1
00:00:02,640 --> 00:00:06,720
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल

2
00:00:06,720 --> 00:00:09,880
पूर्वक होंगे

3
00:00:09,880 --> 00:00:13,920
और आज काफी दिनों के बाद हम

4
00:00:13,920 --> 00:00:18,800
लोग वर्ण व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए उपस्थित हैं।

5
00:00:18,800 --> 00:00:23,280
चर्चा में एक मित्रवती ही हैं आकाश गर्ग जी।

6
00:00:23,280 --> 00:00:27,360
उनके संभवत कुछ जिज्ञासाएं हैं, कुछ

7
00:00:27,360 --> 00:00:32,320
काउंटर क्वेश्चंस हैं वर्ण व्यवस्था से रिलेटेड। तो

8
00:00:32,320 --> 00:00:38,320
वही आज यहां पर उपस्थित होने वाले हैं। हम ले लेते हैं सर्वप्रथम।

9
00:00:38,720 --> 00:00:44,720
आकाश गर्ग जी अभी तो नहीं

10
00:00:47,640 --> 00:00:52,160
है। गर्ग जी अभी इस समय नहीं है। जय श्री राम विश्वजीत

11
00:00:52,160 --> 00:00:55,880
सिंह

12
00:00:55,880 --> 00:01:01,880
जी

13
00:01:02,280 --> 00:01:04,440
आकाश

14
00:01:04,440 --> 00:01:09,080
तो हमारी एक शाम को लाइव और है जिसमें

15
00:01:09,080 --> 00:01:11,720
कि

16
00:01:11,720 --> 00:01:15,920
अ जो इस नाम से है कि भगवत गीता पर रामपाल

17
00:01:15,920 --> 00:01:19,920
के बोल वचन उसका तीसरा भाग है और काफी

18
00:01:19,920 --> 00:01:23,920
रोचक चल रही है क्योंकि हर सेंटेंस लगभग हर श्लोक

19
00:01:23,920 --> 00:01:28,080
में कुछ ना कुछ उसने मिलावट की है। हर श्लोक में उसने कुछ ना कुछ ऐसा

20
00:01:28,080 --> 00:01:32,520
किया है जो जैसे आंखों में मिर्ची ठोकने जैसा होता

21
00:01:32,520 --> 00:01:35,560
है।

22
00:01:35,560 --> 00:01:39,920
और एक उसके साथ ही साथ एक

23
00:01:39,920 --> 00:01:44,120
जो हमें रेगुलरली फॉलो करते

24
00:01:44,120 --> 00:01:49,840
हैं उनके लिए एक सूचना भी है कि अभी कुछ दिनों पूर्व

25
00:01:49,840 --> 00:01:54,640
भागवतानंद ने अपने YouTube चैनल पर एक वीडियो डाला।

26
00:01:54,640 --> 00:01:59,440
उस वीडियो में अह एक लड़का है

27
00:01:59,440 --> 00:02:03,680
आदित्य वैभव सिंह। उसने ये सब चीजें कही थी कि मैं मुझे

28
00:02:03,680 --> 00:02:07,760
जो है मैं पहले गलत था। इनको

29
00:02:07,760 --> 00:02:12,760
भागवतानंद जी को समझ नहीं पाया। निग्राचार को समझ नहीं पाया

30
00:02:12,760 --> 00:02:17,200
और उसने काफी गलत बातें कह दी और

31
00:02:17,200 --> 00:02:21,440
उसने मैंने देखा नहीं था मगर संभवत उसने अपनी वीडियो में मेरा

32
00:02:21,440 --> 00:02:25,520
नाम भी लिया था कि मैंने उसे क्या कहते हैं ये सब

33
00:02:25,520 --> 00:02:29,600
मैं इस योजना में सम्मिलित हूं जिस योजना के

34
00:02:29,600 --> 00:02:33,680
अंतर्गत भागवतानंद को गाली दी जाए। भागवतानंद के स्क्रीनशॉट एडिट किए जाए और

35
00:02:33,680 --> 00:02:37,760
भागवतानंद की घर की स्त्रियों के लिए अपमान सूचक शब्द

36
00:02:37,760 --> 00:02:42,280
कहे जाए। पंक्तियां कही जाए तो

37
00:02:42,280 --> 00:02:48,280
अ क्या

38
00:02:48,840 --> 00:02:51,080
कह

39
00:02:51,080 --> 00:02:55,360
तो इस पर हमारी प्रतिक्रिया ये थी कि उस लड़के ने हमको

40
00:02:55,360 --> 00:02:59,520
भी फोन करके काफी कुछ कहा था भागवतानंद के बारे में और हमने

41
00:02:59,520 --> 00:03:03,680
उसकी उन बातों का जो तर्क पूर्ण नहीं लगी थी वहां भी काउंटर किया था इवन

42
00:03:03,680 --> 00:03:07,680
उसको यह भी कहा था कि आपने जो गालियां दी हैं भागवतानंद को

43
00:03:07,680 --> 00:03:11,680
वो वो गलत दी है भागवतानंद के घर की

44
00:03:11,680 --> 00:03:15,760
स्त्रियों के आप क्षमा मांगी है इसके तो ये सब हुआ था मगर अभी

45
00:03:15,760 --> 00:03:19,840
एक नया मोड़ लिया है कि उस लड़के ने दोबारा एक वीडियो बनाई है उसमें बता रहा है

46
00:03:19,840 --> 00:03:24,240
वो उसने अपना खुद का चैनल बना लिया आदित्य वैभव सिंह नाम से

47
00:03:24,240 --> 00:03:28,240
और उस चैनल में उसने वो वीडियो डाली है उसमें वो बता रहा है कुछ प्रमाण भी वहां पर

48
00:03:28,240 --> 00:03:32,800
दे रहा है साक्ष्य भी दे रहा है कि उस पर कैसे दबाव डाला गया अह

49
00:03:32,800 --> 00:03:37,120
इस षड्यंत्र में जो है षड्यंत्र पूर्वक हमारा नाम महा सम्मिलित

50
00:03:37,120 --> 00:03:41,120
करने के अन्य भी कुछ नाम है वो वहां पर सम्मिलित करने के

51
00:03:41,120 --> 00:03:45,440
लिए कि मुझे शिवश ने कहा था मुझे आशतोष भट्ट ने कहा था ऐसा करने के लिए वैसा

52
00:03:45,440 --> 00:03:49,760
करने के लिए तो इस तरीके से षड्यंत्र पूर्वक उसमें उसने

53
00:03:49,760 --> 00:03:53,760
कुछ चैट भी दिखाए हैं जिसमें कि उसको ये कहा जा रहा है

54
00:03:53,760 --> 00:03:57,760
कि तुम्हें ऐसासा कहना होगा वीडियो में उस पर दबाव डाला जा रहा है। ने

55
00:03:57,760 --> 00:04:02,000
एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुनाई है यह बताते हुए कि यह ऑडियो रिकॉर्डिंग

56
00:04:02,000 --> 00:04:03,840
भागवतानंद के वकील की है

57
00:04:03,840 --> 00:04:08,160
और उसमें वो कह रहे हैं कि आप ऐसा-सा कर दो तो फिर हम विचार करेंगे

58
00:04:08,160 --> 00:04:12,880
कि आपको क्षमा करना है कि नहीं करना। इस तरह की चीज खैर

59
00:04:12,880 --> 00:04:17,280
तो ये भागवतानंद की धीरे-धीरे जो वो सच्चाइयां

60
00:04:17,280 --> 00:04:21,280
हैं जो जिन पर लोग विश्वास नहीं कर रहे

61
00:04:21,280 --> 00:04:25,280
थे वह सब सामने आ रही। अभी हम लोग जो अभी का विषय उस पर आ जाते हैं और आकाश

62
00:04:25,280 --> 00:04:29,440
जी आ चुके उनको ले लेते हैं।

63
00:04:29,440 --> 00:04:35,440
जय श्री राम जी जय श्री राम

64
00:04:38,120 --> 00:04:42,320
जी तो संभवता आप हमारे नाम जब वाले सेशन

65
00:04:42,320 --> 00:04:46,480
में भी जुड़े हुए हैं। मैं हूं पर मैंने कभी ज्वाइन

66
00:04:46,480 --> 00:04:50,480
नहीं किया। मुझे ऐसा समय थोड़ा मिल पाता है। मैंने

67
00:04:50,480 --> 00:04:56,480
कभी ज्वाइन नहीं किया। मैं श्वेता से जुड़ा हुआ हूं। मतलब वैसे

68
00:04:57,760 --> 00:05:01,760
ठीक है। वर्ण व्यवस्था के

69
00:05:01,760 --> 00:05:06,000
संबंध में आपका क्या वो है

70
00:05:06,000 --> 00:05:10,720
वो हमें शॉर्ट हां मैं बता देता हूं।

71
00:05:10,720 --> 00:05:11,220
वर्ण

72
00:05:11,200 --> 00:05:15,360
व्यवस्था मेरे हिसाब से समाज को चलाने के लिए

73
00:05:15,360 --> 00:05:19,440
दी गई है। जैसे कि भगवान ने सृष्टि का निर्माण किया। ब्रह्मा जी ने सृष्टि

74
00:05:19,440 --> 00:05:23,760
का निर्माण किया। उसके हिसाब से इंसानों

75
00:05:23,760 --> 00:05:27,760
को बफरकेट किया चार हिस्सों में कि ये इस समाज

76
00:05:27,760 --> 00:05:32,000
के इस हिस्से का काम ये करेंगे ये करेंगे ये करेंगे ठीक है और

77
00:05:32,000 --> 00:05:36,080
वर्ण व्यवस्था मेरे हिसाब से आपके हिसाब से जन्म से ही

78
00:05:36,080 --> 00:05:40,240
होती है मेरे हिसाब से जन्म से होती है परंतु

79
00:05:40,240 --> 00:05:44,240
अगर किसी का कर्म उसके जन्म के

80
00:05:44,240 --> 00:05:48,320
वर्ण मतलब कोई परिवार है कोई मान लो ब्राह्मण परिवार का है लेकिन वो

81
00:05:48,320 --> 00:05:52,680
अगर कर्म ब्राह्मण वाले नहीं कर रहा है फॉर अ लॉन्ग पीरियड ऑफ

82
00:05:52,680 --> 00:05:57,520
टाइम तो उसको हमें उस वर्ण का मानना चाहिए क्योंकि अल्टीमेटली

83
00:05:57,520 --> 00:06:01,600
वर्ण व्यवस्था हमने इस चीज के लिए कि समाज कैसे

84
00:06:01,600 --> 00:06:05,600
काम करेगा अगर कोई ब्राह्मण कुल में जन्म किसी ने लिया है और वो

85
00:06:05,600 --> 00:06:09,600
लॉन्ग टाइम के लिए या आजीवन मान लो वैश्य करता है बिजनेस

86
00:06:09,600 --> 00:06:13,600
है बिजनेस करता है तो हमें उसे अगर सामाजिक दृष्टि

87
00:06:13,600 --> 00:06:19,600
से देखा जाए तो उसे हमें वैश्य मानना पड़ेगा यह मेरा पॉइंट है

88
00:06:24,160 --> 00:06:30,160
मतलब आप इसके फेवर में नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी उससे हो

89
00:06:30,760 --> 00:06:34,880
मगर उसको जो है ब्राह्मण का कार्य दे दिया जाए। क्षत्रिय का कार्य दे दिया

90
00:06:34,880 --> 00:06:39,120
जाए बल्कि उसके जन्म को देख के ही उसको कार्य दे। हां वो उस योग्य हो। ऐसा

91
00:06:39,120 --> 00:06:43,520
ना हो कि उसने केवल जन्म ले लिया है। परंतु वो उसके

92
00:06:43,520 --> 00:06:47,920
योग्य नहीं है। जैसे कि मान लीजिए

93
00:06:47,920 --> 00:06:52,240
जैसे कि मान लीजिए हमें जैसे कि मान लीजिए हमें यज्ञ कराना है।

94
00:06:52,240 --> 00:06:56,240
ठीक है? अब यज्ञ कराने के लिए योग्यता चाहिए कि वेद मंत्रों का

95
00:06:56,240 --> 00:07:00,320
ज्ञाता हो, संध्या वंदन करता हो। है ना?

96
00:07:00,320 --> 00:07:05,280
और धारण करता हो, तचाचार का ध्यान रखता हो।

97
00:07:05,280 --> 00:07:09,680
अब उसने ब्राह्मण कुल में जन्म तो लिया है।

98
00:07:09,680 --> 00:07:13,680
परंतु उसने इन सब जो बाकी जो उसके आचरण है

99
00:07:13,680 --> 00:07:17,880
उनको धारण नहीं किया है। हम तो

100
00:07:17,880 --> 00:07:22,360
हमें जो है किसी ऐसे ब्राह्मण को ढूंढना चाहिए

101
00:07:22,360 --> 00:07:26,720
जो जिसने जो ब्राह्मण कुल में तो जन्म हो मगर साथ ही साथ उसने

102
00:07:26,720 --> 00:07:31,040
इन योग्यताओं को भी धारण कर रखा हो।

103
00:07:31,040 --> 00:07:33,600
हम

104
00:07:33,600 --> 00:07:35,040
ठीक है।

105
00:07:35,040 --> 00:07:39,200
अच्छा मैं पहले आपने जो कहा है ना उसमें एक बात कह देता हूं। जैसे कि

106
00:07:39,200 --> 00:07:43,280
हम आपने कहा कि ब्राह्मण यदि

107
00:07:43,280 --> 00:07:47,280
अपने वर्ण के अनुसार कार्य नहीं कर रहा है और

108
00:07:47,280 --> 00:07:51,520
वो शायद वैश्य व्यक्ति के अनुसार वो अपने जीव को पार्जन

109
00:07:51,520 --> 00:07:52,020
कर रहा है।

110
00:07:52,000 --> 00:07:56,440
है ना? ठीक है मतलब व्यापार

111
00:07:56,440 --> 00:08:00,640
इसमें इसमें एक छोटी सी चीज और है फॉर ए लॉन्ग टाइम

112
00:08:00,640 --> 00:08:04,960
फॉर ए लॉन्ग टाइम इसमें हम अलग से बात करेंगे शॉर्ट

113
00:08:04,960 --> 00:08:09,440
टाइम में हम वो कंसीडर नहीं कर सकते कि शॉर्ट टाइम में कर रहा है तो उसने चेंज किया

114
00:08:09,440 --> 00:08:13,520
लॉन्ग टाइम अपना जीवन ही कर रहा है इसप हम लोग अलग से बात करेंगे

115
00:08:13,520 --> 00:08:17,680
फॉर ए लॉन्ग टाइम पे मगर अभी हमने जैसे आपने कहा कि

116
00:08:17,680 --> 00:08:21,680
ब्राह्मण यदि वैश्य वर्ण के अनुसार कार्य कर रहा है तो

117
00:08:21,680 --> 00:08:25,440
उसको ब्राह्मण नहीं बल्कि की वैश्य कहना चाहिए। ठीक है?

118
00:08:25,440 --> 00:08:30,400
अब एक बताइए मुझे कि पतित ब्राह्मण किसे कहेंगे

119
00:08:30,400 --> 00:08:36,400
या कर्म संकरता का दोष कहां पे आएगा?

120
00:08:37,360 --> 00:08:41,840
दोष कहां जाएगा? जैसे जैसे इसको मैं आपको बताऊं

121
00:08:41,840 --> 00:08:46,800
जैसे कि हमने किसी को कोई ड्यूटी दी है।

122
00:08:46,800 --> 00:08:51,120
कि तू वॉचमैन है। तेरा काम है यहां पे रक्षा करना।

123
00:08:51,120 --> 00:08:55,200
ये तेरी ड्यूटी है। हम ठीक है? मगर उसने अपनी ड्यूटी नहीं

124
00:08:55,200 --> 00:08:59,280
निभाई। किसी कारण से उसको आसक्ति हुई कि मैं जाकर के वहां

125
00:08:59,280 --> 00:09:03,520
पर सब्जी की ठेल लगा लूं। टमाटर बेचूं।

126
00:09:03,520 --> 00:09:07,600
तो हम उसे ड्यूटी से भागने वाला कहेंगे या उसको ये कहने

127
00:09:07,600 --> 00:09:13,600
लगेंगे टमाटर बेचने वाला है। उसकी आइडेंटिटी क्या होगी उस समय?

128
00:09:17,600 --> 00:09:21,680
अ मैं बताता हूं उसकी आइडेंटिटी क्या होगी? अह पहले उसने एक कर्म चूस

129
00:09:21,680 --> 00:09:25,760
किया रक्षा का क्षत्रिय हो गया वो जैसे कि गार्ड गार्ड की नौकरी कर रक्षा

130
00:09:25,760 --> 00:09:30,080
का गया तो क्षत्रिय हो गया उसके बाद उसका मन परिवर्तन हुआ आप

131
00:09:30,080 --> 00:09:34,160
उसको ये नहीं बोल सकते कि वो भागा है हम उसको इस तरीके से क्यों देख रहे हैं

132
00:09:34,160 --> 00:09:38,480
कि वो भागा है उसने कर्म अपना चेंज किया है पहले आजीविका वो

133
00:09:38,480 --> 00:09:42,640
रक्षात्मक कार्य से कमा रहा था अब वो आजीविका सब्जी का ठेरे लगाने से कमा रहा है

134
00:09:42,640 --> 00:09:46,640
तो उसका चेंज हो गया ना कर्म चेंज हो गया इसको हम करण

135
00:09:46,640 --> 00:09:50,160
आप जैसे बोलो कर्म संकरता है वर्ण संता बोल सकते

136
00:09:50,160 --> 00:09:55,080
परंतु इस समय वो कर्म जो कर रहा है हम तो उसको वही बोलेंगे ना

137
00:09:55,080 --> 00:09:59,000
अगर मैं अपने

138
00:09:59,000 --> 00:10:03,920
मैं आप बोलिए आप बोलिए इसका इस पॉइंट का काउंटर दीजिए आप

139
00:10:03,920 --> 00:10:06,240
हम

140
00:10:06,240 --> 00:10:11,000
क्या आप बोलिए आप बोलिए आप बोल रहे

141
00:10:11,000 --> 00:10:15,440
थे अब मैं एक मोटा मोटा बात बोलता हूं हमारे हमारे समाज

142
00:10:15,440 --> 00:10:19,440
में हमारे समाज में एक ये वो होती है जैसे जैसे मैं वैश्य वर्ण

143
00:10:19,440 --> 00:10:23,440
से हूं बाय बर्थ और करता हूं काम एक

144
00:10:23,440 --> 00:10:27,440
मल्टीीनेशनल में जो हम शूद्र भी कह सकते हैं कि मैं सेवा का कार्य कर रहा हूं एक मल्टीनेशनल में

145
00:10:27,440 --> 00:10:31,560
काम करता हूं मैं राइट और

146
00:10:31,560 --> 00:10:35,680
हमारे क्या बोल रहे हो आप आपके अनुसार तो शूद्र ही कहा जाएगा ना

147
00:10:35,680 --> 00:10:39,760
शद्र ही कहा जाएगा मेरे हिसाब से शूद्र ही कहा जाएगा जब तक

148
00:10:39,760 --> 00:10:44,600
मैं सेवा कर रहा हूं शद्र ही कहा जाएगा मान लो आफ्टर रिटायरमेंट

149
00:10:44,600 --> 00:10:48,640
मैं इसी मतलब गायत्री जप करने लगता हूं मतलब बहुत बहुत टाइम के

150
00:10:48,640 --> 00:10:54,640
लिए तब मैं अपने आप को ब्राह्मण कंसीडर कर सकता हूं।

151
00:10:55,680 --> 00:11:00,240
इससे मुझे दो बातें समझ में आई। आपने जो बातें कही है। ठीक है?

152
00:11:00,240 --> 00:11:04,240
पहली बात ये है कि मेरा आपने वो जवाब

153
00:11:04,240 --> 00:11:08,480
नहीं दिया कि पतित ब्राह्मण या कर्म संकर्ता

154
00:11:08,480 --> 00:11:11,840
कब कहा जाएगा?

155
00:11:11,840 --> 00:11:16,000
मैं इसका जवाब देता हूं। ब्राह्मण चलो किसी ने

156
00:11:16,000 --> 00:11:20,000
जन्म लिया ब्राह्मण कुल में वो ब्राह्मण है लेकिन वो ब्राह्मण

157
00:11:20,000 --> 00:11:24,240
का कर्म नहीं कर रहा है मतलब कोई कोई और भी कर्म नहीं कर रहा है लेकिन ब्राह्मण

158
00:11:24,240 --> 00:11:29,720
का कर्म नहीं कर रहा है तो वह रहेगा तो ब्राह्मण ही श्रेष्ठ नहीं है कोई

159
00:11:29,720 --> 00:11:34,000
भी डेली लाइफ में नहीं

160
00:11:34,000 --> 00:11:38,240
देखो कोई कोई भी अपने दिनचर्या में कुछ ना कुछ करता ही है उसके हिसाब

161
00:11:38,240 --> 00:11:42,240
से हम उसको बोलेंगे कि भाई ये ये है या ये ये है आजीविका कमाने के लिए

162
00:11:42,240 --> 00:11:46,240
या किसी भी कार्य के लिए वो कुछ ना कुछ कर्म तो करता ही है। ठीक

163
00:11:46,240 --> 00:11:50,400
है? तो अगर वो ब्राह्मण अपना काम नहीं कर रहा है जैसे कि

164
00:11:50,400 --> 00:11:54,480
तीन टाइम की संध्या नहीं कर रहा है और जो भी ब्राह्मण कर्म है या उसके घर

165
00:11:54,480 --> 00:11:58,560
वालों ने ब्राह्मण का आजीविकोपार्जन वेद इत्यादि

166
00:11:58,560 --> 00:12:03,200
पठनपाठन ईश्वर का पठनपाठन कर्मकांड इत्यादि करके उसका आजीविकोपार्जन

167
00:12:03,200 --> 00:12:07,360
होना है हम नहीं कर रहा है वो गायत्री वो गायत्री

168
00:12:07,360 --> 00:12:11,600
साधना नहीं कर रहा है संध्या वंदन नहीं कर रहा है वो ये सब नहीं कर रहा है

169
00:12:11,600 --> 00:12:16,480
इसको कर्म शंकर नहीं कहेंगे और किसी और चीज को कहेंगे

170
00:12:16,480 --> 00:12:21,160
इसको इसको ये बोलेंगे ना श्रेष्ठ ब्राह्मण नहीं है। ब्राह्मण तो

171
00:12:21,160 --> 00:12:25,360
है। कुछ ना कुछ वही कह रहा हूं। मैं वही कह रहा हूं।

172
00:12:25,360 --> 00:12:29,760
मैं वही मैं समझ गया। आप आप मेरी मेरी जगह आ गए। एक एक

173
00:12:29,760 --> 00:12:34,240
करके करेंगे तो हो जाएगा क्लियर। यानी कि कोई ब्राह्मण अपने जो वर्णोचित

174
00:12:34,240 --> 00:12:38,320
कर्म है वर्णोचित आचरण है उनको ना करके दूसरे

175
00:12:38,320 --> 00:12:42,560
अन दूसरे जो वर्ण उसके वर्ण के बाहर की चीजें करता है तो वो

176
00:12:42,560 --> 00:12:46,720
श्रेष्ठ ब्राह्मण नहीं है मगर जो ब्राह्मण विशेषण है उसका वो

177
00:12:46,720 --> 00:12:50,720
रहेगा उसके पास ठीक है

178
00:12:50,720 --> 00:12:55,360
मैं पूरा कर लूं एक मिनट दूसरी बात ऐसे ही ब्राह्मण को पतित ब्राह्मण

179
00:12:55,360 --> 00:12:59,360
और ऐसे ही कर्म करने वाले को कर्म संकर भी कहा जाएगा कि वो कर्म से

180
00:12:59,360 --> 00:13:03,440
शंकर है संकरता आ दोष आ गया कर्म संकर्ता का वहां पर दोष

181
00:13:03,440 --> 00:13:08,760
आया क्या आया कि उसके कर्म जो होने चाहिए थे वो ना हो के दूसरे कर्म

182
00:13:08,760 --> 00:13:12,800
है कर्म संकर्ता और पतित ब्राह्मण

183
00:13:12,800 --> 00:13:16,880
एक ही चीज हो गई कर्म संकरता उसके कर्म वैसे नहीं है जो होने

184
00:13:16,880 --> 00:13:21,120
चाहिए तो कर्म संकरता आ गई जैसे जैसे वर्ण संकरता हां

185
00:13:21,120 --> 00:13:25,200
बोलिए कर्म संकरता वैसे तो मैंने आपके ही मुख से सुना है आपकी

186
00:13:25,200 --> 00:13:29,360
भी एक दो वीडियो देखी थी अब ये ऐसा वर्ड एक्सिस्ट करता है या

187
00:13:29,360 --> 00:13:33,360
हम बस संधि विच्छेद कर्म को नहीं नहीं करता हटा दीजिए

188
00:13:33,360 --> 00:13:37,520
वैसे है शास्त्रों में कर्ता मैं कह रहा हूं कि हटा दीजिए अभी

189
00:13:37,520 --> 00:13:41,520
बात करते हैं पतित ब्राह्मण तो है श्रेष्ठ और पतित तो है ना

190
00:13:41,520 --> 00:13:46,200
यानी कि श्रेष्ठ वो हुआ जो अपने आचरण के अनुसार चल रहा है और पतित वो हुआ

191
00:13:46,200 --> 00:13:50,800
जो अपने आचरण से हीन हो गया आचरण हीन हो गया

192
00:13:50,800 --> 00:13:54,960
ठीक है तो पतित पतित ब्राह्मण है ना तो जब हमने उसको

193
00:13:54,960 --> 00:13:58,960
कहा कि वो पतित ब्राह्मण है तब तो वो दोषी दिखाई देगा मगर यदि

194
00:13:58,960 --> 00:14:03,040
हमने दायित्व से हटने हटने को भी एक दूसरे दायित्व का नाम

195
00:14:03,040 --> 00:14:07,240
दे दिया तो दोषी कहां रहा वो यदि अपने

196
00:14:07,240 --> 00:14:11,320
दायित्व नहीं यदि अपने दायित्व से हटने को भी

197
00:14:11,320 --> 00:14:16,160
हमने एक दूसरे दायित्व का नाम दे दिया उसको छाप दे दी

198
00:14:16,160 --> 00:14:20,160
कि भाई तुम अब तुम्हारी ड्यूटी ये है मगर अब तुम अपनी ड्यूटी ना निभा करके

199
00:14:20,160 --> 00:14:24,240
कुछ और कर रहे हो जिसमें तुम्हें मजा आ रहा है जिसमें तुम्हें आनंद आ रहा है जिसमें तुम्हारी आसक्ति है

200
00:14:24,240 --> 00:14:28,400
तो अब तुमने अपनी ड्यूटी ना निभा करके दूसरी एक दूसरे काम

201
00:14:28,400 --> 00:14:32,400
करने लगे तो तो हम उसको ये नहीं कहेंगे कि वो ड्यूटी से भागा बल्कि हम ये

202
00:14:32,400 --> 00:14:36,480
कहेंगे कि तेरी अब से यही ड्यूटी है। तो वो दोषी नहीं रहा। अगर हमने

203
00:14:36,480 --> 00:14:40,640
उसको वो टैग दे दिया दूसरी ड्यूटी वाला तो वो दोषी नहीं रहेगा। अब दूसरी एक बात

204
00:14:40,640 --> 00:14:44,640
मैंने आपकी बातों से यहां ये समझी है कि

205
00:14:44,640 --> 00:14:48,680
जैसे कि आपने बताया कि उस वो ऐसा नहीं कहेंगे कि वो

206
00:14:48,680 --> 00:14:53,120
भागा। आपने एक बात कही ऐसा नहीं कहेंगे कि वो भागा। बल्कि

207
00:14:53,120 --> 00:14:56,640
ये कहेंगे कि उसका मन परिवर्तित हो गया। ठीक है? हम

208
00:14:56,640 --> 00:15:00,880
तो इसका अर्थ यह है कि वर्णाश्रम

209
00:15:00,880 --> 00:15:05,040
जो धर्म बताया गया है या वर्णाश्रम के अनुसार जो कर्म

210
00:15:05,040 --> 00:15:09,520
बताए गए हैं हम उनको आप धर्म की दृष्टि से नहीं देखते

211
00:15:09,520 --> 00:15:13,840
क्योंकि धर्म जो होता है वो मन परिवर्तित होने के आधार पर बदला

212
00:15:13,840 --> 00:15:14,800
नहीं जाता

213
00:15:14,800 --> 00:15:18,880
जैसे कि हमारा धर्म है माता के प्रति पिता के प्रति

214
00:15:18,880 --> 00:15:23,040
अब हमारा मन परिवर्तित हो गया तो हम अपने

215
00:15:23,040 --> 00:15:27,280
माता-पिता की सेवा करना छोड़ के जो हमारा धर्म में माता का धर्म,

216
00:15:27,280 --> 00:15:31,440
पितृ धर्म, मातृ धर्म उस धर्म का पालन ना करके हम

217
00:15:31,440 --> 00:15:35,440
जो है मान लीजिए किसी और की सेवा कर रहे हैं मगर मात्र

218
00:15:35,440 --> 00:15:39,440
माता और पिता की सेवा नहीं कर रहे हैं तो हम वहां से मातृ धर्म

219
00:15:39,440 --> 00:15:43,600
से नहीं माने जाएंगे। बल्कि हम हमें ये माना जाएगा कि हमारा जो

220
00:15:43,600 --> 00:15:47,680
है क्या कहते हैं? मन परिवर्तित हो गया। इसलिए हम किसी और की सेवा

221
00:15:47,680 --> 00:15:51,760
कर रहे हैं। तो कहने का मतलब है कि आप कहने का

222
00:15:51,760 --> 00:15:52,260
अर्थ यह

223
00:15:52,240 --> 00:15:56,320
है कि आप वर्ण वर्णाश्रम के अनुसार जो बताई

224
00:15:56,320 --> 00:16:00,320
गई नियमावली है कि तेरे अमुक अमुक कर्म होंगे उन कर्मों को

225
00:16:00,320 --> 00:16:04,400
आप धर्म की दृष्टि से नहीं देख रहे हैं क्योंकि आप उनको परिवर्तनशील मान

226
00:16:04,400 --> 00:16:08,480
रहे हैं। मन के आधार पे जबकि धर्म

227
00:16:08,480 --> 00:16:12,640
वो है जो मन के आधार पर परिवर्तित नहीं होगा। बहन तो बहन

228
00:16:12,640 --> 00:16:16,640
बहन के साथ क्या आचरण है वही रहेगा। माता के साथ क्या आचरण है वही रहे?

229
00:16:16,640 --> 00:16:20,640
धर्म वो होता है जो परिवर्तनशील ना हो। सनातन धर्म तो कम से कम

230
00:16:20,640 --> 00:16:25,000
वही होता है। अब जो परिवर्तनशील है वो क्या है?

231
00:16:25,000 --> 00:16:29,200
जैसे इस्लाम में पांच 101 में कहा गया

232
00:16:29,200 --> 00:16:33,440
कि ज्यादा सवाल मत करो वरना तुम्हारे लिए वो आयतें

233
00:16:33,440 --> 00:16:37,600
भी खोल दी जाएंगी। जिनके कारण पहले के

234
00:16:37,600 --> 00:16:41,680
कुछ लोग बागी हो गए थे। हम

235
00:16:41,680 --> 00:16:46,320
तो यानी कि पहले के लोग बागी हो रहे थे इसलिए उनके

236
00:16:46,320 --> 00:16:50,320
उनको नहीं समझ में आ रहा था मन उनका मन जो है उनको एक्सेप्ट नहीं कर पा

237
00:16:50,320 --> 00:16:54,400
रहा था नियमों को इस वजह से कुछ नियम बदल दिए गए

238
00:16:54,400 --> 00:16:57,640
इस्लाम के

239
00:16:57,640 --> 00:17:01,760
अनुसार तो धर्म हमारा जो धर्म है वह बदलता नहीं

240
00:17:01,760 --> 00:17:05,760
है तो यहां पर मैं आपसे जानना चाहूंगा क्या मन के आधार पर आप धर्म

241
00:17:05,760 --> 00:17:07,360
को बदलने वाला मानते हैं या नहीं

242
00:17:07,360 --> 00:17:11,440
मानते

243
00:17:11,440 --> 00:17:15,600
मन के आधार पर धर्म नहीं बदला जा सकता। पर हम जो

244
00:17:15,600 --> 00:17:19,840
हमारा यह जो टॉपिक है वो सामाजिक व्यवस्था को रिलेटेड

245
00:17:19,840 --> 00:17:23,840
है। वर्ण व्यवस्था का समाज में हिसाब किताब

246
00:17:23,840 --> 00:17:28,480
क्या है वो उससे रिलेटेड है। आप इसको इस पे भी आएंगे।

247
00:17:28,480 --> 00:17:32,720
इस पे भी आएंगे। आगे जब हम लोग तर्कसंगत चलेंगे।

248
00:17:32,720 --> 00:17:37,200
अभी जब आपने बात जब हम बात कर रहे हैं ना जैसे

249
00:17:37,200 --> 00:17:41,360
वर्णाश्रम होना चाहिए तो ब्राह्मण के कर्म जो होते हैं अब उसको हम समाज से लेंगे

250
00:17:41,360 --> 00:17:46,000
या शास्त्रों से लेंगे। ब्राह्मण के कर्म क्या होते हैं? ब्राह्मण

251
00:17:46,000 --> 00:17:51,200
के कर्म हम शास्त्रों से लेंगे। मतलब पालन तो हमें शास्त्रों का ही करना चाहिए।

252
00:17:51,200 --> 00:17:55,360
हां। तो शास्त्रों के अनुसार जो धर्म है वो धर्म

253
00:17:55,360 --> 00:17:59,680
जो है शाश्वत है और हम सनातन धर्म कहते ही इसे सनातन

254
00:17:59,680 --> 00:18:03,760
का अर्थ ही है जो किसी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसको सनातन कहते हैं।

255
00:18:03,760 --> 00:18:07,840
तो जब हम ये कह देंगे कि मन उसका मन परिवर्तित हो गया

256
00:18:07,840 --> 00:18:11,920
और वो वहां से चला गया और वहां पर हम उसको दोष नहीं देंगे

257
00:18:11,920 --> 00:18:16,080
तो फिर उसके एक आचरण से हीन हो जाने वाले व्यक्ति को कभी हम दोषी

258
00:18:16,080 --> 00:18:21,200
नहीं ठहरा सकते कि तूने अपनी ड्यूटी का परित्याग किया।

259
00:18:21,200 --> 00:18:23,120
उसने ड्यूटी का परित्याग

260
00:18:23,120 --> 00:18:27,360
करके दूसरी ड्यूटी अपनाई है। उसने कर्म अपने बदले हैं। तो

261
00:18:27,360 --> 00:18:31,360
उसने दो यही तो बात है। देखिए प्रॉब्लम यही है ना कि ड्यूटी

262
00:18:31,360 --> 00:18:36,560
जो होती है ड्यूटी अगर आपको किस उसको ड्यूटी दी? किसने दी?

263
00:18:36,560 --> 00:18:40,560
उसके उसको ड्यूटी आइडियली उसके जो कुल के

264
00:18:40,560 --> 00:18:45,280
मतलब उसके माता पिता है उसके वो है उन्होंने दी है। उन्होंने नहीं दी। अगर

265
00:18:45,280 --> 00:18:49,320
उसका मन नहीं उन्होंने नहीं दी। ड्यूटी उसे शास्त्रों ने दी

266
00:18:49,320 --> 00:18:53,520
है। ड्यूटी उसे ईश्वर ने दी है। उसको किसी विशेष कुल

267
00:18:53,520 --> 00:18:57,600
में जन्म देकर के ड्यूटी उसको किसने दी? उसकी वहां पर उस कुल

268
00:18:57,600 --> 00:19:01,600
में उसके पिता ने निर्धारित नहीं दिया तेरे को ये कर्म करने को। निर्धारित पूर्व से

269
00:19:01,600 --> 00:19:05,600
ही है कि तुम इस कुल में जन्मे हो तो तुम्हारी ड्यूटी है। तो उसको ड्यूटी देने

270
00:19:05,600 --> 00:19:09,760
वाला ईश्वर है। मेरा एक क्वेश्चन है। एक व्यक्ति है उसने

271
00:19:09,760 --> 00:19:14,000
ब्राह्मण कुल में जन्म लिया है। ठीक है? उसके बाद वो

272
00:19:14,000 --> 00:19:18,000
वर्ण संकर हुआ या कर्म संकर हुआ। उसके बाद उसने अपना पेशा बदल के कोई

273
00:19:18,000 --> 00:19:22,000
दूसरा कर लिया। मान लो वो क्षत्रिय हो गया। वो सेना में भर्ती हो गया

274
00:19:22,000 --> 00:19:26,320
तो उसको हम पतित ब्राह्मण कह रहे हैं यहां पे। तो एक तो एक तो ब्राह्मण ब्राह्मण होके

275
00:19:26,320 --> 00:19:30,320
क्षत्रिय का काम क्यों कर रहा है? लेकिन वो कई जनरेशन से

276
00:19:30,320 --> 00:19:34,400
बहुत अच्छे तरीके से क्षत्रियों का काम का कार्य कर रहा है। तो भी

277
00:19:34,400 --> 00:19:38,160
वो दोषी है। शास्त्रों का दोषी है। उसके

278
00:19:38,160 --> 00:19:42,160
सारे कुल अगर क्षत्रिय कार्य

279
00:19:42,160 --> 00:19:46,240
कर रहा है। हां मैं बता देता हूं। कई जनरेशंस की बात आ गई इसमें।

280
00:19:46,240 --> 00:19:50,320
यदि उसको पता है कि वो ब्राह्मण है। ठीक है?

281
00:19:50,320 --> 00:19:54,320
और मेरे पूर्वजों ने ऐसा कर दिया था कि भाई वो

282
00:19:54,320 --> 00:19:58,320
ब्राह्मण का कार्य छोड़कर के क्षत्रिय का कार्य करने लगे। मेरे पूर्वजों ने ऐसा कर

283
00:19:58,320 --> 00:20:02,640
दिया था। तो उसको अगर वो चेंज नहीं करता

284
00:20:02,640 --> 00:20:06,800
है अगर वो चेंज नहीं करता वापस उसी डर्रे आने की कोशिश नहीं करता

285
00:20:06,800 --> 00:20:08,240
है। तो दोषी है।

286
00:20:08,240 --> 00:20:14,240
जैसे कि इसको ऐसे छोड़ दीजिए। इसको छोड़ दीजिए। अगर कोई

287
00:20:15,360 --> 00:20:19,440
वर्ण शंकर की बात ले लीजिए। वर्ण शंकर कोई वर्ण शंकर हो

288
00:20:19,440 --> 00:20:23,440
गया। अब उसकी कई पीढ़ियां जो है सही से चल रही है। मगर

289
00:20:23,440 --> 00:20:27,600
वर्ण शंकर वर्ण शंकर का संकरता का दोष तो लगा ही हुआ है ना।

290
00:20:27,600 --> 00:20:31,840
तो इसी तरीके से आचरण हीनता का दोष यदि वो ब्राह्मण कुल है तो उसमें

291
00:20:31,840 --> 00:20:35,760
लगा रहेगा जब तक वो पुनः वापस नहीं आ जाता है।

292
00:20:35,760 --> 00:20:39,840
वरना हम दोषी किसे कहेंगे? प्रश्न ये था कि यदि हम धर्म से

293
00:20:39,840 --> 00:20:44,000
विमुख हो जाने को भी एक अच्छा सा आडंबर पहना देंगे, अच्छे से कपड़े

294
00:20:44,000 --> 00:20:48,160
पहना देंगे कि हां अब ये जो है व्यापारी हो गया, अब ये वैश्य हो गया तो

295
00:20:48,160 --> 00:20:52,320
फिर हम दोषी कब कहेंगे उसे? आचरण को छोड़कर भागने

296
00:20:52,320 --> 00:20:56,720
वाला कब किसे कहेंगे? और आपने जैसा कि बताया कि मन परिवर्तित

297
00:20:56,720 --> 00:21:00,800
हो गया तो उस पर भी मैंने वो किया कि मन के आधार पर धर्म बदलता नहीं

298
00:21:00,800 --> 00:21:04,960
है। दूसरी बात कि अब उसने ड्यूटी छोड़ी नहीं है। उसने एक ड्यूटी छोड़

299
00:21:04,960 --> 00:21:09,120
के दूसरी ड्यूटी ली है। तो मैंने क्वेश्चन किया आपसे कि ड्यूटी उसको

300
00:21:09,120 --> 00:21:13,280
दी किसने? ईश्वर ने। और उसमें बदलाव

301
00:21:13,280 --> 00:21:17,280
कैसे किया? अपने मन से। समझ रहे

302
00:21:17,280 --> 00:21:21,280
हैं ना? तो ड्यूटी उसको ईश्वर ने दी है। अगर उसमें चेंज भी

303
00:21:21,280 --> 00:21:25,440
करेगा तो ईश्वर ही करेगा। ईश्वर चेंज करते हैं। आपने इस जन्म में कुछ किया।

304
00:21:25,440 --> 00:21:30,480
अगले जन्म में आपके कर्मों के हिसाब से वो चेंज कर देते हैं आपकी ड्यूटी।

305
00:21:30,480 --> 00:21:34,480
अच्छा तो आपके हिसाब से जिस कुल में हमने जन्म लिया है अगर हमें

306
00:21:34,480 --> 00:21:38,960
उसका ज्ञात है कि यह कुल यही करत आ रहा है तो हमें किसी भी परिस्थिति

307
00:21:38,960 --> 00:21:42,960
में वही काम करना चाहिए। चाहे परिस्थिति कोई भी

308
00:21:42,960 --> 00:21:47,200
हो वही काम करना चाहिए। नहीं नहीं नहीं ऐसा नहीं है। हमें

309
00:21:47,200 --> 00:21:51,360
करने का प्रयास करना चाहिए। यदि व्यवस्था है तो इस सत्य को स्वीकारना

310
00:21:51,360 --> 00:21:55,440
चाहिए कि मैं कर्म संकर हूं। मैं आचरण से हीन हूं। इसमें क्या दिक्कत

311
00:21:55,440 --> 00:22:00,000
है? मैं पतित हूं। इसमें क्या दिक्कत है? वो

312
00:22:00,000 --> 00:22:05,240
भाई जैसे जैसे मान लीजिए कि आपको अमुक अमुक स्थिति

313
00:22:05,240 --> 00:22:10,000
में जैसे हमारे यहां पर एक नारी सदा ब्रह्मचारी

314
00:22:10,000 --> 00:22:14,080
श्री राम जी ने कहा एक पत्नी धर्म एक पत्नी व्रत जो होता है वो

315
00:22:14,080 --> 00:22:18,080
श्रेष्ठतम है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम तो

316
00:22:18,080 --> 00:22:22,240
श्रेष्ठतम क्या हुआ राम एक पत्नी वाले

317
00:22:22,240 --> 00:22:26,320
मगर अमुक अमुक स्थिति में अमुक अमुक चीजों की रक्षा के लिए

318
00:22:26,320 --> 00:22:31,280
अमुक अमुक चीजों के लिए हमें एक से ज्यादा विवाह करना पड़ गया

319
00:22:31,280 --> 00:22:35,440
तो वहां पर परिस्थिति के अनुसार करना पड़ गया वो बात ठीक है मगर उसमें आपको यह

320
00:22:35,440 --> 00:22:39,920
स्वीकारने में क्या दिक्कत है ये गति श्रेष्ठतम नहीं है श्रेष्ठतम

321
00:22:39,920 --> 00:22:43,560
गति तो राम वाली ही

322
00:22:43,560 --> 00:22:47,760
है हम अगर उसको भी नॉर्मल कर देंगे नॉर्मलाइज कर देंगे

323
00:22:47,760 --> 00:22:52,320
तो कल को वो जो एक से ज्यादा विवाह करना लोग नियम बना लेंगे

324
00:22:52,320 --> 00:22:56,320
अगर हम उसको भी वो नाम दे देंगे नहीं ये भी सही है हमने परिस्थिति

325
00:22:56,320 --> 00:23:00,720
के कारण अगर ऐसा नहीं परिस्थिति वश अपने वर्ण

326
00:23:00,720 --> 00:23:05,120
के बाहर जैसे आक्रमणी हो गया हर व्यक्ति के हथियार उठाने की आवश्यकता

327
00:23:05,120 --> 00:23:06,960
है सब उठाते हैं।

328
00:23:06,960 --> 00:23:11,520
मगर उसको ही हमने धर्म के रूप में ख्यापित कर दिया तो वास्तविकता जो है

329
00:23:11,520 --> 00:23:15,840
वो तो खो ही जाएगी। तो हमें कहना पड़ेगा कि नहीं भाई सबसे

330
00:23:15,840 --> 00:23:19,840
अच्छी चीज तो है एक ही विवाह हो। मगर यदि आपत्ति

331
00:23:19,840 --> 00:23:24,400
काल स्थिति में आपने कर भी लिया है तो उसको भी आप ऐसा मत समझो। मगर वो श्रेष्ठतम

332
00:23:24,400 --> 00:23:29,200
नहीं है। फाइनेस्ट क्वालिटी ऑफ मर्यादा नहीं है। फाइनेस्ट क्या है? राम।

333
00:23:29,200 --> 00:23:33,440
ये हमें मानना पड़ेगा। आपने अमुक अमुक स्थिति में कुछ भी कर लिया। ये

334
00:23:33,440 --> 00:23:37,520
चीज अच्छा अच्छा। मतलब आप बोल रहे हैं जो जन्म से है वही श्रेष्ठ है।

335
00:23:37,520 --> 00:23:41,520
उसका प्रयास करना चाहिए। ये पॉइंट मैं वो जन्म से जो मिला है

336
00:23:41,520 --> 00:23:45,760
दायित्व उसको करने का प्रयास करना चाहिए। आपकी विवशता हो गई।

337
00:23:45,760 --> 00:23:50,080
आपके घर में सिचुएशन हो गई। आपके पूर्वजों ने कुछ गलती कर दी। ऐसा

338
00:23:50,080 --> 00:23:54,160
ऐसा हो गया तो उस चीज को धारण कर लो कि ठीक है हां यहां पर मैं

339
00:23:54,160 --> 00:23:59,520
इतना नहीं कर पा रहा हूं यह मेरे अंदर कमी है। इतनी इतनी चीज बाकी है।

340
00:23:59,520 --> 00:24:03,760
जब आप सत्य ऐसे मान लीजिए कि किसी के पिता ने कहा कि तुमको

341
00:24:03,760 --> 00:24:08,000
सिगरेट नहीं पीनी है। ठीक है? परंतु वो व्यक्ति

342
00:24:08,000 --> 00:24:12,000
इतना विवश है। इंद्रियों के कारण या जो भी है वो

343
00:24:12,000 --> 00:24:16,560
छोड़ नहीं पा रहा है। मगर उसकी प्रमाण्य बुद्धि है। पिताजी कहते तो सही है।

344
00:24:16,560 --> 00:24:20,560
सिगरेट जो है छोड़ देनी चाहिए। मगर उसकी मगर उसकी वो

345
00:24:20,560 --> 00:24:22,000
विवशता है कि वो छोड़ नहीं पा

346
00:24:22,000 --> 00:24:26,160
रहा है। इंद्रियों के वशीभूत है। ठीक है? तो क्या होगा उससे कि

347
00:24:26,160 --> 00:24:30,480
हमारे उस सिद्धांत की रक्षा होगी। जब हम उसको

348
00:24:30,480 --> 00:24:34,480
नाम ये नहीं कह दे नहीं सिगरेट पीना अच्छा है। पिताजी जो कह गए

349
00:24:34,480 --> 00:24:38,480
वो कह गए सिगरेट पीना अच्छा है। वो ये कहना चालू ना कर दे। वो यही कहे

350
00:24:38,480 --> 00:24:42,480
मैं छोड़ नहीं पा रहा हूं। वो ठीक है। मगर बात तो वही सही है। पिताजी ने जो कहा

351
00:24:42,480 --> 00:24:46,560
था सिगरेट पीना गलत। तो इस तरीके से हमारा सिद्धांत लुप्त नहीं

352
00:24:46,560 --> 00:24:50,560
होगा। तो क्या होगा? कम से कम अगली पीढ़ी बच जाएगी। वो सिगरेट की आदत

353
00:24:50,560 --> 00:24:55,040
पड़ने से पहले ही उसको यह पता चल जाएगा सिगरेट पीना गलत है।

354
00:24:55,040 --> 00:24:59,040
समझ रहे हैं आप मेरी बात? तो सिद्धांत की रक्षा तो करनी पड़ेगी ना। उसी

355
00:24:59,040 --> 00:25:03,040
तरीके से कि हम अगर वर्ण के बाहर अमुक अमुक

356
00:25:03,040 --> 00:25:07,480
स्थितियों में आपातकालीन धर्म बताया गया है कि अमुक अमुक स्थितियों में आप ऐसासा

357
00:25:07,480 --> 00:25:11,680
करिए। है ना? हमारे यहां तीन प्रकार सामान्य स्थितियों

358
00:25:11,680 --> 00:25:15,760
का धर्म, आपातकालीन धर्म और विशेष्य धर्म भी होता है।

359
00:25:15,760 --> 00:25:20,080
विशेष स्थितियां कुछ होती है वहां पर भी धर्म होता है। तो आपातकालीन

360
00:25:20,080 --> 00:25:24,320
में बताया है कि फिर जब ऐसी सिचुएशन आ जाए तो ऐसा कर लो ब्राह्मण को भी हथियार उठाना

361
00:25:24,320 --> 00:25:28,400
है ये सब सब कुछ है वहां पर। मगर उसको ही सामान्य के रूप में

362
00:25:28,400 --> 00:25:32,400
अगर हम क्षापित कर देंगे तो सामान्य जो है आपातकालीन स्थितियों से

363
00:25:32,400 --> 00:25:36,480
पहले का जो धर्म है सामान्य जो रेगुलर है जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल

364
00:25:36,480 --> 00:25:37,120
है वो तो खो ही

365
00:25:37,120 --> 00:25:41,160
जाएगा ना। फिर तो हम सदैव आपातकालीन के नाम पर जैसे कि मांस खाने की

366
00:25:41,160 --> 00:25:45,200
स्थिति मांस खाने की स्थितियों का क्या है कि अमुक अमुक

367
00:25:45,200 --> 00:25:49,440
जैसे प्राण की रक्षा के लिए या फिर जो आपके अंदर

368
00:25:49,440 --> 00:25:53,920
प्रवृत्ति से निवृत्ति के लिए आप मांस का उपयोग अमुक अमुक विधियों का आलंबन

369
00:25:53,920 --> 00:25:58,080
लेकर के करो तो ये कोई विशेष और आपत्ति काल की स्थितियां हो गई।

370
00:25:58,080 --> 00:26:02,160
विशेष और आपत्ति काल मगर अब हमने कह दिया देखो देखो वहां पर देखो मांस

371
00:26:02,160 --> 00:26:06,160
खाने का कहा तो गया है तो खूब मांस खाओ

372
00:26:06,160 --> 00:26:10,320
तो फिर क्या हुआ हमने उस सिद्धांत को खो दिया

373
00:26:10,320 --> 00:26:14,800
तो इसलिए यदि वर्ण के बाहर जाकर के विवशता

374
00:26:14,800 --> 00:26:19,120
वश आपको करना पड़ रहा है तो इस तथ्य को स्वीकार करो कि मैं एक

375
00:26:19,120 --> 00:26:23,440
अच्छा ब्राह्मण नहीं हूं जो कि आपने कहा कि उसको श्रेष्ठ ब्राह्मण नहीं कहा जाएगा।

376
00:26:23,440 --> 00:26:28,080
वही हम भी कह रहे हैं। उसको श्रेष्ठ नहीं कहा जाएगा। उसको पतित कहा जाएगा। निष्कृत

377
00:26:28,080 --> 00:26:32,160
मनुस्मृति में यह भी दिया गया है संविधान कि किन-किन कारणों से

378
00:26:32,160 --> 00:26:36,280
व्यक्ति को अ छोड़ देना

379
00:26:36,280 --> 00:26:40,320
है। उसको लेना नहीं है। यज्ञ में नहीं बुलाना है। विवाह नहीं करना

380
00:26:40,320 --> 00:26:44,560
है। है ना? फिर वो अपने ही जैसे किसी व्यक्ति को ढूंढे उसके साथ विवाह

381
00:26:44,560 --> 00:26:48,720
करे। मगर यदि वो भी अपने आप को नॉर्मल ब्राह्मण के रूप में ही ख्यापित

382
00:26:48,720 --> 00:26:52,320
करता रहेगा तो फिर वो जो कर्म आचर कर्म संकरता

383
00:26:52,320 --> 00:26:56,800
की वजह से जो दोष आ रहे हैं उसकी वजह से अगली पीढ़ी में भी दोष आएंगे। तो

384
00:26:56,800 --> 00:27:01,600
तो व्यवस्था बनी रहे। इसलिए ड्यूटी

385
00:27:01,600 --> 00:27:06,000
के विपरीत जाकर के ड्यूटी कोई और ड्यूटी को ड्यूटी का नाम दे के

386
00:27:06,000 --> 00:27:10,000
ड्यूटी के विपरीत आपको जो ड्यूटी ईश्वर से मिली है उस ड्यूटी

387
00:27:10,000 --> 00:27:14,160
के विपरीत जाकर के यदि किसी और ड्यूटी को आप अपना रहे हैं तो दोषी

388
00:27:14,160 --> 00:27:18,320
आपको तब कहा जा सकता है जब आपका वो जो टैग है ना ब्राह्मण,

389
00:27:18,320 --> 00:27:22,560
क्षत्रिय, वैश्य, अथवा शूद्र वो छीना ना जाए। अगर आपने उसको

390
00:27:22,560 --> 00:27:27,280
वो छीन के दूसरा टैग दे दिया तो वह दोष ही नहीं रहा। मेरा तो यही काम है।

391
00:27:27,280 --> 00:27:31,360
अब जैसे सपोज करिए आपने कहा कि मन परिवर्तित हो गया वो टमाटर बेचने

392
00:27:31,360 --> 00:27:35,440
गया। अब उदाहरण के लिए वहां पर उसी समय अटैक हुआ।

393
00:27:35,440 --> 00:27:39,600
उसने सोचा मैं अपनी ड्यूटी छोड़ के टमाटर बेचने वाला बन जाता हूं। और वहां

394
00:27:39,600 --> 00:27:43,600
हो गई लूट। तो यहां ड्यूटी छोड़ने की वजह से समाज को

395
00:27:43,600 --> 00:27:47,760
नुकसान हुआ ना। तो इसलिए ड्यूटी

396
00:27:47,760 --> 00:27:51,840
का छोड़ना किसी के मन पर आधारित नहीं होना चाहिए। और धर्म भी हमारा

397
00:27:51,840 --> 00:27:56,000
शाश्वत है। वह मन के आधार पर नहीं बदलता। इसीलिए भगवान श्री

398
00:27:56,000 --> 00:28:00,080
कृष्ण के सामने जब अर्जुन कह रहे थे कि मैं तो ध्यान

399
00:28:00,080 --> 00:28:04,240
करूंगा मैं तो छोड़ दूंगा मुझे नहीं युद्ध करना तो भगवान ने वहां

400
00:28:04,240 --> 00:28:07,440
पर उसको उसके क्षत्रिय धर्म की याद दिलाई कि

401
00:28:07,440 --> 00:28:11,520
तू क्षत्रिय है धर्म युक्त धर्म धर्म युक्त युद्ध लड़ना

402
00:28:11,520 --> 00:28:15,680
तेरा धर्म है कर्तव्य है और यदि मन के

403
00:28:15,680 --> 00:28:19,840
कारण उसको बदला हुआ माना जा सकता था तो भगवान ये तर्क ही ना देते उसको

404
00:28:19,840 --> 00:28:25,080
कि तू क्षत्रिय तेरा धर्म धर्म युक्त युद्ध करना रक्षा करना तेरा

405
00:28:25,080 --> 00:28:29,200
धर्म तो ये बातें हैं आप बिल्कुल उसी जगह जिस जगह मैं हूं बस ये

406
00:28:29,200 --> 00:28:33,360
है कि जो पतित वाली जो थ्योरी है इसको थोड़ा सा जान लीजिए कि

407
00:28:33,360 --> 00:28:37,720
कोई ब्राह्मण यदि आचरण से विरुद्ध जाकर के कोई काम करेगा तो उसको

408
00:28:37,720 --> 00:28:41,760
आचरणहीन उसी को कर्म संकरता भी कहते हैं आपको नहीं मालूम है मगर

409
00:28:41,760 --> 00:28:45,840
आचरणहीनता को ही कर्म संता कहते हैं तो उसी उसको

410
00:28:45,840 --> 00:28:49,920
पतित ब्राह्मण आचरणहीन ब्राह्मण निम्न कोटि का ब्राह्मण नाम का

411
00:28:49,920 --> 00:28:54,000
ब्राह्मण ये सब उसको कहा जाएगा यह नहीं मान

412
00:28:54,000 --> 00:28:58,160
लिया जाएगा कि वो वही हो गया। वो एक आचरणहीन ब्राह्मण है क्योंकि वह वैश्य

413
00:28:58,160 --> 00:28:58,660
व्यक्ति

414
00:28:58,480 --> 00:29:03,400
का पालन कर रहा है। वो एक आचरणहीन ब्राह्मण है क्योंकि वो इस समय

415
00:29:03,400 --> 00:29:07,880
क्षत्रयोचित वृत्त से अपना आजीवोजन कर रहा है।

416
00:29:07,880 --> 00:29:11,920
वो हमारे पुराणों में बहुत बार ऐसी चीजें आई है

417
00:29:11,920 --> 00:29:16,080
जब कहा गया कि उस समय के ब्राह्मण भी ऐसे हो गए थे। ब्राह्मण भी यह

418
00:29:16,080 --> 00:29:20,240
करने लगे थे। तो यदि कुछ गलत कर देने से उनका

419
00:29:20,240 --> 00:29:24,240
वो माना जाता कि वह यह करने वाले हो गए या जैसे कि मान लीजिए

420
00:29:24,240 --> 00:29:28,320
ब्राह्मण भी पूजा पूजा पाठ से दूर हो के और जो

421
00:29:28,320 --> 00:29:32,480
है उसमें लग गए थे वैश्यत्त में ऐसे कई कई सारी ऐसी बातें आई है तो

422
00:29:32,480 --> 00:29:36,560
वहां पर यदि अगर बदला हुआ तो फिर वहां पे ये ब्राह्मण ने भी

423
00:29:36,560 --> 00:29:40,880
छोड़ दिया ये चीज है ही नहीं क्योंकि ब्राह्मण छोड़ने के बाद तो ब्राह्मण रहा ही नहीं

424
00:29:40,880 --> 00:29:45,040
जैसे बंध्या पुत्र जिसके पुत्र हो गया वो वो बंध्या नहीं

425
00:29:45,040 --> 00:29:49,120
रहेगी ना बांझ पांच स्त्री जिसके पुत्र हो

426
00:29:49,120 --> 00:29:53,520
गया वो वो पांच नहीं रहेगी। तो इसी तरीके से यदि कर्म के आधारित

427
00:29:53,520 --> 00:29:57,520
हम लोग मान लेंगे कि जो कर्म वो करने लगा वही उसका हो गया तो हम ये नहीं कह

428
00:29:57,520 --> 00:30:01,520
सकते कि ब्राह्मण ने इस कार्य को करना छोड़ दिया।

429
00:30:01,520 --> 00:30:03,920
ये चीज आएगी नहीं वहां पर।

430
00:30:03,920 --> 00:30:07,920
तो ये चीजें दूसरी एक बात आपने कही लॉन्ग पीरियड

431
00:30:07,920 --> 00:30:12,000
लॉन्ग पीरियड वाली वर्ड उसमें क्या है? जैसे आपने

432
00:30:12,000 --> 00:30:16,240
कहा कि लॉन्ग पीरियड तो कितना लॉन्ग किसी

433
00:30:16,240 --> 00:30:20,400
के लिए 5 मिनट लॉन्ग होता है। किसी के लिए 15 मिनट, किसी के लिए 5

434
00:30:20,400 --> 00:30:24,560
घंटे, किसी के लिए 5 महीने, किसी के लिए 5 साल, किसी के लिए 50 साल,

435
00:30:24,560 --> 00:30:28,560
किसी के लिए 100 साल। इतना लॉन्ग। अब ये जो लॉन्ग वाली बात है, इसमें

436
00:30:28,560 --> 00:30:32,640
आपको कहीं ना कहीं थर्ड पार्टी को अथॉरिटेटिव रूप में

437
00:30:32,640 --> 00:30:36,720
बनाना पड़ेगा। आपका प्रमाण, शब्द प्रमाण। वो

438
00:30:36,720 --> 00:30:40,720
तो हमारे पास है नहीं। कि कितना लॉन्ग पीरियड हो

439
00:30:40,720 --> 00:30:44,960
जाने के बाद हम लोग किसी का वर्ण बदला हुआ मान उसको घोषित

440
00:30:44,960 --> 00:30:49,640
ही कर दे ये हो गया तो ऐसा कोई शब्द प्रमाण हमें नहीं प्राप्त

441
00:30:49,640 --> 00:30:53,680
है कि आप इतना हो जाए जैसे ये जो स्पॉन

442
00:30:53,680 --> 00:30:58,760
वाले हैं वो एक बात कहते हैं कि किसी ने

443
00:30:58,760 --> 00:31:03,120
जिसकी जिसके मुख पर भगवान का नाम है

444
00:31:03,120 --> 00:31:07,360
वो जो है ब्राह्मण हो गया मैंने पूछा कितनी बार

445
00:31:07,360 --> 00:31:11,360
जाकिर नायक अभी ले लेगा पांच बार राम राम राम राम ब्राह्मण बना

446
00:31:11,360 --> 00:31:15,600
के बिठा लो अपने यहां तो ये होना चाहिए कितनी बार 5

447
00:31:15,600 --> 00:31:18,960
लाख बार 50 लाख बार ऐसा तो कोई व्यवस्था

448
00:31:18,960 --> 00:31:22,960
थी नहीं है। हां ऐसी व्यवस्था है शायद

449
00:31:22,960 --> 00:31:27,200
मतलब शिव पुराण में कई बार आता है कि ओम नमः शिवाय का इतने हजारों

450
00:31:27,200 --> 00:31:31,360
बार जाप करोगे तो ये मिल जाएगा। मतलब व्यवस्था मुझे

451
00:31:31,360 --> 00:31:36,080
ऐसा नहीं है कि ब्राह्मण का जन्म मिलेगा।

452
00:31:36,080 --> 00:31:40,240
हां जन्म मिलेगा। उसी टाइम आप ब्राह्मण नहीं घोषित हो जाओगे।

453
00:31:40,240 --> 00:31:45,360
हां ये बोल तो ये सारी चीजें हैं।

454
00:31:45,360 --> 00:31:49,920
मेरा एक क्वेश्चन है इसमें जैसे भगवान परशुराम जी थे

455
00:31:49,920 --> 00:31:54,080
वो ब्राह्मण थे या क्षत्रिय थे और भगवान

456
00:31:54,080 --> 00:31:58,560
ने क्षत्रियोचित वो क्षत्रियोचित उसका आलंबन

457
00:31:58,560 --> 00:32:02,560
लेने वाले क्षत्रियोचित आचरण करने वाले ब्राह्मण

458
00:32:02,560 --> 00:32:06,640
थे और देखिए ये आपने अच्छा उदाहरण दिया बहुत अच्छा उदाहरण

459
00:32:06,640 --> 00:32:11,040
दिया अब इसी में देख लीजिए प्रमाण की बात मैं आपको करता हूं परशुराम

460
00:32:11,040 --> 00:32:15,040
जी ने जो उनकी एक तरीके से प्रवृत्ति थी वो क्षत्रिय की थी।

461
00:32:15,040 --> 00:32:19,120
हालांकि उनके पीछे दिव्य कथा है परशुराम जी का

462
00:32:19,120 --> 00:32:23,280
और विश्वामित्र जी का जन्म कैसे हुआ था वो शायद आपको पता हो कि

463
00:32:23,280 --> 00:32:27,360
उनकी माता के लिए जो खीर बनी थी वो विश्वामित्र जी की माता ने

464
00:32:27,360 --> 00:32:31,360
खा ली थी और विश्वामित्र जी की माता के लिए जो खीर बनी थी

465
00:32:31,360 --> 00:32:34,080
वो परशुराम जी की माता जी ने खा ली थी।

466
00:32:34,080 --> 00:32:38,320
उसमें था आशीर्वाद कि तुम्हें एक अच्छे वो अच्छा क्षत्रिय पुत्र

467
00:32:38,320 --> 00:32:42,320
प्राप्त हो या तुम्हें एक अच्छा ब्राह्मण पुत्र प्राप्त हो।

468
00:32:42,320 --> 00:32:46,400
तो इसीलिए विश्वामित्र जी के अंदर क्षत्रिय होते हुए भी ब्राह्मण के गुण आ गए

469
00:32:46,400 --> 00:32:50,640
थे और परशुराम जी के अंदर ब्राह्मण होते हुए भी

470
00:32:50,640 --> 00:32:54,720
क्षत्रिय के आ गए थे जिसको उन्होंने समय के साथ उद्भाषित

471
00:32:54,720 --> 00:32:59,360
कर लिया स्फोटित कर लिया तो उन दोनों को दोष लगा

472
00:32:59,360 --> 00:33:04,520
नहीं नहीं अभी दोष की बात बाद में करेंगे पहले आपको मैं एक प्रमाण दे दूं

473
00:33:04,520 --> 00:33:08,880
कि परशुराम जी जब श्री राम के पास जाते

474
00:33:08,880 --> 00:33:13,600
हैं तब तक वो अनेकों अनेक युद्ध लड़ चुके के

475
00:33:13,600 --> 00:33:17,600
ठीक है। राम जी कहते हैं जब उन्हें ललकारते हैं

476
00:33:17,600 --> 00:33:21,920
और उल्टी सीधी बातें जो भी कह रहे होते हैं आपस में जो चल रही होती है उस समय

477
00:33:21,920 --> 00:33:26,080
राम जी कहते हैं आप ब्राह्मण है इसलिए मैं आपका सम्मान कर रहा हूं वरना इतनी

478
00:33:26,080 --> 00:33:30,520
बातें मैं आपकी नहीं सुनता। तो राम जी ने उनको ब्राह्मण क्यों

479
00:33:30,520 --> 00:33:35,280
कहा? क्षत्रिय कहना चाहिए था। द्रोणाचार्य

480
00:33:35,280 --> 00:33:39,520
ने महाभारत का युद्ध लड़ा और

481
00:33:39,520 --> 00:33:43,680
रावण ने युद्ध लड़ा। मगर कभी रावण

482
00:33:43,680 --> 00:33:48,080
को क्षत्रिय नहीं कहा गया। कभी द्रोणाचार्य को क्षत्रिय नहीं कहा गया।

483
00:33:48,080 --> 00:33:51,280
ब्राह्मण कहा गया।

484
00:33:51,280 --> 00:33:55,280
तो कर्म के आधार पर हम जो

485
00:33:55,280 --> 00:33:59,440
है तो परशुराम जी के केस में

486
00:33:59,440 --> 00:34:03,600
उनका ये आपात धर्म कहा जाएगा या उनके जीवन का उद्देश्य कहा

487
00:34:03,600 --> 00:34:06,480
जाएगा आपात आपात धर्म आपात धर्म

488
00:34:06,480 --> 00:34:10,640
पर हमने तो ये सुना है कि उनका जन्म ही इस कारण से हुआ है कि

489
00:34:10,640 --> 00:34:14,800
संसार से मतलब जो विष्णु भगवान के जो अवतार होते हैं वो

490
00:34:14,800 --> 00:34:18,800
होते हैं कोई स्पेसिफिक पर्पस के लिए धर्म की स्थापना के लिए होते हैं अधर्म के नाश

491
00:34:18,800 --> 00:34:23,040
के लिए और धर्म की स्थापना के लिए अब उनका जो रूप जो हमें विदित

492
00:34:23,040 --> 00:34:27,360
है भाई कितनी उन्होंने तपस्या करी वो भी बहुत जगह आता है पर जो हमें

493
00:34:27,360 --> 00:34:31,600
मेनली देखा है वो है क्षत्रियों को उन्होंने 21 बार

494
00:34:31,600 --> 00:34:35,600
पूरे धरती से हटाया तो ये हम उनका मुख्य कर्म मानेंगे या

495
00:34:35,600 --> 00:34:40,320
हम ये मानेंगे कि उन्होंने बहुत सारी तपस्या की क्या मानेंगे हम इसे

496
00:34:40,320 --> 00:34:44,720
उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन स्थितियों

497
00:34:44,720 --> 00:34:49,680
में और क्षत्रियचित वृत्ति का आलंबन लिया

498
00:34:49,680 --> 00:34:53,760
ये माने तो इसमें हम यह कहेंगे कि

499
00:34:53,760 --> 00:34:58,360
क्योंकि उन्होंने एक प्रतिज्ञा कर ली कि मैं 21 बार वो कर लूंगा

500
00:34:58,360 --> 00:35:02,480
पूरे संसार से क्षत्रियों को हटा दूंगा तो वो तो

501
00:35:02,480 --> 00:35:07,520
उनका जीवन का उद्देश्य बन गया ना तो उससे क्या हुआ?

502
00:35:07,520 --> 00:35:12,120
तो उन्हें दोष लग गया। फिर उस प्रतिज्ञा से उन्हें दोष लग गया। जो ब्राह्मण

503
00:35:12,120 --> 00:35:16,400
को आइडियली क्षत्रियों की हत्या नहीं करनी चाहिए

504
00:35:16,400 --> 00:35:20,400
आइडियली। हां ठीक है नहीं

505
00:35:20,400 --> 00:35:21,600
आई ऐसा कुछ नहीं

506
00:35:21,600 --> 00:35:25,840
है आईडियली ऐसा कुछ नहीं है क्षत्रियों को ब्राह्मण की नहीं करनी चाहिए मगर

507
00:35:25,840 --> 00:35:29,920
यदि कोई भी दोषी है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र कोई भी दोषी है जैसे

508
00:35:29,920 --> 00:35:33,960
क्षत्रिय होते हुए श्री राम जी ने ब्राह्मण का वध कर

509
00:35:33,960 --> 00:35:38,240
दिया वध किया ना तो

510
00:35:38,240 --> 00:35:42,120
दोषी कोई भी है उसको वो तो मिलेगी अब

511
00:35:42,120 --> 00:35:46,400
जैसे हमारा कहना है कि परशुराम जी ने हथियार उठाया

512
00:35:46,400 --> 00:35:50,800
हम तो इसलिए उनको क्षत्रिय कहना चाहिए कि नहीं कहना चाहिए।

513
00:35:50,800 --> 00:35:54,880
ठीक है? मैं कह रहा हूं कि श्री राम जी ने कई जगह पर

514
00:35:54,880 --> 00:35:59,120
उपदेश दे दिए हम लोगों को धर्म उपदेश

515
00:35:59,120 --> 00:36:03,680
कहते हैं जिसे श्री राम जी ने कई जगह गायत्री वंदन किया

516
00:36:03,680 --> 00:36:07,840
संध्या वंदन किया सब कुछ किया हम तो धर्म उपदेश

517
00:36:07,840 --> 00:36:13,840
देने वाले कारण क्या उनको कहीं पर ब्राह्मण कह दिया गया

518
00:36:14,000 --> 00:36:18,320
सबसे पहले तो ये कि सारे वर्ण को ही भगवान की पूजा करने का अधिकार

519
00:36:18,320 --> 00:36:22,560
है क्योंकि केवल आदमी कोई पूजा करता है डजंट मीन वो ब्राह्मण है।

520
00:36:22,560 --> 00:36:27,200
मुख्य कारण मैं कह रहा हूं। मैंने धर्मोपदेश की बात की है।

521
00:36:27,200 --> 00:36:31,440
और जो मैंने बात की पूजा की बात नहीं की। मैंने बात की है जो ब्राह्मणोचित पूजा

522
00:36:31,440 --> 00:36:35,520
होती है। वर्णोचित पूजा होती है। द्वजोचित पूजा होती है। अच्छा

523
00:36:35,520 --> 00:36:39,600
और और छोड़िए। ये छोड़ दीजिए। जब वो जन्मे

524
00:36:39,600 --> 00:36:43,600
थे तब तो वो मिट्टी में खेल रहे हैं। तब तो वो संध्या वंदन

525
00:36:43,600 --> 00:36:49,600
भी नहीं कर रहे हैं। तो क्या उससे पहले तक उनको शद्र कहा गया?

526
00:36:51,280 --> 00:36:56,000
मुझे ये परशुराम वाला दोबारा से करना है डिस्कस पर अभी अभी मेरे दिमाग में आया

527
00:36:56,000 --> 00:37:00,640
स्वामी विवेकानंद ने ये कहा है कि जन्म से सभी शूद्र होते हैं

528
00:37:00,640 --> 00:37:04,720
और उसके बाद विवेकानंद जी हमारे लिए प्रमाण नहीं है नहीं है

529
00:37:04,720 --> 00:37:08,960
अच्छा अच्छा जितने अंश में वो शंकराचार्य की फिलोसफी मानते हैं उतने

530
00:37:08,960 --> 00:37:13,120
अंश में प्रमाण है जहां वो शंकराचार्य के विरुद्ध चले जाते हैं

531
00:37:13,120 --> 00:37:17,200
वहां प्रमाण है ही नहीं गायत्री परिवार और

532
00:37:17,200 --> 00:37:21,680
विवेकानंद दोनों दोनों ही आइडियोलॉजिकली शंकराचार्य

533
00:37:21,680 --> 00:37:25,920
पर आधारित है। उनके लिए शंकराचार्य का दिया जाने वाला ज्ञान ही प्रमाण

534
00:37:25,920 --> 00:37:30,040
है। गायत्री परिवार का भी और विवेकानंद का

535
00:37:30,040 --> 00:37:34,640
भी। पंडित राम शर्माचार्य जी ने तो ये

536
00:37:34,640 --> 00:37:38,640
आदि गुरु शंकराचार्य जी पर एक उनके जीवन दर्शन पर कोई ग्रंथ लिखा है। मुझे

537
00:37:38,640 --> 00:37:42,640
नाम नहीं याद आ रहा है। प्रॉपर उन्हीं को समर्पित सारी फिलॉसफी है

538
00:37:42,640 --> 00:37:47,120
इन दोनों की। मगर बस एक चीज में अलग हो गए।

539
00:37:47,120 --> 00:37:51,360
वर्णाश्रम व्यवस्था मुख्य रूप से वर्णाश्रम

540
00:37:51,360 --> 00:37:55,440
व्यवस्था में उन्होंने छोड़ दिया और आदि शंकराचार्य जी

541
00:37:55,440 --> 00:37:59,440
जो इनके मुख्य स्त्रोत है ज्ञान के उन्होंने अपने 13 वे

542
00:37:59,440 --> 00:38:03,880
अध्याय के दूसरे श्लोक में लिखा कि जो व्यक्ति संप्रदायहीन

543
00:38:03,880 --> 00:38:06,560
है परंपरा विहीन है

544
00:38:06,560 --> 00:38:10,560
परंपरा के आचार्य नहीं है वो उस व्यक्ति को भले

545
00:38:10,560 --> 00:38:14,640
ही कितना भी विद्वान क्यों ना हो त्याग देना चाहिए यह

546
00:38:14,640 --> 00:38:18,720
शंकराचार्य जी का कोट है तो खैर जो

547
00:38:18,720 --> 00:38:22,800
जन्म से शूद्र होते हैं तो यह तो रही विवेकानंद जी

548
00:38:22,800 --> 00:38:27,800
की बात। हम बात करें अगर कि हमारे शास्त्रों

549
00:38:27,800 --> 00:38:31,840
में हमारे शास्त्रों में ही कई जगह

550
00:38:31,840 --> 00:38:35,840
ऐसी उपमाएं आई हैं। जैसे कि भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण

551
00:38:35,840 --> 00:38:40,480
ने कहा कि जो लोग यह कहते हैं मतलब नास्तिकों के लिए उन्होंने कहा

552
00:38:40,480 --> 00:38:44,640
जो लोग यह कहते हैं कि इस सृष्टि का जो विस्तार हुआ है वो

553
00:38:44,640 --> 00:38:49,040
स्त्री पुरुष के भोग से हुआ है। मतलब नास्तिकों

554
00:38:49,040 --> 00:38:53,120
के लिए क्या है? कोई ईश्वर नहीं है। स्त्री पुरुष के भोग से ही विस्तार को

555
00:38:53,120 --> 00:38:57,360
प्राप्त हुई है सृष्टि। ठीक है? जो लोग ऐसा कहते हैं

556
00:38:57,360 --> 00:39:01,760
वो राक्षस होते हैं। तो क्या

557
00:39:01,760 --> 00:39:05,840
वो मनुष्य नहीं है जो नास्तिक है? क्या उसकी योनि ही चेंज मान

558
00:39:05,840 --> 00:39:09,840
ली जाए? या फिर यह माना जाए कि भगवान ने वहां कहा वो राक्षस वत

559
00:39:09,840 --> 00:39:14,000
होते हैं। इसी प्रकार से जहां पर ये वाली बात आएगी

560
00:39:14,000 --> 00:39:18,000
जन्म से शूद्र होते हैं तो वहां ये कहा जाता है शूद्रवत

561
00:39:18,000 --> 00:39:22,160
होते हैं। जैसे किसी को हमने कह दिया कि धर्मणी ना

562
00:39:22,160 --> 00:39:26,680
जिसका गुरु नहीं स्कंद पुराण में वचन है जिसका गुरु नहीं

563
00:39:26,680 --> 00:39:30,800
वो पशु है पशु है तो

564
00:39:30,800 --> 00:39:34,960
क्या वो वास्तविकता में एक पशु के योनि से जन्म लेने

565
00:39:34,960 --> 00:39:39,440
वाला पशु के गर्भ से जन्म लेने वाला नहीं पशु वत है

566
00:39:39,440 --> 00:39:43,600
इसी तरीके से इसका हमें लेना पड़ेगा एक

567
00:39:43,600 --> 00:39:48,560
मेरा क्वेश्चन और है एक वर्ड है द्विज जिसका अर्थ है दूसरा जन्म

568
00:39:48,560 --> 00:39:52,720
हम आप बोल रहे हो कि भगवान ने हमें

569
00:39:52,720 --> 00:39:56,720
हमारे कर्म के हिसाब से जन्म दिया है कि इस कर्म में तो मैंने इसने कुल

570
00:39:56,720 --> 00:40:00,720
में जन्म लिया है। तुम्हें तुम्हें इसी से ही इसी का जो ये चल रहे हैं उस हिसाब

571
00:40:00,720 --> 00:40:04,800
से चलना है। और जब हम गुरु के पास जाते हैं तो हमारा दूसरा जन्म होता है। तो

572
00:40:04,800 --> 00:40:08,880
क्या हमारा गुरु हमें दूसरे वर्ण के हिसाब

573
00:40:08,880 --> 00:40:12,960
से दीक्षित कर सकता है। उपदेश दे सकता है। देना

574
00:40:12,960 --> 00:40:18,960
नहीं चाहिए। यदि दे रहा है तो वो शास्त्रों के विरुद्ध है।

575
00:40:19,280 --> 00:40:23,040
धर्म के विरुद्ध

576
00:40:23,040 --> 00:40:27,040
ओके तो सारे वर्णों के फिर और वैसे भी वैसे भी जो

577
00:40:27,040 --> 00:40:31,040
संस्कार होता है जब आपने संस्कार की बात की

578
00:40:31,040 --> 00:40:35,040
है तो संस्कार होता है तो चाहे वो ब्राह्मण हो चाहे क्षत्रिय हो चाहे

579
00:40:35,040 --> 00:40:39,120
वैश्य हो दिया उसको उपदेश गायत्री का ही जाता

580
00:40:39,120 --> 00:40:43,280
है। किसी और का दे दिया जाता है। उसमें तो कोई अंतर है नहीं। दूसरी

581
00:40:43,280 --> 00:40:47,280
बात यह है कि जब यह बात हो ही रही है कि

582
00:40:47,280 --> 00:40:51,360
कर्म से वो बनेगा तो आप खैर उस बात को मानते

583
00:40:51,360 --> 00:40:55,440
हैं मुझे कहने की जरूरत नहीं है। आप जब ये मानते हैं कि जन्म से वो होता है मगर उसको बदला भी

584
00:40:55,440 --> 00:40:59,440
जा सकता है। तो बदलने वाली बात पे दिक्कत है हमारे बीच में। जन्म से तो

585
00:40:59,440 --> 00:41:03,520
आप भी मानते हैं मगर उसको बदला भी जा सकता है। इसमें हम लोग डिस्कस कर

586
00:41:03,520 --> 00:41:09,280
रहे हैं। मगर जन्म से मानने वाली बात में मैं आपको एक वो दे दूं। तर्क और प्रमाण।

587
00:41:09,280 --> 00:41:13,600
अगर हम यह मानेंगे कि संस्कार के बाद वो अमुक

588
00:41:13,600 --> 00:41:17,680
अमुक वर्ण में अपॉइंट हुआ उनके

589
00:41:17,680 --> 00:41:21,840
द्वारा अगर हम ये मानेंगे संस्कार के बाद जब गायत्री उसका जने हुआ तब

590
00:41:21,840 --> 00:41:26,800
गुरु ने कहा तुम वैश्य हो गए तुम क्षत्रिय हो गए तुम ब्राह्मण हो गए जो भी है

591
00:41:26,800 --> 00:41:30,880
तो उसमें दिक्कत ये आती है कि हमारे शास्त्रों में मनुस्मृति में बताया गया

592
00:41:30,880 --> 00:41:34,320
है कि ब्राह्मण का जनेऊ इस काल

593
00:41:34,320 --> 00:41:38,320
में होना है क्षत्रिय का जनेऊ इस काल में

594
00:41:38,320 --> 00:41:42,400
होना है। शुद्ध वैश्य का जनेऊ इस काल

595
00:41:42,400 --> 00:41:46,720
में होना है। ऋतु काल भी बताया गया है। और उसकी जो आयु है

596
00:41:46,720 --> 00:41:50,960
इतने से इतने बीच में ब्राह्मण का हो जाना चाहिए। इतने से इतने बीच में क्षत्रिय

597
00:41:50,960 --> 00:41:55,360
का होना चाहिए। इतने से इतने बीच में वैश्य का होना चाहिए।

598
00:41:55,360 --> 00:42:00,000
तो यदि संस्कार के बाद ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य

599
00:42:00,000 --> 00:42:04,000
विशेषण संज्ञा उसको प्राप्त हो रही है तो संस्कार

600
00:42:04,000 --> 00:42:10,000
के पहले किसको किस आधार पर ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य मान लेंगे?

601
00:42:10,480 --> 00:42:14,960
क्योंकि गुरु के पास तो वो तब जाएगा जब गायत्री वो हो गया उसका उपनयन

602
00:42:14,960 --> 00:42:18,960
पहला दिन तो वही है जब वो गुरु उसका उस दिन उसका उपनयन किस आधार

603
00:42:18,960 --> 00:42:22,960
पे होगा ब्राह्मण के आधार पे होगा वैश्य के आधार पे होगा क्षत्रिय के आधार पे तो

604
00:42:22,960 --> 00:42:27,040
यहां से दोनों चीजें कट जाती है कि बचपन से व्यक्ति शूद्र होता है अगर हम

605
00:42:27,040 --> 00:42:31,120
उसको शद्रवत नहीं डायरेक्ट शूद्र ही बोले और ये भी

606
00:42:31,120 --> 00:42:35,120
चीज कट जाती है कि वो संस्कार के बाद वो जो है वो होता है ब्राह्मण

607
00:42:35,120 --> 00:42:39,520
क्षत्रिय वैश्य हां संस्कार कार के बिना वो एक निम्न

608
00:42:39,520 --> 00:42:43,640
एक नीच एक पतित ब्राह्मण कहलाएगा।

609
00:42:43,640 --> 00:42:47,680
भाई यह भी तो सोचिए कि यदि उसको कोई ड्यूटी मिली है

610
00:42:47,680 --> 00:42:52,000
समाज की व्यवस्था के लिए भगवान पिछले जन्म के कर्मों

611
00:42:52,000 --> 00:42:56,000
के आधार पर ही इस जन्म का शरीर चुनता है। इस जन्म का कुल चुनता है

612
00:42:56,000 --> 00:43:00,000
कि तुम्हें इस जन्म में इस कुल में मुझे जन्म लेना है। और यदि उसने उन

613
00:43:00,000 --> 00:43:04,000
जो उसको जो वो साध्य कोटि का धर्म है उसको साधा ही नहीं। तो

614
00:43:04,000 --> 00:43:08,080
यहां पर उसकी उसको कुछ तो ब्लेम कर करना चाहिए ना। अब

615
00:43:08,080 --> 00:43:12,160
हमने कह दिया कि साधा नहीं

616
00:43:12,160 --> 00:43:16,240
तो जो है वो वो बन गया जो जो वो कर रहा है। तो यहां पे तो उसको छूट मिल

617
00:43:16,240 --> 00:43:20,480
गई। खूब अपने पिता की आज्ञा का अनादर करो। तुम जो करोगे

618
00:43:20,480 --> 00:43:24,480
वही तुम्हारी वो हो जाएगी। पिता का

619
00:43:24,480 --> 00:43:25,680
पिता का बुढ़ापे

620
00:43:25,680 --> 00:43:29,760
में ध्यान रखना धर्म है। मगर हम पिता का ध्यान नहीं रख रहे हैं। अपने

621
00:43:29,760 --> 00:43:34,000
मित्र का ध्यान रख रहे हैं। मेरी मेरा मन बदल गया। मैं अपने मित्र की ध्यान रखने

622
00:43:34,000 --> 00:43:38,000
मित्र का ध्यान रखने लगा। तो हम उसको दोष कहां दे पाएंगे? वो तो कहने

623
00:43:38,000 --> 00:43:42,000
लगे इस समय तो यही मेरा धर्म और 10 मिनट बाद अगर उसके मन में फिर

624
00:43:42,000 --> 00:43:46,560
आया तो फिर बदल देगा। अब तो मेरा यही धर्म है। अब मैं टमाटर नहीं मैं करेला बेचूंगा।

625
00:43:46,560 --> 00:43:50,560
अब मेरा यही धर्म है। तो जैसे कि आपने तर्क

626
00:43:50,560 --> 00:43:54,720
की दृष्टि से पूछा था सामाजिक व्यवस्था के बारे में। है ना? कि

627
00:43:54,720 --> 00:43:59,520
समाज की व्यवस्था से हम देख रहे हैं। तो सोचिए वो व्यवस्था कैसी होगी? जहां व्यक्ति

628
00:43:59,520 --> 00:44:03,680
जब चाहे तब अपने मन के अनुसार मेरी मनोवत्त हो गई। अपने

629
00:44:03,680 --> 00:44:06,880
मन के अनुसार बदल ले।

630
00:44:06,880 --> 00:44:11,040
अगर हम यहां इस बात को माने कि भगवान ने जो हमें

631
00:44:11,040 --> 00:44:15,280
काम अपॉइंट किया है इस जन्म में हमें वही करना है। उस हिसाब से आपका तर्क

632
00:44:15,280 --> 00:44:19,440
बिल्कुल सही है। अगर हम एक

633
00:44:19,440 --> 00:44:23,520
शास्त्र को साइड रख दे अगर नहीं हमें नहीं रखना चाहिए। अगर हम शास्त्र को साइड रख

634
00:44:23,520 --> 00:44:27,600
दे उस दृष्टि से देखने वाली बात बोल रहा हूं मैं। मैं उसी पे आ गया। अब मैं

635
00:44:27,600 --> 00:44:31,920
उसी पे आ गया। जी हां अगर हम एक

636
00:44:31,920 --> 00:44:35,920
सामाजिक दृष्टि से देखें कि समाज को चलाने के लिए हमें चार

637
00:44:35,920 --> 00:44:39,920
अलग-अलग व्यवस्थाएं चाहिए। जन्म से जब

638
00:44:39,920 --> 00:44:40,880
जब हम किसी व्यक्ति

639
00:44:40,880 --> 00:44:44,960
का चार अलग-अलग व्यक्ति का हमने एनालिसिस करा किसी भी वर्ण

640
00:44:44,960 --> 00:44:49,920
में वो जन्मे हो। हमें हमने उनकी स्किल्स और क्वालिटीज

641
00:44:49,920 --> 00:44:54,000
हमें ऐसी लगी कि एक इसके लिए सही है, एक इसके लिए सही है, एक इसके लिए सही है, एक इसके लिए

642
00:44:54,000 --> 00:44:58,000
सही है। और उनका जन्म अगर मान लो ब्राह्मण ब्राह्मण के काम

643
00:44:58,000 --> 00:45:02,000
नहीं कर मतलब क्वालिटीज मान लो डिफरेंट हो गई। संकरता हो गई क्वालिटीज में

644
00:45:02,000 --> 00:45:06,160
तो हमें उनको उनका वो कर्म नहीं देना चाहिए। जब हमें

645
00:45:06,160 --> 00:45:10,480
उन्हें फोर्स करना चाहिए कि तुम जिस उसमें पैदा हुए हो तुम वही करो।

646
00:45:10,480 --> 00:45:14,640
तुम्हारे क्वालिटी स्किल्स डजंट मैटर हियर।

647
00:45:14,640 --> 00:45:19,120
ठीक है। इस पर बात कर लेते हैं। पहली बात तो यह है सामाजिक

648
00:45:19,120 --> 00:45:23,200
व्यवस्था में जन्म आधारित

649
00:45:23,200 --> 00:45:26,880
वर्ण व्यवस्था कैसे काम आती है वो मैं

650
00:45:26,880 --> 00:45:32,400
आपको बता दूं कि जैसे कि आज

651
00:45:32,400 --> 00:45:37,280
युद्ध छिड़ा और उस समय

652
00:45:37,280 --> 00:45:41,280
कोई व्यक्ति युद्ध के से थोड़ी क्योंकि हमने कह दिया भाई उसकी मनोवत्त जो

653
00:45:41,280 --> 00:45:45,280
है या उसके स्किल जो है डाउन हो रहे हैं या किसी व्यक्ति को यदि जी चुराना

654
00:45:45,280 --> 00:45:49,360
है युद्ध में लड़ने तो उसने अपना स्किल ऐसा दिखा दिया। मुझको नहीं

655
00:45:49,360 --> 00:45:54,120
आ रहा गोली चलाना, मुझको नहीं आ रहा बम फेंकना। तो क्या

656
00:45:54,120 --> 00:45:58,320
हुआ? तो उसने जो है उस व्यक्ति को त्याग

657
00:45:58,320 --> 00:46:03,280
दिया युद्ध के डर से। अब मैं युद्ध नहीं लड़ रहा।

658
00:46:03,280 --> 00:46:07,880
तो हम उसको यह तक नहीं कह सकते कि तू है तुझ

659
00:46:07,880 --> 00:46:12,080
पर। जो तू अपने कर्तव्य से भाग गया। क्योंकि कर्तव्य

660
00:46:12,080 --> 00:46:16,160
से भागने को भी हमने स्वीकार कर रखा है कि हां उसके स्किल नहीं है उसको खो दो

661
00:46:16,160 --> 00:46:20,160
जो उसके उसने दिखाया मैं टमाटर अच्छे बेच लेता हूं तो मैं क्या

662
00:46:20,160 --> 00:46:24,640
कहते हैं मैं मेरा स्किल इसमें अच्छे हैं तो मेरा इसको मान लिया जाए पहली बात

663
00:46:24,640 --> 00:46:25,200
जैसे कि

664
00:46:25,200 --> 00:46:29,680
मान लीजिए कि मुझे रक्षा की जरूरत है और मुझे पता चला कि यहां पे क्षत्रिय

665
00:46:29,680 --> 00:46:33,920
है। क्षत्रिय का घर है। मैं गया वहां पर के भैया भैया रक्षा करो। मुझे रक्षा

666
00:46:33,920 --> 00:46:38,000
की आवश्यकता है। क्षत्रिय ने कहा अभी पांच मिनट पहले मैं जो है ब्राह्मण बन

667
00:46:38,000 --> 00:46:42,080
गया हूं। तो क्या यह व्यवस्था है? पहली बात। दूसरी बात

668
00:46:42,080 --> 00:46:46,720
आपने कहा यदि चार लोगों को हमने पिक किया

669
00:46:46,720 --> 00:46:50,720
और चार लोगों में से उनकी क्वालिटीज के हिसाब से उन्हें

670
00:46:50,720 --> 00:46:54,880
नहीं देना चाहिए बल्कि उनको फोर्स करना चाहिए कि तेरा जो जन्म

671
00:46:54,880 --> 00:46:58,960
है उसके हिसाब से ले। पहली बात तो इसमें कुछ सिचुएशनंस

672
00:46:58,960 --> 00:47:03,120
लागू हो रही है। एक कि चारों के बारे में हमें

673
00:47:03,120 --> 00:47:07,840
पता नहीं है कि उनका कुल क्या है या पता है। ये क्लियर कर दीजिए।

674
00:47:07,840 --> 00:47:12,000
लेट से पता है इन दिस केस। अच्छा पता है। तो

675
00:47:12,000 --> 00:47:16,160
तो सबसे पहली बात है कि यदि मान लीजिए हमको चारों के कुल

676
00:47:16,160 --> 00:47:21,480
के अनुसार हमने ले लिया कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य चार हमको मिल गए। ठीक है?

677
00:47:21,480 --> 00:47:25,600
हम्म हा मिल गए ना? अब हम देख रहे हैं कि उन चारों

678
00:47:25,600 --> 00:47:30,200
में ही क्या कहते अपनी कुल के

679
00:47:30,200 --> 00:47:34,640
विपरीत प्रवृत्ति है। स्किल सेट है

680
00:47:34,640 --> 00:47:38,280
और अपने विपरीत

681
00:47:38,280 --> 00:47:40,400
है। के हिसाब से ना हो

682
00:47:40,400 --> 00:47:44,720
चारों में कुल के विपरीत है। तो यहां पर दिक्कत ये है

683
00:47:44,720 --> 00:47:49,120
यदि ब्राह्मण कुल के लड़के में ब्राह्मण की प्रवृत्ति

684
00:47:49,120 --> 00:47:53,200
नहीं है। ब्राह्मण के गुण नहीं है। तो क्या दूसरे

685
00:47:53,200 --> 00:47:57,520
ब्राह्मण कुल के लड़के मर गए हैं? सारे के सारे हम

686
00:47:57,520 --> 00:48:02,240
लोग क्या करेंगे? किसी दूसरे ब्राह्मण के घर जाएंगे उसको देखेंगे।

687
00:48:02,240 --> 00:48:06,720
हां इन चारों में ही हम लोग तब करेंगे

688
00:48:06,720 --> 00:48:10,800
इनकी गुणवत्ता के अनुसार जब दुनिया में अन्य कुल नष्ट

689
00:48:10,800 --> 00:48:14,800
हो चुके हो उसको कहेंगे आपातकालीन धर्म।

690
00:48:14,800 --> 00:48:18,800
आपातकालीन स्थिति उसी को कहेंगे कि चार ही है इनहीं में से करना है जो करना

691
00:48:18,800 --> 00:48:22,960
है। पांचवा कोई है ही नहीं जिसमें हम सिलेक्शन कर सके। तो अभी तो ऐसा

692
00:48:22,960 --> 00:48:27,280
नहीं है। अगर एक ब्राह्मण सही नहीं है तो दूसरे ब्राह्मण के घर जाओ भाई।

693
00:48:27,280 --> 00:48:31,360
दूसरी बात आपने यहां पर कहा कि हम

694
00:48:31,360 --> 00:48:35,440
लोग चार हम लोग चार लोग होंगे तो इसमें

695
00:48:35,440 --> 00:48:39,680
क्या बात आती है कि उन चारों

696
00:48:39,680 --> 00:48:43,840
को भी आप कहीं ना कहीं से पिक तो करोगे ना कहां

697
00:48:43,840 --> 00:48:48,320
से करोगे उनका शुरुआती पैरामीटर क्या होगा

698
00:48:48,320 --> 00:48:52,480
रास्ते में चलते चलते रिक्शे वाले को भी रोक लोगे साइकिल वाले को भी रोक लोगे ए

699
00:48:52,480 --> 00:48:55,680
रुक जा मुझे तेरे कर्म गुण गुण कर्म चेक करने हैं तेरी

700
00:48:55,680 --> 00:48:59,840
कुशलता चेक करनी है रुक पूजा ऐसा तो करेंगे नहीं। तो एक कोई ना कोई स्टार्टिंग

701
00:48:59,840 --> 00:49:04,080
पॉइंट हमें लेना पड़ेगा कि हम किसी ब्राह्मण के घर जाए। यदि ब्राह्मण

702
00:49:04,080 --> 00:49:08,640
का सिलेक्शन करना है तो ब्राह्मण के घर जाए। ब्राह्मण से ले आए एक लड़का

703
00:49:08,640 --> 00:49:12,640
या स्त्री या पुरुष जो जिस तरह का भी उसका उपयोग है और

704
00:49:12,640 --> 00:49:17,240
क्षत्रिय के लिए क्षत्रिय के घर जाए। तो ये जो

705
00:49:17,240 --> 00:49:21,280
शुरुआती पैरामीटर है यही जन्म जन्म आधारित

706
00:49:21,280 --> 00:49:25,360
वर्ण अवस्था है। उसके बाद यदि ब्राह्मण कुल से आया हुआ ब्राह्मण

707
00:49:25,360 --> 00:49:29,520
लड़का उचित नहीं है। अपने वर्णोचित कार्य

708
00:49:29,520 --> 00:49:33,760
को नहीं कर पा रहा है या उसमें वह कुशलता नहीं है तो हम उसको त्याग देंगे

709
00:49:33,760 --> 00:49:36,400
और किसी दूसरे को देखेंगे। अगर

710
00:49:36,400 --> 00:49:40,480
हम देख रहे हैं कि संध्या वंदन नहीं कर रहा है। शौचाचार में ध्यान नहीं रख रहा है। यह जब

711
00:49:40,480 --> 00:49:44,640
वाशरूम जाता है तो वापस आता है तो इसके पैर गीले नहीं होते हैं। तो हमें

712
00:49:44,640 --> 00:49:48,640
समझ जाना चाहिए कि इसको अज्ञानता वश या व्यवस्था वश ये सब बातें

713
00:49:48,640 --> 00:49:52,640
नहीं मालूम है कि शौचाचार का ध्यान कैसे रखना है या वापस आकर के कुल्ले नहीं

714
00:49:52,640 --> 00:49:56,640
कर रहा है वो मूत्र त्याग मल मूत्र के त्याग के बाद वो कुल्ला

715
00:49:56,640 --> 00:50:00,640
नहीं करना जानता है तो हम इसी से पता चल जाएगा भैया वो वो वाला ब्राह्मण

716
00:50:00,640 --> 00:50:04,640
नहीं है श्रेष्ठतम हम यदि एक परफेक्ट

717
00:50:04,640 --> 00:50:08,640
ब्राह्मण को ढूंढने निकले हैं एस मच एस पॉसिबल तो

718
00:50:08,640 --> 00:50:12,720
उसके लिए यह योग्य नहीं है

719
00:50:12,720 --> 00:50:14,720
अच्छा एक

720
00:50:14,720 --> 00:50:19,040
चीज और है। अब जैसे हम आते हैं भाई भारतीय

721
00:50:19,040 --> 00:50:23,280
में तो हमारे हम सबको पता है कि हमारा सरनेम

722
00:50:23,280 --> 00:50:27,280
के हिसाब से हमारा यह वर्ण है। बहुत लोगों

723
00:50:27,280 --> 00:50:31,600
को अपना वर्ण नहीं पता होता है। बहुत लोग सरनेम अपना चेंज कर लेते हैं या फिर

724
00:50:31,600 --> 00:50:35,680
अगर हम बाकी धर्मों की बात बाकी पंथों की बात करें तो

725
00:50:35,680 --> 00:50:39,840
उनको तो अपना वर्ण नहीं पता। भाई कहीं ना कहीं वो उनको पैदा तो ब्रह्मा जी ने ही करा

726
00:50:39,840 --> 00:50:43,840
है। अब एट दिस पॉइंट ऑफ टाइम उन्हें नहीं पता कि उनका वर्ण क्या

727
00:50:43,840 --> 00:50:47,840
है? तो उन्हें क्या करना चाहिए? या उन्हें हमेशा दोष लगता रहेगा

728
00:50:47,840 --> 00:50:51,920
या फिर कभी दोष लग रहा है किसी जनरेशन को किसी इंसान किसी की लाइफ को

729
00:50:51,920 --> 00:50:56,480
कभी नहीं लग रहा है। तो इसका क्या इलाज है? इसका

730
00:50:56,480 --> 00:51:00,720
इलाज ये है कि उन्हें जो है

731
00:51:00,720 --> 00:51:04,960
सनातन सिद्धांतों के आधार पर जीवन जीना चाहिए। देखिए प्रॉब्लम क्या है? जैसे

732
00:51:04,960 --> 00:51:09,120
हम दूसरे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात कर

733
00:51:09,120 --> 00:51:13,440
ले और या फिर ईसाई धर्म ईसाई

734
00:51:13,440 --> 00:51:17,840
जो मत है या इस्लाम मत है इनकी बात कर ले प्रॉब्लम

735
00:51:17,840 --> 00:51:21,920
इन सब चीज इन सब में ये है हम इनका उदाहरण तो लेते हैं पर पहले

736
00:51:21,920 --> 00:51:26,320
आप अपने आप से ये पूछिए क्या इन व्यवस्थाओं से आप खुश हैं

737
00:51:26,320 --> 00:51:30,000
हमने लोकतंत्र का उदाहरण तो ले लिया कि जो पुलिस

738
00:51:30,000 --> 00:51:34,080
वाला उसके उस पर बनेगा कि नहीं बनेगा क्या हम पुलिस की व्यवस्था से खुश

739
00:51:34,080 --> 00:51:38,080
हैं क्या हम आर्मी की व्यवस्था को जो आर्मी पुलिस की

740
00:51:38,080 --> 00:51:42,160
जो व्यवस्था है जो लोकतंत्र के हिसाब से है मैं आर्मी को गलत नहीं कह रहा हूं आर्मी

741
00:51:42,160 --> 00:51:46,560
सही है जो हमारे देश की रक्षा करता है उसका सम्मान है मगर ये जो आज लोकतांत्रिक

742
00:51:46,560 --> 00:51:50,640
व्यवस्था है इससे क्या हम खुश हैं एक पुलिस वाला रेिग्नेशन

743
00:51:50,640 --> 00:51:54,720
लेटर दे सकता है अपनी ड्यूटी छोड़कर भाग सकता है समय आने पर विपदा

744
00:51:54,720 --> 00:51:58,880
पड़ने पर तो क्या हम इससे खुश हैं?

745
00:51:58,880 --> 00:52:02,880
एक ब्राह्मण जो है अपनी ब्राह्मण जो है ब्राह्मण का कर्म होता है दान

746
00:52:02,880 --> 00:52:06,880
के ऊपर आधारित जीवन जीना दान के ऊपर एक तरीके से अगर और

747
00:52:06,880 --> 00:52:11,520
सरल भाषा में कह तो भीख पर मगर आज ब्राह्मण

748
00:52:11,520 --> 00:52:15,920
जो है लालच व सबकी क्योंकि हमने ही दी करना वर्ण व्यवस्था

749
00:52:15,920 --> 00:52:20,080
सब जगह घुस रहा है तो हमें वो ब्राह्मण मिलना ही बंद

750
00:52:20,080 --> 00:52:24,160
हो गए हैं न्यून उसमें न्यूनता आती जा रही है जो

751
00:52:24,160 --> 00:52:28,480
धर्म ब्रह्म की सही सही व्याख्या लोगों तक पहुंचाए तो तो क्या हो रहा है? नास्तिकता

752
00:52:28,480 --> 00:52:32,720
पनप रही पनप रही है। आप एक उदाहरण ले लीजिए। आर्य समाज

753
00:52:32,720 --> 00:52:36,880
का ले लीजिए। आर्य समाज का जो धर्म ब्रह्म

754
00:52:36,880 --> 00:52:40,880
है वो ना परंपरा से प्राप्त है और ना ही उसमें वर्णाश्रम

755
00:52:40,880 --> 00:52:45,120
धर्म का पालन है। नतीजा आर्य समाज नामक फैक्ट्री

756
00:52:45,120 --> 00:52:49,800
से बाहर निकलता है। विकास दिव्य कीर्ति कौन है?

757
00:52:49,800 --> 00:52:54,160
नास्तिक। विकास दिव्य कीर्ति की जो फैमिली है वह आर्य

758
00:52:54,160 --> 00:52:58,480
समाज को फॉलो करती है।

759
00:52:58,480 --> 00:53:02,800
और वहां से क्या निकला बाहर नास्तिक

760
00:53:02,800 --> 00:53:06,800
इन सब का पर्यावसान परंपरा प्राप्त सिद्धांत परंपरा

761
00:53:06,800 --> 00:53:11,280
प्राप्त धर्म ब्रह्म वर्ण व्यवस्था इत्यादि को ना मानने का जो

762
00:53:11,280 --> 00:53:15,520
पर्यावसान है वो किस में है नास्तिकता में तो क्या

763
00:53:15,520 --> 00:53:19,520
हम लोग इन चीजों को अडॉप कर पा रहे हैं पूरी तरीके से जैसे

764
00:53:19,520 --> 00:53:23,920
आज का संविधान ही मान लीजिए जितने लोग ज्यादा होंगे वही नियम नियम बन जाएगा

765
00:53:23,920 --> 00:53:28,320
तो ये सेक्स मैरिज को भी अलऊ कर दिया जाएगा। लेकिन रिलेशनशिप

766
00:53:28,320 --> 00:53:32,320
को भी अलऊ कर दिया जाएगा। तो क्या हम इन व्यवस्थाओं से खुश हैं? जो हम

767
00:53:32,320 --> 00:53:38,320
इनका उदाहरण लेकर के कहते हैं क्या ये सही ये नहीं होना चाहिए? ये बात।

768
00:53:38,560 --> 00:53:42,640
अच्छा एक क्वेश्चन और है मेरा। एक महिला है

769
00:53:42,640 --> 00:53:46,640
उसने एक वर्ण में आपका एक रह गया वो क्वेश्चन कि उनके

770
00:53:46,640 --> 00:53:50,720
लिए क्या व्यवस्था है जो अपना वर्ण भूल गए हैं। उनको प्रयास करना

771
00:53:50,720 --> 00:53:54,880
चाहिए अपना वर्ण। किसी तरीके से वर्ण ध्यान आ जाए। प्रयास

772
00:53:54,880 --> 00:53:58,880
करना चाहिए। अन्यथा जिस भी तरीके से उनका जीवन का निर्वाह हो रहा है वह करते

773
00:53:58,880 --> 00:54:00,160
रहना चाहिए। यह मानते हुए

774
00:54:00,160 --> 00:54:06,160
कि अभी हम वर्णाश्रम व्यवस्था के अतिरिक्त है बाहर है।

775
00:54:06,160 --> 00:54:10,320
पता उन्हें कैसे लगेगा? वो सिद्ध योगी हो जाए और फिर नहीं

776
00:54:10,320 --> 00:54:14,960
पता चलता है। जब हम लोग जब हम लोग इतिहास जानने निकलते हैं।

777
00:54:14,960 --> 00:54:19,360
यहां क्या हुआ था? यहां क्या हुआ था? हमारे पिताजी कहां रहते थे? वहां कहां रहते

778
00:54:19,360 --> 00:54:23,440
धीरे-धीरे जब जाकर के इस तरीके से अगर इन्वेस्टिगेशन करें तो पता लग

779
00:54:23,440 --> 00:54:27,520
जाता है। 90% चांस होते हैं कि पता लग जाता है। अगर नहीं लगता तो

780
00:54:27,520 --> 00:54:31,520
अपने आप को एक जो अंतज इत्यादि के रूप में देखते हुए

781
00:54:31,520 --> 00:54:35,520
वर्णाश्रम व्यवस्था से बाहर मानते हुए क्योंकि आज तो वैसे भी आज का जो

782
00:54:35,520 --> 00:54:39,520
समय है लोकतंत्र का तो इसमें तो वैसे भी वो वाले नियम लागू है

783
00:54:39,520 --> 00:54:43,680
कि भैया जब डिवाइडर है डिवाइडर वाला रोड है फोर

784
00:54:43,680 --> 00:54:48,080
लाइन और डिवाइडर के एक तरफ जो है जो रोड है वो

785
00:54:48,080 --> 00:54:52,360
अंडर कंस्ट्रक्शन है तो उस समय तो मजबूरी है कि सब लोगों को रॉन्ग साइड ही जाना

786
00:54:52,360 --> 00:54:56,400
पड़ेगा आपातकालीन संक्रमण काल तो इस समय समय आप

787
00:54:56,400 --> 00:55:00,560
यह एक्सपेक्ट नहीं कर सकते कि सब कुछ अपने अपने हिसाब से होता जाए। मगर

788
00:55:00,560 --> 00:55:04,560
कर्म निवादी कारस्ते मा फले कदाचन एज मच एस

789
00:55:04,560 --> 00:55:08,640
पॉसिबल जिससे निर्वाह हो सकता है वो निर्वाह करे। अन्यथा जिसज वृत्ति

790
00:55:08,640 --> 00:55:12,880
से जिसका जीवन का निर्वाह हो रहा है वो करता रहे। और जैसे

791
00:55:12,880 --> 00:55:15,280
मान लीजिए कोई अगर शिक्षक बन भी रहा है और

792
00:55:15,280 --> 00:55:19,440
वो ब्राह्मण नहीं है तो तो उसको पैसे कहां मिलने हैं?

793
00:55:19,440 --> 00:55:23,920
शिक्षक बनने में। आधुनिक शिक्षा को देने में पैसे मिलने हैं ना।

794
00:55:23,920 --> 00:55:28,240
यज्ञ तो करवाने से नहीं। यज्ञ करवाने में ना जाए आधुनिक शिक्षक बने

795
00:55:28,240 --> 00:55:32,240
साइंस पढ़ाए और तो और वेतन भोगी

796
00:55:32,240 --> 00:55:36,720
होते हुए वैसे भी शद्र है शद्रवत हो जाएगा क्योंकि

797
00:55:36,720 --> 00:55:40,800
ब्राह्मण का जो उच्चतम वो है वो तो यही है कि वो दान दक्षिणा से

798
00:55:40,800 --> 00:55:44,880
ही अपना काम चलाए वेतन से नहीं क्योंकि

799
00:55:44,880 --> 00:55:49,040
ब्राह्मण का एक वो होता है मनुस्मृति में एक सिद्धांत है कि जिन

800
00:55:49,040 --> 00:55:53,360
कर्मों को करते समय आपके मन में छिपाने का भाव आएगा वह कर्म

801
00:55:53,360 --> 00:55:57,520
तामसिक होते हैं और इन कर्मों के आधार पर ही ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य,

802
00:55:57,520 --> 00:56:02,320
शूद्र के कामों को बांटा गया है। जैसे वैश्य का काम देख लीजिए।

803
00:56:02,320 --> 00:56:06,320
वैश्य जब तक थोड़ा बहुत छुपाएगा नहीं, उसका बिजनेस नहीं हो

804
00:56:06,320 --> 00:56:10,320
पाएगा। क्यों? उसको बता उसको ये छिपाना पड़ेगा। मैं कितने

805
00:56:10,320 --> 00:56:14,640
का लाया हूं और तुझे कितने का दे रहा हूं? का लाया हूं।

806
00:56:14,640 --> 00:56:19,280
तुझको में दे रहा हूं। यह उसको बोलना पड़ेगा। छिपाने का भाव आ गया।

807
00:56:19,280 --> 00:56:23,600
लाया होगा का। मगर उसको कहना पड़ेगा। का लाया हूं। का

808
00:56:23,600 --> 00:56:27,760
दे रहा हूं। केवल ₹1 मार्जिन ले रहा हूं। उसको अपने अनुसार

809
00:56:27,760 --> 00:56:30,960
जो जो उसका एक निश्चित जो

810
00:56:30,960 --> 00:56:35,120
मार्जिन होता है यानी कि मुनाफा वो वहां पर

811
00:56:35,120 --> 00:56:39,200
लेने के लिए वैश्यचित जो धर्म है उसमें छिपाने का भाव आ ही

812
00:56:39,200 --> 00:56:43,520
जाएगा। क्षत्रिय को सामने वाले से युद्ध लड़ना

813
00:56:43,520 --> 00:56:47,560
है तो अपनी रणनीति को छिपाना

814
00:56:47,560 --> 00:56:51,760
है। हमारे पास कितने हथियार हैं। हम कब कहां कैसे

815
00:56:51,760 --> 00:56:55,760
अटैक करेंगे ये सब छिपाना है। ब्राह्मण को छिपाना

816
00:56:55,760 --> 00:56:59,760
नहीं है। बताना है। जो वो जानता है वो

817
00:56:59,760 --> 00:57:03,920
उसको बताना है। पंडित जी राम राम। जय

818
00:57:03,920 --> 00:57:08,560
श्री राम। जय श्री कृष्णा हर महादेव। तो

819
00:57:08,560 --> 00:57:12,640
यह छिपाने वाले कर्मों के आधार पर ही धर्म और

820
00:57:12,640 --> 00:57:16,800
अधर्म का और कर्तव्य और अकर्तव्य

821
00:57:16,800 --> 00:57:21,360
का निर्धारण हुआ है। और ब्राह्मण के जीवन से छिपाने

822
00:57:21,360 --> 00:57:26,600
वाले कार्यों को काटा गया है एस मच एस पॉसिबल। तो क्या हुआ

823
00:57:26,600 --> 00:57:30,800
कि क्या कहते हैं? वेतन की बात करें। यदि ब्राह्मण वेतन

824
00:57:30,800 --> 00:57:36,240
पर ध्यान देने लगेगा। और एक बात और कही गई है ब्राह्मण के लिए सम्मान

825
00:57:36,240 --> 00:57:40,240
ब्राह्मण को सम्मान का नहीं अपमान को खोजना

826
00:57:40,240 --> 00:57:44,560
अपमान का भूखा रहना है। ब्राह्मण के लिए

827
00:57:44,560 --> 00:57:46,000
अपमान अमृत

828
00:57:46,000 --> 00:57:50,320
है और सम्मान विष है। क्यों? क्योंकि

829
00:57:50,320 --> 00:57:55,120
यदि वो सम्मान की खोज में रहेगा वो कैसे कहेगा मुझे दे दो भैया?

830
00:57:55,120 --> 00:57:59,120
वो मांग नहीं पाएगा भिक्षा। क्योंकि वो सम्मान में रहेगा।

831
00:57:59,120 --> 00:58:03,120
दूसरी बात सम्मान से जुड़ा होता है अहंकार और मुक्ति

832
00:58:03,120 --> 00:58:07,120
कैसे मिलेगी? जब आपका अहंकार दूर हो जाए।

833
00:58:07,120 --> 00:58:11,280
मेरी आइडेंटिटी जो है जो मैं भगवान से अलग अपने आप को फील कर रहा हूं

834
00:58:11,280 --> 00:58:15,560
बंद हो जाए। यह सब तो खैर दार्शनिकता हो गई बहुत। मगर ब्राह्मण के जीवन

835
00:58:15,560 --> 00:58:19,680
से ये जो छिपाने वाली बातें हैं वो कम करी गई

836
00:58:19,680 --> 00:58:24,000
है। उस कारण से देखने में ये भी लगेगा आपको कि इनका जीवन बहुत सरल है।

837
00:58:24,000 --> 00:58:28,240
क्यों? ब्राह्मण को सम्मान के लिए नहीं बोलना है। मेरा सम्मान होना चाहिए।

838
00:58:28,240 --> 00:58:32,560
अगर बोल रहा है तो शास्त्र विरुद्ध है। दूसरी बात ब्राह्मण

839
00:58:32,560 --> 00:58:36,880
को केवल आजी उसके निमित्त प्राण रक्षा के निमित्त धन अर्जित

840
00:58:36,880 --> 00:58:41,280
करना है। केवल प्राण रक्षा के निमित्त उससे ज्यादा आए तो छोड़ दे।

841
00:58:41,280 --> 00:58:45,440
तो क्यों? क्योंकि प्राण रक्षा से जैसे ही ज्यादा आएगा। यानी

842
00:58:45,440 --> 00:58:49,440
कि मेरी जरूरत नहीं है और मेरे पास धन आ गया तो मैं क्या करूंगा उस धन का?

843
00:58:49,440 --> 00:58:53,600
हम लोग क्या करते हैं? एक्स्ट्रा मनी जो होती है उसका। सेब का रख

844
00:58:53,600 --> 00:58:57,920
लेते हैं। सेब ताला लगाते हैं कि नहीं? क्या बताते

845
00:58:57,920 --> 00:59:01,280
हैं दुनिया में यहां रखा है मेरा धन तो ब्राह्मण

846
00:59:01,280 --> 00:59:05,520
के पास यदि ज्यादा धन होगा तो वह उसको छिपाएगा

847
00:59:05,520 --> 00:59:10,000
तो इसलिए ये भी कट कर दिया ब्राह्मण बिना कपड़ों के नहाएगा

848
00:59:10,000 --> 00:59:14,080
नहीं निंदा नहीं करेगा ऐसे बहुत से कार्य

849
00:59:14,080 --> 00:59:18,640
है जहां पर छिपाने का भाव है वो मना कर दिए गए ब्राह्मण को

850
00:59:18,640 --> 00:59:22,640
इसी कारण क्योंकि उसमें सब में छिपाने का भाव तो ये छिपाने के जो

851
00:59:22,640 --> 00:59:26,880
भाव है जितने ज्यादा होते चले जाते हैं तो ब्राह्मण से क्षत्रिय क्षत्रिय

852
00:59:26,880 --> 00:59:30,960
वैश्य शूद्र इत्यादि आ जाता है। उनकी सद्गति का इंतजाम

853
00:59:30,960 --> 00:59:35,120
उनके अनुसार ही कर दिया गया कि जिसको जैसा कर्तव्य मिला उसके अनुसार उसकी

854
00:59:35,120 --> 00:59:39,360
सद्गति मिल जाएगी। तो कहने का मतलब यह है कि वेतन जब अगर

855
00:59:39,360 --> 00:59:43,760
वेतन भोगी अगर ब्राह्मण होगा तो जब तक उसका वेतन सुनिश्चित

856
00:59:43,760 --> 00:59:48,640
नहीं होगा ब्राह्मण का तब तक वो अपने ज्ञान को देने से रोकेगा।

857
00:59:48,640 --> 00:59:52,800
अभी एक जगह पर कहीं पर ब्याह पढ़ा जा रहा था किसी ब्राह्मण के द्वारा तो

858
00:59:52,800 --> 00:59:56,960
ब्राह्मण ने कहा कि ₹000 यहां पर वो

859
00:59:56,960 --> 01:00:01,840
लाइए दक्षिणा तो लड़की वालों ने तो दे दिया

860
01:00:01,840 --> 01:00:05,920
लड़के वाले थोड़े टाइट थे है ना तो

861
01:00:05,920 --> 01:00:09,920
लड़के वाले बोले कि ये ₹2100 ले लो यार

862
01:00:09,920 --> 01:00:14,400
उसने कम दिए होंगे तो ब्राह्मण ने कहा नहीं नहीं तो मैं वहीं बैठा था

863
01:00:14,400 --> 01:00:16,480
तो मैंने कहा आप ये फिक्स नहीं कर सकते

864
01:00:16,480 --> 01:00:21,040
फिक्स हो जाएगा तो वेतन हो जाएगा आपको दक्षिणा स्वरूप जो मिल रहा है वो लो। बोले क्यों?

865
01:00:21,040 --> 01:00:25,280
हमारे बच्चों को कारों में नहीं घूमना है। मैंने कहा नहीं घूमना है। ब्राह्मण उसी

866
01:00:25,280 --> 01:00:29,360
को कहते हैं। जितना जो मिल रहा

867
01:00:29,360 --> 01:00:33,840
है दक्षिणा स्वरूप वो लीजिए। अगर आपने फिक्स किया फिक्स करने का मतलब

868
01:00:33,840 --> 01:00:37,920
जब तक आपका वो निश्चित अमाउंट नहीं आने की संभावना है। तब

869
01:00:37,920 --> 01:00:42,240
तक आप वो जो ज्ञान है उसको आप अंदर छिपाओगे। जितना

870
01:00:42,240 --> 01:00:46,240
छिपाएंगे सारी दुनिया सारा धर्म अधर्म सब कुछ छिपाने पर ही है। मैंने

871
01:00:46,240 --> 01:00:50,480
कुछ वीडियो बनाए इस बारे में। छिपाने से ही हमारी प्रज्ञा शक्ति इफेक्ट

872
01:00:50,480 --> 01:00:54,480
होती है। झूठ बोल रहे हैं छिपा रहे हैं। मर्डर कर रहे हैं

873
01:00:54,480 --> 01:00:58,640
छिपा रहे हैं। सब पाप है। सब में छिपाने का भाव है।

874
01:00:58,640 --> 01:01:03,400
व्यभचार कर रहे हैं, छिपा रहे हैं। मगर शास्त्र सम्मत

875
01:01:03,400 --> 01:01:07,520
जब भोग में जा रहे हैं तो बता रहे हैं। डीजे लगवा

876
01:01:07,520 --> 01:01:11,680
रहे हैं। बैंड बजवा रहे हैं। लोगों को बता रहे हैं। कि

877
01:01:11,680 --> 01:01:15,920
आई एम गोइंग टू समवेयर टुडे बताते

878
01:01:15,920 --> 01:01:19,920
हैं शादी का कार का कार्ड तक छपवाते हैं विचार करना होता है तो घर वालों

879
01:01:19,920 --> 01:01:23,960
तक को नहीं बताते तो ऐसे ही

880
01:01:23,960 --> 01:01:28,160
है कि ब्राह्मण जो है वो यदि वेतन

881
01:01:28,160 --> 01:01:31,600
भोगी हो जाएगा तो उसके अंदर छिपाने का भाव आएगा कि

882
01:01:31,600 --> 01:01:35,680
मैं मैथमेटिक्स तभी पढ़ाऊं ब्रह्म का ज्ञान तभी दूं धर्म

883
01:01:35,680 --> 01:01:40,400
का ज्ञान तभी दूं जब मेरा निश्चित अमाउंट फिक्स हो जाए।

884
01:01:40,400 --> 01:01:44,800
जी ओके मेरा एक क्वेश्चन और था। एक एक महिला

885
01:01:44,800 --> 01:01:49,800
है उसका एक वर्ण में उसका वो वो पैदा हुई है। उसके

886
01:01:49,800 --> 01:01:54,000
बाद उस वो किसी दूसरे वर्ण में उसकी शादी हो गई है।

887
01:01:54,000 --> 01:01:58,000
तो अब उसका काम भगवान ने उसे वो दिया था वो करना है या जो

888
01:01:58,000 --> 01:02:02,080
उसको नए कुल में वो है वो करना है। मतलब उसका वर्ण नहीं

889
01:02:02,080 --> 01:02:06,800
बदलेगा या शादी करने के बाद उसका वर्ण बदल जाएगा?

890
01:02:06,800 --> 01:02:10,800
मैं उसका उत्तर दे देता हूं। देखिए ऐसा है कि वर्ण

891
01:02:10,800 --> 01:02:14,960
जो है वह पुरुषों का होता है आईडियली ठीक है लेकिन उसमें रोटी

892
01:02:14,960 --> 01:02:19,120
और बेटी की मर्यादा दोनों होती ही है क्योंकि अब उसका जो वर्ण है

893
01:02:19,120 --> 01:02:23,280
वो जो उसके पति का वर्ण है उसे वही वरण करना पड़ेगा कि पति ने उसको वरण किया

894
01:02:23,280 --> 01:02:27,280
इसमें एक बात और कह दूं कि शास्त्रोक्त मर्यादा

895
01:02:27,280 --> 01:02:31,280
के हिसाब से स्त्रियों का कोई आज भी पार्जन का कार्य

896
01:02:31,280 --> 01:02:35,680
तो है नहीं क्या कार्य है घर का खाना बनाना

897
01:02:35,680 --> 01:02:40,160
घर की देखभाल करना घर हाउस मैनेजर गृह मंत्रालय

898
01:02:40,160 --> 01:02:44,840
उनके पास तो स्त्री पहली बात जहां भी जाती है उसको क्या मिलेगा वहां

899
01:02:44,840 --> 01:02:46,960
पर गृह मंत्रालय

900
01:02:46,960 --> 01:02:50,960
तो उसके वर्ण उसके कर्म में चेंज कहां आ रहा है उसको तो

901
01:02:50,960 --> 01:02:55,000
वही कार्य करना है चारों में से कहीं भी जाए पहली बात तो ये जाना नहीं

902
01:02:55,000 --> 01:02:59,440
चाहिए अब उसके बाद बात कर रहे हैं कि वो चारों में से कहीं भी जाएगी उसका जो शास्त्रों

903
01:02:59,440 --> 01:03:03,760
के हिसाब से जो उसका कार्य है वो तो वही है

904
01:03:03,760 --> 01:03:07,840
उसको घर ही संभालना है उसको घर को स्वर्ग बनाना उसको घर को मंदिर

905
01:03:07,840 --> 01:03:12,160
बनाना है। उसको अपने जो उसका भ्र्ता

906
01:03:12,160 --> 01:03:16,320
है उसकी सहायता करनी है कि वो अपने वर्णाश्रम धर्म

907
01:03:16,320 --> 01:03:19,320
के पालन में कहीं चूक ना जाए। जैसे

908
01:03:19,320 --> 01:03:23,520
कि एक गृहस्थ व्यक्ति है ब्राह्मण है और उसको संध्या

909
01:03:23,520 --> 01:03:27,680
वंदन करना है। संध्या वंदन करने के लिए अगर

910
01:03:27,680 --> 01:03:31,840
हो सके तो उससे पहले उसकी

911
01:03:31,840 --> 01:03:36,560
जो धर्मपत्नी है वह जागे ब्रह्म मुहूर्त में।

912
01:03:36,560 --> 01:03:41,640
और वह यह ध्यान दे कि मेरे पति को क्योंकि यहां पर

913
01:03:41,640 --> 01:03:46,000
एक शास्त्रोक्त पूजा करनी है जिससे उसका

914
01:03:46,000 --> 01:03:50,160
और मेरा दोनों का उद्धार होना है। दोनों का कल्याण होना है। तो वो

915
01:03:50,160 --> 01:03:54,160
वहां पर व्यवस्था कर दे कि मेरे पति आए तो उन्हें कम

916
01:03:54,160 --> 01:03:56,400
से कम समय में अपना जो चीजें चालू हो

917
01:03:56,400 --> 01:04:00,480
जाए। तो इस तरीके से जो पत्नी है उसका

918
01:04:00,480 --> 01:04:04,800
कोई विशेष अलग से धर्म नहीं है। उसका मेन जो है वह घर गृहस्ती

919
01:04:04,800 --> 01:04:08,800
को ही मंदिर बनाना स्वर्ग बनाना। गृह मंत्रालय पत्नी के

920
01:04:08,800 --> 01:04:13,760
पास है तो वो चेंज नहीं होगा। दूसरी बात यह है कि

921
01:04:13,760 --> 01:04:17,760
मनुस्मृति में वचन आया कि स्त्री का कोई कुल नहीं होता है अपना। वो जिस कुल में

922
01:04:17,760 --> 01:04:22,320
व्याती है उसी कुल की मानी जाती। तो

923
01:04:22,320 --> 01:04:24,840
इसका

924
01:04:24,840 --> 01:04:28,960
अर्थ ये एक जरूर दोष उत्पन्न होगा कि उनकी जो आगे होने वाली

925
01:04:28,960 --> 01:04:33,840
जो संतान होगी वो वर्ण शंकर अवश्य कहलाएगी। वर्ण शंकर हो जाएगी।

926
01:04:33,840 --> 01:04:38,560
ये दोष जरूर आएगा।

927
01:04:38,560 --> 01:04:42,560
ताकि स्त्री के कर्म जो ब्राह्मण के यहां जाने पड़ते हैं। स्त्री के कर्म तो

928
01:04:42,560 --> 01:04:47,040
वही रहेंगे। वो जहां भी जाए उसको अपने घर गृह मंत्रालय

929
01:04:47,040 --> 01:04:51,040
को संभालना है। आचरण चेंज कब हो रहे हैं? जब ब्राह्मण जो

930
01:04:51,040 --> 01:04:55,440
है वैश्य उचित वृत्त से और जो है वो आजीव को पार्जन

931
01:04:55,440 --> 01:05:01,440
कर रहा है तब हो रहा है तब प्रभाव पड़ रहा है जी

932
01:05:03,200 --> 01:05:07,440
और अगर स्त्री मान लो विवाह ही ना करे तो उसे वही वर्ण का अपनाना

933
01:05:07,440 --> 01:05:11,680
पड़ेगा जिस वर्ण में वो पैदा हुई है। पहली बात उसको वर्ण

934
01:05:11,680 --> 01:05:15,840
अपनाना ही कहां है? पहली बात तो ये उसका उसका धर्म क्या है?

935
01:05:15,840 --> 01:05:20,000
गृह मंत्रालय उसका धर्म है तो उसको ऐसा नहीं है मुझे चुनाव करना है कि

936
01:05:20,000 --> 01:05:24,000
मुझे ट्रेडिंग करनी है या मुझे पढ़ाना

937
01:05:24,000 --> 01:05:28,080
है या मुझे जो है रक्षा करनी है अगर उसे

938
01:05:28,080 --> 01:05:34,080
विवाह ही नहीं करना है तो धनोपार्जन के लिए कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा

939
01:05:34,160 --> 01:05:38,240
तब तो पहली बात तो ये है कि इसकी व्यवस्था की गई है कि जो स्त्री होती

940
01:05:38,240 --> 01:05:42,240
है उसको सदैव किसी ना किसी पुरुष के साथ में रहना चाहिए

941
01:05:42,240 --> 01:05:46,240
तो वो जिस पुरुष के साथ रहेगी पहला तो उसका कर्तव्य है कि वो उसका भरण

942
01:05:46,240 --> 01:05:50,240
पोषण करे। दूसरी बात विवाह ना करने को वो नहीं

943
01:05:50,240 --> 01:05:54,080
कहा गया है। आज्ञा नहीं दी गई है। स्त्री को विवाह करना ही है।

944
01:05:54,080 --> 01:05:58,160
हम तीसरी बात ये है कि आप यहां पर फिर आपातकालीन

945
01:05:58,160 --> 01:06:02,160
ले आ रहे हो। उस स्थिति में वो उसको नहीं फिर भैया जब

946
01:06:02,160 --> 01:06:06,160
आखरी हमारा कोई है नहीं पुरुष नहीं है तो हम कुछ ना कुछ तो करेंगे। वो कुछ

947
01:06:06,160 --> 01:06:10,240
भी करे फिर जब उसने शास्त्रों को तिलांजलि देकर के विवाह ना करना

948
01:06:10,240 --> 01:06:14,320
अपना लिया। शास्त्रों को तिलांजलि देकर के उसने पुरुष विहीन जीवन

949
01:06:14,320 --> 01:06:18,400
जीना अपना लिया और उसके जीवन की आज ऐसी परिस्थिति आ

950
01:06:18,400 --> 01:06:23,960
ही गई है कि उसको खुद ही कमाना है खुद ही खाना है तो जाकर के फिर कमाए

951
01:06:23,960 --> 01:06:28,000
काहे राम राज्य क्या था हर

952
01:06:28,000 --> 01:06:32,320
व्यक्ति स्वकर्मण अपने अपने कर्म के हिसाब से

953
01:06:32,320 --> 01:06:36,400
अपने अपने वर्ण के हिसाब से कार्य करता था तो हम यह कहते

954
01:06:36,400 --> 01:06:40,800
हैं कि हवा उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए

955
01:06:40,800 --> 01:06:44,880
धूप उतनी निकलनी थी जितनी निकलनी चाहिए। संसार

956
01:06:44,880 --> 01:06:49,040
की कोई भी ऐसी आईडियोलॉजी नहीं है जिसने दावा किया हो। मैं कहता हूं

957
01:06:49,040 --> 01:06:53,440
हमारे राम दूसरों के लिए कल्पना है। हमारे

958
01:06:53,440 --> 01:06:57,600
राम इस्लाम के लिए कल्पना है। हमारे राम क्या

959
01:06:57,600 --> 01:07:01,600
कहते हैं ये ईसाई के लिए कल्पना है। बौद्धों के लिए कल्पना है हमारे

960
01:07:01,600 --> 01:07:05,760
राम। ठीक है? मगर उन्होंने

961
01:07:05,760 --> 01:07:09,200
क्या अपनी आईडियोलॉजी में भाई दूसरा तो विश्वास नहीं

962
01:07:09,200 --> 01:07:13,360
कर सकता कि आपकी आईडियोलॉजी जो है वह सही है। तो हमारे हिसाब से उन सबकी

963
01:07:13,360 --> 01:07:17,360
आईडियोलॉजी कल्पना है। जैसे हमारी आईडियोलॉजी उनके लिए कल्पना है। तो

964
01:07:17,360 --> 01:07:21,360
अगर मैं कहूं तो इस्लाम ने क्रिश्चियन ने बौद्ध ने

965
01:07:21,360 --> 01:07:26,080
कहीं कल्पना में ही सही ऐसा दावा कर दिया। क्या परफेक्शन

966
01:07:26,080 --> 01:07:32,080
एक परफेक्ट समाज का दावा कर दिया? नहीं किया।

967
01:07:32,320 --> 01:07:37,120
हमारे यहां किया गया। हवा उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए।

968
01:07:37,120 --> 01:07:41,200
धूप उतनी निकलती थी जितनी निकलनी चाहिए। अकाल मृत्यु किसी

969
01:07:41,200 --> 01:07:45,600
की नहीं होती थी। कोई विधवा नहीं होती थी।

970
01:07:45,600 --> 01:07:49,600
यह सब दावे हमारे यहां किए गए। कल्पना में ही सही तुमने

971
01:07:49,600 --> 01:07:54,080
कर दिया क्या? क्यों नहीं कर पाए? और एक बात देख लीजिए।

972
01:07:54,080 --> 01:07:58,160
संसार में धर्म और ब्रह्म को बताने

973
01:07:58,160 --> 01:08:02,960
का दावा करने वाली बहुत सी आईडियोलॉजी ढेर सारी

974
01:08:02,960 --> 01:08:07,720
कहीं पर भी एक आदर्श दिया क्या कि

975
01:08:07,720 --> 01:08:12,080
मैं ये जो आईडियोलॉजी जो हम दे रहे हैं इस आईडियोलॉजी

976
01:08:12,080 --> 01:08:16,800
को हमारे इस व्यक्ति ने पूर्णतया निभा के दिखाया

977
01:08:16,800 --> 01:08:20,880
दुनिया में कोई नहीं है। मोहम्मद ने इस्लाम की आईडियोलॉजी

978
01:08:20,880 --> 01:08:24,720
बताने वाले के रूप में मोहम्मद ख्यापित है।

979
01:08:24,720 --> 01:08:28,880
मगर उन्होंने भी कई जगह चूक कर दी। मोहम्मद ने भी कई जगह चूक

980
01:08:28,880 --> 01:08:32,960
कर दी। उन्हीं के हिसाब से उन्हीं के स्क्रिप्चर के हिसाब से कहीं-क पर

981
01:08:32,960 --> 01:08:37,120
मोहम्मद जो है भूल गए, ये कर दिया, वो कर दिया। ऐसे गलतियां की

982
01:08:37,120 --> 01:08:41,360
जिनको बाद में उन्होंने उन्हें सुधारा। यानी कि पूरी

983
01:08:41,360 --> 01:08:45,520
दुनिया में सब सब लोग

984
01:08:45,520 --> 01:08:49,880
दावा करते हैं कि हमारे पास धर्म और ब्रह्म की व्याख्या है। मगर

985
01:08:49,880 --> 01:08:54,000
उस धर्म ब्रह्म को पाने के लिए उस धर्म बताए जाने वाले

986
01:08:54,000 --> 01:08:58,160
धर्म पर चलने वाला एक एग्जांपल सेट नहीं कर पाया पूरी दुनिया

987
01:08:58,160 --> 01:09:02,320
में कोई सिर्फ सनातन ने किया राम एक

988
01:09:02,320 --> 01:09:06,960
एग्जांपल है हमारे पास जो परफेक्ट राम

989
01:09:06,960 --> 01:09:12,960
राम राज्य इसीलिए हम लोग राम राज्य का उदाहरण लेते हैं कि उसमें स्वास कर्मणा

990
01:09:13,160 --> 01:09:17,520
था जी मेरा एक क्वेश्चन परशुराम जी पे वापस

991
01:09:17,520 --> 01:09:21,760
आया है अ जैसे परशुराम जी ने

992
01:09:21,760 --> 01:09:25,920
ब्राह्मण कुल में जन्म लिया। उन्होंने क्षत्रिय का मोठी

993
01:09:25,920 --> 01:09:30,320
काम किया तो उन्हें दोष लग गया। ये सही है।

994
01:09:30,320 --> 01:09:34,760
आपातकालीन स्थिति में उन्होंने क्षत्रिय क्षत्रियचित वृत्ति का आलंबन

995
01:09:34,760 --> 01:09:38,800
लिया। बिल्कुल लिया। उन्हें श्रेष्ठतम ब्राह्मण के रूप

996
01:09:38,800 --> 01:09:39,840
में कहां पर अपनाया

997
01:09:39,840 --> 01:09:45,040
गया? अच्छा।

998
01:09:45,040 --> 01:09:49,360
ओके। तो आइडली उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था कि किसी क्षत्रिय की मदद

999
01:09:49,360 --> 01:09:53,360
लेके उस क्षत्रिय को ट्रेन करके जैसे चाणक्य ने किया इस तरह से

1000
01:09:53,360 --> 01:09:56,480
करना चाहिए था।

1001
01:09:56,480 --> 01:10:00,560
देखिए पहली बात है कि आप कर सकते थे

1002
01:10:00,560 --> 01:10:04,960
मैं इसका उत्तर देता हूं। मैं इसका उत्तर देता हूं। देखिए ऐसा है कि आप भगवान परशुराम

1003
01:10:04,960 --> 01:10:09,120
को कंपेयर नहीं कर सकते किसी भी बीइंग से।

1004
01:10:09,120 --> 01:10:13,120
इसको इसको मैं ऐसे ऐसे बता दूं कंपेयर ना करने

1005
01:10:13,120 --> 01:10:15,880
के विषय में।

1006
01:10:15,880 --> 01:10:19,880
कि रामो विग्रहवान

1007
01:10:19,880 --> 01:10:24,400
धर्म परशुराम विग्रह धर्म नहीं

1008
01:10:24,400 --> 01:10:28,480
तो कहीं-कहीं पे भगवान के जो अन्य अवतार है

1009
01:10:28,480 --> 01:10:32,560
उन्होंने अवतार किया लीलावत लीला के रूप में अनेक सारे उदाहरण

1010
01:10:32,560 --> 01:10:36,640
देने के लिए किया मगर यथावत उनको एकजेक्टली हम सेम टू सेम कॉपी

1011
01:10:36,640 --> 01:10:40,720
नहीं कर सकते हम कॉपी किसे कर सकते हैं राम को राम

1012
01:10:40,720 --> 01:10:44,880
विग्रह वर्न अब जो भगवान ने अन्य जो रूप लेकर के अन्य

1013
01:10:44,880 --> 01:10:48,960
जो लीलाएं की है, अन्य जो आचरण किए हैं, उनको आदर्श के रूप में नहीं

1014
01:10:48,960 --> 01:10:53,040
अपनाया जा सकता। क्योंकि उन्होंने कई जगह पर सीमाओं के पार

1015
01:10:53,040 --> 01:10:54,880
जाकर के भी दिखाया और वो

1016
01:10:54,880 --> 01:10:58,960
दिखाने की आवश्यकता थी। क्योंकि उन्हें एक नियम

1017
01:10:58,960 --> 01:11:02,960
ख्यापित करना था कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है।

1018
01:11:02,960 --> 01:11:07,200
ईश्वर सभी नियमों को बनाने वाला सर्वनियामक है। तो मैं हसूंगा

1019
01:11:07,200 --> 01:11:11,280
भी, मैं गाऊंगा भी, मैं नाचूंगा भी, मैं रोऊंगा

1020
01:11:11,280 --> 01:11:15,360
भी। तो जब उन्हें सभी नियमों को तोड़ने वाले के रूप में

1021
01:11:15,360 --> 01:11:19,720
अपने आप को बताना है कि मैं पूर्ण हूं। सत्यम ज्ञान अनंतम

1022
01:11:19,720 --> 01:11:24,480
ब्रह्म तो मैं सब कुछ कर सकने वाला हूं तो मैं अनेकानेक

1023
01:11:24,480 --> 01:11:28,640
अजीब अजीब तरह की लीलाएं करके भी दिखाऊंगा। इसीलिए भगवान

1024
01:11:28,640 --> 01:11:32,720
के सभी अन्य रूप जो है वो हमारे लिए पूज्य है।

1025
01:11:32,720 --> 01:11:37,320
आराध्य है, स्मरणीय है, आदरणीय है,

1026
01:11:37,320 --> 01:11:42,400
अनुसरणीय है बट अनुकरणीय नहीं।

1027
01:11:42,400 --> 01:11:46,480
और जो राम है वो हमारे साथ हमारे लिए यह सब

1028
01:11:46,480 --> 01:11:50,640
होते हुए अनुकरणीय भी है। हम लोग उन सबको ओबे

1029
01:11:50,640 --> 01:11:54,720
करेंगे। भगवान कृष्ण को ओबे करेंगे। भगवान परशुराम

1030
01:11:54,720 --> 01:11:58,720
को ओबे करेंगे। अगर उन्होंने कहीं कोई सिद्धांत दिया उसको ओबे करेंगे।

1031
01:11:58,720 --> 01:12:03,120
मगर फॉलो नहीं करेंगे। फॉलो हम राम को करते हैं। राम आदर्श

1032
01:12:03,120 --> 01:12:07,120
है हमारा। क्योंकि जब हम ईश्वर को फॉलो

1033
01:12:07,120 --> 01:12:10,000
अगर ईश्वर को फॉलो करने वाली बातें सोच लेंगे तो

1034
01:12:10,000 --> 01:12:14,080
उसमें तो यह भी आ जाएगा कि ईश्वर ने विष पीना सिखाया

1035
01:12:14,080 --> 01:12:18,080
भाई नीलकंठ के रूप में

1036
01:12:18,080 --> 01:12:22,160
उसको भी फॉलो करें। विष पीना चाहिए क्योंकि उन्होंने हलाल

1037
01:12:22,160 --> 01:12:26,440
विष पिया था। है ना?

1038
01:12:26,440 --> 01:12:30,880
तो क्या कहते हैं? बाकी सभी जो हमारे

1039
01:12:30,880 --> 01:12:35,000
पूज्य भगवान के जो अन्य रूप हैं वह हमारे लिए पूजनीय

1040
01:12:35,000 --> 01:12:39,320
हैं। बिल्कुल नो डाउट उनकी पूजा करके हमें मोक्ष की प्राप्ति

1041
01:12:39,320 --> 01:12:43,520
होगी। मगर एज ए मर्यादा पुरुषोत्तम

1042
01:12:43,520 --> 01:12:49,520
के रूप में राम है। उनको फॉलो करना है।

1043
01:12:53,800 --> 01:12:57,920
जी नाउ आई एम आउट ऑफ क्वेश्चंस। मतलब बहुत कुछ आपकी

1044
01:12:57,920 --> 01:13:02,080
बातें मुझे समझ में आई है जो कि मैं मुझे स्टार्टिंग में नहीं लगा था कि मैं इस बात को मानूंगा

1045
01:13:02,080 --> 01:13:06,480
चिंतन करूंगा मैं इस बात पे और भी वैसे बिल्कुल और देखो अभी

1046
01:13:06,480 --> 01:13:09,840
अच्छा रेफरेंस

1047
01:13:09,840 --> 01:13:13,120
बाकी आप यहां से

1048
01:13:13,120 --> 01:13:17,200
कुछ क्वेश्चन देखिए जन्म आधारित तो आप भी मानते हैं बस आप इतना मानते

1049
01:13:17,200 --> 01:13:21,280
हैं कि बाद में चेंज हो जाएगा जन्म आधारित तो आप भी

1050
01:13:21,280 --> 01:13:26,480
या नहीं हो सकता इस पर अभी मैं सोचूंगा अब आप इस पर चिंतन करिएगा

1051
01:13:26,480 --> 01:13:30,560
मगर कुछ क्वेश्चन ले जाइए कि जैसे आप जैसे हम लोग अगर किसी

1052
01:13:30,560 --> 01:13:34,640
का चेंज हुआ मानेंगे तो कितना कितने ड्यूरेशन में उसका चेंज हुआ

1053
01:13:34,640 --> 01:13:38,640
मानेंगे है ना कितने क्या एग्जजेक्टली क्या कर

1054
01:13:38,640 --> 01:13:42,640
देने पर मान लिया जाएगा कि ये हो गया क्या एक किलो आलू बेच

1055
01:13:42,640 --> 01:13:46,640
देने पर मान लिया जाएगा ये वैश्य हो गया या फिर 10 बोरी आटा बेचने

1056
01:13:46,640 --> 01:13:50,720
पर माना जाएगा वैश्य हो गया यह भी तो फिक्स होना चाहिए ना धर्म का

1057
01:13:50,720 --> 01:13:55,520
मतलब क्या है देखिए व्यक्ति जो जन्मा है उसके अंदर

1058
01:13:55,520 --> 01:14:00,320
असुनिश्चित विचार आ रहे हैं। मैं क्या करूं, क्या ना करूं? पागल है।

1059
01:14:00,320 --> 01:14:04,400
ऐसे जन्मा है व्यक्ति। जैसे किसी बच्चे को अगर मर्यादा हम नहीं सिखाएंगे

1060
01:14:04,400 --> 01:14:08,640
वो बिना कपड़ों के बाहर चला जाएगा। भले ही वो स्त्री

1061
01:14:08,640 --> 01:14:12,720
हो या पुरुष हो यानी बालिका हो या बालक हो। हमें उसे सिखाना पड़ता है

1062
01:14:12,720 --> 01:14:17,040
बेटा बिना कपड़ों के बाहर नहीं जाना। ये मर्यादा दी।

1063
01:14:17,040 --> 01:14:21,800
तो धर्म का मतलब है एक लकीर। फिक्स फिक्स करना।

1064
01:14:21,800 --> 01:14:26,160
तो अगर हम कर्मों के हिसाब से फिक्स कर रहे हैं तो कौन सी आयु

1065
01:14:26,160 --> 01:14:30,720
तक किसी को फिक्स कर सकते हैं? किस आयु के बाद उसका बदला नहीं जाएगा?

1066
01:14:30,720 --> 01:14:34,800
क्या कर देने पर ये निश्चित हो जाएगा कि हां अब ये वैश्य हो गया। कितने

1067
01:14:34,800 --> 01:14:39,280
दिन तक कर देने पर हो जाएगा? ये बहुत सारे क्वेश्चन उठ जाते हैं।

1068
01:14:39,280 --> 01:14:41,680
क्योंकि अगर कर्म के आधार पर चेंज होने

1069
01:14:41,680 --> 01:14:45,760
वाली बातें होती तो ये सारी व्यवस्थाएं भी देते। दूसरी बात यह है कि

1070
01:14:45,760 --> 01:14:49,840
वह व्यवस्था ही कैसी जहां पर अव्यवस्था फैली रहे कि

1071
01:14:49,840 --> 01:14:54,160
हमें इसकी आवश्यकता है। हम गए चलो भैया युद्ध छिड़ा है। मैं तो ब्राह्मण हो गया। मैं तो गायत्री

1072
01:14:54,160 --> 01:14:56,760
जपू

1073
01:14:56,760 --> 01:15:00,880
बस मैं तो कर्मकांड करूंगा। भगवान कृष्ण कह रहे हैं कि

1074
01:15:00,880 --> 01:15:04,880
हे अर्जुन जा तू क्षत्रिय है। तेरा धर्म है युद्ध करना। बस

1075
01:15:04,880 --> 01:15:10,280
अभी पांच मिनट पहले मैंने कथा वाचने का निर्णय ले लिया है। अब मैं कथा

1076
01:15:10,280 --> 01:15:14,320
वाचूंगा। हो गया। तो यह सब आप क्वेश्चन भी ले जाइए

1077
01:15:14,320 --> 01:15:18,400
इस तरीके के। ठीक है? आप और रेफरेंस भी

1078
01:15:18,400 --> 01:15:22,560
दे दीजिए मुझे जो आपने बातें बहुत सारी बोली है कि

1079
01:15:22,560 --> 01:15:27,280
रेफरेंसेस एक तो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र का

1080
01:15:27,280 --> 01:15:31,440
जनेऊ किस आयु में और किस उसमें ऋतु काल में होना

1081
01:15:31,440 --> 01:15:35,840
चाहिए। ये तो पंडित जी आपको दे देंगे। मैं दे दूंगा और एक

1082
01:15:35,840 --> 01:15:39,920
मैं आपको दे दूंगा। एक मैंने बात बोली है वो वाली कि मधुस्मति

1083
01:15:39,920 --> 01:15:44,080
के 12 अध्याय के 37 श्लोक में छिपाने वाले

1084
01:15:44,080 --> 01:15:48,160
कर्मों को करने से पुस्तक हो जो वर्ण व्यवस्था से रिलेटेड हो

1085
01:15:48,160 --> 01:15:52,880
जो शास्त्रीय प्रमाण के साथ आती हो उसको मैं मनुस्मृति है आकाश जी मनुस्मृति

1086
01:15:52,880 --> 01:15:56,880
से बेस्ट क्या मैं हम लोगों का जो

1087
01:15:56,880 --> 01:16:01,120
हम लोग जो बुक एक प्रकाशित करने वाले हैं आह्वान की है उसमें

1088
01:16:01,120 --> 01:16:05,440
एक पूरा चैप्टर है वर्ण व्यवस्था का तर्क और प्रमाण के साथ तो मैं

1089
01:16:05,440 --> 01:16:09,520
देखता हूं अभी अभी उसका जो वो पार्ट है ना वर्णा

1090
01:16:09,520 --> 01:16:14,560
वाला वो मैं आपको देने का देने का प्रयास करूंगा।

1091
01:16:14,560 --> 01:16:18,560
ठीक है? हां ये सब रेफरेंसेस आप ले लीजिएगा। देखिएगा कि ब्राह्मण को कितना

1092
01:16:18,560 --> 01:16:22,640
वो किया गया है कि अब

1093
01:16:22,640 --> 01:16:27,280
देखिए आप ब्राह्मण जरूरत से ज्यादा कमा नहीं सकता।

1094
01:16:27,280 --> 01:16:31,280
ब्राह्मण ऐसे ही ब्राह्मण का जीवन होगा निर्वाह कि

1095
01:16:31,280 --> 01:16:35,280
भैया कोई अगर चाहे तो इसमें दान कर दे थोड़ा सा तो उससे ही ब्राह्मण

1096
01:16:35,280 --> 01:16:39,280
का वो चलेगा और उसी से उसको वो जो धर्मोचित कार्य

1097
01:16:39,280 --> 01:16:43,880
आगे करने हैं योजनाबद्ध तरीके से वो भी चलेंगे

1098
01:16:43,880 --> 01:16:48,240
और ब्राह्मण अपमान का भूखा

1099
01:16:48,240 --> 01:16:52,480
रहना चाहिए सम्मान नहीं देखना चाहिए और

1100
01:16:52,480 --> 01:16:56,960
बहुत सारी ऐसी चीजें जो उसके जीवन को कठिन बनाती है देखने में

1101
01:16:56,960 --> 01:17:01,120
मैं मैं इसमें एक बात जोड़ देता हूं। जी ब्राह्मण का

1102
01:17:01,120 --> 01:17:05,280
जो सबसे उच्च कोटि जो नेक्स्ट लेवल जो एक उपाधि

1103
01:17:05,280 --> 01:17:09,360
होती है या फिर बोली जो एक जो एक स्टेज होती है वो सन्यास की होती है।

1104
01:17:09,360 --> 01:17:13,440
है ना? ब्रह्मचर्य सन्यास की आती है। और अगर आपने करपात्री जी

1105
01:17:13,440 --> 01:17:17,800
का नाम सुना हो धर्म समार स्वामी श्री करपात्री जी महाभाग

1106
01:17:17,800 --> 01:17:22,000
वो एक समय भोजन करते थे और करपात्र यानी कि ऐसे हाथ

1107
01:17:22,000 --> 01:17:26,000
बनाते थे और जितना इसमें भोजन आ जाए बस उतना ही लेते थे। उसके बाद वो

1108
01:17:26,000 --> 01:17:30,160
भोजन अन्न छूते भी नहीं थे। ठीक है? यह जीवन होता है एक ब्राह्मण

1109
01:17:30,160 --> 01:17:34,240
का। मैं उस ब्राह्मण के मैं गृहस्थ ब्राह्मण की बात नहीं कर रहा हूं मैं। एक मैं ब्राह्मण

1110
01:17:34,240 --> 01:17:38,400
के एक अटल स्टेज की बात कर रहा हूं। उसी में अगर आप दूसरे लोअर स्टेजेस

1111
01:17:38,400 --> 01:17:42,560
पे आएंगे जो गृहस्थ का जीवन है वो वो भी इंपॉर्टेंट ही है। इक्वली इंपॉर्टेंट है क्योंकि

1112
01:17:42,560 --> 01:17:46,560
एक सन्यासी को या ब्रह्मचारी को भी गृहस्थ की तरफ ही देखना पड़ता है भोजन लेने

1113
01:17:46,560 --> 01:17:50,560
के लिए। क्योंकि वो अग्नि का स्पर्श नहीं कर सकते थे तो स्वयं खाना नहीं बना

1114
01:17:50,560 --> 01:17:54,560
सकते। और अगर कर पात्र इसलिए उनका नाम बना क्योंकि कर जो होता है

1115
01:17:54,560 --> 01:17:58,720
ना कर का पात्र बनाकर उस पर भोजन लेते थे और जितना उनके हाथ में आ गया उतना ही करते

1116
01:17:58,720 --> 01:18:02,880
थे भोजन उसके अलावा नहीं करते थे तो आसान नहीं होता जीवन ठीक है

1117
01:18:02,880 --> 01:18:07,280
संघर्ष बहुत होता है अगर आपको वो शरीर मिला है ना तो उसके हिसाब से

1118
01:18:07,280 --> 01:18:11,440
आपको अह मानसिक और अन्य तरह के बल भी भगवान

1119
01:18:11,440 --> 01:18:12,160
ने दिए

1120
01:18:12,160 --> 01:18:16,400
हैं। ठीक है? जैसे क्षत्रियों को शारीरिक बल, भुजाओं का बल बहुत अति अत्यधिक

1121
01:18:16,400 --> 01:18:20,480
दिया होगा। ठीक है? और दूसरे शूद्रों को अलग तरह का बल दिया

1122
01:18:20,480 --> 01:18:25,440
है। ब्राह्मणों को अलग तरह का बल दिया है। ठीक है? तो यह भाव रहता है। और

1123
01:18:25,440 --> 01:18:29,840
बस यही बात है। एक बात और है जैसे वो मैं याद दिला दूं

1124
01:18:29,840 --> 01:18:30,560
कि ब्राह्मण

1125
01:18:30,560 --> 01:18:34,960
क्षत्रिय वैश्य होने से अमुक विधि में अमुक व्यक्ति अधिकृत

1126
01:18:34,960 --> 01:18:39,200
है। केवल इस बात का पर्यावसान है। इस बात में इनका पर्यावसान है। ऐसा

1127
01:18:39,200 --> 01:18:43,520
नहीं है कि भाई जो शूद्र है उसको मोक्ष नहीं मिल सकता। उसको भगवान की शरणागत

1128
01:18:43,520 --> 01:18:47,600
नहीं मिल सकती। ऐसा नहीं है। फलचर्य नहीं है। फलचर्य नहीं है। जो

1129
01:18:47,600 --> 01:18:51,920
इन विधियों का सारी विधियां है जो कुल मिलाकर के करना

1130
01:18:51,920 --> 01:18:56,080
डूस एंड डोंट्स है ना कर्तव्य और अकर्तव्य तो ये सारी

1131
01:18:56,080 --> 01:19:00,720
विधियां विधि और विधि निषेध ये सारी विधियों का पर्यावसान क्या है? धर्म

1132
01:19:00,720 --> 01:19:04,720
इनको ही तो धर्म कहते हैं। ये करना है ये नहीं करना। ये धर्म है। और धर्म

1133
01:19:04,720 --> 01:19:08,720
का पर्यावसान है। धर्म का पर्यावसान है मोक्ष में। तो ऐसा

1134
01:19:08,720 --> 01:19:12,800
नहीं है कि कोई ब्राह्मण के रास्ते पर चलकर के ही उसको मोक्ष

1135
01:19:12,800 --> 01:19:16,960
मिलेगा। वरना मोक्ष नहीं मिलेगा। मोक्ष किसी को भी मिल सकता है। तो कर्मकांड

1136
01:19:16,960 --> 01:19:21,120
के भाव से जी तो जन्म आधारित जो

1137
01:19:21,120 --> 01:19:25,200
व्यवस्था है उसका पर्यावसान जो व्यवहार है ना संसार में जो

1138
01:19:25,200 --> 01:19:29,600
व्यवहार कैसे करना है उसमें है इसमें नहीं है कि किसको परमार्थ

1139
01:19:29,600 --> 01:19:33,600
मिलेगा किसको परमार्थ नहीं मिलेगा। परमार्थ तो ये है कि भैया अभी

1140
01:19:33,600 --> 01:19:38,000
भगवान का नाम जपने लगो राम राम राम राम राम राम राम और अभी देखो आपका

1141
01:19:38,000 --> 01:19:39,760
से परमार्थ सेट होने लगेगा।

1142
01:19:39,760 --> 01:19:43,920
व्यवहार सेट होते हुए मतलब व्यवहार में जो दिक्कतें आ रही होंगी जो ऊपर

1143
01:19:43,920 --> 01:19:48,120
उतारचाव आ रहे होंगे वह सब सेट होते हुए आपका परमार्थ सुनिश्चित होने

1144
01:19:48,120 --> 01:19:52,560
लगेगा। ये चीज ठीक है। आपको

1145
01:19:52,560 --> 01:19:56,640
एक बात इसमें जोड़ता हूं मैं फलचर्य की जो बात हो रही थी उस भाव

1146
01:19:56,640 --> 01:20:02,640
से बोलता हूं और कर्मकांड के दृष्टिकोण से बताता हूं आपको।

1147
01:20:06,720 --> 01:20:12,720
आपका वीडियो पॉज हो गया शायद।

1148
01:20:17,880 --> 01:20:23,880
हम कोई अगर चर्चा के लिए आना चाहता है तो वह आ सकता

1149
01:20:24,040 --> 01:20:28,160
है। इस प्रकार की चर्चाएं हमारे चैनल पर कम देखने को मिलती है

1150
01:20:28,160 --> 01:20:34,160
जैसी आज हुई [हंसी]

1151
01:20:34,600 --> 01:20:36,480
है। एजुकेटेड

1152
01:20:36,480 --> 01:20:40,480
दलित आर ऑल मूविंग बस हटा दीजिए।

1153
01:20:40,480 --> 01:20:44,600
ठीक है? काफी है। पढ़ लिया। एजुकेटेड

1154
01:20:44,600 --> 01:20:49,720
दलित मूव कर रहे हैं बुद्धिज्म की ओर।

1155
01:20:49,720 --> 01:20:53,760
तो आवश्यकता यह नहीं है कि हम अपने धर्म की परिभाषा बदल दें।

1156
01:20:53,760 --> 01:20:57,920
आवश्यकता यह है कि उनसे जाकर के बैठ के ऐसी ही वार्ता करें

1157
01:20:57,920 --> 01:21:02,400
जैसे आज आकाश गर्ग जी से की है। उन तक वो

1158
01:21:02,400 --> 01:21:06,560
शिक्षा नहीं पहुंच रही है धर्म को समझने वाली। इसलिए मूव कर रहे हैं।

1159
01:21:06,560 --> 01:21:10,560
उन तक सही शिक्षा पहुंचेगी धर्म की तो मूव नहीं करेंगे। मगर

1160
01:21:10,560 --> 01:21:14,640
इसके उलट यदि हम धर्म को ही बदलने लगे इस भय से कि व्यक्ति धर्म

1161
01:21:14,640 --> 01:21:19,280
को छोड़ रहा है। इस भय से हम धर्म को चेंज करने लगे। हां

1162
01:21:19,280 --> 01:21:23,520
तो व्यक्ति तो कल को यह भी कहेगा कि मुझे बहन से विवाह करना है। तो ठीक है अपने

1163
01:21:23,520 --> 01:21:27,520
अलऊ कर दो बहन से विवाह करना। उसके आगे और बढ़ेगा। सोचिए कहांहां तक जा

1164
01:21:27,520 --> 01:21:31,840
सकता है। पराकाष्ठा पे जाएगा। व्यक्ति तो जानवर है। जानवर

1165
01:21:31,840 --> 01:21:36,000
के समान था ना धर्म ना पशु भी समान। तो हम यह नहीं कर सकते कि

1166
01:21:36,000 --> 01:21:40,240
बाढ़ का पानी आ गया और मंत्री जी से पूछा गया कि मंत्री जी बाढ़

1167
01:21:40,240 --> 01:21:44,520
का पानी खतरे के निशान तक आ गया तो खतरे का निशान 2 इंच और ऊपर उठा दो।

1168
01:21:44,520 --> 01:21:48,640
नहीं हमको व्यवस्था करनी होगी कि बाढ़ से कैसे बचा जाए

1169
01:21:48,640 --> 01:21:52,000
ना कि उस उस निशान को ही बदल दो। धर्म को ही बदल दो।

1170
01:21:52,000 --> 01:21:55,680
फिर धर्म बदल गया तो धर्म क्या है?

1171
01:21:55,680 --> 01:21:59,680
मनुष्य की भावनाओं के अनुसार यह सारी बातें हैं। तो आवश्यकता

1172
01:21:59,680 --> 01:22:04,000
यह नहीं है कि हम अपने धर्म को चेंज करते जाए। आवश्यकता यह है कि उसका

1173
01:22:04,000 --> 01:22:06,000
सही स्वरूप उस तक पहुंचाएं

1174
01:22:06,000 --> 01:22:10,000
और उसका कारण है कि जो वास्तविक ब्राह्मण है वह आज लुप्त होते चले

1175
01:22:10,000 --> 01:22:14,320
जा रहे हैं। न्यूनता को प्राप्त होते जा रहे हैं। क्योंकि यह वर्ण व्यवस्था

1176
01:22:14,320 --> 01:22:18,320
को ना मानने वाले जो तंत्र ऐसे उद्भाषित हो गए हैं। आर्य समाज इत्यादि

1177
01:22:18,320 --> 01:22:22,800
के रूप में जो वर्ण व्यवस्था पर चोट कर करके कर करके ब्राह्मणों

1178
01:22:22,800 --> 01:22:26,880
को लालच देते हैं। ब्राह्मण अपनी वृत्ति छोड़ के वैश्य उचित

1179
01:22:26,880 --> 01:22:31,200
कार्य करें और सबको और उनको लालच देते हैं। तुम जो है ब्राह्मण

1180
01:22:31,200 --> 01:22:35,360
ऐसे भी कई योजनाबद्ध तरीके से काम चल रहा है। शूद्रों का जीवन

1181
01:22:35,360 --> 01:22:39,440
अगर देखा जाए तो व्यवहारिक दृष्टिकोण से सबसे सरल है।

1182
01:22:39,440 --> 01:22:43,680
ब्राह्मण के अनुसार जीवन बता देंगे पागल हो जाए व्यक्ति। तो शूद्र

1183
01:22:43,680 --> 01:22:48,080
को शूद्र को कहा वही ब्राह्मण होते हैं जो अपनी वृत्त अपनी

1184
01:22:48,080 --> 01:22:52,400
मतलब सरल तरल जीवन भोग की ओर जाना चाहते हैं। तो वो क्या करते हैं? शूद्रों

1185
01:22:52,400 --> 01:22:58,400
से कहते हैं तुम ब्राह्मण बनो कर्म के अनुसार और वह स्वयं उनका कार्य करने लगते हैं।

1186
01:22:58,720 --> 01:23:03,200
योजनाबद्ध एक क्वेश्चन और मेरे दिमाग में आया। अभी

1187
01:23:03,200 --> 01:23:07,600
बहुत सारे कर्मकांडों में हमें ब्राह्मण चाहिए होते हैं और कर्म

1188
01:23:07,600 --> 01:23:11,840
मतलब उच्च कोटि के ब्राह्मण हमें नहीं मिल पाते। तो हमें उसे

1189
01:23:11,840 --> 01:23:15,840
चूज करना चाहिए जो किसी और वर्ण का है और ब्राह्मण वाले

1190
01:23:15,840 --> 01:23:19,840
कर्म कर रहा है या फिर उसे चूस करना चाहिए। हां ठीक है।

1191
01:23:19,840 --> 01:23:21,040
उसे चूस करना चाहिए जो

1192
01:23:21,040 --> 01:23:25,200
पतित ब्राह्मण है और उसे चूस करना चाहिए।

1193
01:23:25,200 --> 01:23:29,440
उसे दान पहली बात तो यह है। पहली बात तो यह है कि मतलब ऐसी

1194
01:23:29,440 --> 01:23:33,600
संभावनाएं कम है कि आपको ब्राह्मण ना ही मिले। दूसरी बात यह है

1195
01:23:33,600 --> 01:23:37,680
कि मनुस्मृति में इस बारे में कहा गया है कि अगर वो इतना इतना कुछ कर रहा है

1196
01:23:37,680 --> 01:23:42,120
तो उसको ब्राह्मण के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए। कुछ चीजें बताई गई

1197
01:23:42,120 --> 01:23:47,880
है। कैसे चेक करें ब्राह्मण को? इस बारे में

1198
01:23:47,880 --> 01:23:52,000
है। किसी ब्राह्मण को कैसे चेक करें? मैं आपको रेफरेंस दे

1199
01:23:52,000 --> 01:23:56,960
दूंगा इसका। इस बारे में भगवत गीता का दो श्लोक काम में आएंगे। पहला

1200
01:23:56,960 --> 01:24:00,960
यदि आप विवशतावश अथवा अज्ञानता

1201
01:24:00,960 --> 01:24:05,440
वश धर्म का अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में मन में पश्चाताप

1202
01:24:05,440 --> 01:24:10,080
रख रहे हैं कि मैं धर्म का अनुकरण नहीं कर पा रहा हूं तो भी आप धर्मज्ञ हैं। पहली बात

1203
01:24:10,080 --> 01:24:14,160
और दूसरी बात है कर्म निवाद कारस्ते मा फले सुदा

1204
01:24:14,160 --> 01:24:18,160
हमने अपने कर्म को किया हमने ढूंढा अब नहीं मिला वो

1205
01:24:18,160 --> 01:24:22,320
बेस्ट वाला जो हम ढूंढने जा रहे हैं नहीं मिला मगर जनेऊ है

1206
01:24:22,320 --> 01:24:26,320
शिख सूत्र इत्यादि है उतने पर हमने उसको लाकर के ब्राह्मण के

1207
01:24:26,320 --> 01:24:32,320
रूप में अपने यहां पर स्वीकार किया

1208
01:24:38,000 --> 01:24:42,160
ठीक है फिर पूरा करते हैं। कोई आ भी नहीं रहा है। आपको रेफरेंस

1209
01:24:42,160 --> 01:24:46,320
पंडित जी दे देंगे। आशा करते हैं आज की चर्चा आपको अच्छी लगी हो और

1210
01:24:46,320 --> 01:24:51,200
काफी सारे तथ्यों पर हम लोगों ने बात की है। प्रकाश भी डाला है। एक

1211
01:24:51,200 --> 01:24:55,200
सुनील जी से वार्ता हुई थी। वो हमारे पास एक उसमें पीडीएफ

1212
01:24:55,200 --> 01:24:59,360
में है। वो पूरी वार्ता क्रमबद्धता से तो उसको भी

1213
01:24:59,360 --> 01:25:03,600
आप ले लीजिएगा। उसमें आपको बहुत फैक्टफुल चीजें

1214
01:25:03,600 --> 01:25:08,320
आएंगी। ठीक है पंडित जी आभार आपका और

1215
01:25:08,320 --> 01:25:12,400
आकाश गर्ग जी आपका आभार जो लोग भी हमें सहायता करना चाहते

1216
01:25:12,400 --> 01:25:16,480
हैं आर्थिक बल प्रदान कर सकते हैं हमें यह बारकोड

1217
01:25:16,480 --> 01:25:20,320
यहां पर दिया गया है अकाउंट डिटेल्स भी दी गई है सभी को

1218
01:25:20,320 --> 01:25:24,640
जय श्री राम जय श्री राम जय

1219
01:25:24,640 --> 01:25:28,640
श्री राम जय श्री कृष्णा हर महादेव हर हर महादेव
