1
00:00:03,360 --> 00:00:07,440
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं

2
00:00:07,440 --> 00:00:11,680
आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। आने में विलंब भी हुआ है।

3
00:00:11,680 --> 00:00:15,760
जो स्कॉन के फॉलोअर हैं जो इस समय हमारे साथ आने वाले हैं चर्चा

4
00:00:15,760 --> 00:00:20,000
में। उनके मोबाइल में भी कुछ दिक्कत थी और कुछ आप जानते

5
00:00:20,000 --> 00:00:24,000
ही हैं। ठीक है? तो हम उनको ले लेते हैं सबसे पहले स्टेज

6
00:00:24,000 --> 00:00:28,320
पे।

7
00:00:28,320 --> 00:00:34,320
जय श्री राम। प्रदीप जी जय श्री

8
00:00:35,200 --> 00:00:40,000
प्रदीप जी आपकी आवाज थोड़ी सी थोड़ी साफ नहीं आ रही

9
00:00:40,000 --> 00:00:44,480
हरे कृष्णा आवाज साफ है अभी हां ठीक है

10
00:00:44,480 --> 00:00:48,640
ठीक है ठीक है प्रदीप जी आप कहां से जुड़े हुए हैं इस से

11
00:00:48,640 --> 00:00:54,080
मैं इस द्वारका से कनेक्ट हुआ था

12
00:00:54,080 --> 00:00:57,920
द्वारका अच्छा

13
00:00:57,920 --> 00:01:02,000
मतलब आप गुजरात से दमनदीप से नहीं नहीं दिल्ली दिल्ली

14
00:01:02,000 --> 00:01:07,680
द्वार का जो है अच्छा दिल्ली द्वार जी जी

15
00:01:07,680 --> 00:01:11,760
ठीक है तो थोड़ा सा अपने अपना कुछ अगर

16
00:01:11,760 --> 00:01:16,720
परिचय देना चाहे तो वो दे दीजिए जी

17
00:01:16,720 --> 00:01:18,640
मैं इस के थ्रू कनेक्टेड

18
00:01:18,640 --> 00:01:22,720
वैसे हुआ था आपने कहा था ना आपको प्रार्थना करनी है इसलिए

19
00:01:22,720 --> 00:01:27,600
मैंने आपको कहा है अच्छा

20
00:01:27,600 --> 00:01:30,000
ओम

21
00:01:30,000 --> 00:01:34,400
जन शलाक चक्षुरिम तस्मै श्री गुरुवे

22
00:01:34,400 --> 00:01:38,720
नम श्री चैतन्य मनोषम स्थापितम येन भूतले

23
00:01:38,720 --> 00:01:42,960
स्वयं रूप कदाम ददाति पदंतिकम वंदे

24
00:01:42,960 --> 00:01:47,280
श्री गुरु श्रीत पद कमलम श्री गुरु वैष्णव

25
00:01:47,280 --> 00:01:51,760
श्री रूपम साजम सहगण रघुनाथम तम सजीव

26
00:01:51,760 --> 00:01:56,000
साद्वैतम सावधूतम परिजन सहितम कृष्ण चैतन्य देवम

27
00:01:56,000 --> 00:02:00,320
श्री राधा कृष्ण पाद ललिता श्री

28
00:02:00,320 --> 00:02:04,480
हे कृष्ण करुणा सिंधु दीन बंधु जगत गोपेश गोपिका कांत

29
00:02:04,480 --> 00:02:08,560
राधा कांत नमोस्तुते तप्त कांचन गौरांगी राधे वृंदावनेश्वरी

30
00:02:08,560 --> 00:02:13,280
वृषभानुते प्रणमाम हरि प्रशा कल्पतर

31
00:02:13,280 --> 00:02:17,440
कृपा सिंधु पत नाम पावने वैष्णवे नमो

32
00:02:17,440 --> 00:02:22,000
नम जय श्री कृष्ण थोड़ा थोड़ा प्रार्थना

33
00:02:22,000 --> 00:02:26,080
संक्षिप्त में रख प्रार्थना वैसे आपने आज मुझे आशा

34
00:02:26,080 --> 00:02:30,320
है कि आप जो अपनी नित्य जो वंदना करते हैं भगवान

35
00:02:30,320 --> 00:02:33,680
की वो आपने की होगी और अभी भी इसके बाद भी आप करेंगे तो

36
00:02:33,680 --> 00:02:38,000
वहां पर आप करिए यहां पे आप प्रार्थना जो एक

37
00:02:38,000 --> 00:02:42,000
अपने गुरुओं को आप जिन्हें गुरु मानते हैं उनके प्रति आप अपना भाव प्रकट

38
00:02:42,000 --> 00:02:46,560
करते हुए थोड़ा सा पॉइंट पे आए क्योंकि ये वो जगह नहीं है जहां पर हम लोग अपनी प्रार्थना

39
00:02:46,560 --> 00:02:50,640
का शो ऑफ करें। जी ठीक है

40
00:02:50,640 --> 00:02:54,960
अच्छा कुछ अगर रह गया हो तो मतलब जो

41
00:02:54,960 --> 00:02:59,760
कुछ आवश्यक रह गया हो तो उसको आप कर लीजिए करो

42
00:02:59,760 --> 00:03:03,760
पम कृपा श्री गुरु दी बस इतना ही था

43
00:03:03,760 --> 00:03:08,240
जी तो ठीक है अभी

44
00:03:08,240 --> 00:03:12,720
स्पॉन से रिलेटेड चीजें हैं जिस पर हम लोग डिस्कस करने वाले हैं

45
00:03:12,720 --> 00:03:17,520
तो सबसे पहले मुझे ये थोड़ा सा बता दीजिए क्या आप मानते हैं कि स्पॉन

46
00:03:17,520 --> 00:03:22,400
परंपरा प्राप्त और प्रामाणिक संस्थान है।

47
00:03:22,400 --> 00:03:26,640
जी विदाउट एनी डाउट इस जो है वो परंपरा प्राप्त है और

48
00:03:26,640 --> 00:03:31,520
प्रमाणिक संस्था है। इनफ जो श्री भगवत गीता प्रभुपाद ने दी है

49
00:03:31,520 --> 00:03:34,080
वो

50
00:03:34,080 --> 00:03:38,080
वो सामग्री के बारे में हम लोग बात करेंगे। थोड़ा सा क्या है ना टू

51
00:03:38,080 --> 00:03:42,640
द पॉइंट टू द पॉइंट बात करते हैं तो ठीक रहता है। जी

52
00:03:42,640 --> 00:03:46,720
हम आपने बिल्कुल मान लिया कि वो प्रामाणिक अब सबसे पहली बात ये

53
00:03:46,720 --> 00:03:50,880
आती है कि वर्तमान में

54
00:03:50,880 --> 00:03:55,440
इस का अंतिम निर्णायक कौन है?

55
00:03:55,440 --> 00:03:59,520
जी वर्तमान में इस का जो अंतिम निर्णायक है वो

56
00:03:59,520 --> 00:04:03,760
कोई एक व्यक्ति नहीं है क्योंकि जब एक व्यक्ति कोई सेल्फ रियलाइज

57
00:04:03,760 --> 00:04:07,920
सोल अगर आती है वो एक पूरे संस्था का

58
00:04:07,920 --> 00:04:12,000
स्थापना करती है तो तो एक व्यक्ति अगर हम किसी को रख

59
00:04:12,000 --> 00:04:16,080
देते हैं ना तो उसमें दिक्कत होती है और वो दिक्कत ये होती है कि अगर वो

60
00:04:16,080 --> 00:04:20,400
एक व्यक्ति करप्ट हो गया तो तो पूरी संस्था तो

61
00:04:20,400 --> 00:04:24,400
यहां पर बात आ रही है कि इस पे जो प्रमाणिक लोग हैं वो है

62
00:04:24,400 --> 00:04:28,480
मेनली मैनेजेरियल तरीके से जीबीसी और जीबीसी ही

63
00:04:28,480 --> 00:04:32,480
अपॉइंट करती है सन्यासी को जो दीक्षा भी दे सकते हैं वो अपॉइंट करती है कौन

64
00:04:32,480 --> 00:04:36,720
आगे दीक्षा देगा एंड सो ऑन तो एक क्षत्रिय है ये वैष्णवों की इसको अंब्रेला

65
00:04:36,720 --> 00:04:39,280
कह सकते हैं

66
00:04:39,280 --> 00:04:43,600
आपको नाम पता है कि जीबीसी में कौन-कौन है? जी

67
00:04:43,600 --> 00:04:49,200
कई कई सारे लोगों के नाम पता है सारे लोगों के

68
00:04:49,200 --> 00:04:53,360
सब लोगों के तो मैं नहीं कह सकता बट बहुत

69
00:04:53,360 --> 00:04:57,360
सारे डिवोटीज के नाम और मैं एक क्वेश्चन इसलिए कर रहा हूं

70
00:04:57,360 --> 00:05:01,600
जी जी कि मैं एक परंपरा से जुड़ा हुआ हूं। ठीक है जी

71
00:05:01,600 --> 00:05:05,920
जी मुझे मालूम है मेरा अंतिम निर्णायक कौन है जी

72
00:05:05,920 --> 00:05:09,920
आपको नहीं मालूम है नहीं जो मुख्य

73
00:05:09,920 --> 00:05:10,480
निर्णायक

74
00:05:10,480 --> 00:05:14,640
है वो ऐसे कई पर्सनालिटीज रहे हैं जिनसे मेरा भी बहुत

75
00:05:14,640 --> 00:05:18,640
आकर्षण रहा है और मैंने कहा आपने कहा जीबीसी में कई मेंबर्स

76
00:05:18,640 --> 00:05:22,960
हैं जीबीसी अंतिम निर्णायक है और जीबीसी में कई ऐसे मेंबर्स भी हैं

77
00:05:22,960 --> 00:05:27,040
जिनसे आपका धर्म प्रभावित हो सकता है आपका ब्रह्म प्रभावित हो सकता

78
00:05:27,040 --> 00:05:32,240
है परंतु आपको मालूम ही नहीं है कि वह कौन

79
00:05:32,240 --> 00:05:36,560
मुख्यत मैं जीबीसी से आकर्षित की

80
00:05:36,560 --> 00:05:41,200
बात नहीं हो रही है। बात हो रही है 2 प्लस टू इक्व 4

81
00:05:41,200 --> 00:05:45,280
ये धर्म है ना प्लस इक्व 4 यहां दो चीजें हैं। मुख्य निर्णायक जब

82
00:05:45,280 --> 00:05:49,920
आप कह रहे हैं कि जो मुख्य निर्णायक है आपके

83
00:05:49,920 --> 00:05:54,480
आपके जो संप्रदाय है उनके आपको जानते हैं कि वो कौन है।

84
00:05:54,480 --> 00:05:58,720
यहां पर आप कह रहे हैं स्पिरिचुअल पर्सनालिटी की। मैं यहां बात कर रहा हूं दो

85
00:05:58,720 --> 00:06:03,120
के अंदर जो मैं बता रहा हूं इस के जो फैसले

86
00:06:03,120 --> 00:06:07,440
हैं इस को क्या कहना है भक्तों से

87
00:06:07,440 --> 00:06:11,440
इस को प्रभुपाद जी की किताब का क्या अर्थ बताना है

88
00:06:11,440 --> 00:06:15,520
क्या नहीं बताना है ये फैसला पहले से किया हुआ है बस प्रभुपाद

89
00:06:15,520 --> 00:06:19,600
जी को कंट्राडिक्ट नहीं करना है यानी उनको विरोधाभास नहीं करना ये मैं मैं

90
00:06:19,600 --> 00:06:24,000
बता रहा हूं कंट्राडिक्ट नहीं करने वाली बात मैं बता रहा हूं जी

91
00:06:24,000 --> 00:06:25,520
ये फैसला अंतिम

92
00:06:25,520 --> 00:06:29,600
रूप से कौन लेगा कहने का मतलब ये है जैसे आपने हमने कहा कि प्रभुपाद

93
00:06:29,600 --> 00:06:33,680
जी को कंट्राडिक्ट नहीं करना है। प्रभुपाद जी ने मान लीजिए कह दिया कि

94
00:06:33,680 --> 00:06:37,840
भैया श्री कृष्ण जी तो रास्कल थे। ठीक है? श्री

95
00:06:37,840 --> 00:06:41,840
कृष्ण जी सबसे बड़े रास्कल थे। मान लीजिए प्रभुपाद जी ने कहा। अब

96
00:06:41,840 --> 00:06:46,080
इसका एक अर्थ तो यह निकाला जा सकता है कि वह अंतिम रूप से बता रहे हैं

97
00:06:46,080 --> 00:06:50,160
कि भैया अगर इस दुनिया में रास्कलडम का अस्तित्व है

98
00:06:50,160 --> 00:06:54,160
तो हमें मानना पड़ेगा कि उसके भी मूल में कृष्ण ही है। इसमें कोई बुरी

99
00:06:54,160 --> 00:06:58,240
बात नहीं है। दुनिया में यत्र तत्र सर्वत्र मैं ही मैं

100
00:06:58,240 --> 00:07:02,240
हूं। भगवान ही है। हर चीज की पराकाष्ठा में मूल में

101
00:07:02,240 --> 00:07:06,240
वही बैठे हैं। है ना? भगवान है मैं नहीं है

102
00:07:06,240 --> 00:07:10,480
भगवान है अलग-अलग है मैंने वही कहा इस समय भगवान

103
00:07:10,480 --> 00:07:14,720
का के द्वारा बोला गया वचन ही यहां पर रिपीट कर रहा हूं

104
00:07:14,720 --> 00:07:18,720
ठीक है मैं भगवान के द्वारा बोला गया वचन ही रिपीट कर

105
00:07:18,720 --> 00:07:22,720
रहा हूं जी जी जी हां अभी मैं अपने वो जो अद्वैत और

106
00:07:22,720 --> 00:07:26,720
द्वैत की वो जो अंतर है उसको नहीं ला रहा हूं मैं भगवान ने जो कहा है वो मैं

107
00:07:26,720 --> 00:07:30,960
आपको बता रहा हूं जैसे भगवान ने कहा तू मेरी शरण में आ जा

108
00:07:30,960 --> 00:07:35,040
है ना तो यहां पे उसी तरीके से उनके बोले बोले हुए कथन को मैंने रिसाइट किया

109
00:07:35,040 --> 00:07:39,200
है। ठीक। जी। अब बात ये है कि जब हर चीज के मूल में

110
00:07:39,200 --> 00:07:40,720
ही वो हैं

111
00:07:40,720 --> 00:07:44,800
तो उनके कही हुई बात का अर्थ ये निकल रहा है। हां

112
00:07:44,800 --> 00:07:48,960
भाई मूल रूप से देखा जाए तो भैया अगर दुनिया में रास्कलडम है

113
00:07:48,960 --> 00:07:53,040
तो इसका मतलब रास्कलडम भी होना चाहिए। उनके अंदर वो क्वालिटी

114
00:07:53,040 --> 00:07:57,200
भी होनी चाहिए। उसके भी अधिष्ठाता उसके भी अधिष्ठान वो होने

115
00:07:57,200 --> 00:08:01,440
चाहिए। तो ये तो हो गया एक अर्थ। दूसरा अर्थ दूसरा निकलेगा।

116
00:08:01,440 --> 00:08:05,600
वो कहेगा कि नहीं नहीं कृष्ण कृष्ण जी तो वही वाले रास्कल है जो बुरा माना

117
00:08:05,600 --> 00:08:09,840
जाता है सांसारिक दृष्टिकोण से। अब यहां पर दो अर्थ निकल

118
00:08:09,840 --> 00:08:13,840
रहे हैं और मैं आपको उदाहरण दे देता हूं। तीन बेर खाती थी वो तीन

119
00:08:13,840 --> 00:08:18,000
बेर खाती है। इसमें बेर शब्द दो बार आ गया।

120
00:08:18,000 --> 00:08:22,160
ठीक है? लिखने वाला लिख के आप कहना चाहते हैं कि एक ही शब्द के बहुत सारे

121
00:08:22,160 --> 00:08:26,160
अर्थ हो सकते हैं। तो जब एक मिनट

122
00:08:26,160 --> 00:08:30,640
जब लिखने वाला प्रेजेंट नहीं है हमारे बीच में तो उसका

123
00:08:30,640 --> 00:08:34,720
अर्थ बताने वाला निर्णायक कौन है? यह जानना

124
00:08:34,720 --> 00:08:38,880
आवश्यक है। हो सकता है प्रभुपाद जी ने उसी शब्द का दूसरे कॉन्टेक्स्ट में कुछ कहा

125
00:08:38,880 --> 00:08:42,880
हो और हम दूसरे कॉन्टेक्स्ट में निकाले। तो इसलिए प्रभु प्रभुपाद जी

126
00:08:42,880 --> 00:08:46,960
की ओर से एक प्रामाणिक व्यक्ति होना चाहिए जो ये बताया कि प्रभुपाद जी

127
00:08:46,960 --> 00:08:51,120
ने ये कहा है और वो भी उसकी प्रामाणिकता सिद्ध हो जिससे कि हम उसकी

128
00:08:51,120 --> 00:08:55,440
बात मान सके कि हां ये जो बात बोलेगा वो प्रभुपाद जी से ही बोलेगा।

129
00:08:55,440 --> 00:08:58,480
हमें

130
00:08:58,480 --> 00:09:03,280
आप कहां गए? स्क्रीन पे कुछ लगा था। स्क्रीन पे कुछ लगा था तो वो क्लीन कर

131
00:09:03,280 --> 00:09:07,440
कर दीजिए कर दीजिए। तो हमें तो जब प्रभुपाद जी की

132
00:09:07,440 --> 00:09:11,600
ओर से हम एक निर्णायक व्यक्ति को स्वीकार करेंगे तो वो बताएगा कि प्रभुपाद जी की कहीं

133
00:09:11,600 --> 00:09:15,680
पे भी कोई भी चीजें अगर आ रही है जो समझ में नहीं आ रही संशय हो रहा है

134
00:09:15,680 --> 00:09:19,760
तो हम उसमें कुछ सन्यासी का नाम ले सकता हूं जैसे

135
00:09:19,760 --> 00:09:23,840
किस गोपाल कृष्ण मुख्य देखिए जब आपने जब

136
00:09:23,840 --> 00:09:27,840
आपने ये कह दिया कि मैं कुछ लोगों का नाम नहीं जानता हूं और फिर

137
00:09:27,840 --> 00:09:31,920
आपने एक स्टेटमेंट और दिया है कि हम प्रभुपाद जी के अगेंस्ट नहीं जाने

138
00:09:31,920 --> 00:09:36,080
चाहिए। ठीक है? तो इसको अब मुझे एक्सप्लेन करने दीजिए कि यह आवश्यक क्यों

139
00:09:36,080 --> 00:09:40,080
है जानना। ठीक है? आपने स्टेटमेंट एक दे दिया है कि भाई हम प्रभुपाद जी के

140
00:09:40,080 --> 00:09:44,080
अगेंस्ट नहीं जाएंगे। अब यदि बात ऐसी है कि प्रभुपाद जी के अगेंस्ट नहीं

141
00:09:44,080 --> 00:09:48,080
जाना है तो ऐसे तो कोई कह सकता है कि भैया उसकी बात मानो जो

142
00:09:48,080 --> 00:09:52,160
वेद के साथ है। वेद के विरोध में नहीं जाएंगे तो प्रभुपाद जी की भी आवश्यकता

143
00:09:52,160 --> 00:09:56,240
नहीं थी। अच्छा और और बाद में आ जाओ कि हम व्यास जी के विरोध में नहीं

144
00:09:56,240 --> 00:10:00,720
जाएंगे तब भी प्रभुपाद जी की आवश्यकता नहीं थी और बाद में आ जाओ मधवाचार्य

145
00:10:00,720 --> 00:10:04,880
जी के विरोध में नहीं जाएंगे तब भी प्रभुपाद जी की आवश्यकता नहीं थी और बाद में आ जाओ

146
00:10:04,880 --> 00:10:09,520
चैतन्य महाप्रभु के विरोध में नहीं जाना है तब भी प्रभुपाद जी की आवश्यकता नहीं है

147
00:10:09,520 --> 00:10:13,600
मगर प्रभुपाद जी की आवश्यकता मानने का अर्थ यही है कि प्रभुपाद जी

148
00:10:13,600 --> 00:10:17,760
के एब्सेंट में हमें प्रभुपाद जी का

149
00:10:17,760 --> 00:10:22,240
उत्तराधिकारी चाहिए। उनकी ओर से बोलने वाला निर्णायक

150
00:10:22,240 --> 00:10:26,800
अब आपने कहा कि वो निर्णायक जीबीसी है।

151
00:10:26,800 --> 00:10:30,880
मेरा मेरा हो रहा है क्या? एक मिनट नहीं

152
00:10:30,880 --> 00:10:34,880
नहीं कोई दिक्कत नहीं है। मुझे थोड़ा नहीं मेरा कुछ रुक रुक के

153
00:10:34,880 --> 00:10:38,880
आ रहा था क्या मेरा अभी? बीच में हुआ था बट ठीक है।

154
00:10:38,880 --> 00:10:42,960
अभी ठीक है। ठीक है। तो अभी क्या है कि आपने

155
00:10:42,960 --> 00:10:46,960
कहा कि वो जीबीसी अंतिम निर्णायक। अब मैंने आपसे पूछा कि

156
00:10:46,960 --> 00:10:51,200
जीबीसी यदि है तो उसके सभी मेंबर्स का आपको पता है क्योंकि

157
00:10:51,200 --> 00:10:55,440
आप अगर प्रभुपाद जी को अपने धर्म ब्रह्म का निर्णायक मान रहे हैं

158
00:10:55,440 --> 00:10:59,440
तो आपको पता होना चाहिए कि पता होना प्रैक्टिकल नहीं है। एक्चुअली अगर

159
00:10:59,440 --> 00:11:03,600
आप देख सन्यासी की लिस्ट में सभी मेंबर्स का होना पता होना सबके नाम

160
00:11:03,600 --> 00:11:07,680
जबानी याद रहना प्रैक्टिकल नहीं है क्योंकि आप देखिए 400

161
00:11:07,680 --> 00:11:11,840
से 500 ऐसे मेंबर्स हैं कई कई कंट्रीज में हैंडल करते हैं जिसको काफी बड़ी

162
00:11:11,840 --> 00:11:15,840
ऑर्गेनाइजेशन है। तो प्रैक्टिकिटी में अगर देखा जाए प्रैक्टिकिटी नहीं

163
00:11:15,840 --> 00:11:19,920
है तो फिर यह वाली जो व्यवस्था है जिसमें शिष्य को अपने अंतिम निर्णायक गुरु

164
00:11:19,920 --> 00:11:25,920
का नाम नहीं पता है ये व्यवस्था शास्त्रोक्त कैसे

165
00:11:26,720 --> 00:11:30,720
राम जी को अपने गुरु का नाम पता है मेरे गुरु वशिष्ठ है मुझे

166
00:11:30,720 --> 00:11:35,520
मेरे गुरु का नाम पता है मेरे गुरु जगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर है

167
00:11:35,520 --> 00:11:39,680
मधवाचार्य वालों को पता है मेरे मेरे गुरु अंतिम निर्णायक फलाने

168
00:11:39,680 --> 00:11:43,920
तीर्थ है श्री संप्रदाय वालों वालों को पता है कि मेरे गुरु

169
00:11:43,920 --> 00:11:48,080
विद्या भास्कर जी महाराज है या फिर राघवाचार्य जी महाराज है। आपको नहीं

170
00:11:48,080 --> 00:11:52,160
पता है 400 लोगों होने की वजह से तो यहां पे दो बातें

171
00:11:52,160 --> 00:11:56,240
आ गई। यहां पे दो बातें आ गई। एक मिनट एक कि अगर पॉसिबल

172
00:11:56,240 --> 00:12:00,240
नहीं है तो इसका अर्थ ये नहीं है कि गलत चीज को हम सही मान लें। दूसरी

173
00:12:00,240 --> 00:12:04,320
कि ये जो इंपॉसिबल वाली विधि है इसका वर्णन

174
00:12:04,320 --> 00:12:08,400
कहां पे है? जब मधवाचार्य जी

175
00:12:08,400 --> 00:12:12,400
जाते हैं तो वह अपना उत्तराधिकारी बनाते हैं। फिर वह जाते

176
00:12:12,400 --> 00:12:16,480
हैं तो वह अपना उत्तराधिकारी बनाते हैं। चैतन्य जहां से

177
00:12:16,480 --> 00:12:20,480
वो डिटच हुआ है जहां से मधुवा वालों ने माना कि ये हमारे यहां का नहीं है। मगर आप लोग कहते

178
00:12:20,480 --> 00:12:25,360
हो नहीं वहीं का है। ठीक है। तो जहां से आप लोग ये मान रहे हो

179
00:12:25,360 --> 00:12:30,480
कि वो वहीं का है। वहां से उत्तराधिकारी वाली चीज तो खत्म ही हो गई।

180
00:12:30,480 --> 00:12:35,360
है ना? बता सकता हूं इसका वर्णन कहां पर है? अब आप बताइए

181
00:12:35,360 --> 00:12:39,360
जी आपका प्राइमरी क्वेश्चन है जो फर्स्ट क्वेश्चन आपका रहा

182
00:12:39,360 --> 00:12:42,240
है वो ये है कि गुरु परंपरा एक एक्सिस्ट

183
00:12:42,240 --> 00:12:46,240
करती है तो मल्टीपल लोग कहां से आए ऐसा ही कुछ है मैं सही पकड़

184
00:12:46,240 --> 00:12:50,320
रहा हूं इस का अंतिम निर्णायक मैं

185
00:12:50,320 --> 00:12:54,720
मैं मैं बता देता हूं इस का अंतिम निर्णायक कौन है

186
00:12:54,720 --> 00:12:58,720
यदि एक से ज्यादा लोग हैं तो क्या यह शास्त्रोक्त है

187
00:12:58,720 --> 00:13:02,720
और यदि एक से ज्यादा लोग हैं तो वो एक से ज्यादा लोग आपको मालूम होने

188
00:13:02,720 --> 00:13:06,800
चाहिए क्योंकि वो आपके अंतिम गुरु हैं। क्योंकि वो

189
00:13:06,800 --> 00:13:10,800
प्रभुपाद जी के उत्तराधिकारी हैं। तो आपको मालूम तो होना ही पड़ेगा। वो 500

190
00:13:10,800 --> 00:13:14,880
हो चाहे हजार हो ये आपकी प्रॉब्लम है। और अगर आपको मालूम ही नहीं मेरा गुरु कौन

191
00:13:14,880 --> 00:13:18,880
है तो इसका मतलब यह है कि आप उन किताबों को मान रहे हो। उस

192
00:13:18,880 --> 00:13:22,960
सिस्टम को मान रहे हो जिस सिस्टम को आप सोच रहे हो कि प्रामाणिक है। मगर आपको पता ही

193
00:13:22,960 --> 00:13:27,120
नहीं है कि इसको चला कौन रहा है। नहीं

194
00:13:27,120 --> 00:13:31,520
आपको आक्षेप नहीं करना चाहिए। पहले मैं जवाब देता हूं। से देखते हैं। नहीं मैंने आक्षेप

195
00:13:31,520 --> 00:13:35,520
नहीं किया है। मैंने मैंने क्या है संभावनाएं व्यक्त की है कि अगर ऐसा है

196
00:13:35,520 --> 00:13:39,600
तो ऐसा होगा। ऐसा है तो ऐसा होगा। ऐसा है तो ऐसा होगा। मैंने अभी वो आरोप

197
00:13:39,600 --> 00:13:43,680
नहीं लगाया। मैंने संभावनाएं व्यक्त की है। ठीक है। ठीक है। मुझे

198
00:13:43,680 --> 00:13:47,920
मालूम है। और सबसे पहला जो आपने क्वेश्चन पूछा वो है कि मल्टीपल गुरु है।

199
00:13:47,920 --> 00:13:52,000
मल्टीपल गुरु शास्त्रों में कहां है? यही यही है। मल्टीपल

200
00:13:52,000 --> 00:13:57,280
गुरु होना। गुरु परंपरा में गुरु परंपरा में अंतिम

201
00:13:57,280 --> 00:13:57,780
शास्त्रों

202
00:13:57,680 --> 00:14:01,840
में एवं परंपरा प्राप्त 4.2

203
00:14:01,840 --> 00:14:05,840
गुरु परंपरा में जो हमारा जो सिस्टम है मधवाचार्य जी की

204
00:14:05,840 --> 00:14:10,000
परंपरा का आपने कहा आपने एक एक चीज और दी अच्छा हुआ आपने याद

205
00:14:10,000 --> 00:14:14,000
दिला दिया एक चीज और है आपने कहा कि यदि एक ही

206
00:14:14,000 --> 00:14:18,720
व्यक्ति पर हम लोग वो करेंगे डिपेंड हो जाएंगे तो उसमें विकृति आ सकती है

207
00:14:18,720 --> 00:14:23,040
इसलिए वो उचित नहीं है तो इसका मतलब मधवाचार्य उचित नहीं थे।

208
00:14:23,040 --> 00:14:27,280
मधवाचार्य के बाद वाले उचित नहीं थे। मधवाचार्य के आज तक वाले उचित

209
00:14:27,280 --> 00:14:31,280
नहीं है। जी और अपने और और

210
00:14:31,280 --> 00:14:35,520
सुनिए और सुनिए अपने टाइम में प्रभुपाद जी भी उचित नहीं है। फिर तो

211
00:14:35,520 --> 00:14:40,800
क्योंकि अपने टाइम में तो वो भी सिंगल थे। मैं अब बोलूं

212
00:14:40,800 --> 00:14:45,360
एक व्यक्ति जो है वो बोलने के लिए क्वालिफाइड होता है तब

213
00:14:45,360 --> 00:14:49,600
जब आचार्य होते हैं ना वो कृष्ण के द्वारा या भगवान

214
00:14:49,600 --> 00:14:53,760
के द्वारा एमावर्ड होते हैं। जो एमावर्ड आचार्य होते हैं उनका कुछ स्पेशल

215
00:14:53,760 --> 00:14:57,760
केस होता है। ठीक है? वो एमावर्ड आचार्य जो है वो वो लोग

216
00:14:57,760 --> 00:15:02,080
हैं जिनका फॉल डाउन नहीं होता। यानी वो अपने स्तर से कभी गिरते नहीं है।

217
00:15:02,080 --> 00:15:06,160
अगर शास्त्रों के नजरिए से देखा जाए तो इन लोगों को उत्तम अधिकारी कहते

218
00:15:06,160 --> 00:15:10,400
हैं। ठीक है? उत्तम अधिकारी कभी अपने स्तर से गिरेगा नहीं।

219
00:15:10,400 --> 00:15:13,360
लेकिन विवरण भी दे दीजिए।

220
00:15:13,360 --> 00:15:17,840
शास्त्रोक्त विवरण भी दे दीजिए। शास्त्रोक्त विवरण

221
00:15:17,840 --> 00:15:22,480
ये श्रीमद् भागवतम है। जस्ट मैं इसके श्लोकास

222
00:15:22,480 --> 00:15:26,480
टू टू थ्री मिनट्स में अभी कोड कर सकता हूं। थोड़ा सा रिट्रीव

223
00:15:26,480 --> 00:15:30,560
करने पड़ेंगे मुझे। श्रीमद् भागवतम हां आप

224
00:15:30,560 --> 00:15:34,960
केवल मुझे नंबर बता दीजिए मैं निकाल लेता हूं। एक बार

225
00:15:34,960 --> 00:15:39,120
चेक कर लीजिएगा श्रीमद् भागवतम के अंदर

226
00:15:39,120 --> 00:15:43,200
श्रीमद् भागवतम के अंदर कनिष्ठ मध्यम और उत्तम

227
00:15:43,200 --> 00:15:49,200
अधिकारी का रेफरेंस नहीं

228
00:15:51,760 --> 00:15:56,320
कनिष् मध्यम और उत्तम अधिकारी का जो रेफरेंस है इनकी डेफिनेशन दी है क्लियर

229
00:15:56,320 --> 00:16:01,920
कि सह मध्यमा सह कनिष्ठ अधिकारी सह उत्तम ऐसे

230
00:16:01,920 --> 00:16:07,920
दे दीजिए देख जरा जी

231
00:16:08,400 --> 00:16:12,800
स्टार्ट कैसे करें इसको

232
00:16:12,800 --> 00:16:15,040
यहां पर

233
00:16:15,040 --> 00:16:19,440
चैट आ जाएगी कोई दिक्कत नहीं कनिष्ठ मध्यम एंड उत्तम

234
00:16:19,440 --> 00:16:23,520
मध्यम एंड रेफरेंसेस इन श्रीमद् भागवतम

235
00:16:23,520 --> 00:16:28,320
अधिकारी हां अधिकारी रेफरेंसेस इन श्रीमद् भागवतम

236
00:16:28,320 --> 00:16:34,320
इन भागवत पुराण हां भागवत लिख सकते हैं

237
00:16:38,240 --> 00:16:44,240
जस्ट ए मिनट

238
00:16:45,840 --> 00:16:50,240
जी ये आ रहा है 11 एंटो में चैप्टर टू में आ रहा है

239
00:16:50,240 --> 00:16:56,240
11वा स्कंध दूसरा चैप्टर

240
00:17:02,320 --> 00:17:08,320
ओके

241
00:17:27,440 --> 00:17:33,440
कौन सा चैप्टर?

242
00:17:36,480 --> 00:17:40,640
11th स्कंध 11वा स्कंध सेकंड चैप्टर

243
00:17:40,640 --> 00:17:44,960
45 श्लोक ये उत्तम अधिकारी की

244
00:17:44,960 --> 00:17:49,440
11थ 11th कैंटो श्रीमद् भागवतम

245
00:17:49,440 --> 00:17:53,760
11th कैंटो 11.2.45

246
00:17:53,760 --> 00:17:56,640
अब समझ 11.2.45

247
00:17:56,640 --> 00:18:02,000
हां 11वा स्कंध दूसरा अध्याय 45 श्लोक

248
00:18:02,000 --> 00:18:08,000
जी

249
00:18:09,360 --> 00:18:12,640
तो

250
00:18:12,640 --> 00:18:16,640
इंग्लिश ट्रांसलेशन ट्रांसलेट मैं बता रहा हूं मैं

251
00:18:16,640 --> 00:18:22,640
बता अच्छा ठीक है

252
00:18:22,720 --> 00:18:28,720
उसी में कर दीजिए

253
00:18:32,320 --> 00:18:37,520
इसमें आपने बताया 45 जी 11.2.45

254
00:18:37,520 --> 00:18:41,840
हां तो इसमें लिखा हुआ है 45 में

255
00:18:41,840 --> 00:18:46,160
इस प्रकार जो प्रतििक्षण एक एक व्यक्ति के द्वारा भगवान के चरण कमलों

256
00:18:46,160 --> 00:18:50,160
का ही भजन करता है उसे भगवान के प्रति प्रेममय भक्ति

257
00:18:50,160 --> 00:18:55,120
संसार के प्रति वैराग्य और अपने प्रियतम भगवान के स्वरूप की स्फूर्ति

258
00:18:55,120 --> 00:18:59,360
यह सब अवश्य ही प्राप्त होते हैं वह भागवत हो जाता है और जब ये सब प्राप्त

259
00:18:59,360 --> 00:19:05,280
हो जाते हैं तब वह स्वयं परम शांति का अनुभव करने लगता है।

260
00:19:05,280 --> 00:19:09,440
इसमें क्या है? इसमें अगर ओरिजिनल श्लोका

261
00:19:09,440 --> 00:19:12,640
देखें तो

262
00:19:12,640 --> 00:19:16,800
श्री हवा सर्वभूते पश्च भगवत भाव आत्म

263
00:19:16,800 --> 00:19:21,200
भूतानी भगवती आत्म ए भागवतो

264
00:19:21,200 --> 00:19:25,760
अगर मैं इंग्लिश में पढू तो कोई दिक्कत तो नहीं है इसमें वैसे ट्रांसलेशन

265
00:19:25,760 --> 00:19:30,160
की इंग्लिश मत पढ़िए आप हिंदी बताइए अच्छा

266
00:19:30,160 --> 00:19:34,160
ठीक है ठीक है ठीक है

267
00:19:34,160 --> 00:19:39,280
मुझे लग रहा है ये राजू जो बात है क्या ये

268
00:19:39,280 --> 00:19:43,920
श्री हवीर ने कहा हवीर जी तो

269
00:19:43,920 --> 00:19:48,160
एकादश स्कंध है दूसरा अध्याय है और

270
00:19:48,160 --> 00:19:52,400
45वा श्लोक है सबसे उन्नत भक्त प्रत्येक वस्तु

271
00:19:52,400 --> 00:19:56,720
में समस्त आत्माओं की आत्मा परमेश्वर श्री कृष्ण को देखता है फल

272
00:19:56,720 --> 00:20:01,040
स्वरूप वह सब कुछ परमेश्वर के संदर्भ में देखता है और समझता है

273
00:20:01,040 --> 00:20:05,360
कि जो कुछ भी विद्यमान है शाश्वत रूप से परमेश्वर में ही स्थित

274
00:20:05,360 --> 00:20:09,440
है और साथ में इसी के जस्ट

275
00:20:09,440 --> 00:20:14,560
नेक्स्ट श्लोक में मध्यम अधिकारी और कनिष्ठ अधिकारी भी दिया है।

276
00:20:14,560 --> 00:20:20,560
जस्ट अगले ही श्लोक में अगर आप देखो सिक्स जो भगवान से प्रेम उनके

277
00:20:21,040 --> 00:20:26,960
जो भगवान से प्रेम उनके भक्तों से मित्रता दुखी

278
00:20:26,960 --> 00:20:32,560
मध्यम अधिकारी का तो मुझे याद भी है। इसके चार सिम्टम्स है ओवर इसमें

279
00:20:32,560 --> 00:20:36,560
मध्यम शब्द आ रहा है क्या? मध्यम और उत्तम और ये

280
00:20:36,560 --> 00:20:40,960
आ रहा है

281
00:20:40,960 --> 00:20:45,040
भागवत उत्तम ये तो नहीं है ये वाला फिफ्थ 45 श्लोक

282
00:20:45,040 --> 00:20:49,120
है इसमें उत्तमा उत्तमा वाला वर्ड आ रहा है 46 में मध्यमा आ रहा है और

283
00:20:49,120 --> 00:20:53,360
47 में कनिष् आ रहा है हां भागवत उत्तम आ रहा है मध्यमा

284
00:20:53,360 --> 00:20:57,440
आ रहा है कनिष् भी आ रहा है ठीक है ओके तो उत्तम कनिष्ठ

285
00:20:57,440 --> 00:21:01,520
और मध्यमा आ रहा है इसमें ये वाली बात कहां पे आ रही है कि वो गिरता नहीं है फॉल डाउन नहीं

286
00:21:01,520 --> 00:21:03,840
होता

287
00:21:03,840 --> 00:21:08,080
देखिए जो उत्तम अधिकारी है ना उत्तम अधिकारी वो हर तरफ भगवान

288
00:21:08,080 --> 00:21:12,160
को देख पा रहा है। यानी वो हमेशा हर सेकंड भगवान का स्मरण कर पा रहा है। वो भगवान

289
00:21:12,160 --> 00:21:16,240
को एक भी क्षण के लिए भूल भूलता नहीं है। ये चीज है। लेकिन मध्यम

290
00:21:16,240 --> 00:21:20,480
अधिकारी जो है अगर आप उसके कैरेक्टरिस्टिक्स में देख तो चार चीजें

291
00:21:20,480 --> 00:21:25,760
आप एक बात समझिए। देखिए ऐसे अगर हम अपने मन से निकालेंगे

292
00:21:25,760 --> 00:21:29,760
मन से नहीं निकाल रहा। आप एक्सक्ट पढ़ सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं। एक एक मिनट एक मिनट। मैं जो

293
00:21:29,760 --> 00:21:33,760
है ना ये श्रीधरी टीका निकाल लेता हूं तो हमारा वो नहीं

294
00:21:33,760 --> 00:21:36,640
होगा ना श्रीधरी टीका तो मानना है ना आपको

295
00:21:36,640 --> 00:21:40,880
जी श्रीधरी टीका के अंदर आपका जो ट्रांसलिट्रेशन है

296
00:21:40,880 --> 00:21:45,280
मैं उसको 100% नहीं मानूंगा वो मुझे देखना पड़ेगा

297
00:21:45,280 --> 00:21:49,040
तो आपको फिर श्री

298
00:21:49,040 --> 00:21:53,120
आपको फिर श्रीधरी की प्रमाणिकता सिद्ध करनी होगी अपने कि आप जो

299
00:21:53,120 --> 00:21:57,120
श्रीधर स्वामी जी की ओर से बोलेंगे वो प्रमाणिक क्यों माना जाए क्योंकि आप तो श्रीधर

300
00:21:57,120 --> 00:22:01,360
स्वामी को अपनी परंपरा में गिनते नहीं क्यों नहीं गिनते हैं?

301
00:22:01,360 --> 00:22:05,440
कहां गिनते हो? यहां पर मैं आपको करेक्ट करूंगा।

302
00:22:05,440 --> 00:22:09,520
फॉर एक एग्जांपल देकर। अच्छा एक एक काम कर लेते हैं। पहले देख

303
00:22:09,520 --> 00:22:13,920
लेते हैं कि इन्होंने क्या लिखा है। ठीक है। मैं ये वाली इसमें

304
00:22:13,920 --> 00:22:18,080
देखिए अगर आप देखिए अगर ये वाली बात है ना कि मैं उनका

305
00:22:18,080 --> 00:22:22,160
ट्रांसलेशन नहीं मानूंगा। तो फिर मैं आपका ट्रांसलेशन क्यों मानू? जब इसमें

306
00:22:22,160 --> 00:22:26,160
गिरने की बात नहीं लिखी है और आपने जो तर्क दिया है कि उनको जो है

307
00:22:26,160 --> 00:22:30,640
भगवान ही दिखते हैं तो आपको मैं बता दूं कि

308
00:22:30,640 --> 00:22:34,800
अकॉर्डिंग टू डायरेक्टली वो भी लिखा है मैम ओके ओके हां

309
00:22:34,800 --> 00:22:39,040
सॉरी मैम बीच में काट दिया मुझे माफ करिएगा गिरने की बात डायरेक्टली

310
00:22:39,040 --> 00:22:43,120
वो गिरने वाली बात लिखी है तो बताइए हां गिरने की बात नहीं है

311
00:22:43,120 --> 00:22:47,600
लेकिन दूसरों से व्यवहार कैसा होता है व्यवहार

312
00:22:47,600 --> 00:22:51,600
वही मैं बता रहा हूं वही मैं बता रहा हूं जब यहां की तो बात छोड़िए

313
00:22:51,600 --> 00:22:52,100
यहां

314
00:22:51,680 --> 00:22:55,760
तो तब भी हमें पांच इंद्रियां प्राप्त है। कर्मेंद्रियां प्राप्त है। ज्ञानेंद्रियां प्राप्त

315
00:22:55,760 --> 00:23:01,040
है। है ना? 11 प्रकार की इंद्रियां हमें प्राप्त है। तो फिर भी

316
00:23:01,040 --> 00:23:05,200
जब हम मुक्त थे भगवान की ही शरण में थे तब

317
00:23:05,200 --> 00:23:09,440
भी हमारा फॉल डाउन हो गया। तो यहां पर आप ये कह रहे हैं उसका फॉल

318
00:23:09,440 --> 00:23:14,000
डाउन हो नहीं सकता। ये लिखा है यहां पर। तो ये बात तो मैच ही नहीं कर रही है।

319
00:23:14,000 --> 00:23:18,000
ये मैं एज अ क्वेश्चन एक और लिख लेता हूं। मैं इस पे भी आऊंगा। अभी हम एक एक

320
00:23:18,000 --> 00:23:22,000
करके चलते हैं। पहली चीज हमारी जो बात हुई वो हुई कनिष्ठ मध्यम

321
00:23:22,000 --> 00:23:26,080
और उत्तम का बिहेवियर कैसा होता है और साथ में वो फॉल डाउन वाली चीज कहां लिखी है

322
00:23:26,080 --> 00:23:30,160
ये चीज है ना नहीं तो हम लोग तो फॉल डाउन के लिए आए हैं ना मैंने कनिष्ठ मध्यम उत्तम मैंने

323
00:23:30,160 --> 00:23:34,160
किया ही नहीं आपने शुरू किया वो तो अब आपने कहा वो फॉल डाउन नहीं होता

324
00:23:34,160 --> 00:23:38,320
जो उत्तम भक्त होता है पहली चीज तो उसका फॉल डाउन फॉल

325
00:23:38,320 --> 00:23:42,320
डाउन ना होना यहां नहीं लिखा है और मैं आपको बता दूं यहां पे जो भी आया

326
00:23:42,320 --> 00:23:46,720
है वो फॉल डाउन होकर ही आया है और वो बहुत अच्छी उसमें था

327
00:23:46,720 --> 00:23:50,960
यह तो कुछ भी नहीं है। उत्तम भक्त होने के ठीक है। ठीक है। वो अच्छी स्थिति

328
00:23:50,960 --> 00:23:55,040
में था लेकिन वो उत्तम भक्त से भी उत्तम भक्त से भी

329
00:23:55,040 --> 00:23:59,600
अच्छी स्थिति में था। मुक्त था वो। ये तो अच्छा

330
00:23:59,600 --> 00:24:03,680
ये मैं एग्री नहीं करता हूं। तो अच्छा तो बताइए यहां

331
00:24:03,680 --> 00:24:06,800
पर ये जो उत्तम अधिकारी की बात हो रही है ना ये बात हो रही

332
00:24:06,800 --> 00:24:10,960
है कि उत्तम अधिकारी इस भगवान की पर्सनल फॉर्म

333
00:24:10,960 --> 00:24:15,120
को रियलाइज कर चुका व्यक्ति। ठीक है? भगवान की जो अगर अगर

334
00:24:15,120 --> 00:24:19,200
आप देख भगवान के तीन लेवल्स हम बांट सकते हैं। भगवान की

335
00:24:19,200 --> 00:24:23,440
पर्सनल फॉर्म को भगवान की पर्सनल फॉर्म को उसने रियलाइज कर लिया है।

336
00:24:23,440 --> 00:24:28,080
ठीक है? मगर वो फॉल डाउन नहीं हो सकता। ये यहां पर मेंशन नहीं है।

337
00:24:28,080 --> 00:24:32,080
और अगर ऐसी बात अगर हम कहे तो जो व्यक्ति बैकुंठ में

338
00:24:32,080 --> 00:24:36,080
है उसका भी फॉल डाउन हुआ है। वो भी भगवान की पर्सनल उसको

339
00:24:36,080 --> 00:24:40,320
रियलाइज कर चुका है। उसका भी फॉल डाउन हुआ है। में है उसका फॉल

340
00:24:40,320 --> 00:24:44,320
डाउन नहीं होता। किसका? ये भगवत गीता में लिखा है। ये भगवत गीता में लिखा है

341
00:24:44,320 --> 00:24:48,400
जो वैुंठ में है तम परम यत न निवते

342
00:24:48,400 --> 00:24:52,480
ये तो आप ही तो कह रहे हो वही से आए हम लोग आप

343
00:24:52,480 --> 00:24:56,720
ही तो कह रहे हो वही से आए हम लोग हां हम दो

344
00:24:56,720 --> 00:25:00,880
देखो वहां पर भी ना स्टेजेस है लेवल्स है हम ऐसे नहीं कह सकते अरे फॉल डाउन

345
00:25:00,880 --> 00:25:04,880
हुआ कि नहीं हुआ वहां से नहीं वैुंठ से नहीं हुआ वैुंठ के

346
00:25:04,880 --> 00:25:08,880
नीचे भी एक स्टैंडर्ड है वैुंठ के नीचे यानी हम लोग वैकुंठ में नहीं

347
00:25:08,880 --> 00:25:13,200
थे जी हम लोग वैुंठ में नहीं थे हम नित्य

348
00:25:13,200 --> 00:25:17,200
बद्ध जीव है और जो वैुंठ में है वो नित्य सिद्ध जीव

349
00:25:17,200 --> 00:25:21,840
है। यानी कि हम कभी भी

350
00:25:21,840 --> 00:25:22,400
मुक्त

351
00:25:22,400 --> 00:25:26,560
थे ही नहीं। हम जो नित्य सिद्ध जीव है

352
00:25:26,560 --> 00:25:30,640
उसके जो नीचे वाला लेवल है। ठीक है? नित्य सिद्ध वो नित्य

353
00:25:30,640 --> 00:25:34,720
सिद्ध जीव जो है वो वहां पर भक्ति करके पहुंचे हैं ना।

354
00:25:34,720 --> 00:25:39,280
हां वो भक्ति करके पहुंचे हैं। लेकिन हम भक्ति कभी किए नहीं। हम

355
00:25:39,280 --> 00:25:44,000
हम भक्ति नहीं किए क्योंकि भक्ति मतलब सेवा और हम सेवा से

356
00:25:44,000 --> 00:25:49,840
विरोध करके यहां भोग की वृत्ति कर रहे हैं इसलिए हम यहां है

357
00:25:49,840 --> 00:25:54,880
तो ये जो यहां पे जो यहां पे जो भक्त है वो

358
00:25:54,880 --> 00:25:58,880
यहां पे जो यहां पे जो उत्तम भक्त है वो वो वाले लेवल पे भगवान को देख

359
00:25:58,880 --> 00:26:03,280
रहा है जो जिस लेवल पे जीव था ही नहीं। नहीं

360
00:26:03,280 --> 00:26:07,360
यहां पर उत्तम भक्त जो है यह वहां पर भगवान को देख रहे हैं

361
00:26:07,360 --> 00:26:11,520
जहां पर भगवान जीव सब है भगवान का एक अलग

362
00:26:11,520 --> 00:26:15,520
धाम है उत्तम भक्त उन जहां से हम लोग आए नहीं है जहां से

363
00:26:15,520 --> 00:26:19,760
हम लोग आए नहीं है वहां से हम आए नहीं है क्योंकि वहां से तो होता ही नहीं जितने

364
00:26:19,760 --> 00:26:24,000
भी लोग जितने भी लोग वहां भगवान के लोक में है वो वो पहले नीचे वाले

365
00:26:24,000 --> 00:26:28,080
लेवल पर थे या वो भगवान के लोक में भी कुछ

366
00:26:28,080 --> 00:26:32,320
नित्य लोग हैं और भी भगवान के भगवान के

367
00:26:32,320 --> 00:26:36,720
वर्ल्ड में भी कुछ नित्य पार्षद है। नीचे में भी कुछ नित्य पार्षद

368
00:26:36,720 --> 00:26:37,440
है और

369
00:26:37,440 --> 00:26:41,600
यहां पे भी कभी-कभी कुछ नित्य होते हैं लोग जो बहुत ज्यादा ऑफेंसिव मेंटालिटी

370
00:26:41,600 --> 00:26:45,600
वाले होते हैं। तो जो लोग शुरुआत

371
00:26:45,600 --> 00:26:49,600
से ही नित्य हैं जो लोग शुरुआत से ही नित्य हैं तो ये

372
00:26:49,600 --> 00:26:53,680
तो तत्व ज्यादा हो जाएंगे। फिर जो लोग शुरुआत से ही

373
00:26:53,680 --> 00:26:57,920
नित्य है। नहीं तत्व ज्यादा नहीं है। यहां लेकिन एक ही तत्व

374
00:26:57,920 --> 00:27:01,920
के अंदर कैटेगरीज नहीं हो सकती। इसमें तो कोई दिक्कत है नहीं। एक ही है जीव

375
00:27:01,920 --> 00:27:06,080
तत्व और जीव तत्व का मतलब होता है मार्जिनल पोटेंसी या आसान शब्दों

376
00:27:06,080 --> 00:27:10,160
में बोलूं तटस्थ शक्ति। तटस्थ शक्ति के पास चॉइस होती है।

377
00:27:10,160 --> 00:27:14,480
हालांकि आपकी ये वाली जो बात है ना कि वो लोग नित्य

378
00:27:14,480 --> 00:27:18,480
थे मतलब वो जो है वो मुक्ति में थे ही नहीं। ये वाली जो आपकी

379
00:27:18,480 --> 00:27:22,480
बात है मुक्ति की पांच कैटेगरी है। और वो पांच

380
00:27:22,480 --> 00:27:26,480
लिस्ट करता हूं। पहली होती है सबसे नीचे। अरे तो मुक्ति मुक्ति में थे

381
00:27:26,480 --> 00:27:30,560
ना मुक्ति में थे मैं

382
00:27:30,560 --> 00:27:34,640
ये कह रहा हूं भक्ति से फॉल डाउन नहीं होता मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ

383
00:27:34,640 --> 00:27:38,640
रहा हूं कि मुक्ति में थे कि नहीं थे मुक्ति से भी फॉल डाउन हो सकता

384
00:27:38,640 --> 00:27:42,880
है मैंने मैंने अभी क्या पूछा देखिए भाई साहब थोड़ा सा मैं प्लीज

385
00:27:42,880 --> 00:27:46,880
आप बहुत अच्छा बहुत अच्छे से चल रहा है मैं पूछ रहा हूं कि वो मुक्ति

386
00:27:46,880 --> 00:27:50,320
में थे कि नहीं थे

387
00:27:50,320 --> 00:27:52,640
कौन आप नित्य सिद्धों

388
00:27:52,640 --> 00:27:56,720
की बात जो अभी यहां पे आके उत्तम भक्त बन रहे हैं जो

389
00:27:56,720 --> 00:28:00,800
यहां पर आके उत्तम भक्त बनने वाले जो है उनकी दो केटेगरी है जो ऊपर से आ

390
00:28:00,800 --> 00:28:05,040
रहे हैं और पहले से ही उत्तम थे। ठीक है और कहां से आ रहे हैं?

391
00:28:05,040 --> 00:28:09,120
कहां से आ रहे हैं? भगवान के धाम से ही आ रहे हैं और पहले से ही मुक्त

392
00:28:09,120 --> 00:28:14,000
थे। नित्य सिद्ध जीव कहते हैं। नित्य यानी इटरनल सिद्ध

393
00:28:14,000 --> 00:28:18,000
हमेशा। तो ये वाले जो जो मधवाचार्य जी है और प्रभुपाद

394
00:28:18,000 --> 00:28:22,000
जी है ये डायरेक्ट भगवान के उससे आए हैं। ये आप कह रहे हैं

395
00:28:22,000 --> 00:28:26,080
और इसके रेफरेंसेस मैं दे सकता हूं। इसके रेफरेंस मैं दे सकता हूं। अब अब

396
00:28:26,080 --> 00:28:30,240
ये ये बात आ गई क्लियर हो गया। अच्छा अब अब थोड़ा सा हो गया कि कुल मिलाकर

397
00:28:30,240 --> 00:28:34,320
के उत्तम भक्त जो है वो डायरेक्ट वहां से आया है।

398
00:28:34,320 --> 00:28:38,320
जो सबसे पराकाष्ठा वाला लोक है। एक और कैटेगरी है जो यहां से

399
00:28:38,320 --> 00:28:42,960
उत्तम बनते हैं। पहले मैंने भाई साहब अभी आपसे क्लियर क्या पूछा?

400
00:28:42,960 --> 00:28:46,960
ये जो ये वाले जो है प्रभुपाद जी प्रभुपाद जी वाले लोग

401
00:28:46,960 --> 00:28:50,960
हैं ये ऊपर वाले लोक से आए हैं। प्रभुपाद जी उत्तम अधिकारी है

402
00:28:50,960 --> 00:28:54,960
लेकिन उत्तम अधिकारी ऊपर से भी आ सकते हैं और नीचे से कोई मैंने क्या

403
00:28:54,960 --> 00:28:59,040
पूछा ये भाई साहब ये कहां से आए हैं? आप ये बताओ ना ऊपर

404
00:28:59,040 --> 00:29:03,280
वाले से आए हैं ना मेन वाले से आए हैं ना

405
00:29:03,280 --> 00:29:07,440
और हम यहां से भाई साहब भाई साहब मैं मैं जो पूछ रहा हूं क्लियर

406
00:29:07,440 --> 00:29:07,940
है

407
00:29:07,760 --> 00:29:12,480
हां मेन वाले से प्रभुपाद जी आए हैं ना जी जी जी

408
00:29:12,480 --> 00:29:16,640
हां हां हां जी बिल्कुल हां मेन जहां

409
00:29:16,640 --> 00:29:21,360
इसके बाद कहीं नहीं जाना है उस वाले से आए है ना

410
00:29:21,360 --> 00:29:25,440
हां ठीक है तो ये फॉल डाउन नहीं है नहीं

411
00:29:25,440 --> 00:29:29,600
ये फॉल डाउन नहीं है क्योंकि वो वो परमिशन ले आए हैं और हमारा उद्धार करने के

412
00:29:29,600 --> 00:29:34,720
लिए आए हैं। अच्छा ठीक। मतलब वो वो

413
00:29:34,720 --> 00:29:38,960
परमिशन लेकर के आए हैं और हमारा उद्धार करने के लिए आए हैं। है ना? अब मुझे

414
00:29:38,960 --> 00:29:43,600
प्रभुपाद जी के संबंध में आप प्रमाण दे दीजिए कि वो बैकुंठ से आए थे।

415
00:29:43,600 --> 00:29:47,600
जी दे सकता हूं। ये यहां पर पहली चीज

416
00:29:47,600 --> 00:29:51,600
आती है कि जब हम प्रमाण देते हैं तो इसमें लॉजिकल रीजनिंग के भी

417
00:29:51,600 --> 00:29:55,840
कुछ रूल्स लग सकते हैं। वो वो आप दीजिए। मैं मैं देखूंगा कि उसमें लॉजिक से कट

418
00:29:55,840 --> 00:30:00,240
सकता है कि नहीं। नहीं कटेगा तो मैं उसको मानूंगा। जी पहला प्रमाण

419
00:30:00,240 --> 00:30:04,400
ये पहले मैं ये एस्टब्लिश करना पसंद करूंगा कि श्री चैतन्य महाप्रभु

420
00:30:04,400 --> 00:30:08,800
साक्षात कृष्ण है। उसकी क्या आवश्यकता है?

421
00:30:08,800 --> 00:30:13,120
ये एस्टब्लिश करने की वजह से प्रभुपाद जी की एस्टब्लिशमेंट

422
00:30:13,120 --> 00:30:17,280
हो पाएगी। मतलब आपके पास शास्त्रीय वो

423
00:30:17,280 --> 00:30:21,440
नहीं है। आपके जो सेक्ट के द्वारा लिखे गए वो है ग्रंथ उनको आप फिर प्रस्तुत करना

424
00:30:21,440 --> 00:30:23,040
चाहते हैं। ग्रंथ

425
00:30:23,040 --> 00:30:27,120
नहीं है। मैं प्रूफ कर सकता हूं कैसे नहीं है। नहीं

426
00:30:27,120 --> 00:30:31,680
वो आप वो आप जो ग्रंथ है जिनको आप प्रूफ कर वो

427
00:30:31,680 --> 00:30:35,680
ग्रंथ नहीं है। और एक्चुअली सेक्टेरियन नहीं है। मैं नहीं कह रहा

428
00:30:35,680 --> 00:30:39,920
वो सेक्टेरियन है। जिनको आप प्रस्तुत करना चाहते हैं शास्त्र जिनमें प्रभुपाद

429
00:30:39,920 --> 00:30:43,920
जी का बैकुंठ से आना लिखा है। अपनी मर्जी से आना लिखा है वो आप मुझे

430
00:30:43,920 --> 00:30:47,920
बता दीजिए। ठीक है। एक तो दिव्य प्रबंध में है। दिव्य

431
00:30:47,920 --> 00:30:52,080
प्रबंध रामचार्य जी के संप्रदाय का है। वहां पर एक पर्टिकुलर

432
00:30:52,080 --> 00:30:56,080
लाइन आती है कि अहो अहो मतलब

433
00:30:56,080 --> 00:31:00,080
बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया और अब कोई नर्क नहीं जाएगा। कोई नर्क नहीं

434
00:31:00,080 --> 00:31:04,320
जाएगा। क्योंकि पाश्चात्य देश में वेस्टर्न कंट्रीज में भी सारे लोग भगवान

435
00:31:04,320 --> 00:31:08,400
का नाम ऊंचे सुर में कीर्तन करते हुए ले रहे हैं। और अब कोई नर्क नहीं जाएगा। ये डिस्क्रिप्शन आता है। एक

436
00:31:08,400 --> 00:31:14,160
दिव्य प्रबंधन में आता है। ठीक है? दूसरा डिस्क्रिप्शन मिलता है

437
00:31:14,160 --> 00:31:18,240
आप इसको मान रहे हैं। मैं प्रूफ कर लिखी है

438
00:31:18,240 --> 00:31:22,400
कि ये जो जो लोग कीर्तन कर रहे हैं उनको कीर्तन कराने

439
00:31:22,400 --> 00:31:28,400
वाला व्यक्ति जो है वो बैकुंठ से आया है।

440
00:31:30,000 --> 00:31:34,160
जो लोग कीर्तन कर रहे हैं उनको हम लोग ये जांच कर रहे हैं कि इनका

441
00:31:34,160 --> 00:31:40,160
प्रमाण कैसे मिलता है। प्रभुपाद जी जो है वही से आए ऊपर वाले से

442
00:31:40,720 --> 00:31:44,720
जी भविष्यवाणी के नजरिए से देखा जाए तो मिल सकता है लेकिन अगर आप

443
00:31:44,720 --> 00:31:48,800
उसको सेक्टेरियन मानेंगे तो फिर कोई फायदा नहीं होगा। मैं एक तरीके

444
00:31:48,800 --> 00:31:53,280
से मैं आप अपना पक्ष प्रस्तुत करिए। कर्मवादी

445
00:31:53,280 --> 00:31:57,280
कार माले कदाचना पर विश्वास रखिए। ठीक है। ठीक है। मैं

446
00:31:57,280 --> 00:32:01,680
एक तो दिव्य प्रबंध एक लिस्ट कर सकते हैं आप। दूसरा श्रीमद्

447
00:32:01,680 --> 00:32:05,760
भागवतम में भी आता है कि श्रीमद् भागवतम कलयुग

448
00:32:05,760 --> 00:32:10,080
में वेस्टर्न कंट्रीज यानी पाश्चात्य देश में जाएगा। आप देख सकते हैं रेफरेंस

449
00:32:10,080 --> 00:32:14,320
का श्रीमद् भागवतम कलयुग श्रीमद् भागवतम कलयुग में नारद

450
00:32:14,320 --> 00:32:18,800
मुनि ने ऐसा बोला था कि श्रीमद् भागवतम कलयुग में पाश्चात्य

451
00:32:18,800 --> 00:32:22,800
देश में जाएगा। तो इनफ जब प्रभुपाद जी से पूछा गया कि आपने इतनी सारी

452
00:32:22,800 --> 00:32:27,280
प्रीचिंग कर दी तो प्रभुपाद जी कहते थे ये भागवतम मुझे लेके जा रहा है ऑबियसली विनम्रता

453
00:32:27,280 --> 00:32:32,560
वश वो भी ये कहां लिखा है पहले तो ये बता दीजिए थोड़ा सा

454
00:32:32,560 --> 00:32:36,880
भागवत पुराण में भविष्यवाणी की श्रीमद् भागवतम कंट्री

455
00:32:36,880 --> 00:32:42,640
से बाहर जाएगा भारतवर्ष से बाहर जाएगा

456
00:32:42,640 --> 00:32:48,640
बताइए जी जस्ट मिनट

457
00:32:51,920 --> 00:32:57,920
जी

458
00:33:02,640 --> 00:33:08,640
हम

459
00:33:53,360 --> 00:33:57,520
मतलब ये कन्वर्सेशन ऐसी चल रही थी कि नारद मुनि भक्ति देवी से बात कर रहे थे और

460
00:33:57,520 --> 00:33:58,020
भक्ति

461
00:33:57,920 --> 00:34:02,000
देवी ने कहा था कि मैं कहां पे है वो बता दीजिए मैं खोल लूं।

462
00:34:02,000 --> 00:34:08,000
जी जी जस्ट अ मिनट

463
00:34:10,800 --> 00:34:15,520
उनकी मर्जी याद दिला दीजिए

464
00:34:15,520 --> 00:34:21,520
कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं

465
00:34:22,720 --> 00:34:26,960
वैसे एक बात आपको बता दू कर सकते है

466
00:34:26,960 --> 00:34:31,280
वैसे एक बात मैं आपको बता दू आप ये बता दीजिए मगर हमें मूल ये देखना

467
00:34:31,280 --> 00:34:35,520
है। यदि वो यह कह रहा है कि भागवत यहां से बाहर जाएगा तो उसको ले जाने

468
00:34:35,520 --> 00:34:40,160
वाला वही होगा जो बैकुंठ से आया है। मुक्त धाम से परम मुक्त धाम से।

469
00:34:40,160 --> 00:34:44,160
जी। इसके जो कोटेशंस है इस कोटेशंस के लिए

470
00:34:44,160 --> 00:34:48,240
ही मुझे श्री चैतन्य महाप्रभु की स्थापना करने की जरूरत थी। क्योंकि अगर आप श्री चैतन्य

471
00:34:48,240 --> 00:34:52,400
महाप्रभु को शास्त्रों में एक्सेप्ट करेंगे तो श्री चैतन्य महाप्रभु के

472
00:34:52,400 --> 00:34:56,720
पर्सनल सर्वेंट्स यानी उनके परंपरा में आने वाले जो ग्रंथ हैं

473
00:34:56,720 --> 00:35:00,720
उनके उनकी स्थापना ऑटोमेटिकली हो जाएगी। उनके पर्सनल शिष्य

474
00:35:00,720 --> 00:35:04,960
अगर हम ऐसे अगर करें कि श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान है इसलिए

475
00:35:04,960 --> 00:35:09,280
उनके द्वारा कही गई बातों को मानना पड़ेगा। ठीक है? तो और उनके

476
00:35:09,280 --> 00:35:12,960
द्वारा कही गई बातों को जो है आप ही प्रस्तुत करेंगे तो फिर

477
00:35:12,960 --> 00:35:17,280
हमें यहां बैठने की जरूरत ही नहीं है। चैतन महाप्रभु को भगवान मान लिया। चैतन

478
00:35:17,280 --> 00:35:21,600
महाप्रभु को भगवान मान लिया। उसके बाद उनके नाम से जितनी चीजें छपी हुई है आपके

479
00:35:21,600 --> 00:35:25,760
द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी। मैं उनको सिरोधार कर लूं तो बात ही खत्म हो गई। फिर तो कुछ

480
00:35:25,760 --> 00:35:30,320
रह ही नहीं गया ना। हमें आठ ग्रंथों की आवश्यकता है।

481
00:35:30,320 --> 00:35:34,640
आप चैतन्य महाप्रभु को भगवान सिद्ध करके फिर उनके रेफरेंस

482
00:35:34,640 --> 00:35:38,640
से कि यह किताबें उनके ही प्रामाणिक शिष्यों के हमें यहां पर आपके ऊपर

483
00:35:38,640 --> 00:35:42,880
विश्वास करना होगा। ये आपके पर्सनलाइज ग्रंथ है।

484
00:35:42,880 --> 00:35:47,280
नहीं पर्सनलाइज नहीं है। मैं प्रूफ कर सकता हूं। ये प्रूफ कर तो आप वो जो है

485
00:35:47,280 --> 00:35:51,280
हमारे आर्ट्स ग्रंथों से प्रूफ करिए ना। अपनी परंपरा से जो भाष्य

486
00:35:51,280 --> 00:35:55,280
लिख के जो उनके शिष्यों ने उन्हीं पे तो चैलेंज है। उन्हीं को तो क्लेम

487
00:35:55,280 --> 00:35:59,360
कर रहा हूं। अभी उनकी प्रामाणिकता हमने एक्सेप्ट ही नहीं की। तो आप उसको एज ए प्रूफ कैसे रख

488
00:35:59,360 --> 00:36:03,600
सकते हो? ऐसे तो फिर मैं अपनी परंपरा की चीजों को रखूंगा तो आप मान लोगे क्या?

489
00:36:03,600 --> 00:36:09,280
और मैं प्रूफ कर दूंगा शंकराचार्य जो है भगवान शिव थे।

490
00:36:09,280 --> 00:36:13,680
जी शंकराचार्य जी भगवान शिव थे। इसमें

491
00:36:13,680 --> 00:36:17,760
मुझे भी कोई डाउट नहीं है। लेकिन और मैं ये

492
00:36:17,760 --> 00:36:21,760
भी प्रूफ करूंगा कि वो मायावाद वाला मामला जो आपने रस वो रायता फैला

493
00:36:21,760 --> 00:36:26,240
हुआ है उसको भी प्रूफ कर दूंगा। वैष्णव परंपरा के ही वैष्णव

494
00:36:26,240 --> 00:36:28,160
परंपरा का आपने कोट किया ना वैष्णव

495
00:36:28,160 --> 00:36:32,560
परंपरा के प्रामाणिक आचार्य ने अपने उसमें लिखा है वो श्लोक प्रक्षिप्त

496
00:36:32,560 --> 00:36:38,240
है हमने प्रक्षिप्त नहीं कहा हमने कहा का पालिकों के लिए

497
00:36:38,240 --> 00:36:42,720
प्रक्षिप्त मतलब प्रक्षिप्त मतलब मिलावट

498
00:36:42,720 --> 00:36:46,800
वैष्णव परंपरा के प्रामाणिक आचार्य ने अभी आपने श्री संप्रदाय

499
00:36:46,800 --> 00:36:50,960
का कोट किया ना यानी श्री संप्रदाय के आचार्यों को आप प्रामाणिक मान

500
00:36:50,960 --> 00:36:55,040
रहे हो तभी तो कोट कर रहे तो वैष्णव संप्रदाय

501
00:36:55,040 --> 00:36:59,360
के प्रामाणिक आचार्य ने उस श्लोक को प्रक्षिप्त कहा है और हमने

502
00:36:59,360 --> 00:37:03,440
उसको कापालिकों के लिए कहा है जिनको दक्ष के दक्ष के यज्ञ

503
00:37:03,440 --> 00:37:07,440
के समय श्राप मिला था उनकी मुक्ति के लिए दोनों में से कोई भी बात

504
00:37:07,440 --> 00:37:11,440
मानी जा सकती है परंतु शंकर वो शंकराचार्य जी

505
00:37:11,440 --> 00:37:15,440
के ऊपर वो लागू इसलिए नहीं होता क्योंकि वो वैदिक थे और उसमें अवैदिक दर्शन की बात

506
00:37:15,440 --> 00:37:19,440
हो रही है उन्होंने जो दर्शन दिया है वेद के अर्थ में दिया

507
00:37:19,440 --> 00:37:23,440
है और वो वहां पर जो बात हो रही है वहां पर वेद के विरुद्ध भी बात हो

508
00:37:23,440 --> 00:37:27,440
रही है दर्शन की तो ऐसे बहुत सी चीजें हैं और उनके बारे

509
00:37:27,440 --> 00:37:31,600
में जहांजहां पर भविष्यवाण आ रही है जिससे वो शिव जी सिद्ध होते हैं शिव के अवतार सिद्ध

510
00:37:31,600 --> 00:37:35,760
होते हैं जिसको आप मान रहे पर्सनली बोला है तो अब कहीं ना कहीं तो देखो लिखना

511
00:37:35,760 --> 00:37:40,000
पड़ेगा ना देखो इतना तो हम कंट्राडिक्ट नहीं कर सकते कि श्री चैतन्य महाप्रभु

512
00:37:40,000 --> 00:37:43,200
तो आप आप फिर ये क्लेम मत करिए कि भाई वो

513
00:37:43,200 --> 00:37:47,280
बैकुंठ से आए हैं। क्यों आए हैं? क्योंकि चैतन्य महाप्रभु भगवान है और उनके नाम से

514
00:37:47,280 --> 00:37:51,280
उनके शिष्यों ने कुछ लिखा है उसको मैं मान तो सब कुछ मान लेता हूं। स्वयं

515
00:37:51,280 --> 00:37:55,600
बोला स्वयं बोला और किसी ने सुना तो लिखेंगे ही ना वो प्रामाणिकता

516
00:37:55,600 --> 00:37:59,680
कैसे सिद्ध होगी अभी तो आपकी प्रामाणिकता

517
00:37:59,680 --> 00:38:04,160
सिद्ध नहीं हो रही है अभी मैं चैतन महाप्रभु से आपकी कनेक्टिविटी भी देखूंगा ना

518
00:38:04,160 --> 00:38:08,160
ओके ओके ओके क्वेश्चन ये है कि उन्होंने बोला

519
00:38:08,160 --> 00:38:12,160
और किसी ने लिखा ये प्रामाणिकता उन्होंने बोला और किसी ने

520
00:38:12,160 --> 00:38:17,520
लिखा प्रामाणिकता सिद्ध कैसे होगी अच्छा बताइए कि

521
00:38:17,520 --> 00:38:21,760
ड गोस्वामियों ने प्रभुपाद जी के लिए बोला है तू बैकुंठ के अवतार

522
00:38:21,760 --> 00:38:26,960
है। हां

523
00:38:26,960 --> 00:38:31,680
बोला है। हां कहां पे बोला है? कृष्णदास

524
00:38:31,680 --> 00:38:36,320
गोस्वामी रघुनाथ दास गोस्वामी के डायरेक्ट डिसाइपल थे। रूप रघुनाथ पदे

525
00:38:36,320 --> 00:38:40,320
चैतन्य देखिए मैं बहुत ज्यादा नहीं मैं बहुत ज्यादा आपको नहीं बताऊंगा। मगर

526
00:38:40,320 --> 00:38:44,640
अगर ऐसा है कि सर गोस्वामी ने बोला है तो जो आज के टाइम के प्रामाणिक

527
00:38:44,640 --> 00:38:48,800
आचार्य हैं गिया वैष्णव संप्रदाय के वो विरोध क्यों कर रहे हैं?

528
00:38:48,800 --> 00:38:52,880
वो विरोध इसलिए कर रहे हैं देखिए विरोध करने

529
00:38:52,880 --> 00:38:56,880
यानी यानी कि चैतन्य महाप्रभु के शिष्य झूठ बोल सकते

530
00:38:56,880 --> 00:39:00,880
हैं ना नहीं आप कह तो रहे वो विरोध

531
00:39:00,880 --> 00:39:04,960
इसलिए कर रहे उनका जो विरोध है वो

532
00:39:04,960 --> 00:39:08,960
भी तो उनहीं के शिष्य है वो भी तो उनहीं के शिष्य है वो भी

533
00:39:08,960 --> 00:39:13,120
उनहीं के शिष्य है लेकिन उनके बारे में शास्त्रों में ये नहीं लिखा कि वो फ्यूचर में आएंगे लेकिन चैतन्य

534
00:39:13,120 --> 00:39:17,120
महाप्रभु ने ये नहीं तो उनके लिए भी उनके लिए

535
00:39:17,120 --> 00:39:21,120
मैं ये कह रहा हूं आप जिसके तरफ से वह प्रस्तुत कर रहे हैं

536
00:39:21,120 --> 00:39:25,280
उनके लिए भी तो नहीं लिखा है। एक बार दोबारा ये लाइन रिपीट

537
00:39:25,280 --> 00:39:29,520
करिएगा। जैसे कि आपने कहा कि भैया

538
00:39:29,520 --> 00:39:33,840
चैतन्य महाप्रभु जी के शिष्यों ने चैतन्य महाप्रभु की जी की वाणी को नोट

539
00:39:33,840 --> 00:39:37,920
किया। ठीक जी कोई उसके बाद उन्होंने वो वाणी अपने

540
00:39:37,920 --> 00:39:43,200
उसके बाद वो वाणी उन्होंने अपने उत्तराधिकारियों को दी। आगे परंपरा में

541
00:39:43,200 --> 00:39:47,360
ठीक है। उसके बाद उन्होंने आगे परंपरा में दी। ऐसे करते करते वो

542
00:39:47,360 --> 00:39:51,680
वाणी आज आई है आप तक बीच में गौडिया वैष्णव संप्रदाय है तो गौडिया

543
00:39:51,680 --> 00:39:55,840
वैष्णव संप्रदाय के जो प्रमाणिक आचार्य गण है वो प्रभुपाद

544
00:39:55,840 --> 00:39:59,920
जी को नहीं मान रहे हैं जबकि उन्हीं से ड गोस्वामियों की वाणी आप तक

545
00:39:59,920 --> 00:40:03,920
आई है। ठीक है। वो प्रमाणिक आचार्य जो है आप

546
00:40:03,920 --> 00:40:09,360
किन की बात कर रहे हैं? रघुनाथ दास शास्त्री वृंदावन

547
00:40:09,360 --> 00:40:13,520
थोड़ा सा उनके बारे में वो आप हमारा वीडियो वो आप हमारा

548
00:40:13,520 --> 00:40:17,680
वो आप हमारा वीडियो शायद नित्यानंद परिवार के हैं वो हमारा वीडियो आप देख सकते

549
00:40:17,680 --> 00:40:21,760
हैं उन्होंने खुल के विरोध किया है अगर आप ये कहते हैं कि

550
00:40:21,760 --> 00:40:26,000
वो वो अगर आप ये कहते हैं कि वो जो जिस सीरीज में है उन्होंने

551
00:40:26,000 --> 00:40:31,280
और भी कई सारी बातें बताई है कि इस के पास जो है वो जो

552
00:40:31,280 --> 00:40:35,520
जो मुक्ति होती है ना तो अलग-अलग परिवारों के वो है कि वहां वहां पर क्या-क्या गहने

553
00:40:35,520 --> 00:40:39,520
होते हैं ऑर्नामेंट्स वगैरह उनके चित्र इत्यादि तो वो सब इस के पास

554
00:40:39,520 --> 00:40:43,680
वो डिटेलिंग नहीं है वो एक आचार्य के पास ही होती है जो परंपरा से होता है आचार्य ग

555
00:40:43,680 --> 00:40:47,680
वैष्णव उन्होंने और भी चीजें बताई ठीक

556
00:40:47,680 --> 00:40:52,640
है ठीक है वो मामला थोड़ा सा बदल जाएगा अब थोड़ा मूल विषय पे आ जाते हैं।

557
00:40:52,640 --> 00:40:56,640
मैं उनकी इस बात को एग्री नहीं करता हूं और मैं ये भी एग्री नहीं करता हूं कि

558
00:40:56,640 --> 00:40:58,240
नित्यानंद देखिए बात ये नहीं

559
00:40:58,240 --> 00:41:02,560
है। बात ये बात ये नहीं है कि आप एग्री करते हैं कि मैं भी मैं भी इस बात को स्वीकार

560
00:41:02,560 --> 00:41:06,880
कर रहा हूं। आप मेरी बात आप मेरी बात समझ नहीं पा रहे।

561
00:41:06,880 --> 00:41:10,880
चैतन्य महाप्रभु के प्रामाणिक शिष्यों के में

562
00:41:10,880 --> 00:41:14,960
से किसी एक शिष्य की बात है। प्रमाणिक आपने उनको कैसे स्वीकार

563
00:41:14,960 --> 00:41:18,960
किया? किस बेसिस पे? प्रमाणिक बोलते हैं तो कोई

564
00:41:18,960 --> 00:41:23,120
बेसिस तो होना चाहिए ना। किसी को प्रमाणिक माने वो प्रमाणिक का मतलब

565
00:41:23,120 --> 00:41:27,120
है कि वो ठीक है। तो आप अप्रामाणिक कैसे है? अप्रामाणिक

566
00:41:27,120 --> 00:41:31,200
कैसे है? बताइए। अप्रमाणिक पहला डायरेक्ट कंफ्यूजन तो

567
00:41:31,200 --> 00:41:35,360
यह है कि अप्रमाणिक परिवार से आने वाला कोई

568
00:41:35,360 --> 00:41:39,680
भी व्यक्ति होता है इंजीनियर का बेटा इंजीनियर नहीं होता

569
00:41:39,680 --> 00:41:43,680
नहीं वो वो इंजीनियर नहीं है वो बाकायदा घोषित उत्तराधिकारी

570
00:41:43,680 --> 00:41:47,840
है वो बाकायदा पिछले

571
00:41:47,840 --> 00:41:51,840
सुनिए वो पिछले तो प्रमाणिक नहीं है कोई बात

572
00:41:51,840 --> 00:41:56,240
नहीं अब आप अपनी प्रामाणिकता मुझे सिद्ध कर दीजिए चलिए प्रभुपाद जी की प्रमाणिकता

573
00:41:56,240 --> 00:42:00,320
सिद्ध कर दीजिए प्रभुपाद जी की प्रमाणिकता

574
00:42:00,320 --> 00:42:04,560
एक तो दिव्य प्रबंध भागवतम के मैंने श्लोका कुछ तो कोट किए हैं।

575
00:42:04,560 --> 00:42:07,040
उसके अलावा

576
00:42:07,040 --> 00:42:11,040
श्री चैतन्य भागवत अभी मैं अभी मैं एक चीज क्लियर कर दूं। हां अभी इसकी

577
00:42:11,040 --> 00:42:13,440
जरूरत नहीं है। रहने दीजिए। अभी मत लगाइए। अभी

578
00:42:13,440 --> 00:42:17,600
मैं एक चीज क्लियर कर दूं। हम लोग किस ओर जा रहे हैं। मैं वो थोड़ा सा जनता को बता दूं।

579
00:42:17,600 --> 00:42:21,760
पहली बात कि आप जब श्लोक दिखा रहे हैं कि वो बैकुंठ

580
00:42:21,760 --> 00:42:25,760
से आए तो आपके पास स्वतंत्र रूप से भागवत इत्यादि का ऐसा न्यूट्रल

581
00:42:25,760 --> 00:42:29,840
प्रमाण नहीं है जिससे कि वो सिद्ध हो सके। आपको अपनी परंपरा के द्वारा लिखे

582
00:42:29,840 --> 00:42:34,240
गए ग्रंथों को एज ए प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ेगा। ठीक है?

583
00:42:34,240 --> 00:42:39,200
आप मेरी बात सुनेंगे। जी जी जी सॉरी रियली सॉरी

584
00:42:39,200 --> 00:42:43,920
तो पहली बात आपके पास आठ ग्रंथों से प्रमाण नहीं है। आपको जो है

585
00:42:43,920 --> 00:42:47,120
अपने

586
00:42:47,120 --> 00:42:51,120
अपनी परंपरा के जो पर्टिकुलर जो ग्रंथ है उससे आपको

587
00:42:51,120 --> 00:42:54,000
ये

588
00:42:54,000 --> 00:42:58,080
उससे आपको जो है वो ये उसको एज ए प्रमाण आप प्रस्तुत कर रहे हो

589
00:42:58,080 --> 00:43:02,480
अपनी परंपरा के जो पर्सनलाइज आपके एक तरीके से जो परंपरा के लिए पर्सनलाइज

590
00:43:02,480 --> 00:43:06,560
ग्रंथ है। ठीक है? पहली बात। दूसरी बात ये है कि अब जब हम ये

591
00:43:06,560 --> 00:43:10,560
भी मान ले कि अब हम थोड़ी देर के लिए दुर्जन तोष न्याय पे जा रहे हैं और तब ये देख

592
00:43:10,560 --> 00:43:14,880
रहे हैं कि चैतन्य महाप्रभु से

593
00:43:14,880 --> 00:43:18,880
आपके जो प्रभुपाद जी है वो प्रमाणिक कैसे हैं?

594
00:43:18,880 --> 00:43:22,960
यदि आप ये कह रहे हो कि उनके चैतन महाप्रभु ने क्या लिखा क्या नहीं लिखा इस विषय

595
00:43:22,960 --> 00:43:26,960
में उनके शिष्य जो बताएंगे वो प्रमाण होगा क्योंकि आप चैतन महाप्रभु को

596
00:43:26,960 --> 00:43:31,680
एज ए प्रमाण वहां पर रखना चाह रहे हो तो अब वही बात आ रही है

597
00:43:31,680 --> 00:43:35,840
भाई साहब मैं कुछ बोलना चाहता हूं ना फिर वो प्रवाह टूट जाता है

598
00:43:35,840 --> 00:43:40,000
तो फिर चैतन्य महाप्रभु के ही एस ए शिष्य

599
00:43:40,000 --> 00:43:44,000
अपने आप को क्लेम करने वाले एक लोग कह रहे हैं कि जो प्रभुपाद जी

600
00:43:44,000 --> 00:43:48,160
हैं वो प्रामाणिक नहीं है वो अपने मन की बातें बोलते हैं

601
00:43:48,160 --> 00:43:52,480
ठीक ठीक है और दूसरे लोग शायद है जो आपके अनुसार वो मान रहे हैं कि नहीं प्रभुपाद

602
00:43:52,480 --> 00:43:56,720
जी वही है वो तो बात ऐसी है कि जब हम चैतन्य महाप्रभु

603
00:43:56,720 --> 00:44:00,960
के शिष्य होने के नाते किसी की बात को प्रमाण मान सकते हैं तो चैतन्य महाप्रभु के शिष्य

604
00:44:00,960 --> 00:44:02,160
होने के नाते ही दूसरे की

605
00:44:02,160 --> 00:44:06,400
बात को अप्रण क्यों माने और जब वो जो जो स्थिति

606
00:44:06,400 --> 00:44:12,240
क्लियर नहीं है तो फिर उसको हम एज ए प्रमाण क्यों स्वीकार करें

607
00:44:12,240 --> 00:44:16,240
कह रहे या तो दोनों को ही स्वीकार करो या दोनों को ही मत करो ऐसा कहना चाहते

608
00:44:16,240 --> 00:44:20,480
और क्योंकि दोनों में कंट्राडिक्शन हो रहा है तो वहां पर उस जो चीज है ना जिसको

609
00:44:20,480 --> 00:44:24,720
हम लेना चाह रहे हैं प्रमाण वो ली नहीं जा सकती एक

610
00:44:24,720 --> 00:44:29,360
और प्रमाण है भक्ति देवी वाला जो शायद मैं बोल रहा था वो वाला आ गया ये ब्रह्म

611
00:44:29,360 --> 00:44:33,520
पुराण से है अच्छा नहीं श्री भागवत महात्म से भागवत महात्म

612
00:44:33,520 --> 00:44:37,760
से ये है भागवत महात्म 1.5 और

613
00:44:37,760 --> 00:44:42,000
1.50 1.50 और इसमें है भक्ति देवी

614
00:44:42,000 --> 00:44:46,080
जी कह रहे हैं कि इदम स्थानम परित्यज विदेशम

615
00:44:46,080 --> 00:44:50,160
गमताया यानी ये स्थान छोड़ के मैं विदेश जाऊंगी।

616
00:44:50,160 --> 00:44:54,160
ऐसा भक्ति देवी ने प्रमाण दिया है। ऑबियसली आप

617
00:44:54,160 --> 00:44:58,160
इसमें ये इसमें इसमें ये कहां लिखा है कि उसको ले जाने वाला बैकुंठ से

618
00:44:58,160 --> 00:45:02,240
आने वाला जो उत्तम भागवत उत्तम वाला होगा जो फॉल डाउन नहीं होता

619
00:45:02,240 --> 00:45:04,480
है।

620
00:45:04,480 --> 00:45:08,800
जो अपनी मर्जी से आया है।

621
00:45:08,800 --> 00:45:12,880
तो देखो ठीक है। यहां पर मैं एक रेफरेंस बस

622
00:45:12,880 --> 00:45:16,880
एक मिनट और लूंगा एक रेफरेंस के लिए और वो रेफरेंस है कि

623
00:45:16,880 --> 00:45:20,960
भक्ति देवी का देख जरा एक मिनट भक्ति देवी वाला देख ले कौन सा बताया

624
00:45:20,960 --> 00:45:25,200
आपने भागवत महात्म 1.50

625
00:45:25,200 --> 00:45:31,120
उत्तराखंड श्रीमद् भागवत महात्म 1.50

626
00:45:31,120 --> 00:45:35,520
श्रीमद् भागवत महात्म

627
00:45:35,520 --> 00:45:39,520
ये आप क्या उसमें अंदर जाके भागवत श्रीमद् भागवतम के अंदर जा

628
00:45:39,520 --> 00:45:44,080
रहे हो क्या तब महात्म में जा रहे हो ये पद्म पुराण का है

629
00:45:44,080 --> 00:45:48,320
भागवत महात्म पद्म पुराण के अंदर है ठीक है। ठीक है। तो इसका

630
00:45:48,320 --> 00:45:52,480
कौन सा चैप्टर बताया आपने? उत्तर उत्तरखंड

631
00:45:52,480 --> 00:45:56,800
और श्रीमद् भागवत। अरे उत्तराखंड मत बोलो आप सीधे चैप्टर बोलो ना। वो भागवत महात्म

632
00:45:56,800 --> 00:46:02,800
तो अपने आप में ही एक वो अलग कट के आ गया ना। चैप्टर बोलो आप। 1.50 1.5

633
00:46:04,000 --> 00:46:10,000
चैप्टर पहले

634
00:46:11,840 --> 00:46:15,680
ओके।

635
00:46:15,680 --> 00:46:20,800
क्या लिखा है उसमें इदम स्थान परित्यज

636
00:46:20,800 --> 00:46:26,800
गमते विदेशम गमतेदम

637
00:46:33,600 --> 00:46:37,920
स्थानम परित्यज विदेशम गमते मया अब मैं स्थान छोड़कर

638
00:46:37,920 --> 00:46:42,080
अन्यत्र जाना चाहती हूं तो ये तो ये बोल रहा है कि किंतु

639
00:46:42,080 --> 00:46:46,160
सामने पड़े हुए दोनों मेरे पुत्र थके बांधे दुखी हो रहे अब मैं यह

640
00:46:46,160 --> 00:46:50,160
स्थान छोड़कर अन्यत्र जाना चाहती हूं। पर वो वृंदावन

641
00:46:50,160 --> 00:46:54,320
में थे। वृंदावन छोड़ के वो कहां जाते हैं? एक्चुअली इसका मतलब

642
00:46:54,320 --> 00:47:00,000
है कि वो अन्य जाना चाहती हूं। नहीं जाऊंगी।

643
00:47:00,000 --> 00:47:04,320
जाऊंगी।

644
00:47:04,320 --> 00:47:09,040
यहां तो लिखा है जाना चाहती हूं।

645
00:47:09,040 --> 00:47:13,440
गमते गमते अगर हम गमते शब्द को अगर हम तो

646
00:47:13,440 --> 00:47:18,080
ठीक है ठीक है जाऊंगी मान लीजिए या जाना

647
00:47:18,080 --> 00:47:22,160
चाहती हूं मान लीजिए पर इससे ये नहीं सिद्ध होता है कि उसको

648
00:47:22,160 --> 00:47:26,320
ले जाने वाला जो होगा वो वही बैक से आने वाला मुक्त

649
00:47:26,320 --> 00:47:30,320
होगा आपका लॉजिक बिल्कुल ठीक है मैं इसमें कंट्राडिक्ट नहीं करूंगा मैं जस्ट एक

650
00:47:30,320 --> 00:47:36,320
मिनट लूंगा इसका रेफरेंस निकालने का टू

651
00:47:56,320 --> 00:48:00,640
ठीक है? एक रेफरेंस आप देख सकते हैं। वो है श्रीमद्

652
00:48:00,640 --> 00:48:06,000
भागवतम 1.5.37

653
00:48:06,000 --> 00:48:12,000
श्रीमद् भागवतम 1.5.37

654
00:48:14,560 --> 00:48:20,080
97 क्या लिखा है वहां? जी

655
00:48:20,080 --> 00:48:26,080
जस्ट मिनट 1.5.375.37

656
00:48:26,480 --> 00:48:31,520
आप टाइप कर सकते हैं।

657
00:48:31,520 --> 00:48:37,520
लेते

658
00:48:38,720 --> 00:48:44,720
जी

659
00:48:44,720 --> 00:48:50,080
आई थिंक नहीं है

660
00:48:50,080 --> 00:48:54,240
इसमें लिखा है 377 में कि प्रद्युम्न

661
00:48:54,240 --> 00:49:00,240
अनिरुद्ध और संकर्षण को भी नमस्कार है। इस प्रकार

662
00:49:00,240 --> 00:49:04,880
आई थिंक यह वाला नहीं है। जस्ट मैं एक मिनट कन्फर्म करता हूं। हम

663
00:49:04,880 --> 00:49:08,880
आप कहना क्या चाहते हैं वह पहले बता दीजिए। हां जस्ट मैं एक मिनट एक

664
00:49:08,880 --> 00:49:14,800
मिनट। यहां पर एक श्लोक मैं रेफरेंस चेक कर रहा था कि

665
00:49:14,800 --> 00:49:20,800
वो प्रूफ एक्सिस्ट करता है जिसमें

666
00:49:21,040 --> 00:49:25,200
एक दूसरा वर्ड्स है। आई थिंक ये वाला जो है इसमें आचार्यों की टीका से

667
00:49:25,200 --> 00:49:29,440
था। इसलिए मैं इसको नहीं उठाऊंगा।

668
00:49:29,440 --> 00:49:34,160
जस्ट एक मिनट दीजिएगा।

669
00:49:34,160 --> 00:49:38,320
ये आपने स्क्रीन शेयर की है क्या? नहीं मैंने तो नहीं

670
00:49:38,320 --> 00:49:42,160
की।

671
00:49:42,160 --> 00:49:47,360
अच्छा ये उनका टीका है शायद सीधा स्वामी जी का।

672
00:49:47,360 --> 00:49:51,440
अच्छा नहीं इसके इसके

673
00:49:51,440 --> 00:49:57,440
टीका में आता है लेकिन डायरेक्ट वर्ड यहां नहीं आता। एक्चुअली

674
00:49:58,080 --> 00:50:04,080
एक मिनट बस एक मिनट रुकिए ना जस्ट वन मिनट

675
00:50:20,640 --> 00:50:26,640
हम

676
00:50:58,480 --> 00:51:02,640
आप ना जो समय इसमें नष्ट कर रहे हैं अगर आप

677
00:51:02,640 --> 00:51:06,640
थोड़ा सा मुझे ये बता दे कि आप दिखाने क्या वाले हैं तो मैं आपको बता दूंगा कि उसकी आवश्यकता

678
00:51:06,640 --> 00:51:10,640
है कि नहीं। जी उसकी आवश्यकता बिल्कुल है। मुझे

679
00:51:10,640 --> 00:51:13,360
वो वो क्लेम बता दीजिए वहां से क्या आप दिखाना

680
00:51:13,360 --> 00:51:17,360
चाहो क्लेम है कि नित्य सिद्ध वैष्णव

681
00:51:17,360 --> 00:51:21,440
वो धरती पर आते हैं प्रीचिंग करने के लिए। भगवान भी धरती पर आते हैं। इसका तो

682
00:51:21,440 --> 00:51:25,680
कोई डाउट नहीं है। भगवत गीता वो डायरेक्टली प्रूफ ही करती है। उसके तो बहुत सारे रेफरेंसेस

683
00:51:25,680 --> 00:51:29,680
मिल जाएंगे। यह वाला पर्टिकुलर जो क्लेम है नित्य सिद्ध वैष्णव वो

684
00:51:29,680 --> 00:51:34,000
भी भगवान के कार्य को पूरे करने के लिए धरती पर आते हैं। यह डायरेक्टली

685
00:51:34,000 --> 00:51:38,560
प्रूफ कर पाएगा कि अगर भगवान भाई साहब भाई साहब एक बात बताइए

686
00:51:38,560 --> 00:51:43,280
कि अब मैंने कहीं पे शास्त्रों से यह निकाल लिया कि भैया

687
00:51:43,280 --> 00:51:47,600
कहीं पे भगवान को गाली देने वालों से झगड़ा होगा

688
00:51:47,600 --> 00:51:51,600
और यह हो गया झगड़ा होगा और जो है लड़ाई होगी वैष्णवों के

689
00:51:51,600 --> 00:51:55,760
द्वारा लड़ाई होगी और मैंने दूसरी जगह से निकाल लिया कि वैष्णव नित्य सिद्ध

690
00:51:55,760 --> 00:51:59,760
वैष्णव जो है भगवान के धर्म की रक्षा करने के लिए वो भी आते हैं। ठीक है? तो

691
00:51:59,760 --> 00:52:04,800
मैं यह क्लेम कर दूं कि भाई मैं भी उनका नृत्य सिद्ध वही हूं।

692
00:52:04,800 --> 00:52:08,960
कैसे? मैंने कहा कि अगर मैंने कहीं से

693
00:52:08,960 --> 00:52:12,960
रेफरेंस मैंने कहा कि रेफरेंस मैंने ये निकाला। मैंने कहा कि

694
00:52:12,960 --> 00:52:17,040
रेफरेंस ये निकाला भक्ति विदेश जाएगी। ठीक है? पहली

695
00:52:17,040 --> 00:52:21,200
बात तो अगर इसी को ले लूं तो भैया मैंने भी विदेश में भक्ति को भेजा है।

696
00:52:21,200 --> 00:52:26,560
मैं कोई मेरे कारण भी वहां पर भक्ति कर रहा है विदेश में। ठीक है?

697
00:52:26,560 --> 00:52:28,400
और उसके बाद नित्य सिद्ध वैष्णव

698
00:52:28,400 --> 00:52:32,400
आते हैं बैकुंठ से भक्ति को भेजने वाले आप दोनों को कनेक्ट कर

699
00:52:32,400 --> 00:52:36,400
रहे हैं तो फिर मेरे को भी आप नित सिद्ध वैष्णव मान लेंगे नहीं वैसे मैं

700
00:52:36,400 --> 00:52:40,640
इससे तो एग्री नहीं करता कि आपने भक्ति ले गए हैं लेकिन क्योंकि नहीं तो फिर

701
00:52:40,640 --> 00:52:44,720
फिर मैं एग्री कैसे करूंगा आप आपके भक्ति ले जाने को

702
00:52:44,720 --> 00:52:48,800
फिर हम हमारा दूसरा चैप्टर खुल जाएगा सर्वशक्तिमान है कि नहीं क्योंकि भक्ति

703
00:52:48,800 --> 00:52:53,040
तो ईश्वर की होगी और ईश्वर पहले फिर वो सिद्ध हो ईश्वर

704
00:52:53,040 --> 00:52:57,120
और मैं अभी जाना नहीं चाहता हूं वो सर्वशक्तिमान वाले पार्ट में क्योंकि वहां पे व्हाट टू

705
00:52:57,120 --> 00:53:03,120
स्टॉप द ट्रेन थोड़ा सा पुल द चैन हो जाता है।

706
00:53:08,480 --> 00:53:13,760
हां ये मुझे मिल गया ये तो ट्राई कर सकते हैं आप श्रीमद् भागवतम 10.1.25

707
00:53:13,760 --> 00:53:17,920
नहीं ये वाला जो लॉजिक है आपने बिल्कुल ठीक दिया है कि मैं हो सकता है

708
00:53:17,920 --> 00:53:23,440
ये आप एक बात को समझिए देखिए आप एक बात को समझिएगा

709
00:53:23,440 --> 00:53:27,600
मैं आपको मैं उसको दूसरा उदाहरण दे रहा हूं जिससे आप उसको समस्या को समझ पाए

710
00:53:27,600 --> 00:53:32,960
जी जी जी रामपाल ने कहा कि भैया

711
00:53:32,960 --> 00:53:37,040
वेदों में कहीं पे कबीर शब्द आया मान लो कबीर नहीं आया रुद्र आ गया और

712
00:53:37,040 --> 00:53:41,200
रामपाल वो जो वो जो थे कबीर उनका नाम रुद्र है। ठीक है? तो

713
00:53:41,200 --> 00:53:45,280
रुद्र शब्द तो वेदों में आ गया मान लो। ठीक है? एक्सप्लेन एक मिनट

714
00:53:45,280 --> 00:53:49,360
मैं बता सकता हूं कि आप क्या कहना चाह रहे हैं। मैं बता दूं एक मिनट। रुद्र शब्द वेदों

715
00:53:49,360 --> 00:53:53,360
में आ गया। फिर रामपाल ने कहा कि वो जो है गरीबों की मदद करेगा

716
00:53:53,360 --> 00:53:57,520
और ऐसी भविष्यवाण मिल जाएगी हमारे शास्त्रों में कि गरीबों

717
00:53:57,520 --> 00:54:01,840
की मदद करेगा और ये भी नहीं कि रुद्र ही करेगा। ये भी

718
00:54:01,840 --> 00:54:06,000
अलग-अलग दोनों मगर वो भी वहां पर किसी ना किसी तरीके से भगवत भागवत कार्य

719
00:54:06,000 --> 00:54:10,160
करने वाला है। ये भी वहां इस आधार पर रामपाल रामपाल कबीर

720
00:54:10,160 --> 00:54:15,120
को भगवान घोषित कर लेता है। तो हमें एग्जजेक्टली

721
00:54:15,120 --> 00:54:19,200
हमें जब किसी को एज ए टू द पॉइंट एज ए प्रमाण सिद्ध करना

722
00:54:19,200 --> 00:54:23,360
है ना तो उसके लिए साफ सुथरे प्रमाण चाहिए। इस तरीके से अपने

723
00:54:23,360 --> 00:54:23,860
द्वारा

724
00:54:23,680 --> 00:54:27,680
की गई व्याख्या को कनेक्ट करते हुए और जो है प्रभुपाद जी पर लागू हो जाए

725
00:54:27,680 --> 00:54:31,760
तो यह सब स्वीकार्य नहीं है। यहां दो चीजें

726
00:54:31,760 --> 00:54:36,240
आती है। पहला तो ये कि

727
00:54:36,240 --> 00:54:41,120
जनरली हम आप लोग ये कंसीडर करते हैं। आप लोग को ये लगता है कि

728
00:54:41,120 --> 00:54:45,440
जो हम प्रमाण देते हैं वो जो है रेफरेंस

729
00:54:45,440 --> 00:54:50,000
के साथ नहीं होता। बट जो चैतन्य चरितामृत पर्टिकुलरली ग्रंथ है

730
00:54:50,000 --> 00:54:54,320
जनरली जिनको लोग जिनको वो भागवतम से सेक्टेरियन

731
00:54:54,320 --> 00:54:58,320
बोल दिया जाता है अलग कर दिया जाता है चैतन्य चरितामृत एक्चुअली स्क्रिप्चर्स

732
00:54:58,320 --> 00:55:02,640
के अंदर ही काउंट होगा क्योंकि भागवत या शास्त्र की डेफिनेशन है

733
00:55:02,640 --> 00:55:06,640
शास्त्र सम्मत शास्त्र कि शास्त्र

734
00:55:06,640 --> 00:55:10,960
सम्मत जो टेक्स्ट होता है यानी जो शास्त्र को कंट्राडिक्ट नहीं कर रहा होता

735
00:55:10,960 --> 00:55:15,360
वो शास्त्र भी शास्त्र में काउंट होता है। ठीक है? ठीक है?

736
00:55:15,360 --> 00:55:19,440
तो ये आपका ये आपका चैतन चरितामृत को शास्त्र प्रूव करने

737
00:55:19,440 --> 00:55:23,440
के लिए है। अब आपने उसको शास्त्र प्रूव कर दिया है। आपकी सारी

738
00:55:23,440 --> 00:55:27,680
बातें सिद्ध हो गई। बात खत्म। खत्म हो गया सारा डिफरेंसेस

739
00:55:27,680 --> 00:55:31,680
ऑफ ओपिनियंस क्योंकि आपने उसको शास्त्र कह दिया और शास्त्र

740
00:55:31,680 --> 00:55:35,680
कौन है? जो शास्त्र के अनुसार चले। और शास्त्र के अनुसार कैसे चलेगा? हमने शास्त्रों

741
00:55:35,680 --> 00:55:38,800
की जो व्याख्या की है वो व्याख्या ही मान्य है। दूसरी व्याख्या मान्य

742
00:55:38,800 --> 00:55:42,800
नहीं है। शास्त्रों के अनुसार चलना मतलब जो भी आप बताइए

743
00:55:42,800 --> 00:55:47,280
आप सभी संप्रदाय को प्रामाणिक मानते हैं। आप ये बताइए

744
00:55:47,280 --> 00:55:51,280
मैं मैं पूछ रहा हूं। मैं आपकी बात को काउंटर कर रहा हूं। एक पिछला पॉइंट

745
00:55:51,280 --> 00:55:55,280
मिस हो जाएगा। एक पॉइंट को मिस करके फिर हम दूसरे पे जाएंगे ना। तो मैं कहां जा रहा हूं?

746
00:55:55,280 --> 00:55:59,280
आप आप जब आपके पास प्रभुपाद जी को वो

747
00:55:59,280 --> 00:56:03,360
जो मिनट भाई साहब आपने एक

748
00:56:03,360 --> 00:56:07,360
आरोप लगाया है। अब मैं उसको मुझे जवाब देने दीजिए। प्लीज आपने

749
00:56:07,360 --> 00:56:11,360
आरोप लगाया मैं दूसरा खोल रहा हूं। दूसरा आप खोल रहे हैं। आपको प्रभुपाद को

750
00:56:11,360 --> 00:56:15,600
उस वाले ऊपर वाले बैकुंठ से आना सिद्ध करना था प्रभुपाद जी को। मगर

751
00:56:15,600 --> 00:56:19,600
आप नहीं जब कर पा रहे तो अब आप चैतन्य चरितामृत को एज ए शास्त्र

752
00:56:19,600 --> 00:56:23,760
यहां पर रख रहे हैं। फिर मैं कहूंगा क्या वल्लभ संप्रदाय आपके द्वारा प्रामाणिक माना

753
00:56:23,760 --> 00:56:27,840
जाने वाला संप्रदाय जो है वो चैतन्य चरितामृत को प्रामाणिक मानता है। एज ए

754
00:56:27,840 --> 00:56:31,920
संप्रदाय मानता एज ए शास्त्र मानता है। प्रामाणिक शास्त्र

755
00:56:31,920 --> 00:56:35,920
मानता है। फिर मैं कहूंगा क्या श्री संप्रदाय मानता है। आप ही अपने ही उसमें फंस

756
00:56:35,920 --> 00:56:39,920
जाओगे। मेरे तक तो आना ही नहीं पड़ेगा। इसलिए

757
00:56:39,920 --> 00:56:43,920
ऐसी चीजें ना करिए जो अकाट्य ना हो। वही चीजों पे चलिए

758
00:56:43,920 --> 00:56:48,240
जो देख सकते हैं आप देखिए मैं आपकी

759
00:56:48,240 --> 00:56:52,400
बातें समझ रहा हूं आपने अपनी चीजें तोड़ आपने अपनी चीजें इकट्ठा

760
00:56:52,400 --> 00:56:53,840
करके उनके

761
00:56:53,840 --> 00:56:58,160
ऐसा लग रहा है मैं मैंने उस शब्द को हटा दिया जब मेरे मुंह से तोड़ निकला

762
00:56:58,160 --> 00:57:02,480
उसके बाद मैंने तुरंत रिटर्न गया अपने वाक्य को सुधारते हुए फिर आया ठीक है

763
00:57:02,480 --> 00:57:06,560
तो मुझे थोड़ा जब मैं एक एक जो है एक क्या कहते हैं

764
00:57:06,560 --> 00:57:10,640
एक एक प्रभा में एक बात बोलने जा

765
00:57:10,640 --> 00:57:15,120
रहा होता हूं तो प्लीज आप वहां पे अगर वो कर देंगे ना बीच में

766
00:57:15,120 --> 00:57:19,600
क्या कहते हैं उसको अब कर दूंगा बीच में रोक दूंगा कंट्राडिक्ट

767
00:57:19,600 --> 00:57:24,480
कर दूंगा कंट्राडिक्ट नहीं उसको कुछ और शब्द कहते हैं मुझे याद नहीं आ रहा है

768
00:57:24,480 --> 00:57:29,280
छोड़िए उसको अंग्रेजी में भाड़ में तो मैं ये कह रहा था

769
00:57:29,280 --> 00:57:33,280
कि अरे यार हां जब

770
00:57:33,280 --> 00:57:37,360
मैं कोई एक सूत्रात्मक शैली में कोई बात बोल रहा

771
00:57:37,360 --> 00:57:41,360
हूं तो उसमें आप कोशिश करिए उससे क्या होगा ना हमारी चर्चा थोड़ी

772
00:57:41,360 --> 00:57:45,360
सी लोगों समझ में आएगी। हां इंटरप्ट हां इंटरप्ट ये

773
00:57:45,360 --> 00:57:49,600
सब लेकिन पीछे ऐसा भी हुआ है ना जिसमें आप भी बीच में टोक देते थे

774
00:57:49,600 --> 00:57:53,680
तो उस वजह से वो सूत्रात्मक शैली में आपका क्लेम नहीं होता है

775
00:57:53,680 --> 00:57:57,760
वो वो आप कोई जैसे आप मान लीजिए आप कह रहे हो कि मैं भागवतम का एक श्लोक कोट

776
00:57:57,760 --> 00:58:02,160
कर रहा हूं। अब मैंने आपसे पूछा कि कौन सा किस मामले में कर रहे हैं? उसकी आवश्यकता

777
00:58:02,160 --> 00:58:06,160
है कि नहीं? मुझे बता तो दीजिए। अब आपने कहा कि भक्ति जाएगी। उसमें

778
00:58:06,160 --> 00:58:08,880
भक्ति भक्ति जाने का श्लोक जो

779
00:58:08,880 --> 00:58:13,040
है प्रस्तुत करने की कोई बात ही नहीं क्योंकि हमें ये प्रूव करना है भक्ति को लेके बैकुंठ

780
00:58:13,040 --> 00:58:17,280
वाला जाएगा। तो बैकुंठ जाने वाला वैकुंठ अच्छा भक्ति

781
00:58:17,280 --> 00:58:21,520
को ले जाने वाला कोई वैुंठ से गिरता है या नहीं ये प्राइमरी

782
00:58:21,520 --> 00:58:25,600
टॉपिक था। हां तो उसके बाद उसके बाद उसके बाद हम प्रमाण

783
00:58:25,600 --> 00:58:29,760
पे हम क्यों आए प्रमाण पे इसलिए हम आए थे क्योंकि प्रभुपाद जी वो

784
00:58:29,760 --> 00:58:33,920
वाले वो है कि नहीं जो नित्य सिद्ध है और वो जो है अवतरित हुए हैं

785
00:58:33,920 --> 00:58:38,000
यहां पर जो है भक्ति को ले जाने वाले के रूप में तो वहां पर भक्ति को ले जाने वाला

786
00:58:38,000 --> 00:58:42,080
बैकुंठ से आने वाला नहीं है ठीक है और दूसरा भी आपने रेफरेंस दिया

787
00:58:42,080 --> 00:58:46,080
है वो भी प्रभुपाद जी से कनेक्ट नहीं हो रहा फिर जब कनेक्ट जब कनेक्ट नहीं हो रहा है

788
00:58:46,080 --> 00:58:50,160
तो आप चैतन्य रेफरेंस है ये वाला रेफरेंस है यही वाला देने

789
00:58:50,160 --> 00:58:54,160
वाला था मैं कि आने वाला वैकुंठ पहले

790
00:58:54,160 --> 00:58:58,800
मैं बोल रहा था कि पांच टाइप की मुक्ति होती है सारूप्य सालोक्य

791
00:58:58,800 --> 00:59:02,880
सानिध्य भाई साहब वो मुक्ति कौन सी है? पहले आप अपनी चीजों

792
00:59:02,880 --> 00:59:07,280
को थोड़ा क्लियर कर दीजिए। आप पहले तो ये बता दीजिए वो मुक्ति कौन सी है जो परम

793
00:59:07,280 --> 00:59:11,280
है आपके यहां परम टोटल जो मैक्सिमम परम वाली जो

794
00:59:11,280 --> 00:59:15,360
मुक्ति है वो है कि भगवान की सेवा भाई साहब नाम

795
00:59:15,360 --> 00:59:19,360
बताइए अभी आपने बताया ना मुक्ति कई प्रकार की होती है उसमें से नाम बताइए कौन सी मुक्ति

796
00:59:19,360 --> 00:59:23,600
है वो टॉप मोस्ट जो है वो सष्टि जितना एस

797
00:59:23,600 --> 00:59:24,100
एस आई

798
00:59:23,920 --> 00:59:27,920
रिमेंबर सष्टि बट जो सष्टि सृष्टि

799
00:59:27,920 --> 00:59:32,000
भगवान का शास्त्र में शास्त्र में नाम है ये वाली

800
00:59:32,000 --> 00:59:36,080
मुक्ति का हां है। हां। ठीक है। अब ये वाली मुक्ति

801
00:59:36,080 --> 00:59:40,160
परम मान ली। ठीक है। हां। अब इस इस मुक्ति से अपनी

802
00:59:40,160 --> 00:59:44,240
इच्छा के कारण वो आए हैं। प्रभुपाद जी आपके अनुसार

803
00:59:44,240 --> 00:59:48,240
प्रपाद जी अपनी इच्छा से आए हैं। वो उनका फॉल डाउन नहीं हुआ। ठीक है। अब

804
00:59:48,240 --> 00:59:52,240
आप वो अब आप अब आप मैंने पूछा कि प्रभुपाद जी आए हैं तो इस विषय में

805
00:59:52,240 --> 00:59:56,320
शास्त्र का प्रमाण क्या है? तो आप सांकेतिक चीजों को प्रमाण में

806
00:59:56,320 --> 01:00:00,480
यूज़ कर रहे हैं। वहां संकेत है। सांकेतिक मान

807
01:00:00,480 --> 01:00:04,480
रहे हैं क्योंकि आपने मेरा जो लॉजिकल कॉन्टेक्स्ट था

808
01:00:04,480 --> 01:00:08,480
आपने उसको एग्री नहीं किया। एक चीज को तो लॉजिकल कॉन्टेक्स्ट बताइए

809
01:00:08,480 --> 01:00:12,640
क्या है आपका? लॉजिकल कॉन्टक्स्ट बताइए आपका। लॉजिकल कॉन्टेक्स्ट ये

810
01:00:12,640 --> 01:00:17,040
है कि श्री चैतन्य महाप्रभु हर जगह एस गॉड एक्सेप्टेड

811
01:00:17,040 --> 01:00:21,280
है। इसमें कोई डाउट नहीं है। महाभारत में भी एक्सेप्टेड है एस ग

812
01:00:21,280 --> 01:00:25,280
और श्री भागवतम में जब आप जब आप चैतन्य

813
01:00:25,280 --> 01:00:29,360
महाप्रभु को एज ए प्रूफ रखेंगे तो फिर वहां दिक्कत आएगी

814
01:00:29,360 --> 01:00:33,440
कि चैतन महाप्रभु हमारे बीच में नहीं है। उनकी ओर से बोलने

815
01:00:33,440 --> 01:00:37,600
वाले दूसरे लोग हैं। जो आपसे भी पहले के हैं उनमें से कई लोग

816
01:00:37,600 --> 01:00:39,200
आपको मना कर रहे हैं।

817
01:00:39,200 --> 01:00:43,440
वो आपकी बातों का विरोध कर रहे हैं। ठीक है? जो आपसे पहले

818
01:00:43,440 --> 01:00:47,440
के हैं गिया वैष्णव इस गडिया वैष्णव से निकला है

819
01:00:47,440 --> 01:00:51,440
ना? कर रहे हो अगर तो कर रहे

820
01:00:51,440 --> 01:00:55,920
तो इसका मतलब ये है कि चैतन महाप्रभु के रेफरेंस से

821
01:00:55,920 --> 01:01:00,320
एक मिनट भाई साहब इसका मतलब ये है कि चैतन महाप्रभु

822
01:01:00,320 --> 01:01:04,400
के रेफरेंस से बात करने वाले लोगों में आप यह मान रहे हो कि वो झूठ

823
01:01:04,400 --> 01:01:08,880
बोल सकते हैं तो जब एक परिवार कोई झूठ बोल सकता है तो जो

824
01:01:08,880 --> 01:01:13,200
आपके पक्ष का है वो भी झूठ बोल सकता है। कहने का मतलब यह है

825
01:01:13,200 --> 01:01:17,360
कि वो लोग जो ड गोस्वामी का पालन नहीं कर रहे हैं वो सब

826
01:01:17,360 --> 01:01:21,360
झूठ बोल रहे हैं। ड गोस्वामी के सारे गोस्वामी का ज्ञान आपके पास

827
01:01:21,360 --> 01:01:25,520
डायरेक्ट आया है क्या? तो आप इससे क्या स्थापित

828
01:01:25,520 --> 01:01:30,080
करना चाहते हैं? अगर डायरेक्ट नहीं आया। परंपरा से आया है ना? हां।

829
01:01:30,080 --> 01:01:34,240
हां। तो बीच में जो परंपरा से आया है तो बीच वाले जो

830
01:01:34,240 --> 01:01:38,240
लोग हैं जिस परंपरा से आपके पास वो आया है

831
01:01:38,240 --> 01:01:42,240
उसमें से कुछ लोग आपके भाष्य को मना कर रहे हैं।

832
01:01:42,240 --> 01:01:46,480
आपकी चीजों को मना कर रहे हैं। वो जो है पुंडरीिक जी को जानते

833
01:01:46,480 --> 01:01:51,200
हैं। पुंडरीिक जी प्रामाणिक है कि अप्रामाणिक है?

834
01:01:51,200 --> 01:01:54,240
जनरली हम उनको गोपाल भट्ट गोस्वामी जी की लीन एज में

835
01:01:54,240 --> 01:01:58,400
काउंट करते हैं। तो उस नहीं मैं पूछ रहा हूं कि वो स गोस्वामियों

836
01:01:58,400 --> 01:02:02,960
की ओर से आया हुआ ज्ञान कोई भी व्यक्ति 100%

837
01:02:02,960 --> 01:02:07,040
यस या 100% नो नहीं होता तो कोई

838
01:02:07,040 --> 01:02:11,120
फिर धर्म का निर्णय कैसे होगा? क्योंकि एक व्यक्ति को आप

839
01:02:11,120 --> 01:02:13,760
नहीं बोल सकते

840
01:02:13,760 --> 01:02:17,840
मैं बता रहा हूं ना मैं बता रहा हूं। नहीं होता है तो जो जो व्यक्ति आपको क्लेम

841
01:02:17,840 --> 01:02:21,920
कर रहा है जो जिसको जिसको आप सपोर्ट कर रहे हो जिसको आप प्रामाणिक कह

842
01:02:21,920 --> 01:02:25,920
रहे हो फिर उसको जाकर के क्लेम करो कि आप ये कैसे कह रहे हो? आप

843
01:02:25,920 --> 01:02:30,000
उनका विरोध करो। हम करते हैं। हम करते हैं। कहां कर रहे हो?

844
01:02:30,000 --> 01:02:34,080
नहीं अकेले मैंने नहीं बहुत सारे लोगों ने दूसरी

845
01:02:34,080 --> 01:02:38,240
बात यह भी आ जाती है कि जो दूसरी बात दूसरी

846
01:02:38,240 --> 01:02:42,240
बात ये भी आ जाती है कि पुंडरीिक जी को अप्रामाणिक कुछ बातों

847
01:02:42,240 --> 01:02:46,880
में किसने माना है आपके यहां देखो

848
01:02:46,880 --> 01:02:51,440
कोई भी व्यक्ति 100% यस मैंने क्या कहा कुछ बातों मैंने क्या कहा

849
01:02:51,440 --> 01:02:55,440
मैंने कुछ बातें कहा ना मैंने कहा कुछ बातों में पुंडरीिक जी को अप्रामाणिक

850
01:02:55,440 --> 01:03:00,480
किसने माना है आपके यहां

851
01:03:00,480 --> 01:03:03,680
कुछ बातों में अप्रमाणिक

852
01:03:03,680 --> 01:03:07,680
नहीं मुझे नाम परिकुलर नाम नहीं पता कि किसने माना है बस

853
01:03:07,680 --> 01:03:11,840
मैं इतना बता सकता हूं कि जो व्यक्ति रूप

854
01:03:11,840 --> 01:03:16,240
गोस्वामी या ड गोस्वामी मेरी बात आप समझ नहीं रहे

855
01:03:16,240 --> 01:03:20,560
अगर आप परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्य गद्दी पर जो बैठे

856
01:03:20,560 --> 01:03:24,560
हैं उनमें भी दोष शास्त्र गद्दी शास्त्र नहीं होती

857
01:03:24,560 --> 01:03:28,560
ना मैं गद्दी पर बैठा हूं कोई भी गद्दी पर बैठ सकता है गद्दी शास्त्र ठीक है।

858
01:03:28,560 --> 01:03:32,640
शास्त्र शास्त्र है। उसकी प्रमाणिकता कैसे सिद्ध होगी? शास्त्र

859
01:03:32,640 --> 01:03:36,880
जो है वो वेदव्यास जी से आ रहे हैं और वेदव्यास जी भगवान के इंकार्नेशन। अरे आपको किसने

860
01:03:36,880 --> 01:03:40,880
बताया कि जो छपा हुआ शास्त्र आप पढ़ रहे हो ये शास्त्र अभी चैतन्य

861
01:03:40,880 --> 01:03:45,040
महाप्रभु जी की बात कर लेते हैं। चैतन्य महाप्रभु जी को आपने भगवान सिद्ध किया।

862
01:03:45,040 --> 01:03:49,360
उसके बाद उनकी कही हुई बातों को उनके शिष्यों ने लिखा और वो वो जो बातें हैं

863
01:03:49,360 --> 01:03:54,000
वो आपके पास परंपरा से आ रही है। ठीक है?

864
01:03:54,000 --> 01:03:58,400
ठीक है। जी। जी अब जो आप कह रहे हो कि जो गद्दी है वो जरूरी

865
01:03:58,400 --> 01:04:02,400
नहीं है 100% सही बात कर रही हो तो जो थोड़ी सी भी गलत बात

866
01:04:02,400 --> 01:04:06,480
कर सकती है वो थोड़ी सी भी गलत वाले गलत बात वाले शास्त्र

867
01:04:06,480 --> 01:04:10,720
को आपको दे सकती है

868
01:04:10,720 --> 01:04:14,720
आपको प्रमाण बुद्धि रखनी होगी उसके प्रति जिससे आपने शास्त्र

869
01:04:14,720 --> 01:04:18,800
है सीधी बात और यदि ऐसा है यदि

870
01:04:18,800 --> 01:04:23,120
ऐसा है कि कोई भी व्यक्ति 100% नहीं होता है ठीक है तो जितने

871
01:04:23,120 --> 01:04:27,280
जीबीसी मेंबर्स है जो आपके धर्म का निर्णय कर रहे हैं। यहीं से बात शुरू हुई थी तो

872
01:04:27,280 --> 01:04:31,440
वो सारे नंबर 100% करेक्ट नहीं है। तो फिर इसका मतलब

873
01:04:31,440 --> 01:04:35,520
आपके पास 100% सही ज्ञान नहीं है धर्म का। नहीं

874
01:04:35,520 --> 01:04:39,600
है। यहां पर अब 100% सही ज्ञान है। मैं बताता

875
01:04:39,600 --> 01:04:43,920
हूं कैसे? जीबीसी जो है एक सेल्फ रियलाइज सोल

876
01:04:43,920 --> 01:04:47,920
जब सेल्फ रियलाइज नहीं होती है। उसके नीचे की स्टेजेस पे होती है। कोई सोल है

877
01:04:47,920 --> 01:04:51,920
जीव है। जब वो सेल्फ रियलाइज नहीं है। यानी उसने कृष्ण का साक्षात दर्शन नहीं

878
01:04:51,920 --> 01:04:56,240
किया। जब वो उसके नीचे के लेवल्स पर है तब यानी कनिष्ठ अधिकारी

879
01:04:56,240 --> 01:05:00,400
मध्यम अधिकारी उत्तम अधिकारी वाले लेवल्स पर है। उत्तम अधिकारी तो सेल्फ रियलाइज है।

880
01:05:00,400 --> 01:05:04,400
कनिष्ठ और मध्यम के लेवल्स पर है। ठीक है? सबसे पहली बात तो यहां पे दिक्कत

881
01:05:04,400 --> 01:05:08,640
ये है तब उसको अथॉरिटी नहीं काउंट किया जा सकता। तब उसको अथॉरिटी

882
01:05:08,640 --> 01:05:12,800
सबसे पहली बात तो ये है कि आप जो स्वता सुखाय वाली बातें

883
01:05:12,800 --> 01:05:16,880
हैं ना उनको सामाजिक समाज के लिए आप एज ए प्रमाण

884
01:05:16,880 --> 01:05:21,040
प्रस्तुत कर रहे हो। मैं आपसे कह रहा हूं मैंने जो है भगवान को देख लिया है

885
01:05:21,040 --> 01:05:25,040
पर्सनल वाले रूप को अब बताओ मान लोगे

886
01:05:25,040 --> 01:05:25,920
नहीं सिम्टम

887
01:05:25,920 --> 01:05:30,000
से ये ये जो होता है ना भगवान को सुनो ये जो होता है ना

888
01:05:30,000 --> 01:05:34,240
कि भगवान को हमने पर्सनली समझ लिया ये कर लिया ये हमारे अपने

889
01:05:34,240 --> 01:05:38,720
इसका सुनिए सुनिए मेरी बात सुन लीजिए मेरे भाई मेरी बात सुन लीजिए

890
01:05:38,720 --> 01:05:43,040
मैं बता रहा हूं इसका जो पर्यावसान है वो मेरे आत्म कल्याण

891
01:05:43,040 --> 01:05:47,360
में है कि मैं अपने आप में ये जान रहा हूं कि मैंने भगवान को देख लिया या

892
01:05:47,360 --> 01:05:51,440
मैं भगवान को जान रहा हूं। इसका इसका यूज़ हम यहां

893
01:05:51,440 --> 01:05:55,600
नहीं कर सकते कि क्योंकि मैंने भगवान को देख लिया इसलिए तुम मेरी बात मान लो और

894
01:05:55,600 --> 01:06:00,000
मुझे आचार्य स्वीकार कर लो। प्रामाणिक अब मैं बताता हूं कैसे

895
01:06:00,000 --> 01:06:04,080
इसका भी समझ लीजिए। इसमें कई बार इसको भी ले आते हैं। इस वाली बात

896
01:06:04,080 --> 01:06:08,080
को भी ले आते हैं। जो ब्रह्म ज्ञानी हो गया वो ब्राह्मण हो गया। ठीक है?

897
01:06:08,080 --> 01:06:12,400
इसको कहते हैं कर्मणा व्यवस्था। ठीक है? अब दिक्कत

898
01:06:12,400 --> 01:06:16,640
यह है कि मैं आपसे यह कह रहा हूं कि मैंने भगवान को जो पर्सनलाइज

899
01:06:16,640 --> 01:06:20,960
जो दिखते हैं पर्सनालिटी उनकी जो पर्सनल है वह मैंने देख ली है। आपने

900
01:06:20,960 --> 01:06:25,040
तो नहीं देखी है। तभी तो मैं आपको आचार आपको मुझे आचार बनाना है। तो

901
01:06:25,040 --> 01:06:29,040
आप इस बात का निर्णय कैसे करेंगे कि मैंने भगवान की सही वाली पर्सनालिटी

902
01:06:29,040 --> 01:06:33,040
देखी है कि नहीं देखी है। मुझे पीछे से जब तक मुझे जब तक पीछे

903
01:06:33,040 --> 01:06:37,280
से ठप्पा नहीं मिलेगा ना मेरे किसी आचार्य का ऐसे जिसमें आपकी

904
01:06:37,280 --> 01:06:41,040
प्रमाण्य बुद्धि हो तब तक मैं ये चीज सिद्धि नहीं कर सकता

905
01:06:41,040 --> 01:06:45,120
कि मैंने वही देखा है जो जिसके कारण आप मुझे प्रमाणिक मानोगे

906
01:06:45,120 --> 01:06:49,120
तो ये जो चीजें हैं कि मैंने ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर लिया है। इसके आधार

907
01:06:49,120 --> 01:06:53,120
पर मेरा स्वाता सुखा है। इसके आधार पर आचार्य नहीं बनता मैं। हां जब

908
01:06:53,120 --> 01:06:57,840
कोई गोस्वामी उन्होंने श्री चैतन

909
01:06:57,840 --> 01:07:02,000
जब कोई जब कोई शब्द प्रमाण है हमारा जैसे

910
01:07:02,000 --> 01:07:06,000
कि क्या कहते हैं अवतार ठीक है

911
01:07:06,000 --> 01:07:10,000
भगवान का अवतार है भगवान के अवतार लीला करते हैं बहुत

912
01:07:10,000 --> 01:07:14,160
सारी लीलाएं करते हैं मगर राक्षस भी करते हैं भगवान के

913
01:07:14,160 --> 01:07:18,320
राक्षस भी दूसरी चमत्कारिक चीजें कर देते तो हम फैसला कैसे करेंगे कि कौन अवतार

914
01:07:18,320 --> 01:07:23,120
है कौन नहीं है सीधी बात हमारी तो परंपरा हमारे

915
01:07:23,120 --> 01:07:27,120
जो परंपरा प्राप्त आचार्य हैं, शास्त्र है वह यह फैसला करेंगे कि हां भाई

916
01:07:27,120 --> 01:07:31,120
यह अवतार है। यह भगवान का अवतार है। ठीक है? वहां

917
01:07:31,120 --> 01:07:35,280
पे और कोई लॉजिक चलेगा ही नहीं। इसी प्रकार से मैंने दर्शन किया

918
01:07:35,280 --> 01:07:39,520
कि नहीं किया? ये वाली बात आप तय नहीं कर सकते हो क्योंकि

919
01:07:39,520 --> 01:07:43,600
आपने तो देखा ही नहीं है कि भगवान कैसे? तो आप कैसे पता लगाओगे कि मैं सच बोल रहा हूं कि झूठ

920
01:07:43,600 --> 01:07:47,600
बोल रहा हूं। बताइए। लेकिन जो ड गोस्वामी है

921
01:07:47,600 --> 01:07:51,680
ना ड गोस्वामी को श्री चैतन्य महाप्रभु ने एक्सेप्ट किया था

922
01:07:51,680 --> 01:07:55,680
एस देयर डिसाइपल अपने शिष्य के रूप में बात हो रही है कि आपके

923
01:07:55,680 --> 01:07:56,180
जीबीसी

924
01:07:56,160 --> 01:08:00,320
मेंबर्स जो है उनमें भी दोष हो सकता है तो फिर आपका धर्म दोष दोष रहित

925
01:08:00,320 --> 01:08:04,560
कैसे जीबीसी मेंबर्स की बात हो रही है यहां जिसको फॉलो कर रहे हैं वो जिसको

926
01:08:04,560 --> 01:08:08,720
फॉलो कर रहे हैं वो दोष अरे भाई मैं भी कह रहा हूं मैं फॉलो कर रहा हूं लो मैं

927
01:08:08,720 --> 01:08:12,720
भी कह रहा हूं मैं फॉलो कर रहा हूं हां इट डिपेंड्स ऑन

928
01:08:12,720 --> 01:08:16,800
ऑफ़ योर फॉलोइंग किसी के कहने से नहीं होगा ना। दूसरी बात वो जिसको फॉलो कर रहे हैं

929
01:08:16,800 --> 01:08:21,120
फिर भी तो आप मान रहे हो उनके आचरण से दिखा है सालो कि वो एक भी

930
01:08:21,120 --> 01:08:25,360
सेकंड जो है 40 साल से सेवा से अलग नहीं हुए और 40 साल 50

931
01:08:25,360 --> 01:08:29,440
साल से फॉलो कर रहे हैं तो वो अच्छा 40 50 साल से उनकी आपने वीडियो

932
01:08:29,440 --> 01:08:33,920
फिल्म देखी है क्या यार्राफी की

933
01:08:33,920 --> 01:08:38,080
लोगों ने देखा है अथॉरिटेटिवनेस उनकी भी अथॉरिटीज है उन्होंने भी मेंटोर

934
01:08:38,080 --> 01:08:42,400
किया है और बहुत सारे लोगों ने देखा है बहुत सारे लोग साक्षात प्रमाण है साक्षात

935
01:08:42,400 --> 01:08:46,480
प्रमाण के लिए जरूरत नहीं पड़ती है अलग से शास्त्र ढूंढने की जो

936
01:08:46,480 --> 01:08:50,560
लोग प्रत्यक्ष प्रमाण है वो बहुत सारे प्रत्यक्ष प्रमाण ने खुद देखा

937
01:08:50,560 --> 01:08:54,720
है कि ये जो व्यक्ति है 40 साल से स्क्रिप्चर्स को फॉलो कर रहा है अगेंस्ट

938
01:08:54,720 --> 01:08:58,800
नहीं गया इसीलिए उस पोजीशन पे बिठाया लेकिन ऐसा कभी भी क्लेम उस व्यक्ति

939
01:08:58,800 --> 01:09:02,800
ने भी नहीं किया कि भाई जो मैं बोलूंगा वो मानो वो व्यक्ति हमेशा यही

940
01:09:02,800 --> 01:09:06,960
कहेगा जो प्रभुपाद जी या जो शड गोस्वामी कह रहे हैं वो मानो और वो ऐसा क्यों कह रहे हैं

941
01:09:06,960 --> 01:09:11,040
वो अरे ये तो ये बात तो जाकिर नायक भी कहता है मेरे भाई एक मिनट एक

942
01:09:11,040 --> 01:09:11,540
मिनट

943
01:09:11,360 --> 01:09:15,840
मैं पूरा कर लूं वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि क्योंकि श्री चैतन्य महाप्रभु के पर्सनल

944
01:09:15,840 --> 01:09:19,840
डिसाइपल्स है ड गोस्वामी। श्री चैतन्य महाप्रभु ने

945
01:09:19,840 --> 01:09:24,160
ड गोस्वामी की अथॉरिटी को ठप्पा लगाया है।

946
01:09:24,160 --> 01:09:28,160
श्री चैतन्य महाप्रभु ने ठप्पा लगाया श गोस्वामी की अथॉरिटी को और श्री चैतन्य महाप्रभु

947
01:09:28,160 --> 01:09:32,320
ने ही ठप्पा लगाया है। प्रभुपाद जी की भी अथॉरिटी मोर सेनापति भक्त

948
01:09:32,320 --> 01:09:36,480
जो है वो आएगा। देखिए अभी कई बातें हैं। पहली बात तो आपके

949
01:09:36,480 --> 01:09:40,720
जो प्रभुपाद जी हैं उनका शास्त्रों से शास्त्रों

950
01:09:40,720 --> 01:09:44,960
से जो हमारे आर्ष ग्रंथ है जिनको मैं भी मानू आप भी मानो जो

951
01:09:44,960 --> 01:09:49,280
हमारे आर्ष ग्रंथ है जिनमें जिनको लेकर के हम दोनों एक मत है कि हां भागवतम

952
01:09:49,280 --> 01:09:53,440
हमारा प्रामाणिक शास्त्र है उन शास्त्रों से आपने उनकी प्रामाणिकता

953
01:09:53,440 --> 01:09:57,520
सिद्ध नहीं की। आप पहले चैतन्य महाप्रभु और उनके जो शास्त्र है उनको उनको सिद्ध

954
01:09:57,520 --> 01:10:01,920
कर रहे हो। उसके बाद एक भाई साहब एक मिनट भाई साहब

955
01:10:01,920 --> 01:10:06,080
एक मिनट तो वो जब जब आप उनकी उसको

956
01:10:06,080 --> 01:10:10,080
प्रामाणिक सिद्ध कर रहे हो तो वैसे वो भी हमारे लिए प्रामाणिक स्वीकार करना है ही

957
01:10:10,080 --> 01:10:14,640
नहीं। वो इलॉजिकल बात है। फिर भी अगर दुर्जनोष न्याय से हम उसमें आगे

958
01:10:14,640 --> 01:10:19,040
फिर उसमें जब हम दुर्जनोष न्याय से आगे बढ़ते हैं। दुर्जनोष

959
01:10:19,040 --> 01:10:23,440
न्याय से जब हम आगे बढ़ते हैं तो

960
01:10:23,440 --> 01:10:26,480
दुर्जनोष न्याय से जैसे कोई ये कह रहा है कि मैंने

961
01:10:26,480 --> 01:10:30,480
चोरी की तो मैंने अपने आप को बता दिया स्वतंत्र रूप से कि ठीक है

962
01:10:30,480 --> 01:10:34,720
भाई मैं इस तरह से चोरी नहीं की पर थोड़ी देर के लिए मान लेता हूं कि मैंने चोरी

963
01:10:34,720 --> 01:10:38,720
की है। फिर मैं उसके बाद अपनी आर्गुममेंट देता हूं चोरी ना करने के संबंध

964
01:10:38,720 --> 01:10:42,800
में। इसको कहते हैं दुर्जंतोष न्याय कि थोड़ी देर के लिए तुम्हारी

965
01:10:42,800 --> 01:10:46,880
बात जो मानने लायक नहीं है इलॉजिकल है पहले ही वो काउंटेबल है

966
01:10:46,880 --> 01:10:51,040
तो थोड़ी देर के लिए उस बात को भी मान के अब मैं आगे बढ़ रहा हूं तो ये आपकी वो वाली

967
01:10:51,040 --> 01:10:55,040
बात है कि अब थोड़ी देर के लिए मान लिया कि चलो चैतन्य महाप्रभु की

968
01:10:55,040 --> 01:10:59,040
आपने शास्त्रीयता सिद्ध कर ली और उनका जो चैतन्य चरितामृत

969
01:10:59,040 --> 01:11:03,360
शास्त्र है वो हमारे लिए भी प्रामाणिक हो गया जबकि वो आपके ही द्वारा प्रामाणिक

970
01:11:03,360 --> 01:11:07,360
माने जाने वाले अन्य संप्रदायों के द्वारा मान्य नहीं है। फिर भी मैंने

971
01:11:07,360 --> 01:11:11,840
अभी के लिए उसको मान लिया। फिर भी मैंने अभी के लिए उसको मान लिया फिलहाल।

972
01:11:11,840 --> 01:11:15,840
ठीक है? तो अब यह इसको कहते हैं दुर्जनंतोष न्याय कि मैं अब थोड़ी देर के लिए इसको मान के

973
01:11:15,840 --> 01:11:19,840
आगे बढ़ता हूं। तो फिर मैं आगे बढ़ता हूं कि ट गोस्वामी

974
01:11:19,840 --> 01:11:24,080
ने जो लिखा वो उनके शिष्यों को उन्होंने दिया और फिर उन्होंने जो

975
01:11:24,080 --> 01:11:28,480
उन्होंने उस चीज को आगे प्रोसीड किया। ऐसे करते करते आप तक भी आ गया।

976
01:11:28,480 --> 01:11:32,640
अब जब आप तक आया है तो आपसे पहले वाले जो लोग हैं पिछली पीढ़ी

977
01:11:32,640 --> 01:11:36,960
उसमें से कई लोग हैं जो इस को प्रमाणिक नहीं मान रहे हैं।

978
01:11:36,960 --> 01:11:41,040
कुछ लोग होंगे जो मान भी रहे हैं जिनका जिनको आप अपने साथ

979
01:11:41,040 --> 01:11:41,540
प्रस्तुत

980
01:11:41,520 --> 01:11:45,520
करते हो सार्वजनिक रूप से जैसे कि पुंडरीिक जी वर्णाश्रम व्यवस्था

981
01:11:45,520 --> 01:11:49,600
को फॉलो कर रहे हैं। भाई साहब फॉलो करने

982
01:11:49,600 --> 01:11:54,240
का क्लेम कर रहे हैं आप। आप अब ये बताइए कि आपको श्रुति शास्त्रों से

983
01:11:54,240 --> 01:11:58,320
ये प्राप्त है। ये क्या कहते हैं

984
01:11:58,320 --> 01:12:02,560
विष्णु जी की परब्रह्मता आपके पास है श्रुति शास्त्र से?

985
01:12:02,560 --> 01:12:08,000
श्रुति शास्त्र वेदास वाले

986
01:12:08,000 --> 01:12:12,800
वेदास उपनिषद ब्राह्मण ओके आप नेक्स्ट पॉइंट पे आए हैं तो

987
01:12:12,800 --> 01:12:16,880
मैं मैं नेक्स्ट पॉइंट पे नहीं हूं मैं अभी आपको एक प्रैक्टिकल दिखाने वाला हूं

988
01:12:16,880 --> 01:12:21,200
आपके पास श्रुति शास्त्रों का कोई क्लेम है

989
01:12:21,200 --> 01:12:25,200
कि श्री विष्णु परम है या श्री कृष्ण परम है

990
01:12:25,200 --> 01:12:29,200
मेरे पास है पर मैं आपसे पूछ रहा हूँ अच्छा

991
01:12:29,200 --> 01:12:33,360
श्रुति शास्त्र का कोई मंत्र जानते हैं श्रुति शास्त्र

992
01:12:33,360 --> 01:12:37,360
के मंत्र जो है मैं कम जानता हूं और उसका एक कारण है कि

993
01:12:37,360 --> 01:12:41,360
कौन सा मंत्र जानते हैं? कम कम जानता हूं ना

994
01:12:41,360 --> 01:12:45,680
के बराबर ही जानता हूं। कोई एक मंत्र बताइए।

995
01:12:45,680 --> 01:12:49,840
उसे स्थापित क्या करना चाहते हैं आप? कुछ है मैं बताऊंगा

996
01:12:49,840 --> 01:12:54,560
आपको। कोई एक मंत्र बताइए मुझे जो आप जानते हैं।

997
01:12:54,560 --> 01:12:57,600
ओम पूर्णमद पूर्णमद

998
01:12:57,600 --> 01:13:02,000
पूर्णम। अब ये बताइए श्रुति शास्त्रों में अधिकारी होने के लिए आपने जनेऊ

999
01:13:02,000 --> 01:13:04,560
कराया है।

1000
01:13:04,560 --> 01:13:08,640
एक्सक्टली इसीलिए ज्यादा प्रेफरेंस

1001
01:13:08,640 --> 01:13:12,960
देते हैं। हम जनेऊ नहीं जनेऊ दिखाइए। जनेऊ दिखाइए।

1002
01:13:12,960 --> 01:13:17,200
नहीं कराया नहीं कराया। नहीं कराया तो आपने ये मंत्र आपने इसका मतलब अभी

1003
01:13:17,200 --> 01:13:22,000
अभी शास्त्र विरुद्ध कार्य किया ना

1004
01:13:22,000 --> 01:13:26,240
हां किया। ये मैं किया ना और ना जाने कितनी बार कर चुकेगे

1005
01:13:26,240 --> 01:13:30,240
आज से पहले। एग्री बहुत बारी है ना इसका मतलब

1006
01:13:30,240 --> 01:13:34,640
अभी अभी तक मैं यह देख रहा था कि आप किसी के आचरण से उसको पहचान

1007
01:13:34,640 --> 01:13:38,960
रहे हैं जबकि आप अपने आचरण को लेकर के साफ सुथरे नहीं है।

1008
01:13:38,960 --> 01:13:43,200
आपको मना करना था मेरे पास जनेऊ नहीं है। एक मिनट आपको मना करना था

1009
01:13:43,200 --> 01:13:47,520
मेरे पास जनेऊ नहीं है। मैं नहीं पढ़ सकता। क्योंकि मैं उत्तम अधिकारी

1010
01:13:47,520 --> 01:13:51,520
नहीं हूं इसलिए मुझसे गलती होती है। ये प्रूफ है। तो जब आपसे गलती होती है

1011
01:13:51,520 --> 01:13:57,520
तो आपके द्वारा जिसको स्वीकार किया जा रहा है कि उससे गलती नहीं हो सकती। ये कैसे मान लें?

1012
01:13:57,520 --> 01:14:01,760
एक मिनट एक भाई साहब एक मिनट जिसके प्रामाणिक होने

1013
01:14:01,760 --> 01:14:05,840
के विषय में आप ही साक्ष्य हो जिसके प्रमाणिक होने के

1014
01:14:05,840 --> 01:14:09,920
विषय में आप ही साक्ष्य हो साक्ष्य है अरे

1015
01:14:09,920 --> 01:14:12,640
डीबीसी के मेंबर्स के लिए आप आप बता रहे थे

1016
01:14:12,640 --> 01:14:16,640
ना बहुत सारे लोग बोलते हैं वो बहुत सारे लोग मिट्टी से शौच करते हैं मालूम

1017
01:14:16,640 --> 01:14:20,560
है आपको

1018
01:14:20,560 --> 01:14:24,560
तो वो जो बहुत सारे लोग हैं देखो यहां परसेंटेज

1019
01:14:24,560 --> 01:14:28,720
ऑफ अथॉरिटी कह सकते हैं। इसको सीधी सी बात

1020
01:14:28,720 --> 01:14:32,880
है जो उत्तराधिकारी होगा ना उसको

1021
01:14:32,880 --> 01:14:37,440
पिछले वाले पूर्वाचार्य ने ठूठा गाड़ के बताया हो ये है मेरा उत्तराधिकारी।

1022
01:14:37,440 --> 01:14:41,600
इसके अलावा और कोई तरीका नहीं है। एक एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मुझे

1023
01:14:41,600 --> 01:14:45,600
मुझे बोलने दीजिए। इसके अलावा आप ये आचरण वाले तरीके बताएंगे

1024
01:14:45,600 --> 01:14:49,840
ना तो इसमें इतना तक जाना पड़ेगा कि मैं सोच में भी आपको उनके साथ भेजूंगा।

1025
01:14:49,840 --> 01:14:54,560
चेक करके आओ चार बार मिट्टी से धो रहे हैं कि नहीं धो रहे हैं। एग्री

1026
01:14:54,560 --> 01:14:58,640
फिर कर्मों के आधार पे आप कैसे किसी को जज कर

1027
01:14:58,640 --> 01:15:02,880
सकते हैं? आज उसके कर्म अच्छे हैं। जब वो आपके सामने अच्छे

1028
01:15:02,880 --> 01:15:06,880
कर्म है दो मिनट जाकर के उससे कोई गलती हो रही है। बताइए क्या कर लेंगे आप? उसकी

1029
01:15:06,880 --> 01:15:10,960
उसकी लाइफ की कोई फिल्म देख रहे हैं आप तो इसलिए केवल

1030
01:15:10,960 --> 01:15:15,040
कर्म के आधार पर केवल एक बार दोबारा बोलिए। केवल कर्म

1031
01:15:15,040 --> 01:15:19,120
के आधार पे नहीं चल सकते। पीछे से क्लेम भी चाहिए कि यह

1032
01:15:19,120 --> 01:15:23,600
है। उसके बाद उसके थोड़े बहुत जितने कर्म हम देख सकते हैं उनको देख के एक्सेप्टेबल

1033
01:15:23,600 --> 01:15:27,840
प्रपाद जी ने क्लेम किया है कि जीबीसी ऑथराइज है। बिल्कुल

1034
01:15:27,840 --> 01:15:31,920
वैसे ही श्री चैतन्य महाप्रभु जो ईश्वर पुरी और ऊपर माधवेंद्र पुरी से आ रहे

1035
01:15:31,920 --> 01:15:36,000
थे उन्होंने क्लेम किया है कि ये ट गोस्वामी ऑथराइज है। ट गोस्वामी ने क्लेम किया प्रभुपाद

1036
01:15:36,000 --> 01:15:40,320
ऑथराइज है। तो क्लेम है ना कहां दिक्कत है? स गोस्वामी ने प्रपाद जी को ऑथराइज क्लेम

1037
01:15:40,320 --> 01:15:44,480
किया है। क्या नाम ले क्या द्वारा

1038
01:15:44,480 --> 01:15:49,360
स गोस्वामी ने प्रभुपाद जी को नाम ले ऑथराइज किया है।

1039
01:15:49,360 --> 01:15:53,600
हां मोर सेनापति भक्त आयु तथा डायरेक्टली बोला है नाम लेके

1040
01:15:53,600 --> 01:15:57,840
भाई साहब अभी आप जीबीसी को जीबीसी को जो कह रहे हैं ना कि जीबीसी जीबीसी को क्लेम

1041
01:15:57,840 --> 01:16:01,840
किया है। एक व्यक्ति का पर्सनल नाम देना ये

1042
01:16:01,840 --> 01:16:06,240
जनरली थोड़ा सा प्रैक्टिकल भी नहीं है। तो फिर आप जीबीसी को क्यों बता रहे हैं?

1043
01:16:06,240 --> 01:16:10,400
जीबीसी का तो नाम लिया ना प्रभुपाद ने। अच्छा अच्छा इसमें एक बात और

1044
01:16:10,400 --> 01:16:14,480
है। जीबीसी के किसी मेंबर का कभी भी आज तक आचरण बिगड़ा हुआ निकला है

1045
01:16:14,480 --> 01:16:18,640
कि नहीं निकला है? हां जी दोबारा क्या? जीबीसी के

1046
01:16:18,640 --> 01:16:22,720
किसी मेंबर का आचरण आज तक बिगड़ा हुआ निकला है कि नहीं निकला है? क्यों नहीं

1047
01:16:22,720 --> 01:16:26,800
निकलेगा? क्यों? वो जो उत्तम अधिकारी है उसका निकल सकता है। जो उत्तम अधिकारी

1048
01:16:26,800 --> 01:16:30,880
नहीं है उसका निकल सकता है। लेकिन यहां पर ऑथराइज करने का मतलब

1049
01:16:30,880 --> 01:16:35,200
ये होता है कि इतने सालों की उसका ट्रस्ट मेंटेन हुआ है। वो

1050
01:16:35,200 --> 01:16:39,360
ट्रस्ट के बेसिस पे अथॉरिटी क्योंकि उसके अलावा कोई मतलब इसका

1051
01:16:39,360 --> 01:16:43,200
मतलब आप क्या आप क्या मानते हैं? ये बता दीजिए कि जीबीसी

1052
01:16:43,200 --> 01:16:47,600
के मेंबर्स आपको गलत मैं एक मिनट मैं पूछ क्या रहा हूं वो सुन लीजिए।

1053
01:16:47,600 --> 01:16:51,680
डीबीसी के मेंबर्स आपको एज इट इज ज्ञान देंगे प्रभुपाद जी का कि

1054
01:16:51,680 --> 01:16:55,760
नहीं देंगे? बिल्कुल 100% अपने

1055
01:16:55,760 --> 01:16:59,840
वो अपने तरफ से 99% प्रयास पूरा करेंगे।

1056
01:16:59,840 --> 01:17:04,400
लेकिन भाई साहब फिर आपका यही पे तो चूक हो रही है। धर्म में ये सब नहीं होता है ना।

1057
01:17:04,400 --> 01:17:09,440
99% नहीं होता है धर्म में। होता है। यही तो दिक्कत है।

1058
01:17:09,440 --> 01:17:13,520
धर्म में ये सब नहीं होता कि 99% नहीं होता है। लेकिन अगर

1059
01:17:13,520 --> 01:17:17,600
धर्म धर्म में 99% नहीं होता। पहले मैंने इसीलिए सबसे पहले उत्तम

1060
01:17:17,600 --> 01:17:21,600
अधिकारी मध्यम अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी बताया क्योंकि उत्तम अधिकारी

1061
01:17:21,600 --> 01:17:26,000
से गलती नहीं होती। लेकिन उत्तम अधिकारी साहब जीबीसी में उत्तम अधिकारी है क्या?

1062
01:17:26,000 --> 01:17:30,000
आप मुझे ये आप बार-बार उत्तम उत्तम क्यों करते हैं? आप ये बताइए जीबीसी में कौन है?

1063
01:17:30,000 --> 01:17:34,080
उत्तम है कि मध्यम है कि कनिष्ठ है? कौन है? मिक्स है उत्तम मध्यम

1064
01:17:34,080 --> 01:17:38,080
और जो मध्यम को ठीक से फॉलो नहीं करेगा वो कनिष्ठ पे आ जाएगा सिम्टम्स के बेसिस

1065
01:17:38,080 --> 01:17:42,560
पे तो आपका जो धर्म आ रहा है उत्तम मध्यम और वो कनिष्ठ

1066
01:17:42,560 --> 01:17:46,800
सबसे मिल के आ रहा है जी और वो तो यानी की उसमें कनिष्

1067
01:17:46,800 --> 01:17:50,960
की भावनाएं भी है क्या दोबारा एक बार कनिष्ठ की चीजें

1068
01:17:50,960 --> 01:17:54,960
भी है ना हां है क्या दिक्कत है तो कनिष्ठ से तो गलती

1069
01:17:54,960 --> 01:17:58,320
होना आप स्वीकार कर रहे हो ना होती है मेरे से भी हुई अभी मैंने

1070
01:17:58,320 --> 01:18:02,400
पांच मिनट पहले जस्ट एक तो हो सकती मैं तो

1071
01:18:02,400 --> 01:18:07,040
हो सकती है तो यानी कि आपके पास जो बुक्स आ रही है उसमें गलती छपी हो सकती है ना

1072
01:18:07,040 --> 01:18:12,240
गलती छपी हो सकती है अगर वो उत्तम अधिकारी के द्वारा नहीं लिखी हुई तब उत्तम अधिकारी

1073
01:18:12,240 --> 01:18:16,320
आप ये बता दीजिए आप फिर ये क्लियर कर दीजिए कि भैया जीबीसी

1074
01:18:16,320 --> 01:18:20,320
में ये ये उत्तम अधिकारी है इनसे फिल्टर होके ही कोई बात हम तक

1075
01:18:20,320 --> 01:18:24,480
आएगी आप क्यों 500 पे जा रहे हैं आप वो 100 बता दीजिए कितने हैं उत्तम अधिकारी

1076
01:18:24,480 --> 01:18:28,800
कितने हैं मैं कुछ उत्तम अधिकारियों के नाम लेता हूं कुछ नहीं उत्तम अधिकारी

1077
01:18:28,800 --> 01:18:34,800
एक्सजेक्टली कितने हैं ये पता पता लगाना मुश्किल है क्योंकि

1078
01:18:35,280 --> 01:18:39,600
वैसे ही जैसे आप यह नहीं पता लगा सकते जैसे कृष्ण ने कृष्ण को किसने देखा है

1079
01:18:39,600 --> 01:18:43,840
ये पता नहीं लगा सकते नहीं हो सकता तो

1080
01:18:43,840 --> 01:18:47,840
आपको कैसे पता आपको कैसे पता एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट

1081
01:18:47,840 --> 01:18:52,080
भाई साहब भाई साहब आप जब अपने धर्म ब्रह्म का निर्णय ले रहे हैं तो आपको

1082
01:18:52,080 --> 01:18:56,240
कैसे पता कि जब आपको यही नहीं पता है कि उत्तम अधिकारी कौन है तो आपको

1083
01:18:56,240 --> 01:19:00,320
यह कैसे पता कि वहां से आने वाली जो बात है वो उत्तम अधिकारी से फिल्टर होके आ

1084
01:19:00,320 --> 01:19:04,720
रही है कि नहीं आ रही है। क्या कंफ्यूजिंग बातें हैं? हां, यहां कंफ्यूजिंग

1085
01:19:04,720 --> 01:19:09,280
बात ये है कि वी ऑल एक्सेप्ट प्रभुपाद एस उत्तम अधिकारी।

1086
01:19:09,280 --> 01:19:13,440
ठीक है। फिर वही बात हो गई। अभी प्रभुपाद जी आपके

1087
01:19:13,440 --> 01:19:17,440
बीच में नहीं है। हां। प्रभुपाद जी के ही

1088
01:19:17,440 --> 01:19:21,440
नाम से ऐसे लोग मिल जाएंगे जो इस का खंडन कर रहे हैं।

1089
01:19:21,440 --> 01:19:25,600
हां। तो तो फिर तो प्रभुपाद जी के जो शिष्य हैं

1090
01:19:25,600 --> 01:19:29,600
वो झूठ बोल सकते हैं। आप खुद मान रहे हो। एक बार

1091
01:19:29,600 --> 01:19:32,160
दोबारा बोलना।

1092
01:19:32,160 --> 01:19:36,240
आपने कहा प्रभुपाद जी उत्तम अधिकारी हैं। ठीक है?

1093
01:19:36,240 --> 01:19:40,640
आपने कहा जीबीसी में 500 मेंबर्स हैं। मैं सबके नाम याद नहीं रख सकता।

1094
01:19:40,640 --> 01:19:45,280
ठीक है? अब आपने कहा कि जो जीबीसी के मेंबर्स हैं उसमें

1095
01:19:45,280 --> 01:19:49,440
कनिष्ठ कनिष्ठ अधिकारी भी हैं और मध्यम अधिकारी भी हैं। वह भी अपनी बात कहते

1096
01:19:49,440 --> 01:19:50,800
हैं। मगर अंतिम

1097
01:19:50,800 --> 01:19:54,880
रूप से किताब में छपके वही बात आती है जो उत्तम अधिकारी से फ़िल्टर

1098
01:19:54,880 --> 01:19:58,960
हुई हो। ठीक है? ठीक है? तो अब जब हम

1099
01:19:58,960 --> 01:20:03,040
ये मान रहे हैं कि उत्तम अधिकारी से फिल्टर हो के ही कोई बात आ रही है तो हमारे पास

1100
01:20:03,040 --> 01:20:07,200
उत्तम अधिकारी की सूची होनी चाहिए ना जो छपी हो इस

1101
01:20:07,200 --> 01:20:11,520
की तरफ से पहली बात तो फिर बाद की बात है हम उसप क्लेम करेंगे।

1102
01:20:11,520 --> 01:20:15,600
पहले आप वो लिस्ट तो बताइए कौन-कौन उत्तम अधिकारी है आपके

1103
01:20:15,600 --> 01:20:19,680
यहां? हिजोरस गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज कितने

1104
01:20:19,680 --> 01:20:24,880
पहले एक एक चीज पहले आप बड़े-बड़े क्लेम करिए। पहले कितने हैं ये बताइए।

1105
01:20:24,880 --> 01:20:28,880
देखो कितने काउंट करना क्योंकि उत्तम अधिकारी के जो सिम्टम्स है ना अगर

1106
01:20:28,880 --> 01:20:33,280
आप उनको नोटिस करोगे मैं भागवतम यानी कि आपको एक एक के साथ लाइफ बितानी

1107
01:20:33,280 --> 01:20:37,360
होगी और फिर आप ये चेक करोगे उत्तम अधिकारी है और फिर आप ये चेक करोगे

1108
01:20:37,360 --> 01:20:41,760
कि जीबीसी जीबीसी एक मिनट भाई साहब एक मिनट एक मिनट

1109
01:20:41,760 --> 01:20:46,080
फिर आप ये चेक करोगे कि जीबीसी की जो किताबें हैं वो इनसे फिल्टर

1110
01:20:46,080 --> 01:20:50,880
होके जा रही है कि नहीं जा रही है यस आईडियली तो यही है

1111
01:20:50,880 --> 01:20:54,960
तो आपने कर लिया क्या जो

1112
01:20:54,960 --> 01:20:59,200
आप कह रहे हैं आइडियल ही तो यही है। हां जीबीसी की किताबें जो है उत्तम आपने

1113
01:20:59,200 --> 01:21:03,600
कर लिया आपने वहां के उत्तम अधिकारियों को जांच लिया कौन-कौन

1114
01:21:03,600 --> 01:21:06,000
है और ये भी जांच लिया कि उनसे फिल्टर हो के किताबें

1115
01:21:06,000 --> 01:21:10,080
आ रही है कि नहीं आ रही है। बहुत सों को जाता है क्योंकि फिर

1116
01:21:10,080 --> 01:21:14,400
बहुत सारे भाई साहब धर्म में ऐसा नहीं चलता है। ब्रह्म में अनिर्वचनी

1117
01:21:14,400 --> 01:21:18,720
आ सकती है। ब्रह्म में अचिंत बातें आ सकती हैं। धर्म

1118
01:21:18,720 --> 01:21:22,720
में नहीं आती है। नो का मतलब नो होता है। बहन का मतलब बहन

1119
01:21:22,720 --> 01:21:26,720
होता है। यह धर्म है। धर्म क्लियर होता

1120
01:21:26,720 --> 01:21:30,800
है। निश्चित होता है। रामो विग्रह धर्म ये मर्यादा लाइन है

1121
01:21:30,800 --> 01:21:34,800
धर्म। इसके उधर नहीं जाना है। जैसे आप ही ने तो

1122
01:21:34,800 --> 01:21:39,040
अभी बताया ना कृष्ण को किसने देखा ये पता लगाया नहीं जा सकता। उत्तम अधिकारी वही

1123
01:21:39,040 --> 01:21:43,120
तो है। तो मैं ये कैसे पता अरे भैया जिस चीज को अच्छा चलो ठीक है। जिस

1124
01:21:43,120 --> 01:21:47,280
चीज को पता नहीं लगाया जा सकता उसको आप प्रमाण के रूप में कैसे ले रहे हैं?

1125
01:21:47,280 --> 01:21:51,360
हां सिम्टम्स के तौर पर। कौन से तो फिर

1126
01:21:51,360 --> 01:21:55,520
सिम्टम्स के तौर पर आप वो सिम्टम्स के द्वारा चेक करके लिस्ट बना के आओ

1127
01:21:55,520 --> 01:21:59,680
ना मेरे पास एक्सक्टली वो 26 26 डिवाइन क्वालिटीज

1128
01:21:59,680 --> 01:22:03,920
भगवत गीता में है कुछ सिम्टम्स भागवतम में भी है 26 है डिवाइन

1129
01:22:03,920 --> 01:22:07,920
इन टोटल डिवाइन क्वालिटीज की लिस्ट है वो भगवत

1130
01:22:07,920 --> 01:22:12,240
गीता में है भागवतम में है तितवा कार भाई साहब आप आप ना

1131
01:22:12,240 --> 01:22:16,320
आप गलत जा रहे है मैंने कहा कि जो भी नियमावली है उत्तम भक्त

1132
01:22:16,320 --> 01:22:20,320
को जान जांचने की वो वो नियमावली अप्लाई करते

1133
01:22:20,320 --> 01:22:21,200
हुए आपने

1134
01:22:21,200 --> 01:22:25,440
ये जांच कर ली है उनके साथ में लाइफ बिता के। ये इंडिविजुअल

1135
01:22:25,440 --> 01:22:29,440
होता है। ये मैनेजमेंट का अधिकार नहीं है। मैं बताता हूं क्यों

1136
01:22:29,440 --> 01:22:33,920
मैनेज इसका मतलब आपको नहीं पता चल सकता कि

1137
01:22:33,920 --> 01:22:38,080
आप ये क्लेम नहीं कर सकते कि उत्तम अधिकारी से ही आपकी चीजें आपके पास आ

1138
01:22:38,080 --> 01:22:42,160
रही है। प्रभुपाद जी की इसीलिए तो हम कर रहे हैं ना

1139
01:22:42,160 --> 01:22:46,160
प्रभुपाद जी की बुक्स ही डिस्ट्रीब्यूट करते हैं ना मेजरली। यही कारण है हम इंडिविजुअल

1140
01:22:46,160 --> 01:22:50,400
किसी एक सन्यासी की बुक्स नहीं देते। अक्सर नहीं देते। हम जनरली कोशिश

1141
01:22:50,400 --> 01:22:54,880
करते हैं प्रभुपाद जी का जो सिद्धांत है वो दे और प्रभुपाद जी जो है अरे भाई साहब

1142
01:22:54,880 --> 01:22:59,360
फिर आप वही पर जा रहे हो। जनरली हम यही कोशिश करते हैं। प्रभुपाद

1143
01:22:59,360 --> 01:23:03,360
जी ने ये प्रभुपाद जी सुनिए प्रभुपाद जी ने क्या कहा है

1144
01:23:03,360 --> 01:23:07,600
ये आपने खुद से नहीं सुना है। आपको उनका कोई शिष्य बता

1145
01:23:07,600 --> 01:23:11,600
रहा है। प्रभुपाद जी ने ये कहा है। प्रपाद जी की ऑडियो है। अब ये

1146
01:23:11,600 --> 01:23:15,600
ऑडियो प्रूफ तो है ना। प्रपाद जी की तो डायरेक्ट ऑडियो है। ये तो खुद से भी सुना

1147
01:23:15,600 --> 01:23:19,680
है। अब ठीक है। उसका जो भाष्य इत्यादि

1148
01:23:19,680 --> 01:23:23,680
है प्रभुपाद जी की बातों का वो ट्रांसक्रिप्शन है

1149
01:23:23,680 --> 01:23:27,680
वो वो सब ट्रांसक्रिप्शन है। ट्रांसक्रिप्शन तो समझ सकते तो आप ये बताइए जो

1150
01:23:27,680 --> 01:23:31,760
ऑडियो अवेलेबल है वो हरे कृष्णा वालों के पास भी है। सबके

1151
01:23:31,760 --> 01:23:36,080
पास है। ठीक है। तो जब उसको है तो उस ऑडियो

1152
01:23:36,080 --> 01:23:36,580
मैं

1153
01:23:36,400 --> 01:23:40,480
आपको यह प्रूफ करना चाह रहा हूं कि ऑडियो होने के बावजूद भी वो जो

1154
01:23:40,480 --> 01:23:44,720
कहने वाला व्यक्ति है उसकी बातों का अर्थ निकालते समय

1155
01:23:44,720 --> 01:23:49,200
उसमें मतभेद हो सकता है। उस आदमी की

1156
01:23:49,200 --> 01:23:53,200
तो हो रहा है तो फिर हम निर्णय कैसे करेंगे? कहां मतभेद

1157
01:23:53,200 --> 01:23:57,760
हो रहा है? ये पर्टिकुलर केस अरे हरे कृष्णा वालों की आपसे लड़ाई है कि नहीं है?

1158
01:23:57,760 --> 01:24:01,760
मैं मैं आपको एक प्रायोरिटी देता हूं और मतभेद कैसे सेटल

1159
01:24:01,760 --> 01:24:05,760
होगा मैं ये बताता हूं। प्रायोरिटी ये है कि देखिए देखिए मैं पहले

1160
01:24:05,760 --> 01:24:10,000
आप ये बताइए मैं मैं पहले आप पहले आप ये चीज क्लेम करिए

1161
01:24:10,000 --> 01:24:14,080
कि है कि नहीं है मतभेद ऑडियो होने के बावजूद भी मतभेद

1162
01:24:14,080 --> 01:24:18,240
है ना मतभेद है और क्लियर कैसे प्रभुपाद जी के प्रामाणिक

1163
01:24:18,240 --> 01:24:22,720
प्रभुपाद जी के प्रामाणिक शिष्यों के बीच मतभेद है ना ऑडियो होने के बावजूद भी

1164
01:24:22,720 --> 01:24:27,360
है और क्लियर कैसे होगा ये भी बताता हूं ठीक है क्लियर है मैं

1165
01:24:27,360 --> 01:24:31,440
उसको बाद की बात करूंगा ना क्लियर कैसे होगा वो ठीक है वो एक अलग बात है वो

1166
01:24:31,440 --> 01:24:35,440
एक अलग मतभेद है ना मैं ये समझाना चाह रहा हूं

1167
01:24:35,440 --> 01:24:39,440
देखिए मैं ये समझाना चाह रहा हूं सीधेसीधे

1168
01:24:39,440 --> 01:24:43,440
दिक्कत ये है क्योंकि टाइम वेस्ट है उधर जाना उसकी आवश्यकता ही

1169
01:24:43,440 --> 01:24:48,240
नहीं है मैं बता रहा हूं ना मैं बता रहा हूं सीधे-सीधे भगवान

1170
01:24:48,240 --> 01:24:51,920
भगवान श्री कृष्ण के बोले हुए वचन हमारे पास लिखे

1171
01:24:51,920 --> 01:24:56,080
हैं जो आप भी मानते हो भगवान कृष्ण के शास्त्र के अंदर खुद मत

1172
01:24:56,080 --> 01:25:00,320
भेद है शास्त्र के कई मीनिंग है और कई लीनिंग है और वो सब

1173
01:25:00,320 --> 01:25:04,400
ऐसे ही जब ऐसे ही जब प्रभुपाद जी नहीं रह जाएंगे

1174
01:25:04,400 --> 01:25:08,480
और उनका ऑडियो रह जाएगा उनकी कही बातों के भी कई मीनिंग

1175
01:25:08,480 --> 01:25:12,480
है इसीलिए हरे कृष्णा है इसीलिए भी इस बोर है इसीलिए

1176
01:25:12,480 --> 01:25:16,800
भी इस ये है आपका वाला लेकिन कुछ तो ग्लोबल करेक्ट है ग्लोबली

1177
01:25:16,800 --> 01:25:20,880
करेक्ट है अरे आप बार-बार अपने पैराटर्स ही चेंज कर रहे हो अभी

1178
01:25:20,880 --> 01:25:25,040
हम लोग यहां पे अभी हम लोग यहां पे आ चुके हैं मैं आपको दोबारा से वहां पे ले जाता हूं

1179
01:25:25,040 --> 01:25:29,120
जीबीसी के मेंबर्स उत्तम अधिकारी हैं कि नहीं यह

1180
01:25:29,120 --> 01:25:33,200
आपने कैसे तय किया और कितने उत्तम अधिकारी हैं और यह कैसे

1181
01:25:33,200 --> 01:25:37,600
तय किया कि उनसे फिल्टर हो के चीजें आ रही है बताइए। देखो

1182
01:25:37,600 --> 01:25:41,840
मैक्सिमम उत्तम अधिकारी है ये देखो जिस तरीके से पहले मैंने

1183
01:25:41,840 --> 01:25:46,160
बताया कि ज्यादा लोग होते हैं तो गलतियां कम होती है।

1184
01:25:46,160 --> 01:25:50,240
इसको एक मैनेजमेंट अच्छा ठीक है। ये भी ये भी आपका तर्क है

1185
01:25:50,240 --> 01:25:54,400
जो ज्यादा लोग होते हैं इसको भी कितने ज्यादा लोग होंगे तो गलती गलती नहीं होगी। दो

1186
01:25:54,400 --> 01:25:58,640
चीजों को अलग करूंगा। एक मिनट मैं कंप्लीट करता हूं। पहले मैं दो चीजों को अलग करूंगा। मैनेजमेंट

1187
01:25:58,640 --> 01:26:02,880
अलग है। स्पिरिचुअली अपने लिए गुरु चुनना अलग है।

1188
01:26:02,880 --> 01:26:07,120
इन दोनों को अलग-अलग रखना चाहिए। इसमें बाउंड्री रखनी चाहिए। मैनेजमेंट के

1189
01:26:07,120 --> 01:26:11,360
अधिकारी हम कोशिश ये पूरा प्रयास करते हैं कि वो स्पिरिचुअली

1190
01:26:11,360 --> 01:26:15,440
एलिवेटेड हो। प्रयास पूरा रहता है। लेकिन हम ये

1191
01:26:15,440 --> 01:26:19,440
100% क्लेम भी नहीं करते। ना वो व्यक्ति एबीसी क्या है? स्पिरिचुअल

1192
01:26:19,440 --> 01:26:23,760
अधिकारी है कि मैनेजमेंट वाले हैं? मैनेजमेंट अधिकारी। हां

1193
01:26:23,760 --> 01:26:27,840
तो भैया इतना रायता फैला क्यों रहे हो? इतना रायता क्यों

1194
01:26:27,840 --> 01:26:32,080
फैला रहे हो? आप आपसे मैंने क्या कहा था? आपका जो परंपरा प्राप्त

1195
01:26:32,080 --> 01:26:36,400
जो आपका ज्ञान विज्ञान है आज के टाइम में इसका अंतिम निर्णायक कौन है? तो जीबीसी

1196
01:26:36,400 --> 01:26:40,560
को क्यों लाए? उसको लाओ ना जो स्पिरिचुअल अधिकारी हो। स्पिरिचुअल

1197
01:26:40,560 --> 01:26:44,640
और मैनेजमेंट स्पिरिचुअल अरे मैनेजमेंट स्पिरिचुअल ही होता है। लेकिन एक

1198
01:26:44,640 --> 01:26:48,800
व्यक्ति करेगा तो गलती के ज्यादा चांसेस रहेंगे ना। और व्यक्ति हर बात बोल दो।

1199
01:26:48,800 --> 01:26:52,800
जय गंगे मैया कर दो आप। हर बात बोल दो। पहले आप कह

1200
01:26:52,800 --> 01:26:56,800
रहे हो कि नहीं जो स्पिरिचुअल अधिकारी है वो अलग है मैनेजमेंट वाले अलग है फिर मैंने कहा कि

1201
01:26:56,800 --> 01:27:00,800
आप मैनेजमेंट वालों को क्यों लाए एक मिनट भाई साहब एक मिनट फिर

1202
01:27:00,800 --> 01:27:05,120
मैंने बोला कि आप मैनेजमेंट वालों को क्यों लाए स्पिरिचुअल अधिकारी को क्यों नहीं लाए तो आपने कहा

1203
01:27:05,120 --> 01:27:09,200
नहीं नहीं वो होते वही वही मैनेजमेंट वाले ही वो

1204
01:27:09,200 --> 01:27:13,440
होते हैं मगर सब लोग सही नहीं हो सकते उसमें कुछ गलतियां हो सकती है इसलिए वो ज्यादा होने

1205
01:27:13,440 --> 01:27:17,520
चाहिए हां ऑब्वियसली सही तो हर एक सोसाइटी

1206
01:27:17,520 --> 01:27:21,520
में ये मैनेजमेंट करने का तरीका है ये इस वर्ल्ड के अंदर मैनेजमेंट करने का

1207
01:27:21,520 --> 01:27:22,320
तरीका फॉर एग्जांपल

1208
01:27:22,320 --> 01:27:26,320
यूनिवर्सिटी क्यों होती है? क्योंकि यूनिवर्सिटी में कोई एक टीचर होता है। उसी मैं ज्यादा की बात

1209
01:27:26,320 --> 01:27:30,320
अभी कर ही नहीं रहा हूं। आप उसको अभी वो तो मैं अभी लूंगा। वो भी आपका काउंटर

1210
01:27:30,320 --> 01:27:34,400
योग्य है। जो आप ये बात कह रहे हो ना कितने मैं बता देता हूं। अच्छा

1211
01:27:34,400 --> 01:27:38,560
ये बताइए ये बताइए कि कितने होंगे तो माना जाएगा

1212
01:27:38,560 --> 01:27:43,280
गलती नहीं होगी। चलिए इसी को देख लेते हैं। 12

1213
01:27:43,280 --> 01:27:47,280
प्रभुपाद जी ने 12 बोले। आपके यहां तो 500 है।

1214
01:27:47,280 --> 01:27:51,440
हां वो 500 वो 500 एक्चुअली गुरु की पदवी पर कौन

1215
01:27:51,440 --> 01:27:55,600
है और कौन दीक्षा दे देते हैं वो उनके नाम है। वो जीबीसी ने ऑथराइज किए हैं इन टोटल

1216
01:27:55,600 --> 01:27:59,760
पूरे ऑल ओवर वर्ल्ड 12 है। यानी कि जो आपके अंतिम

1217
01:27:59,760 --> 01:28:04,000
निर्णायक है वो 12 है। हां। अभी तक आपको मालूम

1218
01:28:04,000 --> 01:28:08,720
नहीं था ये बात। मुझसे बात करतेकरते पता चल गई। नहीं।

1219
01:28:08,720 --> 01:28:12,880
तो आपको शुरू में कहना चाहिए था अंतिम निर्णायक 12 है। 500 जीबीसी मेंबर्स

1220
01:28:12,880 --> 01:28:17,200
आप बोल रहे मुझे पता नहीं है इतने पॉसिबल नहीं है इतने नाम याद होना देखिए बातों को

1221
01:28:17,200 --> 01:28:23,120
घुमाना पलटना ये सब चीजें हमारी चीजों को बिगाड़ेगा

1222
01:28:23,120 --> 01:28:27,120
जी शुरू में आपने क्या कहा मैंने क्या कहा था अंतिम निर्णय

1223
01:28:27,120 --> 01:28:31,200
कौन है आपने सुनिए अब आप सुन लीजिए जरा अपनी बातों से मुकरिए

1224
01:28:31,200 --> 01:28:35,200
मत आपने शुरू में मैंने कहा अंतिम भाई साहब बीच में मत

1225
01:28:35,200 --> 01:28:37,360
बोलिए सॉरी सॉरी शुरू में

1226
01:28:37,360 --> 01:28:41,840
आपने कहा था मैंने जब पूछा अंतिम निर्णायक कौन है आपने कहा जीबीसी

1227
01:28:41,840 --> 01:28:45,920
तब आपने 12 नहीं बोला बोला। उसके बाद मैंने बोला जीबीसी में कितने मेंबर्स? तो आपने

1228
01:28:45,920 --> 01:28:50,560
बोला 4500 मैंने कहा कितनों के नाम याद है? आपने कहा सबके नाम याद नहीं कुछ के नाम याद है।

1229
01:28:50,560 --> 01:28:55,120
कहां कहां चले गए थे 12 मेंबर्स तब?

1230
01:28:55,120 --> 01:28:59,360
इसमें आपको मैं मैं देखिए थोड़ा सा मेरी शायद वो पिच लाउड

1231
01:28:59,360 --> 01:29:04,080
हो रही है। मैं आप बहुत सज्जन व्यक्ति हैं। इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं।

1232
01:29:04,080 --> 01:29:08,160
मैं यह कह रहा हूं। आप अपने जो आप

1233
01:29:08,160 --> 01:29:12,160
इस यह चीज सोच के मत चलिए कि मुझे प्रतीक को सही सिद्ध

1234
01:29:12,160 --> 01:29:16,240
करना है ना। आपको ये सोच के चलना है कि आपको इस को सही सिद्ध

1235
01:29:16,240 --> 01:29:20,400
करना है। आप इस के प्रति वो रहिए लॉयल जैसे एक भव्य राधा कृष्ण

1236
01:29:20,400 --> 01:29:24,400
दास आया था। उसने 10 चीजें ऐसी बोली थी उसमें जो इस के विरोध में है। अभी

1237
01:29:24,400 --> 01:29:28,480
भी बोलता है। अच्छा अभी भी वो करता है। तो

1238
01:29:28,480 --> 01:29:32,480
वो इस के लिए लॉयल नहीं है। वो अपने उसको स्थापित करना चाहता है। मैं चुप

1239
01:29:32,480 --> 01:29:36,640
नहीं हो सकता। आप इस पर मत जाइए कि मुझे किसी तरीके

1240
01:29:36,640 --> 01:29:41,040
से अपनी बात को सेट करना है। जो फंडामेंटल्स है इस के

1241
01:29:41,040 --> 01:29:45,040
यदि वो आपको मालूम है तो उनके ऊपर बात करिए रखिए नहीं तो आप टॉपिक

1242
01:29:45,040 --> 01:29:49,360
चेंज करने को बोलिए। ऐसा मत करिए कि जब जो मन में आया बात को

1243
01:29:49,360 --> 01:29:52,720
पुष्टि करने के लिए कुछ भी बोल दिया। ठीक है? जी जी मैं

1244
01:29:52,720 --> 01:29:56,960
अब आप अब दोबारा से हम अंतिम निर्णय की बात कर लेते हैं। अंतिम निर्णायक

1245
01:29:56,960 --> 01:30:01,040
इस का कौन है? फिर से सवाल हां एक बार वो 12 की जस्ट

1246
01:30:01,040 --> 01:30:05,120
लिस्ट निकाल रहे हैं। हां नहीं नहीं नहीं नहीं एक मिनट मैं

1247
01:30:05,120 --> 01:30:09,280
लिस्ट पूछूंगा आपसे मैं लिस्ट पूछूंगा आपसे मैं पूछूंगा अभी

1248
01:30:09,280 --> 01:30:13,520
मैं पूछ रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि 12 मेंबर्स हैं ऐसे आप क्लेम कर रहे हैं 12

1249
01:30:13,520 --> 01:30:17,600
मेंबर्स ठीक है ये आपके धर्म अब ये

1250
01:30:17,600 --> 01:30:22,320
तो इसमें तो स्पिरिचुअल मैनेजमेंट वाला लफड़ा नहीं आएगा ना स्पिरिचुअल

1251
01:30:22,320 --> 01:30:26,400
धर्म के निर्णायक है ना ये आपके हां

1252
01:30:26,400 --> 01:30:30,560
है ना अरे अरे अरे भाई कंफ्यूज

1253
01:30:30,560 --> 01:30:34,640
हो क्या हां नहीं नहीं तो तो थोड़ा यार वैसे

1254
01:30:34,640 --> 01:30:38,640
बोलो वो लक्ष्य मूवी देखी है ऋतिक रोशन की हां हां ठीक है ठीक

1255
01:30:38,640 --> 01:30:42,720
है वो बोलते है ना धावा तो ऋतिक रोशन की बारी आती है ऋतिक रोशन कहता

1256
01:30:42,720 --> 01:30:46,880
है दवा तो वो कहता क्या बात है बचपन में मां का दूध नहीं पिया क्या सीने

1257
01:30:46,880 --> 01:30:51,280
में आग चाहिए आग ठीक है ठीक है कॉन्फिडेंटली

1258
01:30:51,280 --> 01:30:55,280
अपनी बात बोलिए भाई कॉन्फिडेंटली हां हां हां जिससे की होता

1259
01:30:55,280 --> 01:30:59,280
क्या है जब आप कॉन्फिडेंटली अपनी बात बोलते हैं तो हम बाद में उस बात को लेके

1260
01:30:59,280 --> 01:31:03,360
चलते हैं कि ये बात मुकरेगा नहीं और आप लबड़ में कुछ बोलोगे तो उसमें हमें दिक्कत

1261
01:31:03,360 --> 01:31:07,360
होती है कि अभी इसने ठीक से बाद में कह दे मैंने बोला ही नहीं था तो दिक्कत

1262
01:31:07,360 --> 01:31:07,920
होती है उसको

1263
01:31:07,920 --> 01:31:12,080
लेने में।

1264
01:31:12,080 --> 01:31:16,640
खैर तो मैं ये कह रहा हूं 12 मेंबर्स हैं। ठीक है।

1265
01:31:16,640 --> 01:31:21,680
अच्छा अब ये बताइए कि आप अभी तक इस को फॉलो कर रहे थे?

1266
01:31:21,680 --> 01:31:25,920
जी। ठीक है। आपके अंतिम निर्णायक जो

1267
01:31:25,920 --> 01:31:30,000
12 मेंबर्स हैं उनके नाम आज तक आपको नहीं पता

1268
01:31:30,000 --> 01:31:34,160
है। तो आप किसको फॉलो कर रहे हैं? कभी-कभी कभी-कभी

1269
01:31:34,160 --> 01:31:38,400
बीचबीच में चेंज होते रहते हैं।

1270
01:31:38,400 --> 01:31:42,480
ठीक है? चेंज होते रहते हैं। ठीक है। मैं इस बात

1271
01:31:42,480 --> 01:31:46,560
करूंगा। मैं इस पर बात करूंगा। जब आपने जाइन किया उस दिन से ले आज तक

1272
01:31:46,560 --> 01:31:52,240
आपको पता थे जब तक चेंज नहीं हुए तब तक कि

1273
01:31:52,240 --> 01:31:56,400
जनरली तो हमारा पहले आकर्षण जो होता है मेरा अगर मैं पर्सनली बताऊं

1274
01:31:56,400 --> 01:32:00,720
कि जो आकर्षण है वो पहले श्रील प्रभुपाद जी से हुआ ऑब्वियसली प्रभुपाद

1275
01:32:00,720 --> 01:32:05,920
जी की सोसाइटी है और इस में प्रभुपाद जी के प्रति बहुत फेथ है और

1276
01:32:05,920 --> 01:32:10,720
जी आपको प्रक जी प्रक जी मैं आपको एक बात बताऊं

1277
01:32:10,720 --> 01:32:16,640
दुनिया की हर सनातन का प्रचार करने वाली संस्था

1278
01:32:16,640 --> 01:32:20,960
वो जिसके प्रति हमारी श्रद्धा पहले से है

1279
01:32:20,960 --> 01:32:23,120
उसको ही ढाल बनाकर अपना रायता

1280
01:32:23,120 --> 01:32:27,360
परोस रही है। हां ये है। जैसे जैसे मेरी

1281
01:32:27,360 --> 01:32:31,440
श्रद्धा वेद में है। ठीक है। तो भैया आ गए दयानंद

1282
01:32:31,440 --> 01:32:35,680
जी। हम वेदों का अर्थ बताएंगे। परंपरा

1283
01:32:35,680 --> 01:32:40,000
के विरुद्ध जाकर के बताएंगे। पर वेदों का बताएंगे जिससे कि हिंदू अट्रैक्ट

1284
01:32:40,000 --> 01:32:44,080
हो जाए। फिर गायत्री परिवार वाले आ जाएंगे। हम

1285
01:32:44,080 --> 01:32:48,080
वेदों का अर्थ बताएंगे। मगर परंपरा से विरुद्ध

1286
01:32:48,080 --> 01:32:52,640
जाकर के बताएंगे। अरे भैया जिससे शास्त्र हैं जिससे शास्त्र

1287
01:32:52,640 --> 01:32:56,720
हैं उस उसके अर्थ पर यदि विश्वास नहीं है तो उसके शास्त्र पर विश्वास

1288
01:32:56,720 --> 01:33:00,800
कैसे और यदि उसके शास्त्र पर विश्वास है तो उसके अर्थ

1289
01:33:00,800 --> 01:33:05,280
पर विश्वास क्यों नहीं सीधी सी बात खैर

1290
01:33:05,280 --> 01:33:09,280
तो ये जो क्लेम होता है ये जो क्लेम है आपका ये जो

1291
01:33:09,280 --> 01:33:13,360
क्लेम है आपका ये जो क्लेम है कि मेरा अट्रैक्शन प्रभुपाद जी की तरफ था वो

1292
01:33:13,360 --> 01:33:17,360
हो सकता है ठीक है मगर फिर बिना जाने आपको ये

1293
01:33:17,360 --> 01:33:21,440
नहीं मानना चाहिए था कि मैं प्रमाणिक मेरे साथ एक्चुअली हुआ था। मेरे साथ एक्चुअली

1294
01:33:21,440 --> 01:33:25,600
हुआ था। ये मेरा पर्सनल है। हां पर्सनल ओपिनियन

1295
01:33:25,600 --> 01:33:30,160
है ना? यही होने लगता है। यहां पे आने के बाद यही होता है। पर्सनल एक्सपीरियंस पर्सनल एक्सपीरियंस

1296
01:33:30,160 --> 01:33:34,720
व्यक्ति कुछ कह देता है कि भाई ये मेरा पर्सनल है या का नहीं है।

1297
01:33:34,720 --> 01:33:38,240
अच्छा जी बताइए। ये वाला ये मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है और वो ये

1298
01:33:38,240 --> 01:33:42,320
है कि मेरा फेथ प्रभुपाद जी पे था और मैं फिलोसोफिकली नहीं आया था।

1299
01:33:42,320 --> 01:33:46,320
बस आकर्षण के नजरिए से आया था। लेकिन बाद में फिलोसफी बाद में

1300
01:33:46,320 --> 01:33:50,400
मैं मेरा घुमा अभी अभी आपने क्लेम किया थोड़ी

1301
01:33:50,400 --> 01:33:54,800
देर पहले जब इस चर्चा की शुरुआत हुई है आपने कहा बिल्कुल 100%

1302
01:33:54,800 --> 01:33:58,400
मैं 100% कन्विक्स हुआ

1303
01:33:58,400 --> 01:34:02,480
फिर मैंने फिलॉसफी पढ़ी तब मैं मैं भाई साहब वो आपकी बातें लूंगा ना

1304
01:34:02,480 --> 01:34:06,720
मैं किधर जा रहा हूं आप दूसरी ओर जाकर के जवाब देते इसीलिए बीच में मुझे इंटक्ट

1305
01:34:06,720 --> 01:34:10,960
करना पड़ता है मैं कभी भी विषय से हटता ही नहीं हूं

1306
01:34:10,960 --> 01:34:15,280
आपको विषय से नहीं हटना पड़ेगा और अगर गलती से वाकलन हो गया। भगवती

1307
01:34:15,280 --> 01:34:21,280
का वरदान नहीं है मुझे।

1308
01:34:21,920 --> 01:34:26,000
देखिए की अथॉरिटी पूछ रहे हैं। मैं भी तो ये पूछ सकता हूं

1309
01:34:26,000 --> 01:34:30,160
ना कि आप लोगों की क्या अथॉरिटी है? मेरा भी तो अधिकार है। आप देखिए

1310
01:34:30,160 --> 01:34:34,160
ये बात आप अगर शुरू में कहते तो मैं अवश्य इस पर बात करता क्योंकि अपने आप में एक

1311
01:34:34,160 --> 01:34:38,480
बहुत लंबी चर्चा हो जाएगी। ठीक है? तो चर्चा के मध्य

1312
01:34:38,480 --> 01:34:42,480
में आ के आप एक नया सवाल डाल के फिर मेरे विषय को जो

1313
01:34:42,480 --> 01:34:46,560
है जानने का या तो आप शुरू में कहते मैं पूछूंगा आप कह देते कि मैं

1314
01:34:46,560 --> 01:34:50,800
आपसे पूछने आया हूं ठीक है तो मैं आपसे बात करता हूं उस तरह से अब चर्चा

1315
01:34:50,800 --> 01:34:54,800
का मध्य चल रहा है मैं मैं एक बात कह रहा था वो

1316
01:34:54,800 --> 01:34:58,880
मैं पूरी कर लूं मैं एक फनी बात है वो पूरी कर लूं क्या है

1317
01:34:58,880 --> 01:35:02,960
कि मुझे भगवती का वरदान नहीं प्राप्त है तो मेरे से वाकलन

1318
01:35:02,960 --> 01:35:06,960
हो जाता है जैसे मैंने हल्का सा बोल दिया तोड़

1319
01:35:06,960 --> 01:35:11,200
मरोड़ के आपके लिए कि आप शास्त्रों में तो मैंने तोड़

1320
01:35:11,200 --> 01:35:15,360
बोला मुझे याद आया नहीं नहीं इस पे जो है दूसरी तरफ हम जा सकते हैं तोड़ मरोड़ने पे

1321
01:35:15,360 --> 01:35:19,520
तो मैंने तुरंत पीछे से वो सेंटेंस चालू किया कि मुझे बिल्कुल भी विषय से हटना

1322
01:35:19,520 --> 01:35:23,680
नहीं है ना कि फिर मुझे वो तोड़ना मरोड़ना सिद्ध करना

1323
01:35:23,680 --> 01:35:27,680
पड़ जाएगा अगर मैंने बोल दिया तो है ना तो वो जो विषय चल रहा

1324
01:35:27,680 --> 01:35:31,920
है उसको हां तो मैं इस बात का बहुत ध्यान रखता

1325
01:35:31,920 --> 01:35:36,080
हूं इस बात का बहुत ध्यान रखता हूं कि हमारी चर्चा भटके ना

1326
01:35:36,080 --> 01:35:37,360
क्योंकि भटकने

1327
01:35:37,360 --> 01:35:41,520
के चक्कर में ही दुनिया भर में निष्कर्ष नहीं प्राप्त

1328
01:35:41,520 --> 01:35:45,520
हो पाते हैं। निष्कर्ष इतना भटक जाता है यहां

1329
01:35:45,520 --> 01:35:49,920
से यहां यहां से। यहां जो आप दुर्जन तोषणी न्याय के बारे में बात कर रहे थे ना

1330
01:35:49,920 --> 01:35:53,920
यहां मुख्य रूप से ना गलती उसकी वजह से है। मैं बताता हूं

1331
01:35:53,920 --> 01:35:58,400
कैसे क्योंकि अब हम अपना क्लेम क्लेम ले आए।

1332
01:35:58,400 --> 01:36:02,400
एक अपना क्लेम ले आए वापस तो थोड़ा सा प्रकाश

1333
01:36:02,400 --> 01:36:07,200
आ जाए मामले पे क्या मामला चल रहा है। शुरू में जब मैंने कहा कि प्रारंभिक

1334
01:36:07,200 --> 01:36:11,200
शुरू में जब मैंने कहा कि प्रारंभिक जब मैंने

1335
01:36:11,200 --> 01:36:15,360
प्रारंभ में आपसे कहा कि अंतिम निर्णायक इस का कौन है? ठीक है आपने

1336
01:36:15,360 --> 01:36:19,440
जीबीसी मेंबर्स का मैंने कहा कितने मेंबर्स आपको पता है

1337
01:36:19,440 --> 01:36:23,760
चार 500 भी हो सकते हैं और गिने नहीं है और नाम सबके याद होना पॉसिबल नहीं है। एक्चुअली

1338
01:36:23,760 --> 01:36:27,920
मेरे से ही गलती हुई है। वो गुरु चार 500 जो है गुरुज है और 12 जीबीसी

1339
01:36:27,920 --> 01:36:31,920
मेंबर है। 12 जीबीसी मेंबर ये गुड। तो अब बात ये आती है

1340
01:36:31,920 --> 01:36:36,080
कि अगर आपसे गलती हुई थी तो वहां पर जैसे आपने फिर ये बताया कि मेरा अट्रैक्शन

1341
01:36:36,080 --> 01:36:40,160
तो प्रभुपाद जी की तरफ था। ठीक है? जी। ठीक है। उसके बाद फिलोसफी पढ़ी। हां

1342
01:36:40,160 --> 01:36:44,160
ये भी देखिएगा। आपका अट्रैक्शन प्रभुपाद जी की तरफ था। फिर

1343
01:36:44,160 --> 01:36:48,720
फिलोसफिकल पढ़ने से आपको ये वो सब हो गया। अब उसमें बात

1344
01:36:48,720 --> 01:36:52,720
अब उसमें बात ये आती है कि

1345
01:36:52,720 --> 01:36:55,840
प्रभुपाद जी

1346
01:36:55,840 --> 01:37:00,000
के जो ये 12 जीबीसी मेंबर्स हैं इनको आपने नहीं जाना था। अगर जानते

1347
01:37:00,000 --> 01:37:05,520
होते तो शुरू में ही कहते ना कि मेरे अंतिम निर्णायक कौन है?

1348
01:37:05,520 --> 01:37:09,840
क्या कहते? वैसे मैं हां जान तो मेरे अंतिम निर्णायक

1349
01:37:09,840 --> 01:37:13,840
कौन है? वो जीबीसी में से किसी को बोलता है। ऐसा कह रहे हैं। आप कहते हैं मेरे अंतिम

1350
01:37:13,840 --> 01:37:18,960
निर्णायक 12 जीबीसी मेंबर्स हैं। अच्छा अच्छा हां ठीक है।

1351
01:37:18,960 --> 01:37:23,040
है ना? ये बात ये बात आपको अभी-अभी मालूम पड़ी है ना? हां

1352
01:37:23,040 --> 01:37:27,040
फिलोसफी पढ़ने के बाद पढ़ी इस के बारे में। नहीं अभी ऑन गोइंग

1353
01:37:27,040 --> 01:37:31,280
चर्चा में आपको 12 जीबीसी मेंबर्स के बारे में पता चला है कि आपके अंतिम

1354
01:37:31,280 --> 01:37:35,360
निर्णायक वो है पता था पता था तो फिर आपने वहां क्यों नहीं बोला

1355
01:37:35,360 --> 01:37:39,760
उनके बारे में मैं माफी चाहता हूं कि उस समय गुरु

1356
01:37:39,760 --> 01:37:44,160
शब्द और जीबीसी मेंबर्स अच्छा मैंने क्या कहा अंतिम निर्णायक

1357
01:37:44,160 --> 01:37:48,640
इसमें कौन सी चीज है जो आपको समझ में नहीं आ रही है जीबीसी ही है जीबीसी

1358
01:37:48,640 --> 01:37:52,960
ही और जीबीसी जो है वो 12 है बाकी जो चार 500 है वो गुरु है

1359
01:37:52,960 --> 01:37:57,040
और वो दीक्षा दे सकते हैं अब जो 12 है अब जो 12

1360
01:37:57,040 --> 01:38:01,280
है अब जो 12 है मैंने कहा कि इन 12 के बारे में आपने

1361
01:38:01,280 --> 01:38:05,440
जांच पड़ताल के कौन है नहीं की तो आपने कहा कि मैंने

1362
01:38:05,440 --> 01:38:07,760
इसलिए नहीं की क्योंकि मेरा अट्रैक्शन तो प्रभुपाद जी से

1363
01:38:07,760 --> 01:38:12,000
था मैंने इस विषय में ज्यादा जानकारी नहीं की यही है ना

1364
01:38:12,000 --> 01:38:16,480
है ना नहीं मैं एग्री नहीं करूंगा बट मैं मेरा सभी से ही आकर्षण है सभी

1365
01:38:16,480 --> 01:38:20,560
वालों से आकर्षण है बट पर्टिकुलरली अगर टाइम कंस्ट्रेंट

1366
01:38:20,560 --> 01:38:25,360
भी देख सकते हैं ना कि मेरी बातों का गलत मतलब समझ रहे

1367
01:38:25,360 --> 01:38:29,440
आपका फोकस जो था वो उनकी तरफ था। आपके लिए सभी ग्रह

1368
01:38:29,440 --> 01:38:34,080
हैं। सभी रेस्पेक्टेबल है। मगर आपका फोकस जो है प्रभुपाद जी की ओर था।

1369
01:38:34,080 --> 01:38:38,240
इस कारण से आपने इसमें रुचि नहीं जताई कि 12 जीबीसी मेंबर्स कौन

1370
01:38:38,240 --> 01:38:42,320
है। जी ऐसा ही तो ठीक है। ठीक। जी।

1371
01:38:42,320 --> 01:38:46,400
अब बात ये आती है कि जब आपको यह नहीं

1372
01:38:46,400 --> 01:38:50,720
पता कि 12 जीबीसी मेंबर्स कौन है उनके नाम तक नहीं पता

1373
01:38:50,720 --> 01:38:54,800
तो उनके आचरण इत्यादि मालूम होना तो बहुत दूर की बात हो गई।

1374
01:38:54,800 --> 01:38:58,880
अच्छा ठीक है। अब जब आपको आचरण इत्यादि के

1375
01:38:58,880 --> 01:39:03,040
बारे में नहीं पता तो आपको उनके नाम पता होने

1376
01:39:03,040 --> 01:39:07,200
तक प्रभुपाद जी की शिक्षा के विषय में प्रमाण कौन

1377
01:39:07,200 --> 01:39:11,200
है और वो प्रमाणिक शिक्षा है कि नहीं? ये आप किस

1378
01:39:11,200 --> 01:39:15,280
आधार से क्लेम कर रहे थे? अभी तक आप अपने

1379
01:39:15,280 --> 01:39:19,600
आप को प्रमाणिक कैसे मान रहे हैं? जब तक आपको 12 जीबीसी मेंबर्स के बारे में

1380
01:39:19,600 --> 01:39:24,320
नहीं पता कि वह कौन है? उनके आचरण कैसे हैं।

1381
01:39:24,320 --> 01:39:28,400
अभी तक मैं प्रमाणिक कैसे मान रहा था? इस को मैं प्रभुपाद जी

1382
01:39:28,400 --> 01:39:32,960
के बुक्स के बेसिस पर प्रमाणिक मान रहा था। अरे भैया

1383
01:39:32,960 --> 01:39:36,960
तो आप ये बताइए वो जो बुक्स में लिखा हुआ है पूरा पूरा रिकॉर्ड है

1384
01:39:36,960 --> 01:39:41,280
क्या ऑडियो में? पूरा पूरा है। क्या दिक्कत है? पूरा रिकॉर्ड

1385
01:39:41,280 --> 01:39:45,760
भागवतम का पूरा भाष्य रिकॉर्डेड है। हां 12

1386
01:39:45,760 --> 01:39:49,840
कहां पे है बताइए? प्रभुपाद जी की श्रीमद् भागवतम का पूरा कमेंट्री

1387
01:39:49,840 --> 01:39:53,840
है। प्रपाद जी ने इनफ वो ऑडियो रिकॉर्डेड है

1388
01:39:53,840 --> 01:39:57,920
वो ऑडियो भी रिकॉर्डेड है और पूरा एक एक

1389
01:39:57,920 --> 01:40:02,160
शब्द जो प्रभुपाद जी के नाम से छपा हुआ है वो सब रिकॉर्डेड

1390
01:40:02,160 --> 01:40:06,160
है एक्चुअली गलत है श्रीमद् भागवतम के 10थ कैंो

1391
01:40:06,160 --> 01:40:10,240
तक प्रपाद जी ने शरीर छोड़ दिया था 11 12 जो है वो दूसरा है वो किसी और

1392
01:40:10,240 --> 01:40:14,400
ने इसका अर्थ है इसका अर्थ है कि आप प्रभुपाद

1393
01:40:14,400 --> 01:40:18,640
जी के कहने के कारण किसी को प्रमाणिक नहीं मान सकते क्योंकि उनकी

1394
01:40:18,640 --> 01:40:23,440
सारी सामग्री आपको प्राप्त नहीं है प्रत्यक्ष क्ष रूप से

1395
01:40:23,440 --> 01:40:27,600
नहीं प्रभुपाद जी ने कहा इसलिए मैं बताता हूं क्यों प्रभुपाद जी ने कहा

1396
01:40:27,600 --> 01:40:31,600
इसलिए क्योंकि उन्होंने ये नोटिस किया उन्होंने ये

1397
01:40:31,600 --> 01:40:35,600
बहुत सालों तक ऑब्जर्व किया कि ये लोग शास्त्रों को यानी

1398
01:40:35,600 --> 01:40:39,600
षड गोस्वामी को कंट्राडिक्ट नहीं कर रहे और मैं ड गोस्वामी

1399
01:40:39,600 --> 01:40:43,760
को कंट्राडिक्ट नहीं करता तो मैं ऐसे ही व्यक्ति को ट्रस्ट कर सकता हूं जो शड गोस्वामी को कंट्राडिक

1400
01:40:43,760 --> 01:40:47,840
ना करे तो जो कमेंट्री लिख रहे हैं ना जो व्यक्ति जो दूसरे शिष्यों ने भी

1401
01:40:47,840 --> 01:40:52,160
लिखी जो थोड़ा सा हेल्प किया ट्रांसलेशन में ट्रांसक्रिप्शन में वो भी

1402
01:40:52,160 --> 01:40:56,400
इसीलिए किया ऐसे ही किया कि वो ड गोस्वामी की कमेंट्री

1403
01:40:56,400 --> 01:41:00,560
के बेसिस पे लिख रहे हैं और क्योंकि वो उससे कंट्राडिक्ट नहीं करे अगर आप कंपेयर

1404
01:41:00,560 --> 01:41:04,720
करेंगे तो हमें पता चलेगा कंट्राडिक्ट नहीं है बिल्कुल सेम है जो इधर लिखा

1405
01:41:04,720 --> 01:41:08,960
है वही ये इधर लिखा है बस अलग लैंग्वेज में लिखा है ताकि लोगों को आसानी है समझ आ जाए इंग्लिश

1406
01:41:08,960 --> 01:41:13,360
में लिखा है बस ऐसा क्योंकि यानी

1407
01:41:13,360 --> 01:41:17,840
कि हम ये समझ सकते हैं एक मिनट हम ये समझ सकते हैं

1408
01:41:17,840 --> 01:41:21,920
कि क्योंकि वो ड गोस्वामियों की कमेंट एंट्री एज इट इज

1409
01:41:21,920 --> 01:41:26,560
करके दे रहे हैं। इसलिए आपको उन पर भरोसा है। अच्छा

1410
01:41:26,560 --> 01:41:30,640
इसका मतलब है कि सड गोस्वामी होगा। यही तो वो बात है जो मैं सबको कहना चाहता

1411
01:41:30,640 --> 01:41:34,720
हूं। जब हम किसी के ज्ञान के आधार पर जब हम

1412
01:41:34,720 --> 01:41:38,800
किसी के ज्ञान के आधार पर उसकी प्रमाणिकता को जांचते हैं। ज्ञान के आधार

1413
01:41:38,800 --> 01:41:42,880
पर पीछे से क्लेम नहीं है। ज्ञान के आधार पर। ठीक है? तो जब हम किसी के

1414
01:41:42,880 --> 01:41:46,880
ज्ञान के आधार पर उसकी प्रमाणिकता की जांच करते हैं तो अगर

1415
01:41:46,880 --> 01:41:51,200
हम किसी की परीक्षा ले रहे हैं इसका मतलब है कि जिस विषय में हम उसकी परीक्षा

1416
01:41:51,200 --> 01:41:54,960
ले रहे हैं उस विषय में हम पारंगत हैं।

1417
01:41:54,960 --> 01:41:59,440
यानी कि षट गोस्वामियों ने क्या कहा है ये आपको पहले से पता होना चाहिए।

1418
01:41:59,440 --> 01:42:03,520
तभी तो आप ये समझ पाएंगे कि उन्होंने ट गोस्वामियों का विरोध किया है कि नहीं किया

1419
01:42:03,520 --> 01:42:07,760
है। देखिए बुक्स उनकी भी डायरेक्टली छपी हुई है। बुक्स

1420
01:42:07,760 --> 01:42:12,080
भाई साहब बुक्स तो वेद भी है। मेरी बात सुनिए। बुक्स तो वेद भी है। आर्य

1421
01:42:12,080 --> 01:42:16,400
समाज भी वेद का अर्थ कर रहा है। तो आर्य समाज को अपना लेंगे आप। क्या निकालना

1422
01:42:16,400 --> 01:42:20,400
चाहते हैं आप इससे? ये निकालना चाहता हूं कि इस आधार पर

1423
01:42:20,400 --> 01:42:24,480
तो हम किसी को प्रमाणिक मान ही नहीं सकते कि वो षट गोस्वामी के विरोध में नहीं जा रहा है। क्यों

1424
01:42:24,480 --> 01:42:28,560
नहीं मान सकते? क्योंकि षट गोस्वामियों का अर्थ हमें स्वतंत्र रूप से मालूम नहीं

1425
01:42:28,560 --> 01:42:32,720
है। हम तो उन्हीं के द्वारा उनहीं पे आश्रित है। ड गोस्वामियों के अर्थ जानने

1426
01:42:32,720 --> 01:42:36,720
के लिए हम उनहीं पे आश्रित है। और फिर उनहीं वो षड गोस्वामियों

1427
01:42:36,720 --> 01:42:40,880
के आधार पर हम उनको जज कर रहे हैं। हां मैं बहुत

1428
01:42:40,880 --> 01:42:44,960
डीप में समझ गया। मैं बहुत डीप में समझ गया। मैं इसका आंसर देता हूं। इसका आंसर एक्चुअली

1429
01:42:44,960 --> 01:42:50,240
है मैं आपका बहुत डीप में समझ गया। और ये बहुत एक्चुअली करेक्ट लॉजिक है।

1430
01:42:50,240 --> 01:42:54,240
इसका आंसर है कि शास्त्रों में जब कंट्राडिक्शन होती है ना

1431
01:42:54,240 --> 01:42:58,240
एक जगह और दूसरी जगह की तो वहां पर एक जगह ऐसी भी होती

1432
01:42:58,240 --> 01:43:02,320
है उन्हीं शास्त्रों में जो हमें थोड़ा ढूंढना पड़ेगा। जहां पर प्रायोरिटी भी

1433
01:43:02,320 --> 01:43:06,480
लिखी होती है कि दो से तीन चीजों में जब कंट्राडिक्शन हो तो

1434
01:43:06,480 --> 01:43:10,000
इनमें से किसी को चूज करने के लिए वो रूल्स क्या है? वो

1435
01:43:10,000 --> 01:43:14,000
रूल्स एक प्रायोरिटी की लिस्ट होती है कि पहले इसको प्रायोरिटी मिलनी चाहिए

1436
01:43:14,000 --> 01:43:18,480
फिर इसको फिर इसको फिर इसको जो उस प्रायोरिटी की लिस्ट को कंट्राडिक्ट

1437
01:43:18,480 --> 01:43:22,640
करता है या तोड़ देता है या गलत कर देता है

1438
01:43:22,640 --> 01:43:26,960
वो प्रायोरिटी की लिस्ट को तो वो गलत कंक्लूजन पे तो वो डेविएट

1439
01:43:26,960 --> 01:43:30,960
हो जाता है एक्चुअल फिलोसफी से वो प्रायोरिटी कहांहां है मैं बताता हूं एग्जांपल्स देता हूं

1440
01:43:30,960 --> 01:43:35,760
फॉर एग्जांपल जनरली लोग एक मिनट एक मिनट कंट्राडिक्शन

1441
01:43:35,760 --> 01:43:40,160
की बात नहीं हो रही है हां बात हो रही है ना

1442
01:43:40,160 --> 01:43:44,240
कंट्राडिक्शन की बात ही नहीं हो रही है। बात हो रही है। पहली बात

1443
01:43:44,240 --> 01:43:48,320
तो यह जो आपने लॉजिक दिया है ना प्रायोरिटी वाला यह भी ध्वस्त हो जाएगा। ये

1444
01:43:48,320 --> 01:43:52,640
भी ध्वस्त हो जाएगा। वो वो मैं करना नहीं चाहता। फिर विषय बदल जाएगा।

1445
01:43:52,640 --> 01:43:56,640
अभी मैं दूसरी बात कर रहा हूं कि बात ये नहीं हो रही है कि कंट्राडिक्शन

1446
01:43:56,640 --> 01:44:00,720
है कि नहीं शास्त्र में। बातें हो रही है कि यदि आप

1447
01:44:00,720 --> 01:44:04,720
जो आपके जीबीसी मेंबर्स हैं वो ड गोस्वामियों को फॉलो कर रहे हैं

1448
01:44:04,720 --> 01:44:08,880
कि नहीं कर रहे हैं। इस आधार पर उन्हें एक मिनट इस आधार

1449
01:44:08,880 --> 01:44:13,360
पर उन्हें यदि आप प्रमाणिक समझ रहे हैं। इसका मतलब है कि षट गोस्वामियों

1450
01:44:13,360 --> 01:44:17,520
का ज्ञान डायरेक्ट आपके पास है। आपने उनसे नहीं

1451
01:44:17,520 --> 01:44:21,680
लिया है। ये आपके पास है और तब एक

1452
01:44:21,680 --> 01:44:25,040
मिनट तब आप ये देख रहे हैं कि ये षट गोस्वामियों के आधार पर बोल रहे हैं कि नहीं

1453
01:44:25,040 --> 01:44:29,280
बोल रहे हैं। और जब स गोस्वामियों का ज्ञान आपके पास ऑलरेडी है उनकी जरूरत

1454
01:44:29,280 --> 01:44:33,520
क्या है? जीबीसी मेंबर्स की जरूरत क्या है? से तो कोई भी शिष्य

1455
01:44:33,520 --> 01:44:38,480
टीचर को कभी जज ही नहीं कर सकता। मैं किसी स्कूल में कभी जज ही नहीं कर सकता। नहीं कर सकता

1456
01:44:38,480 --> 01:44:43,040
पॉइंट। दैट्स द पॉइंट। नहीं कर सकता। उसको पीछे से ठप्पा चाहिए।

1457
01:44:43,040 --> 01:44:47,040
उसको पीछे से ठप्पा चाहिए। ये शंकराचार्य बनेगा।

1458
01:44:47,040 --> 01:44:52,960
ये मधवाचार्य बनेगा। उसको पीछे से ठप्पा चाहिए। जज नहीं कर सकता।

1459
01:44:52,960 --> 01:44:56,960
को दिया ना किसको? भक्ति सिद्धांत ठाकुर प्रपाद जी ने

1460
01:44:56,960 --> 01:45:01,120
प्रभुपाद को दिया उनके गुरु गौरवी दास मैं मान लेता हूं इनको भी मान

1461
01:45:01,120 --> 01:45:05,200
लेता हूं सब मान लेता हूं दुरजंतोष न्याय से मगर आपने कहा कि प्रभुपाद

1462
01:45:05,200 --> 01:45:09,200
जी ने ये कहा कि सद गोस्वामियों के विरोध में जो नहीं जाएगा वो

1463
01:45:09,200 --> 01:45:13,280
आपके लिए प्रामाणिक है ना या मैं एक चीज थोड़ी सी करेक्ट

1464
01:45:13,280 --> 01:45:17,520
करूंगा कि मत मानिए आप एक्चुअल

1465
01:45:17,520 --> 01:45:21,680
में फैक्ट देखिए फैक्ट उससे हमारी चर्चा

1466
01:45:21,680 --> 01:45:25,760
का विषय विषय होता चला जाएगा ना उसमें टाइम

1467
01:45:25,760 --> 01:45:29,920
जाएगा जो जो मूल एजेंडा चल रहा है यहां पे वो वो काफी दूर चले

1468
01:45:29,920 --> 01:45:34,240
जाते हैं जैसे मान लीजिए कि हम लोगों को कश्मीर से

1469
01:45:34,240 --> 01:45:38,240
कन्याकुमारी जाना है हिमसागर एक्सप्रेस में हिमसागर एक चलती है कश्मीर

1470
01:45:38,240 --> 01:45:40,240
से कन्याकुमारी तक उसमें जाना

1471
01:45:40,240 --> 01:45:44,240
है रास्ते में गुजरात की तरफ मुड़ गई गाड़ी रास्ते में जो है उड़ीसा

1472
01:45:44,240 --> 01:45:48,240
की तरफ मुड़ गई गाड़ी तो ये ठीक नहीं है उससे हमारी यात्रा वो जो जा रहे

1473
01:45:48,240 --> 01:45:52,320
हैं ना हम लोग कन्याकुमारी की ओर वो जो है विषयंतर

1474
01:45:52,320 --> 01:45:56,400
के कारण उसमें विलंब हो रहा है जो अभी भीष्ट फल है उसकी प्राप्ति में देर होगी।

1475
01:45:56,400 --> 01:46:00,640
तो कहने का मतलब ये है कि प्रभुपाद जी ने यदि ये कहा है कि ड गोस्वामियों

1476
01:46:00,640 --> 01:46:04,720
के विरोध में यदि ये नहीं जाए तो फिर आप ये मान लेना कि ये प्रामाणिक है। तो

1477
01:46:04,720 --> 01:46:09,440
ये तो ये बहुत ही इलॉजिकल बात है।

1478
01:46:09,440 --> 01:46:13,520
ठीक है? जी। क्योंकि षड गोस्वामियों के विरोध

1479
01:46:13,520 --> 01:46:17,760
में कौन जा रहा है, कौन नहीं जा रहा है, यह फैसला आप कर ही नहीं सकते क्योंकि षड गोस्वामियों

1480
01:46:17,760 --> 01:46:21,840
के ज्ञान के लिए आप स्वयं उन पर निर्भर है। जीबीसी के मेंबर्स पर मान

1481
01:46:21,840 --> 01:46:25,920
लो 100% नहीं कर सकता। मान लो 100% नहीं कर सकता पर 100% तो कोई

1482
01:46:25,920 --> 01:46:30,240
भी नहीं कर सकता। देखा जाए तो इसका नहीं देखिए दूसरे

1483
01:46:30,240 --> 01:46:34,320
देखिए देखिए देखिए दूसरे के गलत होने से आपका सही होना सिद्ध

1484
01:46:34,320 --> 01:46:38,320
नहीं होता आपने क्या कहा था मेरा जो है

1485
01:46:38,320 --> 01:46:42,880
बिल्कुल प्रामाणिक ज्ञान है 100% 100%

1486
01:46:42,880 --> 01:46:47,120
मेरे जितने आज तक मैंने अपनी पर्सनल एक्सपीरियंस से

1487
01:46:47,120 --> 01:46:51,440
जितने आज तक एक-एक प्रूफ स्टडी किए हैं उन प्रूफ्स

1488
01:46:51,440 --> 01:46:55,840
में मुझे आज तक एक भी कंट्राडिक्शन नहीं मिला। अरे मेरे

1489
01:46:55,840 --> 01:47:00,000
मेरे भैया समझ क्यों नहीं रहे हो स गोस्वामी मान लीजिए मैं मैं

1490
01:47:00,000 --> 01:47:04,000
आपको एक उदाहरण देता हूं मैं उदाहरण देता हूं उससे समझ लेना ठीक है स

1491
01:47:04,000 --> 01:47:08,880
गोस्वामी ने एक बात लिखी है नारायण मैं

1492
01:47:08,880 --> 01:47:13,360
बात समझा दूं मैं एक बात समझ देखिए ज्ञान को देखिए आप समझे नहीं

1493
01:47:13,360 --> 01:47:17,520
वो ये कहना चाह रहे हैं कि मान लीजिए आपको पता है कि 2 2 4

1494
01:47:17,520 --> 01:47:22,960
होता है पता है ये बात जानते हैं आपको इस बात का ज्ञान है

1495
01:47:22,960 --> 01:47:27,840
ये मुझसे ज्ञान है ना मुझसे नहीं नहीं प्रक जी से कह रहा हूं। है ना?

1496
01:47:27,840 --> 01:47:32,000
हां आपसे कह रहा हूं। तो अब मान लीजिए कि आपको ये टेस्ट

1497
01:47:32,000 --> 01:47:36,080
करना है। शिवा जी को टेस्ट करना है कि उनको 2 2 आता है कि नहीं।

1498
01:47:36,080 --> 01:47:40,320
ठीक है। तो मान लीजिए कि उन्होंने बोल दिया कि 2 2 3 होता है।

1499
01:47:40,320 --> 01:47:44,640
बहुत अच्छा लॉजिक है। तो आप क्या कहेंगे? सही है कि गलत? हां। मैं

1500
01:47:44,640 --> 01:47:48,720
इसका इसका एक्चुअली मेरे पास आंसर है ये। अभी अभी थोड़ा सा

1501
01:47:48,720 --> 01:47:53,040
टू द पॉइंट आंसर दे दीजिए ना। उससे चीजें क्लियर हो जाएगी। वो सही बोल रहे हैं। जो

1502
01:47:53,040 --> 01:47:57,280
चीजें मैं अरे आप ये आंसर दीजिए जब मैं आपको

1503
01:47:57,280 --> 01:48:01,840
2 2 3 बोलूंगा तो आप मना करोगे ना मुझे

1504
01:48:01,840 --> 01:48:05,840
हां ऑब्वियसली क्योंकि उसकी क्योंकि

1505
01:48:05,840 --> 01:48:09,920
आपको पता था 2 प्लस टू फोर है ठीक है अब जिस

1506
01:48:09,920 --> 01:48:10,880
विषय में आपको पता

1507
01:48:10,880 --> 01:48:14,960
ही नहीं है कि 2 प्लस टू क्या होता है उस विषय में तो आप मेरे ऊपर डिपेंड

1508
01:48:14,960 --> 01:48:19,120
करेंगे ना मेरा जज कैसे करेंगे नहीं पता है मान लो

1509
01:48:19,120 --> 01:48:23,280
मुझे 20% पता है मान लो मुझे 30% क्योंकि मुझे 30%

1510
01:48:23,280 --> 01:48:27,680
पता है। मैंने उस 30% को टेस्ट किया। इसीलिए मैंने वो 30%

1511
01:48:27,680 --> 01:48:31,760
100 वो 30% में 100% सही निकला। मैंने

1512
01:48:31,760 --> 01:48:37,200
एक्सेप्ट किया मुझे मुझे मुझे मेरे पास है। अच्छा है।

1513
01:48:37,200 --> 01:48:40,800
मैं इनहीं का 2 प्लस टू से दे देता हूं मैं। 2 2

1514
01:48:40,800 --> 01:48:44,960
3 है। आपको पता है आपको एडिशन आता है। ठीक है? सुनिए सुनिए। जी

1515
01:48:44,960 --> 01:48:49,280
श्वेता जी आप जो है ना इनको मैथमेटिक का उदाहरण मत दीजिए। आप इनको ऐतिहासिक

1516
01:48:49,280 --> 01:48:53,360
उदाहरण दीजिए के उसका नाम राम था। राम मतलब जिसमें सिर्फ

1517
01:48:53,360 --> 01:48:57,360
शब्द प्रमाण होता है उसमें और कुछ नहीं होता गिनती भी नहीं इसलिए क्या

1518
01:48:57,360 --> 01:49:01,360
है कि मैथ को मैथ को मैं इसलिए ला रहा हूं ताकि इनको समझने में आसान हो

1519
01:49:01,360 --> 01:49:06,000
जाएगा और मतलब बहुत ही लॉजिकल बात चली जाएगी

1520
01:49:06,000 --> 01:49:10,000
ठीक है अब आपको अब आपको पता है कि 2 2 4 होता है जानते हैं इसका

1521
01:49:10,000 --> 01:49:14,480
मतलब आपको ज्ञान है कि दो नंबर को जोड़ना कैसे आता है। ठीक।

1522
01:49:14,480 --> 01:49:19,120
ठीक है। मान लीजिए मान लीजिए कि आपको ये नहीं पता।

1523
01:49:19,120 --> 01:49:23,280
सुन रहे हैं आप मेरी बात? हां हां। हां।

1524
01:49:23,280 --> 01:49:25,920
मान लीजिए आपको मान लीजिए आपको ये नहीं पता

1525
01:49:25,920 --> 01:49:30,320
कि हम माइनस कैसे करते हैं या डिवाइड कैसे करते हैं। हां।

1526
01:49:30,320 --> 01:49:34,880
ठीक। क्योंकि आपने टेस्ट कर लिया कि इनको 2 2 4

1527
01:49:34,880 --> 01:49:40,400
आता है शिवश को। तो अब मैं इनसे डिवीजन सीख सकता हूं। करेक्ट?

1528
01:49:40,400 --> 01:49:44,560
हां। आया ना? ठीक है? अब मान लीजिए आपने इनसे हां

1529
01:49:44,560 --> 01:49:48,720
आप मान लीजिए आपने इनसे पूछा 2 बाय टू क्या होता है? तो

1530
01:49:48,720 --> 01:49:52,720
इन्होंने उत्तर दे दिया फाइव और असल में उसका उत्तर

1531
01:49:52,720 --> 01:49:56,880
वन होना चाहिए। मेरी बात समझ में आई? तो अब आप ये कैसे

1532
01:49:56,880 --> 01:50:01,120
डिसाइड करेंगे कि वो 30% ज्ञान से जो आपने टेस्ट किया था तो बाकी बच्चा हुआ 70%

1533
01:50:01,120 --> 01:50:05,120
ज्ञान भी सही दे रहे हैं। हां मैं इसमें बताता हूं कैसे

1534
01:50:05,120 --> 01:50:09,200
करूंगा। जी आपने बहुत बढ़िया पॉइंट बोला मगर मैं कहूंगा कि आप

1535
01:50:09,200 --> 01:50:13,200
आप दर्शक ही देख नहीं तो लोगों को लगेगा कि भाई दोद

1536
01:50:13,200 --> 01:50:17,280
लोग वो कर रहे हैं तो बिल्कुल सही क्वेश्चन बिल्कुल सही

1537
01:50:17,280 --> 01:50:21,280
है मैं मेरे पास आंसर भी है इसका आंसर है जो लोग क्लेम कर रहे

1538
01:50:21,280 --> 01:50:25,360
हैं ना जो लोग क्लेम कर रहे हैं कि मुझे आता है उन

1539
01:50:25,360 --> 01:50:29,520
सबकी एक मैं लिस्ट बनाऊंगा ठीक है उन सबकी लिस्ट में से मैं

1540
01:50:29,520 --> 01:50:33,600
वेरीफाई करूंगा कि मोस्ट ऑथराइज्ड कौन सा है यानी

1541
01:50:33,600 --> 01:50:37,600
मोस्ट लॉजिकल रूल्स को एग्री एग्री करने वाला कौन सा है? मुझे अभी क्या पता

1542
01:50:37,600 --> 01:50:40,960
है? मुझे अभी प्लस पता है। है ना? अब प्लस मान लो 10 लोग क्लेम

1543
01:50:40,960 --> 01:50:44,960
कर रहे हैं कि हमें प्लस देखो साबित कर दिया। सही है? तो

1544
01:50:44,960 --> 01:50:49,520
अ मैं डिवीजन भी करके दिखाऊंगा। और 10 लोगों ने अलग-अलग आंसर निकाल दिए। तो अब मैं

1545
01:50:49,520 --> 01:50:53,520
वो व्यक्ति जो उस डिवीजन को करने के लिए एग्जैक्ट

1546
01:50:53,520 --> 01:50:57,520
आंसर बता रहा है कि मैंने ऐसा क्यों किया? उस क्यों किया को

1547
01:50:57,520 --> 01:51:01,680
मैं जज करूंगा। उन 10 व्यक्तियों के क्यों को मैं जज करूंगा। और

1548
01:51:01,680 --> 01:51:05,840
वो क्यों जो है उस क्यों वो जो क्यों लॉजिकली सबसे ज्यादा

1549
01:51:05,840 --> 01:51:09,840
एप्रोप्रियट होगा उसको मैं चुन लूंगा और मैंने चुन लिया अब आप मत बोलिए अब आप

1550
01:51:09,840 --> 01:51:14,000
मत बोलिए नहीं तो बहुत ज्यादा दूर लंबी दूर चली जाएगी सुनिए मुझे बोलने

1551
01:51:14,000 --> 01:51:18,080
दो मेरे भाई जिन विषयों में शब्द ही

1552
01:51:18,080 --> 01:51:22,160
प्रमाण है उन विषयों में आप अपने स्ववेक से निर्णय ले ही

1553
01:51:22,160 --> 01:51:24,800
नहीं सकते

1554
01:51:24,800 --> 01:51:28,880
अच्छा आपके पास ये जो धर्म है ना ब्रह्म को प्राप्त

1555
01:51:28,880 --> 01:51:33,600
करना ये अती्द्रिय विषय होता है। इसमें आपका

1556
01:51:33,600 --> 01:51:37,920
सुन मैं मैं बता रहा हूं कैसे है। मैं बता रहा हूं कैसे आप इसमें अपना सेल्फ

1557
01:51:37,920 --> 01:51:42,080
लॉजिक लगाएंगे। आप अपना सेल्फ लॉजिक लगाएंगे और सेल्फ लॉजिक

1558
01:51:42,080 --> 01:51:46,160
लगा करके उससे देखेंगे कि भैया कौन सी चीज मेरे को आत्म संतुष्टि पहुंचा

1559
01:51:46,160 --> 01:51:50,560
रही है। वही सही होगा। ठीक है? तो एक यहां मैं एक डिसए्रीमेंट

1560
01:51:50,560 --> 01:51:55,040
करता हूं। यहां अतींद्रियम के शब्द के मीनिंग पे डिसएग्रीमेंट है। आपका अतींद्रियम

1561
01:51:55,040 --> 01:51:56,000
का जो मीनिंग है ना

1562
01:51:56,000 --> 01:52:00,000
वो ये है कि इंद्रियों के परे है तो इंद्रियों में आ ही नहीं सकता। मेरा अ्द्रम

1563
01:52:00,000 --> 01:52:04,000
का मीनिंग वो नहीं है। हालांकि अरे भाई ये हमारा विषय है ही नहीं। मैं

1564
01:52:04,000 --> 01:52:08,080
बता रहा हूं। ये हमारा विषय है ही नहीं। मैं बता रहा हूं। गायत्री मंत्र

1565
01:52:08,080 --> 01:52:12,160
से मोक्ष मिलता है। अच्छा ये अती्द्रिय विषय है कि नहीं

1566
01:52:12,160 --> 01:52:14,960
है?

1567
01:52:14,960 --> 01:52:20,880
यानी इंद्रियों के परे अभी अभी मैंने एक्सपीरियंस नहीं किया। लेकिन जब मैं एक्सपीरियंस कर लूंगा।

1568
01:52:20,880 --> 01:52:25,040
मोक्ष की जो स्थिति है उसमें केवल शब्द प्रमाण है मेरे भाई। हरे

1569
01:52:25,040 --> 01:52:29,360
कृष्णा से मोक्ष मिलेगा। इसमें शब्द प्रमाण है। इसमें इंद्रियों

1570
01:52:29,360 --> 01:52:33,360
की गति नहीं है। इसमें शास्त्र का शब्द ही प्रमाण

1571
01:52:33,360 --> 01:52:37,760
है। और नहीं तो क्यों हम लोग वेदों पर वो

1572
01:52:37,760 --> 01:52:41,840
मरे पड़े हैं सब लोग। धर्म जो है उसके कई

1573
01:52:41,840 --> 01:52:46,000
चीजें अंद्रिय विषय है। उसमें आपने सेल्फ लॉजिक्स नहीं लगा सकते। एक हद

1574
01:52:46,000 --> 01:52:50,000
तक कुछ चीजें कर सकते हैं मगर सेल्फ लॉजिक नहीं लगा सकते। तो जहां पे शब्द ही

1575
01:52:50,000 --> 01:52:54,000
प्रमाण है। जैसे कि मैं आपको समझाने का प्रयास करता हूं। जैसे

1576
01:52:54,000 --> 01:52:58,160
मेरी ये देख रहे हैं आप बगलबंदी। तो वैसे मैं आपको

1577
01:52:58,160 --> 01:53:02,160
एक मिनट मैं मैं समझा रहा हूं आपको ये बगलबंदी देख रहे

1578
01:53:02,160 --> 01:53:06,320
हैं बगलबंदी देख रहे है ना ये बगलबंदी

1579
01:53:06,320 --> 01:53:10,320
ये रेड कलर ये अच्छा जी देख रहा हूं इसके कलर

1580
01:53:10,320 --> 01:53:11,200
के विषय में

1581
01:53:11,200 --> 01:53:15,280
आंख ही प्रमाण है हां ठीक है

1582
01:53:15,280 --> 01:53:19,760
अब मैं कहूं कि मैं भैया कान से पता लगाऊंगा इसका कलर क्या है

1583
01:53:19,760 --> 01:53:23,840
वो पॉसिबल नहीं है तो वो वो ठीक बात है क्या इसी तरीके

1584
01:53:23,840 --> 01:53:28,400
से जो ब्रह्म को प्राप्त कराने वाली नियमावली है हां

1585
01:53:28,400 --> 01:53:33,040
हां इसमें शब्द ही प्रमाण है। इसमें

1586
01:53:33,040 --> 01:53:37,200
हमारा अपना एक्सपीरियंस प्रमाण नहीं है। मैंने तो मना ही नहीं किया। तो

1587
01:53:37,200 --> 01:53:41,280
आप कह रहे हो ना बात सुनिए तो मैं आपको बता रहा हूं। पूरा पूरा

1588
01:53:41,280 --> 01:53:45,280
बता रहा हूं। आपने अब कहा कि मैं अपने लॉजिक से पता लगाऊंगा

1589
01:53:45,280 --> 01:53:51,280
कौन किसकी बात ज्यादा सही बैठ रही है। आपने लॉजिक से

1590
01:53:51,280 --> 01:53:55,280
अरे भैया तो शास्त्रों का मीनिंग तो आपको स्वयं से पता नहीं है ना। वो तो उसके

1591
01:53:55,280 --> 01:53:59,520
लिए तो आप परंपरा पे डिपेंड कर रहे हो ना। अभी तो परंपरा पे आप जज कर रहे हो

1592
01:53:59,520 --> 01:54:03,520
यहां दोनों का आपको शास्त्रों का जो मीनिंग आपको शास्त्रों

1593
01:54:03,520 --> 01:54:07,600
का जो मीनिंग है वो स्वयं से ज्ञात नहीं हो सकता है

1594
01:54:07,600 --> 01:54:11,840
वो किसी गुरु से ही प्राप्त हो सकता है ना मैं इसमें एक शब्द प्रयोग करूंगा

1595
01:54:11,840 --> 01:54:16,160
वो है लीस्ट कंट्राडिक्टिव एक्सप्लेनेशन सबसे

1596
01:54:16,160 --> 01:54:20,160
कम कंट्राडिक्शन लाने वाला यानी कंट्राडिक्शन तो खैर

1597
01:54:20,160 --> 01:54:24,720
सबको पता ही होगा सबसे कम विरोधाभास लाने वाला जो एक्सप्लेनेशन

1598
01:54:24,720 --> 01:54:26,400
है या ना

1599
01:54:26,400 --> 01:54:31,920
विरो विरोधाभास लाने वाला जो एक्सप्लेनेशन है मैं उसको सही मानूंगा

1600
01:54:31,920 --> 01:54:36,080
दोबारा और ये कहां लिखा है ये प्रूव बाय कंट्राडिक्शन

1601
01:54:36,080 --> 01:54:40,160
तो खैर मैथमेटिकल भी होता है और नहीं नहीं मैथमेटिकल नहीं अब इसमें

1602
01:54:40,160 --> 01:54:44,160
भी शास्त्र प्रमाण दे दीजिए ना कि जिसमें सबसे ज्यादा

1603
01:54:44,160 --> 01:54:48,160
कम कंट्राडिक्शन हां हां ये लीस्ट वाला हमारे पास तो है जब

1604
01:54:48,160 --> 01:54:52,320
दो श्रुतियां आपसी विरोध में हो ना दोनों को मानो मनुस्मृति

1605
01:54:52,320 --> 01:54:56,400
दो 14 बिल्कुल सही है लेकिन उसमें एक प्रायोरिटी होती है

1606
01:54:56,400 --> 01:55:00,560
उसमें प्रायोरिटी कहां लिखी है? कहां लिखी है? बताता हूं। जैसे

1607
01:55:00,560 --> 01:55:04,560
फॉर एग्जांपल चाणक्य नहीं अभी आप शास्त्र का प्रमाण दीजिए। कहां लिखा

1608
01:55:04,560 --> 01:55:08,640
है आपकी ये जो डेफिनेशन है? लीस्ट क्या था? लीस्ट कंट्राडिक्शन क्या था?

1609
01:55:08,640 --> 01:55:12,720
एक्सप्लेनेशन। लीस्ट कंट्राडिक्टिव एक्सप्लेनेशन। देखो ये

1610
01:55:12,720 --> 01:55:17,040
तो खैर बहुत ज्यादा लॉजिकली है कि जिसके जिसके पास सबसे ज्यादा आंसर

1611
01:55:17,040 --> 01:55:23,040
है और जिसके आंसर जो है वो आपस में विरोधाभास नहीं कर रहे।

1612
01:55:23,440 --> 01:55:27,440
यानी कि कुल मिलाकर के जिसके आंसर्स बहुत ज्यादा

1613
01:55:27,440 --> 01:55:31,440
विरोधाभास नहीं कर रहे हैं। उस उसका आपको जो है वो

1614
01:55:31,440 --> 01:55:35,920
उसको आप प्रमाणिक मानेंगे। ठीक है? इसको ले लो।

1615
01:55:35,920 --> 01:55:39,920
ना के बराबर कर रहे हैं। हां ठीक है। ठीक है। एक तरीके से ये कर लिया। तो आपने

1616
01:55:39,920 --> 01:55:44,160
देख लिया कि उनके जीबीसी मेंबर्स के कौन-कौन से लोग हैं जिनके

1617
01:55:44,160 --> 01:55:48,800
बहुत ज्यादा वो नहीं कर रहे। ये जांच कर ली आपने। हां।

1618
01:55:48,800 --> 01:55:53,600
तो इसके लिए आपने वेदाद शास्त्रों का अध्ययन करना पड़ेगा।

1619
01:55:53,600 --> 01:55:57,760
मैं मान लो 100% नहीं कर पाया वही अगेन वही चीज आती है 30% अरे भैया

1620
01:55:57,760 --> 01:56:01,840
तो जब आपने कुछ भी 100% किया ही नहीं है तो किसी को अपना 100% निर्णायक

1621
01:56:01,840 --> 01:56:06,240
कैसे मान रहे हो ये क्या बात हुई सर इस तरीके से तो पूरी दुनिया में कोई भी निर्णायक

1622
01:56:06,240 --> 01:56:10,320
नहीं हो सकता इस बिल्कुल है जब जब हम शब्द को जब अपने

1623
01:56:10,320 --> 01:56:15,040
लॉजिक हटा के शब्द को प्रमाण मानेंगे तो बिल्कुल निर्णायक हो जाएगा

1624
01:56:15,040 --> 01:56:19,360
शब्द को फिर आपने क्यों माना शब्द को इसलिए माना शब्द

1625
01:56:19,360 --> 01:56:23,440
को इसलिए माना कि किसी ने हमको वो दी नास्तिक लोग तो यही कहते

1626
01:56:23,440 --> 01:56:27,520
हैं कि उसी में लिखा है और आपने मान लिया। शब्द को इसलिए हमने माना क्योंकि

1627
01:56:27,520 --> 01:56:31,840
उसमें जो चीज वेरीाईबल थी वो सही थी। जो चीज वेरीिफायबल

1628
01:56:31,840 --> 01:56:36,000
नहीं थी वो वेरीाएबल वाली सही थी। इसलिए हमने शब्द को

1629
01:56:36,000 --> 01:56:38,480
किस लिए माना पे अगर आप जाएंगे तो सबसे पहली

1630
01:56:38,480 --> 01:56:42,480
बात तो आप वेद के बाहर जा रहे हैं। पहले तो हम ये मान ले।

1631
01:56:42,480 --> 01:56:46,720
नहीं शब्द प्रमाण खुद में लिखा है कि शब्द को हम क्यों मानते हैं? इसलिए

1632
01:56:46,720 --> 01:56:50,720
मानते हैं क्योंकि हम वैदिक हैं। हमारा वैदिक होने का मतलब

1633
01:56:50,720 --> 01:56:54,800
ही है कि हम वेदों को मानने वाले हैं। अगर आप इस पर क्लेम करेंगे तो आप वेदों पर क्लेम

1634
01:56:54,800 --> 01:56:58,880
कर रहे हैं। हां हम वैदिक है लेकिन

1635
01:56:58,880 --> 01:57:02,960
आप आप वेदों के विरुद्ध क्लेम कर रहे हैं ना वेदों को क्यों माने? पहले तो इस पे जाइए फिर हम आपको

1636
01:57:02,960 --> 01:57:07,040
बताएंगे वेदों को क्यों माने? हां हम वैदिक हैं लेकिन शरीर से तो कोई

1637
01:57:07,040 --> 01:57:11,280
होता नहीं है। मान लो कोई व्यक्ति कोई दूसरे मैं ये नहीं कह रहा। मैं आपको

1638
01:57:11,280 --> 01:57:15,520
एक्सप्लेनेशन दूंगा। हमको वेद को क्यों मानना है? मैं आपको एक्सप्लेनेशन दूंगा।

1639
01:57:15,520 --> 01:57:19,520
पर आपको पहले ये कहना पड़ेगा भैया फिर तो मैं वेदों को भी कह दूंगा कि वेद के हम

1640
01:57:19,520 --> 01:57:25,520
विरोधी हैं। आपको ये कहना पड़ेगा। दोबारा

1641
01:57:26,960 --> 01:57:31,200
मैं नहीं बोल रहा हूं। एक्चुअली मैं इसलिए बोल चलिए मैं

1642
01:57:31,200 --> 01:57:35,440
थोड़ा सा मैं थोड़ा सा और दोबारा क्लिटी पे ले आता हूं बात को। जैसे

1643
01:57:35,440 --> 01:57:39,440
मान लीजिए कि आपके स गोस्वामी ने लिखा कि तीन

1644
01:57:39,440 --> 01:57:43,440
बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है। ठीक है? इसमें बेर

1645
01:57:43,440 --> 01:57:47,600
शब्द दो बार आ रहा है। ठीक है? अच्छा। अब

1646
01:57:47,600 --> 01:57:51,760
आपको यह नहीं पता है कि इन्होंने दोनों बार वेद शब्द का उपयोग

1647
01:57:51,760 --> 01:57:55,760
किस अर्थ में किया है। ठीक है?

1648
01:57:55,760 --> 01:57:59,760
तो जीबीसी के मेंबर आपको श गोस्वामी की इस बात का अर्थ

1649
01:57:59,760 --> 01:58:04,000
सही बता रहे हैं कि नहीं बता रहे हैं। इसके लिए आपके पास लॉजिक ये है कि उन्होंने

1650
01:58:04,000 --> 01:58:08,080
क्योंकि 70% अर्थ सही बताए हैं। 70%

1651
01:58:08,080 --> 01:58:12,240
अर्थ उन्होंने हां। 70% अर्थ उन्होंने सही

1652
01:58:12,240 --> 01:58:16,560
बताए हैं। इसलिए आप ये मान रहे हो। ठीक है? हां वो जो 70%

1653
01:58:16,560 --> 01:58:20,560
जाएगी ना मेरी नॉलेज भी उधर तक ही जाएगी मान लो

1654
01:58:20,560 --> 01:58:24,560
मेरी इंटेलिजेंस है उसकी भी एक लिमिटेशन है ना मैं मैं कह रहा

1655
01:58:24,560 --> 01:58:28,560
हूं 70 मैं कह रहा हूं उन्होंने 70% क्योंकि सही बताए हैं

1656
01:58:28,560 --> 01:58:32,640
इसलिए आप उनकी इस बात को मान लोगे जो भी वो बताएंगे बेर के बारे में

1657
01:58:32,640 --> 01:58:38,000
ठीक है पहली बात तो ये है कि ये कहां लिखा हुआ है

1658
01:58:38,000 --> 01:58:42,320
कि जो 70% बात सही करे उसकी बाकी की 30% बातें मान्य

1659
01:58:42,320 --> 01:58:46,800
हो जाएंगी दूसरी बात ये है

1660
01:58:46,800 --> 01:58:50,880
दूसरी बात ये है कि वो जो 70% की आपने

1661
01:58:50,880 --> 01:58:54,880
जांच की है कि उन्होंने सही बोला है कि नहीं बोला है वो जांच आपने किस आधार पे की

1662
01:58:54,880 --> 01:58:58,880
है? हां जो दूसरी बात है मैं वो पहले

1663
01:58:58,880 --> 01:59:02,880
बोलूं थोड़ा सा फनी लग रहा था लेकिन फिर भी जो दूसरी

1664
01:59:02,880 --> 01:59:07,200
बात है वो पहले बोलूंगा कि जो 70%

1665
01:59:07,200 --> 01:59:11,520
है उसकी जांच मैंने इस आधार पे की है कि कुछ एक्सेप्टेड फैक्ट्स

1666
01:59:11,520 --> 01:59:16,080
होते हैं जो कभी कंट्राडिक्ट नहीं किए जा सकते दोबारा। कुछ एक्सेप्टेड

1667
01:59:16,080 --> 01:59:20,400
फैक्ट्स होते हैं जिनको कभी कंट्राडिक्ट किया जा ही नहीं सकता।

1668
01:59:20,400 --> 01:59:24,400
उनकी कोई कंट्राडिक्शन होती ही नहीं है वैलिड। ठीक है? उन

1669
01:59:24,400 --> 01:59:28,720
जैसे फैक्ट की एक लिस्ट होती है। फॉर एग्जांपल मोरली

1670
01:59:28,720 --> 01:59:32,800
मैं मोरली मैं अगर बोलूं जस्टिस राइट सनराइज इन द ईस्ट हां या सन

1671
01:59:32,800 --> 01:59:36,960
राइज इन द ईस्ट ये एक्सेप्टेड फैक्ट है और इसमें कोई कंट्राडिक्शन

1672
01:59:36,960 --> 01:59:41,360
किया ही नहीं जा सकता। ऐसे कुछ लिस्ट ऑफ एक्सेप्टेड फैक्ट्स होते हैं। या फॉर एग्जांपल

1673
01:59:41,360 --> 01:59:46,000
अगर साइंटिफिकली बोला जाए स्पीड ऑफ़ लाइट इज़ 3 10 रे टू पावर 8 मीटर पर सेकंड।

1674
01:59:46,000 --> 01:59:50,080
यह एक फैक्ट है और किसी ने और पांच छ लोगों

1675
01:59:50,080 --> 01:59:54,480
ने इसको कैलकुलेशन किया अलग-अलग तरीकों से और पांच छह अलग-अलग लोग अलग-अलग

1676
01:59:54,480 --> 01:59:57,600
जगह पर सेम रिजल्ट पे आए। इसीलिए ये एक्सेप्टेड

1677
01:59:57,600 --> 02:00:01,600
फैक्ट हमने एक्सेप्ट कर लिया। है लेकिन ये एक्सेप्टेड फैक्ट और ये एक्सेप्टेड

1678
02:00:01,600 --> 02:00:06,160
फैक्ट एक बार मुझे पता चल गया तो अब मैं क्या बोलूंगा कि अब जो मुझे व्यक्ति बताएगा

1679
02:00:06,160 --> 02:00:10,400
कि स्पीड ऑफ लाइट इसके अलावा कुछ है। मैं उसकी नहीं मानूंगा। क्यों?

1680
02:00:10,400 --> 02:00:14,400
क्योंकि वो एक व्यक्ति है और मैंने 10 व्यक्ति जो अलग-अलग रिजल्ट कर रहे

1681
02:00:14,400 --> 02:00:18,480
थे उन उनकी अथॉरिटी से एक्सेप्ट किया है।

1682
02:00:18,480 --> 02:00:22,480
और लास्ट में मैं वैदिक स्ट्रिप्चर को क्यों मान रहा हूं? क्योंकि सेम रीज़न मुझे वैदिक

1683
02:00:22,480 --> 02:00:26,640
स्ट्रिप्चर से मिलता है। अथर्ववेद में एच सी वर्मा मैंने मतलब 11थ में बुक पढ़ी थी। एच

1684
02:00:26,640 --> 02:00:30,800
सी वर्मा में डायरेक्टली स्पेशल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के चैप्टर में लिखा है कि स्पीड ऑफ

1685
02:00:30,800 --> 02:00:36,800
लाइट अथर्ववेद में वैल्यू लिखी हुई है।

1686
02:00:38,080 --> 02:00:43,280
हो गया। योजन की जो डेफिनेशन होती है वो होती है।

1687
02:00:43,280 --> 02:00:46,960
हां जी।

1688
02:00:46,960 --> 02:00:50,960
हम तो इसीलिए को एक्सेप्ट करते हैं।

1689
02:00:50,960 --> 02:00:55,600
ठीक है? अभी सबसे पहली बात तो ये है कि जो एक्सेप्टेड फैक्ट्स आप बता रहे हैं

1690
02:00:55,600 --> 02:01:00,800
ये आप मटेरियलिस्टिक चीजों के लिए बता रहे हैं जिसमें प्रत्यक्ष चीजें प्रमाण होती है।

1691
02:01:00,800 --> 02:01:05,360
ठीक है? इनकी तुलना आप किन विषयों से कर रहे हैं? जैसे मैं

1692
02:01:05,360 --> 02:01:09,440
जस्टिस मुझे प्यारा है। ठीक है? जस्टिस होना

1693
02:01:09,440 --> 02:01:13,600
चाहिए। तो ये एक्सेप्टेड फैक्ट क्यों है? क्योंकि हमारी जो वैसे

1694
02:01:13,600 --> 02:01:18,080
तो कई लोग इसको भी काउंटर कर देंगे मगर फिर भी चर्चा का वो ना बदले

1695
02:01:18,080 --> 02:01:22,160
इसलिए मैं आपको फिलहाल जो है मान ले रहा हूं इस बात को कई

1696
02:01:22,160 --> 02:01:26,240
लोग कह देंगे नहीं नहीं नहीं जिसकी लाठी उसकी भैंस भाड़ में

1697
02:01:26,240 --> 02:01:31,280
गया अनजस्टिस बोलते हैं लोग हां बोलते हैं नहीं

1698
02:01:31,280 --> 02:01:35,840
तो वो वो फिर चीज अलग हो जाएगी मगर मैं अभी फिलहाल आपको कह रहा हूं कि एक्सेप्टेड

1699
02:01:35,840 --> 02:01:39,920
है आप आपकी अंतरात्मा क्योंकि एक्सेप्ट कर रही है तो आपने एक्सेप्टेड फैक्ट कुल मिला के

1700
02:01:39,920 --> 02:01:44,160
बात यही है ना कि आपने जीबीसी के मेंबर्स को

1701
02:01:44,160 --> 02:01:48,320
उस आधार पर जांचा जो आधार आपको खुद के ज्ञान से मालूम

1702
02:01:48,320 --> 02:01:52,480
था। सभी खुद की नॉलेज

1703
02:01:52,480 --> 02:01:53,120
दिक्कत ये

1704
02:01:53,120 --> 02:01:57,120
है कि वो आप पहले कह रहे थे कि शास्त्रों का अर्थ मैंने देखा कि वो

1705
02:01:57,120 --> 02:02:01,520
70% मैच नहीं कर मैच कर रहा था इसलिए मैंने 30% मान लिया। नहीं

1706
02:02:01,520 --> 02:02:06,320
जब मैंने 70% शास्त्रों की बात करते करते अपने सेल्फ मटेरियलिस्टिक

1707
02:02:06,320 --> 02:02:10,560
ऑब्जेक्ट उस पे आ गए। ऑब्जरवेशन मैंने शास्त्रों पे विश्वास

1708
02:02:10,560 --> 02:02:14,720
इसलिए सुनिए मैं वही तो कह रहा हूं शास्त्रों का अर्थ शास्त्रों

1709
02:02:14,720 --> 02:02:19,200
के अर्थ में जज आप नहीं कर सकते उनको क्योंकि शास्त्रों

1710
02:02:19,200 --> 02:02:23,200
का अर्थ आपको उन्हीं से प्राप्त हो रहा है मेरे भाई शास्त्रों

1711
02:02:23,200 --> 02:02:27,360
के अर्थ में आप उनको कंपेयर भी तो किया जितनी तक मेरी इंटेलिजेंस जाती

1712
02:02:27,360 --> 02:02:31,600
थी मैंने कंपेयर भी तो किया अगर मैं एनालिस्ट करूं

1713
02:02:31,600 --> 02:02:35,920
तो फॉर एग्जांपल अद्वैत फिलोसफी से आपने शंकराचार्य को शंकराचार्य

1714
02:02:35,920 --> 02:02:40,160
को आपने कर लिया जितना मैक्सिमम मेरी इंटेलिजेंस आती

1715
02:02:40,160 --> 02:02:44,240
थी उतना ऐसे नहीं होता है ना जितना मैक्सिमम अगर

1716
02:02:44,240 --> 02:02:48,320
उसके बाद की चीज अगर उसके बाद की चीज से आपकी चीज कट गई तो

1717
02:02:48,320 --> 02:02:52,480
एक्चुअली मैं बताता हूं ये क्या होता है ऐसे ही होता है कोई भी किसी चीज पे बिलीव करता है

1718
02:02:52,480 --> 02:02:56,640
आपका बिलीव सिस्टम जो है वो एक कागज है। मेरा बिलीव सिस्टम वो एक कागज है।

1719
02:02:56,640 --> 02:03:00,720
आपने अपने जितनी नॉलेज हो सकती थी उसके बेसिस पर उस कागज पे कुछ

1720
02:03:00,720 --> 02:03:04,960
फैक्ट्स लिख दिए कि मैं मानता हूं मैं इसी को फॉलो करूंगा पूरी लाइफ और मैंने

1721
02:03:04,960 --> 02:03:08,240
अपने पे लिख दिए। फिर हम दोनों मिले कभी और हमने एक

1722
02:03:08,240 --> 02:03:12,400
दूसरे से शेयर करे। अगर हम दोनों ऑनेस्ट है। अगर हम दोनों व्यक्ति ऑनेस्ट

1723
02:03:12,400 --> 02:03:16,560
है तो आप में से और मुझ में से वो व्यक्ति

1724
02:03:16,560 --> 02:03:20,560
एक्सेप्ट करेगा कि हां यार मेरा वाला जो है ना वो कम एक्यूरेट था।

1725
02:03:20,560 --> 02:03:24,640
तुम्हारा वाला जो है ना वो इन रूल्स की वजह से ज्यादा एक्यूरेट है। फिर हम शेयर

1726
02:03:24,640 --> 02:03:29,120
करेंगे। शेयर करने के बाद शास्त्रार्थ में ऐसे ही तो होता है। शेयर करने के बाद में पता चलेगा

1727
02:03:29,120 --> 02:03:33,360
और हम उसी कंक्लूजन पे आ जाएंगे। मुझे आज तक अपने एक्सपीरियंस

1728
02:03:33,360 --> 02:03:37,360
में कोई व्यक्ति बोला मिला ही नहीं जो प्रभुपाद जी को कंट्राडिक्ट कर पाया हो।

1729
02:03:37,360 --> 02:03:41,440
उनके सारे शास्त्र एक्सप्लेनेशन के प्रभुपाद जी की प्रभुपाद

1730
02:03:41,440 --> 02:03:45,840
जी की बुक्स जो आपको उनसे प्राप्त हुई है जीव गोस्वामी जीबीसी

1731
02:03:45,840 --> 02:03:49,920
से जो प्राप्त हुई है उनको कोई कंट्राडिक्ट नहीं कर पाया इसलिए आप

1732
02:03:49,920 --> 02:03:54,000
ये मान रहे हो कि भाई मेरे लिए वही प्रमाण है। फिर भी इसमें चूक हो

1733
02:03:54,000 --> 02:03:58,160
सकती है कि वो हो सकता है गलत बोल रहे हो। इसमें स्पेस है

1734
02:03:58,160 --> 02:04:02,160
कैसे वो अरे वो गलत जो चीजें मैं एक्सेप्ट करता था और

1735
02:04:02,160 --> 02:04:06,160
वो कभी गलत नहीं हो सकती और उन्होंने भी गलत नहीं बोली

1736
02:04:06,160 --> 02:04:10,160
और आपने कहा आज तक मुझे ऐसा नहीं मिला कोई जो उनको कंट्राडिक्ट

1737
02:04:10,160 --> 02:04:14,400
कर सके यानी कि मिल जाएगा तो आप मान लोगे ना हां

1738
02:04:14,400 --> 02:04:18,400
अगर मिलेगा तो मैं मानूंगा मगर आज तो मिला ही नहीं मैंने जितना को टेस्ट किया

1739
02:04:18,400 --> 02:04:22,480
तो मिला ही नहीं तो अभी आपका फेथ क्या है फेथ क्या है

1740
02:04:22,480 --> 02:04:23,360
आपका फेथ क्या

1741
02:04:23,360 --> 02:04:27,600
है प्रामाणिक है कि नहीं है मेरा फथ देखो मेरा फेथ

1742
02:04:27,600 --> 02:04:32,320
100% प्रमाणिक है लेकिन एक जीव की एक लिमिटेशन होती है। फॉर एक्स

1743
02:04:32,320 --> 02:04:36,640
की मैं आपको बता रहा हूं। आपने कहा 100%

1744
02:04:36,640 --> 02:04:40,640
आपका चीजें प्रामाणिक है। ठीक है? अब जो चीजें आपको मिल रही है मैं

1745
02:04:40,640 --> 02:04:44,640
अभी इस पे नहीं जा रहा हूं कि वो वेद का अर्थ है कि नहीं। वो गीता का अर्थ है कि नहीं। मैं इस पे नहीं

1746
02:04:44,640 --> 02:04:48,720
जा रहा हूं। मैं अभी जा रहा हूं कि प्रभुपाद जी ने बोला है जो ट गोस्वामियों के विरोध

1747
02:04:48,720 --> 02:04:52,960
में नहीं जाएगा। वो प्रामाणिक है। ठीक है? ठीक है जो प्रपाद

1748
02:04:52,960 --> 02:04:57,040
जी ने बोला कि प्रपाद जी ने बोला है जो ट गोस्वामियों के विरोध

1749
02:04:57,040 --> 02:05:01,040
में नहीं जाएगा वो प्रामाणिक है ठीक है अच्छा अब

1750
02:05:01,040 --> 02:05:05,680
जो ड गोस्वामियों के विरोध में नहीं जाएगा तो हमको

1751
02:05:05,680 --> 02:05:09,680
ये कैसे पता लगेगा कि षट गोस्वामी ने बोला क्या है जिससे कि हम ये

1752
02:05:09,680 --> 02:05:13,680
जज कर पाए कि वो ड गोस्वामी के विरोध में

1753
02:05:13,680 --> 02:05:18,240
जा रहा है कि नहीं जा रहा है अब अब इसमें दिक्कत यह आती है अब आपने बताया कि मैं अपने सेल्फ

1754
02:05:18,240 --> 02:05:22,720
रियलाइजेशन से पता करूंगा। ठीक है। ठीक है ना?

1755
02:05:22,720 --> 02:05:26,960
अपने सेल्फ मेरे पास कुछ लिस्ट ऑफ़ फैक्ट्स हैं। आप अपने

1756
02:05:26,960 --> 02:05:31,040
स्व विवेक से ये तय करेंगे कि स गोस्वामी ने बोला क्या

1757
02:05:31,040 --> 02:05:35,120
था कि उसके विरोध में वो जा रहे हैं कि नहीं जा रहे हैं। ठीक है? मैथमेटिकल कैलकुलेशन भी दे

1758
02:05:35,120 --> 02:05:38,400
सकता हूं मैं कि मेरे पास मान लो 10 फैक्ट्स है वो कभी गलत

1759
02:05:38,400 --> 02:05:42,560
नहीं होते और वो कोई एक भी व्यक्ति अगर मुझे मिल गया कि उन 10 में से कोई एक

1760
02:05:42,560 --> 02:05:46,960
उसने गलत बोल दिया कि ये वाला गलत है और मुझे 100% पता है मैंने बहुत सारे

1761
02:05:46,960 --> 02:05:51,280
सोर्सेस से पता किया है ये सही ही है और वो एक व्यक्ति गलत

1762
02:05:51,280 --> 02:05:55,440
अच्छा अब आप ये बता दीजिए कि ये जो आप थ्योरी बता रहे हैं

1763
02:05:55,440 --> 02:05:59,520
आपकी क्योंकि ये जो आपकी थ्योरी है मेरे विरुद्ध जा रही है तो मैं इसमें आपसे शास्त्रीय प्रमाण

1764
02:05:59,520 --> 02:06:04,000
मांग रहा हूं ये दे दीजिए मुझे ये जो थ्योरी है इसको कहते कहते हैं असेंडिंग

1765
02:06:04,000 --> 02:06:08,480
नॉलेज और डिसेंडिंग का प्रमाण ये है

1766
02:06:08,480 --> 02:06:12,640
शास्त्रीय प्रमाण ये है कि शास्त्रीय कहते हैं वेद जो है वो हमारे मदर की तरह

1767
02:06:12,640 --> 02:06:16,960
है वेद जो है वो हमारे मदर की तरह है और

1768
02:06:16,960 --> 02:06:21,520
भगवान जो है श्री कृष्ण जो है वो हमारे फादर की तरह ठीक है तो

1769
02:06:21,520 --> 02:06:25,840
हम वेदों को एक्सेप्ट इसलिए करते हैं क्योंकि वेदों की उत्पत्ति

1770
02:06:25,840 --> 02:06:30,080
हमसे पहले हुई लेकिन यहां दिक्कत आती

1771
02:06:30,080 --> 02:06:34,800
है अगर फिजिकली देखा जाए तो बहुत सारे लोगों की हमसे से पहले उत्पत्ति हुई

1772
02:06:34,800 --> 02:06:38,880
तो हमें कंपैरिजन करना पड़ता है। ठीक है?

1773
02:06:38,880 --> 02:06:43,040
समझ पा रहे हो ना? बहुत सारे लोगों की हमसे पहले उत्पत्ति हुई। अगर मैं इसी बॉडी के अंदर

1774
02:06:43,040 --> 02:06:47,840
देखूं इसीलिए मुझे कंपैरिजन करना पड़ा। वैसे शास्त्र बोलते हैं कि

1775
02:06:47,840 --> 02:06:51,840
उनको मदर की तरह मानो और मदर बोलती है कि फादर ये है तो आपको मानना

1776
02:06:51,840 --> 02:06:53,520
पड़ेगा क्योंकि मदर ने देखा

1777
02:06:53,520 --> 02:06:57,520
है कि फादर कौन है। मदर को पता है कि फादर कौन है। हम तो

1778
02:06:57,520 --> 02:07:01,520
जज नहीं कर सकते। मैं पास्ट में जा नहीं सकता। कैसे अब तो आपने मेरी बात

1779
02:07:01,520 --> 02:07:05,600
कर दी। कि आपको पता ही नहीं है कि फादर कौन है। वह मदर

1780
02:07:05,600 --> 02:07:09,840
ही बताएगी। तो फिर आप फादर वो सही बता रहा है। सामने

1781
02:07:09,840 --> 02:07:13,840
वाला फादर सही बता रहा है कि नहीं बता रहा है। इस आधार पे उसको मदर कैसे मान

1782
02:07:13,840 --> 02:07:16,720
सकते हो?

1783
02:07:16,720 --> 02:07:20,800
मैं इसी जब आप जब आप जब आप फादर को जानने के

1784
02:07:20,800 --> 02:07:24,880
विषय में मदर पर ही आश्रित हो तो फादर को जानने के

1785
02:07:24,880 --> 02:07:28,880
आधार पर मदर को मदर कैसे मान रहे हो? मदर को मदर तो स्वतंत्र रूप

1786
02:07:28,880 --> 02:07:33,040
से मानना पड़ेगा ना। फादर को जानने के आधार पे नहीं। आपको बताया ना मैं स्वतंत्र

1787
02:07:33,040 --> 02:07:37,040
रूप से ही इस कंक्लूजन पे पहुंचा कि शास्त्र सही है और फिर

1788
02:07:37,040 --> 02:07:41,120
इस कौन सही है कंपेयरिंग फिलोसफीस ऑफ अदर्स देन प्रभुपाद सही

1789
02:07:41,120 --> 02:07:45,280
है उनकी सारी बुक्स में कभी कंट्राडिक्शन नहीं मिला देन जीबीसी

1790
02:07:45,280 --> 02:07:49,600
मेंबर्स सही है देन जीबीसी मेंबर्स सही है क्योंकि श्रील प्रभुपाद

1791
02:07:49,600 --> 02:07:53,600
ने बोला है कि जीबीसी मेंबर्स को मैं मानता हूं अथॉरिटी लेकिन प्रभुपाद

1792
02:07:53,600 --> 02:07:58,160
ने कभी भी ये नहीं बोला कि जीबीसी मेंबर्स को कुछ जीबीसी मेंबर्स सन्यासी

1793
02:07:58,160 --> 02:08:02,560
नहीं भी है पॉसिबल है तो तो

1794
02:08:02,560 --> 02:08:06,720
ऐसे गृहस्थ है तो और कुछ मेंबर्स जो है वो गुरु

1795
02:08:06,720 --> 02:08:08,560
अपने आप को नहीं एक्सेप्ट करते।

1796
02:08:08,560 --> 02:08:12,640
लेकिन इसका मतलब ये मैंने अभी देखिए मैंने अभी क्या कहा? हमारी अभी बात

1797
02:08:12,640 --> 02:08:16,640
कहां से चल रही थी? हमारी बात ये चल रही है कि आप मुझे शास्त्र के

1798
02:08:16,640 --> 02:08:20,640
प्रमाण देने वाले हैं इस विषय में कि उनको आप प्रमाणिक जो मान रहे हो अपनी जो

1799
02:08:20,640 --> 02:08:26,640
आपने थ्योरी बताई है उसके आधार पे। तो वो थ्योरी का शास्त्रीय कुछ रेफरेंस

1800
02:08:26,720 --> 02:08:31,120
मैं एक मिनट इसको इंग्लिश में इसका शब्द जानता हूं। असेंडिंग नॉलेज मैं इसका

1801
02:08:31,120 --> 02:08:35,120
रेफरेंस 2 मिनट्स में आपको देता हूं। ठीक है? आप सही क्वेश्चन पे एक

1802
02:08:35,120 --> 02:08:39,040
मिनट आ सकते हैं। इसको खोल दीजिएगा

1803
02:08:39,040 --> 02:08:43,600
यार मम्मा वेट कर बोल दिया

1804
02:08:43,600 --> 02:08:48,320
टेस्ट चल रहा है। अच्छा बाकी आज

1805
02:08:48,320 --> 02:08:54,320
ऑडियो

1806
02:08:56,560 --> 02:09:01,120
नहीं है ओके। सेंडिंग

1807
02:09:01,120 --> 02:09:03,680
नॉलेज

1808
02:09:03,680 --> 02:09:09,680
शास्त्र प्रमाण एंड डिफरेंट टाइप्स ऑफ प्रूफ्स

1809
02:09:10,320 --> 02:09:14,480
डिफरेंट टाइप्स ऑफ प्रमाण शास्त्र आप ये कर सकते हैं सर्च की

1810
02:09:14,480 --> 02:09:18,480
कौन-कौन से टाइप ऑफ प्रमाण है शास्त्रों में तो वो सारे प्रमाणों की अगर आप

1811
02:09:18,480 --> 02:09:22,480
लिस्ट देख तो उनमें से एक ये भी है जो असेंडिंग नॉलेज है मैं एक

1812
02:09:22,480 --> 02:09:27,120
मिनट बस वो उसका शास्त्रीय प्रमाण भी लाता हूं जी

1813
02:09:27,120 --> 02:09:31,280
असेंडिंग नॉलेज आपको मिल जाएगा।

1814
02:09:31,280 --> 02:09:36,960
हां मैं वैदिक स्ट्रिप्चर के वो भी एक्चुअली रेफरेंस भी देख रहा था।

1815
02:09:36,960 --> 02:09:41,840
भाई ये स्पिरिचुअल विंग्स वाले बहुत परेशान हो रहे हैं।

1816
02:09:41,840 --> 02:09:45,920
ये तू तड़ाक में बोल भी रहे हैं। तो इनको मैं कह दूं भाई आपकी माताजी ने निष्ठा पूर्वक

1817
02:09:45,920 --> 02:09:50,160
दूध पिलाया है। तो आप अपना चेहरा लेकर के सामने

1818
02:09:50,160 --> 02:09:55,200
आए। हमारा नंबर दिया गया है 740830

1819
02:09:55,200 --> 02:09:59,760
18869 पर आप WhatsApp करिए अपना थोपड़ा वहां पर भेजिए

1820
02:09:59,760 --> 02:10:03,760
और फिर हम आपके साथ आमने सामने बैठकर के बात करेंगे वरना

1821
02:10:03,760 --> 02:10:08,480
स्पिरिचुअल विंग्स की बजाय अपने लिए चिकन विंग्स लिख लीजिए नाम में

1822
02:10:08,480 --> 02:10:14,480
और लोगों को लोगों का आहार बनिए ठीक है

1823
02:10:17,920 --> 02:10:22,000
वैसे ये जो क्वेश्चन आया ना कि आप शास्त्र को क्यों

1824
02:10:22,000 --> 02:10:26,080
एक्सेप्ट कर रहे हैं? यह वाला जो क्वेश्चन है पर्टिकुलर यह बिल्कुल उसी की

1825
02:10:26,080 --> 02:10:30,400
तरह है जो आप कह रहे हैं कि आप इस को क्यों एक्सेप्ट कर रहे हैं?

1826
02:10:30,400 --> 02:10:34,720
इस इन दोनों क्वेश्चंस को आप कंपेयर कीजिएगा। ठीक है? मैं अगर

1827
02:10:34,720 --> 02:10:38,720
इस में ही पैदा हुआ होता जो कि मैं नहीं हुआ हूं। अगर मैं इस में ही किसी व्यक्ति के

1828
02:10:38,720 --> 02:10:42,800
यहां देखिए मैं मैं दूसरी ओर जा रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि जिन जिस

1829
02:10:42,800 --> 02:10:46,880
विषय में आप सामने वाले पर ही आधारित है आश्रित

1830
02:10:46,880 --> 02:10:51,360
है। जैसे आपने कहा ना कि मदर मदर ये बताएगी पिता कौन है?

1831
02:10:51,360 --> 02:10:55,360
अब आप कह रहे हो कि मैं मदर पिता का नाम सही बता रही है कि नहीं

1832
02:10:55,360 --> 02:10:59,440
बता रही इस आधार पर मदर को मदर मान रहा हूं। आप खुद ही अपनी

1833
02:10:59,440 --> 02:11:03,440
बात को ब्रेक कर रहे हो। मैं इस आधार पे नहीं मान रहा। मैं इस आधार पे मदर को मदर मान रहा

1834
02:11:03,440 --> 02:11:07,520
हूं क्योंकि उन्होंने पूरी लाइफ मुझे पोषित किया है और मैं पूरी लाइफ उन्हीं पे ही निर्भर

1835
02:11:07,520 --> 02:11:10,320
रहा हूं। अपने रिसोर्सेज के लिए ठीक है तो

1836
02:11:10,320 --> 02:11:14,560
आपके जीबीसी मेंबर्स जो है वो आपको पोषित करने वाले हैं

1837
02:11:14,560 --> 02:11:18,800
पूरी एक्चुअली वो स्पिरिचुअली और फिलोसफिकली हमें पोषित

1838
02:11:18,800 --> 02:11:22,800
कर रहे हैं मैनेजमेंट के नजरिए से पूरी जीबीसी में आपकी एक तरीके से

1839
02:11:22,800 --> 02:11:26,880
आस्था है आपकी आस्था है आपके पास लॉजिक

1840
02:11:26,880 --> 02:11:30,960
और नहीं है इसमें आस्था नहीं है इसमें

1841
02:11:30,960 --> 02:11:35,280
फैक्ट है फैक्ट ये है कि मैनेजमेंट वाली जो जो जीबीसी है

1842
02:11:35,280 --> 02:11:39,600
उन्होंने सेवा की है माता ने पुत्र की सेवा की है

1843
02:11:39,600 --> 02:11:43,600
और वो सेवा ही अपने आप में सबूत है कि उस पुत्र ने

1844
02:11:43,600 --> 02:11:47,680
माता की बात मानी। वो जो सेवा की अमाउंट है उन्होंने उनकी सेवा की

1845
02:11:47,680 --> 02:11:52,080
है। उन्होंने उनकी सेवा की है इसलिए सिद्ध होता

1846
02:11:52,080 --> 02:11:56,160
है। एक मिनट मैं जरा लिख लू इस बात

1847
02:11:56,160 --> 02:12:02,160
को आप क्या क्लेम कर रहे हैं। एक मिनट

1848
02:12:02,400 --> 02:12:06,560
ये एक्चुअली ये वाला जो चैप्टर है इस चैप्टर पे बहुत विधिवत तरीके से कभी बात

1849
02:12:06,560 --> 02:12:10,640
हुई नहीं। किसी व्यक्ति से अच्छा तो आपसे इसलिए हो रही

1850
02:12:10,640 --> 02:12:14,720
है तो अब आनंद भी आ रहा है। हां थोड़ा

1851
02:12:14,720 --> 02:12:20,720
लेट हो गया है। वैसे एक तो उन्होंने सेवक सेवा की है।

1852
02:12:20,720 --> 02:12:24,800
ठीक है। एक ये है कि वो जो ज्ञान दे रहे हैं वो

1853
02:12:24,800 --> 02:12:28,800
अकाट्य है। ठीक है? हां। जो ज्ञान दे रहे

1854
02:12:28,800 --> 02:12:32,880
हैं वो अकाट्य है। आप आज तक देखा नहीं कि किसी ने उनके ज्ञान को

1855
02:12:32,880 --> 02:12:37,120
काट दिया। खैर यह तो अकाट वाली बात तो मेरे लिए सबसे इजी है। खैर

1856
02:12:37,120 --> 02:12:41,120
फिर भी अभी एक तो उन्होंने सेवा की है और दूसरा और क्या

1857
02:12:41,120 --> 02:12:46,160
बताया आपने? आप जितने आर्गुममेंट्स देंगे मैं काट सकता हूं। हां हां

1858
02:12:46,160 --> 02:12:49,280
सेवा की है और

1859
02:12:49,280 --> 02:12:53,280
सेवा किस-किस सेंस में की है? सेवा अगला बताइए।

1860
02:12:53,280 --> 02:12:57,280
सेवा छोड़ दीजिए। रिसोर्सेज मिले हैं। वो सेवा

1861
02:12:57,280 --> 02:13:01,360
का ही एक्सपेंशन हो सकता है। मैं बताता हूं कैसे। नहीं नहीं

1862
02:13:01,360 --> 02:13:05,440
सेवा की है इतना काफी है उसमें उसमें किसी भी तरह से सेवा की हो

1863
02:13:05,440 --> 02:13:09,600
सेवा की है उन्होंने और कोई उनको प्रमाण मानने एक हां उन्होंने

1864
02:13:09,600 --> 02:13:14,640
आपका पोषण किया है हां पोषण किया है

1865
02:13:14,640 --> 02:13:18,560
आपका पोषण किया है और हां

1866
02:13:18,560 --> 02:13:23,440
इनमें से सबसे ज्यादा जो इंपॉर्टेंट वाला है वो नॉन कंट्राडिक्टिव ही है यानी कि

1867
02:13:23,440 --> 02:13:27,840
वो अकाट्य वाला कारण अकाट वाला ठीक है ठीक है क्योंकि वो अकाट्य

1868
02:13:27,840 --> 02:13:32,320
ज्ञान दे रहे हैं इसलिए इसलिए इसलिए वो दोनों

1869
02:13:32,320 --> 02:13:36,320
की है इसलिए मैं सुन भी रहा हूं और अकाट है इसलिए मैं कंटिन्यूस फॉलो

1870
02:13:36,320 --> 02:13:41,200
भी कर रहा हूं। ठीक है। ठीक है। वो अकाट है इसलिए आप वो कर रहे हैं। ठीक है।

1871
02:13:41,200 --> 02:13:45,600
तो आपकी प्रमाणिकता की यही है कि कोई उसको चैलेंज नहीं कर पाया। बस

1872
02:13:45,600 --> 02:13:49,760
क्योंकि ये जो बाकी के दो है सेवा की है और उन्होंने आपका पोषण किया है। इसको

1873
02:13:49,760 --> 02:13:54,320
मैं काट सकता हूं तुरंत। इसको मैं काट सकता हूं तुरंत।

1874
02:13:54,320 --> 02:13:58,320
ये बिल्कुल भी लॉजिकल चीज है। सेवा की है। यह कहीं नहीं लिखा है

1875
02:13:58,320 --> 02:14:02,320
कि किसी ने किसी की अगर सेवा की है तो वो उसके द्वारा कही जाने वाले

1876
02:14:02,320 --> 02:14:06,960
बातों को एज इट इज देगा। यह कहीं नहीं लिखा है।

1877
02:14:06,960 --> 02:14:11,040
ठीक है। एक और बार अगर किसी ने किसी की सेवा की

1878
02:14:11,040 --> 02:14:15,120
है तो उसके द्वारा कही गई बातों को वो व्यक्ति वैसा ही

1879
02:14:15,120 --> 02:14:19,440
बताएगा जैसा उसने कहा था। कहीं नहीं लिखा है। ये भी ठीक है। हमारी

1880
02:14:19,440 --> 02:14:23,760
मदद भी जो होती है वो उन्होंने हमारी सेवा की। लेकिन ये आपका अपना अपना उनको

1881
02:14:23,760 --> 02:14:27,920
मानने के लिए अपने आप लॉजिक दे रहे हैं। मगर ये लॉजिक जो है ये वाला जो सेवा की

1882
02:14:27,920 --> 02:14:33,920
है इसलिए वो प्रमाणिक है। इसलिए सेवा करने के

1883
02:14:34,400 --> 02:14:38,480
दूसरी बात आप जरा आप जरा इस प्रकाश डाल दीजिए कि उन्होंने आपका पोषण

1884
02:14:38,480 --> 02:14:42,480
किया है। सेवा तो सेवा तो काट दिया ना कि सेवा को

1885
02:14:42,480 --> 02:14:44,880
रखूं।

1886
02:14:44,880 --> 02:14:49,040
इनमें सबसे ज्यादा जरूरी जो है वो अकाट्य और अकाट

1887
02:14:49,040 --> 02:14:53,360
पे आ रहे हैं। अकाट पे आ रहे हैं कुल मिलाकर के। ठीक है?

1888
02:14:53,360 --> 02:14:58,160
शब्द प्रमाण की बात खत्म हो गई क्योंकि शब्द प्रमाण वो है जो अकाट्य हो।

1889
02:14:58,160 --> 02:15:02,160
ठीक है ना? हां। मैंने इसलिए प्रपाद जी को फॉलो किया क्योंकि

1890
02:15:02,160 --> 02:15:06,240
आज तक मुझे कोई काट्य नहीं मिला। सिंपल। ठीक। ठीक।

1891
02:15:06,240 --> 02:15:10,320
चलो अब ये थोड़ा सा पोषण वाले पे आप बता दो जरा मुझे क्या है? आप प्रकाश

1892
02:15:10,320 --> 02:15:14,640
डाल दो अब। पोषण वाला ठीक है। कई बार अगर अगर मैं इस एग्जांपल

1893
02:15:14,640 --> 02:15:18,880
की डीप में जाऊं तो कोई और भी पोषण करते हैं। लेकिन सत्य की जो प्रायोरिटी

1894
02:15:18,880 --> 02:15:22,960
है वो पोषण से ज्यादा ही होती है। फॉर एग्जांपल अरे भाई मुझे थोड़ा सा

1895
02:15:22,960 --> 02:15:26,960
बताओ आपने उनको उन्होंने आपको खिलाया पिलाया तब आपने

1896
02:15:26,960 --> 02:15:31,920
उनको प्रमाणिक माना या प्रामाणिक मानने के बाद उन्होंने आपको खिलाया पिलाया?

1897
02:15:31,920 --> 02:15:37,920
उन्होंने मुझे खिलाया पिलाया इसीलिए मैंने उनको सुना।

1898
02:15:38,880 --> 02:15:44,480
वरना वरना मैं उनको मिशनरी भी ऐसे ही करते हैं।

1899
02:15:44,480 --> 02:15:48,480
वो आदमी व्यक्ति उनको सुनता है। हां फिर मैंने

1900
02:15:48,480 --> 02:15:52,560
उनको सुना और क्योंकि मैंने उनको सुना और मुझे वो पता

1901
02:15:52,560 --> 02:15:56,800
लगा कि वो अकाट है। हां और पता लगा कि वो अकाट है। इसीलिए एक्सेप्ट किया।

1902
02:15:56,800 --> 02:16:01,040
अगर वो खिलाते जाते तो शायद मैं सुनता नहीं। ये भी एक है रीज़।

1903
02:16:01,040 --> 02:16:05,200
ठीक है। ठीक है। अब आप मुझे

1904
02:16:05,200 --> 02:16:09,280
बता दीजिए कि ईश्वर है एक सिद्ध कैसे होता है? बहुत इजी है।

1905
02:16:09,280 --> 02:16:13,600
अरे सिंपल अगर मैं

1906
02:16:13,600 --> 02:16:17,840
ईश्वर सिद्ध कैसे होते हैं? तो लॉजिक से अप्रोच करें

1907
02:16:17,840 --> 02:16:21,840
तो सिद्ध लॉजिक से ही करना पड़ेगा ना क्योंकि शब्द शब्द तो वही मानना

1908
02:16:21,840 --> 02:16:26,160
है जो अकाट से होगा। हां। तो नेचर के जो लॉस है बहुत स्पेसिफिक

1909
02:16:26,160 --> 02:16:30,240
है। नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। आप वैल्यूस

1910
02:16:30,240 --> 02:16:34,320
देखो जो वैल्यूस हम एक्सेप्ट करते हैं। मैं उस ईश्वर की बात कर रहा हूं

1911
02:16:34,320 --> 02:16:38,400
जो हमारा अंतिम गंतव्य है। अंतिम विकल्प है। मैं

1912
02:16:38,400 --> 02:16:42,720
उनकी बात कर रहा हूं और केवल इस रूप में नहीं इस रूप में नहीं कि इस संसार

1913
02:16:42,720 --> 02:16:46,960
को बनाया है तो इसलिए ईश्वर है तो अब उसकी पूजा करो। उसकी पूजा

1914
02:16:46,960 --> 02:16:51,440
करना भी सिद्ध करना होगा कि उसकी पूजा करना आवश्यक है।

1915
02:16:51,440 --> 02:16:54,000
उस तक पहुंचना आवश्यक है। हां

1916
02:16:54,000 --> 02:17:00,000
बिल्कुल आवश्यक है। देखो

1917
02:17:00,720 --> 02:17:04,880
अच्छा तो जो ईश्वर है वो एक्सिस्ट करते हैं।

1918
02:17:04,880 --> 02:17:08,960
इसका सबसे बड़ा प्रूफ है कि नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। लॉस

1919
02:17:08,960 --> 02:17:12,240
ऑफ नेचर आर वेरी स्पेसिफिक।

1920
02:17:12,240 --> 02:17:16,240
अ और एक और प्रूफ है जिसको हम

1921
02:17:16,240 --> 02:17:20,320
कहते हैं कॉज ऑफ कॉजेस आर्गुमेंट या कॉजलल आर्गुमेंट।

1922
02:17:20,320 --> 02:17:24,400
बहुत फेमस सर्व कारणम ठीक है तो

1923
02:17:24,400 --> 02:17:29,120
मैंने आपको क्या कहा मैंने आपको कहा कि अगर इस दुनिया में

1924
02:17:29,120 --> 02:17:33,200
कोई एलन मस्क है जो बहुत अमीर व्यक्ति है यदि मेरा

1925
02:17:33,200 --> 02:17:37,200
उससे कनेक्शन ये सिद्ध नहीं हो रहा है तो मेरा ईश्वर नहीं है

1926
02:17:37,200 --> 02:17:41,680
कि मुझे उसको प्राप्त करना है उसकी पूजा करनी है उसको जाना है

1927
02:17:41,680 --> 02:17:45,760
आपकी जो डेफिनेशन है ना ये वाली जो डेफिनेशन है इससे

1928
02:17:45,760 --> 02:17:50,320
वो आपका गंतव्य सिद्ध नहीं हो रहा उसको गंतव्य के रूप में स्थापित करना है आपको

1929
02:17:50,320 --> 02:17:54,320
अच्छा ये साबित करना है कि ईश्वर मेरा गंतव्य है।

1930
02:17:54,320 --> 02:17:58,400
बहुत इजी है। देखो अगर भगवान ने भगवान

1931
02:17:58,400 --> 02:18:03,440
ने नेचर के लॉस को बनाया इसका मतलब ये होता है कि भगवान इंटेलिजेंट है।

1932
02:18:03,440 --> 02:18:07,600
इससे ये प्रूफ होता है। नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। इससे ये प्रूफ होता है। जैसे

1933
02:18:07,600 --> 02:18:11,760
मैंने पहला बोला ना नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। उससे ठीक है। इंटेलिजेंट है। मान

1934
02:18:11,760 --> 02:18:16,240
लिया। हां। भगवान बहुत इंटेलिजेंट है और अगर भगवान बहुत इंटेलिजेंट

1935
02:18:16,240 --> 02:18:21,280
है तो इन्होंने इस पूरे यूनिवर्स को किसी पपस से बनाया।

1936
02:18:21,280 --> 02:18:25,040
ठीक है? ठीक है?

1937
02:18:25,040 --> 02:18:29,040
यानी कि भगवान का कारण है उसको बनाने का संसार को

1938
02:18:29,040 --> 02:18:33,280
बनाने की। यानी हां संसार को उनका बनाने का कुछ कारण है।

1939
02:18:33,280 --> 02:18:37,680
क्यों? भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने की। हां भगवान को आवश्यकता

1940
02:18:37,680 --> 02:18:42,000
है संसार बनाने की। ये सच है और वो आवश्यक है। मतलब वो पूर्ण नहीं है।

1941
02:18:42,000 --> 02:18:46,720
वो पूर्ण नहीं है। भगवान पूर्ण होते हुए भी आवश्यक है क्योंकि

1942
02:18:46,720 --> 02:18:50,960
जो पूर्ण है इस पूर्ण पूर्ण है उसको किसी चीज का अभाव नहीं होता

1943
02:18:50,960 --> 02:18:55,120
ना। हां लेकिन जो पूर्ण है

1944
02:18:55,120 --> 02:18:59,360
वो अपनी पूर्णता के अंदर ही यानी वो अपनी पूर्णता को अपने

1945
02:18:59,360 --> 02:19:03,520
अंदर ही पूर्ण कर सकता है ना। फॉर एग्जांपल कि अगर भगवान पूर्ण है। ठीक है?

1946
02:19:03,520 --> 02:19:07,600
उनको बाहर से किसी एक्सटर्नल चीज की नहीं जरूरत। इसका मतलब

1947
02:19:07,600 --> 02:19:11,680
है पूर्ण होने का मतलब वो अपने अंदर ही वो सेल्फ सेटिस्फाइड जिसको

1948
02:19:11,680 --> 02:19:15,760
कहते हैं। बाहर से एक्सटर्नल किसी चीज को नहीं जरूरत। यह पूर्ण का शब्द

1949
02:19:15,760 --> 02:19:20,240
का मतलब है। लेकिन खुद के अंदर तो सेटिस्फाइड ही है ना। यानी

1950
02:19:20,240 --> 02:19:22,640
वो अपनी ही एनर्जी बनाते हैं।

1951
02:19:22,640 --> 02:19:26,640
ये जो वर्ल्ड है दुनिया बनाने दुनिया बनाए बिना वो

1952
02:19:26,640 --> 02:19:30,800
सेल्फ सेटिस्फाइड है कि नहीं? है।

1953
02:19:30,800 --> 02:19:34,960
लेकिन दुनिया बनाने में दुनिया बनाने में कोई एक्सटर्नल चीज इनवॉल्व नहीं

1954
02:19:34,960 --> 02:19:39,040
थी। उनके अंदर से ही दुनिया निकली और वो उनके अंदर से दुनिया निकल

1955
02:19:39,040 --> 02:19:43,280
के उन्हीं की सेवा कर रही है। ठीक है? इसीलिए

1956
02:19:43,280 --> 02:19:47,360
मैं कह रहा हूं आवश्यकता थी कि नहीं? मैं ये पूछ रहा हूं आवश्यकता है कि नहीं?

1957
02:19:47,360 --> 02:19:52,080
आप कंधे से वो हाथ डाल लीजिए भाई साहब बगल वाले। हां

1958
02:19:52,080 --> 02:19:56,800
दोबारा आप ये बता रहे हैं कि भगवान की आवश्यकता है कि नहीं? हां।

1959
02:19:56,800 --> 02:20:01,120
हां बिल्कुल है। क्योंकि भगवान ने हमें भी किसी कारण से बनाया क्योंकि वो इंटेलिजेंट

1960
02:20:01,120 --> 02:20:05,200
है। बिना कारण के तो कुछ करते नहीं। ठीक है? उन्होंने अगर हमें किसी

1961
02:20:05,200 --> 02:20:09,520
मैं आपसे पूछ रहा हूं। मैंने आपसे पूछा आपने कहा सृष्टि बनाए

1962
02:20:09,520 --> 02:20:13,520
बिना उनको सेटिस्फाइड थे तो फिर सृष्टि बनाने का कारण क्या रह

1963
02:20:13,520 --> 02:20:18,400
गया? या तो वो सेटिस्फाइड नहीं है।

1964
02:20:18,400 --> 02:20:22,560
अगर हम ये अस्यूम करें कि भगवान सारा

1965
02:20:22,560 --> 02:20:26,640
काम करके अगर हम ये अस्यूम करें कि भगवान

1966
02:20:26,640 --> 02:20:30,720
को सृष्टि बनाने की जरूरत नहीं है सेटिस्फाई होने की तो यह भी

1967
02:20:30,720 --> 02:20:35,520
भगवान के अंदर एक कमी हो जाएगी। क्यों ये ध्यान से सुनिएगा

1968
02:20:35,520 --> 02:20:37,840
क्योंकि हम ये उन पर एक अवरोध लगा

1969
02:20:37,840 --> 02:20:42,160
रहे हैं और वो मैंने नहीं कहा मैंने नहीं कहा कि वो बनाएंगे

1970
02:20:42,160 --> 02:20:46,720
ही नहीं अवरोध नहीं लगा रहा हूं मैं पूछ रहा हूं सृष्टि के बिना

1971
02:20:46,720 --> 02:20:50,880
यदि वो पूर्ण है वो संतुष्ट है तो वो सृष्टि बना क्यों रहे हैं

1972
02:20:50,880 --> 02:20:55,120
मेरे पास इसका उत्तर है आपके पास है कि नहीं कभी नहीं बनाते

1973
02:20:55,120 --> 02:20:59,280
मेरे पास भी इसका उत्तर है वो कभी मैं कहां कह रहा हूं मैं कह रहा हूं बना क्यों रहे हैं आवश्यकता

1974
02:20:59,280 --> 02:21:04,000
क्यों कह रहे हैं आप आवश्यकता पे ही तो बुद्ध ने खंडन किया है आपको पता है

1975
02:21:04,000 --> 02:21:08,000
बुद्ध ने किस आधार पे खंडन किया है सनातन का किस आधार

1976
02:21:08,000 --> 02:21:12,080
पे जो हमने यह कहा कि आवश्यकता है जो आपने ये फैलाया

1977
02:21:12,080 --> 02:21:16,400
आवश्यकता है ईश्वर को यदि आवश्यकता हो जाएगी तो ईश्वर सच्चिदानंद

1978
02:21:16,400 --> 02:21:20,640
कहां से रह जाएगा भाई हां लेकिन

1979
02:21:20,640 --> 02:21:24,800
ईश्वर को अगर आवश्यकता नहीं रहेगी यहां पर है कि ईश्वर में कोई कमी

1980
02:21:24,800 --> 02:21:28,800
नहीं है ये आप मानते हैं ना ईश्वर में कभी कोई कमी नहीं हो सकती इसका तो कोई

1981
02:21:28,800 --> 02:21:32,880
खंडन नहीं है अगर मैं ये मानू कि भगवान ऐसी कोई चीज नहीं है पूरी

1982
02:21:32,880 --> 02:21:37,120
दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है तो भी ये भी तो एक कमी हुई ध्यान

1983
02:21:37,120 --> 02:21:41,120
से सुनिएगा अगर ये मानू ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया

1984
02:21:41,120 --> 02:21:45,200
में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है ये भी तो एक कमी हुई

1985
02:21:45,200 --> 02:21:49,360
कमी ये कमी कहां है ये कमी कहां है भाई मैं स्वयं ही स्वयं

1986
02:21:49,360 --> 02:21:53,280
में वो हूं स्थित प्रज्ञ हूं ये कमी कहां है

1987
02:21:53,280 --> 02:21:57,680
पहली बात तो ये है पहली बात तो ये है कि आपको अगर किसी चीज की जरूरत

1988
02:21:57,680 --> 02:22:01,920
है आप ये मान रहे हैं आप ये मान रहे तो आप कहो ना कि हां आवश्यकता

1989
02:22:01,920 --> 02:22:04,960
है आप ये मानो ना

1990
02:22:04,960 --> 02:22:09,040
एक्सटर्नल की है ना इसलिए है यदि आवश्यकता

1991
02:22:09,040 --> 02:22:13,120
मान रहे हो तो फिर उसको पूर्ण कैसे कह रहे हो देखो मैं आपको डायग्राम

1992
02:22:13,120 --> 02:22:17,360
से समझाता हूं कंप्लीट शब्द का मतलब क्या होता है कंप्लीट शब्द

1993
02:22:17,360 --> 02:22:21,440
का मतलब होता है मतलब आप ये कह रहे हो कि कंप्लीट होते हुए भी उसको आवश्यकता

1994
02:22:21,440 --> 02:22:25,440
है। हां मैं बताता हूं कैसे कंप्लीट शब्द का

1995
02:22:25,440 --> 02:22:30,000
मतलब होता है कि उसमें आवश्यकता है और

1996
02:22:30,000 --> 02:22:34,160
आवश्यकता नहीं है। ये दोनों ही चीजें आनी चाहिए

1997
02:22:34,160 --> 02:22:38,240
तभी वो उसको कंप्लीट कह पाऊंगा। कंप्लीट शब्द

1998
02:22:38,240 --> 02:22:42,240
उल्टा दिख रहा है। आवश्यकता है और आवश्यकता नहीं है। ये उस उन

1999
02:22:42,240 --> 02:22:46,400
कंप्लीट शब्द का ये मतलब है कि है और नहीं है। दोनों एक साथ ट्रू

2000
02:22:46,400 --> 02:22:50,880
होने चाहिए। तभी भगवान कंप्लीट है। आप ये बताइए

2001
02:22:50,880 --> 02:22:55,200
कि जो चीजें भगवान से निकल के आ रही है वो नित्य

2002
02:22:55,200 --> 02:23:00,160
है ना? वो तो वो वो तो नित्य है ना?

2003
02:23:00,160 --> 02:23:05,200
भगवान से जो चीजें निकल के आ रही है वो नित्य है ना शाश्वत है ना

2004
02:23:05,200 --> 02:23:09,440
नित्य है पर वो ट्रांसफॉर्म होती है मैं बताता हूं कैसे बदलने वाली नित्य

2005
02:23:09,440 --> 02:23:13,440
है बदलने वाली नित्य कूटस्थ लक्षण कहते हैं अंदर ही अंदर

2006
02:23:13,440 --> 02:23:17,920
उसमें लक्षण उसमें अपना स्वरूप चेंज होता है ठीक है बदलने वाली नित्य

2007
02:23:17,920 --> 02:23:22,240
यानी कि भगवान से डिफरेंट क्वालिटीज वाली कोई चीज एक्सिस्ट करती

2008
02:23:22,240 --> 02:23:26,320
है ऑब्वियसली एक मिनट और भगवान को उसकी आवश्यकता

2009
02:23:26,320 --> 02:23:30,480
है वो क्वालिटी भगवान से ही आ रही है भगवान से भगवान को उसकी

2010
02:23:30,480 --> 02:23:34,640
आवश्यकता है। भगवान को उसकी आवश्यकता है

2011
02:23:34,640 --> 02:23:39,200
और नहीं भी है। दोनों एक साथ ट्रू है। अगर आप ये कहते हैं कि आवश्यकता

2012
02:23:39,200 --> 02:23:43,200
यानी कि भगवान भगवान यानी कि भगवान है और नहीं भी है।

2013
02:23:43,200 --> 02:23:47,200
दोनों ही बातें हैं। नहीं भगवान भगवान है भी और नहीं भी

2014
02:23:47,200 --> 02:23:51,280
है। और क्या भगवान सुनिए जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता

2015
02:23:51,280 --> 02:23:55,440
नहीं है तो वो सच्चिदानंद है। जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता है

2016
02:23:55,440 --> 02:23:59,440
तो वो सच्चिदानंद नहीं है। तो यानी कि भगवान भगवान नहीं भी है और है भी है

2017
02:23:59,440 --> 02:24:03,920
क्या फिलोसफी है हां तो बताइए भगवान भगवान

2018
02:24:03,920 --> 02:24:08,000
भगवान सच्चिदानंद है कि नहीं भगवान हर मोमेंट

2019
02:24:08,000 --> 02:24:12,080
पर सच्चिदानंद है ऐसी कोई मोमेंट नहीं है यानी कि जब उसको

2020
02:24:12,080 --> 02:24:16,640
आवश्यकता है जब उसको आवश्यकता है तो वो सच्चिदानंद है कि नहीं

2021
02:24:16,640 --> 02:24:20,960
ये आपने बोला कि आपने आवश्यकता को सच्चिदानंद से जोड़ा

2022
02:24:20,960 --> 02:24:25,200
मैं ये कह रहा हूं कि भगवान कंप्लीट है उसमें है और नहीं है दोनों

2023
02:24:25,200 --> 02:24:29,200
है लेकिन मैं मैं हां यही बात

2024
02:24:29,200 --> 02:24:33,040
है। सच्चिदानंद को आवश्यकता से नहीं जोड़ना है। इसलिए

2025
02:24:33,040 --> 02:24:37,040
ये नहीं कहना है कि भगवान ने किसी कारण से ये दुनिया बनाई है।

2026
02:24:37,040 --> 02:24:41,360
भगवान ने अकारण ये दुनिया बनाई है। हमको ये मानना

2027
02:24:41,360 --> 02:24:45,520
पड़ेगा कि ये जो दुनिया है वो भगवान की शक्ति का परिणाम

2028
02:24:45,520 --> 02:24:49,760
मात्र है। बात तो गलत क्या है। भगवान को कोई आवश्यकता

2029
02:24:49,760 --> 02:24:55,040
नहीं है संसार बनाने की। मगर आप कह रहे हो भगवान को आवश्यकता है।

2030
02:24:55,040 --> 02:24:59,120
कारण है नहीं नहीं भी है तो जब जब आप

2031
02:24:59,120 --> 02:25:03,520
कहोगे जब आप कहोगे तो फिर भगवान सिर्फ जब नहीं भी वाले में जाओगे

2032
02:25:03,520 --> 02:25:08,720
तभी भगवान सच्चिदानंद सिद्ध होगा।

2033
02:25:08,720 --> 02:25:12,800
ऐसा क्यों? जब आवश्यकता है तभी अरे जिसको आवश्यकता होती

2034
02:25:12,800 --> 02:25:17,120
है वही तो सच्चिदानंद नहीं है। ये ये रूल

2035
02:25:17,120 --> 02:25:22,800
ये रूल गलत है। इस रूल को आप लिख लीजिए कि ये रूल गलत है।

2036
02:25:22,800 --> 02:25:26,800
तो इसका मतलब आप ये कह रहे हैं कि जिसको आवश्यकता है भी कोई

2037
02:25:26,800 --> 02:25:30,960
वो भी सच्चिदानंद है। यानी कि जिसके अंदर किसी चीज का

2038
02:25:30,960 --> 02:25:35,920
जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद है।

2039
02:25:35,920 --> 02:25:39,920
जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद हो सकता है। क्योंकि

2040
02:25:39,920 --> 02:25:44,080
क्योंकि उसके पास जिस चीज का अभाव है वो उसी से पूर्ण

2041
02:25:44,080 --> 02:25:48,320
हो रही है। अगर मेरे पास पेन का अभाव है

2042
02:25:48,320 --> 02:25:52,400
मैं तब भी सच्चिदानंद हो सकता हूं। अगर ये पेन मेरे ही शरीर से निकला है और

2043
02:25:52,400 --> 02:25:56,480
मैं इसको यूज़ कर रहा हूं। हालांकि अभी नहीं हुआ बट फॉर एग्जांपल ये हाथ हाथ

2044
02:25:56,480 --> 02:26:00,480
तो मेरा ही है ना तो मैं समझ गया क्योंकि वो मेरे से ही

2045
02:26:00,480 --> 02:26:04,720
पूर्ण हो रही है मगर मगर मगर मगर वो जो क्रिया हो रही है ना

2046
02:26:04,720 --> 02:26:10,000
वो जो क्रिया हो रही है उस क्रिया का अभाव है

2047
02:26:10,000 --> 02:26:14,000
वो जो तत्व निकल रहा है आपके अंदर से वो जो तत्व आपके अंदर से निकल

2048
02:26:14,000 --> 02:26:18,160
रहा है वो मान लिया कि वो आपका ही पार्ट है ठीक है जीव

2049
02:26:18,160 --> 02:26:22,400
और प्रकृति मान लिया ठीक है मगर वो जो क्रिया

2050
02:26:22,400 --> 02:26:24,160
हो रही है उसका

2051
02:26:24,160 --> 02:26:28,320
तो अभाव था ना कि वो मैनिफेस्ट हो रही है। दुनिया बन रही

2052
02:26:28,320 --> 02:26:32,320
है। लोग आ रहे हैं, जा रहे हैं। जीव हो रहा है, यह हो रहा है। ये ड्रामा चल रहा

2053
02:26:32,320 --> 02:26:36,320
है। ये जो क्रिया है, मैं तत्व की बात नहीं कर रहा। जो क्रिया है उसका

2054
02:26:36,320 --> 02:26:40,320
तो अभाव मानना पड़ेगा ना। हां। क्रिया का अभाव जो है मैं

2055
02:26:40,320 --> 02:26:44,480
बताता हूं कैसे है और कैसे नहीं है। मैं बताता हूं। ये भी डायग्राम से एक्सप्लेन करूं तो समझ

2056
02:26:44,480 --> 02:26:48,480
आएगा। ये है टाइम। मैंने टाइम जो है ऐसे

2057
02:26:48,480 --> 02:26:51,840
लिख लिया।

2058
02:26:51,840 --> 02:26:55,920
ठीक है? ये है टाइम और भगवान जो है टाइम क्योंकि भगवान

2059
02:26:55,920 --> 02:27:00,240
ने बनाया भगवान टाइम के अंदर भी है और भगवान टाइम के बाहर भी है। क्योंकि

2060
02:27:00,240 --> 02:27:04,400
भगवान भगवान ने टाइम को बनाया इसलिए भगवान इस

2061
02:27:04,400 --> 02:27:08,640
आउट ऑफ टाइम। लेकिन भगवान ने टाइम को बनाया तो भगवान

2062
02:27:08,640 --> 02:27:12,880
टाइम के अंदर भी है। हम तो अगर गॉड को मैं डिफाइन

2063
02:27:12,880 --> 02:27:17,680
करूं तो गॉड इज आउट ऑफ टाइम्स एंड इन ऑफ टाइम आल्सो।

2064
02:27:17,680 --> 02:27:21,760
ठीक है? तो दो चीजें हो गई। एक हो गया इन टाइम गॉड और एक हो गया

2065
02:27:21,760 --> 02:27:26,480
आउट ऑफ टाइम गॉड। जब आउट ऑफ टाइम गॉड वो लेते हैं तो उनको

2066
02:27:26,480 --> 02:27:30,800
क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती है। लेकिन जब क्यों? क्योंकि

2067
02:27:30,800 --> 02:27:35,040
टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। क्रिया सारी टाइम के अंदर में होती है। भगवान

2068
02:27:35,040 --> 02:27:39,120
का जो सबसे परम रूप है वो इन टाइम वाला है

2069
02:27:39,120 --> 02:27:39,620
कि

2070
02:27:39,360 --> 02:27:42,480
आउट ऑफ टाइम वाला है? वो आउट ऑफ टाइम वाला

2071
02:27:42,480 --> 02:27:47,120
है। आउट ऑफ टाइम वाला है। आउट ऑफ टाइम वाला है।

2072
02:27:47,120 --> 02:27:51,280
वो कृष्ण का फॉर्म है। उसका रूप है। उसका रूप मैं अभी आपसे

2073
02:27:51,280 --> 02:27:54,640
फॉर्म पे बात कर रहा हूं। क्या

2074
02:27:54,640 --> 02:27:58,800
अभी मैं बात ये कर रहा हूं कि आपने कहा वो आउट ऑफ टाइम वाला है और वो

2075
02:27:58,800 --> 02:28:03,040
सच्चिदानंद है। उसको संसारें

2076
02:28:03,040 --> 02:28:06,880
वो इन टाइम में भी प्रेजेंट है और आउट ऑफ टाइम में भी प्रेजेंट है। फॉर एग्जांपल ठीक है?

2077
02:28:06,880 --> 02:28:11,840
तो जो ये संसार बनता है वो इन टाइम में बनता है कि आउट ऑफ टाइम में बनता है?

2078
02:28:11,840 --> 02:28:16,320
यहां पर तो इन टाइम है। हम समय के अंदर है। हम अभी समय के बाहर नहीं है। सिंपल

2079
02:28:16,320 --> 02:28:20,560
तो यानी वो जो जो संसार बनाने वाले भगवान कृष्ण है वो इन

2080
02:28:20,560 --> 02:28:24,720
टाइम वाले हैं। संसार बनाने वाले जो कृष्ण है

2081
02:28:24,720 --> 02:28:29,120
वो आउट ऑफ कृष्ण आउट ऑफ टाइम है। कृष्ण से विष्णु आते हैं। गर्भोधक्षा

2082
02:28:29,120 --> 02:28:33,360
विष्णु एस पर श्रीमद् भागवतम। गर्भोदक्षा विष्णु अरे भैया तो फिर आप फिर

2083
02:28:33,360 --> 02:28:37,360
घूम के वहीं आ गए। मैं पूछ रहा हूं उनको आवश्यकता क्या है? क्या

2084
02:28:37,360 --> 02:28:41,520
आवश्यकता है? आवश्यकता है रस।

2085
02:28:41,520 --> 02:28:45,840
यानी रस नहीं था ना उनके पास।

2086
02:28:45,840 --> 02:28:49,920
रस जो चीज है ना रस चीज को अगर आप समझेंगे ना रस चीज का

2087
02:28:49,920 --> 02:28:54,080
मतलब होता है मैं भाई साहब मैं सोच रहा हूं रस था कि नहीं था। भैया देखो दो

2088
02:28:54,080 --> 02:28:58,640
घंटे 28 मिनट हो चुके हैं। मुझे रस नहीं आ सकता।

2089
02:28:58,640 --> 02:29:02,640
दो लोग तो नहीं है ना? अरे

2090
02:29:02,640 --> 02:29:06,720
मेरे भाई तो यह मान लो ना कि रस नहीं था। मैं पूछ क्या रहा हूं रस था कि नहीं

2091
02:29:06,720 --> 02:29:10,800
था? आप कह रहे हो कि नहीं था सब कुछ था मगर रस नहीं था मगर फिर भी वो

2092
02:29:10,800 --> 02:29:15,840
सच्चिदानंद था। आप कहो ना अभाव था।

2093
02:29:15,840 --> 02:29:19,920
रस का भाव था हां था। था रस का

2094
02:29:19,920 --> 02:29:24,000
अभाव हो गया ना? भगवान में किसी चीज का अभाव नहीं है। ये

2095
02:29:24,000 --> 02:29:28,160
भी तो एक इनकंप्लीटनेस हो गई ना। भगवान में ऐसी कोई चीज नहीं है दुनिया में जिसका

2096
02:29:28,160 --> 02:29:32,160
भगवान में अभाव नहीं है। यह भगवान को इनकंप्लीट बनाता है। ऐसी एक नहीं

2097
02:29:32,160 --> 02:29:36,160
बनाता है। नहीं बनाता है क्योंकि भगवान है ही वही जो भगवान है

2098
02:29:36,160 --> 02:29:40,480
ही वही सुनिए भगवान की धारणा ही यहीं से शुरू होती है कि जो इनकंप्लीट

2099
02:29:40,480 --> 02:29:44,720
जिसमें किसी चीज का अभाव ना हो। सच्चिदानंद अगर

2100
02:29:44,720 --> 02:29:48,720
उसमें अगर उसमें रस का अभाव मान लेंगे ना तो उसके

2101
02:29:48,720 --> 02:29:52,800
आनंद में बाध्यता आ जाएगी। नहीं नहीं आनंद

2102
02:29:52,800 --> 02:29:57,120
है रस नहीं है आनंद जो है वो रस से अलग है ठीक है सच्चिदानंद

2103
02:29:57,120 --> 02:30:00,960
में जो चीज है ना वो आनंद ये रस शब्द ही अलग है ठीक है

2104
02:30:00,960 --> 02:30:05,440
इन तीनों को आप मिक्स मत करिएगा आनंद में अभाव कभी नहीं आता

2105
02:30:05,440 --> 02:30:09,680
रस में अभाव कभी आता है कभी नहीं आता रस का अभाव था ना उनके

2106
02:30:09,680 --> 02:30:13,840
पास रस से क्या आता है भाई साहब रस रस से क्या आता है

2107
02:30:13,840 --> 02:30:17,920
रिलेशनशिप के अंदर एक्सचेंजेस रस से भी एक आनंद

2108
02:30:17,920 --> 02:30:22,320
ही आता है ना हां लेकिन यह वाला आनंद है यह ब्रह्मानंद

2109
02:30:22,320 --> 02:30:26,560
तो रथ से आने वाले आनंद का आनंद का अभाव था ना

2110
02:30:26,560 --> 02:30:30,640
हां प्लेजर ड्यू टू रिलेशनशिप अभाव था अभाव था तो जब

2111
02:30:30,640 --> 02:30:35,520
अभाव था तो उसका आनंद बाधित है ना

2112
02:30:35,520 --> 02:30:40,320
उनका आनंद बाधित है हां

2113
02:30:40,320 --> 02:30:44,400
लेकिन उनको एक्सटर्नल सोर्स की जरूरत नहीं पड़ी ना बाधित शब्द का मतलब क्या होता है अरे

2114
02:30:44,400 --> 02:30:48,480
भाई एक्सटर्नल मैं कह रहा हूं अगर मेरे को खुजली करने

2115
02:30:48,480 --> 02:30:52,800
की जरूरत पड़ गई अगर और एक्सटर्नल से वो नहीं मैंने खुद ही खुजली को खुजा

2116
02:30:52,800 --> 02:30:57,280
लिया तो इसका मतलब मैं भगवान हूं। नहीं

2117
02:30:57,280 --> 02:31:03,280
क्या भाई मुझे खुजली नहीं होनी चाहिए

2118
02:31:04,320 --> 02:31:09,920
समझ नहीं आया कोई बात नहीं अच्छा था

2119
02:31:09,920 --> 02:31:14,080
देखो गॉड जो है उनको अपनी प्रेजेंस को फिल करने के लिए और

2120
02:31:14,080 --> 02:31:18,240
किसी की नीड नहीं है। ठीक है? बाहर से किसी चीज की नीड नहीं है। बात

2121
02:31:18,240 --> 02:31:22,400
ये नहीं है। मैं मैं तत्व की बात नहीं कर रहा हूं कि उनको पास तत्व का अभाव

2122
02:31:22,400 --> 02:31:27,200
है कि नहीं। मैं जान रहा हूं आप कहां जा रहे हो। मैं सामग्री की बात नहीं कर रहा हूं।

2123
02:31:27,200 --> 02:31:32,000
मैं क्रिया की बात कर रहा हूं। किसी क्रिया की आवश्यकता थी ना उनको।

2124
02:31:32,000 --> 02:31:36,320
सामग्री की आवश्यकता नहीं थी। क्रिया की आवश्यकता थी ना।

2125
02:31:36,320 --> 02:31:40,320
तो उससे साबित क्या होता है? अगर आवश्यकता थी तो। उससे साबित यह होता है कि आपकी

2126
02:31:40,320 --> 02:31:44,720
फिलोसफी के अनुसार भगवान सच्चिदानंद सिद्ध नहीं हो रहे। आपने कहा था अकाट

2127
02:31:44,720 --> 02:31:48,720
है हमारी। हम काट रहे हैं उसको जिसको क्रिया की आवश्यकता है वो सच्चिदानंद

2128
02:31:48,720 --> 02:31:53,200
नहीं है। इसमें कोई रिलेशनशिप ही नहीं है। बिल्कुल रिलेशनशिप है।

2129
02:31:53,200 --> 02:31:57,440
जिस क्रिया का मेरे अंदर अभाव है, जिस क्रिया के परिणाम का मेरे अंदर अभाव

2130
02:31:57,440 --> 02:32:01,440
है और मैं मेरे को उस क्रिया की आवश्यकता है तो उसका अभाव मेरे

2131
02:32:01,440 --> 02:32:05,520
अंदर मानना पड़ेगा तो मेरे आनंद की नित्यता सिद्ध नहीं होगी। भले ही मैं अपने

2132
02:32:05,520 --> 02:32:08,400
से ही खुजा लूं।

2133
02:32:08,400 --> 02:32:12,400
मैं ये देखो मैं ऐसे बोल रहा हूं कि भगवान जो है वो

2134
02:32:12,400 --> 02:32:16,400
दो पाथ से आनंद ले रहे हैं क्योंकि वो दोनों पाथ से आनंद ले रहे हैं

2135
02:32:16,400 --> 02:32:20,400
ना एक एक आनंद वाला है रस वाला आनंद एक

2136
02:32:20,400 --> 02:32:24,960
आनंद वाला है रस वाला आनंद मैं कह रहा हूं रस वाले आनंद

2137
02:32:24,960 --> 02:32:29,040
की उनको जरूरत है कि नहीं हां तो जरूरत होने

2138
02:32:29,040 --> 02:32:33,120
से उनका भगवान साबित होना कैसे हटता है अभाव है ना दुनिया में

2139
02:32:33,120 --> 02:32:37,200
कुछ ऐसा तत्व है जो उनके पास नहीं है जो

2140
02:32:37,200 --> 02:32:41,520
उनके आनंद में है। भगवान के अंदर अभाव

2141
02:32:41,520 --> 02:32:45,680
होना यह उनकी पूर्णता है।

2142
02:32:45,680 --> 02:32:49,840
वाह बहुत बढ़िया। भगवान के अंदर अभाव होना

2143
02:32:49,840 --> 02:32:54,080
है। भगवान के अंदर अभाव होना वो उनकी पूर्णता है। वाह

2144
02:32:54,080 --> 02:32:58,160
बहुत बढ़िया। बहुत अच्छा। बहुत बढ़िया। बहुत अच्छी बात।

2145
02:32:58,160 --> 02:33:02,400
बिल्कुल सही है। अब आप ये बता दीजिए कि भगवान के अंदर अभाव होना

2146
02:33:02,400 --> 02:33:06,720
ये उनकी एक मिनट। एक मिनट। अब आप अब आप ये मैं बता रहा मैं पूछ रहा हूं। भगवान

2147
02:33:06,720 --> 02:33:10,720
के अंदर अभाव होना यह उनकी पूर्णता है। यह शास्त्र में कहां लिखा

2148
02:33:10,720 --> 02:33:14,720
है? भगवान के अंदर ये जो पूर्ण वाला

2149
02:33:14,720 --> 02:33:18,720
श्लोक था एक बार निकालिएगा। निकालता हूं। एक मिनट रुकिए। बहुत ज्यादा

2150
02:33:18,720 --> 02:33:22,960
टाइम हो गया सर। मैं जल जाता हूं। बहुत कुटाई होगी। सॉरी।

2151
02:33:22,960 --> 02:33:24,640
हां ठीक है। कल आ जाना।

2152
02:33:24,640 --> 02:33:28,960
कल क्या मतलब जब दोबारा हमको जब भी मौका मिलेगा क्योंकि कुछ और लोगों के भी शेड्यूल

2153
02:33:28,960 --> 02:33:33,360
है। मिनट लेकिन इसमें एग्री

2154
02:33:33,360 --> 02:33:37,440
करते हैं कि आज तक फिलॉसफी में कोई डिफिट नहीं हुआ

2155
02:33:37,440 --> 02:33:41,760
है। इसीलिए दो हो तो रहे हो यार। तुमने ये कह दिया भगवान के अंदर अभाव

2156
02:33:41,760 --> 02:33:45,840
है। बताओ तो अभाव होने का मतलब ये थोड़ी भगवान पहले तो ये बता दो कि

2157
02:33:45,840 --> 02:33:49,840
आपने लिखा कहां पे है? कहां लिखा? पहले तुम्हें ये मालूम आप अपना ओपिनियन दे

2158
02:33:49,840 --> 02:33:54,240
रहे हो कि आपके आगे इस का क्लेम है। भगवान के अंदर अभाव

2159
02:33:54,240 --> 02:33:58,560
हां भगवान के अंदर अभाव होना भगवान की पूर्णता है। तो वो वो आप

2160
02:33:58,560 --> 02:34:02,640
पहले तो मैं कंफर्म कर लूं इस का क्लेम है कि नहीं? आप इस का क्लेम दिखा दो। ये

2161
02:34:02,640 --> 02:34:06,800
पहले तो ये कन्फर्म कर फिर शास्त्र में देखेंगे। जो मैंने पूर्णम

2162
02:34:06,800 --> 02:34:10,960
वाला श्लोक कोट करा था जिसको मैं शुरू नहीं करूंगा क्योंकि वो फिर से आप बोलेंगे

2163
02:34:10,960 --> 02:34:14,960
कि आपने जने नहीं पहना है। ठीक है मैं ब्राह्मण नहीं हूं। कोई बात

2164
02:34:14,960 --> 02:34:18,960
नहीं। लेकिन नहीं तो आप आप मुझे नंबर बता दो। उसका आपको पता है

2165
02:34:18,960 --> 02:34:23,200
तो एक बार नंबर बताइए। एक मिनट बहुत लेट हो गया वैसे।

2166
02:34:23,200 --> 02:34:28,800
आपको एक इंफॉर्मेशन दे दूं। केवल ब्राह्मणी वेद पढ़ सकता है। ये गलत है।

2167
02:34:28,800 --> 02:34:33,040
जो वैश्य होते हैं और जो क्षत्रिय होते हैं वो भी पढ़ सकते हैं। अच्छा

2168
02:34:33,040 --> 02:34:37,360
दैट्स ग्रेट। शद्र नहीं पढ़ सकता। और कलयुग में सारे शद्र है। कलयुग

2169
02:34:37,360 --> 02:34:40,160
शद्र संभव कलयुग

2170
02:34:40,160 --> 02:34:44,400
में सभी स्त्रियां व्यभचारणी हो जाएंगी। तो क्या आप अपनी माताओं और बहनों

2171
02:34:44,400 --> 02:34:48,240
को मानते हैं? व्यभचारी

2172
02:34:48,240 --> 02:34:52,240
कलयुग में सारी स्त्रियां स्त्रियां व्यभचारणी हो जाएंगी।

2173
02:34:52,240 --> 02:34:56,400
पराय पुरुषों से बातें किया करेंग रामायण महत्व में लिखा

2174
02:34:56,400 --> 02:35:00,560
हुआ है यहां कलयुग के यहां हो जाएंगी

2175
02:35:00,560 --> 02:35:04,640
बोला है होंगी बोला है यहां कलयुग केसेट यानी के स्टार्ट से बोला है कलयुग

2176
02:35:04,640 --> 02:35:08,640
स्टार्ट हुआ था 5000 साल पहले जब कृष्ण ने लीला विराम करी थी उसी मोमेंट पे जैसे

2177
02:35:08,640 --> 02:35:13,280
राम जी ने विराम की तो त्रेता युग स्टार्ट हुआ स्टार्ट हुआ

2178
02:35:13,280 --> 02:35:17,440
आपने है कहां पे लिखा है जरा दिखाइए है सारे सूत्र

2179
02:35:17,440 --> 02:35:21,680
है संभव का जो अ वाला पार्ट है ना मैं कह रहा हूं लिखा

2180
02:35:21,680 --> 02:35:25,840
कहां पे पहले ये बता दो आप सारे शद्र है

2181
02:35:25,840 --> 02:35:29,760
सारेद्र है

2182
02:35:29,760 --> 02:35:33,920
इसके साथ संभव वाला ये भागवतम का श्लोक है कल

2183
02:35:33,920 --> 02:35:37,920
शद्र कलयुग में सारे शद्र है ये भागवतम मैं साथ में वो पूर्ण वाला पहले

2184
02:35:37,920 --> 02:35:40,640
कोट कर

2185
02:35:40,640 --> 02:35:44,880
पहले वो कोट कर हां पहले वो पूर्णम कोट कर लेता हूं उसके बाद मैं शायद

2186
02:35:44,880 --> 02:35:49,600
जा सकूं ऑब्वियसली मैं

2187
02:35:49,600 --> 02:35:53,680
रिसाइट ना करूं तो शायद ठीक है। इसका नंबर कैसे

2188
02:35:53,680 --> 02:35:59,680
बताते? अरे पूर्णम पूर्णिम में आप बता रहे हो अभाव होता है भगवान में।

2189
02:36:01,920 --> 02:36:07,920
मैं कह रहा हूं पूर्ण में अभाव लिखा है भगवान में।

2190
02:36:09,120 --> 02:36:12,480
एक मिनट एक मिनट।

2191
02:36:12,480 --> 02:36:16,640
हां इसमें इसमें एक्चुअली ये लिखा है। पूर्णस मैं पूरा नहीं पढ़ रहा। आधा

2192
02:36:16,640 --> 02:36:22,640
पढ़ रहा हूं। ऑफेंस। अरे भाई आप हिंदी पढ़ो ना उसकी। अच्छा

2193
02:36:23,360 --> 02:36:27,360
मतलब पूर्ण का पूर्ण में से चला जाएगा तो पूर्ण बचेगा ये

2194
02:36:27,360 --> 02:36:31,680
है ये है मैं बताता हूं ये कहां लिखा है भाई भगवान में भी अभाव

2195
02:36:31,680 --> 02:36:37,360
होता है

2196
02:36:37,360 --> 02:36:41,440
पूर्ण से पूर्ण चला जाएगा तो पूर्ण बचेगा भाई साहब पूर्ण

2197
02:36:41,440 --> 02:36:45,600
करिए आप एक काम करिए कल ये ले आइएगा कि कलयुग

2198
02:36:45,600 --> 02:36:49,760
में सभी शद्र है और आता हूं ये तो बहुत छोटा

2199
02:36:49,760 --> 02:36:53,760
नहीं नहीं अब क्योंकि फिर उसमें एक लंबी चर्चा ख जाएगी। मेन

2200
02:36:53,760 --> 02:36:59,280
मुद्दा क्या है कि भगवान में अभाव है। भगवान में अभाव होता है।

2201
02:36:59,280 --> 02:37:03,920
ये तो लॉजिकली भी प्रूवेबल है। लॉजिकली प्रूवेबल है ही नहीं

2202
02:37:03,920 --> 02:37:08,000
क्योंकि आप आप किसी भी तरीके से भगवान

2203
02:37:08,000 --> 02:37:12,480
को सिद्धि नहीं कर पाओगे। 7.9.10 है

2204
02:37:12,480 --> 02:37:17,200
श्रीमद् भागवतम में 7.9 ये लिख सकते हैं 7.9.10

2205
02:37:17,200 --> 02:37:19,360
कल शद्र संभवा इसमें है और

2206
02:37:19,360 --> 02:37:23,440
भगवान में अभाव होना ये भी भगवान की कंप्लीटनेस

2207
02:37:23,440 --> 02:37:27,600
है। आप इसको समझिए। भगवान में अभाव

2208
02:37:27,600 --> 02:37:32,000
होना यानी भगवान का भगवान ना होना यह उसकी कंप्लीटनेस है।

2209
02:37:32,000 --> 02:37:36,400
एक्चुअली हां अब बिल्कुल भगवान का भगवान ना होना भगवान की कंप्लीटनेस

2210
02:37:36,400 --> 02:37:37,680
है। हां

2211
02:37:37,680 --> 02:37:41,840
कि यानी थोड़ी देर के लिए यानी भगवान में अनित्यता ना होना भगवान

2212
02:37:41,840 --> 02:37:46,320
की कंप्लीटनेस है। हां मैं बताता हूं कैसे

2213
02:37:46,320 --> 02:37:50,480
मैं बताता हूं। कैसे जैसे मैंने ये डायग्राम ये डायग्राम बनाया ना मैंने

2214
02:37:50,480 --> 02:37:54,480
भगवान इन टाइम भी है और आउट ऑफ टाइम भी है। अगर वो इन टाइम है तो वो

2215
02:37:54,480 --> 02:37:58,720
कभी मरते हैं यानी वो नित्य नहीं है। मरते हैं इन द सेंस आप उसको

2216
02:37:58,720 --> 02:38:02,720
शाश्वत वाले वे में मत लीजिएगा कि कभी मरते हैं जैसे हम मर रहे हैं वैसे नहीं।

2217
02:38:02,720 --> 02:38:06,800
मतलब मगर मेरे भाई मेरे भाई जब वो एंड

2218
02:38:06,800 --> 02:38:11,120
टाइम में है तब भी वो वहां पर हैं

2219
02:38:11,120 --> 02:38:15,120
जब वो एंड टाइम में है तो तो वहां पर हमको लेना ये पड़ेगा कि

2220
02:38:15,120 --> 02:38:19,440
वो उनकी लीला मात्र है दोबारा क्या

2221
02:38:19,440 --> 02:38:23,440
हां तब हमको लेना पड़ेगा जो एंड टाइम वाली बात है वो लीला

2222
02:38:23,440 --> 02:38:27,600
मात्र है। हम अगर उनको स्वरूप से ही बदलने वाला मान

2223
02:38:27,600 --> 02:38:31,680
लेंगे। उनके स्वरूप में ही यह मान लेंगे कि वह जो है क्या

2224
02:38:31,680 --> 02:38:35,840
कहते हैं यह वो जो है भगवान होने को छोड़ रहे हैं। स्वरूप

2225
02:38:35,840 --> 02:38:40,000
को ही मान लेंगे। वो उनकी लीला नहीं मानेंगे। वास्तविकता में अपने स्वरूप

2226
02:38:40,000 --> 02:38:44,000
से बदलने वाला मान लेंगे तो फिर तो उनकी भगवान की शाश्वतता ही

2227
02:38:44,000 --> 02:38:48,240
भंग हो जाएगी। भगवान तत्व सबसे पहले आप ये समझ लीजिए।

2228
02:38:48,240 --> 02:38:52,640
सबसे पहले आप ये समझ लीजिए कि भगवान है कौन? जो शाश्वत सनातन

2229
02:38:52,640 --> 02:38:53,140
है

2230
02:38:52,880 --> 02:38:57,760
वो भगवान है। अब आप कह रहे हैं कि अगर उसमें अगर उसमें जो है

2231
02:38:57,760 --> 02:39:01,840
अगर उसमें अशाश्वतता नहीं है तो भगवान कैसे वो उसका स्वरूप भूत

2232
02:39:01,840 --> 02:39:06,080
लक्षण है भाई। वो उनका स्वरूप

2233
02:39:06,080 --> 02:39:10,320
बोध लक्षण है। हां सच्चिदानंद उनका स्वरूप

2234
02:39:10,320 --> 02:39:14,320
भूत लक्षण है। अगर उसको ही आप उससे छीन लोगे कि थोड़ी देर

2235
02:39:14,320 --> 02:39:18,400
के लिए वास्तविकता में वो बदल जाते हैं। इन टाइम में वो लीला कर लेते बात

2236
02:39:18,400 --> 02:39:22,480
अलग है। मगर उनका बदलना भी उनके अंदर कोई कमी

2237
02:39:22,480 --> 02:39:28,080
नहीं है। ये साबित कर रहा है। मैं ये कह रहा हूं। भगवान का

2238
02:39:28,080 --> 02:39:32,080
नाम बदलना। इसका मतलब उनका स्वरूप नित्य नहीं है।

2239
02:39:32,080 --> 02:39:36,320
होकर भी नहीं है। और ज्यादा इन दोनों में ज्यादा ज्यादा सही

2240
02:39:36,320 --> 02:39:40,480
वाला जो है वो ये है कि नित्य है। लेकिन अगर मैं ये बोलूं कि भगवान का ऐसा

2241
02:39:40,480 --> 02:39:44,560
कोई स्वरूप ही नहीं है जो कभी नित्य नहीं जो नॉन नित्य

2242
02:39:44,560 --> 02:39:48,720
है। यानी भगवान में कमी हो गई कि भगवान में कोई नॉन नित्य स्वरूप नहीं है।

2243
02:39:48,720 --> 02:39:53,040
तो भगवान में एक नॉन नित्य स्वरूप है और वो है जो गर्भदक्षा

2244
02:39:53,040 --> 02:39:57,280
विष्णु वाली जो फॉर्म्स है और नित्य स्वरूप भी है। कृष्ण वाली जो तो इसका मतलब आप जिसे

2245
02:39:57,280 --> 02:40:01,600
भगवान मानते हैं वो बदलता भी है।

2246
02:40:01,600 --> 02:40:06,640
वो बदलता है लेकिन वो शाश्वत नहीं है।

2247
02:40:06,640 --> 02:40:08,000
हम जिसे भगवान मानते हैं

2248
02:40:08,000 --> 02:40:13,120
वो शाश्वत है लेकिन उससे बदलने वाली चीजें आती है।

2249
02:40:13,120 --> 02:40:17,200
तो आप आप पहले डिसाइड कर लो बोलना क्या है? वो बदलता

2250
02:40:17,200 --> 02:40:22,400
है कि नहीं बदलता कि उससे बदलने वाली चीजें आती है। हां जी।

2251
02:40:22,400 --> 02:40:26,880
आप 10 बातें बोल देते हो। हमको एक भी समझ नहीं आई यार

2252
02:40:26,880 --> 02:40:30,880
यार इतनी देर अब मुझे जाना पड़ेगा यार

2253
02:40:30,880 --> 02:40:34,960
क्या हमको एक भी समझ नहीं आई यार मुझे एक भी

2254
02:40:34,960 --> 02:40:39,120
समझ में नहीं आई यार डायग्राम बना के दिखा दिया यार ये

2255
02:40:39,120 --> 02:40:43,680
यार यार मत करिए आप प्लीज हां

2256
02:40:43,680 --> 02:40:47,920
ये आपकी जो फिर मैं ऐसा कहूंगा फिर आपको बुरा लगेगा अच्छा

2257
02:40:47,920 --> 02:40:52,160
चल रहा है हां सर सॉरी सॉरी ये आपकी असफलता का द्योतक है

2258
02:40:52,160 --> 02:40:56,240
कि आप किसी तरीके से हंस के यार करके जो है ये प्रूफ करना चाह

2259
02:40:56,240 --> 02:41:00,320
रहे हैं कि आपने समझाया बहुत अच्छा मगर सामने वाला समझ नहीं पाया। आप

2260
02:41:00,320 --> 02:41:04,560
कह रहे हैं कि भगवान होना तब सिद्ध होगा किसी का जब वो भगवान ना होके

2261
02:41:04,560 --> 02:41:08,720
दिखा दे। वाह भगवान होना तब सिद्ध होगा जब वो

2262
02:41:08,720 --> 02:41:12,720
भगवान है और नहीं है एक साथ हो सके। दोबारा

2263
02:41:12,720 --> 02:41:16,960
भगवान होना तब सिद्ध होगा जब वो भगवान है और नहीं है एक

2264
02:41:16,960 --> 02:41:20,960
तो जिस समय वो भगवान नहीं होगा अगर वो भगवान नहीं होने वाली

2265
02:41:20,960 --> 02:41:23,200
स्टेज में जाता है

2266
02:41:23,200 --> 02:41:27,200
अगर वो भगवान नहीं होने वाली स्टेज में जा रहा है जिस समय जैसा कि आप मान

2267
02:41:27,200 --> 02:41:31,200
रहे हैं तो उस समय भगवान उस समय भगवान रह जाएगा कि

2268
02:41:31,200 --> 02:41:34,160
नहीं रह जाएगा

2269
02:41:34,160 --> 02:41:38,800
मैं बताता हूं ना कैसे नहीं रहेगा और कैसे रहेगा ये भी

2270
02:41:38,800 --> 02:41:43,440
क्वालिटेटिवली और क्वांटिटेटिवली क्वालिटेटिवली रह जाएगा। क्वांटिटेटिवली

2271
02:41:43,440 --> 02:41:47,520
नहीं रहेगा। बताइए खोल के बताइए इसको खोलिए जरा।

2272
02:41:47,520 --> 02:41:51,840
खोलिए। हां। क्वालिटेटिवली फॉर एग्जांपल समुद्र की जो बूंद

2273
02:41:51,840 --> 02:41:55,920
होती है वो भी साल्टी होती है। साल्टी जो है टेस्ट की चीज है। है ना? अरे

2274
02:41:55,920 --> 02:42:00,320
तो वही तो मैं कह रहा हूं कि वो अपने स्वरूप से जो सच्चिदानंद

2275
02:42:00,320 --> 02:42:04,560
स्वरूप है शाश्वत उसमें रहते ही है। वो लीला पूर्वक जो है उसमें

2276
02:42:04,560 --> 02:42:08,720
रहते हुए भी वो लीला पूर्वक ऐसे रूप धारण करते हैं जो प्रकट

2277
02:42:08,720 --> 02:42:13,120
और अप्रकट होते हैं। तब तो ठीक है। मगर आप कहते उनका

2278
02:42:13,120 --> 02:42:17,200
मगर जो आप अगर यह क्लेम करेंगे कि जो उनका परम लक्ष्य जो हमारा

2279
02:42:17,200 --> 02:42:21,200
परम लक्ष्य स्वरूप है वो भी अपने भगवान होने से बदल

2280
02:42:21,200 --> 02:42:25,280
जाता है सच्चिदानंद से बदल जाता है जो स्वयं की संतुष्टि से बाहर

2281
02:42:25,280 --> 02:42:29,360
निकलता है असंतुष्ट भी हो जाता है वो तो फिर हमें मानना पड़ेगा

2282
02:42:29,360 --> 02:42:33,520
कि उसमें नित्यता नहीं है उसमें शाश्वत नहीं है वो फिर हमारा परम लक्ष्य सिद्ध

2283
02:42:33,520 --> 02:42:37,760
नहीं होगा क्योंकि अगर आप ये मानते हैं कि भगवान कभी असंतुष्ट नहीं होते

2284
02:42:37,760 --> 02:42:38,320
तो फिर आपको

2285
02:42:38,320 --> 02:42:42,320
यह मानना पड़ेगा कि भगवान में कोई कमी है और वो कमी है

2286
02:42:42,320 --> 02:42:46,640
कि भगवान कभी असंतुष्ट नहीं होते। अरे भैया ऐसा भगवान किसको चाहिए

2287
02:42:46,640 --> 02:42:50,720
जो भगवान ना होके दिखाए? ये आप किसको

2288
02:42:50,720 --> 02:42:53,760
चाहिए की बात कर रहे हैं। मैं पूर्ण वाला श्लोक करूं

2289
02:42:53,760 --> 02:42:59,040
तो पूर्ण वाला श्लोक एक्चुअली ये प्रूफ कर रहा है कि भगवान कंप्लीट है और कंप्लीट

2290
02:42:59,040 --> 02:43:03,040
भगवान कंप्लीट है तो भगवान कंप्लीट है तो वो तब कंप्लीट है

2291
02:43:03,040 --> 02:43:07,440
जब वो कंप्लीट है। आप कह रहे हो वो इनकंप्लीट होंगे तब वो कंप्लीट होंगे।

2292
02:43:07,440 --> 02:43:11,520
इनकंप्लीट होना भी उनकी कंप्लीटनेस को एक्चुअली ग्लोरिफाई

2293
02:43:11,520 --> 02:43:15,760
करता है। तो भगवान अगर वो भगवान ना होकर भगवान

2294
02:43:15,760 --> 02:43:20,000
सुनिए सुनिए सुनिए मैं आपको बता रहा हूं। मान लीजिए मान

2295
02:43:20,000 --> 02:43:24,000
लीजिए ये भगवान है। इधर देखिए इधर देखिए ये मान लीजिए भगवान है। अब

2296
02:43:24,000 --> 02:43:28,000
इन्होंने अपने इस स्वरूप को नष्ट कर दिया। ये दिखा

2297
02:43:28,000 --> 02:43:32,160
दिया मैं नष्ट भी होता हूं। टाइम के बाहर कुछ नष्ट नहीं होता। भाई मैंने टाइम बताया

2298
02:43:32,160 --> 02:43:36,560
ना टाइम यानी कि वो रूप सात्वत है वो अनित्यता

2299
02:43:36,560 --> 02:43:40,560
नहीं है उसमें अच्छा चलो ठीक है वो नष्ट नहीं होता एक मिनट एक मिनट नष्ट ना होने

2300
02:43:40,560 --> 02:43:44,720
का भाव है एक मिनट फिर नष्ट ना होने का भाव है आपके लॉजिक को

2301
02:43:44,720 --> 02:43:49,040
ले तो बाहर है इसलिए पर नष्ट यानी कि भगवान में जो चेंजेस

2302
02:43:49,040 --> 02:43:53,840
आ रहे हैं वो अंदर आ रहे हैं। उनका जो परम रूप है वो बना हुआ है लगातार

2303
02:43:53,840 --> 02:43:57,840
टाइम के बाहर तो भूख तो वही हो गई। उसी को मैं लीला कह रहा हूं। उसी

2304
02:43:57,840 --> 02:44:01,920
को टाइम टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो। उसी को तो मैं

2305
02:44:01,920 --> 02:44:05,920
लीला कह रहा हूं भाई। हां मैं भी उसी को उसी को आप

2306
02:44:05,920 --> 02:44:08,800
टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो। कृष्ण का

2307
02:44:08,800 --> 02:44:12,960
रूप शाश्वत है। क्या दिक्कत है? शाश्वत है। हो गया। परम

2308
02:44:12,960 --> 02:44:17,680
रूप शाश्वत है। हो गया। क्लियर है? बदलता नहीं है।

2309
02:44:17,680 --> 02:44:21,760
बदलता नहीं है। किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। यहां दो

2310
02:44:21,760 --> 02:44:25,760
चीजें लेना। टाइम भाई साहब देखिए मैं मैं बार-बार आप ना खिचड़ी पका रहे

2311
02:44:25,760 --> 02:44:29,920
हैं। बहुत टाइम हो चुका है। प्लीज नहीं पका रहा। आप समझे नहीं मैं इसलिए समझा रहा हूं।

2312
02:44:29,920 --> 02:44:33,920
मैं समय आप जो है चार तरह की बातें करते भाई अभी

2313
02:44:33,920 --> 02:44:38,720
टाइम के अभी सुनिए अभी टाइम के बाहर वाला रूप शाश्वत है

2314
02:44:38,720 --> 02:44:42,720
टाइम के अंदर वो चेंज होता है ना है टाइम के बाहर वाला

2315
02:44:42,720 --> 02:44:47,280
शाश्वत है ठीक है टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है

2316
02:44:47,280 --> 02:44:51,360
टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है टाइम के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन होता है ये शब्द लीजिएगा

2317
02:44:51,360 --> 02:44:55,600
प्लीज ये ठीक है एक्सपेंशन होता है एक्सपेंशन होता है मगर वो एक्सपेंशन होते

2318
02:44:55,600 --> 02:44:59,840
समय भी एक्सपेंशन होते समय भी वो अपने आप में पूर्ण

2319
02:44:59,840 --> 02:45:04,160
शाश्वत है। हां हां उसमें

2320
02:45:04,160 --> 02:45:08,240
ये वाली कमी नहीं है कि वो उसमें अनितता नहीं है। नहीं तो वो कंप्लीट नहीं होगा। लेकिन

2321
02:45:08,240 --> 02:45:12,240
फिर एक्सपेंशन किया ही क्यों? एक्सपेंशन किया। वो वो मैं आऊंगा ना।

2322
02:45:12,240 --> 02:45:16,320
वो मैं आऊंगा। वो मैं आऊंगा। जब वो शाश्वत है। उसके दुख में

2323
02:45:16,320 --> 02:45:20,880
बाधा नहीं आती है। हां। नहीं आती है।

2324
02:45:20,880 --> 02:45:24,480
वो स्वरूप से चेंज नहीं होता है। हां।

2325
02:45:24,480 --> 02:45:28,880
तो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो। हां

2326
02:45:28,880 --> 02:45:32,880
ऐसा कोई स्टेज ही नहीं है कि भगवान ठीक है नहीं जाता है। तो अब बात ये आ गई अगर

2327
02:45:32,880 --> 02:45:37,120
वो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो सच्चिदानंद है तो

2328
02:45:37,120 --> 02:45:42,400
उसको संसार बनाने की आवश्यकता आप क्यों कह रहे हैं?

2329
02:45:42,400 --> 02:45:46,560
क्योंकि उनके अंदर आनंद है ना उस आनंद को वो 100 वो

2330
02:45:46,560 --> 02:45:50,800
हमेशा वृद्धि करना चाहते हैं। देखो अगर मैं कहूं कि भगवान भगवान बाधित

2331
02:45:50,800 --> 02:45:54,880
नहीं है ना। भगवान सच्चिदानंद है। आप एक काम करो पहले तो स्क

2332
02:45:54,880 --> 02:45:58,960
से मुझे दिखा दो जो आप कह रहे हो। देखो कम तो होता नहीं है और आप

2333
02:45:58,960 --> 02:46:03,200
पहले आप आप देखिए मैं अपना मगजमारी बेकार में करूंगा। पहले आप अपनी स्कन

2334
02:46:03,200 --> 02:46:07,200
से मुझे रेफरेंस दिखा दो जो आप कह रहे हो। कम से कम ये पता तो चले भगवान

2335
02:46:07,200 --> 02:46:12,240
में अभाव है शुरू करना। हां बेटा

2336
02:46:12,240 --> 02:46:16,320
ये जो 18 पॉइंट पहले तो कल शद्र संभवा दिखा रहा था। स्कंद पुराण

2337
02:46:16,320 --> 02:46:20,480
नहीं वो मत दिखाइए वो वो मैं देखूंगा। अभी आप अभाव दिखाइए अभाव

2338
02:46:20,480 --> 02:46:26,480
भगवान में अभाव होना चाहिए। भगवान में अभाव होना चाहिए।

2339
02:46:26,480 --> 02:46:30,640
ये जो पूर्ण वाला श्लोक है ना मैं पूर्ण वाले पूर्ण वाले श्लोक

2340
02:46:30,640 --> 02:46:35,280
की व्याख्या आपके इस ने की है कहीं जहां लिखा हो भाव

2341
02:46:35,280 --> 02:46:39,280
अभाव गुस्सा मत नहीं इसलिए

2342
02:46:39,280 --> 02:46:39,840
आप देर

2343
02:46:39,840 --> 02:46:44,000
कर रहे है ना हां जी मैंने पूछा स्कॉन का आप जो

2344
02:46:44,000 --> 02:46:48,000
क्लेम कर रहे हैं वो स्कॉन का ही क्लेम है वो पहले बता दीजिए तब तो मैं उस टाइम अपना

2345
02:46:48,000 --> 02:46:52,640
खर्च कर ना से है ना ये वाला और वृधारण

2346
02:46:52,640 --> 02:46:56,960
उपनिषद से भी है दो जगह भाई साहब इस की बुक का नाम बताइए

2347
02:46:56,960 --> 02:47:01,840
जिसमें अभाव माना हो उसने भगवान में पूर्णता

2348
02:47:01,840 --> 02:47:06,080
मानी है भाई साहब मैं पूछ रहा हूं अभाव कहां माना है

2349
02:47:06,080 --> 02:47:10,480
मैं कैसे मान लू आप जो व्याख्या कर रहे हो उस कौन की व्याख्या है

2350
02:47:10,480 --> 02:47:14,560
अच्छा हां ये ये वाला रस वाला जो है एक कासेप्ट

2351
02:47:14,560 --> 02:47:18,720
आपका क्वेश्चन एन ओ डी में है एन ओ डी में एनओडी में

2352
02:47:18,720 --> 02:47:22,800
हां एन ओ डी में है और भगवान को रस क्यों क्यों चाहिए ये वाला आपना

2353
02:47:22,800 --> 02:47:26,800
पे सर्च करिएगा तो हमको वर्ड्स भी बता देंगे जेमिनाई पे कर

2354
02:47:26,800 --> 02:47:30,880
दीजिएगा तो वर्ड्स भी बता देंगे भगवान को रस क्यों चाहिए आनंद की

2355
02:47:30,880 --> 02:47:34,960
वृद्धि के लिए आनंद नहीं है ऐसा कोई स्टेज नहीं है पर आनंद की वृद्धि

2356
02:47:34,960 --> 02:47:38,960
होती रहे इस चीज के इसी चीज को रस कहते है

2357
02:47:38,960 --> 02:47:43,600
भगवान आनंद कम तो होता नहीं है आनंद की वृद्धि होती रहे कंटीन्यूसली

2358
02:47:43,600 --> 02:47:47,600
और कभी कम ना हो लेकिन हमेशा आनंद बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता

2359
02:47:47,600 --> 02:47:51,840
रहे भगवान के अंदर भी अभाव होना चाहिए।

2360
02:47:51,840 --> 02:47:55,200
तभी भगवान सिद्ध होगा। यह बताइए। भगवान

2361
02:47:55,200 --> 02:47:59,440
में अभाव होना आवश्यक है। पहले यह बताइए। उनके कहने का मतलब है आनंद

2362
02:47:59,440 --> 02:48:03,440
स्टेबल नहीं है ना। आनंद भी बढ़ रहा है ना। क्यों बढ़ रहा है? स्टेबल होना चाहिए।

2363
02:48:03,440 --> 02:48:07,520
आनंद स्टेबल आनंद बढ़ क्यों रहा? वो वो मैं बाद में प्रश्न करूंगा।

2364
02:48:07,520 --> 02:48:13,440
पहले आप इस का क्लेम बता दीजिए। अभाव है।

2365
02:48:13,440 --> 02:48:17,520
एक बार भगवान में अभाव है।

2366
02:48:17,520 --> 02:48:22,080
भगवान पूर्ण है। भगवान में अभाव होना भी भगवान की पूर्णता है। हां

2367
02:48:22,080 --> 02:48:26,480
ये ये दिखाइए। भगवान में अभाव होना भी भगवान की पूर्णता का है।

2368
02:48:26,480 --> 02:48:30,560
ये बहुत अच्छी चीज मिल गई। आज इस ने अगर ऐसा कहा है तो मुझे

2369
02:48:30,560 --> 02:48:36,560
नहीं पता था।

2370
02:48:39,120 --> 02:48:44,000
क्योंकि पूर्णता है और वो ऐसे है कि अभाव

2371
02:48:44,000 --> 02:48:48,960
है एक भी अभाव नहीं है ये भी तो अपूर्णता हुई ना

2372
02:48:48,960 --> 02:48:53,280
मैं भाई साहब आपसे मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं रेफरेंस रेफरेंस

2373
02:48:53,280 --> 02:48:59,280
आप जो बोल रहे हैं वो स्कॉन मानता है कि नहीं मानता वो बता दीजिए

2374
02:49:01,360 --> 02:49:05,360
मैं अभी शास्त्र का आपसे नहीं मांग रहा हूं अभी मैं आपका स्कॉन का मांग

2375
02:49:05,360 --> 02:49:07,680
रहा हूं।

2376
02:49:07,680 --> 02:49:11,760
नेक्टर ऑफ डिवोशन में है ये। नेक्टर ऑफ डिवोशन में

2377
02:49:11,760 --> 02:49:16,000
एक हम बहुस्याम ये श्लोक पर्टिकुलर आता है। मैं इसको

2378
02:49:16,000 --> 02:49:17,520
वर्ड्स भी बता देता हूं।

2379
02:49:17,520 --> 02:49:23,520
एक बहुस्याम मैं एक हूं। चार

2380
02:49:24,720 --> 02:49:30,720
एक मिनट

2381
02:49:34,080 --> 02:49:40,080
स्ट्रक्चर वाला अभी करना सॉरी

2382
02:49:40,640 --> 02:49:44,880
ये है

2383
02:49:44,880 --> 02:49:48,880
नेक्टर ऑफ डिवोशन में है और नेक्टर ऑफ डिवोशन में उन्होंने चांडोक्य उपनिषद से कोट

2384
02:49:48,880 --> 02:49:53,120
किया छंडोग्य उपनिषद से कोट किया है और वो

2385
02:49:53,120 --> 02:49:57,280
है छंडोग्य नहीं होता है छंदोग्य होता है आपकी

2386
02:49:57,280 --> 02:50:01,760
हिंदी कमजोर है क्या आई थिंक हां

2387
02:50:01,760 --> 02:50:05,920
क्यों हां हिंदी भाषी नहीं है आप

2388
02:50:05,920 --> 02:50:09,920
प्रयास कर रहा हूं नहीं नहीं आप मतलब हिंदी भाषी नहीं है क्या मदर टंग

2389
02:50:09,920 --> 02:50:14,000
आपकी क्या है हिंदी है बट जो स्कूल

2390
02:50:14,000 --> 02:50:18,080
कॉलेज में जनरली इंग्लिश पढ़ाई जाती थी तो उस समय मैंने टेस्ट नहीं किया अभी मैं

2391
02:50:18,080 --> 02:50:22,640
प्रयास कर रहा हूं अच्छी होगी धीरेधी बताइए

2392
02:50:22,640 --> 02:50:27,680
छंदो उपनिषद 6.2.3

2393
02:50:27,680 --> 02:50:31,840
भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं इस की बुक इसमें

2394
02:50:31,840 --> 02:50:37,280
कि उन्होंने कहा हो भगवान में अभाव होना चाहिए

2395
02:50:37,280 --> 02:50:41,760
ये श्याम वाला जो बुक है ना अच्छा आप प्रभुपाद जी की कोटेशन

2396
02:50:41,760 --> 02:50:46,080
चाहते हैं क्या हां ठीक है

2397
02:50:46,080 --> 02:50:52,080
अनिकेत जी मजा आ गया आज

2398
02:50:54,480 --> 02:50:58,000
खुजली वाला अच्छा था

2399
02:50:58,000 --> 02:51:04,000
वो बीइंग स्पिरिट सोल वाला बनाएगा खुजली एडिटिंग

2400
02:51:04,000 --> 02:51:10,000
इतना सा लेगा और बना

2401
02:51:10,560 --> 02:51:14,800
प्रभु जी आप इस का कोई अगर जैसा नेक्टर ऑफ डिवोशन

2402
02:51:14,800 --> 02:51:18,800
बता रहे हैं ना तो आप बोलिए कि ये तो नेक्टर ऑफ तो

2403
02:51:18,800 --> 02:51:22,960
इस का गौ का ही बुक है ना नहीं लेकिन ये चांदो

2404
02:51:22,960 --> 02:51:27,120
उपनिषद से कोट किया है ना उन्होंने कोट भले ही किया हो आप पहले बुक

2405
02:51:27,120 --> 02:51:31,200
तो बताइए देखिए चांदो उपनिषद के भाष कई सारे है अभी मैं

2406
02:51:31,200 --> 02:51:35,280
ये देख रहा हूं कि क्या इस ने वो बात मानी है कि नहीं जो आप मान रहे हो

2407
02:51:35,280 --> 02:51:39,760
कि भगवान में अभाव होना भगवान में अभाव नहीं होगा तो वो भी तो माना जाएगा

2408
02:51:39,760 --> 02:51:44,800
ऐसे तो फिर ये भी कहना पड़ेगा भगवान यदि नष्ट नहीं होगा

2409
02:51:44,800 --> 02:51:48,880
प्रभु जी का लेक्चर चलेगा क्या एक लेक्चर में भी सुना अमोग लीला

2410
02:51:48,880 --> 02:51:52,880
प्रभु जी के लोग ही दिल्ली वाले कहते हैं वो जो मूर्ख है

2411
02:51:52,880 --> 02:51:58,080
बताइए अमोग लीला प्रभु जी की बात को कैसे मान लेंगे क्लेम

2412
02:51:58,080 --> 02:52:02,160
अमोग लीला प्रभु जी की बात को वहां के जो क्या कहते

2413
02:52:02,160 --> 02:52:06,240
हैं कई अभी जो मैं गया था ईस्टर क्या नाम है उसका दिल्ली का

2414
02:52:06,240 --> 02:52:10,400
ईस्ट ऑफ कैलाश जी जहां मैं गया था

2415
02:52:10,400 --> 02:52:14,560
वो कह रहे थे वो कई मूर्खता पूर्ण बात कर देते हैं भाई मैं क्या करूं उनके

2416
02:52:14,560 --> 02:52:18,720
बारे में मूर्ख नहीं बोलना चाहिए हां एक्चुअली होता ये है कि होता

2417
02:52:18,720 --> 02:52:22,720
ये है कि किसी कांसेप्ट को कोई किसी वे में ले लेता है। किसी का किसी वे में ले लेता

2418
02:52:22,720 --> 02:52:25,680
है और इसमें कोई गलती नहीं है। वो अपनी बातें सिद्ध करने के लिए

2419
02:52:25,680 --> 02:52:29,760
कोई भी कुछ भी कुछ भी बोल देता है। कुछ भी बोल देता है। अभी बीइंग अभी मैं देख

2420
02:52:29,760 --> 02:52:33,840
रहा था खूब क्या कहते हैं? खूब ढिंढोरा

2421
02:52:33,840 --> 02:52:38,000
पीटा जा रहा था। देखो देखो मरवा वालों ने हमें मान लिया। हमें प्रामाणिक मान

2422
02:52:38,000 --> 02:52:42,400
लिया। हमें मान लिया। अभी उसका मोहन प्रभु उनका

2423
02:52:42,400 --> 02:52:46,640
क्या कहते हैं? क्या नाम? मोहन प्रभु नाम है उनका गया। मैंने नहीं देखा

2424
02:52:46,640 --> 02:52:50,960
सॉरी मैं रेफरेंस देता हूं रेफरेंस रेफरेंस दे दीजिए आप

2425
02:52:50,960 --> 02:52:54,960
रेफरेंस इसपनिषद में है ऑल फैसिलिटीज आर गिवन

2426
02:52:54,960 --> 02:52:59,120
टू स्मॉल कंप्लीट यूनिट

2427
02:52:59,120 --> 02:53:03,200
ट्रांसलेशन ऑल फैसिलिटीज आर गिवन ऑल फैसिलिटीज

2428
02:53:03,200 --> 02:53:04,160
आर गिवन

2429
02:53:04,160 --> 02:53:08,240
टू स्मॉल कंप्लीट यूनिट्स नेमली द लिविंग एंटिटीज

2430
02:53:08,240 --> 02:53:12,400
यानी जीवो को सारी फैसिलिटी दी जाती है जो स्माल कंप्लीट यूनिट

2431
02:53:12,400 --> 02:53:16,480
है यानी हम लोग जीव स्माल कंप्लीट यूनिट ठीक है टू इनेबल

2432
02:53:16,480 --> 02:53:20,880
देम टू रियलाइज्लीट हो तो अजीब सागा ना एक्चुअल

2433
02:53:20,880 --> 02:53:24,960
तो बेटर है अरे रुको मेरे भाईनिषद का भाष है उनका

2434
02:53:24,960 --> 02:53:30,560
रुको मैं निकाल दूं अरे बहुत बढ़िया

2435
02:53:30,560 --> 02:53:35,600
श्लोक संख्या बता दीजिए आप प्रक प्रभु

2436
02:53:35,600 --> 02:53:39,760
मुझे जाना पड़ेगा अभी थोड़ा लेट हो गया है आप श्लोक

2437
02:53:39,760 --> 02:53:45,760
संख्या बता दीजिए श्लोक संख्या बता दीजिए

2438
02:53:46,000 --> 02:53:50,240
1.1 में ही परपट में है। 1.1 में ही परपट में है। ऑल फॉर्म्स

2439
02:53:50,240 --> 02:53:54,880
ऑफ इनकंप्लीटनेस आर ड्यू टू द इनकंप्लीट नॉलेज ऑफ़ द कंप्लीट हो।

2440
02:53:54,880 --> 02:53:58,880
और ट्रांसलेशन में क्या है? ये ये

2441
02:53:58,880 --> 02:54:03,120
परपट्स में ट्रांसलेशन में ट्रांसलेशन है नहीं उसमें।

2442
02:54:03,120 --> 02:54:07,280
भाष्य में भाष्य में भाष्य में हां वो समझ गया भाष्य

2443
02:54:07,280 --> 02:54:13,120
में। अनुवाद में क्या है? अनुवाद में

2444
02:54:13,120 --> 02:54:17,120
अनुवाद में भी देख लेता हूं। एक मिनट मेरे पास

2445
02:54:17,120 --> 02:54:21,200
क्योंकि अभी इस का प्रूफ मांग रहे थे ना तो इस का अगर प्रूफ मांगेंगे तो

2446
02:54:21,200 --> 02:54:26,240
भाष्य जनरली रेफर करते हैं। अनुवाद तो तब आएंगे जब वैदिक स्क्रिप्चर की बात

2447
02:54:26,240 --> 02:54:31,280
अनुवाद तो किया होगा ना। अरे भाई श्लोक है तो उसका अनुवाद तो किया होगा ना।

2448
02:54:31,280 --> 02:54:37,280
जी जी ट्रांसलेशन की बात कर ट्रांसलेशन में है।

2449
02:54:38,240 --> 02:54:42,640
द पर्सनालिटी ऑफ़ गॉड इज परफेक्ट एंड कंप्लीट बिकॉज़ ही इज कंप्लीटली

2450
02:54:42,640 --> 02:54:46,640
परफेक्ट ऑल एमिनेशन फ्रॉम हिम सच एस ह फिनोमिनल वर्ल्ड

2451
02:54:46,640 --> 02:54:50,640
मैं ले आया मैं ले आया मैं मेरे पास है जी बहुत थैंक

2452
02:54:50,640 --> 02:54:55,760
यू अच्छा ठीक है अच्छा अब आप बताइए कौन सा मंत्र है

2453
02:54:55,760 --> 02:54:59,520
1.1 हां

2454
02:54:59,520 --> 02:55:03,760
1.1 जी

2455
02:55:03,760 --> 02:55:08,160
ये पूर्ण पूर्णम का ही है क्या हां हां उसी के

2456
02:55:08,160 --> 02:55:12,160
में है परम पूर्ण या सर्वोपरि परम सत्य

2457
02:55:12,160 --> 02:55:16,960
पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान है निर्विशेष ब्रह्म या परमात्मा की अनुभूति

2458
02:55:16,960 --> 02:55:20,960
परम पूर्ण की अधूरी अनुभूति है पूर्ण पुरुषोत्तम

2459
02:55:20,960 --> 02:55:25,200
भगवान तो सच्चिदानंद विग्रह है। ठीक है? सच्चिदानंद

2460
02:55:25,200 --> 02:55:29,200
अपने आप में ही किसी भी चीज के अभाव को कैंसिल

2461
02:55:29,200 --> 02:55:33,760
कर देता है। ठीक है? हां।

2462
02:55:33,760 --> 02:55:37,760
विग्रह है और निर्विशेष ब्रह्म की अनुभूति उनके सत पहलू

2463
02:55:37,760 --> 02:55:41,840
या उनके शाश्वत होने की अनुभूति है तथा परमात्मा की अनुभूति

2464
02:55:41,840 --> 02:55:45,920
उनके सत तथा चित पहलुओं की अनुभूति है जो

2465
02:55:45,920 --> 02:55:50,240
उनकी शाश्वतता तथा ज्ञान को सूचित करते हैं किंतु भगवान की अनुभूति

2466
02:55:50,240 --> 02:55:53,360
सारे दिव्य स्वरूपों सतित तथा आनंद की

2467
02:55:53,360 --> 02:55:57,520
अनुभूति है। जब किसी को परम पुरुष की अनुभूति होती है तो

2468
02:55:57,520 --> 02:56:01,520
वह परम सत्य के इन पहलुओं का भी पूर्ण रूप में अनुभव करता है। विग्रह का

2469
02:56:01,520 --> 02:56:05,520
अर्थ है रूप। अतः परम सत्य रूप विहीन

2470
02:56:05,520 --> 02:56:09,520
निराकार नहीं है। यदि वह रूप विहीन होते या यदि वह अपनी

2471
02:56:09,520 --> 02:56:14,320
सृष्टि की अपेक्षा किसी भी तरह कम होते किसी भी तरह

2472
02:56:14,320 --> 02:56:18,320
कम होते अपनी सृष्टि की तरह किसी भी तरह कम होते तो

2473
02:56:18,320 --> 02:56:22,640
वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। लो ये तो उल्टा बोल रहे हैं।

2474
02:56:22,640 --> 02:56:26,720
अगर वो कम होते हां ठीक है। परम पूर्ण में हमारे

2475
02:56:26,720 --> 02:56:30,720
अनुभव के भीतर तथा बाहर की प्रत्येक वस्तु होनी चाहिए। अन्यथा वह

2476
02:56:30,720 --> 02:56:34,800
पूर्ण नहीं हो सकती। परम पूर्ण भगवान में अनंत शक्तियां होती है। वह सब

2477
02:56:34,800 --> 02:56:38,800
की सब उनहीं के समान पूर्ण होती है। इस तरह यह दृश्य भौतिक जगत

2478
02:56:38,800 --> 02:56:43,120
भी अपने में पूर्ण है। यह 24 तत्व जिनका यह भौतिक ब्रह्मांडस्थाई

2479
02:56:43,120 --> 02:56:47,200
प्राकट्य है। इस तरह व्यवस्थित किए गए इस ब्रह्मांड के पालन तथा

2480
02:56:47,200 --> 02:56:51,600
भरण के लिए आवश्यक प्रत्येक वस्तु उत्पन्न कर सके।

2481
02:56:51,600 --> 02:56:55,680
ब्रह्मांड का पालन करने के लिए इसकी किसी अन्य इकाई

2482
02:56:55,680 --> 02:56:59,680
को बाह्य प्रयास की आवश्यकता नहीं है। ब्रह्मांड अपने निजी

2483
02:56:59,680 --> 02:57:03,680
कालमाप के अनुसार कार्य करता है और परम पूर्ण की शक्ति द्वारा

2484
02:57:03,680 --> 02:57:07,760
निश्चित किया गया है और जब वह कालावधि पूरी हो जाती है तो यह

2485
02:57:07,760 --> 02:57:08,400
अस्थाई

2486
02:57:08,400 --> 02:57:12,960
अभिव्यक्ति परम पूर्ण की संपूर्ण व्यवस्था से विनष्ट हो जाती है।

2487
02:57:12,960 --> 02:57:17,520
छोटी छोटी पूर्ण इकाइयों को सारी प्रदान की जाती है

2488
02:57:17,520 --> 02:57:21,600
जिससे कि वे पूर्ण परम पूर्ण की अनुभूति कर सके। परम

2489
02:57:21,600 --> 02:57:25,600
पूर्ण के अधूरे ज्ञान के कारण ही विभिन्न प्रकार की

2490
02:57:25,600 --> 02:57:29,680
अपूर्णताओं का अनुभव होता है। परम पूर्ण के अधूरे ज्ञान

2491
02:57:29,680 --> 02:57:33,760
के कारण ही विभिन्न प्रकार की अपूर्णताओं का अनुभव होता है।

2492
02:57:33,760 --> 02:57:38,000
मनुष्य जीवन की मनुष्य जीवन जीव की चेतना का पूर्ण प्राकट्य

2493
02:57:38,000 --> 02:57:42,400
है। और यह चेतना जन्म और मृत्यु के चक्र में

2494
02:57:42,400 --> 02:57:46,560
84 लाख योनियों से विकसित होने के बाद मिलती है। यदि जीव

2495
02:57:46,560 --> 02:57:50,640
अपनी पूर्ण चेतना युक्त इस मानव जीवन में परम पूर्ण से संबंधित अपनी पूर्णता

2496
02:57:50,640 --> 02:57:54,720
की अनुभूति नहीं करता तो वह अपनी पूर्णता की अनुभूति करने का

2497
02:57:54,720 --> 02:57:58,960
अवसर खो देता है।

2498
02:57:58,960 --> 02:58:03,280
और भौतिक प्रकृति के नियम द्वारा विकास चक्र में डाल दिया जाता है।

2499
02:58:03,280 --> 02:58:07,440
क्योंकि हम यह नहीं जानते कि हमारे पालन के लिए प्रकृति

2500
02:58:07,440 --> 02:58:11,680
में पूर्ण व्यवस्था है। अत हम इंद्रिय भोग के तथाकथित पूर्ण

2501
02:58:11,680 --> 02:58:15,840
जीवन की सृष्टि करने के लिए प्रकृति के साधनों का उपयोग करने

2502
02:58:15,840 --> 02:58:19,920
का प्रयास करते हैं। क्योंकि जीव परम पूर्ण से संबद्ध हुए बिना

2503
02:58:19,920 --> 02:58:23,440
इंद्रिय जीवन का भोग नहीं कर सकता। अत इंद्रिय

2504
02:58:23,440 --> 02:58:27,440
भोग का भ्रम युक्त जीवन मोह माना जाता है। शरीर का

2505
02:58:27,440 --> 02:58:31,440
हाथ तभी तक पूर्ण इकाई है जब तक वह संपूर्ण शरीर से जुड़ा हुआ रहता

2506
02:58:31,440 --> 02:58:35,600
है। एक मिनट बस सॉरी मैं टोक रहा हूं बीच में। अरे

2507
02:58:35,600 --> 02:58:39,600
मैं पूरा पढ़ लूं ना इसमें अभाव कहीं पर कमी भगवान में मानी इन्होंने

2508
02:58:39,600 --> 02:58:43,840
पूरा पढ़ लूं मैं बताता हूं कहे आपने पढ़ चुके हैं इसीलिए मैं टोक रहा था

2509
02:58:43,840 --> 02:58:46,480
हां बताइए

2510
02:58:46,480 --> 02:58:50,960
जो अगर आप फर्स्ट लाइन ही पढ़े बिकॉज़ ही इस कंप्लीट होल

2511
02:58:50,960 --> 02:58:54,960
मैं इंग्लिश में पढ़ने की आदत की वजह से बोल रहा हूं आप समझ पाएंगे बहुत ज्यादा

2512
02:58:54,960 --> 02:58:58,960
मुश्किल नहीं है। ठीक है? बिकॉज़ ही इज कंप्लीट होल इवन

2513
02:58:58,960 --> 02:59:03,280
दो सो मेनी कंप्लीट यूनिट्स एमिनेट फ्रॉम हिम

2514
02:59:03,280 --> 02:59:07,520
ही रिमेंस कंप्लीट होल। ये लाइन को ज्यादा

2515
02:59:07,520 --> 02:59:11,600
ध्यान से पढ़िएगा। ठीक है? अरे ही रिमलीट ही रिमेंस

2516
02:59:11,600 --> 02:59:16,240
कंप्लीट रहा ना वो वो इनकंप्लीट नहीं हुआ ना?

2517
02:59:16,240 --> 02:59:20,320
हां इनकंप्लीट नहीं हुआ। तो जब वो नहीं हुआ तो आप क्यों कह

2518
02:59:20,320 --> 02:59:24,400
रहे हो वो जो है इनकंप्लीट हो जाता है। उसमें इनकंप्लीटनेस

2519
02:59:24,400 --> 02:59:28,800
ना होना भी उसका वो है। आप अभाव शब्द को एब्सेंस

2520
02:59:28,800 --> 02:59:33,200
बोलते हैं। अभाव शब्द मतलब एब्सेंस किसी चीज की एब्सेंस

2521
02:59:33,200 --> 02:59:37,440
है ना? तो भगवान में हां जी। भगवान

2522
02:59:37,440 --> 02:59:41,600
में भगवान पूर्ण है। अपने आप में कंप्लीट होल है। ठीक है?

2523
02:59:41,600 --> 02:59:46,160
तो वो उनके अंदर से पार्शियल कंप्लीट यूनिट

2524
02:59:46,160 --> 02:59:50,240
निकलते हैं। एक्सपैंड होते हैं। अरे भाई पार्शियल कंप्लीट यूनिट की बात

2525
02:59:50,240 --> 02:59:54,480
नहीं हो रही है। भगवान आनंदित है कि नहीं? विचार की बात हो रही है। यहां

2526
02:59:54,480 --> 02:59:58,560
ज्ञान की बात हो रही है यहां। यहां सामग्री की बात ही नहीं हो रही है।

2527
02:59:58,560 --> 03:00:02,080
आप तत्व के आधार पर कहते हैं कि तत्व उनसे निकलता है इनकंप्लीट।

2528
03:00:02,080 --> 03:00:06,400
मगर वो फिर भी पूर्ण है। वो नहीं कह रहा हूं। वो अपने आप में

2529
03:00:06,400 --> 03:00:10,640
सदा आनंदित है कि नहीं? या उनमें कोई अभाव

2530
03:00:10,640 --> 03:00:14,640
है रस? रस रस का होना चाहिए ना। वो आनंद वृद्धि होने को ही

2531
03:00:14,640 --> 03:00:18,800
रस कहते हैं। नहीं साहब इसमें अभी आपने एक कोट किया था कि

2532
03:00:18,800 --> 03:00:23,520
भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं होगा वो। वो मुझे बताइए कहां लिखा है?

2533
03:00:23,520 --> 03:00:27,680
अभाव है। आनंद की वृद्धि का अभाव हो गया ना? तभी तो आनंद

2534
03:00:27,680 --> 03:00:31,680
की वृद्धि करनी पड़ी। ये इसमें कहां लिखा है?

2535
03:00:31,680 --> 03:00:35,760
आनंद की वृद्धि का अभाव है भगवान में। तभी

2536
03:00:35,760 --> 03:00:40,400
वरना अच्छा ये एक मिनट। ये भाई साहब आप समय वेस्ट करते हैं।

2537
03:00:40,400 --> 03:00:44,400
रेफरेंस मैं मांग रहा हूं। भगवान में अभाव होना माना है कि नहीं? इस ने आप

2538
03:00:44,400 --> 03:00:48,720
मुझे रेफरेंस दे रहे हो कि भगवान से इनकंप्लीट जो है अभाव

2539
03:00:48,720 --> 03:00:53,360
युक्त स्मॉल पूर्ण चीजें निकलती है। ये क्या बात है?

2540
03:00:53,360 --> 03:00:57,360
और फिर कह रहे हो मुझे देर हो रही है। सॉरी ठीक

2541
03:00:57,360 --> 03:01:01,360
है। ठीक है। खुद ही तो खुद ही तो घुमा रहे हो। खुद ही तो खिचड़ी बना रहे हो।

2542
03:01:01,360 --> 03:01:05,520
फिर कह रहे हो मैं कुछ समझ नहीं रहा हूं। मैंने मांगा आपसे क्या है कि क्या

2543
03:01:05,520 --> 03:01:10,160
इस ने माना है भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं कहलाएंगे।

2544
03:01:10,160 --> 03:01:14,240
इस ने यह जरूर माना है कि भगवान का जो प्रेम है या भगवान का जो आनंद

2545
03:01:14,240 --> 03:01:18,400
है वो कंटीन्यूस इनक्रीस होता है। यह

2546
03:01:18,400 --> 03:01:22,720
भाई साहब सुनिए आपकी जो व्याख्या है वो

2547
03:01:22,720 --> 03:01:26,720
इस की ही व्याख्या है या हम कैसे माने हम तब तो आपके

2548
03:01:26,720 --> 03:01:30,720
साथ अपना समय वेस्ट करें। जब बात आएगी प्रमाण की

2549
03:01:30,720 --> 03:01:35,040
तो आपको प्रमाण देना होगा। अभी मैं इससे सहमत नहीं हूं

2550
03:01:35,040 --> 03:01:39,040
कि अभाव होगा तभी भगवान अभाव होगा। फिर तो हम ये कह देंगे भगवान अपने आप को नष्ट नहीं

2551
03:01:39,040 --> 03:01:42,320
कर सकता। ये भी अभाव है उसमें।

2552
03:01:42,320 --> 03:01:46,880
क्यों नहीं कर सकते? कर सकते। अरे अभी

2553
03:01:46,880 --> 03:01:51,120
फिर मैं कहूंगा अभी आप बच्चे हो। अभी आप बच्चे हो। वो लीला

2554
03:01:51,120 --> 03:01:55,600
में आकर करते हैं। आप स्वरूप से भगवान अपने आप को

2555
03:01:55,600 --> 03:01:59,600
ये आप कह रहे हैं। ये आप कह रहे हैं कि भगवान की लीला में

2556
03:01:59,600 --> 03:02:03,840
जो आप भाई साहब आप एक काम करिए। आप मुझे अभाव का वो दिखाइए। प्रमाण इस

2557
03:02:03,840 --> 03:02:07,840
से वो दिखाइए। जी हां। लेकिन ये प्रमाण

2558
03:02:07,840 --> 03:02:11,840
चल जाएगा ना कि भगवान का प्रेम जो है वो कंटीन्यूसली इनक्रीस होता रहेगा। नहीं ये नहीं चलेगा।

2559
03:02:11,840 --> 03:02:16,000
आप पहले आपको ये बताना आप ये ये दिखाना होगा

2560
03:02:16,000 --> 03:02:20,160
अगर भगवान में अभाव नहीं होगा ये सिद्धांत है। ये सिद्धांत

2561
03:02:20,160 --> 03:02:23,440
है। अगर वो वृद्धि मान रहे है ना रस की वृद्धि रस की वृद्धि कोई

2562
03:02:23,440 --> 03:02:27,760
आके कह देगा ये तो उन्होंने ये तो उन्होंने लीला में कहा है। आप कहोगे

2563
03:02:27,760 --> 03:02:31,920
कि रियल में कहा है। अल्टीमेट रियलिटी वाली बात कही है। दूसरा आ

2564
03:02:31,920 --> 03:02:35,920
के कह देगा। दूसरा आकर के कह देगा ये तो उन्होंने लीला में कहा है। हम कैसे मान ले?

2565
03:02:35,920 --> 03:02:40,000
इसलिए वो सिद्धांत जो है ना कि भगवान में अभाव होना चाहिए। अगर अभाव नहीं होगा तब

2566
03:02:40,000 --> 03:02:40,800
भी वो पूर्ण नहीं

2567
03:02:40,800 --> 03:02:44,880
है। भगवान में यदि अभाव नहीं होगा तब भी वो पूर्ण नहीं

2568
03:02:44,880 --> 03:02:48,880
है। ये होगा सिद्धांत का

2569
03:02:48,880 --> 03:02:52,880
सिद्धांत है कि नहीं? चैतन्य चरितामृत के अंदर जो

2570
03:02:52,880 --> 03:02:56,960
थ्री रीज़ लिखे हैं इंटरनल रीज़ चैतन्य महाप्रभु के आने के उसके अंदर ये है। मुझे याद

2571
03:02:56,960 --> 03:03:01,040
आ गया भगवान की मर्सी है कि भगवान ने मुझे रिमेंबेंस दी। चैतन्य महाप्रभु के

2572
03:03:01,040 --> 03:03:05,120
थ्री इंटरनल रीजंस लिखे हैं कि वो क्यों आते हैं। उसके अंदर थर्ड वाला जो

2573
03:03:05,120 --> 03:03:09,200
रीजन है वो है कि भगवान श्रीमती राधा रानी के मूड को टेस्ट करना चाहते

2574
03:03:09,200 --> 03:03:13,200
हैं। अब भगवान श्रीमती राधा रानी के मूड को क्यों टेस्ट

2575
03:03:13,200 --> 03:03:17,280
करना चाहते हैं? क्योंकि उनके अंदर ये भाई साहब भाई साहब आप पहले

2576
03:03:17,280 --> 03:03:21,360
अपने किसी व्यक्ति से पूछ कर आइए। मैं ये क्लेम कर रहा हूं कि

2577
03:03:21,360 --> 03:03:25,360
भगवान में अभाव नहीं होगा तो वो भगवान नहीं होंगे। ये आप पूछ

2578
03:03:25,360 --> 03:03:29,440
के आइए। हम हम इस से क्यों कह रहे हैं? आप समझिए। इस से

2579
03:03:29,440 --> 03:03:33,600
दिक्कत क्या है? ठीक है? जैसे ने कहा मैं

2580
03:03:33,600 --> 03:03:38,400
बता रहा हूं। मैं मैं बता रहा हूं इस से दिक्कत क्या है? फिलोसफिकल दिक्कत बता रहा हूं अभी आपकी।

2581
03:03:38,400 --> 03:03:44,160
जैसे आपने कहा कि वो टेस्ट लेने के लिए आते हैं। ठीक है?

2582
03:03:44,160 --> 03:03:48,320
तो हमारा अरे भाई मैं कुछ और बता रहा हूं। सुन

2583
03:03:48,320 --> 03:03:51,760
लो। मैं कुछ और कह रहा हूं। मैं कुछ और बता रहा हूं आपको।

2584
03:03:51,760 --> 03:03:55,840
अभी आपने कितना टाइम वेस्ट कराया इसको खोल के? कितना टाइम वेस्ट

2585
03:03:55,840 --> 03:03:59,920
कराया? वो जो अरे उसमें क्या निकला मैं पूछ रहा हूं अभाव है कि नहीं

2586
03:03:59,920 --> 03:04:04,000
आप इसको खुलवा रहे हो फिर आप कह रहे हो याद आ गया मर्स ऑफ गड की वजह से इसका

2587
03:04:04,000 --> 03:04:08,000
मतलब आपने ये वेस्ट खुलवाया था आपको याद नहीं आ रहा

2588
03:04:08,000 --> 03:04:12,240
इसमें टाइम वेस्ट करा रहे थे इसका जो मीनिंग है वो मीनिंग

2589
03:04:12,240 --> 03:04:14,560
भाई साहब इसमें कहीं भी प्रभुपाद जी ने यह

2590
03:04:14,560 --> 03:04:18,560
नहीं माना है कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो हम भगवान को

2591
03:04:18,560 --> 03:04:21,440
भगवान कैसे कहेंगे

2592
03:04:21,440 --> 03:04:25,840
ठीक है अब दूसरी बात ये है कि आप जो चैतन्य

2593
03:04:25,840 --> 03:04:29,840
चरतामृत के आधार पर यह मान रहे हो कि भगवान में अभाव होना मान रहे हैं वो

2594
03:04:29,840 --> 03:04:33,840
तो इसको ऐसे है कि हम यह क्लेम करते हैं कि यदि आप यह

2595
03:04:33,840 --> 03:04:37,920
कहते हैं कि भगवान में अभाव हो ही नहीं सकता पूर्णम के आधार पे तो फिर आप

2596
03:04:37,920 --> 03:04:41,920
ये एक तरफ कैसे कह सकते हैं कि भगवान रस लेने के लिए आते हैं। ये

2597
03:04:41,920 --> 03:04:46,160
हमारा उनके ही सिद्धांत पर वार है कि भैया आपकी दोनों बातें आपस

2598
03:04:46,160 --> 03:04:50,480
में कंट्राडिक्ट एक मिनट भाई साहब भाई साहब ये

2599
03:04:50,480 --> 03:04:54,720
आपस में आपकी दो चीजें कंट्राडिक्ट हो रही है। ये हमारा उनप क्लेम होता है। आप

2600
03:04:54,720 --> 03:04:58,800
बाद वाली चीज से पहली वाली चीज को दुरुस्त कर रहे हो कि

2601
03:04:58,800 --> 03:05:03,040
क्योंकि यहां पर रस माना है तो इसका मतलब प्रभुपाद जी ये मान रहे हैं कि अभाव है। पहले

2602
03:05:03,040 --> 03:05:07,200
हमको दिखाओ कि प्रभुपाद जी ने अभाव होना आवश्यक

2603
03:05:07,200 --> 03:05:11,360
माना है भगवान में। ये दिखाओ

2604
03:05:11,360 --> 03:05:15,600
एक मिनट दीजिए। हम

2605
03:05:15,600 --> 03:05:19,600
आप ऐसा करिए। आप ऐसा करिए। अब कल आइए। आपको भी लेट हो गया

2606
03:05:19,600 --> 03:05:23,840
और 11:30 बज रहे हैं। तीन घंटे की हो गई है। फिर भी मैं कहूंगा कि एक इंटेलेक्चुअल

2607
03:05:23,840 --> 03:05:28,160
पर्सन आया भाई काफी लंबी चर्चा हुई और अधिकांश

2608
03:05:28,160 --> 03:05:32,320
इतनी देर तक जो अच्छा ये भी बात है मैं सच कहूं तो जो मेरी जो

2609
03:05:32,320 --> 03:05:36,400
सीधी सीधी कुछ चीजें हैं वो मैंने नहीं ली क्योंकि वही देख देख करके और सीखने

2610
03:05:36,400 --> 03:05:40,400
को कुछ मिलेगा नहीं। इसीलिए मैंने ऐसी चीजें जो रखी है जिन टॉपिक्स

2611
03:05:40,400 --> 03:05:44,720
पे हमने कभी भी डीपली बात की ही नहीं किसी से। इसलिए बहुत सम्यक

2612
03:05:44,720 --> 03:05:48,720
रूप से एक लंबी सी चर्चा भी लोगों को देखने को मिली होगी। काफी कुछ सीखने को मिला

2613
03:05:48,720 --> 03:05:52,800
होगा और प्रक जी आपने घुमाया बहुत है। यह ध्यान

2614
03:05:52,800 --> 03:05:56,880
रखिए। अरे यार मत कहिए यार यार मत

2615
03:05:56,880 --> 03:06:00,960
कहिए। यार मत कहिए आपने घुमाया बहुत है। घुमाया कैसे

2616
03:06:00,960 --> 03:06:05,040
है? जब मैं पूछ रहा हूं कि जीबीसी आपका अंतिम निर्णायक कौन है?

2617
03:06:05,040 --> 03:06:09,200
धर्म और धर्म का तो आप कह रहे हो जीबीसी। जीबीसी के 500 मेंबर्स। एक

2618
03:06:09,200 --> 03:06:13,760
घंटे बाद आप आकर के कहते हो कि नहीं वो 12 मेंबर्स हैं। ठीक है?

2619
03:06:13,760 --> 03:06:17,840
उसके बाद आप जो है अंतिम प्रमाण

2620
03:06:17,840 --> 03:06:22,080
आ जाता है कि भाई जिसकी बातें अकाट होंगी वही मेरे लिए प्रमाण है। ठीक है?

2621
03:06:22,080 --> 03:06:26,560
मैं भी एक क्वेश्चन पूछ के फिर एंड करूंगा। ठीक है?

2622
03:06:26,560 --> 03:06:31,040
एक एक मिनट एक मिनट ठीक है। चलो अब हम अकाट पे आ गए। आपसे

2623
03:06:31,040 --> 03:06:35,200
मैंने खूब देर से कह रहा था कि अभाव कहां पे माना है कि

2624
03:06:35,200 --> 03:06:39,440
भगवान में अभाव होना चाहिए। सिद्धांत प्रभुपाद जी ने माना है कि नहीं माना?

2625
03:06:39,440 --> 03:06:44,720
फिर मैं काउंटर करूंगा कि शास्त्र से सिद्ध करो इस बात। ठीक है?

2626
03:06:44,720 --> 03:06:48,880
प्रभुपाद जी ने माना है कि नहीं माना? वो तो बाद

2627
03:06:48,880 --> 03:06:53,600
की बात है। अच्छा दूसरी बात

2628
03:06:53,600 --> 03:06:57,600
का नाम भी लिया था कि चैतन्य महाप्रभु के इंटरनल जो रीज़ है चैतन चिरतामृत

2629
03:06:57,600 --> 03:07:01,600
में नहीं आप ये आप जो है प्रभुपाद

2630
03:07:01,600 --> 03:07:05,920
जी की कही हुई किसी बात से अंदाजा मत बताइए कि उन्होंने सिद्धांत

2631
03:07:05,920 --> 03:07:10,080
ये माना है। उनका मुझे सिद्धांत चाहिए कि उन्होंने

2632
03:07:10,080 --> 03:07:14,240
माना है कि नहीं माना या सगवाियों ने माना हो। कि

2633
03:07:14,240 --> 03:07:18,400
भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान भगवान सिद्ध नहीं होंगे। फिर

2634
03:07:18,400 --> 03:07:22,560
हम दूसरे दूसरे दिन तर्क और प्रमाण पर इस पर बात करेंगे। आपने घुमाया

2635
03:07:22,560 --> 03:07:26,640
आपने ईशोपनिषद में कहीं नहीं लिखा है भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान भगवान

2636
03:07:26,640 --> 03:07:30,640
सिद्ध नहीं होंगे। इस तरह की कोई बात है ही नहीं। बल्कि वहां तो वो ये कह रहे

2637
03:07:30,640 --> 03:07:35,360
हैं कि भगवान में अगर कोई कमी हो जाएगी। ये देखो।

2638
03:07:35,360 --> 03:07:39,520
अब आपको तो मना कर रहे हैं वो। ये देखो। लेकिन आज तक इस एक

2639
03:07:39,520 --> 03:07:43,520
भी मोमेंट में ये कब साबित हुआ कि इस कौन की फिलोसोफी गलत है?

2640
03:07:43,520 --> 03:07:46,480
साबित हो ही नहीं रहा है। आदत सही है। कहीं साबित

2641
03:07:46,480 --> 03:07:50,480
नहीं हुआ। गलत साबित ये हो रही है ना कि आप कह रहे हो भगवान को

2642
03:07:50,480 --> 03:07:54,480
आवश्यकता है संसार बनाने की और मैं कह रहा हूं आवश्यकता नहीं है। खत्म हो रही

2643
03:07:54,480 --> 03:07:58,880
है इसकी फिलोसफी। आप आवश्यकता सिद्ध करने में लगे हुए हो। आप आवश्यकता

2644
03:07:58,880 --> 03:08:03,200
सिद्ध करने में लगे हुए हो। उसके लिए एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप आवश्यकता सिद्ध

2645
03:08:03,200 --> 03:08:07,360
करने में लगे हुए हो। हालांकि तार्किक रूप से तो वो छिन्नभिन्न हो

2646
03:08:07,360 --> 03:08:11,360
ही रहा है। साथ ही साथ आप अपने आप अपने शास्त्रों से भी उसको नहीं

2647
03:08:11,360 --> 03:08:15,360
सिद्ध कर पा रहे हो। ठीक है? आप अपने शास्त्रों से भी उसको सिद्ध नहीं

2648
03:08:15,360 --> 03:08:19,360
कर पा रहे हो। अच्छा अभी मैं बता दू आपके अभी मैं बता दू आपके

2649
03:08:19,360 --> 03:08:25,360
प्रभुपाद जी ने क्या कहा है? मैं बता दूं। यहां पे वो कह रहे हैं

2650
03:08:25,600 --> 03:08:29,280
प्रभुपाद जी कह रहे हैं यहां पे

2651
03:08:29,280 --> 03:08:34,560
अद्वत कैसे यदि वह रूप विहीन होते

2652
03:08:34,560 --> 03:08:38,560
यदि वह अपनी सृष्टि की अपेक्षा किसी भी

2653
03:08:38,560 --> 03:08:42,560
तरह किसी भी तरह कम होते तो

2654
03:08:42,560 --> 03:08:46,640
वह एक मिनट तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। किसी

2655
03:08:46,640 --> 03:08:50,960
भी तरह कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। यहां प्रपाद

2656
03:08:50,960 --> 03:08:55,040
जी इसी लाइन इसी लाइन को पकड़ रखिएगा। इसी लाइन को पकड़े रखिएगा। किसी

2657
03:08:55,040 --> 03:09:00,560
भी तरीके से एक बार दोबारा बोलिएगा। किसी भी तरीके से

2658
03:09:00,560 --> 03:09:01,520
किसी भी तरह

2659
03:09:01,520 --> 03:09:05,680
कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। हां तो

2660
03:09:05,680 --> 03:09:09,920
ये बोलना कि कुछ है जो भगवान में नहीं है।

2661
03:09:09,920 --> 03:09:14,160
ये कम होना हो गया ना उनको कम आंकना हो गया ना। कुछ

2662
03:09:14,160 --> 03:09:18,160
है जो भगवान में नहीं है। आप भी तो यही कह रहे

2663
03:09:18,160 --> 03:09:22,480
थे दिल से। यानी कि हम ये कहे कि क्योंकि भगवान

2664
03:09:22,480 --> 03:09:26,640
स्वयं को नष्ट नहीं कर सकते पारमार्थिक रूप से इसलिए वो भगवान

2665
03:09:26,640 --> 03:09:30,720
नहीं है और यदि या फिर हम ये मान ले अपने आप को नष्ट कर सकते हैं थोड़ी

2666
03:09:30,720 --> 03:09:34,720
बहुत देर के लिए किसने कहा नहीं कर सकते भगवान

2667
03:09:34,720 --> 03:09:38,800
अपनी भगवतता को नष्ट करते हैं जब वो श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप

2668
03:09:38,800 --> 03:09:43,200
आप कल आइए अपने रेफरेंस लेकर के आइए जय श्री राम मैं एक

2669
03:09:43,200 --> 03:09:47,360
ये वाला कंप्लीट कर लो उसके बाद कल भी आऊंगा नहीं ये वाला अभी मुझे मुझे

2670
03:09:47,360 --> 03:09:51,440
अभी आप कंप्लीट मत करिए आप उल्टा सीधा बोल रहे हैं। आप इस की चीजों को

2671
03:09:51,440 --> 03:09:55,680
रख के बोलिए। इस की चीजों को रख के बोलिए। और क्योंकि

2672
03:09:55,680 --> 03:09:59,760
आप आंसर नहीं दे पा रहे तो आपको शायद ऐसा लग रहा होगा। सॉरी कहां रखा आपने इस की

2673
03:09:59,760 --> 03:10:04,160
चीजों को? कहां रखा बताइए? आप एक सेकंड का टाइम दीजिए। फिर

2674
03:10:04,160 --> 03:10:07,440
दो मिनट बस और रुक दीजिए।

2675
03:10:07,440 --> 03:10:09,680
हां।

2676
03:10:09,680 --> 03:10:13,760
अच्छा एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट। एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब

2677
03:10:13,760 --> 03:10:16,880
एक मिनट। आपने कहा आप आंसर नहीं दे पा रहे इसलिए आप

2678
03:10:16,880 --> 03:10:20,880
वो कर रहे हैं। ठीक है? अब मैंने कहा कि आपने कहां रखा इस की चीजों को तो आप कह

2679
03:10:20,880 --> 03:10:24,960
रहे हैं एक मिनट दीजिए। यानी कि अभी तक आपने इस की चीज नहीं रखी है। आपको एक मिनट क्यों

2680
03:10:24,960 --> 03:10:28,960
चाहिए? मैं आपको मैं पूछ रहा हूं आपको एक मिनट क्यों चाहिए? आप तो

2681
03:10:28,960 --> 03:10:32,960
रख चुके हैं ना। आप रख चुके हैं की चीज़ कि नहीं रख

2682
03:10:32,960 --> 03:10:36,960
चुके हैं? भाई साहब मैं पूछ रहा हूं रख चुके हैं कि नहीं रख चुके? रख चुके हैं कि

2683
03:10:36,960 --> 03:10:40,960
नहीं रख चुके? रख चुका हूं। ये जो चुके हैं तो फिर आपको

2684
03:10:40,960 --> 03:10:44,960
एक मिनट जो चाहिए वही उसी चीज में बोलो जिस चीज का मैं आंसर नहीं दे पा रहा

2685
03:10:44,960 --> 03:10:49,280
हूं। जिस चीज का मैं आंसर नहीं दे पा रहा हूं उसी को आधार बना करके मुझे

2686
03:10:49,280 --> 03:10:53,360
जो है निरुत्तर करिए। आप नई चीज मत लाइए या फिर एक्सेप्ट

2687
03:10:53,360 --> 03:10:57,360
करिए। आपने बात गलत बोली मैं उसी को आधार बना रहा हूं। अभी आपने वो कम

2688
03:10:57,360 --> 03:11:01,680
वाली लाइन बोली ना आपने कम वाली लाइन बोली

2689
03:11:01,680 --> 03:11:05,920
उसका जवाब नहीं दे पाए। उसका क्या बोलेंगे आप? इसमें क्या जवाब मांगा

2690
03:11:05,920 --> 03:11:10,080
आपने? वो कह रहे हैं कि यदि वो किसी भी तरह कम होते तो वह

2691
03:11:10,080 --> 03:11:14,080
पूर्ण नहीं हो सकते थे। इसमें आपने क्या क्या एक मिनट इसमें

2692
03:11:14,080 --> 03:11:18,080
आपने कहां पे सिद्ध कर लिया कि प्रभुपाद जी ये कह रहे हैं कि उनके अंदर

2693
03:11:18,080 --> 03:11:22,160
अभाव होना चाहिए तभी वो भगवान होंगे। अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं होंगे। ये कहां

2694
03:11:22,160 --> 03:11:26,480
से सिद्ध हो गया? अभाव शब्द का मतलब बताइए। अरे अभाव

2695
03:11:26,480 --> 03:11:30,640
छोड़ो। अभाव का द्योतक कुछ आ जाए। दक अभाव

2696
03:11:30,640 --> 03:11:32,000
का प्रतीति आ जाए।

2697
03:11:32,000 --> 03:11:36,240
अभाव की प्रतीति आ जाए फिर वही बात मैं

2698
03:11:36,240 --> 03:11:41,520
कह रहा हूं अभाव की मैं कह रहा हूं अभाव की प्रतीति आ जाए अभाव

2699
03:11:41,520 --> 03:11:45,680
अभाव की प्रतीति आ जाए प्रतीति मतलब यहां पे उसको प्रकट करने वाली कोई

2700
03:11:45,680 --> 03:11:50,080
पंक्ति आ जाए कोई शब्द आ जाए दूसरे शब्दों में वो बात आ जाए बस

2701
03:11:50,080 --> 03:11:54,080
उससे वो आशय निकल आए वो भाव निकल आए कि भगवान

2702
03:11:54,080 --> 03:11:58,320
में यदि किसी तरह का अभाव नहीं होगा तब भी यह भी एक अभाव

2703
03:11:58,320 --> 03:12:02,480
है और इसलिए भगवान सिद्ध नहीं होंगे ऐसा प्रभुपाद जी ने इस

2704
03:12:02,480 --> 03:12:07,040
श्लोक में कहा माना ये जो माना

2705
03:12:07,040 --> 03:12:11,520
जो आपने लाइन बोली ना जो जिस लाइन को आप पॉइंट कर रहे थे ना

2706
03:12:11,520 --> 03:12:15,760
उसी लाइन में ही प्रभुपाद जी माना है हां बताइए क्या माना है बताइए

2707
03:12:15,760 --> 03:12:20,000
बताइए समझाइए समझाइए आप कह रहे हो ना मैं उत्तर नहीं दे पा रहा समझाइए उसी

2708
03:12:20,000 --> 03:12:24,240
लाइन को आप ध्यान से एक बार और पढ़िएगा बस

2709
03:12:24,240 --> 03:12:28,320
वही मोमेंट को एक बार एक लास्ट बात आप पढ़ लीजिए ना मैं

2710
03:12:28,320 --> 03:12:34,320
पढ़ देता हूं क्योंकि मैं बता एक मिनट

2711
03:12:37,360 --> 03:12:40,160
हां

2712
03:12:40,160 --> 03:12:44,400
यदि वह रूप विहीन होते या यदि वह अपनी सृष्टि की अपेक्षा

2713
03:12:44,400 --> 03:12:48,400
किसी भी तरह कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे।

2714
03:12:48,400 --> 03:12:52,640
किसी भी तरह कम होते तो किसी भी तरह जो कम होते हैं ना

2715
03:12:52,640 --> 03:12:56,640
उस किसी भी तरह कम होते में भगवान में अभाव भी होना चाहिए, भाव भी

2716
03:12:56,640 --> 03:13:00,800
होना चाहिए। भगवान में फॉर्म भी होना चाहिए, फॉर्मलेस भी होना चाहिए। भगवान में

2717
03:13:00,800 --> 03:13:04,960
मैं कह रहा हूं इसका मतलब आप उस भगवान को मानते हैं जो

2718
03:13:04,960 --> 03:13:09,200
थोड़ी बहुत देर के लिए नष्ट भी हो सकता है। भगवान

2719
03:13:09,200 --> 03:13:13,360
का एक्सपेंशन नष्ट हो सकता है लेकिन भगवान नष्ट नहीं हो सकता। अरे तो भैया मैं

2720
03:13:13,360 --> 03:13:17,360
मैं आपसे भगवान के अंतिम स्वरूप की बात कर रहा हूं। फिर आप एक्सपेंशन

2721
03:13:17,360 --> 03:13:21,120
पे आते हैं। बताइए

2722
03:13:21,120 --> 03:13:25,120
मैं कह रहा हूं अंतिम स्वरूप अंतिम स्वरूप में किसी तरह का

2723
03:13:25,120 --> 03:13:29,200
मैं बात कर रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं भाई साहब

2724
03:13:29,200 --> 03:13:33,360
भगवान का अंतिम स्वरूप भगवान के अंतिम स्वरूप में आप अभाव

2725
03:13:33,360 --> 03:13:37,440
मानते हैं कि नहीं मानते हैं? आप बोलिए नहीं मानते। अंतिम स्वरूप है ना

2726
03:13:37,440 --> 03:13:42,080
भगवान का अंतिम स्वरूप है ना वो भेद अभेद है।

2727
03:13:42,080 --> 03:13:46,160
भेद अभेद का मतलब होता है उस वो एक

2728
03:13:46,160 --> 03:13:50,560
होने के बाद भी उसके अंदर भेद है। एक और अलग

2729
03:13:50,560 --> 03:13:52,880
दोनों एक साथ है।

2730
03:13:52,880 --> 03:13:56,960
जब मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा

2731
03:13:56,960 --> 03:14:00,960
हूं भगवान का जो अंतिम स्वरूप है भगवान का

2732
03:14:00,960 --> 03:14:05,120
जो अंतिम स्वरूप है उसमें आप अभाव मानते हैं किसी

2733
03:14:05,120 --> 03:14:09,120
प्रकार का कि नहीं मानते अगर आप कहेंगे कि उससे वो

2734
03:14:09,120 --> 03:14:13,440
जो अचिंत भेदाभेद वाले जीव बाहर आते हैं जिनमें अभाव है

2735
03:14:13,440 --> 03:14:17,440
उससे उनमें अभाव होना सिद्ध नहीं होगा उससे उनमें

2736
03:14:17,440 --> 03:14:21,600
अभाव होना सिद्ध नहीं होगा परम भगवान में कोई दिक्कत नहीं है कोई

2737
03:14:21,600 --> 03:14:25,600
अभाव हां तो भैया इतनी देर से आप आप क्यों

2738
03:14:25,600 --> 03:14:29,600
भगवान के जो एक्सपेंशन है उनके आधार पर बात कर रहे हो।

2739
03:14:29,600 --> 03:14:33,600
मैं तो अंतिम स्वरूप की बात कर रहा हूं ना और मैं भी तो क्वालिटेटिवली गड

2740
03:14:33,600 --> 03:14:37,840
ही हूं। किटेटिवली मैं क्वांटिटेटिवली गॉड नहीं हूं। मैं भी किटेटिवली

2741
03:14:37,840 --> 03:14:41,920
गड हूं और मेरे अंदर अभाव है तो भगवान के अंदर अभाव हुआ ना क्योंकि मैं किटेटिवली

2742
03:14:41,920 --> 03:14:45,920
तो सेम हूं। अगर मैं किटेटिवली सेम हूं और मेरे अंदर अभाव है

2743
03:14:45,920 --> 03:14:50,000
और क्वांटिटेटिवली और किटेटिवली दोनों वाले में अभाव नहीं है तो दोनों चीजें

2744
03:14:50,000 --> 03:14:54,640
एक साथ ट्रू हो गई ना। नहीं आपली आप

2745
03:14:54,640 --> 03:14:58,720
देखिए आप क्वालिटेटिवली अभाव हो मगर जो हमारे जो

2746
03:14:58,720 --> 03:15:02,960
भगवान है वो यही तो क्लेम कर रहे हैं कि मेरे से अगर कुछ

2747
03:15:02,960 --> 03:15:06,960
निकल भी जाएगा तब भी मैं अपने आप में पूर्ण हूं तो आप निकलने पर

2748
03:15:06,960 --> 03:15:07,920
ये क्यों सिद्ध करना

2749
03:15:07,920 --> 03:15:12,000
चाहते हैं कि क्योंकि मैं निकला हूं इसलिए वो अपूर्ण भी है। ये कहां से

2750
03:15:12,000 --> 03:15:16,000
सिद्ध हो रहा है? यही तो वो क्लेम कर रहे हैं कि मेरे से कुछ निकल भी

2751
03:15:16,000 --> 03:15:20,000
जाएगा तब भी मैं पूर्ण हूं। आप अपने अभाव के आधार पर भगवान को

2752
03:15:20,000 --> 03:15:24,080
ही अपूर्ण सिद्ध कर रहे हैं कि देखो मैं क्योंकि उनसे निकला हूं तो इससे सिद्ध हो रहा है। भगवान

2753
03:15:24,080 --> 03:15:27,440
में अभाव भी है।

2754
03:15:27,440 --> 03:15:31,600
इसका रेफरेंस है यहां पर इसी वाले श्लोक में एक बार निकालता हूं। अब

2755
03:15:31,600 --> 03:15:36,000
आप कल आइए भाई साहब रेफरेंसेस लेकर के। ठीक है।

2756
03:15:36,000 --> 03:15:39,680
ओके।

2757
03:15:39,680 --> 03:15:43,760
अरे यार गुस्सा मत होइए। गुस्सा आप हो रहे हो। और उसको आप हंसी

2758
03:15:43,760 --> 03:15:48,080
में दिखा रहे हैं। मैं जो अंदर भाव होता है उसको बाहर करता हूं।

2759
03:15:48,080 --> 03:15:52,160
दोहरा नेचर नहीं है ना दो बातें बोलता हूं। बातों से पलटता नहीं

2760
03:15:52,160 --> 03:15:56,640
हूं। आप पलटे अपनी बात से आप पलटे

2761
03:15:56,640 --> 03:16:00,720
आपने जीबीसी वाले में पलटा पलटी मारी। हां मैं

2762
03:16:00,720 --> 03:16:04,720
पर मैंने माना भी है। वो मेरे अरे भाई पलटे कि नहीं पलटे?

2763
03:16:04,720 --> 03:16:08,960
भैया तुम इतनी जल्दी टॉपिक चेंज करते हो। बात हो रही पलटे

2764
03:16:08,960 --> 03:16:12,960
कि नहीं पलटे? तो मैंने माना भी पलटे थे ना। साबित ही होता

2765
03:16:12,960 --> 03:16:17,040
है। मेरा ही सिद्धांत साबित होता है। वैष्णव सिद्धांत ही साबित होता है कि मैं कहां साबित

2766
03:16:17,040 --> 03:16:21,360
हो रहा है भाई? भाई कहां साबित हो रहा है? अभी तो हम अभी तो हम इसमें है

2767
03:16:21,360 --> 03:16:22,960
कि इस कौन वो बात मानता

2768
03:16:22,960 --> 03:16:26,960
है कि नहीं जो आप आप बोल रहे हो। सिद्धांत तो साबित होना दूर की बात है।

2769
03:16:26,960 --> 03:16:30,960
सिद्धांत तो साबित हो गया। मैं उत्तम अधिकारी नहीं हूं और मेरे अंदर गलती है। ये सिद्धांत साबित

2770
03:16:30,960 --> 03:16:35,040
तो हो गया। अगर मैं उत्तम अधिकारी होता तो मेरे अंदर एक भी गलती ना होती।

2771
03:16:35,040 --> 03:16:40,560
तो ये इसपे हमारा विवाद था क्या? इस पे हमारा विवाद है क्या?

2772
03:16:40,560 --> 03:16:44,720
इस पर हमारा विवाद है। विवाद इस बात पर था। विवाद

2773
03:16:44,720 --> 03:16:48,880
इस बात पर था। सुनिए विवाद इस बात पर था कि आपका अंतिम निर्णायक कौन

2774
03:16:48,880 --> 03:16:53,040
है? आपने कहा पहले जीबीसी सुन लीजिए संक्षिप्त विवरण आपका।

2775
03:16:53,040 --> 03:16:57,280
ठीक है? अब जीबीसी में मैंने आपसे पूछा कि जीबीसी में कितने मेंबर है? आपको

2776
03:16:57,280 --> 03:17:01,840
टोटल नहीं पता। आपको उनके नाम नहीं पता। आपने इमॉसिबिलिटी दिखा दी। ठीक है? हालांकि

2777
03:17:01,840 --> 03:17:05,920
आप जब ये क्लेम कर रहे हैं कि भैया ज्यादा लोग होंगे तो निर्णय होगा। तो

2778
03:17:05,920 --> 03:17:09,920
फिर यह भी चीज दिक्कत आएगी तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण

2779
03:17:09,920 --> 03:17:14,160
है तो फिर ये कैसे डिसाइड हुआ कि 500 पे विकृति नहीं आएगी

2780
03:17:14,160 --> 03:17:18,240
1000 पे क्यों नहीं आएगी 250 पे क्यों आएगी

2781
03:17:18,240 --> 03:17:22,240
तभी तो कलयुग शुरू होगा ना घोर कलयुग आ सकती

2782
03:17:22,240 --> 03:17:26,960
इसका मतलब आप कंफर्म नहीं हो अपने धर्म में आएगी

2783
03:17:26,960 --> 03:17:31,200
घोर कलयुग कैसे शुरू होगा इसका मतलब ये चीज फिक्स नहीं है कि 500

2784
03:17:31,200 --> 03:17:35,840
लोग होंगे तो बिल्कुल सही चीज देंगे घोर कलयुग

2785
03:17:35,840 --> 03:17:38,320
उससे आगे चलते हैं। उससे आगे समरी सुन लीजिए। समरी

2786
03:17:38,320 --> 03:17:42,640
सुन लीजिए। उसके बाद उसके बाद बात इस पे आ गई कि भैया

2787
03:17:42,640 --> 03:17:47,040
क्योंकि उन्होंने कहा है कि जो षट गोस्वामियों के विपरीत नहीं जाएगा

2788
03:17:47,040 --> 03:17:51,040
वो जो है प्रमाणिक होगा। ठीक है? क्योंकि प्रभुपाद जी ने ये कहा

2789
03:17:51,040 --> 03:17:55,040
है तो इसलिए क्योंकि जीबीसी मेंबर षट गोस्वामियों के विपरीत नहीं जाते। इसलिए

2790
03:17:55,040 --> 03:17:59,040
वो मेरे लिए प्रमाणिक है। फिर मैंने कहा कि षड गोस्वामियों का

2791
03:17:59,040 --> 03:18:03,120
ज्ञान आपको जब है ही नहीं तो आप ये कैसे पता लगाओगे कि उनके विपरीत

2792
03:18:03,120 --> 03:18:07,120
जाते हैं कि नहीं जाते हैं? तो अंत में बात आ गई कि उनका क्योंकि सिद्धांत

2793
03:18:07,120 --> 03:18:11,200
अकाट है इसलिए मेरे मेरे को उन पर विश्वास है। वो जो सेवा इत्यादि वाले

2794
03:18:11,200 --> 03:18:15,760
दिए थे उस पर आपने खुद कह दिया वो जो है साइड की चीजें हैं। सेवा और पोषण इत्यादि

2795
03:18:15,760 --> 03:18:19,760
ठीक है तो अकाट पे बात आ गई तो तो जब आप बात

2796
03:18:19,760 --> 03:18:23,840
अकाट पे आ गई अकाट पे अभी भी चल रही है। और जब आपने अपनी कोई बात बोली

2797
03:18:23,840 --> 03:18:28,080
है उसमें मैं कह रहा हूं कि इस ने ये बात बोली है कि नहीं यही सिद्ध कर दो। शास्त्र

2798
03:18:28,080 --> 03:18:32,240
ने बोली है कि नहीं बोली वो बाद में देखेंगे और फिर वो तार्किकता पे कितनी खरी उतरती

2799
03:18:32,240 --> 03:18:36,240
है वो भी बाद में देखेंगे। इस ने बोली कि नहीं? तो जब आपकी बात अका

2800
03:18:36,240 --> 03:18:40,240
चल ही रही है आप इस का रेफरेंस तक नहीं दे पा रहे हैं मुझे तो आपने

2801
03:18:40,240 --> 03:18:44,800
वो उत्तम अरे भैया कहां दे दिया

2802
03:18:44,800 --> 03:18:49,200
ठीक है वो जनता जनता ने दे दिया आप दे दिया आपने दे दिया आपने दे दिया

2803
03:18:49,200 --> 03:18:53,200
आप संतुष्ट है ठीक है ठीक है तो अब आपको आने की जरूरत तो है नहीं

2804
03:18:53,200 --> 03:18:54,960
दोबारा

2805
03:18:54,960 --> 03:18:59,120
नहीं आप समझे नहीं ना तो आने की जरूरत होनी चाहिए आप

2806
03:18:59,120 --> 03:19:03,200
समझेंगे तो फिर मैं नहीं भाई साहब आपको आप आप

2807
03:19:03,200 --> 03:19:07,200
संतुष्ट है कि नहीं है? मैं तो कल भी नहीं समझूंगा। मुझे मालूम मैं क्यों नहीं

2808
03:19:07,200 --> 03:19:11,760
समझूंगा। मेरे पास उसके लिए बहुत सारे लॉजिक रीजनिंग है।

2809
03:19:11,760 --> 03:19:16,000
मैं इसके एक बस एक छोटी सी चीज बोलू। एक लास्ट थी।

2810
03:19:16,000 --> 03:19:22,000
आप एक बात बताइए। आपने अपनी ओर से जो 100% था वो दे दिया है।

2811
03:19:22,160 --> 03:19:26,320
मैंने पूरा प्रयास किया पर आपने मुझे सिर्फ बोलने का मौका दिया। पूछने

2812
03:19:26,320 --> 03:19:30,720
का मौका कहां दिया? अगर मैं पूछने पे आया तो फिर आप आपको भी मैं 100%

2813
03:19:30,720 --> 03:19:35,040
वाले पे एक्सपेक्ट करूंगा। मगर अभी तो मैंने यही मैं आपको पूछने पूछने

2814
03:19:35,040 --> 03:19:39,040
का मौका मैं देता आप आप शुरू में कह देते अभी तो हमारी चर्चा ऑन गोइंग

2815
03:19:39,040 --> 03:19:43,120
है ना? हां अभी तो हमारी चर्चा ऑन गोइंग है ना?

2816
03:19:43,120 --> 03:19:47,520
तो आप क्या चाहते हैं? मैं अभी तीन घंटे के बाद अब एक नई चर्चा शुरू करूं

2817
03:19:47,520 --> 03:19:51,520
रात भर। नहीं नहीं कोई बात नहीं। हां। तो फिर

2818
03:19:51,520 --> 03:19:55,680
अभी पूछने का मौका नहीं दिया। ये बात एक अलग जा रही है। बात क्या हो रही है? देखो टॉपिक

2819
03:19:55,680 --> 03:19:59,680
कैसे चेंज होता है कि आपने मुझे पूछने का मौका नहीं दिया। टॉपिक क्या आपने पूछा था मेरी

2820
03:19:59,680 --> 03:20:03,760
फिलोसफी तो सिद्ध हो गई। मैं आपको समराइज करते हुए लाया। मैं

2821
03:20:03,760 --> 03:20:07,760
आपको समराइज करते हुए लाया कि अभी बात इस पे अटक रही है कि आप जो क्लेम कर रहे हो

2822
03:20:07,760 --> 03:20:10,000
वो इस कौन करता है कि नहीं करता है? ये

2823
03:20:10,000 --> 03:20:14,320
आप सिद्ध नहीं कर पा रहे हो। और आप कह रहे हो मैंने कर दिया। नहीं

2824
03:20:14,320 --> 03:20:18,800
कर दिया। आप समझ नहीं पाए। ये आपकी कमी है।

2825
03:20:18,800 --> 03:20:23,920
ये कहां लिखा है? इसमें क्या भाव माना है उन्होंने प्रभुपाद ने।

2826
03:20:23,920 --> 03:20:27,520
अरे यार लिखा तो है यार कहां लिखा

2827
03:20:27,520 --> 03:20:31,760
मैं दोबारा दोबारा पढ़वाता हूं अगर भगवान में कोई कमी

2828
03:20:31,760 --> 03:20:36,320
हुई तो भगवान को पूर्ण नहीं कहा जा सकता

2829
03:20:36,320 --> 03:20:40,560
भगवान में कुछ वो कुछ इस शब्द को कुछ ये पहले

2830
03:20:40,560 --> 03:20:44,560
ही बता दो ये भगवान में कौन से वाले स्तर की बात कर रहे हो अंतिम

2831
03:20:44,560 --> 03:20:48,720
प्रमाण ना अंतिम अंतिम जो स्वरूप है भगवान का वो ना

2832
03:20:48,720 --> 03:20:52,880
हां हां अंतिम स्वरूप में यदि की कुछ भी कमी

2833
03:20:52,880 --> 03:20:57,040
नहीं हुई तो वो भगवान नहीं है। अंतिम स्वरूप एक कमी

2834
03:20:57,040 --> 03:21:01,200
होनी चाहिए। कम से कम होनी चाहिए। कोई कमी नहीं

2835
03:21:01,200 --> 03:21:05,360
होनी चाहिए। कम से कम एक ये कौन तय करेगा यार?

2836
03:21:05,360 --> 03:21:09,520
ये कौन तय करेगा? मैं बताता हूं। ये कौन तय करेगा? मैं बताता

2837
03:21:09,520 --> 03:21:13,680
हूं और भी हो सकती है। पर मैं बताता हूं क्यों? क्योंकि अगर एक भी कमी

2838
03:21:13,680 --> 03:21:17,680
नहीं है। ये भी तो अपने आप में कमी है। ये ध्यान रखिए। तो आप परम

2839
03:21:17,680 --> 03:21:21,840
रूप जो उसका क्या कहते हैं जो जो उनका जो

2840
03:21:21,840 --> 03:21:27,040
परम रूप है परम उसमें भी आप कमी मानते हो ना

2841
03:21:27,040 --> 03:21:28,640
एक कमी है अरे

2842
03:21:28,640 --> 03:21:32,640
यार मैं बोल रहा हूं कि मानते हो हां कि ना तो तुम एक कमी है क्यों बोल रहे हो

2843
03:21:32,640 --> 03:21:36,640
हां बोलो ना हे कल बात करना जाओ

2844
03:21:36,640 --> 03:21:42,640
जय श्री राम ओके सॉरी

2845
03:21:45,200 --> 03:21:51,200
यही वाला हाल वही भव्य राधा कृष्ण में भी हुआ था

2846
03:21:51,200 --> 03:21:55,280
और एक्चुअली जो अपने पैरामीटर जो वो

2847
03:21:55,280 --> 03:21:59,280
वाले सेट है ना सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ये सब

2848
03:21:59,280 --> 03:22:03,520
जो सेट है जो चीजें हैं उसप बात जब करते हैं तो उसमें वो जल्दी रिजल्ट

2849
03:22:03,520 --> 03:22:08,240
आता है मगर हमको केवल एक यही काम नहीं करना है ना है ना

2850
03:22:08,240 --> 03:22:12,320
कई तरह की जो उसमें चीजें हैं उनको

2851
03:22:12,320 --> 03:22:16,320
लेकर के चलना है तो जैसे वैसे इस विषय पर मैंने

2852
03:22:16,320 --> 03:22:20,480
बहुत ज्यादा डीपली किसी से बात नहीं की थी तो यह बात करनी भी

2853
03:22:20,480 --> 03:22:24,800
आवश्यक थी कि इस कौन का अंतिम निर्णायक कौन है

2854
03:22:24,800 --> 03:22:27,360
है ना

2855
03:22:27,360 --> 03:22:31,600
अब बात दिक्कत दिक्कत क्या है कि पूछो कुछ

2856
03:22:31,600 --> 03:22:36,640
व्यक्ति बोलता कुछ है चार घंटे घुमाता कुछ है और फिर है

2857
03:22:36,640 --> 03:22:41,760
आपको समझ में नहीं आ रहा है हैं बेमतलब

2858
03:22:41,760 --> 03:22:43,840
का अपना इतना लंबा

2859
03:22:43,840 --> 03:22:48,080
खींच मतलब यहां लिखा है कि उनमें किसी भी तरह की कमी

2860
03:22:48,080 --> 03:22:52,240
नहीं हो सकती इसलिए उनमें कमी है। वाह क्या लॉजिक

2861
03:22:52,240 --> 03:22:56,400
है और ये बात प्रपाद ने लिखी है। मतलब

2862
03:22:56,400 --> 03:23:00,400
यहां अचिंत हां फिर अचिंत पे आ गए।

2863
03:23:00,400 --> 03:23:04,560
फिर वो फिर वो क्या कह रहे है? क्योंकि उससे जीव निकले हैं। जीवो में कमी है इसलिए

2864
03:23:04,560 --> 03:23:08,640
उसमें कमी थी। भाई जीवो में निकलने पर कमी दिख रही है।

2865
03:23:08,640 --> 03:23:12,960
और यहां तो वो अद्वैत जैसी बात कर रहे हैं। क्या कह रहे हैं वो?

2866
03:23:12,960 --> 03:23:17,280
देखो प्रभुपाद जी अद्वत जैसी भाषा बोल रहे हैं। यहां पर

2867
03:23:17,280 --> 03:23:22,480
क्या कह रहे हैं देखो

2868
03:23:22,480 --> 03:23:26,560
यहां क्या कह रहे हैं। तो वह अपनी पूर्णता की अनुभूति

2869
03:23:26,560 --> 03:23:31,040
करने का अवसर खो देता है। यानी कि पूर्णता

2870
03:23:31,040 --> 03:23:35,200
की अनुभूति मात्र करनी है। पूर्ण बनना नहीं है। समझ गए? एक

2871
03:23:35,200 --> 03:23:39,200
तो पहली बात तो एक पूर्ण जीव बन सकता है। जीव के लिए

2872
03:23:39,200 --> 03:23:43,360
कह रहे हैं। यदि जीव अपनी पूर्ण चेतना युक्त इस मानव जीवन

2873
03:23:43,360 --> 03:23:47,360
में परम पूर्ण से संबंधित अपनी पूर्णता की अनुभूति

2874
03:23:47,360 --> 03:23:51,360
नहीं करता। ठीक है? यानी कि वो पूर्ण हो सकता है। ठीक है?

2875
03:23:51,360 --> 03:23:55,680
पहली बात। दूसरी बात पूर्णता की अनुभूति करनी है।

2876
03:23:55,680 --> 03:23:59,680
अनुभूति मात्र करनी है। यानी अपूर्ण वो है ही नहीं। है ही

2877
03:23:59,680 --> 03:24:03,920
नहीं। आ गया ना? और ये बंदा उसको सिद्ध करने पे। हां। अच्छा

2878
03:24:03,920 --> 03:24:08,000
एक जगह उसने ये भी कहा था ये क्लेम कर रहा है कि जीव ये

2879
03:24:08,000 --> 03:24:12,160
क्लेम कर रहे हैं कि जीव क्योंकि उनसे निकले अपूर्ण है इसलिए मानना पड़ेगा वो भी अपूर्ण

2880
03:24:12,160 --> 03:24:17,200
है यहां पे प्रपाद जी कह रहे हैं वो पूर्ण है केवल अनुभूति करना बाकी है लो

2881
03:24:17,200 --> 03:24:21,200
दोनों की बातें एकदम ऑोजिट जा रही है सबसे बड़ी

2882
03:24:21,200 --> 03:24:25,520
बात है अगर आप यहां पे ये लिखा है कि उनमें

2883
03:24:25,520 --> 03:24:29,600
किसी भी तरह की कमी होती तो वो भगवान नहीं हो सकते थे पूर्ण नहीं हो

2884
03:24:29,600 --> 03:24:33,680
सकते तो ये बंदा ये कह रहा है कि किसी भी तरह की कमी होती अब मैं बता रहा हूं ये वाली कमी

2885
03:24:33,680 --> 03:24:38,400
होती ये वाली कमी क्यों मान लोगे कि उनमें कमी नहीं है। वाह

2886
03:24:38,400 --> 03:24:42,960
यानी कि भगवान भी भगवान ना होने की स्टेज में जा सकते हैं।

2887
03:24:42,960 --> 03:24:48,480
परम रूप में लीला में नहीं कह रहा हूं। लीला में भगवान

2888
03:24:48,480 --> 03:24:52,480
अपने शरीर को नष्ट करके दिखा सकते हैं। सब कुछ दिखा सकते हैं। मगर अभी पारमार्थिक

2889
03:24:52,480 --> 03:24:56,560
धरातल की बात यदि हो रही है तो वहां पे ये

2890
03:24:56,560 --> 03:25:00,720
बोल रहे हैं कि भैया भगवान भी अपनी जो उसको भगवतता

2891
03:25:00,720 --> 03:25:05,120
से है वो उससे अलग हो सकते हैं। भगवत से अरे भैया भगवान जब भगवतता

2892
03:25:05,120 --> 03:25:09,360
से अलग हो जाएंगे सृष्टि का अस्तित्व कैसे रह जाएगा? हर चीज का कारण

2893
03:25:09,360 --> 03:25:13,840
वही है। हां। नहीं

2894
03:25:13,840 --> 03:25:18,080
तो देखिए मैंने एक एक चीज और लिखा था भैया इसमें और इनहीं सब कंट्राडिक्शन

2895
03:25:18,080 --> 03:25:24,080
की वजह से तो इस की फिलोसफी फेल है।

2896
03:25:24,880 --> 03:25:28,960
सही नहीं एक्चुअली क्या हो जाता है? अब कंट्राडिक्शन अब

2897
03:25:28,960 --> 03:25:33,040
वो इन कंट्राडिक्शन से एक कंट्राडिक्शन से पहले वाले कंट्राडिक्शन को

2898
03:25:33,040 --> 03:25:37,040
प्रूफ कर रहे हैं। जो कंट्राडिक्शन पैदा हो रहा है कि भगवान पूर्ण है तो

2899
03:25:37,040 --> 03:25:41,200
उसको रस की आवश्यकता क्या है? ये कंट्राडिक्शन है। ठीक है? तो वो कह रहे हैं कि

2900
03:25:41,200 --> 03:25:45,200
रस की आवश्यकता रस की आवश्यकता ये सिद्ध करती है

2901
03:25:45,200 --> 03:25:51,120
भगवान में अभाव भी है और तब भी भगवान है

2902
03:25:51,120 --> 03:25:55,280
ये सच्चिदानंद है इनका सच्चिदानंद कौन है जो

2903
03:25:55,280 --> 03:25:59,360
सच्चिदानंद नहीं है वाह क्यों क्योंकि सच्चिदानंद

2904
03:25:59,360 --> 03:26:04,480
सच्चिदानंद ना होने का अभाव आ जाएगा ना उनमें फिर ये

2905
03:26:04,480 --> 03:26:09,520
सच्चिदानंद है क्या माया है अविद्या है ये क्या है क्या भाई

2906
03:26:09,520 --> 03:26:13,440
चलिए मायावाद है

2907
03:26:13,440 --> 03:26:17,600
चलिए ठीक है। आशा करता हूं लोगों को काफी कुछ सीखने को मिला हो।

2908
03:26:17,600 --> 03:26:21,600
काफी देर तक बात हुई। फिर भी प्रतीक को कहूंगा जेंटल व्यक्ति है।

2909
03:26:21,600 --> 03:26:27,040
मगर जहां पर फंस रहे हैं तो वो घुमा भी रहे हैं बात को और

2910
03:26:27,040 --> 03:26:31,280
तीन घंटे हो चुके हैं। मैं पूछ रहा हूं कि अभाव है कि नहीं है। परम

2911
03:26:31,280 --> 03:26:35,280
वाले रूप में तो हां कि ना बोलने की बजाय

2912
03:26:35,280 --> 03:26:39,440
क्या बोल रहे हैं? एक एक चीज का अभाव है कि नहीं है? फिर

2913
03:26:39,440 --> 03:26:40,160
लोग कहते हैं गुस्सा

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03:26:40,160 --> 03:26:44,160
क्यों आता है? चलो ठीक है जय

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03:26:44,160 --> 03:26:48,160
श्री राम राम जय श्री राम
