1
00:00:03,360 --> 00:00:07,520
जैसे आपके यहां कहा जाता है कि पुनर्जन्म तो आपके यहां माना नहीं

2
00:00:07,520 --> 00:00:10,160
जाता ना।

3
00:00:10,160 --> 00:00:15,920
पुनर्जन्म आखिरत के में जो होगा ना वो माना जाता है।

4
00:00:15,920 --> 00:00:19,920
आखिर रात में फैसला होगा जो आया है उसका दोबारा यहां यहां पे जन्म नहीं

5
00:00:19,920 --> 00:00:24,160
होना है। हां नहीं उनका नहीं होना है। तो

6
00:00:24,160 --> 00:00:28,240
जैसे इस विषय में इस्लाम द्वारा क्या बताया जाता है कि जो जैसे जिस दिन

7
00:00:28,240 --> 00:00:32,480
वो आखिरी रात होगी उससे जस्ट पहले कोई बच्चा जो जन्मा

8
00:00:32,480 --> 00:00:37,600
होगा और जो अभी कुरान को जान भी नहीं पाया होगा

9
00:00:37,600 --> 00:00:41,680
और जो है फिर कयामत आ जाएगी और उसके बाद आखिर रात में उसका फैसला

10
00:00:41,680 --> 00:00:46,480
किस आधार पर होगा? इस विषय में क्या बताया इस्लाम ने?

11
00:00:46,480 --> 00:00:51,120
इस्लाम ने इसके बारे में बताया है कि

12
00:00:51,120 --> 00:00:55,680
एक लफ्ज आया है कुरान में नसूर नश्र करना

13
00:00:55,680 --> 00:01:00,000
इसका मतलब होता है रिलीज करना यानी दोबारा रिलीज

14
00:01:00,000 --> 00:01:03,440
करना जैसे

15
00:01:03,440 --> 00:01:07,680
सेवन अर्थ और सेवन ही आसमान

16
00:01:07,680 --> 00:01:12,080
सेवन डायमेंशन ये बताया गया है और उनके

17
00:01:12,080 --> 00:01:16,320
अंदर मुख्तलिफ तरीके से इंसान का जीवन जो है

18
00:01:16,320 --> 00:01:19,600
वहां बीत रहा है।

19
00:01:19,600 --> 00:01:23,760
सूर फरकान की आयत नंबर तीन पढ़ेंगे ना नहीं तो

20
00:01:23,760 --> 00:01:27,760
मैं यही कह रहा हूं कि उनका जो फैसला है ना जो कयामत से एक दो

21
00:01:27,760 --> 00:01:31,920
दिन पहले जन्मे होंगे या कोई एक पर्टिकुलर टाइम होगा जब जन्म

22
00:01:31,920 --> 00:01:36,240
होना बंद हो जाएगा बच्चों का है ना कुछ

23
00:01:36,240 --> 00:01:40,480
या फिर कयामत से जो एक दो दिन पहले जो जन्मे होंगे बच्चे तो

24
00:01:40,480 --> 00:01:44,480
उनका फैसला किस आधार पर होगा क्या होगा उनका हां तो

25
00:01:44,480 --> 00:01:48,480
कयामत से कोई एक दो दिन पहले वैसे जन्मेगा नहीं ये

26
00:01:48,480 --> 00:01:52,560
लिखा है आपके नहीं आपने एक दो दिन पहले कयामत

27
00:01:52,560 --> 00:01:57,840
से जो जन्मेंगे ये बहुत टाइम पीरियड पहले ही बंद हो जाएंगे बच्चे होना।

28
00:01:57,840 --> 00:02:02,000
जिनको

29
00:02:02,000 --> 00:02:06,000
क्या चीज ये लिखा है आपके कयामत से इतने दिन पहले

30
00:02:06,000 --> 00:02:10,000
तक बंद हो जाएंगे बच्चे जन्म लेना पहले नहीं इसमें

31
00:02:10,000 --> 00:02:14,240
यू लिखा है कि कयामत से पहले औलादें होना बच्चे

32
00:02:14,240 --> 00:02:18,320
होना जो है वो बंद हो जाएंगे कितने दिन

33
00:02:18,320 --> 00:02:22,480
पहले दिन पहले नहीं कोई दिन मुकरर नहीं किया

34
00:02:22,480 --> 00:02:26,560
है बल्कि ये जरूर बताया गया है कि कयामत से पहले

35
00:02:26,560 --> 00:02:30,720
तो तो ये एक निशानी हो जाएगी जब है ना बच्चे होना बंद होंगे

36
00:02:30,720 --> 00:02:34,800
तो वो घटना और इसमें एक चीज ये और आती है

37
00:02:34,800 --> 00:02:38,000
कि अ

38
00:02:38,000 --> 00:02:42,560
क्या कहते हैं ये जैसे जो जानवर इत्यादि

39
00:02:42,560 --> 00:02:47,280
है [गला साफ़ करने की आवाज़] इनका फैसला कैसे होगा? जानवर

40
00:02:47,280 --> 00:02:51,280
इत्यादि जो है पहली चीज इनको अल्लाह

41
00:02:51,280 --> 00:02:56,800
ने यानी जो ईश्वर है उसने अपनी इबादत के लिए नहीं बनाया।

42
00:02:56,800 --> 00:03:01,840
ईश्वर ने जानवरों को अपनी इबादत के लिए नहीं बनाया। भक्ति के लिए नहीं बनाया।

43
00:03:01,840 --> 00:03:06,720
ठीक है? कुरान की एक आयत है खल जिन्ना

44
00:03:06,720 --> 00:03:10,800
कि हमने इंसान और जिन्नात को अपनी ताबेदारी के

45
00:03:10,800 --> 00:03:15,280
लिए बनाया है। यानी ईश्वर के जो एहकामात है जो ऑर्डर्स है

46
00:03:15,280 --> 00:03:17,040
उनको उनके ताबे होने

47
00:03:17,040 --> 00:03:21,360
के लिए बनाया है। तकलीक किया है। मतलब

48
00:03:21,360 --> 00:03:25,840
कहने का मतलब है कि इनकी टेस्टिंग नहीं चल रही है। जानवरों

49
00:03:25,840 --> 00:03:29,920
की टेस्टिंग नहीं है। तो जैसे कयामत

50
00:03:29,920 --> 00:03:34,160
आ जाएगी और ये मर जाएंगे तो ये भी दोबारा वहां जीवित होंगे

51
00:03:34,160 --> 00:03:38,400
जहां आखिर रात है क्या है ना वो तो फिर स्वर्ग

52
00:03:38,400 --> 00:03:42,960
नरक जैसे जन्नत जहन्नुम बोलते हैं ना तो जन्नत के अंदर तमाम खुश

53
00:03:42,960 --> 00:03:48,400
तमाम खुशनुमा चीजेंगी

54
00:03:48,400 --> 00:03:52,400
तमाम खुशनुमा चीजें जन्नत के अंदर होंगी। इंसान का

55
00:03:52,400 --> 00:03:57,280
नफ्स जो चाहेगा वहां उसे वो चीज मिलेगी। मान

56
00:03:57,280 --> 00:04:02,560
लीजिए कोई शख्स जन्नत में नहीं ये जो ये जो जानवर है जानवर

57
00:04:02,560 --> 00:04:06,560
जानवर का यहां पर जानवर को कर्म

58
00:04:06,560 --> 00:04:10,800
के लिए नहीं बनाया कि वो यहां कर्म नहीं कर्म के लिए नहीं बनाया वो कोई बात नहीं

59
00:04:10,800 --> 00:04:15,280
मगर यहां जब डेथ हुई तो उसके बाद जानवर वहां पे जिंदा होगा क्या होगा

60
00:04:15,280 --> 00:04:19,920
कि नहीं होगा इसमें इस्लाम कहता क्या है अभी मैं काउंटर नहीं कर रहा हूं केवल मैं

61
00:04:19,920 --> 00:04:24,320
जिज्ञासा जानना चाहता हूं इस्लाम ने कहा क्या है कुरान जानवरों

62
00:04:24,320 --> 00:04:28,320
के बारे में यही कहता है कुल्लू अल फान लेकिन जब हर श

63
00:04:28,320 --> 00:04:32,080
को फना होना है हर एक को कुल्लू मन अल फान हर एक जो चीज

64
00:04:32,080 --> 00:04:36,320
है उस पर फना होगा यानी वो खत्म होगा अब जानवर

65
00:04:36,320 --> 00:04:40,400
जो है कयामत का दिन होगा मोहम्मद रसूल्लाह की एक हदीस

66
00:04:40,400 --> 00:04:44,480
मिलती है जिसमें बताया गया है कि अल्लाह ताला कयामत के

67
00:04:44,480 --> 00:04:48,720
दिन सींग वाली बकरी को जिसने किसी बिना सींग

68
00:04:48,720 --> 00:04:52,960
वाली बकरी को मारा होगा तो उनको भी लाएगा

69
00:04:52,960 --> 00:04:57,040
और लाकर इंसाफ करवाएगा कि तेने इस सींग वाली बकरी ने

70
00:04:57,040 --> 00:05:01,360
बिना सींग वाली बकरी को जो मारा था उसका इंसाफ करवाएगा

71
00:05:01,360 --> 00:05:05,520
उसको सींग देगा और ताकि वो वापस उसका बदला ले ले कि उसको क्यों

72
00:05:05,520 --> 00:05:09,680
बिना गलती के मारा तो ये इंसाफ बताने के लिए कि अल्लाह

73
00:05:09,680 --> 00:05:14,000
जो है वो इंसाफ वाला है। ऐसा नहीं है कि यहां अगर किसी के साथ नाइंसाफा

74
00:05:14,000 --> 00:05:18,000
नाइंसाफी हो गई तो ऐसा नहीं है कि कयामत के दिन भी नाइंसाफी

75
00:05:18,000 --> 00:05:22,000
होगी। वहां नहीं होगी कि वहां फैसला करने वाला नहीं मैं वो नहीं पूछ

76
00:05:22,000 --> 00:05:26,720
रहा हूं। मैं अगर इंसाफ होगा तो उसका स्वरूप

77
00:05:26,720 --> 00:05:30,800
क्या होगा? किस सूरत में इंसाफ होगा? अगर इंसाफ जैसे अगर किसी

78
00:05:30,800 --> 00:05:35,600
जैसे जानवर का कर्म तो चेक किया नहीं जा रहा है तो वहां पर जानवर होंगे

79
00:05:35,600 --> 00:05:39,760
नहीं होंगे या होंगे तो किस आधार पर कहां होंगे ये मैं

80
00:05:39,760 --> 00:05:43,760
पूछ रहा हूं। नहीं वहां नफ्स होगा। नफ्स नफ्स समझते

81
00:05:43,760 --> 00:05:47,440
हैं आप बता। नस मतलब

82
00:05:47,440 --> 00:05:51,440
नस मतलब आपकी बॉडी के अंदर जो आपकी साइकी है ना

83
00:05:51,440 --> 00:05:55,600
आपकी बॉडी आपकी है और आपकी साइकी को जब मौत आएगी तो आपकी बॉडी

84
00:05:55,600 --> 00:06:00,000
जो है वो उसे मृत घोषित कर दिया जाएगा तो आपका जो नफ्स है ना

85
00:06:00,000 --> 00:06:04,080
जिस नब्स से हम ऑर्डर लेते हैं यानी कोई भी ख्वाहिश हम

86
00:06:04,080 --> 00:06:08,080
करते हैं या कुछ भी करते हैं न्स जैसे कि हम जिसे हम आत्मा कहते

87
00:06:08,080 --> 00:06:12,080
हैं वो जिसे हम आत्मा कहते हैं नहीं आत्मा

88
00:06:12,080 --> 00:06:16,480
नहीं आत्मा नहीं आत्मा को तो हम रूह बोलते

89
00:06:16,480 --> 00:06:20,560
रूह न बॉडी ये तीन कासेप्ट को

90
00:06:20,560 --> 00:06:24,800
समझने की जरूरत है। रूह, नफ्स, बॉडी अब नफ्स जो है कुरान में आया [हंसी]

91
00:06:24,800 --> 00:06:28,960
कुल्लू न्स मौत। हां तो मैं ये कह रहा था कि नफ्स के बारे में

92
00:06:28,960 --> 00:06:32,960
जैसे कुरान ने जो नफ्स के बारे में कहा है उसके बारे में

93
00:06:32,960 --> 00:06:36,960
मैं बताना। न्स का मतलब आप नफ्स का मतलब आप कहीं चेतना से तो नहीं

94
00:06:36,960 --> 00:06:42,000
कह रहे जो उसकी जो उसके अंदर जो कॉन्शियसनेस होती है। हां कॉन्शसनेस।

95
00:06:42,000 --> 00:06:46,000
कॉन्शसनेस जो होती है ना हमारी सही की कॉन्शसनेस जो होती है उसी के बारे में बोल रहा

96
00:06:46,000 --> 00:06:50,240
हूं तो कुल न्स जा अब ये जो कॉन्शसनेस के बारे में इसको

97
00:06:50,240 --> 00:06:54,240
भी समझने की जरूरत है सिर्फ कॉन्शसनेस ही नहीं क्योंकि जानवरों के अंदर भी अकल

98
00:06:54,240 --> 00:06:59,120
तो होती है अकल तो होती है ना लेकिन उनके पास

99
00:06:59,120 --> 00:07:02,880
है तो तो कॉन्शियसनेस क्या है माम उनकी कॉन्शियसनेस

100
00:07:02,880 --> 00:07:06,880
को क्या मिलेगा मतलब वो जो एक वो है वो एक है

101
00:07:06,880 --> 00:07:11,120
ना कि कब्र में से उनके पास नफ्स नहीं है

102
00:07:11,120 --> 00:07:15,680
उनके पास पास नफ्स नहीं है तो क्या है?

103
00:07:15,680 --> 00:07:19,200
वो जीव है।

104
00:07:19,200 --> 00:07:23,440
जीव है। मैं बस मैं मैं इसमें ये नहीं कह रहा हूं कि

105
00:07:23,440 --> 00:07:27,840
आप गलत है कि सही है। मैं इसमें ये जानना चाह रहा हूं कि

106
00:07:27,840 --> 00:07:31,840
अगर वो मरा है तो यहीं रह जाएगा। उसका वहां पर कोई काम नहीं

107
00:07:31,840 --> 00:07:35,920
है। वो एक क्या कहते हैं? एक नकली प्रतिबिंब

108
00:07:35,920 --> 00:07:40,480
जैसा है। वो यही मर के खत्म हो जाएगा। ऐसा है उसकी या फिर

109
00:07:40,480 --> 00:07:44,560
या फिर या फिर वो भी एक मिनट या फिर

110
00:07:44,560 --> 00:07:48,640
वो भी किसी लोक में परलोक में या आपके हिसाब से जो जन्नत हो या

111
00:07:48,640 --> 00:07:52,720
कुछ हो वहां पे वो भी दोबारा से वहां खड़ा होगा कुछ करेगा ये

112
00:07:52,720 --> 00:07:57,200
मैं पूछ रहा हूं हां तो वही मैं कह रहा हूं जानवरों का कोई हिसाब

113
00:07:57,200 --> 00:08:01,360
किताब नहीं होगा हिसाब किताब समझ रहे हैं यानी जो

114
00:08:01,360 --> 00:08:05,920
भी आप और हम जो हमारी इंद्रियों का इस्तेमाल कर रहे हैं ना

115
00:08:05,920 --> 00:08:10,160
मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा मतलब कि वहां वो होंगे

116
00:08:10,160 --> 00:08:14,480
ही नहीं ये माना जाए वहां वो होंगे ही

117
00:08:14,480 --> 00:08:18,800
नहीं वो होंगे लेकिन जैसे मान लो आज मैंने

118
00:08:18,800 --> 00:08:22,960
जैसे जैसे यहां है वैसे ही वहां होंगे ना वहां

119
00:08:22,960 --> 00:08:27,200
नहीं वहां ऐसे नहीं होंगे कैसे होंगे वहां ऐसे वहां

120
00:08:27,200 --> 00:08:31,200
ऐसे नहीं होंगे जैसे मान लो कोई जानवर है मेरे सामने अगर वो मर

121
00:08:31,200 --> 00:08:35,200
गया तो अब हम अगर ये सोचे कि जिस तरह से यहां जीवन व्यतीत कर रहा था

122
00:08:35,200 --> 00:08:39,280
ये जानवर तो स्वर्ग में भी ऐसे ही होगा या नर्क में भी ऐसे होता है तो स्वर्ग नर्क

123
00:08:39,280 --> 00:08:43,360
का कासेप्ट उनके लिए नहीं है क्योंकि ये जितनी भी चीजें है ना ये इंसान के लिए

124
00:08:43,360 --> 00:08:47,360
ईश्वर ने मैं समझ गया तो मैं आप जो नहीं है वो मत

125
00:08:47,360 --> 00:08:51,360
बताइए आप जो वो बताइए जो है समझ रहे हैं जैसे मैंने पूछा

126
00:08:51,360 --> 00:08:55,520
किसी से कि स्वस्थ रहने के लिए क्या-क्या क्या खाना

127
00:08:55,520 --> 00:08:59,520
चाहिए तो मैं उसको गिना रहा हूं देख तुझे मूली नहीं खानी है तुझे आलू

128
00:08:59,520 --> 00:09:03,680
नहीं खाना है या तुझे पिज़्ज़ा नहीं खाना है बर्गर नहीं खाना मगर ये नहीं बता

129
00:09:03,680 --> 00:09:07,760
रहा हूं कि तुझे खाना क्या है समझ रहे हैं तो मैं मुझे

130
00:09:07,760 --> 00:09:12,000
थोड़ा सा वो बताइए मुझे बता दीजिए उनका

131
00:09:12,000 --> 00:09:16,080
होगा क्या? जी उनका कोई हिसाब किताब नहीं होगा। ये दो

132
00:09:16,080 --> 00:09:20,080
वर्ड में मैंने समझाया कि उनका कोई हिसाब नहीं होगा। आप

133
00:09:20,080 --> 00:09:24,880
नहीं होगा बता रहे हैं भाई। अगर वो वहां होंगे

134
00:09:24,880 --> 00:09:28,880
तो अगर हम चाहेंगे जैसे मुझे घोड़े की

135
00:09:28,880 --> 00:09:33,200
सवारी करनी है। ठीक है? मुझे घोड़े की सवारी करनी है। मुझे उड़ने

136
00:09:33,200 --> 00:09:33,840
वाले घोड़े की

137
00:09:33,840 --> 00:09:38,880
सवारी करनी है। तो ईश्वर मेरे लिए वो अवेलेबल करेगा।

138
00:09:38,880 --> 00:09:42,960
अगर मुझे उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है या मुझे चलने वाले घोड़े

139
00:09:42,960 --> 00:09:47,120
की तेज स्पीड में लाइट की स्पीड में चलने वाले घोड़े की सवारी

140
00:09:47,120 --> 00:09:51,680
करनी है तो ईश्वर मेरे लिए अवेलेबल करेगा स्वर्ग में

141
00:09:51,680 --> 00:09:55,680
अच्छा तो उन चीजों के लिए

142
00:09:55,680 --> 00:10:01,120
वो वहां पर होंगे हां हम चाहेंगे तो

143
00:10:01,120 --> 00:10:05,680
अच्छा जैसे मतलब जिन जिनके बारे में

144
00:10:05,680 --> 00:10:09,680
इंसानों को पता ही नहीं है कुछ ऐसे जैसे प्रजातियां जीव है

145
00:10:09,680 --> 00:10:13,680
उनका क्या होना जैसे कई प्रजातियां जैसे

146
00:10:13,680 --> 00:10:18,640
कई प्रजातियां ऐसी है जिनके बारे में लोगों को पता ही नहीं है उनका क्या होगा

147
00:10:18,640 --> 00:10:24,640
हमको तो पता है हां तो

148
00:10:24,640 --> 00:10:29,200
तो वहां ईश्वर हमें ऑप्शन देगा कि तुम्हें इनमें से कौन सी चीज चाहिए

149
00:10:29,200 --> 00:10:33,360
ना ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ये जितना

150
00:10:33,360 --> 00:10:37,360
ज्ञान होगा जितनी सोचने की बसीरत होगी जैसे आज साइंस ने

151
00:10:37,360 --> 00:10:41,520
मान लो डायनासोर अब्सॉर्ब किया कि डायनासोर भी किसी

152
00:10:41,520 --> 00:10:45,680
टाइम में रहते थे इस पृथ्वी के ऊपर फिर वो विलुप्त हो गई प्रजाति तो आज

153
00:10:45,680 --> 00:10:49,200
साइंस ने क्या किया उसको जान लिया तो साइंस

154
00:10:49,200 --> 00:10:53,440
ने किस तरीके से जाना उन्होंने जमीन की खुदाई की और उनको फसल्स मिले और फसल्स

155
00:10:53,440 --> 00:10:57,600
मिले तो उन्होंने उससे जाना कि इसकी आकार ये होगा और ये होगा इस तरह से उन्होंने

156
00:10:57,600 --> 00:11:01,600
एक रूप दिया कि इस तरह से दिखता होगा डायनासोर तो हमने भी जान लिया कि भाई

157
00:11:01,600 --> 00:11:06,320
डायनासोर ऐसा दिखता होगा हमारे साइंटिस्टों ने काफी रिसर्च करके मालूमात

158
00:11:06,320 --> 00:11:10,320
की तो ऐसे ही हम भी मालूमात जब हासिल करते हैं ना तो मालूमात

159
00:11:10,320 --> 00:11:14,400
से हमें बहुत सारी चीजें पता चलती है। जैसे हमें फरिश्तों के बारे में पता

160
00:11:14,400 --> 00:11:18,400
चलता है कि उनके एक से ज्यादा पंख होते हैं। थोड़ा थोड़ा सा काफी है।

161
00:11:18,400 --> 00:11:22,480
थोड़ा सा काफी है। जैसे कि आपने कहा कि जैसे वहां पे वहां पे

162
00:11:22,480 --> 00:11:26,720
जाकर के जैसे हमारी इच्छा हुई कि वो जो है जो

163
00:11:26,720 --> 00:11:30,880
घोड़े हैं, कुत्ता है, बिल्ली है हमें जिस रूप में उसकी

164
00:11:30,880 --> 00:11:34,880
आवश्यकता होगी तो वो हमारे लिए अवेलेबल हो जाएगा। तो

165
00:11:34,880 --> 00:11:38,880
इसमें बहुत सारी चीजें हैं। फिर क्वेश्चन पे क्वेश्चन जैसे एक बात ये

166
00:11:38,880 --> 00:11:42,960
आती है कि वो अवेलेबल हो जाएगा

167
00:11:42,960 --> 00:11:48,720
तो वो जिस समय अवेलेबल होगा उससे पहले कहां पे रहेगा?

168
00:11:48,720 --> 00:11:52,720
पहले उससे पहले यहां तो कयामत आ गई।

169
00:11:52,720 --> 00:11:57,360
यहां तो कयामत आ गई। फिर आपने बताया कि

170
00:11:57,360 --> 00:12:02,240
एक सेकंड कयामत को आपने क्या समझा है? [गला साफ़ करने की आवाज़]

171
00:12:02,240 --> 00:12:05,520
कयामत के बाद खत्म हो गई ना

172
00:12:05,520 --> 00:12:09,600
दुनिया खत्म हो गई ना दुनिया तो खत्म हो गई लेकिन

173
00:12:09,600 --> 00:12:13,600
दुनिया कोई एक ही दुनिया है अच्छा तो

174
00:12:13,600 --> 00:12:18,160
दूसरी दुनिया से वो आएंगे तो ये आपसे

175
00:12:18,160 --> 00:12:22,480
ये जानना चाह रहा हूं कि कयामत के बारे में आप क्या जानते हैं जैसे कयामत एक अरबी वर्ड

176
00:12:22,480 --> 00:12:26,800
है ना जिसका मतलब ये बताइए अभी मैं आपको काउंटर

177
00:12:26,800 --> 00:12:30,880
नहीं कर रहा हूं अभी मैं जान रहा हूं केवल बिल्कुल मैं भी बताना ये

178
00:12:30,880 --> 00:12:35,600
चाह रहा हूं कयामत लफ्ज का मतलब मतलब होता है खड़ा कर देना।

179
00:12:35,600 --> 00:12:39,840
बिल्कुल सीधा खड़ा कर देना। जिस तरह से जैसे हम

180
00:12:39,840 --> 00:12:44,000
पहले भी जो मर चुके हैं जो भी मर रहे हैं जो आगे आएंगे वो मरेंगे सब मर

181
00:12:44,000 --> 00:12:48,240
के इस इस दुनिया से इस दुनिया से तो गए

182
00:12:48,240 --> 00:12:52,400
है ना। अब उन सबको जो है

183
00:12:52,400 --> 00:12:56,560
खड़ा कर देगा अल्लाह ताला वापिस। तो उसको कयामत बोलते

184
00:12:56,560 --> 00:13:00,720
हैं। सबको खड़ा कर देगा मरे हुए को और जो भी उन्होंने कर्म किए होंगे अपनी बॉडी

185
00:13:00,720 --> 00:13:05,040
के साथ उन कर्म के आधार पर उनके फैसला होगा। तो कयामत ये है।

186
00:13:05,040 --> 00:13:09,440
बाकी सूर इब्राहिम जब हम पढ़ेंगे तो उसमें आया है कि और उस दिन इस जमीन

187
00:13:09,440 --> 00:13:13,760
को बदल दिया जाएगा दूसरी जमीन में। मतलब इसी जमीन

188
00:13:13,760 --> 00:13:17,680
को दूसरी जमीन में बदल दिया जाएगा।

189
00:13:17,680 --> 00:13:20,800
तो जमीन तो रहेगी ना। जन्नत भी अगर होगी तो

190
00:13:20,800 --> 00:13:25,280
किसी जमीन पर ही होगी ना। भाई उसके अंदर भी पांव रखने के लिए जमीन तो होगी।

191
00:13:25,280 --> 00:13:29,520
ऐसा तो नहीं होगा कि हवा में लटके होंगे। यानी यानी कि वो जो वो जो

192
00:13:29,520 --> 00:13:33,760
जानवर होंगे वो दूसरी जमीन पर पहुंच जाएंगे। दूसरे ग्रह दूसरी तो दुनिया उसमें

193
00:13:33,760 --> 00:13:37,920
पहुंच जाएंगे। जानवर की बात नहीं कर रहे हैं। जानवर तो देखो मैंने अभी

194
00:13:37,920 --> 00:13:42,480
आपको बताया था हमारे लिए अवेलेबल हो जाएंगे। जैसे अगर मेरी चाहत हो रही है।

195
00:13:42,480 --> 00:13:46,560
मैं वही कह रहा हूं कि यहां ये दुनिया खत्म हुई तो हम पहुंचे आखिर

196
00:13:46,560 --> 00:13:50,800
रात में तो आखिर रात में वो जानवर कहां से आए?

197
00:13:50,800 --> 00:13:55,280
दूसरी दुनिया से आए हैं या वहां पर कोई एक स्टोर है जहां पर जानवरों

198
00:13:55,280 --> 00:13:59,360
को रखा जाएगा वहां से अवेलेबल होंगे वो क्या है वो तो

199
00:13:59,360 --> 00:14:03,600
ये चल ही रहा है ना अल्लाह की जो कायनात है मुख्तलिफ डायमेंशन जो है

200
00:14:03,600 --> 00:14:09,360
मुख्तलिफ डायमेंशन जो है उनके अंदर चल ही रहा है मामला डायमेंशन

201
00:14:09,360 --> 00:14:13,520
देखो भविष्य हमारे लिए तो भूतकाल भविष्य काल वर्तमान काल है

202
00:14:13,520 --> 00:14:17,680
ना डायनासोर जब थे अगर ईश्वर तो रिवाइंड कर सकता है

203
00:14:17,680 --> 00:14:21,760
वापस पीछे मतलब फॉरवर्ड कर सकता है, बैकवर्ड कर

204
00:14:21,760 --> 00:14:27,120
सकता है। ईश्वर के लिए तो कोई इमॉसिबल कोई चीज है नहीं।

205
00:14:27,120 --> 00:14:31,360
भाई साहब मैं बस भाई साहब मेरा सवाल दूसरा है। मैं बस ये कह रहा हूं

206
00:14:31,360 --> 00:14:35,600
कि जो ये जानवर हैं ये दूसरी दुनिया

207
00:14:35,600 --> 00:14:36,100
में

208
00:14:35,840 --> 00:14:39,840
जाएंगे। दूसरे डायमेंशन में जाएंगे और हमारे लिए आखिर

209
00:14:39,840 --> 00:14:44,000
रात इत्यादि में बोलने पर वहां उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

210
00:14:44,000 --> 00:14:48,000
ना ना आप शायद समझ नहीं पा रहे हैं या मैं समझा नहीं पा

211
00:14:48,000 --> 00:14:52,080
रहा हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। अभी मैंने बताया था कि

212
00:14:52,080 --> 00:14:56,080
डायनासोर मान लो छ करोड़ साल पहले थे। है ना?

213
00:14:56,080 --> 00:15:00,320
तो वो हमारे लिए तो छ करोड़ साल पहले थे। है ना? अब

214
00:15:00,320 --> 00:15:04,880
ईश्वर के लिए तो नहीं कह सकते ना कि छ ईश्वर के लिए भी छ करोड़ साल पहले थे।

215
00:15:04,880 --> 00:15:08,880
ईश्वर की निगाह में तो भूतकाल, वर्तमान काल

216
00:15:08,880 --> 00:15:13,280
और भविष्य काल तीनों एक ही एक ही वक्त में एक्सिस्ट कर रहा है।

217
00:15:13,280 --> 00:15:17,360
भाई हमारे लिए हमारे क्योंकि हमारा ज्ञान महदूद है

218
00:15:17,360 --> 00:15:21,920
एक हद तक है तो हमारे लिए आने वाला कल जो होगा

219
00:15:21,920 --> 00:15:26,240
वो होगा मैं तो समझ गया उसको उसको आप उसको उसको मत बताइए। वो बताइए

220
00:15:26,240 --> 00:15:30,560
कि वो क्या करेगा कि जानवर जो मर गए हैं उनको पीछे

221
00:15:30,560 --> 00:15:34,560
से उठा के वापस ले आएगा हमारे सामने। ऐसे है ना वो

222
00:15:34,560 --> 00:15:38,720
या ना ले आएगा वो तो वहां जब जाएंगे ना हम और जब हम खिश

223
00:15:38,720 --> 00:15:43,200
करेंगे तब देखो हम वो बात कर [हंसी] रहे हैं नहीं पता है

224
00:15:43,200 --> 00:15:48,480
अभी हमको अभी हमको नहीं पता जानवरों का क्या सिस्टम है कुल मिला के बात ये

225
00:15:48,480 --> 00:15:50,960
जो आयत बताई ना वहां नफ्स

226
00:15:50,960 --> 00:15:55,280
के लिए हर वो चीज होगी जो वो चाहेगा। अगर मान लो मेरा नफ्स चाहेगा

227
00:15:55,280 --> 00:15:59,280
कि मुझे किसी उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है तो मेरे लिए

228
00:15:59,280 --> 00:16:03,280
ईश्वर उड़ने वाला घोड़ा अवेलेबल कर देगा। देखिए वो उड़ने वाला घोड़ा

229
00:16:03,280 --> 00:16:07,280
तो ईश्वर अपने आप से बना सकता है ना नया मैं पूछ रहा हूं यहां के जानवरों

230
00:16:07,280 --> 00:16:11,760
का क्या होगा कुछ नहीं होगा यहां

231
00:16:11,760 --> 00:16:15,840
मतलब वो मर के यही रह जाएंगे खत्म हो जाएगा उनका शरीर जमीन

232
00:16:15,840 --> 00:16:20,000
बदल जाएगी दूसरे ग्रह पे जाएंगे क्या होगा बहुत सारी प्रजातियां

233
00:16:20,000 --> 00:16:24,160
विलुप्त हो गई अब तो नहीं है ना अब तो नहीं है जो सर्वाइव

234
00:16:24,160 --> 00:16:28,240
कर सकी जो प्रजाति सर्वाइव कर सकी वो भाई साहब तो ये ये

235
00:16:28,240 --> 00:16:32,400
आप शुरू में ही कह रहे थे कि वो यही खत्म हो जाएंगे उनकी आगे की कोई कहानी नहीं है।

236
00:16:32,400 --> 00:16:36,480
आप ये समझाना चाहता न्स नफ्स इसीलिए समझा रहा था लेकिन आप नफ्स

237
00:16:36,480 --> 00:16:41,120
को समझे नहीं। नफ्स समझा रहा था मैं कि नफ्स उनके अंदर नफ्स नहीं है।

238
00:16:41,120 --> 00:16:45,600
नब्स नहीं नब्स का मतलब है कि उनके अंदर जो है

239
00:16:45,600 --> 00:16:50,400
कॉन्शियसनेस नहीं है। ना ये नब्स कॉन्शियसनेस

240
00:16:50,400 --> 00:16:54,720
आप कह रहे हैं नफ्स मतलब वो दर्द वो दर्द सहन वो दर्द

241
00:16:54,720 --> 00:16:58,720
सहन कर रहे हैं। वो चिल्ला रहे हैं। वो बचना चाहते हैं। वो जीना चाहते हैं। वो खाना चाहते

242
00:16:58,720 --> 00:17:03,120
हैं। वो पीना चाहते हैं। तो कौन सी चीज नहीं है उनके? मतलब

243
00:17:03,120 --> 00:17:06,320
नब्स की बात कर रहा हूं। नब्स आप समझिएगा बात को। न्स

244
00:17:06,320 --> 00:17:10,400
जैसे आपकी बॉडी के अंदर आप हैं। है ना? और आप स्वाद

245
00:17:10,400 --> 00:17:14,400
में समझते हैं। जायके के अंदर समझते हैं। आपको अगर सब्जी

246
00:17:14,400 --> 00:17:18,560
दी जाए तो उसमें अच्छा मसाला वगैरह लगा के आप खाएंगे और जानवर के सामने

247
00:17:18,560 --> 00:17:22,640
जब रखी जाएगी तो वो सीधा उसको चारा समझ के खा जाएगा। उसका भोजन

248
00:17:22,640 --> 00:17:26,640
समझ के खा जाएगा। लेकिन हम मनुष्य हमारे पास नफ्स है

249
00:17:26,640 --> 00:17:30,720
तो हम उसको हमारे स्वाद अनुसार करते हैं।

250
00:17:30,720 --> 00:17:34,800
तो अब ये चीज उनमें नहीं है कि किसी जानवर के कभी कोई शेर जब

251
00:17:34,800 --> 00:17:38,880
मांस खाता है तो आपने देखा कि नमक मिर्ची लगा के बढ़िया तलवल के खाए ना

252
00:17:38,880 --> 00:17:42,880
कोई शाकाहारी जानवर को देखा कभी कि वो अच्छे से तेलवेल में तल

253
00:17:42,880 --> 00:17:46,960
के खाए नहीं तो वो नब्स जो ये हमारे से डिमांड इसको हम ये भी इसको

254
00:17:46,960 --> 00:17:51,360
हम इसको हम इसको हम ये भी कह सकते हैं कि हमारे पास

255
00:17:51,360 --> 00:17:55,520
चीज है उनके पास हमारे पास चीज एक ही है। हमारे पास

256
00:17:55,520 --> 00:17:59,520
ज्यादा है। हमारे पास ज्यादा उनके पास कम है। मगर है

257
00:17:59,520 --> 00:18:03,600
ही नहीं। सुनिए तो है ही नहीं। अगर यह कह देंगे कि है ही नहीं

258
00:18:03,600 --> 00:18:07,600
तो फिर यह मानना पड़ेगा जैसे शेर है वो कोई प्रकार के मांस को ज्यादा

259
00:18:07,600 --> 00:18:11,680
प्रभ करता है। कुत्ता है वो कोई किसी प्रकार के भोजन को ज्यादा

260
00:18:11,680 --> 00:18:15,920
अच्छा लगता है उसे और कोई प्रकार का भोजन उसे कम मतलब वो स्वाद

261
00:18:15,920 --> 00:18:20,080
में सेलेक्टिव है। स्वाद में सिलेक्टिव है मगर उसको अपने

262
00:18:20,080 --> 00:18:21,520
और स्वादिष्ट कैसे बनाया

263
00:18:21,520 --> 00:18:25,600
जाए इतनी बुद्धिमता उसके अंदर नहीं है। अब अगर ऐसी बात की

264
00:18:25,600 --> 00:18:29,680
जाए तो सुनिए तो ऐसी बात की जाए तो

265
00:18:29,680 --> 00:18:33,920
कई इंसान ऐसे होते हैं जो आगे बुद्धि वाला व्यक्ति

266
00:18:33,920 --> 00:18:38,160
समझ पा रहा है, सीख पा रहा है, कर पा रहा है मगर वो इंसान नहीं कर पा रहा है। जैसे

267
00:18:38,160 --> 00:18:42,240
कि रिजल्ट आता है, क्लासेस होती है, फाइट होता है तो उसमें

268
00:18:42,240 --> 00:18:46,480
कई लोग कम नंबर लाते हैं, कई लोग ज्यादा नंबर लाते हैं। इसी में और पीछे

269
00:18:46,480 --> 00:18:50,480
चलते चले जाए और पीछे चलते चले जाए तो जानवर हो जाएगा व्यक्ति। मतलब मैं

270
00:18:50,480 --> 00:18:54,560
कह रहा हूं इससे इससे उसका स्वाद

271
00:18:54,560 --> 00:18:58,960
स्वादिष्ट ना बना पाना। इससे ये तो सिद्ध होता है कि

272
00:18:58,960 --> 00:19:03,040
जो है उसके पास हमसे कम बुद्धि है। मगर यह सिद्ध नहीं होता कि बुद्धि है ही नहीं क्योंकि

273
00:19:03,040 --> 00:19:07,120
वो बचने का प्रयास कर रहा है। वो सारी चीजें कर रहा है।

274
00:19:07,120 --> 00:19:12,480
वो जीना चाहता है। आहार निद्रा भय मिथुन वो सब है उसमें। बस

275
00:19:12,480 --> 00:19:16,640
उसके शरीर के उसको जो शरीर प्राप्त है उसका हमारी

276
00:19:16,640 --> 00:19:20,960
हमारी जानकारी में उसके शरीर का परम कल्याण उसको जो शरीर

277
00:19:20,960 --> 00:19:24,960
मिला है उससे सद्गति कैसे प्राप्त करनी है जो मोक्ष है वो

278
00:19:24,960 --> 00:19:28,960
कैसे प्राप्त करनी है वो क्या कहते हैं

279
00:19:28,960 --> 00:19:33,120
तो इतनी बुद्धि नहीं है कि वो धर्म को समझ पाए कि मोक्ष कैसे प्राप्त

280
00:19:33,120 --> 00:19:36,800
करना है ये हमारी मगर आप अगर कह रहे हैं कि वो जो है

281
00:19:36,800 --> 00:19:40,960
क्योंकि वो खाने को स्वादिष्ट नहीं बना सकता इसलिए हम उसमें किसी चीज की कमी

282
00:19:40,960 --> 00:19:45,040
मान रहे हैं। जिस चीज को आप नब्स कह रहे हैं। मैं ये नहीं कह

283
00:19:45,040 --> 00:19:49,280
रहा हूं। आप मैं वही कह रहा हूं। आप जो बोले चले जा रहे हैं। मैं ये कह रहा हूं कि नब्ज़

284
00:19:49,280 --> 00:19:53,440
और बुद्धि बुद्धि और नब्ज़ इनको आप एक साथ मिला दे

285
00:19:53,440 --> 00:19:57,760
रहे हो। नब्ज़ या तो आप जो है ना वो आप

286
00:19:57,760 --> 00:20:01,760
वो कर दो। आप डिफाइन कर दो। नब्स आप क्या किसे कह रहे हो जो इंसान में नहीं

287
00:20:01,760 --> 00:20:06,240
है। फिर मैं देखूंगा कि जो चीज आप कह रहे हो वो इंसान में है कि नहीं।

288
00:20:06,240 --> 00:20:10,240
ठीक है। मैं नब्स को डिफाइन करता हूं। नफ्स एक अरबी लफ्ज है और

289
00:20:10,240 --> 00:20:14,240
इस लफ्ज का मतलब होता है एक ऐसी हवा एक ऐसी हवा

290
00:20:14,240 --> 00:20:18,480
जो हमारी बॉडी को लगती है। है ना? जो हमारी बॉडी में है।

291
00:20:18,480 --> 00:20:23,520
है ना? तो हमारी बॉडी के जिस भी ऑर्गन्स को लगती है,

292
00:20:23,520 --> 00:20:27,520
इंद्रियों को लगती है। तो वो इंद्रियां एक्टिव होती है

293
00:20:27,520 --> 00:20:32,320
और वो इंद्रियां बॉडी के अनुकूल ख्वाहिशित करती है।

294
00:20:32,320 --> 00:20:36,320
है ना? और बुद्धि करती है कि ये जो नफ्स ने यानी

295
00:20:36,320 --> 00:20:40,560
जो ये हवा हमारे ऑर्ग्स को लगी है और जो डिमांड हमसे

296
00:20:40,560 --> 00:20:44,560
ये करवा रही है ये बॉडी से जो डिमांड करवा रही है इसको

297
00:20:44,560 --> 00:20:48,720
असल में जब देखा जाएगा क्या इस डिमांड का आदेश ईश्वर ने दिया

298
00:20:48,720 --> 00:20:51,920
है या ना दिया है ये चीज चेक चेक करेगा

299
00:20:51,920 --> 00:20:55,920
माइंड और नफ्स यानी वो हवा जो हमारी बॉडी को अंदर लगी है

300
00:20:55,920 --> 00:20:59,920
हमारे ऑर्गन्स के टच हुई है हमारे ऑर्गन्स में जो है लग रही है और हमसे

301
00:20:59,920 --> 00:21:04,480
ख्वाहिश करवा रही चाहत करवा रही है

302
00:21:04,480 --> 00:21:08,800
तो वो हवा जो होती है ना हवा हवा समझ लो हमारी बॉडी में ऑक्सीजन

303
00:21:08,800 --> 00:21:12,880
है ना पानी है सब कुछ है तो वो जो हवा के

304
00:21:12,880 --> 00:21:16,880
स्वरूप जो हमारे अंदर नफ्स है न्स हवा के

305
00:21:16,880 --> 00:21:20,880
स्वरूप तो हमारे बॉडी के अनुकूल

306
00:21:20,880 --> 00:21:24,880
ही और जैसे आपने मिसाल दी एक ऐसे व्यक्ति की जिसका माइंड

307
00:21:24,880 --> 00:21:29,040
थोड़ा ज्यादा ग्रोथ किया हुआ है और एक का कम किया हुआ है तो जिसका कम

308
00:21:29,040 --> 00:21:33,040
किया हुआ है वो भी स्वाद स्वाद में तो समझता है। ऐसा नहीं है कि वो

309
00:21:33,040 --> 00:21:37,120
स्वाद में नहीं समझता है। स्वाद में वो भी समझता है। समझ रहा है

310
00:21:37,120 --> 00:21:43,040
ना? जानवर समझता है। तो आप एक काम कीजिए। हम तो

311
00:21:43,040 --> 00:21:47,040
बंदर क्या जान अदरक का स्वाद और ये सारी चीजें हम बोलते हैं। लेकिन आप एक

312
00:21:47,040 --> 00:21:51,200
काम कीजिए। किसी भी जानवर को आप इतना इवोल्व करके बताइए। इवॉल्व करके

313
00:21:51,200 --> 00:21:55,520
बताइए। उसके मेंटालिटी से ही इवोल्व करके बताइए कि वो भी इंसानों की तरह। जैसे

314
00:21:55,520 --> 00:21:59,600
इंसान भी एक टाइम था इंसानों के बराबर की बात नहीं

315
00:21:59,600 --> 00:22:03,600
कर रहा हूं। मगर स्वाद में वो सेलेक्टिव होता है। मेरे मैं नहीं देखा था। मेरे मित्र के

316
00:22:03,600 --> 00:22:06,960
यहां पर एक स्वान था जिसे कुत्ता कहते हैं।

317
00:22:06,960 --> 00:22:10,960
सुनिए उसको आप अगर फलाना वाला भोजन देता था वो तो

318
00:22:10,960 --> 00:22:14,960
वो अरुचि से खाता था। नहीं खाता था। मगर कुछ भोजन ऐसे थे जिनको

319
00:22:14,960 --> 00:22:18,960
वो तुरंत चाप जाता था। पूरा उसकी

320
00:22:18,960 --> 00:22:23,200
बॉडी शेर जो है ना खाता

321
00:22:23,200 --> 00:22:27,200
है बॉडी का जो ठीक है

322
00:22:27,200 --> 00:22:31,200
ठीक है दूसरा इसमें एक दूसरी जानकारी वो है

323
00:22:31,200 --> 00:22:35,280
कि जैसे जो कुत्ता है उसके

324
00:22:35,280 --> 00:22:39,360
मन में भी ये है कि मैं मरू नहीं मुझे चोट ना लगे मैं मरू नहीं

325
00:22:39,360 --> 00:22:44,160
वो उसके मन में भी ये भाव है ये तो मानते हैं ना आप

326
00:22:44,160 --> 00:22:48,160
चाहता है जीना चाहता किसी कुत्ते

327
00:22:48,160 --> 00:22:51,920
से ये कहते हुए सुना होगा ना आपने

328
00:22:51,920 --> 00:22:55,920
भी जीना जब आप उसे मारने का प्रयास करते हैं तो वो भागता

329
00:22:55,920 --> 00:23:00,000
है ना अब भागेगा वो तो क्योंकि उसको दर्द होगा भाई

330
00:23:00,000 --> 00:23:04,720
कोई भी चीज हो काटने को भी

331
00:23:04,720 --> 00:23:09,600
यही सिद्ध यही सिद्ध करता है कि उसके अंदर सर्वाइवल

332
00:23:09,600 --> 00:23:14,560
वो है डिजायर कि वो सर्वाइव करना चाहता है बचना चाहता है

333
00:23:14,560 --> 00:23:18,640
चाहता है सही है हां उसी को मैं कह रहा हूं जीना चाहता है।

334
00:23:18,640 --> 00:23:22,960
अब क्या है कि उसने

335
00:23:22,960 --> 00:23:27,360
ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको वो जो मांग रहा है वो ना दिया जाए

336
00:23:27,360 --> 00:23:31,440
तो ये उसके साथ अन्याय जैसा नहीं होगा। फिर तो

337
00:23:31,440 --> 00:23:35,440
वो क्या मांग रहा है आप बताओ? वो हमेशा जीना जीना

338
00:23:35,440 --> 00:23:40,160
चाहता है ना हमेशा मगर उसको मार दिया गया। जबकि उसने कुछ लिया नहीं था।

339
00:23:40,160 --> 00:23:45,120
आप हमेशा जीना तो इंसान भी चाहता है लेकिन मौत एक अटल सत्य है वो आनी है।

340
00:23:45,120 --> 00:23:49,200
हां मौत मौत एक अटल इंतजाम है ना उसके

341
00:23:49,200 --> 00:23:53,200
लिए इंतजाम किया है ना ऊपर वाले ने कि तुम यहां पे पहुंच के अपना सेटलमेंट कर सकते

342
00:23:53,200 --> 00:23:57,280
हो। मार कौन रहा है?

343
00:23:57,280 --> 00:24:01,760
भाई कोई नहीं मार रहा हो। अपनी मौत मर रहा हूं। मैं कह रहा हूं इंसान के लिए तो इंतजाम

344
00:24:01,760 --> 00:24:05,840
किया है ना। यही तो उसूल है। यही तो उसूल

345
00:24:05,840 --> 00:24:10,080
है कि हमें ईश्वर ने कौन सी चीजें बताई है जो हमारे लिए लाभदायक

346
00:24:10,080 --> 00:24:14,240
है और कौन सी चीजें हैं जो हमारे लिए हानिकारक है। कौन सी चीजें

347
00:24:14,240 --> 00:24:18,320
खाने योग्य है और कौन सी चीजें खाने योग्य नहीं है। तो ये ज्ञान

348
00:24:18,320 --> 00:24:22,400
के आधार पे ही तो हमें पता चलेगा ना। मान लीजिए एक व्यक्ति मैं

349
00:24:22,400 --> 00:24:26,640
वो नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं जो कुत्ते की जो आशा है कि मैं जिंदा

350
00:24:26,640 --> 00:24:30,720
रहना चाहता हूं। मगर उसको बिना बात के मार दिया। मर गया वो

351
00:24:30,720 --> 00:24:34,720
प्राकृतिक आपदा से मर गया। कैसे भी मर गया मर गया वो उसकी जो ख्वाहिश है

352
00:24:34,720 --> 00:24:38,240
वो उसके उसके बारे में कोई विचार कोई चिंतन नहीं

353
00:24:38,240 --> 00:24:42,640
तो उसके साथ एक अन्याय नहीं हुआ कि वो पूरे जीवन चाहता था कि उसको भी

354
00:24:42,640 --> 00:24:47,280
अमरता प्राप्त हो जाए वो सर्वाइव करे पर वो मर गया

355
00:24:47,280 --> 00:24:51,600
तो ये आपको किसने बताया कुत्ता भी मोक्ष पाना चाहता है

356
00:24:51,600 --> 00:24:55,600
हां हां ये कुत्ता जो है मोक्ष पाना

357
00:24:55,600 --> 00:24:59,600
चाहता है ये आपको किसने बताया अरे भैया अभी

358
00:24:59,600 --> 00:25:03,760
आपने माना ना कि वो जो है बचना बचना चाहता है मैं मोक्ष अभी मोक्ष का वो

359
00:25:03,760 --> 00:25:07,760
मत लाइए बीच में उसके अंदर एक इंस्ट है कि वो सर्वाइव करना चाहता है

360
00:25:07,760 --> 00:25:11,760
हर हाल में बचना चाहता है भागता है मुझे मारते हैं तो इसका

361
00:25:11,760 --> 00:25:15,280
मतलब तो मरना ही है

362
00:25:15,280 --> 00:25:19,840
अंतते तो उसे भी मरना ही है चाहे वो मगर

363
00:25:19,840 --> 00:25:24,000
मगर उसके मरने के विषय में उसके मरने के विषय में

364
00:25:24,000 --> 00:25:28,320
जैसे इंसानों के लिए उन्होंने चिंतन मनन किया आपके अनुसार

365
00:25:28,320 --> 00:25:32,400
जो ईश्वर है उन्होंने चिंतन मनन किया वैसा ऐसा चिंतन मनन जानवरों

366
00:25:32,400 --> 00:25:36,480
के लिए नहीं किया। जबकि दर्द उन्हें भी हो रहा है। मौत से वो भी डर रहे हैं।

367
00:25:36,480 --> 00:25:40,480
सुख वो भी प्राप्त करना चाहते हैं। आनंद वो भी प्राप्त करना चाहते हैं।

368
00:25:40,480 --> 00:25:44,800
मगर उनके लिए नहीं किया कुछ भी।

369
00:25:44,800 --> 00:25:49,200
किसने? ईश्वर ने नहीं किया।

370
00:25:49,200 --> 00:25:53,280
मैं पूछ रहा हूं। हम जहां रह रहे हैं ना जहां रह रहे

371
00:25:53,280 --> 00:25:57,280
हैं। भूलोक में जो रह रहे हैं। हम जमीन पर जो रह रहे हैं। जमीन से ऊपर

372
00:25:57,280 --> 00:26:01,280
आसमान है। है ना? तो आसमानों की जिंदगी अलग

373
00:26:01,280 --> 00:26:05,520
है और जमीन की जिंदगी अलग है। और एक जिंदगी मरने के बाद जिसको

374
00:26:05,520 --> 00:26:09,520
हम बोलते हैं आलम बरजक। आलम बर्जक बोलते

375
00:26:09,520 --> 00:26:14,080
हैं जिंदगी को उस वो जिंदगी अलग है।

376
00:26:14,080 --> 00:26:18,240
मतलब हम टॉपिक पे अभी तक आए नहीं। हां।

377
00:26:18,240 --> 00:26:22,800
तो बस इसको इसको यहां पे मतलब फुल स्टॉप मान ले कि

378
00:26:22,800 --> 00:26:26,800
नहीं ईश्वर ने जो है उनकी ये जो चीज है कि वो जीना चाहते

379
00:26:26,800 --> 00:26:31,520
हैं वो सुखी होना चाहते हैं इससे ईश्वर को कोई मतलब नहीं है

380
00:26:31,520 --> 00:26:35,520
इस्लाम के अनुसार क्योंकि उसने उसको बनाया ही ऐसे मतलब कैसे

381
00:26:35,520 --> 00:26:39,600
नहीं देखो हम इंसानों को जो ईश्वर ने बनाया ना तो

382
00:26:39,600 --> 00:26:43,680
हम ही उनकी देखरेख करेंगे जैसे मान लो एक कुत्ता मेरे मोहल्ले में

383
00:26:43,680 --> 00:26:47,840
रहता है ना और वो जीना भी चाहता है है ना और

384
00:26:47,840 --> 00:26:52,480
मैं देख रहा हूं के उसके पास जो है भोजन की कमी है।

385
00:26:52,480 --> 00:26:56,720
तो ये मेरी जिम्मेवारी बनती है कि उस कुत्ते तक भोजन मैं पहुंचाऊं

386
00:26:56,720 --> 00:27:00,000
क्योंकि मैं उसका ख्याल रखूं। ये [गला साफ़ करने की आवाज़] मेरी जिम्मेदारी

387
00:27:00,000 --> 00:27:04,160
बनती है। ईश्वर ने मुझे जिम्मेदारी दी है कि मैं अल्लाह की ईश्वर

388
00:27:04,160 --> 00:27:10,160
की बनाई हुई हर एक चीज के ऊपर मैं क्या करूं? ध्यान दूं।

389
00:27:10,800 --> 00:27:16,800
भाई साहब आप आप यहां मेरा मैं सवाल मैं

390
00:27:17,360 --> 00:27:21,520
मेरे से शायद कोई गलती हो रही है। मैं आपको शायद अपना सवाल

391
00:27:21,520 --> 00:27:25,520
समझा नहीं पा रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि एक दिन

392
00:27:25,520 --> 00:27:30,000
कुत्ते को मरना है। एक दिन इंसान को भी मरना है।

393
00:27:30,000 --> 00:27:34,240
इंसान के लिए मौत के आगे की चीजें इंसान को सर्वदा

394
00:27:34,240 --> 00:27:38,480
सुखी रखने के लिए यदि वो इस्लाम के अनुसार चलता है तो

395
00:27:38,480 --> 00:27:42,880
उसके लिए इंतजाम ईश्वर ने किया है। मगर कुत्ते

396
00:27:42,880 --> 00:27:46,880
इत्यादि जो हैं है ना? उनके लिए कोई इंतजाम

397
00:27:46,880 --> 00:27:51,840
नहीं किया। जबकि उनके अंदर भी ख्वाहिश है कि मैं जीऊं, मैं सुखी रहूं।

398
00:27:51,840 --> 00:27:56,000
तो वो उस वो जो अंतिम सुख है इंसान उसे दे सकता है। पल भर

399
00:27:56,000 --> 00:28:00,000
के लिए राग दे सकता है। एक दिन का भोजन दे सकता है। मरते दम तक का

400
00:28:00,000 --> 00:28:04,000
भोजन दे सकता है। परंतु उसे वो जो अनंत सुख उसको चाहिए कुत्ते

401
00:28:04,000 --> 00:28:09,040
को। मैं कभी दुखी ही ना हूं। वो जो अनंत सुख चाहिए।

402
00:28:09,040 --> 00:28:13,520
आप ये कहना चाह रहे हो कि कुत्ता ये चाहे कि मैं भी इंसानों जैसे जिंदगी गुजारू।

403
00:28:13,520 --> 00:28:15,040
यही कहना चाह रहे हो। कुत्ता ये नहीं

404
00:28:15,040 --> 00:28:19,040
चाहता है। कुत्ता सुखी रहना चाहता है। वो इंसानों को नहीं वो ये नहीं जानता

405
00:28:19,040 --> 00:28:23,040
इंसानों का जीवन सुखी है कि नहीं है। वो अपनी बात जानता है कि भैया मैं मरू

406
00:28:23,040 --> 00:28:27,360
नहीं। मुझे कोई दुख नहीं होना चाहिए।

407
00:28:27,360 --> 00:28:31,440
उसप उसप उसप इस्लाम के अनुसार जो

408
00:28:31,440 --> 00:28:35,440
ईश्वर है उसने कोई बात की है उन लोगों की कि नहीं की?

409
00:28:35,440 --> 00:28:39,840
बस इतना बता दीजिए हम लोग विषय पर आ जाए। की है बात कि नहीं की है?

410
00:28:39,840 --> 00:28:43,920
इस्लाम ने जानवरों के प्रति जो कुछ उनके लिए जमीन में रखा है वो

411
00:28:43,920 --> 00:28:48,160
सब वो खा रहे हैं और खुसुखी है। नहीं जैसे

412
00:28:48,160 --> 00:28:52,160
देखिए जो आप बात कर रहे हैं कुरान से हमें मिलता कुरान से

413
00:28:52,160 --> 00:28:56,320
कुरान से हमें मिलता क्या है? जैसे जो हमारे अंदर मौत का खौफ है वो

414
00:28:56,320 --> 00:29:00,400
मौत का खौफ दूर होगा। भाई अगर तुम कुरान को फॉलो करोगे तो तुम्हारे

415
00:29:00,400 --> 00:29:04,400
लिए मौत के बाद भी एक बहुत वैसी जीवन आपके

416
00:29:04,400 --> 00:29:08,400
लिए सुरक्षित है। अगर कुरान को फॉलो करोगे तो अभी

417
00:29:08,400 --> 00:29:12,560
के लिए मान लेते हैं अनंत आनंदमय है। है ना?

418
00:29:12,560 --> 00:29:16,720
यहां पर मतलब आपको आपके लिए हर चीज सकारात्मक है। कोई भी चीज ऐसी नहीं जो आपको

419
00:29:16,720 --> 00:29:20,720
बुरी लग सके। ठीक है? तो आपकी जो इच्छाएं हैं

420
00:29:20,720 --> 00:29:24,800
उनकी पूर्ति करने के लिए इस्लाम के अनुसार जो

421
00:29:24,800 --> 00:29:29,040
ईश्वर है उसने इंतजाम किया है। पर ये जो जानवर इत्यादि है इनकी

422
00:29:29,040 --> 00:29:31,520
इच्छाओं की कोई

423
00:29:31,520 --> 00:29:35,680
मतलब कोई इंतजाम नहीं है। जिस कारण से जो कुत्ते का जो वो है

424
00:29:35,680 --> 00:29:39,680
एंड वो उसके साथ ही अधूरा है। अतृप्त मतलब कि वो जो

425
00:29:39,680 --> 00:29:43,680
सदा सुखी रहना चाहता था सदा आनंदमय रहना चाहता था वो उसका नहीं

426
00:29:43,680 --> 00:29:47,680
सुना गया। इंसान का सुना गया

427
00:29:47,680 --> 00:29:51,760
इंसान का सुना गया और कुत्ते का नहीं सुना गया। कुत्ता भी मांग रहा है

428
00:29:51,760 --> 00:29:56,240
कि मुझे सुख चाहिए, मुझे आनंद चाहिए, मुझे अमरता चाहिए। वो मैं कह रहा हूं। नहीं

429
00:29:56,240 --> 00:30:00,400
आपको बताया किस कुत्ते ने आपको बताया कि मुझे आनंद चाहिए, मुझे सुख चाहिए

430
00:30:00,400 --> 00:30:04,880
और मुझे भी स्वर्ग चाहिए। मुझे भी नर्क चाहिए और मुझे भी जो भाई साहब अभी

431
00:30:04,880 --> 00:30:09,120
मैंने अभी मैंने नरक इत्यादि नहीं बोला है। मैंने बोला है कि वो कभी मरना

432
00:30:09,120 --> 00:30:13,120
नहीं चाहता है। वो कभी मरना नहीं चाहता है। वो ऐसी वो

433
00:30:13,120 --> 00:30:17,120
ऐसी वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता है जो उसे ठीक

434
00:30:17,120 --> 00:30:21,120
ना लग रही हो। वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता। देखिए

435
00:30:21,120 --> 00:30:25,200
आप आप ख्वाहिश करवा रहे हैं कुत्ते से। कुत्ते से आप ख्वाहिश करवा रहे हैं। मैं

436
00:30:25,200 --> 00:30:29,200
अभी आप अभी मैं ख्वाहिश नहीं करवा रहा। मैं अभी

437
00:30:29,200 --> 00:30:33,520
मैं अभी आप आपने खुद बोला ना वो भी जीना चाहता है

438
00:30:33,520 --> 00:30:38,480
तो कुत्ता अगर कुछ सोचता है तो ये बात के

439
00:30:38,480 --> 00:30:43,040
भाई साहब अभी आपने माना कि वो जीना चाहता है अभी आपने माना

440
00:30:43,040 --> 00:30:46,640
हर कोई जीना चाहता है हर कोई जीना चाहता है तो वही तो मैं

441
00:30:46,640 --> 00:30:50,720
कह रहा हूं कि इंसानों के लिए जीवन के बाद भी एक

442
00:30:50,720 --> 00:30:54,960
सुखी संसार की व्यवस्था है। जानवरों के लिए क्या है? तो आप यह

443
00:30:54,960 --> 00:30:58,960
या तो यह कह दीजिए कि हां पार्शियलिटी है कि जानवरों के लिए कुछ नहीं है।

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बता रहा हूं कि जानवरों के लिए क्योंकि जानवर के अंदर वो रूह

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मैं अब रूह की बात आएगी। जानवरों के अंदर वो रूह नहीं है

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कि जिस रूह की वजह से इंसान को बसीरत मिली,

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फवाद मिला और तीसरी चीज समात मिली। समात

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समझ रहे हैं? तीनों चीजें इसका कुत्ता इस दुख के

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यानी कि कुत्ता इस दुख के साथ ही उसका अंत हो जाएगा कि भैया मैं

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जो है जो चाहता था मुझे नहीं मिला। मैं वही तो कह रहा हूं उसको नहीं है।

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वो कह रहा हूं के बारे में आप बता रहे हैं तो ये कुत्ते ने

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आपको बताया क्या? देखो हमारी इस गुफ्तगू से कोई मतलब नहीं निकलेगा।

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हम टॉपिक पे आएंगे ठीक रहेगा क्योंकि कुत्ते के बारे में विषय में हम बात करने नहीं बैठे।
