कि जो प्रश्न तुम उठा रहे हो उनका उत्तर तुम स्वयं दे सकते हो।
00:15:38:16 ठीक है? खैर अब इसमें एक बात आती है। एक बात और कर लूं मैं। आप बोल आप बता दीजिए आप कुछ कह रहे थे। फिर मैं आपकी बात पूरी कर। हां मैं ये कह रहा हूं कि अभी जो ये हो रहा है ना वेस्ट बंगाल में जो आज की हमारी स्ट्रीम का टॉपिक भी है तो वो इसलिए भी हो रहा है क्योंकि वर्ण व्यवस्था जो जन्म से नहीं मानी लोगों ने उसको जन्म से ना मानकर इन्होंने जो वैकल्पिक रूप से कर दी ये भी बहुत बड़ा कारण है। मुझे याद है जब ये डायरेक्ट एक्शन डे हुआ था तो उसमें एक गोपाल पाठा नाम का एक व्यक्ति था जो कि अपना कसाई था वो पर वो क्षत्रिय वर्ण से था। उस व्यक्ति ने ने जो है वह अपना धर्म को फॉलो किया और गोपाल पाठा ने एक ही दिन में जब प्रत्युत्तर देना शुरू किया तो जो सामने वाला पक्ष था जिसने दो दिन में कितने नरसंहार कर दिया था हिंदुओं का वो पक्ष रुक गया इवन महात्मा गांधी जी को यहां से जाना पड़ा गोपाल पाठा के हाथ पांव जोड़ने पड़े कि भाई रुक जा मत यह कर तो गोपाल पाठ ने कहा कि अगर मेरे हिंदू हिंदुओं पे अगर कोई भी विधर्मी अगर कुछ भी करेगा तो मैं यह तब तक नहीं रोकूंगा जब तक मैं 10 गुना मारकाट नहीं कर दूं तो वो व्यक्ति क्षत्रिय वर्ण का था। हमारे वर्णाश्रम जो है वो जन्म से हटा
00:16:53:18 दिया गया। इसीलिए आज बंगाल की ये स्थिति हो गई है। यह बात समझ में नहीं आ रही है लोगों को। आर एस मांझी क्या कर रहे हैं? ब्राह्मण बना रहे हैं सबको। अब सब सबको तुम ब्राह्मण ही बना दोगे। तो जो क्षत्रिय वाला काम है वह करेगा कौन? क्षत्रिय वाला काम कोई करेगा नहीं। और तो फिर उसी में क्या होता है कि हिंदू भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा क्योंकि आपके पास क्षत्रिय है ही नहीं क्योंकि आपके पास क्षत्रिय कौन है? वैकल्पिक रूप से मिलिट्री और पुलिस वाले और पुलिस वाले किसके अधीन है? सरकार के अधीन वो तो आएंगे नहीं ग्राउंड लेवल पर रक्षा करने। तो जहां पर जब वो जन्म से अगर कोई क्षत्रिय होगा वही व्यक्ति लड़ पाएगा। अभी देखा ना महाराणा सांगा सांगा राणा सांगा के लिए कुछ कहा था एक व्यक्ति ने संसद में तो क्या किया उन क्षत्रिय लोगों ने जो जन्म से राजपूत थे उन्होंने उसकी ईंट से ईंट खड़ी कर दी उसके घर को घेर लिया था मैंने वो वीडियो देखे उनमें उन भाइयों की जो क्षत्रिय कुल के थे यहां से पूरा छिल गया पूरे शरीर लेकिन उनके उफ तक नहीं है मुंह पे और वह कह रहे हैं कि हम अभी भी लड़ेंगे हमारे जो राणा सांगा के लिए अगर किसी ने कोई भी गलत बात कही तो हम उसको छोड़ेंगे नहीं तो वो होते हैं जन्म से क्षत्रिय वाले तो वर्ण को जन्म से नहीं मानोगे तब भी यह प्रॉब्लम आएगी तो हिंदुओं को भागने पर खड़ा होना पड़ेगा तो ये एक पॉइंट था ये एक
00:18:08:21 मोहतरमा है या कौन है ये रिद्धिमा कपूर ये कह रहे हैं कि भारत के कई टुकड़े कर दिए कि हिंदू केवल अकाट्य प्रमाण का प्रत्तर देता रह गया तो ये आपके लिए था जो मैंने अभी कहा है अरे इन ऐसे लोगों को मुझे लेने दिया करिए मेरे मैं ऐसे लोगों के लिए मुझे लगता है मेरा जन्म है भारत के कई टुकड़े हो गए और हम क्या करते क्या बोला इन्होंने? क्या बोला? भारत के कई टुकड़े हो गए और हिंदू केवल अकाट्य प्रमाण से प्रतिउत्तर देता रहा। हां, इसमें एक लाइन और जोड़ दीजिए एक लाइन और जोड़ दीजिए कि हिंदू केवल YouTube पे कमेंट करता रहा। हां हिंदू केवल YouTube पे कमेंट कर रहा है। बिल्कुल। मैं ऐसे ही लोगों के लिए जन्मा हूं ना। वही फैसला ऑन द स्पॉट। जी जी। है ना? भारत के कई टुकड़े हो गए। मगर हिंदू केवल क्या करता रहा? दूसरे की किसी की फोटो दूसरे को बदनाम करने के लिए और वो YouTube पर जाकर कमेंट करता रहा। हो गया दिल इनका नकली है। हां नकली है। दिल गार्डन गार्डन हो गया। खैर खैर जी मैं ये कह रहा था अब एक बात आती है जो हमने अभी बात की ना कि अपने शब्द प्रमाण को आप जो है आघात पहुंचा रहे हो। अपने वैसे ही आचार्य कम है परंपरा प्राप्त। मगर आप जब अपने परंपरा प्राप्त आचार्यों पर अविश्वास प्रकट कर रहे हो
00:19:23:25 तो आप जो है हिंदू धर्म को ही सनातन को नष्ट नष्ट करने पर तुले हो। खैर अब बात आती है कि इसमें एक चीज आ जाएगी कि भाई गुरु अगर कोई ऐसा आचरण करे जो कि हमारे सनातन धर्म के विरुद्ध हो तो हम उसमें दोष दृष्टि ना रखें। ठीक है? तो यहां पर दो बातें हो रही है। इसको समझ लीजिए। गुरु यदि कुछ कह रहा है यह सत्य है और आप उस पर दोष दृष्टि कर रहे हो तो इस इस प्रक्रिया के द्वारा इस गतिविधि के द्वारा आप अपने सनातन को नष्ट कर रहे हो। मगर गुरु ने सिखाया कि ये मैं तुम्हें जो ग्रंथ दे रहा हूं इसमें ये अमुक अमुक जो लाइन है इनका कोई भी वो करे उल्लंघन इसमें जो धर्म है इसका यदि कोई उल्लंघन करे तो वो आचरण अधर्म युक्त ही मानना तो यदि तुम गुरु के वचन वचनों को वचनों के प्रति गुरु के द्वारा दी जाने वाली जो सीख है उसके प्रति जब तुम अविश्वास दिखाओगे तो वहां पर आप सनातन पर प्रहार करोगे। मगर गुरु कह रहा है कि तुम्हारा यह
00:20:39:01 ग्रंथ है और इसमें लिखी हुई एक एक बात सत्य है और फिर भी गुरु का कोई आचरण उसके विरुद्ध जा रहा है। तो हां वहां उस आचरण पर आप कह सकते हो। गुरु के प्रति अविश्वास नहीं प्रकट कर सकते। अगर करोगे तो सनातन पर आप सनातन को नष्ट करने की तैयारी कर। आचरण वो कह रहा है हां इसमें लिखा है मदिरापान करना मना है ठीक बात है मगर वो मदिरापान कर रहा है वहां पर वो आप गुरु से कह सकते हो कि आप मद्रापान तो वो भी कहेगा करपात्री जी कहते थे कि जहां पर शास्त्रों में और गुरु के उसमें अंतर आ जाए वहां पर शास्त्र को प्रमाण प्रधानता देना मगर वो जो शास्त्र होंगे वह भी तो गुरु से ही मिले होंगे तो उनहीं शास्त्रों को शास्त्र मानोगे ना जो गुरु से मिले हैं या किसी इस्लाम वाले के द्वारा दे देने पर भी तुम मान लोगे कि यह भी शास्त्र है। कुरान को भी मान लोगे शास्त्र है। बाइबल को भी मान लोगे शास्त्र है। तो गुरु के प्रति अविश्वास प्रकट करना एक अलग चीज है। और गुरु का कोई आचरण जो शास्त्र से बाहर जा रहा है उस पर प्रश्न करना एक अलग चीज है। गुरु के प्रति अविश्वास प्रकट नहीं कर सकते। गुरु जिन शास्त्रों के लिए कहेगा
00:21:54:09 कि यह शास्त्र हमारे शास्त्र है वही शास्त्र शास्त्र है। और फिर उन शास्त्रों के आधार पर यदि गुरु का कोई आचरण दहिक रूप से उसके बाहर जा रहा है तो आप प्रश्न कर सकते हो। मगर आप गुरु की अगर गुरु की क्रेडिबिलिटी पर ही उंगली उठा दोगे कि ये गुरु झूठ बोल रहा है। यहां पे वो अज्ञानी हो गया। यहां पे वो मूर्ख हो गया या वो यहां पर लालच वश बोल रहा है। यहां पे वो द्वेष वश बोल रहा है। तो क्या किया आपने? अपने शब्द प्रमाण को खत्म कर दिया। नष्ट कर दिया। फिर क्या होगा कि उसके द्वारा दिया गया जो शास्त्र है वो भी शास्त्र नहीं है। फिर कैसे है शास्त्र बताओ? तो यह बातें हैं ध्यान रखने की है कि हमें हिंदुओं को यूनफॉर्म होने की आवश्यकता है और हमें हम हिंदू जो बटे हुए हैं उनको एक छत्र होने की आवश्यकता है। उनको संगठित होने की आवश्यकता है। संगठित होने के लिए हमें चाहिए होंगी हमें चाहिए होगी संशय से हमारा निवारण जिन संशयों के कारण हम बटे हुए हैं। संशय क्या है? चार 40 संशयात्मा विनश्यति हम संशयों के कारण बटे हुए हैं। किसी का कुछ संशय है, किसी का कुछ संशय है तो हम लोग एक हो सकते हैं जब हमारे संशय संशय जो है वो कटे
00:23:09:20 हैं। कुछ कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों को लेकर हम एक शत्रु एक मत हो। तो हमारे संशय कटते हुए हमें जो सार्वभौम सिद्धांत है वह कहां से मिलेंगे? गुरु से। गुरु कौन होगा? जो परंपरा प्राप्त हो। ठीक है? तो हमें हमारे सार्वभौम सिद्धांत जिन सिद्धांतों के आधार पर हम हम अपने पड़ोस में रहने वाले हिंदू को अपने साथ खड़ा कर सकते हैं वो सिद्धांत हमें गुरु से मिलते हैं। परंपरा प्राप्त गुरु। तो यह पहला चरण है। आगे आने वाले वीडियो में हम लोग बात करेंगे धर्मामीटर के बारे में कि कौन किस प्रकार का हिंदू है। कौन किस प्रकार का आस्तिक है, कौन किस प्रकार का विधर्मी है और उसमें आपको थोड़ी सरलता होगी लोगों को समझने में। वह जरूर देखिएगा और इसके बाद बिल्कुल एक प्रैक्टिकली एक योजना है जो हम तीन से चार दिन में आपके सामने प्रस्तुत कर कर देंगे जिसके द्वारा आप यह समझ पाएंगे कि आप एक सामान्य से सामान्य व्यक्ति होते हुए भी किस प्रकार अपने धर्म की रक्षा करने में निमित्त बन सकते हैं।
00:24:24:05 [संगीत]
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शंकराचार्य जी अकाट्य क्यों ? #shankaracharya
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