1
00:00:03,600 --> 00:00:07,760
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल

2
00:00:07,760 --> 00:00:12,000
पूर्वक होंगे और विगत कुछ दिनों से आप देख रहे होंगे हमने

3
00:00:12,000 --> 00:00:16,240
ब्रह्मा कुमारीज को लेकर के बहुत सारे जो वक्तव्य

4
00:00:16,240 --> 00:00:20,880
है वो भी प्रस्तुत किए और ब्रह्मा कुमारी से जुड़े हुए कई

5
00:00:20,880 --> 00:00:25,120
उनकी यहां की जो दीदी कही जाती है उनके साथ कई

6
00:00:25,120 --> 00:00:29,360
सारी चर्चाएं भी आपने देखी होंगी। तो बस इसी क्रम

7
00:00:29,360 --> 00:00:34,480
में आज हमारे बीच में

8
00:00:34,480 --> 00:00:38,720
एक संत जी हैं वो आए

9
00:00:38,720 --> 00:00:42,880
हुए हैं जो संभवत ब्रह्मा कुमारी को

10
00:00:42,880 --> 00:00:46,960
फॉलो नहीं करते बट उन्हें ब्रह्माकुमारी का को समर्थन

11
00:00:46,960 --> 00:00:51,040
जरूर देते हैं। तो वह ब्रह्माकुमारी का जो पक्ष है उनका कहना

12
00:00:51,040 --> 00:00:55,280
है कि वह पक्ष सामने आना चाहिए। तो उसी पक्ष को रखने के लिए वह यहां उपस्थित

13
00:00:55,280 --> 00:01:01,280
है हमारे बीच में। मैं उनको ऊपर ले लेता हूं।

14
00:01:06,960 --> 00:01:12,960
जी जय श्री राम कमल किशोर जी

15
00:01:13,040 --> 00:01:18,240
जय श्री राम सभी दर्शकों को जय श्री राम जय प्रभु राम।

16
00:01:18,240 --> 00:01:22,240
जी तो सबसे पहले छोर जी थोड़ा

17
00:01:22,240 --> 00:01:26,320
सा अपना परिचय आप दर्शकों को बता दें कि आप कैसे

18
00:01:26,320 --> 00:01:32,320
क्या थोड़ा सा अपने बारे में एक संक्षिप्त

19
00:01:32,560 --> 00:01:37,920
सहारनपुर में दिव्य शक्ति अखाड़े के हम आचार्य महामंडलेश्वर हैं

20
00:01:37,920 --> 00:01:42,320
और 157 बार के अरक दादा हैं।

21
00:01:42,320 --> 00:01:46,720
समाज का कार्य करते हैं। अपने धर्म के लिए जीते हैं।

22
00:01:46,720 --> 00:01:50,720
समाज के लिए जीते हैं और साधु संतों के बीच

23
00:01:50,720 --> 00:01:54,720
में रहकर आध्यात्मिक चर्चा किया करते हैं। आध्यात्म का ज्ञान बांटते

24
00:01:54,720 --> 00:02:00,720
हैं। प्रेम की भाषा जानते हैं।

25
00:02:00,880 --> 00:02:05,040
बहुत सुंदर बहुत सुंदर। तो अ

26
00:02:05,040 --> 00:02:05,540
महाराज

27
00:02:05,440 --> 00:02:09,600
जी ये आपने कहा कि आप महामंडलेश्वर हैं और

28
00:02:09,600 --> 00:02:13,600
आज दिव्य शक्ति अखाड़े से हैं। तो आपकी गुरु परंपरा

29
00:02:13,600 --> 00:02:17,680
आपके गुरु कौन है?

30
00:02:17,680 --> 00:02:22,000
हमारे गुरु परमपिता परमात्मा शिव

31
00:02:22,000 --> 00:02:26,160
और माता पार्वती ही हमारे गुरु हैं। क्योंकि लौकिक में हमें

32
00:02:26,160 --> 00:02:30,400
कोई ऐसा गुरु नहीं मिला जिसे हम समझ

33
00:02:30,400 --> 00:02:35,440
सके या वो हमें समझा सके ज्ञान की भाषा दे सके।

34
00:02:35,440 --> 00:02:40,000
अच्छा तो महाराज जी आप

35
00:02:40,000 --> 00:02:44,000
वैदिक हैं। वेदों को मानने वाले मतलब वेद को प्रमाण मानते हैं। वेद

36
00:02:44,000 --> 00:02:48,160
पर वेद को लेकर के मतलब मिलाजुला सा मामला है।

37
00:02:48,160 --> 00:02:52,240
जैसे आपने कहा ना धर्म और आप चोले से भी आप सनातनी दिख रहे हैं। तो क्या हम

38
00:02:52,240 --> 00:02:56,720
ये मान सकते हैं कि आप वेदों को प्रमाण मानते हैं?

39
00:02:56,720 --> 00:03:01,920
वास्तव में वेद ही प्रमाण है। वेद जोवेद,

40
00:03:01,920 --> 00:03:06,960
ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद ये चार इसमें प्रकट है फिर उनके

41
00:03:06,960 --> 00:03:08,560
ब्राह्मण ग्रंथ है उपनिषद

42
00:03:08,560 --> 00:03:12,800
है जी जी तो इनको आप प्रमाण

43
00:03:12,800 --> 00:03:17,840
हुआ करते थे सुनिए पहले तीन ही वेद हुआ करते थे इसीलिए

44
00:03:17,840 --> 00:03:21,840
भगवान ने गीता में ये बात कही है कि वेद त्रई के नाम

45
00:03:21,840 --> 00:03:25,920
से उसे कहा है पहले तीन ही वेद हुआ करते थे बाद में सामवेद जोड़ा

46
00:03:25,920 --> 00:03:30,240
गया है और वेदों को बिल्कुल मानना

47
00:03:30,240 --> 00:03:34,320
चाहिए क्योंकि वेद शब्द विध धातु से आया है जिसका अर्थ

48
00:03:34,320 --> 00:03:38,560
होता है ज्ञान। ज्ञान जो प्रकाश से प्रकाश की

49
00:03:38,560 --> 00:03:39,840
ओर ले जाता है। जी

50
00:03:39,840 --> 00:03:43,920
जी जी मैं असल में ये जानना चाह रहा था कि जैसे आपने कहा कि हम वेद

51
00:03:43,920 --> 00:03:48,240
को परम प्रमाण मानते हैं। तो वेद के अनुसार जो

52
00:03:48,240 --> 00:03:52,240
तात्विक व्याख्या है परमेश्वर की वह आपके पास शिव

53
00:03:52,240 --> 00:03:56,240
जी ने आपको कहा है कि बुद्धि है तो वेद के किस भाष्य में

54
00:03:56,240 --> 00:04:00,320
उपनिषद के किस भाष्य के रूप में वो आपको प्राप्त है या आपने

55
00:04:00,320 --> 00:04:04,480
अपनी कोई छापी है जो शिवजी ने आपको पढ़ाई है वो एक ग्रंथ के

56
00:04:04,480 --> 00:04:08,560
रूप जैसे ब्रह्मसूत्र पर भाष्य किया है हमारे आचार्यों ने तो आप

57
00:04:08,560 --> 00:04:13,600
किसके भाष्य पर आधारित है या आप भाष

58
00:04:13,600 --> 00:04:17,600
हम किसी के भाष्य पर आधारित नहीं है। हम सिर्फ

59
00:04:17,600 --> 00:04:22,160
एक बात जानते हैं। सिर्फ एक बात

60
00:04:22,160 --> 00:04:23,520
मानवता सबसे बड़ा

61
00:04:23,520 --> 00:04:28,080
धर्म है। मानव के लिए ये सारे वेद बने हैं। उपनिषद

62
00:04:28,080 --> 00:04:32,320
बने हैं। पुराण बने हैं। मानव की भलाई के लिए बने

63
00:04:32,320 --> 00:04:36,320
हैं। और अगर इस पृथ्वी पर मान लीजिए कि मानव ही

64
00:04:36,320 --> 00:04:40,480
ना रहा तो यह सारे मंदिर, मस्जिद,

65
00:04:40,480 --> 00:04:44,560
गुरुद्वारे या जितने भी धर्म बने हुए हैं जो वास्तव में धर्म नहीं है

66
00:04:44,560 --> 00:04:48,960
बने हुए हैं। यहां पर या तो कीड़े मकोड़े ठहर जाएंगे या मकड़ियां

67
00:04:48,960 --> 00:04:53,200
जाला लगा देंगी या ये जंगल बन जाएंगे। जी

68
00:04:53,200 --> 00:04:57,360
मैं समझ रहा हूं आपकी बात। मैं उसप आऊंगा। अभी असल में एक्चुअली

69
00:04:57,360 --> 00:04:59,120
मैं ये पूछना चाह रहा हूं।

70
00:04:59,120 --> 00:05:03,200
आपने कहा कि आपके लिए वेद ही परम प्रमाण है। तो वेदों

71
00:05:03,200 --> 00:05:07,520
के कई प्रकार के अर्थ हमें प्राप्त हैं। अगर वेदों का निचोड़

72
00:05:07,520 --> 00:05:11,520
देख ले ईश्वर तत्व के विषय में तो उपनिषद और फिर उपनिषद के बाद ब्रह्मसूत्र

73
00:05:11,520 --> 00:05:15,680
के रूप में हमें प्राप्त है। तो क्या आप ब्रह्म सूत्र की किसी

74
00:05:15,680 --> 00:05:19,760
व्याख्या पर विश्वास रखते हैं या अपनी स्वतंत्र व्याख्या है ईश्वर तत्व के

75
00:05:19,760 --> 00:05:20,260
विषय

76
00:05:20,000 --> 00:05:24,480
में? ईश्वर तत्व के विषय में व्याख्याएं कई है। त्रत है, द्वैत है, अद्वैत है।

77
00:05:24,480 --> 00:05:28,560
है ना? शुद्धत है, विशिष्टा द्वैत है। तो आप ईश्वर तत्व के विषय में कौन

78
00:05:28,560 --> 00:05:32,720
सी व्याख्या को प्रमाण मानते हैं कि यही व्याख्या एक्यूरेट है। ये

79
00:05:32,720 --> 00:05:36,800
कह रहा हूं। ये सब कुछ अपने

80
00:05:36,800 --> 00:05:40,800
सोचने पे निर्भर करता है। अब देखिए गिलास

81
00:05:40,800 --> 00:05:45,280
मैं पूछ रहा हूं। मैंने पूछा आप किसको मानते हैं?

82
00:05:45,280 --> 00:05:49,520
मैं सभी को मानता हूं। सभी को मानता हूं और उसी का प्रमाण देने

83
00:05:49,520 --> 00:05:53,760
जा रहा हूं आपको। एक गिलास है। उसमें आधा गिलास पानी है।

84
00:05:53,760 --> 00:05:57,760
आप पहले सुन ले। आधा गिलास पानी है। एक व्यक्ति देखकर कहता

85
00:05:57,760 --> 00:06:02,080
है कि उसमें आधा गिलास पानी है। दूसरा कहता है आधा गिलास खाली है। तीसरी व्याख्या

86
00:06:02,080 --> 00:06:06,080
मैं कर देता हूं कि गिलास पूरा भरा हुआ है। आधा हवा से भरा

87
00:06:06,080 --> 00:06:08,480
हुआ है। आधा पानी से भरा हुआ है।

88
00:06:08,480 --> 00:06:12,480
देख आदमी किस तरफ से रहा है। किस दृष्टिकोण

89
00:06:12,480 --> 00:06:16,640
से देख रहा है। वो उस हिसाब से अपनी व्याख्या गण लेता है।

90
00:06:16,640 --> 00:06:17,140
जिस

91
00:06:16,960 --> 00:06:21,200
तरह से श्रीमद् भागवत गीता पे कम

92
00:06:21,200 --> 00:06:25,520
से कम भी 800 टिप्पणियां यानी टीकाएं जो है प्रकाशित हो चुकी है।

93
00:06:25,520 --> 00:06:29,760
हर व्यक्ति ने अपनी व्याख्या की है। अपनी अपनी समझ से व्याख्या की है।

94
00:06:29,760 --> 00:06:33,760
तो इसलिए उन व्याख्याओं को ना पढ़ के वास्तविकता क्या है

95
00:06:33,760 --> 00:06:37,840
जो मेरी समझ में आई है? मैं तो उसे जानता हूं। तो मैं वही कह

96
00:06:37,840 --> 00:06:41,920
रहा हूं कि आपके पास अपनी वास्तविकता वाला कोई भाष्य है ब्रह्म सूत्र पर या

97
00:06:41,920 --> 00:06:46,720
वह भी ब्रह्म सूत्र भी आप उसी में गिनते हैं कि वो अलग-अलग पर्सेक्टिव

98
00:06:46,720 --> 00:06:50,720
ओनली है। ब्रह्म सूत्र पर आपका अपना स्वतंत्र भाष्य

99
00:06:50,720 --> 00:06:54,800
कोई या फिर आप ब्रह्मत्र मेरा अपना कोई भाष्य

100
00:06:54,800 --> 00:06:58,800
नहीं है। मतलब जो अनुभव होता है जो

101
00:06:58,800 --> 00:07:02,880
आप मुझे अनुभव होता है भगवान शिव से जो मिला

102
00:07:02,880 --> 00:07:07,120
मुझे क्योंकि भगवान शिव वास्तविक गीता के भी प्रणेता वही है जितने

103
00:07:07,120 --> 00:07:11,600
भी ग्रंथ है हमारे वो किसके आपस में चर्चा किसकी है

104
00:07:11,600 --> 00:07:15,600
भगवान शिव माता पार्वती से बात करते हैं माता पार्वती भगवान शिव से बात

105
00:07:15,600 --> 00:07:17,840
करती है एक प्रश्न करता है दूसरा उत्तर देता

106
00:07:17,840 --> 00:07:22,080
है मैं वही पूछ रहा हूं कि भगवान शिव से मिलने वाला

107
00:07:22,080 --> 00:07:26,320
अलग से ईश्वर तत्व के विषय में कोई ग्रंथ है आपके पास या आप

108
00:07:26,320 --> 00:07:31,440
ग्रंथ के रूप में इनहीं पर निर्भर करते हैं। वेद उपनिषद और गीता गीता के ऊपर

109
00:07:31,440 --> 00:07:36,080
गीता सभी को पढ़ता हूं सभी को पढ़ता हूं। सभी को

110
00:07:36,080 --> 00:07:40,080
भाई साहब मेरा प्रश्न निर्भरता मेरा प्रश्न निर्भर करते हैं

111
00:07:40,080 --> 00:07:44,240
या अपने पास आपका स्वतंत्र कोई ग्रंथ है? मेरी स्वतंत्र

112
00:07:44,240 --> 00:07:48,400
सोच है। कोई ग्रंथ नहीं है मेरा अपना। मेरी स्वतंत्र सोच है।

113
00:07:48,400 --> 00:07:52,640
अच्छा तो आपकी एक स्वतंत्र सोच है जो आपको शिव पार्वती जी से मिली है।

114
00:07:52,640 --> 00:07:57,040
और वो स्वतंत्र सोच जो है वेद उपनिषद और गीता

115
00:07:57,040 --> 00:08:01,520
से मेल खाती है इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं कि मैं वैदिक भी हूं।

116
00:08:01,520 --> 00:08:05,680
हां। उसी का सार है ये जो मेरे पास आया है। उसी का सार मेरे पास है।

117
00:08:05,680 --> 00:08:09,920
जी। अभी मैं करेक्ट। अभी करेक्ट हो गया। अब बात ये आती है कि

118
00:08:09,920 --> 00:08:14,080
आपने कैसे पता किया कि आपको जो दिव्य तरीके से जो ज्ञान-विज्ञान

119
00:08:14,080 --> 00:08:18,400
मिला है वो वेदों का ही अर्थ है

120
00:08:18,400 --> 00:08:22,720
ये कैसे पता चला? देखिए वेद कहते हैं कि एक ब्रह्म

121
00:08:22,720 --> 00:08:26,080
है द्वितीय कोई तो है नहीं दूसरा कोई है नहीं।

122
00:08:26,080 --> 00:08:30,080
अब एक अगर एक है तो उसके टुकड़े कैसे किए जा सकते हैं?

123
00:08:30,080 --> 00:08:34,320
नहीं कर सकते ना। एक के टुकड़े करोगे तो दो हो जाएंगे। जब एक है तो उसका कोई टुकड़ा

124
00:08:34,320 --> 00:08:40,320
नहीं हो सकता। ब्रह्म एक है। वही शिवंद है।

125
00:08:40,480 --> 00:08:44,800
वही सबसे बड़ी शक्ति है। अब

126
00:08:44,800 --> 00:08:48,960
उस ब्रह्म को हमने जाना। भगवान

127
00:08:48,960 --> 00:08:53,200
शिव ने हमें ज्ञान समझ नहीं आप मेरी बात समझ लीजिए। मेरा क्वेश्चन

128
00:08:53,200 --> 00:08:53,700
ये

129
00:08:53,520 --> 00:08:57,680
है कि आपको दिव्य तरीके से कुछ ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता

130
00:08:57,680 --> 00:09:01,840
है। आपने कैसे कंफर्म किया कि ये जो ज्ञान विज्ञान

131
00:09:01,840 --> 00:09:06,000
मेरे पास आया है ये वैदिक है।

132
00:09:06,000 --> 00:09:10,080
प्रैक्टिकली वो क्या किया था? वैदिक क्या होता है? भाई साहब

133
00:09:10,080 --> 00:09:14,320
वैदिक क्या होता है? वैदिक वही तो होता है ना जो वेदों से आया हुआ हो।

134
00:09:14,320 --> 00:09:18,480
ठीक है ना? वेद क्या है? कोई

135
00:09:18,480 --> 00:09:21,200
बुक लेते

136
00:09:21,200 --> 00:09:25,680
हैं। यानी कि वेद नाम यानी

137
00:09:25,680 --> 00:09:30,080
कि वेद नाम से छपी हुई किसी ग्रंथ को आपने लिया और उसमें

138
00:09:30,080 --> 00:09:34,080
देख के वेरीफाई किया कि मेरे स्वप्न में आया हुआ या मेरे को दिव्य तरीके

139
00:09:34,080 --> 00:09:38,080
से जो प्राप्त हुआ है शिव पार्वती के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो वैदिक

140
00:09:38,080 --> 00:09:42,080
है। ठीक है ना? हां मैंने स्वयं में अनुभव किया। अनुभव

141
00:09:42,080 --> 00:09:46,640
किया उसे। ठीक। मैं आपको एक छोटी सी उदाहरण दूं इस बारे में। मैं

142
00:09:46,640 --> 00:09:50,640
एक्चुअली मेरा प्रश्न मेरा प्रश्न किसी और दिशा में है।

143
00:09:50,640 --> 00:09:55,360
दिशा मैं अभी आपको बता रहा हूं। जैसे आपने कहा कि मैंने

144
00:09:55,360 --> 00:09:59,360
वेद से वेरीफाई किया कि मेरे पास जो ज्ञान

145
00:09:59,360 --> 00:10:03,360
आया है दिव्य दिव्य योजना के द्वारा वो वैदिक

146
00:10:03,360 --> 00:10:07,360
ही है। तो आपने ये जो वेरीफाई किया है ये किसी पुस्तक से किया है।

147
00:10:07,360 --> 00:10:08,560
है ना?

148
00:10:08,560 --> 00:10:12,640
पुस्तक से किया ना? नहीं पुस्तकों से नहीं किया है।

149
00:10:12,640 --> 00:10:17,920
पुस्तकों का ज्ञान तो सिर्फ वैसा ही होगा जैसे एक कोई किताब पढ़ ले 200

150
00:10:17,920 --> 00:10:21,920
अभी आपने बताया था अभी आपने बताया था ना वेद जो अथर्ववेद ऋग्वेद

151
00:10:21,920 --> 00:10:26,160
सामवेद बाद में जोड़ा अथर्ववेद और था तो ये जो आपने वेरीफाई

152
00:10:26,160 --> 00:10:30,240
किया ये आपने कहीं से छपी हुई पुस्तक ला के किया या अपने से आपने

153
00:10:30,240 --> 00:10:34,480
वेद अपने रट रखे हैं और आपने उसे वेरीफाई कर लिया कैसे

154
00:10:34,480 --> 00:10:38,880
मैं वही तो आपसे कहना चाह रहा हूं जी वेद एक प्रामाणिक

155
00:10:38,880 --> 00:10:42,880
पुस्तक है ठीक है उसमें जो लिखा है वो कहा जाता है कि

156
00:10:42,880 --> 00:10:47,440
वेद प्रामाणिक है। ठीक है? जब तक व्यक्ति के जीवन में वो नहीं उतरते

157
00:10:47,440 --> 00:10:51,600
तो वह एक खाली पुस्तक रह जाएंगे या नहीं रह जाएंगे? भाई साहब मैं जीवन में उतरने

158
00:10:51,600 --> 00:10:55,680
की बात बाद में करूंगा। मैं अभी पूछ रहा हूं। आपने वेरीफाई कैसे किया था? प्रैक्टिकल क्या

159
00:10:55,680 --> 00:10:59,680
था उसका कि मैंने वेरीफाई तो अनुभव से होगा ना। आप गूंगे से पूछ रहे हो कि

160
00:10:59,680 --> 00:11:03,760
गुड का स्वाद कैसा है? अनुभव को अनुभव को क्या शब्दों में बयान करूंगा मैं? नहीं

161
00:11:03,760 --> 00:11:07,920
कर सकता। ठीक है। ठीक है मैं अभी बता रहा हूं। आपने कहा कि अनुभव से वेरीफाई किया। मतलब

162
00:11:07,920 --> 00:11:12,240
आप ये कंफर्म नहीं कह सकते कि मेरे को जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो

163
00:11:12,240 --> 00:11:16,320
वेद नाम से छपी हुई जो पुस्तकें हैं ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद

164
00:11:16,320 --> 00:11:20,320
उसमें भी लिखा है। ये आप कंफर्म नहीं कह सकते। आपने अनुभव कर लिया। क्यों

165
00:11:20,320 --> 00:11:24,320
नहीं कह सकते? क्यों नहीं कह सकते? वेदों

166
00:11:24,320 --> 00:11:28,320
को पहले वेदों को पहले पढ़ा ना हमने। पढ़ने के बाद

167
00:11:28,320 --> 00:11:32,800
उनकी अनुभूति अनुभूति अनुभूति हमारे

168
00:11:32,800 --> 00:11:36,880
इसका मतलब वेद प्रमाणिक है या नहीं है यानी कि

169
00:11:36,880 --> 00:11:40,880
वेद नाम से छपी हुई पुस्तक को आपने पढ़ा ना हम कहते हैं

170
00:11:40,880 --> 00:11:45,200
वो प्रमाणिक है बिल्कुल है लेकिन पढ़ने के बाद

171
00:11:45,200 --> 00:11:49,360
पढ़ने के बाद उस पर चिंतन भी आवश्यक है मनन करना भी आवश्यक है

172
00:11:49,360 --> 00:11:53,520
मैंने भाई साहब पूछा आपने पढ़ा ना उसको वेद नाम से छपी हुई पुस्तक को

173
00:11:53,520 --> 00:11:57,600
पढ़ा ना पढ़ा तो वो कौन सी वो कौन सी पब्लिक एप्लीकेशन से

174
00:11:57,600 --> 00:12:01,680
थी वो कौन से थोड़ा सा उसका विवरण बता दीजिए कौन

175
00:12:01,680 --> 00:12:06,080
सी पुस्तक पढ़ी थी आपने वेदनाथ से छपी हुई हां हमने गायत्री

176
00:12:06,080 --> 00:12:10,960
परिवार वालों की जो पुस्तक है आदरणीय पंडित श्री राम शर्मा जी वाले

177
00:12:10,960 --> 00:12:15,040
हां नहीं पंडित श्री राम शर्मा जी ने जो लिखे हैं अच्छा

178
00:12:15,040 --> 00:12:19,760
अच्छा शर्मा आचार्य अच्छा अच्छा अच्छा गीत गायत्री परिवार

179
00:12:19,760 --> 00:12:25,760
जो हरिद्वार गायत्री परिवार वाले हैं उनकी पुस्तकें हमने मंगाई पढ़ी

180
00:12:25,840 --> 00:12:30,000
उन्होंने तो चारों का भाष्य नहीं किया है मेरे हिसाब से

181
00:12:30,000 --> 00:12:34,960
उन्होंने उन्होंने खाली उसका ट्रांसलेशन दिया है हां

182
00:12:34,960 --> 00:12:39,200
तो उसी को ट्रांसलेशन किया है संस्कृत से उसी को हमने पढ़ा और पढ़ने

183
00:12:39,200 --> 00:12:39,700
के

184
00:12:39,360 --> 00:12:43,680
बाद अपने जीवन में ढाला एक सूत्र ढाल लिया तो बात खत्म हो जाती है जी

185
00:12:43,680 --> 00:12:48,160
हां ठीक अब अब सवाल ये आता है कि आपको कैसे विश्वास

186
00:12:48,160 --> 00:12:52,240
है क्योंकि श्री राम शर्मा जो आचार्य हैं वो आपके गुरु तो

187
00:12:52,240 --> 00:12:56,240
है नहीं क्योंकि आपने कहा गुरु तो मेरे शिव और पार्वती है नहीं

188
00:12:56,240 --> 00:13:00,560
है ना? हां। तो जब वो आपके गुरु नहीं है तो आपको कैसे पता

189
00:13:00,560 --> 00:13:04,800
कि जो अरबों साल पहले जो वेद मंत्र आए हैं वही वेद

190
00:13:04,800 --> 00:13:08,960
मंत्र श्री राम शर्मा आचार्य ने उनका अर्थ किया है और किताबें छापी है। ये कैसे

191
00:13:08,960 --> 00:13:13,280
कन्फर्म किया आपने? हमने अर्थ देखा अर्थ

192
00:13:13,280 --> 00:13:17,680
देखा श्लोक पढ़ा। उस अर्थ को अपने भीतर अनुभव किया

193
00:13:17,680 --> 00:13:23,200
मनन किया। तब हमें लगा कि ये बिल्कुल ठीक है। नहीं नहीं भाई साहब।

194
00:13:23,200 --> 00:13:27,600
प्रमाण आपने अनुभव जो किया है वो तो एक अलग बात हो गई। मैं ये कह रहा हूं

195
00:13:27,600 --> 00:13:31,680
कि वेद के नाम पर जो मंत्र उसमें मंत्र होते हैं श्लोक नहीं होते हैं वेद

196
00:13:31,680 --> 00:13:35,680
में। तो वेद के नाम पर जो मंत्र आप कह रहे हैं जिनको आपने पढ़ा और फिर

197
00:13:35,680 --> 00:13:39,760
मनन किया। आप ये कैसे कंफर्म किया आपने कि

198
00:13:39,760 --> 00:13:43,760
ये वही मंत्र है जिन्हें ईश्वर ने दिया था सृष्टि के प्रारंभ

199
00:13:43,760 --> 00:13:46,640
में।

200
00:13:46,640 --> 00:13:51,280
ये वेदों में भी लिखा है कि वेद ईश्वर की वाणी है।

201
00:13:51,280 --> 00:13:55,280
जैसे मुझे यह विश्वास करना पड़ता है। सुन लीजिए जैसे यह मुझे विश्वास

202
00:13:55,280 --> 00:13:59,360
करना पड़ता है। मेरी मां मुझे बताती है कि तुम्हारा पिता है तो मुझे मानना पड़ता है ना कि

203
00:13:59,360 --> 00:14:03,360
मेरा पिता है। इसी तरह से जब आपकी मां को

204
00:14:03,360 --> 00:14:07,360
हम गुरु कहते हैं ना आपका गुरु तो है नहीं। श्री राम शर्मा आचार्य

205
00:14:07,360 --> 00:14:11,520
आपके गुरु तो वो जो लेकिन उन्होंने

206
00:14:11,520 --> 00:14:15,680
लेकिन उन्होंने वेदों को संकलित तो किया है। अगर कोई संकलन

207
00:14:15,680 --> 00:14:19,680
करता है तो कोई गलत काम तो नहीं करता ना वो। नहीं तो संकलन करने के नाम पर

208
00:14:19,680 --> 00:14:23,760
तो कोई भ्रष्ट धूत व्यक्ति भी संकलित कर सकता है। हो सकता है कि वेद के मंत्र कुछ

209
00:14:23,760 --> 00:14:27,760
और हो। वो आपको झूठ बोल दे। आपको देखिए ऐसा है। मेरा कहने

210
00:14:27,760 --> 00:14:32,160
का तात्पर्य यह है कि जिससे हम वेद मंत्र ले रहे हैं उसके प्रति हमको परमान्य

211
00:14:32,160 --> 00:14:36,400
बुद्धि रखनी पड़ेगी। यह हमारा गुरु है। अगर नहीं रखेंगे

212
00:14:36,400 --> 00:14:41,840
तो फिर हमें उसके वेद मंत्र पर विश्वास कैसे?

213
00:14:41,840 --> 00:14:46,400
उन्होंने वेदों का संकलन किया। हमने उन वेदों को पढ़ा।

214
00:14:46,400 --> 00:14:50,720
हमने अपने जीवन में उतार के देखा। हमने अपने जीवन में उतार के देखा

215
00:14:50,720 --> 00:14:54,720
बिल्कुल सही है। तो हमारे लिए सही है। प्रमाणिकता सिद्ध हो गई।

216
00:14:54,720 --> 00:14:59,040
प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए क्या किसी सर्टिफिकेट थोड़ी लेना पड़ेगा?

217
00:14:59,040 --> 00:15:03,040
जैसे जैसे मान लीजिए मान लीजिए कि मेरे को जो है

218
00:15:03,040 --> 00:15:07,280
किसी व्यक्ति को एहसास हो कि भाई मुझे जो है चोरी करने में खुशी

219
00:15:07,280 --> 00:15:11,520
मिल रही है। ठीक है? अब किसी व्यक्ति ने कहा हो अपनी

220
00:15:11,520 --> 00:15:15,520
किताब एक छापी हो और उसमें लिखा हो कि भगवान ने किताब छापी है।

221
00:15:15,520 --> 00:15:19,680
इसमें लिखा है चोरी करने से खुशी मिलती है और मैंने उसको पढ़ लिया और मुझे अनुभव

222
00:15:19,680 --> 00:15:23,840
भी हो रहा है चोरी करने से खुशी मिल रही है। तो मैं मान लूं और सबसे

223
00:15:23,840 --> 00:15:27,840
बड़ी बात सबसे बड़ी बात तो ये है कि राम शर्मा

224
00:15:27,840 --> 00:15:32,000
आचार्य जी आपके गुरु नहीं है। यानी कि राम शर्मा आचार्य जी झूठ भी बोल सकते हैं, गलत

225
00:15:32,000 --> 00:15:34,960
भी लिख सकते हैं।

226
00:15:34,960 --> 00:15:39,040
वो गलत लिख सकते हैं। चलिए मान लेता हूं। आपकी बात ऊपर रख देता हूं। लेकिन सवाल

227
00:15:39,040 --> 00:15:43,120
ये उठता है कि उन्होंने जो वेदों के मंत्र लिखे हैं

228
00:15:43,120 --> 00:15:47,120
वो तो गलत नहीं हो सकते ना। वो तो गलत नहीं हो सकते। मैं वही कह

229
00:15:47,120 --> 00:15:51,520
रहा हूं। ये कैसे तय किया आपने? वो गलत नहीं हो सकते। तय किया। बार-बार

230
00:15:51,520 --> 00:15:55,520
आपसे कह रहा हूं कि मैंने अपने अनुभव में उतारा और उनसे तय कर लिया।

231
00:15:55,520 --> 00:15:57,600
मुझे जो मेरे

232
00:15:57,600 --> 00:16:02,320
एक मंत्र का एक मंत्र का वो बताइए। फॉर एग्जांपल कैसे आपने तय किया?

233
00:16:02,320 --> 00:16:07,200
मैं आपको बता देता हूं। साधारण सी बात है। साधारण सी बात है।

234
00:16:07,200 --> 00:16:11,200
जैसे वेदों का सार आ जाता है उपनिषदों

235
00:16:11,200 --> 00:16:15,280
में फिर आ जाता है अपने पुराण अभी आप वेद अभी आप

236
00:16:15,280 --> 00:16:19,280
वेद से ही बताइए ना कोई आप सुन तो ले पहले सुनेंगे तभी तो

237
00:16:19,280 --> 00:16:24,240
बताऊंगा आपको जी

238
00:16:24,240 --> 00:16:28,800
न बंधो अस्ति न मोक्ष अस्त ब्रह्म वास्त निरामय नमस्

239
00:16:28,800 --> 00:16:33,280
सचित कारते ठीक एक तो ये क्योंकि

240
00:16:33,280 --> 00:16:37,920
सचित के कहां का है ये पहले

241
00:16:37,920 --> 00:16:42,240
सुनने की थोड़ी सी आदत डालेंगे तो बड़ा अच्छा होगा। वरना क्या मैं ना आपको समझाऊं

242
00:16:42,240 --> 00:16:47,840
वरना क्या हमारी जो बातचीत हो रही है ना आपस में वो खिचड़ी बन के रह जाएगी।

243
00:16:47,840 --> 00:16:51,920
बिल्कुल बिल्कुल एक्चुअली मेरे पास ग्रंथ रखे हैं तो मैं खोलता उसको आप

244
00:16:51,920 --> 00:16:57,440
जो बता रहे है इसलिए पूछा था मैंने। हां हां

245
00:16:57,440 --> 00:17:01,840
अब ना बंधन है ना मोक्ष। सभी

246
00:17:01,840 --> 00:17:06,080
का सार आ गया गीता में। ठीक है?

247
00:17:06,080 --> 00:17:10,160
मानव को ना इधर का रहना

248
00:17:10,160 --> 00:17:14,240
चाहिए ना उधर का रहना चाहिए। बीच में आ जाना चाहिए। यही

249
00:17:14,240 --> 00:17:18,320
शब्द संत का भी अर्थ होता है। सम अंत हर

250
00:17:18,320 --> 00:17:22,720
चीज के दो सिरे होते हैं। हर्ष और शोक दुख और सुख

251
00:17:22,720 --> 00:17:26,720
लाभ हानि यश अपयश मान अपमान हर चीज के दो

252
00:17:26,720 --> 00:17:31,200
सिरे होते हैं जीवन में। और उन दो सिरों के बीच में जो आ जाता है

253
00:17:31,200 --> 00:17:35,280
ना उसे दुख का अनुभव होता है ना सुख का अनुभव होता है ना हर्ष का होता है ना शोक का होता है ना मान

254
00:17:35,280 --> 00:17:39,440
का अपमान का यश अपयश जो इनमें बराबर आ जाता है

255
00:17:39,440 --> 00:17:43,680
यानी ज्ञान यज्ञ में चला जाता है उसके लिए सारे

256
00:17:43,680 --> 00:17:47,680
कर्म जो है वो गौण हो जाते हैं। सारे

257
00:17:47,680 --> 00:17:51,760
उसी तरह से भस्म हो जाते हैं। जैसे लकड़ी भस्म हो जाती है। ये भगवान श्री कृष्ण

258
00:17:51,760 --> 00:17:56,000
गीता के चौथे अध्याय में पहले से शुरुआत करते हुए दसवे

259
00:17:56,000 --> 00:17:59,120
श्लोक तक चले जाते हैं।

260
00:17:59,120 --> 00:18:03,120
असल में क्या मेरे पास समय आप समय आपने कम रखा है

261
00:18:03,120 --> 00:18:08,400
आपको 7:00 बजे जाना है कहीं पे है ना आपने बताया था तो

262
00:18:08,400 --> 00:18:12,720
मैं एक्चुअली मैं आपसे किसी श्लोक की व्याख्या नहीं पूछ रहा हूं मैं एक आपसे

263
00:18:12,720 --> 00:18:16,880
आपने कहा वेद मंत्र आपने पढ़े हैं व्याख्या बताई

264
00:18:16,880 --> 00:18:22,880
है वेदों की ही व्याख्या बताई है ये

265
00:18:23,200 --> 00:18:27,600
हमारी बात अभी चल रही थी कि वेद मंत्र आपने श्री राम शर्मा आचार्य के पढ़े

266
00:18:27,600 --> 00:18:31,600
और फिर उसको अनुभव किया वेद मंत्रों को तो वह मंत्र कोई एक बताइए

267
00:18:31,600 --> 00:18:36,160
थोड़ा सा फिर उसका कैसे अनुभव किया वह बता दीजिए मुझे मैं

268
00:18:36,160 --> 00:18:41,040
आपको अनुभव तो बता सकता हूं इस समय मंत्र बोलने की

269
00:18:41,040 --> 00:18:46,000
बोलिए बोलिए कोई मंत्र नहीं

270
00:18:46,000 --> 00:18:50,000
मैं वेद शुरुआत ही अग्निवीर से हो जाती है अग्नि क्या मैं

271
00:18:50,000 --> 00:18:54,000
आपको एक शब्द से ले लूंगा तो आप बोलेंगे की लंबी व्याख्या हो जाएगी अग्नि

272
00:18:54,000 --> 00:18:58,000
अग्नि क्या कभी भी अग्नि पूछ रहा हूं। भाई साहब मैं मंत्र

273
00:18:58,000 --> 00:19:02,480
पूछ रहा हूं। कोई एक मंत्र कोट करिए जिससे मैं बोल सकूं। सर

274
00:19:02,480 --> 00:19:06,560
आवश्यकता नहीं है। मेरे पास भी पड़े हैं। मैं आपको दिखा देता हूं। नहीं

275
00:19:06,560 --> 00:19:12,560
नहीं दिखाने की नहीं कह रहा हूं मैं।

276
00:19:17,280 --> 00:19:21,360
मैं भी आपको दिखा रहा हूं। मैं दिखाने के लिए नहीं कह रहा हूं। आपने कहा आपने

277
00:19:21,360 --> 00:19:25,440
कहा कोई मंत्र बता दीजिए। तो मैंने आपको बोला ओम अग्नि नीले। बोला ना

278
00:19:25,440 --> 00:19:29,520
अग्निवीले ओम अग्निवीले मैं यही पहले इसी को पहले इसी को तो समझ

279
00:19:29,520 --> 00:19:34,960
ले ओम क्या है और अग्निवीले क्या है तभी तो बाकी को पढूंगा मैं

280
00:19:34,960 --> 00:19:40,080
ओम अग्नि मिले तो पढ़ लू क्या है किस अग्नि देव की स्तुति करने जा रहे हैं

281
00:19:40,080 --> 00:19:44,080
ओम का अर्थ क्या है जब तक ये नहीं जान लेते तो बाकी वेद का जानना बेकार हो

282
00:19:44,080 --> 00:19:48,400
गया ना ये तो पूरी पुस्तक हो गई देखिए जैसे कि

283
00:19:48,400 --> 00:19:53,280
वेद ने मंत्र मुझे पढ़ के सुना दीजिए मंत्र बता दीजिए किस मंत्र ने आपको

284
00:19:53,280 --> 00:19:57,360
मंत्र मैं आप मैं पूछ रहा हूं। वेद ने वेद

285
00:19:57,360 --> 00:20:01,600
ने एक जगह कोट किया है कि वेद के अलावा कोई

286
00:20:01,600 --> 00:20:06,320
भी और मोक्ष का मार्ग नहीं है। ठीक है?

287
00:20:06,320 --> 00:20:10,320
ठीक है? मान ली आपकी बात। आप किताब की बात कर रहे हैं। मैं कह रहा

288
00:20:10,320 --> 00:20:14,560
हूं विध धातु की ज्ञान की बात कर रहा हूं। आप सिर्फ किताबों में

289
00:20:14,560 --> 00:20:19,360
किताब की बात कर रहे हैं ना आप श्री राम शर्माचार्य जी का पढ़ा ना आपने।

290
00:20:19,360 --> 00:20:23,360
किताब पढ़ने के बाद आगे भी तो चलना ही या किताब पे ही उलझा रह जाना है। अगर मैं

291
00:20:23,360 --> 00:20:27,440
कहूं अगर मैं कहूं कि ये मील का पत्थर है। अभी

292
00:20:27,440 --> 00:20:31,440
मैं कहूं ये मील का पत्थर है और यहां से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली है और मील

293
00:20:31,440 --> 00:20:32,400
का पत्थर पकड़ के

294
00:20:32,400 --> 00:20:36,480
बैठ जाएंगे तो दिल्ली कब पहुंचेंगे। देखिए बैठने की बात नहीं जब तक क्लियर नहीं होगी

295
00:20:36,480 --> 00:20:40,560
तब तक हम आगे कैसे चले जाए। हमें जाना कानपुर है और हम चले जाए सीतापुर। इसीलिए

296
00:20:40,560 --> 00:20:42,240
तो कह रहा हूं। इसीलिए तो आपसे कह

297
00:20:42,240 --> 00:20:46,240
रहा हूं पहले ओम अग्नि मिले को तो क्लियर कर ले आपने जो गिलास वाला

298
00:20:46,240 --> 00:20:50,320
उदाहरण दिया था कि एक गिलास में पानी कम है और एक गिलास में आधा खाली

299
00:20:50,320 --> 00:20:54,320
है और आधा भरा हुआ है। कोई यह कहता है कोई कहता है आधी हवा है, आधा पानी

300
00:20:54,320 --> 00:20:58,720
है। उसमें यह भी कहा जा सकता है कि जब कोई यह कह देता है कि इस गिलास

301
00:20:58,720 --> 00:21:02,880
में आधा पानी भी नहीं है। ये गिलास तो पूरा खाली है। तो उसको

302
00:21:02,880 --> 00:21:07,040
क्या हम मानेंगे? या जो यह कह दे जो अपने

303
00:21:07,040 --> 00:21:11,600
पर्सेक्टिव बताते समय गिलास के बारे में अपना दृश्य दशकन मूल्यांकन

304
00:21:11,600 --> 00:21:15,680
बताते समय जो ये क्लेम कर दे कि मैं जो कह रहा हूं वो सही है दूसरा जो

305
00:21:15,680 --> 00:21:19,760
कह रहा है गलत है उसको क्या सही मानेंगे आप जैसे कि

306
00:21:19,760 --> 00:21:23,840
किसी ने कहा ईश्वर अवतार ले सकता है एक एक मिनट भाई साहब जैसे कि किसी

307
00:21:23,840 --> 00:21:28,560
ने कहा ईश्वर अवतार ले सकता है दूसरे ने कहा नहीं ले सकता

308
00:21:28,560 --> 00:21:32,880
ले ही नहीं सकता वो ईश्वर अवतार नहीं ले सकता बीच में नहीं आ सकता

309
00:21:32,880 --> 00:21:37,120
तो यहां पे इन दोनों दोनों में से अगर उन्होंने अपने ही मत को रखा होता केवल सामने

310
00:21:37,120 --> 00:21:41,440
वाले को मना नहीं किया होता तब हम ये कह सकते कि हां सबका सामंजस्य हो गया

311
00:21:41,440 --> 00:21:45,520
मगर जो ये कह दे कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता और और कई लोगों

312
00:21:45,520 --> 00:21:49,600
ने कहा है ले सकता है तो जिसने इन चारों का खंडन कर दिया उसका सामंजस्य

313
00:21:49,600 --> 00:21:53,680
कैसे बिठाएंगे आप ये तो ये रही गिलास वाली बात ये तो ये रही गिलास

314
00:21:53,680 --> 00:21:56,320
वाली बात

315
00:21:56,320 --> 00:22:00,480
अब अभी अब अभी वेद की बात मैं कर रहा हूं आपने कहा कि आपने

316
00:22:00,480 --> 00:22:05,600
वेद मंत्र पढ़े हैं श्री राम शर्माचार्य के श्री राम शर्माचार्य

317
00:22:05,600 --> 00:22:09,760
श्री राम शर्मा आचार्य के नहीं ऋग्वेद के मंत्र पढ़े हैं। श्री राम आचार्य ने वो

318
00:22:09,760 --> 00:22:14,240
संकलित किए हैं। भाषा बदलिए आप

319
00:22:14,240 --> 00:22:20,240
भाषा को बदलिए प्लीज। वो वो किताब आपको कहां से मिली थी?

320
00:22:20,560 --> 00:22:24,720
खरीदी हमने परचेस की है भाई। अरे भाई तो किसकी छपी हुई किताब

321
00:22:24,720 --> 00:22:28,880
थी वो। वो किसकी छपी हुई किताब थी भाई साहब? ये

322
00:22:28,880 --> 00:22:33,040
छपी हुई है वहां पे गायत्री परिवार वालों ने छापी है।

323
00:22:33,040 --> 00:22:37,040
हां तो गायत्री परिवार वालों से आपने वेद के मंत्र लिए हैं ना

324
00:22:37,040 --> 00:22:42,800
वो शिव और पार्वती ने नहीं दिए ना आपको वेद के मंत्र

325
00:22:42,800 --> 00:22:46,800
भाई साहब आपको मैं समझा नहीं पाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि आप

326
00:22:46,800 --> 00:22:50,960
अभी उस स्तर पे नहीं आ पा रहे हैं जिस स्तर पे मैं

327
00:22:50,960 --> 00:22:54,960
बात करना चाह रहा हूं आप चाहते हैं कि आपसे प्रश्न ना

328
00:22:54,960 --> 00:22:58,960
किया जाए आप समझना नहीं चाह रहे आप समझना नहीं चाह रहे आप एक ही बात पे अड़े हुए

329
00:22:58,960 --> 00:23:03,040
हैं निश्चित हो गए हैं आप निश्चित हो गए हैं कि मेरा

330
00:23:03,040 --> 00:23:07,360
कहने का अर्थ है मैं कहना चाह रहा हूं भाई साहब

331
00:23:07,360 --> 00:23:11,360
मैं कहना ये रहा हूं मैं कहना ये चाह रहा हूं

332
00:23:11,360 --> 00:23:15,440
कि यदि आपको राम शर्मा जी पर विश्वास नहीं है एज

333
00:23:15,440 --> 00:23:19,600
ए गुरु आप उनको स्वीकार नहीं करते तो फिर उनके द्वारा दिए गए वेद

334
00:23:19,600 --> 00:23:23,600
मंत्र पर आपको विश्वास कैसे है ये कह रहा हूं मैं तो मैं

335
00:23:23,600 --> 00:23:27,760
तो आपसे बार-बार कह रहा हूं आपको आप अपने आप अपनी हमारी

336
00:23:27,760 --> 00:23:31,760
बातों को पहले ध्यान से सुने हमने ये कब कहा कि श्री रामचर्या ने श्री

337
00:23:31,760 --> 00:23:35,920
राम शर्मा आचार्य ने वेद मंत्र दिए हैं। हमने ये तो कभी कहा ही नहीं।

338
00:23:35,920 --> 00:23:40,400
हमने कहा मंत्र है। रुगद के

339
00:23:40,400 --> 00:23:45,520
ये वेद के ही मंत्र है। आपने कैसे इसको वो किया? वेरीफाई

340
00:23:45,520 --> 00:23:49,760
वेरीफाई अपने अनुभव से किया। बार-बार आपसे कह रहा हूं अपने अनुभव से किया।

341
00:23:49,760 --> 00:23:53,920
जैसे पहला ही मंत्र आपने पढ़ा। भाई साहब ये बताइए वेद से मुक्ति मिलती

342
00:23:53,920 --> 00:23:57,920
है। ये अनुभव आपने कैसे कर लिया? बताइए। मुक्ति मिल गई आपको? मुक्त

343
00:23:57,920 --> 00:24:02,000
हो चुके हैं। क्योंकि मुक्ति हो चुके हैं आपको? मुक्त हो चुके

344
00:24:02,000 --> 00:24:06,080
आप। अब मैं आपकी ओर अगर आपकी ओर कोई वार करेगा तो आपकी

345
00:24:06,080 --> 00:24:09,600
पलक तो नहीं चपकेगी।

346
00:24:09,600 --> 00:24:13,840
वो तो स्वाभाविकता है ना? यानी मुक्त नहीं हुए ना?

347
00:24:13,840 --> 00:24:17,840
यानी मुक्त नहीं हुए ना? अगर पलक झपक जाए तो इसका मतलब आदमी मुक्त नहीं

348
00:24:17,840 --> 00:24:22,000
हुआ। ये आपकी दृष्टि है। आपका दृष्टिकोण है। मेरा दृष्टिकोण नहीं है। अच्छा चलिए पलक

349
00:24:22,000 --> 00:24:26,000
झपकना किस बात का प्रमाण है बताइए? आप शरीर को शरीर

350
00:24:26,000 --> 00:24:30,480
को आत्मा को आप दोनों को इकट्ठा कर रहे हैं। अरे

351
00:24:30,480 --> 00:24:34,560
तो प्रपंच रूपी संसार में है। जो मुक्त नहीं हुआ वही तो संसार में है। आप

352
00:24:34,560 --> 00:24:38,560
कह रहे हैं आप मुक्त हो गए। आप मुक्त हो गए तो आपको भूख लगती है ना आप सोच

353
00:24:38,560 --> 00:24:42,560
जाते होंगे। नहीं तो फिर आप ऐसा करें। आप ऐसा करें। थोड़ा सा गीता का अध्ययन कर

354
00:24:42,560 --> 00:24:47,120
ले। चौथा अध्याय पढ़ ले। आदमी किस तरह से मुक्त होता है।

355
00:24:47,120 --> 00:24:51,120
ज्ञान मार्ग में चलने वाला व्यक्ति और कर्म मार्ग में चलने

356
00:24:51,120 --> 00:24:55,200
वाला व्यक्ति। कर्म क्या है? पांच इंद्रियां करती है और पांच ज्ञानेंद्रियां करती

357
00:24:55,200 --> 00:24:59,440
है साथ में एक मन कार्य करता है ये 11 चीजें काम करती

358
00:24:59,440 --> 00:25:03,440
है लेकिन इनसे कर्म किया हुआ इनसे कर्म किया

359
00:25:03,440 --> 00:25:07,520
हुआ उससे श्रेष्ठ कौन है जो व्यक्ति ज्ञान यज्ञ में चला जाता है और ज्ञान यज्ञ में

360
00:25:07,520 --> 00:25:11,600
गया हुआ व्यक्ति वैसे ही जिस तरह से ईंधन अग्नि में भस्म

361
00:25:11,600 --> 00:25:13,360
हो जाता है उसी प्रकार

362
00:25:13,360 --> 00:25:18,240
वो बिल्कुल ही मुक्त हो जाता है क्यों ऐसे

363
00:25:18,240 --> 00:25:22,240
व्यक्ति को पथिक कहा जाता है कि वो मुक्ति के मुमुक्षु है बट वो

364
00:25:22,240 --> 00:25:26,320
वो मुक्त नहीं है। मुक्त तो तभी है जब वो मुक्त हुआ जब उसको बोध हो गया। आत्म स्वरूप

365
00:25:26,320 --> 00:25:30,560
हो गया। जिसकी पलक ना झप या तो पलक या तो पलक

366
00:25:30,560 --> 00:25:34,480
जो त्रिव ताप है जो भौतिक

367
00:25:34,480 --> 00:25:38,720
में अगर कोई पलक झपकना छोड़ दे तो इसका मतलब वो मुक्त हो गया। और

368
00:25:38,720 --> 00:25:43,680
भी चीजें हैं। उसको ना भूख किसी चीज की आवश्यकता नहीं होगी। वो स्थित हो जाएगा।

369
00:25:43,680 --> 00:25:47,760
स्थित हो जाएगा। आप उस स्तर पे बात नहीं कर

370
00:25:47,760 --> 00:25:51,760
पा रहे हैं जिस स्तर पे हम करना चाहते हैं। आप थोड़ा और ऊंचा उठे अच्छा लगेगा। ऐसा

371
00:25:51,760 --> 00:25:56,000
नहीं है भाई साहब आपके पास जवाब नहीं है इसलिए आप ऐसी बातें कर रहे हैं। जवाब

372
00:25:56,000 --> 00:26:00,080
जवाब हम आपको देना चाहते आप सुनना नहीं चाहते। हम बार-ब मैंने पूछा

373
00:26:00,080 --> 00:26:04,080
जब आपको राम शर्माचार्य जी पर आपको जब राम शर्माचार्य जी पर

374
00:26:04,080 --> 00:26:08,160
विश्वास नहीं है तो आपको यह विश्वास कैसे है कि उन्होंने जो मंत्र

375
00:26:08,160 --> 00:26:12,400
दिए वही मंत्र है जो वही मंत्र विश्वास

376
00:26:12,400 --> 00:26:16,720
नहीं है लेकिन हम तो बार-बार कह रहे हैं कि हमें ये ऋग्वेद पर विश्वास है

377
00:26:16,720 --> 00:26:20,000
ऋग्वेद को हमने पढ़ा

378
00:26:20,000 --> 00:26:24,000
कैसे मालूम किया वही आपको बताना

379
00:26:24,000 --> 00:26:28,160
अनुभव से किया आप अनुभव करो ना मेरे साथ बैठ के अनुभव आपने मुक्ति कर लिया

380
00:26:28,160 --> 00:26:29,440
भाई साहब

381
00:26:29,440 --> 00:26:33,600
आपने अनुभव मुक्ति का कर लिया कर लिया तो

382
00:26:33,600 --> 00:26:37,600
आप बोलिए ना तो आपका स्वास्थ्य खराब होता होगा ना

383
00:26:37,600 --> 00:26:42,080
ही आपका जो है आपको भूख लगती होगी स्वास्थ्य स्वास्थ्य

384
00:26:42,080 --> 00:26:46,240
शरीर की बात है तो शरीर से भी आप शरीर

385
00:26:46,240 --> 00:26:50,240
से आप जुड़े हुए हैं ना जब ईश्वर भी पृथ्वी पर आता

386
00:26:50,240 --> 00:26:54,240
है तो उसके शरीर को भी भूख लगती है वो

387
00:26:54,240 --> 00:26:58,640
भी पलकाता है विवशता नहीं होती उसकी जी यही

388
00:26:58,640 --> 00:27:03,040
अंतर है। वो अपनी इच्छा से करता है। हमारी व्यवस्था है।

389
00:27:03,040 --> 00:27:07,200
आपकी व्यवस्था है भोजन करने की। ईश्वर की व्यवस्था नहीं है। ईश्वर

390
00:27:07,200 --> 00:27:11,280
चाहे तो 14 कितने दिन तक लक्ष्मण लक्ष्मण जी ही देख लीजिए कितने

391
00:27:11,280 --> 00:27:15,280
दिन तक वो बिना रात में सोए जगे समय अवधि काट

392
00:27:15,280 --> 00:27:18,480
दी थी उन्होंने।

393
00:27:18,480 --> 00:27:22,640
वो भी बात है। मेरा कहने का अर्थ यह है महाराज जी

394
00:27:22,640 --> 00:27:26,720
कि यदि हम किसी से वेद के मंत्र ले रहे हैं तो हमें उसके प्रति

395
00:27:26,720 --> 00:27:30,880
प्रमाण बुद्धि दिखानी पड़ेगी। किसी से भी ले क्योंकि हमको

396
00:27:30,880 --> 00:27:34,880
डायरेक्ट या तो हमको डायरेक्ट मिल गए हो। शिव पार्वती जी ने डायरेक्ट हमें दे दिए हो। हमें

397
00:27:34,880 --> 00:27:37,120
डायरेक्ट

398
00:27:37,120 --> 00:27:41,360
मिल गए। देखिए आपको लगता है कि आप सुनिए। मान

399
00:27:41,360 --> 00:27:45,360
लीजिए कि यहां से किसी ने मुंबई जाना है, मुंबई जाना है, कोई तो

400
00:27:45,360 --> 00:27:49,440
साइकिल से जा रहा है, कोई पैदल जा रहा है, कोई कार पे जा रहा है, कोई बस पे जा रहा है, कोई

401
00:27:49,440 --> 00:27:53,600
ट्रेन पे जा रहा है, कोई बाय एयर जा रहा है। रास्ते अलग-अलग है। है ना?

402
00:27:53,600 --> 00:27:57,680
तो साधु सन्यासी क्या करते हैं? उनको डायरेक्ट मिल जाता है। हमें

403
00:27:57,680 --> 00:28:01,680
डायरेक्ट मिल गया। मिल गया। तो चाहिए। आपको डायरेक्ट मिला है। वेद का मंत्र

404
00:28:01,680 --> 00:28:06,080
वगैरह सब मिला है। हमें मिल गया। अब कुछ पाने की चाह नहीं।

405
00:28:06,080 --> 00:28:10,320
कुछ पाने की चाह नहीं। कुछ परिवार से लिया

406
00:28:10,320 --> 00:28:14,400
है। फिर आप क्यों कह रहे थे? अरे हमने आपसे कहा कि गायत्री

407
00:28:14,400 --> 00:28:19,280
परिवार का हमने यह लिखा हुआ पढ़ा। आप घुमा

408
00:28:19,280 --> 00:28:23,520
हम कह रहे पढ़ा क्या क्या किसी किताब को पढ़ना आपने किसी

409
00:28:23,520 --> 00:28:27,600
आपके पीछे इतनी सारी किताबें दिख रही है तो क्या आपने वो पढ़ी है ना? है

410
00:28:27,600 --> 00:28:32,000
ना? पढ़ी है ना? इसी तरह से हमने भी किताबों को पढ़ा है।

411
00:28:32,000 --> 00:28:33,680
को पढ़ा है। वेद

412
00:28:33,680 --> 00:28:37,680
मंत्र आपको स्वतंत्र रूप से मिले थे। हां स्वतंत्र मिले

413
00:28:37,680 --> 00:28:41,840
हैं क्योंकि ग्रंथों में स्वतंत्र रूप से आपको

414
00:28:41,840 --> 00:28:46,000
वेद दिए हैं। हमने ग्रंथों को पढ़ा ग्रंथों को पढ़ा उनप मनन किया चिंतन किया

415
00:28:46,000 --> 00:28:50,160
और इन चीजों से परे हट गए हम। ठीक है? सारे वेद दे सारे वेद दे दिए

416
00:28:50,160 --> 00:28:54,240
हैं ना उन्होंने आपको। शिव पार्वती सब कुछ दे दिया है। जो हमें चाहिए था वो

417
00:28:54,240 --> 00:28:58,320
हमें मिल गया है। इसके अलावा हमें और कुछ नहीं चाहिए। हमें कुछ पाना ही नहीं है। मंडल

418
00:28:58,320 --> 00:29:03,920
का दसवे मंडल का 192वा सूक्त सुना सकते हैं वेद का?

419
00:29:03,920 --> 00:29:08,000
सवाल ये है ही नहीं है। नहीं सवाल ही नहीं है। ये आप ये क्लेम कर

420
00:29:08,000 --> 00:29:12,640
रहे हैं कि आपको स्वप्न में या दिव्य योजना से वेद के मंत्र प्राप्त हुए हैं।

421
00:29:12,640 --> 00:29:16,320
मारने की बात

422
00:29:16,320 --> 00:29:20,480
विषय से विषय से आप भटक रहे हैं ना भटके। मैं विषय

423
00:29:20,480 --> 00:29:24,560
पे ही हूं। मैं आपकी प्रामाणिकता मैं आपकी प्रामाणिकता पर प्रश्न उठा रहा हूं।

424
00:29:24,560 --> 00:29:29,840
आपने कहा कि मुझे देखिए देखिए ऐसा है

425
00:29:29,840 --> 00:29:33,920
ऐसा है देखिए ऐसा है भगवान ने मोहिनी

426
00:29:33,920 --> 00:29:37,920
का रूप धारण करके छल भी किया है भगवान ने बुद्ध

427
00:29:37,920 --> 00:29:41,920
का रूप धारण करके जो वैदिक यज्ञ है उनका खंडन

428
00:29:41,920 --> 00:29:46,080
भी किया है इसका अर्थ है कि भगवान ऐसा रूप ऐसा कृत कर सकते

429
00:29:46,080 --> 00:29:50,160
हैं जो वेदों के विरुद्ध हो तो इसलिए यदि आप

430
00:29:50,160 --> 00:29:54,400
यह कह रहे हैं कि शिव पार्वती ने मुझे ज्ञान दिया है तो मुझे उसकी प्रमाणिकता

431
00:29:54,400 --> 00:29:59,040
जांच रहा हूं कि भाई वो वही है कि नहीं। तो इसलिए

432
00:29:59,040 --> 00:30:03,040
सुनिए सुनिए प्रमाणिकता तो वो जानेगा ना जो स्वयं

433
00:30:03,040 --> 00:30:07,360
परमात्मा को जान चुका हो। आप तो एक साधारण मानव है। आप कैसे हमारी प्रमाणिकता

434
00:30:07,360 --> 00:30:12,560
जानेंगे? मैं परमात्मा को जानने की प्रमाणिकता नहीं जांच रहा हूं। मैं

435
00:30:12,560 --> 00:30:16,560
सामने वाले की प्रमाणिकता जांच रहा हूं। नहीं नहीं नहीं आप आप

436
00:30:16,560 --> 00:30:20,560
प्रमाणिकता जान रहे हैं। इसलिए कि सामने वाले के अंदर कितना ज्ञान है। ये जानना चाह रहे हैं

437
00:30:20,560 --> 00:30:24,560
आप। ना ना ज्ञान नहीं ज्ञान ज्ञान नहीं ज्ञान नहीं ज्ञान तो आप में मुझसे

438
00:30:24,560 --> 00:30:29,040
बहुत ज्यादा है मैं जान रहा हूं प्रमाणिकता मैं ज्ञान नहीं वो ज्ञान प्रामाणिक

439
00:30:29,040 --> 00:30:31,680
है वैदिक है कि नहीं मेरा बस इतना है आपके

440
00:30:31,680 --> 00:30:35,680
पास बहुत ज्ञान हो सकता है सब कुछ हो सकता है वो ज्ञान वैदिक है कि नहीं

441
00:30:35,680 --> 00:30:39,760
सवाल ये चल रहा है वैदिक वो वैदिक जो हमें परंपराओं से

442
00:30:39,760 --> 00:30:44,640
प्राप्त होने वाले के द्वारा जो ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता है रामानुजाचार्य

443
00:30:44,640 --> 00:30:48,640
शंकराचार्य परंपराओं से प्राप्त होता है आपका जो ज्ञान विज्ञान

444
00:30:48,640 --> 00:30:52,640
है वो वही उनहीं परंपराओं का है कि नहीं आप मुझे वैदिक

445
00:30:52,640 --> 00:30:56,720
अर्थ बता दे चलिए कहानी खत्म गेम ओवर बताइए

446
00:30:56,720 --> 00:31:02,000
भाई साहब अभी बात ये चल रही है आपने कहा आपको स्वतंत्र रूप से

447
00:31:02,000 --> 00:31:06,080
मुझसे पूछ रहे हैं आप मुझे ये बता दीजिए कि वैदिक का अर्थ क्या है बस इतना बता दीजिए

448
00:31:06,080 --> 00:31:10,720
बाकी कुछ नहीं हमारे परम प्रमाण है सनातनियों के श्रुति शास्त्र

449
00:31:10,720 --> 00:31:14,880
जो कल्प के प्रारंभ में ब्रह्मा जी को स्वास रूप में प्राप्त

450
00:31:14,880 --> 00:31:19,280
होते हैं नारायण के द्वारा वो जो ग्रंथ है कालांतर में जब लिपिबद्ध

451
00:31:19,280 --> 00:31:23,360
किए जाते हैं आचार्य के द्वारा व्यास जी के द्वारा उनहीं ग्रंथों को हम वेद

452
00:31:23,360 --> 00:31:27,360
के नाम से जानते हैं। यद्यपि वेद का अर्थ ज्ञान भी है। वेद का

453
00:31:27,360 --> 00:31:31,600
अर्थ ज्ञान भी है। पर यहां पर वेद ग्रंथों की बात हो रही है। जिस पर विश्वास

454
00:31:31,600 --> 00:31:36,000
करने वाले को सनातनी कहा जाता है। अब आपने कहा कि ये जो वेद

455
00:31:36,000 --> 00:31:40,000
के मंत्र हैं लिपिबद्ध होते हुए जो वेद के मंत्र है यह

456
00:31:40,000 --> 00:31:44,080
आपको शिव जी और पार्वती जी से प्राप्त हुए हैं

457
00:31:44,080 --> 00:31:46,960
और स्वतंत्र रूप से आपको किसी किताब की जरूरत नहीं पड़ी।

458
00:31:46,960 --> 00:31:50,960
तो मैं आपसे बस इतना कहना चाहूंगा। हां ठीक है। तो

459
00:31:50,960 --> 00:31:55,520
आप मुझे केवल दव मंडल का 192वा सूक्त जरा सुना दीजिए।

460
00:31:55,520 --> 00:32:00,240
कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे मैं आपसे एक छोटा सा प्रश्न

461
00:32:00,240 --> 00:32:04,560
फिर आपकी ये बात जो है ये आप जो परीक्षा

462
00:32:04,560 --> 00:32:08,720
लेना चाहते हैं ना हम आपकी परीक्षा में नहीं बैठना चाहते। मैं परीक्षा नहीं

463
00:32:08,720 --> 00:32:12,880
ले रहा हूं। फिर आपको ये कहना चाहिए कि मैं वैदिक हूं। पूछा

464
00:32:12,880 --> 00:32:17,040
था पहले जब हमसे पूछा था आपने कि वेद का कोई मंत्र बताइए तो हम शुरुआत ऋग्वेद

465
00:32:17,040 --> 00:32:21,120
से करने वाले थे। लेकिन उसके बाद आपने आगे बढ़ गए सीधा दव

466
00:32:21,120 --> 00:32:25,200
मंडल में चले जाते आप और पहले का पहले श्लोक का ही यानी पहले जो

467
00:32:25,200 --> 00:32:29,360
मंत्र का है उसका अर्थ तो आप मुझे बता दें आपको सारे

468
00:32:29,360 --> 00:32:33,360
आपसे वेद पढ़ने नहीं बैठा हूं ना यहां पर आप एक क्लेम कर रहे हैं कि आप ब्रह्म कुमारी

469
00:32:33,360 --> 00:32:37,600
का समर्थन करते हैं तो फिर सबसे पहले ब्रह्मा कुमारी का समर्थन करने वाले का

470
00:32:37,600 --> 00:32:41,840
समर्थन हो रहा है कि नहीं हो रहा है ये देख रहा हूं मैं मैं तो ब्रह्मा

471
00:32:41,840 --> 00:32:45,840
कुमारी का समर्थन करता हूं हां तो इसीलिए मैं

472
00:32:45,840 --> 00:32:51,840
की प्रमाणिकता पूछ रहा हूं इसीलिए मैंने आपकी प्रमाणिकता पूछी।

473
00:32:52,880 --> 00:32:55,360
परंपरा

474
00:32:55,360 --> 00:33:00,160
आप मेरी प्रमाणिकता ना पूछ के आप पूछ रहे हैं कि मेरा ज्ञान कितना है? मुझे कितना

475
00:33:00,160 --> 00:33:02,400
फलाने

476
00:33:02,400 --> 00:33:06,400
की वेद के मंत्र मुझे जब से प्राप्त हुए हैं तो मैं जानना चाहता हूं

477
00:33:06,400 --> 00:33:10,400
प्राप्त हुए भी है कि ये एक बात है केवल एक। क्यों जानना चाहते? क्यों

478
00:33:10,400 --> 00:33:14,640
जानना चाहते हैं आप? क्यों जानना चाहते हैं? और आप मुझे एक बात आप एक अप्रामाणिक

479
00:33:14,640 --> 00:33:18,880
संस्था का समर्थन कर रहे हैं ना भाई साहब इसलिए आपकी प्रमाणिकता जान रहा हूं मैं

480
00:33:18,880 --> 00:33:23,040
तो उस संस्था के बारे में आप बात कर ले मुझसे वेदों की प्रमाणिकता

481
00:33:23,040 --> 00:33:27,200
छोड़ देते आपकी प्रमाणिकता के बारे में ना पूछू आपसे ना क्यों पूछेंगे

482
00:33:27,200 --> 00:33:31,360
आप जब क्यों आप प्रमाण तो ये है ना कि आप वेदों को जानिए आपको

483
00:33:31,360 --> 00:33:37,360
वैदिक का अर्थ पूरा मालूम नहीं है अच्छा ये बताइए जब

484
00:33:37,920 --> 00:33:42,000
कक्षा का एक कक्षा का विद्यार्थी एक एमए और पीएचडी वाले ले

485
00:33:42,000 --> 00:33:46,240
एग्जाम देने के लिए सामने बैठा हो तो कैसे कोई एग्जाम दे देगा? ये ये तय

486
00:33:46,240 --> 00:33:50,400
कौन कर रहा है यहां पर? किसने तय किया? अब हम कर रहे हैं ना? पहले

487
00:33:50,400 --> 00:33:56,000
आप तय कर रहे थे। अब हम तय कर रहे हैं। आप कक्षा के विद्यार्थी

488
00:33:56,000 --> 00:34:00,080
यानी कि आप स्वयं को एक अथॉरिटी के रूप में

489
00:34:00,080 --> 00:34:04,160
यहां प्रस्तुत कर रहे हैं ना। क्योंकि हमें कुछ पाने के लिए नहीं। जब

490
00:34:04,160 --> 00:34:08,480
आप भाई साहब महाभारत में एक सिद्धांत लिखा है भीष्म जी का वाक्य है

491
00:34:08,480 --> 00:34:12,640
कि अन्यों के साथ वही व्यवहार करिए जो स्वयं के साथ स्वीकार्य हो

492
00:34:12,640 --> 00:34:16,720
तो आप जब स्वयं को अथॉरिटी के रूप में प्रस्तुत यहां कर रहे हैं तो मैं

493
00:34:16,720 --> 00:34:20,800
ये नहीं कह रहा मुझे भी अथॉरिटी कम से कम अपनी अथॉरिटी के बारे में मुझे प्रश्न तो करने

494
00:34:20,800 --> 00:34:25,040
दीजिए बिल्कुल आपने प्रश्न कर लिया लेकिन सवाल यह है कि मेरा जवाब

495
00:34:25,040 --> 00:34:29,440
आपको संतुष्ट कर ही नहीं पा रहा है नहीं मैंने

496
00:34:29,440 --> 00:34:32,400
आप विद्यार्थी

497
00:34:32,400 --> 00:34:35,440
ब्रह्मा कुमारी

498
00:34:35,440 --> 00:34:39,520
में आपको समस्त वेद जो है वो

499
00:34:39,520 --> 00:34:43,760
शिव पार्वती जी के द्वारा डायरेक्ट प्राप्त हुए हैं। आपका कोई गुरु नहीं है।

500
00:34:43,760 --> 00:34:48,400
है ना? उन्होंने ही दिए हैं। उन्होंने ही ग्रंथ

501
00:34:48,400 --> 00:34:53,520
आपको ऋग्वेद का दवे मंडल का 192वा सूक्त बताने में क्या दिक्कत है?

502
00:34:53,520 --> 00:34:57,600
पहले वही तो वही तो कह रहा हूं कि आप ऋग्वेद के दवे मंडल

503
00:34:57,600 --> 00:35:01,600
पे अटक गए हैं। श्लोक पे उसके मंत्र पे अटक गए। लेकिन

504
00:35:01,600 --> 00:35:05,760
नौवा मंडल बता दीजिए। नौवा पहले वाला पहले वाला पता

505
00:35:05,760 --> 00:35:09,840
नहीं चलेगा। भाई साहब पहले बता दीजिए। पहले

506
00:35:09,840 --> 00:35:14,320
वाला हमें पता नहीं और दव पे चल दिए। शुरुआत तो पहले कर ले। अरे मैं

507
00:35:14,320 --> 00:35:18,640
वेद पढ़ने नहीं बैठा हूं। मैं केवल ये मेरी यह जिज्ञासा है कि आप जो क्लेम

508
00:35:18,640 --> 00:35:22,800
कर रहे हैं कि मुझे स्वप्न में मिला है वो वास्तविकता है या केवल एक बात है। मैं

509
00:35:22,800 --> 00:35:26,880
यह जानना चाह रहा हूं। आपके पास आपके

510
00:35:26,880 --> 00:35:30,960
पास यदि कोई दिव्यता है तो मैं जैसे अर्जुन ने भी भगवान से कहा था जब

511
00:35:30,960 --> 00:35:35,280
भगवान ने कहा था मैं ही भगवान हूं। अर्जुन ने कहा कि आप अपना विराट स्वरूप दिखा दीजिए।

512
00:35:35,280 --> 00:35:39,280
उन्होंने दिखा दिया। ऐसे ही मेरी आपके प्रति जिज्ञासा है की यदि आपके

513
00:35:39,280 --> 00:35:43,360
पास दिव्यता है तो उसका दिव्यता का सबूत दे दीजिए मुझे। तो पहले आप उसी तरह

514
00:35:43,360 --> 00:35:47,360
से अर्जुन बनकर आइए हमारे पास फिर बात करेंगे। [हंसी] ठीक है

515
00:35:47,360 --> 00:35:51,360
तो आपको नहीं लेना है हम आपको सारा देंगे ठीक है

516
00:35:51,360 --> 00:35:55,360
कुल मिला के आपको ऋग्वेद नहीं बताना है चलिए ठीक है अब मुझे बता दीजिए आपके

517
00:35:55,360 --> 00:35:59,520
अनुसार धर्म क्या है ऋग्वेद के ऋग्वेद के अगर पहले वाले से शुरू करते प्रथम

518
00:35:59,520 --> 00:36:03,760
मंडल से सूत्र नंबर एक से शुरू मेरे आचार्यों से मुझे

519
00:36:03,760 --> 00:36:07,920
मेरे आचार्यों से पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य जी का मैं शिष्य हूं

520
00:36:07,920 --> 00:36:09,040
जो अध्यात्म

521
00:36:09,040 --> 00:36:13,120
के विषय में मेरी जो जिज्ञासाएं होती है मैं उनसे शांत कर लेता हूं अपनी जिज्ञासाओं

522
00:36:13,120 --> 00:36:17,200
को मैं आपके पास यहां पर कक्षा लेने के लिए नहीं बैठा हूं। मुझे बताया

523
00:36:17,200 --> 00:36:21,520
गया था कि आप ब्रह्मा कुमारी का समर्थन करते हैं और अपने आप को महामंडलेश्वर

524
00:36:21,520 --> 00:36:25,600
भी कहते हैं। यद्यपि महामंडलेश्वर कहने के विषय में भी एक अच्छी खासी एक

525
00:36:25,600 --> 00:36:29,840
बात हो जाएगी। मगर वो अभी हमारा मुख्य विषय नहीं है। तो उसको जाने देता हूं। फिलहाल

526
00:36:29,840 --> 00:36:33,920
मैं आपसे ब्रह्मा कुमारी पर बात करने के लिए अब आगे बढ़ता

527
00:36:33,920 --> 00:36:38,080
हूं। ठीक है। हां ठीक है। आइए। हां। अब मुझे

528
00:36:38,080 --> 00:36:43,200
बता दीजिए आपके अनुसार धर्म किसे कहते हैं?

529
00:36:43,200 --> 00:36:47,440
किसी भी गुणों को धारण करना जितने

530
00:36:47,440 --> 00:36:51,440
भी गुण है उन को धारण करना वही धर्म

531
00:36:51,440 --> 00:36:57,280
कहलाता है और वो मानवता के अंतर्गत आता है

532
00:36:57,280 --> 00:37:02,320
तो मानवता की कोई सुनिश्चित नियमावली है आपके पास

533
00:37:02,320 --> 00:37:07,440
मानवता के जो गुण है जैसे प्रेम है

534
00:37:07,440 --> 00:37:12,880
शुद्ध आचरण है स्पष्ट वादिता है

535
00:37:12,880 --> 00:37:15,920
सच्चाई है,

536
00:37:15,920 --> 00:37:19,920
ज्ञान का सागर है। यह जो परमात्मा के गुण बताए गए हैं,

537
00:37:19,920 --> 00:37:24,480
उनहीं गुणों को यदि व्यक्ति अपने जीवन में धारण करता है तो

538
00:37:24,480 --> 00:37:28,640
कहते हैं कि गुण धारण कर लिए उसने और वो धर्म

539
00:37:28,640 --> 00:37:32,720
के मार्ग पर चल रहा है। तो जो धारण किया जाए वह

540
00:37:32,720 --> 00:37:36,800
धर्म है। ठीक है? धारक तत्व को धर्म कहते हैं। इसकी उपयोगिता क्या

541
00:37:36,800 --> 00:37:40,880
है? आवश्यकता क्या है इसकी?

542
00:37:40,880 --> 00:37:44,960
मानव के जीवन में उसके भीतर ही

543
00:37:44,960 --> 00:37:49,040
दो शक्तियां चलती हैं। एक शक्ति होती है रचनात्मक,

544
00:37:49,040 --> 00:37:54,400
एक होती है नकारात्मक। जब रचनात्मक शक्ति

545
00:37:54,400 --> 00:37:58,480
कम हो जाती है और नकारात्मक शक्तियां उभर जाती है

546
00:37:58,480 --> 00:38:02,640
तो उस समय एक आत्मा और बुद्धि बुद्धि ये कहती है कि ये

547
00:38:02,640 --> 00:38:06,800
गलत है बुद्धि ये कहती है कि ये सही है बुद्धि तोलती है

548
00:38:06,800 --> 00:38:10,880
तराजू की तरह तोलती है और उस समय जो निर्णय सही

549
00:38:10,880 --> 00:38:15,200
है बुद्धि का निर्णय जो सही है उस मार्ग पर चलना

550
00:38:15,200 --> 00:38:19,200
श्रेयस्कर कहलाता है वो श्रेय मार्ग

551
00:38:19,200 --> 00:38:22,080
है

552
00:38:22,080 --> 00:38:26,960
बुद्धि जो कहती है उस मार्ग पर चलना श्रेयस्कर कहलाता है वो धर्म है।

553
00:38:26,960 --> 00:38:32,000
बुद्धि जो कहेगी उस समय उस मार्ग पर चलना उस समय ये नहीं कि

554
00:38:32,000 --> 00:38:34,240
नकारात्मक सोच वाले मार्ग पे नहीं जाना।

555
00:38:34,240 --> 00:38:38,720
इसीलिए ये कहा है कि असतो मा सद्गमय

556
00:38:38,720 --> 00:38:42,720
हमें सत्य के मार्ग की ओर ले चलो। असत से

557
00:38:42,720 --> 00:38:47,040
और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। हम

558
00:38:47,040 --> 00:38:51,280
तो फिर ये तो कहा गया ना ज्ञान से अज्ञान को मिटाकर

559
00:38:51,280 --> 00:38:55,520
ज्ञान की ओर ले चलो। हमें सही मार्ग दिखा परमात्मा कि हम तेरे

560
00:38:55,520 --> 00:38:59,920
दिखाए हुए सही मार्ग पर चल सके। हम तो ये

561
00:38:59,920 --> 00:39:04,080
ये बुद्धि निर्णय करती है। बुद्धि निर्णय करती है और फिर वो आत्मा

562
00:39:04,080 --> 00:39:08,240
पर संस्कार भी बनते चले जाते हैं। निर्णय बुद्धि करती है अच्छा क्या

563
00:39:08,240 --> 00:39:11,920
और बुरा क्या? अच्छा आपने अभी एक बात बताई

564
00:39:11,920 --> 00:39:16,240
जी आपने अभी एक बात कही कि जो धारण किए जाए जिन गुणों को वही धर्म है जैसे

565
00:39:16,240 --> 00:39:21,520
कोई चोर है वो चोरी करने के गुण को धारण करता है तो चोरी करना धर्म है

566
00:39:21,520 --> 00:39:25,840
लेकिन उसे ये भी तो होता है ना कि मैं चोरी कर रहा हूं तो गलत कर रहा हूं हां

567
00:39:25,840 --> 00:39:30,160
तो ये गलत और सही ये जो गलत और सही है इसका इसका आधार

568
00:39:30,160 --> 00:39:34,560
क्या है क्या गलत है क्या ये निर्णय ही बुद्धि करवाती

569
00:39:34,560 --> 00:39:38,800
है बुद्धि करवाती है कि ये ठीक है या नहीं है कर्मी आप अपनी

570
00:39:38,800 --> 00:39:42,960
के ने के दूर जिन इनामया गए मशक्कत काल नानक ते उजले

571
00:39:42,960 --> 00:39:47,280
केती छुट्टी नाल दिवस रात जगत सुनिए

572
00:39:47,280 --> 00:39:51,520
दिवस रात दादा दाया खेला सगल जगत ये जगत जो है दिवस रात

573
00:39:51,520 --> 00:39:55,520
दिवस और रात यानी अंधेरे और उजाले के भीतर नकारात्मक और

574
00:39:55,520 --> 00:39:59,600
सकारात्मक विचारों के बीच में झूल रहा है कर रहा है निर्णय आपको

575
00:39:59,600 --> 00:40:03,600
करना है आपके हाथ में चाकू दे दिया है चाहे तो सेब काट ले सब्जी काट ले या

576
00:40:03,600 --> 00:40:08,960
किसी के पेट में घूप दे हम तो अब यहां से

577
00:40:08,960 --> 00:40:13,040
दो प्रश्न आते हैं। एक कि यह जो मेरी आवाज आ रही है, यह

578
00:40:13,040 --> 00:40:17,040
बुद्धि से नहीं आ रही है बल्कि मन से आ रही है। बुद्धि के अलावा

579
00:40:17,040 --> 00:40:21,120
मन है ना? तो बुद्धि से नहीं आ रही है। एक एक

580
00:40:21,120 --> 00:40:25,360
बुद्धि से नहीं आ रही है। मन से आ रही है। पहला सवाल ये निश्चित कैसे होगा? ये बुद्धि

581
00:40:25,360 --> 00:40:26,960
की आवाज सुननी है और मन की नहीं

582
00:40:26,960 --> 00:40:31,280
सुननी है। ये निश्चित कैसे होगा? भाई मेरे ही अंदर से दोनों आवाजें आ रही हैं।

583
00:40:31,280 --> 00:40:35,280
तो मेरे को कैसे पता चलेगा? जैसे कोई व्यक्ति है वो बिना कपड़ों के बाहर जाना चाहता

584
00:40:35,280 --> 00:40:39,360
है। है ना? कोई व्यक्ति है जो ऐसी स्त्री के साथ संबंध बनाना

585
00:40:39,360 --> 00:40:44,320
चाहता है जो उसके जिसके लिए वो अधिकारी योग्य नहीं है। अनाधिकृत रूप से व्यभचार

586
00:40:44,320 --> 00:40:48,320
तो ये जो आवाज आ रही है गलत करने वाली ये उसके मन

587
00:40:48,320 --> 00:40:52,960
मतलब बुद्धि से नहीं आ रही है बल्कि मन से आ रही है। ये निर्णय वो कैसे करेगा?

588
00:40:52,960 --> 00:40:56,960
पहली बात। दूसरी बात यदि वो दूसरी बात यदि वो कर

589
00:40:56,960 --> 00:41:00,960
भी लेगा तो इससे उसे फायदा क्या होगा? मैंने

590
00:41:00,960 --> 00:41:05,760
पूछा उपयोगिता क्या है? आवश्यकता क्या है धर्म की? दो बातें। जी

591
00:41:05,760 --> 00:41:09,760
हम ये जो दो आवाजें आ रही है ना आपने

592
00:41:09,760 --> 00:41:14,640
कहा हम ये एक ही स्थान से दो आवाजें आ रही है

593
00:41:14,640 --> 00:41:19,040
जब तक शरीर के भीतर आत्मा है तभी तक तो आवाज आएगी

594
00:41:19,040 --> 00:41:23,280
नहीं तो क्या होगा शरीर के सारे अंग पांच कर्मेंद्रियां

595
00:41:23,280 --> 00:41:27,280
पांच ज्ञानेंद्रियां यू के यू जमीन पर पड़ी हुई होंगी आंखें भी होंगी

596
00:41:27,280 --> 00:41:31,360
नाक भी होगा भी होंगे कान भी होंगे त्वचा भी

597
00:41:31,360 --> 00:41:35,360
होगी सारे के सारे अंग होंगे और अगर इसमें से आत्मा

598
00:41:35,360 --> 00:41:39,360
यानी रथी जो चला रहा है इस शरीर को रथी निकल गया तो कह

599
00:41:39,360 --> 00:41:42,000
दिया जाएगा यह अरथी हो गई या

600
00:41:42,000 --> 00:41:46,000
कह दिया जाएगा निधन हो गया ऐसा कहां इतना लंबा जा रहे हैं मैंने

601
00:41:46,000 --> 00:41:50,080
आपसे पूछा है कि मन और बुद्धि में अंतर कैसे करें कि ये आवाज मेरी बुद्धि की

602
00:41:50,080 --> 00:41:54,320
आवाज नहीं है ये अंतर कैसे करें और दूसरी बात की यदि अंतर

603
00:41:54,320 --> 00:41:58,720
कर भी लिया तो इससे मुझे फायदा क्या होगा स्वयं के स्वयं के भीतर ये आवाज

604
00:41:58,720 --> 00:42:02,880
उठती है स्वयं के भीतर ये आवाज उठती है ये गलत है लेकिन क्या होता है कि

605
00:42:02,880 --> 00:42:06,960
उसे उसे दबा दिया जाता है। मन दबा लेता है। नहीं कोई बात नहीं चल बाद में देख लेंगे। कोई बात नहीं चल

606
00:42:06,960 --> 00:42:11,120
बाद में देख लेंगे फिर कर लेंगे। और जैसे जैसे [हंसी] स्वयं के भीतर

607
00:42:11,120 --> 00:42:15,200
से ही आवाजों को इसीलिए तो हम जब स्वयं के भीतर

608
00:42:15,200 --> 00:42:19,520
से ही जब दबा सकते हैं तो हमें कोई बाह्य बल चाहिए ना निश्चित

609
00:42:19,520 --> 00:42:23,680
करने के लिए क्या सही है क्या गलत है इसीलिए भगवान ने कहा तेरे लिए कर्तव कर्तव्य के विषय

610
00:42:23,680 --> 00:42:27,840
में शास्त्र प्रमाण है तो बुद्धि के ऊपर डिपेंड इसलिए नहीं हो सकते

611
00:42:27,840 --> 00:42:31,840
कि वहां हम निर्णय नहीं कर पाएंगे कि कौन सी आवाज बुद्धि से कौन सी मन से जैसे

612
00:42:31,840 --> 00:42:36,080
निठारी वालों को निठारी हत्याकांड में बच्चों का मांस कुकर में उबाल

613
00:42:36,080 --> 00:42:40,080
के खाना ही धर्म लग रहा है वहां उनकी बुद्धि से आवाज आ रही होगी।

614
00:42:40,080 --> 00:42:44,160
उन्होंने दबा दी। उन्होंने सोचा जो मना कर रहा है वो गलत है और जो कह रहा है खा ले वो

615
00:42:44,160 --> 00:42:48,160
सही है। उन्होंने आवाज दबा दी ना लेकिन आवाज

616
00:42:48,160 --> 00:42:52,560
तो आई थी। ये हम सिद्ध कैसे करेंगे?

617
00:42:52,560 --> 00:42:56,560
ये हम सिद्ध कैसे करेंगे? उनके अंदर

618
00:42:56,560 --> 00:42:57,060
ज्ञान

619
00:42:57,040 --> 00:43:01,360
और अभ्यास की कमी थी। क्या

620
00:43:01,360 --> 00:43:05,600
हम सामने वाले को यह सिद्ध कैसे करेंगे कि यह जो आवाज

621
00:43:05,600 --> 00:43:09,600
आ रही है तुम्हारे अंदर से गलत आवाज है। तुम गलत डायरेक्शन में

622
00:43:09,600 --> 00:43:13,600
जा रहे हो। सिद्ध कैसे करेंगे उसको? हम बाहर से सिद्ध नहीं कर सकते।

623
00:43:13,600 --> 00:43:17,680
उसके भीतर ही आवाज आती है और वही वही हो रहा है। इसका मतलब उससे ये नहीं कह सकते

624
00:43:17,680 --> 00:43:22,800
निठारी वाले से कि तुम अधर्म कर रहे हो।

625
00:43:22,800 --> 00:43:26,880
आप कहे उससे अधर्म कर रहे हो। कह सकते हैं? बिल्कुल कह सकते हैं लेकिन

626
00:43:26,880 --> 00:43:30,960
उसके भीतर की आवाज भी तो आती है ना उसके अंदर से और उसके लिए

627
00:43:30,960 --> 00:43:34,960
सत्संग की आवश्यकता होती है। उसके लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है।

628
00:43:34,960 --> 00:43:38,960
क्योंकि अगर किसी को सुधार कैसे होगा वो एक अलग बात है।

629
00:43:38,960 --> 00:43:43,120
सुधार कैसे होगा अलग बात है। मैं पूछ रहा हूं कि जो व्यक्ति

630
00:43:43,120 --> 00:43:47,520
एक नॉर्मल खड़ा हुआ है उसके अंदर दोनों तरह की आवाजें हैं। तो उसमें से किस आवाज

631
00:43:47,520 --> 00:43:52,320
किस उसमें से जो सकारात्मकता वाली आवाज है उसको सुनना है और नकारात्मकता

632
00:43:52,320 --> 00:43:56,320
वाली आवाज है उसको नहीं सुनना है। उसको हम किस आधार पर सिद्ध करवाएंगे कि

633
00:43:56,320 --> 00:44:00,480
ये नकारात्मक है। इसको नहीं सुनना है। ये सकारात्मक है। इसको सुनना है। मेरे मेरा कहना है

634
00:44:00,480 --> 00:44:04,640
कि उसको शास्त्र दिए जाएंगे। भाई शास्त्र में लिखा है बहन के साथ विवाह

635
00:44:04,640 --> 00:44:09,520
नहीं करना है तो नहीं करना है। ये वाली दूसरी आवाज को दबा दो।

636
00:44:09,520 --> 00:44:12,080
ठीक है। कह रहे हैं कि अंदर से ही अंदर से ही

637
00:44:12,080 --> 00:44:17,360
निर्णय होगा। तो अंदर से निर्णय लेने के नाम पे तो व्यक्ति कुछ भी करता रहेगा।

638
00:44:17,360 --> 00:44:21,440
केवल शास्त्र देने से काम चलेगा या शास्त्र पढ़ने के बाद उस पर अमल करने से उसका

639
00:44:21,440 --> 00:44:25,520
अभ्यास करने से काम चलेगा? अरे वो तो आगे की बात है ना भाई साहब आप

640
00:44:25,520 --> 00:44:29,680
दूसरे डायरेक्शन में क्यों जा रहे उस व्यक्ति ने निठारी कांड

641
00:44:29,680 --> 00:44:34,320
वाले व्यक्ति ने अभ्यास नहीं किया उसने शास्त्रों को नहीं जाना

642
00:44:34,320 --> 00:44:38,720
बार बार अगर शास्त्रों को जाना होता पढ़ा होता गुणा होता सत्संग

643
00:44:38,720 --> 00:44:42,960
किया होता तो ये नौबत ही नहीं आती हां शास्त्र से मतलब शास्त्र

644
00:44:42,960 --> 00:44:47,120
से तय होगा क्या गलत है क्या सही मैं ये कहना चाह रहा हूं अब मुझे ये बता दीजिए

645
00:44:47,120 --> 00:44:51,120
इसका फायदा के ज्ञान से शास्त्र एक माध्यम है शास्त्र के ज्ञान

646
00:44:51,120 --> 00:44:55,200
से अरे ऐसे तो भाई साहब बातों के लक्ष्य बनाने तो मैं भी कह दू शास्त्र

647
00:44:55,200 --> 00:44:59,360
के ज्ञान से नहीं ईश्वर प्राप्ति से प्राप्त होगा

648
00:44:59,360 --> 00:45:04,240
और बोलो ईश्वर की शरण में जाने से प्राप्त होगा और बोलो ऐसे बातों के लक्ष्य नहीं बनाने

649
00:45:04,240 --> 00:45:08,240
ईश्वर की शरण में वही तो जाएगा जिस व्यक्ति ने

650
00:45:08,240 --> 00:45:12,400
उस सकारात्मक ज्ञान को समझ लिया और अपने जीवन के ढाल लिया इसी तरीके से

651
00:45:12,400 --> 00:45:16,400
सकारात्मक ज्ञान वही तो प्राप्त करेगा जो शास्त्र के अधीन हो जाएगा

652
00:45:16,400 --> 00:45:20,960
बातों के लक्ष्य क्यों बनाने हैं वही बात मैं कह रहा हूं

653
00:45:20,960 --> 00:45:24,960
आपको लगता है लक्ष्य तो ठीक है लेकिन हमने जो अपनी बात कहनी थी वो कह दीजिए।

654
00:45:24,960 --> 00:45:27,200
अच्छा ठीक है। अभी मुझे बताइए

655
00:45:27,200 --> 00:45:33,200
सही गलत का चुनाव करने का फायदा क्या है? क्यों किया जाए?

656
00:45:34,480 --> 00:45:39,840
क्योंकि इससे एक आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।

657
00:45:39,840 --> 00:45:43,920
आत्मिक शांति की अनुभूति का पहला जो

658
00:45:43,920 --> 00:45:48,640
तरीका है जो मैंने अनुभव किया है कि रात को कोई सपना नहीं आता।

659
00:45:48,640 --> 00:45:53,200
मन में विचार नहीं चलते फालतू के। व्यक्ति

660
00:45:53,200 --> 00:45:57,600
के विचार जो होते हैं बड़ी मुश्किल से चार ही रह जाते हैं। 40

661
00:45:57,600 --> 00:46:01,760
नहीं चलते सिर्फ चार रह जाते हैं। और कई

662
00:46:01,760 --> 00:46:06,000
लोग तो ऐसे होते हैं जो विचारों से शून्य हो जाते हैं।

663
00:46:06,000 --> 00:46:10,160
उन्होंने भी ग्रंथ पढ़े। उससे ज्ञान लिया। ज्ञान को अपने

664
00:46:10,160 --> 00:46:14,560
जीवन में ढाला, सकारात्मक चिंतन किया और उसके बाद वो सकारात्मक

665
00:46:14,560 --> 00:46:18,640
चिंतन से भी परे निकल गए और मस्तिष्क में बिल्कुल कोई विचार नहीं रहा। विचार

666
00:46:18,640 --> 00:46:22,880
शून्य हो जाना। यह परिस्थिति जब आ जाती है तो समझिए पार

667
00:46:22,880 --> 00:46:24,400
हो गए।

668
00:46:24,400 --> 00:46:28,720
अच्छा तो इसका अर्थ है कि यह जो ज्ञान

669
00:46:28,720 --> 00:46:32,800
विज्ञान है इसका सब कुछ जो लय है वो है परम कल्याण

670
00:46:32,800 --> 00:46:36,480
यानी कि मोक्ष में।

671
00:46:36,480 --> 00:46:41,200
जी जब उसको किसी भी

672
00:46:41,200 --> 00:46:45,440
जब उसके पास किसी भी प्रकार का अभाव ना रह जाए। अभाव रहित

673
00:46:45,440 --> 00:46:49,600
हो जाए। उसे किसी चीज की इच्छा ही ना रह जाए कि मुझे यह

674
00:46:49,600 --> 00:46:53,760
पाना है। जो परमात्मा ने दिया है जो ईश्वर ने दिया है काफी है। हे प्रभु

675
00:46:53,760 --> 00:46:57,840
तेरा शुक्रिया। हम तूने जो दिया है हम

676
00:46:57,840 --> 00:47:02,240
तेरे संतान है। तूने पहले बहुत कुछ दिया है हमें और इतना कुछ दे रखा है उसने।

677
00:47:02,240 --> 00:47:06,240
देखिए मैं छोटी सी अगर आप एक मिनट दे तो मैं आपसे अपनी

678
00:47:06,240 --> 00:47:10,240
बात पूरी कर लूं। ईश्वर ने हमें यानी वो परमपिता

679
00:47:10,240 --> 00:47:14,560
जिसे हम कहते हैं उस परमपिता ने परमात्मा शिव और माता पार्वती ने

680
00:47:14,560 --> 00:47:18,640
हमें ये पृथ्वी दी है। ठीक है? पृथ्वी में उसने जो पेड़

681
00:47:18,640 --> 00:47:23,280
दिए हैं अगर उनको पत्थर भी मारे तो वो भी क्या करते हैं? हमें फल देते हैं।

682
00:47:23,280 --> 00:47:27,520
सूर्य कभी भी ये नहीं देखता कि मैं मुसलमान के यहां चमकूं

683
00:47:27,520 --> 00:47:32,000
या हिंदू के यहां चमकूं या उसके यहां ना चमकू उसके यहां ना चमकूं।

684
00:47:32,000 --> 00:47:36,160
हो सकता है कि हम लोग आपस में बांट ले। हम लोग बांट ले कि ठीक है

685
00:47:36,160 --> 00:47:39,600
ईद पर तेरा चंद्रमा है और करवा चौथ पर मेरा चंद्रमा है हम बांट

686
00:47:39,600 --> 00:47:43,600
सकते हैं लेकिन चंद्रमा को तो मालूम ही नहीं है इसी तरह से जो हवाएं चलती है मुझे

687
00:47:43,600 --> 00:47:47,600
छूकर किसी दूसरे के पास चली जाती है फिर तीसरे के पास चली जाती है तो कोई

688
00:47:47,600 --> 00:47:51,680
धर्म भ्रष्ट किसी का नहीं होता यहां ये धर्म नहीं है धर्म भ्रष्ट होता ही नहीं किसी का

689
00:47:51,680 --> 00:47:56,080
इसी तरह से पृथ्वी रात भर अन्न उगाती रहती है उसको

690
00:47:56,080 --> 00:48:00,080
पानी दो बीज को और बीजों को भी पता है कि उगना है और परमात्मा ने तो

691
00:48:00,080 --> 00:48:04,400
यहां तक कर रखा है कि सबसे ऊपर गेहूं की बाली लगती है उससे नीचे से पहले भूसा

692
00:48:04,400 --> 00:48:08,480
लग जाता है। जानवरों के लिए भी उसने बंदोबस्त कर रखा है। तो ये जो परमात्मा का जब

693
00:48:08,480 --> 00:48:12,640
किसी से भेदभाव नहीं करता है। हम मनुष्य क्यों भेदभाव

694
00:48:12,640 --> 00:48:16,880
करें? सबसे बड़ा एक मैं मेरा सवाल

695
00:48:16,880 --> 00:48:21,280
कुछ है। आप थोड़ा सा ट्रैक उसमें खो जाते हैं। आप मैं पूछ रहा हूं

696
00:48:21,280 --> 00:48:25,360
कि जब हम ये फॉलो करेंगे कि ये

697
00:48:25,360 --> 00:48:29,440
करना है और ये नहीं करना है। अंत में सबसे महत्वपूर्ण चीज हमें जो मिलने वाली

698
00:48:29,440 --> 00:48:33,760
है वो है मोक्ष। ठीक है? यही है ना? तो

699
00:48:33,760 --> 00:48:37,840
हां यही हम कहना चाह रहे हैं। फिर वो जो स्मृति आ जाती है व्यक्ति की जो स्मृति आ जाती

700
00:48:37,840 --> 00:48:41,920
है मोक्ष यानी कि जब मेरे को

701
00:48:41,920 --> 00:48:46,240
कुछ भी और प्राप्त करना शेष ना रह जाए जैसे कि गीता में लिखा हुआ है।

702
00:48:46,240 --> 00:48:50,960
है ना? हां बिल्कुल बिल्कुल हां तो यानी कि जो

703
00:48:50,960 --> 00:48:54,800
मोक्ष है मोक्ष है उसको अगर हम लोग थोड़ी सी शास्त्रीय

704
00:48:54,800 --> 00:48:59,840
भाषा में कहे तो सच्चितानंद की प्राप्ति ही मोक्ष है।

705
00:48:59,840 --> 00:49:04,640
बिल्कुल है ना? वो सच्चिदानंद की प्राप्ति

706
00:49:04,640 --> 00:49:08,720
एक मिनट सच्चिदानंद की प्राप्ति सतित

707
00:49:08,720 --> 00:49:12,880
आनंद की प्राप्ति यानी कि अनंत अबाध्य स्वरूप से

708
00:49:12,880 --> 00:49:17,120
स्थित और आनंद में मग्न जी

709
00:49:17,120 --> 00:49:22,000
है ना बिल्कुल अब बात ये आती है

710
00:49:22,000 --> 00:49:26,240
ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी वाले ये कहते हैं कि

711
00:49:26,240 --> 00:49:30,960
इस्लाम भी धर्म है ठीक है

712
00:49:30,960 --> 00:49:34,960
हां हां बोलिए तो क्या यानी कि कुरान

713
00:49:34,960 --> 00:49:39,200
में बताया गया जो ज्ञान विज्ञान है वो भी धर्म है। हां

714
00:49:39,200 --> 00:49:43,200
जी। ठीक है। पहली बात तो ये है कि इस्लाम कोई धर्म ही नहीं

715
00:49:43,200 --> 00:49:48,320
है। इस्लाम धर्म नहीं है। नहीं है।

716
00:49:48,320 --> 00:49:50,640
इस्लाम

717
00:49:50,640 --> 00:49:54,640
इस्लाम धर्म नहीं है। और बाइबल ईसाई वो

718
00:49:54,640 --> 00:49:58,720
भी कोई धर्म नहीं है। हां। ठीक है। तो यानी ब्रह्मा कुमारी

719
00:49:58,720 --> 00:50:02,800
जो ये क्लेम कर रही है कि इस्लाम धर्म है और बाइबल धर्म है ये गलत कर

720
00:50:02,800 --> 00:50:06,960
रही है। उन्होंने कहीं क्लेम नहीं किया है। हमसे विदियों

721
00:50:06,960 --> 00:50:09,920
की बात हो रही है। मैं आपको वीडियो दिखा दूं?

722
00:50:09,920 --> 00:50:11,920
वीडियो दिखा दूं आपको।

723
00:50:11,920 --> 00:50:16,000
हां दिखा दीजिएगा। ऐसा कुछ नहीं है। एक एक

724
00:50:16,000 --> 00:50:20,080
चीज करेंगे। हां मैं वीडियो दिखाता हूं आपको। ऑपरेटर हम लोग अभी

725
00:50:20,080 --> 00:50:24,320
आगे बात कर रहे हैं। ऑपरेटर है नहीं।

726
00:50:24,320 --> 00:50:28,160
कोई बात नहीं। फिर दिखा दीजिए। ठीक है?

727
00:50:28,160 --> 00:50:32,320
तो अगर अगर ब्रह्मा कुमारी वाले ये कह रहे हैं कि

728
00:50:32,320 --> 00:50:36,560
इस्लाम भी धर्म है और ये ईसाई

729
00:50:36,560 --> 00:50:40,640
भी धर्म है तो इतने अंश में आप फिर समर्थक नहीं है ना ब्रह्मा

730
00:50:40,640 --> 00:50:45,040
कुमारी के।

731
00:50:45,040 --> 00:50:49,280
किस बात का समर्थक नहीं हूं। अरे भाई समर्थक

732
00:50:49,280 --> 00:50:53,680
नहीं हूं मैं। ठीक है। अगर कोई सुनिए अगर कोई

733
00:50:53,680 --> 00:50:57,760
अगर कोई खुद को प्रामाणिक कह रहा है कि मैं प्रामाणिक हूं और

734
00:50:57,760 --> 00:51:01,920
उसमें एक रत्ती भर भी हमें ये लग रहा है कि ये झूठ बोल रहा है यहां पे गलत बोल रहा है

735
00:51:01,920 --> 00:51:06,960
तो उसकी अप्रामाणिक वो प्रामाणिकता तो भंग हो गई ना वहां।

736
00:51:06,960 --> 00:51:10,960
तो उनसे बात की जा सकती है इस बारे में। देखिए बौद्ध कोई धर्म

737
00:51:10,960 --> 00:51:14,960
है। तो जब तक बात नहीं होती तो जब तक बात

738
00:51:14,960 --> 00:51:19,520
नहीं होती तब तक तो आप प्रामाणिक ही कहलाएंगे ना।

739
00:51:19,520 --> 00:51:23,520
अब अब अब हम आपको बताते हैं कि हम है संत व्यक्ति। हम जहां भी

740
00:51:23,520 --> 00:51:27,680
जाते हैं वहां देखते हैं कि गुण ले लेते हैं। अवगुण छोड़ देते हैं। हमें अवगुणों

741
00:51:27,680 --> 00:51:32,640
से कोई मतलब ही नहीं। भाई साहब जब

742
00:51:32,640 --> 00:51:35,040
आप

743
00:51:35,040 --> 00:51:39,120
ये आप तब कह पा रहे हैं ना जब फोर्स लगी हुई है सरहदों पे। आपकी

744
00:51:39,120 --> 00:51:43,200
कोई रक्षा कर रहा है खाकी वर्दी पहन के डंडा लेकर के। तब आप कह रहे हैं हमें कोई मतलब

745
00:51:43,200 --> 00:51:47,200
नहीं है। अभी आपको डकैती करने आपके आसपास कोई आएगा। आपको जान से मारने

746
00:51:47,200 --> 00:51:51,280
आएगा। आपको नहीं आपके परिजनों को मारने आएगा आपके प्रियजनों को मारने आएगा या

747
00:51:51,280 --> 00:51:55,440
कहीं पर भी कुछ आएगा तब आपको लगेगा नहीं इसको रोकना जरूरी इसके गुण नहीं लेने इसको

748
00:51:55,440 --> 00:51:59,840
रोकना है एट द टाइम हां तो उस समय रोका जाएगा ना परिस्थिति

749
00:51:59,840 --> 00:52:03,920
तो अपने आसपास जब गलत हो तो वहां पर रोकना पड़ता है ये नहीं

750
00:52:03,920 --> 00:52:07,920
कि उसके गुण ले ले अगर किसी के घर में अगर जैसे कोई कहे कि भाई दुनिया

751
00:52:07,920 --> 00:52:13,920
भर में वैश्यावत्त हो रही है तो हमें कोई मतलब नहीं है हम तो उसके गुण लेंगे

752
00:52:14,000 --> 00:52:16,160
जब

753
00:52:16,160 --> 00:52:20,560
ब्रह्मा कुमारी वाले किसी पे आक्रामक नहीं हो रहे हैं। किसी पे हमला भी नहीं कर रहे हैं। वो

754
00:52:20,560 --> 00:52:24,960
वैचारिक तौर पर आक्रामक हो रहे हैं ना। वैचारिक तौर पर हिंदुओं को दिशाहीन

755
00:52:24,960 --> 00:52:28,960
बना रहे हैं ना। उन्होंने तो कभी नहीं कहा कि दिशाहीन हो जाओ। कभी

756
00:52:28,960 --> 00:52:32,960
नहीं कहा उन्होंने। अरे भाई जब वो ये क्लेम कर रहे हैं। आप कह रहे हो कि इस्लाम और ईसाइयत

757
00:52:32,960 --> 00:52:36,960
धर्म नहीं है और वो कह रहे हैं कि धर्म है।

758
00:52:36,960 --> 00:52:40,960
तो इतने मुझे मानना पड़ेगा ना कि दिशाहीन कर रहे हैं। मुझे

759
00:52:40,960 --> 00:52:45,040
देखिए जो मेरा अपना अनुभव है मुझे नहीं लगा कि अभी उन्होंने इस तरह की कोई बात हमसे की

760
00:52:45,040 --> 00:52:49,120
हो। तो आपको पता करना चाहिए था वीडियो दिखा दूंगा आपको

761
00:52:49,120 --> 00:52:54,400
मैं दिखा दूंगा

762
00:52:54,400 --> 00:52:58,400
आपको फिर समर्थन तब करना चाहिए ना ब्रह्मा कुमारी का जब आप पता कर लो मैं

763
00:52:58,400 --> 00:53:02,400
आपको 10 वीडियो दिखा दूंगा उनके टॉप लीडर्स के द्वारा क्लेम किया जा रहा है कि इस्लाम और

764
00:53:02,400 --> 00:53:06,560
ईसाइयत भी धर्म है हमें क्या पड़ी है उनका विरोध करने की यदि वो इस तरह की बातें

765
00:53:06,560 --> 00:53:09,840
ना करें तो

766
00:53:09,840 --> 00:53:15,360
मेरी बात को थोड़ा ध्यान से समझने की कोशिश कीजिए कि

767
00:53:15,360 --> 00:53:19,520
जो भी धर्म है जो भी धर्म है धर्म

768
00:53:19,520 --> 00:53:24,240
तो एक है सनातन पर ब्रह्मा कुमारी सनातन धर्म को ही मानती है

769
00:53:24,240 --> 00:53:28,720
वो मैं अभी उस पे भी आ रहा हूं मैं ब्रह्मा कुमारी की अपनी फिलोसफी

770
00:53:28,720 --> 00:53:33,040
पे भी आ रहा हूं पर पहले इस्लाम वाली बात क्लियर कर लूं इस्लाम और ईसाईयत

771
00:53:33,040 --> 00:53:37,280
धर्म नहीं है वो लोग ये क्लेम कर रहे हैं मैं 10 वीडियो आपको दिखा दूंगा अब आप मुझे वचन

772
00:53:37,280 --> 00:53:41,280
दे दीजिए आप नहीं मानते कि वो ऐसा क्लेम कर रही है और पता लगा तो आप क्षमा

773
00:53:41,280 --> 00:53:45,520
मांगेंगे सार्वजनिक रूप से कि मैंने ब्रह्मा कुमारी का समर्थन किया

774
00:53:45,520 --> 00:53:50,080
हमने हमने इस बात का समर्थन नहीं किया है। हमने ब्रह्मा कुमारी के गुणों का

775
00:53:50,080 --> 00:53:54,240
भाई साहब जब हम किसी को यह कह रहे हैं ये जो थाली है झूठी नहीं है।

776
00:53:54,240 --> 00:54:00,240
उसमें एक और भी झूठा डाल दिया जाएगा तो थाली झूठी हो गई।

777
00:54:01,120 --> 00:54:05,280
या तो हमने केवल ब्रह्मा कुमारी की उन बातों का समर्थन किया है जो जो ठीक

778
00:54:05,280 --> 00:54:09,520
है सभी बातों का नहीं किया है ये कह दो आप झूठी थाली

779
00:54:09,520 --> 00:54:14,640
और एक मानव की मानवता में बहुत फर्क होता है इंसान में बहुत फर्क होता है

780
00:54:14,640 --> 00:54:18,800
भाई साहब जब हम किसी से आध्यात्म का विषय लेने जाते हैं

781
00:54:18,800 --> 00:54:22,880
ठीक है अध्यात्म के विषय में हम ज्ञान लेने जाते हैं तो जिससे हम लेने जा रहे

782
00:54:22,880 --> 00:54:27,120
हैं उसको झूठ बोलने वाला गलत बोलने वाला नहीं होना चाहिए

783
00:54:27,120 --> 00:54:32,960
जितना पता है उतना बोले कम से कम झूठ तो ना बोले

784
00:54:32,960 --> 00:54:37,040
आप अपनी जगह पे आप ही ने आप ही ने क्लेम कर दिया तो मैं आप ही पे सवाल कर

785
00:54:37,040 --> 00:54:41,040
रहा हूं आपने पता ही नहीं किया कि ब्रह्मा कुमारी ये क्लेम करती है और आप उनका समर्थन लेते फिर

786
00:54:41,040 --> 00:54:45,200
रहे हैं ये तो गलत बात है आप पता करिए ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी

787
00:54:45,200 --> 00:54:49,600
के आपने पोस्टर देखे हैं कभी ब्रह्मा कुमारी के आपने पोस्टर देखे हैं कभी

788
00:54:49,600 --> 00:54:53,680
देखे हैं देखे हैं देखे उसमें वो ईसा नहीं होते हैं उसमें

789
00:54:53,680 --> 00:54:57,680
मोहम्मद नहीं होते हैं हां होते हैं हां तो

790
00:54:57,680 --> 00:55:02,480
क्या क्या दिखाना चाह रहे हैं उस

791
00:55:02,480 --> 00:55:06,560
वो महापुरुष है महापुरुष फोटो लगाए हुए हैं उन्होंने यानी कि

792
00:55:06,560 --> 00:55:10,560
मोहम्मद आपके हिसाब से मोहम्मद जी भी आदर्श है ना महापुरुष

793
00:55:10,560 --> 00:55:13,440
आदर्श हो गए

794
00:55:13,440 --> 00:55:17,600
तो वो उन्होंने फोटो लगा रखे हैं ठीक है वो उनका

795
00:55:17,600 --> 00:55:21,760
महापुरुष आदर्श होते हैं कि नहीं भगवत गीता का वो ध्यान है कि नहीं आपको मनुष्य

796
00:55:21,760 --> 00:55:26,400
हमेशा श्रेष्ठ को फॉलो करता है आपने अभी मोहम्मद जी को महापुरुष कहा है

797
00:55:26,400 --> 00:55:30,480
मोहम्मद को महापुरुष कहा ना आपने ये तो फिर भविष्य पुराण खोल के देखेंगे

798
00:55:30,480 --> 00:55:34,560
उसमें भी मोहम्मद का नाम आया है तो क्या उसमें से भी उड़ा देंगे काट देंगे आप भाई

799
00:55:34,560 --> 00:55:38,880
साहब मैंने तो उसका नाम उसका नाम इस बात में आया है कि वो जो आदर्श

800
00:55:38,880 --> 00:55:43,600
है वहां तो हमारे आदर्शों के साथ चित्रण कर रहे हैं ना उनका

801
00:55:43,600 --> 00:55:47,840
उसमें उसमें उसमें ये दिया है कि ये भी पर पृथ्वी पर अवतार लेंगे

802
00:55:47,840 --> 00:55:48,340
भविष्य

803
00:55:48,320 --> 00:55:52,400
पुराण में लिखा है महाम के रूप में उनके वो आने के बारे

804
00:55:52,400 --> 00:55:52,900
में

805
00:55:52,640 --> 00:55:56,720
है और महामहिन आने के बारे मोहम्मद मोहम्मद होता है।

806
00:55:56,720 --> 00:56:01,760
ये कैसे सिद्ध होगा? तो ये भी तो लिखा है कि रेगिस्तान में वो आएगा।

807
00:56:01,760 --> 00:56:05,760
ये भी तो लिखा है कि लिंगो छेदन होगा। तो

808
00:56:05,760 --> 00:56:09,840
वो अपना नया धर्म चलाएगा। ये लिखा है कि चलाएगा। क्या

809
00:56:09,840 --> 00:56:13,840
उसको लिखा है? वहां लिखा है कि नया धर्म चलाएगा

810
00:56:13,840 --> 00:56:17,920
अपना आके। मैंने क्या पूछा? महापुरुष लिखा है। सवाल ये

811
00:56:17,920 --> 00:56:19,200
है। हम कहते

812
00:56:19,200 --> 00:56:23,280
हैं कि ये हो सकता है कि महापुरुषों के फोटो उन्होंने लगा रखे है। ठीक है। लगा दिए। उनके

813
00:56:23,280 --> 00:56:27,440
लिए महापुरुष है। आप मोहम्मद को आप मोहम्मद को महापुरुष मानते हैं कि नहीं मानते?

814
00:56:27,440 --> 00:56:31,520
मैं आपसे पूछ रहा हूं। हम मोहम्मद को ना महापुरुष

815
00:56:31,520 --> 00:56:35,600
मानते हैं ना ही उसको ये ठीक है कि वो मोहम्मद कौन था

816
00:56:35,600 --> 00:56:39,600
क्या नहीं था। हमें नहीं मालूम ना हम जानना चाहते हैं। हमें अपने से मतलब

817
00:56:39,600 --> 00:56:43,600
है कि हम क्या है? भाई साहब अभी बात ये चल रही है।

818
00:56:43,600 --> 00:56:48,320
आपने उसको महापुरुष बोला है थोड़ी देर पहले। नहीं बोला है

819
00:56:48,320 --> 00:56:52,320
हमने कहा कि उन्होंने महापुरुषों के चित्र हमने कहा कि उन्होंने

820
00:56:52,320 --> 00:56:56,640
उन महापुरुषों के चित्र लगा रखे हैं ठीक है ना आपने पोस्टर की बात की

821
00:56:56,640 --> 00:57:02,640
महापुरुष है आपने ये कहा चित्र लगा रखे हैं नहीं कहा है

822
00:57:04,000 --> 00:57:08,080
भाई उन्होंने बुद्ध का भी चित्र लगा रखा है उन्होंने गुरु नानक का भी चित्र लगा रखा

823
00:57:08,080 --> 00:57:12,160
है तो क्या ये महापुरुष नहीं थे जितने अंश

824
00:57:12,160 --> 00:57:16,160
में वो सनातन के विरुद्ध नहीं है उतने अंश में थे और और जितने अंश

825
00:57:16,160 --> 00:57:20,160
में सनातन के विरुद्ध है उतने अंश में नहीं थे। और

826
00:57:20,160 --> 00:57:24,320
ये जो मोहम्मद जी हैं ये तो एब्सोल्यूट विरोधी हैं वैदिक

827
00:57:24,320 --> 00:57:28,400
धर्म के।

828
00:57:28,400 --> 00:57:32,640
कौन वैदिक धर्म के विरोधी हैं? मोहम्मद। कौन

829
00:57:32,640 --> 00:57:38,640
विरोधी हैं? मोहम्मद। हां।

830
00:57:40,480 --> 00:57:44,480
मोहम्मद ने अपना एक धर्म चलाया। हर आदमी एक

831
00:57:44,480 --> 00:57:48,560
अपने अपने पीछे लोग चला लोग चल पड़ते हैं। किसी के पीछे भी चल पड़ते हैं।

832
00:57:48,560 --> 00:57:52,560
तो वो लोग जैसे उसके पीछे इतिहास नहीं जानना चाह रहा हूं।

833
00:57:52,560 --> 00:57:56,800
मैं मोहम्मद का इतिहास नहीं जानना चाह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं आप उसे उन्हें

834
00:57:56,800 --> 00:58:02,080
महापुरुष मानते हैं कि नहीं मानते? बस ये बताइए।

835
00:58:02,080 --> 00:58:06,240
कुछ बातें कुरान में अच्छी लिखी है तो हम अच्छी मानते हैं जो नहीं ठीक लगती हमें नहीं मानते।

836
00:58:06,240 --> 00:58:10,560
आगे बोलिए। मोहम्मद महापुरुष है कि नहीं ये पूछा है मैंने।

837
00:58:10,560 --> 00:58:14,560
हां मैं बताता हूं। अब सूर अल फातिहा पहली सूर जो है

838
00:58:14,560 --> 00:58:18,800
वो वो बिल्कुल अपने गायत्री मंत्र मैं पूछ रहा हूं कंक्लूजन

839
00:58:18,800 --> 00:58:23,120
क्या है महापुरुष है कि नहीं है कंक्लूजन ये है कि

840
00:58:23,120 --> 00:58:27,200
कुरान में भी मिक्सचर हो गया कुरान में भी मिक्सचर हो गया वरना कुरान

841
00:58:27,200 --> 00:58:31,360
में भी बहुत सारी अच्छी-अच्छी बातें भी तो लिखी है तो बोलो ना कि महापुरुष है फिर उनकी लिखी

842
00:58:31,360 --> 00:58:36,160
किताब में मिक्सचर हो गया है ये बोलो ना मिक्सचर हो गया

843
00:58:36,160 --> 00:58:40,320
ऐसा मान ले किताबों में मिक्सचर हो गया है हमारे में भी मिक्स्

844
00:58:40,320 --> 00:58:44,400
हुआ है महापुरुष है ठीक है। अच्छा

845
00:58:44,400 --> 00:58:49,360
है तो इसका मतलब उन्होंने जो धर्म दिया था वो सनातन ही था।

846
00:58:49,360 --> 00:58:53,440
वो पहले सारे सनातनी ही थे। नहीं वहां मोहम्मद ने

847
00:58:53,440 --> 00:58:55,600
जो बताया वो सनातन था। ये

848
00:58:55,600 --> 00:58:59,600
तो मानना महापुरुष मान रहे हो टोटल महापुरुष तो मानना ही पड़ेगा। सनातन था।

849
00:58:59,600 --> 00:59:04,000
तो मोहम्मद ने मोहम्मद ने भी जो कुछ लिया है वो भी वेदों

850
00:59:04,000 --> 00:59:08,000
से ही लिया है क्योंकि कह रहा हूं मैं कह रहा हूं

851
00:59:08,000 --> 00:59:12,080
भाई साहब कि मोहम्मद ने सनातन ही बताया था ना टोटल

852
00:59:12,080 --> 00:59:16,240
बाद में मिक्सचर हो गया उनके नाम पे मिक्सचर हो गया हां ठीक है तो यानी

853
00:59:16,240 --> 00:59:20,240
वो सनातन ही था

854
00:59:20,240 --> 00:59:24,400
वहां का रहने वाला वहां का रहने वाला पहले जब उसके

855
00:59:24,400 --> 00:59:28,640
परिवार के लोग सारे के सारे पुजारी थे तो पुजारी आखिरकार तो सनातनी

856
00:59:28,640 --> 00:59:32,640
थे या नहीं थे। भाई साहब मैं कह रहा हूं कि मोहम्मद ने जो दिया विरोध

857
00:59:32,640 --> 00:59:36,800
पूर्वक 300 मूर्तियों को तोड़ के वो सनातन दिया था कि

858
00:59:36,800 --> 00:59:40,960
नहीं दिया था? वो मोहम्मद का दृष्टिकोण अलग

859
00:59:40,960 --> 00:59:45,120
था गलत था। मूर्तियां यानी कि वो महापुरुष

860
00:59:45,120 --> 00:59:48,160
नहीं था।

861
00:59:48,160 --> 00:59:53,200
महापुरुष भी दो तरह के हो सकते हैं ना। एक नेगेटिव थिंकिंग वाले, एक पॉजिटिव थिंकिंग वाले।

862
00:59:53,200 --> 00:59:57,360
अच्छा मतलब खलनायक मगर बड़ा गजब का खलनायक। ऐसा उन्होंने

863
00:59:57,360 --> 01:00:01,600
उन्होंने नेगेटिव रास्ता अपना लिया। मूर्तियां तोड़ दी। 360 मूर्तियां

864
01:00:01,600 --> 01:00:05,600
थी तोड़ दी। ठीक है कि नहीं? तो लेकिन जो अच्छी बातें हैं वो

865
01:00:05,600 --> 01:00:09,600
तो ले लेनी चाहिए ना। बुराई बुराइयां छोड़ देनी चाहिए। अच्छी बातें तो

866
01:00:09,600 --> 01:00:13,760
हमारे वेदों में ही है। हमें कहीं क्यों जाना लेने के लिए?

867
01:00:13,760 --> 01:00:17,840
वहां भी तो है। कई जगह लिखा हुआ है अच्छी बातें लिखी हुई है। ऐसी कोई बात बता

868
01:00:17,840 --> 01:00:21,920
दीजिए जो वेद के बाहर हो। बताइए। वेद के बाहर

869
01:00:21,920 --> 01:00:26,080
कोई भी बात नहीं है तो फिर हम जाए कुरान फिर हम क्या करेंगे

870
01:00:26,080 --> 01:00:31,600
कुरान से कुरान का क्या करें फिर हम क्यों जाए कुरान के पास

871
01:00:31,600 --> 01:00:35,760
ना जाइए आपको कौन कह रहा है कि जाइए अरे ब्रह्मा कुमारी वाले कह

872
01:00:35,760 --> 01:00:39,760
रहे है ना कि भैया हमारे रामचंद्र जी के साथ शिव जी के साथ खड़ा कर रहे है ना मोहम्मद को क्यों

873
01:00:39,760 --> 01:00:43,760
कर रहे हैं भाई जब हमारे शिव जी के पास सब कुछ है राम के पास सब कुछ है तो

874
01:00:43,760 --> 01:00:47,920
क्यों ला रहे हो मोहम्मद को जिसमें वेद वेद की कॉपी होने के साथ साथ

875
01:00:47,920 --> 01:00:52,080
वेद के वेद का विरोध भी है वेद

876
01:00:52,080 --> 01:00:56,400
विरोधी को मनुस्मृति में नस्तिक कहा गया है। ठीक है? तो

877
01:00:56,400 --> 01:01:00,560
आप इस बात को जांच आप इस बात को जांच लीजिएगा कि ब्रह्मा कुमारी

878
01:01:00,560 --> 01:01:03,360
वाले यह क्लेम करते हैं कि इस्लाम

879
01:01:03,360 --> 01:01:07,520
और ईसाइयत भी धर्म है।

880
01:01:07,520 --> 01:01:11,680
ये सिर्फ हमारी दृष्टि में एक संप्रदाय है। ये जैसे

881
01:01:11,680 --> 01:01:16,000
बौद्ध एक संप्रदाय है। सिख एक संप्रदाय है। ये सारे के सारे संप्रदाय हैं।

882
01:01:16,000 --> 01:01:20,160
जैन एक संप्रदाय है। ये संप्रदाय हैं। लेकिन सभी का एक ही मूल

883
01:01:20,160 --> 01:01:24,320
है। इनके लिए पंथ शब्द पंथ शब्द उपयुक्त

884
01:01:24,320 --> 01:01:28,800
है। पंथ सिख पंथ भी कह सकते हैं

885
01:01:28,800 --> 01:01:33,440
पंथ भी कह सकते हैं संप्रदाय इनको इनको वैदिक दिखाना

886
01:01:33,440 --> 01:01:37,680
वैदिक प्रतीक चिन्हों के साथ खड़ा करना यह संशय पूर्ण स्थिति

887
01:01:37,680 --> 01:01:41,760
फैलाने के जैसा है क्यों है क्योंकि हमारा धर्म सिखा रहा है

888
01:01:41,760 --> 01:01:45,760
कि रकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई और

889
01:01:45,760 --> 01:01:49,840
33 चार में कुरान यह कह रही है कि यदि आपने किसी को मुख

890
01:01:49,840 --> 01:01:54,000
से मां बहन इत्यादि जैसा कुछ मान लिया है तो भी उसके उलट आप

891
01:01:54,000 --> 01:01:58,000
उससे विवाह कर सकते हो। हमारा धर्म सिखा रहा अपने वचन के पक्के हो

892
01:01:58,000 --> 01:02:02,080
जाओ और वहां पर सिखाया जा रहा है कि आपने माता बहन कुछ बोल

893
01:02:02,080 --> 01:02:06,080
दिया तब भी उससे विवाह कर लो या विवाह के बिना भी जो कुछ किया जा सकता हो वो भी

894
01:02:06,080 --> 01:02:08,560
कर लो।

895
01:02:08,560 --> 01:02:12,960
नहीं मेरे ख्याल से तो 334 में बात नहीं लिखी है। खोलिए

896
01:02:12,960 --> 01:02:15,120
जरा।

897
01:02:15,120 --> 01:02:18,480
रुकिए जरा एक मिनट। एक मिनट रुकिए

898
01:02:18,480 --> 01:02:21,840
जरा।

899
01:02:21,840 --> 01:02:27,840
नवीन जी का नंबर है हमारे पास।

900
01:02:36,000 --> 01:02:39,920
हम सूरह अलहजाब

901
01:02:39,920 --> 01:02:45,920
हम ठीक है जी तो इसमें लिखा है

902
01:02:48,320 --> 01:02:52,480
अल्लाह ने किसी के सीने में दो दिल नहीं दिए और ना तुम्हारी

903
01:02:52,480 --> 01:02:57,200
बीवियों को जिनसे तुम जिहाद करते हो तुम्हारी मां बनाया

904
01:02:57,200 --> 01:03:02,000
और ना तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा बेटा बना दिया हम

905
01:03:02,000 --> 01:03:06,160
ठीक है ये सब तुम्हारे अपने मुंह की बातें हैं मुंह की बातों

906
01:03:06,160 --> 01:03:10,160
को कैंसिल कर दिया ना सुनो मुंह की बातें हैं

907
01:03:10,160 --> 01:03:14,240
और अल्लाह ए हक की बात करता है और सीधा रास्ता दिखाता है मुंह मोले

908
01:03:14,240 --> 01:03:19,280
बेटों को उनके बापों की निसयत से पुकारो

909
01:03:19,280 --> 01:03:23,360
मुंह मोले बेटों को मुंह की बातों का यहां पर डिनाई कर

910
01:03:23,360 --> 01:03:27,360
रहे हैं ना मुंह बोले रिश्तों को डिनाई किया ना यहां पे ना ना ये थोड़ा

911
01:03:27,360 --> 01:03:31,920
समझ का फर्क आ गया मुंह बोले बेटों को उनके बापों को से पुकारो

912
01:03:31,920 --> 01:03:36,080
अल्लाह के नजदीक तुम्हारा मुसिफाना बात है फिर अगर तुम उनके बाप को ना जानो

913
01:03:36,080 --> 01:03:40,480
तो तुम्हारे दीनी भाई हैं ठीक है मतलब मतलब

914
01:03:40,480 --> 01:03:44,320
हम भाई नहीं बना सकते मुंह बोल मुंह बोला

915
01:03:44,320 --> 01:03:47,520
बोला

916
01:03:47,520 --> 01:03:53,520
जिहार जिहार का मतलब बताइए भाई साहब जिहार

917
01:04:06,640 --> 01:04:10,720
इसमें ये दिया है हकीकी मां और जुबान से कही हुई मां या हकीकी बेटा

918
01:04:10,720 --> 01:04:15,120
और मुंह बेला बेटा दोनों की हैसियत बिल्कुल एक हो जानी चाहिए।

919
01:04:15,120 --> 01:04:19,360
क्या लिखा है? हकीकी मां और जुबान

920
01:04:19,360 --> 01:04:23,600
से कही हुई मां यानी असली मां और जुबान से कही हुई मां या हकीकी बेटा

921
01:04:23,600 --> 01:04:29,280
और मुंह बोला बेटा दोनों की हैसियत बिल्कुल एक है।

922
01:04:29,280 --> 01:04:33,360
ये ये कुरान में लिखा है। हां ये है अरबी का

923
01:04:33,360 --> 01:04:36,240
कुरान भी है। ये देखिए। और

924
01:04:36,240 --> 01:04:40,400
इसी में भी है जिहारत का जिहार का अर्थ

925
01:04:40,400 --> 01:04:43,680
बता दीजिए जरा।

926
01:04:43,680 --> 01:04:48,800
देख लेते हैं जरा। कुरान उतारना है जरा ऊपर हरी वाली

927
01:04:48,800 --> 01:04:53,040
हां तलाक देने की सूरत सुनिए

928
01:04:53,040 --> 01:04:57,040
तलाक देने की सूरत जिसमें शौहर अपनी बीवी से कहता था कि तुम मेरे

929
01:04:57,040 --> 01:05:01,120
लिए मां की पीठ की तरह हो यानी जैसे हम मौसी कहते हैं कि

930
01:05:01,120 --> 01:05:05,120
तुम मेरी मां जैसी हो ये माना है यहां पे जिहार

931
01:05:05,120 --> 01:05:09,280
का मतलब किसको कहता था हां

932
01:05:09,280 --> 01:05:13,600
ये देखिए बताता हूं दोबारा बताता हूं तलाक देने की एक सूरत

933
01:05:13,600 --> 01:05:17,840
तलाक देने की एक सूरत जिसमें शौहर अपनी बीवी से कहता है कि तुम मेरे

934
01:05:17,840 --> 01:05:21,920
लिए मां की पीठ की तरह हो। जब उसने तलाक दे दिया तो फिर उसके साथ जो व्यवहार

935
01:05:21,920 --> 01:05:25,920
करेगा वो मां की तरह करेगा। अरे भाई

936
01:05:25,920 --> 01:05:30,160
साहब थोड़ा सा जान लीजिए कुरान के बारे में। ये

937
01:05:30,160 --> 01:05:34,480
जिहार वहां पर होता था। लोग अपनी पत्नी को मां कह

938
01:05:34,480 --> 01:05:39,120
के तलाक दे देते थे। तो उस संबंध में एक आयत आई

939
01:05:39,120 --> 01:05:43,600
जिसमें यह कहा गया कि तुम यह मुंह बोले रिश्ते तुम्हारे मायने नहीं रखते।

940
01:05:43,600 --> 01:05:47,840
यह मुंह से मां कह देना, मुंह से बेटा कह देना यह सब गलत है। और उसके

941
01:05:47,840 --> 01:05:51,520
बाद से उनके यहां पर गोद लेने का जो है बंद हो गया।

942
01:05:51,520 --> 01:05:56,080
मना कर दिया गया टोटल।

943
01:05:56,080 --> 01:06:00,240
जो मेरी दृष्टि में आया वो भी मैंने आपको बताया। हां। तो आप

944
01:06:00,240 --> 01:06:04,960
पहले समझ लीजिए कि क्या कहा जा रहा है वहां पे। एक मिनट।

945
01:06:04,960 --> 01:06:09,360
हां देख ले आप भी। देखिए इसमें

946
01:06:09,360 --> 01:06:12,000
लिखा है

947
01:06:12,000 --> 01:06:16,000
ऐ ईमान वालों उन मुंह बोले बेटों को

948
01:06:16,000 --> 01:06:20,160
उनके सगे बापों के नाम से बुलाया करो यही

949
01:06:20,160 --> 01:06:24,800
बात अल्लाह के नजदीक जियाद है। ठीक है?

950
01:06:24,800 --> 01:06:28,800
पर अगर तुम उनको उनके बाप का नाम मालूम ना हो मुंह बोले

951
01:06:28,800 --> 01:06:32,880
बेटे का। ठीक है? तो वो तुम्हारे दीनी भाई हैं। दीनी दोस्त

952
01:06:32,880 --> 01:06:37,040
हैं। पर तुमसे इसमें भूल चूक हो

953
01:06:37,040 --> 01:06:41,280
जाए तो इसमें तुम पर कुछ पाप नहीं। यानी

954
01:06:41,280 --> 01:06:45,600
कि जो मुंह बोले रिश्ते इत्यादि है उसमें अगर रिश्तों के विरुद्ध

955
01:06:45,600 --> 01:06:49,840
जाते हुए तुमसे कुछ उल्टा व्यवहार हो जाए तो तुम पर कोई पाप नहीं क्योंकि वो मुंह बोले

956
01:06:49,840 --> 01:06:53,840
ये सब आपने कहा ना ये सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं। मुंह की बातों

957
01:06:53,840 --> 01:06:58,480
की अवहेलना हुई ना और हमारे यहां मुंह की बात का वो हो रहा है सम्मान।

958
01:06:58,480 --> 01:07:03,200
रकुल री सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई

959
01:07:03,200 --> 01:07:06,640
क्योंकि यह सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं

960
01:07:06,640 --> 01:07:10,800
और ये जो जिहारत है इसी के कारण ये वाली बात उतरी है और

961
01:07:10,800 --> 01:07:16,480
ऐसी एक चीज नहीं है कुरान में केवल एक ही पंक्ति है

962
01:07:16,480 --> 01:07:20,480
दूसरी बात एक ये है कि जब आप कुरान में कुरान को जस्टिफाई करने

963
01:07:20,480 --> 01:07:25,200
बैठे हैं तो इसका मतलब सबसे पहले तो हम ये मान रहे हैं मैं

964
01:07:25,200 --> 01:07:29,520
हम जस्टिफाई नहीं करने बैठे हैं। हमने तो ये कहा है कि जिस तरह से इनकी

965
01:07:29,520 --> 01:07:34,560
सूर अल फातिहा जो पहली सूर है कुरान की वो

966
01:07:34,560 --> 01:07:39,040
गायत्री मंत्र से ली गई है। सब तारीफ

967
01:07:39,040 --> 01:07:43,360
की हमें मतलब क्या है? जब हमारे पास गायत्री मंत्र है। मेरा

968
01:07:43,360 --> 01:07:47,600
कहने का अर्थ यह है कि दुनिया में कहीं भी यदि कोई थोड़ी बहुत भी चमक

969
01:07:47,600 --> 01:07:51,760
है तो हमारे वेदों के कारण है। जिस प्रकार से दुनिया में कहीं भी कोई बल्ब जल रहा

970
01:07:51,760 --> 01:07:55,760
है तो हम ये थोड़ी ना कह सकते हैं ये जो है स्वतंत्र रूप से थॉमस अलवा एडिसन

971
01:07:55,760 --> 01:07:59,760
के बिना जल रहा है। जो बात आप कह रहे हैं मैं दूसरे तरीके से कह रहा

972
01:07:59,760 --> 01:08:04,320
हूं। इस्लाम धर्म जो जिसको मानते हैं ये धर्म कहते हैं। इस्लाम

973
01:08:04,320 --> 01:08:08,320
कितने साल पुराना है? 14 1500 साल। वेद कितना पुराना है?

974
01:08:08,320 --> 01:08:12,480
पुराने हैं। ये सभी के सभी गूगल भी खोल के देखते हैं तो लिखा जाता है कि वेद

975
01:08:12,480 --> 01:08:17,360
बहुत प्राचीन है। तो इसका मतलब वेदों से कॉपी पेस्ट किया हुआ है।

976
01:08:17,360 --> 01:08:22,000
मैं यही तो बात हम भी कहना चाह उसमें एक दिक्कत कर दी नाव

977
01:08:22,000 --> 01:08:26,000
तुमसे पहले जितनी भी किताबें आई है उसमें मिलावट

978
01:08:26,000 --> 01:08:30,240
हो गई है। इसलिए मैं सबकी वो करूंगी सत्यापन। ये कर दिया उसने।

979
01:08:30,240 --> 01:08:34,240
विरोध ना करती तो सब चला लेते काम। विरोध

980
01:08:34,240 --> 01:08:38,240
एक मिनट। जैसे आपने बताया था ना पानी का गिलास पानी के गिलास की बात

981
01:08:38,240 --> 01:08:42,320
बताई थी ना समर्थन इस बात का समर्थन हम भी नहीं करते हैं हम

982
01:08:42,320 --> 01:08:46,480
तो ये कह रहे हैं कि ये जो कुरान किताब आई ऐसे में ऐसे

983
01:08:46,480 --> 01:08:52,400
में हमें ये कहेंगे कुरान के द्वारा ऐसे में

984
01:08:52,400 --> 01:08:56,960
ऐसे में हमें ये कहना पड़ेगा कि कुरान के द्वारा बताया गया जो नियमावली

985
01:08:56,960 --> 01:09:01,600
है वो मोक्ष प्राप्त कराने में सहायक नहीं है।

986
01:09:01,600 --> 01:09:06,160
वेदों में पहले से ही है। वो नहीं है।

987
01:09:06,160 --> 01:09:10,160
मैं कह रहा हूं कि कुरान को अगर हम एज इट इज माने कुरान

988
01:09:10,160 --> 01:09:14,480
क्योंकि कुरान तो ये नहीं कह रही ना कि जितना वेद वेद से मैच करे उतना ही लेना।

989
01:09:14,480 --> 01:09:18,480
कुरान ये कह रही है मैं ही हूं टोटल। तो जब वो ये कह रही है कि मैं

990
01:09:18,480 --> 01:09:22,560
ही हूं टोटल। तो उसकी इन गलत चीजों को भी हमें मानना पड़ेगा।

991
01:09:22,560 --> 01:09:26,720
ये भी कुरान कह रही है। और जब यह मानना पड़ेगा तो एट द एंड हमें ये मानना

992
01:09:26,720 --> 01:09:30,720
पड़ेगा कि कुरान से कुरान में जो नियमावली

993
01:09:30,720 --> 01:09:34,720
दी गई है उससे हमें सच्चित आनंद प्राप्त नहीं

994
01:09:34,720 --> 01:09:37,680
होगा क्योंकि

995
01:09:37,680 --> 01:09:38,180
नहीं

996
01:09:37,920 --> 01:09:41,920
हो सकता। इसका मतलब कुरान में बताया गया धर्म धर्म नहीं

997
01:09:41,920 --> 01:09:46,080
है। हम तो पहले ही कह चुके हैं कि कुरान में बताया गया धर्म धर्म

998
01:09:46,080 --> 01:09:50,400
नहीं है। वो सिर्फ एक तो इसका मतलब इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी

999
01:09:50,400 --> 01:09:54,640
वालों का ये कहना कि कुरान बाइबल ये सब धर्म है। ये कहना

1000
01:09:54,640 --> 01:09:58,960
गलत है। इस्लाम धर्म है ये गलत है।

1001
01:09:58,960 --> 01:10:04,160
ये एक पुस्तक है जिसको वो लोग अपनी पवित्र पुस्तक मानते हैं तो मानते रहे।

1002
01:10:04,160 --> 01:10:08,560
ठीक है ना? मानते रह। हम कह रहे हैं कि ब्रह्मा हम कह रहे हैं कि ब्रह्मा

1003
01:10:08,560 --> 01:10:13,760
कुमारी का यह कहना कि इस्लाम धर्म है और ये

1004
01:10:13,760 --> 01:10:19,600
क्रिश्चियनिटी धर्म है। ये कहना गलत है ना?

1005
01:10:19,600 --> 01:10:23,680
आपकी बात से हम सहमत है और दूसरी बात आप ये समझ ले कि क्या होता

1006
01:10:23,680 --> 01:10:28,240
है कि कई बार बहुत-ब धन्यवाद। सुन ले थोड़ा सुन ले।

1007
01:10:28,240 --> 01:10:32,320
जी। कई बार क्या होता है कि बच्चे को कहना पड़ता है का से कबूतर ख से

1008
01:10:32,320 --> 01:10:36,400
खरगोश। है ना? ए से एप्पल, बी से बैट, सी से कैट।

1009
01:10:36,400 --> 01:10:40,480
तो क्या सारे अक्षर ए से एप्पल ही होते हैं? या बी से बैट ही होते हैं, सी से कैट ही

1010
01:10:40,480 --> 01:10:44,640
होते हैं? का से कबूतर होते हैं? ख से खरगोश ही होते हैं या गा से गाय होता है? नहीं ना?

1011
01:10:44,640 --> 01:10:48,880
तो कई बार क्या होता है कुछ लोगों को समझाने के लिए उन्होंने

1012
01:10:48,880 --> 01:10:53,120
ये कहा कि ये धर्म है लेकिन जब आदमी अंदर धीरेधी आता चला जाता है

1013
01:10:53,120 --> 01:10:57,360
दीदियों के साथ या उनके साथ राजयोग की अवस्था में जाता है तो

1014
01:10:57,360 --> 01:11:03,120
अलग ही उसकी आभा निकल जाती है वो सिर्फ एक

1015
01:11:03,120 --> 01:11:06,800
परमात्मा

1016
01:11:06,800 --> 01:11:10,880
किसी तरीके से वो कन्वेंस करने के लिए कहना पड़ता है ये भी धर्म है

1017
01:11:10,880 --> 01:11:14,960
कन्वेंस करने के लिए तो आपने जो तर्क दिया है कि ए से

1018
01:11:14,960 --> 01:11:19,040
ए फॉर एप्पल बी फॉर बॉय ये कहा जाता है क्या सिर्फ ए से एप्पल ही होता है

1019
01:11:19,040 --> 01:11:23,040
तो जब हम ए से एप्पल कहते हैं ए से जब हम एप्पल कहते हैं तो हम ये

1020
01:11:23,040 --> 01:11:27,520
नहीं कहते कि ए से कुछ और हो ही नहीं सकता। हम फॉर एग्जांपल

1021
01:11:27,520 --> 01:11:31,600
ले चलते हैं। जैसे ए से एप्पल जैसे बी से बॉय वहां पे कहीं भी लिमिट नहीं

1022
01:11:31,600 --> 01:11:35,680
लगाई। जी इसका मतलब

1023
01:11:35,680 --> 01:11:39,840
इसका मतलब ये लिमिट नहीं है वहां पे कि नहीं दूसरा हो ही नहीं सकता। मगर हम

1024
01:11:39,840 --> 01:11:43,920
किसी ऐसी चीज को ले रहे हैं जो ये कह रही है कि नहीं

1025
01:11:43,920 --> 01:11:47,920
ए से एप्पल ही होगा। दूसरा कुछ नहीं हो सकता। जो ये कह रही है

1026
01:11:47,920 --> 01:11:52,080
उसको हम कह रहे हैं सही पढ़ाई है। उसको हमारी नहीं

1027
01:11:52,080 --> 01:11:57,520
कहा जाता क्योंकि हमारी बड़ी बहनों बड़ी वीडियो से बात होती है।

1028
01:11:57,520 --> 01:12:01,600
वीडियो के वीडियो में आपके कथन के साथ लगा दूंगा और मैं आपको

1029
01:12:01,600 --> 01:12:05,840
भेज भी दूंगा तो आप आ के फिर दोबारा से इस बारे में चर्चा कर लीजिएगा।

1030
01:12:05,840 --> 01:12:07,280
ठीक है। ठीक है।

1031
01:12:07,280 --> 01:12:11,360
ठीक है। ठीक है शिवश जी। अब दूसरी बात ये आती है आगे कि अब

1032
01:12:11,360 --> 01:12:15,600
बात आ जाती है स्वतंत्र रूप से ब्रह्मा कुमारी के द्वारा बताया गया जो

1033
01:12:15,600 --> 01:12:20,720
धर्म है वो धर्म है कि नहीं ठीक है जी

1034
01:12:20,720 --> 01:12:24,720
तो ब्रह्मा कुमारी का कांसेप्ट क्या है कि उसको

1035
01:12:24,720 --> 01:12:28,800
कैसे जीव को मुक्ति मिलने वाली है वो बता दीजिए मुक्ति क्या है ब्रह्मा कुमारी के हिसाब

1036
01:12:28,800 --> 01:12:31,120
से

1037
01:12:31,120 --> 01:12:35,520
ब्रह्माकुमारी का एक ही छोटा सा सूत्र है कि

1038
01:12:35,520 --> 01:12:39,680
हमें सभी को समान भाव से देखना और प्रेम करना करना

1039
01:12:39,680 --> 01:12:43,680
यानी गीता के चौथे अध्याय पे ही वो ज्यादा अधिक मुक्ति पूछ रहा हूं।

1040
01:12:43,680 --> 01:12:47,840
मुक्ति की मुक्ति का विवरण बताइए ना आप क्या करना है वो बता रहे हैं। डूस एंड डोंट्स

1041
01:12:47,840 --> 01:12:52,000
बता रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं मुक्ति क्या है? मुक्ति का स्वरूप क्या है? ब्रह्मा

1042
01:12:52,000 --> 01:12:56,560
कुमारी के अनुसार जैसे इस्लाम के अनुसार मुक्ति का स्वरूप है।

1043
01:12:56,560 --> 01:13:01,040
मुक्ति का स्वरूप है आखिर रात। इस्लाम के अनुसार

1044
01:13:01,040 --> 01:13:05,040
स्वरूप है आखी रात। वही मैं आपसे कहना चाह

1045
01:13:05,040 --> 01:13:09,360
रहा हूं। जो शरीर है वो पंच तत्वों में विलीन हो जाएगा।

1046
01:13:09,360 --> 01:13:14,880
लेकिन आत्मा को परमात्मा से मिलाना यानी उस

1047
01:13:14,880 --> 01:13:19,520
आत्मा को परमात्मा से मिलाना

1048
01:13:19,520 --> 01:13:22,560
और आगे

1049
01:13:22,560 --> 01:13:28,240
जैसे परमात्मा के बारे में कहा जाता है कि करोड़ों सूर्य का प्रकाश है वहां पे।

1050
01:13:28,240 --> 01:13:32,240
नूर है बहुत ज्यादा। प्रकाश ही प्रकाश है वहां पे। आपका वीडियो रुक

1051
01:13:32,240 --> 01:13:37,440
रुक के चल रहा है शायद। फोन आपका हीट हो गया शायद।

1052
01:13:37,440 --> 01:13:41,600
सब ठीक चल रहा है नहीं हां तो

1053
01:13:41,600 --> 01:13:45,600
क्या है कि इसी तरह से आत्मा एक ज्योतिर

1054
01:13:45,600 --> 01:13:49,600
बिंदु स्वरूप है उनका ये कहना मानना है ज्योति बिंदु स्वरूप है आत्मा परमात्मा

1055
01:13:49,600 --> 01:13:53,600
से मिलना चाहती है और वही मोक्ष है वही मुक्ति है और उस मुक्ति

1056
01:13:53,600 --> 01:13:57,680
को पाने का मार्ग जो है और की एकता ही है वो प्रेम है

1057
01:13:57,680 --> 01:14:02,800
और सेवा है हां परमात्मा और पाना ही मोक्ष

1058
01:14:02,800 --> 01:14:07,840
हां बिल्कुल अच्छा और इसीलिए इसीलिए

1059
01:14:07,840 --> 01:14:12,240
तो ये कहती है कि अभी ये जो है कलयुग चल

1060
01:14:12,240 --> 01:14:16,320
कलयुग का अंत चल रहा है इस समय और आप जो है

1061
01:14:16,320 --> 01:14:20,640
यदि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार चलेंगे तो आप देवी देवता

1062
01:14:20,640 --> 01:14:25,200
बन करके अगला जो सतयुग स्टार्ट होगा उसमें आएंगे। ये क्या है?

1063
01:14:25,200 --> 01:14:28,000
हम

1064
01:14:28,000 --> 01:14:32,320
आप अगर हम पिछला इतिहास देखें अपना तो हमारे पास 5000

1065
01:14:32,320 --> 01:14:36,560
साल से ज्यादा का मतलब मैं स्पष्ट कर दूं कहने का मतलब मैं स्पष्ट कर दूं ब्रह्मा

1066
01:14:36,560 --> 01:14:40,720
कुमारी के यहां सच्चिदानंद है ही नहीं मुक्ति में आप

1067
01:14:40,720 --> 01:14:44,800
केवल यहां से श्रेष्ठ जीवन प्राप्त करोगे स्वर्ग जैसा और उसमें

1068
01:14:44,800 --> 01:14:49,040
भी फिर पतन होगा फिर आप दोबारा से त्रेता वो आएगा

1069
01:14:49,040 --> 01:14:53,040
और फिर उसके बाद त्रेता आएगा फिर द्वापर आएगा फिर

1070
01:14:53,040 --> 01:14:57,200
कलयुग आएगा तो अभी आप कलयुग में हो तो आप देवता बनने की तैयारी कर सकते हो

1071
01:14:57,200 --> 01:15:01,280
बस। तो देवता बनना तो सतयुग नहीं है वो। देवता बनना तो

1072
01:15:01,280 --> 01:15:06,560
सच्चिदानंद नहीं है। ये ब्रह्मा कुमारी का मोक्ष है।

1073
01:15:06,560 --> 01:15:10,640
बताइए थोड़ा और आगे बढ़े

1074
01:15:10,640 --> 01:15:14,800
तो ये कहना है उनका कि दो चीजें हैं जीवन

1075
01:15:14,800 --> 01:15:18,800
में। एक तो है प्रेम और एक है निस्वार्थ सेवा। अगर

1076
01:15:18,800 --> 01:15:22,800
इसको हम अपना लेते हैं तो हमारी आत्मा परमात्मा के साथ जाकर विलीन हो

1077
01:15:22,800 --> 01:15:27,040
जाती है। उसमें मिल जाती है। उसके ब्रह्मांड यानी जैसे सच

1078
01:15:27,040 --> 01:15:31,520
खंड लोक में चली जाती है। जब सच खंड लोक में चली जाएगी तो वापस नहीं आपको

1079
01:15:31,520 --> 01:15:35,520
ब्रह्मा कुमारी के बारे में जानने की और आवश्यकता है। मुझे लगता

1080
01:15:35,520 --> 01:15:39,680
है आपने पंडित राम शर्माचार्य जी के बारे में अच्छे से जान

1081
01:15:39,680 --> 01:15:43,040
लिया है। उनसे जो है आपने वेद के मंत्र भी प्राप्त किए

1082
01:15:43,040 --> 01:15:47,120
हैं। मैं जो है शिव पार्वती जी ने आपको आध्यात्मिक ज्ञान

1083
01:15:47,120 --> 01:15:51,120
भी दिया होगा। बिल्कुल है। मगर आपको ब्रह्मा कुमारीज को जान लेना चाहिए।

1084
01:15:51,120 --> 01:15:55,120
ब्रह्मा कुमारी ने कभी यह क्लेम नहीं किया कि जीव और ब्रह्म की

1085
01:15:55,120 --> 01:16:00,320
एकता मोक्ष है। उनका मोक्ष है देवता

1086
01:16:00,320 --> 01:16:04,400
का स्वरूप प्राप्त करना। जो भी इस समय ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार

1087
01:16:04,400 --> 01:16:09,280
चलेंगे वो अभी जो युग परिवर्तन होने वाला है। अगले उसमें

1088
01:16:09,280 --> 01:16:13,440
सतयुग आएगा उसमें देवी देवता बन जाएंगे। यह मोक्ष है। दैट्स इट। और कुछ

1089
01:16:13,440 --> 01:16:17,520
नहीं है। आप पता कर लीजिए पहले आप इसको

1090
01:16:17,520 --> 01:16:22,080
उन्होंने कभी मोक्ष नहीं कहा है। मोक्ष नहीं बताइए कि मोक्ष

1091
01:16:22,080 --> 01:16:26,480
मोक्ष वाला वीडियो मुझे दे सकते हैं। बता सकते हैं। उन्होंने

1092
01:16:26,480 --> 01:16:30,720
तो सिर्फ इतना ही कहा है कि यहां पर जो लोग हैं अच्छे

1093
01:16:30,720 --> 01:16:34,720
कर्म करेंगे, कर्म करेंगे, अभ्यास करेंगे, निस्वार्थ

1094
01:16:34,720 --> 01:16:38,800
सेवा करेंगे, प्रेम वाला जीवन जिएंगे। यानी दिव्य गुणों को धारण करेंगे

1095
01:16:38,800 --> 01:16:43,280
तो भाई साहब क्या करते हैं जिस देवी

1096
01:16:43,280 --> 01:16:47,280
ठीक है देवी देवता बनेंगे फिर देवी देवता बनेंगे ठीक है ना देवी

1097
01:16:47,280 --> 01:16:51,360
देवता बनेंगे ठीक है उसके बाद उसके बाद

1098
01:16:51,360 --> 01:16:55,440
भी आगे है और कई कई कई नहीं है भाई साहब

1099
01:16:55,440 --> 01:16:58,240
नहीं है यही है ये 5000 साल का

1100
01:16:58,240 --> 01:17:02,320
ड्रामा बार-बार रिपीट होना है सुन लीजिए मैं आपको एक उदाहरण दे

1101
01:17:02,320 --> 01:17:06,320
देता हूं छोटी सी इनहीं की दादी जानकी का नाम आपने

1102
01:17:06,320 --> 01:17:10,560
सुना है 104 साल की दादी जानकी

1103
01:17:10,560 --> 01:17:14,560
का नाम आपने सुना 104 साल की होकर उन्होंने अपना शरीर

1104
01:17:14,560 --> 01:17:18,800
छोड़ा। कैलिफोर्निया में 1978 में 40

1105
01:17:18,800 --> 01:17:22,800
देशों के साइंटिस्ट डॉक्टर्स इकट्ठा हुए। उन्हें पता

1106
01:17:22,800 --> 01:17:27,680
चला था कि भारतवर्ष में एक ऐसी लेडी है जो विचार शून्य हो जाती है।

1107
01:17:27,680 --> 01:17:31,920
विचार जिसके मन में बिल्कुल नहीं चलते हैं ना बुद्धि में ना मन में चलते हैं। उन्होंने

1108
01:17:31,920 --> 01:17:35,920
कहा ऐसा हो नहीं सकता। पॉसिबल नहीं है कि कोई भी हो सपने में भी

1109
01:17:35,920 --> 01:17:40,000
विचार चलते हैं और जिसके अंदर विचार ना चलते हैं वो डेड बॉडी मानी जाती

1110
01:17:40,000 --> 01:17:44,240
है। हम दादी जानकी को वहां बिठाया गया ईजी की मशीन लगाई

1111
01:17:44,240 --> 01:17:48,240
गई 1978 की बात बता रहा हूं कैलिफोर्निया में और उस समय जब

1112
01:17:48,240 --> 01:17:52,560
उन्होंने दादी को बोला दादी रेडी उन्होंने कहा रेडी जब उनका ग्राफ लिया गया तो ग्राफ बिल्कुल स्ट्रेट

1113
01:17:52,560 --> 01:17:56,560
लाइन जा रहा था दे सेड ये तो डेड बॉडी का ग्राफ है। आधा घंटा

1114
01:17:56,560 --> 01:18:00,640
चला और आधे घंटे के बाद जब उन्होंने देखा तो दादी तो बिल्कुल वैसे ही नॉर्मल बैठी है।

1115
01:18:00,640 --> 01:18:04,800
एक वही आदमी विचार शून्यता में चला जाना

1116
01:18:04,800 --> 01:18:09,040
विचार शून्यता में चला जाना मतलब क्या है विचार शून्यता में चला जाना

1117
01:18:09,040 --> 01:18:12,480
मोक्ष को प्राप्त कर लेना

1118
01:18:12,480 --> 01:18:13,600
विचारता

1119
01:18:13,600 --> 01:18:17,600
में चला जाना मोक्ष को प्राप्त कर लेना ठीक है मगर फिर भी आप जब तक

1120
01:18:17,600 --> 01:18:21,760
प्रपंच रूपी संसार में है शरीर से जुड़े हुए हैं तो वहां पर क्या

1121
01:18:21,760 --> 01:18:26,480
होता है जैसे सुशुप्ति की अवस्था होती है सुशुप्त सुशुप्ति

1122
01:18:26,480 --> 01:18:30,800
में क्या होता है हम विचार शून्य ही होते हैं वहां परंतु वहां पर बीज

1123
01:18:30,800 --> 01:18:34,880
बाकी होता माया रूपी संसार का और वो

1124
01:18:34,880 --> 01:18:38,960
जैसे ही पनपता है दोबारा से आप फंसते हैं तब तक इसलिए सुसुक्ति

1125
01:18:38,960 --> 01:18:43,440
की अवस्था मुक्ति के बहुत निकट तो मानी जाएगी परंतु

1126
01:18:43,440 --> 01:18:47,440
मुक्ति नहीं मानी जाएगी। दूसरी बात वो रिसर्च पेपर हमें

1127
01:18:47,440 --> 01:18:51,840
कैसे मिल सकता है? वो ग्राफ वाला 104 वाला

1128
01:18:51,840 --> 01:18:55,840
104 वाला ग्राफ वाला पेपर हमें कैसे मिल सकता है? तो आप मुझे

1129
01:18:55,840 --> 01:18:59,920
अपना एड्रेस भेज दीजिए। मैं आपको नहीं आप

1130
01:18:59,920 --> 01:19:04,000
WhatsApp कर दीजिएगा। WhatsApp WhatsApp कर दीजिएगा बस। मैं आपको पूरी की पूरी पुस्तक

1131
01:19:04,000 --> 01:19:08,160
ही भेज दूंगा ना आपको। द मोस्ट स्टेबल माइंड इन द वर्ल्ड पॉजिटिव थॉट्स के नाम से बुक है उनकी इंग्लिश

1132
01:19:08,160 --> 01:19:12,320
में। दूसरी बात ये आती है। दूसरी बात ये आती है कि अभी

1133
01:19:12,320 --> 01:19:16,400
हम बात कर रहे हैं कि ब्रह्मा कुमारीज वालों ने कहीं पर ये क्लेम किया

1134
01:19:16,400 --> 01:19:20,560
है कि जीव और ब्रह्म की एकता हो जाएगी। दोबारा जीव को वापस

1135
01:19:20,560 --> 01:19:25,760
नहीं आना पड़ेगा। ये कहीं पर है कोई वीडियो में किसी में?

1136
01:19:25,760 --> 01:19:28,720
ये जब पर्सनल हम दादी से बात

1137
01:19:28,720 --> 01:19:32,800
करते हैं तो वो ये बात कहती है कि हां ऐसा होता है कि जब पूरा

1138
01:19:32,800 --> 01:19:37,040
सचंड लोक में चले जाएंगे पूर्ण रूप से हमको कहीं पर प्राप्त

1139
01:19:37,040 --> 01:19:41,280
हो सकता है कि ये बात वो कहती है

1140
01:19:41,280 --> 01:19:47,280
ये बात करके पूछ लेंगे उनसे भी हम बता देंगे आपको ठीक है ना तो थोड़ा सा

1141
01:19:49,040 --> 01:19:51,200
ब्रह्मा

1142
01:19:51,200 --> 01:19:55,280
जी हमारा भी ज्यादा होता है ठीक है।

1143
01:19:55,280 --> 01:19:59,840
अब ब्रह्मा कुमारी वालों का भी यही क्लेम है कि वो

1144
01:19:59,840 --> 01:20:04,000
वैदिक धर्म ही बता रही हैं। ब्रह्मा कुमारी वाले भी।

1145
01:20:04,000 --> 01:20:08,000
ठीक है। बिल्कुल बिल्कुल उनका यही कहना है। वेदों में एक बात

1146
01:20:08,000 --> 01:20:12,160
कही गई है कि जो हमारे

1147
01:20:12,160 --> 01:20:16,800
श्रुति शास्त्र है जो हमारे आचार्य हैं

1148
01:20:16,800 --> 01:20:20,960
वो जो है जनेऊ करा के ही आचार्य बनेंगे। और

1149
01:20:20,960 --> 01:20:25,120
जनेऊ होने का एक तरीका होता है। प्रॉपर प्रोटोकॉल होता है।

1150
01:20:25,120 --> 01:20:31,120
तो ब्रह्मा कुमारी के यहां पर जनेऊ हो रहा है आचार्य बनने के लिए।

1151
01:20:31,840 --> 01:20:35,840
अभी अभी मैंने आपसे ये कहा था थोड़ी देर पहले ही कि

1152
01:20:35,840 --> 01:20:40,160
गीता में भगवान ने चौथे अध्याय में क्या कहा है?

1153
01:20:40,160 --> 01:20:44,320
क्या कि ज्ञान कर्म जो है

1154
01:20:44,320 --> 01:20:48,400
ज्ञान का जो वो हवन कर्म

1155
01:20:48,400 --> 01:20:52,720
से श्रेष्ठ है।

1156
01:20:52,720 --> 01:20:56,800
से या इसका मतलब है कि हमें जो दहिक धर्म

1157
01:20:56,800 --> 01:21:01,840
बताया गया है वो हमें मानने की जरूरत नहीं यदि हम ज्ञान में चले गए तो

1158
01:21:01,840 --> 01:21:06,080
जी यदि हम ज्ञान में चले गए तो दहिक धर्म मानने

1159
01:21:06,080 --> 01:21:10,320
की आवश्यकता नहीं है। जिसको ज्ञान हो गया उसको

1160
01:21:10,320 --> 01:21:14,320
जिसने पीएचडी कर ली उसको दसवीं के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। मैं मैं

1161
01:21:14,320 --> 01:21:18,320
पूछ रहा हूं जो ज्ञान मार्ग में चला गया। ज्ञान हो गया नहीं। ज्ञान तो अंतिम वही है

1162
01:21:18,320 --> 01:21:22,320
जब आपको ज्ञान हो जाए कि मैं हो गया मुक्त हो गया वही ज्ञान है। जब तक

1163
01:21:22,320 --> 01:21:26,720
वो ज्ञान नहीं है तब तक वो ज्ञान ही नहीं है। वास्तविक

1164
01:21:26,720 --> 01:21:31,040
जब तक जीव अपने स्वरूप में स्थित ना हो जाए स्वरूप

1165
01:21:31,040 --> 01:21:35,760
भूत ना हो जाए। अंशीभूत ना हो जाए भगवान के तब तक उसका

1166
01:21:35,760 --> 01:21:40,000
ज्ञानी होना भी सिद्ध नहीं होता। मगर अभी फिलहाल मैं ये कह रहा हूं कि दहिक धर्म

1167
01:21:40,000 --> 01:21:44,400
को मानने की आवश्यकता नहीं है। यदि वो ज्ञान मार्ग में जा रहा है।

1168
01:21:44,400 --> 01:21:47,600
सही कह रहे हैं आप? बिल्कुल।

1169
01:21:47,600 --> 01:21:51,760
अच्छा तो इसका मतलब है इसका मतलब है

1170
01:21:51,760 --> 01:21:57,760
कि माता बहन पत्नी में अंतर करने की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।

1171
01:21:58,240 --> 01:22:03,280
नहीं देखिए लौकिक रूप से है। जैसे प्रभु राम ने किया

1172
01:22:03,280 --> 01:22:07,920
यानी कि दैहिक धर्म को निभाना है ना। लौकिक

1173
01:22:07,920 --> 01:22:12,080
रूप से तो आवश्यकता है लेकिन मानसिक रूप से यानी मानसिक

1174
01:22:12,080 --> 01:22:15,120
स्तर पे

1175
01:22:15,120 --> 01:22:19,280
ऊंचा उठ जाता है रूप से तो लौकिक

1176
01:22:19,280 --> 01:22:23,520
रूप से जो लौकिक मर्यादाएं बताई गई है उनको निभाना है ना

1177
01:22:23,520 --> 01:22:27,600
निभानी पड़ेगी वो सभी पूछता हूं अथर्ववेद

1178
01:22:27,600 --> 01:22:31,840
में अथर्ववेद में 11 पांच 16 इत्यादि

1179
01:22:31,840 --> 01:22:36,080
में 11 मंडल के और दवे सूक्त में बताया गया है

1180
01:22:36,080 --> 01:22:40,320
आचार्य कौन बन सकता है और कैसे बन सकता है पूरा है तो

1181
01:22:40,320 --> 01:22:44,960
ब्रह्मा कुमारी के यहां पर क्या आचार्य बनने के लिए

1182
01:22:44,960 --> 01:22:49,360
ये बातें फॉलो की जा रही है अथर्ववेद की वो आचार्य बनाते

1183
01:22:49,360 --> 01:22:52,240
ही नहीं है

1184
01:22:52,240 --> 01:22:56,880
कौन होता है आचार्य कौन है बताइए

1185
01:22:56,880 --> 01:23:01,040
बात को मेरी पहले आप आचार्य नहीं बनाते एक मिनट आपने कहा आचार्य नहीं

1186
01:23:01,040 --> 01:23:05,200
आचार्य वो है जो शास्त्रों में दिए गए आचरण को स्वयं

1187
01:23:05,200 --> 01:23:09,600
में स्थापित करे और अपने शिष्यों में स्थापित करें।

1188
01:23:09,600 --> 01:23:13,760
आचार्य तो आप कह रहे हो कि वो शास्त्रों में दिए गए आचरण को शिष्यों

1189
01:23:13,760 --> 01:23:18,080
में स्थापित कर रहा है मगर वो आचार्य नहीं है। वो

1190
01:23:18,080 --> 01:23:22,080
देखिए भगवान ने भी अलग-अलग तरह से रास्ते

1191
01:23:22,080 --> 01:23:26,080
दिखाए। ठीक है ना? जैसे रास्ते में उन्होंने कहा द्रव्य में

1192
01:23:26,080 --> 01:23:30,640
द्रव्य में यज्ञ की अपेक्षा। बोला है कि नहीं बोला उन्होंने?

1193
01:23:30,640 --> 01:23:35,040
द्रव्य में यज्ञ की ज्ञान यज्ञ मैंने क्या कहा

1194
01:23:35,040 --> 01:23:40,320
ज्ञान यज्ञ के

1195
01:23:40,320 --> 01:23:44,800
मैंने क्या पूछा भाई साहब ज्ञान यज्ञ के नाम पे

1196
01:23:44,800 --> 01:23:48,960
क्या दहिक दैहिक उसको छोड़ देना है दहिक धर्म को ज्ञान यज्ञ

1197
01:23:48,960 --> 01:23:54,960
के नाम पर छोड़ देना ठीक है

1198
01:24:03,840 --> 01:24:08,320
कर्म करते हुए भी कर्मों में लिप्त ना होना यही तो ज्ञान

1199
01:24:08,320 --> 01:24:14,080
है यही तो है मैं यही तो कह रहा हूं कि आप कर्म कर

1200
01:24:14,080 --> 01:24:18,560
पास जाकर मैं यही तो कह रहा हूं कि आप कर्म करिए ना फिर

1201
01:24:18,560 --> 01:24:22,800
तो वहां तो नहीं हो रहा है कर्म वेदों के अनुसार लेकिन कर्म करते

1202
01:24:22,800 --> 01:24:26,880
हुए भी कर्म में लिप्त नहीं होना मैं लिप्त हो जाओ।

1203
01:24:26,880 --> 01:24:31,600
मैं ये नहीं कह रहा लिप्त हो जाओ। मैं कह रहा हूं जो कर्म बताए गए हैं शास्त्र के अनुसार

1204
01:24:31,600 --> 01:24:35,680
वो कर्म करो। उसमें लिप्त मत हो। मैं कहां कह रहा हूं? मगर वहां तो कर

1205
01:24:35,680 --> 01:24:38,720
ही नहीं रहे ना।

1206
01:24:38,720 --> 01:24:42,960
तो ये ये शरीर के कर्म है ना एक तरह से। तो भाई साहब मैं

1207
01:24:42,960 --> 01:24:47,680
पूछ रहा हूं। आपसे शरीर का शरीर का धर्म मानना है कि नहीं मानना है?

1208
01:24:47,680 --> 01:24:52,160
शरीर का जो जो शरीर की आवश्यकताएं हैं, भौतिक आवश्यकताएं

1209
01:24:52,160 --> 01:24:55,360
हैं, उनको मानना है। बाकी नहीं

1210
01:24:55,360 --> 01:24:59,760
तो क्योंकि लिखा है या मनुस्मति में

1211
01:24:59,760 --> 01:25:04,000
कौन से शास्त्र में लिखा है कि उनको मानना है उनको नहीं मानना है वहां तो सीधे

1212
01:25:04,000 --> 01:25:08,320
सीधे भगवान ने कह दिया तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र

1213
01:25:08,320 --> 01:25:12,320
प्रमाण है तो आप डिफरशिएट कैसे कर रहे हैं कि इन

1214
01:25:12,320 --> 01:25:17,280
वालों को मानना है इन वालों को नहीं मानना है ये तो मनमुखी व्याख्या हो गई मैं तो भाई साहब

1215
01:25:17,280 --> 01:25:21,360
शिवश जी मैं तो आपसे ये कह रहा हूं कि चौथे अध्याय के 33 वे और 34 वे श्लोक

1216
01:25:21,360 --> 01:25:25,440
में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से क्या कह कह रहे हैं द्रव्य में यज्ञ

1217
01:25:25,440 --> 01:25:29,440
की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ

1218
01:25:29,440 --> 01:25:33,760
है। पीएचडी करना श्रेष्ठ है। तो इसका मतलब ये नहीं कि नर्सरी

1219
01:25:33,760 --> 01:25:38,400
में बताया गया है 2 2 4 ये छोड़ दो।

1220
01:25:38,400 --> 01:25:42,480
अगर आप मैथमेटिशियन बहुत अच्छे बन रहे हैं इसका मतलब ये नहीं जो बेसिक नॉलेज है

1221
01:25:42,480 --> 01:25:46,560
उसको ठुकरा दो। ठुकराना नहीं है उसी के आधार पे बन रहे हैं।

1222
01:25:46,560 --> 01:25:49,760
तो

1223
01:25:49,760 --> 01:25:53,920
अगर आप मैं फिर पूछ रहा हूं भाई साहब मैं फिर पूछ रहा हूं। आप अगर यह

1224
01:25:53,920 --> 01:25:58,000
कह रहे हैं कि लौकिक जो धर्म है उसकी आवश्यकता नहीं है तो

1225
01:25:58,000 --> 01:26:02,320
क्या माता बहन और पत्नी में अंतर करना भी छोड़ दिया जाए और

1226
01:26:02,320 --> 01:26:06,720
यदि वहां पे आप दैहिक धर्म को अपना रहे हो तो फिर जनेऊ

1227
01:26:06,720 --> 01:26:10,800
कराना और वेदोक्त रीति और भी परंपराएं हैं और भी बहुत

1228
01:26:10,800 --> 01:26:15,600
सारी विधि है उनका पालन क्यों नहीं हो रहा है तो

1229
01:26:15,600 --> 01:26:19,680
सारी विधियों का तो पालन हो भी नहीं सकता ना श्री गुरु नानक देव जी ने कहा

1230
01:26:19,680 --> 01:26:23,680
किया कबीर ने कहा किया

1231
01:26:23,680 --> 01:26:27,680
तो इसीलिए तो भाई साहब इसीलिए तो श्री गुरु नानक देव जी ने

1232
01:26:27,680 --> 01:26:31,840
जो कहा उसको हम वैदिक नहीं मानते। इसीलिए तो जो बुद्ध

1233
01:26:31,840 --> 01:26:36,160
ने कहा उसको हम वैदिक नहीं मानते। भाई आप

1234
01:26:36,160 --> 01:26:40,320
पहले अपने आप को वैदिक होने से बाहर कहो। उसके बाद

1235
01:26:40,320 --> 01:26:44,320
हम देखेंगे कि वो सही है कि गलत है। ऐसा है हर व्यक्ति के

1236
01:26:44,320 --> 01:26:48,480
अनुसार हर व्यक्ति के अनुसार चलना पड़ता है। कि

1237
01:26:48,480 --> 01:26:52,480
कौन व्यक्ति कितनी समझ से कैसे समझेगा। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण

1238
01:26:52,480 --> 01:26:56,560
जब अर्जुन को समझाने जाते हैं तो हर तरह से समझाते हैं। कभी किसी तरह से कभी किस

1239
01:26:56,560 --> 01:27:01,040
तरह से कभी ऐसे हर तरह से उसको समझाते हैं। मैं पूछ रहा हूं आप समझाइए

1240
01:27:01,040 --> 01:27:04,880
मगर आचार समझाने वाले होने की योग्यता तो शास्त्रों के अनुसार

1241
01:27:04,880 --> 01:27:09,920
धारण करिए। चलो मैंने कहा कि दो लोग दो लोग 10 में से दो लोग ना कराएं।

1242
01:27:09,920 --> 01:27:14,160
पूरे के पूरे ब्रह्मा कुमारी में कितने लोग हैं जो जनेऊ करा रहे हैं। बताइए यज्ञ

1243
01:27:14,160 --> 01:27:18,320
पवित्र करा रहे हैं। और नहीं करा रहे तो वेदों को मानने वाला कैसे

1244
01:27:18,320 --> 01:27:22,320
कह रहे हो अपने आप को? आपने तो कराया होगा। आप तो महामंडलेश्वर

1245
01:27:22,320 --> 01:27:26,320
कह रहे हैं अपने आप को। हां बिल्कुल है। बिल्कुल है। धारण करते हैं वंदन करते

1246
01:27:26,320 --> 01:27:31,760
हैं आप? हां बिल्कुल करते हैं। हम तो

1247
01:27:31,760 --> 01:27:35,760
हम तो प्रातः काल उठ जाते हैं। प्रातः काल काम करते हैं। सारे काम करते हैं।

1248
01:27:35,760 --> 01:27:39,920
जो भी हमें करने होते हैं। आप मुझे बता सकते हैं

1249
01:27:39,920 --> 01:27:42,400
हमारे

1250
01:27:42,400 --> 01:27:47,360
नहीं हम इस बारे में नहीं पढ़ना चाहते अभी क्योंकि देखिए अच्छा 7:16

1251
01:27:47,360 --> 01:27:51,600
हो चुके हैं। आने वाले लोग हैं। दरवाजे पे तो मैं क्षमा

1252
01:27:51,600 --> 01:27:55,920
चाहूंगा अभी आपसे कि अपन जो बातचीत हो गई वो काफी एक घंटा 27

1253
01:27:55,920 --> 01:28:00,000
मिनट। ब्रह्मा कुमारी के बारे में पता लगाइएगा इस्लाम को धर्म क्यों बता रही है

1254
01:28:00,000 --> 01:28:04,000
और वेदों होने पे अभी हमारी बात रह गई है कि वो अपना जो

1255
01:28:04,000 --> 01:28:08,080
ज्ञान दे रही है वो वैदिक है कि नहीं उस पर बहुत सारी बातें हैं क्योंकि

1256
01:28:08,080 --> 01:28:12,320
वो कह रही है कि हम तो मुरली को परम प्रमाण मानते हैं मगर हम वैदिक धर्म

1257
01:28:12,320 --> 01:28:16,400
के बात बता रहे हैं वेदों के विरुद्ध वो बहुत सारी बातें बता रही है वो

1258
01:28:16,400 --> 01:28:20,000
कह रही जो जो एक कल्प है जो वो वो

1259
01:28:20,000 --> 01:28:24,000
कह रही 5000 साल का है जबकि हमारे अनुसार तो ये अब

1260
01:28:24,000 --> 01:28:28,880
तक दो अरब वर्ष बीत चुके हैं जो जो वेद

1261
01:28:28,880 --> 01:28:32,880
वेदोक्त ज्ञान विज्ञान है उसके अनुसार दो वर्ष बीत चुके हैं। तो

1262
01:28:32,880 --> 01:28:37,040
ब्रह्मा कुमारी ऐसी बहुत सी और उनकी मुक्ति मुक्ति के बारे में बात करिएगा

1263
01:28:37,040 --> 01:28:41,440
आप ये थोड़ा सा पता लगा लीजिएगा और फिर एक बार मैं

1264
01:28:41,440 --> 01:28:45,520
आशा करूंगा कि आप एक बार आए दोबारा से और जो बाकी की चीजें मैं भी वो

1265
01:28:45,520 --> 01:28:49,680
वाली वो वीडियो दिखाऊंगा आपको जो दीदियों ने जिसमें बोला है कि इस्लाम

1266
01:28:49,680 --> 01:28:53,840
धर्म है धर्म आपको थिंकिंग वाली जो 104 साल वाली दादी

1267
01:28:53,840 --> 01:28:58,000
की किताब है वो भेज देते हैं। वो इतना वो इतना जरूरी नहीं है। वो इतना मेरे लिए

1268
01:28:58,000 --> 01:29:02,480
आवश्यक नहीं है। चमत्कार दुनिया में बहुत हो रहे हैं। रावण भी चमत्कारी

1269
01:29:02,480 --> 01:29:06,480
था। औरों की तो बात छोड़िए। कंस भी चमत्कारी

1270
01:29:06,480 --> 01:29:10,560
था। है ना? तो आप एक बार आइए दोबारा से

1271
01:29:10,560 --> 01:29:14,560
जो ये जो चर्चा है इसको पूरा पूरा करिए। मैं संध्या वंदन पे आपसे थोड़ा सा

1272
01:29:14,560 --> 01:29:19,520
पूछ रहा था क्योंकि जो जनेऊ करता है वो संध्या वंदन संध्या करता है।

1273
01:29:19,520 --> 01:29:23,760
पहले मुझे कुछ लोगों से मिलने दीजिए। जय श्री राम। जय श्री राम।

1274
01:29:23,760 --> 01:29:28,240
जय श्री राम। जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय श्री राम

1275
01:29:28,240 --> 01:29:34,240
जय श्री राधे

1276
01:29:49,600 --> 01:29:53,600
चलिए ठीक है। आशा करता हूं आप लोगों को काफी

1277
01:29:53,600 --> 01:29:57,600
कुछ जानने को मिला होगा और इसीलिए हम स्वप्न निर्मित आचार्यों

1278
01:29:57,600 --> 01:30:01,840
को स्वीकार नहीं करते क्योंकि स्वीकार करेंगे तो देखकर देखा है ना कैसे किस तरह से

1279
01:30:01,840 --> 01:30:06,240
लोग खड़े हो जाएंगे हम भी आचार्य हम भी आचार्य

1280
01:30:06,240 --> 01:30:10,480
हैं समझिए अपने धर्म को ठीक है जय श्री राम वैसे मैं बता

1281
01:30:10,480 --> 01:30:14,480
दूं कुरान हमारे पास भी है जय श्री राम
