1
00:00:01,360 --> 00:00:05,680
सभी को जय श्री राम। हमारी संजय पारा सर जी के साथ दो

2
00:00:05,680 --> 00:00:09,840
लाइव हो चुकी है। एक हुई थी तीन तारीख

3
00:00:09,840 --> 00:00:14,160
की रात को और अभी चार तारीख की दोपहर में भी हुई है अभीभी एक लाइव। नेटवर्क

4
00:00:14,160 --> 00:00:18,160
की प्रॉब्लम की वजह से टुकड़ों में हो पा रही है बातचीत और काफी

5
00:00:18,160 --> 00:00:22,640
चीजें हम जान चुके हैं। बस इतना है अभी फिलहाल कि संजय जी का कहना था

6
00:00:22,640 --> 00:00:27,040
कि जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम की संस्था शुरू करने वाले वीरेंद्र

7
00:00:27,040 --> 00:00:31,520
देव दीक्षित जी हैं जिनके बारे में उनके आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

8
00:00:31,520 --> 00:00:35,600
वालों के दो टुकड़े हो चुके हैं। मतलब कुछ मानते हैं कि वीरेंद्र देव दीक्षित

9
00:00:35,600 --> 00:00:39,600
जी अभी जीवित है। उनका कहीं पर है छुपे हुए समाज से और कुछ

10
00:00:39,600 --> 00:00:44,560
मानते हैं वह जीवित नहीं है। वो शरीर छोड़ चुके दूसरे शरीर में आने वाले हैं।

11
00:00:44,560 --> 00:00:48,640
और वीरेंद्र दीक्षित जी ने जो ज्ञान लिया है वह लिया है लेखराज जी

12
00:00:48,640 --> 00:00:52,800
की शिष्याओं से जो उनकी मुरली जो मुरली के रूप में

13
00:00:52,800 --> 00:00:57,440
लेखराज जी का कहना है कि मेरे पास जो है

14
00:00:57,440 --> 00:01:01,600
शिव जी आते थे और वो लिखवाते थे और मैं लिखता था तो उनकी शिष्याओं

15
00:01:01,600 --> 00:01:05,760
ने वो मुरलियां लेकर इनको दी है वीरेंद्र देव दीक्षित जी को और वीरेंद्र देव

16
00:01:05,760 --> 00:01:09,920
दीक्षित जी ने उनसे मुरलियां लेकर यह कहा कि जो शिष्याएं हैं वह सही अर्थ नहीं

17
00:01:09,920 --> 00:01:13,920
बता रही है। लेखराज जी भी सही अर्थ नहीं बता पाए और मैं सही अर्थ बता

18
00:01:13,920 --> 00:01:17,920
रहा हूं। बात ऐसी है कि अगर लेखराज जी अब यहां पर हम लोग क्वेश्चन कर रहे

19
00:01:17,920 --> 00:01:22,160
थे संजय जी से कि जब लेखराज जी उसका अर्थ नहीं समझ पाए

20
00:01:22,160 --> 00:01:26,160
नहीं बता पाए और उनकी शिष्याएं भी उनका अर्थ वो

21
00:01:26,160 --> 00:01:30,800
मुरलियों का अर्थ नहीं समझ पाए नहीं बता पाई तो फिर

22
00:01:30,800 --> 00:01:35,120
उनकी कैपेसिटी पर कैपेबिलिटी पर डाउट हो जाना चाहिए कि

23
00:01:35,120 --> 00:01:39,200
भाई ये हमें जो मुरली भी दे रहे हैं वो भी डाउटफुल हो गई कि वो हो सकता है नकली हो

24
00:01:39,200 --> 00:01:43,280
कोई मिलावट हो या जो हो तो ये मैंने प्रश्न किया तो यही प्रश्न चल रहा था इसमें

25
00:01:43,280 --> 00:01:47,760
हम बीच में ले लेते हैं अब संजय जी को जी

26
00:01:47,760 --> 00:01:52,960
संजय जी जय श्री राम जी जय श्री राम भाई जी

27
00:01:52,960 --> 00:01:57,040
जैसे तो अब हम उस प्रश्न से आगे बढ़ जाते हैं

28
00:01:57,040 --> 00:02:02,000
जी अगर आपकी संतुष्टि हो गई है तो आगे बढ़ो

29
00:02:02,000 --> 00:02:06,160
नहीं संतुष्टि तो नहीं हुई इसमें आपने ये कहा ना कि कोर्ट आपने कहा को

30
00:02:06,160 --> 00:02:10,240
वो कोर्स ले लीजिए कोर्स तो लेना पड़ेगा वो सबको

31
00:02:10,240 --> 00:02:14,240
लेना पड़ेगा क्योंकि देखो देखिए कोर्स कोर्स किसी दो चीज को

32
00:02:14,240 --> 00:02:18,240
जब जानते हो ना देखो एक मेरी भी सलाह सुनो मैं भी पढ़ा लिखा हूं दो रोटी मैं

33
00:02:18,240 --> 00:02:22,400
भी खाता हूं जी जी जब तक जब तक हम दोनों

34
00:02:22,400 --> 00:02:26,560
एक चीज को ना पढ़े हो एक चैप्टर पढ़े और उसके बारे में डिस्कस करें तो अच्छा

35
00:02:26,560 --> 00:02:30,960
रहता है उसका निर्णय निकलता है ठीक है जब तक

36
00:02:30,960 --> 00:02:35,200
आप भी एक चीज को पढ़े मैं भी एक चीज को पढूं और फिर उसके बाद डिस्कस करें तो उसका आंसर

37
00:02:35,200 --> 00:02:39,280
निकलेगा सागर मंथन इसी को सागर मंथन कहते हैं कि पहले ज्ञान सागर को

38
00:02:39,280 --> 00:02:43,280
पढ़ा जाए समझा जाए ठीक है मैं मैं इसमें अपनी बात कह दूं देखिए भाई

39
00:02:43,280 --> 00:02:47,360
साहब कि जैसे आपने कहा है कि सात दिन का कोर्स कोई बात नहीं जैसे

40
00:02:47,360 --> 00:02:51,680
अभी मुझे कोई व्यक्ति मिलता है और वो यह कहता है मैं ईश्वर हूं

41
00:02:51,680 --> 00:02:55,760
मैं कहूंगा क्यों वो कहेगा कोर्स कर ले वो सात दिन का नहीं वो 50

42
00:02:55,760 --> 00:02:59,840
दिन का कहेगा फिर तीसरा व्यक्ति कहेगा तीसरा व्यक्ति कहेगा

43
00:02:59,840 --> 00:03:03,840
कि मैं ईश्वर हूं और फिर मैं उससे पूछूं क्यों कि नहीं मेरा

44
00:03:03,840 --> 00:03:07,840
150 दिन का कोर्स कर ले अगर भाई तुम जो कोर्स मुझे

45
00:03:07,840 --> 00:03:08,340
दे

46
00:03:08,080 --> 00:03:12,400
रहे हो और उसमें वह ज्ञान मेरे क्वेश्चन का आंसर है उस उस कोर्स

47
00:03:12,400 --> 00:03:16,640
है तो वो आंसर मुझे अभी दो जिससे मैं उस कोर्स के लिए अट्रैक्ट हो जाऊं।

48
00:03:16,640 --> 00:03:22,480
दूसरी बात आपने शायद ये चैलेंज भी

49
00:03:22,480 --> 00:03:26,880
मेरे दो मेरे दो उत्तर है ना मेरे दो उत्तर है।

50
00:03:26,880 --> 00:03:31,120
दूसरा उत्तर ये है कि आपने जैसे चैलेंज किया हुआ है ना ओपन चैलेंज

51
00:03:31,120 --> 00:03:35,440
के कोर्ट में आके भी सिद्ध कर दो कोई। बिल्कुल सिद्ध होगा।

52
00:03:35,440 --> 00:03:39,520
तो ये जो आपने चैलेंज किया है जब कोर्ट कहेगी आप अपनी बातों को सिद्ध करिए

53
00:03:39,520 --> 00:03:43,600
यहां ये बातें समझ में नहीं आ रही तो आप कहोगे कोर्ट कोर्ट वालों से कि कोर्स करो हमारा

54
00:03:43,600 --> 00:03:47,600
जाके बिल्कुल बिल्कुल कहेंगे एसआईटी गठित करो और एक

55
00:03:47,600 --> 00:03:51,600
बार इस सारे ज्ञान का पूरा आकलन करवाया जाए बिल्कुल कहेंगे क्यों नहीं

56
00:03:51,600 --> 00:03:55,760
कहेंगे मगर उस कोर्स को अगर उस ज्ञान को समझे तो टाइम भी

57
00:03:55,760 --> 00:03:59,840
आपसे जब पूछताछ होगी तो कोर्स करने की थोड़ी ना कहोगे आप तो उस

58
00:03:59,840 --> 00:04:02,720
कोर्स में

59
00:04:02,720 --> 00:04:07,200
ठीक है तो कुल मिला के कुल मिला के इस प्रश्न ने कहा अभी आपके पास जवाब नहीं है। फिलहाल

60
00:04:07,200 --> 00:04:11,760
नहीं बिल्कुल हर बात का जवाब है। अब आपको समझ नहीं आ रहा उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता।

61
00:04:11,760 --> 00:04:16,560
चलिए आगे बढ़ते हैं। अब मुझे ये बताइए कि

62
00:04:16,560 --> 00:04:20,560
आप ईश्वर को मानते हैं। है ना? जी बिल्कुल।

63
00:04:20,560 --> 00:04:23,120
तो ईश्वर है। यह सिद्ध कैसे होता

64
00:04:23,120 --> 00:04:27,200
है? मतलब कैसे विश्वास हुआ? कैसे विश्वास करें कि इस दुनिया में कोई ईश्वर

65
00:04:27,200 --> 00:04:31,280
है? इस दुनिया में कोई ईश्वर है तो यह गीता

66
00:04:31,280 --> 00:04:35,440
ने फाइनल बताया। इन मुरलियों ने फाइनल बताया। गीता क्या कहती

67
00:04:35,440 --> 00:04:39,520
है ना भाव ना भाव विते स ईश्वर

68
00:04:39,520 --> 00:04:43,680
इस मुरली ने बताया शिव बाबा सृष्टि पर सदा कायम है और फिर गीता ने

69
00:04:43,680 --> 00:04:47,680
बताया

70
00:04:47,680 --> 00:04:51,840
ये बात तो उसके लिए है जो गीता पर विश्वास करता हो अभी वो जो

71
00:04:51,840 --> 00:04:55,840
व्यक्ति खड़ा है आप बताओ आप अपनी बताओ आप गीता पर विश्वास

72
00:04:55,840 --> 00:04:59,840
करते हो कि नहीं मैं न्यूट्रल व्यक्ति की ओर से आपसे प्रश्न

73
00:04:59,840 --> 00:05:04,080
कर रहा हूं कि क्या आपके यहां जो ज्ञान दिया गया है जैसे आप पहले

74
00:05:04,080 --> 00:05:08,560
आप अपना पक्ष क्लियर करो। आप जय श्री राम बोल रहे हैं तो आप गीता पाठी हो कि नहीं हो?

75
00:05:08,560 --> 00:05:12,880
गीता पाठी हूं। बिल्कुल हूं। तो गीता पाठी हो तो

76
00:05:12,880 --> 00:05:18,880
गीता में गीता में आया कि नहीं आया? पहले

77
00:05:19,680 --> 00:05:24,080
कि नास्ते विद्यते भावो ना भावो विद्यते सत गीता में आया कि नहीं आया?

78
00:05:24,080 --> 00:05:28,080
आया। कि सत्य का इस दुनिया में कभी विनाश नहीं होता। सत्य सदाकाल होता है।

79
00:05:28,080 --> 00:05:32,240
उसी सत्यनारायण की कथा घर गाई जाती है। इस बात को मानते हो? अरे

80
00:05:32,240 --> 00:05:36,320
भाई साहब मैं मानता हूं मैं जो मेरा जो प्रश्न है वह क्या है कि

81
00:05:36,320 --> 00:05:40,320
कोई नास्तिक व्यक्ति कोई नास्तिक व्यक्ति जो अभी

82
00:05:40,320 --> 00:05:44,880
तक भगवानता है ना अभी तक वो रामायण को मानता है

83
00:05:44,880 --> 00:05:48,880
उसके समक्ष ये कैसे सिद्ध करें उसको कैसे

84
00:05:48,880 --> 00:05:52,960
विश्वास दिलाएं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है क्या इस बारे

85
00:05:52,960 --> 00:05:58,000
में कोई विवेचना है अपने आत्म विज्ञान में

86
00:05:58,000 --> 00:06:02,080
जैसे हम कह रहे हैं जैसे मैं और क्लियर जैसे हम कह रहे हैं ये

87
00:06:02,080 --> 00:06:06,160
ईश्वर है। ये ईश्वर है। इसकी पूजा वो कहेगा कि भाई ईश्वर होता कौन है?

88
00:06:06,160 --> 00:06:10,800
मैं क्यों मानू कोई ईश्वर है? मैं क्यों पूजा करूं?

89
00:06:10,800 --> 00:06:15,040
तो वहां से मैं पूछ रहा हूं क्या आपके यहां पर क्या आपके

90
00:06:15,040 --> 00:06:19,440
यहां पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में वीरेंद्र देव वीरेंद्र देव दीक्षित

91
00:06:19,440 --> 00:06:23,440
जी द्वारा या फिर ब्रह्मा कुमारी लेखराज जी से आई हुई मुरलियों

92
00:06:23,440 --> 00:06:27,600
के द्वारा क्या इस बात पर विवेचना है कि हम किसी व्यक्ति

93
00:06:27,600 --> 00:06:31,600
को जो कि अभी ना तो वैदिक है ना अभी मुरलियों में विश्वास रखने

94
00:06:31,600 --> 00:06:34,800
वाला है ना गीता में विश्वास रखने वाला न्यूट्रल खड़ा हुआ है

95
00:06:34,800 --> 00:06:38,800
वो समझना चाहता है कि मैं कैसे मानू इस दुनिया में कोई ईश्वर तो हमारे

96
00:06:38,800 --> 00:06:42,800
पास क्या थ्योरी है उसके लिए? उसके लिए एक

97
00:06:42,800 --> 00:06:48,400
थ्योरी सीधी सी है। जिसको आप नास्तिक समझ रहे हैं ना वो सबसे बड़ा आस्तिक होता है।

98
00:06:48,400 --> 00:06:52,400
जिसको आप बोल रहे हो कि नास्तिक है न्यूट्रल है। वो सब वो प्रैक्टिकल में

99
00:06:52,400 --> 00:06:56,480
चीज को जानना चाहता है। आप उसको नास्तिक कह रहे हैं। हमारी परिभाषा के अंदर वो

100
00:06:56,480 --> 00:07:00,800
सबसे बड़ा आस्तिक है। वो प्रैक्टिकल बात को जानना चाहता है। तो फिर

101
00:07:00,800 --> 00:07:05,040
नास्तिक कौन? भगवान और नास्तिक वो हुआ जो

102
00:07:05,040 --> 00:07:10,720
सच्चाई को जानते हुए भी पीछे हट जाता है कि नहीं आत्मा और परमात्मा का ज्ञान हमें नहीं चाहिए।

103
00:07:10,720 --> 00:07:15,040
या तो आत्मा को मानता हो या परमात्मा को मानता हो। देखिए

104
00:07:15,040 --> 00:07:19,520
नास्तिक शब्द की अगर विवेचना करेंगे तो ये आएगी कि जिसमें जो आस्तिक

105
00:07:19,520 --> 00:07:23,520
नहीं है नास्तिक। यानी कि जो भगवान के अस्तित्व पर

106
00:07:23,520 --> 00:07:27,920
विश्वास वो भगवान के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता। मगर जो जानते

107
00:07:27,920 --> 00:07:32,080
हुए मुकरता है तो उसको तो कुछ और कहेंगे। उसको कुछ झूठ बोलने वाला

108
00:07:32,080 --> 00:07:37,440
कहेंगे क्योंकि वो मन में तो विश्वास कर रहा है मगर वो हां

109
00:07:37,440 --> 00:07:41,840
ऊपर से मना कर रहा है कोई बात नहीं तो जब देखो कर्म अकर्म

110
00:07:41,840 --> 00:07:46,080
विकर्म जब उसके कर्मों का पाप कर्म बढ़ेगा तो क्या उसको भोजा नहीं होगा भोजा

111
00:07:46,080 --> 00:07:50,000
होगा तो उसको परेशानी आएगी फिजिकली बीमारी आएगी या कोई दिक्कत

112
00:07:50,000 --> 00:07:54,000
आएगी तो दुख में तो याद करता है ना फिर सब प्यार से नहीं करते तो दुख में करते

113
00:07:54,000 --> 00:07:58,240
हैं तब भगवान से याद आ जाता है नहीं नहीं नहीं बात

114
00:07:58,240 --> 00:08:02,240
ये है कि अभी आपसे एक सामान्य व्यक्ति पूछ एक नवयुवक पूछ रहा

115
00:08:02,240 --> 00:08:06,720
है मान लो मैं मुझे समझ लो कि भगवान है ये मैं कैसे मानू

116
00:08:06,720 --> 00:08:10,800
इस बारे में क्या ज्ञान विज्ञान दिया गया है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

117
00:08:10,800 --> 00:08:15,280
में वो दुख आएगा तब मैं मानूंगा उसमें वही बात हो गई मैं उस समय

118
00:08:15,280 --> 00:08:19,600
क्या मानूंगा क्या नहीं मानूंगा ये मैं अभी मान लूं ये वाली बात है ना

119
00:08:19,600 --> 00:08:23,680
तो तो मैं ईश्वर है ये विश्वास कैसे करूं मतलब मैं

120
00:08:23,680 --> 00:08:27,760
आपके पीछे पीछे चलना शुरू करूं कि भाई वीरेंद्र दीक्षित जी भगवान है

121
00:08:27,760 --> 00:08:32,080
या बीके के पीछे पीछे चलना शुरू करूं कि लेखराज जी भगवान

122
00:08:32,080 --> 00:08:36,160
है या उनके द्वारा बताया गया कि शिव बाबा भगवान है तो मैं इनके पीछे

123
00:08:36,160 --> 00:08:40,640
चलूं तो मैं पहले ये तो सेटिस्फाइड हूं कि हां भगवान है

124
00:08:40,640 --> 00:08:44,720
या तो ये पृथ्वी अपने आप मतलब जो प्रकृति वगैरह अपने आप काम कर

125
00:08:44,720 --> 00:08:48,320
रही दुनिया में कोई भगवान नहीं है। जी

126
00:08:48,320 --> 00:08:52,720
आप ही बोलते रहेंगे या बोलने का मौका भी मिलेगा। असल

127
00:08:52,720 --> 00:08:56,800
में बोलने का मौका जब मिलता है तो आप मेरे प्रश्न का जवाब ना दे के

128
00:08:56,800 --> 00:09:00,800
सीधे अपने फेथ को लाते हो कि मान लो दुख

129
00:09:00,800 --> 00:09:04,800
में तो याद करते एक मिनट रुको शिव जी अब नहीं ऐसा नहीं

130
00:09:04,800 --> 00:09:05,300
होता

131
00:09:05,040 --> 00:09:09,120
है ये चर्चा नहीं होती आप आप बोलते जाएंगे चर्चा थोड़ी ना होती है और चर्चा चर्च घर

132
00:09:09,120 --> 00:09:13,120
में होती है आप सनातनी हो कि चर्च घर में रहने वाले हो आप

133
00:09:13,120 --> 00:09:17,920
आप जो है मैं अब चुप हो रहा हूं अब आप बोले जी

134
00:09:17,920 --> 00:09:22,000
बोलने तो देते ही नहीं हो आप कोई आंसर तो आप ले ही नहीं रहे भाई साहब मैं फिर से अपनी

135
00:09:22,000 --> 00:09:26,000
बात बता रहा हूं। मैं चुप हो रहा हूं। मैं फिर से अपने मैं

136
00:09:26,000 --> 00:09:30,080
चुप हो रहा हूं। आप बोलिए क्वेश्चन जितना छोटा करोगे क्वेश्चन जितना छोटा करोगे तो

137
00:09:30,080 --> 00:09:34,080
आंसर भी स्पष्ट मिले। आंसर तो ले ही नहीं रहे ना।

138
00:09:34,080 --> 00:09:38,160
इसका मतलब कहीं आप मुझे डेमोरलाइज तो नहीं करना चाहते हो? नहीं नहीं देखिए

139
00:09:38,160 --> 00:09:42,480
मैं मैं अपने क्वेश्चन को इसलिए एक्सप्लेन करता हूं

140
00:09:42,480 --> 00:09:46,800
क्योंकि जब मैंने छोटा पूछा था तो आंसर भी तो

141
00:09:46,800 --> 00:09:50,800
आंसर भी तो देने का मौका दो ना। आपने ये कह दिया ना कि दुख

142
00:09:50,800 --> 00:09:56,800
में तो याद करता है ना किसको करता है शास्त्र

143
00:09:57,360 --> 00:10:01,360
ये बातें वेद शास्त्र में नहीं आई क्या दुख में सब याद करते हैं सुख में कोई नहीं याद करता

144
00:10:01,360 --> 00:10:05,440
वेद शास्त्र में ये उसके लिए है ना जो वेद शास्त्र में विश्वास करता

145
00:10:05,440 --> 00:10:10,560
हो अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं जो व्यक्ति न्यूट्रल खड़ा है

146
00:10:10,560 --> 00:10:14,720
न्यूट्रल जो खड़ा है जब दुख तो उसके ऊपर भी आते होंगे प्रकृति उसको भी प्रभावित

147
00:10:14,720 --> 00:10:18,880
करती होगी दुख सुख उसमें भी आते हैं कि नहीं आते हैं तो इससे जब

148
00:10:18,880 --> 00:10:23,040
आते हैं तो बड़े-बड़े लोग इससे भगवान का होना यह

149
00:10:23,040 --> 00:10:27,120
सिद्ध हुआ कि एक दिन उसको भी अकल आ जाती है। विश्व पिता कहा जाता है।

150
00:10:27,120 --> 00:10:31,200
विश्व पिता तभी कहा जाता है जब इस पूरी दुनिया उसको अपना बाप मान ले तभी वो विश्व

151
00:10:31,200 --> 00:10:35,360
पिता या जगन्नाथ कहा जाता है। नहीं नहीं कईयों को अकल नहीं आई

152
00:10:35,360 --> 00:10:39,520
है। कई मना करते हैं। बेशक उसका भी

153
00:10:39,520 --> 00:10:43,680
नहीं देखो शिवशंश अगर नहीं मानते तो उसका वो अनाड़ी

154
00:10:43,680 --> 00:10:47,840
पना लेकिन वो भी टूट जाता है एक दिन। मतलब हमें उसको

155
00:10:47,840 --> 00:10:51,840
समझाने के लिए कुछ नहीं है। समझाने

156
00:10:51,840 --> 00:10:55,840
के लिए आप जब एक बात बताइए आपको मैं कहने लग हूं कि हां वहां भगवान

157
00:10:55,840 --> 00:11:00,160
आया भगवान की पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। आप मान गए क्या एकदम से नहीं माने

158
00:11:00,160 --> 00:11:04,160
आप अपने तर्क वितर्क में फंस गए। अर्जुन क्या एक दिन में मान गया था भगवान के कहने से

159
00:11:04,160 --> 00:11:08,240
कि मैं भगवान हूं। 18

160
00:11:08,240 --> 00:11:12,480
मैं रुका हुआ हूं क्योंकि आप अपनी ओर से बोल लीजिए। मैं रुका हुआ हूं। फिर मैं आपका

161
00:11:12,480 --> 00:11:16,720
आपकी बातों का उत्तर दूंगा। जी बोलिए। जी तो फिर जैसे

162
00:11:16,720 --> 00:11:20,720
आप पूछ रहे हो कि मैं कैसे मानूं जब आप पैदा हुए जब समझदार हुए तो आपकी मां ने ही

163
00:11:20,720 --> 00:11:24,880
तो बताया होगा कि तू कौन है? मैं तेरी मां हूं यह तेरा पिता है।

164
00:11:24,880 --> 00:11:28,880
तो ठीक और गलत का फैसला हमें भगवान ने बुद्धि दी है हर बात को जानने

165
00:11:28,880 --> 00:11:32,960
की पहचानने की। और रही बात ज्ञान की। सागर

166
00:11:32,960 --> 00:11:37,200
मंथन सागर ज्ञान का सागर है तो ज्ञान का सागर कौन है? पहले तो उसको जानो

167
00:11:37,200 --> 00:11:41,280
फिर मंथन करो। तो मंथन देवता भी करते

168
00:11:41,280 --> 00:11:45,440
हैं, दानव भी करते हैं। तो यह ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय

169
00:11:45,440 --> 00:11:49,440
इतना छोटी चीज ना लगाओ आप। देवी और देवता तैयार हो रहे हैं। सत्य सनातन

170
00:11:49,440 --> 00:11:53,040
धर्म की स्थापना हो रही है यहां।

171
00:11:53,040 --> 00:11:57,200
तो आप जो क्वेश्चन जितना कर रहे हैं आप पता नहीं किस थ्योरी

172
00:11:57,200 --> 00:12:01,200
पर ले चल रहे हैं। सत्य सनातन धर्म को अच्छे से जानते हैं कि नहीं जानते हैं। मुझे नहीं समझ में

173
00:12:01,200 --> 00:12:05,200
आती ये बातें। और किसी चीज को जब तक आप चख के नहीं

174
00:12:05,200 --> 00:12:10,480
देखोगे। बगैर चखे आप खट्टा मीठा कैसे बताओगे? क्या चीज है ये?

175
00:12:10,480 --> 00:12:14,480
सत्य सनातन धर्म कब स्थापन हुआ? कब भगवान आते हैं? ईश्वर का

176
00:12:14,480 --> 00:12:18,560
मतलब क्या है? भगवान का मतलब क्या है? हरि का मतलब क्या है? हर शब्द का

177
00:12:18,560 --> 00:12:22,560
अर्थ है। लेकिन उलझा के खड़ा कर रही है दुनिया ना। सुलझने तो देती नहीं

178
00:12:22,560 --> 00:12:26,720
है। भगवान तो सीधा साधा सहज ज्ञान सहज राजयोग सिखाता है आकर के।

179
00:12:26,720 --> 00:12:27,520
बड़ी सहजता से

180
00:12:27,520 --> 00:12:31,600
ज्ञान सुनाता है। लेकिन ये उलझाया किसने ये दुनिया? यह दुनिया उड़ जाने वाली तो

181
00:12:31,600 --> 00:12:35,680
बैठी है। इतने चारों तरफ बैठे हैं धर्म के मामले में और यह भारत भाई साहब

182
00:12:35,680 --> 00:12:40,240
आप मेरी बात का जवाब नहीं दे रहे। अगर मुझे कोई नास्तिक मिले तो आध्यात्मिक

183
00:12:40,240 --> 00:12:44,320
विश्वविद्यालय की ओर से मैं उसको क्या उत्तर दूं कि जब तू दुखी होगा तब देख

184
00:12:44,320 --> 00:12:48,400
लियो जा। उससे हाथ जोड़ लो। ये उत्तर दूं। हां

185
00:12:48,400 --> 00:12:53,200
बिल्कुल और क्या करोगे? और क्या करोगे? इसके सिवा क्या? यही उत्तर है।

186
00:12:53,200 --> 00:12:57,200
मेरे पास तो है उत्तर। मैं जानना चाहता हूं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास है कि

187
00:12:57,200 --> 00:13:02,000
नहीं। आज से लगभग 3000 वर्ष

188
00:13:02,000 --> 00:13:06,880
सुनिए अब देखिए आपको मैंने सुना ना आपने उत्तर नहीं दिया अब मैं

189
00:13:06,880 --> 00:13:11,040
बता रहा हूं आज से ढाई हजार के बारे में जानते ही कुछ नहीं ब्रह्मा

190
00:13:11,040 --> 00:13:15,040
बाबा के बारे में कुछ नहीं जानते बताओ ना

191
00:13:15,040 --> 00:13:19,120
मैं आपसे पूछ तो रहा हूं गीता जो कहती है श्रद्धावानम अगर श्रद्धा और

192
00:13:19,120 --> 00:13:23,280
विश्वास ही नहीं है तो उसे बातें ही क्या करनी है श्रद्धा और

193
00:13:23,280 --> 00:13:27,360
विश्वास बात ही नहीं करनी है ये बताइए आपके अंदर बचपन

194
00:13:27,360 --> 00:13:31,360
से बचपन से श्रद्धा थी। हां जी बिल्कुल थी।

195
00:13:31,360 --> 00:13:35,440
पैदा होते ही श्रद्धा है आपके अंदर। तो जब से होश संभाला

196
00:13:35,440 --> 00:13:39,680
तब से श्रद्धा थी। भगवान को जानना पहचानना कोई एक पॉइंट है ना जहां आपको

197
00:13:39,680 --> 00:13:42,880
जहां आपको बताया गया जहां पर श्रद्धा नहीं थी।

198
00:13:42,880 --> 00:13:46,960
कोई एक पॉइंट है ना जहां श्रद्धा नहीं थी। फिर भी बताया गया।

199
00:13:46,960 --> 00:13:50,960
ये सब की अपनी अंदर की ये अंदर का ज्ञान है। आप पर चिंतन करते हो। मैं

200
00:13:50,960 --> 00:13:55,040
स्वचिंतन करता हूं। मैं कैसे फील करूं कि इस

201
00:13:55,040 --> 00:13:59,280
दुनिया में ईश्वर है। बताइए तो बगैर ईश्वर

202
00:13:59,280 --> 00:14:03,440
के आप ये दुनिया वैसे ही बन गई क्या? यानी कि

203
00:14:03,440 --> 00:14:07,680
चलो अब एक बात बोली है ये दुनिया बनाने वाला ईश्वर

204
00:14:07,680 --> 00:14:13,680
है। अब आपने एक बात बोली है

205
00:14:14,000 --> 00:14:18,720
तुम इतनी दिक्कतों के बाद आपने

206
00:14:18,720 --> 00:14:22,880
भी आप गीता

207
00:14:22,880 --> 00:14:27,120
हम किसी नास्तिक को क्या जवाब देंगे? क्या वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने बताया

208
00:14:27,120 --> 00:14:31,280
है अब आपने एक बात क्या है सृष्टि ऐसे ही बन गई

209
00:14:31,280 --> 00:14:35,440
ये है जवाब सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है यही तो

210
00:14:35,440 --> 00:14:39,680
है सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है बिल्कुल मनुष्य सृष्टि

211
00:14:39,680 --> 00:14:43,680
का भी बीज रूप बाप है जिसने पूरी सृष्टि को रचा हुआ है बाप बगैर बच्चे पैदा होते

212
00:14:43,680 --> 00:14:47,760
हैं क्या ईश्वर ठीक है क्योंकि ईश्वर का मतलब

213
00:14:47,760 --> 00:14:52,720
क्या होता है ईश्वर का मतलब क्या होता है ईश माने शासन्ता

214
00:14:52,720 --> 00:14:58,720
वर माने श्रेष्ठ श्रेष्ठ जो इस दुनिया प्यार से शासन करता है उसको ईश्वर कहते हैं।

215
00:14:59,040 --> 00:15:03,680
मतलब आपका कहना है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है।

216
00:15:03,680 --> 00:15:07,840
जी जो बहुत प्यार से ईश्वर का ईश माना शासन करता है। श्रेष्ठ से श्रेष्ठ

217
00:15:07,840 --> 00:15:12,080
शासन करता है। इसलिए उसी ने गीता लिखी है। श्रीमद् भगवत

218
00:15:12,080 --> 00:15:16,320
गीता सर्वस्त्र शिरोमणि शासन बहुत मैं

219
00:15:16,320 --> 00:15:20,400
इस बात से मैं सहमत हूं। आपने अब एक मैंने जो क्वेश्चन किया

220
00:15:20,400 --> 00:15:24,560
है नास्तिक को क्या जवाब दें? उससे रिलेटेबल बात आपने

221
00:15:24,560 --> 00:15:28,640
ये बोली है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है। सृष्टि बनाई है

222
00:15:28,640 --> 00:15:32,800
मतलब ये सूर्य, चंद्रमा इत्यादि सब उसी ने बनाया है। बिल्कुल बिल्कुल

223
00:15:32,800 --> 00:15:36,880
देखो इस बारे में तो क्या कहते हैं? अल्लाह ताला ने जन्नत बनाई, आसमान बनाया पर वो अल्लाह ताला

224
00:15:36,880 --> 00:15:38,080
को कोई नहीं जानता।

225
00:15:38,080 --> 00:15:41,360
नहीं वो

226
00:15:41,360 --> 00:15:45,600
जानने वाली बात आगे की है। आप अभी यहां पे है ना कि उसने सृष्टि बनाई है।

227
00:15:45,600 --> 00:15:49,680
यहीं पे है ना? जी उसको उस रचयता को जानना है। उसको

228
00:15:49,680 --> 00:15:53,760
जानना है। उस जी नास्तिक का नास्तिक

229
00:15:53,760 --> 00:15:57,920
का जो अगला अगला प्रश्न होता है वो ये होता है कि मैं कैसे

230
00:15:57,920 --> 00:16:02,160
मान लूं कि कोई एक शक्ति है जिसने इसको बनाया है

231
00:16:02,160 --> 00:16:06,880
वो मानना अब एक बात बताइए समय होता है हर चीज का

232
00:16:06,880 --> 00:16:10,960
अभी आप किसी चीज को नहीं समझ पा रहे हैं। एक दवाई काम नहीं करेगी,

233
00:16:10,960 --> 00:16:15,200
दूसरी करेगी, तीसरी करेगी। इस दुनिया में जब पतित पावन कहते

234
00:16:15,200 --> 00:16:19,200
हो, दुख हर्ता सुख्ता कहते हो तो क्यों कहते हो? दुखों का पहाड़ टूटेगा इसका

235
00:16:19,200 --> 00:16:23,280
मतलब तभी तो दुख हर्ता सुख्ता कहा जाेगा। अगर समय का नाम

236
00:16:23,280 --> 00:16:27,360
लेकर के यानी कि भाई साहब कुल मिला के एक ही बात हो रही है कि समय या कोर्स का

237
00:16:27,360 --> 00:16:31,360
नाम लेकर के हम कोई बात बोल सकते हैं। यानी कि कोई

238
00:16:31,360 --> 00:16:35,600
आप ही आप ही मेरे सामने खड़े हो। मैंने कहा मैंने कह दिया

239
00:16:35,600 --> 00:16:39,600
मान लो। मान लो मैंने कह दिया कि आपकी सारी बातें झूठी है। आप कहोगे कैसे?

240
00:16:39,600 --> 00:16:43,840
मैं कहूंगा समय आने पता लग जाएगा। यह कोई बात है क्या? हां। तो और

241
00:16:43,840 --> 00:16:47,840
एक बात बताइए क्या आप समय सृष्टि का

242
00:16:47,840 --> 00:16:51,920
कौन सा समय चल रहा है? कल्पांत चल रहा है। कल्पांत का जो आप वेद

243
00:16:51,920 --> 00:16:53,440
शास्त्र जो पढ़ रहे हैं वो कल्पांत

244
00:16:53,440 --> 00:16:57,680
के समय क्या है? सारे के सारे आपको ये भी नहीं पता। क्या मतलब भाई साहब? मैं कह रहा हूं नास्तिक

245
00:16:57,680 --> 00:17:01,680
ये बोलेगा। मैं कैसे मान लूं यह सृष्टि किसी ने बनाई है प्रकृति है थी

246
00:17:01,680 --> 00:17:05,920
और धीरज धर वनवा जब समय पड़ता है बड़े-बड़े मान

247
00:17:05,920 --> 00:17:09,920
जाते हैं प्यार से कौन मानता है इसका मतलब मैं फिलहाल आपसे ये कह सकता हूं कि

248
00:17:09,920 --> 00:17:14,480
आपकी सारी बातें झूठी है धीरज धरो आपको समय आने पता चल जाएगा

249
00:17:14,480 --> 00:17:18,640
जी जी मैं कह सकता हूं हां तो सत्य को ही दबाया

250
00:17:18,640 --> 00:17:22,720
जाता है इस दुनिया में झूठा ही साबित किया जाता है और दुनिया कर क्या रही है धर्म कहना

251
00:17:22,720 --> 00:17:26,800
अनुचित मान रहे हैं जिस तर्क के आधार पे आप अपना कहना उचित बता रहे हैं उसी

252
00:17:26,800 --> 00:17:30,800
तर्क के आधार मेरा कहना अनुचित बता रहे हैं। आपको मेरा विरोध

253
00:17:30,800 --> 00:17:35,120
नहीं करना चाहिए। मैं भी वही बात बोल रहा हूं जो आप बोल रहे हैं। क्योंकि आप कह रहा हूं

254
00:17:35,120 --> 00:17:39,200
मैं समझ जाऊंगा। मैं कह रहा हूं आप समझ जाओगे। धर्म की बात कर रहे हो ना कर्म

255
00:17:39,200 --> 00:17:43,440
की बात कर रहे हो। पता नहीं कहां धर्म की बात ऐसे होती है। सुनिए

256
00:17:43,440 --> 00:17:47,680
मैं बता रहा हूं। धर्म की बात क्या कर रहा हूं। सुनिए। धर्म की बात ऐसे होती है।

257
00:17:47,680 --> 00:17:51,680
जब तक हम ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे। जब तक हम

258
00:17:51,680 --> 00:17:55,840
ईश्वर को ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे। तब तक कोई

259
00:17:55,840 --> 00:17:59,840
क्यों ईश्वर के नाम से बताई गई बातों को धर्म मानेगा? जब धर्म

260
00:17:59,840 --> 00:18:04,240
की बात करनी हो गीता हाथ में लेकर के आया करो। गीता के एक एक श्लोक में भगवान के अस्तित्व

261
00:18:04,240 --> 00:18:08,240
को बताया गया। गीता पढ़ो आप एक बार आराम से। मैं भाई साहब मैं गीता पे भी आऊंगा।

262
00:18:08,240 --> 00:18:08,740
अभी

263
00:18:08,480 --> 00:18:12,640
मैं पूछ रहा हूं। मैं गीता से ही बोलूंगा। अभी मैं अस्तित्व को सिद्ध करूंगा ना। मैं उपनिषद

264
00:18:12,640 --> 00:18:16,720
से बोलूंगा। मैं उपनिषद से बोलूंगा। जब मैं भगवान

265
00:18:16,720 --> 00:18:20,880
का अस्तित्व सिद्ध करूंगा। जब मैं भगवान का अस्तित्व सिद्ध करूंगा। मैं उपनिषद

266
00:18:20,880 --> 00:18:24,880
से बोलूंगा। आपके पास है वीरेंद्र जी के द्वारा

267
00:18:24,880 --> 00:18:28,880
दिया गया ऐसा कुछ नास्तिक का मुंह बंद करने का है चुनौती

268
00:18:28,880 --> 00:18:33,680
दे रहे हो आप चैलेंज दे रहे हो दुनिया को नास्तिक को चुप करा पाओगे

269
00:18:33,680 --> 00:18:37,760
सब चुप हो जाएंगे बड़े-बड़े चुप हो जाएंगे तो कैसे होंगे ऐसे

270
00:18:37,760 --> 00:18:41,760
ही चुप होंगे कोर्स कर लेना समय आने पे चुप हो जाओगे ऐसे होंगे चुप भाई एक

271
00:18:41,760 --> 00:18:46,080
तो सीधी सी बात है या तो ज्ञान से समझेगा या फिर हालात खराब होंगे तब समझेगा

272
00:18:46,080 --> 00:18:50,160
ज्ञान दो ना मुझे ये क्यों कह रहे हो गीता लेके आओ तब बात करना ज्ञान दो मुझे हां

273
00:18:50,160 --> 00:18:54,240
तो फिर जाओ ना हमारे अरे मधुबनों के दरवाजे खुले हुए दिन रात जाके लोरा ज्ञान

274
00:18:54,240 --> 00:18:58,240
जा आपके पास नहीं है बताने को कुछ अरे जो बता रहे

275
00:18:58,240 --> 00:19:02,240
हैं वो तुम्हें सहज नहीं हो रहा है तुम कौन सा ज्ञान लेना चाहते एक लाइन बताई है

276
00:19:02,240 --> 00:19:06,480
कि सृष्टि उसने बनाई तो मैं मैं पूछ रहा हूं ये कैसे सिद्ध होता है कि सृष्टि

277
00:19:06,480 --> 00:19:10,480
उसने बताई बनाई है इस बारे में आप बोलिए क्या ब्रह्मा ने

278
00:19:10,480 --> 00:19:14,640
सृष्टि नहीं रची फिर वही बात आप वो बात बोल

279
00:19:14,640 --> 00:19:18,960
रहे हो कि मेरा फेथ किसी किताब पे है तो मैं उस किताब के आधार पे मान लूं

280
00:19:18,960 --> 00:19:23,040
मैं कह रहा हूं एक न्यूट्रल व्यक्ति नास्तिकता का जवाब क्या है? हमारे शास्त्रों में

281
00:19:23,040 --> 00:19:23,760
दिया है,

282
00:19:23,760 --> 00:19:27,760
उपनिषद में दिया गया है। वो मैं पूछ रहा हूं क्या आप जिसे भगवान कह

283
00:19:27,760 --> 00:19:31,920
रहे हो उसने आपको बताया कि नहीं बताया? ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध किए

284
00:19:31,920 --> 00:19:35,920
बिना आत्म्ञान क्या हो

285
00:19:35,920 --> 00:19:40,000
सकता? क्या आपको खुद समझ में आ रहा है? ईश्वर की परिभाषा

286
00:19:40,000 --> 00:19:44,000
आप खुद जानते हो?

287
00:19:44,000 --> 00:19:47,840
उसको काट नहीं पाएंगे। एक इंच मात्र

288
00:19:47,840 --> 00:19:52,000
तब आप उसको एक इंच मात्र काट नहीं पाएंगे। हां तो आप तो भगवान से भी बड़े

289
00:19:52,000 --> 00:19:56,080
हो गए। इससे क्या मतलब है? से बड़े हो गए। भाई साहब जो

290
00:19:56,080 --> 00:20:00,320
पॉइंट ये है क्या आपके आप जिसे भगवान कह रहे हो उसने

291
00:20:00,320 --> 00:20:04,480
आपको नास्तिकता का खंडन बताया है कि नहीं? नास्तिक

292
00:20:04,480 --> 00:20:08,560
आपके सामने खड़ा है। वो मैं क्यों तुम्हारे धर्म को

293
00:20:08,560 --> 00:20:12,560
मैं क्यों तुम्हारे ज्ञान को? तुम मुझे पहले सिद्ध करोगे ईश्वर है। मैं कर सकता हूं।

294
00:20:12,560 --> 00:20:16,880
आप कर सकते हो क्या? आप कर रहे हो। आप करो सिद्ध ईश्वर

295
00:20:16,880 --> 00:20:21,440
को। पहले आप करो। हां ठीक। ठीक है। पर फिलहाल अभी तो ये मान लेता

296
00:20:21,440 --> 00:20:26,160
हूं मैं कर देता हूं। मैं कर देता हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं।

297
00:20:26,160 --> 00:20:30,320
अभी ये मान ले आप सिद्ध नहीं कर सकते। हां आप ये मानिए आप सिद्ध

298
00:20:30,320 --> 00:20:34,320
नहीं कर सकते। आप सिद्ध करिए ईश्वर को। हां चलिए अब ये बात

299
00:20:34,320 --> 00:20:36,880
है। मैं करण

300
00:20:36,880 --> 00:20:39,280
उपनिषद से दुनिया देख रही है।

301
00:20:39,280 --> 00:20:43,520
चलो आप चुप हो जाओ तो मैं कर आप थोड़ा मौन रहिए तो मैं करूं।

302
00:20:43,520 --> 00:20:47,680
जी। बृहधारण उपनिषद बहारण्यक उपनिषद एक तीन

303
00:20:47,680 --> 00:20:52,880
28 असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय

304
00:20:52,880 --> 00:20:56,960
मृत्युमा इसी को क्लियर कर दो बस अरे भैया इसी को

305
00:20:56,960 --> 00:21:01,200
क्लियर करता आप प्लीज थोड़ी देर शांत रहिए मैं अगर सिद्ध ना कर पाऊं

306
00:21:01,200 --> 00:21:05,360
तो आप बताना और मेरी बात को काट के दिखाना अब चुप रहिए

307
00:21:05,360 --> 00:21:09,360
थोड़ी देर प्लीज उपनिषद का वाक्य में

308
00:21:09,360 --> 00:21:13,440
बता रहा है प्राणी मात्र के विषय में भाई साहब प्लीज प्लीज

309
00:21:13,440 --> 00:21:17,840
प्लीज इंटरप्ट मत करिए। अब मैं आपको बता रहा हूं नास्तिकता का खंडन। ठीक है?

310
00:21:17,840 --> 00:21:22,000
उपनिषद का यह वाक्य हमें बताता है प्राणी मात्र के

311
00:21:22,000 --> 00:21:26,320
विषय में कभी ना मरने की और अनंत

312
00:21:26,320 --> 00:21:30,560
ज्ञान को प्राप्त कर लेने की और सदा आनंदित

313
00:21:30,560 --> 00:21:34,560
रहने की प्यास विद्यमान है। इसको कहते हैं

314
00:21:34,560 --> 00:21:38,800
सत प्राणी मात्र में। प्राणी मात्र

315
00:21:38,800 --> 00:21:42,800
में एक नास्तिक के अंदर भी यह तीन तरह की प्यास

316
00:21:42,800 --> 00:21:47,280
सदा विद्यमान है। कौन-कौन सी प्यास है? पहली प्यास है सत की प्यास।

317
00:21:47,280 --> 00:21:51,280
मैं सत हो जाऊं। अमरता की प्यास। दूसरी

318
00:21:51,280 --> 00:21:54,560
प्यास है ज्ञान की प्यास। मैं मूर्खता

319
00:21:54,560 --> 00:21:58,960
रहित हो जाऊं। ऐसा कुछ ना हो जो मुझे ना पता हो। एक मिनट

320
00:21:58,960 --> 00:22:03,440
बीच में आप बीच-बीच में बोलिए मत। प्लीज मैं

321
00:22:03,440 --> 00:22:07,520
भरू। अच्छा ठीक है। ठीक ठीक है। आप आप करिए। हम ही भरिए।

322
00:22:07,520 --> 00:22:11,600
तीसरी प्यास है सदा आनंदित रहने की प्यास। मैं कभी भी

323
00:22:11,600 --> 00:22:15,760
दुखी ना हूं। ये तीन तरह की जो प्यास है ये तीन तरह

324
00:22:15,760 --> 00:22:20,160
की जो प्यास है सत, चित्त, आनंद। ये तीन तरह की प्यास नास्तिक

325
00:22:20,160 --> 00:22:24,400
के अंदर भी है। एक नास्तिक भी कई बार सोचता है। बारिश

326
00:22:24,400 --> 00:22:28,480
ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए।

327
00:22:28,480 --> 00:22:32,560
यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल कर लेने की भावना उसके

328
00:22:32,560 --> 00:22:37,520
मन में कई बार आती है। कल इंडिया पाकिस्तान में कौन जीतेगा?

329
00:22:37,520 --> 00:22:41,600
तो काश हमारा भारत जीत जाए। इसका मतलब उसके मन

330
00:22:41,600 --> 00:22:45,600
में भी भविष्य को देख लेने की और भविष्य को कंट्रोल

331
00:22:45,600 --> 00:22:49,600
कर लेने की चाह मन में आती है। एक नियम

332
00:22:49,600 --> 00:22:53,840
है कि हमारे मन में जिस जिस चाह

333
00:22:53,840 --> 00:22:58,080
का जो जो चाह विद्यमान है उस उस चाह का विषय

334
00:22:58,080 --> 00:23:02,320
इस दुनिया में मौजूद है। जैसे कि हमारे अंदर प्यास है

335
00:23:02,320 --> 00:23:06,400
तो हमारे अंदर प्यास होने से सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में

336
00:23:06,400 --> 00:23:09,680
पानी है। हमारे अंदर भूख है

337
00:23:09,680 --> 00:23:13,680
तो हमारे अंदर भूख होने से यह सिद्ध हो जाता है कि

338
00:23:13,680 --> 00:23:17,840
इस दुनिया में भोजन है। हमारे पास देखने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध

339
00:23:17,840 --> 00:23:21,840
होता है कि दुनिया में दृश्य है। हमारे पास सुनने की क्षमता है। तो

340
00:23:21,840 --> 00:23:26,000
उससे सिद्ध होता है कि दुनिया में आवाज है। तो जिस प्रकार

341
00:23:26,000 --> 00:23:30,400
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त है ना देखने

342
00:23:30,400 --> 00:23:34,560
की विषय से दृश्य सिद्ध होता है। देखने की चाह से दृश्य सिद्ध होता है।

343
00:23:34,560 --> 00:23:39,120
भूख से भोजन सिद्ध होता है। प्यास से पानी सिद्ध होता है। उसी प्रकार

344
00:23:39,120 --> 00:23:43,520
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सतित आनंद

345
00:23:43,520 --> 00:23:47,680
की चाह से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व

346
00:23:47,680 --> 00:23:52,880
सिद्ध होता है। अच्छा अन्य

347
00:23:52,880 --> 00:23:57,280
नहीं मानेगा नास्तिक तो वो बोल दे कि वो

348
00:23:57,280 --> 00:24:02,160
जो है वो मरना चाहता है। मैं क्वेश्चन पूछूं

349
00:24:02,160 --> 00:24:06,400
एक मिनट मैं पूरा कर लूं। मैं पूरा कर लूं। फिर क्वेश्चन पूछिए। नास्तिक

350
00:24:06,400 --> 00:24:10,400
व्यक्ति भी नास्तिक व्यक्ति भी कभी दुखी नहीं होना चाहता।

351
00:24:10,400 --> 00:24:14,480
वो भी ये सोचता है। मेरे पिता कभी ना मरे। मैं बूढ़ा

352
00:24:14,480 --> 00:24:18,480
कभी ना हूं। मैं यह सब ना करूं। तो यह सब उसके अंदर भी घटित

353
00:24:18,480 --> 00:24:22,720
होता है। अगर वो मुंह से कह भी दे, वो मुंह से कह भी दे कि भैया मैं तो मरना

354
00:24:22,720 --> 00:24:26,720
चाहता हूं। उसके ओर जब घुमाएंगे ना घूसा या

355
00:24:26,720 --> 00:24:30,800
लपाड़ा तो उसकी पलक झपक जाएगी। इसका मतलब

356
00:24:30,800 --> 00:24:34,880
वो भले ही मुंह से कह रहा है मगर जो उसकी जो आंख है वो ये बता रही है कि मरना नहीं

357
00:24:34,880 --> 00:24:39,440
चाहता है। सर्वाइवल है उसके अंदर। वो सर्वाइव करना चाहता है।

358
00:24:39,440 --> 00:24:43,920
छोटा सा जो बात पूछने की थी वो क्लियर करो। भाषण नहीं चाहिए।

359
00:24:43,920 --> 00:24:47,920
सार में टिका हुआ। अब आप प्रश्न पूछिए। प्रश्न ये

360
00:24:47,920 --> 00:24:52,000
है परमेश्वर किसे कहते हैं?

361
00:24:52,000 --> 00:24:56,320
भाई साहब अभी बात ये हो रही है आप ना करें। अगर आप एज ए नास्तिक

362
00:24:56,320 --> 00:25:00,320
काउंटर करना चाहते हैं मुझे तो काउंटर करिए। आपका जो आपके पास

363
00:25:00,320 --> 00:25:04,480
नास्तिकता का खंडन नहीं था। मैंने अभी नास्तिकता का खंडन किया है।

364
00:25:04,480 --> 00:25:08,480
आपके पास है नास्तिकता खंडन अरे भाई शिवशु

365
00:25:08,480 --> 00:25:13,200
सारा दिन मैं कोई बच्चा थोड़ा ना हूं। मैंने दुनिया देखी है यार।

366
00:25:13,200 --> 00:25:17,600
ऐसे बातें ना करिए भाई साहब ये सब बातें ना करिए आप

367
00:25:17,600 --> 00:25:21,680
जो विषय चल रहा है उस पर बात करनी है तो बात कर वो

368
00:25:21,680 --> 00:25:26,000
सत्य चित्त आनंद स्वरूप कौन है परमात्मा कौन है ये बताइए परमेश्वर

369
00:25:26,000 --> 00:25:28,720
कौन है ये बताइए

370
00:25:28,720 --> 00:25:32,720
अभी विषय चल रहा है कि ईश्वर है कि नहीं पहले इसी बात

371
00:25:32,720 --> 00:25:36,880
पे आइए

372
00:25:36,880 --> 00:25:41,680
सुनिए सत्यम ज्ञानमंत ब्रह ये परिभाषा है

373
00:25:41,680 --> 00:25:47,520
दो एक सत्यम ज्ञान अनंतम जो है

374
00:25:47,520 --> 00:25:51,920
जो ज्ञान है जो अनंत है वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान

375
00:25:51,920 --> 00:25:56,000
है वही ईश्वर है ये हमने उसकी उसके बारे में आपको बता

376
00:25:56,000 --> 00:26:00,160
दिया थोड़ा ब्रेक भी ले लिया कर थोड़ा भी ले लिया

377
00:26:00,160 --> 00:26:04,080
सर्वशक्तिमान का मतलब क्या होता है

378
00:26:04,080 --> 00:26:09,440
भाई साहब अभी आप पहले नास्तिकता पे आइए बताओगे तो

379
00:26:09,440 --> 00:26:13,440
अरे आप मुझे तोड़िए ना पहले नास्तिक पे तोड़िए आप मुझे

380
00:26:13,440 --> 00:26:17,440
आपको मेरी परिभाषा स्वीकार है कि नहीं नास्तिकता कुछ भी नहीं आ

381
00:26:17,440 --> 00:26:21,600
रहा आपको एक भी बात नहीं डिस्क्राइब कर पा रहे हो नास्तिक नास्तिक को ले बैठ गए हो और दुनिया

382
00:26:21,600 --> 00:26:23,520
इतनी आस्तिकों की भरी पड़ी है उनके

383
00:26:23,520 --> 00:26:27,600
लिए कुछ बोलोगे एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो

384
00:26:27,600 --> 00:26:31,920
आप नहीं सिवान साहब गलत ट्रैक जा रहे हैं आप पहले ये बताइए सत्य की परिभाषा

385
00:26:31,920 --> 00:26:36,960
बताइए सत्य किसे कहते हैं जो शाश्वत हो जो

386
00:26:36,960 --> 00:26:41,120
उसको कैसे सिद्ध अरे रुको भाई उसको सिद्ध कैसे करोगे कैसे

387
00:26:41,120 --> 00:26:45,200
शाश्वत सिद्ध ऐसे करेंगे कि भैया नास्तिक के मन में भी नास्तिक के मन

388
00:26:45,200 --> 00:26:49,280
में भी चार सत्य हो जाने वो भावना की बात है बात पे ट्रैक

389
00:26:49,280 --> 00:26:53,440
से मत जाओ शाश्वत का मतलब होता है प्रैक्टिकल में हमारे सामने हो

390
00:26:53,440 --> 00:26:57,440
शाश्वत का मतलब जो आंखों से देखूं और पहचानो जानू कि हां

391
00:26:57,440 --> 00:27:01,680
ये सत्य है चलो ये कहां लिखा है कहां लिखा है

392
00:27:01,680 --> 00:27:05,760
जो अपने सामने हो वही हो इसका मतलब इसका मतलब हवा को नहीं

393
00:27:05,760 --> 00:27:10,480
मानेगा आदमी जो जो चीज नहीं दिख रही है उसको नहीं मानेगा

394
00:27:10,480 --> 00:27:14,560
एक मिनट मिनट रुक जा भाई रुक जा इस भाषण को कहीं और दे दियो पागल

395
00:27:14,560 --> 00:27:18,560
भाई देख भाई तू बात करनी है तो बात नहीं हो पाएगी भाई बहुत देर हो गई मैंने

396
00:27:18,560 --> 00:27:22,720
सुन लिया लेकिन बात से भागो भाई तू बात करनी है तो निकल जा

397
00:27:22,720 --> 00:27:26,720
भाई तू जा सकता है भाई तेरे पास ना ज्ञान है ना कुछ है तू जा सकता

398
00:27:26,720 --> 00:27:31,760
है भाई कुछ नहीं है कुछ भी नहीं है आपके पास चल निकल चल निकल

399
00:27:31,760 --> 00:27:37,760
ये कोई

400
00:27:39,200 --> 00:27:43,440
कुछ नहीं है बस केवल पाखंड

401
00:27:43,440 --> 00:27:47,600
कुछ नहीं है इन लोगों के पास नाटक कंपनी खोल रखी है ये आ

402
00:27:47,600 --> 00:27:50,720
रहा है वो आ रहा है

403
00:27:50,720 --> 00:27:56,720
ये जाएंगे वहां धर्म की स्थापना करने के लिए

404
00:27:58,960 --> 00:28:02,960
तू तड़ाक पे आ गए रुक जा भाई

405
00:28:02,960 --> 00:28:07,840
ये भाई वो भाई आ गए

406
00:28:07,840 --> 00:28:13,040
ये है असलियत इनकी विश्वविद्यालय वालों की और

407
00:28:13,040 --> 00:28:17,360
बीके वालों के विरुद्ध है। हालांकि उनकी भी यही पोल पट्टी है।

408
00:28:17,360 --> 00:28:21,840
जब हम इस तरह से सिद्ध करेंगे ना तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा।

409
00:28:21,840 --> 00:28:26,000
क्यों नहीं सिद्ध होगा? कि जिसने सृष्टि बनाई

410
00:28:26,000 --> 00:28:30,080
उसने पूरी सृष्टि बनाई ना। पहली बात तो इनके यहां माना ही नहीं जाता सृष्टि बनाई

411
00:28:30,080 --> 00:28:34,080
है ईश्वर ने। जब ये पूरा नाटक है तो बनी बनाई है सृष्टि।

412
00:28:34,080 --> 00:28:38,080
काहे की काहे की सृष्टि बनाई फिर? झूठ बोल रहे

413
00:28:38,080 --> 00:28:42,080
हैं खुद ही। अगर सृष्टि बनाना मान लो बनाने की

414
00:28:42,080 --> 00:28:46,400
बात मान लो तो वह पूरी सृष्टि बनाई कि नहीं बनाई पूरी सृष्टि

415
00:28:46,400 --> 00:28:51,680
का कंट्रोल है कि नहीं है सबका शासन करने वाला है हम

416
00:28:51,680 --> 00:28:54,240
सबका शासन इनके हाथ में है कि

417
00:28:54,240 --> 00:28:58,320
नहीं है इनके ईश्वर के हाथ में तो ईश्वर के हाथ

418
00:28:58,320 --> 00:29:02,400
में सबका शासन है तो कैसे है वो तो एक जगह है वो तो सर्वव्यापी है ही

419
00:29:02,400 --> 00:29:07,120
नहीं वो तो एक जगह है ना तो भाई उसकी शक्ति सर्वव्यापी

420
00:29:07,120 --> 00:29:11,120
है यानी कि वो वो यहां पे है। उसकी शक्ति पूरे में है।

421
00:29:11,120 --> 00:29:15,200
अब उसमें और उसकी शक्ति में अंतर है। क्योंकि वो तो यहां पे है ना।

422
00:29:15,200 --> 00:29:19,280
वो पूरे में नहीं है। अब उसमें और उसकी शक्ति में अंतर है। तो अंतर है तो

423
00:29:19,280 --> 00:29:23,520
कहीं ना कहीं जो शक्ति है वो कम है। तो जब कम है

424
00:29:23,520 --> 00:29:27,600
शक्ति जब शक्ति कम है तो

425
00:29:27,600 --> 00:29:31,600
क्या मतलब है उसका? कि ईश्वर का कंट्रोल

426
00:29:31,600 --> 00:29:36,080
सब जगह शाश्वत रूप से नहीं है। यहां ज्यादा यहां कम है। शाश्वतता

427
00:29:36,080 --> 00:29:38,720
भंग हो गई।

428
00:29:38,720 --> 00:29:42,800
यह ईश्वर नहीं है। कंट्रोल पूरी जगह

429
00:29:42,800 --> 00:29:45,600
होना चाहिए बराबर।

430
00:29:45,600 --> 00:29:49,760
तो क्या मानना पड़ेगा? शक्ति भी वही है। मगर ये तो मानते नहीं

431
00:29:49,760 --> 00:29:54,240
इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। दूसरी बात अगर उसने सृष्टि बनाई है

432
00:29:54,240 --> 00:29:59,360
तो कोई 5 किलोमीटर के एरिया की सृष्टि तो बनाई नहीं है।

433
00:29:59,360 --> 00:30:03,360
पूरी लंबी चौड़ी सृष्टि बनाई है। उसमें कहीं पर कुछ हो रहा है, कहीं पर कुछ हो

434
00:30:03,360 --> 00:30:07,440
रहा है। अगर उसने सृष्टि बनाई है मान लीजिए कि पांच अगर ऐसा

435
00:30:07,440 --> 00:30:09,360
मान ले कि उसने 5 किलोमीटर की सृष्टि

436
00:30:09,360 --> 00:30:13,440
बनाई है। तो 5 किलोमीटर की सृष्टि बनाई है और बगल के 5 किलोमीटर की

437
00:30:13,440 --> 00:30:17,840
सृष्टि नहीं बनाई है। मान लीजिए सपोज करिए तो क्या दिक्कत आएगी

438
00:30:17,840 --> 00:30:21,840
कि बगल वाले में ज्वालामुखी फट रहा है और मैंने जो सृष्टि बनाई है

439
00:30:21,840 --> 00:30:25,920
उसमें मुझे गड्ढा नहीं होने देना है अभी हम तो बगल में ज्वालामुखी

440
00:30:25,920 --> 00:30:30,080
अगर फट गया उसका यहां पर आया प्रभाव तो गड्ढा हो जाएगा

441
00:30:30,080 --> 00:30:34,320
तो ये जरूरी है कि जिसने ये 5 किलोमीटर बनाया हो उसी ने ये भी 5 किलोमीटर

442
00:30:34,320 --> 00:30:38,640
बनाया हो अब ये भी जरूरी है कि हर 5 किलोमीटर के एरिया में क्या-क्या

443
00:30:38,640 --> 00:30:43,120
घटित होने वाला है मुझे पता हो तो इस तरीके से मैं सर्वज्ञ हो गया

444
00:30:43,120 --> 00:30:47,280
सृष्टि का निर्माता अगर बनूंगा तो मैं सर्वज्ञ होना पड़ेगा।

445
00:30:47,280 --> 00:30:51,440
उसके बाद क्या जरूरी है कि जो पूरी दुनिया में जो भी कुछ घटित

446
00:30:51,440 --> 00:30:56,160
हो रहा है उसको मैं रोक सकूं। अगर मेरे अनुसार मुझे चलाना है सृष्टि को

447
00:30:56,160 --> 00:31:00,800
तो फिर मुझे सर्वशक्तिमान होना पड़ेगा। अब सर्वशक्तिमान

448
00:31:00,800 --> 00:31:04,800
होने का मतलब क्या हो गया? देश कृत काल कृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार

449
00:31:04,800 --> 00:31:09,520
की बाधा से मुक्त हो तो ये तो अवतार मानते नहीं है

450
00:31:09,520 --> 00:31:13,520
हम तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं

451
00:31:13,520 --> 00:31:17,600
होगा नास्तिकता का खंडन कौन सा ईश्वर करता है

452
00:31:17,600 --> 00:31:21,840
जो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म वो ईश्वर जो अबाध्य है

453
00:31:21,840 --> 00:31:24,480
हमारी व्यवहारिक भूख क्या है कहां से

454
00:31:24,480 --> 00:31:29,680
पता चलता है कि हमारे मूल में जो है सच्चिदानंद की प्यास है व्यवहार से

455
00:31:29,680 --> 00:31:34,080
व्यवहारिक भूख भी है ना व्यवहारिक भूख क्या है? बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए।

456
00:31:34,080 --> 00:31:38,240
यहां से हम इसके अंदर जाते हैं। मूल में पहुंचते हैं। तो जब व्यवहारिक भूख

457
00:31:38,240 --> 00:31:42,800
है तो व्यवहारिक भूख का विषय भी है जो सब कुछ कर सकता है। सर्वशक्तिमान

458
00:31:42,800 --> 00:31:47,040
ईश्वर और जब इसके मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है तो उसके भी मूल

459
00:31:47,040 --> 00:31:51,680
में जाएंगे तो सच्चिदानंद है। कनेक्शन हो गया। हम

460
00:31:51,680 --> 00:31:55,920
तो यह तो है ईश्वर। अब इनसे हमने पूछा भैया ईश्वर की प्राप्ति

461
00:31:55,920 --> 00:31:59,920
ईश्वर की सिद्धि कैसे होती है? तो ये बोल रहे हैं गीता हाथ में ले बात करो। फिर बोल

462
00:31:59,920 --> 00:32:04,160
रहे हैं कि तुम तुम बता दो। तो इनको कुछ आता जाता नहीं जो इन्होंने

463
00:32:04,160 --> 00:32:08,480
रट्टा मार लिया है। केवल इनके पास वही है और ये चुनौती

464
00:32:08,480 --> 00:32:12,480
देते फिर रहे हैं। कोई व्यक्ति आ जाता है मनुवादी हैं तो इनके

465
00:32:12,480 --> 00:32:16,720
ये हाल होते हैं। ना इनको ये पता है उस पर विश्वास कैसे किया जाए पीछे

466
00:32:16,720 --> 00:32:20,800
से और उल्टा ये तो और दो कदम आगे हैं। वे वीरेंद्र

467
00:32:20,800 --> 00:32:25,440
देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई बातों पर भी अविश्वास है। इसका मतलब

468
00:32:25,440 --> 00:32:29,520
कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं दे रहे हैं। क्यों? क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित

469
00:32:29,520 --> 00:32:33,600
जी तो झूठ बोल सकते हैं। क्यों बोल सकते हैं? क्योंकि उनके मन में मालूम

470
00:32:33,600 --> 00:32:37,760
था मैं भगवान हूं मगर वो कहे कुछ और रहते हैं। मैं भगवान नहीं वो भगवान

471
00:32:37,760 --> 00:32:39,520
है। हम तो वो

472
00:32:39,520 --> 00:32:43,920
तो झूठ बोल रहे थे इनके अनुसार।

473
00:32:43,920 --> 00:32:48,080
नहीं तो इनकी वाणी प्रमाण मानी जाए। माननी पड़ेगी। ये हमारे ऋषि

474
00:32:48,080 --> 00:32:52,800
मुनि हो गए। इनकी वाणी को प्रमाण मान लो भाई।

475
00:32:52,800 --> 00:32:57,600
है कि नहीं? क्यों माना जाए? क्योंकि इन्होंने

476
00:32:57,600 --> 00:33:01,600
एमए कर रखा है इंग्लिश से और यह कोर्ट में जाने एक चुनौती देते

477
00:33:01,600 --> 00:33:05,600
हैं लोगों को और चुनौती देके कोर्ट में क्या कहेंगे हाई कोर्ट में

478
00:33:05,600 --> 00:33:09,680
कोर्स कर लो मेरा सात दिन का समय आने पता लग जाएगा ये कहेंगे वहां

479
00:33:09,680 --> 00:33:13,760
ये चुनौती है इनकी हम देख

480
00:33:13,760 --> 00:33:17,840
रहे हो ये थी इनकी मुरली की कहानी जो मैं सुन सुन

481
00:33:17,840 --> 00:33:21,840
के यहां तक लाया हूं यह चुनौती दे रहे हैं कोर्ट में जाके

482
00:33:21,840 --> 00:33:25,840
जब कोर्ट पूछे हां भाई आपकी चीज कैसे सिद्ध होती है कोर्स कर लो समय

483
00:33:25,840 --> 00:33:29,840
आने पता लग जाएगा जज साहब इसलिए मेरा फैसला अभी कर दो। अच्छा छ साल

484
00:33:29,840 --> 00:33:33,920
में पता नहीं लगा जज साहब को। फिर सुनवाई हुई। भैया अभी तक तो पता नहीं लगा। क्या करें?

485
00:33:33,920 --> 00:33:39,920
अरे समय आने पता लग जाएगा। जज साहब

486
00:33:41,360 --> 00:33:45,280
कौन है भाई?

487
00:33:45,280 --> 00:33:50,400
कौन है? जी टी एफ बी एन एन कौन है ये?

488
00:33:50,400 --> 00:33:55,600
अपना चेहरा दिखाएं।

489
00:33:55,600 --> 00:33:59,760
एक कोई है वह कह रहे हैं कि तुम्हें कितना पता है भगवान के बारे में जितना

490
00:33:59,760 --> 00:34:03,760
पता है तुम जैसों के लिए पर्याप्त है हमें जितना पता

491
00:34:03,760 --> 00:34:07,760
है वो तुम जैसों के लिए पर्याप्त है पाखंडियों के लिए और

492
00:34:07,760 --> 00:34:12,480
जो विधर्मी लोग हैं उनके लिए पर्याप्त है ना

493
00:34:12,480 --> 00:34:16,640
कभी आ जाना कभी ये जो भाई हम चुनौती देते थोड़ी ना फिर रहे हैं तुमने

494
00:34:16,640 --> 00:34:20,640
चुनौती दी है ना आ जाओ सिद्ध कर दो कोर्ट में आ जाओ ये कर दो वो कर

495
00:34:20,640 --> 00:34:24,880
दो अपनी फैंटसी की दुनिया से बाहर आ जाओ जिस दिन मनवादी

496
00:34:24,880 --> 00:34:30,800
से पाला पड़ गया सामना हो गया गिग्गी बंध जाएगी।

497
00:34:30,800 --> 00:34:35,120
हाय बड़े तुम्हें कितना पता है नास्तिकता का तोड़

498
00:34:35,120 --> 00:34:39,120
नहीं है। चले हैं धर्म की चीजें बताने। धर्म की शुरुआत

499
00:34:39,120 --> 00:34:43,120
होती है नास्तिकता के अंत से। बिना नास्तिकता के अंत से कहां से धर्म?

500
00:34:43,120 --> 00:34:47,280
काहे का धर्म?

501
00:34:47,280 --> 00:34:53,280
इसीलिए कहते हैं

502
00:34:57,920 --> 00:35:02,000
बता दी परिभाषा तो तू तड़ाक पे आ गया व्यक्ति देखो

503
00:35:02,000 --> 00:35:08,000
ये है सच रुक जा ये ये नहीं है वो नहीं है

504
00:35:08,640 --> 00:35:12,640
खुद ज्ञान ज्ञानी बनके कौन बैठा है ये बैठा है प्रश्न मैं पूछ रहा

505
00:35:12,640 --> 00:35:17,040
हूं सवाल का उत्तर नहीं फिर क्या पूछा परमेश्वर कौन है

506
00:35:17,040 --> 00:35:21,200
परमेश्वर कौन है ये रामपाल हो गया यहां पे कबीर को परमेश्वर नहीं कहा

507
00:35:21,200 --> 00:35:25,280
जाएगा तो मैं जो है मना कर दूंगा।

508
00:35:25,280 --> 00:35:29,440
इस पर आ गया एक ही परम तत्व जो सत्यम ज्ञान

509
00:35:29,440 --> 00:35:33,440
अनंतम ब्रह वाला जो परम तत्व है जो अध्य है जो सृष्टि

510
00:35:33,440 --> 00:35:37,520
का रचयिता है वो पांच रूपों में प्रकट होता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और

511
00:35:37,520 --> 00:35:41,680
गणेश कालांतर से कल्प वेद से यही पांच रूपों

512
00:35:41,680 --> 00:35:46,080
में से कभी विष्णु भगवान भगवान की प्रधानता के साथ महिमा गाई जाती है

513
00:35:46,080 --> 00:35:50,080
और कभी शिव जी की प्रधानता के साथ और कभी दुर्गा माता

514
00:35:50,080 --> 00:35:54,400
कभी गणेश जी कभी ब्रह्मा जी इस कारण से

515
00:35:54,400 --> 00:35:58,480
अलग-अलग जब भगवान के अलग-अलग रूपों में उनकी महिमा का गान हुआ तो उस

516
00:35:58,480 --> 00:36:02,560
रूप में ये पुराण रचे गए हैं। इसमें इनमें पांचों में कोई भेद नहीं

517
00:36:02,560 --> 00:36:06,080
है। तात्विक

518
00:36:06,080 --> 00:36:12,080
लीला भेद है। लीला

519
00:36:14,720 --> 00:36:20,240
हम ये है परमेश्वर की पहचान। और

520
00:36:20,240 --> 00:36:24,240
जब आप खुद कह रहे हो कि परमेश्वर झूठ बोल सकता है तो उसने तुम्हें जो ज्ञान दिया

521
00:36:24,240 --> 00:36:28,480
है कि मैं यह था मैं वह था वो वो था सब झूठा हो सकता है। इसलिए

522
00:36:28,480 --> 00:36:32,560
अपुरुष ग्रंथ अपौरुषय

523
00:36:32,560 --> 00:36:36,560
जो भगवान ने भी नहीं रचे ऐसे ग्रंथ क्योंकि भगवान की सत्ता

524
00:36:36,560 --> 00:36:40,640
के अंदर ही दुनिया में सब कुछ है। है ना? विद्याद

525
00:36:40,640 --> 00:36:44,720
सब कुछ भगवान के उसमें है। यह भी गीता में लिखा है। सबका स्त्रोत

526
00:36:44,720 --> 00:36:48,720
भगवान ही है। यह भी गीता में लिखा है। हम

527
00:36:48,720 --> 00:36:52,800
तो जब सबका स्त्रोत झूठ और सच दोनों का स्त्रोत भगवान ही

528
00:36:52,800 --> 00:36:58,000
है तो फिर उनके द्वारा कही गई बात पर विश्वास कैसे

529
00:36:58,000 --> 00:37:02,960
अपौरुषय ग्रंथों पर विश्वास है और फिर उसके बाद जो ग्रंथ

530
00:37:02,960 --> 00:37:06,960
उनके अनुसार चलेंगे

531
00:37:06,960 --> 00:37:11,040
उसके बाद उनके उस अपौरुषय ग्रंथ यानी वेद आदि शास्त्रों

532
00:37:11,040 --> 00:37:15,120
के अनुसार जो ग्रंथ आगे चलेंगे वो ग्रंथ हमारे लिए स्वीकार्य होंगे

533
00:37:15,120 --> 00:37:19,520
जैसे कि गीता पुराण स्मृति ग्रंथ

534
00:37:19,520 --> 00:37:23,920
महाभारत रामायण ये सब हमारे लिए प्रमाण इसलिए है क्योंकि

535
00:37:23,920 --> 00:37:28,720
वेदों के अनुसार चले

536
00:37:28,720 --> 00:37:32,720
अभी कोई पूछ रहे थे आपके साथ कनेक्ट कैसे होंगे तो हमने लिंक दिया हुआ है

537
00:37:32,720 --> 00:37:38,240
आप आ सकते हैं

538
00:37:38,240 --> 00:37:42,080
क्या नाम है इनका

539
00:37:42,080 --> 00:37:45,680
शास्त्रवाद जी

540
00:37:45,680 --> 00:37:50,000
हां जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम

541
00:37:50,000 --> 00:37:56,000
दे लिया इनके वीरेंद्र के आध्यात्मिक विश्वविद्यालयों वालों का ज्ञान

542
00:37:56,480 --> 00:38:00,480
यही होता है भैया ये लोग आएंगे अपना देंगे

543
00:38:00,480 --> 00:38:06,320
वो भी चैलेंज करेंगे लेकिन उत्तर होगा नहीं इनके पास

544
00:38:06,320 --> 00:38:10,400
चैलेंज करेंगे फिर कहेंगे कोर्स कर लो अरे भाई जो कोर्स में

545
00:38:10,400 --> 00:38:14,400
मेरे प्रश्न का अगर जवाब है तो तुम अभी क्यों नहीं दे रहे हो तुमने

546
00:38:14,400 --> 00:38:18,480
तो कोर्स किया है तुम तो 12 साल से कर रहे करवा रहे हो कोर्स क्या कोर्स

547
00:38:18,480 --> 00:38:22,640
में तुम पीटते हो क्या व्यक्ति को बंद कमरे में बोल बाहर विरोध

548
00:38:22,640 --> 00:38:28,080
तो नहीं करेगा जाके बोल बोल हां

549
00:38:28,080 --> 00:38:33,360
जो व्यक्ति मैनपुलेट हो जाए उसका कोर्स कंप्लीट [हंसी]

550
00:38:33,360 --> 00:38:37,680
इनका कहने का अर्थ ये होता है कि भाई जो ये बोल दे वही मान लो

551
00:38:37,680 --> 00:38:41,920
हां उसप क्वेश्चन मत करो तो अगर ऐसा ही है तो फिर मैं जो बोलूंगा

552
00:38:41,920 --> 00:38:43,840
वो क्यों नहीं माना जाएगा ये भी बात तो

553
00:38:43,840 --> 00:38:47,840
है अच्छा मैंने भगवान भगवान को देखा भाई तुम्हारी ये बात कैसे मान

554
00:38:47,840 --> 00:38:51,840
ले तुमने देखा है

555
00:38:51,840 --> 00:38:55,920
तीसरा आंख का ये लोग बात करते हैं थर्ड आई कहां से क्या प्रमाण

556
00:38:55,920 --> 00:39:00,000
है इसका आपने पूछा इसका तो उत्तर नहीं था इनके पास

557
00:39:00,000 --> 00:39:04,080
एक प्रश्न इसमें उत्तर नहीं करता

558
00:39:04,080 --> 00:39:08,240
इसी प्रकार एक नंबर का पूरा नाटक चल रहा है पूरा नाटक

559
00:39:08,240 --> 00:39:12,400
पूरी नाटक कंपनी खोल के बैठ बैठ गए और सब स्टोरी लिख दी

560
00:39:12,400 --> 00:39:16,560
है स्क्रिप्ट लिख दी है ये हुआ वो हुआ बंपर स्क्रिप्ट पहले

561
00:39:16,560 --> 00:39:21,280
लेखराज जी के यहां से चालू होता है। फिर वो उनका उसको उसका विरोध ये करते हैं

562
00:39:21,280 --> 00:39:25,360
वीरेंद्र देव दीक्षित फिर जो है ये चालू करते हैं भाई वीरेंद्र देव दीक्षित से भी आगे वो

563
00:39:25,360 --> 00:39:29,360
भी कहानी जोड़ दी वीरेंद्र देव दीक्षित नहीं कह रहे हैं कि मैं जो है वो

564
00:39:29,360 --> 00:39:33,680
सेवक राम हूं ये कह रहे हैं मैं सेवक वो सेवक राम थे

565
00:39:33,680 --> 00:39:37,680
क्या बात है वही वाली बात कबीर नहीं कह रहे हैं कि मैं भगवान

566
00:39:37,680 --> 00:39:41,920
हूं कबीर कह रहे हैं मैं तो भक्त वो हूं भक्त हूं फिर कबीर

567
00:39:41,920 --> 00:39:45,920
भगवान है लो तो फिर प्रश्न वही आ जाएगा परमात्मा कौन

568
00:39:45,920 --> 00:39:49,440
है तुम बताओ

569
00:39:49,440 --> 00:39:53,600
मतलब प्रवचन देने खुद आए हैं। और

570
00:39:53,600 --> 00:39:57,600
जब क्वेश्चन खुद पे नहीं रहा आंसर नहीं आया तो

571
00:39:57,600 --> 00:40:03,600
लो

572
00:40:04,880 --> 00:40:08,880
यही होता है भैया जब पास नहीं होता है तो 50 बार सुनो ये क्या

573
00:40:08,880 --> 00:40:12,960
कह रहे हैं उनको पूरी बात कहने दो तब पता चलेगा कितनी बार

574
00:40:12,960 --> 00:40:17,040
कहने दे पूरी स्टोरी सुनिए है एक घंटे की उनकी क्या हुआ

575
00:40:17,040 --> 00:40:21,040
कैसे हुआ हां भाई मेरा सीधा सा प्रश्न है

576
00:40:21,040 --> 00:40:25,360
नास्तिक व्यक्ति के लिए आपके पास पास क्या विचार है? क्या कहोगे

577
00:40:25,360 --> 00:40:29,360
उससे? पता लग जाएगा। जा ये है हमारे हमारे अज्ञान। हम

578
00:40:29,360 --> 00:40:33,360
अभी राइट नाउ हमारे सामने नास्तिक खड़ा है। मना कर रहा है कि भाई

579
00:40:33,360 --> 00:40:37,440
मैं नहीं मानता भगवान को। क्यों मानू भगवान को? क्या कहोगे उससे? कुछ तो

580
00:40:37,440 --> 00:40:41,920
कहने ये है कहना। जाओ पता लग जाएगा।

581
00:40:41,920 --> 00:40:46,000
ये कोई बात है क्या? जाओ तुम्हें भी पता लग जाएगा।

582
00:40:46,000 --> 00:40:50,080
कुछ दिनों बाद जाओ घूमते रहो। ऐसे ही पता लग जाएगा। पता लग जाएगा। खेलते

583
00:40:50,080 --> 00:40:54,400
रहो। यह खेल है। पता लग जाएगा। या तो इनकी बात मानो या पता लग जाएगा

584
00:40:54,400 --> 00:41:00,400
तो फिर मेरी बात मानो या तो फिर पता लग जाएगा। ठीक है?

585
00:41:01,280 --> 00:41:05,600
कौन आया है? परिस्थिति उत्सव आपका

586
00:41:05,600 --> 00:41:11,120
चेहरा नहीं दिख रहा उत्सव जी।

587
00:41:11,120 --> 00:41:17,120
हां बताइए जय श्री राम। जय श्री राम। अरे मैं तो आपका

588
00:41:17,360 --> 00:41:22,400
लाइव स्ट्रीम बहुत दिन से देख रहा हूं यार। अच्छा लगता है। जी

589
00:41:22,400 --> 00:41:26,400
अरे अह कुछ दिन पहले एक भाई

590
00:41:26,400 --> 00:41:30,880
के साथ आपका बहस हुआ था इस सर का अबदार के गुण

591
00:41:30,880 --> 00:41:36,880
लेकर मतलब गुण है कि नहीं इस बारे में थोड़ा सा

592
00:41:37,840 --> 00:41:42,160
हम तो उसने उस टाइम पर आपने बोला

593
00:41:42,160 --> 00:41:46,800
ईश्वर का मतलब जो अवतार है उसका कोई गुण नहीं होता है।

594
00:41:46,800 --> 00:41:51,280
पहचान लक्षण हां हां लक्षण

595
00:41:51,280 --> 00:41:55,360
वो वो जो भाई था वो जो जिस

596
00:41:55,360 --> 00:41:59,360
तरीके से उसने ईश्वर को स्वीकारा है उसने भी अनुभव से स्वीकारा है। उसमें

597
00:41:59,360 --> 00:42:03,760
कोई स्पष्ट पहचान से नहीं स्वीकारा है। उसके यहां भी ये मान्यता है कि ऋषियों

598
00:42:03,760 --> 00:42:07,760
के अंतःकरण में ईश्वर ने वेदों का उपदेश

599
00:42:07,760 --> 00:42:11,760
दिया। तो ऋषियों ने कैसे पहचाना था कि वो

600
00:42:11,760 --> 00:42:16,000
ईश्वर ही दे रहा है। कैसे पहचाना था?

601
00:42:16,000 --> 00:42:20,320
अनुभव से। उनको एक अनुभव हुआ कि भाई ऐसा अनुभव पूरा माया माया

602
00:42:20,320 --> 00:42:24,320
रूपी संसार के विरुद्ध है अविद्या के विरुद्ध एक अनुभव

603
00:42:24,320 --> 00:42:28,320
वही अनुभव हमारे जो शब्द प्रमाण होते हैं ऋषि ऋषि

604
00:42:28,320 --> 00:42:32,400
मुनि संत गण इत्यादि जो हमारे शास्त्रों में वर्णित है वही

605
00:42:32,400 --> 00:42:37,520
अनुभव उन्हें होता है जिसको देख के वो ईश्वर है जिसको

606
00:42:37,520 --> 00:42:41,760
जिसको अंतकरण में अनुभूति करके जो अनुभव हुआ

607
00:42:41,760 --> 00:42:45,760
और फिर ये निर्णय हुआ ईश्वर है ऐसे ही जिसको देख के ये

608
00:42:45,760 --> 00:42:49,840
अनुभव हो ईश्वर है वो ईश्वर है। मगर किसके द्वारा

609
00:42:49,840 --> 00:42:54,160
जो तपस्वी है जो आप पुरुष है

610
00:42:54,160 --> 00:42:58,560
वो लोग अपने मतलब सा वो पुरुष वो पुरुष

611
00:42:58,560 --> 00:43:02,720
वो गुरुजन जो हमारे लिए प्रमाण है उनके

612
00:43:02,720 --> 00:43:07,840
द्वारा ठीक है। हां हम

613
00:43:07,840 --> 00:43:13,840
नहीं बट अवतार का तो लक्षण है कि नहीं ये मैं पूछ रहा हूं।

614
00:43:14,240 --> 00:43:18,240
अवतार का लक्षण बता तो दिया भाई वो सारी चीजें

615
00:43:18,240 --> 00:43:22,400
कर देगा मगर वो पहचान जो निश्चित पहचान है

616
00:43:22,400 --> 00:43:26,720
निश्चित पहचान किसी शब्द उसके अधीन ही है किसी

617
00:43:26,720 --> 00:43:30,880
आप पुरुष के द्वारा कहे गए शब्द के अधीन ही है वो

618
00:43:30,880 --> 00:43:34,000
जैसे कि प्रणवाक्षर

619
00:43:34,000 --> 00:43:38,160
यह बात हम भी तो कहते हैं ये जो वेद है ये वही वेद

620
00:43:38,160 --> 00:43:43,200
है जो ईश्वर ने दिए थे इस संबंध में क्या प्रमाण है

621
00:43:43,200 --> 00:43:47,360
इस संबंध में? यही प्रमाण है किसी आप पुरुष का शब्द कि

622
00:43:47,360 --> 00:43:52,880
हां यह वही वेद है। यह वही मंत्र है।

623
00:43:52,880 --> 00:43:56,880
ठीक है। वेद अपारुषय हैं। इस संबंध में वेद का

624
00:43:56,880 --> 00:44:02,320
वाक्य यही प्रमाण है। वेद अपारुषय हैं।

625
00:44:02,320 --> 00:44:06,400
अच्छा बहुत सारे लोग बोलते हैं मतलब अच्छा एक बात

626
00:44:06,400 --> 00:44:10,640
बताओ शिवांश भैया जो पूर्ण ब्रह्म है

627
00:44:10,640 --> 00:44:14,720
उसका कोई विश्लेषण व्याख्या कोई कर सकता है क्या? कोई संत

628
00:44:14,720 --> 00:44:19,120
ऐसा कोई डिटेल्स से मतलब डिटेल्स

629
00:44:19,120 --> 00:44:23,280
ज्यादा व्याख्या हिंदी एक हद तक जहां तक

630
00:44:23,280 --> 00:44:27,760
की जा सकती है वहां तक की गई है। इतनी तार्किक कि आपको ये

631
00:44:27,760 --> 00:44:31,920
फील हो जाएगा कि हां यही वो व्याख्या है जिससे कि उस ब्रह्म तक

632
00:44:31,920 --> 00:44:37,600
पहुंचा जा सकता है जो ब्रह्म अंततो गत निर्वचनीय है।

633
00:44:37,600 --> 00:44:41,600
ठीक है? हां मेरे हिसाब से तो जो

634
00:44:41,600 --> 00:44:47,600
गीता में श्री कृष्ण जैसे कि मैं आपको बताऊं मैं आपको बताऊं

635
00:44:47,840 --> 00:44:51,920
जैसे कि मैंने आपको यह बता दिया

636
00:44:51,920 --> 00:44:56,400
कि आपको अगर बॉडी बनानी है तो आपको क्या-क्या खाना है।

637
00:44:56,400 --> 00:44:58,640
ठीक है?

638
00:44:58,640 --> 00:45:02,640
मैंने आपको यह बता दिया कि अगर आपको बॉडी बनानी है तो आपको क्या-क्या खाना है। पर

639
00:45:02,640 --> 00:45:06,960
मैं आपको यह नहीं बता सकता निश्चित रूप से कि अगर आपको बॉडी

640
00:45:06,960 --> 00:45:11,440
बनानी है तो आपको क्या-क्या नहीं खाना है। क्योंकि वो लिस्ट अनंत होती चली जाएगी।

641
00:45:11,440 --> 00:45:15,520
अनंत दुनिया कितने पता नहीं पौधे होंगे जहां

642
00:45:15,520 --> 00:45:17,520
पर वो नहीं होगी। तो वो अनिर्वचनीय लिस्ट

643
00:45:17,520 --> 00:45:21,520
होगी। तो मैं आपको यह तो निश्चित नहीं बता सकता कि आपको

644
00:45:21,520 --> 00:45:25,600
क्या-क्या नहीं खाना है। मगर यह निश्चित बता सकता हूं कि आपको क्या-क्या खाना

645
00:45:25,600 --> 00:45:30,160
है। यानी कि जिस हद तक बताया जा सकता है जो शब्दों में व्यवहारिक

646
00:45:30,160 --> 00:45:34,800
हो सकती है बात उसको हमने व्यवहारिक रूप से बताया है। बता सकते हैं संतग

647
00:45:34,800 --> 00:45:38,960
मगर जो फिर उससे आगे की चीज जो व्यवहार का विषय है ही नहीं।

648
00:45:38,960 --> 00:45:44,480
तो वह सीधे फिर प्राप्त करने का प्राप्तव्य का विषय है।

649
00:45:44,480 --> 00:45:48,560
अच्छा मेरा एक मतलब इसमें इस बारे में मत है। कहां तक सही है कहां

650
00:45:48,560 --> 00:45:52,720
तक गलत है थोड़ा सा बोलना मेरे हिसाब से तो जो

651
00:45:52,720 --> 00:45:56,800
ब्रह्म है पूर्ण परमात्मा जो भी बोलते हैं हम लोग

652
00:45:56,800 --> 00:46:00,880
उसका व्याख्या खुद ब्रह्म ही कर सकता और

653
00:46:00,880 --> 00:46:04,960
कोई दूसरा संत अरे नहीं कर सकता भाई बात

654
00:46:04,960 --> 00:46:09,360
ये है वो वचनों में आ ही नहीं सकता सुनिए वो व्याख्या वचनों

655
00:46:09,360 --> 00:46:13,520
में नहीं आ सकती है। मैं बता तो रहा हूं। वो जो व्याख्या

656
00:46:13,520 --> 00:46:19,520
है वो वचनों में आ ही नहीं सकती ना। समझिए आपको

657
00:46:19,600 --> 00:46:23,680
मेरी बात सुनो वो छोड़ो। ब्रह्म की ब्रह्म की व्याख्या छोड़ दो। मैं

658
00:46:23,680 --> 00:46:27,840
कह रहा हूं गुड़ खाते समय आपको कैसा लगता है? ये व्याख्या कौन

659
00:46:27,840 --> 00:46:32,080
कर सकता है? बताइए। नहीं कोई नहीं कर सकता बट थोड़ा बहुत हिंट

660
00:46:32,080 --> 00:46:32,580
दे सकता है।

661
00:46:32,560 --> 00:46:37,200
बट व्याख्या नहीं कर सकता। तो ये ये अनिर्वचनीय चीजें होती हैं। अनिर्वचनीय

662
00:46:37,200 --> 00:46:41,360
चीजें होती है। मगर इसके कारण इस अनिर्वचनीयता

663
00:46:41,360 --> 00:46:45,520
के कारण सुनिए इस अनिर्वचनीयता के कारण

664
00:46:45,520 --> 00:46:50,000
हम जो चीजें कही जा रही है उसको नकार नहीं सकते। आप हमारी अनिर्वचनीय

665
00:46:50,000 --> 00:46:56,000
को तो अनिर्वचनीयता जो है उसको खंडित नहीं कर सकते।

666
00:46:56,000 --> 00:47:00,160
नहीं यार मैं नहीं कर सकता। और मेरा तो मानना

667
00:47:00,160 --> 00:47:05,920
है जब गिता में श्री कृष्ण आपकी पहचान क्या है?

668
00:47:05,920 --> 00:47:09,920
मैं तो यार सच्ची बोलो तो मैं तो श्री कृष्ण

669
00:47:09,920 --> 00:47:13,920
का भक्त हूं बस और कुछ नहीं मेरा दूसरा कोई पहचान नहीं है बस इतना ही आप जो

670
00:47:13,920 --> 00:47:18,320
है ऐसा करें हमारी क्लासेस में आए वहां पर आ के क्लासेस में आ के जिज्ञासा

671
00:47:18,320 --> 00:47:22,320
पूछे क्योंकि अगर शास्त्र करना है या आपका

672
00:47:22,320 --> 00:47:26,320
वैसा विषय कुछ सुनिए तो अगर आपका कुछ वैसा विरोधाभासी

673
00:47:26,320 --> 00:47:30,320
विषय तो हम उसको आपके साथ उसको ऑर्गेनाइज करें। तरीके से उसको

674
00:47:30,320 --> 00:47:34,880
सेटल्ड वे में करें। ठीक है? नहीं मेरी

675
00:47:34,880 --> 00:47:39,040
बात सुनिए। अगर आप अगर आप जिज्ञासु हैं अगर आप

676
00:47:39,040 --> 00:47:43,280
जिज्ञासु हैं तो आप जो है क्लासेस में आ जाइए। ठीक है? क्योंकि

677
00:47:43,280 --> 00:47:47,360
अभी क्या है ना हम लोग एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले से बात कर रहे

678
00:47:47,360 --> 00:47:48,000
हैं।

679
00:47:48,000 --> 00:47:52,080
उसके रिगार्डिंग यह जो है यह वीडियो है। अब इसमें आकर के

680
00:47:52,080 --> 00:47:58,080
यदि आप कोई दूसरे मत के हैं, दूसरे विरोधी दर्

681
00:47:59,280 --> 00:48:03,360
भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं? मैं ये नहीं कह रहा कि आप हो। मैं ये कह रहा हूं

682
00:48:03,360 --> 00:48:07,600
अगर हैं तो यह जो वीडियो है ये हमारा ये जो लाइव है वो

683
00:48:07,600 --> 00:48:11,600
बेकार हो जाएगा। खराब होगा। हम आपके साथ व्यवस्थित रूप से अलग से कर लेंगे।

684
00:48:11,600 --> 00:48:15,600
दूसरी बात जो दूसरी बात है कि

685
00:48:15,600 --> 00:48:20,240
यह क्यों कहा गया है अनिर्वचनीयता क्यों कही गई है वो मैं आपको बता रहा हूं

686
00:48:20,240 --> 00:48:24,400
कि जिस समय आप भगवान के साथ एक ही

687
00:48:24,400 --> 00:48:28,880
भूत होंगे उस समय आपको कैसा लगेगा

688
00:48:28,880 --> 00:48:32,880
ब्रह्म के साथ एक ही भूत होंगे उस समय आपको कैसा लगेगा

689
00:48:32,880 --> 00:48:37,680
यह केवल फील है इसको आप शब्द से व्यवहार से बता नहीं सकते इसलिए

690
00:48:37,680 --> 00:48:42,000
भगवान को कहा गया है व्यवहार में ना आ सकने वाला

691
00:48:42,000 --> 00:48:46,080
जो वाणी का भी विषय नहीं है। अंतिम स्वरूप क्या है भगवान का?

692
00:48:46,080 --> 00:48:50,240
जो वाणी का भी विषय नहीं है। वह स्वरूप है। मगर भगवान

693
00:48:50,240 --> 00:48:54,560
फिर एक स्वरूप ऐसा बनाते हैं जो वाणी का विषय हो जाए जिसके

694
00:48:54,560 --> 00:48:58,800
बारे में बातचीत करके हम जो वाणी का विषय नहीं है उस तक पहुंच

695
00:48:58,800 --> 00:49:03,280
सके। समझ गए आप? समझ गए ना आप? जैसे कि

696
00:49:03,280 --> 00:49:07,360
जैसे कि जैसे कि हमें लगी है भूख

697
00:49:07,360 --> 00:49:11,600
तो हमारी भूख मिटती है कैलोरी से। हमारी भूख

698
00:49:11,600 --> 00:49:15,760
मिटती है कैलोरी से मगर कैलोरी हमारे व्यवहार का विषय नहीं

699
00:49:15,760 --> 00:49:21,520
है। कैलोरी खरीदने जाते हो क्या बाहर कभी?

700
00:49:21,520 --> 00:49:25,600
कैलोरी खरीदने जाते हो क्या? पूछ रहा हूं। नहीं जाते। क्या

701
00:49:25,600 --> 00:49:29,840
खरीदने जाते हो? जिससे जिसके द्वारा कैलोरी प्राप्त हो जाएगी वो

702
00:49:29,840 --> 00:49:35,360
फूड। ये हो गया कैलोरी का सगुण साकार स्वरूप।

703
00:49:35,360 --> 00:49:39,520
खाना। मगर अंतत गतवा खाना खा के क्या मिलता है?

704
00:49:39,520 --> 00:49:43,600
कैलोरी एनर्जी मिलती है कैलोरी की फॉर्म में।

705
00:49:43,600 --> 00:49:47,600
तो कैलोरी के लिए हम प्रयास नहीं कर सकते क्योंकि वह हमारे व्यवहार का विषय नहीं

706
00:49:47,600 --> 00:49:51,600
है। प्रयास किसके लिए कर सकते हैं? जो कैलोरी जिससे मिलती

707
00:49:51,600 --> 00:49:56,000
है। इसी तरीके से ब्रह्म का व्यवहार में ना आ सकने वाला जो स्वरूप

708
00:49:56,000 --> 00:50:00,400
है उसके लिए हम प्रयास नहीं कर सकते। मगर उसके लिए कर सकते हैं।

709
00:50:00,400 --> 00:50:04,560
ब्रह्म के उस स्वरूप के लिए जिसके द्वारा ब्रह्म का व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप

710
00:50:04,560 --> 00:50:09,840
प्राप्त होगा। ठीक है? चलिए

711
00:50:09,840 --> 00:50:13,920
ठीक है और आप क्लासेस ज्वाइन कर लीजिए उसमें विस्तृत बात होगी

712
00:50:13,920 --> 00:50:19,920
है ना नहीं

713
00:50:20,160 --> 00:50:24,480
ठीक है फिर काफी रोचक रहा आज का कोमल जब

714
00:50:24,480 --> 00:50:28,400
खुद हिंदू

715
00:50:28,400 --> 00:50:32,480
बांटे बांटे हिंदू धर्म का मजाक बैठे-बैठे बना

716
00:50:32,480 --> 00:50:37,040
दिया है आप लोगों ने ये आप लोगों ने किया है

717
00:50:37,040 --> 00:50:41,040
ये जो हमें बता रहे हैं ना आप यह आपने किया है। ब्रह्मा उसके शरीर में आ

718
00:50:41,040 --> 00:50:44,800
गए। यह मजाक बना रखा है।

719
00:50:44,800 --> 00:50:48,800
और दो ढेले की बातें नहीं पता है। बता रहे हैं

720
00:50:48,800 --> 00:50:53,200
मेरे को गीता पता मेरे को यह पता है। वो पता है। कुछ नहीं पता है।

721
00:50:53,200 --> 00:50:57,600
मजाक बना रखा है आप लोगों ने। लोगों को बहका रहे हैं आप। पाखंड

722
00:50:57,600 --> 00:51:03,600
फैला रहे हैं। ठीक है। सभी को जय श्री राम।

723
00:51:04,240 --> 00:51:08,560
जय श्री राम। हर जी।

724
00:51:08,560 --> 00:51:12,560
जय श्री राम भैया
