1
00:00:02,640 --> 00:00:06,640
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी

2
00:00:06,640 --> 00:00:12,400
कुशल पूर्वक होंगे। और

3
00:00:12,400 --> 00:00:18,080
एक चौपाल लगाई गई है अभी हाल ही में कुछ अह

4
00:00:18,080 --> 00:00:22,160
मैंने अभी शाम को ही देखी और जो मानसिक रोग से ग्रस्त

5
00:00:22,160 --> 00:00:26,640
जो ये मातृशक्ति हैं जब से वो हमसे

6
00:00:26,640 --> 00:00:30,960
ऑनलाइन आमने सामने आकर के बैठी थी उसके बाद से थोड़ा सा उनका टेंपरामेंट

7
00:00:30,960 --> 00:00:35,280
हिला हुआ है। यद्यपि

8
00:00:35,280 --> 00:00:39,600
क्या कहते हैं श्री राम जी के पास जब सुपनका

9
00:00:39,600 --> 00:00:44,080
आती है गलत मंतव्य से तो उस समय श्री राम जी

10
00:00:44,080 --> 00:00:48,160
थोड़ा सा विनोद भी करते हैं वहां पर सुपनका के साथ तो एक मर्यादा में रहते हुए एक

11
00:00:48,160 --> 00:00:52,640
सीमा के अंदर हमने अभी विनोद किया इन मातृशक्ति

12
00:00:52,640 --> 00:00:56,640
से वह तब जब इन्होंने व्यक्तिगत रूप से उल्टे सीधे शब्द हमको

13
00:00:56,640 --> 00:01:00,720
कहे और उल्टे सीधे शब्द कहना तो

14
00:01:00,720 --> 00:01:04,960
प्रारंभ इन्होंने ही किया उसके बाद से इन्होंने हमारा

15
00:01:04,960 --> 00:01:09,680
कुछ शायद आग तो लगी थी यहां से जब से गई थी जलन मछली की तरह

16
00:01:09,680 --> 00:01:13,680
सर पटक के रो रहा हूं कब से एक सर फिरा हूं मैं उस तरह का हालात था

17
00:01:13,680 --> 00:01:19,520
थोड़ा सा तो फिर इन्होंने एक अपने मानसिक रोग को प्रकट करते हुए एक और

18
00:01:19,520 --> 00:01:23,600
वीडियो बनाया जिसमें संडास के चित्र से हमें जोड़ते हुए और

19
00:01:23,600 --> 00:01:27,760
तरह-तरह की बातें अनर्गल प्रलाप जिस पर अभी विस्तृत बातें करेंगे

20
00:01:27,760 --> 00:01:31,840
फोटो में उल्टा सीधा करना तो यह जब व्यक्ति फोटो फोटो बिगाड़

21
00:01:31,840 --> 00:01:35,920
करके प्रस्तुत करने लगे आपकी और या फिर

22
00:01:35,920 --> 00:01:39,920
आपको व्यक्तिगत ऐसी निराधार चीजों से जोड़ने लगे डायरिया

23
00:01:39,920 --> 00:01:44,160
ये वो इस तरह का तो यहां समझ लेना चाहिए कि उसके पास सैद्धांतिक

24
00:01:44,160 --> 00:01:48,240
पक्ष कमजोर है इसलिए उसे ऐसा करना पड़ रहा है। जब वो सिद्धांतों पर बात

25
00:01:48,240 --> 00:01:50,960
करने की बजाय इस तरह की चीजों का सहारा लेने लगे।

26
00:01:50,960 --> 00:01:55,120
खैर तो अभी हमारे साथ हैं सनातन शंकर जी

27
00:01:55,120 --> 00:01:59,280
उनको ले लेते हैं और इच्छवाकु जी भी

28
00:01:59,280 --> 00:02:03,440
हैं। उनको ले लेते हैं। और जय श्री राम सबको जय श्री राम

29
00:02:03,440 --> 00:02:08,560
नमस्कार जय श्री राम और शास्त्रवाद जी भी है उनको भी ले लेते हैं

30
00:02:08,560 --> 00:02:12,960
जी तो आपने आप लोगों जय श्री राम

31
00:02:12,960 --> 00:02:17,280
तो आप लोगों ने देखी होगी मूर्खों की एक चौपाल आज लगी थी

32
00:02:17,280 --> 00:02:21,440
और उसमें जो है जुगलबंदी कर रहे थे कोशिश कर रहे

33
00:02:21,440 --> 00:02:25,440
थे वो दिखाने की जो वो है नहीं कुछ मानसिक

34
00:02:25,440 --> 00:02:30,560
रोगी थे कुछ अभागे थे कुछ जो है

35
00:02:30,560 --> 00:02:36,560
परेशान भी थे अपने निराकार परमात्मा से और कुछ तो

36
00:02:37,360 --> 00:02:41,680
मूर्ख के लक्षण वाले थे ना कंफ्यूज्ड

37
00:02:41,680 --> 00:02:45,760
थे कंफ्यूज बहुत एक वहां पर एक वहां पर कोई ढोंगी भी आया था कि

38
00:02:45,760 --> 00:02:50,640
मैं गोवर्धन पीठ से जुड़ा हुआ हूं एक ढोंगी भी आया था कोई गुरुदेव

39
00:02:50,640 --> 00:02:56,640
पूरी के शंकराचार्य जी से दीक्षित हूं है ना अच्छा आया था

40
00:02:59,840 --> 00:03:04,240
अच्छा ठीक है। तो अभी सबसे पहले हम एक

41
00:03:04,240 --> 00:03:08,320
इनकी एक बात देखते हैं। भाई वो जरा सा वो दिखाएंगे कि इनका आज की लाइव का

42
00:03:08,320 --> 00:03:13,760
टाइटल क्या था वो जरा देखते हैं। इसको कहते हैं मूर्खों की चौपाल।

43
00:03:13,760 --> 00:03:17,760
एक-एक करके जरा मीमांसा करेंगे। क्या-क्या बातें इन्होंने की है और टाइटल इनका जरा

44
00:03:17,760 --> 00:03:22,240
देख लेते हैं। इनका टाइटल एक बार दिखा देंगे क्या? ऑपरेटर

45
00:03:22,240 --> 00:03:26,800
उसका टाइटल है हिंदू यूनिटी। क्या है टाइटल?

46
00:03:26,800 --> 00:03:30,880
हिंदू यूनिटी और उसमें बैठा मुख्य प्रखर रूप

47
00:03:30,880 --> 00:03:35,120
से आयोजक कौन है? वह आर्य समाज की विचारधारा से प्रभावित है। क्योंकि

48
00:03:35,120 --> 00:03:39,360
भाई वर्णाश्रम व्यवस्था के विपरीत जाना, विदेश गमन के विपरीत जाना

49
00:03:39,360 --> 00:03:44,560
और विशेषतः जो ईश्वर का स्वरूप है मूर्ति पूजा

50
00:03:44,560 --> 00:03:48,560
अवतारवाद इनके विपरीत जाना। यह सारी जो चीजें हैं यह

51
00:03:48,560 --> 00:03:53,200
आर्य समाज से मिलती हैं। यह है भाई आज का टाइटल। तो

52
00:03:53,200 --> 00:03:57,280
अब यह जो मातृ शक्ति हैं जो थोड़ा सा विक्षिप्त हो

53
00:03:57,280 --> 00:04:01,360
गई हैं। जब से आमनासामना हुआ है वह ऐसा था ना वो जो जुरासिक

54
00:04:01,360 --> 00:04:05,840
पार्क में जो तार थे ना बिजली वाले तो डायनासोर्स

55
00:04:05,840 --> 00:04:10,160
में तो इतनी अकल होती थी कि वो जब तारों में बिजली बंद हो जाती थी वो तब अंदर आते

56
00:04:10,160 --> 00:04:14,240
थे। आप लोगों ने अगर ध्यान दिया हो तो वो जो तार थे बिजली के

57
00:04:14,240 --> 00:04:18,640
जिनके उस तरफ डायनासोर रहते थे टरेक्स वगैरह तो वो जब तारों में प्रवाह

58
00:04:18,640 --> 00:04:22,720
बंद हो जाता था विद्युत का तब वो इधर आते थे उनको उनके अंदर इतनी बौद्धिक

59
00:04:22,720 --> 00:04:27,040
क्षमता थी कि वह देख लेते थे कि अब इसमें बिजली नहीं है तो अब हम इसको छू सकते हैं। इन्होंने

60
00:04:27,040 --> 00:04:28,880
क्या किया? बिजली के प्रवाह के दौरान

61
00:04:28,880 --> 00:04:33,280
ही तार को छू लिया दो-तीन दिन पहले

62
00:04:33,280 --> 00:04:38,240
है ना। तो जब तार को छुआ तो वो जो

63
00:04:38,240 --> 00:04:42,640
मुंगेरी लाल का एक सीन है ना राजपाल यादव का कि लड़के का नाम देके वो

64
00:04:42,640 --> 00:04:46,880
लड़की का नाम देके लड़के से भिड़वा देते हो। मार जब पड़ती है उसके बाद वह ऐसे

65
00:04:46,880 --> 00:04:51,040
काफी देर तक करता रहता है। तो कुछ ऐसी हालत इनकी हो गई थी। यहां से जाने

66
00:04:51,040 --> 00:04:55,120
के बाद दो-तीन दिन तक यह ट्रॉमा में रही होंगी। उसके बाद फिर इनको

67
00:04:55,120 --> 00:04:59,200
हमसे धुनके हुए धुनकाए गए पिटे हुए समाजियों

68
00:04:59,200 --> 00:05:03,280
ने और उधर से थोड़ा बहुत ज्यादा नहीं स्क ने

69
00:05:03,280 --> 00:05:07,440
भी थोड़ा सा कुछ परेशान लोगों ने सपोर्ट किया कि तुम ये

70
00:05:07,440 --> 00:05:12,160
करो तुम वो करो। फिर उभर के आई अच्छा क्या लेके आई?

71
00:05:12,160 --> 00:05:16,320
डायरिया और मतलब व्यक्तिगत कटाक्ष उसमें

72
00:05:16,320 --> 00:05:20,480
उसमें थे अग्रणी और सैद्धांतिक बातें

73
00:05:20,480 --> 00:05:24,960
कोशिश कर रही हैं थोड़ा बहुत सिद्धांत पर बात करने की मगर ठीक है व्यक्तिगत

74
00:05:24,960 --> 00:05:28,960
कटाक्ष डायरिया और ये सब थे उसमें

75
00:05:28,960 --> 00:05:32,960
अ तो इनका जो टाइटल अभी आपने देखा हिंदू

76
00:05:32,960 --> 00:05:37,360
यूनिटी ये जो मातृशक्ति है ये स्वयं आर्य समाज

77
00:05:37,360 --> 00:05:41,840
से प्रभावित है। हालांकि [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं आर्य समाजी नहीं कहूंगा क्योंकि आर्य समाजियों

78
00:05:41,840 --> 00:05:43,920
की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि उनके यहां परंपरा

79
00:05:43,920 --> 00:05:48,160
तो है नहीं कोई। गुरु गद्दी है नहीं कोई। तो कोई भी व्यक्ति खुद को आर्य समाजी मानने

80
00:05:48,160 --> 00:05:52,240
के लिए और ना मानने के लिए कभी भी स्वतंत्र है। कुल मिलाकर के सिद्धांत

81
00:05:52,240 --> 00:05:56,400
विहीन शब्द अगर इनके लिए उपयोग में लाया जाए सिद्धांत विहीन। क्योंकि

82
00:05:56,400 --> 00:06:00,480
जो सबका होता है वह किसी का नहीं होता है। तो सिद्धांत विहीन वाली

83
00:06:00,480 --> 00:06:04,720
स्थिति इनकी होती है। अच्छा सिद्धांत विहीन का एक उदाहरण मुझे याद आता

84
00:06:04,720 --> 00:06:08,880
है। जब हम लोग बचपन में क्रिकेट खेलने जाते थे

85
00:06:08,880 --> 00:06:12,960
तो सदैव टीम में एक व्यक्ति ऐसा जरूर रखते थे कि नाली

86
00:06:12,960 --> 00:06:16,960
में गेंद चली जाए तो वो निकाल लाए। उसको जो है दिक्कत ना हो

87
00:06:16,960 --> 00:06:21,040
नाली में गेंद नाली से गेंद निकाल के लाने में। तो उसका कारण

88
00:06:21,040 --> 00:06:25,200
क्या था? क्योंकि वो जो हम इस कार्य के लिए हमको किसी सिद्धांत

89
00:06:25,200 --> 00:06:29,440
विहीन व्यक्ति को ढूंढना पड़ता था कि कौन है जो अपने उस पर ठोस

90
00:06:29,440 --> 00:06:33,520
ना रहे चीजों पर वैसे तो आज जो मूर्खों की चौपाल लगी है

91
00:06:33,520 --> 00:06:37,600
उसमें ज्यादातर सब के सब सिद्धांत विहीन ही थे जो खुद को गोवर्धन

92
00:06:37,600 --> 00:06:41,680
मठ से क्लेम कर रहा है वो भी सिद्धांत विहीन है और कैसे है ये तो हम अभी

93
00:06:41,680 --> 00:06:46,080
देखेंगे मगर इनका जो टाइटल है वो देखिए आप हिंदू हिंदू यूनिटी

94
00:06:46,080 --> 00:06:50,640
क्या मतलब है हिंदू का भाई आर्य समाज के अनुसार दयानंद का भाष्य क्या कहता है

95
00:06:50,640 --> 00:06:54,720
हिंदू हिंदू का मतलब है काफिर, चोर, लुटेरा, डाकू। जाओ पढ़

96
00:06:54,720 --> 00:06:58,880
लो जाकर के। थोड़ी बहुत किताबें तो हमने भी पढ़ी है आर्य समाज की।

97
00:06:58,880 --> 00:06:59,380
फिर

98
00:06:59,120 --> 00:07:03,200
तुम हिंदू यूनिटी की बात कर रहे हो। और हिंदू यूनिटी की बात अगर

99
00:07:03,200 --> 00:07:07,920
कर रहे हो तो भाई आर्य समाज को कहो ना कि राधा पर बोलना बंद करें।

100
00:07:07,920 --> 00:07:12,080
तुम कह रहे हो कि हम थोपना नहीं चाहिए। तुमने यह भी कहा अपनी लाइव

101
00:07:12,080 --> 00:07:16,080
में। मैंने सुना किसी ने कटिंग भेजी है। मैंने यह भी

102
00:07:16,080 --> 00:07:20,560
सुना। तुमने अपनी लाइव में यह भी कहा कि

103
00:07:20,560 --> 00:07:24,560
क्या कहते हैं यह हम लोग किसी के पर्सनल उसकी परंपरा

104
00:07:24,560 --> 00:07:28,560
में क्या होता है? वह वर्णाश्रम है, यह है वह है तो हम उस पर कटाक्ष नहीं करेंगे। हमारा

105
00:07:28,560 --> 00:07:33,040
तो व्यक्तिगत मामला है। अरे भाई तुम्हारा अगर व्यक्तिगत मामला था तो तुम

106
00:07:33,040 --> 00:07:37,200
विदेश यात्रा का विरोध क्यों कर रही हो? जहां वो

107
00:07:37,200 --> 00:07:41,360
लोग सिद्धांत ले आए आपके विरोध में। आप व्यक्तिगत लड़ रही होश्वर जी से। ठीक है?

108
00:07:41,360 --> 00:07:45,600
यद्यपि वह भी व्यक्तिगत मामला नहीं है। मैं बताऊंगा कैसे नहीं है।

109
00:07:45,600 --> 00:07:49,840
मगर जब आप यह समझ रही हो कि मुक्तेश्वर

110
00:07:49,840 --> 00:07:54,000
जी पर बोलना मेरा व्यक्तिगत मामला है तो उसमें शंगेरी की पीठ को क्यों ला रही हो बीच में?

111
00:07:54,000 --> 00:07:58,240
करपात्री जी के यजुर्वेद भाष्य को क्यों ला रही हो बीच में? और विदेश

112
00:07:58,240 --> 00:08:02,320
यात्रा पर यदि आप पर सवाल उठा दिया गया है तो वहां कोई और रास्ता निकालो।

113
00:08:02,320 --> 00:08:06,400
यह करने की बजाय कि उसका आप शास्त्र खंडन प्रस्तुत कर रही हो। फिर कह रही हो कि

114
00:08:06,400 --> 00:08:10,640
हमारी तो व्यक्तिगत लड़ाई है। कैसे व्यक्तिगत लड़ाई है? सिद्धांत का ही जब आपने विरोध

115
00:08:10,640 --> 00:08:14,480
कर दिया किसी परंपरा से जुड़े हुए तो फिर कहां से व्यक्तिगत

116
00:08:14,480 --> 00:08:18,560
लड़ाई रह गई? तो पहली बात तो यह है कि यह व्यक्तिगत का ड्रामाबाजी बंद

117
00:08:18,560 --> 00:08:22,560
करो। जो चौपाल तुमने लगा के बैठी थी बैठी थी ना

118
00:08:22,560 --> 00:08:27,440
तुम उसमें केवल दो तीन हुक चुल्लुओं की कमी और थी।

119
00:08:27,440 --> 00:08:31,520
रामपाली आ जाता कोई और एक ये मीठी

120
00:08:31,520 --> 00:08:35,600
वाली दीदी ब्रह्मा कुमारी बस पूरा था। हम हम

121
00:08:35,600 --> 00:08:39,600
जो जितना कमेंट बॉक्स में रामपाल जी भी थे। कमेंट बॉक्स में मैंने देखा वहां पर

122
00:08:39,600 --> 00:08:43,760
रामपाल वाले भी थे और वो कह रहे थे कि हम सबको एक

123
00:08:43,760 --> 00:08:47,760
होना चाहिए। हिंदू यूनिटी अबव ऑल

124
00:08:47,760 --> 00:08:52,880
सबसे ऊपर हिंदू यूनिटी। हम तो

125
00:08:52,880 --> 00:08:56,960
ये एक तो ये बात हो गई कि भाई इन्होंने कहा हिंदू यूनिटी अबव ऑल

126
00:08:56,960 --> 00:09:01,200
और फिर तुम कह रही हो कि तुम जिस शिव को मानते हो वो ही है। इनका वो कमेंट

127
00:09:01,200 --> 00:09:05,280
है क्या आपके पास? वो कमेंट जरा शो कर देना इन्होंने लाइव

128
00:09:05,280 --> 00:09:09,280
लाइव में बोला था इन्होंने कि कुछ नहीं लाइव में बोला है कल

129
00:09:09,280 --> 00:09:13,840
इन्होंने किसी को कमेंट भी किया है उसका स्क्रीनशॉट मैंने अपनी स्टोरी पे लगाया Instagram स्टोरी पे

130
00:09:13,840 --> 00:09:18,160
इन्होंने किसी को कमेंट किया जाकर के कि जिसको तुम जिसको तुम पूजते

131
00:09:18,160 --> 00:09:22,160
हो वो जुड़ाई है ये बोला ये हिंदू यूनिटी है तुम्हारी और

132
00:09:22,160 --> 00:09:26,240
सबसे अच्छी बात ये के मामले में लाइफ में 40 मिनट

133
00:09:26,240 --> 00:09:29,360
में ही लड़ाई हो गई सबकी

134
00:09:29,360 --> 00:09:29,920
अरे

135
00:09:29,920 --> 00:09:34,160
भाई किसी की ईंट किसी का रोना और भानुमती

136
00:09:34,160 --> 00:09:38,640
का कुवा जोड़ा वह वाला काम तुम कर रही हो जाके

137
00:09:38,640 --> 00:09:42,960
जड़ में जाओ ना जड़ में पत्तों पर पानी डालने से कुछ नहीं होगा अभी दो दिन पहले तुम खुद हिंदू

138
00:09:42,960 --> 00:09:46,960
यूनिट पे आक्रमण कर रही थी ना रामानुज स्वीकार है तुम्हें ना

139
00:09:46,960 --> 00:09:51,040
शंकराचार्य स्वीकार है तुम्हें ना मधवाचार्य स्वीकार है तुम्हें तब तो तुम अड़ी

140
00:09:51,040 --> 00:09:55,680
हुई थी कि नहीं आर्य समाज ब्रह्म मुनि आकाइव

141
00:09:55,680 --> 00:10:00,960
फलानी वेबसाइट उस पर अड़ी हुई थी तब तुम्हें हिंदू यूनिटी याद नहीं आ रही थी

142
00:10:00,960 --> 00:10:04,960
अभी तो वो तुमने वो मक्कारी वगैरह वाले शब्द बोल दिए। थोड़ा

143
00:10:04,960 --> 00:10:09,040
सा अगर तुम वहां पर यह जवाब देते हुए आगे बढ़ जाती ना कि ठीक है मेरी परंपरा नहीं

144
00:10:09,040 --> 00:10:13,040
है। इस मामले में आप ही मुझे थोड़ा सा प्रकाश डालिए। परंपरा से क्या है? क्या नहीं है?

145
00:10:13,040 --> 00:10:17,520
तो मैं आपको एक सकारात्मक बताते हुए आगे बढ़ता।

146
00:10:17,520 --> 00:10:22,000
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तुम्हारा? धर्म क्या है?

147
00:10:22,000 --> 00:10:26,080
भाई तुम जब धर्म के ऊपर बात करने आ रही हो तो तुम्हें पूछा जाएगा ना कि

148
00:10:26,080 --> 00:10:30,080
धर्म आपकी जानकारी में धर्म है क्या? किसी कबीले का नाम

149
00:10:30,080 --> 00:10:34,320
है क्या धर्म जिसका परवसान मोक्ष में हो वह विधि धर्म

150
00:10:34,320 --> 00:10:38,640
है थोड़ा पढ़ लो जाकर के ये

151
00:10:38,640 --> 00:10:42,640
तुम्हें प्रकृति की परंपरा से मिला नहीं क्या बुद्धि के

152
00:10:42,640 --> 00:10:46,960
साथ खैर

153
00:10:46,960 --> 00:10:51,280
तो हिंदू यूनिटी की बात कर रहे हैं टाइटल डाला हिंदू यूनिटी

154
00:10:51,280 --> 00:10:55,280
बिठाया किसको है जिनके लिए हिंदू काफिर चोर लुटेरा डाकू है

155
00:10:55,280 --> 00:10:59,440
और वहां इंडियन पैक पता नहीं कौन बैठा हुआ है एक जो बहुत तर्कनिष्ठ व्यक्ति

156
00:10:59,440 --> 00:11:03,520
बन रहा है। तरह-तरह की बातें कर रहा है। उसकी बातें लेंगे यहां पे। मगर एक बात तो सर थोड़ा

157
00:11:03,520 --> 00:11:08,640
बहुत पुरुष बचा है कि नहीं बचा है भाई? वो महिला होकर के

158
00:11:08,640 --> 00:11:12,640
संपर्क कर रही है। हमने उसको जो है रील में जाकर के बोला

159
00:11:12,640 --> 00:11:16,800
और रील बना दी। उसने जो है महिला होकर के हमारा चैलेंज हम चैलेंज तो हमने

160
00:11:16,800 --> 00:11:21,200
दिया ही था। चैलेंज उसी ने दिया था। हमने तो कहा था चैलेंज वगैरह की भावना हटा दो। 510

161
00:11:21,200 --> 00:11:25,280
मिनट से ज्यादा टिक नहीं पाओ। और परंपरा क्यों आवश्यक है

162
00:11:25,280 --> 00:11:29,760
पूछना और किसी भी चीज में परंपरा क्यों पूछी जाएगी मैं इस पर बात करूंगा।

163
00:11:29,760 --> 00:11:33,760
अरे भैया जब हम तीन बैरन वास की बांसुरिया

164
00:11:33,760 --> 00:11:38,240
गिरजा मुख चूमत बनवारी गिरजा का मतलब क्या है? पार्वती

165
00:11:38,240 --> 00:11:42,320
गिरजा मुख चूम मत बनवारी। इसका मतलब क्या हो गया? गिरजा पार्वती

166
00:11:42,320 --> 00:11:47,520
माता बनवारी का मुख चूम रही है। यह निकलेगा क्या अर्थ?

167
00:11:47,520 --> 00:11:51,680
किसका भाष्य मान रही हो? वो इसलिए जरूरी है कि जब भाष्य में अर्थ

168
00:11:51,680 --> 00:11:56,560
में विपरीतार्थक बोध होने लग जाए तो निर्णायक कौन होगा?

169
00:11:56,560 --> 00:12:00,640
तो जब आर्य आर्य समाज ने दूसरा अर्थ कर रखा है उनहीं शास्त्रों

170
00:12:00,640 --> 00:12:02,160
का तो हम आपसे पूछेंगे ना कि

171
00:12:02,160 --> 00:12:06,480
आप आप यदि आर्य समाज के आधार पर विदेश यात्रा का समर्थन कर रही हैं

172
00:12:06,480 --> 00:12:10,640
या किसी भी सिद्धांत का समर्थन कर रही हैं आर्य समाज के आधार पर तो

173
00:12:10,640 --> 00:12:16,320
आर्य समाज की प्रमाणिकता हमें बता दो।

174
00:12:16,320 --> 00:12:22,000
जिस विषय में शब्द ही प्रमाण है उसमें आप कैसे खेल लोगे तर्क के बारे में

175
00:12:22,000 --> 00:12:26,160
जी तो एक तो ये वाली बात हो गई अभी सारे प्रश्न हम

176
00:12:26,160 --> 00:12:30,320
लोग लेंगे एक-एक करके और काफी हंसी की बातें

177
00:12:30,320 --> 00:12:34,400
भी थी उसमें उनमें आपस में भी उलझन ने जन्म ले लिया था।

178
00:12:34,400 --> 00:12:38,080
जी इबाकू जी आप बताएं।

179
00:12:38,080 --> 00:12:42,080
लाइव के पहले चार मिनट के अंतर्गत सबसे पहला स्टेटमेंट तो यह रखा

180
00:12:42,080 --> 00:12:46,160
गया कि अगर हम परंपरा से हो सकते हैं पर उस परंपरा का विरोध करें तो

181
00:12:46,160 --> 00:12:50,160
उससे ना हमारी परंपरा में कोई खोट आएगी ना हमारे गुरु शिष्य के रिलेशन में खोट

182
00:12:50,160 --> 00:12:54,320
आएगी। सबसे पहली बात तो इन्होने यही रखी थी चार मिनट के अंतर्गत कि

183
00:12:54,320 --> 00:12:58,720
परंपरा में हजारों अनुयाई होते हैं। अलग अलग आचार्य होते हैं। तो मतभेद

184
00:12:58,720 --> 00:13:02,720
होने से इसका मतलब ये नहीं है कि हम उस परंपरा के विरोधी हो गए। तो हम अपनी परंपरा

185
00:13:02,720 --> 00:13:07,920
में ही किसी का विरोध कर सकते हैं। सिद्धांतिक रूप से

186
00:13:07,920 --> 00:13:11,920
इसमें वो वाली बात भी जोड़ उपनिषद का वो वो जोड़

187
00:13:11,920 --> 00:13:16,160
दीजिए इसमें वो जोड़ दीजिए मैं जवाब दे दूं फिर तैत उपनिषद का [हंसी] बोला

188
00:13:16,160 --> 00:13:17,360
है उन्होंने कोटिंग

189
00:13:17,360 --> 00:13:21,440
में भूल गया लिखना कि तैत उपनिषद का आदेश है कि गलत आचरण वाले

190
00:13:21,440 --> 00:13:25,680
आचार्य एवं परंपरा को त्याग कर दे प्रकृति के नियम के अनुसार गुरु में भी दोष

191
00:13:25,680 --> 00:13:29,760
हो सकता है। इससे ये साबित नहीं होता कि परंपरा और गुरु का अपमान हो

192
00:13:29,760 --> 00:13:34,000
रहा है। अगर वो त्याग करना चाहे ये बात बोली है इन्होंने।

193
00:13:34,000 --> 00:13:39,440
चार मिनट के अंदर ही शुरुआत की। ठीक है। ठीक है। अभी यह बताइए

194
00:13:39,440 --> 00:13:43,760
कि जब हम किसी गुरु का विरोध कर रहे हैं।

195
00:13:43,760 --> 00:13:48,240
पहली बात तो ये जो तैत्री उपनिषद की ये जो श्रुति वाक्य है

196
00:13:48,240 --> 00:13:52,480
इसका अर्थ यदि हम यह ले लेंगे कि भैया गुरु पर अविश्वास प्रकट

197
00:13:52,480 --> 00:13:56,640
कर दो। अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तावित कर दो तो फिर वो आपका गुरु ही सिद्ध नहीं होगा।

198
00:13:56,640 --> 00:14:00,880
तो वहां पर कहा यह जा रहा है कि गुरुगम्य विद्या जो है गुरु

199
00:14:00,880 --> 00:14:05,200
गोविंद और ग्रंथ के द्वारा प्राप्त जो सिद्धांत है वो गुरु के आचरण

200
00:14:05,200 --> 00:14:09,360
में जब जहां जहां पर दिखाई ना दे वहां वहां पर गुरु का अनुसरण ना करें।

201
00:14:09,360 --> 00:14:13,680
जो गुरु गोविंद ग्रंथ के वो है सिद्धांत उनका आप आचरण

202
00:14:13,680 --> 00:14:17,920
करें। पहले तो इसका अर्थ ये लेना पड़ेगा। क्यों लेना पड़ेगा? क्योंकि यदि हमने

203
00:14:17,920 --> 00:14:21,920
गुरु पर ही यह लगा दिया तो वो गुरु आपका गुरु ही सिद्ध नहीं

204
00:14:21,920 --> 00:14:26,000
होगा। अद्वतारिका उपनिषद गुरु का मतलब अंधकार। रूह का मतलब

205
00:14:26,000 --> 00:14:30,000
निकालने वाला। गुरु वो है जिसने आपको अंधकार से निकाला।

206
00:14:30,000 --> 00:14:32,400
तो यदि आप यह क्लेम कर रहे हो कि क्या

207
00:14:32,400 --> 00:14:36,480
कहते हैं? इतने हिस्सों में मैं गुरु को नहीं जानता। यानी कि आप स्वयं को स्वयं ही

208
00:14:36,480 --> 00:14:40,480
अंधकार से निकाल रहे हो वहां पर। इसका मतलब वहां पर आप

209
00:14:40,480 --> 00:14:44,640
गुरु से प्राप्त होने वाले वेदों पर डिपेंड नहीं हो। उस अच्छे बुरे

210
00:14:44,640 --> 00:14:48,880
की जानकारी के लिए जबकि तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण

211
00:14:48,880 --> 00:14:52,960
है। आपका विवेक प्रमाण नहीं है। प्राथमिकता से शास्त्र प्रमाण

212
00:14:52,960 --> 00:14:57,040
है। क्योंकि अपने आप यह बात तो आर्य समाज

213
00:14:57,040 --> 00:15:01,520
भी स्वीकार करता है। अपने आप व्यक्ति सीख ही नहीं सकता। ईश्वर को आना ही पड़ेगा। अंतकरण

214
00:15:01,520 --> 00:15:06,560
में धर्म का बोध देने के लिए बताइए हम

215
00:15:06,560 --> 00:15:11,120
अपने आप कहां से आलोक अपने आप बोध हो ही नहीं सकता

216
00:15:11,120 --> 00:15:15,200
हां अपने आप आप पशु हैं। स्वयं से आप पशु

217
00:15:15,200 --> 00:15:19,600
हैं। जब तक कोई बाहरी बल आपको आ के मानवता

218
00:15:19,600 --> 00:15:23,680
की शिक्षा नहीं देगा। आप स्वयं से पशु हैं। मध्य मास मैथुन भागवत में वचन

219
00:15:23,680 --> 00:15:27,840
आया जो लोग ये मानते हैं भागवत को वहां भव्य राधा कृष्ण दास भी बैठा।

220
00:15:27,840 --> 00:15:32,160
फिलहाल आज मुझे जो है इन लोगों में भव्य राधा कृष्ण दास का तब भी मुझे एक भूमिका उसकी

221
00:15:32,160 --> 00:15:36,400
ठीक लगी कम से कम हालांकि उसके द्वारा

222
00:15:36,400 --> 00:15:40,640
स्वीकार सिद्धांतों का वहां इतना प्रचंड विरोध हो रहा था उसको जाना

223
00:15:40,640 --> 00:15:45,280
नहीं चाहिए था जाना था तो कम से कम काउंटर करना चाहिए था भाई परंपरा

224
00:15:45,280 --> 00:15:47,440
तो उसके भी ग्रंथों में लिखी हुई है परंपरा से

225
00:15:47,440 --> 00:15:53,280
ही होना चाहिए अर्थ परंपरा से ही होना चाहिए तो परंपरा का जब खंडन हो रहा है

226
00:15:53,280 --> 00:15:57,440
चलो मगर मगर फिर भी उसने इतना तो वो दिखाया

227
00:15:57,440 --> 00:16:01,440
कि भाई अपने सिद्धांतों के विपरीत तो नहीं बोला कम से कम सुनता

228
00:16:01,440 --> 00:16:05,520
रहा चलो इतना तो देना पड़ेगा उस लड़के ने उस लड़के ने इतना तो

229
00:16:05,520 --> 00:16:09,760
दिखाया ना अपना अपने सिद्धांतों के प्रति और ये लोग कैसे हैं सिद्धांत

230
00:16:09,760 --> 00:16:14,000
विहीन वही वो लड़का वो लड़का जिसका कोई सिद्धांत नहीं वो कहीं भी हाथ

231
00:16:14,000 --> 00:16:18,800
डाल देगा उसके लिए कुछ भी है कोई सिद्धांत है ही नहीं नास्तिक भी ऐसे ही होते हैं

232
00:16:18,800 --> 00:16:22,800
सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है

233
00:16:22,800 --> 00:16:27,040
ये उनको नहीं मालूम उनके पास ठोस आधार नहीं है वो कभी भी कोई भी निर्णय

234
00:16:27,040 --> 00:16:31,040
ले सकते हैं लिबरल होने के नाम पर। ठीक है? तो अब

235
00:16:31,040 --> 00:16:35,360
आते हैं वापस वो जो प्रश्न चल रहा है गुरु का विरोध तो गुरु का विरोध कर सकते हैं।

236
00:16:35,360 --> 00:16:39,440
बिल्कुल कर सकते हैं। पहली बात तो जिसका विरोध कर रहे हो वो गुरु सिद्ध नहीं

237
00:16:39,440 --> 00:16:43,680
हो रहा है। दूसरी बात आपके पास अधिष्ठान होना पड़ेगा अधर्म का फिर भी।

238
00:16:43,680 --> 00:16:48,240
यानी कि मान लीजिए कि किसी की निष्ठा जो है अह

239
00:16:48,240 --> 00:16:52,320
मुक्तेश्वर आनंद जी में नहीं आ रही है। ठीक है? और उनके उनका वो विरोध कर

240
00:16:52,320 --> 00:16:56,800
रहा है। ठीक है। मगर उसका अधिष्ठान धर्म का कौन होगा? शंगेरी के शंकराचार्य

241
00:16:56,800 --> 00:17:00,800
पूरी के शंकराचार्य यानी कि अधिष्ठान आपका बेस होना

242
00:17:00,800 --> 00:17:02,640
चाहिए कि मैं इस बेस पर खड़ा

243
00:17:02,640 --> 00:17:06,800
होकर के अब विरोध कर रहा हूं। अमुक गुरु का यदि आप सिरे से

244
00:17:06,800 --> 00:17:10,800
सभी परंपरा से प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों को ठुकराते हुए किसी के

245
00:17:10,800 --> 00:17:15,840
विरुद्ध बोल रहे हैं तो वहां पर आपकी वैदिकता पर प्रश्न उठ जाएगा।

246
00:17:15,840 --> 00:17:20,400
वहां पर आपकी वैदिकता पर प्रश्न उठ जाएगा। भाई

247
00:17:20,400 --> 00:17:24,640
एक लड़का था इसमें सांवले का लड़का बिल्कुल

248
00:17:24,640 --> 00:17:28,720
नपुंसकता वाला व्यवहार भाई खुले चैनल में बोल रखा

249
00:17:28,720 --> 00:17:31,440
है 7408301869

250
00:17:31,440 --> 00:17:35,760
तुम वहां पर ताल ठोक रहे हो कि मेरी डिबेट होगी ये होगा तो मैं पूछूंगा शिवश

251
00:17:35,760 --> 00:17:39,920
से ये करूंगा अरे भाई WhatsApp करो फॉर्म भरो लाइव आओ

252
00:17:39,920 --> 00:17:44,080
क्यों नहीं आ रहे हो क्योंकि नपुंसकता का व्यवहार है इसलिए

253
00:17:44,080 --> 00:17:48,160
नहीं आ रहे हो ना बातें ठुकवा लो बस एक मात्र शक्ति

254
00:17:48,160 --> 00:17:52,240
मिल गई जिसका जिसको ना सर का पता है ना पैर का पता है वो मंद बुद्धि

255
00:17:52,240 --> 00:17:56,400
पने से कार्य करती जा रही है उसके कंधे पर बंदूक रख के अपनीप गोलियां चला लो कि

256
00:17:56,400 --> 00:18:00,560
हम कुटे थे फलाने सन में शिवश के द्वारा तो हम भी अपना बदला ले लें इसके सहारे

257
00:18:00,560 --> 00:18:05,200
हम कुटे थे फलाने महीने में शिवश के द्वारा तो हम भी इसके [हंसी] सहारे

258
00:18:05,200 --> 00:18:09,280
इस महिला के सहारे जो है वो ले लें इसके 2 लाख सब्सक्राइबर हैं Instagram पर

259
00:18:09,280 --> 00:18:13,280
तो इसके जो इसको इसके 2 लाख में से 500 तो गाली देंगे ही शिवश

260
00:18:13,280 --> 00:18:17,790
को हमारे दिल को तसल्ली मिल जाएगी उसने हमारी रातों की नींद छीन ली है

261
00:18:17,790 --> 00:18:21,840
[हंसी] वो वो पगलिया वो

262
00:18:21,840 --> 00:18:25,840
पागल बनके हां हां वो पगलिया की तरह

263
00:18:25,840 --> 00:18:29,840
और वो शिवश नारायण द्विवेदी डायरिया करके गए ये अरे भाई

264
00:18:29,840 --> 00:18:33,920
तुम्हारे पास इतने तर्क थे नियम नहीं है मध्यस्थ नहीं

265
00:18:33,920 --> 00:18:37,920
है परंपरा पे सवाल नहीं होना है ये सब तर्क मर गए थे क्या

266
00:18:37,920 --> 00:18:42,720
तब जब सामने बैठी थी अब्बा डब्बा चब्बा

267
00:18:42,720 --> 00:18:46,800
तर्क भी तर्क भी अगर हम छोड़े तर्क भी अगर हम छोड़े नैतिकता की बात करें

268
00:18:46,800 --> 00:18:50,800
इन्होंने ने बोला था कि शिवश जी के जो अनुयाई है या फिर शंकर

269
00:18:50,800 --> 00:18:54,880
परंपरा के जो इंटरनेट पर फॉलोअर हैं वो इनकी फोटो एडिट कर रहे थे। एआई

270
00:18:54,880 --> 00:18:59,040
से बना रहे थे। इनको गालियां दे रहे थे। तब अब इनकी नैतिकता कहां गई? जब इन्होंने रील में आपकी

271
00:18:59,040 --> 00:19:03,120
फोटो को यही करा आपके बारे में जो जो बुरा नाम बिगाड़ा तब इनकी नैतिकता कहां

272
00:19:03,120 --> 00:19:07,120
गई? जबकि आपने मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं कहा। मैंने पर्सनली इन पर

273
00:19:07,120 --> 00:19:11,120
ऐसा कोई अटैक नहीं किया है। ठीक है। और अभी भी ये पगलिया कहना,

274
00:19:11,120 --> 00:19:15,200
मंदबुद्धि कहना यह मर्यादा के अंदर है। संडास नहीं

275
00:19:15,200 --> 00:19:20,720
भेज दिया तुमको। ठीक है। शौचालय नहीं भेज दिया तुमको।

276
00:19:20,720 --> 00:19:24,800
भाई अश्लील शब्द अश्लील अश्लील चित्रण नहीं

277
00:19:24,800 --> 00:19:29,440
कर दिया तुम्हारा। नैतिकता बदल गई व पागल कहीं की

278
00:19:29,440 --> 00:19:33,040
इनका एक और इन्होंने पांचवे छठे मिनट में ही कहा था।

279
00:19:33,040 --> 00:19:37,120
पागल ही हो गई। ऐसा करंट का झटका लगा उसको उस दिन से पागल ही हो गई है। जाने क्या-क्या बक

280
00:19:37,120 --> 00:19:41,120
रही है? अच्छा कोई भी कोई भी इंटेलेक्चुअल कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति

281
00:19:41,120 --> 00:19:45,120
देखेगा वो जो रील बनाई है उसमें वो संडास का सीन दिखा रही है ये धर्म का

282
00:19:45,120 --> 00:19:49,600
प्रचार कर रहे हो तुम लोग हसे बदला लेना हो रामपाल

283
00:19:49,600 --> 00:19:53,680
रामपाल गैंग ने यही किया है राक्षस का चेहरा बना दिया

284
00:19:53,680 --> 00:19:57,680
कॉमेडी का वही तुम कर रही हो यही यही है सिद्धांत तुम्हारे पास क्योंकि वो तो

285
00:19:57,680 --> 00:20:02,640
सिद्धांत है नहीं ना भाष ब्रह्म सूत्र का ना कुछ है अरे भैया

286
00:20:02,640 --> 00:20:08,000
धर्म क्या है जिस विधि का परवसान मोक्ष में हो

287
00:20:08,000 --> 00:20:12,000
तो तुम्हारा मोक्ष कौन सा है?

288
00:20:12,000 --> 00:20:16,240
अद्वैत है, द्वैत है, विशेषता द्वैत है। अगर नहीं है तो तुम्हारा धर्म कहां से सिद्ध

289
00:20:16,240 --> 00:20:18,640
होगा?

290
00:20:18,640 --> 00:20:22,960
जब तुम धर्म पे बात करने आओगी प्रबुद्ध जनों से जब बात करने

291
00:20:22,960 --> 00:20:27,120
चिलाटुओं को तुम पकड़ती हो और बात करती रहती हो। ठीक है? करती रहो। बौद्धों

292
00:20:27,120 --> 00:20:31,520
को करो जाकर के जितने उसमें भी किसी दिन कोई खड़ा हो जाएगा तो

293
00:20:31,520 --> 00:20:35,280
टाइट हो जाएगा सब मामला।

294
00:20:35,280 --> 00:20:39,280
अरे पहले अपना धर्म सुनिश्चित तो करो मेरा धर्म है क्या उस धर्म

295
00:20:39,280 --> 00:20:43,280
के आधार पर अपनी बात रखना शुरू करो ना तो तुमने यह तय किया कि

296
00:20:43,280 --> 00:20:47,600
त्रतवाद है आर्य समाज का ये भी मैंने जानता हूं तुमने इतना नहीं सोचा होगा बस

297
00:20:47,600 --> 00:20:48,240
लगे

298
00:20:48,240 --> 00:20:52,320
फायर मामा आ गए मामा आ गए वाला तो मैं वो जरा पूरा कर लूं

299
00:20:52,320 --> 00:20:56,320
वो जो गुरु का विरोध हो सकता है गुरु का विरोध हो सकता है मगर तब जब

300
00:20:56,320 --> 00:21:00,640
हम अधिष्ठान के रूप में किसी और अन्य सामर्थ्यवान गुरु को पकड़े

301
00:21:00,640 --> 00:21:04,960
रहे परंपरा प्राप्त आचार्य का विरोध हो सकता है मगर तब

302
00:21:04,960 --> 00:21:09,200
जब हम किसी अन्य परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में हो। अगर

303
00:21:09,200 --> 00:21:13,200
हम स्वतंत्र होकर के परंपरा प्राप्त आचार्य का ही विरोध करेंगे कि हम स्वतंत्र है। हम किसी

304
00:21:13,200 --> 00:21:17,280
को नहीं मानते और हम इसका विरोध कर रहे हैं। यानी कि हम संप्रदाय परंपरा पर

305
00:21:17,280 --> 00:21:21,280
विश्वास नहीं कर रहे। जब परंपरा पर विश्वास नहीं कर रहे तो सुती परंपरा पर विश्वास होना सिद्ध

306
00:21:21,280 --> 00:21:25,920
नहीं होगा। परखच्चे उड़ जाएंगे। परखच्चे जिस दिन सामने आओगे

307
00:21:25,920 --> 00:21:30,000
और परंपरा पर बात करना आवश्यक क्यों है? तुमको प्रमाण हम देने से

308
00:21:30,000 --> 00:21:34,000
पहले सुनिश्चित तो करें कि तुम प्रमाण मानती किसे हो? यही

309
00:21:34,000 --> 00:21:38,000
बातें हमारी उनसे होती है ब्रह्मा कुमारी वालों से देख लो जाकर के वीडियो यही

310
00:21:38,000 --> 00:21:42,480
बातें रामपालियों से होती है भाई तुम हमें

311
00:21:42,480 --> 00:21:47,040
एक शास्त्र का कोई वाक्य ला के उसके नीचे दबाने का प्रयास कर रहे हो

312
00:21:47,040 --> 00:21:51,200
तो वो शास्त्र आया कहां से है और उसका तुम अपना

313
00:21:51,200 --> 00:21:55,360
मनगढ़ंत अर्थ लेकर के और हम पर उसका दबाव डालना चाहती हो तो हम उसके स्त्रोत

314
00:21:55,360 --> 00:21:59,440
की बात करके यह सिद्ध करते हुए कि भैया इसका वही अर्थ मान्य होगा जो हम

315
00:21:59,440 --> 00:22:05,440
बताएंगे क्योंकि यह परंपरा से हमारे पास आए हैं।

316
00:22:05,600 --> 00:22:10,000
अच्छा एक बात बताओ कि यह जो

317
00:22:10,000 --> 00:22:14,160
मातृशक्ति है जो इस समय मेंटल उसमें चली गई है विक्षिप्तता

318
00:22:14,160 --> 00:22:18,160
में तो ये कोई बात जो इसके रेफरेंस

319
00:22:18,160 --> 00:22:22,160
से मानी जाएगी वो यह बोलेगी तब मानी जाएगी या कोई भी बोल देगा तो मान

320
00:22:22,160 --> 00:22:26,320
ली जाएगी इन्हीं के रेफरेंस से मानी जाएगी मतलब नहीं नहीं इनका

321
00:22:26,320 --> 00:22:30,320
कहने का मतलब है कि इनके वाक्य का अर्थ कोई दूसरा बताएगा

322
00:22:30,320 --> 00:22:34,720
अभी मैं वहां गया था दिल्ली में पालम में आध्यात्मिक

323
00:22:34,720 --> 00:22:39,200
विश्वविद्यालय आप तो थे ना वहां सनातन शंकर जी है ना जी [गला साफ़ करने की आवाज़] जी

324
00:22:39,200 --> 00:22:43,680
वहां पे बाय प्रोडक्ट निकला हुआ है एक ब्रह्मा

325
00:22:43,680 --> 00:22:47,680
कुमारीज का ठीक है आध्यात्मिक

326
00:22:47,680 --> 00:22:51,680
अब वहां पे बाय प्रोडक्ट निकला है उसने कहा मैं भगवान हूं मैं भगवान हो चुका हूं भगवान मेरे

327
00:22:51,680 --> 00:22:55,680
अंदर आ चुका है और वहां पे करीब 20 25

328
00:22:55,680 --> 00:22:59,760
50 लड़कियां जो है ब्रेन वाश करके वहां पर रह रही है अपने फैमिली से दूर

329
00:22:59,760 --> 00:23:03,840
आ गई फैमिली वाले हाई कोर्ट जा रहे हैं सुप्रीम सुम्री कोर्ट जा रहे हैं कि हमारी बच्चियों का ब्रेन

330
00:23:03,840 --> 00:23:07,920
वाश करके यहां रखा हुआ है। हम वहां गए तुम नहीं गए थे। केवल

331
00:23:07,920 --> 00:23:12,080
बातें झोंकते हो कमरे में बैठ के। जिस दिन बर्फ

332
00:23:12,080 --> 00:23:16,160
की सिल्ली पे लिटा के चार-चार डंडे पड़ेंगे ना उस दिन ये जो शौक

333
00:23:16,160 --> 00:23:20,160
चढ़ा है ना ये YouTube YouTube पे और जो है एक्शन

334
00:23:20,160 --> 00:23:20,800
पैक फिल्में

335
00:23:20,800 --> 00:23:24,800
बनाने का। सब उतर जाएगा नशा। जिस दिन धरातल पर सामना होगा

336
00:23:24,800 --> 00:23:29,040
मुसीबतों से। हां। उन्होंने ये भी कहा था। इसमें

337
00:23:29,040 --> 00:23:33,360
उन्होंने ये भी कहा था अपनी लाइव में 30 मिनट के आसपास कि आपकी

338
00:23:33,360 --> 00:23:37,680
परंपरा यानी शिवश जी की परंपरा में ऐसा कोई भी एक व्यक्ति दिखा दीजिए

339
00:23:37,680 --> 00:23:42,960
जिसने उनसे ज्यादा नव बौद्ध और इस्लाम का खंडन किया हो

340
00:23:42,960 --> 00:23:47,120
उनसे ज्यादा मेहनत करी हो सैद्धांतिक खंडन में ये ये अभी लेते

341
00:23:47,120 --> 00:23:51,360
हैं ये अगला प्रश्न है तो जब मैं वहां गया

342
00:23:51,360 --> 00:23:54,000
यहां पर एक

343
00:23:54,000 --> 00:23:58,160
इस पॉइंट को याद रखिए

344
00:23:58,160 --> 00:24:02,400
यहां यहां पे है कोई आजादी वादा करके जो कि वहां पे जुड़े

345
00:24:02,400 --> 00:24:06,480
थे वो यहां पे लिंक मांग रहे हैं कमेंट में। नहीं

346
00:24:06,480 --> 00:24:10,480
अभी ये जो चर्चा है ये कोई डिबेट वाली चर्चा

347
00:24:10,480 --> 00:24:14,560
नहीं है। ये उनको रिप्लाई है केवल कोई डिबेट हम हम यहां पे वो नहीं करते

348
00:24:14,560 --> 00:24:18,960
हैं कि भैया वो चार तरह के लोगों को बिठा लो आपस में वो चिल्लप

349
00:24:18,960 --> 00:24:23,040
होने लगे उनके बीच में ही जो उनके यहां हुआ है। आज उनके यहां हुआ है

350
00:24:23,040 --> 00:24:28,160
ना? नहीं नहीं हमारे ये हमारे साथ आज यही हुआ है। यही हुआ है।

351
00:24:28,160 --> 00:24:32,240
अच्छा तो दे दो उनसे कहो

352
00:24:32,240 --> 00:24:36,240
नंबर पर वो WhatsApp करें 748301869 वहां पर इनको वो

353
00:24:36,240 --> 00:24:40,320
दिया जाएगा क्या कहते हैं लिंक क्योंकि

354
00:24:40,320 --> 00:24:44,320
यहां डाल देंगे तो सबके पास आ जाएगा तो मैं ये कह रहा था

355
00:24:44,320 --> 00:24:48,400
जी आपको पता चल गया होगा हां तो मैं ये कह

356
00:24:48,400 --> 00:24:52,720
रहा था कि जब मैं वहां गया तो उसने क्या कहा कि हम वेदों को तो मानते

357
00:24:52,720 --> 00:24:56,720
हैं पर उसका अर्थ में सबने विकृति कर ली है भाई

358
00:24:56,720 --> 00:25:00,800
वेदों के अर्थ में यदि तुम्हें लग रहा है सबने विकृति कर ली तो तुम्हारे पास तो

359
00:25:00,800 --> 00:25:04,880
वेद नहीं आए ना तो वेदों की प्रामाणिकता कहां से सिद्ध हो रही है

360
00:25:04,880 --> 00:25:09,120
तुम छोड़ दो ना वेद का नाम लेना अगर गुरु गलत हो सकते हैं और तुम्हारी

361
00:25:09,120 --> 00:25:13,360
नजरों में सारे गुरु गलत हो सकते हैं कोई गुरु है ही नहीं जिस पर आप विश्वास

362
00:25:13,360 --> 00:25:17,520
कर सको कि झूठ नहीं बोलेगा वेद का अर्थ बताते समय धर्म का अर्थ बताते समय उससे पौरुष

363
00:25:17,520 --> 00:25:21,600
दोष हो सकते हैं गुरु से वाकलन हो सकता है पौरुष

364
00:25:21,600 --> 00:25:25,760
दोष हो सकते हैं मगर एट द एंड उसके द्वारा धर्म की और ब्रह्म की

365
00:25:25,760 --> 00:25:29,840
व्याख्या करते समय यदि यदि आपको यह लग रहा है कि ये झूठ बोल सकता है अज्ञानता

366
00:25:29,840 --> 00:25:33,840
वश लोभवश मोह वश भय वश झूठ बोल

367
00:25:33,840 --> 00:25:38,080
सकता है तो तुम ऐसे किसी गुरु को ढूंढो जो परंपरा

368
00:25:38,080 --> 00:25:42,880
से हो जिससे जिसमें तुम्हारी प्रमाण्य बुद्धि हो जाए या तब तो वैदिक रह पाओगे

369
00:25:42,880 --> 00:25:46,880
और अगर नहीं ढूंढ पा रहे हो तो वेदों का नाम लेना बंद करो मैं ये नहीं कह

370
00:25:46,880 --> 00:25:50,960
रहा कि गुरु में दोष नहीं हो सकते मगर यदि हो सकते हैं तो वेदों में भी दोष

371
00:25:50,960 --> 00:25:54,960
हो सकता है यह बात क्यों छोड़ देते हो यदि गुरु में

372
00:25:54,960 --> 00:25:59,040
दोष हो सकता है तो दोष ही गुरु के द्वारा मिलने वाले वेद मंत्रों

373
00:25:59,040 --> 00:26:03,200
में भी दोष हो सकता है। वहां पर भी वो

374
00:26:03,200 --> 00:26:08,320
झूठ बोल सकता है। ये आधा न्याय क्यों कर रहे हो? अर्ध कुकुट न्याय क्यों कर रहे हो?

375
00:26:08,320 --> 00:26:12,320
कि जो गुरु झूठ बोल सकता है वो तुम्हें मंत्र सत्य देगा। 100% ये

376
00:26:12,320 --> 00:26:16,640
क्या है? प्रमाण बुद्धि खत्म करो। बाहर आओ। उन वेदों

377
00:26:16,640 --> 00:26:20,800
का नाम लेना छोड़ो जिन्हें हम वेद कहते हैं। तो क्या

378
00:26:20,800 --> 00:26:24,960
करोगे? नया ग्रंथ लिखो। अपनी तर्क शक्ति के आधार पर

379
00:26:24,960 --> 00:26:28,400
जो स्वतंत्र हो के तुम्हें सही लग रहा है धर्म के नाम से लिखो उसको

380
00:26:28,400 --> 00:26:33,120
नाम दो क्या नाम देंगे अवेकनिंग अवेकनिंग शास्त्र

381
00:26:33,120 --> 00:26:37,520
या फिर वो क्या था इंडिया पैक शास्त्र

382
00:26:37,520 --> 00:26:41,600
है ना भव्य तो उस बात को मान नहीं रहा था वो मैंने देखा था शांत

383
00:26:41,600 --> 00:26:45,680
भव्य शांत था वहां भव्य का रोल आज बहुत डिसेंट रहा उसके

384
00:26:45,680 --> 00:26:49,680
सिद्धांतों के विरोध में बात हो रही थी वहां किसी ने उसने उसका किसी उसने किसी

385
00:26:49,680 --> 00:26:53,760
का बंदे ने पक्ष नहीं लिया मेरी जानकारी में नहीं लिया ले लिया हो तो बात अलग अलग है। मगर भव्य

386
00:26:53,760 --> 00:26:57,760
का रोल वहां बहुत ठीक था। कम से कम भाई सामर्थ्य है नहीं

387
00:26:57,760 --> 00:27:01,760
कि सबको हम काउंटर कर पाए तो कम से कम मौन रह लो। इतना तो किया उस बंदे

388
00:27:01,760 --> 00:27:05,920
ने। यही होता है सिद्धांत विहीन सिद्धांत सिद्धांतवादी

389
00:27:05,920 --> 00:27:10,080
व्यक्ति की ये जो इक्वलिटी होती है वो अपने सिद्धांतों की रक्षा करता

390
00:27:10,080 --> 00:27:14,080
है भाई। ये कैसा सिद्धांत है तुम्हारा जो आज तुम कह रहे हो हिंदू हिंदू

391
00:27:14,080 --> 00:27:18,080
यूनिटी कल तब तुम शंकर संप्रदाय रामा संप्रदाय सब पर उंगली उठा रही है विदेश

392
00:27:18,080 --> 00:27:22,320
गमन के मामले में। अरे मौन हो जाओ ना सम्मान कर लो उनका उन आचार्यों का

393
00:27:22,320 --> 00:27:26,720
भाई आचार्यों ने बात कही है इस बारे में काउंटर ना करके अलग तरीके से मुक्ति

394
00:27:26,720 --> 00:27:30,800
अगर तुम्हारी वो अपनी वो जो व्यक्तिगत दुश्मनी है उसप तब बात

395
00:27:30,800 --> 00:27:34,800
हो ना तुमने अपने आप को स्वतंत्र घोषित करके ही हमें यह मौका

396
00:27:34,800 --> 00:27:38,880
दिया है कि हम तुमसे पूछ सके यदि तुम स्वतंत्र हो तो तुम्हारी वैदिकता सिद्ध कैसे कर

397
00:27:38,880 --> 00:27:43,360
रही हो और अगर तुम आर्य समाज के द्वारा आओगी

398
00:27:43,360 --> 00:27:43,860
तो

399
00:27:43,520 --> 00:27:48,320
ना तो आर्य समाज की प्रामाणिकता प्रामाणिकता से आर्य समाज सिद्ध होगा

400
00:27:48,320 --> 00:27:52,320
और ना ही वह यक्तिक धरातल पर सिद्ध होगा ना ही उसका धर्म धर्म सिद्ध होगा ना

401
00:27:52,320 --> 00:27:56,400
ही वह ब्रह्म सिद्ध होगा कहां से आओ क्या करोगे वो

402
00:27:56,400 --> 00:28:00,400
खुद ही अपना अस्तित्व तलाशता ढूंढ रहा है आज भी लोग आर्य

403
00:28:00,400 --> 00:28:04,480
समाज के नाम से कभी भी कहीं भी संस्था खोल सकते हैं और

404
00:28:04,480 --> 00:28:08,560
जिहादियों की शादी करवा रहे हैं अपने यहां क्या कर पा रहा है आर्य समाज मैं अभी

405
00:28:08,560 --> 00:28:13,120
अगर शंकराचार्य के नाम से गोवर्धन मठ के नाम से कोई गलत चीज बोलने लगूं तो गोवर्धन

406
00:28:13,120 --> 00:28:17,360
की ओर से मना कर दिया जाएगा ना ये हमारा आदमी नहीं है आर्य समाज ये नहीं कर पाएगा क्योंकि

407
00:28:17,360 --> 00:28:21,600
गुरु गद्दी है ही नहीं। गुरु परंपरा है ही नहीं। परंपरा पर तो खुद लात मारी

408
00:28:21,600 --> 00:28:25,600
ना हमने तो कोई भी अपने आप को आर्य समाजी कहने के लिए स्वतंत्र घूम रहा

409
00:28:25,600 --> 00:28:30,800
है। अभी देखो जाकर के कौन सी माता का मंदिर है वो?

410
00:28:30,800 --> 00:28:34,800
हां जहां पर वीडियो बनाया था आपने खड़ा होकर। मैंने वीडियो बनाया था पूजा भी हो रही है। वहां

411
00:28:34,800 --> 00:28:39,760
पे मूर्ति पूजा हो रही है। आर्य समाज मंदिर लिखा हुआ है। क्या कर पा रहे हैं तुम्हारे लोग?

412
00:28:39,760 --> 00:28:43,840
गोवर्धन मठ के नाम से तुम खुलवा दो। हम कम से कम हम उसप

413
00:28:43,840 --> 00:28:48,080
प्रयास तो कर सके। हमारे पास अधिकार तो है लड़ाई जीत इस पे संदीपन

414
00:28:48,080 --> 00:28:52,240
जी ने क्या कहा था संदीपन जी ने कहा था कि भाई जहां पर आर्य समाज

415
00:28:52,240 --> 00:28:56,400
मूर्ति पूजा कर रहा है वहां भी तुम हमारा विरोध कर रहे हो जहां पर मूर्ति

416
00:28:56,400 --> 00:28:58,640
पूजा नहीं कर रहा है वहां भी तुम हमारा विरोध

417
00:28:58,640 --> 00:29:02,640
कर रहे हो [हंसी] तुमको हम याद दिला रहे हैं

418
00:29:02,640 --> 00:29:07,280
कि परंपरा को ना मानने की स्थिति में तुम्हारा अपना अस्तित्व किस हाल में है

419
00:29:07,280 --> 00:29:11,600
जिस दिन कभी मैं अपनी किताब लेकर के आ जाऊंगा तुम्हारे सामने खुद की छापी हुई सत्यार्थ प्रकाश

420
00:29:11,600 --> 00:29:17,120
मुझे कुछ तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा मुझे देने के मेरे पास होगा।

421
00:29:17,120 --> 00:29:21,200
समझ में आ रहा है? पहली बात तो इसीलिए इसीलिए

422
00:29:21,200 --> 00:29:25,440
निर्भय आर्य जैसे जो है ये कभी भी ये नहीं कहते हैं कि हमारे समाज की संस्था से जुड़े

423
00:29:25,440 --> 00:29:29,520
हुए हैं। ये कहते हैं कि हम दयानंद महर्षि दयानंद को मानते हैं और बस

424
00:29:29,520 --> 00:29:33,680
उन्हीं के सिद्धांतों पे बात कर कभी नहीं बोलेंगे कि हम अग्निवर्त नष्ट से जुड़े

425
00:29:33,680 --> 00:29:37,680
हैं या आर्य समाज दिल्ली सभा से जुड़े हुए हैं। कभी नहीं कहते

426
00:29:37,680 --> 00:29:41,680
क्योंकि उन्हें पता है इनका आपस में विरोध चल रहा है सबका। तो इसका मतलब जो

427
00:29:41,680 --> 00:29:45,920
आर्य समाज वर्तमान में है वह विश्वास के योग्य नहीं है। बिल्कुल

428
00:29:45,920 --> 00:29:50,240
बिल्कुल तो दयानंद जी ने अपनी किताब किसको दी है तुम में से

429
00:29:50,240 --> 00:29:54,400
बताओ किसी को भी नहीं दी थी फस जाओगे यार

430
00:29:54,400 --> 00:29:58,480
इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में तुम्हें समझ में नहीं आता है

431
00:29:58,480 --> 00:30:02,640
वो स्त्री हो स्त्री वो पगला गई है उसको अब संडास डायरिया ये सब दिखाई

432
00:30:02,640 --> 00:30:06,880
देने लगा है धर्म की बातों में मुझे ये लगा आज की जो स्ट्रीम

433
00:30:06,880 --> 00:30:10,960
देखकर मुझे यह लगा कि वो अपना मानसिक तन संतुलन खो चुकी है कुछ भी

434
00:30:10,960 --> 00:30:13,760
बोल रही है अरे आप इंस्टा पे नहीं हो उसने बड़ी

435
00:30:13,760 --> 00:30:17,840
कॉमेडी वाली रील बनाई उसको देख के समझ में आया कि वाकई में

436
00:30:17,840 --> 00:30:22,160
शौक लग गया उनको। बहुत बड़ा शौक लगा। और अरे मुझे तो जब

437
00:30:22,160 --> 00:30:26,320
जब मैं देख रहा था तो मुझे एक ही मन में विचार आया। मैंने कहा शिवास जी को बोलूंगा

438
00:30:26,320 --> 00:30:31,760
शिवास जी परंपरा नहीं पूछनी थी। परंपरा क्यों पूछी आपने? [हंसी]

439
00:30:31,760 --> 00:30:35,760
परंपरा इसलिए पूछी कि आपको पहले हम धर्म के अंदर तो लाए।

440
00:30:35,760 --> 00:30:40,000
फिर आपको बता देते हैं। आपने रामानुजाचार्य जी पर विश्वास किया। देखो रामानुजाचार्य विदेश गमन

441
00:30:40,000 --> 00:30:44,160
कर वो कर रहे हैं। मत खेलो ना यार। जब तुम्हारे अंदर उन

442
00:30:44,160 --> 00:30:48,720
चीजों से भिड़ने का सामर्थ्य नहीं है। दूर रहो। दूर रहो।

443
00:30:48,720 --> 00:30:52,720
दूर रहो ना। कुछ आता जाता है नहीं। नास्तिकता का खंडन है

444
00:30:52,720 --> 00:30:57,600
ना मोक्ष के बारे में कभी पता किया। धर्म की परिभाषा मालूम नहीं होगी।

445
00:30:57,600 --> 00:31:01,760
कुछ नहीं है। जीरो। बढ़ी नहीं। उस दिन आगे।

446
00:31:01,760 --> 00:31:05,840
पूछता मैं ब्रह्मसूत्र का भाष्य कौन? किसका मान रही हो भाई? अरे भैया तुमसे

447
00:31:05,840 --> 00:31:09,840
बात किस आधार पे करें? किस आधार पे बात करें हम

448
00:31:09,840 --> 00:31:14,080
तुमसे? अपनी कुछ वो तो बताओ बेस यह मेरा बेस

449
00:31:14,080 --> 00:31:18,080
है। अच्छा वह बेस जो तुम बताओगी अब तुमने बता दिया आर्काइव बेस है तो वह

450
00:31:18,080 --> 00:31:22,480
आका तुम्हारा बेस सिद्ध ही नहीं होगा। तुमको कोई रैशन

451
00:31:22,480 --> 00:31:26,480
बेस बताना होगा ना जिसको हम तुम्हारा बेस मान सके। तुम

452
00:31:26,480 --> 00:31:28,880
तो कह दो कुरान मेरा बेस है। एक लाइन जो

453
00:31:28,880 --> 00:31:33,040
भी चीज मुझे प्रकृति के लिए अच्छी लगेगी मैं मान सकती हूं कि वो वेद है।

454
00:31:33,040 --> 00:31:37,200
यह तुम्हारी वेदों को वेद मानने की परिभाषा है कि मुझे

455
00:31:37,200 --> 00:31:41,520
जो अच्छा लगेगा वो मैं मान सकता हूं कि ये वेद का अर्थ है। वाह

456
00:31:41,520 --> 00:31:47,520
निठारी को अच्छा लगेगा। कुकर में उबाल के बच्चे खाओ। वो कह देगा ये भी वेद का अर्थ है।

457
00:31:47,680 --> 00:31:50,000
ह

458
00:31:50,000 --> 00:31:54,480
भाई मैच्योर लेडी हैं आप। घर गृहस्ती वाली हैं।

459
00:31:54,480 --> 00:31:58,960
थोड़ा सा मैच ये सब बच्चे हैं। लड़के हैं जो उकसा रहे हैं। आपको

460
00:31:58,960 --> 00:32:03,200
आपकी आयु होगी इनसे डबल। थोड़ा उसका ध्यान

461
00:32:03,200 --> 00:32:07,520
रखो अपने लेवल का मैच्योरिटी का। वो बच्चे उकसा

462
00:32:07,520 --> 00:32:11,600
रहे हैं। वो आगे कर रहे हैं। अच्छा मैं वो वो पहला चैप्टर पहला चैप्टर पूरा

463
00:32:11,600 --> 00:32:15,680
कर दूं। बार-ब रह जाता है। तो पहला चैप्टर क्या है कि गुरु का हम विरोध

464
00:32:15,680 --> 00:32:19,760
कर सकते हैं। मगर किसी अन्य परंपरा से प्रामाणिक गुरु के सानिध्य में रहते हुए यदि

465
00:32:19,760 --> 00:32:24,160
हमें वैदिकता की लाइन में रहना है और यदि हम स्वतंत्र होकर के कर रहे हैं

466
00:32:24,160 --> 00:32:28,320
कि नहीं हमें किसी पर विश्वास नहीं है तो हमें घोषित करना होगा कि फिर जो गुरु

467
00:32:28,320 --> 00:32:32,400
गलतियां कर सकता है गलत बोल सकता है वो वेद भी गलत दे सकता है। मान

468
00:32:32,400 --> 00:32:36,560
लो ना फिर वेद में प्रमाण बुद्धि नहीं रह जाएगी। ये बात है। तो ये इसका

469
00:32:36,560 --> 00:32:40,640
आंसर हो गया। दूसरी बात इन्होंने एक बात कही है कुरान वाली कि जितना मैंने खंडन नहीं

470
00:32:40,640 --> 00:32:43,920
किया। क्या खंडन है? ओपन चैलेंज दे रहा

471
00:32:43,920 --> 00:32:48,000
हूं तुमको। मैं मुसलमान बन के बात करूंगा। टिक नहीं पाओगे 10

472
00:32:48,000 --> 00:32:52,240
मिनट। और फिर तुम बनना जो बनना हो

473
00:32:52,240 --> 00:32:56,480
और मैं शंकराचार्य का शिष्य बन के बात करूंगा।

474
00:32:56,480 --> 00:33:01,280
पर कच्चे उड़ जाएंगे। बेवकूफ हो तुम और कुछ नहीं है।

475
00:33:01,280 --> 00:33:04,640
सिद्धांत विहीन हो।

476
00:33:04,640 --> 00:33:09,200
पागल हो चुकी हो। अंधे अंधी हो चुकी हो। जो तुम्हारे

477
00:33:09,200 --> 00:33:13,200
शास्त्रों को शास्त्र के ज्ञान को प्रिजर्व करके बैठे हुए हैं उनहीं

478
00:33:13,200 --> 00:33:17,120
पर उंगली उठा रही हो बेवकूफ

479
00:33:17,120 --> 00:33:21,840
और यह करने के चक्कर में तुम अपना पल्ला विधर्मियों के सामने कमजोर करके

480
00:33:21,840 --> 00:33:25,840
प्रस्तुत कर रही हो और ये जो तुम्हारा दिखावा है कि

481
00:33:25,840 --> 00:33:30,080
हम परंपरा का विरोध नहीं कर रहे हैं। अरे भाई तो क्यों शंगेरी मठ के नाम पे तुमने बोला

482
00:33:30,080 --> 00:33:34,160
कि इतनी डोनेशन आती है फिर भी ये झुंझुन झुंझुनों को मेरे सामने भेजा है। तो वो तो हम

483
00:33:34,160 --> 00:33:38,400
मुक्तेश्वर जी से जुड़े हुए लोग थे ना तुम्हारी जानकारी में फिर क्यों शंगेरी वालों पर कटाक्ष

484
00:33:38,400 --> 00:33:42,480
किया और तुमको अगर कोई भी

485
00:33:42,480 --> 00:33:46,640
शंकराचार्य से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति कुछ कह देगा तो उस शंकराचार्य के जो दूसरे

486
00:33:46,640 --> 00:33:50,640
शिष्य होंगे वो उनसे जुड़ा हुआ माना जाएगा और वो उनके फेवर में माना जाएगा तो

487
00:33:50,640 --> 00:33:54,720
फिर जो शंकराचार्य का वो शिष्य तुम्हारे यहां क्या कर रहा है जो तुम्हारे यहां बैठा है

488
00:33:54,720 --> 00:33:58,880
वो उसके गुरु भाई बहन नहीं है क्या मेलोडी ड्रामा

489
00:33:58,880 --> 00:34:02,880
कर रखा है अजीब पंचरंगी वो गाना गा लो तुम हम पागल नहीं है भैया

490
00:34:02,880 --> 00:34:07,520
हमारा दिमाग खराब है। वो गाना गा लिया करो।

491
00:34:07,520 --> 00:34:11,680
बोलिए। बातें भी बातें भी घुमा ही रही है। कहती है कि कल इन्होंने जो

492
00:34:11,680 --> 00:34:15,680
लाइव हुई थी आपकी और उनकी उसमें इन्होंने ये कहा था कि उनके पिता श्री माता श्री

493
00:34:15,680 --> 00:34:19,760
रामानुज जी परंपरा से हैं। वो नहीं है। उन्होंने ये कहा है और कहती है कि

494
00:34:19,760 --> 00:34:24,080
आपने बातें घुमाई है। आपने लगातार अग्रेसिव खेला है कि बर्डन ऑफ

495
00:34:24,080 --> 00:34:28,080
उन्होंने उन्होंने दोनों बातें कही है। उन्होंने कहा मेरे परिवार

496
00:34:28,080 --> 00:34:32,080
से जो मुझे मिलाया मैं उसी की हूं। हम और फिर जब मैंने कहा

497
00:34:32,080 --> 00:34:36,480
तो राम फिर मैंने जब ये कहा कि रामानुज रामानुज परंपरा

498
00:34:36,480 --> 00:34:40,720
प्रमाण है आपका प्रमाण मानती हैं आप अगर मानती हो तो मैं उनका आपको

499
00:34:40,720 --> 00:34:46,080
बताऊंगा ना कि रामानुजाचार्य क्या कह गए हैं विदेश यात्रा के बारे में

500
00:34:46,080 --> 00:34:50,240
और इसमें इन्होंने बात घुमाई है कि आपने ये नहीं कहा कि आप रामानुजय संप्रदाय को परम

501
00:34:50,240 --> 00:34:54,240
प्रमाण मानती है कि नहीं। उन्होंने ये कहा है आपके लिए बोला है कि शिवश

502
00:34:54,240 --> 00:34:58,240
जी ये कह रहे थे कि आपने सारी किताबें पढ़ी है कि नहीं रामानुज संप्रदाय की।

503
00:34:58,240 --> 00:35:02,400
ये दिखा दो मैं अपना चैनल ये दिखा दो मैं अपना चैनल डिलीट करता हूं। बोलो

504
00:35:02,400 --> 00:35:06,560
हो सत्य के पक्ष पहली बात तो थोड़ा सा भेजे में धर्म

505
00:35:06,560 --> 00:35:10,560
को डालो। कभी राम को जाना नहीं। कभी

506
00:35:10,560 --> 00:35:14,000
सीता को जाना नहीं।

507
00:35:14,000 --> 00:35:18,080
अरे भैया थोड़ी सत्यवादी तो बनो। सुनो क्या हुआ था वहां पे? एक

508
00:35:18,080 --> 00:35:22,080
बार बोल दूं इसका मैं रिप्लाई दे दूं। वहां पे क्या हुआ था? जब उनसे मैंने पूछा कि

509
00:35:22,080 --> 00:35:22,800
कौन सी परंपरा?

510
00:35:22,800 --> 00:35:26,800
तो इन्होंने कहा जिसमें मेरे माता-पिता दीक्षित है उसी में मैं उसी की मैं मानी

511
00:35:26,800 --> 00:35:30,960
जाऊंगी। तो मैंने कहा ठीक है तो वो प्रमाण मान ले आपका तो क्योंकि सुनिए सुनिए सुनिए

512
00:35:30,960 --> 00:35:35,120
क्योंकि प्रमाण उनको मालूम है रामानुजाचार्य को भी प्रमाण मान लेंगे तो उनका धर्म धर्म

513
00:35:35,120 --> 00:35:39,280
तो एक ही है ना ब्रह्म भले ही अलग हो शंकराचार्य और रामानुजाचार्य जी

514
00:35:39,280 --> 00:35:42,480
का धर्म एक है

515
00:35:42,480 --> 00:35:46,480
मोटे तौर पर सारी मान्यताएं दोनों के यहां पर सेम है ठीक

516
00:35:46,480 --> 00:35:51,520
है तो तो विदेश यात्रा के मामले में दोनों एक मत है

517
00:35:51,520 --> 00:35:55,680
तो तो क्या घुमाया इन्होंने कि अरे मैंने उनसे वेद नहीं पढ़ने उनके सारे

518
00:35:55,680 --> 00:35:59,760
शास्त्र पढ़ेंगे ये सारे शास्त्र पढ़ने की बात तो इन्होंने बोली है। मेरे ऊपर डाल रही। मैं तो ये

519
00:35:59,760 --> 00:36:03,920
पूछ रहा हूं कि आपके लिए क्या वो प्रमाण है? तो मैं सीधी सिंपल सी बात उनकी

520
00:36:03,920 --> 00:36:08,400
व्याख्या आपको प्रस्तुत कर दूं। तो क्या आपके

521
00:36:08,400 --> 00:36:12,400
द्वारा रामानुजी होते हुए विदेश यात्रा का

522
00:36:12,400 --> 00:36:16,400
विरोध सिद्ध नहीं होगा। समझ रही है? हां।

523
00:36:16,400 --> 00:36:20,800
आपको आर्य समाजी बनना होगा। तो घोषित करो मैं आर्य समाजी हूं। तब तो तुम फिर आर्काइव

524
00:36:20,800 --> 00:36:24,800
समाजी बन रही हो। इंटरनेट समाजी बन रही हो। कम से कम ये तो घोषित

525
00:36:24,800 --> 00:36:28,960
करो तब हम तुमसे बात करें। चलो ठीक है आर्य समाज हूं मैं अब बताओ तो

526
00:36:28,960 --> 00:36:33,040
फिर हम तुमसे बात करें कि तुम्हारा ईश्वर सब शक्तिमान है क्या

527
00:36:33,040 --> 00:36:37,600
तुम्हारे पास वेद कहां से आए आर्य समाज के पास वेद कहां से आए वो भी पूछा जाएगा

528
00:36:37,600 --> 00:36:38,100
आर्य

529
00:36:37,920 --> 00:36:42,080
समाज हमारे लिए कुछ नहीं नगण्य कुछ नहीं है उसका अपना अस्तित्व नहीं

530
00:36:42,080 --> 00:36:46,720
है कुछ केवल शादियां कराने पे भागे हुए जो माता-पिता

531
00:36:46,720 --> 00:36:50,880
की आज्ञा के बिना जिनको विवाह करना होता है जगह-जगह देख लो जाकर के पोस्टर लगे रहते

532
00:36:50,880 --> 00:36:54,960
हैं लव मैरिज करने के लिए लव मैरिज करने के लिए संपर्क करें इसी से

533
00:36:54,960 --> 00:36:59,120
इनका अस्तित्व है आर्य समाजियों का फिलहाल वर्तमान में लगभग लगभग

534
00:36:59,120 --> 00:37:03,120
कुछ है कुछ है जो प्रबुद्ध व्यक्ति हैं जो उसको

535
00:37:03,120 --> 00:37:07,520
उन सिद्धांतों को ढो रहे हैं मगर जो मूल अस्तित्व

536
00:37:07,520 --> 00:37:11,600
जो बचा हुआ है वो ये मंदिर जो खोल खोल के बैठे बैठे हुए हैं और उन मंदिरों में

537
00:37:11,600 --> 00:37:15,840
मैं गया हूं उन मंदिरों में आप देखो सिद्धांत का क्या चल रहा है

538
00:37:15,840 --> 00:37:20,000
कचरा विवेकानंद की भी फोटो है वहां पर

539
00:37:20,000 --> 00:37:24,320
शंकराचार्य की भी फोटो है वहां पर पीछे यहां हवन

540
00:37:24,320 --> 00:37:28,880
है यहां वो इनका कुंड है जिसके फेरे पड़ रहे हैं। पीछे शंकराचार्य

541
00:37:28,880 --> 00:37:32,960
और सारे आचार्यों का सारे आचार्यों का वहां फोटो है

542
00:37:32,960 --> 00:37:37,040
पीछे जैसे वो इनके आइडल हो। इस

543
00:37:37,040 --> 00:37:41,040
मामले में मुझे आर्य समाज ठीक लगता था कि

544
00:37:41,040 --> 00:37:46,000
जो भी सिद्धांत है उनके प्रति कट्टर रहता था। ये

545
00:37:46,000 --> 00:37:50,240
वहां माथा मतैया नहीं करता था। उसकी तरह जैसे अभी हम वहां गए थे। वो जो

546
00:37:50,240 --> 00:37:53,360
हंस भगवान की जन्मस्थली पर जो कब्जा

547
00:37:53,360 --> 00:37:57,360
किए बैठे हैं उसने वहां जीसस क्राइस्ट और ये बुद्ध और सबका लगा रखा

548
00:37:57,360 --> 00:38:01,520
था। ये हाल है इनके मंदिरों के और इसीलिए जो प्रबुद्ध लोग हैं इनके

549
00:38:01,520 --> 00:38:05,680
ही यहां के ये जो क्या कहते हैं

550
00:38:05,680 --> 00:38:09,680
निर्भय जैसे और ये जो ऋषि मंतप

551
00:38:09,680 --> 00:38:13,680
वाले वो कौन? संदीपन आर्य संदीपन संदीपन हां ये

552
00:38:13,680 --> 00:38:17,760
लोग इसीलिए इन लोगों से दूर रहते हैं। मगर प्रॉब्लम यह है कि आपने

553
00:38:17,760 --> 00:38:21,840
अगर यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया आपके यहां गुरु परंपरा नहीं है

554
00:38:21,840 --> 00:38:26,080
तो तुम दयानंद ने दयानंद जी ने क्या कहा वो तुम्हारी भी दिक्कत है वो

555
00:38:26,080 --> 00:38:30,160
एग्जैक्ट तुम भी नहीं फुल बोल सकते निर्णायक तरीके से तुम बात नहीं कर सकते दयानंद

556
00:38:30,160 --> 00:38:34,160
जी की ओर से दिक्कत यही है और तुम कहो जो ब्रह्मज्ञानी होगा जो व्याकरणी होगा

557
00:38:34,160 --> 00:38:38,160
यानी कि मुझे यह तय करने के लिए कि कौन

558
00:38:38,160 --> 00:38:42,640
दयानंद जी की तरफ से प्रामाणिक व्यक्ति है बोलने वाला मुझे पहले पूरा व्याकरणी

559
00:38:42,640 --> 00:38:46,880
खुद बनना पड़ेगा जब मैं उसमें पारंगत हो जाऊंगा तब जाकर करके चेक करूंगा दयानंद

560
00:38:46,880 --> 00:38:50,960
जी दयानंद जी ने क्या सिखाया अरे भैया जब मैं पारंगत हो गया तो मुझे क्या जरूरत

561
00:38:50,960 --> 00:38:55,040
है उनसे सीखने की कुछ उसमें पहले घोषणा होनी चाहिए

562
00:38:55,040 --> 00:38:59,200
शब्द प्रमाण से वो घोषित होगा ये है निर्णायक वहां से बोलने वाला फिर मैं उससे

563
00:38:59,200 --> 00:39:03,200
सीखूंगा चीजें कि दयानंद जी ने क्या कहा है थोड़ा जो

564
00:39:03,200 --> 00:39:07,200
इंटेलेक्चुअल लोग हैं थोड़े बहुत आर्य समाज के सोच

565
00:39:07,200 --> 00:39:08,640
के देखो भाई आत्म मंथन

566
00:39:08,640 --> 00:39:13,280
तो करो शीशे में देख के अपने आप से बातें तो करो थोड़ी

567
00:39:13,280 --> 00:39:17,840
किसकी रक्षा कर रहे हो

568
00:39:17,840 --> 00:39:22,080
बिल्कुल दुश्मन नहीं तुम्हारा ज एक और ऋषि उवाच

569
00:39:22,080 --> 00:39:26,400
वाला तो कहता है कि जो व्याकरण पढ़कर वेद मंत्रों का अर्थ

570
00:39:26,400 --> 00:39:30,560
करता है वो ऋषि हो जाता है तो भैया अगर उस आधार पर व्याकरण पढ़ लो और

571
00:39:30,560 --> 00:39:34,880
ऋषि तो फिर कई हो जाएंगे तो फिर यानी मैं तो ये कह रहा हूं

572
00:39:34,880 --> 00:39:38,880
अगर किसी का किसी की प्रामाणिकता जांचने के लिए यदि हमें उस

573
00:39:38,880 --> 00:39:42,880
शास्त्रों को पूरा पहले खुद जानना है वो किससे जानेंगे क्योंकि हम

574
00:39:42,880 --> 00:39:48,160
प्रामाणिकता इसलिए ढूंढ रहे हैं किसी की कि हमको पढ़ाई किससे करनी है?

575
00:39:48,160 --> 00:39:52,160
हमको पढ़ाई किसके अनुगत रह के करनी है? किससे सिद्धांतों को समझना है? हम

576
00:39:52,160 --> 00:39:56,560
इसलिए पढ़ प्रमाणिकता पूछ रहे हैं। और

577
00:39:56,560 --> 00:40:00,720
वो कह रहा है कि भैया प्रमाणिक वो होगा जो अर्थ कर देगा। इसका मतलब हमें

578
00:40:00,720 --> 00:40:04,960
मालूम होना चाहिए कि अर्थ क्या है? तभी तो हम ये देख पाएंगे इसने अर्थ किया कि नहीं किया है।

579
00:40:04,960 --> 00:40:09,600
तो जब हमें मालूम ही है अर्थ क्या है? तो काहे की क्या आवश्यकता है प्रमाणिकता की?

580
00:40:09,600 --> 00:40:13,760
यही कर्म वर्ण व्यवस्था है। यही है कर्म वर्ण व्यवस्था कि

581
00:40:13,760 --> 00:40:17,840
जो ब्रह्म ज्ञानी होगा वही वही ब्राह्मण अरे भैया जब ब्रह्म ज्ञानी

582
00:40:17,840 --> 00:40:22,080
होगा ये हम पता लगा पा रहे हैं। इसका मतलब हमें ब्रह्म ज्ञान होना चाहिए तब तो हम किसी

583
00:40:22,080 --> 00:40:23,760
किसी का ब्रह्म ज्ञानी होना नाप सकते

584
00:40:23,760 --> 00:40:28,080
हैं। तो जब हमने एक

585
00:40:28,080 --> 00:40:32,160
तो जो सूरज आर्य का बंदा है वहां पर बैठा हुआ था वो पता है क्या कह रहा था?

586
00:40:32,160 --> 00:40:36,160
कह रहा है अगर हर चीज के लिए गुरु के पास जाना पड़ रहा है तो फिर किताबें प्रिंट क्यों

587
00:40:36,160 --> 00:40:40,160
कर रखी है? इसको प्रिंट आउट मत करो। गीता प्रेस से मत छापवाओ किसी भी चीज को कि

588
00:40:40,160 --> 00:40:44,320
यार आपको हर चीज के लिए भी गुरु के पास ही जाना पड़ेगा। मतलब ऐसीसी बातें

589
00:40:44,320 --> 00:40:48,640
वहां पर करी गई जहां पर मतलब ये लोग सोचते नहीं है

590
00:40:48,640 --> 00:40:52,640
बिल्कुल तर्कहीन बातें हैं कि भैया [गला साफ़ करने की आवाज़] किताबें क्यों छपवाई अगर

591
00:40:52,640 --> 00:40:56,720
उसके लिए समझने के लिए आपको गुरु के पास जाना पड़ रहा है। अच्छा इनकी क्या है

592
00:40:56,720 --> 00:41:00,720
पता नहीं जानबूझ के मंदबुद्धि अपना जो तत्व

593
00:41:00,720 --> 00:41:04,720
प्रस्तुत करते हैं कि वास्तविकता में मैं कभी-कभी कंफ्यूज हो जाता हूं क्योंकि इनके यहां

594
00:41:04,720 --> 00:41:08,880
पर भी मैं एक समझदारी देखता हूं मगर कहीं पे ये अपनी समझदारी को अपने

595
00:41:08,880 --> 00:41:13,040
से हटा के खूंटी पर टांग देते हैं और वहां पर अपनी वर्चस्वता अपनी

596
00:41:13,040 --> 00:41:17,280
अंधी दौड़ उसको आगे कर देते हैं और जो अपनी तर्कनिष्ठता थी

597
00:41:17,280 --> 00:41:21,280
जो न्यायप्रियता थी उसको भंग कर देते हैं लोग और ये ये बात मैं निर्भय

598
00:41:21,280 --> 00:41:26,960
से भी कहूंगा और इनसे भी कहूंगा संदीपन रॉय से

599
00:41:26,960 --> 00:41:31,600
परंपरा जो सिद्धांत है ना उसका विरोध करते हुए

600
00:41:31,600 --> 00:41:35,680
आपके आर्य समाज का अस्तित्व तक सिद्ध नहीं होगा कुछ

601
00:41:35,680 --> 00:41:39,280
नहीं कर पाओगे

602
00:41:39,280 --> 00:41:44,240
सब खाल खींच जाएगी एक मिनट में वो

603
00:41:44,240 --> 00:41:48,320
निर्भय जब निर्भय सारा हां निर्भय जब आए थे निर्भय

604
00:41:48,320 --> 00:41:53,440
जब आया था छोटा भाई है उस तरह से बात कर रहा हूं निर्भय जब आया था

605
00:41:53,440 --> 00:41:57,440
तो मैं बहुत उसको लेकर के हमंब्ल था। मुझे उससे कुछ वाइब्स आती

606
00:41:57,440 --> 00:42:01,440
हैं भाई जैसी छोटे भाई जैसी। तो मैं उस तरह से था।

607
00:42:01,440 --> 00:42:06,000
मैं उस मोड में था ही नहीं कि मुझे जो है इसको जो है

608
00:42:06,000 --> 00:42:10,480
ओवर एंड आउट करना है। उस मोड में मैं था ही नहीं।

609
00:42:10,480 --> 00:42:14,560
और मैं यह भी चाहता था कि भाई हम लोग कई बार एक ही टॉपिक कर चुके हैं कि

610
00:42:14,560 --> 00:42:18,640
सर्वशक्तिमान और वही तरीका अपना करने परंपरा और सब तो

611
00:42:18,640 --> 00:42:22,640
कुछ नया जानने को भी मिले लोगों को दो इंटेलेक्चुअल लोगों के बीच में कुछ

612
00:42:22,640 --> 00:42:26,640
बातें होंगी तो लोगों को कुछ सीखने को मिला नई चीजें उसको लेकर के

613
00:42:26,640 --> 00:42:30,720
और वो चर्चा इतनी लंबी खींच गई आखिर में जाते-जाते वो

614
00:42:30,720 --> 00:42:35,040
क्या कहते हैं मामला इतना गर्म हो गया कि एक दूसरे के मनोभाव को समझना मुश्किल हो गया

615
00:42:35,040 --> 00:42:39,120
वो हमारे को नहीं समझ पा रहा हम उसको नहीं समझ पा रहे हैं अच्छा उसमें जो टांग

616
00:42:39,120 --> 00:42:42,160
खींचना छीटाकसी करना यह निर्भय की ओर से हो रहा था।

617
00:42:42,160 --> 00:42:46,480
उसने बाद में यह कहा है कि उसको इतना ज्यादा वो इस्लाम और इनको

618
00:42:46,480 --> 00:42:50,640
इनके साथ वो डिबेट करता है। इसलिए वो उसी पर्सेक्टिव से आया था कि यहां पे भी वैसा

619
00:42:50,640 --> 00:42:54,640
ही होगा। पर यहां नहीं था फिर भी उसने वही व्यवहार किया। तो कुल

620
00:42:54,640 --> 00:42:58,800
मिलाकर के वो स्थगित हुई है। अब उसको लोग अपने पाले में कि हमारा हमारा मत हो गया

621
00:42:58,800 --> 00:43:02,800
क्लियर हो गया। अच्छा मैंने जो अविद्या वाली बात कही मैंने जो अविद्या

622
00:43:02,800 --> 00:43:06,880
वाली बात कही और जो मैंने वहां पर कहा तो मैंने वहां पे यही तो जो

623
00:43:06,880 --> 00:43:10,880
इसने कहा हां ठीक है इतना क्लियर हो गया। यह इतना स्पष्ट हो गया कि ईश्वर अवतार

624
00:43:10,880 --> 00:43:14,960
लेता है। तो मैंने वही तो दिखाया मैंने उसमें क्या गलत कर दिया। अविद्या वाले

625
00:43:14,960 --> 00:43:19,760
में इन्होंने क्विट किया तो अविद्या वाला मैंने शॉर्ट बनाया।

626
00:43:19,760 --> 00:43:23,920
न्याय दर्शन में पंचाव्य या और कोई जो और कोई भी

627
00:43:23,920 --> 00:43:28,400
शब्द है वो कौन जानता है कौन नहीं जानता है इस विषय में शास्त्रार्थ

628
00:43:28,400 --> 00:43:32,640
नहीं था। डिबेट नहीं थी, डिस्कशन नहीं था। इस विषय में था

629
00:43:32,640 --> 00:43:36,640
कि समस्त प्रामाणिक और युक्तिक धरातल पर ईश्वर का अवतार

630
00:43:36,640 --> 00:43:40,640
सिद्ध होता है कि नहीं होता है। तो यदि मुझे आपका कोई शब्द समझ में नहीं आ रहा है तो

631
00:43:40,640 --> 00:43:44,880
आपका वहां कर्तव्य है कि आप मुझे शब्द समझा दीजिए क्योंकि यहां शब्दावली किसकी कैसी

632
00:43:44,880 --> 00:43:49,120
है? इस बात का कंपटीशन नहीं है। ठीक है? अभी

633
00:43:49,120 --> 00:43:53,280
मैं कोई शब्द पूछ दूंगा। शास्त्रों में अनेक शब्द है। कोई शब्द खोज के ला दूंगा।

634
00:43:53,280 --> 00:43:57,840
लो ये दे दो मुझे। क्या करोगे फिर? यह

635
00:43:57,840 --> 00:44:02,480
और खैर मैंने मैंने देखा कि निर्भय जो है स्वयं से बातें नहीं बोलता।

636
00:44:02,480 --> 00:44:06,560
उसने शुरू में तो लाइव एक कर दी थी मगर उसके बाद हटा दी स्वयं से

637
00:44:06,560 --> 00:44:10,560
उसके साथ वाले बोल रहे मगर निर्भय को रोकना तो चाहिए। तो

638
00:44:10,560 --> 00:44:15,440
ये ये सब बातें हो गई। थोड़ा सा टॉपिक से हम लोग हट गए थे।

639
00:44:15,440 --> 00:44:20,080
हां इवाकु जी आपने क्या बताया था? इन्होंने

640
00:44:20,080 --> 00:44:24,080
यह बोला है बाद में कि वैसे वो लाइव वाली बात एक बार

641
00:44:24,080 --> 00:44:28,080
ले लेते हैं। इन्होंने जो ऋषि मानंतव्य के चैनल पर लाइव करी थी वो इन्होंने हाइड कर दी। अभी

642
00:44:28,080 --> 00:44:32,080
की लाइव भी हो जाएगी शायद कुछ समय में इनको पता नहीं क्या छुपाना है वैसे उस समय में

643
00:44:32,080 --> 00:44:36,160
और इन्होंने बाद में कहा है कि जो इनके फैमिली के गुरु जी है रामानुज

644
00:44:36,160 --> 00:44:40,240
परंपरा से उनका इनको नाम नहीं मालूम और उनको त्रिंदी स्वामी ही बुलाते थे तो

645
00:44:40,240 --> 00:44:44,400
उनका नाम इनके पिता भाई अगर आप आप ये कह रही हो कि मैं रामानुज

646
00:44:44,400 --> 00:44:48,480
परंपरा से हूं तो रामा मैं पूछ रहा हूं कि उसको प्रमाण मानोगी ना फिर

647
00:44:48,480 --> 00:44:52,800
तो बात वही टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन होगी ना रामानुजाचार्य

648
00:44:52,800 --> 00:44:56,960
परंपरा में विदेश गमन को निषेध माना गया है तो उन बातों

649
00:44:56,960 --> 00:45:01,200
को लेकर क्यों भिड़ रही हो? जिन बातों को लेकर तुम खुद उनहीं पर निर्भर कर रही हो।

650
00:45:01,200 --> 00:45:05,200
ऐसी बातों पर चलो मान लो तुम अगर यह भी करती हालांकि तुम हिंदू यूनिटी की बात

651
00:45:05,200 --> 00:45:09,280
कर रही हो तो तुम तुम्हें तो यह भी नहीं करना चाहिए कि रामानुजाचार्य जी के जो

652
00:45:09,280 --> 00:45:13,120
सिद्धांत शंकराचार्य जी से मेल नहीं खा रहे उनको लेकर के लड़ो। मगर तुम उनको

653
00:45:13,120 --> 00:45:17,120
लेकर के भी लड़ती तब भी समझ में आता कि तुम किसी परंपरा प्राप्त गुरु के सानिध्य

654
00:45:17,120 --> 00:45:21,120
में हो और जो है उनके आधार पर तुम इस अमुक सिद्धांत का विरोध कर

655
00:45:21,120 --> 00:45:25,600
रही हो शंकराचार्य के। मगर यहां तो ऐसा सिद्धांत है जो दोनों परंपराओं

656
00:45:25,600 --> 00:45:29,680
में सेम है। उस पर तुम विरोध कर रही हो। तो ये मानना पड़ेगा ना कि तुम

657
00:45:29,680 --> 00:45:33,760
किसी की नहीं हो। यही मानने की बात है कि

658
00:45:33,760 --> 00:45:37,760
आप जितने और ये जो जितने चिलाटू तुमको जगह दे

659
00:45:37,760 --> 00:45:41,760
रहे हैं स्पेस दे रहे हैं बाबा बाबा वो अमा अर्ज किया

660
00:45:41,760 --> 00:45:45,840
है तो दूसरा वाह वाह वाह अब अम्मा शुरू

661
00:45:45,840 --> 00:45:49,840
तो करने दो वो वाला हाल है ये जितने चिलांटू आपको

662
00:45:49,840 --> 00:45:54,320
स्पेस दे रहे हैं ना वो दे रहे हैं मोटिवेशन ये सब किसी काम नहीं आएंगे

663
00:45:54,320 --> 00:45:58,320
ये मार खाए हुए हैं सब के सब एक तरफ से कूटे

664
00:45:58,320 --> 00:46:04,320
गए हैं जाके देख लो इनके रातों की नींद छीन ली गई है।

665
00:46:04,800 --> 00:46:08,800
पता करो पहले भाई पता करो लेके बस घोड़ा ले घोड़ा

666
00:46:08,800 --> 00:46:12,880
ले चाबुक दौड़ाने लगे कोई बात ना जी ना धर्म का पता ना ना नास्तिकता का पता

667
00:46:12,880 --> 00:46:16,880
ना ईश्वर का साकार निराकार कौन से उसको व्याख्या को मानती हो कौन

668
00:46:16,880 --> 00:46:21,280
सी को नहीं मानती कुछ नहीं हम है जिंदाबाद बंटी और बबली की

669
00:46:21,280 --> 00:46:25,760
थी ना उसमें वो ताजमल को बेचना होता है जब

670
00:46:25,760 --> 00:46:29,760
बंटी और बबली ताजमल को जब बेचते हैं तो क्या करते हैं कि जो

671
00:46:29,760 --> 00:46:33,840
ताजमल की ऑफिसर थी उसके घर पर बेच देते

672
00:46:33,840 --> 00:46:38,160
हैं पब्लिक और वह

673
00:46:38,160 --> 00:46:42,240
उद्घोष करने के लिए नारेबाजी करने के लिए पब्लिक चली जाती है भाई उसके

674
00:46:42,240 --> 00:46:46,240
घर अब जब वहां ऑफिसर जो है उसके घर पर नारेबाजी हो

675
00:46:46,240 --> 00:46:50,800
रही है विरोध हो रहा है तो क्या होता है

676
00:46:50,800 --> 00:46:55,040
अ कि ये इसको फोन

677
00:46:55,040 --> 00:46:59,440
आता है ऑफिसर को कि भाई आपके घर पर विरोध विरोध हो रहा है तो यह ऑफिसर

678
00:46:59,440 --> 00:47:03,600
जल्दी से वहां जाती है कि क्यों मेरे घर पर भीड़ क्यों आई है क्यों विरोध

679
00:47:03,600 --> 00:47:07,680
हो उतनी देर में यहां पर यह जो है ऑफिसर बनके और ताजमल का किसी

680
00:47:07,680 --> 00:47:11,760
अंग्रेज के साथ वो करते हैं डील कि अब हम ऑफिसर

681
00:47:11,760 --> 00:47:16,080
है उतनी देर में। तो अब वो जो भीड़ वहां पर है

682
00:47:16,080 --> 00:47:19,840
वो जो भीड़ है जो वहां पर नारेबाजी करने गई है उसके पास कोई

683
00:47:19,840 --> 00:47:23,920
आधार नहीं है नारेबाजी करने का। ठीक है? वो नारेबाजी कर रही

684
00:47:23,920 --> 00:47:28,000
है। उसको पैसे मिले हैं नारेबाजी करने के। तो वो क्या करते

685
00:47:28,000 --> 00:47:32,480
हैं? वो वहां पहुंचती है ऑफिसर। वो वहां चिल्ला रहे होते हैं। तानाशाही नहीं चलेगी

686
00:47:32,480 --> 00:47:36,480
नहीं चलेगी। तो वो जाके पूछती है भैया क्या बात है क्या प्रॉब्लम है तो चिल्लाते

687
00:47:36,480 --> 00:47:40,800
तानाशाही नहीं चलेगी वो कहती किसकी तानाशाही कौन कर रहा है तानाशाही नहीं

688
00:47:40,800 --> 00:47:44,800
कौन कर रहा है किसकी तानाशाही वो कहते है किसी की भी नहीं चलेगी पूरी करो हमारी

689
00:47:44,800 --> 00:47:48,960
मांगे पूरी करो हां हमारी मांगे पूरी करो तानाशाही

690
00:47:48,960 --> 00:47:54,170
नहीं चलेगी और फिर वो कहती है कि किसकी कि किसी की भी वो हाल है इनका

691
00:47:54,170 --> 00:47:58,960
[हंसी] वही हाल है तुम्हारा अरे भाई चाहिए क्या

692
00:47:58,960 --> 00:48:03,280
कहना क्या चाहते हो कुछ पता है

693
00:48:03,280 --> 00:48:07,360
कुछ नहीं। अच्छा अब देखो खुद के ही सिद्धांतों से कितना

694
00:48:07,360 --> 00:48:11,440
खिलवाड़ कि भैया परंपरा का विरोध भी कर बैठे गौ बलि

695
00:48:11,440 --> 00:48:15,440
को भी ले आए कि गौ बलि हो रही है इनके यहां गौ बलि हो रहे तो फिर क्यों ला रहे हो

696
00:48:15,440 --> 00:48:19,440
भाई करपात्री जी ने ये कहा है फिर मेरा तो व्यक्तिगत विरोध है अमुक्तेश्वर जी

697
00:48:19,440 --> 00:48:24,080
का और वहां पे एक ढोंगी बेवकूफ गोवर्धन

698
00:48:24,080 --> 00:48:28,160
पीठ से जुड़ा हुआ बहरूपिया वहां बोल रहा है कि मैं यह समझता हूं कि इनका

699
00:48:28,160 --> 00:48:32,480
व्यक्तिगत विरोध था। आता क्यों नहीं भाई तू सामने

700
00:48:32,480 --> 00:48:35,040
कौन सा मिश्र है फलाना देख

701
00:48:35,040 --> 00:48:39,200
तो ले तू कितना बड़ा गोवर्धन पीठ से जुड़ा हुआ व्यक्ति है चोर

702
00:48:39,200 --> 00:48:41,840
कहीं का

703
00:48:41,840 --> 00:48:45,840
हां वहां जाके बोला है उसने कि शिवश का पर्सनल ओपिनियन

704
00:48:45,840 --> 00:48:49,920
है एंटी इंटरनेट वाला हमारे आचार्य जन और पूरी के महाभाग तो

705
00:48:49,920 --> 00:48:54,000
खुद ही प्रयास कर रहे हैं कि किताबें लिख लिख के उनकी स्कैन करके अपलोड करा जाए

706
00:48:54,000 --> 00:48:58,000
ताकि इंटरनेट पे रखे अरे भाई अपलोड करने से कोई परेशानी नहीं है वहां

707
00:48:58,000 --> 00:49:02,400
से लेने पे भी कोई परेशानी नहीं मगर उसको अंतिम रूप से स्वीकार कर लेने पर

708
00:49:02,400 --> 00:49:07,680
परेशानी है। फिर परंपरा का औचित्य क्या रह गया?

709
00:49:07,680 --> 00:49:11,760
और तुम कह रहे हो कि मैं गोवर्धन मठ से जुड़ा हुआ हूं। शंकराचार्य मठ

710
00:49:11,760 --> 00:49:15,760
से जुड़े हुए हो ना। शंकराचार्य तो कह रहे हैं ना 13 वे अध्याय के

711
00:49:15,760 --> 00:49:20,400
दूसरे श्लोक में कितना भी विद्वान हो

712
00:49:20,400 --> 00:49:25,120
संप्रदाय विहीन व्यक्ति को त्याग देना चाहिए। क्या करोगे इसका?

713
00:49:25,120 --> 00:49:29,200
अरे आ तो जाओ अपना थोड़ा मुंह लेकर के।

714
00:49:29,200 --> 00:49:33,280
वैसे इनकी डिबेट में अगर ये लाइव देख अगर ये लाइव देख

715
00:49:33,280 --> 00:49:37,280
रहे हो तो यहां पर कमेंट करो हां मैं हूं तुम्हें कमेंट दिलवाता हूं मैं आके यहां

716
00:49:37,280 --> 00:49:41,280
भूको कि तुम गोवर्धन मटके हो पहले तो मैं तुम्हें पता करूं कि तुम

717
00:49:41,280 --> 00:49:45,360
कैसे गोवर्धन मठ से जुड़े हुए हो और फिर शंकराचार्य से कैसे जुड़े हुए

718
00:49:45,360 --> 00:49:49,360
भाई जब शंकराचार्य स्वयं कह रहे हैं कि परंपरावीन व्यक्ति को त्याग देना चाहिए चाहे कितना

719
00:49:49,360 --> 00:49:50,080
भी बड़ा विद्वान

720
00:49:50,080 --> 00:49:54,080
हो क्योंकि उसकी विद्वान जो विद्वान होना

721
00:49:54,080 --> 00:49:59,120
है उसके विद्वान के पैरामीटर के लिए हमें विद्वान होना पड़ेगा उसको जांचने के

722
00:49:59,120 --> 00:50:03,280
यही है। अगर स्वतंत्र रूप से किसी की विद्वता जाननी है,

723
00:50:03,280 --> 00:50:07,520
किसी को ये पता करना है कि इसको 10थ की पढ़ाई आती है कि नहीं तो जो पता करने

724
00:50:07,520 --> 00:50:11,520
वाला व्यक्ति है हर उस व्यक्ति को पहले उसको 10थ की पढ़ाई आती होगी। उसकी आवश्यकता

725
00:50:11,520 --> 00:50:15,520
क्या है? उसकी प्रमाणिकता जांचने की। इसलिए

726
00:50:15,520 --> 00:50:19,760
वो किसी ऐसी सोर्स के द्वारा घोषित होना चाहिए 10थ

727
00:50:19,760 --> 00:50:24,160
पास जिस सोर्स पे हमें यकीन हो। तो

728
00:50:24,160 --> 00:50:28,240
इंटरनेट पे आप डालिए। इंटरनेट से लीजिए मगर अंतिम प्रमाण वो नहीं

729
00:50:28,240 --> 00:50:32,320
है। हमें किसी पर डिपेंड रहना होगा। अगर उसमें डालने वाले

730
00:50:32,320 --> 00:50:36,320
में गड़बड़ी हो गई या किसी ने मिक्सचर कर दिया कुछ कर दिया तो हमारे पास सन्यासी आचार्य

731
00:50:36,320 --> 00:50:38,000
है। अथर्ववेद 11 5 16

732
00:50:38,000 --> 00:50:42,160
ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। मनुस्मृति 12वा अध्याय 112 से

733
00:50:42,160 --> 00:50:47,120
114 धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाएं।

734
00:50:47,120 --> 00:50:52,000
तत्वदर्शी की व्याख्या पढ़ो जाकर के गीता में क्या दी गई है? वैराग्य

735
00:50:52,000 --> 00:50:56,080
जो अपने वैराग्य रूपी हथियार से प्रपंच रूपी पेड़ को काट

736
00:50:56,080 --> 00:51:00,160
डालता है। सन्यास सन्यास सन्यास

737
00:51:00,160 --> 00:51:04,320
श्रेष्ठतम आश्रम सन्यास है।

738
00:51:04,320 --> 00:51:08,720
तो अंतिम निर्णायक कौन होगा? सन्यासी

739
00:51:08,720 --> 00:51:13,760
परंपरा से एवं परंपरा प्राप्तिम। तीन 16 जो अह

740
00:51:13,760 --> 00:51:18,000
क्या कहते हैं? प्रकृति का जो चक्र है उस उस चक्र

741
00:51:18,000 --> 00:51:23,440
के अनुसार नहीं बरतता है। वो मूर्ख है।

742
00:51:23,440 --> 00:51:27,440
मुंडकोपनिषद परंपरा की आवश्यकता बता देना तू आकर

743
00:51:27,440 --> 00:51:31,840
के जो वहां बैठकर के बोल रहा है मैं गोवर्धन मठ से हूं। कितने

744
00:51:31,840 --> 00:51:35,840
पैसे मिले हैं यूएस वाली दीदी से तुमको ये बोलने के। मैंने भी एक

745
00:51:35,840 --> 00:51:39,920
को बुलाया है। एक दो लोगों को बुलाया मैंने। उनको टाइम मिला तो शायद आ जाए।

746
00:51:39,920 --> 00:51:44,160
एक इस का बन के आएगा और एक जो है

747
00:51:44,160 --> 00:51:48,320
एक एक आर्य समाजी बन के आएगा और एक आएगा हिंदू

748
00:51:48,320 --> 00:51:52,160
बनके वो दीदी की नस्ल का होगा।

749
00:51:52,160 --> 00:51:56,400
वैसे इनकी डिबेट इनकी जो चर्चा हुई है अभी इसमें इन्होंने एक बात बहुत अच्छी रखी

750
00:51:56,400 --> 00:52:00,640
मेरे को बहुत अच्छी लगी। जब नास्तिकों से करते हैं डिबेट नास्तिकों

751
00:52:00,640 --> 00:52:02,960
की परंपरा क्यों नहीं पूछते हैं?

752
00:52:02,960 --> 00:52:06,960
बताओ। ये सवाल रखा गया है कि नास्तिकों की परंपरा क्यों नहीं पूछते

753
00:52:06,960 --> 00:52:11,120
हैं? ये ये अच्छा सवाल नास्तिकों की छोड़ो इन्होंने

754
00:52:11,120 --> 00:52:15,200
कहा कि भैया तुम बौद्धों से डिबेट करने जाते हो उनकी परंपरा क्यों नहीं पूछते हो

755
00:52:15,200 --> 00:52:19,360
है ना [हंसी] तो भाई वो जो बौद्ध है और जो नास्तिक

756
00:52:19,360 --> 00:52:23,840
है वो वेदों के आधार पर हमें थोड़ी ना अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं

757
00:52:23,840 --> 00:52:28,000
स्वतंत्र होकर कर रहे है तुम भी करो वही तो मैं कह रहा हूं वही तो कह रहे हैं

758
00:52:28,000 --> 00:52:32,160
वही तो बात है वो स्वतंत्र होकर अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं ईश्वर नहीं

759
00:52:32,160 --> 00:52:36,640
है नहीं मानता जा क्या कर लेगा बता सिद्ध कर मुझे मैं सिद्ध करूंगा तुम नहीं कर पाओगी

760
00:52:36,640 --> 00:52:40,640
ढेले भर की अकल नहीं है। बस तुम्हें संडास संडास ये सब करती रहना।

761
00:52:40,640 --> 00:52:45,120
संडास डायरिया किसी ने पूछ लिया अरे भैया ईश्वर कैसे संडास

762
00:52:45,120 --> 00:52:49,120
किसी ने पूछ लिया अरे भैया ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे संडास डायरिया यही

763
00:52:49,120 --> 00:52:53,120
करना वहां और यही सिखाना अपने यहां पे यही आता है

764
00:52:53,120 --> 00:52:57,120
हमें इनसे पूछा गया आपने तो

765
00:52:57,120 --> 00:52:59,760
भैया

766
00:52:59,760 --> 00:53:02,960
हम बोलिए

767
00:53:02,960 --> 00:53:07,120
बोलिए बोलिए शास्त्रवाल जी जी भैया आपने तो

768
00:53:07,120 --> 00:53:11,120
आपने तो वहां पर लाइव में भी यही बात बोला था ना कि तुम अपने को

769
00:53:11,120 --> 00:53:15,520
नास्तिक बताओ फिर हम बताएंगे आपको नास्तिक माने ही नहीं अपने आप को

770
00:53:15,520 --> 00:53:18,240
मैंने बोला भाई वेद की सीमा से बाहर निकल जाओ फिर हम तुम्हें

771
00:53:18,240 --> 00:53:22,560
विदेश यात्रा सिद्ध करेंगे वेद पर वेद पर आधार

772
00:53:22,560 --> 00:53:26,800
करके जो है हम पर दबाव बनाने की कोशिश मत करो क्योंकि उस विषय में हम ही तुम्हारे

773
00:53:26,800 --> 00:53:31,040
माध्यम है वेद को प्राप्त करने में भले ही मेरी परंपरा ना हो तो रामानुजाचार्य

774
00:53:31,040 --> 00:53:35,440
जी की परंपरा मधवाचार्य जी की परंपरा कोई ना कोई परंपरा माध्यम है

775
00:53:35,440 --> 00:53:40,320
वेद के लिए तो वेद पे क्लेम करके यह मत कहो विदेश यात्रा निषेध

776
00:53:40,320 --> 00:53:44,880
स्वतंत्र हो के कहो मैं नहीं मानता। फिर हम तुम्हें पहले तुम्हें

777
00:53:44,880 --> 00:53:48,880
वैदिक बनाएंगे और अगर वैदिक तुम नहीं हुए तो तुम्हें हम नास्तिक दिखाएंगे

778
00:53:48,880 --> 00:53:53,040
कि तुम नास्तिक हो। नास्तिक नहीं हुए तो हम तुम्हें दिखाएंगे कि तुम मनुष्य भी नहीं हो।

779
00:53:53,040 --> 00:53:57,040
ये बात है। तुमको ले आएंगे किसी ना किसी परंपरा में फिट कर देंगे और फिर

780
00:53:57,040 --> 00:54:01,440
कहेंगे अब मान इसको। अब मान इसको

781
00:54:01,440 --> 00:54:05,760
बहुत सी बात वही है किंत मनमुखी मनमुखी जो ज्ञान

782
00:54:05,760 --> 00:54:09,840
है वो इनको देना है इनको वो मतलब नहीं है शास्त्रों का जो अर्थ

783
00:54:09,840 --> 00:54:13,840
हम बोल रहे हैं वो मानो मतलब ये ये इनका ये दावा है वो मत मानो

784
00:54:13,840 --> 00:54:18,160
जो परंपरा से आचार्यों द्वारा अर्थ किया गया है। हां इनका ये दावा भी है कि

785
00:54:18,160 --> 00:54:22,160
शिवशंकर परंपरा थोप रहे हैं। कहते हैं कि शंकर थोप इसलिए रहे हैं

786
00:54:22,160 --> 00:54:26,240
ना क्योंकि वो इसलिए इनको लग रहा है थोप रहे हैं क्योंकि जो इनका अर्थ है वो

787
00:54:26,240 --> 00:54:30,320
अर्थ जो है वो हमारे से मैच नहीं हो रहा है। जो हमारे आचार्यों द्वारा

788
00:54:30,320 --> 00:54:33,280
किया गया है वह भिन्न किया गया है। यह बताओ मैं शंकर परंपरा

789
00:54:33,280 --> 00:54:37,280
थोप रहा हूं। तुम वेद क्यों थोप रही हो? वेद थोपोगी तो शंकर परंपरा

790
00:54:37,280 --> 00:54:41,520
थोपूंगा। नहीं तो आ जाओ मैदान में। वेद मत थोपो। वेद

791
00:54:41,520 --> 00:54:46,160
थोपोगी तो परंपरा थोपूंगा। यही तो अर्ध कुकुट न्याय है।

792
00:54:46,160 --> 00:54:50,320
कि वेद तो हम थोपेंगे। मगर वेद जिससे मिल रहे हैं उससे बच के

793
00:54:50,320 --> 00:54:54,320
निकलेंगे। अब वो उसमें अपनी रील में अपनी रील में क्या कह रही

794
00:54:54,320 --> 00:54:58,400
है वो? मंद बुद्धि कि यह जो है वहां गए थे वेदों

795
00:54:58,400 --> 00:55:02,480
का वेदों का वो करके आ गए वेदों की जग असाई करके

796
00:55:02,480 --> 00:55:06,560
वेद निंदा सुन के आ गए कहां वो जो मुफ्ती की उसमें

797
00:55:06,560 --> 00:55:10,800
गया था लाइव में मैं ठीक है चार पांच लोग तो मुझसे बात करने वाले

798
00:55:10,800 --> 00:55:14,960
थे काउंटर करने वाले हां जिसका पल्ला हल्का होने

799
00:55:14,960 --> 00:55:19,280
लगता था दूसरा कोई निकाल के लाता था एक साथ हां एक साथ

800
00:55:19,280 --> 00:55:23,280
चार पांच और फिर भी मुफ्ती का तो मुंह बंद हो गया मुफ्ती से

801
00:55:23,280 --> 00:55:27,360
जब मैंने पूछा जब उसने कहा कि मैंने

802
00:55:27,360 --> 00:55:32,080
कहा कि भाई दुनिया में बुराई एक्सिस्ट कैसे कर रही है? किसने बनाया इसे?

803
00:55:32,080 --> 00:55:36,240
भाई बुराई का अधिष्ठाता भी अगर क्योंकि इनके यहां जो वो है ना

804
00:55:36,240 --> 00:55:40,720
ग्रंथ वो अपुरुषय नहीं है। इनके यहां का ग्रंथ अपुरुषय

805
00:55:40,720 --> 00:55:46,320
नहीं है। ये सीख लो थोड़ा काम आएगा तुम्हारे। पागल

806
00:55:46,320 --> 00:55:48,480
पागलों के सेनापति

807
00:55:48,480 --> 00:55:52,560
सीख लो थोड़ा तुम्हारे काम आएगा। एक इन्होंने सफल और रखा था।

808
00:55:52,560 --> 00:55:56,720
सुनो सुनो सुनो सुनो इसको बोल तो मैंने कहा कि

809
00:55:56,720 --> 00:56:02,000
भाई आपके ग्रंथ वहां पर भी और

810
00:56:02,000 --> 00:56:06,080
हां जी मैं कह रहा हूं जिस डिबेट की बात कर

811
00:56:06,080 --> 00:56:10,240
रही है ना ये मुफ्ती के चैनल पर उसप कमेंट पढ़ लेना वहां पर सब ने ये कहा है कि

812
00:56:10,240 --> 00:56:14,560
अगर जो आपका आईडी था उस कुछ और नाम से था आपका आईडी

813
00:56:14,560 --> 00:56:18,800
तो कह रहे हैं अगर इनको बोलने दिया जाता तो ये भारी

814
00:56:18,800 --> 00:56:23,360
पड़ रहे थे उन सब पे अगर इनको बोलने दिया हां

815
00:56:23,360 --> 00:56:27,360
सुनो उस डिबेट की मैं समरी बता दूं जरा मैंने वैसे समरी डाली हुई है जाके देख

816
00:56:27,360 --> 00:56:31,440
लेना अब बाबा हो गया था मुफ्ती जी का हम ठीक है बस वहां बात

817
00:56:31,440 --> 00:56:35,680
इतनी थी मेरा चैनल नहीं था भाई चारचार लोग थे बोलने वाले हटा दिया गया म्यूट

818
00:56:35,680 --> 00:56:39,680
किया गया मुझे ठीक और किस बात पर मेरा वजन हल्का होता हुआ

819
00:56:39,680 --> 00:56:43,840
दिखाई दिया वो भी मैं बताऊंगा उसका काउंटर भी बताऊंगा जो मुझे बोलने नहीं दिया गया और वहां पर

820
00:56:43,840 --> 00:56:48,240
मेरा पक्ष हल्का किस आधार पर पड़ा था वो भी मैं बताऊंगा सुन लो पहली

821
00:56:48,240 --> 00:56:52,640
बात कि वेद के अपौषय होने के कारण उनके ग्रंथ पौरुषय

822
00:56:52,640 --> 00:56:57,360
होने के कारण वो कहते हैं कि उन्होंने रचे अल्लाह ने

823
00:56:57,360 --> 00:57:01,520
अब जब ईश्वर ने रचे उनका उनका ईश्वर है उसने रचे

824
00:57:01,520 --> 00:57:03,840
ईश्वर ने ही तो बुराई को भी जन्म दिया है

825
00:57:03,840 --> 00:57:07,840
तो ईश्वर के द्वारा रचित होने वाली चीज में प्रमाण्य बुद्धि नहीं है

826
00:57:07,840 --> 00:57:12,160
क्योंकि ईश्वर ही तो कह रहा है भैया मैंने ही तो बुराई राक्षस किसने बनाया

827
00:57:12,160 --> 00:57:16,240
तो जब वो राक्षस को बना रहा है तो वो ये जो तुमको कुरान दे रहा है उस कुरान

828
00:57:16,240 --> 00:57:20,240
के जरिए वो सही बात ही बता रहा है तुम्हारी मुक्ति की बात बता रहा है ऐसा ऐसा तो नहीं कुरान

829
00:57:20,240 --> 00:57:26,160
में उसने में फसाने की बात बताई और वेद में उसने निकालने की बात बताई है

830
00:57:26,160 --> 00:57:30,160
हो गया तो अपषय ना होने के कारण मैंने काउंटर किया था जवाब

831
00:57:30,160 --> 00:57:34,320
नहीं था मुक्ति के पास मैंने कहा कि भाई ये बुराई है ये जन्म कैसे

832
00:57:34,320 --> 00:57:38,720
होती है कि बुराई को बनाता है मगर वो बुरा नहीं है बुराई को बनाना बुरा नहीं है ये बोला उसने

833
00:57:38,720 --> 00:57:43,200
तो उसका पक्ष कमजोर नहीं है ये बुराई को बनाना बुराई नहीं है लॉजिकल

834
00:57:43,200 --> 00:57:47,440
बात है क्या ये अगर बुराई को आप बुराई मान रहे हो तो बुराई को बनाने

835
00:57:47,440 --> 00:57:51,920
वाले को भी बुरा मानना ही पड़ेगा हां फिर आपके पास वो अंडरस्टैंडिंग

836
00:57:51,920 --> 00:57:56,240
होनी चाहिए कि बुराई को बनाने वाला किस किस तरह से बुरा सिद्ध नहीं होगा।

837
00:57:56,240 --> 00:58:00,240
तो वो जो तरीका है उसमें उनका ईश्वर फिट नहीं बैठेगा। हमारा ईश्वर फिट

838
00:58:00,240 --> 00:58:04,320
बैठेगा क्योंकि हमारे ईश्वर के अनुसार ये माया है। ये दुख नकली है। उनके

839
00:58:04,320 --> 00:58:07,360
ईश्वर के अनुसार

840
00:58:07,360 --> 00:58:12,720
हां मालूम है मुझे मालूम है। मालूम है।

841
00:58:12,720 --> 00:58:17,360
तो पहली पहला पॉइंट तो ये फिर मैंने पूछा ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या?

842
00:58:17,360 --> 00:58:18,880
बोले कि नहीं

843
00:58:18,880 --> 00:58:22,880
ठीक है तो मैंने कहा फिर बोले कि ईश्वर अपने एक्सिस्टेंस से बाहर जा सकता है। मैंने कहा

844
00:58:22,880 --> 00:58:27,040
बिल्कुल जा सकता है। व्यवहार परमार्थ वाली डेफिनेशन दे दी। वहां भी वो चित्त हो गए।

845
00:58:27,040 --> 00:58:31,280
अब वो लोग लेकर आए क्या? सुनो तब तक मैंने दयानंद

846
00:58:31,280 --> 00:58:35,440
पर भी वीडियो नहीं बनाया था। ना दयानंद जी पर वीडियो बनाया था और ना मैंने इस

847
00:58:35,440 --> 00:58:39,520
पर वीडियो बनाया था। दो लोग मुझे वहां पर मेरे विरोध में खड़े दिखाई दिए थे। मेरे

848
00:58:39,520 --> 00:58:43,760
हिंदू समुदाय के जब मैं मुस्लिमों से बात कर रहा था। दो लोग एक थे दयानंद

849
00:58:43,760 --> 00:58:49,680
और एक थे प्रभुपाद। हम ठीक है।

850
00:58:49,680 --> 00:58:53,760
दयानंद का आधार दयानंद जी का आधार लेकर के वहां वो मुस्लिम मुझसे बोलते हैं अरे

851
00:58:53,760 --> 00:58:57,840
तुम्हारे यहां ज्ञार समाधि तो मानते नहीं। तुम लोग अपने का तो सुलझा लो।

852
00:58:57,840 --> 00:59:01,840
तुम अपना तो सुलझा लो। तब हमसे आकर कहना कि ईश्वर अवतार ले सकता है। ये था उनका

853
00:59:01,840 --> 00:59:06,160
काउंटर। तुम लोग उनको मौका देते हो। हमारे सिद्धांतों

854
00:59:06,160 --> 00:59:10,320
को कमजोर रूप में प्रस्तुत करके। इसलिए मैं तुमसे तुमको

855
00:59:10,320 --> 00:59:14,720
तुमसे बात करना चाहता हूं। तुम्हारा शोधन करना चाहता हूं। और तुमको

856
00:59:14,720 --> 00:59:19,120
मानना है जो मानो उसको इस तरह से धर्म की राह में रोना मत बनाओ

857
00:59:19,120 --> 00:59:24,560
चिल्ला चिल्ला करके और बनाओगे तो मुझे खड़ा पाओगे

858
00:59:24,560 --> 00:59:28,640
तुम्हारा सहारा लिया था वहां पे देख लेना वो तो मैंने अगर मेरे

859
00:59:28,640 --> 00:59:32,800
पास परम बड़े जोर से उन्होंने मतलब यही कही थी प्रखर हो के बात कि भैया

860
00:59:32,800 --> 00:59:34,000
दयानंद सरस्वती जी तो

861
00:59:34,000 --> 00:59:38,080
नहीं मानते हैं तुम्हारे वो तो नहीं ये सब चीजें मानते हैं तो फिर आपने

862
00:59:38,080 --> 00:59:42,560
तब बोलना पड़ा था कि तब भी तब भी मेरे पास परंपरा

863
00:59:42,560 --> 00:59:46,640
थी मैंने वहां वहां भी काउंटर किया। दयानंद सरस्वती की कोई परंपरा नहीं

864
00:59:46,640 --> 00:59:50,640
है। क्या करूं भाई? तुमने मुझे मजबूर किया उनका विरोध

865
00:59:50,640 --> 00:59:55,920
करने के लिए। तुमने थाली में परोस के दिया है। उनको

866
00:59:55,920 --> 01:00:01,920
उनको जाके कहना पंचा सिद्ध करो। पंचाव से सिद्ध करो।

867
01:00:02,560 --> 01:00:06,800
तो मैंने वहां कहा दयानंद सरस्वती

868
01:00:06,800 --> 01:00:11,520
हमारे यहां के प्रामाणिक आचार्य वगैरह नहीं है। स्वोषित है

869
01:00:11,520 --> 01:00:15,520
और जितने भी परंपरा प्राप्त है वो जो है

870
01:00:15,520 --> 01:00:19,840
मानते हैं कि ईश्वर अवतार ले सकता है। तब इनके यहां का कोई व्यक्ति था

871
01:00:19,840 --> 01:00:23,840
जो लेके आया कि तुम्हारे विष्णु पुराण में लिखा है कि इतने इतने वर्ष

872
01:00:23,840 --> 01:00:28,400
से पहले मंत्र इतने थे और बाद में आज इतने रह गए हैं। तो गुरु परंपरा में

873
01:00:28,400 --> 01:00:32,640
यह गुरु परंपरा से अगर ज्ञान सुरक्षित रहता है तो यह कैसे

874
01:00:32,640 --> 01:00:36,640
कम हो गए? पहली बात मैंने इस पर वीडियो मुझे बोलने

875
01:00:36,640 --> 01:00:40,720
ही नहीं दिया गया ना। पहली बात मैंने वहां पर यही

876
01:00:40,720 --> 01:00:44,800
बोला कि जो जब सर्वव्यापी ईश्वर अवतरित होता है एक रूप में

877
01:00:44,800 --> 01:00:48,960
इसी प्रकार से जो व्यापक रूप से मंत्र इत्यादि है शास्त्र का ज्ञान है वह भी इतने

878
01:00:48,960 --> 01:00:49,460
में

879
01:00:49,040 --> 01:00:53,280
सिमट के हमको प्राप्त भी हुआ है। और इस

880
01:00:53,280 --> 01:00:57,200
तरीके से

881
01:00:57,200 --> 01:01:01,920
इस तरीके से जो मंत्र कम हो रहे हैं तो उसमें दो तीन बातें और हैं।

882
01:01:01,920 --> 01:01:06,720
हमारे यहां पर जो विष्णु पुराण इत्यादि उनमें व्याख्या है कि इतने मंत्र जो है

883
01:01:06,720 --> 01:01:10,720
देवताओं के उसके हैं देवलोक के। फिर उसके बाद बचे हुए

884
01:01:10,720 --> 01:01:14,720
मंत्र यहां के हैं। इसके साथ ही साथ अंत तो कतवा यह भी

885
01:01:14,720 --> 01:01:18,960
मानना पड़ेगा कि प्रज्ञा शक्ति डाउन तो हो ही रही है। तो मंत्र

886
01:01:18,960 --> 01:01:23,040
का खो जाना और मंत्र के अर्थ में झूठ बोलना ये अलग-अलग बातें हैं।

887
01:01:23,040 --> 01:01:27,120
मंत्र का लुप्त हो जाना व का लुप्त हो जाना वो

888
01:01:27,120 --> 01:01:31,120
हमारी असामर्थता हो सकती है। मगर जानबूझ

889
01:01:31,120 --> 01:01:36,160
के मंत्र का अर्थ बदलना, झूठ बोलना यह नहीं।

890
01:01:36,160 --> 01:01:40,160
ठीक है? यह दोनों चीजों में अंतर है। हम किसी चीज

891
01:01:40,160 --> 01:01:44,400
में किसी चीज का भार उठाने लायक नहीं गिरती चली जा रही है। वह बात एक अलग है।

892
01:01:44,400 --> 01:01:48,400
मगर हम यह कह दे कि हमने जो है उसको बदल दिया। यह मंत्र

893
01:01:48,400 --> 01:01:52,480
मंत्र नहीं है। अर्थ तुम गलत बता रहे हो। तो यहां पर उनकी उनके प्रति जो

894
01:01:52,480 --> 01:01:56,560
व्यक्ति है जो व्यक्ति आपको प्रोवाइड करा रहा है वेदों का ज्ञान विज्ञान उस

895
01:01:56,560 --> 01:02:00,640
पर आपकी प्रमाण बुद्धि सिद्ध नहीं होगी। ये तीनों चारों बातें वहां पर मुझे बोलने ही नहीं दी

896
01:02:00,640 --> 01:02:04,160
गई। मुझे म्यूट कर दिया गया। अब अब यह बताओ ना तो इनके

897
01:02:04,160 --> 01:02:08,240
वेद जो ग्रंथ है वह अपुरुष है जिससे कि उनके प्रति प्रमाण बुद्धि सिद्ध

898
01:02:08,240 --> 01:02:12,240
हो रही है ना इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध हो रहा है और अपने

899
01:02:12,240 --> 01:02:16,480
ईश्वर की रक्षा करने के लिए इनको हमारे आर्य समाजियों के पास आना पड़ रहा है तो

900
01:02:16,480 --> 01:02:20,720
किसका पक्ष वहां पर हल्का हुआ दोबारा मैंने

901
01:02:20,720 --> 01:02:24,720
कहा तो है आ जाए भैया कोई आता ही नहीं है एक आया था वो

902
01:02:24,720 --> 01:02:29,200
चार घंटे तक अपनी वो शक्ति और शक्तिमान का भेद करता रहा परेशान रहा

903
01:02:29,200 --> 01:02:33,440
मौलवी जी ठीक है पंजाब पंजाब पे

904
01:02:33,440 --> 01:02:37,600
उसकी बात पे आ गया। नहीं नहीं वो आया था जो जो मुल्ला जी आए थे। अच्छा

905
01:02:37,600 --> 01:02:41,600
मुल्ला हां वो भी वो भी मुल्ला जो मुल्ला जी आए थे हां

906
01:02:41,600 --> 01:02:45,840
वो घुमाते रहे हां और अब

907
01:02:45,840 --> 01:02:49,920
आती है बात निर्भय की तो निर्भय के साथ जो बातचीत हुई है उसको मैंने पहले ही

908
01:02:49,920 --> 01:02:54,320
बता दिया उसप तो डिटेलिंग हो गई। जी शिवाकु जी बोले

909
01:02:54,320 --> 01:02:58,400
इन्होंने [गला साफ़ करने की आवाज़] एक बात और रखी है जहां पे लाइव में दो पॉइंट थे।

910
01:02:58,400 --> 01:03:02,400
अगर कोई व्यक्ति सभी संप्रदायों को प्रमाणिक माने और डिसाइड ना कर

911
01:03:02,400 --> 01:03:07,120
पाए कि कौन सी परंपरा सही है तो क्या वो हिंदू है कि नहीं है।

912
01:03:07,120 --> 01:03:11,120
सभी संप्रदाय को नहीं मैंने कल ही अभी पिछली लाइव में ये बात

913
01:03:11,120 --> 01:03:15,200
बोल दी थी। संप्रदाय विहीन होना हिंदू के हिंदू होने में बाधक नहीं

914
01:03:15,200 --> 01:03:19,200
है। आप संप्रदाय विहीन होते हुए भी मूर्ति पूजा को गाय के गाय

915
01:03:19,200 --> 01:03:23,360
के संरक्षक हो। जो पूर्व पूर्व जन्म में विश्वास रखते हो

916
01:03:23,360 --> 01:03:27,520
पुनर्जन्म में विश्वास रखते हो। देवलोक में विश्वास रखते हो और

917
01:03:27,520 --> 01:03:31,680
क्या कहते हैं जो ओमकार है उसके प्रति प्रमाण्य बुद्धि रखते हो तो आप तब

918
01:03:31,680 --> 01:03:35,680
भी हिंदू हो। तो संप्रदाय विहीन होना हिंदू होने में बाधक नहीं

919
01:03:35,680 --> 01:03:39,920
है। संप्रदाय विहीन होना आचार्य होने में बाधक है। प्रामाणिक आचार्य होने में

920
01:03:39,920 --> 01:03:44,640
बाधक है। संप्रदाय विरोधी होना हिंदू होने में बाधक है।

921
01:03:44,640 --> 01:03:48,640
संप्रदाय विहीन होना हिंदू होने में बाधक नहीं है। आचार्य होने

922
01:03:48,640 --> 01:03:52,720
में बाधक है। संप्रदाय विरुद्ध होना कि हम सभी संप्रदायों का विरोध कर

923
01:03:52,720 --> 01:03:57,120
रहे हैं। भाड़ में जाए तो आपके वो वैदिकता वैदिक होने में बाधक है।

924
01:03:57,120 --> 01:04:01,920
ठीक है? वो अजातवाद जी आए हैं जो

925
01:04:01,920 --> 01:04:06,480
कर रहे थे। हां जी [गला साफ़ करने की आवाज़] अजातवाद

926
01:04:06,480 --> 01:04:10,960
जी बताइए नारायण भैया हम वहां पर

927
01:04:10,960 --> 01:04:14,960
देख रहे थे जब हम वो दीदी से चर्चा कर

928
01:04:14,960 --> 01:04:19,200
रहे थे तो बीच में एक गोवर्धन पीठ सो कॉल्ड जो दीक्षित

929
01:04:19,200 --> 01:04:23,280
है वो बीच-बीच में टोके जा रहे थे कोई दीक्षित दीक्षित नहीं है जगह-जगह से

930
01:04:23,280 --> 01:04:27,440
मार के भगाए गए होंगे वो कहीं का अपना कुछ पैसे वैसे

931
01:04:27,440 --> 01:04:31,440
लिए होंगे वहां आने के ऐसे लोगों का कोई धर्म नहीं होता

932
01:04:31,440 --> 01:04:35,360
है समय आने पे अपने घर की स्त्रियों को भी कर दें।

933
01:04:35,360 --> 01:04:39,600
एक तो हम उनका खंडन कर रहे थे। ऊपर से वो

934
01:04:39,600 --> 01:04:43,600
जो मेरी साइड है मेरा ही खंडन करने की कोशिश कर रहे हैं बार-बार

935
01:04:43,600 --> 01:04:47,680
वो दीदी के सामने। वो समझ रहा हूं मैं।

936
01:04:47,680 --> 01:04:51,680
वो या तो वो उन्हीं के द्वारा प्लांटेड व्यक्ति था या वो अपनी दुश्मनी निकालने

937
01:04:51,680 --> 01:04:55,760
आया था। चारों पीठों से संप्रदाय से ही दुश्मनी निकालने

938
01:04:55,760 --> 01:04:59,920
आया था। मैंने कह तो रहा हूं। देखिए एक

939
01:04:59,920 --> 01:05:04,320
होता है अत्याचारी। एक होता है क्रांतिकारी।

940
01:05:04,320 --> 01:05:08,320
इतिहास जब लिखा जाता है ना तो दो तत्व आपको याद रहते हैं

941
01:05:08,320 --> 01:05:12,800
जो ना क्रांतिकारी होते हैं ना अत्याचारी होते हैं। कुछ नहीं उनका होता है। सिद्धांत

942
01:05:12,800 --> 01:05:17,680
विहीन व्यक्ति। ठीक है? तो

943
01:05:17,680 --> 01:05:21,920
जो सिद्धांत विहीन व्यक्ति है वो यदि आपका सगा

944
01:05:21,920 --> 01:05:25,920
भी है ना वो बेकार का है। मूर्ख है वो। 100 मूर्ख दोस्तों से अच्छा एक बुद्धिमान

945
01:05:25,920 --> 01:05:30,080
दुश्मन है वो वाली बात है। सिद्धांत विहीन जिसके पास सिद्धांत नहीं

946
01:05:30,080 --> 01:05:34,160
है कुछ वो क्या किसी का सगा होगा समय आने पर पता नहीं क्या कर दे

947
01:05:34,160 --> 01:05:38,160
वो अपने ही घर की मातृशक्तियों के साथ पता नहीं क्या कर दे सिद्धांत है

948
01:05:38,160 --> 01:05:42,240
ही नहीं कुछ ये मेरी मर्यादा है इसके उधर नहीं जाना है ही नहीं

949
01:05:42,240 --> 01:05:46,640
सिद्धांत तो ये वो सिद्धांत विहीन व्यक्ति होते हैं जो ये सब करते हैं

950
01:05:46,640 --> 01:05:50,400
और ये जो भगवतानंद की उसमें भी तो आया था एक जब आप भगवतानंद से

951
01:05:50,400 --> 01:05:54,880
बात कर रहे थे तब भी तो आया था एक लास्ट में तो वो कहते हैं देखो देखो तुम्हारे ही

952
01:05:54,880 --> 01:05:59,120
गुरु भाई आए हैं ये ये भी प्रताड़ित पूरी मठ

953
01:05:59,120 --> 01:06:03,200
से ऐसा उन्होंने कहा था। बाद में उनका मेरे पास फोन आया था

954
01:06:03,200 --> 01:06:07,280
कि भैया भैया हम जाते जरूर है इधर उधर मगर हमारी वो हम तो उनहीं के

955
01:06:07,280 --> 01:06:11,440
मैंने बहुत सुनाया बहुत सुना है उसको

956
01:06:11,440 --> 01:06:15,440
कि किस-किस प्रकार से आप गुरु द्रोह कर रहे हैं। ऐसा

957
01:06:15,440 --> 01:06:19,840
है दो तरीके के लोग हैं सामर्थ्यवान गुरुओं से जुड़ने वाले।

958
01:06:19,840 --> 01:06:24,320
एक होते हैं जो संघर्ष पूर्वक जुड़े हैं।

959
01:06:24,320 --> 01:06:28,400
हमने संघर्ष किया। मेरे जीवन में सीधे गुरुदेव नहीं आए थे। मेरे जीवन

960
01:06:28,400 --> 01:06:33,120
में पहले संघर्ष आया था। सैद्धांतिक विरोध आया था मुसलमानों की तरफ से

961
01:06:33,120 --> 01:06:36,480
इस्लाम की तरफ से।

962
01:06:36,480 --> 01:06:40,720
और मैं परेशान हो गया था। रात दिन एक करके पढ़ते-पढ़ते

963
01:06:40,720 --> 01:06:45,040
ढूंढने लगा था कि भाई इस बात का जवाब क्या होगा कि तुम्हारा

964
01:06:45,040 --> 01:06:49,040
अर्थ गलत है। मेरा अर्थ सही है। यही फंस रही थी गाड़ी सारी।

965
01:06:49,040 --> 01:06:54,240
क्या होगा इसका जवाब? तब मुझे एक चीज मिली थी जिसका नाम था परंपरा।

966
01:06:54,240 --> 01:06:58,320
तब मुझे शंकराचार्य मिले थे। नहीं तो हर कोई व्यक्ति क्लेम करेगा

967
01:06:58,320 --> 01:07:04,080
ना तुम्हारा अर्थ क्यों माना जाए? तुम जीत नहीं पाओगे। ड्रॉ करके आओगे मैच।

968
01:07:04,080 --> 01:07:05,440
इस बात को जितना जल्दी हो

969
01:07:05,440 --> 01:07:09,520
सके घुसेड़ लो अपने दिमाग में। ड्रॉ करके आओगे मैच।

970
01:07:09,520 --> 01:07:13,760
मैं जीत के आऊंगा वहां पे। अभी मुल्ला जी आए थे ना मुझे नातस प्रतिमा अस्ति

971
01:07:13,760 --> 01:07:17,840
का अर्थ बताने लगे थे। दिखा दिया था उनको आईना। तुरंत चुप हो गए।

972
01:07:17,840 --> 01:07:21,920
हां ठीक बात है। ठीक बात है। नहीं तो सुनते फिर मुझसे।

973
01:07:21,920 --> 01:07:26,400
कुरान के बारे में कुरान में क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? तुम हमें बताओगे।

974
01:07:26,400 --> 01:07:30,400
हम उस विषय में प्रामाणिक नहीं है। वेद के बारे में हम बताएंगे

975
01:07:30,400 --> 01:07:34,640
उसको क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? तुम कौन होते हो अर्थ करने

976
01:07:34,640 --> 01:07:40,000
वाले? बुक लोगे हमसे। और उसका अर्थ तुम बताओगे।

977
01:07:40,000 --> 01:07:44,000
अरे भैया जब तुम्हें मेरे अर्थ तुम्हें माना था उसने। उसने उस उस बात पे

978
01:07:44,000 --> 01:07:48,080
मान लिया था। अगर अच्छा हम ये कहते कि हां माना उसने अच्छा

979
01:07:48,080 --> 01:07:52,240
अगर हम ये कहे कि नहीं नहीं तुम्हारी किताब का अर्थ हम बताएंगे तो वो भी ये कहता

980
01:07:52,240 --> 01:07:56,480
कि तुम्हारे वेद का अर्थ फिर हम बताएंगे तो उसमें क्या फिर आप सिद्धांत पे लड़ ही नहीं पाओगे

981
01:07:56,480 --> 01:08:00,560
किसी से भी देखो ऐसा है माननीय तो माननीय

982
01:08:00,560 --> 01:08:06,000
अभी क्या कहूं आप हो चुकी है मेंटल और कल और बनाना

983
01:08:06,000 --> 01:08:10,080
अपने वो कमरे में जो है शुगर पाल लेना चार

984
01:08:10,080 --> 01:08:14,320
पांच उनको बना लेना उनको घोषित कर देना शिवश के ये हैं वो हैं ऐसे घोषित

985
01:08:14,320 --> 01:08:18,320
करते हुए शुगर पाल लेना, अपने घर में और उनके बीच में नाचना और खूब

986
01:08:18,320 --> 01:08:22,080
ड्रामेबाजी कर लेना, फिर रील बनाना। नहीं नहीं

987
01:08:22,080 --> 01:08:26,080
मगर बात ऐसी है कि हम लोग चोरी पे नहीं लड़ते हैं।

988
01:08:26,080 --> 01:08:30,320
चोरी चकारी पे नहीं लड़ते हैं। हमारे सीधे साफ ऐसे

989
01:08:30,320 --> 01:08:34,400
सिद्धांत हैं। उसको आगे रख के लड़ते हैं। हमें

990
01:08:34,400 --> 01:08:38,480
सामने वाले के यहां क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? क्या गंदगी है? हलाला

991
01:08:38,480 --> 01:08:44,000
वलाला इस पर हम बात नहीं। सीधे ईश्वर सिद्ध करो अपना।

992
01:08:44,000 --> 01:08:48,160
सीधे बिल्कुल मोक्ष सिद्ध

993
01:08:48,160 --> 01:08:52,320
करो सीधे खत्म बोल्ड ये सब देर फिर तुम

994
01:08:52,320 --> 01:08:56,480
हलाला बताओ फिर वो बताएं इसकी शादी यहां हुई इसका वो हुआ मनुस्मति में लिखा

995
01:08:56,480 --> 01:09:00,480
है ये है फिर फिर दयानंद जी के नियोग है ये ये सब

996
01:09:00,480 --> 01:09:04,480
चलता रहे ये सब हमारे पास नहीं है एंटरटेनमेंट बस एंटरटेनमेंट करते रहो

997
01:09:04,480 --> 01:09:08,720
बस हमारे पास ये सब हम वो सनसनी न्यूज़ वाले लोग नहीं है हम लोग

998
01:09:08,720 --> 01:09:11,200
सीधे

999
01:09:11,200 --> 01:09:15,200
ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या पूरा दिल धड़क जाता

1000
01:09:15,200 --> 01:09:18,480
है सामने वाले का खत्म

1001
01:09:18,480 --> 01:09:24,240
कांपने लगता है कांपने देख लेना जाके

1002
01:09:24,240 --> 01:09:28,880
वो तुम्हारे मुफ्ती जी अब देखो एक चीज और देखो आप

1003
01:09:28,880 --> 01:09:32,880
कि ये कहती हैं कि भैया

1004
01:09:32,880 --> 01:09:36,960
हम जो है

1005
01:09:36,960 --> 01:09:41,520
हिंदुत्व के लिए लड़ रहे हैं। मगर अपने हिंदू भाई को शिकस्त

1006
01:09:41,520 --> 01:09:46,720
दिखाने के लिए अपने हिंदू भाई की कहां गई है? मुल्लों के पास।

1007
01:09:46,720 --> 01:09:51,600
कहां गई है? मटेरियल उठाने कहां गई है?

1008
01:09:51,600 --> 01:09:56,240
ठीक है। ये है इनकी असलियत। अच्छा इन्होंने

1009
01:09:56,240 --> 01:10:00,400
अपनी रील में ये भी कहा है कि भैया गौ भक्षकों के साथ जो है

1010
01:10:00,400 --> 01:10:04,720
मिलकर के और गौ रक्षा कैसे होगी? कहां का सिद्धांत

1011
01:10:04,720 --> 01:10:08,720
है कि अगर किसी समुदाय के व्यक्ति से

1012
01:10:08,720 --> 01:10:12,800
हमारी लड़ाई है किसी समुदाय से तो उस समुदाय का कोई सही व्यक्ति

1013
01:10:12,800 --> 01:10:16,880
हो जो हमारी मदद करना चाहता हो उसकी मदद नहीं लेनी है तो विभीषण की मदद गलत ले

1014
01:10:16,880 --> 01:10:21,920
ली फिर राम जी ने नहीं लेनी चाहिए थी

1015
01:10:21,920 --> 01:10:25,920
अरे पागल लोग हो तुम लोगों को बस चले ना रामायण

1016
01:10:25,920 --> 01:10:30,000
में आग लगवा दो तुम लोग वो बैठ के वहां कह रहा है मैं किसी परंपरा पे

1017
01:10:30,000 --> 01:10:34,000
नहीं मानता हूं मैं किसी का सगा नहीं हूं अरे बेवकूफ जब

1018
01:10:34,000 --> 01:10:38,080
तुझे ना मनुस्मृति पे विश्वास है तो फिर ये सिद्ध कैसे होगा तुझे

1019
01:10:38,080 --> 01:10:42,080
किसी गुरु पर विश्वास नहीं है। रामायण वही रामायण है। इसमें राम जी के

1020
01:10:42,080 --> 01:10:47,280
लिए जो लिखा हुआ है वो रावण ऐसा तो नहीं वो रावण ने किया था।

1021
01:10:47,280 --> 01:10:53,280
इसी आधार पे तो आचार प्रसार चल रहा है। तथाकथित

1022
01:10:54,960 --> 01:10:59,120
शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण पे कुछ मनन है ही

1023
01:10:59,120 --> 01:11:04,560
नहीं। और फिर मैं हिंदू हूं। मैं हिंदू हूं।

1024
01:11:04,560 --> 01:11:08,720
हवा निकल जाएगी सारी हिंदू होने की।

1025
01:11:08,720 --> 01:11:13,040
जिस ज्ञान के आधार पर तुम हिंदू हो वो ज्ञान ही नकार दो जो परंपरा

1026
01:11:13,040 --> 01:11:17,040
से ज्ञान आया वही नकार दो तो कौन से हिंदू हो और जो और जो ये बात है ना

1027
01:11:17,040 --> 01:11:21,200
कि थोपो मत थोपो मत सबसे पहली बात तो ये सुन लो थोपना शुरू

1028
01:11:21,200 --> 01:11:25,280
किसने किया है सबके मूल में बैठे हुए हैं शंकराचार्य उससे पहले

1029
01:11:25,280 --> 01:11:29,360
का अपना आचार सिद्ध कर दो किसने थोपा पहली बात तो ये आ

1030
01:11:29,360 --> 01:11:33,840
गई दूसरी बात उनको कितना रोकती हो तुम जाकर के राधा राधा वैश्याव

1031
01:11:33,840 --> 01:11:37,840
ये सब किया करते हैं जो शिवजी को किया करते

1032
01:11:37,840 --> 01:11:41,920
हैं जो आर्य समाज के पास अपने प्रचार

1033
01:11:41,920 --> 01:11:45,920
के लिए जो परंपरा प्राप्त सिद्धांत है और आचार्य है उनकी

1034
01:11:45,920 --> 01:11:50,640
बुराई करने के अलावा और कोई सामग्री है क्या?

1035
01:11:50,640 --> 01:11:53,520
कुछ नहीं।

1036
01:11:53,520 --> 01:11:57,840
और जब इनसे यह सवाल पूछा गया जो आपने अभी बात रखी है। इनसे जब यह सवाल पूछा

1037
01:11:57,840 --> 01:12:01,920
गया इन्होंने कहा है कि मैं विरोध नहीं करती हूं आर्य समाज का।

1038
01:12:01,920 --> 01:12:06,000
पर यहां पे कोई आर्य समाज बैठा था उनकी लाइव में कहते ये आपके जवाब ये आपके सवाल का जवाब

1039
01:12:06,000 --> 01:12:10,160
आसानी से दे पाएंगे। उन्होंने ये क्वेश्चन सुनते ही पलट दिया। जवाब ही नहीं दिया इस चीज।

1040
01:12:10,160 --> 01:12:14,240
हां मेरे सामने ही कहा था वो। हां। और फिर रामायण की मिलावट में ही मानती है ये

1041
01:12:14,240 --> 01:12:18,800
कि रामायण मिलावटी है। तो यही तो मिलावटी

1042
01:12:18,800 --> 01:12:22,960
है। तो उस पुस्तक का एक वो बोल रहे हैं कुछ

1043
01:12:22,960 --> 01:12:27,040
बता रहे हैं उस पुस्तक का एक भी उस पुस्तक

1044
01:12:27,040 --> 01:12:30,480
का एक भी जो

1045
01:12:30,480 --> 01:12:34,560
अंश है वो उसप आपका विश्वास होना सिद्ध नहीं होता ना। या तो

1046
01:12:34,560 --> 01:12:38,640
उसको प्रमाण मानो या ना मानो फिर बन जाओ रामपाली। 5% गीता का ज्ञान काल ने

1047
01:12:38,640 --> 01:12:42,640
दिया है। अरे अपना स्तर तो दिखाओ। अपना घूंघट तो उठाओ। अपनी

1048
01:12:42,640 --> 01:12:46,720
वास्तविकता से परिचित तो करवाओ सामने वालों को। छुपे बैठे हो

1049
01:12:46,720 --> 01:12:50,800
धर्म के दुश्मन चोला ओढ़ के हम धर्म रक्षक हैं। हां

1050
01:12:50,800 --> 01:12:53,040
जी।

1051
01:12:53,040 --> 01:12:57,200
यही तो हुआ है भैया कि उन्होंने आज मनुस्मृति दो 13

1052
01:12:57,200 --> 01:13:01,360
से यह कहा कि वेद ही सर्वत्र प्रमाण है जिसके कारण उन्होंने विशुद्ध मनुस्मृति

1053
01:13:01,360 --> 01:13:05,360
को मान्यता दी अपनी तरफ से आज और तभी

1054
01:13:05,360 --> 01:13:06,320
प्रक्षिप्त

1055
01:13:06,320 --> 01:13:10,480
मान्यता मानी हम बाद में इन्होंने एक क्लेम

1056
01:13:10,480 --> 01:13:14,480
और रखा बढ़िया ये मुस्लिम से जब ये मुस्लिम से जब भिड़ने जाएंगे तो वहां

1057
01:13:14,480 --> 01:13:18,640
कहेंगे भैया वेद ही परम प्रमाण है। वेद मान लो उसके बाद हम तुम्हें बताएंगे कि ईश्वर अवतार

1058
01:13:18,640 --> 01:13:22,640
नहीं ले सकता। हमारे गायत्री मंत्री मोक्ष दिलाएगा। अभी

1059
01:13:22,640 --> 01:13:26,720
इनका एक तर्क सुनिए आप इन्होंने ये कहा अपनी लाइव में इनके साथ कोई बैठे थे उन्होंने

1060
01:13:26,720 --> 01:13:31,040
कहा कि इंडिक स्कॉलर से ले रिसर्च तक ने ये बोला है कि शास्त्रों

1061
01:13:31,040 --> 01:13:35,040
शास्त्र कंट्राडिक्ट्री है शास्त्रों में वो विषांतर आ

1062
01:13:35,040 --> 01:13:39,200
जाता है तो हम किस शास्त्र को सही माने किसको नहीं माने ये बात उनकी लाइफ में बोली गई है और इनसे

1063
01:13:39,200 --> 01:13:43,200
उन्होंने एग्री करा है दूसरा इनकी लाइफ में इन्होंने कमेंट ऊपर शोकेस करा था जिसमें

1064
01:13:43,200 --> 01:13:47,360
ये लिखा हुआ था कि परंपरा तो मान है जो ज्ञान सनातन

1065
01:13:47,360 --> 01:13:51,440
है वो तो प्रकृति है तो ये इनका मैं मानता हूं इनका ओपिनियन है ये जिससे से वो एग्री

1066
01:13:51,440 --> 01:13:54,000
करती हैं।

1067
01:13:54,000 --> 01:13:58,000
अगर ऐसी ही बात है फिर ये परंपरावादियों को ले क्यों बैठी थी? जिनको ये परंपरावादी

1068
01:13:58,000 --> 01:14:02,000
मानती हैं उनको लेके क्यों बैठी है? आज ये लाइफ में मेरे को तो समझ नहीं आता। पहली

1069
01:14:02,000 --> 01:14:06,000
बात तो ये जो इंडेक्स विंडेक्स वाली बातें जो बोल रहा है ये वेद

1070
01:14:06,000 --> 01:14:10,000
में कहां लिखा है? अगर वेद उसके लिए प्रमाण है तो वेद में कहां लिखा है कि इंडेक्स वाली बात

1071
01:14:10,000 --> 01:14:14,400
माननी है। अगर भाई इस तरीके से स्वतंत्र व्याख्या करोगे

1072
01:14:14,400 --> 01:14:18,640
तो हम फिर सीधे इस पर आ जाएंगे कि मनुष्य की वास्तविक चाह क्या

1073
01:14:18,640 --> 01:14:21,600
है? छोड़ दो सारे ग्रंथ आ जाओ स्वतंत्र

1074
01:14:21,600 --> 01:14:25,600
हो के मैं उसके लिए भी तैयार हूं ना स्वतंत्र हो के आ जाओ

1075
01:14:25,600 --> 01:14:29,600
मनुष्य की वास्तविक इच्छा क्या है फिर हम तुम्हें लाएंगे सर्वशक्तिमान ईश्वर पर

1076
01:14:29,600 --> 01:14:33,600
फिर उसके बाद लाएंगे अपष ग्रंथ पर शाश्वत धर्म पर परम

1077
01:14:33,600 --> 01:14:37,520
स्वतंत्र मोक्ष पर फिर बना देंगे तुम्हें वैदिक

1078
01:14:37,520 --> 01:14:41,680
और फिर तुम्हें परंपरावादी बना देंगे तुम मिलो तो सही स्वतंत्र हो के दूर

1079
01:14:41,680 --> 01:14:45,760
ही दूर से सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते दूर ही दूर से रेंग

1080
01:14:45,760 --> 01:14:50,160
कर निकल वो वाली बात है इनकी अब वो वो जो पागल हुई है

1081
01:14:50,160 --> 01:14:54,240
तीन चार दिन पहले वाले शौक से अब वो क्या करेंगी उन्होंने पहले ही

1082
01:14:54,240 --> 01:14:58,240
इतनी गाली गलौज कर दी इतना अपमानजनक व्यवहार कर दिया कहने को

1083
01:14:58,240 --> 01:15:03,520
कह दिया मैं चैलेंज दे रही हूं आ जाना दिस इज द बिगिनिंग ऑफ योर एंड

1084
01:15:03,520 --> 01:15:07,680
कहने को तो ये कह दिया और ऐसी चीजें खुद ही करके रख दी कि मैं उसमें जॉइ

1085
01:15:07,680 --> 01:15:12,320
ही ना करूं कभी इनको शक्ल ना देखूं इनकी ज्ञानार्थक शक्ल

1086
01:15:12,320 --> 01:15:16,320
ध्यान रखना ये सब पढ़ाई लिखाई तुम्हारे बस की बातें नहीं है

1087
01:15:16,320 --> 01:15:20,320
तुम तो बस वो इंटरनेट से ईमेल उठाओ भोले बाबा ने मुझे इंटरनेट से दिए

1088
01:15:20,320 --> 01:15:24,720
हैं और वहां से उठा के और रगड़ दो लोगों पे। अरे रगड़ो तो रगड़ो

1089
01:15:24,720 --> 01:15:29,040
भाई। पानी में रह के मगर से बैर नहीं

1090
01:15:29,040 --> 01:15:33,200
ध्यान रखो। वैदिक बनने वैदिक बन वैदिक

1091
01:15:33,200 --> 01:15:37,280
बनके और परंपरा प्राप्त आचार्यों से विरोध मत करो।

1092
01:15:37,280 --> 01:15:41,440
ठीक है? अभी इन्होंने हाथ डालोगे जल जाओगे। आप जिस डिबेट की आप समरी

1093
01:15:41,440 --> 01:15:45,600
दे रहे थे उसी की इन्होंने क्लिप की डाली है। अभी पांच मिनट छ मिनट।

1094
01:15:45,600 --> 01:15:49,680
यही थे। अरे भैया यही थे जिन्होंने पूछा था कि शिवजी ने आपको ईमेल किया था

1095
01:15:49,680 --> 01:15:54,640
कि नहीं किया था? जो है ना [हंसी] भले भाई साहब

1096
01:15:54,640 --> 01:15:59,040
वो वो वो आप वहां पे आप ही पूछ रहे थे क्या कि वो जो है शिवश

1097
01:15:59,040 --> 01:16:03,200
जी ने आपको परंपरा पे क्वेश्चन करने के लिए मना किया था। हां वो वो वो

1098
01:16:03,200 --> 01:16:07,280
वो मुझे बता रही थी कि ईमेल कर दिया है। उनके दिमाग में डायरेक्ट

1099
01:16:07,280 --> 01:16:12,000
डाल दिया है। ये ये सब बातें करती है। वो बताइए। ये प्रमाण है।

1100
01:16:12,000 --> 01:16:16,000
अरे भाई डायरेक्ट मैं कह रहा हूं डायरेक्ट डाल दिया है तो सुना दो ना ऋग्वेद का

1101
01:16:16,000 --> 01:16:22,000
द मंडल का 192 सूक्त का दूसरा मंत्र

1102
01:16:24,240 --> 01:16:30,240
वो गाना याद आता है बेवकूफिया

1103
01:16:30,290 --> 01:16:34,400
[हंसी] इसी गाने से याद आता है। इन्होंने यह सवाल उठाया है

1104
01:16:34,400 --> 01:16:38,800
कि अह मौर्य मौर्य साम्राज्य के कौटिल्य

1105
01:16:38,800 --> 01:16:42,880
अर्थशास्त्र में चाणक्य ने तो किसी जगद्गुरु का मेंशन करा ही नहीं तो उस समय जगुरु हुआ ही नहीं करते

1106
01:16:42,880 --> 01:16:47,680
थे। ये इनका तर्क है कि चाणक्य

1107
01:16:47,680 --> 01:16:51,840
गुरु नहीं है। वही वाला तर्क वेद में डायनासोर की बात नहीं हुई। ये तो वेद बेकार है।

1108
01:16:51,840 --> 01:16:55,920
वेद बेकार है। अरे भैया उस व्यक्ति को बात किस चीज पर करनी थी? उसने

1109
01:16:55,920 --> 01:17:00,160
उस चीज पर बात की। उसका जो सब्जेक्ट है उस उसने अपने अनुसार बात की

1110
01:17:00,160 --> 01:17:06,160
और चाणक्य हमारे अंतिम प्रमाण है यह कहां से सिद्ध होगा

1111
01:17:06,400 --> 01:17:10,640
अंतिम प्रमाण हमारे वेद है और वेदों के लिए वेदोक्त परंपरा पर निर्भर

1112
01:17:10,640 --> 01:17:14,640
होना होगा अगर हम अपने आप को सनातनी क्लेम करते हैं और यदि

1113
01:17:14,640 --> 01:17:18,800
सनातन की सीमा से बाहर जाओगे तो हम पकड़ के तुम्हें पहले

1114
01:17:18,800 --> 01:17:23,440
वो नास्तिक से आस्तिक बनाएंगे फिर वैदिक बनाएंगे फिर परंपरावादी बना देंगे

1115
01:17:23,440 --> 01:17:27,920
इतना गुर्दा दिया है हमारे आचार्य हमको

1116
01:17:27,920 --> 01:17:32,240
बस इतना है कि वो जो पूरी टाइमिंग है ना वो हमें मिलनी

1117
01:17:32,240 --> 01:17:36,240
चाहिए। उसमें बीच में आप लोग अभद्रता कर दोगे मर्यादा कर दोगे कि

1118
01:17:36,240 --> 01:17:39,520
भैया मेरा पक्ष कमजोर हो रहा है। मुझे क्या मतलब राम से कृष्ण से

1119
01:17:39,520 --> 01:17:43,840
शर्म आनी चाहिए तुम लोगों को।

1120
01:17:43,840 --> 01:17:48,080
तुम्हारे अपने व्यक्तिगत तुम्हारे अपने व्यक्तिगत मंतव्यों के लिए

1121
01:17:48,080 --> 01:17:52,320
तुम राम और कृष्ण के सिद्धांतों पे भी थूक देना चाहते हो। आग

1122
01:17:52,320 --> 01:17:58,000
लगा देना चाहते हो। और फिर कहते हैं लोग कि गुस्सा क्यों आता है?

1123
01:17:58,000 --> 01:18:02,160
बेकार है वह लोग फौजी जो बॉर्डर पर जाकर लड़ते हैं। सियापति

1124
01:18:02,160 --> 01:18:06,240
रामचंद्र की कहते हुए जय और बेकार है जो

1125
01:18:06,240 --> 01:18:10,240
हम रामपाल के काउंटर पर जाकर के लड़े थे। अमीर हमारी मां को गाली मत

1126
01:18:10,240 --> 01:18:14,240
दो। हमारे वेदों को गाली मत दो। हमारे रामकृष्ण को गाली

1127
01:18:14,240 --> 01:18:18,560
मत दो। बेकार है। क्योंकि जब वही क्रोध का सामना तुम्हें

1128
01:18:18,560 --> 01:18:22,960
तुम्हारी गलती पर करना पड़ेगा तो तुम्हें आरोप लगाओगे। और

1129
01:18:22,960 --> 01:18:27,840
जब क्रोध की भी बात आ जाएगी ना तो वह भी सिद्ध नहीं कर पाओगे।

1130
01:18:27,840 --> 01:18:32,240
क्रोध हमारे आंतरिक विषय है कि क्रोध

1131
01:18:32,240 --> 01:18:37,040
है तो मैं यह हूं ये मुझे समझना है। जैसे श्रद्धा हमारा आंतरिक विषय है।

1132
01:18:37,040 --> 01:18:41,120
कोई व्यक्ति राम नाम का जप कर रहा है। इस आधार पर उसको अपॉर्चुनिटी नहीं दी जा

1133
01:18:41,120 --> 01:18:45,280
सकती है। इस आधार पर उसको यह बताया जा सकता है कि तुम्हारी ऐसी

1134
01:18:45,280 --> 01:18:49,280
ऐसी गति होगी। तुम ब्राह्मण हो गए। ब्राह्मण को जो चीजें मिलती है वो

1135
01:18:49,280 --> 01:18:53,280
तुम्हें मिलेगी। यह तुम्हारा आंतरिक विषय है। तो

1136
01:18:53,280 --> 01:18:54,640
मैं चिल्ला क्यों रहा हूं?

1137
01:18:54,640 --> 01:18:58,800
यह मैं जानता हूं। तो मेरे को उसको देखना है कि मुझे क्रोध आ रहा है कि नहीं आ रहा। सामने वाला

1138
01:18:58,800 --> 01:19:04,640
ये डिसाइड नहीं कर सकता मुझे क्रोध आया। हम ठीक है।

1139
01:19:04,640 --> 01:19:08,720
वो भी चिल्लाते हैं ना एलबीडब्ल्यू हाउ इज दैट? हां

1140
01:19:08,720 --> 01:19:13,920
ये क्रोध आता है उन्हें अंपायर पे। काट डालूंगा एंपायर। हाउ इज दैट है।

1141
01:19:13,920 --> 01:19:17,920
बिल्कुल बिल्कुल ये निर्णय तो वही व्यक्ति ही करेगा कि मेरे अंदर क्रोध था

1142
01:19:17,920 --> 01:19:21,920
कि नहीं था। सामने वाला सिर्फ यह नहीं बोल सकता जोर से था तो क्रोध है। ये उसके

1143
01:19:21,920 --> 01:19:26,400
आत्मिर्तन का विषय होता है कि क्रोध उसे नहीं करना है।

1144
01:19:26,400 --> 01:19:30,480
और ये जितने भी परंपरा विहीन है ये आज धर्म नक्शा का जो नारा दे रहे हैं

1145
01:19:30,480 --> 01:19:34,480
ना तो धर्म का जो आचरण ये करते नहीं है एक्चुअल

1146
01:19:34,480 --> 01:19:38,480
में। और ये कहते हैं कि जी हमारी अपनी अंदर की जो बातें

1147
01:19:38,480 --> 01:19:42,560
उनको छोड़ दो। पहले विधर्मियों से लड़ो। पहले इस्लाम ईसाइयत वालों से लड़ो। और ये

1148
01:19:42,560 --> 01:19:46,560
कहते हैं कि अपने घर में हो रहे जो अधर्म है उस पर मौन रहो। उस पर कुछ मत होलो। राधा माता का

1149
01:19:46,560 --> 01:19:50,720
अपमान हो रहा है तब चुप रहो। भगवान शिव को शिव का अपमान हो रहा है तब चुप रहो। परंपरा

1150
01:19:50,720 --> 01:19:54,800
प्राप्त आचार्यों पर कीचड़ उछाला जा रहा है तब तुम चुप रहो। और पाखंडी जैसे

1151
01:19:54,800 --> 01:19:58,800
रामपाल जैसे देवी देवताओं का अपमान कर रहे हैं। वहां पर देवी माता का अपमान कर रहे हैं। नकली

1152
01:19:58,800 --> 01:20:02,960
ग्रंथ छाप रहे हैं और शास्त्रों को जो तोड़ मरोड़ प्रस्तुत कर रहे हैं। तो उन

1153
01:20:02,960 --> 01:20:06,960
पर हम ना बोले भैया। है ना? तो इतनी इतनी निर्लज्ज स्त्री है

1154
01:20:06,960 --> 01:20:09,680
ये। इतनी निर्लज्ज स्त्री है। आज

1155
01:20:09,680 --> 01:20:14,480
तक मुक्तेश्वर जी ने इस स्त्री से बात की है क्या? कुछ किया है क्या पर्सनली?

1156
01:20:14,480 --> 01:20:18,640
हैं? इतना बुरा बुरा लिखती है उनके बारे में तू तड़ाक

1157
01:20:18,640 --> 01:20:22,720
इतना सब और मुझसे कहती है फोन पर बातचीत के दौरान कि वो

1158
01:20:22,720 --> 01:20:26,880
मेरे सामने आ जाएंगे तो मैं तो उनके पैर छूंगी क्या दोगलापन है हां जी

1159
01:20:26,880 --> 01:20:31,040
बोला है हां जी बोला है कि हम तो पूरा सम्मान करते

1160
01:20:31,040 --> 01:20:35,040
हैं सम्मान दिख रहा है और अपने अपने चैनल पर उनको उनके

1161
01:20:35,040 --> 01:20:39,040
दुष्प्रचार कर रहे हो अरे तू तड़ाक हद होती है तू

1162
01:20:39,040 --> 01:20:43,520
तड़ाक तू तड़ाक बोल रही है तू तड़ाक बोल रही है उनके लिए बताइए

1163
01:20:43,520 --> 01:20:47,520
इतनी बड़ी हो गई तुम फन्ने का दो कौड़ी की अकल नहीं है।

1164
01:20:47,520 --> 01:20:51,520
और अब आप यह सोचिए यह तो सिर्फ 3 घंटे में से 1 घंटे 22 मिनट

1165
01:20:51,520 --> 01:20:55,680
तक की है जो मैंने देखी थी। इसके बाद जो यहां हमारे साथ बैठे

1166
01:20:55,680 --> 01:20:59,760
हैं उन्होंने तो पूरा देखा है इसको। तो जो 3 घंटे में गंद मचाया है ये

1167
01:20:59,760 --> 01:21:03,920
तो उसमें से एक घंटे का है। जिसने भी ये लड़ लिया आपस में जिसमें भी वहां

1168
01:21:03,920 --> 01:21:07,920
जो जितने लोग बैठे थे आर्य समाज बैठे थे और बाकी बैठे थे वो आपस में लड़ लिए

1169
01:21:07,920 --> 01:21:11,520
वहां पे भी उसने।

1170
01:21:11,520 --> 01:21:15,760
और वहां पर वही बातें उठाई गई। ये वही बातें उठाई गई है। वहां कहती है कि परंपरा

1171
01:21:15,760 --> 01:21:19,760
की हम इज्जत करते हैं। सुनिए तो एक बार। वहां कहती है कि हम सब परंपराओं की इज्जत करते हैं। किसी

1172
01:21:19,760 --> 01:21:24,320
परंपरा पे उंगली नहीं उठानी। हिंदू यूनिटी के लिए बैठे हैं और ठीक एक [हंसी] दिन पहले

1173
01:21:24,320 --> 01:21:28,400
ठीक एक दिन पहले शंकराचार्य को प्रचंड बहुत सिद्ध करने में लगी हुई थी। जब उनको उसके

1174
01:21:28,400 --> 01:21:32,400
एक दिन पहले ये बात पता चली कि ऐसा कुछ लिखा हुआ है कि तीन दिन की

1175
01:21:32,400 --> 01:21:36,800
टाइम लाइन ही सिद्ध कर देंगी कि क्या क्या शास्त्री धूर्तता

1176
01:21:36,800 --> 01:21:41,040
की पराकाष्ठा और अगर तुम धूर्त नहीं हो लालची नहीं हो

1177
01:21:41,040 --> 01:21:45,200
लालचन नहीं हो और त्रया चरित्र नहीं हो तो तुम

1178
01:21:45,200 --> 01:21:49,200
पागल हो चुकी हो क्या कह रही हो क्या नहीं कह रही हो अपनी बात

1179
01:21:49,200 --> 01:21:53,120
को काट रही हो कुछ नहीं पता है तुम्हें

1180
01:21:53,120 --> 01:21:57,280
और इतना तुमने अपने उसमें कूड़ा करके रखा है मैंने मैंने

1181
01:21:57,280 --> 01:22:01,280
इस महिला को जब मैंने इस महिला की बातें सुनी थी तो मैंने

1182
01:22:01,280 --> 01:22:05,440
केवल किसी ने बताया था उसने ये बातें कही है। तो मैंने एक लंबा सा मैसेज टाइप किया। इसने जितने

1183
01:22:05,440 --> 01:22:09,840
भी पॉइंट रेज हुए थे मुझे किसी ने बताया सारे मैसेजेस इसको मैंने भेजे तुरंत

1184
01:22:09,840 --> 01:22:14,000
भेज दिए और वो भी मरदित भाषा में। ठीक है? अभी वो सारे

1185
01:22:14,000 --> 01:22:18,240
मैसेज क्लेम्स जो है वो ये बताएंगे शास्त्रवाद जी। तो मैंने उसके बाद जब इसकी

1186
01:22:18,240 --> 01:22:23,600
रील देखी इस महिला की मैंने देखा तो उसमें इसने तो पूरा

1187
01:22:23,600 --> 01:22:27,280
पूरा विष्ठा कर वहां

1188
01:22:27,280 --> 01:22:31,440
ज्ञानार्थक रूप से वहां प्रदर्शित कर रखा है वहां। मैंने कहा अब क्या

1189
01:22:31,440 --> 01:22:35,440
मतलब है इससे इस तरीके से बात करने का भाई? जब तू तड़ा कर ही

1190
01:22:35,440 --> 01:22:39,520
रही है डायरिया बोल ही रही है। छोड़िए एक लाइनें क्या

1191
01:22:39,520 --> 01:22:43,600
कहती है कि जैसे क्षत्रिय महिलाओं पे जब भी लांछन उठा जब

1192
01:22:43,600 --> 01:22:47,680
भी उनका अपमान हुआ वो परंपरा ध्वस्त हुई वैसे ही ये बोलती है ये कि

1193
01:22:47,680 --> 01:22:51,680
मैं भी जन्मा क्षत्रिय हूं। जन्म से मैं भी क्षस्त्रीय हूं तो क्षत्रिय

1194
01:22:51,680 --> 01:22:55,680
क्षत्रिय हूं। जन्म से मैं भी क्षत्रिय हूं। तो यही शिवशी आपकी परंपरा

1195
01:22:55,680 --> 01:23:00,560
भी ढहेगी ये बोला है इन्होंने यही तो समाजियों की परंपरा

1196
01:23:00,560 --> 01:23:04,160
इन्होंने क्या कहा था कह रहे शिवशं

1197
01:23:04,160 --> 01:23:08,560
नहीं पहले बोला बाद में बोला परंपरा का भी बोला है कि परंपरा परंपरा

1198
01:23:08,560 --> 01:23:12,800
का बोल के अब वो सही कर रही है अरे पहले तो ये जन्मना जाति

1199
01:23:12,800 --> 01:23:16,800
को मानते ही नहीं है फिर जब जनना जाति को नहीं मानते हैं मैं मैं बता रहा

1200
01:23:16,800 --> 01:23:20,960
हूं मैं बता रहा हूं यही तो आर्य समाजियों की क्वालिटी होती है

1201
01:23:20,960 --> 01:23:25,280
कि अपने आप को घोषित मत करो कुछ घोषित

1202
01:23:25,280 --> 01:23:29,760
मत करो जिससे कि मुझे किसी नियम के नीचे दबना ना पड़े। समझ रहे हो?

1203
01:23:29,760 --> 01:23:34,320
घोषित मत करो अपने आप को। फ्री के हिंदू बने रहो। फ्रीलांस

1204
01:23:34,320 --> 01:23:38,480
वहीित भीित भी मेरी पट भी मेरी अं भी। अब क्या

1205
01:23:38,480 --> 01:23:42,560
है कि अब ये आर्य समाजी है। आर्य समाजी कर्मणा मानता है।

1206
01:23:42,560 --> 01:23:47,040
यह वहां पर जो भी कर रही है वो क्षत्रिय तो है नहीं।

1207
01:23:47,040 --> 01:23:51,120
या तो व्यापार में गिना जाएगा या शदत में गिना जाएगा। फिर कह रही

1208
01:23:51,120 --> 01:23:55,120
मैं क्षत्रिय हूं। हां मैं आपसे कह

1209
01:23:55,120 --> 01:24:00,280
रहा था क्या कहते हैं अजातवाद जी

1210
01:24:00,280 --> 01:24:04,400
[गला साफ़ करने की आवाज़] वहां पर उन्होंने आपको एक जगह पर वहां पर आप आपको

1211
01:24:04,400 --> 01:24:08,480
एक जगह पे उन लोगों ने झूठ पर फसाया था जब आप यह कहने

1212
01:24:08,480 --> 01:24:12,640
लगे थे कि उन्होंने कहां पर कहा है कि परंपरा जो

1213
01:24:12,640 --> 01:24:16,640
है उन्होंने दिखाओ कि परंपरा पर

1214
01:24:16,640 --> 01:24:21,040
चर्चा नहीं होगी उन्होंने कहां कहा है तो वो आपको बोला उनका एमायती

1215
01:24:21,040 --> 01:24:25,040
पक्षधर जो अपने आप को संकर पीठ का बोल रहा था। वो वहां आता है।

1216
01:24:25,040 --> 01:24:29,280
बोलता है कि इन्होंने जब अपनी परंपरा बताई थी रामानुजाचार्य परंपरा तो

1217
01:24:29,280 --> 01:24:33,680
शिवश ने पूछा तुमने उनके सारे शास्त्र पढ़े हैं क्या?

1218
01:24:33,680 --> 01:24:37,680
याद है आप थे कोई और था वो जी जी मैं ही था मैं

1219
01:24:37,680 --> 01:24:41,680
ही था। हां थोड़ा नेट का इशू है इसलिए तो ये जो बात

1220
01:24:41,680 --> 01:24:45,840
है मैंने बोली नहीं है उनसे कि सारे शास्त्र पढ़े हैं क्या? मैंने बोला कि क्या रामानुजाचार्य

1221
01:24:45,840 --> 01:24:49,840
आपके लिए प्रमाण है? नहीं है तो प्रमाण बताओ कौन है आपके लिए? इंटरनेट

1222
01:24:49,840 --> 01:24:54,000
भी प्रमाण नहीं है। किताब छापने वाली प्रिंटिंग पर प्रमाण नहीं

1223
01:24:54,000 --> 01:24:57,760
है तो कौन है आपका प्रमाण?

1224
01:24:57,760 --> 01:25:02,000
तो प्रमाण यह है कि मुझे क्या अच्छा लग रहा है? स्वतंत्र प्रमाण है। तो फिर हमें क्यों दबा रही हो?

1225
01:25:02,000 --> 01:25:06,080
वेद की पंक्ति के नीचे। वहां पे उनको डर ये था

1226
01:25:06,080 --> 01:25:10,080
कि अगर वो रामानुजाचार्य को मान लेते तो विदेश गमन को गलत मानना पड़ता। फिर उनका

1227
01:25:10,080 --> 01:25:14,240
सिद्धांत ध्वस्त हो जाता वं पर। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। और मैंने

1228
01:25:14,240 --> 01:25:18,560
ये बात नहीं कही है कि क्या तुमने सारे शास्त्र पढ़े हैं।

1229
01:25:18,560 --> 01:25:22,800
ठीक है। उन्होंने कही मैंने उनके सारे शास्त्र नहीं पढ़ लिए तो मैं उनको प्रमाणिक

1230
01:25:22,800 --> 01:25:26,800
कैसे मान लूं? अरे भैया प्रमाणिक पहले मानना है फिर उनसे विद्या ग्रहण

1231
01:25:26,800 --> 01:25:30,800
करनी है। अगर विद्या ग्रहण करके तुम किसी को प्रमाणिकता उसकी जज करोगे तो उसकी

1232
01:25:30,800 --> 01:25:34,800
प्रमाणिकता जज करने का फायदा क्या है? भाई प्रमाणिक स्कूल

1233
01:25:34,800 --> 01:25:38,960
में एडमिशन ले पढ़ाई करोगे कि पढ़ाई करके स्कूल की प्रमाणिकता चेक करोगे कि अब

1234
01:25:38,960 --> 01:25:43,040
मैं बड़ा हो गया। अब मैं पीएचडी कर ली। अब मैं घोषित कर रहा हूं प्रमाणिक स्कूल है।

1235
01:25:43,040 --> 01:25:47,200
फायदा क्या है? तुम तो पढ़ चुके हो। और दूसरे को भी तुम पर विश्वास नहीं है। तुम्हारे

1236
01:25:47,200 --> 01:25:51,280
अकॉर्डिंगली जिस ट्रेडिशन को तुम चालू कर रहे हो उसी उसी ट्रेडिशन से दूसरा भी

1237
01:25:51,280 --> 01:25:55,360
पढ़ाई करेगा। तो पढ़ाई स्कूल के बाहर करनी है और पीएचडी करने के बाद घोषित

1238
01:25:55,360 --> 01:25:59,520
करना है ये स्कूल जो है ये प्रमाणिक स्कूल है। फायदा क्या है उसका? क्या

1239
01:25:59,520 --> 01:26:02,880
उपयोगिता है उसकी?

1240
01:26:02,880 --> 01:26:06,880
ये यहां पर सिद्धांत को भूल जा रहे हैं इसी चीज को। ये हम बार-बार यही कहते हैं कि

1241
01:26:06,880 --> 01:26:11,040
अगर आपको वाकई में परंपरा को समझना है तो आप उसे आधुनिक पढ़ाई में लगा दो कि

1242
01:26:11,040 --> 01:26:15,040
जब आप पहली क्लास में जाते हो, नर्सरी में जाते हो तब आप यह देखते हो कि स्कूल जो है

1243
01:26:15,040 --> 01:26:19,120
वो कितना नॉलेज रखता है, कितना ज्ञान रखता है। आप ये देखते हो ये ऑथराइज है और वो

1244
01:26:19,120 --> 01:26:23,120
भी आपके माता-पिता देखते हैं कि ये ऑथराइज है कि नहीं ऑथराइज है। क्या यहां से

1245
01:26:23,120 --> 01:26:27,200
पढ़ाई करने के बाद आपको आगे सक्सेस मिलेगी या नहीं मिलेगी? तो भैया उसकी

1246
01:26:27,200 --> 01:26:31,200
ऑथेंटिसिटी चेक कर होती है। तो वो वहां पर परंपरा आती है। शास्त्रों को

1247
01:26:31,200 --> 01:26:35,200
छाप दो आप इंटरनेट पर डाल दो। उससे ज्ञान लेकर आप ज्ञानी नहीं कहे जाओगे।

1248
01:26:35,200 --> 01:26:39,440
शास्त्र भी यही बात कहते हैं। वो व्यक्ति आपको वहां पर ढोंग वो

1249
01:26:39,440 --> 01:26:43,920
व्यक्ति जो वहां पर ढोंग रच रहा है जो ये कह रहा है वो डाल रहे हैं उस पर

1250
01:26:43,920 --> 01:26:47,920
उसने पूछा है क्या पूरी के शंकराचार्य जी से कि इंटरनेट पर डाल रहे हैं। वो ये कह रहे हैं

1251
01:26:47,920 --> 01:26:52,240
अब आज के बाद जो है परंपरा की कोई आवश्यकता नहीं है। आचार्य की कोई आवश्यकता नहीं है।

1252
01:26:52,240 --> 01:26:56,320
पूछा है उसने? कहीं बोला है? बिल्कुल। बेवकूफ नहीं

1253
01:26:56,320 --> 01:27:00,320
तो। चले हैं ये धर्म की रक्षा करने। हां

1254
01:27:00,320 --> 01:27:04,480
जी। जी इवाकू जी आपकी पूरे हुए पॉइंट्स पॉइंट तो यही है बात

1255
01:27:04,480 --> 01:27:08,480
ये लिया है वहां पे ये लिया है कि जैमिनी जी और वेदव्यास

1256
01:27:08,480 --> 01:27:12,480
जी में लड़ाई हुई तो उनकी परंपरा भंग नहीं हुई क्या फिर वो गढ़पाद आचार्य

1257
01:27:12,480 --> 01:27:16,800
श्री वाला पॉइंट कि इनकी परंपरा में आप ट्रेस नहीं कर सकते इनके पीछे इनकी परंपरा

1258
01:27:16,800 --> 01:27:18,080
खुद की टूटी हुई है इनको ज्ञान

1259
01:27:18,080 --> 01:27:22,480
नहीं है। पहली बात मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता।

1260
01:27:22,480 --> 01:27:27,280
हम यह मानते हैं कि जो सुखदेव जी को मोक्ष मिल गया था

1261
01:27:27,280 --> 01:27:31,440
वही सुखदेव जी प्रकट हुए गॉड पादाचार्य के समक्ष तो

1262
01:27:31,440 --> 01:27:35,600
मोक्ष मिलना पारमार्थिक विषय है और किसी का प्रकट होना

1263
01:27:35,600 --> 01:27:39,680
व्यवहारिक विषय है तो पारमार्थिक विषय के आधार पर आप व्यवहार

1264
01:27:39,680 --> 01:27:43,680
को बदल नहीं सकते जैसे कि परमार्थ है कि अद्वैत है मगर

1265
01:27:43,680 --> 01:27:47,680
हम नीचे व्यवहार में ये नहीं कर सकते माता बहन पत्नी सब एक है आप लोग

1266
01:27:47,680 --> 01:27:51,920
आप लोग करते हैं क्या ऐसा अब जो लोग ऐसा मानसिक

1267
01:27:51,920 --> 01:27:56,240
रोग फैला रहे हैं, डायरिया और शौचालय कर रहे हैं। उन पर तो प्रश्न चिन्ह उड़ सकता है कि संभवत

1268
01:27:56,240 --> 01:28:00,400
उनके इस तरह की मर्यादा हो। धर्म है नहीं, ईश्वर की सिद्धि

1269
01:28:00,400 --> 01:28:04,800
है नहीं, ईश्वर का स्वरूप है नहीं। बने लैंड बड़े

1270
01:28:04,800 --> 01:28:08,640
फील्डर लगा बन रहे हैं।

1271
01:28:08,640 --> 01:28:12,800
और तो और वो लोग बीच में भी लड़ पड़े थे। जब वो स्त्री जो है वो

1272
01:28:12,800 --> 01:28:16,880
बोल रही थी कि हम हम ब्रह्मा कुमारी को सपोर्ट करते हैं तो आर्य समाज

1273
01:28:16,880 --> 01:28:20,880
ही उसके विरोध में दो मिनट बोलने लग गए थे कि नहीं नहीं आपने कैसे बोल दिया ब्रह्मा कुमारी

1274
01:28:20,880 --> 01:28:24,880
को भी लेंगे सपोर्ट में एक दूसरे से तो लड़ते हैं किनको

1275
01:28:24,880 --> 01:28:28,960
लेना है किनको नहीं लेना है खुद नहीं पता वो वो लगता है ऐसे ही

1276
01:28:28,960 --> 01:28:33,040
किसी मंदिर से आया होगा आर्य समाज के जहां पे ये जो संदीपन

1277
01:28:33,040 --> 01:28:33,540
रॉय

1278
01:28:33,360 --> 01:28:37,440
और निर्भय आर्य नहीं जाते हैं और जहां पे सभी संप्रदायों की फोटो

1279
01:28:37,440 --> 01:28:41,440
लगी रहती है विवाह के लिए ₹5100 की रसीद कटती और एक

1280
01:28:41,440 --> 01:28:45,920
दिन में पांच 10 विवाह कराने का प्रयास किया जाता है और तुरंत

1281
01:28:45,920 --> 01:28:50,000
वहां पर किसका विवाह होता है? अच्छा दो तीन बातें हैं। आर्य समाज के

1282
01:28:50,000 --> 01:28:54,080
मंदिर क्या आर्य समाज का अस्तित्व कैसे बचा है मंदिर पे? तो मंदिर में जो

1283
01:28:54,080 --> 01:28:58,080
अस्तित्व बचा हुआ है जो मंदिर है अब मंदिर में बात

1284
01:28:58,080 --> 01:29:03,200
यह है कि जो व्यक्ति पहुंचता है क्या उसका जनेऊ करते हैं?

1285
01:29:03,200 --> 01:29:07,200
तो जनेऊ नहीं करते तो वहां पर आर्य समाज में होने वाले सारे

1286
01:29:07,200 --> 01:29:11,200
विवाह जो है वह शद्र हैं। शद्रों के विवाह हो रहे हैं। इतनी बात तो आर्य समाज के

1287
01:29:11,200 --> 01:29:15,200
सिद्धांत के अकॉर्डिंगली भी है ना कि आर्य समाज में यदि जनेऊ

1288
01:29:15,200 --> 01:29:19,520
के बिना वो करा रहे हैं विवाह तो सब शूद्रों के विवाह हो रहे हैं। शूद्र

1289
01:29:19,520 --> 01:29:23,600
है वहां पर विवाह करने वाले सारे लोग। दूसरी बात यदि जनेऊ करा रहे हैं तो उसकी

1290
01:29:23,600 --> 01:29:27,840
टेस्टिंग कैसे करी है इन्होंने? हमें आज विवाह करना

1291
01:29:27,840 --> 01:29:32,080
है। हां लाओ तुम्हारा जनेऊ कर दे। हो गए भाई ब्राह्मण सीधे

1292
01:29:32,080 --> 01:29:36,160
भर्ती सीधी भर्ती वो आती है ना नाविकों की नेवी में भर्ती

1293
01:29:36,160 --> 01:29:41,440
आती है सीधी भर्ती

1294
01:29:41,440 --> 01:29:47,200
दसवीं से दसवीं फेल जो है वो ग्रेजुएशन करें पोस्ट ग्रेजुएशन करें

1295
01:29:47,200 --> 01:29:50,800
वो आते बोर्ड लगे होते हैं ऐसे

1296
01:29:50,800 --> 01:29:54,880
बाकी बात तो वही है बाकी बात तो ये ठीक है जिसको जैसा करना

1297
01:29:54,880 --> 01:29:59,600
है करें जिनका समर्थ जिनका उनको वो लेना है

1298
01:29:59,600 --> 01:30:03,600
क्या कहते हैं सपोर्ट लेना है ले और क्या ही कहा जा सकता है इनको मानने वाले

1299
01:30:03,600 --> 01:30:07,680
में से तो है नहीं अब निर्भय आर्य के साथ जो

1300
01:30:07,680 --> 01:30:11,760
चीजें हुई है उसका आधार लेकर के जो निर्भय आर्य और मेरे

1301
01:30:11,760 --> 01:30:16,080
बीच की चीजों को सही से नहीं जानते हैं वो गलत तरीके से पोट्रे करके प्रस्तुत

1302
01:30:16,080 --> 01:30:20,320
करते हैं। मैंने भी निर्भय आर्य को मैसेज किया कि निर्भय ऐसा

1303
01:30:20,320 --> 01:30:24,320
है हमारे बीच में वो चीजें अधूरी रह गई है। आप पूरी कर लो आ के ले आओ

1304
01:30:24,320 --> 01:30:28,560
पंचा आपका क्या है और वहां से शुरू करते हैं और

1305
01:30:28,560 --> 01:30:32,560
पूरी कर लो भाई आ के तो अब अब देखिए अभी बीच में

1306
01:30:32,560 --> 01:30:36,640
क्या हुआ था कि इन्होंने शायद अनाउंसमेंट किया था

1307
01:30:36,640 --> 01:30:40,720
हालांकि वो भी मुझे अनैतिकता लगी जब इन्होंने ये कह दिया कांग्रेसी और ये ऐसे

1308
01:30:40,720 --> 01:30:45,120
लोग आ सकते हैं है ना पार्टी वो राजनीति से जोड़ के खामखा

1309
01:30:45,120 --> 01:30:49,120
यार सिद्धांत की बात करो ना क्यों ला रहे हो दूसरी चीजों को बीच में लाना

1310
01:30:49,120 --> 01:30:53,120
है क्योंकि भाई अपनी पुष्टि हो नहीं पा रही सिद्धांत में कमी है

1311
01:30:53,120 --> 01:30:58,160
ना तो दूसरी जगह से उसकी पूर्ति करेंगे

1312
01:30:58,160 --> 01:31:02,160
और हम नहीं जाते हैं मुसलमानों से भी यह कहने तुम्हारे हलाल है हम नहीं आते तुम्हारे पास

1313
01:31:02,160 --> 01:31:06,320
ये कहने तुमने नियोग किया है ईश्वर को सर्वशक्तिमान

1314
01:31:06,320 --> 01:31:10,400
सिद्ध करो तुम्हारा धर्म धर्म तुम्हारा ब्रह्म ब्रह्म तुम्हारा मोक्ष मोक्ष सिद्ध

1315
01:31:10,400 --> 01:31:16,160
करो तीन चीजें सब मान लेंगे तुम्हारा

1316
01:31:16,160 --> 01:31:20,320
वो नहीं राजनीति है ये है वो सब तरह की बातें करेंगे

1317
01:31:20,320 --> 01:31:24,400
ऐसे इनका वो रिसीव हुआ है खैर पॉइंट की बात बता रहा था।

1318
01:31:24,400 --> 01:31:28,400
तो निर्भय आर्य ने अभी अनाउंसमेंट किया था ₹1,000

1319
01:31:28,400 --> 01:31:32,400
दिए जाएंगे और भाई जब यह पब्लिकली अनाउंस कर

1320
01:31:32,400 --> 01:31:36,400
रहे हैं तो उसमें मैं भी तो शामिल हूं कि नहीं हूं उसमें शामिल कि मैं इनके लिए कुछ

1321
01:31:36,400 --> 01:31:40,640
अलग से कुछ या तो हूं तो अब

1322
01:31:40,640 --> 01:31:44,880
जब ये पूरी तरीके से रेडी है ₹11,000 का अनाउंसमेंट कर रहे हैं।

1323
01:31:44,880 --> 01:31:49,120
उसके बाद मैं हफ्ते 10 दिन के बाद इनको मैसेज कर रहा हूं कि निर्भय

1324
01:31:49,120 --> 01:31:53,200
तुम्हारे लोग गलत चीजें फैला रहे हैं तुम्हारे नाम से। तुम्हारे तुम्हारे मेरे बीच की चीजों

1325
01:31:53,200 --> 01:31:57,200
को अंडरस्टैंडिंग को समझ नहीं पा रहे और गलत बातें वो फैला रहे हैं। तो एक काम

1326
01:31:57,200 --> 01:32:01,760
करते हैं पब्लिकली आ के सिद्धांत पर चर्चा कर लेते हैं। मैंने

1327
01:32:01,760 --> 01:32:06,080
यह मैसेज किया था परसों रात को शायद कल ये

1328
01:32:06,080 --> 01:32:10,240
मेरे पास जवाब आया कि मैं देखता हूं बताता हूं और अभी तक मेरे पास मैसेज दोबारा

1329
01:32:10,240 --> 01:32:13,200
वापस आया नहीं का। क्यों? क्या

1330
01:32:13,200 --> 01:32:17,360
तैयारी करनी है शिवश नारायण द्विवेदी से भिड़ने के लिए।

1331
01:32:17,360 --> 01:32:21,680
भाई तुम तो घोषणा कर चुके हो, कटाक्ष कर चुके हो राजनीतिक वाले

1332
01:32:21,680 --> 01:32:27,680
गलत बात है ना निर्भय फिर यह नहीं करना चाहिए था तुम्हें

1333
01:32:28,160 --> 01:32:32,720
और मैंने पहले ही जैसे जैसे अन्यों के साथ अन्यों

1334
01:32:32,720 --> 01:32:36,880
के साथ वही व्यवहार करो जो अपने लिए अच्छा अच्छा लगे तुम्हारे

1335
01:32:36,880 --> 01:32:40,880
लोग तुम्हारे लोग फैला रहे हैं कि नया दर्शन के चक्कर में मैं गया था। तुम खुद कह रहे हो कि नहीं

1336
01:32:40,880 --> 01:32:45,120
वहां ब्लंडर हुआ था जिस कारण से वो स्थगित हुई तो अपने लोगों को मना करो ना ये

1337
01:32:45,120 --> 01:32:49,280
गलत बात मत फैलाओ भाई सच्चाई पे रहो यार गिरो मगर

1338
01:32:49,280 --> 01:32:54,720
उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता नहीं खोने देता तुमसे उम्मीद नहीं है मुझे

1339
01:32:54,720 --> 01:32:58,880
बिल्कुल और तुमसे बात करना भी इसीलिए मेरा कम हुआ तुम्हारे

1340
01:32:58,880 --> 01:33:02,960
यहां वो चैनल है उस पर मेरी बात वही जो मैंने कोमा के बारे में बताया

1341
01:33:02,960 --> 01:33:06,960
था रोको मत जाने दो मैंने कहा रोको मत जाने दो उसको तुम्हारा आदमी

1342
01:33:06,960 --> 01:33:11,040
दिखा रहा है रोको मत जाने दो बदल गए मेरे

1343
01:33:11,040 --> 01:33:15,120
भाव को बदल गए और तुम हो तुम कुछ कर नहीं रहे जबकि मैं तुम में रक्षक

1344
01:33:15,120 --> 01:33:19,120
देखता हूं धर्म का

1345
01:33:19,120 --> 01:33:24,000
शुरुआत अपने से करनी होती है धर्म को धारण करना होता है

1346
01:33:24,000 --> 01:33:28,160
खुद को जलाना पड़ता है पहले अग्नि में ये नहीं बस ढिंढोरा

1347
01:33:28,160 --> 01:33:32,160
पीट दो इसको मनवा लूं उसको मनवा लूं धारण करो ना

1348
01:33:32,160 --> 01:33:36,080
भाई सत्य को

1349
01:33:36,080 --> 01:33:41,920
सिद्धांत की रक्षा के लिए संबंधों का त्याग करना पड़ता है।

1350
01:33:41,920 --> 01:33:45,920
हां बोल रहे थे आप सनातन शंकर जी हां मैं यह कह रहा

1351
01:33:45,920 --> 01:33:50,000
था जो पहली लाइन थी के कांग्रेसियों को और अखिलेश के समर्थकों

1352
01:33:50,000 --> 01:33:54,000
को खुला चैलेंज अब जैसे पहली लाइन पढ़ी मैंने कहा यार ये चैलेंज

1353
01:33:54,000 --> 01:33:58,000
तो उनके लिए है कांग्रेसियों के लिए और अखिलेश यादव की को मानने वालों

1354
01:33:58,000 --> 01:34:02,160
के लिए तो मैं तो पहले वाली लाइन से समझ मैंने कहा भाई इसको तो

1355
01:34:02,160 --> 01:34:06,160
एक्सेप्ट करने वाला व्यक्ति तो मूर्खी कहा जाएगा तो हमने तो उस पर

1356
01:34:06,160 --> 01:34:10,560
बोला नहीं अच्छा उसने दूसरी बार फिर मेरे को टैग करके भी लिखा था

1357
01:34:10,560 --> 01:34:14,880
कि भैया माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया। अच्छा वो डायलॉग

1358
01:34:14,880 --> 01:34:19,280
जो है वो कहां से ले रहे हो तुम? वो भी तो शिवा नारायण द्विवेदी का डायलॉग ले रहे हो तुम।

1359
01:34:19,280 --> 01:34:23,920
ठीक है? तो खैर मेरे तो और भी बातों को लेकर उससे क्लेरिफिकेशन

1360
01:34:23,920 --> 01:34:28,240
चाहिए मुझे तभी वार्ता हो सकती है। क्योंकि मुझे मेरे आचार्यों का जो अपमान

1361
01:34:28,240 --> 01:34:32,320
किया गया है एक वीडियो में और मुझे जिस व्यक्ति ने वो वीडियो दिया वो 100%

1362
01:34:32,320 --> 01:34:34,240
शोर है। वो सामने नहीं आना चाहता

1363
01:34:34,240 --> 01:34:38,320
लेकिन वो कहता है ये आवाज इसी की है। तो अब मैं उस व्यक्ति के साथ कैसे वार्ता करूं

1364
01:34:38,320 --> 01:34:42,400
जो कि हमारे आचार्यों को हमारे आराध्य को वहां पर अभद्र बातें बोल रहा है।

1365
01:34:42,400 --> 01:34:46,480
तो पहले तो मुझे यह कंफर्म 100 उसके मुख से नहीं होगा कि ये भैया मेरी आवाज

1366
01:34:46,480 --> 01:34:50,640
नहीं है। नहीं नहीं क्योंकि जो व्यक्ति प्रत्यक्षदर्शी है उसने तो कहा है कि वो वही

1367
01:34:50,640 --> 01:34:54,800
है तो फिर ऐसे में बात नहीं हो सकती जहां पर हमारे सामने ऐसा व्यक्ति

1368
01:34:54,800 --> 01:34:59,120
खड़ा है जिसने हमारे आराध्या को पहले तो उस पर क्षमा मांगनी पड़ेगी उसे तो मैंने उस पर कम्युनिटी

1369
01:34:59,120 --> 01:35:03,520
पोस्ट भी करी थी जी

1370
01:35:03,520 --> 01:35:07,600
ये जी हां गुरु जय श्री राम भैया

1371
01:35:07,600 --> 01:35:11,760
ये गुरु शिष्य परंपरा के बारे में बताता हूं मैं एक मैं अपना अनुभव बताता

1372
01:35:11,760 --> 01:35:15,760
हूं शायद शिवश भैया को याद होगा एक बार

1373
01:35:15,760 --> 01:35:19,760
मैं फसा था कि मैंने रामचरितमानस गीता

1374
01:35:19,760 --> 01:35:23,920
प्रेस गोरखपुर के रामचरितमानस में एक चौपाई पढ़ा

1375
01:35:23,920 --> 01:35:28,080
था कि जन्म जन्म मुनि जतन कराई अंत राम क आवत ना

1376
01:35:28,080 --> 01:35:32,080
उसमें उसकी व्याख्या दी है कि जन्म जन्म मुनि जन जतन कर लेते हैं

1377
01:35:32,080 --> 01:35:36,400
लेकिन अंत में राम नहीं बोल पाते हैं और जब मैंने पूज्य

1378
01:35:36,400 --> 01:35:40,480
महाराज जी का प्रेमानंद जी महाराज जी का वीडियो देखा था उनको जब ये क्वेश्चन गया

1379
01:35:40,480 --> 01:35:44,480
तो उन्होंने क्या बोला इसको आप उल्टा क्यों ले रहे हो? इसका सही अर्थ यह है

1380
01:35:44,480 --> 01:35:48,640
कि अंत राम कही और फिर आवत नहीं। अंत में राम

1381
01:35:48,640 --> 01:35:49,440
बोला और आए

1382
01:35:49,440 --> 01:35:53,520
नहीं। तो मैंने भैया को फोन करके शिवा भैया को फोन करके पूछा कि ऐसा

1383
01:35:53,520 --> 01:35:57,680
ऐसा ऐसा ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि हां ये बात तो सही है। उसके आगे की चौपाई

1384
01:35:57,680 --> 01:36:01,840
को कोट करके उन्होंने मुझे समझाया। तो देखिए लिखा क्या है? गीता प्रेस

1385
01:36:01,840 --> 01:36:06,080
ऑथेंटिक है। लेकिन आदमी कंफ्यूज हो जाएगा कि जब मुनि जन जतन कर रहे हैं।

1386
01:36:06,080 --> 01:36:10,240
उनके मुख से राम नहीं आ रहा है। तो मैं तो छोटा मोटा मेरे मुख से तो आएगा ही नहीं।

1387
01:36:10,240 --> 01:36:14,640
इससे अच्छा भाई मत राम नाम मत जप करो। यह मेरे बुद्धि में आ सकता था।

1388
01:36:14,640 --> 01:36:18,800
लेकिन जब मुझे डाउट हुआ तो मैंने क्या किया? पूछा परंपरागत

1389
01:36:18,800 --> 01:36:22,880
तो मेरा डाउट क्लियर हुआ। है ना? तो यहां इसलिए परंपरा की जरूरत

1390
01:36:22,880 --> 01:36:26,960
पड़ती है। अरे तो यह बात लिखी है गुरु गीता

1391
01:36:26,960 --> 01:36:31,280
में यह बात लिखी स्पष्ट कि बिना गुरु के

1392
01:36:31,280 --> 01:36:35,360
बिना आधिकारिक गुरु के। ये जो शास्त्र है वो

1393
01:36:35,360 --> 01:36:39,600
हमारेित को भ्रांति में डालते हैं। डाल देंगे।

1394
01:36:39,600 --> 01:36:44,960
गुरु गम विद्या है भाई पढ़ो ना चार नौ तीन छंदो उपनिषद

1395
01:36:44,960 --> 01:36:50,880
गुरु गुरु गम विद्या ही मुक्ति दिलाएगी गुरु गम विद्या

1396
01:36:50,880 --> 01:36:55,120
हां आधे लोग जो है आधे लोग जो है वो देखिए उस ग्रुप

1397
01:36:55,120 --> 01:36:59,120
में जो जुड़ता है ना लाइव में आधे लोग पुराण को नहीं मानने वाले

1398
01:36:59,120 --> 01:37:03,200
लोग हैं। आधे लोग वेद को नहीं मानने वाले लोग हैं। कुछ लोग अपनी परंपरा

1399
01:37:03,200 --> 01:37:04,640
को मानने वाले ये सब मिलकर

1400
01:37:04,640 --> 01:37:08,640
के सोचिए एक सनातन समाज बना रहे हैं। आगे जाकर

1401
01:37:08,640 --> 01:37:13,440
के क्या समाज बनेगा मालूम है? फिर यह आपस में लड़ेंगे। वही जो

1402
01:37:13,440 --> 01:37:17,840
अभी अभी इतना आनंद आएगा आगे जाकर इतना

1403
01:37:17,840 --> 01:37:21,920
आएगा ना जब आपस में इनका जब खिचड़ी पकेगा ना तो हमको सिर्फ आनंद लेना है

1404
01:37:21,920 --> 01:37:26,240
बस। हां भैया आप बोल रहे थे। नहीं नहीं आपस में आपस में नहीं लड़ेंगे।

1405
01:37:26,240 --> 01:37:30,240
पता है ये मैं बताऊं। आपस में नहीं लड़ेंगे। ये जब आर्य समाज वाला

1406
01:37:30,240 --> 01:37:34,240
बोलेगा कि तुम्हारी राधा मां ये है। आचार्य ये है तो जो दूसरा मानने

1407
01:37:34,240 --> 01:37:38,240
वाला व्यक्ति होगा रामपाल का बोलेंगे। बोलेंगे नहीं नहीं नहीं ऐसा है इनको बोलने दो

1408
01:37:38,240 --> 01:37:42,480
रामपाल का खंडन करने दो रामपाल वाले बोलेंगे के भैया ऐसा है हम

1409
01:37:42,480 --> 01:37:46,480
दयानंद सरस्वती ऐसे थे दयानंद सरस्वती वैसे थे तो आर्य समाज बोलेगा

1410
01:37:46,480 --> 01:37:50,640
अरे अरे नहीं इनको बोलने दो कुछ भी नहीं हमें विधर्मियों से लड़ना है इनको बोलने दो इनको गालियां

1411
01:37:50,640 --> 01:37:54,640
देने दो हमें जितनी दे रहे हैं ऐसे करेंगे ये लोग वहां पर

1412
01:37:54,640 --> 01:37:59,040
कोई सिद्धांत नहीं होगा इनका और जो ज्ञान है वो मनमुखी रूप से ज्ञान

1413
01:37:59,040 --> 01:38:03,040
ले लो अब जब विधर्मियों के साथ बात करने बैठेंगे बोलेंगे तुम्हारी कुरान में यह लिखा है

1414
01:38:03,040 --> 01:38:07,200
वो बोलेगा तुम्हारे वेद में यह लिखा है फिर उधर से राम रामपाली बोलेगा नहीं नहीं वहां तो कबीर

1415
01:38:07,200 --> 01:38:11,280
लिखा है तो इस तरह की खिचड़ी ये पकाना चाहते हैं। यह धर्म नहीं

1416
01:38:11,280 --> 01:38:16,320
है बल्कि ये अधर्म है। हम जी

1417
01:38:16,320 --> 01:38:21,280
बड़ी अभद्रता मेरे को एक चीज का और लगा था वो जो

1418
01:38:21,280 --> 01:38:25,360
महोदया जो हैं उन्होंने जो एक रील डाला है कि शिवा

1419
01:38:25,360 --> 01:38:29,360
नारायण द्विवेदी आए थे कुछ करने के लिए और डायरिया करके चले गए और ये

1420
01:38:29,360 --> 01:38:33,600
मुझसे हाथ जोड़ के ये कर रहे थे वो कर रहे भाई मर्यादा में आकर

1421
01:38:33,600 --> 01:38:37,680
के अगर कोई बोल दे कि माता जी आपको प्रणाम। अब यह

1422
01:38:37,680 --> 01:38:41,760
फोटो वो ले ले और डाल दे कि देखो देखो देखो शिवाय

1423
01:38:41,760 --> 01:38:45,920
नारायण मेरे सामने नतमस्तक हो गए तो शिवाय नारायण द्विवेदी का और भी तो कुछ

1424
01:38:45,920 --> 01:38:50,160
है रूप वो भी तो दिखा दो आप अधूरा चीज दिखा रही है। मैंने

1425
01:38:50,160 --> 01:38:54,320
कमेंट में वही डाला है वो कहती लाइव आ के बात कर लीजिए

1426
01:38:54,320 --> 01:38:58,640
रिप्लाई में। इसमें इसमें क्या है कि इन्होंने क्लेम

1427
01:38:58,640 --> 01:39:02,640
किया अपनी रील में। उसमें कह रही हैं

1428
01:39:02,640 --> 01:39:07,200
कि भाई इन्होंने मुझसे बहन बहन करके सारे प्रश्न जान लिए मेरे।

1429
01:39:07,200 --> 01:39:11,200
भाई हम आपसे बहन बहन करके इसलिए बात कर रहे हैं और अभी

1430
01:39:11,200 --> 01:39:15,360
भी इस चर्चा के अंत में भी आपके लिए शुभ संदेश है।

1431
01:39:15,360 --> 01:39:19,440
बने रहिए। मगर बहन-बहन करके इसलिए बात कर रहे हैं कि

1432
01:39:19,440 --> 01:39:23,920
जब आप सार्वजनिक रूप से हमारे सिद्धांतों के विरुद्ध खड़े होंगे

1433
01:39:23,920 --> 01:39:28,320
तो हमें वहां पर आपके सिद्धांतों का सच्चाई समाज को दिखानी

1434
01:39:28,320 --> 01:39:32,480
पड़ेगी। जो हम नहीं चाहते हैं, जो हम नहीं

1435
01:39:32,480 --> 01:39:36,880
चाहते हैं कि आप समाज के सामने निरुत्तर

1436
01:39:36,880 --> 01:39:41,040
या फिर ऐसी स्थिति में दिखाई दें क्योंकि आपका एक

1437
01:39:41,040 --> 01:39:45,360
फॉलोअर्स हैं। आपको लोग मानते हैं तो हम आपका

1438
01:39:45,360 --> 01:39:49,600
वो अपमान दुर्गति से आपको बचाना चाहते हैं।

1439
01:39:49,600 --> 01:39:53,760
इसलिए बहन-बहन करके आपको वही पर्सनल बात

1440
01:39:53,760 --> 01:39:57,840
मतलब पर्सनल प्राइवेट चैट में और प्राइवेट कॉलिंग में आपको समझाना

1441
01:39:57,840 --> 01:40:01,920
चाह रहे हैं। आपने जितने प्रश्न किए सबके मैंने उत्तर देने का वहां प्रयास किया

1442
01:40:01,920 --> 01:40:06,080
था। यहां भी मैं करता मगर यहां पे क्योंकि आप आ रही हो परंपरा के विरुद्ध

1443
01:40:06,080 --> 01:40:10,160
होते हुए तो आपको सबसे पहले मुझे यही बताना होगा। नहीं तो यह संदेश

1444
01:40:10,160 --> 01:40:14,240
चला जाएगा समाज में कि परंपरा के विरुद्ध होते हुए भी कोई भी वैदिक खोने का क्लेम

1445
01:40:14,240 --> 01:40:18,400
कर सकता है। नहीं कर सकता और यदि करेगा तो उस शिवश नारायण

1446
01:40:18,400 --> 01:40:22,560
द्विवेदी को वहां मुस्लिमों के सामने कमजोर होना पड़ेगा जो अपने धर्म

1447
01:40:22,560 --> 01:40:26,720
की रक्षा करना चाहता होगा। याद रखना संप्रदाय

1448
01:40:26,720 --> 01:40:30,960
विरुद्ध होते हुए अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है। वैदिक

1449
01:40:30,960 --> 01:40:35,200
धर्म की रक्षा नहीं हो सकती। संप्रदाय विरुद्ध होते

1450
01:40:35,200 --> 01:40:39,200
हुए संप्रदाय विहीन होते हुए आप हिंदू खुद को क्लेम कर

1451
01:40:39,200 --> 01:40:43,760
सकते हो। ठीक वो ठीक है। विरुद्ध मत हो। विहीन रहो।

1452
01:40:43,760 --> 01:40:47,920
ठीक है। मुझे पता नहीं है कहां क्या कहा जा रहा है। प्रणाम है आपको। ठीक है। मुझे

1453
01:40:47,920 --> 01:40:52,000
नहीं पता है। मैं ऐसे ही सही हूं। और विरुद्ध

1454
01:40:52,000 --> 01:40:56,000
हो कि शंकराचार्य का क्या मतलब हां विरुद्ध हो गए शंकराचार्य ने कहा मैं

1455
01:40:56,000 --> 01:41:00,160
नहीं मानूंगा ये कैसे हो सकता है वो कैसे हो सकता है तो फिर तो

1456
01:41:00,160 --> 01:41:03,280
फिर तो पूछा जाएगा

1457
01:41:03,280 --> 01:41:07,280
बिल्कुल बिल्कुल व्याख्या अगर करने लगोगे और आचार्यों के द्वारा जो कही गई

1458
01:41:07,280 --> 01:41:11,520
बात है उससे विरुद्ध अगर बात करने लगोगे तब हम में पूछा जाएगा कि परंपरा

1459
01:41:11,520 --> 01:41:15,840
है वैसे आप अपने आप को सनातनी कहते रहो धर्म के कार्य करते रहो गौ रक्षा आंदोलन

1460
01:41:15,840 --> 01:41:20,320
में जुड़ते रहो हम आपको अच्छा ऐसी बात आप बोल रहे हो जो आचार्यों

1461
01:41:20,320 --> 01:41:24,400
के मुख से कही गई बात से मेल मेल खा रही है तो वहां पर तो हम आपको

1462
01:41:24,400 --> 01:41:28,400
कुछ बोल नहीं रहे हैं। हम तो कह रहे हैं हां भाई बात सही कह रहे हो। जहां पर वो मेल नहीं खा

1463
01:41:28,400 --> 01:41:32,720
रही है वहीं पर तो हम बोल रहे हैं कि भैया यहां पर आपकी बात जो है वो विरुद्ध है। अच्छा उसमें

1464
01:41:32,720 --> 01:41:36,720
आपकी बात नहीं मानी जाएगी क्योंकि आपने तो स्वाध्याय किया है और स्वाध्याय से

1465
01:41:36,720 --> 01:41:40,880
जो आपने गलत अर्थ समझ लिया है वो नहीं माना जा सकता। बात अर्थ

1466
01:41:40,880 --> 01:41:45,120
वही माना जाएगा जो हमारे आचार्य मुख से निकला हुआ अर्थ है। तो वहां पर हम विरोध कर रहे हैं। बाकी

1467
01:41:45,120 --> 01:41:49,280
चीजों में थोड़ी विरोध कर रहे हैं। हम

1468
01:41:49,280 --> 01:41:53,760
बिल्कुल जी

1469
01:41:53,760 --> 01:41:57,840
तो मूर्खों की चौपाल सही टाइटल दिया है आपने और

1470
01:41:57,840 --> 01:42:01,840
वहां पर रामपाल जी वैसे कमेंट बॉक्स में थे। खाली यह नहीं था कि वहां

1471
01:42:01,840 --> 01:42:05,920
पर डिस्कशन में नहीं थे पर कमेंट बॉक्स में काफी लोग थे जो ये कह रहे थे कि

1472
01:42:05,920 --> 01:42:10,000
ब्रह्म कुमारी आर्य समाज ऐसे लोगों को एक साथ आना चाहिए। रामपालियों

1473
01:42:10,000 --> 01:42:14,000
को भी एक साथ आना चाहिए। जैसे मैंने कमेंट में देखा है मेरे को स्क्रीनशॉट भी भेजा किसी ने

1474
01:42:14,000 --> 01:42:18,160
कि देखो ये तो सब लोग मिलकर एक दूसरे

1475
01:42:18,160 --> 01:42:22,320
का समर्थन करने के लिए आ रहे हैं क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी को हराना है परंपरा

1476
01:42:22,320 --> 01:42:26,640
प्राप्त आचार्यों को हराना है तो सारे इकट्ठे हो जाओ भैया वो कांग्रेस

1477
01:42:26,640 --> 01:42:30,640
और अभी चला परंपरा प्राप्त आचार्यों को तो क्या ही हराएंगे वो तो बात दूर

1478
01:42:30,640 --> 01:42:35,920
की है मगर बात ये है कि परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का विरोध करना है महागठबंधन

1479
01:42:35,920 --> 01:42:40,240
और इनको ऐसा लगता है कि विरोध करके अपने पैरों अपना बहुत अच्छा कर रहे हैं

1480
01:42:40,240 --> 01:42:44,320
अरे अरे पागलों यही काम आएंगे तुम्हें जब नास्तिकों को हराना होगा ना

1481
01:42:44,320 --> 01:42:48,960
अंत में यही काम आएंगे सिद्ध ही नहीं कर पाओगे ईश्वर को

1482
01:42:48,960 --> 01:42:53,680
कहां तुम धर्म की रक्षा कर लोगे

1483
01:42:53,680 --> 01:42:57,680
मूर्ख कहीं की जो तुम ये विरोध कर रही हो ना शंकराचार्य परंपरा

1484
01:42:57,680 --> 01:43:02,160
प्रचंड बोध है ये सब जो तुम कर रही हो बैठ के

1485
01:43:02,160 --> 01:43:06,800
आज तुम उस पर लीपापोती कर रही हो सिद्ध कर लोगी इनके विरुद्ध जाते हुए

1486
01:43:06,800 --> 01:43:11,200
ईश्वर की ईश्वर के अस्तित्व को अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी

1487
01:43:11,200 --> 01:43:15,440
मार रही हो और फिर कह रहे हो मैं धर्म रक्षक हूं। आपके

1488
01:43:15,440 --> 01:43:19,840
लिए धर्म मायने नहीं रखता है। ना अपनी

1489
01:43:19,840 --> 01:43:23,920
मायने रखती है। वजूद, वर्चस्वता, घमंड, अहंकार मेरे दो लाख

1490
01:43:23,920 --> 01:43:28,160
फॉलोअ भाई। 3 लाख फॉलोअ है भाई। हाउ

1491
01:43:28,160 --> 01:43:34,000
डेयर? कोई मेरी बात को कैसे काट सकता है? कोई भी आचार्य हो।

1492
01:43:34,000 --> 01:43:38,240
एक आध वीडियो देख लेना पूरी के शंकराचार्य जी का। समझ में नहीं आएगी।

1493
01:43:38,240 --> 01:43:44,000
हिंदी ऐसी है संस्कृत निष्ठ समझे [हंसी]

1494
01:43:44,000 --> 01:43:47,920
बेवकूफ नहीं

1495
01:43:47,920 --> 01:43:52,160
और गंदगी मचा रही हो अपने चैनल पे अरे भाई अगर तुम धर्म

1496
01:43:52,160 --> 01:43:56,400
योद्धा हो तो चैनल पे थोड़ा धर्म का वो करो ना क्या

1497
01:43:56,400 --> 01:44:00,640
कर रही हो ये डायरिया ये सब तुम्हें क्या लगता है इससे मुझे चोट पहुंचती है

1498
01:44:00,640 --> 01:44:05,520
नहीं पहुंचती व्यक्तिगत नहीं पहुंचती सबसे चोट

1499
01:44:05,520 --> 01:44:09,680
इस सब से चोट नहीं पहुंचती है बहुत पहले हो चुका है सबका काम खत्म।

1500
01:44:09,680 --> 01:44:14,480
एक किलिंग मशीन की तरह हूं। किलिंग मशीन

1501
01:44:14,480 --> 01:44:18,640
कुछ नहीं फर्क पड़ता तुम्हारी इन सब बातों से। हां, यह

1502
01:44:18,640 --> 01:44:22,960
जरूर है कि व्यवहारिक उसमें मुझे देखना पड़ेगा कि यदि किसी ने गाली दी तो सिद्धांत

1503
01:44:22,960 --> 01:44:27,200
ये है कि गाली के पीछे गोली चल जाती है। वहां चर्चा का कोई जगह नहीं बची। तुमने

1504
01:44:27,200 --> 01:44:32,560
अमर्यादित बातें इतनी कर दी व्यक्तिगत रूप से। तुमसे क्या चर्चा करें?

1505
01:44:32,560 --> 01:44:38,000
तुम्हारे इससे पता चलता है कि तुम्हारा चरित्र कैसा है।

1506
01:44:38,000 --> 01:44:42,320
इस दोगलेपन से दोगली बातों से पता चलता है कि कितनी बड़ी त्रया चरित्र

1507
01:44:42,320 --> 01:44:44,800
हो।

1508
01:44:44,800 --> 01:44:49,200
ऐसे में तुम्हारे तुम्हारे साथ सद्भावना पूर्वक या फिर सौहार्द

1509
01:44:49,200 --> 01:44:55,200
पूर्वक ऐसी कोई चर्चा कैसे करें जिसमें कि लड़ाई नहीं होनी है।

1510
01:44:57,520 --> 01:45:01,680
ठीक है। जी उसमें तो उसने तो गुरु

1511
01:45:01,680 --> 01:45:05,680
परंपरा का विरोध करने के लिए अर्जुन का सहारा लिया था। की

1512
01:45:05,680 --> 01:45:10,160
अर्जुन ने द्रोणाचार्य से युद्ध किया ना महाभारत में

1513
01:45:10,160 --> 01:45:14,930
हां तो उसका सहारा लिया उन्होंने युद्ध किया ना अपने गुरु से

1514
01:45:14,930 --> 01:45:20,170
[संगीत] तो हम भी कर सकते हैं उनका विरोध कर सकते हैं इस तरह से कुछ

1515
01:45:20,170 --> 01:45:22,480
[हंसी]

1516
01:45:22,480 --> 01:45:28,080
युधिष्ठिर ने गुरु का [गला साफ़ करने की आवाज़] विरोध किया था तो जब वो

1517
01:45:28,080 --> 01:45:32,160
धर्म की साइड लड़े अच्छा वो अपने गुरु से थोड़ी लड़ रहे थे ये भी तो देखो वो किससे

1518
01:45:32,160 --> 01:45:36,400
लड़ रहे थे वो तो कौरवों से लड़ रहे थे वो अपने गुरु युधिष्ठिर जो

1519
01:45:36,400 --> 01:45:40,640
युधिष्ठिर जो है वो तो स्वयं वहां पर भीष्म जी से

1520
01:45:40,640 --> 01:45:44,800
अ धर्म की व्याख्या वर्णाश्रम की व्याख्या पूछ

1521
01:45:44,800 --> 01:45:48,800
रहे हैं। तो ऐसे में यदि उन्होंने कहा भी है पहले

1522
01:45:48,800 --> 01:45:52,880
तो प्रकरण पूरा देखने वाली बात है। यदि उन्होंने कुछ ऐसे कहे भी है तो उनको

1523
01:45:52,880 --> 01:45:57,360
जो है सिद्धांत के रूप में कैसे ग्रहण किया जाएगा? वो तो स्वयं

1524
01:45:57,360 --> 01:46:02,000
इस विषय में शंका अपनी दूर कर रहे हैं ना भीष्म जी से

1525
01:46:02,000 --> 01:46:07,280
और फिर वही बात कर्म से देखना है।

1526
01:46:07,280 --> 01:46:11,680
वही वाली बात कि जो ब्रह्म ज्ञानी होगा वही ब्राह्मण है।

1527
01:46:11,680 --> 01:46:12,800
अरे भैया जब ब्रह्म

1528
01:46:12,800 --> 01:46:16,880
ज्ञानी होगा तो हम उसके ब्रह्म ब्रह्म ज्ञान का पता कैसे करें उसके हमें

1529
01:46:16,880 --> 01:46:22,320
ब्रह्म ज्ञानी होना पड़ेगा पहले। फिर फायदा क्या है आचार्य का?

1530
01:46:22,320 --> 01:46:28,320
फिर वही बात कोई सिर ना पैर उपयोगिता क्या है उसकी

1531
01:46:30,160 --> 01:46:34,160
भैया लेकिन इसमें इसमें इसमें जो है उत्तर तो ये हो सकता

1532
01:46:34,160 --> 01:46:38,800
था ये भी हो सकता है कि जो अर्जुन था वो तो कोई

1533
01:46:38,800 --> 01:46:42,880
धर्म के लिए तो लड़ाई नहीं कर रहा था ना मतलब कि धर्म व्याख्या के लिए तो लड़ाई नहीं

1534
01:46:42,880 --> 01:46:47,040
कर रहा था शास्त्रों पे लड़ाई तो नहीं कर रहा था वो तो न्याय और अधिकार के लिए लड़ाई

1535
01:46:47,040 --> 01:46:51,120
कर रहा था धर्म धर्म युद्ध है ना तो ये

1536
01:46:51,120 --> 01:46:55,120
बात को इससे जोड़ा नहीं क्या चल रहा है वो

1537
01:46:55,120 --> 01:46:59,120
देखने वाली बात है कि किस आधार पर कहा जा रहा है मगर भाई एक मोटा पॉइंट

1538
01:46:59,120 --> 01:47:03,120
तो पकड़ो अगर कर्म के आधार पर तुम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य घोषित ये

1539
01:47:03,120 --> 01:47:07,120
वाली उसको लागू कर दोगे तो किसी को भी आचार्य के रूप में स्वीकार

1540
01:47:07,120 --> 01:47:11,280
करने से पहले भाई अपना ब्राह्मण सिद्ध कर अच्छा कैसे सिद्ध होगा कि मुझे वेद आते

1541
01:47:11,280 --> 01:47:15,520
हैं वेद मंत्र सारे हैं उनकी व्याख्या मेरी पूर्व अच्छा सुना भाई अब मैं कैसे

1542
01:47:15,520 --> 01:47:19,600
पता करूं कि वो वेद मंत्र सुना रहा है मेरे को वेद

1543
01:47:19,600 --> 01:47:23,760
मंत्र आते हैं मुझे व्याख्या मालूम हो तात्विक विवेचना आती हो मुझे फायदा

1544
01:47:23,760 --> 01:47:28,480
क्या है फिर उसकी प्रमाणिकता का मैं उनसे

1545
01:47:28,480 --> 01:47:32,560
वेद का अर्थ जानने के लिए उनकी प्रमाणिकता जांच रहा हूं या फिर

1546
01:47:32,560 --> 01:47:36,560
अपने वैदिक मंत्रों को जानने के बाद उनकी वेद की उनकी प्रमाणिकता जांच

1547
01:47:36,560 --> 01:47:40,880
रहा हूं क्या है इसमें एग्जीक्यूशन भी तो देखो भाई इंप्लीमेंटेशन

1548
01:47:40,880 --> 01:47:44,960
भी तो देखो उसका क्या होना है उसका उपयोग क्लासिफिकेशन होता क्यों

1549
01:47:44,960 --> 01:47:49,040
है वर्गीकरण होता क्यों है जिससे कि चीजों को व्यवस्थित

1550
01:47:49,040 --> 01:47:53,040
किया जा सके समाज को व्यवस्थित किया जा सके। एक

1551
01:47:53,040 --> 01:47:57,040
दिशा में अब सुव्यवस्थित होकर के समाज अपना कार्य कर

1552
01:47:57,040 --> 01:48:03,040
सके। मुख्य कार्य क्या है? मोक्ष। उसके लिए कार्य कर सके।

1553
01:48:10,480 --> 01:48:14,240
भाग गया। सुभाष भाग गया था।

1554
01:48:14,240 --> 01:48:18,400
अच्छा ये कोई बता रहे हैं कि शंकराचार्यों

1555
01:48:18,400 --> 01:48:22,400
को डिबेट का चैलेंज देते हुए विशुद्ध नास्तिक कह रहा है और आप उसको

1556
01:48:22,400 --> 01:48:26,560
अपना छोटा भाई बोल रहे हैं तो यह तो करपात्री

1557
01:48:26,560 --> 01:48:30,880
जी ने भी बोला था

1558
01:48:30,880 --> 01:48:35,600
है ना ये करपात्री जी ने भी बोला था

1559
01:48:35,600 --> 01:48:41,600
भटक चुके हैं भटके हुए हैं हम तो वापस लाएंगे हां

1560
01:48:41,680 --> 01:48:45,760
सब मिल भी जाएंगे ना [गला साफ़ करने की आवाज़] सब मिल भी जाएंगे ना तो भी

1561
01:48:45,760 --> 01:48:49,760
प्रश्न वही आएगा कि बताइए गुरु परंपरा सब

1562
01:48:49,760 --> 01:48:53,920
लोग मिलके बता दो भाई इतने सारे लोगों का सिद्धांत मिल

1563
01:48:53,920 --> 01:48:57,920
गया है और सब अपने सिद्धांत को उनके अकॉर्डिंग सब अपने

1564
01:48:57,920 --> 01:49:01,920
सिद्धांत को टॉप का मानते हो परब्रह्म का मानते हो तो सब मिलकर दे

1565
01:49:01,920 --> 01:49:06,160
दो ना उत्तर शिवाय नारायण द्विवेदी का उत्तर दे दो खत्म करो शिवाय नारायण

1566
01:49:06,160 --> 01:49:10,240
द्विवेदी भाग जाएगा क्या हार जाएगा कभी नहीं आएगा पहले उत्तर तो दो सब

1567
01:49:10,240 --> 01:49:14,240
मिलकर उत्तर नहीं दे पा रहे खाली आपस में मजाक बना रहे हैं भाग गया भाग

1568
01:49:14,240 --> 01:49:18,240
गया नहीं मैं दावा कर देता हूं मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट

1569
01:49:18,240 --> 01:49:22,400
हूं सारे लोग मेरे से ऑडिट करवा लो और मेरे साइन जो है वह मान्य

1570
01:49:22,400 --> 01:49:25,680
होंगे तो मान लोगे मेरे से यह नहीं पूछोगे भैया बताओ तुम कौन

1571
01:49:25,680 --> 01:49:29,840
से सीए इंस्टट्यूट दिल्ली से कहां से तुम पढ़े हो अपना सर्टिफिकेट तो दिखाओ ये नहीं

1572
01:49:29,840 --> 01:49:33,840
बोलोगे क्या मेरे से इतनी सी बात तो इन्होंने कही जब आप दावा कर रहे हो वो

1573
01:49:33,840 --> 01:49:37,840
दावा आपका वहां पर फेल हो जा रहा है कि भैया आपने दावा कर दिया मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट हूं

1574
01:49:37,840 --> 01:49:42,000
या मैं डॉक्टर हूं एमबीबीएस हूं भैया डॉक्टर एमबीबीएस हूं तो अपनी डिग्री बता दो ना तो

1575
01:49:42,000 --> 01:49:46,320
यही तो पूछा जा रहा है परंपरा बता दो परंपरा ही तो आपकी डिग्री है और परंपरा

1576
01:49:46,320 --> 01:49:50,400
में अगर आपने माना तो जो आचार्य द्वारा जो बात कही गई है फिर जो आपकी बात

1577
01:49:50,400 --> 01:49:54,480
है वहां से मैच की जाएगी। यही तो सिद्धांत है। इतनी सी बात आपको समझ

1578
01:49:54,480 --> 01:49:58,880
नहीं आ रही है। ये चीज मेरे को समझ में नहीं आई। ईश्वर परंपरा

1579
01:49:58,880 --> 01:50:03,040
ईश्वर परंपरा डायरेक्ट पहले ईश्वर परंपरा डायरेक्ट आज

1580
01:50:03,040 --> 01:50:07,280
दूसरा आचार्य। मतलब दो ही आचार्य दो ही आचार्य।

1581
01:50:07,280 --> 01:50:11,680
रामानुज अच्छा रामानुज आचार्य हम रामानुज परंपरा

1582
01:50:11,680 --> 01:50:15,760
से। तो ठीक है रामानुज परंपरा की बात को तो नहीं काटोगे ना। तब उन्होंने

1583
01:50:15,760 --> 01:50:20,240
बात पलट दिया। क्यों? क्योंकि पता है अरे यार ये कहांहां पड़ चुका है। कहांहां से

1584
01:50:20,240 --> 01:50:24,480
ले आके हमको ब्लास्ट करेगा। अभी अब ये जो मातृ

1585
01:50:24,480 --> 01:50:28,480
अब ये जो मातृ शक्ति हैं ये ये बना

1586
01:50:28,480 --> 01:50:32,560
रही है कि भाई ये खुशी मना रही है कि शिवश देखो यहां पे मान लो वैसे उसमें मेरा

1587
01:50:32,560 --> 01:50:36,720
ही पक्ष सिद्ध है। वो मुफ्ती वाली डिबेट में मगर मान भी लिया

1588
01:50:36,720 --> 01:50:40,880
जाए कि मेरा पक्ष असिद्ध है तो उसकी क्या खुशी मनानी चाहिए एस ए हिंदू

1589
01:50:40,880 --> 01:50:44,880
इनको। हां। दूसरी बात कि भाई मिल

1590
01:50:44,880 --> 01:50:48,880
जाते हैं सारे रंग इसी मिट्टी के रंग में और गिरते हैं वीर जले ही

1591
01:50:48,880 --> 01:50:52,880
मैदान जंग में। कभी घर से बाहर निकलो तो तब तो बता रही हूं मास्क

1592
01:50:52,880 --> 01:50:56,080
लगा के आती हूं इंडिया।

1593
01:50:56,080 --> 01:51:00,240
सीना तान के धर्म रक्षा करते हैं युद्ध के मैदान में खड़े होकर

1594
01:51:00,240 --> 01:51:04,560
के और तुम्हारी भी करेंगे जिस दिन तुम पर हमारे सामने कोई आक्रमण

1595
01:51:04,560 --> 01:51:08,560
हो रहा होगा। ये ध्यान रखना। ये नहीं है वहां पे कि उस दिन अरे इसने मेरे

1596
01:51:08,560 --> 01:51:12,720
साथ ऐसा किया था तो हम आज इसकी रक्षा नहीं करेंगे। अगर मेरे सामने तुम्हारे

1597
01:51:12,720 --> 01:51:16,960
ऊपर आक्रमण हो रहा होगा उस दिन भी तुम्हारा यह भाई खड़ा होगा वहां तुम्हारी रक्षा में समझे क्योंकि

1598
01:51:16,960 --> 01:51:21,040
तुम तो हो पागल सुरमई अंखियों में

1599
01:51:21,040 --> 01:51:26,320
वो हो जाती है ना पागल वो हाल है तुम्हारा

1600
01:51:26,320 --> 01:51:32,320
[हंसी] बिल्कुल सही कहा सदमा

1601
01:51:32,880 --> 01:51:37,120
से आप जा रहे हैं पिछले दिन से आप

1602
01:51:37,120 --> 01:51:41,360
जा रहे हैं हां पिछले आठ

1603
01:51:41,360 --> 01:51:45,360
दिन से हम गाना बहुत गा रहे हैं। [हंसी] वीडियो में

1604
01:51:45,360 --> 01:51:49,440
भी गा रहे हैं। रील में भी गा रहे हैं। चलो कुछ हुआ नहीं हुआ। कम से कम वो गाना

1605
01:51:49,440 --> 01:51:54,240
कहां से आया पता है? वो तत्व

1606
01:51:54,240 --> 01:51:58,240
वहां से आ रहा है वो गाना। इस मातृ शक्ति ने एक रील बनाई।

1607
01:51:58,240 --> 01:52:02,320
उसमें क्या कहा कि मैं तुम्हें तुम्हारे शंकराचार्य जी का एक वो

1608
01:52:02,320 --> 01:52:06,400
बता रही हूं। त्यम तक्यम बड़ा एक्टिंग करें ड्रामेटाइज और

1609
01:52:06,400 --> 01:52:10,640
अपनी सारी रील्स जो बनाती है उसमें नाटक करती है। सारी रील्स में नाटक

1610
01:52:10,640 --> 01:52:14,800
करती है। एक्टिंग एक्टिंग शिवाश नारायण द्विवेदी

1611
01:52:14,800 --> 01:52:19,360
मतलब वही एक पैटर्न है प्रॉपर उसी पैटर्न में इनको बोलना है। हां

1612
01:52:19,360 --> 01:52:23,440
तो भाई जो कुछ ठीक है तुम्हारी भेड़ तुम्हारी जो फौज है वो अंधी

1613
01:52:23,440 --> 01:52:27,280
है। ठीक है। जो

1614
01:52:27,280 --> 01:52:31,360
सारी चीजें ठीक है। अरे है ना? मगर जो

1615
01:52:31,360 --> 01:52:35,440
कुछ प्रबुद्ध जन होंगे वो तो तुम्हारी चीजों को पकड़ेंगे ना। मेरा तो ये

1616
01:52:35,440 --> 01:52:39,600
कहना है कि इस विषय को छोड़ ही देते हैं आज के बाद और इससे इंपॉर्टेंट चीजें रहेंग अपने पास बात

1617
01:52:39,600 --> 01:52:41,600
करने को। ये है

1618
01:52:41,600 --> 01:52:47,600
हां ये तो बहुत छोटा विषय है। फालतू का विषय है बल्कि और

1619
01:52:47,680 --> 01:52:51,200
बहुत आएंगे ऐसे।

1620
01:52:51,200 --> 01:52:57,200
शास्त्रवाद जी कुछ रह गया हो पॉइंट्स तो आप बता दे।

1621
01:52:58,400 --> 01:53:02,480
जी भैया उसने तो ये कहा था कि आप जो है हरामियों का विरोध इसलिए

1622
01:53:02,480 --> 01:53:06,560
करते हैं ताकि वो जो है प्रोफेशन

1623
01:53:06,560 --> 01:53:08,720
किताब

1624
01:53:08,720 --> 01:53:12,720
अब ये तो ये ये मेंटलिज्म तो वही अपना मेंटल प्रस्तुत

1625
01:53:12,720 --> 01:53:16,880
करें इसलिए करते हैं चौखंबा से बताते हैं इसलिए करते हैं क्योंकि उसमें हमारे

1626
01:53:16,880 --> 01:53:20,880
देवी देवताओं के लिए जिस पर हमारी आस्था है हमारे आराध्यों के लिए

1627
01:53:20,880 --> 01:53:25,280
हमारे आचार्यों के लिए इवन दयानंद सरस्वती जी के लिए भी बहुत अंट

1628
01:53:25,280 --> 01:53:29,280
शंट बातें लिखी हुई है और वो एक नंबर के गवार है सब के सब

1629
01:53:29,280 --> 01:53:33,280
फड़ कहीं के तो वो जब अपनी भाषा में बोलते हैं तो और ज्यादा

1630
01:53:33,280 --> 01:53:38,080
गंदा लगता है वो ठीक है इसलिए विरोध करते हैं

1631
01:53:38,080 --> 01:53:42,240
वेदों में प्रमाण है [हंसी] अब बाकी तो इनकी ईश्वरीय

1632
01:53:42,240 --> 01:53:46,400
परंपरा इनको मुबारक मैं तो ये कहूंगा मैं कुछ इनको मैं

1633
01:53:46,400 --> 01:53:51,200
कुछ बोल दूं कुछ मतलब कुछ क्वेश्चन है वो तो मैं पूछ लेता हूं ताकि

1634
01:53:51,200 --> 01:53:55,280
मैं अपना बात रख सकूं एक था शंकराचार्य जी का शिष्य बन के वहां पे था

1635
01:53:55,280 --> 01:53:56,640
वो बोल रहा था कि जो

1636
01:53:56,640 --> 01:54:01,040
ये बोल रही थी आपके विरोध में उस टाइम पर तो वो डिफेंसिव

1637
01:54:01,040 --> 01:54:05,360
में थी इसलिए वो ज्यादा वीडियो बना दी और ज्यादातर ये सब

1638
01:54:05,360 --> 01:54:09,360
कुछ बात बोल दी तो प्रश्न उठता है क्या डिफेंसिव में कोई कुछ भी बोल देगा

1639
01:54:09,360 --> 01:54:13,360
किसी को भी मतलब किसी भी आचार्य को कुछ भी बोल दे या किसी

1640
01:54:13,360 --> 01:54:17,600
भी सिद्धांत को खारिज कर देगा मैं

1641
01:54:17,600 --> 01:54:21,600
हां पूछ रहा हूं और और एक बात मैंने देखी कि कोई व्यक्ति अपने आप

1642
01:54:21,600 --> 01:54:25,680
को शंकराचार्य का शिष्य बोलते हुए इनका इनके साथ बै बैठा हुआ है। इनका विरोध नहीं कर

1643
01:54:25,680 --> 01:54:29,840
रहा है तो वह उनसे जुड़ा हुआ नहीं है। किनसे जो इनको गाली दे

1644
01:54:29,840 --> 01:54:34,080
चुके हैं। और यदि कोई व्यक्ति सिद्धांतों का पक्ष आकर के

1645
01:54:34,080 --> 01:54:38,160
सिद्धांतिक पक्ष में इनके विरुद्ध खड़ा हुआ है शंकराचार्य का शिष्य तो वो उनसे

1646
01:54:38,160 --> 01:54:42,480
जुड़ा हुआ है। यह कहां का शास्त्रीय सिद्धांत है? अरे झांको अपनी अंतरात्मा

1647
01:54:42,480 --> 01:54:46,640
में। खिलवाड़ कर रही हो तुम इंसानियत और धर्म और वेद वेद वैदिक धर्म

1648
01:54:46,640 --> 01:54:52,640
के साथ। इस नीच मानसिकता से बाहर आ जाओ।

1649
01:54:54,880 --> 01:55:00,720
अपने बच्चों को यही सिखाओगी अन्याय

1650
01:55:00,720 --> 01:55:05,120
भेड़चाल में भागी जा रही हो अपने आप से पूछो तो सही कि मैं सच्चाई

1651
01:55:05,120 --> 01:55:09,120
पे हूं क्या

1652
01:55:09,120 --> 01:55:13,120
बोलिए शास्त्र जी हम जी भैया

1653
01:55:13,120 --> 01:55:17,440
और वही शंकराचार्य जी का शिष्य पे बोलता है कि आपने

1654
01:55:17,440 --> 01:55:21,520
जो परंपरा की बात लाई थी बीच में परंपरा की बात जो आप

1655
01:55:21,520 --> 01:55:25,760
कर रहे थे वो इसलिए कर रहे थे क्योंकि आप जो व्यक्ति विशेष

1656
01:55:25,760 --> 01:55:30,000
पे उसने सवाल उठाया था उस का आप उत्तर नहीं दे पाते।

1657
01:55:30,000 --> 01:55:34,240
ठीक है? पहली बात तो मैं पहली बात तो मैं पहली बात तो मैं

1658
01:55:34,240 --> 01:55:38,640
मैं समझ गया। पहली बात तो मैं इस मामले

1659
01:55:38,640 --> 01:55:43,200
में आया ही इसलिए हूं क्योंकि अब यह बात व्यक्तिगत नहीं रह गई थी।

1660
01:55:43,200 --> 01:55:47,520
यह बात अब सिद्धांत पर चली गई थी। ठीक है?

1661
01:55:47,520 --> 01:55:51,520
भारती कृष्ण तीर्थ जी का उदाहरण लेकर के इन्होंने विदेश यात्रा का समर्थन करने

1662
01:55:51,520 --> 01:55:55,600
का प्रयास किया था कि हम जो है शास्त्र का अर्थ बताएंगे सही तो वहां

1663
01:55:55,600 --> 01:55:59,920
सिद्धांत पर बात गई थी परंपरा पे बात चली गई थी और केवल सांकर परंपरा पे नहीं

1664
01:55:59,920 --> 01:56:03,920
समस्त प्रमाणिक परंपराओं पर क्योंकि सबका मत है कि जो क्या कहते

1665
01:56:03,920 --> 01:56:08,480
हैं विदेश गमन निषेध है विदेश गमन

1666
01:56:08,480 --> 01:56:09,920
संक्रमण काल है किसी ने

1667
01:56:09,920 --> 01:56:14,000
कर लिया तो उसको कोई अगर टारगेट कर रहा है व्यक्तिगत वो गलत है हम उसके विरोध

1668
01:56:14,000 --> 01:56:18,160
में है मगर यह नहीं है कि उससे से रक्षा करने के चक्कर में आप जो

1669
01:56:18,160 --> 01:56:22,160
सिद्धांत का ही खंडन करने लग जाओ। तो पहली बात तो

1670
01:56:22,160 --> 01:56:26,400
मैं इसमें आया ही इसलिए ही हूं। ठीक है? दूसरी बात यह है

1671
01:56:26,400 --> 01:56:30,400
कि अगर यह व्यक्तिगत बात थी। ठीक है? अगर

1672
01:56:30,400 --> 01:56:34,400
यह व्यक्तिगत बात थी तो फिर आप क्यों ला

1673
01:56:34,400 --> 01:56:38,400
रही हैं? शंगेरी पीठ में इतना डोनेशन आता है।

1674
01:56:38,400 --> 01:56:43,200
और तुम जैसे झुनझुना बजाने वालों को भेज दिया है। कहां रह गई व्यक्तिगत? बताओ।

1675
01:56:43,200 --> 01:56:47,360
फिर वो करपात्री जी ने यजुर्वेद के भाष्य में यह लिखा है। शय

1676
01:56:47,360 --> 01:56:51,360
ने यह लिखा है। क्यों ला रही हो? मतलब अगर तुम्हारी

1677
01:56:51,360 --> 01:56:55,520
किसी चीज पर कोई बात की जाएगी तुम ऐसा क्यों कर रही हो? तो तुम सारा इधर उधर

1678
01:56:55,520 --> 01:56:59,520
का घसीट लाओगी और सामने वाला यदि परंपरा तुम्हारी पूछ ले तो तुम कहोगे ये

1679
01:56:59,520 --> 01:57:03,600
व्यक्तिगत से बचने के लिए किया। अरे तुम व्यक्तिगत रहो ना फिर। तुम

1680
01:57:03,600 --> 01:57:07,600
पूछो बार-बार मृत्यु जी ने ये वाला कमेंट क्यों किया है? हमारे पास हर

1681
01:57:07,600 --> 01:57:11,760
कमेंट का जवाब है। और बोलो। पर तुम

1682
01:57:11,760 --> 01:57:16,080
जब अपने आप को संप्रदाय विरोधी कह रही हो, फ्रीलांस

1683
01:57:16,080 --> 01:57:20,160
कह रही हो तो पहले तुमको जमीन पर लाना पड़ेगा ना भाई। किसी

1684
01:57:20,160 --> 01:57:24,240
एक आचार से जोड़ना पड़ेगा पहले। तो विदेश गमन का जो विरोध है या

1685
01:57:24,240 --> 01:57:24,960
शवास का

1686
01:57:24,960 --> 01:57:29,680
जो विरोध है उन सब का जवाब हमें नहीं देना पड़ेगा। फिर वो तो खत्म हो गया। फिर सीधे कमेंट में बात आ जाएगी।

1687
01:57:29,680 --> 01:57:34,000
यह है बात। ठीक है? तो

1688
01:57:34,000 --> 01:57:38,560
सैद्धांतिक विरोध तुम्हारा खत्म करना पड़ेगा। तब उस पर आएगी ना बात।

1689
01:57:38,560 --> 01:57:42,560
व्यक्तिगत वाली बात इसीलिए मैंने शुरू में बताया वह सेकेंडरी है व्यक्तिगत वाली

1690
01:57:42,560 --> 01:57:46,560
बात और तुमने भी उस पर वो हुआ था शुरू में हम सैद्धांतिक बात पर आए थे

1691
01:57:46,560 --> 01:57:50,640
तो सिद्धांत तो यहां से शुरू होगा कि तुम्हारे पास शास्त्र आए कहां से जिन शास्त्रों का आधार

1692
01:57:50,640 --> 01:57:54,640
बना करके तुम ये क्लेम कर रही हो कि विदेश जाने का समर्थन कर रही हो वो शास्त्र

1693
01:57:54,640 --> 01:57:58,880
तुम्हारे पास आए कहां से तुम हम पर शास्त्र का दबाव डाल रही हो हम वो शास्त्र

1694
01:57:58,880 --> 01:58:02,960
तुम्हारे पास आए कहां से इस बात का दबाव डाल रहे है समझ गई तुमने

1695
01:58:02,960 --> 01:58:07,120
शास्त्र का दबाव डाला है ना तुम्हारे पास शास्त्र तुमने इंटरनेट से शास्त्र पढ़े ठीक

1696
01:58:07,120 --> 01:58:11,200
इसको समझो थोड़ा तार्किकता लाओ थोड़ी सोचने की स्टाइल में और इनकी

1697
01:58:11,200 --> 01:58:15,360
एक जो एक ये क्लेम था क्या कहते हैं

1698
01:58:15,360 --> 01:58:19,520
कि हां मैंने इनसे निवेदन किया था कि भाई चर्चा

1699
01:58:19,520 --> 01:58:23,760
कहो इसको चर्चा कहने का निवेदन नहीं मैंने कहा चर्चा निष्पक्ष दिखाई दे इन्होंने

1700
01:58:23,760 --> 01:58:27,920
सांवले कलर का मेरी नजरों में एक विलेन जैसा चेहरा बनाया था शंकर

1701
01:58:27,920 --> 01:58:31,920
परंपरा की ओर से आ रहा है कोई और उसमें नाम क्या लिखा था कि ऑन देयर

1702
01:58:31,920 --> 01:58:35,920
कंट्राडिक्टरी कुछ ऐसा कुछ नाम था तो चर्चा होने

1703
01:58:35,920 --> 01:58:40,080
से पहले ही उसका नाम क्या मेरी निर्भय के साथ चर्चा हुई थी। क्या

1704
01:58:40,080 --> 01:58:45,680
शीर्षक है? आज भी देख लेना जाकर के। निष्पक्ष शीर्षक है उसमें चर्चा में।

1705
01:58:45,680 --> 01:58:49,680
ठीक है? और तुमने ऐसा शीर्षक डाला कि पहले ही व्यक्ति ये सोचने लगे कि

1706
01:58:49,680 --> 01:58:54,080
इसमें जो है उनके कंट्राडिक उनके अंदर का जो विरोधाभास है उस पर बात हो। तो मैंने यह निवेदन

1707
01:58:54,080 --> 01:58:58,480
किया था कि इसका जो पोस्टर बनाओ वो ऐसा बनाओ जो निष्पक्ष

1708
01:58:58,480 --> 01:59:02,800
दिखे। है ना? विदेश गमन पर चर्चा, सैद्धांतिक

1709
01:59:02,800 --> 01:59:07,040
विषयों पर चर्चा ऐसा बनाओ पोस्टर। मैंने

1710
01:59:07,040 --> 01:59:11,040
उनको सुझाव भी दिया था और रही बात

1711
01:59:11,040 --> 01:59:15,040
यह कि वह चर्चा थी या डिबेट थी इसको भी सुन लो। चर्चा में जब

1712
01:59:15,040 --> 01:59:19,280
मैंने आपसे पूछा कि आपकी परंपरा क्या है? बहुत विनम्रता से। पहली बार

1713
01:59:19,280 --> 01:59:23,360
ऊंची आवाज किसकी हुई थी? अगर वो डिबेट थी तो उस चर्चा को डिबेट

1714
01:59:23,360 --> 01:59:27,520
में बदलने वाला कौन था? पहली बार ऊंची आवाज तुम्हारी हुई थी।

1715
01:59:27,520 --> 01:59:32,000
और व्यक्ति की ऊंची आवाज तब होती जब सामने वाला दबाना चाह रहा है।

1716
01:59:32,000 --> 01:59:36,160
और हम दबने वाले नहीं है।

1717
01:59:36,160 --> 01:59:41,360
गब्बर सिंह तुम एक मारोगे तो हम दो मारेंगे। ठीक है?

1718
01:59:41,360 --> 01:59:45,440
तो यह कहना कि चर्चा के नाम पर डिबेट कर ली। ये फंसा

1719
01:59:45,440 --> 01:59:49,440
दिया वो फसा दिया। ये सब जितने चिलांटू तुम्हारे साथ खड़े हुए हैं। एक तो

1720
01:59:49,440 --> 01:59:53,920
किसी में दम नहीं है। तुम तो तब भी मुझे वो लगी। इस मामले में तो भाई शेरनी

1721
01:59:53,920 --> 01:59:55,200
है।

1722
01:59:55,200 --> 01:59:59,200
ललकारा सामना किया। ह और

1723
01:59:59,200 --> 02:00:03,200
वो लोग कौन है? नपुंसक जैसे जो तुम्हारे पीछे तुम्हारे कंधे पर वार कर

1724
02:00:03,200 --> 02:00:07,840
रहे हैं। इंडिया पैक जैसा व्यक्ति और जो स्वयं को गोवर्धन

1725
02:00:07,840 --> 02:00:12,320
पीठ से जुड़ा हुआ बता रहा है। उसने तो मुझे फोन तक नहीं किया। भाई मुझे तुम्हारे साथ चर्चा करनी है।

1726
02:00:12,320 --> 02:00:18,320
तुम्हारे साथ बैठ के बातें झोंक रहे हैं। ये रात और ये दूरी

1727
02:00:18,640 --> 02:00:22,640
तेरा मिलना है जरूरी।

1728
02:00:22,640 --> 02:00:26,880
ये सब कर रहे हैं। अरे भैया बीए मैन फोन

1729
02:00:26,880 --> 02:00:32,880
करो। चर्चा डिसाइड करो। आओ गोवर्धन पीठ से हो। तुम विदेश यात्रा का विरोध करो।

1730
02:00:33,200 --> 02:00:38,960
पहले तो तुम्हें यही सिद्ध करना तुम गोवर्धन पीठ से कैसे हो?

1731
02:00:38,960 --> 02:00:44,400
मूर्ख कहीं के। हां जी बताइए शास्त्र जी कोई पॉइंट बचा?

1732
02:00:44,400 --> 02:00:49,760
भैया था कि उन्होंने सारे देख लिए। आर्य समाजवादी

1733
02:00:49,760 --> 02:00:53,920
आर्य समाजवादी था। उसने ये कहा था कि आगम

1734
02:00:53,920 --> 02:00:58,640
जो है उसी से बनते हैं। तो

1735
02:00:58,640 --> 02:01:02,880
शंकराचार्य जी ने अपने भाष्य में आगम का वेर विरोधी बोला है आगम

1736
02:01:02,880 --> 02:01:07,360
को। तो फिर किस प्रकार से मंदिर का पथ लेते हैं। शंकराचार्य

1737
02:01:07,360 --> 02:01:11,520
देवी भागवत में वचन दिया गया है कि आगम शास्त्र

1738
02:01:11,520 --> 02:01:15,680
जो हैं उनमें कहीं-कहीं वो अवैदिक भी हो जाते हैं। तो जो वेद विरोधी अंश

1739
02:01:15,680 --> 02:01:20,240
है वेद विरुद्ध अंश वो सर्वथा त्यागने योग्य है।

1740
02:01:20,240 --> 02:01:24,320
ठीक है? वेद विरुद्ध जहां पर होगा जो भी आगम वो त्यागने योग्य है ही

1741
02:01:24,320 --> 02:01:28,320
है। यह पुराणों का कोट है और शंकराचार्य पुराण

1742
02:01:28,320 --> 02:01:33,280
को मानते थे।

1743
02:01:33,280 --> 02:01:37,440
जी भैया और आपने देखा भैया जो ने आपके ऊपर वीडियो बनाया

1744
02:01:37,440 --> 02:01:41,440
अभी तक। ठीक है। बनाया होगा वो तो

1745
02:01:41,440 --> 02:01:46,640
जवाब दिया ही जाएगा। आवाज कहां तक जानी चाहिए?

1746
02:01:46,640 --> 02:01:52,000
लाहौर तक। [हंसी]

1747
02:01:52,000 --> 02:01:57,740
वो तो बनाया ही जाएगा।

1748
02:01:57,740 --> 02:02:03,740
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1749
02:02:04,800 --> 02:02:10,480
अच्छा एक तरफ ये सोचो कि

1750
02:02:10,480 --> 02:02:14,960
जिन लोगों को मैं जानता नहीं हूं कि उन जिनों जिन्होंने इनको अपशब्द

1751
02:02:14,960 --> 02:02:19,360
कहे। हालांकि शुरुआत इन्होंने ही की अपशब्दों की तू तड़ाक की फिर भी रिटर्न

1752
02:02:19,360 --> 02:02:23,600
में जिन लोगों ने इनको अपशब्द कहे हैं कि वो उनको मैं पर्सनली

1753
02:02:23,600 --> 02:02:27,760
नहीं जानता हूं और वो अब मुक्तेश्वर जी से शंकराचार्य

1754
02:02:27,760 --> 02:02:32,480
से जुड़े हुए भी है कि नहीं ये भी मैं नहीं कंफर्म जानता फिर भी उनकी ओर से हंबल

1755
02:02:32,480 --> 02:02:36,560
होकर के मैंने क्षमा कहा कि मुझे क्षमा भाई उनकी तरफ से मैं क्षमा मांगता हूं

1756
02:02:36,560 --> 02:02:41,200
अगर आपके साथ कुछ अभद्र व्यवहार और एक तरफ ये है

1757
02:02:41,200 --> 02:02:45,280
जो खुद मुझे टारगेट कर रही हैं और फिर भी

1758
02:02:45,280 --> 02:02:48,480
अपेक्षा कर रही है कि मैं इनके साथ जो मंच साझा करूंगा

1759
02:02:48,480 --> 02:02:53,360
धिक्कार है तुम पर नारी होने के नाम पर धिक्कार है तुम पर

1760
02:02:53,360 --> 02:02:57,600
जो ये सब कर रही हो अपनी सबसे बड़ी बात है तुम धर्म धर्म का चैनल

1761
02:02:57,600 --> 02:03:01,840
अपना प्रस्तुत कर रही हो वहां पर तुम ये गंदगी फैला रही हो डायरिया

1762
02:03:01,840 --> 02:03:05,920
और ये सब बताइए वहां पे मैंने देखा एक चित्र में जो एक कार्टून

1763
02:03:05,920 --> 02:03:10,320
को वो शौच पर बैठा हुआ दिखा रही है ये गंदगी ये सिखाते

1764
02:03:10,320 --> 02:03:15,840
हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य ये तो दयानंद जी भी नहीं सिखाते यार

1765
02:03:15,840 --> 02:03:21,840
इतनी चीजें इस स्तर की बातें दयानंद जी भी नहीं करते।

1766
02:03:22,880 --> 02:03:27,040
बिल्कुल पर्सनल लेवल पर अटैक करना [हंसी] हम

1767
02:03:27,040 --> 02:03:31,200
और व्यक्ति को टारगेट करना ये वही करना। चर्चा तुम्हें करनी है जो

1768
02:03:31,200 --> 02:03:35,200
चैलेंज चैलेंज की बात तुम कर रही थी। अब चर्चा तुम्हें करनी है। तुमने अपने चैनल पर हम

1769
02:03:35,200 --> 02:03:39,600
तुम्हारे आए थे। तुमने मक्कार वगैरह तुमने कहा। हमने नहीं कहा। तुम तुम्हारे पास तर्क

1770
02:03:39,600 --> 02:03:43,760
थे जो तुम्हें भूक रही हो। अपनी रील में यह हो सकता था वो होना था। तुम्हें तब वहां करने

1771
02:03:43,760 --> 02:03:48,800
चाहिए थे। वहां अकल घास चरने चली गई थी क्या कि अब शौक लग गया था।

1772
02:03:48,800 --> 02:03:52,960
अब बात यह है कि तुमने जब पहले अमर्यादित आचरण कर दिया है तुम्हें

1773
02:03:52,960 --> 02:03:57,680
100 बार गर्ज है और तुम्हारे अंदर है सामर्थ्य

1774
02:03:57,680 --> 02:04:01,680
पहले क्षमा मांगो। इस रील को डिलीट करो। अपमानजनक में

1775
02:04:01,680 --> 02:04:07,680
बनाई है और तब आओ हमारे चैनल पर। ठीक है?

1776
02:04:08,740 --> 02:04:13,360
[गला साफ़ करने की आवाज़] और बात कही थी। हां

1777
02:04:13,360 --> 02:04:17,360
इसमें एक बात कही थी कि जो लोग भी गाली देते हैं

1778
02:04:17,360 --> 02:04:21,520
वो सब शिवश के गुरु भाई है। ठीक है और और जो वहां बैठा

1779
02:04:21,520 --> 02:04:25,760
है उसके गुरु भाई नहीं है। शंकराचार्य क्योंकि वो उनके पक्ष में बैठे हैं।

1780
02:04:25,760 --> 02:04:31,020
और बाद में बाद में ये भी बोला कि इनकी दीक्षा भी नहीं हुई है तो भी गुरु भाई है।

1781
02:04:31,020 --> 02:04:35,120
[हंसी] अरे उनमें से कई के तो चेहरे भी नहीं जानता हूं। भाई

1782
02:04:35,120 --> 02:04:39,280
कौन है क्या है

1783
02:04:39,280 --> 02:04:43,600
हां तो मैं एक बात कहूंगा लास्ट में जो मैंने कहा था ना शुभ संदेश है

1784
02:04:43,600 --> 02:04:49,520
परामर्श है आपके लिए वो यही है कि

1785
02:04:49,520 --> 02:04:53,840
आप अपने अंदर भी ये जानती है आपने स्वीकार भी किया शास्त्र इत्यादि

1786
02:04:53,840 --> 02:04:57,920
का अध्ययन आपका बहुत नगण्य से लेवल लेवल का है उसमें आप जो धर्म

1787
02:04:57,920 --> 02:05:01,920
विरोधियों को कुछ कर पा रही तो वो करती रहिए आपको यदि उसमें

1788
02:05:01,920 --> 02:05:05,920
कुछ सहायता चाहिए अकाट्य सिद्धांतों के जो चिल्लांटू लोग हैं जो आपको पुश कर

1789
02:05:05,920 --> 02:05:09,920
रहे हैं ना चलो चलो इनसे वो नहीं मिल पाएंगे आपको अकाट चीजों की जरूरत पड़े

1790
02:05:09,920 --> 02:05:14,480
तो आप को हमसे उस क्षेत्र में मदद भी मिलेगी उसमें हम आपके साथ हैं।

1791
02:05:14,480 --> 02:05:19,120
इस तरह से हम ही लोगों को चैलेंज करना जो

1792
02:05:19,120 --> 02:05:23,120
हम लोग मतलब परमाणिक परंपराओं को चैलेंज करना धर्म के

1793
02:05:23,120 --> 02:05:24,160
लिए बिल्कुल भी

1794
02:05:24,160 --> 02:05:28,320
अच्छा कार्य नहीं है। धर्म पर प्रहार है। प्रामाणिक परंपराओं का विरोध

1795
02:05:28,320 --> 02:05:32,320
करना वो प्रहार है धर्म पर। आप अपने शब्द प्रमाण को खुद खत्म कर रहे

1796
02:05:32,320 --> 02:05:36,320
हो। फिर हर व्यक्ति वेद का अर्थ करने वाला स्वयं को कहने लगेगा। तब आप

1797
02:05:36,320 --> 02:05:40,320
उसको निरुत्तर नहीं कर पाओगे। आप कहोगे तुम्हें जो मानना है तुम मानो। हमें जो मानना है मत मानो।

1798
02:05:40,320 --> 02:05:44,400
और जो तुम यह कह रही हो कि थोपो मत। ठीक है? तो भाई

1799
02:05:44,400 --> 02:05:49,520
अगर मेरे घर के बगल में बहन भाई विवाह कर रहे होंगे तो मैं वहां रोकूंगा।

1800
02:05:49,520 --> 02:05:53,520
क्योंकि आज अगर मैंने नहीं रोका तो कल को मेरे यहां के बच्चे जो है वह उससे सीख

1801
02:05:53,520 --> 02:05:57,600
लेंगे। समझ में आ रहा है? तो हम रोकेंगे। हमारे घर के बगल

1802
02:05:57,600 --> 02:06:02,320
में वैश्यालय खुल रहा होगा तो हम वहां रोकेंगे। नहीं खुलने देंगे।

1803
02:06:02,320 --> 02:06:07,280
इसी बात की तो लड़ाई है। फिर क्यों रोक रही हो मुसलमानों को अंदर आने से?

1804
02:06:07,280 --> 02:06:12,560
आने दो फिर थोपो मत।

1805
02:06:12,560 --> 02:06:16,560
अधर्म जहां पर होगा वहां पर रोकेंगे ना। और थोपने की बात यह है कि

1806
02:06:16,560 --> 02:06:20,640
अगर तुम्हारी चीजें किसी मुसलमान से बात करते समय, किसी ईसाई से बात करते

1807
02:06:20,640 --> 02:06:24,720
समय, किसी बुद्ध, बौद्ध से बात करते समय हमारे आड़े ना आए तो हम ना रोके। हम

1808
02:06:24,720 --> 02:06:28,880
ना थोपे। हमें क्या मतलब है? थोपते तुम लोग हो।

1809
02:06:28,880 --> 02:06:33,600
हरिहर में भेद करके स्कॉन वाले ले जाते हैं। बांट देते हैं।

1810
02:06:33,600 --> 02:06:39,200
फिर वह प्रजापति ब्रह्मा वाले ब्रह्मा कुमारी वाले ले जाते हैं।

1811
02:06:39,200 --> 02:06:43,200
मंदिर में हमारे तोड़फोड़ हो रही है। प्रजापति ब्रह्मा वालों को ब्रह्मा

1812
02:06:43,200 --> 02:06:47,200
कुमारी वालों के हम जा रहे हैं। चलो भैया बचाने। नहीं नहीं नहीं हम

1813
02:06:47,200 --> 02:06:51,200
तो वहां सेंटर जाते हैं मेडिटेशन सेंटर। हरे कृष्णा

1814
02:06:51,200 --> 02:06:55,280
वाले कहेंगे अरे शिवजी तो भगवान है ही नहीं। हम क्यों जाए बचाने? आर्य समाज कहेगा

1815
02:06:55,280 --> 02:06:59,360
शिवजी तो कैलाश में तो कैलाश में क्या शिवजी नपुंसक हो गए क्या?

1816
02:06:59,360 --> 02:07:03,760
आर्य समाज यह कहेगा शिवलिंग यहां है तो और

1817
02:07:03,760 --> 02:07:07,760
हिंदू कहेगा भाई पहले मुझे मेरे धर्म का पता तो लग जाने दो तब तो मैं चलूं कहां

1818
02:07:07,760 --> 02:07:11,920
चलना है यह स्थिति है तुम जैसे लोगों ने जो बना के रखी

1819
02:07:11,920 --> 02:07:16,160
है और इसलिए शोधन आवश्यक है वैचारिक क्रांति इसलिए आवश्यक

1820
02:07:16,160 --> 02:07:20,240
है ऋग्वेद के दव मंडल के 192 सूक्त के दूसरे मंत्र में लिखा

1821
02:07:20,240 --> 02:07:24,720
हुआ है एक मत हो के अध्यात्म के मार्ग पर चलो

1822
02:07:24,720 --> 02:07:27,600
एक मत होना इसलिए जरूरी है कि हम सुरक्षित हो सके अपने

1823
02:07:27,600 --> 02:07:31,760
अस्तित्व और आदर्श की रक्षा रक्षा कर सके जो तुम जिसे थोपना कह रही हो वो

1824
02:07:31,760 --> 02:07:35,840
एक शत्र करने के निमित्त किया जाने वाला प्रयास है

1825
02:07:35,840 --> 02:07:40,000
और तुम तो बैठी हो वहां मंदिर है ही नहीं तो रक्षा किसकी

1826
02:07:40,000 --> 02:07:44,000
करोगी तो यहां पे जिन जो रक्षा रक्षा के लिए कार्य हो रहे हैं

1827
02:07:44,000 --> 02:07:48,160
उनमें टांग अड़ाओ इसलिए कह रहा हूं इस तरह की चैलेंजबाजी से दूर

1828
02:07:48,160 --> 02:07:52,240
रहो धागे खुल जाएंगे धागे दोबारा आमनासामना दोबारा

1829
02:07:52,240 --> 02:07:56,320
हो एक झटका मिले कि गई हो ना जो मेंटली डिसेबल्ड थोड़ा सा हो गई

1830
02:07:56,320 --> 02:08:00,400
हो धागे खुल जाएंगे धागे आगे किसी के बहकावे

1831
02:08:00,400 --> 02:08:04,560
में मत आओ। तुम्हारे कंधे पर बंदूक रख के चला रहे हैं वो लोग। खुद

1832
02:08:04,560 --> 02:08:08,560
पिटे कुटे घूम रहे हैं। तो तुमको आगे कर रहे

1833
02:08:08,560 --> 02:08:12,640
हैं कि लड़ो लड़ो हम तुम्हारे साथ हैं। नेता तुम संघर्ष करो। हम तुम्हारे साथ हैं। वो वाली बात

1834
02:08:12,640 --> 02:08:16,640
है। कर लो तुम। और किसी दिन दोबारा फस गया मामला।

1835
02:08:16,640 --> 02:08:21,840
फिर तुम्हारी ऐसे ही होगी फजीहत। कुछ नहीं कर पाओगी।

1836
02:08:21,840 --> 02:08:26,080
प्रामाणिक सिद्धांतों का विरोध करते हुए अपने फजीते करा लोगी

1837
02:08:26,080 --> 02:08:30,080
और कुछ नहीं है। वो जो बड़ा सा जानवर होता

1838
02:08:30,080 --> 02:08:34,240
है ना बताया था हाथी वो हम है और

1839
02:08:34,240 --> 02:08:36,480
वो

1840
02:08:36,480 --> 02:08:40,320
वो तुम हो

1841
02:08:40,320 --> 02:08:44,560
ठीक है बहुत बढ़िया तो तो

1842
02:08:44,560 --> 02:08:48,560
परामर्श मानो किसी के बहकावे मत आओ अपना वो जो Instagram

1843
02:08:48,560 --> 02:08:52,720
instagramिंग वो जो चल रही है चलाओ विरोधियों से करो

1844
02:08:52,720 --> 02:08:56,720
और प्रामाणिक आचार्यों से दूरी बना लो तुम्हें पसंद नहीं है मत

1845
02:08:56,720 --> 02:09:00,720
अब तुम कह कह रही थोपो मत। अरे भाई तुम्हें पसंद नहीं आ रहा है मुक्तेश्वर जी तो थोप

1846
02:09:00,720 --> 02:09:04,880
क्यों रही हो फिर अपनी नापसंद को? थोप तो तुम रही हो ना तू ततड़ा

1847
02:09:04,880 --> 02:09:07,200
करके

1848
02:09:07,200 --> 02:09:11,280
हम वही कार्य कर रहे तो थोपो मत। तुमको पसंद नहीं आ रहा है तुम मत करो फॉलो। मत

1849
02:09:11,280 --> 02:09:15,760
लो उनसे दीक्षा। करो बौद्धों का खंडन। इस्लाम

1850
02:09:15,760 --> 02:09:21,760
का खंडन। कौन थोप रहा है?

1851
02:09:22,720 --> 02:09:26,800
ठीक है आने इसी से बात याद आती है पूरी महाभाग की बात याद

1852
02:09:26,800 --> 02:09:31,200
आती है वो उसका पडकास्ट आया था जो कहते हैं जितने मुंह उतनी बातें धर्म

1853
02:09:31,200 --> 02:09:35,200
उतना ही फैलता जाएगा या फिर उतना ही बिगड़ेगा जितने मुंह उतनी बातें

1854
02:09:35,200 --> 02:09:40,320
प्रमाणिक आचार्य को ही सुनना चाहिए प्रमाणिक वाणी को ही सुनना चाहिए वही बात है जी

1855
02:09:40,320 --> 02:09:44,400
बिल्कुल बिल्कुल आपको और भी कुछ कहना है और कुछ नहीं

1856
02:09:44,400 --> 02:09:48,800
बस करते हैं एंड करते हैं रात 12 भी हो गई है हां काफी

1857
02:09:48,800 --> 02:09:52,800
लंबी चर्चा हो गई ठीक है। अनिकेत जी, सनातन शंकर जी,

1858
02:09:52,800 --> 02:09:56,960
शास्त्रवाद जी आने के लिए सभी को आभार और जय श्री

1859
02:09:56,960 --> 02:10:01,840
राम। जय श्री राम। हर हर महादेव। जय श्री राम।

1860
02:10:01,840 --> 02:10:07,840
जय श्री राम। हर हर महादेव।

1861
02:10:31,270 --> 02:10:35,270
[संगीत]
