1
00:00:01,840 --> 00:00:06,080
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,080
कुशल पूर्वक होंगे। धनतेरस की सभी को

3
00:00:10,080 --> 00:00:14,960
हार्दिक शुभकामनाएं और

4
00:00:14,960 --> 00:00:18,960
दीप मलिकोत्सव की भी आप सभी को

5
00:00:18,960 --> 00:00:22,560
हार्दिक शुभकामनाएं।

6
00:00:22,560 --> 00:00:26,960
एक भाई साहब का आज हमारे पास कॉल आया था।

7
00:00:26,960 --> 00:00:31,200
अ उनका प्रारंभिक कथन

8
00:00:31,200 --> 00:00:35,360
यही था कि हम उनके द्वारा जो उनके वो बहुत

9
00:00:35,360 --> 00:00:40,320
बड़े कोई विद्वान हैं जिनका नाम महेंद्रपाल आर्य है

10
00:00:40,320 --> 00:00:45,200
उनके साथ जो है चर्चा करें और उनको बड़ा विश्वास था। हालांकि

11
00:00:45,200 --> 00:00:50,400
हमने जब बाद में उन्होंने वीडियो भेजा तो कुछ और चीजें नजर आई जो मैं अभी आपको बताऊंगा

12
00:00:50,400 --> 00:00:54,640
पर उन्हें बड़ा विश्वास था कि हमारे जो महेंद्र पाल आर्य

13
00:00:54,640 --> 00:00:58,720
जी हैं बहुत ही तर्कसंगत और बहुत ही युक्ति युक्त और

14
00:00:58,720 --> 00:01:03,360
प्रामाणिक बातें करते हैं।

15
00:01:03,360 --> 00:01:07,920
तो उनकी महिमा का गान करते समय वह जो महानुभाव

16
00:01:07,920 --> 00:01:12,400
थे उन्होंने यह भी कहा कि महेंद्रपाल आर्य पूर्व में जो है

17
00:01:12,400 --> 00:01:16,400
मौलाना थे कहीं कोई और उसके बाद जो है

18
00:01:16,400 --> 00:01:21,760
उनका मतांतरण हुआ और उन्होंने अभी तक 36,000

19
00:01:21,760 --> 00:01:26,640
मुसलमानों को हिंदू बना दिया है 36,000

20
00:01:26,640 --> 00:01:30,240
और इसके साथ ही साथ

21
00:01:30,240 --> 00:01:34,400
उन्होंने यह भी बताया कि 5000 करोड़ करोड़ का उन्हें प्रलोभन

22
00:01:34,400 --> 00:01:38,480
मिला था सनातन विरोधी तत्वों के द्वारा

23
00:01:38,480 --> 00:01:42,480
और 5000 करोड़ का प्रलोभन भी उन्होंने

24
00:01:42,480 --> 00:01:46,800
स्वीकार नहीं किया तो यह

25
00:01:46,800 --> 00:01:51,040
उनका दावा था और अटूट विश्वास था महेंद्र

26
00:01:51,040 --> 00:01:55,120
पाल आर जी के ऊपर तो हमने कहा कि ठीक है आप जो है उनसे चर्चा

27
00:01:55,120 --> 00:01:59,200
करा सकते हैं आप हमारी आप चाहते हैं कि हम उनसे चर्चा करें तो आप

28
00:01:59,200 --> 00:02:04,320
करवा दीजिए आयोजन करवा दीजिए इस बात का

29
00:02:04,320 --> 00:02:08,400
तो फिर भी मैंने कहा ये जो 500 करोड़ वाली जो बात है

30
00:02:08,400 --> 00:02:12,960
इस संबंध में क्या प्रमाण है? तो बोले कि वीडियो है उनको कॉल आया था।

31
00:02:12,960 --> 00:02:17,120
कॉल क्या ऑडियो आया था। मुझे ऐसा लगा कि उन्होंने कहा कि कॉल आया

32
00:02:17,120 --> 00:02:19,280
था।

33
00:02:19,280 --> 00:02:23,360
मैंने कहा तो भेज दीजिए वो वीडियो जरा उसको। हम अपने दृष्टि से

34
00:02:23,360 --> 00:02:27,440
भी देख ले क्या है। तो वो वीडियो जब आया तो उसमें उनके जो

35
00:02:27,440 --> 00:02:31,440
महेंद्र पाल आर जी थे वह किसी की ऑडियो

36
00:02:31,440 --> 00:02:35,920
उसने अपनी ऑडियो रिकॉर्ड करके भेजी थी और उसको वह सुना रहे हैं।

37
00:02:35,920 --> 00:02:40,080
देखिए मुझे यह ऑडियो कॉल आया है। ऑडियो रिकॉर्ड आई वॉइस रिकॉर्डिंग

38
00:02:40,080 --> 00:02:44,160
आई है WhatsApp में जिसको मैं आपको सुना रहा हूं

39
00:02:44,160 --> 00:02:49,760
और जिसमें जो है देखिए मुझे प्रलोभन दिया जा रहा है ₹00 करोड़ रुपए का।

40
00:02:49,760 --> 00:02:54,000
अब जब मैंने वह वीडियो देखा और उसमें रिकॉर्डिंग सुनी

41
00:02:54,000 --> 00:02:58,240
तो पहली बात तो यह नजर आया कि पढ़ने वाला जो है वो किसी कागज

42
00:02:58,240 --> 00:03:02,560
को सामने रख के पढ़ रहा है। उसे कहते हैं ना उस रिकॉर्डिंग

43
00:03:02,560 --> 00:03:06,560
में उस व्यक्ति ने यह कहा महेंद्र पाल आर्य जी से कि आप

44
00:03:06,560 --> 00:03:10,640
जो है हमारी ओर आ जाओ और हम जो स्क्रिप्ट लिख के देंगे वो स्क्रिप्ट आप बोलो।

45
00:03:10,640 --> 00:03:14,640
तो हम इस बात के लिए आपको चाइना के जो क्या

46
00:03:14,640 --> 00:03:18,720
कहते हैं? युयान कहते हैं जो वहां का जो मुद्रा

47
00:03:18,720 --> 00:03:23,520
है वो किस रूप में जानी जाती है कुछ है तो चाइना के हम आपको करोड़ देंगे

48
00:03:23,520 --> 00:03:28,960
चाइना के अनुसार यूयान क्या है वो 5 करोड़ तो

49
00:03:28,960 --> 00:03:33,120
जो कि भारत में 500 करोड़ के रूप में मतलब

50
00:03:33,120 --> 00:03:34,560
माना जाता है रूप में परिवर्तित

51
00:03:34,560 --> 00:03:39,040
हो के आपको मिल जाएगा 500 करोड़ ये उसने कहा था

52
00:03:39,040 --> 00:03:43,280
तो जैसे कि वो यह कह रहा है ना कि महेंद्र पाल आर्य जी को एक स्क्रिप्ट

53
00:03:43,280 --> 00:03:47,280
दी जाएगी वो सनातन विरोधी तत्व के द्वारा वो वो उसको बुद्ध के

54
00:03:47,280 --> 00:03:51,840
रूप में बता रहा है बोलने वाला तो वो

55
00:03:51,840 --> 00:03:56,000
जब महेंद्र पाल आर जी तो बहुत अच्छे से किसी बात

56
00:03:56,000 --> 00:04:00,240
को समझ के मेरा ऐसा मानना है कि पढ़ सकते हैं बोल सकते हैं वक्ता

57
00:04:00,240 --> 00:04:04,320
के रूप में तो जब वो किसी विधिवत रूप से स्क्रिप्टेड चीज को पढ़ेंगे

58
00:04:04,320 --> 00:04:08,400
भी तब भी उसको पकड़ पाना बहुत मुश्किल होगा कि स्क्रिप्टेड बोल रहे हैं या अपने मन से

59
00:04:08,400 --> 00:04:13,600
बोल रहे हैं। हां यू युवान हां जी

60
00:04:13,600 --> 00:04:18,640
तो क्या पहली बात तो यह आई क्या चाइना के 5 करोड़

61
00:04:18,640 --> 00:04:22,720
युवान 500 करोड़ होते हैं क्या भारत के तो मुझे इस पर संदेह था मुझे इस

62
00:04:22,720 --> 00:04:26,720
बात की पुष्टि नहीं हुई है अब वो पता नहीं क्या बात है हो सकता है मैं इस

63
00:04:26,720 --> 00:04:30,800
मामले में गलत हूं कि क्या वहां पर एग्जैक्ट वो रकम के बारे में कहा

64
00:04:30,800 --> 00:04:35,200
गया है पर वह मुख्य विषय नहीं है मुख्य विषय यह है कि

65
00:04:35,200 --> 00:04:39,280
अगर महेंद्र पाल आर्य जी स्वयं

66
00:04:39,280 --> 00:04:43,600
यह पढ़ेंगे स्क्रिप्टेड किसी पत्र

67
00:04:43,600 --> 00:04:47,680
को तो वह इतने अच्छे से पढ़ देंगे कि उनको पकड़ पाना मुश्किल होगा कि वो स्क्रिप्टेड

68
00:04:47,680 --> 00:04:49,600
पढ़ रहे हैं कि अपने मन से बोल रहे

69
00:04:49,600 --> 00:04:53,600
हैं। मगर यह जो व्यक्ति की जो वॉइस रिकॉर्डिंग सुनाई जा रही है उसमें स्पष्ट दिखाई

70
00:04:53,600 --> 00:04:57,840
दे रहा है कि वो व्यक्ति अह जो है एक लिखी

71
00:04:57,840 --> 00:05:02,080
हुई चीज को पढ़ पढ़ के बोलता चला जा रहा है। और कोशिश कर

72
00:05:02,080 --> 00:05:06,400
रहा है कि उसमें भाव आ जाए परंतु वो ओवर एक्टिंग लग रही है।

73
00:05:06,400 --> 00:05:11,280
मेरे दृष्टि में तो ऐसा ही है। अब बात यह है कि 36,000

74
00:05:11,280 --> 00:05:15,760
लोगों की यदि घर वापसी हुई है तो वो 36,000

75
00:05:15,760 --> 00:05:20,000
लोगों की लिस्ट होगी आपके पास फिर कोई जब आप काउंट कर रहे हैं तो तो कृपया

76
00:05:20,000 --> 00:05:24,240
कर वो संपर्क सूत्र के साथ 36,000 लोगों की वो घर वापसी की लिस्ट

77
00:05:24,240 --> 00:05:28,400
आप प्रोवाइड करा दें। और इसमें कोई बुराई नहीं है कि

78
00:05:28,400 --> 00:05:32,480
आप जो है अगर घर वापसी करा रहे हैं तो इस पर हमें कोई आपत्ति है। हां यदि आप

79
00:05:32,480 --> 00:05:36,800
उन्हें सदा सनातन सिद्धांतों के नाम पर कुछ कचरा सिद्धांत इत्यादि

80
00:05:36,800 --> 00:05:42,400
देंगे। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

81
00:05:42,400 --> 00:05:47,040
और शाश्वत धर्म देने की बजाय यदि आप उसको तथाकथित

82
00:05:47,040 --> 00:05:51,040
इस्लाम से ही मिलता जुलता कुछ देंगे तो आपके उन सिद्धांतों पर

83
00:05:51,040 --> 00:05:55,280
हम अवश्य अगर हमारे सामने आएगा और हमें लगेगा कि आपका प्रतिकार

84
00:05:55,280 --> 00:05:59,600
करने से करना आवश्यक है क्योंकि आपसे जनता प्रभावित हो रही है तो हम वहां करेंगे।

85
00:05:59,600 --> 00:06:01,840
मगर

86
00:06:01,840 --> 00:06:04,960
बैक टू द पॉइंट एक यू

87
00:06:04,960 --> 00:06:09,280
बराबर 12 इंडियन रुपए तो करोड़

88
00:06:09,280 --> 00:06:14,400
12 कितना हुआ 50 करोड़

89
00:06:14,400 --> 00:06:18,560
12 से करेंगे तो 60 करोड़ हुआ तो वो 500 करोड़

90
00:06:18,560 --> 00:06:23,120
कैसे हो गया तो तो खैर

91
00:06:23,120 --> 00:06:27,360
बैक टू द पॉइंट यह लियो लियो

92
00:06:27,360 --> 00:06:31,440
जी हैं जो बता रहे हैं कि एक युवान बराबर होता

93
00:06:31,440 --> 00:06:35,840
है 12 इंडियन रुपए। तो उस हिसाब से

94
00:06:35,840 --> 00:06:39,840
60 करोड़ हो गया। मगर वो बता रहा है कि हम आपको 5 करोड़ चाइना के देंगे और

95
00:06:39,840 --> 00:06:44,320
वो आपके वहां आकर के 500 करोड़

96
00:06:44,320 --> 00:06:49,200
तो थोड़ा सा कार्टूनिस्ट पन दिखाई दे रहा है वहां पर। खैर

97
00:06:49,200 --> 00:06:53,280
तो 36,000 लोगों की कोई लिस्ट तो इन्होंने जारी की नहीं है। और

98
00:06:53,280 --> 00:06:56,240
हमारी आपत्ति

99
00:06:56,240 --> 00:07:00,240
घर वापसी पे तो है नहीं। हमारी आपत्ति तो इस बात पर है कि सनातन के नाम

100
00:07:00,240 --> 00:07:04,320
पर इस्लाम से मिलती जुलती धारणाएं इस्लाम से मिलती जुलती चीजें

101
00:07:04,320 --> 00:07:10,240
क्यों परोसी जा रही है जबकि पास जबकि हमारे पास सर्वशक्तिमान

102
00:07:10,240 --> 00:07:16,240
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म है।

103
00:07:16,720 --> 00:07:19,440
अच्छा

104
00:07:19,440 --> 00:07:25,440
अब इसके बाद वो भाई साहब जो है

105
00:07:27,280 --> 00:07:31,360
जो इस बात को लेकर के आए थे कि हमें हमारे महेंद्र पाल आर्य जो है वह

106
00:07:31,360 --> 00:07:35,840
बहुत ही विद्वान है और आप उनसे चर्चा कर लीजिए। सर्वशक्तिमान

107
00:07:35,840 --> 00:07:40,480
ईश्वर पर ही चर्चा होनी थी और आपको एक बात और बता दूं निकट भविष्य में

108
00:07:40,480 --> 00:07:44,480
वो जो निर्भय आर्य करके हैं उन्होंने हमें संपर्क किया

109
00:07:44,480 --> 00:07:48,560
था और उनके साथ जो है एक चर्चा आपको दिखाई दे

110
00:07:48,560 --> 00:07:52,560
सकती है। वो अपनी कुछ तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोक्ष को लेकर के

111
00:07:52,560 --> 00:07:56,560
मैंने आपके वीडियोस नहीं सुने हैं तो उसमें वो तैयारी कर रहे हैं और

112
00:07:56,560 --> 00:08:01,040
जल्दी आपको वो चर्चा आपके समक्ष आ सकती है। उनको जो अपने स्वयं को रैशन

113
00:08:01,040 --> 00:08:05,280
आर्य के नाम से भी बताते हैं और उसके रिगार्डिंग

114
00:08:05,280 --> 00:08:09,280
जो हमारी और उनकी बातचीत हुई है वो हमने YouTube पर प्रसारित कर

115
00:08:09,280 --> 00:08:13,600
दी आज सुबह जिसने ना देखी हो मेन चैनल है जो आान वहां पर

116
00:08:13,600 --> 00:08:17,840
तो फिर वो व्यक्ति जो है आगे करके कुछ बोलने लगा तो वहां पर एक बात उखड़

117
00:08:17,840 --> 00:08:21,840
आई कि भाई क्योंकि मेरे मन में ये चल ही रहा था कि पौराणिक अलंकारिक क्योंकि वो

118
00:08:21,840 --> 00:08:27,040
चर्चा जिसने सुनी होगी वो जानता होगा तो

119
00:08:27,040 --> 00:08:31,120
इसी बारे में पौराणिक और अलंकारिक के बारे में जो है चालू

120
00:08:31,120 --> 00:08:34,800
हो गई बात

121
00:08:34,800 --> 00:08:38,800
तो उसमें उस व्यक्ति ने हनुमान जी पर आपत्ति जताई पूछ होने

122
00:08:38,800 --> 00:08:43,200
पर और मैंने भी कुछ आपत्ति जताई तो वो आपको रिकॉर्डिंग

123
00:08:43,200 --> 00:08:47,440
अ सुनाई देगी अभी मगर कुल मिलाकर

124
00:08:47,440 --> 00:08:51,440
के बात क्या है कि उस व्यक्ति ने

125
00:08:51,440 --> 00:08:55,760
अंत में मुझसे कहा कि मैं आपसे यह जो हनुमान जी की पूछ वाला मामला है चमत्कार

126
00:08:55,760 --> 00:08:59,760
को मानना अथवा ना मानना इस वाले वाले मामले पर आकर के मैं आपसे अभी के

127
00:08:59,760 --> 00:09:03,840
अभी चर्चा करना चाहता हूं। वो बहुत उत्सुक हो गया क्योंकि मैंने शायद संभव था मेरी

128
00:09:03,840 --> 00:09:07,920
दृष्टि में मैंने उसको निरत्तर कर दिया। तो इस

129
00:09:07,920 --> 00:09:11,920
कारण से बहुत उत्सुक हो गए और बोले कि अभी के अभी चर्चा कर लो। तो भाई हमारे यहां भी

130
00:09:11,920 --> 00:09:16,000
त्यौहार है और और भी कई दायित्व होते हैं।

131
00:09:16,000 --> 00:09:20,000
तो मैंने कहा कि अभी तुरंत तो नहीं कर सकता। मगर उसके बहुत कहने पर

132
00:09:20,000 --> 00:09:24,080
फिर मैंने कहा कि चलो 2:00 बजे आ जाओ लाइव आ कर के

133
00:09:24,080 --> 00:09:28,320
बात कर लेते हैं। वह फोन पर ही करना चाहता था। तो फिर मैंने उसको कहा कि

134
00:09:28,320 --> 00:09:32,480
भाई लाइव में ही करेंगे तो आप अपनी फोटो भेज दीजिए। फोटो भेजने के नाम पर उसने

135
00:09:32,480 --> 00:09:36,560
कहा ठीक है मगर उसके बाद काफी देर तक फोटो नहीं भेजी तो जो फिर

136
00:09:36,560 --> 00:09:40,800
मैंने फोन किया कि फोटो क्यों नहीं भेज रहे हो? अगर करनी है तो बताओ नहीं करनी है तो हम अपना कार्य

137
00:09:40,800 --> 00:09:42,240
करें। तो फिर वो

138
00:09:42,240 --> 00:09:46,320
बोला कि नहीं करनी है। फिर मतलब थोड़ा सा मुझे लगा कि आनाानी कर रहा

139
00:09:46,320 --> 00:09:51,040
था। मगर फिर तैयार हो गया तो उसने अपनी फोटो भेज दी। फाइनली

140
00:09:51,040 --> 00:09:55,120
थोड़ा सा पलट पलट रहा था अपनी बात से। फोटो भेज दी। मैंने अलंकारियों में

141
00:09:55,120 --> 00:09:59,280
देखा है। कि वह लोग अपनी बात से पलट जाते हैं क्योंकि उनके यहां यह सब मर्यादाएं कोई खास

142
00:09:59,280 --> 00:10:03,360
मायने नहीं रखती। कुछ भी बोल देते हैं। फिर कह देंगे मैं तो हूं

143
00:10:03,360 --> 00:10:09,120
ही नहीं। खैर अ

144
00:10:09,120 --> 00:10:13,280
क्या कहते हैं ये?

145
00:10:13,280 --> 00:10:17,760
जैसे वह एक था ना यह क्या नाम था जो

146
00:10:17,760 --> 00:10:22,800
हम पर जो पारिवारिक मेरी पारिवारिक जानकारियां एकत्रित करते हुए

147
00:10:22,800 --> 00:10:26,880
जो कटाक्ष करने कटाक्ष किया उपवास उड़ाया वो

148
00:10:26,880 --> 00:10:30,960
एक मीटिंग हुई थी ना उसमें वो आया था क्या नाम था उसका बड़ा

149
00:10:30,960 --> 00:10:35,040
फ्रेश फ्रेश सा एक लड़का है ना क्या

150
00:10:35,040 --> 00:10:39,600
नाम था उसका न्यू कमर है जो

151
00:10:39,600 --> 00:10:43,680
विज्ञान दर्शन नाम से है ना उसका चैनल मोहित गड मोहित गड

152
00:10:43,680 --> 00:10:47,840
तो वो भी यही कहता है कि भाई मैं जो है आर्य समाजी हूं ही नहीं

153
00:10:47,840 --> 00:10:51,920
आर्य समाजी ना होना क्यों क्योंकि आप जिसका

154
00:10:51,920 --> 00:10:56,000
पक्ष लेने आ रहे हो यदि आपकी बात सिद्ध हो जाती है तो उसका पक्ष

155
00:10:56,000 --> 00:10:57,360
सिद्ध हो जाए परंतु

156
00:10:57,360 --> 00:11:01,760
यदि उसका दोष सिद्ध हो रहा हो तो उसकी बाध्यता में आप बाधित ना हो जाए मोहित

157
00:11:01,760 --> 00:11:05,840
गौर तो ऐसा दिखाई देता है

158
00:11:05,840 --> 00:11:10,000
अच्छा तो फिर उसने अपना दे दिया

159
00:11:10,000 --> 00:11:14,320
फोटो वोटोो दे दिया तो वही हमने फोटो लगाया कि भाई आ जाओ चमत्कार को मानने

160
00:11:14,320 --> 00:11:18,320
ना मानने के विषय में क्या चर्चा हो सकती है तो इस बात को लेकर के

161
00:11:18,320 --> 00:11:22,400
यह चर्चा आयोजित हुई है तो भाई इनको जरा वो ऑडियो सुना दो

162
00:11:22,400 --> 00:11:26,480
एक नंबर दो नंबर और तीन नंबर वाला वही आप आवश्यक है वो आप सुना

163
00:11:26,480 --> 00:11:29,120
दीजिए

164
00:11:29,120 --> 00:11:33,840
और मैंने उनको लिंक दे दिया है अब अगर वह नहीं आते हैं तो उनकी कायरता का हीक

165
00:11:33,840 --> 00:11:39,840
होगा यहां पर

166
00:11:42,640 --> 00:11:46,720
हां कोई बात नहीं है आप पहले नंबर वाला सुना दीजिए कोई

167
00:11:46,720 --> 00:11:49,120
बात नहीं

168
00:11:49,120 --> 00:11:54,880
तो सनातनी जस्ट जी

169
00:11:54,880 --> 00:11:59,120
अच्छा मैं मेरे कुछ समर्थक हैं मैं जब तक ऑडियो

170
00:11:59,120 --> 00:12:03,280
रिकॉर्डिंग चालू हो रही है एक-एक करके जरा मैं पूछना चाहता हूं कि आप लोगों ने अपना

171
00:12:03,280 --> 00:12:07,520
जो नाम जो यह रखा है वह किस क्यों रखा है

172
00:12:07,520 --> 00:12:13,040
जैसे सनातनी जिस से मैं पूछूंगा कि क्या आधार है?

173
00:12:13,040 --> 00:12:19,040
जय श्री राम आपको जय श्री राम। थोड़ा सा तब तक एक समय

174
00:12:19,600 --> 00:12:23,600
का सदुपयोग हो जाएगा। थोड़ा सा जो डिफरेंट नाम वाले लोग हैं वो अपना

175
00:12:23,600 --> 00:12:28,800
अगर नाम क्यों रखा है ये बताना चाहे तो बता सकते हैं।

176
00:12:28,800 --> 00:12:33,040
लिखकर बता दें तो हम यहां प्रदर्शित कर देंगे। सनातनी

177
00:12:33,040 --> 00:12:39,040
जस्ट जी अगर हैं सुन रहे हैं तो

178
00:12:46,240 --> 00:12:50,320
हां तोताराम जी आ चुके हैं। एंटर हो चुके हैं।

179
00:12:50,320 --> 00:12:54,400
तो हमारी जो अभी जो वो होने वाली थी वो नाम का अर्थ बताने की वो

180
00:12:54,400 --> 00:12:58,800
फिर किसी दिन कर लेंगे।

181
00:12:58,800 --> 00:13:04,800
तो तोताराम जी को ले लें स्टेज पर।

182
00:13:05,920 --> 00:13:11,920
तोताराम जी अपना कैमरा ऑन कर लीजिए आप।

183
00:13:15,120 --> 00:13:19,360
थोड़ा फेस साफ दिखाई नहीं दे रहा आपका। एक तो कैमरा पहले कपड़े

184
00:13:19,360 --> 00:13:25,360
से साफ कर लीजिए। बहुत धुंधला आ रहा है चेहरा।

185
00:13:45,200 --> 00:13:49,280
तो एक बार हम लोग वो रिकॉर्डिंग सुन ले क्या जिससे कि हमारी पृष्ठभूमि

186
00:13:49,280 --> 00:13:55,280
तैयार हो जाए चर्चा करने की

187
00:13:58,630 --> 00:14:02,720
[संगीत] हां तोताराम जी जी

188
00:14:02,720 --> 00:14:06,960
जी एक बार वो वो रिकॉर्डिंग सुन लेना जिससे हमारी वो पृष्ठभूमि

189
00:14:06,960 --> 00:14:12,960
तैयार हो जाए

190
00:14:13,760 --> 00:14:17,920
जी जी बोलिए रिकॉर्डिंग हम लोग एक बार सुन

191
00:14:17,920 --> 00:14:23,920
लेते हैं जिससे कि वो पृष्ठभूमि तैयार

192
00:14:24,320 --> 00:14:28,480
चलिए खैर रिकॉर्डिंग हम बाद में अलग से डाल देंगे। हमारे और

193
00:14:28,480 --> 00:14:33,120
आपके बीच में यहां पहुंचने तक क्या बात हुई?

194
00:14:33,120 --> 00:14:37,680
चलिए सीधे आते हैं कि आपका कहना है कि पौराणिक

195
00:14:37,680 --> 00:14:41,840
लोग वो हैं जो चमत्कार में विश्वास

196
00:14:41,840 --> 00:14:45,920
रखते हैं। और आर्य समाजी वो हैं जो चमत्कार में

197
00:14:45,920 --> 00:14:50,080
विश्वास नहीं रखते। चमत्कार को मानने पर आपत्ति मानते हुए आप

198
00:14:50,080 --> 00:14:54,720
उनको वेद विरोधी के रूप में पौराणिक

199
00:14:54,720 --> 00:14:58,960
रूप में प्रस्तुत करते हो। पौराणिक कहते हो तो हमने इस पर आपत्ति जताई तो आपका कहना

200
00:14:58,960 --> 00:15:03,040
था कि भाई आप लोग बंदर वो हनुमान जी के पूछ मानते हो।

201
00:15:03,040 --> 00:15:07,120
पूंछ कैसे हो सकती है बंदर हनुमान जी के है ना?

202
00:15:07,120 --> 00:15:11,200
तो फिर मेरा आपको कहना था कि भाई अमैथुनी सृष्टि की रचना

203
00:15:11,200 --> 00:15:14,160
कैसे हो सकती है? तिब्बत की धरती से

204
00:15:14,160 --> 00:15:18,240
बिना माता के गर्भ से बिना माता के गर्भ धारण किए

205
00:15:18,240 --> 00:15:22,400
कोई मनुष्य कैसे उत्पन्न हो रहा है और भी ढेर सारी चमत्कारिक

206
00:15:22,400 --> 00:15:26,560
बातें तो आप पहले अपना पक्ष स्पष्ट कर दीजिए कि आप

207
00:15:26,560 --> 00:15:30,640
आर्य समाज चमत्कार को स्वीकार करता है कि

208
00:15:30,640 --> 00:15:35,120
नहीं करता है या केवल उन बातों को ही स्वीकार करता है जो वैज्ञानिक

209
00:15:35,120 --> 00:15:39,600
धरातल पर स्वीकार की जा चुकी है।

210
00:15:39,600 --> 00:15:43,840
देखिए ईश्वर जो है विज्ञान क्या है और

211
00:15:43,840 --> 00:15:48,480
ईश्वर क्या है? इसके बारे में जानना पड़ेगा हमारे लिए।

212
00:15:48,480 --> 00:15:52,800
ठीक है? ईश्वर ने क्या है? सिद्धांत दिया हमारे लिए। सृष्टि

213
00:15:52,800 --> 00:15:57,360
का निर्माण किया। जो सृष्टि का जो निर्माण किया

214
00:15:57,360 --> 00:16:01,360
पहले आप अपना पक्ष क्लियर कर दीजिए। वो सृष्टि के निर्माण पे हम लोग आएंगे

215
00:16:01,360 --> 00:16:05,520
बाद में। आप पहले अपना पक्ष क्लियर कर दीजिए कि आप

216
00:16:05,520 --> 00:16:09,520
चमत्कार को मानते हैं या सिर्फ उस बात को मानते हैं जो

217
00:16:09,520 --> 00:16:14,080
वैज्ञानिक दृष्टि से स्वीकार कर ली गई है आज के समाज के द्वारा

218
00:16:14,080 --> 00:16:18,160
या फिर ऐसा भी मानते हैं कि कुछ ऐसे भी कार्य होते हैं

219
00:16:18,160 --> 00:16:22,160
जो कि वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध नहीं किए जा पाए हैं। स्वीकार नहीं कर

220
00:16:22,160 --> 00:16:26,400
पाए हैं। हो सकता है निकट भविष्य में ऐसा हो जाए कि वो उन बातों

221
00:16:26,400 --> 00:16:29,200
को भी स्वीकार कर ले। तो आप इनमें से कौन सी बात को

222
00:16:29,200 --> 00:16:33,280
मानते हैं? दोनों दोनों में विश्वास तो दोनों को

223
00:16:33,280 --> 00:16:37,280
मानते हैं तो आपने ये जो कह रहे हैं कि हनुमान जी के पूछ कैसे हो सकती

224
00:16:37,280 --> 00:16:42,640
है तो इसको चमत्कार के रूप में स्वीकार क्यों नहीं करते

225
00:16:42,640 --> 00:16:46,800
इसको चमत्कार के रूप में स्वीकार इसलिए नहीं करते क्योंकि पूरे संसार

226
00:16:46,800 --> 00:16:50,800
में अगर हम किसी भी मानव की सर्वे करें तो कभी भी देखने

227
00:16:50,800 --> 00:16:54,960
को हमें पूछ नहीं मिलेगी। पूछ तो मिल जाएगी। व्यक्ति

228
00:16:54,960 --> 00:16:59,120
की पूछ तो होती है लेकिन पूछ नहीं होती है। इसलिए हम

229
00:16:59,120 --> 00:17:03,440
पूछ मिल जाएगी पर पूछ नहीं होती है। मतलब पूछ

230
00:17:03,440 --> 00:17:07,520
का जैसे आप है आपकी एक आपके कर्मों से क्या है? आपकी पूछ

231
00:17:07,520 --> 00:17:11,600
है। आपकी कर्मों से क्या है? आपकी पूछ है। लोग आपको

232
00:17:11,600 --> 00:17:16,000
पूछते हैं कि आप ये बताइए कि आपको किस तरीके ये काम जो है वो पूछ

233
00:17:16,000 --> 00:17:20,080
वो पूछ के भाई वो कहां है? वो कौन है? वो वाली बात किसी को

234
00:17:20,080 --> 00:17:24,240
जानना जी जी ये है

235
00:17:24,240 --> 00:17:28,240
तो कहने का तात्पर्य यही है ना कि आप उनहीं बातों को स्वीकार करते हैं

236
00:17:28,240 --> 00:17:32,240
जिनके प्रत्यक्ष प्रमाण मिलते हैं। आप कह रहे हैं पूरी

237
00:17:32,240 --> 00:17:36,480
दुनिया में कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं है जो जिसके

238
00:17:36,480 --> 00:17:40,480
पूछ हो तो यानी कि आप प्रत्यक्ष प्रमाण जिसका है आप उसी को स्वीकार करते हैं कि

239
00:17:40,480 --> 00:17:46,480
हां ये पॉसिबल है। जी जी

240
00:17:46,960 --> 00:17:50,960
इसीलिए क्योंकि हनुमान जी की जो पूछ थी कि नहीं थी तो

241
00:17:50,960 --> 00:17:55,200
वो नहीं मिलते हैं प्रत्यक्ष प्रमाण तो इसलिए आप जो है उसको स्वीकार नहीं करते

242
00:17:55,200 --> 00:17:59,200
हैं। जी हां संसार में अगर आप सर्वे करेंगे तो

243
00:17:59,200 --> 00:18:03,200
व्यक्ति काला गोरा लंबा चौड़ा ठीक है ये तो अरे

244
00:18:03,200 --> 00:18:07,280
भाई इतना लंबा नहीं है ना देखो आपके यहां पता नहीं त्यौहार मनाया जाता है कि

245
00:18:07,280 --> 00:18:11,440
नहीं मेरे यहां मनाया जाता है थोड़ा सा आप कृपा करिए खामखा की बातें

246
00:18:11,440 --> 00:18:15,680
बोलने का क्या मतलब है टू द पॉइंट हम लोग चल रहे हैं समझ रहे है ना जब

247
00:18:15,680 --> 00:18:19,920
मैं आपसे क्लियर पूछ लिया आपका पक्ष तो अब मुझे उस पर बोलने दीजिए आपका

248
00:18:19,920 --> 00:18:24,080
पक्ष क्लियर हो गया कि भाई जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमारे पास अवेलेबल है

249
00:18:24,080 --> 00:18:28,240
उसको मानते पहली बात तो यह है कि मेरे पास अभी वह

250
00:18:28,240 --> 00:18:32,240
सामग्री नहीं है जिसमें बता पाऊं

251
00:18:32,240 --> 00:18:36,400
कि उस प्रजाति को क्या कहा जाता था। पर बाली जो

252
00:18:36,400 --> 00:18:40,400
देश है उसमें ऐसी प्रजाति को का होना स्वीकार किया गया

253
00:18:40,400 --> 00:18:44,640
है जिनको कि जंगली मनुष्य भी कहा जाता था।

254
00:18:44,640 --> 00:18:48,800
कारण था कि उनके 6 इंच तक की पूंछ होती थी। सुन लीजिए सुन लीजिए। सुन

255
00:18:48,800 --> 00:18:53,200
लीजिए। मैंने आपको पूरा सुना ना? पूरा सुना ना? मैंने मुंडी तो नहीं हिलाई।

256
00:18:53,200 --> 00:18:57,280
मुंडी हिलाई क्या मैंने? मुंडी हिलाई थी क्या भाई साहब? मैंने

257
00:18:57,280 --> 00:19:01,600
हेलो हां हां बोलिए। मैंने मुंडी हिलाई क्या? मैंने मुंडी

258
00:19:01,600 --> 00:19:03,760
हिलाई क्या?

259
00:19:03,760 --> 00:19:08,560
मैंने मुंडी हिलाई क्या भाई साहब? आप आगे बढ़िए। आगे बढ़िए।

260
00:19:08,560 --> 00:19:12,640
भाई साहब आप आपने ये जो किया ना इरिटेटिंग था। मत करिए ना ऐसा

261
00:19:12,640 --> 00:19:17,280
कुछ कि वो चर्चा से वो दूसरी ओर चले जाए हम लोग।

262
00:19:17,280 --> 00:19:21,840
ठीक है। मैं आगे बढ़ता हूं।

263
00:19:21,840 --> 00:19:26,000
ठीक है। तो पहली बात तो ऐसा स्वीकार किया गया है कि

264
00:19:26,000 --> 00:19:30,000
बाली में ऐसे भी प्राणी माने गए हैं जिनको कि

265
00:19:30,000 --> 00:19:34,240
जंगली पुरुष कहा जा सकता है। मनुष्यों की अपेक्षाकृत उनके रोम

266
00:19:34,240 --> 00:19:38,320
बहुत अधिक होते थे और क्या कहते थे बंदरों की अपेक्षाकृत वो ज्यादा

267
00:19:38,320 --> 00:19:42,560
बुद्धिमान माने जाते थे। उनके छ इंच तक की पूछ होती थी। ऐसी

268
00:19:42,560 --> 00:19:46,960
जानकारी हमें प्राप्त है। मगर अभी उसके कोई ठोस प्रमाण इत्यादि

269
00:19:46,960 --> 00:19:51,120
मेरे पास अवेलेबल नहीं है। इसलिए उसी बात पर हम ठहरेंगे नहीं। हम आगे

270
00:19:51,120 --> 00:19:55,280
बढ़ेंगे। अब आप एक बात बताइए कि

271
00:19:55,280 --> 00:19:59,520
गायत्री मंत्र को पढ़ने से क्या होता है?

272
00:19:59,520 --> 00:20:05,200
गायत्री मंत्र को पढ़ने से उसमें सद्बुद्धि की कामना की जाती है ईश्वर से।

273
00:20:05,200 --> 00:20:09,280
आप कुछ फल प्राप्त होता है कि नहीं होता है? बिल्कुल

274
00:20:09,280 --> 00:20:13,280
प्राप्त होता है। अच्छा। तो ये कहां पूरी दुनिया में

275
00:20:13,280 --> 00:20:18,960
सिद्ध है कि कोई मंत्र पढ़ देने से कोई फल प्राप्त हो जाएगा?

276
00:20:18,960 --> 00:20:23,200
फल प्राप्त तो हमें ध्यान लगाना पड़ता है ना उसके लिए मतलब

277
00:20:23,200 --> 00:20:28,160
कहां से सिद्ध है ये कहां से सिद्ध है पूरी दुनिया में

278
00:20:28,160 --> 00:20:32,160
अपने अपने आत्मिक ज्ञान से अपने आत्मिक भाई साहब

279
00:20:32,160 --> 00:20:36,240
मैं वैज्ञानिक धरातल पर आपसे पूछ रहा हूं कहां से सिद्ध है जैसे आप प्रत्यक्ष

280
00:20:36,240 --> 00:20:40,320
रूप से मांग रहे हैं कि पूरी दुनिया में ऐसा कोई वानर नहीं है।

281
00:20:40,320 --> 00:20:45,920
आपने एक चीज और कही थी वानर ना होने के संबंध में कि

282
00:20:45,920 --> 00:20:50,640
अगर वो थे किसी समय पे तो आप कहां गए? तो डायनासोर

283
00:20:50,640 --> 00:20:54,640
थे किसी मैंने आपको कहा डायनासोर थे तो आप कहां गए? तो आपने

284
00:20:54,640 --> 00:20:58,800
यह भी जवाब दिया था वहां पर कि जो भगवान जो एक बार

285
00:20:58,800 --> 00:21:02,800
सिद्धांत बना देता उसको बार-बार नहीं बदलता है। तो अगर मैंने आपसे यह भी

286
00:21:02,800 --> 00:21:06,880
पूछा था कि भैया अमैतुनी सृष्टि कैसे बन सकती है तो आपका

287
00:21:06,880 --> 00:21:10,880
उसमें कहना था कि अमैतुनी सृष्टि बन बना दी उसके बाद

288
00:21:10,880 --> 00:21:14,880
फिर वो उसका सिद्धांत है कि वो माता के गर्भ से जन्म लेगा। यह सब बातें आपने

289
00:21:14,880 --> 00:21:19,280
की थी। खैर मैं वो बातों पर अभी आऊंगा। वो बातों पर मैं अभी आऊंगा।

290
00:21:19,280 --> 00:21:23,840
वो मैं बातों पर मैं अभी आऊंगा। अभी अभी अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे

291
00:21:23,840 --> 00:21:27,920
कि गायत्री मंत्र को पढ़ने से सद्बुद्धि मिलती

292
00:21:27,920 --> 00:21:32,080
है। ये कौन सी वैज्ञानिक धरातल की कसौटी पर कसा गया है

293
00:21:32,080 --> 00:21:35,120
ये सिद्धांत

294
00:21:35,120 --> 00:21:39,440
इसको महसूस किया जाता है। इसको कोई कोई विज्ञान की कसौटी पर नहीं इसको आप तर्क

295
00:21:39,440 --> 00:21:43,440
कसौटी पर कसेंगे उसके बाद यहां एक विचार निकल के आएगा। ये व्यक्ति

296
00:21:43,440 --> 00:21:47,520
स्वयं क्या निकल के आएगा बताइए? मतलब मतलब इसके

297
00:21:47,520 --> 00:21:51,520
प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। मतलब इसके प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं

298
00:21:51,520 --> 00:21:55,680
है। अरे भाई साहब अनुभव तो हमारा भी है ना। हमारा

299
00:21:55,680 --> 00:22:01,360
अनुभव कह रहा है कि हां थे। हनुमान जी थे जिनके पूछ थी।

300
00:22:01,360 --> 00:22:05,440
जी अनुभव तो हमारा भी कुछ कह रहा है ना कि

301
00:22:05,440 --> 00:22:11,440
क्या क्या हम लोग हम लोग हम लोगों का अनुभव भाड़ में जाए।

302
00:22:12,400 --> 00:22:16,720
नहीं ये तो प्रेजेंट का है ना। ये तो हम प्रेजेंट में बता रहे हैं कि हम जब हम ओम या संध्या

303
00:22:16,720 --> 00:22:21,120
करेंगे ठीक है उसका मानसिक डेवलपमेंट के लिए ठीक है और

304
00:22:21,120 --> 00:22:25,440
भाई साहब आपने यहां पर ऐसी चीज को स्वीकार किया है जिसका

305
00:22:25,440 --> 00:22:29,280
प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है

306
00:22:29,280 --> 00:22:33,280
फिर आप हमारे प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में हमारी चीजों पर आपत्ति क्यों

307
00:22:33,280 --> 00:22:37,280
जता रहे हैं आप नहीं मानो तो मत मानो मगर उसको आपत्ति क्यों जता रहे

308
00:22:37,280 --> 00:22:41,680
हो जब आप अपने प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में अपनी चीजों को मान ले रहे हो

309
00:22:41,680 --> 00:22:47,520
हमें भी महसूस होता है हां हनुमान जी थे

310
00:22:47,520 --> 00:22:51,520
महसूस होने के नाम पे हम नहीं चल सकते ना। नहीं तो प्रत्यक्ष प्रमाण की अगर बात

311
00:22:51,520 --> 00:22:56,080
है तो प्रत्यक्ष प्रमाण की अगर बात है तो प्रत्यक्ष प्रमाण की बात करिए।

312
00:22:56,080 --> 00:23:00,480
प्रत्यक्ष प्रमाण कहां है? गायत्री मंत्र से सद्बुद्धि आएगी। ये तो हमारा बिलीव

313
00:23:00,480 --> 00:23:06,320
है। ये हमारा बिलीव है। बिल्कुल।

314
00:23:06,320 --> 00:23:11,680
हम बताइए कौन से साइंटिस्ट ने कहां पे सिद्ध किया? पूरा पूरा विश्वास है

315
00:23:11,680 --> 00:23:16,960
तो ऐसे ही पूरा विश्वास हमें है।

316
00:23:16,960 --> 00:23:20,960
यानी कि प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में भी आर्य समाज ने कई चीजें

317
00:23:20,960 --> 00:23:24,960
स्वीकार कर रखी है। टू द पॉइंट ये है। पॉइंट की बात यह है कि प्रत्यक्ष

318
00:23:24,960 --> 00:23:28,960
प्रमाण के अभाव में भी आर्य समाज ने कई चीजों को स्वीकार किया है। और

319
00:23:28,960 --> 00:23:32,960
बताइए बिना माता के गर्भ में पूरी दुनिया में बिना

320
00:23:32,960 --> 00:23:38,960
माता के गर्भ से पूरी दुनिया में कहां पर संतान उत्पत्ति होती है बताइए।

321
00:23:39,280 --> 00:23:43,360
तो ये ईश्वर का उसको सृष्टि की रचना कैसे होगी? देखिए यही

322
00:23:43,360 --> 00:23:47,680
चीज़ तो यानी कि ईश्वर चाहे ईश्वर चाहे

323
00:23:47,680 --> 00:23:51,680
एक मिनट एक मिनट ईश्वर चाहे तो प्रत्यक्ष प्रमाण

324
00:23:51,680 --> 00:23:55,680
जिसका प्राप्त नहीं है या जो वैज्ञानिक कसौटी पर कसा नहीं जा पा

325
00:23:55,680 --> 00:23:59,680
रहा है ऐसे कार्य भी कर सकता है जिनको हम चमत्कार कहते हैं।

326
00:23:59,680 --> 00:24:03,760
सीधी बात वो ऐसे ऐसा मनुष्य बना सकता है

327
00:24:03,760 --> 00:24:08,000
जिसने कि वो माता के गर्भ के बिना भी मनुष्यों को बना

328
00:24:08,000 --> 00:24:12,000
सकता है। यानी कि वो ऐसा वानर भी बना सकता है जो

329
00:24:12,000 --> 00:24:16,080
मनुष्यों की तरह बात करता हो। मनुष्यों की तरह विद्वान हो या फिर ऐसा मनुष्य

330
00:24:16,080 --> 00:24:20,080
भी बना सकता है जिसके शरीर की आकृति वानरों से मिलती जुलती

331
00:24:20,080 --> 00:24:26,080
हो।

332
00:24:35,360 --> 00:24:40,320
बानों से मिलती जुलती हो हम

333
00:24:40,320 --> 00:24:44,720
वानरों से मिलती जुलती तो होगी लेकिन पूछ कैसे बना देगा?

334
00:24:44,720 --> 00:24:49,520
अरे भाई बिना माता के गर्भ के इंसान कैसे पैदा कर देगा?

335
00:24:49,520 --> 00:24:53,920
बताओ। अरे तो सृष्टि का निर्माण करना है।

336
00:24:53,920 --> 00:24:57,920
ठीक है। यानी कि अपमान ईश्वर चमत्कार कर सकता

337
00:24:57,920 --> 00:25:02,000
है। जो वैज्ञानिक धरातल पर कसा नहीं

338
00:25:02,000 --> 00:25:06,320
जा सकता है वो काम भी वो कर सकता है। तो विज्ञान विज्ञान

339
00:25:06,320 --> 00:25:10,640
क्या है? पहले तो इसको क्लियर करना ना विज्ञान क्या है? आप बताइए

340
00:25:10,640 --> 00:25:14,800
विज्ञान क्या है? ना कि जो प्रत्यक्ष प्रमाण जिसके अवेलेबल नहीं है उसको

341
00:25:14,800 --> 00:25:18,960
हम नहीं मानते। तो जब माता के गर्भ के बिना

342
00:25:18,960 --> 00:25:23,040
जन्म लेने वाले इंसान के प्रत्यक्ष प्रमाण आपके पास नहीं है तो आप उसको

343
00:25:23,040 --> 00:25:27,200
क्यों मानते हैं? दिखाओ एक इंसान माता के गर्भ के बिना जन्म

344
00:25:27,200 --> 00:25:31,200
ले रहा हो जो एक विज्ञान विज्ञान यही है कि एक

345
00:25:31,200 --> 00:25:35,280
जीव किसी जीव से जन्म लेता है। ये विज्ञान है। अब ये इसके लिए ये विज्ञान आया

346
00:25:35,280 --> 00:25:39,360
कहां से? विज्ञान हमें ईश्वर ने दिया। वही तो भैया वही तो

347
00:25:39,360 --> 00:25:43,360
हम भी कह रहे हैं कि भैया जहां साइंस खत्म हो जाती जिसके बाउंड्री के

348
00:25:43,360 --> 00:25:47,440
बाहर साइंस नहीं जा पाती है वहीं पर स्पिरिचुअलिटी आती है।

349
00:25:47,440 --> 00:25:50,400
मगर आप अपनी बातों को रखने के लिए तो जो

350
00:25:50,400 --> 00:25:54,400
विज्ञान के बाहर की चीजें भी है वो स्वीकार करते हो। मगर सामने वाले की चीजों

351
00:25:54,400 --> 00:25:58,560
पर कटाक्ष करते हो। टिप्पणी करते हो। नहीं मेरी आप

352
00:25:58,560 --> 00:26:02,880
सुनिए। मेरा कहने देखो टू द पॉइंट मेरी मेरी बात इतनी

353
00:26:02,880 --> 00:26:06,960
है उसको समझ लो आप कि आप भी ऐसी कई चीजें

354
00:26:06,960 --> 00:26:11,360
स्वीकार करते हैं जिसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है वहां पर बिलीफ

355
00:26:11,360 --> 00:26:15,440
है आपका इसी प्रकार से हम भी करते हैं तो फिर आपको

356
00:26:15,440 --> 00:26:19,600
हमारे करने पर आपत्ति ये क्यों हो जाती है कि भैया पूरी दुनिया में कोई भी ऐसा

357
00:26:19,600 --> 00:26:23,840
वानर नहीं है या कोई भी दुनिया पूरी दुनिया में ऐसा मनुष्य नहीं है जिसके पूंछ

358
00:26:23,840 --> 00:26:28,000
हो फिर आप यहां तर्क करने आ जाते हैं और फिर हम आपसे पूछते हैं कि

359
00:26:28,000 --> 00:26:32,000
माता गर्भ के बिना इतना मनुष्य जन्म कैसे ले रहा है? यहां इतने हिस्से में तो आपने भी

360
00:26:32,000 --> 00:26:37,280
विज्ञान के बाहर जाकर चमत्कार को स्वीकार कर लिया।

361
00:26:37,280 --> 00:26:41,360
नहीं तो हमें ये चमत्कार नहीं दिखाई देता ना कि कोई आसमान से आज टपक रहा है कोई

362
00:26:41,360 --> 00:26:45,520
व्यक्ति। ये चमत्कार हमें दिखाई नहीं देता। ये आपकी प्रॉब्लम है। आप

363
00:26:45,520 --> 00:26:49,680
चमत्कार तो स्वीकार कर रहे हैं। वरना प्रत्यक्ष प्रमाण एक एक मिनट भाई साहब

364
00:26:49,680 --> 00:26:53,760
एक मिनट आप प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाइए। माता के गर्भ से जन्म लेने वाली

365
00:26:53,760 --> 00:26:58,480
बात का। बिना माता के गर्भ से कौन जन्म लेता है? प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाओ।

366
00:26:58,480 --> 00:27:04,480
और अगर नहीं है तो फिर चमत्कार कहते किसको है यह बताओ माता के

367
00:27:04,480 --> 00:27:08,560
तो सृष्टि के सृष्टि के सृष्टि के आदि में हुआ था जब सृष्टि का निर्माण किया

368
00:27:08,560 --> 00:27:12,800
तब तब मनुष्य युवा अवस्था में ईश्वर ने मनुष्य की रचना की

369
00:27:12,800 --> 00:27:16,000
युवा अवस्था में

370
00:27:16,000 --> 00:27:20,080
अच्छा आप ये बताइए क्या ऐसा कोई प्रमाण है जिसमें

371
00:27:20,080 --> 00:27:26,080
भगवान ने ये कहा हो कि ये ये कार्य मैंने अभी कर दिया दोबारा नहीं करूंगा

372
00:27:27,600 --> 00:27:31,600
जी ऐसा कोई कार्य ऐसा कोई प्रमाण

373
00:27:31,600 --> 00:27:35,600
है जिसमें भगवान ने कहा हो यह कार्य मैंने अभी कर दिए दोबारा नहीं

374
00:27:35,600 --> 00:27:39,920
करूंगा

375
00:27:39,920 --> 00:27:43,920
यही प्रमाण साक्षात दिख रहा है मतलब प्रमाण नहीं

376
00:27:43,920 --> 00:27:49,760
है इस विषय में वो सृष्टि के प्रारंभ में जो करता है बाद में नहीं कर सकता

377
00:27:49,760 --> 00:27:53,840
जी बिल्कुल नहीं तो फिर आप ये क्यों कह रहे हो तो सृष्टि के प्रारंभ में

378
00:27:53,840 --> 00:27:57,840
किया था अब थोड़ी ना मिलेगा प्रमाण दिखाओ मुझे भाई भाई मुझे दिखाओ

379
00:27:57,840 --> 00:28:02,640
ना कहां पर बिना माता के गर्भ के जन्म हो रहा है। ये

380
00:28:02,640 --> 00:28:06,720
प्रमाण आप हमें दिखाओ ना। किस बात का? हम तो ये कह रहे हैं कि बिना

381
00:28:06,720 --> 00:28:10,880
माता को बिना ये विज्ञान है ना हम तो विज्ञान को लेकर चल रहे हैं और ईश्वर को साथ

382
00:28:10,880 --> 00:28:14,960
लेकर चल रहे हैं क्योंकि ईश्वर ने सृष्टि का रचना किया। उसमें युवा अवस्था में

383
00:28:14,960 --> 00:28:19,840
मनुष्य की रचना कर दी और उसके बाद में उसका विधान बता दिया। मनुष्य क्या

384
00:28:19,840 --> 00:28:23,840
बात स्वीकार किया है कि डायरेक्ट युवा अवस्था में ही

385
00:28:23,840 --> 00:28:28,560
मनुष्य जीवन स्टार्ट हुआ है। जी बिल्कुल

386
00:28:28,560 --> 00:28:32,560
नहीं गलत बिल्कुल राइट साइंस

387
00:28:32,560 --> 00:28:36,560
ने माना है धीरेधीरे परिवर्तन हुआ है सीधे युवा अवस्था

388
00:28:36,560 --> 00:28:41,280
का वो नहीं माना है साइंस ने आप मानते हो साइंस की बात

389
00:28:41,280 --> 00:28:42,880
नहीं साइंस की बात

390
00:28:42,880 --> 00:28:47,120
जो जो तर्क की कसौटी पर फिट बैठती है उसको मानते हैं तो हमने

391
00:28:47,120 --> 00:28:51,200
तर्क की कसौटी आपसे पूछ तो ली सद्बुद्धि कैसे आ रही मंत्र पढ़ने से तर्क

392
00:28:51,200 --> 00:28:55,920
की कसौटी पर उतारो उसको खरा यह आपका बिलीफ है

393
00:28:55,920 --> 00:28:59,920
बिलीव नहीं है। यह बिलीव नहीं है। यह खुद को महसूस करेंगे तब आपको पता चलेगा। आप

394
00:28:59,920 --> 00:29:03,920
करिए ना। आप तो खुद करते हैं। यानी कि आप यह चाहते हैं ना कि

395
00:29:03,920 --> 00:29:08,400
हम ये बात माने कि आपको जो महसूस हो रहा है वो सही बात है।

396
00:29:08,400 --> 00:29:12,400
जी बिल्कुल। तो बस ऐसे ही हमें महसूस हो रहा है कि भैया वो

397
00:29:12,400 --> 00:29:16,640
थे। उनके पूछ थी।

398
00:29:16,640 --> 00:29:20,800
पूछ थी तो हमें दिखाओ ना। ये चीज महसूस ही तो कर रहे हैं आप इस चीज को।

399
00:29:20,800 --> 00:29:25,040
अरे तो आप मुझे दिखाओ ना। आप भी तो महसूस ही कर रहे हो। सद्बुद्धि

400
00:29:25,040 --> 00:29:30,160
के आने का प्रमाण दिखाओ तो इसके लिए आप तो कर रहे हो

401
00:29:30,160 --> 00:29:34,320
अगर इस चीज का मतलब इस चीज को आप अध्ययन करिए ना फिर आपको पता चलेगा बैठकर

402
00:29:34,320 --> 00:29:38,320
संध्या करिए तो इस चीज का आप अध्ययन करिए आपको पता चलेगा ये बात तो मैं भी कह सकता

403
00:29:38,320 --> 00:29:42,320
हूं तो ये चीज तो हमें तो दिखनी चाहिए ना

404
00:29:42,320 --> 00:29:46,400
आप देखिए आप क्या है आगे बढ़ते जा रहे हैं आपने जब मुझसे ये कहा

405
00:29:46,400 --> 00:29:50,400
कि भैया अगर तुमको महसूस हो रहा है तो उसका प्रमाण भी तो दिखाओ तो

406
00:29:50,400 --> 00:29:54,400
मैंने जब आपसे कहा कि आपको महसूस हो रहा है आप भी प्रमाण दिखाओ तो आपने ने क्या

407
00:29:54,400 --> 00:29:58,480
कहा? प्रमाण नहीं आप अध्ययन करो। ये क्या है? आपके अगले

408
00:29:58,480 --> 00:30:02,480
स्टेप पर चले जा रहे हो। मैंने आपसे क्या कहा? आपके पास

409
00:30:02,480 --> 00:30:06,720
बिना माता के गर्भ के मनुष्य के जन्म लेने के संबंध

410
00:30:06,720 --> 00:30:10,880
में कोई प्रमाण है वो भी युवा अवस्था में। कोई प्रमाण है प्रत्यक्ष

411
00:30:10,880 --> 00:30:15,120
प्रमाण तो वहां पर आपका बिलीव यही है। वहां पर आपका

412
00:30:15,120 --> 00:30:20,080
महसूस करना ही है।

413
00:30:20,080 --> 00:30:24,080
तो प्रमाण तो आपके पास ही आपके पास है प्रमाण बताओ। मेरे पास

414
00:30:24,080 --> 00:30:28,160
तो प्रमाण है मेरा बिलीव है मुझे मुझे जो गुरु वचनों से जो परंपरा से प्राप्त हुआ

415
00:30:28,160 --> 00:30:32,160
है उसके अनुसार मुझे विश्वास है कि हनुमान जी थे नहीं तो

416
00:30:32,160 --> 00:30:36,400
ये उसी प्रकार जिस प्रकार जिस प्रकार आपको गुरु वचनों

417
00:30:36,400 --> 00:30:40,480
से आपको शास्त्र वचनों से जो ये प्राप्त हो रहा है कि भैया क्या कहते

418
00:30:40,480 --> 00:30:44,720
हैं कि गायत्री मंत्र पढ़ने से सद्बुद्धि मिलती है। हम भी मानते हैं सद्बुद्धि

419
00:30:44,720 --> 00:30:48,960
मिलती है। मगर हम आपको यह याद दिला रहे हैं कि आर्य

420
00:30:48,960 --> 00:30:53,200
समाज भी ऐसी कई चीजें मानता है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण

421
00:30:53,200 --> 00:30:57,280
नहीं होता। मगर वो अपने प्रतिद्वंदी पर या उसके हिसाब से जो उसका

422
00:30:57,280 --> 00:31:01,680
शत्रु है उस पर कटाक्ष करने के लिए उनकी उसकी उन

423
00:31:01,680 --> 00:31:06,160
चीजों पर कटाक्ष करता है। उसका हास्य करता है। उसका उपहास बनाता

424
00:31:06,160 --> 00:31:10,240
है जो चीजें अभी विज्ञान के द्वारा जो आधुनिक विज्ञान

425
00:31:10,240 --> 00:31:14,400
है इसके द्वारा जो चीजें स्वीकार नहीं की गई है। अपनी कई ऐसी चीजें मानता

426
00:31:14,400 --> 00:31:18,480
है जो आधुनिक विज्ञान के द्वारा स्वीकार नहीं की गई है। मगर सामने वाले की

427
00:31:18,480 --> 00:31:22,720
इसी प्रकार की चीजों पर कटाक्ष करता है। उपहास उड़ाता है।

428
00:31:22,720 --> 00:31:26,800
तो यह तो अन्याय है ना। या तो आप बिल्कुल खड़े हो जाओ कि नहीं

429
00:31:26,800 --> 00:31:31,280
हम आधुनिक विज्ञान के द्वारा स्वीकार चीजों को ही हम स्वीकार करेंगे

430
00:31:31,280 --> 00:31:35,120
अन्यथा नहीं करेंगे। मगर आप तो कई बार करते हैं

431
00:31:35,120 --> 00:31:39,360
उसके बिना जैसे मैंने आपको कहा जैसे मैंने

432
00:31:39,360 --> 00:31:43,360
आपको कहा कि युवा अवस्था में बिना माता के

433
00:31:43,360 --> 00:31:47,520
गर्भ के एक आपने पहला क्या कहा था कि पूरी

434
00:31:47,520 --> 00:31:51,600
दुनिया मुझे दिखा दो। कहीं किसी के पूछो पूरी दुनिया मुझे दिखा दो। कहीं बिना माता

435
00:31:51,600 --> 00:31:55,600
गर्भ के और वो जो है युवा अवस्था में पैदा हो रहा हो। अमैथुनी सृष्टि

436
00:31:55,600 --> 00:31:59,680
का मतलब ही है विज्ञान के बाहर जाकर के जो है जन वो सृष्टि का

437
00:31:59,680 --> 00:32:03,920
प्रारंभ होना। वहीं से चमत्कार शुरू है। भैया जहां साइंस

438
00:32:03,920 --> 00:32:07,920
की बाउंड्री है वहीं से भगवान शुरू होते हैं। नहीं

439
00:32:07,920 --> 00:32:13,760
तो यही सब कुछ सच्चिदानंद मिल जाता है व्यक्ति को।

440
00:32:13,760 --> 00:32:18,800
आया कहां से? साइंस तो ईश्वर ने दिया। उसका विधि

441
00:32:18,800 --> 00:32:24,720
तो भाई मैं आपसे पूछ तो रहा हूं आप इतनी बातें क्यों बदल रहे हो

442
00:32:24,720 --> 00:32:28,960
आप मुझसे प्रत्यक्ष प्रमाण मांगते हो जब मैं मांगता हूं तो कहते हो अध्ययन

443
00:32:28,960 --> 00:32:34,320
करो क्या बात है ये

444
00:32:34,320 --> 00:32:40,320
कहां गए तोताराम जी

445
00:32:51,680 --> 00:32:56,640
साइंस है क्या? साइंस ये है जो बहुत सारे

446
00:32:56,640 --> 00:33:00,720
होने वाले घटनाक्रमों को देख के आपको रिजल्ट दे देती

447
00:33:00,720 --> 00:33:04,720
है कि ऐसे से ऐसा होता है। ठीक है? बस उसी को साइंस

448
00:33:04,720 --> 00:33:08,960
का नाम दे दिया। जो जो साइंस की समझ में आता जाता है वो एक समीकरण निकाल

449
00:33:08,960 --> 00:33:12,960
लेती है कि अगर ऐसा होगा तो ऐसा होगा ऐसा होगा तो ऐसा होगा वो सिद्धांत वो दे देती है

450
00:33:12,960 --> 00:33:16,960
उसी का नाम साइंस है अब जैसे जैसे वो ये पकड़ पाएगी कि भैया

451
00:33:16,960 --> 00:33:20,960
ऐसे वानर भी हो सकते हैं ऐसे वानर भी पाए जा सकते यद्यपि ऐसा कहीं

452
00:33:20,960 --> 00:33:25,440
कहीं संदर्भ मिलता है कि बाली में ऐसी प्रजाति थी जिनके

453
00:33:25,440 --> 00:33:30,800
मनुष्यों की अपेक्षागत रोम ज्यादा होते थे और वो

454
00:33:30,800 --> 00:33:35,280
वानर बंदरों की अपेक्षागत अधिक सामाजिक थे अधिक बुद्धिमान थे

455
00:33:35,280 --> 00:33:39,920
ऐसे संदर्भ में मिलते हैं। 9 लाख वर्ष पूर्व की प्रजाति बताई गई। अब लुप्त हो गई है।

456
00:33:39,920 --> 00:33:43,920
मगर मामला यह नहीं है। मामला यह है कि आप अपनी कई

457
00:33:43,920 --> 00:33:47,920
चीजें ऐसी जब मानते हैं जो साइंस की कसौटी पर खरी नहीं उतरती

458
00:33:47,920 --> 00:33:52,320
है। कसी नहीं गई है। तो फिर सामने वाले की ऐसी चीजों पर आप उपास

459
00:33:52,320 --> 00:33:56,320
क्यों बनाते हो? सामने वाले की ऐसी चीजों पर आपत्ति क्यों जताते हो? फिर वहां

460
00:33:56,320 --> 00:34:00,720
पर शब्द प्रमाण के रूप में स्वीकार करो बस।

461
00:34:00,720 --> 00:34:04,720
और अभी अगर इनकी बातें अगर खोल के देखेंगे इनकी इनकी किताबें पढ़ेंगे

462
00:34:04,720 --> 00:34:08,800
तमाम सारी ऐसे उदाहरण निकल आएंगे जहां साइंस की कसौटी पर खरा नहीं उतरा

463
00:34:08,800 --> 00:34:12,960
है ये तो मैंने अभी ये दो बातें की है तो ये

464
00:34:12,960 --> 00:34:17,040
बात सुना दीजिए वो रिकॉर्डिंग सुना दीजिए

465
00:34:17,040 --> 00:34:21,040
इनकी

466
00:34:21,040 --> 00:34:27,040
चले गए भाई साहब

467
00:34:36,880 --> 00:34:42,880
ऑपरेटर जी रिकॉर्डिंग सुना दीजिए।

468
00:34:45,360 --> 00:34:51,360
अरे यहां भी सुना दीजिए मेन पर भी डाल देंगे।

469
00:34:53,920 --> 00:34:59,920
तो बंद कर दें फिर।

470
00:35:02,480 --> 00:35:06,960
नहीं सुनानी है तो बताइए फिर बंद कर दें।

471
00:35:06,960 --> 00:35:12,960
तोताराम जी चले गए।

472
00:35:18,000 --> 00:35:23,600
जी ये मैंने आपसे भेजा है। हां

473
00:35:23,600 --> 00:35:28,000
आपने कौन सा पेज नंबर भेजा है? ये नहीं है। दूसरी है।

474
00:35:28,000 --> 00:35:34,000
पहली वाली सुनाइए।

475
00:35:37,600 --> 00:35:41,600
अपनी चीजें महसूस होती है। महसूस होने

476
00:35:41,600 --> 00:35:45,680
पर मान लो। अनुमान पे मान लो। शब्द प्रमाण मान

477
00:35:45,680 --> 00:35:50,560
लो। सामने वाले की चीजों पर कटाक्ष करो।

478
00:35:50,560 --> 00:35:54,720
जो निर्भय आर्य आने वाले उनका एक वह था कि

479
00:35:54,720 --> 00:35:59,200
भाई जब मैंने आपको जोकर का आपने मुझे अलंकारी कह लिया तो बात बराबर हो गई। नहीं

480
00:35:59,200 --> 00:36:03,280
अलंकारी आपके जोकर कहने के प्रतिकार स्वरूप नहीं कहा

481
00:36:03,280 --> 00:36:08,560
गया। अलंकारी जो आप एक शब्द यूज़ करते हो पौराणिक

482
00:36:08,560 --> 00:36:12,880
और वो भी आपके द्वारा यूज़ किया जा रहा है तो उसका पर्यावसान किस में होता है?

483
00:36:12,880 --> 00:36:17,280
वेद विरोधी के रूप में। वेद विरोधी

484
00:36:17,280 --> 00:36:17,780
इसलिए

485
00:36:17,680 --> 00:36:21,840
वैदिक ही अपने आप को भले ही कहते हो वैदिक काट दो पौराणिक रूप में प्रस्तुत करो

486
00:36:21,840 --> 00:36:26,000
तो आपके द्वारा भले ही हमारे द्वारा वही शब्द यूज़ में

487
00:36:26,000 --> 00:36:30,160
आता भी हो मगर आपके द्वारा जब वही शब्द यूज़ होता है तो उसमें आपके द्वारा

488
00:36:30,160 --> 00:36:34,640
हीन भावना उस शब्द के द्वारा प्रकट होती है। तो पौराणिक

489
00:36:34,640 --> 00:36:38,880
जो शब्द इस रूप में वेद विरोधी होने के रूप में प्रयोग में लिया जाता

490
00:36:38,880 --> 00:36:42,880
है उसके प्रतिकार स्वरूप हमने आपको अलंकार कहा। अब यदि

491
00:36:42,880 --> 00:36:46,880
पौराणिक शब्द में ऐसा कोई अवमानना नहीं है तो अलंकारी में भी अवमानना नहीं

492
00:36:46,880 --> 00:36:51,120
है। यदि पौराणिक हमारे यहां के कुछ लोगों के पोस्टर पर लिखा रहता है

493
00:36:51,120 --> 00:36:55,520
तो अलंकारी भी आपके यहां पर आपके यहां के लोगों के नाम से जुड़ा रहता है।

494
00:36:55,520 --> 00:36:59,760
दूसरी बात कि उन्होंने तो अपने को व्यक्तिगत

495
00:36:59,760 --> 00:37:03,760
कहा है। क्या कहते हैं? उन्होंने स्वयं को व्यक्तिगत

496
00:37:03,760 --> 00:37:07,920
कहा है। और व्यक्तिगत किसी व्यक्ति ने अपने

497
00:37:07,920 --> 00:37:12,080
नाम में निष्ठा विद्या अलंकार लगा लिया। व्यक्तिगत लगाया। कम्य कम्युनिटी

498
00:37:12,080 --> 00:37:16,800
पर तो नहीं लगाया। तो मतलब कहने का यह है कि आप हमारे विरोध में

499
00:37:16,800 --> 00:37:20,880
कोई कार्य करोगे तो हम आपके द्वारा निर्धारित

500
00:37:20,880 --> 00:37:25,280
कार्य के अनुपात में ही आपके विरोध में हम कार्य करेंगे। भाई

501
00:37:25,280 --> 00:37:29,600
आपने हमसे हमारे विरोध में यह वर्ड ख्यापित

502
00:37:29,600 --> 00:37:32,720
करने से पहले अनुमति थोड़ी ना ली थी कि हम ऐसा करने जा रहे हैं। आप

503
00:37:32,720 --> 00:37:37,280
भी ऐसा ही करना अगर हमारा विरोध करना तो जब आपने एक जो

504
00:37:37,280 --> 00:37:41,360
स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है जब उसको ब्रेक कर दिया तो फिर स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल को ब्रेक

505
00:37:41,360 --> 00:37:45,440
करके दूसरी चीज की जा रही है। ठीक है? और दूसरी बात

506
00:37:45,440 --> 00:37:49,600
क्या है? कुल मिलाकर के क्रम है। आपने पौराणिक

507
00:37:49,600 --> 00:37:54,000
से हमें वेद विरोधी सिद्ध करने का प्रयास किया। तो हमने आपकी ऐसी छवि

508
00:37:54,000 --> 00:37:58,400
बताई आपको कि आप अलंकारी हो। और जब आप वहां पर आए

509
00:37:58,400 --> 00:38:02,400
तो आपने जो है मंच का अपमान किया। वहां पर कुछ ऐसी चीजें की जो

510
00:38:02,400 --> 00:38:06,720
कि ठीक नहीं थी जो आपने स्वीकारा भी उसके लिए आप आपका जो है

511
00:38:06,720 --> 00:38:10,880
अभिनंदन है उस बात के लिए। परंतु जो अवमानना हुई उसके

512
00:38:10,880 --> 00:38:15,040
कारण हमने तू तड़ा की भाषा बोली। मगर जब आपने उस पर भी जाकर के आगे जोकर

513
00:38:15,040 --> 00:38:19,200
बोला या आप हो सकता है गाली भी दे देते क्योंकि ऐसे वीडियोस भी सामने

514
00:38:19,200 --> 00:38:23,360
आए हैं जिसमें ये कोई इनकी

515
00:38:23,360 --> 00:38:27,440
मीटिंग चल रही है। हालांकि सबके चेहरे नहीं दिख रहे हैं मगर उसमें जो है ये दिखाई दे

516
00:38:27,440 --> 00:38:31,600
रहा है कि गाली गलौज भी इनके यहां हो रही है। तो अगर

517
00:38:31,600 --> 00:38:35,600
आप गाली भी देते थे तो भी हम मौन हो जाते। हमारे लिए जोकर ही पर्याप्त था कि भाई

518
00:38:35,600 --> 00:38:39,840
अब जोकर जब इसने बोल दिया इस व्यक्ति ने तो अब यहां से आगे चर्चा का स्पेस

519
00:38:39,840 --> 00:38:44,320
खत्म हो गया। तो आप पौराणिक

520
00:38:44,320 --> 00:38:47,920
के बदले में अलंकारी

521
00:38:47,920 --> 00:38:51,920
मंच का अपमान मंच पर आकर के कुछ ऐसी चीजें करने

522
00:38:51,920 --> 00:38:56,080
में जो कि ठीक नहीं थी उनके स्वर उनके बदले में तू ततड़ाक

523
00:38:56,080 --> 00:39:00,400
जो आपका इनका कहना था निर्भय का

524
00:39:00,400 --> 00:39:04,960
और

525
00:39:04,960 --> 00:39:09,040
क्या कहते हैं उसके बाद जब इन्होंने वहां से जाने के बाद जोकर

526
00:39:09,040 --> 00:39:13,120
शब्द का उपयोग किया तो उसके बदले में हमने ये कह दिया फिर आप क्षमा मांगो

527
00:39:13,120 --> 00:39:17,520
उसके बाद आगे होगा तो इन्होंने क्षमा मांग ली है उसमें ऑडियो कॉल करके

528
00:39:17,520 --> 00:39:22,240
और मैं कहूंगा कि और अन्य जो समाजी हैं

529
00:39:22,240 --> 00:39:26,240
अलंकारी उनसे कहीं अपेक्षाकृत ये जो

530
00:39:26,240 --> 00:39:30,320
निर्भय है इनका क्या कहते हैं जो

531
00:39:30,320 --> 00:39:34,400
मतलब बुद्धि बल अधिक है और थोड़ा सा वाक पटता है चीजों को

532
00:39:34,400 --> 00:39:39,360
समझने के लिए प्रयासरत है तो इस रूप में इनका अभिनंदन भी होना चाहिए

533
00:39:39,360 --> 00:39:43,440
परंतु वो बात एक स्पष्ट है कि जब आप किसी के अनुमति

534
00:39:43,440 --> 00:39:47,600
के विरुद्ध या इच्छा के विरुद्ध जाकर के उसकी एक पहचान उस पर चिपकाने का प्रयास करते

535
00:39:47,600 --> 00:39:52,880
हो तो फिर आपको इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। जब आपकी इच्छा के विरुद्ध

536
00:39:52,880 --> 00:39:56,960
आपकी पहचान को ख्यापित करने का प्रयास जब सामने वाला करे इस

537
00:39:56,960 --> 00:40:01,120
बात को लेकर के फिर उस बात को फिर आगे बढ़ाना फिर जोकर पर चले जाना। फिर जोकर

538
00:40:01,120 --> 00:40:02,960
का भी अगर यद्यपि हमने जोकर का

539
00:40:02,960 --> 00:40:07,040
जवाब दिया नहीं है। मगर अगर हम कहते कि जोकर जोकर पर भी हम कुछ तंज कर

540
00:40:07,040 --> 00:40:11,200
दे तो उस पर फिर गाली पर चले जाना तो एक जोकर जब बात आ गई तो वहां

541
00:40:11,200 --> 00:40:15,360
पर बात स्पेस खत्म हो जाता है। जब ये ऋषिवाच ने तेरी

542
00:40:15,360 --> 00:40:19,520
परंपरा के चितड़े उड़ा देंगे। ये सब कर दिया था तो वहां स्पेस खत्म हो गया। चर्चा का

543
00:40:19,520 --> 00:40:24,320
स्पेस खत्म हो गया। वहां जब मोहित गड ने वहां आकर के

544
00:40:24,320 --> 00:40:28,480
व्यक्तिगत उपहास उड़ाया सबके साथ मिल बैठकर तो उसके बाद

545
00:40:28,480 --> 00:40:32,480
यह लिखना बेकार था ना। कि भैया मुझसे आप चर्चा कर लो।

546
00:40:32,480 --> 00:40:36,480
आप पहले स्रांत तरीके से कांटेक्ट करते और मोहित

547
00:40:36,480 --> 00:40:41,040
गौर के घमंड की एक बात और बताऊं आपने। मोहित गौर ने कभी मुझसे

548
00:40:41,040 --> 00:40:45,200
Instagram पर संपर्क किया था। मुझे क्या मालूम कौन

549
00:40:45,200 --> 00:40:49,280
है भाई? बोला मैंने पूछा कि आपका परिचय तो बोले कि मेरा मेरा पेज ही

550
00:40:49,280 --> 00:40:53,600
मेरा परिचय है। वो चाहते थे कि मैं उनका पेज देख के आऊं कि उनका महिमा

551
00:40:53,600 --> 00:40:58,000
गान कितना बड़ा है। मैंने वो पेज कभी देखा ही नहीं।

552
00:40:58,000 --> 00:41:02,080
नहीं मैंने फिर आगे फिर उसमें इंटरेस्ट जताया तो मोहित गौर को

553
00:41:02,080 --> 00:41:06,080
लगता रहा कि यह व्यक्ति मुझे जानता है फिर भी इसने मुझसे चर्चा स्वीकार नहीं की। मुझे

554
00:41:06,080 --> 00:41:10,160
मालूम ही नहीं था मोहित गौर ये जो दिखने वाला लड़का है आर समाजी है यही

555
00:41:10,160 --> 00:41:14,640
वो है विज्ञान दर्शन के नाम से इसका पेज है। तो ये

556
00:41:14,640 --> 00:41:19,280
सारा किस कारण से हुआ? यह हुआ

557
00:41:19,280 --> 00:41:23,120
क्या कहते हैं? अहंकार के कारण।

558
00:41:23,120 --> 00:41:29,120
ठीक है? एक मिनट।

559
00:41:35,920 --> 00:41:39,920
तो अगर किसी को वो निर्भय आर्य वाली बात

560
00:41:39,920 --> 00:41:44,400
में अगर समझ में ना आया हो तो वो समझ ले पौराणिक

561
00:41:44,400 --> 00:41:48,800
अलंकारी मंच की अवमानना उखड़

562
00:41:48,800 --> 00:41:53,120
के बात करना जिसमें कि तुम आपकी

563
00:41:53,120 --> 00:41:57,120
बजाय तू तड़ाक जैसे शब्दों का उपयोग होना मुझे बिल्कुल एग्जैक्टली तो याद

564
00:41:57,120 --> 00:42:01,120
नहीं है क्या से क्या हुआ था। उसके बाद जोकर कह देना हमारा शांत हो जाना। यह

565
00:42:01,120 --> 00:42:05,120
क्रम है। और कभी भी या कोई भी संसार में

566
00:42:05,120 --> 00:42:09,200
कोई भी जो आज इतने सारे सेक्स हो गए हैं। कोई भी जब यह

567
00:42:09,200 --> 00:42:13,200
बात उठाएगा ना कि आपने हमारे लिए ऐसा कहा तो उसको ये ध्यान रखना चाहिए कि

568
00:42:13,200 --> 00:42:17,200
सबसे पहले जहां पर बुराई शुरू करने का नाम आता है ना कि किसने

569
00:42:17,200 --> 00:42:21,360
बुराई शुरू की, किसने कटाक्ष करना शुरू किए। तो उसमें सबसे पहले नाम

570
00:42:21,360 --> 00:42:25,440
आता है कि शंकराचार्य की बुराई शुरू की गई।

571
00:42:25,440 --> 00:42:29,520
हमने आर्य समाज तो था ही नहीं अस्तित्व में जो हम उस पर कटाक्ष करते

572
00:42:29,520 --> 00:42:33,760
उसका उपास उड़ाते सबसे पहले तो आर्य समाज आया अस्तित्व में तब उसने

573
00:42:33,760 --> 00:42:35,360
किया

574
00:42:35,360 --> 00:42:39,600
हम तो ये वाली बातें करने से पहले झांक

575
00:42:39,600 --> 00:42:43,680
ले कि आपके इतिहास में शुरू कहां से हो रही है ये सब बातें खैर

576
00:42:43,680 --> 00:42:48,160
आ जाते हैं कोई आए हैं यहां पर चले भी गए हैं

577
00:42:48,160 --> 00:42:54,160
क्या हुआ वह चेहरा नहीं दिखाना चाह रहे थे क्या

578
00:43:11,440 --> 00:43:14,240
बोगस इरफान

579
00:43:14,240 --> 00:43:20,240
पता नहीं कहना क्या चाहते हैं मगर

580
00:43:20,960 --> 00:43:24,960
अ एक ही मैसेज बार-बार कर रहे हो। इसका मतलब है कि आपके अंदर आपके

581
00:43:24,960 --> 00:43:28,960
पास ज्यादा मटेरियल नहीं है। हमारे विरोध में एक ही मैसेज करोगे तो बैन कर दिया

582
00:43:28,960 --> 00:43:32,960
जाएगा। विरोध भी करो विरोध भी करो मगर दमदारी के

583
00:43:32,960 --> 00:43:37,040
साथ विरोध भी करो। निर्भय आर्य की तरह विरोध करो जिसका

584
00:43:37,040 --> 00:43:41,280
सम्मान किया जा सके समय आने पर हैं। उस दम लगनी

585
00:43:41,280 --> 00:43:45,600
चाहिए ना उसमें विरोध में भी गिरो गिरो। मगर उस झरने

586
00:43:45,600 --> 00:43:49,600
की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। यह क्या है? एक मैसेज

587
00:43:49,600 --> 00:43:53,600
पकड़ लिया उसको कॉपी पेस्ट करते चले जा रहे हो मतलब उसमें

588
00:43:53,600 --> 00:43:59,600
भी चंदी चोरी

589
00:43:59,600 --> 00:44:03,760
ठीक है तोताराम जी चले गए हैं 9 दो 11

590
00:44:03,760 --> 00:44:06,400
हो गए हैं

591
00:44:06,400 --> 00:44:09,360
और

592
00:44:09,360 --> 00:44:15,360
क्या कहें तोते उड़ गए चलिए खैर

593
00:44:21,520 --> 00:44:26,000
ठीक है फिर सभी को जय श्री राम। आप सब त्यौहार मनाएं

594
00:44:26,000 --> 00:44:30,000
और बहुत जल्द वो चर्चा होगी। निर्भय हमसे संपर्क करेंगे

595
00:44:30,000 --> 00:44:35,440
पुनः और

596
00:44:35,440 --> 00:44:40,720
ये बोल देखिए आप मैं इसमें थोड़ा सा अपने भाइयों को कहूंगा

597
00:44:40,720 --> 00:44:44,880
ये इस प्रकार की बातों से प्रभावित मत ना हो।

598
00:44:44,880 --> 00:44:48,880
इस कारण से अपने जीवन में साधना

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00:44:48,880 --> 00:44:52,960
का बल बढ़ाएं। यह इस प्रकार की बातें विचलित करने

600
00:44:52,960 --> 00:44:57,120
वाली नहीं है। हमें समत्व जितना प्राप्त

601
00:44:57,120 --> 00:45:01,840
होगा ना समत्व उतना ही हमारा जो परफॉर्मेंस है बहुत अच्छा होगा।

602
00:45:01,840 --> 00:45:06,080
सचिन जो है 90 के 90 के आसपास जाकर के बहुत

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00:45:06,080 --> 00:45:10,080
बार आउट हो जाता था। उसका कारण था कि वो नर्वस हो जाता था। उसको कहा जाता

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00:45:10,080 --> 00:45:14,160
था नर्वस 90। तो हम लोग यदि विचलित ना

605
00:45:14,160 --> 00:45:18,240
होना सीख ले जीत का लालच हार का भय ना हो

606
00:45:18,240 --> 00:45:22,320
शत्रु प्रतिकार करो तो हमारा सबसे अच्छी वो आएगी

607
00:45:22,320 --> 00:45:26,640
आउटपुट हम ज्यादा अच्छा निकाल सकते हैं तो आप इन बातों से विचलित

608
00:45:26,640 --> 00:45:30,720
होने की कोई आवश्यकता नहीं है। कोई अगर इस तरह से मुंह चला देगा आपके सामने हमारा कुछ

609
00:45:30,720 --> 00:45:34,720
नहीं बिगड़ रहा है। हम सैद्धांतिक रूप से बहुत बलिष्ठ हैं और

610
00:45:34,720 --> 00:45:38,720
अपना सिद्धांत का बल, शास्त्र का बल, गुरु

611
00:45:38,720 --> 00:45:43,120
का बल, गोविंद का बल और साधना का बल एकत्र करें। साधना

612
00:45:43,120 --> 00:45:47,120
के बल एकत्र हो जाने से क्या होता है? इस प्रकार की चीजें सामने होती हैं।

613
00:45:47,120 --> 00:45:50,640
तो उसका हम बहुत मुंहत उत्तर देने के योग्य

614
00:45:50,640 --> 00:45:54,800
होते हैं। विचलित ना होने के कारण। बहुत मुंहत उत्तर

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00:45:54,800 --> 00:45:59,040
देते हैं। विचलित ना होने के कारण समत्व को प्राप्त

616
00:45:59,040 --> 00:46:03,440
करने का प्रयास करिए और प्राप्त होता है। भक्ति से भगवान की भक्ति करें।

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00:46:03,440 --> 00:46:07,440
खूब भक्ति करें। उससे बल प्राप्त होगा। जब ऐसी विरोधी चीजें आएंगी ना

618
00:46:07,440 --> 00:46:11,840
हमारे सामने। इतनी बुरी बुरी चीजें कहींंगी तो हम मुस्कुराएंगे।

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00:46:11,840 --> 00:46:16,160
क्योंकि भगवान जैसे मुस्कुराते हैं ना बैठे सब कुछ जिनके पास चक्र

620
00:46:16,160 --> 00:46:20,320
है सुदर्शन चक्र। जैसे वो मुस्कुराते हैं वैसे ही मुस्कुराएंगे। मुसीबतों

621
00:46:20,320 --> 00:46:24,320
में मुस्कुराएंगे। तो आप लोग ऐसे समत्व स्थिति

622
00:46:24,320 --> 00:46:28,720
को प्राप्त करने का प्रयास करें। वो होगा साधना के बल से। साधना का।

623
00:46:28,720 --> 00:46:33,120
साधना का बल बहुत कर दीजिए। आप देखिएगा यह सारी स्थितियां आप यूं चुटकियां

624
00:46:33,120 --> 00:46:38,080
बजाते हुए सह लेंगे। मुझे पता है पीड़ा होती होगी जब कोई ऐसा कहता होगा।

625
00:46:38,080 --> 00:46:42,880
है ना? पहाड़ी जी जुड़ गए हैं।

626
00:46:42,880 --> 00:46:48,880
क्या बात है? एंटी रामपाली स्क्वाड आ गई क्या?

627
00:46:51,040 --> 00:46:55,520
एंटी रामपाल स्क्वाड आ गई पूरी की पूरी।

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00:46:55,520 --> 00:47:01,520
हां ए आर एस नहीं भैया। जय श्री राम।

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00:47:04,080 --> 00:47:10,080
बताइए पांडी जी

630
00:47:13,200 --> 00:47:18,560
बताइए आप ही बता दीजिए शास्त्रवाद जी तब तक

631
00:47:18,560 --> 00:47:22,560
जी भैया अभी का वीडियो जो देख रहे थे लाइव अभी

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00:47:22,560 --> 00:47:26,640
तोताराम जी क्या-क्या बोल रहे बोल रहे थे हनुमान

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00:47:26,640 --> 00:47:30,800
जी के पूछ के विषय में जो आप जो आजकल लाइफ का विषय था जब

634
00:47:30,800 --> 00:47:36,800
खुद पे आ गया बात तो

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00:47:38,400 --> 00:47:43,040
जी भैया जब खुद पे बात आ गया तो उनके पास कोई प्रमाण ही नहीं

636
00:47:43,040 --> 00:47:47,040
और दूसरों पे आ गए आक्षेप करने के लिए। इसीलिए मैं मैं

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00:47:47,040 --> 00:47:51,280
यह चाहता हूं कि हम लोग एक और बहुत प्रयास

638
00:47:51,280 --> 00:47:57,280
करें। अपने स्वयं को ऐसा बनाए ना कि

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00:47:57,520 --> 00:48:01,680
हर स्थिति में हम किसी का सामना कर सके। सनातन विरोधी

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00:48:01,680 --> 00:48:06,000
तत्व का स्वयं को ऐसा बनाएं। हम

641
00:48:06,000 --> 00:48:10,160
लोग अगर हम इस पर ध्यान दें कि अगर शास्त्र में ये कहा गया है कहीं पर ये

642
00:48:10,160 --> 00:48:14,240
लिखा है। क्यों लिखा है? अब पूरा वैदिक वांग में हमने पढ़ा

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00:48:14,240 --> 00:48:18,480
हो नहीं तो कोई भी व्यक्ति कहीं से भी प्रश्न कर सकता है। इसलिए पांच

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00:48:18,480 --> 00:48:22,480
सिद्धांतों को याद करिए। स्वाध्यन करिए मगर पांच

645
00:48:22,480 --> 00:48:26,560
सिद्धांतों को पकड़ के रखिए। यदि ये आपके पास होंगे आप कभी

646
00:48:26,560 --> 00:48:31,600
भी डगमगा नहीं सकते। पांच सिद्धांत सर्वशक्तिमान

647
00:48:31,600 --> 00:48:35,760
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म को ख्यापित करने वाले

648
00:48:35,760 --> 00:48:39,840
पांच सिद्धांत। तो आपकी स्थिति ऐसी हो जाएगी कि आप रास्ते में जा रहे

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00:48:39,840 --> 00:48:43,920
हैं, मूंगफली लेने जा रहे हैं। मगर वहां कोई सनातन विरोधी मिल गया उसको वही चुप करा

650
00:48:43,920 --> 00:48:48,240
दिया। ऐसे हो जाएंगे आप।

651
00:48:48,240 --> 00:48:52,240
बिल्कुल। हम लोग इसमें अगर ध्यान देंगे ना कि हमको सारे शास्त्र पढ़े होने

652
00:48:52,240 --> 00:48:53,520
चाहिए। कहां क्या लिखा है?

653
00:48:53,520 --> 00:48:57,600
श्लोक क्रमांक शास्त्र के कौन से चैप्टर में ये बात लिखी है। अगर इस

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00:48:57,600 --> 00:49:01,680
पर इस पर ही निर्भर हो जाएंगे तो कभी भी हम वो नहीं

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00:49:01,680 --> 00:49:04,880
होंगे।

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00:49:04,880 --> 00:49:09,200
क्या कहते हैं जिसको परास्त नहीं किया जा सकता है कोई एक शब्द

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00:49:09,200 --> 00:49:13,280
है ना अजय कभी भी हम

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00:49:13,280 --> 00:49:17,360
अजय नहीं हो पाएंगे क्योंकि हम कभी भी पूरे शास्त्र तो पढ़ नहीं पाएंगे तो वो संभावना

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00:49:17,360 --> 00:49:21,920
बनी रहेगी कि पता नहीं उस शास्त्र में कहां पर क्या बात कही गई हो

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00:49:21,920 --> 00:49:26,080
जिसके कारण कोई एक प्रश्न सामने आ जाए तो आप स्वा

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00:49:26,080 --> 00:49:30,400
अध्ययन करते रहिए शास्त्रों के मर्मज्ञ बनने का पूरा प्रयास करिए स्वा अध्ययन पूरे

662
00:49:30,400 --> 00:49:34,640
पूरा करिए मगर पांच सिद्धांत वो

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00:49:34,640 --> 00:49:38,880
आप हमेशा पहले याद कर लीजिए सदैव के लिए वो पांच सिद्धांत

664
00:49:38,880 --> 00:49:43,200
जिसके पास होंगे वो रास्ता चलते अपने अपनी संतान

665
00:49:43,200 --> 00:49:47,360
को खिलौना दिलाने भी जा रहा होगा ना और उस समय भी अगर कोई कुछ कह देगा

666
00:49:47,360 --> 00:49:51,680
सनातन के बारे में तो वहां पर भी उसकी वो उसको काउंटर कर पाएगा

667
00:49:51,680 --> 00:49:55,760
वहां पर भी उसको वो निरुत्तर कर देगा क्योंकि आफ्टर ऑल सब बातें

668
00:49:55,760 --> 00:50:00,640
एक तरफ जब शास्त्र की बात आएगी तो आपके पास क्या होगा परंपरा अगर

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00:50:00,640 --> 00:50:04,720
शास्त्र का कोई ऐसा संदर्भ आ भी आपके सामने जिसके बारे में आपने जानकारी

670
00:50:04,720 --> 00:50:10,640
नहीं की है तो आपके पास क्या है फिर वहां पर परंपरा

671
00:50:10,640 --> 00:50:14,960
जी भैया परंपरा ही तो एक ऐसा अस्त्र है मतलब एक

672
00:50:14,960 --> 00:50:19,200
ऐसा महा अस्त्र है जिसके सामने कोई नहीं टिक पाएगा कितना

673
00:50:19,200 --> 00:50:23,440
भी कोई भी आ जाए अपने स्व को लेकर के कोई नहीं

674
00:50:23,440 --> 00:50:27,440
कोई सीख ही नहीं पाएगा अभी कुछ दिन

675
00:50:27,440 --> 00:50:32,640
पहले गुरुदेव इसीलिए कहते हैं

676
00:50:32,640 --> 00:50:35,040
कि

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00:50:35,040 --> 00:50:40,480
इतने इतने लाख वर्ष पूर्व से हमारी

678
00:50:40,480 --> 00:50:44,560
परंपरा है। साक्षात हरिहर के तेज से हमारी नियुक्ति होती

679
00:50:44,560 --> 00:50:48,640
है। इसीलिए तो कहते हैं उसकी बहुत वैल्यू

680
00:50:48,640 --> 00:50:52,640
है। आज देखो कहीं ना कहीं परंपरा के नाम से हलचल

681
00:50:52,640 --> 00:50:56,640
है समाज में। नहीं तो कुछ दिनों पहले तक लोग जानते नहीं थे

682
00:50:56,640 --> 00:51:00,880
परंपरा के महत्व को। आज परंपरा के महत्व

683
00:51:00,880 --> 00:51:06,880
को जानते होते तो क्या फंसते हैं रामपाली गैंग में गैंग के चक्कर में लोग हमारे

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00:51:07,760 --> 00:51:11,760
तो शास्त्रों शास्त्रों के ज्ञान को तो पहुंचाना

685
00:51:11,760 --> 00:51:17,040
ही है वो ये जो पांच सिद्धांत है ये भी शास्त्रीय ज्ञान है

686
00:51:17,040 --> 00:51:22,080
मगर सबसे पहले इन पांच सिद्धांतों की स्थापना समाज में बहुत

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00:51:22,080 --> 00:51:26,000
प्रखरता से होनी चाहिए

688
00:51:26,000 --> 00:51:30,160
जी परंपरा पांच सिद्धांत क्या है? इस पर मैंने

689
00:51:30,160 --> 00:51:35,600
वीडियो बनाया है और बहुत जल्द और भी वीडियो बनाऊंगा।

690
00:51:35,600 --> 00:51:40,640
ठीक है। मुझे लगता नहीं है और कोई आएगा।

691
00:51:40,640 --> 00:51:45,440
ठीक है। फिर सभी को जय श्री राम। मेरे ख्याल से कोई आए भाई।

692
00:51:45,440 --> 00:51:50,080
रूल है बिना रूल नहीं कर सकते हैं। आान ब्रो आई कांट रिवील फेस।

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00:51:50,080 --> 00:51:53,600
मेरे को लाइव में लाओ।

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00:51:53,600 --> 00:51:57,840
देखिए वैचारिक मतभेद के निमित्त अगर चर्चा है तो हम बिना फेस

695
00:51:57,840 --> 00:52:01,840
के नहीं लेते हैं और अगर आप हमें जानते हैं जानने वाले हैं

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00:52:01,840 --> 00:52:06,000
तो आप संपर्क करें अगली लाइव में हम आपको ले लेंगे अगर वैचारिक मतभेद नहीं है तो

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00:52:06,000 --> 00:52:10,960
ठीक है सभी को जय श्री राम जय श्री राम शास्त्रवाद जी

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00:52:10,960 --> 00:52:16,960
जय श्री राम जय श्री

699
00:52:19,920 --> 00:52:23,920
[संगीत]
