1
00:00:03,520 --> 00:00:07,040
तो सभी को जय श्री राम।

2
00:00:07,040 --> 00:00:12,080
आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

3
00:00:12,080 --> 00:00:16,640
और सभी को शुभकामनाएं। ढेर सारी

4
00:00:16,640 --> 00:00:19,360
हमारे दो

5
00:00:19,360 --> 00:00:24,640
बड़े वरिष्ठ आचार्य गण

6
00:00:24,640 --> 00:00:28,880
राघवाचार्य जी महाराज और

7
00:00:28,880 --> 00:00:34,240
शंकराचार्य जी महाराज दोनों एक पटल पर हमें दिखाई दिए। हमारी ऐसी

8
00:00:34,240 --> 00:00:38,320
आशा है कि आगे भविष्य में भी परंपरा प्राप्त

9
00:00:38,320 --> 00:00:44,320
जो आचार्य गण हैं संप्रदाय हैं उनमें अ

10
00:00:44,480 --> 00:00:49,280
हमें एकता दिखाई देगी व्यवहारिक रूप से। अभी

11
00:00:49,280 --> 00:00:53,200
जो मुख्य विषय है बात करने का

12
00:00:53,200 --> 00:00:57,200
वह एक सुपर क्वालिटी के कुछ

13
00:00:57,200 --> 00:01:01,360
कायर और गीदड़ों से मेरा सामना हुआ है। जिंदगी में मुझे

14
00:01:01,360 --> 00:01:07,120
लगता है कि वो आयु में काफी छोटे होंगे। विवेक

15
00:01:07,120 --> 00:01:11,680
भी ठीक से उनका काम नहीं कर रहा है।

16
00:01:11,680 --> 00:01:14,320
तो

17
00:01:14,320 --> 00:01:18,480
इन लोगों ने क्या है एक नई विधा निकाली शिवश नारायण द्विवेदी

18
00:01:18,480 --> 00:01:19,040
से

19
00:01:19,040 --> 00:01:23,120
सामना तो कर नहीं पाएंगे। क्यों नहीं कर पाएंगे? क्योंकि शिवश

20
00:01:23,120 --> 00:01:27,680
नारायण द्विवेदी पटकेगा। बात बातबात में पटकेगा। तो इसलिए

21
00:01:27,680 --> 00:01:31,840
सामना नहीं करेंगे। पहले कोशिश किया अछल पूर्वक

22
00:01:31,840 --> 00:01:36,400
बात करने का। बात की भी भागवतानंद

23
00:01:36,400 --> 00:01:40,800
के एक समर्थक ने भागते

24
00:01:40,800 --> 00:01:45,040
हुए मुझे फोन किया और फोन करके वह उसी

25
00:01:45,040 --> 00:01:49,200
विषय पर कि पीएन मिश्र वाले विषय में आप चुप क्यों हैं उसी

26
00:01:49,200 --> 00:01:53,360
विषय पर उसने चर्चा चढ़ी तो हम जो इस संबंध में जो बातें

27
00:01:53,360 --> 00:01:57,440
हम कह चुके हैं कई बार तो वह बातें हमने बता दिया

28
00:01:57,440 --> 00:02:01,280
अपना पक्ष कई बार बता दिया

29
00:02:01,280 --> 00:02:05,280
और जब सामने बात आएगी तो

30
00:02:05,280 --> 00:02:09,280
बताएंगे भी आगे भी बताएंगे। अब हुआ क्या कि क्योंकि

31
00:02:09,280 --> 00:02:13,440
मैं उस समय पूरी पहुंच रहा था। उस समय इनका इस व्यक्ति का फोन

32
00:02:13,440 --> 00:02:17,520
आया था। तो शायद नेटवर्क का इशू रहा होगा जिसकी वजह

33
00:02:17,520 --> 00:02:21,760
से उसको मेरी बात ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी। तो ये कहते हुए फोन समाप्त

34
00:02:21,760 --> 00:02:27,200
हो गया कि भाई

35
00:02:27,200 --> 00:02:31,200
क्या कहते हैं? जब किसी सही गंतव्य स्थान पर पहुंच जाएंगे स्थिरता आ जाएगी नेटवर्क

36
00:02:31,200 --> 00:02:35,200
इत्यादि में तब बात करेंगे और उसके बाद वहां बहुत सारी गतिविधियां है ना इसका

37
00:02:35,200 --> 00:02:39,280
कॉल मेरे पास आया इस व्यक्ति का ना ही मैं इससे बात कर पाया अपनी ओर से फोन लगा

38
00:02:39,280 --> 00:02:43,440
करके क्योंकि मुझे इससे प्रथम बात करके प्रथमत

39
00:02:43,440 --> 00:02:47,600
यही लगा था कि भाई कोई व्यक्ति है जो इस विषय में हमारा पक्ष जानना चाह रहा है वो

40
00:02:47,600 --> 00:02:51,680
न्यूट्रल है उसका कोई माइंड मेकअप नहीं है वो समर्थक नहीं है मगर वो

41
00:02:51,680 --> 00:02:55,760
एक न्यायपूर्ण व्यक्ति है जो सत्य को जानना चाह रहा है

42
00:02:55,760 --> 00:03:00,080
कि इस बारे में हमारा पक्ष है यद्यपि हम अपना पक्ष काफी बार लेख इत्यादि

43
00:03:00,080 --> 00:03:05,280
के माध्यम से और अन्य विषयों पर बनाए गए वीडियो या

44
00:03:05,280 --> 00:03:09,280
सामग्री में इस विषय को हम बता चुके हैं रख चुके हैं। फिर

45
00:03:09,280 --> 00:03:13,600
भी मैंने उसको न्यूट्रल समझते हुए न्याय प्रिय

46
00:03:13,600 --> 00:03:17,920
समझते हुए मैंने वहां पर फोन पर कोशिश की कि मैं उसको

47
00:03:17,920 --> 00:03:22,080
उसका जो संशय है या फिर उसकी जो चीजें हैं

48
00:03:22,080 --> 00:03:26,080
उसका मैं निराकरण उसको कर दूं। समस्या हो यह

49
00:03:26,080 --> 00:03:30,800
बात होते हुए खत्म हुई कि भाई

50
00:03:30,800 --> 00:03:35,120
जब नेटवर्क ठीक जगह में पहुंच जाऊंगा जहां नेटवर्क होगा तो बात होगी।

51
00:03:35,120 --> 00:03:39,120
अब इन लोगों ने क्या किया कि वो जो बात थी जो मेरी ओर से

52
00:03:39,120 --> 00:03:43,440
संतुष्टिजनक मैंने उत्तर दे दिए थे। मेरी जानकारी में

53
00:03:43,440 --> 00:03:48,320
उसमें ऐसी कोई बात नहीं थी जिसको काटा जा सके। है ना?

54
00:03:48,320 --> 00:03:52,400
मगर फिर भी उसकी कुछ चीजें थी जो उसको बोलनी थी मगर

55
00:03:52,400 --> 00:03:54,880
नेटवर्क

56
00:03:54,880 --> 00:03:58,880
ना होने के कारण बात बाद में होगी। ऐसा कहा गया। अब इस व्यक्ति

57
00:03:58,880 --> 00:04:02,960
ने क्या किया कि वो जो रिकॉर्डिंग थी वो अपने

58
00:04:02,960 --> 00:04:07,040
किसी अमुक अमुक चैनल से निर्गत कर दी कि

59
00:04:07,040 --> 00:04:11,600
देखो देखो सुभाष नारायण द्विवेदी ने क्या बहाने लगाए। जब मैंने यह देखा

60
00:04:11,600 --> 00:04:15,600
कि भाई इन्होंने वह रिकॉर्डिंग डाल दी। जबकि मैंने तो अपनी ओर से बिल्कुल

61
00:04:15,600 --> 00:04:19,760
सटीक उत्तर दिए हैं। और अंत में अगर आपकी कुछ अन्य जिज्ञासा

62
00:04:19,760 --> 00:04:23,760
भी है उसमें आगे कुछ प्रश्न भी है तो आगे वार्ता होने के नाम से वो कॉल

63
00:04:23,760 --> 00:04:29,760
डिस्कनेक्ट हुआ था। परंतु फिर इसने

64
00:04:35,200 --> 00:04:39,200
परंतु फिर इसने अपने आप को अपने पक्ष को या मतलब उस

65
00:04:39,200 --> 00:04:43,360
समय तो इसने ये भी नहीं बताया था कि वो मेरा विरोधी है। कौन कर रहा है तो छल

66
00:04:43,360 --> 00:04:47,600
पूर्वक कर रहा है। ऐसे ही कायर निर्मित होते हैं शंकराचार्य

67
00:04:47,600 --> 00:04:51,680
के विरोधियों के यहां पर वो भले ही आर्य समाज हो भले ही स्कन

68
00:04:51,680 --> 00:04:56,800
हो वो भले ही ये भागवत आनंद हो थसिकल सोसाइटी का

69
00:04:56,800 --> 00:05:01,040
परंपरागत एजेंट वो आज आपने श

70
00:05:01,040 --> 00:05:05,360
देख लिया होगा हमारे मेन चैनल पे तो

71
00:05:05,360 --> 00:05:09,520
इसने अपने आप को भागवतानंद का समर्थक और मेरा

72
00:05:09,520 --> 00:05:13,600
विरोधी वहां पर नहीं बताया था। इसने एक न्यूट्रल बताया था और

73
00:05:13,600 --> 00:05:17,760
संभवत हमारी क्लासेस वाले जो ग्रुप है उसमें जुड़ा हुआ है। इसका

74
00:05:17,760 --> 00:05:21,760
नाम वहां पर अभिषेक दिखा रहा है जो जहां से मैसेजेस मुझे आ रहे हैं।

75
00:05:21,760 --> 00:05:25,760
अभिषेक पाठक करके कोई जुड़ा हुआ। तो मुझे लगा कि कोई

76
00:05:25,760 --> 00:05:30,080
न्यूट्रल व्यक्ति है जो जानना चाह रहा है हमारे पक्ष। तो इसने वहां पर अपनी पहचान

77
00:05:30,080 --> 00:05:34,160
नहीं बताई और इसके हिसाब से मैंने इसके उत्तर नहीं दिए थे। मेरे हिसाब

78
00:05:34,160 --> 00:05:38,480
से दे दिए थे। पर मैंने ये कहा था भाई कहीं स्थिरता आ जाएगी जहां नेटवर्क

79
00:05:38,480 --> 00:05:42,720
में वहां बात होगी। इसने उस रिकॉर्डिंग को यह कहते हुए कि

80
00:05:42,720 --> 00:05:46,960
भाई मेरा पक्ष जो है गलत है और इसका पक्ष सही है। निर्णायक जबकि बात अभी अधूरी

81
00:05:46,960 --> 00:05:50,320
है। इसने खुद उस रिकॉर्डिंग में ये कहा था कि आप जब कहीं

82
00:05:50,320 --> 00:05:54,320
गंतव्य तक पहुंच जाए तब आप बात करेंगे हम लोग। तो

83
00:05:54,320 --> 00:05:58,640
फिर इसने यह कहते हुए कि मैं जीत गया है। मेरा निर्णायक होते हुए वीडियो कैसे

84
00:05:58,640 --> 00:06:03,120
डाल दिया? ये सारी कायरता छल पूर्वक फोन करना।

85
00:06:03,120 --> 00:06:07,200
फिर जो इसके हिसाब से अभी हमारी चर्चा बाकी

86
00:06:07,200 --> 00:06:11,600
है। फिर भी निर्णायक बन जाना। उतने पर ही जबकि

87
00:06:11,600 --> 00:06:15,600
मैंने तो मना नहीं किया था कि नहीं मैं बात नहीं करूंगा फिर भी इसने वो इस रूप

88
00:06:15,600 --> 00:06:19,760
में ऑडियो निर्गत कर दिया तो जब मैंने यह देखा कि भाई इसने ऑडियो निर्गत कर दिया

89
00:06:19,760 --> 00:06:24,000
है एक बार पोस्टर लगा दीजिए मैं कह रहा हूं मेरा नाम शिवश नारायण

90
00:06:24,000 --> 00:06:28,320
द्विवेदी है ठीक है और इस वीडियो

91
00:06:28,320 --> 00:06:32,720
को कट करके कहीं पर डाल दीजिए उसमें थंबनेल लगा दीजिए कि शिवश

92
00:06:32,720 --> 00:06:36,720
नारायण द्विवेदी ने बताया कि उसका नाम शिवश नारायण द्विवेदी नहीं है

93
00:06:36,720 --> 00:06:41,040
तो क्या अंदर का वो जो कंटेंट है बदल जाएगा। वही इन्होंने

94
00:06:41,040 --> 00:06:45,040
किया था। कंटेंट में कहीं भी मैं गलत दिखाई नहीं दे रहा हूं। उसको

95
00:06:45,040 --> 00:06:49,120
आप सुनेंगे। मगर उसको इस रूप में डाला गया थंबनेल लगा के। देखो देखो इसने क्या

96
00:06:49,120 --> 00:06:53,280
प्रलाप किया है शिवश ने। खैर फिर हमने उसका सही थंबनेल लगा

97
00:06:53,280 --> 00:06:57,280
के अपने मेन चैनल पर डाल दिया कि चलो ठीक है। तो अब ये भाई साहब क्या हुआ कि अब

98
00:06:57,280 --> 00:07:01,440
इनके सामर्थ नहीं है कि फोन करें दोबारा। और शायद मैं करता

99
00:07:01,440 --> 00:07:05,520
भी तो वहां अभी आप जानते ही थे। पूरी गया हुआ था तो वहां पर

100
00:07:05,520 --> 00:07:09,520
बहुत सारे कार्य भी थे। राघवाचार्य जी महाराज भी वहां पर आए थे। उसके बाद

101
00:07:09,520 --> 00:07:14,000
हमने वहां निगमानंद के मठ में जाकर के भी चर्चा इत्यादि की। तो वहां पर व्यस्तता

102
00:07:14,000 --> 00:07:18,400
थी तो मैं शायद करता भी मगर उससे पहले इसने क्या एक नया नुस्खा निकाला

103
00:07:18,400 --> 00:07:22,480
कि अब शिवश नारायण द्विवेदी ये जान गया है कि मैं उसका विरोधी हूं तो मैं फोन

104
00:07:22,480 --> 00:07:26,480
ना करूं। तो अब क्या करूं? अब मैं अपना ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर करके भेज

105
00:07:26,480 --> 00:07:30,480
दूं। तो ऑडियो रिकॉर्ड कर करके इसने मुझे भेजे दो तीन। मैंने वो

106
00:07:30,480 --> 00:07:34,560
भी रख ली। मैं उस पर कुछ प्रतिक्रिया दे ही नहीं पाया। फिर यह अपने

107
00:07:34,560 --> 00:07:38,720
ऑडियो मैसेज खुद ही उसमें बोल बोल करके और अपना

108
00:07:38,720 --> 00:07:42,720
वही ऑडियो मैसेजेस वीडियो के रूप में बनाकर और वहां डालते रहे कि देखो देखो

109
00:07:42,720 --> 00:07:46,880
हम शिवाश नरेंद्र द्विवेदी को जवाब तो पहली बात तो यह है कि

110
00:07:46,880 --> 00:07:49,360
भाई

111
00:07:49,360 --> 00:07:53,360
जब तुमने छल क्यों किया? अपनी पहचान क्यों

112
00:07:53,360 --> 00:07:57,760
छुपाई कि तुम उसके समर्थक हो और मेरे विरोधी हो। ये डर क्यों है?

113
00:07:57,760 --> 00:08:02,000
वैसे ही डर अच्छा होता है। तुम जैसे विरोधियों के मन में

114
00:08:02,000 --> 00:08:06,400
सनातन धर्म के विरोधियों के मन में सार्वभौम सनातन

115
00:08:06,400 --> 00:08:10,400
सिद्धांतों के प्रचारकों का धर्म रक्षकों का डर

116
00:08:10,400 --> 00:08:14,480
अच्छा है। दूसरी बात यह है कि जब दोबारा बात करने

117
00:08:14,480 --> 00:08:19,280
को कहते हुए बात खत्म हुई है तो दोबारा बात करे बिना आप निर्णायक कैसे बने?

118
00:08:19,280 --> 00:08:20,960
तीसरी बात ये है कि

119
00:08:20,960 --> 00:08:25,760
जब तुम सब हमसे ये चाहते हो अभी वो वीडियो रिकॉर्डिंग सुनाई जाएगी।

120
00:08:25,760 --> 00:08:29,760
तो जब तुम हमसे यह चाहते हो कि हम सामना करें जो कि हमने सबके लिए द्वार खोल

121
00:08:29,760 --> 00:08:34,000
रखे हैं। तुम तुम अपने अंधे कुएं में गिरे हुए हो तो क्या करें?

122
00:08:34,000 --> 00:08:38,240
जब वहां पर जो एक सीरीज शुरू हुई थी भागवतानंद का

123
00:08:38,240 --> 00:08:42,240
हमारे ऊपर आक्षेप करना हमको उसका उत्तर देना उस सीरीज के अंत

124
00:08:42,240 --> 00:08:46,320
में ही हमने कह दिया था भागवत आनंद आप प्रत्यक्ष सामना करो। हमने अभी भी

125
00:08:46,320 --> 00:08:51,680
एक दो दिन तीन चार दिन पहले पोस्ट में और वीडियो के माध्यम से कहा है कि विद्यानंद

126
00:08:51,680 --> 00:08:55,680
पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज के यहां पर आकर के तुम उनको समक्ष रखते हुए बात

127
00:08:55,680 --> 00:08:59,840
कर लो आकर के तो भाग कौन रहा है और भागता कौन

128
00:08:59,840 --> 00:09:04,000
है कैसे सिद्ध होता है ये सब दिखाई देगा मगर तुम क्या कह रहे हो तुम क्या

129
00:09:04,000 --> 00:09:08,240
छल कर रहे हो हमसे कह रहे हो कि हम जो है हम कायर है

130
00:09:08,240 --> 00:09:12,240
जो डंके की चोट पर जाकर के सनातन विरोधियों से लड़ते हैं

131
00:09:12,240 --> 00:09:16,480
जिसको जान से मारने की धमकी आती है उसके परिवार परिवार को जान से मारने की धमकी

132
00:09:16,480 --> 00:09:20,880
आती है। फिर भी वो टिका रहता है। लड़ता है। अखबारों में न्यूज़ छपती

133
00:09:20,880 --> 00:09:24,960
है कि ऐसा ऐसासा हो रहा है इसके साथ। ह

134
00:09:24,960 --> 00:09:28,960
बड़े-बड़े गैंग से सामना कर रहे हैं और तुम हमको सिखा रहे हो आ

135
00:09:28,960 --> 00:09:33,840
के कल के छोरे। खैर खैर

136
00:09:33,840 --> 00:09:36,640
तो इनका सबसे पहले संदर्भ

137
00:09:36,640 --> 00:09:40,880
जिससे कि क्लियर हो जाए। सबसे पहले जो मेरी और उसकी बात हुई है जो अधूरी

138
00:09:40,880 --> 00:09:45,040
रही थी उसके हिसाब से। मेरे हिसाब से पूरी थी। पर उसके हिसाब से अधूरी थी वो बात

139
00:09:45,040 --> 00:09:51,040
तो वह वाला आप ऑडियो इनको सुना दीजिए सभी को

140
00:09:55,920 --> 00:10:00,560
और अभी भी यहां पर आने से पहले मैंने उस व्यक्ति को मैसेज भेजा है कि भाई

141
00:10:00,560 --> 00:10:04,880
निष्ठा पूर्वक माताजी ने बचपन में दूध पिलाया है तो प्रत्यक्ष

142
00:10:04,880 --> 00:10:10,160
वार्ता करने का साहस प्रकट करो ना

143
00:10:10,160 --> 00:10:14,240
उसको दिया है लिंक अगर आना चाहे तो आएगा ये

144
00:10:14,240 --> 00:10:20,240
सुनिए जय श्री राम जय श्री राम हां

145
00:10:21,440 --> 00:10:25,600
प्रश्न भैया वही था कि पीएन मिश्रा जी का कुछ कुछ तो

146
00:10:25,600 --> 00:10:29,760
अनावश्यक लगा हमें जो उन्होंने कहा है वर्ण व्यवस्था

147
00:10:29,760 --> 00:10:33,840
को लेकर के शंकराचार्य जी को और करात्री जी को

148
00:10:33,840 --> 00:10:38,000
लेकर के आदि ये सब जो है अभी कुछ दिनों पहले एक ब्राह्मण

149
00:10:38,000 --> 00:10:42,160
विरोधी फिल्म बनाई थी अनुराग कश्यप ने अच्छा उसने उसने

150
00:10:42,160 --> 00:10:47,120
बहुत पूरे वर्णाश्रम जो धर्म होता है उसकी धड्डियां उड़ाई थी। उसमें कोई किसी

151
00:10:47,120 --> 00:10:51,120
कोई विचारक थे। उनकी पुस्तक का आधार लेकर के

152
00:10:51,120 --> 00:10:55,120
फिल्म बनाई थी। काफी चर्चा हुई थी। उसका विरोध भी किया था। ब्राह्मण विरोधी फिल्म

153
00:10:55,120 --> 00:10:59,120
या वर्णाश्रम विरोधी फिल्म इस तरह से। तो हम उसका भी तो

154
00:10:59,120 --> 00:11:02,160
विरोध नहीं कर पाए हैं।

155
00:11:02,160 --> 00:11:06,400
हाइपरस्ट हाइपरस्ट के चैनल पर धर्म सम्राट नाम से अपने आप को विख्यापित

156
00:11:06,400 --> 00:11:10,480
करता है। जो कहता है वो ऋषि वाच गया। वहां पर उसने खूब उल्टी

157
00:11:10,480 --> 00:11:13,440
की जहर उबला

158
00:11:13,440 --> 00:11:17,600
हम लोग उसे भी समय नहीं दे पाए। विज्ञान दर्शन भी हाइपर

159
00:11:17,600 --> 00:11:21,600
क्वेस्ट पर जाकर के उल्टियां कर चुका है। करपात्री जी को अगर सिंगल पॉइंट तरीके से

160
00:11:21,600 --> 00:11:25,280
देखा जाए तो कलयुगी योगी नाम का एक व्यक्ति जो हमारे चैनल पर कई

161
00:11:25,280 --> 00:11:29,760
बार आ चुका है। दो एक बार आ चुका है। उसने जो है बहुत गिरे

162
00:11:29,760 --> 00:11:34,080
हुए स्तर से जो है कृपात्री जी के बारे में बात करते हुए रील बनाई। वक्तव्य दिए।

163
00:11:34,080 --> 00:11:38,160
वहां भी कुछ नहीं कर पाए। और इसके साथ ही साथ एक फेमस

164
00:11:38,160 --> 00:11:42,400
चेहरा है नित्यानंद मिश्रा जिसने करपात्री जी के ऊपर

165
00:11:42,400 --> 00:11:46,400
उंगली उठाई थी वो पृथ्वी गोल है वाले मामले पर पृथ्वी घूमती है वाले मामले पर

166
00:11:46,400 --> 00:11:50,400
और अलोपनिषद पर भी उठाई थी यद्यपि अलोपनिषद वाले मामले को हमने

167
00:11:50,400 --> 00:11:54,560
बहुत उसको ही केंद्रित करते हुए नहीं मगर एक जवाब दे दिया था इसमें उसका संदर्भ

168
00:11:54,560 --> 00:11:58,800
भी था मगर ये नहीं बताया था लोगों को कि भाई हम इस वीडियो में उसको जवाब दे रहे हैं

169
00:11:58,800 --> 00:12:03,360
तो इतने सारे लोग हैं और भी ना जाने कितने लोग हैं

170
00:12:03,360 --> 00:12:07,600
जो कि पीएन मिश्र जी से बहुत ज्यादा आगे ख्याति प्राप्त

171
00:12:07,600 --> 00:12:11,920
है और वो बोलते हैं और जैसे

172
00:12:11,920 --> 00:12:15,920
ये बताया जा रहा है कि इनकी ही जानकारी के अनुसार ये शंकर परंपरा के विरोध

173
00:12:15,920 --> 00:12:20,240
में बोलते हैं क्योंकि हमने ज्यादा उनके चीजों को सुना नहीं है मगर उससे भी ज्यादा

174
00:12:20,240 --> 00:12:24,400
घृणात्मक तरीके से निम्न दृष्टि से ख्यापित करते हुए बहुत लोग बोले हैं तो

175
00:12:24,400 --> 00:12:28,480
हमने उनके लिए भी तो कुछ नहीं किया है तो ऐसे में यही प्रश्न क्योंकि पीएन मिश्र

176
00:12:28,480 --> 00:12:32,480
जी के विरोध में आपने क्यों नहीं बोला अभी प्रमुख मुद्दा तो वही

177
00:12:32,480 --> 00:12:38,480
बना हुआ है ना यह प्रमुख मुद्दा तय कौन कर रहा ये प्रमुख है।

178
00:12:38,800 --> 00:12:40,480
आप आप देखिए प्रमुख

179
00:12:40,480 --> 00:12:44,640
मुद्दा तय कौन करेगा? यह प्रमुख है। अभी इसी

180
00:12:44,640 --> 00:12:49,280
पे अधिक विवाद छिड़ा हुआ था ना इसलिए किस पे अधिक विवाद छिड़ा था?

181
00:12:49,280 --> 00:12:52,880
पीए

182
00:12:52,880 --> 00:12:56,960
मिनट रुकिए। इसको पॉज करिए। देखिए व्यक्ति कह रहा है

183
00:12:56,960 --> 00:13:01,360
प्रमुख मुद्दा एक छिड़ा हुआ है। यह क्या है ना कि जो लोग धरातल

184
00:13:01,360 --> 00:13:05,760
पर उतरते नहीं है अपनी मां के सम्मान की रक्षा करने के लिए

185
00:13:05,760 --> 00:13:10,080
उनको और जिन्होंने अपने कुएं के बाहर के दुनिया

186
00:13:10,080 --> 00:13:14,240
संसार देखा नहीं होता है। उनको ऐसा ही लगता है कि हम जो देख रहे हैं हम जो सोच रहे हैं बस उतना

187
00:13:14,240 --> 00:13:18,400
ही है। वही वाली बात है। अब इसने घोषणा कर दी। यह प्रमुख मुद्दा

188
00:13:18,400 --> 00:13:22,720
है। इसमें विवाद छिड़ा हुआ है। भाई तेरे कहने से मान लिया जाएगा

189
00:13:22,720 --> 00:13:27,520
कि विवाद छिड़ा हुआ है। अरे विवाद छिड़ा हुआ है। हाई कोर्ट में

190
00:13:27,520 --> 00:13:32,560
आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं हाई कोर्ट में। केस चल रहे हैं उस पर।

191
00:13:32,560 --> 00:13:37,040
यह प्रमुख मुद्दा नहीं है। मगर पीएन मिश्र जी ने भागवतानंद

192
00:13:37,040 --> 00:13:43,040
के ऊपर कुछ कटाक्ष किया। ये तुम्हारे जैसों के लिए प्रमुख मुद्दा है।

193
00:13:44,640 --> 00:13:48,800
तुम्हारी मां के साथ बलात्कार हुआ। यह कोई

194
00:13:48,800 --> 00:13:53,040
व्यक्ति किताबें छाप छाप करके दुनिया भर में प्रचारित कर रहा है। ये तुम्हारे लिए प्रमुख मुद्दा

195
00:13:53,040 --> 00:13:57,040
नहीं है। और तुम दूसरों से अपेक्षा कर रहे

196
00:13:57,040 --> 00:14:01,120
हो कि तुम्हें जो चीज बुरी लग रही है जिस समय जिस देश काल परिस्थिति में उसी देश

197
00:14:01,120 --> 00:14:05,120
काल परिस्थिति में आदमी जुड़ जाए तुम्हारे अनुसार। प्रमुख मुद्दा

198
00:14:05,120 --> 00:14:09,200
है।

199
00:14:09,200 --> 00:14:13,280
यह प्रमुख मुद्दा अगर तुम इस आधार पर तय कर रहे हो जो

200
00:14:13,280 --> 00:14:17,360
भी तुमने आधार अभी आगे दिए होंगे वही पर काटेंगे वो आधार फिर तुम्हें

201
00:14:17,360 --> 00:14:20,720
शास्त्रों से देने होंगे

202
00:14:20,720 --> 00:14:24,720
मन मुखी बातें नहीं तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य

203
00:14:24,720 --> 00:14:28,720
की स्थिति में शास्त्र प्रमाण है। शास्त्र से लाओ मुझे लगता

204
00:14:28,720 --> 00:14:32,880
है कि हाई कोर्ट में जो इस समय चल रहा है वो प्रमुख मुद्दा है।

205
00:14:32,880 --> 00:14:37,040
मुझे लगता है कि कोई मां है जिसने अपनी 10 10 बुक छाप रखी

206
00:14:37,040 --> 00:14:43,040
है। उसकी बेटी को किडनैप कर लिया गया एक तरीके से। ये

207
00:14:43,840 --> 00:14:47,840
ब्रह्मा कुमारी जैसी संस्था है कोई जो ब्रह्मा कुमारी जैसे

208
00:14:47,840 --> 00:14:50,400
सिद्धांत

209
00:14:50,400 --> 00:14:54,400
प्रचारित करती है। अमोल को केके नाम का कोई आदमी

210
00:14:54,400 --> 00:14:59,040
है जो अपने आप को भगवान बनाने में तुला हुआ है। और ये बेचारी

211
00:14:59,040 --> 00:14:59,840
इसकी बेटी

212
00:14:59,840 --> 00:15:03,840
फंसी हुई है वहां पर। ब्रेन वाश करके वहां पर कैद किया हुआ है

213
00:15:03,840 --> 00:15:08,000
एक तरीके से और यह सारी कहानी इस्मा ने

214
00:15:08,000 --> 00:15:12,000
अपनी इस बुक में लिखी है। इसकी लड़ाई लड़ना प्रमुख मुद्दा नहीं

215
00:15:12,000 --> 00:15:16,160
है। मगर पीएन मिश्र जी जैसे ऐसे व्यक्ति जिनका

216
00:15:16,160 --> 00:15:20,240
कि कोई धार्मिक व्यक्तित्व नहीं है। उन्होंने मेरी जानकारी में क्या

217
00:15:20,240 --> 00:15:24,720
कहा मैं अभी भी नहीं जानता। मगर उन्होंने यदि कुछ कह दिया जो कि भागवतानंद

218
00:15:24,720 --> 00:15:28,720
उसकी भागवतानंद की विरोध में थी वो बात तो

219
00:15:28,720 --> 00:15:33,280
प्रमुखता हो गया। इसको कहते हैं अंधभक्ति।

220
00:15:33,280 --> 00:15:37,520
यह मां रोरो के पागल है। रोज फोन करती है मुझे कि मेरी मदद

221
00:15:37,520 --> 00:15:40,080
करिए।

222
00:15:40,080 --> 00:15:45,360
मगर ये प्रमुख मुद्दा नहीं है तुम जैसों के लिए। पक्षपाती

223
00:15:45,360 --> 00:15:49,920
कभी देख लो दर्पण में अपने आप को। प्रमुख मुद्दा

224
00:15:49,920 --> 00:15:54,080
इस मां से पूछो जाकर के क्या मुद्दा है प्रमुख? जिसकी बेटी

225
00:15:54,080 --> 00:16:00,080
को उससे छीन लिया गया।

226
00:16:00,800 --> 00:16:05,280
जान से मारने की चाकूओं से वोट डालने की धमकी आ रही है।

227
00:16:05,280 --> 00:16:09,360
हाई कोर्ट से हम सिक्योरिटी मांग रहे हैं। ये प्रमुख मुद्दे

228
00:16:09,360 --> 00:16:14,160
नहीं है। ये प्रमुख मुद्दे हैं तुम्हारे लिए।

229
00:16:14,160 --> 00:16:19,120
चले आए दिखाने। प्रमुख मुद्दा

230
00:16:19,120 --> 00:16:22,320
चलाओ।

231
00:16:22,320 --> 00:16:26,320
भयंकर विवाद छिड़ा अनुराग कश्यप की मूवी पे। नरसिम्हा में जो नरसिम्हा में

232
00:16:26,320 --> 00:16:30,400
जो देखिए आप तो व्यष्टि की बात कर रहे हैं। मैं समस्ती की बात कर रहा हूं। पूरे वर्णाश्रम

233
00:16:30,400 --> 00:16:34,480
धर्म की ही धज्जियां उड़ा दी गई है। यहां तो पीएन मिश्र पर्टिकुलर किसी एक गुरु

234
00:16:34,480 --> 00:16:38,480
परंपरा के विरोध में बोल रहे हैं ना। एक मिनट पॉज करो। तो पूरे धर्म

235
00:16:38,480 --> 00:16:42,640
पर ही उंगली उठा दी गई है। और अभी उस फिल्म का मुझे याद नाम

236
00:16:42,640 --> 00:16:47,040
याद नहीं आ रहा। जितने भी लेफ्टिस्ट वाले जो चैनल है जो सनातन

237
00:16:47,040 --> 00:16:51,120
धर्म में कमियां ढूंढते हैं उन सारे चैनल्स

238
00:16:51,120 --> 00:16:55,360
पर उस फिल्म के पक्ष में जो है वीडियोस

239
00:16:55,360 --> 00:16:59,360
बने थे और लाखों की संख्या में व्यूज थे और मैंने देखा

240
00:16:59,360 --> 00:17:03,360
था मैंने उसको नोट किया था अपनी डायरी में कि इसको मुझे उत्तर देना है नहीं

241
00:17:03,360 --> 00:17:07,520
दे पाया पर इस जैसे व्यक्ति के अनुसार जो है प्रमुख मुद्दा

242
00:17:07,520 --> 00:17:11,520
वो है पीएन मिश्र वाला

243
00:17:11,520 --> 00:17:17,520
चलो प्ले करो

244
00:17:18,960 --> 00:17:23,040
नरसिम्हा भूमि में पूरे शिव जी का अपमान किया गया है कि

245
00:17:23,040 --> 00:17:27,120
वो वो राक्षसों के देवता है। हम उसको भी नहीं समय दे पाए। मेरा कहने का

246
00:17:27,120 --> 00:17:31,440
अर्थ यह है कि जब हम किसी का विरोध करते हैं तो हमें यह देखना

247
00:17:31,440 --> 00:17:35,520
होता है। किसी का प्रतिकार करते हैं तो हमें यह देखना होता है कि प्रतिकार करने

248
00:17:35,520 --> 00:17:39,680
से कितना लाभ मिलेगा और प्रतिकार ना करने से उसी समय किसी दूसरे का प्रतिकार

249
00:17:39,680 --> 00:17:43,680
करने से कितनी हानि बच पाएगी। हानि होगी या लाभ होगा। दूसरे से

250
00:17:43,680 --> 00:17:47,760
लाभ होगा या हानि होगी। सिर्फ यह नहीं कि क्योंकि किसी ने हमारा नाम लेकर के

251
00:17:47,760 --> 00:17:51,840
बोल दिया तो हम उसका तुरंत वीडियो बना दें। यह कार्य तो हमारा नहीं है।

252
00:17:51,840 --> 00:17:56,080
हम तो ऐसे किसी तंत्र व्यक्तित्व इत्यादि को पकड़ते हैं

253
00:17:56,080 --> 00:18:00,080
जिसका जो एक कल्ट के रूप में ख्यापित हो रहा हो जिससे कि एक बड़ा

254
00:18:00,080 --> 00:18:04,080
जन समूह जुड़ चुका हो और उसकी विचारधारा जो है फैल रही हो। पीएन

255
00:18:04,080 --> 00:18:08,160
मिश्र जी का व्यक्तित्व क्या है धार्मिक क्षेत्र में? पॉज करिए। उस प्रकार से

256
00:18:08,160 --> 00:18:12,240
तो नहीं है कुछ कहते। तो हमें क्या जब ये व्यक्ति खुद

257
00:18:12,240 --> 00:18:16,240
मान रहा है कि पीएन मिश्र जी को धर्म के विषय में सुनने वाले कोई बहुत लोग

258
00:18:16,240 --> 00:18:20,400
नहीं है तो उनका नाम लेकर के खंडन करने की आवश्यकता क्यों

259
00:18:20,400 --> 00:18:24,640
पड़ी है? क्योंकि वह इस समय भागवत आनंद का विरोध कर रहे हैं। केवल

260
00:18:24,640 --> 00:18:30,000
इसलिए इस व्यक्ति की मानसिकता है। इसको कहते हैं अंधापन

261
00:18:30,000 --> 00:18:34,320
और जिस चैनल के द्वारा यह कह रहा है कि भाई

262
00:18:34,320 --> 00:18:38,320
करपात्री जी का विरोध हुआ है या आगे इसने कहा है इसकी रिकॉर्डिंग में

263
00:18:38,320 --> 00:18:42,640
करपात्री जी का विरोध हुआ है। शंकराचार्य का विरोध हुआ है। क्या उस चैनल पर पहले

264
00:18:42,640 --> 00:18:46,640
सिद्धांतिक विरोध नहीं हुआ है क्या? अरे उससे

265
00:18:46,640 --> 00:18:50,880
पहले संदीप देव ने इतने वीडियोस बनाए हैं। पूरी शंकर पूरी शंकराचार्य

266
00:18:50,880 --> 00:18:56,880
जी का शिष्य नाम है। संदीप देव ने इतने वीडियो बनाए हैं

267
00:18:57,920 --> 00:19:02,080
पूरी शंकराचार्य जी को लेकर के उस विषय में जब वो मुक्तेश्वर जी महाराज को

268
00:19:02,080 --> 00:19:06,160
नहीं मानते हैं। तो तब

269
00:19:06,160 --> 00:19:11,680
तुमने क्यों नहीं पूछा कि इस विषय में तुम क्यों नहीं बोल रहे हो?

270
00:19:11,680 --> 00:19:15,840
क्यों पीएन मिश्र जी जब जब यह कह रहे हैं यह वाला

271
00:19:15,840 --> 00:19:21,840
जो मामला है ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी और पूरी शंकराचार्य जी

272
00:19:22,480 --> 00:19:26,640
दोनों दोनों के बीच में ये वाला जो मामला है मानना और ना मानना

273
00:19:26,640 --> 00:19:30,640
इस विषय में पीएन मिश्र जी के मेरे गुरु के विरोधी नहीं है मैंने कभी कोई नाम

274
00:19:30,640 --> 00:19:34,720
लेकर के वीडियो बनाया क्या संदीप देव जी के ऊपर

275
00:19:34,720 --> 00:19:40,720
वीडियो बनाया क्या

276
00:19:41,520 --> 00:19:46,640
और तो और वो सब छोड़ो भागवतंद

277
00:19:46,640 --> 00:19:50,640
ये जो मामला चालू हुआ कब चालू हुआ

278
00:19:50,640 --> 00:19:55,760
ये वाला मामला शायद मार्च अप्रैल में कुंभ के बाद

279
00:19:55,760 --> 00:19:59,920
तो ये जो भागवतानंद वाला मामला क्या भागवतानंद इससे पहले जाने

280
00:19:59,920 --> 00:20:03,920
कब से शंकराचार्यों के ऊपर विशेष रूप से पूरी पीठ के आचार्यों

281
00:20:03,920 --> 00:20:08,480
के ऊपर अपने कुतर्कों के द्वारा जो है टिप्पणी करता आ रहा था।

282
00:20:08,480 --> 00:20:13,200
मैंने तो नहीं बनाया उसको लेकर के वीडियो।

283
00:20:13,200 --> 00:20:17,200
फिर आज केवल पीएन मिश्र जी क्योंकि विरोध में खड़े हुए हैं

284
00:20:17,200 --> 00:20:21,280
भागवतानंद के तो तुम ये कैसे मुझसे अपेक्षा कर रहे हो कि मैं इसको प्रमुख मुद्दा

285
00:20:21,280 --> 00:20:25,360
समझते हुए सब काम छोड़ के पीएन मिश्र जी के पीछे लग जाऊं। क्योंकि

286
00:20:25,360 --> 00:20:29,440
भागवतानंद ने कहा है। तुम लोगों के पास बात करने का केवल एक आधार

287
00:20:29,440 --> 00:20:33,520
है। जिस किसी भी माई के लाल को उसकी माई ने दूध पिलाया

288
00:20:33,520 --> 00:20:37,680
वो आ जाना। केवल एक ही आधार निकलेगा। तुम्हारी सब बातों

289
00:20:37,680 --> 00:20:42,160
के पीछे क्योंकि भागवतानंद ने कहा है

290
00:20:42,160 --> 00:20:45,840
चलाइए

291
00:20:45,840 --> 00:20:49,840
अगर ना कोई एक व्यक्ति अगर कुछ बोल भी रहा है डेली इतने वीडियोस बनते हैं

292
00:20:49,840 --> 00:20:54,000
शंकराचार्य की विचारधारा के विरोध में जबकि उनका अपना एक उनका अपना एक भी

293
00:20:54,000 --> 00:21:00,000
है थोड़ा पीछे से

294
00:21:01,200 --> 00:21:05,360
उस प्रकार से तो नहीं है कुछ ख्याति उनकी तो हमें क्या करना है कोई एक व्यक्ति ये वाली बात

295
00:21:05,360 --> 00:21:08,000
है ये वाली

296
00:21:08,000 --> 00:21:12,240
जिसका एक्ट के रूप में ख्यापित हो रहा हो जिससे कि एक बड़ा जन

297
00:21:12,240 --> 00:21:16,240
समूह जुड़ चुका हो और उसकी विचारधारा जो है फैल रही हो। पीएन मिश्र

298
00:21:16,240 --> 00:21:20,320
जी का व्यक्तित्व क्या है धार्मिक क्षेत्र में? उस प्रकार से तो नहीं

299
00:21:20,320 --> 00:21:24,400
है कुछ ख्याति उनकी। तो हमें क्या करना? कोई एक व्यक्ति अगर कुछ बोल भी रहा है।

300
00:21:24,400 --> 00:21:28,480
डेली इतने वीडियोस बनते हैं शंकराचार्य की विचारधारा के विरोध में। जबकि उनका अपना

301
00:21:28,480 --> 00:21:32,640
एक उनका अपना एक कल्ट भी है। तो हम पीएन मिश्र जी पर अपनी एनर्जी और समय क्यों नष्ट

302
00:21:32,640 --> 00:21:37,120
करें? सबसे पहली बात। दूसरी बात यह है कि दूसरी बात यह है कि जो व्यक्ति ख्यापित

303
00:21:37,120 --> 00:21:41,120
नहीं है उसको हम अपने चैनल से ख्यापित क्यों करवा दें? भाई पीएन मिश्र

304
00:21:41,120 --> 00:21:45,120
जी का सामाजिक पर्सनालिटी के रूप में, धार्मिक पर्सनालिटी के रूप में क्या व्यक्तित्व

305
00:21:45,120 --> 00:21:49,200
है? अगर उनको संदीप देव जी अपने चैनल पर ना बोलने को बुलाएं। उनका अपना क्या

306
00:21:49,200 --> 00:21:53,280
स्टेटस है जो हम उनका खंडन करें। कितने उनके दीक्षा प्राप्त शिष्य हैं या

307
00:21:53,280 --> 00:21:57,600
कितने उनके फॉलोअर्स हैं जिससे कि वो कुछ बात बोल देंगे तो उनको दिक्कत हो जाएगी। दिक्कत

308
00:21:57,600 --> 00:22:00,960
यह है कि पीएन मिश्र जी ने दिक्कत यह है कि पीएन मिश्र जी इस समय

309
00:22:00,960 --> 00:22:04,960
भागवतानंद के विरोध में खड़े हुए हैं। तो इसलिए सवाल उठ रहा है कि भाई भागवत

310
00:22:04,960 --> 00:22:09,200
आनंद के विरोध में जो खड़ा हुआ व्यक्ति है वो जो ऐसी बात बोल रहा है जो आपके भी एक मिनट

311
00:22:09,200 --> 00:22:13,280
वो जो आपकी आवाज अब आ रही है

312
00:22:13,280 --> 00:22:17,280
आ रही है। हां तो बात मुद्दे की ये है विषय ये है लोग हमसे सवाल

313
00:22:17,280 --> 00:22:21,360
क्यों पूछ रहे हैं कि पीएन मिश्र जी का विरोध क्यों नहीं किया है? इसलिए नहीं पूछ रहे हैं कि शंकर के सिद्धांत

314
00:22:21,360 --> 00:22:25,600
का खंडन हो रहा है। धर्म का खंडन हो रहा है। क्योंकि धर्म का खंडन होने वाली बात होती तो हमको नित्यानंद

315
00:22:25,600 --> 00:22:30,000
मिश्र में भी परेशान करते। हाइपरकस्ट में भी परेशान करते। विज्ञान दर्शन में भी परेशान करते।

316
00:22:30,000 --> 00:22:34,080
तो जो लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि पीएन मिश्र पे क्यों नहीं बोला है वो इससे उनको

317
00:22:34,080 --> 00:22:38,160
मतलब है कि कौन सा ऐसा व्यक्ति है जिसने भागवतानंद का भी विरोध किया है और

318
00:22:38,160 --> 00:22:42,320
जिसने शंकर परंपरा का भी विरोध किया उसके खिलाफ शिवा नारायण द्विवेदी क्यों नहीं बोल रहे? तो

319
00:22:42,320 --> 00:22:46,320
हमारे काम करने की एक स्ट्रेटजी होती है। सबसे पहली बात यह है हम हर हर

320
00:22:46,320 --> 00:22:50,320
किसी के वक्तव्य का उत्तर देने नहीं जुड़ जाते कि भैया बस किसी राह चलते व्यक्ति

321
00:22:50,320 --> 00:22:54,400
ने भी अगर कुछ बोल दिया तो उसने शंकर परंपरा के खिलाफ बोला है तो हम उसका उत्तर देने

322
00:22:54,400 --> 00:22:58,560
लग जाए। अपनी एनर्जी उसमें लगाने लग जाए। हमें ये देखना होता है। एक मिनट

323
00:22:58,560 --> 00:23:02,640
एक मिनट हमें यह देखना होता है कि उस व्यक्ति की क्रेडिबिलिटी कितनी है। उस व्यक्ति

324
00:23:02,640 --> 00:23:06,640
का को फॉलो करने वाले लोग कितने हैं। आज तक ज्यादातर हमने कल्ट्स

325
00:23:06,640 --> 00:23:10,880
को पकड़ा है। जो अपने आप को एक संस्था एक तंत्र के रूप में उद्भाषित कर रहे हैं। हम उनको

326
00:23:10,880 --> 00:23:14,960
पकड़ते हैं। जिनकी अपनी एक विचारधारा छप चुकी है। किताबें छप चुकी है। उसी के

327
00:23:14,960 --> 00:23:16,000
उसी के समर्थन में जो वो

328
00:23:16,000 --> 00:23:20,080
गलत बातें फैला रहा है। ऐसी कोई धार्मिक छवि तो इनकी नहीं है। ये कहीं के वक्ता

329
00:23:20,080 --> 00:23:24,240
हो, कहीं प्रवचन करता हो, इनके बहुत सारे शिष्य हो और ये फिर सनातन धर्म के विरोध

330
00:23:24,240 --> 00:23:28,480
में बातें कर रहे हो। दूसरी बात यह भी देखना पड़ता है कि

331
00:23:28,480 --> 00:23:32,480
यह तो यह तो यह बात रही कि भाई इनकी कोई धार्मिक छवि नहीं। दूसरी बात यह भी है

332
00:23:32,480 --> 00:23:36,480
कि जो व्यक्ति फेमस नहीं है जिस व्यक्ति को लोग नहीं जानते हैं उस व्यक्ति

333
00:23:36,480 --> 00:23:41,680
पर वीडियो बना करके हम उसको उत्तर दे के नाम देकर के फेमस क्यों करें?

334
00:23:41,680 --> 00:23:46,320
भाई अभी तक तो उसको लिमिटेड लोग जानते हैं ना जो जो इस संदर्भों से जुड़े हुए हैं।

335
00:23:46,320 --> 00:23:50,480
फिर वो भी जानेंगे इस वाले भी जानेंगे। देखो पीएन मिश्र पीएन मिश्र जो है

336
00:23:50,480 --> 00:23:54,640
इस वाले भी जानेंगे। आर्य समाज भी जानेंगे कि पीएन मिश्र खुद वर्ण व्यवस्था

337
00:23:54,640 --> 00:23:57,440
का वो कर रहे हैं समर्थन

338
00:23:57,440 --> 00:24:02,640
फिर वो हमसे आकर के तर्क करेंगे हम क्यों जनवाए उन्हें

339
00:24:02,640 --> 00:24:06,800
हालांकि जब जान जाएंगे तो उसका उत्तर देना भी होगा उसका उत्तर भी है हमारे पास मगर

340
00:24:06,800 --> 00:24:10,960
हम अपनी एनर्जी क्यों वेस्ट करें ऐसी चीज में जब हमारे पास रामपाल है स्कन

341
00:24:10,960 --> 00:24:15,040
है आर्य समाज है ब्रह्मा कुमारी है तो हम क्यों ऐसी निरर्थक अपनी एनर्जी वेस्ट

342
00:24:15,040 --> 00:24:19,200
करें क्योंकि भागवतानंद का उसने विरोध किया है इसलिए लोग ये कहेंगे कि तुमने इसका

343
00:24:19,200 --> 00:24:23,280
विरोध क्यों नहीं किया अच्छा दूसरी बात ये है कि अब जैसे ये

344
00:24:23,280 --> 00:24:27,360
अमुक आचार्य जी की ही बात है रामभद्राचार्य जी ने इतनी सारी बातें कही

345
00:24:27,360 --> 00:24:31,200
तो बात आ रही शिवा नारायण द्विवेदी क्यों नहीं बोल रहा है

346
00:24:31,200 --> 00:24:35,680
तो क्या हर व्यक्ति के विरोध में हमारा ही बोलना जरूरी है

347
00:24:35,680 --> 00:24:39,680
ये कैसे तय हो रहा है और क्या भागवतानंद ने हर सनातन विरोधी आज तक जो

348
00:24:39,680 --> 00:24:43,760
भी वक्तव्य आया उसने सबके बारे में बोल लिया है इसका मतलब कहीं ना कहीं सामर्थ्य की सीमा होगी

349
00:24:43,760 --> 00:24:47,920
ना बोलने की और फिर जब जब रामभद्राचार्य जी के विरोध में इतने सारे

350
00:24:47,920 --> 00:24:52,320
लोग ऑलरेडी बोल रहे हैं वक्तव्य आ रहे हैं वो भी प्रामाणिक आचार्यों के आ रहे हैं।

351
00:24:52,320 --> 00:24:56,320
आ रहे हैं कि नहीं? ज्योतिषी वाले महाराज का आया और सभी एक तरफ से जब बोल रहे हैं

352
00:24:56,320 --> 00:25:00,480
और हमने बिना नाम लिए हुए भी कई ऐसी बातें दिखा दी अपने पेज

353
00:25:00,480 --> 00:25:04,880
से जिसमें कि उनका जो उन्होंने जो भी वक्तव्य दिया है उसका प्रतिकार

354
00:25:04,880 --> 00:25:08,960
हो गया। मगर ये जो इसको जो विषय बनाया जा

355
00:25:08,960 --> 00:25:13,040
रहा है कि तुमने उनका नाम ले क्यों नहीं बोला? तुमने पीएम मिश्र जी का क्यों नहीं बोला? भाई हमको हम

356
00:25:13,040 --> 00:25:17,200
लोग धरातल पर लड़ने वाले लोग हैं। आप लोग लड़ नहीं रहे हो धरातल पे। आप केवल क्वेश्चन

357
00:25:17,200 --> 00:25:21,440
कर रहे हो। जिसको धरातल पर लड़ाई लड़नी होती है उसको यह तय करना होता है कि कितना

358
00:25:21,440 --> 00:25:25,520
बोलना है किससे बोलना है कब बोलना है अभी बोलना है बाद में बोलना है बहुत सारी

359
00:25:25,520 --> 00:25:29,840
चीजें बोलनी होती है अब हमारा मान लीजिए रामपाल का केस चल रहा है हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है

360
00:25:29,840 --> 00:25:33,840
कुछ लेख जिस चैनल की ये लोग बात कर रहे हैं कि तुम विरोध

361
00:25:33,840 --> 00:25:38,240
क्यों नहीं कर रहे हो उसी चैनल पे संदीप देव जी के चैनल पे ही संदीप

362
00:25:38,240 --> 00:25:41,120
देव जी स्वयं

363
00:25:41,120 --> 00:25:45,200
करपात्री जी पर बोल चुके हैं सद्धांतिक विरोध प्रकट कर

364
00:25:45,200 --> 00:25:46,240
चुके हैं

365
00:25:46,240 --> 00:25:50,720
तो क्यों नहीं आए थे कल इससे पहले पूछने क्यों नहीं बोल रहे हो

366
00:25:50,720 --> 00:25:54,960
और तुम्हारा वो भागवतानंद क्यों जाता था वहां पर तुमको कब

367
00:25:54,960 --> 00:25:59,440
पता चला ये लोग आज लोग इतनी अभद्र बातें बोल रहे हैं संदीप देव जी के लिए अश्लील

368
00:25:59,440 --> 00:26:04,400
बातें बोल रहे हैं इनको कब पता चला संदीप देव जी के सिद्धांत वो है

369
00:26:04,400 --> 00:26:08,880
सैद्धांतिक उनका पक्ष जो है ऐसा ऐसा है भागवतानंद

370
00:26:08,880 --> 00:26:14,480
से बात होते ही इनको पता चल गया कि

371
00:26:14,480 --> 00:26:18,480
संदीप देव जी का सैद्धांतिक पक्ष ये है जिस पर ये

372
00:26:18,480 --> 00:26:22,560
अभद्र बातें कर रहे हैं। यही है दोगलापन

373
00:26:22,560 --> 00:26:26,800
तो दोगलेपन को आचार बना के बैठोगे तो वहां से दोगलापन ही तो सीखोगे

374
00:26:26,800 --> 00:26:30,880
और क्या सीख सकते हो भाई जो कायरता का पोषण

375
00:26:30,880 --> 00:26:34,960
हुआ है बचपन से माता जी का दूध नहीं मिला तो ऐसी फैक्ट्री से

376
00:26:34,960 --> 00:26:39,200
और ऐसी फैक्ट्री में जाने वाले ऐसे कायरों से वही दोगलापन ही तो प्राप्त

377
00:26:39,200 --> 00:26:44,800
होगा। पक्षपात विहीनता थोड़ी ना प्राप्त हो जाएगी।

378
00:26:44,800 --> 00:26:47,200
अच्छा

379
00:26:47,200 --> 00:26:53,200
प्ले करिए प्ले करिए आगे आगे प्ले करिए

380
00:26:54,480 --> 00:26:58,720
उसी समय हाइपर क्वेस्ट चैनल पे धर्म सम्राट नाम से जो अपने आप को कह रहा है पहले ऋषि विवाद किया कहता था वो गया

381
00:26:58,720 --> 00:27:02,800
और उसने जो है बहुत एक डेढ़ घंटे उन लोगों ने जो है जहर उगल लिया अब हम जो है वो हाई कोर्ट के

382
00:27:02,800 --> 00:27:06,960
लिए जो लिखना है वो छोड़ के उसका खंडन बनाने लग जाए नहीं तो तुम क्यों नहीं बोल रहे हालांकि ये पूछा

383
00:27:06,960 --> 00:27:10,960
नहीं गया है पूछना चाहिए था ना हमारा मन था अनुराग कश्यप का विरोध करने

384
00:27:10,960 --> 00:27:15,760
का नहीं कर पाए हमारा मन था नरसिम्हा का विरोध करने का नहीं कर पाए

385
00:27:15,760 --> 00:27:19,760
क्योंकि दो गलत रास्तों में से कम गलत और दो सही रास्तों में से ज्यादा सही

386
00:27:19,760 --> 00:27:23,760
चुनना पड़ता है। पीएन मिश्र जी का विरोध करने से पीएन मिश्र जी की और

387
00:27:23,760 --> 00:27:28,080
प्रसिद्धि होगी। उन्होंने क्या कहा है क्या नहीं कहा है। यदि वो गलत है तो उनकी और प्रसिद्धि होगी। जवाला

388
00:27:28,080 --> 00:27:32,080
वाले जवाला में करणा वर्ण व्यवस्था इत्यादि सभी मामलों में हम अपना

389
00:27:32,080 --> 00:27:36,160
बहुत सीधा साफ सुथरा पक्ष प्रस्तुत कर ही चुके हैं। उसमें नाम लेके ही खंडन करने की

390
00:27:36,160 --> 00:27:40,240
आवश्यकता क्यों है? ख्यापित करने के लिए, प्रसिद्ध

391
00:27:40,240 --> 00:27:44,240
करने के लिए और दूसरी बात कि जब हम अपनी

392
00:27:44,240 --> 00:27:48,640
ओर से और ज्यादा मान लीजिए वह पहले से ही सार्वजनिक है वो बातें मगर हम उसको और ज्यादा सार्वजनिक

393
00:27:48,640 --> 00:27:52,640
क्यों करें ये सारी बातें मैंने अपने वीडियो में कही है ना भाई कोई चीज कितनी भी खराब हो गई हो

394
00:27:52,640 --> 00:27:56,720
उसको और खराब करेंगे क्या करपात्री जी ने एक बात कही थी कि गर्मी पड़ रही

395
00:27:56,720 --> 00:28:00,960
है बहुत भयंकर तो हम क्या गर्मी और पड़ने देंगे हम तो उपाय करेंगे गर्मी ना लगे हमें

396
00:28:00,960 --> 00:28:05,760
कि नियत होकर बैठ जाएंगे नहीं साहब गर्मी पड़ रही है अब हम ना पंखा चलाएंगे ना कूलर चलाएंगे

397
00:28:05,760 --> 00:28:09,920
लेकिन एक बात तो ये भी है ना कि संदीप देव जी का जो चैनल है वो तो थापित

398
00:28:09,920 --> 00:28:13,920
है ना और उसमें भी तो व्यूज जा ही रहे हैं तो मैंने मैंने क्या कहा हम उसको और

399
00:28:13,920 --> 00:28:19,920
क्यों इनक्रीस करें हम उसको और क्यों इनक्रीस करें

400
00:28:20,320 --> 00:28:24,960
क्या मतलब है चाहे जितना देखेंगे ना

401
00:28:24,960 --> 00:28:29,520
इस व्यक्ति को समझ में नहीं आया तो उदाहरण उदाहरण ले लीजिए एक

402
00:28:29,520 --> 00:28:34,640
बालक है जो पूरे वर्ष जिसने पढ़ाई नहीं की है

403
00:28:34,640 --> 00:28:38,800
पूरे वर्ष उसने पढ़ाई नहीं की है परीक्षा के दिनों में जब वो पढ़ने बैठता है तो उसकी

404
00:28:38,800 --> 00:28:44,000
माता जी उससे कहती है कि जाके दूध ले आओ या परचून की दुकान से सामान ले आओ।

405
00:28:44,000 --> 00:28:48,080
अब वो बालक अगर यह कहता है कि भाई मेरे परीक्षा के दिन पास

406
00:28:48,080 --> 00:28:52,080
में आ गए और मुझे पढ़ना है तो क्या माता का यह कहना सही होगा वहां

407
00:28:52,080 --> 00:28:56,160
पर कि हां पूरे वर्ष तो पढ़ा नहीं। अब पढ़ के

408
00:28:56,160 --> 00:29:00,320
क्या कर लेगा? वो भले ही उसने पूरे वर्ष पढ़ाई ना की

409
00:29:00,320 --> 00:29:04,640
हो। फिर भी यदि वो पढ़ रहा है परीक्षा की तैयारी के लिए तो उसका पढ़ना

410
00:29:04,640 --> 00:29:09,360
ही उचित है। इसी प्रकार से वो कितना भी ख्यापित हो गया हो

411
00:29:09,360 --> 00:29:13,920
मगर हमारे द्वारा अकारण उसको और ख्यापित करने का प्रयास उचित

412
00:29:13,920 --> 00:29:17,280
नहीं है।

413
00:29:17,280 --> 00:29:21,520
ठीक है? जैसे कि भले ही कितनी

414
00:29:21,520 --> 00:29:25,600
भी गर्मी पड़ रही हो फिर भी हमें गर्मी से बचने का प्रयास

415
00:29:25,600 --> 00:29:29,600
करना ही हमारा उचित है। कितना भी ताले वाले घर

416
00:29:29,600 --> 00:29:33,840
में चोरी भी हो जाती हो फिर भी घर से ताला लगाकर निकलना

417
00:29:33,840 --> 00:29:39,840
ही उचित है। समझ गए? चलो भैया

418
00:29:40,320 --> 00:29:44,320
उनका पर्टिकुलर उनका व्यक्तित्व क्या है? पीएम विश्व जी का उनका व्यक्तित्व

419
00:29:44,320 --> 00:29:48,320
क्या है? उनकी सामाजिक छवि क्या है? उनके फॉलोअर्स धर्म के धर्म के क्षेत्र में क्या वो एक क्या

420
00:29:48,320 --> 00:29:52,320
वो उनको ऐसे देखा जाता है कि वो एक निर्णायक व्यक्ति है या उन्हें किसी आचार्य के रूप में

421
00:29:52,320 --> 00:29:56,720
देखा जाता है धार्मिक गुरु के रूप में देखा जाता है एक व्यक्ति है वो अधिवक्ता

422
00:29:56,720 --> 00:30:00,720
है वरिष्ठ उस रूप में उनको देखा जाता है कोई नहीं उनसे दीक्षा लेने जा रहा है

423
00:30:00,720 --> 00:30:04,800
हर कोई उनकी बात को सुनने के बाद यदि वो वर्णाश्रमी होगा तो अपने गुरुओं से बोलेगा कि ये

424
00:30:04,800 --> 00:30:09,600
बात सही कह रहा है और अगर वो वो होगा आर्य समाज उसको नहीं तो वो उनसे लेगा निर्देश

425
00:30:09,600 --> 00:30:13,760
दूसरी बात ये है कि हम इस लड़ाई को अपने मंच से भी दिखा करके और ज्यादा लोगों को क्यों बताएं

426
00:30:13,760 --> 00:30:18,400
कि भैया देखो शंकर परंपरा का ही अनुयाई ये कह रहा है किता है

427
00:30:18,400 --> 00:30:22,560
क्यों बता ये सब इतने गिरे हुए लोग हैं करिए

428
00:30:22,560 --> 00:30:26,720
जरा ये सब इतने गिरे हुए लोग हैं इनको इससे मतलब

429
00:30:26,720 --> 00:30:31,280
नहीं है बिल्कुल भी कि धर्म स्थापना धर्म रक्षा क्या होती है का खगा

430
00:30:31,280 --> 00:30:33,840
भाई नहीं मालूम होगा

431
00:30:33,840 --> 00:30:37,920
बस इन्हें इससे मतलब है कि जिसमें इनकी वो है आस्था

432
00:30:37,920 --> 00:30:42,080
उसके खिलाफ कोई क्यों बोल रहा है भाई मैं पूरी

433
00:30:42,080 --> 00:30:46,160
के शंकराचार्य जी से दीक्षित हूं शिष्य हूं उनका और उनके बारे

434
00:30:46,160 --> 00:30:50,640
में इतने लोग बोलते हैं मगर फिर भी हम लोग फिल्टर करके बात करते हैं किस

435
00:30:50,640 --> 00:30:55,120
किसको हम समय दे किस पर एनर्जी वेस्ट करें

436
00:30:55,120 --> 00:30:59,360
एक बहुत पहले नास्तिक आया था मेरे ही चैनल पर क्या नाम था प्रेमजीत

437
00:30:59,360 --> 00:31:03,440
सिरोही वो अभी भी कुछ ना कुछ प्रलाप किया करता है

438
00:31:03,440 --> 00:31:07,440
अब मैं उसको भी जवाब दूं क्यों नहीं दे रहे भाई नहीं दे रहे तो तुम वो हो ये

439
00:31:07,440 --> 00:31:11,440
हो मगर यदि मैं नहीं दे रहा हूं तो तुम उसके लिए क्यों नहीं बोल रहे हो

440
00:31:11,440 --> 00:31:15,520
आ के वो जो भव्य था इस वाला उसने बहुत

441
00:31:15,520 --> 00:31:19,680
गंदा गंदा बोला था यहां से जाकर के मेरे बारे में भी

442
00:31:19,680 --> 00:31:23,920
गुरुदेव के बारे में भी कोई कार्य नहीं कर पाए हम समय ही नहीं निकाल पाए

443
00:31:23,920 --> 00:31:28,000
अरे भाई आर्य समाजियों ने बाकायदा एक पूरी पडकास्ट की

444
00:31:28,000 --> 00:31:32,400
थी मेरे जो व्यक्तिगत जो चित्र इत्यादि

445
00:31:32,400 --> 00:31:36,400
है साधना मार्ग में आने से पहले के वो साझा करके उसकी

446
00:31:36,400 --> 00:31:40,400
हंसी उड़ा रहे हैं। मेरे घर की स्त्रियों को वहां पर जो है हंसी

447
00:31:40,400 --> 00:31:44,560
उड़ा रहे हैं वहां पर उनकी छवियां दिखा करके मैं उनके

448
00:31:44,560 --> 00:31:48,640
विरोध में कार्य नहीं कर पाया कोई खास जो कर

449
00:31:48,640 --> 00:31:49,140
सकता

450
00:31:48,960 --> 00:31:53,200
था कानूनी कारवाई आज भी वो वीडियो डला हुआ है

451
00:31:53,200 --> 00:31:57,760
तो उस पर तुमने क्यों नहीं बात ये सोचा कि भाई तुम क्यों नहीं कर रहे हो ऐसा ऐसा

452
00:31:57,760 --> 00:32:02,320
क्योंकि यह देखना पड़ता है कि हमें पहले क्या करना है

453
00:32:02,320 --> 00:32:06,400
यह देखना पड़ता है कि दो गलत कार्यों में से कम गलत और दो सही

454
00:32:06,400 --> 00:32:10,480
रास्तों में से ज्यादा ज्यादा सही क्या है? और यदि यह विवेक आपके पास नहीं है

455
00:32:10,480 --> 00:32:14,480
तो घर बैठिए और यदि आपको लगता है कि हम जो कर रहे हैं वो गलत कर रहे हैं

456
00:32:14,480 --> 00:32:18,720
तो आके निरत्तर करिए सामने से। ये क्या कायरपन

457
00:32:18,720 --> 00:32:22,880
है भाई? लगता है हड्डियों में पानी भरा हुआ

458
00:32:22,880 --> 00:32:28,880
है। हां। चलो प्ले करो।

459
00:32:28,960 --> 00:32:33,120
ठीक है। वो आगे हमसे प्रश्न करेंगे। हम उनको उत्तर देंगे। मगर हमने अपना काम बढ़ाया ना खुद ही। हम

460
00:32:33,120 --> 00:32:37,760
क्यों बढ़ाएं? और दूसरी बात ये है कि पीन मिश्री है कौन? हैं।

461
00:32:37,760 --> 00:32:41,840
मान लीजिए कि वो राम मंदिर अयोध्या केस में साथ दे रहे हैं। रामपाल वाले केस में साथ दे रहे हैं और

462
00:32:41,840 --> 00:32:45,840
अन्य केसों में साथ दे रहे हैं। हम खामखा उनका नाम लेकर के विरोध करके और इन सब बड़े

463
00:32:45,840 --> 00:32:49,920
अभियानों को रोक दें क्योंकि भागतानंद का जिसने विरोध किया उसका नाम लेकर के विरोध करना आवश्यक

464
00:32:49,920 --> 00:32:53,920
है। अनुराग कश्यप का विरोधक नहीं है। करने वाले बड़े

465
00:32:53,920 --> 00:32:57,440
अभियानों से एक बात याद आई

466
00:32:57,440 --> 00:33:01,760
भागतानंद का मंतव्य देखो कि अगर शिवश नारायण

467
00:33:01,760 --> 00:33:06,080
द्विवेदी उससे लड़ रहा है और कोर्ट

468
00:33:06,080 --> 00:33:10,160
में केस चल रहा है और शिवश नारायण द्विवेदी प्रखर हो के लड़ रहा है

469
00:33:10,160 --> 00:33:14,240
वहां पर तो भागतानंद चलो साथ नहीं दे सकता तो कम से कम

470
00:33:14,240 --> 00:33:18,320
मौन तो रह सकता है मगर क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी उसके विरोध में

471
00:33:18,320 --> 00:33:22,400
खड़ा है तो रामपाल वालों के द्वारा जो एक षड्यंत्र पूर्वक मेरे एक

472
00:33:22,400 --> 00:33:26,800
लेख को प्रचारित किया गया था। जो मैंने यह कहते हुए लिखा था

473
00:33:26,800 --> 00:33:30,960
कि हम लोगों ने जब वहां पर जाकर के विरोध किया था रामपाल

474
00:33:30,960 --> 00:33:35,200
के बुक स्टॉल पर तो मुझे पुलिस के साथ जाना चाहिए था। पुलिस

475
00:33:35,200 --> 00:33:39,200
के साथ ना जाने का मुझे दुख है। तो उसको मैंने जो लिखा

476
00:33:39,200 --> 00:33:43,520
था कि जो वहां मेले में हुआ उस बात का मुझे दुख है। इसकी पुनरावत्ति

477
00:33:43,520 --> 00:33:44,160
नहीं होगी। क्षमा

478
00:33:44,160 --> 00:33:48,320
भी नहीं बोल। तो उस बात को रामपाल वाले

479
00:33:48,320 --> 00:33:52,400
मेरा पक्ष कमजोर करने के लिए अधिकारियों को दिखाते हैं कि देखिए व्यक्ति हमसे

480
00:33:52,400 --> 00:33:56,880
माफी मांग चुका है और फिर भी हमारा विरोध कर रहा है और मैंने बकायदा

481
00:33:56,880 --> 00:34:00,960
अपने बयान जो दिए हैं इस केस में उस केस में उस टिप्पणी को लिखा है

482
00:34:00,960 --> 00:34:05,120
जिससे कि आगे चलकर के वो मेरे लिए मतलब परेशानी का विषय ना बने

483
00:34:05,120 --> 00:34:09,360
पहले ही व्यक्ति को पता रहे कि अगर यह लोग यह वाला लेख आ के मेरा दिखाएं उसका

484
00:34:09,360 --> 00:34:13,440
गलत मतलब बताएं तो भैया यह उसका जवाब है इस भागतानंद ने क्या

485
00:34:13,440 --> 00:34:17,520
किया इस भागतानंद ने धर्म की रक्षा को मां

486
00:34:17,520 --> 00:34:21,600
के अपमान को पीछे करते हुए उसी भगवती के अपमान उसी भगवती को

487
00:34:21,600 --> 00:34:25,920
पीछे करते हुए जिसके लिए दावा करता है कि मुझे पढ़ाने आती है। अपनी

488
00:34:25,920 --> 00:34:30,000
मां के अपमान को भी इसने पीछे कर दिया केवल इस वजह से कि शिवश

489
00:34:30,000 --> 00:34:34,800
नारायण द्विवेदी मेरा विरोध है। विरोधी है और उसने वहां पर डाल दिया।

490
00:34:34,800 --> 00:34:38,960
पोस्ट कर दिया कि देखो यह क्या लिखा है? यह जो है रामपाल से माफी मांग रहे हैं। उनहीं

491
00:34:38,960 --> 00:34:43,040
की शैली में और कर दिया पोस्ट। क्यों

492
00:34:43,040 --> 00:34:47,120
किया? इसलिए क्योंकि धर्म उसके लिए मायने

493
00:34:47,120 --> 00:34:51,360
नहीं रखता है। उसके लिए मायने क्या रखता है कि शिवश नारायण द्विवेदी को परेशान

494
00:34:51,360 --> 00:34:55,440
या किसी भी तरीके से बहुत बड़ी बात नहीं है कि रामपाल से भी हाथ मिला लेगा।

495
00:34:55,440 --> 00:34:59,520
इतना नीच व्यक्ति है। बात नहीं है।

496
00:34:59,520 --> 00:35:03,520
ठीक है। बाकी हमें इस बात का कोई भय नहीं है कि 50

497
00:35:03,520 --> 00:35:07,760
कायर और 50 नीच आपस में जो है वो हो जाए।

498
00:35:07,760 --> 00:35:11,920
एक हो जाए विरोध करने लगे। हम तो वही लड़ेंगे क्योंकि हमने

499
00:35:11,920 --> 00:35:16,720
बचपन में वो श्लोक सुन लिया कर्मवादी कारस्ते मा फले सुदा

500
00:35:16,720 --> 00:35:20,800
ठीक है चला है या ये क्या कहते हैं

501
00:35:20,800 --> 00:35:24,880
ये हाइपर पोस्ट इत्यादि बड़े-बड़े चैनल्स है ये भी तो ख्यापित है अभी

502
00:35:24,880 --> 00:35:29,120
तक कुल मिलाकर के संदीप देव जी के चैनल पर जितने व्यूज आए होंगे टोटल सारे वीडियोस

503
00:35:29,120 --> 00:35:33,360
को मिला के उससे ज्यादा व्यूज हैं जिसमें वो हाइपर के चैनल पर वो गया है

504
00:35:33,360 --> 00:35:37,920
धर्म सम्राट वाला आप आपकी आवाज जा रही है बार-बार

505
00:35:37,920 --> 00:35:42,000
मैं कह रहा हूं कि कुल मिला मिलाकर अभी जितने वीडियोस बनाए गए हैं संदीप

506
00:35:42,000 --> 00:35:46,320
देव जी के चैनल पर पीएन मिश्र वाले विषय में जब से यह विरोध हुआ है।

507
00:35:46,320 --> 00:35:50,640
ठीक है? जब से वो हुआ है तब से इतने

508
00:35:50,640 --> 00:35:54,720
वीडियोस बनाए गए हैं। जितने उसमें टोटल व्यूज आए हैं उससे ज्यादा व्यूज

509
00:35:54,720 --> 00:35:59,520
मिलेंगे आपको हाइपरस्ट में जाकर के। अगर आपका यह कहना है कि वो पहले से ख्यापित है तो मैं पहले हाइपरस्ट

510
00:35:59,520 --> 00:36:03,600
वाले का विरोध करूं तब काम छोड़छाड़ के। पर हम वहां पर इसलिए

511
00:36:03,600 --> 00:36:07,680
ही चुप है कि पहली बात तो हाइपरस्ट की कोई धार्मिक छवि नहीं है जो हर बात का उसका उत्तर दे। वो

512
00:36:07,680 --> 00:36:11,840
अपने आप में ही मिक्स। दूसरी बात यह कि जो वहां पर जो बोल के आया उसके उसका

513
00:36:11,840 --> 00:36:14,560
अपना उसके अपने व्यक्तिगत तौर पर हम खूब खंडन उसका कर चुके।

514
00:36:14,560 --> 00:36:18,640
आगे हमें जैसे ही समय मिलेगा हम फिर करेंगे। हमने इसलिए नहीं किया

515
00:36:18,640 --> 00:36:22,720
भाई। उसको तवज्जो नहीं दी। तो यह निर्णय होता है कि जो व्यक्ति

516
00:36:22,720 --> 00:36:26,720
धरातल पर खड़ा होता है तो उसको एक स्ट्रेटजी के तहत कार्य करना होता है कि किसका

517
00:36:26,720 --> 00:36:30,800
विरोध नाम लेकर के करना है, किसका नहीं करना है, किसका बाद में करना है, किसका अभी करना है।

518
00:36:30,800 --> 00:36:35,040
आप जब कोई काम करने निकलोगे घर से बाहर पुलिस थाना कोर्ट कचहरी जाओगे तब

519
00:36:35,040 --> 00:36:39,200
आपको यह पता लगेगा कि भाई पुलिस वाले से क्या बोलना है, वकील से क्या बोलना है, किसको साथ

520
00:36:39,200 --> 00:36:43,440
में लेकर चलना है? किसकी कुछ बातों को सहन करना है? इस बात को उन्होंने भी बोला है।

521
00:36:43,440 --> 00:36:47,600
ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी ने। उनके कल के वक्तव्य में है यह बात। कल परसों

522
00:36:47,600 --> 00:36:52,320
के वक्तव्य में हेलो हां उनके

523
00:36:52,320 --> 00:36:56,560
उनके कल परसों के वक्तव्य में है ज्योतिष वीर वाले महाराज जी की वो कह रहे हैं कि

524
00:36:56,560 --> 00:37:00,720
लोग आरोप लगाते रहते हैं हम लोग हम लोगों को कई बार सहना पड़ जाता है

525
00:37:00,720 --> 00:37:04,880
जिससे कि विधर्मियों को या विरोधियों को वो ना मिल जाए तो कई कारण

526
00:37:04,880 --> 00:37:08,880
होते हैं हां तो कई कारण हो सकते हैं किसी का विरोध ना करने के

527
00:37:08,880 --> 00:37:13,200
भी और अगर बात यही है कि इसका विरोध क्यों नहीं किया तो मैं आपको पीएन मिश्र

528
00:37:13,200 --> 00:37:17,200
जी से ज्यादा खतरनाक चीजें आपको मैं बता रहा हूं सारी आपका प्रश्न होना चाहिए आपने

529
00:37:17,200 --> 00:37:21,200
इनका जो है ना बहुत ज्यादा आपकी आवाज बहुत ज्यादा कट रही है आप

530
00:37:21,200 --> 00:37:25,200
यदि प्रेम में होंगे तो हां तो ये सवाल

531
00:37:25,200 --> 00:37:29,360
गलत है कि आपने पीएम मिश्रा जी का विरोध क्यों नहीं किया नाम लेकर विरोध करना आवश्यक नहीं है ना कोई

532
00:37:29,360 --> 00:37:29,860
वो

533
00:37:29,600 --> 00:37:35,600
आवश्यक नहीं है जो

534
00:37:35,600 --> 00:37:39,840
इसके बाद वो हिस्सा हम लोगों ने वीडियो में दिखाया नहीं था हमारे पास रिकॉर्डिंग सेव

535
00:37:39,840 --> 00:37:44,000
है जिसमें इस व्यक्ति ने ये कहा था कि आप जब कहीं पहुंच जाइएगा जहां जा रहे हैं

536
00:37:44,000 --> 00:37:48,000
फिर बात करिएगा वो रिकॉर्डिंग िंग हो तो ढूंढ लो आप उसको सुना

537
00:37:48,000 --> 00:37:52,400
देना अंत में उसका। खैर तो

538
00:37:52,400 --> 00:37:56,400
हमने क्या-क्या कारण बताए पीएन मिश्र जी का नाम

539
00:37:56,400 --> 00:37:58,960
लेकर

540
00:37:58,960 --> 00:38:03,040
इस पक्ष को रखने में कि भाई जवाला को अपने

541
00:38:03,040 --> 00:38:07,360
पति का नाम नहीं मालूम था या वो क्या कहते हैं देह

542
00:38:07,360 --> 00:38:11,360
दे इत्यादि के रूप में व्यभचारणी थी इत्यादि विषय में यह सब झूठी अफवाएं

543
00:38:11,360 --> 00:38:16,960
हैं। जबाला जो क्या कहते हैं

544
00:38:16,960 --> 00:38:20,960
जवाला वाले विषय में जो आचार प्रशांत की जो थ्योरी है उसका हमने आचार्य प्रशांत के

545
00:38:20,960 --> 00:38:25,040
यहां जाकर के वीडियो बना करके आचार्य प्रशांत के लोगों के सामने जाकर के

546
00:38:25,040 --> 00:38:29,120
इस थ्योरी पर उनका प्रतिकार किया था। ठीक कर चुके

547
00:38:29,120 --> 00:38:33,360
हैं और ये बता चुके हैं कि वो केवल उनको

548
00:38:33,360 --> 00:38:37,600
अपने गोत्र नहीं याद था। वहां पर सत्यकाम जमाला की जो मां

549
00:38:37,600 --> 00:38:41,600
थी उनको अपना गोत्र उनको गोत्र नहीं याद था। वहां ऐसी बात नहीं है कि

550
00:38:41,600 --> 00:38:44,720
उनको अपने पति का नाम नहीं याद था। तो उसको गलत तरीके से

551
00:38:44,720 --> 00:38:48,720
पोर्ट्रे करके बताया जा रहा है। तो यदि पीएन मिश्र जी भी ऐसा कर रहे

552
00:38:48,720 --> 00:38:52,960
हैं तो यह हमारा पक्ष है। देख लीजिए जाकर के पुराने

553
00:38:52,960 --> 00:38:57,200
वीडियो डले हुए हैं। और

554
00:38:57,200 --> 00:39:01,680
दूसरा विषय एक और है कोई यदि पीएन मिश्र जी कर्मणा

555
00:39:01,680 --> 00:39:07,600
कर्म के अनुसार क्या कहते हैं? इसको

556
00:39:07,600 --> 00:39:11,680
वर्ण के बदलने को स्वीकार करते हैं। तो हमने इस बारे में बता रखा है कि

557
00:39:11,680 --> 00:39:15,680
कर्म से जो है वर्ण नहीं बदलता है। जिसका जो वर्ण है जन्म से

558
00:39:15,680 --> 00:39:20,160
वही रहता है। हमने कई वीडियो बनाए देख सकते हैं आप लोग जाकर के। मगर

559
00:39:20,160 --> 00:39:24,160
प्रॉपर उनके पीछे पड़ जाना उनका नाम लेकर के उनका खंडन करना यदि

560
00:39:24,160 --> 00:39:28,240
वो ऐसा कर रहे हैं। मुझे अभी तक ये क्लियर ही नहीं है कि वो ऐसा कर रहे हैं। कुछ

561
00:39:28,240 --> 00:39:32,720
उड़ती उड़ती चीजें बहुत समय नहीं है। रामपाल वालों ने काउंटर

562
00:39:32,720 --> 00:39:36,960
रामपाल वालों रामपाल वाले अपना वोट बंद करके गायब

563
00:39:36,960 --> 00:39:41,200
हो गए। वहां से सारी किताबें इत्यादि हटा दी अपने सेंटर। वहां

564
00:39:41,200 --> 00:39:45,520
पुलिस जा रही है तो उनको किताबें नहीं मिल रही है। सरकार ने काउंटर लगाया हाई कोर्ट में

565
00:39:45,520 --> 00:39:49,760
कि भाई कोई किताब मिली नहीं। अब हमें वहां जवाब लिखना है कि धड़ल्ले

566
00:39:49,760 --> 00:39:53,840
से इनकी किताबें मिल रही है। YouTube पे इतना प्रचार प्रसार चल रहा है और

567
00:39:53,840 --> 00:39:57,920
आप लोग कह रहे हो हमें किताबें नहीं मिल रही। इनके चैनल बंद करवाइए। चैनल

568
00:39:57,920 --> 00:40:02,480
पे जो बोल रहा है हमसे किताब लीजिए। उसको पकड़िए।

569
00:40:02,480 --> 00:40:06,480
हम ये सब ना करके पीएन मिश्र जी का नाम ले ले के वीडियो बना के जाए। क्यों?

570
00:40:06,480 --> 00:40:10,800
क्योंकि भागवत आनंद ने कहा है। अब इनका अगला अगली जो इन्होंने रिकॉर्डिंग

571
00:40:10,800 --> 00:40:15,040
भेजी जब यह रिकॉर्डिंग हमने अपनी ओर से पहले नहीं डाली थी YouTube पर।

572
00:40:15,040 --> 00:40:19,040
पहले इन लोगों ने डाली ये दिखाते हुए कि देखिए देखिए शिवंशु

573
00:40:19,040 --> 00:40:23,120
नारायण के पास उत्तर नहीं था जब हमने फोन किया तो जबकि खुद ही ये

574
00:40:23,120 --> 00:40:27,200
कह रहा है व्यक्ति कि भैया कहीं आप पहुंच जाइए तो दोबारा बात होगी।

575
00:40:27,200 --> 00:40:32,400
तो दोबारा बात जब हुई नहीं तो तुम निर्णायक कैसे बन गए?

576
00:40:32,400 --> 00:40:36,640
और यदि दोबारा और यदि बात होनी थी तो वही उत्तर देते और अगर उत्तर तुम्हारे

577
00:40:36,640 --> 00:40:40,800
पास थे और अगली बार बात होना शेष था तो निर्णायक ना बनते इसको

578
00:40:40,800 --> 00:40:44,800
कहते दोगलापन कायरता चलिए अब इनके जो आगे कुछ

579
00:40:44,800 --> 00:40:49,040
ऑडियो मैसेजेस हमको फिर आए क्योंकि हमारे पास तो यही कार्य है ना भाई

580
00:40:49,040 --> 00:40:53,280
कि कोई भागानंद का कायर और नीच बुद्धि का

581
00:40:53,280 --> 00:40:57,360
कोई चेला है वो हमको मैसेज करता रहे और हम उसको उत्तर

582
00:40:57,360 --> 00:41:03,360
देते रहे नहीं देंगे तो हम गलत है चलिए

583
00:41:11,600 --> 00:41:16,560
सुनाइए पहला तीन ऑडियो उनमें से पहला

584
00:41:16,560 --> 00:41:21,280
शिवश जी जरा हमें ये बताइए कि आपने हमें उत्तर क्या दिया?

585
00:41:21,280 --> 00:41:25,360
बहुत करिए। हमने पीएन मिश्रा के जब

586
00:41:25,360 --> 00:41:30,080
उत्तर नहीं आपको मिला था तो उत्तर देना

587
00:41:30,080 --> 00:41:34,080
मिलना बाकी था ना अगली बार बात होनी थी ना तो क्यों जाके वहां

588
00:41:34,080 --> 00:41:38,640
पर वीडियो डाल दिया क्योंकि तुम्हारे मन में छल आ गया था

589
00:41:38,640 --> 00:41:42,640
कि हम इसी वीडियो इसी कंटेंट को जो है और इस नाम से डालते देखो

590
00:41:42,640 --> 00:41:46,880
देखो उत्तर नहीं दिया खुश हो जाते हैं तो अंत का है अरे

591
00:41:46,880 --> 00:41:52,880
उत्तर नहीं मिला था तो दोबारा बात होनी बाकी थी ना मैंने बात करने से मना किया था क्या

592
00:41:53,200 --> 00:41:59,200
चलो चलो

593
00:42:08,080 --> 00:42:14,080
चलाइए को वो ना मिल जाए तो

594
00:42:16,640 --> 00:42:22,640
हैं। हम लोग आप लोगों को कई बार

595
00:42:24,720 --> 00:42:29,200
बहुत ज्यादा कट रही है। आप एक काम करें आप अपने डेस्टिनेशन पे पहुंच जाइए। उसके बाद

596
00:42:29,200 --> 00:42:33,200
ये देखिए ये वो पहली वाली कॉल रिकॉर्डिंग है। क्या कह रहा है

597
00:42:33,200 --> 00:42:37,840
ये व्यक्ति? आपकी आवाज बहुत ज्यादा कट रही है। आप अपनी डेस्टिनेशन पे पहुंच जाइए।

598
00:42:37,840 --> 00:42:42,240
आप अपने डेस्टिनेशन पे पहुंच जाइए। उसके बाद बात

599
00:42:42,240 --> 00:42:46,240
जब बात करना इस व्यक्ति के लिए शेष था तो ये निर्णायक

600
00:42:46,240 --> 00:42:50,880
बन के इसने वीडियो क्यों डाला

601
00:42:50,880 --> 00:42:55,120
हम ये है चल ये है दोगलापन है कायरता

602
00:42:55,120 --> 00:42:59,280
ये है दूध की कमी पोषक तत्वों की कमी शरीर

603
00:42:59,280 --> 00:43:03,280
में चलिए अरे कि आप

604
00:43:03,280 --> 00:43:07,440
सीधा बॉलीवुड में घुस गए कि भैया हम बॉलीवुड

605
00:43:07,440 --> 00:43:11,600
के इन पिक्चरों का विरोध नहीं कर पाए ऋषिवाच का

606
00:43:11,600 --> 00:43:15,680
ये नहीं कर पाए तो हाइपरकस्ट का नहीं कर पाए तो नित्यानंद का नहीं

607
00:43:15,680 --> 00:43:19,760
कर पाए पीछे करो पीछे करो वहीं से सुनाओ जहां

608
00:43:19,760 --> 00:43:24,400
से शिवश जी आपने हमें उत्तर क्या दिया शिवश

609
00:43:24,400 --> 00:43:29,760
जी जरा हमें ये बताइए कि आपने हमें उत्तर क्या दिया

610
00:43:29,760 --> 00:43:34,080
हमने हमने आपको उत्तर दिया कि

611
00:43:34,080 --> 00:43:38,480
किसी का विरोध करने के लिए समय

612
00:43:38,480 --> 00:43:42,720
उसकी प्रसिद्धि और उसकी छवि

613
00:43:42,720 --> 00:43:47,440
प्रसिद्धि अलग चीज है। छवि अलग चीज है। और

614
00:43:47,440 --> 00:43:50,480
प्राथमिकता

615
00:43:50,480 --> 00:43:55,440
महत्ता के अनुसार प्राथमिकता और

616
00:43:55,440 --> 00:43:59,520
दो गलत रास्तों में से कम गलत और ज्यादा दो सही

617
00:43:59,520 --> 00:44:03,520
रास्तों में से ज्यादा सही इत्यादि परिमाप होते हैं ये

618
00:44:03,520 --> 00:44:07,920
निर्णय करने के लिए कि किस किसका विरोध करना है और किसका नहीं करना है।

619
00:44:07,920 --> 00:44:12,240
यह उत्तर हमने आपको दिया और ऐसे कई कारण आपको उसी रिकॉर्डिंग

620
00:44:12,240 --> 00:44:16,240
में सुनाए जिसके कारण पी एन मिश्र जी का नाम लेकर के

621
00:44:16,240 --> 00:44:20,240
यदि पी एन मिश्र जी कोई ऐसी बातें कर रहे हैं करुणा वर्ण व्यवस्था और

622
00:44:20,240 --> 00:44:24,480
जवाला इत्यादि के बारे में तब उनका विरोध करना क्यों क्यों उचित

623
00:44:24,480 --> 00:44:28,640
नहीं ठहरता और हमने क्यों उसको प्राथमिकता नहीं दी हमने ये सारे उत्तर आपको

624
00:44:28,640 --> 00:44:32,800
दिए तो आपका ये पूछना बेवकूफी है निरी कि आपने हमें उत्तर क्या

625
00:44:32,800 --> 00:44:36,880
दिया अब चलाइए प्ले करिए पी

626
00:44:36,880 --> 00:44:40,880
एन मिश्र के बारे में आपसे वार्ता की। आप सीधा बॉलीवुड में घुस

627
00:44:40,880 --> 00:44:44,800
गए कि भैया हम बॉलीवुड के इन पिक्चरों

628
00:44:44,800 --> 00:44:49,200
का विरोध नहीं कर पाए। करिए।

629
00:44:49,200 --> 00:44:53,280
पहुंच करिए। अपने जिन्नोपासक का वीडियो जाकर

630
00:44:53,280 --> 00:44:57,440
के देख लो। उसने जो वो वाला बनाया है जिसमें उसने कहा है कि मेरे

631
00:44:57,440 --> 00:45:01,520
विरोधी किस-किस प्रकार से कॉमेडी करते हैं। वो अभी दो चार दिन पहले

632
00:45:01,520 --> 00:45:05,680
का ही वीडियो है। उसमें उसने खुद स्वीकार किया है कि जो फिल्में होती

633
00:45:05,680 --> 00:45:10,000
हैं वो समाज का आईना होती है। समाज में क्या हो रहा है वो उसकी छवि प्रस्तुत

634
00:45:10,000 --> 00:45:16,000
करती है। इस प्रकार की बातें उसने खुद कही है। जाके देख लो अपने चिन्होपासक को।

635
00:45:16,720 --> 00:45:20,800
किसी चीज से कितनी जनसंख्या प्रभावित हो रही है

636
00:45:20,800 --> 00:45:25,040
इसको देखेंगे कि नहीं? अगर आज की जनता बॉलीवुड से ज्यादा प्रभावित

637
00:45:25,040 --> 00:45:29,120
है बजाय हमारे आचार्यों से या बजाय आचार्यों को फॉलो करने

638
00:45:29,120 --> 00:45:33,280
वाले अमुक अमुक अधिवक्ताओं से तो हम पहले बॉलीवुड को देखेंगे ना जाकर

639
00:45:33,280 --> 00:45:36,400
के।

640
00:45:36,400 --> 00:45:40,400
अब हम अब हमने सपा का वो जो अभी राजनीतिक वो हुआ

641
00:45:40,400 --> 00:45:44,480
था मामला जिसमें वो बाल उतारे गए थे उस मामले में हम घुसे

642
00:45:44,480 --> 00:45:48,640
तो तुम कह दो तुम राजनीति में घुस गए। अब कुल मिलाकर के तुम तय करोगे

643
00:45:48,640 --> 00:45:52,800
कि हमें कहां घुसना है, कहां नहीं घुसना है। यह मां जो अपनी बिटिया को देख

644
00:45:52,800 --> 00:45:57,360
रही है, ढूंढ रही है, यह तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है।

645
00:45:57,360 --> 00:46:01,520
हाई कोर्ट में रामपाल का रामपाल को सजा मिले।

646
00:46:01,520 --> 00:46:05,520
उसकी किताबें बिकना बंद हो। तुम्हारी मां का जिसमें अपमान हो

647
00:46:05,520 --> 00:46:09,600
रहा है। धूर्त व्यक्तियों उसकी किताबें बिकना बंद हो। इससे

648
00:46:09,600 --> 00:46:13,600
तुम्हारा कोई मतलब नहीं है। तुम्हारा मतलब किससे है? कि

649
00:46:13,600 --> 00:46:17,600
भागवतानंद का विरोध करने वाले का विरोध यदि श्री नारायण द्विवेदी

650
00:46:17,600 --> 00:46:22,400
कर सकता है तो क्यों नहीं कर रहा तुम्हारा मतलब इससे इसे

651
00:46:22,400 --> 00:46:28,080
दोगलापन कहते हैं चलो

652
00:46:28,080 --> 00:46:33,360
तो हाइपरकस्ट का नहीं कर पाए तो नित्यानंद का नहीं कर पाए

653
00:46:33,360 --> 00:46:37,360
क्या वो सब शंकर परंपरा के थे हां

654
00:46:37,360 --> 00:46:41,520
पॉज करो जो शंकर परंपरा का कुल मिलाकर

655
00:46:41,520 --> 00:46:45,520
के क्या बात है। इसने एक तर्क दिया है कि भाई उनसे ज्यादा

656
00:46:45,520 --> 00:46:50,560
महत्वपूर्ण क्या कहते हैं?

657
00:46:50,560 --> 00:46:55,440
पीएन मिश्र जी का इसलिए अधिक है क्योंकि वो शंकर परंपरा के हैं। नहीं

658
00:46:55,440 --> 00:46:59,920
पहली बात तो अगर तुम ये चाहते हो कि इस बात को मान लिया जाए कि शंकर परंपरा

659
00:46:59,920 --> 00:47:04,240
को होकर के कोई कोई बिल्कुल अज्ञात व्यक्ति भी अगर शंकर

660
00:47:04,240 --> 00:47:08,560
परंपरा से दीक्षित है और वो शंकर परंपरा के सिद्धांतों के विरोध में बोलेगा

661
00:47:08,560 --> 00:47:12,800
तो उसका नाम लेकर के तुरंत उस पर वीडियो बनना चाहिए। उसका प्रतिकार होना चाहिए या

662
00:47:12,800 --> 00:47:17,040
उसका खंडन होना चाहिए। यह क्या कोई सनातन सिद्धांत

663
00:47:17,040 --> 00:47:21,680
है? मूर्ख व्यक्ति

664
00:47:21,680 --> 00:47:25,680
कुतर्क कर रहा है। शंकर परंपरा से दीक्षित

665
00:47:25,680 --> 00:47:31,680
मुझे लोग पता है जो आज उनके विरोध में बोल रहे हैं। दीक्षित लोग

666
00:47:32,880 --> 00:47:37,200
एक व्यक्ति है जो खुद को विगन कहता है। सुधीर चौधरी

667
00:47:37,200 --> 00:47:41,280
जिसकी इसने फोटो लगाई थी ना मैं किसी दिन बात करूंगा। उसने

668
00:47:41,280 --> 00:47:45,680
मठ के परिकों पर आरोप लगाया था कि भैया इन्होंने मुझे मारा। अच्छा हुआ मारा।

669
00:47:45,680 --> 00:47:49,840
जूतों से मारना चाहिए था उस व्यक्ति को।

670
00:47:49,840 --> 00:47:54,080
शंकर परंपरा का शिष्य होकर के बीगन बीगन क्यों लिख रहा है?

671
00:47:54,080 --> 00:47:58,080
गौवंश की उपयोगिता तुझे नष्ट करनी है ना। और

672
00:47:58,080 --> 00:48:02,240
जो व्यक्ति गौवंश की उपयोगिता को नष्ट करने पर तुला हुआ है उस

673
00:48:02,240 --> 00:48:06,640
व्यक्ति का अगर विरोध शंकर शंकराचार्य के मठ में हुआ

674
00:48:06,640 --> 00:48:10,720
तो यह व्यक्ति उसको सपोर्ट कर रहा है। ये विगन आचार्य प्रशांत

675
00:48:10,720 --> 00:48:14,960
वाले जो धारणा वाला व्यक्ति है ये व्यक्ति ये भागवतानंद

676
00:48:14,960 --> 00:48:19,200
उसका सपोर्ट कर रहा है कि उसने देखिए शंकर मठ में पूरी के शंकराचार्य

677
00:48:19,200 --> 00:48:23,200
जी के मठ में एक व्यक्ति को पीटा गया। अच्छा हुआ मैं वहां नहीं था नहीं

678
00:48:23,200 --> 00:48:27,200
तो मैं और पीटता उसको अब वो विरोध कर रहा

679
00:48:27,200 --> 00:48:31,280
है मैं उसका नाम लेकर के वीडियो बनाने लगूं कि भैया वो तो शंकर परंपरा का है

680
00:48:31,280 --> 00:48:37,280
वो कैसे विघन लिख रहा है अपने आप को

681
00:48:37,520 --> 00:48:41,680
ऑडियो मैसेज बनाते रहो छाती चौड़ी करके जाओ वीरों

682
00:48:41,680 --> 00:48:45,840
की तरह लड़ो जाकर के एक आध संस्था से ऐसी

683
00:48:45,840 --> 00:48:50,640
जो अधर्म कर रही हो तब आना बात करने समझे

684
00:48:50,640 --> 00:48:54,800
चले हमको बताने साहस क्या होता है। घर

685
00:48:54,800 --> 00:49:00,160
में घुसकर मारने वालों में से हैं। आवश्यकता पड़ जाए

686
00:49:00,160 --> 00:49:05,360
तुम्हारी तरह नहीं है। ऑडियो वॉरियर।

687
00:49:05,360 --> 00:49:09,360
खैर फिर भी फिर भी जो कायरों की फौज तैयार कर रहा

688
00:49:09,360 --> 00:49:13,440
है ना भागताना उसमें तुम तो शिखर पे

689
00:49:13,440 --> 00:49:19,440
हो। कम से कम। कम से कम ऑडियो ले तो आए।

690
00:49:21,760 --> 00:49:26,080
संदीप रामायण का उत्तरकांड नहीं मानते। यह जानते

691
00:49:26,080 --> 00:49:30,160
हुए भी उसके चैनल पर भागवतानंद उसके चैनल पर इंटरव्यू देने

692
00:49:30,160 --> 00:49:34,160
इंटरव्यू देने क्यों गया बताओ? उत्तरकांड नहीं मानता संदीप

693
00:49:34,160 --> 00:49:38,560
देव ऐसा भागवतानंद ने कहा था।

694
00:49:38,560 --> 00:49:42,640
और मुझे जहां तक मेरी जानकारी संदीप देव जी नहीं जानते हैं उत्तर नहीं मानते

695
00:49:42,640 --> 00:49:45,120
उत्तरकांड।

696
00:49:45,120 --> 00:49:49,440
तो यह भागवतानंद क्यों गया था उसके चैनल पर? क्योंकि वहां से इसके

697
00:49:49,440 --> 00:49:55,440
समर्थन में कारण हो रहा था। इसको धर्म की चिंता नहीं है।

698
00:49:57,600 --> 00:50:03,440
फिर नाम लेके इसने क्यों नहीं वीडियो बना दिया? उस समय तक

699
00:50:03,440 --> 00:50:08,560
अपने ही सिद्धांतों का खुद ही खंडन कर रहे हो।

700
00:50:08,560 --> 00:50:13,600
है जो अपने संप्रदाय के विरुद्ध बात कर रहा है ऑनलाइन

701
00:50:13,600 --> 00:50:16,880
बैठ के

702
00:50:16,880 --> 00:50:21,440
ये बच्चों के ये बच्चों वाली बातें करते हैं

703
00:50:21,440 --> 00:50:25,440
यदि तुम्हारे को भाई हमारे जो तर्क है

704
00:50:25,440 --> 00:50:29,680
इस संबंध में कि हमने क्यों नहीं किया पीएन मिश्र जी का सामने

705
00:50:29,680 --> 00:50:33,680
आकर के विरोध उनका नाम लेकर के विरोध यदि वह तर्क तुम्हें

706
00:50:33,680 --> 00:50:37,920
गलत लग रहे हैं और अपने तर्क तुम्हें सही लग रहे हैं तो अपने तर्क सही

707
00:50:37,920 --> 00:50:42,000
लगवाने के माने जाने के संबंध में उनके सिद्ध सही सिद्ध करने

708
00:50:42,000 --> 00:50:46,240
के संबंध में तुम्हें फिर शास्त्र लाना होगा। हम तो तुम्हें बता

709
00:50:46,240 --> 00:50:50,320
रहे हैं कि हमने क्यों क्यों नहीं किया? हमने इसलिए

710
00:50:50,320 --> 00:50:54,960
भी नहीं किया कि पीएन मिश्र जी का विरोध करने से हमारा इस रामपाल वाला अभियान

711
00:50:54,960 --> 00:50:59,680
का जो पक्ष है वो भी कमजोर पड़ सकता है। तो हम क्यों करें?

712
00:50:59,680 --> 00:51:03,760
तुम हमसे प्रश्न कर रहे हो। तुमने विरोध क्यों नहीं किया? मुक्तेश्वर जी महाराज जी से जाकर के

713
00:51:03,760 --> 00:51:08,000
प्रश्न क्यों नहीं कर रहे हो? और तुम्हारा ये भागानंद

714
00:51:08,000 --> 00:51:12,160
क्यों नहीं कर रहा उनसे प्रश्न? अरे शंकर परंपरा का अनुयाई

715
00:51:12,160 --> 00:51:12,660
छोड़ो।

716
00:51:12,640 --> 00:51:16,640
वो तो डायरेक्ट उनके उसी उसी पीठ के शिष्य है ना। क्यों

717
00:51:16,640 --> 00:51:20,640
नहीं कर रहे उनका नाम लेकर के? वीडियो क्यों नहीं बना रहे? और अगर नहीं बना रहे तो ये क्यों नहीं

718
00:51:20,640 --> 00:51:26,000
वीडियो बना रहा उनके ऊपर? वहां मौन क्यों है ये?

719
00:51:26,000 --> 00:51:30,000
और इसके पिता इतनी इतनी अमुक अमुक शास्त्री बातें करते हैं तब यह क्यों मौन हो

720
00:51:30,000 --> 00:51:34,080
जाता है कि हमारे पिता की प्रतिष्ठा हमें अपने आप से ज्यादा प्रिय है। ये दोगला

721
00:51:34,080 --> 00:51:38,320
दोगला दोगलापंथी कहां गई? इसका मतलब

722
00:51:38,320 --> 00:51:42,480
है जो महाराज जी ने बोला था ज्योति पीठ वाले महाराज जी ने उस पर

723
00:51:42,480 --> 00:51:46,640
आपको चिंतन करना पड़ेगा कि कई बार हमें सह लेना पड़ता है।

724
00:51:46,640 --> 00:51:50,640
कुछ बातों को सह लेना पड़ता है। अभियान की रक्षा के लिए धर्म

725
00:51:50,640 --> 00:51:54,960
की रक्षा के लिए प्राथमिकता देनी पड़ती है। चुनाव करना

726
00:51:54,960 --> 00:51:58,960
पड़ता है। अगर कष्ट हो तो उसको सहना पड़ता है। यह

727
00:51:58,960 --> 00:52:03,200
सब बातें वो सोच सकते हैं जो धरातल पर उतरे हो।

728
00:52:03,200 --> 00:52:07,360
वो कभी नहीं सोच सकता जो अपने कमरे से बाहर नहीं निकला है। चूचू का मुरब्बा

729
00:52:07,360 --> 00:52:13,120
उसने केवल किया है। बस और कुछ नहीं।

730
00:52:13,120 --> 00:52:17,760
चलो क्या कहता है मालूम है? रहा है। एक मिनट

731
00:52:17,760 --> 00:52:22,000
भागवतानंद अभी जो लास्ट वीडियो जो उसके छाती पर सांप लूटा

732
00:52:22,000 --> 00:52:26,080
जो रागवाचार्य जी महाराज वहां पहुंचे तो उसमें बोल रहा है कि मेरा मेरी वजह से

733
00:52:26,080 --> 00:52:30,160
चलो पहुंच गए। तेरी वजह से क्या? अरे भैया तेरे तेरे माता पिता

734
00:52:30,160 --> 00:52:34,240
की वजह से हो गए ना फिर तो तेरी वजह से नहीं हुआ। राघवाचार्य

735
00:52:34,240 --> 00:52:37,920
जी तेरी वजह से वहां नहीं पहुंचे।

736
00:52:37,920 --> 00:52:41,920
तेरे वो माता पिता की वजह से पहुंचे। अगर उन्होंने तुमको जन्म ही नहीं दिया होता तो

737
00:52:41,920 --> 00:52:45,920
क्या होता? ना तू ऐसा बोलता ना राघवाचार्य जी वहां जाते।

738
00:52:45,920 --> 00:52:50,160
और उनके माता पिता की वजह से भी क्यों? उनके माता-पिता ऐसे पीछे चलता

739
00:52:50,160 --> 00:52:54,400
चला जा।

740
00:52:54,400 --> 00:52:58,880
हर चीज का क्रेडिट उस व्यक्ति को खुद को देना है। हर चीज का क्रेडिट।

741
00:52:58,880 --> 00:53:02,960
राघवाचार्य जी महाराज अगर शंकराचार्य के मठ में जा रहे हैं तो इसका इसका

742
00:53:02,960 --> 00:53:07,040
कारण है वह अगर इस का विरोध हो रहा है आज तो उसका कारण मैं जानता

743
00:53:07,040 --> 00:53:12,240
तक नहीं था ये कौन है व्यक्ति जब मैं पहली बार लखनऊ के इस मंदिर में गया था

744
00:53:12,240 --> 00:53:16,320
मगर इस व्यक्ति ने अपनी पोस्ट डाली मेरा वीडियो लेते हुए और ये कहा कि देखिए

745
00:53:16,320 --> 00:53:21,920
हमारे बोलने की वजह से सब बोल रहे हैं। यह दोगलापन

746
00:53:21,920 --> 00:53:26,000
लालच लोकेशना का भूखा और तब भी मैं शांत रहा था यह देख

747
00:53:26,000 --> 00:53:30,080
कर के और मैंने उस उस पोस्ट को इसकी जो इसके लोग कहते हैं तुमने

748
00:53:30,080 --> 00:53:34,080
कभी समर्थन क्यों नहीं किया है जाके देख Facebook पे उसको लाइक दिया है

749
00:53:34,080 --> 00:53:38,080
मैंने और अपनी लाइव चर्चा में बताया भी है जब ये यही

750
00:53:38,080 --> 00:53:42,080
आरोप ये बता रहा था कि मेरी अच्छी बातों का तुमने समर्थन क्यों नहीं किया

751
00:53:42,080 --> 00:53:45,360
है

752
00:53:45,360 --> 00:53:49,680
समर्थन किया है जहां अच्छी चीज दिखी है कोई अगर तो उसको लाइक किया है,

753
00:53:49,680 --> 00:53:53,760
पसंद किया है।

754
00:53:53,760 --> 00:53:57,920
मैंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। उसको छोड़ दिया। ठीक है भाई क्रेडिट

755
00:53:57,920 --> 00:54:01,920
लेना चाहते हो ले लो क्रेडिट। हम नहीं जानते थे तुम कौन से भागतानंद हो। कौन से

756
00:54:01,920 --> 00:54:06,080
आचार्य हो लुप्त संप्रदाय के। कुछ नहीं पता था हमें तुम्हारे बारे में।

757
00:54:06,080 --> 00:54:12,080
और तुम कह रहे हो कि तुम्हारी वजह से हम इस के पीछे पड़े हैं।

758
00:54:12,240 --> 00:54:16,320
फिर राघवाचार्य जी महाराज क्यों आए? क्योंकि

759
00:54:16,320 --> 00:54:20,560
भारतानंद की को हमें नीचा दिखाना था। ऐसा कुछ नहीं है। हमें

760
00:54:20,560 --> 00:54:24,640
समाज को ये सच्चाई दिखानी थी कि तुम जो ये प्रलाप कर रहे हो ना

761
00:54:24,640 --> 00:54:28,800
कि वहां पर मठ में मिलने नहीं दिया जाता है वैदिक आचार्यों से वरिष्ठ

762
00:54:28,800 --> 00:54:33,360
जनों से वो सच्चाई समाज को दिखानी थी और

763
00:54:33,360 --> 00:54:37,360
जो वैष्णव संप्रदाय है वो एक मंच पर आए शंकर संप्रदाय तो अच्छी

764
00:54:37,360 --> 00:54:41,760
बात है सभी सनातनियों के लिए और हम भी तो इसीलिए गए थे राघवाचार्य

765
00:54:41,760 --> 00:54:47,680
जी महाराज के पास कुंभ में इंटरव्यू लेने उनका

766
00:54:47,680 --> 00:54:51,840
तो क्या यह कुतर्क है कि वो उनहीं का अनुय है। लाइव आकर

767
00:54:51,840 --> 00:54:56,160
ऐसा कर रहा है। भाई लाइव आकर बहुत से लोग बहुत कुछ कर रहे हैं।

768
00:54:56,160 --> 00:55:00,560
हम शब्द नहीं दे सकते। हमें चुनना होगा कि किसको पहले करें

769
00:55:00,560 --> 00:55:04,800
और हम ये भी देखना होगा कि किसको करने से हमारा जो बड़ा अभियान है वो नष्ट

770
00:55:04,800 --> 00:55:07,920
ना हो जाए।

771
00:55:07,920 --> 00:55:12,000
ये सब बातें हमने आपको बताई। ये उत्तर दिया और उसके बाद भी यदि

772
00:55:12,000 --> 00:55:16,160
तुम्हारे भूसे के ढेर में कुछ तुम्हें मिल नहीं रहा है तो चर्चा

773
00:55:16,160 --> 00:55:21,200
शेष रही तो फिर तुमने कैसे निर्णायक बन गए? चलो

774
00:55:21,200 --> 00:55:26,880
आगे बढ़ो।

775
00:55:26,880 --> 00:55:30,880
जिसके विषय में आप भी जानते हैं कि कर्मणा वर्ण व्यवस्था मानता है और

776
00:55:30,880 --> 00:55:35,040
आप तो जो है भैया अनेकों से वर्ण व्यवस्था पर

777
00:55:35,040 --> 00:55:40,720
जो है डिबेट कर ही चुके हैं।

778
00:55:40,720 --> 00:55:44,720
जिन जो प्रतिष्ठित नहीं भी हैं। आपके लाइव में कितने

779
00:55:44,720 --> 00:55:49,360
लोग हैं जो प्रतिष्ठित हैं।

780
00:55:49,360 --> 00:55:53,360
आपने कितने प्रतिष्ठित लोगों से जो है डिबेट किया है

781
00:55:53,360 --> 00:55:57,440
लाइव में। हमने तो देखा है कि कोई भी आरा गरा नथूरा उठ

782
00:55:57,440 --> 00:56:02,880
के लाइव में आ जाता है तो उसी से डिबेट करने लग जाते हैं महाशय आप।

783
00:56:02,880 --> 00:56:05,440
पॉज करिए।

784
00:56:05,440 --> 00:56:09,440
जो प्रतिष्ठित नहीं भी हैं उनसे भी हमने चर्चा की है

785
00:56:09,440 --> 00:56:13,680
क्योंकि जब हम ऐसे लोगों से आमने सामने से बात करते हैं

786
00:56:13,680 --> 00:56:17,760
तो वो वीडियोस ज्यादा देखे जाते हैं और हमने कोई मना नहीं किया

787
00:56:17,760 --> 00:56:21,840
है। अगर संदीप देव जी हमारे वर्ण व्यवस्था को

788
00:56:21,840 --> 00:56:26,720
लेकर के या पी. एन. मिश्र जी वर्ण व्यवस्था को लेकर के या जबाला वाले

789
00:56:26,720 --> 00:56:30,880
विषय को लेकर के हमसे वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करना

790
00:56:30,880 --> 00:56:35,040
चाहते तो हमने कहीं लिख के डाला क्या? हम हर वीडियो में कहते हैं किसी प्रकार

791
00:56:35,040 --> 00:56:39,040
के वैचारिक मतभेद के लिए आप यहां WhatsApp करें। अगर इस तरीके से वो सामने आना

792
00:56:39,040 --> 00:56:42,000
चाहते हैं यद्यपि हम नहीं चाहते। मगर यदि वह सामने

793
00:56:42,000 --> 00:56:46,560
आना चाहते तो हमने कोई मना भी नहीं किया है।

794
00:56:46,560 --> 00:56:50,560
हमने कहीं लिखा है क्या पीए मिश्र जी यदि सामने आ के इस चीज

795
00:56:50,560 --> 00:56:56,240
में चर्चा करेंगे हमसे विरोध विरोध के निमित्त तो हम मना कर देंगे।

796
00:56:56,240 --> 00:57:00,240
भाई हम जितना ऐसी असहज स्थितियों से बच सकते हैं

797
00:57:00,240 --> 00:57:06,240
बचेंगे। परंतु यदि बात आ ही जाएगी तो फिर पीछे नहीं हटेंगे। भाई

798
00:57:06,720 --> 00:57:10,880
जानबूझ के क्यों अपने लिए वह चीजें तैयार करें?

799
00:57:10,880 --> 00:57:15,680
अपने से क्यों तैयार करें? जितना हो सकता है

800
00:57:15,680 --> 00:57:19,680
हम बचेंगे कि हमें जो है पढ़ाई से ना

801
00:57:19,680 --> 00:57:25,200
उठना पड़े परीक्षा के दिनों में।

802
00:57:25,200 --> 00:57:29,200
मगर हम अपनी ओर से ये क्यों करें कि नहीं पूरे साल नहीं पढ़े तो इसलिए आप

803
00:57:29,200 --> 00:57:33,200
उठ जाओ। अब मत पड़ो। जितना हो सकता है हम अपनी ओर से प्रयास

804
00:57:33,200 --> 00:57:37,520
करेंगे कि ताला लगाने वाले घर में चोरी ना हो।

805
00:57:37,520 --> 00:57:42,240
अपने आप हो ही जाए तो बात अलग है। मगर हम तो ताला लगाएंगे ना

806
00:57:42,240 --> 00:57:47,040
और मन में यही अपेक्षा रखेंगे ना कि चोरी ना हो।

807
00:57:47,040 --> 00:57:53,040
किस भावना के साथ ताला लगाएं कि चोरी हो जाए।

808
00:57:53,120 --> 00:57:55,520
प्रलापी

809
00:57:55,520 --> 00:57:59,760
धूर्तपन करना है। कहने को जो है चलिए

810
00:57:59,760 --> 00:58:03,920
चलाइए। प्रतिष्ठित नहीं है। हम उस जो है धर्म क्षेत्र में हम उसका

811
00:58:03,920 --> 00:58:08,080
विरोध क्यों करने जाए? एक एक व्यक्ति का विरोध क्यों करने जाए? उस समय क्यों कर रहे थे

812
00:58:08,080 --> 00:58:12,240
और जब वो लाइव में आ के आपसे उत्तर दे दिया है उस समय क्यों

813
00:58:12,240 --> 00:58:16,240
कर रहे थे उस समय क्यों कर रहे थे क्योंकि वो साहस पूर्ण तरीके

814
00:58:16,240 --> 00:58:20,480
से अपने चेहरे के साथ सामने आकर के कर्मणा वर्ण व्यवस्था पर

815
00:58:20,480 --> 00:58:24,640
चर्चा करते हैं और क्योंकि वो कोई स्क्रिप्टेड नहीं होती है तो

816
00:58:24,640 --> 00:58:28,720
सामने से आने वाले जो काउंटर्स होते हैं कर्मणा वर्ण व्यवस्था

817
00:58:28,720 --> 00:58:32,960
या किसी भी विषय में जो काउंटर्स होते हैं वो अनएक्सेक्टेड होते

818
00:58:32,960 --> 00:58:36,960
हैं तो इसलिए वही के वही उनका उनका निदान करने से

819
00:58:36,960 --> 00:58:40,400
समाज में जागरूकता आती है उन विषयों को लेकर के

820
00:58:40,400 --> 00:58:44,400
इसलिए हर व्यक्ति को हमने टाइम दिया और अभी भी देंगे तुम आ जाओ तुमको दे

821
00:58:44,400 --> 00:58:48,720
तो रहे हैं भागतानंद को दे रहे हैं एक हद तक हमने बचाने का प्रयास किया था

822
00:58:48,720 --> 00:58:52,720
कि भाई भागतानंद के साथ जो हमारा युद्ध जैसा वो है

823
00:58:52,720 --> 00:58:58,400
वातावरण बन गया है वो समाज को ना दिखाई दे

824
00:58:58,400 --> 00:59:02,480
आर्य समाज वाले उसका और मेरा उपयोग करते हुए

825
00:59:02,480 --> 00:59:06,480
और मेरा और उसका विरोध ना करना सीख मगर जब उसने

826
00:59:06,480 --> 00:59:10,560
कर दिया और हमारे पास कोई और नहीं रहा तो फिर

827
00:59:10,560 --> 00:59:14,720
हमने कह भी दिया कि आ जाओ भैया ठीक है अब जब जिस चीज को हम बचा

828
00:59:14,720 --> 00:59:18,720
रहे हैं वो चीज नष्ट हो ही गई तो ठीक है आ जाओ मैदान में आमने सामने

829
00:59:18,720 --> 00:59:22,880
तब से ले आज तक कह रहे हैं तुम्हारा भागता भाग ही रहा है और केवल हमसे ही नहीं

830
00:59:22,880 --> 00:59:26,960
भाग रहा है हर व्यक्ति को लिए बहाने बनाता है गुरु चरण दास क्योंकि वो वैदिक नहीं है इसलिए

831
00:59:26,960 --> 00:59:30,960
नहीं जाऊंगा पी एन मिश्र जी क्योंकि वो अपने गुरु

832
00:59:30,960 --> 00:59:35,120
को नहीं मान रहा इसलिए नहीं जाऊंगा अरे भाई तुम सामने जाकर तुम्हें

833
00:59:35,120 --> 00:59:39,840
यही तो सिद्ध करना है कि तुम अपने गुरु को नहीं मान रहे हो सिद्ध कर दो जाके

834
00:59:39,840 --> 00:59:43,840
इसी चीज के निमित्त तो शास्त्रार्थ है और यदि दो

835
00:59:43,840 --> 00:59:48,080
क्या दो क्या दो परफेक्ट लोकों में शास्त्रार्थ होता है क्या

836
00:59:48,080 --> 00:59:53,520
किसी एक का पक्ष तो सदव वो रहता है ना गलत

837
00:59:53,520 --> 00:59:55,920
और किसी एक का पक्ष सही तभी तो शास्त्रार्थ

838
00:59:55,920 --> 00:59:59,920
होता है कौन सा ऐसा शास्त्रार्थी है जो यह सोच के जाता है कि

839
00:59:59,920 --> 01:00:04,320
सामने वाला सही है फिर भी मैं उसे परास्त करूंगा शास्त्रार्थ में

840
01:00:04,320 --> 01:00:08,800
अगर तुम ऐसा सोचते हो कि ऐसे ऐसे होते हैं शास्त्र तो तुम मूर्ख हो निरे

841
01:00:08,800 --> 01:00:12,800
कुए के मेंढक चलो सीधा उसे मना भी कर सकते

842
01:00:12,800 --> 01:00:16,800
थे कि तुम धर्म चैतन्य के प्रतिष्ठित नहीं हो तो हम तुम्हारे साथ डिबेट नहीं करेंगे

843
01:00:16,800 --> 01:00:20,960
क्यों आपने ही कहा था ना कि एक एक व्यक्ति का तो हम

844
01:00:20,960 --> 01:00:24,960
विरोध नहीं करते चलेंगे एक व्यक्ति का एक व्यक्ति का

845
01:00:24,960 --> 01:00:29,280
विरोध भी नहीं कर पाएंगे और अगर कोई सामने

846
01:00:29,280 --> 01:00:33,360
से आकर के चर्चा करना ही चाहता है तो उसका स्वागत है आप

847
01:00:33,360 --> 01:00:37,760
जाके बोल दो कौन आना चाहता है? तुम आना चाहते हो। भागानंद आना चाहता है।

848
01:00:37,760 --> 01:00:42,080
जो आ जाएगा उससे चर्चा करेंगे। भाई आ जाओ कब आ रहे हो?

849
01:00:42,080 --> 01:00:46,240
हम उसको समय देंगे निकालेंगे और और

850
01:00:46,240 --> 01:00:50,560
उसको समय हम अपने हिसाब से देते हैं। जो जो व्यक्ति फॉर्म भरता है

851
01:00:50,560 --> 01:00:54,560
चर्चा के निमित्त उसको हम अपने हिसाब से समय देते हैं। कब देना है कब नहीं देना

852
01:00:54,560 --> 01:00:59,360
है। कुछ लोगों का तो नंबर दो दो महीने बाद आया है। तो

853
01:00:59,360 --> 01:01:03,680
इसका कंपैरिजन तुम कैसे कर लोगे? तुम्हारे भागतानंद

854
01:01:03,680 --> 01:01:08,160
ने खुद कहा है कमेंट में जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा के मैं सबका उत्तर नहीं दे सकता

855
01:01:08,160 --> 01:01:11,600
चाहिए क्या तुम्हारे हिसाब से

856
01:01:11,600 --> 01:01:12,100
वैसे

857
01:01:12,080 --> 01:01:16,080
भागतानंद के पास तो बहुत समय है वो कमेंट में भी खेल जाएगा उसको कुछ नहीं

858
01:01:16,080 --> 01:01:20,240
मिलेगा कंटेंट तो वो कमेंट में भी एक दो चीज कमेंट उठा करके उस पर ही दोद घंटे का

859
01:01:20,240 --> 01:01:24,240
वीडियो बना लेगा अभी राजेश बनवाल जी ने एक पोस्ट

860
01:01:24,240 --> 01:01:28,400
डाली थी बड़ी हास्यास्पद बहुत हंसी आई थी मुझे उसको देख कर के उसमें क्या दिखाया

861
01:01:28,400 --> 01:01:33,280
गया था कि भागतानंद को स्वप्न में अ दीक्षा मिली

862
01:01:33,280 --> 01:01:38,400
परिसाधना के द्वारा और उसके बाद जो है उसने एक

863
01:01:38,400 --> 01:01:42,560
एक जो है गलत सिद्धांत उसने प्रतिपादित किया तो

864
01:01:42,560 --> 01:01:46,960
आदि शंकराचार्य जी ने उसके थप्पड़ लगवाया ये चित्र

865
01:01:46,960 --> 01:01:51,280
जो कॉमिक्स की स्टाइल में उन्होंने व्यंग चित्र के रूप में ये पोस्ट डाली थी आदि

866
01:01:51,280 --> 01:01:55,680
शंकराचार्य जी ने एक थप्पड़ लगवाया तो भागतानंद कहता है कि

867
01:01:55,680 --> 01:01:59,680
कौन है कौन है कौन मार रहा है मुझे तो फिर अगले अगले अगले

868
01:01:59,680 --> 01:02:03,840
श में कहता है कि कौन है निग्रह कर दूंगा

869
01:02:03,840 --> 01:02:07,840
तीन घंटे का वीडियो बना दूंगा तो यह है

870
01:02:07,840 --> 01:02:11,840
उसके पास समय समय है भाई कुछ करना धरना है नहीं वीडियो

871
01:02:11,840 --> 01:02:16,080
बना दूंगा अभी कह रहा था दो दो घंटे

872
01:02:16,080 --> 01:02:20,080
जो राघवाचार्य जी महाराज वाले दिन जब क्रेडिट लेने के लिए उसने वीडियो बनाया था कि

873
01:02:20,080 --> 01:02:24,160
देखो देखो मेरी वजह से ऐसा हो रहा है। अ तो उस दिन शाम

874
01:02:24,160 --> 01:02:27,120
उसने क्या बात बोली थी किसी व्यक्ति के लिए कि वो तो

875
01:02:27,120 --> 01:02:31,120
इसकी किस्मत अच्छी है नहीं तो मैं अभी वीडियो बना देता इसके लिए।

876
01:02:31,120 --> 01:02:35,440
आप सोचिए कि ये किसी व्यक्ति को पनिश

877
01:02:35,440 --> 01:02:39,520
करने के लिए या उसके जीवन के प्रभाव

878
01:02:39,520 --> 01:02:43,680
को अपने वीडियो बनाने से तुलना करता है। अरे भैया

879
01:02:43,680 --> 01:02:48,000
अगर तेरे वीडियो से इतना प्रभाव पड़ रहा है तो तू बना दे रामपालियों पर वीडियो

880
01:02:48,000 --> 01:02:52,320
मुसलमानों पर वीडियो बना दे और कर दे उनका खत्म नाश।

881
01:02:52,320 --> 01:02:56,640
जो क्या कहते हैं जो विध विधर्म के द्वारा फैलाई जाने वाली सनातन

882
01:02:56,640 --> 01:03:00,720
विरोधी चीजें हैं इन पर तू वीडियो बना दे एक एक करके खत्म हो जाए जिससे सारी

883
01:03:00,720 --> 01:03:04,800
समस्याएं क्योंकि तेरे वीडियो इतने इंपॉर्टेंट है ना कि तू

884
01:03:04,800 --> 01:03:08,880
वीडियो बना देगा नहीं तो उसकी किस्मत बुरी हो जाए वो अगर तूने वीडियो

885
01:03:08,880 --> 01:03:13,040
नहीं बनाया तो बच जाएगा उसकी किस्मत अच्छी मानी जाएगी जो तू वीडियो नहीं बना पाया तो भैया

886
01:03:13,040 --> 01:03:17,520
इन पे बनाना तू वीडियो इस्लाम पे क्रिश्चियनिटी

887
01:03:17,520 --> 01:03:22,160
पे हर समाजियों पे एक एक वीडियो लाइन से बना दे सब पे वो वो वाला

888
01:03:22,160 --> 01:03:26,400
जिससे पोस्टमार्टम हो जाए और उनकी किस्मत जो है जो अच्छी किस्मत

889
01:03:26,400 --> 01:03:30,960
है वो उसमें दुर्भाग्य में बदल जाए। कब बनाएगा भाई?

890
01:03:30,960 --> 01:03:35,920
चलिए प्ले करिए।

891
01:03:35,920 --> 01:03:39,920
कुछ प्रिंसिपल्स उनके लिए होते हैं कि किस-किस प्रकार से किनको चुनना

892
01:03:39,920 --> 01:03:44,160
है? किनका खंडन करना है, किनका नहीं करना है। तो आपके

893
01:03:44,160 --> 01:03:48,720
लाइफ में जो बच्चे बच्चे आ के आपसे जो है डिबेट करके चले गए क्या वो धर्म क्षेत्र में प्रतिष्ठित

894
01:03:48,720 --> 01:03:53,120
थे? तुम भी आ जाओ तुम भी आ जाओ तुम्हारे

895
01:03:53,120 --> 01:03:56,560
तुमको मना किया क्या

896
01:03:56,560 --> 01:04:00,800
भाई स्थिति ये है कि होना ही है और हां ये बात सही

897
01:04:00,800 --> 01:04:04,800
है कि भागतानंद ने भी जब हमको पहली बार जब अटेमप्ट किया

898
01:04:04,800 --> 01:04:09,200
था कि हम चर्चा करना चाहते हैं तो इसी इसी कारण से कि इस चर्चा

899
01:04:09,200 --> 01:04:13,520
होने वाली इस प्रकार की चर्चा का दुष्प्रभाव ज्यादा पड़ेगा तो हम पीछे हटे

900
01:04:13,520 --> 01:04:17,680
थे क्यों क्योंकि उसने कहा था भारतानंद ने जब तुम

901
01:04:17,680 --> 01:04:21,840
के पास जा सकते हो चर्चा करने के लिए तो मेरे पास क्यों

902
01:04:21,840 --> 01:04:25,840
नहीं आ सकते? क्योंकि तुम्हारे पास आने का मतलब है कि

903
01:04:25,840 --> 01:04:29,840
हम तुम्हारे पास आएंगे तो खंडन करे बिना नहीं रह सकते

904
01:04:29,840 --> 01:04:33,840
और समाज को हम ये दिखाना नहीं चाहते कि हम तुम्हारा खंडन कर रहे हैं। ये

905
01:04:33,840 --> 01:04:38,240
बात होती है। इसी प्रकार से अन्य कई लोग ऐसे होते हैं जिसके

906
01:04:38,240 --> 01:04:42,720
पास जाना जाना जिसके साथ चर्चा करनी है तो भैया उसका जो सैद्धांतिक

907
01:04:42,720 --> 01:04:46,960
विरोध है करना पड़ेगा और कई बार हम समाज को ये नहीं दिखाना चाहते कि हम इसका

908
01:04:46,960 --> 01:04:50,960
विरोधी है हम दोनों जिससे कि सामने वाला लाभ उठाए जैसा

909
01:04:50,960 --> 01:04:55,680
कि मुक्तेश्वर जी महाराज ने कहा ज्योतिष पीठ वाले उन्होंने कहा

910
01:04:55,680 --> 01:05:00,880
कि कई बार सह लेना पड़ता है नहीं तो विधर्मी जो है उसका फायदा उठाएंगे

911
01:05:00,880 --> 01:05:05,040
और तुमने सुना भी है तो फिर तुमसे क्यों सोच रहे हो के पीएन मिश्र

912
01:05:05,040 --> 01:05:09,360
जी का हम वैसे ही अक्षरस विरोध करें।

913
01:05:09,360 --> 01:05:13,520
कई ऐसे स्थितियां होती है जिसमें हमको सह लेना पड़ता है। कोई

914
01:05:13,520 --> 01:05:17,600
अगर गलत बात कही जा रही है बहुत सी अन्य चीजों को महत्व देना पड़ता है। उसको पीछे

915
01:05:17,600 --> 01:05:21,680
करना पड़ता है। और क्यों करना पड़ता है? जिससे कि विरोधी हमारा

916
01:05:21,680 --> 01:05:25,760
फायदा ना उठाएं। हम दो लकीर के इस तरफ

917
01:05:25,760 --> 01:05:29,760
वाले लोगों का फायदा लकीर के उस तरफ वाले लोग ना उठाएं। इतनी सी

918
01:05:29,760 --> 01:05:34,000
बात भेजे में नहीं घुस रही। और नहीं घुस रही तो फिर तू यह बता

919
01:05:34,000 --> 01:05:38,240
सिद्धांत तो मैंने बता दिया फिर नहीं घुस रही तो फिर तू यह बता कि

920
01:05:38,240 --> 01:05:42,240
मुक्तेश्वरानंद जी पीए मिश्र जी का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं अगर नहीं कर रहे

921
01:05:42,240 --> 01:05:46,240
हैं तो भारतानंद कब उनके विरोध में वीडियो बनाने वाला है आत्म

922
01:05:46,240 --> 01:05:49,600
मुग्धता पक्षपाती

923
01:05:49,600 --> 01:05:54,160
और मठ के अपने मोह में अपने शिष्यों के मोह में ये सब

924
01:05:54,160 --> 01:06:00,160
टाइटल दे दे के कब वीडियो बनाने वाला तुम्हारा भागता

925
01:06:01,920 --> 01:06:06,160
उससे जब वो अपनी शंका का निवारण नहीं कर पाए तो आपके वक्तव्यों से कर लेंगे। यह आप कैसे सुनिश्चित

926
01:06:06,160 --> 01:06:09,200
कर रहे हैं?

927
01:06:09,200 --> 01:06:13,280
क्या नहीं कर पागचार्य जी को पीछे करना

928
01:06:13,280 --> 01:06:17,360
जरा महाशय और कहने को जो है जो प्रतिष्ठित

929
01:06:17,360 --> 01:06:21,520
नहीं है हम उस जो है धर्म क्षेत्र में हम उसका विरोध क्यों करने जाए एक एक व्यक्ति का विरोध

930
01:06:21,520 --> 01:06:25,520
क्यों करने जाए तो उस समय क्यों कर रहे थे और जब वो लाइव में आ करके आपसे

931
01:06:25,520 --> 01:06:29,520
डिबेट करना चाह रहा था तो आप सीधा उसे मना भी कर सकते थे कि तुम धर्म क्षेत्र

932
01:06:29,520 --> 01:06:34,480
में प्रतिष्ठित नहीं हो तो हम तुम्हारे साथ डिबेट नहीं करेंगे क्यों

933
01:06:34,480 --> 01:06:38,960
आपने ही कहा था ना कि एक एक व्यक्ति का तो हम विरोध नहीं करते चलेंगे। धरातल

934
01:06:38,960 --> 01:06:43,120
पर उतारे व्यक्ति की कुछ नीति होती है। कुछ प्रिंसिपल्स उनके

935
01:06:43,120 --> 01:06:47,200
लिए होते हैं कि किस-किस प्रकार से किनको चुनना है। किनका बिल्कुल एक

936
01:06:47,200 --> 01:06:51,200
मिनट थोड़ा एक मिनट। इसका अर्थ ये है कि हमने ये

937
01:06:51,200 --> 01:06:55,760
देखा कि किसके साथ लाइव चर्चा करने से कोई दिक्कत नहीं आएगी।

938
01:06:55,760 --> 01:06:59,920
और यह बात सत्य है कि पीएन मिश्र जी जैसे लोग अगर

939
01:06:59,920 --> 01:07:04,240
वह ऐसी चीजें कर रहे हैं कि शंकराचार्य जी द्वारा निर्गत सिद्धांतों

940
01:07:04,240 --> 01:07:08,480
के वो विरोध में है और वो उसी के लिए उसी को लेकर चर्चा करेंगे तो आत्मा

941
01:07:08,480 --> 01:07:13,120
से यही आवाज निकलेगी ये चर्चा जो है सामाजिक ना हो ना देख

942
01:07:13,120 --> 01:07:16,960
और यही बात हमने भागवतानंद के लिए भी कही थी और

943
01:07:16,960 --> 01:07:21,760
जिसका उसने चवा उड़ाया जिसको बदल करके उसने प्रस्तुत किया

944
01:07:21,760 --> 01:07:26,000
हमारे मन से यही आवाज निकली थी कि नहीं ये चर्चा अगर हमारे बीच में वैचारिक मतभेद

945
01:07:26,000 --> 01:07:30,320
है भी तो इसको जन सामान्य ना देखे। मगर

946
01:07:30,320 --> 01:07:34,320
जब उसने कोई रास्ता नहीं छोड़ा तो हमने कह दिया आ जाओ अब कब आ रहे हो। तब से ले

947
01:07:34,320 --> 01:07:38,720
आज तक तुम्हारा भागानंद भाग रहा है। और

948
01:07:38,720 --> 01:07:42,800
जिन लोगों से हमने ऐसे करके डिबेट की है जो लोग आए

949
01:07:42,800 --> 01:07:46,800
हैं वो ज्यादातर इस वाले पक्ष से आए हैं। आर्य समाजियों के पक्ष से आए हैं। तो हमने

950
01:07:46,800 --> 01:07:50,880
वहां लिखा है मोटा-मोटा आर्य समाज जो इधर ही के

951
01:07:50,880 --> 01:07:55,040
पाले के होते हैं। हम नहीं चाहते कि उनसे आमनासामना हो। अब क्या हम श्री

952
01:07:55,040 --> 01:07:59,040
संप्रदाय वालों से लड़ेंगे जाकर के सैद्धांतिक विरोध में कि मधु संप्रदाय

953
01:07:59,040 --> 01:08:03,120
वालों से लड़े हैं क्या तुम्हारे हिसाब से लड़ना चाहिए उससे धर्म को

954
01:08:03,120 --> 01:08:07,040
बहुत फायदा होगा

955
01:08:07,040 --> 01:08:09,280
बेवकूफ

956
01:08:09,280 --> 01:08:14,000
दो कौड़ी की अकल नहीं है दो कौड़ी की तूती बंधु

957
01:08:14,000 --> 01:08:18,080
कामना होगा जब चलो बच्चे आकर के आपसे जो

958
01:08:18,080 --> 01:08:22,240
है डिबेट करके चले गए क्या वो धर्म क्षेत्र में प्रतिष्ठित थे और यदि

959
01:08:22,240 --> 01:08:26,400
उनको उनकी शंका का निवारण आप कर रहे थे तो आपने तो अनेक वीडियो बनाया था। फिर पॉज

960
01:08:26,400 --> 01:08:30,560
करो शंका का निवारण दो इनको उत्तर दो। हम उनकी

961
01:08:30,560 --> 01:08:34,800
शंका का निवारण नहीं कर रहे थे। हम जानते हैं कि इट्स बेटर टू केयर

962
01:08:34,800 --> 01:08:37,280
देन क्योर।

963
01:08:37,280 --> 01:08:41,680
ठीक है? जो एक बार चला गया उसको वापस लाना बहुत मुश्किल है।

964
01:08:41,680 --> 01:08:46,080
मगर वो जो जिस जिसज आधार पर अपनी मान्यताएं

965
01:08:46,080 --> 01:08:50,160
बनाकर बैठे हैं। जो सामने आया वो कभी अपनी मान्यता को

966
01:08:50,160 --> 01:08:54,320
चेंज नहीं करेगा। मगर उसको जो सुन रहा है और जो बिल्कुल वैसे ही आधार

967
01:08:54,320 --> 01:08:58,400
बनाकर अपनी उसने मान्यताएं बनाई है उसके मन

968
01:08:58,400 --> 01:09:02,640
में जरूर परिवर्तन होता है और हमने बहुत सारे लोगों को वापस पाया है आर्य समाज

969
01:09:02,640 --> 01:09:07,920
से इस से और रामपाल से ये है रिजल्ट

970
01:09:07,920 --> 01:09:13,760
तुमने क्या किया है क्या किया तुमने कौन हो तुम

971
01:09:13,760 --> 01:09:18,000
तुच्छा ही की है तुमने केवल और तुम्हारे भागतानंद ने केवल पोस्टमार्टम

972
01:09:18,000 --> 01:09:22,160
करूंगा उसकी किस्मत अच्छी थी जो मैं वीडियो नहीं बना पाया भाई। वीडियो

973
01:09:22,160 --> 01:09:26,240
बनाने से उसको दिल का दौरा पड़ जाएगा। एक

974
01:09:26,240 --> 01:09:30,320
लुक्का चला ससुराल वो ससुराल लुक्का चला ससुराल लुक्का

975
01:09:30,320 --> 01:09:34,320
वीडियो बना देगा तो भैया किसी की जिंदगी तहसनहस हो जाएगी। जीवन उसका

976
01:09:34,320 --> 01:09:37,600
तहसनहस हो जाएगा।

977
01:09:37,600 --> 01:09:41,600
हाय बड़े। चलो उससे

978
01:09:41,600 --> 01:09:45,600
जब वो अपनी शंका का निवारण नहीं कर पाए तो आपके वक्तव्यों से कर लेंगे। ये आप कैसे सुनिश्चित कर रहे

979
01:09:45,600 --> 01:09:49,920
हैं? इसका जवाब दे दिया है। और आप

980
01:09:49,920 --> 01:09:54,480
का निवारण नहीं करते हैं। जन सामान्य को दिखाते हैं कि देखो

981
01:09:54,480 --> 01:09:58,640
जो जो सनातन सिद्धांतों के विरोध में जो जो कुतर्क किए गए उनको कैसे उनको

982
01:09:58,640 --> 01:10:03,520
मिट्टी में मिलाया जाता है। कोई शंका का निवारण नहीं करते हैं। मगर उन चर्चाओं

983
01:10:03,520 --> 01:10:07,520
उन चर्चाओं को देखकर प्रभाव पड़ता है जन सामान्य

984
01:10:07,520 --> 01:10:11,600
में इसलिए करते हैं। हम तुम्हें क्या लगता है कौन हम जाते हैं?

985
01:10:11,600 --> 01:10:15,840
एक मिनट के पास हम जो इंटरव्यू लेने गए थे इसलिए कहते हैं कि उसकी शंकाओं

986
01:10:15,840 --> 01:10:20,480
का निवारण हो जाए। वो जो है ये कहना छोड़ दे कि मैं जो है शंकराचार्य

987
01:10:20,480 --> 01:10:24,560
या हम आज तक जब भी इस में गए हैं किसी उसके ब्रह्मचारी से बात किए हैं या

988
01:10:24,560 --> 01:10:28,800
मंदिर के अध्यक्ष से बात किए तो ये सोच के गए कि आज से अपना पद छोड़ देगा

989
01:10:28,800 --> 01:10:32,880
इस की नौकरी को त्याग देगा क्या बेवकूफी है

990
01:10:32,880 --> 01:10:36,880
ये उसके मत को वहां सामने से

991
01:10:36,880 --> 01:10:37,380
नेस्तो

992
01:10:37,280 --> 01:10:41,840
नाभूत वहां पर उसकी विचारधारा का शोधन इत्यादि

993
01:10:41,840 --> 01:10:46,720
प्रकट करने के लिए हम लोग बात करते हैं जिसको देख के जन सामान्य

994
01:10:46,720 --> 01:10:50,800
अगर वो बिगड़ रहा है तो बचे और यदि दूर है तो दूर ही

995
01:10:50,800 --> 01:10:55,520
रहे। चलिए

996
01:10:55,520 --> 01:11:00,240
कह के संबोधित कर रहे हैं। आप पहले जाइए अपने गुरु जी के पास और कहिए

997
01:11:00,240 --> 01:11:04,480
कि जो है निद्राचार्य जी को हम भागदानंद कह रहे हैं इस आधार

998
01:11:04,480 --> 01:11:08,480
पे कि एक जो है शंकर परंपरा के ही

999
01:11:08,480 --> 01:11:12,560
एक प्रियन मिश्र नामक एक व्यक्ति हैं। अधिवक्ता हैं। उन्होंने अपने ही

1000
01:11:12,560 --> 01:11:17,120
संप्रदाय के विरुद्ध सिद्धांतों को रखा है। जन्मना के जगह करना वर्ण

1001
01:11:17,120 --> 01:11:21,200
अरे मेरे भाई इतनी बार इस बारे में बात हो चुकी है।

1002
01:11:21,200 --> 01:11:25,440
अरे पीएन मिश्र जी गलत है तो तू साबित करना कोई पीएन

1003
01:11:25,440 --> 01:11:29,600
मिश्र जी को सजा देने के लिए नहीं बुलाया जा रहा तुझे जो तू यहां बक

1004
01:11:29,600 --> 01:11:33,760
रहा है अपने को सही बताने के पक्ष में वही बकना है

1005
01:11:33,760 --> 01:11:38,560
ना तो सामने जाकर बकने से क्यों पीछे हट रहा है बात ये है

1006
01:11:38,560 --> 01:11:42,640
इसलिए भागता नंद कहा गया है हर व्यक्ति जिसने

1007
01:11:42,640 --> 01:11:46,880
भी इसको कभी ललकारा ये वहां से पीछे भागा है गुरु चरण दास ने

1008
01:11:46,880 --> 01:11:51,440
ललकारा तो क्या कहा कि वो वेदों को नहीं मानता मैं क्यों जाऊं

1009
01:11:51,440 --> 01:11:52,560
अरे भैया जो तुम्हारे

1010
01:11:52,560 --> 01:11:57,680
मत को मानता होगा उससे शास्त्रार्थ होता है क्या कभी और

1011
01:11:57,680 --> 01:12:02,080
अगर गुरु को ना मानने वाली बात है तो

1012
01:12:02,080 --> 01:12:06,320
सबके गुरु व्यास है और सबके हिसाब से सामने वाली

1013
01:12:06,320 --> 01:12:10,400
पार्टी ने अपने गुरु को नहीं माना है अगर ब्रह्म तत्व तत्व

1014
01:12:10,400 --> 01:12:14,640
तात्विक विषय कहा जाए तो श्री संप्रदाय के अनुसार शंकराचार्य

1015
01:12:14,640 --> 01:12:18,640
जी ने अपने गुरु का विरोध किया कहीं ना कहीं शंकराचार्य जी के अनुसार श्री संप्रदाय ने

1016
01:12:18,640 --> 01:12:22,640
विरोध किया कहीं ना कहीं यह कोई आधार नहीं होता है शास्त्रार्थ

1017
01:12:22,640 --> 01:12:26,800
से पीछे हटने का कि वो अपने गुरु को ही नहीं मानता हम क्यों मान

1018
01:12:26,800 --> 01:12:31,120
हम क्यों जाए और अगर यह आधार है तो फिर ले आओ फिर सनातन सिद्धांत

1019
01:12:31,120 --> 01:12:35,280
हमने तो तुम्हें बता दिया दोनों के गुरु एक

1020
01:12:35,280 --> 01:12:38,160
है व्यास

1021
01:12:38,160 --> 01:12:43,120
फिर दोनों के गुरु नारायण श्रीमन नारायण

1022
01:12:43,120 --> 01:12:47,360
दोनों परंपरा वही से चल रही है तो शंकराचार्य शंकराचार्य

1023
01:12:47,360 --> 01:12:51,600
परंपरा में और रामानुजाचार्य परंपरा में कभी कोई विरोध होना ही नहीं था। शास्त्रार्थ

1024
01:12:51,600 --> 01:12:56,800
होना ही नहीं था। और इस्लाम की बात कर लो।

1025
01:12:56,800 --> 01:13:00,800
यह सनातनी परंपराएं हो गई। इस्लाम की बात कर लो। इस्लाम

1026
01:13:00,800 --> 01:13:04,880
में भी तो कहीं ना कहीं कोई ऐसा समय रहा है ना जब अपने

1027
01:13:04,880 --> 01:13:07,600
से पूर्व वाले की बात का खंडन करते हुए अपने मत

1028
01:13:07,600 --> 01:13:13,120
को पुष्ट किया गया। प्रचारित किया गया।

1029
01:13:13,120 --> 01:13:17,120
पीछे कहीं भी जाओगे तो मूल में तो कहीं ना कहीं कोई सही बात बोलने

1030
01:13:17,120 --> 01:13:21,360
वाला मिल जाएगा ना। जिसको अनसुना किया गया और अपना सिद्धांत

1031
01:13:21,360 --> 01:13:25,360
गढ़ा गया। रामपाल भी अपने गुरु का विरोध में किया है। पहले

1032
01:13:25,360 --> 01:13:29,520
हनुमान जी का उपासक था रामपाल। आर्य समाजी भी रह

1033
01:13:29,520 --> 01:13:33,680
चुका है। फिर वो अपना बना है।

1034
01:13:33,680 --> 01:13:37,840
तो इसलिए रामपाल का खंडन ना किया जाए क्योंकि उसने तो भाई आर्य समाज का वो

1035
01:13:37,840 --> 01:13:41,840
यही बात तो तुझे सिद्ध करनी है जाकर के। तो शास्त्रार्थ ना करने

1036
01:13:41,840 --> 01:13:46,080
का यह कारण नहीं होता कि वह इस मामले में गलत है। उस वो गलत

1037
01:13:46,080 --> 01:13:50,080
है। यही तुम्हें सिद्ध करना है। तुम घोषित मत करो।

1038
01:13:50,080 --> 01:13:54,160
ये घोषित मत करो। निर्णायक मत बनो। वहां जाओ और सामने

1039
01:13:54,160 --> 01:13:58,560
से जाकर के सिद्ध करो। उसके लिए शास्त्रार्थ है।

1040
01:13:58,560 --> 01:14:04,560
समझे?

1041
01:14:07,520 --> 01:14:11,920
ये है आप ही अपने गुरु जी को ये भी कहिएगा कि गुरु जी गुरु जी आपके

1042
01:14:11,920 --> 01:14:15,920
जो गुरु जी थे कृपात्रेय स्वामी उनको जो है शंकराचार्य बनाने

1043
01:14:15,920 --> 01:14:19,920
की फैक्ट्री उन्होंने कह दिया है लेकिन वहां जो है

1044
01:14:19,920 --> 01:14:24,160
गुरु जी मेरी ऐसा कहा है नकली शंकराचार्य बनाने

1045
01:14:24,160 --> 01:14:28,160
की फैक्ट्री या शाप ब्राह्मण नहीं होते हैं

1046
01:14:28,160 --> 01:14:32,320
या जबाला वाले वाले मामले के अनुसार जो है कर्मणा वर्ण व्यवस्था

1047
01:14:32,320 --> 01:14:36,400
है तो ये गलत है। गलत कहा उन्होंने और अगर इस पर हमारी कोई

1048
01:14:36,400 --> 01:14:40,560
वैचारिक चर्चा होगी तो वो करेंगे अवश्य ही और हम नहीं चाहते कि

1049
01:14:40,560 --> 01:14:44,800
इस तरह की चर्चा हमारे और उनके बीच में हो तो वो सार्वजनिक रूप से हो जैसा कि हम भागतानंद

1050
01:14:44,800 --> 01:14:48,960
के केस में भी नहीं चाहते थे। मगर भागतानंद ने तो हमें विवश

1051
01:14:48,960 --> 01:14:52,960
किया सामना करने के लिए और इसी तरीके से सामना करने के लिए विवश

1052
01:14:52,960 --> 01:14:56,720
किया तो कर रहे हैं।

1053
01:14:56,720 --> 01:15:01,040
मगर अब तुम ये पूछो भागतानंद से कि वो कब जाएगा

1054
01:15:01,040 --> 01:15:05,040
ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के पास और कब पोस्टमार्टम करेगा कि क्यों नहीं बोल

1055
01:15:05,040 --> 01:15:09,120
रहे हो पीएन मिश्र जी के विरोध में

1056
01:15:09,120 --> 01:15:13,280
पूछो तो वहां आंसर वही आएगा जो ज्योतिष

1057
01:15:13,280 --> 01:15:17,520
पीठ वाले महाराज जी ने कहा था कि कई मामलों में हमें सहना पड़ता है। अपने

1058
01:15:17,520 --> 01:15:21,840
बड़े अभियान को बचाने के लिए हमें अपनी जो ये छोटी मोटी

1059
01:15:21,840 --> 01:15:26,080
ये जो प्रहार हो रहे हैं इनको सह लेना पड़ता है। और अगर तुम्हारे इतनी बुद्धि

1060
01:15:26,080 --> 01:15:30,320
नहीं है तो जाओ कभी घर से बाहर निकलो दो पैसे का काम करो मुंह

1061
01:15:30,320 --> 01:15:34,400
चलाना आसान है जिस दिन निकलोगे ना

1062
01:15:34,400 --> 01:15:38,880
बाहर थाना कोर्ट कचहरी इत्यादि के चक्कर काटने पड़ेंगे एफआईआर

1063
01:15:38,880 --> 01:15:44,880
हो रही होंगी तुम्हारे विरुद्ध पता चल जाएगा आटे दाल का भाव क्या होता है

1064
01:15:44,960 --> 01:15:50,080
जेब में नहीं है टल्ला टिल्ला मांग रहे हैं लाल किल्ला चलो

1065
01:15:50,080 --> 01:15:53,840
मैं अपने संप्रदाय के लोगों का

1066
01:15:53,840 --> 01:15:58,400
विरोध नहीं कर सकता उनसे द्वेष नहीं कर सकता हूं भले वो हमारे संप्रदाय

1067
01:15:58,400 --> 01:16:02,640
अरे भैया टोमू व्यक्ति भागतानंद का जो मठ

1068
01:16:02,640 --> 01:16:06,080
है ना निगमानंद

1069
01:16:06,080 --> 01:16:11,280
क्या लिख के गए हैं निगमंद अपने ग्रंथों में

1070
01:16:11,280 --> 01:16:15,440
गौरांग यानी चैतन्य महाप्रभु

1071
01:16:15,440 --> 01:16:19,360
और ये ईसा ईसा

1072
01:16:19,360 --> 01:16:23,440
बाइबल का प्रचार करने वाला कुरान का प्रचार

1073
01:16:23,440 --> 01:16:29,120
करने वाला वाले मोहम्मद ये सब लोग

1074
01:16:29,120 --> 01:16:33,200
और कौन बुद्ध ये सब गौतम ऋषि के देह से

1075
01:16:33,200 --> 01:16:37,440
उत्पन्न है और धर्म की संस्थापना के लिए आए थे भाई क्या बात कर रहे हो कब

1076
01:16:37,440 --> 01:16:41,920
कर रहा है तुम्हारा भागतानंद अपने निगमानंद का खंडन कहा

1077
01:16:41,920 --> 01:16:46,000
था मत छेड़

1078
01:16:46,000 --> 01:16:50,160
कहा था कि इस इस बात को मत छेड़ नहीं तो तू अपनी

1079
01:16:50,160 --> 01:16:54,240
जो थोड़ा बहुत जो तूने अपने ताश के पत्तों का ढेर बनाया आया है ना ये

1080
01:16:54,240 --> 01:16:58,400
खड़ा करके Facebook पे कैरी मिनाटी बनके वो नष्ट

1081
01:16:58,400 --> 01:17:01,040
होने लगेगा

1082
01:17:01,040 --> 01:17:05,200
सच्चे धर्म रक्षक से टकराएगा तो दिक्कत आ जाएगी

1083
01:17:05,200 --> 01:17:09,280
कहा था पर इसको चाहिए थे व्यूज इसको चाहिए

1084
01:17:09,280 --> 01:17:14,160
कंटेंट निग्रह कर दूंगा वीडियो बना दूंगा

1085
01:17:14,160 --> 01:17:18,800
बना भैया वीडियो कर वो

1086
01:17:18,800 --> 01:17:22,080
सन्यासी का खंडन करे निगमानंद मटके

1087
01:17:22,080 --> 01:17:27,760
निगमानंद मठ सन्यासी का खंडन करे बोला है ना जिसने

1088
01:17:27,760 --> 01:17:32,560
एनी बेसेंट थियोसफिकल सोसाइटी की फाउंडर

1089
01:17:32,560 --> 01:17:36,720
और किसकी शिष्य शिष्या सुमेरू दास की सुमेरू दास का शिष्य

1090
01:17:36,720 --> 01:17:41,200
कौन है निगमानंद गुरु भाई बहन दोनों निगमंद और एनी बेसेंट

1091
01:17:41,200 --> 01:17:45,200
ये है कलेक्शन फ्री मैशन का एक व्यक्ति

1092
01:17:45,200 --> 01:17:49,200
किसी अमुक अपने टाइम में वो ना जानते हुए एक दिन के लिए उसका अध्यक्ष का

1093
01:17:49,200 --> 01:17:53,440
फोटो हो गया बस हो गया वो फ्री मैशन का और ये तुम्हारे अरे गुरु घंटाल

1094
01:17:53,440 --> 01:17:58,080
क्या कर रहे हैं उनप अब बोल बना वीडियो इसी

1095
01:17:58,080 --> 01:18:03,920
दिन ये तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे दिखा तमाशा

1096
01:18:03,920 --> 01:18:08,000
खैर अभी पूरा वीडियो बाकी है चालू करो इसका लेकिन

1097
01:18:08,000 --> 01:18:12,320
मैं नहीं करूंगा गुरु जी क्योंकि वो तो अपने संप्रदाय के है ना हमें तो व्यक्तिगत द्वेष निग्रचार

1098
01:18:12,320 --> 01:18:16,320
जी से करनी है सिद्धांत जाए भाड़ में गुरु जी सिद्धांत क्या होता है हमें तो

1099
01:18:16,320 --> 01:18:20,720
व्यक्तिगत संबंध बनाना है ना सबके साथ हमें ये देखना है

1100
01:18:20,720 --> 01:18:24,960
कि किसके गलत बोलने से ज्यादा जनसंख्या

1101
01:18:24,960 --> 01:18:29,360
प्रभावित हो रही है। तो हमें जब जैसा समय मिलेगा अनुकूल

1102
01:18:29,360 --> 01:18:33,360
लगेगा वहां पर हम उसका प्रतिकार करेंगे। अगर तुम्हें

1103
01:18:33,360 --> 01:18:37,520
लगता है कि हमारा प्रतिकार करने का जो आधार है यह चयन

1104
01:18:37,520 --> 01:18:41,520
करने का कि किसका करना है किसका नहीं करना है। चयन तो तुम्हारे निग्गू

1105
01:18:41,520 --> 01:18:45,840
ने भी किया है। परंतु और उसने स्पष्ट रूप से पक्षपात

1106
01:18:45,840 --> 01:18:50,880
के रूप में किया है। क्योंकि उसके लिए तो कोई विषय है नहीं।

1107
01:18:50,880 --> 01:18:54,880
भाई वो वो क्यों नहीं बोल रहा है प्रखर हो के मुक्तेश्वर जी के लिए यह जो

1108
01:18:54,880 --> 01:18:59,040
सवाल जितने तुम हमसे कर रहे हो पीए मिश्रा जी के विषय में यही पीएन मिश्र

1109
01:18:59,040 --> 01:19:03,520
जी के विषय में सारे सवाल उनसे करो क्यों नहीं हो रहे हैं क्योंकि

1110
01:19:03,520 --> 01:19:07,920
यहां पर चयन तुम भी कर रहे हो मगर तुम्हारे चयन करने का आधार है

1111
01:19:07,920 --> 01:19:11,920
अपनी अनुकूलता और हमारे चयन करने का आधार है धर्म

1112
01:19:11,920 --> 01:19:16,080
की अनुकूलता धर्म रक्षा की अनुकूलता अभियान की अनुकूलता

1113
01:19:16,080 --> 01:19:22,080
व्यक्तिगत अनुकूलता नहीं चलो

1114
01:19:24,880 --> 01:19:28,880
एक बार यदि आपकी इतनी ही हैसियत थी तो जाकर के एक बार आप जिन

1115
01:19:28,880 --> 01:19:32,880
निगमानंद जी पे आक्षेप लगा रहे हैं जाकर के अपने गुरुदेव से क्यों नहीं पूछ लेते हैं कि

1116
01:19:32,880 --> 01:19:38,560
आप क्यों निगमंद जी के वार्षिक उत्सव पर जाते थे पॉज करो

1117
01:19:38,560 --> 01:19:43,440
जाते थे कि गए थे पहले तो ये इस पर आ जाओ

1118
01:19:43,440 --> 01:19:46,480
अच्छा

1119
01:19:46,480 --> 01:19:50,640
क्या भागता नंद मठ में नहीं रहा है तो

1120
01:19:50,640 --> 01:19:55,120
भागतानंद क्योंकि मठ में रहा है तो इसलिए मान लिया जाए कि भागतानंद पूरी शंकराचार्य

1121
01:19:55,120 --> 01:19:59,120
जी के विरोध में करपात्री जी के विरोध में जो भी विष्ठा निकालता है मुंह

1122
01:19:59,120 --> 01:20:04,960
से वो सब विष्ठा उनको स्वीकार रहे।

1123
01:20:04,960 --> 01:20:09,120
पूरी के शंकराचार्य जी कहते हैं कि जीव

1124
01:20:09,120 --> 01:20:13,360
की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद

1125
01:20:13,360 --> 01:20:17,360
स्वरूप परमेश्वर और उसको प्राप्त करने के निमित्त

1126
01:20:17,360 --> 01:20:21,360
बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है और ये लोग

1127
01:20:21,360 --> 01:20:25,600
कह रहे हैं कि कुरान और बाइबल भी धर्म है और ऐसे ही धर्म की स्थापना

1128
01:20:25,600 --> 01:20:29,760
के लिए आते हैं भैया वहां वो अवतार लेते हैं आचार्य ऋषि मुनि हमारे

1129
01:20:29,760 --> 01:20:35,760
वो अवतार है मोहम्मद और ये बाइबल वाले ईसा

1130
01:20:36,800 --> 01:20:39,200
हम

1131
01:20:39,200 --> 01:20:43,280
तो तुम्हारे हिसाब से पूरी शंकराचार्य जी ये कुरान की फिलोसफी

1132
01:20:43,280 --> 01:20:47,760
को मानते हैं क्योंकि वो क्योंकि वहां गए थे और

1133
01:20:47,760 --> 01:20:52,000
भागतानंद की फिलोसफी को भी मानते हैं निग्रह कर दूंगा वाली पोस्टमार्टम तीन घंटे

1134
01:20:52,000 --> 01:20:56,320
का वीडियो क्योंकि वो वहां गए थे भागतानंद

1135
01:20:56,320 --> 01:21:00,400
उनके वहां साथ में फोटो है भागतानंद की उनको प्रशय मिला वहां पर

1136
01:21:00,400 --> 01:21:04,480
वो तो जब भागतानंद जो है अपने लिए कुछ विशेष वहां चाह

1137
01:21:04,480 --> 01:21:09,280
रहा होगा तो भगाया गया है जूतों ही जूतों उसको वहां से

1138
01:21:09,280 --> 01:21:15,280
और तब उसने मोर्चा खोला भगा दिया गया जब उसको

1139
01:21:15,440 --> 01:21:19,520
तो थोड़ा काम करो घर बैठे बात करना मुंह

1140
01:21:19,520 --> 01:21:20,320
चलाना तूती

1141
01:21:20,320 --> 01:21:26,320
चलाना बहुत सरल होता है जी चलिए प्ले करिए

1142
01:21:26,800 --> 01:21:30,960
क्या उनकी गति है धर्म क्षेत्र में क्या थे नहीं थे क्यों नहीं बस चर्चा कर लिए क्यों

1143
01:21:30,960 --> 01:21:35,040
नहीं निग्र आचार्य जी के विषय को लेकर के आप अपने गुरु जी के पास जाकर के एक सार्वजनिक

1144
01:21:35,040 --> 01:21:39,200
वक्तव्य निर्गत किया बताइए आपके पास क्यों

1145
01:21:39,200 --> 01:21:43,200
नहीं क्यों क्यों नहीं किया क्यों नहीं किया हमने हमें जो पूछना है

1146
01:21:43,200 --> 01:21:47,280
हमने पूछ लिया किस वीडियो को डालना है किसको नहीं डालना है कौन सा वीडियो बना भी

1147
01:21:47,280 --> 01:21:51,360
है कौन सा नहीं बना है जब उन्होंने एक बार स्पष्ट कह दिया

1148
01:21:51,360 --> 01:21:55,440
निग्रहचार कोई हो ही नहीं सकता और निग्रह निकासिका में हमने कम से कम कुछ

1149
01:21:55,440 --> 01:21:59,520
नहीं तो 50 कारण दिए होंगे उसकी अप्रामाणिकता के और अभी जितना वो

1150
01:21:59,520 --> 01:22:03,520
जूझता जाएगा जितना वो करता जाएगा उतना ही ज्यादा और क्रिस्टल क्लियर चीज है

1151
01:22:03,520 --> 01:22:07,920
आपको। अब वो तो हमने सवाल तो खड़े कर दिए। अब उनकी उनके समर्थन

1152
01:22:07,920 --> 01:22:12,720
में अब चीजें आपको मिलती जाएंगी। आने वाला है कल वीडियो मिल जाएगा देख लेना।

1153
01:22:12,720 --> 01:22:16,800
ठीक है? निगमंद जिसको वो अपने परंपरा परंपरा प्रामाणिक आचार्य बता

1154
01:22:16,800 --> 01:22:21,680
रहे हैं वो उनके बारे में देख लेना। क्या है

1155
01:22:21,680 --> 01:22:25,840
लखनऊ से तो कहने का अर्थ क्या है? कि हमने जब अपने गुरु

1156
01:22:25,840 --> 01:22:30,240
का वक्तव्य प्राप्त कर लिया और हमें हमारे गुरु के सिद्धांत प्राप्त हो गए हैं

1157
01:22:30,240 --> 01:22:35,200
तो हम क्यों भैया अलग से एनर्जी वेस्ट करें

1158
01:22:35,200 --> 01:22:35,700
तुम्हारे

1159
01:22:35,680 --> 01:22:39,840
हिसाब से कि तुम एक एक व्यक्ति आता जाए हम सब कुछ कर चुके हैं मगर वही वाली

1160
01:22:39,840 --> 01:22:43,920
बात फिर आया तुमने ये तो किया ही नहीं हम वीडियो बना चुके हैं हम सब कुछ डाल चुके हैं सब

1161
01:22:43,920 --> 01:22:48,080
कुछ बता चुके हैं मगर क्योंकि एक नया व्यक्ति आया तो फिर वीडियो बनाए तो

1162
01:22:48,080 --> 01:22:52,480
ये सब काम तुम्हारे पास है छिछोरे लोगों के पास है क्योंकि तुम्हारे पास टाइम है

1163
01:22:52,480 --> 01:22:57,200
हमारे पास समय नहीं है भाई हमें तो लड़ना है धरातल पे

1164
01:22:57,200 --> 01:23:00,240
चलो

1165
01:23:00,240 --> 01:23:04,320
के लिए पैसे हैं समय है लेकिन वही लखनऊ से कामाख्या

1166
01:23:04,320 --> 01:23:08,400
जाकर के और वहां पे निग्रचार जी के समकक्ष बैठ के और वहां से

1167
01:23:08,400 --> 01:23:12,400
लाइव प्रसारण करने के लिए आपके पास समय पॉज करो ये आपके सिद्धांत

1168
01:23:12,400 --> 01:23:15,920
में पॉज करो

1169
01:23:15,920 --> 01:23:20,800
नहीं उसकी बात पूरी हो जाने दो क्या कह रहा है आपके सिद्धांत में क्या है

1170
01:23:20,800 --> 01:23:26,000
का परायक देता है

1171
01:23:26,000 --> 01:23:29,120
हो गया

1172
01:23:29,120 --> 01:23:33,520
हो गया ना ये वाला ठीक तो क्या कह रहा है कि जब आप जोधपुर

1173
01:23:33,520 --> 01:23:37,600
जा सकते हो तो कामाख्या क्यों नहीं गए भाई कामाख्या वाला जब हमको ये

1174
01:23:37,600 --> 01:23:42,400
पहले से पता है कि वो हमसे चर्चा नहीं करना चाहता है तो हम कामाख्या क्यों जाए

1175
01:23:42,400 --> 01:23:46,640
जब हमको ज्ञात है कि जो व्यक्ति है वो हमारा विरोधी

1176
01:23:46,640 --> 01:23:52,080
है तो हम क्यों मुंह उठा के सीधे चले जाए अपना समय बर्बाद करें

1177
01:23:52,080 --> 01:23:56,080
हमको जब यह ज्ञात है कि सामने वाला हमको समय देने के लिए तैयार नहीं है

1178
01:23:56,080 --> 01:24:00,160
तो हम क्यों जाए और जहां वह है

1179
01:24:00,160 --> 01:24:04,240
वो कहां है उसके उसका अता पता क्या उसने सार्वजनिक कर रखा था हमें क्या

1180
01:24:04,240 --> 01:24:08,320
पता कहां है वो कभी वो कामाखक्क्या का शिखर पकड़ के जने दिखाने

1181
01:24:08,320 --> 01:24:12,320
लगता है कभी रेलवे स्टेशन पे दिखता है हमें क्या पता भाई जो हम

1182
01:24:12,320 --> 01:24:15,440
चले जाए

1183
01:24:15,440 --> 01:24:19,600
और कहां जाना है कहां नहीं जाना है ये तय कर ये तय हम करेंगे

1184
01:24:19,600 --> 01:24:23,600
ना भाई अगर तुमको लगता है कि हमारा वहां जाना गलत था। वहां जाना सही था। तो तुम

1185
01:24:23,600 --> 01:24:27,760
शास्त्र लाओ। फिर शास्त्र की बात आ जाएगी। नहीं

1186
01:24:27,760 --> 01:24:31,760
तो अपनी बुद्धि विवेक से जहां पर जिसको जो अनुकूलता लगी वो

1187
01:24:31,760 --> 01:24:35,600
करेगा व्यक्ति।

1188
01:24:35,600 --> 01:24:39,680
जब वस्तुनिष्ठता के साथ उस संबंध में तुम्हारे पास यदि शास्त्र का प्रमाण हो तो वो

1189
01:24:39,680 --> 01:24:43,760
ले आओ। कोई व्यक्ति गड्ढे से बच के निकल रहा है। उसने ब्रेक

1190
01:24:43,760 --> 01:24:48,240
लगाई वो इधर से निकला। और कोई व्यक्ति गड्ढे से बच के निकल रहा है। वो इधर से निकला।

1191
01:24:48,240 --> 01:24:52,320
अब तुम कहो इधर से निकलने वाले तुम इधर से निकले इधर से क्यों नहीं निकले? तुम

1192
01:24:52,320 --> 01:24:56,560
इधर से निकले थे। इधर से क्यों नहीं निकले? ये पागलपन है और कुछ नहीं है। ईश्वर

1193
01:24:56,560 --> 01:25:00,640
तत्व को सदैव पुरुष लिंग से ही संबोधित

1194
01:25:00,640 --> 01:25:04,960
किया जाता है। जबकि स्त्रीलिंग

1195
01:25:04,960 --> 01:25:09,040
से क्यों नहीं हो सकता? मगर बात ये है कि जब स्त्रीलिंग तत्व से

1196
01:25:09,040 --> 01:25:14,160
भी संबोधित कर दिया जाएगा तो क्वेश्चन ये आएगा कि नहीं पुल्लिंग से क्यों नहीं?

1197
01:25:14,160 --> 01:25:18,320
तो किसी एक का चुनाव कर लिया गया। अब वो उसी में प्रासंगिक

1198
01:25:18,320 --> 01:25:22,560
हो गया कि ईश्वर ऐसा करता है। ईश्वर ऐसा करता है।

1199
01:25:22,560 --> 01:25:26,560
यह कभी नहीं कहा जाता ईश्वर ऐसा करती है। जबकि भगवती को भी ईश्वर

1200
01:25:26,560 --> 01:25:30,400
का ही स्वरूप कहा गया है।

1201
01:25:30,400 --> 01:25:34,480
किसी भी एक को चुनोगे आप तो दूसरे का खंडन तुम कह रहे हो।

1202
01:25:34,480 --> 01:25:38,560
खंडन हो गया उस विधा का। और हमने तुम्हें बताया कामाख्या

1203
01:25:38,560 --> 01:25:42,720
का उसने क्या अपना अता पता सार्वजनिक कर रखा था जो हम चले जाए। हमें

1204
01:25:42,720 --> 01:25:46,880
जिसके बारे में ज्ञान प्राप्त हो गया। संज्ञान में आ गया कि भैया ये यहां पर हैं। हम

1205
01:25:46,880 --> 01:25:50,320
वहां चले गए।

1206
01:25:50,320 --> 01:25:54,320
कोई विरोधी हमसे मिलना नहीं चाहता मगर उससे मिलने के लिए अपने घर

1207
01:25:54,320 --> 01:25:59,280
से 1000 किलोमीटर दूर कामाख्या चले जाए। वाह

1208
01:25:59,280 --> 01:26:03,280
गम व्यक्ति वो भी तब जो वो जो

1209
01:26:03,280 --> 01:26:07,360
व्यक्ति लाइव में नहीं आ सकता है। दूर बैठ के ऑनलाइन नहीं जुड़ सकता है। उस व्यक्ति

1210
01:26:07,360 --> 01:26:11,360
से मिलने के लिए हम कामाख्या चले जाए। अरे भैया हमने उससे व्यक्तिगत चर्चा के

1211
01:26:11,360 --> 01:26:15,360
लिए कहा था। उसने मना कर दिया। इसीलिए कहा था कि समाज को हम यह विरोध नहीं

1212
01:26:15,360 --> 01:26:19,440
दिखाना चाहते हैं। जबकि वह गुरुदेव का खंडन बहुत पहले से कर

1213
01:26:19,440 --> 01:26:24,720
रहा था। करपात्री जी का खंडन बहुत पहले कर चुका था। खंडन का प्रयास

1214
01:26:24,720 --> 01:26:29,440
खंडन क्या होता है वो हमने दिखाया निग्रह निकासिका में देख लेना।

1215
01:26:29,440 --> 01:26:34,480
वाक्य स्कलन वाक्य स्कलन। ठीक है?

1216
01:26:34,480 --> 01:26:37,760
चलो अगला चलाओ।

1217
01:26:37,760 --> 01:26:41,760
हेमंत पालीवाल के पास जाकर के क्या सिद्ध कर दिया आपने? उसमें भी

1218
01:26:41,760 --> 01:26:45,440
18 मिनट के आसपास में आपने कट लगाया है। पता नहीं क्या बीच

1219
01:26:45,440 --> 01:26:49,680
में घपला किया है आपने। अरे ऑडियो को भी साबित

1220
01:26:49,680 --> 01:26:54,080
हेमंत पालीवाल को इसने 100 करोड़ का नोटिस भेजा था। हेमंत

1221
01:26:54,080 --> 01:27:00,000
पालीवाल का क्या उत्तर आया तुम्हारे इस भगोड़ानंद ने? क्यों नहीं दिखाया समाज को?

1222
01:27:00,000 --> 01:27:04,080
क्यों नहीं दिखाया? पता है पूछना उससे। तुम किसी से

1223
01:27:04,080 --> 01:27:08,480
यह कह रहे हो अगर कि भैया मैंने तुम्हारे यहां से यौन रोग का

1224
01:27:08,480 --> 01:27:12,560
यौन रोग की चिकित्सा नहीं कराई तो जब कोई तुमसे आकर पूछ रहा है कि कराई

1225
01:27:12,560 --> 01:27:16,880
कि नहीं कराई तो तुम ये क्यों कह रहे हो कि मैं बता नहीं सकता ये क्यों नहीं कह रहे हो कि

1226
01:27:16,880 --> 01:27:21,040
नहीं कराई तो ऐसा हो सकता है ना कि डॉक्टर

1227
01:27:21,040 --> 01:27:25,120
ये कहे कि भाई तुमने कराई तो है मेरे यहां से यौन चिकित्सा तो मैं झूठ तो

1228
01:27:25,120 --> 01:27:29,200
नहीं बोल सकता हूं मेरा धर्म नहीं है झूठ बोलना इसलिए मैं मौन रहूंगा के इस

1229
01:27:29,200 --> 01:27:33,360
विषय में मैं कुछ बता नहीं सकता मैं झूठ क्यों बोलू अपना धर्म का त्याग क्यों करूं

1230
01:27:33,360 --> 01:27:37,920
मैं झूठ बोल करके कि नहीं कराई कराई है क्योंकि तुमने

1231
01:27:37,920 --> 01:27:42,320
ये हो सकता है ना कि उन्होंने उत्तर दिया हो उसमें 100 करोड़ के नोटिस के

1232
01:27:42,320 --> 01:27:46,400
प्रतिकार स्वरूप क्यों नहीं है तो वैसे तो हर चीज को दिखाता

1233
01:27:46,400 --> 01:27:51,040
है देखो ये नोटिस आया ये हुआ है वो हुआ है क्यों नहीं दिखाया इसने वो नोटिस

1234
01:27:51,040 --> 01:27:55,280
नोटिस का जवाब क्या आया कब दिखाएगा हेमंत पालीवाल ने

1235
01:27:55,280 --> 01:27:59,360
इसके नोटिस के जवाब में क्या दिया था जवाब क्यों

1236
01:27:59,360 --> 01:28:01,360
नहीं दिखाया

1237
01:28:01,360 --> 01:28:05,360
तुम्हें ऐसा लग रहा है ना कि सिद्ध कुछ नहीं हुआ तो क्यों इसने हमको

1238
01:28:05,360 --> 01:28:10,320
100 करोड़ का नोटिस भेजा है जब उससे सिद्ध कुछ नहीं हो रहा

1239
01:28:10,320 --> 01:28:16,080
100 करोड़ का नोटिस इस व्यक्ति ने धूर्त व्यक्ति ने क्यों भेजा पूछा

1240
01:28:16,080 --> 01:28:20,080
पूछो जाके हेमंत पालीवाल का क्या उत्तर आया था

1241
01:28:20,080 --> 01:28:24,640
तुम्हारे नोटिस के जवाब में चितड़े उड़ जाएंगे तब तुम्हारे भागतानंद

1242
01:28:24,640 --> 01:28:29,360
के पूछो क्या जवाब दिया हेमंत पालीवाल जी ने

1243
01:28:29,360 --> 01:28:34,160
और जब सिद्ध नहीं हो रहा है तो क्यों परेशान हुए क्यों नोटिस भेजा था

1244
01:28:34,160 --> 01:28:39,360
जब उससे कुछ हो ही नहीं रहा है तो बेवकूफ पक्षपाती

1245
01:28:39,360 --> 01:28:43,680
देखा करो तो कभी-कभी दर्पण चलो कर दीजिएगा उत्तर

1246
01:28:43,680 --> 01:28:47,120
देते हुए के साथ करिएगा

1247
01:28:47,120 --> 01:28:51,200
ठीक है और बोलिए तो मैं आपको अपना चेहरा भी भेज देता हूं एआई के रिलेटेड या कोई भी खैरागरा

1248
01:28:51,200 --> 01:28:55,520
नथूरा इंसान का जो है चेहरा उठा के मेरे इसमें तो मत ही लगाइए

1249
01:28:55,520 --> 01:28:59,520
ठीक है अच्छा हुआ कि अभी हमने किसी अच्छा हुआ

1250
01:28:59,520 --> 01:29:03,840
कि अभी किसी पशु का चेहरा नहीं लगाया है क्योंकि

1251
01:29:03,840 --> 01:29:07,920
कार्य तुम्हारे वही है और अगर कोई ऐसा ऐसा

1252
01:29:07,920 --> 01:29:11,920
जज्बा है सत्य का पक्ष रखने का तो सामने आके बात

1253
01:29:11,920 --> 01:29:16,320
करो समझे हेमंत पालीवाल

1254
01:29:16,320 --> 01:29:16,820
ने

1255
01:29:16,480 --> 01:29:20,800
बहुत बढ़िया जवाब लिख के दिया है हमें अंदर की खबर है बहुत

1256
01:29:20,800 --> 01:29:26,800
अच्छा उत्तर दिया उन्होंने इनके सांप सूंघ गया है तब से

1257
01:29:27,040 --> 01:29:31,200
इनसे कहो अपना वो निर्गत करें हेमंत पालीवाल ने जो नोटिस में उत्तर कर दिया

1258
01:29:31,200 --> 01:29:35,360
है पता चल जाएगा दूध का दूध और पानी

1259
01:29:35,360 --> 01:29:39,360
पानी हम चले हैं किसी और पर

1260
01:29:39,360 --> 01:29:43,520
आक्षेप करने जिन भागवतानंद जी को आप भागवतानंद कह करके संबोधित कर रहे हैं अरे क्या पीएल

1261
01:29:43,520 --> 01:29:47,600
मिश्र की औकात थी वहां पे कि अपने संप्रदाय के ही सिद्धांतों को ले जा

1262
01:29:47,600 --> 01:29:51,680
के और भागवतानंद जी के समक्ष बैठ के उसे शास्त्रार्थ करें वो तो अपने ही संप्रदाय

1263
01:29:51,680 --> 01:29:55,680
के सिद्धांतों के विरुद्ध जा के जो है वक्तव्यव निर्गत कर रहा था दे रहा था संदीप देव के पास और

1264
01:29:55,680 --> 01:29:59,840
संदीप देव की भाषा भागतानंद कह करके आप उन्हें संबोधित कर रहे हैं जो संदीप देव जो है

1265
01:29:59,840 --> 01:30:03,840
अरे निग जी छोड़िए ना संदीप देव ने क्या अभद्र टिप्पणियां नहीं की है सनी सनी

1266
01:30:03,840 --> 01:30:08,000
योनि और किन-किन वैश्याओं का नाम लेकर के उसकी भाषा तो आपको इतनी

1267
01:30:08,000 --> 01:30:13,920
सौहार्द लगी कि आप उनकी ही भाषा बोलने लग गए भाषा एक मिनट

1268
01:30:13,920 --> 01:30:18,240
हमने इस उत्तर का इस बात का उत्तर पहले ही दे दिया है

1269
01:30:18,240 --> 01:30:22,240
संदीप देव जी कब से कर रहे हैं जो तुम उनका ये सब

1270
01:30:22,240 --> 01:30:27,280
कर रहे हो प्रतिकार तुम्हारा ये निग्गू क्या कर रहा था वहां जाकर के

1271
01:30:27,280 --> 01:30:31,360
भागतानंद क्या कर रहा था उनके चैनल पर बैठ बैठ समर्थन प्राप्त हो

1272
01:30:31,360 --> 01:30:31,860
रहा था

1273
01:30:31,520 --> 01:30:35,680
इस दोगले को तब हमने आज तक कभी ना संदीप देव जी के विरोध में कोई वीडियो बनाया

1274
01:30:35,680 --> 01:30:39,680
ना पक्ष में बनाया बनाया क्या तुम्हारा जा

1275
01:30:39,680 --> 01:30:43,840
के वहां पब्लिसिटी पाने के लिए जा रहा था ना उत्तरकांड प्रक्षिप्तता सुनने के बाद भी

1276
01:30:43,840 --> 01:30:49,840
आज तुम लोगों को पता लग रहा है कि ओशोवादी थे वो

1277
01:30:50,720 --> 01:30:54,720
हमने कभी समर्थन दिया क्या ना हमने समर्थन दिया और

1278
01:30:54,720 --> 01:30:59,360
ना ही कभी हमने उनका विरोध किया और विरोध क्यों नहीं किया हमने फिर बताया तुमको

1279
01:30:59,360 --> 01:31:03,520
सब पीछे सुन लेना क्यों नहीं विरोध किया

1280
01:31:03,520 --> 01:31:07,440
चलो प्ले करो

1281
01:31:07,440 --> 01:31:11,040
वहां पे आपको भद्रता नहीं दिखी

1282
01:31:11,040 --> 01:31:16,000
तुम्हारे को दिखीता

1283
01:31:16,000 --> 01:31:20,320
चलो प्ले करो

1284
01:31:20,320 --> 01:31:24,640
क्या नाम है उसका ओशो रजनीश ओशो उसका शिष्य बना बैठा है

1285
01:31:24,640 --> 01:31:28,640
देखो कितने का ले उसी की कितने दूर है रजनीश

1286
01:31:28,640 --> 01:31:32,720
ओशो का शिष्य वो कब बना है जब पीएन मिश्री जी ने वो वक्तव्य दे

1287
01:31:32,720 --> 01:31:36,880
दिया उसके बाद बना है पहले से है कैसे धूर्त

1288
01:31:36,880 --> 01:31:42,240
लोग हो यार तुम शर्म भी नहीं आती तुम लोगों को कुतर्क करते समय

1289
01:31:42,240 --> 01:31:46,960
तुमसे तो अच्छे ही है ना कि अपने धर्म धर्म रक्षा अभियानों को और

1290
01:31:46,960 --> 01:31:51,120
उनहीं लोगों की जो ऐसी गलत बातें कर रहे हैं इन लोगों की अन्य कुछ अच्छी बातों

1291
01:31:51,120 --> 01:31:55,360
के कारण हम कम से कम मौन तो है समर्थन देने तो नहीं जा रहे उनको

1292
01:31:55,360 --> 01:31:59,360
मंच पे तुम लोग तो राम राम श्याम श्याम कर

1293
01:31:59,360 --> 01:32:03,520
रहे हो आप अगर इतना ही दिक्कत है तो भैया वो पीएन

1294
01:32:03,520 --> 01:32:09,520
मिश्र जी के वक्तव्य से पहले से है ना अगर है तो

1295
01:32:10,900 --> 01:32:15,200
[संगीत] चलो

1296
01:32:15,200 --> 01:32:19,200
आलंबन लेकर के आप जो है स्वयं को दिखा रहे हैं कि देखो हमने निग्रचार जी का विरोध

1297
01:32:19,200 --> 01:32:23,200
कर दिया वाह रे किसका आलंबन लेकर के अरे

1298
01:32:23,200 --> 01:32:29,200
महाशय जिस व्यक्ति को शकले और शाकदपी ब्राह्मणों

1299
01:32:29,600 --> 01:32:34,480
ठीक है प्ले करो बकवास है और कुछ नहीं

1300
01:32:34,480 --> 01:32:38,720
का संदर्भ ही नहीं पता है इधर उधर से उठा पर लाभ कर दे रहा है और अपना मंतव्य

1301
01:32:38,720 --> 01:32:42,720
सिद्ध करने के लिए पुराणों को ही प्रक्ष बता दे रहा है अरे मूर्ख

1302
01:32:42,720 --> 01:32:48,160
व्यक्ति जब तू इतना मुंह चला सकता है तो क्यों नहीं करने जाता

1303
01:32:48,160 --> 01:32:52,400
जब तू यह मुंह चला सकता है तेरा पक्ष मजबूत है तो सामना करना

1304
01:32:52,400 --> 01:32:56,400
हम तो इस बार हम यह विरोध नहीं कर रहे हैं कि नहीं भागतांद के मामले

1305
01:32:56,400 --> 01:33:00,400
में संदीप देव जी के माम पीए मिश्र के मामले में अमुक अमुक

1306
01:33:00,400 --> 01:33:04,480
सही है और अमुक अमुक गलत है। हम ये कह रहे हैं भागता भाग क्यों रहा है?

1307
01:33:04,480 --> 01:33:09,760
जब उसका पक्ष मजबूत है तो सामने से जाके करे ना।

1308
01:33:09,760 --> 01:33:13,840
क्यों नहीं कर रहा है सामना? यही जो

1309
01:33:13,840 --> 01:33:18,000
शान की तरीके से बोल रहे हो यही तो बोलना है वहां पर।

1310
01:33:18,000 --> 01:33:22,320
बस यहां पीठ पीछे भक लो। स्वान की तरह

1311
01:33:22,320 --> 01:33:26,320
जाओ जाके सामना करो। हमें जो गलत लगता है वो हम सामने जाकर के बोल देते हैं।

1312
01:33:26,320 --> 01:33:30,320
कहां जाना है बताओ? बोले हम हम जिस चीज में भी लड़ रहे हैं हम पीठ पीछे नहीं

1313
01:33:30,320 --> 01:33:35,520
लड़ रहे हैं। सामना करके सामने से

1314
01:33:35,520 --> 01:33:39,760
ठीक है। पीठ पीछे खाना फूंसी वाली चीजें रिकॉर्डिंग भेज

1315
01:33:39,760 --> 01:33:44,880
देना। ये सब वो लोग करते हैं जिनकी हड्डियों में पानी भरा होता है।

1316
01:33:44,880 --> 01:33:50,880
चलो चलो।

1317
01:33:55,040 --> 01:33:59,120
प्रयोग में ला के और क्या साबित करना चाहते हैं कि आप बहुत बड़े सिद्धांतवादी

1318
01:33:59,120 --> 01:34:03,360
है आप ही के सिद्धांत के अनुकूल आपका ही गुरु भाई नहीं चल रहा है उस

1319
01:34:03,360 --> 01:34:07,360
वहां तो आपकी हैसियत नहीं हुई विरोध करने की आ गए हैं निग्रचार जी का विरोध बता दिया

1320
01:34:07,360 --> 01:34:11,440
बता दिया आगे बढ़ाओ विधवा विलाप बार-बार उसी बात का

1321
01:34:11,440 --> 01:34:17,440
खंडन नहीं कर पाएंगे नई चीज आएगी तो बोल बढ़ाओ

1322
01:34:18,080 --> 01:34:22,880
चलाओ ना पूरा पूरा होने दो उसको

1323
01:34:22,880 --> 01:34:28,880
रिकॉर्डिंग पूरी होने दीजिए

1324
01:34:30,000 --> 01:34:32,480
हम

1325
01:34:32,480 --> 01:34:37,200
निग्रचार का विस्फोटक साक्षात्कार ये भी तो इन दोनों ने किया था

1326
01:34:37,200 --> 01:34:42,560
हमने क्या इसके विरोध में बनाया था वीडियो

1327
01:34:42,560 --> 01:34:45,200
बेवकूफ

1328
01:34:45,200 --> 01:34:49,760
मूर्ख व्यक्ति टूटी बंद हो जाएगी

1329
01:34:49,760 --> 01:34:55,760
सामने आ गए तो

1330
01:34:58,560 --> 01:35:02,640
एक साल पहले क्या कर रहा था भागवतानंद यहां पे तब नहीं

1331
01:35:02,640 --> 01:35:06,880
पता था उत्तरकांड प्रक्षिप्त कहा कर पात्री जी का विरोध किया है ओशोवादी

1332
01:35:06,880 --> 01:35:10,880
है बस जिस व्यक्ति से विरोध हो

1333
01:35:10,880 --> 01:35:15,120
जाए उसकी हिस्ट्री खंगाने लगो उल्टे सीधे अभद्रता से उसके

1334
01:35:15,120 --> 01:35:21,120
लिए शब्द बोलने लगो बाकी आइए जी आइए जी पहले आप पहले आप

1335
01:35:26,480 --> 01:35:30,640
इधर उधर घूमने के लिए तो आपके पास बहुत पैसे हैं चलिए वो रिकॉर्डिंग चलाइए फटाफट बहुत लंबा

1336
01:35:30,640 --> 01:35:36,640
हो जाएगा नहीं तो

1337
01:35:57,200 --> 01:36:03,200
चलाइए

1338
01:36:09,760 --> 01:36:13,760
जिस समय आप हेमंत पालीवाल के पास गए उससे

1339
01:36:13,760 --> 01:36:18,160
तो अच्छा था कि आप जाकर रामा चले जाते वहां पे निग्रचार जी ने भी कहां जाते्या

1340
01:36:18,160 --> 01:36:22,400
में और कहां जाते कामाख्या में

1341
01:36:22,400 --> 01:36:26,560
स्टेशन पे जाकर के हेलो टाटा बाय-ब बोल के वापस आ जाते

1342
01:36:26,560 --> 01:36:30,720
अरे कुछ बोलने से पहले विष्ठा निकालने से पहले सोच तो लिया करो क्या बोल

1343
01:36:30,720 --> 01:36:34,720
रहे हो कुछ तर्कपूर्ण बात है हमें पता है सामने वाला मिलना नहीं

1344
01:36:34,720 --> 01:36:38,880
चाहता हमें उसका एड्रेस नहीं पता है हम कामाख्या का टिकट कटा ले चले जाए कामाख्या

1345
01:36:38,880 --> 01:36:43,040
क्यों जाए और जब वो सौहार्दपूर्ण चर्चा कोई सामंजस्य वाली

1346
01:36:43,040 --> 01:36:47,280
भावना रखता नहीं हमारे लिए क्यों चले जाए

1347
01:36:47,280 --> 01:36:51,280
तुम आ जाओ यहां पर या ऑडियो मैसेज भेजने की बजाय

1348
01:36:51,280 --> 01:36:55,280
आओगे चलो टिकट के पैसे भी मैं दे दूंगा तुम कहोगे कि टिकट नहीं है

1349
01:36:55,280 --> 01:36:59,440
पैसे नहीं है ₹000 ज्यादा दे दूंगा चलो आओगे

1350
01:36:59,440 --> 01:37:03,760
आ जाओ नहीं आओगे क्यों नहीं आओगे कहीं शिवश

1351
01:37:03,760 --> 01:37:06,960
हमको पीट ना दे

1352
01:37:06,960 --> 01:37:12,160
खैर मैं पिटने इत्यादि की वजह से नहीं ऐसा किया था मैंने

1353
01:37:12,160 --> 01:37:16,320
कामाख्या में जाता जब मुझे ऐसा लगता कि वो चर्चा

1354
01:37:16,320 --> 01:37:20,320
में विश्वास रखता है। ठीक है? वो

1355
01:37:20,320 --> 01:37:24,320
भड़काऊ चीजें करके अपने फॉलोवरर्स, अपने व्यूज पाना चाहता

1356
01:37:24,320 --> 01:37:24,820
था।

1357
01:37:24,800 --> 01:37:28,880
जो हमें लगा कि जब वो चर्चा इत्यादि को लेकर के नकारात्मक है

1358
01:37:28,880 --> 01:37:33,520
तो हम क्यों जाए भाई? सामने वाला का सामने वाले का ही आत्मसम्मान

1359
01:37:33,520 --> 01:37:37,680
है। हमारा आत्मसम्मान नहीं है। सामने वाला मना कर रहा है कि हमें नहीं

1360
01:37:37,680 --> 01:37:41,760
करनी है। अब तुम हो कौन? जब वो ये बना रहा है वीडियो। तुम हो

1361
01:37:41,760 --> 01:37:46,000
कौन? क्यों करें तुम? जो दो दिन पहले हमसे कह रहा है हमसे

1362
01:37:46,000 --> 01:37:50,000
चर्चा कर लीजिए और फिर दो-तीन दिन बाद जब उसने देखा कि आक्रामक

1363
01:37:50,000 --> 01:37:54,320
भी हो सकता है तो कह रहा तुम हो कौन उसके पास हम क्यों जाए भाई चलो

1364
01:37:54,320 --> 01:37:58,640
प्ले करो

1365
01:37:58,640 --> 01:38:02,720
तो निग्रचार्य जी तो आ नहीं सकते थे उनका अपना जो है साधन जो उनका चलता है वो चल रहा था

1366
01:38:02,720 --> 01:38:07,120
और वो सब वो वो सनातन सिद्धांत है

1367
01:38:07,120 --> 01:38:11,440
भागतानंद जो करता है वो सब सनातन सिद्धांत है बहुत

1368
01:38:11,440 --> 01:38:15,680
बढ़िया से टॉफी चॉकलेट खोल लो खा अकेले अकेले खुश हो जा। बहुत

1369
01:38:15,680 --> 01:38:19,200
बढ़िया मिठाई हमने परोस दी।

1370
01:38:19,200 --> 01:38:23,280
प्ले करो। महाशय कि आपके पास जो है निघाचार्य जी के पास जाने

1371
01:38:23,280 --> 01:38:27,520
के लिए समय नहीं है। लेकिन व्यर्थ के लोगों के पास जाने के लिए समय है। व्यर्थ के लोग नहीं थे।

1372
01:38:27,520 --> 01:38:31,520
आचार्य कोटि के व्यर्थ के लोग नहीं थे।

1373
01:38:31,520 --> 01:38:36,160
जितने लोगों को हमने समय दिया है वो सब बहुत परिणाम स्वरूप है। निग्राचार्य जरूर

1374
01:38:36,160 --> 01:38:40,320
ये तुम जिसको निग्राचार्य कह रहे हो भागतानंद। भागतानंद जरूर

1375
01:38:40,320 --> 01:38:44,400
व्यर्थ का व्यक्ति है। जिसका ना कोई अड़ा है ना पिछाड़ा

1376
01:38:44,400 --> 01:38:48,560
है। एक नंबर का व्यर्थ व्यक्ति जो

1377
01:38:48,560 --> 01:38:52,560
कहता है कि मुझे मैं अगर शास्त्रार्थ से निग्रह नहीं होगा तो मैं

1378
01:38:52,560 --> 01:38:56,560
शस्त्र से करूंगा और ना वो शास्त्रार्थ करता है ना शास्त्र करता है वो

1379
01:38:56,560 --> 01:39:01,360
तो वीडियो बनाता है। पोस्टमार्टम कहता है उस वीडियो बनाने को।

1380
01:39:01,360 --> 01:39:05,440
यह है व्यर्थ का व्यक्ति जिसकी अपनी परंपरा वो कहता है निगमंद

1381
01:39:05,440 --> 01:39:09,600
से आती है और जिस फ्रीशन थिसफिकल सोसाइटी का वो विरोध करता है

1382
01:39:09,600 --> 01:39:14,080
वही उसी की परंपरा उसी में घुस जाती है जाकर के चलो

1383
01:39:14,080 --> 01:39:18,720
व्यक्तियों को नहीं गिन रहे है

1384
01:39:18,720 --> 01:39:22,800
यदि सिद्धांत बल है आप में धरातल पर उतरे हुए व्यक्ति है धर्म के लिए जाइए

1385
01:39:22,800 --> 01:39:26,800
ग्रहचार्य जी के पास क्यों नहीं एक बार जा के जो है स्पष्ट रूप से लाइव आ

1386
01:39:26,800 --> 01:39:30,800
जाइए उनके समक्ष बैठ के और कर लीजिए जो करना है आपको डिबेट

1387
01:39:30,800 --> 01:39:35,040
देख लेते हैं कितना सिद्धांतवादी है और कितने अपने शंकर परंपरा के सिद्धांतों के अनुकूल

1388
01:39:35,040 --> 01:39:39,120
चलने वाले हैं औरंद

1389
01:39:39,120 --> 01:39:43,120
से अभी हमने अपने लास्ट वीडियो में भी कहा है अभी भी कह रहे हैं पोस्ट

1390
01:39:43,120 --> 01:39:47,280
में कहा है कि भागतानंद को जब भी अनुकूल लगे अभी

1391
01:39:47,280 --> 01:39:51,520
नहीं तो 15 दिन बाद एक महीने बाद तो वो आ जाए विद्या

1392
01:39:51,520 --> 01:39:55,840
भास्कर जी महाराज के सामने बैठकर के कर ले हमसे चर्चा हम क्यों जाए भाई

1393
01:39:55,840 --> 01:40:00,080
वो कोई हमसे वरिष्ठ है क्या जो हम चले जाए उसके पास जो मना मना

1394
01:40:00,080 --> 01:40:04,240
कर रहा है कि हमें चर्चा नहीं करनी हम फिर भी अरे प्लीज हमसे चर्चा कर लीजिए है कौन

1395
01:40:04,240 --> 01:40:08,400
वो तुर्रम खान है कोई अगर उस तरीके

1396
01:40:08,400 --> 01:40:13,680
से देखा जाए तो वो तो जैसे कोई नाजायज औलाद होती है

1397
01:40:13,680 --> 01:40:17,680
जिसको हराम कहा जाता है उसमें

1398
01:40:17,680 --> 01:40:21,680
ऐसे ही धर्म के क्षेत्र में उसकी छवि है जिसका कोई पिता नहीं

1399
01:40:21,680 --> 01:40:25,840
है अर्थात जिसका कोई गुरु नहीं है और उसने जो अपनी नकली परंपरा बताई

1400
01:40:25,840 --> 01:40:29,680
है उसकी धज्जिया भी उड़ रही है देखिए

1401
01:40:29,680 --> 01:40:30,180
उड़

1402
01:40:30,160 --> 01:40:34,160
रही है। उड़ा दी। आगे भी उड़ेगी। तो

1403
01:40:34,160 --> 01:40:38,560
धर्म के क्षेत्र में तो वह एक वैसा व्यक्ति है ना जिसको कहेंगे

1404
01:40:38,560 --> 01:40:42,560
अवैध संतान किसी की। जिसको अपने पिता का नाम नहीं

1405
01:40:42,560 --> 01:40:46,800
मालूम होता है। ऐसे व्यक्ति के मना करने के बाद भी हम उसके चक्कर काटे

1406
01:40:46,800 --> 01:40:51,120
कि हम आपसे चर्चा करना चाहते हैं। और हम ये अपेक्षा करें ऐसे दोगले

1407
01:40:51,120 --> 01:40:55,120
व्यक्ति से कि हम वहां जब जाएं तो हमारे बड़े अनुकूल रहे। सारा वातावरण

1408
01:40:55,120 --> 01:41:01,120
वहां का। चले जाएं हम मुंह उठा के।

1409
01:41:01,280 --> 01:41:05,200
चलो

1410
01:41:05,200 --> 01:41:09,280
जी के भी विषयों को रखिएगा और निगमंद जी के बारे में भी पूछ करके आइएगा और उस विषय को सार्वजनिक

1411
01:41:09,280 --> 01:41:12,080
करिएगा और ये

1412
01:41:12,080 --> 01:41:16,480
एक बात और है एक बात और है पॉज करो इस तुम्हारे इस धूर्त

1413
01:41:16,480 --> 01:41:20,640
व्यक्ति ने ही कहा है कि जब ये वीडियो

1414
01:41:20,640 --> 01:41:24,720
कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी चर्चा हो सकती है तो क्यों भाई आने का आने

1415
01:41:24,720 --> 01:41:28,880
का ही आने की अनिवार्यता हो तो मैं तो दूर से पूछ रहा हूं।

1416
01:41:28,880 --> 01:41:33,520
तू ये चाहता है कि मैं कामाख्या जाऊं, यहां जाऊं, वहां जाऊं। हैं?

1417
01:41:33,520 --> 01:41:37,600
और तेरा जो ये भागतांद है ना अभी पुलिस को बयान देने के लिए आया

1418
01:41:37,600 --> 01:41:41,920
था लखनऊ। अगर इसने मुझे बता दिया होता तो हो जाती चर्चा। मगर

1419
01:41:41,920 --> 01:41:46,000
चोरों की तरह आया और चोरों की तरह चला गया। पूछ जाकर के

1420
01:41:46,000 --> 01:41:50,000
वहां क्यों नहीं शिवन से संपर्क किया था। आप गए तो थे वहां पर। तूने अभी कहा

1421
01:41:50,000 --> 01:41:54,320
ना कि वो तो नहीं आ सकते। निग्रचार्य जी तो नहीं आ सकते।

1422
01:41:54,320 --> 01:41:58,400
पूछ निग्राचार उन्नाव तक आया था कि नहीं भागता भागता पूछ अपने

1423
01:41:58,400 --> 01:42:02,800
निग्राचार से पूछ बयान देके गया कि नहीं

1424
01:42:02,800 --> 01:42:08,480
पुलिस की मार की बात ही है निराली गूंगा भी गाय कब वाली

1425
01:42:08,480 --> 01:42:12,560
आए थे तुम्हारे वो जो साधनाएं चल रही तुम्हारा वो सनातन सिद्धांत

1426
01:42:12,560 --> 01:42:16,560
टूट गया पांच मिनट पहले तुमने सनातन सिद्धांत बताया निग्रचार जी तो आ नहीं

1427
01:42:16,560 --> 01:42:21,680
सकते आए थे यहां तुम्हें मिलाते हुए बयान देके गए हैं फिर आएंगे

1428
01:42:21,680 --> 01:42:25,840
फिर आएंगे कोर्ट में वो वो अभी केस खत्म थोड़ी ना हुआ है। चार्जशीट दाखिल

1429
01:42:25,840 --> 01:42:30,000
होगी। आएंगे तुम्हारे बाबूजी हम तब मन जारी

1430
01:42:30,000 --> 01:42:34,000
होगा। आना पड़ेगा न्यायालय। आएंगे तुम्हारे बाबूजी। तो ये कहना छोड़

1431
01:42:34,000 --> 01:42:38,400
दो कि वो आ नहीं सकते। हां मगर उसने हमें बताया होता तो हम उससे जरूर

1432
01:42:38,400 --> 01:42:42,640
मिल लेते जा के। अगर वो ये दिखाता कि हां भाई मैं इंटरेस्टेड हूं।

1433
01:42:42,640 --> 01:42:47,040
वरना वो अगर किसी कमरे के अंदर है और हम बाहर जाके कहे कि भागवतानंद

1434
01:42:47,040 --> 01:42:51,040
हमें तुमसे चर्चा करनी है। वो कह दे हमें नहीं करनी। तो हम ऐसा अपमान

1435
01:42:51,040 --> 01:42:56,000
क्यों करवाए अपना?

1436
01:42:56,000 --> 01:43:00,080
चलो आनंद बीच में जो है कुत्ते की पूछ जैसे जो है

1437
01:43:00,080 --> 01:43:04,720
बीच में ना आ जाए टेढ़ी हो के क्या बोल रहा है

1438
01:43:04,720 --> 01:43:09,920
यहां पे आपको भाषा कठोर लगेगी चलो खैर वो कठोर

1439
01:43:09,920 --> 01:43:14,000
नहीं कर सकते हैं अपने वाचिक क्रिया से आप हमें

1440
01:43:14,000 --> 01:43:18,080
वहां धूत बोल सकते हैं वहां मूर्ख बोल सकते हैं इस जगह पे जो कि आप बोलिएगा ही बोलिएगा ठीक

1441
01:43:18,080 --> 01:43:22,160
है यह भी आप बोल ही दीजिएगा कि निग्र आचार्य जी ने तुम्हें क्या सिखाया है अरे

1442
01:43:22,160 --> 01:43:26,240
भैया भैया क्या सिखाया है नहीं सिखाया है वो छोड़िए ना हम उनके पास बैठ के कभी पढ़े नहीं है कि

1443
01:43:26,240 --> 01:43:31,440
वो हमको सिखाएंगे ठीक है देखो इस व्यक्ति ने किया

1444
01:43:31,440 --> 01:43:35,600
अपना अनुमान लगा के एक समस्या वो समस्या को जन्म

1445
01:43:35,600 --> 01:43:39,680
दिया कि तुम हमसे पूछ सकते हो और

1446
01:43:39,680 --> 01:43:43,920
हमको हम भले ही हम पूछने में इंटरेस्टेड नहीं है मगर

1447
01:43:43,920 --> 01:43:48,240
अपने आप के तुम हमसे पूछोगे जन्म दे के अब उसका उत्तर दे रहा है बेवकूफ

1448
01:43:48,240 --> 01:43:52,400
अरे हमें इंटरेस्ट नहीं है तुम्हें तुमने निग्राचार्य से क्या सीखा है हमें मालूम है क्या सीखा क्या

1449
01:43:52,400 --> 01:43:56,960
नहीं सीखा है जबरदस्ती जैसे कि

1450
01:43:56,960 --> 01:44:00,960
गायत्री मंत्र बहुत आवश्यक है। प्रत्येक मनुष्य को पढ़ना आवश्यक है।

1451
01:44:00,960 --> 01:44:04,960
बहुत प्रत्येक मनुष्य पहले अब उड़ा दो गायत्री मंत्र से ही मोक्ष

1452
01:44:04,960 --> 01:44:08,960
मिलेगा केवल। नाम जप से मोक्ष नहीं मिलेगा। केवल गायत्री मंत्र से। उसके

1453
01:44:08,960 --> 01:44:11,200
बाद कहो कि तुम्हारे जो आचार्य गण

1454
01:44:11,200 --> 01:44:15,280
है ना वो तुमको शूद्रों को गायत्री मंत्र पढ़ना नहीं पढ़ने नहीं देना चाहते।

1455
01:44:15,280 --> 01:44:19,600
मतलब जो समस्या थी ही नहीं उसको पहले जन्म दो और

1456
01:44:19,600 --> 01:44:23,680
उस समस्या का नाम लेकर के उसको फिर चिपका दो उसके आधार पर

1457
01:44:23,680 --> 01:44:28,000
अपने मंतव्य की सिद्धि करो वही तुम कर रहे हो यहां पर चलोगे आगे बढ़ो

1458
01:44:28,000 --> 01:44:32,160
ये पढ़े होते और तब आप अगर ये शब्द हमारे लिए प्रयोग में लाते तो भले वो कुछ

1459
01:44:32,160 --> 01:44:36,160
सेंस रखता वहां पे कि हम निग्रचार्य जी के समक्ष बैठ के पढ़े हैं तो निग्रहचार्य

1460
01:44:36,160 --> 01:44:40,560
जी ने हमें भाषा की मर्यादा नहीं सिखाई। अब यहां भी आप उल्टा प्रणाम मत कर दीजिएगा कि निग्रचार

1461
01:44:40,560 --> 01:44:44,640
जी को भी भाषा की मर्यादा नहीं पता है। आपको यदि कुछ भी आक्षेप लगाना है या

1462
01:44:44,640 --> 01:44:48,720
कुछ भी अपना प्रश्न रखना है या जो भी करना है आपको हम आपको चैलेंज देते हैं।

1463
01:44:48,720 --> 01:44:52,800
आप जाइए निग्रचार जी के पास और जाकर के उनके समक्ष बैठ के जो करना है करिए। अरे कहां

1464
01:44:52,800 --> 01:44:56,800
चले जाए? पहले अपने भगोनंद से कहो ना कि हां

1465
01:44:56,800 --> 01:45:00,960
वो चर्चा करना चाहता है। हो कौन तुम? तुम्हारा

1466
01:45:00,960 --> 01:45:04,960
अपना खुद का अस्तित्व ही नहीं है। कुछ काले चोर की तरीके से किसी की

1467
01:45:04,960 --> 01:45:09,040
अवैध संतान की तरीके से तो तुम ऑडियो भेज रहे हो। जैसे तुमको तुम्हारे घर

1468
01:45:09,040 --> 01:45:13,040
वालों ने या तुम्हारे जीवन में कुछ ऐसा घट गया है जिसके कारण तुम मुंह

1469
01:45:13,040 --> 01:45:17,040
दिखाने के लायक नहीं बचे हो। होता है ना घटनाएं घटित हो जाती है।

1470
01:45:17,040 --> 01:45:21,120
लड़कों के साथ भी हो जाती है। तो मुंह दिखाने के लायक जब कोई नहीं बचता है वो इस तरीके

1471
01:45:21,120 --> 01:45:25,120
से चोरी करता है। मुंह को छुपाता फिरता है। हम कैसे मान ले कि तुम ये जो

1472
01:45:25,120 --> 01:45:26,320
तुम जो कह रहे हो कि

1473
01:45:26,320 --> 01:45:30,400
भागता के यहां चले जाओ तो तुम्हारे कह देने से हम अगर चले जाएंगे तो वो

1474
01:45:30,400 --> 01:45:34,480
हमें समय देगा। और वो जब यहां लखनऊ आता है जबकि वो कह चुका है कि

1475
01:45:34,480 --> 01:45:39,200
मैं चर्चा नहीं करूंगा। और यदि वह तैयार भी है

1476
01:45:39,200 --> 01:45:43,280
तो यह हमें अधिकार है चुनाव करने का कि हम जाए या

1477
01:45:43,280 --> 01:45:47,280
ना जाए या फिर उसको बीच की जगह पर बुलाए ना उसकी हो ना हमारी हो

1478
01:45:47,280 --> 01:45:51,360
रामपाल वाले भी कहते हैं धना आश्रम चले जाओ धनाना आश्रम चले जाओ कभी

1479
01:45:51,360 --> 01:45:55,920
वहां से रामपाल के यहां से अधिकृत लोगों द्वारा फोन नहीं आता है

1480
01:45:55,920 --> 01:46:00,640
सब भक्त ये जो उसके जो भक्त हैं तथाकथित सो कॉल्ड बेवकूफ

1481
01:46:00,640 --> 01:46:04,720
वो कहते रहते धना आश्रम चले जाओ हम चले जाए मुंह उठा के भले ही धना

1482
01:46:04,720 --> 01:46:09,680
आश्रम में मुंह छुपा रहे हैं वो लोग। मगर एक बात मैं कहूंगा

1483
01:46:09,680 --> 01:46:13,840
कि भागतानंद और इस जैसे

1484
01:46:13,840 --> 01:46:19,840
आर्य समाज वालों से बात करने इत्यादि में

1485
01:46:20,240 --> 01:46:24,560
बात करने में और व्यवहार कुशलता में ये स्कॉन

1486
01:46:24,560 --> 01:46:28,640
और रामपाल के लोग बहुत सही है। ये लोग

1487
01:46:28,640 --> 01:46:33,200
नीचता पे नहीं आते हैं। ये वाली पे

1488
01:46:33,200 --> 01:46:37,360
तुच्छ वाली भाषा पे जैसे भागतानंद आता है। गिरी हुई बातें करने लगता। उसके

1489
01:46:37,360 --> 01:46:41,600
फॉलोअर्स करने लगते हैं। आर्य समाज भी करते हैं इस तरीके से। आर्य

1490
01:46:41,600 --> 01:46:45,760
समाजी भी इस तरीके से बात करने लगते हैं। मगर ये मैंने देखा

1491
01:46:45,760 --> 01:46:49,840
कि रामपाल के जो वो होंगे वो रामपाल की कही हुई जो चीजें

1492
01:46:49,840 --> 01:46:53,920
हैं उसका बहुत पालन करने का प्रयास करते हैं। जैसे अब

1493
01:46:53,920 --> 01:46:57,920
इसने कहा कि भागतानंद ऐसा करता है। अब ये मत कहने लगना। क्यों ना कहे?

1494
01:46:57,920 --> 01:47:02,000
अरे भाई तुम राम को मानने का दावा करते हो ना तो राम ने सिखाया

1495
01:47:02,000 --> 01:47:05,040
है क्या गाली देना?

1496
01:47:05,040 --> 01:47:09,120
तो वो गाली देगा तो हम प्रश्न करेंगे ना तू दे उत्तर तू आया

1497
01:47:09,120 --> 01:47:12,560
उसकी तरफ से तो

1498
01:47:12,560 --> 01:47:16,640
चलो और नहीं कर सकते हैं तो अपनी कपोल बुद्धि के साथ

1499
01:47:16,640 --> 01:47:20,880
जो है ना ये जो बड़बड़ बड़बड़ करते रहते हैं इसको बंद रखिए

1500
01:47:20,880 --> 01:47:25,040
हम आपके सिद्धांत में कनिक भी तेज नहीं है पूरा निश्चय ही सिद्धांत है आपका

1501
01:47:25,040 --> 01:47:29,760
हम आदि शंकराचार्य जी का नहीं आपका आपके भीतर जो व्याप्त सिद्धांत है उसका

1502
01:47:29,760 --> 01:47:33,040
हम नारायण

1503
01:47:33,040 --> 01:47:37,120
और भी भी कोई रिकॉर्डिंग है

1504
01:47:37,120 --> 01:47:41,680
तो ये इनके वो है ये निर्णय देके चले गए इस पर तो हम क्या ही बोले

1505
01:47:41,680 --> 01:47:45,840
भाई वो तो तुम अपना निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हो किसके सिद्धांत में दम है कि नहीं तर्क

1506
01:47:45,840 --> 01:47:49,920
दोगे तो हम उसका वो देंगे उत्तर अपने

1507
01:47:49,920 --> 01:47:54,080
सिद्धांत के पक्ष में जो तुमने निर्णय दिया है लास्ट में उसके पक्ष में जो तुमने तर्क

1508
01:47:54,080 --> 01:47:58,240
दिए वो सब कुतर्क है और सामने आओगे तो बता

1509
01:47:58,240 --> 01:48:02,320
रहा हूं मैं उसकी तरह भागता नंद की तरह नहीं बात अपना जनेऊ निकालिए मेरा

1510
01:48:02,320 --> 01:48:06,320
जनेऊ मैं गंगा में उतर गया हूं। मैं शिव पुराण का शपथ ले रहा हूं। ये

1511
01:48:06,320 --> 01:48:10,320
सब मेरे पास नहीं है। ठीक है? सामने आओगे तो त्रुटि

1512
01:48:10,320 --> 01:48:14,400
बंद हो जाएगी। हम हो के एकदम

1513
01:48:14,400 --> 01:48:18,960
आवेश में आ के आपके समक्ष जो है और प्रलाप करने के

1514
01:48:18,960 --> 01:48:23,120
अब यह मत कह दीजिएगा कि हम जो है अग्रेसिव होकर के एकदम

1515
01:48:23,120 --> 01:48:27,120
आवेश में आकर के आपके समक्ष जो है और प्रलाप करने

1516
01:48:27,120 --> 01:48:27,760
के लिए

1517
01:48:27,760 --> 01:48:31,760
प्रस्तुत हो गए। हां यही हो रहा है। रखा है।

1518
01:48:31,760 --> 01:48:35,840
यही हो ही रहा है। कई बार ऐसा होता है। सुनो कई बार कुछ लोग क्या

1519
01:48:35,840 --> 01:48:40,160
होता है एक बार एक मेरा कार का ड्राइवर

1520
01:48:40,160 --> 01:48:45,120
था। बहुत पहले की बात है। सात आठ साल पहले की

1521
01:48:45,120 --> 01:48:50,960
तो वो कार का ड्राइवर था। वो किसी को परेशान कर रहा था।

1522
01:48:50,960 --> 01:48:55,520
तो मुझे उस तरफ से फोन आया। वो किसी कन्या को परेशान कर रहा था। तो मैं अपने

1523
01:48:55,520 --> 01:48:59,840
वो मुझे बहुत मानता था बड़े भाई की तरह। तो मैं अपने दो चार

1524
01:48:59,840 --> 01:49:04,160
साथियों को लेकर के गया कि आज मैं जो है इसको बहुत मार लगाऊंगा।

1525
01:49:04,160 --> 01:49:08,400
यह जो है कन्या को परेशान कर रहा है। तो मैं गया तो जैसे

1526
01:49:08,400 --> 01:49:12,400
ही उसने मुझे देखा कि भैया आ चुके हैं। वैसे

1527
01:49:12,400 --> 01:49:17,120
ही पहले से बोलने लगा भैया मारो मुझे मारो मारो भैया मुझे मारो।

1528
01:49:17,120 --> 01:49:21,520
मतलब वो ये बताने लगा दो वो ये दिखाने लगा

1529
01:49:21,520 --> 01:49:25,600
ऐसा भाव प्रस्तुत करने का। देखो मैंने तो कहा ही था ये मारेंगे।

1530
01:49:25,600 --> 01:49:30,400
तो देखो मार रहे देखा मतलब अपनी मार के समय भी अपने आप को

1531
01:49:30,400 --> 01:49:34,560
लोगों की नजरों में सही सिद्ध करने का एक प्रयास होता है

1532
01:49:34,560 --> 01:49:38,640
जब एक्सपेक्टेड है कि गाली देने पर तुम ऐसा कह सकते हो तो

1533
01:49:38,640 --> 01:49:42,640
कहा जाएगा तो तुम पहले से ही बता दो अब ये ना कहने लगना कि गाली

1534
01:49:42,640 --> 01:49:43,140
क्यों

1535
01:49:42,880 --> 01:49:46,880
दी है ना क्यों ना कहा जाए भाई गाली देना गलत है

1536
01:49:46,880 --> 01:49:51,040
और ऐसा कहा इसलिए जाता है भविष्य जो है भविष्य को व्यक्त इसलिए

1537
01:49:51,040 --> 01:49:55,120
कहा करा जाता है जिससे कि वो गाली को लेकर के जो खंडन होने

1538
01:49:55,120 --> 01:49:59,120
वाला है। उसमें कुछ ना उससे जो होने वाली उससे होने वाला जो अपमान

1539
01:49:59,120 --> 01:50:03,280
है उसमें थोड़ा तो कुछ कमी आ जाए वैसा ही यहां कर रहे हो। यह मत

1540
01:50:03,280 --> 01:50:07,280
कहने लगना वो मत कहने लगना। और जब मैं कहूं तो भैया मैंने तो पहले

1541
01:50:07,280 --> 01:50:11,360
ही कहा था ये कहेंगे देखा तो व्यक्ति इस बात पे ध्यान देने की बजाय देखो इसने गाली

1542
01:50:11,360 --> 01:50:15,360
दी। देखो इसने कन्या को परेशान किया। इसलिए इसके मार लग रही है।

1543
01:50:15,360 --> 01:50:19,440
बल्कि इससे ज्यादा प्रभाव देव का उसने कहा था वही हुआ। ये कोई बात है

1544
01:50:19,440 --> 01:50:23,600
क्या? जो गलत है उसको गलत कहा जाएगा। तुम पहले से ही बता दोगे गलत कहेंगे तो उससे

1545
01:50:23,600 --> 01:50:28,000
वो गलत का प्रभाव कम हो जाएगा क्या? चलो

1546
01:50:28,000 --> 01:50:32,080
प्ले करो। उत्तर देना है दीजिए नहीं देना है मत दीजिए।

1547
01:50:32,080 --> 01:50:36,080
उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। फर्क नहीं पड़ता तभी तो

1548
01:50:36,080 --> 01:50:40,480
अवैध संतान की तरीके से भेज रहे हो। तेजस्वीता है

1549
01:50:40,480 --> 01:50:44,560
तो जाकर के निग्रहचार्य जी के समक्ष बैठ के उनसे दे दिया भैया आगे

1550
01:50:44,560 --> 01:50:48,640
बढ़ाओ। तेज कर दो ना। से निग्रहचार्य जी के सामने जाकर के

1551
01:50:48,640 --> 01:50:52,720
बैठिए। कौन है निग्राचार्य भाई पहले तू सिद्ध बता तो

1552
01:50:52,720 --> 01:50:56,960
दे मुझे चल यही बता दे कब आ रहा है बता दे कौन है निग्राचार्य

1553
01:50:56,960 --> 01:50:57,920
मैं मान जाऊंगा

1554
01:50:57,920 --> 01:51:02,000
तुझे कब आ रहा है निगराचार्य ही सिद्ध कर दे उसे जो तू बार-बार निग्राचार्य बोल रहा

1555
01:51:02,000 --> 01:51:04,480
है

1556
01:51:04,480 --> 01:51:07,360
कि यदि शास्त्रार्थ

1557
01:51:07,360 --> 01:51:11,360
में भाग ना लेने के कारण आप निग्रचार्य

1558
01:51:11,360 --> 01:51:15,440
जी को भागानंद कह करके संबोधित कर रहे हैं तो जाकर के पहले पीएल मिश्र को से कहिए कि आप अपने

1559
01:51:15,440 --> 01:51:19,760
सिद्धांत के अनुकूल चलिए और फिर जाकर के जो है उनसे शास्त्र अरे मेरे

1560
01:51:19,760 --> 01:51:23,840
भाई वो अपने सिद्धांत के अनुकूल चल रहे हैं कि नहीं चल रहे यही शास्त्रार्थ में

1561
01:51:23,840 --> 01:51:27,840
सिद्ध करना जाकर के तू जो भी व्यक्ति

1562
01:51:27,840 --> 01:51:32,320
दुनिया में किसी भी सामने वाले दार्शनिक या धार्मिक पक्ष के अनुकूल

1563
01:51:32,320 --> 01:51:36,400
नहीं है उसके अनुसार वो उसके अनुसार अपने सिद्धांत के अनुसार नहीं

1564
01:51:36,400 --> 01:51:40,400
चल रहा है। एट द एंड जो अपने को मानव कह रहा है कि मैं मनुष्य

1565
01:51:40,400 --> 01:51:45,200
हूं। मनुष्य का सिद्धांत है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में अंतर करना।

1566
01:51:45,200 --> 01:51:49,360
और अंतर करने का आधार है सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर। तो जो

1567
01:51:49,360 --> 01:51:53,440
भी व्यक्ति सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर को सर्वशक्तिमान नहीं मान रहा है वो

1568
01:51:53,440 --> 01:51:57,520
किसी ना किसी एन केन प्रकार ने अपने मनुष्य होने का खंडन कर रहा है। तो

1569
01:51:57,520 --> 01:52:01,840
बस कहीं दुनिया में अब शास्त्रार्थ होगा ही नहीं। भले

1570
01:52:01,840 --> 01:52:07,680
ही वो बाधित ईश्वर को माने या ना माने। क्या बेवकूफी है।

1571
01:52:07,680 --> 01:52:11,040
चलो

1572
01:52:11,040 --> 01:52:15,440
कर लिया। ठीक है। तुम अरे तुम जो मुंह चला रहे हो स्वान

1573
01:52:15,440 --> 01:52:19,760
की भांति जो ये मुंह चला रहे हो यही मुंह चलाओ ना वहां जाकर के

1574
01:52:19,760 --> 01:52:23,920
तुम वीडियो बना रहे हो तीनती घंटे के जंगल में जाकर के नारनिया के जंगल

1575
01:52:23,920 --> 01:52:28,000
दिखा रहे हो वहां जाकर टहल टहल करके वीडियो बना रहे हो अपनी

1576
01:52:28,000 --> 01:52:32,000
वो पिशाचनी को ढूंढ रहे होगे परना में वो मिलने

1577
01:52:32,000 --> 01:52:36,000
आई होगी तो वही जंगलों में अपना जा रहे हो अपना खैर वो तुम ये

1578
01:52:36,000 --> 01:52:40,080
सब कर रहे हो तुम क्यों नहीं जाकर के वही तर्क वही प्रमाण जो तुम वीडियो में दे

1579
01:52:40,080 --> 01:52:44,080
रहे हो वो सामने से इसको कायरता कहते हैं मेरे भाई और ये तुमको नहीं

1580
01:52:44,080 --> 01:52:48,080
दिखेगा जिनके मुख से विठा निकलती है उनको आचार्य मानने

1581
01:52:48,080 --> 01:52:52,320
वालों को ये नहीं दिखेगा ये दिखेगा जो थोड़ा प्रबुद्ध

1582
01:52:52,320 --> 01:52:56,480
वर्ग होगा उसको तुम्हें भी दिख सकता होगा दिखता होगा

1583
01:52:56,480 --> 01:53:01,040
ऐसा मैंने समझा था जब तुम्हारा प्रथम कॉल आया था चलिए चलाई चलाई

1584
01:53:01,040 --> 01:53:06,240
ना हो अपने संप्रदाय से हो वो क्या शास्त्रार्थ करेगा जी हां

1585
01:53:06,240 --> 01:53:10,240
क्या रामानुज संप्रदाय और जब शंकर संप्रदाय का शास्त्रार्थ होता

1586
01:53:10,240 --> 01:53:14,240
था पूर्व में कभी हुआ होगा तब क्या रामानुज संप्रदायों

1587
01:53:14,240 --> 01:53:18,400
ने अपने सिद्धांत के विरुद्ध जाकर के कोई भाषण किया क्या या

1588
01:53:18,400 --> 01:53:22,480
शंकर परंपरा के आचार्य ने कभी शंकर परंपरा के सिद्धांत के विरुद्ध जा के

1589
01:53:22,480 --> 01:53:26,080
जो है शास्त्रार्थ किया था क्या ये बेवकूफ कैसा व्यक्ति

1590
01:53:26,080 --> 01:53:30,240
है बार-बार वही विरुद्ध जाकर के कितना तर्क दे चुका है तेरे को एक

1591
01:53:30,240 --> 01:53:35,280
ही बात को रिपीट कर किया है इसने देखो तो इसका प्रलापन

1592
01:53:35,280 --> 01:53:39,360
वाले चैतन्य महाप्रभु के विरोध में ही कर रहे हैं हमारे अनुसार कार्य

1593
01:53:39,360 --> 01:53:44,640
तो इस वाले वालों से बात करना बंद कर दें।

1594
01:53:44,640 --> 01:53:49,760
मधवा संप्रदाय के विरोध में जाकर के ही कार्य कर रहे हैं। वर्ण व्यवस्था को मानता है मधुवा संप्रदाय।

1595
01:53:49,760 --> 01:53:53,920
तो अब इस वालों से बात करना बंद कर दें। क्या

1596
01:53:53,920 --> 01:53:58,240
बेवकूफी है? बच्चे हैं दूध

1597
01:53:58,240 --> 01:54:02,240
मुंह में। हम अरे जो व्यक्ति अपने ही सिद्धांत के अनुकूल नहीं है वो

1598
01:54:02,240 --> 01:54:06,320
शास्त्रार्थ करने की हैसियत ही नहीं रखता है। ठीक है। अगर तुझे यही लगता

1599
01:54:06,320 --> 01:54:10,320
है तेरा यही मानना है मैंने तो अपना पक्ष बता दिया भाई। अब

1600
01:54:10,320 --> 01:54:14,400
तेरा अगर यही मानना है कि शास्त्रार्थ उसी से होगा जो अपने सिद्धांत को मानने वाला

1601
01:54:14,400 --> 01:54:18,400
होगा। तो पहले तो तुझे यह सिद्ध करना होगा कि वो अपने सिद्धांत

1602
01:54:18,400 --> 01:54:24,400
को ना मानने वाला है और फिर तुझे यह सिद्ध करना होगा कि

1603
01:54:24,880 --> 01:54:29,440
क्या कहते हैं कि ये सनातन सिद्धांत है कि जो अपने सिद्धांत को मानता होगा उसी शास्त्रार्थ

1604
01:54:29,440 --> 01:54:33,520
होगा। अब ये वाली जो बात है कि वो अपने सिद्धांत को

1605
01:54:33,520 --> 01:54:37,760
मानता है कि नहीं मानता है। इसको एक तरफा रूप से तो सिद्ध नहीं किया जाएगा।

1606
01:54:37,760 --> 01:54:41,280
जब तुम यह आरोप लगा रहेगे कि अपने सिद्धांत को ना मानने

1607
01:54:41,280 --> 01:54:45,360
वाला व्यक्ति है तो सामने वाले पक्ष का उसी समय वहां पर उत्तर देने

1608
01:54:45,360 --> 01:54:49,760
के लिए मौजूद होना आवश्यक है। वही शास्त्रार्थ है तो तुम शास्त्रार्थ

1609
01:54:49,760 --> 01:54:53,200
से पहले निर्णायक नहीं हो सकते

1610
01:54:53,200 --> 01:54:58,240
कि वो अपने ही सिद्धांत को नहीं मानता है। वो व्यास जी को नहीं मानता है। चलो पढ़ाओ

1611
01:54:58,240 --> 01:55:02,320
और इसके लिए आप उन्हें भागतानंद के संबोधित कर रहे हैं। तो यदि आपको वो भागतानंद लग

1612
01:55:02,320 --> 01:55:06,400
रहे हैं तो जाकर के भाई आप भागने वाले नहीं है ना। आप तो रणभूमि में उतरे हुए जो है महाशय

1613
01:55:06,400 --> 01:55:10,400
है महावीर है धरातल पर उतरे हुए महावीर है आप क्यों नहीं धरातल

1614
01:55:10,400 --> 01:55:14,400
पर तो निग्रचार जी भी है वहां पर स्थित जाइए ना जा के समक्ष

1615
01:55:14,400 --> 01:55:18,400
बैठ के एक बार शास्त्रार्थ कर लीजिए उनहीं से शास्त्रार्थ ना कर पाए तो

1616
01:55:18,400 --> 01:55:22,560
एकदम मतलब सरल रूप से संवाद ही कर लीजिए जा के बैठ के लाइव

1617
01:55:22,560 --> 01:55:26,640
आ के कर लीजिएगा देख लेते हैं ना भागानंद से कब

1618
01:55:26,640 --> 01:55:30,640
आ रहा है लाइव वो क्यों नहीं आ जाता लाइव हम तो कब से कह रहे

1619
01:55:30,640 --> 01:55:34,800
हैं विद्या भास्कर जी के यहां आ जाए देखो तुम्हारे ये

1620
01:55:34,800 --> 01:55:39,360
ये कितने बकवास बातें हैं जो तुम ये कह रहे हो कि उनसे

1621
01:55:39,360 --> 01:55:43,760
जाकर के कर ले। पहली बात तो वो तैयार है कि नहीं हमसे

1622
01:55:43,760 --> 01:55:47,920
चर्चा करने के लिए पहली बात। दूसरी बात यदि वो तैयार है

1623
01:55:47,920 --> 01:55:52,000
भी तो हमारा निर्णय होगा कि भैया हम वहां जाए या उसको

1624
01:55:52,000 --> 01:55:56,160
यहां बुलाए या बीच में रहे। आप यह तय करने वाले कोई नहीं है कि आप वहां चले

1625
01:55:56,160 --> 01:55:56,660
जाओ।

1626
01:55:56,400 --> 01:56:00,400
निग्राचार्य जी नहीं आएंगे। चोर है हमारी नजरों में वो हम क्यों

1627
01:56:00,400 --> 01:56:05,280
जाए भैया उसके लिए वहां पर दूसरी बात

1628
01:56:05,280 --> 01:56:09,440
हमारा निर्णय होगा कि हम वहां जाए कि उसको यहां बुलाए। दूसरी बात

1629
01:56:09,440 --> 01:56:13,440
एक बहुत अच्छी जगह विद्या भास्कर जी महाराज के यहां आ जाए। वहां बैठकर के चर्चा कर

1630
01:56:13,440 --> 01:56:17,440
ले वो व्यक्ति हमसे और तो और नहीं आना चाहता है तो लाइव आ जाए। सबसे

1631
01:56:17,440 --> 01:56:21,440
बढ़िया बात मगर नहीं। हमने तो

1632
01:56:21,440 --> 01:56:25,760
कब से कह रखा है तुम्हारा भागता नहीं भाग रहा है तुम्हें पता नहीं है अन्गल

1633
01:56:25,760 --> 01:56:30,160
प्रलाप के सीधा आपको यह बोलता

1634
01:56:30,160 --> 01:56:34,240
हूं कि जिस परिसाधना और जिस किसी

1635
01:56:34,240 --> 01:56:38,400
भी प्रलाप के द्वारा अपने ग्रह आचार्य जी पे आक्षेप करते हैं उसे ऐसा

1636
01:56:38,400 --> 01:56:42,480
सिद्ध करिए सर्वप्रथम कि निग्रहचार्य जी के पास कोई

1637
01:56:42,480 --> 01:56:46,560
उत्तर ना रहे अपने में नहीं कर सकते हैं तो एकदम भीगी

1638
01:56:46,560 --> 01:56:52,080
बिल्ली बन करके कोने में जाकर के दर के सो जाइए और यदि आपकी

1639
01:56:52,080 --> 01:56:56,240
भागतानंद के पास कोई उत्तर ना रहे। भाई मैंने

1640
01:56:56,240 --> 01:57:00,240
मैंने किसी का किसी चोर को रंगे हाथों पकड़ा दिया। ये देखो

1641
01:57:00,240 --> 01:57:04,240
ये चोरी करता हुआ पकड़ लिया। वीडियो दिखा दिया सब कर दिया। वो कहे नहीं मैंने चोरी नहीं

1642
01:57:04,240 --> 01:57:08,400
की। वही उत्तर तो अभी भी है उसके पास। वो

1643
01:57:08,400 --> 01:57:11,440
तो लोगों को देखना पड़ेगा ना उसके उत्तर वो सही है कि

1644
01:57:11,440 --> 01:57:16,400
नहीं, तार्किक है कि नहीं? प्रामाणिक है कि नहीं? वो तो मुंह चलाएगा ही।

1645
01:57:16,400 --> 01:57:20,400
यह कोई सेंस है तुम्हारी इन बातों का कि उनके पास कोई उत्तर ना दो उत्तर ना

1646
01:57:20,400 --> 01:57:24,400
हो और जो कुतर्क कर रहा है अपने बचाव में यह कालिया जिन

1647
01:57:24,400 --> 01:57:28,480
वाली बातों में कर ले चर्चा आ के लाइव बोल कब आ रहा है तेरा भागवत आनंद

1648
01:57:28,480 --> 01:57:32,560
तू आजा तुझे तो पता है उसका पूरा पक्ष तुझे पता है ना

1649
01:57:32,560 --> 01:57:36,560
उसका पूरा पक्ष भागंद का तू आजा तुझे तो पता है ना उसने क्या-क्या

1650
01:57:36,560 --> 01:57:42,560
उत्तर दिए हैं ये परिधना इत्यादि में तू आजा कब आएगा

1651
01:57:42,960 --> 01:57:47,600
अवैध संताने होंगी यदि यदि अवैध संतान तो कैसे आओगे

1652
01:57:47,600 --> 01:57:51,760
गुरुद के या अवैध संतान नहींगे तो तुम्हारे जीवन

1653
01:57:51,760 --> 01:57:55,760
में अगर ऐसा कुछ घटित हो गया होगा वही जिससे

1654
01:57:55,760 --> 01:57:59,840
कि किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे होंगे तो कैसे आओगे शब्द

1655
01:57:59,840 --> 01:58:03,840
लिखे हैं उसके आधार पे कह रहा हूं और भागदानंद कहने से पहले आप जा के

1656
01:58:03,840 --> 01:58:08,160
एक बार अपने गुरुदेव से क्यों नहीं बा कर लेते और इतना

1657
01:58:08,160 --> 01:58:14,000
ही और भागा कौन है भाई इसको इसको

1658
01:58:14,000 --> 01:58:18,160
है नहीं अपनी नपुंसकता तुम तो जिनके नाम जो अधिक प्रेम में तुम उनका

1659
01:58:18,160 --> 01:58:21,520
बोध करते हो ना

1660
01:58:21,520 --> 01:58:25,520
सिद्धांत बल है तो करेंगे बिल्कुल करेंगे तुम ही जो है जी से दूर ही

1661
01:58:25,520 --> 01:58:30,000
भागे थे कामाख्या चले गए राजस्थान हो गया

1662
01:58:30,000 --> 01:58:34,080
यही वाली अभी सारी सुनी है ना ठीक है

1663
01:58:34,080 --> 01:58:36,560
फिर

1664
01:58:36,560 --> 01:58:40,640
कुछ और हो तो चलो अभी नहीं आ पाए हो अगर यह व्यक्ति सुन

1665
01:58:40,640 --> 01:58:45,120
रहा है और आना चाहता है विद थोपड़ा विद फेस कायरता

1666
01:58:45,120 --> 01:58:49,760
में नहीं आना चाहता है तो आ जाए दे दो लिंक और

1667
01:58:49,760 --> 01:58:53,840
यदि अभी अनुकूलता नहीं है समय इत्यादि की तो हमसे संपर्क कर लेना हमने

1668
01:58:53,840 --> 01:58:58,000
नंबर इस व्यक्ति का ब्लॉक ब्लॉक कर दिया है तो हमसे संपर्क कर

1669
01:58:58,000 --> 01:59:00,720
ले और

1670
01:59:00,720 --> 01:59:04,800
दिन तारीख समय सुनिश्चित कर ले फिर हम इसको समय दे देंगे और तब बात

1671
01:59:04,800 --> 01:59:10,800
हो जाएगी ठीक है

1672
01:59:12,160 --> 01:59:17,760
दे दो भाग का कोई आना चाहे चेला चपाटी तो

1673
01:59:17,760 --> 01:59:20,560
लिंक दे दो।

1674
01:59:20,560 --> 01:59:24,640
देखें कितने माई के लाल जन्म माई के लाल ऐसे

1675
01:59:24,640 --> 01:59:28,640
हैं भागतांद को फॉलो करने वाले जिनकी मां ने उन्हें निष्ठा पूर्वक दूध

1676
01:59:28,640 --> 01:59:32,720
पिलाया है। ये ले भाई देख रहा है

1677
01:59:32,720 --> 01:59:35,760
तो आजा

1678
01:59:35,760 --> 01:59:40,880
जिसमें है दम

1679
01:59:40,880 --> 01:59:46,880
तो फक्त है बाजीराव सिंघम

1680
01:59:51,040 --> 01:59:55,120
बॉलीवुड में घुस गए। बॉलीवुड हमारे धर्म

1681
01:59:55,120 --> 01:59:59,200
में घुस रहा है ना। नरसिम्हा भूमि में इस

1682
01:59:59,200 --> 02:00:03,840
द्वारा फंडेड विचारधारा को वहां परोसा गया है

1683
02:00:03,840 --> 02:00:08,320
और लाखों करोड़ों लोग उसे देख रहे हैं। पीएन मिश्र जी का ये वीडियो

1684
02:00:08,320 --> 02:00:12,320
मेरे ख्याल से अभी तक जितनी भी चर्चाएं हुई है सब मिलाकर के दो

1685
02:00:12,320 --> 02:00:15,840
लाख व्यूज हुए होंगे।

1686
02:00:15,840 --> 02:00:21,840
उसको करोड़ों लोग देख चुके हैं।

1687
02:00:22,080 --> 02:00:26,640
फिर भी हम उसको ताक में रख दे और

1688
02:00:26,640 --> 02:00:30,400
इनके पीछे पड़ जाए।

1689
02:00:30,400 --> 02:00:34,880
चलो नहीं आ रहा कोई। ठीक है भाई।

1690
02:00:34,880 --> 02:00:38,880
तो बचपन में माता जी ने अगर आपको लगता है कि आप सत्य

1691
02:00:38,880 --> 02:00:42,960
के पक्षधर हैं और बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध

1692
02:00:42,960 --> 02:00:47,040
पिलाया है तो यह कायरता पूर्ण तरीके से

1693
02:00:47,040 --> 02:00:51,200
ऑडियो मैसेज भेजना बंद करो और प्रत्यक्ष सामना करो।

1694
02:00:51,200 --> 02:00:55,200
ठीक है? और दिन तारीख के लिए हमसे संपर्क

1695
02:00:55,200 --> 02:00:59,280
कर लेना। पीएन मिश्र जी के विषय में हमने बता दिया कि

1696
02:00:59,280 --> 02:01:03,280
हम हमने उनका जो है नाम लेकर के विरोध क्यों नहीं किया है और

1697
02:01:03,280 --> 02:01:06,320
यदि वह ऐसा कह रहे हैं तो कहां-कहां पर सात

1698
02:01:06,320 --> 02:01:10,320
भौम सिद्धांतों का उन्होंने खंडन किया है गलत है वो वहां पर

1699
02:01:10,320 --> 02:01:16,080
उनका प्रतिकार और दूसरा कि

1700
02:01:16,080 --> 02:01:20,080
तुम्हारा भागतानंद भागा है चर्चाओं से बहुत सारी चर्चाओं से वो

1701
02:01:20,080 --> 02:01:24,160
भागा है उसने सदैव भाग भागा है वो चर्चाओं से इसलिए

1702
02:01:24,160 --> 02:01:28,240
उसका नाम भागतानंद उपयुक्त लगा है और अच्छा नाम है वो उसके लिए और

1703
02:01:28,240 --> 02:01:32,560
दूसरी बात है कि वो दोगला है तुम्हारी ही तरह जैसे

1704
02:01:32,560 --> 02:01:36,960
कि वो हमसे प्रश्न कर रहा है कि शंकराचार्यों से पूरी शंकराचार्य

1705
02:01:36,960 --> 02:01:41,440
जी के अमुक अमुक शिष्य ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं वैसा क्यों नहीं कर रहे पर जहां से उसको प्रशय

1706
02:01:41,440 --> 02:01:45,440
प्राप्त है वहां पर वो मौन है वहां पोस्टमार्टम नहीं

1707
02:01:45,440 --> 02:01:49,440
कर रहा है उनकी किस्मत अच्छी है अकॉर्डिंग टू भागतानंद क्योंकि

1708
02:01:49,440 --> 02:01:53,600
इसके पोस्टमार्टम करने से किस्मत बुरी हो जाती है दुर्भाग्य

1709
02:01:53,600 --> 02:01:59,600
चालू हो जाता है व्यक्ति का ठीक ठीक है आ जाना जय श्री राम सभी को

1710
02:01:59,680 --> 02:02:03,760
और हां निगमानंद का विरोध करवाइए निगमानंद के बारे

1711
02:02:03,760 --> 02:02:08,000
में निगमानंद ने अपने ग्रंथों में बहुत सारी ऐसी बातें की है जो हमारे सार्वभौम

1712
02:02:08,000 --> 02:02:12,160
सनातन सिद्धांतों के विरोध में है अपनी निगमानंद की मूर्ति

1713
02:02:12,160 --> 02:02:16,240
होकर मूर्ति बनकर के पूजा होती है उनके सभी मंदिरों में वहीं पे हमारे

1714
02:02:16,240 --> 02:02:20,480
रामकृष्ण इत्यादि जो है वही नीचे छोटी-छोटी मूर्तियां लगी होती है और

1715
02:02:20,480 --> 02:02:21,600
साईं बाबा इत्यादि

1716
02:02:21,600 --> 02:02:25,840
के प्रकरण में हमारा यही तर्क है कि जहां पर हमारे राम कृष्ण है वहां भगवान के रूप में साईं

1717
02:02:25,840 --> 02:02:29,840
बाबा को ख्यापित क्यों किया गया है? पहली बात। दूसरी बात निगमानंद की

1718
02:02:29,840 --> 02:02:34,320
पत्नी के रूप में जगदंबा को जगदंबा मां भगवती तारा को

1719
02:02:34,320 --> 02:02:40,320
प्रकट किया जाता है। कर्मणा वर्ण व्यवस्था को फॉलो किया जाता है। और

1720
02:02:40,880 --> 02:02:45,040
ये इनको ईश्वर अल्लाह एक वाली धारणा इस वाली सारी चीजें वहां चलती

1721
02:02:45,040 --> 02:02:49,440
है। है ना? तो

1722
02:02:49,440 --> 02:02:53,520
ये सब देख लीजिए। और यदि वह कहते हैं मैं शंकर संप्रदाय से

1723
02:02:53,520 --> 02:02:57,600
शिक्षित हुआ हूं, गौ संप्रदाय से दीक्षित हूं या यह हूं या वो हूं

1724
02:02:57,600 --> 02:03:01,680
तो इसमें फिर बात आएगी क्या आप वहां के प्रामाणिक उत्तराधिकारी हैं, वक्ता हैं,

1725
02:03:01,680 --> 02:03:05,680
कुछ है आपको आपकी इन गलत बातों को वहां से समर्थन प्राप्त है। अरे

1726
02:03:05,680 --> 02:03:10,400
इस मामले में तो इस कौन इनसे अच्छे हैं? निगनंद वालों से क्यों?

1727
02:03:10,400 --> 02:03:15,040
वो कम से कम अपनी पूजा तो नहीं करा रहे हैं मूर्ति पर लगा के।

1728
02:03:15,040 --> 02:03:19,920
मां भगवती को अपनी पत्नी तो नहीं कह रहे हैं किसी व्यक्ति विशेष की।

1729
02:03:19,920 --> 02:03:24,160
और ऐसे व्यक्ति को अपनी परंपरा में आचार बताने वाले और आकर के हमसे

1730
02:03:24,160 --> 02:03:28,320
बात करते हैं मुंह उठा के चुप

1731
02:03:28,320 --> 02:03:34,320
बड़े जय श्री राम

1732
02:03:38,500 --> 02:03:42,500
[संगीत]
