1
00:00:02,000 --> 00:00:06,080
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,160
सभी कुशल पूर्वक होंगे। और आज हमारे

3
00:00:10,160 --> 00:00:14,320
साथ जो है रामपाल को फॉलो करने वाले एक पुराने व्यक्ति

4
00:00:14,320 --> 00:00:20,320
आए हैं अमित दास।

5
00:00:29,600 --> 00:00:32,160
तो

6
00:00:32,160 --> 00:00:35,280
शायद कुछ नेटवर्क

7
00:00:35,280 --> 00:00:41,280
वगैरह का कुछ इशू है।

8
00:00:42,160 --> 00:00:46,240
फोन करके इन्होंने कहा कि भाई पहले हमारा अध्ययन जो था वह उतना

9
00:00:46,240 --> 00:00:50,320
नहीं था। अब हमने अध्ययन और कर लिया है। तो हमें दोबारा

10
00:00:50,320 --> 00:00:54,800
से आपसे चर्चा करनी है और अध्ययन करने के बाद हमने

11
00:00:54,800 --> 00:00:59,360
पूछा कि भाई पहले आप कई बार निरुत्तर हो चुके हैं।

12
00:00:59,360 --> 00:01:03,520
बात को स्वीकार भी किया। निरुत्तर हो चुके हैं वाली बात

13
00:01:03,520 --> 00:01:08,480
को।

14
00:01:08,480 --> 00:01:12,320
हां अमित दास जी

15
00:01:12,320 --> 00:01:16,880
कई बार आ चुके हैं आप हमारे चैनल पर। साहब

16
00:01:16,880 --> 00:01:21,120
बिल्कुल मैं कई बार आ चुका हूं। दो बार आ चुका हूं। जैसा कि

17
00:01:21,120 --> 00:01:25,280
मेरा परिचय है कि मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं और समाज

18
00:01:25,280 --> 00:01:29,920
नारायण द्विवेदी से मैं दो बार चर्चा कर चुका हूं।

19
00:01:29,920 --> 00:01:34,240
इससे पहले ये ग्रंथ मेरे पास थे नहीं। अभी

20
00:01:34,240 --> 00:01:38,480
ग्रंथ रखे हैं। ग्रंथों का अच्छे से अध्ययन किया है। भगवत गीता

21
00:01:38,480 --> 00:01:42,960
अच्छे से पढ़ी है। समझा है। नहीं। वो ठीक है। पहले

22
00:01:42,960 --> 00:01:47,200
जब आप आए थे तो निरुत्तर हो गए थे। ये मानते हैं ना। पहले मैंने

23
00:01:47,200 --> 00:01:51,440
पहले मैंने ग्रंथों को नहीं पढ़ा ना। ठीक है। नहीं पढ़ा था तो निरंतर

24
00:01:51,440 --> 00:01:55,120
हुए ना उस ना पढ़ने के कारण।

25
00:01:55,120 --> 00:01:57,520
हम

26
00:01:57,520 --> 00:01:58,480
हां।

27
00:01:58,480 --> 00:02:02,640
तो फिर उस बीच जो आपने यहां से जाकर के अपने

28
00:02:02,640 --> 00:02:06,880
चैनल पर चर्चा आगे बढ़ाइएगा। वो बेकार

29
00:02:06,880 --> 00:02:10,960
की बात है। मैं बढ़ाऊंगा बढ़ाऊंगा। थोड़ा सा एक कुछ थोड़ा

30
00:02:10,960 --> 00:02:15,040
सा एक टॉपअप जनता को थोड़ा सा प्रस्तुत तो कर दिया जाए। कुछ प्रीफिक्स

31
00:02:15,040 --> 00:02:20,240
वगैरह मतलब क्या सिद्ध करना चाहते हो कि मैं

32
00:02:20,240 --> 00:02:24,320
ठीक है बोलिए नहीं नहीं मैं ये कह रहा हूं कि जब आप ये

33
00:02:24,320 --> 00:02:28,560
मान रहे हैं कि आप पहले निरुत्तर हुए थे जब आपको ज्ञान

34
00:02:28,560 --> 00:02:32,640
का अभाव था ग्रंथ का अभाव था आपके जीवन में तो फिर जब आपने

35
00:02:32,640 --> 00:02:36,640
यहां से जाकर के जो हमारे वीडियोस पर जो टिप्पणियां की थी उन्हीं वीडियोस पर

36
00:02:36,640 --> 00:02:40,720
जिसमें आप निरुत्तर होकर के गए हैं जो आप मान रहे हैं वह अभी भी आपने अपने चैनल

37
00:02:40,720 --> 00:02:46,720
पर डाले हुए हैं।

38
00:02:46,960 --> 00:02:51,200
अब कौन सी बात पर निरुत्तर हो गया था वह मुझे ध्यान ही नहीं है अभी तक।

39
00:02:51,200 --> 00:02:55,200
नहीं आपने यहां जो हमारे और आपके बीच में चर्चा हुई आप

40
00:02:55,200 --> 00:02:59,200
निरुत्तर हुए। अभी आपने माना तो उसके रिगार्डिंग आपने अपने चैनल

41
00:02:59,200 --> 00:03:03,200
पर जो वीडियोस डाले हैं हमारे विरोध में कि वहां पर यह दिखाते हुए कि आप निरुत्तर

42
00:03:03,200 --> 00:03:07,760
नहीं हुए। तो वो अभी भी है ना आपके चैनल पर।

43
00:03:07,760 --> 00:03:11,760
नहीं मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कौन सी बात पर निरुत्तर हुआ यह भी तो

44
00:03:11,760 --> 00:03:16,160
मुझे पता होना चाहिए। अरे निरुत्तर होना तो आपने माना ना निरुत्तर

45
00:03:16,160 --> 00:03:20,240
हुए आपने माना ना हम मैं मैं निरत्तर हुआ ठीक

46
00:03:20,240 --> 00:03:24,240
है बस इससे क्या मिलेगा मैं बस एक मैं आपकी वो

47
00:03:24,240 --> 00:03:28,480
जो आज की लाइव चर्चा है उसप मैं आ रहा हूं कुछ मैं एक बात पर प्रकाश

48
00:03:28,480 --> 00:03:32,720
डालना चाह रहा हूं बहुत जरूरी बात है तो जिन चर्चाओं में आप निरुत्तर

49
00:03:32,720 --> 00:03:36,720
हो गए उन्हीं चर्चाओं में आपने अपने पक्ष में जो है वीडियो बनाया वो अभी आज

50
00:03:36,720 --> 00:03:40,800
भी डला हुआ है बस मेरा एक एक सुझाव है एक प्रश्न

51
00:03:40,800 --> 00:03:45,200
है मेरा छोटा सा ठीक कि क्या आपको नहीं लगता कि जिन चर्चाओं

52
00:03:45,200 --> 00:03:49,360
में आप निरुत्तर हुए हैं उन चर्चाओं में भी आपने अपने

53
00:03:49,360 --> 00:03:53,680
पक्ष को विजय घोषित करते हुए जो वीडियो डाल रखे हैं उन

54
00:03:53,680 --> 00:03:57,840
वीडियोस को देख के व्यक्ति भ्रमित होगा क्योंकि आपके हिसाब

55
00:03:57,840 --> 00:04:01,840
से वो चर्चाएं आपके पक्ष में नहीं है मगर आपने जो वीडियोस बनाए

56
00:04:01,840 --> 00:04:02,340
हैं

57
00:04:02,000 --> 00:04:06,160
उसमें आपने यह दिखाया कि वह मेरे पक्ष में है तो जो बात झूठी

58
00:04:06,160 --> 00:04:10,160
है वह आपके वीडियो से निर्गत हो रही है यह मेरा कहना है इसमें कुछ

59
00:04:10,160 --> 00:04:14,560
कहेंगे कि हम लोग मेन मुद्दे पर हैं नहीं उस बात को मैं आज साबित

60
00:04:14,560 --> 00:04:19,920
करूंगा ना शास्त्रों से झूठी नहीं है वह बातें

61
00:04:19,920 --> 00:04:24,000
आप निरत्तर होकर के गए थे परंतु फिर भी

62
00:04:24,000 --> 00:04:27,280
आपने स्वयं

63
00:04:27,280 --> 00:04:31,280
तो आज मैं वो सिद्ध करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है वो मोक्ष

64
00:04:31,280 --> 00:04:35,600
नहीं देता वो नहीं कह रहा हूं मैं आपने बात मानी ना

65
00:04:35,600 --> 00:04:39,760
उस समय आपने उस समय आपने बात नहीं मानी थी

66
00:04:39,760 --> 00:04:44,320
लेकिन आज मैं शास्त्रों से प्रमाण दूंगा जब मानोगे आप बात

67
00:04:44,320 --> 00:04:48,320
ठीक है वो मैं मानूंगा मानूंगा आप जो गए थे निरत्तर हो के

68
00:04:48,320 --> 00:04:51,600
गए थे ना

69
00:04:51,600 --> 00:04:55,680
हां उस समय मुझे उत्तर नहीं आया था अभी उत्तर है मेरे पास

70
00:04:55,680 --> 00:05:00,000
उत्तर है तो जो आपने वीडियोस बनाए थे ये दिखाते हुए कि आप निरुत्तर

71
00:05:00,000 --> 00:05:04,080
नहीं हुए तो आपका निरुत्तर ना होना जिन वीडियोस से आप दिखा रहे हो

72
00:05:04,080 --> 00:05:08,240
प्रकट कर रहे हो वो भ्रम फैलाएगा ना जनता में वो यह सोचेंगे कि

73
00:05:08,240 --> 00:05:12,960
यहां पर आपने शास्त्रों से जवाब नहीं दिया तब भी आप विजय आज

74
00:05:12,960 --> 00:05:18,960
की लाइव देख के फिर वो सारे भ्रम नष्ट हो जाएंगे।

75
00:05:20,960 --> 00:05:25,040
आज की लाइव देख के वो ये भी तो सोच सकते हैं कि जब इसने तब जो कहा था

76
00:05:25,040 --> 00:05:29,120
जब वो विश्वास करने योग्य नहीं हो सकता। अभी भी बोल रहा हूं। आज क्लियर हो

77
00:05:29,120 --> 00:05:33,280
आज आज क्लियर हो जाएगा ना। सोच वो सोचने वाला क्या सोच रहा है उसको

78
00:05:33,280 --> 00:05:35,760
छोड़िए।

79
00:05:35,760 --> 00:05:40,080
आपका काम क्या है? कुछ भी प्रचार है।

80
00:05:40,080 --> 00:05:44,160
आपको सत्य का प्रचार करना है कि नहीं करना है? बिल्कुल सत्य का प्रचार

81
00:05:44,160 --> 00:05:48,400
करेंगे। तो जहां पे आप निरुत्तर हो रहे हो वहां पर भी अपने पक्ष

82
00:05:48,400 --> 00:05:53,680
को ये दिखा रहे हो कि हम निरुत्तर नहीं हुए। ये असत्य का प्रचार है ना।

83
00:05:53,680 --> 00:05:58,080
मैंने कल भी सही बोला था और आज भी सही बोलूंगा।

84
00:05:58,080 --> 00:06:02,480
अरे भाई आपका खुद का कहना है कि आपके पास जवाब नहीं थे। आपने उत्तर

85
00:06:02,480 --> 00:06:06,560
जी ये चर्चा आगे बढ़ाइए। मैंने अभी थोड़ी

86
00:06:06,560 --> 00:06:07,060
देर

87
00:06:06,800 --> 00:06:11,120
पहले आपसे यही प्रश्न किया था कि आपको इस पर कुछ बोलना है या हम लोग चर्चा आगे बढ़ाएं

88
00:06:11,120 --> 00:06:15,120
तो आपने कहा कि नहीं हां ऐसे

89
00:06:15,120 --> 00:06:19,840
कर चलिए ठीक है आपका प्रश्न बताइए तो

90
00:06:19,840 --> 00:06:22,960
मेरा प्रश्न ये रहेगा

91
00:06:22,960 --> 00:06:27,040
पहला तो मैं ये प्रमाणित करूंगा उसमें प्रश्न नहीं है प्रमाणित करूंगा

92
00:06:27,040 --> 00:06:31,040
कि गीता ज्ञान देने वाला जो ईश्वर है अह वो

93
00:06:31,040 --> 00:06:35,120
मोक्ष नहीं देता ये गीता में ही प्रमाण है। दूसरा प्रश्न

94
00:06:35,120 --> 00:06:39,280
आपसे ये है कि गीता ज्ञान देने वाला प्रभु वो

95
00:06:39,280 --> 00:06:43,360
राक्षस स्वरूप क्यों है? जीवो का भक्षण क्यों करता है?

96
00:06:43,360 --> 00:06:47,120
और वो क्रूर क्यों है?

97
00:06:47,120 --> 00:06:51,360
उसका जो स्वभाव है, वो क्रूरता वाला क्यों है? ये आपसे

98
00:06:51,360 --> 00:06:55,520
प्रश्न है मेरा। पहले आप अपनी बात वो जो पहली

99
00:06:55,520 --> 00:06:59,200
वाली है वो साबित करो।

100
00:06:59,200 --> 00:07:03,200
पहली वाली कौन सी साबित करूं? जो आपने यह कहा कि मैं यह साबित

101
00:07:03,200 --> 00:07:09,200
करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वह मोक्ष नहीं देगा।

102
00:07:09,920 --> 00:07:13,920
आपने प्रश्न पूछा था मैं प्रश्न ये तो मेरा प्रश्न पहला यही है

103
00:07:13,920 --> 00:07:18,400
कि वो क्रूर क्यों है? दूसरा

104
00:07:18,400 --> 00:07:22,720
कैसे सिद्ध करेंगे? मोक्ष नहीं देता है। आप कैसे सिद्ध करेंगे?

105
00:07:22,720 --> 00:07:26,720
मोक्ष नहीं देता है। कैसे सिद्ध करेंगे? गीता

106
00:07:26,720 --> 00:07:31,280
से। गीता से। गीता से से इसके लिए

107
00:07:31,280 --> 00:07:35,600
इसके लिए हम जाएंगे गीता अध्याय

108
00:07:35,600 --> 00:07:40,400
दो में और गीता अध्याय नौ में

109
00:07:40,400 --> 00:07:44,400
गीता अध्याय दो का कौन सी कौन सी

110
00:07:44,400 --> 00:07:48,480
प्रेस की छपी हुई गीता है आपके पास मेरे पास

111
00:07:48,480 --> 00:07:54,160
गीता प्रेस गोरखपुर वाली है ये छोटी जो गुटखा आती है वाली

112
00:07:54,160 --> 00:07:58,160
अच्छा तो यह कैसे आई

113
00:07:58,160 --> 00:08:04,160
आपके पास भगवत गीता?

114
00:08:06,720 --> 00:08:12,720
आपकी आवाज कट रही है।

115
00:08:13,280 --> 00:08:17,760
कहने का तात्पर्य ये है कि आप गीता से गीता गीता

116
00:08:17,760 --> 00:08:21,760
अरे मैं गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे।

117
00:08:21,760 --> 00:08:25,920
मैं मैं बताऊंगा। मुझे दुकान से प्राप्त हुई है जी मुझे। मैं मैं अपनी

118
00:08:25,920 --> 00:08:29,920
बात पूरी कर लूं कि कहने का तात्पर्य यह है कि

119
00:08:29,920 --> 00:08:34,240
आप गीता नामक शास्त्र से सिद्ध करेंगे कि

120
00:08:34,240 --> 00:08:39,280
गीता का ज्ञान देने वाला मुक्ति दाता नहीं है। ठीक है

121
00:08:39,280 --> 00:08:43,760
आप आपकी आवाज कट कट के आ रही है।

122
00:08:43,760 --> 00:08:48,000
आपके इंटरनेट में प्रॉब्लम है। इंटरनेट में प्रॉब्लम है आपके।

123
00:08:48,000 --> 00:08:54,000
मेरे में नहीं है।

124
00:08:54,720 --> 00:09:00,720
एक सेकंड नेटवर्क स्लो है आपका

125
00:09:04,640 --> 00:09:09,920
आ रही है आवाज हम

126
00:09:09,920 --> 00:09:14,000
हां तो मेरा यही कहना है गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे और

127
00:09:14,000 --> 00:09:17,520
दुकान से खरीद के लाया हूं मैं

128
00:09:17,520 --> 00:09:23,520
हम गीता प्रेस के पास कहां से आई है वो

129
00:09:23,680 --> 00:09:28,080
गीता प्रेस के पास कहां से आई? अब यह मुझे नहीं पता

130
00:09:28,080 --> 00:09:31,920
उनके पास कहां से आई।

131
00:09:31,920 --> 00:09:36,160
वो तो वहीं जाके तहकीकात करनी पड़ेगी। तो आपको

132
00:09:36,160 --> 00:09:40,320
यह नहीं पता है कि गीता प्रस के पास कहां से आई है तो

133
00:09:40,320 --> 00:09:46,320
आप अंदाजा लगा सकते हैं कहां से आई है।

134
00:09:46,880 --> 00:09:51,440
हां आप है ना थोड़ा सा प्रश्न गलत पूछ रहे हो।

135
00:09:51,440 --> 00:09:56,240
गीता का ज्ञान किसने दिया ये ये पूछोगे तो तो मैं बता सकता हूं।

136
00:09:56,240 --> 00:10:00,240
और इसके रचयिता कौन है? ये बता सकता हूं। मैं ये कह रहा हूं कि लेकिन आई

137
00:10:00,240 --> 00:10:04,320
कहां से ये नहीं बता सकता मैं। हम ये

138
00:10:04,320 --> 00:10:08,320
नहीं बता सकते। इसका मतलब इसका मतलब ये तो सिद्ध हो गया कि

139
00:10:08,320 --> 00:10:12,320
रामपाल यानी कि आपके पास जो गीता का ज्ञान आ रहा है

140
00:10:12,320 --> 00:10:16,560
गीता के श्लोक और उसका अर्थ आ रहा है। वो रामपाल

141
00:10:16,560 --> 00:10:21,040
के पास है ये आपको नहीं पता है। गीता प्रेस गोरखपुर

142
00:10:21,040 --> 00:10:25,200
वाले जो अनुवाद है उनको मानते हो ना आप? मैं मैं अपनी

143
00:10:25,200 --> 00:10:29,200
मैं बात करूंगा। मैं बात करूंगा। मगर फिलहाल तो

144
00:10:29,200 --> 00:10:33,280
बात यह हो रही है कि रामपाल रामपाल जी कह रहा हूं

145
00:10:33,280 --> 00:10:37,680
मैं फिलहाल क्योंकि भाई आपकी रामपाल के प्रति श्रद्धा है तो मैं फिलहाल रामपाल

146
00:10:37,680 --> 00:10:41,760
जी कह रहा हूं। रामपाल जी के पास गीता का ज्ञान कहां

147
00:10:41,760 --> 00:10:47,760
से आया? गीता के श्लोक कहां से आए? ये आपको नहीं पता है। कहां से आए?

148
00:10:49,600 --> 00:10:53,840
कहां से आए? मतलब उन्होंने गीता प्रेस गोरखपुर से गोरखपुर

149
00:10:53,840 --> 00:10:57,840
वाली दुकान से खरीदी होगी। अच्छा गीता

150
00:10:57,840 --> 00:11:01,920
प्रेस गोरखपुर की दुकान से खरीदी। मतलब गीता में क्या लिखा है और क्या नहीं लिखा

151
00:11:01,920 --> 00:11:06,000
है। इस विषय में रामपाल जी के लिए गीता प्रस

152
00:11:06,000 --> 00:11:11,440
प्रमाण है। गीता प्रस प्रमाण हो गई ना।

153
00:11:11,440 --> 00:11:15,520
गीता प्रस प्रमाण मतलब कि इसमें ये श्लोक लिखा है

154
00:11:15,520 --> 00:11:19,760
तो मैं मानता हूं कि गीता प्रस ने सही लिखा है वो श्लोक। जरूरी नहीं है।

155
00:11:19,760 --> 00:11:23,920
अगर प्रमाण नहीं मानेंगे तो हो सकता है कि वहां

156
00:11:23,920 --> 00:11:28,000
पर भगवान ने कुछ और कहा हो, अर्जुन ने कुछ और कहा हो, गीता प्रेस वाले कुछ और छाप

157
00:11:28,000 --> 00:11:32,080
रहे हो। तो गीता प्रस से जब वो मान रहे हैं कि गीता प्रस से जो गीता है वही

158
00:11:32,080 --> 00:11:36,480
गीता है जो कृष्ण भगवान ने अर्जुन को कही थी तो इसका मतलब रामपाल

159
00:11:36,480 --> 00:11:39,120
के लिए

160
00:11:39,120 --> 00:11:43,360
ये बता दीजिए आप प्रमाण किसको मानते हैं तर्कतर्क

161
00:11:43,360 --> 00:11:47,360
कर रहे हो बेकार की बहस नहीं

162
00:11:47,360 --> 00:11:51,360
है बहुत आवश्यक बहस है और इसमें मैं आपके पॉइंट पर जल्दी आ

163
00:11:51,360 --> 00:11:55,600
रहा हूं एक हमारा कार्य केवल आपको निरुत्तर करना

164
00:11:55,600 --> 00:11:59,760
नहीं है हमारा कार्य जन ता के समक्ष तथ्यात्मक

165
00:11:59,760 --> 00:12:03,920
तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है अपने सनातन को जानने

166
00:12:03,920 --> 00:12:04,800
के लिए कि वो कौन

167
00:12:04,800 --> 00:12:09,200
सा दृष्टिकोण उन्हें रखना चाहिए। तो आपने कहा कि रामपाल

168
00:12:09,200 --> 00:12:13,680
जी जो है वो भगवत गीता ले आते हैं गीता प्रेस से तो इसका मतलब रामपाल

169
00:12:13,680 --> 00:12:17,760
जी के लिए गीता के विषय में गीता प्रेस गोरखपुर प्रमाण

170
00:12:17,760 --> 00:12:20,560
है।

171
00:12:20,560 --> 00:12:24,640
यानी वो मानते हैं यानी यानी

172
00:12:24,640 --> 00:12:29,040
मैं बता दे रहा हूं जो आपके प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं। मैं

173
00:12:29,040 --> 00:12:33,280
अथवा मेरे गुरु जी जो मानते हैं वही मैं मानता हूं। मेरे गुरु

174
00:12:33,280 --> 00:12:37,520
जी का यह कहना है कि यह गीता का जो ज्ञान है वह काल ब्रह्म ने बोला

175
00:12:37,520 --> 00:12:41,600
है जो गीता में सीधे स्पष्ट लिखा हुआ है वह अपने आप

176
00:12:41,600 --> 00:12:45,680
को ब्रह्म बता रहे हैं और अपना मंत्र ओम बता रहे हैं। दूसरी बात

177
00:12:45,680 --> 00:12:50,160
इसकी जो रचनाकार लिखने वाले हैं वो वेदव्यास जी हैं।

178
00:12:50,160 --> 00:12:54,240
यानी कि जो अह गीता का ज्ञान

179
00:12:54,240 --> 00:12:58,560
देने वाला ब्रह्म और लिखने वाला वेदव्यास जी

180
00:12:58,560 --> 00:13:02,560
और जिस चीज को प्रमाण मानकर हमारे गुरु जी ने

181
00:13:02,560 --> 00:13:07,520
अपनी स्वयं की पुस्तक लिखी है गीता मैं

182
00:13:07,520 --> 00:13:12,400
थोड़ा सा इंटरप्ट करूंगा इंटरप्ट करूंगा देखिए बहुत अच्छे से बात हो जाएगी

183
00:13:12,400 --> 00:13:16,480
मुझे बहुत लंबा महिमा मंडन या प्रवचन इत्यादि नहीं सुनना है

184
00:13:16,480 --> 00:13:19,840
यहां पे बात ये है कि रामपाल जी

185
00:13:19,840 --> 00:13:23,840
पूछा मैंने बोला आपने काफी लंबा

186
00:13:23,840 --> 00:13:27,840
बोला है और आपने व्यर्थ का बोला है वो मैं सिद्ध

187
00:13:27,840 --> 00:13:32,240
कर रहा हूं कैसे व्यर्थ का बोला है रामपाल जी

188
00:13:32,240 --> 00:13:36,320
क्या मानते हैं गीता को गीता ज्ञान देने वाला कौन है या उसको किसने

189
00:13:36,320 --> 00:13:40,400
लिखा था मैं मेरा प्रश्न ये नहीं है वो भले ही काल ने बोली

190
00:13:40,400 --> 00:13:44,400
मगर वो जो श्लोक वहां पर बोले गए हैं महाभारत काल

191
00:13:44,400 --> 00:13:48,560
में वो रामपाल जी को कैसे प्राप्त हुए तो आपने कहा वो गीता प्रेस

192
00:13:48,560 --> 00:13:52,320
गोरखपुर प्राप्त हुए।

193
00:13:52,320 --> 00:13:56,320
उनको कैसे पता कि काल ने यह बोला था या नहीं बोला था?

194
00:13:56,320 --> 00:14:00,400
अगर वह इस विषय में गीता प्रेस पर आश्रित है तो गीता प्रेस

195
00:14:00,400 --> 00:14:04,720
उनके लिए प्रमाण हुआ कि गीता प्रेस सच बोलती

196
00:14:04,720 --> 00:14:08,720
है जो काल ने वहां पर बोला था आपके अनुसार वो काल ने बोला

197
00:14:08,720 --> 00:14:13,040
था तो काल ने जो बोला है एज इट इज वो संस्कृत के श्लोक गीता

198
00:14:13,040 --> 00:14:17,120
प्रेस ने आपको छाप कर दिए हैं। इस विषय में रामपाल जी के

199
00:14:17,120 --> 00:14:22,480
लिए गीता प्रेस प्रमाण हो गई ना आप

200
00:14:22,480 --> 00:14:28,480
नेटवर्क इशू आ रहा है थोड़ा सा हम्।

201
00:14:37,710 --> 00:14:43,710
[हंसी]

202
00:14:56,320 --> 00:15:00,880
हम नेटवर्क इशू नहीं है। मुझे लग रहा है कि आपका फोन जो है ना

203
00:15:00,880 --> 00:15:04,960
उसमें मेमोरी ज्यादा उभर गई है। जिसके कारण

204
00:15:04,960 --> 00:15:09,360
वो यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वो

205
00:15:09,360 --> 00:15:14,240
सहन नहीं कर पा रहे हैं।

206
00:15:14,240 --> 00:15:18,480
ऐसा होता है

207
00:15:18,480 --> 00:15:22,160
नेटवर्क इशू आ रहा है। आपको

208
00:15:22,160 --> 00:15:26,160
तो आपको नेटवर्क नेटवर्क वाले एरिया में जाता हूं। हां

209
00:15:26,160 --> 00:15:32,160
जाइए जाइए।

210
00:15:39,680 --> 00:15:45,680
नेटवर्क वाले एरिया जाता।

211
00:15:50,480 --> 00:15:54,560
आप लोग समझ रहे होंगे मैं किस तथ्य पर प्रकाश डालना

212
00:15:54,560 --> 00:16:00,160
चाहता हूं। आप लोगों को समझाना चाहता हूं कि

213
00:16:00,160 --> 00:16:04,240
हर व्यक्ति को शास्त्रज्ञ या शास्त्रों को जानने वाला

214
00:16:04,240 --> 00:16:08,560
होने की आवश्यकता नहीं है। यदि वह अपने परंपरा विषयक सिद्धांत

215
00:16:08,560 --> 00:16:12,560
को समझ जाए। आपको लोगों को केवल ये समझाना है ना कि

216
00:16:12,560 --> 00:16:16,640
परंपरा क्या होती है और किस लिए आवश्यक है। कहां तक उनको

217
00:16:16,640 --> 00:16:21,120
सारे शास्त्रों की नॉलेज आप देंगे? कोई भी आकर के विधर्मी

218
00:16:21,120 --> 00:16:25,680
आपके शास्त्रों का खंडन करने लगेगा। आपके सिद्धांतों का खंडन करने लगेगा।

219
00:16:25,680 --> 00:16:29,680
आपके धर्म का खंडन करने लगेगा। और वहां

220
00:16:29,680 --> 00:16:33,840
पर वह कुछ ना कर पाए। एक साधारण व्यक्ति तो वहां पर आपको

221
00:16:33,840 --> 00:16:39,840
कौन बचा सकता है? बहुत लंबी लड़ाई लड़ने की जरूरत कहां है?

222
00:16:52,720 --> 00:16:57,120
हां बताइए। हां तो काल

223
00:16:57,120 --> 00:17:01,200
ने आपके हिसाब से महाभारत काल महाभारत का जो समय था उसमें

224
00:17:01,200 --> 00:17:05,280
काल नामक कोई एंटिटी है जो राक्षस जैसी है और उसने

225
00:17:05,280 --> 00:17:09,520
भगवत गीता का ज्ञान दिया वो ठीक है अभी फिलहाल के लिए दुर्जन से मान

226
00:17:09,520 --> 00:17:13,520
लेते हैं कि उसी ने दिया जो रामपाल का मानना है वो सही है मैं ये कह

227
00:17:13,520 --> 00:17:17,680
रहा हूं कि वो जो श्लोक है उसने क्या कहा था संस्कृत में

228
00:17:17,680 --> 00:17:21,760
क्या नहीं कहा था वो श्लोक आपको आपके रामपाल जी

229
00:17:21,760 --> 00:17:26,000
को कहां से प्राप्त हुए आपको प्राप्त हुए मान लो गीता

230
00:17:26,000 --> 00:17:30,080
प्रेस से आपके रामपाल जी को भी प्राप्त हुए गीता प्रेस से इसका मतलब काल

231
00:17:30,080 --> 00:17:34,800
ने क्या कहा और क्या नहीं कहा इस विषय में गीता प्रेस रामपाल

232
00:17:34,800 --> 00:17:40,800
दास के लिए प्रमाण है गीता प्रेस गोरखपुर

233
00:17:41,200 --> 00:17:44,480
मेरे लिए भी प्रमाण है

234
00:17:44,480 --> 00:17:48,640
नहीं तो जब हम किसी को प्रमाण कहते हैं तो

235
00:17:48,640 --> 00:17:52,800
इसका मतलब यह होता है कि हम यह कह रहे हैं कि नहीं यह झूठ नहीं बोलता अगर

236
00:17:52,800 --> 00:17:56,400
मेरे लिए प्रमाण है तो

237
00:17:56,400 --> 00:18:00,480
हम मेरे लिए सनातन धर्म के जितने भी शास्त्र है

238
00:18:00,480 --> 00:18:04,560
क्योंकि मैं रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले

239
00:18:04,560 --> 00:18:08,800
एक मेरी तो हो जाने दीजिए एक मिनट एक मिनट

240
00:18:08,800 --> 00:18:12,880
एक मिनट अरे एक मिनट सुन तो लीजिए

241
00:18:12,880 --> 00:18:17,200
अब इससे पहले संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले मैं हिंदू

242
00:18:17,200 --> 00:18:23,200
ही था और मैं सारे शास्त्रों को मानता था अरे मेरे उन्होंने मेरी

243
00:18:26,320 --> 00:18:29,920
आप

244
00:18:29,920 --> 00:18:34,080
मैं आपने जो क्लेम कर दिया कि मैं मैं उसको प्रमाण मानता हूं। मैं उस क्लेम

245
00:18:34,080 --> 00:18:38,800
को काउंटर कर रहा हूं ना। सुनिए ना मैं उस क्लेम को उसको प्रमाण।

246
00:18:38,800 --> 00:18:43,520
अरे सुनिए मैं मैं भी इनको प्रमाण मानता हूं। इसकी

247
00:18:43,520 --> 00:18:47,520
प्रमाण कर दिया। अब आपको और ज्यादा बताने की आवश्यकता रह गई।

248
00:18:47,520 --> 00:18:51,760
नेम कर तो दिया आपने। आप मानते हैं प्रमाण? ठीक है। बस

249
00:18:51,760 --> 00:18:56,480
बस एक बात है बात

250
00:18:56,480 --> 00:19:00,560
यहां पे शुरू होती है एक मिनट एक मिनट एक मिनट बात यहां पे शुरू होती है

251
00:19:00,560 --> 00:19:06,560
बात ये शुरू होती है कि अ

252
00:19:07,040 --> 00:19:11,200
रामपाल दास प्रमाण मानते हैं गीता प्रेस को यानी कि गीता प्रेस

253
00:19:11,200 --> 00:19:15,200
झूठ नहीं बोलती काल ने जो जो कहा एज इट इज छाप के दिया है गीता

254
00:19:15,200 --> 00:19:18,240
प्रश्न

255
00:19:18,240 --> 00:19:22,240
यही तो मानना पड़ेगा में लिखा लिखा हुआ है। हां हां हां

256
00:19:22,240 --> 00:19:26,240
मैं उसके लिए थोड़ा सा बोलूंगा कि गीता मैथ वालों

257
00:19:26,240 --> 00:19:30,320
ने जो चीज कोष्टक में लिखी है वो उन्होंने अपनी तरफ से

258
00:19:30,320 --> 00:19:34,880
लिखी है। बाकी के जो संस्कृत के अनुसार है वो ठीक है।

259
00:19:34,880 --> 00:19:39,040
अच्छा ठीक है। जो चीज कोष्टक में यानी कि गीता प्रेस अज्ञानता अवश्य

260
00:19:39,040 --> 00:19:44,640
कुछ कर सकती है। बता सकती है आपको धर्म का अर्थ

261
00:19:44,640 --> 00:19:50,640
जो आपके लिए प्रमाण है वोक में

262
00:19:51,200 --> 00:19:55,520
जो आपके लिए

263
00:19:55,520 --> 00:19:59,520
मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं जो आपके लिए प्रमाण है

264
00:19:59,520 --> 00:20:05,520
वो कोष्क में झूठ बोल सकता है ना

265
00:20:05,920 --> 00:20:10,080
हां बिल्कुल हां यानी कि कोष्क में वो

266
00:20:10,080 --> 00:20:14,160
झूठ बोल सकता है। फिलहाल मैं आपको बता दूं विष्णु पुराण का अर्थ

267
00:20:14,160 --> 00:20:18,320
करते समय रामपाल ने बिना कोष्क के माना है कि

268
00:20:18,320 --> 00:20:22,880
जो गीता प्रेस है। उसने यहां पर अनुवाद गलत कर रखा है।

269
00:20:22,880 --> 00:20:26,880
यानी कि बिना कोष्क के भी गीता प्रेस वाले रामपाल

270
00:20:26,880 --> 00:20:32,880
दास के अनुसार झूठ बोल सकते हैं। अज्ञानता कर सकते हैं।

271
00:20:34,400 --> 00:20:38,480
मेरे सुनिए मेरे अनुसार गुरु जी के अनुसार

272
00:20:38,480 --> 00:20:42,640
आपके अनुसार मतलब आप जो है रामपाल को नहीं मानते इतने अंश में जितने

273
00:20:42,640 --> 00:20:47,360
अंश में वो गीता प्रेस को बिना कोष्क के झूठ बोलने वाला या अज्ञानी

274
00:20:47,360 --> 00:20:51,360
है कहते हैं। फिलहाल में आपकी अरे फिलहाल

275
00:20:51,360 --> 00:20:55,520
में आपकी मेरे से ज्ञान चर्चा हो रही है। अरे भाई तुमने अभी

276
00:20:55,520 --> 00:21:00,000
क्लेम किया कि रामपाल दास जो जो मेरे से हो रही है ना चर्चा

277
00:21:00,000 --> 00:21:03,120
हम

278
00:21:03,120 --> 00:21:07,200
हां तो उनकी उनसे चर्चा नहीं हो रही ना आपकी उनसे जब चर्चा

279
00:21:07,200 --> 00:21:11,360
होगी तब आप उनसे बात करना फिलहाल मेरे से चर्चा की है पर्सनली

280
00:21:11,360 --> 00:21:15,440
मैं जो मानता हूं उसे मैंने आपको बता दिया एक मिनट

281
00:21:15,440 --> 00:21:19,680
अमित दास मैं तुमसे चर्चा कर रहा हूं रामपाल

282
00:21:19,680 --> 00:21:24,640
को सुनिए मैं इस समय उस समय उस

283
00:21:24,640 --> 00:21:28,960
फिलहाल मैं चर्चा ये कर रहा हूं ज्ञान देने वाला जो प्रभु

284
00:21:28,960 --> 00:21:34,480
है उसका इंटरनेट अटक रहा है मोक्ष नहीं रहा है उसका प्रमाण

285
00:21:34,480 --> 00:21:38,800
इंटरनेट अटक रहा है आपका मैं इंटरनेट

286
00:21:38,800 --> 00:21:42,880
अटक रहा है गीता का इंटरनेट अटक

287
00:21:42,880 --> 00:21:46,960
चिपचिप के आ रहा है अरे जो बता रहे हो वो बिगड़

288
00:21:46,960 --> 00:21:52,240
रहा है ना मामला बताते हुए

289
00:21:52,240 --> 00:21:56,480
मैं मैं ये मैं ये कह रहा हूं कि गीता का फिलहाल मेरी चर्चा

290
00:21:56,480 --> 00:22:02,480
इस पर नहीं है कि उसको सही साबित करना है कि किसको गलत करना है।

291
00:22:02,640 --> 00:22:06,800
ले

292
00:22:06,800 --> 00:22:11,280
जिस

293
00:22:11,280 --> 00:22:15,440
को लेकर के क्लेम करने वाले हो जिस

294
00:22:15,440 --> 00:22:19,600
शास्त्र को लेकर के तुम क्लेम करने वाले हो उसी शास्त्र को लेकर के

295
00:22:19,600 --> 00:22:25,600
मैं उसकी प्रमाणिकता के विषय में तुमसे बात कर रहा हूं ना

296
00:22:26,480 --> 00:22:31,040
ठीक है तो उसकी प्रमाणिकता के विषय में आपके जो रामपाल

297
00:22:31,040 --> 00:22:35,120
है वो वो यह नहीं मानते कि गीता प्रेस अपनी किताबों

298
00:22:35,120 --> 00:22:40,320
में सच सच लिखती है। वो ये मानते हैं कि गीता प्रेस झूठ भी लिखती है।

299
00:22:40,320 --> 00:22:44,320
हम गीता प्रेस पर आश्रित नहीं है। उनकी मैं अपनी बात उनकी

300
00:22:44,320 --> 00:22:48,400
मान्यता में उनकी मान्यता में अभी ये क्लियर हुआ ही नहीं। मैंने उनको मुख

301
00:22:48,400 --> 00:22:52,400
से सुना ही नहीं कि क्या गलत है क्या सही है। अच्छा

302
00:22:52,400 --> 00:22:58,400
मतलब अभी आपको अभी आपको पता नहीं है रामपाल दास सही है कि गलत है।

303
00:22:58,400 --> 00:23:02,480
आपने ये कहा कि गीता प्रेस वालों गलत लिखते हैं। मैंने उनके

304
00:23:02,480 --> 00:23:06,080
मुंह से सुना नहीं ना।

305
00:23:06,080 --> 00:23:10,480
तो विष्णु पुराण का जो वो क्या कहते हैं? वीडियो दिखाते

306
00:23:10,480 --> 00:23:14,480
हैं कि भैया इतने अंश में वह गलत है। जहां पर विष्णु पुराण में वह

307
00:23:14,480 --> 00:23:19,040
महादेव को काल बोला गया है। हम

308
00:23:19,040 --> 00:23:23,840
विष्णु पुराण के शिव पुराण में विष्णु पुराण

309
00:23:23,840 --> 00:23:27,840
विष्णु पुराण का लिखा है इनका अच्छा

310
00:23:27,840 --> 00:23:32,480
विष्णु पुराण में लिखा है ना वो विष्णु पुराण है

311
00:23:32,480 --> 00:23:37,040
समय विष्णु पुराण का अर्थ करते समय रामपाल

312
00:23:37,040 --> 00:23:43,040
दास ने ये माना है कि यहाँ पर जो है उन्होंने गलत अर्थ कर दिया है

313
00:23:43,120 --> 00:23:47,200
हां तो उनका मानना है ठीक है सही बात है तो

314
00:23:47,200 --> 00:23:51,280
सही मानना है तो इसका मतलब गीता परस्पर विश्वास नहीं किया जा

315
00:23:51,280 --> 00:23:55,360
सकता कि वह आपको सही सही श्लोक देगी क्योंकि वह अमुक अमुक जगह कहीं-कहीं

316
00:23:55,360 --> 00:24:01,200
पर झूठ भी बोल रही है अज्ञानता वश या फिर किसी और के कारण

317
00:24:01,200 --> 00:24:05,360
अभी अभी आपको अभी आपको चर्चा डिवाइड करनी है

318
00:24:05,360 --> 00:24:09,520
या टॉपिक पर करनी है? अरे भाई इसको

319
00:24:09,520 --> 00:24:14,000
बताओ तो गीता प्रेस पर विश्वास है कि नहीं है?

320
00:24:14,000 --> 00:24:20,000
अरे गीता प्रेस गोरखपुर वाली जो गीता भगवत गीता है मैं

321
00:24:20,160 --> 00:24:24,160
जगह भी झूठ बोल सकता है विश्वास

322
00:24:24,160 --> 00:24:28,160
मानते हो गीता गीता प्रेस विष्णु पुराण

323
00:24:28,160 --> 00:24:32,640
में और कोष्टक में झूठ बोल सकती है तो वो

324
00:24:32,640 --> 00:24:37,680
अन्य जगह श्लोकों को भी बदल सकती है श्लोक भी दूसरे लिख सकती है

325
00:24:37,680 --> 00:24:41,760
हां तो ये ऐसा ऐसा बोलो ना कोष्टक में जब उन्होंने इशारा कर दिया

326
00:24:41,760 --> 00:24:46,160
है कि ये अपनी तरफ से लिखा हुआ है ऐड करके। बाकी उन्होंने

327
00:24:46,160 --> 00:24:50,160
कहा एक मिनट एक एक मिनट उन्होंने ये

328
00:24:50,160 --> 00:24:55,600
कहां लिखा है कि कोष्क में मैं अपनी तरफ से लिख रहा हूं।

329
00:24:55,600 --> 00:24:59,680
बुद्धिमान व्यक्ति समझ जाता है कोष्टक में जो लिखा हुआ होता है वो उसका अपनी

330
00:24:59,680 --> 00:25:03,840
तरफ से लिखा रहता है। कोष्ठक में लिखने का मतलब

331
00:25:03,840 --> 00:25:08,960
होता है कि वहां पे लिखे गए भाव को और अच्छे से समझाना।

332
00:25:08,960 --> 00:25:13,040
हम हम बिल्कुल। उसमें यह नहीं होता है कि मैं अपनी ओर से लिख रहा हूं। यह नहीं

333
00:25:13,040 --> 00:25:17,120
यह यह आवश्यक नहीं है। वहां पे जो चीज़ समझ

334
00:25:17,120 --> 00:25:22,000
में आ रही है वहां पे जो चीज कठिनता से समझ में आ रही है उसका एक सरलार्थ

335
00:25:22,000 --> 00:25:26,000
कोष्क में लिख दिया। हां वो सरल वो सरलार्थ अपनी तरफ से ऐड

336
00:25:26,000 --> 00:25:30,240
किया है ना। अपनी ओर से कहां किया? उसी का अर्थ लिखा ना उन्होंने

337
00:25:30,240 --> 00:25:34,720
तो उन्होंने अपनी जानकारी में हम उसी का अर्थ लिख रहे हैं।

338
00:25:34,720 --> 00:25:38,720
अब सुन आप सुनिए। अब जैसे कोई कार्य है उस कार्य

339
00:25:38,720 --> 00:25:42,560
करने में

340
00:25:42,560 --> 00:25:46,720
कर दिया। मैं इसको और क्लियर कर देता हूं। जो

341
00:25:46,720 --> 00:25:50,800
वो श्लोक छाप रहे हैं वो अपनी बुद्धि विवेक से छाप रहे हैं कि नहीं

342
00:25:50,800 --> 00:25:53,600
छाप रहे हैं?

343
00:25:53,600 --> 00:25:57,760
अब मैं आपको एक एक मैं श्लोक दिखा देता हूं। इस

344
00:25:57,760 --> 00:26:01,760
श्लोक में क्लियर हो जाएगा। आपने कहा है कि सरल

345
00:26:01,760 --> 00:26:05,920
है क्या? नहीं नहीं। आपको श्लोक दिखा देता

346
00:26:05,920 --> 00:26:10,000
हूं। श्लोक में क्लियर हो जाएगा। श्लोक क्यों दिखा रहा हूं

347
00:26:10,000 --> 00:26:14,880
मैं फिलहाल बात ये चल रही है बता रहा हूं मैं

348
00:26:14,880 --> 00:26:19,120
आपको ये कह रहा हूं मैं आपको ये मैं आपको ये कह रहा हूं कि

349
00:26:19,120 --> 00:26:23,280
जो वो अपने बुद्धि और विवेक से आप कह रहे हो कोष्क में लिखते हैं तो क्या

350
00:26:23,280 --> 00:26:27,440
वो जो श्लोक छापते हैं वो अपने बुद्धि और विवेक से नहीं छापते उसमें बुद्धि विवेक

351
00:26:27,440 --> 00:26:31,440
को साइड में रखते हैं अब साइड में रखे हैं चाहे घर

352
00:26:31,440 --> 00:26:35,760
पे रखे वो तो मुझे पता नहीं लेकिन गीता अध्याय श्लोक 14

353
00:26:35,760 --> 00:26:40,000
15 में सुनिए आपको विश्वास नहीं जिस आपको विश्वास

354
00:26:40,000 --> 00:26:44,000
नहीं है उसकी छापी हुई किताब को आधार बना

355
00:26:44,000 --> 00:26:48,160
दावे कैसे कर रहे हो कि यह बात सुनिए

356
00:26:48,160 --> 00:26:52,240
चर्चा खत्म कीजिए फिर जब विश्वास है नहीं है चर्चा नहीं है कि

357
00:26:52,240 --> 00:26:56,320
नहीं है कीजिए की बात कुछ नहीं

358
00:26:56,320 --> 00:26:57,680
होती यहां

359
00:26:57,680 --> 00:27:01,680
सुनो मैं आप जैसे मुझे गुमराह करने का

360
00:27:01,680 --> 00:27:05,760
प्रयास कर रहे हो तो मैं गुमराह नहीं होऊंगा और आप

361
00:27:05,760 --> 00:27:09,760
फालतू बातें करेंगे आपको वाकई मैं निकाल दूंगा। आप यह स्वीकार

362
00:27:09,760 --> 00:27:13,760
करो। इस बात का उत्तर नहीं है। आप चर्चा पे आओ। इस बात का

363
00:27:13,760 --> 00:27:17,040
उत्तर नहीं है। आप

364
00:27:17,040 --> 00:27:21,200
अब आपको भ्रमित करने का प्रयास कर रहे है। आप चर्चा

365
00:27:21,200 --> 00:27:25,280
में आओ। नहीं आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो। सीधा

366
00:27:25,280 --> 00:27:29,360
मेरा ये भ्रमित करना कहां पर सिद्ध होता है? कौन से शास्त्र के सिद्धांत से सिद्ध

367
00:27:29,360 --> 00:27:33,440
होता है? वो बताओ। चलो। तुम्हारे तुम्हारे तर्कों से

368
00:27:33,440 --> 00:27:37,520
सिद्ध होता है कि आप आप हमारा टॉपिक ये था कि गीता ज्ञान देने

369
00:27:37,520 --> 00:27:41,840
वाला जो प्रभु है वो मोक्ष नहीं तुम्हारा ये

370
00:27:41,840 --> 00:27:47,440
लिखा है तुम्हारे मन से मानी जाए

371
00:27:47,440 --> 00:27:51,920
आपके मन से बात मानी जाए बातें अरे हमारे मन से कुछ मत मानो

372
00:27:51,920 --> 00:27:56,080
तो फिर एक ये क्लेम जो किया है कि आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो

373
00:27:56,080 --> 00:28:00,960
इसके संबंध में शास्त्री सिद्धांत दो चलो तुम

374
00:28:00,960 --> 00:28:05,200
रामपाल दास की किताब से ही बता दो। [हंसी] सुनो आप आप

375
00:28:05,200 --> 00:28:08,880
है ना मैं आपको

376
00:28:08,880 --> 00:28:12,960
कर रहा हूं। मैं आपको सत्य की बात कर

377
00:28:12,960 --> 00:28:16,880
रहा हूं। आप इस संबंध में

378
00:28:16,880 --> 00:28:21,360
रामपाल दास की किताब से प्रमाण दे दो मान लूंगा। चलो इतनी छूट

379
00:28:21,360 --> 00:28:25,360
आप तो नहीं आप आप टॉपिक को छोड़ के दूसरे टॉपिक को भाग रहे वहां

380
00:28:25,360 --> 00:28:29,680
पे फसने लगो वहां पे अपने मनगढ़ंत बातें बोलने लगो तो फसने वाली बात

381
00:28:29,680 --> 00:28:33,680
ही कहां है तो भ्रमित कर रहे हैं आप

382
00:28:33,680 --> 00:28:37,680
मुझे तो टॉपिक पे दूसरी बातों पे

383
00:28:37,680 --> 00:28:43,680
क्यों लग रहे हो अरे तो बात है ना

384
00:28:44,880 --> 00:28:48,880
जब मैं प्रमाण जब मैं प्रमाण दे रहा हूं गीता ज्ञान दाता

385
00:28:48,880 --> 00:28:52,880
प्रभु तू स्वयं कह रहा है कि मैं मोक्ष नहीं देता तो मैंने

386
00:28:52,880 --> 00:28:56,880
क्या कहा है मैंने क्या कहा है भाई साहब दूसरी जगह मत जाओ सुनने की

387
00:28:56,880 --> 00:29:00,960
बजाय आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण सिद्ध नहीं

388
00:29:00,960 --> 00:29:04,960
हो रहा ना आप जिसको प्रमाण कह रहे हो वो प्रमाण

389
00:29:04,960 --> 00:29:09,280
सिद्ध नहीं हो रहा शुरुआत में आपने पूछा था कि पहले वाला जो प्रश्न है उसे सिद्ध कीजिए

390
00:29:09,280 --> 00:29:14,880
आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण सिद्ध शुरुआत में अपनी बातों से मत

391
00:29:14,880 --> 00:29:18,960
शुरुआत में आपने कहा था कि पहले ये सिद्ध कीजिए कि गीता

392
00:29:18,960 --> 00:29:23,040
ज्ञान दाता प्रभु मोक्ष नहीं देता ये सिद्ध कीजिए जब मैं सिद्ध करने

393
00:29:23,040 --> 00:29:27,120
लगा तो आप तर्क वितर्क पे आ गए कि गीता प्रेस नहीं है

394
00:29:27,120 --> 00:29:31,280
बता रहा हूं जब आप ये सिद्ध करने लगे तो आपने गीता प्रेस की गीता उठाई

395
00:29:31,280 --> 00:29:35,360
है मैंने कहा क्यों उठाई गीता प्रेस पे

396
00:29:35,360 --> 00:29:39,440
क्यों आश्रित हो तो मैं अपनी दिखा रहा हूं अपने गुरु जी की

397
00:29:39,440 --> 00:29:43,440
दिखाऊं उसको मानोगे तो गुरुजी के पास

398
00:29:43,440 --> 00:29:47,760
आप मैं बताऊं मैं बता रहा हूं गुरु जी के पास जो आई है वो भी गीता

399
00:29:47,760 --> 00:29:51,760
से आई आपने खुद कह दिया या तो आप कहते कि गुरु जी के

400
00:29:51,760 --> 00:29:56,160
पास उनके गुरु से आई उनके पास उनके गुरु से आई गुरु परंपरा बताते

401
00:29:56,160 --> 00:30:00,080
तब हम सोचते सुनिए गीता का

402
00:30:00,080 --> 00:30:04,400
बहुत से गुरुओं ने बहुत से संतों ने अपने अलग-अलग अनुवाद

403
00:30:04,400 --> 00:30:08,480
किए हैं। ऐसी बात नहीं है लेकिन जो ज्यादातर है ज्यादातर

404
00:30:08,480 --> 00:30:12,560
संख्या में लोग गीता प्रेस गोरखपुर की प्रमाण मानते हैं क्योंकि

405
00:30:12,560 --> 00:30:18,560
ये सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। [हंसी]

406
00:30:19,840 --> 00:30:23,920
अरे सोच तो लिया करो क्या बोल रहे हो कहां मान्यता प्राप्त

407
00:30:23,920 --> 00:30:28,080
है सरकार मान्यता देगी कौन सी चीज प्रमाणिक है कौन सी नहीं

408
00:30:28,080 --> 00:30:32,240
है बिल्कुल भाई अब सरकार द्वारा

409
00:30:32,240 --> 00:30:37,120
मान्यता प्राप्त है आपको इसकी नॉलेज नहीं है अच्छा ठीक है

410
00:30:37,120 --> 00:30:43,120
रामपाल की रामपाल दास की किताबों की मान्यता कहां से प्राप्त है

411
00:30:45,120 --> 00:30:49,360
हम जब आप सरकार की मानते हो तो फिर सरकार

412
00:30:49,360 --> 00:30:53,920
द्वारा मान्यता प्राप्त है क्या रामपाल की किताबें?

413
00:30:53,920 --> 00:30:57,920
अरे हम रामपाल जी महाराज को ही प्रमाण मानते हैं। अरे

414
00:30:57,920 --> 00:31:02,400
तो जब सरकार नहीं मान रही है उनको प्रमाण तो तुम क्यों मान रहे हो?

415
00:31:02,400 --> 00:31:06,480
यानी कि सरकार वो माने या ना माने उनकी मान्यता में सुनो

416
00:31:06,480 --> 00:31:10,720
उनकी मान्यता को लेकर मैं मानूंगा क्या? यानी सरकार

417
00:31:10,720 --> 00:31:14,720
उनकी मान्यता को मैं मानूंगा। नहीं मेरी मान्यता मेरे ऊपर निर्भर

418
00:31:14,720 --> 00:31:18,720
करती है। इसलिए मानते हैं क्योंकि सरकार प्रमाण मानती है।

419
00:31:18,720 --> 00:31:22,960
मैं क्या मानता हूं क्या नहीं मानता ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं गीता

420
00:31:22,960 --> 00:31:27,120
प्रेस को मानता हूं। ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं रामपाल जी को मानता हूं।

421
00:31:27,120 --> 00:31:31,120
ये मेरे ऊपर निर्भर है। ये किसीको कोई और तय नहीं करेगा। इसका

422
00:31:31,120 --> 00:31:35,280
कोई इन बातों का कोई उत्तर नहीं है। बस आपने माना यहां से शुरू करो

423
00:31:35,280 --> 00:31:40,800
कि भैया वो किताब में ये छपा है। बाकी मेरे पास इनका उत्तर नहीं है।

424
00:31:40,800 --> 00:31:42,960
प्रमाण

425
00:31:42,960 --> 00:31:48,000
भाड़ में आप आप ये बताइए आप गीता प्रेस को मानते हो?

426
00:31:48,000 --> 00:31:52,000
अरे मैं मैं तो मानता ही हूं ना मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम क्यों

427
00:31:52,000 --> 00:31:56,160
मानते हो? मैं तो इसलिए मानता हूं क्योंकि मेरे जो परंपरा प्राप्त आचार्य है उन्होंने कहा गीता प्रेस

428
00:31:56,160 --> 00:32:00,240
की गीता में सही सही श्लोक चपे हैं। सुनो हम जिसको

429
00:32:00,240 --> 00:32:04,240
मानते हो मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। अरे मेरे भाई तो

430
00:32:04,240 --> 00:32:08,720
तुम तुम तुम्हारे जो क्लेम है वो तो झूठे है ना। पहले ये तो स्वीकार

431
00:32:08,720 --> 00:32:12,720
मेरा छोड़ दो। मेरा छोड़ दो। मेरा छोड़ दो। आप जिसको

432
00:32:12,720 --> 00:32:16,800
मानते हैं मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। ठीक है? अब बात

433
00:32:16,800 --> 00:32:21,600
ये आएगी कि मैंने जो लिखा है

434
00:32:21,600 --> 00:32:25,600
जो मैंने लिखा है उसके बारे में कोई और बताएगा कि मैं ही

435
00:32:25,600 --> 00:32:29,600
बताऊंगा कि मैंने क्या लिखा है। इसका अर्थ। तुमने

436
00:32:29,600 --> 00:32:33,840
जो लिखा है वो तुम ही बताओगे। कोई और क्यों बताएगा? तो

437
00:32:33,840 --> 00:32:38,000
मेरे गुरुओं ने जो व्यास जी से लेकर के यहां तक जो गीता लेकर के

438
00:32:38,000 --> 00:32:42,080
आए हैं उसका अर्थ बताया है कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वो

439
00:32:42,080 --> 00:32:46,240
भगवान श्री कृष्ण जो है वो मोक्ष दायक है वो लेके

440
00:32:46,240 --> 00:32:50,960
आ रहे हैं वो लिख रहे हैं वो गीता प्रेस को दे रहे हैं गीता छापो

441
00:32:50,960 --> 00:32:55,120
अब तुम आकर के कह रहे हो कि तुमने जो लिखा है वो गलत उसका सही अर्थ मैं

442
00:32:55,120 --> 00:32:59,280
बता रहा हूं हम मतलब

443
00:32:59,280 --> 00:33:03,360
आपका यह कहना है कि जिन्होंने लिखा है। उन्होंने कह दिया

444
00:33:03,360 --> 00:33:07,360
श्री कृष्ण भगवान मोक्ष देते हैं। बस इतना काफी है। पढ़ने की आवश्यकता नहीं

445
00:33:07,360 --> 00:33:12,400
है। है मगर यदि उसका अर्थ

446
00:33:12,400 --> 00:33:15,360
यदि उसका अर्थ उन गुरुओं के विपरीत जा

447
00:33:15,360 --> 00:33:19,680
रहा है जिन्होंने लिखा है जिन्होंने परंपरा से आपको गीता दी है। यदि उसका अर्थ

448
00:33:19,680 --> 00:33:25,120
उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है तो

449
00:33:25,120 --> 00:33:29,120
एक मिनट एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट

450
00:33:29,120 --> 00:33:33,200
यदि उसका अर्थ आपके हिसाब से उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है

451
00:33:33,200 --> 00:33:37,360
जो जो गीता को लेकर के आ रहे हैं। तो आपको यह मानना पड़ेगा

452
00:33:37,360 --> 00:33:41,680
कि मैं गीता को प्रमाण नहीं मानता। मैं गीता

453
00:33:41,680 --> 00:33:47,200
को प्रमाण नहीं मानता। ये आपको कहना पड़ेगा। अगर

454
00:33:47,200 --> 00:33:51,200
अनुवाद को आप नहीं मानते तो आप भी प्रमाणित नहीं

455
00:33:51,200 --> 00:33:53,360
हुए।

456
00:33:53,360 --> 00:33:57,360
अरे मैं तो मानता हूं ना। मैं तुमसे पूछ रहा हूं। तुम

457
00:33:57,360 --> 00:34:01,520
अपने क्लेम को साफ करो कि गीता के आधार

458
00:34:01,520 --> 00:34:05,600
पर आप कुछ नहीं मानते हो। आपका आधार दूसरा होना चाहिए। ये कहना बंद

459
00:34:05,600 --> 00:34:09,760
करो कि मैं गीता के कारण किसी को तत्वदर्शी मानता हूं। ये कहना बंद करो

460
00:34:09,760 --> 00:34:13,920
कि मैं गीता के कारण किसी को काल मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं किसी

461
00:34:13,920 --> 00:34:18,240
किसी को गीता के कारण कबीर मानता हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। आप स्वतंत्र

462
00:34:18,240 --> 00:34:22,320
होकर के कहिए कि भैया कबीर भगवान है बिना गीता के। गीता

463
00:34:22,320 --> 00:34:26,640
को मानने का दावा करना झूठा है। ये

464
00:34:26,640 --> 00:34:30,480
बात है। तो मैं मैं इसी इसी

465
00:34:30,480 --> 00:34:34,880
बात के प्रति उत्तर में मैं यह जवाब दूंगा आपको। जैसे किसी भी

466
00:34:34,880 --> 00:34:39,120
अन्य धर्म के व्यक्तियों से जब चर्चा होती है तो मैं उनको स्पष्ट कह देता हूं कि

467
00:34:39,120 --> 00:34:43,440
भाई मैं इस चीज को मानता हूं। इसमें इसमें जो चीजें लिखी

468
00:34:43,440 --> 00:34:48,320
हैं उन बातों को मैं प्रमाणित मानता हूं। और

469
00:34:48,320 --> 00:34:52,560
जो अनुवाद किया है मैं खड़े हुए हो जिसकी साइड

470
00:34:52,560 --> 00:34:56,560
से तुम यहां खड़े हुए हो वो तो नहीं मानता मैं

471
00:34:56,560 --> 00:35:00,880
सुनिए पर्सनली अपनी साइड से तो ये मानो कि अभी मुझे नहीं पता रामपाल

472
00:35:00,880 --> 00:35:04,880
सही बोलते हैं कि गलत बोलते हैं ये मानो मैं रामपाल जी महाराज की

473
00:35:04,880 --> 00:35:08,960
बात ही नहीं कर रहा अरे भाई तुम तो तुमसे हम बात क्यों

474
00:35:08,960 --> 00:35:13,440
कर रहे हैं फिर क्यों बात करेंगे फिर तुमसे हम हम

475
00:35:13,440 --> 00:35:17,520
गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है का दावा कर रहे

476
00:35:17,520 --> 00:35:21,520
हो रामपाल के पक्ष को यहां पुष्ट करने नहीं आए हो तो हम क्यों तुमसे बात

477
00:35:21,520 --> 00:35:26,400
करें बहुत सारे लोग हैं जो हमारा विरोध करते हैं तुमसे हम क्यों बात करें भाई

478
00:35:26,400 --> 00:35:31,600
एक सेकंड तुम्हारी क्या बात हुई थी

479
00:35:31,600 --> 00:35:35,680
कि हम ज्ञान चर्चा करेंगे और अपने ज्ञान चर्चा में ये सिद्ध करेंगे कि गीता ज्ञान

480
00:35:35,680 --> 00:35:39,760
देने वाला प्रभु है वो मोक्ष आगे बढ़ो के इस विषय में मेरे मेरे पास

481
00:35:39,760 --> 00:35:44,080
उत्तर नहीं है मैं आगे बढ़ना चाहता हूं ये बोल दो आगे बढ़ो नहीं

482
00:35:44,080 --> 00:35:45,600
इस विषय में मैं बात नहीं

483
00:35:45,600 --> 00:35:49,920
करना चाहता। मुझे सिर्फ यह बात करनी है कि गीता ज्ञान देने वाला

484
00:35:49,920 --> 00:35:54,880
नहीं। बात ना करने का कारण बताओ कि मेरे पास उत्तर नहीं है।

485
00:35:54,880 --> 00:35:58,960
कारण बताओ। कारण नहीं नहीं क्या क्या होता मैं

486
00:35:58,960 --> 00:36:03,360
जरूरी मैं उत्तर देना ही नहीं चाहता उसका।

487
00:36:03,360 --> 00:36:07,520
ठीक है। फिलहाल तुम्हारे यहां पर इतना सब कवायद करने से लोगों को लोग निर्णय

488
00:36:07,520 --> 00:36:12,800
ले लेंगे कि उत्तर है कि नहीं है। ठीक। अब तुम अपना वो क्लेम बताओ।

489
00:36:12,800 --> 00:36:17,520
गीता से हां गीता

490
00:36:17,520 --> 00:36:21,680
अध्याय दो और नौ में यह स्पष्ट

491
00:36:21,680 --> 00:36:25,760
लिखा हुआ है कि जितने भी भूत

492
00:36:25,760 --> 00:36:29,840
प्राणी हैं वो प्रकृति में लीन होते

493
00:36:29,840 --> 00:36:33,920
हैं और प्रकृति और परबह्म दोनों एक ही है।

494
00:36:33,920 --> 00:36:38,000
दोनों अलग नहीं है। इसे अलग समझने का प्रयास करेंगे

495
00:36:38,000 --> 00:36:42,080
तो फिर मुझे और भी प्रमाण देने पड़ेंगे पुराणों से

496
00:36:42,080 --> 00:36:46,160
गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 में लिखा हुआ है क्योंकि

497
00:36:46,160 --> 00:36:50,160
इस मान्यता के अनुसार जन्मे की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित

498
00:36:50,160 --> 00:36:54,320
है और नौ में लिखा हुआ है कि प्रकृति जितने भी भूत प्राणी हैं। जितने

499
00:36:54,320 --> 00:36:58,320
भी टोटली एक्स वाई जेड जितने भी भूत प्राणी हैं।

500
00:36:58,320 --> 00:37:00,640
प्रकृति में लीन होते हैं और लीन होने के बाद में

501
00:37:00,640 --> 00:37:04,720
जब सृष्टि का जो कार्यभार है वो समेटने के बाद में फिर दोबारा

502
00:37:04,720 --> 00:37:08,960
से मैं उनको रच देता हूं। तो इस इस

503
00:37:08,960 --> 00:37:13,680
हिसाब से जन्म मृत्यु किसी की कटती नहीं है। कहां

504
00:37:13,680 --> 00:37:17,680
लिखा है?

505
00:37:17,680 --> 00:37:22,160
गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 पढ़िए। उसके बाद में

506
00:37:22,160 --> 00:37:28,160
नौ पर आ जाइए।

507
00:37:29,680 --> 00:37:35,680
नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए।

508
00:37:37,840 --> 00:37:41,440
नौ का सात और आठ।

509
00:37:41,440 --> 00:37:47,440
पहले दो का 27 पढ़ लीजिए। उसके बाद नौ का सात आठ पढ़ना।

510
00:37:50,480 --> 00:37:56,480
जन्मे हुई की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है।

511
00:38:07,200 --> 00:38:13,200
दो का 27

512
00:38:14,720 --> 00:38:18,880
ये हां दो का एक मिनट एक मिनट

513
00:38:18,880 --> 00:38:24,880
देख रहा हूं देख रहा हूं हां

514
00:38:27,040 --> 00:38:31,520
दो 27 में लिखा है संपूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट

515
00:38:31,520 --> 00:38:35,600
थे और मरने के बाद भी अप्रकट होने वाले हैं। केवल बीच में ही प्रकट

516
00:38:35,600 --> 00:38:39,600
है। ऐसी स्थिति में शोक क्यों? 27 में लिखा

517
00:38:39,600 --> 00:38:43,760
है कि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और

518
00:38:43,760 --> 00:38:47,760
मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तू

519
00:38:47,760 --> 00:38:52,560
शोक करने योग्य नहीं है।

520
00:38:52,560 --> 00:38:56,960
तो इसमें तो एक मान्यता बताई जा रही है कि यदि आपको मोक्ष

521
00:38:56,960 --> 00:39:01,040
प्राप्त नहीं हो रहा है तो उस स्थिति में जिसकी मृत्यु हो रही है उसका जन्म

522
00:39:01,040 --> 00:39:05,040
निश्चित है और जिसका जन्म हो रहा है उसमें मृत्यु निश्चित है। इसमें ये कहा है कि उसको मोक्ष

523
00:39:05,040 --> 00:39:09,040
मिलेगा ही नहीं। मोक्ष मिल ही नहीं सकता।

524
00:39:09,040 --> 00:39:15,040
अब अब आप नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए।

525
00:39:35,440 --> 00:39:39,840
कल्पों के अंत में सब भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं। अर्थात

526
00:39:39,840 --> 00:39:44,960
प्रकृति में लीन होते हैं। और कल्पों के आदि में उनको मैं फिर रचता हूं।

527
00:39:44,960 --> 00:39:47,600
तो

528
00:39:47,600 --> 00:39:51,680
इसका अर्थ क्या हुआ? यह तो महाप्रलय की बात हो रही है।

529
00:39:51,680 --> 00:39:55,680
महाप्रलय के समय की बात हो रही है। ये मोक्ष की बात थोड़ी

530
00:39:55,680 --> 00:39:58,640
ना हो रही है।

531
00:39:58,640 --> 00:40:04,640
जिसके जो जन्मा जन्म जन्मांतर

532
00:40:04,720 --> 00:40:08,880
एक सेकंड एक सेकंड सुनिए। अरे पूरा पढ़ा

533
00:40:08,880 --> 00:40:14,000
नहीं आपको। अपनी प्रकृति को अंगीकार करके

534
00:40:14,000 --> 00:40:18,480
स्वभाव के बल से परतंत्र हुए संपूर्ण भूत समुदाय को बार-बार

535
00:40:18,480 --> 00:40:24,080
उनके कर्मों के अनुसार रचता हूं। ठीक है? इसमें क्या दिक्कत है?

536
00:40:24,080 --> 00:40:28,160
इसमें क्या दिक्कत है? हां। अब सवाल हां मैं

537
00:40:28,160 --> 00:40:32,320
आगे आगे बढ़ता हूं। आगे बढ़ता हूं। अब आते हैं गीता अध्याय आठ

538
00:40:32,320 --> 00:40:36,560
के श्लोक नंबर 16 में। 16 में कहा है कि हे अर्जुन ब्रह्मलोक

539
00:40:36,560 --> 00:40:41,200
पर्यंत सब लोग पुनरावृत्ति में लेकिन मुझे प्राप्त करके पुनर्जन्म

540
00:40:41,200 --> 00:40:45,440
नहीं होता यानी कि प्रकृति और परब्रह्म दोनों एक ही है

541
00:40:45,440 --> 00:40:50,960
अलग नहीं है।

542
00:40:50,960 --> 00:40:56,960
एक मिनट मुझे आठ 16 देख लेने।

543
00:41:12,240 --> 00:41:14,800
ब्रह्मलोक पर्यंत सब लोग पुनरावर्ती

544
00:41:14,800 --> 00:41:18,800
है। परंतु हे कुंती पुत्र मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता

545
00:41:18,800 --> 00:41:22,960
क्योंकि मैं कालातीत हूं और यहां ये सब ब्रह्मा आदि लोक काल के द्वारा

546
00:41:22,960 --> 00:41:28,400
सीमित होने से अनित्य है। तो इसमें क्या दिक्कत क्या है?

547
00:41:28,400 --> 00:41:33,040
प्रकृति में प्रकृति में प्रकृति में प्रकृति में

548
00:41:33,040 --> 00:41:36,960
होना में

549
00:41:36,960 --> 00:41:39,520
आपका

550
00:41:39,520 --> 00:41:43,840
समझने का प्रयास कर रहा हूं मैं तो मुझे करेक्ट मुझे करेक्ट करिएगा

551
00:41:43,840 --> 00:41:47,920
एक मिनट एक मिनट आप वहां कह रहे हैं कि वो प्रकृति में लीन होते

552
00:41:47,920 --> 00:41:51,920
हैं कल्प के समय और यदि मुक्ति यही

553
00:41:51,920 --> 00:41:55,920
है कि वो जो है ईश्वर में लीन हो जाए तो क्योंकि प्रकृति और

554
00:41:55,920 --> 00:41:59,920
ईश्वर एक ही है तो इसलिए यदि प्रकृति में लीन होने से व्यक्ति

555
00:41:59,920 --> 00:42:03,920
मुक्त नहीं होता है तो फिर इसका मतलब ईश्वर में भी लीन होने से

556
00:42:03,920 --> 00:42:07,920
व्यक्ति मुक्त नहीं होगा।

557
00:42:07,920 --> 00:42:12,080
मतलब आप ये समझते हैं कि प्रकृति और नहीं

558
00:42:12,080 --> 00:42:16,160
प्रकृति और ब्रह्म दोनों ही है। आपको शिव पुराण

559
00:42:16,160 --> 00:42:20,320
में प्रमाण दे सकता हूं। व्यवहार में व्यवहार

560
00:42:20,320 --> 00:42:24,320
की दृष्टि से नहीं सुनो सुनो मैं मैं प्रमाण

561
00:42:24,320 --> 00:42:28,480
में जानता हूं। भाई मेरी बात 120 मेरी बात सुनो

562
00:42:28,480 --> 00:42:32,880
भाई मेरी बात सुन लो सुन लो सुन लो सुन लो

563
00:42:32,880 --> 00:42:37,200
हां सुनाइए तत्व की दृष्टि से दोनों एक है

564
00:42:37,200 --> 00:42:41,600
व्यवहार में दोनों अलग-अलग है तो जहां पर ये कहा जा रहा है कि

565
00:42:41,600 --> 00:42:46,000
प्रकृति में लीन हो के वो लोग वापस आते हैं तो वहां पर व्यवहारिक

566
00:42:46,000 --> 00:42:50,000
भेद के अनुसार कहा जा रहा है और जहां पर यह कहा जा

567
00:42:50,000 --> 00:42:54,000
रहा है कि परम ब्रह्म और प्रकृति एक है तो उस परम ब्रह्म को प्राप्त

568
00:42:54,000 --> 00:42:58,160
करने वाले जो है मोक्ष को प्राप्त कर रहे हैं। जैसे कि जैसे

569
00:42:58,160 --> 00:43:02,960
कि इधर देखो भैया इधर देखो वीडियो की ओर देखो

570
00:43:02,960 --> 00:43:05,840
मैं

571
00:43:05,840 --> 00:43:08,960
आपके शिव पुराण का

572
00:43:08,960 --> 00:43:12,960
एक मिनट वो मैंने एक्सेप्ट किया है। मैं आपको ये बता रहा हूं

573
00:43:12,960 --> 00:43:18,960
कि आपका नाम है अमित दास।

574
00:43:19,200 --> 00:43:23,280
आप उदाहरण मत दीजिए। सुनिए श्रीस भाई आपने

575
00:43:23,280 --> 00:43:28,160
आप जहां ब्रह्मा विष्णु महेश उदाहरण

576
00:43:28,160 --> 00:43:32,560
उदाहरण क्यों नहीं दूं तुम किसी के भाई हो किसी के बेटे हो किसी के

577
00:43:32,560 --> 00:43:36,720
किसी के पुत्र हो किसी के पति हो किसी के पिता हो कि नहीं

578
00:43:36,720 --> 00:43:41,040
हो तत्व की दृष्टि से हो जहां से

579
00:43:41,040 --> 00:43:46,400
की दृष्टि से हो वहां से वहां से आगे जाएंगे क्या आत्मा

580
00:43:46,400 --> 00:43:50,720
किससे आगे

581
00:43:50,720 --> 00:43:56,080
जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश प्रकट होते हैं। सुनिए जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश

582
00:43:56,080 --> 00:44:00,080
आत्मा उससे बताइए उसका प्रमाण प्रकट

583
00:44:00,080 --> 00:44:04,080
होने से आगे जाएंगे। प्रकट होने से आगे जाएंगे। उसका प्रमाण मैं

584
00:44:04,080 --> 00:44:09,040
उसका प्रमाण दूंगा ना अपने आपको।

585
00:44:09,040 --> 00:44:13,440
एक मिनट मैं आपको प्रमाण दे तो रहा हूं। मैंने आपसे

586
00:44:13,440 --> 00:44:17,600
कहा कि आप किसी के पिता, पुत्र और भाई हैं। पति हैं।

587
00:44:17,600 --> 00:44:23,600
क्या आप तत्व की दृष्टि से भी पिता पुत्र पति है सबके?

588
00:44:24,880 --> 00:44:28,640
एक ही है।

589
00:44:28,640 --> 00:44:32,640
लेकिन व्यवहारिक रूप तत्व की दृष्टि से भी आप

590
00:44:32,640 --> 00:44:37,840
पिता, पुत्र, पति और भाई ये सब हैं।

591
00:44:37,840 --> 00:44:41,920
व्यवहारिक रूप से अलग हूं मैं। लेकिन तुमसे

592
00:44:41,920 --> 00:44:46,080
आप वही मैं कह रहा हूं। जहां पर प्रकृति में लीन हो के वापस

593
00:44:46,080 --> 00:44:50,080
आने की बात हो रही है। वहां व्यवहार की बात हो रही है। जहां पर

594
00:44:50,080 --> 00:44:54,320
प्रकृति और ब्रह्म अलग-अलग है। और जहां पर ब्रह्म को प्राप्त करके

595
00:44:54,320 --> 00:44:58,320
जो है मुक्ति पाने की बात हो रही है। वहां पर जब आप कहेंगे प्रकृति एक ही है

596
00:44:58,320 --> 00:45:02,320
तो वहां व्यवहार नहीं है। वहां मोक्ष है। वहां परमार्थ है। तत्व की दृष्टि की बात हो रही है।

597
00:45:02,320 --> 00:45:06,400
वहां समझ में आया? हां। उसी के लिए

598
00:45:06,400 --> 00:45:10,640
उसी के लिए गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा है कि मुझ ब्रह्म का एक ओम मंत्र

599
00:45:10,640 --> 00:45:14,640
है और ओम मंत्र से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। बात को पलट रहे हैं और ब्रह्मोक

600
00:45:14,640 --> 00:45:18,880
में मंत्र लेट अरे भाई

601
00:45:18,880 --> 00:45:24,560
नहीं आप सुनिए अब मेरी बात सुनिए जवाब सुनिए

602
00:45:24,560 --> 00:45:28,880
आप जवाब सुनिए सुनिए एक एक मिनट अब आप जवाब सुनिए

603
00:45:28,880 --> 00:45:34,080
हां सातवा अध्याय बोलिए सातवा अध्याय बोलिए

604
00:45:34,080 --> 00:45:36,400
पांच

605
00:45:36,400 --> 00:45:40,160
सातवा अध्याय कौन सा खोलू बताइए? सातवां

606
00:45:40,160 --> 00:45:46,160
अध्याय खोल लिया मैंने।

607
00:45:54,800 --> 00:46:00,800
कौन सा है? बता रहा हूं। कौन सा?

608
00:46:09,920 --> 00:46:14,880
इसमें लिखा हुआ है दव श्लोक में जाइए।

609
00:46:14,880 --> 00:46:17,120
हेलो

610
00:46:17,120 --> 00:46:21,680
हेलो हां मैं सुन रहा हूं।

611
00:46:21,680 --> 00:46:26,160
10वें श्लोक में लिखा हुआ है कि

612
00:46:26,160 --> 00:46:30,240
इसमें लिखा हुआ है कि हे अर्जुन तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज

613
00:46:30,240 --> 00:46:34,240
और मुझको ही जान मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और

614
00:46:34,240 --> 00:46:38,880
तेजस्वी बलवानों का हो गया काफी है। सनातन हो गया बस काफी है। उतना काफी है।

615
00:46:38,880 --> 00:46:44,000
सनातन का मतलब क्या है?

616
00:46:44,000 --> 00:46:48,000
सनातन का सदा रहने वाला। जिसका ना

617
00:46:48,000 --> 00:46:54,000
कभी जन्म होता है ना कभी मृत्यु होती है।

618
00:46:54,000 --> 00:46:58,000
सनातन आप ठीक से पढ़ पा रहे हैं ना? हां

619
00:46:58,000 --> 00:47:02,160
पढ़ रहा हूं। पढ़ पा रहे हैं ना? दोबारा आप खुद पढ़िए। आप पढ़िए ना पढ़

620
00:47:02,160 --> 00:47:08,160
के सुनाइए। तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज मुझको जान।

621
00:47:08,880 --> 00:47:13,040
हां। सनातन बीज मुझको जान। बोल रहा है ना? सनातन यानी कि

622
00:47:13,040 --> 00:47:17,840
जो के लिए मुझसे ही उत्पन्न होना जान

623
00:47:17,840 --> 00:47:22,400
सनातन है वो जो बीज है वो सनातन है

624
00:47:22,400 --> 00:47:26,480
वो जो बीज है सनातन है जिससे भूत उत्पन्न

625
00:47:26,480 --> 00:47:31,680
हो रहे हैं वो भूत सन वो जो बीज है वो सनातन है

626
00:47:31,680 --> 00:47:35,760
तो इससे ये प्रमाण नहीं हो गया तो मोक्ष हो जाएगा अरे

627
00:47:35,760 --> 00:47:39,760
मैं मैं मैं सिद्ध करूंगा ना मैं सिद्ध करूंगा चार नौ पे

628
00:47:39,760 --> 00:47:45,760
जाओ चार नौ पे जाओ

629
00:47:46,240 --> 00:47:52,160
बताइए चार में क्या है?

630
00:47:52,160 --> 00:47:58,160
क्या लिखा है? पढ़ो।

631
00:48:07,360 --> 00:48:11,360
नौ हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म दिव्य

632
00:48:11,360 --> 00:48:16,080
अर्थात निर्मल अलौकिक है। इस प्रकार जो मनुष्य

633
00:48:16,080 --> 00:48:20,400
तत्व से जान लेता है वह शरीर को त्याग कर फिर

634
00:48:20,400 --> 00:48:24,480
जन्म को प्राप्त नहीं होता। ठीक है? ये ये बिल्कुल सही बात है।

635
00:48:24,480 --> 00:48:29,440
आगे पढ़ो आगे आगे पढ़ो। आगे उसमें एक पंक्ति और है भाई।

636
00:48:29,440 --> 00:48:35,120
आगे एक पंक्ति और है। किंतु मुझको ही प्राप्त होता है। ये तो पढ़ो।

637
00:48:35,120 --> 00:48:39,680
हां किंतु मुझको प्राप्त होता है। कहां लिखा है? ये कोष्क में लिखा हुआ है आपने। गीता

638
00:48:39,680 --> 00:48:42,960
वाली में चेक कीजिए।

639
00:48:42,960 --> 00:48:47,840
एक मिनट। यह संस्कृत में मामेती

640
00:48:47,840 --> 00:48:52,000
लिखा हुआ है। मामेती आपके यहां कोष्टक में लिखा

641
00:48:52,000 --> 00:48:56,240
है। यहां पे कोष्टक में नहीं लिखा है। ये देखो बिना कोष्क

642
00:48:56,240 --> 00:49:00,240
के लिखा है। आप गीता प्रेस कौन सी है

643
00:49:00,240 --> 00:49:01,280
पुस्तक आपके पास?

644
00:49:01,280 --> 00:49:05,360
गीता प्रेस गीता प्रेस को

645
00:49:05,360 --> 00:49:07,680
नहीं।

646
00:49:07,680 --> 00:49:11,840
दिखा दिया ना ये देखो।

647
00:49:11,840 --> 00:49:15,840
हां मैं पढ़ के सुना रहा हूं। एक सेकंड सुनो

648
00:49:15,840 --> 00:49:20,160
मेरी बात सुनो। वहां पर

649
00:49:20,160 --> 00:49:24,480
रुक जाओ। अर्जुन बोले एक मिनट एक मिनट

650
00:49:24,480 --> 00:49:29,520
एक मिनट वहां पे संस्कृत भी दी गई है। मा मेती

651
00:49:29,520 --> 00:49:32,880
मुझे ही

652
00:49:32,880 --> 00:49:37,040
ठीक है। संस्कृत है वहां पे अवेलेबल। तो पहली बात तो ये

653
00:49:37,040 --> 00:49:43,040
है एक

654
00:49:44,400 --> 00:49:48,480
और भी मैं और भी श्लोक दे दूंगा

655
00:49:48,480 --> 00:49:52,720
मैं और भी श्लोक दे दूंगा प्राप्त होता है एक मिनट

656
00:49:52,720 --> 00:49:56,880
मैं और भी श्लोक दे दूंगा कि और भी पहले जो आपने बोला है

657
00:49:56,880 --> 00:50:00,960
उसको तो क्लियर कर लो मैं करूंगा क्लियर उसको क्लियर करूंगा

658
00:50:00,960 --> 00:50:05,440
मुझे बोलने तो दो लेट मी फिनिश मुझे बोलने दो मैं क्लियर कर रहा हूं

659
00:50:05,440 --> 00:50:09,600
मां मेथी को ये कह रहे हैं कि भैया वो जन्म जन्म और मृत्यु को प्राप्त नहीं होता।

660
00:50:09,600 --> 00:50:13,600
तो लास्ट में एक शब्द आ रहा है मामेती। तो वहां से निकल रहा है कि नहीं वो

661
00:50:13,600 --> 00:50:17,600
जन्म मृत्यु को प्राप्त नहीं होता किंतु मुझे ही प्राप्त होता है। ये अर्थ

662
00:50:17,600 --> 00:50:21,680
निकल रहा है वहां से। अब दूसरी बात ये आती है

663
00:50:21,680 --> 00:50:24,880
कि

664
00:50:24,880 --> 00:50:30,880
शायद नौवे अध्याय का 34वा श्लोक

665
00:50:44,480 --> 00:50:49,120
मुझ में मनवाला हो मेरा भक्त बन मेरा पूजन

666
00:50:49,120 --> 00:50:53,360
करने वाला हो मुझको प्रणाम कर इस

667
00:50:53,360 --> 00:50:57,760
प्रकार आत्मा को मुझ में नियुक्त करके

668
00:50:57,760 --> 00:51:02,560
मेरा पराय होकर तू मुझको ही प्राप्त होता है बस

669
00:51:02,560 --> 00:51:06,880
हो गया यहां भी प्राप्त होने

670
00:51:06,880 --> 00:51:10,960
एक मिनट मैं अपने पूरे प्रमाण के बारे में बोल रहा एक एक मिनट और

671
00:51:10,960 --> 00:51:15,280
भी प्रमाण है एक मिनट ठीक है लीजिए फिर मैं

672
00:51:15,280 --> 00:51:19,680
बोलूंगा आठ पांच

673
00:51:19,680 --> 00:51:24,160
आठ पांच आठ 13 आठ पांच निकालो पहले

674
00:51:24,160 --> 00:51:29,840
आठ पांच

675
00:51:29,840 --> 00:51:33,440
ठीक है

676
00:51:33,440 --> 00:51:36,960
8 5

677
00:51:36,960 --> 00:51:42,960
13

678
00:51:44,000 --> 00:51:48,160
इसमें लिखा हुआ है कि सब इंद्रियों

679
00:51:48,160 --> 00:51:52,880
के द्वाराों को रोक कर तथा मन को

680
00:51:52,880 --> 00:51:57,200
हृदय में स्थिर स्थिर करके आठ

681
00:51:57,200 --> 00:51:59,760
पांच

682
00:51:59,760 --> 00:52:05,760
अच्छा आठ पांच हम

683
00:52:07,760 --> 00:52:12,080
जो पुरुष अंतकारल में मुझको ही स्मरण करता हुआ शरीर

684
00:52:12,080 --> 00:52:16,080
को त्याग कर जाता है वह मेरे साक्षात

685
00:52:16,080 --> 00:52:20,320
स्वरूप को प्राप्त होता है। इसमें कुछ भी संदेह नहीं।

686
00:52:20,320 --> 00:52:25,040
हम ठीक है। तो अभी हमने जानी दो बातें

687
00:52:25,040 --> 00:52:29,520
कि जो गीता को कहने वाला है वह सनातन

688
00:52:29,520 --> 00:52:33,600
है। और जो भी व्यक्ति

689
00:52:33,600 --> 00:52:37,840
उसका भजन करता हुआ अंत काल में शरीर छोड़ता है वो उसको

690
00:52:37,840 --> 00:52:41,920
ही प्राप्त होता है। किसको? जो सनातन है उसके साक्षात स्वरूप को प्राप्त

691
00:52:41,920 --> 00:52:44,320
होता है।

692
00:52:44,320 --> 00:52:48,880
तो इसका मतलब वो कौन से स्वरूप को प्राप्त होता है? सनातन

693
00:52:48,880 --> 00:52:51,680
स्वरूप को।

694
00:52:51,680 --> 00:52:57,360
कहां गए? हम

695
00:52:57,360 --> 00:53:03,360
सुन रहा हूं। आप बोलिए। अरे भाई शक्ल दिखाओ ना अपनी।

696
00:53:03,440 --> 00:53:07,440
चेहरा दिखाओ। अरे और भी कोई प्रमाण है बाकी

697
00:53:07,440 --> 00:53:11,760
फिर नहीं तो फिर मैं मैं बोलूं फिर अब इसको

698
00:53:11,760 --> 00:53:17,520
काट सकते हो तो काटो।

699
00:53:17,520 --> 00:53:23,520
काटो इसे।

700
00:53:26,880 --> 00:53:30,960
और भी कोई प्रमाण है आपके या फिर मैं बोल भाई और भी बहुत सी

701
00:53:30,960 --> 00:53:36,960
चीजें है पहले इसको काट सकते हो तो काटो

702
00:53:37,200 --> 00:53:41,280
हां तो इसी को हां अब अब आई ना बात और प्रमाण देखना है तो

703
00:53:41,280 --> 00:53:47,280
देख लो 932 933

704
00:53:47,360 --> 00:53:51,360
हम बोल लीजिए आप है ना इकट्ठा बोल लीजिए फिर

705
00:53:51,360 --> 00:53:55,360
मेरे बोलने आपने कहा प्रमाण है तो मैं दिखा देता

706
00:53:55,360 --> 00:53:59,440
हूं और देख लो 932 933

707
00:53:59,440 --> 00:54:04,000
हां जब मैं प्रमाण दिखाऊंगा तो आप बीच में नहीं बोलना फिर

708
00:54:04,000 --> 00:54:09,120
आपने प्रमाण चर्चा तो फिर

709
00:54:09,120 --> 00:54:13,200
932 में लिखा है वो मेरी शरण में होकर परम गति को

710
00:54:13,200 --> 00:54:18,800
प्राप्त करता है परम गति

711
00:54:18,800 --> 00:54:24,000
ठीक है ठीक है अब काटो इसे

712
00:54:24,000 --> 00:54:28,160
हां तो पहला तो मैंने आपको प्रमाण दिया था कि

713
00:54:28,160 --> 00:54:32,640
प्रकृति को प्राप्त होकर प्राणी फिर उसका पुनर्जन्म

714
00:54:32,640 --> 00:54:37,120
सृष्टि रचना होती रहती है उसके कर्म के आधार से। ठीक है? अब हम

715
00:54:37,120 --> 00:54:41,120
आपको प्रमाण दिखाते हैं कि आपको बताया वहां

716
00:54:41,120 --> 00:54:45,280
पर व्यवहार की बात हो रही। आप यह

717
00:54:45,280 --> 00:54:49,280
कहो ना कि वो वहां पर मुझे प्राप्त हो जाता है। जहां पर मुझको प्राप्त होने की बात

718
00:54:49,280 --> 00:54:53,440
हो रही है वहां पर है। या तो सुनिए आप आप बोल

719
00:54:53,440 --> 00:54:57,600
लीजिए नहीं तो फिर मुझे प्रमाण दिखाने दीजिए। भाई ऐसा है ना आप आप

720
00:54:57,600 --> 00:55:01,680
क्या करोगे यहां से जितने टाइम आपने अपनी बात को रखा और मैंने काउंटर

721
00:55:01,680 --> 00:55:06,880
नहीं किया उतने टाइम की क्लिप निकाल करके वीडियो बनाओगे इसलिए आए हो

722
00:55:06,880 --> 00:55:11,200
मैं जहां आप बोलोगे वहां मैं आपको पता चलूंगा ना

723
00:55:11,200 --> 00:55:15,520
ठीक है कोई बात नहीं अच्छी बात है लेकिन पहला मेरा

724
00:55:15,520 --> 00:55:21,520
प्रमाण जो मैं दिखाता हूं उसको क्लियर हो जाए

725
00:55:22,640 --> 00:55:26,640
बोलो कैमरा कहां गया?

726
00:55:26,640 --> 00:55:32,640
एक सेकंड

727
00:55:35,040 --> 00:55:39,200
इतनी सारी चर्चा करने की आप लोगों को जरूरत भी नहीं होती

728
00:55:39,200 --> 00:55:41,520
है।

729
00:55:41,520 --> 00:55:47,120
यदि आपके पास परंपरा है।

730
00:55:47,120 --> 00:55:52,560
ठीक है? यह सारे श्लोक आपको रटे हो कहां क्या लिखा है यह भी रटा हो

731
00:55:52,560 --> 00:55:56,800
कोई एक व्यक्ति नहीं है सनातन का दुश्मन बहुत

732
00:55:56,800 --> 00:56:01,200
है दिन और रात यही चल रहा है कैसे सनातन को नष्ट करें

733
00:56:01,200 --> 00:56:05,520
कैसे कृष्ण भगवान का खंडन करें कैसे राम भगवान का खंडन करें

734
00:56:05,520 --> 00:56:09,520
सारे शास्त्रों को या तो आप हर व्यक्ति रटा हो और नहीं तो वो

735
00:56:09,520 --> 00:56:13,600
किसी चौक चौराहे पर कोई व्यक्ति मिल गया कि देखो यहां पर तो उसने प्रकृति

736
00:56:13,600 --> 00:56:17,680
में लीन होने की बात कही है और प्रकृति और वो तो एक ही है यानी प्रकृति से

737
00:56:17,680 --> 00:56:21,920
व्यक्ति वापस आता तो लो हो गया। इसलिए आपको यह जानना आवश्यक

738
00:56:21,920 --> 00:56:25,920
है कि आपको सारे शास्त्रों को रटा होना आवश्यक नहीं

739
00:56:25,920 --> 00:56:29,920
है। आपको परंपरा प्राप्त आचार्य पर आश्रित होना आवश्यक है।

740
00:56:29,920 --> 00:56:34,080
अपने धर्म को यदि बचाना है तो नहीं तो हर

741
00:56:34,080 --> 00:56:37,920
दूसरा व्यक्ति आपके बच्चों को आपके भाइयों को कब आपसे छीन लेगा।

742
00:56:37,920 --> 00:56:41,920
अभक्त के नाम पर काफिर बना देगा। आपके बच्चों को आपको पता नहीं

743
00:56:41,920 --> 00:56:47,920
चलेगा।

744
00:56:50,800 --> 00:56:56,480
अमित जी फिलहाल गायब हो चुके हैं।

745
00:56:56,480 --> 00:57:00,480
इसीलिए कहते हैं इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में

746
00:57:00,480 --> 00:57:04,640
कोई नहीं है टक्कर में। इसीलिए कहते हैं कि पहले

747
00:57:04,640 --> 00:57:08,800
तो तुम्हारा वो बाहर निकाली आत्मा शास्त्र कहां

748
00:57:08,800 --> 00:57:12,880
से आए? पहले तो वो वो आवश्यक है जनता को

749
00:57:12,880 --> 00:57:17,040
सिद्ध करना। परंपरा की आवश्यकता कितनी है? हर व्यक्ति हर बच्चा

750
00:57:17,040 --> 00:57:21,120
के रटे हुए घूमेगा कि कृष्ण भगवान ने कहा अपने आपको कहा

751
00:57:21,120 --> 00:57:24,480
है।

752
00:57:24,480 --> 00:57:28,560
रट के घूमे हर व्यक्ति तब वो अपने आपको माइंड वाश से बचा सकता

753
00:57:28,560 --> 00:57:32,640
है। ब्रेन वाश से बचा सकता है। वरना ये अमित जैसे

754
00:57:32,640 --> 00:57:37,200
लोग रामपाल जैसे लोग हर दूसरे दिन आपके भाइयों को आपसे अलग कर देंगे।

755
00:57:37,200 --> 00:57:41,920
आपको रटना यह है एवं परंपरा प्राप्तिम

756
00:57:41,920 --> 00:57:46,640
मुंडकोनिषद एक एक से लेकर चार तक यह रटना है आपको

757
00:57:46,640 --> 00:57:50,720
कि तुमको शास्त्र कहां से मिले यदि तुम्हें भगवत कृपा से मिले हैं

758
00:57:50,720 --> 00:57:55,760
तो शास्त्र रटे होने चाहिए फिर मोबाइल में देख के मत बताओ

759
00:57:55,760 --> 00:57:58,080
हम

760
00:57:58,080 --> 00:58:04,080
तुम्हें किताब लेने क्यों जाना पड़ रहा है भाई गीता प्रेस तक

761
00:58:04,400 --> 00:58:08,960
हमें शास्त्र परंपरा से मिलते

762
00:58:08,960 --> 00:58:12,000
और

763
00:58:12,000 --> 00:58:16,320
यदि कोई नहीं भी आ रहा है हमें शास्त्र परंपरा

764
00:58:16,320 --> 00:58:19,920
से मिलते हैं और

765
00:58:19,920 --> 00:58:23,920
परंपरा से जब हमने अपने गुरु मुख से वो चीजें सुनी है तो जब

766
00:58:23,920 --> 00:58:27,920
हम गीता प्रेस में कोई भी उसको छाप रहा हो तो हम वहां पर सत्यापित कर सकते हैं

767
00:58:27,920 --> 00:58:31,920
कि भैया ये हमसे हमारे परंपरा प्राप्त गुरुओं ने अपने गुरुओं से सुनी थी

768
00:58:31,920 --> 00:58:37,040
कि नहीं। जिन गुरुओं में पीछे वो लोग आ जाएंगे जिन्होंने उन शास्त्रों को लिखा था।

769
00:58:37,040 --> 00:58:41,040
कहां गए अमित? भाग गए।

770
00:58:41,040 --> 00:58:45,440
अब आ भी जाओ भाई। इतनी देर मत लगाओ।

771
00:58:45,440 --> 00:58:50,000
ऊपर लीजिए ना। आप जानबूझ के ऊपर नहीं ले रहे हो।

772
00:58:50,000 --> 00:58:56,000
ऊपर ही तो ले गया है। और कितना ऊपर भेज दे तुमको?

773
00:58:57,700 --> 00:59:02,160
[हंसी] ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। कितनी

774
00:59:02,160 --> 00:59:06,800
कितनी देर हो गई है तुम्हारे यहां नेट खराब चल रहा है क्या

775
00:59:06,800 --> 00:59:12,800
कुछ नेट की प्रॉब्लम है तुम्हारे यहां

776
00:59:15,280 --> 00:59:19,280
अभी वो थोड़ा सा छटपटाहट में है कि ऊपर लो ऊपर लो अभी

777
00:59:19,280 --> 00:59:23,360
बताता हूं बताता हूं वो पूरा पढ़ के नहीं आए थे वो उनको

778
00:59:23,360 --> 00:59:27,600
जितना रटा दिया कि यहां पर देखो यहां जाके इससे लड़ो उससे लड़ो वो उतने रटा

779
00:59:27,600 --> 00:59:32,880
रटाए पे आए थे अभी तो मैं वीडियो आपका

780
00:59:32,880 --> 00:59:37,120
हां आपका और वीडियो नहीं देखते हैं क्या ये लोग जब फॉर्म भर

781
00:59:37,120 --> 00:59:42,480
तो और वीडियो नहीं देखे क्या

782
00:59:42,480 --> 00:59:46,080
ये सब चीज तो आपने

783
00:59:46,080 --> 00:59:50,240
चेहरा दिखाकर चर्चा होती है अमित को तो ऊपर लो ना

784
00:59:50,240 --> 00:59:54,560
हां अमित बताओ

785
00:59:54,560 --> 00:59:58,560
अरे अरे भाई सुभाष भाई आप डर क्यों रहे हो मेरे से चर्चा करने

786
00:59:58,560 --> 01:00:02,720
में इतना फालतू बात बोलोगे अमित हम तुमको भगा

787
01:00:02,720 --> 01:00:07,040
टू द पॉइंट बात करो उसी पे आ गए टू द पॉइंट बात करो

788
01:00:07,040 --> 01:00:11,120
उसी उसी पे आ गए कल जिस पर चर्चा किए थे उसी पे

789
01:00:11,120 --> 01:00:16,560
आ गए ये डर गए भाग गया ये हो गया हो गया

790
01:00:16,560 --> 01:00:20,560
डरने लगते हैं जब इनका इनका पारा हल्का होने लगता है

791
01:00:20,560 --> 01:00:24,800
तो व्यक्तिगत कटाक्ष जैसे उजेश पांडे जाहिलियत

792
01:00:24,800 --> 01:00:28,800
मूर्खता बदतमीजी ये क्या है जब

793
01:00:28,800 --> 01:00:33,440
हमारा पला हल्का होने लगे तो व्यक्तिगत कटाक्ष करने लग

794
01:00:33,440 --> 01:00:37,520
हां वो तो मैंने रात में सुना ही था कि जाहिलियत जाहिलियत वाले प्रश्न

795
01:00:37,520 --> 01:00:41,760
कर रहे हो तो आपने खाली प्रति उत्तर बहुत अच्छा दिया मतलब उनके मुंह नहीं लगे

796
01:00:41,760 --> 01:00:46,960
आप खाली इतना ही बोले कि जो आप कृत कर रहे हो ना वो भी भगवती देख रही है

797
01:00:46,960 --> 01:00:51,200
वहां पे हमने अपने राम की मर्यादा सिखाई उनके यहां तो राम भैया विधि विधि

798
01:00:51,200 --> 01:00:55,360
के विरुद्ध जाकर के कुछ भी कर लेते हैं जबकि भगवान कह रहे हैं कि सुति

799
01:00:55,360 --> 01:00:59,520
स्मृति मोहम आज्ञा

800
01:00:59,520 --> 01:01:02,800
बराबर

801
01:01:02,800 --> 01:01:07,120
हां जी राजपूत जी बताइए जय

802
01:01:07,120 --> 01:01:13,120
श्री राम

803
01:01:21,200 --> 01:01:26,480
जी बताइए बताइए

804
01:01:26,480 --> 01:01:32,480
आपके यहां से आवाज मुझे रिपीट सुनाई दे रही है आप हेडफोन निकाल के बात करिए।

805
01:01:37,440 --> 01:01:41,600
अमित से मेरा कहना है कि अगली बार आना। अच्छी तैयारी करके आना

806
01:01:41,600 --> 01:01:45,600
और अपना नेट वगैरह अच्छे से ध्यान से रख के आना कि

807
01:01:45,600 --> 01:01:49,600
बार-बार वो सतलोक ना जाना पड़े नेट का कनेक्शन लेने के

808
01:01:49,600 --> 01:01:53,520
लिए। और [हंसी]

809
01:01:53,520 --> 01:01:58,000
चेहरा ना छुपाना पड़े बार-बार।

810
01:01:58,000 --> 01:02:02,000
ठीक है? ये कहना है मेरा कोष्टक में बंद होकर

811
01:02:02,000 --> 01:02:06,000
के सतलोक की यात्रा कर लो अब तुम हां

812
01:02:06,000 --> 01:02:10,160
जी बताइए राजपूत जी

813
01:02:10,160 --> 01:02:14,400
नहीं वो बोलिए आप बोलिए बस हो गया

814
01:02:14,400 --> 01:02:20,400
बोल लिए

815
01:02:21,200 --> 01:02:25,360
तो खुद का नेट खराब है और वह यहां पर आकर के बोल रहा है कि

816
01:02:25,360 --> 01:02:31,360
ऊपर नहीं ले रहे डर गए हो यह है वह है

817
01:02:32,320 --> 01:02:36,320
काफी दिनों बाद जो है रामपाल ही कोई मिला था। रामपाल

818
01:02:36,320 --> 01:02:40,400
वाले सोच रहे होंगे कि आजकल शिवश नारायण द्विवेदी जो

819
01:02:40,400 --> 01:02:45,440
है कुछ बोल नहीं रहा है हमारे ऊपर। भाई तुम अकेले नहीं हो ना?

820
01:02:45,440 --> 01:02:50,400
तुम अकेले नहीं हो ना? सनातन के दुश्मन बहुत सारे हैं

821
01:02:50,400 --> 01:02:54,960
और जो जितनाए आते हैं

822
01:02:54,960 --> 01:02:58,960
नए-नए आते हैं शिवाज भैया एक जगह आप गए थे एक खूब पकड़े थे वो

823
01:02:58,960 --> 01:03:02,960
बाल जिसका ऐसा खड़ाखड़ा था युद्ध नाम की कोई चीज ही नहीं

824
01:03:02,960 --> 01:03:07,040
है दुनिया में [हंसी] युद्ध

825
01:03:07,040 --> 01:03:10,720
नाम की कोई चीज ही नहीं है

826
01:03:10,720 --> 01:03:14,800
कमाल का व्यक्ति बीके पर भी आने वाले

827
01:03:14,800 --> 01:03:19,120
हैं और मैं एक बात बता दूं अभी मैंने

828
01:03:19,120 --> 01:03:23,120
स्किप स्किप चीजें तो खोली नहीं।

829
01:03:23,120 --> 01:03:28,800
अभी मैं अगर इसकी चीजें खोलता तो ये और तेजी में भागता।

830
01:03:28,800 --> 01:03:32,800
भाई इसकी किताब में लिखा हुआ है कि श्री कृष्ण और विष्णु

831
01:03:32,800 --> 01:03:37,200
भगवान है। विष्णु के अवतार श्री कृष्ण है। वो ईश्वर है। परम

832
01:03:37,200 --> 01:03:42,080
परमेश्वर है। परम ब्रह्म है वो। इसकी किताब में लिखा है।

833
01:03:42,080 --> 01:03:45,600
रामपाल ने लिखा है।

834
01:03:45,600 --> 01:03:51,600
और इसकी किताब में क्या लिखा है कि

835
01:03:51,920 --> 01:03:55,760
आत्मा नित्य नहीं है।

836
01:03:55,760 --> 01:03:59,920
अच्छा आत्मा नित्य नहीं है। तो

837
01:03:59,920 --> 01:04:03,840
ये मोक्ष कैसे दिला देगा आत्मा को? बताओ।

838
01:04:03,840 --> 01:04:09,600
जब आत्मा [हंसी] नित्य ही नहीं है तो मोक्ष दिला सकता है क्या उसको?

839
01:04:09,600 --> 01:04:13,680
216 में क्या लिखा है कि जो असत है उसका कभी

840
01:04:13,680 --> 01:04:18,320
भाव नहीं होता और जो सत है उसका कभी अभाव नहीं होता

841
01:04:18,320 --> 01:04:22,640
तो जो असत है जिसका अभाव था कभी ना कभी वो असत है जिसका

842
01:04:22,640 --> 01:04:26,640
अभाव है किसी समय किसी देश काल परिस्थिति में जिसका

843
01:04:26,640 --> 01:04:31,360
अभाव है वो असत है वो सत कैसे हो जाएगी

844
01:04:31,360 --> 01:04:36,560
हम अभी मैंने ये चैप्टर तो खोले ही नहीं थे

845
01:04:36,560 --> 01:04:40,560
अभी तो आयुष मात्र खाली खोला गया था। मेरे को लगता

846
01:04:40,560 --> 01:04:44,800
है उसको क्या लगा होगा कि उसको रटा दिखा

847
01:04:44,800 --> 01:04:48,880
कोई आए हैं। एक मिनट अक्षय जी करके कोई आए हैं जो लाइव

848
01:04:48,880 --> 01:04:52,960
में जुड़ना चाहते हैं। बात से मतलब नहीं होता। आप हमारे चैनल के हिस्ट्री

849
01:04:52,960 --> 01:04:58,240
पहले देख करके आइए। हम उसी को यहां पर लेते हैं जो अपना चेहरा दिखाए।

850
01:04:58,240 --> 01:05:02,640
ज्यादातर मतलब उस उस बात में जब आईडियोलॉजिकल डिबेट होनी है।

851
01:05:02,640 --> 01:05:07,040
जब हमें विरोधी क्या कहते हैं?

852
01:05:07,040 --> 01:05:11,200
वैचारिक मतभेद के निमित्त जब चर्चा करनी है तो उसी के साथ होती है जिसमें

853
01:05:11,200 --> 01:05:15,200
चेहरे के साथ व्यक्ति आता है और इसके कई सारे कारण है वो कई

854
01:05:15,200 --> 01:05:19,280
बार हम बता चुके बार-बार एक एक व्यक्ति को नहीं बता पाएंगे आपको अगर प्रोटोकॉल को

855
01:05:19,280 --> 01:05:23,360
फॉलो करते हुए आना है तो आप आ सकते हैं नहीं तो जय श्री राम ठीक है आप

856
01:05:23,360 --> 01:05:27,600
वीडियो सर्च करें और देखें अपनी जांच पड़ताल करें इस विषय में जो व्यक्ति

857
01:05:27,600 --> 01:05:31,760
चेहरे के साथ आएगा वो आ सकता है यहां पर लाइव में और

858
01:05:31,760 --> 01:05:36,000
अन्यथा नहीं ठीक है तो बेकार

859
01:05:36,000 --> 01:05:40,800
में अपनी उंगलियों को कष्ट ना दें। कीपैड वॉरियर बनके तभी

860
01:05:40,800 --> 01:05:45,760
आए जब आप चेहरा दिखाएं।

861
01:05:45,760 --> 01:05:51,760
[हंसी]

862
01:05:57,200 --> 01:06:01,280
अभी संभवता ये हो सकता था

863
01:06:01,280 --> 01:06:05,520
कि वो यह कहता कि मैं सनातन तरीके से तुम्हारा जन्म

864
01:06:05,520 --> 01:06:09,760
और मरण करता रहता हूं। तो इसमें बहुत सी तात्विक

865
01:06:09,760 --> 01:06:13,840
विवेचनाएं हैं कि जो क्रिया होती है वह कभी सनातन हो ही

866
01:06:13,840 --> 01:06:17,840
नहीं सकती। क्योंकि वो शुरू हो रही है अंत हो रही है। व्यवहार हो रहा है। जहां व्यवहार

867
01:06:17,840 --> 01:06:22,240
है वह सनातन नहीं है। तो

868
01:06:22,240 --> 01:06:26,240
यह जो तुम्हारा जन्म और मरण मैं सदा से मैं करता हूं। यह

869
01:06:26,240 --> 01:06:30,320
वाली बात जहां सनातन बीज है ना दूसरी बात यह भी है। अगर वो ये कहता

870
01:06:30,320 --> 01:06:34,320
कि यहां पर ये नहीं कह रहे हैं कि वो सनातन बीज स्वयं है। यानी वो स्वरूप से

871
01:06:34,320 --> 01:06:38,400
सनातन है। वो ये कह सकता था कि वो कह रहा है कि वो सदा से

872
01:06:38,400 --> 01:06:42,720
उनके जीवन मरण की व्यवस्था करने वाला है। सदा से संपूर्ण

873
01:06:42,720 --> 01:06:46,720
भूतों ये कह सकता था। फिर वहां पर बात आती है कि भैया गीता प्रेस की

874
01:06:46,720 --> 01:06:50,800
बात जो गीता प्रेस वाले जो छाप रहे हैं वो

875
01:06:50,800 --> 01:06:54,880
मानेंगे कि जो उससे किताब ले कहेगा तुमने

876
01:06:54,880 --> 01:07:00,080
क्या लिखा है वो मैं बताऊंगा हम

877
01:07:00,080 --> 01:07:00,880
समझ रहे हैं मेरी

878
01:07:00,880 --> 01:07:03,520
बात

879
01:07:03,520 --> 01:07:07,600
गीता प्रेस में लिखा है उन्होंने सनातन बीज उन्होंने कहा भगवान कृष्ण के लिए

880
01:07:07,600 --> 01:07:12,480
अब कैसे पता चलेगा कि उन्होंने भगवान कृष्ण के लिए कहा है

881
01:07:12,480 --> 01:07:14,640
हम

882
01:07:14,640 --> 01:07:18,800
गीता प्रेस वाले भगवान मानते हैं। कृष्ण को मोक्षदायक मानते हैं।

883
01:07:18,800 --> 01:07:22,800
गीता प्रेस वाले राधेश्याम जी खेमका जी आए थे अभी माघ मेले

884
01:07:22,800 --> 01:07:26,800
में जो गुरुदेव हैं। आपने एक

885
01:07:26,800 --> 01:07:30,800
वीडियो देखा होगा हमारे चैनल पर आहान पर जिसमें कि गुरुदेव को उनके

886
01:07:30,800 --> 01:07:34,880
जो मुख्य परिकर में से एक हैं ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी उन्होंने एक

887
01:07:34,880 --> 01:07:39,040
राजस्थानी भेंट भगवान को भगवान के लिए जो

888
01:07:39,040 --> 01:07:43,040
थी वो गाई थी वहां पर स्टेज पर उस समय उनका साथ दे रहे थे

889
01:07:43,040 --> 01:07:46,880
राधेश्याम खेमका जी

890
01:07:46,880 --> 01:07:50,880
ठीक है जो उसके संपादक भी है कल्याण के वो

891
01:07:50,880 --> 01:07:54,880
वहां पर थे वो दूसरे माइक पे बैठ के खड़े थे और वहां उनका

892
01:07:54,880 --> 01:07:58,880
साथ दे रहे थे मतलब जैसे जैसे कहीं पे जैसे डाउन ले बिगड़ती

893
01:07:58,880 --> 01:08:03,120
है ना तो वहां से वो उठाते थे दोबारा अगले पैराग्राफ को तो

894
01:08:03,120 --> 01:08:07,120
राधेश्याम खेमका जी बोल रहे हैं कि भैया हम कृष्ण के लिए ही बोल रहे हैं सनातन

895
01:08:07,120 --> 01:08:11,280
बीज मगर व्यक्ति उससे किताब लेके बोलेगा नहीं तुमने इसमें ये नहीं कहा है मैं

896
01:08:11,280 --> 01:08:15,520
जो बोल रहा हूं वो कहा है [हंसी] इसी

897
01:08:15,520 --> 01:08:18,240
को कहते हैं परंपरा

898
01:08:18,240 --> 01:08:22,320
ठीक है मुझे लगता नहीं वो वापस आएगा अब हो गया उसका काम नहीं

899
01:08:22,320 --> 01:08:26,560
हो गया हो गया समय में व्यर्थ दबाते हैं

900
01:08:26,560 --> 01:08:32,560
मैं सिर्फ ये बोलूंगा

901
01:08:38,240 --> 01:08:42,240
भैया जो भी सनातन विरोधी तंत्र है अक्षय जी हमने आपकी बात सुन ली है

902
01:08:42,240 --> 01:08:46,720
जो भी सनातन विरोधी तंत्र हैं यदि वह सनातन सिद्धांतों

903
01:08:46,720 --> 01:08:51,040
पर आघात कर रहे हैं तो हमें उनका प्रतिकार करना पड़ेगा वो हमारा कर्तव्य

904
01:08:51,040 --> 01:08:55,200
है ठीक है और ठीक है इतनी देर की चर्चा

905
01:08:55,200 --> 01:08:59,360
पर्याप्त है। हमेशा की तरह क्लीन बोल्ड होकर वापस जा चुके

906
01:08:59,360 --> 01:09:03,440
हैं। रामपाली महोदय जो आए थे और आप लोगों को जो भी

907
01:09:03,440 --> 01:09:07,680
कुछ जानने को मिला हो उससे उसको अपने जीवन में अप्लाई

908
01:09:07,680 --> 01:09:11,760
भी अवश्य करें। भगवान का नाम जप करने से अंत समय में

909
01:09:11,760 --> 01:09:15,760
भी आपको भगवान ही याद आएंगे। जिसके कारण आपकी मुक्ति सुनिश्चित

910
01:09:15,760 --> 01:09:19,840
होगी। तो भगवान का नाम जप करें। अधिकार की सीमा में उनका मंत्र इत्यादि

911
01:09:19,840 --> 01:09:24,080
गुरु से प्रदत्त जो मंत्र है उसका जाप करें। ठीक है?

912
01:09:24,080 --> 01:09:28,400
चलिए अनिकेत जी लाइव में कैसे जुड़े?

913
01:09:28,400 --> 01:09:32,560
लाइव में जुड़ने के लिए हमने अभी यहां स्ट्रीम का लिंक दिया है

914
01:09:32,560 --> 01:09:36,640
प्रवीण जी और यदि वैचारिक मतभेद के निमित्त आपको लाइव में

915
01:09:36,640 --> 01:09:40,800
आना है तो अभी अभी बंद होगी लाइव अभी होने

916
01:09:40,800 --> 01:09:46,640
वाली है। जैसे ही बंद होगी तो आपको स्क्रीन पर एक नंबर दिखाई देगा। उस नंबर पर WhatsApp करिए

917
01:09:46,640 --> 01:09:50,640
और WhatsApp में

918
01:09:50,640 --> 01:09:54,480
क्या कहते हैं? WhatsApp करिए।

919
01:09:54,480 --> 01:09:58,720
WhatsApp करने पर एक फॉर्म प्राप्त होगा YouTube लाइव स्ट्रीम डिस्कशन का। उसको भर देंगे

920
01:09:58,720 --> 01:10:02,880
तो हम आपके साथ चर्चा सुनिश्चित कर लेंगे। एक बात और है वो कह के गया उसको

921
01:10:02,880 --> 01:10:07,520
पूरा कर दूं। उसने कहा था कि वो क्रूर क्यों दिख रहे हैं? क्योंकि

922
01:10:07,520 --> 01:10:12,080
यदि इस संसार में क्रूरता नामक तत्व है

923
01:10:12,080 --> 01:10:16,960
तो भगवान के बिना नहीं है। ठीक है?

924
01:10:16,960 --> 01:10:21,440
तो दुनिया में यदि मृत्यु है तो उसके भी अंतिम निर्णायक

925
01:10:21,440 --> 01:10:25,520
कौन है? भगवान अगर मृत्यु है दुनिया

926
01:10:25,520 --> 01:10:30,640
में तो उसके भी अंतिम निर्णायक भगवान ही है ना यत्र तत्र सर्वत्र

927
01:10:30,640 --> 01:10:34,640
तो उस रूप को भी दिखाया जाएगा और दूसरी बात

928
01:10:34,640 --> 01:10:38,880
यह है कि दिखाने के बाद अर्जुन को जब आपका कहना है कि अर्जुन

929
01:10:38,880 --> 01:10:43,120
के वो कृष्ण भगवान के अंदर से निकल के अलग होकर के अपना रूप दिखाया

930
01:10:43,120 --> 01:10:47,200
था। मगर अर्जुन ने उसके बाद भी विराट रूप को

931
01:10:47,200 --> 01:10:51,200
देख लेने के बाद भी उनको भगवान कृष्ण ही कहा

932
01:10:51,200 --> 01:10:55,440
था। मधुसूदन ही कहा था। ये नहीं कहा था कि नहीं नहीं तुम काल

933
01:10:55,440 --> 01:10:59,600
हो। जब उसने देख लिया कि ये तो विराट विराट स्वरूप है जिसको

934
01:10:59,600 --> 01:11:04,160
तुम काल कह रहे हो वो अलग है। अर्जुन तो वहां पर उसको बार बार मधुसूदन

935
01:11:04,160 --> 01:11:08,160
कह रहा है। है ना? अर्जुन तो वही कह रहे हैं। मधुसूदन

936
01:11:08,160 --> 01:11:10,320
कह रहे हैं। और

937
01:11:10,320 --> 01:11:14,560
दूसरी बात और क्या है वहां पर? कि

938
01:11:14,560 --> 01:11:18,720
भगवान यह दिखा रहे हैं कि जिनको तू मरा हुआ जान रहा है वह वास्तव

939
01:11:18,720 --> 01:11:22,800
में उनको एक ना एक दिन मरना ही है। मेरे यहां तो वो किसी ना

940
01:11:22,800 --> 01:11:26,880
किसी तरीके से काल के मुंह में जाने ही है। तो तू यह मत समझ के तूने किसी

941
01:11:26,880 --> 01:11:30,880
को मारा है। वो उसको भाव दिखाने के लिए उन्होंने वो अपना दृश्य दिखाया था कि

942
01:11:30,880 --> 01:11:35,200
उसके उनकी दांत में धृतराष्ट्र पिस रहे हैं या ये सब

943
01:11:35,200 --> 01:11:39,280
जो उन्होंने देखा था उन्होंने दुर्योधन इत्यादि सब उनकी दाढ़ में है।

944
01:11:39,280 --> 01:11:43,440
दांतों के बीच में पिस रहे हैं। तो वो जो दृश्य था उन्होंने

945
01:11:43,440 --> 01:11:48,000
वही भाव दिखाने के लिए बताया था कि भाई सबका मरना निश्चित है। कुछ कोई भी

946
01:11:48,000 --> 01:11:52,080
वो नहीं है। जब तक जीवन और मरण के चक्कर में फंसा हुआ है तब तक वो मुक्त

947
01:11:52,080 --> 01:11:56,560
नहीं है। वो दिखाने के लिए उन्होंने अपना स्वरूप दिखाया था।

948
01:11:56,560 --> 01:12:00,640
वो भाव प्रकट करने के लिए। इसलिए सोचना बेवकूफी है कि वो

949
01:12:00,640 --> 01:12:04,960
क्रूर क्यों है? ठीक है। तुम्हारा जो भगवान

950
01:12:04,960 --> 01:12:08,960
है जिसको तुम भगवान मानते हो वो क्या बुआ जैसा बना रहता है क्या

951
01:12:08,960 --> 01:12:13,360
हमेशा? ऐसे बुआ जैसा भोला

952
01:12:13,360 --> 01:12:16,080
भाई

953
01:12:16,080 --> 01:12:20,880
और अगर ऐसा है तो तुम जैसे मूर्ख मान सकते हैं इसको भगवान

954
01:12:20,880 --> 01:12:26,480
भगवान तो वो है जिनके बिना कुछ संभव ही नहीं है।

955
01:12:26,480 --> 01:12:29,280
ठीक है?

956
01:12:29,280 --> 01:12:33,280
जय श्री राम। सभी को जय श्री राम।
