1
00:00:02,240 --> 00:00:07,360
तो जय श्री राम सभी को।

2
00:00:07,360 --> 00:00:10,560
आज की बहुत ही महत्वपूर्ण

3
00:00:10,560 --> 00:00:14,560
चर्चा होने वाली है।

4
00:00:14,560 --> 00:00:18,880
अ अनिकेत जी हैं हमारे साथ।

5
00:00:18,880 --> 00:00:24,480
जो कुछ ऐसे क्वेश्चन आते हैं कमेंट्स के माध्यम से जो

6
00:00:24,480 --> 00:00:28,800
रेलेवेंट होते हैं और जिनका उत्तर देना चाहिए

7
00:00:28,800 --> 00:00:32,880
पर समय के अभाव के कारण उत्तर देना वहां संभव नहीं होता है।

8
00:00:32,880 --> 00:00:37,360
लिख लिख करके और निष्कर्ष पूर्व मार्ग तक भी नहीं पहुंचा जा सकता है।

9
00:00:37,360 --> 00:00:41,680
इसलिए कुछ जो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं

10
00:00:41,680 --> 00:00:46,480
उनको एकत्रित करके अनिकेत जी यहां पर उपस्थित हैं हमारे बीच

11
00:00:46,480 --> 00:00:51,040
जिन्होंने थोड़ा सा अपनी तैयारी की है प्रश्नों को लेकर के

12
00:00:51,040 --> 00:00:56,080
तो उन्ही सब प्रश्नों पर अभी बात करने वाले हैं हम

13
00:00:56,080 --> 00:01:01,440
तो हम ले लेते हैं अंकित जी को पहले

14
00:01:01,440 --> 00:01:07,440
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम भैया

15
00:01:09,920 --> 00:01:15,440
मुझे आवाज कम आ रही है क्या आपकी?

16
00:01:15,440 --> 00:01:19,440
जय श्री राम। अभी आ रही है? नहीं आवाज नहीं आ रही है

17
00:01:19,440 --> 00:01:25,440
आपकी ठीक से। कोई और बात

18
00:01:26,000 --> 00:01:32,000
क्या बात?

19
00:01:45,360 --> 00:01:51,040
हां अंकित जी आप है यहां पर

20
00:01:51,040 --> 00:01:56,560
अभी आ रही है आवाज हा अब परफेक्ट है

21
00:01:56,560 --> 00:02:00,560
तो जी को आप देख चुके है पहले एक बार चर्चा में

22
00:02:00,560 --> 00:02:04,640
आ चुके उनका कुछ शंका

23
00:02:04,640 --> 00:02:08,720
थी मोक्ष विषयक जो समाधान हुआ था उसके

24
00:02:08,720 --> 00:02:13,600
बाद से वो लगातार फॉलो भी करते हैं चैनल को और

25
00:02:13,600 --> 00:02:17,600
प्रेमानंद जी महाराज के शिष्य हैं मतलब उनके प्रति आस्था है

26
00:02:17,600 --> 00:02:21,920
अभी दीक्षा नहीं हुई है ना अंकित जी

27
00:02:21,920 --> 00:02:26,000
जी जी करेक्ट करेक्ट

28
00:02:26,000 --> 00:02:30,320
ठीक है अंकित जी अब आप प्रारंभ करें

29
00:02:30,320 --> 00:02:34,320
ओके तो पिछले कई दिनों

30
00:02:34,320 --> 00:02:40,320
से जो वीडियो मैं आपका देख रहा हूं तो उसमें कमेंट सेक्शन में जाकर के

31
00:02:40,800 --> 00:02:44,880
इसके रिप्लाई देना थोड़ा संभव नहीं होता है शायद आपके लिए तो वो कुछ प्रश्न

32
00:02:44,880 --> 00:02:49,280
मैं आपके समक्ष आपका थोड़ा सा वो फोटो है ना वो रुक रुक रुक के

33
00:02:49,280 --> 00:02:53,600
काम कर रहा है

34
00:02:53,600 --> 00:02:57,600
आपका नेट शायद गड़बड़ है थोड़ा नेट

35
00:02:57,600 --> 00:03:03,600
गड़बड़ है एक मिनट

36
00:03:12,320 --> 00:03:16,880
अभी भी आ रहा है। लीव हो वापस आओ।

37
00:03:16,880 --> 00:03:22,880
हां लीव होके वापस आ जाइए।

38
00:03:29,360 --> 00:03:33,120
जानकारी के लिए बता दें एक

39
00:03:33,120 --> 00:03:37,520
गौ माता के निमित्त एक

40
00:03:37,520 --> 00:03:42,000
अभियान चल रहा है। उसकी जानकारी जल्दी ही निर्गत

41
00:03:42,000 --> 00:03:47,520
की जाएगी चैनल के माध्यम से। उससे आप लोग सभी जुड़े।

42
00:03:47,520 --> 00:03:51,840
ऐसी ऐसा निवेदन है हमारा और नाम

43
00:03:51,840 --> 00:03:56,000
जप के सत्र चल रहे हैं बहुत अच्छे से मातृ शक्तियों के लिए अलग से भी चल रहे

44
00:03:56,000 --> 00:04:00,000
हैं तो आप नाम जप से जुड़ सकते हैं। कई बार लोगों का प्रश्न होता है

45
00:04:00,000 --> 00:04:04,000
कि आपका सहयोग कैसे करें? तो सबसे पहली

46
00:04:04,000 --> 00:04:08,080
आवश्यकता होती है कि आप दिन भर में सवा घंटे की

47
00:04:08,080 --> 00:04:12,240
भक्ति कर रहे हो तभी हम आपके और आप हमारे

48
00:04:12,240 --> 00:04:16,400
योग्य सिद्ध होंगे। तो अगर

49
00:04:16,400 --> 00:04:21,760
किसी का भी मन है धर्म युद्ध में सहायता करने का सहयोग करने का तो सबसे पहले

50
00:04:21,760 --> 00:04:27,760
ईश्वर का बल सवा घंटे की जो भक्ति है उसका बल

51
00:04:27,840 --> 00:04:32,240
एकत्रित करना शुरू करें। उसके बाद फिर आगे के स्टेप्स हैं।

52
00:04:32,240 --> 00:04:36,240
और इसके साथ ही साथ किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के

53
00:04:36,240 --> 00:04:40,240
निमित्त हमने अपने दरवाजे बंद नहीं कर रखे।

54
00:04:40,240 --> 00:04:44,480
हम तैयार है चीजों का निस्तारण करने के लिए

55
00:04:44,480 --> 00:04:49,040
यदि कोई विरोध है तो आप मुझे

56
00:04:49,040 --> 00:04:55,040
मेरी आवाज अब रिपीट सुनाई दे रही है अंकित जी

57
00:04:55,360 --> 00:05:00,800
वीडियो अभी भी अटक रहा है मेरे ख्याल से ना अटक रहा है

58
00:05:00,800 --> 00:05:04,800
क्या दिक्कत हो सकता है दिक्कत आप फोन

59
00:05:04,800 --> 00:05:09,840
से कर रहे हैं क्या हां मोबाइल से है

60
00:05:09,840 --> 00:05:14,560
तो मुझे लग रहा है उसमें स्पेस मेमोरी ज्यादा हो गई तो इसलिए अब वो

61
00:05:14,560 --> 00:05:19,200
उसका हो गया। अटक रहा है क्या?

62
00:05:19,200 --> 00:05:23,280
कैमरा बंद करके पूछूं क्या? आवाज तो आ रही है ना? हां कैमरा बंद

63
00:05:23,280 --> 00:05:27,440
कर लीजिए। ठीक है। तो ऐसा करिए ना पूरे उसमें

64
00:05:27,440 --> 00:05:33,200
मेरा आवाज तो आएगी मेरे ख्याल से। छोटा सा कर

65
00:05:33,200 --> 00:05:39,040
ऐसा हो जाएगा क्या ये बात?

66
00:05:39,040 --> 00:05:45,040
ले आउट

67
00:05:46,080 --> 00:05:52,080
हां तो आवाज क्लियर है ना आवाज

68
00:05:52,720 --> 00:05:57,040
और वैचारिक मैं कुछ बता रहा था वैचारिक

69
00:05:57,040 --> 00:06:01,920
मतभेद के निमित्त जो है YouTube लाइव स्ट्रीम पर आने के लिए आप

70
00:06:01,920 --> 00:06:06,000
वीडियो के अंत में एक मोबाइल नंबर आता है स्क्रीन पर वहां पर आप

71
00:06:06,000 --> 00:06:10,160
WhatsApp करेंगे तो आप जो है फॉर्म भर के अपनी कुछ बेसिक सी

72
00:06:10,160 --> 00:06:14,640
जानकारी हमें देते हुए उसमें फोटो और नाम की आवश्यकता होती है और फिर किस

73
00:06:14,640 --> 00:06:19,600
संस्था या तंत्र के पक्ष को आप प्रस्तुत करना चाहते हैं।

74
00:06:19,600 --> 00:06:24,000
तो

75
00:06:24,000 --> 00:06:30,000
तो ये जो है आप कर सकते हैं। इसके अलावा

76
00:06:30,800 --> 00:06:34,960
जो हम आहान के सेशंस भी चल रहे हैं जो बेसिक

77
00:06:34,960 --> 00:06:38,960
इंफॉर्मेशन आवश्यक है जो हर हिंदू को जानने के लिए उसको

78
00:06:38,960 --> 00:06:42,960
हम प्रोवाइड करा रहे हैं आान के सेशंस के द्वारा और उसके बाद फिर आपका

79
00:06:42,960 --> 00:06:48,960
सफर चालू होता है प्रामाणिक आचार्यों के सानिध्य में

80
00:06:49,040 --> 00:06:53,200
ज्ञान विज्ञान जो वैदिक है उसको प्राप्त करने का

81
00:06:53,200 --> 00:06:56,080
जी बोलिए

82
00:06:56,080 --> 00:07:02,080
एक बार आप नेट ऑफ करके ऑन करके देख लीजिए शायद ठीक हो जाए।

83
00:07:14,800 --> 00:07:20,800
नहीं काम नहीं कर रहा है।

84
00:07:25,120 --> 00:07:29,120
वही आ रहा है मेरे ख्याल से वही प्रॉब्लम होगा जो आपने बताया था

85
00:07:29,120 --> 00:07:31,840
ना।

86
00:07:31,840 --> 00:07:37,840
ठीक है। अभी आप प्रश्न

87
00:07:54,320 --> 00:07:58,320
जो है बोल करके अपनी बातें सिद्ध करके और फिर चले जाते

88
00:07:58,320 --> 00:08:02,480
हैं। अभी आप अपने को जिताने अभी आपकी आवाज अभी

89
00:08:02,480 --> 00:08:06,800
आप बात शुरू से शुरू करिए। अभी आपकी आवाज कट गई थी।

90
00:08:06,800 --> 00:08:11,200
अच्छा अभी मेरी आवाज क्लियर है ना?

91
00:08:11,200 --> 00:08:13,760
जी

92
00:08:13,760 --> 00:08:18,480
तो पहला प्रश्न तो ये है कि

93
00:08:18,480 --> 00:08:22,480
जब आप किसी को लाइव बुलाते हैं या फिर कोई लाइव आता है आप बुलाते

94
00:08:22,480 --> 00:08:26,480
नहीं। हालांकि जब कोई आता है तो जब लाइव करते हैं उसके बाद बहुत

95
00:08:26,480 --> 00:08:30,000
सी जगह पर कमेंट देखने मिलता है कि आप अपनी बात रख

96
00:08:30,000 --> 00:08:34,240
करके और अपनी बातें को सिद्ध करने का प्रयास करके दूसरे

97
00:08:34,240 --> 00:08:40,240
को बोलने का मौका नहीं देते और जब वो बोलना चाहता है तो उसको रिमूव कर देते हैं।

98
00:08:43,120 --> 00:08:48,000
दूसरे को बोलने नहीं देते और उसको रिमूव कर देते हैं।

99
00:08:48,000 --> 00:08:52,080
हां और अपनी बात सिद्ध करने के लिए अपनी बात बोल करके उसको

100
00:08:52,080 --> 00:08:56,160
रिमूव कर देते हैं। यह प्रश्न है।

101
00:08:56,160 --> 00:09:00,240
इसका उदाहरण दे तो मैं समझ पाऊं। वैसे क्या होता है? मैं

102
00:09:00,240 --> 00:09:04,320
बता देता हूं आपको। जैसे कोई व्यक्ति मान लीजिए अटक रहा है। जैसे

103
00:09:04,320 --> 00:09:08,400
अभी एक लास्ट टाइम बात हुई थी भागवतानंद की ओर से

104
00:09:08,400 --> 00:09:12,560
कोई आए थे वो अचुत नाम था उनका। तो वो आ

105
00:09:12,560 --> 00:09:16,640
के मैंने उनसे पूछा भागवतानंद की परंपरा क्या है? तो वो मुझसे ये सवाल करने

106
00:09:16,640 --> 00:09:20,640
लगा कि आप जो है रामानुजाचार्य जी को प्रमाण क्यों मानते हो या आपने

107
00:09:20,640 --> 00:09:24,640
उनको प्रामाणिक क्यों कहा है? अमुक अमुक इतने अंशों में वो प्रामाणिक नहीं

108
00:09:24,640 --> 00:09:28,960
है या जो भी है वो ऐसे बोलने लगा तो इसमें बात ये आती है भाई अंगूर

109
00:09:28,960 --> 00:09:33,360
वाली बात सबसे पहली बात तो भागवतानंद

110
00:09:33,360 --> 00:09:38,000
का वो वीडियो देखना चाहिए जिसमें भागवतानंद स्वयं बता रहे हैं कोई मतानुज्ञानिक गृहस्थान

111
00:09:38,000 --> 00:09:42,480
करके एक दोष आता है कि भाई मेरे

112
00:09:42,480 --> 00:09:45,760
गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता

113
00:09:45,760 --> 00:09:50,000
आपके पास अपने लिए स्वतंत्र व्याख्या क्या है

114
00:09:50,000 --> 00:09:54,560
जैसे कि एक बार आर्य समाज ने हमसे पूछा

115
00:09:54,560 --> 00:09:57,200
कि

116
00:09:57,200 --> 00:10:01,200
सुखदेव नहीं आर्य समाज आर्य समाजियों का एक बार एक आरोप था

117
00:10:01,200 --> 00:10:05,360
कि जो गॉड पादाचार्य थे वो कुछ उन्होंने

118
00:10:05,360 --> 00:10:10,400
आरोप लगाया था राक्षस इत्यादि ऐसे करके कुछ सिद्ध करने का प्रयास किया था।

119
00:10:10,400 --> 00:10:14,480
ठीक है? तो हमने उसमें जवाब देते समय उनके ग्रंथों

120
00:10:14,480 --> 00:10:19,120
में उनके आगे कोई

121
00:10:19,120 --> 00:10:23,520
विद्वान है उनके यहां के तो उन्होंने माना था कि जो गॉड पादाचार्य

122
00:10:23,520 --> 00:10:27,760
थे वो राक्षस नहीं थे। उन्होंने अपने ग्रंथ में माना था। तो हमने

123
00:10:27,760 --> 00:10:31,840
अपनी व्याख्या देते हुए उनकी बात को भी वहां पर क्लेम किया

124
00:10:31,840 --> 00:10:36,240
था कि भाई देखो तुम्हारी भी जिसको तुम विद्वान मानते हो

125
00:10:36,240 --> 00:10:40,160
उसको भी जो है

126
00:10:40,160 --> 00:10:44,240
उसने भी माना है जो तुम कह रहे हो वो उसके भी विरुद्ध है जिसको तुम विद्वान मानते हो

127
00:10:44,240 --> 00:10:48,240
जिसको तुम प्रमाण मानते हो तो जब ऐसा हुआ तो उसने एक आरोप

128
00:10:48,240 --> 00:10:52,480
लगाया कि भाई अगर उनको मानना है जो हमारे विद्वान है उनको मानना है

129
00:10:52,480 --> 00:10:56,640
तो वो तो यह भी कह रहे हैं कि मूर्ति पूजा गलत है तो फिर आप उनको

130
00:10:56,640 --> 00:11:00,640
को पूरा क्यों नहीं मान रहे? मतलब उनका प्रमाण क्यों दे रहे हो? तो हमने उनको बताया

131
00:11:00,640 --> 00:11:04,880
कि हम उनका प्रमाण आपको तब दे रहे हैं जब हमारे पास अपनी स्वतंत्र

132
00:11:04,880 --> 00:11:08,960
व्याख्या है। हमें गॉड पादाचार्य जी को राक्षस

133
00:11:08,960 --> 00:11:12,960
ना मानने के लिए आपके विद्वान की आवश्यकता नहीं है। हमारे पास

134
00:11:12,960 --> 00:11:17,120
पर्याप्त चीजें हैं। जैसे उसने जो भी चीजें दी गई थी उसको हमने

135
00:11:17,120 --> 00:11:21,440
अपने शास्त्रों से परंपरा प्राप्त शास्त्रों से उसका निस्तारण करके अंत में बोला था।

136
00:11:21,440 --> 00:11:25,840
तो हमारे पास अपनी स्वतंत्र व्याख्या है। उसके बाद हमने

137
00:11:25,840 --> 00:11:29,920
तुम्हारी संतुष्टि के लिए जैसे टॉपअप होता है ना टॉपअप कि

138
00:11:29,920 --> 00:11:34,160
ऊपर से एक चीज और डाल दी। उस टॉपअप के रूप में ऐसा नहीं है कि वो टॉपअप

139
00:11:34,160 --> 00:11:38,160
नहीं है तो हमारा बेस है ही नहीं हमारे पास। उस रूप में हमने

140
00:11:38,160 --> 00:11:42,240
आपका उदाहरण आपको दे दिया कि भाई ये इतनी इतनी चीज तो तुम भी मानते हो।

141
00:11:42,240 --> 00:11:46,240
तो तुम अपने इसके अगेंस्ट कैसे जा सकते हो? ठीक है? तो ये

142
00:11:46,240 --> 00:11:50,320
हमने निस्तारण दिया। अब वो व्यक्ति जो भागवतानंद की ओर से आ रहा है,

143
00:11:50,320 --> 00:11:54,480
उसके पास अपनी चीजें बताने के लिए कुछ नहीं है की भाई मेरे मेरे भागवत

144
00:11:54,480 --> 00:11:58,640
आनंद के पास भागवतानंद के पास पारंपरिक ज्ञान कैसे

145
00:11:58,640 --> 00:12:02,640
आया अच्छा अगर सपने द्वारा आया या किसी भी दिव्य घटना के

146
00:12:02,640 --> 00:12:06,880
द्वारा आया तो उस दिव्य घटना को सत्यापित किसने किया क्योंकि

147
00:12:06,880 --> 00:12:11,040
ये जो चमत्कारिक घटनाएं हैं ये तो बुरी शक्तियां भी दिखा सकती हैं आपको।

148
00:12:11,040 --> 00:12:15,280
तो आप सत्यापित कैसे कर रहे हो? अच्छा अगर आप स्वयं को ही स्वयंभू

149
00:12:15,280 --> 00:12:19,440
बोल दो कि भाई मैं ही हूं। मेरी बात पर भरोसा

150
00:12:19,440 --> 00:12:23,440
है तो करो। या तो यही कहा हो आपने तो फिर जो आपको देखेगा

151
00:12:23,440 --> 00:12:27,760
कि आप आप तो पुरुष हो तो जिसको आपके ऊपर श्रद्धा रखनी होगी वो रखेगा।

152
00:12:27,760 --> 00:12:32,480
जिसको नहीं रखनी होगी वो नहीं रखेगा। जैसे मोहम्मद ने कह दिया कि मैं ही हूं।

153
00:12:32,480 --> 00:12:36,560
हम जिसको रखनी होगी वो रखेगा। नहीं रखनी होगी नहीं रखेगा। ब्रह्मा कुमारी

154
00:12:36,560 --> 00:12:40,640
वालों ने कह दिया कि मैं ही हूं। सत्यापन कराने कहीं नहीं जा रहे

155
00:12:40,640 --> 00:12:44,640
वो किसी मैं ही हूं। ब्रह्मा जी आ रहे हैं रोज बॉडी में

156
00:12:44,640 --> 00:12:48,640
तो मैं ही हूं जिसको आस्था रखनी होगी रखेगा नहीं रखनी होगी नहीं रखेगा तो

157
00:12:48,640 --> 00:12:49,360
पहली बात तो

158
00:12:49,360 --> 00:12:53,360
यह घोषित नहीं किया अब घोषित किया तो आस्था रखने के

159
00:12:53,360 --> 00:12:57,840
लायक है कि नहीं वो भी एक बात आ जाती है उसके बाद

160
00:12:57,840 --> 00:13:02,000
यहां पर क्या है कि उसने घोषित नहीं ना नहीं किया वो तो एक अलग बात हो गई बल्कि

161
00:13:02,000 --> 00:13:06,080
उसने उन लोगों से स्वयं को सत्यापित करने का धोखा किया

162
00:13:06,080 --> 00:13:10,880
है जिनका धर्म ब्रह्म शंकराचार्य से आता है ये सोने पे सुहागा हो गया

163
00:13:10,880 --> 00:13:14,880
भाई उपनिषदों का कौन सा भाष्य

164
00:13:14,880 --> 00:13:19,120
निगमंद ने पढ़ा और पढ़ाया शंकर

165
00:13:19,120 --> 00:13:21,280
भाष्य

166
00:13:21,280 --> 00:13:25,360
तो धर्म ब्रह्म के मामले में आदि शंकराचार्य

167
00:13:25,360 --> 00:13:29,360
जी की परंपरा प्रमाण हो गई सत्यापन कराने क्योंकि वहां गए तो ये

168
00:13:29,360 --> 00:13:33,440
सारे क्वेश्चन थे तो इनके बारे में कोई जवाब ना देकर के वो

169
00:13:33,440 --> 00:13:37,440
ये बोल रहा है कि आप रामानुजाचार्य जी को प्रमाणिक क्यों मानते हो वो क्यों मानते हो

170
00:13:37,440 --> 00:13:41,440
तो मेरा कहना उसमें यह है कि भाई अगर तुम्हें मेरे उदाहरण से अपना

171
00:13:41,440 --> 00:13:45,520
अपने उसको महल को खड़ा करना है। करो। पहले घोषित

172
00:13:45,520 --> 00:13:49,760
करो कि तुम्हारे उदाहरण के बिना मेरे पास कुछ नहीं बोलने के लिए। पहले घोषित

173
00:13:49,760 --> 00:13:54,320
कर दो फिर आगे बढ़ो। फिर मैं तुम्हें उसमें क्वेश्चन का आंसर दूंगा कि हमने रामानुजाचार्य

174
00:13:54,320 --> 00:13:58,320
जी को क्यों मान लिया या कितने अंशों में माना? कितने अंशों में

175
00:13:58,320 --> 00:14:02,320
नहीं माना। ये सब बातें मैं आपको तब जवाब दूंगा।

176
00:14:02,320 --> 00:14:04,560
पहले आप घोषित करो। ये

177
00:14:04,560 --> 00:14:09,200
टैगलाइन लिखो कि हमारे पास स्वतंत्र व्याख्या नहीं है।

178
00:14:09,200 --> 00:14:13,920
ठीक है? तो जब वो व्यक्ति ये घोषित किए बिना

179
00:14:13,920 --> 00:14:18,000
विषयंतर कर रहा है कि आपने रामानुजाचार्य जी को क्यों माना? अब रामानुजाचार्य जी को

180
00:14:18,000 --> 00:14:22,080
हम सिद्ध करने जाए या कुछ भी वहां पर करने जाए उसमें एक बात और खुलती चली जाएगी जो

181
00:14:22,080 --> 00:14:26,320
ये वाली बात थी कि निग्रह संप्रदाय की प्रामाणिकता

182
00:14:26,320 --> 00:14:30,400
ये तो कहीं खो के रह जाएगी। घंटों उसमें हम आगे बढ़ते चले जाएंगे। प्रश्न

183
00:14:30,400 --> 00:14:34,480
पूछा ये गया कि भागवत प्रामाणिक कैसे है? तो आपकी जो व्याख्या है वो आप पहले

184
00:14:34,480 --> 00:14:38,800
हमें बताओ। स्वतंत्र व्याख्या क्या है? उसमें क्या दावा है आपका?

185
00:14:38,800 --> 00:14:43,200
अगर आपके पास दिव्य घटना से आया है तो उसका सत्यापन

186
00:14:43,200 --> 00:14:47,200
किससे कराया? खुद से सत्यापन नहीं कराना मानते हो तो तुमने

187
00:14:47,200 --> 00:14:51,200
तो माना है। जिससे मानते हो उस पर तुम्हें पूरा भरोसा नहीं है। निग्रह की

188
00:14:51,200 --> 00:14:55,360
दृष्टि फिर तुम रखते ही हो तो फिर वो तुम्हारा प्रमाण नहीं हुआ। शब्द प्रमाण बहुत सारी चीजें

189
00:14:55,360 --> 00:14:59,360
उसमें आगे लग जाती। तो जब व्यक्ति इस तरह से विषयंतर करने की कोशिश

190
00:14:59,360 --> 00:15:03,360
करता है। बिना अपना क्लेम बताए। मैं यह क्लेम कर

191
00:15:03,360 --> 00:15:07,600
रहा हूं। अपना क्लेम करो। घोषणा करो। यह

192
00:15:07,600 --> 00:15:11,600
मेरा दावा है। अब मैं इसको प्रस्तुत करने जा रहा हूं। मैं आपके उदाहरण के आधार पर

193
00:15:11,600 --> 00:15:15,680
ही मैं भागवत आनंद को भागवत आनंद को निग्रह परंपरा को प्रामाणिक सिद्ध

194
00:15:15,680 --> 00:15:19,680
करता हूं। कर सकता हूं। मेरे पास स्वतंत्र व्याख्या नहीं। तो जब

195
00:15:19,680 --> 00:15:23,680
इस रूप में विषयंतर करने का प्रयास किया जाता है तो मैं

196
00:15:23,680 --> 00:15:27,680
उसको विषय करने से रोकता हूं कि टू द पॉइंट जो चर्चा चल रही है वहीं पर

197
00:15:27,680 --> 00:15:31,760
है। पहली बात। दूसरी बात ये है कि रिमूव कर देना। रिमूव

198
00:15:31,760 --> 00:15:35,840
कब होता है? जैसे स्कॉन वगैरह जैसे परेशान आत्माएं आती है। स्कन के फॉलोवरर्स आ

199
00:15:35,840 --> 00:15:39,840
जाते हैं। रामपाल के फॉलोअर्स आ जाते हैं या फिर

200
00:15:39,840 --> 00:15:44,480
और कोई आ जाता है तो जब उनके पास यह जो सिस्टमेटिकली

201
00:15:44,480 --> 00:15:48,640
कोई जवाब नहीं रह जाता है, तर्क नहीं रह जाता है, प्रमाण नहीं रह जाता है

202
00:15:48,640 --> 00:15:53,200
तब वो क्या करने लगते हैं कि तुम मायावादी हो, तुम ये हो, तुम वो हो,

203
00:15:53,200 --> 00:15:57,440
कुछ पर्सनल अटैक करने लगेंगे जिसके पीछे उनका कोई बेस नहीं होगा। ऐसे अटैक्स

204
00:15:57,440 --> 00:16:01,520
वो करने लगेंगे। तो मैं उन अटैक्स को यहां लेने के लिए थोड़ी ना बुलाया

205
00:16:01,520 --> 00:16:07,280
मैंने उसको। तब मैं रिमूव कर देता हूं। जब वो इस तरह की बातें कर रहा होता है।

206
00:16:07,280 --> 00:16:11,360
जैसे कि हमारे बीच में था कि ईश्वर अवतार ले सकता है कि

207
00:16:11,360 --> 00:16:15,520
नहीं ले सकता है? कैसे ले सकता है? तो जब मुझे ऐसा लगा कि वो

208
00:16:15,520 --> 00:16:19,600
इस चीज में आ रहा है कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी को कौन से शास्त्र

209
00:16:19,600 --> 00:16:23,680
कितना कितना पता है? वहां पर जो ट्रैक है वो बदल

210
00:16:23,680 --> 00:16:28,000
रहा है। तो मैंने वहां पर हटाया और वो ठीक

211
00:16:28,000 --> 00:16:30,320
है ना?

212
00:16:30,320 --> 00:16:34,400
तो विषयांतर के कारण आप सामने वाले को जो है वो

213
00:16:34,400 --> 00:16:34,900
हटा

214
00:16:34,720 --> 00:16:38,800
देते हो या फिर वो व्यर्थ शिकायत करता है। टोकता हूं।

215
00:16:38,800 --> 00:16:42,960
विषयंतर के कारण मैं टोकता हूं और जब वो जब वो चर्चा

216
00:16:42,960 --> 00:16:46,960
से हटकर के पर्सनल टैक्स, पर्सनल क्लेम्स इन सब चीजों पर आता है तो

217
00:16:46,960 --> 00:16:51,040
मैं तो उसको जवाब दे नहीं सकता। वैसे के वैसे तो उनको सुनने की

218
00:16:51,040 --> 00:16:55,200
बजाय मैं हटा देता हूं।

219
00:16:55,200 --> 00:16:59,200
और ऐसा भी नहीं है बहुत सारी चर्चाएं पूरी पूरी हुई है।

220
00:16:59,200 --> 00:17:03,280
ऐसा भी नहीं है बहुत सारी चर्चाएं तो पूरी पूरी हुई है। व्यक्ति भागा है खुद छोड़

221
00:17:03,280 --> 00:17:07,280
के तो उसको यही कैसे माना जाए कि हटाता ही हूं। खुद भी गायब

222
00:17:07,280 --> 00:17:11,280
हो गया। एकदम से रामपाल के ना जाने कितने लोग अचानक से गायब हो गए। आर्य

223
00:17:11,280 --> 00:17:15,360
समाज का व्यक्ति आया था अभी कुछ दिन पहले। आर्य समाज का व्यक्ति आया था

224
00:17:15,360 --> 00:17:19,520
कुछ दिन पहले। वो वो चला गया। वो भाग गया। हम

225
00:17:19,520 --> 00:17:23,520
आर्य समाज का व्यक्ति आया। उसने बोला कि मैं जो है लेके आऊंगा किसी और को।

226
00:17:23,520 --> 00:17:27,520
आज तक नहीं आया। कई कई अलंकारी ऐसे हैं जिन्होंने

227
00:17:27,520 --> 00:17:31,600
फॉर्म तो भरा जब मैंने उनको संपर्क किया तो बोला अरे छोड़ो जाने दो

228
00:17:31,600 --> 00:17:37,520
उनको समझ में आ गया मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

229
00:17:37,520 --> 00:17:41,600
हां नहीं तो एक वीडियो मैंने देखा था भव्य राधिका दास

230
00:17:41,600 --> 00:17:46,080
वाला उसमें आप तीन चार घंटे तकरीबन ले लिए थे

231
00:17:46,080 --> 00:17:50,080
तो यह नहीं है मतलब इससे अभी समझ में आ गया हमें कि अगर

232
00:17:50,080 --> 00:17:55,280
कोई व्यर्थ की बात करेगा तो इतना समय भी नहीं होता है व्यक्ति के पास कि वो

233
00:17:55,280 --> 00:17:59,280
आगे आगे बढ़ाते हुए। खैर आशा करता हूं कि इससे

234
00:17:59,280 --> 00:18:03,440
लोगों को समझ आ गया होगा कि शिवश जी हटाते नहीं है और अगर

235
00:18:03,440 --> 00:18:07,440
हटाते हैं तो उसका कारण भी बता दिया उन्होंने। कोई नहीं

236
00:18:07,440 --> 00:18:11,520
अच्छी बात है। एक और होता है शिवश भाई देखते हैं

237
00:18:11,520 --> 00:18:15,600
हम लोग। कई कमेंट में आर्य समाजी और

238
00:18:15,600 --> 00:18:19,840
रामपाल एंड टीम ऐसे कुछ लोग हैं

239
00:18:19,840 --> 00:18:24,240
जो आपके कुछ वीडियो में और फिर कमेंट में जाते हैं और वेदों

240
00:18:24,240 --> 00:18:28,400
का मंत्र और उसका ट्रांसलेशन डाल के बोलते हैं कि देखो सिद्ध कर दिया

241
00:18:28,400 --> 00:18:32,400
सिद्ध कर दिया और जब उनको ये कहा जाता है कि लाइव आ जाओ लाइव आ

242
00:18:32,400 --> 00:18:37,360
जाओ तो कहते हैं कि सिद्ध कर दिया तो फिर लाइव आने की क्या जरूरत है

243
00:18:37,360 --> 00:18:41,360
हम तो उन उन लोगों को आप क्या कहना चाहोगे जो कहते हैं कि

244
00:18:41,360 --> 00:18:45,440
सिद्ध कर सिद्ध कर दिया क्योंकि केवल इतने से तो नहीं चल पाएगा

245
00:18:45,440 --> 00:18:49,760
ना कि मामा आ गए मामा आ गए ठीक है मेरी

246
00:18:49,760 --> 00:18:55,760
लाल के असीन सपने देखने का सबको अधिकार है देखते रह

247
00:18:55,920 --> 00:19:00,000
तो वो जो मंत्र डाल देते हैं उससे कई सनातनी ऐसे हैं शिवाजी

248
00:19:00,000 --> 00:19:04,000
भाई जो भ्रमित हो के कहते हैं हां हां यार सिद्ध तो कर दिया देखो देखो संस्कृत

249
00:19:04,000 --> 00:19:08,720
में है उसका अनुवाद भी है और लिखा भी है जैसे वो रामपालियों

250
00:19:08,720 --> 00:19:12,880
का होता है कवि कवि अरे कवि आ का विवेक इतना कम

251
00:19:12,880 --> 00:19:16,960
है। यदि लोगों का विवेक इतना कम है कि व्यक्ति जो

252
00:19:16,960 --> 00:19:21,520
दावा कर रहा है वह कह रहा है कि भाई अगर तुम्हें इस दावे से कोई असंतुष्टि है विपरीतार्थक

253
00:19:21,520 --> 00:19:25,600
बातें हैं तुम्हारे पास तो आप सामने आमने सामने बैठकर के आकर चर्चा कर

254
00:19:25,600 --> 00:19:29,840
लो। परंतु वहां पर लोग जो है आमने सामने चर्चा ना करके

255
00:19:29,840 --> 00:19:33,840
वहीं पर कारब टारगेट खेल के और जो है वही के व सिद्ध

256
00:19:33,840 --> 00:19:38,160
करके जा रहे हैं और ऐसे मूर्ख लोग जो वहां एक तरफ पक्ष सुन

257
00:19:38,160 --> 00:19:42,560
के वहीं पर निर्णय ले रहे हैं तो उनका हम क्या कर सकते हैं? वो अपने ही पैरों कुल्हाड़ी

258
00:19:42,560 --> 00:19:44,480
मारेंगे। जुगनू

259
00:19:44,480 --> 00:19:48,640
और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। टिमटिमाते

260
00:19:48,640 --> 00:19:49,920
हुए दिए की

261
00:19:49,920 --> 00:19:53,920
आकर्षित होते हैं। तो जुगनू और उल्लू का सूर्य के

262
00:19:53,920 --> 00:19:57,920
प्रकाश की ओर आकर्षित ना होकर टिमटिमाते हुए दिए की ओर आकर्षित

263
00:19:57,920 --> 00:20:02,320
होने में जुगनू और उल्लू के असामर्थता का दोष है।

264
00:20:02,320 --> 00:20:06,400
सूर्य की सामर्थता का नहीं। तो निर्णय क्या

265
00:20:06,400 --> 00:20:10,960
हुआ? प्रकाश के विषय में

266
00:20:10,960 --> 00:20:15,840
जुगनू और उल्लू प्रमाण नहीं होते।

267
00:20:15,840 --> 00:20:19,840
समझा समझा तो जो लोग वहां पर कमेंट को देख के मान

268
00:20:19,840 --> 00:20:24,000
जा रहे हैं तो उनको हम क्या कहे? भोली जनता कहे

269
00:20:24,000 --> 00:20:28,000
सीधे साधे लोग कहे या मजा लेने आते हैं वो कहे क्या

270
00:20:28,000 --> 00:20:32,240
कहे? अब क्या कहेंगे उसमें? आप विवेक

271
00:20:32,240 --> 00:20:37,920
की कमी है जो इस तरह से निर्णय ले रहे हैं।

272
00:20:37,920 --> 00:20:42,240
समझ गया समझ चौथा

273
00:20:42,240 --> 00:20:48,240
अगला ये है प्रश्न शिवा भाई कि इस

274
00:20:50,480 --> 00:20:54,640
आवाज नहीं आ रही लाइव जब आप करते हैं या इस से रिलेटेड कोई वीडियो डालते

275
00:20:54,640 --> 00:20:59,600
हैं हम उसमें क्या होता है

276
00:20:59,600 --> 00:21:03,760
कि उसमें आता है कि तो इतना अच्छा काम

277
00:21:03,760 --> 00:21:08,000
कर रहा है खाना खिला रहा है कई कई लोगों को कई लोगों को नाम जप

278
00:21:08,000 --> 00:21:12,080
करवा रहा है। कई लोगों का नशा छुड़वा रहा है। तो छोटी मोटी

279
00:21:12,080 --> 00:21:16,160
चीज तो कलयुग है। दाग तो लग जाता है। उन चीजों को लेकर के बड़ी-बड़ी चीजों

280
00:21:16,160 --> 00:21:21,040
को इग्नोर कर दे।

281
00:21:21,040 --> 00:21:25,600
ये निर्णय कैसे हुआ? बड़ी चीज कौन सी है? अगर

282
00:21:25,600 --> 00:21:29,600
अच्छी चीजें करवा रहा है तो क्रिश्चियन मिशनरी भी अच्छी चीजें करवाती हैं।

283
00:21:29,600 --> 00:21:34,800
कोई मर रहा है उसका जो इलाज करवा दिया जाकर के देख के। फिर

284
00:21:34,800 --> 00:21:38,800
क्रिश्चियन मिशनरीज भी तुमसे भी अच्छा अच्छी हो गई। तुम जितना कर रहे

285
00:21:38,800 --> 00:21:43,280
होगे उससे 10 गुना ज्यादा वो कर रहे हैं कन्वर्शन कराने के लिए।

286
00:21:43,280 --> 00:21:45,440
हम

287
00:21:45,440 --> 00:21:49,680
जब आप जो मानवता के मूल सिद्धांत है सर्वशक्तिमान

288
00:21:49,680 --> 00:21:53,680
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म उसके साथ ही यदि खिलवाड़

289
00:21:53,680 --> 00:21:58,160
कर दोगे तो सत ही स्तर पर आप लाख चीजें करते रहो।

290
00:21:58,160 --> 00:22:03,200
उसके मूल में तो मानवता का दुश्मन निकलेगा ना।

291
00:22:03,200 --> 00:22:07,200
लाख चीजें आप करते रहो। और

292
00:22:07,200 --> 00:22:11,200
अब बड़ी चीज की बात ही अगर हो रही कंपेरेटिवली कि वो अच्छी चीज कर

293
00:22:11,200 --> 00:22:15,520
रहे हैं तो हमने क्या हत्या कर दी? हमारे भी अच्छाइयों

294
00:22:15,520 --> 00:22:19,680
को देख लो ना। हमने भी कौन सा वो ऐसा कर दिया

295
00:22:19,680 --> 00:22:23,680
कि किसी का जो है नरसंहार कर दिया हो। स्पॉन में खड़ा करके

296
00:22:23,680 --> 00:22:28,000
बेंडेड क्वीन की तरह तड़ात गोलियां चला दी हो। अरे भैया

297
00:22:28,000 --> 00:22:32,160
जिस तरीके का वह कार्य कर रहे हैं और वह कुछ ऐसी

298
00:22:32,160 --> 00:22:36,160
चीजें कर रहे हैं जो प्रशंसनीय हैं उनके होते हुए वो

299
00:22:36,160 --> 00:22:40,800
ऐसी चीजें कर रहे हैं जो जिनका गढ़ अर्थ मानवता का दुश्मन है

300
00:22:40,800 --> 00:22:45,040
मानवता का शत्रु है वैदिक धर्म का शत्रु है तो उतने

301
00:22:45,040 --> 00:22:49,360
अंश में उनको यदि हम अपनी मर्यादा में रहते हुए प्रतिकार कर रहे हैं

302
00:22:49,360 --> 00:22:53,440
तो उसको भी उसी दृष्टि से देखिए ना कि थोड़ा बहुत दोष तो सब में होता है तो ये

303
00:22:53,440 --> 00:22:57,440
वाला दोष स्वीकार कर लो आप जैसे आप अपना दोष स्वीकार

304
00:22:57,440 --> 00:23:01,680
करने की अपेक्षा कर रहे हो हमसे वैसे ही अगर यदि हमारा आपका

305
00:23:01,680 --> 00:23:05,760
दोष स्वीकार ना करना हमारा दोष दिख रहा है आपको तो उस दोष

306
00:23:05,760 --> 00:23:10,080
को आप भी तो स्वीकार कर लो बात खत्म हो गई महाभारत

307
00:23:10,080 --> 00:23:14,480
का सिद्धांत है कि अन्यों के साथ वैसा ही व्यवहार

308
00:23:14,480 --> 00:23:20,160
करें जो स्वयं के साथ होने पर आपको स्वीकार हो

309
00:23:20,160 --> 00:23:24,400
तो जो स्वयं के लिए अस्वीकार है उसको ना करना

310
00:23:24,400 --> 00:23:28,400
अन्यों के साथ ही धर्म तो जब आप मेरे दोष को स्वीकार नहीं

311
00:23:28,400 --> 00:23:34,400
कर पा रहे हैं तो मुझसे अपेक्षा क्यों कर रहे हैं कि मैं आपके दोष को स्वीकार कर लूं।

312
00:23:38,000 --> 00:23:42,080
और मान लीजिए कि अगर कोई बिगिनर है

313
00:23:42,080 --> 00:23:46,320
इस की चीजों को देखकर के नाम जप कराते का ये नाम जप

314
00:23:46,320 --> 00:23:50,320
हो रहा है। यहां पर सनातन का प्रचार हो रहा है। करके बिगिनर अगर कोई जॉइ करता

315
00:23:50,320 --> 00:23:54,560
है तो आप क्या कहना चाहेंगे? जॉइ करना चाहिए या नहीं करना चाहिए? या उसका स्वतंत्र

316
00:23:54,560 --> 00:23:59,920
है वो जो चाहे वो करे आपके अकॉर्डिंग

317
00:23:59,920 --> 00:24:04,080
इस जैसी जितनी भी सनातन विरोधी संस्थाएं उनसे दूर रहो

318
00:24:04,080 --> 00:24:10,080
कृष्ण भक्ति करनी है तो परंपरा प्राप्त कई ऐसे

319
00:24:10,400 --> 00:24:14,560
ऐसी परंपराएं हैं ऐसे आचार्य हैं जो कृष्ण भक्ति करा रही है उनके

320
00:24:14,560 --> 00:24:19,040
सानिध्य में और जो है आप

321
00:24:19,040 --> 00:24:23,040
भक्ति करिए अगर आपको शंकराचार्य

322
00:24:23,040 --> 00:24:27,200
से जो है दिक्कत ही है स्कॉन का भरा हुआ आपके अंदर

323
00:24:27,200 --> 00:24:31,440
वो जो कीचड़ निकल नहीं पा रहा है शंकराचार्य से यदि

324
00:24:31,440 --> 00:24:35,440
है ही है कोई तो बहुत सी और भी प्रामाणिक परंपराएं हैं इस

325
00:24:35,440 --> 00:24:41,440
से दूरी बनाइए उन परंपराओं के सानिध्य में आके कृष्ण की भक्ति करिए

326
00:24:42,560 --> 00:24:46,800
आपने अभी कहा कि इस जैसे जो

327
00:24:46,800 --> 00:24:50,960
सनातन का प्रचार नहीं कर रहे हैं तो फिर वो किसका प्रचार कर रहे हैं आपके

328
00:24:50,960 --> 00:24:54,640
अकॉर्डिंग

329
00:24:54,640 --> 00:24:58,960
सनातन विरुद्ध शक्तियों का, क्रिश्चियनिटी का, इस्लाम

330
00:24:58,960 --> 00:25:01,360
का

331
00:25:01,360 --> 00:25:06,640
भाई ईश्वर अल्लाह एक है। वेद को अक्षरस मानना नहीं है।

332
00:25:06,640 --> 00:25:11,200
हम ईश्वर अल्लाह एक है। वेद को अक्षरस मानना नहीं है।

333
00:25:11,200 --> 00:25:15,280
कुरान भी जो है वो जो है वो

334
00:25:15,280 --> 00:25:19,840
क्या कहते हैं? कुरान देने वाला मोहम्मद।

335
00:25:19,840 --> 00:25:24,240
ये सब ये प्रॉफेट थे। हम

336
00:25:24,240 --> 00:25:29,040
तो वो जो है सनातन विरुद्ध शक्तियों द्वारा

337
00:25:29,040 --> 00:25:33,120
पोषित जो भावनाएं हैं उनके लिए काम करने वाली

338
00:25:33,120 --> 00:25:37,120
दिखाई देती है। इस मामले में मैं आर्य समाज की अलंकार समाज की

339
00:25:37,120 --> 00:25:42,720
प्रशंसा करूंगा कि मैंने उनके यहां से कम से कम

340
00:25:42,720 --> 00:25:46,800
एक इसके लिए तो मैंने सद उनको कट्टर देखा कि वो कभी भी

341
00:25:46,800 --> 00:25:50,800
इस तरह से सामने से ये नहीं कहते कि कुरान भी बहुत बढ़िया है। कुरान

342
00:25:50,800 --> 00:25:54,880
में भी वही लिखा है। यद्यपि उनकी एक बात है जो इस में नहीं

343
00:25:54,880 --> 00:25:58,960
है। वो बात एक अलग है। मगर इस इस इतने अंश में

344
00:25:58,960 --> 00:26:03,680
अलंकार जो अलंकारी है वो प्रशंसा के योग्य है कि नहीं है।

345
00:26:03,680 --> 00:26:09,680
वो इस्लाम वगैरह के लिए कभी सहिष्णता नहीं प्रकट करते हैं।

346
00:26:09,920 --> 00:26:14,560
हालांकि सिद्धांत ऐसे दिए हैं जो इस्लाम से ही

347
00:26:14,560 --> 00:26:18,720
आ जाते हैं। मूर्ति पूजा का विरोध निराकार

348
00:26:18,720 --> 00:26:22,720
वादिता ईश्वर का कोई स्वरूप नहीं है। हम

349
00:26:22,720 --> 00:26:27,040
हां तो ऐसे तो

350
00:26:27,040 --> 00:26:31,120
इस ये भी कहता है कि हमने जो आपका लाइव देखा है इस के साथ

351
00:26:31,120 --> 00:26:35,200
में उसमें कई जगह पर ये भी दिखने में आता है कि वो लोग कहना चाहते

352
00:26:35,200 --> 00:26:39,760
हैं ये कि पहले हम उनको इस्लामिक लोगों को यहां लाना चाहते

353
00:26:39,760 --> 00:26:43,920
हैं और यहां ला के उनको हम असली जो मूल है सनातन

354
00:26:43,920 --> 00:26:49,680
सिद्धांत वो दे देंगे। इसलिए हमको अल्लाह और ये सब का नाम लेना पड़ता है।

355
00:26:49,680 --> 00:26:53,760
तो यह मानेंगे कैसे? इस कौन ऐसा सोचता

356
00:26:53,760 --> 00:26:58,560
है? पता कैसे चलेगा? इस की ऑफिशियल सोच यही है ये पता कैसे चलेगा?

357
00:26:58,560 --> 00:27:03,280
ऐसा है सीधी बात है कि गुरु आचार्य सन्यासी

358
00:27:03,280 --> 00:27:07,760
विरक्त इनके जो लक्षण है उस पर घटित ही नहीं होता है।

359
00:27:07,760 --> 00:27:11,760
हम आप दो तरह की बातें यदि कर रहे हैं

360
00:27:11,760 --> 00:27:14,080
दोगलापन का व्यवहार कर रहे हैं तो आपकी वही

361
00:27:14,080 --> 00:27:18,080
बात क्यों सही है जो अभी आप बोल रहे हो वो बात सही क्यों नहीं है जो आप बाद में बोल रहे

362
00:27:18,080 --> 00:27:22,080
हो इधर उधर बोल रहे हो भाई मुसलमानों मुसलमान यदि ये

363
00:27:22,080 --> 00:27:26,080
क्वेश्चन करेगा कि तुम गीता को क्यों मिलाते हो तुम कृष्ण को क्यों मिलाते हो तो

364
00:27:26,080 --> 00:27:30,400
मुसलमानों को भी तो ये चूर्ण दिया जाता होगा ऐसा नहीं माना जाए जैसे हमको

365
00:27:30,400 --> 00:27:34,400
यहां पर ये बहला फुसला रहे हैं कि हम तो उनको लाने के लिए कर रहे हैं तो वहां पर भी बहलाते

366
00:27:34,400 --> 00:27:38,400
फुसलाते होंगे मानते तो कुरान कोई है बस हम उनको को हिंदुओं को कन्वर्ट

367
00:27:38,400 --> 00:27:44,400
करने के लिए कर रहे हैं। ये कोई बात है क्या?

368
00:27:44,720 --> 00:27:48,720
आपका कहने का मतलब है क्लियर कर दो। जो है क्लियर कर

369
00:27:48,720 --> 00:27:52,880
मतलब ये है कि इसमें फिर बहुत सारी बातें हो जाती हैं। यदि

370
00:27:52,880 --> 00:27:57,040
वो मुसलमानों के लिए क्रिश्चियंस के लिए है तो वो बातें उन्हीं को सुनाई

371
00:27:57,040 --> 00:28:01,040
जाए। फिर हिंदू के कान में ना पड़े।

372
00:28:01,040 --> 00:28:05,520
ऐसा तो है नहीं। हां ये भी एक बात है। करेक्ट है। करेक्ट।

373
00:28:05,520 --> 00:28:10,880
दूसरी बहुत सी बातें हैं। फिर अगर ऐसा है तो फिर शिव की बुराई क्यों कर रहे हो?

374
00:28:10,880 --> 00:28:15,120
शिव की निंदा क्यों कर रहे हो? शिव से क्या आपत्ति

375
00:28:15,120 --> 00:28:19,200
है? जब तुम अल्लाह से तुम्हें कोई आपत्ति नहीं हो रही। अल्लाह से कोई आपत्ति

376
00:28:19,200 --> 00:28:23,760
नहीं हो रही है तो शिव से आपत्ति क्यों है? दूसरी बात

377
00:28:23,760 --> 00:28:27,840
जिन बुक्स में तुमने इस प्रकार के उद्देश्य की पूर्ति के लिए मिलावट की है उसको

378
00:28:27,840 --> 00:28:29,200
तुम सनातनी धर्म ग्रंथों से

379
00:28:29,200 --> 00:28:33,360
अलग करो। कह रहे हो कि हम जो मिलावट भी कर रहे हैं

380
00:28:33,360 --> 00:28:37,920
उनको इसमें लाने के लिए और फिर यह भी कह रहे हो कि एज इट इज गीता है।

381
00:28:37,920 --> 00:28:41,920
मत कहो तुम अपने आप को धार्मिक संस्था कहने की बजाय तुम अपने

382
00:28:41,920 --> 00:28:46,240
आप को समाज सुधारक संस्था कहो ना।

383
00:28:46,240 --> 00:28:50,640
भाई आरएसएस वगैरह जो है ये क्लेम थोड़ी ना करती है कि हम धर्म के ज्ञाता हैं।

384
00:28:50,640 --> 00:28:54,640
तो ऐसे में वो धर्म के बारे में अगर कुछ बोल भी जाती तो उससे उतना

385
00:28:54,640 --> 00:28:58,960
प्रभाव नहीं पड़ता है। जितना प्रभाव स्वयं को धर्माधिकारी

386
00:28:58,960 --> 00:29:02,960
या धर्म धर्माचार के रूप में प्रकट करने वाला व्यक्ति जब वह

387
00:29:02,960 --> 00:29:08,960
बोलेगा बात तो उसके बोलने से इतना प्रभाव पड़ेगा।

388
00:29:11,120 --> 00:29:15,120
ठीक है। इस का ही एक प्रचारक लगने वाला एक

389
00:29:15,120 --> 00:29:19,200
व्यक्ति है। क्या आप उनको जानते हैं? मैं नाम लूंगा। एक प्रश्न बार-बार आ

390
00:29:19,200 --> 00:29:23,280
रहा है। प्रेमानंद जी महाराज अमुक अमुक विषयों में गलत बोलते हैं। ऐसा कुछ

391
00:29:23,280 --> 00:29:27,360
प्रश्न आ रहा है। तो इन सब बातों के लिए एक

392
00:29:27,360 --> 00:29:31,840
ही बात है कि प्रेमानंद जी महाराज ने अपना

393
00:29:31,840 --> 00:29:35,920
धर्म के विषय में प्रमाण सर्वोच्च पद पर शंकराचार्य को

394
00:29:35,920 --> 00:29:40,000
स्वीकार किया है। तो वहां पर दिक्कत इसलिए नहीं है क्योंकि

395
00:29:40,000 --> 00:29:44,160
जब प्रेमानंद जी अपनी शरणागति धर्म के विषय में धर्म और अधर्म

396
00:29:44,160 --> 00:29:48,480
के विषय में कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में जब अपनी शरणागति शंकराचार्य

397
00:29:48,480 --> 00:29:52,480
की ओर उन्होंने दिखा दी तो उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कह दिया

398
00:29:52,480 --> 00:29:56,880
मेरी उतनी बातों को माना जाए जो शंकराचार्य के सम्मत हो और यदि शंकराचार्य

399
00:29:56,880 --> 00:30:00,880
के विपरीत मेरी बातें कोई जा रही है तो उन बातों का त्याग कर दिया जाए

400
00:30:00,880 --> 00:30:05,200
और ऐसे बहुत से हमारे सनातन का प्रचार करने वाले आचार्य

401
00:30:05,200 --> 00:30:09,280
गण है या धर्माचार्य या प्रचार चारक है जिनसे गलतियां हो रही है।

402
00:30:09,280 --> 00:30:13,520
परंतु क्योंकि वो किसी प्रमाणिक आचार्य को अपना प्रमाण बता रहे हैं

403
00:30:13,520 --> 00:30:17,520
तो हमें हमारे पास एक फिल्टर है कि इनकी कौन सी बात को मानना है, कौन सी को नहीं

404
00:30:17,520 --> 00:30:21,760
मानना है। तो जिस विषय में वो विपरीत जाते हुए देखेंगे

405
00:30:21,760 --> 00:30:26,080
उतने विषयों का। मगर जो व्यक्ति शंकराचार्य की प्रामाणिक आचार्य

406
00:30:26,080 --> 00:30:26,580
की

407
00:30:26,240 --> 00:30:32,240
शरणागति प्राप्त किए बिना गलत बातें बोल देगा।

408
00:30:32,320 --> 00:30:36,800
होते हुए स्वयं को धर्माचार्य दिखाते हुए

409
00:30:36,800 --> 00:30:40,800
उससे उससे दिक्कत है ना प्रॉब्लम उससे

410
00:30:40,800 --> 00:30:44,960
हो गई तो बाकी वो गलत अगर कहीं-क

411
00:30:44,960 --> 00:30:49,120
पर कोई कोई अगर कोई भी अमुक आचार्य गलत बोल भी रहा है तो समय

412
00:30:49,120 --> 00:30:53,760
आने पर समय मिलने पर आवश्यकता अनुसार और

413
00:30:53,760 --> 00:30:57,760
वातावरण के अनुसार उस दिशा में भी शोधन का प्रयास किया ही

414
00:30:57,760 --> 00:31:02,400
जाएगा कोई वो थोड़ी ना है कि नहीं किया जाएगा परंतु प्राथमिकता

415
00:31:02,400 --> 00:31:06,560
किसको देंगे किसको बाद में बाद के लिए रखेंगे ये भी देखने वाला वाला विषय

416
00:31:06,560 --> 00:31:10,640
है। आपके सामने कोई भगवती को गाली दे रहा है।

417
00:31:10,640 --> 00:31:14,800
अब सब कुछ छोड़ के अनुरुद्धाचार्य जी ने अपनी कथा में कुछ कह दिया जो शास्त्रीय बात

418
00:31:14,800 --> 00:31:18,880
है उसके पीछे पड़ गए। तो ये तो गलत बात है। पहले मां

419
00:31:18,880 --> 00:31:24,080
भगवती को गाली देने वाले को देखना पड़ेगा।

420
00:31:24,080 --> 00:31:28,160
ये बात है।

421
00:31:28,160 --> 00:31:32,160
यहां कमेंट में एक चीज और आ रहा है कि ईश्वर अल्लाह को तो प्रेमानंद जी भी बताते

422
00:31:32,160 --> 00:31:36,240
हैं। अनिकेत दुबे जी इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? मैंने उसी का जवाब दिया है। उसी

423
00:31:36,240 --> 00:31:40,240
का जवाब दिया है। मिल गया। बाकी मैंने अभी देखा नहीं है।

424
00:31:40,240 --> 00:31:44,400
जी कहां पे बताते हैं वो सब सामने आएगा तब बात है। मैंने भी नहीं देखा।

425
00:31:44,400 --> 00:31:48,880
मैंने भी नहीं देखा है। वो अपनी बात ऐसे ही कह रहे हैं। मैंने भी कहीं नहीं देखा है।

426
00:31:48,880 --> 00:31:52,960
जितनी भी बातें भागवत मैंने एक बात बता दी

427
00:31:52,960 --> 00:31:57,360
कि जैसे अब ये प्रदीप मिश्रा है अनिरुद्धचार्य

428
00:31:57,360 --> 00:32:02,080
हैं और मान लीजिए प्रेमानंद जी हैं। तो ये जो

429
00:32:02,080 --> 00:32:06,080
ये जो संत है या ये जो धर्माचार्य हैं ये जो धर्म के प्रचारक

430
00:32:06,080 --> 00:32:10,240
हैं इन्होंने अपनी शरणागति प्रस्तुत कर रखी है। सार्वजनिक

431
00:32:10,240 --> 00:32:14,240
कर रखी है। कि धर्म और अधर्म के विषय में अंतिम निर्णायक

432
00:32:14,240 --> 00:32:18,400
शंकराचार्य होते हैं। तो जितनी बात शंकराचार्य के सम्मत होगी

433
00:32:18,400 --> 00:32:22,800
उनकी वो मानी जाए और जितनी बात नहीं तो इससे क्या होता है कि विप्लव

434
00:32:22,800 --> 00:32:26,880
की स्थितियां दूर रहती है। जो भी विवेक विवेकी

435
00:32:26,880 --> 00:32:30,880
होगा शंकराचार्य के विरुद्ध जहां बात जाती हुई दिखेगी वो त्याग कर देगा उनकी उस बात का।

436
00:32:30,880 --> 00:32:35,040
यदि कोई ऐसी बात जा रही है तो इसलिए ऐसे

437
00:32:35,040 --> 00:32:40,320
विषयों में शोधन करने का प्रयास प्राथमिकता से नहीं करना पड़ता है।

438
00:32:40,320 --> 00:32:44,560
वहां पर तय करना पड़ता है। रामपाल है तो शंकराचार्य का विरोध करता है।

439
00:32:44,560 --> 00:32:48,560
भगवती को गाली देता है। ये लोग ढिंढोरा पीटते हैं। भगवती ने आकर के मंत्र

440
00:32:48,560 --> 00:32:53,520
दिया। कितनी बार लड़ने चले गए भैया। इतनी इतनी

441
00:32:53,520 --> 00:32:57,600
जलील बातें कान में जो है तेजाब डाल

442
00:32:57,600 --> 00:33:02,160
दो। ऐसी ऐसी बातें उसकी किताबों में लिखी गई है। कितनी बार इन्होंने आग लगा दी?

443
00:33:02,160 --> 00:33:06,240
यहां आकर के प्रश्न कर रहे हैं। तो ये भी देखना पड़ता है

444
00:33:06,240 --> 00:33:10,320
कि अब जैसे पीएन मिश्र जी वाला ही मामला बार-बार आता है कि पीएन मिश्र जी को तो तुमने

445
00:33:10,320 --> 00:33:14,480
कुछ नहीं कहा। अरे भैया हम क्यों कहे कुछ वो अपने आप को धर्माचार्य

446
00:33:14,480 --> 00:33:18,880
के रूप में प्रस्तुति ही नहीं कर रहे हैं। और अगर हर सामान्य व्यक्ति के लिए

447
00:33:18,880 --> 00:33:23,200
इतने लोग बोल रहे हैं रोज के रोज उन सबके लिए वीडियो बनाएं क्या?

448
00:33:23,200 --> 00:33:28,000
तो जहां हमें आवश्यकता दिखाई देगी कि भैया इससे प्रभावित हो रहा है समाज

449
00:33:28,000 --> 00:33:32,000
और इसको हमें प्रायोरिटी देनी है उसको हम प्रायोरिटी देंगे।

450
00:33:32,000 --> 00:33:36,000
ठीक है? अब पीएन मिश्र यदि कोई ऐसी बात बोल रहे हैं जो कि

451
00:33:36,000 --> 00:33:40,320
धर्म के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है। सनातन सिद्धांतों के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है। शंकराचार्य

452
00:33:40,320 --> 00:33:44,480
के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है। तो वो सबसे पहली बात है कि शंकराचार्य

453
00:33:44,480 --> 00:33:48,560
के प्रति शरणागति तो दिखा रहे हैं। तो हमें सबको मालूम है कि इनकी

454
00:33:48,560 --> 00:33:52,560
उतनी बात सुननी है जितनी शंकराचार्य के साथ हो। दूसरी बात यह है कि वो अपने आप

455
00:33:52,560 --> 00:33:56,640
को धर्माचार्य के रूप में प्रस्तुति ही नहीं कर रहे

456
00:33:56,640 --> 00:34:02,160
तो वहां पर उनसे वो जो साइड इफेक्ट्स आने हैं

457
00:34:02,160 --> 00:34:06,960
उनकी संभावनाएं बहुत अल्प है। तो

458
00:34:06,960 --> 00:34:11,440
ऐसे सारा काम धाम छोड़ के और रामपाल का विरोध छोड़ के

459
00:34:11,440 --> 00:34:15,520
अन्य अप्रामाणिक संप्रदायों का जो अप्रामाणिक तंत्र इत्यादि उन सब का विरोध

460
00:34:15,520 --> 00:34:19,600
छोड़ के पीएन मिश्र जी के पीछे लग जाए। तुमने कैसे बोल दिया भाई

461
00:34:19,600 --> 00:34:23,600
और अमुक अमुक तरीके से जहां पर यदि किसी से प्रेम

462
00:34:23,600 --> 00:34:27,920
जी से या किसी से भी कोई ऐसी गलत बात होती भी है तो

463
00:34:27,920 --> 00:34:32,000
किस मर्यादा में रहकर किसका किसके किसके सम प्रतिकार

464
00:34:32,000 --> 00:34:36,480
स्वरूप बात को रखना है वो रखा भी जाता है। क्यों

465
00:34:36,480 --> 00:34:40,560
पूरी शंकराचार्य जी का वक्तव्य हमने जो है अपने चैनल

466
00:34:40,560 --> 00:34:44,880
से रिलीज नहीं किया जिसमें वो बता रहे हैं कि क्या कहते हैं जो सात

467
00:34:44,880 --> 00:34:48,960
द्वीप होते हैं ब्राह्मण होते हैं। हमने तो निर्गत किया।

468
00:34:48,960 --> 00:34:53,040
हमने तो उसमें कोताई नहीं बरती। लोग कहते रामभद्राचार्य रामभद्राचार्य जी के

469
00:34:53,040 --> 00:34:58,160
लिए भी हमने पोस्ट डाली। उनहीं के उनहीं के ग्रंथ में लिखा हुआ था एक जगह

470
00:34:58,160 --> 00:35:02,320
कि मुझे अपनी संस्कृत पर बहुत गर्व था। परंतु जब मैंने करपात्री

471
00:35:02,320 --> 00:35:06,560
जी की हिंदी पढ़ी तो मैं जो है सोच में पड़ गया।

472
00:35:06,560 --> 00:35:10,560
वो हमने क्यों डाला? वो भी तो प्रतिकार ही है। अब तुम चाहते हो

473
00:35:10,560 --> 00:35:11,680
कि तुम्हारी व्यक्तिगत

474
00:35:11,680 --> 00:35:15,680
लड़ाई कोई किसी से चल रही है उसको हम अपने अपना बना ले। उसमें कूद जाए सब

475
00:35:15,680 --> 00:35:19,840
छोड़छाड़ के। दूसरी बात जो बड़े-बड़े अभियान चल रहे हैं उनमें आग लगा दें।

476
00:35:19,840 --> 00:35:23,840
अच्छा और तीसरी बात कि तुम जैसे चाहते हो उसी भाषा में उसके

477
00:35:23,840 --> 00:35:29,680
साथ ट्रीट करें। ये भी बात

478
00:35:29,680 --> 00:35:35,680
अगला प्रश्न बताएं।

479
00:35:38,160 --> 00:35:42,240
तो क्योंकि बात भागवतानंद की तरफ गई है।

480
00:35:42,240 --> 00:35:46,800
तो मैं यह कहना चाहूंगा यह भी कमेंट में आपके सामने

481
00:35:46,800 --> 00:35:50,880
पढ़ना भागवत अपने लीजिए इंटरव्यू में कह

482
00:35:50,880 --> 00:35:56,880
रहे थे कि

483
00:35:57,440 --> 00:36:01,520
अच्छा अच्छा ठीक है तो फिर

484
00:36:01,520 --> 00:36:06,400
इस पे ही वापस आते हैं शिवाश भाई इस का ही एक प्रचारक

485
00:36:06,400 --> 00:36:10,400
है दिखने में आता है उसका नाम है बीइंग द

486
00:36:10,400 --> 00:36:14,560
स्पिरिट सोल क्या आप जानते हैं उनको

487
00:36:14,560 --> 00:36:18,880
बीइंग स्पिरिट सोल कौन है ये मैं नहीं जानता।

488
00:36:18,880 --> 00:36:23,200
तो जो व्यक्ति का अपना अस्तित्व नहीं है उसका जवाब मैं क्यों दूं?

489
00:36:23,200 --> 00:36:27,360
बोलता है कि उसने बहुत खंडन कर रखा है। अब मेहनत करके तुम्हारा खंडन बना

490
00:36:27,360 --> 00:36:31,520
भी देंगे और जबकि शुरुआत में उसने जब पहला वीडियो बनाया था तो

491
00:36:31,520 --> 00:36:35,600
उसके उस वीडियो का खंडन मैंने प्रस्तुत करके निराकरण प्रस्तुत

492
00:36:35,600 --> 00:36:39,840
करके उसको सीधे कह दिया था कि अब आमने सामने की चर्चा कर लो। तब से ले

493
00:36:39,840 --> 00:36:43,920
वो आदमी अपने ही इस मुंगेरी लाल के हसीन सपनों में क्या-क्या देख रहा है, कर रहा

494
00:36:43,920 --> 00:36:48,000
है। मुझे तो ज्ञात भी नहीं वो क्या-क्या कहता है, क्या-क्या करता है। हालांकि अपने हर

495
00:36:48,000 --> 00:36:52,240
वीडियो में, हर पोस्ट में वो जो है अ टैग

496
00:36:52,240 --> 00:36:56,320
कर देता है। उसकी खुद की आइडेंटिटी अभी सस्िशियस है। संदिग्ध

497
00:36:56,320 --> 00:37:00,320
है कि वो है कौन? कहीं भगाया हुआ है, लताड़ा गया। अब

498
00:37:00,320 --> 00:37:04,480
मैं उसके लिए मेहनत करके उसकी जो बातें हैं। हालांकि उसकी जो बातें बहुत छिचले

499
00:37:04,480 --> 00:37:08,640
लेवल की होती है जो सामने अगर सामने

500
00:37:08,640 --> 00:37:12,480
से वन वन बात हो तो बहुत जल्दी उसका वो हो जाए।

501
00:37:12,480 --> 00:37:16,560
मगर क्या कहते हैं

502
00:37:16,560 --> 00:37:20,640
अब हमने मेहनत करके जो है उसके निराकरण प्रस्तुत किए। उसके बाद स्कॉन वाले

503
00:37:20,640 --> 00:37:25,920
कहे हमें क्या पता भैया तुमने किसका क्या निराकरण हमें क्या करना उससे?

504
00:37:25,920 --> 00:37:30,240
अच्छा वो शक्ल दिखाता नहीं है। सामने आता नहीं है तो वो भी नहीं है कि लोग जागरूक

505
00:37:30,240 --> 00:37:34,560
हो। देखो सामने से चुप किया उस व्यक्ति को। वो भी नहीं है तो हमें वहां पर

506
00:37:34,560 --> 00:37:38,640
कोई उद्देश्य की पूर्ति है ही नहीं उसका जवाब देने में तो हम क्यों दे

507
00:37:38,640 --> 00:37:42,800
उसका जवाब कोई वहां से खड़ा होगा इस का कोई जैसे

508
00:37:42,800 --> 00:37:46,800
अभी इस कान के कोई थे प्रबंधक थे कौन थे

509
00:37:46,800 --> 00:37:50,800
वहां बिहार की साइड के उन्होंने राघवाचार्य जी महाराज वाले वीडियो के बाद

510
00:37:50,800 --> 00:37:55,600
उन्होंने जो है रिप्लाई दिया था हमने दिया उसको उनको तफाक से बनाया वीडियो

511
00:37:55,600 --> 00:37:59,760
तो अच्छा अब इसमें भी वही वाली बात है कि किसका देना है बहुत से लोग डेली वीडियो

512
00:37:59,760 --> 00:38:03,760
बना रहे तो सबका तो हम नहीं दे पा रहे हैं हमें हमें ब्रह्मा कुमारी का

513
00:38:03,760 --> 00:38:07,760
भी प्रतिकार करना है। रामपाल का भी प्रतिकार करना है। अलंकार समाज का भी

514
00:38:07,760 --> 00:38:11,760
प्रतिकार करना है। बहुत सी चीजें हमारे सामने तो हमें देखना पड़ता है। इसके बारे

515
00:38:11,760 --> 00:38:15,760
में बोलना जरूरी है। तो हम बोले बाकी ये सोलवल

516
00:38:15,760 --> 00:38:19,840
वाले की अपनी खुद की आइडेंटिटी तो पहले पता चले तब तो हम वहां मेहनत

517
00:38:19,840 --> 00:38:23,200
करें।

518
00:38:23,200 --> 00:38:27,840
वो है कौन? सही बात है। सही बात है।

519
00:38:27,840 --> 00:38:31,920
नहीं नहीं इसलिए मैंने ये प्रश्न किया था क्योंकि वो चेहरा बिगाड़ करके

520
00:38:31,920 --> 00:38:36,080
कुछ भी अपने मन से डाल देता है और मर्यादा के बाहर जाकर के जैसे

521
00:38:36,080 --> 00:38:40,160
आहवान चैनल है तो उसको हैवान कर देता है। इसीलिए मैंने आपसे पूछा

522
00:38:40,160 --> 00:38:44,640
तो खैर आपने उसका उत्तर बहुत अच्छा दिया। तो उसकी खुद की आइडेंटिटी नहीं है। वो मुंह छुपाते

523
00:38:44,640 --> 00:38:48,880
बैठ रहा है। सामने आता नहीं है। जो व्यक्ति खुद एक चोर

524
00:38:48,880 --> 00:38:53,200
की तरीके से काम कर रहा है। नपुंसक कायर की तरीके से काम कर रहा है। जिसका

525
00:38:53,200 --> 00:38:57,440
काम यह है कि मेरे वक्तव्यों को बदल करके

526
00:38:57,440 --> 00:39:01,440
प्रस्तुत करके उनका खंडन करना। समझ रहे हैं? मतलब एक होता है

527
00:39:01,440 --> 00:39:05,520
कि तुमने जो कहा मैंने उसको एज इट इज लिया। अब मैं उसको चुनौती दे रहा हूं।

528
00:39:05,520 --> 00:39:09,680
एक होता है कि मैंने जो कहा ही नहीं। मेरे इधर उधर से

529
00:39:09,680 --> 00:39:13,680
मिक्स अप करके मेरे भाव को बदल के प्रस्तुत किया। देखो यह इसने कहा अब मैंने

530
00:39:13,680 --> 00:39:17,680
इसका खंडन कर दिया। तो इसको क्या कहेंगे? कायरता। एडिटिंग

531
00:39:17,680 --> 00:39:21,760
वीर कहेंगे इसको। अब ऐसे एडिटिंग वीर का हम निराकरण कहां

532
00:39:21,760 --> 00:39:26,320
तक प्रस्तुत करें? अब वो हमारे आचार्यों के बारे में वो बता रहा है कि उसने क्या कहा?

533
00:39:26,320 --> 00:39:30,400
आचार्यों ने हमारे शंकराचार्यों ने क्या कहा? ये उसको पता है।

534
00:39:30,400 --> 00:39:36,080
उनसे परंपरा प्राप्त वही वाली बात। इसीलिए मैंने भागवत आनंद से पूछा ना

535
00:39:36,080 --> 00:39:38,240
कि अगर हम इस तरीके से किसी

536
00:39:38,240 --> 00:39:42,240
के भी द्वारा किसी भी परंपरा की बातें जानने के दावे को स्वीकार करने

537
00:39:42,240 --> 00:39:47,200
लगेंगे तो अब इस वाला दावा कर रहा है कि हमारे आचार्यों ने क्या कहा है?

538
00:39:47,200 --> 00:39:53,200
वो हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों से ज्यादा उसको पता है।

539
00:39:53,200 --> 00:39:57,280
आर्य समाज कहते हैं कि जो वो है आदि शंकराचार्य जी अवतार को

540
00:39:57,280 --> 00:40:02,240
नहीं मानते थे। आर्य समाज क्लेम करते हैं। अगर ये परंपरा वाली चीज को हम ना पकड़े

541
00:40:02,240 --> 00:40:06,640
अच्छा वो यह कह देंगे कि जितनी चीजें हम लाएंगे उनके नाम से आदि शंकराचार्य

542
00:40:06,640 --> 00:40:11,760
जी के नाम से तो सब मिलावट है। उन्होंने मिलावट कर दिया है।

543
00:40:11,760 --> 00:40:16,480
इसलिए परंपरा को पकड़ के रखना पड़ेगा। आज नहीं तो कल जितने लोग जो वर्णाश्रमी

544
00:40:16,480 --> 00:40:20,640
है, परंपरावादी हैं और सिद्धांतवादी

545
00:40:20,640 --> 00:40:24,720
हैं वो इस चीज को समझ जाएंगे। इस लड़ाई में किसका पक्ष जो है

546
00:40:24,720 --> 00:40:29,840
सत्य का पक्ष है?

547
00:40:29,840 --> 00:40:34,080
हम करेक्ट करेक्ट समझ गया। आप आप एक और प्रश्न

548
00:40:34,080 --> 00:40:38,240
आता है कमेंट में बहुत

549
00:40:38,240 --> 00:40:42,320
अच्छा ठीक। कई जगह पर ऐसे भी प्रश्न आता है शिवा

550
00:40:42,320 --> 00:40:46,400
भाई जो मर्यादा के बाहर जाकर के कुछ लोग शब्दावली यूज करते हैं। जैसे मैं

551
00:40:46,400 --> 00:40:50,560
आपको बताता हूं वो लोग क्या यूज करते हैं। अबे इतनी हिम्मत है अगर तो जाकर

552
00:40:50,560 --> 00:40:54,800
के अमोग लीला से भिड़ जा। जाकर के फलाने आर्या से भिड़ जा।

553
00:40:54,800 --> 00:40:58,880
फलाने उससे भिड़ जा। इन लोगों को

554
00:40:58,880 --> 00:41:03,040
आप क्या कहना चाहेंगे? जो इस तरह के शब्दावली यूज़ करते हैं। मर्यादा

555
00:41:03,040 --> 00:41:07,040
के बाहर जाकर के। क्योंकि मैं जानता हूं कि आप मर्यादा के बाहर जाकर के वो शब्द नहीं

556
00:41:07,040 --> 00:41:13,040
यूज़ कर सकते। ऐसे कमेंट वालों का क्या किया जाए?

557
00:41:15,600 --> 00:41:18,000
देखिए

558
00:41:18,000 --> 00:41:22,000
जब चर्चा के विषय में या किसी भी

559
00:41:22,000 --> 00:41:26,400
जिन विषयों पर बातें चल रही है उन विषयों के बीच में तर्क

560
00:41:26,400 --> 00:41:30,400
वितर्क और प्रमाणों के बीच में जब व्यक्ति इस

561
00:41:30,400 --> 00:41:35,360
तरह की भाषा शैली पर उतर आता है तो वही तो उसकी पराजय का दतक

562
00:41:35,360 --> 00:41:40,400
कभी कोई यह थोड़ी ना कहेगा कि मैं जो है मैं ही हूं मैं हार गया

563
00:41:40,400 --> 00:41:44,560
वो इस तरह की भाषा शैली का उपयोग करना, विषय से हटकर के बातें

564
00:41:44,560 --> 00:41:49,520
करने लगना, इमोजीस भेजना, यह सब चीजें जो है

565
00:41:49,520 --> 00:41:52,560
अ

566
00:41:52,560 --> 00:41:57,120
यही देवताक होती है कि व्यक्ति हार रहा है, कुछ कर नहीं पा रहा है। उसकी बेबसी है

567
00:41:57,120 --> 00:42:01,280
तो वो मुंह चला रहा है। मैंने इस बारे में अपना

568
00:42:01,280 --> 00:42:06,640
घटना है छोटी सी। मैं छोटा था जब

569
00:42:06,640 --> 00:42:10,720
उस दिन होलिका दहन था तो होलिका दहन

570
00:42:10,720 --> 00:42:14,720
वाले दिन वो पिताजी ने मुझसे जो गन्ना मंगाया था तो मैं गन्ना

571
00:42:14,720 --> 00:42:19,040
लेकर के आ रहा था हम और रास्ते

572
00:42:19,040 --> 00:42:23,680
मुझे पता नहीं था कि गन्ने के आगे का जो अग्र भाग होता है उसकी उसका ही मेन

573
00:42:23,680 --> 00:42:27,680
उसमें कार्य होता है मुख्य रूप से तो मैंने जो

574
00:42:27,680 --> 00:42:29,840
है

575
00:42:29,840 --> 00:42:34,720
मैं ला रहा था तो उसका आगे का अगला भाग जो है थोड़ा सा टूट गया था

576
00:42:34,720 --> 00:42:38,720
तो मैं साइकिल से था साइकिल के पीछे से वो टूट

577
00:42:38,720 --> 00:42:44,000
करके और रास्ते में मेरे घर से थोड़ा सा दूर वो गिर गया।

578
00:42:44,000 --> 00:42:48,640
मैंने सोचा कि इसका तो कोई कार्य है नहीं। चलते हैं आगे। तो मैं आ गया।

579
00:42:48,640 --> 00:42:52,800
फिर पिताजी ने पूछा गन्ना मैंने गन्ना दिखाया तो उसमें जो अग्र भाग होता है उसमें उसके बाल

580
00:42:52,800 --> 00:42:57,440
होते हैं गन्ने के। तो वो था ही नहीं।

581
00:42:57,440 --> 00:43:01,440
तो पिताजी ने कहा वो कहां है? मैंने कहा कि वो तो गिर गया पीछे। बोले कि

582
00:43:01,440 --> 00:43:05,840
अरे वही तो मेन है। वही तो मुख्य अची पूजा में।

583
00:43:05,840 --> 00:43:07,600
तो मैं

584
00:43:07,600 --> 00:43:11,600
गया उसको लेने तो देखा तो एक वो बालों के साथ थोड़ा

585
00:43:11,600 --> 00:43:15,600
सा उसमें गन्ना भी था तो उस हिस्से को लेकर के एक बच्चा जो

586
00:43:15,600 --> 00:43:19,840
है खेल रहा था मेरे लगभग मेरे थोड़ा

587
00:43:19,840 --> 00:43:23,920
19 20 छोटा होगा वो तो वो मैंने उससे

588
00:43:23,920 --> 00:43:27,920
कहा भाई ये मेरा है ये गन्ना तुम दे दो मुझे

589
00:43:27,920 --> 00:43:32,560
उसने कहा नहीं दूंगा मैंने एक दो बार विनम्रता से कहा भाई ये

590
00:43:32,560 --> 00:43:36,560
मुझे दे दो मेरा है उसने कहा नहीं दूंगा। मैंने पाया

591
00:43:36,560 --> 00:43:40,880
है। तो मैंने उससे ले लिया। बलपूक ले लिया मैंने उससे।

592
00:43:40,880 --> 00:43:45,680
जब मैंने बलपूक ले लिया मुझे गाली बकने लगा।

593
00:43:45,680 --> 00:43:49,680
है ना? तो जब वो गाली बकने लगा तो

594
00:43:49,680 --> 00:43:53,760
मैंने गाली देने का था ही नहीं। मेरे पास वो है ही नहीं। मेरे सिस्टम में ही नहीं

595
00:43:53,760 --> 00:43:57,760
गाली देने का। तो फिर मैंने क्या किया? वो गन्ने का वो अग्र

596
00:43:57,760 --> 00:44:02,080
भाग पकड़ा। और दूसरी ओर जो उसका डंडा डंडे जैसा भाग था वो लिया

597
00:44:02,080 --> 00:44:06,560
और गाली के उपलक्ष में उसको चपाचप चपाचप उसके

598
00:44:06,560 --> 00:44:12,160
लगा दिए पांच 10 और मैं घर आ गया

599
00:44:12,160 --> 00:44:16,320
लेके तो पीछे से पीछे से उस बच्चे

600
00:44:16,320 --> 00:44:20,640
की दादी थी शायद वो उसको लेते हुए आ गई वो थोड़े ग्रामीण

601
00:44:20,640 --> 00:44:22,880
प्रवेश का बच्चा था

602
00:44:22,880 --> 00:44:27,120
तो उसको लेकर के और जो है आ गई घर पे कह अरे

603
00:44:27,120 --> 00:44:31,280
तुम्हारे मौला ने हमारे मोड़ा के मारा है

604
00:44:31,280 --> 00:44:36,400
डंडे से ये रो रहा है हमारा लल्लू

605
00:44:36,400 --> 00:44:40,560
तो मैंने कहा ये मुझे गाली दे रहा था

606
00:44:40,560 --> 00:44:44,640
मैंने कहा ये माता जी गाली दे रहा था मुझे तो बोली

607
00:44:44,640 --> 00:44:47,360
कि बेटा

608
00:44:47,360 --> 00:44:51,360
जिसके पास भगवान ने जिसको ताकत नहीं दी है ना

609
00:44:51,360 --> 00:44:57,360
जिसके पास ताकत नहीं होती है उसके पास जुबान होती है।

610
00:44:58,080 --> 00:45:02,320
समझ गए आप? समझ गया। जिसके पास सामर्थ

611
00:45:02,320 --> 00:45:07,360
नहीं होता। बहुत सुंदर उत्तर है। उसके पास ही होता है।

612
00:45:07,360 --> 00:45:11,360
सुंदर उत्तर है। समझ गया? इसी तरह की घटना वहां पर

613
00:45:11,360 --> 00:45:15,520
होती है। बस उसका दृश्य बदल जाता है। स्टोरी यही रहता है। आपने एकदम

614
00:45:15,520 --> 00:45:19,760
सही कहा। अब जैसे कि शिवश भाई एक आपके सामर्थ्य के

615
00:45:19,760 --> 00:45:23,920
ऊपर एक प्रश्न मैं पूछूंगा। जैसे कि एक्चुअल में मेरे

616
00:45:23,920 --> 00:45:28,000
अनुसार बाकी दुनिया जो सोचे मेरे अनुसार आप जो घुस के

617
00:45:28,000 --> 00:45:32,160
निग्रह करते हैं किसी भी शिविर में किसी के भी आपको डर

618
00:45:32,160 --> 00:45:37,920
नहीं लगता।

619
00:45:37,920 --> 00:45:42,080
ऐसा था कि जीवन में जब आसक्ति कम होती चली जाती

620
00:45:42,080 --> 00:45:46,080
है तो भय भी कम होता चला जाता है। और जब से गुरुदेव की शरण

621
00:45:46,080 --> 00:45:50,480
में आया था मैं मैं बता रहा हूं उससे पहले मैं थोड़ा सा सोते

622
00:45:50,480 --> 00:45:54,560
जागते उठते बैठते केवल एक ही चिंता रहती

623
00:45:54,560 --> 00:45:58,720
थी कि ये जो मेरे धर्म को दीमक की तरह खाया जा रहा है नाश हो रहा है

624
00:45:58,720 --> 00:46:02,880
सनातन संस्कृति का मुझे चैन से नींद

625
00:46:02,880 --> 00:46:07,040
नहीं आती थी जब मुझे शंकराचार्य मिले उस दिन के बाद मैंने

626
00:46:07,040 --> 00:46:11,200
सोना चालू किया चैन की नींद जब मुझे वो ज्ञान मिला वो

627
00:46:11,200 --> 00:46:15,600
विज्ञान मिला जिसके आधार पर मैं जो है अपने सनातन की रक्षा रक्षा कर सकता हूं।

628
00:46:15,600 --> 00:46:19,600
जीवन का उद्देश्य मिला। तो जिस दिन शंकराचार्य

629
00:46:19,600 --> 00:46:23,920
की शरणागति प्राप्त हो गई थी ना उस दिन बहुत

630
00:46:23,920 --> 00:46:28,560
बड़े हिस्से में जो मोह माया होती है जीवन की

631
00:46:28,560 --> 00:46:32,560
वो खत्म हो गई। नष्ट हो गई। और कई बार

632
00:46:32,560 --> 00:46:36,560
मैं बता चुका हूं। मुझे यदि जीवित रहते हुए जो मोक्ष का अनुभव

633
00:46:36,560 --> 00:46:40,720
हो सकता है वो जब मैंने शंकराचार्य को पहली बार देखा था अपनी आंखों

634
00:46:40,720 --> 00:46:45,520
से तो वो अनुभव मुझे हो गया था। उसके बाद मुझे कोई

635
00:46:45,520 --> 00:46:49,520
अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से किसी भी चीज की भौतिक वादिता

636
00:46:49,520 --> 00:46:53,040
की प्राप्ति इत्यादि की इच्छा शेष

637
00:46:53,040 --> 00:46:57,120
नहीं रह गई थी। तो इस

638
00:46:57,120 --> 00:47:01,120
कारण से जब लक्ष्य सामने होता है ना तो बस वही चीजें

639
00:47:01,120 --> 00:47:05,600
याद आती है। नैन छिनती शस्त्राण नैन दति पावका

640
00:47:05,600 --> 00:47:09,600
ना चैनम क्लेदपो ना सोति मारता गुरुदेव

641
00:47:09,600 --> 00:47:14,000
के पास एक बार कैंसर का मरीज आया उसने कहा मैं कैंसर

642
00:47:14,000 --> 00:47:18,240
गुरुदेव ने ये नहीं कहा कि मैं चमत्कार से सिद्धि से तुम्हारा कैंसर ठीक कर देता हूं।

643
00:47:18,240 --> 00:47:23,040
गुरुदेव ने ये कहा था कि मैं तुम्हारा दुख कम कर दूंगा।

644
00:47:23,040 --> 00:47:27,040
मैं तुम्हारा कष्ट कम कर सकता हूं क्योंकि मूल में तो वही है

645
00:47:27,040 --> 00:47:31,600
ना गुरुदेव ने यह भी कहा था जी

646
00:47:31,600 --> 00:47:35,760
कि जो लोग अराजक तत्व होते हैं ये सब होते हैं जो इनके

647
00:47:35,760 --> 00:47:40,560
अंदर एक गुण तो होता ही है ये लोग रिस्क लेना जानते हैं

648
00:47:40,560 --> 00:47:45,040
उतने हिस्से में तो वो जो है प्रश

649
00:47:45,040 --> 00:47:49,120
प्रशंसा के पात्र होते ही हैं कि एक सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा

650
00:47:49,120 --> 00:47:52,480
करें तो वो लोग रिस्क लेते

651
00:47:52,480 --> 00:47:56,560
तो ये सारी चीजें गूंजने लगती है। फिर जब कोई ऐसा

652
00:47:56,560 --> 00:48:00,720
लक्ष्य महत्वपूर्ण सामने होता है और फिर हम वही करते

653
00:48:00,720 --> 00:48:06,160
हैं। शेर का बच्चा एक ही अच्छा

654
00:48:06,160 --> 00:48:10,320
शेर से याद आया। कई लोग शेर र

655
00:48:10,320 --> 00:48:16,320
के आगे उ लगा के आपको शेरू भी कह रहे हैं।

656
00:48:16,560 --> 00:48:20,560
वो अपने परिवार में अपने लोगों को ऐसा ही कहते होंगे। इसलिए उनकी आदत

657
00:48:20,560 --> 00:48:25,920
है ऐसा कहने की अपने पिता पिता से ऐसे ही बातें करते होंगे

658
00:48:25,920 --> 00:48:29,920
शेरू टॉमी ये सब अच्छा वो आदत घर से

659
00:48:29,920 --> 00:48:34,240
प्राप्त जो संस्कार है वो उसको प्रदर्शित कर रहे हैं समाज में जिनके

660
00:48:34,240 --> 00:48:38,560
पास उत्तर नहीं है वही तो ऐसा कर रहे हैं उत्तर होता तो सामने आते

661
00:48:38,560 --> 00:48:43,360
फट से कितने लोग आके गए हैं

662
00:48:43,360 --> 00:48:47,760
और नहीं आए तो हम तो तुम्हारे खेमे में गए थे हम तो आज भी तैयार

663
00:48:47,760 --> 00:48:51,920
हैं मगर सामने से ही कोई प्रतिक्रिया नहीं

664
00:48:51,920 --> 00:48:55,920
आ रही। वीडियो बना के, कमेंट लिख के, पोस्ट लिख के जवाब तो दिया जा

665
00:48:55,920 --> 00:49:00,000
रहा है भागवतानंद की ओर से। परंतु आमने सामने बैठने में

666
00:49:00,000 --> 00:49:06,000
नानी याद आ रही है। हम

667
00:49:06,240 --> 00:49:10,240
ये बात ये आपने जो आमने सामने की

668
00:49:10,240 --> 00:49:14,240
बात कही भागवतानंद के लिए तो एक

669
00:49:14,240 --> 00:49:18,240
जगह पर मैंने उनको रिक्वेस्ट करके बुलाया था कि आप

670
00:49:18,240 --> 00:49:21,200
सामने आ जाइए जो भी आप कह रहे हैं वीडियो की क्या जरूरत है आप सामने

671
00:49:21,200 --> 00:49:25,280
आ जाइए चीजें क्लियर हो जाएंगी ये और थोड़ा सा कहते

672
00:49:25,280 --> 00:49:29,440
हैं ना कॉम्प्लेक्स हो जा रहा है मगजमारी हो जा रहा है इसमें तो उन्होंने यह रिप्लाई

673
00:49:29,440 --> 00:49:34,080
दिया था तुम और शिवा दोनों महामूर्ख धूर्त हो

674
00:49:34,080 --> 00:49:38,160
तुमसे नहीं हो पाएगा ग्रंथ श्लोक हिंदी अनुवाद

675
00:49:38,160 --> 00:49:42,800
तक बताने के बाद भी शिवश समझ नहीं पाता

676
00:49:42,800 --> 00:49:46,880
वह एक उपद्रवी है वह वही रहेगा मूर्ख

677
00:49:46,880 --> 00:49:51,200
उपद्रियों के साथ हम समय बर्बाद नहीं करते।

678
00:49:51,200 --> 00:49:55,360
मतलब उनका कहने का ये मतलब है कि उनको हमने श्लोक बोला फटाफट फटाफट संस्कृत

679
00:49:55,360 --> 00:49:59,680
का श्लोक बोल दिया। फटाफट अनुवाद बोल दिया। लेकिन उसको केवल कुतर्क करना है।

680
00:49:59,680 --> 00:50:05,680
तेरा ये बता तेरा वो बता इस भाव से।

681
00:50:06,160 --> 00:50:10,400
भाई बोला तो मैंने भी था कि माया मोह स्वरूप है। आज तक तो उसका

682
00:50:10,400 --> 00:50:14,400
उत्तर आया नहीं है। आ गया क्या? भगवान का

683
00:50:14,400 --> 00:50:19,120
अवतार सच्चिदानंद स्वरूप होता है। माया मोह स्वरूप होता है।

684
00:50:19,120 --> 00:50:23,200
बात यह है कि तुम जिसे कुतर्क कह रहे हो उसके संबंध में कोई शास्त्र का

685
00:50:23,200 --> 00:50:28,400
वो है क्या लिस्ट के ये कुतर्क होते हैं? नहीं है।

686
00:50:28,400 --> 00:50:32,480
हां तुमने निर्णय लिया है कि वो ये कुतर्क है तो उसको कुतर्क मान लिया

687
00:50:32,480 --> 00:50:37,440
जाए। इसी को कहते हैं कि तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण।

688
00:50:37,440 --> 00:50:42,000
हम कुतर्क कह के किसी का उत्तर देने से मना नहीं कर देते हैं।

689
00:50:42,000 --> 00:50:46,000
देते हैं अंत तक। झूठे की हद तक चोर के घर तक कहां तक जाओगे?

690
00:50:46,000 --> 00:50:50,080
चलो वहीं तक। कुतर्क तो यह है कि हमको शास्त्र अतीत

691
00:50:50,080 --> 00:50:54,320
जन्मांतर से प्राप्त है। यह कुतर्क है। हमने इसमें

692
00:50:54,320 --> 00:50:58,320
ये नहीं कहा कि ये कुतर्क है तुम्हारा। अब हम इसके आगे कुछ नहीं बोलेंगे। हमने इसमें तबाक

693
00:50:58,320 --> 00:51:02,480
से जवाब दिया। सुनाओ। तुम्हें अतीत जन्मांतर से शास्त्र प्राप्त

694
00:51:02,480 --> 00:51:06,560
है तो सुनाओ। फिर उनके पक्ष की ओर से बोला जा रहा है कि भैया

695
00:51:06,560 --> 00:51:10,800
उनको प्राप्त है मगर वो सुनाएंगे नहीं ठेंगा प्राप्त है।

696
00:51:10,800 --> 00:51:14,880
मोबाइल क्यों देखते हैं भाई?

697
00:51:14,880 --> 00:51:19,360
हां क्यों देखते हैं हम मोबाइल?

698
00:51:19,360 --> 00:51:23,360
मोबाइल देख के वीडियो बनाने का अर्थ है कि तुम्हें अतीत जन्मांतर

699
00:51:23,360 --> 00:51:27,440
से प्राप्त नहीं है। ये कुतर्क था। कुतर्क किसको कहते

700
00:51:27,440 --> 00:51:31,680
हैं? हमने कुतर्क होने पर भी स्पष्ट रूप से कुतर्क होने पर भी हमने

701
00:51:31,680 --> 00:51:36,640
वहां ये नहीं कहा कि ये तो कुतर्क है। हम इसका जवाब नहीं देंगे। उसका जवाब दिया

702
00:51:36,640 --> 00:51:40,880
तो कुतर्कों का जवाब नहीं दिया जाता है। ऐसा नहीं है। जवाब देने

703
00:51:40,880 --> 00:51:46,240
के बाद ही वो कुत कुतर्क सिद्ध होता है। सही मायने में देखा जाए तो

704
00:51:46,240 --> 00:51:50,480
उससे पहले तक वो एक सवाल होता है, दावा होता है, क्लेम होता है। तो

705
00:51:50,480 --> 00:51:54,720
ये उत्तर ना दे पाने की जो अभाव है,

706
00:51:54,720 --> 00:51:58,800
जो असामर्थता है, उसका परिणाम है कि वो इस तरह से कह करके बचना

707
00:51:58,800 --> 00:52:03,600
चाहते हैं। कुतर्क है इसलिए जवाब नहीं देंगे। कुतर्क है सब।

708
00:52:03,600 --> 00:52:07,760
तुम्हारे पास शास्त्र कहां से आया? तुम निग्रह निग्रचार तुम्हें कैसे कहा

709
00:52:07,760 --> 00:52:11,760
जाए? क्या आधार है उसका? मंत्र सत्यापित कराने जा रहे

710
00:52:11,760 --> 00:52:15,840
हो। शंकर शंकर परंपरा से ज्ञान विज्ञान प्राप्त करने वाले

711
00:52:15,840 --> 00:52:20,240
किसी व्यक्ति के पास। उस पर भी तुम्हारा एक निग्रह

712
00:52:20,240 --> 00:52:24,320
करने की दोष दृष्टि वहां विद्यमान है। उस पर भी तुम खुद क्लेम कर चुके

713
00:52:24,320 --> 00:52:28,480
हो कि वह किसी ऐसी एंटिटी को भगवान कह रहा है जो है भगवान नहीं है।

714
00:52:28,480 --> 00:52:29,920
फिर वो तुम्हारा

715
00:52:29,920 --> 00:52:33,920
मंत्र सत्यापित करने वाला प्रमाण कैसे बन गया? ये सब

716
00:52:33,920 --> 00:52:38,240
कुतर्क नहीं है। ये सब लॉजिकल तार्किक प्रश्न है। ये और शास्त्र

717
00:52:38,240 --> 00:52:42,240
सम्मतता है। शिव पुराण से ले सारे शास्त्रों में परंपरा बताई जा रही

718
00:52:42,240 --> 00:52:46,560
है। तुम्हारी परंपरा बताते टाइम तुम भाग रहे हो। बता

719
00:52:46,560 --> 00:52:50,640
ही नहीं पा रहे हो। मेरी परंपरा यह है क्योंकि बताने जाओगे तो शंकर के सानिध्य

720
00:52:50,640 --> 00:52:54,800
में आ जाओगे। ब्रह्म सूत्र और जितना भी जो

721
00:52:54,800 --> 00:52:58,800
तात्विक विवेचना है निगमानंद को भी अगर मान लिया जाए

722
00:52:58,800 --> 00:53:02,880
कि वो निगंद की परंपरा से दीक्षित है। उसने सत्यापित

723
00:53:02,880 --> 00:53:06,960
किया है। यद्यपि यदि तुम वहां से दीक्षित हो तो तुम उनके अगेंस्ट

724
00:53:06,960 --> 00:53:11,040
जाकर के अपना संप्रदाय खड़ा ही नहीं कर सकते। पहली बात अगेंस्ट

725
00:53:11,040 --> 00:53:15,360
नहीं जा सकते क्योंकि वो तुम्हारे शब्द प्रमाण है। तुम्हारे मंत्र को उन्होंने सत्यापित किया है।

726
00:53:15,360 --> 00:53:19,520
अगर उसमें तुम दोष दृष्टि रख रहे हो तो फिर इसका मतलब वो व्यक्ति धर्म

727
00:53:19,520 --> 00:53:23,600
और धर्म की गलत व्याख्या कर सकता है तो तुम्हारे गलत मंत्र को सत्यापित भी तो कर

728
00:53:23,600 --> 00:53:26,800
सकता है।

729
00:53:26,800 --> 00:53:30,880
इसको अर्थ न्याय कहते हैं। तो इसलिए

730
00:53:30,880 --> 00:53:34,560
पहली बात तो

731
00:53:34,560 --> 00:53:36,960
जी

732
00:53:36,960 --> 00:53:41,200
करेक्ट तो हां नहीं मैंने कई जगह पर जो

733
00:53:41,200 --> 00:53:45,200
भागवतानंद का वक्तव्य आता है तो वहां पर मैंने कहा है कि आप लाइव आकर के

734
00:53:45,200 --> 00:53:49,200
चर्चा कर लीजिए तो पिछले 10 15 10 12 दिन से मैं वही कर रहा हूं यह

735
00:53:49,200 --> 00:53:53,200
सोचकर कि शायद ये आ जाएंगे आ जाएंगे आ जाएंगे लेकिन लास्ट में जाकर के मुझे भी समझ

736
00:53:53,200 --> 00:53:57,440
में आ गया कि वह सामने नहीं आएंगे भले ही वो क्योंकि उनको पता है कि प्रश्न शुरू

737
00:53:57,440 --> 00:54:01,440
ही यहां से होगा कि आपका परंपरा बताइए तो पहले

738
00:54:01,440 --> 00:54:05,600
क्वेश्चन में शायद से वो थोड़ा डगमगा जाएंगे इसलिए नहीं बता रहे कोई

739
00:54:05,600 --> 00:54:09,600
बात नहीं भाई भाई कई लोग ये कह रहे हैं कि

740
00:54:09,600 --> 00:54:13,680
400 ग्रंथ है 700 ग्रंथ है उससे परंपरा हम सिद्धि करेंगे अरे

741
00:54:13,680 --> 00:54:17,680
भैया शास्त्रों में अगर मान लिया जाए कि कबीर नाम आ गया तो इसलिए मान

742
00:54:17,680 --> 00:54:21,680
लिया जाए कि रामपाल जो जो क्लेम कर रहा है वो सही है वो शास्त्रों की

743
00:54:21,680 --> 00:54:25,760
लिखी हुई बात तुमसे कैसे जुड़ रही है प्रश्न ये है अगर शास्त्र में कहीं

744
00:54:25,760 --> 00:54:30,000
निग्रह आ भी गया पहली बात तो वहां निग्रह संप्रदाय है कि नहीं निग्रह

745
00:54:30,000 --> 00:54:34,320
वो है कि नहीं तंत्र वो तो बाद की बात है कि क्या लिखा है 400 शास्त्रों

746
00:54:34,320 --> 00:54:38,400
में मान लिया जाए कि उसमें निग्रह परंपरा के बारे में बताया गया है पर वो

747
00:54:38,400 --> 00:54:42,160
निग्रह परंपरा तुम्हारे पास आ गई तुम उसके उत्तराधिकारी हो

748
00:54:42,160 --> 00:54:46,400
इस विषय में तो तुम तुम तुमको अपने आप तुमको अपना सत्यापन

749
00:54:46,400 --> 00:54:50,400
किसी से कराना पड़ेगा जिससे तुमने कराया उस पर तुम्हें खुद विश्वास

750
00:54:50,400 --> 00:54:54,560
नहीं है जिससे तुमने कराया है उसके तुम अगेंस्ट जा रहे हो

751
00:54:54,560 --> 00:55:00,000
जिससे तुम तुमने कराया है वो गलत बोल रहा सत्यापन

752
00:55:00,000 --> 00:55:04,240
अब रही सही बात कि तुमने किसी से कराया ना होता तब

753
00:55:04,240 --> 00:55:08,320
हम यह देखते कि तुम खुद क्लेम कर रहे हो कि भाई मैं अपने आप में एक आप पुरुष हूं।

754
00:55:08,320 --> 00:55:12,640
मेरी बात को मानना हो तो मानो नहीं मानना है तो मत मानो। अभी तो तुमने और अगेंस्ट

755
00:55:12,640 --> 00:55:16,800
काम कर रखा है। निगमानंद के शिष्य से जो है अपने मंत्र को सत्यापित

756
00:55:16,800 --> 00:55:21,200
करने का जो प्रयास किया है उससे अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार रखी है।

757
00:55:21,200 --> 00:55:25,280
अगर तुम ये ना करते हो स्वतंत्र रूप से कहते कि भाई मेरे ऊपर

758
00:55:25,280 --> 00:55:29,440
मेरी दिव्यता पर आस्था है तो रखो नहीं आस्था है तो ना रखो। तो फिर

759
00:55:29,440 --> 00:55:33,520
वो आस्थावानों से फिर प्रश्न होते उसकी दिव्यता के संबंध में वो

760
00:55:33,520 --> 00:55:37,280
एक अलग चैप्टर हो जाता।

761
00:55:37,280 --> 00:55:40,480
तो ये है जी

762
00:55:40,480 --> 00:55:45,040
समझ गए समझ गए तो आपको क्या लगता है भविष्य में आएंगे

763
00:55:45,040 --> 00:55:49,040
फिर ये देखा जाता कि इनकी दिव्यता पर आस्था रखना है कि नहीं रखना है ब्रह्मा

764
00:55:49,040 --> 00:55:53,200
कुमारीज वाला इनका मन इनको मानना है कि नहीं मानना ब्रह्मा कुमारीज

765
00:55:53,200 --> 00:55:57,360
वाले भी तो आस्था रख रहे हैं कि भाई ब्रह्मा जी आते हैं वेदों का सही अर्थ

766
00:55:57,360 --> 00:56:02,640
बताते हैं और जो आज जो वेद प्रचलित है वो मिलावटी खत्म काम

767
00:56:02,640 --> 00:56:06,720
आस्था रख लो आप नहीं कई लोग आते हैं कई लोग कई लोग

768
00:56:06,720 --> 00:56:10,720
हम उनको निरत्तर कर देते हैं।

769
00:56:10,720 --> 00:56:14,720
आपको जी शंकर का विरोध करके आप

770
00:56:14,720 --> 00:56:18,720
अपना ताना-वाना खड़ा नहीं कर पाओगे। ठीक है? वो

771
00:56:18,720 --> 00:56:23,120
हमारे उदारता है कि हम नहीं कर रहे विरोध

772
00:56:23,120 --> 00:56:27,200
शांत है प्रतिकार नहीं कर रहे तो बात अलग है। मगर

773
00:56:27,200 --> 00:56:31,360
करना चाहे तो कर सकते हैं और कर रहे हैं। हां

774
00:56:31,360 --> 00:56:34,320
जी।

775
00:56:34,320 --> 00:56:38,480
जी शिव जी लास्ट एक शॉर्ट

776
00:56:38,480 --> 00:56:42,480
वीडियो में एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया था शायद जिज्ञासा है

777
00:56:42,480 --> 00:56:47,120
उनको उसका मैं उसने बड़ा किया है। मैं शॉर्ट में आपको समझा देता हूं।

778
00:56:47,120 --> 00:56:51,360
वो जो जिज्ञासु दर्शक है वो समाज इस मुद्दे पर आपके

779
00:56:51,360 --> 00:56:56,480
खिलाफ योजनाबद्ध फ्रेमवर्क बना रहा है।

780
00:56:56,480 --> 00:57:00,640
इस पर आप क्या स्पष्टीकरण देना चाहेंगे? उसने कहा है कि

781
00:57:00,640 --> 00:57:04,880
भाई वह जो है आर्य समाज हमारी ओर से जो पक्ष प्रस्तुत किया

782
00:57:04,880 --> 00:57:08,880
है उसको आधार बना के विंडा कर रहा है और यह कह रहा है कि गुरु

783
00:57:08,880 --> 00:57:12,960
की सब बात मान लो। हमने अपने किसी वीडियो में यह नहीं कहा है कि गुरु की

784
00:57:12,960 --> 00:57:16,960
शास्त्र विरुद्ध बातों को भी मान लिया जाए। ना

785
00:57:16,960 --> 00:57:21,120
हमने सदैव कहा गुरु गोविंद और ग्रंथ हर वीडियो के अंत में

786
00:57:21,120 --> 00:57:25,280
आपको चित्र दिखाई देता होगा एम थ्री जी गुरु गोविंद और ग्रंथ

787
00:57:25,280 --> 00:57:29,360
हमने कहा सदैव तो हमने ये कभी कहा ही नहीं है हमने कब कहा कि शबरी

788
00:57:29,360 --> 00:57:33,360
के विषय में हम शास्त्री व्याख्या नहीं देंगे हमने कहा क्या

789
00:57:33,360 --> 00:57:37,520
बुद्ध के विषय में हम शास्त्री व्याख्या नहीं देंगे मोटे मोटे तौर पर हमने चीजें बताई

790
00:57:37,520 --> 00:57:41,520
भी अपनी रखी भी प्रश्न यह है कि कोई भी व्यक्ति उठ के

791
00:57:41,520 --> 00:57:46,480
खड़ा हो जाएगा और अपने आप को आचार्य बोल के

792
00:57:46,480 --> 00:57:49,360
क्या कहते हैं और जो है शंकराचार्य का विरोध

793
00:57:49,360 --> 00:57:53,520
करने लगेगा। परंपरा प्राप्त आचार्यों के निग्रह के नाम पर लोगों को उनके

794
00:57:53,520 --> 00:57:57,680
प्रति अनास्थावान बनाने लगेगा। जिससे कि विधर्मियों

795
00:57:57,680 --> 00:58:01,680
के खेमे में जाकर के जब वो हमारे शास्त्रों का अर्थ कर रहे होंगे विधर्मी

796
00:58:01,680 --> 00:58:05,760
तो हम उनसे ये नहीं कह पाएंगे भैया परंपरा प्राप्त आचार्यों के अर्थ को हमें स्वीकार

797
00:58:05,760 --> 00:58:10,080
करना पड़ेगा। क्यों? क्योंकि वो कहेगा विधर्मी भैया अमुक अमुक विषयों में परंपरा

798
00:58:10,080 --> 00:58:14,160
प्राप्त आचार्यों ने गलत व्याख्या की है। तो उनको प्रमाण के तौर पर कैसे माना

799
00:58:14,160 --> 00:58:18,800
जाए? तो इस नुकसान से बचने के लिए हम सीधे

800
00:58:18,800 --> 00:58:22,800
सबसे पहले इस सिस्टम पर आघात करेंगे ना

801
00:58:22,800 --> 00:58:27,120
कि कोई भी व्यक्ति बिना परंपरा के क्वेश्चन उठा कैसे रहा है। परंपरा

802
00:58:27,120 --> 00:58:31,280
प्राप्त आचार्यों की व्याख्या पर। यह नहीं है कि उसको क्वेश्चन पूछने

803
00:58:31,280 --> 00:58:35,440
का हक नहीं है। परंतु यदि कोई अपने आप को आचार्य

804
00:58:35,440 --> 00:58:39,760
घोषित कर रहा है तो हम स्वतंत्र रूप से उससे पूछ रहे हैं कि तुमको आचार्य कैसे

805
00:58:39,760 --> 00:58:44,000
बने? शास्त्र कहां से मिले? वो एक अलग चैप्टर है। शबरी के विषय में हमारा

806
00:58:44,000 --> 00:58:48,080
जवाब क्या है? उससे संतुष्टि हो रही है लोगों को कि नहीं हो रही है?

807
00:58:48,080 --> 00:58:52,080
रामानुज वाले उससे संतुष्ट है कि नहीं? रामानुज रामानुजाचार्य जी की बातों

808
00:58:52,080 --> 00:58:56,160
से शंकराचार्य वाले संतुष्ट है कि नहीं? ये अलग विषय है। कोई

809
00:58:56,160 --> 00:59:00,960
भी व्यक्ति खुद को आचार्य घोषित करके और जो है प्रश्न करने लगेगा

810
00:59:00,960 --> 00:59:04,800
प्रश्न ना भी करे। मगर यदि वो अवमानना

811
00:59:04,800 --> 00:59:09,120
कर रहा है आचार्यों की स्वयं को आचार्य बना करके और विरोधी

812
00:59:09,120 --> 00:59:13,360
बातें फैला रहा है जो हमारे रहे सहे प्रमाणिक आचार्यों के रूप में हमें शब्द

813
00:59:13,360 --> 00:59:18,160
प्रमाण प्राप्त है उनके प्रति निग्रह की दृष्टि रखने

814
00:59:18,160 --> 00:59:22,240
की भावना का पोषण कर रहा है यदि कोई व्यक्ति तो हम उसकी

815
00:59:22,240 --> 00:59:26,160
प्रामाणिकता उससे पूछ लेंगे

816
00:59:26,160 --> 00:59:30,240
पूछ ली जी हमने प्रमाणिकता पूछने में ये

817
00:59:30,240 --> 00:59:34,560
थोड़ी ना कहा कि हम जो हमारे पास शबरी का पक्ष नहीं है शास्त्री ये कहां कहा

818
00:59:34,560 --> 00:59:39,280
है क्या कहीं या हमारे पास बुद्ध का पक्ष नहीं है शास्त्री है

819
00:59:39,280 --> 00:59:43,680
ये नहीं कहा हमने मोटे मोटे तौर पर तो हमने बता ही दिया है

820
00:59:43,680 --> 00:59:48,320
और विस्तृत रूप से अलग से जो है वीडियो बना करके एक

821
00:59:48,320 --> 00:59:52,400
जैसे राधा जी के बारे में बहुत दिनों से समय से चल रहा है राधा जी राधा

822
00:59:52,400 --> 00:59:56,480
मां के ऊपर बहुत सारी सवाल उठते हैं जो श्री कृष्ण की

823
00:59:56,480 --> 01:00:00,480
रास लीला उनका जो कुब्जा कुब्जा का प्रसंग है और राधा कृष्ण के

824
01:00:00,480 --> 01:00:04,640
ऊपर तो इतने दिन हो गए हम नहीं बना पाए। तो

825
01:00:04,640 --> 01:00:09,600
हमने कहीं भी यह नहीं कहा कि भाई शास्त्रों के विरुद्ध हम गुरु को मानते हैं।

826
01:00:09,600 --> 01:00:13,680
तो अगर हमारी जो हमने बात नहीं कही है उसको तुम बना करके और

827
01:00:13,680 --> 01:00:17,840
फिर उसके ऊपर आधारित होकर के प्रश्न कर रहे हो। तो ये तुम्हारी बेवकूफी

828
01:00:17,840 --> 01:00:20,000
है। इसके बारे में भागवतानंद से संपर्क करो। उसने

829
01:00:20,000 --> 01:00:24,240
अपने एक वीडियो में बताया था कि जो सामने वाले में ने नहीं भी बोला

830
01:00:24,240 --> 01:00:28,320
है उसको तुम अपनी ओर से उसके विचारों को व्यक्त करके

831
01:00:28,320 --> 01:00:32,320
फिर उसका खंडन करके दिखा रहे हो। तो हमने ऐसा कहा ही नहीं है कि शास्त्र के

832
01:00:32,320 --> 01:00:36,400
विरुद्ध गुरु को मान लो। हमने कहा है कि ना तो

833
01:00:36,400 --> 01:00:40,480
गुरु को छोड़ सकते हो ना शास्त्र को छोड़ सकते हो। केवल शास्त्र को भी नहीं ले सकते

834
01:00:40,480 --> 01:00:44,480
केवल गुरु को भी नहीं ले सकते। धर्म तो तभी प्राप्त होगा जब

835
01:00:44,480 --> 01:00:48,560
गुरु और शास्त्र दोनों एक बात बोलेंगे। वो धर्म है।

836
01:00:48,560 --> 01:00:53,760
वो ब्रह्म है। शास्त्री भी बोले और गुरु भी बोले।

837
01:00:53,760 --> 01:00:58,000
केवल गुरु नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गोविंद भी नहीं। गुरु गोविंद

838
01:00:58,000 --> 01:01:02,080
और ग्रंथ इन तीनों के सामंजस्य से मिलेगा। तो यदि कोई इस भावना

839
01:01:02,080 --> 01:01:06,160
का पोषण कर रहा है कि नहीं नहीं केवल शास्त्र से हो जाएगा तो हम उसको रोकेंगे

840
01:01:06,160 --> 01:01:11,280
पूछेंगे उससे और यही काम कर रहा है भागवतानंद केवल शास्त्र से हो जाएगा।

841
01:01:11,280 --> 01:01:15,680
केवल शास्त्र से हो जाएगा तो परंपरा की आवश्यकता ही क्या है?

842
01:01:15,680 --> 01:01:19,760
हम फिर शास्त्र आएंगे कहां से? क्या शास्त्र है और क्या

843
01:01:19,760 --> 01:01:24,640
शास्त्र नहीं है? कौन घोषित करेगा? अगर केवल शास्त्र से हो जाएगा।

844
01:01:24,640 --> 01:01:28,800
तो यह सारी बातें

845
01:01:28,800 --> 01:01:34,160
जी जी इसमें काफी स्पष्टीकरण आपने दे दिया

846
01:01:34,160 --> 01:01:38,160
आर्य समाज द्वारा बातें आधार बनाने की है

847
01:01:38,160 --> 01:01:42,160
तो आप देख लो आर्य समाज ने दोनों पक्षों में से किस पक्ष की किस पक्ष का

848
01:01:42,160 --> 01:01:46,480
समर्थन किया है अलंकारियों का चैनल आप टटोल लो जाकर के

849
01:01:46,480 --> 01:01:50,640
समर्थन किसका कर रहे हैं भागवत आनंद के पक्ष का

850
01:01:50,640 --> 01:01:55,040
क्यों कर रहे हैं क्योंकि उन्हें रामानुजाचार्य

851
01:01:55,040 --> 01:01:59,680
जी से वर्तमान में दिक्कत नहीं हो रही है। जो पक्ष समर्थन कर रहे हैं।

852
01:01:59,680 --> 01:02:03,680
है ना? उन्हें रामानुजियों से दिक्कत नहीं हो रही। भागवतानंद से

853
01:02:03,680 --> 01:02:07,920
भी दिक्कत नहीं हो रही। जिसने उन्हें गाली दी इनको क्या

854
01:02:07,920 --> 01:02:12,160
कहते हैं? दयानंद जी के लिए इतना अनाप शनाप बका उनसे भी उसे

855
01:02:12,160 --> 01:02:16,160
उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। उन्हें दिक्कत हो रही है। शिवश नारायण द्विवेदी ये

856
01:02:16,160 --> 01:02:21,040
पूछ रहा है कि तुम्हारी परंपरा क्या है? वेद मंत्र कैसे आए?

857
01:02:21,040 --> 01:02:25,120
जिसके मंत्र पर विश्वास है उसके अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं? इसके अर्थ पर विश्वास नहीं है।

858
01:02:25,120 --> 01:02:30,880
उसके मंत्र पर विश्वास। क्यों? ये जो सवाल है वो जो पूछ रहा है

859
01:02:30,880 --> 01:02:35,200
इस सवाल के विरोध में उसके ऐसे ही कुछ अपने प्रियजन

860
01:02:35,200 --> 01:02:39,360
जब खड़े हो रहे हैं जिन पर वो विश्वास प्रकट करता

861
01:02:39,360 --> 01:02:43,440
है तो हमें उनका समर्थन करना चाहिए। जिससे कि

862
01:02:43,440 --> 01:02:43,940
कल को

863
01:02:43,840 --> 01:02:48,000
जब हमसे वो पूछेगा तो हम भी वही जवाब दे दे जो आज ये दे

864
01:02:48,000 --> 01:02:52,080
रहे हैं। इसलिए मैं पीछे नहीं हट सकता इस

865
01:02:52,080 --> 01:02:56,080
बात से। अगर उनकी बात सुनकर के भागवत के पक्ष की ओर

866
01:02:56,080 --> 01:03:00,080
से जो भी बातें बोली गई है परंपरा के लिए वो बातें सुनकर के

867
01:03:00,080 --> 01:03:04,080
मैं प्रतिकार नहीं करूंगा तो कल को आर्य समाजी उनका सहारा लेंगे ना तुमने यहां भी तो

868
01:03:04,080 --> 01:03:08,720
ये बातें सुन ली थी तो मैं तो प्रश्न करूंगा फिर

869
01:03:08,720 --> 01:03:13,040
आप खुद देख लो आर्य समाजी की ओर किसका पक्ष जा रहा है आर्य समाजी के समर्थन

870
01:03:13,040 --> 01:03:18,160
में उससे पता लगा लो किसका पक्ष वो है अवैध

871
01:03:18,160 --> 01:03:22,240
वो तो देखा हम समझ में आया खाली

872
01:03:22,240 --> 01:03:26,400
आर्य द्विवेदी वो शिवश नारायण द्विवेदी और

873
01:03:26,400 --> 01:03:30,400
भागवतानंद में से दोनों में से किसका समर्थन कर रहे हैं? क्यों?

874
01:03:30,400 --> 01:03:34,720
क्योंकि परंपरा के विषय में यदि मैं मैं परंपरा

875
01:03:34,720 --> 01:03:38,800
के विषय में सवाल कर रहा हूं तो जिस जगह पर आकर के आर्य समाज खड़ा हो रहा है

876
01:03:38,800 --> 01:03:43,040
वहीं पर भागवतानंद खड़ा हो रहा है। अब ऐसे में वह भागवतानंद

877
01:03:43,040 --> 01:03:47,280
क्योंकि भागवतानंद को आश्रय प्राप्त है जो है जिनके जिनके

878
01:03:47,280 --> 01:03:51,280
प्रति मेरा मेरा भी वह है श्रद्धा तो ऐसे में जब

879
01:03:51,280 --> 01:03:55,440
उनके पक्ष से कुछ बोला जा रहा है भागवतानंद के समर्थन में

880
01:03:55,440 --> 01:03:59,040
तो वो उस उन बातों का समर्थन इसीलिए कर रहे हैं कि हमारे पत्ते

881
01:03:59,040 --> 01:04:03,120
सही हो जाए हमें इस बात के जवाब देने से

882
01:04:03,120 --> 01:04:07,600
मुक्ति मिल जाए कि हमारी परंपरा क्या है इसीलिए वो ऐसा कर

883
01:04:07,600 --> 01:04:11,840
नहीं तो वो मेरा समर्थन भी तो कर सकते थे भाई मैं तो दया दयानंद जी बोलता

884
01:04:11,840 --> 01:04:16,160
हूं वो तो तूक बोलता है पता नहीं क्या-क्या बोला था वो शौच

885
01:04:16,160 --> 01:04:21,040
इत्यादि तक पे हंसी मजाक ये सब तो मैं नहीं करता हूं पर्सनल टैक्स

886
01:04:21,040 --> 01:04:25,120
मगर क्यों कर रहे हैं वो हम इसीलिए क्योंकि वहां उनको

887
01:04:25,120 --> 01:04:29,200
सुरक्षा का घेरा मिल रहा है इसी इसी के चलते बहती गंगा में हाथ

888
01:04:29,200 --> 01:04:33,360
धोने से और जो है हमें जो है सुरक्षा मिल जाएगी इसके इस प्रश्न

889
01:04:33,360 --> 01:04:37,520
से कि तुम्हारी परंपरा क्या है वेद मंत्र कैसे है इसीलिए उसका

890
01:04:37,520 --> 01:04:41,600
समर्थन करते तो जो आर्य समाज आधार

891
01:04:41,600 --> 01:04:45,840
बना रहा है वो मेरी बातों का आधार नहीं बना रहा है। वो

892
01:04:45,840 --> 01:04:49,920
भागवतन के पक्ष से जो बातें बोली जा रही है उनका आधार बना रहा है। उनसे

893
01:04:49,920 --> 01:04:54,000
अपनी चीजों को पुष्ट कर रहा है। क्योंकि वो वही सारी बातें बोली जा रही है वहां पे वही प्रश्न

894
01:04:54,000 --> 01:04:58,640
फंस रहे हैं जो आर्य समाजियों के यहां फंसते हैं। जी

895
01:04:58,640 --> 01:05:02,640
काफी खाली आर्य समाज ही नहीं शिवानी भाई इसमें जितने भी

896
01:05:02,640 --> 01:05:06,880
लोग गुरु शिष्य परंपरा का खंडन करते हैं उन सबको एक तरह से इनकी

897
01:05:06,880 --> 01:05:11,520
तरफ से बल मिल रहा है।

898
01:05:11,520 --> 01:05:16,800
अगर हम परंपरा के सिस्टम पे उंगली उठा देंगे

899
01:05:16,800 --> 01:05:21,120
तो इस वाले ये कहते हैं कि भाई मोहम्मद ने तो अच्छा बताया

900
01:05:21,120 --> 01:05:26,000
था तो मोहम्मद की चीजें तुम तक आई कैसे

901
01:05:26,000 --> 01:05:30,000
कुरान का गलत मतलब निकाल रहे हैं कुरान वाले कुरान वाले कुरान में

902
01:05:30,000 --> 01:05:34,000
जो लिखा है वो अच्छा लिखा है गलत मतलब निकाल रहे हैं तो उनकी ये बातें

903
01:05:34,000 --> 01:05:38,400
भी माननी पड़ जाएंगी कि भैया तुम कैसे बोल रहे हो कि भैया हमने अपने

904
01:05:38,400 --> 01:05:42,400
विवेक से पता किया है तो कुरान को भी अच्छा मान लो,

905
01:05:42,400 --> 01:05:46,640
बाइबल को भी अच्छा मान लो। ये सब फिर करना चालू करना पड़ेगा। अगर

906
01:05:46,640 --> 01:05:50,640
परंपरा के भाई परंपरा के बिना ये लोग कर्मणा आचार्य

907
01:05:50,640 --> 01:05:54,720
बन रहे हैं। ये लोग वैसे तो कर्मणा वर्ण व्यवस्था को नहीं मानते हैं। मगर

908
01:05:54,720 --> 01:05:58,880
आचार्यों के विषय में कर्मणा आचार्य। कर्मणा आचार्य से काम नहीं चलेगा ना।

909
01:05:58,880 --> 01:06:02,960
पीछे से ठप्पा भी चाहिए प्रामाणिकता का। जैसे पीछे से जन्म भी चाहिए।

910
01:06:02,960 --> 01:06:06,960
कर्म भी चाहिए ब्राह्मण के लिए। पीछे से जन्म

911
01:06:06,960 --> 01:06:11,040
भी चाहिए। क्षत्रिय के लिए कर्म भी चाहिए, पीछे से जन्म

912
01:06:11,040 --> 01:06:15,040
भी चाहिए। इसी तरीके से केवल कर्म आचार्य नहीं चलेगा ना। पीछे

913
01:06:15,040 --> 01:06:19,200
से जन्म भी चाहिए। जन्म का मतलब गुरु के द्वारा वो अधिकार दिया

914
01:06:19,200 --> 01:06:23,360
जाना, गुरु के द्वारा वो ज्ञान दिया जाना वो भी चाहिए। प्रामाणिकता

915
01:06:23,360 --> 01:06:26,560
पीछे से फिर आचरण। क्योंकि जो आचरण

916
01:06:26,560 --> 01:06:30,640
जांचने का जो विषय है उसमें सुनिश्चितता नहीं

917
01:06:30,640 --> 01:06:34,800
है कि कौन एक्टिंग कर रहा है कौन एक्टिंग नहीं कर रहा है तो इसलिए पीछे

918
01:06:34,800 --> 01:06:38,800
से प्रमाण और फिर आगे से कर्मणा आचरण अब ये लोग

919
01:06:38,800 --> 01:06:42,800
खुद एक तरफ तो कर्मणा वर्ण व्यवस्था का विरोध करते हैं और फिर खुद यहां पर

920
01:06:42,800 --> 01:06:46,880
आकर के कर्मणा आचार्य तो बना रहे हैं कि भैया वो जो है शास्त्र

921
01:06:46,880 --> 01:06:50,960
है इसलिए मान लो अरे भैया जब पीछे से उसकी प्रामाणिकता सिद्ध

922
01:06:50,960 --> 01:06:54,960
नहीं हो रही तो आपको कैसे आप 24 घंटे उसके साथ रह रहे हो

923
01:06:54,960 --> 01:06:58,960
और बहुत सारी बातें आचरण में तो दोष साफ दिखाई दे रहा है। वह खुद कह रहा है मैं गाली

924
01:06:58,960 --> 01:07:03,360
बकता हूं। वो वाकलन के नाम पर छह बार झूठ बोल रहा है।

925
01:07:03,360 --> 01:07:07,520
स्त्रियों को निराधार वैश्या बोल रहा है। ये आचरण है आचार्य

926
01:07:07,520 --> 01:07:11,680
के। उससे जब कोई बात पूछी जा रही तो चार बार में चार पलटियां मार

927
01:07:11,680 --> 01:07:17,200
रहा है। ये आचरण ये आचार्य होता है। हम

928
01:07:17,200 --> 01:07:21,200
कर्मणा आचार्य बनाने की कोशिश कर रहे हो। अगर कर्मना पे भी आ जाएंगे तो

929
01:07:21,200 --> 01:07:25,520
उसके आचरण भी वैसे नहीं है। गुरु विरोधी सिद्ध होता है।

930
01:07:25,520 --> 01:07:30,720
जबकि गुरु के विषय में बहुत सारी चीजें बताई गई है।

931
01:07:30,720 --> 01:07:35,040
गरुड़ पुराण में और गुरु गीता में इत्यादि

932
01:07:35,040 --> 01:07:40,560
में गुरु के विषय में बहुत सारी चीजें बताई गई। जी

933
01:07:40,560 --> 01:07:44,880
जी आखरी प्रश्न लूंगा मैं शिवानी भाई यही कि

934
01:07:44,880 --> 01:07:48,960
ये बहुत से लोग कहते हैं कि शिवश नारायण द्विवेदी

935
01:07:48,960 --> 01:07:52,960
जो है वो शास्त्रों को प्रमाण और शास्त्रों से बात ना

936
01:07:52,960 --> 01:07:57,120
करके घंटों बिता देता है खाली तर्क वितर्क और कुतर्क से ये कैसे

937
01:07:57,120 --> 01:08:01,440
वो कैसे अगर सर्वशक्तिमान है तो ये कैसे वो कैसे

938
01:08:01,440 --> 01:08:05,520
शास्त्रों का आधार नहीं रखता है ऐसा भी शास्त्रों का कई लोगों का है

939
01:08:05,520 --> 01:08:09,600
कई लोगों का बात तो ये गलत है। शास्त्रों का आधार नहीं रखते हैं। मगर

940
01:08:09,600 --> 01:08:13,680
शास्त्रों की पहली बात तो सबने अपनी व्याख्या कर रखी है। तो हम

941
01:08:13,680 --> 01:08:17,840
जब शास्त्र खोलेंगे तो कहेंगे ये वाली व्याख्या क्यों मानी जाए? हमारी क्यों ना मानी जाए?

942
01:08:17,840 --> 01:08:21,920
तो जो प्रश्न आना ही है यही पे आना ही है कि भाई किसकी

943
01:08:21,920 --> 01:08:25,920
व्याख्या माननी तो परंपरा बता दो। और

944
01:08:25,920 --> 01:08:29,920
यदि तुम्हारी व्याख्या को मान के चलते हैं तो क्या सर्वशक्तिमान ईश्वर मिलता है? वहां पर

945
01:08:29,920 --> 01:08:33,920
परम स्वतंत्र मोक्ष मिलता है क्या वहां पर? तो जिस व्याख्या पर आना ही

946
01:08:33,920 --> 01:08:37,920
है यहां से होते हुए वही आना है तो उसी को सीधे बात टू द पॉइंट बात

947
01:08:37,920 --> 01:08:42,080
कर लेते हैं। दूसरी बात यह है कि लड़ाई सदैव हमें कोई

948
01:08:42,080 --> 01:08:46,480
इन लोगों से लड़ाई नहीं लड़नी। जो मूल युद्ध है वो है सनातन

949
01:08:46,480 --> 01:08:50,560
विरोधियों से। तो जब सनातन विरोधियों से जो

950
01:08:50,560 --> 01:08:54,960
युद्ध है वहां पर वो हमारे शास्त्रों का प्रमाण थोड़ी मानेंगे। बौद्धों

951
01:08:54,960 --> 01:08:55,760
से जब कोई बात

952
01:08:55,760 --> 01:09:00,000
चल रही होगी तो उनको हम अपने शास्त्र दिखाएंगे। देखो हमारे यहां तो ये लिखा है इसको मान लो।

953
01:09:00,000 --> 01:09:04,000
उससे काम नहीं चलेगा। वहां उनके सिद्धांत को उनके शास्त्रीय

954
01:09:04,000 --> 01:09:08,080
सिद्धांत को जो है उसका प्रतिकार करना पड़ेगा।

955
01:09:08,080 --> 01:09:12,960
उस दृष्टिकोण से सदैव अपनी बात को रखिए कि हम

956
01:09:12,960 --> 01:09:17,040
जो है सनातन के विरुद्ध तंत्रों से बात कर रहे हैं तब कैसे बात चलेगी वहां

957
01:09:17,040 --> 01:09:21,040
पर और ऐसा नहीं है आवश्यकता अनुसार शास्त्रों

958
01:09:21,040 --> 01:09:25,040
का संदर्भ भी लिया जाता है क्यों हमने हरिहर वेद पे जो वीडियो बनाया उसमें

959
01:09:25,040 --> 01:09:29,040
जाने कितने शास्त्रों के प्रमाण दिए हैं हरिहर वेद वाले

960
01:09:29,040 --> 01:09:33,040
बहुत सारे वीडियो शास्त्रों के प्रमाण दिए जहां आवश्यकता होती है देते ही

961
01:09:33,040 --> 01:09:37,600
है ईश्वर ने सृष्टि क्यों बनाई वेदों के चौथे अध्याय का

962
01:09:37,600 --> 01:09:41,920
अध्याय का पहला जो मंत्र है श्वतापनिषद का

963
01:09:41,920 --> 01:09:46,480
दिया ना क्यों दिया प्रमाण जी केवल तर्क में थोड़ी ना चलते प्रमाण भी

964
01:09:46,480 --> 01:09:50,480
जहां प्रमाण आवश्यक है अब बात हो रही है कोई ये क्लेम कर रहा है

965
01:09:50,480 --> 01:09:54,480
कि वेदों में नात प्रतिमा अस्ति लिखा है तो हम पहले पूछेंगे प्रमाण

966
01:09:54,480 --> 01:09:58,560
देने की बजाय उसमें प्रमाण कहां चलेगा नात प्रतिमा का अपना अर्थ बता

967
01:09:58,560 --> 01:10:04,560
रहे हैं तो हम पूछेंगे भैया तुम्हारे पास वेद मंत्र आया कैसे

968
01:10:04,800 --> 01:10:08,240
जी जी

969
01:10:08,240 --> 01:10:12,320
काफी जगह पर काफी जगह पर आप शास्त्रों का प्रमाण देते हैं। ऐसा नहीं है। वेदों का

970
01:10:12,320 --> 01:10:16,560
भी प्रमाण बहुत जगह पर दिया हुआ है। बस एक मिनट मैं अपनी बात करके फिर

971
01:10:16,560 --> 01:10:20,720
पूरा कर दूंगा। यही है कि इस आज के डिस्कशन का

972
01:10:20,720 --> 01:10:25,200
कारण यही था। काफी लोग कमेंट करते हैं तो जैसे कि मैं

973
01:10:25,200 --> 01:10:29,280
आहान चैनल को सपोर्ट करता हूं। गुरु शिष्य परंपरा इसके अकॉर्डिंग

974
01:10:29,280 --> 01:10:33,600
इसीलिए तो मैं जाकर के जब वीडियो देखता हूं किसी दूसरे

975
01:10:33,600 --> 01:10:37,600
का भी अगर जो आह्वान के विरुद्ध में बनाते हैं शिवा भाई

976
01:10:37,600 --> 01:10:41,680
के विरुद्ध में बनाते हैं तो वहां पर बहुत से लोग कमेंट करते हैं जो हमारे मैक्सिमम

977
01:10:41,680 --> 01:10:45,680
सनातन भाई ही होते हैं तो वो लोग कमेंट तो कर देते हैं लेकिन जब उनको

978
01:10:45,680 --> 01:10:49,920
सामने आने के लिए बोला जाता है तो वो आने से हिचकिचाते

979
01:10:49,920 --> 01:10:54,480
हैं भागते हैं अगर वो सामने आ जाएंगे तो उसका उत्तर मैं एक बात बता दूं

980
01:10:54,480 --> 01:10:59,040
सामने आने वाली बात कभी मैं एक बात बता दूं वाला कई बार बता चुका हूं।

981
01:10:59,040 --> 01:11:03,360
देखो ये बातें ऐसी होती है कि जब मैं आपने कोई बात पूछी

982
01:11:03,360 --> 01:11:07,520
पहली बात तो यह है कि मेरे पास समय होना चाहिए। ठीक है?

983
01:11:07,520 --> 01:11:11,600
दूसरी बात ये है कि मैंने यदि कोई आपने यदि कोई बात पूछी मैंने उसका उत्तर

984
01:11:11,600 --> 01:11:15,600
दिया। यदि आपके पास अगला प्रश्न है तो आप करोगे नहीं तो आप

985
01:11:15,600 --> 01:11:19,760
हो सकता है वहां कोई जवाब ही ना दो। गायब हो जाओ। इससे क्या निष्कर्ष हुआ?

986
01:11:19,760 --> 01:11:20,260
कोई

987
01:11:20,080 --> 01:11:24,160
परिणाम प्राप्त हुआ उस चर्चा का नहीं हुआ। यहां पर जब आपके पास उत्तर नहीं

988
01:11:24,160 --> 01:11:28,400
होगा। आप मौन हो गए तो दिखाई देगा कि आपके पास उत्तर नहीं है। जैसे

989
01:11:28,400 --> 01:11:33,040
भागवत आनंद से फर्स्ट राउंड में जब पूछा गया कौन सी परंपरा तो वो मौन हो गया।

990
01:11:33,040 --> 01:11:37,200
उत्तर नहीं था तो मौन हुआ ना वो दिखाई दिया। मगर

991
01:11:37,200 --> 01:11:41,440
कमेंट में जब कोई मौन होता है तो उसका वो दिखाई नहीं देता। प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होता।

992
01:11:41,440 --> 01:11:45,520
दूसरी बात कि वहां पर हमारी ऊर्जा वगैरह तो उतनी लगती है,

993
01:11:45,520 --> 01:11:49,760
मेहनत भी लगती है। परंतु वो जो कमेंट में जो चर्चा

994
01:11:49,760 --> 01:11:54,400
होती है वह इतनी उसका रीच नहीं होती है।

995
01:11:54,400 --> 01:11:58,640
तो एक अनजान व्यक्ति को कमेंट में हम अगर निरत्तर

996
01:11:58,640 --> 01:12:02,880
भी कर दें तो उनसे उससे हमें वह फल प्राप्त नहीं होता है जो हम जन जागरूकता

997
01:12:02,880 --> 01:12:07,600
के लिए कर रहे हैं। सनातन सनातन को संगठित करने के लिए कर रहे हैं।

998
01:12:07,600 --> 01:12:10,720
दूसरी बात

999
01:12:10,720 --> 01:12:16,720
दूसरी बात यह है कि

1000
01:12:16,720 --> 01:12:20,880
जब सामने व्यक्ति होता है वो विषयंतर करता है तो हम उसको वही की व

1001
01:12:20,880 --> 01:12:25,440
पॉइंट आउट करते हैं कि आप यहां विषय कर रहे हैं आप विषय जैसे कि

1002
01:12:25,440 --> 01:12:29,600
भागवतानंद ने क्या किया जब उससे परंपरा पूछी जा रही है कि तुम्हारे यहां अग्नि

1003
01:12:29,600 --> 01:12:33,680
पुराण तुमने सबरी भाई परंपरा बताना मेरे गलत होने

1004
01:12:33,680 --> 01:12:37,680
से तेरा सही होना सिद्ध थोड़ी ना होता है और मैंने पूछा पूछा था कि तुम्हें

1005
01:12:37,680 --> 01:12:41,840
कौन सी चर्चा करनी है कर लो भाई तब तो तुमने नहीं बोला था जब परंपरा

1006
01:12:41,840 --> 01:12:45,920
का विषय शुरू हुआ तो तुम्हारी चर्चाएं निकल आई तो विषयंतर करते करते

1007
01:12:45,920 --> 01:12:50,000
जब वो बार-बार यहां तक ले आया कि भाई शबरी जो है पहले पैर धुलाया तब

1008
01:12:50,000 --> 01:12:54,000
वो अंदर गए तो ये यहां पर मैंने कहा ना कि

1009
01:12:54,000 --> 01:12:58,720
विषयांतर हो रहा है भाई प्रश्न चल रहा है तुम्हारी परंपरा क्या है

1010
01:12:58,720 --> 01:13:02,080
वो बताओ

1011
01:13:02,080 --> 01:13:06,240
तो विषयांतर भी कर लेता है व्यक्ति जब कमेंट में बात करता है दूसरी

1012
01:13:06,240 --> 01:13:10,240
बात इतने के सारे कमेंट्स में जो है उसको उत्तर दे दे के दे दे के वहां पर

1013
01:13:10,240 --> 01:13:14,320
निरत्तर करने की नत्तर करने का संभव भी नहीं है एक व्यक्ति को

1014
01:13:14,320 --> 01:13:18,480
और अंतत गत वो निरत्तर हो भी जाएगा तो वहां से कोई प्रत्यक्ष परिणाम

1015
01:13:18,480 --> 01:13:22,560
ऐसा इतना ठोस प्राप्त नहीं होगा कि हां भैया वो

1016
01:13:22,560 --> 01:13:26,880
कोई निरुत्तर हुआ सामने से निरुत्तर होगा तो वो दिखाई देगा उसका निरुत्तर

1017
01:13:26,880 --> 01:13:31,200
होना इसलिए हम कहते हैं फट से ज्यादा दिक्कत है तो आप सामना करिए

1018
01:13:31,200 --> 01:13:33,600
बस

1019
01:13:33,600 --> 01:13:37,680
अगर मैं अन्याय भी कर दिखाई देगा ना लोगों को तो

1020
01:13:37,680 --> 01:13:41,840
डर कैसा लाइव चर्चा में यदि मैं अन्याय कर रहा हूं

1021
01:13:41,840 --> 01:13:47,840
तो वो भी तो दिखेगा ना लोगों को

1022
01:13:48,560 --> 01:13:52,720
चलिए और आपको क्या लगता है शिवश भाई ये क्यों नहीं ये क्यों

1023
01:13:52,720 --> 01:13:56,880
ये क्यों नहीं आना चाहते लाइव आपको क्या लगता है आपके अनुभव से ये लाइव क्यों नहीं आते

1024
01:13:56,880 --> 01:14:01,040
बोलते तो पीछे ही बोलते हैं नहीं डरता यार डरते हैं या क्या

1025
01:14:01,040 --> 01:14:03,360
है

1026
01:14:03,360 --> 01:14:06,080
हां

1027
01:14:06,080 --> 01:14:12,080
ये जो लाइव नहीं आते हैं इसका कारण आपके अनुसार आपको क्या लगता है?

1028
01:14:12,480 --> 01:14:17,520
इसीलिए क्योंकि इनके पास सामर्थ्य नहीं है अपनी चीजों को पुष्ट करने के लिए

1029
01:14:17,520 --> 01:14:21,520
इसीलिए लाइव नहीं आते हैं। यदि होता तो ये बढ़ चढ़ के आते भागता

1030
01:14:21,520 --> 01:14:25,680
भागते हुए आते। मगर नहीं है उसके पास सवालों का जवाब हो।

1031
01:14:25,680 --> 01:14:29,920
400 ग्रंथ कर ले, 700 कर ले, सात लाख कर ले।

1032
01:14:29,920 --> 01:14:35,120
सात करोड़ ग्रंथों का प्रमाण ले आए। प्रश्न वही रहेगा

1033
01:14:35,120 --> 01:14:39,120
और एक जो हिस्सा था कि वह ब्रह्मा कुमारी जैसा खुद को

1034
01:14:39,120 --> 01:14:43,120
बना सकता था वो भी उसने कट कर दिया है। अमृतानंद सरस्वती से

1035
01:14:43,120 --> 01:14:47,120
जो है अपने मंत्र को सत्यापित करने जो गया है। खुद ही अपने

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01:14:47,120 --> 01:14:51,360
पैरों में कुल्हाड़ी मार ली। तब तो कम से कम यह तो कह सकता था जिसकी मेरे ऊपर आस्था हो वो विश्वास

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01:14:51,360 --> 01:14:55,360
रखे इसकी ना हो ना रखे। हालांकि उस आस्था में भी जो निग्रह

1038
01:14:55,360 --> 01:14:59,440
परंपरा है उसके संबंध में बहुत सारी तार्किक प्रश्न खड़े

1039
01:14:59,440 --> 01:15:03,680
हो जाते हैं। वो एक अलग है। फिर हम उसके

1040
01:15:03,680 --> 01:15:07,040
निग्रहत्व को समाप्त करते।

1041
01:15:07,040 --> 01:15:11,440
मगर तो पहला स्टेप है उसने ये करके

1042
01:15:11,440 --> 01:15:15,440
अमृतानंद सरस्वती के पास जाकर के अपने मंत्र को सत्यापित करने की बात कह

1043
01:15:15,440 --> 01:15:19,680
करके अपने पैरों पर बहुत बड़ी कुल्हाड़ी मार ली है। उसके बाद जो दूसरी

1044
01:15:19,680 --> 01:15:25,040
कुल्हाड़ी है वो है निग्रह। सभी संप्रदायों में अनुशासनात्मक

1045
01:15:25,040 --> 01:15:29,200
निग्रह वो भी शास्त्रार्थ के द्वारा। एक प्रश्न यह भी आया कि पूरी

1046
01:15:29,200 --> 01:15:33,280
के शंकराचार्य जी शास्त्रार्थ क्यों नहीं करते? जब उन्हें कोई ललकारता है तो दूसरे को ललकारने

1047
01:15:33,280 --> 01:15:37,520
के बाद सामने नहीं आ रहा है तो फिर उस पर दोष दृष्टि क्यों? पूरी के शंकराचार्य जी ने सीधे

1048
01:15:37,520 --> 01:15:43,520
सीधे कह रखा है मेरी शैली धर्म संस्थापना में शास्त्रार्थ वाली नहीं है।

1049
01:15:46,160 --> 01:15:50,240
अच्छा मगर तुमने क्या कह रखा है कि तुम निग्रह कैसे करोगे? शास्त्रार्थ के

1050
01:15:50,240 --> 01:15:54,320
द्वारा तुमने तो यह कह रखा है। दूसरी बात

1051
01:15:54,320 --> 01:15:58,320
यदि तुमको सामने वाला योग्य नहीं लग रहा है तो फिर

1052
01:15:58,320 --> 01:16:02,400
भैया उससे तुमने लाइव चर्चा की बात तो खुद ही सबसे पहले कही थी। यदि वो योग्य नहीं

1053
01:16:02,400 --> 01:16:06,400
था तो अच्छा बाद में योग्य नहीं लगा तो फिर तुम इस चीज के लिए क्यों तैयार हो कि मेरे

1054
01:16:06,400 --> 01:16:10,480
अनुकूल वातावरण में तुम आकर के मुझसे प्रश्न पूछ लेना। मतलब मेरा कहीं शिविर

1055
01:16:10,480 --> 01:16:14,560
लगा हो वहां तुम प्रश्न पूछ लेना। मगर बराबरी का जहां पर मौका हो वहां नई प्रश्नों

1056
01:16:14,560 --> 01:16:19,360
का उत्तर देने के लिए मौजूद होंगे।

1057
01:16:19,360 --> 01:16:23,360
तीसरी बात यदि स्तर का नहीं है तो उसके लिए वीडियो बना क्यों रहे हो पोस्ट

1058
01:16:23,360 --> 01:16:27,600
क्यों लिख रहे हो नाम ले ले के जैसे बीइंग स्पिरिट सोल वाले के

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01:16:27,600 --> 01:16:31,840
लिए हमने कुछ भी लिखना लिखाना बंद कर रखा है बेकार का नगण्य व्यक्ति

1060
01:16:31,840 --> 01:16:36,160
है हमारे लिए वो करता रहा है कुछ भी भाई उसका

1061
01:16:36,160 --> 01:16:40,320
निराकरण प्रस्तुत करके हमें प्राप्त क्या होगा प्रामाणिक रूप से वो इस का आदमी

1062
01:16:40,320 --> 01:16:44,320
है भी कि नहीं है हमें क्या पता कम से कम एक चेहरा दिखा के

1063
01:16:44,320 --> 01:16:48,480
फॉलोअ आता है तो कम से कम लोगों को दिखता तो है कि मान्यता से प्रभावित था।

1064
01:16:48,480 --> 01:16:53,200
निरत्तर हुआ। इसको बरगलाया गया था। वो तो वो भी नहीं दिख रहा है।

1065
01:16:53,200 --> 01:16:57,280
एडिटिंग कर करके उस्ताद बना जा रहा है। खुद ही से निर्णय कर लेता

1066
01:16:57,280 --> 01:17:01,280
है कि हमारे आचार्यों ने ये किया और फिर उसका खंडन लिख देगा। देखो यहां

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01:17:01,280 --> 01:17:05,440
बवाश नारायण द्विवेदी अपने आचार्यों के इस तरह से विरुद्ध है। क्योंकि

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01:17:05,440 --> 01:17:09,440
उसको पता है कि हमारे आचार्यों ने क्या कहा क्योंकि उसने यहां से कुरगम्य

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01:17:09,440 --> 01:17:13,440
विद्या के द्वारा शिक्षा प्राप्त की है। हमने थोड़ी ना प्राप्त की है। उसने प्राप्त

1070
01:17:13,440 --> 01:17:18,320
की है। यह है

1071
01:17:18,320 --> 01:17:22,720
जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद है। शिवश भाई आपने बहुत ही

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01:17:22,720 --> 01:17:26,960
सुंदर उत्तर दिया इतने सारे कमेंट्स का। मैं सबसे यही निवेदन

1073
01:17:26,960 --> 01:17:30,960
करूंगा। किसी को भी आपत्ति है, कुछ कहना है तो लाइव आकर के

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01:17:30,960 --> 01:17:35,280
निडरता से सामने आकर के प्रश्न कीजिए। यहां कोई ये नहीं है।

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01:17:35,280 --> 01:17:39,360
बाकी कमेंट में लगे रहना है तो जैसे शिवा भाई कहते हैं कि कमेंट

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01:17:39,360 --> 01:17:43,760
वॉरियर बनना है तो आपकी मर्जी। कमेंट वॉरियर बने रहिए। कमेंट वॉरियर

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01:17:43,760 --> 01:17:48,160
बनो, एडिटिंग वॉरियर बनो। बिहार समाजियों से कहा तो है

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सर्वत्र जो एक रस ईश्वर है

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01:17:52,640 --> 01:17:56,640
वो कोई कार्य करने वाला जैसे ही क्रियाशील होगा तो वो

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01:17:56,640 --> 01:18:01,040
कम ज्यादा होगा इस संबंध में आप वीडियो बनाओ निर्गुण सगुण को

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01:18:01,040 --> 01:18:05,040
वो लोग क्या कह रहे हैं कि भैया जब वो कुछ कर रहा है तो वह

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01:18:05,040 --> 01:18:09,040
सगुण है जब वो नहीं कर रहा है तो वो निर्गुण है ये उनका कहना है आर्य

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01:18:09,040 --> 01:18:13,520
समाज की जो सत्यार्थ प्रकाश है यानी कि

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01:18:13,520 --> 01:18:17,520
जैसे अगर मैं जिस समय कुछ नहीं कर रहा हूं तो वो जो मेरे अंदर

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01:18:17,520 --> 01:18:21,680
गुण नहीं है मुझे निर्गुण कहा जाएगा। कहां का सिद्धांत है भाई? तो बहुत

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01:18:21,680 --> 01:18:25,760
बड़े बेवकूफी भरी बात है ये। मेरे अंदर गुण नहीं है

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01:18:25,760 --> 01:18:29,840
जिस समय उन गुणों को यूज़ नहीं कर रहा हूं। ये कोई बात है क्या? और

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01:18:29,840 --> 01:18:33,360
जिस मैं यूज़ कर रहा हूं अगर मैं निर्गुण हूं तो जिस समय मैं यूज़ कर

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01:18:33,360 --> 01:18:37,440
रहा हूं उस समय मैं सगुण हो गया। वाह! तो अभी मैं

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01:18:37,440 --> 01:18:43,440
बैठा हुआ हूं, अभी मैं निर्गुण हूं कि नहीं?

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01:18:43,910 --> 01:18:49,910
[हंसी] जी बताओ भाई समझ रहा

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01:18:50,480 --> 01:18:52,640
तो

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01:18:52,640 --> 01:18:56,640
वो इस पर जवाब नहीं दे रहे हैं बाकी सब कुलाचिया मारते रहेंगे सब

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करते रहेंगे मगर इस बात का जवाब नहीं देंगे निर्गुण निर्गुण सगुण हुआ

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01:19:00,720 --> 01:19:04,800
कैसे एक रस ईश्वर जो है शक्ति के रूप में इधर उधर काम कैसे कर

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01:19:04,800 --> 01:19:09,520
रहा है बल कैसे लग रहा है धक्का कैसे लग रहा है प्रकृति में

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01:19:09,520 --> 01:19:13,840
प्रकृति को जो अवयव है उनमें इन सब बातों का जवाब है ही नहीं।

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01:19:13,840 --> 01:19:18,080
अवतार तो यही से सिद्ध हो जाता है। जब एक रस ईश्वर क्रियाशील

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01:19:18,080 --> 01:19:22,160
होता है तो निर्गुण ईश्वर जो होता है वो सगुण होता है। सगुण अवतार है

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01:19:22,160 --> 01:19:26,400
वो उसका प्रथम व से सिद्ध हो जाता है। जो उनका ये कहना है कि अपने स्वभाव

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01:19:26,400 --> 01:19:30,480
के विपरीत काम कैसे करता है? उसका जवाब है। ठीक

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01:19:30,480 --> 01:19:32,880
है।

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01:19:32,880 --> 01:19:37,120
जी। ये उसकी सामर्थता है कि वो निर्गुण

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01:19:37,120 --> 01:19:41,840
होते हुए भी क्रियाशील और सगुण हो जाता है और वो अवतार भी लेता है उसी क्रम में आगे।

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01:19:41,840 --> 01:19:46,160
ठीक है। जी चलिए

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01:19:46,160 --> 01:19:48,640
धन्यवाद है आपका शिवानी भाई आपने सारी

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01:19:48,640 --> 01:19:53,920
चीजों का उत्तर दिया उसके लिए। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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01:19:53,920 --> 01:19:57,360
जय श्री राम सभी

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01:19:57,360 --> 01:20:01,360
जय श्री राम। जय श्री राम।
