1
00:00:03,280 --> 00:00:08,880
जय श्री राम सभी को।

2
00:00:08,880 --> 00:00:13,040
तो कल वाले जो भाई साहब हैं वह दोबारा आए हैं

3
00:00:13,040 --> 00:00:17,200
ब्रह्मा कुमारी के प्रबल समर्थक और बहुत सारे प्रश्न थे जो कल

4
00:00:17,200 --> 00:00:22,800
अधूरे रह गए थे। आज हम उनको

5
00:00:22,800 --> 00:00:28,800
पूर्णता की ओर ले जाने का प्रयास करेंगे।

6
00:00:29,920 --> 00:00:35,920
जय श्री राम

7
00:00:39,600 --> 00:00:45,600
जय श्री राम जी जय श्री राम

8
00:00:48,080 --> 00:00:53,040
जी मेरी आवाज क्लियर है ना हां

9
00:00:53,040 --> 00:00:57,200
तो कल एक विषय चल रहा था कि

10
00:00:57,200 --> 00:01:01,200
आप सब धर्मों में कही हुई एक बात को आप

11
00:01:01,200 --> 00:01:05,280
मानते हैं जो सब धर्मों में होती है। तो

12
00:01:05,280 --> 00:01:09,520
इस कारण से आप उस बात को मानते हैं कि वो क्योंकि

13
00:01:09,520 --> 00:01:13,600
सब धर्म वाले बोल रहे हैं। और फिर बात ये हुई थी कि भाई किसी

14
00:01:13,600 --> 00:01:17,840
को भी धर्म की कैटेगरी में आप किस हिसाब से रखते हैं? तो आपका कहना था

15
00:01:17,840 --> 00:01:22,000
क्योंकि वो किसी अ क्या कहते हैं? आठ

16
00:01:22,000 --> 00:01:26,000
कला वाले व्यक्ति ने कही है इसलिए उसे रखते हैं और

17
00:01:26,000 --> 00:01:30,320
फिर वो बात अलग हुई कि आठ कला वाले व्यक्ति की सिद्धि

18
00:01:30,320 --> 00:01:34,320
कैसे होगी कि वो आठ कला का था तो उसमें आपने दो

19
00:01:34,320 --> 00:01:39,040
तीन चीजें कही थी एक कि उसे कई लोग मानते हैं

20
00:01:39,040 --> 00:01:43,120
तो उसका यह था कि लोग उसको तो नहीं मान रहे उसकी गलत चीजों को

21
00:01:43,120 --> 00:01:47,280
मान रहे हैं जो आप मानते नहीं कि वो उसकी चीजें हैं। दूसरी कि उसने

22
00:01:47,280 --> 00:01:51,440
अपने जैसा कईयों को बनाया है तो उसने बनाया है क्यों

23
00:01:51,440 --> 00:01:55,600
बनाया है इस विषय में भी कोई प्रमाण नहीं था हमारे पास फिर

24
00:01:55,600 --> 00:02:00,160
तीसरी आपने ये कहा जो सबसे ज्यादा प्रबल बात हुई वो ये हुई

25
00:02:00,160 --> 00:02:03,360
कि उन्होंने क्योंकि धर्म

26
00:02:03,360 --> 00:02:07,680
स्टार्ट किया था इसलिए वो आठ कला वाले थे

27
00:02:07,680 --> 00:02:13,520
तो मेरा ये कहना था कि जब

28
00:02:13,520 --> 00:02:17,680
किसी भी धर्म किसी भी तंत्र को या विचारधारा को

29
00:02:17,680 --> 00:02:21,680
धर्म मानने के लिए हम यह देख रहे हैं कि यदि उसे आठ कला

30
00:02:21,680 --> 00:02:25,840
वाले ने कहा है तो उसे धर्म माना जाएगा तो आठ कला वाला किसे

31
00:02:25,840 --> 00:02:29,840
माना जाए उस संबंध में हम धर्म कैसे ले लेंगे क्योंकि धर्म की तो अभी तक सिद्धि नहीं हुई है

32
00:02:29,840 --> 00:02:34,400
कि वो धर्म है कि नहीं है उसके लिए ही तो हम आठ कला पर पहुंचे हैं

33
00:02:34,400 --> 00:02:39,840
तो ये सब बातें चल रही थी तो अभी

34
00:02:39,840 --> 00:02:43,760
अ

35
00:02:43,760 --> 00:02:47,840
हां अभी एक एक बार फिर से थोड़ा रिवाइज कर लेते हैं कि

36
00:02:47,840 --> 00:02:52,160
जो मैंने यह सवाल पूछा है कि आप

37
00:02:52,160 --> 00:02:56,880
किसी भी बात को जैसे आपने का कहना है कि जो भी बात

38
00:02:56,880 --> 00:03:01,200
चार चीजों में समान होती है उसको हम जो है वो मान लेते हैं धर्म

39
00:03:01,200 --> 00:03:06,320
ये चार जो आपने नाम लिए धर्म के हां

40
00:03:06,320 --> 00:03:10,320
वो चार मुख्य धर्म बताया वैसे तो छोटे-छोटे धर्म मंत्र पथ

41
00:03:10,320 --> 00:03:14,720
बहुत हैं लेकिन मुख्य चार है जो

42
00:03:14,720 --> 00:03:18,960
बरा धर्म है मुख चार है। नहीं नहीं तो बुद्ध को इसमें नहीं गिनते।

43
00:03:18,960 --> 00:03:22,960
पांच मानते हैं कि चार मानते हैं मुख्य

44
00:03:22,960 --> 00:03:27,040
देखिए अगर सिख को जोड़ देते हैं सिख 500 वर्ष पहले स्थापन हुआ था।

45
00:03:27,040 --> 00:03:31,120
अगर जोड़ते हैं तो पांच हो जाता है। नहीं तो चार ही है। जो सबसे पुराना और

46
00:03:31,120 --> 00:03:35,360
मुख्य अच्छा एक विषय ये भी था कि बुद्ध का बुद्ध के बारे में ब्रह्मा

47
00:03:35,360 --> 00:03:39,920
कुमारी का मानना है कि वो परमेश्वर को मानते थे।

48
00:03:39,920 --> 00:03:44,160
है ना? जी जी परमात्मा को ज्योति रूप में मानते थे। ऐसा

49
00:03:44,160 --> 00:03:48,320
हमें बताया गया है। ठीक है? ये ब्रह्मा कुमारी का कहना है।

50
00:03:48,320 --> 00:03:52,560
जबकि हमें बुद्ध के इतिहास में ऐतिहासिक वर्णन यही मिलता है सभी प्राप्त सभी

51
00:03:52,560 --> 00:03:56,880
तरह से कि बुद्ध ने किसी भी ईश्वरीय सत्ता अथवा जो आत्मा

52
00:03:56,880 --> 00:03:58,960
की सत्ता की बात स्वीकार नहीं की

53
00:03:58,960 --> 00:04:04,880
है। हो सकता है। आपकी बात सही हो सकता है।

54
00:04:04,880 --> 00:04:10,400
तो अब बात यह है कि

55
00:04:10,400 --> 00:04:14,000
आपका कहना है कि

56
00:04:14,000 --> 00:04:18,000
हम वो जो चारों धर्म चार मुख्य धर्मों में जो एक

57
00:04:18,000 --> 00:04:22,320
बात होती है उसको मानते हैं। तो आप मुझे बताएं कि

58
00:04:22,320 --> 00:04:26,400
जैसे कौन सी एक बात है जो चारों में समान है जिसको आपने धर्म माना

59
00:04:26,400 --> 00:04:30,480
है। देखिए मुख्य चार धर्म जो माना गया

60
00:04:30,480 --> 00:04:34,640
है ना उसमें मुख्य एक बात है कि सभी परमात्मा को ज्योति

61
00:04:34,640 --> 00:04:38,720
बिंदु मानते हैं। ज्योति स्वरूप मानते हैं। ज्योति की पूजा करते

62
00:04:38,720 --> 00:04:43,440
हैं। ज्योति के रूप में उसको मान्यता दिया गया है और वास्तव में

63
00:04:43,440 --> 00:04:47,440
शायद मान इस्लाम में

64
00:04:47,440 --> 00:04:52,400
इस्लाम में इस्लाम भी वो संग असमद

65
00:04:52,400 --> 00:04:56,480
इस्लाम में ज्योति की बात कहां पे मानी है? संग

66
00:04:56,480 --> 00:05:00,560
असमत नामक पत्थर दीवार पे चिपका हुआ मक्का मदीना में और मुसलमान

67
00:05:00,560 --> 00:05:05,120
लोग जाके उसी को चूमते हैं पूजा करते हैं। ज्योति कहां है?

68
00:05:05,120 --> 00:05:09,120
वही बिंदु रूप में पत्थर चिपका दिया। ज्योति मान लीजिए जैसे

69
00:05:09,120 --> 00:05:13,280
हमारा शिवलिंग ज्योति का ही प्रतीक तो है। नहीं उन्होंने माना

70
00:05:13,280 --> 00:05:14,080
है

71
00:05:14,080 --> 00:05:18,480
उन्होंने माना है ज्योति का प्रतीक है। देखो

72
00:05:18,480 --> 00:05:24,240
उन्होंने माने या ना माने हमें बताया गया है कि वो ज्योति रूप प्रक

73
00:05:24,240 --> 00:05:28,240
मेरी बात समझिए आप आपने क्लेम किया। आपने क्लेम

74
00:05:28,240 --> 00:05:32,560
किया आपने क्लेम किया कि वो ज्योति की ज्योति स्वरूप

75
00:05:32,560 --> 00:05:36,640
मानते हैं। ज्योति स्वरूप की पूजा करते हैं। ठीक है? अब मैंने पूछा

76
00:05:36,640 --> 00:05:40,720
कि ज्योति ज्योति स्वरूप मुसलमान में कहां पर है? आपने कहा कि

77
00:05:40,720 --> 00:05:44,960
वो में जाते हैं जो मक्का में वहां पर जाकर जो पत्थर है उसको चूमते

78
00:05:44,960 --> 00:05:49,040
हैं। तो बात यह है कि पहली बात तो पत्थर और ज्योति में

79
00:05:49,040 --> 00:05:53,440
अंतर है। पहली बात अब आपने कहा कि वो पत्थर

80
00:05:53,440 --> 00:05:57,760
एक मिनट अब आपने कहा कि वो पत्थर जो है वो ज्योति का ही प्रतीक

81
00:05:57,760 --> 00:06:01,840
है। ठीक है? हां। तो जब कोई चीज किसी

82
00:06:01,840 --> 00:06:05,920
की प्रतीक है तो हम जिस चीज को प्रतीक

83
00:06:05,920 --> 00:06:09,920
मान रहे हैं उस चीज को उसी का प्रतीक मान रहे हैं।

84
00:06:09,920 --> 00:06:14,080
दूसरा सामने वाला जिस पर हम क्लेम कर रहे हैं कि वो भी इसको ज्योति का ही प्रतीक मान

85
00:06:14,080 --> 00:06:18,480
रहा है। ये कंफर्मेशन आपने ली है। हां हमारे

86
00:06:18,480 --> 00:06:22,640
लिए है। क्योंकि हमारे हमारे मंदिर में भी शिवलिंग

87
00:06:22,640 --> 00:06:27,280
के रूप में जो भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं? मुसलमान उसको ज्योति स्वरूप

88
00:06:27,280 --> 00:06:29,440
समझकर ज्योति के प्रतीक

89
00:06:29,440 --> 00:06:33,440
के रूप में मानते हैं या कुछ कोई और किसी और चीज के रूप में उसको

90
00:06:33,440 --> 00:06:37,840
मानते हैं। वो मैं ये पूछ रहा हूं। आपने कहा मुसलमान

91
00:06:37,840 --> 00:06:41,840
भी आपने कहा मुसलमान भी ऐसा कर रहा है।

92
00:06:41,840 --> 00:06:46,080
आपने कहा आपने कहा मुसलमान भी ऐसा कर रहा है।

93
00:06:46,080 --> 00:06:50,080
ठीक है? तो आपने मुसलमान से कंफर्म किया कि

94
00:06:50,080 --> 00:06:54,480
मुसलमान उस पत्थर को ज्योति का स्वरूप मानता है या नहीं?

95
00:06:54,480 --> 00:06:59,280
हां मानता है या नहीं मानता यह हमें कंफर्म नहीं है। हमने उनसे कोई कन्फर्मेशन

96
00:06:59,280 --> 00:07:03,440
आप यह दावा कैसे कर सकते हो कि वह ज्योति स्वरूप की पूजा कर रहा है। हो

97
00:07:03,440 --> 00:07:07,440
सकता है वो पत्थर की पत्थर को हो सकता है वो

98
00:07:07,440 --> 00:07:11,520
पत्थर को पत्थर समझ के ही पूज रहा हो। फिर क्यों उसको अपना तो फिर

99
00:07:11,520 --> 00:07:15,840
अपना क्यों थोप रहे हो कि वो ज्योति मान के पूज रहा है उसे। इसलिए कि ज्योति

100
00:07:15,840 --> 00:07:20,320
रूप में वो बना के दिखाया गया। हम भी शिवलिंग को पूजा करते हैं। वो ज्योति का ही रूप है।

101
00:07:20,320 --> 00:07:24,400
मैं आपसे पूछ क्या रहा हूं? आपने जब उससे कंफर्म नहीं किया कि तुम

102
00:07:24,400 --> 00:07:28,720
पत्थर को पत्थर समझ के चूम रहे हो या फिर ज्योति का प्रतीक

103
00:07:28,720 --> 00:07:32,800
समझ के पूज रहे हो तो फिर आप उसकी ओर से क्लेम क्यों कर रहे हो कि वो ज्योति

104
00:07:32,800 --> 00:07:36,800
समझ के उसको पूज रहा है और फिर उस बात को फिर उस बात

105
00:07:36,800 --> 00:07:40,800
को ले रहे हो कि उसके यहां हमारे यहां पे सेम है। इसलिए कर रहे

106
00:07:40,800 --> 00:07:44,560
हैं कि हमारे परमपिता परमात्मा स्वयं पर काया

107
00:07:44,560 --> 00:07:48,640
में प्रवेश करके बताया कि वो इसे मान के पूजा कर रहे हैं। इसलिए वही

108
00:07:48,640 --> 00:07:52,640
मैं कह रहा हूं। इसीलिए बात अटकी थी कल इतनी लंबी सुनिए कुल मिलाकर

109
00:07:52,640 --> 00:07:57,120
के जो एक मुस्लिम है एक मिनट जो एक मुस्लिम

110
00:07:57,120 --> 00:08:01,120
है वो इस पेन को इस पेन को अगर वो किसी

111
00:08:01,120 --> 00:08:05,120
भी वजह से पूज रहा है या उसको सम्मान दे रहा

112
00:08:05,120 --> 00:08:09,200
है तो क्योंकि आपके बाबा ने ये बताया है पर काया में

113
00:08:09,200 --> 00:08:13,440
प्रवेश करके कि वो ज्योति का स्वरूप समझ के पूज रहा है

114
00:08:13,440 --> 00:08:17,920
इसलिए आप ये कहोगे कि मैं ये जो मुसलमान है ज्योति स्वरूप

115
00:08:17,920 --> 00:08:21,920
मान के पेन की पूजा पूजा कर रहा है। पेन को सम्मान दे रहा है। ठीक। भले

116
00:08:21,920 --> 00:08:26,160
ही भले ही मैं यह कहूं कि मैं ज्योति स्वरूप का

117
00:08:26,160 --> 00:08:30,240
समझ के इसकी पूजा नहीं कर रहा हूं। मैं इसको पेन समझ के ही

118
00:08:30,240 --> 00:08:34,240
पूजा कर रहा हूं। मगर आपके बाबा अगर ये कह देंगे कि

119
00:08:34,240 --> 00:08:38,480
इसकी ज्योति समझ के ये पूज रहा है तो वो बात आपके लिए मान्य है।

120
00:08:38,480 --> 00:08:42,560
मान्य है। बिल्कुल। क्यों मान्य है? क्योंकि परमात्मा

121
00:08:42,560 --> 00:08:46,800
मतलब कि एक एक मिनट एक मिनट। मतलब कि मैं आपको ये कहूं कि

122
00:08:46,800 --> 00:08:50,880
आप जो है अ रात को रोज चोरी करने का

123
00:08:50,880 --> 00:08:55,120
मन बनाते हो। आपके रात में आपको रोज रात में चोरी

124
00:08:55,120 --> 00:08:59,360
और डकैती डालने का प्लान बनाते हो। तो ये बात मैं समाज

125
00:08:59,360 --> 00:08:59,860
को बता

126
00:08:59,760 --> 00:09:04,400
दूं आपके आपके माध्यम से मुझे किसी दिव्य शक्ति ने ये बात कही है।

127
00:09:04,400 --> 00:09:08,480
पर काया में प्रवेश करके जी नहीं ऐसा नहीं हो

128
00:09:08,480 --> 00:09:12,720
सकता है। क्यों परमात्मा ये साधारण बातें नहीं कर सकता।

129
00:09:12,720 --> 00:09:17,040
परमात्मा का बातें दिव्य होता है। अलौकिक होता है।

130
00:09:17,040 --> 00:09:21,600
वो इस से अलग होता है। सारी बातें तो

131
00:09:21,600 --> 00:09:26,000
ठीक है। तो ठीक है। अलौकिक अलौकिक अलौकिक बातें सुन लीजिए

132
00:09:26,000 --> 00:09:30,160
कि आप रोज रात में परमात्मा को हटाकर उसकी गद्दी में बैठने

133
00:09:30,160 --> 00:09:34,560
की योजना बनाते हो। आप जी हम

134
00:09:34,560 --> 00:09:38,800
ये अलौकिक हो गई। नहीं अलौकिक कैसे हो गया? हम परमात्मा

135
00:09:38,800 --> 00:09:42,800
नहीं हो सकते कभी भी। नहीं मैं ये नहीं कह रहा आप बोल सकते

136
00:09:42,800 --> 00:09:47,760
हो मैं ये नहीं कह रहा मैं कह रहा हूं कि आप ऐसी प्लानिंग करते हो रोज

137
00:09:47,760 --> 00:09:51,920
जी ऐसा प्लानिंग क्योंकि मुझे क्योंकि मुझे क्योंकि मुझे

138
00:09:51,920 --> 00:09:55,920
किसी ने बताया है जिस पर परकाया में प्रवेश करके मुझे किसी दिव्य

139
00:09:55,920 --> 00:10:00,000
शक्ति ने बताया है तो ये बातें तो ये बातें छपवा

140
00:10:00,000 --> 00:10:04,400
दूं अखबारों में प्रिंट मीडिया में कि आप जो है भगवान की गद्दी हतियाना

141
00:10:04,400 --> 00:10:08,960
चाहते हो भगवान बनना चाहते हो नहीं नहीं जनाब

142
00:10:08,960 --> 00:10:13,200
भगवान जो ऐसी बातें नहीं करता है। छोटी मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं

143
00:10:13,200 --> 00:10:14,800
आप ऐसी गलत बात रोज

144
00:10:14,800 --> 00:10:19,040
कर रहे हो। नहीं कर सकते ना हम। अरे तो

145
00:10:19,040 --> 00:10:23,120
ये तो आप कह रहे हो ना। हम तो उसकी मानेंगे ना जिसने आकर के हम परकाय

146
00:10:23,120 --> 00:10:27,200
में प्रवेश करके हमको बताया है। नहीं जो जो समझदार

147
00:10:27,200 --> 00:10:31,440
होगा हमारी बातों को परख लेगा। वो कि ये भगवान द्वारा ही कहा गया है।

148
00:10:31,440 --> 00:10:35,760
साहब आप देखिए अभी अभी बात क्या हो रही है? हमने कहा मुसलमान पत्थर

149
00:10:35,760 --> 00:10:40,080
को चूम रहा है। आप कह रहे हो ज्योति स्वरूप समझ के चूम रहा है। मुसलमान कह रहा है नहीं

150
00:10:40,080 --> 00:10:44,240
ये हमारा पवित्र पत्थर है। कोई ज्योति ज्योति के स्वरूप में नहीं पूज रहा हूं। मैं इसको

151
00:10:44,240 --> 00:10:48,240
पवित्र पत्थर समझ मैं इसको पत्थर समझ के ही पूज रहा हूं।

152
00:10:48,240 --> 00:10:52,480
मगर आपने कहा कि क्योंकि हमारे बाबा ने कहा है

153
00:10:52,480 --> 00:10:57,040
इसलिए हम इसको यह मानेंगे कि वो भले ही कहता कहता मर जाए

154
00:10:57,040 --> 00:11:01,280
मुसलमान कि मैं इसको पत्थर समझ के चूम रहा हूं। वो भले ही कहता

155
00:11:01,280 --> 00:11:05,760
कहता मर जाए मगर हम ये मानेंगे कि वो ज्योति स्वरूप समझ के पूज रहा है। इसका मतलब

156
00:11:05,760 --> 00:11:10,080
मैं अपने मन में क्या सोच रहा हूं इस विषय में मेरी गवाही मान्य नहीं होगी बल्कि

157
00:11:10,080 --> 00:11:14,480
आपके बाबा ने आ के परकाय में प्रवेश करके जो बोल दिया वो बात मान्य होगी।

158
00:11:14,480 --> 00:11:18,960
तो इसी प्रकार से आप अपने मन में आप

159
00:11:18,960 --> 00:11:23,120
अपने मन में ये जो मैं आप पर आरोप

160
00:11:23,120 --> 00:11:27,520
लगा सकता हूं कि आप जो ब्रह्मा कुमारी जाने का दिखावा करते हो आध्यात्मिक

161
00:11:27,520 --> 00:11:29,840
वगैरह जाने का वो दिखावा

162
00:11:29,840 --> 00:11:33,840
है बल्कि आप वहां इसलिए जाते हो जिससे कि लोगों का धन

163
00:11:33,840 --> 00:11:38,000
दौलत वगैरह अपने पास संचित कर सके। नहीं वो

164
00:11:38,000 --> 00:11:42,160
हमारे व्यवहार से हमारे स्वभाव से लोगों को पता लग जाएगा। अगर ऐसा

165
00:11:42,160 --> 00:11:46,240
है तो पता लग जाएगा। को मुसलमान के किस स्वभाव से पता लगा कि वो जो है

166
00:11:46,240 --> 00:11:50,880
वास्तव में ज्योति स्वरूप की पूजा कर रहा है। पत्थर को नहीं चूम रहा है। वो

167
00:11:50,880 --> 00:11:54,960
देखिए वो जब मुसलमान के धर्म की स्थापना किया गया

168
00:11:54,960 --> 00:11:58,960
था उस समय हम तो थे नहीं। हम उसको जानते नहीं है। लेकिन जब आपको किसी

169
00:11:58,960 --> 00:12:03,120
के बारे में सीधी सी बात है ना जब आपको किसी के बारे में कुछ मालूम नहीं है तो

170
00:12:03,120 --> 00:12:07,440
क्लेम मत करो। इसलिए

171
00:12:07,440 --> 00:12:11,440
इसलिए कर रहे हैं। कारण बता देता हूं। 2500 वर्ष पहले उसकी स्थापना

172
00:12:11,440 --> 00:12:15,520
हुई है। अरे भैया 2500 नहीं 1400 पहले

173
00:12:15,520 --> 00:12:21,520
इसको ठीक कर लो आप 1400

174
00:12:23,840 --> 00:12:29,840
1400 वर्ष पहले हुई है इस्लाम धर्म की स्थापना हां

175
00:12:30,640 --> 00:12:34,960
इस्लाम धर्म से पहले कौन सा धर्म आया था? अरे

176
00:12:34,960 --> 00:12:39,600
अब दूसरी बातें करने लगे

177
00:12:39,600 --> 00:12:44,880
इस्लाम की स्थापना कहां से मानोगे

178
00:12:44,880 --> 00:12:49,200
कहां से जहां से भी हो मतलब 2500 वर्ष पहले उसकी

179
00:12:49,200 --> 00:12:55,200
कौन सी घटना है कौन सी घटना है जिससे मानोगे इस्लाम की स्थापना

180
00:12:56,160 --> 00:13:00,240
देखो 2500 वर्ष की हमें थोड़ी पता व्यर्थ की बातें मत करो व्यर्थ की

181
00:13:00,240 --> 00:13:04,240
बातें हैं ये टॉपिक बदल जाएगा अभी बात ये टॉपिक ये चल

182
00:13:04,240 --> 00:13:08,240
रहा है कि व्यक्ति के बारे

183
00:13:08,240 --> 00:13:12,400
में वो मन में क्या सोच रहा है? इस विषय में व्यक्ति नहीं बताएगा। आप

184
00:13:12,400 --> 00:13:16,560
बताओगे क्योंकि आपके आपके बाबा जी ने कहा कि ये ये सोच रहा है मन

185
00:13:16,560 --> 00:13:18,960
में।

186
00:13:18,960 --> 00:13:23,040
इसी प्रकार से मैं भी इसी प्रकार से मैं भी कह रहा हूं कि आप जो है अपना

187
00:13:23,040 --> 00:13:27,040
धंधा चलाने के लिए बीके की बातें करते हैं। वास्तविकता में कोई

188
00:13:27,040 --> 00:13:31,280
आध्यात्मिक व्यक्ति आप नहीं है। वो बातें तर्क पूर्ण भी होना चाहिए।

189
00:13:31,280 --> 00:13:34,480
वो ज्योति बिंदु रूप

190
00:13:34,480 --> 00:13:38,720
फिर आप जो है मुसलमान द्वारा उस पत्थर को ज्योति

191
00:13:38,720 --> 00:13:42,960
मानने के संबंध में तर्क बताइए क्या तर्क है ज्योति

192
00:13:42,960 --> 00:13:46,960
मान नहीं रहे ज्योति रूप में दिखाया गया बिंदी परमात्मा ज्योति बिंदु

193
00:13:46,960 --> 00:13:51,120
है तो परमात्मा को ज्योति हर कोई मान रहे हैं मैंने

194
00:13:51,120 --> 00:13:55,120
अभी क्या है मैंने अभी क्या कहा जब आप आप अपने मन

195
00:13:55,120 --> 00:13:59,360
में क्या सोच रहे हो इस विषय में आपने तर्क मांगे मेरी बात पर विश्वास

196
00:13:59,360 --> 00:14:03,440
नहीं किया तर्क मांगे अब अब मुसलमान अपने मन में क्या सोच

197
00:14:03,440 --> 00:14:07,920
रहा है? उसको ज्योति मान रहा है कि नहीं मान रहा है? इस संबंध में मैं तर्क मान रहा हूं।

198
00:14:07,920 --> 00:14:11,200
मैं तर्क मांग रहा हूं। बताइए तर्क क्या है?

199
00:14:11,200 --> 00:14:15,440
ठीक है? वो ज्योति ना मानता हो लेकिन हमें ज्योति रूप में दिख रहा है इसलिए हमने

200
00:14:15,440 --> 00:14:19,440
मान लिया और परमात्मा ने हमें ज्योति रूप में कैसे दिख

201
00:14:19,440 --> 00:14:24,400
रहा है वो? वो पत्थर ज्योति रूप में कहां से दिख रहा है? अभी तो कह रहे थे वो प्रतीक है उसका।

202
00:14:24,400 --> 00:14:28,400
ज्योति बिंदु ज्योति बिंदु ज्योति का मतलब हुआ प्रकाश जैसा बिंदु

203
00:14:28,400 --> 00:14:32,480
जैसा हुआ है डॉट डॉट बिंदु मतलब डॉट वो डॉट नहीं है वो

204
00:14:32,480 --> 00:14:36,720
पत्थर है वो डॉट भी नहीं है बिंदु नहीं है

205
00:14:36,720 --> 00:14:40,800
नहीं ज्योति है प्रकाश नहीं है हमारा शिवलिंग भी पत्थर नहीं है

206
00:14:40,800 --> 00:14:45,040
लेकिन हम उसको ज्योति हमारे यहां पे लिखा हमारे यहां पे लिखा

207
00:14:45,040 --> 00:14:49,200
है कि वो ज्योति स्वरूप परमात्मा का प्रतीक है लिखा है हमारे

208
00:14:49,200 --> 00:14:53,200
यहां हम मानते हैं कि वो परमात्मा का प्रतीक है तब उसे तब

209
00:14:53,200 --> 00:14:57,200
तब शिवलिंग उस पत्थर को तब वो जो शिवलिंग है उसको हम

210
00:14:57,200 --> 00:15:01,200
जोड़ते हैं कि वो ज्योति से मैच खाता है। मगर उसके यहां पे

211
00:15:01,200 --> 00:15:05,280
नहीं लिखा है। उसके यहां पे नहीं लिखा है कि ये ज्योति स्वरूप

212
00:15:05,280 --> 00:15:09,360
परमात्मा का प्रतीक है। उसमें हम नहीं जाना चाहेंगे

213
00:15:09,360 --> 00:15:13,360
क्योंकि उसमें टाइम खराब है। अरे भाई तो नहीं जाना चाहेंगे तो आप यह कहो

214
00:15:13,360 --> 00:15:17,360
ना कि भैया उसके यहां क्या है क्या नहीं है। नहीं पता फिर झूठा क्लेम क्यों

215
00:15:17,360 --> 00:15:21,440
कर रहे हो? जिस बारे में आपको पता नहीं है वो क्लेम क्यों कर रहे हो? या फिर

216
00:15:21,440 --> 00:15:25,440
ये मान लो कि हम किसी के बारे में भी कोई भी क्लेम कर सकते हैं क्योंकि

217
00:15:25,440 --> 00:15:26,400
हमारे बाबा जी आकर

218
00:15:26,400 --> 00:15:30,560
के परखा में प्रवेश करके बताते हैं वो हम क्लेम करेंगे। हां हां

219
00:15:30,560 --> 00:15:34,640
बिल्कुल बिल्कुल वही बता इसलिए अब अगर ऐसा आप कर सकते

220
00:15:34,640 --> 00:15:38,720
हैं तो मैं भी कह रहा हूं मेरे पास एक मेरे बाबा जी है जो परकाय में प्रवेश

221
00:15:38,720 --> 00:15:42,800
करके आते हैं और ये बताते हैं कि आप धंधेबाज हो फिर मान ले इस

222
00:15:42,800 --> 00:15:47,040
बात को। देखो आप तो मांग सकते हो लेकिन

223
00:15:47,040 --> 00:15:51,280
तर्क अगर लगाया जाए तो तर्क आप कहां दे रहे हो बाबा

224
00:15:51,280 --> 00:15:56,080
जी के बाबा जी के कहे के अलावा आप तर्क कहां दे रहे हो

225
00:15:56,080 --> 00:16:00,080
बाबा जी का बात के कहे के अलावा

226
00:16:00,080 --> 00:16:04,160
आप मुसलमान द्वारा उस पत्थर को ज्योति स्वरूप मानने

227
00:16:04,160 --> 00:16:08,240
के संबंध में तर्क कहां दे रहे हो मैं यह कह रहा हूं

228
00:16:08,240 --> 00:16:12,320
कि मेरा पिता कौन है हमें नहीं पता है लेकिन हमारी मां बताया कि ये तुम्हारे पिता

229
00:16:12,320 --> 00:16:16,400
है तो हमने माना ना उसी तरह से परमपिता परमात्मा स्वयं आ के बता रहे

230
00:16:16,400 --> 00:16:20,960
हैं तो हमें मानना चाहिए बस ये कहना है तो वो परमपिता परमात्मा

231
00:16:20,960 --> 00:16:24,960
ही है ये आप मानते हो ना मैं तो मानता हूं कि मेरे पास जो परकाय में प्रवेश

232
00:16:24,960 --> 00:16:28,960
करके मुझे बता रहे हैं मैं वो मानता हूं उनको मानता हूं वो परमपिता है और

233
00:16:28,960 --> 00:16:34,240
वो बता रहे हैं कि आप लोग धंधेबाज हो बीके वाले तो क्या

234
00:16:34,240 --> 00:16:38,240
वो माने कि आपकी स्वतंत्रता है हम उसे मैं उसको किताबों में छपवा

235
00:16:38,240 --> 00:16:41,440
दूं आपके नाम से लक्ष्मी शर्मा जो है धंधेबाज व्यक्ति

236
00:16:41,440 --> 00:16:45,680
है लोगों को मूर्ख बनाता है पाखंडी हैवा सकते

237
00:16:45,680 --> 00:16:49,760
हैं इसमें तो आपका अनुचित अनुचित तो नहीं होगा

238
00:16:49,760 --> 00:16:53,840
नहीं नहीं आपका रिमोट कंट्रोल हमारे हाथ में थोड़ी है आप जैसे मर्जी

239
00:16:53,840 --> 00:16:58,720
आप पुलिस स्टेशन तो नहीं जाएंगे मानहानि का दावा इत्यादि तो नहीं करेंगे

240
00:16:58,720 --> 00:17:02,720
नहीं सर नहीं हम कोई विरोधाभासी

241
00:17:02,720 --> 00:17:07,440
बात नहीं होगी हमारे परमात्मा ने ये भी बताया कोई आपत्ति

242
00:17:07,440 --> 00:17:13,440
आपको कोई आपको कोई आपत्ति नहीं है कि आपको झूठा

243
00:17:13,520 --> 00:17:17,680
और ये सब षड्यंत्र करने वाला कह दिया जाए। हां

244
00:17:17,680 --> 00:17:21,680
कोई आपत्ति नहीं। आप कर सकते हैं। आप स्वतंत्र हैं। वो आप अपने लिए करेंगे।

245
00:17:21,680 --> 00:17:25,760
हम अपने लिए करेंगे। सबका धर्म अलग-अलग है। चलिए ठीक है। ये बात

246
00:17:25,760 --> 00:17:29,760
हो गई। अब अब आप ये बताइए जी। कि

247
00:17:29,760 --> 00:17:34,400
आपने कहा था कि किसी भी किसी भी तंत्र को किसी भी विचारधारा

248
00:17:34,400 --> 00:17:38,400
को जी। धर्म की कैटेगरी

249
00:17:38,400 --> 00:17:42,640
में मानने के लिए आपने कहा क्योंकि वो एक आठ कला वाले व्यक्ति द्वारा स्थापित

250
00:17:42,640 --> 00:17:47,040
किया गया है। इसलिए वो धर्म है। जी जी जी है

251
00:17:47,040 --> 00:17:51,680
ना? जी हां तो

252
00:17:51,680 --> 00:17:56,160
इसका तर्क जानना चाहेंगे? बताइए।

253
00:17:56,160 --> 00:17:56,800
हां।

254
00:17:56,800 --> 00:18:01,040
ये पूरी सृष्टि जो है परमात्मा ने हमें बताया 5000 साल का हूबहू

255
00:18:01,040 --> 00:18:05,040
रिपीट होता है। हर 5000 साल पे हूबहू रिपीट

256
00:18:05,040 --> 00:18:09,360
होता है। मतलब अभी आप जिस नाम से जिस रूप से जिस समय

257
00:18:09,360 --> 00:18:13,360
जिस स्थान से बात कर रहे हैं 5000 साल पहले भी किया था आपने

258
00:18:13,360 --> 00:18:17,760
और आने वाले 5000 साल के बाद भी करेंगे। क्योंकि यह सृष्टि ड्रामा

259
00:18:17,760 --> 00:18:21,840
हूबहू रिपीट होता है। इसलिए किसी का कोई दोष नहीं होता है। कोई कुछ

260
00:18:21,840 --> 00:18:25,840
भी कर रहा है वो वास्तव में वो दोषी नहीं है। ड्रामा अनुसार

261
00:18:25,840 --> 00:18:30,080
ही कर रहा है। क्योंकि फिक्स है रोल उसका और उसका जिसका रोल

262
00:18:30,080 --> 00:18:34,480
जो फिक्स है वही करेगा। हमारे कहने से वो चेंज नहीं होगा।

263
00:18:34,480 --> 00:18:38,880
ये ड्रामा अटल है अविनाशी है और फिक्स

264
00:18:38,880 --> 00:18:43,040
है। ये भी बताया है बाबा ने। तो इसलिए अगर कोई बुरा करता है हमारे लिए या

265
00:18:43,040 --> 00:18:47,360
आपके लिए तो वो अपने लिए करता है और उसका रोल है। उसमें उसका कोई दोष

266
00:18:47,360 --> 00:18:50,080
नहीं है।

267
00:18:50,080 --> 00:18:54,160
वो उसका सजा उसको अपने आप मिलेगा। वो ड्रामा का काम है। हमारा

268
00:18:54,160 --> 00:19:00,160
काम नहीं है। किसी के गलती को सुधारना हमारा काम नहीं है।

269
00:19:02,560 --> 00:19:06,880
तो इसी प्रकार से सृष्टि के शुरू 5000 में 16 कला

270
00:19:06,880 --> 00:19:10,960
आत्माएं होती है और सृष्टि आधी जब खत्म हो जाती है तो आठ कला हो

271
00:19:10,960 --> 00:19:15,040
जाती है और फिर उसके बाद कलाहीन हो जाती है। यानी कलयुग के अंत में

272
00:19:15,040 --> 00:19:19,120
कोई कला नहीं बचा है किसी पे मनुष्य में। इसलिए आठ

273
00:19:19,120 --> 00:19:23,200
कला वाला मनुष्य जो धर्म स्थापन किया था उसकी हर बातें आप

274
00:19:23,200 --> 00:19:27,200
यथार्थ रूप से नहीं समझ सकते। क्यों? क्योंकि वो कला नहीं है। अभी

275
00:19:27,200 --> 00:19:31,600
उस कला को समझने के लिए उसी आठ कला में जाना पड़ेगा। तभी हम धर्म संस्थापक

276
00:19:31,600 --> 00:19:35,680
की बातें यथार्थ समझ पाएंगे। नहीं तो नहीं

277
00:19:35,680 --> 00:19:39,680
समझ सकते। यह प्रमाण है कि वो आठ कला वाला

278
00:19:39,680 --> 00:19:43,760
आत्मा ही धर्म का स्थापन किया है। क्योंकि वो 2200 वर्ष 2250

279
00:19:43,760 --> 00:19:49,440
वर्ष पहले हुआ है। यानी 1250 वर्ष से पहले आठ कला था

280
00:19:49,440 --> 00:19:53,520
और 2500 वर्ष के पहले 2500 वर्ष के पहले 16 कला

281
00:19:53,520 --> 00:19:57,760
था। ये क्रमश बढ़ा। पहले 14 हुआ फिर 16

282
00:19:57,760 --> 00:20:02,400
हुआ। इस तरह से क्रमश घटते जा रहा है। आठ के बाद एकाएक जीरो नहीं

283
00:20:02,400 --> 00:20:06,560
देर बाद मुझे बोलने की मुझे बोलने का समय मिलेगा। जी

284
00:20:06,560 --> 00:20:10,720
जी जरूर जरूर जरूर मैं तो तर्क दे रहा था मैं पूछ रहा हूं कितनी देर

285
00:20:10,720 --> 00:20:15,040
बाद मिलेगा समय मुझे बोलने का आप बोल

286
00:20:15,040 --> 00:20:18,080
सकते हैं मैंने आपको तर्क बता दिया

287
00:20:18,080 --> 00:20:22,160
बात हो गई हो गई आपकी बात बिल्कुल

288
00:20:22,160 --> 00:20:26,880
आपने कहा कि परमात्मा ने ये बताया है कि

289
00:20:26,880 --> 00:20:30,960
जो ढाई हजार साल पहले का समय था लगभग 2250 वर्ष

290
00:20:30,960 --> 00:20:35,360
पहले का समय उस समय आठ कला वाले लोग होते थे

291
00:20:35,360 --> 00:20:39,360
ठीक इसलिए क्योंकि उस समय आठ कला

292
00:20:39,360 --> 00:20:43,440
वाले लोग होते थे। इसलिए बुद्ध के द्वारा स्थापित किया जो मामला है

293
00:20:43,440 --> 00:20:48,880
वो धर्म है। जी बुद्ध के द्वारा हुआ।

294
00:20:48,880 --> 00:20:52,880
एक मिनट भाई साहब भाई साहब 50 चीजें मत बोला करिए। अब मैं बोल रहा

295
00:20:52,880 --> 00:20:58,720
हूं। जी आपने बोल लिया ना। जी

296
00:20:58,720 --> 00:21:01,520
तो बोलिए

297
00:21:01,520 --> 00:21:05,680
आपने कहा 2250 वर्ष पूर्व क्योंकि बुद्ध हुए थे इसलिए उनके

298
00:21:05,680 --> 00:21:10,000
द्वारा स्थापित जो तंत्र और जो जो भी सिस्टम

299
00:21:10,000 --> 00:21:14,240
है विचारधारा है वो सब धर्म है क्योंकि वो आठ कला के थे क्योंकि

300
00:21:14,240 --> 00:21:18,480
वो 2250 वर्ष पूर्व हुए थे तो फिर

301
00:21:18,480 --> 00:21:22,880
यहां पर प्रश्न ये आता है कि 2250 वर्ष पूर्व

302
00:21:22,880 --> 00:21:26,960
सभी लोग तो होते नहीं थे आपने ही कहा आठ कला के कोई कम

303
00:21:26,960 --> 00:21:30,880
था कोई ज्यादा का थांब

304
00:21:30,880 --> 00:21:33,120
तो तो

305
00:21:33,120 --> 00:21:37,200
बुद्ध आठ कला के थे इस संबंध में प्रमाण क्या

306
00:21:37,200 --> 00:21:41,520
है प्रमाण यही बताया ना कि 5000

307
00:21:41,520 --> 00:21:45,920
साल का पूरा सृष्टि है तो 2500 वर्ष

308
00:21:45,920 --> 00:21:50,080
16 कला होता है अरे भैया आप ही तो आप ही कह रहे हो

309
00:21:50,080 --> 00:21:54,160
कि उसी उसी समय धारा में दूसरे लोग दूसरी मतलब कम

310
00:21:54,160 --> 00:21:58,160
कलाएं ज्यादा कला के भी थे तो कला और

311
00:21:58,160 --> 00:22:02,160
कला से मेरा मतलब है कि थोड़ा बहुत जैसे आठ के जगह

312
00:22:02,160 --> 00:22:06,240
थोड़ा बहुत तो बुद्ध बुद्ध आठ कला के थे

313
00:22:06,240 --> 00:22:10,480
ये कैसे पता इसलिए कि वो 2200

314
00:22:10,480 --> 00:22:14,480
वर्ष पहले था उस समय सभी मनुष्य के कला इतना

315
00:22:14,480 --> 00:22:18,560
ही होता है लगभग जैसे आप कोई बताते हो आपका कहने का मतलब है उस

316
00:22:18,560 --> 00:22:22,880
समय का हर मनुष्य सात आठ कला वाला ही था लगभग

317
00:22:22,880 --> 00:22:27,040
लगभग बिल्कुल इसका मतलब उस समय

318
00:22:27,040 --> 00:22:31,760
उस समय जितने लोग आए और उन्होंने जो जो धर्म स्थापना की

319
00:22:31,760 --> 00:22:36,400
वो सारी धर्म वो सारे विचार जो थे वो धर्म थे

320
00:22:36,400 --> 00:22:40,560
हां धर्म थे या उत्तम विचार थे जो भी आप मान सकते हैं

321
00:22:40,560 --> 00:22:44,800
क्योंकि उसके समांतर और कोई दूसरा नहीं था तो वही धर्म

322
00:22:44,800 --> 00:22:45,920
था उस समय के समाज को

323
00:22:45,920 --> 00:22:50,720
सुधारने के लिए उन्होंने जो मत दिया वो धर्म है 2250

324
00:22:50,720 --> 00:22:54,880
वर्ष पूर्व बुद्ध आए और बुद्ध ने जो विचार दिए वो

325
00:22:54,880 --> 00:23:00,880
आपके अनुसार धर्म थे क्योंकि उस समय के लोग आठ कला वाले होते थे।

326
00:23:00,960 --> 00:23:04,960
जी जी लगभग आठ कला वाला होते थे और उनको वो समय भी

327
00:23:04,960 --> 00:23:08,640
आता था पूरा यथार्थ

328
00:23:08,640 --> 00:23:12,640
आदि शंकराचार्य जी का नाम सुना है आपने? जी जी जी सुना

329
00:23:12,640 --> 00:23:16,640
है सुना है बिल्कुल वो भी लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्वी हुए थे।

330
00:23:16,640 --> 00:23:20,800
जी बिल्कुल बिल्कुल वो भी आठ कला में थे। तो वो भी आठ कला के

331
00:23:20,800 --> 00:23:24,960
थे। बिल्कुल बिल्कुल तो फिर उनके द्वारा दिया गया भी धर्म

332
00:23:24,960 --> 00:23:29,760
हो गया। बिल्कुल उनके द्वारा भी जो मत और

333
00:23:29,760 --> 00:23:33,920
आदेश दिया गया वो धर्म माना जाता है और वो समाज को सुधारने के लिए

334
00:23:33,920 --> 00:23:38,080
उन्होंने दिया है। ठीक। अब ये बताइए कि बुद्ध ने भी धर्म दिया

335
00:23:38,080 --> 00:23:42,080
ढाई हजार वर्ष पूर्व और आदि शंकराचार्य जी ने भी धर्म दिया

336
00:23:42,080 --> 00:23:46,640
ढाई हजार वर्ष पूर्व। यानी दोनों ने उत्तम विचार दिए।

337
00:23:46,640 --> 00:23:50,880
जी बिल्कुल। हां। तो अब यह बताइए जब दोनों

338
00:23:50,880 --> 00:23:54,880
दोनों यानी कि दोनों एक ही बात कही लगभग दोनों ने

339
00:23:54,880 --> 00:23:58,960
एक ही बात कही हां लगभग उसमें कुछ अलग

340
00:23:58,960 --> 00:24:00,960
अलग भी हो सकता है लेकिन मोटा

341
00:24:00,960 --> 00:24:06,960
मोटी आत्मा और परमात्मा की तरफ बढ़ने की बातें एक ही

342
00:24:07,920 --> 00:24:12,160
अलग-अलग तो फिर बुद्ध के बुद्ध जो थे

343
00:24:12,160 --> 00:24:16,160
बुद्ध से बौद्ध वालों से बौद्ध से आदि शंकराचार्य की लड़ाई क्यों

344
00:24:16,160 --> 00:24:20,880
हुई शास्त्रार्थ क्यों क्यों हुआ युद्ध क्यों हुए

345
00:24:20,880 --> 00:24:25,040
वो मतभेद या मन मनभेद अरे मतभेद अरे भैया

346
00:24:25,040 --> 00:24:29,040
जब आत्मा परमात्मा की बात दोनों कर रहे हैं थोड़ा बहुत करने धरने में अंतर आ

347
00:24:29,040 --> 00:24:33,440
रहा है तो थोड़ी ना युद्ध होते हैं युद्ध तो होते हैं आर्या पार की बातों पे

348
00:24:33,440 --> 00:24:37,600
एक कह रहा है कि जो है भगवान है दूसरा कह रहा है भगवान

349
00:24:37,600 --> 00:24:41,840
है ही नहीं तब होते हैं युद्ध ये मतभेद तो किस

350
00:24:41,840 --> 00:24:46,000
हो सकता है भाई भाई में हो जाता है पिता पुत्र में भी हो जाता है भाई भाई में कोई बात

351
00:24:46,000 --> 00:24:52,000
अटकती है ना तब होता है वो बात क्या थी जो अटकी थी?

352
00:24:53,280 --> 00:24:57,280
आदि शंकराचार्य और बुद्ध दोनों की विचारधारा ईश्वर

353
00:24:57,280 --> 00:25:01,360
को लेकर के एक थी। जी एक चीज

354
00:25:01,360 --> 00:25:05,360
नहीं थी। हां वो आप बता सकते हैं। तो आप काहे

355
00:25:05,360 --> 00:25:09,360
के लिए बता रहे हो? फिर आठ कला वाले होते थे। हम ये बता रहे

356
00:25:09,360 --> 00:25:13,680
हैं कि उन्होंने जो भी उस समय कहा था वो आठ कला में कहा था। इसलिए

357
00:25:13,680 --> 00:25:17,680
उत्तम बात कही होगी। आत्मा तो फिर जब दोनों उत्तम बात कह रहे हैं

358
00:25:17,680 --> 00:25:21,680
तो लड़ाई क्यों हो रही है? देखिए दोनों उत्तम बात कह

359
00:25:21,680 --> 00:25:26,000
रहे हैं लेकिन दो रास्ते से जा रहे हैं। मान लो आप दिल्ली जाना चाहते हैं तो उसके

360
00:25:26,000 --> 00:25:30,160
दो रास्ते इसका मतलब इसका मतलब जो सत्य बात होती

361
00:25:30,160 --> 00:25:34,400
है उसके दो विपरीत ऐसे मार्ग हो सकते हैं जो आपस में लड़ाई

362
00:25:34,400 --> 00:25:38,800
भी हो उसके उसके कारण सत्य तो सिर्फ आत्मा और परमात्मा

363
00:25:38,800 --> 00:25:42,960
है लेकिन उसके समझने का तरीका अलग-अलग है इसलिए मतभेद हो जाता है। यानी

364
00:25:42,960 --> 00:25:46,960
कि समझने का तरीका आठ कला वाले का भी किसी एक का गलत हो सकता

365
00:25:46,960 --> 00:25:52,320
है। समझने का तरीका किसी एक का सही हो सकता है। जी

366
00:25:52,320 --> 00:25:56,400
नहीं अलग-अलग हो सकता है थोड़ा बहुत नहीं किसी एक

367
00:25:56,400 --> 00:26:00,400
का सही किसी एक का गलत हो सकता है ना बिल्कुल

368
00:26:00,400 --> 00:26:05,200
थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है ज्यादा जमीन आसमान का फर्क नहीं होगा जैसे

369
00:26:05,200 --> 00:26:08,720
इतना हो सकता है जिस पर लड़ाई हो

370
00:26:08,720 --> 00:26:12,800
हां तो लड़ाई कब हुआ अभी तो हो रहा है ना कलयुग में हो रहा है अरे मैं

371
00:26:12,800 --> 00:26:17,760
तभी कह रहा हूं तभी कह रहा हूं ढाई हजार वर्ष पूर्व लड़ाई हुई है

372
00:26:17,760 --> 00:26:21,680
बौद्धों से आदि शंकराचार्य

373
00:26:21,680 --> 00:26:26,000
चलो हो सकती है मान लेते हैं हम तो तो

374
00:26:26,000 --> 00:26:30,080
जब आप कह रहे हैं एक मिनट भाई साहब जब आप ये कह रहे हैं कि दोनों उत्तम

375
00:26:30,080 --> 00:26:34,320
विचार वाले थे दोनों ने उत्तम विचार दिए जब दोनों के उत्तम ही विचार

376
00:26:34,320 --> 00:26:38,480
थे तो लड़ाई नहीं होनी चाहिए थी लड़ाई होने का मतलब ये है एक मिनट अभी

377
00:26:38,480 --> 00:26:42,480
मुंह थोड़ा बंद रखिए थोड़ी देर लड़ाई होने का अर्थ ये है कि दोनों

378
00:26:42,480 --> 00:26:47,120
में से किसी एक का विचार उत्तम नहीं था तभी वो

379
00:26:47,120 --> 00:26:51,440
उत्तम उत्तम वाला अनुत्तम से लड़ था। उत्तम

380
00:26:51,440 --> 00:26:55,440
था लेकिन रास्ते अलग-अलग थे। रास्ते अलग-अलग होने

381
00:26:55,440 --> 00:26:59,440
से भी मतभेद होता है। यानी कि उत्तम उत्तम विचार होते हुए

382
00:26:59,440 --> 00:27:03,600
भी दो इतने विपरीत रास्ते हो सकते हैं कि उनमें आपस में लड़ाई भी हो

383
00:27:03,600 --> 00:27:07,840
जाए। हो जाएगा। वहां मानसान की बात आ जाती है। हम बने

384
00:27:07,840 --> 00:27:13,120
हैं, हम बने हैं। ऐसा हो सकता है। यानी कि किसी एक के अंदर गलत विचार थे।

385
00:27:13,120 --> 00:27:17,120
थे। हो सकता है। लेकिन आजकल हो सकता है वाली बातें नहीं हो रही

386
00:27:17,120 --> 00:27:21,280
है भाई साहब यहां पर। यानी कि किसी के अंदर गलत

387
00:27:21,280 --> 00:27:23,760
विचार थे ना ये घमंड वाले मान सम्मान

388
00:27:23,760 --> 00:27:27,920
वाले जो नहीं होने चाहिए थे। द्वापर

389
00:27:27,920 --> 00:27:32,240
जो जितने भी धर्म है देखिए आप बार-बार

390
00:27:32,240 --> 00:27:36,880
पटरी मत बदला करिए। अभी मैंने पूछा किसी के अंदर

391
00:27:36,880 --> 00:27:41,280
वही नहीं आप अभी इसका जवाब दीजिए। आपने कहा मान सम्मान

392
00:27:41,280 --> 00:27:45,760
के कारण मान सम्मान के कारण लड़ाई हो सकती है। इसका मतलब

393
00:27:45,760 --> 00:27:49,920
किसी के अंदर ऐसे ऐसे गलत विचार थे

394
00:27:49,920 --> 00:27:54,240
घमंड वाले जिसके कारण लड़ाई हुई ऐसे मतभेद

395
00:27:54,240 --> 00:27:58,560
थेकि 16 कला में कोई मतभेद नहीं है परिपूर्ण है आठ कला में मतभेद

396
00:27:58,560 --> 00:28:02,720
है इसलिए उसको द्वापर कहा गया द्वत मत शुरू हो गया कला के द्वारा

397
00:28:02,720 --> 00:28:06,960
भी आठ कला वाले के द्वारा भी जो बातें हैं

398
00:28:06,960 --> 00:28:10,960
उनको धर्म नहीं माना जा सकता क्योंकि उसमें गलत बातें भी

399
00:28:10,960 --> 00:28:15,120
हो सकती है द्वत मत हो सकती है द्वत

400
00:28:15,120 --> 00:28:19,280
मत दो वो दो रास्ते आठ कला वाले से

401
00:28:19,280 --> 00:28:25,200
गलत बातें आठ कला वाले के द्वारा गलत बातें बताई जा सकती हैं।

402
00:28:25,200 --> 00:28:29,920
चलो बताई जा सकती है। आप कह रहे हैं तो मान लेते हैं हम क्योंकि आठ कला मतलब

403
00:28:29,920 --> 00:28:33,920
उसकी आप ही ने तो कहा है कि हां हो सकता है।

404
00:28:33,920 --> 00:28:37,840
नहीं तो मतभेद नहीं होना चाहिए था।

405
00:28:37,840 --> 00:28:39,120
नहीं मतभेद तो

406
00:28:39,120 --> 00:28:43,840
आप दिखा रहे हैं। सतयुग में भी रावण और राम के साथ मतभेद था।

407
00:28:43,840 --> 00:28:48,160
किसके साथ? तो सतयुग में दिखा रहे हैं आप। क्या कोई मतलब

408
00:28:48,160 --> 00:28:52,240
कोई रावण के साथ रावण नहीं था। कोई कंस के साथ

409
00:28:52,240 --> 00:28:56,400
कृष्ण नहीं था। लेकिन बता रहे हैं एक मिनट भाई साहब तो आप क्या

410
00:28:56,400 --> 00:29:00,560
कहते हैं कि रावण और कंस ने भी धर्म दिया है दुनिया को।

411
00:29:00,560 --> 00:29:05,840
रावण रावण राम के समय में था ही नहीं।

412
00:29:05,840 --> 00:29:10,000
अरे जो था आपके हिसाब से जो था ये रावण

413
00:29:10,000 --> 00:29:14,000
और कंस ने दुनिया को धर्म दिया है क्या? जो आप बता रहे हो फिर तो

414
00:29:14,000 --> 00:29:18,000
रावण और कंस में लड़ाई क्यों हुई? मैं वही तो पूछ रहा हूं। आप कह रहे

415
00:29:18,000 --> 00:29:22,320
हो आप कह रहे हो। देखो थोड़ा ठंडे दिमाग से बात करो। आप बड़े बड़े

416
00:29:22,320 --> 00:29:26,880
हो। कल मुझसे लोगों ने कहा कि भाई आप जो है बहुत ज्यादा

417
00:29:26,880 --> 00:29:31,280
क्या कहते हैं? अग्रेसिव होकर के बात कर रहे थे। तो मैंने अपने आपको

418
00:29:31,280 --> 00:29:35,360
मैंने अपने आपको मना मैंने अपने आप को मनाया कि मैं आज अग्रेसिव नहीं

419
00:29:35,360 --> 00:29:40,800
हूं। आपसे बात करने से और आपको लग रहा है

420
00:29:40,800 --> 00:29:44,880
नहीं। और सुनो आपके द्वारा जो है ऐसे बातें कई बार

421
00:29:44,880 --> 00:29:49,120
हो रही है जो मूर्खता की पराकाष्ठा है। मगर

422
00:29:49,120 --> 00:29:53,120
फिर भी मैं अपने आप को नियंत्रित करके आपसे बात करने का प्रयास कर

423
00:29:53,120 --> 00:29:54,160
रहा हूं। तो थोड़ा ध्यान दो

424
00:29:54,160 --> 00:29:58,240
आप मेरी बात पे कि बिल्कुल हां

425
00:29:58,240 --> 00:30:02,320
कि बात ये है आपने कहा कि बुद्ध ने भी धर्म दिया। आदि शंकराचार्य जी ने भी

426
00:30:02,320 --> 00:30:06,400
धर्म दिया। मैंने बताया दोनों में लड़ाई झगड़ा क्यों हुआ कि भैया दोनों के अंदर

427
00:30:06,400 --> 00:30:10,480
दोनों में से किसी में हो सकता है मान सम्मान की बात आ गई हो। इसका मतलब

428
00:30:10,480 --> 00:30:16,480
कि वो जो आठ कला वाले लोग हैं वो गलत बातें बोल सकते हैं।

429
00:30:16,880 --> 00:30:20,880
देखिए द्वैत मत वहां से शुरू हो गया। दो मत होगा तो मतभेद होगा

430
00:30:20,880 --> 00:30:25,040
ही। रास्ता एक ही है परमात्मा तक जाने का। मत

431
00:30:25,040 --> 00:30:29,200
एक ही है। लेकिन रास्ता अलग-अलग है। मुझे उदाहरण देके

432
00:30:29,200 --> 00:30:33,360
बताइए कि किस बात को लेकर में दोनों में झगड़ा हो सकता हुआ

433
00:30:33,360 --> 00:30:37,520
होगा? बताइए। जैसे जैसे उदाहरण के लिए कोई

434
00:30:37,520 --> 00:30:41,680
कृष्ण को परमात्मा मानते हैं। कोई राम को मानते हैं। कोई गणेश को मानते

435
00:30:41,680 --> 00:30:46,000
हैं। तो इन मान्यताओं के कारण मतभेद हो सकता है। इसी

436
00:30:46,000 --> 00:30:50,000
तरह से परमात्मा को मतभेद सुनिए सुनिए।

437
00:30:50,000 --> 00:30:54,080
अगर मानते हैं ठीक तो उनमें से एक जो

438
00:30:54,080 --> 00:30:59,360
होगा वो ये कहेगा ना कि नहीं नहीं कृष्ण परमात्मा नहीं है।

439
00:30:59,360 --> 00:31:03,360
बिल्कुल और एक कहेगा है तभी मतलब एक कहेगा है मगर

440
00:31:03,360 --> 00:31:07,520
क्या परमात्मा दोनों है या फिर जो अर्थ लगाए

441
00:31:07,520 --> 00:31:09,600
जा रहे हैं कि केवल कृष्ण है केवल

442
00:31:09,600 --> 00:31:13,680
राम है या एक ही परमात्मा के दो स्वरूप

443
00:31:13,680 --> 00:31:17,920
है इनमें से कौन सी बात सच्ची होगी परमात्मा कोई भी शरीर

444
00:31:17,920 --> 00:31:22,320
धारी नहीं हो सकता हां इसका मतलब इसका मतलब ये उदाहरण

445
00:31:22,320 --> 00:31:26,480
आपका गलत है आप आप यहां पर क्या है बुद्ध और जो

446
00:31:26,480 --> 00:31:30,560
आदि शंकराचार्य दोनों आप कह रहे धर्म देने वाले हैं। मगर उदाहरण किसका दे

447
00:31:30,560 --> 00:31:34,560
रहे हो? आप उदाहरण दे रहे हो कि दोनों गलत बात कहने वाले हैं। वो

448
00:31:34,560 --> 00:31:38,640
लोग धर्म देने वाले नहीं है। आपके आपके अनुसार आपके

449
00:31:38,640 --> 00:31:42,960
अनुसार कृष्ण को भगवान यानी परमात्मा मानना भी गलत है। राम

450
00:31:42,960 --> 00:31:46,960
को परमात्मा यानी भगवान मानना भी गलत है। तो फिर उदाहरण क्यों दे

451
00:31:46,960 --> 00:31:51,200
रहे? वो तो वो तो आपस में लड़ेंगे ही। उनके उनके वो तो गलत है ही है। बस

452
00:31:51,200 --> 00:31:55,840
एक कृष्ण को मान के गलती कर रहा है। दूसरा राम को मान के गलती कर रहा है।

453
00:31:55,840 --> 00:31:59,920
वो तो आपस में उनका लड़ना तो निश्चित है। मगर यहां तो आप दोनों को सही

454
00:31:59,920 --> 00:32:04,320
कह रहे हो। ये दोनों लोग सही थे। देखिए

455
00:32:04,320 --> 00:32:08,480
सही का मतलब ये नहीं कि 100% सही थे। मानव कभी भी 100% सही नहीं।

456
00:32:08,480 --> 00:32:12,560
मुझे वो बात बताइए। मुझे वो बात बताइए। किस बात के आधार पर

457
00:32:12,560 --> 00:32:16,720
उनके बीच में लड़ाई हुई? जब परमात्मा और आत्मा को लेकर के

458
00:32:16,720 --> 00:32:20,960
जब आत्मा और परमात्मा को लेकर के उन दोनों ने

459
00:32:20,960 --> 00:32:25,600
उत्तम बात कही तो किस बात को लेकर के दोनों में लड़ाई हुई?

460
00:32:25,600 --> 00:32:29,680
इसलिए कि दो रास्ता था अलग-अलग रास्ता था। इसलिए वो रास्ते में अलगाव

461
00:32:29,680 --> 00:32:34,480
क्या था? क्या रास्ता अलग था? वो क्या था?

462
00:32:34,480 --> 00:32:38,480
वही वही तो बता रहा हूं कि किसी ने परमात्मा को जाने परमात्मा तक

463
00:32:38,480 --> 00:32:42,800
जाने का रास्ता राइट से बताया। किसी ने लेफ्ट से बता दिया होगा। इसलिए

464
00:32:42,800 --> 00:32:46,960
मतभेद है। परमात्मा तक जाने का रास्ता

465
00:32:46,960 --> 00:32:51,280
किसी ने राइट से बताया, किसी ने लेफ्ट से बता दिया। जैसे कि क्या परमात्मा

466
00:32:51,280 --> 00:32:55,440
तक जाने के लिए क्या दिल्ली से मुंबई इस तरह से रास्ता है? कोई क्या

467
00:32:55,440 --> 00:32:59,760
है मामला? जी मतलब

468
00:32:59,760 --> 00:33:03,840
विचार रूपी रास्ता की बात कर रहा हूं। तो वो विचार बताइए। विचार

469
00:33:03,840 --> 00:33:09,600
बताइए। कौन सा विचार अड़ा आपस में वो विचार बताइए।

470
00:33:09,600 --> 00:33:13,760
ये मन का भेद था। परमात्मा मैं पूछ रहा हूं आपने

471
00:33:13,760 --> 00:33:17,840
विचार रूपी रास्ता जो बोला है वो विचार बताइए जो अटका दोनों का

472
00:33:17,840 --> 00:33:22,000
आपस में

473
00:33:22,000 --> 00:33:26,720
देखिए विचार जो अटका उसमें और भी कई बातें हैं

474
00:33:26,720 --> 00:33:30,800
उसमें भाई साहब आप इस तरह से बात नहीं होती किसी किसी समझदार व्यक्ति को

475
00:33:30,800 --> 00:33:34,960
भेजिए अपनी ओर से क्योंकि जितनी बार आप अटकते हैं चलिए मान लीजिए चलिए

476
00:33:34,960 --> 00:33:40,160
ये कर लीजिए चलिए वो कर लीजिए यही कर रहा हूं मैं तब से

477
00:33:40,160 --> 00:33:44,320
हम ठीक है। अभी अभी मैंने

478
00:33:44,320 --> 00:33:48,320
आपसे पूछा आपने कहा दोनों ने उत्तम बात की तो मैंने कहा

479
00:33:48,320 --> 00:33:52,640
फिर दोनों में झगड़ा कैसे? जब झगड़ा झगड़े की बात आई तो आपने कहा कि भाई

480
00:33:52,640 --> 00:33:56,960
किसी का रास्ता अलग हो सकता है किसी का रास्ता। तो हमें विचार में समझाइए

481
00:33:56,960 --> 00:34:01,120
कि परमात्मा को प्राप्त करने के दो सही विचारों के बीच

482
00:34:01,120 --> 00:34:05,360
में एक दूसरे से झगड़ा कैसे हो सकता है? दो सही

483
00:34:05,360 --> 00:34:09,760
विचार। परमात्मा को प्राप्त करने के दो सही विचार आपस

484
00:34:09,760 --> 00:34:13,920
में झगड़े का कारण कैसे बन सकते हैं वो बताइए मुझे। आप जो उदाहरण

485
00:34:13,920 --> 00:34:17,920
दे रहे हैं वो दो गलत विचारों का दे रहे हैं। राम को मानते थे, कृष्ण को मानते थे। आपका

486
00:34:17,920 --> 00:34:21,920
कहना है कि वो दोनों गलत है। देखिए मनुष्य दो

487
00:34:21,920 --> 00:34:26,240
दो सही विचारों का उदाहरण दीजिए मुझे। तो आप उदाहरण नहीं दे रहे हैं।

488
00:34:26,240 --> 00:34:30,400
मनुष्य के विचार अलग-अलग हो सकते हैं। कोई दिल्ली पहुंचना चाहता है।

489
00:34:30,400 --> 00:34:34,800
भाई साहब देखिए आप जाइए आप हो गया। कोई

490
00:34:34,800 --> 00:34:37,200
ऐसे ही ये ब्रह्मा कुमारी में सब आपके

491
00:34:37,200 --> 00:34:42,080
जैसे ही भरे पड़े हैं क्या? आपके जैसे ही है सबके सब

492
00:34:42,080 --> 00:34:48,080
थोड़े बहुत थोड़े बहुत कुछ विद्वान भी हैं।

493
00:34:53,760 --> 00:34:59,760
चलिए ठीक है। जय श्री राम सभी को।

494
00:35:06,160 --> 00:35:10,560
अगर आप आज्ञा दे तो मैं आपको ब्रह्मा कुमारी

495
00:35:10,560 --> 00:35:14,640
का थोड़ा सा उद्देश्य पे बात कर दूं। क्या चाहते हैं? नहीं मैं मैं जानता

496
00:35:14,640 --> 00:35:19,040
हूं मैं जो है आपको यहां पे ब्रह्मा कुमारी का प्रचार करने के लिए नहीं बुलाया

497
00:35:19,040 --> 00:35:23,360
है। ब्रह्मा कुमारी जो पाखंड सुनिए ब्रह्मा कुमारी जो पाखंड

498
00:35:23,360 --> 00:35:27,760
फैला रहा है आप जैसे लोगों के रूप में अपना प्रचार करवा रहा है।

499
00:35:27,760 --> 00:35:31,920
मैंने उसकी वास्तविकता को सामने लाने के लिए कि ब्रह्मा कुमारी

500
00:35:31,920 --> 00:35:35,920
के द्वारा कही जाने वाली बातें कितनी मूर्खता पूर्ण वो कितनी

501
00:35:35,920 --> 00:35:40,000
धूर्तता पूर्ण है। ये समाज के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया है। अब आप

502
00:35:40,000 --> 00:35:44,080
मुझे बता दीजिए। ये आपकी नजर में हो सकता है। अब आप मुझे

503
00:35:44,080 --> 00:35:48,960
बता दीजिए। अब आप मुझे बता दीजिए। अब आप मुझे ये बता दीजिए

504
00:35:48,960 --> 00:35:53,600
कि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार

505
00:35:53,600 --> 00:35:58,240
अ ईश्वर है। ये कैसे सिद्ध होता है?

506
00:35:58,240 --> 00:36:02,320
ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार ईश्वर ज्योति बिंदु स्वरूप में है। उनका

507
00:36:02,320 --> 00:36:06,320
रूप और रहने का जगह परमधाम बताया गया है। मैंने

508
00:36:06,320 --> 00:36:10,880
नहीं पूछा है। मैंने नहीं पूछा है। मैंने नहीं पूछा है।

509
00:36:10,880 --> 00:36:14,880
मैंने ये नहीं पूछा है। मेरी बात सुनिए भाई साहब। मेरी

510
00:36:14,880 --> 00:36:20,720
बात सुनिए। मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार

511
00:36:20,720 --> 00:36:24,720
ईश्वर है। ये कैसे सिद्ध होता है? आप बता रहे हैं ईश्वर ऐसा है। ईश्वर वैसा

512
00:36:24,720 --> 00:36:28,800
है। ईश्वर यहां रहता है। वहां है। आप थोड़ा मूर्खता से बाहर

513
00:36:28,800 --> 00:36:32,800
आइए। भाई साहब आप इतने ऐज में बने हैं। बार-बार मुझे आपके साथ इस तरह

514
00:36:32,800 --> 00:36:38,560
से बात करनी पड़ रही है। शर्म आनी चाहिए आपको। जी

515
00:36:38,560 --> 00:36:42,640
ठीक है ठीक है मैंने पूछा क्या है आपसे

516
00:36:42,640 --> 00:36:47,520
ईश्वर सिद्ध कैसे होता है तो आप ये क्या बता रहे हो सर लाल है पीला है नीला है

517
00:36:47,520 --> 00:36:51,520
देखिए तभी तो पता लगेगा ना ईश्वर सिद्ध कैसे होता है उसका रंग बताएंगे रूप बताएंगे

518
00:36:51,520 --> 00:36:56,560
रहने का जगह बताएंगे तभी तो आप जानेंगे ना कि इससे सिद्ध होता है

519
00:36:56,560 --> 00:37:01,680
अच्छा अगर मैं अगर मैं आपको ये कहूं

520
00:37:01,680 --> 00:37:06,720
अगर मैं आपको ये कहूं आप किस समय कहां पर हो

521
00:37:06,720 --> 00:37:09,280
जी

522
00:37:09,280 --> 00:37:14,160
धरती पर हैं आप अभी धरती में किस जगह पे

523
00:37:14,160 --> 00:37:18,240
समस्तीपुर बिहार बिहार और बिहार में कहां

524
00:37:18,240 --> 00:37:22,400
पर समस्तीपुर जी ठीक है

525
00:37:22,400 --> 00:37:26,400
आपकी आप जिस कमरे में इस समय हो वहां पर जो

526
00:37:26,400 --> 00:37:31,920
है एक चुड़ैल खड़ी हुई है जी मान लोगे

527
00:37:31,920 --> 00:37:36,080
कैसे मान लेंगे उसका उसका मैं आपको उसका रंग बता रहा हूं। मैं

528
00:37:36,080 --> 00:37:40,160
आपको उसका रंग बता रहा हूं। सफेद कलर की साड़ी है और लाल कलर का

529
00:37:40,160 --> 00:37:44,160
खून लगा हुआ है चेहरे पर। जी जी और जैसे हवा

530
00:37:44,160 --> 00:37:48,320
चलती है हमको महसूस होती है दिखाई नहीं देती। ऐसे ही वो खड़ी हुई है मगर

531
00:37:48,320 --> 00:37:52,480
आपको दिखाई नहीं दे रही है। मान लो चुड़ैल चुड़ैल

532
00:37:52,480 --> 00:37:56,880
का काम क्या है? चुड़ैल का काम है आपका

533
00:37:56,880 --> 00:38:00,880
चुड़ैल का काम है आपका आपको मूर्ख बनाना। आपके आपके

534
00:38:00,880 --> 00:38:06,000
दिमाग में जो मूर्खता भरना हां तो अगर मूर्खता

535
00:38:06,000 --> 00:38:10,160
भर रहा है तभी तो यह सिद्ध होगा ना कि चुड़ैल है लेकिन अगर अच्छी

536
00:38:10,160 --> 00:38:14,320
बातें भर रहा है तो हम कैसे फील करेंगे कि वो चुड़ैल है ये

537
00:38:14,320 --> 00:38:18,560
भी तो हो सकता है ना अब ये जो अच्छी बातें है कि मूर्खता है डिसाइड कौन

538
00:38:18,560 --> 00:38:22,160
करेगा

539
00:38:22,160 --> 00:38:26,640
देखो परमात्मा कोई शरीरधारी नहीं हो सकता ज्योति बिंदु है और उसको फील

540
00:38:26,640 --> 00:38:30,720
फिर बकवास शुरू कर दी इसीलिए फिर लोग कहते हैं कि बोलने नहीं देते हो।

541
00:38:30,720 --> 00:38:34,720
लोग कमेंट करते हैं कि बोलने नहीं देते हो। यह बकवास सुनने के लिए मैं

542
00:38:34,720 --> 00:38:39,120
बोलने दूं आपको। चलिए जाइए आप अपना काम करिए।

543
00:38:39,120 --> 00:38:45,120
दो कौड़ी का दिमाग

544
00:38:48,800 --> 00:38:52,960
32 ही दिखाने आते हैं। ऐसे ही लोग भर रखे हैं ब्रह्मा

545
00:38:52,960 --> 00:38:58,960
कुमारी में सब के सब।

546
00:38:59,600 --> 00:39:05,600
कोई और चर्चा के लिए आना चाहता हो तो आ सकता है।

547
00:39:12,240 --> 00:39:16,560
मुंह चलाने आए थे बस 5000 साल का ड्रामा है दोबारा होगा

548
00:39:16,560 --> 00:39:22,560
और वह प्रवचन देने आए थे जो इनको इन्होंने रटा हुआ है जो अपने यहां

549
00:39:25,840 --> 00:39:29,040
मूर्खों की टोली

550
00:39:29,040 --> 00:39:32,400
मूर्ख कुमारीज

551
00:39:32,400 --> 00:39:36,400
अगर ऐसे लोग वहां पर है इन इन लोगों को वहां पर रख रखा है

552
00:39:36,400 --> 00:39:42,400
तो क्या कहा जाए मूर्ख ना कहा जाए तो

553
00:39:49,200 --> 00:39:55,200
कहां से आते हैं ये लोग?

554
00:40:04,720 --> 00:40:08,800
कोई ज्वाइन करेगा कोई? हर्ष जी आप ही आ

555
00:40:08,800 --> 00:40:14,800
जाओ। शास्त्रवाद कोई हो तो वो आ जाए।

556
00:40:18,080 --> 00:40:24,080
हां पंडित जी आइए।

557
00:40:25,920 --> 00:40:31,920
आ जाइए आप भी आ जाइए। [हंसी]

558
00:40:36,880 --> 00:40:40,960
कल रात को मुझे कुछ ऐसे कमेंट्स दिखाई दिए तो मैंने कहा आज मैं

559
00:40:40,960 --> 00:40:46,960
अपने को कंट्रोल में करूंगा। भाई

560
00:40:53,920 --> 00:40:58,240
शिवश जी आप प्लीज उनके यहां से कोई

561
00:40:58,240 --> 00:41:02,800
प्रमाणित व्यक्ति लाइए वरना लोग आपको गलत

562
00:41:02,800 --> 00:41:07,200
समझ रहे हैं। देखिए

563
00:41:07,200 --> 00:41:11,440
हम मैं एक बार मंदिर

564
00:41:11,440 --> 00:41:15,840
के बाहर खड़ा हुआ था। आज से चार पांच साल पहले की बात है।

565
00:41:15,840 --> 00:41:20,240
मेरे हाथ में

566
00:41:20,240 --> 00:41:24,320
ये हिंदुओं को भटकाने के लिए जो तंत्र

567
00:41:24,320 --> 00:41:28,880
चल रहे हैं इनको लेकर के मैंने एक प्लेट बनवाया था और मैं बांट रहा था बाहर

568
00:41:28,880 --> 00:41:32,960
और मैं माइक पे पोर्टेबल माइक स्पीकर पे जो है बोल रहा था

569
00:41:32,960 --> 00:41:37,040
कि अपने बच्चों को ब्रेन वाश होने से बचाएं। ऐसे लोग मंगलवार

570
00:41:37,040 --> 00:41:41,120
था हनुमान जी के मंदिर में भीड़ थी तो काफी लोग वहां पर जुट रहे मगर

571
00:41:41,120 --> 00:41:45,120
मैं अपना काम कर रहा था और वो प्लेट्स बांट

572
00:41:45,120 --> 00:41:49,200
रहा था। तो वहां पर एक व्यक्ति

573
00:41:49,200 --> 00:41:53,440
आ गया। बोला कि हिंदू

574
00:41:53,440 --> 00:41:57,440
धर्म भी कोई बहुत अच्छा धर्म नहीं है। तो मैंने तपाक से उसको

575
00:41:57,440 --> 00:42:01,920
बोला कि हिंदू धर्म में एक सूत कोई कमी नहीं है।

576
00:42:01,920 --> 00:42:06,000
बोला कि अच्छा सती प्रथा सही थी। जाति

577
00:42:06,000 --> 00:42:10,160
वो सती प्रथा सही है। दहेज प्रथा सही है। तो मैंने कहा दहेज

578
00:42:10,160 --> 00:42:14,560
प्रथा सती प्रथा कहां पर मैंडेटरी लिखी गई है? भाई

579
00:42:14,560 --> 00:42:20,080
किसी स्त्री का जो

580
00:42:20,080 --> 00:42:24,160
भरता है उसने देह त्याग कर दिया है। उस स्त्री को

581
00:42:24,160 --> 00:42:28,160
अब कोई मोह नहीं रह गया है सांसारिक तो

582
00:42:28,160 --> 00:42:32,320
वो अपने अभिभावकों से और इच्छा पूर्वक वो

583
00:42:32,320 --> 00:42:36,320
भी जो है जो दिव्य शरीर होते थे

584
00:42:36,320 --> 00:42:41,520
उसी में पॉसिबल हुआ। इच्छा पूर्वक अगर वो जाती है उसको सती कहते।

585
00:42:41,520 --> 00:42:45,600
कोई यह थोड़ी ना कि हमारे यहां किसी को मार मार के सती बनाया जाता हो। ऐसा कहीं

586
00:42:45,600 --> 00:42:49,680
नहीं है। ऐसा था, ऐसा होता तो

587
00:42:49,680 --> 00:42:53,840
माता कौशल्या को श्री राम जी ने बनाया था क्या सती?

588
00:42:53,840 --> 00:42:59,840
हां कैकई को बनाया था क्या? बनाया गया था क्या सती?

589
00:43:00,960 --> 00:43:05,440
तो सती कोई एक इच्छा पूर्वक कुछ

590
00:43:05,440 --> 00:43:10,080
कार्य कि दिव्य आत्माओं ने किया है जैसे पद्मावती

591
00:43:10,080 --> 00:43:15,280
ने किया था अलाउद्दीन खिलजी से अपने शरीर की रक्षा करने के लिए

592
00:43:15,280 --> 00:43:18,080
हम

593
00:43:18,080 --> 00:43:22,240
और दहेज की बात भी ऐसी है मनुस्मृति में लिखा

594
00:43:22,240 --> 00:43:26,960
हुआ है कि जो लोग धन

595
00:43:26,960 --> 00:43:32,480
सामग्री इत्यादि प्राप्त करने हेतु तू अपने पुत्र

596
00:43:32,480 --> 00:43:36,640
का विवाह करते हैं। मतलब मांग करते

597
00:43:36,640 --> 00:43:41,200
हैं सामान की वो सभी नीच होते हैं।

598
00:43:41,200 --> 00:43:45,200
उनका खंडन किया गया है। तो फिर यह दहेज क्या है जो आ

599
00:43:45,200 --> 00:43:49,600
रहा है विवाह में? ये पिता के द्वारा अपनी पुत्री को दिया गया उपहार

600
00:43:49,600 --> 00:43:53,840
है। भेंट है। आशीर्वाद है। वो

601
00:43:53,840 --> 00:43:58,160
है उसकी मंगल कामनाएं। कोई अगर उसका

602
00:43:58,160 --> 00:44:02,800
गलत उपयोग कर रहा है कि कितना दोगे तो उसको तो नीच कह रहा है ना धर्म।

603
00:44:02,800 --> 00:44:06,880
खैर उससे यह सब बातें हुई थी मेरी। उसके

604
00:44:06,880 --> 00:44:12,480
बाद उस दिन मुझे पता लगा था कि भाई हम सबको कभी खुश नहीं कर सकते।

605
00:44:12,480 --> 00:44:16,000
हम सबको कभी खुश नहीं कर सकते। जैसा अभी कमेंट था ना कमेंट में

606
00:44:16,000 --> 00:44:20,160
आया था कि लोग आपको गलत समझ रहे हैं। तो हम सबको कभी खुश नहीं

607
00:44:20,160 --> 00:44:25,040
कर सकते। और इस बारे में करपात्री जी ने एक बात कही है।

608
00:44:25,040 --> 00:44:29,920
वो यह बात है कि कुत्तों को अगर शंख की ध्वनि पसंद नहीं आए

609
00:44:29,920 --> 00:44:34,320
तो इसका अर्थ है हम शंख बजाना बंद नहीं कर सकते। हम अपने

610
00:44:34,320 --> 00:44:38,400
ओर से सत्य के मार्ग पर जो कर सकते हैं यथा सामर्थ्य वो

611
00:44:38,400 --> 00:44:42,720
कर रहे हैं। फिर भी लोगों को अगर समझ में नहीं आ रहा है। अंधे

612
00:44:42,720 --> 00:44:46,720
हो चुके हैं। ठान रखी है उन्होंने। मानवता का

613
00:44:46,720 --> 00:44:51,920
नाश करेंगे। धर्म का नाश करेंगे। धर्म से लड़ेंगे तो लड़ो।

614
00:44:51,920 --> 00:44:57,760
हम भी लड़ेंगे सवा लाख से एक लड़ावा

615
00:44:57,760 --> 00:45:03,760
चिड़िया से मैं बाज बाज लड़ावा

616
00:45:03,760 --> 00:45:09,120
जय श्री राम भैया जय श्री राम

617
00:45:09,120 --> 00:45:13,440
बताइए दो दिन से अभी जो दो दिन से जो अभी लाइव चल रहा है

618
00:45:13,440 --> 00:45:18,880
उसे देख के तो मतलब जनता का पूरा मनोरंजन तो हो ही गया पूरा

619
00:45:18,880 --> 00:45:22,880
नहीं मनोरंजन नहीं है। देखने वालों को सर में दर्द हो रहा

620
00:45:22,880 --> 00:45:26,400
होगा।

621
00:45:26,400 --> 00:45:30,400
उस व्यक्ति के पास अपनी रटी हुई बातों के अलावा

622
00:45:30,400 --> 00:45:35,040
कहने के लिए और कुछ है ही नहीं।

623
00:45:35,040 --> 00:45:39,280
बिल्कुल आपने सिद्धि पूछा वो अपने ईश्वर का डेफिनेशन देने

624
00:45:39,280 --> 00:45:44,160
लग गया। हम डेफिनेशन भी नहीं थी। वो

625
00:45:44,160 --> 00:45:48,560
वो लक्षण थे केवल।

626
00:45:48,560 --> 00:45:53,440
जी भैया। डेफिनेशन दीजिए। डेफिनेशन को वो कहेंगे

627
00:45:53,440 --> 00:45:57,680
जिसमें थोड़ा बहुत लक्षण हो और मुख्यता उसका उपयोग हो।

628
00:45:57,680 --> 00:46:02,000
वो परिभाषा कहलाएगी कि व्हाट इज ए कंप्यूटर? कंप्यूटर

629
00:46:02,000 --> 00:46:06,240
इज एन इलेक्ट्रॉनिक मशीन व्हिच कैन परफॉर्म आवर अर्थमेटिकल

630
00:46:06,240 --> 00:46:12,240
एंड लॉजिकल ऑपरेशंस एट वेरी हाई स्पीड।

631
00:46:12,640 --> 00:46:17,920
ये डेफिनेट

632
00:46:17,920 --> 00:46:23,440
ये कुंफू पांडा कौन आया है?

633
00:46:23,440 --> 00:46:27,520
देखा आपने ब्रह्मा कुमारी वाले भाई साहब से मैंने बहुत आज की वार्ता

634
00:46:27,520 --> 00:46:31,600
तो तसल्ली से की है ना। कल कुछ लोग आरोपी ये कह रहे थे कि भाई आप बहुत

635
00:46:31,600 --> 00:46:36,240
एग्रेसिव होकर के बात कर रहे हो। आप आकर के इन मूर्खों से जब

636
00:46:36,240 --> 00:46:40,480
इन मूर्खों से जब यह जो कमेंट करने वाले लोग हैं जब ऐसे मूर्ख

637
00:46:40,480 --> 00:46:44,480
लोगों से करेंगे ना उनको जब तो समझ

638
00:46:44,480 --> 00:46:48,960
में आएगा कि शिवश जी ने तो बहुत झेल लिया था।

639
00:46:48,960 --> 00:46:53,280
जी भैया ये लोग आते नहीं है ना। ये लोग बोलेंगे कि किसी प्रोफेशनल

640
00:46:53,280 --> 00:46:57,440
को लेकर आओ। इस तरह से बातें करेंगे। हम कहते हैं भाई सब

641
00:46:57,440 --> 00:47:01,520
यहां पर प्रोफेशनल बन के ही आते हैं। लेकिन जब वो निरुत्तर हो जाते हैं तो फिर वह

642
00:47:01,520 --> 00:47:05,920
अनप्रोफेशनल लगने लग जाते हैं। और फिर बात ये है कि जो परंपरा

643
00:47:05,920 --> 00:47:10,240
विहीन है वो कहीं से भी एट द एंड प्रोफेशनल सिद्धि नहीं हो पाएगा।

644
00:47:10,240 --> 00:47:15,600
अब जो ब्रह ये जो ये वाले लोग हैं जो

645
00:47:15,600 --> 00:47:19,760
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय इनका कहना है कि हम ब्रह्मा कुमारी

646
00:47:19,760 --> 00:47:23,840
से निकले हैं। ब्रह्मा कुमारी वाले का कहना

647
00:47:23,840 --> 00:47:28,800
है कि गलत लोग हैं।

648
00:47:28,800 --> 00:47:33,440
जी भैया

649
00:47:33,440 --> 00:47:37,920
ये लोग कभी अपने बात को सिद्ध कैसे कर पाएंगे जब आएंगे तब

650
00:47:37,920 --> 00:47:42,880
निरुत्तर होके ही जाएंगे तो कोई भी यहां पर प्रोफेशनल

651
00:47:42,880 --> 00:47:47,120
यहां तो ये है कि ब्रह्मा कुमारी में केवल उससे बात की जाए जिसके ऊपर वो देवता

652
00:47:47,120 --> 00:47:50,960
आ रहा हो

653
00:47:50,960 --> 00:47:55,040
सीधे उससे बात की जाए और उसमें भी वो कह देगा कि अभी मेरे ऊपर देवता थोड़ी जब

654
00:47:55,040 --> 00:47:59,040
देवता आए तब बात करना तो उसी समय बात की जाए जिस समय वो देवता मुरली बोल रहा

655
00:47:59,040 --> 00:48:03,200
हो तब बात की जाए अन्यथा बात

656
00:48:03,200 --> 00:48:07,200
कर ही नहीं सकते तब तो आप उसके ईश्वर

657
00:48:07,200 --> 00:48:11,200
जो है उसी को निरुत्तर कर देंगे [हंसी] आप तो

658
00:48:11,200 --> 00:48:15,360
उसके पास है क्या मैं तो उससे पूछूंगा तुमने कहा मिलावट हो गई इसका मतलब तुम्हें

659
00:48:15,360 --> 00:48:19,520
पता है वहां क्या लिखा था सुनाओ कुरान पूरी सुनाओ

660
00:48:19,520 --> 00:48:23,680
जरा

661
00:48:23,680 --> 00:48:27,680
बिल्कुल भैया ये लोग कभी के मंत्र सुनाओ और एक ही जगह

662
00:48:27,680 --> 00:48:31,840
अटके रहते हैं। हां कुछ जाना ना ताना

663
00:48:31,840 --> 00:48:35,920
कुछ ना तर्क पूर्ण अपने सवाल रखे वहां पर जो बता दिया गया

664
00:48:35,920 --> 00:48:40,000
चले आए और यहां पे वो एक बटन लगा दिया और अपना

665
00:48:40,000 --> 00:48:44,080
वो टेप रिकॉर्ड है चालू कर दिया उगल दिया सारा और यही उगलने से

666
00:48:44,080 --> 00:48:48,320
मैं कल मना कर रहा हूं तो लोग कह रहे है कि तुम बोलने नहीं देते हो यही टेप रिकॉर्ड

667
00:48:48,320 --> 00:48:52,320
सुना था ना अभी दो पांच मिनट में जब मुझे कहना पड़ गया था कि मैं

668
00:48:52,320 --> 00:48:56,320
कब बोलूंगा मैं अगर यह ना कहूं तो वह आधे घंटे तक उनमें से उन्हीं बातों

669
00:48:56,320 --> 00:49:00,400
को तोड़ मरोड़ करके वह रिपीट करता रहे व्यक्ति हद

670
00:49:00,400 --> 00:49:05,840
है वही भैया ये बुद्धि का स्तर है हमारा

671
00:49:05,840 --> 00:49:11,840
तो ऐसे लोगों के यहां पर फंसते हैं हमारे हिंदू

672
00:49:12,000 --> 00:49:16,000
चलिए ठीक है मुझे लगता नहीं और कोई बात होनी है कल निर्भय आर्य के

673
00:49:16,000 --> 00:49:20,720
साथ है 1:00 बजे है कल आप लोग जुड़िएगा मोस्ट

674
00:49:20,720 --> 00:49:24,960
अवेटेड है वह निर्भय आर्य ने बड़ी तैयारी कर रखी है अवतार का खंडन

675
00:49:24,960 --> 00:49:30,000
करने की

676
00:49:30,000 --> 00:49:34,080
क्या लगता है? अभी तो बहुत ही अभी तो बहुत ही वो प्रोफेशनल बन रहे

677
00:49:34,080 --> 00:49:38,160
हैं। है ना? यहां पे आएंगे और जब वो उत्तर

678
00:49:38,160 --> 00:49:42,640
में निरुत्तर हो जाएंगे तो फिर समझ आएगा सभी को।

679
00:49:42,640 --> 00:49:45,280
मतलब

680
00:49:45,280 --> 00:49:49,840
अच्छा वो लोग स्वयं को

681
00:49:49,840 --> 00:49:53,840
वो स्वयं को इतना ज्ञानी समझ करके पुराणों में जो है

682
00:49:53,840 --> 00:49:58,800
अवतारवाद और शास्त्रों में जो है उसको खंडन करने आ रहे हैं ना यहां पे

683
00:49:58,800 --> 00:50:02,880
ज्ञानी बनके और जब पुराण की तो बात ही नहीं है ना उसमें

684
00:50:02,880 --> 00:50:05,760
कोई

685
00:50:05,760 --> 00:50:09,920
नहीं पुराण की तो बात ही नहीं है कोई

686
00:50:09,920 --> 00:50:14,320
अवतार अवतार का जो सिद्धांत बहुत सारे हमारे पुराण शास्त्र इत्यादि

687
00:50:14,320 --> 00:50:18,400
सभी में है ना हम तो अवतार को जब वो जब अवतार को

688
00:50:18,400 --> 00:50:22,640
वो मना करेंगे तो इनडायरेक्टली तो वो सभी शास्त्रों को चैलेंज करेंगे

689
00:50:22,640 --> 00:50:26,720
ना और जब सभी शास्त्रों को चैलेंज करेंगे तो शास्त्रों

690
00:50:26,720 --> 00:50:30,880
के रक्षक जो है परंपरा प्राप्त आचार्य गण जो है तो उन्हीं के

691
00:50:30,880 --> 00:50:34,880
जो एक आप है शिष्य हैं जब उनसे इस विषय में भिरेंगे तो

692
00:50:34,880 --> 00:50:39,440
ये बहुत ही अच्छा एक डिस्कशन होगा

693
00:50:39,440 --> 00:50:43,520
और सभी को समझ भी आएगा आएगा कि इस प्रकार से चैलेंज

694
00:50:43,520 --> 00:50:47,680
जो करते हैं ना उस वो कैसे निरुत्तर होते हैं वह कल के लाइव में देखने को मिल सकता

695
00:50:47,680 --> 00:50:52,080
है। हां और हमारे चैनल

696
00:50:52,080 --> 00:50:56,160
पर आह्वान पर मेन चैनल पर इस समय दो बहुत अच्छे वीडियोस पड़े

697
00:50:56,160 --> 00:51:00,400
हुए हैं। आपको उन्हें देखना चाहिए। एक तो बुद्ध से जो

698
00:51:00,400 --> 00:51:04,400
एक बुद्ध को मानने वालों से जो बाती बातें हुई

699
00:51:04,400 --> 00:51:08,560
हैं और एक जो कल मैंने एक डिटेल्ड वीडियो

700
00:51:08,560 --> 00:51:12,640
बनाया है नास्तिक और ये जो मुस्लिम के ऊपर

701
00:51:12,640 --> 00:51:16,720
जो और उसमें हमारी फिलोसफी भी बहुत अच्छे

702
00:51:16,720 --> 00:51:21,200
से समझ में आएगी आपको वीडियो में तीनों पक्ष है नास्तिकता

703
00:51:21,200 --> 00:51:26,320
का खंडन कैसे है और इस्लाम का ईश्वर

704
00:51:26,320 --> 00:51:30,320
ईश्वर कैसे नहीं ना ही वह नास्तिकता का खंडन कर सकने

705
00:51:30,320 --> 00:51:34,880
वाला है और ना ही उसका अस्तित्व भी सिद्ध होता है।

706
00:51:34,880 --> 00:51:39,440
और फिर तीसरा पक्ष है कि सनातन

707
00:51:39,440 --> 00:51:43,520
की जो कोर चीजें हैं वो भी आपको उससे पता चलेगी। बहुत इनेटिव वीडियो

708
00:51:43,520 --> 00:51:49,200
है वो। बनते बनते बन गया है अपने आप।

709
00:51:49,200 --> 00:51:53,200
बहुत ही ज्यादा ज्ञानवर्धन है। उसमें बहुत ही ज्ञान है।

710
00:51:53,200 --> 00:51:57,280
उसे देख के तो ऐसा लग रहा था जैसे कि आप वहां होते तो फिर उन दोनों में

711
00:51:57,280 --> 00:52:01,360
से किसी में भी मतलब अपने तर्क को सिद्ध करने का वो

712
00:52:01,360 --> 00:52:05,440
रहता ही नहीं। वहां पे आप दोनों के बीच आप उन दोनों के बीच आप रहते

713
00:52:05,440 --> 00:52:09,440
तो फिर जीत तो सनातन की वहां पे होती। और

714
00:52:09,440 --> 00:52:13,520
वैसे भी उसका जो सिद्धांत दिया गया था वो सनातन के पक्ष से ज्यादातर कुछ कुछ

715
00:52:13,520 --> 00:52:16,720
लग रहा था।

716
00:52:16,720 --> 00:52:22,720
हम

717
00:52:27,840 --> 00:52:32,000
चलिए ठीक है। मुझे लगता नहीं है आज और कोई कोई

718
00:52:32,000 --> 00:52:36,000
वैसी बात होनी है अर्थपूर्ण कल आप लोग जुड़े

719
00:52:36,000 --> 00:52:40,400
और साय काल को शायद हमारी चर्चा होगी आर्य समाझी

720
00:52:40,400 --> 00:52:44,880
के साथ या फिर

721
00:52:44,880 --> 00:52:48,960
एक दो लोग और हैं जिन्होंने संपर्क किया है तो शाम को देखते हैं।

722
00:52:48,960 --> 00:52:53,200
ठीक है चलिए जय श्री राम सभी को जय

723
00:52:53,200 --> 00:52:57,200
श्री राम
