1
00:00:00,160 --> 00:00:04,160
करना है। किस कौन सा मेन मैटर है जिस चीज पे हम आज

2
00:00:04,160 --> 00:00:06,320
डिस्कस करने जा रहे हैं।

3
00:00:06,320 --> 00:00:10,640
जी मैं थोड़ी सी मैं अपनी जानकारी में बता दूं मेन मैटर मेरे जानकारी

4
00:00:10,640 --> 00:00:14,960
में क्या है? जी जी बिल्कुल बिल्कुल मेरी जानकारी

5
00:00:14,960 --> 00:00:19,200
में मेन मैटर ये है कि अभी

6
00:00:19,200 --> 00:00:23,360
मुक्तेश्वरनंद जी महाराज है जो उनकी कोई बात आपको ऐसी लगी

7
00:00:23,360 --> 00:00:27,520
जो कि धर्म के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है आपको। है ना? तो आपने

8
00:00:27,520 --> 00:00:31,520
वहां पर एक कोई वीडियो बनाया और आप मैंने अभी देखा नहीं

9
00:00:31,520 --> 00:00:35,760
है वो पहला वीडियो आपने कैसे बनाया पर आपका यह कहना है कि वो

10
00:00:35,760 --> 00:00:39,920
मर्यादा में रह के आपने बनाया है ना उसके बाद

11
00:00:39,920 --> 00:00:44,240
उनका फेवर करने वाला जो पक्ष है उन्होंने आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष

12
00:00:44,240 --> 00:00:48,720
इत्यादि शुरू किए और रिप्लाई में रेप्लिकेशन में आपने भी

13
00:00:48,720 --> 00:00:52,880
ऐसा नहीं है कि बियों्ड द बिल्कुल वो चले गए मगर मतलब आपने भी फिर उनको उन्हीं

14
00:00:52,880 --> 00:00:57,200
की भाषा में समझाया और उसमें आपने भी जो मुक्तेश्वर

15
00:00:57,200 --> 00:01:01,440
जी महाराज उनके लिए भी आपने चीजें कुछ बोली है ना व्यक्तिगत

16
00:01:01,440 --> 00:01:05,760
कटाक्ष उन पर भी कर दिए अच्छा दूसरी बात मेरी जो जानकारी में है इसी बीच

17
00:01:05,760 --> 00:01:09,760
उन्होंने क्या किया कि आपका पक्ष

18
00:01:09,760 --> 00:01:13,920
आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के लिए उन्होंने कुछ शास्त्रों का सहारा लेने

19
00:01:13,920 --> 00:01:17,920
का प्रयास किया और उसमें शास्त्रों का सहारा लेने का प्रयास किया और

20
00:01:17,920 --> 00:01:21,360
उसमें सहारा लेने का जो प्रयास किया था वो जो अभी तक मुझे

21
00:01:21,360 --> 00:01:25,600
मूल रूप से पता है वो आपका जो विदेश गमन है विदेश में आप रह रहे हो उसको आधार

22
00:01:25,600 --> 00:01:29,840
बनाते हुए उन्होंने आपको शास्त्र के विरुद्ध घोषित करते हुए आपका

23
00:01:29,840 --> 00:01:34,000
जो है आपके बारे में अनापशनाप जो है बोलने का उन्होंने आधार

24
00:01:34,000 --> 00:01:38,000
बनाया। अब इस पर क्या हुआ कि दो चीजें हैं।

25
00:01:38,000 --> 00:01:42,320
एक तो आपने जो अभिक्तेश्वर जी पर इनके

26
00:01:42,320 --> 00:01:46,480
करने से जो पर्सनल अटैक आपने किया उनके ऊपर वो हमारे और आपके बीच

27
00:01:46,480 --> 00:01:50,640
का डिस्कशन है पर वो सेकेंडरी है। वो सेकेंडरी नहीं उस उस मैडम विदेश

28
00:01:50,640 --> 00:01:54,720
गमन के बाद मैंने शंकरा अभी मुक्तेश्वरानंद जी पे कोई टिप्पणी नहीं किया। मैंने

29
00:01:54,720 --> 00:01:58,880
पर्सनली उस शिष्य पे नहीं मैं मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं

30
00:01:58,880 --> 00:02:03,200
कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। जो जो वो है वो मैं नहीं कह रहा हूं।

31
00:02:03,200 --> 00:02:07,200
अब क्या है कि जो उन्होंने क्या किया कि आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष

32
00:02:07,200 --> 00:02:11,600
करने के चक्कर में वो एक ऐसी अप्रासंगिक चीजें कहेंगे कि विदेश गमन

33
00:02:11,600 --> 00:02:16,160
को ला के आपसे बात करने का कोई आधार नहीं था वहां पर। पर वो लाए।

34
00:02:16,160 --> 00:02:20,160
अब जब लाए तो वह एक बात अलग है कि वह अप्रासंगिक है कि

35
00:02:20,160 --> 00:02:24,240
नहीं है। मगर वह जो सिद्धांत है कि विदेश गमन वाला जो सिद्धांत

36
00:02:24,240 --> 00:02:28,400
है कि विदेश गमन के बारे में शंकराचार्य परंपरा का क्या कहना है। पर

37
00:02:28,400 --> 00:02:32,800
आपने वहां पर यह प्रस्तुत किया कि नहीं विदेश गमन के बारे में जो बताया

38
00:02:32,800 --> 00:02:36,400
जा रहा है वो गलत बताया जा रहा है। ऐसा नहीं है। विदेश गमन की यात्रा का कोई निषेध

39
00:02:36,400 --> 00:02:40,560
नहीं है। ऐसा आपने प्रस्तुत किया। है ना? तो मेरा एक पक्ष

40
00:02:40,560 --> 00:02:44,960
यह है कि जो हमारा परंपरा का और जितने भी

41
00:02:44,960 --> 00:02:49,040
प्रामाणिक आचार्य हैं परंपरा प्राप्त चाहे वो रामानुजाचार्य हो चाहे वो शंकराचार्य हो चाहे

42
00:02:49,040 --> 00:02:53,040
वो मधवाचार्य जी हो वो कोई भी अगर परंपरा प्राप्त आचार्य है तो वो विदेश

43
00:02:53,040 --> 00:02:57,360
गमन की यात्रा का वो निषेध माना है सभी ने अच्छा एक मत

44
00:02:57,360 --> 00:03:01,920
तो अब मेरा एक तो पक्ष ये है कि मैं ये जो विदेश गमन वाली बात है

45
00:03:01,920 --> 00:03:05,920
इस पर बात करूं और इसमें भी एक

46
00:03:05,920 --> 00:03:10,240
जो मैंने कहा कि शंकराचार्य परंपरा प्राप्त आचार्यों का विरोध करने वाला

47
00:03:10,240 --> 00:03:14,240
स्वयं को सनातनी कैसे कहेगा वह भी एक बात आ जाती है यहीं से निकल

48
00:03:14,240 --> 00:03:18,240
कर के और तीसरी बात यह आ जाती है कि जब यह चीजें हो जाती है तो इस क्रम

49
00:03:18,240 --> 00:03:22,320
में फिर आगे आपका उनका आप पर वो तो मैं दोषी मान ही रहा हूं कि उन्होंने

50
00:03:22,320 --> 00:03:26,320
जो है आपके व्यक्तिगत उस पर जाकर के वो किया फिर आपका जो

51
00:03:26,320 --> 00:03:30,640
है इसके जवाब में आपका जाना मुक्तेश्वर

52
00:03:30,640 --> 00:03:34,720
जी पर व्यक्तिगत ये सब चीजों पे फिर ये थर्ड हमारा आप साबित करिए

53
00:03:34,720 --> 00:03:39,040
कि मैं व्यक्तिगत तौर पे मुक्तेश्वरानंद जी पे मेरे मेरे विदेश गमन

54
00:03:39,040 --> 00:03:43,280
को लेकर गई हूं। मैंने अभी मुक्तेश्वरंद जी का उस वीडियो विदेश गमन को लेकर नहीं

55
00:03:43,280 --> 00:03:47,520
विदेश गमन को लेकर नहीं मैं कह रहा हूं कि जब आपने कोई भी विरोध

56
00:03:47,520 --> 00:03:51,920
किया उनका तो उन्होंने आपका आपके आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष

57
00:03:51,920 --> 00:03:56,000
प्रश्न पूछना विरोध नहीं होता। पहली बात आप भी इस बात को मानते होंगे। मैं

58
00:03:56,000 --> 00:04:00,000
मानता हूं। ये हमारा तीसरा पक्ष है कि आपने प्रश्न पूछा है विरोध किया वो हम उस समय

59
00:04:00,000 --> 00:04:04,080
डिस्कस कर लेंगे। ठीक है? अब भी है तो वो मेरा व्यक्तिगत

60
00:04:04,080 --> 00:04:08,160
प्रश्न नहीं है। वो इस वजह से है कि मुझे उनकी

61
00:04:08,160 --> 00:04:12,640
कोई बात ऐसी बुरी लगी। ठीक है। ठीक। वो ठीक है। अब क्या है?

62
00:04:12,640 --> 00:04:16,800
आपको पता है मैंने आपको डिटेल दिया हुआ है। कौन-कौन सी बात बुरी लगी उसको मैं अभी स्क्रीन पे

63
00:04:16,800 --> 00:04:20,960
दिखाकर भी प्रमाणित कर सकती हूं। वो हमारा सेकेंडरी टॉपिक

64
00:04:20,960 --> 00:04:24,960
है। मेन मेरा आने की वजह है। नहीं नहीं वही हमारा प्राइमरी है। शिवश जी आई एम

65
00:04:24,960 --> 00:04:28,960
सॉरी टू से। वही हमारा प्राइमरी है। मेरी आने की मूल वजह मैं

66
00:04:28,960 --> 00:04:33,520
जो बता रहा हूं वो एक बार मुझे कह लेने दीजिए। मेरे आने की मूल वजह है कि उन्होंने

67
00:04:33,520 --> 00:04:37,760
आप अप्रासंगिक था। यहां पर कहने की कोई आवश्यकता नहीं थी कि भाई आप विदेश

68
00:04:37,760 --> 00:04:42,240
आप प्रश्न पूछ रही हो उनको आपको प्रश्न का उत्तर देना है। मगर उन्होंने अप्रासंगिक

69
00:04:42,240 --> 00:04:46,720
चीज को लाए तो सही मगर वहां पर क्या हो रहा है कि जब आप विदेश गमन का पक्ष

70
00:04:46,720 --> 00:04:50,720
ले रही हैं तो जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हैं उनके द्वारा निर्गत उनके

71
00:04:50,720 --> 00:04:54,800
द्वारा स्वीकार्य जो सिद्धांत है उनका विरोध हो रहा है। तो इसलिए मैं

72
00:04:54,800 --> 00:04:58,880
फिर प्रामाणिक आचार्यों की ओर से फिर मैं वहां पर मुझे सामने आना

73
00:04:58,880 --> 00:05:02,880
पड़ा है कि नहीं सिद्धांतिक विरोध मत करिए। जो व्यक्ति जिस व्यक्ति का पर्सनल

74
00:05:02,880 --> 00:05:07,040
आपका विरोध है वो करिए। तो सिद्धांतिक पक्ष को सिद्धांतिक विरोध किस चीज का है

75
00:05:07,040 --> 00:05:11,040
मैं बताती हूं। सिद्धांतिक विरोध जो है वो इस चीज का है

76
00:05:11,040 --> 00:05:15,120
कि जो उन्होंने रेफरेंस दिया था अगर तो वो मुझे सही रेफरेंस देते।

77
00:05:15,120 --> 00:05:19,360
देखिए आपको मेरी बात उस चीज पर माननी पड़ेगी कि एक उन्होंने रेफरेंस

78
00:05:19,360 --> 00:05:23,360
दिया था फॉर एग्जांपल मनुस्मृति 3.148 ठीक है? मैंने

79
00:05:23,360 --> 00:05:27,600
उसको वेरीफाई किया। वहां पे वो चीज नहीं लिखा होता। सिमिलर सिमिलर श्लोक

80
00:05:27,600 --> 00:05:31,600
मुझे मिला 1.58 3.158 [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] में जिसको

81
00:05:31,600 --> 00:05:35,680
कि मैंने अपने वीडियो में भी एक्सप्लेन किया है। बट इट वास नॉट लाइक कि सिर्फ

82
00:05:35,680 --> 00:05:39,680
समुद्र यात्रा करने से कोई अपवित्र हो जाता है। उसमें जो मेधा तिथि

83
00:05:39,680 --> 00:05:43,920
का जो कमेंट्री है आप आई डोंट नो आप लोग मानते हो कि नहीं मानते हो। मेधा तिथि

84
00:05:43,920 --> 00:05:48,400
मेधा तिथि हमारे यहां की प्रामाणिक कमेंट्री है। हां तो मेधा

85
00:05:48,400 --> 00:05:52,400
की कमेंट्री को मैंने दिखाया जिसको ये लोग विकपीडिया कह रहे हैं पर वो विकपीडिया नहीं

86
00:05:52,400 --> 00:05:56,480
है। हां मेधा तिथि की जो कमेंट्री है वो इंग्लिश और वो भी [गला साफ़ करने की आवाज़]

87
00:05:56,480 --> 00:06:00,560
कोनियल इंग्लिश है जो कि लोगों को समझने में प्रॉब्लम होती है। उसके लिए

88
00:06:00,560 --> 00:06:04,800
मैंने जरूर हिंदी में ट्रांसलेट करके उसको अच्छे से हिंदी में शब्दा

89
00:06:04,800 --> 00:06:08,800
शब्द बाय शब्द ट्रांसलेट करके उसको नीचे लिखा है। तो अब पता नहीं शायद उसको

90
00:06:08,800 --> 00:06:13,120
वो विकपीडिया कह रहे हैं या किस चीज को विकपीडिया कह रहे हैं। आई रियली डोंट नो। लेकिन मैंने मेधा

91
00:06:13,120 --> 00:06:17,200
तिथि का क्योंकि मुझे पहले ही पता था कि आप आप लोग

92
00:06:17,200 --> 00:06:21,200
आर्य समाज वाले विशुद्ध मनुस्मृति को नहीं मानते हो तो मैंने सोचा कि

93
00:06:21,200 --> 00:06:22,160
जो मानते हो चलो मैं

94
00:06:22,160 --> 00:06:26,240
उसी से प्रमाण दिखाती हूं। उसमें मेधाथि ने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया है कि

95
00:06:26,240 --> 00:06:30,400
वो किसके लिए ऐसे धर्म का निषेध है। विदेश यात्रा

96
00:06:30,400 --> 00:06:34,400
की बात तो उसमें है ही नहीं। समुद्र पार करने का है। कुल मिला के आपको कुल मिला के

97
00:06:34,400 --> 00:06:38,480
आपको शास्त्रों से रेफरेंस चाहिए तो आप मानेंगे कि वो क्या

98
00:06:38,480 --> 00:06:42,560
कहते हैं? नहीं मुझे शास्त्रों से भी रेफरेंस नहीं चाहिए। शास्त्रों से भी रेफरेंस नहीं चाहिए।

99
00:06:42,560 --> 00:06:46,560
मुझे शास्त्रों से ऐसा रेफरेंस भी है। वेदों के अनुसार मैंने अपने

100
00:06:46,560 --> 00:06:50,560
वीडियो में शास्त्रों के अनुसार भी ऐसा रेफरेंस दिया है जो कि

101
00:06:50,560 --> 00:06:54,800
आप भले नहीं माने लेकिन मुझे नहीं लगता कि वेद कभी प्रकृति

102
00:06:54,800 --> 00:06:58,960
विरुद्ध हो सकते हैं। और दूसरा चीज अगर आप शास्त्र से इस बात को प्रमाणित करेंगे

103
00:06:58,960 --> 00:07:03,440
तो फिर आपको मेरी उस बात को भी प्रमाणित करना पड़ेगा कि जब आपके विदेशों

104
00:07:03,440 --> 00:07:07,760
में रहने वाले बहुत सारे शिष्य अगर मैं सारी मैं सारी चीजें

105
00:07:07,760 --> 00:07:11,840
सारी चीजें आएंगी। अभी तो हम केवल टॉपिक क्लियर कर रहे हैं ना। आप सारी चीजें यहीं पे

106
00:07:11,840 --> 00:07:15,920
रख दे रहे हो। अभी तो हम केवल टॉपिक क्लियर कर रहे हैं ना। फिर आपको वो भी प्रमाणित करना पड़ेगा

107
00:07:15,920 --> 00:07:19,200
कि उन

108
00:07:19,200 --> 00:07:23,200
मैं सारी चीजें मैं सारी चीजें करूंगा।

109
00:07:23,200 --> 00:07:27,760
अब यहां से हम शुरू कर रहे हैं कि हम जो है

110
00:07:27,760 --> 00:07:31,760
दो सनातनी है और सनातन के अर्थ को लेकर के आपका कुछ और अर्थ हो रहा है।

111
00:07:31,760 --> 00:07:35,840
विदेश गमन को लेकर के मेरा कुछ और अर्थ हो रहा है। है ना? यही है ना?

112
00:07:35,840 --> 00:07:40,000
जी और और दूसरी चीज दूसरी दूसरी एक और

113
00:07:40,000 --> 00:07:44,160
बात है आपको यह भी क्लेरफाई करना पड़ेगा क्योंकि इसमें मुझे तीन प्रकार

114
00:07:44,160 --> 00:07:48,240
के जवाब मिले हैं इस मामले में जो मैंने बोला था कि

115
00:07:48,240 --> 00:07:52,480
भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज जिनको मैं मानती हूं एस पर रिकॉर्ड

116
00:07:52,480 --> 00:07:56,560
कि आदि गुरु शंकराचार्य के बाद जिन्होंने धर्म के प्रचार प्रसार के

117
00:07:56,560 --> 00:08:01,440
लिए जो सनातन के दर्शन के लिए और फिलोसफी के लिए जिन्होंने सबसे ज्यादा

118
00:08:01,440 --> 00:08:05,600
भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज जगतगुरु श लूंगा ना

119
00:08:05,600 --> 00:08:09,920
मैं ये सारी चीजें आपकी उसमें इंक्लूडेड है अभी हमने चैप्टर क्लियर किए वो सारी

120
00:08:09,920 --> 00:08:13,920
ऑडियंस को भी तो जानना चाहिए ना ऑडियंस को भी वो वो आप वो आपके

121
00:08:13,920 --> 00:08:18,080
पॉइंट्स है ना जो आप जब मैं कुछ कहूंगा तो उसके काउंटर में आप ये सब दोगी मुझे

122
00:08:18,080 --> 00:08:22,240
जैसे कि भारतीय होगा आपको इजी होगा मैं पहले से बता दे रही हूं आपको

123
00:08:22,240 --> 00:08:26,400
इजी होगा कि मेरा प्रश्न क्या क्या था उस चीज में अदरवाइज कहीं

124
00:08:26,400 --> 00:08:30,480
ऐसा नहीं हो कि आपका डिस्कशन क्योंकि मेरे मेन पॉइंट्स जानना जरूरी है

125
00:08:30,480 --> 00:08:34,400
ना कि आपके ऐसा नहीं कि आपका डिस्कशन लंबा

126
00:08:34,400 --> 00:08:38,560
हो जाए कि हमारे पास फिर समय ही ना बचे कि हम बाकी मैं बता वो मेन

127
00:08:38,560 --> 00:08:42,640
पॉइंट्स आपके तब आ रहे हैं ना जब आपको कोई काउंटर किया गया है तो मैंने तो अभी काउंटर

128
00:08:42,640 --> 00:08:47,200
किया ही नहीं है शुरू वो मेन पॉइंट्स तब आए सामने जब मैं काउंटर करूं कोई

129
00:08:47,200 --> 00:08:51,280
तब आप उनको रख दीजिए इससे क्या होगा एक सिस्टमेटिकली एक स्ट्रक्चरल

130
00:08:51,280 --> 00:08:55,360
वे में हमारी डिस्कशन जा सकती है कि अब हमने टॉपिक डिसाइड

131
00:08:55,360 --> 00:08:59,680
कर लिया कि वेद वेद गमन को लेकर के क्या पक्ष है सनातन का धर्म का

132
00:08:59,680 --> 00:09:03,920
अब जो है आगे मैं उसमें आप अपना पक्ष रखूं फिर आप अपना पक्ष रखिए फिर आपकी

133
00:09:03,920 --> 00:09:07,920
कोई आपके पास कोई ऐसा तथ्य है जिससे कि मेरा सिद्धांत कट रहा है तो फिर आप वो

134
00:09:07,920 --> 00:09:12,000
रखिए। जैसे आपने कहा कि वेद में प्रमाण है और जैसे आपने कहा भारती कृष्ण

135
00:09:12,000 --> 00:09:16,080
तीर्थ जी या जैसे आपने कहा डोनेशन या फिर आपने कहा कि वहां पर जो है

136
00:09:16,080 --> 00:09:20,320
विदेशों में अपना वो सेंटर बना रहे हैं। है ना सिंगरी

137
00:09:20,320 --> 00:09:24,480
मठ वाली ये सब चीजें उसके काउंटर में होनी चाहिए जब मैं विदेश गमन

138
00:09:24,480 --> 00:09:28,480
का पक्ष लूं। ठीक है? ठीक है। चलिए ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़]

139
00:09:28,480 --> 00:09:32,560
अब हम क्योंकि दोनों सनातनी है तो मैं यह

140
00:09:32,560 --> 00:09:36,720
मान के चल रहा हूं आप सनातनी है। पक्की सनातन धर्मी है। इसमें तो कोई दो राय

141
00:09:36,720 --> 00:09:40,880
नहीं है। नहीं आप तो कल मेरे मानव होने पे भी डाउट कर रहे थे।

142
00:09:40,880 --> 00:09:44,960
हम लोग बात शुरू करें। ये भी ये भी आप उसप पॉइंट रखिएगा आगे जब आए।

143
00:09:44,960 --> 00:09:48,960
तो आप एक सनातन धर्मी है। वो मान के मैं चल रहा हूं। तो आपके लिए परम

144
00:09:48,960 --> 00:09:49,760
प्रमाण वेद

145
00:09:49,760 --> 00:09:55,040
है। हम एस पर मनुस्मृति 12.3

146
00:09:55,040 --> 00:09:59,440
13 2.3 13 हां

147
00:09:59,440 --> 00:10:04,960
तो अब मुझे आप ये बता दीजिए कि आपके पास वेद कैसे आए?

148
00:10:04,960 --> 00:10:09,040
वेद कैसे आए? अब हमारे पास ईश्वर परंपरा से आए वेद ये कह

149
00:10:09,040 --> 00:10:13,440
सकते हैं आप आपको आपने किसके वेद को पढ़ा?

150
00:10:13,440 --> 00:10:17,600
मैंने कौन से वेद देखो वेदों के कई अर्थ जो वेद अवेलेबल होगा वही तो पढ़ा

151
00:10:17,600 --> 00:10:21,840
जाएगा ना। जो वेद अवेलेबल होगा वही तो पढ़ा जाएगा ना? और शब्द आठ शब्द

152
00:10:21,840 --> 00:10:26,000
भाई शब्द एक मिनट सॉरी वेद के वेद के रूप में आप

153
00:10:26,000 --> 00:10:30,480
किसी किताब को कब मानेंगे ये वेद ही है

154
00:10:30,480 --> 00:10:35,680
एक मिनट [गला साफ़ करने की आवाज़] वेद को कैसे मानूंगी कि जैसे आप मानते हैं

155
00:10:35,680 --> 00:10:39,680
हम तो गुरु परंपरा से मानते हैं हमारे गुरु है परंपरा मैं ईश्वर परंपरा से

156
00:10:39,680 --> 00:10:43,680
मानती हूं अब अगर इंटरनेट मिल रहे हैं इंटरनेट आर्काइव पे मुझे

157
00:10:43,680 --> 00:10:48,080
वेद मिल रहे हैं आज मैंने आपको शयानाचार्य जी का भाष्य का जो बता रही थी

158
00:10:48,080 --> 00:10:52,160
तो वो आप कैसे मानेंगे कि वो वेद ही है क्योंकि कॉलोनियल

159
00:10:52,160 --> 00:10:56,400
बीच में कॉलोनियल मैंने आपको वो भी प्रमाण दिया था कि अंग्रेजों ने अंग्रेजों

160
00:10:56,400 --> 00:11:00,720
ने हमारे धर्म शास्त्रों में मिलावट की है। वो इस बात को प्राउडली एक्सेप्ट

161
00:11:00,720 --> 00:11:04,800
करते हैं उनके लेटर्स में मैकुले बेबिंग के लेटर भी मैक्स मुलर के

162
00:11:04,800 --> 00:11:08,800
इंटरनेट पे कोई भी चीज वेद नाम से आ जाएगी तो आप उसको वेद मान लेंगे।

163
00:11:08,800 --> 00:11:13,280
कोई भी चीज कैसे वेद मान लेंगे? तो कैसे

164
00:11:13,280 --> 00:11:17,680
नहीं तो आपके पास क्या वेदव्यास जी का मैनुस्क्रिप्ट है?

165
00:11:17,680 --> 00:11:21,760
वेदव्यास जी ने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए

166
00:11:21,760 --> 00:11:25,760
उसने जिसको वेद दिए ऐसे करके हमारे पास वेद आ रहे हैं। उसी तरह वेद देते देते उसी

167
00:11:25,760 --> 00:11:30,000
तरह वो इंटरनेट पे आया। तो इंटरनेट पे आया मगर इंटरनेट

168
00:11:30,000 --> 00:11:34,080
पे कौन सी चीज वेद है कौन सी नहीं है इसको जस्टिफाई इसको वेरीफाई करने के लिए हमारे

169
00:11:34,080 --> 00:11:38,480
पास परंपरा प्राप्त आचार्य है ना। तो वो जिनका मैं

170
00:11:38,480 --> 00:11:42,720
वो भी आचार्य ही है। कोई ऐसे सड़क छाप कोई मेरे जैसा

171
00:11:42,720 --> 00:11:46,960
तो कोई 10थ पास जो 10थ तक संस्कृत पढ़ा है वैसा किसी ने भाषण नहीं किया है।

172
00:11:46,960 --> 00:11:51,120
वो भी किसी परंपरा से ही आते हैं। अब आप उस परंपरा को नहीं मानते हैं

173
00:11:51,120 --> 00:11:55,120
तो आपकी वो वो आपके किस परंपरा से किस परंपरा

174
00:11:55,120 --> 00:11:59,200
से आते? आप परंपरा बताइए तो किस परंपरा से आते मैं तो शब्दार्थ

175
00:11:59,200 --> 00:12:03,440
के साथ जाती हूं कि उस शब्दों में क्या लिखा अरे भाई आपके आपको

176
00:12:03,440 --> 00:12:07,440
कोई भी वेद नाम से पुस्तक दे रहा है तो आप उसको बिना वेरिफिकेशन के मान लेंगे

177
00:12:07,440 --> 00:12:11,440
ये वेद नहीं तो आप आपसे तो मैंने बताया था अब इसी इसी

178
00:12:11,440 --> 00:12:15,680
बात के लिए मैं कह रही थी कि पहले आप जो मेरा प्रश्न है उस पे सिर्फ जवाब

179
00:12:15,680 --> 00:12:19,760
दीजिए वेदों पे ही हम जाएंगे लेकिन बाद में जाएंगे और आपके

180
00:12:19,760 --> 00:12:20,640
लिए

181
00:12:20,640 --> 00:12:24,640
आपके लिए वेद प्रमाण कैसे मैं वो मैं आपके लिए यह सवाल होना ही

182
00:12:24,640 --> 00:12:28,800
नहीं चाहिए कि मेरे लिए वेद प्रमाण कैसे है अगर मैं मैं आपको वेद का वो वर्ष दिखाती

183
00:12:28,800 --> 00:12:32,880
हूं और आप उसको प्रमाणित कर दे कि ये गलत है जो मैं वेद के वर्सेस

184
00:12:32,880 --> 00:12:36,880
आपको दिखा रही हूं। अगर मैं यजुर्वेद से कोई वर्स आपको दिखा रही हूं और

185
00:12:36,880 --> 00:12:41,040
आप मुझसे ये सवाल नहीं करेंगे क्योंकि आप आचार्य परंपरा से आते हैं तो आपको

186
00:12:41,040 --> 00:12:45,120
ये क्लियर करना पड़ेगा कि क्या मैं जो भाष्य दिखा रही हूं

187
00:12:45,120 --> 00:12:49,200
वो गलत है या सही है। उसके जो शब्द बाय शब्द अर्थ है क्योंकि संस्कृत में

188
00:12:49,200 --> 00:12:53,280
मेरी जानकारी शून्य नहीं है। तो मैं भी इस शब्दों के अर्थ को समझती

189
00:12:53,280 --> 00:12:57,360
हूं। तो आपको यह बताना पड़ेगा कि क्या मैं जो वर्ड्स आपको दिखा

190
00:12:57,360 --> 00:13:01,600
रही हूं वो सही है या गलत है। मैं ये बात मैं

191
00:13:01,600 --> 00:13:06,400
ये बात मैं ये बात इसलिए नमाजी से ग्रहण किया है या

192
00:13:06,400 --> 00:13:10,720
मैं मैं ये बात मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं। मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि

193
00:13:10,720 --> 00:13:14,960
वेदों में कई शब्द ऐसे होते हैं जिनके कई अर्थ होते हैं। अनेकार्थक

194
00:13:14,960 --> 00:13:19,040
होते हैं। ठीक है? उसमें अब जैसे एक ही एक

195
00:13:19,040 --> 00:13:23,120
ही शब्द के कई अर्थ निकल रहे हैं। अब इसमें से कौन सा अर्थ मानना

196
00:13:23,120 --> 00:13:27,120
है यह हमको जाकर के उससे जानना पड़ेगा जिसने हमको वेद दिए

197
00:13:27,120 --> 00:13:31,840
हैं। मैं मैं एक एक मिनट एक मैं

198
00:13:31,840 --> 00:13:36,400
क्लेरिफाई करूं। मैं बता रहा हूं ना क्या बात है हम तो बात ये है कि

199
00:13:36,400 --> 00:13:41,120
जिससे हमने वेद लिए जिससे हमारा वेद लेना सिद्ध हो रहा है

200
00:13:41,120 --> 00:13:45,200
उसका यदि हम उसके अर्थ पर विश्वास नहीं करते तो हमें उसके वेद

201
00:13:45,200 --> 00:13:49,200
पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए और जिससे हम वेद जिसके हम अर्थ

202
00:13:49,200 --> 00:13:53,280
पर विश्वास करते हैं अगर जिसके हम अर्थ पर विश्वास नहीं करते तो उसके

203
00:13:53,280 --> 00:13:57,440
वेद पर विश्वास नहीं होना चाहिए और जिसके वेद पर विश्वास है तो उसके अर्थ

204
00:13:57,440 --> 00:14:01,440
पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता है। इसका मतलब आपका

205
00:14:01,440 --> 00:14:05,760
कहने का मतलब यह है कि अगर हमारे पास वेद के कुछ मंत्र

206
00:14:05,760 --> 00:14:09,760
हैं जो जिसके संस्कृत की शब्दावली का हमें

207
00:14:09,760 --> 00:14:13,760
अर्थ पता है फिर भी उस गुरु की

208
00:14:13,760 --> 00:14:17,920
बात मानेंगे या किसी परंपरा प्राप्त गुरु की बात मानेंगे जो उसको डिफाइन

209
00:14:17,920 --> 00:14:22,080
करना है राइट हमें अपनी बुद्धि नहीं लगानी है मतलब अकल लगानी है

210
00:14:22,080 --> 00:14:26,320
लगानी है लगानी नहीं नहीं नहीं लगानी है गुरु

211
00:14:26,320 --> 00:14:30,320
गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु नहीं केवल गोविंद

212
00:14:30,320 --> 00:14:34,800
नहीं गुरु गोविंद और ग्रंथ तीनों के मिक्सचर से होना चाहिए। यानी कि ग्रंथ का आलंबन

213
00:14:34,800 --> 00:14:38,880
भी हो गुरु के उसमें शब्द प्रमाण भी हो और गोविंद भी हो। उससे

214
00:14:38,880 --> 00:14:42,880
प्राप्त होने वाला गोविंद हो। और ये मैं नहीं ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये मैं नहीं

215
00:14:42,880 --> 00:14:46,880
कह रहा ये मैं नहीं कह रहा हूं। अब जैसे आप आप जब आप जब आर्य

216
00:14:46,880 --> 00:14:50,880
समाज की बात करती हैं तो आर्य समाज कई मामलों में उसी शब्द

217
00:14:50,880 --> 00:14:51,520
का वो अर्थ

218
00:14:51,520 --> 00:14:55,760
लेता है जो परंपरा प्राप्त आचार्य नहीं लेते। और उसके दोनों अर्थ निकल रहे हैं जैसे प्रतिमा।

219
00:14:55,760 --> 00:14:59,760
अर्थ ही लेता है ये तो डिपेंड करता है श्लोक पे

220
00:14:59,760 --> 00:15:04,080
सॉरी मंत्र डिपेंड करता है मंत्र पे तो जब मैं आपके सामने मंत्र प्रस्तुत

221
00:15:04,080 --> 00:15:08,240
करूंगी और आपको लगेगा कि इस मंत्र में कोई शब्द

222
00:15:08,240 --> 00:15:12,560
ऐसा है जिसका अर्थ यह नहीं है तब आप मुझे काट सकते हैं

223
00:15:12,560 --> 00:15:16,640
आपके लिए वेद प्रमाण है तो आपने जिससे वेद लिए वो प्रमाण

224
00:15:16,640 --> 00:15:20,800
होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए बताइए मुझे मुझे वेद मिले हैं एक ऐसी

225
00:15:20,800 --> 00:15:25,040
ईश्वरीय परंपरा से या प्राकृतिक परंपरा से कह लीजिए क्योंकि मेरे पास बुद्धि

226
00:15:25,040 --> 00:15:29,120
मेरे पास पढ़ने की क्षमता है और मैं यह डिफरशिएट कर सकती हूं

227
00:15:29,120 --> 00:15:33,280
अपने कॉमन सेंस से भी कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है। नहीं

228
00:15:33,280 --> 00:15:37,280
नहीं यह जैसे भूभु जैसे भूभु स्वाहा से

229
00:15:37,280 --> 00:15:41,440
क्या कहते हैं मुक्ति मिलेगी यह आप कैसे कैसे तर्क से आपने सिद्ध

230
00:15:41,440 --> 00:15:46,320
कर रही है इसको आपने वेद क्यों माना

231
00:15:46,320 --> 00:15:50,640
मुझे सिद्ध करना ही नहीं वो सिद्ध तो आपको करना है आपने कहने

232
00:15:50,640 --> 00:15:54,880
कहने का मतलब यह है कि अगर स्वयं को सनातनी कहना है वैदिक कहना

233
00:15:54,880 --> 00:15:58,960
है तो हमको परंपरा प्राप्त आचार्य पर अपना विश्वास

234
00:15:58,960 --> 00:16:03,120
रखना सिद्ध करना होगा प्रकट करना होगा पहले मैं यह

235
00:16:03,120 --> 00:16:08,640
चाहता हूं कि आप यह अपना क्लियर कर दीजिए जिससे कि मैं आपको प्रमाण दे सकूं।

236
00:16:08,640 --> 00:16:12,800
आप [गला साफ़ करने की आवाज़] मुझे प्रमाण नहीं देंगे। आपकि आप देखिए आपके

237
00:16:12,800 --> 00:16:16,960
और मेरे बीच तो कोई कन्वर्सेशन भी नहीं था। आप तो बीच में खुद से आए हैं मेरे खिलाफ

238
00:16:16,960 --> 00:16:21,040
वीडियो बनाकर या मेरे सपोर्ट में वीडियो बना मतलब आप मतलब आपका कहने का मतलब

239
00:16:21,040 --> 00:16:25,120
है मतलब आपका कहने का मतलब है कि कहीं से भी कुछ भी हमें वेद के

240
00:16:25,120 --> 00:16:29,120
नाम से मिल जाए तो हम उसे स्वीकार कर ले इंटरनेट। नहीं कहीं से कुछ भी नहीं

241
00:16:29,120 --> 00:16:34,400
जो मानवता और प्रकृति के अनुकूल हो वो

242
00:16:34,400 --> 00:16:38,880
अच्छा आपकी मानवता कहां से डिफाइन होती है भाई वेद तो आपको अभी जस्टिफाई

243
00:16:38,880 --> 00:16:42,960
करने है तो यानी मानवता आपको पहले से पता है वो कहां से डिफाइन होगी हमारी

244
00:16:42,960 --> 00:16:47,040
मानवता तो वेद से डिफाइन होती है अच्छा तो आपकी मानवता वेद से

245
00:16:47,040 --> 00:16:51,040
अगर डिफाइन होती है तो जितने भी परंपरा प्राप्त शिष्य हैं और जो

246
00:16:51,040 --> 00:16:55,440
खुद को क्लेम करते हैं परंपरा प्राप्त शिष्य तो कुछ चीजों को तो मैं खुद भी

247
00:16:55,440 --> 00:16:59,680
कर सकती हूं जैसे कि फॉर एग्जांपल आपने बोल को आप विषय

248
00:16:59,680 --> 00:17:03,840
हो रहा है विषयांतर नहीं हो रहा है विषयंतर नहीं हो रहा है

249
00:17:03,840 --> 00:17:09,840
उदाहरण विषयांतर नहीं होता है ठीक है उदा उदाहरण का मतलब होता है

250
00:17:10,480 --> 00:17:14,480
शिष्य मुझे क्योंकि मैं मनुस्मृति को तो अच्छे से

251
00:17:14,480 --> 00:17:18,720
पढ़ी हूं वेदों में मेरी जानकारी कम है मैंने आपको पहले ही क्लेरिफाई किया मैंने आपसे पूछा

252
00:17:18,720 --> 00:17:23,520
है मनुस्मृति आपके पास आई कहां से किसने दी

253
00:17:23,520 --> 00:17:27,600
भैया ईश्वर ने दिया ईश्वर ने यहां

254
00:17:27,600 --> 00:17:31,680
क्या तीन लोग करेंगे क्या कन्वर्सेशन? प्लीज मैं रिक्वेस्ट करती

255
00:17:31,680 --> 00:17:36,000
हूं मुझे अगर कोई डॉक्यूमेंट्स का जरूरत होगा तो मुझे प्रोवाइड करना। हम

256
00:17:36,000 --> 00:17:40,480
हां जी ठीक है हम जी तो

257
00:17:40,480 --> 00:17:44,640
अ क्या बोल रही थी मैम? हां तो मैं उदाहरण दे

258
00:17:44,640 --> 00:17:48,640
रही हूं तो उदाहरण उस चीज का पार्ट हो सकता है। क्यों नहीं हो सकता है? उदाहरण इस चीज

259
00:17:48,640 --> 00:17:52,640
का पार्ट मैंने मैंने मैंने कह दी मान लिया आपकी बात। आप उदाहरण दीजिए। आप

260
00:17:52,640 --> 00:17:57,040
उदाहरण दीजिए। नहीं नहीं नहीं अगर माननीय आप उदाहरण दीजिए

261
00:17:57,040 --> 00:18:01,040
अगर आप उदाहरण दीजिए माता जी उदाहरण माननीय आप

262
00:18:01,040 --> 00:18:05,760
उदाहरण दीजिए आपके परंपरा प्राप्त शिष्यों ने अगर मनुस्मृति

263
00:18:05,760 --> 00:18:10,000
को खंडित करके जिसका जिसका कि मैंने

264
00:18:10,000 --> 00:18:14,080
आई थिंक परसों के श्लोक में परसों के वीडियो में जो मैंने मेंशन किया

265
00:18:14,080 --> 00:18:18,560
था कि मनुस्मृति का गलत शब्दार्थ करके हाफ

266
00:18:18,560 --> 00:18:23,520
वर्ड निकाल के आप पोस्ट बना देते हो और पोस्ट कर देते हो कि समुद्र

267
00:18:23,520 --> 00:18:25,600
जो क्रॉप करता है वो मले

268
00:18:25,600 --> 00:18:29,760
है वो विधर्मी है वो अधर्मी है इस टाइप का अगर आप पोस्ट बना के

269
00:18:29,760 --> 00:18:33,920
डाल देते हो तो आप भी तो गुरु परंपरा से आ रहे हो और आप ये क्लेम

270
00:18:33,920 --> 00:18:38,080
करते हो कि परंपरा से हूं इसलिए सही है दूसरा चीज भारती तीर्थ

271
00:18:38,080 --> 00:18:42,080
जी महाराज का हम आपको हम आप देखिए आप ना इसमें क्या

272
00:18:42,080 --> 00:18:46,080
कर रही हैं कि जब आपके पास उत्तर नहीं है तो आप इतना लंबा इमोशनल अटैक कर रही हैं कि

273
00:18:46,080 --> 00:18:50,240
हम मैं उसको मेरी मजबूरी हो जाए मेरी मेरी मज मेरी मजबूरी

274
00:18:50,240 --> 00:18:54,400
हो जाएगी कि मैं अपने इस विषय को छोड़ के आपके उनका क्लेरिफिकेशन देने जाऊं।

275
00:18:54,400 --> 00:18:58,400
अभी आपने कहा भाई भाई शिवा भाई शिवाश

276
00:18:58,400 --> 00:19:03,600
भाई आई एम सॉरी टू से लेकिन ये आप जो कर रहे हैं ना इसको

277
00:19:03,600 --> 00:19:07,840
मतलब मैं क्या बोली न्याय संगत नहीं बोला जाएगा क्योंकि

278
00:19:07,840 --> 00:19:12,400
आपकी वैदिकता सिद्ध करिए माता जी आपकी वैदिकता सिद्ध करें

279
00:19:12,400 --> 00:19:16,400
जा सकता है आपके मैं सिद्ध कर रहा हूं ना जिससे आपने वेद लिए है

280
00:19:16,400 --> 00:19:20,880
उस पर आपको भरोसा है कि नहीं या तो आप अवैध हो जाइए

281
00:19:20,880 --> 00:19:24,880
या तो आप सुनिए शिवश जी

282
00:19:24,880 --> 00:19:29,840
आपको यह सवाल ही नहीं करना चाहिए कि मुझे वेद किसने दिया है

283
00:19:29,840 --> 00:19:33,920
क्यों क्योंकि क्योंकि जिस मैटर पे हम डिस्कस

284
00:19:33,920 --> 00:19:38,000
करने आए हैं आप जिन अपने गुरु भाई बहनों के बचाव में आए हैं उनके

285
00:19:38,000 --> 00:19:40,800
साथ मेरा इस बात को लेकर कोई झगड़ा नहीं था

286
00:19:40,800 --> 00:19:45,440
मैंने अभी मुक्तेश्वर मैं आपको यह बता रहा हूं कि यदि आप परंपरा

287
00:19:45,440 --> 00:19:49,840
को लेकर नहीं मैं आपको यह बता रहा हूं कि आप परंपरा प्राप्त आचार्य

288
00:19:49,840 --> 00:19:53,920
की शरण में नहीं है तो आप स्वयं मैम को वैदिक सिद्ध नहीं कर सकती सनातनी सिद्ध नहीं

289
00:19:53,920 --> 00:19:58,400
कर सकती धार्मिक सिद्ध नहीं कर सकती मानवता सिद्ध नहीं कर सकती मुझे नहीं मानो सनातन

290
00:19:58,400 --> 00:20:02,480
मुझे नहीं मानो वैदिक आई डोंट मानो नहीं मानो नहीं आप अपनी वैदिकता

291
00:20:02,480 --> 00:20:06,880
सिद्ध करिए या तो क्लेम या तो ये क्लेम कर दीजिए कि मैं सनातनी नहीं हूं मत मानो

292
00:20:06,880 --> 00:20:10,960
मैं तो कह रही हूं आप मत मानो मैं कह रही हूं कि आप मानो मैं कह रही हूं

293
00:20:10,960 --> 00:20:14,960
आप मानो आप तो फिलहाल आप सनातनी नहीं है आज के

294
00:20:14,960 --> 00:20:19,120
मैं फिलहाल फिलहाल आप सनातनी है कि नहीं फिर मैं आप फिर मैं

295
00:20:19,120 --> 00:20:23,280
अब चली जाऊंगी उस चीज पर जहां पे आपके लोग कहीं भी जाइए

296
00:20:23,280 --> 00:20:27,440
मैं आपको ले जाऊंगी कहां पे आपके लोग और मैं

297
00:20:27,440 --> 00:20:31,520
प्रमाण दिखाऊंगी कल के चैट का आप ही के गुरु भाइयों के साथ जो लोग

298
00:20:31,520 --> 00:20:35,840
गौ बलि को सही मानते हैं फिर तो यह बात हो गई

299
00:20:35,840 --> 00:20:39,840
सारे जवाब है मेरे पास सारे जवाब है एक तरफ

300
00:20:39,840 --> 00:20:43,920
गौ बलि को देखिए आप आप अगर आप अगर बदतमीजी

301
00:20:43,920 --> 00:20:48,000
पे जाएंगी और अपमानजनक भाषा पे जाएगी मुझे जाना पड़ेगा मैं आपको

302
00:20:48,000 --> 00:20:52,160
प्रतिर नहीं दे सकता इन चीजों का डिस्कस कर तो आप अगर इस तरह से नाम

303
00:20:52,160 --> 00:20:55,840
लेंग जो जो मेरे लिए प्रणम्य है जो मेरे लिए सम्मानीय है

304
00:20:55,840 --> 00:21:00,080
अगर आप उनके लिए इस तरह से बात करेंग सीधेसीधे नाम लेकर के मुझे छोड़नी पड़ेगी

305
00:21:00,080 --> 00:21:04,080
लाइव आप अपनी चीजों पे रहिए तो मैं उनका कुछ और नाम ले उनका नाम

306
00:21:04,080 --> 00:21:08,400
अभी उनके नाम उनके उनके नाम के आगे जी लगाइए जी

307
00:21:08,400 --> 00:21:12,480
हां तो मैं कब जी नहीं लगाया इस पूरे वीडियो में ये वीडियो

308
00:21:12,480 --> 00:21:16,720
अभी आपने बोला बिना जी अभी आपने बोला बिना जी के अभी बोला रिवाइंड करके देख लीजिए

309
00:21:16,720 --> 00:21:20,800
किसके किसके बारे में मैंने बोला जी के लिए आपने अभी अभी बिना जी के

310
00:21:20,800 --> 00:21:24,960
बोला है। सुनिए ये वीडियो बाद में पोस्ट होगा। भाई सब

311
00:21:24,960 --> 00:21:29,440
लोग देख लेना मैंने जी बोला है कि नहीं बोला है। मैं बिना जी लगाए नहीं बोलती [गला साफ़ करने की आवाज़] हूं। ठीक है।

312
00:21:29,440 --> 00:21:33,440
ठीक है। ठीक है। ठीक है। अगर मुझे आपके शंकरा चलिए अब अब आप

313
00:21:33,440 --> 00:21:37,440
अब आप जी अब आप अब आप जी लगा। अब आप जी लगाएंगी ना।

314
00:21:37,440 --> 00:21:41,600
अब आप जी लगाएंगी। मैं हमेशा लगाती हूं। ठीक है। मैं हमेशा लगाती हूं।

315
00:21:41,600 --> 00:21:45,760
और मैं मुझे नहीं लगता है कि मैंने जी नहीं लगाया था। स्लिप ऑफ नहीं आपने भयंकर

316
00:21:45,760 --> 00:21:49,840
आचार और ना जाने क्या-क्या कहा है कमेंट्स में जाकर के।

317
00:21:49,840 --> 00:21:54,000
भयंकराचार्य कहा है मैंने भयंकराचार्य एंड उस कमेंट को किस

318
00:21:54,000 --> 00:21:58,800
चीज पर रिप्लाई किया मैंने वो भी आपको दिखाना चाहिए

319
00:21:58,800 --> 00:22:02,800
टारगेट करते हैं कि वो दिखाते कुछ और है मतलब ये हाथी के दांत खाने के

320
00:22:02,800 --> 00:22:06,880
कुछ और दिखाने के कुछ और तो अगर आप बात ये चल रही है कि

321
00:22:06,880 --> 00:22:11,040
आप वैदिक कैसे हैं यदि आप परंपरा प्राप्त आचार्य का विरोध कर रही है तो

322
00:22:11,040 --> 00:22:15,200
आप वैदिकता बताइए मैं इसलिए नहीं मैं वैदिक हूं कि नहीं हूं

323
00:22:15,200 --> 00:22:19,280
फिर आप अगर इस चीज पे प्रश्न आप वैदिक नहीं है तो मान लीजिए फिलहाल फिलहाल

324
00:22:19,280 --> 00:22:24,320
मैं हूं कह लीजिए फिर आप भी मान लीजिए कि आप वेद

325
00:22:24,320 --> 00:22:28,720
मैं बोल तो रहा हूं मेरे मैं वेद के उस अर्थ को ग्रहण करूंगा जो मुझे परंपरा

326
00:22:28,720 --> 00:22:32,960
प्राप्त प्रमाणिक आचार्य ने दिया होगा और वो और वो तार्किक

327
00:22:32,960 --> 00:22:38,080
भी है वो तार्किक भी है मैं सिद्ध करूंगा मैं

328
00:22:38,080 --> 00:22:42,160
आप कितना भी आप पर्सनल पे जाइए आप मुझे मालूम है आपके पास [हंसी] यही

329
00:22:42,160 --> 00:22:47,360
बात है मैं कहां जा रहा हूं मैंने आपसे पूछा आपकी

330
00:22:47,360 --> 00:22:51,920
आप आप यदि है आप तो सारी चीजें खोल दो

331
00:22:51,920 --> 00:22:56,240
आप सारी चीजें ले आओ पर ये मत बताना मैं वैदिक कैसे हूं इंटरनेट

332
00:22:56,240 --> 00:23:00,320
पे मिलने वाली किसी चीज को आप वैदिक मान लेंगी मैं उस भारतवर्ष की भूमि

333
00:23:00,320 --> 00:23:04,320
पर जन्म ली हूं भारतवर्ष की भूमि पर जन्म ली हूं और

334
00:23:04,320 --> 00:23:08,720
मैं उसी वैदिक सनातन परंपरा को फॉलो करती हूं जो मुझे मेरे कौन सी परंपरा

335
00:23:08,720 --> 00:23:12,720
परंपरा बताइए ना अपनी कौन सी परंपरा मुंडकोनिषद में ऋषि बता रहे हैं

336
00:23:12,720 --> 00:23:13,840
अपनी परंपरा गुरु से

337
00:23:13,840 --> 00:23:18,480
दीक्षित थे तो मैं उन्हीं की परंपरा को फॉलो कर रही हूं कौन सी परंपरा बताइए

338
00:23:18,480 --> 00:23:22,480
कौन सी परंपरा? वैष्णव परंपरा को हम लोग फॉलो करते हैं।

339
00:23:22,480 --> 00:23:26,640
नाम बताइए वैष्णव कौन सी परंपरा? नाम बताइए। रामानुज

340
00:23:26,640 --> 00:23:30,640
रामानुज परंपरा विदेश यात्रा मान रामानुज परंपरा को प्रमाण मानती है

341
00:23:30,640 --> 00:23:34,640
फिर आप उनके विरोध में तो नहीं जाएंगी। सुनिए सुनिए सुनिए। विदेश यात्रा की

342
00:23:34,640 --> 00:23:38,640
बात विदेश यात्रा रामानुज रामानुज परंपरा को प्रमाण मानती है

343
00:23:38,640 --> 00:23:42,640
कि नहीं? ये पूछ रहा हूं मैं। मैंने उनकी सारी बुक्स

344
00:23:42,640 --> 00:23:46,800
को थोड़ी पढ़ा हुआ है। मेरे सामने तो यानी कि आपको धर्म को जान

345
00:23:46,800 --> 00:23:51,040
यानी कि आपको धर्म को जानने से पहले पता है कि मेरा धर्म क्या है?

346
00:23:51,040 --> 00:23:55,280
आपको पहले ही पता है। पता है मैं जब आप यानी कि वेद वेद वेद की आवश्यकता

347
00:23:55,280 --> 00:23:59,280
ही नहीं है। एक बात बताइए सुनिए पहले मेरी एक बात बताइए। आप ब्राह्मण है।

348
00:23:59,280 --> 00:24:03,520
जन्म से ब्राह्मण है। बोलिए आप जन्म से कि नहीं है?

349
00:24:03,520 --> 00:24:07,600
देखिए इन बातों का आप मुझे इसका रिलेशन

350
00:24:07,600 --> 00:24:11,840
रिलेशन सिद्ध करिए। रिलेशन सिद्ध करिए मैं बताऊंगा रिलेशन

351
00:24:11,840 --> 00:24:15,920
सिद्ध करिए बताऊंगा रिलेशन सिद्ध करिए बताऊंगा किस कौन सा रिलेशन

352
00:24:15,920 --> 00:24:20,080
सिद्ध कर इस टॉपिक से इस प्रश्न का रिलेशन सिद्ध करिए हां है इस टॉपिक

353
00:24:20,080 --> 00:24:24,240
से इस प्रश्न का रिलेशन नहीं है क्योंकि आप मुझे साबित करने को कह रहे हैं कि मुझे

354
00:24:24,240 --> 00:24:28,400
वेद किस परंपरा से प्राप्त है मैं वैदिक हूं भी कि नहीं हूं कहने का

355
00:24:28,400 --> 00:24:29,040
मतलब यह

356
00:24:29,040 --> 00:24:33,200
है कि कहने का मतलब यह है जिससे हम वेद लेंगे यदि हमें

357
00:24:33,200 --> 00:24:37,600
उसके अर्थ पर विश्वास नहीं है तो हमें उसके वेद पर भी विश्वास नहीं है

358
00:24:37,600 --> 00:24:41,840
विश्वास है लेकिन मैं रामानुज परंपरा के विरुद्ध तो नहीं जाएंगी

359
00:24:41,840 --> 00:24:45,920
आप रामानुज पर मैं वही कह रहा हूं मैं रामानुज

360
00:24:45,920 --> 00:24:50,160
रामानुज परंपरा आपके लिए प्रमाण होनी चाहिए यदि आप उनसे वेद

361
00:24:50,160 --> 00:24:54,640
ले रही है तो मैंने उनसे वेद कहां लिया उन्होंने वेद का भाष्य किया है

362
00:24:54,640 --> 00:24:58,720
तो फिर आप बताइए आप बताइए वेद कहां से आ रहे हैं आपके पास

363
00:24:58,720 --> 00:25:02,880
सपने में आके दिए भगवान ने मैं मैं बोल रही हूं मैं ईश्वर

364
00:25:02,880 --> 00:25:06,880
परंपरा से मेरे पास बुद्धि अरे वो ईश्वर परंपरा में नाम होंगे ना कि

365
00:25:06,880 --> 00:25:11,120
आपको किसने भेद दिए उनको उनको दिए और

366
00:25:11,120 --> 00:25:15,600
ईश्वर परंपरा से हां तो आपको किसने दिए

367
00:25:15,600 --> 00:25:19,760
ईश्वर परंपरा से इंटरनेट पे इसका मतलब इंटरनेट आपका

368
00:25:19,760 --> 00:25:23,760
प्रमाण है इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट

369
00:25:23,760 --> 00:25:28,880
आपका प्रमाण है इंटरनेट नहीं इंटरनेट पे तो भी है तो प्रमाण

370
00:25:28,880 --> 00:25:32,960
तो फिर उसको क्यों मैं कह रहा हूं जिससे आपने लिए बेवकूफ

371
00:25:32,960 --> 00:25:37,600
से आप शंकराचार्य मैं आपको बता रहा हूं

372
00:25:37,600 --> 00:25:42,400
शस्त्र तुम शस्त्र नहीं बिल्कुल निशस्त्र दिख रहे हो अरे यही तो ब्रह्मास्त्र है

373
00:25:42,400 --> 00:25:44,160
यही ये इलॉजिकल चीजें हैं तो

374
00:25:44,160 --> 00:25:48,560
आप अपने उनको बता दीजिएगा ये वीडियो डाल दीजिएगा आप इलॉजिकल चीजें हो तो

375
00:25:48,560 --> 00:25:52,960
जिसके वेद जिसके अर्थ पर हमें विश्वास नहीं है उसके वेद पर हमारा

376
00:25:52,960 --> 00:25:58,960
के लिए आए थे आपके बेहूदा मैं यहां पर मैं

377
00:25:59,120 --> 00:26:03,760
आप लोग जो गुरु परंपरा प्राप्त मैं आपको

378
00:26:03,760 --> 00:26:07,840
मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है मेरे पास आपकी हर

379
00:26:07,840 --> 00:26:12,000
बात का उत्तर है। मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है। पर उससे

380
00:26:12,000 --> 00:26:16,480
पहले अरे उससे पहले उससे पहले आपका आप

381
00:26:16,480 --> 00:26:20,560
उससे पहले आपके लिए प्रमाण क्या है? सुनिए जिसका

382
00:26:20,560 --> 00:26:24,560
कोई नहीं जिस जो किसी एक को नहीं मानता वो किसी का नहीं होता। तो

383
00:26:24,560 --> 00:26:28,640
इसलिए मैं जानना चाह रहा हूं मैं जानना चाह रहा हूं आपके लिए प्रमाण क्या तब मैं

384
00:26:28,640 --> 00:26:32,720
वहां से प्रमाण दूंगा ना। आपका प्रमाण ही आप नहीं बता रहे हो। ठीक है। मैं वैदिक

385
00:26:32,720 --> 00:26:36,720
स्क्रिप्चर डॉटin पे तीन चार ऋषियों का प्रमाण है। ब्रह्म मुनि

386
00:26:36,720 --> 00:26:41,120
का प्रमाण है। वैदिक स्क्रिप्चर ड.in को वेद कहां से मिले वो बताइए।

387
00:26:41,120 --> 00:26:45,600
कहां से मिले उसको वेद? अरे मैं बता दूं शिवश जी भाई साहब

388
00:26:45,600 --> 00:26:50,480
आप आप कर लीजिए या तो इनहीं से बात कर लीजिए आप। एक मिनट दीजिए मुझे एक मिनट।

389
00:26:50,480 --> 00:26:54,480
बात कर लीजिए आप। तीसरा व्यक्ति बोलेगा मैं छोड़ दूंगा। आप बात

390
00:26:54,480 --> 00:26:58,480
करिए मुझसे। और भाई साहब हेलो आर्यन जी आपको जब आना

391
00:26:58,480 --> 00:26:59,280
हो तो आप मेरे साथ

392
00:26:59,280 --> 00:27:05,040
लाइव पे अलग से आइएगा। ठीक है।

393
00:27:05,040 --> 00:27:09,200
नंबर नोट कर लीजिए। 7408301869

394
00:27:09,200 --> 00:27:14,880
WhatsApp करिए, फॉर्म भरिए, लाइव आइए।

395
00:27:14,880 --> 00:27:18,960
मैं फ्री हूं। मैं यहां पे किसी भी चीज को एक्सेप्ट

396
00:27:18,960 --> 00:27:23,040
करने के लिए फ्री हूं जो मुझे मानव जाति के कल्याण के लिए लगेगा। और

397
00:27:23,040 --> 00:27:27,120
वही वेद वैदिक आपको कैसे पता यह कल्याण है? वेद के

398
00:27:27,120 --> 00:27:31,360
बिना आपको कैसे पता यह कल्याण है? बताइए। जब वेद वाणी यह कहती

399
00:27:31,360 --> 00:27:35,520
है कि वेदों की वेदों की जो कल्याण वेद वेद वाणी का

400
00:27:35,520 --> 00:27:39,520
प्रमाण कैसे दे रहे हो आप वेद वाणी का प्रमाण पूछ लिया

401
00:27:39,520 --> 00:27:43,600
तो आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी जी ठीक है सुन रहा हूं सुन रहा हूं क्षमा करिए

402
00:27:43,600 --> 00:27:47,920
सुन रहा हूं सुन रहा हूं जब जो वेदवाणी कहेगी कि प्रत्येक

403
00:27:47,920 --> 00:27:51,920
मनुष्य पृथ्वी पर एक है एक समान है वेदवाणी

404
00:27:51,920 --> 00:27:56,080
कह रही है कि प्रत्येक मनुष्य चाहे वो किसी भी वर्ण से हो किसी भी देश से

405
00:27:56,080 --> 00:28:00,240
हो कहीं से भी हो क्योंकि अगर आपके जगत गुरु गुरु शंकराचार्य

406
00:28:00,240 --> 00:28:04,560
की पदवी ले रहे हैं जगतगुरु तो वो जगतगुरु सिर्फ एक देश के लिए नहीं हो सकता वो संपूर्ण

407
00:28:04,560 --> 00:28:08,720
ब्रह्मांड के लिए देखिए बहुत एक्सप्लेनेशन बताने की जरूरत नहीं है टू द पॉइंट

408
00:28:08,720 --> 00:28:12,720
आप बात करिए टू द पॉइंट प्लीज अब जब आपने सवाल

409
00:28:12,720 --> 00:28:15,360
पूछा है तो मेरा आंसर एलबोरेटेड

410
00:28:15,360 --> 00:28:19,520
बहुत श भी होती एबोरेटिव में आप क्या करती है ऐसी चीजों पर जाती है जो मेरे

411
00:28:19,520 --> 00:28:23,920
लिए सेंसिटिव होती है मुझे टॉपिक छोड़ के उनका क्लेरिफिकेशन देना पड़ेगा

412
00:28:23,920 --> 00:28:28,320
इसलिए ऐसा एलबोरेटिव करिए जिसमें मेरी सेंसिटिव चीजें हो

413
00:28:28,320 --> 00:28:32,800
आप गुरु गुरु प्राप्त आप गुरु परंपरा प्राप्त शिष्य है। आपको लोग शंकराचार्य

414
00:28:32,800 --> 00:28:36,800
का शस्त्र कहते हैं। तो आप में इतनी शक्ति नहीं है कि आप उसको शुद्ध मेरे में शक्ति

415
00:28:36,800 --> 00:28:40,800
है। मगर यहां से टॉपिक टॉपिक नहीं छोड़ रही हूं मैं टॉपिक

416
00:28:40,800 --> 00:28:44,880
पे ही हूं। हां तो आप सेंसिटिव चीजें मत लाइए मुझे छोड़ छोड़ के उनका

417
00:28:44,880 --> 00:28:48,960
क्लेरिफिकेशन मैं दूंगा। मैं सब आप जितनी चीजें हैं सब नोट कर लीजिए। मैं

418
00:28:48,960 --> 00:28:52,960
हर एक चीज का जवाब दूंगा। सुनिए आपने एक्सेप्ट किया कि

419
00:28:52,960 --> 00:28:57,040
आप चायनाचार्य के भाष्य को मानते हैं। राइट? आपने एक्सेप्ट किया था कि नहीं

420
00:28:57,040 --> 00:29:01,040
किया? मैं ये पूछ रहा हूं कि यदि आप अपने आप को वैदिक सनातनी कह रही

421
00:29:01,040 --> 00:29:05,040
है तो आप किसके किसके द्वारा वेद को प्राप्त करने पर मान रही है कि

422
00:29:05,040 --> 00:29:10,080
मैं वैदिक सनातनी हूं। इंटरनेट को मानती है तो मैं इंटरनेट की प्रमाणिकता पूछूंगा।

423
00:29:10,080 --> 00:29:14,160
ये पूछूंगा कि इंटरनेट के विरुद्ध तो नहीं शंकर सर्व्याप्त ईश्वर ने यहां

424
00:29:14,160 --> 00:29:18,320
मेरे भेजे में बुद्धि दी हुई है जिससे कि मैं पढ़ सकता हूं। आपको वेद

425
00:29:18,320 --> 00:29:22,720
वेद डायरेक्ट वेद डायरेक्ट मिले है या किसी ग्रंथ के रूप में मिले हैं आपको?

426
00:29:22,720 --> 00:29:26,880
ग्रंथ के भगवान शंकर ने ग्रंथ के रूप में मिले हैं। इसका मतलब

427
00:29:26,880 --> 00:29:30,560
भगवान ने डायरेक्ट आपको नहीं दिए हैं। किसी और के द्वारा आपको मिले हैं।

428
00:29:30,560 --> 00:29:34,800
भगवान ने डायरेक्ट नहीं दिए ना तो मैं मैं बता मुझे मैं बता तो रहा हूं जिससे

429
00:29:34,800 --> 00:29:38,800
मुझे वेद मिले हैं उसके भाष्य पर मुझे विश्वास है। आपको विश्वास है कि

430
00:29:38,800 --> 00:29:42,880
नहीं? मुझे विश्वास है। वही बात तो मैं कह रही हूं। तो मुझे बताइए किससे मिले

431
00:29:42,880 --> 00:29:46,880
उस व्यक्ति का नाम बताइए किससे मिले? ब्रह्म मुनि के भाष से

432
00:29:46,880 --> 00:29:50,960
मैंने जो आप देखिए पीछे से मत आइए। इधर

433
00:29:50,960 --> 00:29:55,040
से चलिए इधर से बताइए आपको इंटरनेट से मिले कोई आपने वेबसाइट

434
00:29:55,040 --> 00:29:59,040
बताई है वहां से मिले ठीक है ठीक है उसमें बता रही हूं ना किसके

435
00:29:59,040 --> 00:30:03,040
भाष मैंने आज आपको सयानाचार्य के भाष्य के बारे में भी बताया

436
00:30:03,040 --> 00:30:07,280
तो वो भी तो मुझे इंटरनेट आर्काइव से ही मिले अब वो इंटरनेट पे होते हुए भी आप मानेंगे

437
00:30:07,280 --> 00:30:11,520
या नहीं मानेंगे वो इसलिए मानूंगा क्योंकि मैं इसलिए मानूंगा क्योंकि मेरे परंपरा

438
00:30:11,520 --> 00:30:16,160
प्राप्त आचार्य उसपे ठप्पा लगा रहे हैं कि ये वेद है तो आप परंपरा

439
00:30:16,160 --> 00:30:20,320
प्राप्त आचार्य ठप्पा लगा रहे हैं ना मैं उस परंपरा में विश्वास नहीं कर सकती नहीं

440
00:30:20,320 --> 00:30:24,400
रखती तो आप किस में तो आप तो आप किस में रखती हैं? देखा

441
00:30:24,400 --> 00:30:28,400
ये बचने का तरीका है गौ बलि गौ बलि जा वो वर्णाश्रम जन्मना ये

442
00:30:28,400 --> 00:30:32,480
सब लाना आपके गुरु भाई बहन ये सब लाना मैं पूछ रहा हूं आपको अगर वेद

443
00:30:32,480 --> 00:30:36,560
पे विश्वास है तो किसके द्वारा आप भी तो हो बात कुछ

444
00:30:36,560 --> 00:30:41,680
और थी टॉपिक कुछ और स्टार्ट हो गया भाई मैं मैं

445
00:30:41,680 --> 00:30:45,680
आपने क्या लिखा है टॉपिक का टॉपिक का नाम क्या लिखा है बताइए टॉपिक क्या लिखा हुआ है

446
00:30:45,680 --> 00:30:50,400
आपके वहां टॉपिक है आपका कंट्राडिक्टरी

447
00:30:50,400 --> 00:30:55,280
टाइटल में क्या लिखा है टाइटल में टाइटल में लिखा हुआ है कंट्राडिक्टरी

448
00:30:55,280 --> 00:30:59,920
कंडक्ट ऑफ शंकराचार्य संप्रदाय संप्रदाय संप्रदाय

449
00:30:59,920 --> 00:31:03,920
संप्रदाय आया ना नाम आया ना संप्रदाय बात हो रही है तो मैं

450
00:31:03,920 --> 00:31:08,240
आपसे पूछ रहा हूं क्या संप्रदाय के विरुद्ध सुनिए कंट्राडिक्टरी कंडक्ट

451
00:31:08,240 --> 00:31:12,400
मैंने अरे भाई मैं आपसे ये पूछ रहा हूं यदि आप अपने आप को संप्रदाय विहीन

452
00:31:12,400 --> 00:31:16,400
बता रही है तो आपका वैदिक होना कैसे सिद्ध हो रहा है शास्त्रों को मानने वाला

453
00:31:16,400 --> 00:31:20,480
कैसे सिद्ध हो रहा है सनातनी होना कैसे सिद्ध हो रहा है मानव होना कैसे सिद्ध

454
00:31:20,480 --> 00:31:24,720
हो रहा है धर्म ना पशु भी समाना जिसका गुरु नहीं वो पशु

455
00:31:24,720 --> 00:31:28,800
है। गुरु गीता में लिखा हुआ है। आपको कैसे पता है कि मेरा गुरु नहीं है। मेरे पास है

456
00:31:28,800 --> 00:31:32,880
गुरु तो आप उसका नाम बताइए ना भाई। उसका नाम

457
00:31:32,880 --> 00:31:36,880
बताइए। तो मैं आदि गुरु शंकराचार्य को अपना गुरु मानती हूं। बोलिए

458
00:31:36,880 --> 00:31:41,520
मैं उनके ही गुरु अष्टम का तो आदि गुरु शंकराचार्य

459
00:31:41,520 --> 00:31:45,520
की बुक आपको कैसे मिली? आदि गुरु

460
00:31:45,520 --> 00:31:49,680
आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? मैं

461
00:31:49,680 --> 00:31:53,680
पूछ रहा हूं। आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? आदि गुरु

462
00:31:53,680 --> 00:31:57,840
शंकराचार्य से मिली। डायरेक्ट दिए उन्होंने। शंकराचार्य से मिली। आदि

463
00:31:57,840 --> 00:32:00,720
गुरु शंकराचार्य दी उसने

464
00:32:00,720 --> 00:32:04,720
उसने किसी को दी। उसने उसको इंटरनेट और मैंने उसको उस

465
00:32:04,720 --> 00:32:08,960
बुक को खरीदा। इंटरनेट इंटरनेट पर डाली गई चीज तब तक हमारे

466
00:32:08,960 --> 00:32:12,960
लिए सत्य नहीं है जब तक उसको उस गुरु परंपरा के किसी प्रामाणिक आचार्य ने

467
00:32:12,960 --> 00:32:16,960
सत्यापित ना किया हो। जिससे उन्होंने फिर आप शयनाचार्य को कैसे फिर

468
00:32:16,960 --> 00:32:21,120
आप शनाचार्य के इंटरनेट आर्काइव को कैसे मान गए? अरे क्योंकि हमारे गुरु

469
00:32:21,120 --> 00:32:25,120
ने उसे सत्यापित किया ना हमारे हमारे पास हमारे

470
00:32:25,120 --> 00:32:29,120
पास हमारे गुरु के द्वारा सत्यापित बुक्स है अगर इससे मैच खा रहा

471
00:32:29,120 --> 00:32:33,520
है इंटरनेट वाला मार मार के दिया तू इसी बुक को मानना चाहे उस बुक उस प्रकाशन

472
00:32:33,520 --> 00:32:37,520
की चौखंबा प्रकाशन से चाहे एक ही सपोज अगर

473
00:32:37,520 --> 00:32:41,600
चौ चौखंबा प्रकाशन की रामायण है 100 रामायण है उसमें से

474
00:32:41,600 --> 00:32:45,760
एक बुक पे स्टैंप मार के दिया हुआ है आपके गुरु ने तो आप बाकी सारी बुक

475
00:32:45,760 --> 00:32:49,920
को कूड़ेदान में फेंक देना उस एक बुक को मानना राइट नहीं नहीं नहीं नहीं ऐसे नहीं ऐसे

476
00:32:49,920 --> 00:32:54,000
मानेंगे परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिए गए परंपरा प्राप्त

477
00:32:54,000 --> 00:32:58,160
नहीं बता रहा हूं ना परंपरा प्राप्त नहीं थे ब्रह्म मुनि ब्रह्म

478
00:32:58,160 --> 00:33:02,160
मुनि की टाइमलाइन बताइए पहले तो इसी टाइम लाइन के अपनी टाइम लाइन के नहीं आप आप

479
00:33:02,160 --> 00:33:06,320
बताइए ब्रह्म मुनि प्राप्त नहीं थे नहीं पूछ रहा हूं थे कि नहीं थे

480
00:33:06,320 --> 00:33:10,480
अरे भाई पहले उनके बारे में बताइए तो कौन सी परंपरा से थे ईश्वर से

481
00:33:10,480 --> 00:33:14,560
लिए थे उन्होंने वेद कहां पे एक्सिस्ट कर रहे हैं वो तो बताइए थे ब्रह्मा

482
00:33:14,560 --> 00:33:16,160
मुनि उन उनहीं के समकालीन

483
00:33:16,160 --> 00:33:20,320
थे जब आपके शयनाचार्य हुए तो उनके उनके उनके आसपास के

484
00:33:20,320 --> 00:33:24,400
थे। उनकी परंपरा क्या थी?

485
00:33:24,400 --> 00:33:28,960
उन्होंने किससे लिए थे? आपने ही मुझे बताया कि आर्य समाजी थे।

486
00:33:28,960 --> 00:33:33,040
ब्रह्म मुनि के बारे में नहीं बताया। मैंने तो मैंने तो उनके बारे में बताया था जिनके नाम के अंत

487
00:33:33,040 --> 00:33:37,600
में अलंकार आता है। मैंने उनका भी बोला था। मैंने बोला था कि मैंने जो

488
00:33:37,600 --> 00:33:41,680
मैंने मैंने अलंकार मैंने आर्य समाजी होना। अलंकार वालों के लिए साहब आपने ब्रह्म

489
00:33:41,680 --> 00:33:45,680
मुनि को एक्सेप्ट किया होगा। नहीं ब्रह्म मुनि के बारे में

490
00:33:45,680 --> 00:33:49,760
बताइए। तो वो कौन सी परंपरा से हैं? बताइए कौन सी परंपरा से हैं? मैं

491
00:33:49,760 --> 00:33:53,760
केवल इतना कहना चाह रहा हूं। मैं थोड़ा सा बता दूं कि किसी

492
00:33:53,760 --> 00:33:58,160
परंपरा प्रामाणिक परंपरा को माने बिना किसी का वैदिक सनातनी धर्म

493
00:33:58,160 --> 00:34:02,320
धार्मिक और मनुष्य होना भी सिद्ध नहीं होता। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार जिसके पास धर्म नहीं है वो मनुष्य

494
00:34:02,320 --> 00:34:06,480
नहीं है। दूसरी बात ये है कि मुंडकोपनिषद में जिसके पास जिसके पास धर्म नहीं है वो

495
00:34:06,480 --> 00:34:10,480
मनुष्य नहीं है। ठीक है। हां तो मैं आपके पास धर्म ना होना सिद्ध कर

496
00:34:10,480 --> 00:34:14,640
रहा हूं ना। मैं आपके पास धर्म ना होना सिद्ध कर रहा हूं ना। जिसके

497
00:34:14,640 --> 00:34:18,640
पास गुरु नहीं वो धर्म नहीं उसके पास। आपको कैसे पता मेरे पास गुरु नहीं है भाई

498
00:34:18,640 --> 00:34:23,280
गुरु अरे तो बताइए अरे तो बताइए आप बताइए ना माननीय

499
00:34:23,280 --> 00:34:27,600
आगे बढ़ जाएगी एक मिनट लेट मी स्पीक

500
00:34:27,600 --> 00:34:31,200
शिवश जी आप इस तरह से गुंडागर्दी टाइप से बात नहीं कर सकते

501
00:34:31,200 --> 00:34:35,440
आपको सुनना भी पड़ेगा ठीक है आपको सुनना भी पड़ेगा

502
00:34:35,440 --> 00:34:39,520
गुंडागर्दी नहीं गुंडागर्दी नहीं गुंडागर्दी नहीं है आपको बोलने

503
00:34:39,520 --> 00:34:43,760
का मौका नहीं दे रहे और तर्क पे नहीं जा रहे हैं आप सिर्फ बोले शास्त्र शास्त्र

504
00:34:43,760 --> 00:34:47,840
शास्त्र नहीं नहीं ऐसा नहीं है तर्क ही तो दे रहा हूं मैं लॉजिक अभी तो मैंने

505
00:34:47,840 --> 00:34:51,840
शास्त्र खोला ही नहीं मुंडको मुंडकोपनिषद में ऋषि

506
00:34:51,840 --> 00:34:55,920
बता रहे हैं कि मुझे ये जो वैदिक शिक्षा है कहां से मिली वो

507
00:34:55,920 --> 00:34:59,920
अपने गुरुओं के नाम बता रहे हैं। आप अपने गुरुओं के नाम बताइए। मेरे पास

508
00:34:59,920 --> 00:35:04,000
सृष्टि के प्रारंभ से होना चाहते सार्वजनिक। मैं उनका नाम नहीं बता सकती। मेरे

509
00:35:04,000 --> 00:35:08,160
गुरु अभी संसार के परंपरा बताइए। परंपरा परंपरा

510
00:35:08,160 --> 00:35:12,320
बताइए। परंपरा परंपरा बताइए। वैष्णव परंपरा है

511
00:35:12,320 --> 00:35:16,320
उनका। कौन सी परंपरा? वैष्णव है मधवाचार परंपरा है श्री संप्रदाय

512
00:35:16,320 --> 00:35:20,880
रामानुज है क्योंकि वो लोग त्रिदंड धारण करते हैं तो या तो वो रामानुज यानी कि

513
00:35:20,880 --> 00:35:25,840
ठीक है रामानुज रामानुज परंपरा आपके लिए प्रमाण है

514
00:35:25,840 --> 00:35:30,000
उसके विरुद्ध तो नहीं किताबें तो नहीं पढ़ रही हूं ना जो मेरे पास अरे भैया

515
00:35:30,000 --> 00:35:34,240
तो ये ये कैसा गुरु हुआ गुरु का मतलब होता है जिसप हम प्रमाण जिसको हम प्रमाण

516
00:35:34,240 --> 00:35:38,880
माने क्योंकि अगर आप उनको प्रमाण नहीं शिवश जी शिवश जी

517
00:35:38,880 --> 00:35:43,120
हम इस डिस्कशन के लिए आए ही नहीं थे पहली बात तो प्राय विहीन

518
00:35:43,120 --> 00:35:46,400
होने पर ही तो बात हो रही है। आप संप्रदाय विहीन होते हुए हिंदू सिद्ध नहीं

519
00:35:46,400 --> 00:35:50,640
होती है ना। वैदिक सिद्ध मेरे हिंदू होने से आप मुझे हिंदू

520
00:35:50,640 --> 00:35:55,520
नहीं मानिए। मैं यह कह रही हूं। आप मुझे मुसलमान

521
00:35:55,520 --> 00:35:59,520
आप फिलहाल ये मान लीजिए कि मैं हिंदू नहीं हूं फिलहाल। मान लिया मैं तो नहीं

522
00:35:59,520 --> 00:36:03,680
मानूंगी क्योंकि मुझे भारत की भारत की नहीं मुझे

523
00:36:03,680 --> 00:36:08,320
भारत की आपका संप्रदाय आपका संप्रदाय माने या ना माने मुझे

524
00:36:08,320 --> 00:36:12,320
मुझे भारत का कानून मुझे दुनिया का दुनिया में जितने भी यानी कि

525
00:36:12,320 --> 00:36:16,560
आपके लिए धर्म से धर्म से आगे धर्म धर्म से आगे कानून आ गया

526
00:36:16,560 --> 00:36:20,880
धर्म से आगे कानून है भाई धर्म से आगे कानून है

527
00:36:20,880 --> 00:36:25,040
हां क्यों आप कानून नहीं मानते क्या आप भारत में रह के

528
00:36:25,040 --> 00:36:29,520
भारत का कानून नहीं मानते क्या कानून कानून मानूंगा मगर जहां पर धर्म

529
00:36:29,520 --> 00:36:33,680
जहां पर धर्म क्रॉस हो रहा है वहां पर कानून के प्रति आस्था नहीं रहेगी। हां हम

530
00:36:33,680 --> 00:36:37,680
ये कोशिश करेंगे मानेंगे मानेंगे कि नहीं मानेंगे डजंट मैटर आपकी आस्था है कि नहीं है

531
00:36:37,680 --> 00:36:41,760
मानेंगे कि नहीं मानेंगे उतनी सीमा में उतनी उतनी

532
00:36:41,760 --> 00:36:45,920
सीमा में जितना मेरा धर्म क्रॉस नहीं कर रहा मगर आप समलैंगिकता

533
00:36:45,920 --> 00:36:50,560
को मानती है नहीं मानती समलैंगिकता को मानती है तो वो कानून का

534
00:36:50,560 --> 00:36:54,560
मेरे ऊपर कंपशन नहीं है लेकिन बस ऐसे ही बस ऐसे ही बस ऐसे ही मानते हैं

535
00:36:54,560 --> 00:36:58,640
हम भी कानून को ऐसे ही मानते आप कानून को ऐसे मानते हैं तो उस हिसाब से आपको

536
00:36:58,640 --> 00:37:01,440
कानून जो है कानून कभी भी हमारा परम प्रमाण

537
00:37:01,440 --> 00:37:05,600
नहीं है मेरे मेरे खानदान में कोई वर्ण शंकर नहीं रहा है तो

538
00:37:05,600 --> 00:37:10,240
इस हिसाब से मुझे वैदिक हिंदू माना जाएगा। कैसे

539
00:37:10,240 --> 00:37:14,240
आप देखिए मैं आपको समझा ये किताब मान लीजिए वेद है। ठीक है?

540
00:37:14,240 --> 00:37:18,480
ये वेद है। अब ये किताब मैंने किसी से ली। अब मैं ये कह रहा हूं कि जिससे

541
00:37:18,480 --> 00:37:22,640
मैंने ली उस पर मुझे भरोसा नहीं है। वो क्या बोल रहा है। सच बोला जो ईश्वर पे विश्वास नहीं करते। आप

542
00:37:22,640 --> 00:37:26,720
ईश्वर पे विश्वास ये आप कह रही है। ये आप कह रही मैं तो आपका उदाहरण दे

543
00:37:26,720 --> 00:37:30,880
रहा हूं। कह रही हूं कि मैं ईश्वर पे विश्वास करती हूं। अब अब वो तो ईश्वर ने जो ज्ञान दिया

544
00:37:30,880 --> 00:37:36,080
है वेदों के रूप में वो दी और उस इंटरनेट पे

545
00:37:36,080 --> 00:37:40,080
यानी कि अपने मन से आप किसी भी चीज को वेद मान लेंगी किसी भी चीज को कैसे

546
00:37:40,080 --> 00:37:44,480
वेद मान लूंगी भाई वो क्या आधार है किसी चीज को किसी चीज को

547
00:37:44,480 --> 00:37:48,560
हां ऑथेंटिक किसने किया उसे कैसे ऑथेंटिक है यानी कि आप उस वेबसाइट के

548
00:37:48,560 --> 00:37:52,640
विरुद्ध नहीं जाएंगे आप आर्य समाज को ऑथेंटिक नहीं मानते उन्होंने कौन

549
00:37:52,640 --> 00:37:57,040
सा अपराध किया जो आप उनको ऑथेंटिक नहीं मानते

550
00:37:57,040 --> 00:38:01,040
ये हमारी चर्चा का विषय नहीं है। क्यों? ओ माय गॉड। मतलब जहां

551
00:38:01,040 --> 00:38:05,200
अच्छे से जाओ वो आपकी चर्चा का विषय नहीं है। ठीक है। ठीक है। मैं बता रहा हूं। आर्य

552
00:38:05,200 --> 00:38:09,280
समाज के पास वेद कहां से आए? बताइए। उनके गुरु से आए। उनके गुरु परंपरा

553
00:38:09,280 --> 00:38:13,280
से आए। नाम बताइए। नाम दयानंद सरस्वती कुछ तो अच्छा किया

554
00:38:13,280 --> 00:38:17,280
होगा। उनको देके मारा या श्रद्धानंद

555
00:38:17,280 --> 00:38:21,440
में चले हम कुछ तो अच्छा किया होगा। कुछ अच्छा किया होगा।

556
00:38:21,440 --> 00:38:26,400
गोली मारा आपका लॉजिक है सरस्वती

557
00:38:26,400 --> 00:38:30,560
आप अगर इस तरीके से आरोप लगाने

558
00:38:30,560 --> 00:38:34,560
के लिएंगी आप अपनी वैदिकता सिद्ध करें कृपा

559
00:38:34,560 --> 00:38:38,640
करके वैदिकता नहीं हम यहां

560
00:38:38,640 --> 00:38:42,800
आए ही नहीं आप मुझे तो आप आप संप्रदाय पर आरोप लगा

561
00:38:42,800 --> 00:38:46,800
रही हैं। आप संप्रदाय विहीन होते हुए स्वयं को सनातनी हिंदू वैदिक

562
00:38:46,800 --> 00:38:50,640
आर्य किसको सिद्ध कर दीजिए

563
00:38:50,640 --> 00:38:54,720
आपने संप्रदाय का विरोध किया है ना आप जिनको मातृ शक्ति कह रहे

564
00:38:54,720 --> 00:38:58,720
हो जिन चार आपने संप्रदाय का विरोध किया है ना वो गलत

565
00:38:58,720 --> 00:39:02,960
है जिन्होंने ऐसा किया है वो गलत है तो हिंदू है वो वैदिक

566
00:39:02,960 --> 00:39:07,280
हिंदू हैं उनको वेदों का ज्ञान है सपोर्ट

567
00:39:07,280 --> 00:39:13,280
में आप लोग डाल रहे थे जिनसे जिनका सपोर्ट ले रहे थे वो वैदिक है

568
00:39:13,280 --> 00:39:17,280
शास्त्रों का ज्ञान मुझे है। मैं ठीक है। मैं एक चीज बता दूं आपको

569
00:39:17,280 --> 00:39:21,360
थोड़ा काम डाउन हो जाइए। ठीक है। आप भी हो आप भी आप भी

570
00:39:21,360 --> 00:39:26,720
मस्कारी मत कीजिए प्लीज। मैं आपसे विनती करती हूं। आप शंकराचार्य संप्रदाय

571
00:39:26,720 --> 00:39:30,800
से आप इस तरह के आप इस समय इस तरह के शब्दों

572
00:39:30,800 --> 00:39:33,360
का प्रयोग करेंगे।

573
00:39:33,360 --> 00:39:37,600
शब्दों का प्रयोग क्योंकि आपने मुझे धोखा दिया है। अभी मुझे जाना पड़ेगा आप

574
00:39:37,600 --> 00:39:40,720
मुझे जाना पड़ेगा। डिस्कशन जिस चीज पर होनी थी जो

575
00:39:40,720 --> 00:39:44,720
शब्द के लिए आप वापस ले लीजिए आप अगरेंग तो मुझे जाना पड़ेगा नहीं

576
00:39:44,720 --> 00:39:49,760
लूंगी मैं बिल्कुल नहीं लूंगी इसलिए क्योंकि आप आधार पर डिस्कशन

577
00:39:49,760 --> 00:39:54,320
ठीक है सभी को जय श्री राम आप लोगों ने देखा इन माननीय

578
00:39:54,320 --> 00:39:59,520
के साथ हमारी चर्चा हुई और हमने इनसे इन्होंने

579
00:39:59,520 --> 00:40:03,520
शंकराचार्य परंपरा पर जो है विरोध

580
00:40:03,520 --> 00:40:07,520
करना स्वीकार किया था तो हमारा एक छोटा सा प्रश्न

581
00:40:07,520 --> 00:40:11,600
है यदि आप संप्रदाय विहीन हैं। यदि आप संप्रदाय

582
00:40:11,600 --> 00:40:15,760
विहीन हैं तो आप किस प्रकार से वैदिक सनातनी आर्य हिंदू सिद्ध

583
00:40:15,760 --> 00:40:19,760
होते हैं। ठीक है? कि जिससे कि हम आपको प्रमाण दे पाए। जैसे

584
00:40:19,760 --> 00:40:23,760
रामानुज को भी मानने वाली हो रही तो मैं रामानुज से ही प्रमाण दे दूं भाई कि रामानुज

585
00:40:23,760 --> 00:40:27,920
क्या मानते हैं इस विषय में कि विदेश गमन करना

586
00:40:27,920 --> 00:40:32,320
चाहिए कि नहीं करना चाहिए। अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] दूसरी

587
00:40:32,320 --> 00:40:36,400
बात यह है कि अभी आ रही है किसी

588
00:40:36,400 --> 00:40:40,400
और की आवाज अच्छा दूसरी बात यह है कि अब मैं प्रमाण यहां पर दे

589
00:40:40,400 --> 00:40:44,400
देता हूं वहां पर वहां से तो प्रमाण वो

590
00:40:44,400 --> 00:40:48,640
मैं बताना चाह रहा था बार-बार अब मैं देता हूं प्रमाण थोड़े से मुंडकोपनिषद में

591
00:40:48,640 --> 00:40:52,720
एक एक से ले चार तक ऋषि मुनि ये बता रहे हैं

592
00:40:52,720 --> 00:40:56,240
कि हमारे पास ब्रह्म विद्या वैदिक विद्या कहां से आई

593
00:40:56,240 --> 00:41:00,240
ठीक है ऋषि मुनि बता रहे हैं मेरा गुरु कौन है मगर आज का

594
00:41:00,240 --> 00:41:04,560
एक सामान्य व्यक्ति जो शंकराचार्य का विरोध करने चला है उसको वो नहीं बताएगा

595
00:41:04,560 --> 00:41:08,640
कि उसका गुरु कौन है बिना गुरु के आपका वैदिक होना ही सिद्ध नहीं होगा।

596
00:41:08,640 --> 00:41:12,720
वैदिक ना बिना हुए मानवता कैसे सिद्ध हो जाएगी? मैं मानव हूं। आ गए

597
00:41:12,720 --> 00:41:16,880
ना मानवता संविधान को ले आया ना बीच में।

598
00:41:16,880 --> 00:41:20,960
ठीक है? अच्छा और अगर इन्होंने कहा

599
00:41:20,960 --> 00:41:24,960
कि आदि शंकराचार्य जी से मैंने वेद लिए हैं। हालांकि आदि शंकराचार्य की किताबें इन

600
00:41:24,960 --> 00:41:29,280
तक कैसे आई वो भी सिद्ध नहीं हो रहा है। फिर भी आदि शंकराचार्य जी

601
00:41:29,280 --> 00:41:33,280
अपनी भगवत गीता के भाष्य के 13 वे अध्याय के दूसरे श्लोक में लिख रहे

602
00:41:33,280 --> 00:41:39,120
हैं। संप्रदाय विहीन व्यक्ति कितना भी विद्वान हो उसको त्याग दो।

603
00:41:39,120 --> 00:41:43,120
तो आर्य समाज को कैसे जो है अपना प्रमाण मान रही है। अच्छा आर्य समाज

604
00:41:43,120 --> 00:41:47,760
स्वतंत्र रूप से आर्य समाज से पूछ लो वेद कहां से आया? तो आज तक उनके पास जवाब नहीं है।

605
00:41:47,760 --> 00:41:52,320
वह घूम घूमते फिर रहे हैं। अच्छा अब उनको अगर प्रमाण मानती हैं।

606
00:41:52,320 --> 00:41:58,320
यह उनको अगर प्रमाण मानती हैं तो

607
00:41:58,480 --> 00:42:01,120
इनके

608
00:42:01,120 --> 00:42:05,200
वो जरा दिखा दीजिए। नवीन जी मैंने एक आपको अभी भेजा है कि जो

609
00:42:05,200 --> 00:42:09,600
मूर्ति पूजा है वह क्या कहते हैं? वो है अधर्म। यह

610
00:42:09,600 --> 00:42:11,520
लिखा है। रामलीला देखने

611
00:42:11,520 --> 00:42:15,680
पर आप 100 वर्षों तक जो अश्वमेध यज्ञ करते हो ना उतना पाप आपको

612
00:42:15,680 --> 00:42:19,680
लगता है। मूर्ति पूजा अधर्म है। ये हर हर महादेव कहती है ना हर

613
00:42:19,680 --> 00:42:23,760
हर महादेव कहती है ना दयानंद जी ने क्या लिखा है शिव जी के बारे

614
00:42:23,760 --> 00:42:27,840
में कि अगर शिव जी कैलाश में रहते हैं तो वो

615
00:42:27,840 --> 00:42:32,000
जो वहां पर जो शिवजी है वो क्या हिज उनका शिवलिंग यहां पर है तो जो

616
00:42:32,000 --> 00:42:36,080
कैलाश में शिव वो है वो क्या हिजड़े हो गए ये इनके प्रमाण है

617
00:42:36,080 --> 00:42:40,240
दयानंद जी पूछ रही थी ना क्या अपराध किया मैं केवल इसलिए नहीं बोल

618
00:42:40,240 --> 00:42:44,960
रहा हूं केवल इसलिए कि टॉपिक को मुझे बचाना है जो टॉपिक है मूल प्रश्न

619
00:42:44,960 --> 00:42:49,840
संप्रदाय का विरोध होते हुए संप्रदाय विहीन होते हुए

620
00:42:49,840 --> 00:42:53,920
आप कैसे खुद को सनातनी क्लेम कर सकते हैं? वैदिक

621
00:42:53,920 --> 00:42:58,080
सिद्ध कर सकते हैं या शंकराचार्यों को ना मानते हुए

622
00:42:58,080 --> 00:43:02,160
आप स्वयं को कैसे आदि शंकराचार्य को मानने वाला सिद्ध कर सकते हैं? आप हमारे बारे

623
00:43:02,160 --> 00:43:06,480
में देख लीजिएगा। माननीय हिस्ट्री देख लीजिएगा। हर व्यक्ति इनहीं सब सवालों

624
00:43:06,480 --> 00:43:10,720
से परेशान है। लगा कि रामपाल हो या ब्रह्मा कुमारी हो यान

625
00:43:10,720 --> 00:43:15,360
हो या आर्य समाज हो सब परेशान है। बंटी और बबली देखी है क्या आपने?

626
00:43:15,360 --> 00:43:19,440
बंटी और बबली में रात को अमिताभ बच्चन जो खटिया पर उठ उठ के खड़ा हो जाता था ना

627
00:43:19,440 --> 00:43:23,520
सपनों में आते थे उसके बंटी बबली ऐसे ही आहान सपनों में

628
00:43:23,520 --> 00:43:26,560
आता है इन अप्रामाणिक लोगों के और

629
00:43:26,560 --> 00:43:31,040
रात में उठ उठ के खड़े होते हैं जाना चाहिए था आपको आपको

630
00:43:31,040 --> 00:43:35,120
अरे आप थोड़ी देर और रुकते हैं ना वो हो गया था उनका आपको हटना नहीं चाहिए था

631
00:43:35,120 --> 00:43:39,200
वहां से आप समझ नहीं रहे देखिए मैं उनके जवाब अब मक्कारी

632
00:43:39,200 --> 00:43:43,200
से मैं मक्कारी बोल गया अब वो आगे पता नहीं क्या बात कह जो मुझे सुन के आना

633
00:43:43,200 --> 00:43:47,280
पड़े हैं तो मैं भाई जो व्यक्ति जिसके पास

634
00:43:47,280 --> 00:43:51,920
धर्म नहीं है जिसके पास क्वेश्चन में ही वो हो गया था उनका काम जब

635
00:43:51,920 --> 00:43:56,000
मैंने क्या कहा था मैंने मैंने रील क्या रील में क्या

636
00:43:56,000 --> 00:44:01,040
कहा था पांच मिनट कहा था ना आबा हो गया

637
00:44:01,040 --> 00:44:05,680
आबा बाबा हो गया ना इसीलिए कहते हैं मत

638
00:44:05,680 --> 00:44:09,680
हां ठीक है नहीं हो इसीलिए कहते हैं मत पढ़ो चक्कर में

639
00:44:09,680 --> 00:44:13,840
भाई मत पढ़ो मत पढ़ो और इन इन माननीय को मैंने अभी

640
00:44:13,840 --> 00:44:17,920
कल कल रात को चैट में बहुत देर तक समझाने का प्रयास किया।

641
00:44:17,920 --> 00:44:22,480
ठीक है? मुझे कोई अच्छा नहीं लगा कि भाई मुझे मैं इनकी इस तरह से इनकी चीजें बाहर लाऊं।

642
00:44:22,480 --> 00:44:26,560
है ना? संप्रदाय का विरोध करते हुए संप्रदाय विहीन होते

643
00:44:26,560 --> 00:44:30,800
हुए ना तो आपका वैदिक होना सिद्ध होगा फिर ना आपका सनातनी होना

644
00:44:30,800 --> 00:44:34,880
सिद्ध होगा। सनातन के बाहर जाते ही आप जो कह रही थी ना मैं मुसलमान हूं। मुसलमान हूं।

645
00:44:34,880 --> 00:44:39,520
सनातन के बाहर जाते ही आपको ईश्वर को मान ना मानने वाला सिद्ध करेंगे हम।

646
00:44:39,520 --> 00:44:42,910
अभी आप समझ नहीं पाओ हम कौन है।

647
00:44:42,910 --> 00:44:47,120
[हंसी] आखरी विकल्प है शंकराचार्य। फिर हम जब

648
00:44:47,120 --> 00:44:51,200
आप मुसलमान बनोगे ना आपने कहा मैं मुसलमान हूं। जब आप मुसलमान बनोगे तब

649
00:44:51,200 --> 00:44:55,440
हम आपका सिद्ध करेंगे। आप ईश्वर को नहीं मानते। जब आप ईश्वर को ना मानने

650
00:44:55,440 --> 00:44:59,520
वाले सिद्ध होगे तब हम सिद्ध करेंगे कि आप धर्म को नहीं मानते। धर्म नहीं है आपका कुछ भी। कुछ

651
00:44:59,520 --> 00:45:03,760
भी कर सकते हो। अरे जब ही नहीं बीच में

652
00:45:03,760 --> 00:45:07,920
बीच उन्होंने क्या किया था? उन्होंने आर्य समाज का भी लिया था। लाठी पकड़ी थी एक बार

653
00:45:07,920 --> 00:45:13,920
कि मैं तो उसको बस गुरु परंपरा पूछी तो खत्म [हंसी]

654
00:45:14,640 --> 00:45:18,720
आर्य समाज आर्य समाज नहीं बता पा रहे हैं जब वो नहीं बता पा रहे हैं हमारी गुरु

655
00:45:18,720 --> 00:45:22,800
परंपरा क्या है तो आप क्या बताएंगी आरकाव इनका प्रमाण है अब मैं कुछ प्रमाण

656
00:45:22,800 --> 00:45:27,040
दे दूं लगातार देखिए मैं प्रमाण दे भगवत गीता चार दो भगवान कह रहे हैं परंपरा

657
00:45:27,040 --> 00:45:31,360
से ज्ञान आ रहा है ठीक है भगवत गीता 36 उसमें जो परंपरा

658
00:45:31,360 --> 00:45:35,520
सृष्टि के परंपरा चक्र से जो चला आ रहा है ज्ञान है उसका विरोध

659
00:45:35,520 --> 00:45:40,240
करने वाले को मोक्ष नहीं मिलता। तीसरा मुंडकोपनिषद

660
00:45:40,240 --> 00:45:44,320
का मैंने दे ही दिया। निरुक्त का निरुक्त का हम देते रहते हैं। निरुक्त में

661
00:45:44,320 --> 00:45:48,640
भी आचार्य यास्क ने श्रुति परंपरा श्रुति का मतलब ही परंपरा।

662
00:45:48,640 --> 00:45:52,960
श्रुति परंपरा किससे सुना भाई? कोई आका

663
00:45:52,960 --> 00:45:57,120
कोई आकाइव पे इंटरनेट पर डाल लेगा तो आप उसको वेद मान लोगे। आप उस पे

664
00:45:57,120 --> 00:46:01,280
किसी से ठप्पा लगवाओगे। ये वेद है। और जिससे ठप्पा लगवाओगे उस उसको

665
00:46:01,280 --> 00:46:05,280
आप झूठा नहीं कह सकते। अज्ञानी नहीं कह सकते। क्योंकि जो आपको झूठ बोल सकता है

666
00:46:05,280 --> 00:46:09,360
अर्थ के रूप में, जो आपको अज्ञानता परोस सकता है अर्थ के रूप में, वो आपको

667
00:46:09,360 --> 00:46:13,360
वैदिक नाम पे गलत मंत्र भी दे सकता है। यह बहुत

668
00:46:13,360 --> 00:46:17,440
बड़ा युद्ध है। इसको समझिए। जिस दिन जाकिर नायक के सामने

669
00:46:17,440 --> 00:46:21,600
खड़े होगे, किसी मुसलमान के सामने खड़े होगे और वो आपको आपके वेदों का अर्थ

670
00:46:21,600 --> 00:46:25,600
बता रहा होगा। एक ही शब्द के दो अर्थ निकल रहे होंगे। तब आपके पास अकाट उत्तर

671
00:46:25,600 --> 00:46:29,760
नहीं होगा उसको चुप कराने का कि प्रतिमा का अर्थ क्यों क्यों ना माना जाए?

672
00:46:29,760 --> 00:46:33,760
मूर्ति अकाट उत्तर नहीं होगा। हुआ जो तुमको मानना है वो मान

673
00:46:33,760 --> 00:46:38,240
लो जो हमको मानना होगा हमारे पास अकाट उत्तर होगा अकाट्य निरत्तर

674
00:46:38,240 --> 00:46:42,880
करेंगे हम सामने वाले को इसको कहते हैं मैं सोच रहा हूं अंतिम मैं चला जाता हूं लाइव

675
00:46:42,880 --> 00:46:47,360
उनसे जरा इसी बात पे बात ही कर लेता हूं परंपरा बता दो बस एक बार आपकी क्या है

676
00:46:47,360 --> 00:46:51,360
गुरु कौन है वो असल में देखो वो तैयार हो के आई हैं कि हम जब

677
00:46:51,360 --> 00:46:55,360
बिगड़ने लगेगा तो हमारे पास अभद्र भाषा शैली अमेरिका में बैठी है क्या

678
00:46:55,360 --> 00:46:59,600
कर लेंगे यहां पर किसी विदेश में बैठी हुई है यहां क्या कर लेंगे भाई

679
00:46:59,600 --> 00:47:03,680
एफआईआर कराते घूमेंगे कि इन्होंने हमें यह कह दिया वो को कह दिया। अच्छा हमारे पास तो इतना

680
00:47:03,680 --> 00:47:07,680
बल है नहीं कि हम गाली का जवाब गाली से दें। हां गाली के पीछे गोली जरूर चल

681
00:47:07,680 --> 00:47:11,760
जाती है। गाली के पीछे गोली जरूर चल जाती है। मगर हमें गोली तक जाना ही क्यों है? वहां से

682
00:47:11,760 --> 00:47:15,920
हट जाओ भाई दूर हट जाओ। वो कह वो डायलॉग था ना हम बीड़ में रहते हैं। गाली के पीछे

683
00:47:15,920 --> 00:47:19,460
गोली चल जाती है। पान सिंह तोमर

684
00:47:19,460 --> 00:47:23,600
[हंसी] हम बीड़ के बागी हैं। तो कहने का अर्थ यह

685
00:47:23,600 --> 00:47:27,760
है प्रमाण मैं दे रहा था। आदि शंकराचार्य

686
00:47:27,760 --> 00:47:31,760
को यदि आप मानते हो तो 13व अध्याय के दूसरे श्लोक में उन्होंने कहा है संप्रदाय विहीन को

687
00:47:31,760 --> 00:47:35,760
त्याग देना चाहिए जो यह आपके है ना जिनका आप नाम ले रहे

688
00:47:35,760 --> 00:47:39,840
हो अलंकार और ये सब ये सब संप्रदाय विहीन है विद्वान भी हो तब

689
00:47:39,840 --> 00:47:43,920
भी त्याग दो आदि शंकराचार्य को यदि मानते हो तब बात कर रहे हो फिर भी आपका आदि

690
00:47:43,920 --> 00:47:44,960
शंकराचार्य जी को मानने

691
00:47:44,960 --> 00:47:49,120
वाला सिद्ध नहीं होता क्योंकि उनके जो प्रामाणिक शिष्य हैं उन उन पर आपका भरोसा नहीं है

692
00:47:49,120 --> 00:47:54,000
ये बात हो गई लॉजिक लेके तो हम चल रहे हैं ना भाई आप हो इलॉजिकल

693
00:47:54,000 --> 00:47:58,400
बिना गुरु का झंडा उठाए हो के हम बहुत बड़े हिंदू है सनातनी बताइए

694
00:47:58,400 --> 00:48:02,400
गलत बात है ना फिर आप जब फंस रहे हो तो आप मक्कारी पे जा रहे हो गौ व पे जा रहे हो ये

695
00:48:02,400 --> 00:48:06,640
कर रहे हो वो कर रहे हो सबके जवाब हैं पर पहले आप ये निश्चित करिए

696
00:48:06,640 --> 00:48:11,200
कि हमको वेदों से प्रमाण देना है कि नहीं देना वेदों से देना है तो क्यों देना है

697
00:48:11,200 --> 00:48:15,360
वेद आप अगर वेद को प्रमाण मानना है तो क्यों मानना है ना तो

698
00:48:15,360 --> 00:48:19,440
फिर वेदों से हम जाएंगे और उसके बाद भी जब आपने ये मान लिया

699
00:48:19,440 --> 00:48:23,680
कि शंकर परंपरा से आपको वेद मिले हैं। रामानुजाचार्य परंपरा से आपको वेद मिले हैं।

700
00:48:23,680 --> 00:48:27,920
यदि आपने यह मान लिया तो उसके बाद मानने के बाद आपको

701
00:48:27,920 --> 00:48:32,480
छंदोग उपनिषद के अनुसार शरणागत होकर के आना है। शरणागत

702
00:48:32,480 --> 00:48:36,560
सर झुका के तब प्रश्नों का जवाब दिया जाएगा।

703
00:48:36,560 --> 00:48:40,560
सर झुका के जाना है। वरना पहले ही खत्म कर देंगे

704
00:48:40,560 --> 00:48:44,880
मानवता आपकी। बताइए।

705
00:48:44,880 --> 00:48:49,520
अब जब वो फंसने लगी तो क्या करने लगी? तुम गौली और तुम स्वरूपानंद

706
00:48:49,520 --> 00:48:53,840
और जो है तुम जो है तुम्हारे गुरु भाई बहन और जो है आदि शंकराचार्य से मिला है इनको ज्ञान

707
00:48:53,840 --> 00:48:58,000
डायरेक्ट हां शिव पहले शिव जी अच्छा मैं थोड़ा मैं

708
00:48:58,000 --> 00:49:00,160
थोड़ा सा उसमें कॉमेडी में आने वाला था वो कहने

709
00:49:00,160 --> 00:49:04,320
वो जब ये कह रही थी शिवजी है मेरे गुरु तो मुझे लगा अब ये ये कह दे

710
00:49:04,320 --> 00:49:08,560
वो ये कह दे वो ये कह दे कि मुझे डायरेक्ट शिवजी से मिला है

711
00:49:08,560 --> 00:49:12,560
अगर ये कह देती तो वो बाबा जी जैसा हाल होता भैया सुना

712
00:49:12,560 --> 00:49:16,720
सुनाइए द ऋग्वेद के दसवे मंडल का 192 सूत्र था अच्छा एक

713
00:49:16,720 --> 00:49:20,960
एक खंबा लेके आई थी वो आर्य समाज का मुझे मालूम था किसी

714
00:49:20,960 --> 00:49:23,280
को लाएंगी

715
00:49:23,280 --> 00:49:27,280
मगर हम तो घर से था हां तीसरा व्यक्ति आर्यन वहां

716
00:49:27,280 --> 00:49:31,360
पे था ना हां अच्छा अच्छा वो कोई आर्य समाजी को लेके आई थी

717
00:49:31,360 --> 00:49:35,360
अपने उसमें सुरक्षा में तो भाई हम तो घर से निकले ही थे बांध कर

718
00:49:35,360 --> 00:49:39,440
सर पे कफन जहां हथेली पर लिए लो बढ़ चले एक कदम जिंदगी तो अपनी

719
00:49:39,440 --> 00:49:43,600
महमा मौत की महफिल में सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ठीक है

720
00:49:43,600 --> 00:49:47,760
अब हमारे दिल में है थोड़ा सा इतिहास क्लास देखिए उठा के कि क्या

721
00:49:47,760 --> 00:49:52,000
है किसके सामने जा रहे इसीलिए कहा था इसीलिए कहा था मैं मेरा व्यक्तिगत

722
00:49:52,000 --> 00:49:56,080
आपके आपको परामर्श है 5 मिनट 510 मिनट से ज्यादा टिकनी पर

723
00:49:56,080 --> 00:50:00,080
दूर दूर रहिए अच्छा है बढ़िया 188000 फॉलोवर्स का आपने बना रखा है

724
00:50:00,080 --> 00:50:04,160
बढ़िया उसमें मगन रहिए डॉक्टरी करिए खामखा शंकराचार्य

725
00:50:04,160 --> 00:50:08,480
के सैनिकों से ना भिड़िए हां मैं उनकी निंदा अवश्य करता हूं जिन्होंने

726
00:50:08,480 --> 00:50:12,560
इन्होंने जब क्वेश्चन उठाया अगर मर्यादित शैली में उठाया और वो अमर्यादित

727
00:50:12,560 --> 00:50:15,360
हुए और यदि अमर्यादित शैली में भी इन्होंने क्वेश्चन

728
00:50:15,360 --> 00:50:20,160
उठाया तो यह अमर्यादित हो गए। यह भी गलत है। यह भी गलत है।

729
00:50:20,160 --> 00:50:24,320
तुम नीच लोग हो। तुम नीच लोग हो जो शंकराचार्य का नाम

730
00:50:24,320 --> 00:50:28,480
डुबो रहे हो। जो ऐसा कर रहे हो शंकराचार्य का नाम लेकर के वहां जाकर के एक महिला

731
00:50:28,480 --> 00:50:32,480
ने अगर कुछ बोल दिया तो उसको तुम भी उसी की तरह बोलने लगे। ये नीचता है धर्म नहीं

732
00:50:32,480 --> 00:50:36,800
है। ये राम ने सिखाया है तुमको।

733
00:50:36,800 --> 00:50:40,800
राम ने सिखाया है। गिरो मगर उस झरने की तरह जो

734
00:50:40,800 --> 00:50:44,880
गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। मर जाओ। धर्म

735
00:50:44,880 --> 00:50:48,240
का साथ मत छोड़ो।

736
00:50:48,240 --> 00:50:52,320
मगर नहीं हम बहुत बड़े गुरु के शिष्य हैं। बहुत बड़े गुरु के शिष्य हैं। अब हम किसी

737
00:50:52,320 --> 00:50:57,120
को भी कुछ भी कह देंगे। नीच लोग हो तुम लोग।

738
00:50:57,120 --> 00:51:01,200
तुम्हारी वजह से इस तरह के वातावरण निर्मित होते

739
00:51:01,200 --> 00:51:05,360
हैं। तुम्हारी वजह से शंकराचार्यों को कहीं पर खामखा की लड़ाई

740
00:51:05,360 --> 00:51:09,360
मोल लेनी पड़ती है। तुम्हारी वजह से 10 महत्वपूर्ण काम छोड़कर के ऐसे

741
00:51:09,360 --> 00:51:13,680
व्यर्थ के कामों में आना पड़ता है। अरे भैया बौद्धों के लिए बोल रही है। मुस्लिमों

742
00:51:13,680 --> 00:51:17,680
के लिए बोल रही है। ठीक है। कुछ अगर मर्यादा में रह के बोल दिया किसी तो चलेगा

743
00:51:17,680 --> 00:51:22,000
बस तुमने हाउ डेयर यू? हाउ डेयर यू कोई काम ना धाम जाके

744
00:51:22,000 --> 00:51:26,000
बौद्धों से भिड़ो ना। दिन भर शंकराचार्य को गाली दे रहे हैं। वही भागवतानंद का

745
00:51:26,000 --> 00:51:30,080
हाल है। जो रामभद्राचार्य जी ने तुम्हारे गुरु को ये कह दिया वो कह दिया तो तुम क्यों नहीं जा रहे?

746
00:51:30,080 --> 00:51:34,160
अरे भैया तुमने इतने भयानक भयानक वक्तव्य देने वाले दिन भर वो साइंस

747
00:51:34,160 --> 00:51:38,880
जर्नी कितनी गाली देता है। क्या कर लिया तुमने उसका?

748
00:51:38,880 --> 00:51:42,880
सब कुछ छोड़ के इसके पीछे लग गए। तुम जैसे लोगों की वजह से

749
00:51:42,880 --> 00:51:46,880
यह जो वातावरण है ना यह विप्लवकारी यह उत्पन्न होता

750
00:51:46,880 --> 00:51:50,800
है। दो हिंदू हिंदू आपस में लड़ रहे हैं भैया।

751
00:51:50,800 --> 00:51:54,880
अब मुझे उसे समझाना पड़ रहा है उन्हें। इसी बात के लिए

752
00:51:54,880 --> 00:51:58,960
एक बार ब्रह्मचारी जी महा महाग से बात हो रही थी। चर्चा

753
00:51:58,960 --> 00:52:03,040
हो रही थी एकांत में ही। तो बड़ा गुस्सा हो रहे थे। इसी बात को लेकर। उन्होंने कहा था

754
00:52:03,040 --> 00:52:03,600
कमेंट

755
00:52:03,600 --> 00:52:07,600
लोग आदि लोग अपने आप को शंकराचार्य का गुरुदेव का शिष्य बताकर ऐसी

756
00:52:07,600 --> 00:52:11,680
ऐसी बातें करने लगते हैं। कहते मन करता है कि मतलब इनका तो भगवती

757
00:52:11,680 --> 00:52:15,680
का कुछ भुगवा दूं इनके ऊपर मैं मतलब इतना गुस्सा हो गए

758
00:52:15,680 --> 00:52:19,760
थे वो लोग वो ब्रह्मचारी जी इतना गुस्सा हो गए थे कहते भगवा ना खाना

759
00:52:19,760 --> 00:52:23,760
खा पाए ठीक से ना बाहर निकाल पाए ठीक से ये इन लोगों

760
00:52:23,760 --> 00:52:27,840
ने ज्यादा फफूंद मचा रखी है हाउ डेयर यू तुमने कैसे

761
00:52:27,840 --> 00:52:31,920
बोल दिया बस इनको यही दिखा और कुछ दिखा ही नहीं जी ओशो

762
00:52:31,920 --> 00:52:35,920
वाले दिनों रात गाली दिया करते हैं बुद्ध वाले दिनों गाली दिया करते कोई नहीं दिख

763
00:52:35,920 --> 00:52:39,920
रहा तुमको एकमात्र शक्ति मिल गई उसको उसको जाकर के वो किसी

764
00:52:39,920 --> 00:52:44,000
संप्रदाय वगैरह से है नहीं अपना जो ठीक है वो अपने जो भी उसको

765
00:52:44,000 --> 00:52:48,000
समझ में आ रहा है अपना कर रही है भिड़ गए उससे जाके खामखा अरे आओ ना भैया

766
00:52:48,000 --> 00:52:52,080
रामपाल का विरोध करो आके लखनऊ में हैं जाओ

767
00:52:52,080 --> 00:52:56,720
जा के हाई कोर्ट में केस करो रामपाल के विरुद्ध तुम्हारी मां को गाली दी है दुर्गा मां को

768
00:52:56,720 --> 00:53:01,200
नहीं वो नहीं होगा केवल कीबोर्ड वॉरियर बनेंगे

769
00:53:01,200 --> 00:53:05,520
कीबोर्ड वॉरियर तुम्हारे लिए धर्म कुछ नहीं है भगवान कुछ नहीं है केवल तुम्हारा

770
00:53:05,520 --> 00:53:09,520
अपना जो वर्चस्व है ना उसकी रक्षा करते हो तुम इस तरह हम

771
00:53:09,520 --> 00:53:15,520
और तुम जैसे नीच लोगों की वजह से हम जैसे लोगों को जूझना पड़ता है इन परिस्थितियों से।

772
00:53:16,720 --> 00:53:20,800
स्वाता सुख के लिए खाली बस मैं कीबोर्ड पे लिख दूंगा और

773
00:53:20,800 --> 00:53:25,120
कूल बन जाऊंगा। यही है। गलत

774
00:53:25,120 --> 00:53:29,440
ये तो है। अगर उसने अमर्यादित आचरण किया भी है तब भी वहां आप अमर्यादित

775
00:53:29,440 --> 00:53:35,440
नहीं हो सकते। जाके रिपोर्ट लिखाओ। धर्म की लड़ाई लड़ो।

776
00:53:36,160 --> 00:53:42,160
सनातनी हो तुम मत भूलो शंकराचार्य के शिष्य हो मत भूलो

777
00:53:44,640 --> 00:53:48,880
और क्रोध को पालना सीखो उस क्रोध को डायरेक्शन देना सीखो

778
00:53:48,880 --> 00:53:53,040
कहां पे सारा क्रोध एक प्रश्न में आ गया परंपरा क्या है आपकी बताइए

779
00:53:53,040 --> 00:53:57,600
लो हो गया व्यक्ति वा

780
00:53:57,600 --> 00:54:01,600
पूछ रहा हूं रामानुजाचार्य पर है लेकिन आपने उनको बहुत बोलने

781
00:54:01,600 --> 00:54:06,480
का समय दिया है कई बार इतना आप देते नहीं है

782
00:54:06,480 --> 00:54:10,800
आपने उनको बोलने का काफी समय दिया उन्हें। एक भाई साहब अवनीश

783
00:54:10,800 --> 00:54:15,280
जी पूछ रहे हैं किया किसने है ये? एक तो ये माउस इतनी तेज चलता है मेरा।

784
00:54:15,280 --> 00:54:19,280
ऐसा है अवनीश जी मैं आपको थोड़ा सा वृतांत बता देता हूं। हालांकि उसमें भी

785
00:54:19,280 --> 00:54:23,360
वृतांत बताया है। ये संप्रदाय

786
00:54:23,360 --> 00:54:27,600
विहीन हिंदू हैं। मूल में इनके संप्रदाय है नहीं कोई। क्योंकि

787
00:54:27,600 --> 00:54:31,760
इनके लिए यदि कोई संप्रदाय होगा तो उसको इन्हें प्रमाण मानना पड़ेगा। प्रमाण

788
00:54:31,760 --> 00:54:35,760
मानना पड़ेगा। तो उसने जो भी अर्थ किया होगा उसके विरुद्ध नहीं जा पाएंगी वेद

789
00:54:35,760 --> 00:54:39,840
शास्त्रों का क्योंकि विरुद्ध तो फिर प्रमाण सिद्ध नहीं होगा वेदों

790
00:54:39,840 --> 00:54:43,920
को मानना तो ये संप्रदाय विहीन हिंदू हैं।

791
00:54:43,920 --> 00:54:48,240
है ना जिसको हम लोगों ने यह नहीं इनके लिए नहीं कह रहा हूं मगर इस तरह के हिंदुओं

792
00:54:48,240 --> 00:54:52,320
को हमने Honda हिंदू नामकरण दिया है। Honda हिंदू कुछ पता नहीं

793
00:54:52,320 --> 00:54:56,560
है धर्म क्या है? कहां से निकल रहा है? कहां से हो रहा है? अभी आकर के बोल देगा

794
00:54:56,560 --> 00:55:00,800
कोई संस्कृतक बन जाएगा मुसलमान हो। वो कहेगा मैं करूंगा तुम्हारे वेदों का भाष्य।

795
00:55:00,800 --> 00:55:04,800
तुम क्यों करोगे? हम क्यों नहीं करेंगे? दो अर्थ निकल रहे हैं। कई मंत्रों के

796
00:55:04,800 --> 00:55:10,560
दो अर्थ निकल रहे हैं। तो मैं करूंगा भाष्य। तुम क्यों नहीं करोगे?

797
00:55:10,560 --> 00:55:14,720
तो तुम क्या कहोगे वहां पे? है तुम्हारे पास परंपरा नहीं है।

798
00:55:14,720 --> 00:55:18,880
हम कहेंगे वहां पर तब हमारी जरूरत पड़ेगी। तुम तुम लोगों को

799
00:55:18,880 --> 00:55:21,760
इतनी सी बात समझ में नहीं आ रही। वेदों का प्रमाण

800
00:55:21,760 --> 00:55:25,920
शंकराचार्य हैं। परंपरा प्राप्त आचार्य है वेदों

801
00:55:25,920 --> 00:55:30,000
का प्रमाण। तो आपका धर्म जो भी है परंपरा प्राप्त

802
00:55:30,000 --> 00:55:34,000
आचार्यों की सीमा के अंदर है। अब आप यह

803
00:55:34,000 --> 00:55:38,080
शरणागत होकर के विनम्र भाव से प्रश्न कर सकते हो कि महाराज

804
00:55:38,080 --> 00:55:42,320
जी गुरु जी गुरुदेव मुझे यह चीज समझ में नहीं आ रही है।

805
00:55:42,320 --> 00:55:46,320
एक तरफ तो जो है यह बताया जा रहा है कि गाय

806
00:55:46,320 --> 00:55:50,640
के विषय में यह बताया जा रहा है और वहां पर गाय शब्द भी आ रहा है जिसका कुछ अर्थ का अनर्थ

807
00:55:50,640 --> 00:55:55,040
सा दिखाई दे रहा है। अच्छा वो क्या कहने लगी कि मानवता

808
00:55:55,040 --> 00:55:59,440
मेरा पैरामीटर है। मानवता आपका पैरामीटर कैसे हो गया भाई? आपका

809
00:55:59,440 --> 00:56:03,600
पैरामीटर धर्म का वेद है। शास्त्र है। तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य

810
00:56:03,600 --> 00:56:07,680
के विषय में। शास्त्र प्रमाण है। मानवता मानवता उद्भाषित

811
00:56:07,680 --> 00:56:11,680
वहां से होती है। अगर आपको धर्म नहीं मिलेगा आपके माता-पिता जो कि आपने बताया

812
00:56:11,680 --> 00:56:16,160
वैष्णवाचार्य से दीक्षित थे। अगर आपको धर्म नहीं मिलेगा तो आप

813
00:56:16,160 --> 00:56:20,160
पशु हो। धर्म ही ना पशु भी समाना तो वेद के

814
00:56:20,160 --> 00:56:24,160
बिना अपने आप को इंसान कैसे कहोगे? और लॉजिकल वे से अगर चलें

815
00:56:24,160 --> 00:56:29,120
तो आपने कहा मैं सनातनी नहीं मुसलमान हूं। ये देखिए इसको कहते हैं लोहा शंकराचार्य।

816
00:56:29,120 --> 00:56:33,520
इसको कहते हैं लोहा। सामने वालों को कहना पड़ रहा है मैं जो है मुसलमान हूं।

817
00:56:33,520 --> 00:56:37,120
क्या करूं? फड़फड़ा फड़फड़ा रहा हूं। जिनसे

818
00:56:37,120 --> 00:56:41,600
आजीवन लोहा लेते आए। आजीवन आज वही बनना पड़ रहा है। क्यों?

819
00:56:41,600 --> 00:56:45,680
क्योंकि संप्रदाय का विरोध कर रहे हो ना? परंपरा का विरोध कर रहे हो ना? इसलिए

820
00:56:45,680 --> 00:56:49,840
भाई जान लो वेद आपके पास परंपरा से आते हैं। तो आपको

821
00:56:49,840 --> 00:56:54,240
किसी ना किसी परंपरा के सानिध्य में खड़ा होना पड़ेगा।

822
00:56:54,240 --> 00:56:58,320
अब वह बात बाद बात की है कि उन्होंने विदेश गमन को क्या

823
00:56:58,320 --> 00:57:02,400
माना है। कोई भी प्रामाणिक आचार्य ऐसे नहीं है जिन्होंने विदेश गमन को निषेध

824
00:57:02,400 --> 00:57:06,400
ना किया हो। ठीक है? तो आप सिद्धांतिक विरोध मत

825
00:57:06,400 --> 00:57:10,480
करिए। अब रह जाती है बात कि आपके कुछ कटाक्ष है उनको लेकर के

826
00:57:10,480 --> 00:57:14,480
उनके सवाल हैं। तो सबसे पहली बात संप्रदाय का विरोध मत

827
00:57:14,480 --> 00:57:18,480
करिए। संप्रदाय के सिद्धांतों का विरोध मत करिए। आप श्रृंगेरी के शंकराचार्य को लेकर के

828
00:57:18,480 --> 00:57:22,560
बता रही वहां चंदा होता है मगर इतना चंदा आता है फिर भी तुम जैसे झुंझुनों को भेजा इसका मतलब

829
00:57:22,560 --> 00:57:26,800
आप संप्रंगेरी पीठ पर भी सवाल उठा रही हैं विदेश

830
00:57:26,800 --> 00:57:30,880
यात्रा का विरोध विदेश यात्रा गमन का निषेध का विरोध करके आप जो है पूरी पीठ चारों

831
00:57:30,880 --> 00:57:34,880
पीठों का आप जो है उठा रही हैं तो फिर आपसे पूछना पड़ेगा ना जब आप आपका कोई

832
00:57:34,880 --> 00:57:38,880
प्रमाण है ही नहीं इनमें से जिस दिन सनातन पर

833
00:57:38,880 --> 00:57:43,040
वार होगा ना उस दिन आखिरी आखिरी उपाय होगा शंकराचार्य

834
00:57:43,040 --> 00:57:47,520
ध्यान रखना कुछ काम नहीं आएगा ये Instagram पर रील्स बनाना

835
00:57:47,520 --> 00:57:51,520
ये क्या हुआ? कुछ भी काम नहीं आएगा उसमें

836
00:57:51,520 --> 00:57:52,240
Instagram पे

837
00:57:52,240 --> 00:57:56,480
रील बनाना। तो अब मैं वो लॉजिकल

838
00:57:56,480 --> 00:58:00,640
वे में थोड़ा सा बता दूं। इन्होंने जैसे माना कि भाई मुझे मुसलमान मान लीजिए। तो

839
00:58:00,640 --> 00:58:05,200
मुसलमान है तो फिर हम आपको नास्तिक सिद्ध करेंगे। ईश्वर को ना मानने वाला सिद्ध करेंगे।

840
00:58:05,200 --> 00:58:09,280
जब आप ईश्वर को ना मानने वाले सिद्ध होंगे तब हम आपको सिद्ध करेंगे।

841
00:58:09,280 --> 00:58:13,440
जब आप ईश्वर को नहीं मानते तो आपके पास धर्म नहीं है। ठीक है?

842
00:58:13,440 --> 00:58:17,440
जब आपके पास धर्म नहीं है तो सामने खड़े हुए तीन पुरुष क्योंकि आप मातृ शक्ति

843
00:58:17,440 --> 00:58:22,080
हैं। जब आप ईश्वर को मानने वाले नहीं है तो सामने खड़े हुए तीन पुरुष

844
00:58:22,080 --> 00:58:27,520
पिता भाई और पति में अंतर करने का आधार क्या होगा?

845
00:58:27,520 --> 00:58:31,760
हो गए पशु इसलिए कहा था कि आपको अपने

846
00:58:31,760 --> 00:58:35,920
मानव होने पर भी भ्रमित जो भ्रम है वो टूट जाएगा। संप्रदाय

847
00:58:35,920 --> 00:58:40,080
के बाहर जाकर के नहीं आप संशय करिए। गुरु वही जो संशय दूर कर गए।

848
00:58:40,080 --> 00:58:44,080
गुरु गु का मतलब गुरु गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला

849
00:58:44,080 --> 00:58:48,160
अद्वैत का उपनिषद आपको निकाला जाएगा अंधकार से

850
00:58:48,160 --> 00:58:52,160
मगर ये जो ये जो ये जो विरोध करने की भावना है ना मैं बाहर खड़ी हूं संप्रदाय

851
00:58:52,160 --> 00:58:58,000
के बाहर छोड़ के आइए अंदर हर बात का जवाब है

852
00:58:58,000 --> 00:59:02,000
जो [गला साफ़ करने की आवाज़] लोग ऐसा कर रहे हैं अच्छा सनातनी ऐसा

853
00:59:02,000 --> 00:59:06,080
कर रहे हैं तो पूरे सनातन को गाली दोगे क्या शंकराचार्य के शिष्य

854
00:59:06,080 --> 00:59:07,360
अगर गलत कर रहे हैं तो तुमने

855
00:59:07,360 --> 00:59:13,040
कहा कि मैं शंकराचार्य को गाली दूंगी या अमर्याद ित आचरण करूंगी

856
00:59:13,040 --> 00:59:17,120
तो सनातनी ऐसा कर रहे तो सनातन को गाली दोगे तुम यही है तुम्हारा

857
00:59:17,120 --> 00:59:21,840
सिद्धांत ये तो उनका सिद्धांत है 9 पांच खत्म कर दो

858
00:59:21,840 --> 00:59:27,120
पवित्र महीना खत्म होते ही ये तो उनका सिद्धांत है सनातन में कैसे आ गया

859
00:59:27,120 --> 00:59:31,120
और हम रेप्लिकेशन में दे रहे हालांकि उन्होंने गलत किया है। रेप्लिकेशन

860
00:59:31,120 --> 00:59:35,200
में भी आपका देना सिद्ध नहीं होता। राम ने मंदोदरी का हरण

861
00:59:35,200 --> 00:59:39,440
करना नहीं सिखाया है। सीता के हरण के विरुद्ध

862
00:59:39,440 --> 00:59:45,440
रावण का वध करना सिखाया है राम ने। मंदोदरी का हरण नहीं।

863
00:59:46,820 --> 00:59:49,200
[गला साफ़ करने की आवाज़]

864
00:59:49,200 --> 00:59:51,360
और

865
00:59:51,360 --> 00:59:55,520
फिर आखिर में आप देखिए पहला वर्ड पहला वर्ड किस

866
00:59:55,520 --> 00:59:59,840
तरह से इन्होंने आप मक्कारी मत करिए। देखा

867
00:59:59,840 --> 01:00:04,000
यह इनकी तमीज है। इसीलिए कहते हैं धर्म ना पशु पशु समाना।

868
01:00:04,000 --> 01:00:08,400
इसीलिए कहते हैं जिसके पास धर्म नहीं है उसके उससे क्या अपेक्षा करोगे आप

869
01:00:08,400 --> 01:00:12,880
कि वो इंसानियत दिखाएगा। हम आपके चैनल पर आए हैं। हम कोई बदतमीजी

870
01:00:12,880 --> 01:00:17,120
कर नहीं रहे हैं। हम अपने लॉजिकल प्रश्न रख रहे हैं। आप प्रश्नों के उत्तर अगर कुतर्क

871
01:00:17,120 --> 01:00:21,200
है तो भाई कुतर्क सिद्ध करो उसे। वो भी नहीं कर रहे हो। मक्कारी

872
01:00:21,200 --> 01:00:25,280
मत करिए। यानी कि आप अपने मन से एक टैग दे रहे हैं। अच्छा मक्कारी है कहां

873
01:00:25,280 --> 01:00:29,280
से सिद्ध होगा? तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है।

874
01:00:29,280 --> 01:00:33,440
अपने आप को सनातनी कहते हो ना तो तुमको वेद वैदिक

875
01:00:33,440 --> 01:00:38,400
अपने आप को मानव कहते हो ना मनुष्य तो पहले तुमको वेद की शरण में आना होगा।

876
01:00:38,400 --> 01:00:44,400
ठीक है। वेद की शरण में आओगे तब तुमको परंपरा की शरण में आना होगा।

877
01:00:46,960 --> 01:00:51,120
जी [गला साफ़ करने की आवाज़] श्वेतांग जी और सीना

878
01:00:51,120 --> 01:00:55,200
और डंके डंके की चोट पे कह भी रही है कि नहीं नहीं

879
01:00:55,200 --> 01:01:01,200
मैं वापस नहीं लूंगी क्योंकि उनका चैनल है भाई वो तुर्रम खान है ना

880
01:01:01,200 --> 01:01:05,360
तुर्रम खान हो ना भाई तुम कुछ भी बोलोगे मैं वापस नहीं लूंगी किसने

881
01:01:05,360 --> 01:01:09,440
सेट किया मैंने सेट किया शास्त्र को तो मैं मानती हूं उतना मानती हूं जितना जहां जो अच्छा लगता है मान

882
01:01:09,440 --> 01:01:13,440
लेती हूं तुम्हारे जो दयानंद जी है जो तुम्हारे लिए वैसे

883
01:01:13,440 --> 01:01:17,920
तो दयानंद जी भी तुम्हारे लिए प्रमाण नहीं है। हालांकि मुझे मालूम है तुम वहां से भी क्विट करोगे।

884
01:01:17,920 --> 01:01:22,000
तुम अगर वैसे तो ये संप्रदाय नहीं है। मगर जब मैं संप्रदाय

885
01:01:22,000 --> 01:01:26,000
के रूप में इसको दुर्जन तोष न्याय से प्रस्तुत करूंगा यहां से ही भाग जाओगे आप। देखो

886
01:01:26,000 --> 01:01:30,160
कैसे हां आपने अपनी उसमें

887
01:01:30,160 --> 01:01:34,240
क्या कहा था? अपनी रील में क्या कहा था? स्त्री कभी अपवित्र

888
01:01:34,240 --> 01:01:39,480
नहीं होती। कहा था ना? यह देखो दयानंद जी क्या लिख रहे हैं।

889
01:01:39,480 --> 01:01:44,080
[खांसने की आवाज़] जिन नीच स्त्रियों को छूना

890
01:01:44,080 --> 01:01:48,320
नहीं उनको कुछ लोग अपवित्र मानते हैं। यह देखो

891
01:01:48,320 --> 01:01:52,320
अपवित्र मानने का अपवित्र मानने का विरोध कर रहे

892
01:01:52,320 --> 01:01:56,400
हैं। आपके भैया क्या इसका पेज इसका पेज नंबर

893
01:01:56,400 --> 01:02:00,480
बता दीजिए। वो मैं ज़ूम नहीं हो रहा है ना? मैं मैं बता रहा हूं। उसका पेज

894
01:02:00,480 --> 01:02:02,640
नंबर है। समुल्लास वगैरह बता दीजिए।

895
01:02:02,640 --> 01:02:07,280
एकादश समुल्लास है। और एकादश समुल्लास

896
01:02:07,280 --> 01:02:11,440
में ये पेज नंबर 231 है। थोड़ा बहुत तो आगे पीछे

897
01:02:11,440 --> 01:02:15,520
होगा। आप दिखाइए। ठीक ठीक अब यहां से ही भाग जाना फिर कौन है तुम्हारा

898
01:02:15,520 --> 01:02:19,600
प्रमाण भाई भागोगे आप दयानंद जी की सीमा में रह के

899
01:02:19,600 --> 01:02:24,720
भी अपना सनातन सिद्ध नहीं कर पाओगे यद्यपि दयानंद जी का सनातन सिद्ध नहीं है

900
01:02:24,720 --> 01:02:28,880
ठीक है इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर मत पड़ो मत पड़ो मैंने आज इनको

901
01:02:28,880 --> 01:02:33,440
दिन में भी समझाया भाई एक कैसे जो है

902
01:02:33,440 --> 01:02:38,000
कि भाई इनको फीलिंग आ जाए नहीं लाइव में आओ लाइव में भैया

903
01:02:38,000 --> 01:02:43,520
काफी चैट हुई है काफी बातचीत हुई है इनसे

904
01:02:43,520 --> 01:02:47,600
यह शेड्यूल उन्होंने की थी। हमारे पर भी यह लाइव चल रही थी। शेड्यूल उन्होंने

905
01:02:47,600 --> 01:02:51,600
की थी। इनका प्रूफ

906
01:02:51,600 --> 01:02:55,600
वो है आर्काइव इंटरनेट परंपरा

907
01:02:55,600 --> 01:03:00,640
प्रूफ है। इंटरनेट [हंसी]

908
01:03:00,640 --> 01:03:05,920
ये देखिए। वो ये कहना चाह रही थी कि मैं साइड भाषा का ले आऊंगी। आप उसको भी नहीं मानोगे।

909
01:03:05,920 --> 01:03:10,560
तो बोला मानेंगे। हमारे आचार्य गण ने बोला है तो मानेंगे। भाई दो पहले बताइए दो

910
01:03:10,560 --> 01:03:15,040
आपने दो दो सनातनियों के बीच में जब बात हो रही है

911
01:03:15,040 --> 01:03:19,040
और एक सनातनी कह रहा है कि भाई अगर तुम परंपराओं को नहीं मानते हो

912
01:03:19,040 --> 01:03:23,520
तो पहले सबसे पहले अपना सनातनी होना सिद्ध कर दो आपका क्लेम है ना मैं सनातनी

913
01:03:23,520 --> 01:03:27,600
तो इससे बाहर निकलो फिर हम आपको लेके आएंगे अपने ईश्वर से फिर हम आपको

914
01:03:27,600 --> 01:03:31,600
पहले नास्तिक बनाएंगे फिर नास्तिकता से आपको ईश्वर सिद्ध करेंगे अपना ईश्वर सिद्ध करेंगे

915
01:03:31,600 --> 01:03:37,120
फिर शंकराचार्य की शरण में ले आएंगे फिर ले आएंगे वहीं जहां से अभी आप गए हो

916
01:03:37,120 --> 01:03:41,200
पता नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] चले आते हां वो खोला आपने एक एकादश

917
01:03:41,200 --> 01:03:43,760
उल्लास

918
01:03:43,760 --> 01:03:47,920
हां [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है उनको जो है वह अभी भी लाइव है एक लोग बता रहे हैं वो गलतसलत

919
01:03:47,920 --> 01:03:52,000
कह रही है ठीक है तो वो उनकी स्वतंत्रता है वो कुछ भी कह सकती

920
01:03:52,000 --> 01:03:58,000
है हमें जो करना था हम करके चले आए हैं

921
01:04:00,800 --> 01:04:03,760
एक तो मेरा माउस

922
01:04:03,760 --> 01:04:08,480
231 नंबर सेंसिटिविटी कम कर दीजिए उसकी

923
01:04:08,480 --> 01:04:12,560
कैसे कम होती है?

924
01:04:12,560 --> 01:04:18,560
अब अभी बताता हूं थोड़ी देर में।

925
01:04:18,880 --> 01:04:24,880
अवनीश जी कह रहे हैं पीडीएफ परंपरा से हैं। [हंसी]

926
01:04:27,280 --> 01:04:31,600
बार-ब मैं वैष्णव वैष्णव परंपरा से कौन सी परंपरा भाई

927
01:04:31,600 --> 01:04:35,600
जिससे हम देख जब उन्होंने बोला कि मैं जब उन्होंने बोला कि वैष्णव

928
01:04:35,600 --> 01:04:39,680
परंपरा से तो थोड़ी देर सोचने लग गई थी कि अब मैं क्या बोलूं? अच्छा इसके आगे भी होता है कुछ

929
01:04:39,680 --> 01:04:43,760
वो वो भी याद है आपको? कौन से ब्राह्मण हो? कौन सा वेद है? क्या

930
01:04:43,760 --> 01:04:48,800
गोत्र है? वैसे ही वैष्णव परंपरा अच्छा कौन सी वैष्णव [हंसी] परंपरा

931
01:04:48,800 --> 01:04:52,880
रामानुज परंपरा अब उनको ये भी डाउट है कि इन्हने

932
01:04:52,880 --> 01:04:57,200
त्रिदंड सन्यास लिया होगा तो कोई वैष्णव परंपरा होगी हां हां

933
01:04:57,200 --> 01:05:01,680
तो रामानुज परंपरा है तो रामानुज को प्रमाण मान लो ना भाई रामानुजा

934
01:05:01,680 --> 01:05:05,680
तो रामानुज फिर नहीं तो अगर इतनी

935
01:05:05,680 --> 01:05:10,080
इतना ज्यादा उन्होंने नहीं अगर रामानुज को रामानुजा परंपरा

936
01:05:10,080 --> 01:05:14,320
में ही अगर पढ़ा होता कुछ किया होता तो तुरंत चट से निकलता कि रामानुज परंपरा

937
01:05:14,320 --> 01:05:16,080
से वैष्णव परंपरा नहीं निकलती तब।

938
01:05:16,080 --> 01:05:20,080
ठीक है। हम तो अपनी ईश्वर से लेके यहां तक की परंपरा बता रहे हैं।

939
01:05:20,080 --> 01:05:24,800
आप अपने पीछे के दो गुरुओं के नाम नहीं बता पा रहे। भाई पेज खोलो आप

940
01:05:24,800 --> 01:05:28,960
उनका 231 ना हम देखो

941
01:05:28,960 --> 01:05:33,040
मैं शेयर कर रहा हूं स्क्रीन नारायण नारायण नारायण

942
01:05:33,040 --> 01:05:36,640
या शेयर स्क्रीन

943
01:05:36,640 --> 01:05:40,400
फिर इसके बाद एंटायर स्क्रीन

944
01:05:40,400 --> 01:05:44,400
यह देखिए क्या 200 ये

945
01:05:44,400 --> 01:05:49,680
ऑपरेटर जी हटा दीजिए स्क्रीन से अवनीश जी का वक्तव्य है जो

946
01:05:49,680 --> 01:05:53,760
हटा देता हूं 231 ये है क्या

947
01:05:53,760 --> 01:05:57,920
हां यही इसमें देखिए जो हां बस बस बस

948
01:05:57,920 --> 01:06:02,080
ये जो श्लोक श्लोक लिखे है ना दो तीन चार इन श्लोकों

949
01:06:02,080 --> 01:06:06,640
के नीचे जो हां ये ये वाला बड़ा करिए

950
01:06:06,640 --> 01:06:10,720
यही पैराग्राफ जिस पे हां ये देखिए ये दयानंद जी मान

951
01:06:10,720 --> 01:06:15,040
रहे हैं कि स्त्रियां पवित्र होती है और उनको को अपवित्र मानने का

952
01:06:15,040 --> 01:06:19,520
विरोध कर रहे हैं। देखिए जिन नीच स्त्रियों को छूना नहीं

953
01:06:19,520 --> 01:06:23,520
उनको अपवित्र अति पवित्र उन्होंने माना है। ये क्रिटिसाइज कर रहे

954
01:06:23,520 --> 01:06:27,520
हैं वाम मार्गियों को। ठीक है? वाम मार्गी है उनको

955
01:06:27,520 --> 01:06:31,120
क्रिटिसाइज कर रहे हैं यहां पर। और यहां पर फिर आगे कह रहे जैसे शास्त्रों

956
01:06:31,120 --> 01:06:35,280
में रजसला आदि स्त्रियों के स्पर्श का निषेध है। लो स्पर्श का निषेध

957
01:06:35,280 --> 01:06:39,280
है। आप रजला से अपना वो मान रही है ना पवित्रता। ऐसे नहीं

958
01:06:39,280 --> 01:06:43,280
करते। ऐसे नहीं करते चीटिंग। अब बताओ कहां

959
01:06:43,280 --> 01:06:49,280
जाओगे इसको आप या तो मान लो मान लो कल गलत बोला था

960
01:06:49,280 --> 01:06:53,280
भाई बात ऐसी है 145 वा अध्याय इसका निराकरण कर दूं आपके

961
01:06:53,280 --> 01:06:57,840
संशय का 145वा अध्याय 52वा श्लोक मत्स पुराण

962
01:06:57,840 --> 01:07:02,160
समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत

963
01:07:02,160 --> 01:07:06,320
धर्म है विपरीतार्थक कहीं पे कुछ मिल रहा तो एक जगह का थोड़ी ना उठाओगे अर्ध

964
01:07:06,320 --> 01:07:10,160
को कुट करोगे क्या न्याय है

965
01:07:10,160 --> 01:07:14,160
कि एक ही बात व्यक्ति की ये चीज मानेंगे ये चीज नहीं मानेंगे ऐसे ही यही

966
01:07:14,160 --> 01:07:18,560
तो वही है वेद मानेंगे वेद का कोट करके सामने वाले को दबाएंगे

967
01:07:18,560 --> 01:07:22,640
सामने वाला जिससे वेद लिए उसको कोट करके आपको नहीं दबा सकता

968
01:07:22,640 --> 01:07:26,720
वेद का कोट करके सामने वाले को दबाएंगे सामने वाला जिससे वेद लिए

969
01:07:26,720 --> 01:07:30,720
उसका कोट करके भैया तुम अर्थ गलत बता रहे हो मैं सही बता रहा हूं उसका कोट करके आपको

970
01:07:30,720 --> 01:07:34,800
ना दबाए ये आपके दयानंद स्त्रियों को पवित्र

971
01:07:34,800 --> 01:07:38,960
अति पवित्र मानने का विरोध कर रहे हैं कुछ स्थितियों में

972
01:07:38,960 --> 01:07:42,960
और नीच तक कह रहे हैं नीच समझ रहे हो? ऐसे ही वर्ड्स

973
01:07:42,960 --> 01:07:48,960
का उपयोग करते हो ना वो सेंटीमेंटल और सेंसिटिव चीजों का उपयोग करके

974
01:07:48,960 --> 01:07:53,680
अब इनकी कई और भी चीजें हैं कुछ जैसे

975
01:07:53,680 --> 01:07:57,760
अच्छा मैंने ऐसा तो है नहीं कि स्वतंत्र रूप से इनसे परंपरा पूछी है। मैं

976
01:07:57,760 --> 01:08:01,840
शास्त्रों का प्रमाण दे रहा हूं। शास्त्र कह रहे हैं परंपरा में जाने को। शिव पुराण में

977
01:08:01,840 --> 01:08:05,840
लिखा है परंपरा में जाने को। निरुक्त मेंस काचार्य कह रहे हैं परंपरा में जाने को।

978
01:08:05,840 --> 01:08:10,000
गीता कह रही है परंपरा में जाने को। मुंडकोपनिषद कह रहा है परंपरा में जाने को। लॉजिक

979
01:08:10,000 --> 01:08:16,000
कह रहा है परंपरा में जाने को। आप परंपरा बताइए अपनी।

980
01:08:16,880 --> 01:08:20,960
अब इन्ह इनके कुछ आरोप है स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज

981
01:08:20,960 --> 01:08:25,280
पर एक वो है। उनका एक फोटो नहीं आता जिसमें जो है एक पादरी

982
01:08:25,280 --> 01:08:29,520
पादरी का क्या था वो सर पे हाथ रख के वो फोटो धोखे से खिंचवा ली गई है। उसको वायरल

983
01:08:29,520 --> 01:08:33,680
कर दिया गया है। बैठे थे उनको पता ही नहीं था ये होने वाला है। उन्होंने कर दिया। फोटो खचवा।

984
01:08:33,680 --> 01:08:37,680
इसका एक्सप्लेनेशन उन्होंने दिया है। अब यदि उन पर विश्वास नहीं है

985
01:08:37,680 --> 01:08:41,920
तो वेद पर प्रमाण कैसे? फिर फसोगे। फिर फसोगे। उन्होंने

986
01:08:41,920 --> 01:08:46,000
एक्सप्लेनेशन दे दिया। अगर उन पर विश्वास नहीं है वेद प्रमाण कैसे बताओ?

987
01:08:46,000 --> 01:08:51,280
फस जाओगे। इसीलिए कहते हैं परंपरा

988
01:08:51,280 --> 01:08:55,440
सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र, मोक्ष, शाश्वत धर्म तीन चीजें बस

989
01:08:55,440 --> 01:08:59,600
इसी के इर्दगिर्द फसोगे बस और कुछ नहीं। अच्छा फिर ये कहती है कि सीएए

990
01:08:59,600 --> 01:09:03,760
का विरोध क्या किया? मुक्तेश्वर जी के लिए वो सीएए में प्रशासन

991
01:09:03,760 --> 01:09:08,160
का विरोध का किया। अब मुक्तेश्वर जी ने क्या कहा कि भाई

992
01:09:08,160 --> 01:09:08,720
जैसे पुरी

993
01:09:08,720 --> 01:09:12,880
के शंकराचार्य जी से भी पूछा गया कि भाई जो पिछली बार कुंभ का मेला लगा था तो पूछा

994
01:09:12,880 --> 01:09:17,120
गया कि क्या मुसलमानों को आने दिया जाए? तो पुर के शंकराचार्य जी ने हमारे

995
01:09:17,120 --> 01:09:21,360
सनातन धर्म की उदारता क्या है? कि भाई रसखान जैसे को जैसों को ना रोका

996
01:09:21,360 --> 01:09:25,840
जाए। रसखान जैसों को ना रोका जाए। जो इतने बड़े भक्त हुए रसखान

997
01:09:25,840 --> 01:09:29,840
जैसे लोग उनको भी रोक दोगे क्या? ठीक है? तो

998
01:09:29,840 --> 01:09:33,920
जो मुक्तेश्वर जी महाराज जी हैं उनकी अगर

999
01:09:33,920 --> 01:09:38,000
शंकराचार्य पद को लेकर के एक संदिग्ध स्थिति है या आपकी नजर

1000
01:09:38,000 --> 01:09:42,080
में वो नहीं है किसी की नजर में है तो इसका मतलब यह है कि वो जो भी बात करेंगे वो

1001
01:09:42,080 --> 01:09:46,240
गलत हो गई उन्होंने भी तो यही कहा जो अच्छा हो उसको आने दो अच्छा ना हो मत आने दो

1002
01:09:46,240 --> 01:09:50,880
और अच्छा चेक करने को किसको बोल रहे हैं सरकार को

1003
01:09:50,880 --> 01:09:54,880
ना आने दे अगर वो मुसलमान मुसलमान का मतलब आप ये मान रहे हो

1004
01:09:54,880 --> 01:09:59,040
इस्लाम का मतलब कि वो हिंदू विरोधी है और हिंदू विरोधी का मतलब

1005
01:09:59,040 --> 01:10:03,040
धार्मिक है। तो यदि कोई अपने सिद्धांतों को छोड़ के नहीं आ पा

1006
01:10:03,040 --> 01:10:07,040
रहा है। उसको गाय खानी ही है तो मत आने देना उसको अंदर।

1007
01:10:07,040 --> 01:10:11,200
उसको हिंदू का विरोध करना ही है तो मत आने देना। कह तो रहे हैं। और क्या

1008
01:10:11,200 --> 01:10:15,360
कहे या शास्त्रों में लिखी हुई बात का भी विरोध कर दे। मत आने दो ना

1009
01:10:15,360 --> 01:10:19,600
भाई। जो अपने ऐसे सिद्धांतों को छोड़कर अंदर नहीं आ पा रहा

1010
01:10:19,600 --> 01:10:25,600
है। जो हिंदू विरोधी सिद्धांत है तो उनको मत आने दो। कह तो रहे हैं।

1011
01:10:28,400 --> 01:10:33,840
करेक्ट शंगेरी मट पूर्वाचार्य महाभाग

1012
01:10:33,840 --> 01:10:37,840
उन्होंने पूर्वाचार्य महा के लिए कृष्ण भारती कृष्ण तीर्थ

1013
01:10:37,840 --> 01:10:42,000
जी के लिए बोला

1014
01:10:42,000 --> 01:10:46,000
हां उनके लिए बोला विदेश गए तो विदेश गए तो वो शंकराचार्य के पद

1015
01:10:46,000 --> 01:10:50,080
को छोड़ रहे हैं। अपनी उस विदेश गमन को शास्त्रीय सिद्ध नहीं कर

1016
01:10:50,080 --> 01:10:54,320
रहे बल्कि बता रहे हैं अशास्त्रीय है। हां अगर आप पर्सनली

1017
01:10:54,320 --> 01:10:58,400
उनके द्वारा किया जाने वाला जो कार्य है उसका आप जो है वो करें कि

1018
01:10:58,400 --> 01:11:02,400
वो सही था कि गलत था। तो समष्टि का धर्म जब आ जाता है तो व्यष्टि के धर्म

1019
01:11:02,400 --> 01:11:06,560
का त्याग हो जाता है। बड़े भाई की आज्ञा मानना धर्म

1020
01:11:06,560 --> 01:11:10,560
है। कुंभकरण ने मानी मगर दोषी है। क्यों? समष्टि के धर्म का विरोध हो

1021
01:11:10,560 --> 01:11:14,560
गया। पिता की आज्ञा मानना धर्म है। पिता की आज्ञा

1022
01:11:14,560 --> 01:11:18,640
मानना धर्म है। मगर प्रह्लाद जी ने नहीं

1023
01:11:18,640 --> 01:11:23,840
मानी। मगर वो हमारे आदर्श सिद्ध हुए। क्यों? क्योंकि उन्होंने समष्टि के धर्म को चुना।

1024
01:11:23,840 --> 01:11:28,240
करेक्ट। राजगद्दी के प्रति राजगद्दी के प्रति जो आपने प्रतिज्ञा

1025
01:11:28,240 --> 01:11:32,480
की हुई है उसका पालन करना धर्म है। परंतु उसका पालन

1026
01:11:32,480 --> 01:11:36,960
करने के बावजूद भीष्म पितामह दोषियों में गिने गए।

1027
01:11:36,960 --> 01:11:41,120
गिने गए ना। क्यों गिने गए? क्योंकि उन्होंने व्यष्टि

1028
01:11:41,120 --> 01:11:43,600
प्रतिज्ञा के धर्म जब क्रॉस कर रहा था समष्टि

1029
01:11:43,600 --> 01:11:47,680
के धर्म को न्याय अन्याय को तो उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा को आगे कर दिया।

1030
01:11:47,680 --> 01:11:51,680
इसी प्रकार से समष्टि के लिए वैदिक मैथमेटिक्स के प्रचार के

1031
01:11:51,680 --> 01:11:56,560
लिए अगर वह चले भी गए तो उन्होंने यह नहीं कहा कि मेरा जाना सही है इसका अनुकरण करो।

1032
01:11:56,560 --> 01:12:00,640
रामो विग्रह धर्म भारती कृष्ण

1033
01:12:00,640 --> 01:12:04,800
तीर्थ जी महाराज विग्रहान धर्म नहीं कहा उन्होंने कि मैं विग्रहान धर्म हूं।

1034
01:12:04,800 --> 01:12:08,800
शास्त्रों [गला साफ़ करने की आवाज़] ने राम को विग्रहान धर्म कहा है। उन्होंने कभी इस बात का विरोध नहीं

1035
01:12:08,800 --> 01:12:13,040
किया है। तो जितने अंश में जो राम जी के साथ है उसका अनुकरण

1036
01:12:13,040 --> 01:12:17,920
करो। जो राम जी की सीमा के बाहर है उसका अनुकरण मत करो। यह हमारा धर्म।

1037
01:12:17,920 --> 01:12:22,080
ठीक है? और क्या है इनका आरोप? हां। कि भाई वहां पर क्यों

1038
01:12:22,080 --> 01:12:26,400
खुलवाए जा रहे हैं? क्यों भाई? मनुस्मति पढ़ो जिनका पक्ष ले रही हो।

1039
01:12:26,400 --> 01:12:30,400
लुटेरों के द्वारा लूटा हुआ धन लेके भी यदि धर्म की रक्षा होती है

1040
01:12:30,400 --> 01:12:35,760
तो करो। पढ़ो जाके मनुस्मति।

1041
01:12:35,760 --> 01:12:39,920
तो क्या गलत कर रहे हैं? अगर धर्म की रक्षा के लिए अगर वहां पर एक खुल रहा है तो इस

1042
01:12:39,920 --> 01:12:45,920
जैसी संस्थाएं क्रिश्चियन बना रही हैं।

1043
01:12:47,040 --> 01:12:51,040
इस जैसी संस्थाएं लोगों को क्रिश्चियन बना रही है। विदेशी वह

1044
01:12:51,040 --> 01:12:55,040
दिखा दिखा के झंडा वहां पर विदेशियों के द्वारा ही वहां पर सेंटर अगर

1045
01:12:55,040 --> 01:12:59,120
खुलवाया जा रहा है जो पतित हो चुके उन्हीं के उन्हीं के पतित पतित लोगों को ही

1046
01:12:59,120 --> 01:13:03,360
वहां सेट किया जा रहा है। कहीं से भी आदर्श स्थापित नहीं किया जा रहा तो उसमें आपको क्या आपत्ति

1047
01:13:03,360 --> 01:13:09,360
है? वहां क्या कोई श्रोत ब्राह्मण जा रहा है क्या?

1048
01:13:10,320 --> 01:13:14,320
और यदि एट द एंड भाई कोई सवाल आ रहा है तो तुम भूबाकी

1049
01:13:14,320 --> 01:13:18,640
करोगे Instagram पे

1050
01:13:18,640 --> 01:13:23,120
भूबाकी करोगे क्या Instagram पे जाके जाओ शरणागत

1051
01:13:23,120 --> 01:13:27,440
हो के पूछो क्योंकि वो तुम्हारे वेद के प्रमाण हैं। वरना

1052
01:13:27,440 --> 01:13:31,600
छोड़ दो ये कहना कि हम वैदिक हैं। बन जाओ। बाइबल लिख दो।

1053
01:13:31,600 --> 01:13:35,600
कुरान लिख दो एक नई। मेरे पास मानवता आई। मैं इंसान हूं। लिख दो फिर

1054
01:13:35,600 --> 01:13:40,880
आएंगे हम। फिर आएंगे तुम्हारी मानवता को टटोलने

1055
01:13:40,880 --> 01:13:44,880
है ना फिर आएंगे बाहर फिर आएंगे वह बाहरों

1056
01:13:44,880 --> 01:13:48,880
के मौसम जहां और भी है सितारों के आगे तो सितारों के

1057
01:13:48,880 --> 01:13:52,960
आगे वाला जो जहां है ना वो शुरू होता है जहां पर

1058
01:13:52,960 --> 01:13:58,160
शंकराचार्य आते हैं वहां

1059
01:13:58,160 --> 01:14:02,240
आपके कुछ लाख फॉलोवर्स हो गए तो समझने लगे हम धर्म के निर्णायक

1060
01:14:02,240 --> 01:14:08,240
हो गए भाई नहीं हो आप धर्म के निर्णायक जाओ जा के अपनी वैदिकता तलाशो

1061
01:14:10,000 --> 01:14:14,000
उनको लग उनको लग रहा था कि हां ठीक है बहुत फॉलोवर्स है ये है वो है मैंने जो पढ़ा

1062
01:14:14,000 --> 01:14:19,280
है वही सत्य है क्यों क्योंकि वो मिला है ना मुझे

1063
01:14:19,280 --> 01:14:23,600
vacom से आकाइव से हम

1064
01:14:23,600 --> 01:14:28,080
ये धर्म मिला है इनको यही तो हम इन सनातनियों की सबसे बड़ी कमजोरी

1065
01:14:28,080 --> 01:14:32,720
है नहीं मैं इसमें एक बात कहना चाहूंगा एक्चुअली

1066
01:14:32,720 --> 01:14:37,120
मतलब ये ना हंसने की बात नहीं है वैसे बहुत दुखद है क्योंकि

1067
01:14:37,120 --> 01:14:41,440
ये कौन है इस तरह के लोग सिंह जी आ रहे हैं

1068
01:14:41,440 --> 01:14:45,440
आ रहे हैं जा रहे हैं कैमरा कैमरा ऑन कर लीजिए तो मैं आपको

1069
01:14:45,440 --> 01:14:49,440
ले लूं जी बताइए तो दुखद इसलिए है क्योंकि

1070
01:14:49,440 --> 01:14:53,760
इनकी प्रायोरिटी धर्म रक्षा नहीं है

1071
01:14:53,760 --> 01:14:57,760
ये कंटेंट बनाना है आप इसको समझिए ये बहुत ये बहुत जरूरी है और ये बहुत

1072
01:14:57,760 --> 01:15:01,840
घातक है ये ये ये सब चीजें श्वेता जी उनके ऊपर ये सब चीजें उनके ऊपर

1073
01:15:01,840 --> 01:15:05,920
छोड़ दीजिए हम वही बात बोलते हैं जो अकाट हो छोड़िए हम क्यों बोले

1074
01:15:05,920 --> 01:15:10,000
भाई नहीं आप अरे आप आप आप ये नहीं लगता

1075
01:15:10,000 --> 01:15:13,200
कि आपको ये ऐसा है आप सिर्फ उनकी बात नहीं कर रहा मैं इन जनरल सब की

1076
01:15:13,200 --> 01:15:17,280
बात कर रहा हूं प्रातिक चीजों पे हम क्यों बात करें हमारे पास अकाट्य चीजें

1077
01:15:17,280 --> 01:15:21,520
प्रातिक चीजों पे हम बात नहीं करते हैं उनकी तरह बन जाएंगे ना प्रातिक चीजों पे बात करेंगे

1078
01:15:21,520 --> 01:15:25,600
हम कांटे की नोक की बात करेंगे बिल्कुल तस ना मस्त

1079
01:15:25,600 --> 01:15:29,680
अब उन्होंने कहा मक्कारी कर रहे हो मक्कारी सिद्ध सिद्ध करने कहां जाओगे या

1080
01:15:29,680 --> 01:15:33,680
तो उन्हीं को प्रमाण मान लो दिक्कत ये है ना हां

1081
01:15:33,680 --> 01:15:37,760
हां बिल्कुल बिल्कुल ये तो तो ऐसी चीजें ना ऐसी चीजों पे हमें जाना है।

1082
01:15:37,760 --> 01:15:41,760
हमारे पास खंबे हैं। बिल्कुल कुदाली लो भैया

1083
01:15:41,760 --> 01:15:46,160
बता दो। लेकिन आपको थोड़ी थोड़ी देर और रुकना चाहिए था। मक्कार

1084
01:15:46,160 --> 01:15:49,680
और दो चार बार मक्कार सुनता।

1085
01:15:49,680 --> 01:15:53,920
[हंसी] कम से कम नहीं मुझे उस टाइम उस टाइम आप

1086
01:15:53,920 --> 01:15:58,080
कृष्ण बन जाते। [हंसी] ठीक है।

1087
01:15:58,080 --> 01:16:02,240
उस टाइम आप कृष्ण बन जाते। तो रुक जाते थोड़ी देर और और हो जाता मतलब

1088
01:16:02,240 --> 01:16:06,240
पता है वो क्योंकि देखिए वो आप दूसरे टॉपिक पे आ जाना चाहिए था ये

1089
01:16:06,240 --> 01:16:11,040
टॉपिक तो उनका हो गया था खत्म उन्होंने स्वीकार लिया था कि भाई मैं मुसलमान हूं बस

1090
01:16:11,040 --> 01:16:15,040
नहीं वो वो खत्म नहीं कर रही थी वो क्या कर रही थी सेंसिटिव चीजें ला रही

1091
01:16:15,040 --> 01:16:19,040
थी जिससे कि मैं वहां पे बोलने लगूं और परंपरा वाली बात भूल जाए लोग समझ

1092
01:16:19,040 --> 01:16:23,440
जैसे भागवतानंद ने किया था जैसे भागवतानंद ने किया था

1093
01:16:23,440 --> 01:16:28,880
ठीक है दूसरे सेंसिटिव टॉपिक उखाड़ दो हां जी राम कुमार जी

1094
01:16:28,880 --> 01:16:32,880
मैं कुछ कह रहा था बहुत जरूरी बात कह रहा था मैं भूल

1095
01:16:32,880 --> 01:16:36,880
गया हल्का सा पीछे रिवाइंड रिवाइंड कर दीजिए हल्का सा दो तीन

1096
01:16:36,880 --> 01:16:41,360
मिनट का जय श्री राम राम महाजन जी जय

1097
01:16:41,360 --> 01:16:45,440
श्री राम जय श्री राम शिवश भैया जय श्री राम कोई नहीं

1098
01:16:45,440 --> 01:16:50,080
है टक्कर में काहे पड़े हो चक्कर में [हंसी]

1099
01:16:50,080 --> 01:16:52,720
अरे यार

1100
01:16:52,720 --> 01:16:57,040
लोगों को परंपरा अपनी प्राप्त नहीं है डिबेट करने चले आ रहे हैं उस चैनल

1101
01:16:57,040 --> 01:17:01,040
पे क्या यार क्या कैसे

1102
01:17:01,040 --> 01:17:05,760
उस समय उस समय उनका फेस देखने लायक था जब आ कर रही थी

1103
01:17:05,760 --> 01:17:10,240
अरे क्या बताऊं मैं आपको क्या बताऊं मैं सब देख रहा था

1104
01:17:10,240 --> 01:17:14,800
मैं एक्चुअल बाइक [गला साफ़ करने की आवाज़] में उसके बाद

1105
01:17:14,800 --> 01:17:18,960
मैं फिर उसमें था फिर जब ये खत्म हुआ तो फिर मैंने कहा कि शिवश भैया

1106
01:17:18,960 --> 01:17:23,280
से बात किया जाए अभी जस्ट बाइक से उतरा था थोड़ी देर पहले तो मैंने कहा

1107
01:17:23,280 --> 01:17:27,360
ये जो ये जो ये जो बहन जी है ये जो बहन जी है

1108
01:17:27,360 --> 01:17:31,360
जी ये रामपाल का विरोध करती है। ठीक है?

1109
01:17:31,360 --> 01:17:35,440
ये हर उस व्यक्ति का विरोध करती है। हां। अब आप बताइए जब

1110
01:17:35,440 --> 01:17:39,600
ये कहीं से भी वेद ले लेने को प्रमाणिक कहती चली जाएंगी तो

1111
01:17:39,600 --> 01:17:44,320
फिर किसी के भी अर्थ को मानना पड़ जाएगा ना हमारे को। नहीं नहीं

1112
01:17:44,320 --> 01:17:48,480
किसी तब तो मैक्स मूलर ने भी अपना एक

1113
01:17:48,480 --> 01:17:52,960
मैक्स मूलर ने भी छाप रखा है तो बात

1114
01:17:52,960 --> 01:17:56,960
और रही और अगर रही बात ये कि भैया किसके किसके व्याकरण

1115
01:17:56,960 --> 01:18:01,120
से सिद्ध होंगे तो व्याकरण का आना भी तो सिद्ध करोगे किसके व्याकरण

1116
01:18:01,120 --> 01:18:05,120
के नियम मान्य होंगे किसके नहीं होंगे बिल्कुल ठीक बात कह रहे

1117
01:18:05,120 --> 01:18:09,440
बिल्कुल ठीक बात कह रहे हैं ये तो मतलब बहुत

1118
01:18:09,440 --> 01:18:13,680
दिक्कत है लोग कहा गया विद्या पशु

1119
01:18:13,680 --> 01:18:18,160
ही समाना विद्या से मनुष्य पशु के समान नहीं है और

1120
01:18:18,160 --> 01:18:22,400
पशु के समान है और जिसके पास आचार्य बल नहीं है फिर वो विद्या

1121
01:18:22,400 --> 01:18:26,640
को कैसे सार्थक सिद्ध कर सकता है अच्छा हां इनको इनको और बता दूं अच्छा याद

1122
01:18:26,640 --> 01:18:30,720
दिला दिया आपने छंदो उपनिषद में लिखा हुआ है चार

1123
01:18:30,720 --> 01:18:35,040
नौ तीन जाके देख लो क्या लिखा है विद्या वही

1124
01:18:35,040 --> 01:18:39,520
जो आचार्य से प्राप्त विद्या ही आपको मोक्ष दिलाएगी आचार्य

1125
01:18:39,520 --> 01:18:44,080
से प्राप्त आर्काइव से प्राप्त नहीं इंटरनेट से प्राप्त नहीं।

1126
01:18:44,080 --> 01:18:48,160
ठीक है। नहीं नहीं तो आवश्यक है। नहीं

1127
01:18:48,160 --> 01:18:52,240
नहीं किताब तो नहीं किताब तो हमारे पास पूरी की पूरी

1128
01:18:52,240 --> 01:18:56,480
बचपन में जब हम कुछ पढ़ लिख लेते हैं तो हमारे पास सारी बुक्स

1129
01:18:56,480 --> 01:18:59,360
तो पड़ी हुई रहती है। तो फिर क्या जरूरत पड़ती है हमें किसी टीचर

1130
01:18:59,360 --> 01:19:03,520
से जाकर के पढ़ने की? भाई एक क्लासीय

1131
01:19:03,520 --> 01:19:07,840
शिक्षा लेने के लिए एक जो नैतिक शिक्षा है जो सामाजिक प्रचलन

1132
01:19:07,840 --> 01:19:11,920
में जो शिक्षा चल रही है मैकाले शिक्षा पद्धति उसके लिए तो

1133
01:19:11,920 --> 01:19:16,320
गुरु चूज कर लेते हैं लोग और जिससे जीवन मुक्त

1134
01:19:16,320 --> 01:19:20,880
होना है जीवन की महत्ता समझ में आएगी जीवन

1135
01:19:20,880 --> 01:19:24,880
के बाद का क्या है हिसाब किताब और जीवन व्यतीत कैसे करना है उसके लिए

1136
01:19:24,880 --> 01:19:29,200
गुरु की आवश्यकता नहीं है ये कैसे संभव है भाई एक

1137
01:19:29,200 --> 01:19:35,200
नहीं फिर आप अपने होने का खेल छोड़ दो ना फिर क्यों ढिरा

1138
01:19:35,520 --> 01:19:39,520
तो कहीं आप अगर आपने आज तक भी

1139
01:19:39,520 --> 01:19:43,760
अगर किसी को गुरु नहीं बनाया है तथापि आप अपने आप को वैदिक

1140
01:19:43,760 --> 01:19:48,720
अगर कहते हो तो कहीं ना कहीं से आचार्य का आलंबन आपको लेना ही पड़ेगा

1141
01:19:48,720 --> 01:19:54,560
और आज के डेट में भी जो जितने जितने भी लोग हैं संप्रदाय हैं

1142
01:19:54,560 --> 01:19:58,880
वो सारे किसी न किसी संप्रदाय से तो जुड़े हैं। कोई रामानंद संप्रदाय

1143
01:19:58,880 --> 01:20:03,440
से जुड़ा है। कोई रामानंद संप्रदाय से जुड़ा है। कोई आदि गुरु भगवान

1144
01:20:03,440 --> 01:20:07,840
शंकर के संप्रदाय से जुड़ा पड़ा है। कोई रामानंदी है। कोई माधवाचार्य

1145
01:20:07,840 --> 01:20:12,320
संप्रदाय से जुड़ा हुआ है। गय संप्रदाय से है। वो लोग उस संप्रदाय

1146
01:20:12,320 --> 01:20:14,880
को छोड़ के बात तो नहीं करता।

1147
01:20:14,880 --> 01:20:20,800
शास्त्रवाद जी को ऐड कर दीजिए। ऊपर

1148
01:20:20,800 --> 01:20:24,880
ऑपरेटर जी आप थोड़ा सा वो जो मैं अभी कह रहा था ना दो मिनट का

1149
01:20:24,880 --> 01:20:29,840
उससे पीछे का रिवाइंड करके दिखा दीजिए। जब मैंने इनको ऊपर लिया है राम मनोहर जी को

1150
01:20:29,840 --> 01:20:34,320
जी जी [गला साफ़ करने की आवाज़] हां हां शास्त्रवाद

1151
01:20:34,320 --> 01:20:37,920
जी बताइए जय श्री राम

1152
01:20:37,920 --> 01:20:42,480
आपका प्रश्न जय श्री राम कौन सा प्रश्न है

1153
01:20:42,480 --> 01:20:46,640
आपका

1154
01:20:46,640 --> 01:20:50,880
कौन सा प्रश्न है

1155
01:20:50,880 --> 01:20:54,880
बताइए कौन सा प्रश्न है हमारे गणेश भगवान की प्रतिमा

1156
01:20:54,880 --> 01:20:58,880
कहां गई उनका दर्शन हो तो चैनल पर

1157
01:20:58,880 --> 01:21:03,600
आना अधूरा सा लगता है। वो ऊपर रखी है।

1158
01:21:03,600 --> 01:21:08,240
थोड़ा सा ऊपर रखी है वो भी [हंसी]

1159
01:21:08,240 --> 01:21:12,800
वो केवल दर्शनार्थ है। मन में भैया

1160
01:21:12,800 --> 01:21:17,120
शिवश भैया एक छोटी सी बात आपको बताता हूं जो मेरे साथ घटित

1161
01:21:17,120 --> 01:21:21,200
हुई है जो मैं बता देता हूं आपको। होता क्या था कि जब मैं

1162
01:21:21,200 --> 01:21:25,440
पढ़ाई लिखाई जब कर रहा था तो एग्जाम के समय में

1163
01:21:25,440 --> 01:21:29,520
अपने मन में ही स्वास्तिक वचन मैं गाता हुआ निकलता था। जैसे

1164
01:21:29,520 --> 01:21:33,840
रूम से निकला ना तो स्वास्तिक वचन शुरू करते हुए मैं चला जाता था

1165
01:21:33,840 --> 01:21:38,160
सेंटर तक। अचानक क्या हुआ कि जैसे मैंने पढ़ना

1166
01:21:38,160 --> 01:21:42,240
शुरू किया। मुझे वो याद आ गया। मुझे वो याद मुझे वो याद आ गया। आप अपनी बात

1167
01:21:42,240 --> 01:21:46,800
को याद रखिए। मुझे वो याद आ गया। इस क्वेश्चन को भी अभी

1168
01:21:46,800 --> 01:21:50,880
ऑपरेटर जी इस क्वेश्चन को आप अपनी बात को याद रखिएगा। मुझे वो

1169
01:21:50,880 --> 01:21:55,680
याद आ गया। हां। अब बात ये आती है कि आप अगर यह कहना चाहते हो

1170
01:21:55,680 --> 01:22:00,000
कि परंपरा प्राप्त सारे आचार्य बिगड़ चुके हैं। सब विकृति आ चुकी है। अगर

1171
01:22:00,000 --> 01:22:04,160
एक ये अंतिम बात आती है तो तो फिर उनकी अगर वो बिगड़ गए

1172
01:22:04,160 --> 01:22:07,120
तो उनकी बात मान ले क्या? मत मानो।

1173
01:22:07,120 --> 01:22:11,120
आप यह क्लेम मत करो कि उनसे प्राप्त होने वाले वेदों को हम मानते हैं।

1174
01:22:11,120 --> 01:22:15,200
सिंपल स्वतंत्र अपना शास्त्र लाओ और स्वतंत्र

1175
01:22:15,200 --> 01:22:19,280
रूप से सनातनी बनो। दिखाओ सनातनी बन के। वो जो वेद है जो

1176
01:22:19,280 --> 01:22:23,680
आपको परंपरा से प्राप्त हो रहे हैं उस पर क्लेम मत करो। जब आपने स्वतंत्र शास्त्र

1177
01:22:23,680 --> 01:22:27,760
छोड़े तो उसी को कहते हैं इस्लाम। उसी को

1178
01:22:27,760 --> 01:22:31,760
कहते हैं बाइबल। कुरान। समझ रहे हैं? कुरान और

1179
01:22:31,760 --> 01:22:36,320
बाइबल वाले कम से कम इस मामले में तो अच्छे होते हैं कि

1180
01:22:36,320 --> 01:22:41,200
जिस पर विश्वास नहीं है उससे मिलने वाली किताब पर भी विश्वास नहीं है।

1181
01:22:41,200 --> 01:22:45,200
यहां तो एक दोगलापन है। किताब पर विश्वास है उसके अर्थ पर विश्वास नहीं

1182
01:22:45,200 --> 01:22:49,360
है जो दे रहा है। ठीक है? ये मुझे कहना बाकी रह गया। तो ये

1183
01:22:49,360 --> 01:22:53,360
समस्या का हल है जो ये कहते हैं। अरे अगर गुरु गलत हो गया हो तो क्या करें? तो छोड़ दो

1184
01:22:53,360 --> 01:22:57,360
वैदिकता। निकलो बाहर। घोषित करो गैर सनातनी

1185
01:22:57,360 --> 01:23:01,360
स्वयं को ढोरा पीटना बंद करो। भगवान ने कहा

1186
01:23:01,360 --> 01:23:06,480
जब खत्म होने वाला होगा तब हम आएंगे। कैसे तुम क्लेम कर रहे हो? खत्म हो गया धर्म।

1187
01:23:06,480 --> 01:23:10,640
पूर्ण रूप से आचारत्व समाप्त होने का अर्थ है धर्म नष्ट हो गया। साधु भक्तों

1188
01:23:10,640 --> 01:23:15,360
के उद्धार के लिए भगवान आते हैं।

1189
01:23:15,360 --> 01:23:19,520
ढिंढोरा पीटना बंद करो। फिर मैं सनातनी मैं सनातनी मैं सनातन की रक्षा

1190
01:23:19,520 --> 01:23:23,840
कर रहा हूं। घोषित करो गैर सनातनी। फिर हम आएंगे। छोड़ेंगे

1191
01:23:23,840 --> 01:23:27,920
फिर भी नहीं। फिर आएंगे। जब गैर सनातनी हो जाओगे फिर बता पूछेंगे

1192
01:23:27,920 --> 01:23:32,000
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? शाश्वत धर्म है कि नहीं? नास्तिक तो

1193
01:23:32,000 --> 01:23:36,560
नहीं हो? फिर पूछेंगे फिर घुमा फिरा के कान पकड़ के फिर यही ले आएंगे। अब इस बार जब आओगे

1194
01:23:36,560 --> 01:23:41,600
मान इनको शंकराचार्य को इसको कहते हैं आवाान।

1195
01:23:41,600 --> 01:23:44,720
समझे?

1196
01:23:44,720 --> 01:23:48,800
वो उस समय पर लिंक मिल नहीं रहा था ना तो मैं वेट कर रहा था कि

1197
01:23:48,800 --> 01:23:52,800
लिंक जैसे आए तो मैं जुड़ जाऊं आपसे। एक भाई साहब

1198
01:23:52,800 --> 01:23:56,960
कह रहे हैं यानी कि सब्सक्रिप्शन जरूरी है। जैसे जैसे

1199
01:23:56,960 --> 01:24:01,040
अगर आप किसी से प्राप्त होने वाली किताब पर विश्वास कर रहे हैं

1200
01:24:01,040 --> 01:24:05,040
तो उसके प्रति अविश्वास करेंगे तो आपका किताब पर विश्वास होना सिद्ध नहीं

1201
01:24:05,040 --> 01:24:09,040
होगा। आप किताब पर विश्वास प्रकट मत करिए। ठीक

1202
01:24:09,040 --> 01:24:13,120
है? आप जो है जैसे Netflix को सब्सक्रिप्शन लाने ना लेने

1203
01:24:13,120 --> 01:24:17,280
की स्थिति में छोड़ देते। छोड़ दीजिए। आप अगर उससे तुलना कर रहे हैं तो जब

1204
01:24:17,280 --> 01:24:21,280
आप ऐसा करेंगे तो आपकी मानवता धर्म आपकी आस्तिकता ही सिद्ध नहीं

1205
01:24:21,280 --> 01:24:25,280
हो पाएगी। घूम फिर के आपको फिर आना पड़ेगा। इस बार आपको सांप्रदायिक होना

1206
01:24:25,280 --> 01:24:29,360
पड़ेगा। सांप्रदायिक होना कोई बुरी बात नहीं है। इसको लोगों ने खराब किया है

1207
01:24:29,360 --> 01:24:30,960
सांप्रदायिक नाम।

1208
01:24:30,960 --> 01:24:35,440
बहुत पवित्र शब्द है सांप्रदायिक। ठीक है? बहुत

1209
01:24:35,440 --> 01:24:37,680
जो

1210
01:24:37,680 --> 01:24:41,760
अब वो जो क्या कहते हैं? एक एक मिनट। अब वह जो भाई साहब

1211
01:24:41,760 --> 01:24:46,080
थे जो अब कमेंट कर रहे थे अह क्या कहते हैं यह?

1212
01:24:46,080 --> 01:24:49,920
हां, मेरा एक क्वेश्चन है। यह

1213
01:24:49,920 --> 01:24:54,080
मेरा एक क्वेश्चन है। यह जिज्ञासा के लिए है। कम टू लाइव मत बोलिएगा।

1214
01:24:54,080 --> 01:24:58,080
जब आप गुरु परंपरा के मिले शास्त्र को बोलते हैं तो आपका तात्पर्य क्या?

1215
01:24:58,080 --> 01:25:02,560
प्रामाणिक भाष्य दीक्षा सिर्फ लेना या सारे शब्द पूछना।

1216
01:25:02,560 --> 01:25:06,720
आपका प्रश्न क्लियर करिए। प्रश्न ही क्लियर नहीं है। मैं बता देता हूं क्या

1217
01:25:06,720 --> 01:25:10,720
है। मैं यह कहता हूं कि यदि आप हम पर भेदों का अर्थ

1218
01:25:10,720 --> 01:25:14,880
बताते हुए कुछ मानने का दबाव डाल रहे हैं। अगर आप देखिए तर्क

1219
01:25:14,880 --> 01:25:18,880
से अगर बात करेंगे तो हम तर्क से आपसे बात करते रहेंगे। ठीक है? हम

1220
01:25:18,880 --> 01:25:23,120
तर्क से कर करके आपको शंकराचार्य की शरण में लाएंगे। उसके बाद उनकी बात आपको माननी

1221
01:25:23,120 --> 01:25:27,520
पड़ेगी। तर्क से लाएंगे। यदि आप शुरू में हमारे ऊपर वेदों का कोई

1222
01:25:27,520 --> 01:25:31,680
वो डालोगे कि भाई यहां पे ऐसा कहा है, वहां पर वो कहा है। आप इस बात को मान

1223
01:25:31,680 --> 01:25:35,840
लीजिए। तो आप हमारे पर दबाव डाल रहे हो ना जैसे आपने कहा Netflix

1224
01:25:35,840 --> 01:25:39,920
का सब्सक्रिप्शन की तरह तो ऐसे आप वेदों को भी तोल लीजिए

1225
01:25:39,920 --> 01:25:44,000
आप अपने आप का सब्सक्रिप्शन ले रहे हो ना वेदों में वेदों का सब्सक्रिप्शन

1226
01:25:44,000 --> 01:25:46,640
तो ले रहे हो कि मैं वेद को प्रमाण मानता हूं

1227
01:25:46,640 --> 01:25:50,800
मगर वेद [गला साफ़ करने की आवाज़] दिए हैं उसका सब्सक्रिप्शन नहीं लोगे इसको कहते हैं अर्ध

1228
01:25:50,800 --> 01:25:55,440
कुकुट न्याय तो कहने का अर्थ यह है कहने

1229
01:25:55,440 --> 01:25:59,200
का अर्थ यह है कि

1230
01:25:59,200 --> 01:26:03,280
जिसके वेद पर विश्वास है उसके अर्थ पर भी विश्वास

1231
01:26:03,280 --> 01:26:07,520
होना चाहिए। जिसके अर्थ पर विश्वास नहीं उसके वेद पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए।

1232
01:26:07,520 --> 01:26:11,760
आप स्वतंत्र हो जाओ वेद से बाहर चले जाओ। हम जब आप हमारा Netflix

1233
01:26:11,760 --> 01:26:15,760
छोड़ दोगे ना तब हम आपको ले आएंगे पकड़ के। Netflix

1234
01:26:15,760 --> 01:26:19,840
को माने बिना काम चल नहीं पाएगा आपका। मगर तब मैं और

1235
01:26:19,840 --> 01:26:23,920
अब में अंतर ये होगा कि तब आप प्रामाणिक हिंदू होंगे। वास्तव में

1236
01:26:23,920 --> 01:26:29,520
हिंदू होंगे। अभी आप भटके हिंदू हो। हुंडा हिंदू हो।

1237
01:26:29,520 --> 01:26:33,600
ठीक है? अच्छा हां अब आप

1238
01:26:33,600 --> 01:26:37,760
बोलिए राम मनोहर जी तो मैं जो कंक्लूजन दे रहा था वो यह है क्या कंक्लूजन

1239
01:26:37,760 --> 01:26:41,840
है कि अगर आप ये मानते हो कि परंपराओं में विकृति आ गई है

1240
01:26:41,840 --> 01:26:46,000
सब खत्म हो गया है कोई आचार्य बचा नहीं है तो उनके वेदों पर विश्वास

1241
01:26:46,000 --> 01:26:50,240
मत करो स्वतंत्र रूप से वेद ले आओ और उसको करो भैया उनके वेदों

1242
01:26:50,240 --> 01:26:54,240
पर विश्वास मत करो जो वेद उनसे आए हैं उनको

1243
01:26:54,240 --> 01:26:58,240
अपना बता करके उसके नाम पर लोगों पर दबाव मत डालो देखो मैं यहां यह बता

1244
01:26:58,240 --> 01:27:01,920
रहा हूं धर्म ने यह कहा है वेद ने यह कहा है अपने शास्त्र

1245
01:27:01,920 --> 01:27:06,080
लाइए स्वतंत्र रूप से फिर हम उन शास्त्रों को चेक करेंगे। हो सकती

1246
01:27:06,080 --> 01:27:11,920
है आपकी दीक्षा। क्यों नहीं हो सकती? भाई हैं आप हमारे।

1247
01:27:11,920 --> 01:27:16,160
बिल्कुल दीक्षा बिल्कुल दीक्षा हो सकती है और

1248
01:27:16,160 --> 01:27:20,160
साधारण जो सनातनी लोग हैं उनके समझने के लिए एक

1249
01:27:20,160 --> 01:27:24,160
बहुत छोटी सी बात है जो आज भी सनातन की परंपरा को फॉलो

1250
01:27:24,160 --> 01:27:28,160
करते हैं उन्हें ये समझना चाहिए कि हमारे यहां दशा अवतार की

1251
01:27:28,160 --> 01:27:32,480
जो शिक्षा दी गई है जिसमें एक अवतार गुरुदेव

1252
01:27:32,480 --> 01:27:37,600
भी कहा करते हैं कि जो दशावतार में जो

1253
01:27:37,600 --> 01:27:43,040
यश सिंह जी कह रहे हैं कि ये आ नहीं पा रहे हैं ऊपर सर क्या कह रहे हैं?

1254
01:27:43,040 --> 01:27:47,680
क्यों क्या दिक्कत आ गई इनको? नहीं तो होगा ही।

1255
01:27:47,680 --> 01:27:53,200
यश सिंह जी इससे आपके धर्म और ब्रह्म पर क्या असर पड़ रहा है वो बताइए।

1256
01:27:53,200 --> 01:27:57,200
इस सवाल से आपका जीवन कैसे प्रभावित हो रहा है वो बताइए। ये जो

1257
01:27:57,200 --> 01:28:01,200
सवाल आप हमसे पूछ रहे हैं। यह रिलेटिव भी तो होना

1258
01:28:01,200 --> 01:28:05,200
होगा ना। आप अचानक से अगर हमसे कहेंगे कि Axis बैंक में किसके अकाउंट

1259
01:28:05,200 --> 01:28:09,200
में क्या कितना पैसा जमा है तो हम पूछेंगे ना उसका जवाब ना दे पाने की

1260
01:28:09,200 --> 01:28:14,080
स्थिति में। में भैया यह सवाल हमारी चीजों से रिलेट कैसे कर रहा है?

1261
01:28:14,080 --> 01:28:16,960
ठीक है? धर्म और ब्रह्म की व्याख्या उनकी वही

1262
01:28:16,960 --> 01:28:21,040
है जो धर्म और ब्रह्म की व्याख्या शंगेरी के शंकराचार्य देते हैं। जो धर्म

1263
01:28:21,040 --> 01:28:27,040
की व्याख्या जो धर्म और ब्रह्म की व्याख्या पूरी के शंकराचार्य देते हैं।

1264
01:28:30,240 --> 01:28:36,240
हां अब आप बोले शास्त्रवाद जी

1265
01:28:39,200 --> 01:28:44,560
जी भैया जय श्री राम जय श्री राम

1266
01:28:44,560 --> 01:28:48,720
मैंने अभी [गला साफ़ करने की आवाज़] देखा था आपका पूरा चर्चा एक भी प्रश्न का वो उत्तर नहीं

1267
01:28:48,720 --> 01:28:53,840
दे पाई खाली घुमाते रहे

1268
01:28:53,840 --> 01:28:57,920
आपने पूछा रामानुजा रामानुजाचार्य पर भी विश्वास नहीं

1269
01:28:57,920 --> 01:29:00,560
था उनको

1270
01:29:00,560 --> 01:29:05,040
पहले रामानुजाचार्य पे गई बाद में फिर शंकराचार्य

1271
01:29:05,040 --> 01:29:09,680
पे भी आगे लास्ट में लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य

1272
01:29:09,680 --> 01:29:15,680
थे आप देखते थे एक को भी नहीं मानी

1273
01:29:16,000 --> 01:29:20,000
अगर वो थोड़ा सा थोड़ा पर्सनल ना होती ना ये सेंसिटिव चीजों को बीच

1274
01:29:20,000 --> 01:29:24,160
में लाने का प्रयास ना करती तो मैं उनको मना पाता कि यदि आप आदि शंकराचार्य

1275
01:29:24,160 --> 01:29:28,320
जी पर भी बिलीव करते हैं तो देखिए आदि शंकराचार्य जी 13व अध्याय के दूसरे उसमें

1276
01:29:28,320 --> 01:29:32,560
कर रहे हैं कि असंप्रदाय विहीन आपको धर्म नहीं सिखा सकता

1277
01:29:32,560 --> 01:29:36,640
छंदोग उपनिषद कह रहे हैं कि आपको परंपरा प्राप्त आचार्य से ही विद्या

1278
01:29:36,640 --> 01:29:40,800
सीखनी होगी। विपिन चौहान

1279
01:29:40,800 --> 01:29:45,040
जी शास्त्रवाद जी

1280
01:29:45,040 --> 01:29:49,600
जी विपिन जी जय श्री राम

1281
01:29:49,600 --> 01:29:53,760
जी जय श्री राम भैया हां कैसे हैं आप? हां जी

1282
01:29:53,760 --> 01:29:57,840
ठीक है हां जी हां जी हां जी बढ़िया हो गई संतुष्टि हो गई संतुष्टि हो गई

1283
01:29:57,840 --> 01:30:01,840
कि नहीं हो गई हां जी हां जी हां जी हो गई वो तो पहले प्रश्न में ही ढेर

1284
01:30:01,840 --> 01:30:05,920
हो गई वो तो बहुत तो मैं कह के आया था ना

1285
01:30:05,920 --> 01:30:10,800
मैं कह के आया था पांच 10 मिनट उनका वहां पर हो गया खत्म

1286
01:30:10,800 --> 01:30:14,800
बस अभी अब वो कि मैं इस पर बात

1287
01:30:14,800 --> 01:30:19,040
ही नहीं करना चाह रही थी उनका तो वही है ज्ञान ही इंटरनेट से उन्होंने

1288
01:30:19,040 --> 01:30:23,120
बना रखा है ये ये उनकी ये उनकी जनता पूछा करेगी

1289
01:30:23,120 --> 01:30:27,200
अब पूछा करेगी जो जनता उनकी फॉलोअ होगी भी ना यह चर्चा अगर

1290
01:30:27,200 --> 01:30:31,200
उन्होंने हटाई नहीं अपनी आईडी से तो जनता उनसे पूछेगी कि

1291
01:30:31,200 --> 01:30:35,360
इंटरनेट आपका प्रमाण है इसका क्या जवाब होगा पूछेंगी और मैं

1292
01:30:35,360 --> 01:30:39,360
उनका स्वागत करता हूं उनके उनके विरोध में जो भी जो भी अमर्यादित

1293
01:30:39,360 --> 01:30:43,360
चीजें कर रहा है कोई पहली बात वो कोई शंकराचार्य से पूछ के नहीं कर रहा है जिस तरह से

1294
01:30:43,360 --> 01:30:47,440
सनातन धर्म से पूछ के नहीं कर रहा है और यदि आप किसी के कहने से उसकी

1295
01:30:47,440 --> 01:30:51,920
पूरी कम्युनिटी को आप कुछ कहेंग तो आप फिर सनातन धर्म को भी कहने वाली बनेगी क्या

1296
01:30:51,920 --> 01:30:56,000
ये प्रश्न होगा। दूसरी बात यह है मैं उनका विरोध करता हूं। आप मुझे बताइए।

1297
01:30:56,000 --> 01:31:00,000
मैंने कुछ लोगों के नाम नोट किए। मैं मुक्तेश्वर जी महाराज जी के पास

1298
01:31:00,000 --> 01:31:04,000
इस चीज को पहुंचाऊंगा। जरूर पहुंचाऊंगा। इसमें मैं आपके साथ हूं। मगर आप जब

1299
01:31:04,000 --> 01:31:04,640
संप्रदाय का

1300
01:31:04,640 --> 01:31:08,720
विरोध करेंगी के मठ में ये हो रहा है। वहां पर ये हो रहा है। तो

1301
01:31:08,720 --> 01:31:12,720
हम पूछेंगे भैया संप्रदाय के बिना तुम हिंदू कैसे? वह

1302
01:31:12,720 --> 01:31:16,720
तो यह तक अपने उनमें कहती थी कि यह

1303
01:31:16,720 --> 01:31:20,800
जो शंकराचार्य हैं तुम तुम लोग इतना वो नहीं करते

1304
01:31:20,800 --> 01:31:24,800
हो हिंदुओं को जागृत जितना मैं करती हूं मैं मुसलमानों से

1305
01:31:24,800 --> 01:31:29,360
और अंबेडकर वालों से इनसे मैं दिन रात भैती घमंड

1306
01:31:29,360 --> 01:31:33,440
सुरक्षित बैठी ये घमंड है इनका सुरक्षित बैठी हुई है विदेश में

1307
01:31:33,440 --> 01:31:38,160
ठीक है और यहां के बारे में बोल रही है सुरक्षित बैठी हुई है विदेश में

1308
01:31:38,160 --> 01:31:42,320
हां Instagram पे यहां के बारे में बोल रही है जैसे वो ध्रुव राठी बोलता है।

1309
01:31:42,320 --> 01:31:46,640
ठीक है? यहां पे सीने पर गोली खाने वाले लोग हैं। सीने पे

1310
01:31:46,640 --> 01:31:50,640
मां के लिए किससे बात कर रही हो? और यह तो

1311
01:31:50,640 --> 01:31:54,800
ये तो एक निमित्त मात्र व्यक्ति है शंकराचार्य का। ना जाने कैसे

1312
01:31:54,800 --> 01:31:59,120
ऐसे कितनों ने अपना बलिदान दे दिया।

1313
01:31:59,120 --> 01:32:03,200
सुरक्षित कमरे में बैठ के लाखों रुपए वहां पा रही हो। डॉक्टरी की कमाई

1314
01:32:03,200 --> 01:32:07,200
कर रही हो। सुरक्षित कमरे में बैठकर के भाषण बाजी कर लेती हो। उससे कहती हो मैंने बहुत

1315
01:32:07,200 --> 01:32:11,760
कुछ कर लिया। फिर खुद ही बता रही हूं मैं। छोड़िए हटाओ

1316
01:32:11,760 --> 01:32:16,480
क्या बता रही है यह आपका झूठा घमंड है

1317
01:32:16,480 --> 01:32:19,840
लड़ रहे हैं राम मंदिर के मुकदमे गवाही क्यों

1318
01:32:19,840 --> 01:32:24,000
दे रहे हैं मुक्तेश्वर जी अरे भैया अगर वो मुसलमान के पक्षधर

1319
01:32:24,000 --> 01:32:28,080
है क्यों गवाही दे रहे हैं राम मंदिर के मुकदमे में स्कंद पुराण की ये

1320
01:32:28,080 --> 01:32:32,080
नहीं है कुछ भी कांग्रेसी है तो क्यों कह रहे हैं राहुल गांधी को कि तुम

1321
01:32:32,080 --> 01:32:35,200
हिंदू धर्म से आओ

1322
01:32:35,200 --> 01:32:39,280
और तुम्हें कोई प्रश्न आ रहा है तुम्हें बनाना है वीडियो कंटेंट बनाना है बनाओ ना

1323
01:32:39,280 --> 01:32:43,360
भाई भाई मर्यादा में रह के और फिर

1324
01:32:43,360 --> 01:32:47,440
तुम किसी एक व्यक्ति के द्वारा की गई गलती के चक्कर में पूरे संप्रदाय को घसीट रहे हो तो

1325
01:32:47,440 --> 01:32:51,440
फिर आएगा ना कोई ना कोई आएगा ना कोई

1326
01:32:51,440 --> 01:32:55,440
आ गया जी विपिन जी अभी वो

1327
01:32:55,440 --> 01:32:59,520
अपने चैनल पे वो कर रही थी मतलब उन्हें इतना भी भेद ये

1328
01:32:59,520 --> 01:33:03,600
नहीं पता कि कि शिवश जी वहां क्यों आए उसे

1329
01:33:03,600 --> 01:33:07,680
यह नहीं पता कि जब तुम पूरे शंकराचार्य सारे सभी शंकराचार्य को

1330
01:33:07,680 --> 01:33:12,000
तुम लपेट ोगे तो जब सबको लपेटा है तो सबके

1331
01:33:12,000 --> 01:33:16,080
शिष्य तो कहेंगे अब उसे लग रहा है कि जो यह शंकराचार्य शिष्य चैनल

1332
01:33:16,080 --> 01:33:20,080
है उसने मुझे कहा है उसके पक्ष में यह सभी लोग आ

1333
01:33:20,080 --> 01:33:24,080
रहे हैं मतलब उसे यह भी नहीं पता कि क्या देखिए ऐसा है भगवत

1334
01:33:24,080 --> 01:33:28,400
गीता में लिखा हुआ है मैं बताता हूं भगवत गीता हम लोग शास्त्र से बात करते हैं

1335
01:33:28,400 --> 01:33:32,560
भगवत गीता में लिखा है कि आप जिस

1336
01:33:32,560 --> 01:33:34,880
चीज का चिंतन करेंगे उसके प्रति

1337
01:33:34,880 --> 01:33:38,880
उत्पन्न होती है आसक्ति पहला स्टेप क्या होती है आसक्ति

1338
01:33:38,880 --> 01:33:43,680
तो चिंतन किसका चल रहा है इनके मन में? Instagram, फॉलोवर्स,

1339
01:33:43,680 --> 01:33:47,840
साख, साख, प्रेस्टीज। तो अब इन सब

1340
01:33:47,840 --> 01:33:51,920
चीजों के प्रति जागृत हुई आसक्ति। अब इनको

1341
01:33:51,920 --> 01:33:56,480
वो प्रेस्टीज बन कैसे रही है कि भाई कुछ ना कुछ ये बोल रही है, विरोध कर रही है जो भी कर रही हैं।

1342
01:33:56,480 --> 01:34:00,640
फिर किसी ने आकर के इनके विरोध से परेशान होकर के वहां पर जो है कुछ इनको कह दिया। इनकी

1343
01:34:00,640 --> 01:34:04,880
प्रेस्टीज पर बात आ गई। अब क्या हुआ? जब वो आसक्ति जिस चीज के लिए है,

1344
01:34:04,880 --> 01:34:09,120
जब वह पूर्ति नहीं हो रही होती है, तो उत्पन्न होता है क्रोध।

1345
01:34:09,120 --> 01:34:13,440
तो क्या आया? अगला स्टेप आसक्ति के बाद क्रोध। क्रोध।

1346
01:34:13,440 --> 01:34:17,600
अब क्रोध आया। अब क्रोध का सिद्धांत है कि वो जहां

1347
01:34:17,600 --> 01:34:22,160
से उत्पन्न होता है सबसे पहले उसी जगह को जलाता है। अग्नि की तरह।

1348
01:34:22,160 --> 01:34:26,560
क्रोध एक अग्नि है। माचिस की तीली जब जलेगी

1349
01:34:26,560 --> 01:34:30,640
तभी अग्नि प्रकट होगी। ठीक है? तो क्रोध जब आता

1350
01:34:30,640 --> 01:34:34,880
है तो वह प्रज्ञा शक्ति को जला के आता है। तो भगवत

1351
01:34:34,880 --> 01:34:39,120
गीता में लिखा है आपकी स्मरण शक्ति प्रभावित होती है क्रोध आने से। लिखा

1352
01:34:39,120 --> 01:34:43,120
है भगवत गीता में तो स्मरण शक्ति प्रज्ञा शक्ति निर्णय शक्ति आपकी

1353
01:34:43,120 --> 01:34:47,280
प्रभावित हो जाती है। उस समय फिर आप ये जज करना लॉजिक लॉजिकल

1354
01:34:47,280 --> 01:34:50,080
वे से देखना और तर्क बुद्धि से

1355
01:34:50,080 --> 01:34:54,080
चीजों को समझने का प्रयास करना सकारात्मकता सब खत्म होने लगती है। अब

1356
01:34:54,080 --> 01:34:58,080
उनके अंदर क्रोध हावी हो रहा है। क्रोध हावी हो रहा है। वो समझ ही नहीं पा रही। शिवांश नारायण

1357
01:34:58,080 --> 01:35:02,080
द्विवेदी ने वीडियो क्यों बनाया? भाई तुम सबको क्यों घसीट रहे हो? तुम विदेश गमन यात्रा का पता

1358
01:35:02,080 --> 01:35:06,080
कर लो। शंकराचार्य ने क्या कहा है? अगर उन्होंने कहा हो कि निषेध है तो मत बोलो उस

1359
01:35:06,080 --> 01:35:10,160
पर। फिर तुम शंगेरी शंकराचार्य को भी घसीट रही हो। फिर किसी एक

1360
01:35:10,160 --> 01:35:14,720
व्यक्ति के कहने पर तुम्हें कुछ उल्टा सीधा कह देने पर तुम मुक्तिशान जी को भयंकराचार्य

1361
01:35:14,720 --> 01:35:18,960
उल्टा सीधा बोल रही हो। ये भी मत बोलो। उनकी समीक्षा करने का अधिकार शंकराचार्यों

1362
01:35:18,960 --> 01:35:23,040
को है। वो करेंगे। ये भी आदि शंकराचार्य ने लिखा

1363
01:35:23,040 --> 01:35:25,200
है।

1364
01:35:25,200 --> 01:35:29,520
ठीक है? और वो रहे हैं कौन तुम रही हो?

1365
01:35:29,520 --> 01:35:34,400
सन्यासी हैं। तुम हो सब श्रेष्ठतम जो

1366
01:35:34,400 --> 01:35:38,640
वो है क्या कहते हैं? आश्रम सन्यास है। धर्म

1367
01:35:38,640 --> 01:35:43,120
में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए। सन्यासी वो जिसका ब्रह्मचर्य

1368
01:35:43,120 --> 01:35:47,520
सिद्ध है। ठीक है? मनुस्मति

1369
01:35:47,520 --> 01:35:51,680
12वा अध्याय 112 से 114 पढ़ लो जाकर के। अब बात

1370
01:35:51,680 --> 01:35:55,840
आ जाती है कि भाई वह सन्यासी नहीं है कि क्रोध करते हैं। वहां यह नहीं लिखा

1371
01:35:55,840 --> 01:36:00,160
है कि जो सन्यासी क्रोध करेगा उसका सन्यासत्व खत्म। यह स्वाता

1372
01:36:00,160 --> 01:36:04,160
परम अपने कल्याण के लिए है। इसको भी समझ लो।

1373
01:36:04,160 --> 01:36:05,440
जो सन्यासी क्रोध

1374
01:36:05,440 --> 01:36:09,600
करे उसका सन्यासत्व नष्ट नहीं मान लिया गया। वो

1375
01:36:09,600 --> 01:36:13,600
क्रोध करके ही वो चिल्ला रहा है या वैसे ही चिल्ला रहा है। यह कैसे

1376
01:36:13,600 --> 01:36:17,760
पता आपको? उसके मन में क्रोध है कि नहीं है? मैं तेज

1377
01:36:17,760 --> 01:36:21,760
आवाज में बोल रहा हूं। एंपायर आउट दैट बोलता है। बॉलर बोलता

1378
01:36:21,760 --> 01:36:26,240
है अंपायर आउट दैट चिल्ला के बोलता है। क्रोधित होता है क्या अंपायर पे वो

1379
01:36:26,240 --> 01:36:30,400
नहीं होता। इसका मतलब किसी के चिल्लाने से हम जज नहीं कर सकते वो क्रोधित हो रहे हैं कि नहीं।

1380
01:36:30,400 --> 01:36:34,560
यानी कि क्रोधित होना मेरा अंदर अपना निर्णय है। इसका

1381
01:36:34,560 --> 01:36:38,880
मतलब यह बात किसके लिए कि भाई सन्यासी हो तो क्रोधित मत होना।

1382
01:36:38,880 --> 01:36:43,040
मन से किसी के प्रति द्वेष भावना मत लाना मन से। मगर आपको

1383
01:36:43,040 --> 01:36:47,120
व्यवहार तो करना पड़ेगा ना। पाकिस्तानी अटैक करेंगे,

1384
01:36:47,120 --> 01:36:51,280
मुस्लिम अटैक करेंगे। तुम्हारे ऊपर अटैक करेंगे वहां अब मुक्तेश्वर जी खड़े होंगे तो डंडा

1385
01:36:51,280 --> 01:36:54,560
ना मारे उनको

1386
01:36:54,560 --> 01:36:59,120
ना मारे उनको और मारेंगे तो उनका सन्यासी होना खत्म हो जाएगा

1387
01:36:59,120 --> 01:37:03,200
दूर रहो भाई आप दूर रहिए नहीं मालूम है दूर रहिए

1388
01:37:03,200 --> 01:37:07,280
अपने वो नन्हे मुन्ने जो चिल्लांटू हैं वो क्या नाम

1389
01:37:07,280 --> 01:37:11,680
है बौद्धों को पकड़िए इस्लाम को पकड़िए उनको करिए ना

1390
01:37:11,680 --> 01:37:15,680
हम साथ हैं आपके दूर रहिए खामखा

1391
01:37:15,680 --> 01:37:19,680
वो व्यर्थ का जो एक भार

1392
01:37:19,680 --> 01:37:25,120
है वो क्यों अपने उसमें उठा रहे हैं? शंकराचार्यों से लड़ने चले आए।

1393
01:37:25,120 --> 01:37:29,120
अरे भैया जिसके ऊपर जिसके ऊपर आई हो उसका उसके

1394
01:37:29,120 --> 01:37:35,120
बारे में नहीं पता वो तक तो कुछ कर नहीं पा रहे हैं।

1395
01:37:37,760 --> 01:37:42,800
जी विपिन जी बोल।

1396
01:37:42,800 --> 01:37:46,880
जी अभी उनहीं के ही उसमें मतलब उनके कुछ तर्क चल

1397
01:37:46,880 --> 01:37:50,880
रहे थे तो मैंने चीज भी देखी है कि ऐसे जो भी

1398
01:37:50,880 --> 01:37:55,280
तत्व होते हैं ना इनको आर्य समाजी सोचते हैं अब हम इन्हें

1399
01:37:55,280 --> 01:37:59,360
अपने लपेटे में शरण शरण देते हैं

1400
01:37:59,360 --> 01:38:03,520
आर्य समाजी मूर्ति पूजा को आर्य समाजी मूर्ति पूजा को अधर्म मानते

1401
01:38:03,520 --> 01:38:08,320
हैं। ये कल रील बना दें इनके फॉलोअ देखना क्या होगा फिर

1402
01:38:08,320 --> 01:38:12,400
आर्य समाजी आर्य आर्य समाजी रामलीला को देखने को

1403
01:38:12,400 --> 01:38:16,400
जो है 100 अस्मद यज्ञ के बराबर पाप मानते हैं जितना उससे पुण्य मिलता

1404
01:38:16,400 --> 01:38:20,400
है उतना पाप देखना हर हर महादेव करती हैं हां आर्य

1405
01:38:20,400 --> 01:38:25,440
समाजी कहे शिव जी को तक बोल दिया उन्होंने

1406
01:38:25,440 --> 01:38:28,960
बताइए

1407
01:38:28,960 --> 01:38:32,960
इसको कहते हैं फिर मैं वही फिर अब ये मक्कारी बोल रही

1408
01:38:32,960 --> 01:38:37,040
है डंके की चोट पर बोल रही हैं कि भैया मैं जो है मक्कारी का शब्द का

1409
01:38:37,040 --> 01:38:41,040
उपयोग करूंगी तो मैं आपका क्या गुलाम हूं क्या? शंकराचार्य

1410
01:38:41,040 --> 01:38:45,120
का शिष्य हूं मैं। राम का भक्त हूं। तुम्हारा गुलाम हूं क्या

1411
01:38:45,120 --> 01:38:51,120
मैं? यहां पे मैं मक्कारी शब्द का उपयोग सुनूंगा तुमसे मेरे लिए।

1412
01:38:51,520 --> 01:38:56,640
जय श्री राम। चीथड़े उड़ जाएंगे सिद्धांतों के। जय श्री राम।

1413
01:38:56,640 --> 01:39:00,960
चीथड़े उड़ जाएंगे जैसे अभी उड़े हैं। इस क्रम में आगे बढ़ोगे

1414
01:39:00,960 --> 01:39:05,280
ना जिस दिन इसलिए कह रहे हैं दूर रहो। बार-बार कह रहा हूं। बार-बार

1415
01:39:05,280 --> 01:39:09,520
कह रहा हूं। मक्कारी शब्द का उपयोग करूंगी। वाह

1416
01:39:09,520 --> 01:39:15,520
मैं तो ऐसी भाषा बोलूंगी। वाह कौन हो? डॉन हो तुम।

1417
01:39:16,160 --> 01:39:20,400
अभद्रता कर रही थी वो। हां। बोल

1418
01:39:20,400 --> 01:39:24,800
हो रही थी भैया। लेकिन आपको आपको कह रही थी कि आप अभद्रता

1419
01:39:24,800 --> 01:39:28,800
ना करें। आप उसको वो नहीं करें। जो फिकर हो वो रही थी।

1420
01:39:28,800 --> 01:39:32,880
ये अभद्रता है। ये अभद्रता परंपरा पूछना तुम्हारा प्रमाण क्या

1421
01:39:32,880 --> 01:39:37,040
है? ये पूछना अभद्रता है। ये कहो कि हमारे फंसने वाली बातें मत करो

1422
01:39:37,040 --> 01:39:40,400
तुम।

1423
01:39:40,400 --> 01:39:44,400
मीठा रोने लगी थी। बस वो तो वो तो

1424
01:39:44,400 --> 01:39:48,400
वो तो आर्य समाज के आर्य समाज कभी परंपरा बताने लग गई

1425
01:39:48,400 --> 01:39:52,400
थी। हां वो आर्य समाज के अर्थ अच्छा

1426
01:39:52,400 --> 01:39:56,400
इनको यही नहीं पता कि भैया आर्य समाज वाले ना तो अवतार को मानते हैं

1427
01:39:56,400 --> 01:40:00,720
ना तो वो मूर्ति पूजा को मानते हैं और तुम आर्य समाज के किसी आचार्य को प्रमाणिक

1428
01:40:00,720 --> 01:40:04,800
बोल रही हो अच्छा खुद बोल रहे हो कि मैं रामानुजा संप्रदाय कहीं से उन्होंने

1429
01:40:04,800 --> 01:40:08,880
बताया कि मैं उस संप्रदाय से हूं भाई और पीडीएफ से YouTube से

1430
01:40:08,880 --> 01:40:13,120
वो सायनाचार्य का जो आर्काइव से इन्होंने वो वहां से पीडीएफ डाउनलोड

1431
01:40:13,120 --> 01:40:17,680
कर लिया मतलब मिक्स मिक्स बातें कर रही थी भाई कहीं से तो आपको बताना पड़ेगा

1432
01:40:17,680 --> 01:40:23,520
कि भाई आप कौन सी पर्टिकुलर चीज को मान रहे हो?

1433
01:40:23,520 --> 01:40:29,440
तीन संप्रदाय बताया उन्होंने [हंसी]

1434
01:40:29,440 --> 01:40:33,760
यश जी जो प्रश्न कर रहे हैं यश सिंह जी हमारा

1435
01:40:33,760 --> 01:40:38,400
नंबर सार्वजनिक है 7408301869

1436
01:40:38,400 --> 01:40:42,720
नोट कर लो और जितने भी आपको वैचारिक मतभेद है

1437
01:40:42,720 --> 01:40:46,720
आप लेके फॉर्म भर दो आ जाओ बदतमीजी से बात नहीं करोगे तब तक बात

1438
01:40:46,720 --> 01:40:51,040
होगी विषयांतर नहीं करोगे बात होगी ठीक है विषयंतर मत करो बदतमीजी मत करो

1439
01:40:51,040 --> 01:40:55,360
पर्सनल अटैक्स मत मत करो। ओके भैया हटा दो ये ऑपरेटर महोदय

1440
01:40:55,360 --> 01:40:59,440
इसको हटा दो स्क्रीन से। फॉर्म भर देना फॉर्म वो मुन्ना भाई

1441
01:40:59,440 --> 01:41:05,440
मुन्ना भाई एमबीबीएस का डायलॉग याद आया। फॉर्म भरा क्या? [हंसी]

1442
01:41:07,520 --> 01:41:11,840
फॉर्म भरा क्या? [हंसी]

1443
01:41:11,840 --> 01:41:15,850
मेरा भी फॉर्म भर देना। मेरा मेरा भी फॉर्म।

1444
01:41:15,850 --> 01:41:20,160
[हंसी] हां राम। ये बढ़िया। तीन तीन

1445
01:41:20,160 --> 01:41:24,160
तीन तीन संप्रदाय बता दिए। जी तीन तीन बता दीजिए जी

1446
01:41:24,160 --> 01:41:28,880
तीनतीन संप्रदाय उन्होंने बताया [हंसी] उसमें

1447
01:41:28,880 --> 01:41:33,120
आद शंकराचार्य संप्रदाय भी लास्ट में बता दिया उन्होंने

1448
01:41:33,120 --> 01:41:37,120
हम कह रहे हैं भाई कोई एक ही पकड़ के चलो ना

1449
01:41:37,120 --> 01:41:41,920
भाई

1450
01:41:41,920 --> 01:41:46,000
मतलब खुद कन्फ्यूज हो

1451
01:41:46,000 --> 01:41:50,560
भाषनाचार्य की और कभी पता लग रहा है कि कभी रामानंदी

1452
01:41:50,560 --> 01:41:54,560
संप्रदाय बता बता रही है कभी रामानुज संप्रदाय कभी आर्य समाज अंत में तो

1453
01:41:54,560 --> 01:41:58,720
ऊट मतलब कद बांध के किसी तरीके से जो है

1454
01:41:58,720 --> 01:42:02,880
आदि गुरु शंकराचार्य का सिद्धांत भी बताने लग गए कि हम भाई तुम

1455
01:42:02,880 --> 01:42:07,360
जहां बैठे हो उसी के प्रतिपादक लोग बैठे उनके तुच्छ

1456
01:42:07,360 --> 01:42:11,360
धूल के बराबर के लोग भी नहीं बैठे यहां पे और उनके सामने भी

1457
01:42:11,360 --> 01:42:15,760
तुम ऐसी बातें कर रहे हो ये तो मेरे मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया उस समय

1458
01:42:15,760 --> 01:42:21,760
मैं खुद कंफ्यूज हो गया उस [हंसी] बात से

1459
01:42:26,080 --> 01:42:30,880
वेद के अतिरिक्त स्वता प्रमाण कुछ नहीं है और

1460
01:42:30,880 --> 01:42:34,960
फिर भी आज भी गुरु के शरण में आने के बाद ही हम वेद को प्रमाणित

1461
01:42:34,960 --> 01:42:38,960
मानते हैं। जब तक गुरु ना कह दे कि ये चीज सही है तो सही है गलत है तो गलत

1462
01:42:38,960 --> 01:42:42,960
है। हम स्वत प्रमाण मान लिया। अरे अरे

1463
01:42:42,960 --> 01:42:47,360
जो जो बात उनके मन के अकॉर्डिंग सही होगी चाहे वो कोई भी परंपरा

1464
01:42:47,360 --> 01:42:51,440
के आचार्य बोले वो उस तरफ में चल जाएगी। हां हटा दी

1465
01:42:51,440 --> 01:42:55,520
हटा दी। ये पढ़िए ये कमेंट कितना बढ़िया है ये देखिए कभी मैं आदि गुरु शंकराचार्य जी

1466
01:42:55,520 --> 01:42:59,600
को मानता हूं कभी रामानुजाचार्य को मानता हूं कभी आर्य

1467
01:42:59,600 --> 01:43:03,840
समाज को मानता हूं। [हंसी] हम जी

1468
01:43:03,840 --> 01:43:08,240
ऐसे ही लोग जी ऐसे ही लोग ये आपने बहुत अच्छा किया

1469
01:43:08,240 --> 01:43:12,640
और मैं काफी समय से ये सोच रहा था कि ऐसे बहुत सारे यूबर हैं जो कि मनमुखी

1470
01:43:12,640 --> 01:43:16,720
ज्ञान दे रहे हैं। मतलब शंकराचार्य आदि गुरु शंकराचार्य

1471
01:43:16,720 --> 01:43:20,960
जी ने जो कहा वो उनकी परंपरा के जो आज के चार शंकराचार्य

1472
01:43:20,960 --> 01:43:24,960
हैं वो नहीं बताएंगे। है ना? वो कौन बताएंगे? ये यूट्यूबर

1473
01:43:24,960 --> 01:43:29,280
बताएंगे। ये बोलेंगे मुझे ज्ञान डायरेक्ट उनसे मिल गया। अच्छा इन्होंने

1474
01:43:29,280 --> 01:43:33,600
इन्होंने एक रील और बनाई थी जब मैंने एक रील बना दी कि बहन जो आपसे

1475
01:43:33,600 --> 01:43:37,600
व्यक्तिगत कटाक्ष किए गए हैं मैं क्षमा प्रार्थी हूं और यदि

1476
01:43:37,600 --> 01:43:41,600
इस सब के बाद भी आप जो है वो

1477
01:43:41,600 --> 01:43:45,680
यदि इस सब के बाद भी आप चैलेंज वाली भावना आपके अंदर है

1478
01:43:45,680 --> 01:43:49,680
तो आपका स्वागत है मगर मेरा व्यक्तिगत सजेशन है कि आप ऐसी

1479
01:43:49,680 --> 01:43:53,680
किसी भी चर्चा से दूर रहिए कि 510 मिनट से ज्यादा टिक नहीं पाएंगी शंकराचार्य

1480
01:43:53,680 --> 01:43:57,920
का विरोध करते हुए अपने आपको मनुष्य भी सिद्ध नहीं कर पाएंगे और ये अगर अगर ये पर्सनल

1481
01:43:57,920 --> 01:44:02,000
अटैक ना करें। इनकी मनुष्यता पे इनकी मनुष्यता पर सवाल आ जाता है। अभी तो

1482
01:44:02,000 --> 01:44:06,400
लाइफ पूरी हो गई। एक बोल नहीं पाती मनुष्य कैसे

1483
01:44:06,400 --> 01:44:10,400
ठीक है। हम बिल्कुल बिल्कुल हां बिल्कुल तो इन्होंने

1484
01:44:10,400 --> 01:44:14,480
ये जब मैंने रील बनाई है ना उसके बाद जो है इन्होंने एक रील बनाई उसमें

1485
01:44:14,480 --> 01:44:18,640
बताया शंगेरी मटके शंकराचार्य वहां से डोनेशन ले रहे हैं। डोनेशन ले रहे हैं।

1486
01:44:18,640 --> 01:44:22,800
तो अभी पहलगांव जब अटैक हुआ था ना पता कर लेना। जितने लोग प्रभावित हुए

1487
01:44:22,800 --> 01:44:27,200
थे सबके घर में दो लाख दिए थे। सबके घर में श्रृंगेरी

1488
01:44:27,200 --> 01:44:31,200
वालों ने और ना जाने कितने कितने प्रकल्प चल रहे हैं

1489
01:44:31,200 --> 01:44:37,200
पता है तुमको राम सेतु के लिए कौन-कौन लड़ा था जाके पता करो

1490
01:44:37,840 --> 01:44:42,160
राम मंदिर है

1491
01:44:42,160 --> 01:44:46,240
अच्छा लास्ट में उसमें इन्होंने उसमें

1492
01:44:46,240 --> 01:44:50,720
उन्होंने लास्ट में ये बात और कही थोड़ी फिल्मी स्टाइल में तथकिम

1493
01:44:50,720 --> 01:44:54,880
तथ्य किम तथ्यम तथ्य किम इस तरह से कि

1494
01:44:54,880 --> 01:44:58,880
देखो मैंने इतनी तगड़ी बात बता दी आज। अब इसका तो कोई जवाब

1495
01:44:58,880 --> 01:45:02,960
है ही नहीं। अरे भैया जिसकी बात बता रही हो लॉजिकल प्रश्न

1496
01:45:02,960 --> 01:45:07,120
ये है उसके शास्त्र आए कहां से आपके पास? प्रमाण यह है कि वो खुद कह रहा है भगवत

1497
01:45:07,120 --> 01:45:11,200
गीता में संप्रदाय विहीन व्यक्ति को त्याग दो लात मार दो लात।

1498
01:45:11,200 --> 01:45:15,440
चलो ततक्यम ले। संप्रदाय

1499
01:45:15,440 --> 01:45:19,840
विहीन व्यक्ति नहीं चाहिए। कितना भी ततकिम कर रहा हो वो।

1500
01:45:19,840 --> 01:45:23,920
ठीक है? तो आप यह ड्रामा ड्रामेटाइजेशन करके

1501
01:45:23,920 --> 01:45:28,000
मत आइए। आप सकारात्मक बुद्धि ले आइए। एक एक प्रश्न का जवाब है। एक एक

1502
01:45:28,000 --> 01:45:32,160
प्रश्न का जवाब खाली नहीं बैठे हैं। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल मैं

1503
01:45:32,160 --> 01:45:36,240
बोलूं अगर टू द पॉइंट अगर वो बात करती तो उन्हें अच्छे से समझ में आ जाता।

1504
01:45:36,240 --> 01:45:40,560
लेकिन वो बात करने के उसमें थी ही नहीं कि भैया मुझे समझना है इस चीज को।

1505
01:45:40,560 --> 01:45:44,560
वो यह मान के बैठी हुई हैं कि विदेश में बैठी हुई हूं और जो ज्ञान मैंने लिया है

1506
01:45:44,560 --> 01:45:48,720
मुझे शंकराचार्यों से भी ज्यादा ज्ञान है। मतलब अगर आप हमारे आचार्यों

1507
01:45:48,720 --> 01:45:52,800
की किसी भी बात के ऊपर अपनी बात रख रही हैं यानी कि आप यह दावा कर रही हैं

1508
01:45:52,800 --> 01:45:53,300
कि

1509
01:45:53,120 --> 01:45:57,600
आपका जो ज्ञान है वो हमारे आचार्यों से भी बड़ा ज्ञान है। जिन्होंने पूरा सन्यास

1510
01:45:57,600 --> 01:46:01,840
ले रखा है। उनकी पूरा एज हो जाती है व्यक्ति की।

1511
01:46:01,840 --> 01:46:05,840
सन्यास सन्यास सन्यास वो बड़ा है कि नहीं वो वो एक बात

1512
01:46:05,840 --> 01:46:09,840
अलग है मगर मेरा जो मेरा जो ज्ञान है मैं जो

1513
01:46:09,840 --> 01:46:13,840
प्रस्तुत कर रही हूं वो किसी भी आचार्य परंपरा से

1514
01:46:13,840 --> 01:46:18,240
स्वतंत्र होते हुए भी प्रामाणिक है क्योंकि मैंने माना है

1515
01:46:18,240 --> 01:46:23,280
क्योंकि समझ रहे हैं भाई हम आर्काइव को प्रमाण कैसे मान ले

1516
01:46:23,280 --> 01:46:27,760
आर्काइव हमारे लिए प्रमाण नहीं है आपके लिए प्रमाण है ये क्या कह रहे हैं अक्षय

1517
01:46:27,760 --> 01:46:33,360
अक्षय करके कोई आए हैं मोक्ष कह रहे हैं ये क्या कह रहे भाई

1518
01:46:33,360 --> 01:46:37,360
भाई किसी को अब वैचारिक मतभेद के निमित्त जो चर्चा करनी हो तो वह

1519
01:46:37,360 --> 01:46:41,520
वो कर दे। क्या कहते हैं WhatsApp करें 740830

1520
01:46:41,520 --> 01:46:46,080
पट्टी चला दीजिए। पट्टी ठीक है। ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़]

1521
01:46:46,080 --> 01:46:51,440
चल गई पट्टी चल गई। मुझे आ गया भाई पट्टी चलानी। ये पट्टी [हंसी]

1522
01:46:51,440 --> 01:46:55,600
ये पट्टी जो है ना ये पट्टी साइक्लिक है और

1523
01:46:55,600 --> 01:47:01,040
इसी इसी साइकिल में सबको आना है। एक दिन ये साइक्लिक है।

1524
01:47:01,040 --> 01:47:05,360
आप देखिए डंके की चोट पर कितने ज्यादा स्पष्ट

1525
01:47:05,360 --> 01:47:08,400
होते हुए हम लोग अपनी बात कहते हैं। कहते

1526
01:47:08,400 --> 01:47:12,560
हैं कि नहीं कहते? जैसे मेरे पास आया बात मेरे पास आई बात तुरंत

1527
01:47:12,560 --> 01:47:16,640
बोला भाई मेरे पास यहां से आ रहा है। उसने सवाल उठाया ना

1528
01:47:16,640 --> 01:47:20,880
तुम्हारे पास कहां से? मैंने बोला और आज तक ना जाने कितनी बार मैंने स्पष्ट

1529
01:47:20,880 --> 01:47:24,960
बोला होगा। जब भी मेरा सिद्धांत पूछा जाएगा। जब भी किसी विषय

1530
01:47:24,960 --> 01:47:29,040
में मेरी मान्यता क्या है? वो पूछी जाएगी। मेरा गुरु कौन है? परंपरा कौन है?

1531
01:47:29,040 --> 01:47:33,040
मैं वहां पर अपनी चीजों को स्पष्ट रखूंगा। उसमें गोलमोल बातें

1532
01:47:33,040 --> 01:47:36,480
नहीं करूंगा। ब्रह्मा कुमारी की तरह।

1533
01:47:36,480 --> 01:47:40,990
अरे आप इनका नाम ले लिए आपने।

1534
01:47:40,990 --> 01:47:45,840
[हंसी] अरे तो वही बवाल है इनका।

1535
01:47:45,840 --> 01:47:49,840
जी बताएं। मतलब प्रणाम।

1536
01:47:49,840 --> 01:47:54,960
हां जी। पहले आपसे पहले बात हो चुकी है। दोनों से थोड़ी-थोड़ी बात हुई है। पहले

1537
01:47:54,960 --> 01:47:59,120
मैं समझना चाह रहा था फर्ज करें जो आज के जमाने में अगर हम बात करते

1538
01:47:59,120 --> 01:48:03,200
हैं। अगर अगर हम शंकराचार्य मत से अगर हम अगर हम नहीं

1539
01:48:03,200 --> 01:48:07,280
मानते हैं तो उसके अलावा हम और किसका हम ये दे सकते और किसका हम प्रमाण

1540
01:48:07,280 --> 01:48:11,680
दे सकते हैं? देखिए मूल में मूल मूल में तो शंकराचार्य

1541
01:48:11,680 --> 01:48:15,760
जी ही बैठे हैं सबके बाकी रामानुजाचार्य जी की परंपरा

1542
01:48:15,760 --> 01:48:20,080
में आप जा सकते हैं मधवाचार्य परंपरा में जा सकते हैं प्रामाणिक परंपराएं

1543
01:48:20,080 --> 01:48:23,760
जो हैं उनकी आप जा सकते हैं क्योंकि क्योंकि

1544
01:48:23,760 --> 01:48:28,240
वहां पर संप्रदाय में ब्रह्म को लेकर के तो मान्यता

1545
01:48:28,240 --> 01:48:32,320
अलग-अलग है। मगर जो मोटे-मोटे हमारा धर्म धर्म के जो सिद्धांत है

1546
01:48:32,320 --> 01:48:36,320
उसमें एकत्व है। तो हमारे को हमारे भाइयों की जरूरत सनातनियों

1547
01:48:36,320 --> 01:48:40,400
की जरूरत कहां पर है? उनका उनका भ्रम अगर थोड़ा बहुत अलग

1548
01:48:40,400 --> 01:48:44,400
है तो उसमें हमारा व्यवहार में कोई उसमें आपत्ति नहीं होनी है। तो इन

1549
01:48:44,400 --> 01:48:48,560
सबका धर्म जो है प्रामाणिक परंपराओं का एक है। जैसे विदेश गमन को ले एक ही है

1550
01:48:48,560 --> 01:48:54,160
और वैदिक जो भी आचार विचार हैं, शौचाचार हैं

1551
01:48:54,160 --> 01:48:58,160
वर्णाश्रम धर्म इत्यादि लेकर के सब में एक है। तो आप उसमें से किसी तो

1552
01:48:58,160 --> 01:49:02,240
इसको इस प्रकार से अगर कहे तो क्या सपोज लिंगायत को हम एक प्रमाणिक

1553
01:49:02,240 --> 01:49:06,240
संप्रदाय मान सकते हैं? ये ये एक अलग विषय हो जाए वस्तुनिष्ठ नाम

1554
01:49:06,240 --> 01:49:10,800
ले ले के प्रमाणिक मैंने मोटा मोटा बता दिया मुझे

1555
01:49:10,800 --> 01:49:14,800
ये कौन-कौन से संप्रदाय कौन-कौन से

1556
01:49:14,800 --> 01:49:18,880
संप्रदाय इस कौन कौन-कौन

1557
01:49:18,880 --> 01:49:22,960
से संप्रदाय वैदिक माने गए हैं प्रामाणिक माने गए हैं हम बोलेंगे तो

1558
01:49:22,960 --> 01:49:26,960
हम वो शंकराचार्य की दृष्टि में बोलेंगे उनकी सीमा में बोलेंगे तो

1559
01:49:26,960 --> 01:49:31,040
हमें वो वस्तुनिष्ठता के साथ वो अलग से हम प्रस्तुत कर देंगे वो एक अलग प्रश्न मोटे

1560
01:49:31,040 --> 01:49:35,040
मोटे कुछ उदाहरण मैंने आपको दे दिए जैसे कि सुद्धा परंपरा है इनकी

1561
01:49:35,040 --> 01:49:38,800
वल्लभाचार्य जी की मान्य है गड वैष्णव भी मान्य है

1562
01:49:38,800 --> 01:49:43,440
प्रामाणिक और क्या कहते हैं मधवाचार्य मान्य है रामानुजाचार्य

1563
01:49:43,440 --> 01:49:47,680
मान्य है और क्या कहते हैं रामानंदाचार्य मान्य है

1564
01:49:47,680 --> 01:49:51,920
तो ये कुछ मोटी मोटी आपको शंकर परंपराएं आपके समक्ष है बाकी

1565
01:49:51,920 --> 01:49:56,000
जो और कितने सारे नाम इसमें शामिल हो सकते हैं प्रामाणिकता में तो उस पर

1566
01:49:56,000 --> 01:50:00,000
हम अलग से विध्चुअली लाएंगे कंटेंट लाने का प्रयास

1567
01:50:00,000 --> 01:50:04,320
कर रहे इस पर अगर कभी बात हो तो तो मैं आई वांट टू मतलब इस पे मुझे एक्चुअली

1568
01:50:04,320 --> 01:50:08,480
खास करके समझना है क्योंकि क्या प्रमाणिक क्या है और क्या-क्या नहीं है क्योंकि बहुत मार्केट में तो

1569
01:50:08,480 --> 01:50:12,480
नकली भी आपके इस कान टाइप के भी चीजें देखिए मूल में मैंने आपको जब मूल

1570
01:50:12,480 --> 01:50:17,200
में बता दिया शंकराचार्य की दृष्टि से कि शंकराचार्य की सीमा में रहकर आप चले

1571
01:50:17,200 --> 01:50:21,280
शंकराचार्य ने बता दिया हां शंकराचार्य की सीमा

1572
01:50:21,280 --> 01:50:25,360
में रहकर आप चले क्योंकि हमें वेद वहीं से वेद का आना हमारा वहीं से सिद्ध हो रहा है

1573
01:50:25,360 --> 01:50:29,920
उन्होंने बता दिया कि आप रामानुजाचार्य परंपरा में भी जा सकते बिल्कुल जा सकते हैं रामानुजाचार्य

1574
01:50:29,920 --> 01:50:34,800
भगवान की परंपरा में जाए रामानंदाचार्य वो स्वीकार करते हैं। ठीक है?

1575
01:50:34,800 --> 01:50:38,800
तो जब हमारा मूल हमें मिल गया तो हमें फिर चाहे जो हो जाए जैसे

1576
01:50:38,800 --> 01:50:42,800
हमें मालूम पड़ गया वेद की सीमा में रहना है। किसी भी शास्त्र को मानने और ना मानने के

1577
01:50:42,800 --> 01:50:46,880
लिए वेद की सीमा में रहना है। तो जो जितने भी शास्त्र वेद की सीमा

1578
01:50:46,880 --> 01:50:50,960
का उल्लंघन नहीं करेंगे वो सारे शास्त्र हम स्वीकार कर सकते हैं। उल्लंघन करेंगे स्वीकार

1579
01:50:50,960 --> 01:50:54,160
नहीं करेंगे। वेद विरोधी नास्तिक

1580
01:50:54,160 --> 01:50:54,800
हां

1581
01:50:54,800 --> 01:50:59,360
बहुत सही है। जी सनातन शंकर जी जी

1582
01:50:59,360 --> 01:51:03,920
बिल्कुल बिल्कुल आपने बिल्कुल सही कहा। धर्म और ब्रह्म हमारा एक है। संप्रदायों

1583
01:51:03,920 --> 01:51:08,480
के अलग-अलग धर्म धर्म धर्म एक है। ब्रह्म को ले मान्यता है। थोड़ी-थोड़ी

1584
01:51:08,480 --> 01:51:12,880
थोड़ी-थोड़ी अलग है। उसमें भी उसमें भी गुरुदेव कहते हैं वो सत्य

1585
01:51:12,880 --> 01:51:16,880
की क्रमिक अभिव्यक्ति है कि उस स्टेज में भी व्यक्ति पहुंचेगा तो वहां से

1586
01:51:16,880 --> 01:51:21,040
भी मुक्ति जो है ये अपने संप्रदायिक भेद के अनुसार मैं बता रहा हूं। तो वो

1587
01:51:21,040 --> 01:51:25,120
वहां पर चल जाए क्योंकि हमारा धर्म एक है। मूर्ति पूजा वर्णाश्रम मोटी मोटी

1588
01:51:25,120 --> 01:51:29,120
ये चीजें हमारी एक हो गई। यज्ञ को ले हमारी जो मान्यता है वही रामानुजाचार्य जी

1589
01:51:29,120 --> 01:51:33,120
की है वही रामानंदाचार्य जी की तो उसमें ज्यादा वो

1590
01:51:33,120 --> 01:51:37,120
नहीं है स्पेस नहीं है डिफरेंसेस नहीं है और हमारे को दूसरे हिंदू

1591
01:51:37,120 --> 01:51:41,360
की आवश्यकता कहां है धरती पे धर्म के विषय में क्योंकि हम जब मूर्ति

1592
01:51:41,360 --> 01:51:45,440
पूजा के लिए लड़ने जाएंगे तो हमारा बगल वाला हिंदू आ रहा है कि नहीं आ रहा है

1593
01:51:45,440 --> 01:51:49,600
उसे बचाने के लिए आर्य समाज ही होगा नहीं आएगा नहीं आएगा आ जाए तो

1594
01:51:49,600 --> 01:51:53,840
वो आ जाएगा तो वो आर्य समाज के विरोध में आएगा वो आर्य

1595
01:51:53,840 --> 01:51:58,080
समाज छोड़ के आएगा ना तो कह मूर्ति पूजा आर्य समाज तो कह रहा है अधर्म

1596
01:51:58,080 --> 01:52:02,080
है मूर्ति पूजा तो जो आ रहा है वो वो अधर्म करेगा अगर

1597
01:52:02,080 --> 01:52:06,240
वो आर्य समाज है तो वो उसके अनुसार अधर्म करेगा और इस वाले नहीं

1598
01:52:06,240 --> 01:52:10,480
अगर अगर वहां शिव की प्रतिमा होगी तो इस वाले नहीं आएंगे

1599
01:52:10,480 --> 01:52:14,640
इस वाले वर्णाश्रम के लिए नहीं आएंगे वर्णाश्रम के लिए नहीं आएंगे और

1600
01:52:14,640 --> 01:52:18,640
जहां पे ईश्वर अल्लाह को एक कहने का विरोध किया जा रहा होगा वहां इस नहीं आएगा ब्रह्मा

1601
01:52:18,640 --> 01:52:22,720
कुमारी नहीं आएगा ब्रह्मा कुमारी भी नहीं आएगा मूर्ति में

1602
01:52:22,720 --> 01:52:26,720
भी नहीं आएगा ब्रह्मा कुमारी हमने एक एक रोड पे

1603
01:52:26,720 --> 01:52:31,280
स्टेज पर प्ले किया था। करीब करीब हो गए होंगे चारप साल।

1604
01:52:31,280 --> 01:52:35,600
बहुत पीछे हमारी लिस्ट में जाएंगे वो मिल जाएगा आपको। बहुत साधारण

1605
01:52:35,600 --> 01:52:39,840
सा प्ले था। नाटक था नुक्कड़ नाटक वो किया था हमने इसी डिफरेंसेस

1606
01:52:39,840 --> 01:52:43,840
और ओपिनियंस पे काफी सराहा गया था क्रिटिक्स के द्वारा। हालांकि

1607
01:52:43,840 --> 01:52:49,440
बहुत ही अल्प संसाधनों के साथ वो हुआ था। है ना?

1608
01:52:49,440 --> 01:52:53,440
जी जी जी बिल्कुल नहीं बहुत बहुत महत्वपूर्ण जितनी

1609
01:52:53,440 --> 01:52:57,680
भी चर्चा हुई आपकी उनके साथ वो लास्ट में जो उन्होंने

1610
01:52:57,680 --> 01:53:01,760
बात की उन्हें नहीं करनी चाहिए थी पर जितनी भी हुई उतनी

1611
01:53:01,760 --> 01:53:05,760
से काफी वैल्यूुएबल सवाल अभी ले लेंगे अभी सनातन शंकर जी बोल रहे

1612
01:53:05,760 --> 01:53:09,760
हैं फिर ले लेंगे इसको हटा दीजिए जी तो जितनी

1613
01:53:09,760 --> 01:53:14,320
भी चर्चा आपकी उनसे हुई है अगर कोई तार्किक

1614
01:53:14,320 --> 01:53:18,560
रूप से उस चर्चा को सुनेगा तो मेरा यह मानना है कि उसे कहीं ना कहीं

1615
01:53:18,560 --> 01:53:22,640
ऐसा जरूर पता चल जाएगा कि प्रमाणिकता की कितनी ज्यादा आवश्यकता

1616
01:53:22,640 --> 01:53:25,600
है। हमारे शास्त्रों की प्रमाणिकता हमारे आचार्यों से

1617
01:53:25,600 --> 01:53:29,680
ही होगी। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि यह मैंने वेद

1618
01:53:29,680 --> 01:53:33,680
मंत्र ले लिया। अब इसका अर्थ जो है वो मैं अपने आप कहीं से कर

1619
01:53:33,680 --> 01:53:38,000
लूंगा और क्योंकि मुझे संस्कृत आती है तो मैं संस्कृत के आधार

1620
01:53:38,000 --> 01:53:42,000
पर उसका अर्थ कर लूंगा। भाई संस्कृत में एक ही शब्द के बहुत सारे अर्थ भी होते हैं।

1621
01:53:42,000 --> 01:53:46,000
तो कौन सा अर्थ लेना है यह हमें आचार्य बताएंगे। यहां

1622
01:53:46,000 --> 01:53:50,160
पर जो है बहुत सारे लोग चूक कर जाते हैं और वह यह समझते हैं कि क्योंकि हमने

1623
01:53:50,160 --> 01:53:54,320
इंटरनेट से ले लिया तो वो मान्य एक एक मैं इस तरह

1624
01:53:54,320 --> 01:53:58,880
का एक कुछ बनाने की सोच रहा हूं। अगर कोई हमें सुन रहा है और वो इन्वेस्टमेंट

1625
01:53:58,880 --> 01:54:02,960
कर सकता है तो मैं एक छोटी सी एक शॉर्ट फिल्म बनाना चाहता

1626
01:54:02,960 --> 01:54:07,120
हूं जिसमें कि उसका प्रारूप यह होगा कि भाई

1627
01:54:07,120 --> 01:54:11,200
नॉर्मल दिखाया जाएगा कि यह है वेद और यह है वेदार्थ। अब

1628
01:54:11,200 --> 01:54:15,200
एक गुरु ने अपने शिष्य को दिए। अब वह ले चला उसने जगह-जगह

1629
01:54:15,200 --> 01:54:19,680
जो है बांटना शुरू किया वेद वेदार्थ वेद वेदार्थ बार-बार दे रहे देते हुए दिखाया जाएगा

1630
01:54:19,680 --> 01:54:23,680
उसके बाद फिर एक किसी के अंदर आया वेद तो पकड़ा वेदार्थ को फेंक

1631
01:54:23,680 --> 01:54:27,840
दिया वेद को पकड़ा वेदार्थ को

1632
01:54:27,840 --> 01:54:32,000
फेंक दिया अब वो अब वो वेद बांट रहा है वेद बांट रहा है और अपना उसमें

1633
01:54:32,000 --> 01:54:36,720
अगली बुक में अपना वेदार्थ मेरी आवाज आ रही है हेलो

1634
01:54:36,720 --> 01:54:40,720
मेरे को तो आ रही है हां जी आप केवल आपकी आवाज

1635
01:54:40,720 --> 01:54:44,880
आ रही है शिवश भैया की आवाज नहीं आ काफी देर से मेरी आवाज

1636
01:54:44,880 --> 01:54:48,880
नहीं आ रही और उनको भी नहीं आ रही थी जो दूसरी आ रही है वो भी मेरे को तो

1637
01:54:48,880 --> 01:54:51,520
आ रही है

1638
01:54:51,520 --> 01:54:55,600
आ रही है मैं एक बार दोबारा जॉइ करता हूं हां

1639
01:54:55,600 --> 01:54:59,920
कहीं आपके में कनेक्शन में दिक्कत हो गई फिर हम उसमें अच्छा

1640
01:54:59,920 --> 01:55:04,160
ठीक है हां फिर मैं फिर मैं उसमें ये दिखाना चाहूंगा आ रही है आवाज

1641
01:55:04,160 --> 01:55:08,400
सभी लोग कह रहे हैं फिर मैं उसमें ये दिखाना चाहूंगा कि हमने

1642
01:55:08,400 --> 01:55:12,400
शुरुआत कहां से हुई थी जिसने वेद दिए उसी ने वेदार्थ भी दिया ठीक है अब वो

1643
01:55:12,400 --> 01:55:16,640
बांटा कई लोगों को बांटा उसके बाद फिर उसने एक

1644
01:55:16,640 --> 01:55:20,640
कोई ऐसा आया एक कोई ऐसा आया जिसने क्या किया वेद

1645
01:55:20,640 --> 01:55:25,120
लिया और कुछ ऐसे एक्सप्रेशन दिखाए जाएंगे द्वेष वाले

1646
01:55:25,120 --> 01:55:29,200
और जो है वेदार्थ को उसने फेंक दिया अब उसने वेद बांटना

1647
01:55:29,200 --> 01:55:33,680
शुरू किया और वेद के साथ में अपना वेदार्थ लगा के देना शुरू किया

1648
01:55:33,680 --> 01:55:37,840
उसने शुरू किया अब फिर ऐसे लोग पैदा होने लगे वो उसकी

1649
01:55:37,840 --> 01:55:42,080
देखा देखी जैसे उसने किया था फिर लोग पैदा होने लगे उसने क्या उसका

1650
01:55:42,080 --> 01:55:46,320
भी वेदार्थ फेंक दिया। अब अपना वेदार्थ सब अपना अपना वेदार्थ वो वेद वही लिए हुए

1651
01:55:46,320 --> 01:55:50,400
अब एक दिन कोई घचू टाइप का रामपाली टाइप का वो

1652
01:55:50,400 --> 01:55:54,560
आकर के शंकरा जिसने शुरू में वेद दिए थे ना वेद और वेदार्थ उसके सामने

1653
01:55:54,560 --> 01:55:56,000
खड़ा हो गया तुम गलत

1654
01:55:56,000 --> 01:56:00,080
कर रहे हो कैसे वेद में लिखा है वेद में

1655
01:56:00,080 --> 01:56:04,080
लिखा है अच्छा और वेदार्थ मेरा मेरा

1656
01:56:04,080 --> 01:56:08,160
वेदार्थ मेरा वेदार्थ वेद तेरे अरे भाई ये वेद

1657
01:56:08,160 --> 01:56:12,320
तो मेरे से ही लेके गया हट उससे नहीं लेके गया था ये

1658
01:56:12,320 --> 01:56:16,480
तो मुझे उसने दिए हैं। थॉमस अलवा एडिसन के द्वारा बनाया गया बल्ब

1659
01:56:16,480 --> 01:56:20,800
यदि आपको परचून की दुकान से मिल रहा है तो थॉमस अलवा एडिसन से आपका कोई रिश्ता नहीं है। परचून

1660
01:56:20,800 --> 01:56:25,120
की दुकान से लिए है ना ये हम उस थ्रेट

1661
01:56:25,120 --> 01:56:29,280
उस नाटक में हम ये दिखाएंगे। जिससे वेद लिए घूम

1662
01:56:29,280 --> 01:56:33,280
फिर के अपना सब करके माथा मथैया उसी के सामने आकर खड़े हो गए। तुम गलत

1663
01:56:33,280 --> 01:56:37,440
हो। कैसे की वेद में लिखा है। अरे वेद

1664
01:56:37,440 --> 01:56:41,680
में लिखा है। वेद तो मुझी से लेके गया। अरे तुमसे नहीं मैंने तो उससे लिया है यार।

1665
01:56:41,680 --> 01:56:46,240
तुम कौन हो? यह दिखाऊंगा मैं उसमें। मेरे पास थोड़ा सा

1666
01:56:46,240 --> 01:56:50,240
धन की आवश्यकता है। इसमें मुझे लगता है जब मैंने नमः शिवम की शूटिंग

1667
01:56:50,240 --> 01:56:54,560
की थी तो लगभग 90 हजार से ले एक लाख तक खर्चा

1668
01:56:54,560 --> 01:56:58,640
आ गया था। क्योंकि बहुत सारे वो जो डांसर्स थे उनको जो

1669
01:56:58,640 --> 01:57:02,720
नृतक थे ना नृत्य करते उसमें नमः शिवम में तो लगभग

1670
01:57:02,720 --> 01:57:06,800
मुझे लगता है कि इसमें 60 से 70 हजार का लागत

1671
01:57:06,800 --> 01:57:10,800
है इसमें आ जाएगी। तो अगर कोई मदद करना चाहता है,

1672
01:57:10,800 --> 01:57:11,300
मदद

1673
01:57:11,120 --> 01:57:15,280
कर सकता है तो हमें यह शॉर्ट फिल्म बनानी है। इसके लिए हमारी मदद करें।

1674
01:57:15,280 --> 01:57:19,440
लोगों को सच्चाई दिखाएं कि देखो रियलिटी जब इस तरह

1675
01:57:19,440 --> 01:57:23,680
से शॉर्ट फिल्म के रूप में ये चीजें सामने आएंगी ना तब जो है समझ

1676
01:57:23,680 --> 01:57:29,680
में आएगा लोगों को। शिवश

1677
01:57:36,480 --> 01:57:40,560
हां ये प्रश्न है। मोक्ष परम सत्य है तो विदेश में जो रहता

1678
01:57:40,560 --> 01:57:44,880
है उसने क्या बिगाड़ा है? आप इसके

1679
01:57:44,880 --> 01:57:50,880
विषय में पढ़िए। आप पूर्व जन्म को मानने वाले हैं कि नहीं?

1680
01:57:51,600 --> 01:57:55,680
उसने कुछ ऐसा किया है कि उसको ऐसी धरती पर जन्म मिला है। जहां से

1681
01:57:55,680 --> 01:57:59,760
जो वैदिक ज्ञान विज्ञान है वो दूर है। फिर भी उनको मना नहीं

1682
01:57:59,760 --> 01:58:04,080
किया गया है। वो यथाशक्ति प्रयास करके आए और मोक्ष के लिए प्रयासरत

1683
01:58:04,080 --> 01:58:08,240
हो जाए। जैसे स्टीव जॉब्स आए मार्क जुकरबर्ग आए

1684
01:58:08,240 --> 01:58:12,320
आए ना आए ना भारतीय धरती पे आए ना

1685
01:58:12,320 --> 01:58:16,400
हां आ जाओ मना थोड़ी ना किया है दिया जाएगा आपको मोक्ष

1686
01:58:16,400 --> 01:58:20,480
का ज्ञान विज्ञान और पहुंचाया भी जा रहा है कोशिश की जा रही है देखो वो

1687
01:58:20,480 --> 01:58:24,720
सेंटर खोल रहे हैं ना वहां के भले भला करने के लिए ये सब

1688
01:58:24,720 --> 01:58:28,720
बकवास चलिए लेकिन मन मनमानी नहीं चलेगी मनमानी नहीं चलेगी जो मनमानी

1689
01:58:28,720 --> 01:58:32,960
ये कर रहे हैं वो नहीं चलेगी मनमानी चले मनमानी

1690
01:58:32,960 --> 01:58:37,200
करोगे तो कोई ना कोई आ जाएगा तुम्हारे रास्ते में। अरे मैं मैं चला

1691
01:58:37,200 --> 01:58:41,680
जाऊंगा तो और आएंगे। सैकड़ों आएंगे। आज मैं एक हूं। सनातन

1692
01:58:41,680 --> 01:58:45,680
शंकर जी आ गए। शास्त्रवाद जी आ गए। कितने लोग हो गए खड़े?

1693
01:58:45,680 --> 01:58:49,680
हो गए ना? हम जाएंगे तो और आएंगे। अनिकेत

1694
01:58:49,680 --> 01:58:54,160
जी हैं। अनिकेत जी भी आए हैं। अनिकेत जी भी आ गए हैं।

1695
01:58:54,160 --> 01:58:58,880
काफी लोग आ रहे हैं। और एक हमारा चैनल शुरू हुआ है। वो भी प्रामाणिक

1696
01:58:58,880 --> 01:59:03,120
चीजें बता रहा है। शंकराचार्य की ओर से क्या कहते हैं? अ

1697
01:59:03,120 --> 01:59:06,880
श्रुति मार्ग चैनल का नाम है। श्रुति मार्ग

1698
01:59:06,880 --> 01:59:10,960
उस पे रामशरण झा जी हैं। वो शंकराचार्य परंपरा से

1699
01:59:10,960 --> 01:59:15,520
ही हैं और चीजें बता रहे हैं। अच्छी बता रहे हैं। तो एक

1700
01:59:15,520 --> 01:59:19,760
एक आम बोगे लाखों आम पाओगे। आज हम

1701
01:59:19,760 --> 01:59:23,760
एक हम कुछ लोग आहान कर रहे हैं। बहुत आएंगे

1702
01:59:23,760 --> 01:59:27,840
फिर और यह जो जितना सनातनाभास का चोला ओढ़ के

1703
01:59:27,840 --> 01:59:32,160
लोग दिगभ्रमित कर रहे हैं हिंदुओं को उन सबका उन सबका लय

1704
01:59:32,160 --> 01:59:36,880
होगा। खत्म नहीं करना है। उन सबका लय होगा। परंपराओं का

1705
01:59:36,880 --> 01:59:40,880
और जब लय होगा जब लय होगा तो मेरी

1706
01:59:40,880 --> 01:59:45,040
घर की मातृशक्ति पर आंख उठाने वाला कोई पैदा नहीं होगा दुनिया में

1707
01:59:45,040 --> 01:59:49,680
विधर्मी कोई क्योंकि हम एकत्र हो जाएंगे। हाथी बन जाएंगे।

1708
01:59:49,680 --> 01:59:53,920
किसी कुत्ते में भकने की किसी कुत्ते में भौकने का साहस नहीं होगा तब

1709
01:59:53,920 --> 01:59:59,520
क्योंकि हम हाथी बनकर बैठेंगे तब हम अलग-अलग नहीं रहेंगे।

1710
01:59:59,520 --> 02:00:03,760
बिल्कुल बिल्कुल

1711
02:00:03,760 --> 02:00:08,960
बहुत बढ़िया। जी शास्त्र जी कुछ बोलेंगे?

1712
02:00:08,960 --> 02:00:13,120
जी भैया बहुत बढ़िया बोला आपने। ये होना ही चाहिए। सब

1713
02:00:13,120 --> 02:00:17,440
एक साथ होने चाहिए। क्यों इस पे लोग विरोध करेंगे? मूर्ति पूजा

1714
02:00:17,440 --> 02:00:21,600
पुराणों का विरोध और भी गुरु परंपरा का आचार्य परंपरा का सबका

1715
02:00:21,600 --> 02:00:26,480
विरोध क्यों करना है? अरे ज्ञान जहां से मिला है उसका सम्मान करो। उसको

1716
02:00:26,480 --> 02:00:30,800
उसके चीज को समझो और अपना मार्ग प्रशस्त

1717
02:00:30,800 --> 02:00:35,040
करो। लेकिन लोग अपने स्वार्थवश अलग-अलग हो

1718
02:00:35,040 --> 02:00:39,200
के और अपना मिथ्या अहंकार में जी

1719
02:00:39,200 --> 02:00:43,280
करके और कुछ भी फैला रहे हैं वो नहीं होना

1720
02:00:43,280 --> 02:00:47,280
चाहिए। और आपने बहुत अच्छा बोला कि

1721
02:00:47,280 --> 02:00:51,360
उद्देश्य नष्ट करना नहीं है। उनको अपने में मिलाना

1722
02:00:51,360 --> 02:00:55,520
है। अर्थात उनको पुनः सही मार्ग पे

1723
02:00:55,520 --> 02:00:58,400
लाना है।

1724
02:00:58,400 --> 02:01:02,960
बिल्कुल जी बिल्कुल जी मृगराज मृगराज जी जय श्री राम।

1725
02:01:02,960 --> 02:01:07,120
जय श्री राम भैया जी। जय श्री राम। बताइए

1726
02:01:07,120 --> 02:01:11,200
जी तो भैया जी इनकी जो बात थी उस

1727
02:01:11,200 --> 02:01:15,360
वो चम्म्या मिशन से थोड़ी मेल खाती है। कुछ समय

1728
02:01:15,360 --> 02:01:18,880
पूर्व चिन्या मिशन का भी एक बहुत ही वरिष्ठ सन्यासी जी

1729
02:01:18,880 --> 02:01:22,880
थे। वो भी कुछ ऐसा ही कह रहे थे कि पुस्तक पढ़ने पर जो है

1730
02:01:22,880 --> 02:01:27,120
पुस्तक का लेखक आपके गुरु तुल्य हो जाते हैं या गुरु ही हो जाते हैं।

1731
02:01:27,120 --> 02:01:31,360
तो कहीं ना कहीं पर ऐसे जो वरिष्ठ जन हैं

1732
02:01:31,360 --> 02:01:35,760
वो कुछ ना कुछ ऐसा प्रभाव डाल के जो है माहौल बिगाड़

1733
02:01:35,760 --> 02:01:40,710
रहे हैं। वो चिन्मय मिशन वालों के पास वेद कहां से आए?

1734
02:01:40,710 --> 02:01:43,520
[हंसी]

1735
02:01:43,520 --> 02:01:47,840
जी जी वही बात है वो डिवाइन लाइफ ट्रस्ट सोसाइटी तक जाएंगे शिवंद

1736
02:01:47,840 --> 02:01:51,920
सरस्वती तक जाएंगे उससे पहले का वो जा ही नहीं पाएंगे अच्छा

1737
02:01:51,920 --> 02:01:56,560
दूसरी बात वो गुरु हो जाते हैं तो फिर उनकी चीजें हम खोल के दिखाएंगे

1738
02:01:56,560 --> 02:02:00,640
मना मत करना उनकी ऐसी चीजें निकल आएंगी तुमको मना करना पड़ेगा

1739
02:02:00,640 --> 02:02:04,640
इसका मतलब वो आपके गुरु सिद्ध नहीं हो रहे क्योंकि गुरु वो

1740
02:02:04,640 --> 02:02:08,800
है जो आपका शब्द प्रमाण है जैसे वेद शब्द प्रमाण है तो जिससे वेद लिया वो भी शब्द

1741
02:02:08,800 --> 02:02:12,960
प्रमाण है उसका विरोध मत करिए फिर ये जो दयानंद जी दयांद जी आपका शब्द प्रमाण

1742
02:02:12,960 --> 02:02:17,040
है तो दयानंद जी को मान लीजिए कि जो जो कह रहे हैं वो सही है तो हर हर महादेव

1743
02:02:17,040 --> 02:02:21,120
बोलना बंद करो क्यों बोल रहे हर हर महादेव ये जो भस्म लगा के

1744
02:02:21,120 --> 02:02:25,360
टीका लगाया बंद करो दयानंद जी धर्म बता रहे

1745
02:02:25,360 --> 02:02:29,600
बंद करो और आप खुद ही अपनी रील में कह रहे हो स्त्रियां जो है पवित्र

1746
02:02:29,600 --> 02:02:33,840
नहीं होती कभी भी फिर दयानंद जी लिख रहे हैं अपवित्र स्त्रियां जिनको ऐसी

1747
02:02:33,840 --> 02:02:34,340
नीच

1748
02:02:34,000 --> 02:02:38,000
स्त्रियां जिनको छूना मना है उनको भी परम पवित्र कह रहे विरोध कर

1749
02:02:38,000 --> 02:02:42,160
रहे हैं पवित्र कहने का तो जान लो थोड़ा उसके बाद उड़ो

1750
02:02:42,160 --> 02:02:46,400
और उड़ो फिर उनके सामने उड़ो ये जो प्रामाणिक परंपराओं

1751
02:02:46,400 --> 02:02:50,480
का विरोध ना करते हो जितना उड़ना है उड़ो सब साथ में है आपके भाई

1752
02:02:50,480 --> 02:02:56,040
मगर प्रामाणिक परंपरा का ईगो नहीं हर्ट करने का हम

1753
02:02:56,040 --> 02:03:00,320
[हंसी] इनसे लड़ो बौद्धों से और इन ईसाइयों

1754
02:03:00,320 --> 02:03:04,480
इन ईसाइयों से और इन इस्लाम से लाइफ में कुछ भी करने का लाइफ

1755
02:03:04,480 --> 02:03:08,560
में कुछ भी करने का पर जयकांत सिगरे के ईगो को हर्ट नहीं करने का

1756
02:03:08,560 --> 02:03:12,720
बिल्कुल [हंसी] अब ये जो ऐसे डायलॉग्स

1757
02:03:12,720 --> 02:03:17,200
है ना ये जो ऐसे डायलॉग्स है ना मत पढ़ो चक्कर में ये

1758
02:03:17,200 --> 02:03:21,360
आर्य समाजियों की इस की रातों की खटिया से नींद उड़ चुकी

1759
02:03:21,360 --> 02:03:25,760
है। अरे यार ये तो एक तो ये मजाक उड़ उड़ाता है। एकदम निरत्तर

1760
02:03:25,760 --> 02:03:30,160
करता है। उसके बाद मजाक उड़ उड़ाता है। ये आपके उन कटाक्षों

1761
02:03:30,160 --> 02:03:34,240
का जवाब है जो कटाक्ष आप कर रहे हो ना ये मक्कारी भयंकराचार्य ये

1762
02:03:34,240 --> 02:03:38,400
सब आप हम ये सब नहीं कर पा रहे हैं। विवश है। तो इस तरह से आपको हम जवाब

1763
02:03:38,400 --> 02:03:42,480
दे रहे हैं। यह भी मर्यादा में रहते हुए हैं। है ना? यह जवाब दे

1764
02:03:42,480 --> 02:03:46,480
रहे हैं। आपने कहा ना? कहा इसलिए बंटी बबली का

1765
02:03:46,480 --> 02:03:49,040
सीन याद दिलाया आपको और इन्होंने मक्कार

1766
02:03:49,040 --> 02:03:55,040
और भयंकराचार्य और काफी कुछ कह रही हैं। ये तू तड़ाक बोलती हैं।

1767
02:03:55,120 --> 02:03:59,440
इसलिए याद दिलाया कि लाइफ में कुछ भी करने का जयकांत सिगरे

1768
02:03:59,440 --> 02:04:03,440
के इको को हर्ट नहीं करने का।

1769
02:04:03,440 --> 02:04:09,440
हां मृगराज जी क्या कह रहे थे आप?

1770
02:04:11,920 --> 02:04:15,760
बोले जी

1771
02:04:15,760 --> 02:04:21,040
ठीक है काफी देर की वो हो गई है चौपाल [हंसी]

1772
02:04:21,040 --> 02:04:25,040
नहीं बढ़िया बहुत बढ़िया ये आपने बहुत बढ़िया अभी मैं मेरा भी ऐसे ही

1773
02:04:25,040 --> 02:04:29,120
नंबर फ्लैश होने वाला है मैंने भी अभी अपना सेटअप बना लिया है तो

1774
02:04:29,120 --> 02:04:33,120
हां आप ही की तर्ज पर वन टू वन डिस्कशन के लिए

1775
02:04:33,120 --> 02:04:37,360
मैं भी ऐसे ही इनको इसमें क्या होता है ना कि जो

1776
02:04:37,360 --> 02:04:43,360
हमारी चीजों को काउंटर कर रहे हैं उनके साथ

1777
02:04:43,520 --> 02:04:47,520
वह स्वीकार कर चुकी वो सनातनी नहीं है। हां तो फिर हम पूछेंगे इंसान कैसे

1778
02:04:47,520 --> 02:04:51,600
हो? बताओ चलो आओ इंसान कैसे [नाक से की जाने वाली आवाज़] हो?

1779
02:04:51,600 --> 02:04:55,600
धर्म सिद्ध करो सनातन के बिना अपना ईश्वर को ईश्वर सिद्ध करो।

1780
02:04:55,600 --> 02:05:00,080
सनातन के बाहर जाके। क्या है तुम्हारा सनातन? [हंसी]

1781
02:05:00,080 --> 02:05:04,160
जहां पर वो फंस रही थी वहीं पे वो दूसरे दूसरी चीजें लेके आने लग गई थी। जहां

1782
02:05:04,160 --> 02:05:10,160
फंस रही थी। ऐसे चल नहीं पाएगा।

1783
02:05:10,320 --> 02:05:14,400
चलो ठीक है। का उत्तर नहीं दे पाई। एक भी प्रश्न भैया हम बता रहे

1784
02:05:14,400 --> 02:05:18,880
एक भी प्रश्न का उत्तर कहां था उनके पास? नहीं नहीं दे पाएंगे। बस सवालों

1785
02:05:18,880 --> 02:05:22,960
से सवालों से बचने के लिए बस वो अपने वो पहले ही वो

1786
02:05:22,960 --> 02:05:27,040
पहले अपने साथ उसको ले आई थी एक बैसाखी को साथ

1787
02:05:27,040 --> 02:05:31,040
में आर्यन मैं जानता था कोई ना कोई

1788
02:05:31,040 --> 02:05:35,120
आएगा। मैंने कहा तुम इन वो उधर स्क्रीन में उनको जवाब दे रहा था।

1789
02:05:35,120 --> 02:05:39,120
आपने देखा हो बीच-बीच वो पढ़ रही थी जवाब इधर इधर देख रही थी वो वो

1790
02:05:39,120 --> 02:05:43,280
कुछ जवाब दे रहा था। तो क्या कहते ठीक है आप वहां

1791
02:05:43,280 --> 02:05:48,560
स्क्रीन में देख करके खूब उनसे जवाब ले लो वो भी कौन खेत की मूली है

1792
02:05:48,560 --> 02:05:52,640
भाई वो जो है वो कौन खेत की मूली हाल बस ये होगा कि यहां से अभी

1793
02:05:52,640 --> 02:05:56,000
टॉपिक डायवर्ट होने लगेंगे

1794
02:05:56,000 --> 02:05:58,640
है ना तो आप जब स्वतंत्र

1795
02:05:58,640 --> 02:06:02,720
हो के वहां रील बना रही हो तब किसी को साथ में क्यों नहीं ले रही हो उसको साथ में लो भाई तब

1796
02:06:02,720 --> 02:06:06,720
रील बनाओ फिर हम दोनों से एक साथ बात करेंगे तुम 50 एक

1797
02:06:06,720 --> 02:06:11,040
साथ आप ये कह रही थी भीड़ लेके आना भीड़ इन्होंने उन्होंने डायलॉग मारा था तुम अपनी भीड़

1798
02:06:11,040 --> 02:06:15,280
ले आना। मैं तो भीड़ नहीं लाया। सिंगल मैन वन मैन आर्मी मास

1799
02:06:15,280 --> 02:06:20,560
आर्मी मास मामा मास [हंसी]

1800
02:06:20,560 --> 02:06:24,880
ये बुरा लगता है। ये लोगों को बुरा लगेगा।

1801
02:06:24,880 --> 02:06:28,960
मास कहता है अपने आप को। कोई नहीं है चक्कर में। मत पड़ो। [हंसी] कोई नहीं

1802
02:06:28,960 --> 02:06:33,120
है। चक्कर में बुरा लगेगा। जयकांत शीघ्र

1803
02:06:33,120 --> 02:06:37,200
बनता है। ये सब बुरा लगता है इन लोगों को। क्या करें भाई? कैसे कैसे आप

1804
02:06:37,200 --> 02:06:41,360
लोगों को रिटेलिएट करें? कैसे आप लोगों को काउंटर करें आपकी बदतमीजी

1805
02:06:41,360 --> 02:06:45,520
को हम आपने घोषित कर लिया मैं तो ऐसे ही करूंगी आपने अपने को घोषित

1806
02:06:45,520 --> 02:06:48,570
कर लिया स्वयंभू

1807
02:06:48,570 --> 02:06:52,640
[गला साफ़ करने की आवाज़] और वही सिद्धांत ये जो इन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई कर रखी है वहां पर भी यही सिद्धांत

1808
02:06:52,640 --> 02:06:56,640
लागू किए थे क्या इन्होंने जो ये सिद्धांत वेदों के ऊपर लागू कर रही है कि कभी आर्य समाज का

1809
02:06:56,640 --> 02:07:00,800
पकड़ लिया कभी इधर से पकड़ लिया तो क्या अरे ये सब

1810
02:07:00,800 --> 02:07:04,960
ये सब प्रश्न तो मुझे पूछने ही नहीं दिए गए हां क्या आपने डॉक्टरी कहां

1811
02:07:04,960 --> 02:07:08,960
से करी ये मैं करता मैं मैं खोल खोल रहा

1812
02:07:08,960 --> 02:07:12,960
था ना चैप्टर्स खोल रहा था भाई आपने आप डॉक्टर खुद को

1813
02:07:12,960 --> 02:07:13,680
कह रही हो तो किसी

1814
02:07:13,680 --> 02:07:17,760
ने आपको सर्टिफाइड किया तब कह रही हो ना कहीं से आप सर्टिफाइड हो

1815
02:07:17,760 --> 02:07:21,840
कोई आपका प्रमाण है डॉक्टरी के विषय में और

1816
02:07:21,840 --> 02:07:25,840
डॉक्टर में तो चलो कुछ प्रैक्टिकल उदाहरण होते हैं जिससे कि हम पीछे से

1817
02:07:25,840 --> 02:07:29,840
नया कुछ कर सकते हैं मगर जिसमें शब्द ही प्रमाण है उसमें पीछे वालों

1818
02:07:29,840 --> 02:07:34,800
को कैसे काउंटर करोगे हैं जी ओ गो

1819
02:07:34,800 --> 02:07:39,040
और डी ओ डू इसमें शब्द प्रमाण है। इसमें

1820
02:07:39,040 --> 02:07:43,120
कुछ नहीं कर सकते। जहां से आपने इंग्लिश सीखी है उसी को मानना पड़ेगा। उसी

1821
02:07:43,120 --> 02:07:47,120
को मानना पड़ेगा।

1822
02:07:47,120 --> 02:07:51,200
जहां पर ये ये जो धर्म है ये अती्द्रिय विषय है।

1823
02:07:51,200 --> 02:07:55,520
इसमें हमारे शास्त्र प्रमाण है। इसमें हम कहे हमारे आंखें देख हमारी आंखें

1824
02:07:55,520 --> 02:07:59,520
देखेंगे हमारे कान देखेंगे तो रंग के विषय में कान प्रमाण नहीं हो सकते।

1825
02:07:59,520 --> 02:08:03,600
उसी तरह से धर्म के विषय में हमारा हमारा जो व्यक्तिगत अनुभव है वो प्रमाण

1826
02:08:03,600 --> 02:08:08,000
नहीं हो सकता। हां व्यक्तिगत अनुभव के साथ वेद

1827
02:08:08,000 --> 02:08:12,400
वेद स्वयं का वह व्यक्तिगत अनुभव जो वेद के साथ सामंजस्य

1828
02:08:12,400 --> 02:08:16,960
बैठा है वो आपका उपयोगी है ठीक है

1829
02:08:16,960 --> 02:08:21,200
नहीं तो निठारी कह देगा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है मांस खाना बच्चों का कुकर उबाल

1830
02:08:21,200 --> 02:08:25,280
के मैं भी मानव हूं हो गई धर्म की सिद्धि फिर तो

1831
02:08:25,280 --> 02:08:29,600
फिर जिनसे लड़ रही हो उनसे क्यों लड़ रही हो उनका व्यक्तिगत अनुभव है सब

1832
02:08:29,600 --> 02:08:33,840
बात ही खत्म चलिए जय श्री राम

1833
02:08:33,840 --> 02:08:38,240
जय श्री राम राम जी जय श्री राम जय श्री राम भैया

1834
02:08:38,240 --> 02:08:43,520
जय श्री राम जय श्री राम

1835
02:08:43,520 --> 02:08:49,520
ये कुछ कह तो नहीं रहे

1836
02:08:58,320 --> 02:09:00,560
हम

1837
02:09:00,560 --> 02:09:05,200
ठीक है सभी को जय श्री राम नारायण समारंभाम शंकराचार्य मध्यमाम अस्मदाचार्य

1838
02:09:05,200 --> 02:09:09,200
परताम वंदे गुरु परंपरा जय श्री राम
