1
00:00:01,600 --> 00:00:05,680
आपने जब हमारा फॉर्म भरा होगा तो उसमें यह चीज लिख के आई होगी कि हम चर्चा

2
00:00:05,680 --> 00:00:09,760
उसी के साथ करते हैं जो वीडियो के साथ आता है। ओके

3
00:00:09,760 --> 00:00:14,240
ओके आई एम है ठीक है बहुत बढ़िया तो

4
00:00:14,240 --> 00:00:19,200
सभी को जय श्री राम और ईश्वर के को लेकर के

5
00:00:19,200 --> 00:00:23,200
ईश्वर के अस्तित्व को लेकर के हमारी आज चर्चा है हर्षित जी के

6
00:00:23,200 --> 00:00:28,000
साथ तो जी

7
00:00:28,000 --> 00:00:32,240
हर्षित जी आप ईश्वर को नहीं मानते

8
00:00:32,240 --> 00:00:35,120
हां

9
00:00:35,120 --> 00:00:38,640
एक्चुअली मैं थोड़ा

10
00:00:38,640 --> 00:00:44,640
इसको क्रिएट कर लूंगा मैं फोन को रख लेते

11
00:00:45,280 --> 00:00:49,440
रख बोलो सर आप हां जी हां जी

12
00:00:49,440 --> 00:00:55,040
तो ईश्वर के ईश्वर को आप नहीं मानते कि ईश्वर है

13
00:00:55,040 --> 00:00:59,200
हां मैं ऐसा मतलब नहीं मानता कि अभी कोई पर्टिकुलर कोई ईश्वर

14
00:00:59,200 --> 00:01:03,440
है कहीं ना कहीं पे अच्छा आपने कभी ये जानने का प्रयास

15
00:01:03,440 --> 00:01:07,440
किया है कि हम ईश्वर कहते किसे हैं?

16
00:01:07,440 --> 00:01:11,600
कौन है ईश्वर हम ईश्वर एक्चुअली

17
00:01:11,600 --> 00:01:15,680
भावना होती है ये बात है ईश्वर मैंने मैंने जैसे जाना है मैं

18
00:01:15,680 --> 00:01:20,000
मैं आपकी वो नहीं पूछ रहा आपकी मान्यता

19
00:01:20,000 --> 00:01:24,640
हम लोग जिससे आप बात करने आए हैं सनातनी हम

20
00:01:24,640 --> 00:01:28,720
तो हम लोगों के अकॉर्डिंगली ईश्वर क्या है ईश्वर तत्व

21
00:01:28,720 --> 00:01:34,560
हम किसे कहते हैं आपने कभी जानने का प्रयास किया है

22
00:01:34,560 --> 00:01:38,560
हम क्या है आप

23
00:01:38,560 --> 00:01:43,040
सच्चिदानंद को मानते हो सच्चिदानंद को प्राप्त करना चाहते हो आप

24
00:01:43,040 --> 00:01:47,120
हम और सच्चिदानंद क्या है ये आप सच्चिदानंद

25
00:01:47,120 --> 00:01:51,200
क्या है ये भी आप जानते हो हां

26
00:01:51,200 --> 00:01:55,200
अच्छा तो सबके लिए नहीं बट

27
00:01:55,200 --> 00:01:59,280
सबके लिए मेरे भाषण हो अलग-अलग डेफिनेशन है सबके लिए ये बात है

28
00:01:59,280 --> 00:02:03,280
सच्चिदानंद ये बात है सचित आनंद सत्य यानी

29
00:02:03,280 --> 00:02:07,280
सत्य अब जो आस्तिक होता है। उसके लिए सत्य थोड़ा कुछ अलग होता है। नास्तिक

30
00:02:07,280 --> 00:02:11,360
के लिए सत्य कुछ अलग होता है। आस्तिक है वो सत्य किसी भी चीज को मान सकता है। ये

31
00:02:11,360 --> 00:02:15,360
बात है। और नास्तिक जो है वो सत्य को जानता है।

32
00:02:15,360 --> 00:02:19,520
ठीक है ठीक है। मैं बता रहा हूं। सत्य को अब आप मुझे बता दीजिए कि अपनी

33
00:02:19,520 --> 00:02:23,760
माता बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर करते हैं। अब मेरी

34
00:02:23,760 --> 00:02:27,840
बात सुनिए। आप ले दे के आप इस बात पे आते हो। मैं आपको आज क्लियर कर देता हूं।

35
00:02:27,840 --> 00:02:31,920
ठीक है ना? देखो एक बात तो सुनो पहले तो ले दे के और

36
00:02:31,920 --> 00:02:36,080
इस तरह के जो ऐसी भाषा यूज़ करोगे तो फिर मुझे भी थोड़ा सा कठोर

37
00:02:36,080 --> 00:02:41,520
होना पड़ेगा वो आपको ठीक नहीं लगेगा तो नहीं सर मैं नहीं

38
00:02:41,520 --> 00:02:45,600
ले दे के आप ऐसा करते हो आप वैसा करते हो ये तो मैं भी कह सकता हूं ले दे

39
00:02:45,600 --> 00:02:50,240
के आप ईश्वर को ना मानने की बात पे ही आते हैं सारे के सारे

40
00:02:50,240 --> 00:02:54,880
है ना तो मैंने तो आपको व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं किया है ना

41
00:02:54,880 --> 00:02:59,200
किया है क्या बस भाई जो परिभाषा जो तर्क

42
00:02:59,200 --> 00:03:03,520
जो उत्तर नास्तिकों के लिए बनाए गए हैं हमें

43
00:03:03,520 --> 00:03:06,480
प्राप्त है वही हम आपको देंगे ना

44
00:03:06,480 --> 00:03:10,480
कि हम नई किताबें खोल दे। सही बात है। अब ईश्वर के विषय

45
00:03:10,480 --> 00:03:14,880
में यदि हमको बताया गया है हम ईश्वर उसे मानते हैं कि सच्चिदानंद है जो

46
00:03:14,880 --> 00:03:18,880
वही ईश्वर है तो हम आपको ये कह दे कि जो माया मोह स्वरूप है वो ईश्वर

47
00:03:18,880 --> 00:03:21,360
है।

48
00:03:21,360 --> 00:03:26,080
हम अपनी डेफिनेशन बदलेंगे नहीं ना। तो अब मैं पूछ रहा हूं आपसे

49
00:03:26,080 --> 00:03:30,480
जो मोरल वैल्यूस है उनका आधार क्या है? मोरल

50
00:03:30,480 --> 00:03:34,640
वैल्यू नहीं आप वापस पहले आपके उस टॉपिक पे आओ या बात है वो माता की माता को नजर

51
00:03:34,640 --> 00:03:39,120
से बहन को बहन की नजर से उसी को मैंने दूसरे रूप में कहा है

52
00:03:39,120 --> 00:03:44,240
वही है ये मोरल वैल्यू नैतिकता

53
00:03:44,240 --> 00:03:48,800
नहीं बट मैं फिर भी आपको एक बात मैं क्लियर कर दूं मेरी बात सुनो

54
00:03:48,800 --> 00:03:53,440
क्या आप थोड़ा ऐसे बैठिए कि थोड़ा सा चेहरावरा ठीक से दिखाई दे थोड़ा

55
00:03:53,440 --> 00:03:57,280
अभी उसके लिए उसके लिए मैं

56
00:03:57,280 --> 00:04:01,280
एक मिनट के लिए कर सेटिंग कर लीजिए। हां

57
00:04:01,280 --> 00:04:07,280
मैं उसके लिए तो सॉरी बोलता हूं आपसे।

58
00:04:18,400 --> 00:04:24,400
फिर भी चेहरा क्लियर नहीं आया मेरा। नहीं ठीक है। ठीक है। चलिए बताइए।

59
00:04:24,480 --> 00:04:28,560
हां हां तो सर मैं ये बोल रहा नहीं मैं ये बोल रहा था धर्म

60
00:04:28,560 --> 00:04:34,000
अपन को बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताता है। ये बातें हम

61
00:04:34,000 --> 00:04:38,560
धर्म अपन को बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताता है। सर है ना? नहीं

62
00:04:38,560 --> 00:04:44,160
वो ठीक है। मैं कह रहा हूं जब आप ईश्वर के धर्म क्या है मालूम है।

63
00:04:44,160 --> 00:04:48,400
हां मैं मैं जानता हूं धर्म क्या है? क्या है?

64
00:04:48,400 --> 00:04:52,480
ये जो मोरलिटीज होती है ना वो उन्हीं को धर्म बोलते हैं।

65
00:04:52,480 --> 00:04:56,480
बातें मतलब अपने कुछ कोई भी वो काम होते हैं अपने कार्य उन्हीं को

66
00:04:56,480 --> 00:05:00,640
धर्म बोला जाता है कि इसका कार्य ये है। धर्म का उद्देश्य

67
00:05:00,640 --> 00:05:05,120
क्या है? धर्म का उद्देश्य होता है देखो

68
00:05:05,120 --> 00:05:09,200
एक्चुअली देखा जाए तो जो समाज

69
00:05:09,200 --> 00:05:13,680
है ना समाज को बिल्कुल एकता में समाज में एकता बनाए रखना और पवित्रता

70
00:05:13,680 --> 00:05:17,760
बनाए रखना समाज में ये तो धर्म का एक रूप हो गया धर्म का एक

71
00:05:17,760 --> 00:05:22,320
घटक हो गया धर्म का जो मूल उद्देश्य है वो है सच्चिदानंद

72
00:05:22,320 --> 00:05:26,480
को प्राप्त कराने वाले नियम हां

73
00:05:26,480 --> 00:05:30,960
ठीक है धर्म का जो मूल उद्देश्य है वो है भगवान

74
00:05:30,960 --> 00:05:33,520
को प्राप्त कराने वाले नियम। अब

75
00:05:33,520 --> 00:05:37,520
यदि आप ये कहते हैं कि मैं ईश्वर को नहीं मानता, धर्म को मानता हूं

76
00:05:37,520 --> 00:05:41,520
तो आपका धर्म को मानना सिद्ध ही नहीं होगा क्योंकि आप ईश्वर को मानते नहीं है।

77
00:05:41,520 --> 00:05:45,520
तो वो धर्म आपके लिए अस्तित्व में आना सिद्ध नहीं होगा। तो अब

78
00:05:45,520 --> 00:05:50,240
आपके पास धर्म यानी कि ईश्वर को प्राप्त कराने वाली नियमावली

79
00:05:50,240 --> 00:05:54,400
से स्वतंत्र होकर माता बहन और पत्नी में अंतर कराने का

80
00:05:54,400 --> 00:05:58,640
आधार क्या है? करने का आधार क्या है? मोरल वैल्यूस को मानने का आधार

81
00:05:58,640 --> 00:06:02,080
क्या है?

82
00:06:02,080 --> 00:06:06,080
इन मोरल वैल्यूस को मानने का आधार तो मेरी बात सुनो। देखो ये तो

83
00:06:06,080 --> 00:06:10,560
नॉर्मल सामाजिक चीजें हैं। जब से ये मानव समाज

84
00:06:10,560 --> 00:06:15,120
में आया समाज में अच्छी-अच्छी बातें होने लगी तो

85
00:06:15,120 --> 00:06:19,200
मोरलिटीज बनने लगी। ये बात है। और ये मोरलिटी

86
00:06:19,200 --> 00:06:23,200
जो होती है वही यानी कई लोगों ने कई लोगों ने

87
00:06:23,200 --> 00:06:27,840
मिलकर के जो मान लिया उसको आप मान रहे हो। नहीं

88
00:06:27,840 --> 00:06:31,840
कई लोगों ने मान लिया वो वो वो बात नहीं तो क्या बात

89
00:06:31,840 --> 00:06:34,640
है

90
00:06:34,640 --> 00:06:39,120
पहले आप आप उस टॉपिक पे वापस आओ आओ आप

91
00:06:39,120 --> 00:06:43,120
उस टॉपिक पे ही तो है आपने कहा था ना माता बहन और पत्नी पे मैं बताऊंगा आज

92
00:06:43,120 --> 00:06:47,120
आपको क्लियर आप ले देके यही ले आते हो हां तो

93
00:06:47,120 --> 00:06:51,120
मैं बोल रहा हूं नहीं हम ये जो बात

94
00:06:51,120 --> 00:06:55,120
है ना क्या धर्म ये भी बताता है कि किसी का मर्डर करना चाहिए

95
00:06:55,120 --> 00:06:59,200
नहीं करना चाहिए चाहिए कि भाई नहीं करना चाहिए। अच्छी बात है। बिलकुल बताता है।

96
00:06:59,200 --> 00:07:03,840
नहीं करना चाहिए। कब करना चाहिए? किस स्थिति में करना चाहिए? बिलकुल बताता है।

97
00:07:03,840 --> 00:07:07,920
है ना? हां।

98
00:07:07,920 --> 00:07:12,240
आप बिना किसी से निकलना चाहिए। बिना बिना हिले बात करिए। बिना हिले

99
00:07:12,240 --> 00:07:16,320
मत थोड़ा सा। नहीं उसके लिए मैं सॉरी बोलता हूं। थोड़ा एक्चुअली क्या थोड़ा थक

100
00:07:16,320 --> 00:07:20,320
थक गया मैं ये बात है। मैं रेडी नहीं था इस डिबेट के

101
00:07:20,320 --> 00:07:24,400
लिए। अच्छा अच्छा रेडी नहीं थे। अच्छा तो फोन क्यों हो रहा आप? रेडी नहीं थे

102
00:07:24,400 --> 00:07:28,640
तो। नहीं मैंने नहीं आप वापस टॉपिक

103
00:07:28,640 --> 00:07:32,800
पे आओ यह बात है तो यह टॉपिक में आपके पास जवाब नहीं है कि आप माता

104
00:07:32,800 --> 00:07:36,480
को माता की दृष्टि से क्यों देखते हैं

105
00:07:36,480 --> 00:07:40,560
क्यों देखते हैं इसमें धर्म जरूरी थोड़ी जोड़ना इसको

106
00:07:40,560 --> 00:07:44,720
ये बात ये तो तो मुझे मुझे बताओ ना मुझे आप बताओ ना

107
00:07:44,720 --> 00:07:48,800
क्यों देखते हो आपने अभी शुरुआत में एक बात कही थी कि

108
00:07:48,800 --> 00:07:52,800
मैं सत्य को उसको सत्य मानता हूं जिसको मैं जानता हूं तो यहां

109
00:07:52,800 --> 00:07:57,440
पे क्या जाना आपने माता को माता की दृष्टि से देखने के लिए आपने क्या जाना?

110
00:07:57,440 --> 00:08:01,440
क्या साइंटिफिक जान लिया आपने? बहन को बहन की दृष्टि से

111
00:08:01,440 --> 00:08:05,440
देखने के लिए क्या जान लिया आपने? उसमें कोई साइंटिफिक

112
00:08:05,440 --> 00:08:09,600
उसकी जरूरत नहीं है। ये बात है उसके लिए। साइंटिफिक जरूरत नहीं है। मतलब

113
00:08:09,600 --> 00:08:13,680
जैसे भी जैसे भी बहुत से जरूरी नहीं है

114
00:08:13,680 --> 00:08:17,840
कि भाई कोई साइंटिफिकली ऐसे कुछ माना जाए। मोरलिटीज

115
00:08:17,840 --> 00:08:21,920
होती है। यहां पे ये बातें सब सभ्य समाज में रहते हैं तो सभ्य समाज है। बिल्कुल ये सब

116
00:08:21,920 --> 00:08:23,040
नहीं होता। ये बात है

117
00:08:23,040 --> 00:08:27,120
कोई नहीं देखता तो यानी कि यानी कि आप इस नियम को मान रहे हो ना कि बहुत

118
00:08:27,120 --> 00:08:31,600
सारे लोग मानते हैं इसलिए मैं मान रहा हूं तब्य समाज से आपने ले लिया उसको

119
00:08:31,600 --> 00:08:37,600
हां तो बहुत सारे लोग ही तो ईश्वर को भी मान रहे हैं

120
00:08:37,760 --> 00:08:41,840
तो मान सकता है वो जो बहुत सारे लोग मान रहे

121
00:08:41,840 --> 00:08:45,920
हैं वो ईश्वर को ही मान रहे हैं। इसीलिए उनके पास मोरल्टीज है। नहीं

122
00:08:45,920 --> 00:08:50,080
तो वो बहुत सारे लोगों ने उसका पैरामीटर क्या था ये मानने का

123
00:08:50,080 --> 00:08:54,240
उन बहुत सारे लोगों को आप जानो ना क्वेश्चन करो ना उन बहुत सारे लोगों से

124
00:08:54,240 --> 00:08:58,320
पैरामीटर क्या है कि झूठ मत बोलो सच बोलो पैरामीटर क्या है कि बहन

125
00:08:58,320 --> 00:09:02,720
के साथ विवाह मत करो पैरामीटर क्या है कि माता की ओर कुदृष्टि मत डालो

126
00:09:02,720 --> 00:09:06,880
इसका पैरामीटर क्या है क्यों ना डाली जाए क्यों सच बोला जाए

127
00:09:06,880 --> 00:09:11,680
क्यों अन्याय ना किया जाए जब एक बालक

128
00:09:11,680 --> 00:09:15,680
जब एक जब एक बालक एक शिशु का जन्म होता

129
00:09:15,680 --> 00:09:19,680
है तो वो उसको केवल अपना

130
00:09:19,680 --> 00:09:24,160
कंजशन दिखाई दे रहा होता है। जैसे शास्त्रों की भाषा में बोला गया है धर्म

131
00:09:24,160 --> 00:09:28,320
वो आहार निद्रा भय मैथुन उसमें ये चार

132
00:09:28,320 --> 00:09:32,560
चीजें होती है। उसको कोई मतलब नहीं है मैं किसी का अच्छा कर रहा हूं कि बुरा कर रहा हूं।

133
00:09:32,560 --> 00:09:36,800
आहार निद्रा भय मैथुन ये होता है उसके अंदर और आप देख लो

134
00:09:36,800 --> 00:09:38,400
हां जो जो शान

135
00:09:38,400 --> 00:09:42,720
इत्यादि है अभी सर्दियों के दिनों में बहुत सारे जो

136
00:09:42,720 --> 00:09:46,720
मादाएं हैं उन्होंने कई शिशुओं को जन्म दिया है।

137
00:09:46,720 --> 00:09:50,800
आने वाले समय में वो उनहीं के साथ जो है रमण करके दोबारा से नए

138
00:09:50,800 --> 00:09:54,960
शिशुओं की उत्पत्ति कर देंगी।

139
00:09:54,960 --> 00:09:58,960
हम हां मैं जानता हूं ये मनुष्य तो

140
00:09:58,960 --> 00:10:04,400
ऐसा नहीं कर तो वो जो होते हैं इन्हें

141
00:10:04,400 --> 00:10:08,400
एक मिनट इसे अपवाद अपवाद बोलते हैं। ये अपवाद होते हैं। बहुत

142
00:10:08,400 --> 00:10:12,400
से जानवर ऐसे भी होते हैं जो बिल्कुल नहीं करते। इंटरब्रीडिंग ये बात है। प्रकृति में

143
00:10:12,400 --> 00:10:16,400
इंटरब्रीडिंग बिल्कुल भी नहीं होती। प्रकृति खुद इंटरब्रीडिंग के खिलाफ होती है

144
00:10:16,400 --> 00:10:20,880
नेचर क्योंकि अगर मेरी बात सुनो इंटरब्रीडिंग होगी तो मतलब

145
00:10:20,880 --> 00:10:26,080
कौन से जानवर हैं जो ऐसा नहीं करते हैं कौन से जानवर हैं जो ऐसा नहीं करते

146
00:10:26,080 --> 00:10:30,080
शेर होते हैं चिंपांजी शेर होते हैं इस बारे में प्रमाण

147
00:10:30,080 --> 00:10:34,400
क्या है चिंपांजी चिंपांजी होते हैं

148
00:10:34,400 --> 00:10:38,720
डॉग होते हैं प्रेरडॉग मेरी बात सुनो नहीं मेरी बात सुनो सर आप

149
00:10:38,720 --> 00:10:42,880
डॉग होते हैं ना के विषय में प्रमाण है आपके पास कोई

150
00:10:42,880 --> 00:10:46,960
हां मेरे पास प्रमाण है। बताइए मेरी बात सुनो।

151
00:10:46,960 --> 00:10:51,440
तो प्रेरी डॉग आप सर्च करना प्रेरी डॉग जो होते हैं ना अरे

152
00:10:51,440 --> 00:10:53,600
एक एक किस्म के मतलब डॉग्स

153
00:10:53,600 --> 00:10:58,160
होते हैं ये तो ये इनको मतलब साइंटिस्टों ने इन पे वो किया

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00:10:58,160 --> 00:11:02,560
रिसर्च किया साइंटिस्टों ने तो उन्होंने पता किया कि जो जब इनके

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00:11:02,560 --> 00:11:06,560
ब्रीडिंग का समय आता है जब करते हैं वो ब्रीडिंग

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00:11:06,560 --> 00:11:10,640
का समय आता है तो जो बहनें होती है ना अपने भाइयों को अवॉयड करती है ये बात है

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00:11:10,640 --> 00:11:14,640
वो वो दूसरे ग्रुप में जाना पसंद करती है वो शेयर जो होते

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00:11:14,640 --> 00:11:18,640
हैं ना अवॉयड भाई साहब सुनिए अवॉयड करना और ना करने

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00:11:18,640 --> 00:11:23,040
में अंतर है। आप इसी तरह से हो क्या कि अवॉइड

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00:11:23,040 --> 00:11:27,280
करते हो अपनी बहन को मगर अगर काम नहीं चलेगा तो फिर वहां आप ऐसे

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00:11:27,280 --> 00:11:31,600
हो तो उससे तुलना क्यों कर रहे हो? हां तो उससे

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00:11:31,600 --> 00:11:35,840
तुलना मत करो। अब सीधी बात आओ आप आप बोल रहे थे ना कभी जानवर

163
00:11:35,840 --> 00:11:40,080
अब शेर भी नहीं करते। अरे भैया एक यही चीज नहीं है।

164
00:11:40,080 --> 00:11:45,840
चलो इसमें तुम्हारे पास अपवाद है। और भी बहुत सी चीजें है। दूसरे छीन के नहीं खाना है।

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00:11:45,840 --> 00:11:49,840
हां छीन के नहीं खाना ये बात है। अब ये भी सभ्य समाज की वो

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00:11:49,840 --> 00:11:53,920
हां तो वो सभ्य समाज की मोरल बात है। मोरल बात है। मैंने आपसे क्या कहा

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00:11:53,920 --> 00:11:57,920
भाई साहब? वो सभ्य समाज की वो रजिस्टर्ड कोई बुक है जहां लिखा

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00:11:57,920 --> 00:12:02,080
हो। सभ्य समाज ये करेगा। सभ्य समाज ये नहीं करेगा। वो रजिस्टर्ड बुक है क्या कोई

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00:12:02,080 --> 00:12:06,080
नियमावली की?

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00:12:06,080 --> 00:12:10,320
नियमावली की ऐसे बुक थोड़ी होती है वो तो जो भी रहता है उसमें तो नॉर्मल

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00:12:10,320 --> 00:12:15,200
बात समाज क्या मानता है और क्या नहीं मानता है इस विषय में निर्णय कैसे करोगे

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00:12:15,200 --> 00:12:19,200
आधा समाज कहेगा समलैंगिक होना सही है आधा समाज कहेगा समलैंगिक होना कोई

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00:12:19,200 --> 00:12:23,280
दिक्कत नहीं है आधा समाज कहेगा कि बहन से विवाह कर सकते हैं आधा समाज कहेगा नहीं

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00:12:23,280 --> 00:12:27,680
कर सकते हैं आधा समाज कहेगा कि एपिस्टन फाइल जो एपिस्टन

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00:12:27,680 --> 00:12:31,760
फाइल ओपन हुई है वह अच्छा है क्यों उसमें समाज के ही लोग तो जा रहे हैं और

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00:12:31,760 --> 00:12:35,840
आधा समाज कहेगा नहीं गलत है

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00:12:35,840 --> 00:12:39,840
तो कोई निश्चित नियमावली माननी पड़ेगी ना कि भैया यह समाज

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00:12:39,840 --> 00:12:44,000
की वो है। वही निश्चित नियमावली धर्म है।

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00:12:44,000 --> 00:12:48,480
नहीं तो ऐसे समाज के नाम पर कोई भी कुछ भी करेगा। निश्चितता

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00:12:48,480 --> 00:12:53,280
क्या है? निश्चितता कि ये होगा या नहीं होगा।

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00:12:53,280 --> 00:12:57,440
उसी का नाम धर्म है। और दूसरी बात कि आपने

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00:12:57,440 --> 00:13:01,440
जब लोगों के मानने के कारण ये माना कि बहन से विवाह नहीं करना है तो

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00:13:01,440 --> 00:13:05,760
फिर लोगों के मानने के कारण ये भी मानिए ईश्वर है। क्योंकि

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00:13:05,760 --> 00:13:09,760
जिन लोगों ने माना है उनके उनका भी आधार ईश्वर

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00:13:09,760 --> 00:13:14,640
ही है। नहीं तो उनके पास भी ये सवाल आ जाएगा। उन्होंने ऐसा क्यों माना?

186
00:13:14,640 --> 00:13:18,880
ठीक है। जरूरत थोड़ी तो मानना है। धर्म

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00:13:18,880 --> 00:13:21,360
का तो नहीं मानते तो बताओ

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00:13:21,360 --> 00:13:27,360
ना कि माता बहन पत्नी में अंतर किस आधार पे करते हो? बताओ।

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00:13:28,640 --> 00:13:32,960
ये तो मोरल बात है ना। अरे कहां रजिस्टर मोरल

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00:13:32,960 --> 00:13:37,120
बात है। भाई साहब दूसरे टॉपिक

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00:13:37,120 --> 00:13:41,280
पे आओ आप। यानी कि आप एक्सेप्ट करो ना। इसका मेरे पास उत्तर

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00:13:41,280 --> 00:13:46,000
नहीं है।

193
00:13:46,000 --> 00:13:52,000
हां हां नहीं नहीं

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00:13:52,640 --> 00:13:56,880
ये तो इस चीज को मैं आपको नेक्स्ट

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00:13:56,880 --> 00:14:02,880
डिबेट में क्लियर करूंगा करते रहोगे तब तक मैं उसको खींचता रहूंगा

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00:14:04,080 --> 00:14:08,080
नहीं मैं बोल रहा हूं आपसे मैं क्लियर कर रहा हूं कि इस

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00:14:08,080 --> 00:14:12,160
चीज को मैं बिल्कुल फिक्स नेक्स्ट डिबेट में क्लियर करूंगा आपसे नहीं नहीं

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00:14:12,160 --> 00:14:17,360
ये नहीं अभी आप यह बताइए आपके पास उत्तर है कि नहीं

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00:14:17,360 --> 00:14:22,400
वो बाद की बात बाद में देखी जाएगी आपके पास उत्तर है

200
00:14:22,400 --> 00:14:28,400
माता बहन और पत्नी में अंतर करने का आधार

201
00:14:29,360 --> 00:14:33,520
नहीं नहीं अब इसमें एक बात है कि

202
00:14:33,520 --> 00:14:37,600
अगर मैं गहनता में जाऊं तो यानी कि आज आपके पास एक ठोस नियम नहीं

203
00:14:37,600 --> 00:14:43,600
है कि मैं इसलिए माता बहन और पत्नी में अंतर करता हूं। नहीं है ना?

204
00:14:45,840 --> 00:14:50,000
हां हां तो आज की डेट में आप जब आगे

205
00:14:50,000 --> 00:14:54,080
रिसर्च करके आएंगे तो बात अलग है। मगर आज की डेट में ये अंतर करने का

206
00:14:54,080 --> 00:14:58,240
जब आपके पास ठोस आधार नहीं है तो आप ही ने कहा कि आप वही करते

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00:14:58,240 --> 00:15:02,640
हैं वही मानते हैं जो आप जान लेते हैं। यानी कि आज ऐसा संभव

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00:15:02,640 --> 00:15:07,760
हो सकता है क्या कि इस नियम को आप ना माने?

209
00:15:07,760 --> 00:15:12,000
ऐसी संभावना है जब आपके पास ठोस आधार तो है नहीं। आपने जाना है नहीं

210
00:15:12,000 --> 00:15:17,200
अभी तक तो आप नहीं जानते हैं ना

211
00:15:17,200 --> 00:15:22,400
तो इस नियम को ना मानने की संभावना शेष है क्या अभी

212
00:15:22,400 --> 00:15:26,480
नहीं है हम शेष नहीं है यानी

213
00:15:26,480 --> 00:15:29,360
पक्का है

214
00:15:29,360 --> 00:15:33,360
आज से लेकर के आज से लेकर के और जब तक

215
00:15:33,360 --> 00:15:37,360
आप वो नई रिसर्च नहीं कर लेंगे तब तक भी आपका इस नियम को मानने

216
00:15:37,360 --> 00:15:42,400
के लिए आप प्रतिबद्ध हैं। है ना? हां है ना

217
00:15:42,400 --> 00:15:46,560
तो फिर यहां पर तो ये मानना ही पड़ेगा ना कि धर्म है आपका आधार यहां से ले आपकी

218
00:15:46,560 --> 00:15:51,840
रिसर्च आने तक तब तक क्यों मानोगे इस नियम को

219
00:15:51,840 --> 00:15:55,840
नहीं ऐसी बात नहीं है ये तो मानता आ रहा हूं जरूरी नहीं है धर्म आपके

220
00:15:55,840 --> 00:16:00,240
हिंदू हिंदू धर्म नहीं बाकी

221
00:16:00,240 --> 00:16:00,880
फिर खींचेगा

222
00:16:00,880 --> 00:16:04,880
मामला आपने कहा था ना टॉपिक बदल दो अब फिर

223
00:16:04,880 --> 00:16:10,560
खींचेगा आप जस्टिफाई करोगे मैं तह तक जाऊंगा चलो

224
00:16:10,560 --> 00:16:15,040
दूसरे धर्म में भी नहीं होता। यह बात है। क्या सिस्टर के साथ विवाह?

225
00:16:15,040 --> 00:16:18,560
दूसरे धर्म में भी नहीं होता।

226
00:16:18,560 --> 00:16:22,720
तो दूसरे धर्म आए कहां से? पहले तो हमने ये

227
00:16:22,720 --> 00:16:26,720
डिसाइड ये किया है कि धर्म है क्या? तो जब आप

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00:16:26,720 --> 00:16:30,800
कह रहे हो दूसरा धर्म तो उसको फिर आपको धर्म सिद्ध करना पड़ेगा कि वह

229
00:16:30,800 --> 00:16:35,040
भी धर्म है और इसके लिए वहां पर जो ईश्वर है जिससे उस धर्म

230
00:16:35,040 --> 00:16:39,120
के द्वारा वो प्राप्त होने वाली जो मुख्य तत्व है उसको आपको ईश्वर

231
00:16:39,120 --> 00:16:43,120
सिद्ध करना पड़ेगा और हम उसे सिद्ध करेंगे वो अनश्वर है वो ईश्वर

232
00:16:43,120 --> 00:16:45,840
है ही नहीं

233
00:16:45,840 --> 00:16:50,480
करने के लिए तैयार हो टॉपिक चेंज करो आप

234
00:16:50,480 --> 00:16:54,880
हां तो अभी से लेकर के वहां तक तो कम से कम आपके पास

235
00:16:54,880 --> 00:16:59,120
माता बहनों पत्नी में अंतर ना करने का आधार धर्म ही है ना यही मानना पड़ेगा

236
00:16:59,120 --> 00:17:03,840
ना आज से लेके नई रिसर्च आने तक हैं हां

237
00:17:03,840 --> 00:17:08,080
हां फिलहाल आप भी ईश्वर के अस्तित्व को मानने

238
00:17:08,080 --> 00:17:12,720
वाले हैं आज से ले अगली रिसर्च आने तक अस्तित्व

239
00:17:12,720 --> 00:17:16,240
अलग बात है और ये मानना अलग बात है ये बातें अस्तित्व

240
00:17:16,240 --> 00:17:20,480
अलग बात है कि भ कोई पर्टिकुलर चीज कोई बैठी हुई है कहीं ब्रह्मांड

241
00:17:20,480 --> 00:17:24,480
में से वगैरह कहीं मैं आपकी बात को समझना चाह रहा हूं आप ये तो नहीं कह रहे

242
00:17:24,480 --> 00:17:28,640
कहीं कि भाई अस्तित्व अलग बात है कि वो तत्व है। अब मैं उसकी

243
00:17:28,640 --> 00:17:33,200
पूजा करूंगा कि नहीं करूंगा वो एक अलग बात है। आप यह कह रहे हैं क्या?

244
00:17:33,200 --> 00:17:37,360
हां हां तो आप ये कह रहे हैं मतलब ईश्वर को

245
00:17:37,360 --> 00:17:41,600
आप मान रहे हैं मगर मैं उसके प्रति श्रद्धावान नहीं हूं। ईश्वर का अस्तित्व

246
00:17:41,600 --> 00:17:47,600
है। अभी तो मैंने माना अगली चर्चा आने तक।

247
00:17:48,480 --> 00:17:52,640
हां मैं मैं नहीं मानता ये बात ऐसे।

248
00:17:52,640 --> 00:17:56,640
तो क्या मानते हैं फिर बताइए अब से ले और आपकी रिसर्च आने

249
00:17:56,640 --> 00:18:01,360
तक आपका आधार क्या होगा माता बहन पत्नी में अंतर करने का

250
00:18:01,360 --> 00:18:06,080
धर्म ही है ये तो नॉर्मल बात है तो

251
00:18:06,080 --> 00:18:10,160
नॉर्मल है तो नॉर्मल को एक्सेप्ट कर लो ना धर्म है तो नॉर्मल बात है

252
00:18:10,160 --> 00:18:14,240
तो हां क्या ये कोई कह के मर गया था जो बात नॉर्मल हो उसको एक्सेप्ट

253
00:18:14,240 --> 00:18:18,560
मत करना

254
00:18:18,560 --> 00:18:22,800
नहीं आप टॉपिक चेंज करो आप इस बात पे आओ आप दूसरी बात मैं चेंज

255
00:18:22,800 --> 00:18:26,800
मैं चेंज करूंगा मैं चेंज करूंगा मगर अनश्वरवादी हो आए

256
00:18:26,800 --> 00:18:31,120
हो ईश्वर का खंडन करते हो और जो ईश्वर को मानते हैं उनसे आर्ग्यू

257
00:18:31,120 --> 00:18:35,600
आर्गुममेंट करते हो तुम्हें थोड़ा टटोल तो ले कितना

258
00:18:35,600 --> 00:18:39,920
अपने उस मान्यता को लेकर के कितना मजबूत पक्ष है आपका

259
00:18:39,920 --> 00:18:43,920
हां अबे ऐसा थोड़ी ना होगा कि

260
00:18:43,920 --> 00:18:48,400
कोई व्यक्ति आए और हमारे ईश्वर को कह के चला जाए हम नहीं मानते

261
00:18:48,400 --> 00:18:52,720
और हम सुन सुन के बैठ जाए ऐसे थोड़ी ना

262
00:18:52,720 --> 00:18:56,800
नहीं ऐसे तो मैं भी हिंदू धर्म का ही ये बात है। मैं भी ब्राह्मण ब्राह्मणियों

263
00:18:56,800 --> 00:19:00,880
में हर्ष शर्मा नाम है मेरा। भाई साहब भाई साहब देखिए

264
00:19:00,880 --> 00:19:05,120
दो तरीके के धार्मिक होते हैं। एक जो

265
00:19:05,120 --> 00:19:09,840
उस अमुक कुल परंपरा में जन्म लेते हैं जहां धर्म को माना जा रहा है।

266
00:19:09,840 --> 00:19:14,400
और दूसरे जो उस अमुक कुल परंपरा

267
00:19:14,400 --> 00:19:18,400
में जन्म लेने के बाद उसके जो निर्धारित चीजें हैं उस धर्म

268
00:19:18,400 --> 00:19:22,640
की उसको मानते भी हैं। जैसे कि देखा जाए तो दुनिया

269
00:19:22,640 --> 00:19:26,800
में सनातनी शब्द है। सब है क्योंकि जीव

270
00:19:26,800 --> 00:19:31,200
मात्र की प्यास है। असतो मा सद्गमया तसो मा ज्योतिगमया मृत्यु मतमया

271
00:19:31,200 --> 00:19:33,600
तो इस दृष्टि से हम कह सकते हैं कि दुनिया

272
00:19:33,600 --> 00:19:37,760
में कोई है ही नहीं जो सनातनी ना हो मगर जब हम कहते हैं कि कोई मुसलमान

273
00:19:37,760 --> 00:19:41,840
है कोई बाइबल वाला है कोई बुद्ध वाला है तो फिर एक

274
00:19:41,840 --> 00:19:45,840
तरफ तो ये कह रहे हैं सब सनातनी है फिर एक तरफ ये कहते तो जब हम व्यवहार की

275
00:19:45,840 --> 00:19:49,840
दृष्टि से देखते हैं तो तात्विक विवेचना हो गई जब हम व्यवहार की दृष्टि से

276
00:19:49,840 --> 00:19:54,240
देखते हैं तो हम ये देखते हैं कि असतो सदगमया को मानने वाला कौन

277
00:19:54,240 --> 00:19:56,720
है

278
00:19:56,720 --> 00:20:00,960
तब वहां पर वो वो अलग हो जाता है। हम तो भैया असतो मां सर्गमाया को नहीं मानेंगे।

279
00:20:00,960 --> 00:20:04,960
हम तो भैया उसको मानेंगे 433 को कि

280
00:20:04,960 --> 00:20:09,120
मुंह बोली रिश्तों की जहां पर मुंह ये सब मुंह की बातें हैं। अगर

281
00:20:09,120 --> 00:20:13,360
किसी ने आपको माता बहन और ये सब कह दिया है

282
00:20:13,360 --> 00:20:17,440
मुंह से तो आप इससे पलट सकते हैं। तो ये फिर अंतर आ

283
00:20:17,440 --> 00:20:22,400
जाता है। कुरान में कहा गया है सब। ठीक है?

284
00:20:22,400 --> 00:20:26,640
तो यह अंतर आ जाता है कि

285
00:20:26,640 --> 00:20:30,640
तात्विक रूप से हम सभी क्या ढूंढ रहे हैं उसके आधार पर हम ईश्वर की

286
00:20:30,640 --> 00:20:34,640
सिद्धि करते हैं। हम सिद्ध कर देंगे तुम भी सनातनी हो। जैसे अभी मैंने

287
00:20:34,640 --> 00:20:38,800
सिद्ध किया। ठीक है? मगर वो फिर व्यवहार की दृष्टि से क्या

288
00:20:38,800 --> 00:20:42,800
तुम उसको मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो? ततही स्तर

289
00:20:42,800 --> 00:20:46,800
पर उस चीज को मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो? फॉलो कर रहे हो कि

290
00:20:46,800 --> 00:20:48,640
नहीं कर रहे हो? एम्प्लीफाई कर रहे हो कि नहीं कर रहे

291
00:20:48,640 --> 00:20:52,880
हो? स्वयं को उन नियमों के नीचे मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो? फॉलो

292
00:20:52,880 --> 00:20:57,040
तो क्या कर पाएगा कोई? कम से कम स्वयं के ऊपर एक

293
00:20:57,040 --> 00:21:01,440
लॉ को तुम स्वीकार कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो? जिस धर्म कुल परंपरा

294
00:21:01,440 --> 00:21:05,440
में आपका जन्म हुआ है। तब आप हिंदू कहलाएंगे। जिस

295
00:21:05,440 --> 00:21:09,520
हिंदू की हमें आवश्यकता है मैं फॉलो

296
00:21:09,520 --> 00:21:13,680
की जिस हिंदू की समाज को आवश्यकता है वो

297
00:21:13,680 --> 00:21:17,680
हिंदूवाद तब कहलाएंगे जब स्वयं को हिंदू धर्म के धर्म शास्त्रों

298
00:21:17,680 --> 00:21:21,840
के द्वारा बताए गए जो नियम इत्यादि है उनके नीचे स्वयं

299
00:21:21,840 --> 00:21:25,840
को खड़ा पाएंगे और यदि आप उनकी आधीनता स्वीकार नहीं कर रहे हैं

300
00:21:25,840 --> 00:21:29,840
तो आपके ऐसे हिंदुत्व से किसी को कोई सरोकार नहीं है।

301
00:21:29,840 --> 00:21:34,160
इससे अच्छा तो वो जो हिंदू धर्म शास्त्रों

302
00:21:34,160 --> 00:21:38,160
की जो लॉ है उसको स्वीकार नहीं कर रहा है

303
00:21:38,160 --> 00:21:42,160
मान लो नियमों को तो उसके उसमें दिक्कत क्या आएगी मालूम

304
00:21:42,160 --> 00:21:46,160
है उससे अच्छा वो मुसलमान है जिसने अपनी कुरान को अपने ऊपर

305
00:21:46,160 --> 00:21:50,400
लागू कर रखा है मैं बताता हूं क्यों उससे अच्छा वो बाइबल वाला है

306
00:21:50,400 --> 00:21:54,640
जिसने अपनी बाइबल को अपने ऊपर लागू कर रखा है उससे अच्छा वो बुद्ध

307
00:21:54,640 --> 00:21:58,880
वाला है जिसने वो बुद्ध के द्वारा बताए गए जो सिद्धांत है उनको अपने ऊपर लागू

308
00:21:58,880 --> 00:22:02,880
कर रखा है क्यों क्यों? क्योंकि जिसने किसी भी लॉ को अपने

309
00:22:02,880 --> 00:22:03,680
ऊपर लागू नहीं

310
00:22:03,680 --> 00:22:08,320
कर रखा है, उसके कंपैरेटिवली जिसने कर रखा है,

311
00:22:08,320 --> 00:22:12,400
उसके प्रति हम सुनिश्चित तो हो सकते हैं कि भैया इतनी बातें तो यह भी

312
00:22:12,400 --> 00:22:16,640
मानता है। उससे हम ज्यादा अपेक्षा कर सकते हैं कि

313
00:22:16,640 --> 00:22:20,800
इसका मन नहीं बदलेगा। और जो अपने आप को किसी

314
00:22:20,800 --> 00:22:24,960
भी नियमावली के नीचे ही नहीं मानता है वह भले ही किसी को कितना भी मां

315
00:22:24,960 --> 00:22:29,120
मां कहे भले ही किसी को कितना भी बहन बहन कहे मगर

316
00:22:29,120 --> 00:22:33,280
उससे हम ये अपेक्षा कैसे करें कि अमुक घड़ी

317
00:22:33,280 --> 00:22:37,680
में अमुक स्थान पर इंद्रियों के वशीभूत हो के यह व्यक्ति

318
00:22:37,680 --> 00:22:41,680
इस मानने का विरोध भी कर सकता है। नहीं चलो ठीक है

319
00:22:41,680 --> 00:22:47,280
क्या हो गया कोई भगवान है ही नहीं तो हम क्यों माने इस सिद्धांत को

320
00:22:47,280 --> 00:22:51,360
तो जो व्यक्ति अपने आप को नियम धर्म शास्त्रों के

321
00:22:51,360 --> 00:22:55,440
नीचे नहीं मानता उसकी स्थिति ये है कि गलती से वो

322
00:22:55,440 --> 00:22:59,520
ऐसे एकांत वातावरण में पहुंच गया अपनी बहन के साथ ही

323
00:22:59,520 --> 00:23:03,600
तो उसके अंदर आने ये वाला दूसरा वाला जो भाव है

324
00:23:03,600 --> 00:23:07,680
वो आने की संभावना हम ज्यादा एक्सपेक्ट कर सकते हैं बजाय इसके

325
00:23:07,680 --> 00:23:11,840
कि जिस जिसने ऐसी किताब को ऐसे धर्म शास्त्रों को ऐसे नियमों को

326
00:23:11,840 --> 00:23:16,000
स्वीकार कर रखा है जिसमें कि पर्टिकुलरली

327
00:23:16,000 --> 00:23:18,800
वो चीज तो कम से कम मानी गई है कि नहीं इसके साथ तुम्हें

328
00:23:18,800 --> 00:23:22,800
रमण नहीं करना तो जो ये नास्तिक व्यक्ति है इसका तो कोई सिद्धांत

329
00:23:22,800 --> 00:23:27,280
ही नहीं है। क्यों? और सिद्धांत नहीं है इसके कारण

330
00:23:27,280 --> 00:23:31,280
इससे हम अपेक्षा नहीं कर सकते कि इसके साथ इसको इसी की बहन के साथ अकेला

331
00:23:31,280 --> 00:23:35,440
छोड़ा जाए। ठीक है? वहां पर अपेक्षा नहीं की जाती

332
00:23:35,440 --> 00:23:40,640
क्योंकि उसके पास कोई ठोस सिद्धांत नहीं है। अच्छा

333
00:23:40,640 --> 00:23:44,880
दूसरी बात आपने एक बात कही कि धर्म के अन्य धर्मों में भी माना

334
00:23:44,880 --> 00:23:48,960
जाता है। तो वो जो अन्य धर्मों में जितने भी जहां पर भी इंसानियत यानी

335
00:23:48,960 --> 00:23:52,960
कि मोरल्टीज दिखाई दे रही है हम आपको सिद्ध कर सकते हैं कि वो

336
00:23:52,960 --> 00:23:57,120
सारी मोरल्टीज यहां से ही कॉपी की गई है। जैसे कि आप ये

337
00:23:57,120 --> 00:24:01,600
कहो कि मैं थॉमस अलवा एडिसन को नहीं मानता नहीं जानता

338
00:24:01,600 --> 00:24:05,920
मगर आपके घर में बल्ब उसी का जल रहा है। ठीक है?

339
00:24:05,920 --> 00:24:10,160
जानता हूं मैं उसको। हां। तो ऐसे ही कुरान

340
00:24:10,160 --> 00:24:14,480
वाला बाइबल वाला वेद को नहीं जानता नहीं मानता मगर उसके कुरान

341
00:24:14,480 --> 00:24:18,640
में उसके बाइबल में जो ज्ञान का प्रकाश थोड़ा

342
00:24:18,640 --> 00:24:22,640
बहुत है वो कहां से जल रहा है वेद से जल रहा है

343
00:24:22,640 --> 00:24:26,800
अब वो उसको एक्सेप्ट नहीं कर रहा है जैसे आपने दुकान से लिया अब मैं तो दुकान से लाया हूं

344
00:24:26,800 --> 00:24:30,800
थॉमस अलवा एडिसन ने बल्ब थोड़ी ना दिया मुझे मगर मूल में क्या

345
00:24:30,800 --> 00:24:34,080
है मूल में थॉमस अलवा

346
00:24:34,080 --> 00:24:38,080
एडिसन ठीक है बल देने वाला उसी प्रकार से दूसरी बात

347
00:24:38,080 --> 00:24:42,160
अगर आप कहो कि वेद के विरुद्ध जाकर के स्वतंत्र रूप से हमने

348
00:24:42,160 --> 00:24:46,320
जो है इसको पाया है तो थॉमस अलवा एडिसन के विरुद्ध विरुद्ध

349
00:24:46,320 --> 00:24:50,480
जाकर के विरुद्ध थॉमस अलवा एडिसन के विरुद्ध जाकर के हमने बल्ब

350
00:24:50,480 --> 00:24:54,480
को जलाया है विरुद्ध जाकर के है ना तो वहां तो एक बार को पॉसिबल

351
00:24:54,480 --> 00:24:58,880
हो भी सकता है कि कोई नई प्रक्रिया से बल्ब जल जाए है ना परंतु

352
00:24:58,880 --> 00:25:03,040
यहां पे आपको सिद्ध करना होगा कि अगर आप वेद के विरोधी हैं सनातन

353
00:25:03,040 --> 00:25:07,120
के विरोधी हैं तो आप सिद्ध करिए आपका परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म और

354
00:25:07,120 --> 00:25:11,200
सर्वशक्तिमान ईश्वर। ठीक है? तो इतनी बात

355
00:25:11,200 --> 00:25:15,280
तो हमारी हो गई क्लियर। अब आ जाते हैं सच्चिदानंद पे जिसके बारे में आपने शायद

356
00:25:15,280 --> 00:25:19,360
तैयारी की है। इसीलिए आप कह रहे हो कि उस टॉपिक पे आओ उस टॉपिक पे आओ।

357
00:25:19,360 --> 00:25:23,760
नहीं मैं मैं तो मैं तो नहीं बोल रहा। मैंने कोई तैयारी

358
00:25:23,760 --> 00:25:27,760
नहीं ऐसे नहीं की। वो तो हम लोग ये मान रहे हैं कि हमारे हर्षित भट्ट जी

359
00:25:27,760 --> 00:25:32,560
हैं। वो ईश्वर को मानने वाले हैं। अगली रिसर्च आने तक इनकी।

360
00:25:32,560 --> 00:25:36,560
फिलहाल तो हमें यही मानना है ना क्योंकि आप धर्म को

361
00:25:36,560 --> 00:25:40,800
तो मानेंगे। इस बीच जब आप रिसर्च करेंगे उस बीच अपनी

362
00:25:40,800 --> 00:25:45,040
जो घर की स्त्रियां है उनके प्रति अमुक अमुक जो आचरण है उनका निर्वाह तो करेंगे

363
00:25:45,040 --> 00:25:49,200
ना रिसर्च जब कर रहे होंगे तो उस बीच रिसर्च पूरी

364
00:25:49,200 --> 00:25:53,440
होने तक तो आप मानेंगे ना कि हम ईश्वर को मानते हैं। तभी आप मान पाएंगे

365
00:25:53,440 --> 00:25:57,440
अन्यथा सिद्ध नहीं होगा। तो हम यह मानेंगे कि आपकी अगली रिसर्च आने

366
00:25:57,440 --> 00:26:01,600
तक जो आपने कहा है तब तक तो आप कम से कम सनातनी है। ईश्वर में

367
00:26:01,600 --> 00:26:05,840
विश्वास रखने वाले हैं और धर्म को मानने वाले हैं। फिलहाल अभी तक यहां पे पहुंचे

368
00:26:05,840 --> 00:26:09,920
हम लोग है ना। अब वो अगली रिसर्च आप ला पाए यदि

369
00:26:09,920 --> 00:26:14,080
कभी जीवन में वैसे तो संभव है नहीं। है ना?

370
00:26:14,080 --> 00:26:18,160
मगर यदि आपके हिसाब से दुर्जन तोष न्याय से कभी लाभ पाए तो

371
00:26:18,160 --> 00:26:21,840
तब हम देखेंगे कि भाई

372
00:26:21,840 --> 00:26:24,160
हम

373
00:26:24,160 --> 00:26:28,320
अच्छा अब ये अब हमारा वो आर्ग्यू वो ले लो आर्ग्यू

374
00:26:28,320 --> 00:26:32,160
जो हम कह रहे हैं कि

375
00:26:32,160 --> 00:26:36,320
जो सच्चिदानंद है हम सत्य किसे कहते हैं पहले

376
00:26:36,320 --> 00:26:40,560
उसको समझ लो जो कभी भी कन्वर्ट नहीं होता है वो सत्य है

377
00:26:40,560 --> 00:26:44,880
जो एज इट इज रहता है चित मतलब अखंड ज्ञान

378
00:26:44,880 --> 00:26:49,200
उसमें ब्रेक ना लगे ज्ञान में ठीक है और आनंद मतलब एंडलेस

379
00:26:49,200 --> 00:26:53,760
जॉय उसमें ब्रेक नहीं आना चाहिए तो एक

380
00:26:53,760 --> 00:26:58,160
नास्तिक व्यक्ति भी नास्तिक व्यक्ति क्या प्राणी मात्र भी सतचित

381
00:26:58,160 --> 00:27:02,640
आनंद को ढूंढ रहा है तो हमारी ऐसी जितनी भी इनबिल्ट इच्छाएं

382
00:27:02,640 --> 00:27:04,320
हैं जिनको

383
00:27:04,320 --> 00:27:08,480
हम चाहते हुए भी अपने से दूर नहीं कर पा रहे हैं। है

384
00:27:08,480 --> 00:27:12,480
ना? उन सबके विषय का अस्तित्व है दुनिया में। जैसे

385
00:27:12,480 --> 00:27:16,880
हमारे अंदर प्यास है तो उससे पानी का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है। हमारे

386
00:27:16,880 --> 00:27:20,960
अंदर भूख है तो उससे भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है।

387
00:27:20,960 --> 00:27:25,040
तो जिस प्रकार से एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी प्यास से पानी का अस्तित्व

388
00:27:25,040 --> 00:27:29,120
सिद्ध होता है। भूख से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी

389
00:27:29,120 --> 00:27:33,360
प्रकार आपके अंदर व्याप्त जो सच्चिदानंद की चाह है। उसी से सिद्ध

390
00:27:33,360 --> 00:27:37,600
होता है कि इस दुनिया में सच्चिदानंद कोई है। उसी को हम दूसरे

391
00:27:37,600 --> 00:27:41,600
शब्दों में ईश्वर और भगवान कहते हैं। और उसी को प्राप्त करने के

392
00:27:41,600 --> 00:27:46,000
निमित्त हमारे पास एक नियमावली होती है। वेदा आदि शास्त्रों द्वारा जो वर्णित

393
00:27:46,000 --> 00:27:50,320
होती है। उसी नियमावली को फॉलो करके हम उस तक पहुंच सकते जो हमारी

394
00:27:50,320 --> 00:27:54,480
मूल चाह है। ठीक है? अब आप इसका

395
00:27:54,480 --> 00:27:58,640
करिए। आप बताइए क्या आपके अंदर नहीं है ये चाह? आप सच्चिदानंद को नहीं

396
00:27:58,640 --> 00:28:02,240
ढूंढ रहे।

397
00:28:02,240 --> 00:28:06,320
सच्चिदानंद को नहीं परम सबके लिए अलग-अलग

398
00:28:06,320 --> 00:28:11,360
है। सच्चिदानंद एक्चुअली ये बात है। अरे भैया जो मैंने सच्चिदानंद

399
00:28:11,360 --> 00:28:15,520
मैंने क्या कहा आप केवल एक मिनट

400
00:28:15,520 --> 00:28:19,520
भाई साहब एक मिनट मैं आपको एक चीज बता मैंने जो सच्चिदानंद बताया है।

401
00:28:19,520 --> 00:28:23,520
मैंने जो सच्चिदानंद बताया है क्या आप उसको ढूंढ रहे हैं कि नहीं ढूंढ रहे? मैं

402
00:28:23,520 --> 00:28:27,520
ये मैं ये पूछ रहा हूं। आपका वाला अलग होगा। आपका वाला अलग

403
00:28:27,520 --> 00:28:31,520
होगा। जो मेरा वाला है जो मैंने जो व्याख्या बताई है उसको आप ढूंढ रहे

404
00:28:31,520 --> 00:28:36,320
हैं कि नहीं ढूंढ रहे हैं?

405
00:28:36,320 --> 00:28:40,480
सभी ढूंढ रहे हैं उसको तो उसको तो सभी ढूंढ रहे हैं बात है। अगर इनडायरेक्टली देखा

406
00:28:40,480 --> 00:28:44,480
जाए तो सभी ढूंढ रहे हैं इनडायरेक्टली पर डायरेक्टली ऐसा हो नहीं सकता ये बात है। अगर मेरे अंदर

407
00:28:44,480 --> 00:28:48,640
स्पाइडरमैन को देखने की इच्छा मौजूद है। तो जरूरी नहीं स्पाइडरमैन भी मौजूद ही है।

408
00:28:48,640 --> 00:28:52,800
इसका मतलब इसका मतलब आप ऐसी चीज को ढूंढ रहे हो जिसका अस्तित्व

409
00:28:52,800 --> 00:28:56,000
है ही नहीं।

410
00:28:56,000 --> 00:29:00,160
हां आप भी तो ऐसे चीज को ढूंढ रहे हो। अरे भाई मैं तो मान

411
00:29:00,160 --> 00:29:04,960
रहा हूं ना कि वो चीज है। आप कह रहे हो वो चीज नहीं है। आपके

412
00:29:04,960 --> 00:29:09,360
अनुसार मैं पूछ रहा हूं। आपके अनुसार आप ऐसी चीज को ढूंढ रहे हो

413
00:29:09,360 --> 00:29:13,520
जो कि आपके ही अनुसार अस्तित्व में नहीं है। आप खुद

414
00:29:13,520 --> 00:29:19,520
कह रहे हो कि वो नहीं है। पर मैं उसी को ढूंढ रहा हूं।

415
00:29:20,080 --> 00:29:24,240
तो ऐसे अस्तित्व में कैसे हो सकता है कोई? सच्चिदानंद वास्तविकता अरे

416
00:29:24,240 --> 00:29:28,720
भाई मैं मैंने सवाल क्या किया है मैंने सवाल क्या किया है हां

417
00:29:28,720 --> 00:29:33,680
मैंने प्रश्न क्या किया है कि आप

418
00:29:33,680 --> 00:29:37,760
किसी ऐसी एंटिटी को ऐसे तत्व को ढूंढ रहे हो जिसके लिए आप खुद

419
00:29:37,760 --> 00:29:42,800
कह रहे हो कि वो है नहीं

420
00:29:42,800 --> 00:29:46,880
यानी जैसे मान लीजिए कि आप खुद कह रहे हैं कि यहां पे पांच का

421
00:29:46,880 --> 00:29:50,960
सिक्का नहीं है इस कमरे के अंदर और फिर आप उसी पांच के

422
00:29:50,960 --> 00:29:56,160
सिक्के को उसी कमरे में ढूंढ रहे हैं

423
00:29:56,160 --> 00:30:02,160
तो ऐसे व्यक्ति को क्या कहेंगे आप?

424
00:30:03,360 --> 00:30:07,520
वो बात आपको फॉर्म नहीं भरना चाहिए था। बहुत ही या तो आपके

425
00:30:07,520 --> 00:30:12,640
अंदर जो है ना जो वास्तविक सनातनी है ना

426
00:30:12,640 --> 00:30:16,800
वो उसके कारण आप जो है आर्ग्यू नहीं कर पा रहे हैं। जो आपके अंदर

427
00:30:16,800 --> 00:30:20,960
वास्तव में एक धर्मज्ञ व्यक्ति है ना ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुआ है।

428
00:30:20,960 --> 00:30:25,120
पूर्वजों से बाप दादाओं से धर्म मिला है आपको। आपको तो ब्राह्मण कुल

429
00:30:25,120 --> 00:30:29,440
में जन्म मिला है तो आपको उसका पोषण करना चाहिए।

430
00:30:29,440 --> 00:30:33,440
और आप कहां ईश्वर के अस्तित्व को नकारने चले आए और वह भी

431
00:30:33,440 --> 00:30:37,440
सरफेरे लोगों की सभा में। नहीं मैं एक्चुअली नहीं

432
00:30:37,440 --> 00:30:41,440
एक्चुअली मेरी बात सुनो सर। मैं धर्म के खिलाफ नहीं हूं। ये बात है।

433
00:30:41,440 --> 00:30:45,600
धर्म तो बिल्कुल अच्छी बात है। मैं मानता हूं धर्म धर्म अजीब चीज है। मैं मानता हूं ये बात। ईश्वर

434
00:30:45,600 --> 00:30:49,680
के अस्तित्व का खंडन करना सुनिए। ईश्वर

435
00:30:49,680 --> 00:30:54,960
के अस्तित्व का खंडन करना धर्म के खिलाफ होना ही है।

436
00:30:54,960 --> 00:30:59,040
ठीक है? जैसे जैसे कि मैं मैं बता रहा हूं।

437
00:30:59,040 --> 00:31:03,120
जैसे कि मैं मैं बता रहा हूं। जैसे कि मैं कहूं कि भैया

438
00:31:03,120 --> 00:31:07,360
जो है मैं काम करने के

439
00:31:07,360 --> 00:31:11,200
आजीव को पार्जन जो बिजनेस इत्यादि जो चल रहे हैं जॉब है इत्यादि ये

440
00:31:11,200 --> 00:31:15,280
सब जो चल रहा है मैं इसके खिलाफ नहीं। ये तो बहुत अच्छी चीज है जो चल रहा है। पर मैं पैसे

441
00:31:15,280 --> 00:31:19,360
के अस्तित्व को नहीं मानता हूं। तो जब तुमने पैसे

442
00:31:19,360 --> 00:31:23,920
का अस्तित्व ही नकार दिया तो ये जॉब का अस्तित्व कैसे रह जाएगा?

443
00:31:23,920 --> 00:31:28,000
जॉब का पर्यावसान किस में है?

444
00:31:28,000 --> 00:31:32,080
हां, पैसे में ही है। तुमने कहा पैसे का पैसा

445
00:31:32,080 --> 00:31:36,480
दुनिया में है ही नहीं तो कोई आदमी क्यों जाएगा जॉब करने? क्योंकि

446
00:31:36,480 --> 00:31:40,880
पैसा मैंने देख रखा है। ये बात है। पैसा मैंने देख रखा है इसलिए।

447
00:31:40,880 --> 00:31:44,880
बात ये हो रही है कि जिस चीज की आप जो दोहरी बात कह रहे हैं ना

448
00:31:44,880 --> 00:31:48,960
कि मैं धर्म को तो मानता हूं पर मैं ईश्वर को नहीं मानता हूं। अच्छा देखने

449
00:31:48,960 --> 00:31:52,960
वाली बात है तो आपने ऐसा क्या देख लिया जो आप बहन को बहन के साथ बहन वाला

450
00:31:52,960 --> 00:31:57,200
व्यवहार करते हैं? क्या देख लिया?

451
00:31:57,200 --> 00:32:01,360
धर्म एक्चुअली मान्यता ये बात है। हां भाई

452
00:32:01,360 --> 00:32:05,520
तो यानी कि आप कुछ ऐसी चीज मान रहे हैं ना जो आपने देखी नहीं है। एक मिनट।

453
00:32:05,520 --> 00:32:09,520
यानी कि आप कुछ ऐसी चीज मान रहे हैं ना जो आपने देखी नहीं है।

454
00:32:09,520 --> 00:32:15,040
तो उस विषय में जहां पर जो आपको सबसे इंपॉर्टेंट चीज लग रही है धर्म

455
00:32:15,040 --> 00:32:19,840
जो सबसे इंपॉर्टेंट चीज आपको लग रही है धर्म उसके

456
00:32:19,840 --> 00:32:23,840
उसको आचरण में लाने के भाव से ही

457
00:32:23,840 --> 00:32:28,000
आपके ही द्वारा ईश्वर की सिद्धि हो रही है। और अभी मैंने एक चीज पूछी थी कि

458
00:32:28,000 --> 00:32:32,800
आपने पांच का सिक्का देखा नहीं है। ठीक है?

459
00:32:32,800 --> 00:32:36,880
और आप खुद कह रहे हो यहां पर पांच का सिक्का नहीं है। या तो आप यह हो

460
00:32:36,880 --> 00:32:40,960
जाओ कि नहीं हो सकता है। मैंने अभी देखा नहीं है। हो सकता है। मैं

461
00:32:40,960 --> 00:32:45,360
ये नहीं कह सकता नहीं है। अच्छा मैं ढूंढ रहा हूं तो होगा ही।

462
00:32:45,360 --> 00:32:49,360
ढूंढोगे थोड़ी ना। ढूंढोगे तो तभी ना जब होगा जब आप ये

463
00:32:49,360 --> 00:32:55,360
मानोगे कि यहां कमरे में पांच का सिक्का है तभी तो ढूंढोगे।

464
00:32:55,680 --> 00:32:59,840
अच्छा जो ये कह रहा है कि पांच का सिक्का है ही नहीं। वो ढूंढ रहा है

465
00:32:59,840 --> 00:33:05,840
फिर भी पांच के सिक्के को। उस व्यक्ति को आप कहोगे क्या? एक बार बता तो दो।

466
00:33:06,320 --> 00:33:12,320
मूर्ख हैं। क्या कहोगे?

467
00:33:14,160 --> 00:33:18,480
चलो ठीक है हर्षित जी आए आप अच्छा लगा और

468
00:33:18,480 --> 00:33:22,640
जो है आप रिसर्च करिए और रिसर्च होने तक हम मान रहे हैं कि हर्षित

469
00:33:22,640 --> 00:33:28,080
जी जो है अ

470
00:33:28,080 --> 00:33:32,480
हर्षित जी जो है फिलहाल धार्मिक व्यक्ति हैं और ईश्वर के अस्तित्व को विश्वास

471
00:33:32,480 --> 00:33:36,480
रखने वाले हैं। हां ये हो सकता है कि इनके घर में जो

472
00:33:36,480 --> 00:33:40,560
माता-पिता इत्यादि पूर्वज है इनके उन्होंने इनको वो स्ट्रांग वजह

473
00:33:40,560 --> 00:33:44,560
नहीं दी कि ईश्वर इसलिए है और इन्होंने भी कभी इस तरह से आत्मचिंतन

474
00:33:44,560 --> 00:33:48,720
नहीं किया कि मैं बहन को बहन क्यों मानता हूं आज से और रिसर्च पूरी होने

475
00:33:48,720 --> 00:33:52,880
तक अपने आप से केवल एक ही सवाल करिए कि मैं माता को माता क्यों

476
00:33:52,880 --> 00:33:57,120
मानू और मैं बहन को बहन क्यों मानू बस उसी में आप पहुंच जाएंगे

477
00:33:57,120 --> 00:34:01,440
ईश्वर तक ठीक है और सच्चिदानंद

478
00:34:01,440 --> 00:34:05,520
की बात तो आपको पता ही कि मैं क्यों चाहता हूं जब साइंस ये कह

479
00:34:05,520 --> 00:34:09,520
रही है कि भैया आप कभी आप अभी साइंस ने घोषित नहीं किया कि आप

480
00:34:09,520 --> 00:34:13,760
नहीं मरोगे कभी भी। फिर भी मैं मृत्यु का भाव आने पर ही चिंतित

481
00:34:13,760 --> 00:34:17,840
हो जाता हूं। अपने प्रियजनों के बारे में अगर मैं सुन लूं कि वो

482
00:34:17,840 --> 00:34:21,840
दिन कैसा होगा जब वो आखरी सासे ले रहे होंगे तो आप दुखी हो जाते हो। क्यों

483
00:34:21,840 --> 00:34:26,480
मृत्यु से भाग रहे हो? मृत्यु तो सत्य है।

484
00:34:26,480 --> 00:34:30,480
आपके हिसाब से मृत्यु से भाग रहे हो आप तो नहीं भागना चाहिए।

485
00:34:30,480 --> 00:34:34,640
ये सारी बातें आप ले जाओ। और भी कुछ लोग आ गए। मुझे लगता है उनसे उनको

486
00:34:34,640 --> 00:34:38,640
हम ले लें। आप आए अच्छा लगा और अपनी रिसर्च तैयार करके लाओ। हां। ठीक

487
00:34:38,640 --> 00:34:44,240
है।

488
00:34:44,240 --> 00:34:48,480
जय श्री राम। जय श्री राम सर।

489
00:34:48,480 --> 00:34:53,120
हम जय श्री राम का अर्थ भी सुन लीजिए।

490
00:34:53,120 --> 00:34:57,120
हर्षित जी। जय श्री राम का अर्थ सुनते हैं। भाई हां

491
00:34:57,120 --> 00:35:01,200
सुनाओ। जय श्री राम। कभी-कभी कुछ लोग

492
00:35:01,200 --> 00:35:05,520
टोक देते हैं कि जय श्री राम क्यों बोले? तो हां

493
00:35:05,520 --> 00:35:09,680
श्री राम को धर्म कहा गया है। श्री राम कौन

494
00:35:09,680 --> 00:35:13,920
है? जो जिन जो धर्म के विक्रहवान स्वरूप है। और धर्म

495
00:35:13,920 --> 00:35:18,080
क्या है? वह नियम जो हमें माता बहनों पत्नी

496
00:35:18,080 --> 00:35:22,320
में अंतर करना सिखाते हैं। उन नियमों को धर्म कहते हैं। यानी कि वह नियम

497
00:35:22,320 --> 00:35:26,400
जो हमें जानवर से मनुष्य बनाते हैं। मनुष्य और जानवर के बीच में

498
00:35:26,400 --> 00:35:30,560
अंतर करते हैं। तो जब भी हम कहते हैं कि जय श्री राम तो उसका

499
00:35:30,560 --> 00:35:34,640
अर्थ होता है उन नियमों की जय। जो नियम हमें मनुष्य बना रहे

500
00:35:34,640 --> 00:35:38,720
हैं। तो इसलिए कभी भी जय श्री राम बोलने में किसी को भी

501
00:35:38,720 --> 00:35:42,880
लज्जा का भाव नहीं आना चाहिए। यदि आ रहा

502
00:35:42,880 --> 00:35:46,880
है तो इसका मतलब है वह पशुता का पोषण करना चाहता है

503
00:35:46,880 --> 00:35:51,040
राम के विरुद्ध जाकर। ठीक है? चलिए जय श्री

504
00:35:51,040 --> 00:35:55,840
राम। जय श्री राम सर। धन्यवाद।

505
00:35:55,840 --> 00:36:00,960
नेक्स्ट टाइम मिलता हूं आपको। बिल्कुल।

506
00:36:00,960 --> 00:36:05,040
पंडित जी कैसे हैं? जय श्री राम। ले

507
00:36:05,040 --> 00:36:09,760
दे के आप भी फिर जय श्री राम।

508
00:36:09,760 --> 00:36:13,120
क्यों नहीं

509
00:36:13,120 --> 00:36:17,360
जबरदस्त हम क्या मतलब पूरी

510
00:36:17,360 --> 00:36:22,000
स्टोरी जो है पूरी रख दी है शुरू से लेकर अंत तक हम

511
00:36:22,000 --> 00:36:26,080
लगभग सभी टॉपिक जो थे मुख्य मुख्य वो सारे टॉपिक

512
00:36:26,080 --> 00:36:30,320
कवर कर दिए उसमें नहीं मुख्यमुख्य नहीं वो उससे पूरा समझ में आ जाएगा

513
00:36:30,320 --> 00:36:34,640
कहानी कुछ छूटा ही नहीं है ऐसा है जी तो वो

514
00:36:34,640 --> 00:36:38,640
काफी बढ़िया था और वो तो रिलीज होते ही

515
00:36:38,640 --> 00:36:43,360
देख लिया था मैंने। हम आपने पहले ही देख लिया।

516
00:36:43,360 --> 00:36:48,000
आज एक वीडियो रिलीज किया गया है जिसमें भागवतानंद और हमारे बीच में जो कंट्रोवर्सी

517
00:36:48,000 --> 00:36:52,080
है उसका पूरा आपको समझ में आ जाएगा। शुरुआत कैसे हुई? शुरुआत

518
00:36:52,080 --> 00:36:56,160
में कौन किस प्रकार से बातें कर रहा था? क्योंकि यह भी सुनने में आता

519
00:36:56,160 --> 00:37:00,320
है कि भाई तुम कैसे बात करते हो हमारे जगतगुरु करणा जगत गुरु से हैं।

520
00:37:00,320 --> 00:37:05,280
बात करने का बात करने की सभ्यता नहीं है। तो

521
00:37:05,280 --> 00:37:09,360
यह सब चीजें भी है। मतलब मेरा पर्सनल रेकमेंडेशन है। यह

522
00:37:09,360 --> 00:37:13,600
ऐसी वीडियोस है जो मस्ट वाच है और वो एक बार सबको देखनी

523
00:37:13,600 --> 00:37:16,000
चाहिए। तो उसमें शुरुआत में आप देख सकते

524
00:37:16,000 --> 00:37:20,400
हैं कि हमने शुरू में कैसे बोलना प्रारंभ किया था। कैसे उदारता दिखाई थी।

525
00:37:20,400 --> 00:37:24,800
पर उदारता को लोगों ने कायरता समझ लिया है ना

526
00:37:24,800 --> 00:37:28,880
गुरुदेव कहते हैं ना कि उदा कि हिंदुओं की

527
00:37:28,880 --> 00:37:32,960
उदारता को कायरता समझना भूल है। हां

528
00:37:32,960 --> 00:37:37,120
बिल्कुल तो वही हुआ सामने वाले ने हमारी उदारता को कायरता

529
00:37:37,120 --> 00:37:41,440
समझ लिया। अच्छा उदारता इसलिए थी कि जो सनातन मान हिंदुओं

530
00:37:41,440 --> 00:37:45,520
के लिए ठोस कारवाईया है उनमें बाधा ना पड़े और उसने

531
00:37:45,520 --> 00:37:50,240
ऐसी भाव को उसकी क्योंकि उसका वो नहीं था।

532
00:37:50,240 --> 00:37:54,320
उसका मुख्य उद्देश्य यह नहीं था। दमन सनातन

533
00:37:54,320 --> 00:37:58,560
विरुद्ध विचारधाराओं का दमन उसका मुख्य उद्देश्य नहीं था। उसको किसी तरीके से रोटी

534
00:37:58,560 --> 00:38:02,720
सेकना उसका उद्देश्य था। तो कोई है

535
00:38:02,720 --> 00:38:06,800
क्या इस समय

536
00:38:06,800 --> 00:38:10,880
कुछ लोग डिस्कशन कमेंट्स पे कर रहे हैं। अगर ये प्रश्न है आपके तो आप लेकर पूछ सकते

537
00:38:10,880 --> 00:38:15,040
हैं। है ना? हम आ जाइए

538
00:38:15,040 --> 00:38:19,040
लाइव। हां चेहरा लेकर आइएगा। उससे फायदा यह होता है

539
00:38:19,040 --> 00:38:23,840
कि वो जो मैसेज है वो ज्यादा से ज्यादा

540
00:38:23,840 --> 00:38:27,840
फैलता है। उसकी रीच बढ़ जाती है और हमारे पास

541
00:38:27,840 --> 00:38:32,000
जब वो सुविधा है चेहरा देख के आमने सामने

542
00:38:32,000 --> 00:38:36,080
से बात करने की तो फिर हम नहीं तो अगर केवल आवाज में ही बात करनी

543
00:38:36,080 --> 00:38:40,240
थी तो फोन कर लेते ना एक दूसरे को या लाइव स्ट्रीम में आने की आवश्यकता क्या

544
00:38:40,240 --> 00:38:44,240
थी? सही बात है। देखिए ये तो

545
00:38:44,240 --> 00:38:48,480
मैं ये पहले पांच मिनट में ही हो गया था इनका काम। हर्षित जी का

546
00:38:48,480 --> 00:38:53,280
लेकिन फिर भी आपने ऑलमोस्ट 35 40 मिनट इनको

547
00:38:53,280 --> 00:38:57,840
समय दे दिया है। अच्छा है मतलब ठीक है इनको भी थोड़ा कांसेप्ट इनका क्लियर होगा।

548
00:38:57,840 --> 00:39:01,840
और जो कुछ इंटेलेक्चुअल नास्तिक जो इस वीडियो को देखते हैं मैं देखता हूं

549
00:39:01,840 --> 00:39:05,840
कई बार वो बाद में मैंने जो चीजें क्लियर नहीं की होती है तो बाद में

550
00:39:05,840 --> 00:39:09,920
उन उन विषयों को लेकर के वो कुछ ना कुछ कुछ ना लंबे-लंबे मैसेज कर

551
00:39:09,920 --> 00:39:14,080
देते हैं। बिल्कुल। तो इसलिए मैंने

552
00:39:14,080 --> 00:39:18,400
कहा एक पूरा एक पैटर्न में एक अपना बता दो जिससे कि जो भी

553
00:39:18,400 --> 00:39:22,160
ऐसा कोई इंटेलेक्चुअल पर्सन आ जाए तो वो उन छूटे

554
00:39:22,160 --> 00:39:26,640
हुए टॉपिक्स को आधार बना के खामखा मगजमारी ना करे कमेंट में।

555
00:39:26,640 --> 00:39:31,680
यद्यपि हमारी सबसे जो मुख्य बात है वो तो अंत में आ ही जाएगी वीडियो के।

556
00:39:31,680 --> 00:39:35,840
यदि आपको कोई भी किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद है तो दिए

557
00:39:35,840 --> 00:39:40,320
गए नंबर पर WhatsApp करें। [हंसी] अच्छा

558
00:39:40,320 --> 00:39:44,320
एक बात और है आपको पता है मैंने आज एआई

559
00:39:44,320 --> 00:39:48,480
से और पूछा था कि किसी को यदि स्वप्न में

560
00:39:48,480 --> 00:39:52,640
स्वप्न में किसी ने दीक्षा दे दी है आकर के मंत्र आ गया है उसके

561
00:39:52,640 --> 00:39:56,880
पास अच्छा हां या फिर कोई ऐसा

562
00:39:56,880 --> 00:40:00,960
व्यक्ति है जो अपने आप संस्कृत पढ़पुढ़ा के जो है दयानंद जी टाइप

563
00:40:00,960 --> 00:40:05,040
का वो संस्कृतज्ञ बन करके जो है वो स्वयं को

564
00:40:05,040 --> 00:40:09,120
आचार्य गिनने या गिनवाना चाहता है। हां तो उसके

565
00:40:09,120 --> 00:40:13,360
पक्ष की ओर से आप मुझसे तर्क रखिए। क्या

566
00:40:13,360 --> 00:40:17,440
क्या रख वो तैयार हो गया। हां ठीक है रख देता हूं। मैंने कहा ठीक

567
00:40:17,440 --> 00:40:21,520
शुरू करो। फिर हुआ शुरू फिर उसने तर्क रखे तो जितने तर्क रखे

568
00:40:21,520 --> 00:40:25,680
मैंने सबको वो वो उसका वो बना

569
00:40:25,680 --> 00:40:29,680
के लड्डू आपका पूरा आपका

570
00:40:29,680 --> 00:40:34,400
पूरा वार्म अप होता रहता है उसमें। है ना? एक तरह से तैयारी हो जाती है आपकी।

571
00:40:34,400 --> 00:40:37,280
तर्क ले दुनिया भर की। भागवतानंद स्वयं आ नहीं

572
00:40:37,280 --> 00:40:41,600
रहा है। अरुण पांडे जी आए थे तो मुझे लगा था कि थोड़ा भोजन मिलेगा।

573
00:40:41,600 --> 00:40:45,760
अब अरुण पांडे जी जब आए थे तो

574
00:40:45,760 --> 00:40:49,840
मुझे लगा था कि भाई भागवतानंद की ओर से कोई ऐसा व्यक्ति आ रहा है

575
00:40:49,840 --> 00:40:54,160
जिसको जिसके निरुत्तर होने पर भागवतानंद को

576
00:40:54,160 --> 00:40:58,240
चोट पहुंचेगी। हालांकि वो उसमें भी कह देता हम हम थोड़ी ना निरुत्तर हुए अरुण

577
00:40:58,240 --> 00:41:02,560
पांडे जी वो तुरंत अलग हो जाता मगर फिर भी

578
00:41:02,560 --> 00:41:06,560
अरुण पांडे जब इनकी परंपरा को सिद्ध ना कर पाते

579
00:41:06,560 --> 00:41:10,720
वहां पर आमनेसामने में तो कुछ प्रभाव

580
00:41:10,720 --> 00:41:14,800
पड़ता भागवत अनंत पर तो मुझे कोई मिला था क्योंकि मैं ढूंढ रहा हूं भाई कोई

581
00:41:14,800 --> 00:41:18,880
आए उसके पक्ष से और सामने से मैं निरोत्तर करूं कोई मिलता ही नहीं है अच्छा

582
00:41:18,880 --> 00:41:22,880
मिलते हैं तो उसके कुछ बिल्कुल अभी नववीत

583
00:41:22,880 --> 00:41:26,880
फॉलोवर्स इत्यादि मिलते हैं तो उससे कोई काम है नहीं भाई वो अज्ञानी हो

584
00:41:26,880 --> 00:41:30,880
सकते हैं उनको पता नहीं हो चीजों के बारे में तो फॉलोअर्स का मुंह

585
00:41:30,880 --> 00:41:34,880
बंद करने से कोई ऐसा खास हां ये ये हम कर सकते हैं कि ज्यादातर फॉलोअर्स

586
00:41:34,880 --> 00:41:38,960
कैसे हैं उनका स्तर क्या है भागवतानंद को आचार्य मानने

587
00:41:38,960 --> 00:41:43,920
के संबंध में उनके पास क्या है तो आपने देखा ही है आज के वीडियो में

588
00:41:43,920 --> 00:41:48,400
नहीं ये बात ये बात अच्छा है कि आप मतलब कभी अगर कोई

589
00:41:48,400 --> 00:41:52,320
भागवत आनंद को लेकर अगर कोई भी उनके आगे जो आचार्य आदि जो शब्द लगाता है ना आप

590
00:41:52,320 --> 00:41:56,320
पहले ही रोक देते हैं उसको शुरुआत वैसे करते [हंसी] हैं। क्यों क्यों माने

591
00:41:56,320 --> 00:41:59,520
आपने कैसे बोल दिया

592
00:41:59,520 --> 00:42:03,760
गुरुदेव ने गुरुदेव ने एक बार बात कही थी कि निग्रहचार्य जो

593
00:42:03,760 --> 00:42:08,000
है वो केवल भगवान उसमें कारण है ना उसमें कारण

594
00:42:08,000 --> 00:42:12,080
ये है और उसमें भी अगर मैं एक बात जोड़ दूं तो भगवती

595
00:42:12,080 --> 00:42:16,400
के स्वरूप में वो ब्रह्म जो है वो निग्रह करते हैं। हां। उसका

596
00:42:16,400 --> 00:42:20,480
कारण यह है कि आपको पहले

597
00:42:20,480 --> 00:42:24,640
जितने भी जो संप्रदाय हैं जो स्वयं के वैदिक होने का दावा कर रहे हैं

598
00:42:24,640 --> 00:42:29,200
सभी संप्रदाय। ठीक है? तो पहले तो आपको

599
00:42:29,200 --> 00:42:33,200
उन उन संप्रदायों के यहां पर जाकर के

600
00:42:33,200 --> 00:42:38,400
उनकी शिक्षा उनकी परंपरा से प्राप्त करनी पड़ेगी।

601
00:42:38,400 --> 00:42:42,720
ठीक है? और यदि शिक्षा को आपने उनकी परंपरा में जाकर के प्राप्त नहीं किया

602
00:42:42,720 --> 00:42:46,720
तो आपके द्वारा उन उस अमुक अमुक परंपरा के संबंध

603
00:42:46,720 --> 00:42:51,040
में कहे जाने वाले वक्तव्य प्रामाणिक कैसे होंगे? प्रामाणिक

604
00:42:51,040 --> 00:42:55,200
क्यों माने जाएंगे? जब आपने प्रामाणिक रीति से अध्ययन नहीं किया तो प्रामाणिक

605
00:42:55,200 --> 00:42:59,280
आपके वक्तव्य होंगे नहीं। जैसे अभी अपया दीक्षित जी का मामला था। अपया

606
00:42:59,280 --> 00:43:03,280
दीक्षित जी ने वहां पर शबरी पे फोकस ही नहीं था। उनका

607
00:43:03,280 --> 00:43:07,920
फोकस था वो उन्हें यह बताना था कि जन्मांतर से

608
00:43:07,920 --> 00:43:12,000
यदि आपने पूर्व जन्म में पुण्य कर्म किए हैं जिनका लाभ आपको इस

609
00:43:12,000 --> 00:43:16,080
जन्म में मिला है तो इस कारण से शद्र शद्र का शरीर प्राप्त

610
00:43:16,080 --> 00:43:20,240
होने पर भी आप मुक्ति पथ में आगे बढ़ सकते हैं। आपका कल्याण हो

611
00:43:20,240 --> 00:43:24,560
सकता है। तो इसलिए उन्होंने वो धर्मव्याद वाला उदाहरण लिया

612
00:43:24,560 --> 00:43:28,880
वहां से विष्णु धर्म पुराण से। अब वो एक बाय

613
00:43:28,880 --> 00:43:33,040
डिफॉल्ट था। बाय प्रोडक्ट था कि साथ में वहां शबरी जी का भी नाम आ गया

614
00:43:33,040 --> 00:43:37,040
कि धर्मव्याद जी को मुक्ति वैसे ही मिली जैसे शबरी जी को मिली।

615
00:43:37,040 --> 00:43:41,120
ठीक है? अब यहां पे धर्मव्याद जी को धर्मव्याद

616
00:43:41,120 --> 00:43:45,280
शूद्र को मुक्ति ऐसे मिली जैसे शबरी शद्र को मिली। ये नहीं लिखा है श्लोक में।

617
00:43:45,280 --> 00:43:49,360
धर्मव्यास जी को वैसी ही मुक्ति मिली जैसी शबरी को। तो कौन सी मुक्ति मिली थी?

618
00:43:49,360 --> 00:43:53,520
तो शबरी जी का जो मुक्ति का विवरण है उस विवरण का

619
00:43:53,520 --> 00:43:57,520
चित्तांकन करने के लिए कहा गया विष्णु धर्म पुराण में कि धर्म

620
00:43:57,520 --> 00:44:01,680
व्याद को वैसे मुक्ति मिली जैसे शबरी जी को मिली थी। कैसे मिली थी? तो उनका वो

621
00:44:01,680 --> 00:44:05,760
सीन है रामायण में ऐसे मिली थी। उस सीन के कारण

622
00:44:05,760 --> 00:44:10,400
विष्णु धर्म पुराण में उनका नाम आया शबरी जी का और वहां पे

623
00:44:10,400 --> 00:44:14,800
धर्म व्याद के साथ नाम आ जाने के कारण अपया दीक्षित जी ने

624
00:44:14,800 --> 00:44:18,800
किया। इन दोनों में से ना तो विष्णु धर्म पुराण और ना ही अपया

625
00:44:18,800 --> 00:44:23,200
दीक्षित जी वाला जो मामला है दोनों ही जगह पर शबरी

626
00:44:23,200 --> 00:44:27,440
की जाति के निर्णय की बात ही नहीं हो रही थी। विष्णु धर्म

627
00:44:27,440 --> 00:44:31,680
पुराण में योग की महिमा बताई जा रही थी और यहां पर वो एक

628
00:44:31,680 --> 00:44:36,080
एक सिद्धांत की सिद्धि कर रहे थे कि जन्मांतर से प्राप्त

629
00:44:36,080 --> 00:44:40,400
पुण्य कर्मों के फल के कारण आपको शूद्र शरीर

630
00:44:40,400 --> 00:44:44,480
में भी मुक्ति पथ में आप आगे कल्याणक मार्ग पर जा सकते

631
00:44:44,480 --> 00:44:48,560
हैं। दोनों का उद्देश्य अलग कहीं पे भी शबरी

632
00:44:48,560 --> 00:44:52,560
जी के जाति का निर्णय है ही नहीं। तो अब इन्होंने क्या किया नहीं देखो

633
00:44:52,560 --> 00:44:56,640
अपया दीक्षित जी ने मान तो क्या हुआ प्रामाणिक रीति से आपने उनका अध्ययन तो किया

634
00:44:56,640 --> 00:45:00,880
नहीं अब आपने खुद से उनके शब्दों को पढ़ लिया तो यही तो आर्य समाज

635
00:45:00,880 --> 00:45:04,960
कहते हैं आर्य समाज हमसे आके कहने लगते हैं शंकराचार्य ने तो वो लिखा है क्या

636
00:45:04,960 --> 00:45:08,960
कहते हैं परा परा भक्ति

637
00:45:08,960 --> 00:45:12,960
हम तो उसमें तो उन्होंने निराकार माना है।

638
00:45:12,960 --> 00:45:17,280
अरे भैया शंकराचार्य जी का आप गीता भाष्य उठा के देख लीजिए उसमें

639
00:45:17,280 --> 00:45:21,360
जाने कितनी जगह उन्होंने जो है सगुण साकार की बात भी की और पुराणों के उदाहरण

640
00:45:21,360 --> 00:45:25,440
दिए पुराणों के जब उदाहरण दे रहे हैं तो पुराणों को मान रहे हैं और पुराणों को मान रहे हैं तो पुराणों

641
00:45:25,440 --> 00:45:29,600
में तो सगुण साकार का सचित्र चित्रण है हम भरभ

642
00:45:29,600 --> 00:45:34,000
के हां बिल्कुल तो अब वो लोग कहते हैं कि हम शंकराचार्य

643
00:45:34,000 --> 00:45:39,040
जी को तुमसे ज्यादा जानते हैं तो हम उनसे पूछते हैं कि शंकराचार्य जी की किताब

644
00:45:39,040 --> 00:45:44,560
परा भक्ति या जो भी है वो आपके पास आई कैसे आएगा

645
00:45:44,560 --> 00:45:48,880
और हम ही को झूठा कह रहे हैं। हां तो यह है

646
00:45:48,880 --> 00:45:53,440
कि सबसे पहली बात तो उस अमुक अमुक संप्रदाय में सब में आपको प्रामाणिक

647
00:45:53,440 --> 00:45:57,680
रीति से अध्ययन करना पड़ेगा जो संभव नहीं है मनुष्य दृष्टि से कि सभी जितनी

648
00:45:57,680 --> 00:46:02,720
भी परंपरा है चलो कर भी लिया तो अद्वैत को

649
00:46:02,720 --> 00:46:07,280
प्रमाण मानने वाले के रूप में आपको अन्यों को अप्रमाण मानना पड़ेगा।

650
00:46:07,280 --> 00:46:11,360
अब क्या है कि शंकराचार्य जी का सिद्धांत तो यह नहीं था कि भैया जो

651
00:46:11,360 --> 00:46:15,440
एज इट धर्म का शास्त्रों के निर्णय को ना मान रहा हो उसके साथ

652
00:46:15,440 --> 00:46:19,520
शास्त्रार्थ करना ही करना है। अगर वो धर्म को मान लिया तो ब्रह्म को नहीं भी मान रहा है तब

653
00:46:19,520 --> 00:46:23,680
भी जो है वो एक्सेप्टेबल मगर

654
00:46:23,680 --> 00:46:27,760
आपका तो ऐसा नहीं है। आपको तो शास्त्र के अर्थ में जरा सी भी छेड़छाड़

655
00:46:27,760 --> 00:46:31,840
होगी तो आपको तो निग्रह करना है। तो आपको फिर यदि आप अद्वैत को मानने

656
00:46:31,840 --> 00:46:35,920
वाले हैं तो आपको विशिष्टाद्वैत का निग्रह करना है। आपको द्वैताद्वैत का निग्रह

657
00:46:35,920 --> 00:46:40,080
करना है। शुद्ध्वत का निग्रह करना है। सबका निग्रह करना है।

658
00:46:40,080 --> 00:46:44,080
सबका निग्रह करने का मतलब कि सब लोग अद्वैत को मानने लगे।

659
00:46:44,080 --> 00:46:48,880
तो जब सब लोग अद्वैत को मानने लगेंगे तो निग्रचार

660
00:46:48,880 --> 00:46:53,260
कहां से करेंगे? उसका निग्रह करेंगे।

661
00:46:53,260 --> 00:46:54,240
[हंसी] तो वो

662
00:46:54,240 --> 00:46:58,240
खत्म ही हो जाएगा। और यदि निग्रह नहीं करेंगे तो अपना निग्रह का ठप्पा

663
00:46:58,240 --> 00:47:02,480
हटाओ। कि हम निग्रचार है तो इसलिए ईश्वर

664
00:47:02,480 --> 00:47:06,880
ही निग्रचार हो सकते हैं। निग्रह करने वाले आचार्य

665
00:47:06,880 --> 00:47:11,040
ईश्वर ही होते जो सब जगह पर अपनी भूमिका निभा

666
00:47:11,040 --> 00:47:15,360
के आ जाए। हां सूर्यवंशी क्या कह रहे हैं?

667
00:47:15,360 --> 00:47:19,440
उनसे जी आप लाइव आ जाइए ना। सूर्यवंशी

668
00:47:19,440 --> 00:47:23,600
जी आपको अगर ईश्वर

669
00:47:23,600 --> 00:47:27,840
पर विश्वास नहीं है तो आप लाइव आ सकते हैं। ईश्वर की असिद्धि

670
00:47:27,840 --> 00:47:31,200
आप सिद्ध कर दीजिए।

671
00:47:31,200 --> 00:47:35,600
मैंने वो उनके साथ जो बातचीत थी वो इसलिए बढ़ाई थी

672
00:47:35,600 --> 00:47:39,600
कि व्यक्ति क्या है? ईश्वर और धर्म को जब हल्के में लेता है तो मुझे

673
00:47:39,600 --> 00:47:43,680
बड़ा हृदय को चोट पहुंचती है। तो कभी मिल जाए मुझे तो फिर

674
00:47:43,680 --> 00:47:47,040
मैं जल्दी छोड़ता नहीं हूं।

675
00:47:47,040 --> 00:47:51,200
नहीं ठीक है क्योंकि उससे क्या है कि दर्शकों को थोड़ा ना बार-बार ये एक तरह से रिहाइ्रेशन

676
00:47:51,200 --> 00:47:55,360
हो जाता है मतलब इसको ये समझ में आ जाती है कि भाई धर्म और

677
00:47:55,360 --> 00:47:59,360
ईश्वर कैसे एक दूसरे से जुड़े हुए

678
00:47:59,360 --> 00:48:03,440
हैं और जब आप धर्म को ईश्वर को नहीं स्वीकारेंगे तो ऑफ कोर्स

679
00:48:03,440 --> 00:48:06,640
आप धर्म को भी नहीं स्वीकारेंगे

680
00:48:06,640 --> 00:48:09,280
ये बाय डिफॉल्ट मुझे लगता है और कोई आने वाला

681
00:48:09,280 --> 00:48:13,280
नहीं है तो आप लोग वो जो वीडियो

682
00:48:13,280 --> 00:48:17,440
आज डाला गया है मेन चैनल पे आवाान पे उसको जरूर देख लें उसमें पूरी कंट्रोवर्सी

683
00:48:17,440 --> 00:48:22,240
आपको एक ही वीडियो में दिख जाएगी। कहां से क्या प्रारंभ था, किसने अपनी

684
00:48:22,240 --> 00:48:26,400
आचरण को बदला, किसके किसके क्या सवाल थे, किसके

685
00:48:26,400 --> 00:48:30,560
क्या जवाब थे? और उसमें हमने जवाब भी बहुत अच्छे से उपलब्ध

686
00:48:30,560 --> 00:48:35,120
कराए हैं। बिल्कुल व्यक्ति तस ना हो। केवल अपनी व्याख्या ही नहीं दी है जवाब में।

687
00:48:35,120 --> 00:48:39,840
भागवतानंद के द्वारा ही उसका जवाब दिलवाया है कई जगह।

688
00:48:39,840 --> 00:48:43,840
भागवतानंद ने सवाल उठाया तो उसका निराकरण भागवतानंद ही कर रहा

689
00:48:43,840 --> 00:48:47,920
है। है ना? तो यह बहुत अच्छे से उसको बनाया गया है।

690
00:48:47,920 --> 00:48:52,800
आप उसको देख सकते हैं। ठीक है पंडित जी आ नहीं रहा है कोई

691
00:48:52,800 --> 00:48:55,840
फिर हम लोग

692
00:48:55,840 --> 00:48:59,920
तुषार के अलावा जी आसार प्रशांत को आजकल इसलिए सुनता हूं क्योंकि

693
00:48:59,920 --> 00:49:04,000
उस पर आईआईटी का ठप्पा लगा है। तो आईआईटी का ठप्पा लगा है

694
00:49:04,000 --> 00:49:08,080
तो आप जाके उनसे आईआईटी का ज्ञान लीजिए ना टेक्निकल ज्ञान लीजिए। धर्म का

695
00:49:08,080 --> 00:49:12,240
कौन सा ठप्पा लगा है उनके ऊपर? क्या परंपरा है उनकी? कौन गुरु है?

696
00:49:12,240 --> 00:49:16,240
आईआईटी में उपनिषद पढ़ाए गए थे क्या? ये तो आपने

697
00:49:16,240 --> 00:49:20,800
बहुत अच्छा कर दिया कि आईआईटी का ठप्पा बना। यानी कि आप ठप्पे वाले गुरु के से ही पढ़ेंगे

698
00:49:20,800 --> 00:49:24,320
तो ठप्पे वाले गुरु से आप फिर वो ठप्पा फिर धर्म का ज्ञान का

699
00:49:24,320 --> 00:49:28,320
ठप्पा कहां है उसके पास? और क्या ऐसे तो हम भी

700
00:49:28,320 --> 00:49:32,400
आयाम से पढ़े हैं। तो ये थोड़ी ना हुआ कि हम बस धर्म का ज्ञान

701
00:49:32,400 --> 00:49:36,880
भी देने लग जाएंगे। जहां का ठप्पा लिया वहां का देंगे। आप एक काम करिएगा।

702
00:49:36,880 --> 00:49:41,040
आपके घर में अब जब कोई बीमार पड़ जाए ऑपरेशन होना हो तो उसको

703
00:49:41,040 --> 00:49:45,040
मोबाइल सही करने वाले के पास ले जाइएगा। डॉक्टर के पास मत ले जाइएगा।

704
00:49:45,040 --> 00:49:49,120
अच्छा हो उसने अच्छे जगह सर्टिफिकेशन किया हो, इंजीनियर हो, उसके

705
00:49:49,120 --> 00:49:53,440
पास ले जाइएगा। तब पता चल जाएगा। वहां टस से मस नहीं करेंगे।

706
00:49:53,440 --> 00:49:57,600
धर्म के साथ खिलवाड़ करेंगे। है ना? जो

707
00:49:57,600 --> 00:50:01,600
सबसे मुख्य तत्व है उसी के साथ खिलवाड़ करना है।

708
00:50:01,600 --> 00:50:05,840
और वहां कि नहीं नहीं मेरे को कुत्ते को कुत्ते को दिखाना

709
00:50:05,840 --> 00:50:10,160
है। नहीं नहीं मैं तो सर्टिफाइड डॉक्टर के पास जाऊंगा।

710
00:50:10,160 --> 00:50:14,480
मुझे तो बाजा बजाना सीखना है। अरे देखो ना कोई सर्टिफाइड ट्रेनर मिल जाए तो

711
00:50:14,480 --> 00:50:20,080
बाजा बजाने के लिए भी सर्टिफाइड चाहिए। मगर धर्म के लिए

712
00:50:20,080 --> 00:50:20,640
रास्ते में

713
00:50:20,640 --> 00:50:24,720
वो आलू ले लो। सुबह से ना एक आलू बिका है ना ही बिका है

714
00:50:24,720 --> 00:50:29,920
आधा काधा वो कहीं से भी खरीद लेंगे।

715
00:50:29,920 --> 00:50:33,920
चलिए जय श्री राम। सभी चलिए ठीक है। जय श्री राम। जय श्री

716
00:50:33,920 --> 00:50:37,920
कृष्णा। हर हर महादेव। हर हर महादेव।
