1
00:00:00,160 --> 00:00:04,240
ये लाइव यहां से होगा ना? हो गया हो गया हो

2
00:00:04,240 --> 00:00:08,560
गया। लाइव हो गया। सभी को जय श्री राम। आपने

3
00:00:08,560 --> 00:00:12,960
जैसा कि आज टाइटल देख लिया है। हम लोग एक हमारे

4
00:00:12,960 --> 00:00:17,040
चैनल पे अधिकांशतः थोड़ा सा युद्ध

5
00:00:17,040 --> 00:00:21,120
का वातावरण सा देखने को मिलता है आप लोगों को। तो सोचा कि

6
00:00:21,120 --> 00:00:25,360
थोड़ा सा एक लाइट वातावरण भी प्रस्तुत कर दें।

7
00:00:25,360 --> 00:00:29,520
हमेशा बॉर्डर, एलओसी यही सब देखने को मिलती

8
00:00:29,520 --> 00:00:35,520
है। कभी-कभी हम साथ-साथ हैं। कुछ कुछ होता है टाइप की

9
00:00:35,520 --> 00:00:39,600
या कुछ कुछ होता है तो हटा दो। हम साथ-साथ हैं या हम

10
00:00:39,600 --> 00:00:43,600
ये जो पारिवारिक फिल्में आती हैं तो ये भी थोड़ा सा इस तरह का वातावरण

11
00:00:43,600 --> 00:00:47,840
भी मिल जाए। है ना? तो ठीक है। मैं

12
00:00:47,840 --> 00:00:52,000
हम लोग आज के जो हमारे गेस्ट हैं सब उनको ले लेते हैं। पंडित जी तो हैं ही

13
00:00:52,000 --> 00:00:56,000
हमारे सदा के। जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

14
00:00:56,000 --> 00:01:00,160
राम जी ठीक है मैं बाकियों को भी लेता हूं स्टेज पर

15
00:01:00,160 --> 00:01:04,480
विश्वा जी आपका स्वागत है नमस्कार नमस्कार महादेव स्वागत

16
00:01:04,480 --> 00:01:09,040
है राष्ट्रवाद सभी को नमस्कार सभी को हर हर महादेव

17
00:01:09,040 --> 00:01:13,840
हर हर महादेव हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव

18
00:01:13,840 --> 00:01:17,920
हर हर महादेव जय श्री राम जय श्री राम हर और हर हर महादेव

19
00:01:17,920 --> 00:01:22,000
यहां पे थोड़ा सा ऐसा लग रहा होगा क्योंकि एक वो फैला हुआ

20
00:01:22,000 --> 00:01:26,720
है कि भाई त्रिपुंड तो यह तो शंकर भगवान के ही उपासक हैं।

21
00:01:26,720 --> 00:01:30,720
तो मैं क्लियर कर दूं ये त्रिपुंड जो है इस बात का ही देवतक

22
00:01:30,720 --> 00:01:34,880
नहीं है केवल कि हम जो है हमारे ईस्ट भगवान शिव ही हैं। ये

23
00:01:34,880 --> 00:01:39,200
त्रिपुंड इस बात का देवतक है कि हमारे गुरु भगवान शिव हैं। और

24
00:01:39,200 --> 00:01:43,280
भगवान शिव भी क्यों? हमारे जो गुरु हम शंकर संप्रदाय

25
00:01:43,280 --> 00:01:47,280
वाले हैं। शंकराचार्य वाले ये इस बात का दक है। मैं अपनी

26
00:01:47,280 --> 00:01:52,080
बात करूं तो मैं श्री राम का उपासक हूं और

27
00:01:52,080 --> 00:01:56,240
यहां पर सभी मतलब लगभग पांचों देव पंच देवपासना वाले बैठे हुए हैं।

28
00:01:56,240 --> 00:02:00,320
सभी में सबका मैं बता देता हूं। मेरे भी इष्ट भगवान श्री

29
00:02:00,320 --> 00:02:04,320
राम ही है। परम ब्रह्म परमेश्वर भगवान श्री राम। गुरुदेव से जो

30
00:02:04,320 --> 00:02:08,800
दीक्षा मिली है उनकी कृपा से वो भगवती में मिली है।

31
00:02:08,800 --> 00:02:13,280
तो मंत्र जो है वो भगवती का चलता है। लेकिन दिमाग में

32
00:02:13,280 --> 00:02:17,440
हमेशा भगवान ही रहते हैं। मतलब भगवती में भी राम को ही देखता हूं। जैसा गुरुदेव बताते

33
00:02:17,440 --> 00:02:21,600
हैं कि कहीं भी जो आपका इष्ट हो उसमें अनन्यता रख के और सब में उसी को देख लो।

34
00:02:21,600 --> 00:02:25,680
बस यही है। तो सात भी हो गए और वैष्णव भी

35
00:02:25,680 --> 00:02:29,680
हो गए। इ्वाकु जी आप भी बता दीजिए। इवाकू मेरा नाम इवाकू

36
00:02:29,680 --> 00:02:33,760
द क्रिएटर है। आप लोग जानते तो नहीं है मुझे बट मैं आवा जी को तीन साल से देख

37
00:02:33,760 --> 00:02:37,760
रहा हूं। वेरी ऑनर्ड टू बी हियर एंड मैं मेरी दीक्षा नहीं हुई है। परंतु

38
00:02:37,760 --> 00:02:41,760
मैं श्रीकुल बगलामुखी एक परंपरा है। बगलामुखी वहां की परंपरा श्रीकुल

39
00:02:41,760 --> 00:02:45,760
से आती है। जयपुर में ही उनका मठ है। वहां से मैं शिक्षा ग्रहण करता हूं। चंडीधाम

40
00:02:45,760 --> 00:02:49,760
से मेरे कुछ अनुयायी हैं जो मेरे को सिखाते हैं थोड़ा-थोड़ा। शंकर परंपरा

41
00:02:49,760 --> 00:02:54,080
से मेरे एक भैया है जिन्होंने मेरे को थोड़ा थोड़ी शिक्षा दी है। तो अभी दीक्षा नहीं हुई है परंतु

42
00:02:54,080 --> 00:02:58,080
मैं आस्था रखता हूं और सब संप्रदायों की सीख लेने में विश्वास रखता

43
00:02:58,080 --> 00:03:03,760
हूं। अभी अगर आप वैसे बोले तो भगवती मेरी इष्ट है

44
00:03:03,760 --> 00:03:07,120
सात है ना तो ये ना सोचे कि नहीं नहीं शिवजी वाले

45
00:03:07,120 --> 00:03:11,120
ही है ओनली और ओमकार जी भी है हमारे बीच में जो हरिहर में

46
00:03:11,120 --> 00:03:15,200
दोनों के प्रति उनका वैसा भाव है हर के

47
00:03:15,200 --> 00:03:19,360
द्वारा हरि की प्राप्ति हरि के द्वारा हर की प्राप्ति थोड़ा सा बता दे अपने बारे में

48
00:03:19,360 --> 00:03:23,680
ओमकार जी जय श्री राम हर हर महादेव सबको

49
00:03:23,680 --> 00:03:27,680
प्रणाम जय श्री राम मेरा नाम ओमकार सुमेर पराडकर है मैं यहां पे

50
00:03:27,680 --> 00:03:33,600
कनाडा से जुड़ा हुआ हूं से तो

51
00:03:33,600 --> 00:03:39,600
गुरु ग्रंथ गोविंद की कृपा है विदेश में रहते हुए सम

52
00:03:41,440 --> 00:03:45,920
तो मेरी शुरुआत अगर थोड़ी सी बता दू तो मैं प्रेमानंद जी महाराज को

53
00:03:45,920 --> 00:03:50,000
सुना करता था सुनता हूं तो उनके भग नाम जप की

54
00:03:50,000 --> 00:03:54,000
कृपा से धीरे धीरे में जैसे शिव नाम शिव मेरे इष्ट है तो

55
00:03:54,000 --> 00:03:58,080
फिर नाम जपता गया और वैसे करते की बात ये है

56
00:03:58,080 --> 00:04:02,240
कि श्री राम कृपा से मैं एक्चुअली भगवान शंकराचार्य जो हमारे पूरी के है

57
00:04:02,240 --> 00:04:06,560
स्वामी निलानंद सरस्वती जी महाराज तो उनके प्रति मेरा गुरु भाव

58
00:04:06,560 --> 00:04:11,360
डेवलप होने लगा अभी भी बढ़ रहा है उनहीं की कृपा से ऐसे करके

59
00:04:11,360 --> 00:04:15,520
तो बस मैं आहान से जुड़ा हूं लगभग दो तीन साल से शिवश भैया को

60
00:04:15,520 --> 00:04:19,680
बार बार बोदर करता रहता हूं चैट पे तो बहुत धैर्य पूर्वक मेरे

61
00:04:19,680 --> 00:04:23,920
प्रश्नों का उत्तर देते हैं हमारी बातचीत बहुत होती है तो बड़ा अच्छा

62
00:04:23,920 --> 00:04:28,000
लगता है तो आप सबको बहुत थैंक यू जी जी जी जी

63
00:04:28,000 --> 00:04:32,800
बिल्कुल आपका स्वागत है और

64
00:04:32,800 --> 00:04:36,960
हमारे बीच में शास्त्रवाद जी भी है उनको तो आपने हमारे चैनल पर कई बार देखा ही

65
00:04:36,960 --> 00:04:42,640
है। जी शास्त्रवाद जी

66
00:04:42,640 --> 00:04:46,640
आप ही तो मेरे गुरु जैसे हैं। आप ही से जो सीखे हैं जितना

67
00:04:46,640 --> 00:04:51,280
भी सीख पाए हैं। ऐसे मेरे इष्ट भगवान श्री कृष्ण है।

68
00:04:51,280 --> 00:04:55,360
लेकिन जितना राम जी से लिंक करके कृष्ण जी को देखना होता है।

69
00:04:55,360 --> 00:04:59,360
जैसे हमने इतना शास्त्रों से भगवान श्री कृष्ण के जिस

70
00:04:59,360 --> 00:05:03,440
चरित्र को किस तरह से समझना है। राम जी को किस तरह समझना है और

71
00:05:03,440 --> 00:05:07,680
किस प्रकार सभी को एक देखना है। ये आपसे ही सीखे

72
00:05:07,680 --> 00:05:11,760
हैं और आप ही मेरे मार्गदर्शक रहे हैं। ईश्वर

73
00:05:11,760 --> 00:05:15,920
की कृपा है कि आप ही मेरे को मिले क्योंकि बहुत पूर्व मैंने इस

74
00:05:15,920 --> 00:05:20,000
विषय में भगवान से कहा था कि मुझे ऐसा कोई

75
00:05:20,000 --> 00:05:24,240
प्राप्त हो जो मुझे इस चीज का सही मार्गदर्शन दे और आप मुझे प्राप्त

76
00:05:24,240 --> 00:05:26,720
हो गए।

77
00:05:26,720 --> 00:05:30,960
चलो ठीक है मगर मुझे गुरु के रूप में ना देखें हां ऐसे देख

78
00:05:30,960 --> 00:05:34,320
ले कि एक प्रचारक मिला है

79
00:05:34,320 --> 00:05:37,680
क्या कहते है सनातन से

80
00:05:37,680 --> 00:05:42,080
मैं डायरेक्ट मैं डायरेक्ट उनसे तो नहीं जुड़ा हूं ना

81
00:05:42,080 --> 00:05:46,880
डायरेक्ट शंकराचार्य जी से तो नहीं जुड़ा हूं आपसे ही जुड़ा है तो जितना

82
00:05:46,880 --> 00:05:47,920
मध्यस्थ में

83
00:05:47,920 --> 00:05:53,280
देख सकते है ठीक है सनातन शंकर जी भी आ गए

84
00:05:53,280 --> 00:05:57,600
हां सनातन शंकर जी नहीं आए अभी जुड़े

85
00:05:57,600 --> 00:06:02,000
थे टोकन ले लीजिए वो

86
00:06:02,000 --> 00:06:07,520
यहां पे जो ये जो मीटिंग हो रही है इसका जो मुख्य वो है

87
00:06:07,520 --> 00:06:12,320
Instagram पे क्योंकि वो जो अभी महिला आई थी कुछ दिन एक दो दिन पूर्व

88
00:06:12,320 --> 00:06:16,400
वो क्या कहते हैं Instagram पे एक्टिव ज्यादा

89
00:06:16,400 --> 00:06:20,480
हैं जिनसे हमारी चर्चा हुई थी तो उस वो अभी वहां

90
00:06:20,480 --> 00:06:24,880
पर पहले वो क्या कर रही थी और इसके बाद अभी वो क्या कर रही हैं।

91
00:06:24,880 --> 00:06:28,960
इन सब विषयों को थोड़ा सा केंद्र में रखते हुए फिर जो व्यापक

92
00:06:28,960 --> 00:06:33,120
मैसेज है ना कि यह क्या है इंटरनेट संप्रदाय जो खड़ा हो रहा है हमारे

93
00:06:33,120 --> 00:06:37,280
सामने खड़ा हो चुका है ऑलमोस्ट तो इस पर एक दृष्टिकोण तो इसमें विशेष

94
00:06:37,280 --> 00:06:41,360
रूप से क्योंकि हम उतना ज्यादा Instagram पे क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है वो नहीं जानते

95
00:06:41,360 --> 00:06:45,360
तो एक शिवाकु जी का आने का मुख्य प्रयोजन है कि

96
00:06:45,360 --> 00:06:49,840
वो जो वहां के जो जानकारी

97
00:06:49,840 --> 00:06:55,600
सीधे नहीं प्राप्त है इनको प्राप्त है उस रूप में इवाकू जी जुड़े हुए और

98
00:06:55,600 --> 00:07:00,320
श्वेतांग जी आहान का एक भाग हैं और पहले से ही

99
00:07:00,320 --> 00:07:03,040
ओमकार जी पहले से ही आहान का भाग है। शास्त्रवाद जी

100
00:07:03,040 --> 00:07:07,440
आहान का भाग हैं। तो फिर यहां पर जो विभिन्न

101
00:07:07,440 --> 00:07:10,960
वैचारिक जो

102
00:07:10,960 --> 00:07:14,960
भी विषय वस्तु सामने आएगी मुख्य रूप से इवाकू जी द्वारा

103
00:07:14,960 --> 00:07:18,960
अगर वो सेंटर में वो चल रहा है और भी अन्य आस वो जो Instagram

104
00:07:18,960 --> 00:07:23,040
वाली बातें हैं वो आएंगी तो इवाकू जी के द्वारा आएंगी तो उस पर

105
00:07:23,040 --> 00:07:27,600
हम लोगों का एक दृष्टिकोण आपको प्राप्त होगा

106
00:07:27,600 --> 00:07:30,000
और

107
00:07:30,000 --> 00:07:34,560
हां जैसे WhatsApp यूनिवर्सिटी ये भी किसी ने अच्छा कमेंट किया है

108
00:07:34,560 --> 00:07:38,000
है ना? जैसे WhatsApp यूनिवर्सिटी

109
00:07:38,000 --> 00:07:42,160
अब दीदी ने शुरू किया है। दीदी ने नहीं शुरू किया है। यह कुछ

110
00:07:42,160 --> 00:07:46,560
ऐसे लोग हैं जो अभी आपको क्रमबद्धता से पता चल जाएगा। थोड़ा सा

111
00:07:46,560 --> 00:07:51,200
ऐसा ना सोचिएगा कि आज का बोरियत होने वाला है क्योंकि यहां पे बोरी बोरियत कभी नहीं है।

112
00:07:51,200 --> 00:07:56,080
चाहे बॉर्डर हो चाहे हम वो हम साथ-साथ हैं वो या

113
00:07:56,080 --> 00:08:00,240
हमेशा सुपरहिट फिल्में ही देते हैं। स्क्रीन अटक गई है।

114
00:08:00,240 --> 00:08:04,240
जी। तो अच्छी चीजें मिलने वाली है आपको और बने

115
00:08:04,240 --> 00:08:08,400
रहिए लास्ट तक। ठीक है? सनातन शंकर जी की कोई टेक्निकल इशू आ रहा है

116
00:08:08,400 --> 00:08:12,400
तो हम लोग शुरू करते हैं कुछ बातें जो

117
00:08:12,400 --> 00:08:16,480
मुझे मालूम है पहले मैं वो रख दूं कि अभी एक दो दिन पहले हमारी

118
00:08:16,480 --> 00:08:18,400
एक लाइव चर्चा हुई

119
00:08:18,400 --> 00:08:22,480
और लाइव चर्चा महिला हैं

120
00:08:22,480 --> 00:08:26,720
जो विदेश में रह रही हैं और वहां से वह सनातन

121
00:08:26,720 --> 00:08:31,120
को जानने वाली होते हुए धर्म रक्षा के विषय में भी कई सारे

122
00:08:31,120 --> 00:08:35,360
ऐसे संदेश निर्गत कर रही हैं जिनसे हिंदुओं को लाभ भी है।

123
00:08:35,360 --> 00:08:39,600
पर साथ ही साथ उनके द्वारा कुछ ऐसी चीजें हो रही थी। मैंने

124
00:08:39,600 --> 00:08:43,680
मैंने उनको 2022 में देखा था जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाला मामला चल रहा था।

125
00:08:43,680 --> 00:08:48,320
बड़े ही अभद्र तरीके से जो निर्णायक है हमारे सनातन धर्म के

126
00:08:48,320 --> 00:08:52,880
आचार्य परंपराओं को वो उल्टा सीधा तू ततड़ाक और

127
00:08:52,880 --> 00:08:57,040
क्या कहते हैं उपमाएं देना हास्यप्रद उपमाएं देना ये सब वो कर रही

128
00:08:57,040 --> 00:09:01,280
थी। तो तब मैंने यह सोचकर शांति बनाए

129
00:09:01,280 --> 00:09:05,360
रखी थी कि ठीक है बहुत सारे लोग कर रहे हैं। तो हम

130
00:09:05,360 --> 00:09:10,000
इनको ही क्यों प्रतिकार करें? इनका ही क्यों प्रतिकार करें? भाई

131
00:09:10,000 --> 00:09:14,000
1 लाख लोग रोज उठकर के सबसे पहले शंकराचार्य को कुछ ना

132
00:09:14,000 --> 00:09:18,000
कुछ बोलते हैं। दुनिया में अधर्म भी बहुत है ना। तो दुनिया में अधर्म

133
00:09:18,000 --> 00:09:22,000
बहुत है। तो सब सारे अधर्मियों को मालूम है कि भाई हमारा मूल टारगेट क्या

134
00:09:22,000 --> 00:09:26,240
है? हम आखिरी प्रहार कर रहे होंगे तो वहां का आखिरी

135
00:09:26,240 --> 00:09:30,640
योद्धा कौन होगा? जो हमें धर्म को नाश धर्म का

136
00:09:30,640 --> 00:09:33,600
धर्म को नष्ट करने से हमें

137
00:09:33,600 --> 00:09:37,840
टारगेट पहले शुरुआत से ही करते हैं। जो भी जितने भी षड्यंत्र

138
00:09:37,840 --> 00:09:42,640
आते हैं बाहर से हमारे देश में एन केन प्रकारने उनके ग्रंथ

139
00:09:42,640 --> 00:09:46,800
उनके वाक्यों में उनके संदर्भों में शंकराचार्य को लेकर के आपत्ति

140
00:09:46,800 --> 00:09:50,880
होती है। उनको शंकराचार्य को पहले टारगेट करना है। अगर सनातन धर्म का कुछ बिगाड़ना

141
00:09:50,880 --> 00:09:55,200
है तो शंकराचार्य को पहले टारगेट करना है। फिर वो ईसाई बन के आए। नास्तिकता

142
00:09:55,200 --> 00:09:59,520
बन नास्तिकता जो बुद्ध

143
00:09:59,520 --> 00:10:04,240
की नास्तिकता है वो आए या ईसाई ईसाई बन के आए या

144
00:10:04,240 --> 00:10:08,560
इस्लाम बन के आए या फिर सनातना

145
00:10:08,560 --> 00:10:12,960
भाष बन के अगर आए भाषियों में फिर वो अंदर वेदों

146
00:10:12,960 --> 00:10:17,360
को मानने वाले होते हुए फिर वेदों के अर्थ में छेड़छाड़ करने वाले फिर सनातना

147
00:10:17,360 --> 00:10:21,760
भाष फिर वो रामपाली हो या इस हो या आर्य समाज हो ब्रह्माकुमारीज

148
00:10:21,760 --> 00:10:26,000
हो इन सबके आप लिटरेचर देखेंगे इन सबके आप जो

149
00:10:26,000 --> 00:10:30,000
इनके जो पथ प्रदर्शक हैं जो इनके लीडर्स हैं उनके अगर आप

150
00:10:30,000 --> 00:10:34,160
वक्तव्य देखेंगे तो उसमें किसी का नाम हो या ना हो मगर

151
00:10:34,160 --> 00:10:38,320
उसमें एक नाम जरूर मिलेगा जिसका वो विरोध कर रहे होंगे

152
00:10:38,320 --> 00:10:42,480
वो नाम शंकराचार्य तो आप समझ सकते हैं जैसे गुरुदेव का एक वचन

153
00:10:42,480 --> 00:10:46,560
है पूरी के शंकराचार्य जी का जगुरु शंकराचार्य ने एक बार

154
00:10:46,560 --> 00:10:48,800
कहा था जब

155
00:10:48,800 --> 00:10:53,680
युद्ध हो रहा था तो

156
00:10:53,680 --> 00:10:57,760
आपका सामने वाला कई बार आपको बता

157
00:10:57,760 --> 00:11:01,760
गति में कौन है जो जैसे मेरा कोई शत्रु है

158
00:11:01,760 --> 00:11:06,000
तो उससे आप पूछ लो तो कौरवों में से

159
00:11:06,000 --> 00:11:10,000
शायद दुर्योधन ने ये कहा था कि मैं मानता हूं कि मैं धर्म कर रहा हूं। दम है तो रोक

160
00:11:10,000 --> 00:11:14,800
लो। यानी कि यह मान लिया उसने कि

161
00:11:14,800 --> 00:11:18,960
पांडव जो है वह न्याय के पक्ष में है। है ना? तो इसी तरीके से

162
00:11:18,960 --> 00:11:23,040
यदि शंकराचार्य कौन है यह जानना है ना तो आप यहां जाकर

163
00:11:23,040 --> 00:11:27,200
के पढ़े कि जाकिर नायक जब बोलता है हिंदुओं को वो करना

164
00:11:27,200 --> 00:11:31,200
होता है उसे टारगेट तो किस आचार्य

165
00:11:31,200 --> 00:11:36,080
का नाम उसने लिया टारगेट करने के लिए अगर आचार्यों की बात हो रही है तो

166
00:11:36,080 --> 00:11:40,320
और अगर ईसाइयत को टारगेट करना होगा निशाना

167
00:11:40,320 --> 00:11:44,720
बनाना होगा सनातन को तो वो किसका नाम लेंगे अगर बौद्धों को सनातन

168
00:11:44,720 --> 00:11:48,800
को निशाना बनाना होगा उनके आचर लेकर के वो ये

169
00:11:48,800 --> 00:11:53,360
सब नहीं कहेंगे इस के फलाने वो हैं एच एच वो फलाने वाले

170
00:11:53,360 --> 00:11:57,600
कुछ नहीं सीधे शंकराचार्य ने और फिर

171
00:11:57,600 --> 00:12:01,840
अगर सनातना भाषियों में आ जाए अंदर वाले तंत्रों में तो आप देखो सत्यार्थ प्रकाश

172
00:12:01,840 --> 00:12:04,000
में कितने के नाम लिखे

173
00:12:04,000 --> 00:12:08,160
हैं पारंपरिक उसमें किसका नाम लेकर के वहां पर दिया गया है टारगेट

174
00:12:08,160 --> 00:12:12,960
किया गया है रामपाल की किताब आप पढ़ना शुरू करिए उसमें भी आपको शंकराचार्य

175
00:12:12,960 --> 00:12:17,360
और यह तो जानते ही होंगे इसका वाला

176
00:12:17,360 --> 00:12:21,680
वो डोंगरीला में ट्रेनिंग दी जाती थी ना पहले डोंगरीला

177
00:12:21,680 --> 00:12:26,000
में एक ट्रेनिंग ट्रेनिंग दी जाती थी वो

178
00:12:26,000 --> 00:12:30,160
क्या ट्रेनिंग थी जो शोम

179
00:12:30,160 --> 00:12:34,320
शोम शोम शामो शाह वो होती है ना अमरीश पुरी

180
00:12:34,320 --> 00:12:38,640
करता है तहलका तहलका में करता है वो ट्रेनिंग देता था जनरल डोंग

181
00:12:38,640 --> 00:12:42,800
तुम्हारा बॉस है जनरल डोंग तुम्हारा भगवान है वो जो कहेगा वो तुम्हें

182
00:12:42,800 --> 00:12:46,800
करना है वो जो बताएगा वही तुम्हें सोचना है तो इस तरह से

183
00:12:46,800 --> 00:12:51,680
वहां पर मानव बम बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती थी वो दिन भर उनको वही

184
00:12:51,680 --> 00:12:55,920
तो इसी तरीके से जब किसी बाहरी षड्यंत्र को यहां पर भेजा जाता

185
00:12:55,920 --> 00:13:00,480
है तो उन्हें मालूम है कि वहां पर सबसे ज्यादा खतरा किससे है बाहरी षड्यंत्र को

186
00:13:00,480 --> 00:13:05,120
तो जब किसी को यहां भेजा जाता है तो उसको एक ट्रेनिंग दी जाती है पहले शंकराचार्य

187
00:13:05,120 --> 00:13:09,680
से कैसे बचना है तो शंकराचार्य से बचने के लिए कुछ जुमले आते हैं मायावादी

188
00:13:09,680 --> 00:13:13,680
मायावादी मायावादी फिर कहीं पे आएगा जातिवादी

189
00:13:13,680 --> 00:13:17,760
जातिवादी ऐसे जुमले हैं इनको लेकर के आप जो है शंकराचार्य से बच

190
00:13:17,760 --> 00:13:19,360
सकते हो ऐसा उनको लगता

191
00:13:19,360 --> 00:13:24,560
है तो अब यह

192
00:13:24,560 --> 00:13:28,640
जो मैंने इतना सब बताया शंकराचार्य की महत्ता के बारे में तो

193
00:13:28,640 --> 00:13:32,720
मैंने बताया कि यह जो मातृ शक्ति है जो अभी आपको हमारे चैनल पर दिखाई

194
00:13:32,720 --> 00:13:36,960
दी थी यह मातृशक्ति वहां से लेकर के शंकराचार्य के लिए तू तड़ाक

195
00:13:36,960 --> 00:13:41,040
और अपने ही जो मूल स्त्रोत है हमारे वैदिक धर्म

196
00:13:41,040 --> 00:13:45,040
के मूल स्त्रोत कहां से आ रहे हैं कौन है हमारा शब्द प्राण उसी पर प्रहार कर

197
00:13:45,040 --> 00:13:49,120
रहे जिस डाल पर बैठे हैं उसी तो हमने तब इनको इग्नोर किया था और तब से

198
00:13:49,120 --> 00:13:53,200
लेकर के अभी अभी हाल में यह मामला सामने आया जब दोबारा से मैंने

199
00:13:53,200 --> 00:13:57,520
देखा कि इन्होंने किसी बात को लेकर के अभी मुक्तेश्वर जी का विरोध शुरू किया।

200
00:13:57,520 --> 00:14:01,520
अब आप विरोध करो मगर मर्यादा में रह के करो। पहली बात तो

201
00:14:01,520 --> 00:14:05,520
आप मर्यादा लांग करके कर रहे हो। फिर उसमें अगर कोई आपको रिटेलिएट कर रहा है

202
00:14:05,520 --> 00:14:09,680
तो फिर आप उसमें जो है और अमर्यादित हो मर्यादित ऐसे हो रहे हो

203
00:14:09,680 --> 00:14:14,160
कि आपकी आपका जो वार है वो पूरे

204
00:14:14,160 --> 00:14:18,320
संप्रदाय पे जा रहा है और तो और आप ऐसा कर रहे हो कि फिर वो संप्रदाय पे

205
00:14:18,320 --> 00:14:22,320
नहीं जा रहा है। वो समस्त प्रामाणिक परंपराओं द्वारा स्वीकार सिद्धांतों पे

206
00:14:22,320 --> 00:14:26,720
आपने टारगेट कर दिया। जैसे कि विदेश गमन विदेश गमन को लेकर के सारे प्रामाणिक

207
00:14:26,720 --> 00:14:31,040
संप्रदाय जितने भी सारे एकमत है कोई इसमें अंतर तो जब आप विदेश गमन निषेध

208
00:14:31,040 --> 00:14:34,880
का समर्थन कर रही हो यह सोच कर कि मैं इससे अमक्तेश्वंद

209
00:14:34,880 --> 00:14:38,880
औरेश्वरंद जी और उनके समर्थकों को

210
00:14:38,880 --> 00:14:42,960
टारगेट कर रही हूं मगर आप जब ये सिद्धांत को टारगेट कर तो पूरी परंपरा फिर

211
00:14:42,960 --> 00:14:47,040
आपने वीडियो बनाया वीडियो बना करके आपने जो है शंगेरी मठ के

212
00:14:47,040 --> 00:14:51,760
लिए कह दिया कि इतनी डोनेशन आती है फिर फिर भी तुम जैसे झुंझनों को भेजा है

213
00:14:51,760 --> 00:14:56,240
कह रही थी कि मैं तो ज्योति फिर वो मुक्तिश जी को टारगेट कर रहे हैं। फिर शंगेरी

214
00:14:56,240 --> 00:15:00,400
मठ को भी आपने कुल मिलाकर के आप जो है कहीं ना कहीं से घुमा

215
00:15:00,400 --> 00:15:05,680
फिरा संप्रदाय के सामने स्वामी महाग को भी टारगेट कर दिया।

216
00:15:05,680 --> 00:15:09,680
उन्होंने करपात्र स्वामी महाग को भी टारगेट कर दिया। सबकी आवाज आ रही

217
00:15:09,680 --> 00:15:12,560
है।

218
00:15:12,560 --> 00:15:17,360
मैं कह रहा हूं कि उन्होंने करपात्र स्वामी को भी नहीं छोड़ा। उनको भी टारगेट किया ना।

219
00:15:17,360 --> 00:15:22,000
वो केवल ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी तक थोड़ी ना सीमित रही।

220
00:15:22,000 --> 00:15:26,000
आवाज सबको मेरी साफ सुनाई दे रही है? आवाज आ रही है आपकी? वीडियो बीचबीच में

221
00:15:26,000 --> 00:15:31,520
अटक रही है। वीडियो मुझे गड़बड़ हो रहा है।

222
00:15:31,520 --> 00:15:35,600
भैया मैं एक बार लीव करके दोबारा आता हूं। मुझे आपकी आवाज दोद बार सुनाई

223
00:15:35,600 --> 00:15:39,600
दे रही है। आप सभी की मतलब नहीं तो फिर वो आपके साइड

224
00:15:39,600 --> 00:15:45,600
में इशू है। अच्छा अच्छा ओके ठीक। आपके साइड

225
00:15:46,720 --> 00:15:50,720
तो ऐसा है कि पता नहीं वो सुन पाए

226
00:15:50,720 --> 00:15:54,240
हैं कि नहीं। लेकिन

227
00:15:54,240 --> 00:15:58,240
आवाज बराबर है। मेरे बगल में मैंने फोन में चला रखी है। आवाज बराबर आ रही है। वीडियो

228
00:15:58,240 --> 00:16:02,480
का इशू है। तो वही बात है। हां उनका वीडियो बीच-बीच में हो रहा है।

229
00:16:02,480 --> 00:16:06,640
हां वीडियो फ्रीज हो रहा है। अब यही बात है जब तक आते

230
00:16:06,640 --> 00:16:10,800
नहीं हम लोग चर्चा कर लेते हैं। वही बात को आगे बढ़ाते हैं।

231
00:16:10,800 --> 00:16:14,880
जी जी तो अवेकनिंग भारत जी ने जितनी टिप्पणियां करी है मेरे पास लिखी

232
00:16:14,880 --> 00:16:19,760
हुई है इधर और उनके अनुयायों ने जितनी टिप्पणियां करी है वो भी लिखी हुई है इधर।

233
00:16:19,760 --> 00:16:23,840
अच्छा वही है हां वही वही तो थोड़ा पहले चालू करते

234
00:16:23,840 --> 00:16:28,000
हैं जो शिवश जी ने कहा आ ही गए शिवश जी आ गए हां हां हां तो अब

235
00:16:28,000 --> 00:16:32,480
ठीक चल रहा है तो अब शिवश जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए

236
00:16:32,480 --> 00:16:36,800
मैं आप शायद सुन नहीं पाए थे बस मैं बीच में आपको मैंने बोला था कि जब आप ज्योतिष

237
00:16:36,800 --> 00:16:41,360
पीठ वाले महाराज जी की ही बात कर रहे थे तो वो फिर अब श्रृंगरी

238
00:16:41,360 --> 00:16:45,520
महास्वामी के पास भी आए थे ये केवल वहां तक नहीं रही ना उन्होंने करपात्र

239
00:16:45,520 --> 00:16:49,840
जी भी अपनी उंगली उठा दी उनको भी उन्होंने उन्होंने मतलब

240
00:16:49,840 --> 00:16:53,840
बोल दिया है अपने व्यंग बोल दिया उन्होंने ठीक है तो मुझे अच्छा नहीं लगा ये

241
00:16:53,840 --> 00:16:58,000
जो उनके शब्दों का चयन था लेकिन ठीक है आप अपनी बात अभी वो वापस अभी

242
00:16:58,000 --> 00:17:02,080
वो वापस जब गई है यहां से खाली हाथ है ना

243
00:17:02,080 --> 00:17:06,080
जब खाली हाथ वापस गई है तो वो मायावा अब वो इस का सहारा भी

244
00:17:06,080 --> 00:17:10,560
ले रही है वहां दिख रहा है तो करपात्री

245
00:17:10,560 --> 00:17:14,640
जी के लिए तो बोली अपनी लाइव में बोल दिया करपात्री जी ना होते ना

246
00:17:14,640 --> 00:17:18,800
करपात्री जी क्या है पता नहीं है अभी तुम्हें वो

247
00:17:18,800 --> 00:17:22,800
भगत सिंह थी ना द लेजेंड ऑफ भगत सिंह उसमें कहता है

248
00:17:22,800 --> 00:17:27,040
जाओ बेटा जाओ जिस दिन बर्फ की सिल्ली पर लिटा के चार पांच डंडे पड़ेंगे

249
00:17:27,040 --> 00:17:31,280
ना एक क्रांतिकारी होने का जो भूत सवार हुआ है भगत सिंह को कहते हैं वो शायद राम प्रसाद

250
00:17:31,280 --> 00:17:35,280
बिश्ल जिस दिन चार डंडे पड़ेंगे ना बर्फ की सिल्लियों पे लिटा

251
00:17:35,280 --> 00:17:40,080
करके उस दिन एक क्रांतिकारी बन खेलने का जो शौक चढ़ा है ना वो उतर जाएगा

252
00:17:40,080 --> 00:17:44,240
तो खैर ये सब बातें तो अभी उसमें आएंगी तो अब

253
00:17:44,240 --> 00:17:48,240
बात ये है कि ये किस तरह के लोग हैं और इनको को सेंटर में रखते हुए

254
00:17:48,240 --> 00:17:53,280
हम लोग थोड़ी सी बातें करने वाले हैं। अलग-अलग वो लेंगे। अ

255
00:17:53,280 --> 00:17:57,920
क्या कहते हैं कि अब अब आप खड़े कहां पर हो रहे हो कि

256
00:17:57,920 --> 00:18:02,000
भाई मैं जो है वेदों को जानता हूं। मैं जो है शास्त्रों को जानता हूं और

257
00:18:02,000 --> 00:18:06,080
आप कह क्या रहे हो? जिससे हमारे पास शास्त्र आए हैं। मैं उनको गलत ठहरा रहा हूं।

258
00:18:06,080 --> 00:18:10,240
जिससे हमारे पास शास्त्र आए हैं। मैं उनको गलत ठहरा रहा हूं। मेरे पास शास्त्र आ गए। तुमसे मैंने

259
00:18:10,240 --> 00:18:14,400
शास्त्र लिया है। मैं तुमको ही कह रहा हूं। तुम गलत अर्थ बता रहे हो। अरे भैया अगर वह अज्ञानी है वह

260
00:18:14,400 --> 00:18:17,280
झूठा है तो तुमको शास्त्र क्यों देगा सच्चा

261
00:18:17,280 --> 00:18:22,080
बदल देगा शास्त्र ठीक है पहली बात दूसरी बात यह है

262
00:18:22,080 --> 00:18:26,160
कि अब एक प्रश्न बहुत जरूरी है जो मैं पहले रख दूं

263
00:18:26,160 --> 00:18:30,160
जो मेरे सामने मुझे लगता है मन में आई होगी बात कि भाई इस प्रश्न की

264
00:18:30,160 --> 00:18:34,720
आवश्यकता क्या है आवश्यकता इस प्रश्न की यह है कि

265
00:18:34,720 --> 00:18:38,720
व्यक्ति यह क्लेम कर रहा है कि भाई मैं विदेश गमन को

266
00:18:38,720 --> 00:18:42,800
लेकर के हमारे शास्त्रों ने निषेध नहीं किया है शास्त्रों में फिर

267
00:18:42,800 --> 00:18:46,880
वह तर्क से अगर बात है तो वह बाद की बात है। ठीक है? जिस विषय

268
00:18:46,880 --> 00:18:50,960
में शास्त्र ही प्रमाण है अती्द्रिय विषय कौन सी

269
00:18:50,960 --> 00:18:55,120
धरती अशुद्ध है कौन सी नहीं है? यह अती्द्रिय विषय है। इसको हम विज्ञान से कहां से सिद्ध

270
00:18:55,120 --> 00:18:59,360
करेंगे भाई? यह अती्द्रिय विषय है। मोक्ष अती्द्रिय विषय है।

271
00:18:59,360 --> 00:19:03,360
बहन भाई में संबंध विवाह का बनना है कि नहीं यह अती्द्रिय विषय

272
00:19:03,360 --> 00:19:07,520
है। वो बात अलग है। बाद में वैज्ञानिकों ने अपनीपनी थ्योरीज दे दी। तो

273
00:19:07,520 --> 00:19:11,600
व्यक्ति सपोर्ट लेने लगा नहीं। शुरुआत तो अती्द्रिय विषय से

274
00:19:11,600 --> 00:19:16,160
ही हो रही है ना और कई वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो उसके पक्ष में थ्योरी दे रहे हैं। तो यह अती्द्रिय

275
00:19:16,160 --> 00:19:20,240
विषय जो अती्द्रिय विषय हैं उनमें हमारे लिए शास्त्र शब्द प्रमाण

276
00:19:20,240 --> 00:19:24,320
है। हमारे लिए क्या प्रमाण है? शब्द प्रमाण है। जैसे

277
00:19:24,320 --> 00:19:28,640
कि कोई हमसे यह कहे कि भाई मेरा जो ये मैंने बगल

278
00:19:28,640 --> 00:19:32,400
बंदी पहन धारण की हुई है। इसका कलर क्या है? इस विषय

279
00:19:32,400 --> 00:19:36,560
में जो है कान प्रमाण है तो कान प्रमाण नहीं है। इस विषय में आंख प्रमाण

280
00:19:36,560 --> 00:19:40,720
है और सुनने के विषय में कान प्रमाण है। तो जिस तरीके

281
00:19:40,720 --> 00:19:45,120
से यह रंग के विषय में आंख प्रमाण है। सुनने के विषय में कान प्रमाण है।

282
00:19:45,120 --> 00:19:49,280
उसी तरीके से जो अती्द्रिय विषय है ना मोक्ष धर्म मोक्ष को प्राप्त

283
00:19:49,280 --> 00:19:53,440
कराने वाला धर्म उसमें शास्त्र प्रमाण है। तो कई ऐसे नियम

284
00:19:53,440 --> 00:19:57,680
है जिनके संबंध में आपको तार्किक चीजें मिल जाएंगी। मगर कई ऐसे नियम भी होंगे जहां

285
00:19:57,680 --> 00:20:02,000
पर आपको शास्त्र को सर्वोपरि कहना पड़ेगा। और जब तक आप शास्त्र के अधीनता

286
00:20:02,000 --> 00:20:06,240
नहीं स्वीकार करेंगे तब तक क्या होगा कि विप्लव आएगा

287
00:20:06,240 --> 00:20:10,640
क्योंकि आपका दृष्टिकोण से आपको कुछ और सही लग रहा है और दूसरे के दृष्टिकोण

288
00:20:10,640 --> 00:20:14,880
से कुछ और इसी बात का तो युद्ध है भाई वेद में जिसकी प्रमाण्य बुद्धि

289
00:20:14,880 --> 00:20:18,960
नहीं है वो बन गया इस्लाम जिसकी वेद में प्रमाण्य बुद्धि

290
00:20:18,960 --> 00:20:23,760
नहीं बन गया बुद्ध जिसकी वेद में प्रमाण्य बुद्धि नहीं है ये क्या विप्लव है क्यों

291
00:20:23,760 --> 00:20:28,000
तो अब बात आ गई कि विदेश गमन को सिद्ध करना है

292
00:20:28,000 --> 00:20:32,160
निषेध या फिर उसका समर्थन करना है तो उसमें शब्द प्रमाण है, शास्त्र प्रमाण है।

293
00:20:32,160 --> 00:20:36,160
अब जब शास्त्रों से हमें आपको प्रूफ करना है तो शास्त्रों के कई अर्थ आ

294
00:20:36,160 --> 00:20:40,160
गए। अब हम आपको दिखाएंगे कि देखो यहां ब्रदारण्य उपनिषद

295
00:20:40,160 --> 00:20:44,160
में लिखा है। अभेद में ये लिखा है। आप कहोगे नहीं आर्य समाज तो यह कह रहे हैं।

296
00:20:44,160 --> 00:20:47,440
फलाने तो यह कह रहे हैं। तो आपने तो कोई एक पिलर को पकड़ ही

297
00:20:47,440 --> 00:20:51,520
नहीं रखा। यद्यपि अभी वहां तक बात आ नहीं पाई कहां तक?

298
00:20:51,520 --> 00:20:55,920
कि आर्य समाज ने क्या-क्या कहा है। नहीं तो आपका वहां पर और मुंह धुआ होता।

299
00:20:55,920 --> 00:21:00,000
अभी आपने इन सब विषयों में कभी सोचा ही नहीं होगा ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं। मैं आपको

300
00:21:00,000 --> 00:21:04,160
मैं आपकी चीजों को समझ पा रहा हूं। कोई तात्विक व्याख्या अभी मैं पूछता कौन सी तात्विक

301
00:21:04,160 --> 00:21:08,400
व्याख्या माना है आपने? भाई ब्रह्मसूत्र के किस भाष्य को मानने

302
00:21:08,400 --> 00:21:12,800
वाला होते हुए तुम वो हो सनातनी यही ना बता पाते तुम।

303
00:21:12,800 --> 00:21:17,200
अच्छा ईश्वर अवतार ले सकता है तो फिर आर्य समाज को छोड़ना पड़ जाता।

304
00:21:17,200 --> 00:21:21,280
विशिष्टाद्वैत को भी मान लो अगर कि तुम्हारे वो जो गुप्त गुरु हैं। हालांकि कोई है

305
00:21:21,280 --> 00:21:25,440
नहीं। नाटक था वो लिख लिख के बता रहा था। कोई सपोर्टर आया था जो जिसने बीच

306
00:21:25,440 --> 00:21:29,520
में दखल अंदाजी की थी ना तो वो लिख लिख के बता रहा था

307
00:21:29,520 --> 00:21:33,680
कि ये जवाब दो तो वो पढ़ रही थी उसको लैपटॉप में स्क्रीन से तो

308
00:21:33,680 --> 00:21:37,760
खैर तो इन्होंने कहा मेरे गुरु सामने नहीं आना चाहते

309
00:21:37,760 --> 00:21:42,160
यही भागवतानंद भी कहता है मेरे गुरु सामने नहीं आना चाहते हैं जिसके पास परंपरा

310
00:21:42,160 --> 00:21:46,240
है नहीं प्रमाणिक वो यही कहता है मेरे गुरु नहीं सामने आना चाहते या कोई कहता

311
00:21:46,240 --> 00:21:50,960
है सपने में गुरु आए हैं ये कह देता है तो खैर तो

312
00:21:50,960 --> 00:21:54,960
अभी मैं आगे आपसे जब पूछता कि आप मूर्ति पूजा मानते हो कि नहीं मानते हो? नहीं

313
00:21:54,960 --> 00:21:59,520
मानते तो आर्य समाज के प्रमाण को मानते हो तो आर्य समाज को प्रमाण कैसे कर सकते हो?

314
00:21:59,520 --> 00:22:02,560
तो यह मैं परंपरा पूछने का विषय ये है कि

315
00:22:02,560 --> 00:22:06,560
जो मुझे आगे चलके आपसे पूछना ही पड़ेगा। जब मैं आपको सबूत दूंगा आप

316
00:22:06,560 --> 00:22:10,720
कहोगे नहीं इसका अर्थ ये वाला है। तो फिर मैं आपसे पूछूंगा कि आप कौन से अर्थ

317
00:22:10,720 --> 00:22:14,800
को मानने वाली हैं? कौन से अर्थ को मतलब कौन सी परंपरा के अर्थ को मानने वाली

318
00:22:14,800 --> 00:22:18,880
है? मुझे पूछना ही था। तो वो जो मूल विषय है वो सबसे पहले इधर ही आ जाए

319
00:22:18,880 --> 00:22:23,040
ना जो आगे चलकर के आना ही है कि किस अर्थ को माना जाए क्योंकि

320
00:22:23,040 --> 00:22:27,040
यह सर्वविदित है जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं उनके लिए विदेश गमन निषेध है तो

321
00:22:27,040 --> 00:22:31,040
आपको तो उसमें हस्तक्षेप करना ही नहीं चाहिए था यदि आप मूर्ति पूजक हो यदि

322
00:22:31,040 --> 00:22:35,120
आप प्रामाणिक परंपराओं से जुड़ी हुई हो रामानुज परंपरा से जुड़ी हुई तो इस विषय

323
00:22:35,120 --> 00:22:39,360
में आपका फिर हस्तक्षेप होना ही चाहिए था क्योंकि हुआ इससे इस बात का धोतक

324
00:22:39,360 --> 00:22:43,440
है कि आप किसी के सगे नहीं हो जो सबका सगा होता है ना सेकुलर वो किसी का

325
00:22:43,440 --> 00:22:47,440
सगा नहीं होता है तो वह हो आपकी तो आपकी वह

326
00:22:47,440 --> 00:22:51,440
स्थिति क्लियर करने के लिए और आपका वह एक जो भ्रम है कि मैं

327
00:22:51,440 --> 00:22:55,840
बहुत बड़ी हिंदू हूं हिंदू धर्म की रक्षा कर हिंदू आप हैं।

328
00:22:55,840 --> 00:22:59,920
हिंदू धर्म आप हैं। आपका संप्रदाय विहीन होना हिंदुत्व में बाधक

329
00:22:59,920 --> 00:23:03,920
नहीं है। संप्रदाय विहीन होना हिंदुत्व में बाधक नहीं है।

330
00:23:03,920 --> 00:23:08,000
वो प्रामाणिक आचार्य में बाधक है। संप्रदाय

331
00:23:08,000 --> 00:23:12,000
विहीन होना हिंदुत्व हिंदू होने में बाधक नहीं है। प्रामाणिक

332
00:23:12,000 --> 00:23:17,040
आचार्य होने में बाधक है। परंतु संप्रदाय का विरोध होना

333
00:23:17,040 --> 00:23:17,600
एक तरफ

334
00:23:17,600 --> 00:23:21,760
से सभी संप्रदायों का विरोध होना यह हिंदुत्व वादक आपको

335
00:23:21,760 --> 00:23:25,920
किसी ना किसी खंभे को पकड़ना पड़ेगा तब कह सकते हो मैं वैदिक हूं किसी ना किसी

336
00:23:25,920 --> 00:23:30,320
जहाज में सवार होना पड़ेगा वो जहाज है परंपरा

337
00:23:30,320 --> 00:23:34,400
है ना आज वो रील बनाई है मैंने उसमें कहा है कि वो जो

338
00:23:34,400 --> 00:23:38,400
बड़ा वाला जानवर होता है ना एक बड़ा वाला हूं

339
00:23:38,400 --> 00:23:44,400
क्या कहते हो उसको हाथी हाथी वो हम है

340
00:23:44,560 --> 00:23:49,760
और वो दुख वो होता है ना तो

341
00:23:49,760 --> 00:23:53,920
ठीक है तो इसलिए मेरा ये प्रश्न था क्योंकि ये प्रश्न आगे आना

342
00:23:53,920 --> 00:23:58,000
ही था क्योंकि आप आर्य समाज भी लिए बैठी हो पता नहीं कौन ब्रह्म मुनि भी लिए बैठी हो

343
00:23:58,000 --> 00:24:02,320
अलंकार भी लिए बैठी हो फिर हमको हर हर महादेव भी कह रही हो जो

344
00:24:02,320 --> 00:24:06,640
इनसे Instagram पे टेलीफोनिक वार्ता हुई जो उसमें हर हर महादेव

345
00:24:06,640 --> 00:24:10,640
भी कह रही है अरे भैया पहले निश्चित तो कर लो कि आप कौन से भाष्य को मान

346
00:24:10,640 --> 00:24:14,720
रहे हो वेदों के आप तो भाष्यकार हो नहीं। पहली बात तो फिर आप

347
00:24:14,720 --> 00:24:18,720
भाषिकार बन भी जाओगे तो सच्चाई यह है कि शंकराचार्य के विरुद्ध हो के आपका

348
00:24:18,720 --> 00:24:23,040
कोई अस्तित्व सिद्धि नहीं होगा। खैर इतना लंबा सब हो गया।

349
00:24:23,040 --> 00:24:27,040
थोड़ा सा इस विषय में आप लोग थोड़ा-थोड़ा बोल लें। फिर वीरूपाक्ष

350
00:24:27,040 --> 00:24:31,280
जी से हम लोग वो पॉइंट रेज करवा ले लेंगे जो वो बोल

351
00:24:31,280 --> 00:24:33,040
रही हैं। है ना? जी श्वेता

352
00:24:33,040 --> 00:24:37,200
जी। मैंने तो बोल दिया। आप

353
00:24:37,200 --> 00:24:41,760
विश्वाकु जी से सुनते हैं पहले। मैं बोल दूंगा अंत में फिर से। तो

354
00:24:41,760 --> 00:24:45,920
शुरुआत करने से पहले ये कहना चलिए अब शुरुआत

355
00:24:45,920 --> 00:24:49,840
कर दी तो कर दीजिए। मैंने सोचा था तीनों

356
00:24:49,840 --> 00:24:53,840
मैं कह हां मैं मैं मैं बोल देता हूं। मैं कहता हूं कि एक बार सनातन शंकर जी

357
00:24:53,840 --> 00:24:58,640
के भी थोड़े दो पॉइंट ले लेते हैं। क्योंकि वो अभी आए हैं और

358
00:24:58,640 --> 00:25:03,360
थोड़ा उनका भी सम्मान हो जाएगा। बोलिए अगर आप बोल पा रहे हैं तो

359
00:25:03,360 --> 00:25:07,440
जी मेरी आवाज सही आ रही है। माइक सही है। जी जी आ रही है। आ रही

360
00:25:07,440 --> 00:25:11,440
है। हां हां नहीं काफी

361
00:25:11,440 --> 00:25:15,440
जो डिस्कशन सुना और यह तो काफी दिनों से चल ही रहा था कि लोग

362
00:25:15,440 --> 00:25:20,080
ये जो पीडीएफ डाउनलोड करके आका.com को अपना

363
00:25:20,080 --> 00:25:24,320
बेस मानकर जो इंटरनेट से किताबें डाउनलोड करके खुद को जो आचार्य

364
00:25:24,320 --> 00:25:28,400
घोषित कर रहे हैं ये लोग ज्ञानी घोषित कर रहे हैं बेसिकली और ये सोचते हैं कि हमने

365
00:25:28,400 --> 00:25:32,560
जो वहां पे ऑनलाइन जो पढ़ ली बात और उसको जो अपने मनमुखी

366
00:25:32,560 --> 00:25:36,720
आधार पर जो समझ लिया मतलब वही सच है और जो आचार्य

367
00:25:36,720 --> 00:25:40,880
हैं जो परंपरा से आचार्य हैं वो तो इनके लिए

368
00:25:40,880 --> 00:25:45,040
ऐसे हैं जैसे कि ये लोग समझते हैं कि ये तो राजनेताओं के विरोधी हैं।

369
00:25:45,040 --> 00:25:48,160
है ना? जबकि इनको यह समझ लेना चाहिए कि

370
00:25:48,160 --> 00:25:52,800
भाई जितने भी हमारे जो आचार्य हैं

371
00:25:52,800 --> 00:25:56,880
उनको जो ज्ञान मिला है वो परंपरा से ही मिला है। और इवन मैं तो ये भी बोलना

372
00:25:56,880 --> 00:26:01,200
चाहता हूं। मैंने पिछली बार भी कहा था शिवा जी के लाइव में कि

373
00:26:01,200 --> 00:26:05,280
आज हम जो मॉडर्न आधुनिक पढ़ाई कर रहे हैं उसमें जो

374
00:26:05,280 --> 00:26:09,360
हम पढ़ाई करते हैं वो भी तो किसी ऑथराइज इंस्टट्यूट से ही करते हैं या किताबें लाकर घर

375
00:26:09,360 --> 00:26:13,440
पे ही सब डिग्रियां ले लेते हैं। ऐसा तो नहीं होता ना। तो जब आप वो

376
00:26:13,440 --> 00:26:17,520
डिग्रियां वहां से नहीं ले पा रहे हो इन इंजीनियरिंग की डिग्री कर रहे हो तो आप ऑथराइज इंस्टट्यूट

377
00:26:17,520 --> 00:26:21,600
को देख रहे हो। उसमें भी आप देख रहे हो कि ये रिकॉग्नाइज्ड है कि नहीं है। अच्छा यहां से पढ़ाई

378
00:26:21,600 --> 00:26:25,760
करने के बाद क्या आपको आगे उसका जो जॉब मिलेगी

379
00:26:25,760 --> 00:26:29,760
या नहीं मिलेगी ये भी आप देख रहे हो। लेकिन जैसे ही धर्म शास्त्रों

380
00:26:29,760 --> 00:26:33,920
की बात आ रही है तो वहां पर आप क्या कर रहे हो कि ऑनलाइन पीडीएफ पढ़ रहे हो और वहां पर जो

381
00:26:33,920 --> 00:26:38,000
आपको समझ में आ रहा है वो समझ ले रहे हो और फिर अगर आचार्यों

382
00:26:38,000 --> 00:26:42,000
की बात वहां से भिन्न पाई जा रही है तो आप कह रहे हो कि आचार्य गलत है तो ऐसा

383
00:26:42,000 --> 00:26:46,160
तो आप मॉडर्न एजुकेशन में भी नहीं कर रहे हो कि जो आपकी बात टीचर से अगर

384
00:26:46,160 --> 00:26:50,240
भी है तो आप टीचर को तो चैलेंज नहीं कर रहे हो। है ना? तो

385
00:26:50,240 --> 00:26:54,400
ये लोगों को ये समझ लेना चाहिए कि आप सिद्धांत जो है वो

386
00:26:54,400 --> 00:26:58,640
खुद ही तोड़ रहे हो अपना बनाया हुआ सिद्धांत और उनको जो डॉक्टरी की पढ़ाई उन्होंने

387
00:26:58,640 --> 00:27:02,640
करी होगी तो डॉक्टरी की पढ़ाई उन्होंने ऐसे तो नहीं है कि खुद

388
00:27:02,640 --> 00:27:03,600
से ही किताबें

389
00:27:03,600 --> 00:27:07,920
लाकर डॉक्टर बन गई होंगी या जो भी उन्होंने पढ़ाई की होगी वहां पर भी उन्होंने कहीं

390
00:27:07,920 --> 00:27:12,480
गई होंगी टेस्ट दिया होगा फिर उसी एमबीबीएस

391
00:27:12,480 --> 00:27:16,720
जो इंस्टट्यूट होगा उसके हिसाब से ही उन्होंने पेपर भी लिखा होगा

392
00:27:16,720 --> 00:27:20,720
अच्छा नंबर भी उनको दूसरों ने दिए होंगे खुद को तो इन्होंने नंबर भी नहीं दिए होंगे। खुद का

393
00:27:20,720 --> 00:27:24,960
पेपर खुद से थोड़ी चेक करे होंगे। तो यह बात इनको

394
00:27:24,960 --> 00:27:28,960
यह समझ लेनी चाहिए। अब एक और बात आती है मैं

395
00:27:28,960 --> 00:27:33,200
मैं इसमें बस एक एक बात जोड़ देता हूं डॉक्टरी वाली क्योंकि आप दूसरी जगह चली जाएंगे

396
00:27:33,200 --> 00:27:37,440
फिर आप देखिए ऐसा है कि आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं ये बात और जब मान लीजिए

397
00:27:37,440 --> 00:27:41,600
वो भी अगर इस व्यवहारिक इंस्टट्यूट कॉलेज आदि में जब पढ़ रही होंगी

398
00:27:41,600 --> 00:27:45,760
तो भी उन्होंने अपने गुरु पे श्रद्धा तो रखी होगी। उस ग्रंथ पर श्रद्धा रखी

399
00:27:45,760 --> 00:27:49,760
होगी ना माना होगा ना मतलब शब्द प्रमाण माना होगा कि नहीं माना होगा उस

400
00:27:49,760 --> 00:27:53,840
गुरु का उस समय कि बैठ के बॉडी काट रही थी उस समय रिसर्च कर रही थी

401
00:27:53,840 --> 00:27:57,920
हर जैसे ये लाइन समझ में नहीं आई तो मैं अब खुद ही प्रैक्टिकली करूंगी सबका ऐसे तो नहीं हुआ

402
00:27:57,920 --> 00:28:02,000
होगा ठीक है तो वही बात जो है यहां पे

403
00:28:02,000 --> 00:28:06,720
भी लागू होती है ठीक है आप अपनी पूरी बात कर लीजिए फिर मैं इसको इसमें बाद में जोडूंगा

404
00:28:06,720 --> 00:28:11,520
जी नहीं नहीं बिल्कुल बिल्कुल आपने बिल्कुल सही पॉइंट जोड़ा अब ये लोग क्या करते हैं कि

405
00:28:11,520 --> 00:28:15,600
सनातन धर्म के अंदर ही आर्य आर्य समाज, रामपाल, इस जैसे

406
00:28:15,600 --> 00:28:18,800
अलग-अलग इन विचारधाराओं का नाम लेते हैं। उन्होंने भी आर्य

407
00:28:18,800 --> 00:28:23,040
समाज का नाम लिया और फिर परंपरा प्राप्त आचार्यों पर ये लोग अभद्र

408
00:28:23,040 --> 00:28:27,200
टिप्पणियां कर रहे हैं। अच्छा जैसे कि आपने बोला कि कृपा जी महाराज का उससे कोई

409
00:28:27,200 --> 00:28:31,360
लेना देना नहीं था। उन पे भी उन्होंने टिप्पणी कर दी। तो ये इंटरनेट से जितना

410
00:28:31,360 --> 00:28:35,440
भी पढ़ा हुआ ज्ञान जो है वो गुरु परंपरा से बड़ा कैसे हो सकता है?

411
00:28:35,440 --> 00:28:39,680
यह सबसे बड़ा जो है प्रश्न है तो हम किसी व्यक्ति को नहीं बोलते

412
00:28:39,680 --> 00:28:45,120
हैं। हम तो बोलते हैं कि भैया यह जो पूरा झूठा सिस्टम चला हुआ है इनका जो स्वषित

413
00:28:45,120 --> 00:28:50,080
रूप से ज्ञानी बने हुए हैं। इसकी जो शुरुआत है वो सारी की सारी

414
00:28:50,080 --> 00:28:54,160
19वीं 20वीं सदी में ही शुरू हुई है। अब बहुत

415
00:28:54,160 --> 00:28:58,240
सारा इस वक्त भ्रम ये फैलाया जा रहा है कि भाई आप बस किताब पढ़ लो

416
00:28:58,240 --> 00:29:02,400
और किसी का अनुवाद पढ़ लो तो अनुवादक के ज्ञान से आपने

417
00:29:02,400 --> 00:29:06,480
जो चीज समझ ली यानी कि वो चीज आपको अंडरस्टैंड हो गई वो समझ ली तो

418
00:29:06,480 --> 00:29:10,720
भैया परंपरा से जो आप समझोगे तो उसका जो गढ़ अर्थ है वो

419
00:29:10,720 --> 00:29:14,800
आपको समझ में आएगा जो आप अर्थ समझ रहे हो वो तो आपकी अपनी

420
00:29:14,800 --> 00:29:18,800
बुद्धि के अनुसार है लेकिन क्या वो वाकई में सही भी है ये यहां पर

421
00:29:18,800 --> 00:29:22,960
बात जी इसमें मैं एक बात और जोड़ दूं

422
00:29:22,960 --> 00:29:27,040
एक एक एग्जांपल छोटा सा जोड़ दूं मैं जैसे वह आर्य समाज का

423
00:29:27,040 --> 00:29:31,120
वो ले रही हैं बीच में वचन मतलब अपना सहारा डूबते का

424
00:29:31,120 --> 00:29:34,240
सहारा अलंकार हमारा

425
00:29:34,240 --> 00:29:38,240
तो अगर वो ले रही हैं तो अब बात यह है

426
00:29:38,240 --> 00:29:42,480
कि दयानंद जी तो अब है नहीं अभी मैं दयानंद जी की ही बात को तोड़

427
00:29:42,480 --> 00:29:46,640
मरोड़ करके अगर उनकी वह जो कह रहे थे मैं जानता हूं और मैं बदल के कहने

428
00:29:46,640 --> 00:29:50,800
लूंगा तो कोई इनकी तरफ से यह नहीं कह सकता है अकाट रूप से कि नहीं दयानंद

429
00:29:50,800 --> 00:29:55,040
जी ने यह कहा था यह नहीं कहा बताइए जैसे कि दयानंद जी ने मुक्ति

430
00:29:55,040 --> 00:29:59,760
वाला जो इनका चैप्टर है शायद शायद सातवा है कि 11वा समुल्लास

431
00:29:59,760 --> 00:30:03,760
उसमें दयानंद जी ने कहा है जो सबसे पहली स्थिति है वो व्यवहार में ना आ

432
00:30:03,760 --> 00:30:07,760
सकने वाली है यहां खत्म हो गया आर्य समाज का सिद्धांत दयानंद

433
00:30:07,760 --> 00:30:11,760
जी ने ही कह दिया और ऋग्वेद का वचन उद्धत

434
00:30:11,760 --> 00:30:15,760
मतलब वहां पर रखते प्रस्तुत करते हुए कहा अब जब व्यवहार में ना आ सकने

435
00:30:15,760 --> 00:30:19,920
वाली स्थिति है प्रलय काल में उसके

436
00:30:19,920 --> 00:30:24,080
बाद व्यवहार में आ सकने वाली स्थिति हो गई।

437
00:30:24,080 --> 00:30:28,080
जब शुरुआत है तो ईश्वर भी व्यवहार में ना आ सकने वाला

438
00:30:28,080 --> 00:30:32,400
है। हम मांडक्य उपनिषद

439
00:30:32,400 --> 00:30:37,200
तो जब व्यवहार में ना आ सकने वाला ईश्वर का

440
00:30:37,200 --> 00:30:41,280
जो प्रारंभिक लक्षण है व्यवहार में ना आ सकने वाला।

441
00:30:41,280 --> 00:30:45,440
अब वो उसके बाद व्यवहार में आया। कहीं पर क्रियाशील

442
00:30:45,440 --> 00:30:49,360
हुआ, यह हुआ, शक्तिमान हुआ। यह सब व्यवहार में आ गया।

443
00:30:49,360 --> 00:30:53,440
व्यवहार में आया ना? व्यवहार में ना आ सकने वाले से व्यवहार में आया। यह

444
00:30:53,440 --> 00:30:57,760
क्या है? अवतार। अब इसको वो लोग अगर कुछ कुछ शब्द

445
00:30:57,760 --> 00:31:01,760
शब्द वगैरह से जोड़ करके ये कहने का प्रयास करें कि नहीं नहीं यहां पे गलत व्याख्या है। आप

446
00:31:01,760 --> 00:31:06,000
गलत व्याख्या कर रहे हो। मैं कहूंगा भाई यही कहा है उन्होंने। कैसे सिद्ध अकाट

447
00:31:06,000 --> 00:31:10,240
रूप से सिद्ध नहीं कर। तुमको जो मानना है मानो ये कह के जाए। हम अकाट रूप से सिद्ध करेंगे

448
00:31:10,240 --> 00:31:14,400
क्योंकि हम परंपरा को मानते हैं। आपको अंत में कहना होगा जो मानना हो मानो।

449
00:31:14,400 --> 00:31:18,400
यह जो मानना हो मानो कह के हम नहीं आएंगे जाकिर नायक के सामने से। हम

450
00:31:18,400 --> 00:31:22,560
नहीं आएंगे वहां नास्तिक के सामने से उसको निरुत्तर करके आएंगे

451
00:31:22,560 --> 00:31:27,120
तुम आओगे वहां से यह कह जो मानना हो जैसे इस व्यवहार और व्यवहार से

452
00:31:27,120 --> 00:31:31,440
अव्यवहारिक से व्यवहार में आने वाले विषय में तुम्हें मानना यही करना पड़ेगा

453
00:31:31,440 --> 00:31:35,520
हम कहेंगे भैया दयानंद जी ने तो यह मान लिया बिना व्यवहार में आ सकने वाला तो फिर

454
00:31:35,520 --> 00:31:39,760
वही पृथ्वी के लिए व्यवहार में कैसे आ रहा है सूर्य चंद्रमा इत्यादि इन सब के लिए व्यवहार

455
00:31:39,760 --> 00:31:43,760
में कैसे आ रहा है व्यवहार का विषय बन रहा है ना इन सबका तभी तो सृष्टि की रचना

456
00:31:43,760 --> 00:31:48,400
हो रही है क्रियाशील ईश्वर इक्वल टू व्यवहार इक्वल टू सगुण निराकार

457
00:31:48,400 --> 00:31:52,480
व्यवहार चालू हो गया। तो व्यवहार में ना आ सकने वाली स्थिति उन्होंने मान करके

458
00:31:52,480 --> 00:31:56,480
अवतार को तो खुद ही मान रखा है। ये अवतार हो गया ईश्वर का। व्यवहार में ना आ सकने

459
00:31:56,480 --> 00:32:00,960
वाले ईश्वर ने व्यवहार में आ सकने वाला अवतार ले लिया। तभी उसने

460
00:32:00,960 --> 00:32:04,400
अब बात यह है कि अगर ये ये कहेंगे नहीं इन्होंने यह

461
00:32:04,400 --> 00:32:08,400
नियम माना है। दयानंद जी ने ये माना है तो यहां पर वो ये क्यों कहेंगे? तो हम

462
00:32:08,400 --> 00:32:12,400
ये कहेंगे दयानंद जी ने यहां पे गलती कर दी। हम ये क्यों कहेंगे

463
00:32:12,400 --> 00:32:16,560
दयानंद जी ने वहां पे वो नियम माना है तो यहां पे भी सही लिखा होगा। हम यह सिद्ध

464
00:32:16,560 --> 00:32:20,800
करेंगे कि देखो दयानंद जी दो तरह की बातें करने वाले हैं। दयानंद जी कोई अंतिम प्रमाण

465
00:32:20,800 --> 00:32:24,880
थोड़ी ना है। हम हम यह कहेंगे दयानंद जी अपने ही सिद्धांतों में एक दूसरे

466
00:32:24,880 --> 00:32:29,120
के विरोधाभासी सिद्धांत दे दिए। हम क्यों माने कि उन्होंने वो सिद्धांत माना तो उसके आलोक

467
00:32:29,120 --> 00:32:33,280
में सिद्धांत देखें। क्यों? हम तो दयानंद जी को गलत सिद्ध करने आए

468
00:32:33,280 --> 00:32:37,520
हैं ना। दयानंद जी गलत थे। उन्होंने ये कह दिया यहां पे।

469
00:32:37,520 --> 00:32:42,080
लो तो तुम वहां पे अकाट रूप से हमें निरुत्तर नहीं कर पाओगे। तो परंपरा

470
00:32:42,080 --> 00:32:46,880
वहां पर भी तुमको माननी पड़ेगी कि दयानंद जी की तरफ से बोलने वाला कौन है? मैं।

471
00:32:46,880 --> 00:32:51,200
अब क्या हुआ? यहां तुमने दयानंद जी की ओर से परंपरा मान ली। और

472
00:32:51,200 --> 00:32:55,280
जो पहले से परंपरा चली आ रही जिसका विरोध दयानंद जी कर रहे हैं उसको तुम नहीं मानोगे।

473
00:32:55,280 --> 00:32:59,360
यही तो इस्लाम है। इस्लाम ने क्या किया कि मेरे से पहले

474
00:32:59,360 --> 00:33:03,520
कुरान कहती है मेरे से पहले आई हुई सभी किताबों को मैं

475
00:33:03,520 --> 00:33:07,520
सत्यापित करूंगी। यानी कि वह यह मान रही है कि अभी तक वह जो

476
00:33:07,520 --> 00:33:11,600
परंपरा से ज्ञान था वह सब नष्ट हो चुका है। मैं सत्यापन करूंगी। अब कुरान

477
00:33:11,600 --> 00:33:16,000
को मानने वाले लोग यह दावा नहीं दावा करेंगे हमसे आकर के नहीं कुरान के

478
00:33:16,000 --> 00:33:19,600
कुरान के संदर्भ से जो हम बताएंगे वो चैन ऑफ नरेशन से जुड़े हुए

479
00:33:19,600 --> 00:33:23,600
वो कुरान का अर्थ होगा। क्यों भाई? जब तुम परंपरा को मानने वाले हो ही नहीं।

480
00:33:23,600 --> 00:33:29,360
तुमने अपने से पहले की परंपरा को खुद नष्ट अमान्य कर दिया।

481
00:33:29,360 --> 00:33:33,440
तो फिर तुम अब क्यों परंपरा को मान रहे हो अपने विषय में? ये ध्यान

482
00:33:33,440 --> 00:33:37,680
रखने वाली बात है। जी मैं कहूंगा थोड़ा सा ओमकार जी आप बोले थोड़ा सा

483
00:33:37,680 --> 00:33:41,840
जी प्रणाम मैंने विषय जो

484
00:33:41,840 --> 00:33:45,840
है इस वीडियो के मैंने एक जगह लिख के ऐसे अपने पॉइंट्स लिखे हुए

485
00:33:45,840 --> 00:33:50,000
हैं तो परंपरा क्यों आवश्यक है ये पहला क्वेश्चन है तो उसप मैं बाद

486
00:33:50,000 --> 00:33:54,080
में आऊंगा एक्चुअली में नीचे के पहले अपनी तरफ से मतलब मैं बताता हूं अभी

487
00:33:54,080 --> 00:33:59,120
मुझे लगता है और बाद में क्योंकि थोड़ा बड़ा होगा इसलिए वो पहले क्लियर कर

488
00:33:59,120 --> 00:34:03,280
तो कौन सी परंपरा वास्तविक है तो श आंसर यही

489
00:34:03,280 --> 00:34:07,280
सच्चिदानंद प्राप्ति के लिए धर्म एक ही विधा है। सो ऐसी

490
00:34:07,280 --> 00:34:11,600
कोई भी परंपरा जो धर्म का पूर्ण पालन करने में स्वयं सक्षम

491
00:34:11,600 --> 00:34:15,680
हो करती आई हो वही पर फिर परंपरा आ जाती है। अभी भी

492
00:34:15,680 --> 00:34:20,080
कर रही है और आगे भी करने की प्रामाण्य बुद्धि कम से कम वैसे एफर्ट

493
00:34:20,080 --> 00:34:24,800
मतलब प्रयास भी करती है अभ्यास भी करती है। तो उसे

494
00:34:24,800 --> 00:34:28,960
मतलब मुझे लगता है कि उसको वास्तविक मानने में कोई प्रॉब्लम नहीं होनी

495
00:34:28,960 --> 00:34:33,200
चाहिए। एक बाद में शंकराचार्य परंपरा का महत्व

496
00:34:33,200 --> 00:34:34,880
क्या है? तो सार्वभौमिक

497
00:34:34,880 --> 00:34:39,120
परंपरा है। जैसे उदाहरण के लिए पंच परमेश्वर मंत्रों की दीक्षा

498
00:34:39,120 --> 00:34:43,520
देने में समर्थ है। उदाहरण के लिए जो अन्य दर्शन

499
00:34:43,520 --> 00:34:47,680
है विशिष्ट अद्वैत और जितने भी बाकी के जो

500
00:34:47,680 --> 00:34:51,680
है उनका वो खंडन नहीं करती बल्कि उसको क्रमिक रूप में

501
00:34:51,680 --> 00:34:55,920
देखते अंतिम निर्णय अद्वैत को माना जाता है। तो ऐसा नहीं है कि भाई

502
00:34:55,920 --> 00:35:00,240
वो एकदम बिल्कुल है ही नहीं। एक्चुअली उसी का अवलंबन

503
00:35:00,240 --> 00:35:04,320
लेते हुए स्टेप बाय स्टेप कोई भी व्यक्ति अद्वैत तक परा भक्ति तक

504
00:35:04,320 --> 00:35:08,320
पहुंचेगा। तो यह बात हुई मेरा विशेष

505
00:35:08,320 --> 00:35:12,400
अट्रैक्शन अद्वैत की तरफ कदाचित पूर्व संस्कारों की वजह से और इस

506
00:35:12,400 --> 00:35:16,560
जन्मों में मैंने ये देखा कि बिना किसी लीफ के केवल

507
00:35:16,560 --> 00:35:21,520
तर्क के आधार पर कैसे भगवान को यह सिद्ध कर पा रहे क्योंकि

508
00:35:21,520 --> 00:35:25,520
आम तौर पर होता है कोई भी जैसे अन्य परंपराएं होती है। मैं किसी का अपमान नहीं कर

509
00:35:25,520 --> 00:35:29,600
रहा हूं। लेकिन टिपिकली क्या होता है कि वो होता है ना कि पहले इस्तेमाल

510
00:35:29,600 --> 00:35:33,680
करें फिर विश्वास करें वो वाली बात पहले आप भगवान नाम जप के तो देखो

511
00:35:33,680 --> 00:35:37,760
फिर आपको एक एक इफेक्ट आएगा ऐसे करके लेकिन

512
00:35:37,760 --> 00:35:42,080
अगर कोई नास्तिक यदि ये कहे कि मैं भाई क्यों क्यों जपू मैं

513
00:35:42,080 --> 00:35:46,160
कारण क्या है मुझे करना ही नहीं है उतने एक्सट्रीम में अगर कोई

514
00:35:46,160 --> 00:35:50,000
चला जाए तो वहां पर फिर शंकराचार्य जी का फिर वहां के

515
00:35:50,000 --> 00:35:54,080
वहां से उनकी पावर समझ में आती है कि बिना किसी प्रायर बिलीफ अगर

516
00:35:54,080 --> 00:35:58,400
कोई प्योर प्योर नास्तिक है तो उसको कैसे जवाब

517
00:35:58,400 --> 00:36:02,400
देना है कि जैसे भैया बताते कि सच्चिदानंद क्या है पहले बताया फिर

518
00:36:02,400 --> 00:36:06,480
धर्म की व्याख्या दी फिर ये कहा कि अच्छा इतनी बढ़िया व्याख्या

519
00:36:06,480 --> 00:36:10,480
जहां से आपको मिल रही है तो फिर वो पूरा पैकेज आपको एक्सेप्ट

520
00:36:10,480 --> 00:36:14,560
करना पड़ेगा वहां पर फिर आप सिलेक्टिव नहीं हो सकते तो इस

521
00:36:14,560 --> 00:36:18,800
तरीके की मतलब ये जो है जैसे मतलब मैं सीख रहा हूं

522
00:36:18,800 --> 00:36:23,120
तो मुझे समझ में आने लगी इसलिए फिर मेरा वो और मजबूत हो गया शंकराचार्य परंपरा

523
00:36:23,120 --> 00:36:27,440
की और मतलब भक्ति मेरी उससे बल मिल गया।

524
00:36:27,440 --> 00:36:31,520
बाद में नेक्स्ट क्वेश्चन है गुरु शिष्य संबंध क्यों अनिवार्य है?

525
00:36:31,520 --> 00:36:35,840
अनिवार्य मतलब जहां तक मेरी समझ है बिना गुरु के शिष्य अनाथ है।

526
00:36:35,840 --> 00:36:40,080
वहां पर खत्म हो जाती है। अनाथ है। बिल्कुल अनाथ है। कुछ नहीं करता।

527
00:36:40,080 --> 00:36:44,640
आज की डेट में कई सारे लोग देहधारी

528
00:36:44,640 --> 00:36:48,800
गुरु को अवॉइड करते हैं। क्योंकि कहीं ना कहीं लगता है कि गुरुदेव डांट

529
00:36:48,800 --> 00:36:53,040
मार देंगे। हमने अगर कुछ गड़बड़ की गलत कर दिया तो थोड़ा सा नाराज

530
00:36:53,040 --> 00:36:57,200
हो जाए। डांट मार देंगे। इसलिए कई बार मतलब जैसे कदाचित

531
00:36:57,200 --> 00:37:01,280
दीदी जी विषय में मतलब जिस जिनकी प्रेरणा से ये टॉपिक चल रहा है।

532
00:37:01,280 --> 00:37:05,120
कभी कभी कभी ऐसा भी होता है कि अश्रद्धा ना हो जाए

533
00:37:05,120 --> 00:37:09,360
या डाउट हो जाए क्योंकि आजकल ऐसा हो भी रहा है तो इस वजह से भी वो देहधारी

534
00:37:09,360 --> 00:37:13,600
गुरु में श्रद्धा नहीं रखते। बिल्कुल बिल्कुल

535
00:37:13,600 --> 00:37:17,680
तो लेकिन उसमें भी तो जैसे गुरु गीता या कहां पर वहां पर

536
00:37:17,680 --> 00:37:21,760
भी गुरु से विषय जितने भी शास्त्र है वहां पर उन्होंने बताया

537
00:37:21,760 --> 00:37:25,920
कि अगर मान के चलो कि गुरु गड़बड़ निकल गया तो फिर आप बिना कोई

538
00:37:25,920 --> 00:37:30,480
इंसल्ट किए पे आप यू स्टेप बैक आप अपने आप को डिसोसिएट

539
00:37:30,480 --> 00:37:34,560
कर लो अपमान करने की जरूरत नहीं है अच्छा मान ले किसी पाखंडी से

540
00:37:34,560 --> 00:37:38,640
कोई लेजिटमेट मंत्र मिल जाता है किसी को अब जैसे इस वालों का

541
00:37:38,640 --> 00:37:42,800
हरे कृष्ण महामंत्र तो मैंने गुरुदेव से ही किसी प्रवचन में सुना

542
00:37:42,800 --> 00:37:47,040
था कि हो सकता है कि गुरुदेव आपके जो बाबा जी थे वो फेक निकले

543
00:37:47,040 --> 00:37:51,280
लेकिन जो मंत्र आपको दिया गया वो सही निकला तो आप उसी को कैरी करिए

544
00:37:51,280 --> 00:37:55,520
और जो आपके सही वाले गुरुदेव है वो प्रकट हो जाएंगे आज नहीं तो ऐसे

545
00:37:55,520 --> 00:37:59,520
मतलब तो जितनी चीजें है तो वहां पर शास्त्र सम्मत

546
00:37:59,520 --> 00:38:03,840
सोलशन भी दिया गया है क्योंकि पाखंड तो है ही आज की डेट में

547
00:38:03,840 --> 00:38:08,160
तो हां तो उसके लिए सोशल भी है लेकिन कई बार मुझे ऐसा लगता है कि

548
00:38:08,160 --> 00:38:12,240
लोग जानबूझ के देहधारी गुरु को अवॉयड करते जैसे दीदी का भी बोल रहे थे

549
00:38:12,240 --> 00:38:16,400
कि आदि शंकराचार्य जी मेरे बस ऑलमोस्ट मेरा डन हो गया कि

550
00:38:16,400 --> 00:38:20,320
जैसे जी मेरे गुरु है या शिव मेरे गुरु है तो गुरुदेव

551
00:38:20,320 --> 00:38:24,560
ने ये कहा कि भाई आपका भगवान भी आपको ट्रांजक्शनबल

552
00:38:24,560 --> 00:38:28,960
नहीं है हमारी उतनी तो औकात है नहीं कि सीधा सीधा बात करे उनसे और आपने गुरुदेव

553
00:38:28,960 --> 00:38:33,520
को भी वहां बिठा दिया तो अब बात किससे तो व्यवहारिक

554
00:38:33,520 --> 00:38:37,920
धरातल पे हमें इसलिए देहधारी गुरु चाहिए ताकि अगर गलती हमारी

555
00:38:37,920 --> 00:38:42,160
हो गई गड़बड़ हो गई तो हमें वो रस्ते पर लाए कि भाई ऐसा नहीं ऐसे

556
00:38:42,160 --> 00:38:46,240
करना है। ये लास्ट पॉइंट ये कि

557
00:38:46,240 --> 00:38:50,400
समाज क्यों भटक रहा है कि यही बेसिकली गुरु ग्रंथ गोविंद से वंचित रहने

558
00:38:50,400 --> 00:38:54,400
के कारण भटक रहा है। तो शिवा जी आप अपना दीजिए। फिर मैं

559
00:38:54,400 --> 00:38:58,640
पहले वाले पे आता हूं। परंपरा आवश्यक थी। आप बोलिए। मैं मैं

560
00:38:58,640 --> 00:39:02,640
एक चीज बताऊं। यह जो व्यवहारिक गुरु

561
00:39:02,640 --> 00:39:06,800
को स्वीकार ना करने की जो चीज है यह आज की नहीं है। बहुत

562
00:39:06,800 --> 00:39:10,880
पहले की है और व्यवहारिक गुरु को स्वीकार ना करना

563
00:39:10,880 --> 00:39:15,040
ही मोहम्मद है। क्योंकि भाई आपको व्यवहार में मिल रहा है कुछ बताने

564
00:39:15,040 --> 00:39:19,280
वाला। अब हम उस व्यवहारिक को नहीं मानेंगे। अपना कोई जिब्राइल

565
00:39:19,280 --> 00:39:23,680
आया या जो भी है वो इस्लाम बन गया। व्यवहारिक गुरु को ठुकराना

566
00:39:23,680 --> 00:39:28,160
कोई नई बात नहीं है। जिसको भी अपने मन की चलानी होती है धर्म के नाम पर

567
00:39:28,160 --> 00:39:32,160
वह व्यवहारिक गुरु को ठुकराने का प्रयास करता है। पहली बात अब

568
00:39:32,160 --> 00:39:35,360
इसमें तर्क क्या है कि व्यवहारिक गुरु को

569
00:39:35,360 --> 00:39:39,680
ठुकरा करके आपने एक पारलौकिक गुरु को स्वीकार

570
00:39:39,680 --> 00:39:43,760
कर लिया। ठीक है? अच्छी बात है। दूसरों के व्यवहार में वो आ नहीं

571
00:39:43,760 --> 00:39:48,720
रहा है। प्रमाण है नहीं उसका। आपका अपना जो

572
00:39:48,720 --> 00:39:52,720
व्यक्तिगत एक अनुभव है कि हमको कोई शक्ति आ

573
00:39:52,720 --> 00:39:56,720
रही है कुछ दे रही है उसको तुम लोगों के समक्ष इसको मान

574
00:39:56,720 --> 00:40:00,720
लो मैंने सपना देखा इसको मान लो शिवजी ने मुझे मंत्र दिया इसको मान

575
00:40:00,720 --> 00:40:05,280
लो मुझे मां भगवती ने मंत्र दिया इसको मान लो अपने आप पर्सनल

576
00:40:05,280 --> 00:40:10,240
एक्सपीरियंस को लोगों को कहना चाहते हो कि ये प्रमाण है

577
00:40:10,240 --> 00:40:14,240
और अपने तो पर्सनल एक्सपीरियंस को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे

578
00:40:14,240 --> 00:40:18,320
हो और फिर उनको दबाना किसके नीचे चाह रहे हो? जो प्रत्यक्ष

579
00:40:18,320 --> 00:40:22,400
रूप से वेद के मंत्र हमें दिखाई दे रहे हैं जो पढ़ने में आ रहे हैं जो हमारे व्यवहार का

580
00:40:22,400 --> 00:40:26,400
विषय है। उसके नीचे आप लोगों को दबाना चाह रहे हो

581
00:40:26,400 --> 00:40:30,480
और अर्थ की दृष्टि से अपना क्या ले आ रहे हो? अपनी व्यवहारिक चीजें नहीं ला रहे हो।

582
00:40:30,480 --> 00:40:34,800
अपनी ला रहे हो भाई अलौकिक चीजें जो दूसरे के व्यवहार का विषय नहीं है। दूसरा क्या जाने

583
00:40:34,800 --> 00:40:38,880
कि तुमने भैया उसको वाकई में वो परम शक्ति आई है तुम्हारे

584
00:40:38,880 --> 00:40:43,360
पास। वो क्यों विश्वास करें? उसको तुम प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो।

585
00:40:43,360 --> 00:40:47,760
ठीक है? और उनको किसके नीचे दबाना चाह रहे हो?

586
00:40:47,760 --> 00:40:50,400
किसके नीचे? कि भाई

587
00:40:50,400 --> 00:40:54,400
ये ये वेद में ये लिखा है। देखो इस वेद में लिखा है। इसका अर्थ ये होता

588
00:40:54,400 --> 00:40:58,880
है जो मैं बता रहा हूं। ये अर्थ कहां से मिला? मेरे वो पारलौकिक गुरु से।

589
00:40:58,880 --> 00:41:03,520
ठीक? ये तो सिस्टम हो गया। अब इसका एग्जीक्यूशन क्या है? वो भी समझिए।

590
00:41:03,520 --> 00:41:08,080
कि अवतार को और व्यवहारिक गुरु को समाजियों

591
00:41:08,080 --> 00:41:12,560
ने क्यों ठुकराया? अवतार को और व्यवहारिक गुरु को समाजियों

592
00:41:12,560 --> 00:41:16,640
ने क्यों ठुकया? इसलिए ठुकराया कि इन दोनों ही चीजों को मान लेंगे तो प्रत्यक्ष

593
00:41:16,640 --> 00:41:20,720
प्रमाण हो जाएगा हमारे पास हमारी बातों को काटने के लिए अगर इनमें

594
00:41:20,720 --> 00:41:24,800
से एक परंपरा प्राप्त आचार्य की आवश्यकता मान लेंगे तो

595
00:41:24,800 --> 00:41:29,120
हमारे सिद्धांतों को काट दिया जाए कोई ना कोई आकर के परंपरा प्राप्त आचार्य काट देगा तो इसलिए परंपरा

596
00:41:29,120 --> 00:41:33,280
आउट फिर अवतार को मान लेंगे तो अवतार आकर के कह देगा भैया यह

597
00:41:33,280 --> 00:41:37,280
हमारे गुरु हैं वशिष्ठ है यह हमारे शंकराचार्य हमारे गुरु हैं जो भी है अवतार

598
00:41:37,280 --> 00:41:41,520
को अगर मान लेंगे तो वह आकर के प्रत्यक्ष प्रमाण दे देगा तो आग की लपट

599
00:41:41,520 --> 00:41:45,600
को मानो ही नहीं आग की लपट को मानो ही नहीं

600
00:41:45,600 --> 00:41:50,480
तो काट की लकड़ी में अग्नि दाहक क्षमता होने की सिद्धि हो जाएगी

601
00:41:50,480 --> 00:41:54,560
इसलिए लपट को ही नकार दो तो क्या है अगर हमें धर्म के नाम

602
00:41:54,560 --> 00:41:58,720
पर वेद के नाम पर अपने मनमाने अर्थ प्रस्तुत करने हैं तो क्या करो

603
00:41:58,720 --> 00:42:02,720
ये दो जो प्रत्यक्ष चीजें आ रही है प्रत्यक्ष प्रमाण जो आ रहा है अग्नि का दाहक

604
00:42:02,720 --> 00:42:05,600
क्षमता का उसको नकार दो नहीं नहीं अग्नि लपट

605
00:42:05,600 --> 00:42:09,600
बन ही नहीं सकती दाहक क्षमता वो आंखों का विषय बनने वाला रूप

606
00:42:09,600 --> 00:42:13,840
नहीं ले सकती और इसी प्रकार से परंपरा है तो क्या हुआ? वो तो वेदों

607
00:42:13,840 --> 00:42:17,840
के विरुद्ध जा रहे हैं। अरे भैया वेदों के विषय में तो वही प्रमाण है ना जिन

608
00:42:17,840 --> 00:42:21,920
पर जिनको जिनको तुम आस्था रख रहे हो। अब इससे होता क्या है? इसका एग्जीक्यूशन

609
00:42:21,920 --> 00:42:26,800
क्या होता है? इसका एग्जीक्यूशन यही होता है कि हमने वो एक ड्रामा

610
00:42:26,800 --> 00:42:30,800
स्क्रिप्ट आधी पदरी लिख ली है और हम लोग बहुत जल्द

611
00:42:30,800 --> 00:42:36,800
कुछ शॉर्ट फिल्म्स लेकर के आएंगे। तो उसमें क्या है कि

612
00:42:37,040 --> 00:42:41,680
एक जगह पर भाई बहन का विवाह चल रहा है। ठीक है?

613
00:42:41,680 --> 00:42:45,760
स्वयं श्री रामचंद्र जी आ गए। वह

614
00:42:45,760 --> 00:42:49,840
भ्रमण के लिए निकले हैं और रामचंद्र जी वहां पहुंचे और

615
00:42:49,840 --> 00:42:54,080
वहां पहुंच के बोलते हैं कि आप ये क्या करा रहे हो? भाई भाई बहन का विवाह करा रहे क्या दिक्कत

616
00:42:54,080 --> 00:42:58,160
है? अरे नहीं गलत है। अरे कैसे गलत है? अरे शास्त्रों का अर्थ ये शास्त्रों का अर्थ

617
00:42:58,160 --> 00:43:02,160
हमने निकाला ना। ब्रह्मा कुमारी प्रजापति ब्रह्मा आकर बता गए हमको। ये अर्थ है हो सकता

618
00:43:02,160 --> 00:43:06,480
है। विवाह हो सकता है। अरे मैं राम हूं। मैं भगवान स्वयं आया हूं। इस

619
00:43:06,480 --> 00:43:10,960
अरे अवतार नहीं ले सकता। ईश्वर तुम हो ही नहीं सकते। अच्छा

620
00:43:10,960 --> 00:43:14,960
मैं राम ही हूं। मैं क्या करके दिखाऊं तुम बताओ? अरे भैया जो सर्वव्यापक है वो एक

621
00:43:14,960 --> 00:43:19,280
जगह कैसे आ जाएगा? अच्छा तो उसका वहां पे होना

622
00:43:19,280 --> 00:43:21,040
उसका वहां पे होना उसके ईश्वरत्व

623
00:43:21,040 --> 00:43:25,200
में बाधक है। इस पॉइंट का सहारा लेकर के जो सर्व्यापक है वो यहां कैसे

624
00:43:25,200 --> 00:43:29,360
आ जाएगा? तो इसको नकार वहां पे प्रजापति प्रजापति

625
00:43:29,360 --> 00:43:34,320
ब्रह्मा जी चले गए लेकिन राम जी नहीं चल रहे आपको अवतार के। हां हां हां

626
00:43:34,320 --> 00:43:38,400
वहां आ गए। वहां आ गए। जो सब नहीं अभी आर्य समाज

627
00:43:38,400 --> 00:43:42,480
की दृष्टिकोण से जो सब जगह वो यहां कैसे हो सकता है? अब वो जब सब जगह हो गया

628
00:43:42,480 --> 00:43:46,560
तो भैया अब तो वो आ नहीं सकता हमको सब रोकने के लिए हमारी बात को काटने के लिए आ ही

629
00:43:46,560 --> 00:43:50,560
नहीं सकता कोई परंपरा पे विश्वास नहीं है और ईश्वर के अवतार पे विश्वास नहीं है।

630
00:43:50,560 --> 00:43:54,640
ईश्वर अगर आ जाएगा अवतार लेकर के तो हम ऐसे मना कर दे वो तो सर्वव्यापी है। एक देसी

631
00:43:54,640 --> 00:43:58,640
हो नहीं सकता। और सर्वव्यापी आपको बता नहीं सकता आ के। सर्वव्यापी

632
00:43:58,640 --> 00:44:03,040
होते हुए वो आपके व्यवहार का विषय बन नहीं सकता। तो इस खेल में इस लूप

633
00:44:03,040 --> 00:44:07,040
में डाल के अपनी मनमानी शास्त्रों के नाम से चलाने के

634
00:44:07,040 --> 00:44:11,440
लिए यह व्यवहारिक गुरु और व्यवहारिक ईश्वर के स्वरूप को मना करते आइए

635
00:44:11,440 --> 00:44:15,600
लोग और आज जो भटका हुआ हिंदू है, दिशाहीन हिंदू है, संप्रदाय

636
00:44:15,600 --> 00:44:19,920
विहीन हिंदू है, वो भी यही कर रहा है कि परंपरा को क्यों नहीं मानना

637
00:44:19,920 --> 00:44:24,080
इसलिए नहीं मानना है। और अवतार को भी कब तक मान रहा है? जब तक अवतार आकर के तुमको

638
00:44:24,080 --> 00:44:28,240
रोक नहीं रहा है। जिस दिन भगवान श्री राम, कल्कि इत्यादि के तुम भगवान नहीं

639
00:44:28,240 --> 00:44:32,320
हो मैं नहीं मानूंगा। यह चालू हो जाएंगे ये लोग जो ये कह रहे हैं।

640
00:44:32,320 --> 00:44:36,160
तो यह बात है कि यह विरोध

641
00:44:36,160 --> 00:44:40,400
करने का कारण यही होता है कि इनको अपनी चलानी है वेदों के नाम पे

642
00:44:40,400 --> 00:44:44,560
सनातन के नाम पे। अच्छा दूसरी बात यह है कि चलो विकृति आ गई। मान लिया

643
00:44:44,560 --> 00:44:48,560
मैंने कई अपनी उसमें कहा। अरे तो भैया वेदों के नाम से क्यों प्रस्तुत कर रहे हो?

644
00:44:48,560 --> 00:44:52,640
अपनी आध्यात्मिकता। अपना निजी अनुभव। तुम उसी नाम से क्यों

645
00:44:52,640 --> 00:44:56,880
प्रस्तुत कर रहे हो? जो नाम ख्यापित है पहले से। नया नाम लाओ, नया किताब

646
00:44:56,880 --> 00:45:01,040
लाओ, बन जाओ, मोहम्मद बन जाओ, ईसा बन जाओ। फिर हम देखेंगे

647
00:45:01,040 --> 00:45:05,120
तुम्हारे सिद्धांत में कितना दम है। मगर वो पहले से ख्यापित

648
00:45:05,120 --> 00:45:09,200
जो चीज है उसके नाम से करना इसलिए जरूरी है कि भीड़ उसको छोड़कर के इधर

649
00:45:09,200 --> 00:45:13,200
आए। हमारा जो हम जो धर्म विरुद्ध आचरण बता रहे हैं

650
00:45:13,200 --> 00:45:17,360
पशुत्व बता रहे हैं उसको ज्वाइन करें वो जिससे कि हम लोग ज्यादा

651
00:45:17,360 --> 00:45:21,600
संख्या में हो जाए और फिर हम लोग राज करें और उसके भी अंत में वो

652
00:45:21,600 --> 00:45:25,840
गति जो गंतव्य तक ना पहुंचाए उसका कोई अस्तित्व नहीं होता है ट्रेडमल पर दौड़ता

653
00:45:25,840 --> 00:45:30,080
हुआ आदमी उसके भी अंत में तुम अपना ही नुकसान करोगे जी ओमकार

654
00:45:30,080 --> 00:45:34,160
जी जी बस उसमें भी जैसे आर्य समाज का अगर यदि

655
00:45:34,160 --> 00:45:38,160
कोई भाई बहन मुझसे बात करे उनको यही बोलूंगा कि भाई ये जो आप एक देश वाली

656
00:45:38,160 --> 00:45:42,320
आर्गुममेंट जो करते हो ना स्वरूप दृष्टि से राम कण कण

657
00:45:42,320 --> 00:45:46,640
में बसा है। शिव कण कण में बसा है। स्वरूप की दृष्टि से

658
00:45:46,640 --> 00:45:50,800
जब आप किसी अवतार की बात करते हो तो वहां पर वो सगुण साकार

659
00:45:50,800 --> 00:45:51,360
में आ जाते

660
00:45:51,360 --> 00:45:55,360
हैं तो आकार और गुण किसी विशेष देश में हो सकते हैं। तभी

661
00:45:55,360 --> 00:45:59,840
तो ऐसे प्राण जैसे दिखे होंगे ना त्रेता युग में कि भाई ये है

662
00:45:59,840 --> 00:46:03,920
लेकिन यदि उनसे पूछा जाए जैसे भगवान श्री कृष्ण को पूछा गया अर्जुन ने कि अरे

663
00:46:03,920 --> 00:46:07,920
आप दिखाइए दर्शन दीजिए तो फिर उन्होंने दिखा दिया तो उनमें वो

664
00:46:07,920 --> 00:46:11,920
भी एबिलिटी है ना कि यदि कोई भक्त प्रेम से पूछे तो वो

665
00:46:11,920 --> 00:46:16,240
फिर वो वाला दर्शन भी उनका विराट स्वरूप भी दिखा सकते तो

666
00:46:16,240 --> 00:46:20,480
उससे फिर मैं कर देता कि पारमार्थिक लेवल है स्वरूप की कण

667
00:46:20,480 --> 00:46:24,880
कण में बस ये सर्वत्र व्याप्त है हा व्यवहार जो क्योंकि व्यवहार इटसेल्फ

668
00:46:24,880 --> 00:46:29,040
भी तो लोकल है ना जो व्यवहार एक होता है जरूरी थोड़ी है वही व्यवहार

669
00:46:29,040 --> 00:46:33,120
वहां हो शरीर में भी तो वही है ना दिखाई आंख से देता है

670
00:46:33,120 --> 00:46:37,360
ना बात मुंह से करते हैं ना तो वो भी तो लोकलाइज हुआ ना तो

671
00:46:37,360 --> 00:46:41,600
इस तरह से मतलब मैं करके देता हूं और अभी मैं मेन फर्स्ट पॉइंट फिनिश

672
00:46:41,600 --> 00:46:45,600
एक कमेंट है शायद किसी को कोई कन्फ्यूजन हो रही है उसको क्लियर कर दूं

673
00:46:45,600 --> 00:46:49,840
नहीं शिवश एक एक मिनट नहीं शिवश भाई किसी नाटक

674
00:46:49,840 --> 00:46:53,840
में भगवान को मत दिखाना ये उनका अपमान होगा क्योंकि

675
00:46:53,840 --> 00:46:57,840
वो नाटक शास्त्री नहीं है। भगवान की लीला में वह वर्णित

676
00:46:57,840 --> 00:47:01,920
नहीं है। इस बारे में हम परमिशन ले लेंगे आचार्य से।

677
00:47:01,920 --> 00:47:06,480
अगर वह कहेंगे तो दिखाएंगे। नहीं कहेंगे तो नहीं दिखाएंगे। ठीक है। अच्छा

678
00:47:06,480 --> 00:47:11,200
वो ठीक है। आप अपनी बात पूरी कर

679
00:47:11,200 --> 00:47:15,280
दो मिनट में फिनिश करता हूं। ओमकार जी।

680
00:47:15,280 --> 00:47:19,600
क्योंकि यहां पे अभी दिन है। मेरी मीटिंग एक्चुअली होगी थोड़ी देर में दूसरी ऑफिस।

681
00:47:19,600 --> 00:47:23,920
मैं फिनिश करता हूं। तो सबसे मेन क्वेश्चन इसका

682
00:47:23,920 --> 00:47:28,080
मीटिंग का कि परंपरा आवश्यक क्यों थी? जहां तक मेरी समझ है

683
00:47:28,080 --> 00:47:32,080
परंपरा स्वयं सिद्ध है। सांस लेते हैं। हमारे पेरेंट्स सांस लेते

684
00:47:32,080 --> 00:47:36,160
थे। हम भी सांस ले रहे हैं। तो मतलब कोई एक सेट सिस्टम

685
00:47:36,160 --> 00:47:41,040
फॉलो करना। वो हमारे अंदर पहले से ही बसा हुआ है।

686
00:47:41,040 --> 00:47:45,120
सांस लेना। अब इसमें मैं अभी तक धर्म गया भी नहीं हूं। कोई आस्तिक है

687
00:47:45,120 --> 00:47:49,360
नास्तिक है। वहां पर मैं गया ही नहीं हूं। सांस तो लेता है ना भाई। आर्य समाज जी भी सांस

688
00:47:49,360 --> 00:47:53,840
लेता है। भी लेता है, हम भी लेते हैं। ठीक है? तो उस परंपरा को सबने सब्सक्राइब

689
00:47:53,840 --> 00:47:58,560
किया हुआ है। यदि कोई अनसस्क सब्सक्राइब कर दे तो मर जाए वही पर। ठीक है?

690
00:47:58,560 --> 00:48:02,640
तो परंपरा का खंडन करना एक तरह से मृत्यु ही है।

691
00:48:02,640 --> 00:48:06,640
ठीक है? एक बात इसीलिए वो निस्ग सिद्ध प्राकृतिक

692
00:48:06,640 --> 00:48:10,720
भी है जो सास का उदाहरण दिया श्वास लेने का। जहां

693
00:48:10,720 --> 00:48:15,040
तक जनरल सेंस की बात है तो भाई परंपरा तो शास्त्र सम्मत गाइडेंस

694
00:48:15,040 --> 00:48:19,040
किसी भी विद्यार्थी को शिष्य को प्रोवाइड करेगी। ये उसका प्रैक्टिकल एक और

695
00:48:19,040 --> 00:48:21,600
एक अच्छा ये

696
00:48:21,600 --> 00:48:25,680
मतलब बेसिक परंपरा आवश्यक क्यों कुछ और बिंदु मुझे रखने थे

697
00:48:25,680 --> 00:48:30,000
जैसे कई सारे लोग ऐसे अनर्गल प्रलाप जो करते हैं धार्मिक

698
00:48:30,000 --> 00:48:34,160
बुद्धि पतित होने के कारण या फिर अभी तक वहां है ही नहीं

699
00:48:34,160 --> 00:48:38,400
उस लेवल इसलिए ये सब होता है तो मेरा प्रार्थना उनसे

700
00:48:38,400 --> 00:48:43,120
यही कि ज्यादा से ज्यादा नाम जप करें पहले आप किसी चक्करों में मत पड़िए

701
00:48:43,120 --> 00:48:47,440
चाहे आप वर्णाश्रमी हो चाहे कुछ हो क्योंकि क्या है जब तक वो शुद्ध

702
00:48:47,440 --> 00:48:51,680
होगा नहीं ना तब तक वहां जाके भी क्या ही कर लेंगे। ठीक

703
00:48:51,680 --> 00:48:55,760
है? ये होता है तो पहले घिस के नाम जप करो। उसके

704
00:48:55,760 --> 00:48:59,920
बाद यदि भगवान चाहे तो मुक्त नहीं देंगे। यदि भगवान चाहते हैं कि

705
00:48:59,920 --> 00:49:04,080
नहीं आप प्रॉपर धार्मिक रूप से आए। प्रॉपर अपना सब कर्मकांड ज्ञान

706
00:49:04,080 --> 00:49:08,160
कांड भक्ति कांड स्टेप बाय स्टेप जो भी है वो सब करते हुए आए

707
00:49:08,160 --> 00:49:12,320
तो ठीक है वैसे भगवान की इच्छा लेकिन दोनों ही तरफ फिर कल्याण

708
00:49:12,320 --> 00:49:16,480
ही होना है तो इसके लिए मैं जैसे प्रेमंद जी नाम परफस करते हैं

709
00:49:16,480 --> 00:49:20,720
मैं भी प्रार्थना पूर्वक नाम पे बोलूंगा कि स्पेशली जैसे

710
00:49:20,720 --> 00:49:24,880
दीदी ने बात कही थी ऐसे लोगों के लिए जो भी वहां तक पहुंच

711
00:49:24,880 --> 00:49:29,040
चुके भगवान करे उनका चलता रहे आगे और कल्याण होगा उनके

712
00:49:29,040 --> 00:49:33,200
लिए नहीं कह रहा हूं एक बात बाद ने जो सेुलर शब्द आपने

713
00:49:33,200 --> 00:49:36,640
यूज़ किया ना आप थोड़ा सा गूगल एआई वगरा से पूछ

714
00:49:36,640 --> 00:49:41,040
लीजिए। सेुलर टर्म भारतीय कॉन्टेक्स्ट में थोड़ी अलग है।

715
00:49:41,040 --> 00:49:45,360
उसकी जो ओरिजिनल डेफिनेशन है यूरोप से ये टर्म आती है सेुलर की

716
00:49:45,360 --> 00:49:49,600
बेसिकली स्टेट और लॉ का सेपरेशन ये

717
00:49:49,600 --> 00:49:53,840
है मूल में। अब हमारे इसमें ये फिट ही नहीं है क्योंकि

718
00:49:53,840 --> 00:49:57,920
हमारे लिए गवर्नेंस के लिए लॉ के लिए लौकिक धरातल पर

719
00:49:57,920 --> 00:50:01,920
मनुवाद जैसे है मनुस्मृति और और अन्य जैसे

720
00:50:01,920 --> 00:50:06,000
शुक्र नीति या जो भी मतलब गुरुदेव जैसे उदाहरण देते हैं कि मैनेजमेंट

721
00:50:06,000 --> 00:50:10,240
करने के लिए एडमिनिस्ट्रेशन करने के लिए हमारे धर्म में ऑलरेडी प्रोविजन

722
00:50:10,240 --> 00:50:14,240
है तो वहां सेपरेशन की जरूरत ही नहीं है। इसलिए जैसे गुरुदेव

723
00:50:14,240 --> 00:50:18,560
भी कह सेुलर शब्द वंदा पुत्र टाइप है मतलब ऐसे ही है। उसका कोई सरफेर

724
00:50:18,560 --> 00:50:22,560
नहीं है। उसका कोई अर्थ ही नहीं है। अभाव अभाव हां तो धर्म की दृष्टि

725
00:50:22,560 --> 00:50:26,720
से इसीलिए वो ऐसा सिद्ध होता है क्योंकि हमारे इसमें वो प्रोविजन है अन्य

726
00:50:26,720 --> 00:50:30,720
तंत्र में उनको सेुलर लाना पड़ा मे बी बिकॉज़ उनके पास

727
00:50:30,720 --> 00:50:34,800
वो प्रोविजन नहीं है या फिर उनको लगता है कि भाई हमारे पास

728
00:50:34,800 --> 00:50:38,880
ऐसी कोई है नहीं सिस्टम तो चलो कुछ हम लोग नया कर देते ये सोच

729
00:50:38,880 --> 00:50:43,200
के उन्होंने वहां पे चालू किया लेकिन भारतीय हिंदू ये रेलेवेंट

730
00:50:43,200 --> 00:50:47,280
है ही नहीं एक बात मतलब लौकिक धरातल के लिए ये है मनुस्मृति

731
00:50:47,280 --> 00:50:51,520
वगरा और बाद में आगे जाके यमराज जी न्याय करे या फिर भगवान न्याय

732
00:50:51,520 --> 00:50:52,320
करे।

733
00:50:52,320 --> 00:50:56,560
ठीक है? ये बात है। जहां तक ये जितनी ऑर्गेनाइजेशन

734
00:50:56,560 --> 00:51:00,880
है मार समाज बी के जितनी भी है जहां तक धर्म संगत

735
00:51:00,880 --> 00:51:05,680
हो वहां तक मैं उनको प्रणाम करता हूं। उनको अग्री करता हूं कि अगर

736
00:51:05,680 --> 00:51:09,760
वाला कहता है मुझे हरे कृष्णा बड़ा आनंद आता है। मैंने बोला भैया जपना

737
00:51:09,760 --> 00:51:13,840
जितना ज्यादा जपो उतना कम ही है। मतलब जितना

738
00:51:13,840 --> 00:51:17,920
लेकिन अगर आप कोई जनेऊ बांटोगे अधर्म टाइप कोई काम करोगे

739
00:51:17,920 --> 00:51:22,000
तो भैया वो मत करना। ये मतलब अपने ही पैर पे कुल्हाड़ी मारने वाली बात।

740
00:51:22,000 --> 00:51:26,080
मैं उनको बोलूंगा कि भाई आप इतना अच्छा नाम जपते हो, इतना सुंदर कीर्तन करते

741
00:51:26,080 --> 00:51:30,800
हो। फिर ये बाकी सब करने की क्या जरूरत है?

742
00:51:30,800 --> 00:51:35,920
तो ऐसे करके मैं प्यार से बोलूंगा।

743
00:51:35,920 --> 00:51:40,160
बस लास्ट पॉइंट सॉरी मैं क्योंकि पता नहीं बार-ब आ पाऊंगा कि नहीं। अच्छा

744
00:51:40,160 --> 00:51:44,160
जहां तक 15 की बात है एजुकेशन करियर उसके लिए हम

745
00:51:44,160 --> 00:51:48,320
लोग कॉलेज यूनिवर्सिटी जाते हैं प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन करते हैं वहां पर किसी

746
00:51:48,320 --> 00:51:52,480
अथॉरिटी से अपने आप को सर्टिफाई करवाते हैं तो भाई यही चीज आप धर्म

747
00:51:52,480 --> 00:51:57,040
में भी करो ना क्योंकि नियम तोड़ने के लिए क्या धर्म ही मिला है क्या

748
00:51:57,040 --> 00:52:01,520
तो ऐसे लगता है और

749
00:52:01,520 --> 00:52:05,520
समराइज इस पूरी चीज को करने के लिए तो किसी भी व्यक्ति को

750
00:52:05,520 --> 00:52:09,520
ज्ञान हो उस धर्म का या जो भी मतलब ज्ञान हो उसका उसका अभ्यास

751
00:52:09,520 --> 00:52:13,760
हो और फिर उसका अधिकार हो। ये तीनों अगर चीजें जैसे गुरु ग्रंथ में

752
00:52:13,760 --> 00:52:17,760
वैसे ही उसी फॉर्मेट में ये अगर तीन चीजें अपनी जगह पे है तो उनका

753
00:52:17,760 --> 00:52:22,080
कल्याण निश्चित बस ये बोल के मैं खत्म कर महादेव

754
00:52:22,080 --> 00:52:26,160
नहीं बहुत अच्छा आपने अपना पर्सेक्टिव दिया है यहां पे और

755
00:52:26,160 --> 00:52:30,320
बहुत ही ज्यादा थोड़ा सा जो प्रासंगिक चीजों को रखते हुए चीजें

756
00:52:30,320 --> 00:52:34,560
जब बताई जाती है तो उसमें ज्यादा कनेक्ट हो पाता है व्यक्ति। हम थोड़ा सा विलंब

757
00:52:34,560 --> 00:52:38,880
ना लास्ट जोड़ दूं यहां पे लिखा नहीं था विदेश को ले। भैया मैं खुद विदेश

758
00:52:38,880 --> 00:52:42,960
में बैठा हूं। मैं कनाडा में रहता हूं। 20 साल से ज्यादा रहता हूं।

759
00:52:42,960 --> 00:52:46,960
मैं भी पहले ऐसा ही था। सेकुलर पॉलिटिकल हिंदू ये भी मैं बोल दूं। घोषित

760
00:52:46,960 --> 00:52:51,200
मुझे कोई शर्म नहीं आ रही क्योंकि हां भाई मेरी गलती थी। लेकिन गुरु ग्रंथ

761
00:52:51,200 --> 00:52:55,680
गोविंद की कृपा है कि जो धार्मिक हिंदू जो होते हैं धर्म क्या है? गुरु

762
00:52:55,680 --> 00:52:59,920
धीरेधीरे उनकी कृपा से नाम की कृपा से मुझे ये सब समझ में आने लगा।

763
00:52:59,920 --> 00:53:04,080
एक बार विदेश में रह के जहां तक जितनी धर्म संगत चीजें

764
00:53:04,080 --> 00:53:08,160
आप कर सकते हो। जैसे नाम जप वगरा करो आनंद पूर्वक करो

765
00:53:08,160 --> 00:53:12,160
लेकिन उसके लिए अपनी जो परंपरा है ट्रेडिशन है उसको उजाड़

766
00:53:12,160 --> 00:53:16,160
नहीं अपने गुरुदेव से परमिशन ले जो भी

767
00:53:16,160 --> 00:53:20,560
उनको ठीक लगे अपने जो बड़े है भाई जो भी है गुरु भाई आदि

768
00:53:20,560 --> 00:53:24,640
उनकी गाइडेंस में जैसे शिवज भैया से मैं पूछता रहता हूं कि अच्छा ये करना ठीक

769
00:53:24,640 --> 00:53:28,720
है क्या ये करना तो वो फिर मुझे बता देते हो सकता है कि

770
00:53:28,720 --> 00:53:32,800
मेरा मन एक थोड़ा होता है ना कि जैसे मैं शिव षडाक्षरी मंत्र पहले ऐसे

771
00:53:32,800 --> 00:53:37,280
ही जपता था ठीक है बाद में उसको उसकी मर्यादा समझ में आने लगी।

772
00:53:37,280 --> 00:53:42,640
अरे नहीं अच्छा आप यदि अच्छा भाव की जहां तक बात है

773
00:53:42,640 --> 00:53:46,800
भगवान की मर्यादा को उसका पालन करना ये भी प्रेम का

774
00:53:46,800 --> 00:53:50,800
ही एक रूप है ना। हम जैसे छोटे बच्चों को भी कहते हैं कि अरे

775
00:53:50,800 --> 00:53:54,800
बच्चा बड़ा हो गया। बड़ा हो गया मतलब क्या? उसको मर्यादा समझ में आती है।

776
00:53:54,800 --> 00:53:58,800
एकदम से किसी के कमरे में ऐसे ही नहीं घुसेगा। पहले थोड़ा सा नक करेगा कि

777
00:53:58,800 --> 00:54:02,960
क्या मैं अंदर आ सकता हूं? ऐसे थोड़ा प्यार से आएगा। यही

778
00:54:02,960 --> 00:54:06,400
है तो इसलिए विदेश में जितने भी शास्त्र सम्मत

779
00:54:06,400 --> 00:54:10,560
बातें हैं खंडन है तो उसको मैं प्रणाम करता हूं। ये मेरी असमर्थता

780
00:54:10,560 --> 00:54:14,720
है या विवशता कह लीजिए पूर्व संस्कार प्रारब्ध आद कह लीजिए

781
00:54:14,720 --> 00:54:18,880
जिसके कारण मैं मेरे जैसे यहां पे है लेकिन उनको कदापि शास्त्र खंडन

782
00:54:18,880 --> 00:54:22,880
नहीं करना चाहिए। गुरु ग्रंथ गोविंद का खंडन नहीं करना क्योंकि ये

783
00:54:22,880 --> 00:54:27,040
होता आप वहां से बोलेंगे ना तो फिर वहां पर आपको उतना शायद

784
00:54:27,040 --> 00:54:31,120
वो वो बोलेंगे आप भारत में रह के ये सब बोल रहे हो वही बाहर वाला चाहिए

785
00:54:31,120 --> 00:54:35,200
जो इसका करें। इसीलिए मैं विशेष बोल रहा हूं कि भैया धार्मिक लोगों को

786
00:54:35,200 --> 00:54:39,360
बाहर कोई काम नहीं है। एक क्वेश्चन बार-बार आ रहा है कि भाई आप

787
00:54:39,360 --> 00:54:43,360
हमें वर्तमान के चार शंकराचार्यों के नाम बता दीजिए। ठीक है? तो मैं

788
00:54:43,360 --> 00:54:47,600
यह कहूंगा कि मैथमेटिक्स की बुक में आपको जो है सामाजिक विज्ञान के प्रश्नों

789
00:54:47,600 --> 00:54:52,160
का हल नहीं मिलेगा और जो सामाजिक विज्ञान की बुक होगी उसमें आपको मैथमेटिक्स

790
00:54:52,160 --> 00:54:56,240
के उत्तर नहीं मिलते हैं। तो जो आप ये चार बातें अब आप ये लोट

791
00:54:56,240 --> 00:55:00,400
डालना चाहते हो ना कि मैं बोलूं मैं बोलूं। मुझे मालूम है एक क्वेश्चन आ क्यों रहा है? तो मैं

792
00:55:00,400 --> 00:55:04,480
आपको वो स्त्रोत बताता हूं। मेरा जो स्त्रोत है धर्म और ब्रह्म

793
00:55:04,480 --> 00:55:08,880
के विषय में जो इस समय चारों पीठों से जुड़े हुए जो ख्यापित नाम है वो धर्म

794
00:55:08,880 --> 00:55:13,040
ब्रह्म के विषय में वो चारों मेरे लिए परिणम में है। और ये जो व्यवहारिक प्रश्न है

795
00:55:13,040 --> 00:55:17,200
जिससे मेरा कोई मामला है ही नहीं कि कौन ये कौन की अथॉरिटी क्या है

796
00:55:17,200 --> 00:55:21,280
कौन क्या नहीं है। इसके निर्णय कुछ और हैं। जैसे कि Axis बैंक में किसके

797
00:55:21,280 --> 00:55:21,780
अकाउंट

798
00:55:21,680 --> 00:55:25,680
में कितना पैसा है। इस वशय में मैं मेरी कोई गति नहीं है। तो इसी प्रकार

799
00:55:25,680 --> 00:55:29,920
से कौन किस पद पर बैठा है? किस पद पर नहीं बैठा है। मेरी पर्सनल कोई इसमें गति

800
00:55:29,920 --> 00:55:34,080
नहीं है। इस विषय में मैं निर्भर हूं अपने पूज्य गोवर्धन मठ

801
00:55:34,080 --> 00:55:38,080
पूरी पीठाधीश्वर जो वर्तमान के शंकराचार्य क्योंकि वो

802
00:55:38,080 --> 00:55:42,240
मेरे गुरु हैं। तो यह व्यवहार के विषय में मैं उन पर निर्भर हूं।

803
00:55:42,240 --> 00:55:46,400
तो उनका जो निर्णय होगा वही मेरा निर्णय होगा। धर्म ब्रह्म चारों का एक है तो

804
00:55:46,400 --> 00:55:50,560
चारों का धर्म ब्रह्म मेरा है। हम आपको यह बता सकते हैं कि प्रामाणिक आचार्य

805
00:55:50,560 --> 00:55:54,720
के क्या-क्या लक्षण होते हैं जो शास्त्रों में लिखे होते हैं। अगर आपको यही निर्धारित

806
00:55:54,720 --> 00:55:59,040
करवाना है निर्णायक बनना है इसी विषय में तो आप पूरी के शंकराचार्य जी के पास जा सकते हैं।

807
00:55:59,040 --> 00:56:03,040
आप मेरे धर्म को काटिए, ब्रह्म को काटिए। इस विषय में ये चैनल है।

808
00:56:03,040 --> 00:56:07,040
है ना? ये चैनल इस विषय में नहीं है। निर्णय करने के लिए शंकराचार्य कौन है? कौन नहीं।

809
00:56:07,040 --> 00:56:11,200
हां। गुरुदेव के द्वारा निर्गत जो बात है उसको हम जरूर

810
00:56:11,200 --> 00:56:15,200
प्रचारित कर देंगे कि गुरुदेव ने कहा कि फलाने शंकराचार्य हैं तो शंकराचार्य हैं।

811
00:56:15,200 --> 00:56:19,360
गुरुदेव ने किसी बात में समीक्षा नहीं की। मौन रहा तो हम उस विषय में मौन है। हमारी कोई गति

812
00:56:19,360 --> 00:56:23,360
नहीं है उसमें। अब अगर आपको ये निर्णय लेना ही है तो आप जाएं

813
00:56:23,360 --> 00:56:27,520
और पूरी के शंकराचार्य जी से ये विनम्र भाव से उनके शरणागत

814
00:56:27,520 --> 00:56:31,840
होकर के पूछे कि भाई वर्तमान के चार प्रामाणिक शंकराचार्यों के नाम क्या है? मेरे

815
00:56:31,840 --> 00:56:36,000
ये इसमें मेरा इसमें जो है मेरा जो व्यक्तिगत वो है क्योंकि

816
00:56:36,000 --> 00:56:36,800
मेरे गुरु वो हैं

817
00:56:36,800 --> 00:56:41,440
तो मेरे निर्णायक वो है जिसके जो गुरु होंगे परंपरा से उनके निर्णायक वो होंगे।

818
00:56:41,440 --> 00:56:45,680
ठीक है जो क्या कहते हैं समष्टि का भाव है वह

819
00:56:45,680 --> 00:56:49,760
है धर्म ब्रह्म के विषय में तो आप चारों में से किसी भी किसी भी पीठ में जाकर

820
00:56:49,760 --> 00:56:53,840
के अपनी बात पूछ सकते हैं। ठीक है? तो, यह जो आप डालने का प्रयास

821
00:56:53,840 --> 00:56:57,920
करते हो, यह हम क्या बताएं आपको? अब

822
00:56:57,920 --> 00:57:02,000
यह जो इसको क्या कहते हैं? असहज स्थिति में डालने का

823
00:57:02,000 --> 00:57:06,240
जो उपयोग वो है उपाय कि सामने वाले को परेशान करो। जैसे

824
00:57:06,240 --> 00:57:10,400
कि अमुक्तेश्वर जी महाराज को आज तक वाले टीवी पर ले आएंगे।

825
00:57:10,400 --> 00:57:14,960
आप ये बताइए आप ये बताइए कोई शूद्र शंकराचार्य बन सकता है कि नहीं? जल्दी बताओ।

826
00:57:14,960 --> 00:57:19,200
पंप आप ये बताइए कोई शूद्र शंकराचार्य

827
00:57:19,200 --> 00:57:23,200
बन सकता है कि नहीं? बस और कोई काम नहीं है यही प्रश्न। अरे भैया फिर जब

828
00:57:23,200 --> 00:57:27,200
जवाब जब जवाब नहीं आएगा उसकी क्लिप काट देंगे। कह दिया नहीं

829
00:57:27,200 --> 00:57:31,280
बन सकता। जातिवादी है ये। ये तो इनका काम यही है। इनको क्लिप चाहिए, मीडिया

830
00:57:31,280 --> 00:57:35,280
चाहिए इनको और कुछ तो मैं इस विषय मैं इस विषय का निर्णायक

831
00:57:35,280 --> 00:57:39,680
नहीं हूं कि शंकराचार्य पद पद पर कौन बैठा है, कौन नहीं बैठा है। क्योंकि इसमें

832
00:57:39,680 --> 00:57:43,840
बहुत सारी जो वर्तमान की सोर्सेस होती है ना इंफॉर्मेशन

833
00:57:43,840 --> 00:57:48,000
वो सब चाहिए होती है। हमारा चैनल धर्म ब्रह्म के विषय में प्रकाश डालने

834
00:57:48,000 --> 00:57:52,160
वाला है और इस विषय में प्रकाश डालने वाला है कि आपको धर्म ब्रह्म के

835
00:57:52,160 --> 00:57:56,480
को जानने के लिए किस किस तरह के प्रामाणिक आचार्य से जुड़ना चाहिए

836
00:57:56,480 --> 00:58:00,560
और प्रामाणिक आचार्य कौन हो सकता है? इन विषयों का प्रचार करने वाला हमारा चैनल है। एक

837
00:58:00,560 --> 00:58:04,560
तरीके से यदि हमारे चैनल को आप मैथमेटिक्स मानेंगे तो आप प्रश्न कर रहे हैं जाकर के

838
00:58:04,560 --> 00:58:08,560
किसका? हिंदी ग्रामर का। ठीक है? तो सारे

839
00:58:08,560 --> 00:58:12,880
सब्जेक्ट्स की बुक होती है। उसमें सब कुछ नहीं मिलता है। अब आपने वो डायनासोर

840
00:58:12,880 --> 00:58:17,120
के बारे में पूछने लगे अरे भैया डायनासोर क्यों बताएं हम? जब हमारा विषय

841
00:58:17,120 --> 00:58:21,280
यह है कि ब्रह्म की प्राप्ति कैसे मोक्ष क्या है? परम स्वतंत्र मोक्ष क्या है?

842
00:58:21,280 --> 00:58:25,360
सर्व शक्तिमान ईश्वर क्या है? आप हमसे पूछ रहे हो आकर के कि भैया हमको जो है वो

843
00:58:25,360 --> 00:58:29,360
कॉस थीटा ये सब बता दो। हमें नहीं हमारी गति नहीं है। cos थीटा में यहां बैठे कुछ

844
00:58:29,360 --> 00:58:33,440
लोगों की है। यहां बैठे मेरे गुरु भाई हैं जो उनकी है। मेरी कॉस थीटा वगैरह

845
00:58:33,440 --> 00:58:37,520
में उतनी गति नहीं है। तो आप मुझसे प्रश्न पूछने कॉस थीटा क्या है? ये कोई बात है

846
00:58:37,520 --> 00:58:42,080
क्या? अभी मैं ही आपके आपके संबंध में ऐसे प्रश्न पूछने लगूं जिसके लिए

847
00:58:42,080 --> 00:58:46,080
उत्तर देने में आपको असहजता होने लगे। तो आप यही कहोगे ना इससे हमारे विषय का क्या

848
00:58:46,080 --> 00:58:50,160
मतलब है? जिस विषय पर हमारा चैनल है जिस विषय पर हम चर्चा करते हैं उस विषय पर

849
00:58:50,160 --> 00:58:54,160
बात करिए। ठीक है? अच्छा अभी

850
00:58:54,160 --> 00:58:59,120
हम आ जाते हैं। अब हमारा वो जो बहुत मोस्ट अवेटेड टाइम है।

851
00:58:59,120 --> 00:59:03,120
वीरूपाक्षी जी आप अपनी बात रखिए। जी जी तो बात

852
00:59:03,120 --> 00:59:07,440
चालू करने से पहले एक पंक्ति कहना चाहूंगा

853
00:59:07,440 --> 00:59:11,680
जो कि बहुत फेमस है सनातन धर्म के अंदर कि गुरु शिव स्वरूप है और शंकराचार्य

854
00:59:11,680 --> 00:59:15,680
ही शिव है। आदिकाल से लेकर आज तक मैंने जब इतिहास

855
00:59:15,680 --> 00:59:19,760
भी पढ़ा। शिव को गाली दी गई जैनों ने दी, बौद्धों ने दी, अन्य धर्मों ने

856
00:59:19,760 --> 00:59:24,160
दी। और शंकराचार्य की शिव स्वरूप ही है तो यह तो मैं एक्सपेक्ट करता ही हूं मलिच्छों

857
00:59:24,160 --> 00:59:28,160
से और जो धर्म के अगेंस्ट बोलते हैं पतित

858
00:59:28,160 --> 00:59:32,320
जो है कि वो बोलेंगे उल्टा सीधा बोलेंगे क्योंकि जो भगवत ज्ञान

859
00:59:32,320 --> 00:59:36,400
है उसकी प्राप्ति हर किसी को आसानी से नहीं होती उसकी प्राप्ति

860
00:59:36,400 --> 00:59:41,760
करने के लिए भी आपको संघर्ष करना होता है। शरणागति होना होता है।

861
00:59:41,760 --> 00:59:45,760
बातें समझनी होती है। तो सबसे पहले तो मैं सबसे निवेदन

862
00:59:45,760 --> 00:59:49,760
करूंगा कि कोई भी किसी व्यक्ति विशेष को गाली ना दे जाकर उनकी चैट्स में बातें

863
00:59:49,760 --> 00:59:53,760
होंगी अच्छे तरीके से होंगी तो आप प्लीज ना उनको हेट दीजिएगा

864
00:59:53,760 --> 00:59:57,760
ना हमसे उम्मीद कीजिएगा कि हम उनको देंगे या फिर आप हमसे भी हेट ना

865
00:59:57,760 --> 01:00:01,760
कीजिएगा तो बात चालू करते है इंटरनेट संप्रदाय की यहां पे सब मैंने क्लेम्स भी लिखे हुए

866
01:00:01,760 --> 01:00:05,840
हैं मैंने कुछ पॉइंट्स भी लिखे हुए हैं जो चैट में आए थे डीएम में आए थे तो इंटरनेट संप्रदाय क्या

867
01:00:05,840 --> 01:00:09,840
है इंटरनेट संप्रदाय मैं आपको बताता हूं Instagram के दृष्टिकोण से जब मैं चार साल से यहां

868
01:00:09,840 --> 01:00:14,400
पे हूं कि बच्चे आते हैं बच्चे आते वो

869
01:00:14,400 --> 01:00:18,640
पीडीएफ निकालते हैं। उन्होंने एक गुट पकड़ लिया है कि हम शिवजी

870
01:00:18,640 --> 01:00:23,280
वाले हैं। हम विष्णु वाले हैं। हम भगवती वाले हैं। अब हम वेद खंगालेंगे।

871
01:00:23,280 --> 01:00:27,280
एक एक कोट निकालेंगे कि वेद तत्र्या यजुर्वेद में ये लिखा हुआ

872
01:00:27,280 --> 01:00:31,280
है। अब हमारे इष्ट तुम्हारे इष्ट से बड़े हैं। फिर सामने वाले बोलेगा नहीं

873
01:00:31,280 --> 01:00:35,280
नहीं हमारे यहां पे ये लिखा हुआ है। तुम्हारी बात कट गई है। अब वेद से वेद को काटने

874
01:00:35,280 --> 01:00:39,360
वाले बैठे हैं। इसमें एक बात जोड़ दूं। ये आपको डिस्कर्ड पे बहुत मिलेंगे। हां

875
01:00:39,360 --> 01:00:43,520
डिस्कर्ड पे मिलेंगे आपको Instagram पे मिलेंगे। मैं हाथ जोड़ लेता हूं मैं दूर जाता हूं वहां से मैंने कहा तुम अपना

876
01:00:43,520 --> 01:00:47,600
करते रहो जो अभय राधा कृष्ण दास जी थे जिनकी डिबेट हुई थी आवाहन जी के साथ

877
01:00:47,600 --> 01:00:52,720
वो इन्हीं का पार्ट है जब मैं उनको तीन साल पहले जानता हूं इनकी डिबेट

878
01:00:52,720 --> 01:00:56,720
तो वो इसी इसी फील्ड के है वो अब मैं बताता हूं अवेकनिंग भारत जी का इनकी रिसर्च खुद

879
01:00:56,720 --> 01:01:00,720
की कोई नहीं होती अगर आपको इतनी रिसर्च होती जितने श्लोक अपनी वीडियो में

880
01:01:00,720 --> 01:01:04,800
लगाती है तो इनको इतना पता होता कि वेद गमन वेद गमन क्या

881
01:01:04,800 --> 01:01:09,040
बोल रहा हूं विदेश गमन अलाउड क्यों नहीं है इनको पता होता क्लूलेस

882
01:01:09,040 --> 01:01:13,120
थी ये पूरे आधे घंटे डिबेट जो चली 40 मिनट चली बाद में 4 घंटे इन्होंने खींचा

883
01:01:13,120 --> 01:01:17,280
उसको क्लूलेस थी पूरे टाइम ये तो वही बात आती है कि इंटरनेट संप्रदाय के जो व्यक्ति

884
01:01:17,280 --> 01:01:21,280
होते हैं वो किताबों में से चीजें छाटते हैं कंट्रोल एफ फंक्शन होता है

885
01:01:21,280 --> 01:01:25,280
लैपटॉप में वहां उसको पीडीएफ डाउनलोड करते हैं कंट्रोल एफ में अपना नाम लिख

886
01:01:25,280 --> 01:01:29,360
दिया शिव जी के बारे में से शिव लिख दिया शिव से अब जितने वो आए हमने वो श्लोक उठा लिए

887
01:01:29,360 --> 01:01:33,600
मंत्र उठा लिए और उनका वो छाप दिया वहां पे परंपरा

888
01:01:33,600 --> 01:01:37,920
की इंपॉर्टेंस क्या होती है इसके लिए मैं स्पेशली ये लेके आया हूं अमर

889
01:01:37,920 --> 01:01:38,420
चित्रकथा

890
01:01:38,400 --> 01:01:42,560
की गीता है ये कॉमिक बुक है शायद से इनको ज्यादा अच्छे से समझ आए इन सब से क्योंकि इसमें

891
01:01:42,560 --> 01:01:46,800
चित्र वगैरह है चाहे किताबों में और वहां गुरु सानिध्य में पढ़ना होता है तो ये किताबें

892
01:01:46,800 --> 01:01:50,960
कॉमिक इन सब से इनको ज्यादा अच्छे समझ आएगा मेरे हिसाब से तो अगर

893
01:01:50,960 --> 01:01:55,120
ये किताब भी है ये कॉमिक भी है जब बच्चे पढ़ते हैं इसमें गीता के बारे में लिखा

894
01:01:55,120 --> 01:01:59,360
है गीता के सार के बारे में लिखा है तो ये कॉमिक कहां से आती है अमर चित्र

895
01:01:59,360 --> 01:02:03,360
पब्लिश करता है तो इनको कहीं से इन्होने गीता से उठाई होगी यह चीज गीता उनको कहां

896
01:02:03,360 --> 01:02:07,360
से प्राप्त होती है गीता उनको ग्रंथालय से प्राप्त होती है जो की सबसे बड़ा ग्रंथालय

897
01:02:07,360 --> 01:02:11,600
आज की डेट में गीता प्रेस या फिर चौक उनको मैनुस्क्रिप्ट कहां से प्राप्त

898
01:02:11,600 --> 01:02:15,920
होती है? परंपराओं से प्राप्त होती है। और आधे से ज्यादा परंपराओं में जिसमें मैनुस्क्रिप्ट

899
01:02:15,920 --> 01:02:20,240
है शंकर परंपरा के पास सबसे ज्यादा मैनुस्क्रिप्ट है। ये बात भी कहीं छुपी हुई नहीं है। क्योंकि शंकर

900
01:02:20,240 --> 01:02:24,400
परंपरा सबसे ज्यादा प्रिजर्व परंपरा है। तो अगर मुझे कुछ पढ़ना है, धर्म

901
01:02:24,400 --> 01:02:28,800
ग्रंथ पढ़ना है और जब मुझे वो भाषा लिपि ही नहीं आती। ये संस्कृत

902
01:02:28,800 --> 01:02:32,880
के यू श्लोक और मंत्र उठा लेते हैं ये ट्रांसलेट कैसे करते

903
01:02:32,880 --> 01:02:37,040
हैं। मुझे समझ नहीं आता। क्योंकि जब संस्कृत के नियम ही तीन बार चेंज हो चुके हैं वेद वेद

904
01:02:37,040 --> 01:02:41,040
काल से लेकर आज तक तीन महा आचार्य रह चुके हैं संस्कृत के तो ये लोग बिना पढ़े बिना

905
01:02:41,040 --> 01:02:45,200
गुरु सानिध्य में वो संस्कृत समझ कैसे लेते हैं अलग-अलग टाइम की संस्कृत अलग-अलग लिपि

906
01:02:45,200 --> 01:02:49,440
अलग-अलग लिपी लिखावट की संस्कृत समझ कैसे लेते हैं अब यहां पे

907
01:02:49,440 --> 01:02:53,760
हां मैं बताता हूं इंटरनेट से हां इंटरनेट से वही

908
01:02:53,760 --> 01:02:58,080
अब मेरे पे यहां पे संकीर्तन मीमांसा है करपात्री जी की किताब है वर्णाश्रम मर्यादा

909
01:02:58,080 --> 01:03:02,080
अगर मेरे को पढ़ना है वर्णाश्रम मर्यादा के बारे में पढ़ना है तो मैं

910
01:03:02,080 --> 01:03:06,240
एक आचार्य वाणी ही पढूंगा किसी आचार्य ने जिसको ये सब ज्ञान

911
01:03:06,240 --> 01:03:10,240
है, जिसको परंपरागत ज्ञान है, जिसको भाषा का ज्ञान है, अगर वो उस

912
01:03:10,240 --> 01:03:14,240
पर टिप्पणी करेगा, समझाएगा, लिखाएगा तो ही मैं समझ पाऊंगा ना भाई। क्योंकि

913
01:03:14,240 --> 01:03:18,240
जो चीज मेरे को पढ़ी ही नहीं जाएगी, फ्रेंच में नहीं पढ़ सकता। मुझे उसके लिए ट्रांसलेशन ही

914
01:03:18,240 --> 01:03:22,240
पढ़नी पड़ेगी। अगर आपको ट्रांसलेशन पे ही पूर्णता विश्वास नहीं है। अगर आपको

915
01:03:22,240 --> 01:03:26,240
ट्रांसलेशन केवल ट्रांसलेशन अच्छी है, ये नहीं है। इस किताब का 20% भाग अच्छा

916
01:03:26,240 --> 01:03:30,400
है, 80% भाग अच्छा नहीं है। तो वो बात बनेगी ही नहीं। तो अभी

917
01:03:30,400 --> 01:03:34,400
इन्होंने यहां पर कटाक्ष करा था या

918
01:03:34,400 --> 01:03:38,560
फिर कटाक्ष तो नहीं बोलूंगा इन्होंने हेट ही करा था हेट स्पीच बोली थी बहुत आचार्य

919
01:03:38,560 --> 01:03:42,640
के ऊपर चीजों के ऊपर और कल का इनका एक पॉइंट था मोरालिटी का उसको मैं

920
01:03:42,640 --> 01:03:46,720
थोड़ा सा डिस्कस करूंगा क्योंकि मैं उस वाले क्षेत्र से आता हूं जहां पे हम इसी में डील करते

921
01:03:46,720 --> 01:03:50,960
हैं फिलोसोफी में तो इनको शायद से धर्म संगत बातें नहीं पता

922
01:03:50,960 --> 01:03:54,960
पता या अच्छी भी नहीं लगती होंगी तो इनके लिए थोड़ा हम वेस्टर्न फिलोसोफी की तरफ चल लेते

923
01:03:54,960 --> 01:03:59,040
हैं थोड़ी देर के लिए फ्रेडरिक नीस ने मोरालिटी की बात करी मोरालिटी के लिए कहा ये

924
01:03:59,040 --> 01:04:03,040
इंसान का बनाया हुआ कांसेप्ट है हिंदू धर्म में भी यही बात आती है कि मोरालिटी

925
01:04:03,040 --> 01:04:07,200
जो है नैतिकता है वो मनुष्य की बनाई हुई है। ईश्वर तो है नैतिकता के परे है। मैं गलत

926
01:04:07,200 --> 01:04:09,840
तो नहीं हूं इधर।

927
01:04:09,840 --> 01:04:13,920
नहीं मोरलिटी मनुष्य की बनाई हुई कैसे हो जाएगी? मोरल्टी भी हमें

928
01:04:13,920 --> 01:04:18,160
धर्म शास्त्रों से मिलती है तो वो अपविषय मतलब हां मोरल्टी

929
01:04:18,160 --> 01:04:22,320
जो है हमारी वो अनादि है। वो अनादि सिद्धांत

930
01:04:22,320 --> 01:04:26,480
है। अनादि सिद्धांत है पर अगर वो वैसे हम बात करते हैं। अगर हम धर्म संगत

931
01:04:26,480 --> 01:04:30,720
बात ना करें अभी थोड़ी देर के लिए कि मोरालिटी की बात करते हैं कि जो मोरालिटी सही मोरली

932
01:04:30,720 --> 01:04:34,720
सही ग्रंथ होगा। अब मनुष्य की मोरालिटी कहां से आती है? अगर आप ग्रंथ पढ़ेंगे तो आपको

933
01:04:34,720 --> 01:04:38,720
मोरालिटी मिलेगी एक। अगर आप धर्म के ग्रंथ पढ़ेंगे तो धर्म की

934
01:04:38,720 --> 01:04:42,800
मोरालिटी आपके अंदर आएगी। अगर हम यहां पर नास्तिकता के विषय में बात भी करें कि

935
01:04:42,800 --> 01:04:46,880
मोरालिटी क्या होती है? तो किसी अब हमारे यहां पर सर्कल में हम धर्म

936
01:04:46,880 --> 01:04:51,040
की बात करें तो धर्म हमारे लिए हमारी मोरालिटी है। दूसरा धर्म हमारे लिए मोरालिटी नहीं

937
01:04:51,040 --> 01:04:55,120
होगा। तो मोरालिटी का विषय आप उठा ही कैसे सकते हैं, कि आपके लिए मोरलिटी क्या सही है

938
01:04:55,120 --> 01:04:59,600
भैया? आपके लिए मोरालिटी का जो विजन है वो अलग

939
01:04:59,600 --> 01:05:03,600
मैं इस पर क्लियर करूं थोड़ा सा ऐसा है मोरलिटी हमारी आवश्यकता

940
01:05:03,600 --> 01:05:07,920
नहीं है मूल हम ये हमें ठीक करने की जरूरत है मोरलिटी

941
01:05:07,920 --> 01:05:11,920
हमारी मूल सेंट्रिक हम लोग मोरल्टी सेंट्रिक नहीं है

942
01:05:11,920 --> 01:05:16,320
हम लोग सच्चिदानंद सेंट्रिक है हम लोग क्या है सच्चिदानंद

943
01:05:16,320 --> 01:05:20,480
सेंट्रिक है अब क्या है कि सच्चिदानंद सेंट्रिक होने के कारण हमको

944
01:05:20,480 --> 01:05:24,560
मोरल्टी को साधन के रूप में लेना पड़ता है मोरल्टी बाय प्रोडक्ट है

945
01:05:24,560 --> 01:05:25,280
कि हमें

946
01:05:25,280 --> 01:05:29,440
हमारे सामने वो खड़े हैं सच्चिदानंद स्वरूप भगवान मोक्ष ज्ञान

947
01:05:29,440 --> 01:05:33,600
स्वरूप है ना आत्म स्वरूप तो वो हमारे भगवान है अब हमें

948
01:05:33,600 --> 01:05:37,680
उन तक पहुंचना है तो कैसे पहुंचेंगे कि डूस एंड डोंट्स

949
01:05:37,680 --> 01:05:41,920
ये नहीं करना है ये करना है तो ये डस एंड डोंट्स जिसने हमको सच्चिदानंद

950
01:05:41,920 --> 01:05:46,000
स्वरूप बताया वो तो वहां तुम्हें पहुंचना है हमें उस पर आस्था भी है

951
01:05:46,000 --> 01:05:50,000
विश्वास भी है और तर्क संगत भी उसकी बातें हमें लग

952
01:05:50,000 --> 01:05:54,160
गई तो अब हमने उसके द्वारा बताए हुए जो ड डस एंड डोंट्स है वो

953
01:05:54,160 --> 01:05:58,240
ले इसको कहते हैं मोरालिटी डूस एंड डोंट्स को जो बाय प्रोडक्ट के रूप में हमें

954
01:05:58,240 --> 01:06:02,240
मिली। अब यही पर वाली बात है कि जो व्यक्ति नास्तिक होता है उससे हम

955
01:06:02,240 --> 01:06:06,240
क्यों कहते हैं कि सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है? कौन बहन है? कौन पत्नी है? इसका

956
01:06:06,240 --> 01:06:10,240
आधार क्या है? ये इसलिए ही कहते हैं क्योंकि वो आदमी सामने खड़े हुए ईश्वर को

957
01:06:10,240 --> 01:06:14,240
तो मान नहीं रहा है। मोक्ष को तो मान नहीं रहा है। स्पिरिचुअलिटी को तो मान नहीं रहा

958
01:06:14,240 --> 01:06:18,480
है। तो उसे डस एंड डोंट्स का आधार क्या है उसके पास? अब वो कहेगा जो

959
01:06:18,480 --> 01:06:23,360
जो कई लोग कहते हैं तो अभी तो कई लोगों की संख्या जो आपके हिसाब से जो मोरलिटी

960
01:06:23,360 --> 01:06:27,760
जो क्या कहते अनैतिकता है वह आप जो आपके लिए नैतिकता है वह उनकी अनैतिकता

961
01:06:27,760 --> 01:06:32,080
है। जो आपके लिए अनैतिकता है वो उनकी नैतिकता है। अगर अगर हम मोरल्टी

962
01:06:32,080 --> 01:06:36,080
का आधार ज्यादा संख्या पे या मनुष्यों पे लगा देंगे वही

963
01:06:36,080 --> 01:06:40,400
तो कारण है विप्लव का। दुनिया में जंग है क्यों?

964
01:06:40,400 --> 01:06:44,560
क्योंकि हमने जो हमारी मोरल्टी का मुख्य आधार हो सकता है

965
01:06:44,560 --> 01:06:48,720
अती्द्रिय विषयों में जो धर्म शास्त्र वेदा आद शास्त्र जो पारंगत

966
01:06:48,720 --> 01:06:53,040
है ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने में ईश्वर तक पहुंचाने में

967
01:06:53,040 --> 01:06:57,200
और जो तर्क और तर्क और प्रमाण की युक्ति युक्त

968
01:06:57,200 --> 01:07:01,200
चीजों से ओतप्रोत हैं। हम उनको छोड़ के हम अलग से अपने

969
01:07:01,200 --> 01:07:05,200
को स्वतंत्र रूप से ये कोशिश करते हैं कि हम मोरल मोरल हो सकते हैं। जैसे वो

970
01:07:05,200 --> 01:07:09,200
कह रही थी कि मैं देखूंगी कि प्रकृति के प्रकृति के लिए क्या

971
01:07:09,200 --> 01:07:13,200
है। मनुष्य के लिए क्या अच्छा है तो वो जो अच्छा होगा उसको

972
01:07:13,200 --> 01:07:17,200
मैं मानूंगी ये वेद है। अरे भाई तुम ठीक है तुमको प्रकृति के लिए जो

973
01:07:17,200 --> 01:07:22,960
अच्छा लगेगा वो तुम मानोगी मगर वो वेद का अर्थ है ये कैसे कह रही हो तुम भाई

974
01:07:22,960 --> 01:07:27,280
हो जाती है मोरलिटी इनकी सब्जेक्टिव हो जाती है अगर आपको

975
01:07:27,280 --> 01:07:31,520
धर्म के बिना मोरल्टी प्राप्त हो रही है तो ये आपकी कोरी बकवास

976
01:07:31,520 --> 01:07:35,520
है वो धज्जियां उड़ जाएंगी 510 मिनट में ही वही कल आप देख ही लीजिए ना इन्होंने

977
01:07:35,520 --> 01:07:39,520
क्या करा है कल इन्होंने क्या करा है कल इन्होंने नाश ही करा है तर्क का पूरे तरीके से

978
01:07:39,520 --> 01:07:43,920
इन्होंने उन चरित्रों को और उन उन नामों को बीच में लाया जिनकी जरूरत नहीं

979
01:07:43,920 --> 01:07:48,160
ब्रह्मलीन स्वामी जी पे कलपोली करपात्री स्वामी जी पे ये और इनके फॉलोवरर्स लगातार

980
01:07:48,160 --> 01:07:52,400
अटैक कर रहे हैं। अब इन दो महापुरुषों का नाम लाना जरूरी

981
01:07:52,400 --> 01:07:55,600
था ही नहीं इस बात में जब विदेश गमन के ऊपर बात थी

982
01:07:55,600 --> 01:07:59,600
तो आप इन पर्सनालिटीज को अटैक कर ही नहीं सकते। आपका नाम बिगाड़ा आपके

983
01:07:59,600 --> 01:08:03,680
नाम के बारे में बोला चलिए वो तो एक बार को एक्सेप्टेबल होता है कि आप अपना सहन कर

984
01:08:03,680 --> 01:08:07,680
सकते हैं। आपके जो महाभाग गुरु जी रहे हैं या फिर जो अपने ऊपर वाले गुरु जी रहे हैं उनका

985
01:08:07,680 --> 01:08:12,160
कोई नहीं सुनता। जो महापुरुष रहे हैं सिद्ध स्वामी जी रहे हैं उनका कोई नहीं सुनता।

986
01:08:12,160 --> 01:08:16,400
अब यही बात है प्रमाण की बात आ जाती है, नैतिकता की बात आ जाती है, वेदाचार की बात आ जाती है।

987
01:08:16,400 --> 01:08:20,560
तो इनको जब ये कोट करते हैं क्या इनको कभी ये पढ़ने को नहीं मिला

988
01:08:20,560 --> 01:08:25,200
कि जब विदेश गमन करता है व्यक्ति तो उसका वर्ण त्याग हो जाता है।

989
01:08:25,200 --> 01:08:29,440
वेदाचार से वो मुक्त हो जाता है। वेदाचार उसके लिए अब है नहीं। पतित

990
01:08:29,440 --> 01:08:33,440
हो जाता है। वो चातुर वर्ण में नहीं आता है। तो इसका मतलब ये थोड़ी हुआ

991
01:08:33,440 --> 01:08:37,760
कि आप वहां पे जैसे यहां पे हमारे साथ बैठे हैं। ये टोर ये कनाडा

992
01:08:37,760 --> 01:08:41,760
से है जी। तो अब इनके पास अभी इनके पास वेद अधिकार नहीं है तो इसका मतलब

993
01:08:41,760 --> 01:08:46,000
ये थोड़ी हुआ कि वो नाम जाप नहीं कर सकते भगवान को याद नहीं कर सकते एक वेद अधिकार

994
01:08:46,000 --> 01:08:50,000
वाली लिमिटेशन हो गई है उनप अगर वहीं पर उनकी आगमिक दीक्षा होती तो बात

995
01:08:50,000 --> 01:08:54,000
अलग होती तो जब इतना आप लोग इंटरनेट पर जाके देखोगे जितने

996
01:08:54,000 --> 01:08:58,000
लोग धर्म के रक्षक बने हुए हैं जिनको ये बात नहीं पता कि वेदाचार में और

997
01:08:58,000 --> 01:09:02,000
अभेद में और आगम में क्या डिफरेंस है वो धर्म की रक्षा करने बैठे हुए हैं फ्रंट पे

998
01:09:02,000 --> 01:09:06,080
वो किताबें उठाते हैं चार रेफरेंसेस उठाते हैं और अपने मन से उनकी

999
01:09:06,080 --> 01:09:10,240
बात करने लग जाते हैं इनसे किसी इसमें एक बात इसमें मैं इसमें

1000
01:09:10,240 --> 01:09:10,800
एक बात ये

1001
01:09:10,800 --> 01:09:15,360
बोल दूं कि जो ये बात आज कर रही हैं कि करपात्री

1002
01:09:15,360 --> 01:09:19,520
जी गलत हैं और क्या कहते हैं या

1003
01:09:19,520 --> 01:09:23,520
पूज्यपाद ब्रह्म स्वामी श्री स्वरूपानंद जी महाराज या

1004
01:09:23,520 --> 01:09:27,680
क्या कहते हैं या फिर मायावादम असत शास्त्रम वाला

1005
01:09:27,680 --> 01:09:31,760
जो श्लोक कर रहे हैं। आपको क्या ये इसमें कुछ मुझे बताने

1006
01:09:31,760 --> 01:09:36,480
की जरूरत है कि दोनों तरह की फर्सेस लगी हुई है। इधर आर्य समाज

1007
01:09:36,480 --> 01:09:40,560
इधर आर्य समाज इधर स्कॉन सिंगल पॉइंट एजेंडा पूरी पूरी पूरी

1008
01:09:40,560 --> 01:09:44,560
पूरी बैकिंग है इनको सिंगल पॉइंट एजेंडा इसको बैकअप दो भाई इसको

1009
01:09:44,560 --> 01:09:48,640
बैकअप दो लाख फॉलोअ है ये लड़ेगी आवान से क्योंकि वो बंटी बबली

1010
01:09:48,640 --> 01:09:52,640
वाला सीन है ना बंटी और बबली का सीन किसी ने देखी हो तो वो जब पकड़

1011
01:09:52,640 --> 01:09:56,720
नहीं पा रहा होता है बंटी और बबली को तो रात में खटिया से उठ करके जो

1012
01:09:56,720 --> 01:10:01,040
है खड़ा हो जाता है देखा है यही हाल है

1013
01:10:01,040 --> 01:10:05,120
वर्तमान में स्कनिस्ट का आर्य समाजियों यही हाल

1014
01:10:05,120 --> 01:10:09,680
है। योगेश भारद्वाज जी ने अपने एक वक्तव्य में मेरा मेरा नाम कोट करके कहा है

1015
01:10:09,680 --> 01:10:14,000
कि भाई काहे की तेरी परंपरा? योगेश भारद्वाज जी ने कहा है काहे की तेरी परंपरा।

1016
01:10:14,000 --> 01:10:18,000
अरे भाई सीधा सा प्रश्न है। वेद कैसे आए ये बता दो ना मुझको।

1017
01:10:18,000 --> 01:10:22,000
वही तो आप तक पहुंची वही बात है। इनको पता ही नहीं है। अब ये

1018
01:10:22,000 --> 01:10:26,000
कल अवेकनिंग भारत जी कह रही थी कि हम शयनाचार्य जी का भाष्य

1019
01:10:26,000 --> 01:10:30,160
मानते हैं। इन्हें पता है शयनाचार्य जी कौन सी परंपरा चाहते हैं। शंकर परंपरा

1020
01:10:30,160 --> 01:10:34,240
में है शयनाचार्य जी। ये क्या बातें करती है? इन्होंने वेद भाष्य उठा

1021
01:10:34,240 --> 01:10:38,240
लिया इंटरनेट से। रिसर्च ही नहीं है इनकी। नहीं नहीं देखिए देखिए ऐसा है कि

1022
01:10:38,240 --> 01:10:43,440
मैं थोड़ा पब्लिक के पॉइंट ऑफ व्यू से एक बात कह देता हूं कि

1023
01:10:43,440 --> 01:10:47,440
मान लीजिए कि आपने शायण भाष्य जो है वो आर्काइव से उठा लिया और बिल्कुल वो

1024
01:10:47,440 --> 01:10:51,680
प्रमाणिक आचार्य है तो मैं उनकी बात मानूंगा या कुल्लूक भट्ट भाष्य मनुस्मृति

1025
01:10:51,680 --> 01:10:55,680
उठा ली या मेद भाष्य मनुस्मृति की उठा ली। ठीक है? लेकिन दिक्कत

1026
01:10:55,680 --> 01:11:00,640
वहां आती है कि जब आप उसको इंटरप्रेट करते हो। जी। अब

1027
01:11:00,640 --> 01:11:04,800
अब किसी आचार्य ने जब उसका भाष्य किया उसमें जो शब्दों

1028
01:11:04,800 --> 01:11:08,880
की को चूज किया उसने या आप सिंपल सा लीजिए आप रामचरितमानस

1029
01:11:08,880 --> 01:11:13,520
ले लीजिए है ना रामचरितमानस आपको मिल जाएगी बिल्कुल एकदम

1030
01:11:13,520 --> 01:11:17,600
मतलब कि वो है कि टारगेटेड बाय मेनी बट डिफिटेड

1031
01:11:17,600 --> 01:11:21,680
बाय नन वो स्वामी तुलसीदास जी है ठीक है तो

1032
01:11:21,680 --> 01:11:25,760
ऐसा लेवल है उनका तो अब क्या होगा कि उन्होंने जिस शब्दों का चयन

1033
01:11:25,760 --> 01:11:29,840
किया है अब वो शब्द को आप अगर अर्थ का अनर्थ कर दें अपने क्योंकि

1034
01:11:29,840 --> 01:11:33,920
आप तो ले रहे हैं आर्काइव से, इंटरनेट से और बिल्कुल एकदम प्रामाणिक आप

1035
01:11:33,920 --> 01:11:38,000
ग्रंथ उठा रहे हैं। लेकिन उस प्रामाणिक ग्रंथ का भी अर्थ आपको कैसे पता

1036
01:11:38,000 --> 01:11:41,360
लगेगा? जब वहां पे डाउट होगा तो आप तो आपने अपने मन से

1037
01:11:41,360 --> 01:11:45,360
लिया और उसके बाद आपने उसको छाप दिया। रील बना दी उसके ऊपर। ठीक है? तो वही सब

1038
01:11:45,360 --> 01:11:50,240
वहां समस्या आती है ना? तो उसके लिए हमें फिर व्यवहार में आचार्य चाहिए।

1039
01:11:50,240 --> 01:11:54,320
ठीक है? जो उसका सही अर्थ बता सके या समझा सके। जैसे ढोल गवार

1040
01:11:54,320 --> 01:11:58,480
शूद्र पशु नारी वाला जो दोहा आता है एसेट्रा। ठीक है? मैं

1041
01:11:58,480 --> 01:12:02,560
मैं मैं बोलना चाहूंगा मेधा तिथि का

1042
01:12:02,560 --> 01:12:06,800
इन्होंने उदाहरण लिया है। पहली बात तो यहां भी तर्क बनता है मेधा तिथि

1043
01:12:06,800 --> 01:12:10,800
की कमेंट्री आप तक पहुंची कैसे तो मेधा तिथि ने क्या कहा है

1044
01:12:10,800 --> 01:12:15,040
तो वह लाइनेस से जो लेके आए हैं जिन्होंने यहां आर्काइव पे दी है वो

1045
01:12:15,040 --> 01:12:19,040
क्या कह रहे हैं उनके अर्थ में वो आपको देखना पड़ेगा और अगर आपको उन पर विश्वास

1046
01:12:19,040 --> 01:12:23,120
नहीं है तो उन्होंने जो आर्काइव को दिया है मेधा तिथि के नाम से उस पर विश्वास

1047
01:12:23,120 --> 01:12:27,360
क्यों कर रहे हो भाई दोनों में से एक चीज छोड़नी पड़ेगी आपको आप अपना स्वतंत्र

1048
01:12:27,360 --> 01:12:31,360
मत लाओ फिर हम देखेंगे कितने सनातन और सनातन के विरुद्ध में कितनी देर तक

1049
01:12:31,360 --> 01:12:35,520
टिक पाते स्वतंत्र मत लाओ फिर मेरा मेरा तिथि को वो क्लेम मत करो। वेद

1050
01:12:35,520 --> 01:12:39,760
को क्लेम मत करो। ब्रह्म सूत्र को क्लेम मत करो। ये सनातन शास्त्रों को छोड़ दो। स्वतंत्र

1051
01:12:39,760 --> 01:12:43,840
मत लाओ। अगर इनहीं को इनहीं को हमारा दबाव बनाना है। हम

1052
01:12:43,840 --> 01:12:47,920
पर इनहीं के दबाव में लाना है। मेधा तिथि के अर्थों को कोट कर करके

1053
01:12:47,920 --> 01:12:51,920
लोगों ने आचार्य विदेश गमन पर निबंध लिखा है। उन्होंने

1054
01:12:51,920 --> 01:12:55,920
करपाती जी महाराज ने। अभी अगर मौका मिला तो उसको दिखाएंगे हम आप लोगों

1055
01:12:55,920 --> 01:12:56,720
को। मेधा

1056
01:12:56,720 --> 01:13:00,880
अतिथि ने भी विदेश गमन को निषेध बताया है। अब आपने क्या

1057
01:13:00,880 --> 01:13:04,880
किया कि उनकी कमेंट्री आपको मिली इंग्लिश में और इंग्लिश का

1058
01:13:04,880 --> 01:13:08,960
आपने खुद से ट्रांसलेशन कर लिया। हो गए जय जयकार। बम भोले बाबा मामा आ

1059
01:13:08,960 --> 01:13:13,120
गए मामा आ गए वाली बात चालू कर दी। तो ये एक बात ध्यान

1060
01:13:13,120 --> 01:13:18,080
रखने की। दूसरी बात वो जो अभी चल रही थी ना करपात्री जी वाली जी। उसमें

1061
01:13:18,080 --> 01:13:22,080
एक बात थी कि जैसे हम कहते हैं कि हम धर्म का प्रचार

1062
01:13:22,080 --> 01:13:26,240
कर रहे हैं। हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं। है ना? तो उसके लक्षण हमारे अंदर भी दिखने

1063
01:13:26,240 --> 01:13:30,240
चाहिए ना। कितनी भी परिस्थिति आ गई आज तक कभी किसी ने मुझे अश्लील

1064
01:13:30,240 --> 01:13:34,480
शब्दों का उपयोग करते देखा हो तो वो बता सकता है। कितनी

1065
01:13:34,480 --> 01:13:38,480
परिस्थितियों से मैं गुजर चुका हूं। अभी मुझे कुछ ऐसे लोग मिल गए

1066
01:13:38,480 --> 01:13:42,800
हैं। भागवतानंद के कैंप में मैं गया था। तो वहां पर कुछ एक कोई ऐसे

1067
01:13:42,800 --> 01:13:46,800
बच्चे थे वहां पर लड़के थे जो अब टूट रहे हैं और वह आगे आकर के हो

1068
01:13:46,800 --> 01:13:50,800
सकता है आपको हमारे अगले लाइव में प्रमाण मिले

1069
01:13:50,800 --> 01:13:55,040
साक्ष्य जो वहां पर अवेलेबल थे वो आकर बोले

1070
01:13:55,040 --> 01:14:00,080
भाई भागवतानंद की ओर से गाली दी गई थी तब भी मैंने उसको गाली नहीं दी

1071
01:14:00,080 --> 01:14:04,080
क्योंकि गालियों से प्रभावित होना मैं आपको सच बता रहा हूं

1072
01:14:04,080 --> 01:14:08,400
गालियों से प्रभावित होना ईश्वर साक्षी है मेरा मार से प्रभावित

1073
01:14:08,400 --> 01:14:11,760
होना जो दहक मुझे मुझे अगर कोई मारे

1074
01:14:11,760 --> 01:14:15,920
बहुत हद तक भगवान पता नहीं इतना मैं अपने आप को बहुत

1075
01:14:15,920 --> 01:14:20,240
प्रारंभिक रूप से अगर दहिक कष्ट को लेकर के प्रभावित होना बहुत उसमें न्यूनता

1076
01:14:20,240 --> 01:14:24,480
आ गई है मैं नहीं प्रभावित होता क्यों नहीं प्रभावित होता क्योंकि मैंने

1077
01:14:24,480 --> 01:14:28,640
अपने गुरु मुख से उन तत्वों को पढ़ा है कौन से तत्व

1078
01:14:28,640 --> 01:14:33,680
नैन छिनती शस्त्राण नैनती पावका ना चैन क्ल

1079
01:14:33,680 --> 01:14:37,920
श मारता ये सब केवल कहने के लिए नहीं है मेरे जीवन में

1080
01:14:37,920 --> 01:14:42,000
यह सब रक्त में बह रहे हैं कर्मवादी कारस्ते फले

1081
01:14:42,000 --> 01:14:46,000
कदाचना संबंध का निर्वाह करो मगर सिद्धांत का

1082
01:14:46,000 --> 01:14:50,800
त्याग कभी मत करो रामो विग्रह धर्म असतो मा सद्गमया तमसोगया

1083
01:14:50,800 --> 01:14:55,200
ये सब रक्त में बह रहे हैं ऐसे ही नहीं है मैं अभिनय नहीं करता हूं यहां आ के इनका

1084
01:14:55,200 --> 01:14:59,200
ये सब रक्त में बहने वाली तो जब कोई सिद्धांत आपके रक्त में

1085
01:14:59,200 --> 01:15:03,600
बहने लगता है तो उसको आपको याद नहीं रखना पड़ता वो आपका स्वाभाविक

1086
01:15:03,600 --> 01:15:07,680
लक्षण बन जाता है तो वहां मेरा स्वाभाविक लक्षण था कि उसने जब मुझे

1087
01:15:07,680 --> 01:15:11,680
अश्लील शब्दों का संबोधन किया मेरे मेरे लिए तो मैं वहां पर अपनी मर्यादा को

1088
01:15:11,680 --> 01:15:15,760
याद रखता कि मुझे क्या करना है। इन्होंने जब अभी मुझे मक्कार इत्यादि कहा तो

1089
01:15:15,760 --> 01:15:19,760
मक्कार से आगे बात ना बढ़े तो मैंने कहा भाई यहां से छोड़ो नहीं तो यह

1090
01:15:19,760 --> 01:15:23,760
कुछ कह देंग मुझे आना पड़ेगा फिर ये हो जाएगा भैया वहां पर गाली

1091
01:15:23,760 --> 01:15:27,040
दी गई इनको अब फिर मैं रामपाल को छोड़

1092
01:15:27,040 --> 01:15:31,360
के यहां क्रिश्चियन मिशनरीज धर्म परिवर्तन करा रही है उनको छोड़

1093
01:15:31,360 --> 01:15:35,360
के अनेकानेक घटनाएं घट रही है गौ

1094
01:15:35,360 --> 01:15:39,440
हत्या हो रही है उस कार्य को छोड़ के मैं इस पर लग जाऊं कि भैया एक मेरी हिंदू

1095
01:15:39,440 --> 01:15:43,440
बहन ने मुझे जो है गाली दी थी अब यह टास्क हो गया मेरा यह मुझे

1096
01:15:43,440 --> 01:15:47,840
नहीं करना तो वहां से दूर हटना ज्यादा अच्छा है। खामखा का ऐसा खुद ही

1097
01:15:47,840 --> 01:15:52,080
सरकमस्ट्ससेस क्यों उनको क्यों जन्म दो

1098
01:15:52,080 --> 01:15:56,400
जिनसे तुम्हारा कोई बहुत बड़ा अभीष्ट तुम्हें प्राप्त फल नहीं होना है।

1099
01:15:56,400 --> 01:16:00,480
तो अब इन्होंने क्या किया जो आचरण की मैं बात लाया कि हम धर्म की रक्षा

1100
01:16:00,480 --> 01:16:04,640
कर रहे हैं। तो इन्होंने सबसे पहली बात तो यह है कि झूठ क्यों बोल रहे हो

1101
01:16:04,640 --> 01:16:08,640
भाई? आपसे जब पूछा जा रहा है आपको वेद मंत्र कैसे मिले? कह

1102
01:16:08,640 --> 01:16:12,960
दो भैया इसका मेरे पास जवाब नहीं है। मैं हार मानती हूं। सिंपल

1103
01:16:12,960 --> 01:16:17,120
जैसे अभी मैंने जैसे अभी मैंने कहा किसी ने बोला चार शंकराचार्यों

1104
01:16:17,120 --> 01:16:21,360
के नाम बता दो मैंने नाटक तो नहीं किया मेरी गति नहीं भाई इसमें जाके

1105
01:16:21,360 --> 01:16:25,680
पूरी शंकराचार्य जी से पूछ लो मेरे धर्म धर्म और ब्रह्म को काट काट काटने

1106
01:16:25,680 --> 01:16:30,080
की क्षमता हो तो आके काट लो ये है ना इसको कहते हैं

1107
01:16:30,080 --> 01:16:34,320
सिद्धांतवादी व्यक्ति रामो विग्रह धर्म तो मैं जितना

1108
01:16:34,320 --> 01:16:38,480
हो सकता है कोशिश यही करता हूं मेरे से मर्यादा का उल्लंघन ना हो अब आपने क्या

1109
01:16:38,480 --> 01:16:42,320
किया कि आपसे पूछा गया पहले जो है ईश्वर परंपरा फिर रामानुज परंपरा

1110
01:16:42,320 --> 01:16:46,480
फिर रामानुज जो है गुरु छुपा रहे हैं। जिन कर्मों को करते समय छिपाने का

1111
01:16:46,480 --> 01:16:50,560
भाव उत्पन्न हो वो कर्म परंपरा वो भी बोला

1112
01:16:50,560 --> 01:16:54,640
था मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं

1113
01:16:54,640 --> 01:16:58,720
तो जिन कर्मों को करते समय छिपाने का भाव उत्पन्न हो वो कर्म तामसिक कहलाते हैं।

1114
01:16:58,720 --> 01:17:02,720
12वा अध्याय 37वा श्लोक मनुष्मति पढ़ लो। तो आप तामसिक

1115
01:17:02,720 --> 01:17:07,840
कार्य करना सिखा रहे हो ये कह करके मैं छुपाऊंगा। अच्छा दूसरी बात

1116
01:17:07,840 --> 01:17:12,000
फिर आगे आप चले मैं अपनी बुद्धि से तय करूं भाई अती्द्रिय विषय है मोक्ष

1117
01:17:12,000 --> 01:17:16,240
को प्राप्त करना मैंने पूछा ना गायत्री मंत्र से मोक्ष मिल रहा है कैसे सिद्ध करोगे

1118
01:17:16,240 --> 01:17:20,240
अती्द्रिय विषय मेरे भाई उसमें आपको वेद को प्रमाण मानना है ना

1119
01:17:20,240 --> 01:17:24,400
तो जब आपकी इंद्रियां वहां काम नहीं कर रही तभी तो वहां धर्म है इंद्रियां

1120
01:17:24,400 --> 01:17:28,480
काम कर रही होती तो धर्म होता ही नहीं ना इंद्रियों से सब कुछ होना जाना होता

1121
01:17:28,480 --> 01:17:32,480
जी ओमकार जी ऐसे मजे से बोलता हूं कि जैसे छोटे बच्चों

1122
01:17:32,480 --> 01:17:36,720
की थोड़ी साइकोलॉजी होती है ना कि मान लो कोई खिलौना है ऑलरेडी उनके

1123
01:17:36,720 --> 01:17:40,800
पास लेकिन वो वो बोलते नहीं मुझे उसके वाला चाहिए या फिर मुझे उसके वाला

1124
01:17:40,800 --> 01:17:44,800
चाहिए कि जो भाई आपको प्राप्त है जैसे

1125
01:17:44,800 --> 01:17:49,040
धर्म शास्त्र की मर्यादा में रहते हैं जैसे नाम जब कोई भी कर सकता है

1126
01:17:49,040 --> 01:17:53,360
अब वो आपको प्राप्त है वो आपको करना नहीं है अच्छा जो वो वाले

1127
01:17:53,360 --> 01:17:57,680
भाई साहब बहन जी करे वो मुझे करना है मुझे वो चाहिए

1128
01:17:57,680 --> 01:18:01,760
मुझे वो वाला चाहिए मुझे सही बात है मुझे ये नहीं चाहिए मुझे वो

1129
01:18:01,760 --> 01:18:05,920
चाहिए नहीं नहीं बाबा बाबा बाबा मुझे वही वाला चाहिए

1130
01:18:05,920 --> 01:18:09,920
वो वाली बात। वो चलो मान लो वो दे दिया तो फिर से भी

1131
01:18:09,920 --> 01:18:14,640
तृप्ति नहीं फिर कुछ और मांगेंगे।

1132
01:18:14,640 --> 01:18:19,040
हां तो फिर इनका आचरण देखिए कैसे दो जो एक वाक्य

1133
01:18:19,040 --> 01:18:23,120
आया है रामू विग्रहवान धर्मा आपसे बात कर रहा हूं। आप इस वीडियो को देखेंगी

1134
01:18:23,120 --> 01:18:27,520
मुझे मालूम है। तो सीधे आपसे बात कर रहा हूं। क्या नाम है आपका? हां

1135
01:18:27,520 --> 01:18:31,680
सोनाली जी। अवेकनिंग हां सोनाली जी। अवेकनिंग अवेकनिंग अवेकनिंग।

1136
01:18:31,680 --> 01:18:36,160
तो भैया नींद से आप सोकर के जाग जाइए। 337 13

1137
01:18:36,160 --> 01:18:40,240
वाल्मीकि रामायण रामो विग्रह धर्म राम जी जो कहते

1138
01:18:40,240 --> 01:18:44,240
हैं जो करते हैं वो धर्म है। ठीक है। अब उन्होंने क्या कहा रामोद

1139
01:18:44,240 --> 01:18:48,240
नाभि भाषेते राम दो प्रकार की बातें नहीं करता। आपने कम से कम छह

1140
01:18:48,240 --> 01:18:52,320
सात प्रकार की बातें कर डाली उसमें। अरे भाई सीधे बोल दो ना मुझे। मैं

1141
01:18:52,320 --> 01:18:56,400
नहीं जानती इस विषय में आप ही मुझे बता दीजिए। वेद वेद के विषय

1142
01:18:56,400 --> 01:19:00,800
में क्या है? तो मैं आपको समझाता फिर वहां पर एक बहन होने के नाते बहन हमको परंपरा

1143
01:19:00,800 --> 01:19:04,800
से वेद प्राप्त होते हैं। इसलिए हमको परंपरा पर निर्भर होना होगा। उनके अर्थ के लिए

1144
01:19:04,800 --> 01:19:08,800
भी हम दोगले नहीं है कि तुम्हारी इतनी बात मानेंगे इतनी अब वो क्यों गुरु का गुरु

1145
01:19:08,800 --> 01:19:12,720
को स्वीकार नहीं कर रही। क्यों अलौकिक गुरु को बता रही ईश्वर परंपरा बुद्धि में

1146
01:19:12,720 --> 01:19:17,440
आए वो क्यों करता है? अहंकार जीत जाता है। वहां अहंकार जीत जाता है।

1147
01:19:17,440 --> 01:19:21,520
क्योंकि क्योंकि यदि हम किसी व्यवहारिक

1148
01:19:21,520 --> 01:19:25,520
गुरु को दे देंगे तो उसके व्यवहारिक शब्दों को ला के हमारे सामने रख देगा।

1149
01:19:25,520 --> 01:19:29,600
एक्स मैन सामने हो गया बॉर्डर बन गया तो ये

1150
01:19:29,600 --> 01:19:33,600
रख देगा हमारी सारी बातें कटंगी तो इसलिए वो बात बताओ

1151
01:19:33,600 --> 01:19:37,600
नहीं कि हम हम किसको प्रमाण करते प्रमाण तुम किसी को मानते नहीं मगर अभी अगर

1152
01:19:37,600 --> 01:19:41,680
तुम्हारा कोई गुरु है भी तो उसको बता दोगे यदि रामानुज परंपरा इत्यादि से मान लो

1153
01:19:41,680 --> 01:19:45,680
दुर्जन से तो वो आपकी बात तुरंत कट जाएगी मैं विद्या भास्कर जी का

1154
01:19:45,680 --> 01:19:49,760
या राघवाचार्य जी का आपको वक्तव्य सुनाता जो वर्तमान के प्रामाणिक उनके उस

1155
01:19:49,760 --> 01:19:53,760
संप्रदाय के गुरु हैं। ठीक है? आचार्य हैं। तो ये

1156
01:19:53,760 --> 01:19:58,320
तो रही ये बात। अब इन्होंने क्या किया कि जब इन्होंने यह तक कह दिया आदि शंकराचार्य

1157
01:19:58,320 --> 01:20:02,480
जी मेरे गुरु हैं। अब भैया जब आदि शंकराचार्य जी तुम्हें गुरु तुम्हारे

1158
01:20:02,480 --> 01:20:06,480
गुरु हैं तो क्या रामोदर नाभ भाषे का खंडन नहीं हो रहा जब तुम दूसरे दिन

1159
01:20:06,480 --> 01:20:11,440
कह रही कि अमायावाद अस शास्त्रम ये वाक्य किसी ये वाक्य

1160
01:20:11,440 --> 01:20:15,520
मुक्तेश्वर जी के विरुद्ध जा रहा है क्या ये वाक्य उन्हीं के विरुद्ध जा रहा है जो आप ये

1161
01:20:15,520 --> 01:20:19,680
कह रहे हो इस देश में आ के ये इसमें आगे

1162
01:20:19,680 --> 01:20:23,760
देखेंगे ना आप इनके मैप देखेंगे इन्होने कैसे चालू करी मैं ईश्वरीय परंपरा से

1163
01:20:23,760 --> 01:20:28,320
हूं शंकराचार्य जी मेरे आदि गुरु हैं उससे पहले बीच में बोली कि जो मोरालिटी

1164
01:20:28,320 --> 01:20:32,480
के मेरी मोरली कॉन्शियस के लिए सही है। मैं वो मानती हूं। उसके बाद ये राम परंपरा

1165
01:20:32,480 --> 01:20:36,560
पे आ गई। वहां वहां नास्तिक हो गई। पहले शंकर संप्रदाय वाली

1166
01:20:36,560 --> 01:20:40,640
हो गई। फिर ये जो है वेद विरोधी हो गई और फिर ये

1167
01:20:40,640 --> 01:20:44,720
नास्तिक हो गई। फिर रामानुजी हो गई और लास्ट में इंटरनेट संप्रदाय वाली हो

1168
01:20:44,720 --> 01:20:48,880
गई। नहीं नहीं एक और आपने ध्यान नहीं दिया। एक बार में उन्होंने अपने को फ्रस्ट्रेशन

1169
01:20:48,880 --> 01:20:54,880
बोल दिया था कि मैं कि मैं मुस्लिम हूं। ये भी बोल दिया था उन्होंने एक बार।

1170
01:20:55,680 --> 01:20:59,760
क्या बात अच्छा अब फिर तो मैं वो भी कहूंगा एक बार उन्होंने अपने आप को वो

1171
01:20:59,760 --> 01:21:04,320
भी नीला भी बनाया था नीला हां क्या है संविधान कानून

1172
01:21:04,320 --> 01:21:08,400
ऊपर है कानून को भी तो ले आई थी बीच में क्या आप कानून को

1173
01:21:08,400 --> 01:21:13,520
नहीं मानते लो भाई फिर लड़ाई किस बात की कानून को ही मान लो

1174
01:21:13,520 --> 01:21:17,520
अच्छा अच्छा सुनिए कानून तो सब जगह लागू है ही है तो फिर

1175
01:21:17,520 --> 01:21:21,520
काहे के लिए मरे जा रहे हो चिल्ला चिल्ला करके काहे के लिए रील बना रहे हो जब कानून को

1176
01:21:21,520 --> 01:21:25,600
तुम मानते हो अपना अंतिम निर्णायक तो कान कानून तो लागू है। भारत में

1177
01:21:25,600 --> 01:21:29,680
कानून लागू है। फिर क्या दिक्कत है? उसी से तो देश चल रहा है। हां जी।

1178
01:21:29,680 --> 01:21:33,840
बताइए। अभी जैसे हम बात कर ही रहे थे किताब के बारे में मेटाफिजिकल

1179
01:21:33,840 --> 01:21:37,920
विषय जो होते हैं जिनके बारे में हम प्रमाण नहीं दे सकते। जैसे गायत्री

1180
01:21:37,920 --> 01:21:42,000
मंत्र वाला एग्जांपल दिया। तो जब हम देखते हैं कि जितने इनके आर्गुमेंट होते है ना इंटरनेट

1181
01:21:42,000 --> 01:21:43,440
से जो आते हैं कि ये

1182
01:21:43,440 --> 01:21:47,760
धर्म किताब में ये लिखा है इस ग्रंथ में ये लिखा है सबके लिए आचार्य

1183
01:21:47,760 --> 01:21:52,080
वाणी है। सबका ऑलरेडी आंसर दे चुके हैं आचार्य जन दे चुके हैं।

1184
01:21:52,080 --> 01:21:56,240
अगर जिनको नहीं मालूम है उनके लिए मैं बता दूं और अवेकनिंग भारत जी को भी ये

1185
01:21:56,240 --> 01:22:00,400
आती है कल्याण नाम की एक सीरीज गीता प्रेस की मैगजीन। इसके

1186
01:22:00,400 --> 01:22:04,720
अंदर अंक आता है साल का एक विशेष। आप जाएंगे इंटरनेट आर्काइ पर जाइएगा।

1187
01:22:04,720 --> 01:22:08,880
वहां पर नारी अंक करके एक अंक है। वहां पर नारी का पूरा धर्म समझा रखा है। हनुमान

1188
01:22:08,880 --> 01:22:13,040
अंक करके एक अंक है। हनुमान जी के विषय में जितना ज्ञान है, सूर्य अंक करके तो अलग-अलग

1189
01:22:13,040 --> 01:22:17,040
किताबें हैं भैया उनको जरा पढ़ो। वो आचार्य वाणी इन्हीं को

1190
01:22:17,040 --> 01:22:21,120
समझाने के लिए है। वो गुमराह करने के लिए थोड़ी है। तुम जिस विषय

1191
01:22:21,120 --> 01:22:25,360
के बारे में तुम्हें तिनका ज्ञान नहीं है, भाषा तुम्हें आती नहीं, वेदांगों का तुम्हें ज्ञान नहीं।

1192
01:22:25,360 --> 01:22:29,520
इंटरनेट पर तुम किन से चुरा रहे हो? डाटा जो ये पोस्ट बनाती है वो डाटा भी

1193
01:22:29,520 --> 01:22:33,520
जो शंकर परंपरा के पेज होते हैं छोटे-मोटे पेज होते हैं उन्हीं का डाटा चुरा के

1194
01:22:33,520 --> 01:22:37,520
पोस्ट बनाती है ये जहां पे इनको बात वहां छुपी कटी वहां पे इन्होंने

1195
01:22:37,520 --> 01:22:42,080
परंपरा को ही डिनाउंस कर दिया कि हमें ये 20% किताब अच्छी लगती है 80%

1196
01:22:42,080 --> 01:22:46,160
हमारे लिए किताब बेकार है भाई आर्य समाज ही वाली हरकत है रामपाल

1197
01:22:46,160 --> 01:22:50,160
आर्य समाज ये सब यही करते हैं 80% 20% हमें रामपाल ने तो

1198
01:22:50,160 --> 01:22:54,240
ज्ञान गंगा में ज्ञान गंगा में लिख रखा है 5% ज्ञान काल

1199
01:22:54,240 --> 01:22:58,240
ब्रह्म का है उसको नहीं लेना है बिल्कुल ये किताब

1200
01:22:58,240 --> 01:22:58,740
है

1201
01:22:58,480 --> 01:23:02,720
हां ये किताब है अब आर्य समाज वाले क्या करेंगे चार बात हमारे धर्म संगत

1202
01:23:02,720 --> 01:23:06,720
हो गई चार विरोध हो गई तो अब जो चार विरोधी है इनको काट देंगे हम

1203
01:23:06,720 --> 01:23:10,960
और जो चार सही लग रही है वो प्रमाणिक हो गया अरे भैया ये प्रमाणिक कैसे हुआ ये समझाओ

1204
01:23:10,960 --> 01:23:15,120
जरा ये मिलावट कैसे नहीं है ये मिलावट कैसे है तुमको जो अच्छा लगा वो मिलावट

1205
01:23:15,120 --> 01:23:19,440
नहीं है मैं इस वो भी फिक्स नहीं है कि कौन सा वाला

1206
01:23:19,440 --> 01:23:24,080
मिलावटी है वो भी फिक्स अच्छा लगता है अच्छा लगा कि हमारी यहां तारीफ

1207
01:23:24,080 --> 01:23:28,160
ये मिलावट नहीं है जैसे जैसे ही एक शब्द पर भी हम अपना

1208
01:23:28,160 --> 01:23:32,640
अप्रमाण्य बुद्धि दिखाएंगे अपनी वैसे ही वो पूरी की पूरी जो उसकी प्रमाण्यता

1209
01:23:32,640 --> 01:23:36,640
है वो गायब हो जाएगी।

1210
01:23:36,640 --> 01:23:40,880
मुझे लगता है एक बार मैं लीव करके वापस आ जाऊं। आप अपनी बात बोलिए वीरूपाक्ष जी

1211
01:23:40,880 --> 01:23:45,520
आप क्या चल रहा है आपका? क्या दिक्कत है? लीव

1212
01:23:45,520 --> 01:23:49,680
कर गए। हां बोलिए ऐशको जी। जी नाम तो आपका इतना बढ़िया है। हां

1213
01:23:49,680 --> 01:23:53,840
एक बात तो मैं रखता हूं। मैं अब देखिए मैं शंकर परंपरा का अनुयाय हूं नहीं।

1214
01:23:53,840 --> 01:23:58,080
मेरे मन में एक भ्रांति भरी गई थी दो वर्षों पहले कि कर्पात्री स्वामी शूद्रों से चिढ़ते

1215
01:23:58,080 --> 01:24:02,080
हैं। विश्वनाथ मंदिर में घुसने नहीं दिया। मैं कर्पात्री धाम गया। पिछले साल मैं ये किताब

1216
01:24:02,080 --> 01:24:06,240
खरीद के लाया। पढ़ने के लिए बकायदा मेरे को बोला था किसी ने। सिद्धार्थ पांडे जी हैं। करपात्री

1217
01:24:06,240 --> 01:24:10,400
धाम में ही शिष्य हैं। उन्होंने बोला था ये किताब पढ़िएगा। इसके अंदर क्लियर रीजन

1218
01:24:10,400 --> 01:24:13,520
लिखा हुआ है कि वो विश्वनाथ मंदिर को क्यों छोड़े, नया

1219
01:24:13,520 --> 01:24:17,680
विश्वनाथ क्यों बना? और क्या-क्या चीजें रही। और इंटरनेट पे अब क्या है? क्योंकि

1220
01:24:17,680 --> 01:24:21,840
अवेकनिंग भारत जी महिला है। सोनाली जी महिला है। तो अब एक महिलाओं का फेमिनिज्म का चल गया।

1221
01:24:21,840 --> 01:24:26,400
करपात्र्री और मिसोजनिस्ट भी थे। ये आचार्य मिसोजनिस्ट भी थे। मिसोजनिस्ट

1222
01:24:26,400 --> 01:24:30,400
कहां से थे भैया? जहां तक मैंने सुना है कि एक कुछ रिपोर्टरों का ग्रुप

1223
01:24:30,400 --> 01:24:34,560
गया था काशी घाटों पर गया था हमसे इंटरव्यू लेने तो दूर से वो

1224
01:24:34,560 --> 01:24:38,560
देख के देख रहे थे घाट पे तो एक बच्ची खेल रही थी। लाल कलर के वस्त्र

1225
01:24:38,560 --> 01:24:42,720
पहने हुए थे उसने तो वो खेल रही थी। पास जाके देख करात्री स्वामी जी बैठे हुए थे घाट

1226
01:24:42,720 --> 01:24:46,800
पे। तो ये बात हमको चंडीधाम से पता चली। कहते हैं कि

1227
01:24:46,800 --> 01:24:50,880
वो इतने बड़े भक्त थे कृपात्री स्वामी जी राजा

1228
01:24:50,880 --> 01:24:55,360
राजेश्वरी बाल त्रिपुरा के कि संग चलती थी उनके वो व्यक्ति जो

1229
01:24:55,360 --> 01:24:59,920
शक्ति को पूजता हो वो मिसजेनिस्ट हो कैसे सकता है भाई मिसोजनी

1230
01:24:59,920 --> 01:25:04,160
की परिभाषा तुम्हारे लिए क्या है मनुस्मृति क्या कोई भी सिविल बेसिक राइट

1231
01:25:04,160 --> 01:25:08,160
है उसको मना करती है कोई राइट मना नहीं करती है धार्मिक विषय

1232
01:25:08,160 --> 01:25:12,240
में तो धार्मिक डॉक्यूमेंट ही सर्वोपरि होगा अगर आप मेटाफिजिकल

1233
01:25:12,240 --> 01:25:16,720
विषय की बात कर रहे हैं तो मेटाफिजिकल विषय में जो डॉक्यूमेंट है मनुस्मृति

1234
01:25:16,720 --> 01:25:20,800
इंपीरियल डॉक्ट्राइन मानी जाएगी धर्म के विषय में इम्पीरियल डॉक्ट्राइन है उसको आप

1235
01:25:20,800 --> 01:25:24,800
संविधान की तरह नहीं कह सकते हो ना जब मनुस्मृति में अलग-अलग वर्णों के

1236
01:25:24,800 --> 01:25:28,640
लिए आपके आपके अलग-अलग डिनोशन दे रखे हैं ये काम है ये काम है ये काम नहीं है तो

1237
01:25:28,640 --> 01:25:32,880
वो मानना पड़ेगा दंड भी सबको बराबर दिया गया है

1238
01:25:32,880 --> 01:25:36,960
अब यही बात आती है मेरे को बहुत बढ़िया बात लगती है ये शंकर परंपरा के लिए कहते हैं

1239
01:25:36,960 --> 01:25:41,680
कि शूद्र यज्ञ नहीं कर सकता शूद्र जने नहीं पहन सकता

1240
01:25:41,680 --> 01:25:46,240
ब्राह्मण का जीवन अगर मनुस्मृति के एहसास देखिए फूंक-फूक कदम रखना होता

1241
01:25:46,240 --> 01:25:50,640
बहुत कठिन है। देखिए मैं इसमें इसमें एक बात जोडूंगा

1242
01:25:50,640 --> 01:25:54,800
कि यज्ञ करना और जनेऊ पहनना आपका अंतिम लक्ष्य

1243
01:25:54,800 --> 01:25:58,800
नहीं है। ठीक है? या ब्राह्मण बनना आपका अंतिम

1244
01:25:58,800 --> 01:26:03,120
लक्ष्य नहीं है या क्षत्रिय बनना या वैश्य बनना या शूद्र बनना हां

1245
01:26:03,120 --> 01:26:07,440
सच्चिदानंद स्वरूप को प्राप्त करना आपका अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। उसके लिए अलग-अलग

1246
01:26:07,440 --> 01:26:11,440
विधि बनाई बताई है, बनाई गई है। ठीक है? तो उसके हिसाब

1247
01:26:11,440 --> 01:26:15,840
से आपको व्यवहार में रहकर आपको फॉलो करना चाहिए और फॉलो करके आप उसी

1248
01:26:15,840 --> 01:26:19,920
क्योंकि फल शौर्य नहीं है। गुरुदेव क्या कहते हैं? फल चौर्य नहीं है भगवान की

1249
01:26:19,920 --> 01:26:24,000
तरफ से किसी भी जीव को फल में ऐसा नहीं है कि

1250
01:26:24,000 --> 01:26:28,080
नहीं भाई तुम अगर मनुष्य हो तो तुम्हें ज्यादा फल मिलेगा और तुम श्वान हो तो तुम्हें कम

1251
01:26:28,080 --> 01:26:32,080
फल मिलेगा। ऐसा भी नहीं है। यह भी नहीं है अगर पराकाष्ठा मिले कि

1252
01:26:32,080 --> 01:26:36,080
तुम ब्राह्मण हो, सन्यासी हो, ब्रह्मचारी हो इसलिए तुम्हें ज़्यादा फल मिलेगा

1253
01:26:36,080 --> 01:26:40,240
और अगर तुम चांडाल हो तो तुम्हें कम फल मिलेगा। फल चौरे फिर भी नहीं है। बस

1254
01:26:40,240 --> 01:26:43,680
कर्म का बोध होना चाहिए व्यवहार में क्योंकि हम हम व्यवहार

1255
01:26:43,680 --> 01:26:47,760
से बंधे हैं ना। हम व्यवहार से बंधे हैं तो हम हम किसी कुल के अंदर आते

1256
01:26:47,760 --> 01:26:51,920
हैं। किसी शरीर में आते हैं तो हमें उस शरीर के हिसाब से व्यवहार करना पड़ता है।

1257
01:26:51,920 --> 01:26:55,920
तो बात यहां पे जैसे एक और बात आती है इनकी कि इनकी एक और बात आती

1258
01:26:55,920 --> 01:27:00,160
है कि भैया ब्राह्मण यज्ञ करते हैं। शूद्र को नहीं करने देते। एक बात बताओ शूद्र

1259
01:27:00,160 --> 01:27:04,240
अपना नाम जाप करे उसको उतना ही फल मिलेगा जितना ब्राह्मण को उसे कर्म करने

1260
01:27:04,240 --> 01:27:08,240
का मिलेगा। ज्यादा कम थोड़ी होता है। जो व्यक्ति निष्ठा से अपना धर्म

1261
01:27:08,240 --> 01:27:12,880
निभाएगा उसको उसी निष्ठा के अनुसार उसी का फल मिलेगा। ब्राह्मण

1262
01:27:12,880 --> 01:27:17,040
ब्राह्मण को जो कठिन कठिन तपस्या करके जो फल मिलेगा वही

1263
01:27:17,040 --> 01:27:21,040
शूद्र को कम भक्ति में मिल जाएगा। भाई माला जाप एक माला जाप करना

1264
01:27:21,040 --> 01:27:25,040
और एक होम यज्ञ का अंतर कितना है अंतर? व्यक्ति विशेष करने बैठे 10

1265
01:27:25,040 --> 01:27:29,040
मिनट में माला जाप हो जाएगा। यज्ञ करने बैठे घंटा भर लग सकता है। एक

1266
01:27:29,040 --> 01:27:33,120
तो सामग्री इकट्ठा करना संभालना करना। इसमें एक इसमें एक और बात जोड़

1267
01:27:33,120 --> 01:27:37,200
देता हूं मैं। मंदिर का एग्जांपल ले लीजिए आप। एक मंदिर

1268
01:27:37,200 --> 01:27:41,200
के गर्भ गृह में जो ब्राह्मण पूरा पूज करता है पूजा

1269
01:27:41,200 --> 01:27:45,360
अर्चना अपना सारे उपचार सारे उपचार करता है उसमें तो वो जब

1270
01:27:45,360 --> 01:27:49,360
उसको जितना फल प्राप्त होता है ना उतना अगर एक शूद्र केवल उस मंदिर

1271
01:27:49,360 --> 01:27:53,360
के शिखर का दर्शन कर ले तो वो फल मिल जाता है। बताइए तो अब

1272
01:27:53,360 --> 01:27:57,600
इसमें हां तो अब इस अब इसमें फिर जाती है क्या? नहीं जाती अभी भी नहीं बोलेंगे

1273
01:27:57,600 --> 01:27:58,800
इसमें भाई कर्म

1274
01:27:58,800 --> 01:28:03,440
के हिसाब से आपको मतलब शरीर के हिसाब से वर्ण के हिसाब से आपको

1275
01:28:03,440 --> 01:28:07,600
क्या बोलते हैं अलग-अलग कर्म दिया गया है ना वह तो करना चाहिए तो

1276
01:28:07,600 --> 01:28:11,680
बस यह है अब जब आपको दे रखी है भैया एक ब्राह्मण पुजारी है ठीक है

1277
01:28:11,680 --> 01:28:15,840
ना वो मंदिर में अपने सात से आठ घंटे लगाएगा त्रिकाल संध्या भी करेगा सारे काम

1278
01:28:15,840 --> 01:28:19,840
करेगा तब जाके उसको अपनी ड्यूटी पूरी होगी तो ये आपके

1279
01:28:19,840 --> 01:28:23,840
लिए क्या वो एक चॉइस थोड़ी है कि आप ब्राह्मण बन गए ये ड्यूटी नहीं करेंगे तो फल मिल जाएगा

1280
01:28:23,840 --> 01:28:27,920
चॉइस थोड़ी है वृणाश्रम धर्म भी बहुत कैलकुलेटेड चीज है और मैं तो कहता हूं

1281
01:28:27,920 --> 01:28:31,920
जिनको वर्णाश्रम धर्म से इतनी दिक्कत है सब परंपराएं ओपन है आगमिक

1282
01:28:31,920 --> 01:28:36,080
परंपराएं भी ओपन बहुत सारी परंपराएं हैं आगमन वहां जाइए

1283
01:28:36,080 --> 01:28:40,080
हमारे गुरुदेव तो ये भी कहते हैं हां हमारे गुरुदेव ये भी

1284
01:28:40,080 --> 01:28:44,480
कहते हैं कि आपको फल चाहिए शास्त्र सम्मत लेकिन विधि

1285
01:28:44,480 --> 01:28:48,960
चाहिए सेुलर सेुलर वालों की विधि चाहिए विधि चाहिए

1286
01:28:48,960 --> 01:28:52,960
अगर फल शास्त्र सम्मत चाहिए तो फिर विधि भी विधि भी शास्त्र सम्मत फॉलो

1287
01:28:52,960 --> 01:28:56,960
करनी पड़ेगी आम आम भी खाना है पेड़ से भी नहीं तोड़ना है लिंकेट

1288
01:28:56,960 --> 01:29:01,120
करके मंगाना है ये कहीं बात थोड़ी हुई ये कोई बात थोड़ी हुई तो इनके

1289
01:29:01,120 --> 01:29:05,280
थोड़े क्लेम की बात कर लेते हैं जैसे तक शिवाश जी आ नहीं रहे। बेसिक बेसिक क्लेम्स की बात कर लेते हैं जो इन्होंने कल

1290
01:29:05,280 --> 01:29:09,360
रखे हैं कि शास्त्र नहीं कहता है कि विदेश गमन गलत

1291
01:29:09,360 --> 01:29:13,600
है। शास्त्र कौन सा शास्त्र नहीं कहता इनके लिए वेद अथॉरिटी है। वेद के अलावा सब कचरा है इनके

1292
01:29:13,600 --> 01:29:14,100
लिए।

1293
01:29:13,840 --> 01:29:17,840
ये इन्होंने पहले ही इस्टैब्लिश कर दिया था कि मैं अपनी बुद्धि के अनुसार वेद को ही

1294
01:29:17,840 --> 01:29:22,160
अथॉरिटी मानती हूं। तो इन्होंने ये बात कही थी। अब विदेश गमन

1295
01:29:22,160 --> 01:29:26,560
क्यों गलत है? अगर हम आचार्य वाणी को भी एक बार को छोड़ दे। हम मूल ट्रांसलेशन

1296
01:29:26,560 --> 01:29:31,360
उठा ले। ऐसा कोई ग्रंथ है 18 महापुराण दो इतिहास या फिर

1297
01:29:31,360 --> 01:29:35,440
किसी भी और अपने शास्त्र में जहां पर लिखा हो कि विदेश गमन अलाउड है।

1298
01:29:35,440 --> 01:29:39,520
कोई भी ऐसा ग्रंथ है तो प्रमाण रख दीजिए सामने लाके। कोई कमेंट्री नहीं

1299
01:29:39,520 --> 01:29:43,760
मूल श्लोक दिखा दीजिए कि विदेश गमन सही है ऐसा लिखा हो। ये दिखा

1300
01:29:43,760 --> 01:29:47,760
दीजिए बस। इतना सा है। परंपरा नेसेसरी क्यों नहीं है? इस पर

1301
01:29:47,760 --> 01:29:52,000
भैया कितनी बार बात हो चुकी है। एग्जांपल दे दिए हैं कितने? स्टोरी

1302
01:29:52,000 --> 01:29:56,160
भी लगा चुके हैं। अगर इनको समझ नहीं आता क्योंकि होता क्या है कि जब हम बात करते हैं हम शास्त्र संवत बात करते

1303
01:29:56,160 --> 01:30:00,320
हैं थोड़ा टेक्निकल टर्म्स में बात करते हैं तो इनको नहीं समझ आती होगी। उसके लिए कल मैंने इनके

1304
01:30:00,320 --> 01:30:04,400
लिए सिंपल तरीके से समझाया था इनको वो भी शायद उनको नहीं समझ आया होगा। शिवश जी आ ही

1305
01:30:04,400 --> 01:30:08,640
चुके हैं तो अब एक क्लेम है तो शिवश जी आंसर कर पाएंगे शायद से। चले गए वापस

1306
01:30:08,640 --> 01:30:14,640
से शायद।

1307
01:30:14,640 --> 01:30:18,800
नहीं जो चक्रवर्ती राजा होते थे वो वो क्षेत्र विस्तार इसीलिए तो करते

1308
01:30:18,800 --> 01:30:23,040
थे वो ताकि कोई विदेश भूमि रहे ही ना ये भी तो था भाई

1309
01:30:23,040 --> 01:30:27,120
अब विदेश भूमि होने का क्या है आर्य देश जो है उसकी

1310
01:30:27,120 --> 01:30:31,360
परिभाषा क्या है यहां यज्ञ होते हैं यहां जितने धर्म शास्त्र है उनके नियमों

1311
01:30:31,360 --> 01:30:35,520
का सम्मान होता है तो वो आर्यभूमि है होने को पाकिस्तान भी पुराने समय से

1312
01:30:35,520 --> 01:30:39,760
भारत का हिस्सा था पर आज क्या वो वैदिक भूमि मानी जाएगी नहीं मानी जाएगी कैसे

1313
01:30:39,760 --> 01:30:43,840
मानी जाएगी कोई तरीके कोई वो बात ही नहीं है। अब वही बात आ जाएगी कि अब ये

1314
01:30:43,840 --> 01:30:47,840
सवाल उठाते हैं कि देश में भी इतने हो रहे हैं धर्म विरुद्ध काम हो

1315
01:30:47,840 --> 01:30:51,840
रहे हैं तो ये भी आर्यभूमि नहीं है। बट यहां प्रयास है। यहां उन्हें रोकने

1316
01:30:51,840 --> 01:30:55,920
का प्रयास है। यहां धर्म अभी भी बचा है। नेपाल और

1317
01:30:55,920 --> 01:31:00,960
भारत ऐसे देश हैं जहां धर्म अभी बचा है। जहां धर्म के लिए लड़ाई चालू है।

1318
01:31:00,960 --> 01:31:05,040
जहां पे इसके खिलाफ आवाज है। बाकी देशों में और जब

1319
01:31:05,040 --> 01:31:09,200
ये मूल जब ये मूल धर्म को समझेंगी, बस माफ कीजिएगा काट रहा हूं।

1320
01:31:09,200 --> 01:31:13,200
जब ये मूल धर्म को समझेंग जब ये वर्णाश्रम को समझेंग तब इन्हें समझ में आ जाएगा

1321
01:31:13,200 --> 01:31:17,200
कि अगर एक ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र मान लो पाकिस्तान में है वहां

1322
01:31:17,200 --> 01:31:21,280
पर तो हिंदू है नहीं अब वहां पर क्या वो अपने धर्म को फॉलो कर पाएगा ब्राह्मण क्या

1323
01:31:21,280 --> 01:31:25,600
त्रिकाल संध्या कर पाएगा वहां पर मलेच्छों के बीच में रहकर वो नहीं कर पाएगा

1324
01:31:25,600 --> 01:31:30,000
इसीलिए वहां पर निषेध किया गया है क्यों क्योंकि वहां पर जाएगा तो वो अपने

1325
01:31:30,000 --> 01:31:34,160
जो धर्म है उसको फॉलो नहीं कर पाएगा तो इससे ऐसी भूमि पर जाना ही क्यों जहां

1326
01:31:34,160 --> 01:31:38,320
पर आपका धर्म प्रचार और धर्म का कार्य आप कर ही नहीं पाओ बिल्कुल और चलिए

1327
01:31:38,320 --> 01:31:42,400
ये बोलते हैं कि आप मनुस्मृति का पालन नहीं करते। आप कहते हैं मनुस्मृति में विदेश गमन मना है। आप

1328
01:31:42,400 --> 01:31:46,880
खुद पालन नहीं करते। आपके घर में वाशरूम है। ये वो ये अभी ये उठाते हैं। तो

1329
01:31:46,880 --> 01:31:50,960
घर के अंदर वाशरूम होना या फिर जो जो भी नियम है उनका

1330
01:31:50,960 --> 01:31:54,960
पालन करना विदेश जाने से तो आसान ही है। विदेश

1331
01:31:54,960 --> 01:31:59,040
जाना पर्सनल चॉइस है। विदेश जाना आपके ऊपर है

1332
01:31:59,040 --> 01:32:03,200
कि आपको जाना है। उसप आपके ऊपर ऑब्लिगेशन थोड़ी है कि सरकार ही भेज रही है बाहर।

1333
01:32:03,200 --> 01:32:07,440
ऐसा थोड़ी है। वो आपका अपना चॉइस है कि आप विदेश जा सकते हैं, नहीं जा सकते।

1334
01:32:07,440 --> 01:32:11,440
कुछ चीजें ऐसी होती है जो आज की डेट में फॉलो नहीं करी जा सकती। अब मनुस्मृति ये कहता है कि

1335
01:32:11,440 --> 01:32:16,560
यज्ञ की संविधा आती है पेड़ से गिरनी चाहिए। पेड़ बचे हैं गिरने के लिए।

1336
01:32:16,560 --> 01:32:20,560
पेड़ बचे हैं गिरने के लिए। बचे ही नहीं। अच्छा विदेश भी इनको जाना है और वो भी शास्त्र

1337
01:32:20,560 --> 01:32:25,120
सम्मत विधि से विदेश जाना है। आप विदेश जाओ पर ये मत बोलो। हां

1338
01:32:25,120 --> 01:32:29,120
शास्त्र सम्मत विधि से विदेश मत जाओ। आप ये बोलो कि भैया शास्त्र सम्मत

1339
01:32:29,120 --> 01:32:33,200
विधि नहीं है। हम विदेश जा सकते हैं। लेकिन शास्त्रों के आधार पर नहीं जा सकते। तो आप

1340
01:32:33,200 --> 01:32:37,680
अपने आप को पहले बताओ। मैं इसमें हां मैं इसमें एक बात बोलूंगा कि

1341
01:32:37,680 --> 01:32:41,840
विदेश जाना अ इस कल्प

1342
01:32:41,840 --> 01:32:45,280
या इस युग में पूर्ण तरह से निषेध नहीं है। कुछ-कुछ

1343
01:32:45,280 --> 01:32:49,360
जगहों पर कुछ-कुछ कारणों के की वजह से जा सकता है। धर्म रक्षा के लिए भी जाया

1344
01:32:49,360 --> 01:32:53,360
जा सकता है। इसमें आपको एग्जांपल इसमें एग्जांपल दे देता हूं मैं आपको

1345
01:32:53,360 --> 01:32:57,440
पूर्वाचार्य महाभाग जी का। हमारे फादर ऑफ फादर

1346
01:32:57,440 --> 01:33:01,600
ऑफ वैदिक मैथमेटिक्स बोलते हैं ना एमआईटीस में आपको

1347
01:33:01,600 --> 01:33:05,840
उनके लेक्चर्स मिलेंगे। ठीक है? वैदिक मैथमेटिक्स के वो फादर

1348
01:33:05,840 --> 01:33:10,160
कहे जाते हैं वो। ठीक है? फादर ऑफ वैदिक मैथमेटिक्स हमारे पूर्वाचार्य जी महाराज जगतुगुरु

1349
01:33:10,160 --> 01:33:14,320
स्वामी श्री भारती कृष्ण तीर्थ महाग तो

1350
01:33:14,320 --> 01:33:18,400
वो भी विदेश यात्रा करके आए लेकिन धर्म संगत कैसे

1351
01:33:18,400 --> 01:33:22,480
गए थे वो उस समय पीठ पर नहीं थे आसीन पीठ त्याग

1352
01:33:22,480 --> 01:33:26,960
की थी उन्होंने और फिर इसके बाद धर्म रक्षा के लिए वो

1353
01:33:26,960 --> 01:33:31,120
विदेश यात्रा करके आए थे तो कारण ये था ठीक है इनको

1354
01:33:31,120 --> 01:33:35,280
ये भी नहीं पता होगा कि सन्यासी पे वर्णाश्रम कैसे लागू होता है इनको ये भी बात नहीं मालूम

1355
01:33:35,280 --> 01:33:39,280
हां नहीं नहीं पता होगा नहीं पता नहीं पता होगा। अभी मैं

1356
01:33:39,280 --> 01:33:43,360
दिखाता हूं आपको इनके हिसाब से जो इनको लोग भाते हैं ना वो दिखाता हूं। ये देख रहे हैं आप कि इजरली

1357
01:33:43,360 --> 01:33:47,680
ब्राह्मण है जो अभी वैदिक त्रिकाल संध्या कर रहा है। इनके हैं 500

1358
01:33:47,680 --> 01:33:51,680
कुछ फॉलोअ है और ये रणवीर अल्लादिया के साथ पडकास्ट करना चाहते हैं। ये अभी वैदिक मंत्र

1359
01:33:51,680 --> 01:33:55,680
पढ़ रहे हैं। इजराइली ब्राह्मण कहते हैं ये खुद को और इनका काफी पैसा बन रहा है इनका। ऐसे

1360
01:33:55,680 --> 01:33:59,840
लोग इनको अच्छे लगते हैं। क्योंकि वहां वैलिडेशन मिल जाती है इनको

1361
01:33:59,840 --> 01:34:00,400
ना जाने

1362
01:34:00,400 --> 01:34:04,800
क्या ही होगा इनका। और इनका एक और आता है कि एनआरआई

1363
01:34:04,800 --> 01:34:08,800
फंडिंग उठाते हैं। एनआरआई हिंदुओं की फंडिंग उठाते हैं। जिनको हम अनप्योर या फिर अनवर्दी

1364
01:34:08,800 --> 01:34:12,880
कहते हैं। ऐसा थोड़ी है। ये कहां हमने कहा किसी को जो एनआरआई

1365
01:34:12,880 --> 01:34:17,040
वाला बंदा है या फिर कोई बाहर रहता है। उसको हमने आज तक ऐसा कहा कि आप हिंदू

1366
01:34:17,040 --> 01:34:21,200
नहीं है। या फिर ऐसा कहा हो कि आप भगवान का नाम नहीं ले सकते। मनाही

1367
01:34:21,200 --> 01:34:26,000
तो कहीं नहीं करी। वेदाचार का पालन नहीं कर सकते। वो एक मनाही है।

1368
01:34:26,000 --> 01:34:30,000
अब उसका आपको पालन करना है नहीं करना है आप कर लीजिए। जी मैं तो कहता हूं आप कनाडा में बैठ के

1369
01:34:30,000 --> 01:34:34,160
आप स्त्री हैं। आप जनेव धारण करके यज्ञ भी कर लीजिए। फल तो आपको मिलेगा नहीं।

1370
01:34:34,160 --> 01:34:38,320
अब ये कड़वा सच है। मानना है मानिए नहीं मानिए हम ना माने। पाप लगेगा वो अलग।

1371
01:34:38,320 --> 01:34:42,400
अब वो आपके हिसाब पे है कि आपकी बुद्धि क्या कहती है? प्रमाण सामने है।

1372
01:34:42,400 --> 01:34:47,920
परंपराएं सामने है। बाकी आपके ऊपर है।

1373
01:34:47,920 --> 01:34:52,000
कल जो इनके अनुयाई थे। कल जो इनके साथ बैठे थे वो बाद में लाइव

1374
01:34:52,000 --> 01:34:56,080
में आके कहते हैं कि शंकराचार्य तो प्रचंड बौद्ध है। ये वो और कल तक इनको ये बात मालूम

1375
01:34:56,080 --> 01:35:00,160
नहीं थी। इनकी 4 घंटे की लाइफ में ये क्लियर एक्सट्रैक्ट है। जहां पर ये

1376
01:35:00,160 --> 01:35:04,160
कहती है ऐसा लिखा ही नहीं होगा। आप क्या बात कर रहे हो? शंकराचार्य प्रचंड बहुत कैसे हो सकते हैं? आज

1377
01:35:04,160 --> 01:35:08,240
वही क्लेम ये स्टोरियों पे लगा रही है। पोस्ट कर रही है कि यहां पे ये लिखा है। यहां

1378
01:35:08,240 --> 01:35:12,800
ये ये लिखा है। कल तक जो बात आपको मालूम नहीं थी कि शंकराचार्य के बारे में ये रामानुजाचार्य

1379
01:35:12,800 --> 01:35:15,680
माधवाचार्य जी ने भाष्य में लिखा है। आज उसका डंका बजा

1380
01:35:15,680 --> 01:35:19,760
रहे हैं आप। ये क्या बात हुई भाई? जब आपको ये

1381
01:35:19,760 --> 01:35:24,000
बातें बताई नहीं है। और सबसे बुरा मेरे को तब लगता है जब इन लोगों के पास कुछ बचता

1382
01:35:24,000 --> 01:35:28,000
नहीं ना। कल इन्होंने क्या करा? शिवशं जी पे अटैक कैसे चालू करें? डिबेट चालू

1383
01:35:28,000 --> 01:35:32,000
होती है। आप ब्राह्मण है क्या शिवश जी? आप ब्राह्मण है क्या? ये बात कहां से

1384
01:35:32,000 --> 01:35:36,000
आई? विदेश गमन के बीच में? उनकी जाति पूछना, जाति

1385
01:35:36,000 --> 01:35:40,640
पे खेलना या फिर मैं कहूं उनके पूज्य गुरुदेव के बारे में, उनके पूर्वाचार्यों

1386
01:35:40,640 --> 01:35:44,720
के बारे में अलग-अलग तरीके की टिप्पणियां करना। ये प्रवोकेशन नहीं तो

1387
01:35:44,720 --> 01:35:48,800
और क्या है? अगर आप बात पे नहीं खेल पा रहे हैं तो आप क्या चाह रहे हैं? शिवा जी अपना आपा खो

1388
01:35:48,800 --> 01:35:52,800
दें। कुछ कह दे ताकि हम सिंपैथी गेन करें। उन्होंने करा ही नहीं। वो चले गए। और

1389
01:35:52,800 --> 01:35:56,800
डबल डाउन कर रही है कि मक्कार बुलाया तो बुलाऊं घी। ये कोई तरीका थोड़ी

1390
01:35:56,800 --> 01:36:00,880
है। आप अपनी ही आप अपने ही फॉलोअर की नजरों में गिर रहे हैं और कुछ इसका वो नहीं

1391
01:36:00,880 --> 01:36:04,960
है। वो इन्होंने विनाशकाल विपरीत

1392
01:36:04,960 --> 01:36:08,960
बुद्धि तो वही है समस्या अपने उन्हें

1393
01:36:08,960 --> 01:36:12,960
अपने आप को गलत होते हुए नहीं देखना था। वो जो उसके

1394
01:36:12,960 --> 01:36:16,960
लिए जो अपना सकते हैं सब लेकिन समस्या ये हो गई

1395
01:36:16,960 --> 01:36:21,040
उनके साथ कि वो कुछ ज्यादा ही गलत हो गई। कोई बात नहीं अब मैं मैं कहता हूं मैं

1396
01:36:21,040 --> 01:36:25,120
एक मीम डालता हूं हमेशा जब भी ऐसा कुछ होता है उसमें लिखा रहता है कि मनुष्य का

1397
01:36:25,120 --> 01:36:29,600
अहंकार ही उसका भगवान की या फिर मोक्ष की राह से दूर लेके जाता है

1398
01:36:29,600 --> 01:36:30,880
ये मैं हर बार कहता हूं

1399
01:36:30,880 --> 01:36:34,880
और ये बात अचूक सत्य है क्योंकि मैं देखता आ रहा हूं कि जितने साल यहां

1400
01:36:34,880 --> 01:36:38,960
पे आप आवाहन जी के चैनल पे भी देख लीजिए कोई ऐसा व्यक्ति नहीं आया होगा बोल के गया होगा कि मैं आपकी बात

1401
01:36:38,960 --> 01:36:43,040
मानता हूं आपने तर्क सही रखे हैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं आया होगा सब

1402
01:36:43,040 --> 01:36:47,120
डिबेट के बाद अपने Instagram अपने सोशल मीडिया पे जाके हम जीत गए हमने आवाहन को हरा दिया हमने

1403
01:36:47,120 --> 01:36:51,600
ये कर दिया हमने इनको डिस्रूव कर दिया हमारी किताब सही कर क्या होता है

1404
01:36:51,600 --> 01:36:55,840
इससे कुछ नहीं होगा आप चार दिन खुश रहेंगे पांचवे दिन आपको लोग भूल जाएंगे

1405
01:36:55,840 --> 01:36:59,920
और अभी इनका प्रोपगेंडा देखिएगा भव्य राधा कृष्ण दास के साथ जो डिबेट हुई

1406
01:36:59,920 --> 01:37:03,920
थी इनकी उसमें से इन्होंने एक्सट्रैक्ट उठाए हैं जब वहां बात आई थी कि

1407
01:37:03,920 --> 01:37:07,920
ईश्वर दुष्कर्म वाली जो बात उठी थी उसका एक्सट्रैक्ट उठा के हनुमान जी को ऐसे

1408
01:37:07,920 --> 01:37:12,400
ऐसे पेंट करा है कि वो इसका समर्थन करते हैं। यही

1409
01:37:12,400 --> 01:37:16,720
दिक्कत है इंटरनेट की कि आप इंटरनेट से धर्म का ज्ञान उतना ही ले सकते हैं जितना कि

1410
01:37:16,720 --> 01:37:21,040
हम एक अपने नहीं नहीं यह एक्चुअली उस व्यक्ति का व्यक्तित्व

1411
01:37:21,040 --> 01:37:25,120
और उसकी मेंटल एबिलिटी से पता लगती है उससे कि आप

1412
01:37:25,120 --> 01:37:29,120
यह सोचिए कि इसका मतलब यह होता है कि यह व्यक्ति अपने

1413
01:37:29,120 --> 01:37:33,360
आप को सही साबित करने के लिए कितना गलत हो सकता है। इतना कहां तक जा सकता है धर्म

1414
01:37:33,360 --> 01:37:37,360
तो दूर की बात है धर्म तो आएगा ही नहीं। वह उसके कोई लेना

1415
01:37:37,360 --> 01:37:41,440
देना नहीं है उसका। लेकिन अपनी बात को सही करने के लिए मैं अधर्म का पूरा साथ

1416
01:37:41,440 --> 01:37:45,840
दूंगा या दूंगी। अपनी बात और मैं कांट छाट के दिखाऊंगी

1417
01:37:45,840 --> 01:37:46,800
दिखाऊंगा।

1418
01:37:46,800 --> 01:37:50,880
सही भाई हां यही समस्या अलंकारी है वो भी ऐसे ही करते

1419
01:37:50,880 --> 01:37:55,200
हैं। एक है अलंकारियों का चैनल वो शिवा जी समस्या भी छोटी-छोटी कटंग

1420
01:37:55,200 --> 01:37:59,200
उठा के डालते रहते हैं। राइट राइट तो उससे ये होता

1421
01:37:59,200 --> 01:38:03,280
है ना कि मतलब आदमी का वो दिखता है व्यक्तित्व

1422
01:38:03,280 --> 01:38:07,280
उसका कि कैसा है। ठीक है? और ये ये काम आज के समय हर कोई कर रहा है। ये

1423
01:38:07,280 --> 01:38:11,440
काम अगर आप देखेंगे तो आज की सारी पार्टियां भी यही काम कर रही हैं। बिल्कुल।

1424
01:38:11,440 --> 01:38:15,520
चाहे कांग्रेस हो गई, बीजेपी हो गई, आदि आदि आदि सब आपस में यही सब कर

1425
01:38:15,520 --> 01:38:19,760
रहे हैं। अब ऐसा भी नहीं अपनी कमजोरियों को छुपाने

1426
01:38:19,760 --> 01:38:23,760
के लिए अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए जो सच है उसको दबा

1427
01:38:23,760 --> 01:38:28,080
दो और एक झूठ को छुपाने के लिए 100 झूठ बोलो।

1428
01:38:28,080 --> 01:38:32,160
यही सब चल रहा है। लेकिन सच नहीं बोलेंगे। अभी मैं

1429
01:38:32,160 --> 01:38:36,160
बताता हूं आपको इन्होंने पशु तो फिर हां। इन्होंने पशु

1430
01:38:36,160 --> 01:38:40,640
बबली के ऊपर वीडियो बनाई वहां पे इन्होंने अपने मन से पशु बलि के जो कुछ लिए कोटेशन

1431
01:38:40,640 --> 01:38:44,640
लिए और डाल दिए कि वैदिक काल में पशु बबली नहीं होती आगमों की पशु बबली गंदी है ये वो

1432
01:38:44,640 --> 01:38:48,720
फलाना ढिमकाना उन्होंने वीडियो बना दी अब एक बात बताइए मेरे को सिंपल सी

1433
01:38:48,720 --> 01:38:52,880
जिस विषय में आपको दो रुपए का ज्ञान नहीं है आपने किताब खोली नहीं वो आज तक आपको किसी ने कोर्ट

1434
01:38:52,880 --> 01:38:56,960
भेजा आपने लगा दिया आप में इतनी बुद्धि तो होगी कि आप उसको वेरीफाई चेक करेंगे

1435
01:38:56,960 --> 01:39:01,200
अगर मैं भी आज स्वाध्याय करता हूं स्वाध्याय करने के बाद गुरु से प्रश्न तो करूंगा

1436
01:39:01,200 --> 01:39:02,080
गुरु सब जगह

1437
01:39:02,080 --> 01:39:06,160
है ऐसा नहीं गुरुओं की कमी है गुरु तो है इतने पारंपरिक आचार्य हैं

1438
01:39:06,160 --> 01:39:10,320
इतनी पीठे आप प्रश्न कर सकते हैं। प्रश्न नहीं करना। अनुयाई बैठे हैं उनके।

1439
01:39:10,320 --> 01:39:14,400
उनसे प्रश्न कर सकते हैं। पूछ सकते हैं। पर वो नहीं करना। हम अपनी इंटेलिजेंस लगाएंगे इन

1440
01:39:14,400 --> 01:39:18,560
चीजों में। जिन मामलों में हमारी इंटेलिजेंस शॉर्ट पड़ जाती है। शिवश जी आ गए वापस

1441
01:39:18,560 --> 01:39:24,240
से। जी

1442
01:39:24,240 --> 01:39:28,720
यहां पर थोड़ी सी तकनीकी कुछ पता नहीं आज पहली बार लाइव स्ट्रीम में

1443
01:39:28,720 --> 01:39:32,800
समस्या देख रहा हूं मैं कि पहली बार जो है

1444
01:39:32,800 --> 01:39:36,800
आज मैं वैसे लैपटॉप सेटअप है उससे मैं लाइव था

1445
01:39:36,800 --> 01:39:41,120
थोड़ा सा परेशानी आ रही है तो आप लोग श्वेता जी आप उसको चर्चा

1446
01:39:41,120 --> 01:39:45,120
को पूरा करवा लीजिएगा अगर मैं अगर मुझे लीव करना पड़ता

1447
01:39:45,120 --> 01:39:50,080
है किनहीं कारणों से और दूसरी बात ये है एक

1448
01:39:50,080 --> 01:39:54,080
शक मैसेज था कानून वाली बात पर हमने बात कर ली है। मायावाद

1449
01:39:54,080 --> 01:39:58,880
पर बात कर ली है। और एक बात और है कि

1450
01:39:58,880 --> 01:40:02,880
ये जो हमारा अभी का टॉपिक चल रहा है इससे अलग हट के ऐसा सामने आ रहा है

1451
01:40:02,880 --> 01:40:08,720
कि जो अलंकारी चैनल है

1452
01:40:08,720 --> 01:40:12,960
उसके लोग यह कह रहे हैं कि भाई आप जो है निर्भय के साथ चर्चा करिए। तो आपको याद

1453
01:40:12,960 --> 01:40:17,040
होना चाहिए जो हमारी निर्भय के साथ चर्चा हुई थी। निर्भय

1454
01:40:17,040 --> 01:40:22,960
के साथ लगभग मेरे ख्याल से तीन घंटे की चर्चा हमारी हुई थी और

1455
01:40:22,960 --> 01:40:27,120
उस चर्चा का अंत वैसा सुखद नहीं रहा। हालांकि उसमें

1456
01:40:27,120 --> 01:40:31,120
बहुत ठीक तरीके से चला। उसके बाद में निर्भय ने भी

1457
01:40:31,120 --> 01:40:35,120
स्वीकार किया कि वो अपने एक विशेष पर्सपेक्टिव को लेकर के आया था। इसलिए वो हमारी

1458
01:40:35,120 --> 01:40:39,360
ओर से जो न्यूट्रल वे में रहने की कोशिश की जा रही थी उसको वो ध्यान नहीं रख पाया।

1459
01:40:39,360 --> 01:40:43,600
हमारी पूर्ण हम किसी के लिए छवि बना लेते हैं। तो उस छवि के अनुसार उसका

1460
01:40:43,600 --> 01:40:47,920
व्यवहार रहा जिस कारण से उसको स्थगित होना पड़ा चर्चा को वरना वो किसी निष्कर्ष

1461
01:40:47,920 --> 01:40:52,160
तक पहुंच सकती थी। इसके बाद निर्भय ने जो है उदारता दिखाते हुए

1462
01:40:52,160 --> 01:40:56,240
बहुत अच्छे से क्षमा भी प्रस्तुत किया और हमारा भी हृदय

1463
01:40:56,240 --> 01:41:00,560
गदगद हुआ और हम लोग जो है एक प्रातत्व भाव से हम में बातें भी हुई निर्भय

1464
01:41:00,560 --> 01:41:04,800
और हमारे बीच में से और उसके बाद ये हुआ था कि अब अगर

1465
01:41:04,800 --> 01:41:08,800
एक ठीक-ठाक वे में हम लोग दोबारा से चर्चा वो जो छूट गई

1466
01:41:08,800 --> 01:41:12,800
है वो करना चाहे तो कर सकते हैं। तो इसका अर्थ यह है कि निर्भय के साथ हमने

1467
01:41:12,800 --> 01:41:17,360
चर्चा को कभी भी बैन नहीं किया है। प्रतिबंधित नहीं किया है।

1468
01:41:17,360 --> 01:41:22,000
निर्भय के साथ क्या निर्भय से जुड़े हुए जो संदीप रॉय हैं या

1469
01:41:22,000 --> 01:41:23,840
संदीपन रॉय है जो और या

1470
01:41:23,840 --> 01:41:27,840
फिर उस चैनल से जुड़ा हुआ कोई और व्यक्ति आर्य समाज अलंकार वो जो चैनल

1471
01:41:27,840 --> 01:41:32,000
है अब दूसरी बात ये आती है कि निर्भय से हमने कभी

1472
01:41:32,000 --> 01:41:36,800
नहीं कहा है हमसे बहुत सारी चार बातें हो चुकी है निर्भय से फोन पे टेलीफोनिक

1473
01:41:36,800 --> 01:41:40,880
मेरे ख्याल से उसके निर्भय के पास रिकॉर्ड होगा उन बातों का हमारे पास भी रिकॉर्ड

1474
01:41:40,880 --> 01:41:45,040
है बहुत सारी बातें हुई है पर क्योंकि वो थोड़ा सा प्रातत भाव में हुई

1475
01:41:45,040 --> 01:41:49,440
थी एक तरीके से हमारा व्यक्तिगत वो बातें थी तो ना ही निर्भय

1476
01:41:49,440 --> 01:41:53,440
ने निर्णय लिया कि हम उन बातों को जो है सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करें और

1477
01:41:53,440 --> 01:41:57,920
ना ही मैंने इधर कोई यह निर्णय लिया कि हम कभी करने वाले हैं या करें

1478
01:41:57,920 --> 01:42:02,160
मगर जो सैद्धांतिक पक्ष है उसको लेकर के हमने कभी नहीं कहा है कि अब निर्भय

1479
01:42:02,160 --> 01:42:06,160
से चर्चा नहीं होगी है कि चर्चा होगी मेरी आवाज आ रही है ना

1480
01:42:06,160 --> 01:42:11,040
सबको साफ साफ जी जी जी बिल्कुल आ रही है आ रही है जी जी ठीक है

1481
01:42:11,040 --> 01:42:15,120
चर्चा पहली बात हमने प्रतिबंधित नहीं की है दूसरी बात ये है कि

1482
01:42:15,120 --> 01:42:19,200
इसको ये चर्चा चर्चा एक ठीक तरीके से हो जाए चलो हमेशा दुश्मनी बन

1483
01:42:19,200 --> 01:42:23,440
के क्यों मिले विरोधी बन के ही क्यों मिले तो मैंने इसको एक नाट्य रूपांतरण

1484
01:42:23,440 --> 01:42:27,440
देने के लिए और समस्या की मूल जड़ तक पहुंचने के लिए मैंने

1485
01:42:27,440 --> 01:42:31,520
एक और वो कहा था निर्भय से जब हमारी हेल्दी वार्ता हो रही थी जिस

1486
01:42:31,520 --> 01:42:35,840
समय तो मैंने कहा था कि ऐसा कर लो कि

1487
01:42:35,840 --> 01:42:39,920
ऐसी चर्चा रखो जिसमें कि हम

1488
01:42:39,920 --> 01:42:44,080
तुम आर्य समाजी बनो और मैं मुस्लिम बनूंगा और फिर देखते हैं कि आप

1489
01:42:44,080 --> 01:42:48,160
मुस्लिम को एज ए आर्य समाजी कहां तक ले तोड़ पाते हो इस्लाम

1490
01:42:48,160 --> 01:42:52,160
के सिद्धांत को और फिर तुम इस्लाम वाले बनना और

1491
01:42:52,160 --> 01:42:56,160
एज ए अद्वैती हम तोड़ेंगे कि देखो ये तोड़ दिया

1492
01:42:56,160 --> 01:43:00,160
ठीक है तो हमारा मूल उद्देश्य एक दूसरे की काट करना तो नहीं है हमारा मूल

1493
01:43:00,160 --> 01:43:04,400
उद्देश्य सर्वशक्तिमान परमक्ष जो विधर्म को कैसे निस्तोनाबूत

1494
01:43:04,400 --> 01:43:08,400
करना यही है ना दोनों का मूल उद्देश्य तो जिसके सिद्धांत से विधर्म

1495
01:43:08,400 --> 01:43:12,480
पे कठोर प्रहार हो रहा है उसको अपना लिया जाए या फिर जनता देख ले कि कौन सा

1496
01:43:12,480 --> 01:43:16,480
सिद्धांत चलो हमने एक दूसरे का सिद्धांत नहीं स्वीकारा जनता निर्णय कर लेगी

1497
01:43:16,480 --> 01:43:20,720
कि भैया किसका सिद्धांत जो है ज्यादा शक्तिशाली सिद्ध हुआ विधर्म से

1498
01:43:20,720 --> 01:43:25,040
सामना करते हुए एक तो यह बात तो मैंने इस तरह के हेल्दी डिस्कशन

1499
01:43:25,040 --> 01:43:29,200
के हमारे बीच में उन्होंने कहा भी निर्भय ने मुझसे कहा भी कि संदीपन रॉय जी से मैं

1500
01:43:29,200 --> 01:43:33,440
बात कर लूंगा शायद उधर से वो ग्रीन सिग्नल आया मगर आज तक कोई स्पष्ट उत्तर

1501
01:43:33,440 --> 01:43:37,440
आया नहीं स्पष्ट उत्तर इन विषयों में नहीं आया तो

1502
01:43:37,440 --> 01:43:41,520
जो लोग ये कह रहे हैं निर्भय से चर्चा करो निर्भय से चर्चा करो तो निर्भय से चर्चा को कभी

1503
01:43:41,520 --> 01:43:45,680
हमने मना नहीं किया है निर्भय दोबारा से आ सकते हैं चैनल पर कभी भी वो चर्चा हो

1504
01:43:45,680 --> 01:43:49,680
सकती है। सैद्धांतिक चर्चा हां मगर यह हो सकता है कि एक

1505
01:43:49,680 --> 01:43:53,760
भाव जो हमारे जो घटनाक्रम के बाद एक आया कि

1506
01:43:53,760 --> 01:43:54,960
ऐसा ना हो दोबारा से वो जो

1507
01:43:54,960 --> 01:43:59,120
भाईच प्यारा जैसा बना है हमारे बीच में वो नष्ट ना हो जाए तो इसलिए

1508
01:43:59,120 --> 01:44:03,440
शायद निर्भय निर्भय ना आने का मन हो या मेरा ना आने ये हो सकता है। मगर

1509
01:44:03,440 --> 01:44:07,600
यदि आएंगे तो उसमें कोई पीछे हटने वाला नहीं है। ये निर्भय भी जानते

1510
01:44:07,600 --> 01:44:11,680
हैं और हम भी जानते मतलब हम भी जानते हैं और निर्भय भी जानते हैं। पीछे हटने वाली

1511
01:44:11,680 --> 01:44:15,840
कोई बात नहीं है। यदि ऐसा है कि निर्भय से बात करूं तो आप निर्भय को पूछे कि

1512
01:44:15,840 --> 01:44:20,080
अगर उनको आना है सार्वजनिक रूप से फिर से प्रस्तुत होना है सैद्धांतिक मतभेद

1513
01:44:20,080 --> 01:44:24,160
के निमित्त तो कभी भी हो सकता है। अब आगे दूसरी बात ये आ जाती है

1514
01:44:24,160 --> 01:44:28,160
कि भाई आपके चैनल पर ही क्यों आए? उसका कारण है। उसका

1515
01:44:28,160 --> 01:44:32,240
कारण ये है कि जैसे दूसरों के यहां जाने वाली बात है तो हम ऐसी बहुत

1516
01:44:32,240 --> 01:44:36,400
सी जगह पर गए हैं जो हमारी जगह नहीं थी। जैसे ये जो इनके

1517
01:44:36,400 --> 01:44:40,560
यहां जाना ये क्या कहते हैं इनका क्या नाम है इनका?

1518
01:44:40,560 --> 01:44:44,640
अवेकनिंग हां अवेकनिंग हिंदू अवेकनिंग

1519
01:44:44,640 --> 01:44:48,640
इनके हम गए इसको तो छोड़ दीजिए हम तो भागवतानंद के कैंप में

1520
01:44:48,640 --> 01:44:53,040
गए हैं और दोबारा अगर वो इधर उधर से निकलेगा लखनऊ के 100 200 किलोमीटर

1521
01:44:53,040 --> 01:44:57,200
के और हमारे पास समय होगा तो हम फिर चले जाएंगे ठीक है तो तो हम तो वहां

1522
01:44:57,200 --> 01:45:01,200
सशरीर गए ये हो कि भय हो कि भैया अब वहां विरोधी इतना बड़ा हमने हाई

1523
01:45:01,200 --> 01:45:05,280
कोर्ट में केस कर रखे हैं पुलिस उसे पुलिस में बयान देने आना पड़ रहा है तो हम उसके गढ़ में क्यों

1524
01:45:05,280 --> 01:45:10,720
जाए यहां पे उसी के उसी के लोग हैं फिर भी हम गए तो

1525
01:45:10,720 --> 01:45:14,720
कि हम दूसरे के यहां जाते मगर कब जाते हैं हम अब हमसे

1526
01:45:14,720 --> 01:45:18,800
तो रामपाल ही भी कह रहे धनाना आ जाओ धनाना आ जाओ हम नहीं जाएंगे तो हम जाते

1527
01:45:18,800 --> 01:45:23,120
हैं मगर हम ये चयन करते हैं कि हमारा जो ये एनर्जी

1528
01:45:23,120 --> 01:45:27,360
और ये जो एक भार लेना कि हम कहीं जा रहे हैं इस

1529
01:45:27,360 --> 01:45:31,520
जैसे बहुत सारे युद्ध हैं जो हम लड़ रहे हैं। बहुत सारे हैं।

1530
01:45:31,520 --> 01:45:35,680
चलो एक आर्य समाज और हमारी जो वैचारिक मतभेद है उसको ठीक है साइड में रखिए।

1531
01:45:35,680 --> 01:45:39,680
एक मिनट आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम पर

1532
01:45:39,680 --> 01:45:43,920
कई जो अभी-अभी बालग हुई है। ऐसी लड़कियों को ब्रेन

1533
01:45:43,920 --> 01:45:48,400
वाश करके वहां पर ये सिखाया गया कि कलयुग का अंत होने वाला है। अगले

1534
01:45:48,400 --> 01:45:52,560
युग में हम तुम्हें ले चलेंगे। बहुत सारे युद्ध चल रहे हैं। तो ऐसे में मैं अपनी

1535
01:45:52,560 --> 01:45:56,720
जो ये मेमोरी कार्ड है ना यहां का उसको मैं खाली रखने का प्रयास करता हूं कि

1536
01:45:56,720 --> 01:46:00,960
व्यर्थ के भार इस मेमोरी में ना डालूं। क्योंकि बहुत सारे

1537
01:46:00,960 --> 01:46:05,040
निर्णय, बहुत सारे कार्य जो डेली मुझे करने हैं। तो ऐसे

1538
01:46:05,040 --> 01:46:09,120
में मैं व्यर्थ का चिंतन मनन क्यों करूं कि भाई मुझे संदीपन रॉय के चैनल

1539
01:46:09,120 --> 01:46:13,200
पर जाना है। या तो संदीपन रॉय का चैनल ऐसा हो जिससे समाज

1540
01:46:13,200 --> 01:46:17,360
प्रभावित होता दिख रहा हो। हो सकता है हो सकता है आज नहीं तो कल उनका चैनल ऐसा

1541
01:46:17,360 --> 01:46:21,440
हो जाएगा। उस दिन मैं जाऊंगा। जब वो मेरे लिए एक इंपॉर्टेंस लगेगा ना

1542
01:46:21,440 --> 01:46:25,680
कि हां जैसे निर्भय ने खुद कहा था कि पहले आपका चैनल छोटा सा था। मैंने सोचा

1543
01:46:25,680 --> 01:46:26,180
कोई

1544
01:46:25,840 --> 01:46:30,080
जरूरत नहीं है जाने की। फिर आज आपका चैनल बड़ा हो गया तो यह चीज सही है भाई

1545
01:46:30,080 --> 01:46:34,160
क्याेंस क्या ऐसे हर एक व्यक्ति के बुलाने पर हम उसके चैनल पर

1546
01:46:34,160 --> 01:46:38,240
जाने लगे तो भाई रोज मुझे कम से कम 20 लोग ये कहते हैं आ जाओ आ जाओ

1547
01:46:38,240 --> 01:46:42,320
आ जाओ आ जाओ अरे बिना पूछे मुझे Instagram में लोग जोड़ लेते हैं अपने ग्रुप

1548
01:46:42,320 --> 01:46:46,400
में हां भाई बताओ भाई शास्त्रार्थ शुरू शुरू भाई शास्त्रार्थ अपना

1549
01:46:46,400 --> 01:46:50,480
पक्ष बताओ अब व्यक्ति खड़ा हाई कोर्ट में चेंबर में हरिशंकर जैन जी के

1550
01:46:50,480 --> 01:46:55,280
पास है वो लॉयर के पास वहां हमको बोला जा रहा है हां भाई अद्वैत की पुष्टि करिए चलिए

1551
01:46:55,280 --> 01:46:59,360
हमको वहां कुछ बताना है कि भैया यहां पर हम गए थे। यह हुआ था पुलिस आई

1552
01:46:59,360 --> 01:47:03,360
थी जो कहते मुयना कराना है मौके का और वहां मुझे

1553
01:47:03,360 --> 01:47:08,480
मैसेज आ रहे हैं। चलो भाई चालू हो जाओ। ऐसे नहीं होता है। तो

1554
01:47:08,480 --> 01:47:12,720
निर्भय से प्रतिबंध नहीं है। संदीपन रॉय से कोई प्रतिबंध नहीं है।

1555
01:47:12,720 --> 01:47:16,720
उनके लिए खुला स्वागत है। आपको अपने चैनल पर बुलाना है। आप और

1556
01:47:16,720 --> 01:47:21,440
मेहनत करो और आगे बढ़ो। अगर भगवान ने आप पर कृपा की

1557
01:47:21,440 --> 01:47:25,520
भगवान कभी-कभी कर देते हैं ना। उन पर भी कृपा कर देते। इसलिए तो भगवान हमारे परम प्रमाण

1558
01:47:25,520 --> 01:47:29,680
नहीं है। हमारे परम प्रमाण अपुष ग्रंथ क्यों है?

1559
01:47:29,680 --> 01:47:33,760
भगवान तो कृपा उन पर भी कर देते हैं। सिद्धांत विहीन लोग होते हैं। तो

1560
01:47:33,760 --> 01:47:37,840
अगर भगवान ने कृपा कर दी उनका उनका चैनल

1561
01:47:37,840 --> 01:47:40,880
जो चल रहा है वो आप ही की कृपा से चल रहा है। आप ही के शॉर्ट वीडियो काट काट

1562
01:47:40,880 --> 01:47:44,960
के लगा रहे हैं वो वहां पर। हां। और ये मैं कहना चाहूंगा

1563
01:47:44,960 --> 01:47:49,040
कि अगर आप एक हेल्दी संबंध रखना

1564
01:47:49,040 --> 01:47:53,200
चाहते हैं तो इस तरह की बातें ना करें कि जो मैंने राम जी के बारे में नहीं

1565
01:47:53,200 --> 01:47:57,280
बोला। मगर आधी बात मेरी इधर से उठा के मेरी जैसे मैंने बोला कि रोको मत जाने

1566
01:47:57,280 --> 01:48:02,560
दो। वो एक कोई बहुत बड़ा अपराधी था

1567
01:48:02,560 --> 01:48:06,880
कोर्ट में बोला कि भैया ऐसा है। उसने उसने

1568
01:48:06,880 --> 01:48:10,960
ये लिख के दे दिया कि मैं फलानी तारीख को जो है या तो कल्पना होगी

1569
01:48:10,960 --> 01:48:14,960
कि सत्य है वो नहीं पता। मगर ठीक है। कहानी के तौर पर ले लीजिए। तो उसने ये बोल

1570
01:48:14,960 --> 01:48:19,200
दिया कि मैं इतनी तारीख को यहां से निकल भाग जाऊंगा जेल तोड़ के। पता नहीं

1571
01:48:19,200 --> 01:48:23,440
चार्ल्स सोबराज के लिए बोला जाता है या फिर उसके लिए नटवर लाल के लिए। तो

1572
01:48:23,440 --> 01:48:27,440
उसने जब यह कह दिया कि मैं जेल तोड़ के भाग जाऊंगा तो जेलर ने

1573
01:48:27,440 --> 01:48:31,840
क्या किया? एक पर्ची बंटवा दी अपने सारे कर्मचारियों

1574
01:48:31,840 --> 01:48:35,920
को और उसमें लिखवा दिया रोको रोको

1575
01:48:35,920 --> 01:48:40,720
मत जाने दो। ध्यान से रोको मत जाने दो।

1576
01:48:40,720 --> 01:48:45,760
अब उस पर्ची का किसी ने अर्थ का अनर्थ कर दिया। रोको मत जाने दो।

1577
01:48:45,760 --> 01:48:49,760
रोको मत जाने दो। तब क्या हुआ? चार्ल्स ओवराज आराम से जा रहे

1578
01:48:49,760 --> 01:48:53,920
हैं जेल तोड़ के। क्योंकि बॉस ने कहा है रोको मत जाने दो।

1579
01:48:53,920 --> 01:48:55,920
तो केवल इतना सा अंतर लाने

1580
01:48:55,920 --> 01:49:00,560
से उसका पूरा भाव बदल गया। तो इस तरीके से मेरे कहे हुए चीजों को ये

1581
01:49:00,560 --> 01:49:05,040
छिट रही बातें होती है। छिचली चीजें होती है कि आप सैद्धांतिक

1582
01:49:05,040 --> 01:49:09,040
तौर पर नहीं भिड़ पा रहे तो मेरी चीजें जो मैं कहना नहीं चाहता हूं। आप जान रहे हो मैंने क्या

1583
01:49:09,040 --> 01:49:13,120
कहा है। फिर भी मेरे शब्दों को तोड़ मरोड़ करके प्रस्तुत कर रहे हो और मैं जो नहीं कहना

1584
01:49:13,120 --> 01:49:17,120
चाहता हूं वो प्रस्तुत कर रहे हो। तो ये गलत बात है। ऐसा ना किया जाए और जो

1585
01:49:17,120 --> 01:49:21,280
हेल्दी वातावरण बनाना है सिद्धांतिक चर्चा को लेकर के वो बना रहेगा।

1586
01:49:21,280 --> 01:49:25,360
ठीक है? अब आप अपनी बात रखें। जी अभी मैं बताता हूं आपको वैसे तो

1587
01:49:25,360 --> 01:49:29,600
निर्भय पाठक जो है निर्भय पाठक ही है ना मेरे हिसाब से जो लड़का Instagram

1588
01:49:29,600 --> 01:49:33,920
पे कंटेंट बनाता है जिनसे आपकी चर्चा हो रही है। मैं थोड़ा सा लीव करूंगा और मैं

1589
01:49:33,920 --> 01:49:38,080
किसी और स्पेस में जाकर के कनेक्ट होने का प्रयास करता हूं क्योंकि यहां पर मुझे

1590
01:49:38,080 --> 01:49:42,240
आप लोगों का संदेश भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है। आप लोग कंटिन्यू करिए।

1591
01:49:42,240 --> 01:49:46,480
थोड़ी देर पंडित जी भी नहीं है। आप संभालिए सनातन

1592
01:49:46,480 --> 01:49:51,040
शंकर जी मैं 15 10 मिनट में कनेक्ट होता हूं। है ना?

1593
01:49:51,040 --> 01:49:55,360
वैसे अब बहुत ज्यादा लंबा भी नहीं खींचना है। थोड़ा सा जल्दी करेंगे। मेरे ख्याल से लगभग

1594
01:49:55,360 --> 01:49:59,440
दो घंटे हो गए। ठीक है? जी हम

1595
01:49:59,440 --> 01:50:04,000
यही लड़का है ना ये लड़का।

1596
01:50:04,000 --> 01:50:08,160
हम हां तो आपको इनके बारे में बता दूं। आपको और ऑडियंस को

1597
01:50:08,160 --> 01:50:11,520
कि क्या लेना देना है। ये तो

1598
01:50:11,520 --> 01:50:15,600
ये तो नहीं था ना निर्भय पाठक नाम से आर्य समाज ही है ना

1599
01:50:15,600 --> 01:50:19,680
निर्भय पाठक निर्भय वो नहीं है ये अलग है

1600
01:50:19,680 --> 01:50:22,000
जो

1601
01:50:22,000 --> 01:50:26,160
ये दूसरे वाले हैं अच्छा अच्छा क्योंकि ये भी आर्य समाज ही वक्तव्य रखते हैं तो मेरे को लगा

1602
01:50:26,160 --> 01:50:30,480
यही इनकी बात हो रही है मैंने वो वाला देखा नहीं था लाइव सेशन इसीलिए नहीं नहीं वो

1603
01:50:30,480 --> 01:50:34,560
वो अलग है वो निर्भय अलग है अच्छा वो निर्भय आर्य है दूसरा

1604
01:50:34,560 --> 01:50:37,840
वाला है अच्छा अच्छा अच्छा

1605
01:50:37,840 --> 01:50:41,840
हां जी हां जी बोलिए विरुपाक जी तो जी देखिए क्लेम्स तो

1606
01:50:41,840 --> 01:50:45,840
वैसे दूसरे वाले जो थे उनके साथ डिस्कस हो चुके हैं। एक ही क्लेम

1607
01:50:45,840 --> 01:50:50,000
रहता है जो बड़ा क्लेम है जो इन्होंने रखा था कि शंकराचार्य जी विदेश गमन पे गए

1608
01:50:50,000 --> 01:50:54,160
थे और दूसरा क्लेम रखा था इन्होंने कि करपात्री स्वामी जी के

1609
01:50:54,160 --> 01:50:58,560
जो वो आता है पृथ्वी अचल है वो वाली बात इन्होंने छेड़ी थी इनके फॉलोअर्स ने इन्होंने

1610
01:50:58,560 --> 01:51:02,320
रखी थी वो वाली बात

1611
01:51:02,320 --> 01:51:06,320
श्रृंगेरी के स्वामी जी के बारे में कि वो विदेश गमन करने गए थे विदेश गमन और फिर एनआरआई

1612
01:51:06,320 --> 01:51:10,400
हिंदुओं का पैसा लेते हैं तो ये तीन पॉइंट है इनके बारे में अगर तो हमने ये अपनी

1613
01:51:10,400 --> 01:51:14,720
लाइव में हमने क्लियर किए थे अचला को अगर अचला को अभी कर देंगे

1614
01:51:14,720 --> 01:51:19,520
और जो वो वाली बात है उसको हमने लाइव में क्लियर किया था कि

1615
01:51:19,520 --> 01:51:23,600
अ भारती कृष्ण तीर्थ जी ने

1616
01:51:23,600 --> 01:51:28,320
अपने विदेश गमन को कभी भी शास्त्री नहीं कहा अशास्त्री कहा

1617
01:51:28,320 --> 01:51:32,560
और जब उन्होंने शास्त्री नहीं कहा तो जितने अंशों में उनके जो

1618
01:51:32,560 --> 01:51:36,880
उनका जो आचरण है वो क्या कहते हैं

1619
01:51:36,880 --> 01:51:41,120
शास्त्र के विपरीत है तो उतने उतने अंशों में वो ग्रहण करने

1620
01:51:41,120 --> 01:51:45,200
योग्य नहीं है। स्वयं कह रहे हैं और यह हमारे शास्त्र भी कह रहे हैं। आचरण ग्रहण

1621
01:51:45,200 --> 01:51:49,520
करने योग्य नहीं है। जितने अंशों में किसी आचार्य के जो आचरण

1622
01:51:49,520 --> 01:51:53,760
है वो शास्त्र के विपरीत जा रहे हैं। वो आपको ग्रहण नहीं करने। तो आप भारती कृष्ण

1623
01:51:53,760 --> 01:51:58,000
तीर्थ जी का सहारा लेकर के अपने विदेश गमन को शास्त्रोक्त सिद्ध

1624
01:51:58,000 --> 01:52:02,000
मत करिए। हां सच्चाई ये है कि वर्तमान में संक्रमण काल चल रहा

1625
01:52:02,000 --> 01:52:06,160
है। हम लोग जीरो से बिल्कुल सब कुछ सही ठीक करके नहीं आ सकते हैं।

1626
01:52:06,160 --> 01:52:10,640
अज्ञानता वश हमारे जीवन में बहुत सारी चीजें रोज हो रही हैं। अगर कोई विदेश

1627
01:52:10,640 --> 01:52:14,640
चला भी गया है और वहां से जाकर के धर्म की रक्षा हो पा रही है तो

1628
01:52:14,640 --> 01:52:17,600
उसको करने में कोई आपत्ति नहीं है। है ना?

1629
01:52:17,600 --> 01:52:21,600
मगर ये कि नहीं नहीं मेरा विदेश गमन जाना जो है वो क्या

1630
01:52:21,600 --> 01:52:25,680
कहते हैं? शास्त्रीय है। इस पर ठप्पा लगाओ। ये गलत है। ये

1631
01:52:25,680 --> 01:52:29,920
आप इसको आपत धर्म कह सकती हैं कि हां भाई चले गए विदेश तो चले गए। विदेश

1632
01:52:29,920 --> 01:52:33,920
में चले गए तो चले गए। वहां से विदेश जाकर के हम धर्म की रक्षा में क्या कर

1633
01:52:33,920 --> 01:52:38,320
सकते हैं? तो अपने विदेश गमन को अशास्त्रीय होने पर भी हम उसको भी पुण्य में परिवर्तित

1634
01:52:38,320 --> 01:52:42,480
कर लेंगे। इतना करेंगे वहां जाके। है ना? ये प्रयास होना। जैसे

1635
01:52:42,480 --> 01:52:46,480
अभी जो ओमकार जी हैं ये कनाडा में टोरंटो। अब

1636
01:52:46,480 --> 01:52:50,560
वे चले गए। सो चले गए। इनको नहीं था भाई उस समय इनकी फैमिली को कहां से क्या

1637
01:52:50,560 --> 01:52:54,720
हुआ? कहां जीरो से जब घर में आग लगी हुई पूरी के शंकराचार्य जी क्या कहते जब घर में आग लगी

1638
01:52:54,720 --> 01:52:58,960
तब हम कुआं थोड़ी ना कूदेंगे। तो अगर आप चले गए हैं तो

1639
01:52:58,960 --> 01:53:03,280
इसमें कोई दोष नहीं है। मगर उस पर ठप्पा लगवाना दोष है। अपने जो

1640
01:53:03,280 --> 01:53:07,280
अशास्त्रीय आचरण हैं उनको अशास्त्रीय कहना

1641
01:53:07,280 --> 01:53:11,840
उचित है ना कि यह कहना कि नहीं नहीं मैंने जो कर दिया वही शास्त्रीय है।

1642
01:53:11,840 --> 01:53:16,000
जैसे कि बरसात से बचने के लिए हमारा घर हमारे आसपास नहीं है। हम रास्ते में

1643
01:53:16,000 --> 01:53:20,240
किसी उसके नीचे खड़े हो गए यदि तो हम यह नहीं कहने लगते यही हमारा घर है।

1644
01:53:20,240 --> 01:53:24,640
हमने थोड़ी देर अगर वहां पर वो ले लिया शरण ले ली वही हमारा घर है। वो नहीं बदलता।

1645
01:53:24,640 --> 01:53:28,720
दूसरी बात ये है हम कि जैसे

1646
01:53:28,720 --> 01:53:32,800
इन्होंने ये कहा था कि ये तो अभी के लोगों ने बना दिया

1647
01:53:32,800 --> 01:53:36,960
है तो इस बारे में शब्द प्रमाण है और जो हमारे

1648
01:53:36,960 --> 01:53:41,520
शब्द परंपरा प्राप्त हैं वो सारे आचार्य एक मत है कि वहां जाना

1649
01:53:41,520 --> 01:53:45,840
जो है निषेध है। चले गए वो एक अलग विषय है कि चले गए तो उसमें क्या है?

1650
01:53:45,840 --> 01:53:50,000
हमारे जीवन में डेली ऐसे कार्य हो रहे हैं जो कि पूर्णतया धर्म शास्त्रों के संगत

1651
01:53:50,000 --> 01:53:54,000
नहीं हो रहे। तो उस उसमें हमारे मन में यह भाव होना चाहिए। भाई मैं गलत मैं

1652
01:53:54,000 --> 01:53:58,000
गलत हूं। शास्त्र सही है। इतने अंशों में मैं शास्त्र का अनुसरण अनुकरण नहीं

1653
01:53:58,000 --> 01:54:02,400
कर पा रहा हूं। जैसे कि जैसे कि

1654
01:54:02,400 --> 01:54:06,400
एक पिता ने अपने बेटे को समझा दिया कि

1655
01:54:06,400 --> 01:54:10,880
भैया तुम्हारा जो है मदिरापान गलत है। अब

1656
01:54:10,880 --> 01:54:14,960
उसकी इंद्रियों पर उसे वो नहीं हो रहा है। मदिरापान पर कंट्रोल

1657
01:54:14,960 --> 01:54:18,960
नहीं कर पा रहा है। अब उसने मदिरापान पीना शुरू किया। अब दो बातें

1658
01:54:18,960 --> 01:54:23,280
हैं। मदिरापान वह भी कर रहा है जिसका पिता यह सिखा रहा है मदिरापान अच्छा है।

1659
01:54:23,280 --> 01:54:27,360
जैसे ध्रुव राठी ने एक वीडियो बनाया था कि तुम्हारे यहां भी तो यह होता

1660
01:54:27,360 --> 01:54:31,760
है। अभी नहीं काफी पहले कुछ उसने कहा था तुम्हारे यहां भी तो यह होता है।

1661
01:54:31,760 --> 01:54:35,760
हमारे यहां क्या होता है इससे सिद्ध नहीं होता। वो हमारे यहां का धर्म शास्त्रीय

1662
01:54:35,760 --> 01:54:39,840
संविधान है। तुम्हारे उस चीज पर हमने उंगली उठाई है जो आपके यहां का

1663
01:54:39,840 --> 01:54:43,920
शास्त्रीय संविधान है। तो दोनों बातें हैं। एक का पिता कह

1664
01:54:43,920 --> 01:54:47,840
रहा है मदिरापान कर सकते हो। दूसरे का पिता कह रहा है नहीं कर सकते हो। मदिरापान दोनों कर रहे

1665
01:54:47,840 --> 01:54:51,840
हैं। तो जो अपने पिता की आज्ञा का

1666
01:54:51,840 --> 01:54:56,080
उल्लंघन पूर्वक मदिरापान कर रहा है उसके पिता पर उंगली थोड़ी ना उठेगी। उसने

1667
01:54:56,080 --> 01:55:00,800
मना किया है ना। उसी प्रकार जिस प्रकार

1668
01:55:00,800 --> 01:55:04,880
जैसे अब वो वहां पर दो बातें हैं कि हम पिताजी ने मना

1669
01:55:04,880 --> 01:55:08,880
किया है फिर भी हम जो है वो पी रहे हैं। तो दो बातें हो सकती हैं। एक या

1670
01:55:08,880 --> 01:55:12,880
तो हम यह कहें कि भाई पिताजी ने मना किया है फिर भी मैं पी

1671
01:55:12,880 --> 01:55:17,280
रहा हूं। मगर इस विषय में पिताजी ही सही बोल रहे हैं।

1672
01:55:17,280 --> 01:55:21,600
कहते वह सही मुझे कंट्रोल नहीं हो पा रहे। वह बात अलग है। मेरी मजबूरी है इसको पीना, सिगरेट

1673
01:55:21,600 --> 01:55:25,840
पीना। तो यह क्या हो गया? हमारी प्रमाण्य बुद्धि क्या हुई? जो पिताजी

1674
01:55:25,840 --> 01:55:29,920
ने कहा है उसमें हुई। अब हम अपने आप को बदलने का प्रयास कर रहे हैं। भगवान से

1675
01:55:29,920 --> 01:55:33,920
प्रार्थना कर रहे हैं। क्या कहते हैं? 92 वाली कि तू भगवान कह रहे

1676
01:55:33,920 --> 01:55:38,080
हैं तू मेरी शरण में आ जा। तेरी प्राप्ति की रक्षा अप्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। तो भगवान आपको इतना

1677
01:55:38,080 --> 01:55:42,160
बल देंगे जब आप नाम जप करेंगे। आप में वो शक्ति आ पाएगी आपके चित्त

1678
01:55:42,160 --> 01:55:46,160
में कि आप अपने इस प्रकार के दुर्वसनों से मुक्त हो पाओगे। एक बार

1679
01:55:46,160 --> 01:55:50,160
अपने आप को उनकी शरण में डाल के तो देखो। मगर आप क्या कर रहे हो

1680
01:55:50,160 --> 01:55:54,400
दूसरी जगह पे? नहीं। अगर मैं सिगरेट पी रहा हूं, मेरी मजबूरी

1681
01:55:54,400 --> 01:55:58,480
है, मेरी व्यवस्था है तो यही सही है। पिताजी गलत कह रहे हैं।

1682
01:55:58,480 --> 01:56:02,960
यही सही है। जब आप उसका समर्थन करने लग जाते हैं।

1683
01:56:02,960 --> 01:56:07,200
अज्ञानता वश जो आपने जिस आचरण को स्वीकार किया या फिर

1684
01:56:07,200 --> 01:56:11,520
व्यवस्था वश जिस आचरण को आपने स्वीकार किया उस आचरण

1685
01:56:11,520 --> 01:56:15,600
को ही आप सामान्य धर्म बताने लग जाते हैं। स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बताने

1686
01:56:15,600 --> 01:56:19,760
लग जाते हैं। दिक्कत वहां है। रोड जब बन रहा है

1687
01:56:19,760 --> 01:56:23,840
तो जो एक पट्टी बन रही है और दूसरी पट्टी नहीं बन रही तो

1688
01:56:23,840 --> 01:56:28,160
डिवाइडर के इस तरफ जिनको जाना है वह भी इस समय उधर ही से जाएंगे रॉन्ग साइड

1689
01:56:28,160 --> 01:56:32,240
मगर इस तरफ से जाने का मतलब ये नहीं है कि हम ये कहने लगे नहीं नहीं रोड जब

1690
01:56:32,240 --> 01:56:36,560
बन जाएगा तब भी इधर ही से जाना उचित है ना ये आपातकालीन

1691
01:56:36,560 --> 01:56:40,640
स्थिति है ये रूल नहीं है हम लोग इस बात का प्रचार नहीं करते मेरे से

1692
01:56:40,640 --> 01:56:45,040
बहुत सारी ऐसी चीजें हो रही है मगर मैं इस बात का प्रचार नहीं करूंगा कि यही वो है स्टैंडर्ड

1693
01:56:45,040 --> 01:56:49,120
प्रोटोकॉल स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तो यही है कि डिवाइडर के उस तरफ से ही जाना

1694
01:56:49,120 --> 01:56:53,200
होगा। हां, इस समय रोड बन रहा है तो अभी अभी इस समय हम लोग इस तरफ से जा रहे हैं

1695
01:56:53,200 --> 01:56:57,280
या फिर इस समय ब्लॉक किया हुआ है या फिर उसमें गड्ढे बहुत है तो हमें जाना पड़ रहा है। वो बात

1696
01:56:57,280 --> 01:57:01,360
एक अलग है। मगर हम ये उसको अपने धर्म को ही बदलने लगेंगे ना। परिस्थिति

1697
01:57:01,360 --> 01:57:06,720
बश जो करने लगे वही धर्म हो गया। तो फिर हमारा धर्म सनातन नहीं कहलाएगा।

1698
01:57:06,720 --> 01:57:10,960
वो वही हो जाएगा। कुरान बाइबल वाला धर्म। सनातन वो है

1699
01:57:10,960 --> 01:57:15,440
जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसको सनातन कहते हैं। अवेकनिंग

1700
01:57:15,440 --> 01:57:18,000
भारत जी थोड़ा बहुत प्रामाणिक ज्ञान

1701
01:57:18,000 --> 01:57:22,080
विज्ञान लेने की आपको आवश्यकता है। आप बहुत अच्छा कर सकती हैं अपने जीवन में। आप बहुत

1702
01:57:22,080 --> 01:57:26,400
सारे हिंदुओं को दिशाहीन होने से बचा सकती हैं। बहुत सारी चीजों में आप प्रकाश

1703
01:57:26,400 --> 01:57:30,960
डाल सकती हैं। दो लाख की फॉलोइंग है। आराम से कर सकते हैं।

1704
01:57:30,960 --> 01:57:34,960
सिद्धांतों को समझने की आवश्यकता है। अभी तो ये बहुत प्रारंभिक

1705
01:57:34,960 --> 01:57:39,200
बातें हैं। ये अगर आप परंपरा को नहीं पकड़ेंगी

1706
01:57:39,200 --> 01:57:43,440
ना किसी परंपरा के प्रति आधीनता स्वीकार नहीं करेंगी तो आपके

1707
01:57:43,440 --> 01:57:47,680
सिद्धांत खोखले हैं और तभी तक हैं जब तक सामने की ओर से कोई

1708
01:57:47,680 --> 01:57:51,920
इंटेलेक्चुअल बंदा नहीं आ रहा है। जैसे आपके आपका ये कहना है मैंने बहुत हदीस पढ़ी

1709
01:57:51,920 --> 01:57:56,240
है। मैंने बहुत कुरान पढ़ी है। है ना? और मैं जो है मुस्लिमों

1710
01:57:56,240 --> 01:58:00,320
को तुम्हारा इतना भाई वो जो आप कर पा रहे हो ना जो भी थोड़ा बहुत खंडन है।

1711
01:58:00,320 --> 01:58:04,320
जैसे थॉमस अलवा एडिसन ने बल्ब बनाया। अब दुनिया

1712
01:58:04,320 --> 01:58:08,320
में कहीं भी बल्ब जल रहा है वो थॉमस अलवा एडिसन के कारण है। इसी प्रकार से

1713
01:58:08,320 --> 01:58:12,320
आपके पास जो भी थोड़ा बहुत वैदिक ज्ञान विज्ञान थोड़ा बहुत भी है। उसका कारण

1714
01:58:12,320 --> 01:58:16,400
भी आपके वही परंपरा प्राप्त आचार्य हैं। वहीं से आया वो सिद्धांत जो

1715
01:58:16,400 --> 01:58:20,640
थोड़ा बहुत आप दे पा रहे हैं। दूसरी बात दूसरी बात

1716
01:58:20,640 --> 01:58:24,880
तो आप प्रत्यक्ष रूप से मानो या ना मानो कि मेरा थॉमस अलवा एडिसन

1717
01:58:24,880 --> 01:58:29,200
से कोई कनेक्शन है। आपका एन केन प्रकारनेन

1718
01:58:29,200 --> 01:58:33,040
बल्ब जलाने की स्थिति में ये मानना पड़ेगा कि आपका कनेक्शन है थॉमस अलवा

1719
01:58:33,040 --> 01:58:37,360
एडिसन से। ठीक है? और दूसरी बात यह है कि आपको यह जो अहंकार

1720
01:58:37,360 --> 01:58:41,360
आ गया है कि आप ही एक समर्थ हैं मुसलमानों के उसमें

1721
01:58:41,360 --> 01:58:45,360
तो मैं आपको एक बात कहूंगा एक रिहर्सल टाइप का रख लीजिए। अब मैं आपके

1722
01:58:45,360 --> 01:58:49,840
चैनल पे नहीं आऊंगा। आपने वहां मेरा जो गरिमा इत्यादि का ध्यान नहीं रखा। अब मेरे

1723
01:58:49,840 --> 01:58:54,080
मेरे प्लेटफार्म पे अगर आपको आना हो तो आ जाइएगा। वहां आपका पूरा सम्मान होगा

1724
01:58:54,080 --> 01:58:58,080
क्योंकि सबसे पहले तो आप मुझे लगता है कि मेरे से आयु में भी बड़ी

1725
01:58:58,080 --> 01:59:02,240
हैं। ऊपर से आप धर्म के लिए इतना कार्य कर रही हैं वहां पर। है ना?

1726
01:59:02,240 --> 01:59:06,400
दूसरी बात यह भी है कि मातृशक्ति हैं आप और

1727
01:59:06,400 --> 01:59:10,480
हमारे यहां पर विशेष रूप से मातृ शक्ति के लिए महत्व जो है सिखाया जाता

1728
01:59:10,480 --> 01:59:14,880
है। तो इन सब विषयों से मैं इस बात का पूरे आपको वचन दे सकता हूं कि मेरे प्लेटफार्म

1729
01:59:14,880 --> 01:59:18,880
पर आपके प्रति इस प्रकार की कोई अभद्रता हो गई तो अपना

1730
01:59:18,880 --> 01:59:23,360
चैनल डिलीट कर दूंगा जिस प्रकार की अभद्रता आपने की थी मेरे साथ। अच्छा

1731
01:59:23,360 --> 01:59:27,600
अभी शिवश जी वैसे लाइव है अभी अभी मेरे को सूचना मिली है कि ये किसी आर्य

1732
01:59:27,600 --> 01:59:31,920
समाज के चैनल पर लाइव बैठी हैं वहां पे ये बातें कर रही हैं उन लोगों से डिस्कशन

1733
01:59:31,920 --> 01:59:36,240
चल रहा है इनका वो तो होना ही था वो तो वो तो लोग अभी ऋषि

1734
01:59:36,240 --> 01:59:40,320
ऋषि मानव करके क्या चैनल है ऋषि मानंत्य करके चैनल है तो उसप लाइव बैठी है

1735
01:59:40,320 --> 01:59:44,400
ऋषि मंतव्य होगा ऋषि मंतव्य हां उसपे बैठी है ये लाइव और अभी कह

1736
01:59:44,400 --> 01:59:48,160
रही है वहां लाइव में पता चला है की इन्होंने कोई यज्ञ करवाया है जो करि

1737
01:59:48,160 --> 01:59:52,400
जी ने भी करवाया था तो वापिस आके वो ये यज्ञ करवा लेंगी फिर ये हिंदू हो जाएंगी ऐसा ऐसा

1738
01:59:52,400 --> 01:59:56,480
कहती हैं ये घर वापसी की बात कर रही है शायद तो अभी हिंदू नहीं

1739
01:59:56,480 --> 02:00:00,480
है क्या क्या मालूम क्या ही बात कर रही है मेरे को तो ये सूचना मिली अभी डीएम आया

1740
02:00:00,480 --> 02:00:04,640
था मेरे चलो छोड़ो ये ये बाद में देखा जाएगा अभी जो हमारे पास

1741
02:00:04,640 --> 02:00:08,640
अवेलेबल सामग्री है उस पर बात कर लें तो मैं ये कहने वाला था कि भाई

1742
02:00:08,640 --> 02:00:12,640
अगर आपको ऐसा कोई घमंड इत्यादि है कोई मिथ्या अहंकार इत्यादि

1743
02:00:12,640 --> 02:00:16,640
है या फिर आपको ऐसा लगता है कि आप समर्थवान हो इस्लाम का

1744
02:00:16,640 --> 02:00:20,720
खंडन करने में यद्यपि आप हमारे यहां की रील्स देखेंगे तो एक वो

1745
02:00:20,720 --> 02:00:24,800
महिला आई थी स्कॉलर थी वो वहां की महिला और एक

1746
02:00:24,800 --> 02:00:28,960
वो भी आए थे मुल्ला जी पांच मिनट लगे बस खत्म वही पांच मिनट

1747
02:00:28,960 --> 02:00:33,440
जो इनको दिए थे पांच मिनट हम आए दिन हमारे सीधेसी

1748
02:00:33,440 --> 02:00:38,160
सीधे सिद्धांत है अपने वो पांच मिनट में हो गए तो

1749
02:00:38,160 --> 02:00:42,800
अगर आपको ऐसा कोई विश्वास है कि मैं ही समर्थवान हूं

1750
02:00:42,800 --> 02:00:47,200
और मैंने तो उनको भी कहा है ऋषि मंतव्य वालों को भी कहा है तो मैं ही समर्थवान

1751
02:00:47,200 --> 02:00:51,280
हूं अगर आपको ऐसा लग रहा है मुसलमानों के खंडन में तो एक आप

1752
02:00:51,280 --> 02:00:55,440
हमारे चैनल पर आइए। मैं एज ए मुसलमान आपको काउंटर

1753
02:00:55,440 --> 02:00:59,520
करूंगा। ठीक है? आप मुझे परास्त कर दीजिए। और

1754
02:00:59,520 --> 02:01:03,600
उसके बाद जब आप यह एक राउंड पूरा हो जाएगा तब

1755
02:01:03,600 --> 02:01:07,840
आप फिर मुस्लिम बन जाइएगा। मैं आपको ध्वस्त कर दूंगा। इसको कहते हैं सिद्धांत

1756
02:01:07,840 --> 02:01:12,400
का पावर। और यह बात मैं उनसे भी कह कह चुका हूं जहां पे आप लोग बैठे हो।

1757
02:01:12,400 --> 02:01:16,480
ठीक है? उनसे भी कह चुका हूं। पता नहीं कहां छुपे हुए हैं। रोज

1758
02:01:16,480 --> 02:01:20,480
डंके की चोट पर बात करेंगे और इतनी सब बातें हो चुकी। निर्भय निर्भय ने मुझसे खुद कहा

1759
02:01:20,480 --> 02:01:24,480
था कि संदीपन जी तैयार है इस कार्य के लिए आ जाओ किसी दिन

1760
02:01:24,480 --> 02:01:28,640
मैं मुस्लिम बनके बात करूंगा आप मुझे चित्त कर दो फिर आप मुस्लिम बन के बात करो मैं

1761
02:01:28,640 --> 02:01:32,720
जो है पारंपरिक हिंदू बनके आपको चित कर दूंगा देख लेते

1762
02:01:32,720 --> 02:01:36,720
हैं कौन किस पर भारी पड़ेगा काहे के लिए एक दूसरे के सिद्धांतों को सामने लाना

1763
02:01:36,720 --> 02:01:40,880
जो जो विधर्मी को हराएगा जो विधर्म को परास्त कर सकता है उसी

1764
02:01:40,880 --> 02:01:45,280
में दम है उसी के सिद्धांत में दम है उसी में दम है बिल्कुल बिल्कुल हां

1765
02:01:45,280 --> 02:01:49,360
और इधर-उधर की बात नहीं की जब एक मुद्दे पे बात चल रही होती एक विषय पे बात चल

1766
02:01:49,360 --> 02:01:53,600
रही होती है तो फिर वो आ जाती है अरे वाली तो वो कह रहे हैं उसमें

1767
02:01:53,600 --> 02:01:57,760
एक चीज और हो जाएगी कि हमारे यहां की वो बातें जो छेड़

1768
02:01:57,760 --> 02:02:01,840
के हालांकि मैंने आज तक ये नहीं किया है आज तक मैंने ये

1769
02:02:01,840 --> 02:02:06,000
सब नहीं किया है कि दयानंद जी की फलानी उसके साथ संबंध थे दयानंद जी ने ये

1770
02:02:06,000 --> 02:02:10,240
कहा सीधे सिद्धांत की बात वो क्या मानते हैं क्या लिखा है आपकी किताब में वो वाली बात

1771
02:02:10,240 --> 02:02:14,480
ये लोग क्या करते हैं कि सिंघेरी की ये बोल रहे हैं वो वो बोल रहे हैं भाई तात्विक विवेचना

1772
02:02:14,480 --> 02:02:19,120
चल रही है धर्म ब्रह्म की उससे हटके ये सब बातें क्यों लाते तुम

1773
02:02:19,120 --> 02:02:23,280
जो प्रासंगिक विषय है। अच्छा तो ऐसे क्या

1774
02:02:23,280 --> 02:02:27,440
होगा जब हम मुस्लिम को सामने रख के बात करेंगे तो एक तो क्लियर कट हमें पता चल जाएगा विधर्म

1775
02:02:27,440 --> 02:02:32,000
को हराने में किसका सिद्धांत पावरफुल है। दूसरी बात क्या पता लगेगी

1776
02:02:32,000 --> 02:02:36,080
कि वहां पे एक बाउंडेशन और नहीं होगी। जब विधर्मी को हराओगे तो वहां

1777
02:02:36,080 --> 02:02:40,160
वेदों को तो बाउंडेशन बना के खड़ा नहीं कर सकते। आपको विधर्म को हरा के अपने वेदों को प्रूफ

1778
02:02:40,160 --> 02:02:44,240
करना है वहां। तो तो ये दिक्कत खत्म हो जाएगी। है ना? कि परंपरा किसकी

1779
02:02:44,240 --> 02:02:48,800
क्या है? ये भी दिक्कत खत्म हो जाएगी। तीसरी एक बात और अच्छी आएगी कि जो सेंसिटिव

1780
02:02:48,800 --> 02:02:52,880
चीजें बोल के हम सामने वाले का विषयंतर करने का प्रयास करते

1781
02:02:52,880 --> 02:02:56,880
हैं वह भी वहां नहीं होंगी। जैसे अभी ये मातृ शक्ति आई थी कि

1782
02:02:56,880 --> 02:03:00,880
तुम्हारे स्वामी स्वरूपानंद जी ने ये किया वो किया। अब मैं सारी बातें छोडूं जो कट

1783
02:03:00,880 --> 02:03:04,960
टू कट बात चल रही है और मैं चला जाऊं इनके पास कि भैया तुमने ऐसा कैसे कह दिया

1784
02:03:04,960 --> 02:03:09,040
स्वामी स्वरूप जी उन सबका जवाब है मगर जो विषय चल रहा है उसको

1785
02:03:09,040 --> 02:03:13,520
कैसे बचाएं सबका जवाब है एवरीथिंग हां जी वीरूपाक्षक

1786
02:03:13,520 --> 02:03:17,760
जी बोलिए अभी तो मैं इनकी जब पता चला है जो मैं डीएम

1787
02:03:17,760 --> 02:03:21,840
पड़े हैं वहां पे भी अभी शंकर पर मेरे को टैकल कर छोड़िए इनको तो इनकी बात ज्यादा

1788
02:03:21,840 --> 02:03:25,920
ना करें तो अच्छा है हां इनकी बात ना करें तो अच्छा है तो अभी लाइव को शायद दो

1789
02:03:25,920 --> 02:03:29,920
घंटे हो गए हैं जाने का भी समय है तो एंड एंड करने से पहले यही बोलना

1790
02:03:29,920 --> 02:03:34,240
चाहूंगा जितने भी व्यक्ति विशेष यहां जुड़े हुए हैं जो लोग वहां से आए हैं जो हमारी ऑडियंस

1791
02:03:34,240 --> 02:03:38,240
है कि हां तो जो हमारी ऑडियंस है

1792
02:03:38,240 --> 02:03:42,240
कि धर्म का ज्ञान आप यहां से ले रहे हैं परंपरागत ज्ञान आ

1793
02:03:42,240 --> 02:03:46,240
रहा है आपके थ्रू आप कहीं और से लेते हैं चर्चाओं में जुड़ते हैं तो आप एक बात का

1794
02:03:46,240 --> 02:03:50,560
ध्यान रखिएगा हमेशा किसी भी व्यक्ति विशेष का जब उस पर विश्वास

1795
02:03:50,560 --> 02:03:54,640
करने बैठते हैं इंटरनेट पे मैं बताता हूं स्पेसिफिकली इंटरनेट पे Instagram पे जाकर

1796
02:03:54,640 --> 02:03:58,640
आप किसी पेज को फॉलो करते हैं तो आप एक बार देखिए पूछिए उनसे कि उनको ज्ञान कहां से आता आता

1797
02:03:58,640 --> 02:04:02,640
है कहां से ज्ञान आ रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि इनकी तरह वो अपने मर्जी से कुछ

1798
02:04:02,640 --> 02:04:06,720
भी उठा के लिखते दे रही है। शंकर परंपरा की पोस्ट से ही कोई शंकराचार्य

1799
02:04:06,720 --> 02:04:10,720
का वो है अनुयाई है। उनकी ही पोस्ट उठा के उन्हीं के स्क्रिप्चर से ज्ञान

1800
02:04:10,720 --> 02:04:14,880
लेके उनहीं पर पोस्ट बना के कल को उन्हीं को नकार देना ये सब नहीं होना चाहिए। तो मेरा

1801
02:04:14,880 --> 02:04:18,960
आपसे यही निवेदन है। ये दोगलापन है। ये वहां पर बोलना चाहिए। जहां

1802
02:04:18,960 --> 02:04:23,200
बैठी हुई है अगर वहां सब सिद्धांतवादी लोग हैं तो वहां शरण देने की बजाय बोलना

1803
02:04:23,200 --> 02:04:27,200
चाहिए कि भाई तुमने शंकराचार्य को अपना गुरु क्यों बताया? और बनाया बताया

1804
02:04:27,200 --> 02:04:31,280
तो आज ये क्यों कह रही हो? अरे भाई तुम कर क्या रहे हो? तुम तुम धर्म

1805
02:04:31,280 --> 02:04:35,360
का प्रचार कर रहे हो क्या अधर्म का तुम सोच लो ना फिर तुम कहते हो तुम्हारे मंच पर हम

1806
02:04:35,360 --> 02:04:39,440
आए। हमने ऐसा कब किया भाई? ह किसी का

1807
02:04:39,440 --> 02:04:43,440
भी सहारा ले लिया। उनको तुम्हें दुत्कारना चाहिए। दत्त तुम

1808
02:04:43,440 --> 02:04:47,600
काहे के हिंदू हो भाई? तुम कल कह रही थी आदि शंकराचार्य तुम्हारे वो हैं। तुमने

1809
02:04:47,600 --> 02:04:49,360
चार बार में चार चक्कर गुरु बदला। तुमको

1810
02:04:49,360 --> 02:04:53,680
ये कहना चाहिए। ये इस समय बात कर रहा हूं निर्भय से। जिससे मैं बात कर रहा हूं उसको

1811
02:04:53,680 --> 02:04:57,760
उसके जो और ऑपरेटर है भाई धर्म का केवल चिल्लाना नहीं है दूसरे पर दबाव नहीं

1812
02:04:57,760 --> 02:05:01,760
डालना यह धर्म है धारण भी करना है ना उसे जी धारण भी

1813
02:05:01,760 --> 02:05:05,840
तो करके वैष्णव संप्रदाय भी बोला है वैष्णवी शंकर भी बोला है

1814
02:05:05,840 --> 02:05:10,320
वैष्णवी बोल रहे हो वैष्णवी बोल रहे हो शंकर भी बोल रहे आर समाजी बोल रहे तो उसको

1815
02:05:10,320 --> 02:05:14,320
उस लड़की को तुमको धत क्या कर रही थी आप भाई

1816
02:05:14,320 --> 02:05:18,400
अपनी मर्यादा की सेवा में थोड़ा तो उनको आप फटकार लगाओ कि

1817
02:05:18,400 --> 02:05:22,480
भाई तुमने आदि शंकराचार्य जी को कल वो तुम कहते हो हम उनकी रेस्पेक्ट करते हैं।

1818
02:05:22,480 --> 02:05:26,640
आदि शंकराचार्य जी को कल वो ये कह रही थी। आज वो ये कह रही है। और फिर तुम

1819
02:05:26,640 --> 02:05:30,800
लोग छोड़िए उसी लाइव में उसी लाइव के बीच में जब उन्होंने

1820
02:05:30,800 --> 02:05:34,800
बोला है कि आदि शंकराचार्य जी मेरे गुरु हैं। उनका अनुयाई आके बोल के जाता है

1821
02:05:34,800 --> 02:05:38,800
कि आदि शंकराचार्य जी प्रचंड बौद्ध है और फिर अगले दिन उसका समर्थन करने

1822
02:05:38,800 --> 02:05:43,440
लग गई। ये कैसी बात है? उसी लाइन में 4 घंटे के अंदर

1823
02:05:43,440 --> 02:05:47,440
हां। इसमें एक अचला वाली बात रह गई। अच्छा हुआ किसी ने याद दिला दी।

1824
02:05:47,440 --> 02:05:51,520
तो ऐसे कई विषय हैं जिसमें साइंटिफिक थ्योरी ने

1825
02:05:51,520 --> 02:05:56,000
वो नहीं दिया है। निष्कर्ष नहीं दिया है। कई थ्योरीज यह कहती है वैज्ञानिक

1826
02:05:56,000 --> 02:06:01,280
कि सूर्य जो है वो क्या कहते हैं

1827
02:06:01,280 --> 02:06:04,480
धरती के अराउंड घूमता है। और कई जो

1828
02:06:04,480 --> 02:06:08,480
थ्योरीज है वो ये भी कहती है कि धरती जो है सूर्य के अराउंड घूमती है। तो हमें

1829
02:06:08,480 --> 02:06:12,480
जो परंपरा प्राप्त जो वेदादि शास्त्रों का अर्थ प्राप्त होता है तो उसमें जो

1830
02:06:12,480 --> 02:06:16,480
है पृथ्वी को अचला मान करके सूर्य के होने की चीजें भी बताई गई हैं। दूसरी

1831
02:06:16,480 --> 02:06:20,800
बात पूरी के शंकराचार्य जी ने अचला पृथ्वी मैंने हां अचला अचला

1832
02:06:20,800 --> 02:06:24,880
अच्छा वो वो बात ये है उसमें कई सारे वो हैं जैसे आप सेटेलाइट से

1833
02:06:24,880 --> 02:06:28,880
अगर मूव करती हुई सेटेलाइट से अगर किसी ऑब्जेक्ट का वो लोगे

1834
02:06:28,880 --> 02:06:32,960
ना चित्र तो क्या होगा कि वो आप खुद घूम रहे हो जैसे आपने

1835
02:06:32,960 --> 02:06:36,960
देखा होगा ट्रेन के बगल खड़ी हुई ट्रेन के बगल में आप होते हो आपकी

1836
02:06:36,960 --> 02:06:41,280
ट्रेन चलने लगती है तो आपको लगता है बगल वाली ट्रेन जा रही है तो इसमें बहुत सारी

1837
02:06:41,280 --> 02:06:45,600
रिलेटिव वाली रिलेटिविटी की थ्योरीज बहुत सारी हैं थ्योरी ऑफ रिलेशन

1838
02:06:45,600 --> 02:06:49,600
है वो उसप मैंने अभी हां उसप मैंने भी वीडियो बनाया था कि आइंस्टाइन ने

1839
02:06:49,600 --> 02:06:53,600
भी ये माना है कि कुछ भी चीज अब्सोल्यूट नहीं है। आप धरती को स्थिर

1840
02:06:53,600 --> 02:06:57,680
मानो तो सूर्य धरती के चक्कर लगा रहा है और आप सूर्य को स्थिर मानो तो

1841
02:06:57,680 --> 02:07:01,680
धरती सूर्य के चक्कर लगा रही है क्योंकि हम पृथ्वी के ऊपर हैं। व्यवहार जगत में है

1842
02:07:01,680 --> 02:07:05,920
तो उस व्यवहार जगत में हमें ये मानना पड़ेगा कि धरती जो है वो अचला है।

1843
02:07:05,920 --> 02:07:09,920
अगर आप धरती को अचला नहीं मान रहे हो तो फिर जल जो है वो चलायमान जो आप देख

1844
02:07:09,920 --> 02:07:14,800
पा रहे हो और जो वायु चलायमान जो आप देख पा रहे हो वो सिद्धि नहीं होगा। तो इसीलिए

1845
02:07:14,800 --> 02:07:18,800
जब साइंटिस्ट जो सबसे बड़े आइंस्टाइन से बड़ा तो कोई नहीं है। उन्होंने ये थ्योरी

1846
02:07:18,800 --> 02:07:19,920
दी ही अबब्सोल्यूट

1847
02:07:19,920 --> 02:07:24,480
देयर इज नथिंग अब्सोल्यूट इन साइंस। साइंस में कुछ भी एब्सोल्यूट नहीं होता है।

1848
02:07:24,480 --> 02:07:28,560
ये लोग कहते हैं एब्सोल्यूट सीधी बात है। जब बात

1849
02:07:28,560 --> 02:07:32,640
एब्सोल्यूट की आएगी ना तो दुनिया में एब्सोल्यूट एक ही चीज है। वो

1850
02:07:32,640 --> 02:07:36,880
है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर। किसी भी चीज में आप एब्सोल्यूट ढूंढने जाओगे

1851
02:07:36,880 --> 02:07:41,120
तो वहां पे भगवान बैठे मिलेंगे। इसीलिए हम लोग उसको ढूंढ रहे हैं क्योंकि साइंस

1852
02:07:41,120 --> 02:07:45,120
से हमारी अब्सोलुटली जो एब्सोल्यूटनेस की जो प्यास

1853
02:07:45,120 --> 02:07:49,440
है ना बुझ नहीं पा रही है इसलिए भगवान चाहिए हमको हमको अब्सोल्यूट होना है

1854
02:07:49,440 --> 02:07:55,440
तो वो भगवान ही है किसी भी क्षेत्र में पराकाष्ठा में जाएंगे तो खैर वो

1855
02:07:55,680 --> 02:08:01,120
ये वाली बात हो गई क्लियर वो गुरुदेव वाला

1856
02:08:01,120 --> 02:08:05,200
आपने एक प्रश्न तो शंगेरी जी वाला वो शंगेरी शंकराचार्य

1857
02:08:05,200 --> 02:08:09,200
वो भारती कृष्ण जी वाला हमने बोल दिया वो हो

1858
02:08:09,200 --> 02:08:13,280
गया। अच्छा डोनेशन वाली हमने बात बता दी है। डोनेशन जब आ रही है तो उसका सदुपयोग

1859
02:08:13,280 --> 02:08:17,520
भी हो रहा है। आपको जरूरत है जाकर के चेक करिए और वो जैसे आपने इंफॉर्मेशन

1860
02:08:17,520 --> 02:08:21,680
निकाली ना इतनी डोनेशन आई है तो आप जाकर के इस पर भी एक डॉक्यूमेंट्री निकालिए कि

1861
02:08:21,680 --> 02:08:26,560
भाई उस वो डोनेशन कहांहां पे खर्च हो रही है। ठीक है। अच्छा

1862
02:08:26,560 --> 02:08:30,560
एक बात और है। और और डोनेशन पे एक और बात है कि ऐसा नहीं

1863
02:08:30,560 --> 02:08:34,560
है। एक मिनट नहीं तो मैं फिर भूल जाऊंगा। एक मिनट मैं फिर भूल जाऊंगा।

1864
02:08:34,560 --> 02:08:35,060
एक बात

1865
02:08:34,960 --> 02:08:39,280
रह गई थी कि यह लोग एक तरफ को कह रहे हैं आप हमारे चैनल पे आओ। फिर

1866
02:08:39,280 --> 02:08:43,280
चैलेंज करते हुए क्या कह रहे हैं कि कांग्रेसी आए तो पहली बात तो

1867
02:08:43,280 --> 02:08:47,280
तुम धर्म में राजनीति को ला रहे हो कांग्रेसी तैयारी करके फिर तुम

1868
02:08:47,280 --> 02:08:51,360
हमसे मर फिर ये मर्यादा कहां जा रही है तुम्हारी? सोचिए

1869
02:08:51,360 --> 02:08:55,760
बचपना है ये तुम लोगों का यार। तुम अभी बड़े हो जाओ। बचपना है बचपना है।

1870
02:08:55,760 --> 02:08:59,760
अब संदीपन जी थोड़े मुझे मैच्योर लगते हैं। मगर इस तरह की हरकतों में जब वो समर्थक बनना

1871
02:08:59,760 --> 02:09:04,000
है तो मैं उनको भी कहूंगा तुम बचपना है अभी फिर तुम्हारा तुम्हारे लोगों का। थोड़े बड़े हो जाओ।

1872
02:09:04,000 --> 02:09:08,560
कुछ करो जाकर के धरातल पे सोशल मीडिया वॉरियर बनने के जाओ जाके करो चुप

1873
02:09:08,560 --> 02:09:12,640
ठीक है हमने अपने अपने आसपास तो रामपाल खत्म कर दिया ना तुम करो जा किसी

1874
02:09:12,640 --> 02:09:17,440
राक्षस का नाश बताओ अपनी मैच्योरिटी वहां थोड़ा कुछ कर लो यार

1875
02:09:17,440 --> 02:09:22,080
कांग्रेस बीजेपी ये सब तुम्हारा धर्म है

1876
02:09:22,080 --> 02:09:27,360
पता नहीं चलेगा सामने आने पे ये जो ये सब बातें कर रहे हो तुम

1877
02:09:27,360 --> 02:09:31,440
हम हम बकवास सही बात है इंटरनेट सबसे सस्ता हुआ

1878
02:09:31,440 --> 02:09:35,680
है इंटरनेट सस्ता होते ही सबको अपना वक्तव्य रखना है। वही बात आ जाती है।

1879
02:09:35,680 --> 02:09:39,680
बातें छोंक दो बस। हां वही है। हम अब ये विदेश

1880
02:09:39,680 --> 02:09:43,840
विदेश गमन पे कहते हैं कि अच्छा विदेश गमन नहीं कर सकते तो धन कैसे

1881
02:09:43,840 --> 02:09:47,920
ले सकते हैं? अरे भाई जब कोई वहां से धर्म कार्य के लिए धन दे रहा है

1882
02:09:47,920 --> 02:09:50,000
तो उस पे कहां पर निषेध लिखा

1883
02:09:50,000 --> 02:09:54,080
हुआ है कि भैया विदेश से अगर कोई धर्म कार्य के लिए धन दे तो उस

1884
02:09:54,080 --> 02:09:58,160
पे जो है वो धन नहीं ले सकते। ऐसा कहां पर भी लिखा हुआ है? यह भी बात

1885
02:09:58,160 --> 02:10:02,160
आ जाती है। अच्छा वो आपने भी बताया कि वो जो धन है वो धर्म कार्य

1886
02:10:02,160 --> 02:10:06,240
के लिए ही हो रहा है। वहां पर कोई भोग विलास थोड़ी हो रहा है। तो आप उन चीजों

1887
02:10:06,240 --> 02:10:10,320
को जो इग्नोर कर दे रही हैं। मैं प्रमाण दे सकता हूं

1888
02:10:10,320 --> 02:10:14,480
उनको। ये देखिए ये एक मातृशक्ति है। ठीक है ना? ये यूक्रेन

1889
02:10:14,480 --> 02:10:18,560
की है। ये भारत में ही रहती हैं। पिछले 10 साल से शायद भारत में ही है। इनका मेरे को वीडियो

1890
02:10:18,560 --> 02:10:22,720
मिला था। यह श्रृंगेरी मठ का ही अनुसरण करती हैं और यह खुद स्वयं

1891
02:10:22,720 --> 02:10:27,280
खुद डोनेशंस इकट्ठा करके श्रृंगेरी मठ तक पहुंचाती हैं ट्रस्ट के थ्रू।

1892
02:10:27,280 --> 02:10:31,360
तो ऐसा नहीं है कि हमें कोई चिढ़ है किसी से और फिर

1893
02:10:31,360 --> 02:10:35,520
विदेश गमन विदेश गमन या विदेश भूमि में जन्म लेने वाले व्यक्ति को यह

1894
02:10:35,520 --> 02:10:39,600
थोड़ी ना कहा गया कि हम तुम्हें नाम जप या भगवान के तत्व की व्याख्या नहीं बताएंगे।

1895
02:10:39,600 --> 02:10:43,600
सबको बताएंगे। उसके अधिकार की सीमा में किस तरह से उसका माध्यम क्या हो सकता है वो

1896
02:10:43,600 --> 02:10:47,840
सबको बताया जाएगा। मुक्ति से किसी को वंचित नहीं किया गया। स्टीव जॉब स्टीव

1897
02:10:47,840 --> 02:10:51,920
जॉब भी आए थे भारत में तो क्या उन्हें ब्राह्मण बन गए वो आके कि मुझे

1898
02:10:51,920 --> 02:10:56,560
ब्राह्मण बनना है वो आए थे वहां पर धर्म और भ्रम को समझा उन्होंने वहां पर

1899
02:10:56,560 --> 02:11:01,360
तो बहुत सारे ऐसे अभी हॉलीवुड के भी बहुत सारे एक्टर हैं जो

1900
02:11:01,360 --> 02:11:05,040
हमारे सनातन धर्म की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। उसके सिद्धांतों को पढ़ रहे

1901
02:11:05,040 --> 02:11:09,280
हैं। तो वो आपके जो सिद्धांत है कि

1902
02:11:09,280 --> 02:11:13,440
आए हैं वो और हम उन्हें सीधा ब्राह्मण बनाकर वो जेनेऊ धारण करवा देंगे। भैया

1903
02:11:13,440 --> 02:11:17,600
उससे क्या उन्हें धर्म और भ्रम मिल जाएगा? आप तो गलत कर रहे हो। आप तो उनको गलत धर्म

1904
02:11:17,600 --> 02:11:21,920
की व्याख्या दे रहे हो। तो उससे तो आप धर्म का प्रचार ना कर कर आप तो उल्टा

1905
02:11:21,920 --> 02:11:26,400
धर्म के विरुद्ध जो है कार्य कर रहे हो। अच्छा ये जो अभी

1906
02:11:26,400 --> 02:11:31,040
इन्होंने अवेकनिंग को जो अपनी लाइव स्ट्रीम में ये ले रहे हैं अवेकनिंग भारत

1907
02:11:31,040 --> 02:11:35,200
इनकी मातृशक्ति को तो यानी कि कहीं ना कहीं आर्य समाज इस

1908
02:11:35,200 --> 02:11:39,280
चीज का समर्थन कर रहा है कि भाई अगर आप इंटरनेट से और पीडीएफ से ज्ञान ले रहे हो

1909
02:11:39,280 --> 02:11:43,440
तो आप वैलिड हो मतलब करते रहो ये सब चीजें। उनका अपना वो

1910
02:11:43,440 --> 02:11:47,520
है ना उनका अपना मत वही है ना वो वो भी तो अनाधिकृत रूप से

1911
02:11:47,520 --> 02:11:51,680
बने बैठे हैं ना वही वही और उनका दिक्कत तब आएगी दिक्कत तब

1912
02:11:51,680 --> 02:11:55,680
आएगी दिक्कत तब आएगी जब ये भस्मासुर उनके पीछे पड़ेगा

1913
02:11:55,680 --> 02:11:59,760
जो भस्मासुर को आज वरदान दे रहे हैं हां अभी उनकी लाइफ में वो

1914
02:11:59,760 --> 02:12:03,840
कह रही थी कि शंकर परंपरा वाले जो अनुय गाली दे रहे हैं मेरे को उनका भी नाश

1915
02:12:03,840 --> 02:12:07,920
होगा अभी देखते हैं वो तो सुनो एक चीज और

1916
02:12:07,920 --> 02:12:12,800
गाली थोड़ी दे रहे हमने किसी किसी को गाली थोड़ी एक और है अब वो वहां बैठी हुई

1917
02:12:12,800 --> 02:12:16,960
वहां पर उनको नहीं कहना चाहिए कि भाई तुमने यह कहा कि स्त्रियां कभी भी किसी भी सूरत

1918
02:12:16,960 --> 02:12:20,240
में अपवित्र नहीं होती। नहीं नहीं यह बात नहीं है। अमुक अमुक

1919
02:12:20,240 --> 02:12:24,480
स्थितियों में स्त्रियां अपवित्र माननी पड़ेगी। नहीं तो राम जी क्यों कहते सीता माता को

1920
02:12:24,480 --> 02:12:28,800
वो अग्नि परीक्षा दो। ये तो वो भी मानते हैं आर समाजी हैं।

1921
02:12:28,800 --> 02:12:33,040
जबकि सीता माता तो अयोनिजा है। अब वो

1922
02:12:33,040 --> 02:12:37,040
भागवतानंद वाला जो वो आ जाएगा उसको खंडन नहीं किया मैंने।

1923
02:12:37,040 --> 02:12:41,200
सबरी वाले में सीता माता अगर देखा जाए तो जिनकी अवतार

1924
02:12:41,200 --> 02:12:45,280
बाद में मान्यता है उनके अनुसार सीता माता तो अयोनिजा है और उनमें तक

1925
02:12:45,280 --> 02:12:49,360
भगवान जो है दोष दोष दोष होने की दृष्टि से उनको देख रहे

1926
02:12:49,360 --> 02:12:53,680
हैं अब वो नहीं थी वो बिल्कुल साफ बात है मगर देख तो रहे हैं ना हो सकता है संभावना

1927
02:12:53,680 --> 02:12:57,840
स्वीकार कर रहे हैं तो फिर ये क्या बकवास करके बैठी हुई हो अपने उसमें

1928
02:12:57,840 --> 02:13:01,840
कि भैया वो नहीं होती अब तो उनको सिखाओ आपके आपके

1929
02:13:01,840 --> 02:13:05,920
चैनल पे वो आई है तो उनको आपको सिखाना चाहिए जी इनका कुछ नहीं हो सकता ये अभी

1930
02:13:05,920 --> 02:13:10,000
उनका समर्थन इसलिए इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो आपके विरुद्ध खड़ी है। इतनी सी बात है।

1931
02:13:10,000 --> 02:13:14,000
देखिए ऐसा है। और हमारे परम पूज्य कृपात्री जी महाराज जो

1932
02:13:14,000 --> 02:13:18,160
कि गौ रक्षा आंदोलन जो उन्होंने करा था 1966 1966

1933
02:13:18,160 --> 02:13:22,240
में तो उस सबसे बड़ा आज का आज तक का गौ रक्षा आंदोलन वो

1934
02:13:22,240 --> 02:13:26,560
माना जाता है। उसका नेतृत्व उन्होंने किया था। उसमें जो

1935
02:13:26,560 --> 02:13:30,640
हजारों संतों ने उस गौ रक्षा आंदोलन में भाग लिया था।

1936
02:13:30,640 --> 02:13:34,960
तो भाई आप जो है यह कहकर के भैया वो तो जो

1937
02:13:34,960 --> 02:13:35,460
गौ

1938
02:13:35,360 --> 02:13:39,440
बलि का समर्थन कर रहे हैं। अच्छा समर्थन करने वाला फिर गौ रक्षा आंदोलन क्यों

1939
02:13:39,440 --> 02:13:43,840
चला रहा है? अच्छा उनकी परंपरा के आज के आचार्य भी हमारे जो पूज्य गुरुदेव

1940
02:13:43,840 --> 02:13:49,120
हैं वो

1941
02:13:49,120 --> 02:13:53,200
क्या हुआ? वीडियो कट गई शायद इनकी। हां।

1942
02:13:53,200 --> 02:13:57,440
चलिए मैं एक चीज दिखा देता हूं। यह एक थर

1943
02:13:57,440 --> 02:14:01,440
नाम का एक इनके यहां पहले आर समाजी थे और इन्होंने अभी

1944
02:14:01,440 --> 02:14:05,680
चैनल इन्होंने अपना चैनल खोला है और ये अच्छे से इनकी खिंचाई

1945
02:14:05,680 --> 02:14:11,120
कर क्योंकि ये इनके अंदर से निकला हुआ निकले हुए हैं। ये कोई चैनल है थर

1946
02:14:11,120 --> 02:14:15,280
तो वो जो है अब ये इनके पास इसका कोई उपाय नहीं है

1947
02:14:15,280 --> 02:14:19,360
और आपको मैं बताऊं देश के बहुत बड़े-बड़े नास्तिक हैं जो आर्य समाज से निकल

1948
02:14:19,360 --> 02:14:23,360
के आ रहे हैं। बिल्कुल विकास दिव्य कीर्ति नास्तिक फैमिली से है।

1949
02:14:23,360 --> 02:14:27,360
सिर द होगी तो नास्तिकता ही मिलेगी।

1950
02:14:27,360 --> 02:14:31,600
हां जी। हां जी। हां जी। ये बात है। अच्छा

1951
02:14:31,600 --> 02:14:36,880
एक बात जी आप कुछ कह रहे थे सनातन शंकर जी।

1952
02:14:36,880 --> 02:14:41,040
हां मैं ये कह रहा हूं कि हां एक और है। ये ये देखिए ये व्यक्ति भी हमारे

1953
02:14:41,040 --> 02:14:45,680
चैनल पे आ चुके हैं एक बार। ये अजय आर्य ये बहुत बड़े

1954
02:14:45,680 --> 02:14:49,760
अफलातून माने जाते हैं। एथ बहुत बड़े अफलातून

1955
02:14:49,760 --> 02:14:50,480
आर्य हां।

1956
02:14:50,480 --> 02:14:54,480
तो ये ये भी जो है अब एथस्ट बनके आर्य समाज के विरोध में ही कार्य कर रहे हैं। यह

1957
02:14:54,480 --> 02:14:59,200
तुम्हारे सिद्धांत है। हम वो हैं जो नास्तिकों को

1958
02:14:59,200 --> 02:15:03,360
आस्तिक बनाते हैं और तुम वो हो जो आस्तिकों को नास्तिक बनाते

1959
02:15:03,360 --> 02:15:07,520
हो। ठीक है। चैट में व्यक्ति

1960
02:15:07,520 --> 02:15:12,000
विशेष सवाल उठा रहे हैं। पशु बलि गौ बलि और चौक पब्लिकेशन का सेनाचार्य

1961
02:15:12,000 --> 02:15:16,000
भाष्य पे। तो नहीं उसी उसी पे उसी पे मैं उसी पे बोल रहा था।

1962
02:15:16,000 --> 02:15:20,320
बीच में डिस्कनेक्ट हो गया। मैं यह कह रहा था कि हमारे परम पूज्य कृपात्री

1963
02:15:20,320 --> 02:15:24,400
जी महाराज जिन्होंने 1966 में गौ रक्षा का बहुत

1964
02:15:24,400 --> 02:15:28,560
बड़ा आंदोलन किया था। उस वक्त की इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध उन्होंने

1965
02:15:28,560 --> 02:15:32,560
खड़े होकर देश के सारे संतों को इकट्ठा किया। इतना बड़ा गौ रक्षा आंदोलन आज

1966
02:15:32,560 --> 02:15:36,560
तक नहीं हुआ। तो उसमें इतने सारे निहत्ते साधुओं

1967
02:15:36,560 --> 02:15:40,960
के ऊपर गोलियां चलाई गई। चलाई गई थी। सिर्फ इसलिए क्योंकि

1968
02:15:40,960 --> 02:15:45,120
वहां पर गौ रक्षा की बात थी। लेकिन उस चीज का प्रचार

1969
02:15:45,120 --> 02:15:49,120
प्रसार ना कर कर यह उल्टा यह दुष्प्रचार कर रही हैं कि

1970
02:15:49,120 --> 02:15:54,320
भाई करपात्री जी महाराज जो है वह गौ व के समर्थक हैं और हमारे

1971
02:15:54,320 --> 02:15:58,400
इसको क्लियर मैं इसको क्लियर कर देता हूं। हालांकि हालांकि मैंने इस बात

1972
02:15:58,400 --> 02:16:02,480
को उनको फोन जो टेलीफोनिक वार्ता हुई है। संतुष्ट कर दिया था। उनके

1973
02:16:02,480 --> 02:16:05,520
पास जवाब नहीं थे। मगर अब वो एक सिंपैथी

1974
02:16:05,520 --> 02:16:09,680
गेम नहीं होता है। विक्टिम कार्ड की कुछ ऐसी चीजों को ऐसे बोलो कि वो जो है मुद्दा बन

1975
02:16:09,680 --> 02:16:13,680
जाए। ऐसा है कि जब

1976
02:16:13,680 --> 02:16:17,760
भी कभी समष्टि के भाव से व्यष्टि का वो देखा जाता

1977
02:16:17,760 --> 02:16:22,000
है तो वहां पर समष्टि को प्रायोरिटी दी जाती है। तो द्वापर

1978
02:16:22,000 --> 02:16:26,000
युग तक ऐसे यज्ञ को मान्य किया गया जिसमें इस

1979
02:16:26,000 --> 02:16:30,000
तरह की प्रक्रिया का प्रक्रिया को कहीं पर स्वीकार किया गया। अमुक

1980
02:16:30,000 --> 02:16:34,160
अमुक प्रलयंकारी आपदा से बचने के लिए। ठीक है?

1981
02:16:34,160 --> 02:16:38,160
कि भाई दुनिया की तमाम जो गौ माता

1982
02:16:38,160 --> 02:16:42,240
हैं उनका वध ना हो। उनको बता क्या कहते हैं उनको नुकसान ना

1983
02:16:42,240 --> 02:16:46,560
पहुंचे इसलिए ऐसी कोई प्रक्रिया निर्धारित की गई जिससे कि उनका बचाव

1984
02:16:46,560 --> 02:16:50,800
हो सके। अब उसका जो पहली बात तो कलयुग में तो वो लागू ही नहीं द्वापर

1985
02:16:50,800 --> 02:16:56,000
तक स्वीकार किया गया। दूसरी बात यह है कि

1986
02:16:56,000 --> 02:17:00,000
अगर यह देखा भी जाए कि भैया हम जो करपाती जी गौ बलि के समर्थक

1987
02:17:00,000 --> 02:17:04,400
है तो एग्जीक्यूशन भी तो देखना पड़ेगा। केवल इनपुट क्यों देख रहे हो?

1988
02:17:04,400 --> 02:17:08,640
एग्जीक्यूशन भी तो देखो। एग्जीक्यूशन तो दिखाई नहीं दे रहा आपका। इंप्लीमेंटेशन

1989
02:17:08,640 --> 02:17:12,720
तो दिखाई नहीं दे रहा। कौन से मठ में गौ बलि होती है भाई? मरे जा रहे हैं

1990
02:17:12,720 --> 02:17:17,040
हम लोग। लड़े मरे जा रहे हैं। कटे जा रहे हैं गाय। गाय को बचाने के लिए

1991
02:17:17,040 --> 02:17:20,560
हैं। फिर तुम कैसे कह दे रहे हो कि समर्थन? मतलब मैं जो मैं जो कह

1992
02:17:20,560 --> 02:17:24,720
रहा हूं वो मैं नहीं बताऊंगा। वो कौन बताएगा? सामने वाला बताएगा। अच्छा दूसरी

1993
02:17:24,720 --> 02:17:29,120
बात यह है कि अगर यह मान ले कि अमुक अमुक स्थिति में भी गाय को कैसे

1994
02:17:29,120 --> 02:17:33,680
आपने इस ऐसी प्रक्रिया का कैसे उपयोग मान लिया? तो भाई सुनो

1995
02:17:33,680 --> 02:17:38,000
तुम्हारे जो खुद के दयानंद जी हैं नियोग

1996
02:17:38,000 --> 02:17:42,080
के विषय में लिखते मैं नियोग का आरोप नहीं लगा रहा हूं। सामान्य एक एवरेज

1997
02:17:42,080 --> 02:17:46,080
जो आर्य समाज विरोधी होता है वह नियोग लेकर के आ जाता है आर्य समाज हम

1998
02:17:46,080 --> 02:17:50,720
तो सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र शाश्वत धर्म पर बात करने वाले लोग हैं। खैर

1999
02:17:50,720 --> 02:17:54,960
तो मगर नियोग के विषय में एक तर्क दिया उन्होंने जो मानने

2000
02:17:54,960 --> 02:17:58,960
योग्य है। जब उन्होंने पूर्व पक्ष के रूप में आपत्ति

2001
02:17:58,960 --> 02:18:03,120
जताई है वहां पर पूर्व पक्ष में लिखा है कि भाई सब

2002
02:18:03,120 --> 02:18:07,200
बातें ठीक है मगर मुझे व्यभचार जैसा लग रहा है नियोग वहां

2003
02:18:07,200 --> 02:18:11,360
पर पूर्व पक्ष रखा है उन्होंने दयानंद जी ने तो पूर्व पक्ष में व्यक्ति ने कहा कि

2004
02:18:11,360 --> 02:18:15,680
मुझे जो नियोग है व्यभचार लग रहा है तो दयानंद जी ने पूछा कि विवाह

2005
02:18:15,680 --> 02:18:19,680
करना व्यभचार नहीं है। यह कहां से पता लगा तुम्हें? विवाह

2006
02:18:19,680 --> 02:18:23,680
करना व्यभचार नहीं है। यह कहां से पता लगा तुम्हें? जैसे कल वह कह रही

2007
02:18:23,680 --> 02:18:27,840
थी ना कि मानव कल्याण तो कौन सी चीज मानव कल्याण है कौन सी नहीं है तुम्हें धर्म

2008
02:18:27,840 --> 02:18:32,240
से पता लगा शास्त्रों से पता लगा अपने से आपकी गति नहीं है अती्द्रिय विषय

2009
02:18:32,240 --> 02:18:35,680
बहन से विवाह नहीं करना है बहन से विवाह नहीं

2010
02:18:35,680 --> 02:18:40,160
करना है इस विषय में शास्त्र ही प्रमाण है शब्द प्रमाण से माना हमने

2011
02:18:40,160 --> 02:18:44,160
अब कोई कहे साइंस की वजह से साइंस तो बदलती है सनातन थोड़ी ना साइंस कल को

2012
02:18:44,160 --> 02:18:48,400
कहने लगे कि साइंस जो है बहन से विवाह करने पर कुछ नहीं है बल्कि आप जेनेटिकली अच्छे हो जाओगे

2013
02:18:48,400 --> 02:18:52,480
आपकी संतान करोगे हम नहीं करोगे

2014
02:18:52,480 --> 02:18:56,480
क्यों? क्योंकि धर्म ने कहा है नहीं करना। तो गति अब उन्होंने दयानंद

2015
02:18:56,480 --> 02:19:00,720
जी ने वहां पर तर्क दिया है कि जो विवाह है वो व्यभचार

2016
02:19:00,720 --> 02:19:04,960
नहीं है। इस संबंध में इसको तुमने कैसे माना? आपने विवाह को

2017
02:19:04,960 --> 02:19:09,120
और गैर विवाह की स्थिति में जो संबंध बनते हैं स्त्री पुरुष

2018
02:19:09,120 --> 02:19:13,200
में। इसमें आपने अंतर किस आधार पे किया है? शास्त्र के आधार पे। तो जब शास्त्र ही

2019
02:19:13,200 --> 02:19:17,360
ये कह रहा है कि नियोग को नहीं मानना है गलत। तो फिर आप उसमें कैसे शास्त्र

2020
02:19:17,360 --> 02:19:21,360
के ऊपर जा रहे हो? आपके लिए अच्छाई और बुराई डिपेंड जिस पे करती है

2021
02:19:21,360 --> 02:19:25,600
वही तो सेलेक्ट करेगा कि कहां पे अच्छाई होगी कहां पे नहीं होगी। तो

2022
02:19:25,600 --> 02:19:29,680
कोई चीज हमारे लिए सही है और कोई चीज सही नहीं है। इस

2023
02:19:29,680 --> 02:19:33,920
विषय में शास्त्र प्रमाण है। अती्द्रिय विषय जो है उसमें शास्त्र प्रमाण है।

2024
02:19:33,920 --> 02:19:38,000
यह मोक्ष का विषय अती्द्रिय विषय है। इसको आप तर्क

2025
02:19:38,000 --> 02:19:42,320
से सिद्ध नहीं कर सकते। मोक्ष मिल गया। अती्द्र

2026
02:19:42,320 --> 02:19:46,480
विषय तो उसमें शास्त्र प्रमाण है। हां आपको संतुष्टि

2027
02:19:46,480 --> 02:19:50,640
जनक देने वाले इतने सारे उपाय दिए जाएंगे। इतने सारे तर्क दिए जाएंगे कि

2028
02:19:50,640 --> 02:19:51,140
आपके

2029
02:19:50,880 --> 02:19:54,880
मन में खुद श्रद्धा उमड़े कि हां भाई इसकी ये वाली

2030
02:19:54,880 --> 02:19:59,200
बात जो है ना अतींद्र जिसमें मेरी गति नहीं हो पा रही मानने योग्य है। यह हम दे देंगे

2031
02:19:59,200 --> 02:20:03,600
अकाट्य बातें। तो जब जिस विषय में शास्त्र ने ही संविधान

2032
02:20:03,600 --> 02:20:07,600
दे रखा है तो उसमें हमने हमें शास्त्रों का उल्लंघन ना करके समष्टि

2033
02:20:07,600 --> 02:20:11,680
के भाव से ऐसी प्रक्रिया को भी स्वीकार करना पड़ता है जो भले

2034
02:20:11,680 --> 02:20:15,680
ही व्यष्टि की व्यष्टि के धर्म की दृष्टिकोण से गलत दिखाई दे रही

2035
02:20:15,680 --> 02:20:19,760
हो मगर समष्टि के भाव से वो कि आपदा आ रही है प्रलय आ रही है प्रलय से बचने के

2036
02:20:19,760 --> 02:20:23,840
लिए ऐसा यज्ञ है मान लो द्वापर तक अब तो है भी नहीं अच्छा दूसरी

2037
02:20:23,840 --> 02:20:28,880
बात अब ये व्यष्टि और समष्टि को भी मैं समझा दूं

2038
02:20:28,880 --> 02:20:32,880
प्रह्लाद जी का व्यष्टि का धर्म था कि पिता की आज्ञा का उल्लंघन

2039
02:20:32,880 --> 02:20:37,200
नहीं करना है और समष्टि का धर्म था कि नारायण नारायण

2040
02:20:37,200 --> 02:20:41,360
नाम जपना है। जब समष्टि का धर्म को क्रॉस करने लगता है व्यष्टि का धर्म

2041
02:20:41,360 --> 02:20:45,440
तो समष्टि के धर्म को चुना जाता है। तो प्रह्लाद ने उसको चुना और प्रह्लाद जी

2042
02:20:45,440 --> 02:20:49,680
आज हमारे आदर्श हैं। श्री राम जी के समक्ष धर्म

2043
02:20:49,680 --> 02:20:54,320
था कि अपनी निर्दोष पत्नी को दंड नहीं देना है।

2044
02:20:54,320 --> 02:20:58,960
व्यष्टि का धर्म और समष्टि का धर्म क्या था कि प्रजा जो है

2045
02:20:58,960 --> 02:21:03,040
दुखी हो रही है उनका उदाहरण लेकर के वहां पर अनियमितताएं आ

2046
02:21:03,040 --> 02:21:06,400
रही हैं और वो भी ऐसी वैसी प्रजा नहीं आज जैसी

2047
02:21:06,400 --> 02:21:10,400
स्वकर्म निष्ठ स्वधर्म निष्ठ वो प्रजा वो

2048
02:21:10,400 --> 02:21:14,800
दुख भोग रही है तो उन्होंने समष्टि के धर्म के निर्वाह के लिए

2049
02:21:14,800 --> 02:21:18,880
व्यष्टि के धर्म को चुनना सिखाया वो व्यष्टि के धर्म को त्यागना सिखाया

2050
02:21:18,880 --> 02:21:23,040
समष्टि के धर्म के निर्वाह के लिए वो हमारे आदर्श अब दो उदाहरण ऐसे दे देता

2051
02:21:23,040 --> 02:21:27,040
हूं जिन्होंने व्यष्टि के धर्म को आगे किया समष्टि को पीछे कर दिया जैसे कि भीष्म

2052
02:21:27,040 --> 02:21:31,600
पितामह भीष्म पितामह को मालूम था धर्म क्या है द्रोपदी

2053
02:21:31,600 --> 02:21:35,760
का चीर हरण नहीं होना चाहिए समष्टि था मगर उनका व्यष्टि का धर्म

2054
02:21:35,760 --> 02:21:40,720
था कि उन्होंने प्रतिज्ञा ली हुई थी राजगद्दी के प्रति कटप्पा वाली

2055
02:21:40,720 --> 02:21:44,720
तो उन्होंने क्या किया अपने व्यष्टि के धर्म को चुना समष्टि को त्याग दिया दोषी

2056
02:21:44,720 --> 02:21:48,880
बने महाभारत में अपराधी कहलाए और भगवान

2057
02:21:48,880 --> 02:21:54,160
ने सबसे पहले उनको दंड दिया कुंभकरण

2058
02:21:54,160 --> 02:21:59,200
समष्टि का धर्म था सीता माता को हरण करके लाया था उनका भाई

2059
02:21:59,200 --> 02:22:03,280
साथ नहीं देना चाहिए था भाई का व्यष्टि का धर्म था भाई का साथ देना

2060
02:22:03,280 --> 02:22:07,280
तो जब समष्टि का धर्म हावी हुआ व्यष्टि पे उन्होंने क्या किया व्यष्टि

2061
02:22:07,280 --> 02:22:11,280
को चुना भाई का साथ दूंगा समष्टि जाए भाड़ में वो हमारे लिए

2062
02:22:11,280 --> 02:22:16,160
राक्षस बने बुरे व्यक्ति करे कहलाए वहीं पे विभीषण

2063
02:22:16,160 --> 02:22:20,240
विभीषण ने व्यष्टि के धर्म को त्याग कर दिया समष्टि के धर्म को अपनाया तो वो

2064
02:22:20,240 --> 02:22:24,240
किधर आ गए राम जी की तरफ तरफ धर्म

2065
02:22:24,240 --> 02:22:28,720
की तरफ तो यह आपको समझना होगा धर्म की मीमांसा

2066
02:22:28,720 --> 02:22:33,360
बहुत कहीं-कहीं पर बारीक लकीर होती है धर्म में कहीं-कहीं पर

2067
02:22:33,360 --> 02:22:37,600
और क्या कहते हैं दुनिया की बहुत सारी

2068
02:22:37,600 --> 02:22:41,760
गायों के लिए अगर ऐसी एक विधि के आलंबन से

2069
02:22:41,760 --> 02:22:46,000
दुनिया की बहुत सारे गौवंश को बचाया जा सकता है तो उसको प्रायोरिटी देनी दी जाएगी

2070
02:22:46,000 --> 02:22:50,080
ना इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण ले लो युद्ध हो रहा है

2071
02:22:50,080 --> 02:22:54,080
पूरे देश के 100 करोड़ हिंदुओं की रक्षा के के लिए वहां पर क्यों बलि दी जा रही है सैनिकों की

2072
02:22:54,080 --> 02:22:58,640
बताइए वो गलत है। छाती पर गोली खा रहे हैं।

2073
02:22:58,640 --> 02:23:03,760
यह व्यष्टि और समष्टि का अंतर है। ठीक है जी बोले

2074
02:23:03,760 --> 02:23:08,400
यही अधूरा ज्ञान है इनका आगामिक परंपराओं का नाम ले लेके ये

2075
02:23:08,400 --> 02:23:09,280
अटैक करने लगते हैं

2076
02:23:09,280 --> 02:23:13,280
वेदाचार्य पे जबकि इनको उनकी भी नॉलेज है नहीं जरा सी भी। अभी जैसे

2077
02:23:13,280 --> 02:23:18,080
मैं देख रहा था कि जो वीर शैवा आचार्य है चंद्रशेखराचार्य

2078
02:23:18,080 --> 02:23:22,400
जी काशी के मटके जंगमवाड़ी मटके वो गए थे रशिया वहां पर

2079
02:23:22,400 --> 02:23:26,560
तो कहते ये रशिया चले गए हैं यहां शंकराचार्य लोग कहते हैं कि विदेश गन

2080
02:23:26,560 --> 02:23:30,560
अलाउड नहीं है तो आपको धर्म की थोड़ी अगर नॉलेज है आप एग्जांपल ले रहे

2081
02:23:30,560 --> 02:23:34,720
हैं एक आगमिका आचार्य का तो उनका धर्म भी तो पढ़िए क्या कहता है

2082
02:23:34,720 --> 02:23:39,920
उनका धर्म बात इसको बहुत शॉर्ट में ऐसे समझा दीजिए

2083
02:23:39,920 --> 02:23:44,000
कि भैया शास्त्र में वीर शैवाचार्य विग्रहवान

2084
02:23:44,000 --> 02:23:48,080
धर्म नहीं लिखा है। बिल्कुल शास्त्र में रामो विग्रहवान धर्म लिखा

2085
02:23:48,080 --> 02:23:52,160
है। दुनिया के समस्त जितने भी व्यक्तित्व हैं जितने अंशों में राम जी की सीमा

2086
02:23:52,160 --> 02:23:56,240
के भीतर आएंगे स्वीकार हैं और जहांजहां पर राम जी की सीमा के बाहर जाएंगे

2087
02:23:56,240 --> 02:23:59,520
स्वीकार नहीं है।

2088
02:23:59,520 --> 02:24:03,520
और और सुनिए महाभारत का वचन है घटनाओं का घटित

2089
02:24:03,520 --> 02:24:07,520
होना प्रमाण नहीं होता है। रावण ने सीता का हरण कर लिया। हमारी वाल्मीकि

2090
02:24:07,520 --> 02:24:11,840
रामायण में लिखा है। तो क्या वो हमारा धर्म है? दूसरे की पत्नियों का हरण

2091
02:24:11,840 --> 02:24:15,840
करना तो घटनाओं का घटित होना प्रमाण नहीं होता

2092
02:24:15,840 --> 02:24:18,480
है। उनको

2093
02:24:18,480 --> 02:24:22,640
उनको न्यायोचित रूप में शास्त्रों द्वारा स्वीकार किया जाना प्रमाण होता

2094
02:24:22,640 --> 02:24:24,400
है। शास्त्रों द्वारा या

2095
02:24:24,400 --> 02:24:28,400
तो वह करने वाले व्यक्तित्व को कह दिया जाए मर्यादा पुरुषोत्तम है तो उसका

2096
02:24:28,400 --> 02:24:32,560
धर्म हो गया उसकी हर की हुई चीज या फिर उसके द्वारा किए हुए इस प्रकार

2097
02:24:32,560 --> 02:24:36,720
के विरोधाभासी कृत को कि शास्त्र तो कह रहे हैं नहीं जाना है मगर वो जा रहे हैं

2098
02:24:36,720 --> 02:24:40,880
तो इस प्रकार के कृत्य को शास्त्र ने स्वीकार कर लिया हो अमुक अमुक गद्दी पर अगर कोई बैठा

2099
02:24:40,880 --> 02:24:44,880
होगा तो जाएगा और हम यह व्यक्तिगत दोष उनका इसलिए

2100
02:24:44,880 --> 02:24:48,960
नहीं उनके पास अपना कुछ हो सकता है मगर उसको सिद्धांत बना दो उनकी कोई स्थिति हो

2101
02:24:48,960 --> 02:24:53,440
सकती है धर्म का अनुकरण ना कर पाना

2102
02:24:53,440 --> 02:24:57,040
यदि मेरी

2103
02:24:57,040 --> 02:25:01,440
व्यवस्था नहीं है, चयन है तो मैं अधर्मी हूं और धर्म का अनुकरण

2104
02:25:01,440 --> 02:25:05,440
ना कर पाना यदि मेरा चयन नहीं है, मेरी व्यवस्था

2105
02:25:05,440 --> 02:25:10,240
है तो भी मैं धर्मज्ञ ही कहलाऊंगा। जी

2106
02:25:10,240 --> 02:25:14,400
ठीक है जी बोले। तो बस अब खत्म ही करते हैं। फिर तो सारे तो

2107
02:25:14,400 --> 02:25:18,480
जितने पॉइंट थे हो गए हैं कवर मेरे हिसाब से। हां और कुछ

2108
02:25:18,480 --> 02:25:22,720
बचा नहीं है। अब नया अगर ये कुछ लाके देते हैं तो बात अलग है। अब

2109
02:25:22,720 --> 02:25:27,120
अब वो कर ये रही हैं। फिलहाल जो अभी उनकी स्थिति है ऑपरेटर अगर

2110
02:25:27,120 --> 02:25:31,200
देख पा रहे हो जरा वो मेरा आज का वीडियो दिखा दीजिए। वैसे हम लोग शॉर्ट में इसको डालने वाले हैं।

2111
02:25:31,200 --> 02:25:35,200
मैंने आपको WhatsApp पे एक वीडियो दिया है छोटा सा डेढ़ मिनट का। अभी जो रील डाली है वो

2112
02:25:35,200 --> 02:25:39,920
दिखा दूं यहां के दर्शकों को। तो

2113
02:25:39,920 --> 02:25:43,920
क्या कहते हैं? अब वो कर ये रही हैं। फिलहाल उन्होंने मुझको और मुझसे जुड़े

2114
02:25:43,920 --> 02:25:48,000
हुए कुछ शायद मुख्य लोगों को जो उनकी इस वास्तविकता को जानते हैं कि

2115
02:25:48,000 --> 02:25:52,320
उनका क्या हाल हुआ था आमनेसामने के वन ऑन वन टॉक में। तो

2116
02:25:52,320 --> 02:25:56,320
हां मैं एक बात याद दिला दूं। मैंने जो बात कही मुझे ध्यान रखिएगा आपको बहुत ज्यादा इस बात

2117
02:25:56,320 --> 02:26:00,400
का अगर वो है धारण कर रखा है। मैंने मुसलमानों को चटनी चटाई है तो

2118
02:26:00,400 --> 02:26:04,480
आप इस तरह की चर्चा मुझसे कर सकती है जिसमें मैं मुसलमान बनूंगा। आप चटनी चटा दीजिए।

2119
02:26:04,480 --> 02:26:09,440
फिर मैं आपको दिखाऊंगा कि चटनी चटाना कहते किसे हैं। दूसरी बात।

2120
02:26:09,440 --> 02:26:13,680
दूसरी बात दूसरी बात यह है कि अभी वह कर क्या रही है कि उन्होंने हमको जैसे

2121
02:26:13,680 --> 02:26:17,840
हमारी चीजों को ब्लॉक कर दिया तो जानना ही नहीं चाहती कि शिवश नारायण द्विवेदी

2122
02:26:17,840 --> 02:26:21,840
क्या कह रहे हैं क्या लिख रहे हैं उनको टैग किया जा रहा है जो उनके

2123
02:26:21,840 --> 02:26:25,920
संदेश है वो उस दुनिया से मुक्त शिवांश रहित दुनिया में जीना चाहती

2124
02:26:25,920 --> 02:26:30,080
है क्या रहित शिवांश रहित दुनिया में जीना चाहती है

2125
02:26:30,080 --> 02:26:34,160
शिवशित पता है इंटरनेट पे क्या होता है आपकी वजह से नहीं है कि आपको नहीं

2126
02:26:34,160 --> 02:26:38,640
देखना चाहती वो ये चाहती है कि आप ना देख पाए वो क्या कह रही है अब

2127
02:26:38,640 --> 02:26:42,720
हां जो इंटरनेट का मतलब यही है क्यों छुपा रही है?

2128
02:26:42,720 --> 02:26:46,800
नहीं मगर हां हां नहीं अपने आप को छुपा रही है और वो ये जानना नहीं

2129
02:26:46,800 --> 02:26:50,880
चाहती मैं क्या कह रहा हूं क्या नहीं कह रहा हूं तो एक आवाान रहित दुनिया में वो जीना अब

2130
02:26:50,880 --> 02:26:54,880
वो आवाहान रहित दुनिया में जीना क्यों है इसलिए जीना है कि मैं अपने आप को बता

2131
02:26:54,880 --> 02:26:55,380
पाऊं

2132
02:26:55,120 --> 02:26:59,120
मैं बहुत फन्ने खाऊं पीस मार खाऊं ये अपने आप को मैसेज देना

2133
02:26:59,120 --> 02:27:05,120
है अपने आप को अपनी स्वकल्पित दुनिया में बताना है जैसे अभी हमने

2134
02:27:05,280 --> 02:27:09,520
आनंदाभास नाम की एक चीज होती है ना कि आनंद

2135
02:27:09,520 --> 02:27:13,680
नहीं है वहां आनंदाभास को ही आनंद मान लिया और उसको ही मजे में अपना

2136
02:27:13,680 --> 02:27:17,760
हम सोचने लगे यही आनंद है यही परमानंद है और उसी को आनंदाभास

2137
02:27:17,760 --> 02:27:22,080
को ही आनंद आनंद समझ के भोग रहे हैं तो इसी प्रकार से अपनी मन

2138
02:27:22,080 --> 02:27:26,080
कल्पित एक एक ऐसा संसार जिसमें आहान है ही नहीं जिसमें शिवश

2139
02:27:26,080 --> 02:27:31,040
नारायण द्विवेदी है नहीं जिससे कि मैं वहां पर खुद को ये बता पाऊं कि मैं

2140
02:27:31,040 --> 02:27:35,280
हूं अभिजय अपरा अपराजिता मैं हूं

2141
02:27:35,280 --> 02:27:39,520
जिसको कोई हरा नहीं सकता तो ये जो इस बात का देवता

2142
02:27:39,520 --> 02:27:44,160
है आपका मुझे जो है वो करना जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए। फिर उसके बाद आज की वो

2143
02:27:44,160 --> 02:27:48,320
चलित करेंगे। बिल्कुल। और जब जब यह भगवत आनंद का आपने

2144
02:27:48,320 --> 02:27:52,320
खंडन किया था और जब आपकी वो चल रही थी वीडियो सीरीज

2145
02:27:52,320 --> 02:27:56,320
तब इन्हीं इसी चैनल ने भगवतानंद के जो

2146
02:27:56,320 --> 02:28:00,480
वीडियो की अपने उसमें कम्युनिटी पोस्ट में वीडियो लगाए थे समर्थन में

2147
02:28:00,480 --> 02:28:04,560
कि देखो देखो हम तो अब इस इस बात के लिए हम भगवत आनंद का समर्थन कर रहे हैं।

2148
02:28:04,560 --> 02:28:08,800
अब जैसे ही अवेकनिंग इंडिया से आपकी वो वार्ता हुई। अब वो

2149
02:28:08,800 --> 02:28:10,240
यह सारे उसको कांटेक्ट करने

2150
02:28:10,240 --> 02:28:14,240
में लग गए। अब इन्होंने लाइव स्ट्रीम भी रख दी उसके लेकर है ना

2151
02:28:14,240 --> 02:28:18,560
तो तो ये सब हो रहा है कि भ जहां पर भी इनको

2152
02:28:18,560 --> 02:28:22,880
लग रहा है कि इनको सहारा लेना है तो वहां पर ये

2153
02:28:22,880 --> 02:28:27,040
लोग सहारा ले रहे हैं। अब सोचो भगवत आनंद

2154
02:28:27,040 --> 02:28:31,040
आर्य समाज का खंडन कर रहा था। वो जो उसने जो सीरीज बनाई

2155
02:28:31,040 --> 02:28:35,120
थी उसमें आर्य समाज का और दयानंद सरस्वती जी को तो बहुत अभद्रबद्र बातें बोली थी भगवत

2156
02:28:35,120 --> 02:28:39,440
आनंद ने। अच्छा वो सारी बातें भूल गए थे तब तब क्या करना था? क्योंकि शिवश

2157
02:28:39,440 --> 02:28:43,600
जी से भगवत आनंद की वो चल रही थी डिबेट उस बीच में भगवत आनंद

2158
02:28:43,600 --> 02:28:47,600
को अपने उसमें वही तो कह रहा हूं जहां सिद्धांत नहीं है जिधर सिद्धांत नहीं है क्या

2159
02:28:47,600 --> 02:28:51,680
करेंगे और वो दूसरों का सहारा लेंगे तो यही होता आ रहा है यही होता रहेगा इनके

2160
02:28:51,680 --> 02:28:55,680
साथ तो कोई उम्मीद है नहीं मुझे वैसे भी इनसे कुछ करें नहीं करें अब इतनी सी

2161
02:28:55,680 --> 02:28:59,760
बात है कि मैं तो कहता हूं कि शिवश जी को लेके हम क्या करते हैं कुछ लोगों से

2162
02:28:59,760 --> 02:29:03,840
एक पुस्तक लिखवा देते हैं जहां पे शिवश जी को हम बहुत बड़ा दिखा देते हैं और इंटरनेट पर डाल देंगे

2163
02:29:03,840 --> 02:29:08,000
और वैज्ञानिक भारत जी तक उनकी लिंक पहुंचा देंगे कि अब देखिए इस इस पुस्तक में

2164
02:29:08,000 --> 02:29:12,000
शिवश जी के बारे में महा महात्मा में लिखा हुआ है कि शिवश जी बहुत बड़े आचार्य है तो आपको शिव

2165
02:29:12,000 --> 02:29:16,160
जी की बात माननी पड़ेगी तो इंटरनेट पे आए तो मान लेंगे क्या ये मैं तो ये जानना चाहता हूं इनसे

2166
02:29:16,160 --> 02:29:20,160
उस पर ऊपर लिखवा देना वेद वेद भी लिखवा देना

2167
02:29:20,160 --> 02:29:26,160
ऐसे लिखवा देंगे आवाहन कौरव धर्म वेद ऐसे अलग से लिखवा देंगे

2168
02:29:26,800 --> 02:29:31,200
मैं मैं वैसे मैं वैसे मैं वैसे ऐसा करूंगा अपने जीवन में

2169
02:29:31,200 --> 02:29:36,160
कि जैसे मैं रामपाल के पास खड़ा हूं अगर ज्ञान है मैं

2170
02:29:36,160 --> 02:29:40,240
नहीं मैं ऐसा करने वाला हूं हूं बहुत जल्द वो अचानक

2171
02:29:40,240 --> 02:29:44,400
से पता चलेगा। मैं उसको बोल भी दे रहा हूं। अनाउंसमेंट भी कर दे रहा हूं। बहुत जल्द किसी आर

2172
02:29:44,400 --> 02:29:48,400
समाजी के सामने खड़ा हुआ मैं एक नकली सत्यार्थ प्रकाश निकालूंगा। यह है

2173
02:29:48,400 --> 02:29:52,400
सत्यार्थ प्रकाश। अब तू बता भैया तेरी क्यों असली मेरी क्यों असली नहीं इसी

2174
02:29:52,400 --> 02:29:56,800
में भिड़ जाऊंगा और वो सिद्ध नहीं कर पाएगा कि मेरी क्योंकि उसकी अपरंपरा

2175
02:29:56,800 --> 02:30:00,960
नहीं है। रामपाल के सामने खड़ा हऊंगा। ये है ले तेरी

2176
02:30:00,960 --> 02:30:04,960
क्योंली मेरी कौसली नहीं। रामपाल जरा रामपाल अभी आज से 10 15

2177
02:30:04,960 --> 02:30:08,960
साल बाद आउट हो जाएंगे। ठीक है? तो रामपाल का लिखा हुआ जो ग्रंथ

2178
02:30:08,960 --> 02:30:13,040
होगा तब वो कहने के लिए भी खड़े नहीं होंगे। रामपाल कि मैं मैंने ही

2179
02:30:13,040 --> 02:30:17,040
यह लिखा है। अब मैं उसमें बताऊंगा ये लिखा है। भाई अब बता तू

2180
02:30:17,040 --> 02:30:21,360
क्यों माना जाए? क्यों ना माना? क्योंकि परंपरा को नहीं मानते। जो व्यक्ति परंपरा को नहीं मानेगा

2181
02:30:21,360 --> 02:30:25,440
उसके पास मेरी नकली सत्यार्थ प्रकाश का नकली ज्ञान गंगा

2182
02:30:25,440 --> 02:30:29,600
का या क्या कहते हैं? और जितने भी परंपरा को ना मानने

2183
02:30:29,600 --> 02:30:33,760
वाले सेक्ट्स हैं या जैसे ये जो अपनी ये हैं इनके ही द्वारा

2184
02:30:33,760 --> 02:30:38,480
ये किसी को भी बिलीव करती हूं वही इनके सामने ले पहुंचू ये बताओ ये नकली कैसे

2185
02:30:38,480 --> 02:30:41,920
तब इनकी आंखें खुलेंग ये परंपरा होती क्या है मूल में जाओ

2186
02:30:41,920 --> 02:30:46,240
भाई कैसे सिद्ध करोगे बिना इतिहास के मूल में जाओ सत्य नहीं हो सकते

2187
02:30:46,240 --> 02:30:50,320
मूल में जाओ जब जाकिर नायक चिल्लाएगा श्रता सूत्रपनिषद का यह अर्थ है तुम

2188
02:30:50,320 --> 02:30:54,720
उसको यह नहीं कह पाओगे नहीं ये अर्थ गलत है तुम उसको अपना पक्ष रख पाओगे

2189
02:30:54,720 --> 02:30:58,800
निरुत्तर नहीं कर पाओगे निरुत्तर करने के लिए तुमको उनको परंपरा के पास आना

2190
02:30:58,800 --> 02:31:03,200
पड़ेगा कि उसी का अर्थ माना जाएगा जिससे वेद आए हैं 13 नहीं

2191
02:31:03,200 --> 02:31:07,280
उस दिन के लिए सुरक्षित करके चलना पड़ेगा हमें परंपरा को जिस

2192
02:31:07,280 --> 02:31:11,280
दिन विधर्मी से लड़ाई होगी इसीलिए मैं ये सवाल पूछता हूं सबसे

2193
02:31:11,280 --> 02:31:15,360
यही सवाल इसीलिए पूछता हूं मुझे तैयारी मेरी विधर्मी से है तुम लोगों से जितना

2194
02:31:15,360 --> 02:31:19,440
मेरी तैयारी नहीं है मुझे वहां जितनातना है इसलिए अपने इस

2195
02:31:19,440 --> 02:31:23,440
हथियार को बचा के रखना होगा संभाल के रखना होगा और उस हथियार को मैं बचा

2196
02:31:23,440 --> 02:31:27,440
के रखे हुए हूं रखे रहूंगा क्योंकि अनादि हथियार हंसी

2197
02:31:27,440 --> 02:31:31,440
तो इस बात पे आती है कि भगवत आनंद भी इनके आगे अच्छा लगता है कभी कबार वो भी दो बार तर्क

2198
02:31:31,440 --> 02:31:35,600
की बात कर जाता है। शर्म की बात है ये बिल्कुल हमें मेरे को पता है मैं

2199
02:31:35,600 --> 02:31:39,920
देख रहा था विदेश गमन वाली बात भगवतानंद की वीडियो आएगी विदेश गमन भूल के ही मत करना

2200
02:31:39,920 --> 02:31:45,440
निगराचार्य इनसे अच्छी बात कैसे कर जा रहा है मैं तो ये सोच रहा था बैठ के

2201
02:31:45,440 --> 02:31:50,560
आपको निग्राचार्य नहीं भगवत आनंद हां भगवत आनंद

2202
02:31:50,560 --> 02:31:56,560
आपको एक बात निग्राचार्य केवल ईश्वर ही हो सकते हैं।

2203
02:31:57,600 --> 02:32:02,080
और यह जो विशुद्ध सत्यार्थ प्रकाश आ चुकी है। अब अच्छा विशुद्ध मनुस्मृति

2204
02:32:02,080 --> 02:32:06,400
डॉक्टर सुरेंद्र कुमार की पढ़ेंगे लेकिन विशुद्ध सत्यार्थ प्रकाश

2205
02:32:06,400 --> 02:32:10,480
नहीं सामने आने देंगे। क्यों? क्योंकि इनकी जो अभी की सत्यार्थ प्रकाश

2206
02:32:10,480 --> 02:32:14,800
है उससे उनसे विरोध हो रहा है। तो भैया ने

2207
02:32:14,800 --> 02:32:18,960
नया ट्रेंड चलाया कि बोरी की महाभारत पढ़ेंगे। बाकी महाभारत नकली है। बोरी

2208
02:32:18,960 --> 02:32:23,040
की महाभारत पढ़ेंगे। हां बाकी महाभारत नकली है। जो परंपरा प्राप्त आचार्यों से ज्ञान

2209
02:32:23,040 --> 02:32:27,280
आया वो नकली है और उसको ऑथेंटिकेट कौन कर रहे हैं? जो रिसर्च

2210
02:32:27,280 --> 02:32:31,440
कर रहे हैं जो आज के इतिहासकार बने हुए हैं वो रिसर्च करके जो बताएंगे वो

2211
02:32:31,440 --> 02:32:35,440
इनका वो सत्य है रिसर्च 5000 साल पहले

2212
02:32:35,440 --> 02:32:39,760
हमें मिल गया वो सत्य है। अब बोरी की पता है दिक्कत क्या है? बोरी ने जितनी मैनुस्क्रिप्ट

2213
02:32:39,760 --> 02:32:44,080
थी। अब इनको ये बात थोड़ी मालूम है रिसर्च कल्प भेद क्या है? अलग-अलग

2214
02:32:44,080 --> 02:32:48,320
जो टीके हैं वो क्या है? इन्होंने जितनी स्क्रिप्ट थी लोकथाएं वगैरह सब जोड़ के एक क्रिटिकल

2215
02:32:48,320 --> 02:32:52,560
एडिशन निकाल दिया। रामायण भी कितने प्रकार की है? अलग-अलग

2216
02:32:52,560 --> 02:32:56,960
प्रकार की रामायण है। अद्भुत अद्भुत है, आध्यात्म है, वाल्मीकि है, रामचरितमानस

2217
02:32:56,960 --> 02:33:00,960
है। अब ऐसा थोड़ी होगा कि आज से कुछ 100 साल बाद मैं चारों पांचों मैनुस्क्रिप्ट उठाऊंगा। एक

2218
02:33:00,960 --> 02:33:05,120
नई रामायण क्रिटिकल एडिशन निकाल दूंगा। अच्छा ये ये एक ऐसी बात है

2219
02:33:05,120 --> 02:33:09,280
कि जैसे सामने वाले से अगर सामने वाले को परेशान

2220
02:33:09,280 --> 02:33:13,360
करना है तो अपना कोई भी सिद्धांत मत बताओ।

2221
02:33:13,360 --> 02:33:17,520
सिद्धांत बताओ। मतलब अपनी लाइन मत खींचो क्योंकि लाइन खींच दोगे तुम्हें वहां बाउंड होना

2222
02:33:17,520 --> 02:33:21,680
पड़ेगा। तो एक जैसे कमेंट आता है ना बहुत सही कमेंट है ये कि भाई

2223
02:33:21,680 --> 02:33:25,680
हमारा एक ही सिद्धांत है। हमारा कोई सिद्धांत नहीं है। इसलिए तुम हमें तो

2224
02:33:25,680 --> 02:33:29,840
बाउंड कर नहीं पाओगे। हमें तो बाउंड कर नहीं पाओगे तुम।

2225
02:33:29,840 --> 02:33:34,000
तो खैर बहुत अच्छी चर्चा रही। बहुत बढ़िया रहा। और अगर अनिकेत जी आप

2226
02:33:34,000 --> 02:33:38,560
कुछ बोलेंगे तो आप बोले और फिर क्रमश शास्त्रवाद

2227
02:33:38,560 --> 02:33:42,720
जी आप ले ले और उसके बाद फिर हम इसको लाइव को पूरा करेंगे।

2228
02:33:42,720 --> 02:33:46,560
जी

2229
02:33:46,560 --> 02:33:52,560
जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय श्री राम जी

2230
02:33:53,280 --> 02:33:58,480
तो मैं तो यही कहना चाहूंगा कि देखिए

2231
02:33:58,480 --> 02:34:03,280
पूर्व में देखा गया है इतिहास है कि असत्य

2232
02:34:03,280 --> 02:34:07,760
असत्य के साथ जाकर के दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। जब उसको

2233
02:34:07,760 --> 02:34:12,320
मिलकर दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है वाले फिलोसोफी में जाता है तो उसका कैसे

2234
02:34:12,320 --> 02:34:16,400
अंत हुआ है आपस में लड़मड़ के विनाश हुआ है यह भी दिखा

2235
02:34:16,400 --> 02:34:20,400
है तो ये फिलॉसफी दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है

2236
02:34:20,400 --> 02:34:24,800
इसका कोई लॉजिक नहीं है पहला दूसरी चीज है कि

2237
02:34:24,800 --> 02:34:28,960
धर्म की बात करना धर्म के अपोजिट अधर्म ही होता है

2238
02:34:28,960 --> 02:34:33,440
तो अगर हम रामायण में देखें तो रावण किस तरह की शब्दावली

2239
02:34:33,440 --> 02:34:37,840
भगवान रामचंद्र जी पर बोलता ता था और भगवान

2240
02:34:37,840 --> 02:34:42,560
रामचंद्र जी ने उसका प्रति उत्तर कभी भी अभद्रता से नहीं दिया।

2241
02:34:42,560 --> 02:34:46,640
इसीलिए जो धर्म पर रहता है ना वह कभी भी अभद्रता से

2242
02:34:46,640 --> 02:34:51,120
कभी भी रिप्लाई नहीं देता है। क्यों? क्योंकि वो धर्म पर है जिसका प्रमाण रामचंद्र

2243
02:34:51,120 --> 02:34:55,200
जी भी है। अभद्रता वही दिखाता है जो राक्षस प्रवृत्ति का

2244
02:34:55,200 --> 02:34:59,280
होता है और जो जिसको जिसने

2245
02:34:59,280 --> 02:35:01,600
ज्यादातर धर्म में भी अधर्म ढूंढने का

2246
02:35:01,600 --> 02:35:05,760
प्रयास किया है। तो हालांकि जो जिस

2247
02:35:05,760 --> 02:35:09,840
तरह से पिछली बार बात किया था वो जो माता जी आई थी शिवानी भैया

2248
02:35:09,840 --> 02:35:13,840
के साथ में मक्कारी और इत्यादि जो शब्द उन्होंने यूज़ किया

2249
02:35:13,840 --> 02:35:17,920
था। मैं तो सराहना करूंगा शिवा भैया का कि

2250
02:35:17,920 --> 02:35:22,240
बहुत बढ़िया करते हैं कि वहां से हट जाते हैं। ठीक है? क्योंकि

2251
02:35:22,240 --> 02:35:26,240
जहां भी मैंने देखा है रामायण पढ़ा भी है तो उसमें

2252
02:35:26,240 --> 02:35:30,240
रामचंद्र जी ने भी यही किया है। मर्यादा नहीं तोड़ी है और सिखाया

2253
02:35:30,240 --> 02:35:34,240
भी यही है। तो मोटा-मोटा यही बोलूंगा कि धर्म जो है

2254
02:35:34,240 --> 02:35:40,240
वो यही है कि अभद्रता नहीं सिखाता। किसी भी हाल में मर्यादा नहीं ढूंढनी चाहिए।

2255
02:35:41,520 --> 02:35:45,600
अच्छा अभी अच्छी चीज याद आ गई जय श्री राम एक अच्छी चीज आपकी

2256
02:35:45,600 --> 02:35:50,160
वैसे याद आ गई वो कहती है वो एक शब्द यूज़ करती हैं कुछ

2257
02:35:50,160 --> 02:35:54,160
पटने अटने इत्यादि को लेकर के ये शब्द जो है अश्लील नहीं है

2258
02:35:54,160 --> 02:35:58,240
ये कहती है इसका मतलब डरपोक होता है

2259
02:35:58,240 --> 02:36:02,400
जबकि ये अपने आप में एक अश्लील शब्द है हां अपने आप

2260
02:36:02,400 --> 02:36:06,880
में अश्लील शब्द है आप इसका जो प्रयोग कर रहे हैं इसका जो सर्वविदित

2261
02:36:06,880 --> 02:36:11,040
जो व्याख्या है वो कुछ और है अश्लीलता है उसमें और दूसरी बात

2262
02:36:11,040 --> 02:36:15,200
यदि ऐसा है तो आप इसको दिखाइए कहां पर जो है प्रमाणिक

2263
02:36:15,200 --> 02:36:19,360
रूप से अब जैसे कोई जो शब्द है वो प्रचलित

2264
02:36:19,360 --> 02:36:23,360
हो गया और प्रचलित होने के कारण किसी ने उसको अपनी बुक में छाप भी दिया कि लो भाई

2265
02:36:23,360 --> 02:36:27,520
डरपोक कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि वो प्रामाणिक

2266
02:36:27,520 --> 02:36:32,000
लोगों के द्वारा स्वीकार्य शब्द हो गया डरपोक के लिए। वो अपने आप में एक अश्लील

2267
02:36:32,000 --> 02:36:36,080
और लीचड़ है ना जो चिचले लोग होते हैं ना

2268
02:36:36,080 --> 02:36:40,480
टपोरी टाइप के उनके द्वारा उठाया गया शब्द है कि डरपोक के लिए ये शब्द उठा लो

2269
02:36:40,480 --> 02:36:44,480
ठीक है तो आप उसको जस्टिफाई कर रहे हैं कि उनको जो है शब्द का मतलब भी

2270
02:36:44,480 --> 02:36:48,480
गलत आता है ये है वो है तो उसको जस्टिफाई आप नहीं कर पाएंगी उस पे भी जब बात

2271
02:36:48,480 --> 02:36:52,720
होगी तो खत्म हो जाएगा मामला इसको कहते हैं सिद्ध क्लियर बातें

2272
02:36:52,720 --> 02:36:56,640
होती है हमारी बातें बदलती नहीं है ये हम ये सब

2273
02:36:56,640 --> 02:37:00,640
नहीं होता हमारा सीधी बात नो बकवास स्प्रेड नहीं पीते मगर

2274
02:37:00,640 --> 02:37:04,720
यही है जी शास्त्रवाद जी

2275
02:37:04,720 --> 02:37:09,360
एक चीज एक चीज खाली छोटी सी बोलना एक छोटी सी

2276
02:37:09,360 --> 02:37:13,440
कि भविष्य में हो सकता है कि

2277
02:37:13,440 --> 02:37:18,160
हमें यह भी देखने मिल जाए कि फलाने किसी ने

2278
02:37:18,160 --> 02:37:22,160
परंपरागत किसी व्यक्ति को शास्त्रार्थ में अंत में

2279
02:37:22,160 --> 02:37:28,000
हराया कैसे फट रहे फूट रहे निकल रहे इन शब्दों से

2280
02:37:28,000 --> 02:37:32,000
हां अच्छा कुछ लोग मुझसे इतना सब होने के बाद भी कह रहे हैं कि तुम वहां से

2281
02:37:32,000 --> 02:37:36,160
आए क्यों भाई तो क्या करूं वहां पे और स्तर उनका बढ़ने दूं फिर

2282
02:37:36,160 --> 02:37:40,160
वो जब ये सोच ले इसने मेरा मक्कार शब्द सुन लिया तो अब ये भी सुन लेगा और

2283
02:37:40,160 --> 02:37:44,240
मेरे से कहा ना जाए कुछ मैं सुन के चला हूं फिर या तो अगले दिन मैं वो सब करूं

2284
02:37:44,240 --> 02:37:48,560
भैया रिपोर्ट लिखा ये करो वो जो भी प्रतिकार कर सकते हो अपनी सीमा में सामर्थ्य की

2285
02:37:48,560 --> 02:37:52,720
तो ये तो ये बात आ गई ठीक है मक्कारी

2286
02:37:52,720 --> 02:37:58,720
वाली फिर वो मक्कारी वाली बात को फिर सब लोग ब्रह्मास्त्र मान ले

2287
02:37:59,120 --> 02:38:04,240
कहीं डिबेट या फिर डिस्कशन जितना है तो मक्कारी बोल दो हम जीत जाएंगे।

2288
02:38:04,240 --> 02:38:08,320
अपनी गलती नहीं जी एक और एक और तरीका है। एक और तरीका है। एक

2289
02:38:08,320 --> 02:38:11,760
और तरीका है जैसे वो कि आपको पंचाव आता है। एक और

2290
02:38:11,760 --> 02:38:15,760
तरीका है कि आपने अष्टाध्याय पढ़ी है कि नहीं पढ़ी है? ये भी है तरीका।

2291
02:38:15,760 --> 02:38:19,920
ठीक है? आए थे सर्वशक्तिमान प्राप्त करने ईश्वर को। फिर

2292
02:38:19,920 --> 02:38:24,000
व्याकरण का ज्ञान लेने लगे। तुमको है कि नहीं या न्याय का ज्ञान तुमको है कि नहीं? ये

2293
02:38:24,000 --> 02:38:28,000
सब होने लगा या फिर तुमने मैथमेटिक्स पढ़ी अच्छा तुम्हारे गुरुदेव ने

2294
02:38:28,000 --> 02:38:32,080
तुम्हारे बीच में मैथमेटिक्स भी आई थी एक जगह मैं मैथमेटिक्स भी आई

2295
02:38:32,080 --> 02:38:36,160
थी बीच में एक जगह हालांकि बाद में

2296
02:38:36,160 --> 02:38:40,240
हालांकि बाद में हालांकि बाद में निर्भय ने दूसरा

2297
02:38:40,240 --> 02:38:44,240
अपना चीज बताई कि मैं एक पर्सपेक्टिव लेके आया था वो बोला था मुझको निर्भय ने

2298
02:38:44,240 --> 02:38:48,240
हुआ क्या भैया मेरी आदत पड़ गई है क्योंकि इतने वो इस्लाम वालों

2299
02:38:48,240 --> 02:38:52,240
से और इतना ज्यादा तो एक पहले से ही एक बना के जाता हूं तो मैं आपके

2300
02:38:52,240 --> 02:38:56,240
पास भी वही लेके आया आपकी उस चीज को देख नहीं पाया कि आप न्यूट्रल थे मुझे लेकर के उसने ये सब

2301
02:38:56,240 --> 02:39:00,320
बताया मुझे तो ठीक है शास्त्रवाद जी आप कुछ बोले नहीं तो

2302
02:39:00,320 --> 02:39:04,480
फिर हम इसका समापन करते हैं आज की चर्चा का मुझे लगता है काफी कुछ जानने

2303
02:39:04,480 --> 02:39:08,480
सीखने को मिला हो लोगों को जी जी बस

2304
02:39:08,480 --> 02:39:12,640
यही था कि उसने तो अपने आप को से जोड़ लिया परंपरा से

2305
02:39:12,640 --> 02:39:17,200
फीमेल करके उनको ज्ञान मिला था उसको कुछ बोल दीजिए

2306
02:39:17,200 --> 02:39:21,920
फीमेल करके तो ज्ञान आया शिव जी का उनको

2307
02:39:21,920 --> 02:39:26,240
ये सब बकवास बातें होती है जो अकारण

2308
02:39:26,240 --> 02:39:26,880
बोली जाती

2309
02:39:26,880 --> 02:39:31,120
है सही नहीं है और गुरु परंपरा तो बहुत आवश्यक है ही

2310
02:39:31,120 --> 02:39:35,760
ज्ञान के लिए सभी जानते हैं और एक और बात भैया जब आप अवतारवाद

2311
02:39:35,760 --> 02:39:39,840
पे आर्य समाज के विषय में बोल रहे थे कि एक

2312
02:39:39,840 --> 02:39:44,320
होने का जो सिद्धांत था

2313
02:39:44,320 --> 02:39:49,840
आवाज नहीं आ रही आपकी शास्त्रवाद जी

2314
02:39:49,840 --> 02:39:54,000
हां भैया तो वही जो एक ऋषि की जो बोलते हैं ना तो मैं

2315
02:39:54,000 --> 02:39:58,800
पूछता हूं गीता में भगवान ने कहा है कि जो ईश्वर है वो सभी

2316
02:39:58,800 --> 02:40:02,960
प्राणियों के हृदय में निवास करता है। ठीक है? अब बताइए जो सभी

2317
02:40:02,960 --> 02:40:07,360
प्राणियों के हृदय में निवास करता है वो एक देसी नहीं हो गया क्या उस स्थिति में?

2318
02:40:07,360 --> 02:40:11,440
यदि वो एक देसी होते हुए भी सर्वजाती है तो फिर उसका सर्वजता

2319
02:40:11,440 --> 02:40:15,600
नष्ट नहीं होता है तो फिर अवतार लेने का कैसे नष्ट हो जाएगा सर्वजाती

2320
02:40:15,600 --> 02:40:19,680
का? अरे वो आर्य समाजियों में भी अभी

2321
02:40:19,680 --> 02:40:23,840
आपकी गीता को तो मना कर भी सकते हैं। मैं आर्य समाज की बात बता दूं कि

2322
02:40:23,840 --> 02:40:28,000
वो जो अमुक अमुक ऋषियों के अंतकरण में उन्होंने जो हृदय में वो बात

2323
02:40:28,000 --> 02:40:32,000
डाली तो वो एकदेशी होके ही तो डाली। कैसे डाल दी?

2324
02:40:32,000 --> 02:40:36,160
अरे भाई कहीं पे अगर कुछ भी क्रिया की है ना ईश्वर ने एकदशी होके

2325
02:40:36,160 --> 02:40:40,480
ही की है। समझ लो पहले इसको जाकर ये सिद्धांत पढ़ लो अपना जाके। खैर

2326
02:40:40,480 --> 02:40:42,000
ठीक है। बहुत

2327
02:40:42,000 --> 02:40:46,080
बढ़िया चर्चा हुई। काफी कुछ जानने वाला। कभी-कभी बीच-बीच में ऐसी चर्चा हो जानी

2328
02:40:46,080 --> 02:40:50,240
चाहिए। भाई हमेशा मुझे वॉर का वॉर का ही एक्सपीरियंस लगा रहता है। तो

2329
02:40:50,240 --> 02:40:54,960
मैं अपना पर्सनल जो मेरा वो है ना वो बहुत होता है। क्या कहते हैं क्योंकि

2330
02:40:54,960 --> 02:40:59,920
हमेशा वो वॉर जैसी फीलिंग्स ही आती है। तो ऐसी हेल्दी डिस्कशन भी हो जानी चाहिए।

2331
02:40:59,920 --> 02:41:03,920
और अंत में मैं वही कहूंगा कि क्या नाम है

2332
02:41:03,920 --> 02:41:08,320
उनका? मैं तो नाम भूल गया। सोनाली जी अवेकनिंग भारती भारत जी

2333
02:41:08,320 --> 02:41:12,800
कि आप नास्तिकता का खंडन करते हुए

2334
02:41:12,800 --> 02:41:17,040
ईश्वर की सिद्धि करते हुए मोक्ष की सिद्धि करते

2335
02:41:17,040 --> 02:41:21,120
हुए और शाश्वत धर्म की सिद्धि करते हुए पूरा जगत ढूंढ

2336
02:41:21,120 --> 02:41:25,280
लेना अंत में जब कोई ना मिले ना तो शंकर संप्रदाय

2337
02:41:25,280 --> 02:41:29,360
के द्वारे पे आ जाना मिल जाएगा इन सब तात्विक विवेचनाओं

2338
02:41:29,360 --> 02:41:33,360
में जाइए ठीक है ठीक जय

2339
02:41:33,360 --> 02:41:37,680
हो और किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त हमारा

2340
02:41:37,680 --> 02:41:40,400
नंबर 7408301869

2341
02:41:40,400 --> 02:41:44,400
है। आप उस वहां पर WhatsApp करके फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं

2342
02:41:44,400 --> 02:41:48,560
और अपनी चीजों को हमें बता सकते हैं कि आपको इस विषय के निमित वैचारिक चर्चा

2343
02:41:48,560 --> 02:41:52,960
करनी है। केवल WhatsApp करिए। कॉल वगैरह मत किया करिए। खामखा का

2344
02:41:52,960 --> 02:41:56,960
वो होता है टाइम वेस्ट। ठीक है। सभी को जय श्री राम। जुड़ने के लिए आप सबका बहुत-बहुत

2345
02:41:56,960 --> 02:41:57,680
आभार।

2346
02:41:57,680 --> 02:42:02,080
आपका भी धन्यवाद रहेगा। आपने बुलाया लाइव पे तो नहीं।

2347
02:42:02,080 --> 02:42:06,080
अच्छा एक बात मैं आपको कहूंगा। कि मुझे ऐसी सूचनाएं

2348
02:42:06,080 --> 02:42:12,080
प्राप्त हुई कि आपके चैनल पर भी कुछ ऐसी सामग्री है कुछ

2349
02:42:12,400 --> 02:42:16,560
वर्तनी इत्यादि को लेकर के तो अगर उसको हटा सकते हैं तो हटा दीजिए

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और आगे बढ़िए धर्म के पथ पे आगे बढ़िए दो साल तीन साल पहले जब

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मेरे को भ्रांतियां थी तब मैंने जरूर डाली थी अब अकाउंट मेरे हाथ में भी नहीं है कम

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से कम कम से कम हमारी कम से कम हमारी वर्तनी ऐसी हो जो

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आदर्श बन सके किसी के लिए तो उस ओर जाइए और हम सब भी आपका

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साथ आपके के साथ है। अपने को अकेला ना समझे और इस अगर ऐसी

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कोई त्रुटि है तो उसको सुधार लीजिए। सब में होती है त्रुटि मेरे में भी थी। तो

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अगर ऐसा कुछ है ऊपर नीचे तो उसको सुधार के आगे बढ़िए धर्म के पथ पर। आप

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आप अच्छा लगा आप आए। इतना समय यहां पे दिया आपने। जय श्री राम

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सभी को। जय श्री राम। जय श्री राम।

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जय श्री राम। जय श्री राम।
