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00:00:01:12 इसकन जो प्र तंत्र है जो संस्था है इसमें जैसे अमोग लीला जी कहीं के पदाधिकारी है या कहीं कोई ब्रह्मचारी है कहीं कोई गुरु है कहीं कोई शिक्षा गुरु है कहीं कोई दीक्षा गुरु भी है तो यह सब डिसाइड कौन करता है इसन में यह थोड़ा सा जानने की उत्सुकता थी हमारे अंदर येय स्कोन का तंत्र काम कैसे करता है कौन है निर्णय लेने वाला कि क्या होगा और क्या नहीं होगा गवर्निंग बॉडी कमीशन जीबीसी करके जीने बनाया बनाया तो देखते हैं क्या योग्यता है गुरु की साइड करते डरे ले खने रेगुलेशन बना जीबीसी के एक तरफ जीबीसी का हो जीबीसी
00:01:01:00 यानी कि जीवीसी पूरा तय करता है जो जीवीसी का जो जो कमीशन है वह तय करता है कि कहां क्या होगा अब बात यह आती है कि जीबीसी में कौन हो सकता है मेंबर कौन बन सकता है कौन नहीं बन सकता है इसकी कोई नियमावली है क्या नियमावली है प्रभुपाद जी शिष्य है वही डिसाइड करते हैं और नहीं नहीं जैसे होता है कि जैसे हमारे सनातन धर्म में माना गया है कि अंतिम निर्णायक जो है व सन्यासी होगा वैराग होना चा कुछ हीसी में जीबीसी में जीबीसी में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो सन्यासी ना हो नहीं है प्र के शिष्य
00:01:54:26 हैकी शास्त्र सतता क्या है कि इस तरह से कमेटी बिठाई जाए कुछ ग्रस्त अच्छा ग्रस्त नहीं हो सकता ऐसा है ये नियम है ग्र भी हो सकता है रहे एस एडवाइजरी मतलब ये क्या है एक जीबीसी मेंबर एडवा एडवाइस लेते हैं एक मीटिंग हो हैन को कि समस्याओ से बचाया जाए क्या क्या इंप्रूवमेंट होनी चाहिए क्या डेवलपमेंट होनी चाहिए में तो वो लोग मेरा कने मेरा पूछने का तात्पर्य ये है कि क्या यह जो जीबीसी का गठन है और किस आधार पर उसके मेंबर्स चुने जाएंगे एक एक ब बीसी जो है उसका जो गठन है किस आधार पर उसम मेरा प्रश्न सुन लीजिए मेरा प्रश्न सुन लीजिए कि किस आधार पर उसका गठन है और उसके जो मेंबर्स चुने जाएंगे व मेंबर्स चुने जाने के पैरामीटर एटली क्या है कि उसकी क्या योग्यता होनी चाहिए लक्षण से वो कैसा होना चाहिए क् देखिए जो हमारी जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हैं उन सब में जो अंतिम निर्णायक पद पर बैठा हुआ कोई व्यक्ति है जो भी है
00:03:09:27 आचार्य है वो सन्यासी है चाहे रानुज परंपरा देख लीजिए चाहे आप निंबार्क परंपरा देख लीजिए शंकराचार्य परंपरा देख लीजिए तो उसमें वैराग्य है जो अंतिम निर्णायक की गद्दी में बैठा है और जैसा कि विवेचन किया गया है 434 का विवेचन आपकी जो एज इट भगवत गीता है उसम भी वही विवेचन आता है कि परंपरा से तो होना ही चाहिए साथ ही साथ जिसका वो गृहस्थ से वैराग आ चुका हो जिसके पास है ना तत्वदर्शी हो जाता है तो मैं यह कह रहा था कि अंतिम निर्णायक पद पर बैठने के लिए जो जीबीसी का जीबीसी की सदस्यता है उसको प्राप्त करने के लिए कुछ पैरामीटर नहीं है जो शास्त्रीय हो शास्त्रीय पैरामीटर भगवान की भक्ति में लगा 50 6 साल से लगा है प्रभुपाद जी के आदेशानुसार यापन कर रहा है प्रभुपाद जी के शास्त्रों का जिन्होने बहुत अच्छे से अध्ययन किया है वो उनको लेते हैं भाई साहब मैं निश्चित नियमावली पूछ रहा हूं ऐसे वर्बल नहीं कहीं पर मतलब बिल्कुल निश्चिता के जीबीसी में कौन सदस्य होगा कौन नहीं होगा इसके शास्त्रोक्त पैरामीटर कहां से प्रभुपाद जी ने ही निर्देशित किया है अभी तक प्रभुपाद जी की शिष्य चला रहे हैं और प्रभुपाद जी कोई बुक है इसम कोई बुक कहीं पर लिखा
00:04:25:07 हो ये लेकिन वो जीबीसी का कोर्स भी होता है मैं अभी इतना हाई लेवल पर नहीं गया हं जीबीसी का एक कोर्स होता है मीटिंग होती है कई चीज जीसी के बारे में बताई जाती क्योंकि ये जो प्रोसेस है क्योंकि बात ये है ये जो प्रोसेस है कि जीवीसी अंतिम निर्णायक है यह प्रोसेस एक परंपरा की प्रोसेस नहीं है संप्रदाय की प्रोसेस नहीं है यह तो एक कंपनी की प्रोसेस है कौन को मैनेज करने के आया स् कन को कैसे मैनेज किया अभी मैं आपको बता देता हूं एक छोटा सा उदाहरण अभी मैंने कुछ दिनों पहले ये सुना था जब ये अभी एक वाक्य हो गया था ये अ बिहार में कुछ हुआ था उस पर नहीं जाएंगे कि क्या हुआ था क्या नहीं हुआ था मगर उसके बाद मैंने कई लोगों का इंटरव्यू देखा जो स्कन के ऐसे लोग है जिनको लोग जानते हैं कन का चेहरा तो वो लोग ऐसी बातें करते हुए नजर आए कि अब जीबीसी ने टेक ओवर किया है जीबीसी ऐसा ऐसा बदलाव ला रही है और जीबीसी अभय ध्यान रखेगी किस गुरु के कितने शिष्य होने चाहिए तो सोचिए एक गुरु है जो वो सन्यासी भी हो सकता है है ना ब्रम हो सकता है हो सकता है ना गुरु एक जो गुरु है उसका निर्णय लेने वाला
00:05:37:19 कोई ब्रह्मचारी नहीं हो सकता सन्यासी भी हो सकता है तो वो ये कह रहे थे किस गुरु के कितने शिष्य होने चाहिए यह भी जीवीसी तय करने वाला है तो एक जो सन्यासी गुरु है उसका निर्णय सन्यासियों का निर्णय जीबीसी जिसमें की कोई गृहस्थ भी है कोई वानप्रस्थ भी है और कोई अलग अलग तरह के लोग है जो वहां पर जुड़े हुए हैं और इस तरीके से व एक सन्यासी के ऊपर लीडरशिप करेंगे कि तुम्हारे इतने ही गुरु होंगे यह कौन सा शास्त्र का संविधान है एक गुरु के कितने शिष्य हो सकते ऐसे कोई सन्यासी के र लीडर नहीं और एक मैनेजमेंट है एकली क्या है सिस्टम है ह किसी
00:06:25:12 का सिस्टम हर किसी को मर्यादित रख का आ कैसा हो चाहिए सही है इसकन को मैनेज करने के लिए जीवीसी बाकी मैं जीवीसी के बारे में ज्यादा कुछ जानता प्रभुपाद जी द्वारा संचालित आपको जानना चाहिए ना मैं ये कह रहा हूं आपको जानना चाहिए क्योंकि इस कन एक इकन एक व्यवसायिक कंपनी नहीं है इकन क्लेम करती है कि हम धर्म संस्था है धर्म की संस्थापन की बात कर रहे हैं तो उसमें एक व्यवसायिक जैसे कि वो बोर्ड ऑफ मीटिंग बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग होती है उस तरीके से जीबीसी हो गया अब वह तय कर रहा है कि कौन जो है सन्यासी के कितने गुरु होंगे यह तय करना तो बहुत गलत बात हो गई फिर और यह कौन से शास्त्र का संविधान है ऐसा नहीं है आपने गलत सुना है गलत व्यक्ति से सुना तो क्या है जब देखिए आप क्लेम तब कर सकते हैं मेरी चीज पर जब आप यह बताए कि सही क्या है मैंने तो सुना है वो मैं आपको बता रहा हूं और वो भी वीडियो से सुना है ऐसे नहीं कि बुक में पढ़ लिया हो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या है इस बारे में कोई नियमावली है भाई हमें पता तो रहे कि हम लोग संप्रदाय को ही फॉलो कर रहे हैं बेसिकली तो हम संप्रदाय को फॉलो कर ही नहीं रहे क्योंकि वो जो जो क्लेम कर रहा है जो क्लेम कर रहा है
00:07:40:12 कि हम चैतन्य महाप्रभु की परंपरा से हैं या जो क्लेम कर रहा है कि मधवा चार्य जी की परंपरा से हैं वस्तुत तो व स्वतंत्र है उसका निर्णय लेने वाले कौन है जीबीसी के मेंबर्स और उसमें सन्यासी भी है गृहस्थ भी है वानप्रस्थ भी है सब है मिलजुल कर के और यह कोई वो शास्त्रोक्त नियम है ही नहीं परंपरा से है उस परंपरा में जो पीछे जो गुरु गद्दी है वो निर्णय लेगी कि आप क्या करोगे क्या नहीं करोगे यह तो एक कंपनी तो अलग हो गई बिल्कुल और फिर यह भी कह रहे आपके निर्णय कोई गुरु नहीं ले रहा है सन्यासी नहीं ले रहा है बल्कि एक कंपनी का पैनल एक निर्णय ले रहा
00:08:22:26 है जी के अकॉर्डिंग कैसे संस्था को हम चला सकते बहुत अच्छे से उसम डेवलपमेंट करते हैं उसम कुछ चेंस किए जाते है कि प्रभुपाद जी के अकॉर्डिंग य संस्था बहुत अच्छे से चल पाए प्रभुपाद जीने जीबीसी दिए है कुछ रू दि जीी केडिंग बहुत अच्छे इसम आपके यहां के जो ऑथेंटिक आपके प्रचारक है इन्फ्लुएंस है ये क्या कहते योगा ऑफ लव इनका मैंने वक्तव्य सुना है जो यह बोल रहे थे कि अब जीबीसी ये डिसाइड कर रही है किस गुरु के कितने शिष्य होंगे जिससे कि वो अपने शिष्य को मैनेज कर पाए तो जीबीसी कौन होता है किसी के परर निर्णायक बनने वाला जानकारी नहीं है इसके बारे में मेरे को जानकारी नहीं है कुछ होगा ऐसा
00:09:12:13 अभी मैं बस आपसे ये कह रहा हूं हम लोग आगे चलते हैं आपको जानकारी नहीं है कोई बात नहीं मगर मैं यह कह रहा हूं कि आपको नहीं लगता है कि जब आप यह कहते हो कि हम धर्म का प्रचार कर रहे हैं धर्म धार्मिक संस्था है तो उसकी जो जड़ है कम से कम उसको तो जाने हम लोग कह तो रहे हैं मधवा चार से हैं एक मिनट एक मिनट हम लोग कह तो रहे हैं भाई साहब भाई साहब एक मिनट एक मिनट हम लोग कह तो रहे हैं कि मधवा चार से हैं चैतन्य महाप्रभु से मगर वस्तुतः तो हम स्वतंत्र है और हम लोगों का निर्णय लेने वाले वो जीबीसी के मेंबर्स है जो कि शास्त्रोक्त नहीं है अरे कार्यकारी कोई समिति कार्यकारी नहीं कोई समिति होती है हर संस्था में ये सब लौकिक सिद्धांत है भाई साहब जो आप बोल रहे हैं ये सब ल सिधांत है मेरी बात समझिए आप को सनातनी संस्था के रूप में क्म करते हैं और जो आप सिद्धांत बता रहे हैं यह लौकिक सिद्धांत है लौकिक सिद्धांत सनातन सिधांत की गुरु परंपरा समझ रहे कन को चला कौन को मैनेज करने के लिए बस इस क को जो उसके व्यवसायिक चीज है कि भाई कितनी वो गीता छप
00:10:27:18 है वो सब ठीक है मगर उसम धर्म और धर्म का निर्णय लेने वाले भी वो है ना किस कितने शिष्य होंगे मैं बताता हूं आपको धर्म और धर्म यह बताइए अमोग लीला जी ने जब कोई गलती कर दी थी क्या कहते हैं वो विवेकानंद जी के परर टिप्पणी कर दी थी तो उनको जो है कुछ दिनों के लिए बैन किया गया था जीबीसी के द्वारा वो कौन होते हैं एक भक्त को बैन करने वाले बताइए उनको उनको तो इस ध्यान देना है कि मंदिर का मंदिर का बन रहा है कि नहीं बन रहा है या बुक्स जितनी छाप है उतनी छप रही है कि नहीं छप रही है अगर अमोग लीला जी एक भक्त है वैष्णव भक्त है भगवत भक्त है उनके ऊपर निर्णय लेने वाले वो कौन होते हैं जीबीसी वाले जो उनको बैन करे बताइए कौन सान ना तो उनके गुरु गुरु तो हो सकते है हा उनके गुरु हो सकते हैं गुरु ने किया था हाज उन्होने किया में ऐसा नहीं था बहुत जदा लेटर मैंने दे वो लेटर मैंने देखा है वो लेटर में क्या नाम लिखा था नीचे मुझे नहीं पता क्या था लेकिन बैन किया होगा तो गुरु के हिसाब
00:11:42:25 से किया होगा ऐसे हर कोई नहीं कर सकता और जीबीसी कर सकती है जीबीसी ने उसम जो है यह लिया था निर्णय कि भाई हम उनको एक महीने के लिए बैन कर रहे हैं जीबीसी वो लेटर जो निकला था प्रचारित हुआ और आपको एक बात बता दूं कि जो कुल मिलाकर के आपका यह कहना है कि आपका आप कह तो रहे हो कि मधवा परंपरा के हैं जैसे मैं शंकराचार्य परंपरा का हूं तो मेरे अंतिम निर्णायक वो है जो शंकराचार्य की गद्दी पर बैठे हैं आप मधवा चार्य परंपरा के हैं तो आपकी अंतिम निर्णायक गद्दी पर कौन बैठा हैय आपको नहीं पता आप एट द एंड आप किसको फॉलो कर रहे हैं आपको नहीं पता जी प्रभुपाद जी डायरेक्ट आपसे बात कर रहे हैं क्या जी लिख गए हैं जो भी है उस से चल आपको किसके दवारा मिला बनाया हु प्र जी का आप कह रहे हो कि मैंने वो पढ़ा भी नहीं है जो वो लिख के गए हैं अरे प्रभु जी गुरु शिष्य परंपरा से जन आता है ना दो गुरु परंपरा से आया मगर गुरु शिष्य परंपरा से ज्ञान आया मगर प्रभुपाद
00:12:58:10 जी जीबीसी का जो गठन है वो किस आधार पर किसको चुना जाएगा किसको नहीं चुना जाएगा वो कितने फैसले ले सकता होगा यह सब आपने जाना ही नहीं है फिर भी आप कह रहे प्रभुपाद जी को फॉलो कर रहा हूं हा प्रभुपाद जी को फॉलो कर रहा हूं प्रभुपाद जी के प्रभुपाद के शिष्य आप तोय कह रहे हो मुझे पता ही नहीं प्रभुपाद जी ने क्या लिखा है इस बारे में फिर आप उनको फॉलो करने का क्लेम कैसे कर रहे हो प्रभुपाद जी के शि से आ प्र जी की किताबों से आ रहे फिर वही बात मैंने अभी आपसे यह भी पूछा धर्म और अधर्म का निर्णय ले रही है जीबीसी एक भगवत भक्त को वो कौन होती है वो अगर एक वसाय पहली बात तो यह है कि अगर वो ब्रह्मचारी भी है अमु लीला जी तब भी उनको कोई ग्रस्त य नहीं कह सकता कि तुम बहन हो अब एक महीने के लिए जीबीसी के में भी हैके गुरु है गुरु भाई है वो क स हा तो गुरु भाई का नाम नहीं है ना लेटर में वहा जीबीसी का नाम हैला प्रभज के गुरु है परम पूज गोपाल कृष्ण महाराज उनके जो गुरु भाई है जो लेटर निकला था मायापुर से भाई साहब वो जीबीसी की ओर से निकला
00:14:06:08 था आज की डेट में महामहिम कौन है जैसे मधवा चार परंपरा में जो आनंद कृष्ण तीर्थ की गद्दी पर बैठेगा वो आज के टाइम में महामहिम है शंकराचार्य परंपरा में जो शंकराचार्य की गद्दी पर बैठेगा वो आज के टाइम में शंकर परंपरा का महामहिम है रामानुजाचार्य परंपरा में जो रामानुज की गद्दी पर बैठेंगे वो सब जगतगुरु कहलाएंगे और वो उसके महामहिम है रामानंदाचार्य परंपरा में जो रामानंदाचार्य के पद पर बैठेंगे वो उसके अंतिम निर्णायक हैं इस इस कौन का अंतिम निर्णायक कौन है वो कौन सा संत है प्रभुपाद जी आपके साथ व्यवहारिक नहीं है आज अ आपको कैसे पता जो सूचना आपको मिल रही है वो प्रभुपाद जी की सूचना है भाई वो वो देखिए वो एक संत होना चाहिए ना जो आपका अंतिम रूप से निर्णय लेगा अगर ऐसा है तो फिर तो प्रभुपाद अगर ऐसी बात है तो प्रभुपाद जी का भी आलंबन लेने की क्या जरूरत है यही कह दो कृष्ण जी हमारे गुरु है सीधे यही बोल दो क्यों कृ जग बो नहीं आप अगसे प्रभुपाद जी जिस समय व्यवहारिक थे उस समय व व्यावहारिक रूप से किसी के गुरु हो सकते हैं मगर आज के आपके व्यवहारिक गुरु कौन है जो प्रभुपाद जी की गद्दी पर बैठे
00:15:21:15 हैं ठोस प्रश्न यौन कौन सा शिष्य नाम बता चलिए 10 नाम गिना दीजिए जो आपके अंतिम निर्णायक है आज के टाइम में परम पूज राधानाथ स्वामी महाराज परम पूज लोकनाथ स्वामी महाराज य सब जीसी में हाजी और बताइए परम क्या क्या नाम बताया आपने परम पूज लोकनाथ स्वामी महाराज परम राधानाथ स्वामी महाराज परम पूज जयता स्वामी महाराजय तीन लोग जीबीसी में है इस समय और तीनों सन्यासी है और बाकी और और आपको नहीं पता है होंगे बहुत सारे मेंब है तो आपके जो अंतिम निर्णायक है वो केवल य तीन लोग है जिनका आपने नाम बताया या वो बाकी के लोगों का मिलक के आपको वो आएगा निर्णय कैसे लिया जाता है जब मीटिंग होती है उनके बीच में जो डिस्कशन आता है जो कंक्लूजन आता है वही निर्णय होता है इसका मतलब आपका कोई एक अंतिम निर्णायक नहीं है बहुत सारे और कितने य भी आपको नहीं पता है आप इससे अलग कोई क्वेश्चन करिए ये मैं ना समझा पाऊंगा ना आप समझ
00:16:36:26 पाएंगे मतलब आपको इससे आपको इसको जानने की भी इच्छा नहीं है कि मुझे पता हो कि मैं किसको फॉलो कर रहा हूं मैंने जाना काफी है सवा करने के लिए भाई साहब आपकी संस्था कोई धार्मिक संस्था है कि व्यवसायिक संस्था है धार्मिक संस्था है आज आपके धर्म धर्म का निर्णय कौन ले रहा है गुरु के गुरु के रूप में अपना शास्त्र बताते केवल शास्त्र नहीं बताते आप तो बाहर जा रहे प्रभुपाद जी के विरुद्ध जा रहे प्रभुपाद जी नेहा केवल शास्त्र धर्म बता देंगे प्रभुपाद जीने भगवान के कुछ नहीं प्रभुपाद जी ने कहा है की केवल शास्त्र आपका धर्म निश्चित कर देंगे गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल ग्रंथ नहीं तो आपका वोह गुरु कौन है जिसके आधार पर आपका धर्म धर्म का निर्णय हो जाता है गुरु और साधु भी तो वही बोलेगा जो शास्त्र बोल रहे हैं हम जो भी बोलते हैं मेरे भाई मैं मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं आपके आज आप स्कन से बिलोंग करते हैं एस स्कन डिवटी या स्कन के प्रचारक आपको क्या करना
00:17:51:27 है क्या नहीं करना है यह निर्णय जीबीसी का पैनल ले रहा है उसमें कितने लोग हैं कौन-कौन है उसके लक्षण क्या है के क्या लक्षण होने चाहिए यह तक आपको नहीं पता है और आप जो है फॉलो कर रहे हैं सब पता है मेरे को अभी तो आपने द बार बोला नहीं पता है प्रभुपाद जी के शिष्य प्रभुपाद जी के निर्देशों का पालन करते हैं गुरु के निर्देशों का पालन करते हैं ये मेरे को पता है वोह सन्यासी है कि नहीं स्यासी है सन्यासी सारे के सारे आप बतंगड़ मत बनाओ इस चीज का वो बत अच्छे लेवल प हैने बात बतंगड़ आप बना रहे हो अगर ऐसी बात करनी है तो ऐसे ही सही बात करने की चीज ही नहीं है ये कौन डिसाइड कर रहा है बात करने की चीज नहीं है जब आप य क रहे हो जब आप यह कह रहे हो जब आप यह कह रहे हो कि हम मधवा चार परंपरा से हैं तो आपका निर्णय कौन ले रहा है कि 100 स पता नहीं कितने लोग परंपरा से जुड़े हु बताते हैं अपने आपको कैसे बताते हैं य क्वेन होना चाहिए मेरा कहने का अर्थ यह है कि आपका जो अंतिम निर्णायक है वो कोई संपन्न संत होना चाहिए ना कि एक बहुत सारे लोगों की कोई कमिटी और अगर है तो इसका शास्त्र में वर्णन कहा है मुझे बता दो आप
00:19:07:07 हम मैं जो बो उसका न शास्त्र में बता दूंगा वो भी आपकी गीता से ब्राह्मण और गुणों के अनुसार ब्राह्मण गुणों से संपन्न है व प्र जी के श साल चन कर रहे हैं उनके पास जा पूछ य जो कमेटी का गठन है जो आपका अंतिम निर्णायक बना हुआ है वो कमेटी का गठन का शास्त्रोक्त वर्णन कहां पर है प्रभुपाद जी है ना प्रभुपाद जी ने पॉइंट किया अरे मेरे भाई प्रभुपाद जी प्रभुपाद जी आपको शास्त्र विरुद्ध कोई चीज बताएंगे क्या शस्त्र सत बताएगा ना समत बताएगा इसलिए विश् तो मैं आपसे तो मैं आपसे रेफरेंस मांग रहा हूं ना इस बात का रेफरेंस कहां है कि कमेटी गठन होगी उसम सन्यासी भी हो सकता है उसम ब्रह्मचारी भी हो सकता है सब कुछ हो सकता है इसका रेफरेंस बताइए प्रभुपाद जी कहां पर कहा यही बता दीजिए फिलहाल बाकी आगे देख लेंगे प्रभुपाद जी ने कहां पर कहा है ये आगे देखेंगे आप टॉपिक चेंज करिए मैं ना समझ समझा पा इतनी जानकारी अभी आपने टॉपिक चेंज हो जाएगा आप ये कह रहे हैं कि प्रभुपाद जी ने कहा है कहा कहा है कहां लेटर है प्र जीबीसी को फॉलो करता है वही मेरा शिष्य व मेरा अनुयाई है
00:20:23:15 प्रने अरे जीबीसी को फॉलो करता है जीबीसी के जो नियम है कौन कन उसम बन सकता कौन नहीं बन सकता यह तो बताइए और क्या व शास्त्र सम्मत है कि नहीं सब भेज देंगे रिटन में भेज देंगे आपको क्या क्या है क्या क्या योग्यता पता करके आपको बता और यह भी बताइएगा उसका शास्त्रों में कहां वर्णन है
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