1
00:00:05,200 --> 00:00:09,360
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं कि आप सभी कुशल

2
00:00:09,360 --> 00:00:13,360
पूर्वक होंगे और आज की

3
00:00:13,360 --> 00:00:17,440
जैसा आपने देखा होगा। आपको सूचना मिल गई होगी कि

4
00:00:17,440 --> 00:00:22,000
हमारी चर्चा किसके साथ होने वाली है और किस विषय पर होने वाली है। रामपाल

5
00:00:22,000 --> 00:00:26,400
के बहुत पुराने अ

6
00:00:26,400 --> 00:00:30,480
मतलब पुराने तो होंगे ही जो होंगे ही हमारे ओपोनेंट ओपोनेंट

7
00:00:30,480 --> 00:00:34,720
भी क्या कहें इनको मतलब आपने कई बार इनके साथ हमारी चर्चाएं देख

8
00:00:34,720 --> 00:00:38,720
ली है बाबू और कई बार यह जब निशब्द हुए हैं

9
00:00:38,720 --> 00:00:42,720
तो चर्चा से बिना बताए गोल भी हो गए हैं और

10
00:00:42,720 --> 00:00:46,720
एक बहुत अगर पिन पॉइंट की बात करूं

11
00:00:46,720 --> 00:00:52,160
तो एक जगह इनकी किताब में मैंने दिखा दिया कि अर्जुन को मुक्ति मिल गई।

12
00:00:52,160 --> 00:00:56,480
अर्जुन को मुक्ति कैसे मिल गई? जब वहां पर तत्वदर्शी नहीं था तो

13
00:00:56,480 --> 00:01:00,480
तो बाबू जो है चले गए थे

14
00:01:00,480 --> 00:01:06,480
बिना कुछ बताए। खैर अभी ले लेते हैं बाबू।

15
00:01:12,160 --> 00:01:18,160
बाबू अपना कैमरा चालू कर लीजिए।

16
00:01:21,360 --> 00:01:27,360
जय श्री राम बाबू।

17
00:01:41,600 --> 00:01:47,520
हम क्या हुआ? नहीं आना है क्या? चले गए क्या?

18
00:01:47,520 --> 00:01:53,520
अभी तो हमने टेस्टिंग भी कर ली थी भाई।

19
00:01:54,240 --> 00:01:57,120
हम

20
00:01:57,120 --> 00:02:01,680
क्या हुआ बाबू?

21
00:02:01,680 --> 00:02:07,680
अरे भाई

22
00:02:14,800 --> 00:02:18,960
अरे भाई बाबू अभी आप बड़े कॉन्फिडेंटली

23
00:02:18,960 --> 00:02:23,040
बैठे हुए थे। कहां चले गए? आप एक काम करिए

24
00:02:23,040 --> 00:02:27,040
दोबारा से जुड़ जाइए। मैं आपको हटा रहा हूं। ठीक है। मुझे लगता है कोई टेक्निकल

25
00:02:27,040 --> 00:02:31,440
इशू होगा।

26
00:02:31,440 --> 00:02:35,520
बाबू राम एंटर्ड द स्टूडियो। अच्छा एंटर हो गए।

27
00:02:35,520 --> 00:02:38,400
हां बाबू

28
00:02:38,400 --> 00:02:44,400
पेस्ट लिखा है बाबू।

29
00:02:53,600 --> 00:02:59,600
अरे भाई इतना समय नहीं है।

30
00:03:03,680 --> 00:03:09,200
यह हाल है इनका

31
00:03:09,200 --> 00:03:13,920
ऐसे होगी इनकी सिद्धि जेलधाम बाबा की

32
00:03:13,920 --> 00:03:18,000
काफी दिन हो गए ना वो भी क्या दिन थे हां आए दिन एक

33
00:03:18,000 --> 00:03:22,160
दो हर एक दो दिन छोड़ के रामपाल की

34
00:03:22,160 --> 00:03:26,960
ज्ञान गंगा अज्ञान गंगा पर चर्चा होती जी

35
00:03:26,960 --> 00:03:32,000
हम

36
00:03:32,000 --> 00:03:36,640
सारे अपने जो अ

37
00:03:36,640 --> 00:03:40,720
सिद्धांत निष्ठ भाई हैं या फिर रामपाल के

38
00:03:40,720 --> 00:03:46,720
रामपाल से पीड़ित जो भाई थे वो

39
00:03:47,120 --> 00:03:49,440
हम

40
00:03:49,440 --> 00:03:54,800
रामपाल से पीड़ित थे वह सब यहां जुड़ते थे

41
00:03:54,800 --> 00:04:00,800
और लगभग काफी दिन तक वह दौर चला था।

42
00:04:01,520 --> 00:04:05,600
हां बाबू कैमरा ऑन करें। जेलधाम का वासी

43
00:04:05,600 --> 00:04:11,600
हूं मैं।

44
00:04:12,320 --> 00:04:18,320
हां, सही कह रहे हैं।

45
00:04:19,680 --> 00:04:25,680
कोई नहीं अभी अपने अस्तित्व पर भी इनको वो हो जाएगा।

46
00:04:27,600 --> 00:04:31,600
यह कमेंट आया है जेल धाम का वासी हूं मैं रामपाल

47
00:04:31,600 --> 00:04:35,760
मेरा नाम आवान से हार गया

48
00:04:35,760 --> 00:04:41,600
हार के आएगा मेरा चेला बाबू राम

49
00:04:41,600 --> 00:04:46,560
कभी था आश्रम मंच माइक और भक्तों की भरमार

50
00:04:46,560 --> 00:04:51,200
अब गिनता हूं दीवार की ईंटें यही मेरा दरबार वाह वाह

51
00:04:51,200 --> 00:04:55,440
वाह वाह वाह वाह वैसे जो इसमें

52
00:04:55,440 --> 00:04:59,440
यदि कोई व्यक्ति इस शायरी में दोष भी ढूंढेगा ना कि बहुत

53
00:04:59,440 --> 00:05:03,440
निचले स्तर की है तो मेरे ख्याल से रामपाल जैसी

54
00:05:03,440 --> 00:05:07,840
शख्सियत के लिए ऐसी ही लाइनें अच्छी है।

55
00:05:07,840 --> 00:05:12,000
बहुत ज्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी या शुद्ध हिंदी में

56
00:05:12,000 --> 00:05:16,160
लाइनें लिखेंगे तो वह जो है अपमान हो जाएगा संस्कृत निष्ठ भाषा का

57
00:05:16,160 --> 00:05:20,160
तो ये अच्छा है उसके लिए स्तर भी तो होता है ना व्यक्ति का किस

58
00:05:20,160 --> 00:05:25,600
व्यक्ति के लिए किस स्तर पर बात की जाए

59
00:05:25,600 --> 00:05:29,600
तो बाबू हमारे पास इतना समय नहीं है। लगता है तुम्हारे

60
00:05:29,600 --> 00:05:34,560
पास वेदों में प्रमाण नहीं है। कबीर भगवान है।

61
00:05:34,560 --> 00:05:40,560
हम

62
00:05:40,640 --> 00:05:44,960
लगता है बाबू के फोन में कुछ हो गया है।

63
00:05:44,960 --> 00:05:50,960
हां बाबू।

64
00:05:57,600 --> 00:06:03,600
जय श्री राम सभी को।

65
00:06:04,400 --> 00:06:09,120
मुझे लगता है बाबू का मामला टाटा फिश हो गया आप लोगों को

66
00:06:09,120 --> 00:06:15,040
जो आज एक बढ़िया एंटरटेनमेंट मिलने वाला था। शायद नहीं मिलेगा।

67
00:06:15,040 --> 00:06:19,040
फोन आ गया होगा बाबू के पास। बाबू तुम गलत जगह जा रहे हो। मत पड़ो चक्कर

68
00:06:19,040 --> 00:06:22,240
में कोई नहीं टक्कर में।

69
00:06:22,240 --> 00:06:27,040
अरे बाबू क्या हो गया? जबकि मैंने

70
00:06:27,040 --> 00:06:31,120
मंच पर मतलब ये लाइव स्टार्ट करने से पहले बाबू को स्टेज

71
00:06:31,120 --> 00:06:35,280
पर लिया था। बात की थी कि मेरी आवाज आ रही है कि नहीं आ रही। आपका कैमरा चालू है कि नहीं चालू

72
00:06:35,280 --> 00:06:39,760
है। और तब ये हाल है इस व्यक्ति का। पता

73
00:06:39,760 --> 00:06:45,760
नहीं क्या कर रहा है।

74
00:06:47,360 --> 00:06:51,360
बाबूराम वापस आ रहे हैं तब तक मेरे प्रश्न का उत्तर दो।

75
00:06:51,360 --> 00:06:57,360
वर्ण व्यवस्था को कर्म के आधार पर जन्म के आधार पर बनाया गया।

76
00:07:02,560 --> 00:07:07,680
भाई आप जो है अपना फेस लेकर के आ जाइए। फॉर्म भरिए।

77
00:07:07,680 --> 00:07:13,680
आपके प्रश्नों का उत्तर दिया गया है और दिया भी जाएगा।

78
00:07:16,800 --> 00:07:21,120
एक भाई साहब कर्म के आधार पर कह रहे हैं। अच्छा

79
00:07:21,120 --> 00:07:25,120
कर्म के आधार पर आवश्यकता क्या है? नामकरण की कि ये ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य,

80
00:07:25,120 --> 00:07:29,200
शूद्र है। क्या आवश्यकता है? जब जो व्यक्ति जो कर्म कर रहा हो

81
00:07:29,200 --> 00:07:33,520
उसको वही मान लो। उसमें नामकरण की आवश्यकता क्या है?

82
00:07:33,520 --> 00:07:37,600
भाई कोई व्यक्ति सूत्र का कार्य कर रहा है तो उस समय

83
00:07:37,600 --> 00:07:42,000
उसका उपयोग वहां ले लो सेवा देने में। यदि कोई व्यक्ति सेवा दे रहा है तो

84
00:07:42,000 --> 00:07:46,320
जब कर्म के आधार है तो उसमें फिर नामकरण घोषित करने की आवश्यकता ही नहीं है।

85
00:07:46,320 --> 00:07:50,480
घोषित करने का तो मतलब ही है ना कि कहीं से उनको पहले से ठप्पा दिया जा रहा है। कर्म क्या क्योंकि

86
00:07:50,480 --> 00:07:55,040
कर्म तो व्यक्तिगत पलपल में बदल जाता है। चातुर वर्णमया

87
00:07:55,040 --> 00:07:59,040
सिस्टम भगवान कह रहे मैंने बनाया और जो लोग

88
00:07:59,040 --> 00:08:02,400
यह दावा करते हैं वो कहते हैं वो कि मनुष्यों के पास फ्री

89
00:08:02,400 --> 00:08:06,400
विल है। फ्री विल है तो फिर भगवान का बनाया हुआ सिद्ध कहां हो रहा

90
00:08:06,400 --> 00:08:10,480
है? ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र वो तो निर्णय तो वो

91
00:08:10,480 --> 00:08:14,960
ले रहा है ना। कौन ले रहा है? मनुष्य।

92
00:08:14,960 --> 00:08:19,040
और मनुष्य जब तक निर्णय लेता रहेगा कि मैं कप्तान बनूंगा, मैं विकेटकीपर

93
00:08:19,040 --> 00:08:23,520
बनूंगा, मैं बॉलर बनूंगा, मैं बैट्समैन बनूंगा, तो उस टीम का क्या हाल होगा?

94
00:08:23,520 --> 00:08:27,760
लड़ाई होगी पद के चक्कर में। वही हो रही है। पद

95
00:08:27,760 --> 00:08:31,840
के लिए लड़ाई। टीम तो वह होती है ना जो मैदान के बाहर से तैयार

96
00:08:31,840 --> 00:08:35,600
होकर आती है और अपना काम करती है।

97
00:08:35,600 --> 00:08:40,640
समझ में आया? बाकी आप फॉर्म भरिए। आपका स्वागत है। आमने सामने बात करेंगे।

98
00:08:40,640 --> 00:08:46,560
वैसे भी काफी दिन हो गए वर्ण व्यवस्था पर बात नहीं हुई है

99
00:08:46,560 --> 00:08:50,560
और मैंने सुना है वह कोई आर्य समाजी

100
00:08:50,560 --> 00:08:56,560
चैनल है नए प्रकार का अलंकार शुरू किया गया है

101
00:08:56,640 --> 00:09:00,800
भाई हम ₹10 का इनाम रखते हैं जीतने

102
00:09:00,800 --> 00:09:04,960
वाले के लिए मुझे नहीं लगता कोई विद्वत परिषद होगी मुझे मेरी

103
00:09:04,960 --> 00:09:09,600
जानकारी में नहीं कि दयानंद जी ने ऐसा कोई नाम रखा होगा विद्वान तो थे ही

104
00:09:09,600 --> 00:09:13,600
संप्रदा राय विहीन थे तो क्या हुआ विद्वान तो थे ना तो इस तरह

105
00:09:13,600 --> 00:09:17,920
की निम्न स्तर की बातें नहीं करनी चाहिए कि हम ₹100 देंगे ये है वो है

106
00:09:17,920 --> 00:09:22,000
ये तो वो करता है पवन दास रामपाल का ही एक

107
00:09:22,000 --> 00:09:26,080
बागी चेला जो रामपाल की जो मेन गैंग है उससे अलग

108
00:09:26,080 --> 00:09:30,080
वो आए दिन उसके वीडियोस देख लो जाकर कुछ चिल्लाया करेगा मैं ₹1

109
00:09:30,080 --> 00:09:34,160
लाख दूंगा ये है वो है ये स्तर

110
00:09:34,160 --> 00:09:38,160
से घिरी हुई चीजें हैं ये नहीं करनी चाहिए कोई

111
00:09:38,160 --> 00:09:42,560
सिद्धांत निष्ठ व्यक्ति होगा क्या जो पैसों के लिए आएगा वहां पे

112
00:09:42,560 --> 00:09:47,040
हम

113
00:09:47,040 --> 00:09:51,200
बाकी मैं आके कर देता

114
00:09:51,200 --> 00:09:55,520
एक बार कोई इच्छा तो हुई भाई जा के तुम्हें तुम्हारे सिद्धांतों का

115
00:09:55,520 --> 00:10:00,160
आईना दिखा दूं आप लोगों को और दिखाया भी है

116
00:10:00,160 --> 00:10:04,160
पर

117
00:10:04,160 --> 00:10:08,160
अब तुम वो जो विजय यह भी मन में आया कि वह जो विजय राशि

118
00:10:08,160 --> 00:10:12,240
है ना वह जो राशि को राशि प्राप्त होगी ₹100 उसका कहूंगा कि ये

119
00:10:12,240 --> 00:10:17,440
ले भाई दूध पी लेना नाग पंचमी के दिन ₹100

120
00:10:17,440 --> 00:10:21,600
का ये सब चीजें थोड़ा स्तर विहीन चीजें

121
00:10:21,600 --> 00:10:26,400
हैं। इस पर ध्यान दें एक स्तर बना के चले हैं तो उसको बना के रखें।

122
00:10:26,400 --> 00:10:30,960
गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिरकर भी अपनी सुंदरता को होने नहीं देता।

123
00:10:30,960 --> 00:10:36,960
रामपाली मत बनो।

124
00:10:37,760 --> 00:10:41,840
बाबू बहुत देर हो गई अब 11वा

125
00:10:41,840 --> 00:10:47,840
मिनट चल रहा है

126
00:10:48,400 --> 00:10:54,400
कैमरा ऑन करो भाई

127
00:10:57,040 --> 00:10:59,840
वैसे

128
00:10:59,840 --> 00:11:04,000
आज मुझे मेरे घर से आदेश प्राप्त हुआ था

129
00:11:04,000 --> 00:11:08,000
कि चर्चा चर्चा जल्दी पूरी करना।

130
00:11:08,000 --> 00:11:12,560
तो चर्चा जल्दी पूरी करने का मतलब समझते हैं आप लोग?

131
00:11:12,560 --> 00:11:16,560
मैं चाहूं तो चर्चा जल्दी पूरी कर सकता हूं कि नहीं कर सकता हूं? आप ही

132
00:11:16,560 --> 00:11:20,640
आप ही लोग बताइए। बताइए अगर मैं

133
00:11:20,640 --> 00:11:24,640
चाहूं तो कोई भी चर्चा बहुत जल्दी पूरी

134
00:11:24,640 --> 00:11:28,880
हो जाए। खासतौर पर रामपालियों के समक्ष

135
00:11:28,880 --> 00:11:31,760
तो हो ही जाएगी।

136
00:11:31,760 --> 00:11:35,840
क्या तकनीक ऐसी हो सकती है? कि मेरे घर के द्वारा

137
00:11:35,840 --> 00:11:40,080
आदेश जो मिला है कि भाई जल्दी चर्चा पूरी करना तो

138
00:11:40,080 --> 00:11:46,080
उसके लिए कौन सी तकनीक आवश्यक हो सकती है?

139
00:11:51,600 --> 00:11:55,680
बाबू ये आखिरी चांस है तुम्हारा।

140
00:11:55,680 --> 00:11:59,840
ठीक है। वैसे ही मुझे आदेश मिला हुआ है घर से। चर्चा आज की जल्दी पूरी करनी

141
00:11:59,840 --> 00:12:02,240
है।

142
00:12:02,240 --> 00:12:06,400
हां। अच्छा कोई है जो आहान का समर्थक

143
00:12:06,400 --> 00:12:10,480
है और वह मुझे बता सकता है कि

144
00:12:10,480 --> 00:12:14,640
मेरी मेरे मतलब हम लोग मेरा मैं क्या ऐसा करूं कि चर्चा

145
00:12:14,640 --> 00:12:19,520
तुरंत समाप्त कोई बता सकता है चलिए मैं एक

146
00:12:19,520 --> 00:12:24,960
भेद स्वरूप सम्मान स्वरूप एक जो है ग्रंथ

147
00:12:24,960 --> 00:12:29,360
गुरुदेव का एक ग्रंथ पहुंचाऊंगा। क्या बात है देखिए

148
00:12:29,360 --> 00:12:33,760
यह देखिए यह विजेता है।

149
00:12:33,760 --> 00:12:38,480
जितने ही बात शुरू होगी टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन

150
00:12:38,480 --> 00:12:42,720
खत्म हो गया टाटा बाय बाय केवल

151
00:12:42,720 --> 00:12:48,720
मुझे सामने वाले से क्या पूछना है परंपरा

152
00:12:49,280 --> 00:12:53,280
शास्त्रों पर बात कर रहे हो

153
00:12:53,280 --> 00:12:55,920
परंपरा

154
00:12:55,920 --> 00:12:59,280
शास्त्र कैसे आए

155
00:12:59,280 --> 00:13:03,600
अगर मैं ये वाली बातें पहले ही रख दूं किसी चर्चा में

156
00:13:03,600 --> 00:13:08,560
जैसे वो प्रतीक आया था उस दिन बहुत देर तक चली है चर्चा तीन घंटे

157
00:13:08,560 --> 00:13:13,520
और मैं यह बात पहले ही रख दूं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं

158
00:13:13,520 --> 00:13:17,760
चर्चा शुरू होते ही समाप्त हो गई दूध दही थ्योरी

159
00:13:17,760 --> 00:13:20,320
क्लियर

160
00:13:20,320 --> 00:13:24,640
बाबू मुझे ऐसा लग रहा है कुछ तकनीकी खराबी है तुम्हारे पास उसको

161
00:13:24,640 --> 00:13:28,880
शुद्ध सही कर लो और फिर जो है आप दोबारा

162
00:13:28,880 --> 00:13:34,080
आ जाइए और जो तो

163
00:13:34,080 --> 00:13:38,320
अभी जिन्होंने उत्तर दिया था आर आर मिश्रा जी ये हमसे

164
00:13:38,320 --> 00:13:42,400
संपर्क करें। इनको आह्वान की ओर से घट ग्रंथ जो

165
00:13:42,400 --> 00:13:48,400
है भेंट स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इन्होंने उत्तर दिया था परंपरा।

166
00:13:49,040 --> 00:13:53,280
हां दूसरा उत्तर यही दूसरा तरीका यही है। चर्चा को जल्दी पूरा करना

167
00:13:53,280 --> 00:13:58,320
है तो क्या करना है? सीधी बात नो बकवास।

168
00:13:58,320 --> 00:14:01,440
परमार्थ पथ

169
00:14:01,440 --> 00:14:07,440
चर्चा को जल्दी पूरा करना है तो यह करना है

170
00:14:11,840 --> 00:14:15,840
हम

171
00:14:15,840 --> 00:14:21,680
ठीक है बाबू तुम फिर आ जाओ

172
00:14:21,680 --> 00:14:25,680
तो परमार्थ पथ हमारे दूसरे विजेता है इनको भेंट

173
00:14:25,680 --> 00:14:31,680
प्राप्त होगी हमारी ओर से ग्रंथ के स्वरूप में

174
00:14:31,680 --> 00:14:36,800
आप भी हमसे संपर्क करें WhatsApp के द्वारा। ठीक है?

175
00:14:36,800 --> 00:14:39,840
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं?

176
00:14:39,840 --> 00:14:44,320
हां भाई बाबू बहुत बढ़िया। आ गए करत करत अभ्यास

177
00:14:44,320 --> 00:14:49,360
जड़मती होत सुरान ररी आवत जात ते सिल पर निशान

178
00:14:49,360 --> 00:14:55,360
डडी डडीिकेशन तो मानना पड़ेगा बाबू तुम्हारा।

179
00:14:55,360 --> 00:14:59,440
मुझे मालूम था बाबू जी जो है

180
00:14:59,440 --> 00:15:03,760
फस गया बेचारा उस हां

181
00:15:03,760 --> 00:15:07,920
बाबू बताइए रामपाल जी का ज्ञान आपको

182
00:15:07,920 --> 00:15:12,320
क्यों वो लगता है प्रामाणिक

183
00:15:12,320 --> 00:15:16,320
जी बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय

184
00:15:16,320 --> 00:15:20,800
हो बंदी छोड़ कबीर भगवान की जय हो सत साहेब

185
00:15:20,800 --> 00:15:25,280
राम राम आपके सभी दर्शकों को सत साहिब ये आपने अभी-अभी

186
00:15:25,280 --> 00:15:30,080
जो कबीर को भगवान और रामपाल को भगवान कहा है

187
00:15:30,080 --> 00:15:34,240
और बंदी छुड़वाने वाला कहा है। यह किस

188
00:15:34,240 --> 00:15:40,240
आधार पे कहा है? जी

189
00:15:40,320 --> 00:15:44,480
बताइए जिस आधार से छुड़ाया जाता है उसी आधार से जिस आधार से छुड़ाया जाता

190
00:15:44,480 --> 00:15:50,480
यानी कि यानी कि कबीर जो है वो ईश्वर है

191
00:15:51,200 --> 00:15:56,480
जी जी सर्वशक्तिमान है तो देखिए हम

192
00:15:56,480 --> 00:16:00,560
आपसे बहुत कठिन से जुड़े हैं तो आपसे हम सर्वप्रथम

193
00:16:00,560 --> 00:16:05,680
हम एक दिक्कत है आप सिर्फ यहां पे अभी भगवान मत कहिए मेरे चैनल

194
00:16:05,680 --> 00:16:09,680
अपने शब्द वापस ले लीजिए या फिर भगवान सिद्ध करिए पहले।

195
00:16:09,680 --> 00:16:13,840
हमने हमने हमने जो बोला है

196
00:16:13,840 --> 00:16:18,080
तो हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम किया है। हमने तो आपको कुछ नहीं बोला।

197
00:16:18,080 --> 00:16:22,080
भगवान किसी का अलग नहीं हो सकता है। सबका भगवान एक ही हो सकता है। किसी

198
00:16:22,080 --> 00:16:26,240
का अलग नहीं हो सकता है। आप आप जिसको यहां भगवान कह रहे हैं भगवान

199
00:16:26,240 --> 00:16:31,920
के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। आप उसको भगवान सिद्ध करिए। या तो अपने शब्द वापस लीजिए।

200
00:16:31,920 --> 00:16:36,000
हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम किया। भाई मैं कह रहा हूं मैं

201
00:16:36,000 --> 00:16:40,080
कह रहा हूं भगवान श्री राम की जय। और अगर तुम

202
00:16:40,080 --> 00:16:44,560
पूछोगे मैं श्री राम को भगवान सिद्ध कर दूंगा। सर्वशक्तिमान

203
00:16:44,560 --> 00:16:48,560
सिद्ध कर दूंगा। अब तुम यदि सर्वशक्तिमान सिद्ध कर पा रहे हो कबीर को तो

204
00:16:48,560 --> 00:16:52,800
तुम कहो वरना अपना वापस ले लो। दूसरी बातें करो।

205
00:16:52,800 --> 00:16:56,800
और अपने घर पे खूब लो नाम। अपने घर पे

206
00:16:56,800 --> 00:17:01,040
जाके आप खूब नाम लीजिए उनका। अच्छा अच्छा कोई बात नहीं

207
00:17:01,040 --> 00:17:06,320
तो आपने श्री राम सिद्ध करेंगे ना सक्षम

208
00:17:06,320 --> 00:17:06,960
फिलहाल

209
00:17:06,960 --> 00:17:11,680
आपने ये कहा है ना फिलहाल आपने ये माना है ना

210
00:17:11,680 --> 00:17:16,240
हम करेंगे सिद्ध फिलहाल आपने शुरुआत की है तो आपको सिद्ध करना है

211
00:17:16,240 --> 00:17:20,400
करेंगे ठीक नहीं हम हम उसको हम सिद्ध

212
00:17:20,400 --> 00:17:24,480
करेंगे लेकिन हम ये कह रहे हैं कि आपने बोला है कि हम सर्वशक्तिमान सिद्ध करेंगे

213
00:17:24,480 --> 00:17:28,480
श्री राम को ठीक है तो आप करिए लेकिन इस

214
00:17:28,480 --> 00:17:32,800
इस पर हम आपसे चर्चा करने से पहले हम कुछ बातें रखेंगे अपनी। इसके बाद हम

215
00:17:32,800 --> 00:17:37,120
आपसे चर्चा करेंगे। नहीं नहीं वो बातें आप तब रखिए जब अपने शब्द वापस

216
00:17:37,120 --> 00:17:41,520
लीजिए पहले। हां हम वापस ले लीजिए। देखिए

217
00:17:41,520 --> 00:17:45,760
हम संत रामपाल जी महाराज को अपना गुरु मानते हैं। कबीर साहब को परमात्मा

218
00:17:45,760 --> 00:17:49,920
मानते हैं। हम अपने लिए मानते हैं। हम अपनी बात को अपने पास रख रहे हैं। अपना वापस

219
00:17:49,920 --> 00:17:54,000
लेते हैं। आपसे हमारा उसमें कोई नहीं है। परमात्मा सिद्ध करिए ना।

220
00:17:54,000 --> 00:17:58,000
हमें यदि आप बता रहे हैं। आप मन में मानिए। आप यदि हमें बता रहे

221
00:17:58,000 --> 00:18:02,400
हैं हमारे सामने कोई असत्य बात करेंगे यदि आप तो हम टोकेंगे ना आपको

222
00:18:02,400 --> 00:18:06,400
आपके लिए भी वो परमात्मा नहीं है उसको हम हम सिद्ध

223
00:18:06,400 --> 00:18:10,640
करेंगे कि कबीर परमात्मा अभी अभी अगर आपने पहले वो पॉइंट नहीं उठाया

224
00:18:10,640 --> 00:18:15,040
होता तो हम कुछ ना कहते वो पॉइंट आपने उठाया

225
00:18:15,040 --> 00:18:18,080
हां ठीक है हमने

226
00:18:18,080 --> 00:18:22,080
मैंने आ के कोई क्लेम किया क्या मैंने आ के

227
00:18:22,080 --> 00:18:26,160
कोई क्लेम किया क्या हम सिद्ध करने के लिए तैयार है बात आपको

228
00:18:26,160 --> 00:18:30,400
समझ आप कर दीजिए ना कर दीजिए बहुत देर थोड़ी ना लगेगी कर दीजिए फिर आगे बढ़िए

229
00:18:30,400 --> 00:18:34,400
चलिए ठीक है ठीक है करेंगे करेंगे थोड़ी रुक जाइए रुक जाइए शांत धैर्य

230
00:18:34,400 --> 00:18:38,480
बना करके देखिए नहीं तो आप आप वो शब्द वापस

231
00:18:38,480 --> 00:18:42,480
ले लीजिए आगे चलते हैं आप कह दीजिए अभी फिलहाल के लिए मैं इस बात को रख

232
00:18:42,480 --> 00:18:46,480
रहा हूं कि मैं उन्हें भगवान नहीं मानता फिर आगे चलिए

233
00:18:46,480 --> 00:18:50,480
नहीं तो अगर भगवान कहा है तो अब सिद्ध करो पहले

234
00:18:50,480 --> 00:18:54,560
मैंने कबीर भगवान 100% मानता हूं हां तो

235
00:18:54,560 --> 00:18:58,720
सिद्ध करो 100 100 में 99 भी नहीं है। 100% है कि मैं कबीर

236
00:18:58,720 --> 00:19:03,840
परमात्मा को मानता हूं। ठीक है? तो क्या वो सर्वशक्तिमान है?

237
00:19:03,840 --> 00:19:08,000
जी हम माता के गर्भ से जन्म ले सकता

238
00:19:08,000 --> 00:19:12,000
है? नहीं लेता है। तो वो तो

239
00:19:12,000 --> 00:19:16,480
सर्वशक्तिमान नहीं रहा। फिर

240
00:19:16,480 --> 00:19:22,400
कैसे? अरे सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या है?

241
00:19:22,400 --> 00:19:26,880
सर्वशक्तिमान का अर्थ है कि जो सब कुछ कर सकता है हम

242
00:19:26,880 --> 00:19:30,880
तो वो वो गर्भ से जन्म क्यों नहीं ले पा रहा है फिर वो गर्भ

243
00:19:30,880 --> 00:19:35,280
से जन्म उसको लेने की जरूरत क्या है वो तो अपने अपने नीचे अरे भैया

244
00:19:35,280 --> 00:19:39,280
फिर वही बात हो गई जरूरत ना होना वो थोड़ी ना है मैं कह रहा हूं ले सकता है

245
00:19:39,280 --> 00:19:43,520
कि नहीं कैपेबिलिटी है कि नहीं वो ले सकता है लेकिन

246
00:19:43,520 --> 00:19:47,840
लेता नहीं है क्योंकि उसने उत्पत्ति किया है उसने अपने समय से उत्पत्ति

247
00:19:47,840 --> 00:19:51,840
किया है वो लेता नहीं है इस बात इस मर्यादा को तोड़ सकता

248
00:19:51,840 --> 00:19:56,400
है कि नहीं? मर्यादा नहीं तोड़ता वो। वो

249
00:19:56,400 --> 00:20:00,400
सर्वशक्तिमान है इसलिए मर्यादा नहीं तोड़ता। अच्छा

250
00:20:00,400 --> 00:20:04,000
ये कहां पर लिखी है परिभाषा?

251
00:20:04,000 --> 00:20:08,000
कबीर सागर में लिखा है। वो सर्वशक्तिमान है।

252
00:20:08,000 --> 00:20:12,240
हां। सर्वशक्तिमान ठीक है। सर्वशक्तिमान भी मर्यादा

253
00:20:12,240 --> 00:20:16,320
किसके लिए होती है? मर्यादा का अर्थ क्या है? मर्यादा

254
00:20:16,320 --> 00:20:21,200
का अर्थ है कि वो इतने इतने के अंतर्गत वो कार्य को करेगा। मर्यादा

255
00:20:21,200 --> 00:20:25,520
मर्यादा की आवश्यकता क्या है? मर्यादा की आवश्यकता

256
00:20:25,520 --> 00:20:29,680
इसलिए है कि जो भी मतलब कार्य होगा एक नियम के आधार से होगा। अरे

257
00:20:29,680 --> 00:20:31,600
क्यों? क्यों

258
00:20:31,600 --> 00:20:35,600
होगा नियम के हिसाब से बताइए? नियम के हिसाब से इसलिए

259
00:20:35,600 --> 00:20:39,760
होगा कि अगर नियम को अगर उल्लंघन करके अगर कोई अगर चल

260
00:20:39,760 --> 00:20:44,560
रहा है तो उसमें कुछ भी हानि हो सकती है। लेकिन अगर

261
00:20:44,560 --> 00:20:48,960
यानी कि यानी कि भगवान को भी हानि होगी। भगवान

262
00:20:48,960 --> 00:20:51,840
को भी भय है।

263
00:20:51,840 --> 00:20:56,480
भाई किसी भी चीज की नियम होती है। अगर नियम तोड़ेगा तो उसका हानि होगी।

264
00:20:56,480 --> 00:21:00,480
बाबू मैंने आपसे क्या पूछा है? भगवान को भी हानि होने का भय

265
00:21:00,480 --> 00:21:04,640
है। बिल्कुल 100% भाई अगर अगर नियम तोड़ेगा

266
00:21:04,640 --> 00:21:08,720
तो हानि तो होगा ही। उसमें कौन सी शक की बात है? तो क्या हानि होगी उसकी?

267
00:21:08,720 --> 00:21:12,720
जैसे जैसे हमने नियम तोड़ा तो हमें तो मोक्ष नहीं मिलेगा। नरक

268
00:21:12,720 --> 00:21:16,720
मिलेगा। उसने नियम तोड़ा तो उसको क्या मिलेगा? क्या हानि

269
00:21:16,720 --> 00:21:19,280
है?

270
00:21:19,280 --> 00:21:23,360
उसको उसको जो जिस कार्य को करेगा अगर वो नियम तोड़ के करेगा तो उसमें

271
00:21:23,360 --> 00:21:27,360
उसका हानि होगी। अरे हानि होगी तो उसको कष्ट होगा।

272
00:21:27,360 --> 00:21:33,360
जैसे हमारी हानि यही है कि हमें कष्ट होगा। एट द एंड उसको कष्ट होगा।

273
00:21:33,840 --> 00:21:37,920
उसको कष्ट नहीं होगा क्योंकि उन्होंने सब चीजों को अपने शब्द से उत्पन्न

274
00:21:37,920 --> 00:21:42,000
किया है। मैंने क्या पूछ हानि सिद्ध करो ना भगवान की हानि कैसे

275
00:21:42,000 --> 00:21:46,080
होगी? सिद्ध करो फिर कैसे होगी? हानि ऐसी जैसे मान लीजिए

276
00:21:46,080 --> 00:21:50,240
कि भगवान ने अपने शब्द से उत्पन्न कर लिया। ठीक है? शब्द से

277
00:21:50,240 --> 00:21:54,240
शब्द से उत्पन्न करने के बाद अगर वो अपना रखा है अगर उसको

278
00:21:54,240 --> 00:21:58,400
अगर शब्द को अगर वापस ले लेता है उसने उसका विचार था कि सृष्टि रचे

279
00:21:58,400 --> 00:22:02,560
और सृष्टि ना रच करके अगर शब्द को पूरा वो तोड़ देता है तो उसका

280
00:22:02,560 --> 00:22:07,040
सृष्टि नहीं रची जाएगी। तो इसलिए

281
00:22:07,040 --> 00:22:11,600
इसका मतलब सृष्टि इसका मतलब सृष्टि रचना उसका

282
00:22:11,600 --> 00:22:15,680
लाभ है। सृष्टि रचना से उसे खुशी मिल रही

283
00:22:15,680 --> 00:22:19,680
है। बिल्कुल जब सारे ब्रह्मांडों को उसने उत्पन्न किया तो

284
00:22:19,680 --> 00:22:24,640
किसी रचना से उसे खुशी मिल रही है। बिल्कुल

285
00:22:24,640 --> 00:22:30,000
अच्छा और सृष्टि रचना नहीं होगी तो उसे दुख होगा।

286
00:22:30,000 --> 00:22:34,000
कौन सी आप कौन सी सृष्टि रचना कह रहे हैं? ये जो कोई भी

287
00:22:34,000 --> 00:22:38,240
कोई भी सृष्टि रचना अगर सृष्टि रचना नहीं की उसने

288
00:22:38,240 --> 00:22:42,480
नियमों के विरुद्ध जाने के कारण तो उसे दुख होना मान रहे हो आप। नहीं

289
00:22:42,480 --> 00:22:46,560
कि ये जो हम लोग यहां पर जो ये काल भगवान के 21 ब्रह्मांड के अंतर्गत जो सृष्टि

290
00:22:46,560 --> 00:22:49,520
रची जा रही है। उसकी

291
00:22:49,520 --> 00:22:53,600
उसको कष्ट कैसे होगा ये बता दो। कष्ट होता है कि नहीं होता है? पहले ये बता

292
00:22:53,600 --> 00:22:58,320
दो। कबीर को कष्ट होता है ना जैसे जैसे कष्ट ऐसे होता है

293
00:22:58,320 --> 00:23:02,400
भगवान को भी दुख है भगवान को भी दुख हो सकता है

294
00:23:02,400 --> 00:23:06,640
भगवान को दुख ऐसे होता है कि जैसे हम लोग यहां पर दुखी होते हैं नरक में जाते हैं 84

295
00:23:06,640 --> 00:23:10,720
में जाते हैं तो हम हम परमा हम हमने भगवान के अंश

296
00:23:10,720 --> 00:23:14,720
हैं तो हम लोग जब यहां पर नर्क में जाते हैं अगर यहां चिल रोते हैं चिल्लाते

297
00:23:14,720 --> 00:23:18,720
हैं तो उसको वहां दुख पहुंचता है कि हमारा यह पुत्र हमारा बच्चा यहां पर

298
00:23:18,720 --> 00:23:22,720
नर्क में आज भटक रहा है हमने जब सही मार्ग बताया इसने नहीं माना था

299
00:23:22,720 --> 00:23:26,880
तो इस बात यानी कि भगवान में भी अभाव है, दुख है, कमी है,

300
00:23:26,880 --> 00:23:31,200
पूर्ण नहीं है। फिर वो वो पूर्ण है। लेकिन उसकी संतान

301
00:23:31,200 --> 00:23:35,280
जब यहां पर दुखी है तो मेरे भाई जो

302
00:23:35,280 --> 00:23:39,360
दुखी है वो मुक्त कहां से हो गया? जो किसी भी कारण से दुखी हो

303
00:23:39,360 --> 00:23:43,360
सकता है वो मुक्त कैसे हो गया? अच्छा

304
00:23:43,360 --> 00:23:47,520
आप एक बात आप एक बात बताओ। ऐसे समझ लो। जैसे मान लो कि

305
00:23:47,520 --> 00:23:51,600
हम यहां से मुक्त हो के चले गए। तो कहां जाएंगे? भगवान

306
00:23:51,600 --> 00:23:55,840
के लोक में जाएंगे ना। भगवान के लोक में जाएंगे

307
00:23:55,840 --> 00:24:00,080
ना जी कबीर के लोक में जाएंगे ना तो

308
00:24:00,080 --> 00:24:04,240
वहां जाकर के उसके बाद क्या हमें किसी भी प्रकार का दुख

309
00:24:04,240 --> 00:24:04,740
हो सकता

310
00:24:04,640 --> 00:24:08,960
है नहीं वहां नहीं होता अच्छा

311
00:24:08,960 --> 00:24:14,640
मतलब वहां पर भगवान को दुख हो सकता है हमें नहीं हो सकता

312
00:24:14,640 --> 00:24:18,880
वहां पर सत्यलोक में कोई दुख नहीं होता वहां पर भगवान

313
00:24:18,880 --> 00:24:22,960
को दुख जब आप भगवान का दुख होना स्वीकार कर रहे हो तो तो फिर हम

314
00:24:22,960 --> 00:24:27,200
तो जीव है ना। ये बताइए कि अगर किसी बाप

315
00:24:27,200 --> 00:24:32,240
का अगर बाप के सामने किसी बेटे को कोई मार रहा है तो

316
00:24:32,240 --> 00:24:37,360
क्या बाप को दुख नहीं होगा? बाप को दुख बाप सर्वशक्तिमान नहीं होता ना।

317
00:24:37,360 --> 00:24:42,960
जो बाप जिस बाप से आप तुलना कर रहे हो वो सर्वशक्तिमान नहीं है ना।

318
00:24:42,960 --> 00:24:47,040
आप सर्वशक्तिमान की तुलना एक हाड़ मास के पंच भौतिक शरीर से

319
00:24:47,040 --> 00:24:50,720
तुलना कर रहे हो आप भगवान की।

320
00:24:50,720 --> 00:24:55,120
इसीलिए कहते हैं चक्कर में एक मिनट

321
00:24:55,120 --> 00:24:59,600
आप आपका यह कहना है कि अगर कोई अगर बाप को अगर

322
00:24:59,600 --> 00:25:03,760
बेटे के दुख से अगर दुखी है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है। आप ये कहना

323
00:25:03,760 --> 00:25:07,840
चाहते हो? अरे भैया इसका मतलब जो बाप है वह सर्वशक्तिमान मान रहे हो उसे

324
00:25:07,840 --> 00:25:12,160
अगर बेटे के दुख से वो दुखी हो रहा है फिर भी

325
00:25:12,160 --> 00:25:16,160
भाई अब जो हमारा भगवान को सच्चिदानंद कहा गया

326
00:25:16,160 --> 00:25:21,520
है कि नहीं भगवान को सच्चिदानंद कहा गया है कि नहीं

327
00:25:21,520 --> 00:25:25,600
सच्चिदानंद और सच्चिदानंद घन ब्रह्म में अंतर है। अब कौन से

328
00:25:25,600 --> 00:25:29,680
भगवान की बात घन मैं कह रहा हूं सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहा गया है

329
00:25:29,680 --> 00:25:35,680
कि नहीं? चलो हां वो कहा गया

330
00:25:37,040 --> 00:25:40,320
क्या अर्थ है इसका

331
00:25:40,320 --> 00:25:44,320
उसका नाम है ये नाम का अर्थ नहीं होता सत

332
00:25:44,320 --> 00:25:48,560
कुछ नहीं पता है नाम का अर्थ नहीं होता चले आए नाम का अर्थ है इसका

333
00:25:48,560 --> 00:25:52,880
सुनो सत मतलब स्वरूप से सत कभी

334
00:25:52,880 --> 00:25:56,960
ना चेंज होने वाला चित मतलब अखंड ज्ञानी

335
00:25:56,960 --> 00:26:01,120
सतचित आनंद मतलब अनंत आनंद जिस

336
00:26:01,120 --> 00:26:05,440
आनंद में ब्रेक नहीं लग सकती वो है भगवान

337
00:26:05,440 --> 00:26:09,600
अगर उसके भी आनंद में ब्रेक लग सकती है तो

338
00:26:09,600 --> 00:26:13,680
वो सच्चिदानंद कहां से सिद्ध हुआ सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहां से

339
00:26:13,680 --> 00:26:18,000
सिद्ध हुआ शिवश का शिवश का अर्थ करिए आप शिवांश

340
00:26:18,000 --> 00:26:23,120
का अर्थ क्या होता है शिवका अंश

341
00:26:23,120 --> 00:26:27,200
शिवकांश हो गया अच्छा अच्छा अच्छा

342
00:26:27,200 --> 00:26:31,840
हां चलिए अब सुन लीजिए अब सुन लीजिए इसके बाद चर्चा करेंगे अब

343
00:26:31,840 --> 00:26:36,000
अब आपका हो गया। अब मेरी बात समझ लीजिए। अभी हम

344
00:26:36,000 --> 00:26:40,240
आपसे बोलना चाह रहे थे। आपने बोलने नहीं दे रहे थे। अभी हमारी बात पूरा नहीं हुई थी कि

345
00:26:40,240 --> 00:26:44,320
हमने जब आपके चैनल पर अभी ज्वाइन होना चाह रहा था। बहुत कोशिश किया तो पता नहीं क्यों

346
00:26:44,320 --> 00:26:48,560
हट जा रहे थे। आपके इस पर क्या लिखता है कि दिस दिस होस्ट हैज

347
00:26:48,560 --> 00:26:52,640
इनेबल लोकल रिकॉर्डिंग। मतलब इस पर लोकल रिकॉर्डिंग बोल रहा था

348
00:26:52,640 --> 00:26:56,800
कि आप ये लोकल रिकॉर्डिंग है। तो मैंने काफी कोशिश किया इस पर ज्वाइन नहीं हो पा रहे थे।

349
00:26:56,800 --> 00:27:00,960
अब दूसरी बात यह है कि ये बकवास बातें हमें

350
00:27:00,960 --> 00:27:05,040
ना बताइए। हम आपको बार-बार ऊपर ले रहे थे तब आपने जो है अपना

351
00:27:05,040 --> 00:27:09,120
कैमरा ऑन नहीं कर पा रहे थे। ठीक है? कोई बात नहीं।

352
00:27:09,120 --> 00:27:13,760
अब आप दोबारा उस पे आइए विषय पे। अब आप विषय पे आ जाइए।

353
00:27:13,760 --> 00:27:18,560
आपने कहा हमारा ईश्वर आपने कहा हमारा ईश्वर दुखी होता है

354
00:27:18,560 --> 00:27:22,960
तो दुखी होता है तो इसका मतलब उसका जो आनंद है वो अनंत आनंद

355
00:27:22,960 --> 00:27:27,200
नहीं है उसमें ब्रेक लग सकती है एक मिनट एक मिनट

356
00:27:27,200 --> 00:27:31,520
भाई साहब जब ब्रेक लग सकती है ब्रेक लग सकती है तो ऐसे

357
00:27:31,520 --> 00:27:35,600
आनंद की किसको जरूरत है शांति बना

358
00:27:35,600 --> 00:27:38,160
लीजिए आपके सारे प्रश्न का उत्तर देंगे हम ऐसे नहीं जाएंगे

359
00:27:38,160 --> 00:27:42,720
उत्तर देके जाएंगे थोड़ी शांति बना लीजिए हमारा आपसे कहना है

360
00:27:42,720 --> 00:27:46,720
हमारा सर्वप्रथम हमारा यह कहना है कि आप हमें डिबेट

361
00:27:46,720 --> 00:27:50,720
से अपने से आप हटाओगे नहीं अगर मैं हट भी गया तो आपको जॉइ लेना होगा।

362
00:27:50,720 --> 00:27:54,720
नहीं हमारे पास हमारे पास व्यर्थ का समय नहीं है।

363
00:27:54,720 --> 00:27:58,800
अगर आप यहां पे आ के जेलधाम निवासी की जो

364
00:27:58,800 --> 00:28:02,800
लीलाएं हैं वो वाली जिनके कारण वो जेल में पड़ा हुआ है वो बातें आप

365
00:28:02,800 --> 00:28:07,120
यहां बताने लगोगे तो हमें हटाना पड़ेगा आपको। जी हम उसको नहीं बताएंगे

366
00:28:07,120 --> 00:28:11,120
आपको। हमारा प्रश्न कोई और ये मैंने केवल उदाहरण

367
00:28:11,120 --> 00:28:15,200
दिया आपको। अगर आप व्यर्थ की चीजें करेंगे तो हटाना पड़ेगा हमें आपको। हम यह

368
00:28:15,200 --> 00:28:19,760
आपके साथ वो नहीं और आप अपने मन से कई बार भागे भी हैं।

369
00:28:19,760 --> 00:28:23,920
आप अपना जवाब बाबू बाबू देखो मेरे पास बहुत ज्यादा समय नहीं

370
00:28:23,920 --> 00:28:28,080
है। आप मेरे लिए एक नगण्य व्यक्ति हैं। कोई इंपॉर्टेंट नहीं रखते आप।

371
00:28:28,080 --> 00:28:32,160
मैं मैं आपको तुरंत हटाऊंगा। फालतू की बातें अगर करोगे तो। सीधे जवाब

372
00:28:32,160 --> 00:28:36,160
दो। आपका आपका जिसको आपने अभी भगवान कहा

373
00:28:36,160 --> 00:28:40,320
है उसको दुख होता है। माना आपने। इसका मतलब वो सच्चिदानंद

374
00:28:40,320 --> 00:28:44,480
नहीं है। और आपने अभी एक बेवकूफी और की है

375
00:28:44,480 --> 00:28:48,560
कि सच्चिदानंद का कोई अर्थ नहीं है। यह भी बेवकूफी कर दी

376
00:28:48,560 --> 00:28:52,560
आपने। आप आप वो चीज दिखाइए कि भगवान को

377
00:28:52,560 --> 00:28:53,280
दुख नहीं होता। वो

378
00:28:53,280 --> 00:28:57,280
दिखाइए आप कहां पर लिखा है? अरे सच्चिदानंद अपने आप में ही ये बात

379
00:28:57,280 --> 00:29:01,280
है ना। अच्छा ये बताओ भगवान को भी दुख भगवान

380
00:29:01,280 --> 00:29:05,520
को भी दुख होता है तो हमारे और भगवान में अंतर क्या रह गया बताओ? चलो

381
00:29:05,520 --> 00:29:09,520
नहीं मनगणित नहीं चलेगा। प्रमाण दीजिए कहां पर कि दुख नहीं होता है। दिखाइए प्रमाण। अरे

382
00:29:09,520 --> 00:29:14,560
यही प्रमाण है उसको उसको सच्चिदानंद कहना ही प्रमाण है।

383
00:29:14,560 --> 00:29:18,560
मन देखिए मन हम नहीं मानते। प्रमाण चलता है। संत रामपाल जी मान ठीक

384
00:29:18,560 --> 00:29:22,800
है। ठीक है। नहीं मानते। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। नहीं मानते तुम

385
00:29:22,800 --> 00:29:26,800
हमको ये बताओ। मैं मैं उत्तर मैं उत्तर

386
00:29:26,800 --> 00:29:30,880
दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मेरा प्रश्न आप

387
00:29:30,880 --> 00:29:35,680
कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। आप कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। यही कह रहे हो ना?

388
00:29:35,680 --> 00:29:40,080
प्रमाण दिखाओ। कह रहे हो ना? क्लेम किसका है? किसी

389
00:29:40,080 --> 00:29:44,240
चीज के होने का प्रमाण चाहिए होता है ना होने का नहीं आप दिखाओ

390
00:29:44,240 --> 00:29:48,400
दुख दुख है भगवान को यह प्रमाण आपको दिखाना है दिखाओ

391
00:29:48,400 --> 00:29:52,800
नहीं आप कह रहे हैं कि दुख नहीं होता तो चीज दिखाइए ना कि कहां पर लिखा

392
00:29:52,800 --> 00:29:56,800
अरे भैया किसी चीज के ना होने का प्रमाण थोड़ी ना चाहिए होता है होने का

393
00:29:56,800 --> 00:30:00,880
चाहिए होता है कोई ये क्लेम कर रहा है ये चीज है उसका प्रमाण चाहिए जैसे

394
00:30:00,880 --> 00:30:04,880
मैंने कहा जैसे सुनो जैसे मैंने कहा कि यहां पर

395
00:30:04,880 --> 00:30:08,640
बाबू है तो मुझे प्रमाण देना है अगर बाबू नहीं

396
00:30:08,640 --> 00:30:12,640
तो तुम अगर यहां पे नहीं हो ये अपने आप में एक प्रमाण है। इसके लिए मुझे कुछ ला के

397
00:30:12,640 --> 00:30:16,880
दिखाने की जरूरत नहीं है। वो वो हमारे पास प्रमाण

398
00:30:16,880 --> 00:30:20,960
है कि परमात्मा को दुख होता है। हमारे पास कबीर साहब का प्रमाण है। वो वो दिखाओ वो

399
00:30:20,960 --> 00:30:26,160
दिखाओ। दुख होता है। परमात्मा को दुख होता है वो दिखाओ। फिर हम उसको काटेंगे।

400
00:30:26,160 --> 00:30:30,480
वो चीज हमारे पास प्रमाण है। आप वो चीज दिखाइए कि परमात्मा को दुख नहीं होता है।

401
00:30:30,480 --> 00:30:34,560
आप कहां से प्रमाण मानोगे ये बताओ। किसको प्रमाण मानते हो ये

402
00:30:34,560 --> 00:30:37,040
बताओ। चलो।

403
00:30:37,040 --> 00:30:41,040
कबीर सा में लिखा है ना कबीर सागर को मैं

404
00:30:41,040 --> 00:30:45,280
दिखाऊं आपको कबीर सागर को दिखाऊं तो ये चिल्लाया करो जाके

405
00:30:45,280 --> 00:30:51,280
कबीर सागर में प्रमाण है और कबीर भगवान है वेद का नाम क्यों लेते हो

406
00:30:51,840 --> 00:30:55,920
दुख नहीं होता दिखाइए कहां पर लिखा है अरे भैया जब तुम

407
00:30:55,920 --> 00:30:59,920
खुद कह रहे हो कि यहां से जो जीव मुक्त होता है उसको दुख नहीं होता तो तुम ये

408
00:30:59,920 --> 00:31:05,920
मान रहे हो कि मतलब जीव को दुख नहीं होगा परमात्मा को दुख होगा

409
00:31:06,480 --> 00:31:11,520
यहां पर जीव नरक में जाता है 8रा में जाता है तो परमात्मा होता है

410
00:31:11,520 --> 00:31:15,760
के भगवान के धाम चला जाएगा जहां भगवान बैठा है वहां पे जीव

411
00:31:15,760 --> 00:31:20,000
को वो दुख होगा कि नहीं होगा

412
00:31:20,000 --> 00:31:24,000
वहां पर दुख नहीं होता वहां पर परम शांति इसका मतलब तुम ये कह

413
00:31:24,000 --> 00:31:28,160
रहे हो कि जहां भगवान है वहां भगवान को तो दुख होगा मगर जो

414
00:31:28,160 --> 00:31:32,000
मुक्त जीव है वो उसको दुख नहीं होगा

415
00:31:32,000 --> 00:31:36,080
अरे यार हम क्या कह रहे है कि यार नरक में 84 में जब हम लोग घूमते हैं तब

416
00:31:36,080 --> 00:31:40,080
परमात्मा को दुख होता हम ये कह रहे हैं। अरे मैं मैं कह

417
00:31:40,080 --> 00:31:44,160
रहा हूं जब मैं कह रहा हूं जो जीव मुक्ति धाम चला गया जहां पर

418
00:31:44,160 --> 00:31:48,160
भगवान अच्छा जब परमात्मा को जब दुख होता है और जब मनुष्य जो

419
00:31:48,160 --> 00:31:52,160
है जीव जो है 84 लाख योनियों में होता है तो भगवान कहां

420
00:31:52,160 --> 00:31:56,400
पर होते हैं उस समय जहां उनको दुख होता है कहां

421
00:31:56,400 --> 00:32:01,760
होते हैं भगवान भगवान सनातन धर्मधाम रहते हैं

422
00:32:01,760 --> 00:32:05,840
अरे भैया उस लोक के उस लोक में जिस लोक में आप जाओगे मुक्त

423
00:32:05,840 --> 00:32:06,960
होने के बाद वहां

424
00:32:06,960 --> 00:32:11,440
या उससे भी और अच्छे लोक में रहते हैं ना तो

425
00:32:11,440 --> 00:32:15,840
वहां पर वहां पर किसी की कोई दुख नहीं होती। परमात्मा कभी वहां दुख नहीं होता।

426
00:32:15,840 --> 00:32:18,720
लेकिन परमात्मा

427
00:32:18,720 --> 00:32:22,880
का कोई भी जीव सुनिए मैंने क्या है मैंने क्या

428
00:32:22,880 --> 00:32:27,120
अच्छा ये बताओ इस समय कुछ लोग मुक्त होंगे कि नहीं वहां पे जीव

429
00:32:27,120 --> 00:32:31,120
परमात्मा अकेला है? वहां बहुत बहुत मुक्त हैं।

430
00:32:31,120 --> 00:32:35,200
बहुत लोग हैं वहां पर। मुक्त हैं। तो क्या उनको दुख हो सकता है इस समय जो इस समय मुक्त

431
00:32:35,200 --> 00:32:39,280
है? वहां पर वहां पर नहीं होता नहीं होता तो

432
00:32:39,280 --> 00:32:43,360
वहीं पे जीव जो है वो मुक्त है उसको दुख नहीं हो रहा है भगवान

433
00:32:43,360 --> 00:32:47,440
को दुख होता है वहां पर भगवान को भी दुख नहीं

434
00:32:47,440 --> 00:32:51,520
होता जो यहां पर आत्माएं दुखी होती है उसके विपरीत में परमात्मा वहां

435
00:32:51,520 --> 00:32:56,480
दुखी होता है अरे किसी भी कारण से हो दुखी तो होता है ना

436
00:32:56,480 --> 00:33:02,320
बिल्कुल बिल्कुल दुख है ना तुम्हारे सतलोक में

437
00:33:02,320 --> 00:33:06,480
अपने बाप बाप अपने पुत्र के लिए दुखी नहीं होगा फिर किस किसके लिए दुखी होगा? क्योंकि

438
00:33:06,480 --> 00:33:10,640
वो बाप यह जानता है कि यह जो लड़का है मेरा बेकार में दुखी हो रहा है। क्योंकि

439
00:33:10,640 --> 00:33:14,960
वो बाप जो है वो ये जानता है कि मैं सर्वशक्तिमान हूं।

440
00:33:14,960 --> 00:33:19,040
वो बाप साधारण बाप नहीं है। पंच भौतिक बाप नहीं

441
00:33:19,040 --> 00:33:22,080
है वो बाप।

442
00:33:22,080 --> 00:33:26,160
आपका ये कहना है कि मतलब परमात्मा दुखी नहीं होता। तो आप वो चीज हम परमा

443
00:33:26,160 --> 00:33:30,240
अरे भैया जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे। जब आप

444
00:33:30,240 --> 00:33:36,160
जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे तो हमको मुक्ति कौन देगा?

445
00:33:36,160 --> 00:33:40,320
कौन देगा मुक्ति? अरे तो परमा किसी भी

446
00:33:40,320 --> 00:33:44,560
कारण से सुनो बाबू सुन लो किसी भी कारण

447
00:33:44,560 --> 00:33:48,560
से यदि परमात्मा दुखी हो रहा है तो हमारे

448
00:33:48,560 --> 00:33:52,960
को मुक्ति वो देगा वो भी अनंत वाली अनंत दुख वाली। यह हम कैसे मानेंगे

449
00:33:52,960 --> 00:33:57,600
भाई जो खुद दुखी है किसी भी कारण से

450
00:33:57,600 --> 00:34:01,600
देखिए ये हाई लेवल का ज्ञान है इस ज्ञान को आप

451
00:34:01,600 --> 00:34:06,400
ऐसे नहीं समझ सकते पहले आप बातें करोगे मैं तुम्हें सच से निकाल दूंगा

452
00:34:06,400 --> 00:34:10,480
बहुत हो गया हाई लेवल लो लेवल हमें ना बताना देख रहा हूं तुम्हारा हाई

453
00:34:10,480 --> 00:34:14,960
लेवल कितना है आप प्रमाण

454
00:34:14,960 --> 00:34:17,360
क्या करें आप प्रमाण कौन बोल रहा है प्रमाण नहीं

455
00:34:17,360 --> 00:34:21,440
है भाई मैं प्रमाण तब दिखाऊं ना जब प्रमाण प्रमाण हो अभी

456
00:34:21,440 --> 00:34:25,680
अभी आपसे मैंने पूछा प्रमाण किसे मानते हो आप मानते हो उसको कबीर

457
00:34:25,680 --> 00:34:29,680
सागर को तो मैं क्या दिखाऊं तुम्हें प्रमाण जाओ जाकर के कबीर सागर के नाम पे खूब

458
00:34:29,680 --> 00:34:33,760
ढिंढोरा पीटो के कबीर सागर में प्रमाण है और रामपाल भगवान है और

459
00:34:33,760 --> 00:34:37,840
मैं भगवान हूं और मेरे पिताजी भगवान है सब ढिंढोरा पीटो हमें क्या मतलब वेद

460
00:34:37,840 --> 00:34:42,000
से वेद को प्रमाण मानो वेद को प्रमाण मानना जब सिद्ध करोगे कि

461
00:34:42,000 --> 00:34:46,000
हां मेरे लिए वेद प्रमाण है गीता प्रमाण है तब मैं तुम्हें वो दूंगा

462
00:34:46,000 --> 00:34:50,800
तुम्हारे साथ क्या लाइव चर्चाएं की नहीं है क्या

463
00:34:50,800 --> 00:34:54,880
खूब चर्चाएं कर चुके हैं तो हम उससे आगे की बात करेंगे ना जो हो

464
00:34:54,880 --> 00:34:59,040
चुकी है वही बात रिपीट करते रहे ठीक है ठीक है हम उस पर चर्चा

465
00:34:59,040 --> 00:35:03,520
करते हैं आप बताइए कि परमात्मा पहले है कौन तो उसको तो जान ले पहले

466
00:35:03,520 --> 00:35:07,920
अब परमात्मा किसको मान कर बैठे हैं विषयंतर मत करो तुमने

467
00:35:07,920 --> 00:35:11,920
जो आकर के बोला है उसको वापस लो कि अभी फिलहाल मैं

468
00:35:11,920 --> 00:35:16,080
यह मान रहा हूं कि जो कबीर है और रामपाल

469
00:35:16,080 --> 00:35:22,080
है भगवान नहीं है यह बोलो फिर आगे बढ़े

470
00:35:22,400 --> 00:35:26,960
हम 100% मानते हैं कि कबीर परमात्मा भगवान सारे सृष्टिने

471
00:35:26,960 --> 00:35:31,280
वाले अच्छा चलो ठीक है तुम्हारा भगवान दुखी होता है ठीक है दुखी

472
00:35:31,280 --> 00:35:35,760
होता है मान लिया मान लिया ना ठीक है अब तुम्हारा परमात्मा

473
00:35:35,760 --> 00:35:40,000
दुखी होता है तो दुखी होने वाला परमात्मा एकिस्ट करता

474
00:35:40,000 --> 00:35:44,240
है सिद्ध करो

475
00:35:44,240 --> 00:35:47,840
सिद्ध करो चलो

476
00:35:47,840 --> 00:35:51,920
गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर नंबर 17 अच्छा

477
00:35:51,920 --> 00:35:56,720
गीता को गीता क्या है बताओ जरा

478
00:35:56,720 --> 00:36:00,400
गीता तुम्हारे पास कैसे आई

479
00:36:00,400 --> 00:36:04,480
गीता आई हम आपके परंपरा के आधार से अच्छा तो

480
00:36:04,480 --> 00:36:08,320
गीता का अर्थ कौन बताएगा

481
00:36:08,320 --> 00:36:12,400
आप ही लोग तो अनुवाद किए हैं गीता पे जो भी लिखा आपके परंपरा वाले अनुवाद किए हैं

482
00:36:12,400 --> 00:36:15,600
उसको

483
00:36:15,600 --> 00:36:19,920
उन्होंने माना है कि कबीर भगवान है

484
00:36:19,920 --> 00:36:23,920
उन्होंने गीता मेरी परंपरा मेरी परंपरा वालों ने क्या माना है

485
00:36:23,920 --> 00:36:28,000
क्या कबीर भगवान है आपके परंपरा वाले गीता

486
00:36:28,000 --> 00:36:32,320
में बताई परम अचर ब्रह्म है परमात्मा अरे भाई मैंने क्या कहा कबीर को भगवान

487
00:36:32,320 --> 00:36:36,400
माना है क्या वो जो जिसने दोहे लिखे हैं बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़

488
00:36:36,400 --> 00:36:40,720
खजूर ये इनको प्रमाण माना है क्या जिस जो जिसे तुम्हारा

489
00:36:40,720 --> 00:36:46,400
रामपाल भगवान कहता है उसको हमारे आचार्यों ने भगवान माना है क्या

490
00:36:46,400 --> 00:36:50,480
अच्छा अगर तुम्हें उन पर विश्वास नहीं है उन आचार्यों पर

491
00:36:50,480 --> 00:36:54,560
तो उनके द्वारा दी जाने वाली किताब पर विश्वास कैसे? इसका

492
00:36:54,560 --> 00:36:58,560
मतलब तुम कबीर को उन किताबों के आधार पर परमेश्वर सिद्ध नहीं

493
00:36:58,560 --> 00:36:59,440
कर सकते

494
00:36:59,440 --> 00:37:04,080
जो किताबें तुम्हें उन आचार्यों से मिली है जिन पर तुम्हें विश्वास नहीं है।

495
00:37:04,080 --> 00:37:08,400
ठीक है? तो कुल मिलाकर के तुम्हें स्वतंत्र रूप से सिद्धांत

496
00:37:08,400 --> 00:37:14,320
के द्वारा सिद्ध करना है। सिद्धांत के द्वारा

497
00:37:14,320 --> 00:37:18,480
हम हम उसको सिद्धांत के द्वारा सिद्ध कर रहे हैं। हम आपको ये भी सिद्ध

498
00:37:18,480 --> 00:37:22,640
करके दिखाएंगे कि आप अपने परंपरा वालों की बात को नहीं मानते। हमारे

499
00:37:22,640 --> 00:37:26,640
वो बात है। फिलहाल फिलहाल आप जो है कबीर

500
00:37:26,640 --> 00:37:30,800
को परमात्मा है ये सिद्ध करो। गीता

501
00:37:30,800 --> 00:37:34,960
गीता का प्रमाण मत दो। गीता का प्रमाण दो तो गीता देने वाले पर

502
00:37:34,960 --> 00:37:37,840
विश्वास करो।

503
00:37:37,840 --> 00:37:42,000
हमें विश्वास या तो कह दो या तो यह कह दो कि वो झूठे हैं,

504
00:37:42,000 --> 00:37:46,320
अज्ञानी है तो फिर गीता को मत मानो उनके द्वारा मिलने वाली फिर तुम सिद्ध

505
00:37:46,320 --> 00:37:50,400
कर दो। हम उसको बांध रहे हैं ना कि आपके जो

506
00:37:50,400 --> 00:37:54,960
परंपरा वाले हैं जो गीता का ज्ञान लिखे हैं वेदव्यास जी उनको

507
00:37:54,960 --> 00:37:59,200
जितना जानकारी मिली उतना लिख दिए। अब आगे की अरे भैया

508
00:37:59,200 --> 00:38:03,440
इतना जानकारी उतना नहीं वो सच बोलते हैं वो

509
00:38:03,440 --> 00:38:07,440
सही बात बताते हैं या वो झूठ बोलते हैं वो गलत बात भी बताते

510
00:38:07,440 --> 00:38:10,560
हैं क्या

511
00:38:10,560 --> 00:38:14,800
वो जो गीता जो गीता का ज्ञान देने वाले भगवान ने बोला वेदव्यास

512
00:38:14,800 --> 00:38:19,360
ने दिव्य दृष्टि दिए थे संजय अली मैंने क्या कहा भाई साहब आपको

513
00:38:19,360 --> 00:38:23,360
आपको ये जो किताब है वेदव्यास जी ने नहीं दी है आपको

514
00:38:23,360 --> 00:38:27,920
ये किताब पिछले 100 साल में 50 साल पहले जो हमारे पूर्वाचार्य

515
00:38:27,920 --> 00:38:32,000
हुए हैं उन्होंने दिए। ठीक है? जी। तो आप वो जो

516
00:38:32,000 --> 00:38:36,240
पूर्वाचार्य हैं उन्होंने कबीर को भगवान माना है। अगर

517
00:38:36,240 --> 00:38:40,240
नहीं माना है और फिर भी आप कबीर को भगवान मान रहे हैं उनकी

518
00:38:40,240 --> 00:38:44,640
किताब के आधार पे तो इसका मतलब है कि आपको उनकी गुणवत्ता पर

519
00:38:44,640 --> 00:38:50,320
यकीन नहीं है। कि वो सच ही बोलेंगे।

520
00:38:50,320 --> 00:38:54,640
हम उसी चीज को तो जानना चाहते हैं पहले आपसे। आप हरे भाई

521
00:38:54,640 --> 00:38:58,720
अभी बात अभी बात ये चल रही है कि कबीर परमा

522
00:38:58,720 --> 00:39:03,520
कबीर अभी बात ये चल रही है कि जिसमें दुख है

523
00:39:03,520 --> 00:39:07,600
जिसमें दुख है उस भगवान का अस्तित्व कैसे सिद्ध होता है वो

524
00:39:07,600 --> 00:39:09,920
बताओ

525
00:39:09,920 --> 00:39:14,000
उसका तो आपके पास प्रमाण ही नहीं है लेकिन अब हम प्रश्न कर रहे हैं आपसे आप उत्तर फालतू की

526
00:39:14,000 --> 00:39:18,160
बात करोगे हम तुम्हें हटा देंगे हमारे पास सच्चिदानंद अपने आप

527
00:39:18,160 --> 00:39:23,600
में प्रमाण है उसमें प्रमाण देने की आवश्यकता ही नहीं

528
00:39:23,600 --> 00:39:26,000
और हम तुम्हें प्रमाण दे क्यों?

529
00:39:26,000 --> 00:39:30,160
अरे मैं जो कह रहा हूं जब तुम प्रमाण उसको मानते ही नहीं हो। जब

530
00:39:30,160 --> 00:39:34,240
तुम जब तुम जैसे मैंने तुम्हें अगर ये बुक दी मान लो ये बुक मैं तुम्हें

531
00:39:34,240 --> 00:39:38,320
दे रहा हूं। अब इस बुक को तुम प्रमाण तब मानोगे जब तुम मुझे सच्चा

532
00:39:38,320 --> 00:39:42,480
मानोगे। अगर तुम मुझे झूठा मानते हो तो मैं झूठी किताब भी तुम्हें

533
00:39:42,480 --> 00:39:47,920
दे सकता हूं। तुम्हें कैसे पता है ये वेदव्यास जी वाली किताब है?

534
00:39:47,920 --> 00:39:52,240
ठीक। अब बता रहा हूं आपको। हां। कि आपके

535
00:39:52,240 --> 00:39:56,240
परंपरा से जो परंपरा से चलते आ

536
00:39:56,240 --> 00:40:00,960
रहा है जो वेद गीता संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान तो आज चालू हुआ है 1997

537
00:40:00,960 --> 00:40:04,960
से इससे बातें मत करो पहले तुम ये बताओ दुख ही होने

538
00:40:04,960 --> 00:40:09,680
वाला है ईश्वर कैसे है ये सिद्ध करो पहले

539
00:40:09,680 --> 00:40:14,880
आप आप अभी तक हमें वो प्रमाण नहीं दिए हो प्रमाण दीजिए कि

540
00:40:14,880 --> 00:40:18,960
जो ईश्वर भागवत है कहां

541
00:40:18,960 --> 00:40:23,920
लिखा है दुखी नहीं होता वो प्रमाण हां ठीक है दे रहा हूं

542
00:40:23,920 --> 00:40:28,560
हालांकि देना नहीं चाहिए अपमान है वो प्रमाण का फिर भी दे रहा हूं

543
00:40:28,560 --> 00:40:32,720
वो जनता देखता आप प्रमाण दीजिए वाले के लिए कल

544
00:40:32,720 --> 00:40:37,200
ही खोला था ये प्रमाण तुम भी देख लो इस वाले के लिए खोला था ये प्रमाण

545
00:40:37,200 --> 00:40:41,280
भागवत का ठीक है आप प्रमाण दीजिए कि जनता दे रहा हूं दे रहा हूं

546
00:40:41,280 --> 00:40:45,520
परमेश्वर ये देखो भागवत में लिखा हुआ है स्कंद सात अध्याय

547
00:40:45,520 --> 00:40:51,520
नौ देखो ये देख लो क्या लिखा है

548
00:40:51,680 --> 00:40:57,680
क्या लिखा है पढ़ो

549
00:41:00,880 --> 00:41:05,280
ये कौन सा ग्रंथ है भागवत पुराण भागवत अच्छा

550
00:41:05,280 --> 00:41:09,840
क्या लिखा है भागवत लिखा है ये इसका

551
00:41:09,840 --> 00:41:14,880
इसका कवर दिखाइए कवर कवर में क्या लिखा है

552
00:41:14,880 --> 00:41:19,920
कवर दिखाइए इसका पहले तुम पढ़ लो फिर दिखाऊंगा

553
00:41:19,920 --> 00:41:25,920
ये कहां ऊपर से नीचे साइड? ऊपर से बीते।

554
00:41:26,160 --> 00:41:30,160
अच्छा अच्छा यहां लिखा है कि हल्का

555
00:41:30,160 --> 00:41:34,720
नीचे करिए। हल्का सा हल्का नीचे करिए। हां

556
00:41:34,720 --> 00:41:39,360
परम परमेश्वर अर्थात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान सदैव आत्मा

557
00:41:39,360 --> 00:41:43,440
तष्टिक रहने वाले हैं। अत जब उन्हें कोई भेंट

558
00:41:43,440 --> 00:41:47,440
अर्पित की जाती है। हो गया हो गया हो गया। क्या लिखा

559
00:41:47,440 --> 00:41:51,600
है? और निकालो और भागवत और निकालो। हां। अभी क्या लिखा था?

560
00:41:51,600 --> 00:41:55,600
अभी अभी आपने परमेश्वर तो बता नहीं पा रहे हैं। परमेश्वर है

561
00:41:55,600 --> 00:41:59,920
कौन? वो तो बताइए। फालतू अब देखो तुमने की फालतू बात इसीलिए

562
00:41:59,920 --> 00:42:04,000
निकालता हूं। बात चल रही है कि परमेश्वर में दुख होता है।

563
00:42:04,000 --> 00:42:08,080
ये आपको सिद्ध करना है। आपने पूछा आप कह दो दुख नहीं होता। तो मैंने दिखा दिया

564
00:42:08,080 --> 00:42:12,560
परमेश्वर सदैव आत्म संतुष्ट रहता है। आत्म संतुष्ट

565
00:42:12,560 --> 00:42:17,280
उसको किसी चीज की जरूरत नहीं है। सदैव हमेशा

566
00:42:17,280 --> 00:42:20,640
नित्य स्थाई सनातन

567
00:42:20,640 --> 00:42:24,880
वो वो वो ज्ञान बोला किसने वो चीज दिखाइए। ऐसे कैसे हम मान लेंगे? वो ज्ञान

568
00:42:24,880 --> 00:42:28,960
बोला किसने? उसको अरे भाई किसी ने भी बोला परमेश्वर के

569
00:42:28,960 --> 00:42:30,720
लिए तो बोला गया।

570
00:42:30,720 --> 00:42:34,720
वो तो उसके पास तत्व ज्ञान है। तुमसे बेकार है। अब तुम ये

571
00:42:34,720 --> 00:42:39,840
बता दो तुम्हारे पास किताबें आई कहां से? जिन किताबों का तुम वो कर रहे हो

572
00:42:39,840 --> 00:42:44,240
वो किताब आपके परंपरा वाला से आई है। सुनो सुनो तुम किताबों के आधार पर परमेश्वर

573
00:42:44,240 --> 00:42:49,040
सिद्ध कर रहे हो। सिद्धांत के द्वारा नहीं है तुम्हारे पास परमेश्वरत्व

574
00:42:49,040 --> 00:42:53,200
कबीर के पास उसी चीज को उसी चीज को जानना

575
00:42:53,200 --> 00:42:57,600
चाहता हूं। सिद्धांत क्या है मेरे भाई? सिद्धांत क्या है?

576
00:42:57,600 --> 00:43:01,600
मैं तुमसे पूछ रहा हूं। सिद्धांत क्या है? सिद्धांत

577
00:43:01,600 --> 00:43:05,600
क्या है? सिद्धांत सिद्धांत हमारा यह है कि जो आपके

578
00:43:05,600 --> 00:43:09,600
परंपरा वाले जो ये लिखे हैं परमेश्वर में दुख होता है कि

579
00:43:09,600 --> 00:43:13,680
नहीं ये बताओ ये सिद्धांत है तुम्हारा ईश्वर को

580
00:43:13,680 --> 00:43:17,680
दुख होता है कबीर सागर में प्रमाण है मेरे पास कबीर सागर हम

581
00:43:17,680 --> 00:43:21,760
नहीं मानते कबीर सागर वेद में

582
00:43:21,760 --> 00:43:25,920
वेद में गीता में ईश्वर को दुख ईश्वर को ईश्वर को दुख स्वरूप

583
00:43:25,920 --> 00:43:29,680
मानते हो

584
00:43:29,680 --> 00:43:34,480
आप वेद और गीता को सही सही कैसे मानते हैं? किस आधार से?

585
00:43:34,480 --> 00:43:38,640
वेद और गीता को हम सही मानते हैं क्योंकि हमारे पास वो परंपरा से

586
00:43:38,640 --> 00:43:42,640
आया है। और सीधी बात है अगर सीधी

587
00:43:42,640 --> 00:43:46,960
बात है कि अगर आप यह मान रहे हो किसी भी किताब का अर्थ

588
00:43:46,960 --> 00:43:51,200
कि हमारा जो ईश्वर है उसको दुख होता है क्योंकि वो कुरान में लिखा है वो बाइबल

589
00:43:51,200 --> 00:43:55,520
में लिखा है वो कबीर सागर में लिखा है तो सीधी बात है कि उस ईश्वर

590
00:43:55,520 --> 00:44:00,000
की सिद्धि कर दो कि ऐसा कोई ईश्वर एकिस्ट करता है

591
00:44:00,000 --> 00:44:04,000
स्वतंत्र होकर किताब के आधार पे नहीं क्योंकि किताब को अब हम

592
00:44:04,000 --> 00:44:08,080
चैलेंज कर रहे हैं। किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं कि

593
00:44:08,080 --> 00:44:13,520
ऐसे ईश्वर को ईश्वर सिद्ध कर दो। एक मिनट आपके

594
00:44:13,520 --> 00:44:19,520
ऐसे ईश्वर को ऐसे ईश्वर को

595
00:44:21,760 --> 00:44:25,840
आपके जो परंपरा वाले हैं कि ग्रंथ में जो चीज लिखे हैं तो आप कैसे

596
00:44:25,840 --> 00:44:30,080
मान लीजिए वो सही लिखे हैं। क्योंकि वो परंपरा

597
00:44:30,080 --> 00:44:34,240
मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं क्योंकि वह परंपरा से है। पहली बात

598
00:44:34,240 --> 00:44:38,480
दूसरी बात देने वाला सन्यासी है। एक मिनट तीसरी बात

599
00:44:38,480 --> 00:44:43,040
वो समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देते हैं।

600
00:44:43,040 --> 00:44:47,040
चौथी बात कि वो मेरा संचय दूर करते हैं। जो मेरा प्रश्न

601
00:44:47,040 --> 00:44:51,440
होता है ईश्वर तत्व के विषय में जो तुम जैसे भोंदू लोग और तुम्हारे जैसे

602
00:44:51,440 --> 00:44:55,440
जो भोंदू गुरु के भोंदू चेले नहीं समझ पाते हैं वो तात्विक ज्ञान

603
00:44:55,440 --> 00:45:00,080
वो मुझे देते हैं। यानी कि परंपरा

604
00:45:00,080 --> 00:45:04,960
एक मिनट एक मिनट परम सुनो परंपरा से प्रामाणिकता

605
00:45:04,960 --> 00:45:09,040
लक्षण से सन्यासत्व और समस्त श्रुति स्मृति

606
00:45:09,040 --> 00:45:13,040
शास्त्रों का आलंबन और फल स्वरूप प्राप्त होने वाला तत्व

607
00:45:13,040 --> 00:45:17,120
ज्ञान वो देते हैं वो ज्ञान जिसको प्राप्त करने

608
00:45:17,120 --> 00:45:21,120
के बाद किसी और ज्ञान को पाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। मेरी प्यास है

609
00:45:21,120 --> 00:45:25,440
कि भाई जब ईश्वर अगर सश शरीर है तो वो खड़ा है वो दुनिया किसने

610
00:45:25,440 --> 00:45:29,440
बनाई अब तुम कह देते हो भैया हमें नहीं पता

611
00:45:29,440 --> 00:45:33,600
अरे रुक जाइए रुक जाइए ऐसे जटिल जटिल सवालों का जवाब वो

612
00:45:33,600 --> 00:45:36,880
देते हैं अरे रुक तो जाइए देखिए आप

613
00:45:36,880 --> 00:45:41,040
रुक लीजिए आपका भाषण सुनने हम नहीं आए हैं आप जो गाली दे रहे हैं बहुत आप जा सकते

614
00:45:41,040 --> 00:45:44,480
हैं आप जा सकते हैं चलिए निकलिए निकलिए

615
00:45:44,480 --> 00:45:48,960
हो गया

616
00:45:48,960 --> 00:45:54,960
ठीक है

617
00:45:57,920 --> 00:46:02,000
हां अंकित जी जय श्री राम चर्चा जल्दी खत्म

618
00:46:02,000 --> 00:46:05,920
हो गई ये

619
00:46:05,920 --> 00:46:09,920
इसके लोग बहुत बहुत बेकार निर्लज्ज लोग हैं फालतू

620
00:46:09,920 --> 00:46:15,280
की बातें कमेंट का कोई अर्थ नहीं है ये है मूर्खता

621
00:46:15,280 --> 00:46:19,760
सबसे बड़ा मूर्ख

622
00:46:19,760 --> 00:46:23,920
इस लोग फालतू की बातें करते हैं कमेंट में ऐसे लोग तो नहीं लेना ही ठीक ठीक है। देखिए इतनी

623
00:46:23,920 --> 00:46:28,480
घटिया बात ये लोग करते हैं। यही शिक्षा इनको इनके गुरु से मिलती है। निर्लज्जों

624
00:46:28,480 --> 00:46:32,560
को। अरे जब गुरु के अड्डे से क्या-क्या प्राप्त हुआ

625
00:46:32,560 --> 00:46:37,120
था? आपने तो देखा ही होगा न्यूज़ में यहां कहने में भी लज्जा आती है।

626
00:46:37,120 --> 00:46:42,400
क्या-क्या प्राप्त हुआ था गुरु से? गुरु जहां से पकड़ा गया था। हां।

627
00:46:42,400 --> 00:46:46,400
धक्के मार मार के लातों जूते पीट पीट के किसको

628
00:46:46,400 --> 00:46:50,960
ले जाया गया था? बताइए। है ना?

629
00:46:50,960 --> 00:46:55,360
तो अभी हम विभिन्न धर्म ग्रंथों से विभिन्न

630
00:46:55,360 --> 00:46:59,360
धर्म ग्रंथों से भगवान के सच्चिदानंद

631
00:46:59,360 --> 00:47:03,520
होने का नाम के भगवान होने का प्रमाण भी देख लेते। ठीक है?

632
00:47:03,520 --> 00:47:07,840
हम ऐसे नहीं छोड़ते किसी को। हां अगर ये

633
00:47:07,840 --> 00:47:11,840
ये ना कहता ना तो शायद चर्चा और कुछ भी हो सकती

634
00:47:11,840 --> 00:47:15,920
थी थोड़ी बहुत। हालांकि ग्रंथ का नाम लेता तो मैं पहले प्रमाणिकता पूछूंगा

635
00:47:15,920 --> 00:47:19,200
भाई।

636
00:47:19,200 --> 00:47:23,920
रामायण से प्रमाण देते हैं भगवान के सच्चिदानंद

637
00:47:23,920 --> 00:47:29,920
होने का।

638
00:47:40,320 --> 00:47:46,320
उसने पूछा था ना राम जी को भगवान सिद्ध कर दोगे क्या?

639
00:48:02,640 --> 00:48:06,800
ये देखो युद्ध कांड

640
00:48:06,800 --> 00:48:12,800
शब्द तत शतम

641
00:48:16,240 --> 00:48:20,160
कितना 117 हो गया ना

642
00:48:20,160 --> 00:48:24,400
117 में भगवान क्या कह रहे हैं भगवान को आप अविनाशी परम

643
00:48:24,400 --> 00:48:27,280
ब्रह्म है

644
00:48:27,280 --> 00:48:31,520
अविनाशी परम ब्रह्म 14वा श्लोक और

645
00:48:31,520 --> 00:48:36,800
पुरुषोत्तम का मतलब भी परम ब्रह्म ही है

646
00:48:36,800 --> 00:48:42,800
जगह जगह पुरुषोत्तम कहा जा रहा है

647
00:48:43,040 --> 00:48:49,040
यह रामायण से दे दिया हमने

648
00:48:50,000 --> 00:48:53,200
और

649
00:48:53,200 --> 00:48:57,200
हमने एक बुक वो पीडीएफ बनाई थी ना एक बुक जो उसी

650
00:48:57,200 --> 00:49:02,640
में बहुत सारे प्रमाण थे भगवान के सच्चिदानंद होने के

651
00:49:02,640 --> 00:49:06,480
उसी को देख लेते हैं

652
00:49:06,480 --> 00:49:10,880
मांड उपनिषद एक एक छ भगवान

653
00:49:10,880 --> 00:49:16,880
नित्य है। नित्य का मतलब जिसमें चेंजेस ना आए।

654
00:49:17,840 --> 00:49:21,840
कह रहा है कि सच्चिदानंद का अर्थ कुछ नहीं होता है। मतलब व्यक्ति यहां

655
00:49:21,840 --> 00:49:25,870
से जो जाएगा वो तो दुखी नहीं होगा। मगर जिसके पास जाएगा वो दुखी हो रहा है।

656
00:49:25,870 --> 00:49:29,920
[हंसी] वो दुखी है। अच्छा एक बात और है एक बात और

657
00:49:29,920 --> 00:49:34,320
है कि जो यहां से गया है

658
00:49:34,320 --> 00:49:38,640
जैसे वो जो उसके जैसे वो जो है ना

659
00:49:38,640 --> 00:49:43,920
ईश्वर ईश्वर दुनिया को देख रहा है कि उसके लोग फंस रहे हैं।

660
00:49:43,920 --> 00:49:49,920
ईश्वर दुनिया को देख रहा है कि उसके लोग फंस रहे हैं। ठीक है?

661
00:49:50,000 --> 00:49:54,400
तो इसका मतलब है जो यहां से बाप दादा वगैरह जाएंगे जो मुक्त हो जाएंगे रामपाल

662
00:49:54,400 --> 00:49:58,640
की शरण में आकर के वो भी तो देख रहे हैं कि उसके पोते पोती फंस रहे हैं काल

663
00:49:58,640 --> 00:50:04,640
के जाल में उनको दुख नहीं होगा भगवान को दुख होगा

664
00:50:05,360 --> 00:50:09,520
ये देख लो देख लेना इस वालों जो इस को फॉलो

665
00:50:09,520 --> 00:50:15,520
करते हो ना यह देख लो तुम्हारी थ्योरी है यह

666
00:50:24,960 --> 00:50:29,120
ये कहना क्या चाहते हैं भाई साहब शंकर राय जी आप क्या कहना

667
00:50:29,120 --> 00:50:34,000
चाहते हैं स्पष्ट करें तो

668
00:50:34,000 --> 00:50:38,160
नहीं मैं पीडीएफ बता रहा हूं वो भगवान के हमने प्रमाण दिए थे ना कि इसमें लिखा

669
00:50:38,160 --> 00:50:44,160
है कि जो है परमेश्वर

670
00:50:47,200 --> 00:50:53,200
देखो

671
00:50:54,320 --> 00:50:58,320
मैं अजन्मा अविनाशी अविनाशी होते हुए भी ईश्वर कौन है? अविनाशी

672
00:50:58,320 --> 00:51:03,200
जो स्वरूप से सत्य है। तो भगवान क्या कह रहे हैं? मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी

673
00:51:03,200 --> 00:51:07,280
अपनी प्रकृति को अधीन करके यानी कि इच्छा पूर्वक अपनी

674
00:51:07,280 --> 00:51:11,360
योग माया से प्रकट होता हूं। ठीक है? तो यह

675
00:51:11,360 --> 00:51:14,640
भी उनके

676
00:51:14,640 --> 00:51:20,320
भगवान भगवतता को सिद्ध करता है।

677
00:51:20,320 --> 00:51:24,560
ब्रह्मा जी की परम ब्रह्मता ऋग्वेद एक 115 एक ऋग्वेद

678
00:51:24,560 --> 00:51:29,600
एक 164 दो शतपद ब्राह्मण 10 पांच दो एक

679
00:51:29,600 --> 00:51:33,840
इसमें शतपद ब्राह्मण इत्यादि के कुछ कहीं-कहीं पर

680
00:51:33,840 --> 00:51:38,080
कुछ क्रमांक आगे पीछे हो सकते हैं क्योंकि इसको संशोधित

681
00:51:38,080 --> 00:51:43,360
नहीं किया गया। शतपत ब्राह्मण 14 एक दो दो यह सब में आपको

682
00:51:43,360 --> 00:51:48,720
भगवान यह ब्रह्मा जी की भगवत मिलेगी और

683
00:51:48,720 --> 00:51:54,240
चांदोगपनिषद एक छ से सात ब्रह्म सूत्र एक एक 20

684
00:51:54,240 --> 00:51:58,240
गायत्री के द्वारा इनहीं सर्व देव में आदित्य की स्तुति की

685
00:51:58,240 --> 00:52:02,640
गई है। वाल्मीकि रामायण युद्ध कांड आदित्य हृदय स्त्रोत

686
00:52:02,640 --> 00:52:07,040
स्त्रोत्र भगवान विष्णु की पारबह्मता

687
00:52:07,040 --> 00:52:13,040
ऋग्वेद एक बाय 17 से 23 भरी भरा पड़ा है भाई कहां कहां जाओगे

688
00:52:15,120 --> 00:52:19,280
मैं ही परम ब्रह्म हूं शिव ही परमात्मा है शिव पुराण शिव महापुराण

689
00:52:19,280 --> 00:52:24,480
एक पांच 12 10 36 37

690
00:52:24,480 --> 00:52:29,120
विद समिता

691
00:52:29,120 --> 00:52:33,120
आप ही परम ब्रह्म हो। वाणी का विषय शिव पुराण रुद्र

692
00:52:33,120 --> 00:52:37,120
समिता

693
00:52:37,120 --> 00:52:42,080
41वा अध्याय

694
00:52:42,080 --> 00:52:46,080
ठीक है तो ऐसे बहुत सारे प्रमाण हैं। गणेश

695
00:52:46,080 --> 00:52:50,560
जी की परम ब्रह्मता संसार का बीज स्वेच्छा

696
00:52:50,560 --> 00:52:55,440
से निर्गुण सगुण ब्रह्म ब्रह्म वैवर पुराण गणपति खंड

697
00:52:55,440 --> 00:52:59,520
13 43 से 53 पार्वती

698
00:52:59,520 --> 00:53:04,000
पुत्र गणेश साक्षात ईश्वर है कृष्ण है। देवी

699
00:53:04,000 --> 00:53:10,000
भागवत 91 147 से 48

700
00:53:13,520 --> 00:53:18,160
देवी भगवती ही ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति है। और ब्रह्म कौन है? निरुक्त से

701
00:53:18,160 --> 00:53:22,160
हां ये लो ऋग्वेद 10 125 देवी परम ब्रह्म

702
00:53:22,160 --> 00:53:26,240
से भिन्न नहीं है पितु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद स्वरूप परम

703
00:53:26,240 --> 00:53:30,400
परम तत्व ही है ऐसे बेवकूफों से हम बात करें

704
00:53:30,400 --> 00:53:34,480
सच्चिदानंद है कि नहीं अब हमसे हमारा नाम का अर्थ पूछ रहा है नाम

705
00:53:34,480 --> 00:53:38,710
का अर्थ क्या है तो मैंने बता दिया तो इतना समूह हो गया

706
00:53:38,710 --> 00:53:41,600
[हंसी]

707
00:53:41,600 --> 00:53:46,160
अगर वो और पूछता ना कि शिव का अंश मतलब शिव कौन

708
00:53:46,160 --> 00:53:50,880
कल्याण कल्याणकारी जो कल्याणकारी हो।

709
00:53:50,880 --> 00:53:54,880
इसके बाद उसने क्या बोला मालूम है कि आपने बोला ना शिव का अंश तो

710
00:53:54,880 --> 00:54:00,880
बोलता तो उससे क्या सिद्ध होता है? [हंसी]

711
00:54:01,840 --> 00:54:05,840
इससे क्या सिद्ध होता है? चलिए ठीक है। एक जन को कमेंट में एक

712
00:54:05,840 --> 00:54:10,000
जन को कमेंट में डिबेट करना है। डिबेट वाले बहुत बोल रहे हैं। उनको आप बता दीजिए

713
00:54:10,000 --> 00:54:14,240
खाली कि नंबर है। नंबर दिया गया है। अभी जब ये

714
00:54:14,240 --> 00:54:19,600
वीडियो पूरा होगा तो इसके लास्ट में नंबर मिलेगा 7408301869

715
00:54:19,600 --> 00:54:23,760
आप वहां पर WhatsApp करें। फॉर्म भरे फोटो आपको देना होगा।

716
00:54:23,760 --> 00:54:28,000
एचपी में लोग आजकल ब्लर फोटो दे देते हैं तो फिर उनसे दोबारा

717
00:54:28,000 --> 00:54:32,320
समय खराब होता है सही फोटो मांगने के लिए तो अपना फोटो भी प्रदान करें एचडी

718
00:54:32,320 --> 00:54:36,320
क्वालिटी का जिससे कि हम एक व्यवस्थित सुनिश्चित चर्चा करें और

719
00:54:36,320 --> 00:54:40,640
यहां पर आते समय कान आंख सब सारे जितने भी

720
00:54:40,640 --> 00:54:44,880
आपके सूचना आदान प्रदान वाले जो इंद्रियां केंद्र

721
00:54:44,880 --> 00:54:49,120
है जो स्त्रोत्र है स्त्रोत है वो सब आप जो है खोल कर रखें

722
00:54:49,120 --> 00:54:53,280
सतर्क रहे वही बात बोले जो सत्य हो ऐसा ऐसा

723
00:54:53,280 --> 00:54:57,360
असत्य जिसको आप सिद्ध कर सके वरना ना बोले जिस

724
00:54:57,360 --> 00:55:02,800
विषय के लिए आए वो बोले ठीक है

725
00:55:02,800 --> 00:55:06,800
का से भगवान तो बोल दिया शुरू में काव से भगवान तो बोल

726
00:55:06,800 --> 00:55:10,800
दिया शुरू में वो ये भूल गया कि भाई जिसके सामने बैठा हूं

727
00:55:10,800 --> 00:55:15,040
अब वो सिद्ध करने बोल देगा तो मैं क्या जवाब दूंगा दुखी परमात्मा

728
00:55:15,040 --> 00:55:16,880
दुखी परमात्मा मेरा

729
00:55:16,880 --> 00:55:21,200
परमात्मा नहीं वही अभाव अभाव वाला भगवान

730
00:55:21,200 --> 00:55:25,440
अभाव अभाव हां हां लगभग एक ही जैसा है। सही बोले आप

731
00:55:25,440 --> 00:55:29,520
एक ही जैसा है। खाली कहते है ना समानार्थी शब्द जैसा है। बस बस

732
00:55:29,520 --> 00:55:34,000
ये है कि वहां पे थोड़ा भगवान में अगर

733
00:55:34,000 --> 00:55:38,000
अभाव नहीं है ये भी भगवान ये थोड़ा सा स्टाइल

734
00:55:38,000 --> 00:55:42,000
अलग है। थोड़ा सा आपको थोड़ा अट्रैक्टिव लग सकता है ये वाला स्टाइल

735
00:55:42,000 --> 00:55:46,000
और जो बाबूराम का स्टाइल है। बाबूराम का स्टाइल है वो जो

736
00:55:46,000 --> 00:55:50,240
है ग्रामीण प्रवेश वालों को थोड़ा लग सकते हो उनके बहकावे में

737
00:55:50,240 --> 00:55:54,240
आने वाले दोनों ही तरफ जो लोग हैं

738
00:55:54,240 --> 00:55:58,400
भगवान में अगर अभाव नहीं है तो ये भी भगवान को इनकंप्लीट

739
00:55:58,400 --> 00:56:02,480
बनाते इनकंप्लीट एक्टिंग एक्टिंग

740
00:56:02,480 --> 00:56:05,920
से सिद्ध करना है [हंसी]

741
00:56:05,920 --> 00:56:09,920
मामा आ गए मामा आ देखिए अभी क्या है कि अब हमें

742
00:56:09,920 --> 00:56:14,000
चर्चा को आगे नहीं बढ़ाना है कुछ लोग अगर विचार प्रकट करने के उद्देश्य से

743
00:56:14,000 --> 00:56:18,560
यदि आए हैं और कोई अब

744
00:56:18,560 --> 00:56:22,560
वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं है तो जो लोग वैचारिक मतभेद

745
00:56:22,560 --> 00:56:26,640
के निमित्त चर्चा करने आए हैं वो दोबारा आए फॉर्म भर

746
00:56:26,640 --> 00:56:30,960
के और जो लोग अपने खाली विचार प्रकट

747
00:56:30,960 --> 00:56:32,160
करने आए हैं

748
00:56:32,160 --> 00:56:36,320
वो कर सकते हैं जब वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा

749
00:56:36,320 --> 00:56:41,040
नहीं चाहिए हां मनोहर जी हैं और

750
00:56:41,040 --> 00:56:47,040
दो लोग हैं अक्षय करके क्लीनिंग करके वो अपना चेहरा नहीं दिखा रहे हैं।

751
00:56:47,120 --> 00:56:52,400
जय श्री रामता जय श्री राम राम मनोज

752
00:56:52,400 --> 00:56:55,040
नमस्कार

753
00:56:55,040 --> 00:56:59,040
पहचान आपसे बात हुई थी पहले इनसे आपसे

754
00:56:59,040 --> 00:57:03,120
नहीं शिवश जी से नहीं दूसरे से आपसे आपसे बात हुई थी जी जो दूसरे वाले

755
00:57:03,120 --> 00:57:05,280
हैं

756
00:57:05,280 --> 00:57:09,440
इनका नाम आप शायद सनातन शंकर उसप

757
00:57:09,440 --> 00:57:13,600
आए थे क्या हां उनके हां राइट राइट राइट उनके साथ राइट किस

758
00:57:13,600 --> 00:57:17,760
विषय में किस विषय में बात पिछले

759
00:57:17,760 --> 00:57:22,240
बार बात हो रही थी इनसे कि जो

760
00:57:22,240 --> 00:57:26,400
जो ग्लोबल जो चर्चा हो लंबी चर्चा हो जाएगी

761
00:57:26,400 --> 00:57:30,400
शुरू नहीं करेंगे दोबारा वो लंबी चर्चा हो जाएगी एक्चुअली वैचारिक मतभेद

762
00:57:30,400 --> 00:57:35,440
के निमित है ना नहीं नहीं मतलब वो

763
00:57:35,440 --> 00:57:39,600
मैं बता देता हूं मैं श में बता देता हूं टेक्नोलॉजी और साइंस और

764
00:57:39,600 --> 00:57:44,000
गॉड दोनों के अलग-अलग हिस्से

765
00:57:44,000 --> 00:57:48,400
मतलब मेरा मतलब था कि जो साइंस जो होता है वो भी

766
00:57:48,400 --> 00:57:52,480
आपके जो पंथ की विचारधारा उसके ऊपर डिपेंड होता है। कि आप किसी

767
00:57:52,480 --> 00:57:56,720
को साइंस मानते हो किसी को साइंस नहीं मानते हैं। ये भी आपके रिलीजियस बैकग्राउंड

768
00:57:56,720 --> 00:58:01,040
के ऊपर डिपेंड करता है। पंथ के ऊपर डिपेंड करता है। नहीं नहीं हमारी

769
00:58:01,040 --> 00:58:05,280
आप आपत्ति किस चीज से है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता

770
00:58:05,280 --> 00:58:09,360
है या कर्मणा वर्ण रखा है या इस तरह की

771
00:58:09,360 --> 00:58:13,600
अगर कोई बात है तो हां तो वो अगर आपको

772
00:58:13,600 --> 00:58:17,600
आपत्ति है तो आप जो है किसी भी बात से आपत्ति है तो आप जो है

773
00:58:17,600 --> 00:58:21,680
फॉर्म भरिए और आ जाइए। ठीक है? हां वो वो वो

774
00:58:21,680 --> 00:58:25,680
थोड़ा सा अगले बार करेंगे वो तो लेकिन मैं पिछले बार यही बात हो रही थी इसी के लिए मैं

775
00:58:25,680 --> 00:58:29,920
दोबारा यहां पर हां कि पिछले बार यही बात हम डिस्कशन कर रहे थे

776
00:58:29,920 --> 00:58:34,960
फॉर्म भर के आप आ जाइए। हां जो आपका फॉर्म भर के आप आ जाइए

777
00:58:34,960 --> 00:58:38,960
मैं फॉर्म भर के आप आ जाइए। हां कैसे हैं

778
00:58:38,960 --> 00:58:43,040
राम कुमार जी? जी जी राम मनोहर है राम मनोहर

779
00:58:43,040 --> 00:58:48,880
बात कर रहे हैं भैया राम जी थोड़ा जल्दी निकल गया

780
00:58:48,880 --> 00:58:53,120
का वरदान थोड़ा ज्यादा लंबा हो जाता जी जी लंबा हो जाता

781
00:58:53,120 --> 00:58:57,120
ना नाम तो इस वजह से जो है उसको थोड़ा श में

782
00:58:57,120 --> 00:59:01,680
कर रखा है बाकी बाकी जो है

783
00:59:01,680 --> 00:59:04,800
बता दू

784
00:59:04,800 --> 00:59:09,040
रामपाल जो है वो कंफ्यूज रहेंगे एक ही परमात्मा

785
00:59:09,040 --> 00:59:13,120
एक ही परम परम तत्व पांच रूपों में स्वयं को प्रकट करता है। ब्रह्मा,

786
00:59:13,120 --> 00:59:17,280
विष्णु, महेश, भगवती और गणेश। सृष्टि की रचना एक बार नहीं

787
00:59:17,280 --> 00:59:21,280
हुई है। कई बार हो चुकी है। तो किसी

788
00:59:21,280 --> 00:59:25,360
कल्प में जो परम तत्व के रूप में विष्णु नाम

789
00:59:25,360 --> 00:59:29,360
से परम तत्व को ख्यापित करके अन्यों को उसके परिक इत्यादि के रूप में व्यक्त किया

790
00:59:29,360 --> 00:59:33,440
जाता है। और किसी कल्प में दूसरे जो अन्य

791
00:59:33,440 --> 00:59:37,440
भगवान के रूप है उनको परम तत्व के रूप

792
00:59:37,440 --> 00:59:41,440
में ख्यापित करते हुए बाकी शेष अन्य रूपों को उनके परिकर इत्यादि के

793
00:59:41,440 --> 00:59:45,840
रूप में बात की जाती है। समय-समय पर शास्त्रों में इन सबके एकत्व

794
00:59:45,840 --> 00:59:50,240
की बात भी प्राप्त होती है शास्त्रीय संदर्भ से और यह जो सिद्धांत

795
00:59:50,240 --> 00:59:54,400
है यह सिद्धांत हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिया

796
00:59:54,400 --> 00:59:58,400
गया है जिन आचार्यों ने आपको ये ग्रंथ दिए तो आप

797
00:59:58,400 --> 01:00:02,480
जिन ग्रंथों के आधार पर ये सिद्ध करने में लगे हैं कि कबीर

798
01:00:02,480 --> 01:00:06,800
भगवान है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश भगवान नहीं है वो ग्रंथ आपको

799
01:00:06,800 --> 01:00:10,960
सपने में नहीं आए अभी रामपाल सामने नहीं बैठा था नहीं तो पूछ लेता तुम्हें ग्रंथ

800
01:00:10,960 --> 01:00:15,200
कहां से मिले कबीर नदी है क्या सुना फिर ऋग्वेद

801
01:00:15,200 --> 01:00:19,200
का 192वा सूक्त जैसे कल आए थे परसों बाबा जी हमको शिव

802
01:00:19,200 --> 01:00:20,000
पार्वती ने दिए

803
01:00:20,000 --> 01:00:25,280
हैं ग्रंथ अरे मैं मैं

804
01:00:25,280 --> 01:00:29,440
शिवश भैया मैं लाइव लाइव में जुड़ा हुआ था मैं जुड़ा हुआ था सुन रहा था

805
01:00:29,440 --> 01:00:33,920
मुझे कसम से इतनी हंसी आ रही थी

806
01:00:33,920 --> 01:00:38,480
मतलब मुझे समझ में नहीं आता है कि वो कहते नहीं है कि

807
01:00:38,480 --> 01:00:43,040
हीरे की चोरी और कोयले कोयले पे थाप समझ

808
01:00:43,040 --> 01:00:49,040
वो स्थितियां हो गई है लोगों की गुरु है

809
01:00:49,200 --> 01:00:53,680
आपने एक बात आपने नोट की होगी कि हमारी जो बातें बड़ी

810
01:00:53,680 --> 01:00:57,680
साफ सुथरी रहती है कोई गोलगोल घुमाना नहीं

811
01:00:57,680 --> 01:01:01,840
सीधी बात करना है ना साफ

812
01:01:01,840 --> 01:01:05,840
बिल्कुल और ज्यादातर तो हमारे जो समर्थक हैं जो हमें

813
01:01:05,840 --> 01:01:11,840
देखते आ रहे हैं उनको पता होता है कि अब शिवश जी कौन सी बात बोलने वाले हैं

814
01:01:12,400 --> 01:01:16,480
क्या बात होने वाली है? इसका मतलब क्या है कि हमारे विरोधियों

815
01:01:16,480 --> 01:01:20,560
को भी पता है मैं कौन सी बात बोलने वाला हूं। तब भी वो बेचारे तैयारी करके नहीं

816
01:01:20,560 --> 01:01:25,120
आ पाते। तब भी नहीं आ पाते और आजकल देख नहीं रहे

817
01:01:25,120 --> 01:01:29,200
कूदे हुए हैं मैदान में कि कोई आ जाए जो है

818
01:01:29,200 --> 01:01:33,520
कि विधर्मी आ जाए एक बारी मैदान में।

819
01:01:33,520 --> 01:01:37,600
अरे भाई ऐसी थोड़ी आएंगे। जो लोग चुनौती दे रहे हैं वो लोग तो आके

820
01:01:37,600 --> 01:01:42,160
आए भी और गए भी इसी चैनल पर चार घंटे की लाइव हुई थी

821
01:01:42,160 --> 01:01:46,960
और वो चुनौती देते फिर रहे हैं

822
01:01:46,960 --> 01:01:51,200
धक्का कैसे देगा परमात्मा और धक्का देने के अंश में क्या बराबर

823
01:01:51,200 --> 01:01:55,280
शक्ति लग रही है या नहीं लग रही है यही समझ नहीं

824
01:01:55,280 --> 01:01:59,280
आ रहा था लोगों को भाई धक्का देने से ही

825
01:01:59,280 --> 01:02:03,440
ईश्वर का धक्का देने से ही ईश्वर का अवतार सिद्ध

826
01:02:03,440 --> 01:02:07,680
है और तो बात क्या करें? ईश्वर

827
01:02:07,680 --> 01:02:11,680
ने ईश्वर ने धक्का दे दिया। धक्का बन के

828
01:02:11,680 --> 01:02:16,800
दिया। धक्का बनने के रूप में ईश्वर का अवतार मानना पड़ जाएगा।

829
01:02:16,800 --> 01:02:19,680
100%

830
01:02:19,680 --> 01:02:23,040
जब

831
01:02:23,040 --> 01:02:27,040
ये बात जो हमारे गुरुदेव है उन्होंने कही हमें तो

832
01:02:27,040 --> 01:02:33,040
उन

833
01:02:33,280 --> 01:02:37,280
बन नहीं सकता। आर समाजियों का ईश्वर जगत बना सकता है

834
01:02:37,280 --> 01:02:42,240
बन नहीं सकता इस्लामिक ईश्वर जगत बना सकता है बन नहीं सकता

835
01:02:42,240 --> 01:02:46,320
और जो है बाइबल का ईश्वर जगत बना सकता है बन नहीं सकता साक्षात अवतार

836
01:02:46,320 --> 01:02:50,320
नहीं ले सकता फिर इनका ईश्वर जगत

837
01:02:50,320 --> 01:02:54,400
बनाता ही नहीं बनता भी है अब वो ये तो कह रहे हैं कि भैया धक्का लगा पर वो धक्का

838
01:02:54,400 --> 01:02:58,400
बना कौन धक्का कौन बना ईश्वर ही तो

839
01:02:58,400 --> 01:03:02,640
बना धक्का और जब वो धक्का बना तो सगुण

840
01:03:02,640 --> 01:03:08,640
हो गया एक अनस्थान निर्गुण थादी

841
01:03:12,400 --> 01:03:16,480
शिवा नारायण द्विवेदी एक ऐसा व्यक्ति है जो एक ही तरह की बात करता

842
01:03:16,480 --> 01:03:20,720
है हर लाइव में फिर भी उसका कार्ड नहीं है [हंसी]

843
01:03:20,720 --> 01:03:25,040
अरे एक ही तरह की बात ही होगी भाई

844
01:03:25,040 --> 01:03:29,680
चलिए ठीक है मैं आज घर से आदेश भी मिला था थोड़ा जल्दी आइएगा तो

845
01:03:29,680 --> 01:03:35,680
कुछ ऐसा संयोग बन गया कि वो जो

846
01:03:36,960 --> 01:03:42,560
जी आप निखिल जी आए हैं शायद हां जी निखिल जी जय श्री राम

847
01:03:42,560 --> 01:03:48,560
जय श्री राम भैया जी

848
01:03:50,320 --> 01:03:54,320
जी बोले निखिल जी एक एक

849
01:03:54,320 --> 01:03:58,320
बात मैंने नोटिस की कट रहा है लग

850
01:03:58,320 --> 01:04:02,560
रहा है नहीं नहीं कट नहीं रहा है मैंने मैंने

851
01:04:02,560 --> 01:04:06,720
एक मैंने एक बात नोटिस की जब आपने पूछा कि ग्रंथ कहां

852
01:04:06,720 --> 01:04:10,960
से प्राप्त है? तो बोल रहे हैं आपकी परंपरा से [हंसी] आपकी

853
01:04:10,960 --> 01:04:15,120
परंपरा से ग्रंथ प्राप्त है। ये मतलब कि अब इन लोगों को

854
01:04:15,120 --> 01:04:19,840
ये भी कहने में शर्म आ रही है कि हमारी कोई परंपरा नहीं है या हमारी परंपरा

855
01:04:19,840 --> 01:04:24,320
रामपाल बाबा कहीं से लाया नहीं है। आपकी परंपरा से

856
01:04:24,320 --> 01:04:28,400
अपनी परंपरा मानी है। मगर फिर बात क्या होगी मालूम है। फिर

857
01:04:28,400 --> 01:04:33,920
बात यह होगी क्या कबीर ने कभी वेद छुए?

858
01:04:33,920 --> 01:04:38,080
फिर बात ये हो जाएगी दिक्कत है ना वहां पर कबीर ने

859
01:04:38,080 --> 01:04:43,440
वेद छुए क्या टच किए क्या टच भी नहीं किए

860
01:04:43,440 --> 01:04:47,600
कबीर ने वेदों की बातें की कहीं पर भी वैदिक मंत्र

861
01:04:47,600 --> 01:04:51,760
की व्याख्या की है क्या कबीर ने

862
01:04:51,760 --> 01:04:55,920
फिर ये रामपाल दुष्ट जो

863
01:04:55,920 --> 01:05:00,560
है हमारी परंपरा के कबीर दास जी हैं रामानंद

864
01:05:00,560 --> 01:05:04,560
परंपरा कितना अच्छा व्याख्यान हमारे

865
01:05:04,560 --> 01:05:10,080
आचार्य देते हैं उनके दोहों का चाहे उनकी वाणी का परंपरागत

866
01:05:10,080 --> 01:05:14,080
ये दुष्ट जो है इसने इतना गंदा प्रचार किया

867
01:05:14,080 --> 01:05:18,160
है अभी हमारे गुरुदेव महाराज कबीर चरित्र कह रहे हैं

868
01:05:18,160 --> 01:05:22,160
कथा में और सुन के लग रहा है कि कबीर

869
01:05:22,160 --> 01:05:26,160
जी है और ये रामपाल ने कैसा प्रचार किया से ये

870
01:05:26,160 --> 01:05:30,240
प्रमाण जो है कि भगवान दुखी नहीं होते यह प्रमाण अथा भरा पड़ा है

871
01:05:30,240 --> 01:05:34,240
अथा पर भैया तुम्हारा तो किताबों विश्वास ही

872
01:05:34,240 --> 01:05:38,560
नहीं है। अच्छा दूसरी बात ये है कि संयोग

873
01:05:38,560 --> 01:05:42,800
से अभी कल उसको दिखाने के लिए इस कोिस्ट को मैंने निकाला था भागवत

874
01:05:42,800 --> 01:05:46,800
में कि भगवान सदैव आत्म संतुष्ट रहते हैं। देखो अब कल वो

875
01:05:46,800 --> 01:05:48,960
तो आया नहीं भाग गया वो उसको पता चल गया

876
01:05:48,960 --> 01:05:53,200
भाई कि यहां मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में

877
01:05:53,200 --> 01:05:57,600
बाबू का शिष्य अमोग लीला का शिष्य था वो

878
01:05:57,600 --> 01:06:01,600
चलिए ठीक है फिर फिर बात होती है। हां

879
01:06:01,600 --> 01:06:05,280
आप कुछ कह रहे थे पूरा कर लीजिए।

880
01:06:05,280 --> 01:06:10,400
मैं ये

881
01:06:10,400 --> 01:06:14,400
अभी कबीर चरित्र ही पढ़ रहे थे तो उसमें जो आचार्यों ने कबीर

882
01:06:14,400 --> 01:06:18,720
जी की वाणी का रामानंदाचार्य जी की परंपरा से कबीर जी और जो आचार्यों

883
01:06:18,720 --> 01:06:22,720
ने व्याख्यान किया है कि हां और कबीर जी का जो पर्सनल व्याख्यान है

884
01:06:22,720 --> 01:06:27,200
जो मूल है उसमें भी इसने मिलावट करके दी है।

885
01:06:27,200 --> 01:06:31,280
दोहे वगैरह यह खुद अपनी उसमें मानता है कि कबीर

886
01:06:31,280 --> 01:06:35,520
सागर भी प्रमाण नहीं है। उसमें भी मिलावट है। जब तुम मिलावट

887
01:06:35,520 --> 01:06:40,320
कह रहे हो ना किसी में इसका मतलब तुम्हें पता है कि वास्तविक धर्म क्या है।

888
01:06:40,320 --> 01:06:44,480
तो तुम जिस चीज में ढूंढ पा रहे हो कि यह चीज सही है ये चीज गलत है। वो

889
01:06:44,480 --> 01:06:48,720
चीज तुम इसलिए नहीं ढूंढ इसलिए वो वो चीज तुम्हारे

890
01:06:48,720 --> 01:06:52,960
जीवन में धर्म का निर्णय करने वाली चीज नहीं है। धर्म का निर्णय तो तुम कर चुके हो पहले ही।

891
01:06:52,960 --> 01:06:56,960
वो तो व्यर्थ है। उसका कोई आवश्यकता ही नहीं है। धर्म का निर्णय तो तुम कर

892
01:06:56,960 --> 01:07:02,960
चुके हो पहले ही। तभी तो तुम उसमें चेक कर पा रहे हो क्या मिलावट है क्या मिलावट नहीं है

893
01:07:03,040 --> 01:07:04,000
स्वतंत्र रूप से

894
01:07:04,000 --> 01:07:08,000
आप धर्म का निर्णय कर पा रहे हैं जब किसी ग्रंथ के बाहर रह के

895
01:07:08,000 --> 01:07:12,080
इसका मतलब ग्रंथ आपके धर्म का निर्णय नहीं कर रहा है आपको मालूम

896
01:07:12,080 --> 01:07:17,120
है ऑलरेडी धर्म क्या है तो वो तो कागज का टुकड़ा है कूड़ा है वो तो

897
01:07:17,120 --> 01:07:23,120
अच्छा चलिए फिर फिर बात होती है हां जय श्री राम

898
01:07:23,360 --> 01:07:27,360
हर हर महादेव हर महादेव जय श्री राम

899
01:07:27,360 --> 01:07:31,920
राम मनोहर जी

900
01:07:31,920 --> 01:07:37,920
जय श्री राम

901
01:07:43,670 --> 01:07:47,670
[संगीत]
