1
00:00:02,560 --> 00:00:06,080
जय श्री राम सभी को।

2
00:00:06,080 --> 00:00:12,080
आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और

3
00:00:12,880 --> 00:00:15,600
अ

4
00:00:15,600 --> 00:00:19,600
आज हमारे साथ इस से एक स्कॉन

5
00:00:19,600 --> 00:00:24,000
के एक फॉलोअ हैं। देवेश जी आप अपना कैमरा ऑन कर लीजिए।

6
00:00:24,000 --> 00:00:28,080
थोड़ा सा मैं मूल विषय पर चर्चा जो स्टार्ट हो उससे

7
00:00:28,080 --> 00:00:32,560
पहले कुछ बता दूं। आज मेरे संज्ञान में एक बात आई थी कि

8
00:00:32,560 --> 00:00:38,320
अवतार विरोधियों का यह कहना है कि अवतार यदि

9
00:00:38,320 --> 00:00:43,200
अ नित्य स्वरूप नहीं है हम

10
00:00:43,200 --> 00:00:47,200
है ना तो जो है उसको फिर ईश्वर क्यों माना

11
00:00:47,200 --> 00:00:51,360
जाए? उसमें कई सारे प्रश्न है। पहली बात

12
00:00:51,360 --> 00:00:54,400
यह है कि

13
00:00:54,400 --> 00:00:58,560
आप जब तक तत्वत जानते नहीं है ईश्वर को तब

14
00:00:58,560 --> 00:01:02,800
तक उसको आप यह नहीं सिद्ध

15
00:01:02,800 --> 00:01:07,120
कर सकते कि वो नष्ट होता है। और व्यवहार में

16
00:01:07,120 --> 00:01:11,520
ईश्वर जो है अविनाशी है। जो अवतार है वो अविनाशी है।

17
00:01:11,520 --> 00:01:16,000
और अविनाशी इसलिए है क्योंकि अगर वो

18
00:01:16,000 --> 00:01:17,600
वो अपनी ओर से क्या कर रहे हैं

19
00:01:17,600 --> 00:01:21,840
केवल अपने स्वरूप को केवल प्रकट और अप्रकट कर रहे हैं।

20
00:01:21,840 --> 00:01:25,840
यानी कि अगर वो ये लीला भी दिखा रहे हैं कि मैं नष्ट हो रहा है मेरा शरीर तो उसके

21
00:01:25,840 --> 00:01:29,840
बाद वो अपनी ओर से क्या कर रहे हैं? केवल अप्रकट हुआ और प्रकट हुआ। केवल

22
00:01:29,840 --> 00:01:34,160
वह इतना कर रहे हैं तो व्यवहार में वह अविनाशी है

23
00:01:34,160 --> 00:01:38,240
और क्योंकि वह जो तत्व है जिस जो तत्व जो आपके सामने प्रकट हुआ

24
00:01:38,240 --> 00:01:42,240
है क्योंकि वो तत्व वही तत्व है जो प्राप्तव्य है आपका

25
00:01:42,240 --> 00:01:46,880
जो व्यवहार में ना आ सकने वाला परम तत्व है। इस कारण से

26
00:01:46,880 --> 00:01:50,880
जो है उसे ईश्वर का अवतार कहा गया है। ये तो नहीं कहा

27
00:01:50,880 --> 00:01:55,120
गया कि मोक्ष के समय पे जो ईश्वर प्राप्त होता है उसका वही स्वरूप है।

28
00:01:55,120 --> 00:01:59,200
अब दूसरी बात है कि यदि वो वो वाला स्वरूप नहीं है अल्टीमेट

29
00:01:59,200 --> 00:02:03,280
वाला तो फिर उसको ईश्वर भी माना जाए। तो जो

30
00:02:03,280 --> 00:02:07,280
अवतार का विरोध करते हैं यद्यपि मैंने बहुत सारे तर्क कल

31
00:02:07,280 --> 00:02:11,760
की वीडियो में दिए थे जो अवतार का विरोध करते हैं

32
00:02:11,760 --> 00:02:15,760
है ना तो वो इस बारे में बात नहीं करते कि

33
00:02:15,760 --> 00:02:19,760
निर्गुण सगुण कैसे हुआ जो एक रस है

34
00:02:19,760 --> 00:02:24,560
वो कम ज्यादा कैसे हुआ इसमें बात नहीं करेंगे क्योंकि बात करेंगे अगर इसमें खुल के

35
00:02:24,560 --> 00:02:29,680
तो उनको अवतार वही पर स्वीकार कर लेना पड़ेगा सृष्टि की रचना ही नहीं हो सकती

36
00:02:29,680 --> 00:02:32,800
जो ईश्वर किसी भौतिक

37
00:02:32,800 --> 00:02:36,960
पदार्थ के अंदर और बाहर दोनों है। एक रस है। बराबर रूप से विद्यमान

38
00:02:36,960 --> 00:02:40,960
है। वह जब धक्का लगाएगा शक्ति अपनी लगाएगा तो

39
00:02:40,960 --> 00:02:45,040
अगर वो एक रस है तो अंदर और बाहर दोनों जगह शक्ति लगेगी तो कुछ

40
00:02:45,040 --> 00:02:49,120
होगा ही नहीं। उसको निश्चित करना होगा कि बाहर से शक्ति लगे जिससे वो

41
00:02:49,120 --> 00:02:53,280
सरके अंदर से ना लगे। तो कुछ जब

42
00:02:53,280 --> 00:02:57,760
तक ईश्वर सगुण नहीं होगा निर्गुण से एक रस से भेद वाला नहीं होगा

43
00:02:57,760 --> 00:03:02,080
क्रियाशील होने के रूप में तब तक सृष्टि

44
00:03:02,080 --> 00:03:06,240
की रचना ही नहीं हो सकती तो वहीं पर अवतार आपको मान लेना पड़ेगा। तो

45
00:03:06,240 --> 00:03:10,480
जब आप वहीं पर अवतार मान लेंगे हां तो

46
00:03:10,480 --> 00:03:14,880
आप यह कहेंगे कि ईश्वर ने नहीं बनाई सृष्टि क्योंकि

47
00:03:14,880 --> 00:03:18,880
ईश्वर तो निर्गुण है। ईश्वर तो एक रस है। फिर ये अलग-अलग कैसे हो

48
00:03:18,880 --> 00:03:22,960
रहा है? कहीं पे कहीं पे ज्यादा पावर के रूप में ईश्वर है, कहीं पे कम पावर के रूप में ईश्वर

49
00:03:22,960 --> 00:03:27,120
है। यह वाला बहुत महत्वपूर्ण प्रसंग है जिसमें इस बात का कहीं पर भी इस पर

50
00:03:27,120 --> 00:03:31,120
खुल के बात ही नहीं की जाती है अवतार विरोधियों के द्वारा तो करनी चाहिए उन्हें। है

51
00:03:31,120 --> 00:03:35,360
ना? अब वो यह कह देते कि अगर वो यह कह देते वो वहां पर इच्छा है, शक्ति

52
00:03:35,360 --> 00:03:39,440
नहीं है ईश्वर की तो फिर ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहना बंद करो। शक्तिमान

53
00:03:39,440 --> 00:03:43,520
कहना बंद करो। केवल यह कहो वो इच्छावान है। फिर शक्तिमान का आप क्यों

54
00:03:43,520 --> 00:03:47,600
कहते हैं? कि ईश्वर शक्तिमान भी है। अगर शक्तिमान है तो वहां

55
00:03:47,600 --> 00:03:48,100
शक्ति

56
00:03:47,920 --> 00:03:51,920
यूज़ हो रही है। हम तो शक्ति यूज़ होने के रूप में ईश्वर वहां

57
00:03:51,920 --> 00:03:56,000
पर कम और ज्यादा हो रहा है शक्ति के रूप में। और जब ईश्वर कम और ज्यादा

58
00:03:56,000 --> 00:04:00,080
हो रहा है तो वो एक रस नहीं है। एक रस नहीं है तो

59
00:04:00,080 --> 00:04:04,080
फिर उसको ईश्वर मत मानो। क्योंकि ईश्वर का जो अल्टीमेट

60
00:04:04,080 --> 00:04:08,320
रूप है वो एक रस है। नित्य शाश्वत शाश्वत जो परिवर्तनशील

61
00:04:08,320 --> 00:04:12,400
नहीं है और ये तो परिवर्तनशील हो रहा है। अपने हिसाब से कहीं ज्यादा है कहीं

62
00:04:12,400 --> 00:04:16,480
कम है। तो जो परिवर्तनशील हो पा रहा है

63
00:04:16,480 --> 00:04:20,720
उसको आप फिर एक रस से क्यों जोड़ रहे हैं? तो यह मानना पड़ेगा कि उसको आप ईश्वर

64
00:04:20,720 --> 00:04:24,800
इसीलिए मानते हैं सगुण निराकार को क्योंकि निर्गुण निराकार

65
00:04:24,800 --> 00:04:28,880
ही सगुण निराकार के रूप में अवतरित होता है। तो इसीलिए

66
00:04:28,880 --> 00:04:33,280
हम भी सगुण साकार को ईश्वर इसलिए मानते हैं क्योंकि निर्गुण

67
00:04:33,280 --> 00:04:37,760
निराकार ही पहले सगुण निराकार और फिर जो है सगुण साकार के रूप में अवतरित

68
00:04:37,760 --> 00:04:41,920
होता है। तो इस बारे में जब आप सोचेंगे ना यह

69
00:04:41,920 --> 00:04:46,000
ठीक कैसे है? जैसे कि मैंने कहा कि

70
00:04:46,000 --> 00:04:50,560
भाई यह मैंने यह ग्रंथ उठाया।

71
00:04:50,560 --> 00:04:54,560
ठीक है? अब मैं कहूं अब कोई आके कहने लगे ये शिवश ने थोड़ी ना उठाया। ये तो

72
00:04:54,560 --> 00:04:58,560
उसके एक हाथ ने उठाया। तो शक्ति शक्तिमान को

73
00:04:58,560 --> 00:05:02,560
वो नहीं करती है। क्या कहते हैं? द्वैत भाव

74
00:05:02,560 --> 00:05:03,060
में नहीं

75
00:05:02,960 --> 00:05:07,120
डालती है। मेरे हाथ से मैंने ही उठाया है। ये कहना पड़ेगा ना।

76
00:05:07,120 --> 00:05:11,120
उसी प्रकार से सगुण निराकार रूप का उपयोग करते हुए

77
00:05:11,120 --> 00:05:16,320
ईश्वर ने ही सृष्टि की है। उसी प्रकार से सगुण साकार रूप का

78
00:05:16,320 --> 00:05:20,560
क्या कहते हैं? सगुण साकार रूप का आलंबन लेते हुए ईश्वर

79
00:05:20,560 --> 00:05:24,720
ने ही स्वयं को अभिव्यक्त किया है। यह मानना पड़े। ठीक है?

80
00:05:24,720 --> 00:05:28,720
और दूसरी एक बात और है कि अभी भी मैंने कुछ चीजें जानी है

81
00:05:28,720 --> 00:05:32,720
कि लक्षण इत्यादि पर फिर से बात हो रही है। हमारी जो कल की लाइव हुई

82
00:05:32,720 --> 00:05:36,880
है सनातन शंकर चैनल पर उस लाइव में अभी

83
00:05:36,880 --> 00:05:40,880
वह लक्षण वाली बातों का यथोचित वैसे मैंने जवाब दिया है फिर

84
00:05:40,880 --> 00:05:44,960
भी और अच्छे से अभी वो पॉइंट आया ही नहीं लक्षण का

85
00:05:44,960 --> 00:05:49,040
जो शुरू के पांच पॉइंट पर ही हमारी बात हुई बाकी पांच पॉइंट पर बात ही नहीं हुई तो जिस पर

86
00:05:49,040 --> 00:05:53,360
हमने अभी बात ही नहीं कर पाए उन बातों का भी जो है लक्षण

87
00:05:53,360 --> 00:05:57,440
पर दोबारा से बात करने का वो कोई औचित्य दिखाई नहीं देता है बाकी अभी

88
00:05:57,440 --> 00:06:01,600
हम उस उन बातों को पूरा कर लेंगे ठीक है है ना?

89
00:06:01,600 --> 00:06:07,600
चलिए अब जो है अब हम ले लेते हैं इनको

90
00:06:08,720 --> 00:06:13,520
जो अवतार के पक्षधर हैं। परंतु

91
00:06:13,520 --> 00:06:17,680
देवेश जी आपका आपका कैमरा ऑन नहीं है। आप अपना कैमरा ऑन

92
00:06:17,680 --> 00:06:21,920
करें। कृपया करके कृपा करके। कृपया

93
00:06:21,920 --> 00:06:27,920
अपना कैमरा ऑन करें। कृपा करके अपना कैमरा ऑन करें।

94
00:06:31,680 --> 00:06:36,560
इनका ऑप्शन नहीं आ रहा इनको ऊपर लेने वाला

95
00:06:36,560 --> 00:06:42,560
देवेश प्रमाणिक जी का देवेश जी

96
00:06:42,880 --> 00:06:47,200
हम आप समझ रहे हैं ना कि सबसे

97
00:06:47,200 --> 00:06:51,200
पहली बात कि तत्व की दृष्टि से वो शाश्वत है। जिस तत्व से

98
00:06:51,200 --> 00:06:55,360
वो अवतार बना है वो जो पदार्थ है वो शाश्वत पदार्थ

99
00:06:55,360 --> 00:06:59,520
है। इसलिए उसे ईश्वर कहते हैं। ठीक है। अब बात

100
00:06:59,520 --> 00:07:03,520
यह है कि अगर क्योंकि वह बन रहा है तो बना तो वहां पर

101
00:07:03,520 --> 00:07:08,160
भी जहां निर्गुण से सगुण हो गया। हम

102
00:07:08,160 --> 00:07:14,160
देवेश जी कैमरा ऑन करें।

103
00:07:17,520 --> 00:07:21,760
दूसरी बात अगर आप जब तक आप वो तात्विक दुनिया

104
00:07:21,760 --> 00:07:25,920
में नहीं पहुंचते यानी कि ईश्वर को स्वीकार नहीं करते। ईश्वर

105
00:07:25,920 --> 00:07:30,000
को स्वीकार करने के लिए ईश्वर का सर्वशक्तिमान वाला जो रूप है वह

106
00:07:30,000 --> 00:07:34,000
होना आवश्यक है और सर्वशक्तिमत्ता के लिए कम से कम अवतार का तो विरोध

107
00:07:34,000 --> 00:07:38,800
नहीं किया जा सकता। इतना तो मानना ही पड़ेगा।

108
00:07:38,800 --> 00:07:44,480
हां आप अपने ब्राउज़र की सेटिंग में जाइए।

109
00:07:44,480 --> 00:07:48,720
ब्राउज़र में ऊपर थ्री डॉट्स आ रहे होंगे। उसमें टच करिए। नीचे सेटिंग्स

110
00:07:48,720 --> 00:07:54,240
पे जाइए। और सेटिंग्स में जाने के बाद

111
00:07:54,240 --> 00:07:57,520
कुछ ऑशंस आएंगे।

112
00:07:57,520 --> 00:07:58,160
एक ऑप्शन

113
00:07:58,160 --> 00:08:01,360
होगा

114
00:08:01,360 --> 00:08:07,360
सेटिंग में जाने के बाद क्या ऑप्शन होगा देखता हूं।

115
00:08:07,360 --> 00:08:12,240
साइट सेटिंग्स

116
00:08:12,240 --> 00:08:16,320
जो देवेश प्रमाणिक जी है उनका कहना है कि उनका ब्राउज़र अलऊ नहीं कर रहा है

117
00:08:16,320 --> 00:08:21,120
तो देवेश प्रमाणिक जी अगर आप सुन पा रहे हैं

118
00:08:21,120 --> 00:08:26,400
मेरी बात है ना तो आप

119
00:08:26,400 --> 00:08:30,480
ब्राउज़र जब आपका ये पेज जहां पर ओपन है वहां पर ऊपर थ्री

120
00:08:30,480 --> 00:08:34,560
डॉट्स हैं थ्री डॉट्स को टच करिए उसमें सेटिंग्स

121
00:08:34,560 --> 00:08:39,360
में जाइए और सेटिंग में जाकर

122
00:08:39,360 --> 00:08:44,800
उसमें एक ऑप्शन आएगा नीचे साइट सेटिंग्स उसमें जाइए।

123
00:08:44,800 --> 00:08:48,880
ठीक है? तो आप इसमें खुलकर बात करें जो अवतार का

124
00:08:48,880 --> 00:08:52,960
विरोध कर रहे हैं कि भाई सगुण साकार कैसे हो रहा है? निर्गुण निराकार

125
00:08:52,960 --> 00:08:56,960
सगुण निराकार कैसे हो रहा है? वो उस पर जरा

126
00:08:56,960 --> 00:09:01,040
खुलकर बात करिए। कैसे वह जो एक रस है वह जो है कम ज्यादा क्योंकि

127
00:09:01,040 --> 00:09:05,920
एक रस अगर कम ज्यादा हो जाएगा तो उसके रूप में फ्लेक्सिबिलिटी आ गई

128
00:09:05,920 --> 00:09:10,000
कम अभाव आ गया कि कहीं है कहीं नहीं है कहीं कम ज्यादा परिवर्तनशील हो

129
00:09:10,000 --> 00:09:13,200
गया शाश्वत नहीं रहा तो शाश्वत गुण हट गया तो इसका

130
00:09:13,200 --> 00:09:17,360
मतलब ईश्वर ने सृष्टि नहीं बनाई ये मानोगे क्योंकि तत्व से सगुण

131
00:09:17,360 --> 00:09:21,600
निराकार भी वही नित्य ईश्वर नित ईश्वर

132
00:09:21,600 --> 00:09:25,920
का स्वरूप है इसलिए वो कहते हैं कि ईश्वर ने ही सृष्टि बनाई क्योंकि

133
00:09:25,920 --> 00:09:30,000
तत्व से हाथ भी मेरा ही काम कर रहा है। मेरा ही एक

134
00:09:30,000 --> 00:09:34,080
अभिवंजक संस्थान है। मेरा ही एक कार्य करने वाला एक वो है।

135
00:09:34,080 --> 00:09:38,480
इसलिए माना जाएगा कि शिवश नारायण द्विवेदी नहीं बुक उठाई।

136
00:09:38,480 --> 00:09:41,040
ठीक है?

137
00:09:41,040 --> 00:09:46,320
और यह बातें आपको सोचनी चाहिए।

138
00:09:46,320 --> 00:09:50,320
दूसरी बात यदि कोई व्यक्ति जिसके समक्ष ईश्वर

139
00:09:50,320 --> 00:09:54,560
की सर्वशक्तिमत्ता सिद्ध नहीं हुई क्योंकि अवतार में बाधित है तो उसके समक्ष

140
00:09:54,560 --> 00:09:58,560
जब ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं हुआ तो उसके लिए पारमार्थिक विषय का वही नहीं

141
00:09:58,560 --> 00:10:02,640
है। तो जब परमार्थ के द्वारा हम तत्वत ये जान नहीं पा रहे हैं कि

142
00:10:02,640 --> 00:10:06,720
इस रूप का सृजन हो रहा है। है ना? सृजन हुआ

143
00:10:06,720 --> 00:10:10,720
तो इसका मतलब वो शाश्वत नहीं है। तो इस रूप का क्योंकि सृजन हो रहा है।

144
00:10:10,720 --> 00:10:14,960
तो अ

145
00:10:14,960 --> 00:10:19,040
अगर वह यह बात हम जान नहीं सकते जब तक हम ईश्वर को ईश्वर स्वीकार नहीं

146
00:10:19,040 --> 00:10:23,120
कर ले तो ईश्वर को ईश्वर स्वीकार ना करने से पहले तक ईश्वर को क्या

147
00:10:23,120 --> 00:10:27,360
है वो तो गायब होगा प्रकट हो जाएगा इसका मतलब वो नष्ट नहीं हुआ

148
00:10:27,360 --> 00:10:31,360
उसने अपने आप को केवल प्रकट और अप्रकट किया जितनी बार

149
00:10:31,360 --> 00:10:35,520
कहेंगे उतनी बार आ जाएगा जिस कल्प में कहेंगे उस कल्प में आ जाएगा

150
00:10:35,520 --> 00:10:39,520
जिस युग में कहेंगे उस युग में आ जाएगा तो उसका नाश कहां से हो रहा है

151
00:10:39,520 --> 00:10:43,520
कैसे सिद्ध करोगे वो अविनाशी नहीं है और तत्व की

152
00:10:43,520 --> 00:10:48,000
दुनिया में तब जा पाओगे जब उसकी प्रवक्ता स्वीकार कर लो

153
00:10:48,000 --> 00:10:54,000
हम तो ऐसे चलना पड़ता है।

154
00:10:58,400 --> 00:11:02,080
कौन कह रहा है चर्चा करूंगा।

155
00:11:02,080 --> 00:11:08,080
इस विषय पर मैं आपसे

156
00:11:12,160 --> 00:11:17,120
कौन से विषय पर थोड़ा क्लियर करें? अद्वैत

157
00:11:17,120 --> 00:11:23,120
वेदांत जी कौन से विषय पर विरोध रखते हैं?

158
00:11:46,240 --> 00:11:50,400
देवेश जी आ नहीं रहे हैं। फिलहाल अद्वैत वेदांत

159
00:11:50,400 --> 00:11:54,400
जी का कहना है कि इस अवतार लेने वाले नहीं इस अवतार लेने वाले विषय

160
00:11:54,400 --> 00:11:58,560
में तो ठीक है मगर आपका पक्ष क्या है जो मैं जो मेरे विरुद्ध

161
00:11:58,560 --> 00:12:02,800
है अरे भाई डायरेक्ट नहीं करता है अद्वैत

162
00:12:02,800 --> 00:12:06,880
जी

163
00:12:06,880 --> 00:12:10,960
डायरेक्ट नहीं करता है वही तो मैं कह रहा हूं कि पहले वह अवतार लेता है वो अपना

164
00:12:10,960 --> 00:12:15,040
नित्यत्व वाला रूप छोड़ता नहीं है कि उसी में उसने परिवर्तन कर

165
00:12:15,040 --> 00:12:19,280
लिया वो अपने उस स्वरूप को रखते हुए भी

166
00:12:19,280 --> 00:12:23,520
अवतरित होता है। एक अपनी माया के आलंबन द्वारा। वही

167
00:12:23,520 --> 00:12:27,680
तो मैं कह रहा हूं। वहां पर उसको अवतार लेना होता है।

168
00:12:27,680 --> 00:12:31,920
क्योंकि अगर वो उसी रूप में ही परिवर्तित कर लेगा तो उतनी वो नित्यत्व

169
00:12:31,920 --> 00:12:35,920
कहां रह गया? फिर परिवर्तन आ गया ना। तो माया के आलंबन से

170
00:12:35,920 --> 00:12:40,160
वो एक और रूप लेता है। तो माया के द्वारा एक डायमेंशन

171
00:12:40,160 --> 00:12:44,560
एक तरीके से तैयार की जाती है। उस डायमेंशन में वह अवतरित होता है। सगुण निराकार

172
00:12:44,560 --> 00:12:50,560
के रूप में।

173
00:12:53,440 --> 00:12:59,440
जी जय श्री राम

174
00:13:00,400 --> 00:13:04,400
हरि बोल प्रभु हरी बोल आ रही है आवाज मेरी हां आ रही है

175
00:13:04,400 --> 00:13:08,560
ओके भाई आप कहां से हैं क्या नाम है आपका ब्रो

176
00:13:08,560 --> 00:13:13,280
मेरा नाम है देवेश मैं पश्चिम बंगाल हसीना

177
00:13:13,280 --> 00:13:17,520
मैं आपको काफी फॉलो करता हूं आप अच्छा वीडियोस बनाते तो काफी मतलब सनातन

178
00:13:17,520 --> 00:13:21,600
धर्म को लेकर के जैसे एक फ्लैग बियरर का आप अच्छा काम कर रहे हो आपने जितना कुछ शर्ट

179
00:13:21,600 --> 00:13:25,680
किया यार मेरा ना आपसे एक ये था प्रभु इफ यू डोंट माइंड आप इस पे भी एक बार कर

180
00:13:25,680 --> 00:13:30,240
सकते हो जैसे मेरे पेरेंट्स कभी-कभी ये विजिट कर देते हैं राधास्वामी

181
00:13:30,240 --> 00:13:32,960
अगर आप सुनाओ

182
00:13:32,960 --> 00:13:38,160
राधा वो लिस्ट बहुत लंबी है लिस्ट बहुत लंबी है

183
00:13:38,160 --> 00:13:42,160
जहां पहली बात तो दो तरीके से काम करते हैं एक तो सुनिश्चित जो

184
00:13:42,160 --> 00:13:46,240
गोल है कुछ वो छांट रखे हैं फिर दूसरी बात

185
00:13:46,240 --> 00:13:50,560
कि चलते हुए यदि कुछ अधर्म दिख

186
00:13:50,560 --> 00:13:54,800
जाए तो उसको भी छोड़ना नहीं है। यह वाली बात है। और सुनिश्चित

187
00:13:54,800 --> 00:13:59,200
बोल तो है कि रावण का यदि वध किया जाएगा तो रावण के साथसाथ

188
00:13:59,200 --> 00:14:04,000
बहुत सारे छोटे-छोटे राक्षसों का वध हो जाएगा। हां एक्सजेक्टली

189
00:14:04,000 --> 00:14:08,000
नहीं सही पॉइंट है तो वही आप काफी मतलब आप ये करते हो बोलते हो तो

190
00:14:08,000 --> 00:14:08,960
मुझे लगा कि

191
00:14:08,960 --> 00:14:13,040
वहां पर भी थोड़ा हमें वॉइस रे करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अभी रिसेंटली एकदम अपना

192
00:14:13,040 --> 00:14:17,120
ही सिस्टम बना दिया वैदिक कल्चर एकदम हटा ही दिया है अपना संडे मंडे भी खुद का निकाल लिया

193
00:14:17,120 --> 00:14:21,200
है व्रत आदि तो खुद का कर ही रहे हैं खैर तो बहुत ज्यादा हरीबो हाल है वहां का

194
00:14:21,200 --> 00:14:25,360
मैं चेक कर रहा था और वो लोग मतलब फोर्सफुली मतलब पेरेंट्स को भी कॉल करके बोलते हैं आप आते

195
00:14:25,360 --> 00:14:29,920
नहीं हो आओ आया करो करके वरना आपका ऐसा वैसा हो जाएगा तो

196
00:14:29,920 --> 00:14:34,640
वही राधास्वामी और यह लोग जो है अच्छा

197
00:14:34,640 --> 00:14:38,640
तो जब आपसे सहमत है और हमारे समर्थक है तो फिर किस बात का

198
00:14:38,640 --> 00:14:42,960
लेकर के विरोध है? नहीं एक्चुअली क्या है कि जैसे कुछ कुछ

199
00:14:42,960 --> 00:14:47,200
पॉइंट्स थे जैसे अगर देखा जाए क्योंकि मैं पर्सनली इस आइडियोलॉजी

200
00:14:47,200 --> 00:14:51,360
को थोड़ा सा अपोल्ड करता हूं। मैं उनसे ज्यादा सहमति रखता हूं और मे

201
00:14:51,360 --> 00:14:55,360
बी आप जैसे निराकार में बिलीव करते हो हम जैसे साकार

202
00:14:55,360 --> 00:14:59,360
ब्रह्म में जैसे मान देना तो ये सब आई थिंक थोड़ा सा किसने कहा कि हम

203
00:14:59,360 --> 00:15:03,440
निराकार में ही बिलीव करते हैं। निराकार प्राप्तव्य है

204
00:15:03,440 --> 00:15:07,520
और साकार हमारा व्यवहार है। भक्ति हम भी साकार की ही करते हैं।

205
00:15:07,520 --> 00:15:12,000
ये किसने कहा आपको? वो निराकार को ही मानते हैं। निराकार प्राप्तव्य

206
00:15:12,000 --> 00:15:16,640
है। आप आप मुझे एक बात बताओ कि

207
00:15:16,640 --> 00:15:20,800
मान लिया जाए कि भगवान जो है अंत में भी भगवान

208
00:15:20,800 --> 00:15:24,560
जो है साकार ही मिलेंगे। हम

209
00:15:24,560 --> 00:15:28,640
ठीक है। तो आप ये बताओ कि भगवान

210
00:15:28,640 --> 00:15:33,200
को देखने मात्र से आप मोक्ष को प्राप्त हो जाएंगे या वो क्या

211
00:15:33,200 --> 00:15:37,280
उनको देखने से आपको क्या प्राप्त होगा? जिसके लिए आप मोक्ष के लिए

212
00:15:37,280 --> 00:15:42,320
कार्य कर रहे हैं। क्या प्राप्त होगा आपको? प्रभु

213
00:15:42,320 --> 00:15:46,800
को देख के अगर बोला जाए अगर भागवतम का अगर उससे मतलब हम कोरिलेट

214
00:15:46,800 --> 00:15:50,800
करें तो जैसे ध्रुव महाराज को दिखे थे तो उन्होंने मतलब उनको सर्व ज्ञान सब खुद ही आ

215
00:15:50,800 --> 00:15:54,960
गया तो फिर वो श्लोक देखिए अभी अभी है ना स्वतंत्र रूप से बातें करी क्योंकि शास्त्र

216
00:15:54,960 --> 00:15:58,960
की बात आती है ना तो शास्त्र में फिर ये दिक्कत आएगी कि आपने अपना अर्थ निकाल रखा है

217
00:15:58,960 --> 00:16:03,520
अलग तो एक वो व्याख्या फिर अलग बदल जाएगी परंपरा बचाना पड़ेगा हमको

218
00:16:03,520 --> 00:16:07,600
उसको चेक करना पड़ेगा किसका अर्थ माना जाए तो अभी इसीलिए

219
00:16:07,600 --> 00:16:11,840
मैंने कहा है कि अभी स्वतंत्र रूप से एक न्यूट्रल सवाल सवाल है मेरा कि जैसे

220
00:16:11,840 --> 00:16:16,000
आपने कहा कि जो अंत में भी भगवान का जो व्यवहार में ना

221
00:16:16,000 --> 00:16:20,400
आ सकने वाला स्वरूप है हमारा कहना है कि वो प्राप्त होगा जो अभी जो इंद्रियों

222
00:16:20,400 --> 00:16:24,400
का जो अभी हमारी इंद्रियां इनका विषय नहीं है ऐसा स्वरूप वो प्राप्त

223
00:16:24,400 --> 00:16:28,480
होगा ठीक है जो हमारी इंद्रियों का विषय नहीं है आपका कहना है कि

224
00:16:28,480 --> 00:16:32,480
जो भगवान का अंतिम स्वरूप है वो भी ऐसा ही यही स्वरूप है इंद्रियों का जो

225
00:16:32,480 --> 00:16:36,480
विषय ठीक है तो बात ये है कि

226
00:16:36,480 --> 00:16:39,680
सुनिए तो द्वैत के अनुसार जैसे जो

227
00:16:39,680 --> 00:16:43,760
आपने आपने कहा कि भाई ठीक है आपने कहा कि जो है

228
00:16:43,760 --> 00:16:47,760
हम भगवान का अंतिम स्वरूप जो है प्राप्त वाला व्यवहार में ना

229
00:16:47,760 --> 00:16:52,080
आ सकने वाला नहीं व्यवहारिक स्वरूप ही है तो बात ये है कि उसको देख

230
00:16:52,080 --> 00:16:56,240
के भी आपको कुछ ना कुछ प्राप्त होगा ना वहां पर क्या प्राप्त होगा जिसके

231
00:16:56,240 --> 00:17:00,480
कारण आप उसको देख के संतुष्ट होंगे वो क्या होगा

232
00:17:00,480 --> 00:17:04,480
आनंद आनंदम बुद्धि वर्धनम आनंद आनंद प्राप्त होगा

233
00:17:04,480 --> 00:17:08,640
ना भगवान को देख के तो इसका मतलब भगवान आपके साधन मात्र

234
00:17:08,640 --> 00:17:12,640
है आनंद के नहीं

235
00:17:12,640 --> 00:17:16,720
साधन है भगवान हां साधन है जी मतलब अपने लिए कर

236
00:17:16,720 --> 00:17:20,720
रहे हैं आप भक्ति नहीं हमारे साध्य आई थिंक

237
00:17:20,720 --> 00:17:24,880
उसको साध्य बोलेंगे ना कि साध्य है और

238
00:17:24,880 --> 00:17:29,040
जो आपकी भक्ति आपकी भक्ति सिद्ध कहां हो रही है वहां आप तो अपने

239
00:17:29,040 --> 00:17:33,120
लिए कर रहे हैं भगवान तो एक भगवान एक वो

240
00:17:33,120 --> 00:17:37,600
है क्या कहते हैं इंस्ट्रूमेंट जिनको आप यूज़ कर रहे हैं

241
00:17:37,600 --> 00:17:41,600
आपकी भक्ति का सिद्धि प्रेम कहां सिद्ध हुआ? भगवान तो एक इंस्ट्रूमेंट सिद्ध

242
00:17:41,600 --> 00:17:45,600
हुए। हमने क्या किया है कि आप जिसको कह रहे हैं ना सतचित

243
00:17:45,600 --> 00:17:49,600
आनंद प्राप्त होगा भगवान को देखकर। अभी मैं वही एंडिंग मान रहा

244
00:17:49,600 --> 00:17:53,600
हूं आपकी वाली। तो हमारे यहां क्या है कि हमने इस सतचित

245
00:17:53,600 --> 00:17:54,880
आनंद को भी

246
00:17:54,880 --> 00:17:59,680
भगवान कहा है। ये अल्टीमेट रूप है। हमने इसको अलग नहीं कहा।

247
00:17:59,680 --> 00:18:03,840
जिससे कि हमारी जो भक्ति है वह सिद्ध हो पा रही है। वरना भगवान

248
00:18:03,840 --> 00:18:07,920
तो एक इंस्ट्रूमेंट हो गए कि भैया मैंने उसको देखा इसलिए मुझे सुख प्राप्त

249
00:18:07,920 --> 00:18:12,000
हुआ। तो हमने जो यह सुख हमने जो यह सुख

250
00:18:12,000 --> 00:18:16,240
प्राप्त हुआ है यह जो सुख प्राप्त हुआ है भगवान को देखकर

251
00:18:16,240 --> 00:18:20,480
ही जो सुख प्राप्त हुआ है इसको भगवान का अल्टीमेट स्वरूप कहा

252
00:18:20,480 --> 00:18:22,640
है

253
00:18:22,640 --> 00:18:26,720
सच्चिदानंद को जो आपको प्राप्त हो रहा है जिससे आप एक ही भूत

254
00:18:26,720 --> 00:18:31,120
हो के मोक्ष को फील कर पाए अनुभव ले पाए

255
00:18:31,120 --> 00:18:35,200
कहा गया है ना विष्णु पुराण में जगह जगह पे भगवान को ज्ञान स्वरूप कहा गया है

256
00:18:35,200 --> 00:18:39,200
ना ज्ञान स्वरूप है ना? तो

257
00:18:39,200 --> 00:18:43,280
भगवान का जो व्यवहार में आ सकने वाला रूप वो सामने अगर उसको एंडिंग

258
00:18:43,280 --> 00:18:47,520
में माने तो भी वहां पर उसको देख के आपको ज्ञान प्राप्त हुआ

259
00:18:47,520 --> 00:18:51,840
सुखी होने का। हुआ ना वो

260
00:18:51,840 --> 00:18:56,400
ज्ञान ईश्वर है। ईश्वर का अंतिम स्वरूप वो है। हमारे

261
00:18:56,400 --> 00:19:00,720
उसमें हमने उसको नकारा नहीं है। मगर अल्टीमेट जो अंतिम

262
00:19:00,720 --> 00:19:04,960
स्वरूप है वो इसको माना है। मगर ये मिला कैसे? मिला

263
00:19:04,960 --> 00:19:09,040
कैसे कि उसको ही देख के मिला। हमने उसको नकारा कहां?

264
00:19:09,040 --> 00:19:10,000
उसके ही जरिए

265
00:19:10,000 --> 00:19:14,160
हम यहां तक पहुंचे। उसके इस रूप को हमने स्वीकार। अगर हम इसको भगवान नहीं कहेंगे

266
00:19:14,160 --> 00:19:18,560
जो हमें मिल रहा है तो हम स्वार्थी हो जाएंगे। जो

267
00:19:18,560 --> 00:19:22,560
भक्ति का हम ढिंढोरा पीट सकते हैं वो नहीं पीट सकते। फिर स्वार्थी कहलाएंगे।

268
00:19:22,560 --> 00:19:26,560
अपने लिए कार्य कर। इसका पता नहीं किसी शास्त्र का

269
00:19:26,560 --> 00:19:30,880
वचन कोट करते हैं। पूरी शंकराचार्य जी। जगतगुरु

270
00:19:30,880 --> 00:19:31,600
भगवान कहते हैं

271
00:19:31,600 --> 00:19:36,000
कि अन्यों में प्रीति आत्मा के लिए है। आत्मा

272
00:19:36,000 --> 00:19:37,440
में प्रीति अन्यों के लिए नहीं

273
00:19:37,440 --> 00:19:39,840
है।

274
00:19:39,840 --> 00:19:44,160
अन्यों में प्रीति आत्मा के लिए है। आत्मा में प्रीति अन्यों के लिए नहीं है।

275
00:19:44,160 --> 00:19:48,320
इसको जब खोलेंगे आप तो आप अगर अपनी बिटिया

276
00:19:48,320 --> 00:19:52,320
को खुश देखना चाहते हैं तो इसलिए क्योंकि आपकी आत्मा को उससे प्रसन्नता हो रही

277
00:19:52,320 --> 00:19:54,960
है।

278
00:19:54,960 --> 00:19:59,120
तो देखने में तो ये लग रहा है कि आप परोपकार की भावना से कर रहे हैं। अगर उसमें

279
00:19:59,120 --> 00:20:03,360
खुशी अंत तो गत स्वयं को दे रहे हैं ना इसी प्रकार

280
00:20:03,360 --> 00:20:07,440
से ये जो पुत्री को खुशी देख

281
00:20:07,440 --> 00:20:11,520
के मतलब मुझे खुशी हो रहा है मतलब आत्मा को खुशी हो रहा है आपने आत्मा को बोला ना पर आत्मा

282
00:20:11,520 --> 00:20:15,600
तो एक्चुअली देखा जाए तो उसका जो कॉन्स्टिटुएंट प्रॉपर्टी है तो सच्चित आनंदी हुआ ये जो

283
00:20:15,600 --> 00:20:21,120
हमारा सूक्ष्म शरीर है मन बुद्धि मिथ्या अहंकार का आई थिंक हम उस लेवल पे

284
00:20:21,120 --> 00:20:25,120
कहीं ना कहीं क्योंकि आत्मा का तो प्रॉपर्टी वो तो मम जी लोक

285
00:20:25,120 --> 00:20:29,120
जीवा भूता सनातन वो तो भगवान का अंश निकला है तो वो तो कभी साइड

286
00:20:29,120 --> 00:20:33,200
मगर वो मगर वो भटक गई है ना बंद हो गई ना नहीं

287
00:20:33,200 --> 00:20:37,840
तो फिर अंतर क्या रहा फिर उसको पाना क्या है जब वो सच्चिदानंद

288
00:20:37,840 --> 00:20:41,920
है ही है तो फिर उसको पाना क्या शेष है पाना शेष

289
00:20:41,920 --> 00:20:46,000
है कि वो जो वो जो बद्धता का अनुभव कर रही है उसको दोबारा

290
00:20:46,000 --> 00:20:50,240
से स्वतंत्र का अनुभव करना है वो वो करना है और ये बद्धता

291
00:20:50,240 --> 00:20:52,560
का अनुभव क्या है कि भैया ये है

292
00:20:52,560 --> 00:20:56,800
ये नहीं है वो है मैं यहां नहीं हूं मैं वहां नहीं हूं मैं ये हूं मैं वो हूं जो बाधित

293
00:20:56,800 --> 00:21:00,880
सुख है बाधित सुख है वो बाध्यता का ही

294
00:21:00,880 --> 00:21:04,880
वो है। तो पहले जो यह वाली बात है ना कि हम निराकार को ही मानते

295
00:21:04,880 --> 00:21:09,200
हैं। आप साकार को मानते हैं। इसको आप सही करिए कि हम निराकार

296
00:21:09,200 --> 00:21:13,280
साकार दोनों को मानते हैं। बस भगवान का जो प्राप्त होने वाला स्वरूप

297
00:21:13,280 --> 00:21:17,440
है जिसको हम प्राप्त कर रहे हैं। वहां पर आपने भगवान को अलग कर दिया है।

298
00:21:17,440 --> 00:21:21,600
वही है भगवान सामने है। और हमने क्या किया है कि जो भगवान

299
00:21:21,600 --> 00:21:26,880
से हमें प्राप्त हो रहा है उसको भी हमने भगवान कहा है। ज्ञान स्वरूप

300
00:21:26,880 --> 00:21:30,880
ठीक है। उसको हमने अल्टीमेट कहा और अब क्या है

301
00:21:30,880 --> 00:21:34,880
कि उसको ज्ञान स्वरूप यदि नहीं कहेंगे तो कहीं ना कहीं जो हमारा प्रेम

302
00:21:34,880 --> 00:21:38,960
है भगवान से सिद्ध नहीं होगा। फिर ठीक है

303
00:21:38,960 --> 00:21:43,200
अभी इतना अभी के लिए इतना जान लीजिए क्योंकि ये हमारा मुख्य विषय नहीं है। अभी

304
00:21:43,200 --> 00:21:47,200
के लिए इतना समझ लीजिए कि हमने उस अंतिम जो प्राप्त होने वाली चीज

305
00:21:47,200 --> 00:21:51,280
है प्राप्तव्य है जो जो हमारी वाणी का व्यवहार का विषय ही

306
00:21:51,280 --> 00:21:55,760
नहीं है। मगर भगवान को देख के हमको वो होगा।

307
00:21:55,760 --> 00:22:00,240
ठीक है? वो फील होगा। उस फील को हमने भगवान कहा है।

308
00:22:00,240 --> 00:22:04,560
उस फील को हमने भगवान का अल्टीमेट स्वरूप कहा है। ठीक है?

309
00:22:04,560 --> 00:22:07,760
चलिए और अब आती है बात कि स्कॉन विरोध

310
00:22:07,760 --> 00:22:10,080
क्यों?

311
00:22:10,080 --> 00:22:14,800
ठीक है। यही प्रश्न है ना आपका। हां चलिए। ठीक है।

312
00:22:14,800 --> 00:22:18,880
तो देखिए हमारा वैसे जो ब्रह्म

313
00:22:18,880 --> 00:22:22,960
के स्वरूप की बात है कि भाई ब्रह्म के स्वरूप की बात हम क्यों करते

314
00:22:22,960 --> 00:22:27,040
हैं? इसलिए करते हैं जैसे यह सवाल कई

315
00:22:27,040 --> 00:22:31,120
बार आता है कि अन्य आचार परंपराओं का ब्रह्म स्वरूप भी तो अलग है। मगर

316
00:22:31,120 --> 00:22:35,120
जो ब्रह्म स्वरूप की बात होती है उसमें यह बात होती है

317
00:22:35,120 --> 00:22:40,000
कि ब्रह्म के स्वरूप का जो वर्णन है वो आपके

318
00:22:40,000 --> 00:22:44,240
परमार्थ का हेतु है। आपके परमार्थ में सहायक है।

319
00:22:44,240 --> 00:22:48,400
जैसे कि आपको मुक्ति मिलेगी कि नहीं मिलेगी या कौन सी मुक्ति मिलेगी?

320
00:22:48,400 --> 00:22:52,640
परम स्वतंत्र मोक्ष मिलेगा कि नहीं मिलेगा? ठीक है?

321
00:22:52,640 --> 00:22:57,040
वो इसमें सहायक है। तो उसमें हमें क्योंकि हमारा जो समाज

322
00:22:57,040 --> 00:23:01,120
है व्यवहार उससे प्रभावित नहीं है कि आपको मुक्ति

323
00:23:01,120 --> 00:23:05,120
मिलेगी कि नहीं मिलेगी या कोई व्यक्ति मुक्ति को अंतत गतवा

324
00:23:05,120 --> 00:23:09,120
प्राप्त कर पा रहा है कैवल्य मोक्ष को प्राप्त कर पा रहा है कि नहीं कर पा रहा है तो उसमें

325
00:23:09,120 --> 00:23:13,120
हमारे को मतलब ऐसा नहीं है कि हमें जो है

326
00:23:13,120 --> 00:23:17,120
योजनाबद्ध तरीके से वहां पर जो है अड़ंगा डालने की आवश्यकता

327
00:23:17,120 --> 00:23:21,200
है। हम ओके परंतु होता हमें अड़ंगा

328
00:23:21,200 --> 00:23:23,600
डालने की आवश्यकता कब होती है?

329
00:23:23,600 --> 00:23:27,600
जब कोई धार्मिक व्याख्या को बदल देता है तो

330
00:23:27,600 --> 00:23:31,600
जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हैं जैसे गड़िया वैष्णव परंपराएं प्रामाणिक रूप से

331
00:23:31,600 --> 00:23:36,400
जो चल रही है ठीक है या फिर मधवाचार परंपरा या फिर

332
00:23:36,400 --> 00:23:40,400
जितनी भी परंपराएं हैं उन सबका जो मोटे मोटे तौर पर

333
00:23:40,400 --> 00:23:44,400
जो धर्म है वो हमसे अलग नहीं है ना उनका

334
00:23:44,400 --> 00:23:48,560
हमसे अलग है ना हमारा उनसे अलग है मूर्ति पूजक दोनों है मूर्ति

335
00:23:48,560 --> 00:23:52,960
पूजक दोनों है वर्णाश्रमी दोनों है स्त्री का यज्ञपवि दोनों नहीं कराते

336
00:23:52,960 --> 00:23:57,120
यह सारी चीजें कॉमन आपको मिलंगी। ठीक है?

337
00:23:57,120 --> 00:24:01,200
अब वहीं पर ब्रह अब क्या हुआ कि जब धर्म हमारा छेड़छिड़

338
00:24:01,200 --> 00:24:05,280
नहीं रहा है। धर्म से क्या दिक्कत आती है? धर्म रक्षकों को क्यों बोलना पड़ता

339
00:24:05,280 --> 00:24:09,360
है? ब्रह्म के बारे में क्यों बोलना पड़ता है? धर्म धर्म से जब भेद आता है ना जैसे

340
00:24:09,360 --> 00:24:14,320
मान लीजिए कि हमने कहा कि भाई अ ये

341
00:24:14,320 --> 00:24:18,480
बहन से विवाह नहीं करना चाहिए। ये धर्म है। ठीक है?

342
00:24:18,480 --> 00:24:22,480
अब कोई यह कहने लगा कि नहीं भाई बहन से

343
00:24:22,480 --> 00:24:26,640
विवाह भी कर लो। ठीक है?

344
00:24:26,640 --> 00:24:31,200
तो हमने उसके भगवान की बात क्यों की? क्योंकि

345
00:24:31,200 --> 00:24:35,440
भगवान के द्वारा निर्गत होने वाले सिद्धांत ही धर्म है। जो उन्होंने

346
00:24:35,440 --> 00:24:40,080
कहा है शास्त्रों के द्वारा श्रुति स्मृति मम आज्ञा।

347
00:24:40,080 --> 00:24:45,360
ठीक है? आपकी पिक्चर चिपक रही है क्या?

348
00:24:45,360 --> 00:24:50,800
इंटरनेट नहीं है आपके यहां? नहीं नहीं नहीं मुझे बराबर आ रहा है

349
00:24:50,800 --> 00:24:56,800
एक सेकंड

350
00:25:00,800 --> 00:25:05,680
आ रही है आवाज हेलो

351
00:25:05,680 --> 00:25:09,760
हरी बोल हां आ रही है आवाज आ रही है मगर

352
00:25:09,760 --> 00:25:13,840
थोड़ा सा आपका जो है ना अभी चिपक रहा था अब ठीक आ रही है

353
00:25:13,840 --> 00:25:17,840
तो हमें क्यों बोलना पड़ता है कि जब धर्म व्यवहार

354
00:25:17,840 --> 00:25:21,920
व्यवहार में गलत नियम प्रतिपादित होने लगते हैं, गलत चीजें फैलाई जाती हैं

355
00:25:21,920 --> 00:25:26,240
तो हम सीधे उसके ब्रह्म पर बात करते हैं। अगर

356
00:25:26,240 --> 00:25:30,320
हमने ब्रह्म को अगर हमने ईश्वर की व्याख्या को ही

357
00:25:30,320 --> 00:25:34,320
गलत सिद्ध कर दिया तो उसके नाम पर आने वाली जो आपकी व्यवहारिक

358
00:25:34,320 --> 00:25:38,480
व्याख्या है वो स्वतः गलत हो जाएगी। क्योंकि हम आपकी व्यवहारिक

359
00:25:38,480 --> 00:25:42,560
व्याख्या को कितना भी काउंटर करते रहेंगे मगर आप वहां पर

360
00:25:42,560 --> 00:25:46,640
यह कह सकते हो कि भाई ईश्वर से आ रही तो हम तो यही मानेंगे।

361
00:25:46,640 --> 00:25:50,720
हम हम समझ रहा हूं इसलिए ईश्वर

362
00:25:50,720 --> 00:25:54,880
के विषय में उन तंत्रों का उन संस्थाओं का

363
00:25:54,880 --> 00:25:55,440
विरोध

364
00:25:55,440 --> 00:25:59,760
करना होता है जो संस्थाएं धार्मिक

365
00:25:59,760 --> 00:26:03,920
विषयों में परंपरा से चले आ रहा जो धर्म है धर्म

366
00:26:03,920 --> 00:26:07,920
ब्रह्म की व्याख्या नहीं जो परंपरा से चली आ रही धर्म की व्याख्या

367
00:26:07,920 --> 00:26:11,920
है उसमें हेरफेर करते उन तंत्रों का विरोध करना पड़ता है। ठीक

368
00:26:11,920 --> 00:26:16,240
है? एक बात तो ये हो गई क्लियर। अब धर्म की व्याख्या

369
00:26:16,240 --> 00:26:20,480
इस ने क्या गलत की है? ठीक है? तो दो मोटे-मोटे

370
00:26:20,480 --> 00:26:24,640
पॉइंट्स हैं। ठीक है? पहला पॉइंट है

371
00:26:24,640 --> 00:26:30,160
कि आप जो है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

372
00:26:30,160 --> 00:26:34,160
और बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

373
00:26:34,160 --> 00:26:38,640
इसको हमारे सनातन कृष्ण के साथ क्यों जोड़ते हो? यह जो मायावादी

374
00:26:38,640 --> 00:26:42,960
कहने वाली बात है कि भाई आपको मायावादी कहा गया है। यह सब

375
00:26:42,960 --> 00:26:47,040
तात्विक वो ब्रह्म वाले विषय के जो अंतर है वह है। अगर आपका

376
00:26:47,040 --> 00:26:51,120
धर्म धर्म है आपका जो तात्विक विषय है उससे छेड़खानी करने की हमें कोई

377
00:26:51,120 --> 00:26:55,520
आवश्यकता नहीं है। अब जैसे गौ वैष्णव परंपरा है प्रामाणिक

378
00:26:55,520 --> 00:26:59,920
रूप से जो धर्म चला आ रहा है परंपरा से वही धर्म का पालन कर रही है गड वैष्णव।

379
00:26:59,920 --> 00:27:03,920
ठीक है? तो हम कभी नहीं कहने जाते कि भैया वहां पर जो है मोक्ष क्या है या ईश्वर

380
00:27:03,920 --> 00:27:08,000
की तत्व की विवेचना क्या है? जी है। मगर जब आपका धर्म आप

381
00:27:08,000 --> 00:27:11,040
हेरफेर करते हैं जैसे गडिया वैष्णव संप्रदाय

382
00:27:11,040 --> 00:27:15,120
के कुछ कई प्रमाणिक आचार्य एक से तो मैंने चर्चा भी की है। वो रघुनाथ दास

383
00:27:15,120 --> 00:27:19,680
शास्त्री जी हैं। है ना? उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाई उनके

384
00:27:19,680 --> 00:27:24,160
पहले जन्म से नॉमिनेशन और फिर कर्म से सिलेक्शन

385
00:27:24,160 --> 00:27:28,160
यही वाली बात है। ठीक है? विश्वनाथ विश्वनाथ पाद जी की

386
00:27:28,160 --> 00:27:32,160
मेरे पास भगवत गीता रखी हुई है चार 13 में। उन्होंने भी कह दिया कि भैया जन्म से

387
00:27:32,160 --> 00:27:36,160
जन्म जो है वो व्यवहार का व्यवहार का हेतु है कि व्यवहार में उसे क्या उसका

388
00:27:36,160 --> 00:27:40,160
क्या होगा क्या नहीं होगा और कर्म से उसका परमार्थ सेट होगा ये बात

389
00:27:40,160 --> 00:27:44,160
कही है विश्वनाथ पाद जी ने ठीक है अब

390
00:27:44,160 --> 00:27:48,160
अगर इसको भी नहीं मानते तो पुंडरेक जी तो है प्रामाणिक

391
00:27:48,160 --> 00:27:52,560
पुंडरिक जी ने भी कह दिया अपने मीठे शब्दों में कह दिया इसन

392
00:27:52,560 --> 00:27:56,640
को थोड़ा सा जो वैदिक वर्णाश्रम व्यवस्था है उस

393
00:27:56,640 --> 00:28:00,720
पर ध्यान देना चाहिए उन्होंने मीठे स्वर में कह दिया क्योंकि क्योंकि वो

394
00:28:00,720 --> 00:28:05,120
विरोधी उसमें नहीं जाना चाहते हैं इस के प्रति विरोधी स्वर में ध्वनित

395
00:28:05,120 --> 00:28:09,680
नहीं होना चाहते हैं। ठीक है? अब उनका अपना अपना काम करने का सबका तरीका है।

396
00:28:09,680 --> 00:28:13,840
मगर जब आपका हो जाए तो मेरे को हां मैं बताऊं

397
00:28:13,840 --> 00:28:18,320
मगर क्या हुआ कि यहां से चालू होता है कि भैया

398
00:28:18,320 --> 00:28:22,320
ये जो है आप जो है ये कर रहे हैं धर्म में छेड़छाड़ तो इसलिए अब हम आपसे

399
00:28:22,320 --> 00:28:26,160
ब्रह्म की बात कर रहे हैं कि ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं परम स्वतंत्र

400
00:28:26,160 --> 00:28:30,160
मोक्ष है कि नहीं। ठीक है? तो प्रारंभिक स्तर पर क्या है कि आपके यहां

401
00:28:30,160 --> 00:28:34,240
वर्णाश्रम और ये जो ये हो रहा है ना जो कि शिव और

402
00:28:34,240 --> 00:28:38,320
कृष्ण तो एक नहीं है मगर कृष्ण और अल्लाह एक है। है

403
00:28:38,320 --> 00:28:42,720
ना कि हम वही वही शिक्षा दे रहे हैं जो बाइबल में दी गई है।

404
00:28:42,720 --> 00:28:46,880
जी जी जी मैं सहमत रहूं। आज भी मेरे मैंने एक वीडियो देखा

405
00:28:46,880 --> 00:28:50,960
है इस काउंटर लगा हुआ है विदेश में वह भगवत गीता के साथ कुरान भी

406
00:28:50,960 --> 00:28:55,040
बेच रहा है। अब पुस्तक सेवा यदि आप कह रहे हो कि हम गीता कितनों को आपने

407
00:28:55,040 --> 00:28:59,040
गीता बांटी ये किया वो किया तो आप कुरान से

408
00:28:59,040 --> 00:29:03,040
सेवा कर रहे हो सनातन की कुरान देके अभी अभी का

409
00:29:03,040 --> 00:29:07,200
वीडियो है लेटेस्ट यहां आने से पहले तो ये दो चीजें हो गई अब इसमें थोड़ा

410
00:29:07,200 --> 00:29:11,760
क्रमबद्धता बता रहा हूं मैं आपको क्रम कम क्रम से बता

411
00:29:11,760 --> 00:29:15,920
अब इसमें क्या होता है कि जब हम धर्म के पहले धर्म पर

412
00:29:15,920 --> 00:29:20,320
बात करते हैं। फिर ब्रह्म पर आते हैं। फिर ये हो जाता है कि आप तो मायावादी मायावादी

413
00:29:20,320 --> 00:29:24,400
हो। ठीक है? फिर वहां परंपरा की बात आती है। तो परंपरा से जुड़े हुए सवाल

414
00:29:24,400 --> 00:29:28,560
आ जाते हैं। फिर ये श्रीधर स्वामी और ये वाले ये क्रम है। पहले धर्म

415
00:29:28,560 --> 00:29:33,200
पे बात होती है। फिर ब्रह्म पे बात होती है। फिर इस पर बात आ जाती है परंपरा पे।

416
00:29:33,200 --> 00:29:37,360
कि अच्छा चलो परंपरा के कारण कर रहे हो तो परंपरा पे ले लेते हैं। परंपरा कितनी

417
00:29:37,360 --> 00:29:41,360
मजबूत है। ये सब करना इसलिए पड़ रहा है कि जो ऊपरी सतही स्तर पर जो

418
00:29:41,360 --> 00:29:46,080
दो मुख्य बिंदु है वो क्लियर नहीं वो बिगड़े हुए

419
00:29:46,080 --> 00:29:50,480
ठीक है ना बाकी और भी बहुत कुछ है। अगर अगर मोटा-मोटा पकड़ ले मोटा-मोटा

420
00:29:50,480 --> 00:29:54,480
तो ये उन सबका वो सर्वव्यापक ईश्वर का जो

421
00:29:54,480 --> 00:29:58,640
अवतार होता है ना ऐसे ही सर्व्यापक गलतियों का अवतार मोटा मोटा

422
00:29:58,640 --> 00:30:02,720
वर्णाश्रम और ईश्वर अल्लाह ठीक तो अब

423
00:30:02,720 --> 00:30:07,520
आप बताएं कि इस जो है ईश्वर अल्लाह एक क्यों करता है अब बोले आप

424
00:30:07,520 --> 00:30:11,520
हां ठीक है मैं एक बार फिर से बोलूंगा कि मैं इतने समय से नहीं हूं मेरे को ज्यादा कुछ नहीं

425
00:30:11,520 --> 00:30:15,760
पता पर ना प्रभु ऐसा है कि जहां तक मैंने डिवोटीज से बात किया जो मुझे लगा है उन

426
00:30:15,760 --> 00:30:19,760
लोगों का एक्चुअली मकसद क्या है किसी किसी भी तरह ना हम जो भी बाहर के

427
00:30:19,760 --> 00:30:23,840
लोग हैं उनको धर्म के रास्ते पर लाना। अब भले ही इससे अगर हम लोगों को यह

428
00:30:23,840 --> 00:30:28,160
करना पड़े कि अब हम वो लोग अल्लाह को कैसे देखते हैं ऑल प्रोपराइटर जिसका

429
00:30:28,160 --> 00:30:32,400
सब मतलब जो सर्वशक्तिमान जिसको बोलते हैं और इसीलिए हम उनको अल्लाह से बेसिकली

430
00:30:32,400 --> 00:30:36,400
हम इक्वेट करते हैं कृष्ण को ताकि वो समझे कि वो कृष्ण और अल्लाह एक ही है तो हम उनके भी

431
00:30:36,400 --> 00:30:40,640
शरण में जा सकते हैं। ऐसे करके जब वो धीरे-धीरे आते हैं ना फिर हम उनको धीरे-धीरे चटिंग

432
00:30:40,640 --> 00:30:44,720
बताते हैं। फिर चार नियम का पालन बताते हैं। फिर ब्रह्मचर्य का उसके बाद फिर वो माला

433
00:30:44,720 --> 00:30:48,720
करते-करते धोती कुर्ता फिर सब में वो बेसिकली उससे आते हैं। तो यह आप कह सकते हैं

434
00:30:48,720 --> 00:30:52,800
कि प्रलोभन देने का काइंड ऑफ ना तरीका है कि हम उनको बता रहे हैं कि आप प्लीज आप कैसे

435
00:30:52,800 --> 00:30:56,800
भी करके हमारे धर्म में आओ। उसके बाद आप नाम जप करो प्रसाद पाओ ताकि

436
00:30:56,800 --> 00:31:00,800
आपका जो अगला जीवन है क्योंकि जो वैष्णविज़्म बेसिकली है वो लोग पर दुख दुखी

437
00:31:00,800 --> 00:31:04,800
था जिसको बोलते हैं वो लोग दूसरे का दुख दे रहे है कि ये लोग तो मांस खा रहे हैं मदिरा खा रहे हैं। इन लोगों को

438
00:31:04,800 --> 00:31:08,880
कैसे किसी भी तरह तो इन लोगों को उपकार करना पड़ेगा। इनको कैसे भी तो लाना पड़ेगा। तो इसमें

439
00:31:08,880 --> 00:31:12,960
इतना तत्वदर्शी मतलब दर्शन हो गए और अगर हम षट संदर्भ वगैरह ये सब अगर हम

440
00:31:12,960 --> 00:31:16,960
देखने लगे तो थोड़ा सा कहीं ना कहीं वो लोग समझ नहीं पाएंगे। हम अभी क्लास टू के बच्चे को इंटीग्रेशन

441
00:31:16,960 --> 00:31:21,040
और ये सब तो नहीं समझा सकते। तो इसीलिए उन लोगों को कम से कम क्लास 12 तक का पहले हम लोग को समझाने

442
00:31:21,040 --> 00:31:25,280
के लिए मुसलमान क्रिश्चियन लोग को हम लोग एक इक्वेट एक फंडामेंटल एस्टैब्लिश

443
00:31:25,280 --> 00:31:29,360
करने के लिए कि हां हम दोनों का यहां पे सेम है। तो अब कोई बात नहीं आप यहां भी आ सकते हो। हमारा

444
00:31:29,360 --> 00:31:33,360
भी संडे लव फीस्ट होता है। फिर तो उनको लगा कि हां हमारे क्रिश्चियनिटी में भी होता

445
00:31:33,360 --> 00:31:37,920
था। तो मतलब आप समझ रहे हो ना कि वो एक ये एस्टैब्लिश कर पाएंगे। एक सेंस ऑफ रिलेशनशिप।

446
00:31:37,920 --> 00:31:42,080
उसके बाद फिर वैसे जब हम उनसे माला वाला कराते हैं धोती कुर्ता पहनाते हैं फिर वो भक्ति

447
00:31:42,080 --> 00:31:46,320
में आते हैं तो एक कारण हो गया और दूसरा वर्णाश्रम का जैसे आपने बोला

448
00:31:46,320 --> 00:31:50,480
नहीं अभी मैंने वर्णाश्रम पूछा नहीं है वर्णाश्रम में भी नहीं पूछा वो बात

449
00:31:50,480 --> 00:31:54,480
वो अगला पॉइंट है उस पर जाएंगे आपने कहा कि

450
00:31:54,480 --> 00:31:58,640
वो प्रलोभन प्रलोभन देते हैं ठीक है वो रियल

451
00:31:58,640 --> 00:32:02,640
रियल नहीं होता है मगर प्रलोभन के लिए बोल देते हैं पहली

452
00:32:02,640 --> 00:32:06,880
बात ये है पहली बात ये है कि आपके अनुसार सारी दुनिया को वैष्णव

453
00:32:06,880 --> 00:32:10,000
होना चाहिए

454
00:32:10,000 --> 00:32:14,000
सनातन धर्म ही तो होना चाहिए। सनातन धर्म

455
00:32:14,000 --> 00:32:18,080
ही नहीं वैष्णव होना चाहिए कि वैष्णविज्म ही सनातन धर्म है ना वास्तविकता

456
00:32:18,080 --> 00:32:22,080
में इस के अनुसार है ना सनातनी

457
00:32:22,080 --> 00:32:26,960
होना चाहिए मतलब ऐसा तो मैंने मतलब जो भी चलो सनातनी

458
00:32:26,960 --> 00:32:31,040
अगर कोई व्यक्ति इस के अनुसार अगर विष्णु को नहीं मान रहा

459
00:32:31,040 --> 00:32:35,120
है किसी और देवी देवता की पूजा कर रहा है तो वो वास्तविकता में

460
00:32:35,120 --> 00:32:39,760
अंतत गतवा मूलत सनातनी है सनातनी

461
00:32:39,760 --> 00:32:43,760
तो बिल्कुल है सनातन के अंदर ही तो सब भाग गया जब तक वो आचमन कर रहा है जब तक वो शिव

462
00:32:43,760 --> 00:32:49,200
दुर्गा को मार रहे सब तो सनातन के अंदर ही आते नहीं सब बाहर छोड़े हो गए सनातन के तो

463
00:32:49,200 --> 00:32:53,360
फिर मूर्ख क्यों कहा जा रहा है उसे सिद्ध दुर्गाकारी के पाठक

464
00:32:53,360 --> 00:32:57,360
को ये एक्चुअली प्रभु देखा जाए तो भगवत गीता में

465
00:32:57,360 --> 00:33:01,520
7 28 में काम से अरे भाई बात ये नहीं है मैं ये कह

466
00:33:01,520 --> 00:33:05,520
रहा हूं कि वो गलत है कि नहीं वो उसका कारण शास्त्र है वो बाद की

467
00:33:05,520 --> 00:33:09,520
बात है ना उसका कारण आप शास्त्र ला रहे हो वो बाद की

468
00:33:09,520 --> 00:33:14,480
बात है मगर गलत मान रहे हो ना आप उसे शिव दुर्गा काली के पास।

469
00:33:14,480 --> 00:33:18,640
चलो इस प्रश्न को ऐसे ले लेते हैं थोड़ा सीधे तरीके से

470
00:33:18,640 --> 00:33:22,640
कि आप प्रलोभन देने के लिए

471
00:33:22,640 --> 00:33:25,040
कह देते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक

472
00:33:25,040 --> 00:33:29,120
है। ठीक है? अब ये बताओ प्रलोभन

473
00:33:29,120 --> 00:33:34,080
देने के लिए ये क्यों नहीं कहते हो कि शिव और कृष्ण एक है।

474
00:33:34,080 --> 00:33:38,720
वहां क्यों अड़ जाते हो? नहीं नहीं शिव और कृष्ण एक नहीं है। नहीं

475
00:33:38,720 --> 00:33:42,800
ठीक है। आप सही बोल रहे हो। एक्चुअली अगर आप प्रभु हमारे क्लास आगे की बात सुनिए।

476
00:33:42,800 --> 00:33:46,880
आगे की बात सुनिए। आपने कहा कि वह एक को बोलते हैं और वह आ जाता

477
00:33:46,880 --> 00:33:51,200
है धोती कुर्ता वाला हो जाता है। आप यह क्यों नहीं सोचते हैं कि वह जो बोल जो

478
00:33:51,200 --> 00:33:56,160
जब आप बोलते हो जब आप किसी से बोलते हो तो

479
00:33:56,160 --> 00:34:00,240
क्या कहते हैं वह व्यक्ति चार लोगों को बताता है देखो इस कौन

480
00:34:00,240 --> 00:34:04,400
जो परंपरा है मधवाचार्य जी की वो कह रही है कृष्ण अल्लाह एक

481
00:34:04,400 --> 00:34:08,720
है वो 50 जगह उस चीज को बताता है वो तो आके धोती कुर्ता पहनने लगता है

482
00:34:08,720 --> 00:34:12,880
मगर उसने जितनी ज्यादा जगह ये चीज बांट दी होती है उसमें

483
00:34:12,880 --> 00:34:17,360
से कई लोग ये सोचने लगते हैं कि अरे कृष्ण अल्लाह एक है तो मैं कुरान क्यों ना पढूं

484
00:34:17,360 --> 00:34:21,360
नमाज क्यों ना पढूं नमाज में भी तो चले जाएंगे। सीधी सी बात

485
00:34:21,360 --> 00:34:25,920
है। अगर आपने अपने मन मुताबिक एक ब्रिज बनाया है

486
00:34:25,920 --> 00:34:30,080
हम कि यह जो है इससे लेकर के आए मिथ्या के अनुसार मिथ्या

487
00:34:30,080 --> 00:34:34,320
के द्वारा प्रलोभन के द्वारा तो जिस ब्रिज से कोई मुस्लिम

488
00:34:34,320 --> 00:34:38,400
हिंदूज़्म में आएगा उसी ब्रिज से कोई हिंदू भी मुस्लिम में जा

489
00:34:38,400 --> 00:34:41,040
सकता है।

490
00:34:41,040 --> 00:34:45,120
दूसरी बात। तीसरी बात यह है कि यदि आप

491
00:34:45,120 --> 00:34:49,280
ऐसा कर रहे हो कि भैया मुस्लिमों को यहां

492
00:34:49,280 --> 00:34:53,360
लाने के लिए तो इसकी जरूरत तो

493
00:34:53,360 --> 00:34:57,440
बाहर के देशों में है। भारत में वो किताबें

494
00:34:57,440 --> 00:35:02,000
क्यों बिक रही है? भारत में क्यों कहा जा रहा है? है

495
00:35:02,000 --> 00:35:06,400
ना? और चौथी बात जब वह प्रलोभन है

496
00:35:06,400 --> 00:35:10,560
जब वह प्रलोभन है तो जो प्रलोभन वाले शास्त्र है उनको

497
00:35:10,560 --> 00:35:14,800
आप सनातनी शास्त्र क्यों कह रहे हो आप क्यों कह रहे हो देखो हमने धर्म का प्रचार

498
00:35:14,800 --> 00:35:18,800
किया है ना हम एक विंग है जो कि

499
00:35:18,800 --> 00:35:23,200
षड्यंत्र पूर्वक प्रलोभन इत्यादि दे के व्यक्ति को कन्विंस

500
00:35:23,200 --> 00:35:27,760
कर रहा है कि किसी तरीके से वो जो है इधर देखे सनातन की ओर देख ले

501
00:35:27,760 --> 00:35:31,760
मगर हमारे जो शास्त्र इत्यादि है वो सनातन शास्त्र नहीं है उनमें सनातनी बातें नहीं

502
00:35:31,760 --> 00:35:36,080
लिखी उनमें सब मिक्सचर लिखा है। ये

503
00:35:36,080 --> 00:35:40,240
तो स्वीकार करना पड़ेगा ना। भाई जो हिंदू जो जो

504
00:35:40,240 --> 00:35:44,240
हिंदू है उनको क्यों बता रहे हो कि ईश्वर अल्लाह एक है। फिर वो कस्टमाइज

505
00:35:44,240 --> 00:35:48,560
करो ना उसको कि केवल मुसलमान कोई किताबें जाए वो स्टॉल बना दो।

506
00:35:48,560 --> 00:35:52,960
मुसलमान के लिए ये वाली किताब हिंदू के लिए ये वाली किताब।

507
00:35:52,960 --> 00:35:56,080
क्यों? हिंदू भी तो उसको पढ़ के भटक रहा है ना।

508
00:35:56,080 --> 00:36:00,480
भाई कोई लड़की जब यह समझती है किसी मुस्लिम लड़के को देख के

509
00:36:00,480 --> 00:36:04,720
कि इसका भी वही सिद्धांत होगा जो मेरा सिद्धांत है र

510
00:36:04,720 --> 00:36:08,880
सदा च प्राई पर वचन ना जाए जब वो ऐसे समझती है

511
00:36:08,880 --> 00:36:13,040
क्यों समझती है क्योंकि उससे किसी ने कहा होता है ईश्वर अल्लाह तेरो नाम

512
00:36:13,040 --> 00:36:17,200
सबको सद्गति दे भगवान सबको सन्मति दे भगवान

513
00:36:17,200 --> 00:36:21,280
उससे किसी ने कहा होता है इसलिए वो अल्लाह में अपने कृष्ण को ढूंढने लगती

514
00:36:21,280 --> 00:36:25,440
है जबकि कृष्ण का सिद्धांत क्या है रकुल

515
00:36:25,440 --> 00:36:29,600
सदा चली आई प्राण जाए प्रवचन ना जाए और अल्लाह का सिद्धांत क्या

516
00:36:29,600 --> 00:36:33,680
है अगर तुमने किसी को मां बहन बेटी बोल भी दिया है तब

517
00:36:33,680 --> 00:36:37,760
भी आप उससे मुकर सकते हो मुख की बातों का कोई ये सब तुम्हारे

518
00:36:37,760 --> 00:36:42,080
मुंह की बातें हैं इनका कोई वो मोल नहीं है

519
00:36:42,080 --> 00:36:46,320
नहीं सही बात है प्रभु जी इसमें मैं ये चीज बोलना चाहूंगा कि आप अगर फैक्ट्स एंड फिगर्स

520
00:36:46,320 --> 00:36:50,480
निकालोगे ना अगर अगर नंबर्स पे बात करोगे तो आपको दिख जाएगा कि हमारे यहां से जितने

521
00:36:50,480 --> 00:36:54,480
भी लोग जुड़े हैं क्योंकि हम जब भी क्लास लेते हैं तो हम उनको ऑब्वियसली ये अल्लाह

522
00:36:54,480 --> 00:36:58,640
वगैरह ये सब हमारा बाहर के प्रचार के लिए है। हमारा जब क्लास होता है तो हम अपना

523
00:36:58,640 --> 00:37:02,720
चार भाई सुनो जो धर्म होता है ना उसमें यह सब झूठी बातें

524
00:37:02,720 --> 00:37:07,120
नहीं आती है कि हम लोग फलाने के लिए बोलते हैं और जब बोलते हो

525
00:37:07,120 --> 00:37:11,120
तो घोषित करो ये सनातन ज्ञान नहीं है इन किताबों में ये घोषित

526
00:37:11,120 --> 00:37:15,200
करो लिखो ये सनातन ज्ञान नहीं है क्योंकि सनातन क्या है एक

527
00:37:15,200 --> 00:37:19,200
मिनट सनातन क्या है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना

528
00:37:19,200 --> 00:37:23,200
बदले वो सनातन है। अब आप जो है किसी कारण से ऐसा कर रहे

529
00:37:23,200 --> 00:37:27,200
हो। ठीक है? अच्छा दूसरी बात यह है कि नंबर्स पर

530
00:37:27,200 --> 00:37:31,680
जाएंगे। नंबर की बात ऐसी है कि जो लोग आपकी यह मिस

531
00:37:31,680 --> 00:37:35,920
कसेप्शन से प्रभावित हो रहे हैं। मतलब आप आप जितनों

532
00:37:35,920 --> 00:37:39,920
को ले आए वो आंकड़े तो सब पॉजिटिव है क्योंकि आप ले आए हो। आपने उनका नाम दर्ज

533
00:37:39,920 --> 00:37:44,160
कर लिया कि हम जो मुस्लिम को ले आए, विदेशी को ले आए। मगर जो उसके

534
00:37:44,160 --> 00:37:48,160
विकर्ण फैल रहे हैं जो लड़कियां जो ईश्वर अल्लाह को एक समझ

535
00:37:48,160 --> 00:37:52,320
के फंस रही हैं या बाइबल और गीता को एक समझ के फंस रही है

536
00:37:52,320 --> 00:37:56,480
वो थोड़ी ना बताती है कि हमने इस कौन के कारण इसको ऐसा समझा था

537
00:37:56,480 --> 00:38:00,720
मरते टाइम वो कटने से पहले बता के थोड़ी ना जाएंगी कि हम क्यों फंसे

538
00:38:00,720 --> 00:38:04,800
थे इसके चंगुल में वो मानसिकता इसलिए कहा गया धर्म के साथ छेड़छाड़

539
00:38:04,800 --> 00:38:09,680
मत करिए धर्म तो फिर उसको एज इट इज भी कह रहे हो आप

540
00:38:09,680 --> 00:38:14,000
सबसे बड़ी देखिए आप बात आप प्रलोभन दे ला रहे हो आप

541
00:38:14,000 --> 00:38:18,160
झूठी किताबें लिख के ला रहे हो फिर एज इट इज भी बोल रहे हो अरे एक बात

542
00:38:18,160 --> 00:38:22,320
पे तो ठहर जाओ गीता से ड्रोन है हमारा

543
00:38:22,320 --> 00:38:26,160
ये रहता है कंक्लूजन रहता है जो आप बोल रहे हो कि जो हम शास्त्र लिखते हैं वो सारा तो उसी

544
00:38:26,160 --> 00:38:30,160
से मतलब जो शास्त्र मतलब जो भी हमारा पब्लिशिंग रहता है वो

545
00:38:30,160 --> 00:38:34,320
सारा आपका पद्म पुराण से आपको रेफरेंस मिल जाएगा स्कंद पुराण से भगवत गीता अल्लाह का रेफरेंस

546
00:38:34,320 --> 00:38:38,320
क्या है बताइए जरा ईश्वर अल्लाह एक है कुरान का ईश्वर और यहां का

547
00:38:38,320 --> 00:38:42,480
ईश्वर एक है क्या रेफरेंस है इसका नहीं ये तो हमने कभी मैं वही आपको

548
00:38:42,480 --> 00:38:46,480
बता रहा हूं ना कि ईश्वर और अल्लाह को हम क्यों करते हैं? क्योंकि इसका एक बस यही पॉइंट

549
00:38:46,480 --> 00:38:51,440
है कि वो अगर रिलेट कर पाए कि मैंने आपको बताया ना कि वो गलत है।

550
00:38:51,440 --> 00:38:55,520
वो गलत है। ये पहली बात तो ये

551
00:38:55,520 --> 00:38:59,760
करना गलत है। अगर सुनिए सुनिए क्रम में सुनिए।

552
00:38:59,760 --> 00:39:04,160
क्रम में सुनिए। पहली बात तो यह करना गलत है। दूसरी

553
00:39:04,160 --> 00:39:08,320
बात जो आप तर्क दे रहे हैं कि वहां पर वह सर्वशक्तिमान है। नहीं

554
00:39:08,320 --> 00:39:12,400
वहां पर वो जो अल्लाह है वो उनकी मान्यता ये है कि अल्लाह अवतरित

555
00:39:12,400 --> 00:39:16,720
नहीं हो सकता है। अल्लाह झूठ बोलने की मीन

556
00:39:16,720 --> 00:39:20,960
इट। आप इतना अंदर क्यों जा रहे हो? हम मीन ही नहीं करते। अल्लाह व्लाह क्या है? मुझे अरे भाई

557
00:39:20,960 --> 00:39:24,960
अंदर अंदर इसलिए जा रहे हैं। पहली बात तो ये है कि हम इस

558
00:39:24,960 --> 00:39:28,960
की तरफ से कही जाने वाली कोई बात ऑथेंटिक कब समझे? जब

559
00:39:28,960 --> 00:39:33,280
उसकी किताब से छपी हो जब उसका कोई प्रमाणिक व्यक्ति बोल रहा हो या

560
00:39:33,280 --> 00:39:37,680
उसका केवल एक कोई फॉलोअ बोल रहा हो कब समझे हम बताइए

561
00:39:37,680 --> 00:39:41,200
अगर प्रभुपाद का वाणी है तभी तो प्रभुपाद तो

562
00:39:41,200 --> 00:39:46,720
बोल रहे हैं ना कि हम जो है बाइबल की शिक्षा दे रहे हैं

563
00:39:46,720 --> 00:39:50,880
वो प्रभु वही है कि देखिए आपने ये चीज बोली है

564
00:39:50,880 --> 00:39:55,200
आपने ये चीज बोली है सुनिए आपने ये चीज बोली एक मिनट आपने

565
00:39:55,200 --> 00:39:59,280
ये चीज बोली है कि अंदर से ऐसा नहीं है।

566
00:39:59,280 --> 00:40:03,520
बाहर से ऐसा है। भाई आपकी बात कैसे मान ले कोई

567
00:40:03,520 --> 00:40:07,600
जो आप कर रहे हो जो आप दिखा रहे हो उसी पर तो हम बोल रहे हैं। हम भी

568
00:40:07,600 --> 00:40:11,600
अंदर से विरोध नहीं कर रहे। लो हम भी अंदर से विरोध नहीं कर रहे।

569
00:40:11,600 --> 00:40:15,680
बाहर से ही कर रहे हैं। लो यही तो है। कहने

570
00:40:15,680 --> 00:40:20,240
का मतलब यह है पहली बात वो सर्वशक्तिमत्ता वाला बात जो है वो फिट नहीं बैठती।

571
00:40:20,240 --> 00:40:24,400
दूसरी बात यह है कि अगर आप केवल प्रलोभन दे के कर रहे हैं तो वह

572
00:40:24,400 --> 00:40:28,400
जो है नहीं करना चाहिए क्योंकि उसके बैड इफेक्ट भी है। बैड

573
00:40:28,400 --> 00:40:32,880
इफेक्ट ज्यादा है। जब धर्म की आप व्याख्या बदलेंगे तो बैड इफेक्ट ज्यादा है।

574
00:40:32,880 --> 00:40:36,960
तीसरी बात यह है कि अगर आप प्रलोभन देकर के कर भी रहे हो तो फिर हमसे

575
00:40:36,960 --> 00:40:41,200
कम से कम हिंदुओं से झूठ मत बोलो। उसको सनातनी शास्त्र मत बताओ। उसको

576
00:40:41,200 --> 00:40:45,280
बताओ मैनपुलेटेड शास्त्र। कन्वर्शन के लिए लिखे

577
00:40:45,280 --> 00:40:50,000
गए शास्त्र हिंदू उससे दूर रहे। यह सब कहना शुरू करो।

578
00:40:50,000 --> 00:40:54,000
ठीक है और चौथी बात यह स्वीकार करो

579
00:40:54,000 --> 00:40:56,480
कि वो झूठ है। सबसे पहले तो यह मानना

580
00:40:56,480 --> 00:41:00,560
पड़ेगा कि वो झूठ है ना। ईश्वर अल्लाह है जो एक लिखा गया है वो

581
00:41:00,560 --> 00:41:03,600
झूठ है ना?

582
00:41:03,600 --> 00:41:07,600
हां ये वाला चीज ऑब्वियसली अलग है। कृष्णा जो है वो तो प्रपाद जी ने झूठ

583
00:41:07,600 --> 00:41:11,760
बोला ना कि मैं बाइबल की शिक्षा दे रहा हूं। आप समझ मतलब देखो

584
00:41:11,760 --> 00:41:16,880
ऐसा है कि वो एक भी अलग भी जैसे अरे मैं पूछ रहा हूं झूठ बोला कि नहीं बोला?

585
00:41:16,880 --> 00:41:21,040
नहीं झूठ तो नहीं बोला। खैर झूठ प्रभुपाद झूठ तो नहीं बोलेंगे प्रभुपाद मतलब बाइबल

586
00:41:21,040 --> 00:41:25,360
की दीक्षा ही दे रहे थे प्रचार के बेसिस के लिए करा उन्होंने आपको ये समझना

587
00:41:25,360 --> 00:41:29,680
भाई साहब प्रचार के बेसिस के लिए सत्य बोला कि झूठ बोला

588
00:41:29,680 --> 00:41:33,920
नहीं सत्य ही बोला बिल्कुल सत्य बोला है क्योंकि सब मतलब बाइबल की शिक्षा है ना बाइबल

589
00:41:33,920 --> 00:41:37,920
की शिक्षा है ना इस में क्वालिटेटिवली हम एक ही है हम क्वांटिटेटिवली

590
00:41:37,920 --> 00:41:42,320
हम अलग है पर हम में बाइबल की शिक्षा है कि नहीं

591
00:41:42,320 --> 00:41:46,400
नहीं क्यों होगी बाइबल की शिक्षा क्यों होगी हमारा जी तो कह रहे है ना

592
00:41:46,400 --> 00:41:50,400
आत्म साक्षात्कार का विज्ञान में कि बाइबल की शिक्षा दे रहा हूं मैं। कह रहे

593
00:41:50,400 --> 00:41:54,480
हैं वो तो चौथे चैप्टर में कुछ कुछ हो

594
00:41:54,480 --> 00:41:58,640
सकता है जो मतलब कह सकते हैं जैसे बाइबल में बोला गया है कि वो लोग जैसे

595
00:41:58,640 --> 00:42:02,640
मीट खाते हैं तो कुछ कुछ के अनुसार तो ये भी कह सकते हैं कि हम

596
00:42:02,640 --> 00:42:07,040
आईएस आईएस की शिक्षा दे रहे हैं। नहीं कुछ कुछ चीजें सेम हो जाएंगी।

597
00:42:07,040 --> 00:42:11,040
बाइबल में कुछ कुछ ऐसा चीज है जो ओवरलैप करता है। हमारे आईएस आईएस में

598
00:42:11,040 --> 00:42:11,600
भी कुछ कुछ

599
00:42:11,600 --> 00:42:15,920
ऐसी चीजें हैं जो हमसे मैच करेंगी।

600
00:42:15,920 --> 00:42:20,400
तो वो आप देते होगे हम लोग तो नहीं देते। अरे तो आप आप लिखोगे

601
00:42:20,400 --> 00:42:24,480
कि मैं आईएस आईएस की शिक्षा दे रहा हूं। जब हमारे पास

602
00:42:24,480 --> 00:42:28,560
सनातन ज्ञान है। हमारे पास भगवत गीता है तो क्या हमारे पास

603
00:42:28,560 --> 00:42:32,880
इतना सामर्थ्य नहीं है कि उसमें अपना ढकोसला उसका

604
00:42:32,880 --> 00:42:37,120
रूप परिवर्तित किए बिना उसमें कोई मायाजा डाल किए बिना

605
00:42:37,120 --> 00:42:41,920
और हम सामने वाले को अपने ज्ञान से प्रभावित कर पाए। दूसरी बात

606
00:42:41,920 --> 00:42:46,160
क्या इस देश के समस्त एक मिनट क्या

607
00:42:46,160 --> 00:42:50,160
इस देश के समस्त सनातनी उस वैष्णव ज्ञान को जान चुके हैं

608
00:42:50,160 --> 00:42:54,320
जो हमें मुसलमानों को लाना पड़ रहा है क्रिश्चियनों को लाना पड़ रहा है क्यों

609
00:42:54,320 --> 00:42:58,320
भगवान को सब जोड़ने में क्या दिक्कत है सब तो भगवान अरे सबको जोड़ने में जब हम

610
00:42:58,320 --> 00:43:02,720
जब हम झूठ का सहारा लेकर के जोड़ रहे हैं प्रोपेगेंडा करके जोड़ रहे हैं मैनपुलेट

611
00:43:02,720 --> 00:43:06,800
करके जोड़ रहे हैं एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट एक मिनट एक मिनट

612
00:43:06,800 --> 00:43:10,800
तो पहले हम जो हमारे पास जो है जिसमें इसमें हमको विकार नहीं डालना

613
00:43:10,800 --> 00:43:14,880
है। उससे जितना जोड़ सकते वो तो जोड़ ले। पहले शिव

614
00:43:14,880 --> 00:43:19,280
वालों को तो आप जो है विष्णु भक्त बना लीजिए। देने

615
00:43:19,280 --> 00:43:23,440
जाते आधे लोग यही बोलते हैं हमारे पास भगवत गीता पड़ी है। हमारे पास ये पड़ी है। अब उनको

616
00:43:23,440 --> 00:43:26,720
संप्रदाय से जुड़ना ही नहीं है। तो इसलिए तो प्रभुपाद को बाहर जाना पड़ा। हम लोग

617
00:43:26,720 --> 00:43:30,800
यहां पे जब ये कर रहे थे प्रचार कर रहे थे। कोई ना भगवत गीता ले रहा है। कोई ना संप्रदाय से जुड़ रहा है। कोई

618
00:43:30,800 --> 00:43:34,960
ना भगवान को भोग लगा रहा है। तो बोले भाई साहब देखिए देखिए

619
00:43:34,960 --> 00:43:39,360
तो बनाइए ना उनको। मतलब आप जो है जो व्यक्ति

620
00:43:39,360 --> 00:43:43,360
जो जिस व्यक्ति का गीता पर विश्वास नहीं है एक मिनट एक मिनट

621
00:43:43,360 --> 00:43:47,360
जिस व्यक्ति का गीता एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप मतलब ये कह रहे हैं कि

622
00:43:47,360 --> 00:43:51,360
जिस व्यक्ति का गीता पर विश्वास नहीं है उस व्यक्ति को आप गीता

623
00:43:51,360 --> 00:43:55,440
पर विश्वास ला के फिर उसको सही करने का प्रयास करोगे

624
00:43:55,440 --> 00:43:59,440
मगर जिस व्यक्ति का पहले से ही गीता पर विश्वास है जहां झूठ बोलने की आवश्यकता नहीं

625
00:43:59,440 --> 00:44:03,520
है उसके लिए आप प्रयास नहीं करोगे उसके लिए तो चल ही रहे है उसके लिए तो क्लासेस

626
00:44:03,520 --> 00:44:07,600
चल ही रहे हैं उसके लिए तो लोग आते ही है जिनको आना होता है अब जो सतोगुण में वो

627
00:44:07,600 --> 00:44:12,000
तो आते हैं जो सतोगुण में नहीं है तो झूठ तो झूठ क्यों लिखा है फिर

628
00:44:12,000 --> 00:44:16,080
हिंदू हिंदू सब कोई क्या सतोगुणी है हिंदू सारे तभी तो मैं कह

629
00:44:16,080 --> 00:44:20,240
रहा हूं तो झूठ क्यों लिखा फिर जब आप जो गीता पर पहले से ही भरोसा करते

630
00:44:20,240 --> 00:44:24,320
हैं उनको गीता का ज्ञान दीजिए उसमें क्यों लिखा अल्लाह और कृष्ण एक है मैं बाइबल

631
00:44:24,320 --> 00:44:28,400
का ज्ञान दे रहा हूं मैं आपको फिर से वही बोल रहा हूं

632
00:44:28,400 --> 00:44:32,640
कि जो अल्लाह और जो कृष्ण का आप जो ज्ञान बोल रहे हो ये बस हम एक सेंस ऑफ एस्टैब्लिशमेंट

633
00:44:32,640 --> 00:44:36,720
के लिए करते हैं भाई साहब ये झूठ है कि नहीं मैं थोड़ा सा थोड़ा सा कठोर ोर होना पड़ेगा

634
00:44:36,720 --> 00:44:40,720
मुझे क्षमा करिएगा अब ये बताइए वो झूठ है कि नहीं नहीं झूठ नहीं

635
00:44:40,720 --> 00:44:42,240
है क्योंकि वो क्वालिटेटिवली

636
00:44:42,240 --> 00:44:46,320
वो एक है क्वांटिटेटिवली अलग है क्वांटिटेटिवली एनी टाइम एनी डे कृष्णा

637
00:44:46,320 --> 00:44:50,400
इसको थोड़ा सा इसको थोड़ा सा बताइए मुझे कि झूठ कैसे नहीं है हिंदी

638
00:44:50,400 --> 00:44:54,880
बताइए ठीक है जैसे हम पालन करते हैं

639
00:44:54,880 --> 00:44:58,880
सॉरी मेरा हिंदी मे बी उतना ज्यादा स्ट्रांग नहीं हो सॉरी तो एक्चुअली क्या

640
00:44:58,880 --> 00:45:02,960
है कि जैसे मैं बता रहा था पहले तो आपका क्लेम क्लेम मैं समझ लूं

641
00:45:02,960 --> 00:45:07,040
कि वो झूठ नहीं है सत्य है जो उन्होंने बोला है तो फिर आप

642
00:45:07,040 --> 00:45:11,040
ये क्यों कह रहे हैं कि वो केवल ये होता है वो सेंस वाली बात होती है। क्या कह रहे हैं

643
00:45:11,040 --> 00:45:15,200
आप? वो केवल उनको जो है प्रलोभन के लिए होता है। वो तो सत्य होता है। तो

644
00:45:15,200 --> 00:45:19,200
प्रलोभन काहे के लिए फिर प्रलोभन इन द सेंस कि वो ये देख आप फिर

645
00:45:19,200 --> 00:45:24,400
ये क्यों कह रहे हैं कि भाई वो अंदर से ऐसा नहीं है। वो तो केवल लालच दे के लाते हैं।

646
00:45:24,400 --> 00:45:29,440
वो तो सत्य बात है। वो तो यहां आकर यहां आ के भी वही कहते हैं ना। तो

647
00:45:29,440 --> 00:45:33,520
लालच आपका वही हो गया कि हम कृष्ण को अल्लाह के उनको तौर पे दिखा

648
00:45:33,520 --> 00:45:37,520
रहे हैं। हम एक फॉल्स इमेज क्रिएट कर रहे हैं। हम एक झूठ है

649
00:45:37,520 --> 00:45:41,680
ना? फॉल्स इमेज क्रिएट करना झूठ हो गया ना? उनको

650
00:45:41,680 --> 00:45:46,080
समझने के लिए ना वो क्लास टू का अरे भाई झूठ है कि नहीं? मैं क्या पूछ रहा हूं?

651
00:45:46,080 --> 00:45:50,080
एक इमेज क्रिएट कर रहे हैं हम बेसिकली। भाई साहब अभी आपने फॉल्स शब्द का उपयोग

652
00:45:50,080 --> 00:45:54,320
किया ना। हां वो गलती हो गई। उसको हिंदी में क्या कहते हैं?

653
00:45:54,320 --> 00:45:57,360
शैडो शैडो एक परछाई परछाई क्रिएट कर

654
00:45:57,360 --> 00:46:01,600
को हिंदी में परछाई कहते हैं। अरे शैडो बोल रहा हूं भाई आप ले

655
00:46:01,600 --> 00:46:06,000
भाई साहब अभी आपने फॉल्स बोला कहा फॉल्स इमेज फॉल्स

656
00:46:06,000 --> 00:46:10,080
इमेज एक वो उसका शैडो क्रिएट बेसिकली ये मतलब था मैंने

657
00:46:10,080 --> 00:46:14,080
क्या कहा फॉल्स का हिंदी अर्थ क्या है फॉल्स का हिंदी अर्थ क्या

658
00:46:14,080 --> 00:46:18,160
है अरे भाई स्लिप ऑफ टंग हो ही सकता है मैं बोल तो रहा हूं कि वो शैडो

659
00:46:18,160 --> 00:46:22,480
मैं कहना चाह रहा था मतलब फॉल्स इमेज तैयार नहीं करते वो रियल इमेज

660
00:46:22,480 --> 00:46:26,640
तैयार करते हैं शैडो शैडो शैडो परछाई परछाई

661
00:46:26,640 --> 00:46:31,120
भाई परछाई हरी बोल परछाई मतलब परछाई मतलब परछाई

662
00:46:31,120 --> 00:46:36,320
यार परछाई मतलब एक सबर्डिनेट एक सबोर्डिनेट एक

663
00:46:36,320 --> 00:46:40,640
थोड़ा प्रैक्टिकली समझाइए जरा इस बात को मुझे मैं समझना चाहता हूं क्या वो परछाई

664
00:46:40,640 --> 00:46:44,800
की बात आप कर रहे हैं तो अब मुसलमान जो है ये लोग सिर्फ और सिर्फ अल्लाह को मानते हैं राइट

665
00:46:44,800 --> 00:46:48,800
और जो क्रिश्चियन है ये लोग सिर्फ जीसस को मानते हैं आप मुझे रीजनिंग मत दीजिए भाई

666
00:46:48,800 --> 00:46:52,800
साहब भाई साहब रीजनिंग मत दीजिए कि वो इसलिए ऐसा करते हैं ना आप मुझे

667
00:46:52,800 --> 00:46:57,120
वो परछाई बताइए क्या करते हैं वो उसमें परछाई क्यों कह रहे हैं वो

668
00:46:57,120 --> 00:47:01,520
सत्य है या सत्य की परछाई है जो बोला जा रहा है वो बताइए किसको आप परछाई

669
00:47:01,520 --> 00:47:05,520
कह रहे हैं वो बताइए जो अल्लाह है वो आ तो रहे

670
00:47:05,520 --> 00:47:09,680
हैं कृष्ण से ही आ रहे हैं और जो जीसस क्राइस्ट है वो भी कृष्ण से ही आ रहे हैं तो

671
00:47:09,680 --> 00:47:12,480
अगर देखा जाए तो अल्लाह आ रहे हैं कृष्ण से

672
00:47:12,480 --> 00:47:16,480
अल्लाह आ रहे हैं कृष्ण से सब कोई कृष्ण से ही आ रहे हैं जब

673
00:47:16,480 --> 00:47:20,480
तो इसका मतलब आप समय आने पे ये भी कह देंगे कि भैया वो स्वान

674
00:47:20,480 --> 00:47:25,040
और कृष्ण एक है ये कह देंगे आप

675
00:47:25,040 --> 00:47:29,280
नहीं वैसा नहीं ऐसा नहीं है क्या कृष्ण

676
00:47:29,280 --> 00:47:33,520
से नहीं आ रहा है ये ये मटेरियल भौतिक हो गया ये

677
00:47:33,520 --> 00:47:37,520
आध्यात्मिक जगत नहीं है ये भौतिक का मतलब अल्लाह जो है तात्विक अल्लाह जो

678
00:47:37,520 --> 00:47:41,680
है तात्विक रूप से भी जो है रियल है अल्लाह जो है तात्विक

679
00:47:41,680 --> 00:47:45,840
रूप से रियल है अब जो उनको मानते हैं अब उनको तो उनके हिसाब से बात करना पड़ेगा

680
00:47:45,840 --> 00:47:49,920
ना अब मैं और आप थोड़े तो आपका हिसाब क्या है वही तो मैं कह रहा हूं आप

681
00:47:49,920 --> 00:47:54,000
उनके हिसाब से क्या बोल रहे हो आपका हिसाब क्या है ये तो आपने

682
00:47:54,000 --> 00:47:58,000
फिर रीजनिंग दे दी कि उनके एक मिनट आपने ने फिर रीजनिंग दे दी कि उनके

683
00:47:58,000 --> 00:48:02,240
हिसाब से बात करनी पड़ेगी। ये तो रीजनिंग हो गई।

684
00:48:02,240 --> 00:48:06,400
सत्य क्या है? सत्य क्या है? क्या

685
00:48:06,400 --> 00:48:10,480
कुरान के अनुसार जो कुरान के अनुसार प्रतिपादित होने वाला

686
00:48:10,480 --> 00:48:16,240
जो ईश्वर है वो क्या ईश्वर है? आपके अनुसार

687
00:48:16,240 --> 00:48:20,400
कुरान के हिसाब से तो खैर गलत ही है। कुरान में तो जो लिखा है वो आपके आपके

688
00:48:20,400 --> 00:48:24,480
अनुसार क्या है भाई साहब? कुरान का ईश्वर रियल है। वो है एक्सिस्ट करता

689
00:48:24,480 --> 00:48:30,000
है। वो ईश्वर ही है। या नहीं है यह बता दीजिए। एक्सिस्टेंस छोड़ दीजिए।

690
00:48:30,000 --> 00:48:34,000
कुरान के हिसाब से जो वो बताते हैं वो तो गलत है। कुरान में जो लिखा है। अरे

691
00:48:34,000 --> 00:48:38,000
भाई मैं कह रहा हूं आपके हिसाब से क्या है? हां मेरे हिसाब

692
00:48:38,000 --> 00:48:42,000
से मैं बता रहा हूं। कुरान में जो खैर लिखा है वो तो गलत ही है। वो उन लोगों

693
00:48:42,000 --> 00:48:46,400
को मैं ये नहीं मैं ये नहीं कह रहा। आपके हिसाब से अल्लाह

694
00:48:46,400 --> 00:48:50,480
ईश्वर है। वो सर्वशक्तिमान है। आपकी जानकारी में आपकी जानकारी

695
00:48:50,480 --> 00:48:54,640
में। कुरान का ईश्वर आपके सिद्धांतों पर फिट बैठता है। कृष्ण

696
00:48:54,640 --> 00:48:58,720
के सिद्धांतों पर फिट बैठता है। वही कह रहा हूं बार-बार कि

697
00:48:58,720 --> 00:49:02,720
फिट नहीं बैठता है। नहीं बैठता का बात नहीं है। फिलहाल ये है कि उन लोगों को किसी तरह हम लोग को

698
00:49:02,720 --> 00:49:06,800
धर्म में लाने के लिए फिर आप रीजनिंग पे चले गए। टॉपिक क्या चल रहा है कि

699
00:49:06,800 --> 00:49:11,200
आप झूठ बोलते हैं कि नहीं बोलते? टॉपिक ये चल रहा है। टॉपिक ये नहीं चलता क्यों बोलते हैं?

700
00:49:11,200 --> 00:49:15,280
समझिए बात को। टॉपिक ये नहीं चल रहा है कि आप क्यों बोलते हैं?

701
00:49:15,280 --> 00:49:20,320
टॉपिक ये चल रहा है कि क्या बोलते हैं? सत्य बोलते हैं कि झूठ बोलते हैं?

702
00:49:20,320 --> 00:49:24,320
बिलकुल आप बिलकुल और पर सत्य बोलते हैं।

703
00:49:24,320 --> 00:49:28,560
आप लोग ही मिथ्यावादी होंगे। हम तो नहीं है। अरे भाई केवल

704
00:49:28,560 --> 00:49:31,440
क्लेम करने से कुछ नहीं होता है। आपकी चीजों

705
00:49:31,440 --> 00:49:35,520
का आधार भी तो आप बोलो। आपने क्लेम कर दिया कि आप सत्य बोलते हो। फिर

706
00:49:35,520 --> 00:49:39,520
जब मैं आपसे पूछ रहा हूं, फिर जब मैं आपसे पूछ रहा हूं, एक मिनट। जब मैं आपसे

707
00:49:39,520 --> 00:49:44,320
पूछ रहा हूं क्या कुरान का ईश्वर सत्य है? तो आप कह रहे हो नहीं गलत है।

708
00:49:44,320 --> 00:49:48,080
आपकी आवाज नहीं आ रही, गायब हो रही है।

709
00:49:48,080 --> 00:49:52,160
आवाज आ रही है? हेलो हां आ रही है तो मैं वही कह रहा था कि जैसे अपने

710
00:49:52,160 --> 00:49:56,640
वर्णाश्रम पे भी सवाल उठाया अगर आपने अभी एक बात कही है

711
00:49:56,640 --> 00:50:00,800
मिथ्यावादी तो आप लोग हैं क्या कहा है आपने एक मिनट

712
00:50:00,800 --> 00:50:04,960
आपने क्या कहा है भवनती भवेत ऐसा आता है न जात

713
00:50:04,960 --> 00:50:08,960
ब्राह्मण भवेत न जात्य क्षत्रिय भवेत इसमें शांति पर्व में आता

714
00:50:08,960 --> 00:50:13,120
है महाभारत के 188 में साफ-साफ लिखा हुआ है वर्णाश्रम

715
00:50:13,120 --> 00:50:17,920
की बात हम कर रहे हैं क्या अभी भाई साहब ईश्वर अल्लाह की बात हो गई क्या

716
00:50:17,920 --> 00:50:22,000
बता रहा हूं मैं कि आपका जो क्लेम है वो आपकी आवाज कट रही है। आपकी आवाज कट

717
00:50:22,000 --> 00:50:24,400
रही है।

718
00:50:24,400 --> 00:50:28,560
आप जो है चैप्टर को बदलिए मत। पहले ईश्वर अल्लाह

719
00:50:28,560 --> 00:50:33,280
की बात करिए। हेलो हां

720
00:50:33,280 --> 00:50:37,600
आपने कोई ब्लू वो ये ब्लूटूथ वगैरह तो नहीं लगाया है? नहीं ब्लूटूथ

721
00:50:37,600 --> 00:50:41,840
तो नहीं है कुछ भी। ब्लूटूथ नहीं है। हां। तो बार-बार आपकी आवाज

722
00:50:41,840 --> 00:50:46,000
कट रही है। हां तो ईश्वर ईश्वर अल्लाह

723
00:50:46,000 --> 00:50:46,500
की बात चल

724
00:50:46,480 --> 00:50:50,640
रही है। अभी वर्णाश्रम पर आएंगे। पहले ईश्वर अल्लाह की बात कर लेते हैं।

725
00:50:50,640 --> 00:50:53,680
तो आप मुझे बताइए

726
00:50:53,680 --> 00:50:55,920
कि

727
00:50:55,920 --> 00:51:01,680
ये

728
00:51:01,680 --> 00:51:04,960
मेरा प्रभु आई थिंक इंटरनेट

729
00:51:04,960 --> 00:51:09,360
कृष्ण और अल्लाह को जो कृष्ण और अल्लाह को जो एक कहा जाता है स्पोन

730
00:51:09,360 --> 00:51:15,360
के द्वारा ये सत्य कह रहे हैं आप ये सत्य है।

731
00:51:17,040 --> 00:51:21,600
ये अचिंत भेद तत्व से क्वालिटेटिवली एक क्वालिटेटिवली

732
00:51:21,600 --> 00:51:26,000
अलग है। तो मैंने अभी यह बोला है कि क्या स्वान और कृष्ण को भी अचिंत

733
00:51:26,000 --> 00:51:30,160
इसी बात से बोलेंगे आप एक ये भौतिक है वो आध्यात्मिक है।

734
00:51:30,160 --> 00:51:34,640
वो लोग तो मान तो यानी अल्लाह अल्लाह है ना फिर अल्लाह है ना

735
00:51:34,640 --> 00:51:39,200
अल्लाह भी आध्यात्मिक अल्लाह की अल्लाह की जो आध्यात्मिक बातें हैं आध्यात्मिक

736
00:51:39,200 --> 00:51:43,360
चीजें हैं कुरान की वो सत्य है फिर क्या पता कोई यक्ष हो

737
00:51:43,360 --> 00:51:47,600
ही सकते है वो जिनको अल्लाह मानते हो कोई ऐसे ही मतलब आपको ये पता नहीं है कि अल्लाह

738
00:51:47,600 --> 00:51:51,680
क्या है मगर आप ये कह रहे हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है यानी कि आपको ये भी नहीं

739
00:51:51,680 --> 00:51:54,800
पता कि कृष्ण क्या है

740
00:51:54,800 --> 00:51:59,040
कृष्ण तो खैर आपसे बेटर ही पता है हमें क्या है क्योंकि हम उनका देखो व्यक्तिगत

741
00:51:59,040 --> 00:52:01,520
व्यक्तिगत उसप उस मत जाओ। आपसे क्लेम जो

742
00:52:01,520 --> 00:52:05,520
ये कर रहे हो ना ये मत करो। अभी प्रश्नों पर रहो। आप

743
00:52:05,520 --> 00:52:09,680
आप जो ये व्यक्तिगत ये कह रहे हो आपसे बेहतर पता है। आपसे बेहतर पता है।

744
00:52:09,680 --> 00:52:13,920
ये ये जो कर रहे हो ना व्यक्तिगत व्यक्तिगत कटाक्ष इससे बचो।

745
00:52:13,920 --> 00:52:18,000
मैं पूछ रहा हूं कि जो आपने

746
00:52:18,000 --> 00:52:22,160
कहा कि अल्लाह क्या है? वो तो हम जानते ही नहीं है। वो यक्ष भी हो सकता है। तो

747
00:52:22,160 --> 00:52:26,240
इसका मतलब क्या कृष्ण के बारे में भी ऐसा ही है। कृष्ण के

748
00:52:26,240 --> 00:52:30,800
बारे में क्यों होगा कृष्ण के बारे में पता है तो फिर क्यों कह रहे हो कृष्ण और अल्लाह एक है

749
00:52:30,800 --> 00:52:34,960
झूठ है कि सत्य है ये तो समझाने के लिए भाई उनको अपने धर्म अरे

750
00:52:34,960 --> 00:52:39,040
भाई तो पहले ये बोलो ना कि हां हम झूठ बोलते हैं आप झूठ

751
00:52:39,040 --> 00:52:43,120
बोलते हम बोलते हैं हम सब शास्त्र के आधार पे बोलते हैं हम बस उनको प्रचार करने

752
00:52:43,120 --> 00:52:47,200
तो बताओ शास्त्र में कहां लिखा है कृष्ण और अल्लाह एक है

753
00:52:47,200 --> 00:52:51,440
शास्त्र में कहां कहीं नहीं लिखा है अल्लाह का तो वर्णन ही नहीं क्यों अभी

754
00:52:51,440 --> 00:52:55,440
अभी बोल रहे थे हम जो बोलते शास्त्र से बोलते अब शास्त्र प्रणाम बताओ चलो

755
00:52:55,440 --> 00:52:59,440
शास्त्र चलो शास्त्र से ये बता दो अभी तक ये समझ में आ गया ये बात झूठ

756
00:52:59,440 --> 00:53:03,520
है वो मुंह से ना बोलो बात अलग है मगर अब तुम मुझे बता दो आप मुझे ये बता

757
00:53:03,520 --> 00:53:07,680
दीजिए कि शास्त्र में आज्ञा कहां पे दी गई है कि शास्त्र की जो व्याख्या बदल

758
00:53:07,680 --> 00:53:12,240
के आप जो है किसी को लेके आओ धर्म में वो तो सर कमेंट्री होते

759
00:53:12,240 --> 00:53:16,320
परपट पढ़ोगे कमेंट्री पढ़ोगे तो आप अरे शास्त्र बताइए ना कमेंट्री

760
00:53:16,320 --> 00:53:16,960
तो कमेंट्री

761
00:53:16,960 --> 00:53:21,040
तो हमारी मैं कमेंट्री बता दूं आपको चलेगी कमेंट्री कमेंट्री यानी

762
00:53:21,040 --> 00:53:26,000
आपके पास कमेंट्री नहीं है आपके पास शास्त्र नहीं है कमेंट्री है

763
00:53:26,000 --> 00:53:30,160
सब आपका भी अपना शास्त्र का कमेंट्री है। हर एक संप्रदाय का अपना कमेंट्री होता है। इनके

764
00:53:30,160 --> 00:53:34,480
तो मुझे मुझे कमेंट्री में बता दो कि वो किसी को लाने के लिए शास्त्र

765
00:53:34,480 --> 00:53:39,520
की झूठी व्याख्या करें। ब्रह्म की झूठी व्याख्या करें। ये ला दो।

766
00:53:39,520 --> 00:53:43,600
कहां है? कमेंट्री में जो शास्त्र से सद्ध दिख रहा हो

767
00:53:43,600 --> 00:53:47,760
कि ये इस जो है शास्त्रीय वचन का भाष्य है।

768
00:53:47,760 --> 00:53:51,760
बताओ कहां है? नहीं अद्वैतवाद जैसे हम ये नहीं करते।

769
00:53:51,760 --> 00:53:55,920
हम गलत कमेंट्री हम नहीं देते। वो मैं नहीं बोल रहा हूं। मैंने क्या पूछा है भाई साहब? मैंने क्या

770
00:53:55,920 --> 00:54:00,160
पूछा है? आपके पास पर्सनल अटैक्स के अलावा कोई

771
00:54:00,160 --> 00:54:04,160
सैद्धांतिक आधार नहीं है। जो बीच-बीच में आप आप

772
00:54:04,160 --> 00:54:08,720
बीच-बीच में सामने वाले को आप बीच-बीच में सामने वाले को

773
00:54:08,720 --> 00:54:12,720
क्या कहते हैं? उसका मोरल डाउन करने के लिए या फिर विषय को भटकाने के लिए

774
00:54:12,720 --> 00:54:16,800
आप व्यक्तिगत कटाक्ष कर रहे हो। बस और कुछ थोड़ी ना कर रहे हो। आपकी बातें आप

775
00:54:16,800 --> 00:54:20,960
खुद ही कह रहे हो। आपकी बातें आप जब मैं दुरुपयोग करूंगा अपने अधिकारों का

776
00:54:20,960 --> 00:54:25,040
तो आपको तकलीफ हो जाएगी। नहीं जो भी आपको करना है करो पर

777
00:54:25,040 --> 00:54:29,440
आप ऑलरेडी कर रहे हो आप वो मत करो आप सीमाओं का उल्लंघन मत करो मुझे बताओ

778
00:54:29,440 --> 00:54:32,320
मुझे बताओ कौन से शास्त्र के भाष्य के

779
00:54:32,320 --> 00:54:36,560
कौन से शास्त्र के भाष्य के आधार पर भाई साहब हेलो कौन से शास्त्र

780
00:54:36,560 --> 00:54:40,720
के भाष्य के आधार पर अब एक बार भी और आपने कोई व्यक्तिगत

781
00:54:40,720 --> 00:54:44,880
वो किया क्लेम कि आप यह करते हो आप यह करते हो ठीक है अगर व्यक्तिगत

782
00:54:44,880 --> 00:54:48,960
आप हुए तो मैं आपको रिमूव कर दूंगा ठीक है चर्चा

783
00:54:48,960 --> 00:54:53,440
करनी है तो सैद्धांतिक बात करिए हां ठीक है बाय

784
00:54:53,440 --> 00:54:57,440
चलो निकलो जल्दी निकलो जल्दी निकलो

785
00:54:57,440 --> 00:55:03,440
ये है

786
00:55:03,840 --> 00:55:07,840
ईश्वर अल्लाह एक की बातें हो गई उसका जवाब नहीं है तो वर्णाश्रम पे

787
00:55:07,840 --> 00:55:11,920
ले आए फलाना एक कोई श्लोक रटा हुआ है और जो है

788
00:55:11,920 --> 00:55:16,880
बुरा लग रहा है भाई जवाब नहीं है तो भाई व्यक्तिगत कटाक्ष कर लो

789
00:55:16,880 --> 00:55:19,680
है ना

790
00:55:19,680 --> 00:55:23,680
तो ईश्वर अल्लाह एक करने के विषय में क्रमबद्धता से

791
00:55:23,680 --> 00:55:28,000
चीजें समझ लीजिए। पहली बात सैद्धांतिक विरोध है।

792
00:55:28,000 --> 00:55:32,480
कुरान कुरान इसलिए अल्लाह अल्लाह इसलिए है क्योंकि कृष्ण कृष्ण है।

793
00:55:32,480 --> 00:55:36,480
कृष्ण और अल्लाह एक होता अगर कृष्ण और अल्लाह एक होता

794
00:55:36,480 --> 00:55:40,480
तो फिर वो कुरान कुरान ना होता वो अल्लाह अल्लाह ना होता या फिर ये कृष्ण कृष्ण ना

795
00:55:40,480 --> 00:55:44,640
होता। यह कृष्ण कृष्ण है इसलिए वह अल्लाह अल्लाह है। अब बात आती है सब

796
00:55:44,640 --> 00:55:47,360
सब कुछ कृष्ण से ही आ रहा है। तो सब कुछ कृष्ण

797
00:55:47,360 --> 00:55:51,920
से ही आ रहा है तो यह लोग फिर जीव और ब्रह्म को अलग-अलग क्यों कहते हैं?

798
00:55:51,920 --> 00:55:55,920
जब सब कुछ कृष्ण को ही आ रहा है। कृष्ण से ही आ रहा है तो जीव और ब्रह्म की एकता भी स्वीकार कर

799
00:55:55,920 --> 00:56:00,000
लो भाई। हम अच्छा

800
00:56:00,000 --> 00:56:04,160
और जब तुम अल्लाह और शिव और कृष्ण की एकता क्यों

801
00:56:04,160 --> 00:56:08,320
नहीं वो शिव जी कृष्ण से नहीं आ रहे। आपके अनुसार कृष्ण से आ रहे हैं तो क्यों नहीं बोलते

802
00:56:08,320 --> 00:56:12,320
हो गला? फाड़ फाड़ करके क्यों नहीं छापते हो कि शिव और कृष्ण एक है। अभी तक वो

803
00:56:12,320 --> 00:56:16,400
जो भाई साहब थे कौन दिल्ली वाले उन्होंने कह तो दिया मैं दिखाऊंगा प्रभुपाद

804
00:56:16,400 --> 00:56:20,640
की पुस्तकों में कहां पर शिव और कृष्ण की एकता बताई गई है। आज तक कोई वहां

805
00:56:20,640 --> 00:56:23,680
से प्रमाण नहीं आया।

806
00:56:23,680 --> 00:56:26,320
हम

807
00:56:26,320 --> 00:56:30,320
इसके बाद अगर जो है कि उनहीं से

808
00:56:30,320 --> 00:56:34,400
आ रहे हैं। इस कारण से वो मान लो। अब सैद्धांतिक विरोध है तो सैद्धांतिक

809
00:56:34,400 --> 00:56:38,400
विरोध शिवजी के साथ भी है। मगर वहां पर तो तुम कह देते हो कि नहीं नहीं शिवजी

810
00:56:38,400 --> 00:56:42,480
अलग है। कृष्ण अलग है। अच्छा अब बात आती है मनाने की। मनाने की

811
00:56:42,480 --> 00:56:46,560
बात है तो पहले तो घोषित करोगे झूठ है किताब में तो तुम वहां पर टेप लग

812
00:56:46,560 --> 00:56:50,640
जाएगा। वहां पर सिल लोगे अपना मुख को

813
00:56:50,640 --> 00:56:54,800
हम कि नहीं भैया हम जो है

814
00:56:54,800 --> 00:56:58,800
झूठ नहीं बोलते। प्रलोभन देते हैं। है ना? फॉल्स

815
00:56:58,800 --> 00:57:02,400
इमेज बनाते हैं। सब कुछ करते हैं। मगर

816
00:57:02,400 --> 00:57:06,720
हम जो है झूठ नहीं बोलते। वाह

817
00:57:06,720 --> 00:57:10,720
क्या बात है। अब बात आ जाती है और आगे चलो

818
00:57:10,720 --> 00:57:14,880
क्रमबद्धता से कि चलो भाई सामने वाला स्वीकार नहीं कर रहा कि वो

819
00:57:14,880 --> 00:57:18,880
झूठ बोलता है और वो जो है मुसलमानों को अपने में लय कराने के

820
00:57:18,880 --> 00:57:23,040
लिए तो बोलेगा कि कृष्ण और अल्लाह एक है। मगर शिव जी वालों

821
00:57:23,040 --> 00:57:27,040
को अपने में लय कराने के लिए नहीं बोलेगा कि शिव और कृष्ण एक है। उनको अपने में

822
00:57:27,040 --> 00:57:31,680
लय कराने के लिए क्या बोलेगा? नहीं नहीं कृष्ण ही सुप्रीम है। वहां ऐसे लय होंगे।

823
00:57:31,680 --> 00:57:36,400
समझ रहे हो? क्योंकि वहां पर सहिष्ता है ना।

824
00:57:36,400 --> 00:57:40,400
और एक बात आप ध्यान रखिए जो धर्म होता

825
00:57:40,400 --> 00:57:45,280
है धर्म की जब व्याख्या होती है तो उसमें झूठ चपेट नहीं आता है

826
00:57:45,280 --> 00:57:49,280
ब्रह्म के विषय में झूठ बोल दो भगवान के विषय में ही झूठ बोल दो उसके स्वरूप

827
00:57:49,280 --> 00:57:53,280
के विषय में झूठ बोल दो ये सब धर्म ने कहीं नहीं सिखाया तेरे लिए कर्तव्य और

828
00:57:53,280 --> 00:57:57,360
कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है और ये वाला जो लॉजिक है ना

829
00:57:57,360 --> 00:58:01,440
बच्चे को वो दिया जाता है बच्चे को वो दिया जाता है कम दिया जाता है मगर

830
00:58:01,440 --> 00:58:05,520
झूठ नहीं बोला जाता बच्चे को झूठ नहीं बोला बोला जाता है

831
00:58:05,520 --> 00:58:09,760
कम दिया जाता है यहां पर इतना इस ज्ञान वो आगे चलकर के

832
00:58:09,760 --> 00:58:14,640
ए बी सी डी गलत नहीं हो जाती जो हमने तुम्हें ए बी सी डी सिखाई थी गलत थी

833
00:58:14,640 --> 00:58:17,440
हम वो रहती है उसके आगे का ज्ञान मिलता

834
00:58:17,440 --> 00:58:21,520
जाता है ये तर्क भी गलत है अब दूसरी बात ये है कि कि

835
00:58:21,520 --> 00:58:25,760
भैया मैच करता है इसलिए आत्म साक्षात्कार का विज्ञान नामक

836
00:58:25,760 --> 00:58:29,760
पुस्तक में चौथे चैप्टर में बातों का अंत

837
00:58:29,760 --> 00:58:34,320
होते समय प्रभुपाद जी की ओर से एक वचन लिखा हुआ है। क्या लिखा है?

838
00:58:34,320 --> 00:58:38,400
मैं मेरी बात पर विश्वास करो। मैं जो भी तुम्हें शिक्षा दे रहा हूं बाइबल से

839
00:58:38,400 --> 00:58:44,080
दे रहा हूं। बाइबल किससे शिक्षा दी जा रही है भैया?

840
00:58:44,080 --> 00:58:49,280
बाइबल की शिक्षा है। हम

841
00:58:49,280 --> 00:58:53,280
कम से कम जो आर्य समाज वाले हैं वो टू द पॉइंट

842
00:58:53,280 --> 00:58:57,360
रहते हैं। जो उनके बिलीफ्स है वो क्लियर बोलते

843
00:58:57,360 --> 00:59:01,360
हैं। ये नहीं यहां हम झूठ बोलते हैं। मतलब झूठ

844
00:59:01,360 --> 00:59:05,360
बोल भी रहे हैं। प्रलोभन भी दे रहे हैं। वो झूठ नहीं है। फॉल्स फॉल्स इमेज है। फिर फॉल्स

845
00:59:05,360 --> 00:59:09,440
को पकड़ लिया तो फॉल्स नहीं है। स्लिप ऑफ टंग

846
00:59:09,440 --> 00:59:13,600
हो गया। भाग गए। इसीलिए कहते हैं मत पड़ो

847
00:59:13,600 --> 00:59:19,600
चक्कर में कोई नहीं टक्कर में।

848
00:59:22,800 --> 00:59:27,440
अच्छा ये कह रहे हैं कि ऊपर उठो छोटी-छोटी

849
00:59:27,440 --> 00:59:32,160
बातों से। शायद यह कह रहे हैं।

850
00:59:32,160 --> 00:59:38,160
ऊपर उठ के मतलब कहां जाए मतलब समझे नहीं। कहां जाना है हमको?

851
00:59:45,200 --> 00:59:49,360
तो क्रम क्या बना? पहली बात सैद्धांतिक विरोध।

852
00:59:49,360 --> 00:59:53,440
उसके बाद यह स्वीकार करो कि झूठ है। उसके

853
00:59:53,440 --> 00:59:57,840
बाद धर्म नहीं सिखाता। ऐसा करना।

854
00:59:57,840 --> 01:00:02,000
उसके बाद जो है

855
01:00:02,000 --> 01:00:06,320
वो ए बी सी डी वाला कि कम ज्ञान दिया जाता है। नर्सरी

856
01:00:06,320 --> 01:00:10,320
के बच्चे को पीएचडी का ज्ञान नहीं दिया जाता। कम दिया जाता है मगर झूठा ज्ञान नहीं दिया

857
01:00:10,320 --> 01:00:14,880
जाता। ठीक है? और यदि प्रलोभन

858
01:00:14,880 --> 01:00:18,960
दे ही रहे हो मुस्लिमों को तो शबों को क्यों नहीं दे रहे हो? वहां पर

859
01:00:18,960 --> 01:00:23,600
क्यों अनादर कर रहे हो? ये प्रश्न ये प्रश्न आ जाता है। और

860
01:00:23,600 --> 01:00:28,160
अंतत गतवाएं घोषित करो कि आप सनातन ज्ञान नहीं दे रहे हैं इन किताबों के द्वारा।

861
01:00:28,160 --> 01:00:32,160
और एक बात और आ जाती सातवीं बात कि भाई यह कह

862
01:00:32,160 --> 01:00:36,400
रहे हैं ऐसा क्लेम कर रहे हैं इस की ओर से कि ऐसा होता नहीं है। मान लो

863
01:00:36,400 --> 01:00:37,840
हम कैसे माने कि जो आप

864
01:00:37,840 --> 01:00:42,560
बात कह रहे हैं वो इस की तरफ से कही जा रही है। कैसे माने बुक में लिखो

865
01:00:42,560 --> 01:00:46,640
छवाओ उसको इस की तरफ से कि हम मुसलमानों को मैनपुलेट करने के लिए उनको

866
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जो है वहां से यहां लाने के लिए ऐसा बोलते प्रलोभन देते हैं। भाई हम कैसे

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माने? हम तो आप जो कर रहे हैं जो दिखा रहे हैं वही तो देखेंगे।

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आपने अपने मन से कह दिया हम क्या करें उसका जो आप क्लेम

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करेंगे सार्वजनिक मंचों से वह हम स्वीकार करेंगे ऑफिशली जो क्लेम आएंगे और

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ऑफिशियली क्लेम यही है

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ऊपर उठने की बात यह है कि अभी आपको पता नहीं है लगता है सामर्थवान

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गुरु की शरण में नहीं है वरना इस तरह की बातें ना करते ऊपर उनको

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उठना चाहिए जो कृष्ण और अल्लाह को एक कर रहे हैं

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ठीक है। चलिए

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सभी को जय श्री राम। और सनातन

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शंकर जी के चैनल पर एक लाइव हुई है लगभग दो घंटे

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की। उसमें हमने वो पांच पॉइंट्स पर बात की है पहले और फिर

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हम बाकी के पांच पॉइंट्स पर अ

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बात करेंगे। और

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अनिकेत दुबे जी के साथ भी चर्चा होनी है। पर जो है

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इसको कल शेड्यूल करेंगे। हां। चलिए

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जय श्री राम सभी को।
