1
00:00:03,440 --> 00:00:09,440
जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और

2
00:00:12,560 --> 00:00:17,040
आप सभी ने हमारी चर्चा देखी होगी। कल एक बहुत अच्छी चर्चा हुई थी।

3
00:00:17,040 --> 00:00:21,120
अह समाजी थे। कई विषयों पर उनसे चर्चा

4
00:00:21,120 --> 00:00:25,120
हुई और अंत में पता

5
00:00:25,120 --> 00:00:29,200
नहीं किस कारण से जब मैं उनको प्रमाण पूछ रहा था कि कहां पर ये माना

6
00:00:29,200 --> 00:00:33,520
गया है कि ईश्वर की भक्ति करने से आनंद प्राप्त होता है।

7
00:00:33,520 --> 00:00:37,600
तो वो उन्होंने बस मैं प्रमाण लेने

8
00:00:37,600 --> 00:00:41,600
के लिए उठा और वापस आया तो वो नहीं थे। बहरहाल उनका

9
00:00:41,600 --> 00:00:45,680
फोन आया। आज शायद वो दोबारा किसी और विद्वान के साथ आने

10
00:00:45,680 --> 00:00:49,680
वाले हैं। तो आप अपडेटेड रहिएगा। हम लोग इनफॉर्म

11
00:00:49,680 --> 00:00:55,040
करेंगे आपको और अभी जो महानुभाव आ रहे हैं

12
00:00:55,040 --> 00:00:59,040
वह मैं ले लेता हूं। वो अपना परिचय आपको

13
00:00:59,040 --> 00:01:04,240
अच्छे से देंगे।

14
00:01:04,240 --> 00:01:10,240
ठीक है मैं उन्हें ले लेता हूं।

15
00:01:11,280 --> 00:01:15,280
जय श्री राम संजय जी। जय श्री राम

16
00:01:15,280 --> 00:01:19,280
शिधांशु जी। बहुत-बहुत नमस्कार भाई को। जय

17
00:01:19,280 --> 00:01:23,040
श्री राम।

18
00:01:23,040 --> 00:01:27,440
संजय जी थोड़ा सा आप अपना परिचय मतलब जो आध्यात्मिक

19
00:01:27,440 --> 00:01:31,440
बैकग्राउंड है ना आपका जो जो भी कुछ है जो चीजें हैं

20
00:01:31,440 --> 00:01:35,440
छोटा सा एक श में थोड़ा संक्षिप्त सा वो दर्शकों को

21
00:01:35,440 --> 00:01:39,760
थोड़ा सा दे दीजिए। सर बेसिकली मैं

22
00:01:39,760 --> 00:01:43,680
आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

23
00:01:43,680 --> 00:01:47,760
और आम दुनिया जिसको ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय

24
00:01:47,760 --> 00:01:51,840
के नाम से जानती है। अच्छा जो आपने मेरे

25
00:01:51,840 --> 00:01:56,400
बारे में सुना या जो पहचान आपको मिली ये पहचान मुझे

26
00:01:56,400 --> 00:02:00,480
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय और आध्यात्मिक ईश्वरीय

27
00:02:00,480 --> 00:02:04,720
विश्वविद्यालय के आधार पर मिली। अच्छा बेसिकली

28
00:02:04,720 --> 00:02:09,600
ये लोग 12 साल तकरीबन मैंने इनका अध्ययन किया।

29
00:02:09,600 --> 00:02:13,600
हम 12 साल के बाद जब निष्कर्ष निकला कि

30
00:02:13,600 --> 00:02:17,920
भगवान तो ऐसे ही आते हैं। भगवान भगवान के बारे में

31
00:02:17,920 --> 00:02:23,200
भगवान ऐसे ही आते हैं जैसे ये लोग बता रहे हैं। अच्छा

32
00:02:23,200 --> 00:02:27,840
भगवान से मिलने की बड़ी तमन्ना थी बचपन से। तो

33
00:02:27,840 --> 00:02:31,840
आध्यात्मिकता का शौक था और आध्यात्मिकता का शौक वहां तक लेकर के पहुंचा और

34
00:02:31,840 --> 00:02:37,360
12 साल तकरीबन अध्ययन करने के बाद आज दुनिया के सामने

35
00:02:37,360 --> 00:02:41,360
गीता ज्ञान के आधार पर यह बात प्रमाणित सिद्ध हो जाती है कि भगवान

36
00:02:41,360 --> 00:02:45,440
कब आते हैं, कैसे आते, उसका नाम, रूप, देश काल सब क्लियर हो जाता

37
00:02:45,440 --> 00:02:49,440
है। अच्छा छोटा सा हमारा तो

38
00:02:49,440 --> 00:02:53,600
संक्षिप्त परिचय है कि परमा परमपिता परमात्मा आकर के जो ज्ञान देते हैं,

39
00:02:53,600 --> 00:02:58,720
उसकी उस ज्ञान को ही तीसरा नेत्र कहते हैं और वो प्राप्त हुआ हमें।

40
00:02:58,720 --> 00:02:59,220
उसके

41
00:02:59,120 --> 00:03:03,520
आधार पर अब यह भी जान गए कि राम कौन है जिनको

42
00:03:03,520 --> 00:03:07,600
जय जय श्री राम बोलते हैं महादेव बोलते हैं तो अपना सनातन धर्म

43
00:03:07,600 --> 00:03:11,600
के लिए तो बहुत खुशी की बात है आज कि तकरीबन 12

44
00:03:11,600 --> 00:03:15,840
साल अध्ययन मैंने इनका किया गीता का अध्ययन किया और उसके बाद आप बहुत

45
00:03:15,840 --> 00:03:19,840
अच्छा मिलन है आप चिदंशु जी आपके साथ कि पूरी दुनिया जितने

46
00:03:19,840 --> 00:03:24,160
भी भाई आपको जानते हैं पहचानते हैं उन सबको भी समझने

47
00:03:24,160 --> 00:03:29,040
को मिलेगा जी बाकी तो इसमें

48
00:03:29,040 --> 00:03:33,920
थोड़ा सा आपने हमें यह भी बताया था कि आपका अभी वर्तमान में ब्रह्माकुमारी

49
00:03:33,920 --> 00:03:38,080
संस्था से और जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से संस्था

50
00:03:38,080 --> 00:03:42,080
चल रही उससे थोड़ा सा कुछ विरोध भी है।

51
00:03:42,080 --> 00:03:46,240
वो कैसा विरोध है? क्या है? वो मामला सारा

52
00:03:46,240 --> 00:03:50,960
सा इतना सा है कि भगवान

53
00:03:50,960 --> 00:03:55,200
गीता में लिखते हैं प्रविष्टुम।

54
00:03:55,200 --> 00:03:59,440
और यह प्रवेश शब्द को जो है गलत तरीके से आइडेंटिफाई

55
00:03:59,440 --> 00:04:04,080
कर रहे थे जिस बात पर डिस्प्यूट हुआ और मतलब

56
00:04:04,080 --> 00:04:08,320
देखिए बात मुझे थोड़ा सा थोड़ा सा बात समझा

57
00:04:08,320 --> 00:04:12,800
बिल्कुल क्लियर समझाऊंगा मैं एक्चुअली एक चीज है ब्रह्मा

58
00:04:12,800 --> 00:04:17,280
कुमारी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में भी एक डिस्प्यूट है

59
00:04:17,280 --> 00:04:21,280
और फिर इन दोनों से आपका डिस्प्यूट है तो इसलिए वो डिस्प्यूट समझाते

60
00:04:21,280 --> 00:04:26,320
हुए अपना डिस्प्यूट समझाएं जी जी देखो

61
00:04:26,320 --> 00:04:30,640
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1947 से

62
00:04:30,640 --> 00:04:34,880
हां जी और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

63
00:04:34,880 --> 00:04:39,680
शुरू हुआ 1976 से अच्छा वो

64
00:04:39,680 --> 00:04:43,840
भी यह दावा करते हैं कि भगवान आया है। वो कहते हैं

65
00:04:43,840 --> 00:04:48,080
दादा लेखराज में भगवान आया है। आध्यात्मिक

66
00:04:48,080 --> 00:04:52,400
ईश्वरीय विश्वविद्यालय कहता है कि जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है उसमें

67
00:04:52,400 --> 00:04:57,040
शिव आया है भगवान मतलब शिव को भगवान अलग से कहते हैं।

68
00:04:57,040 --> 00:05:01,040
मेरा डिस्प्यूट इनके साथ यह है कि तुम कहते हो वो प्रवेश करता है। मैं

69
00:05:01,040 --> 00:05:05,520
कहता हूं वो प्रवेश नहीं करता। वो शाश्वत सत्य है।

70
00:05:05,520 --> 00:05:10,000
गीता में लिखा है कि सत्य का कभी नास्ते विद्यते

71
00:05:10,000 --> 00:05:10,500
भाव

72
00:05:10,240 --> 00:05:14,240
ना भाव विद्यते सत। सत्य का कभी विनाश नहीं होता है।

73
00:05:14,240 --> 00:05:18,320
सत्य इस दुनिया में सदा कायम है। लेकिन यहां से उनकी और

74
00:05:18,320 --> 00:05:22,400
मेरी दोनों की आपस में खटकती है। आपकी ब्रह्मा

75
00:05:22,400 --> 00:05:26,400
कुमारी से आपकी वीरेंद्र दीक्षित जी से दोनों से ही

76
00:05:26,400 --> 00:05:31,600
खटकती है। अब तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित से नहीं खटकती है। अच्छा मतलब

77
00:05:31,600 --> 00:05:35,680
जो वहां बैठे जो वहां बैठकर के ज्ञान को

78
00:05:35,680 --> 00:05:38,800
अज्ञान बना रहे हैं ना

79
00:05:38,800 --> 00:05:42,800
उनसे खटकती है। बाबा ने तो जो सुनाया बहुत एग्जैक्ट सुनाया। ब्रह्मा बाबा ने सुनाया। फिर

80
00:05:42,800 --> 00:05:46,880
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने सुनाया 40 साल बहुत अच्छा समझाया। दादा जो

81
00:05:46,880 --> 00:05:51,360
लेखराज जी है उनसे भी नहीं खटकता है और जो

82
00:05:51,360 --> 00:05:55,440
वीरेंद्र देव दीक्षित जी से भी नहीं खटकता है। जी बिल्कुल भी नहीं।

83
00:05:55,440 --> 00:06:00,800
वो तो मेरे बाप और दादा ये जो शब्द यूज़ करते हैं ना बाप और दादा

84
00:06:00,800 --> 00:06:05,040
तो राम बाप को कहते हैं। कृष्ण बच्चे को कहते हैं ऐसा पढ़ाई जब हमने पढ़ी

85
00:06:05,040 --> 00:06:07,920
तो उस पढ़ाई में आया।

86
00:06:07,920 --> 00:06:12,000
तो रामबा जिसको दुनिया राम श्री राम जय जय श्री राम बोलते

87
00:06:12,000 --> 00:06:16,480
हैं इस पढ़ाई के अनुसार तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही श्री राम है।

88
00:06:16,480 --> 00:06:20,480
अच्छा वीरेंद्र दीक्षित जी श्री राम जो पढ़ाई

89
00:06:20,480 --> 00:06:24,560
यहां पढ़ाई गई है वो पढ़ाई स्पष्ट बोलती है। वो वो एक अलग चीज

90
00:06:24,560 --> 00:06:25,440
है।

91
00:06:25,440 --> 00:06:30,160
मैं ये पूछ रहा था कि जो वीरेंद्र दीक्षित जी हैं जैसे उन्होंने कहा कि

92
00:06:30,160 --> 00:06:34,240
ईश्वर प्रवेश नहीं करता है। ईश्वर तो सदा से है।

93
00:06:34,240 --> 00:06:39,120
है ना? ये बात मैं वो नहीं कह रहे। मैं कह रहा हूं वो तो कहते हैं प्रवेश तुम

94
00:06:39,120 --> 00:06:43,360
वो कहते हैं मैं नहीं कह रहा हूं मैं तो इस बात का पक्षधर

95
00:06:43,360 --> 00:06:48,000
हूं कि ईश्वर सदा सत्य है वो बीज रूप है रचयिता है दुनिया

96
00:06:48,000 --> 00:06:52,080
इतने अंश में आपका विरोध है विदेव दीक्षित जी से

97
00:06:52,080 --> 00:06:56,400
बिल्कुल जैसे जैसे सिद्धांशु जी जो सत्य सनातन

98
00:06:56,400 --> 00:07:01,040
धर्म है मेरा नाम शिव मेरा नाम शिवश

99
00:07:01,040 --> 00:07:05,280
शिवशु जी जी शिवशु जी हमारा

100
00:07:05,280 --> 00:07:09,840
टोटल नौ धर्म धर्म है हमारी सृष्टि में आज इस दुनिया में

101
00:07:09,840 --> 00:07:13,920
उसमें से अगर देखा जाए तो एक सनातन धर्म मूर्ति पूजा को मानता है बाकी सब

102
00:07:13,920 --> 00:07:18,080
धर्म मूर्ति पूजा का खंडन करते हैं

103
00:07:18,080 --> 00:07:22,160
और एक मैं दूसरी बात मैं दूसरी बात पूछ रहा हूं

104
00:07:22,160 --> 00:07:26,160
कि वीरेंद्र दीक्षित जी जो है वो जो ये बात कह रहे हैं कि प्रवेश करता

105
00:07:26,160 --> 00:07:30,320
है इतनी जो चीज है वो क्या कहते

106
00:07:30,320 --> 00:07:35,840
हैं आप नहीं मानते हैं कि है जी बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल नहीं

107
00:07:35,840 --> 00:07:39,840
भगवान को प्रवेश करने की क्या पड़ी है? वह शाश्वत है, सदा सत्य है तो वह प्रवेश क्यों

108
00:07:39,840 --> 00:07:40,640
करेगा? वह दूसरों

109
00:07:40,640 --> 00:07:45,440
में प्रवेश करेगा या कोई उसमें प्रवेश करेगा? अच्छा

110
00:07:45,440 --> 00:07:49,760
एक बात बताओ इनके जो चित्र हैं इनके चार चित्र हैं।

111
00:07:49,760 --> 00:07:54,000
नहीं मैं प्रॉब्लम यह है कि जैसे आपके

112
00:07:54,000 --> 00:07:58,640
यहां पर मुरली आती है कोई दिव्य वाणी आती है मुरली के रूप में

113
00:07:58,640 --> 00:08:03,040
तो वो ऐसा माना जाता है कि लेखराज जी के पास भी आती थी पहले

114
00:08:03,040 --> 00:08:07,120
और फिर बाद में वीरेंद्र दीक्षित जी के पास भी आई है ना अब

115
00:08:07,120 --> 00:08:11,360
मुझे ये बताओ अब मुझे ये बताओ हां हां जब

116
00:08:11,360 --> 00:08:15,440
जब वेदव्यास जी सृष्टि रचने लगे तो वेदव्यास जी

117
00:08:15,440 --> 00:08:21,440
बोलते थे और गणेश जी लिखते थे मेरा प्रश्न अलग है मेरा प्रश्न अलग

118
00:08:21,840 --> 00:08:26,000
सुनिए तो हालांकि ब्रह्मा कुमारीज वाले जो है वो यह बात नहीं मानते कि

119
00:08:26,000 --> 00:08:30,000
वीरेंद्र देव दीक्षित के पास भी मुरली आई। ये थोड़ा सा

120
00:08:30,000 --> 00:08:34,160
कांसेप्ट मुरली वाला ठीक कर दीजिए कि अ

121
00:08:34,160 --> 00:08:38,320
वो क्या कैसे लिखवाते हैं क्या करते हैं वो थोड़ा सा क्लियर कर दीजिए। जी

122
00:08:38,320 --> 00:08:42,400
हां वो मैं आपको क्लियर करता हूं। देखो हमारे हमारे भारतीय

123
00:08:42,400 --> 00:08:46,480
इतिहास में जब वेदव्यास जी बोलते

124
00:08:46,480 --> 00:08:50,960
गए और गणेश जी लिखते आप उसको सिद्ध

125
00:08:50,960 --> 00:08:55,280
सुनिए असल में क्या है हमारा मेन

126
00:08:55,280 --> 00:08:59,360
डिस्कशन कुछ और है तो अभी आप फैक्ट बता दीजिए कि ये फैक्ट

127
00:08:59,360 --> 00:09:04,160
है उसके सपोर्ट में जो उसके सपोर्ट में उदाहरण

128
00:09:04,160 --> 00:09:08,480
सुनिए तो उसके सपोर्ट में उदाहरण या फिर दृष्टांत वगैरह

129
00:09:08,480 --> 00:09:12,480
वो तब दीजिए जब मैं समझ समझ ना पाऊं क्योंकि हमारा मेन टॉपिक है नहीं। मेन टॉपिक

130
00:09:12,480 --> 00:09:16,560
आगे बढ़ रहा है। इसलिए कह रहा हूं केवल फैक्ट बता दीजिए कि ऐसे होता है।

131
00:09:16,560 --> 00:09:20,720
यह दादा लेखराज जी के पास आती थी दिव्य वाणी वो लिखवाते थे। वो कहते

132
00:09:20,720 --> 00:09:24,720
थे वो बोलते थे। ऐसे कुछ फैक्ट बता दीजिए। उसके सपोर्टिव जो

133
00:09:24,720 --> 00:09:28,880
दृष्टांत है वो या तो तब बताइए जब मैं आपसे समझ ना पाऊं आपकी बात को

134
00:09:28,880 --> 00:09:33,120
और या फिर मेन टॉपिक क्योंकि आगे है। अभी इसको बहुत ज्यादा विस्तार में करने का कोई

135
00:09:33,120 --> 00:09:37,200
औचित्य नहीं रह जाएगा। तो थोड़ा सा ये बता दीजिए फैक्ट क्या है?

136
00:09:37,200 --> 00:09:41,440
जी फैक्ट यह है कि यह जो ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय

137
00:09:41,440 --> 00:09:45,520
विश्वविद्यालय इससे पहले 1936 में ये विद्यालय शुरू हुए हैं। ओरिजिनली जो ओम

138
00:09:45,520 --> 00:09:50,240
मंडली के नाम से जाना जाता है। अच्छा तो 1936

139
00:09:50,240 --> 00:09:54,480
में जो आज बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है

140
00:09:54,480 --> 00:10:00,480
इनको उस समय सेवक राम के नाम से जाना जा रहा है जो हमें पढ़ाया गया है वहां पर।

141
00:10:00,640 --> 00:10:04,880
असली जो शुरुआत है इन संस्थानों की दोनों ओम मंडली

142
00:10:04,880 --> 00:10:08,960
से चले हैं 1936 से 1936 में

143
00:10:08,960 --> 00:10:13,600
सेवक राम जी गीता सुनाते थे पढ़ के

144
00:10:13,600 --> 00:10:17,760
आपको इस बात का ना पता हो तो ये बात बता दें कि ओरिजिनली जो ओरिजिनल है

145
00:10:17,760 --> 00:10:21,760
ओरिजिन जो हुआ इन संस्थाओं का वो ओम मंडली से हुआ 1936 से

146
00:10:21,760 --> 00:10:25,760
आप फिर थोड़ा सा ट्रैक बदल रहा है हमें मुरली को

147
00:10:25,760 --> 00:10:29,840
जानना है मुरली का क्या होता था कि आता मुरली

148
00:10:29,840 --> 00:10:33,920
क्या है? मुरली वही तो है कि जो गीता ज्ञान दिया गया है उसके बाद

149
00:10:33,920 --> 00:10:38,160
मुरली दादा लेखराज ब्रह्मा वाली आत्मा है। ब्रह्मा के हाथ में वेद शास्त्र दिखाए

150
00:10:38,160 --> 00:10:42,720
जाते हैं। तो उसमें कह रहा हूं ब्रह्मा

151
00:10:42,720 --> 00:10:46,960
जी ब्रह्मा वाली जो आत्मा है आपके अनुसार वो लेखराज जी के शरीर

152
00:10:46,960 --> 00:10:51,040
में प्रवेश करती थी। वो बोलते थे थे।

153
00:10:51,040 --> 00:10:52,240
वो कुछ नहीं करते थे।

154
00:10:52,240 --> 00:10:56,320
वो सुबह 2 बजे उठकर के अमृतवेले लिखते थे। फिर उसी को पढ़ाते थे।

155
00:10:56,320 --> 00:11:00,480
मतलब जो जो ब्रह्मा वाली आत्मा है वह उनको सुनाती थी वो लिखते

156
00:11:00,480 --> 00:11:04,560
थे ऐसा था कौन कौन किसको सुनाता था कोई किसी को नहीं सुनाता था

157
00:11:04,560 --> 00:11:08,560
बाबा बैठ के खुद लिखते थे अच्छा वो स्वयं ब्रह्मा ही थे

158
00:11:08,560 --> 00:11:12,720
इसलिए बिल्कुल वेद शास्त्र किसने लिखा नाम क्या दिया

159
00:11:12,720 --> 00:11:16,800
वेदवाणी बोला है मैं वही कह रहा हूं मैं सपोर्टिव नहीं पूछ रहा हूं

160
00:11:16,800 --> 00:11:20,880
अभी मैं आपकी बात सिद्ध कैसे होती है ये नहीं पूछ रहा मैं आपकी मान्यता पूछ

161
00:11:20,880 --> 00:11:24,880
रहा हूं आपका जो आप मानते हो मान्यता ये

162
00:11:24,880 --> 00:11:29,520
है कि ब्रह्मा बाबा सुबह 2 बजे उठकर के लिखते थे। ये प्रविष्ट शब्द ही गलत

163
00:11:29,520 --> 00:11:33,840
हां जी वो लिखते थे फिर बच्चों को पढ़ाते थे दिन में। अच्छा तो जो प्रविष्टम

164
00:11:33,840 --> 00:11:38,080
शब्द है वो भी उन्होंने लिखा था। प्रविष्टम शब्द उन्होंने

165
00:11:38,080 --> 00:11:42,320
इसलिए लिखा कि मेरे अंदर शिव भगवान प्रवेश करते हैं क्योंकि मगर करते

166
00:11:42,320 --> 00:11:47,360
नहीं है। नहीं लेकिन है कुछ नहीं है ऐसा।

167
00:11:47,360 --> 00:11:51,600
अच्छा एक चीज इसमें और नहीं समझ में आ रही। अच्छा शिव जी प्रवेश कर रहे हैं मतलब

168
00:11:51,600 --> 00:11:55,680
उनका कहना था कि शिव जी प्रवेश कर रहे हैं ब्रह्मा के अंदर और ब्रह्मा वो स्वयं

169
00:11:55,680 --> 00:12:00,400
थे है ना वो स्वयं वाली आत्मा है जी

170
00:12:00,400 --> 00:12:04,880
और ब्रह्मा वाली ब्रह्मा वाली आत्मा है शरीर नहीं है

171
00:12:04,880 --> 00:12:07,280
शरीर तो शरीर

172
00:12:07,280 --> 00:12:11,360
तो भौतिक है शरीर तो भौतिक है शरीर देखो जो

173
00:12:11,360 --> 00:12:15,360
शरीर है ब्रह्मा बाबा है जो मुरली है उस मुरली का नाम है वेदवाणी मुरली

174
00:12:15,360 --> 00:12:19,440
तो हम कह रहे हैं ओरिजिनल नाम है वेदवाणी नहीं वो

175
00:12:19,440 --> 00:12:23,520
ठीक है वो वो अभी हम आगे आएंगे वेद वेद पर आएंगे वेद व्यास पर भी आएंगे

176
00:12:23,520 --> 00:12:27,520
और राम जी पर भी आएंगे कृष्ण जी पर भी आएंगे मतलब अभी ये तथ्यात्मक

177
00:12:27,520 --> 00:12:31,680
बात ये है कि सुबह 2 बजे उठकर के जो लेखराज जी हैं

178
00:12:31,680 --> 00:12:35,760
वो ब्रह्मा वाली आत्मा का शरीर था लेखराज जी के

179
00:12:35,760 --> 00:12:39,920
नाम से जाने जाना जाने वाला है ना तो वो

180
00:12:39,920 --> 00:12:43,920
जो है वो मुरली लिखता था और जो

181
00:12:43,920 --> 00:12:48,160
शिवजी उनका कहना था कि शिव परमात्मा जो है

182
00:12:48,160 --> 00:12:52,480
वो उनके अंदर प्रवेश करके लिखवा रहे हैं। है ना?

183
00:12:52,480 --> 00:12:56,480
ये उनका कहना था। अब ये उनका अब इसके

184
00:12:56,480 --> 00:13:00,800
बाद वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्या कहना है? वीरेंद्र देव दीक्षित

185
00:13:00,800 --> 00:13:05,280
जी का कहना ये है कि ब्रह्मा जो लिखते थे जो उन्होंने पढ़ाया

186
00:13:05,280 --> 00:13:11,280
1947 से लेकर के 1969 तक वो जीवित रहे।

187
00:13:11,360 --> 00:13:15,520
1969 में शरीर छोड़ा ना ब्रह्मा बाबा ने। ठीक है?

188
00:13:15,520 --> 00:13:19,920
तो उस समय तक उन्होंने जो लिखा उस लिखे हुए का

189
00:13:19,920 --> 00:13:22,640
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है सरलार्थ

190
00:13:22,640 --> 00:13:26,720
उसका अर्थ करके समझाते हैं जिसके कारण वो गीता

191
00:13:26,720 --> 00:13:30,880
में आया ना जो कि सह आख्या परिपन यानी कि उस व्याख्या

192
00:13:30,880 --> 00:13:34,960
सहित उस वेद वाणी की व्याख्या करते हैं वो उनको

193
00:13:34,960 --> 00:13:39,360
आप बाबा ने अलग से कोई मुरली नहीं चलाई है वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने जो गणना

194
00:13:39,360 --> 00:13:43,440
के मुख से निकला उस वेद वाणी का क्लेरिफिकेशन किया उन्होंने उन्होंने

195
00:13:43,440 --> 00:13:47,600
क्लेरिफिकेशन अब इस क्लेरिफिकेशन को जहां तक है ब्रह्मा कुमारी वाले मानते

196
00:13:47,600 --> 00:13:51,680
नहीं होंगे। जी वो बिल्कुल नहीं मानते। अच्छा ये

197
00:13:51,680 --> 00:13:55,840
इस बारे में इनका क्लेम क्या था वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कि वो

198
00:13:55,840 --> 00:14:00,240
उनका भी क्लेम कुछ ऐसा ही था कि मेरे अंदर जो है शिव आते हैं या

199
00:14:00,240 --> 00:14:04,240
वो बस ब्रह्मा ही थे। ब्रह्मा क्या दूसरी बॉडी थी? जैसे पहली

200
00:14:04,240 --> 00:14:08,240
बॉडी देख रहा है दूसरी बॉडी ये लेकिन

201
00:14:08,240 --> 00:14:12,320
मुरली कहती है कि वो आया नहीं आया यह कोई विषय नहीं

202
00:14:12,320 --> 00:14:16,320
है। नहीं नहीं मैं यह नहीं कह रहा मैं कह रहा हूं उनका क्लेम क्या था वो क्या

203
00:14:16,320 --> 00:14:20,320
कहते जैसे जैसे लेखराज जी के बारे में हमने समझ लिया

204
00:14:20,320 --> 00:14:24,320
कि वो ब्रह्मा वाली आत्मा की बॉडी थी

205
00:14:24,320 --> 00:14:28,400
लेखराज जी की है ना तो वो स्वयं ब्रह्मा ही हो गए

206
00:14:28,400 --> 00:14:32,560
जी और उन्होंने क्लेम किया कि शिव जी मेरे अंदर आते हैं और मैं लिखता हूं ये क्लेम

207
00:14:32,560 --> 00:14:36,320
था उनका उसके बाद

208
00:14:36,320 --> 00:14:37,840
ये क्लेम करते हैं

209
00:14:37,840 --> 00:14:42,000
कि उसके अंदर शिव भगवान आते हैं और वो लिखवा वो बोलते हैं अंदर अंदर

210
00:14:42,000 --> 00:14:46,080
यानी उसके बुद्धि में आता है और वो लिखते रहते हैं। यानी वो वो नहीं यानी कि वो

211
00:14:46,080 --> 00:14:50,160
नहीं लिखते थे। मतलब उन्होंने ऐसा नहीं कहा था कि मेरे अंदर शिव आते

212
00:14:50,160 --> 00:14:54,160
हैं बल्कि उनको मानने वाले ऐसा कहते हैं। उसको मानने

213
00:14:54,160 --> 00:14:58,400
वाले ऐसा कहते हैं कि शिव उसमें प्रवेश करते हैं और वो लिखवाते हैं और वो लिख लिखता

214
00:14:58,400 --> 00:15:02,400
जाता है। अब अब इसमें जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी

215
00:15:02,400 --> 00:15:06,400
है इनका क्या कहना था। वीरेंद्र देव दीक्षित जी

216
00:15:06,400 --> 00:15:10,480
कहते हैं कि मतलब शिव क्या है? शिव

217
00:15:10,480 --> 00:15:14,640
के बारे में समझाते हैं। नहीं नहीं नहीं उस बारे में क्या

218
00:15:14,640 --> 00:15:18,640
क्या कहना था कि मेरे अंदर आते हैं कहना उनका कहना यह

219
00:15:18,640 --> 00:15:22,640
था कि जो ब्रह्मा बाबा के मुख से जितनी मुरलियां चली

220
00:15:22,640 --> 00:15:26,640
है ना तो ब्रह्मा ज्ञान को समझ पाया ना ब्रह्मा कुमारी ज्ञान को समझ पाई तो मैं

221
00:15:26,640 --> 00:15:30,640
समझाऊंगा अब इस ज्ञान को तो उनके हिसाब से उनके

222
00:15:30,640 --> 00:15:34,960
हिसाब से लेखराज जी है जो वो ज्ञान को समझ नहीं पाए समझ

223
00:15:34,960 --> 00:15:38,960
नहीं पाए तो जैसे कृष्ण के हाथ में मुरली दिखाते हैं वो काट की मुरली है तो कठ

224
00:15:38,960 --> 00:15:43,040
बुद्धि बता दिया उनको अच्छा तो अब इनका

225
00:15:43,040 --> 00:15:48,000
क्या क्लेम है कि मैं कौन हूं? इनका क्या क्लेम था वीरेंद्र देव दीक्षित जी का?

226
00:15:48,000 --> 00:15:52,160
वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्लेम है कि जैसे ब्रह्मा के चार पुत्र दिखाए जाते

227
00:15:52,160 --> 00:15:53,280
हैं।

228
00:15:53,280 --> 00:15:57,440
हां तो यहां ब्रह्मा कुमारी में ये चार कुमार इकट्ठे

229
00:15:57,440 --> 00:16:02,640
गए थे। दशरथ पटेल और चार थे ये लोग इकट्ठे भठी करके आए थे। अच्छा

230
00:16:02,640 --> 00:16:06,960
तो चारों ने भठी की तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उनमें सबसे छोटे थे।

231
00:16:06,960 --> 00:16:10,960
भठी क्या होती है? भठी होती है जैसे सात दिन

232
00:16:10,960 --> 00:16:15,200
का कोर्स करवाते हैं पहले हम हम सात दिन का कोर्स

233
00:16:15,200 --> 00:16:19,280
करने के बाद फिर भठी के लिए जाते हैं यानी कि भ्ठी जैसे भट्ठे में

234
00:16:19,280 --> 00:16:23,440
ईंट पकाते हैं हम माना जैसे 10

235
00:16:23,440 --> 00:16:27,440
20 लोग इकट्ठे हो गए जो पहले कोर्स करवाते हैं हफ्ता 10 दिन तक आए कोर्स किया फिर

236
00:16:27,440 --> 00:16:31,600
उसके बाद भठी में भेजा जाता है पक्का करने के लिए कि हां हमें ज्ञान समझ में आ गया

237
00:16:31,600 --> 00:16:35,600
अच्छा तो जैसे अपना उनका नाम

238
00:16:35,600 --> 00:16:39,840
पड़ा सनत कुमार जो इतिहास बनता है हमारा तो जो ज्ञान और योग में तीखे

239
00:16:39,840 --> 00:16:43,840
चले गए। तो ये जो मुरली हमें पढ़ाई गई इस

240
00:16:43,840 --> 00:16:47,840
मुरली के आधार पर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जो है सनत कुमार साबित हो जाते हैं कि

241
00:16:47,840 --> 00:16:51,840
ये ब्रह्मा का चौथा पुत्र साबित हो गया। योग से आगे

242
00:16:51,840 --> 00:16:55,840
निकल गया। ठीक है। ठीक है। समझ गया। तो ये सनत कुमार

243
00:16:55,840 --> 00:17:00,160
है वीरेंद्र देव दीक्षित जो है वो सनत कुमार है वो ना तो ब्रह्मा

244
00:17:00,160 --> 00:17:04,720
है ना ही वो शंकर है ना शिव है वो सनत कुमार

245
00:17:04,720 --> 00:17:08,720
इस समय वो ब्रह्मा का चौथा पुत्र सनत कुमार है अच्छा

246
00:17:08,720 --> 00:17:12,800
इस समय मतलब पहले कुछ और थे पहले तो आम आदमी

247
00:17:12,800 --> 00:17:16,800
था 40 साल तक तो अपने घर पे ही थे पीएचडी कर रखी है संस्कृत में उन्होंने

248
00:17:16,800 --> 00:17:21,120
अच्छा ये बात और वो वो टॉपिक लेके आए

249
00:17:21,120 --> 00:17:25,520
एक सुनो एक सुनो हां एक बात और बताएं आपको

250
00:17:25,520 --> 00:17:29,600
तो वो पीएचडी के दौरान उनका टॉपिक था इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? बाबा

251
00:17:29,600 --> 00:17:34,000
वीरेंद्र देव दीक्षित जी जब पीएचडी कर रहे हैं उस समय उनका

252
00:17:34,000 --> 00:17:38,080
टॉपिक है इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? तो उस

253
00:17:38,080 --> 00:17:41,600
सर्च में वो यहां पहुंचे हैं।

254
00:17:41,600 --> 00:17:45,680
ठीक है? इसमें एक चीज समझ में नहीं आई

255
00:17:45,680 --> 00:17:49,760
कि जैसे जो वीरेंद्र दीक्षित है उनका यह कहना है कि

256
00:17:49,760 --> 00:17:54,800
जो लेखराज है वो ज्ञान को समझ नहीं पाए। जी और

257
00:17:54,800 --> 00:17:59,520
अच्छा उनका यह कहना तो नहीं था कि शिव जी से ज्ञान लिया है उन्होंने। मतलब

258
00:17:59,520 --> 00:18:03,520
वीरेंद्र दीक्षित जी का इस बारे में क्या कहना था? उनका तो सीधा सा

259
00:18:03,520 --> 00:18:07,680
एक ही कहना है कि जो शिव जिसको ये मानते हैं देखो

260
00:18:07,680 --> 00:18:11,680
पहली बात तो प्रविष्टुम जो है वो हमारा शब्द नहीं है सनातन धर्म

261
00:18:11,680 --> 00:18:15,680
का। देखिए अभी आप कह रहे थे वो भी मानते हैं

262
00:18:15,680 --> 00:18:19,920
तो मुझे अभी उनका पर उनका कहना क्या था वो जानना है

263
00:18:19,920 --> 00:18:23,920
वो तो इस बात को मानते थे कि ब्रह्मा के मुख से जो भगवान ने बोला

264
00:18:23,920 --> 00:18:28,000
है ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है ब्रह्मा के मुख से जो वेद वाणी निकली है उस वेद वाणी

265
00:18:28,000 --> 00:18:32,000
को कोई नहीं समझ पाया तो वो वेद शास्त्रों का सार

266
00:18:32,000 --> 00:18:36,320
बैठकर के स्वयं वो समझाते हैं बाबा वीरेंद्र

267
00:18:36,320 --> 00:18:40,480
देव दीक्षित जी जो मुरली मतलब वीरेंद्र देव

268
00:18:40,480 --> 00:18:44,560
दीक्षित जी ये नहीं मानते थे कि शिव जी उनके अंदर आए। उनका

269
00:18:44,560 --> 00:18:48,640
तो सीधा सा मानना है कि जो यह ज्ञान है इस ज्ञान को नहीं समझ पा रहे।

270
00:18:48,640 --> 00:18:52,720
इस ज्ञान के द्वारा भगवान की पहचान समझने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं

271
00:18:52,720 --> 00:18:56,720
कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी इस बारे में क्या मानते थे कि शिवजी अंदर

272
00:18:56,720 --> 00:19:00,720
आके बोल रहे हैं या बता रहे हैं और फिर वो लिख रहे हैं।

273
00:19:00,720 --> 00:19:04,960
वो जितने भी मान्यताएं सारी गलत है। ऐसा मानते थे। मतलब

274
00:19:04,960 --> 00:19:08,960
वो आते नहीं है। अंदर नहीं आते हैं। ये मानते थे। कोई कोई नहीं आता है, कोई

275
00:19:08,960 --> 00:19:13,280
नहीं जाता है। भाई साहब ये तो आपका क्लेम है ना। मैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी का

276
00:19:13,280 --> 00:19:17,280
स्पष्ट करना चाह रहा हूं। की तरफ से मैं बोल रहा हूं। हां

277
00:19:17,280 --> 00:19:21,360
ठीक। अभी तो अभी थोड़ी देर पहले तो आप कह रहे थे ना कि प्रविष्ट ये भी मानते

278
00:19:21,360 --> 00:19:25,680
थे। प्रविष्ट ये लोग ब्रह्मा कुमारी मानते हैं।

279
00:19:25,680 --> 00:19:30,000
अच्छा ये वीरेंद्र दीक्षित जी ने नहीं माना प्रविष्टम। प्रविष्ट

280
00:19:30,000 --> 00:19:34,080
वो तो इस बात का क्लेम भी नहीं करते। वो तो एक सीधा सा करते हैं। भगवान ने

281
00:19:34,080 --> 00:19:38,080
जो ज्ञान दिया जैसे भी ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है इस ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला है इसका

282
00:19:38,080 --> 00:19:38,960
तंत्र नहीं समझ पा

283
00:19:38,960 --> 00:19:43,040
रहे तुम लोग सब ठीक है ठीक है अब अब्मा के मुख से ज्ञान निकला

284
00:19:43,040 --> 00:19:47,200
है ठीक है ठीक है जो ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला है इस ज्ञान के अंदर

285
00:19:47,200 --> 00:19:51,280
भगवान की पहचान भगवान को कोई नहीं पहचान रहा ठीक है

286
00:19:51,280 --> 00:19:55,280
अब ये जो वीरेंद्र दीक्षित से आपका तो कोई विरोध नहीं है फिर इस

287
00:19:55,280 --> 00:19:59,680
हिसाब से क्योंकि उन्होंने भी प्रविष्टम को नहीं माना कि है मेरा विरोध

288
00:19:59,680 --> 00:20:03,840
मेरा विरोध नहीं है मेरा सिर्फ एक आकलन है जो निष्कर्ष निकला

289
00:20:03,840 --> 00:20:08,000
है इस सब को पढ़ने के बाद मैं नहीं हूं। मेरे साथ और भी 1400 लोग और भी है जिनका सब

290
00:20:08,000 --> 00:20:12,080
ये निष्कर्ष है। सबका ये निर्णय निकला हुआ

291
00:20:12,080 --> 00:20:16,160
है। वो क्या निर्णय है? वो निर्णय ये निकला हुआ है

292
00:20:16,160 --> 00:20:20,160
कि किसी ने 10 साल, किसी ने 15 साल, किसी ने 20 साल इस ज्ञान को सुना,

293
00:20:20,160 --> 00:20:22,320
समझा।

294
00:20:22,320 --> 00:20:26,720
और फिर उसको गीता ज्ञान से टेली किया और टेली करने के बाद निष्कर्ष निकला

295
00:20:26,720 --> 00:20:31,040
कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित श्री राम है सनत कुमार है शिवलिंग

296
00:20:31,040 --> 00:20:35,200
है महादेव है नहीं नहीं भाई साहब भाई साहब आप गलत गलत जा रहे हैं मैं पूछ

297
00:20:35,200 --> 00:20:39,200
रहा हूं विरोध क्या है वो क्या है विरोध इस बात का है

298
00:20:39,200 --> 00:20:43,200
कि इस पर शिव को न समझने के कारण सारे ज्ञान का अज्ञान

299
00:20:43,200 --> 00:20:47,200
बनाया जा रहा है। नहीं नहीं वीरेंद्र देव दीक्षित भी तो यही कह रहे

300
00:20:47,200 --> 00:20:51,360
हैं। उनसे कोई विरोध है क्या आप लोगों का? नहीं किसी से विरोध इस

301
00:20:51,360 --> 00:20:55,360
बात का नहीं है। सिद्धांशु जी आप समझिए इस बात को।

302
00:20:55,360 --> 00:20:59,440
हां हां ये विरोध नहीं है बल्कि इस ज्ञान के अंदर

303
00:20:59,440 --> 00:21:03,520
100% सच्चाई है। बाबा वीरेंद्र दीक्षित बात

304
00:21:03,520 --> 00:21:07,600
समझे नहीं। मैं कुछ और पूछ रहा हूं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई

305
00:21:07,600 --> 00:21:12,480
कोई बात कोई भी बात ऐसी है जो आप स्वीकार ना करते हो।

306
00:21:12,480 --> 00:21:16,480
बिल्कुल उनकी तो एक-एक बात स्वीकार्य है। अच्छा वो थोड़ी

307
00:21:16,480 --> 00:21:20,560
देर पहले शायद मैं कुछ समझ नहीं पाया। मुझे लगा कि आप वीरेंद्र देव दीक्षित के

308
00:21:20,560 --> 00:21:24,800
भी किसी आंशिक रूप से विरोध में हैं। आपने बिल्कुल एक एक

309
00:21:24,800 --> 00:21:28,800
सेकंड का भी विरोध नहीं है। बल्कि उनके

310
00:21:28,800 --> 00:21:32,800
कुल मिलाकर के आप वीरेंद्र देव दीक्षित में फेथ रखते हैं पूरी तरीके से वो

311
00:21:32,800 --> 00:21:37,120
आपके लिए प्रमाण है। जी दिलौर जैन से। अच्छा

312
00:21:37,120 --> 00:21:41,440
अब एक सवाल यह आता है कि वीरेंद्र दीक्षित जी ने

313
00:21:41,440 --> 00:21:45,600
कहा कि जो लेखराज जी थे

314
00:21:45,600 --> 00:21:49,920
उन्होंने शिव का ज्ञान लिखा पर समझ नहीं पाए। इसका मतलब

315
00:21:49,920 --> 00:21:55,360
वीरेंद्र देव दीक्षित को जो उनकी योग्यता है

316
00:21:55,360 --> 00:21:59,520
लेखराज जी की योग्यता उस पर कहीं ना कहीं डाउट

317
00:21:59,520 --> 00:22:03,920
है। हां जी हां जी बिल्कुल डाउट था।

318
00:22:03,920 --> 00:22:08,160
हां जी तो इनकी जो मुरली है मुरली में आया राम बाप को कहते हैं कृष्ण

319
00:22:08,160 --> 00:22:12,480
बच्चे को कहते हैं तो वो कृष्ण बच्चा था।

320
00:22:12,480 --> 00:22:16,640
अ मैं ये कह रहा हूं अभी हम राम और कृष्ण की बातों

321
00:22:16,640 --> 00:22:20,640
पे अभी जाएंगे। है ना? अगला पार्ट वही है राम और कृष्ण

322
00:22:20,640 --> 00:22:24,800
वाला। उस पर हम जाएंगे क्योंकि हमारी कुछ मान्यताएं अलग है ना।

323
00:22:24,800 --> 00:22:28,960
तो आप अगर राम बाप को कहते हैं, राम कृष्ण को कहते हैं तो वो थोड़ा

324
00:22:28,960 --> 00:22:33,120
सा अभी ना करें क्योंकि हमारी मान्यताएं कुछ और है। फिर वो आपस में एक

325
00:22:33,120 --> 00:22:37,360
वैचारिक टकराव होने लगेगा। अभी हम दूसरी चीजें देख रहे हैं।

326
00:22:37,360 --> 00:22:42,320
आगे अगले चैप्टर में हम लोग बातें करेंगे इन विषयों में। है ना? जी। तो

327
00:22:42,320 --> 00:22:45,360
क्या कहते हैं? ये

328
00:22:45,360 --> 00:22:49,440
ये उनको उनकी योग्यता पर डाउट था कि वो अर्थ

329
00:22:49,440 --> 00:22:53,680
सही से बता नहीं पाए मुरली का। लेखराज सही बात जी

330
00:22:53,680 --> 00:22:57,760
हां तो जैसे फिर दो चीजें हो

331
00:22:57,760 --> 00:23:02,480
गई कि लेखराज जी ने अर्थ भी बताया है और मुरली भी लिखवाई है।

332
00:23:02,480 --> 00:23:06,560
या सिर्फ मुरली लिखवाई है। दादा लेखराज ने

333
00:23:06,560 --> 00:23:11,920
जो लिखा सुबह उठ के 2:00 बजे जो लिखा वही बच्चों को पढ़ा दिया।

334
00:23:11,920 --> 00:23:16,000
एज इट इज क्लास में हां एज इट इज लेकिन उसका अर्थ नहीं समझा

335
00:23:16,000 --> 00:23:20,240
पाए। अच्छा तो अब यहां पर एक प्रॉब्लम आती है कि यदि हमें दादा

336
00:23:20,240 --> 00:23:24,320
लेखराज पर आपके जो दादा हैं उन पर यदि हमें भरोसा है

337
00:23:24,320 --> 00:23:27,600
कि वो जो है शिव का ज्ञान हमें लिखवा रहे

338
00:23:27,600 --> 00:23:32,080
हैं। शिव जो बोल रहे हैं वो हमें लिखवा रहे हैं तो यदि आपको भरोसा

339
00:23:32,080 --> 00:23:36,080
है तो फिर जब उनसे गलती हो सकती है

340
00:23:36,080 --> 00:23:40,480
जब आप मान रहे हैं कि अर्थ को लिखवाने में उनसे गलती हुई अर्थ को बताने में गलती हुई

341
00:23:40,480 --> 00:23:45,040
तो मुरली सुनने और लिख लिखने में भी तो गलती हो सकती है।

342
00:23:45,040 --> 00:23:49,040
मुरली सुनने और लिखने में गलती हो सकती है कहीं ना कहीं

343
00:23:49,040 --> 00:23:53,680
हम तो फिर हमें उसकी उनकी मुरलियों पर विश्वास कैसे

344
00:23:53,680 --> 00:23:58,160
उनकी मुरली पर विश्वास ऐसे कि जब उनके मुख से मुरली निकली

345
00:23:58,160 --> 00:24:02,640
तो उससे पहले तो यह ज्ञान 1936 से था जो ज्ञान दिया गया था 1936

346
00:24:02,640 --> 00:24:06,800
का तो किसी को याद नहीं है कि 1936 में क्या ज्ञान दिया

347
00:24:06,800 --> 00:24:12,080
तो 1947 से जब वो ब्रह्मा बाबा के मुख से मुरली निकली तो

348
00:24:12,080 --> 00:24:16,480
जो नया ज्ञान था ना दुनिया के लिए तो एकदम से वो

349
00:24:16,480 --> 00:24:20,800
उसमें एक सीधा सा सेंटेंस आता था कि रूहानी बाप बैठकर के रूहानी बच्चों को पढ़ाते

350
00:24:20,800 --> 00:24:24,880
हैं। तो एक अट्रैक्शन क्योंकि वो ऐसा

351
00:24:24,880 --> 00:24:29,440
नया ज्ञान एकदम से दुनिया के सामने आना तो दुनिया खींची ना उनकी तरफ

352
00:24:29,440 --> 00:24:33,440
और ब्रह्मा बाबा जो है नष्टों को वहां हो के

353
00:24:33,440 --> 00:24:37,440
बड़े अच्छे से दुनियादारी छोड़ के एकदम नए तरीके से

354
00:24:37,440 --> 00:24:42,400
लेकर के आए और वो मां का ब्रह्मा माने मां होती है। वो मां का स्वरूप था।

355
00:24:42,400 --> 00:24:43,280
नहीं नहीं

356
00:24:43,280 --> 00:24:47,760
यह वो मैं पूछ रहा हूं कि जब हमें मालूम पड़ गया कि

357
00:24:47,760 --> 00:24:51,920
जो लेखराज जी हैं उनसे किसी किसी पॉइंट पर गलती हुई है।

358
00:24:51,920 --> 00:24:56,160
गलती हुई है इसका मतलब कहीं ना कहीं उनका मस्तिष्क वो प्रज्ञा शक्ति

359
00:24:56,160 --> 00:25:00,240
नहीं है कि ईश्वर के ज्ञान को समझ पाए। तो जब वो प्रज्ञा शक्ति नहीं है

360
00:25:00,240 --> 00:25:04,240
तो मुरली को जो सुन रहे हैं और उसको लिखवा रहे हैं। उसमें भी तो वो कमी आ सकती

361
00:25:04,240 --> 00:25:08,320
है। हो सकता है दो चार शब्द मुरली में भी गलत लिखवा दिए हो जो उन्होंने कुछ और

362
00:25:08,320 --> 00:25:12,560
कहा हो शिव जी ने उन्होंने गलत लिखवा दिया हो। कहने का मतलब यह है।

363
00:25:12,560 --> 00:25:16,560
कहने का मतलब यह है कि जैसे लेख जैसे कि आपके

364
00:25:16,560 --> 00:25:20,560
लिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रमाण है। प्रमाण का

365
00:25:20,560 --> 00:25:24,560
मतलब इन्होंने जो कहा बिल्कुल सही कहा है। अगर मैंने एक भी बात इसकी गलत

366
00:25:24,560 --> 00:25:28,800
कह दी कि ये बात गलत कही है। तो फिर इनकी किसी भी इनकी

367
00:25:28,800 --> 00:25:33,600
किसी भी इनकी किसी भी बात पर मेरा भरोसा होना सिद्ध नहीं होता। एक न्याय

368
00:25:33,600 --> 00:25:37,600
न्याय है। एक अर्ध कुकुट न्याय कहते हैं। अर्ध कुकुट न्याय का मतलब

369
00:25:37,600 --> 00:25:42,080
कि मान रहे हो तो पूरा मानो। नहीं मान रहे हो तो बिल्कुल मत मानो।

370
00:25:42,080 --> 00:25:46,400
मानना है तो पूरा मानो क्योंकि क्योंकि जब हम किसी को प्रमाण कहते हो

371
00:25:46,400 --> 00:25:50,480
प्रमाण का मतलब होता है कि उसको मानने के पीछे हमारे पास और कोई आधार नहीं

372
00:25:50,480 --> 00:25:54,800
है। वो आधार है सबका और यदि हम उसमें खोजबीन

373
00:25:54,800 --> 00:25:58,480
कर रहे हैं कि इसमें ये हो सकता है, ये हो सकता है। इसका मतलब हमारा प्रमाण कोई और

374
00:25:58,480 --> 00:26:02,640
है। उसके आधार पर हम इसको जांच रहे हैं कि इसने क्या सही कहा है, क्या गलत कहा है।

375
00:26:02,640 --> 00:26:06,880
मगर यहां पर मुरलियों के लिए यहां पर मुरलियों के लिए वीरेंद्र

376
00:26:06,880 --> 00:26:11,520
देव दीक्षित जी के पास केवल एक ही आधार था लेखराज

377
00:26:11,520 --> 00:26:15,600
और लेखराज पर ये डाउट कर रहे हैं कि वो गलत लिखवा रहे हैं। वो गलत ज्ञान दे

378
00:26:15,600 --> 00:26:19,680
रहे हैं। तो जब लेखराज पर डाउट है तो लेख

379
00:26:19,680 --> 00:26:23,920
मेरे कहने का मतलब है लेख जब लेखराज के अर्थ पर डाउट है तो लेखराज

380
00:26:23,920 --> 00:26:28,000
की मुरली पर डाउट क्यों नहीं और यदि लेखराज की मुरली पर डाउट नहीं

381
00:26:28,000 --> 00:26:32,000
है तो लेखराज के अर्थ पर डाउट कैसे इसमें

382
00:26:32,000 --> 00:26:36,160
एक सीधी सी बात है कि जो ब्रह्मा के मुख से जितनी

383
00:26:36,160 --> 00:26:41,200
मुरली निकली है ब्रह्मम वाक्यमति जनार्दनम

384
00:26:41,200 --> 00:26:45,280
ब्रह्मा के जो मुख से जो बात निकली है उस बात

385
00:26:45,280 --> 00:26:49,440
का अर्थ इस दुनिया में कोई नहीं समझ पाया और वो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

386
00:26:49,440 --> 00:26:53,680
बैठ के समझ मुझे भी समझो हमें तो मौका दो

387
00:26:53,680 --> 00:26:57,680
जी हमें तो मौका दो बिल्कुल बोलिए बोलिए इतना लंबा क्वेश्चन दे रहे हैं अभी

388
00:26:57,680 --> 00:27:01,920
बोलने का मौका दो हां पहली बात यहां बात

389
00:27:01,920 --> 00:27:06,160
डिस्प्यूट की नहीं है यहां बात भगवान को समझने की चल रही है पहली बात तो मुख्य

390
00:27:06,160 --> 00:27:10,240
पॉइंट के अंदर नोट करिए आप बात का इस ज्ञान से ब्रह्मा

391
00:27:10,240 --> 00:27:13,520
कुमारी हो चाहे आध्यात्मिक स्तरीय विश्वविद्यालय हो

392
00:27:13,520 --> 00:27:17,600
डिस्प्यूट इस बात का है कि इन्होंने भगवान को अभी तक पहचाना क्यों नहीं

393
00:27:17,600 --> 00:27:22,080
बात ये सारांश चला वापस इस बात का और

394
00:27:22,080 --> 00:27:26,160
ब्रह्मा के मुख से अगर बात इधर से उधर हुई है तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

395
00:27:26,160 --> 00:27:30,160
ने उस बात को टोटली क्लेरिफाई कर दिया क्योंकि ओरिजिनल ज्ञान दाता तो

396
00:27:30,160 --> 00:27:34,240
ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही है इस ज्ञान का जो ब्रह्मा के मुख से आया वो

397
00:27:34,240 --> 00:27:38,480
ज्ञान भी उसी की देन है

398
00:27:38,480 --> 00:27:42,480
जो ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकल रहा है वह ज्ञान बाबा वीरेंद्र देव

399
00:27:42,480 --> 00:27:46,640
दीक्षित द्वारा ही दिया गया है। इससे पहले जन्म में ये मुरली

400
00:27:46,640 --> 00:27:51,120
बता रही है।

401
00:27:51,120 --> 00:27:55,120
आपने जवाब दे दिया। जी मैं पूछ सकता

402
00:27:55,120 --> 00:27:59,440
हूं। जी हां

403
00:27:59,440 --> 00:28:04,400
इन्होंने ही पिछले जन्म में इनको ज्ञान दिया था।

404
00:28:04,400 --> 00:28:08,960
जी है ना? और यही है बिल्कुल

405
00:28:08,960 --> 00:28:13,040
यानी कि शिव ने ज्ञान नहीं दिया है लेखराज को लेखराज

406
00:28:13,040 --> 00:28:17,280
को ज्ञान इन्होंने दिया था शिव को समझ नहीं पा रहे ना ब्रह्मा कुमारी

407
00:28:17,280 --> 00:28:21,280
समझ पा रही ना आध्यात्मिक समझ पा मैं मैं समझने की बात नहीं कर रहा हूं

408
00:28:21,280 --> 00:28:25,280
भाई साहब मैं आपकी चीजों को समझना चाह रहा हूं कि

409
00:28:25,280 --> 00:28:29,440
जी जी मुरली जो मुरली जो लिखवा रहे हैं लेखराज

410
00:28:29,440 --> 00:28:33,600
जी मुरली लिखवा रहे हैं जो वो शिव ने दी है लेखराज जी को या

411
00:28:33,600 --> 00:28:37,600
इन्होंने पिछले जन्म में दी दी है लेखराज जी को किसने किसको दिया जन्म

412
00:28:37,600 --> 00:28:41,760
में 1936 से ज्ञान शुरू हुआ है तो 1936 में शिव कहो

413
00:28:41,760 --> 00:28:46,080
शिव बाबा बोलते हैं हम उसको शिव बाबा ने 1936 से दी ब्रह्मा बाबा को सुनाई

414
00:28:46,080 --> 00:28:50,080
समझाया ज्ञान तो फिर लेखराज क्यों कह रहे हैं कि मैं पिछले जन्म में मैंने ही

415
00:28:50,080 --> 00:28:52,480
दिया था

416
00:28:52,480 --> 00:28:56,560
कौन बोल रहे हैं लेखराज ये वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी

417
00:28:56,560 --> 00:29:00,560
क्यों बोल रहे हैं मैंने ही पिछले जन्म में दिया था क्योंकि ये

418
00:29:00,560 --> 00:29:04,960
यज्ञ 1936 से शुरू हुआ है और जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

419
00:29:04,960 --> 00:29:06,240
है 1942 में शरीर

420
00:29:06,240 --> 00:29:11,520
छोड़ के गए थे और इनका भी मर्डर हुआ था।

421
00:29:11,520 --> 00:29:17,520
वीरेंद्र देव दीक्षित जी 1942 में शरीर छोड़कर

422
00:29:17,520 --> 00:29:22,480
हुआ कराची में थे उस समय तब हां

423
00:29:22,480 --> 00:29:26,640
मतलब लेखराज जी के सेवादार नहीं है। ब्रह्मा जी के पुत्र नहीं है। ये

424
00:29:26,640 --> 00:29:30,960
सनत कुमार नहीं है। ये कोई और सनत ये सनत कुमार तो

425
00:29:30,960 --> 00:29:35,120
सन से बात को समझो आप। हां सनत कुमार कह रहे हैं हम 1969

426
00:29:35,120 --> 00:29:39,280
के बाद में हम बात अब

427
00:29:39,280 --> 00:29:44,080
जो बात चल रही है वो 1942 की चल रही है जो ये

428
00:29:44,080 --> 00:29:48,400
आप बोल रहे हैं कि वो मर गए उनका मर्डर हुआ था तो अभी दोबारा

429
00:29:48,400 --> 00:29:53,040
जन्म लेके आए तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उससे पहले सेवक राम के नाम से था

430
00:29:53,040 --> 00:29:57,520
अच्छा वो सेवक राम के नाम से वो थे तब 1942

431
00:29:57,520 --> 00:30:02,240
में उनका मर्डर हुआ और फिर वो आए वीरेंद्र देव दीक्षित जी के रूप में

432
00:30:02,240 --> 00:30:06,560
मगर है तो वह सनत कुमार ही जी 19 सनत

433
00:30:06,560 --> 00:30:10,560
कुमार कहेंगे 40 साल का होने के बाद जब ब्रह्मा कुमारी आश्रम में आए

434
00:30:10,560 --> 00:30:14,560
ज्ञान लिया ज्ञान समझा और ज्ञान को दूसरों को समझाने लगे मतलब दूसरे

435
00:30:14,560 --> 00:30:18,560
वाले जन्म में दूसरे वाले जन्म में पहले

436
00:30:18,560 --> 00:30:21,520
वाले जन्म में ये लेखराज के पास

437
00:30:21,520 --> 00:30:25,680
थे और सेवक राम के

438
00:30:25,680 --> 00:30:30,080
दादा लेखराज के जीजा थे बहनोई थे अच्छा लेखराज

439
00:30:30,080 --> 00:30:34,320
के जीजा थे बहनोई और इन्होंने लेखराज जी को मुरली

440
00:30:34,320 --> 00:30:38,400
सुनाई थी। इन्होंने दादा लेखराज को दादा लेखराज

441
00:30:38,400 --> 00:30:42,560
को साक्षात्कार हुए थे विनाश के और नई दुनिया की स्थापना के।

442
00:30:42,560 --> 00:30:47,600
नहीं नहीं भाई साहब देखिए मैं पूछ रहा हूं कि मुरली उन्हें

443
00:30:47,600 --> 00:30:51,920
आप सही सुनिए तो अभी मैंने 10 मिनट पहले आपसे

444
00:30:51,920 --> 00:30:56,320
एक प्रश्न पूछा कि मुरली उन्हें इन्होंने सुनाई है। पिछले जन्म में सेवक

445
00:30:56,320 --> 00:31:00,560
राम नाम से जो जिनका जन्म था इन्होंने सुनाई। देखो

446
00:31:00,560 --> 00:31:05,120
अब यहां से तथ्य क्लियर करो आप। दादा लेखराज को 1936 में साक्षात्कार

447
00:31:05,120 --> 00:31:09,120
हुए। ठीक है? किसके? सेवक सेवक

448
00:31:09,120 --> 00:31:13,520
राम ने उनको उनके साक्षात्कारों का अर्थ समझाया और गीता बैठकर

449
00:31:13,520 --> 00:31:18,960
के 1936 से 1942 तक सेवक राम ने यज्ञ चलाया है पहले।

450
00:31:18,960 --> 00:31:22,960
और उस समय ये लेखराज क्या करते थे? लेखराज

451
00:31:22,960 --> 00:31:27,040
सुनते थे। शिष्य थे। उनको साक्षात्कार हुए थे तो वो ज्ञान सुनते थे। गीता ज्ञान दिया जाता

452
00:31:27,040 --> 00:31:31,120
था 1936 से 1942 यानी कि सेवक राम जी से वो ज्ञान सुनते

453
00:31:31,120 --> 00:31:35,600
थे लेखराज जी अपने जीजा से जी

454
00:31:35,600 --> 00:31:36,720
अपने अपने जीजा

455
00:31:36,720 --> 00:31:40,720
से सुनते थे ओके ओके ओके यानी कि तो

456
00:31:40,720 --> 00:31:45,280
फिर ये वाली बात कैसे आ रही कि मुरली जो है इनको आती थी ये

457
00:31:45,280 --> 00:31:49,280
अब वो वीरेंद्र वो तो सेवक राम जी से सुनते थे ना

458
00:31:49,280 --> 00:31:53,440
सज्ञान अब पॉइंट पे आ गए अब देखो अब आपको बात समझाते हैं

459
00:31:53,440 --> 00:31:57,520
1936 में 1936 3 में दादा लेखराज को जो

460
00:31:57,520 --> 00:32:02,080
हीरों का व्यापारी था कोलकाता में हम इनको साक्षात्कार

461
00:32:02,080 --> 00:32:07,120
हुए भगत भगत प्रकार की जो आत्मा होती है ना शुद्ध भक्ति करते हैं जो लोग

462
00:32:07,120 --> 00:32:11,200
तो उनको चतुर्भुजी विष्णु के साक्षात्कार हुए फिर नई दुनिया के हुए

463
00:32:11,200 --> 00:32:15,200
विनाश के हुए तो वो जो है ना पूछते घूम रहे थे दुनिया में कि भाई ये है क्या

464
00:32:15,200 --> 00:32:19,360
मुझे कैसा दिखाई दे रहा है ये सब ठीक है तो जो उन्होंने

465
00:32:19,360 --> 00:32:23,600
जो भक्ति मार्ग के गुरु किए हुए थे उन सब के पीछे इधर उधर गए पूछा

466
00:32:23,600 --> 00:32:27,600
समझा लेकिन नहीं समझ पाए हम तत सेवक राम के

467
00:32:27,600 --> 00:32:32,320
पास पहुंचे। दादा लेखराज की तो बड़ी हीरो की दुकान थी।

468
00:32:32,320 --> 00:32:36,480
लेकिन सेवक राम की जो इसका बहनोई था उसकी भी एक छोटी सी दुकान थी उसी बाजार

469
00:32:36,480 --> 00:32:40,480
में। अच्छा तो सेवक राम जी के पास

470
00:32:40,480 --> 00:32:45,360
आया। वो सेवक राम की जो पत्नी हुई वो दादा लेखराज की बहन है।

471
00:32:45,360 --> 00:32:49,440
बिल्कुल। ज्ञान के अनुसार यहां पर एक नई बात बताऊं

472
00:32:49,440 --> 00:32:51,840
आपके लिए भी बड़ी जानकारी की बात है। वो जो दादा

473
00:32:51,840 --> 00:32:55,840
जो सेवक राम की पत्नी है वही लक्ष्मी और भारत माता है और ये सेवक राम ही भारत

474
00:32:55,840 --> 00:32:59,840
है। ये ज्ञान से बाद में पता चल रहा है 90 साल के बाद। चलो ये तो बाद की

475
00:32:59,840 --> 00:33:04,000
बातें हैं कौन क्या है। चलो वहां सेवक राम

476
00:33:04,000 --> 00:33:08,000
जो है सेवक राम ने गीता के आधार पर उस समय नाम रखा गया। ओम

477
00:33:08,000 --> 00:33:12,320
मंडली और सत्संग होता था। ये ओम मंडली। ठीक है।

478
00:33:12,320 --> 00:33:17,280
सेवक राम की शरण में आ गए लेखराज जिनको अभी चतुर्भुजी

479
00:33:17,280 --> 00:33:21,360
भगवान के दर्शन विष्णु के दर्शन हुए हैं और सृष्टि का नाश और वो सब

480
00:33:21,360 --> 00:33:25,840
देखा है उन्होंने है ना ऐसा जी जी बिल्कुल सेवक

481
00:33:25,840 --> 00:33:30,160
अब एक तरीके सेवक राम गुरु है इस समय जी बिल्कुल

482
00:33:30,160 --> 00:33:34,160
सेवक राम की असली और उनका उनके उनके द्वारा जो ये जो ये

483
00:33:34,160 --> 00:33:38,400
अभियान चल रहा है इसका नाम है मंडली प्रणव प्रणवाक्षर

484
00:33:38,400 --> 00:33:42,400
जो है मंडली ठीक है बोलिए तो ओम

485
00:33:42,400 --> 00:33:47,520
मंडली 1936 से 1942 तक चलती रही। जी

486
00:33:47,520 --> 00:33:51,760
वहां पे कुछ पवित्रता के नाम पर झगड़ा हुआ जिसके कारण ब्रह्मा बाबा

487
00:33:51,760 --> 00:33:56,160
यज्ञ छोड़ के भाग लिए। हम यज्ञ

488
00:33:56,160 --> 00:34:00,400
छोड़ के भागे तो कराची होते हुए धीरे-धीरे ये माउंट आबू पहुंचे

489
00:34:00,400 --> 00:34:04,880
बाद में। और जब उस समय सेवक राम को वहां जो सिंधी

490
00:34:04,880 --> 00:34:07,200
थे कराची में उधर

491
00:34:07,200 --> 00:34:11,440
पाकिस्तान में रह रहे उस समय जो आज पाकिस्तान का भाग है तो वहां

492
00:34:11,440 --> 00:34:15,440
सेवक राम जी को तो मार दिया गया था। ठीक

493
00:34:15,440 --> 00:34:21,440
है? और 1942 में ही भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ।

494
00:34:21,440 --> 00:34:25,440
हम तो जब वो मारकाट हुई तो मारकाट

495
00:34:25,440 --> 00:34:29,440
के समय ब्रह्मा बाबा कुछ कन्याओं माताओं के साथ वहां से दौड़

496
00:34:29,440 --> 00:34:33,600
गए थे। चले गए हम और दादा जो

497
00:34:33,600 --> 00:34:37,760
सेवक राम जी थे उनको मार मूर के कहीं दीवार में जैसे आप ये सारे मिले हैं सारे

498
00:34:37,760 --> 00:34:42,000
इनके यहां से कि दीवार में दिया उनका उनकी हत्या कर दी गई ठीक है सेवक

499
00:34:42,000 --> 00:34:46,160
राम जी तो दो माताएं यज्ञ में बताई जाती है

500
00:34:46,160 --> 00:34:50,320
नहीं नहीं माताएं छोड़िए मैं मुझे वो बताइए कि इनकी मुरली आना कहां से शुरू

501
00:34:50,320 --> 00:34:54,720
हुई है इनकी 1947 हां तो उसी तो बता रहा है 1942

502
00:34:54,720 --> 00:34:59,840
के बाद मुरली कहां चली 1942 से 1947 का पांच साल का नहीं जानोगे

503
00:34:59,840 --> 00:35:04,080
क्या करना मुरली पे ध्यान है ना हमारा तो वो उनकी हिस्ट्री थोड़ी ना जाननी है कि चीज

504
00:35:04,080 --> 00:35:08,320
अरे सेवक राम ने पहले गीता ज्ञान सुनाया पूरी मुरली चलाई उसके बाद

505
00:35:08,320 --> 00:35:12,640
दो माताएं हैं वो मुरली चलाती है फिर 1947 से लेख दादा लेकरा चलाता

506
00:35:12,640 --> 00:35:16,640
है अच्छा दो माताएं जो जो उन्हीं की शिष्या थी सेवक राम

507
00:35:16,640 --> 00:35:21,280
जी की जो सेवक तो सेवक राम की पत्नी हो गई खुद में

508
00:35:21,280 --> 00:35:22,480
हम

509
00:35:22,480 --> 00:35:26,480
और एक एक और थी जो अपनी पत्नी के एब्सेंस में लेके आया

510
00:35:26,480 --> 00:35:30,560
था जो 18 20 साल की लड़की की थी। एक और शादी की थी सेवक राम

511
00:35:30,560 --> 00:35:34,640
ने बाद में। दो शादियां थी। दो शादियां थी तो

512
00:35:34,640 --> 00:35:38,640
दो माताएं थी। अच्छा। अच्छा सेवक राम जी की उस

513
00:35:38,640 --> 00:35:42,800
समय आयु क्या थी जब लेखराज जी उनसे ज्ञान ले रहे थे। 60 साल

514
00:35:42,800 --> 00:35:47,120
और लेखराज जी की बहन से विवाह भी था। मतलब इनका सेवक

515
00:35:47,120 --> 00:35:51,120
बहुत वो तो पहले से ही था। घर गृहस्थ चल रहा था पहले से ही। तो क्या आयु

516
00:35:51,120 --> 00:35:55,200
रही होगी वो? अब उनका लगा लो चार पांच साल तो छोटी

517
00:35:55,200 --> 00:35:59,200
होती ही है अपने यहां अपने धर्म में तो उसकी 60 होगी तो उनकी

518
00:35:59,200 --> 00:36:03,200
55 के करीब लगा 52 55 तो जब लेखराज जी उनसे

519
00:36:03,200 --> 00:36:08,160
ज्ञान ले रहे हैं उस समय सेवक राम जी की आयु थी लगभग 60 साल

520
00:36:08,160 --> 00:36:12,320
जी उस समय वो उन्होंने एक और विवाह भी किया था

521
00:36:12,320 --> 00:36:16,400
20 साल की युवती से उसका कारण क्या था कि जो दादा

522
00:36:16,400 --> 00:36:20,160
लेखराज है वो सत्संग करते थे

523
00:36:20,160 --> 00:36:24,240
ठीक है ठीक है छोड़िए उसका कारण नहीं जानना। आगे चलते हैं। तो

524
00:36:24,240 --> 00:36:28,880
जब 1942 में इनकी हत्या कर दी गई अ

525
00:36:28,880 --> 00:36:33,040
क्या कहते हैं ये जो सेवक राम जी की इसके

526
00:36:33,040 --> 00:36:37,040
बाद अ जो लेखराज जी हैं वो जो दो उनकी बहन

527
00:36:37,040 --> 00:36:37,680
स्वरूपी हुई।

528
00:36:37,680 --> 00:36:42,080
एक बहन है तो दूसरी भी बहन ही हुई। बिल्कुल दोनों बहने हो गई। दोनों

529
00:36:42,080 --> 00:36:46,320
हो गई। तो वो दोनों बहने इनके साथ आई। फिर वो प्रवचन करती

530
00:36:46,320 --> 00:36:50,480
रहीं। 5 साल फिर 1947 से इन्होंने मुरली देना

531
00:36:50,480 --> 00:36:54,720
शुरू किया है। जी कराची में थे उस समय कराची से मुरली 1947

532
00:36:54,720 --> 00:36:58,720
में ब्रह्मा बाबा के मुख से निकलने लगी। अच्छा तो अब यहां

533
00:36:58,720 --> 00:37:02,800
पर पॉइंट यह आता है कि जो मुरली उनके मुख से निकल रही है

534
00:37:02,800 --> 00:37:06,880
उनको शिव जी दे रहे हैं या फिर जो उन्होंने सेवक राम जी से ज्ञान लिया हुआ

535
00:37:06,880 --> 00:37:10,960
था वही उसको मुरली के रूप में दे रहे हैं। जो सेवक राम से उन्होंने

536
00:37:10,960 --> 00:37:15,120
सुना वही ज्ञान उनकी बुद्धि में उपज रहा है और वही सुना रहे हैं।

537
00:37:15,120 --> 00:37:19,120
अच्छा तो उन्होंने ये क्लेम गलत किया है कि हमें शिव बाबा आकर के ज्ञान देते हैं। ये

538
00:37:19,120 --> 00:37:23,360
क्लेम उनका गलत है। भगवान जो है वो दूसरों में प्रवेश

539
00:37:23,360 --> 00:37:27,360
करेगा या भगवान में कोई और प्रवेश करेगा। भगवान कौन है? यही तो सबसे बड़ा विषय चल रहा है

540
00:37:27,360 --> 00:37:31,920
इस ज्ञान में भगवान को मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा भगवान

541
00:37:31,920 --> 00:37:36,000
वो मैं अभी क्लेम पूछ रहा हूं उन्होंने ये क्लेम एक तरीके से झूठा किया था

542
00:37:36,000 --> 00:37:40,160
कि मुझे जो है शिव जी मेरे अंदर आके लिखवाते हैं ये टोटल गलत क्लेम

543
00:37:40,160 --> 00:37:44,240
है कि शिव जी प्रवेश करते हैं एक चीज यहां पे एक छोटी सी चीज और

544
00:37:44,240 --> 00:37:48,400
रह जाती है कि इस जन्म में तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी का जो बाद वाला

545
00:37:48,400 --> 00:37:53,280
जन्म है उसमें तो उनकी दिव्यता आपने बता दी कि वो सनत कुमार है।

546
00:37:53,280 --> 00:37:57,280
है ना? अब इस समय 1966 की जब आप सनत कुमार कह रहे

547
00:37:57,280 --> 00:38:01,280
हैं तो उस समय 1969 में आ जाइए आप। हां हां मैं समझ गया जो

548
00:38:01,280 --> 00:38:05,760
पहले वाला जन्म है उसकी दिव्यता क्या थी? उसकी दिव्यता

549
00:38:05,760 --> 00:38:09,760
यह थी उसकी दिव्यता सुनो। जो 1936

550
00:38:09,760 --> 00:38:13,760
में जिसको भगवान हम कहते हैं जो सृष्टि पर

551
00:38:13,760 --> 00:38:17,760
सदा कायम है उसकी दिव्यता वो पहचान हो गई कि उसने ज्ञान देकर के ये सिद्ध कर

552
00:38:17,760 --> 00:38:21,760
दिया कि वो ज्ञान का कूट भंडार गीता ज्ञान दाता वो सेवक राम है

553
00:38:21,760 --> 00:38:26,560
अच्छा नहीं मतलब वो शिव थे वो शिव थे

554
00:38:26,560 --> 00:38:30,880
जी तो ये तो जब शिवजी यानी

555
00:38:30,880 --> 00:38:35,120
शिवजी जो है स्वयं इनके रूप में है सेवक

556
00:38:35,120 --> 00:38:39,200
राम जी के रूप के रूप में सेवक राम जी के रूप शिव जी स्वयं सेवक राम जी

557
00:38:39,200 --> 00:38:43,440
के रूप में जिन्होंने शिष्यत्व प्रदान किया इनको

558
00:38:43,440 --> 00:38:47,520
अपना अब आप ये बताइए आप शिव किसको शिव

559
00:38:47,520 --> 00:38:51,680
मानते हैं? नहीं वो बाद की बात है भाई साहब वो बाद की बात है। अभी

560
00:38:51,680 --> 00:38:55,840
मैं आपकी केवल मान्यता मान्यता क्लियर कर रहा हूं। 1936

561
00:38:55,840 --> 00:38:58,000
में

562
00:38:58,000 --> 00:39:02,080
हां तो वो क्या कहते हैं लेखराज जी को स्वयं शिव

563
00:39:02,080 --> 00:39:06,240
जी जो है जो ये जो ये जो शरीर है सेवक

564
00:39:06,240 --> 00:39:08,320
राम जी वाला इसके द्वारा वो ज्ञान

565
00:39:08,320 --> 00:39:12,560
देते हैं उसके बाद उनकी हत्या कर दी उस शरीर को नाश कर दिया जाता है और

566
00:39:12,560 --> 00:39:16,560
उसके बाद जो उनकी जो दो पत्नियां थी एक युवती थी 20 साल की और

567
00:39:16,560 --> 00:39:20,560
एक जो है वृद्धा थी 55 साल की ये दोनों पांच साल तक वही ज्ञान आगे

568
00:39:20,560 --> 00:39:24,640
बढ़ाती है उसके बाद 1947 से जो है

569
00:39:24,640 --> 00:39:29,280
यह जो क्या कहते हैं लेखराज जी हैं 1947

570
00:39:29,280 --> 00:39:33,520
से यह ज्ञान देना शुरू करते हैं और यह कहते हैं कि ये ज्ञान मुझे शिवजी

571
00:39:33,520 --> 00:39:37,760
स्वयं दे रहे हैं। ये ये नहीं बताते कि सेवक राम जी से जो ज्ञान लिया है उनकी

572
00:39:37,760 --> 00:39:42,240
पत्नियों से जो ज्ञान लिया है ये वो ज्ञान है। वो ये नहीं बताते। ठीक है ना? अगर शिव

573
00:39:42,240 --> 00:39:46,240
देखो बिल्कुल सही बात है। अगर शिवजी ज्ञान देते तो मैं

574
00:39:46,240 --> 00:39:50,320
आपके किसी भी मान्यता को अभी चैलेंज नहीं कर रहा हूं। आप चिंता मत

575
00:39:50,320 --> 00:39:54,320
करिए जब आप आप अभी उसको आप अभी उसको सिद्ध

576
00:39:54,320 --> 00:39:58,320
करने में व्यर्थ वो ना करें मतलब मैं अभी क्लेम चैलेंज नहीं कर

577
00:39:58,320 --> 00:40:02,400
रहा हूं समझ रहे हैं मैं तो अभी आगे कहानी वहां पे आना चाह रहा हूं जो कुछ

578
00:40:02,400 --> 00:40:06,560
मुख्य पॉइंट है तो आप अपनी जिज्ञासा पूरी करो

579
00:40:06,560 --> 00:40:10,960
हां वो जो तथ्य जब जान ले तब तो हम आपके किसी को काउंटर

580
00:40:10,960 --> 00:40:15,040
कर पाएंगे है ना वो काउंटर करना भी है कि नहीं करना है वो जरूरी नहीं

581
00:40:15,040 --> 00:40:19,040
है वो बाद की बातें है तो अब यहां पे दिक्कत ये

582
00:40:19,040 --> 00:40:23,360
ये है कि इन्होंने जबकि ज्ञान लिया था सेवक

583
00:40:23,360 --> 00:40:27,440
राम जी से मूल ज्ञान सेवक राम जी से लिया था जो स्वयं शिव जी ही थे

584
00:40:27,440 --> 00:40:31,440
है ना इन्होंने ज्ञान लिया था उनसे और ये अपने नाम से बताने लगे

585
00:40:31,440 --> 00:40:35,600
कि शिवजी जो है मुझे प्रकट हो के या मेरे अंदर आकर के लिखवा रहे हैं जो कि गलत

586
00:40:35,600 --> 00:40:39,600
बात है ठीक है अब बात गलत बात है हां टोटली

587
00:40:39,600 --> 00:40:45,600
गलत बात अब आगे की बात ये आती है कि जो

588
00:40:46,480 --> 00:40:50,560
हां जब ये स्वयं शिवजी जी थे सेवक राम जी तो इस जन्म में

589
00:40:50,560 --> 00:40:54,720
सनत कुमार क्यों है? क्योंकि कोई

590
00:40:54,720 --> 00:40:58,720
भी जब आता है आत्मा एक शरीर छोड़ के दूसरा जन्म तो लेगी ही लेगी।

591
00:40:58,720 --> 00:41:03,200
प्रकृति का नियम तो नहीं टूटेगा। तो वो आत्मा थोड़ी ना थी। वो तो

592
00:41:03,200 --> 00:41:07,200
देखो ये बात ये बात एक्सप्लेन करनी पड़ेगी। इस बात का डायरेक्ट अंतर नहीं होता।

593
00:41:07,200 --> 00:41:11,520
ये एक्सप्लेन करनी पड़ेगी ये बात। ठीक ठीक करिए। करिए करिए। जब

594
00:41:11,520 --> 00:41:15,760
पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता आता है। कोई भी नियम

595
00:41:15,760 --> 00:41:20,880
है नौ धर्म है कोई पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता की पहचान होती है।

596
00:41:20,880 --> 00:41:24,960
तो 1936 में पहले ज्ञान आया। ज्ञान से ही तो जानते हैं कि इस

597
00:41:24,960 --> 00:41:29,280
सृष्टि का मालिक कौन है? उस ज्ञान माना जानकारी किसकी? सत्य की।

598
00:41:29,280 --> 00:41:33,360
कि इस दुनिया में सत्य कौन है? जिस सत्यनारायण की घरघर

599
00:41:33,360 --> 00:41:37,520
में कथा सुनाई जाती है तो पहले वो सत्य आकर के ज्ञान देता है।

600
00:41:37,520 --> 00:41:38,400
उस ज्ञान से हमें

601
00:41:38,400 --> 00:41:42,560
जानकारी मिलनी है कि वो सत्य कौन है? तो सेवक राम

602
00:41:42,560 --> 00:41:46,560
के रूप में हम पहचान नहीं पाए कि यही वह ओरिजिनल इस सृष्टि

603
00:41:46,560 --> 00:41:50,800
का सत्यनारायण है। तो 1976 से फिर वही आकर के अपनी जानकारी स्वयं

604
00:41:50,800 --> 00:41:53,840
देता है।

605
00:41:53,840 --> 00:41:57,920
1976 से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ब्रह्मा का चौथा पुत्र

606
00:41:57,920 --> 00:42:02,000
बन के वो ज्ञान को क्लेरिफाई कर देता है। इसके सारे ज्ञान को जो ब्रह्मा के मुख

607
00:42:02,000 --> 00:42:06,080
से निकला है। इसका पूरा टुकड़ा करके शुरू किया।

608
00:42:06,080 --> 00:42:10,160
यहां प्रॉब्लम यह हो रही है कि अगर

609
00:42:10,160 --> 00:42:14,320
पुत्र पुत्र बनने की बात की जाए तो वो तो वीरेंद्र

610
00:42:14,320 --> 00:42:18,400
देव दीक्षित किसी के पुत्र के रूप में पहले से ही एक उपाधि को प्राप्त

611
00:42:18,400 --> 00:42:22,800
है। तो फिर पहले आप समझो इस

612
00:42:22,800 --> 00:42:26,880
रियल उपाधि रियल उपाधि यदि एक मिनट रियल उपाधि यदि

613
00:42:26,880 --> 00:42:31,040
उनकी सनत कुमार की है तो फिर वो शिवजी कैसे हुए? अगर

614
00:42:31,040 --> 00:42:35,280
सनत कुमार की रियल उपाधि है या तो यह कहेंगे कि शिवजी और सनत कुमार एक ही तत्व

615
00:42:35,280 --> 00:42:39,520
है। हां पॉइंट पर आ गए आप सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही

616
00:42:39,520 --> 00:42:43,760
पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही पकड़े आप। आपको प्रणाम करता हूं भाई जी। आप

617
00:42:43,760 --> 00:42:47,840
एक सेकंड में बात को पकड़ गए। प्रणाम आप जैसी शुद्ध आत्मा को।

618
00:42:47,840 --> 00:42:52,320
बहुत शुद्ध प्योर आत्मा है आप। एक सेकंड में ज्ञान पकड़ गए आप।

619
00:42:52,320 --> 00:42:53,440
बिल्कुल। तो

620
00:42:53,440 --> 00:42:57,440
शिव जी और सनत कुमार एक ही तत्व है। बस यहां पर वो जो है ऐसा रोल निभाते हैं

621
00:42:57,440 --> 00:43:01,440
सनत कुमार वाला कि हम ब्रह्मा जी से ज्ञान ले रहे हैं। चौथे पुत्र के रूप में

622
00:43:01,440 --> 00:43:05,600
है। जी है ना? वो अहंकार ब्रह्मा का अहंकार तोड़ने के लिए क्योंकि

623
00:43:05,600 --> 00:43:09,680
ब्रह्मा को अहंकार हो गया था। ये गीता का भगवान

624
00:43:09,680 --> 00:43:13,840
प्रैक्टिकल में इस दुनिया का मालिक मैं हूं। इसलिए ब्रह्मा बाबा को ब्रह्मा

625
00:43:13,840 --> 00:43:18,080
बाबा हार्ट अटैक हो के मरे। अहंकार तोड़ने के लिए तो अहंकार

626
00:43:18,080 --> 00:43:22,400
तोड़ने के लिए उनका शिष्य क्यों बने? उनको उनके गुरु बन के दिखाते।

627
00:43:22,400 --> 00:43:26,560
लेकिन देखो यहां ज्ञान के जन्म की बात है। एक तो जैसे मेरा

628
00:43:26,560 --> 00:43:30,640
जन्म मेरे माता पिता से हुआ उस जन्म की वो एक अलग जन्म की बात है। ज्ञान के

629
00:43:30,640 --> 00:43:34,800
जन्म की बात चल रही है। यहां पर ज्ञान के अनुसार जो जन्म होता है ना उस जन्म

630
00:43:34,800 --> 00:43:38,960
की बात चल रही है। दूसरा शरीर लेकर के आवेगा तो आवेगा

631
00:43:38,960 --> 00:43:42,960
तो ज्ञान में ही ना। ज्ञान में आवेगा तो किसी के तो अंडर में आना पड़ेगा ना

632
00:43:42,960 --> 00:43:47,440
एक बार। तो ये दोनों राम और ये दोनों आपस में दोनों आत्मा एक दूसरे के सहयोगी है।

633
00:43:47,440 --> 00:43:51,440
नहीं नहीं वो ठीक है सहयोगी है। तो फिर दिक्कत ये आ रही है

634
00:43:51,440 --> 00:43:55,520
कि अ फिर ये जो वाली बात है ना

635
00:43:55,520 --> 00:43:59,520
घमंड तोड़ने घमंड कैसे टूट रहा है वो बताइए। घमंड इस प्रकार

636
00:43:59,520 --> 00:44:03,600
से टूट रहा है कि ब्रह्मा इस बात को भूल गया कि तुझे ज्ञान देने वाला सेवक राम

637
00:44:03,600 --> 00:44:07,920
था। उसको तो भूल गया। ठीक है? तो इन्होंने जब ये शिष्य

638
00:44:07,920 --> 00:44:08,640
बन के गए हैं।

639
00:44:08,640 --> 00:44:12,800
जब ये शिष्य बन के गए हैं लेखनाथ जी के पास तो

640
00:44:12,800 --> 00:44:17,040
उससे तो और वो पुष्टि हो जाएगी। मतलब शिष्य बन के गए तो उससे घमंड

641
00:44:17,040 --> 00:44:21,200
कैसे टूटेगा? वो कह रहा हूं मैं। उससे घमंड इस प्रकार से टूटा कि उसके ज्ञान

642
00:44:21,200 --> 00:44:25,280
को सारे को समझा के उसका मंथन करके सार निकाल के दे दिया कि इसके इस

643
00:44:25,280 --> 00:44:30,160
मनुष्य सृष्टि का बाप कौन है? ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने ही हमें समझाया

644
00:44:30,160 --> 00:44:34,320
कि इस ज्ञान जो ब्रह्मा के मुख से इतना जी इस बार जब

645
00:44:34,320 --> 00:44:38,800
लेखराज जी के पास शिष्य के रूप में गए हैं तब भी वो ज्ञान ही दे रहे हैं। उन्हें

646
00:44:38,800 --> 00:44:43,200
तो वो गुरु के रूप में ही गए। हां तो था तो देखो

647
00:44:43,200 --> 00:44:47,280
था तो सनत कुमार लेकिन बाद में ज्ञान ज्ञानेश्वर और योग योगेश्वर

648
00:44:47,280 --> 00:44:51,760
कहा जाता है सनत कुमारी फिर

649
00:44:51,760 --> 00:44:55,920
मतलब वो सनत कुमार के रूप में गए हैं मगर उसके

650
00:44:55,920 --> 00:44:59,920
बाद जो है वो और भी एक नया रूप लेते हैं जो

651
00:44:59,920 --> 00:45:04,000
योगी योगेश्वर और फिर वो गुरु बन जाते हैं लेखराज जी के लेखराज जी

652
00:45:04,000 --> 00:45:08,160
उनको एज गुरु स्वीकार करते हैं दादा लेखराज

653
00:45:08,160 --> 00:45:12,400
जी को स्वीकार करते हैं लेकिन ज्ञान और योग के कारण उनसे

654
00:45:12,400 --> 00:45:16,480
आगे निकल गए। नहीं नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह

655
00:45:16,480 --> 00:45:21,760
रहा हूं जो लेखराज जी है उन्होंने ये कहा कि मेरा गुरु है ये

656
00:45:21,760 --> 00:45:25,840
दादा लेखराज जी ने उस समय नहीं स्वीकार किया। जीवित रहते उन्होंने स्वीकार

657
00:45:25,840 --> 00:45:30,000
नहीं किया। तो घमंड कैसे टूटा फिर? शरीर छूटने के बाद

658
00:45:30,000 --> 00:45:34,400
अकाले मौत जैसे वेद शास्त्रों में गणेश जैसे

659
00:45:34,400 --> 00:45:39,280
अपने सनातन धर्म में गणेश जी का सिर नहीं काट दिया था।

660
00:45:39,280 --> 00:45:43,360
वो आपको वेद शास्त्रों से सारा ज्ञान जोड़ के समझाऊंगा धीरेधी आपको। आप

661
00:45:43,360 --> 00:45:47,600
तो बहुत अच्छे इंसान है। बहुत अच्छी आत्मा है भाई जी। आप बहुत अच्छे से ज्ञान को समझ रहे हो।

662
00:45:47,600 --> 00:45:51,600
मैं जो है ना हमारी मुरली कह रही है। हमारी मुरली कह रही है। क्योंकि

663
00:45:51,600 --> 00:45:55,920
क्योंकि उनका मैं एक क्योंकि उनका अकाल मृत्यु हुई। इससे उनका घमंड

664
00:45:55,920 --> 00:46:00,880
टूटा। घमंड तो जीते जी टूटना चाहिए था ना। मृत्यु के बाद क्या घमंड?

665
00:46:00,880 --> 00:46:04,960
जीते जी आपको इस चीज की यादगार शिवलिंग के मंदिर में रखी

666
00:46:04,960 --> 00:46:06,800
हुई है। बैल और सामने शिवलिंग।

667
00:46:06,800 --> 00:46:10,800
आपको ज्ञान बहुत अच्छे से समझोगे आप एक दिन बहुत अच्छा समझोगे

668
00:46:10,800 --> 00:46:14,880
आप और निष्कर्ष पर निकलोगे दो चार इंटरव्यू निकलवा दो मेरे साथ आप आपके

669
00:46:14,880 --> 00:46:20,240
आप समझ जाओगे उनको समझाना मुश्किल हो रहा है लेकिन आप समझ जाओगे उनसे जल्दी तो

670
00:46:20,240 --> 00:46:24,480
तो इस सृष्टि रूपी रंग मंच पर ये दोनों शेर है एक जावेगा

671
00:46:24,480 --> 00:46:28,560
दूसरा आवेगा ये नियम है इनका खाली

672
00:46:28,560 --> 00:46:32,560
नहीं रहेगी सृष्टि वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा

673
00:46:32,560 --> 00:46:36,800
वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा दादा लेखराज

674
00:46:36,800 --> 00:46:41,280
कोई छोटी चीज नहीं है। सतयुग का पहला राजकुमार है और जो

675
00:46:41,280 --> 00:46:46,720
राजा था वो है तो ब्रह्मा जो ये जो लेखराज जी हैं

676
00:46:46,720 --> 00:46:50,720
घमंड टूटने वाली बात मुझे क्लेरिफाई नहीं हो पाई। खैर छोड़िए वो ठीक

677
00:46:50,720 --> 00:46:54,720
है आपकी मान्यता है कि वो क्योंकि करेंगे भाई जी करेंगे बिल्कुल

678
00:46:54,720 --> 00:46:58,800
करेंगे आपको बहुत अच्छे से हो जाएगी। बहुत बड़ा पॉइंट नहीं है। वो बहुत बड़ा पॉइंट

679
00:46:58,800 --> 00:47:04,000
भी नहीं है। तो हम लोग आगे चलते हैं। तो अब कुल मिलाकर के

680
00:47:04,000 --> 00:47:08,720
कि 1936 में सेवक राम जी से शिष्य

681
00:47:08,720 --> 00:47:13,520
बनते हैं। ज्ञान लेते हैं लेखराज जी। उसके बाद 1942 में

682
00:47:13,520 --> 00:47:17,840
दंगों में मारे जाते हैं सेवक राम जी। उसके बाद पांच साल उनकी जो दो पत्नियां

683
00:47:17,840 --> 00:47:22,000
थी जो बहन स्वरूप थी लेखराज जी की वो प्रवचन देती है मुरलियों का ज्ञान

684
00:47:22,000 --> 00:47:26,160
देती है उसके बाद उनके भी जाने के बाद जो लेखराज जी हैं वो स्वयं

685
00:47:26,160 --> 00:47:30,400
मुरली सुनाने लगते हैं 1947 से मगर यह कहते हुए कि ये मुरली

686
00:47:30,400 --> 00:47:34,400
जो मैं सुना रहा हूं ये स्वयं शिव जी मुझको सुनवा मेरे शरीर में आकर के सुना रहे

687
00:47:34,400 --> 00:47:38,640
हैं ये जो है मैंने किसी से ज्ञान नहीं लिया है उसके बाद उसके

688
00:47:38,640 --> 00:47:43,120
बाद फिर फिर यह दोबारा कब आते हैं

689
00:47:43,120 --> 00:47:47,760
वीरेंद्र दीक्षित जी के रूप में कब आते हैं 1969 में

690
00:47:47,760 --> 00:47:51,760
69 में ये मतलब कहीं पर जन्म हो चुका होगा मगर वो वस्क हो के आए

691
00:47:51,760 --> 00:47:55,840
होंगे लेखराज जी के पास वो जन्म वो जन्म बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित

692
00:47:55,840 --> 00:47:59,840
जी का वो जन्म हुआ अहमदगंज जो है जो यूपी

693
00:47:59,840 --> 00:48:04,720
में पड़ता है फर्रूखाबाद जिले में अहमदगढ़ में जन्म हुआ

694
00:48:04,720 --> 00:48:08,880
अच्छा तो वो जब जन्म ले 40 साल के हो गए तब यहां आए

695
00:48:08,880 --> 00:48:12,960
होंगे लेखराज जी के पास हां जी हां जी तो उसकी जीवन कहानी है पूरी

696
00:48:12,960 --> 00:48:18,160
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी की जो 40 साल के करीब का पीएचडी

697
00:48:18,160 --> 00:48:22,240
का उसके बाद आदि पुरुष कौन ये टॉपिक ले आए उसके

698
00:48:22,240 --> 00:48:26,480
बाद उसके बाद वो इनकी शरण में आ गए मतलब एक घमंड

699
00:48:26,480 --> 00:48:30,640
तोड़ने के लिए एक लीला के रूप में आ गए इनकी शरण में उस समय उस समय के

700
00:48:30,640 --> 00:48:34,480
लिए नहीं कहेंगे उस समय के लिए नहीं कहेंगे

701
00:48:34,480 --> 00:48:38,160
1969 में जब आए हैं तो उस समय

702
00:48:38,160 --> 00:48:42,240
76 तक तो 76 तक तो शिष्य के रूप में ही रहे सनत कुमार के रूप में ही

703
00:48:42,240 --> 00:48:46,240
रहे 1969 में आए। अब यहां समझो

704
00:48:46,240 --> 00:48:51,120
एक सेकंड की बात है समझने का। 1969 में आ गए। हां।

705
00:48:51,120 --> 00:48:55,760
आकर के वहां सात दिन का कोर्स ले लिया। ठीक है।

706
00:48:55,760 --> 00:48:59,920
जिस माता से कोर्स लिया ये वही माता कोर्स करवा रही है जो

707
00:48:59,920 --> 00:49:04,000
सेवक राम की पत्नी थी। अभी भी

708
00:49:04,000 --> 00:49:08,080
जी। वो भी तो दोबारा जन्म ले आ गई ना। कुछ सालों के बाद उसने भी शरीर छोड़ दिया। वो

709
00:49:08,080 --> 00:49:12,560
दोनों पत्नियां एक चीज करिएगा जब किसी का शरीर जन्म

710
00:49:12,560 --> 00:49:16,640
जब किसी का शरीर छोड़ना हो दूसरा शरीर धारण करना

711
00:49:16,640 --> 00:49:20,720
हो तो आप इसको कहते चलिएगा क्योंकि आपकी जब आप बिना ये बताए

712
00:49:20,720 --> 00:49:24,960
कि जन्मांतर हो चुका है ये बताए आगे बढ़ते हैं तो समझ नहीं पाता हूं समझ रहे हैं

713
00:49:24,960 --> 00:49:28,960
ये चीज बताते चलिएगा कि अब जो वो स्त्री थी वो दूसरा जन्म ले आ चुकी

714
00:49:28,960 --> 00:49:33,120
थी जी अब जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जब ब्रह्मा

715
00:49:33,120 --> 00:49:36,400
कुमारी में पहुंचा

716
00:49:36,400 --> 00:49:40,560
हां ज्ञान लेने के लिए जब ज्ञान लेने के लिए पहुंचा तो यज्ञ के आदि

717
00:49:40,560 --> 00:49:44,480
में जो दो माताएं थी

718
00:49:44,480 --> 00:49:49,120
जो आपने देखा ना पांच साल तो उन्होंने मुरलियां चलाई दो पत्नियां थी ना सेवक राम की

719
00:49:49,120 --> 00:49:53,280
समझ गया वो पत्नियां वो पत्नियों में से कोई एक ही जन्मांतर

720
00:49:53,280 --> 00:49:57,360
भेद से दोबारा आ चुकी है अब वो जो है इनको सेवक राम का

721
00:49:57,360 --> 00:50:01,520
जो दूसरा जन्म है जिसमें वो सनद कुमार की भूमिका निभा रहे हैं अब वो

722
00:50:01,520 --> 00:50:05,920
उनको ज्ञान दे रही है अब वो ज्ञान दे रही है बहुत अच्छे

723
00:50:05,920 --> 00:50:11,360
बहुत अच्छी आत्मा है आप एक सेकंड में बात को पकड़ते हैं और उनका नाम है वेदांती।

724
00:50:11,360 --> 00:50:15,440
हम अच्छा समझ गए आप? उनका नाम है वेदांती

725
00:50:15,440 --> 00:50:19,440
जो माता जी थी। जी। अब उनका नाम है वेदांती। वो

726
00:50:19,440 --> 00:50:23,440
बहन कहते हैं। हम उनको वेदती माता कहते हैं। और हमारी मान्यता है यही भारत माता

727
00:50:23,440 --> 00:50:27,920
है। यही लक्ष्मी। ठीक है। अब इससे आगे चलते हैं। फिर 1976

728
00:50:27,920 --> 00:50:30,080
से

729
00:50:30,080 --> 00:50:34,480
यहां से यहां से समझो बात को। ज्ञान ले लिया बाबा ने।

730
00:50:34,480 --> 00:50:38,560
ज्ञान नहीं ज्ञान लेने का ड्रामा किया। ज्ञान तो था ही ना। नहीं

731
00:50:38,560 --> 00:50:42,640
नहीं लेकिन सब गुप्त रहता है ना प्रत्यक्ष नहीं करते भगवान अपने

732
00:50:42,640 --> 00:50:46,800
को लीला की वो तो स्वयं शिव थे ना लेकिन

733
00:50:46,800 --> 00:50:50,880
यहां 1969 से 76 तक का पांच साल का नहीं

734
00:50:50,880 --> 00:50:55,120
थोड़ा सा जानोगे

735
00:50:55,120 --> 00:50:59,520
1976 में अलग आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1976

736
00:50:59,520 --> 00:51:03,840
में अलग से हां नहीं तो उन्होंने माताजी से ज्ञान

737
00:51:03,840 --> 00:51:08,000
लेने का ड्रामा किया कि रियल में ज्ञान लिया क्योंकि ज्ञान अभी उसको

738
00:51:08,000 --> 00:51:12,400
प्रैक्टिकल में समझो जो कुछ हुआ प्रैक्टिकल में हुआ उस बात को अलग छोड़ दो अभी आप भी

739
00:51:12,400 --> 00:51:16,400
तो ड्रामा ही तो है वो लीला है एक तरीके से ईश्वर की हां वो लीला है वो लीला है

740
00:51:16,400 --> 00:51:20,400
उस प्रभु की लीला है वो तो ज्ञानी थे ही स्वयं से है

741
00:51:20,400 --> 00:51:24,560
ना वो तो इस वो तो जानन जानन ही हार है अब

742
00:51:24,560 --> 00:51:28,720
1976 वाला जो मामला आ जाता है वहां से उन्होंने अपना विश्वविद्यालय शुरू कर लिया

743
00:51:28,720 --> 00:51:32,800
क्यों शुरू किया क्योंकि उन्होंने ये बताया कि भाई ये लेखराज जी जो है

744
00:51:32,800 --> 00:51:36,880
इनके अंदर नहीं आते थे कोई इनके पास जो ज्ञान था मैंने दिया

745
00:51:36,880 --> 00:51:41,040
इनको सेवक राम जी के रूप में सेवक राम जी के रूप में वो ज्ञान दिया था।

746
00:51:41,040 --> 00:51:45,280
अब अब यहां से पांच साल की स्टोरी थोड़ा सा बता दूं एक थोड़ी सी। अब

747
00:51:45,280 --> 00:51:50,960
अगर आप इजाजत दें तो 1969 से 76 तक का थोड़ा सा बता दे आपको।

748
00:51:50,960 --> 00:51:55,120
कोई आवश्यकता नहीं हो वो तो फिर आगे चले हम लोग। लेकिन आपके आपके

749
00:51:55,120 --> 00:51:59,120
नॉलेज के लिए जरूरी है। आप एक बड़े बड़े शुद्ध आत्मा है। आप बताइए बताइए।

750
00:51:59,120 --> 00:52:03,120
1969 में जब सात दिन का कोर्स कर लिया भठी कर ली

751
00:52:03,120 --> 00:52:07,200
तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित इनकी मुरलियों को काटने लगे कि तुम कुछ और कह रहे हो मुरली

752
00:52:07,200 --> 00:52:10,560
कुछ और कह रही है अच्छा

753
00:52:10,560 --> 00:52:14,720
यहां से झगड़ा शुरू हुआ झगड़े का कारण नहीं जानोगे हां ये बताइए

754
00:52:14,720 --> 00:52:18,720
ये बताइए हां तो झगड़े का कारण तो यहां से शुरू हुआ ना 73

755
00:52:18,720 --> 00:52:24,160
से 1969 से अच्छा 69

756
00:52:24,160 --> 00:52:28,560
कोर्स तो सात दिन का कोर्स है कोर्स हो गया बात को समझ गए तो 12

757
00:52:28,560 --> 00:52:33,440
ज्यादा दिन तक उन्होंने वो शरण नहीं ली है। बस दो हफ्ते दो हफ्ते में ही

758
00:52:33,440 --> 00:52:37,520
बगावत कर बगावत कर दी कि मुरली का मुरली

759
00:52:37,520 --> 00:52:41,840
कुछ और कह रही है। तुम कुछ और कह रहे हो। अच्छा तो

760
00:52:41,840 --> 00:52:45,360
यहां से झगड़ा शुरू हो गया।

761
00:52:45,360 --> 00:52:49,360
तो फिर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के साथ इन्होंने जो किया उसका सेंटर आना

762
00:52:49,360 --> 00:52:55,040
बंद कर दिया। धक्के मारे वो बेइज्जती की।

763
00:52:55,040 --> 00:52:59,200
अच्छा इसमें एक एक ट्विस्ट और है। एक छोटा सा प्रश्न और है कि

764
00:52:59,200 --> 00:53:03,200
जब स्वयं परमात्मा ही है जो शिव बाबा स्वयं

765
00:53:03,200 --> 00:53:07,200
मतलब सर्वशक्तिमान ईश्वर तो वो धक्के मारे

766
00:53:07,200 --> 00:53:11,360
और ये बेबस कैसे हो रहा है? वहां हत्या हो गई उसकी दीवार में चुन दिया गया। ये क्या है?

767
00:53:11,360 --> 00:53:15,520
इसलिए इसलिए हो रहा है कि जो विधि

768
00:53:15,520 --> 00:53:19,920
विधान के अनुसार जो नियम कानून कायदा इस सृष्टि का बना है ईश्वरीय कानून कायदा

769
00:53:19,920 --> 00:53:23,920
है इस सृष्टि का। हां सृष्टि चल रही है।

770
00:53:23,920 --> 00:53:28,160
यह ईश्वरीय कानून कायदे से चल रही है। और

771
00:53:28,160 --> 00:53:32,800
ईश्वरीय यानी यानी सृष्टि में जो नियम है वो ईश्वर ने बनाए हैं।

772
00:53:32,800 --> 00:53:36,800
ईश्वर ने बनाए हैं और ईश माना शासन करता वर माना श्रेष्ठ श्रेष्ठ जो इस

773
00:53:36,800 --> 00:53:41,120
दुनिया का शासन करता है उसने कानून कायदा बनाया सारा का सारा। तो यानी

774
00:53:41,120 --> 00:53:45,200
कि वो जो अपने जो शासन कायदा कानून

775
00:53:45,200 --> 00:53:49,360
बनाया उसको फॉलो कर रहा है। उसको तोड़ता नहीं है। मैं भी वो कहता

776
00:53:49,360 --> 00:53:53,520
है गीता में भी कहता है ना कि मैं भी इसलिए कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। मैं प्रकृति के नियम

777
00:53:53,520 --> 00:53:57,760
या कोई कानून कायदा नहीं तोड़ता हूं। मैं भी कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। नहीं गीता

778
00:53:57,760 --> 00:54:02,560
में तो उन्होंने ये भी कहा है ना करतुम अकर्तुम अन्यथा करतुम

779
00:54:02,560 --> 00:54:06,560
मतलब करतुम अकर्तुम का मतलब क्या है? मतलब उन्होंने

780
00:54:06,560 --> 00:54:10,160
यह कहा है कि मैं यह भी कर सकता हूं। वह भी जो

781
00:54:10,160 --> 00:54:14,160
नहीं करने वाली चीजें वह भी कर सकता हूं और और भी बहुत कुछ कर सब कुछ कर

782
00:54:14,160 --> 00:54:18,640
सकता हूं। लेकिन लेकिन

783
00:54:18,640 --> 00:54:22,880
वो किसी की कार्य में किसी के किसी

784
00:54:22,880 --> 00:54:26,960
भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करते हैं। सब अपना जो कर्म करता है जो जैसा कर्म

785
00:54:26,960 --> 00:54:31,040
कर रहा है वैसा फल पाता है। नहीं करते नहीं है वो बात

786
00:54:31,040 --> 00:54:35,040
अलग है। चटता वाली बात अलग है। यहां से यहां से नया

787
00:54:35,040 --> 00:54:39,200
एपिसोड ये शुरू होता है। सनत कुमार के रूप में वो सनातन धर्म की स्थापना करने

788
00:54:39,200 --> 00:54:43,200
के लिए दर-दर घूमता है। कोई ज्ञान समझ लो, कोई ज्ञान समझ लो बीके के

789
00:54:43,200 --> 00:54:47,360
यहां भी गया। लोगों के पास गया गलीगली में कि भाई मेरे पास ज्ञान है

790
00:54:47,360 --> 00:54:51,360
मैं ज्ञान समझा सकता हूं तो जैसे एक धर्म

791
00:54:51,360 --> 00:54:55,520
की स्थापना करनी चाहिए धर्म स्थापना के लिए जो है वो दरदर जाते हैं जैसे

792
00:54:55,520 --> 00:54:59,600
एक धर्म पिता धर्म की स्थापना करती है तो सनत कुमार के रूप में वो सनातन सनातन

793
00:54:59,600 --> 00:55:03,840
सत्य सनातन धर्म की स्थापना करते हैं और यहां से आपको

794
00:55:03,840 --> 00:55:07,840
एक सिर्फ एक मिनट आप मुझे सुनेंगे अब सत्य सनातन धर्म

795
00:55:07,840 --> 00:55:12,000
कहा जाता है अनादि अनादि सत्य सनातन देवी देवता स्क्रीन

796
00:55:12,000 --> 00:55:16,000
है ना शायद आपका फोन फोन गरम हो गया है। आपकी स्क्रीन शायद जो

797
00:55:16,000 --> 00:55:20,720
है ना चिपक रही है। अब मतलब आपके वीडियो

798
00:55:20,720 --> 00:55:24,800
आपका रुक गया है। फ्रीज हो गया है। ठीक है। फोन आपका

799
00:55:24,800 --> 00:55:25,300
गरम तो

800
00:55:25,280 --> 00:55:29,280
नहीं हो गया? नहीं फोन गरम नहीं हुआ है। मेबी नेटवर्क प्रॉब्लम हो सकती है

801
00:55:29,280 --> 00:55:35,280
और बाकी कुछ भी। नहीं देखिए। वाईफाई वगैरह कनेक्ट कर लीजिए।

802
00:55:43,280 --> 00:55:47,360
यह है पूरी कहानी वीरेंद्र देव दीक्षित जी की और जो है लेखराज जी

803
00:55:47,360 --> 00:55:51,600
की ओके आवाज आ रही है अभी भी हां आवाज

804
00:55:51,600 --> 00:55:55,680
आ रही है मगर आपका जो जो वो है ना क्या कहते हैं

805
00:55:55,680 --> 00:55:59,680
अ स्पेस मूवमेंट वगैरह वो हां

806
00:55:59,680 --> 00:56:03,680
अब ठीक है ठीक है चलिए अब चल रहा है हां अब चल

807
00:56:03,680 --> 00:56:07,920
रहा है अब जैसे सनत कुमार हो गया ना अब ये सनत कुमार

808
00:56:07,920 --> 00:56:11,920
के रूप में सत्य सनातन धर्म की स्थापना के लिए निकलता है। इन्होंने तो धक्के मार के निकाल दिया

809
00:56:11,920 --> 00:56:16,240
बाबा को वहां से। हां हां उसके बाद ये सत्य सनातन

810
00:56:16,240 --> 00:56:20,320
धर्म की स्थापना के लिए चलता है। तो हम सनातनियों को ये समझना चाहिए कि हमारा धर्म

811
00:56:20,320 --> 00:56:24,400
अनादि है तो हमारा धर्म पिता भी अनादि है। हम हम

812
00:56:24,400 --> 00:56:28,640
ये बात मुझे दुनिया को समझानी है। अब आप निमित्त बनो। कौन सहयोग करेगा?

813
00:56:28,640 --> 00:56:32,800
कोई ना कोई तो अच्छे लोग आवेंगे सामने। अब मतलब वो 76 से फिर

814
00:56:32,800 --> 00:56:37,120
चालू कर देते हैं अपना आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। जी आध्या

815
00:56:37,120 --> 00:56:40,480
पहले नाम रखा प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय नाम रखा

816
00:56:40,480 --> 00:56:44,480
पहले उन्होंने। अच्छा ये तो बाद का नाम

817
00:56:44,480 --> 00:56:48,640
आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय बाद का नाम है। पहले नाम था प्रजापिता ईश्वरीय

818
00:56:48,640 --> 00:56:52,880
विश्वविद्यालय। अच्छा जी।

819
00:56:52,880 --> 00:56:57,280
और फिर बाद में उन्होंने क्या रखा है नाम? आध्यात्मिक

820
00:56:57,280 --> 00:57:01,280
ईश्वरीय विश्वविद्यालय। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय।

821
00:57:01,280 --> 00:57:06,160
तो अभी जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से चल रहे हैं वो अलग है।

822
00:57:06,160 --> 00:57:10,720
जी वो बिल्कुल वो अपने आप को सूर्यवंशी कहो या रुद्राक्ष कहो

823
00:57:10,720 --> 00:57:14,720
क्योंकि सत्य सनातन धर्म देवी देवता धर्म है ना

824
00:57:14,720 --> 00:57:19,120
एक जगह यानी कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित तो जो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय

825
00:57:19,120 --> 00:57:23,200
वो अपन को कहता है सूर्यवंशी। हां। और ब्रह्माकुमारियों को समझते

826
00:57:23,200 --> 00:57:27,200
हैं चंद्रवंशी। और चंद्रवंशी और सूर्यवंशी मिलकर के नर

827
00:57:27,200 --> 00:57:31,200
से नारायण नारी से लक्ष्मी बनने का ज्ञान दिया जाता है। यानी जो अभी

828
00:57:31,200 --> 00:57:35,200
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के रूप में ख्यापित हो रहा है। जैसे

829
00:57:35,200 --> 00:57:39,280
अभी दिल्ली में भी हम गए वहां पे कोई अमोल कोकने हैं।

830
00:57:39,280 --> 00:57:44,240
जी उसके उसके अंडर में जो है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चल रहा है।

831
00:57:44,240 --> 00:57:48,320
किसने कहा? किसने ये किसने कहा आपको कि आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय

832
00:57:48,320 --> 00:57:52,880
चल रहा है नहीं वहां बोर्ड लगा हुआ है और वो अपने आप को वीरेंद्र

833
00:57:52,880 --> 00:57:56,080
से का अनुयाई मानते हैं।

834
00:57:56,080 --> 00:58:00,080
क्या अनुयाई मानते हैं वो एक अलग बात है लेकिन ये तो नहीं कह सकते ना कि आध्यात्मिक ईश्वरी

835
00:58:00,080 --> 00:58:04,160
विश्वविद्यालय चला रहे हैं। नहीं वो ये कह रहे हैं कि हम जो है उन्हीं का

836
00:58:04,160 --> 00:58:08,480
सेंटर चला रहे हैं। आध्यात्मिक

837
00:58:08,480 --> 00:58:12,560
नहीं अब मैं कहने लगू मैं उनका मैं उनकी गद्दी पे बैठा हूं। ऐसा

838
00:58:12,560 --> 00:58:16,960
नहीं होता है। बाप भगवान भगवान होता है। सब भगवान नहीं हो सकते। मतलब अमोल

839
00:58:16,960 --> 00:58:21,200
कोकने जी का ये दावा गलत है। ये सब ये सब गलत है। सब अपनी मनमत

840
00:58:21,200 --> 00:58:25,280
कर रहे हैं। अच्छा ठीक है। अब वापस आ जाते हैं। अब यहां पे एक

841
00:58:25,280 --> 00:58:29,760
दिक्कत ये आती है कि जैसे इन्होंने कहा कि भाई मुरली जो है मैंने ही दी थी

842
00:58:29,760 --> 00:58:33,920
और जो मुरली का सही अर्थ है वो मैं बता रहा हूं। तो यहां पे एक दिक्कत

843
00:58:33,920 --> 00:58:38,000
है कि अगर वो मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं। यहां पर मैं आपको एक

844
00:58:38,000 --> 00:58:43,520
बात और बता दूं। भगवान अपने को भगवान नहीं कहता है।

845
00:58:43,520 --> 00:58:48,160
जो सत्य है वह अपने को सत्य नहीं कहता। सत्य स्वयं

846
00:58:48,160 --> 00:58:52,880
प्रकाशित होता है। यानी कि बाद में अब ये 40 50 साल ज्ञान लेने के बाद

847
00:58:52,880 --> 00:58:57,040
वो अपने को भगवान ही कहता है। भगवान कह रहे हैं ना वो मैं ही हूं सनातन बीज। गीता

848
00:58:57,040 --> 00:59:01,440
में कहता हूं मैं ही हूं सनातन बीज। एक बात बताइए।

849
00:59:01,440 --> 00:59:05,840
अब नाम क्या अकेला सनत कुमार है? क्या अकेला महादेव है?

850
00:59:05,840 --> 00:59:09,840
राम कहो, हनुमान कहो, महादेव कहो, शिव कहो, शंकर कहो, नाम तो उसके

851
00:59:09,840 --> 00:59:12,160
हजारों हैं। नहीं नहीं

852
00:59:12,160 --> 00:59:16,160
मेरा जो प्रश्न है वह अलग है। मैं यह कह रहा हूं

853
00:59:16,160 --> 00:59:20,160
कि क्या कहते हैं ये जो

854
00:59:20,160 --> 00:59:24,160
उन्होंने जो मुरली के नाम से यह बताना चालू किया कि

855
00:59:24,160 --> 00:59:28,320
भाई जो मुरली के नाम मुरली जो आ रही है वो सही है। लेखराज जी अच्छा

856
00:59:28,320 --> 00:59:32,320
लेखराज जी की मृत्यु हो चुकी है क्या? अभी 76 से पहले मतलब 76 में

857
00:59:32,320 --> 00:59:36,480
1969 में 1969 में हो गई ना? 18 जनवरी 1969 को तो इन्होंने

858
00:59:36,480 --> 00:59:40,480
जो ज्ञान लिया था लेखराज से डायरेक्ट नहीं लिया था। उनकी वो जो वहां पर सेविका थी

859
00:59:40,480 --> 00:59:44,480
जो उनका जन्मांतर थी। हां तो यहां डायरेक्ट ज्ञान कोई नहीं

860
00:59:44,480 --> 00:59:48,560
लेता है। मधुबन में जो बहने बैठी है उन्हीं से लिया जाता है। निमित बहनों से लिया जाता है। समझ गए

861
00:59:48,560 --> 00:59:52,880
समझ गए समझ गए समझ गए। तो कुल मिलाकर के इन्होंने ये कहा

862
00:59:52,880 --> 00:59:57,120
76 में कि जो लेखराज जी ने जो मुरली दी है

863
00:59:57,120 --> 01:00:01,520
शिव बाबा के द्वारा देखो उन्होंने

864
01:00:01,520 --> 01:00:05,600
मैं बता रहा हूं। भाई साहब मैं बता रहा हूं। सुन लीजिए। दो बातें उन्होंने कही दो क्लेम

865
01:00:05,600 --> 01:00:09,600
किए। एक तो शिव बाबा ने मुरली नहीं सुनाई। वह मुरली जो है जो

866
01:00:09,600 --> 01:00:13,760
है वह सेवक राम के रूप में मैंने ही सुनाई थी या भेद ये वाला बाद में खुला

867
01:00:13,760 --> 01:00:17,920
होगा कि इन्होंने ही सुनाई थी। हो सकता है। उन्होंने कहा ना हो। ये ये बात हम

868
01:00:17,920 --> 01:00:21,920
कह रहे हैं अपनी तरफ से। ये बात आपने अपनी खोज की है। उससे कह रहे हैं

869
01:00:21,920 --> 01:00:26,080
आप। जी जी। अच्छा ये ये उन्होंने नहीं कहा। बाबा

870
01:00:26,080 --> 01:00:27,280
वीरेंद्र देव दीक्षित ने अपने

871
01:00:27,280 --> 01:00:31,360
को भगवान कभी नहीं कहा। ये तो हम कह रहे हैं कि वो भगवान है। वो सन कुमार है।

872
01:00:31,360 --> 01:00:35,440
हमारे वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपने आप को भगवान कभी

873
01:00:35,440 --> 01:00:39,440
क्लेम नहीं किया। बिल्कुल कभी नहीं किया। ये तो हम अपनी रिसर्च से कह

874
01:00:39,440 --> 01:00:43,440
रहे हैं। आपकी रिसर्च है। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपनी पहचान

875
01:00:43,440 --> 01:00:47,680
स्वयं के द्वारा क्या बताई थी? कि स्वम की पहचान

876
01:00:47,680 --> 01:00:52,000
यह बताई कि जो यह मुरली है इस मुरली

877
01:00:52,000 --> 01:00:56,240
का सही अर्थ नहीं निकला है। वो मंथन करके उस मंथन करके

878
01:00:56,240 --> 01:01:00,400
उसमें से भगवान की पहचान बता देते हैं। तो उन्होंने

879
01:01:00,400 --> 01:01:04,640
उन्होंने अपनी कुछ किसी प्रकार की कोई दिव्यता नहीं बताई थी। वो

880
01:01:04,640 --> 01:01:08,960
कुछ नहीं बताया। बिल्कुल एक साधारण पूर्ण जैसे गीता में बताया ना कि जड़मति

881
01:01:08,960 --> 01:01:13,040
साधारण आपको शन कुमार भी नहीं कहा था। कुछ नहीं कहा। यह

882
01:01:13,040 --> 01:01:17,360
तो हम अपनी रिसर्च बता रहे हैं। वह तो एक जस्ट मतलब

883
01:01:17,360 --> 01:01:21,920
आपने तीन चीजें बताई है। एक लेखराज जी की मान्यता क्या है?

884
01:01:21,920 --> 01:01:26,000
और फिर उसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित जी की मान्यता क्या है? और उसके बाद

885
01:01:26,000 --> 01:01:30,160
थोड़ी सी इत आपकी क्या मान्यता है? ये आप आप बता रहे हैं। जो

886
01:01:30,160 --> 01:01:34,240
कुछ मैं बता रहा हूं वो अपने अपना अपना आधार बता रहा हूं। जो मैंने अभी 12

887
01:01:34,240 --> 01:01:38,320
साल इनको पढ़ा है, समझा है, गीता ज्ञान भी लिया। एक चीज

888
01:01:38,320 --> 01:01:42,480
और है कि उन्होंने अपनी पहचान कुछ और बताई है और आप मानते कुछ और

889
01:01:42,480 --> 01:01:47,440
हो। इतने अंश में आप वीरेंद्र दीक्षित जी की बात के इतर जाते हो।

890
01:01:47,440 --> 01:01:53,440
बिल्कुल एक एक बात मैंने उनकी समझी सुनी पूरा ज्ञान समझा।

891
01:01:54,560 --> 01:01:59,360
बहुत बढ़िया। अब आता है एक पहला पॉइंट जो थोड़ा सा

892
01:01:59,360 --> 01:02:03,440
एक एक प्रश्न है क्योंकि वो क्या कहते हैं? विरुद्ध विरुद्ध में

893
01:02:03,440 --> 01:02:07,680
समझ लीजिए। पहला पॉइंट पहला प्रश्न है कि लेखराज जी की मुरली

894
01:02:07,680 --> 01:02:11,680
का ज्ञान सही से दे रहे हैं वीरेंद्र देव दीक्षित

895
01:02:11,680 --> 01:02:16,160
जी ठीक है तो अब देखो एक मिनट

896
01:02:16,160 --> 01:02:20,160
प्रश्न तो किया ही नहीं प्रश्न तो किया ही नहीं भाई साहब प्रश्न तो करने दीजिए

897
01:02:20,160 --> 01:02:24,240
तो प्रश्न ये है कि लेखराज जी की मुरली का सही अर्थ

898
01:02:24,240 --> 01:02:28,240
बता रहे हैं ये और उनका कहना है कि

899
01:02:28,240 --> 01:02:32,400
वो मुरली तो सही बता रहे हैं जो ईश्वर से ली गई है मतलब जो ईश्वर की बात

900
01:02:32,400 --> 01:02:36,480
है ईश्वर की बात क्या अच्छा इस एक मिनट यहां पे एक

901
01:02:36,480 --> 01:02:40,560
पॉइंट है आपका मानना है कि सेवक राम जी के रूप में उन्होंने ही ज्ञान दिया था लेखराज

902
01:02:40,560 --> 01:02:44,720
जी को ये आपका मानना है मगर लेखराज जी ने इस बारे में क्या कहा कि वो जो मुरली

903
01:02:44,720 --> 01:02:49,520
लिखवाते हैं वो कौन लिखवा रहा है इस बारे में क्या कहा वीरेंद्र

904
01:02:49,520 --> 01:02:53,680
जी वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि शिव

905
01:02:53,680 --> 01:02:57,520
है शिव भगवान है मैं भगवान नहीं हूं शिव भगवान है वो उसमें मेरे में

906
01:02:57,520 --> 01:03:01,600
भी मतलब वो राम और कृष्ण वाली आत्माओं में उन्होंने कैसे क्लेरिफाई किया बड़े

907
01:03:01,600 --> 01:03:05,600
चतुराई से क्लेरिफाई किया इस बात को बाबा वीरेंद्र देव

908
01:03:05,600 --> 01:03:09,600
दीक्षित ने बड़ी चतुराई से क्लियर किया दो बार बोल रहे

909
01:03:09,600 --> 01:03:13,920
आप मेन बात बोलिए ना कि वो क्या मानते थे शिव जी ने ज्ञान दिया था लेखराज

910
01:03:13,920 --> 01:03:18,000
जी को कि नहीं दिया था वो ये मानते थे कि इसमें जो

911
01:03:18,000 --> 01:03:22,800
प्रवेश करके वो लिखवाते हैं ये लिखता है लेकिन समझ नहीं पा रहा है।

912
01:03:22,800 --> 01:03:27,200
अच्छा तो यह वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने क्लेम किया था

913
01:03:27,200 --> 01:03:31,200
कि क्या कहते हैं मतलब यह वो मानते थे कि शिव जी ने ही उनके अंदर घुस

914
01:03:31,200 --> 01:03:35,280
के ज्ञान दिया है तो अभी तो आप कह रहे थे कि वो नहीं मानते थे प्रवेश तुम अब आप

915
01:03:35,280 --> 01:03:39,280
कह रहे मानते थे तुम अरे भाई जी ये कह रहे हैं कि

916
01:03:39,280 --> 01:03:43,600
मानना एक अलग बात है लेकिन जो प्रैक्टिकल बात है यह कोई प्रवेश

917
01:03:43,600 --> 01:03:47,680
नहीं हम वो जो मैं पूछ रहा हूं उन्होंने कहा क्या था

918
01:03:47,680 --> 01:03:52,240
वो तो उन्होंने सीधी सी बात कही उन्होंने एक सीधी सी बात कही

919
01:03:52,240 --> 01:03:56,480
कि इसको मुरली का ना तो अर्थ समझ में आया लेकिन जो बच्चा बुद्धि है लिखता

920
01:03:56,480 --> 01:04:00,560
है और सुना देता है। मैं इस बारे में क्या कहा था कि

921
01:04:00,560 --> 01:04:04,560
शिवजी ने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया है? घुस के दिया है कि बाहर से दिया

922
01:04:04,560 --> 01:04:08,800
है? शिवजी का अर्थ आप भी समझिए। पहले शिवजी को ही समझना

923
01:04:08,800 --> 01:04:12,880
पड़ेगा। बाबा जी उन्होंने सेंटेंस

924
01:04:12,880 --> 01:04:16,960
कहा है। भाई साहब ऐसा है ना कि अभी अगर मैं अर्थ समझने लगूंगा तो

925
01:04:16,960 --> 01:04:20,960
जो हमारा मेन टॉपिक है वो रह जाएगा। उन्होंने कहा क्या था बस ये बता

926
01:04:20,960 --> 01:04:25,040
दीजिए। वो ये मान उन्होंने कहा उन्होंने एक मिनट भाई साहब एक

927
01:04:25,040 --> 01:04:29,360
मिनट उन्होंने उन्होंने उन्होंने यह कहा था कि शिवजी

928
01:04:29,360 --> 01:04:33,440
ने उनके अंदर प्रवेश करके ज्ञान दिया है या उन्होंने यह कहा था कि

929
01:04:33,440 --> 01:04:38,080
शिवजी वहां पर आते हैं और लिखवाते हैं। उन्होंने कहा था

930
01:04:38,080 --> 01:04:42,160
उन्होंने उन्होंने ये कहा था कि शिव उसमें प्रवेश करता

931
01:04:42,160 --> 01:04:46,160
है। ज्ञान देता है। लेकिन ये समझ नहीं पा रहा है कि शिव प्रवेश करके ज्ञान दे रहा है। ये

932
01:04:46,160 --> 01:04:50,160
शिव है कौन? वो समझ नहीं पाया। मतलब उन्होंने

933
01:04:50,160 --> 01:04:54,320
यह कहा था ना कि शिवजी प्रवेश करते हैं लेखराज जी के अंदर। आप यह बात

934
01:04:54,320 --> 01:04:58,480
उनकी डिकोड आपने उनकी बात की है। आपने उनकी

935
01:04:58,480 --> 01:05:04,480
ये बात डिकोड कर ली है। कहा तो लेकिन उस बात का

936
01:05:04,720 --> 01:05:08,720
अर्थ दूसरा है। मैं मान रहा हूं। आपने उनकी

937
01:05:08,720 --> 01:05:12,720
बात को डिकोड कर लिया है। उनके इशारों को समझ लिया है। क्यों? मैंने

938
01:05:12,720 --> 01:05:16,800
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के इशारे को समझ लिया कि बाबा क्या बात समझना चाहता

939
01:05:16,800 --> 01:05:20,880
है। मैं उस बात मैं मैं आपकी चीजों को क्लेम नहीं कर रहा हूं। मैं अभी उन्होंने

940
01:05:20,880 --> 01:05:25,280
कहा क्या था वो पूछ रहा हूं। तो उन्होंने सी बात कही।

941
01:05:25,280 --> 01:05:27,920
उन्होंने सीधा सा क्लेम किया कि यह

942
01:05:27,920 --> 01:05:32,800
जो ज्ञान कहां से आ रहा है यह समझ ही नहीं पा रहा है। अरे

943
01:05:32,800 --> 01:05:36,880
भाई उन्होंने यह माना। उन्होंने ये कहा ना अपनी वाणी के द्वारा यह कहा ना

944
01:05:36,880 --> 01:05:40,880
कि शिवजी प्रवेश करते हैं और मुरली लिखता है मगर वो मुरली को

945
01:05:40,880 --> 01:05:45,040
समझ नहीं पा रहा है। यही ना जी हां हां हां ठीक है।

946
01:05:45,040 --> 01:05:49,040
अब अब आगे चलते हैं। अब आ जाते हैं वहां पर जब ये मुरली का

947
01:05:49,040 --> 01:05:53,040
सही अर्थ बता रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित अब ये ये नहीं कह रहे

948
01:05:53,040 --> 01:05:57,040
कि मैं जो है भगवान हूं। ये नहीं कह रहे ना ही ये कह रहे हैं कि भगवान

949
01:05:57,040 --> 01:06:01,600
मेरे पास आते हैं। मेरे अंदर प्रवेश करते हैं और मैं लिखवाता हूं। है ना? जी

950
01:06:01,600 --> 01:06:05,920
जी। अच्छा अच्छा ये शुरू करने से पहले एक छोटा सा

951
01:06:05,920 --> 01:06:10,240
उत्तर और मतलब एक जानकारी और दे दीजिए। इस समय वीरेंद्र देव दीक्षित

952
01:06:10,240 --> 01:06:14,320
जी मतलब हैं शिव जी आपके हिसाब से और

953
01:06:14,320 --> 01:06:18,400
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के हिसाब से दोनों में से क्या बात है मतलब

954
01:06:18,400 --> 01:06:22,400
अभी है राइट नाउ पृथ्वी पर इस समय

955
01:06:22,400 --> 01:06:26,640
आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय कह रहा है शरीर छोड़ गए शरीर

956
01:06:26,640 --> 01:06:30,880
छोड़ गए अच्छा तो वो जो वो

957
01:06:30,880 --> 01:06:34,880
शरीर का अंत कैसे हुआ ये भी तो बता रहा होगा अब पूरी

958
01:06:34,880 --> 01:06:39,440
तो बात सुनो हां अब वो आध्या आध्यात्मिक हिशोरी विश्वविद्यालय

959
01:06:39,440 --> 01:06:42,960
कह रहा है कि वो शरीर छोड़ गए। हां।

960
01:06:42,960 --> 01:06:46,960
लेकिन इस बात को मैं और मेरे पास कम से कम 100 150

961
01:06:46,960 --> 01:06:51,040
ऐसे ₹1 के नहीं मानते अलग है। ईश्वरीय

962
01:06:51,040 --> 01:06:55,600
विश्वविद्यालय क्या कह रहा है वो बता दो आप। अभी उनकी भी दो मत है।

963
01:06:55,600 --> 01:06:59,600
कोई मत एक मत नहीं है। एक मत नहीं

964
01:06:59,600 --> 01:07:03,600
है। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय। अच्छा दो मत। कोई प्रमाण नहीं कोई

965
01:07:03,600 --> 01:07:07,760
प्रमाण प्रूफ नहीं है। कोई डेथ सर्टिफिकेट नहीं है। मत क्या है

966
01:07:07,760 --> 01:07:11,760
भाई साहब? मत क्या है? कैसे मृत्यु हुई? वो तो पता नहीं क्या-क्या

967
01:07:11,760 --> 01:07:16,880
कह रहे हैं लेकिन अभी फाइनल नहीं। डेथ सर्टिफिकेट तो आवे पहले

968
01:07:16,880 --> 01:07:20,960
जो दो मत है वो दोनों मान रहे हैं। मृत्यु हो गई। हां। नहीं

969
01:07:20,960 --> 01:07:25,360
एक मान रहा है एक मना कर रहा है। एक मना कर रहा है। आप क्या कर रहे हो?

970
01:07:25,360 --> 01:07:29,600
आपका आप 200 लोगों का क्या कहना है? हमारे लिए हमारे लिए तो वो

971
01:07:29,600 --> 01:07:33,600
महाकाल है। वो कभी नहीं मर सकता। जब तक युग परिवर्तन नहीं शरीर

972
01:07:33,600 --> 01:07:37,760
नहीं बन सकता या फिर वो परमात्मा जो शरीर शरीर मतलब शरीर धारण

973
01:07:37,760 --> 01:07:42,000
करता है महाकाल का मतलब क्या होता है महाकाल का मतलब होता है

974
01:07:42,000 --> 01:07:46,240
काल तो शरीर को ही खाता है ना हर जन्म में तो एक तरीके से वीरेंद्र देव दीक्षित

975
01:07:46,240 --> 01:07:50,960
जी कहीं पर है मगर अभी वो समाज के समक्ष नहीं है ऐसा है

976
01:07:50,960 --> 01:07:55,120
कहीं ना कहीं जहां भी है कहीं ना कहीं है वो शरीर नहीं छोड़ सकते अभी

977
01:07:55,120 --> 01:07:58,160
अच्छा ये आपकी मान्यता है वो शरीर में ही है और अभी शरीर

978
01:07:58,160 --> 01:08:03,040
छोड़ नहीं सकते जैसे सेवक तो नहीं तो

979
01:08:03,040 --> 01:08:07,120
आप एक तरफ कह रहे हैं कि वो कभी वो नहीं हो सकता है। मगर वहां पर सेवक राम

980
01:08:07,120 --> 01:08:11,200
जी का शरीर छोड़ना तो मान रहे हैं आप। वहां छोड़ा है। लेकिन

981
01:08:11,200 --> 01:08:15,200
अब जो कल्प का अंत सामने खड़ा हुआ है। कल्प तो फिर महाकाल वाली बात

982
01:08:15,200 --> 01:08:19,440
नहीं है। बात ये है कि कल्प का अंत है इसलिए शरीर नहीं छोड़ सकता। महाकाल वाली बात नहीं है। महाकाल

983
01:08:19,440 --> 01:08:23,760
तो शरीर छोड़ रहा है ना सेवा ग्राम का। सेवा ग्राम का शरीर तो छोड़ ही रहा है।

984
01:08:23,760 --> 01:08:27,760
उस चीज पे आपको समझना पड़ेगा। अभी उस चीज के लिए आप ज्ञान जाके समझिए प्रॉपर्ली।

985
01:08:27,760 --> 01:08:32,160
पहले आप कोर्स करिए आप भी अच्छे से पहले जाके समझिए पूरा का पूरा

986
01:08:32,160 --> 01:08:36,240
अच्छा ठीक है ठीक अब यहां पे अब आपको तो आता है ना कोर्स आपने

987
01:08:36,240 --> 01:08:40,240
तो किया है ना बिल्कुल बहुत अच्छे से किया है समझा जाना तभी

988
01:08:40,240 --> 01:08:44,240
आपके सामने बैठा हूं पूरी दुनिया के सामने भी बैठूंगा तो आप आप मुझे इसका जवाब नहीं

989
01:08:44,240 --> 01:08:48,320
देंगे जब आप यहां पे उनका शरीर छोड़ना स्वीकार नहीं कर रही ये कह के कि वो महाकाल

990
01:08:48,320 --> 01:08:52,320
है तो वहां पे सेवक राम के रूप में शरीर छोड़ना स्वीकार क्यों

991
01:08:52,320 --> 01:08:56,480
कर रहे हैं वहां भी तो वो महाकाल ही है हां तो महाकाल का मतलब आप हर

992
01:08:56,480 --> 01:09:00,720
जन्म में लगाओगे या अंतिम समय जब एटम फटगी पूरा दुनिया

993
01:09:00,720 --> 01:09:04,720
का विनाश थाने उस समय की बात है वो उस समय का के बात ये है कि

994
01:09:04,720 --> 01:09:08,800
क्योंकि यहां कल्प का अंत है इसलिए यहां पर महाकाल शरीर छोड़ के नहीं जाएगा

995
01:09:08,800 --> 01:09:12,880
वरना महाकाल अन्य जन्मों में अन्य शरीरों में जन्म शरीर छोड़ के जा

996
01:09:12,880 --> 01:09:13,380
सकता

997
01:09:13,200 --> 01:09:17,440
है ना जी ये बात पहले भी क्लियर हो गई है कि प्रकृति

998
01:09:17,440 --> 01:09:21,600
के नियम कानून कायदे नहीं छोड़ता जो गायन है वो अब कल के अंत के समय का इस अंतिम समय

999
01:09:21,600 --> 01:09:25,840
का है ठीक है भाई साहब मैं क्लियर हो गया अब दूसरा प्रश्न आता है अच्छा

1000
01:09:25,840 --> 01:09:29,840
आपके हिसाब से वो कहीं पे हैं जो समाज के समक्ष प्रकट नहीं है।

1001
01:09:29,840 --> 01:09:33,920
अभी समय आने पर वो आ जाएंगे। एक क्लेम यह कह रहे हैं कि वो शरीर छोड़

1002
01:09:33,920 --> 01:09:38,000
गए हैं। तो जाहिर सी बात है वो ये कह रहे होंगे कि अब दूसरा शरीर आने वाला है या आ चुका

1003
01:09:38,000 --> 01:09:42,000
होगा वो बता नहीं रहे होंगे। ये क्या कहना है? जो लोग जो लोग ये कह

1004
01:09:42,000 --> 01:09:46,000
रहे हैं कि शरीर छोड़ गए। उन लोगों का इस बारे में क्या कहना है कि वो जन्म ले चुका

1005
01:09:46,000 --> 01:09:50,560
है। दूसरा शरीर आ चुका है या नहीं आया है। क्या है? उनके उनके अनुसार

1006
01:09:50,560 --> 01:09:55,520
2022 में शरीर छोड़ गया और तकरीबन तीन साल का हो गया होगा। फिर

1007
01:09:55,520 --> 01:09:59,600
अच्छा तो उन्होंने मान लिया ना कि आ चुका है वो। हां तो

1008
01:09:59,600 --> 01:10:04,400
कुछ लोग मान रहे हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कुछ मना कर रहे हैं। अच्छा

1009
01:10:04,400 --> 01:10:08,640
तो और मैं भी मना करने वाला हूं। मैं भी दिल्ली में से हूं कि नहीं छोड़ जो लोग

1010
01:10:08,640 --> 01:10:13,360
जो लोग ये मान रहे हैं कि आ चुका है तो उन लोगों ने ये बताया कि कहां पे आ चुका है।

1011
01:10:13,360 --> 01:10:17,440
नहीं कोई प्रूफ नहीं है। मृत्यु का सबूत उनके पास नहीं। जन्म का नहीं कुछ भी

1012
01:10:17,440 --> 01:10:21,440
नहीं है। साहब अफवाएं हैं। ओके ओके ओके ठीक है। अब क्लियर हो गया।

1013
01:10:21,440 --> 01:10:25,680
अब अब आते हैं वो जो अह जो अह एक

1014
01:10:25,680 --> 01:10:28,640
अह तार्किक प्रश्न था वह यह था

1015
01:10:28,640 --> 01:10:32,640
कि जब लेखराज की दी गई लेखराज जी के

1016
01:10:32,640 --> 01:10:36,800
द्वारा दी गई जो मुरलियां हैं वो उनका

1017
01:10:36,800 --> 01:10:41,040
सही अर्थ बता रहे हैं कौन वीरेंद्र देव दीक्षित जी दीक्षित

1018
01:10:41,040 --> 01:10:47,040
जिसके कारण उनको कपिल मुनि कहा जाता है जिसके कारण सांख्य

1019
01:10:47,200 --> 01:10:51,760
कर रहा हूं आप मुझे बीच में काट देते मैं प्रश्न पूछ रहा हूं अभी पूरा तो होने दो लेकिन

1020
01:10:51,760 --> 01:10:55,840
प्रश्न का उत्तर तो जो ज्ञान लिया उसके अनुसार देना पड़ेगा। तो

1021
01:10:55,840 --> 01:11:00,000
आप जब मेरा प्रश्न सुन लो तब देना ना। हम प्रश्न बताओ

1022
01:11:00,000 --> 01:11:04,480
पूरा। हां लेखराज जी के द्वारा दी गई जो मुरलियां

1023
01:11:04,480 --> 01:11:08,560
हैं उनको डिकोड कर रहे हैं ये और इनका कहना

1024
01:11:08,560 --> 01:11:12,960
है कि लेखराज जी ने मुरलियां तो ईश्वर से ली हुई दी है। मगर

1025
01:11:12,960 --> 01:11:17,360
जी। उनका अर्थ सही से नहीं किया। वो मैं कर रहा हूं। ठीक है।

1026
01:11:17,360 --> 01:11:21,600
जी। और उनका ये भी कहना है कि मैं कोई दिव्य आत्मा नहीं हूं।

1027
01:11:21,600 --> 01:11:25,840
जी साधारण पुरुष हूं मगर मैं सही ज्ञान दे रहा हूं। ठीक है। अब

1028
01:11:25,840 --> 01:11:30,720
यहां ये दिक्कत आती है वीरेंद्र दीक्षित जी के द्वारा कहे गए कथन में

1029
01:11:30,720 --> 01:11:36,560
कि क्या उन्हें सारी मुरलियां रटी हुई थी?

1030
01:11:36,560 --> 01:11:41,280
मुरलियों के लिए मुरलियों के लिए उनके पास

1031
01:11:41,280 --> 01:11:45,360
स्त्रोत क्या है? स्त्रोत तो ले रहे हैं उन्हीं को किनको? लेखराज

1032
01:11:45,360 --> 01:11:49,680
जी बिल्कुल बिल्कुल वो आधार

1033
01:11:49,680 --> 01:11:54,320
यानी कि मुरली में मिलावट नहीं है ये वो मानते थे जी वेदव्यास

1034
01:11:54,320 --> 01:11:58,400
वेद वाणी जो ब्रह्मा के मुख से निकली उसी का क्लेरिफिकेशन करते थे और कोई मिलावट नहीं

1035
01:11:58,400 --> 01:12:02,480
करते थे उस बात की नहीं नहीं मैं वो नहीं कह रहा मैं ये कह रहा हूं कि अगर

1036
01:12:02,480 --> 01:12:06,800
उनको ये वीरेंद्र दीक्षित जी को ब्रह ये

1037
01:12:06,800 --> 01:12:11,120
लेखराज जी की मुरली पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर विश्वास

1038
01:12:11,120 --> 01:12:15,120
ना होना सिद्ध नहीं होता और अगर विश्वास नहीं

1039
01:12:15,120 --> 01:12:19,280
है अर्थ पर तो उनकी मुरली पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता।

1040
01:12:19,280 --> 01:12:23,440
समझ रहे? जैसे मैं अगर एक बात भी गलत बोल सकता हूं तो मेरी किसी भी बात

1041
01:12:23,440 --> 01:12:27,440
पर डाउट किया जा सकता है। फिर हम ये नहीं कह सकते ये जो है ईश्वर के द्वारा

1042
01:12:27,440 --> 01:12:31,680
कहा गया वचन है। समझ रहे हैं? जैसे मैं कह रहा हूं कि मेरे पास ईश्वर आते

1043
01:12:31,680 --> 01:12:35,680
हैं और वो लिखवाते हैं और आप मान रहे हो। मगर फिर आप कह रहे हो कि मैं

1044
01:12:35,680 --> 01:12:39,680
दूसरी बात जो बोल रहा हूं। मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं वो मैं गलत बोल रहा हूं। अगर मैं गलत

1045
01:12:39,680 --> 01:12:43,680
बोल सकता हूं तो मैं ये भी गलत बोल सकता हूं कि जो मुरली आ रही है वो ईश्वर

1046
01:12:43,680 --> 01:12:47,680
ने दी है या फिर ये भी कर सकता हूं कि उसमें कुछ मुरलियां ईश्वर की दे दूं कुछ

1047
01:12:47,680 --> 01:12:51,680
अपने मन की दे दूं तो या तो हमें मानना पड़ेगा लेखराज जी को

1048
01:12:51,680 --> 01:12:56,080
तो पूरा अन्यथा अधूरा तो इस संबंध में फिर कैसे माने क्या करें

1049
01:12:56,080 --> 01:13:00,080
इस संबंध में इतना सा सार निकालो अब इस बात का कि ब्रह्मा के

1050
01:13:00,080 --> 01:13:04,240
मुख से जो मुरली निकली है उस मुरली में भगवान का

1051
01:13:04,240 --> 01:13:08,320
नाम रूप देश काल लिखा हुआ उस मुरली के अंदर जो कोई नहीं समझ पाया जो बाबा

1052
01:13:08,320 --> 01:13:12,480
वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने निकाल के दे दिया। आप समझे नहीं मेरा प्रश्न क्या है? अगर

1053
01:13:12,480 --> 01:13:16,640
उनको उनकी योग्यता पे या फिर मंसूबों पर डाउट है

1054
01:13:16,640 --> 01:13:20,880
तो वो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं। अगर वो

1055
01:13:20,880 --> 01:13:25,040
अर्थ अगर वो अर्थ गलत दे सकते हैं तो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं।

1056
01:13:25,040 --> 01:13:30,080
झूठ लिख दो इसमें। एक बात एक बात पहले आप सुनो।

1057
01:13:30,080 --> 01:13:34,400
तो मुरली झूठी है ना उसका क्लेरिफिकेशन झूठा है। दोनों चीजें सत्य है।

1058
01:13:34,400 --> 01:13:39,280
लेखराज जी ने जो क्लेरिफिकेशन किया वो झूठा था ना। गलत था ना

1059
01:13:39,280 --> 01:13:43,680
जो दादा लेखराज ने उन्होंने क्लेरिफिकेशन तो किया ही नहीं उन्होंने तो

1060
01:13:43,680 --> 01:13:47,840
जो पढ़ी जो पढ़ के पढ़ के सुना दी उन बच्चों को तो बच्चे

1061
01:13:47,840 --> 01:13:52,160
जो क्लेरिफिकेशन कर रहे हैं वो गलत है लेखराज गलत नहीं कर रहे बच्चे

1062
01:13:52,160 --> 01:13:56,400
भी गलत नहीं कर रहे ना वो गलत कर रहे लेकिन उस मुरली का जो तंत्र निकलना

1063
01:13:56,400 --> 01:14:00,400
चाहिए भगवान की पहचान वो नहीं हो पा रही जो आपकी जो स्क्रीन है

1064
01:14:00,400 --> 01:14:05,200
वो फिर से पॉज हो गई है नेट खत्म हो गया शायद

1065
01:14:05,200 --> 01:14:06,880
डलवा लीजिए नेट नेट पैक

1066
01:14:06,880 --> 01:14:11,120
डलवा दीजिए हम डलवा दे इधर से अभी क्या करें

1067
01:14:11,120 --> 01:14:16,000
अभी एक मिनट दूसरे दोनों फोन का खत्म हो गया शायद ना

1068
01:14:16,000 --> 01:14:22,000
हां तो आप नंबर बता दीजिए तो

1069
01:14:23,520 --> 01:14:27,520
आशा करते हैं आप लोग सुन रहे होंगे क्योंकि यह जो हिस्ट्री है ना यह समझना बहुत

1070
01:14:27,520 --> 01:14:31,680
आवश्यक है आगे यह जो संस्थाएं हैं इनसे बात करने

1071
01:14:31,680 --> 01:14:35,680
के लिए और यह सब चीजें समझना आवश्यक था। आप लोग भी देखें किस

1072
01:14:35,680 --> 01:14:39,840
तरीके से क्या-क्या दावे किए जा रहे हैं। क्या-क्या कहा जा रहा है।

1073
01:14:39,840 --> 01:14:44,480
और अगर 5 मिनट में भाई साहब वापस आ जाते हैं तो हम फिर आज ही

1074
01:14:44,480 --> 01:14:48,880
कंटिन्यू करेंगे। नहीं तो फिर हम दोबारा कंटिन्यू कर लेंगे।

1075
01:14:48,880 --> 01:14:52,720
जब अगली बार ये भाई साहब आएंगे।

1076
01:14:52,720 --> 01:14:56,560
हम लोग पांच मिनट वेट करते हैं।

1077
01:14:56,560 --> 01:15:00,560
तब तक किसी का कोई प्रश्न है तो

1078
01:15:00,560 --> 01:15:06,560
वह पूछ सकता है।

1079
01:15:10,800 --> 01:15:16,800
क्या कमेंट्स

1080
01:15:36,240 --> 01:15:42,240
कोई प्रश्न किसी का हो तो पूछे।

1081
01:15:42,880 --> 01:15:48,880
दोनों फोन का रिचार्ज खत्म हो गया। यह आपका प्रश्न है।

1082
01:15:50,880 --> 01:15:54,960
देखते हैं क्या होता है। काफ आपका तो नाम

1083
01:15:54,960 --> 01:16:00,960
भी

1084
01:16:03,200 --> 01:16:07,440
जय श्री राम। शास्त्रवाद जी कैसी लगी आपकी आज की चर्चा? अभी

1085
01:16:07,440 --> 01:16:11,760
आत्मा अविनाशी है तो नए लोग मा नए लोग

1086
01:16:11,760 --> 01:16:17,760
मात्रा में पैदा क्यों हो रहे हैं?

1087
01:16:18,160 --> 01:16:22,320
इतनी मात्रा में पैदा क्यों हो रहे हैं? क्या

1088
01:16:22,320 --> 01:16:27,440
जरूरत थी लेखराज की मुरली पढ़ने की?

1089
01:16:27,440 --> 01:16:31,440
वो तो अभी भाई साहब अभी बताएंगे ना। बहुत बहुत ज्यादा उसमें गुत्तम गुप्त

1090
01:16:31,440 --> 01:16:35,760
है। जन्मांतर भेद से भी लोग जो है आ जाते हैं और कब

1091
01:16:35,760 --> 01:16:39,840
जो है बॉडी बदल जाती है वो पता नहीं चलता है। पंडित जी आप ज्वाइन

1092
01:16:39,840 --> 01:16:44,000
कर लीजिए। थोड़ा मैं समझ रहे होंगे ना काफी लंबा

1093
01:16:44,000 --> 01:16:50,000
समय हो गया मुरली समझते समझते

1094
01:17:23,280 --> 01:17:25,440
तो

1095
01:17:25,440 --> 01:17:29,680
हम चारप मिनट हो चुके हैं। भाई साहब का नेट पैक

1096
01:17:29,680 --> 01:17:33,200
खत्म हो गया तो हमारी चर्चा अभी अधूरी हो सकता है हो

1097
01:17:33,200 --> 01:17:39,200
जाए। ऑपरेटर जी आप जो है

1098
01:17:45,680 --> 01:17:51,440
पंडित सोकी जी आ गए। चलिए कुछ

1099
01:17:51,440 --> 01:17:56,080
और कोई सत्संग कर लेते हैं तब तक अभी तक तो

1100
01:17:56,080 --> 01:18:00,560
कुछ ऐसा ही रहा है पूरा एक घंटा 17 मिनट मेरे लिए

1101
01:18:00,560 --> 01:18:06,400
हां जी पंडित जी जय श्री राम

1102
01:18:06,400 --> 01:18:09,600
हेलो

1103
01:18:09,600 --> 01:18:13,600
कहां गए पंडित जी जय श्री राम आवाज आ

1104
01:18:13,600 --> 01:18:19,280
रही है अरे मेरा इशू है अभी जय श्री राम जय श्री राम

1105
01:18:19,280 --> 01:18:23,520
से आया हूं। तो पंडित जी एक

1106
01:18:23,520 --> 01:18:27,680
मूवी आई थी अगर करना है तो करना है कि नहीं? कन्वर्सेशन बढ़िया

1107
01:18:27,680 --> 01:18:31,760
चल रही थी इंटरेस्टिंग। अब बोलिए एक मूवी आई

1108
01:18:31,760 --> 01:18:37,120
थी वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई। जी।

1109
01:18:37,120 --> 01:18:42,600
उसमें एक डायलॉग था।

1110
01:18:42,600 --> 01:18:46,640
[हंसी] वो डायलॉग पता है क्या था? मुझे लग रहा है मुझे

1111
01:18:46,640 --> 01:18:51,120
लग रहा है एक नाम बताइए ये कहा

1112
01:18:51,120 --> 01:18:55,520
ये कहा जाता है जो कि

1113
01:18:55,520 --> 01:18:58,240
वो

1114
01:18:58,240 --> 01:19:02,320
भाई कुछ त्याग इत्यादि की बात होती है वहां पे कि भाई तुम इतना त्याग क्यों कर लेते

1115
01:19:02,320 --> 01:19:06,400
हो तुम इतना क्यों अपने आप को रगड़वा रहे हो तुम अपने आप पे क्यों

1116
01:19:06,400 --> 01:19:10,560
इतना अत्याचार कर रहे हो ऐसी एक बात आती है

1117
01:19:10,560 --> 01:19:15,350
तो जो फिल्म का नायक था ना वो कहता है

1118
01:19:15,350 --> 01:19:19,600
[हंसी] सबको ना सबको सुल्तान मिर्जा ना बनना पड़े इसलिए

1119
01:19:19,600 --> 01:19:24,400
किसी ना किसी को तो बनना ही पड़ेगा। [हंसी]

1120
01:19:24,400 --> 01:19:28,240
हां हां

1121
01:19:28,240 --> 01:19:32,320
बिल्कुल लेकिन ठीक है वो नहीं जरूरी था भी था ये

1122
01:19:32,320 --> 01:19:36,480
जो चल रहा था ना मतलब वो एक्चुअली मतलब हमने अभी क्या व्यवस्थित रूप से

1123
01:19:36,480 --> 01:19:40,800
व्यवस्थित रूप से चीजों को समझाओ सबसे बड़ी बात है कि अभी तीसरा पक्ष

1124
01:19:40,800 --> 01:19:44,960
तैयार है अभी वीरेंद्र देव दीक्षित जी दूसरा पक्ष अभी

1125
01:19:44,960 --> 01:19:48,960
ब्रह्मा कुमारी के अगेंस्ट उसके बाद ब्रह्मा वीरेंद्र देव दीक्षित जी का जो

1126
01:19:48,960 --> 01:19:53,120
वो मामला है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वो वो वो उनका

1127
01:19:53,120 --> 01:19:57,280
ही है। उससे भी फूट करके कुछ लोग उसमें भी आपस में क्लैश और अभी

1128
01:19:57,280 --> 01:19:57,780
एक

1129
01:19:57,760 --> 01:20:01,760
चौथा पक्ष मान लीजिए चौथा पक्ष भी तैयार है जो कह रहा है

1130
01:20:01,760 --> 01:20:05,840
कि जो उन्होंने कहा था क्या कहते हैं इन्होंने ये

1131
01:20:05,840 --> 01:20:09,840
वीरेंद्र दीक्षित जी ने कहा था जिन पे अभी मतलब मैंने कुछ कटिंग्स

1132
01:20:09,840 --> 01:20:13,840
देखी अखबार की उनप काफी सारे चार्जेस थे और जेल वगैरह का भी

1133
01:20:13,840 --> 01:20:18,720
कुछ सीन है। तो क्या कहते हैं

1134
01:20:18,720 --> 01:20:22,720
वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने कहा था वह भी मैं समझाऊ समझ रहे

1135
01:20:22,720 --> 01:20:26,800
हैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी कह रहे हैं कि लेखराज जी ने जो कहा था वो भी वो समझ

1136
01:20:26,800 --> 01:20:30,880
रहे है लेखराज जी नहीं समझ पाए और वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने कहा है वो वीरेंद्र

1137
01:20:30,880 --> 01:20:35,120
देव दीक्षित जी ने कोड वर्ड में कहा है वो मैं समझ रहा हूं उन्होंने किसी को नहीं समझाया अभी तक

1138
01:20:35,120 --> 01:20:39,440
ये भी बात हां तो ये अपने आप में एक उपनिषद हो गया ना

1139
01:20:39,440 --> 01:20:43,520
अरे भैया [हंसी] मतलब आप कितनी

1140
01:20:43,520 --> 01:20:47,520
महान आत्माएं कि अद्वैत वेदांत जैसे जब मर्म को आप नहीं समझ पाए आप

1141
01:20:47,520 --> 01:20:50,330
ये समझ गए

1142
01:20:50,330 --> 01:20:55,760
[हंसी] मैं बीचबीच में तारे रमी का बच्चा बन गया था

1143
01:20:55,760 --> 01:21:00,080
वो जब x² और y स्क्वायर नहीं x²

1144
01:21:00,080 --> 01:21:04,080
y स्क्वायर वगैरह उसको मैथमेटिक्स की प्रॉब्लम्स अंतरिक्ष में नहीं दिखाई देती थी

1145
01:21:04,080 --> 01:21:08,080
प्लेन उड़ाते हुए जब मैथ उसको पढ़ाई जाती थी तो वो उड़ता था

1146
01:21:08,080 --> 01:21:12,320
आसमान में लेकिन मैं सही बताऊं तो अगर जो शास्त्रों का अध्ययन

1147
01:21:12,320 --> 01:21:12,960
करता है ना

1148
01:21:12,960 --> 01:21:17,200
वो समझ जाएगा क्योंकि क्योंकि आप देखेंगे तो उसमें भी इंसेप्शन में इंसेप्शन

1149
01:21:17,200 --> 01:21:21,360
होता है। ठीक है? नारद जी और शरत

1150
01:21:21,360 --> 01:21:25,440
कुमार का संवाद हो रहा है कि भृगु जी

1151
01:21:25,440 --> 01:21:29,760
कुछ ऋषियों को बता रहे हैं जो नारद जी बता रहे हैं जो बाद में ब्रह्मा जी बताते

1152
01:21:29,760 --> 01:21:34,000
हैं किसी और को तो [हंसी] ये

1153
01:21:34,000 --> 01:21:38,000
हो रहा है। मगर बॉडी कब बदल गई? बॉडी

1154
01:21:38,000 --> 01:21:42,320
अचानक से कब बदल गई पता नहीं चला। और वो वही माता जी तो वो ये थोड़ा सा शॉकिंग

1155
01:21:42,320 --> 01:21:46,720
हो जाता है। आश्चर्यचकित कर देने वाला हो जाता है। खैर

1156
01:21:46,720 --> 01:21:52,720
कोई बात पूछिएगा उनसे हां खैर कोई बात नहीं अभी काफी

1157
01:21:52,960 --> 01:21:57,440
हां कन्वर्सेशन बढ़िया जा रही थी मतलब कांसेप्ट बहुत सारे

1158
01:21:57,440 --> 01:22:01,760
हम लोगों को समझ में आ रहा है बहुत सारी ऐसी चीजें है जो नई पता जानने

1159
01:22:01,760 --> 01:22:06,160
को मिली है ना हां क्योंकि वो डिस्प्यूट है ना मामला हम किसी पर्टिकुलर

1160
01:22:06,160 --> 01:22:10,400
एक चीज से सामना नहीं कर रहे हैं यहां पे ब्रह्मा कुमारी की मान्यता

1161
01:22:10,400 --> 01:22:14,720
से भी सामना है वीरेंद्र देव दीक्षित जी की मान्यता से भी सामना है

1162
01:22:14,720 --> 01:22:18,800
वीरेंद्र देव दीक्षित जी के जो दो पार्ट है उसमें जो दूसरा पार्ट नया पार्ट है

1163
01:22:18,800 --> 01:22:22,960
उससे भी सामना है और फिर फिर ये जो तीसरा पार्ट है इससे भी सामना

1164
01:22:22,960 --> 01:22:25,200
है।

1165
01:22:25,200 --> 01:22:28,080
तो सामना हमारा तीन चार तरह

1166
01:22:28,080 --> 01:22:32,080
की मेंटालिटी से है यहां पर। तो इसलिए समझना इस

1167
01:22:32,080 --> 01:22:36,240
बुद्धि को समझना बहुत वो था जरूरी और

1168
01:22:36,240 --> 01:22:40,800
मुझे लगता है कि हमने जो प्रश्न किए ना ठीक तरीके से तो एक क्रमबद्धता

1169
01:22:40,800 --> 01:22:44,880
से हम इन चीजों को समझ पाए। वरना वो इस मूड में नहीं थे। भाई साहब जो आए

1170
01:22:44,880 --> 01:22:49,360
थे वो तो अपना वो दैविक पक्षी

1171
01:22:49,360 --> 01:22:53,920
बताने वाले थे।

1172
01:22:53,920 --> 01:22:58,080
मगर उनको उनकी उनको फिर जब ये समझ में आया ना कि मैं मैं क्या

1173
01:22:58,080 --> 01:23:02,240
समझना चाहता हूं और क्या समझ रहा हूं तब उन्होंने समझाया भी उन्होंने इस बारे

1174
01:23:02,240 --> 01:23:06,720
में ठीक किया अच्छे से फिर समझाया

1175
01:23:06,720 --> 01:23:12,720
रहा हूं मैं जी जी मेरा आदर्श शो होगा कैसा लग रहा है आपको पहले ये बताइए

1176
01:23:13,040 --> 01:23:17,280
वाला अच्छा है क्या जी

1177
01:23:17,280 --> 01:23:21,360
बहुत अच्छा है ये जो याक के जो

1178
01:23:21,360 --> 01:23:27,360
ऊन होते हैं ना या केसे बनाए। अच्छा

1179
01:23:27,440 --> 01:23:31,520
बहुत बढ़िया बहुत अच्छे लग रहे हैं आप। बहुत एकदम डशिंग

1180
01:23:31,520 --> 01:23:36,000
और प्रभावशा

1181
01:23:36,000 --> 01:23:41,040
है। तो मुझे लगता है नहीं वो आएंगे।

1182
01:23:41,040 --> 01:23:45,280
हम लोग फिर उनको उनको अगर इस इसको

1183
01:23:45,280 --> 01:23:49,280
करवाना है अगर उनसे पूछिए अगर रिचार्ज वगैरह करवाना हो तो आप एक काम थोड़ा सा यहां पे

1184
01:23:49,280 --> 01:23:55,120
होस्ट करिए। मैं उनसे एक बार बात करके आता हूं। है ना? आप बात कर लीजिए।

1185
01:23:55,120 --> 01:24:01,120
आप तो अकेले छोड़ के चले गए मुझे। प्रश्न उत्तरी ही करते हैं फिर।

1186
01:24:03,040 --> 01:24:07,040
मैं एक काम करता हूं। मैं जग्गी वास वासुदेव जी बन जाता

1187
01:24:07,040 --> 01:24:11,040
हूं और कोई कैसा भी प्रश्न करे उत्तर देने की कोशिश

1188
01:24:11,040 --> 01:24:17,040
करूंगा।

1189
01:24:24,000 --> 01:24:28,000
चर्चा में वह बोल रहा था कि आप बहुत पवित्र आत्मा हो। बिल्कुल सही बात है।

1190
01:24:28,000 --> 01:24:32,240
जैसे उनका झूठ पकड़ा जाए वैसे या दुष्ट आत्मा

1191
01:24:32,240 --> 01:24:36,320
हो जाएंगे उनके लिए। चलिए वो तो देखते हैं। समय बताएगा कि क्या

1192
01:24:36,320 --> 01:24:40,400
है झूठ क्या सच है वह तो हम अभी डिसाइड नहीं कर सकते

1193
01:24:40,400 --> 01:24:42,960
ना।

1194
01:24:42,960 --> 01:24:48,960
आपका प्रश्न दीजिए। क्या प्रश्न है?

1195
01:24:52,400 --> 01:24:56,400
आपको ब्रह्मा बनना है। अगर आपको ब्रह्मा बनना है

1196
01:24:56,400 --> 01:25:00,640
तो हां बिल्कुल ब्रह्मा भी एक पद भी है। भगवान से मांगिए। ऐसे

1197
01:25:00,640 --> 01:25:04,720
पुरंदर नाम के जो व्यक्ति थे उन्होंने इंद्र की पद भी मान

1198
01:25:04,720 --> 01:25:08,720
ली। ऐसे मांग ली वैसे इंद्र बन गए। इस कल्प के तो वैसे आप ही प्रभा बन सकते

1199
01:25:08,720 --> 01:25:14,720
हैं अनेकों कल्पों के

1200
01:25:16,000 --> 01:25:19,440
राम राम गोयल जी

1201
01:25:19,440 --> 01:25:23,840
आपका प्रश्न क्या है संदेश जी आपने बताया नहीं क्षमा

1202
01:25:23,840 --> 01:25:29,840
करिएगा अगर मैं किसी का नाम गलत पढ़ दूं तो

1203
01:25:38,880 --> 01:25:43,120
आत्मा विनाशी है तो नहीं आत्मा वो भी इतनी सारी

1204
01:25:43,120 --> 01:25:47,280
मृत्यु लोक में मरने वाले काम पैदा

1205
01:25:47,280 --> 01:25:52,400
होने वाले ज्यादा कैसे तो

1206
01:25:52,400 --> 01:25:56,560
मृत्यु लोक यह आवश्यक नहीं है कि केवल

1207
01:25:56,560 --> 01:26:00,640
एक इसी यूनिवर्स का हो ऐसे अनंत कोटि ब्रह्मांड हैं जिसके

1208
01:26:00,640 --> 01:26:04,960
नायक है भगवान। ठीक है? और उसमें जीवन और मृत्यु

1209
01:26:04,960 --> 01:26:10,960
का जो क्रम है वह चलता रहता है। तो यह आप डिसाइड नहीं कर पाएंगे

1210
01:26:10,960 --> 01:26:15,280
डेथ्स इक्वल टू नंबर ऑफ बर्ड्स एटलीस्ट यहां पे है। क्योंकि

1211
01:26:15,280 --> 01:26:20,400
हर लोक में जीवन है। जीव है और वो अलग-अलग

1212
01:26:20,400 --> 01:26:24,400
बायोलॉजिकल और फिजिक्स के रूल्स के हिसाब से जीते

1213
01:26:24,400 --> 01:26:29,120
हैं। तो यह आवश्यक ये आवश्यक नहीं है कि

1214
01:26:29,120 --> 01:26:31,040
मृत्यु लोक में जो मर रहे हैं वो

1215
01:26:31,040 --> 01:26:35,040
वहां पर जी रहे हैं। पहली बात। दूसरी बात यह है जो आत्मा कभी नहीं मरती

1216
01:26:35,040 --> 01:26:39,040
और तो ये नई आत्मा नहीं ये वही ब्रह्म के अंश हैं जो अनगिनत स्वरूप

1217
01:26:39,040 --> 01:26:43,280
में है क्योंकि माया अनंत है तो वैसे ही इन आत्माओं ब्रह्म

1218
01:26:43,280 --> 01:26:47,440
के स्वरूप भी अनंत हैं। उस जैसे वैसे उसके नाम भी अनंत

1219
01:26:47,440 --> 01:26:51,760
है। है ना? जैसे भगवान का एक नाम है ना जो हम यूजली जपते हैं अचुत अनंत

1220
01:26:51,760 --> 01:26:55,840
गोविंद। तो उसमें जो यह नाम अनंत है वह यह अनंत

1221
01:26:55,840 --> 01:26:59,840
यही भाव दिखाता है कि ब्रह्म के जितने भी क्योंकि ब्रह्म जो

1222
01:26:59,840 --> 01:27:03,840
है जगत बनता भी है और बनाता भी है तो जगत भी अनंत माया

1223
01:27:03,840 --> 01:27:08,480
के रूप में रहता है और स्वयं तो है ही अनंत

1224
01:27:08,480 --> 01:27:12,720
ठीक है आत्मा अविनाशी है तो नई आत्मा

1225
01:27:12,720 --> 01:27:16,960
वो भी इतनी सारी मृत्यु लोक में मरने वाले काम उत्तर

1226
01:27:16,960 --> 01:27:22,160
दे दिया इसका ठीक है महाराज जी एक प्रश्न था कैसा

1227
01:27:22,160 --> 01:27:26,960
हम्म चलिए ठीक है मुझे लगता है वो आ नहीं रहे हैं और

1228
01:27:26,960 --> 01:27:31,520
अ इस चर्चा को कंटिन्यू करेंगे अगर वो इच्छुक

1229
01:27:31,520 --> 01:27:36,000
होंगे उनकी रुचि होगी आगे चीजों को बताने के लिए

1230
01:27:36,000 --> 01:27:40,080
ठीक है तो आज के लिए इतना ही पर्याप्त है एक

1231
01:27:40,080 --> 01:27:44,080
अच्छा साधक एक एक अच्छा

1232
01:27:44,080 --> 01:27:46,400
गृहस्थ में कैसे बने

1233
01:27:46,400 --> 01:27:50,400
वर्ण आश्रम मर्यादा सबसे पहला फाउंडेशन है ठीक

1234
01:27:50,400 --> 01:27:54,480
है वर्ण आश्रम को फॉलो करके ही आप एक अच्छे गृहस्थ

1235
01:27:54,480 --> 01:27:58,480
एक अच्छे सन्यासी आदि सब बन सकते हैं या आपके आने वाली जनरेशन

1236
01:27:58,480 --> 01:28:02,480
जो बन सकती है तो आश्रम भगवान की

1237
01:28:02,480 --> 01:28:06,480
सवा घंटे की भक्ति बताई है गुरुदेव ने सवा

1238
01:28:06,480 --> 01:28:10,560
घंटे का भजन का बल जरूर होना चाहिए अगर आप एक सनातनी बनना

1239
01:28:10,560 --> 01:28:14,720
चाहते हैं हिंदू बनना चाहते हैं साधक बनना चाहते हैं कल्याण प्राप्त करना

1240
01:28:14,720 --> 01:28:18,880
चाहते हैं स्वयं का और राष्ट्र की चिंता है परिवार की

1241
01:28:18,880 --> 01:28:23,040
चिंता है परिवार में सुख समृद्ध वृद्धि की भी आवश्यकता है। वेलनेस

1242
01:28:23,040 --> 01:28:27,040
की आवश्यकता है। हर चीज का निवारण एक ही है कि

1243
01:28:27,040 --> 01:28:31,360
आपकी जो नित्य वंदना है भगवान के प्रति वो कम से कम सवा घंटे की

1244
01:28:31,360 --> 01:28:35,440
क्रॉस हो जाए। इतना हो जाए फिर आगे तो फिर वो स्काई

1245
01:28:35,440 --> 01:28:39,440
इज योर लिमिट। मगर सवा घंटे की भक्ति

1246
01:28:39,440 --> 01:28:43,680
बहुत आवश्यक है। मिनिमम सवा घंटे तो बिल्कुल होना चाहिए। अब वो आप डिसाइड कर लीजिए। आपको सुबह,

1247
01:28:43,680 --> 01:28:47,760
दोपहर, शाम कैसे-कैसे करना है। है ना? हम और भक्ति में आप भगवान के नाम का

1248
01:28:47,760 --> 01:28:51,840
जप कर सकते हैं। अगर अगर अगर अगर आप

1249
01:28:51,840 --> 01:28:55,840
उपनीत है तो संध्या वंदन करें। है ना? संध्या वंदन

1250
01:28:55,840 --> 01:29:00,160
करते हुए जो है मंत्र जाप करें। गुरु गुरु से प्राप्त जो मंत्र

1251
01:29:00,160 --> 01:29:01,520
है वो

1252
01:29:01,520 --> 01:29:06,080
जाप करें और नहीं तो नाम जप तो है ही।

1253
01:29:06,080 --> 01:29:10,160
यदि अनाधिकारी हैं मंत्र इत्यादि में वैदिक

1254
01:29:10,160 --> 01:29:14,400
मंत्रों में या गुरु से दीक्षा नहीं हो पाई है तो भगवान के नाम लीजिए।

1255
01:29:14,400 --> 01:29:18,560
राम शिव राम राम राम राम शिव शिव शिव शिव

1256
01:29:18,560 --> 01:29:23,760
डी के मुरली कैरी वाइल्ड माइंड बेंडिंग स्टोरी

1257
01:29:23,760 --> 01:29:29,760
यू हैव गॉट द टू लेट देम फ्लूड इन योर ब्रेन

1258
01:29:30,080 --> 01:29:34,080
ठीक है किसी दिन आप हमसे WhatsApp पर आप संपर्क

1259
01:29:34,080 --> 01:29:38,080
करें इस विषय में ठीक है तो अभी वो भाई साहब अभी नहीं आ

1260
01:29:38,080 --> 01:29:42,080
रहे हैं और हम इस चर्चा को यहीं पर विराम दे रहे हैं और जब हमारा

1261
01:29:42,080 --> 01:29:46,240
वो पार्ट आया था ना तब तक काफी कुछ जानते जानते समय हो गया

1262
01:29:46,240 --> 01:29:50,400
फिर भी इसमें काफी रोचक चीजें आपको जानने को मिली होंगी इनफेटिव

1263
01:29:50,400 --> 01:29:54,800
वीडियो है कि आप समझ पाए हैं कि जो बीके का और आध्यात्मिक

1264
01:29:54,800 --> 01:29:58,880
विश्वविद्यालय का और जो क्या कहते

1265
01:29:58,880 --> 01:30:02,880
हैं अपने जो वीरेंद्र देव दीक्षित और लेखराज इनके बीच के क्लैश

1266
01:30:02,880 --> 01:30:07,040
का भी जो है सारी जानकारी आपको मिली और फिर अगर वो

1267
01:30:07,040 --> 01:30:11,280
भाई साहब आते हैं तो फिर आगे जो है इनके जो दार्शनिक विचार है या

1268
01:30:11,280 --> 01:30:15,440
जो इनके क्लेम्स हैं उन पर हम लोग फिर बात करेंगे। कि वह कैसे किस

1269
01:30:15,440 --> 01:30:16,800
प्रकार से अपनी बातों को सिद्ध

1270
01:30:16,800 --> 01:30:20,880
करते हैं। यह जो भाई साहब है इन्होंने भी ओपन चैलेंज वैसे शायद मेरे ख्याल

1271
01:30:20,880 --> 01:30:24,880
से दे रखा है। संभवत इन इन चीजों को लेकर के जो दावे कर रहे

1272
01:30:24,880 --> 01:30:29,120
हैं बिल्कुल ये सिद्ध कर सकते हैं। तो फिर जरूर है मिलेंगे इनसे भी।

1273
01:30:29,120 --> 01:30:33,760
बाकी आप लोग सब भक्ति करते रह

1274
01:30:33,760 --> 01:30:37,760
और आप जब भक्ति करते हैं भगवान की

1275
01:30:37,760 --> 01:30:42,160
तो उसमें अपनी भावना क्या रखेंगे कि स्वयं का भी कल्याण कर कल्याण

1276
01:30:42,160 --> 01:30:47,280
हो और राष्ट्र धर्म का भी कल्याण हो है ना चलिए

1277
01:30:47,280 --> 01:30:53,280
सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री कृष्ण हर हर महादेव

1278
01:31:02,760 --> 01:31:06,760
[संगीत]
