1
00:00:02,120 --> 00:00:06,520
सभी को जय श्री राम हम लोग फिथ

2
00:00:06,520 --> 00:00:10,880
वीडियो पर बात कर रहे हैं इस समय और जो पिछला

3
00:00:10,880 --> 00:00:15,520
लाइव चल रहा था हमारा उसमें कुछ बाधा उत्पन्न हो गई थी

4
00:00:15,520 --> 00:00:19,520
घर घर की कोई दृश्य थे घर के कुछ तो वह आ

5
00:00:19,520 --> 00:00:23,560
गए घर के नहीं मतलब जिस स्थान पर हमारा कार्य स्थल है जहां

6
00:00:23,560 --> 00:00:27,840
पर हम बैठ करके कार्य कर रहे थे तो वहां के कुछ दश आ गए थे जिसको लेकर

7
00:00:27,840 --> 00:00:32,040
के हमारे घर के लोग थे उनको आपत्ति थी तो उसको अभी प्राइवेट

8
00:00:32,040 --> 00:00:36,040
कर रखा है उस वीडियो और क्या

9
00:00:36,040 --> 00:00:42,040
कहते हैं फर लाइव कर दिया

10
00:00:42,600 --> 00:00:46,840
जाएगा तो हम लोग ये भगवता

11
00:00:46,840 --> 00:00:52,840
अंद के फिफ्थ वीडियो

12
00:00:53,200 --> 00:00:59,200
का फ वीडियो पर बात कर रहे हैं

13
00:01:00,640 --> 00:01:06,640
तो चलते हैं कहां पर थे हम

14
00:01:07,160 --> 00:01:11,880
लोग इसका क्या मसाला मिल

15
00:01:11,880 --> 00:01:16,240
जाएगा

16
00:01:16,240 --> 00:01:20,680
कर 151 का टाइम है

17
00:01:20,680 --> 00:01:25,000
151 के टाइम पर भगवता नंद ने यह बोला था

18
00:01:25,000 --> 00:01:31,000
की क्या कहते हैं यह

19
00:01:31,320 --> 00:01:35,800
भगवता ने बोला था कि तुम दोगले हो जब तुम लाइव के लिए मना कर रहे हो तुम लाइव

20
00:01:35,800 --> 00:01:40,200
वो मेरी बात को समझ नहीं पा रहा है ऐसा हुआ है कि भगवता ंद ने जब पहले

21
00:01:40,200 --> 00:01:44,520
पहले पोस्ट के द्वारा यह पूछा कि हमारे मतलब यह

22
00:01:44,520 --> 00:01:48,520
इच्छा जाहिर की कि हमारे साथ लाइव कर लो जब य

23
00:01:48,520 --> 00:01:52,640
इच्छा जाहिर की तो उस पोस्ट के उत्तर में हमने यह बताई अपनी सिचुएशन

24
00:01:52,640 --> 00:01:56,760
बताई उसमें अलग-अलग चीजें थी कि जैसे कि हमने हर लाइन में अपना निर्णय

25
00:01:56,760 --> 00:02:00,800
नहीं बताया कि हम नहीं आएंगे हमने बताया हमारी स्थिति क्या क्या जैसे कि

26
00:02:00,800 --> 00:02:04,800
गुरु विरोध है आपका तो हमें आपसे एक निश्चित दूरी बना के रखना है

27
00:02:04,800 --> 00:02:08,920
गुरु के गुरु के सम्मान में जो है तंज कसते हैं यह है वो है

28
00:02:08,920 --> 00:02:13,880
फिर हमने बताया दूसरी बात की हमारी और आपकी यदि

29
00:02:13,880 --> 00:02:17,960
राम राम फिर हमने दूसरी चीज बताई कि हमारी और आपकी यदि चीजें

30
00:02:17,960 --> 00:02:22,240
देखेंगे तो अधर्म हों को थोड़ा सा स्पेस मिलेगा फिर हमने बताया

31
00:02:22,240 --> 00:02:26,320
फिर भी आपने जो अगर इन दो चीजों को हम लोग नजर अंदाज कर भी

32
00:02:26,320 --> 00:02:30,560
दे हमारा भाव यह था फिर भी आपने जो विषय चुना वो विषय

33
00:02:30,560 --> 00:02:31,640
हम ऐसा नहीं समझते

34
00:02:31,640 --> 00:02:36,960
कि उसके बारे में सार्वजनिक मंच पर बात होनी चाहिए उसके लिए व्यक्तिगत

35
00:02:36,960 --> 00:02:41,040
स्वार्थ पूर्ण चर्चा ही उचित यह हमने बता अब इसके बाद

36
00:02:41,040 --> 00:02:45,480
जब तक हमने बताया बताया तब तक इनका एक वीडियो और आ गया

37
00:02:45,480 --> 00:02:49,760
जिसमें कि इन्होंने विरोधाभास प्रस्तुत किया ठीक है

38
00:02:49,760 --> 00:02:54,080
फिर जब हमने शाम को लाइव की उस उत्तर को दे देने के बाद और इनका वीडियो

39
00:02:54,080 --> 00:02:58,400
आ जाने के बाद एक और तो हमने शाम को यह कहा कि भाई

40
00:02:58,400 --> 00:03:02,480
पहले तो हम आपसे य कह रहे थे कि व्यक्तिगत चर्चा हो सकती मगर आप

41
00:03:02,480 --> 00:03:08,480
जिस तरीके से कटाक्ष करते जा रहे हो आधी अधूरी सामग्री को

42
00:03:18,840 --> 00:03:22,920
youtube1 मिनट देख लो सर्वशक्तिमान पर ही लाइव

43
00:03:22,920 --> 00:03:27,120
हूं ना तो यहां पर ये भाई साहब

44
00:03:27,120 --> 00:03:31,120
मेरी बात को समझ ही नहीं पा रहे अपने दिमाग के थोड़े घोड़े जो है यूं ही दौड़ा

45
00:03:31,120 --> 00:03:37,120
जा रहे हैं र

46
00:03:37,320 --> 00:03:41,400
चलो लिए लाइव के लिए मना किया था व्यक्तिगत

47
00:03:41,400 --> 00:03:45,840
चर्चा के लिए मना नहीं किया था व्यक्तिगत चर्चा के लिए तब मना किया जब तुमने

48
00:03:45,840 --> 00:03:49,840
वीडियो भी डाल दिया एक और चर्चा के लिए तुमने

49
00:03:49,840 --> 00:03:54,000
कम्युनिटी पोस्ट डाला और उसके थोड़ी मतलब उसके अगले दिन तक तुमने

50
00:03:54,000 --> 00:03:58,000
दिन में एक वीडियो भी डाल दिया तो हम जो तुमने कम्युनिटी पोस्ट

51
00:03:58,000 --> 00:04:02,440
डाला था उसका जवाब दे रहे थे उसके बाद तुमने तुम्हारा वीडियो देख

52
00:04:02,440 --> 00:04:07,160
देखा इसमें तुमने फिर से कुछ निराधार कॉल रिकॉर्डिंग लगाई थी

53
00:04:07,160 --> 00:04:11,560
तो हमने अपने शाम के लाइव में कहा कि

54
00:04:11,560 --> 00:04:15,640
जो तुमने एक आरोप लगाया था कि इसका भगवता अंद का आरोप यह था

55
00:04:15,640 --> 00:04:20,040
कि जब मैं पहले ही मना कर चुका हूं चर्चा करने से

56
00:04:20,040 --> 00:04:24,160
तो फिर ये शाम को आके लाइव में ये क्यों बोल रहा है कि अब हम लाइव नहीं

57
00:04:24,160 --> 00:04:28,160
करेंगे तुमने क्योंकि वीडियो डाल दिया है तो

58
00:04:28,160 --> 00:04:32,440
उसमें जवाब ये पहले हमने यह जो लाइव स्ट्रीम

59
00:04:32,440 --> 00:04:33,920
होती है उसके लिए बना

60
00:04:33,920 --> 00:04:37,960
किया है और यहां उसमें हमने य जगह छोड़ी थी व्यक्तिगत चर्चा की शाम को हमने

61
00:04:37,960 --> 00:04:42,080
व्यक्तिगत चर्चा के लिए भी मना किया कि अब हम व्यक्तिगत चर्चा भी आपसे नहीं करना

62
00:04:42,080 --> 00:04:46,480
चाहते क्योंकि पहले हमको लग रहा था कि आपका उद्देश्य कोई शोधन

63
00:04:46,480 --> 00:04:50,520
शोधन है मगर जिस तरह से आप अपना वीडियो डाल रहे हो निराधार सामग्री को

64
00:04:50,520 --> 00:04:55,440
लेकर के उससे पता लगता है कि आपका उद्देश्य शोधन नहीं लड़ाई है

65
00:04:55,440 --> 00:05:01,440
और मंचन है आपका उद्देश्य चलिए

66
00:05:02,920 --> 00:05:07,680
च में मसाला नहीं मुझे दोला

67
00:05:07,680 --> 00:05:12,480
मलागा तो इस क्या तुम ला के लिए मना कर रहे

68
00:05:12,480 --> 00:05:18,480
मना नहीं किया अरे तुम गोच हो यार

69
00:05:31,000 --> 00:05:35,000
ला खुद मना कर चुके हो जब तुम कहा साला मि जाए और उसके

70
00:05:35,000 --> 00:05:40,080
बाद व्यक्तिगत चता काका खुद कमटी पोस्ट नहीं

71
00:05:40,080 --> 00:05:44,160
व्यक्तिगत चर्चा के लिए हमने शाम को लाइव में कहा है और

72
00:05:44,160 --> 00:05:48,160
जिसका तुम यहां पर खंडन कर रहे हो कि यह तो भाई पहले ही चर्चा के लिए

73
00:05:48,160 --> 00:05:52,160
मना कर चुका है फिर यहां पर क्यों चर्चा के लिए मना कर रहा है जबक वहां पर अंतर है

74
00:05:52,160 --> 00:05:56,240
पहले मैंने लाइव के लिए मना किया व्यक्तिगत चर्चा को समर्थन

75
00:05:56,240 --> 00:06:00,520
दिया शाम को लाइव स्ट्रीम में मैंने व्यक्तिगत

76
00:06:00,520 --> 00:06:06,520
चर्चा

77
00:06:16,560 --> 00:06:20,880
को फिर मैंने शाम को जो है यह बताया कि अ व्यक्तिगत

78
00:06:20,880 --> 00:06:25,120
चर्चा का स्थान भी बंद हो गया तो तुमने य आरोप लगाया था हमारे ऊपर कि भाई

79
00:06:25,120 --> 00:06:29,200
जो है ये जो है पहले ही मना कर चुके कम्युनिटी पोस्ट में फिर भी कह रहे हैं कि

80
00:06:29,200 --> 00:06:33,760
तुमने वीडियो डाल दिया इसलिए व्यक्तिगत चर्चा नहीं करेंगे जबकि

81
00:06:33,760 --> 00:06:37,760
व्यक्तिगत चर्चा के लिए हमने बाद में मना किया है वही

82
00:06:37,760 --> 00:06:42,880
बात क रहा तो क ऐसा क दिया वसा क पले क्या लिखा

83
00:06:42,880 --> 00:06:47,200
निना करेंगे तो नहीं लेकिन व च अवकाश नहीं मिला बचा

84
00:06:47,200 --> 00:06:51,400
य भी बा अगली कमटी पोस्ट ख इतना तो आप पढ़ चुके तो इस क्या बो

85
00:06:51,400 --> 00:06:56,320
अगली कम्युनिटी पोस्ट में नहीं कही थी लाइव स्ट्रीम में कही थी

86
00:06:56,320 --> 00:07:02,320
इस

87
00:07:09,240 --> 00:07:13,240
शिवांश ने स्वयं अपनी गलती स्वीकार करते हु कमटी पोस्ट ाली थी य बकवास कर रहा

88
00:07:13,240 --> 00:07:17,360
है व गलत उसने हमसे कोई और नामले किया

89
00:07:17,360 --> 00:07:23,360
होगा उसने को

90
00:07:28,520 --> 00:07:32,640
गा अब शिवांश ने स्वयं अपनी गलती स्वीकार करते हुए कम्युनिटी पोस्ट डाली

91
00:07:32,640 --> 00:07:36,880
थी यहां जो बकवास कर रहा है वो गलत शिवांश ने कम्युनिटी पोस्ट में क्या डाली थी

92
00:07:36,880 --> 00:07:42,200
आप पढ़ चुके होंगे नहीं पढ़

93
00:07:42,200 --> 00:07:46,360
था कि इससे एक त्रुटि हो गई है और त्रुटी के आधार

94
00:07:46,360 --> 00:07:50,600
पर इसने जो कोई दुगला व्यक्ति होगा व दोगला व्यक्ति ये सीधे सधे गौरी नामक है

95
00:07:50,600 --> 00:07:54,800
और त्रुटि के आधार पर इसने जो कोई दुगला व्यक्ति होगा व दोगला व्यक्ति य सीधे-सीधे गौरी

96
00:07:54,800 --> 00:07:59,000
नामक एक स्त्री बता रहा है गौरी गोस्वामी या क्या नाम है तो उसने

97
00:07:59,000 --> 00:08:03,000
इसको मैसे भेजा था वस्तुत हम कई सारे मैसेज आते रहते हैं मैं नबर

98
00:08:03,000 --> 00:08:07,720
सेव भी नहीं करता मुझे पता भी नहीं भेजने वा क्या जो पूछा जाता है बता देता तो

99
00:08:07,720 --> 00:08:11,760
इसने जो गौरी ने मैंने क्यासे उसने भेजा कि ला

100
00:08:11,760 --> 00:08:15,800
करेंगे कि नहीं करेंगे क्या होगा तो मैंने कह दिया कि आर सामाजिक और ये मैसेज मैंने चार

101
00:08:15,800 --> 00:08:19,920
पांच लोगों को और भेजा सेम टू सेम वा दे

102
00:08:19,920 --> 00:08:24,120
समर्थन किया है और क गुरु निंदा का मुख तोड़ आ समा

103
00:08:24,120 --> 00:08:28,120
और शास्त्र के बिना गु क्या उपदेश करेंगे शास्त्र बिना संबोध दिया ये आपके

104
00:08:28,120 --> 00:08:31,560
लिए भगतान जीने

105
00:08:31,560 --> 00:08:37,480
का उतर दे चुका इस पूरे प्रसंग का उत्तर दे

106
00:08:37,480 --> 00:08:43,400
चुका इस पूरे प्रसंग का उत्तर

107
00:08:43,400 --> 00:08:49,400
में होने के बाद दस

108
00:08:53,040 --> 00:08:58,440
ने बा मला मि

109
00:08:58,440 --> 00:09:02,560
मैंने नीचे इसने सेपरेट मैसेज में लिखा है ये उन्हे भेज दो

110
00:09:02,560 --> 00:09:06,720
मतलब जिसने मुझे व किसको भेज दो गौरी

111
00:09:06,720 --> 00:09:11,080
ने लिखा कि आखि भेजा भगतान जी ने ये जो गौरी

112
00:09:11,080 --> 00:09:15,480
ने भेजा कि आपके लिखा है गौरी ने भेजा कि आपके लिए लिखा है भगवता

113
00:09:15,480 --> 00:09:20,000
अंद जी ने तो यह वाली लाइन जो थी ना कि भगवता अंद जी ने

114
00:09:20,000 --> 00:09:24,720
यह नाम मैंने नहीं पढ़ा ये मैं समझ गया कि किसी थर्ड पर्सन से आ रहा है

115
00:09:24,720 --> 00:09:28,880
मगर ये तुमने ही भेजा है ये मैं नहीं समझा क्योंकि बहुत बहुत मैसेजेस

116
00:09:28,880 --> 00:09:33,080
आते हैं और मुझसे कई लोग ट चैट के माध्यम

117
00:09:33,080 --> 00:09:37,080
से ही चर्चा करने का प्रयास करते हैं तो इसलिए मैं जब कोई इस

118
00:09:37,080 --> 00:09:41,200
तरह से कहता है तो उसको जल्दी जवाब दे मतलब दे देता

119
00:09:41,200 --> 00:09:45,840
हूं जवाब व चैट के माध्यम से बहुत लोग परेशान करते

120
00:09:45,840 --> 00:09:49,920
हैं उन्ह भेज दो यानी किसी को भी भेज दो मगर भगवता को नहीं यह

121
00:09:49,920 --> 00:09:52,520
नहीं जानता

122
00:09:52,520 --> 00:09:56,560
था करना चाहते भाई तो अब यहां पर जब यह बोला जा

123
00:09:56,560 --> 00:10:00,280
रहा है कि हम लाइव में जब ये बोल रहे

124
00:10:00,280 --> 00:10:04,520
मना हम हम लाइव में प्रत्यक्ष वार्ता ही तो करना चाहते थे ना

125
00:10:04,520 --> 00:10:08,720
ये डिस्टर्ब प्रॉब्लम हो रही है कि ये गौरी

126
00:10:08,720 --> 00:10:12,720
जो है यह मैसेज में लिख रही है ना भगवता अंद को यह भगवता ंद ने आपके लिए भेजा

127
00:10:12,720 --> 00:10:16,840
है ये एक अलग मैसेज कर रही है अगर गौरी को एक प्रॉपर एक संदेश भेजना

128
00:10:16,840 --> 00:10:21,120
है तो ऊपर कुछ भी अभिवादन लिख के या इनका नाम लिख के

129
00:10:21,120 --> 00:10:25,720
इनकी ओर से आपके लिए या लास्ट में उसी मैसेज के लास्ट में लिख दे यह भगतान

130
00:10:25,720 --> 00:10:29,720
की ओर से आपके लिए भेजा गया मगर यह क्या करर दो तीन मैसेज अलग

131
00:10:29,720 --> 00:10:33,720
अलग टुकड़ों में भेज रही फिर एक पतला सा छोटा सा पतला सा मैसेज दिखाई दे

132
00:10:33,720 --> 00:10:38,280
रहा है जो मेरी जिस पर नजर नहीं गई ठीक है

133
00:10:38,280 --> 00:10:42,320
जैसे किसी का अगर प पत्र वाहक हम बनते हैं तो

134
00:10:42,320 --> 00:10:46,640
उसके हर हर लाइन के अलग अलग शब्द भेजते हैं क्या क्या करते हैं

135
00:10:46,640 --> 00:10:50,880
तो अगर भगवता अंद की ओर से यह संदेश आया था तो जिस जो बात

136
00:10:50,880 --> 00:10:54,880
भगवता ंद ने भेजी थी उसी में नीचे भगवता ंद के बारे में विवरण

137
00:10:54,880 --> 00:10:59,400
लिख देते तो मैं समझता अब पहले भगतान का वो पढ फिर उसने एक मैसेज पढ़

138
00:10:59,400 --> 00:11:03,400
या फिर उसने तीसरी बार ये कहा ये भगवता नंद ने आपके लिए भेजा है उसके बाद भी और भी कुछ

139
00:11:03,400 --> 00:11:08,000
भेज रही है तो इसलिए वो मिसअंडरस्टैंडिंग

140
00:11:08,000 --> 00:11:12,680
हुई फिर भी क्योंकि वहां त्रुटी मेरी थी कि मैं उसके मैसेज को देखे में नहीं ही

141
00:11:12,680 --> 00:11:16,280
मैंने क्या कहते

142
00:11:16,280 --> 00:11:20,360
हैं इसके बाद भी त्रुटि मेरी है यह देखते हुए मैंने उसको

143
00:11:20,360 --> 00:11:24,360
वहां पर स्वीकार भी किया और ये बात सत्य है कि मैं नहीं

144
00:11:24,360 --> 00:11:28,400
जानता था ये मैसेज जो है भगतान का है खैर तूल देना है तो दो कोई बात नहीं

145
00:11:28,400 --> 00:11:32,480
से बात नहीं करेंगे कते प्रत्यक्ष बात कर तो प्रत्यक्ष अब जब मैं यह कह रहा हूं

146
00:11:32,480 --> 00:11:37,720
ना कि जब इन्होंने भगवता ने यह मैसेज भेजा है

147
00:11:37,720 --> 00:11:41,720
कि क्या कहते हैं भगवता ने ये मैसेज

148
00:11:41,720 --> 00:11:45,840
भेजा कि भाई प्रत्यक्ष मारता के लिए तो कह रहे थे तो यहां पर मुझे ये लग रहा है कि तीसरा

149
00:11:45,840 --> 00:11:50,320
व्यक्ति कह रहा है कि तुमको प्रत्यक्ष वार्ता क्योंकि ऐसा भी करते हैं लोग कि तुमको

150
00:11:50,320 --> 00:11:55,040
ऋषि उवाच ने बुलाया तो प्रत्यक्ष वार्ता के लिए उसके पास क्यों नहीं गए वहां पर ऐसे करते

151
00:11:55,040 --> 00:11:59,320
चैट में मुझसे भिड़ने की कोशिश करेंगे फिर जब मैं कहूंगा लाइव आओ तो तुम उसके साथ

152
00:11:59,320 --> 00:12:03,600
ला क्यों नहीं ऐसे कहते तो यहां पर मैं वही समझ रहा हूं थर्ड पर्सन को कि अ भगतान

153
00:12:03,600 --> 00:12:07,600
के बारे में बोल रहा है कि भगवता ंद के बुलाए जाने पर तुम क्यों नहीं

154
00:12:07,600 --> 00:12:13,120
गए एकदम एक आसन पर बैठ कलांगे

155
00:12:13,120 --> 00:12:17,520
वि जो वक्ति लाइफ में बात करना चाहता है इसने उत्तर दिया उसने भेजा

156
00:12:17,520 --> 00:12:22,280
और क्या क रहा है जो ला में बात करना चाहता है उसने गुरु निदा किन

157
00:12:22,280 --> 00:12:26,360
मैंने भेज नहीं मैं उसको बता रहा हूं जिस मैं जिसके बिहाव

158
00:12:26,360 --> 00:12:30,520
से क्योंकि वो जो पहले समझ लो गौरी जब बात करती

159
00:12:30,520 --> 00:12:34,800
है तो गौरी या तो मतलब

160
00:12:34,800 --> 00:12:38,960
गौरी ऐसे बात करती जिसमें कि स्कन वगैरह वालों का संदेश

161
00:12:38,960 --> 00:12:43,080
प्रेषित नहीं करती गौरी तो गौरी किसी ऐसे व्यक्ति का संदेश

162
00:12:43,080 --> 00:12:47,240
प्रेषित कर रही है जो भगवता अंद का ही फॉलोअर है यह मुझे आभास है

163
00:12:47,240 --> 00:12:51,280
तब मैं उस जब वो व्यक्ति मुझे जब मैं ऐसा समझ रहा हूं कि वोह व्यक्ति यह कह रहा

164
00:12:51,280 --> 00:12:55,280
है कि तुम अगर मुझसे लाइव चर्चा करना चाहते हो तो तुमने जो लाइव चर्चा

165
00:12:55,280 --> 00:12:59,400
क्यों नहीं की थी भगवता आनंद के साथ तो मैं उसको उत्तर दे रहा हूं जो

166
00:12:59,400 --> 00:13:03,760
लाइ चर्चा करना चाहता है व गुरु निंदक है उसके साथ लिए नहीं जा सकते ऐसा है वैसा है

167
00:13:03,760 --> 00:13:07,800
और फिर उसको मैं कह रहा हूं यदि तुम आ नहीं सकते फिर मैं उसको कह

168
00:13:07,800 --> 00:13:11,880
रहा हूं कि यदि तुम आ नहीं सकते तो फिर तुम संदेश क्यों दे रहे हो अगर तुम बात नहीं

169
00:13:11,880 --> 00:13:16,640
कर सकते सामने आकर के तो बात कर क्यों रहे हो फिर मैं यह कह रहा

170
00:13:16,640 --> 00:13:21,120
हूं आप गरी को आप

171
00:13:21,120 --> 00:13:25,120
गौरी को नहीं कह रहा हूं थर्ड पर्सन को कह रहा हूं पहला पैराग्राफ उस थर्ड

172
00:13:25,120 --> 00:13:28,160
पर्सन को बता रहा हूं जब मैं यह समझ रहा हूं

173
00:13:28,160 --> 00:13:32,600
कि वो व्यक्ति य कह रहा है कि तुम भगतान के बुलाए जाने पर क्यों नहीं गए

174
00:13:32,600 --> 00:13:36,800
तो मैं कह रहा हूं कि भगतान के बुलाए जाने पर क्यों नहीं गया क्योंकि

175
00:13:36,800 --> 00:13:40,800
व गुरु निंदक है फिर मैं कह रहा हूं कि आप भी

176
00:13:40,800 --> 00:13:46,800
यदि गुरु निंदक होते तो आपसे के साथ भी नहीं कर

177
00:13:50,320 --> 00:13:54,360
सकता समझ लो थोड़ा समलो

178
00:13:54,360 --> 00:14:00,360
करने करय एक्सपोज नहीं

179
00:14:07,520 --> 00:14:10,160
ु

180
00:14:10,160 --> 00:14:15,240
साय ु कर कितना ठ

181
00:14:15,240 --> 00:14:19,360
क्या अरे भाई पहली बात तो य कि कम्युनिटी चैट जो है बाद में

182
00:14:19,360 --> 00:14:23,400
डाली है यह बोलने की जो तुम देख रहे हो

183
00:14:23,400 --> 00:14:29,400
समय सताना

184
00:14:30,800 --> 00:14:33,440
ने

185
00:14:33,440 --> 00:14:39,440
ताने नहीं पता किने भे तो कैसे

186
00:14:59,360 --> 00:15:05,360
बचारी आचार्य

187
00:15:14,160 --> 00:15:18,280
आचार्य आचार आज त अब लो बात हो रही

188
00:15:18,280 --> 00:15:22,280
है मुक्तेश्वर जी को भाट क्यों कहा या मुक्तेश्वर जी को आचार्य

189
00:15:22,280 --> 00:15:26,360
क्यों नहीं माना शंकराचार्य क्यों नहीं माना तो इस पर मैं कह रहा हूं आचार्य स्तर का मामला

190
00:15:26,360 --> 00:15:30,560
भाई हम उनकी अमानना नहीं करते ना हमें सिखाया गया उनकी समीक्षा करना तो

191
00:15:30,560 --> 00:15:35,040
ये व्यक्ति क्या भिड़ा रहा है ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी आचार्य है

192
00:15:35,040 --> 00:15:39,040
अब यह क्या है ये विष अंतर नहीं है तो क्या है जवाब

193
00:15:39,040 --> 00:15:43,280
नहीं है तो कुछ भी बोलो आज तक भाट भाट भाट करते रहते हैं

194
00:15:43,280 --> 00:15:47,280
कहां भाट करते रहते क करते रहते ब बार

195
00:15:47,280 --> 00:15:51,320
चल आज तक कौन सी डेट है भाई इसका वीडियो

196
00:15:51,320 --> 00:15:55,400
बात बोलो जो खरी हो चल दो तीन दिन आज

197
00:15:55,400 --> 00:15:59,400
तू वीडियो बना रहा है ये वीडियो देखना कौन सी तारीख को आया है दो तीन दिन

198
00:15:59,400 --> 00:16:03,640
पहले आया होगा मैं कह रहा हूं एक हफ्ते पहले तक तू बता पुरी के शंकरा पुरी

199
00:16:03,640 --> 00:16:08,640
मट के किस अधिकृत व्यक्ति ने भाट मांट किया है चल बता

200
00:16:08,640 --> 00:16:12,760
बता कौन सा वक्तव्य पूरी पूरी मटके एक हफ्ते पहले

201
00:16:12,760 --> 00:16:17,000
तक के वीडियोस में बता दे कौन से उसमें भाट किया गया है

202
00:16:17,000 --> 00:16:21,200
हां तेरे जैसे कुछ तुम्हारे जैसे इसके जैसे कुछ दोगले

203
00:16:21,200 --> 00:16:25,240
लोग होंगे वो ऐसा कर रहे होंगे मगर कौन से अधिकृत व्यक्ति ने किया है

204
00:16:25,240 --> 00:16:30,040
बांट बाट एक हफ्ते पहले से बताओ उनके

205
00:16:30,040 --> 00:16:34,120
तुम्हारा पूरा का पूरा गैंग है अरे भैया वो गैंग वही गैंग है जो

206
00:16:34,120 --> 00:16:38,280
तुम्हारा वही गैंग है जो डगले पन के साथ तुम्हारे पी तुम्हारे साथ

207
00:16:38,280 --> 00:16:42,280
जो है पुरी मठ का खंडन करने में लगा है वही गैंग है

208
00:16:42,280 --> 00:16:46,320
वही गैंग है जो तुमको जो है अपने गुरु गुरु का द्रोह करते हुए सब

209
00:16:46,320 --> 00:16:50,520
बातें बोलता है तुम्हारा समर्थन करता है वही गंग है कुछ छोटे

210
00:16:50,520 --> 00:16:55,960
छो छद्म सा उनकी संख्या है ग भाई क्या रना देख

211
00:16:55,960 --> 00:17:01,960
लेंगे क्या है पर लेख लिखे हैं इस विषय में

212
00:17:10,200 --> 00:17:14,520
स शंकराचार्य जी के का मैसेज पू परित

213
00:17:14,520 --> 00:17:18,680
भीराज के और कथा वाचन करते हैं उनका मैसेज प्राप्त

214
00:17:18,680 --> 00:17:22,680
हुआ था और उस मैसेज में उन्होने कुछ बातें कही है जो मैं आपको पढ़ सुना

215
00:17:22,680 --> 00:17:26,920
रहा हं मैं आपको उका सना

216
00:17:26,920 --> 00:17:32,920
पड़ेगा क्या सीख के इस तरह की

217
00:17:34,040 --> 00:17:38,600
डॉक और क्या आप न्यू एज एआई और साइकोलॉजी

218
00:17:38,600 --> 00:17:42,880
की मदद से ऐसी इंगेजिंग वीडियोस बनाना चाहते हो जिसकी मदद

219
00:17:42,880 --> 00:17:47,000
से आप हमारी तरह मिय जनरेट कर पाओ

220
00:17:47,000 --> 00:17:51,200
अगर हा तो मैं आपके लिए नहीं आ रहे हमने बोल तो दिया लाइव

221
00:17:51,200 --> 00:17:55,320
आ नहीं आएंगे आपको बताऊंगा मै मीडिया

222
00:17:55,320 --> 00:18:01,040
की डॉक्यूमेंट्री कैसे बनानी है ए ल् को कसे

223
00:18:01,040 --> 00:18:05,840
करना कैसे करना हैई टू को

224
00:18:05,840 --> 00:18:11,840
कैसे

225
00:18:14,800 --> 00:18:20,800
बता अपनी सामग्री जो भी दिखाते रहो उसर बात

226
00:18:27,760 --> 00:18:31,880
होगी शंकराचार्य क्या शासन कर दे क्या शंकराचार्य के

227
00:18:31,880 --> 00:18:35,880
किस वजन को हमने कहा नहीं मान निग्रह करने आए तो किस ब पर

228
00:18:35,880 --> 00:18:40,120
गतम ब वाले प्रक वहा शास्त्र

229
00:18:40,120 --> 00:18:43,880
प्रमाण है हमारे पास

230
00:18:43,880 --> 00:18:48,840
नहीं उस प्रकरण पर के वो वहां पर सिंहासन पर क्यों बैठे

231
00:18:48,840 --> 00:18:53,000
उस प्रकरण पर कि उन्होंने जो साढ़े तीन वर्ष की जो वो

232
00:18:53,000 --> 00:18:57,120
है वो क्यों कही इन सबका शास्त्रों से कोई

233
00:18:57,120 --> 00:19:01,280
मतलब नहीं था मगर तुमने यहां पर भी उनका विरोध प्रकट किया ना

234
00:19:01,280 --> 00:19:05,360
उस प्रकरण पर कि उन्होंने जो है उनके ही गुरु ने उनको क्या बताया है चार चार

235
00:19:05,360 --> 00:19:09,520
पीठे की पांच पीठे है ना उस

236
00:19:09,520 --> 00:19:14,120
प्रकरण पर तुमने उनका विरोध किया ना उसम काहे का शास्त्र का पक्ष था

237
00:19:14,120 --> 00:19:18,560
उनके गुरु ने क्या कहा है क्या नहीं कहा है यह तुम कहां से बताओगे भाई

238
00:19:18,560 --> 00:19:22,880
शास्त्र में तो चलो ठीक है शास्त्र और भी जगह से प्राप्त है तुम्हें

239
00:19:22,880 --> 00:19:27,080
वो भी एक बात की बात है कि तुम्हारी परंपरा क्या है अगर परंपरा नहीं है तो तुम तुम क्योंकि तुम्हारी

240
00:19:27,080 --> 00:19:29,800
कोई परंपरा नहीं है तो तुम्हें य यदि तुम किसी एक

241
00:19:29,800 --> 00:19:33,800
गुरु पर परंपरा प्राप्त आचार्य पर तुम्हारा विश्वास नहीं है तो फिर

242
00:19:33,800 --> 00:19:37,960
तुम्हारे पास शास्त्रों का कोई प्रमाण नहीं है वो बात अलग है

243
00:19:37,960 --> 00:19:42,600
व परंपरा तो तुम्हारी अभी वो है प्रश्न चिन्ह है परंपरा पर

244
00:19:42,600 --> 00:19:46,760
मगर तुमने उससे इतर जो उनके प्रति अमानना की है शासन करने की कोशिश

245
00:19:46,760 --> 00:19:50,800
की है शास्त्र से बाहर शास्त्र का पक्ष रखने से बाहर वो भी

246
00:19:50,800 --> 00:19:55,080
है वो भी की है ठीक है उसमें कोई कमी नहीं है

247
00:19:55,080 --> 00:19:59,120
चलो चलते हैं श

248
00:19:59,120 --> 00:20:03,640
जी हो अब इसमें खब प्रलाप किया इसने उसम क्या बोले

249
00:20:03,640 --> 00:20:09,640
उत्तर दे दिया

250
00:20:09,840 --> 00:20:14,040
हमने शंकराचार्य माते जिसका स्पष्ट

251
00:20:14,040 --> 00:20:18,040
विरोध शास्त्र सेन अच्छा साढ़े

252
00:20:18,040 --> 00:20:22,280
तीन वर्ष में भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा इसका स्पष्ट

253
00:20:22,280 --> 00:20:26,280
विरोध यह कहां से शास्त्र

254
00:20:26,280 --> 00:20:30,360
से सिंहासन का उन्होंने स्क्ष से त्याग किया अगर वो उसमें बैठ

255
00:20:30,360 --> 00:20:34,480
गए जाकर के अन्यों का सम्मान रखने के लिए तो कहां से उन्होंने शास्त्र का वो

256
00:20:34,480 --> 00:20:38,640
किया विरोध किया और शास्त्र भी कौन से

257
00:20:38,640 --> 00:20:42,720
हैं कौन से नहीं है तुम्हें बता कौन रहा है वह तो बताओ क्योंकि

258
00:20:42,720 --> 00:20:47,080
तुम्हारे हिसाब से तो कोई वो है ही नहीं तुम्हारे

259
00:20:47,080 --> 00:20:51,320
हिसाब से तो कोई प्रमाण है ही नहीं तुम्हारे लिए

260
00:20:51,320 --> 00:20:55,320
वो शास्त्र का भी वो स्त्रोत देखना पड़ेगा ना फिर तुम्हारा कौन सा रह गया शंकराचार्य

261
00:20:55,320 --> 00:20:59,560
है नहीं रामानुजाचार्य है नहीं मार काचार्य है नहीं तुम्हारे

262
00:20:59,560 --> 00:21:04,160
कौन से हैं वो पता नहीं है वो भी देखना पड़ेगा

263
00:21:04,160 --> 00:21:07,720
अच्छा और क्या

264
00:21:07,720 --> 00:21:13,720
है और क्या है

265
00:21:13,880 --> 00:21:18,200
भाई और भी कुछ चीजें थी शास्त्र जैसे कि पुरी के शंकराचार्य

266
00:21:18,200 --> 00:21:22,520
जो है चार करोड़ चारों शंकराचार्य चर करोड़ रुपए लेते ये सब क्या

267
00:21:22,520 --> 00:21:27,240
है और भी बहुत बकवास की है वो फिर ले आएंगे किसी

268
00:21:27,240 --> 00:21:29,560
होता है

269
00:21:29,560 --> 00:21:34,160
हो गया शस के शासक स

270
00:21:34,160 --> 00:21:38,200
हो करहा है

271
00:21:38,200 --> 00:21:42,640
य पर सबरी जी जो है व क्यारी

272
00:21:42,640 --> 00:21:47,080
सबरी व सबरी और गौतम बुद्ध वाला अपना पीडीएफ सार्वजनिक करो

273
00:21:47,080 --> 00:21:50,520
फिर तुम्हारा

274
00:21:50,520 --> 00:21:55,520
देखेंगे शंकराचार्य जी के

275
00:21:55,520 --> 00:21:59,800
काल शासको के शासक नहीं मान रहे

276
00:21:59,800 --> 00:22:04,080
शस हम शासकों का शासक नहीं मान रहे हो

277
00:22:04,080 --> 00:22:08,280
ये तुमने आगे ही बात खींची है चलो खैर अभी मैं सुनाता हूं तुम्हें

278
00:22:08,280 --> 00:22:13,080
तोहा तुमने एक जगह प ये कहा है ना कि क्या कहते हैं ये

279
00:22:13,080 --> 00:22:17,080
केवल पुरी वालों का ही क्यों माने तुम ये बताओ और तुमने कहा

280
00:22:17,080 --> 00:22:21,200
यह बातें इसके लिए जो है रुचि नहीं है इसकी इन बातों में पहली बात तो

281
00:22:21,200 --> 00:22:25,200
यह है कि हमारी जो चर्चा है उसका मूल

282
00:22:25,200 --> 00:22:29,240
आधार मूल विषय क्या है मूल विषय है

283
00:22:29,240 --> 00:22:33,400
कि पूरी मट पर तुमने जो आरोप लगाए और विजय

284
00:22:33,400 --> 00:22:38,080
श्री पर तुमने जो आरोप लगाए यह मूल विषय ठीक है

285
00:22:38,080 --> 00:22:42,240
इसके बाद तुमने जो शास्त्रोक्त पक्ष रखा है वह क्या रखा है वह आज तक मुझे

286
00:22:42,240 --> 00:22:46,840
पता ही नहीं है व सार्वजनिक करोगे तब पता चलेगा सुलभ नहीं है वेबसाइट

287
00:22:46,840 --> 00:22:50,920
पर बहुत बुद्ध के बारे में पढ़ा था तो वो भी मुझे पता नहीं है वो कंप्लीट है कि नहीं मगर

288
00:22:50,920 --> 00:22:55,440
बात वहां पर यह आती है कि जब तुम फसते हो

289
00:22:55,440 --> 00:22:59,520
तो तुम साढ़े तीन वर्ष लाते हो तो तुम लाते हो कि तुम्हारे शंकराचार्य विरोध क्यों

290
00:22:59,520 --> 00:23:03,760
है एक तरफ तुम कहते हो पूरी मट का शोधन कर रहा हूं रक्षा कर रहा हूं तो जब तुम फसते

291
00:23:03,760 --> 00:23:05,520
हो तब तुम गुरु के

292
00:23:05,520 --> 00:23:09,640
विरोध में जाते हो अच्छा तुमने जब यहां पर यह कहा कि शंकराचार्य की हर

293
00:23:09,640 --> 00:23:13,920
उस बात को मैं मानूंगा जो शास्त्र का विरोध नहीं है तो तुमने ये चेक किया

294
00:23:13,920 --> 00:23:18,040
कि दोनों में से कौन से शंकराचार्य वो शास्त्र सम्मत है कौन से नहीं है

295
00:23:18,040 --> 00:23:22,400
और अगर चेक किया तो तुम्हारी विवेचना उसमें क्या निकली क्या निष्कर्ष निकला तुमने

296
00:23:22,400 --> 00:23:27,040
य नहीं किया तो तुम यहां पर अपना दोगलापन क्यों क्यों दिखा यहां पर

297
00:23:27,040 --> 00:23:31,080
यहां पर ये दो बातें क्यों कर रहे भाई जब तुम शास्त्र से

298
00:23:31,080 --> 00:23:35,120
तय करते हो कि कौन से शंकराचार्य सही बोल रहे हैं कौन से नहीं बोल रहे हैं तो यहां

299
00:23:35,120 --> 00:23:39,160
पर पता करो ना शास्त्र से कौन से शंकराचार्य सही बोल रहे हैं कौन से

300
00:23:39,160 --> 00:23:43,320
नहीं बोल रहे हैं अब यहां पर तुम्हें क्यों चाहिए दोनों शंकराचार्य एक सा

301
00:23:43,320 --> 00:23:47,560
बोले और दूसरी बात अब तुमने कहा कि मुझे जो है इसमें धर्म ब्रह्म

302
00:23:47,560 --> 00:23:51,960
में वो इस सवाल से धर्म ब्रह्म पर असर नहीं पड़ता है हां

303
00:23:51,960 --> 00:23:56,520
क्योंकि व्यक्ति को चाहिए तीन चीजें सर्वशक्तिमान

304
00:23:56,520 --> 00:24:00,760
ईश्वर परम स्वतंत्र मक्ष शाश्वत धर्म यह शाश्वत धर्म जो है यह परंपरा प्राप्त

305
00:24:00,760 --> 00:24:04,920
आचार्यों से मिलता है और इन्हीं परंपरा प्राप्त आचार्यों

306
00:24:04,920 --> 00:24:08,960
के पास ऐसी युक्ति और प्रमाण है जिनके कारण ईश्वर की सिद्धि हो सकती

307
00:24:08,960 --> 00:24:13,000
है और परम स्वतंत्र मोक्ष के लिए वह प्रयास कर सकता है

308
00:24:13,000 --> 00:24:17,160
और उसके लिए व धर्म का आलंबन लेगा मगर

309
00:24:17,160 --> 00:24:20,560
अब इसमें आदि शंकराचार्य भगवान ाज

310
00:24:20,560 --> 00:24:24,760
वर्ष पूर्व आए थे या 1200 साल पहले आए थे 1400

311
00:24:24,760 --> 00:24:28,840
साल पहले आए थे ये एक विषय तो है गंभीर भी है मगर इससे व्यक्ति

312
00:24:28,840 --> 00:24:33,080
की जो सिद्धि है ईश्वर की सिद्धांत है

313
00:24:33,080 --> 00:24:37,880
जो मोक्ष के सिद्धांत है उस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है वस्तु नि एक जानकारी

314
00:24:37,880 --> 00:24:42,240
मगर तुम तुम्हारा कहना इसके लिए ये ऐसा व्यक्ति है निर्लज है नीच है

315
00:24:42,240 --> 00:24:47,520
इसको जो है वो नहीं पढ़ता अब मैं तुमसे पूछता हूं

316
00:24:47,520 --> 00:24:51,640
कि ईश्वर द्वैत है या अद्वैत है तात्विक विवेचन

317
00:24:51,640 --> 00:24:55,800
है द्वैत है या अद्वैत या विशिष्टा द्वैत अगर विशिष्टा द्वैत

318
00:24:55,800 --> 00:25:00,000
में भी अद्वैत है तो क्या विशिष्टा द्वैत की जो परंपरा है उन्होंने इसको माना

319
00:25:00,000 --> 00:25:04,520
है और नहीं माना है तो तुम जाकर के खंडन क्यों नहीं कर रहे हो

320
00:25:04,520 --> 00:25:08,520
भगवान रामानुजाचार्य का तुम अगर शंकराचार्य के सिद्धांत को

321
00:25:08,520 --> 00:25:12,600
मान रहे हो वैसे तो नहीं मान रहे हो मान रहे हो तो उस परंपरा के कहलाना पड़ेगा उस

322
00:25:12,600 --> 00:25:16,800
परंपरा के आचार्यों को प्रमाण मानना पड़ेगा तो तुम्हारी परंपरा अलग है तो

323
00:25:16,800 --> 00:25:21,480
तुम्हारा तात्विक सिद्धांत भी अलग है और अगर एक है

324
00:25:21,480 --> 00:25:25,560
तो फिर भी जो विशिष्टा द्वैत है क्या उसके आचार्य मान रहे हैं तुम्हारे

325
00:25:25,560 --> 00:25:29,640
चीज को अवत अद्वैत को जब अद्वैत

326
00:25:29,640 --> 00:25:33,760
को व नहीं मान रहे तो तुमने क्या खंडन किया अगर खंडन नहीं कर रहे हो

327
00:25:33,760 --> 00:25:35,800
उनके साथ में जाकर बैठ रहे हो

328
00:25:35,800 --> 00:25:39,840
तो क्या तुम्हारे लिए भगवान का अस्तित्व भगवान का तात्विक विवेचन यह सब

329
00:25:39,840 --> 00:25:44,320
रुचि पूर्ण नहीं है क्यों नहीं कर रहे हो इसे कहते दोगलापन

330
00:25:44,320 --> 00:25:48,840
तुम जानते हो तुम जानते हो कि ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा

331
00:25:48,840 --> 00:25:53,040
है फिर भी यहां पर तुम ऐसी चीज को निकाल

332
00:25:53,040 --> 00:25:57,080
के ला रहे हो जिससे कि नसता फैले तुम्हारा यही काम

333
00:25:57,080 --> 00:26:01,160
है तुम्हे आग लगवा है तो हमसे समीक्षा क्यों करवाना चाह रहे हो भाई हमारे

334
00:26:01,160 --> 00:26:05,240
गुरु ने कहा ईज वर्ष पूर्व हुआ तो हम तो वही कहेंगे हमसे ये समीक्षा क्यों

335
00:26:05,240 --> 00:26:09,880
करवाना चाह रहे हो कि वो फला जो दूसरे शंकराचार्य शंकरी पीट के उनकी बात

336
00:26:09,880 --> 00:26:14,040
कटेगी जिससे कि नसता फैले जिससे कि विरोधाभास फैले

337
00:26:14,040 --> 00:26:18,200
लड़ाई हो है ना इसलिए समीक्षा करवाना चाह रहे हो भले ही

338
00:26:18,200 --> 00:26:22,240
उससे कोई मामला उस पर फिट बैठ रहा हो कि नहीं बैठ रहा हो भले उससे धर्म ब्रम

339
00:26:22,240 --> 00:26:26,320
पर आंच आ रही हो कि नहीं आ रही हो अब बात ये है सोचने की

340
00:26:26,320 --> 00:26:30,360
कि तूने क्यों नहीं रामानुजाचार्य जी का खंडन कर दिया जो ज्ञान मार्ग यों

341
00:26:30,360 --> 00:26:35,480
को उन्होंने प्रचंद बत का क्यों नहीं कर दिया कर

342
00:26:35,480 --> 00:26:39,840
खंडन नहीं करेगा और क्यों जाकर के

343
00:26:39,840 --> 00:26:44,280
भाई वो लोग गलत है ना तो उनके साथ क्यों बैठ रहा है जाकर के

344
00:26:44,280 --> 00:26:48,480
श्री संप्रदाय के पास तो वही काम तो तू कर रहा है ना वहां पर समीक्षा

345
00:26:48,480 --> 00:26:50,800
से बच रहा है ना तू खुद

346
00:26:50,800 --> 00:26:54,920
अपने वीडियोस में कह रहा है कि सबम प्रणम है ये जो है संत है जितने भी

347
00:26:54,920 --> 00:26:59,280
हैं मैं केवल शास्त्र की बात कर रहा हूं जो शास्त्र के विरोध में जाएगा

348
00:26:59,280 --> 00:27:04,040
अगर तेरे हिसाब से अद्वैत है तो द्वैत वालों का खंडन कर

349
00:27:04,040 --> 00:27:08,240
जा अगर तू कहता है कि अद्वैत है अंतिम लक्ष्य तो

350
00:27:08,240 --> 00:27:12,560
द्वैत वालों का खंडन कर बोल वीडियो बनाना शुरू कर तात्विक

351
00:27:12,560 --> 00:27:15,520
उन

352
00:27:15,520 --> 00:27:19,720
पर मतलब जो जो सिद्धांत दूसरे पर लागू कर रहा है

353
00:27:19,720 --> 00:27:23,760
व्यक्ति वही सिद्धांत अपने पर लागू करने से बच रहा है यही तो

354
00:27:23,760 --> 00:27:29,040
है दोगलापन

355
00:27:29,040 --> 00:27:35,040
ऐसी कोई अता है

356
00:27:37,000 --> 00:27:40,160
क्या म

357
00:27:40,160 --> 00:27:46,160
में संप्रदाय शस्त्र की मर्यादा

358
00:27:49,200 --> 00:27:54,160
के निग्रह करोना जो य कह रहा है है ही नहीं द

359
00:27:54,160 --> 00:27:58,800
है को नकार रहा उसका निग क्यों नहीं कर रहे

360
00:27:58,800 --> 00:28:03,720
अद्वैत को जो नकार रहा उसका निग्रह क्यों नहीं कर रहे हो जो भगवान शिव

361
00:28:03,720 --> 00:28:07,880
के भगवान शिव के उसको नकार रहा है उसका

362
00:28:07,880 --> 00:28:12,000
निग्रह क्यों नहीं कर रहे हो भगवान शिव की परब्रह्म को जो नकार रहा है उसका निग्रह क्यों नहीं कर रहे

363
00:28:12,000 --> 00:28:16,120
हो अगर तुम पंच देवों में आस्था रखने वाले हो क्यों नहीं कर रहे उसका

364
00:28:16,120 --> 00:28:20,680
निग वहां क्यों बच रहे हो करो निग्रह करो लड़ाई

365
00:28:20,680 --> 00:28:25,040
नाम लेकर के रावण जा चार भगवता जो भगवान रामानुजाचार्य

366
00:28:25,040 --> 00:28:29,040
थे उनका खंडन करो और उनकी संप्रदाय वालो के साथ उठना

367
00:28:29,040 --> 00:28:33,040
बैठना बंद करो इतने दोगले हो भाई तुम बहुत

368
00:28:33,040 --> 00:28:37,160
दोगले हो हमसे समीक्षा करवाना चाह रहे

369
00:28:37,160 --> 00:28:41,680
हो अन्य मान्य शंकराचार्य की जिससे की लड़ाई हो

370
00:28:41,680 --> 00:28:44,080
और खुद वहीं पर समीक्षा से बचे बैठे हो कि

371
00:28:44,080 --> 00:28:48,320
नहीं नहीं सब परंपरा वाले सब एक है सबका सम्मान हमारा केवल शास्त्र

372
00:28:48,320 --> 00:28:52,360
के विरुद्ध जाने वाले का खंडन है और हमसे कह रहे हो रुचि नहीं है

373
00:28:52,360 --> 00:28:56,600
इसकी जो है इन मामलों में कोई पीट कितनी तुम्हारी रुचि

374
00:28:56,600 --> 00:29:00,080
है भगवान

375
00:29:00,080 --> 00:29:02,240
अंतिम

376
00:29:02,240 --> 00:29:06,240
लक्ष्य हस रहे हो और जनता को बेवकूफ बना

377
00:29:06,240 --> 00:29:12,240
रहे

378
00:29:15,680 --> 00:29:20,040
हो और पुस्तक के महीनों तक वीडियो बनाएंगे

379
00:29:20,040 --> 00:29:24,040
सा चचा स्वयं करेंगे सार्वजनिक

380
00:29:24,040 --> 00:29:28,800
चर्चा क्यों भाई अभी क्यों नहीं तु पता नहीं तुम्हारे पिताजी कौन है

381
00:29:28,800 --> 00:29:33,080
अभी क्यों नहीं सार्वजनिक चर्चा करो ना

382
00:29:33,080 --> 00:29:37,400
पिताजी को प्रणाम है माता जी को प्रणाम है मगर यहां पर हो रही है बात

383
00:29:37,400 --> 00:29:41,400
जो शिक्षा के विषय में जो पिता है गुरु तुम्हे पता नहीं क्या गुरु कौन है

384
00:29:41,400 --> 00:29:47,400
तुम्हारी वंशावली क्या है गुरु

385
00:29:47,440 --> 00:29:52,320
की अभी क्या दिक्कत है मतलब कि एक व्यक्ति होता है

386
00:29:52,320 --> 00:29:56,400
जिसको पता होता है कि मेरी गुरु परंपरा क्या है वो फिर जो

387
00:29:56,400 --> 00:30:01,120
है जाकर के उसमें खोजता है कि शास्त्रों में कहां कहा इसका संदर्भ है

388
00:30:01,120 --> 00:30:05,320
अभी तुम्हें पता तो होगा ना क्या है क्या नहीं है कि पहले शास्त्रों में खोजो

389
00:30:05,320 --> 00:30:10,000
फिर जो है उसके वो बताओगे कि ये है मतलब अभी तुम्हें पता ही नहीं है

390
00:30:10,000 --> 00:30:14,080
अभी पता होगा ना क्या है क्या नहीं है तभी तो परंपरा से हो बिना परंपरा

391
00:30:14,080 --> 00:30:20,080
के हो आज की डेट में हेलो हेलो

392
00:30:21,960 --> 00:30:26,600
क्या देखो कितना महत्त्वपूर्ण प्रश्न है इस पर इसने आगे सरकाया

393
00:30:26,600 --> 00:30:30,600
हम बन लिखेंगे पुस्तिका लिखेंगे इसी

394
00:30:30,600 --> 00:30:34,640
पर तो फसे ग इसी पर फसे ग

395
00:30:34,640 --> 00:30:37,800
निग्रह चार्य

396
00:30:37,800 --> 00:30:43,800
आना लाइव आना तब पूछूंगा

397
00:30:44,870 --> 00:30:50,870
[संगीत]

398
00:30:58,560 --> 00:31:02,640
हमने अपनी गुरु परंपरा सार्वजनिक कर रखी है हमने नि परंपरा के अंतत सार्वजनिक

399
00:31:02,640 --> 00:31:06,920
कर रखा है हमने हम धिरी मंडल को सा नहीं किया

400
00:31:06,920 --> 00:31:11,040
का लेकिन करेंगे छो ख में तो सा करते ही रहे जिस

401
00:31:11,040 --> 00:31:17,040
दिन मेरा महा साम्राज्य अष हुआ था उसके एक दो दिन के बाद सब कुछ सार्वजनिक कर दिया

402
00:31:17,360 --> 00:31:19,640
था

403
00:31:19,640 --> 00:31:23,720
करके वगत रूप से प्रधान प्रधान लोग को जैसे की स्वामी जी को

404
00:31:23,720 --> 00:31:27,720
जैसे की रावा स्वामी जी को जैसे की बमान स्वामी जी को सब हमने भे

405
00:31:27,720 --> 00:31:31,760
दिया आओ ना फिर अपनी परंपरा सिद्ध

406
00:31:31,760 --> 00:31:37,760
करो आ करके क्या परंपरा है

407
00:31:44,960 --> 00:31:49,440
तुमरी

408
00:31:49,440 --> 00:31:53,760
क्या क्या सबको पता है

409
00:31:53,760 --> 00:31:57,880
सामाजिक व कारण बग हैगा

410
00:31:57,880 --> 00:32:03,360
शंकराचार्य बनाने वा आरस का विरोध

411
00:32:03,360 --> 00:32:07,880
करने अर्थ लोलुपता

412
00:32:07,880 --> 00:32:12,000
आरएसएस वाले या आरएसएस से जुड़े हुए सामान्य

413
00:32:12,000 --> 00:32:16,080
लोग आरएसएस में क्या उत स्त्री से आते हैं हमारे तुम्हारे बीच

414
00:32:16,080 --> 00:32:22,040
के तो लोग है जो आरएसएस से जुड़े हुए हैं उनको छे दे क्या

415
00:32:22,040 --> 00:32:26,120
पूरा उनको हिंदू उनको जो है सनातन वैदिक का हिंदू धर्म जो

416
00:32:26,120 --> 00:32:31,080
है वास्तविक उससे ना जोड़े जोड़ेंगे तो तुम जैसे लोग रोकोगे

417
00:32:31,080 --> 00:32:36,080
और अर्थ लोलुपता के लिए उनका साथ लिया था

418
00:32:36,080 --> 00:32:41,360
कि मां को गाली देने वालों को रोकने के लिए साथ दिया था

419
00:32:41,360 --> 00:32:45,560
और अगर किसी के साथ किसी अंश में खड़े हो जाने से उसको पूरी तरीके से स्वीकार

420
00:32:45,560 --> 00:32:49,880
कर लेना ही माना जाएगा तो तुम अपनी बारी आने पर क्यों कह देते हो कि मैं जो है

421
00:32:49,880 --> 00:32:54,000
मैंने तो उनको इस अंश में ही स्वीकार किया था कि वो जो है विदेश विदेश

422
00:32:54,000 --> 00:32:58,240
गमन का मैंने कहीं वो नहीं किया अपनी बारी आएगी मीला मीठा

423
00:32:58,240 --> 00:33:04,240
मीठा गप गप कड़वा कड़वा थू वो काम है

424
00:33:10,640 --> 00:33:13,880
तुम्हारा सग

425
00:33:13,880 --> 00:33:18,160
करेंगे तो जहा धम स बात हो वही सहयोग करेंगे ना

426
00:33:18,160 --> 00:33:22,320
की बात नहीं होगी हां पर कोई की बात नहीं होगी जहा पर को कपट की बात नहीं होगी

427
00:33:22,320 --> 00:33:28,320
वही सहयोग करेंगे किसकी बात में सहयोग कर सयो मैं बताऊ आपको

428
00:33:36,440 --> 00:33:40,680
की बात नहीं होगी हमारे मंच पर

429
00:33:40,680 --> 00:33:44,880
उस मंच सेज का जोय सहयोग है

430
00:33:44,880 --> 00:33:49,480
व हमने ही मंच से वहा भवाया

431
00:33:49,480 --> 00:33:54,840
छग सा दिन जोड़

432
00:33:54,840 --> 00:33:58,040
दिन दरब

433
00:33:58,040 --> 00:34:02,120
मानते नहीं विदेशी स्त्रियों को भर इत्यादि रूप में बनाकर रखे हैं विदेशियों का खूब आना जाना है

434
00:34:02,120 --> 00:34:06,120
वश्रम इत्यादि को कुछ नहीं मानते ऊपर से उनकी आराधना पद्धति को हमको देखकर

435
00:34:06,120 --> 00:34:10,280
ज्ञात हुआ कि सनातन के मूल परंपरा से कम और बदनी बौद्ध से अधिक प्रभावित

436
00:34:10,280 --> 00:34:14,280
है ऐसा अनुभव हुआ था वहा पर तो हमने कहा और उस समय अपने घर में नहीं थे उनके शि लोग

437
00:34:14,280 --> 00:34:19,800
थे हमने वहाली में लाल किला के बगल में धर्मशाला में रुके

438
00:34:19,800 --> 00:34:24,040
कुछ चेहरा तो जब से संपर्क कम में नहीं जाते तुम पहले उस गांव

439
00:34:24,040 --> 00:34:28,320
में हमारी भागवत कथा कराओ तो हमारी भागवत कथा में हमको इतनी दक्षिणा चाहिए उस कथा के अंतर्गत

440
00:34:28,320 --> 00:34:32,360
शंकराचार्य जी कभी एक दो दिन के लिए आ जाएंगे ऐसा कहा इ लोगों का बजट पाछ लाख काथा

441
00:34:32,360 --> 00:34:36,480
नहीं तब इन लोगों ने फिर हम था व्यस्त और हमारा हमारी

442
00:34:36,480 --> 00:34:40,680
भागवत कथा करवाओ हमारा कार्यक्रम करवाओ ये मैंने ममन शास्त्र जी मु से प्रणाम क्या हुआ

443
00:34:40,680 --> 00:34:44,840
उस गांव के मुखिया ने जो भी मुख सरपच जो भी होता है जब मैं विदा लेकर

444
00:34:44,840 --> 00:34:49,120
उस गाव से जा रहा था अपनी पगड़ी उतार कर मेरे चरणों में रखी और कहा सरपच जो भी हो

445
00:34:49,120 --> 00:34:53,240
ने उस कथा में गालिया प्रयोग की थी कि नहीं गना मतना शब्द प्रयोग किया

446
00:34:53,240 --> 00:34:57,320
था कि नहीं उस कथा में छत्तीसगढ़ में बताना जरा उसके बाद

447
00:34:57,320 --> 00:35:01,760
कौन जो पकड़ी रखेगा करो गालियां उपयोग मां बहन की गालियां

448
00:35:01,760 --> 00:35:05,760
दो तब गंदी गंदी बातें बोलो अश्लील बातें बोलो

449
00:35:05,760 --> 00:35:09,960
अगना मूत ना बोलो डेली कथा में सामान्य

450
00:35:09,960 --> 00:35:14,160
शब्द है उसम गलत क्या है संस्कृत में भी तो उसका वो है य धातु है ये वो है

451
00:35:14,160 --> 00:35:18,200
बोलो बोलो आरती के टाइम पर करो पूजा के टाइम पर करो अच्छे शब्द

452
00:35:18,200 --> 00:35:22,400
है ना बहुत जब मैं विदा शबद के साथ मिल गए अब आप

453
00:35:22,400 --> 00:35:26,560
हमारे जगत ये उसकी शब्दावली थी और ये चा

454
00:35:26,560 --> 00:35:30,680
रे जैसा नहीं आरोप लगा यह शब्दावली उसकी इसलिए थी सम्मानजनक क्योंकि

455
00:35:30,680 --> 00:35:34,760
वो तुम्हारे वास्तविक चरित्र को चाल चलन को जानता नहीं

456
00:35:34,760 --> 00:35:39,240
होगा जान गया होता तो ऐसा ना करता

457
00:35:39,240 --> 00:35:43,680
जाकर इलाज करवाया मैंने डेट बताया टाइम बताया लोकेशन बताया सब स्पष्ट

458
00:35:43,680 --> 00:35:47,840
बात की आगे सुनते

459
00:35:47,840 --> 00:35:53,120
हैं सत्यनाथ जी के बारे में ऐसा वो कह रहे हैं

460
00:35:53,120 --> 00:35:57,280
प्रभावित कोई व्यक्ति कह रहा है कि वज्रयान उनसे प्रभावित है वो वज्रयान से नहीं पूछ

461
00:35:57,280 --> 00:36:02,080
गुरुजी हो सकता है सथ के बारे में हो सता

462
00:36:02,080 --> 00:36:08,080
है सनातन र्म के बहुत कुछ

463
00:36:20,800 --> 00:36:26,800
को क्या तुम्हारे पास उतर है भी नहीं क्या करो ने

464
00:36:27,800 --> 00:36:32,040
तो मैंने तो स्वयं लेख और वीडियो बनाकर य कहा है कि शंकराचार्य को वव संपन्न होने का तो शास्त्र

465
00:36:32,040 --> 00:36:36,280
अधिकार ना लेकिन मैं बता दे रहा हूं क्योंकि मैंने शास्त्र पढ़े और मैं शास्त्रों को तुमसे अधिक

466
00:36:36,280 --> 00:36:40,520
ही महत्व देता हूं कम से कम जो तुम क रहे हो ना तुम मेरे से अधिक धर्म

467
00:36:40,520 --> 00:36:44,600
का आचरण करते हो ठीक है करते हो करना भी चाहिए इसके लिए तुम साधुवाद के पात्र ऐसा है

468
00:36:44,600 --> 00:36:48,960
लेकिन मैं तुमको य पढ़कर बता देता हूं की शंकराचार्य

469
00:36:48,960 --> 00:36:53,920
जी वर्णित करते हैं ऐश्वर्य स्वयं शलोक

470
00:36:53,920 --> 00:36:59,920
है इस ने बताया क्या बताओ

471
00:37:00,000 --> 00:37:06,000
कि

472
00:37:09,480 --> 00:37:13,480
सालोक क्या बता य तुमने फिर से वही किया

473
00:37:13,480 --> 00:37:17,640
यहां य फिर से वही कर रहे हैं भैया जहां पर कुछ बात है नहीं रखने लायक फस

474
00:37:17,640 --> 00:37:23,120
रहे हैं तो एक संस्कृत का श्लोक पढ़ दो जिससे की अपनी बात पर वजन आ जाए

475
00:37:23,120 --> 00:37:26,520
और

476
00:37:26,520 --> 00:37:30,720
बस वजन आ जाए तो लोग ये भूल ही जाए कि वास्तविकता

477
00:37:30,720 --> 00:37:36,080
में विषय क्या था

478
00:37:36,080 --> 00:37:41,000
और यहां पर कुछ ऐसे व्यक्तियों का नाम भी लिया जा रहा है चैट में

479
00:37:41,000 --> 00:37:45,400
जो जिनके कारण ही यह सब शुरू हुआ है अपनी वर्चस्व

480
00:37:45,400 --> 00:37:49,600
दिखाने के चक्कर में वो इतना गिर गए कि गुरु द्रोह करे

481
00:37:49,600 --> 00:37:53,720
गुरु द्रोह के लिए भी तैयार हो गए चैट में ये सब बातें जिनका नाम लिया

482
00:37:53,720 --> 00:37:59,720
जा रहा

483
00:38:00,160 --> 00:38:04,360
अ शास्त्रीय कार्यक्रमों में बुलाकर हमने शंकराचार्य को पैसा नहीं दिया या

484
00:38:04,360 --> 00:38:08,480
इस बात का समर्थन किया है हम यहां विषय क्या कह रहे कि परिक का यंत्र

485
00:38:08,480 --> 00:38:12,520
है कि शंकराचार्य जी के नाम पर डील कर लेते हैं साइड से पैसा ले लेते हैं और जिस मंच पर

486
00:38:12,520 --> 00:38:16,800
शंकराचार्य जी का जाना त नहीं वहा भेज तुमने

487
00:38:16,800 --> 00:38:20,800
जहां पर भागवत कथा में शंकराचार्य के लिए लिया था नाम तुमने

488
00:38:20,800 --> 00:38:24,840
यह नहीं बोला था कि शंकराचार्य के

489
00:38:24,840 --> 00:38:29,240
परों को चार करोड़ रुपए दे दो चारों के और उन्हें यहां बुला लो

490
00:38:29,240 --> 00:38:33,600
उनकी उसमें कुछ भी करो और मगर भगवता आनंद की उसमें यह सब नहीं

491
00:38:33,600 --> 00:38:37,680
पहली बात दूसरी बात है वही

492
00:38:37,680 --> 00:38:42,000
वाली बात है कि जब तुम शंकराचार्य के परकर को भी कुछ कह रहे हो भगवता

493
00:38:42,000 --> 00:38:46,480
अंद तो तुम्हारा भी नाम उसमें बदनाम तो तुम उसमें

494
00:38:46,480 --> 00:38:50,640
शंकराचार्य को भी बदनाम कर रहे हो तो वहां पर शंकराचार्य ने

495
00:38:50,640 --> 00:38:55,280
क्या गलती की थी उस पर तुम यहां पर भी अभी बचने से बताने से बच रहे हो

496
00:38:55,280 --> 00:38:59,440
देते ऐसे शसे जा र ऐसे धर्म विरोधी

497
00:38:59,440 --> 00:39:03,600
तत्व से पैसा लेकर शंकराचार्य जी को वहां पर बेचने का उनकी प्रतिष्ठा उनकी ब्रांडिंग को

498
00:39:03,600 --> 00:39:07,720
निलाम करने का काम कर ये तुम अब कह रहे हो वहां पर तुमने शंकराचार्य की

499
00:39:07,720 --> 00:39:11,720
प्रतिष्ठा को गिराने के लिए अपनी वर्चस्व को सिद्ध करने के लिए अपना कंपेरिजन

500
00:39:11,720 --> 00:39:16,600
करने के लिए ही वो किया था ये तुम अब कह रहे हो बचने के लिए

501
00:39:16,600 --> 00:39:20,600
ये य तुम्हारे कहने का मतलब था तो तुम्हें यही कहना चाहिए

502
00:39:20,600 --> 00:39:24,600
था और अगर विस्तार से नहीं कह सकते थे तो वहां पर जरूरत ही नहीं थी

503
00:39:24,600 --> 00:39:29,680
ना शंकराचार्य का नाम लेने की जरूरत ही नहीं थी वहां का नाम क्यों ले रहे

504
00:39:29,680 --> 00:39:33,760
हो खुद का नाम उठाने के लिए शंकराचार्य का

505
00:39:33,760 --> 00:39:39,760
नाम ले रहे हो कर रहे हो र विषयात तुम कर रहे

506
00:39:40,400 --> 00:39:42,640
हो

507
00:39:42,640 --> 00:39:46,640
नहीं क शंकराचार्य काकम नहीं कर सकते मेरा व टॉपिक ही नहीं

508
00:39:46,640 --> 00:39:50,680
है जो तुम बता रहे हो हम यह क रहे शंकराचार्य जी के ब को बेच कर

509
00:39:50,680 --> 00:39:54,840
अपना अकाउंट यह तुमने नहीं कहा था और दूसरी बात बिना आधार

510
00:39:54,840 --> 00:39:58,960
के अगर तुमय कहोगे जैसे अभी तुमने कहा था लेट बात मेरी बात

511
00:39:58,960 --> 00:40:02,960
को मैनिपुलेट किया जा रहा है उस पर ऑफेंस लगेगा यहां पर तुम मैनिपुलेट कर

512
00:40:02,960 --> 00:40:07,000
रहे हो तुम्हारे पास अगर आधारभूत तथ्य है

513
00:40:07,000 --> 00:40:11,160
कि नहीं है कि वोह ऐसा कर रहे हैं नहीं तो तुम

514
00:40:11,160 --> 00:40:15,200
पर कोड के ऑफेंस चार्जेस लग जाएंगे पूरी मटके पर ऐसा

515
00:40:15,200 --> 00:40:19,400
कर रहे कि नहीं कर रहे तो तुम जो मुझसे कह रहे थे थोड़ी देर पहले कि ऐसा हो जाएगा

516
00:40:19,400 --> 00:40:23,640
वैसा हो जाएगा कोर्ट वाली बातें बता रहे थे यहां पर तुम भी तो अपने लिए वही चीज

517
00:40:23,640 --> 00:40:28,120
कर रहे हो टप ही नहीं रहा बता शकरा

518
00:40:28,120 --> 00:40:31,640
हमने क्या कहा नहीं होता ऐसा कहा क्या जिन लोगों ने कार्यक्रम

519
00:40:31,640 --> 00:40:35,960
कराया है और जिन लोगों ने ऐसे बुरे अनुभव हम बताए उन लोगों से बात की

520
00:40:35,960 --> 00:40:40,080
जाएग जिन लोगों ने हमें बताया जिन लोगों ने कार्यक्रम अटेंड किए तो

521
00:40:40,080 --> 00:40:44,240
ऐसे तो मैं भी ऐसे लोगों को बोल रहा हूं ना रे ऐसे लोगों से सुन रहा हूं ना जो तुम्हारे साथ

522
00:40:44,240 --> 00:40:48,320
रहे हैं मैं भी तो ऐसे ही लोगों को बोल रहा

523
00:40:48,320 --> 00:40:52,680
हूं उ को उपेक्षित कर दिया जाए तो मैं क्या इनके अनुभवों

524
00:40:52,680 --> 00:40:57,440
को उपेक्षित कर दू जो बता रहे जो तुम्हारे साथ रहे इत्यादि में ग्रुप्स में

525
00:40:57,440 --> 00:41:01,440
हम पर की वस्था पर चर्चा कर रहे हमय नहीं शंकराचार्य न के पहली

526
00:41:01,440 --> 00:41:05,560
बात तो तुमने वहा पर परिकर शब्द का उपयोग ही नहीं किया चारों शंकराचार्य की बात की दूसरी

527
00:41:05,560 --> 00:41:09,640
बात जब तुम पर को परिक को लेकर के भी इस तरीके से मंच पर

528
00:41:09,640 --> 00:41:13,760
बोल रहे हो तो वहां पर शंकराचार्य के लिए अपकीर्ति भी हो रही है तो अगर तुम

529
00:41:13,760 --> 00:41:17,760
उनकी अपकीर्ति नहीं चाहते हो तो तुम्ह ऐसी बात भी वहां पर नहीं बोलनी है

530
00:41:17,760 --> 00:41:21,880
पहली बात तो व आवश्यकता ही नहीं है क्या आवश्यकता थी वहां बोलने की अपने आप को

531
00:41:21,880 --> 00:41:27,360
डन दिखाना था ना मैं हू डन यही दिखाना था ना

532
00:41:27,360 --> 00:41:33,360
हमय नहीं कर शरार

533
00:41:39,400 --> 00:41:43,760
कोद हो हमारे

534
00:41:43,760 --> 00:41:48,000
कम बने हमारी वाणी बत धनवाद

535
00:41:48,000 --> 00:41:52,760
चार लाइ के बाद जान वाला प्रने आप सब

536
00:41:52,760 --> 00:41:58,760
न

537
00:41:59,320 --> 00:42:03,000
ना दिखा दिखाओ जदी

538
00:42:03,000 --> 00:42:07,600
गाना है जानवी के लिए मैंने कोई गाना नहीं क्योंकि जानवी नाम की कोई लड़की का

539
00:42:07,600 --> 00:42:13,600
नहीं है मेरे जीवन अब य तो गाना शायद दिखाएंगे आ

540
00:42:15,880 --> 00:42:19,960
नहीं अब यहां पर वही वाली बात आएगी कि जो लोग तुम्हारे साथ रहे

541
00:42:19,960 --> 00:42:24,000
हैं वो लोग जो कह रहे हैं उनके अनुभव को उनके देखे गए को क्या

542
00:42:24,000 --> 00:42:30,000
उपेक्षित कर दे जैसा कि अभी तुमने थोड़ी देर पहले कहा

543
00:42:47,280 --> 00:42:51,600
और मथुरा फिर गए अपना

544
00:42:51,600 --> 00:42:57,600
माम

545
00:42:59,040 --> 00:43:03,200
क्या

546
00:43:03,200 --> 00:43:07,280
हुआ य नहीं क रहा इस पहले आपको

547
00:43:07,280 --> 00:43:11,840
ब का शलोक ही मिलेगा

548
00:43:11,840 --> 00:43:17,430
सुने

549
00:43:17,430 --> 00:43:20,520
[संगीत]

550
00:43:20,520 --> 00:43:24,760
सु तोय जो है फिर भी लगता है हमारे समर्पण में कोई कमी है

551
00:43:24,760 --> 00:43:30,760
तो गोपी गत में गो की

552
00:43:31,200 --> 00:43:36,960
प्रत परम कांत

553
00:43:36,960 --> 00:43:41,040
अ स बता रहे तुम लोग

554
00:43:41,040 --> 00:43:45,280
कोते तुम जब लोगों की सुनी सुनाई बातों को यहां कह सकते

555
00:43:45,280 --> 00:43:49,600
हो कि हम उन बातों को उपेक्षित नहीं कर सकते तो हम लोगों से सुनकर

556
00:43:49,600 --> 00:43:53,200
कुछ नहीं बता

557
00:43:53,200 --> 00:43:57,280
सकते हम तो तुम्हे य ध्यान दिला रहे हैं ना कि वही

558
00:43:57,280 --> 00:44:01,280
बोलो जो अकाट्य हो और अगर नहीं बोलते हो तो फिर सुनी सुनाई बातों को अगर मान लेना

559
00:44:01,280 --> 00:44:06,040
है तो तुम्हारे बारे में भी अरे भाई ये वो गाना है ही नहीं जिसके बारे में बताया गया है

560
00:44:06,040 --> 00:44:10,280
उने वेदों पर रैप बनाया है वेद वेद मंत्रों पर और जानवी

561
00:44:10,280 --> 00:44:14,600
के लिए गाना बनाया वो हमें बताया गया लोगों ने और तुम्हारी शायरियों

562
00:44:14,600 --> 00:44:19,120
के वो स्क्रीनशॉट दिखाए थे फिर एफबी वाले जो हमें लोगों से मिले हैं

563
00:44:19,120 --> 00:44:24,000
तुम्हारे हैं कि नहीं वो तुम बताओ तुम्हे पता होगा मर उनको क्यों ना माना जाए तुम्हारा

564
00:44:24,000 --> 00:44:28,200
ये सोचने वाली बात प आप सर्च करें

565
00:44:28,200 --> 00:44:33,560
करने जोधपुर गया जब सत्य में कभी जोधपुर नहीं गया तुम जान

566
00:44:33,560 --> 00:44:37,760
वा मुझे प्लांटेड किया गया जबकि सत्य में मुझे प्लांटेड

567
00:44:37,760 --> 00:44:41,960
नहीं किया गया विजय श्र फी

568
00:44:41,960 --> 00:44:46,040
मेशन की है जबक सत्य में नहीं है उन्होंने वहां पर जाकर अपने

569
00:44:46,040 --> 00:44:50,240
व्यापार को प्रमोट किया जबक नहीं किया क्या

570
00:44:50,240 --> 00:44:52,200
है स बता रहे

571
00:44:52,200 --> 00:44:56,200
ट सत्य नहीं बता रहे मेरे भाई हम तुम्हे चिता रहे

572
00:44:56,200 --> 00:45:00,880
हैं कि जिस तरीके से तुम सुनी सुनाई बातों को लोगों के समक्ष

573
00:45:00,880 --> 00:45:05,080
रख सकते हो गंभीर आरोप लगाते हुए वैसे ही दूसरे भी रख

574
00:45:05,080 --> 00:45:09,160
सकते हैं तो दूसरे की बातों को क्यों नहीं मानोगे हमने किसी से सुना

575
00:45:09,160 --> 00:45:13,560
है कि तुमने जानवी प गाना गाया है यह एक्सप्लेनेशन

576
00:45:13,560 --> 00:45:19,440
क्यों दे रहे हो तुम वहा पर सुन लिया हो गया

577
00:45:19,440 --> 00:45:25,440
निर्णय इतना आनंद आया मुझे जा वा

578
00:45:33,720 --> 00:45:37,720
मैंने ये गाना सुनाया था क्या वहां पर जो तुम इस गाने को लेकर के जस्टिफिकेशन दे रहे

579
00:45:37,720 --> 00:45:43,720
हो मैंने गाना सुनाया था क्या

580
00:45:57,670 --> 00:46:03,670
[हंसी]

581
00:46:08,200 --> 00:46:13,320
री क चला जा चल रहा

582
00:46:13,320 --> 00:46:17,520
है इस प्रकार से प्रस्तुत करने वाले सोचो

583
00:46:17,520 --> 00:46:21,520
इस पर री चला जाऊ क्या होगा तुम्हारा

584
00:46:21,520 --> 00:46:27,520
हमको मतलब नहीं क्या होगा भैया हमने कहा हमने य गाना सुनाया क्या क्या

585
00:46:29,280 --> 00:46:33,280
भाई कहां तक से

586
00:46:33,280 --> 00:46:37,440
हम ने धर्म को

587
00:46:37,440 --> 00:46:43,440
जाना को तुमसे कम जाना होगा करता

588
00:46:57,440 --> 00:47:02,600
कहा होगा कहा होगा

589
00:47:02,600 --> 00:47:07,560
होगा होगा ना ठीक है

590
00:47:07,560 --> 00:47:11,840
नहीं कहा होगा और कहा होगा तो रही होगी आप सु चुके उसने कहा नहीं कछ

591
00:47:11,840 --> 00:47:16,000
प्रि देना नहीं कहा है नहीं कहा

592
00:47:16,000 --> 00:47:22,000
है हमने सुन लिया हमने कुछ उसमें गलत नहीं कहा है

593
00:47:36,160 --> 00:47:42,160
अच्छ उसने नहीं

594
00:47:43,170 --> 00:47:45,720
[प्रशंसा]

595
00:47:45,720 --> 00:47:50,400
किया उसने

596
00:47:50,400 --> 00:47:54,400
किया बना बो रडि बात

597
00:47:54,400 --> 00:47:58,640
हैने कहा था कल रडि विरोधाभासी बातें

598
00:47:58,640 --> 00:48:02,920
नहीं है तुमने विरोधाभासी वीडियो डाला क्या कॉल रिकॉर्डिंग

599
00:48:02,920 --> 00:48:07,800
वाला विरोधाभासी हमारे लिए हमारे प्रति विरोधाभास

600
00:48:07,800 --> 00:48:12,040
कॉल रिकॉर्डिंग के अंदर विरोधाभास नहीं वह कॉल रिकॉर्डिंग हमारे

601
00:48:12,040 --> 00:48:17,280
प्रति

602
00:48:17,280 --> 00:48:21,160
विरोधाभास मूर्खता की पराकाष्ठा

603
00:48:21,160 --> 00:48:25,840
है वहा मैंने बी एक्सेल नहीं आता थाने एक्सेल सीखा

604
00:48:25,840 --> 00:48:31,840
और एक्सेल के लोग जाग रहे मे साथ उनको

605
00:48:32,320 --> 00:48:37,480
बत आपको बहुतली सब डि को बात बोलना चाहता

606
00:48:37,480 --> 00:48:43,480
अगर कोई स्ल सबसे ज्यादा सु

607
00:49:17,080 --> 00:49:21,240
मैंने पले इसका वी देखा फिर सब तयार किया बिल्कुल नहीं मैं अभी तक लोग

608
00:49:21,240 --> 00:49:25,720
बताते रते ने पले इस वीडि

609
00:49:25,720 --> 00:49:31,720
दे क रही है कि मैंने प लेकिन

610
00:49:38,440 --> 00:49:44,440
मैंने इस प्रन तर्क नहीं

611
00:49:46,280 --> 00:49:51,280
है अब देखो यहां पर इसने क्या स्किप किया है जब मैं यह कह रहा

612
00:49:51,280 --> 00:49:55,360
हूं कि इसके पास सबूत है ठोस

613
00:49:55,360 --> 00:49:59,600
प्रमाण है इसको लगता है जबक वो जो सामग्री इसने दिखाई वो ठोस नहीं है तो

614
00:49:59,600 --> 00:50:03,760
मैंने कहा कि भैया तुम कोर्ट क्यों नहीं चले जाते हो तो इसने

615
00:50:03,760 --> 00:50:07,800
एक तक इसने कुतर्क किया जब शासको शासक बैठे तो हम कोर्ट

616
00:50:07,800 --> 00:50:12,000
क्यों जाए तो भाई जब दो वर्ष बीत

617
00:50:12,000 --> 00:50:16,000
चुके हैं तीन वर्ष बीत चुके तेरे हाथ में वह जो चीजें हैं वह आए हुए और

618
00:50:16,000 --> 00:50:20,160
तुझको य सब पता चल रहा है और तुझे लगता है कि यही ठोस प्रमाण है इसके आधार पर सब सिद्ध

619
00:50:20,160 --> 00:50:24,200
हो जाएगा तो फिर तुम दूसरा रास्ता क्यों नहीं अपना

620
00:50:24,200 --> 00:50:28,400
रहे हो अब तुम कह रहे हो शासको से ज्यादा कोर्ट हो गई क्या

621
00:50:28,400 --> 00:50:32,600
तो क्योंकि तुम्हें वहां से न्याय नहीं मिल रहा है ना अब तुम कह रहे हो कोर्ट में कोर्ट

622
00:50:32,600 --> 00:50:36,720
तो बेकार की चीज है कोर्ट से कुछ मिली नहीं रहा जबकि तुम कोर्ट दूसरी चीजों के लिए जा रहे

623
00:50:36,720 --> 00:50:41,040
हो तुमने सात आठ मुकदमे लड़े हैं यहां तुम्हारा झूठ और फिर दूसरी

624
00:50:41,040 --> 00:50:45,480
बात कि न्याय मिलता है कि नहीं मिलता बाद की बात है मगर कम कर्मण्य

625
00:50:45,480 --> 00:50:49,520
वादी कारते को तो ध्यान रखो तो यहां पर यह कह रहे हैं अरे

626
00:50:49,520 --> 00:50:53,600
सब तो प्रवचन कौन सुने ठीक है सिद्धांत वीक है

627
00:50:53,600 --> 00:50:59,600
इनके भाई साहब

628
00:51:03,480 --> 00:51:09,320
तुम मत करो हम

629
00:51:09,320 --> 00:51:13,520
कर वाल्मीक जी भी राम राम कहते थे वम

630
00:51:13,520 --> 00:51:19,520
जीने म के बा नहीं

631
00:51:21,200 --> 00:51:25,240
करते इतना ही कहने का भाव है तो वहा पर बाद में य

632
00:51:25,240 --> 00:51:30,560
भी लिखा हुआ है कि उसके मैं मेरा स्ने वैसा ही है जैसा तुम्हारा है इसका क्या

633
00:51:30,560 --> 00:51:35,400
करें ये नहीं कहा अपमान मत वहां ये है कि उसका अंत सकार

634
00:51:35,400 --> 00:51:39,440
ऐसा कुछ नहीं है ये आप मैनिपुलेट कर रहे हैं

635
00:51:39,440 --> 00:51:43,680
फिर यहां पर बात आएगी परंपरा सिद्ध करें अपनी जो अर्थ आप ले रहे हैं वहां का

636
00:51:43,680 --> 00:51:47,800
उसमें परंपरा सिद्ध करें चाहिए और उसकी सतता चली

637
00:51:47,800 --> 00:51:51,880
उस पर क्या करना ये कोई भी सज्जन व्यक्ति का कर्तव्य है सज्जन व्यक्ति जब

638
00:51:51,880 --> 00:51:56,040
शत्रुता चली गई तो उसको मां बहन की गालियां नहीं देगा हगना मतना नहीं करेगा

639
00:51:56,040 --> 00:52:00,160
उसके लिए आपत्ति जनक टिप्पणियां नहीं करेगा उसके लिए अश्लील बातें

640
00:52:00,160 --> 00:52:04,160
नहीं करेगा आश्य पूर्ण बातें नहीं करेगा द्वेष पूर्ण बातें नहीं करेगा अपमान जनक

641
00:52:04,160 --> 00:52:08,240
बातें नहीं करेगा और कम से कम यह तो नहीं कहेगा कि मेरा वो शत्रु

642
00:52:08,240 --> 00:52:12,240
है मर भी गया तो क्या हुआ जनता के स

643
00:52:12,240 --> 00:52:18,240
को भगवान शम चंद्र जी ने बस ये

644
00:52:23,040 --> 00:52:28,720
कहा हो

645
00:52:28,720 --> 00:52:32,880
अनुत हो कहा वत कर कब हम क संदाय आचार्य हमारे अनुत

646
00:52:32,880 --> 00:52:38,880
हो गए कब

647
00:52:41,080 --> 00:52:47,080
हमेशा

648
00:52:48,200 --> 00:52:52,200
बो ऐसा है कोई एक श्री संप्रदाय के आचार्य

649
00:52:52,200 --> 00:52:56,480
हैं राम द्विवेदी नाम है उनका

650
00:52:56,480 --> 00:53:01,400
उन्होने उनके साथ इनका शायद शास्त्रार्थ होने वाला था

651
00:53:01,400 --> 00:53:06,000
यह क्या हुआ उनके घर पर किसी कारण वश पहुंचे

652
00:53:06,000 --> 00:53:10,440
तो उस समय जो उन्होंने इनको अतिथि सत्कार इनका अतिथ

653
00:53:10,440 --> 00:53:14,560
किया इन्होने उस वहां पर जो आतिथ्य प्राप्त किया उसके

654
00:53:14,560 --> 00:53:18,960
फोटोज ले ली और उन फोटोस को प्रत्यक्ष

655
00:53:18,960 --> 00:53:23,200
रूप से इस तरह से दर्शाया समाज में कि देखो देखो वो जो है

656
00:53:23,200 --> 00:53:27,560
हमारे जो है अनुग हो गए मतलब एक शास्त्रार्थ वाली बात में उनको वो शास्त्रार्थ

657
00:53:27,560 --> 00:53:31,760
हुआ कि नहीं हुआ वो तो हुआ ही नहीं शायद मेरी जानकारी में तो नहीं है

658
00:53:31,760 --> 00:53:35,800
मगर इन्होंने वो उन फोटोस को ऐसे उपयोग किया वो जो आतिथ्य में जो चीजें वो कर

659
00:53:35,800 --> 00:53:38,280
रहे हैं इनके वो

660
00:53:38,280 --> 00:53:42,680
उन फोटोस को इन्होंने ऐसे यूज किया कि जैसे वो जो है उन्होंने

661
00:53:42,680 --> 00:53:47,320
हमारी प्रभुता स्वीकार कर ली हमारे सामने नतमस्तक हो गए

662
00:53:47,320 --> 00:53:51,600
और आज तक ये सनमार्ग वालों से क्यों भाग रहे हैं चुनौती दे सनमार्ग वालों को

663
00:53:51,600 --> 00:53:57,600
क्यों भाग रहे हैं क्यों इधर उधर की बगले झाक रहे हैं

664
00:54:05,360 --> 00:54:09,520
रहे हो क्या म कर रहे हो

665
00:54:09,520 --> 00:54:13,600
अरे मेरे भाई यहां बात क्या चल रही है यहां

666
00:54:13,600 --> 00:54:17,600
बात यह चल रही है कि कोई व्यक्ति के साथ में मिलू कि ना मिलू उस

667
00:54:17,600 --> 00:54:21,640
संबंध में गुरु के साथ क्या कर्तव्य होना चाहिए तुम जानते हो कि नहीं जानते हो

668
00:54:21,640 --> 00:54:25,680
तो तुम यहां विषयात कर रहे हो फिर मैं क्या कर रहा हूं क्या नहीं

669
00:54:25,680 --> 00:54:29,720
कर रहा हूं यह तो प्रासंगिक चीज हो गई यह तो जांच का विषय हो जाएगा जब

670
00:54:29,720 --> 00:54:33,880
तुम ये कहोगे मैं क्या कर रहा हूं क्या नहीं कर रहा हूं यह

671
00:54:33,880 --> 00:54:37,960
तो जांच का विषय हो जाएगा ना कि मैं उनको बता रहा हूं कि

672
00:54:37,960 --> 00:54:42,000
नहीं बता रहा हूं मैं क्या कर रहा हूं क्या नहीं कर रहा हूं तुम तुम्हारी बात क्यों मानी जाए मेरी बात क्यों

673
00:54:42,000 --> 00:54:46,000
ना मानी जाए क्या है जब कोई शास्त्र की

674
00:54:46,000 --> 00:54:50,240
बात आएगी तो अगर इनके पास कोई तोड़ नहीं है तो दूसरी बात कैसे

675
00:54:50,240 --> 00:54:56,240
फसाए ये फसा दी इन् विषयात

676
00:55:00,240 --> 00:55:04,320
र गुरुदेव से उन्होंने पूछ लिया है कि योग शिक्षिका के

677
00:55:04,320 --> 00:55:08,680
रूप में व्यायाम के रूप में व योग की शिक्षा दे सकती है कि नहीं एक व्यायाम शारीरिक

678
00:55:08,680 --> 00:55:12,960
स्तर पर तुम जुड़े हुए हो त तो ऐसा भी नहीं योगाचार्य जब

679
00:55:12,960 --> 00:55:17,880
शंकराचार्य तुम्हारा संपर्क नहीं है और म वाले

680
00:55:17,880 --> 00:55:22,080
सिकेट की गुलामी कर रहे हो और सिकेट ने तुमको इसलिए खड़ा किया

681
00:55:22,080 --> 00:55:26,400
टिक ट करो मु को टॉपिक तो तुम डायवर्ट कर रहे हो य पर बात

682
00:55:26,400 --> 00:55:30,640
चल रही है कि गुरु के प्रति शिष्य का य कर्तव्य होता है कि नहीं उसे किससे

683
00:55:30,640 --> 00:55:35,160
मिलना है किससे नहीं मिलना विशेष तौर पर यदि वह

684
00:55:35,160 --> 00:55:39,520
गुरु की अवमानना करने वाला है तो यहां पर तुम इस बात का जवाब

685
00:55:39,520 --> 00:55:43,520
ना देते हुए टॉपिक को इस तरफ ले जा रहे हो कि तुम कर क्या रहे हो तुम क्या

686
00:55:43,520 --> 00:55:47,520
गुरु के प्रति सही चीज कर रहे हो अरे भाई मैं नहीं भी कर रहा हूं बात ये हो रही तुम्हें

687
00:55:47,520 --> 00:55:51,560
धर्म का बोध है कि नहीं कि गुरु के प्रति एक शिष्य का य कर्तव्य होता

688
00:55:51,560 --> 00:55:55,680
है कि नहीं कि गुरु की निंदा करने वाले के साथ खड़ा ना हो यहां टॉपिक ये चल रहा

689
00:55:55,680 --> 00:56:01,680
है

690
00:56:03,800 --> 00:56:09,800
बा

691
00:56:14,160 --> 00:56:17,560
आप के

692
00:56:17,560 --> 00:56:20,480
नाम

693
00:56:20,480 --> 00:56:25,120
नेे शुक्ल जी की ऑडियो अपने लाइव में सुनाएंगे पर

694
00:56:25,120 --> 00:56:29,120
इन्होने कहा है लेते क्योंकि इनके पास शुक्ल जी की ऑडियो है

695
00:56:29,120 --> 00:56:34,800
नहीं य इन्होंने बाद में कम्युनिटी पोस्ट में भी डिक्लेयर कर दिया

696
00:56:34,800 --> 00:56:38,400
एक

697
00:56:38,400 --> 00:56:41,640
21

698
00:56:41,640 --> 00:56:46,760
39 ठीक

699
00:56:46,760 --> 00:56:52,400
है कौन सा लाइव

700
00:56:52,400 --> 00:56:57,240
है यह कहते हैं इसको झूठ

701
00:56:57,240 --> 00:57:03,240
ट बता किस दिन का डि

702
00:57:08,440 --> 00:57:14,440
ता

703
00:57:17,960 --> 00:57:23,960
कर जान होका

704
00:57:28,560 --> 00:57:32,560
इसने गौरी वाले प्रक पर हो गने जा वाले

705
00:57:32,560 --> 00:57:36,560
प्रक पर भी क दिया य सब क्यों भाई तुमने त्रुटि हो गई

706
00:57:36,560 --> 00:57:41,160
थी नहीं कहा था कि हमसे वाक स्खलन हो गया है वो

707
00:57:41,160 --> 00:57:45,360
विजय श्री बोल दिया उस महिला को जो मंच पर बैठी है टी

708
00:57:45,360 --> 00:57:49,880
तो तुमसे हुई तुम्हारे कितने झूट मैंने य पकड़ाए हमें क्या बता रहे

709
00:57:49,880 --> 00:57:54,440
हो जानवी बाइपोलर में तुमने क्या सिद्ध कर

710
00:57:54,440 --> 00:58:00,440
दिया तुमने क्या सि कर दिया अपनी किताब को खुद ही पढ़

711
00:58:16,440 --> 00:58:21,800
केआ थो स्लो करके मजा आ गया

712
00:58:21,800 --> 00:58:25,840
एक मिनट स्लो करके मजा आ गया आप सु सही

713
00:58:25,840 --> 00:58:31,840
टाइम मेन टॉपिक आया

714
00:58:33,360 --> 00:58:37,360
है उनकोन से त है क्या जो इलाज कराने घूम रहे

715
00:58:37,360 --> 00:58:41,480
हो राजस्थान क

716
00:58:41,480 --> 00:58:46,200
इ यह तो तुम ही बताओ लोग कह रहे तुम्हारे बारे में

717
00:58:46,200 --> 00:58:50,240
सुनने में आ रहा है तुम्हारे अनुसार बोल रहे हैं ना भगवता नंद तब तुम

718
00:58:50,240 --> 00:58:56,240
ढीले पड़ रहे हो

719
00:59:02,080 --> 00:59:06,320
अरे तुम भी तो कुछ दे दो ना कहां से आया पिजा कौन सा तारीख थी

720
00:59:06,320 --> 00:59:10,320
कौन सा दिन था जो य सब व्यभिचार के आरोप लगा रहे हो तुमने

721
00:59:10,320 --> 00:59:14,520
दिया क्या यह सब जानकारिया दी है क्या लिखित में तुमने

722
00:59:14,520 --> 00:59:20,520
भी तो सुनी सुनाई बातों पर ही बोला है केवल

723
00:59:30,520 --> 00:59:34,560
नहीं बचा तुम योग्य हो भी तुम योग्य नहीं हो तो तुमसा नहीं प्रस्तुत

724
00:59:34,560 --> 00:59:38,560
करना चाह रहे हो चलो ठीक है लेकिन तुम यहां पर जो बन कर

725
00:59:38,560 --> 00:59:43,200
बैठे हुए हो ना उस वही से तुम्हारा दमित हो रहा

726
00:59:43,200 --> 00:59:47,320
है तुम भी योग्य नहीं हो उसके दूसरे कारण है हो

727
00:59:47,320 --> 00:59:51,640
सकता है तुम भक्ष भक्ष या सोच इत्यादि में आगे हो और संध्या

728
00:59:51,640 --> 00:59:56,240
वंदन भी करते हो मगर दूसरे कारण है जो तुम्हारे अंदर

729
00:59:56,240 --> 01:00:00,760
वो नहीं है एक तो जैसे तुम्हारी जो भाषा है वही गंदी है

730
01:00:00,760 --> 01:00:04,800
दिन भर उसमें तुम गालियां देते हो अश्लील शब्द बोलते हो तुम खुद कहते हो मैं

731
01:00:04,800 --> 01:00:08,840
गाली देता हूं मैं गाली दूंगा तो यहां पर तुम्हारा वो जो दोष है

732
01:00:08,840 --> 01:00:13,280
ना जो तुम अपने आप को स्वक्ष रख रहे हो वाणी में आ जा रहा है वो गंदगी तो

733
01:00:13,280 --> 01:00:17,200
उस हिसाब से योग्य तुम भी नहीं बच रहे हो और

734
01:00:17,200 --> 01:00:21,400
निंदा कर ही रहे हो अब वो निंदा वाली बात फिर तुम कह दो शास्त्रो निंदा

735
01:00:21,400 --> 01:00:25,600
फिर मैं कहूंगा कि शास्त्रों से इतर भी तुमने निंदा की है लोगों की इतर

736
01:00:25,600 --> 01:00:29,640
भी तुम ने मरे हुए लोगों की निंदा की है तो फिर वही बात होगी वो फिर चर्चा

737
01:00:29,640 --> 01:00:33,760
का विषय बन जाएगा मगर योग्य तुम भी नहीं हो और अगर मैं

738
01:00:33,760 --> 01:00:37,880
देखूं तो मुझे जो है तुम छोटे क्यूटू पाई से हो बस

739
01:00:37,880 --> 01:00:40,600
और कुछ

740
01:00:40,600 --> 01:00:44,760
नहीं ठीक है आदर कर किसके

741
01:00:44,760 --> 01:00:48,760
साथ हा हा आदर मादर जल्दी बताओ उसका पता चलेगा

742
01:00:48,760 --> 01:00:52,880
किसके साथ आदर करना किसके साथ मादर करना है विद्या वालन को हमने कह

743
01:00:52,880 --> 01:00:56,920
दिया इस विद्या वाला नहीं बोला इसने विद्या न को भी बोला है

744
01:00:56,920 --> 01:01:00,920
अन्य को भी बोला है क्या बो

745
01:01:00,920 --> 01:01:04,640
है प्रमोट

746
01:01:04,640 --> 01:01:08,920
किया दारू को प्रमोट करने वाली जो सामग्री है

747
01:01:08,920 --> 01:01:14,240
स्क्रीनशॉट इत्यादि वह भी तुम्हारी फेसबुक आईडी के चित्र के साथ प्राप्त हुए

748
01:01:14,240 --> 01:01:18,880
हैं सुनो विद्या बालन वा टॉपिक

749
01:01:18,880 --> 01:01:22,880
बता को बद विद्या कर तो इस

750
01:01:22,880 --> 01:01:27,320
प्रकार से आपको होगा लेकिन हमने व यही कहा था

751
01:01:27,320 --> 01:01:31,360
कि अगर डायरेक्टर प्रोड्यूसर इत्यादि पेमेंट नहीं किया पेमेंट करके

752
01:01:31,360 --> 01:01:35,360
देखना के चरित्र पर इस प्रकार से उठाई थी क्या शंकराचार्य

753
01:01:35,360 --> 01:01:39,440
या रामानुजाचार्य राघवाचार्य गालियां देंगे मां बहन

754
01:01:39,440 --> 01:01:43,840
की अगर कोई व्यक्ति गलत काम कर रहा होगा तो

755
01:01:43,840 --> 01:01:48,000
और अगर यह अपने आप को किसी संप्रदाय के आचार्य के रूप में ख्या पित करते

756
01:01:48,000 --> 01:01:52,120
तो य गालियां देंगे भाई गाली तो मुझ जैसा एक साधारण व्यक्ति

757
01:01:52,120 --> 01:01:56,240
नहीं देगा यह तो संप्रदाय के आचार्य इनका क्या हुआ था वो

758
01:01:56,240 --> 01:02:00,280
पता नहीं क्या महा लगा के बता रहे थे इनकी वाणी अगर माने तो

759
01:02:00,280 --> 01:02:04,640
हालांकि वह है नहीं कोई परंपरा वगैरा सब

760
01:02:04,640 --> 01:02:08,720
कपोल कल्पना बढ़िया एक ताना बाना बुना है लोगों को बेवकूफ

761
01:02:08,720 --> 01:02:12,880
बनाने के लिए मगर फिर भी क्या मां बहन की गालिया सुनोगे क्या आप

762
01:02:12,880 --> 01:02:17,160
शंकराचार्य इनके मुख से राम ने कभी सिखाया

763
01:02:17,160 --> 01:02:21,640
है क्या गाली

764
01:02:21,640 --> 01:02:25,880
दो बुरा तो राम जी को भी लगा था उन्होने तो उस प्रकार की

765
01:02:25,880 --> 01:02:29,480
शली का प्रयोग नहीं

766
01:02:29,480 --> 01:02:33,560
किया नहीं तो यह तुम यह तुम्हारे वो है ना शास्त्र से

767
01:02:33,560 --> 01:02:37,680
दिखाओ बुरा लगे तो इस शब्दावली का उपयोग हो सकता

768
01:02:37,680 --> 01:02:42,000
है हम तुमहे शास्त्र से दिखा रहे हैं राम जी ने गाली नहीं दी

769
01:02:42,000 --> 01:02:46,040
दिखाओ शास्त्र से गाली गाली देना चाहिए

770
01:02:46,040 --> 01:02:49,040
बुरा लगने

771
01:02:49,040 --> 01:02:51,600
पर

772
01:02:51,600 --> 01:02:57,000
पर आर मादर सब ख क्या

773
01:02:57,000 --> 01:03:01,320
सर हाउ मच ड यू लव र फ नेली आई लव माय न्यू फ

774
01:03:01,320 --> 01:03:05,520
पुराने वाले बेकार में छोड़कर फै शोर तो करेंगे ही ना

775
01:03:05,520 --> 01:03:10,520
न वाले नहीं

776
01:03:10,520 --> 01:03:15,760
करते कहा

777
01:03:15,760 --> 01:03:19,800
लिखने कहा लिखने का बात

778
01:03:19,800 --> 01:03:25,800
आदर मादर ये सब लिख रहे हो कहा लिख

779
01:03:26,640 --> 01:03:30,640
क्या क्या एक मिनट एक मिनट एक मिनट क्या बोला

780
01:03:30,640 --> 01:03:35,200
इसने फिर से सुनू ये वक्ति इतनी बात कर देता मुझे समझ में नहीं आता क्या

781
01:03:35,200 --> 01:03:39,200
सो विवाह के बा से परेशान

782
01:03:39,200 --> 01:03:43,240
हो मेरा विवाह कब मेरा विवाह

783
01:03:43,240 --> 01:03:47,440
कब हुआ पिछले विवाह पंचमी को अंग्रेजी दिसंबर 204 उस

784
01:03:47,440 --> 01:03:51,440
समय से अभी तक चार महीने हो गए इसको ये बात हम बताने गए कि हमारी पत्नी

785
01:03:51,440 --> 01:03:55,840
बताने गई कि हमारे माके वाले दोनों पित पक्ष और ससुर पक्ष बताने गए

786
01:03:55,840 --> 01:03:59,920
ये खुद आ गया था कैमरा लेशन तुमसे मिलने जुलने वाले

787
01:03:59,920 --> 01:04:03,920
लोग कहते हैं तुम्हारी कई सुनी बातों

788
01:04:03,920 --> 01:04:08,160
के आधार पर अगर तुम जिस प्रकार से कई सुनी बातों के आधार पर उनको निर्णायक

789
01:04:08,160 --> 01:04:12,160
रूप से प्रस्तुत करते हो तथ्यों को तो फिर यह क्यों

790
01:04:12,160 --> 01:04:16,880
ना किया जाए तुमसे जुड़े हुए लोग कहते हैं ऐसा जो तुम्हारे साथ समय

791
01:04:16,880 --> 01:04:20,960
बिताए पुराने लोग प्रशांत

792
01:04:20,960 --> 01:04:24,960
मिश्र जी ने ऐसा नहीं कहा मगर जैसे प्रशांत मिश्र जी हैं तुम्हारे पुराने लोग जुड़े

793
01:04:24,960 --> 01:04:25,920
हुए

794
01:04:25,920 --> 01:04:30,440
ऐसे ही और भी तो जुड़े हुए होंगे वोह लोग यह कहते हैं

795
01:04:30,440 --> 01:04:36,320
उनकी बात क्यों ना मानी जाए क्यों उपेक्षित कर दी जाए उनकी

796
01:04:36,320 --> 01:04:40,400
बात के बाद हम परेशान है परेशान कोई लॉजिक है

797
01:04:40,400 --> 01:04:44,400
क को अरे लॉजिक की क्या तुमने कहां कौन सा

798
01:04:44,400 --> 01:04:48,960
लॉजिक दिया अपनी बात आने पर लिख के दो यह दो वो करो

799
01:04:48,960 --> 01:04:53,240
और दूसरे की बात आने पर जो है किसी ने कुछ कह दिया बस वहां

800
01:04:53,240 --> 01:04:59,240
के लोग ऐसा कह रहे हैं मान लो भैया सही

801
01:05:01,880 --> 01:05:06,400
कुछ नहीं बस बोल देना नीचे पीछे हज और कना

802
01:05:06,400 --> 01:05:11,040
ध ा के लिए कर रहे और शंकराचार्य के शिष्य पर

803
01:05:11,040 --> 01:05:15,200
ये इसमें धर्म ग्रंथ कहां से आ गए अगर कोई मुझसे

804
01:05:15,200 --> 01:05:19,240
कहता है कि भगवता अंद जो है हस्तमैथुन की आदत से

805
01:05:19,240 --> 01:05:24,000
पीड़ित है और वह इलाज करा रहा है अपना

806
01:05:24,000 --> 01:05:28,120
वहां राजस्थान इत्यादि से तो

807
01:05:28,120 --> 01:05:32,720
इसको मुझे ग्रंथों से सिद्ध करना पड़ेगा ग्रंथ की बात क्यों

808
01:05:32,720 --> 01:05:36,800
आई क्योंकि अपनी बात को बढ़ाना है कुछ बोलना

809
01:05:36,800 --> 01:05:41,000
है समथिंग टू से है ना

810
01:05:41,000 --> 01:05:45,120
कुछ तो कहे क्या कहे भाई इसके बारे में तर्क नहीं है क्योंकि हमने खुद ही उन तर्कों

811
01:05:45,120 --> 01:05:49,240
का गला घोटा है हमने खुद ही उन तर्कों का गला घोटा है खुद ही

812
01:05:49,240 --> 01:05:53,480
युक्तियों का ताला गला घोट दिया है इसलिए क्या कहे

813
01:05:53,480 --> 01:05:59,480
कुछ कहने को बचा नहीं

814
01:06:00,840 --> 01:06:05,160
जा ने बना रहे हो किस मात्र शक्ति के प्रति मना

815
01:06:05,160 --> 01:06:09,320
बना दिया भगवा अरे भाई लोग बोल रहे हैं हमारे पास

816
01:06:09,320 --> 01:06:14,240
भी आ रहे हैं मैसेजेस बोल रहे हैं लोग हमसे

817
01:06:14,240 --> 01:06:20,240
तुम भी उंगली रख के बताते हो तो मैं भी उंगली रख के बता दूंगा

818
01:06:28,200 --> 01:06:32,520
उंगली रख के बताओगे ना मैसेज मुझे कोई मैसेज कर देगा मैं अपने किसी

819
01:06:32,520 --> 01:06:37,040
कोई ना कोई तुम्हारे विरोधी होते हैं मैसेज कर देते हैं तो मैं उंगली रख के बता दूंगा

820
01:06:37,040 --> 01:06:41,320
फलानी जान के फलानी मात शक्ति के बारे में तुमने गाना बनाया भाई सुनी

821
01:06:41,320 --> 01:06:45,520
सुनाई बातों परही चलना है ना हम लोगों को तो चल रहे हैं तो फिर तुम्हे दिक्कत क्या हो रही है अब

822
01:06:45,520 --> 01:06:50,000
ये क्यों पूछ रहा किस किस किस बताओ ना ऋषिकेश ब्रह्माचारी

823
01:06:50,000 --> 01:06:54,360
जी का किसके साथ संबंध है बताओ ना एकट उस आदमी का नाम उस

824
01:06:54,360 --> 01:06:58,400
समय स्थान घटना का नाम बताओ जिसमें उसने यह

825
01:06:58,400 --> 01:07:02,920
जिसमें उसका फ्री मिशन के लिए कार्य करना सिद्ध हुआ हो विजया श्री का

826
01:07:02,920 --> 01:07:08,920
वो नहीं बता

827
01:07:13,760 --> 01:07:18,040
पाओगे लोग केस केस नहीं कर

828
01:07:18,040 --> 01:07:22,240
बना दिया इना प्रयास केस केस क्या करोगे

829
01:07:22,240 --> 01:07:26,720
कर दो केस केस केस की बात जो तुम कर रहे

830
01:07:26,720 --> 01:07:31,680
हो जब तुम लोगों की कही सुनी बातों पर

831
01:07:31,680 --> 01:07:35,720
कोई निर्णय देते हो तब तुम्हें केस की याद नहीं आती और हम लोगों की

832
01:07:35,720 --> 01:07:39,720
कही सुनी बातों पर प्रश्न करते तो तुम्हें याद आ रही है वो भी तुम्हें

833
01:07:39,720 --> 01:07:43,720
याद दिलाने के लिए जब तुम्हें याद दिलाने के

834
01:07:43,720 --> 01:07:49,720
लिए कि भाई ऐसे कई सुनी बातों पर निर्णय नहीं लिए जाते

835
01:07:53,640 --> 01:07:57,760
गंभीर इस परेशान दू बच्चा अपना जी खा रहा है

836
01:07:57,760 --> 01:08:01,920
पत्नी है मा थो परेशा इसके अयान

837
01:08:01,920 --> 01:08:06,280
से उनकी पूरी संस्था दा तो हो भी नहीं रही ऐसे कम से कम च उसके केस

838
01:08:06,280 --> 01:08:11,240
अभी इस मानसिकता में हम नहीं है उस पर

839
01:08:11,240 --> 01:08:17,240
केस बच्चे नहीं तुम्हारे बड़े भाई

840
01:08:23,480 --> 01:08:29,480
है नहीं बनाई भाई

841
01:08:29,640 --> 01:08:33,000
नहीं बनाई

842
01:08:33,000 --> 01:08:37,080
भाई जान सुना तो फिर तुम्हारी वाणी को मान्य

843
01:08:37,080 --> 01:08:41,160
मान लिया जाए अन्य जो लोग कह रहे हैं उसको उपेक्षित कर दिया जाए उनके

844
01:08:41,160 --> 01:08:45,280
अनुभवों को हा क्यों भाई तुम्हारा ही तो तर्क है

845
01:08:45,280 --> 01:08:50,280
क्या अन्य लोगों के अनुभवों को अपेक्षित क्यों कर दिया जाए यह है वो

846
01:08:50,280 --> 01:08:56,280
है भगतान रो रहा है

847
01:09:04,240 --> 01:09:08,360
होगा तुमको ने करने सा

848
01:09:08,360 --> 01:09:12,360
करने प् सा करने में समस्या नहीं है हमसे भी नहीं होनी चाहिए क्योंकि

849
01:09:12,360 --> 01:09:16,480
कम से कम अगर तुमको गुरु मानते हो अपने दण से तो

850
01:09:16,480 --> 01:09:20,480
अने समर्थन तो किया है किसी

851
01:09:20,480 --> 01:09:25,000
ने यदि गुरुदेव के बारे में हास्यास्पद उपहास

852
01:09:25,000 --> 01:09:29,480
भी आया है तो हम उसके साथ चर्चा नहीं करते दूरी

853
01:09:29,480 --> 01:09:35,480
बनाते और आवश्यकता पड़े तो उसका खंडन अवश्य करते

854
01:09:36,680 --> 01:09:40,800
हैं दूसरी बात यह भी है कि यदि

855
01:09:40,800 --> 01:09:44,840
हम उसके साथ में मंच साझा करते भी हैं

856
01:09:44,840 --> 01:09:49,000
तो या तो उसमें कोई द्वेष होता है मतलब

857
01:09:49,000 --> 01:09:53,280
कुछ प्रतिकार आक्रमण टाइप से होता है है ना

858
01:09:53,280 --> 01:09:57,360
उसका विरोध होता है और हमें नहीं पता था

859
01:09:57,360 --> 01:10:01,360
कि हमें तुम्हारा विरोध करना है हमें लगता था कि वो जिसके लिए तुम

860
01:10:01,360 --> 01:10:05,400
लाइव आ रहे हो व सौहार्द पूर्ण चर्चा है सर्पण

861
01:10:05,400 --> 01:10:10,640
किसी नतीजे पर पहुंचने के

862
01:10:10,640 --> 01:10:14,640
लिए कुछ लोग यहां पर कह रहे हैं कि भाई पर सब पड़ा

863
01:10:14,640 --> 01:10:18,680
है तो जैसे पर जो पड़ा है कीचड़ वाली होली का वीडियो पड़ा

864
01:10:18,680 --> 01:10:22,880
है या ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के फोन की कॉल रिकॉर्डिंग पड़ी है

865
01:10:22,880 --> 01:10:26,960
उस कॉल रिकॉर्डिंग से सिद्ध क्या हो रहा है जो जैसे य पूछ रहा है

866
01:10:26,960 --> 01:10:31,280
कि मेरा दो मेरा मैं कौन सी ट्रेन से गया मैं कौन से दिन गया

867
01:10:31,280 --> 01:10:35,640
कौन से ईयर गया कुछ बता दो यह सब चीजें हैं क्या उसमें

868
01:10:35,640 --> 01:10:39,640
कि कौन से दिन उनके उनका संबंध बना कौन लड़का था सब चीजें है उसमें

869
01:10:39,640 --> 01:10:42,120
रिकॉर्डिंग

870
01:10:42,120 --> 01:10:47,920
में और कीचड़ वाली होली की बात हम बता चुके हैं दूसरे वीडियो

871
01:10:47,920 --> 01:10:52,000
देखिए क ब सकारात्मक या उनके प्रकल्प के विषय में लोगों

872
01:10:52,000 --> 01:10:56,120
को भाई सम्मान तुमने किया होगा हम मना नहीं

873
01:10:56,120 --> 01:11:00,280
कर रहे मगर तुमने उपहास भी किया है किए गए उपास

874
01:11:00,280 --> 01:11:04,360
के कारण हमारे मन में भावना थी कि हम तुमसे ना मिले क्योंकि

875
01:11:04,360 --> 01:11:08,360
अगर मिलेंगे तो हमें तुम्हारा प्रतिकार करना पड़ेगा उस उपास के लिए और वह

876
01:11:08,360 --> 01:11:12,320
प्रतिकार हम जनता को नहीं दिखाना

877
01:11:12,320 --> 01:11:17,240
चाहते म से कई बार बताते पर

878
01:11:17,240 --> 01:11:21,240
स लेन क अरे मेरे

879
01:11:21,240 --> 01:11:25,280
भाई उसके साथ हमने विरोधाभासी चर्चा की हम

880
01:11:25,280 --> 01:11:25,780
रे साथ

881
01:11:25,760 --> 01:11:30,200
विरोधाभास के लिए नहीं दिखना चाहते थे लोगों को

882
01:11:30,200 --> 01:11:34,280
उसी बात के पीछे पड़े हो मूर्ख हो गए हो मगर आप

883
01:11:34,280 --> 01:11:40,280
दिखाएंगे मामला इतना बढ़ गया तो दिखाने के लिए तैयार है आ

884
01:11:44,520 --> 01:11:48,600
जाना े देखो यही कारण

885
01:11:48,600 --> 01:11:52,880
तुमको अपनी पहचान को बदलना भी पड़ता है स्न मुझे अपने पहचान

886
01:11:52,880 --> 01:11:57,000
को बदलने की कोई आवश्यकता जो बोलता खल खुला बोलता हूं चेहरे के साथ

887
01:11:57,000 --> 01:12:01,480
बोलता हूं नहीं बोलते पहली बात

888
01:12:01,480 --> 01:12:05,560
तुम जो है जब मंच पर जाते हो कहीं

889
01:12:05,560 --> 01:12:09,840
पर वहां पर भगवता नंद तुम गालियां नहीं देते

890
01:12:09,840 --> 01:12:14,080
कथा करने जाते हो वहां गालियां नहीं देते धर्म संसद में जब बोलते हो जाकर गालियां

891
01:12:14,080 --> 01:12:18,200
नहीं देते राज राजन दास जी राघवाचार्य जी

892
01:12:18,200 --> 01:12:22,240
के बगल में बैठते हो गालियां नहीं देते अगना मतना नहीं करते वहां

893
01:12:22,240 --> 01:12:26,880
ठीक है तो पहली बात तो यह है कि जो तुम यहां बोल सब जगह नहीं बोलते

894
01:12:26,880 --> 01:12:30,920
और दूसरी बात यह है कि एक बार एक अपराधी किस्म के व्यक्ति

895
01:12:30,920 --> 01:12:35,080
के यहां छानबीन करने के लिए हनुमान जी की तरह अगर हम दूत

896
01:12:35,080 --> 01:12:39,200
बन के चले गए भेष बदल के चले गए तो उस पर तुम कह रहे हो कि हम हमें

897
01:12:39,200 --> 01:12:40,880
यह नहीं करना पड़ता तुम्हें इसलिए नहीं

898
01:12:40,880 --> 01:12:45,360
मैंने बताया ना यहां देखिए वह जो मर्म है ना जो मैं हमेशा कहता रहता हूं

899
01:12:45,360 --> 01:12:49,480
कि इसने धरातल पर कोई रक्षा विषयक कार्य नहीं किया है इसलिए यह

900
01:12:49,480 --> 01:12:52,640
सबकी समीक्षा कर सकता

901
01:12:52,640 --> 01:12:56,880
है तो मैंने क्या बताया कि इसको बेस तब बदलना पड़ेगा

902
01:12:56,880 --> 01:13:01,800
ना जब इसको अक्ष का पर्दा फास करना हो सामने लाना हो

903
01:13:01,800 --> 01:13:05,800
उसका जो अपराधिक तत्व है या उसका जो शंकराचार्य जी के विरुद्ध जो उसकी

904
01:13:05,800 --> 01:13:09,800
चीजें है तब भेस बदलना पड़ेगा ना मगर इसको ऐसा

905
01:13:09,800 --> 01:13:14,480
कुछ करना ही नहीं है तो भेस क्यों बदले जब भेज नहीं बदलेंगे तो भेज बदलने का आरोप नहीं आएगा

906
01:13:14,480 --> 01:13:19,440
है ना

907
01:13:19,440 --> 01:13:24,320
मच नहीं बोलते मंच से मंच से गाली देकर दिखाओ

908
01:13:24,320 --> 01:13:28,160
मंच से ली दे के

909
01:13:28,160 --> 01:13:32,320
दिखाओ इसलिए तुमको राने जो तुम अपना

910
01:13:32,320 --> 01:13:38,320
सारा जीवन छुपाए हुए हो खुद को आचार्य कहते

911
01:13:42,480 --> 01:13:47,560
हो तो गुरुदेव पर तिग करने

912
01:13:47,560 --> 01:13:52,040
लगते तो गुरुदेव पर ति टी करने लगते क्या क शंकरा

913
01:13:52,040 --> 01:13:56,640
चरित्र राब ऐसा क दिए शंकराचार्य अस नहीं री

914
01:13:56,640 --> 01:14:00,760
शंकराचार्य जी के लिए तुमने काफी उपास वाली चीजें फिर

915
01:14:00,760 --> 01:14:04,920
वही रिपीट रिपीट हो रही है आगे बात करें आधार

916
01:14:04,920 --> 01:14:09,200
श उसके साथ नहीं ली नहीं कर रहे थे अ

917
01:14:09,200 --> 01:14:13,440
नहीं आ जो कते अरे भाई शास्त्र प्रमाण

918
01:14:13,440 --> 01:14:17,920
की बात से इतर तुमने उनका खूब मजाक उड़ाया है ठीक है

919
01:14:17,920 --> 01:14:22,040
यह बातें मत करो ज्यादा सीधे मत बनो जो हो वही रहो

920
01:14:22,040 --> 01:14:28,040
कोई नहीं है ऐसा तो संभव ही नहीं है शरा

921
01:14:41,000 --> 01:14:43,240
ता

922
01:14:43,240 --> 01:14:48,520
को देता तना

923
01:14:48,520 --> 01:14:54,520
बता उस नहीं

924
01:14:55,640 --> 01:14:59,800
राम शब्द इनके लिए पर्याप्त नहीं है यह इनकी प्रस्तुतिकरण है बड़ा

925
01:14:59,800 --> 01:15:03,880
भारी भयंकर मगर उसमें इनका जो मर्म यह है कि राम शब्द

926
01:15:03,880 --> 01:15:08,480
जो है इनके लिए पूर्ण नहीं है उसको अन्य शब्दों की आवश्यकता भी है

927
01:15:08,480 --> 01:15:12,520
देखिए अपने रस गत भेद हो सकते हैं कि कोई श्री लगा के ही करे

928
01:15:12,520 --> 01:15:16,720
मगर कोई अगर यह कहने लगे कि राम शब्द पूर्ण नहीं है तोय इसकी

929
01:15:16,720 --> 01:15:22,720
वितना नहीं है तो और क्या है इसको क्या ही

930
01:15:22,760 --> 01:15:27,440
कहे तुम राम श की व्याख्या नहीं लो वहार की चर्चा कर रहे हो

931
01:15:27,440 --> 01:15:31,480
केवल राम ही बोलते े कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन एक ही सा तु प्रभुपाद

932
01:15:31,480 --> 01:15:36,360
जी और दयानंद जी बोलने के बाद राम क रहे य पर

933
01:15:36,360 --> 01:15:41,440
बो राम राम राम राम राम राम राम जते कोई दिक्त नहीं राम श की व्या

934
01:15:41,440 --> 01:15:45,840
करते सिद्धांत इस विषय में सिद्धांत दो

935
01:15:45,840 --> 01:15:50,000
इस विषय में सिद्धांत दो कि अगर वहां पर किसी के लिए हमने जी

936
01:15:50,000 --> 01:15:54,080
लगा दिया है फिर भले ही वो शब्द अपने आप में पूर्ण हो उसे अलग से कोई

937
01:15:54,080 --> 01:15:58,280
वो चीज की ना हो वहां पर राम कहना आपत्ति जन

938
01:15:58,280 --> 01:16:02,280
सिद्धांत दो इसम तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य के विषय

939
01:16:02,280 --> 01:16:06,640
में जहा शास्त्र देने होते व नहीं देते हो व गोल मोल करते हो बात व मनमुक

940
01:16:06,640 --> 01:16:12,640
बातें करते हो सिद्धांत दो

941
01:16:23,920 --> 01:16:28,160
ऐसा को रासकल कहने वाले प्रभुपाद को जी कह रहा है लेकिन उसी बाद सास

942
01:16:28,160 --> 01:16:32,160
बिना क्योंकि जैसे तुम बताते हो कि अगर हमने ये किया है वो किया

943
01:16:32,160 --> 01:16:36,280
तो ये भी तो किया है तो प्रभुपाद जी ने ही कपाती जी को अपने यहां

944
01:16:36,280 --> 01:16:40,320
बुलाया भी था मंदिर में उद्घाटन में गए

945
01:16:40,320 --> 01:16:44,680
नहीं थे वो फिर अखंडानंद जी गए थे क्या करें

946
01:16:44,680 --> 01:16:49,200
तुम भी तो यही कह रहे हो ना कि हमने अगर यहां विरोध किया वहां विरोध किया तो हमने समर्थन भी तो किया

947
01:16:49,200 --> 01:16:53,640
तो हम तुम्हारे लिए क्यों इतने वो हो गए और वैसे भी वो

948
01:16:53,640 --> 01:16:58,440
हीनता की दृष्टि से नहीं कहा था कि तुम जो है हमारे लिए अछूत हो गए

949
01:16:58,440 --> 01:17:02,440
सम्मान ही था इसीलिए कहा था क्योंकि हम तुम्हारे साथ लड़ना

950
01:17:02,440 --> 01:17:06,480
नहीं चाहते थे दुनिया को दिखाना नहीं चाहते थे शिवांश द्वेदी भगतान लड़

951
01:17:06,480 --> 01:17:10,640
रहे हैं मर एक बात तो तुम्हारी संकीर्ण विचारधारा में घुसी नहीं तुम

952
01:17:10,640 --> 01:17:14,920
अपने अहंकार के नशे में चूर अच्छा दूसरी बात ये

953
01:17:14,920 --> 01:17:19,360
है कि प्रभुपाद जी ने ही

954
01:17:19,360 --> 01:17:23,560
कहीं पर ऐसा वक्तव्य भी दिया है कृपा जी जो है वो

955
01:17:23,560 --> 01:17:28,280
बहुत बड़े स्कॉलर हैं तो ये उनका समर्थन नहीं

956
01:17:28,280 --> 01:17:30,800
है

957
01:17:30,800 --> 01:17:34,880
सा राम ने कहा राम किया अभी भी कहूंगा अभी मैं

958
01:17:34,880 --> 01:17:39,960
कहूंगा तुम राम को नहीं

959
01:17:39,960 --> 01:17:44,320
मानते चापलूसी तुम्हारी है चापलूसी

960
01:17:44,320 --> 01:17:48,360
तुम्हारी है जो तुम यहां पर कुछ होते हो बंद कमरे

961
01:17:48,360 --> 01:17:52,640
में और वहां दूसरों के सामने जब वहां जाते हो सब भ्रांत जग

962
01:17:52,640 --> 01:17:58,640
लोगों के बीच में तो दूसरे हो जाते हो यह तो रा दोगलापन

963
01:18:14,120 --> 01:18:18,480
चापलूसी अब यह भाई साहब यह कह रहे हैं चापलूसी ठीक

964
01:18:18,480 --> 01:18:24,480
है तो यह श्री राम भगवान है जो

965
01:18:52,840 --> 01:18:58,760
यह देखो लूसी की बात

966
01:18:58,760 --> 01:19:02,960
करते अगर यह राज राम भी होते ना यहां पर तो य यह व्यक्ति

967
01:19:02,960 --> 01:19:08,960
ऐसा निर्लज है ऐसा पापी है कि उनमें भी दोष

968
01:19:10,680 --> 01:19:15,000
निकालता यह देख देखो

969
01:19:15,000 --> 01:19:19,320
जब रावण का वध हो गया अब यहां पर ऐसे कहेगा भगतान जिसने

970
01:19:19,320 --> 01:19:23,440
इसकी स्त्री पर कुदृष्टि डाली जिसने इतनी

971
01:19:23,440 --> 01:19:27,440
स्त्रियों के साथ बला कार किया और यह

972
01:19:27,440 --> 01:19:31,520
व्यक्ति अगर श्रीराम यहां हो तो और यह व्यक्ति

973
01:19:31,520 --> 01:19:37,520
ऐसे व्यक्ति के लिए इतना गुणगान कर रहा है देखो क्या कर

974
01:19:44,160 --> 01:19:50,160
र देखो क्या कह रहे

975
01:19:52,880 --> 01:19:58,400
हैं श्री राम ने कहा यह

976
01:19:58,400 --> 01:20:02,760
रावण समरांगन में असमर्थ होकर नहीं मारा गया

977
01:20:02,760 --> 01:20:06,840
इसने प्रचंड पराक्रम प्रकट किया है इसका उत्साह

978
01:20:06,840 --> 01:20:10,880
बहुत बड़ा हुआ था इसे मृत्यु से कोई भय नहीं था यह

979
01:20:10,880 --> 01:20:14,920
देवात ण भूमि में धराशाई धराशाई हुआ है जो लोग अपने

980
01:20:14,920 --> 01:20:19,160
अभ्युदय की इच्छा से क्षत्रिय धर्म में स्थित हो समरांगन

981
01:20:19,160 --> 01:20:23,320
में मारे जाते हैं इस तरह नष्ट होने वाले लोगों के विषय में शोक

982
01:20:23,320 --> 01:20:27,600
नहीं करना चाहिए जिस बु मान वीर ने इंद्र सहित तीनों लोगों को युद्ध

983
01:20:27,600 --> 01:20:31,600
में भयभीत कर रखा था वही यदि इस समय काल के अधीन

984
01:20:31,600 --> 01:20:35,680
हो गया तो उसके लिए शोक करने का अवसर नहीं है ये क्या कर रहे हैं श्री राम

985
01:20:35,680 --> 01:20:39,920
जी यहां रावण की महिमा का गान

986
01:20:39,920 --> 01:20:44,320
कर रहे हैं श्री राम जी युद्ध में किसी को सदा विजय ही विजय मिले

987
01:20:44,320 --> 01:20:48,640
ऐसे पहले भी कभी नहीं हुआ है वीर पुरुष संग्राम में या तो शत्रुओं

988
01:20:48,640 --> 01:20:52,680
द्वारा मारा जाता है या स्वयं ही शत्रुओं को मार गिराता है

989
01:20:52,680 --> 01:20:57,040
आज रावण को जो गति प्राप्त हुई है यह पूर्व काल के महापुरुषों द्वारा

990
01:20:57,040 --> 01:20:59,320
बताई गई उत्तम गति है

991
01:20:59,320 --> 01:21:03,640
यह सब उनकी महिमा में यह क्षत्रिय

992
01:21:03,640 --> 01:21:08,120
वृति से रहने वाला वीर पुरुष यदि युद्ध में मारा गया तो वह शोक के योग्य नहीं है

993
01:21:08,120 --> 01:21:12,280
यही शास्त्र का विधान है सिद्धांत है शास्त्र के निश्चय पर विचार

994
01:21:12,280 --> 01:21:16,480
करके सात्विक बुद्धि का आश्रय ले तुम निश्चिंत हो जाओ अब आगे जो कुछ भी

995
01:21:16,480 --> 01:21:20,640
है इस तरह से इन्होंने यहां रावण की बढ़ाई

996
01:21:20,640 --> 01:21:24,720
की अब ये यहां क्या कहेगा यह व्यक्ति अरे जिसने इसकी

997
01:21:24,720 --> 01:21:28,840
स्त्री का वो किया हरण किया उस पर कुदृष्टि डाली

998
01:21:28,840 --> 01:21:33,200
अयोध्या की गरिमा को भंग करना चाहा अरे दादा

999
01:21:33,200 --> 01:21:37,480
रे अरे जिसने इतनी स्त्रियों के साथ बलात्कार किया

1000
01:21:37,480 --> 01:21:41,720
उसके लिए उसके लिए हाय हाय हाय

1001
01:21:41,720 --> 01:21:46,920
उसके लिए राम ऐसा कर रहा है यह वो निर्लज

1002
01:21:46,920 --> 01:21:50,960
है यह वो निर्लज इनको ड्रामा करना

1003
01:21:50,960 --> 01:21:55,160
आता है केवल ड्रामा मगर ये नहीं पता कि ड्रामे में भी हम तुम

1004
01:21:55,160 --> 01:21:59,240
जहां से ड्रामा सीख के आए हो ना जि स्कूल से तुमने ड्रामे

1005
01:21:59,240 --> 01:22:03,320
की क्लासेस ली है उस स्कूल के प्रिंसिपल हमसे आके ट्यूशन लेते

1006
01:22:03,320 --> 01:22:09,320
समझे

1007
01:22:45,960 --> 01:22:51,960
अरे भाई जब वो सामने से बुला रहा देखलो य य व्यक्ति फिर फस रहा है

1008
01:22:54,840 --> 01:22:59,640
क्या कहा जा रहा है ये क्या बात हुई

1009
01:22:59,640 --> 01:23:03,840
भाई जी नहीं तो रिस्पेक्ट नहीं यह व्यक्ति यहां पर फिर

1010
01:23:03,840 --> 01:23:08,440
जो है उस पर खेल रहा है क्या कहते हैं बच रहा

1011
01:23:08,440 --> 01:23:12,480
है जब उन्होंने तुम्हें सामने से वार्ता के लिए

1012
01:23:12,480 --> 01:23:16,600
बुलाया है तो क्या कायर हो क्या निग्रह का सामर्थ्य नहीं है

1013
01:23:16,600 --> 01:23:20,720
क्या क्यों नहीं जा रहे हो हमने कितनी बार उस पर वक्तव्य

1014
01:23:20,720 --> 01:23:24,720
दिया है इसका मतलब केवल एक तरफ से वक्तव्य दे दे

1015
01:23:24,720 --> 01:23:28,800
हो जाता है शास्त्रार्थ नहीं करना चाहिए चर्चा की कोई आवश्यकता नहीं

1016
01:23:28,800 --> 01:23:32,960
है क्यों नहीं गए अब क्या करें जा एक एक व्यक्ति

1017
01:23:32,960 --> 01:23:37,080
को पस पकड़ बोले एक एक व्यक्ति नहीं है ना वो

1018
01:23:37,080 --> 01:23:41,920
उस परे तुमने वक्तव्य दिए है ना वो तुम्हें शास्त्रार्थ के लिए ललकार रहा है ना

1019
01:23:41,920 --> 01:23:46,000
करो शास्त्रार्थ ना एक एक व्यक्ति क्यों अरे एक संप्रदाय एक व्यक्ति

1020
01:23:46,000 --> 01:23:50,120
सही कर लो अगर वह कह रहा है तो 50 बहाने करके

1021
01:23:50,120 --> 01:23:54,160
नहीं जाऊंगा व है ना 10 बहाने करके ले

1022
01:23:54,160 --> 01:24:00,160
गई दिल तो ये 50 बहाने करके नहीं [हंसी]

1023
01:24:00,600 --> 01:24:04,760
जाऊंगा ऐ नहीं

1024
01:24:04,760 --> 01:24:07,360
होता

1025
01:24:07,360 --> 01:24:12,040
हा तो मेरे ख्याल से अब तुम मेरे सामने भी नहीं आओगे मुझे लगता है

1026
01:24:12,040 --> 01:24:16,120
क्योंकि तुमको समझ में आ गया होगा हल्के में नहीं लेना

1027
01:24:16,120 --> 01:24:18,560
शिवांश

1028
01:24:18,560 --> 01:24:23,320
कोसा क्या रामानंद

1029
01:24:23,320 --> 01:24:27,560
संप्रदाय अरे भाई तुम उसके सामने जाओ ना वो व्यक्ति तुम्हें बुला रहा

1030
01:24:27,560 --> 01:24:31,720
है रामानंद संप्रदाय से दीक्षित है वो व्यक्ति तुम्हें बुला रहे हैं

1031
01:24:31,720 --> 01:24:35,960
क्यों नहीं जा रहे हो कहां गई तुम्हारी वो निग्रह

1032
01:24:35,960 --> 01:24:40,560
चार की सामर्थ बहानेबाजी देख लो भाई नोट कर लो

1033
01:24:40,560 --> 01:24:44,720
इनकी जो फिफ्थ लाइव है उसमें एक 40 के आसपास इनकी बहानेबाजी

1034
01:24:44,720 --> 01:24:48,880
देखो शास्त्रार्थ के लिए कोई ललकार रहा है तो उसमें क्या कह रहे हैं कि हमने

1035
01:24:48,880 --> 01:24:53,000
जो वक्तव्य देना था दे दिया अब क्या करें एक एक व्यक्ति के पास ऐसे

1036
01:24:53,000 --> 01:24:57,320
ऐसे करें क्या बात वो एक एक व्यक्ति हो गया

1037
01:24:57,320 --> 01:25:01,520
उसको सुनिए उनको सुनिए किसी

1038
01:25:01,520 --> 01:25:07,520
दिन लाएंगे लाइव में तुम नहीं जाओगे और रे धागे जरूर खोलेंगे

1039
01:25:09,440 --> 01:25:15,440
बता ऐसा है क्या

1040
01:25:41,000 --> 01:25:45,680
रावा के मच पर उस समय बा

1041
01:25:45,680 --> 01:25:49,680
राघवाचार्य जी के मंच पर हम गए थे उस राघवाचार्य जी के मंच पर

1042
01:25:49,680 --> 01:25:53,840
जाने का मतलब है राघवाचार्य जी के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध प्रदर्शित

1043
01:25:53,840 --> 01:25:56,400
करना

1044
01:25:56,400 --> 01:26:00,400
मंच से हम उनको बहुत क शव कि

1045
01:26:00,400 --> 01:26:06,400
जिसकी वी

1046
01:26:16,880 --> 01:26:20,960
भी और यही बता दूम ग लिख

1047
01:26:20,960 --> 01:26:25,760
रहा सारे पाख राम गु सारे सबकी फो

1048
01:26:25,760 --> 01:26:29,800
खले लोग समझ रहे अरे तुम अपना एक

1049
01:26:29,800 --> 01:26:34,480
पक्ष क्यों रख रहे हो तुम जाओ ना पहले शास्त्रार्थ के लिए कोई बुला रहा है क्यों नहीं गए

1050
01:26:34,480 --> 01:26:38,640
भाई नहीं कर रहा मैंने कितनी चीज बताई है कि तुमने

1051
01:26:38,640 --> 01:26:42,680
कहा कि व अशा स्त्रीय व्यक्ति है उसके आचरण अशा स्त्री है तो

1052
01:26:42,680 --> 01:26:47,400
फिर मैंने बताया भैया उसी को तो तुम्ह निग्रह करना है निग्रह चार हो ना तुम

1053
01:26:47,400 --> 01:26:51,720
निग्रह करो जाकर के उसके आचरण को और तुम मेरे जैसे पतित

1054
01:26:51,720 --> 01:26:55,800
व्यक्ति के पास आ सकते हो मेरे जैसे पतित व जिसका ज लेट हुआ यह हुआ

1055
01:26:55,800 --> 01:27:00,040
व हुआ मुझसे तो कई मामलो में ही होंगे

1056
01:27:00,040 --> 01:27:06,040
मेरे पास आने के लिए जब तैयार हो रहे हो तो उनके पास जाने में क्या दिक्कत हो रही है

1057
01:27:31,680 --> 01:27:35,080
आ प्रकार से

1058
01:27:35,080 --> 01:27:41,080
हमने के में

1059
01:27:41,120 --> 01:27:47,120
अकेले

1060
01:27:48,160 --> 01:27:54,160
हम और

1061
01:27:57,360 --> 01:28:02,760
काम

1062
01:28:02,760 --> 01:28:07,360
होगा देखो यहां पर हमने इनको तर्क दिया प्रमाण के साथ

1063
01:28:07,360 --> 01:28:11,680
कि जिसने श्री राम की पत्नी का हरण कर रखा था

1064
01:28:11,680 --> 01:28:16,120
उसके पास भी श्री राम ने अंगत को भेजा था वार्ता के लिए

1065
01:28:16,120 --> 01:28:22,120
तो य इन्होने कोई जवाब नहीं दिया आगे बढ़ गए जवाब है नहीं इसलिए

1066
01:28:24,240 --> 01:28:28,280
ऐसा लगता है जब तक हम नहीं ऐसा तो

1067
01:28:28,280 --> 01:28:32,280
नहीं है ना कर रहा नहीं एक एक

1068
01:28:32,280 --> 01:28:36,600
व्यक्ति के लिए क्यों भाई जब तुम राजेंद्र दास जी महाराज को इतना बोल रहे हो तो उनका कोई

1069
01:28:36,600 --> 01:28:40,720
कृपा पात्र शिष्य है जो प्रमाणिक शिष्य है वो तुमको बुला रहा है तो क्यों नहीं जा रहे हो

1070
01:28:40,720 --> 01:28:45,240
वो एक एक व्यक्ति नहीं सामान्य व्यक्तियों में क्यों गिन रहे हो उसको

1071
01:28:45,240 --> 01:28:49,280
सामान्य से हटके हैं वो क्यों गिन रहे हो एक एक व्यक्ति बल्कि मैं सामान्य में

1072
01:28:49,280 --> 01:28:53,520
अवश्य हो सकता हूं सामान्य यूट्यू कह सकते हो तुम्हारे

1073
01:28:53,520 --> 01:28:57,520
हिसाब से मैं उ उस रूप में अपने आप को ख्या पित

1074
01:28:57,520 --> 01:29:03,520
नहीं करता और तुम्हारे हिसाब से तो मैं बहुत गया भी उनके आगे

1075
01:29:07,600 --> 01:29:11,440
तोमने

1076
01:29:11,440 --> 01:29:15,640
वा बता दो तो लाइव में बात कर लो उनके साथ लाइव चर्चा करवा देते

1077
01:29:15,640 --> 01:29:19,800
हैं संपर्क कर लेंगे लाइव लाइव जाओगे उनके साथ सनमार्ग वाले

1078
01:29:19,800 --> 01:29:24,200
बुला रहे हैं सनमार्ग वाले कह रहे उनको चुनौती दोगे

1079
01:29:24,200 --> 01:29:28,240
को बोल दे कि तुमने चुनौती दी है बता दो सन्मार्ग वाले हैं

1080
01:29:28,240 --> 01:29:32,480
जो आचार्य श्री जो इनका सबरी माला प इनकी खूब बैंड बजाई है

1081
01:29:32,480 --> 01:29:36,920
वो भी इनको बुलाते हैं मुझे असल में इनका सबरी वाला पक्ष पता ही नहीं है

1082
01:29:36,920 --> 01:29:41,160
तो मैं क्या बोलू उस पहले पक्ष तो बताओ इनका हमने खंडन

1083
01:29:41,160 --> 01:29:45,440
कर दिया हमने खंडन कर दिया तब किया क्योंकि उन आचार्यों ने अपनी जो बात थी वो सार्वजनिक

1084
01:29:45,440 --> 01:29:49,440
की सुलभ सुलभ की लोगों के लिए तभी तो कोई पड़ेगा तुमने कहां लिखा है

1085
01:29:49,440 --> 01:29:54,240
क्या लिखा है बताया ही नहीं है तुमने

1086
01:29:54,240 --> 01:30:00,240
सार्वजनिक करो उसे सुलभ करो

1087
01:30:01,880 --> 01:30:07,880
सुलभ अति कम सं

1088
01:30:10,970 --> 01:30:16,970
[हंसी]

1089
01:30:30,280 --> 01:30:34,480
पता भी है आनंद के विषय में इसको पता भी बत्र के देवता

1090
01:30:34,480 --> 01:30:40,480
क्या लिखा है पता नहीं टप पता

1091
01:30:50,000 --> 01:30:55,640
नहीं मतलब इन्होने एक चीज क्लियर कर दी है

1092
01:30:55,640 --> 01:31:00,400
उन्होने एक चीज क्लियर कर दी है कि हम जो ये बोलते थे

1093
01:31:00,400 --> 01:31:04,400
कि भाई ये धरातल पर कुछ करने नहीं जाते कुछ करने नहीं जाते तो इनका इनकी एक

1094
01:31:04,400 --> 01:31:10,400
चीज क्लियर है यह वीडियो बना के वक्तव्य जारी करते

1095
01:31:11,480 --> 01:31:16,120
रहेंगे इनके किसी भी प्रकार के जो

1096
01:31:16,120 --> 01:31:21,840
प्रकल्प है व कभी आपको देखने को नहीं मिल

1097
01:31:21,840 --> 01:31:27,840
सकते है ना एक मिनट

1098
01:31:57,080 --> 01:32:01,080
तो एक चीज इन्होंने क्लियर कर दी कि ये इसी तरह से वक्तव्य दे

1099
01:32:01,080 --> 01:32:05,320
सकते हैं य धरातल पर कुछ साहस पूर्ण कार्य करते हुए नहीं दिख सकते

1100
01:32:05,320 --> 01:32:09,520
यहीं पर बकब बकती दिखाएंगे बंद कमरे में वह भी बैठ

1101
01:32:09,520 --> 01:32:13,680
कर के जब भाषण देने जाएंगे जब वहां जाएंगे कथा वाचन

1102
01:32:13,680 --> 01:32:18,040
के लिए तो वहां पर भीय कुछ नहीं बोलेंगे ये यही बकैती अपनी दिखाएंगे बंद

1103
01:32:18,040 --> 01:32:24,040
कमरे में बैठकर

1104
01:32:28,560 --> 01:32:34,560
अब इसम क्या ही बोलू

1105
01:32:46,810 --> 01:32:52,810
[हंसी]

1106
01:33:21,440 --> 01:33:26,680
क्या का कहना है साथ चर्चा करने जा रहे

1107
01:33:26,680 --> 01:33:31,360
हैं तो जिनके साथ चर्चा करने से भाग रहे हैं

1108
01:33:31,360 --> 01:33:35,960
तो इनका कहना है कि वह फलाने ग्रंथ को नहीं मानता अरे भाई तो तुम मनवा हो ना

1109
01:33:35,960 --> 01:33:40,160
जैसे हम जैसे आर्य समाजी पुराण को नहीं मानते तो

1110
01:33:40,160 --> 01:33:44,240
हम जब जाते हैं तो वहा पुराण को मनवाने के लिए तर्क प्रस्तुत करते हैं ना

1111
01:33:44,240 --> 01:33:48,680
हम तो मुसलमान को वे वेद को मनवाने के लिए तर्क प्रस्तुत कर देंगे

1112
01:33:48,680 --> 01:33:52,960
हम उसको वो आर्गुमेंट देंगे ना कि तुमको वेद को क्यों मानना है अगर

1113
01:33:52,960 --> 01:33:56,960
व्यक्ति पहले ही निष्ठावान होना होना चाहिए तुम्हारे मंतव्य

1114
01:33:56,960 --> 01:34:01,040
में तो बात ही क्या है आप उसको जो सही चीज है

1115
01:34:01,040 --> 01:34:01,880
तुम्हारे अनुसार वो

1116
01:34:01,880 --> 01:34:05,920
नहीं मानता तो मनवा ना यह बात यहां पर य

1117
01:34:05,920 --> 01:34:11,920
जो है भाग रहे हैं और कुछ

1118
01:34:19,200 --> 01:34:23,800
नहीं भाई लाइव लाइव चल किस पर रही है कि तुम्हारे

1119
01:34:23,800 --> 01:34:27,800
वक्तव्य को सुन रहा हूं और यहां पर मैं जवाब दे रहा हूं तो मैं उस किसी और वीडियो को

1120
01:34:27,800 --> 01:34:32,040
वहां पर दिखाने की कोई बात है क्या ऐसी वहां पर दूसरी बात

1121
01:34:32,040 --> 01:34:36,400
अगर कोई दिक्कत है कोई किसी ग्रंथ को नहीं मानता है जो आपके अनुसार

1122
01:34:36,400 --> 01:34:41,200
सही ग्रंथ है जाकर वहां एक सही आर्गुमेंट पेश करो ना उसको

1123
01:34:41,200 --> 01:34:45,240
इसलिए जाओ तो तुमने कहा कि हम जाएंगे नहीं क्योंकि वह ग्रंथ को नहीं मानता

1124
01:34:45,240 --> 01:34:49,640
है प्रमाणिक यह कौन सी बात है भाई हमको कोई मुस्लिम बुला ले हम तो जाएंगे

1125
01:34:49,640 --> 01:34:54,520
क्रिश्चन बुला ले हम तो जाएंगे कन वाला बुला ले हम तो जाएंगे

1126
01:34:54,520 --> 01:34:58,520
हां व ऐसा व्यक्ति हो ऐसे नहीं कोई गली का लुचा कोई बुला ले

1127
01:34:58,520 --> 01:35:02,560
ऐसा व्यक्ति हो जिससे जनता प्रभावित हो रही हो अन्यथा व हमारे

1128
01:35:02,560 --> 01:35:08,560
लाइफ पर आए ठीक

1129
01:35:08,560 --> 01:35:14,560
है चालू करते हैं फिर यह वाली करके और

1130
01:35:27,720 --> 01:35:32,740
इस बात का इस बात

1131
01:35:32,740 --> 01:35:38,740
[हंसी]

1132
01:35:40,720 --> 01:35:46,720
काने कब कहा शंकराचार्य नहीं

1133
01:35:59,600 --> 01:36:02,600
में शक

1134
01:36:02,600 --> 01:36:08,600
केने इस बात का उत्तर हम दे चुके

1135
01:36:18,080 --> 01:36:24,080
हैं प्रकार

1136
01:36:50,960 --> 01:36:54,960
मिलया देवताओ से मिला हुआ दंड कैसे हो गया विश्वासघात

1137
01:36:54,960 --> 01:36:59,200
से देवताओं की कृपा है निग्रह चार्य है निग्रह

1138
01:36:59,200 --> 01:37:03,920
संप्रदाय य दंड नष्ट कैसे हो रहा

1139
01:37:03,920 --> 01:37:07,960
है दंड जो है परंपरा से मिल रहा है कि अपने मनमुक कोई भी बना ले

1140
01:37:07,960 --> 01:37:12,840
रहा

1141
01:37:12,840 --> 01:37:17,040
है देखो शास्त्रीय उदाहरण है व आपको प्रवेशिका में मिलेगा देखो

1142
01:37:17,040 --> 01:37:21,360
व्यक्ति जब अपनी चीज पर आ रहा तो कैसे बचता है इसमें कुछ शास्त्रीय उदाहरण

1143
01:37:21,360 --> 01:37:25,640
आपको प्रवेशिका मिलेगा बस और प्रवेशिका जब आएगी तब आएगी मगर

1144
01:37:25,640 --> 01:37:31,640
प्रमाणिक इनको अभी से मान लो और प्रमाणिक के रूप में कहेंगे क्या कुछ

1145
01:37:43,720 --> 01:37:48,000
नहीं संप्रदाय का तिलक लगाओगे कि नहीं लगाओगे भाई

1146
01:37:48,000 --> 01:37:52,040
संप्रदाय का तिलक क्यों बदलो ग परंपरा परंपरा भी

1147
01:37:52,040 --> 01:37:57,880
तो कुछ काम की है

1148
01:37:57,880 --> 01:38:03,880
बताओगे तब ना तुम तो प्रवेशिका कर देते हो हर

1149
01:38:07,640 --> 01:38:12,440
बार तुम बताओ ना तुम अपनी चीजें प्रस्तुत तो

1150
01:38:12,440 --> 01:38:16,640
करो प्रस्तुत का कर रहे हो तुम तो प्रवेशिका प्रवेशिका कर रहे हो आज तुमसे

1151
01:38:16,640 --> 01:38:20,640
पूछ लिया तो तुम बोल लो हो बताओ तो

1152
01:38:20,640 --> 01:38:24,720
अपने बारे में भाई चोर बन के ते रहोगे कुछ बताओगे नहीं

1153
01:38:24,720 --> 01:38:28,920
अपने बारे में तो कोई क्या करेगा बताओ आपका

1154
01:38:28,920 --> 01:38:33,160
जो दंड है वो पहले कैसे आया आपका गुरु परंपरा का दंड है अपने आप बनाया

1155
01:38:33,160 --> 01:38:37,320
हुआ दंड है बैट बल के बैट

1156
01:38:37,320 --> 01:38:43,320
सेही तो नहीं बना दिया

1157
01:38:46,120 --> 01:38:52,120
है देखो

1158
01:38:59,080 --> 01:39:03,560
अरे देवता दर्शन दे सकते हैं कलयुग में उस वाला में पूछ गया

1159
01:39:03,560 --> 01:39:08,160
मने में

1160
01:39:08,160 --> 01:39:13,600
हु आरहा

1161
01:39:13,600 --> 01:39:17,720
है देवता के दर्शन तुमको बचपन

1162
01:39:17,720 --> 01:39:21,760
से हो रहे हैं ना सात आ वर्ष की आयु से देवताओं के दर्शन हो

1163
01:39:21,760 --> 01:39:27,760
रहे हैं ना तो फिर 2017 में क्यों जा रहे हो

1164
01:39:30,500 --> 01:39:36,500
[संगीत]

1165
01:39:37,040 --> 01:39:39,800
पूछने

1166
01:39:39,800 --> 01:39:44,200
मने

1167
01:39:44,200 --> 01:39:49,560
हु सुनो तुमने अपने खुद के उसम कहा

1168
01:39:49,560 --> 01:39:53,480
है कि

1169
01:39:53,480 --> 01:39:58,080
जो मेरा वो मुझे जो है बचपन में सात आठ वर्ष की आयु से ही

1170
01:39:58,080 --> 01:40:02,280
देवताओं के दर्शन होते थे तब हम पूछ रहे कि भैया तुम 2000 यह 17

1171
01:40:02,280 --> 01:40:06,680
में जाने जो वर्ष है व जगतगुरु शंकराचार्य

1172
01:40:06,680 --> 01:40:12,680
जी महाराज के चरणों में बैठकर क्या पूछ रहे

1173
01:40:18,720 --> 01:40:23,040
हो अरे भैया तुम अपनी बुद्धि को थोड़ा ठीक करो तो

1174
01:40:23,040 --> 01:40:26,080
जो

1175
01:40:26,080 --> 01:40:32,080
साने

1176
01:40:36,000 --> 01:40:40,000
गु अरे भैया किसी को ऋषि और देवता सपने में

1177
01:40:40,000 --> 01:40:44,880
आकर उनको क्या कर रहे हैं वह एक अलग बात है और

1178
01:40:44,880 --> 01:40:49,000
तुम उनके पास प्रमाणिकता के लिए गए थे कि नहीं गए थे एक अलग बात

1179
01:40:49,000 --> 01:40:53,680
है और यह जो यह

1180
01:40:53,680 --> 01:40:58,280
तुमने बचपन में ही बचपन की सात आ वर्ष की आयु से देवताओं के दर्शन किए हैं

1181
01:40:58,280 --> 01:41:02,280
फिर भी तुम्हें शंकराचार्य के पास जाना पड़ रहा है य पता करने के लिए कि दर्शन दे सकते

1182
01:41:02,280 --> 01:41:08,280
हैं कि नहीं दे सकते यह अलग बात है इनको मिक्स मत

1183
01:41:11,960 --> 01:41:16,000
करो क्या आवश्यकता है तो अपने बारे में बता रहे हैं उनके साथ

1184
01:41:16,000 --> 01:41:20,600
ऐसा ऐसा हुआ तुम बता तुम्हारी चीज चमत्कार पर क्या

1185
01:41:20,600 --> 01:41:24,840
केवल तुम्हारे पीछे कुछ नहीं है बस मंत्र प्राप्त हुआ

1186
01:41:24,840 --> 01:41:29,160
तुम्ह चमत्कारिक तरीके से और क्या है तुम्हारे पीछे कुछ नहीं नथ

1187
01:41:29,160 --> 01:41:33,960
अभी प्रवेशिका लाओगे उसको देखना पोस्टमार्टम कर देंगे भाई ले आओ प्रवेशिका

1188
01:41:33,960 --> 01:41:39,960
लाओ प्रवेशिका कब ला रहे हो

1189
01:41:41,920 --> 01:41:46,440
क्या अरे भाई वो दिव्या भूति तो बाद में आ रही है ना

1190
01:41:46,440 --> 01:41:50,680
शंकराचार्य बन गए लोगों उन्होने शंकराचार्य मान लिया

1191
01:41:50,680 --> 01:41:54,760
यहां तुम निगरा चार्य बनने से पहले अपनी चीज दिला रहे हो हम

1192
01:41:54,760 --> 01:41:58,840
सपने में यह हुआ हमारे साथ ये हुआ बम बम बम बम बचपन से यह हो रहा वो हो रहा

1193
01:41:58,840 --> 01:42:02,840
है य तो तुम पहले अपने आप को ख्या पित कर रहे हो ना कि हम नि ग्रहा चार

1194
01:42:02,840 --> 01:42:07,360
है लुप्त संप्रदाय के गुप्ता

1195
01:42:07,360 --> 01:42:13,360
[संगीत]

1196
01:42:15,760 --> 01:42:20,080
चार बस आधे से ज्यादा निग्रह प्रवेशिका निग्रह

1197
01:42:20,080 --> 01:42:26,080
प्रवेशिका निग्रह प्रवेशिका यही चला बस

1198
01:42:53,560 --> 01:42:59,560
है औरन इस प्रमा तुको चाहिए तो

1199
01:43:03,520 --> 01:43:07,520
उस इसकी शकल देखना जरा भाई एक 54

1200
01:43:07,520 --> 01:43:11,840
47 पर 43 एक 43 से थोड़ा पहले कर

1201
01:43:11,840 --> 01:43:15,880
लेना ज अपनी बातें कमजोर बातें बताने पर आएगा य

1202
01:43:15,880 --> 01:43:20,200
व्यक्ति वहां पर कैसे फेस

1203
01:43:20,200 --> 01:43:24,440
होता है हालाकि वहां पर इस रूप में नहीं पर में हम प्रवेशिका में

1204
01:43:24,440 --> 01:43:28,440
बताएंगे बताओगे ना भैया तो अभी क्या कर रहे हो

1205
01:43:28,440 --> 01:43:33,320
परंपरा तुम्हारी ढीली है तुम परंपरा में कमजोर

1206
01:43:33,320 --> 01:43:37,680
हो परंपरा नहीं है तुम्हारे पास ठन

1207
01:43:37,680 --> 01:43:41,880
ठन गोपाल है इसीलिए बारबार कर रहे हो लाओ नहीं तो परंपरा

1208
01:43:41,880 --> 01:43:45,880
तुमको अभी वाणी से मालूम है कि नहीं तुम्हारी परंपरा पीछे कैसे

1209
01:43:45,880 --> 01:43:50,240
कनेक्टेड हो रही है बताओ मुझे कैसे कनेक्टेड हो रही है

1210
01:43:50,240 --> 01:43:54,720
उसका करें किया पांचा

1211
01:43:54,720 --> 01:43:58,800
ठीक है तो तुम क्या कर रहे हो कि पहले तुमने ठोक दिया कि परंपरा से हूं

1212
01:43:58,800 --> 01:44:03,000
मैं उसके बाद जाकर के शास्त्रों की वो ढूंढोगे यहां

1213
01:44:03,000 --> 01:44:07,080
यहां पर य लिखा है तो इसको मैं पेश कर दूं अभी नहीं पता क्या अभी

1214
01:44:07,080 --> 01:44:11,280
पता है कि नहीं तुम्हें तुम्हारी परंपरा तो क्यों प्रवेशिका तक रुक रहे हो बताओ अपने

1215
01:44:11,280 --> 01:44:17,280
व जगत की सृष्टि होने से अभी तक के गुरुओं के

1216
01:44:17,360 --> 01:44:21,640
नाम यही तो ल है ना देख लो परंपरा

1217
01:44:21,640 --> 01:44:25,800
निगरा चार्य की परंपरा देख लो जितनी बार परंपरा में बात आ रही

1218
01:44:25,800 --> 01:44:30,560
उतनी निग्रह प्रवेशिका में बात

1219
01:44:30,560 --> 01:44:34,600
करेंगे देख लो भैया कितनी बार बोलेंगे निग्रह

1220
01:44:34,600 --> 01:44:38,920
प्रवेशिका निग्रह प्रवेशिका यही बताने आए ना वीडियो में निग्रह प्रवेशिका

1221
01:44:38,920 --> 01:44:43,080
में बताऊंगा बहुत गजब की एक्टर हो भाई

1222
01:44:43,080 --> 01:44:47,320
पालतू की बातें खूब बोलो खूब इधर उधर की बातें झको

1223
01:44:47,320 --> 01:44:51,320
और जब परंपरा की बात आए तो यह करो प्रवेशिका में बताऊंगा प्रवेशिका

1224
01:44:51,320 --> 01:44:55,360
में बताऊंगा अरे जब प्रवेशिका में बताने वाले हो तो अभी से

1225
01:44:55,360 --> 01:44:59,400
क्यों अपने आप को निग्रह चार कह रहे हो निग्रह संप्रदाय बता रहे हो ें कोई बात होगी

1226
01:44:59,400 --> 01:45:03,440
ना जिसके कारण निग्रह संप्रदाय के बारे में पता है वो चीजें बताओ ना अपने

1227
01:45:03,440 --> 01:45:07,640
क्रमबद्ध से कि इनसे इनको विद्या मिली उनसे

1228
01:45:07,640 --> 01:45:11,960
उनको विद्या मिली उनसे उनको विद्या मिली बताओ

1229
01:45:11,960 --> 01:45:17,960
निग्रह प्रवेशिका यही है कुल दीपक

1230
01:45:20,950 --> 01:45:23,760
[हंसी]

1231
01:45:23,760 --> 01:45:29,760
ये सुनो ध्यान

1232
01:45:44,960 --> 01:45:50,960
से सुन

1233
01:46:06,560 --> 01:46:12,560
और

1234
01:46:14,480 --> 01:46:19,200
भगवान और

1235
01:46:19,200 --> 01:46:24,240
कलयुग भवान और भगवान

1236
01:46:24,240 --> 01:46:28,880
विराजमान प्रमाण तुमको चाहिए

1237
01:46:28,880 --> 01:46:33,600
तो वहा

1238
01:46:33,600 --> 01:46:39,280
पर उसका वणन त्र और जिस

1239
01:46:39,280 --> 01:46:41,600
मिलेगा

1240
01:46:41,600 --> 01:46:45,520
बताए भगवान

1241
01:46:45,520 --> 01:46:51,520
की पुरा में मिल जाएगी

1242
01:46:59,440 --> 01:47:05,440
बता

1243
01:47:05,560 --> 01:47:11,560
रहा की प्र

1244
01:47:17,600 --> 01:47:23,600
करते वि प्र

1245
01:47:43,560 --> 01:47:49,560
जी जी

1246
01:47:56,800 --> 01:48:02,800
नहीं

1247
01:48:16,040 --> 01:48:22,040
[संगीत]

1248
01:48:41,560 --> 01:48:45,720
जब तुम्हें पता है तुमने तुम निग्रह करने आए हो तो तुमने

1249
01:48:45,720 --> 01:48:49,720
किसी दोनों में से जब अलग अलग वो है मत आदि

1250
01:48:49,720 --> 01:48:53,720
शंकराचार्य के जन्म को लेकर के तो तुम क्यों नहीं जो जो मत गलत

1251
01:48:53,720 --> 01:48:58,440
है उसका खंडन कर देते हो निग्रह करने आए हो ना कर दो निग्रह

1252
01:48:58,440 --> 01:49:03,400
हमसे क्यों समीक्षा करवाना चाह रहे हो क्योंकि तुम

1253
01:49:03,400 --> 01:49:07,440
धर्म स्थापना नहीं नसता फैलाने आए हो हमें पता है

1254
01:49:07,440 --> 01:49:11,520
ना अपना समीक्षा करने से बचोगे अन्य मतो की वहां कह

1255
01:49:11,520 --> 01:49:12,020
दोगे सब

1256
01:49:11,880 --> 01:49:16,240
प्रणम में है अ हमसे कहोगे समीक्षा करो

1257
01:49:16,240 --> 01:49:22,240
शंकराचार्य की ले

1258
01:49:30,960 --> 01:49:35,120
रामानुजाचार्य जी का कथन सही है तो आदि शंकराचार्य जी

1259
01:49:35,120 --> 01:49:39,520
गलत आदि शंकराचार्य जी का कथन सही है तो रामानुजाचार्य जी गलत

1260
01:49:39,520 --> 01:49:43,880
आदि शंकराचार्य जी का कथन सही है तो जो मधुवा

1261
01:49:43,880 --> 01:49:48,640
चार्य जी उनका कथन गलत मधुवा चार्य जी का कथन सही है तो आदि शंकराचार्य जी का कथन

1262
01:49:48,640 --> 01:49:54,280
तुम अगर आदि शंकराचार्य जी वाले हो तो इनका निग्रह कब करो

1263
01:49:54,280 --> 01:49:58,840
कब किया तुमने निग्रह क्या तुम्हारे लिए सब रुचि पूर्ण नहीं

1264
01:49:58,840 --> 01:50:04,360
है बताना

1265
01:50:04,360 --> 01:50:08,560
मुझे चर्चा क्यों नहीं कर रहे हैं तुम क्यों नहीं कर रहे हो क्योंकि उत्तर

1266
01:50:08,560 --> 01:50:12,600
नहीं पता है या फिर तुम समीक्षा नहीं करना चाहते हो मनता नहीं लाना चाहते हो

1267
01:50:12,600 --> 01:50:16,720
क्यों नहीं समीक्षा कर रहे हो क्यों नहीं समीक्षा कर रहा

1268
01:50:16,720 --> 01:50:20,440
मचार भगवान

1269
01:50:20,440 --> 01:50:26,440
[प्रशंसा]

1270
01:50:27,520 --> 01:50:32,120
इसका जवाब दे चुके ब नर के बच्चे जान और

1271
01:50:32,120 --> 01:50:37,200
पर जब करते हैं क्या ऑस्ट्रेलिया कनाडा अमेरिका

1272
01:50:37,200 --> 01:50:42,320
जाने ब नाटक नाटक करवा

1273
01:50:42,320 --> 01:50:46,960
लो अब इसके लिए वो विषय आवश्यक नहीं रह गए

1274
01:50:46,960 --> 01:50:51,280
इसके लिए वो विषय आवश्यक नहीं है कि जो परिकर

1275
01:50:51,280 --> 01:50:56,120
है उन पर मैंने क्या आरोप लगाया वो सिद्ध होते है कि नहीं या

1276
01:50:56,120 --> 01:51:00,280
जो विजय श्री है उस पर मैंने क्या आरोप लगाया वो सिद्ध होते है कि

1277
01:51:00,280 --> 01:51:04,280
नहीं है ना इसके लिए वो विषय अब इंपॉर्टेंट नहीं है ये जब वहां

1278
01:51:04,280 --> 01:51:08,360
फस रहा है तो क्या कर रहा है साढ़े तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र छत्र का सिंहासन

1279
01:51:08,360 --> 01:51:12,560
का त्याग किया तो वहां पर बैठ क्यों गए चांदी का छत्र सिंहासन उससे

1280
01:51:12,560 --> 01:51:16,760
बैठ क्यों गए या फिर वह चारों चार पीठ है के पांच पीठ

1281
01:51:16,760 --> 01:51:21,600
है है ना वो कांची को पीठ मानते हैं कि नहीं मानते

1282
01:51:21,600 --> 01:51:25,640
यह सब इसके लिए मुख्य बिंधु है य क्यों है क्यों इंपॉर्टेंट बना

1283
01:51:25,640 --> 01:51:29,680
क्यों लाया बीच में क्योंकि इसके पक्ष वहां पर कमजोर था अब जब बीच में

1284
01:51:29,680 --> 01:51:33,880
लाया तो जैसे यह बोल रहा है कि वो दोनों दोनों एक है दो शंकराचार्य

1285
01:51:33,880 --> 01:51:38,360
में मत एक क्यों नहीं है यह है वो है तो यह निग्रह

1286
01:51:38,360 --> 01:51:42,600
वो यह जो है शोधन करना चाहता है जो नीच गुरु द्रोही है वह

1287
01:51:42,600 --> 01:51:46,760
सुने यह शोधन करना चाहता है यह पॉइंट उठा कर के

1288
01:51:46,760 --> 01:51:50,760
दोनों मतक क्यों नहीं है ये मट का शोधन कर रहा है

1289
01:51:50,760 --> 01:51:52,840
शंकर परंपरा का

1290
01:51:52,840 --> 01:51:56,840
वो कर रहा है या यह नष्ट कर रहा है परंपरा

1291
01:51:56,840 --> 01:52:01,560
के प्रति अनास्ता वान बना रहा है ना लोगों को यह करके

1292
01:52:01,560 --> 01:52:07,560
सुन लो वो गुरु द्रोही

1293
01:52:08,750 --> 01:52:14,750
[प्रशंसा]

1294
01:52:18,000 --> 01:52:22,000
नीच मेरे भाई धर्म और ब्रह्म की व्याख्या बदलने से फर्क क्या पड़ रहा

1295
01:52:22,000 --> 01:52:26,360
है वो सुन धर्म और ब्रह्म की व्याख्या नहीं बदलती है

1296
01:52:26,360 --> 01:52:30,560
जब किसी व्यक्ति को अलग-अलग धर्म और ब्रह्म की व्याख्या होती है

1297
01:52:30,560 --> 01:52:34,760
तो नए नए मत पंथ संप्रदाय बनते हैं आर्य समाज कौन

1298
01:52:34,760 --> 01:52:38,840
जैसे रामपाल जैसे और यदि धर्म ब्रह्म की व्याख्या नहीं बदल

1299
01:52:38,840 --> 01:52:42,960
रही है विशेष तौर पर धर्म की व्याख्या नहीं बदल रही तो धर्म

1300
01:52:42,960 --> 01:52:47,160
सबका एक होने के कारण सब लोग एकजुट हो जाते हैं

1301
01:52:47,160 --> 01:52:51,480
एक ही काम करना है एक ही तरीके से करना है तो जितने

1302
01:52:51,480 --> 01:52:55,680
भी जितने भी वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाले परंपरा प्राप्त

1303
01:52:55,680 --> 01:52:59,680
आचार्य को मानने वाले लोग है व ऐसे

1304
01:52:59,680 --> 01:53:03,680
ही अगर वह इस पर आ जाएंगे तो हम सब एक हो जाएंगे तो

1305
01:53:03,680 --> 01:53:07,760
इसलिए हम उस बात को उठाते जिस पर हम एक हो सकते हैं नहीं

1306
01:53:07,760 --> 01:53:08,260
तो

1307
01:53:07,840 --> 01:53:12,160
बहुत सी बातें मनता फैलाने वाली और

1308
01:53:12,160 --> 01:53:16,560
धर्म और ब्रह्म की व्याख्या बदलने का मतलब नहीं है तात्विक रूप से व्याख्या बदल गई

1309
01:53:16,560 --> 01:53:20,840
धर्म ब्रह्म की व्याख्या बदलने का मतलब यह है कि अगर किसी

1310
01:53:20,840 --> 01:53:25,280
को जैसे कि वाली बात आती है कि अ मुक्तेश्वर जी शंकराचार्य है

1311
01:53:25,280 --> 01:53:29,560
कि नहीं अगर वो शंकराचार्य नहीं होंगे तो वो क्या दूसरी

1312
01:53:29,560 --> 01:53:33,840
शिक्षा देंगे शंकर मत के विपरीत शिक्षा देंगे या वेदों में प्रमाण

1313
01:53:33,840 --> 01:53:37,960
बुद्धि ना रखने वाली शिक्षा देंगे शिक्षा तो वही मिलेगी तो जब शिक्षा

1314
01:53:37,960 --> 01:53:42,280
वही मिलेगी तो उनको मानने वाला उनको फॉलो करने वाला उनके अनुग

1315
01:53:42,280 --> 01:53:46,680
उनका शिष्य वो शंकराचार्य के रूप में ख्या पित है पूरी

1316
01:53:46,680 --> 01:53:51,120
वाले जो जगतगुरु शंकराचार्य जी है गुरुदेव भगवान वो उनको नहीं मानते

1317
01:53:51,120 --> 01:53:55,200
उनको शंकराचार्य के रूप में स्वीकार अगर नहीं भी करते हैं फिर भी उनसे कोई व्यक्ति

1318
01:53:55,200 --> 01:53:59,320
अगर जुड़ा है तो व हमसे दूर नहीं होगा

1319
01:53:59,320 --> 01:54:03,880
क्योंकि वह वेदों की रक्षा करने आएगा वो रामचरित मानस की रक्षा करने

1320
01:54:03,880 --> 01:54:08,040
आएगा वह मूर्ति की रक्षा करने आएगा यह है

1321
01:54:08,040 --> 01:54:12,040
धर्म ब्रह्म एक होने का फायदा

1322
01:54:12,040 --> 01:54:16,680
मगर यदि व्यक्ति परंपरा प्राप्त

1323
01:54:16,680 --> 01:54:20,880
आचार्यों के अनुग नहीं होगा यदि व्यक्ति वेदों में प्रमाण बुद्धि

1324
01:54:20,880 --> 01:54:22,920
नहीं रखेगा उसका धर्म ब्रह्म अलग हो जाएगा तो

1325
01:54:22,920 --> 01:54:27,600
क्या होगा वो स् कोनिया बनेगा वो आर समाजी बनेगा वो रामपाल बनेगा

1326
01:54:27,600 --> 01:54:32,120
स् कोनिया बनेगा तो क्या होगा शिव के मंदिर बचाने नहीं आएगा रामचरित

1327
01:54:32,120 --> 01:54:36,320
मानस बचाने नहीं आएगा है

1328
01:54:36,320 --> 01:54:40,360
ना और मेरे ख्याल से वेदों में भी उतनी आस्था नहीं कि वेदों को

1329
01:54:40,360 --> 01:54:42,840
बचाने

1330
01:54:42,840 --> 01:54:47,280
में वर्ण संता फैलाए अंतरजातीय

1331
01:54:47,280 --> 01:54:51,360
विवाह करेगा मलेच्छ को व्यास गद्दी

1332
01:54:51,360 --> 01:54:54,160
में बिठाए

1333
01:54:54,160 --> 01:54:58,440
और ऐसे ही समाजी उनका धर्म ब्रह्म बदल जा

1334
01:54:58,440 --> 01:55:02,880
बदल जाएगा व्यक्ति का अगर व्यक्ति उनसे जुड़ेगा तो तो क्या होगा

1335
01:55:02,880 --> 01:55:06,960
स्त्रियों को गायत्री मंत्र देगा मूर्ति पूजा मूर्ति

1336
01:55:06,960 --> 01:55:11,000
की रक्षा करने नहीं आएगा यह है धर्म ब्रह्म की व्याख्या

1337
01:55:11,000 --> 01:55:15,160
बदलने का तो जिनको राष्ट्र निर्माण करना है जिनको

1338
01:55:15,160 --> 01:55:19,480
सनातनी हों को एकजुट करना है वो उन बातों को लेकर के अगर आएंगे जिनमें

1339
01:55:19,480 --> 01:55:23,880
की सनातनी विरोधाभासी हो जाए जबक उससे कोई फर्क नहीं पड़ना है

1340
01:55:23,880 --> 01:55:28,360
फिर भी एक ऐसे पॉइंट पर बात की जाए जिससे कि नसता

1341
01:55:28,360 --> 01:55:32,480
फैले धर्म ब्रह्म की व्याख्या तो नहीं बदल रही व्यक्ति मंदिर बचाने

1342
01:55:32,480 --> 01:55:36,720
फिर भी आएगा व्यक्ति रामचरित मानस बचाने फिर भी आएगा व्यक्ति वे वेदों

1343
01:55:36,720 --> 01:55:40,720
को बचाने फिर भी आएगा भले ही आदि शंकराचार्य जी का

1344
01:55:40,720 --> 01:55:44,880
काल जो है जगतगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर उनके अनुसार सिद्ध ना हो

1345
01:55:44,880 --> 01:55:49,000
और शरी जी संगे वाले महाराज जी के अनुसार सिद्ध हो जाए मान लो दो

1346
01:55:49,000 --> 01:55:53,040
मिनट तो इससे धार्मिक आचरण में क्या अंतर

1347
01:55:53,040 --> 01:55:57,040
आएगा कोई अंतर नहीं तो हम बात उसकी करते

1348
01:55:57,040 --> 01:56:02,040
हैं जिससे की धार्मिक आचरण में अंतर आ रहा है

1349
01:56:02,040 --> 01:56:06,120
थोड़ा थोड़ा विवेक से भी काम लो भाई तक तुम्हारा

1350
01:56:06,120 --> 01:56:09,240
खत्म हो चुका है समझे और तुम इधर

1351
01:56:09,240 --> 01:56:13,640
उधर की बातें कर रहे हो बस ऐसे तो बहुत सारी बातें

1352
01:56:13,640 --> 01:56:18,320
है जीवन निकल जाएगा पूरा करने

1353
01:56:18,320 --> 01:56:23,920
में आई बात समझ में तो क्या है

1354
01:56:23,920 --> 01:56:28,000
कि धर्म और ब्रह्म की व्याख्या किसी से नहीं बदलेगी मगर व्यक्ति

1355
01:56:28,000 --> 01:56:32,680
जब गलत जगह से जुड़ेगा जहां से नहीं जुड़ना चाहिए वो भले ही

1356
01:56:32,680 --> 01:56:36,680
शरी पीठ के शंकराचार्य जी यह कह रहे हैं कि भाई आदि शंकराचार्य

1357
01:56:36,680 --> 01:56:40,920
जी 1200 साल पहले हुए 1500 साल पहले हु जो भी है और जबकि

1358
01:56:40,920 --> 01:56:45,240
हमारा हमारे गुरुदेव के अनुसार जो है व ईज वर्ष पहले हु मगर फिर भी

1359
01:56:45,240 --> 01:56:49,600
चंगेरी के शंकराचार्य जी की का खंडन या उनकी समीक्षा इसलिए

1360
01:56:49,600 --> 01:56:53,640
नहीं करनी चाहिए क्योंकि व प्रमाण

1361
01:56:53,640 --> 01:56:57,840
है प्रणम है क्योंकि उनके पास भी यदि व्यक्ति जाकर

1362
01:56:57,840 --> 01:57:01,960
के जुड़ता है तो उसका धर्म वही होगा जो हमारा धर्म है

1363
01:57:01,960 --> 01:57:06,200
उसका ब्रह्म वही होगा जो हमारा ब्रह्म है तो धरातल पर कोई कार्य करते

1364
01:57:06,200 --> 01:57:10,320
समय हम लोग व्यावहारिक रूप से एक होंगे वो लड़ेंगे मूर्ति को बचाने

1365
01:57:10,320 --> 01:57:14,320
के लिए हम भी लड़ेंगे मूर्ति को बचाने वो लड़ेंगे भगवान के अवतार के लिए हम

1366
01:57:14,320 --> 01:57:19,240
भी लड़ेंगे भगवान के अवतार केलिए जो आर समाजी वो नहीं लड़ेगा

1367
01:57:19,240 --> 01:57:25,240
इस कन वाले शिव के लिए नहीं लड़ेंगे

1368
01:57:30,320 --> 01:57:34,440
और भी बहुत सी चीजें हैं वर्ण व्यवस्था के लिए नहीं लड़ेंगे मगर जो संगरी

1369
01:57:34,440 --> 01:57:38,800
मट से जुड़ेगा वह भी वर्ण व्यवस्था के लिए लड़ेगा जो पुरी मट से जुड़ेगा

1370
01:57:38,800 --> 01:57:42,920
वो भी वर्ण व्यवस्था के लिए लड़ेगा जो ज्योति मट से जुड़ेगा वो भी वर्ण

1371
01:57:42,920 --> 01:57:47,800
व्यवस्था के लिए लड़ेगा जो द्वारका मट से जुड़ेगा वह भी वर्ण व्यवस्था के लिए

1372
01:57:47,800 --> 01:57:52,240
लड़ेगा जो राघवा चारज से जुड़ेगा वो भी लड़ेगा निबार का चारज

1373
01:57:52,240 --> 01:57:56,440
से लड़ेगा वो भी लड़ेगा निंबार्गा चार जी से जुड़ेगा वो भी

1374
01:57:56,440 --> 01:58:00,880
लड़ेगा ठीक है रामानंदाचार्य जी से जो जुड़ेगा वो भी

1375
01:58:00,880 --> 01:58:06,040
लड़ेगा इसलिए यहां पर विवाद करने की कोई आवश्यकता

1376
01:58:06,040 --> 01:58:10,160
नहीं इस कौन क्या करेगा कृष्ण अल्लाह एक है

1377
01:58:10,160 --> 01:58:14,880
शिव और कृष्ण अलग है वह अल्लाह के लिए

1378
01:58:14,880 --> 01:58:18,920
एगा शिव से दूर हटाएगा ये बात को समझो धर्म

1379
01:58:18,920 --> 01:58:23,240
और ब्रह्म की व्याख्या पर हम क्यों जोर डाल रहे हैं क्योंकि राष्ट्र निर्माण करना है हिंदू

1380
01:58:23,240 --> 01:58:27,360
राष्ट्र इसलिए धर्म ब्रह्म की व्याख्या पर जोर जोर डालते

1381
01:58:27,360 --> 01:58:31,360
हैं कि सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष जब इन तीनों के पीछे भागोगे

1382
01:58:31,360 --> 01:58:35,600
तो हम सब एक हो जाएंगे किसी के नाम से भी वो

1383
01:58:35,600 --> 01:58:39,840
अब इसमें अगर आदि शंकराचार्य भगवान 1200 साल पहले नहीं ईज

1384
01:58:39,840 --> 01:58:44,040
वर्ष पूर्व हुए या ाज वर्ष पूर्व नहीं 1200 साल पहले हुए इससे इसमें कोई

1385
01:58:44,040 --> 01:58:45,520
असर नहीं पड़ेगा

1386
01:58:45,520 --> 01:58:49,720
तो या अगर कोई व्यक्ति संगरी वालों को मान ले तो भी कोई दिक्कत नहीं है

1387
01:58:49,720 --> 01:58:54,040
अगर कोई व्यक्ति पुरी के शंकराचार्य जी को मान ले तो कोई दिक्कत नहीं

1388
01:58:54,040 --> 01:58:59,160
यह कहने का भाव है जो तुम्हारी अल्प बुद्धि में घुसता नहीं

1389
01:58:59,160 --> 01:59:03,320
है चलो खैर बहुत देर बाद ऐसा टॉपिक आया जिस बोलना

1390
01:59:03,320 --> 01:59:07,320
और दूसरी बात यह है कि अगर ऐसी बात है और यह बहुत रुचि पूर्ण होनी चाहिए

1391
01:59:07,320 --> 01:59:11,320
सब चीजें तो तू रामानुजाचार्य जी के लिए बोल ना शंकराचार्य जी को मानता है

1392
01:59:11,320 --> 01:59:15,320
तो बोल रामानुजाचार्य जी के लिए बोले य व्यक्ति

1393
01:59:15,320 --> 01:59:19,520
कि भई ये जो है रामानुजाचार्य जी ने तात्विक वचना गलत की है

1394
01:59:19,520 --> 01:59:23,720
अगर तात्विक वचना उनकी वही है जो इनकी है आदि शंकराचार्य

1395
01:59:23,720 --> 01:59:28,120
जी की उसी का पार्ट है तो उनके गद्दी पर बैठने वाले जो

1396
01:59:28,120 --> 01:59:32,480
आचार्य गण है उनसे कलवा एक ही तात्विक वचन

1397
01:59:32,480 --> 01:59:37,080
है कोई है ही नहीं एक ही संप्रदाय है अवत संप्रदाय कलवा दो

1398
01:59:37,080 --> 01:59:41,080
सब और नहीं कलवा रहे तो उनकी बात का खंडन करो उनकी बात

1399
01:59:41,080 --> 01:59:45,400
कटेगी लड़ो नहीं लड़ो समीक्षा करने से बचोगे

1400
01:59:45,400 --> 01:59:49,440
हमको बताओगे समीक्षा करो हमको टपोरी

1401
01:59:49,440 --> 01:59:55,440
समझ रखा है क्या हमारे तो पीछे पड़े

1402
01:59:56,760 --> 02:00:02,760
रहेंगे यार यह

1403
02:00:04,200 --> 02:00:08,320
व्यक्ति पागल हो गया है पागल हो गया है

1404
02:00:08,320 --> 02:00:12,480
रामपाल के द्वारा वेद का विरोध किया जाता है इससे भी धर्म ब्रह्म की व्याख्या नहीं बद तुम्ह पता

1405
02:00:12,480 --> 02:00:16,520
भी है धर्म ब्रह्म की व्याख्या बदलने का मतलब क्या है जब कोई व्यक्ति मुझे फोन

1406
02:00:16,520 --> 02:00:21,280
करता है कि जो ज्योतिर मठ वाले

1407
02:00:21,280 --> 02:00:25,800
वो है मुक्तेश्वर सरस्वती जी वो शंकराचार्य है कि नहीं तो मैं यही कहता हूं

1408
02:00:25,800 --> 02:00:29,800
भाई इससे क्या मतलब है शंकराचार्य है कि नहीं शंकरा अगर वो

1409
02:00:29,800 --> 02:00:33,800
शंकराचार्य नहीं भी है थोड़ी देर के लिए मान लो तुम उन्हे शंकराचार्य मानते हो

1410
02:00:33,800 --> 02:00:37,840
और हम नहीं मानते नहीं भी है तो क्या वो गलत गलत शिक्षाए दे रहे हैं धर्म ब्रह्म

1411
02:00:37,840 --> 02:00:41,960
की व्याख्या गलत बता रहे हैं धर्म धर्म और ब्रह्म की व्याख्या ि वही बता

1412
02:00:41,960 --> 02:00:46,440
रहे जो शंकर परंपरा के बता रहे हैं तो यह कहां लिखा है कि जो आपका गुरु हो वो

1413
02:00:46,440 --> 02:00:52,120
शंकराचार्य की गद्दी पर बैठा हुआ ही हो तो कहीं नहीं लिखा है

1414
02:00:52,120 --> 02:00:56,200
धर्म और ब्रह्म की सही व्याख्या बताने वाला कोई व्यक्ति आपका गुरु बन सकता

1415
02:00:56,200 --> 02:01:00,520
है वो पीछे से उसके कुछ लक्षण और है वोह चीज है

1416
02:01:00,520 --> 02:01:04,520
तो इस परे ध्यान दो ना अगर वो ब वो वही चीजें बता रहे जो

1417
02:01:04,520 --> 02:01:08,960
आदि शंकराचार्य जी महाराज ने बताई है तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है उनसे

1418
02:01:08,960 --> 02:01:11,760
जुड़ने तो धर्म ब्रह्म की व्याख्या

1419
02:01:11,760 --> 02:01:15,760
नहीं बदल रही है इसलिए और अन्य छोटे मोटे वैचारिक मतभेद होते

1420
02:01:15,760 --> 02:01:21,760
हुए भी कोई भी किसी के अनुग रह सकता है

1421
02:01:25,240 --> 02:01:31,240
अरे जाओ यार तुम छोटी बुद्धि के

1422
02:01:32,400 --> 02:01:36,520
व्यक्ति क्यों मतलब नहीं है किसने कहा जो हमारा

1423
02:01:36,520 --> 02:01:40,600
कहना है वह तो हमने कह ही दिया ना गुरुदेव ने कह दिया मतलब

1424
02:01:40,600 --> 02:01:44,600
अब तुम हमारे मुख से समीक्षा क्यों करवाना चाह रहे हो और समीक्षा करनी है

1425
02:01:44,600 --> 02:01:48,600
तो जाके करो र जी के सिद्धांत की समीक्षा

1426
02:01:48,600 --> 02:01:52,880
वैसे वो तुम्हारे लिए बड़ा भारी विषय हो जाएगा स्थिति

1427
02:01:52,880 --> 02:01:58,880
देख चुका हूं दर्शन इत्यादि के विषय में कैसे हो

1428
02:02:00,670 --> 02:02:05,560
[संगीत]

1429
02:02:05,560 --> 02:02:09,640
तुम अनंद स्वयं को पुरी का शंकराचार्य बता रहा है

1430
02:02:09,640 --> 02:02:13,680
इससे दिक्कत यह है कि जब व्यक्ति उससे पूछने जाएगा कि अद्वैत में

1431
02:02:13,680 --> 02:02:18,600
भक्ति है कि नहीं तो व नहीं बता पाएगा व नास्तिक को आस्तिक नहीं बना पाएगा

1432
02:02:18,600 --> 02:02:22,760
तो क्या होगा वहां पर जाने वाला व्यक्ति टूटेगा

1433
02:02:22,760 --> 02:02:27,040
अगर पुलिस इंस्पेक्टर नकली घूमने लगे तो सही

1434
02:02:27,040 --> 02:02:31,160
पुलिस इंस्पेक्टर के पास ना पहुंचने के कारण अव्यवस्था फैले गी

1435
02:02:31,160 --> 02:02:35,400
वह जो धर्म ब्रह्म की व्याख्या है व व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएगी जैसे

1436
02:02:35,400 --> 02:02:39,760
इंस्पेक्टर नहीं होगा तो सही न्याय नहीं पहुंच पाएगा लोगों तक

1437
02:02:39,760 --> 02:02:44,080
कुछ मालूम ना तालम तुम तो यार बहुत बहुत ज्यादा निम्न लेवल के व्यक्ति

1438
02:02:44,080 --> 02:02:48,200
हो समझ नहीं पाए यार भगवता अंद तुमने मुझे निराश किया है

1439
02:02:48,200 --> 02:02:52,200
सच में गाल होते तो तुम्हा गाल

1440
02:02:52,200 --> 02:02:56,520
पकड़ता और ड़ नोचता गाल है नहीं वजन 47

1441
02:02:56,520 --> 02:03:02,520
है ना

1442
02:03:07,280 --> 02:03:10,780
इसलिए नाटक करवा

1443
02:03:10,780 --> 02:03:16,780
[हंसी]

1444
02:03:28,640 --> 02:03:32,920
क्योंकि गुरुदेव शंकराचार्य है और हम

1445
02:03:32,920 --> 02:03:37,080
उनकी सेना के एक सैनिक है जो गुरुजी करेंगे वही हमें करना

1446
02:03:37,080 --> 02:03:41,080
है क्या हां गुरुदेव ने कहीं गलत नहीं

1447
02:03:41,080 --> 02:03:45,160
किया हम तो जो गुरुदेव कह रहे हैं उसी को ही आगे बढ़ा रहे हैं पर हमसे समीक्षा क्यों

1448
02:03:45,160 --> 02:03:49,520
करवा रहे हो गुरुदेव ने हम समीक्षा समीक्षा करने को तो नहीं कहा है

1449
02:03:49,520 --> 02:03:53,800
तुम जाकर अन्य शंकराचार्य की समीक्षा करो और अगर तुम समीक्षा

1450
02:03:53,800 --> 02:03:58,120
करवाना चाहते हो तो तुम खुद समीक्षाएं करो ना मैं कह रहा हूं उनकी जाकर समीक्षा करो

1451
02:03:58,120 --> 02:04:02,520
अभी देखो तुम्हें आटे दाल का भाव पता चल जाएगा करो जाके रामानंद

1452
02:04:02,520 --> 02:04:06,920
संप्रदाय की समीक्षा सुद्धा दत वालो की समीक्षा जितने लोग अद्वैत

1453
02:04:06,920 --> 02:04:11,040
के वि विरुद्ध में जितने दर्शन है सबकी समीक्षा करट

1454
02:04:11,040 --> 02:04:15,360
डालो पता चल जाएगा फिर आएंगे जब

1455
02:04:15,360 --> 02:04:21,360
ब्रह्म सूत्र के भाष आएंगे सामने करो समीक्षा सबकी

1456
02:04:24,560 --> 02:04:28,680
और समीक्षा करो जो तुमने कहा हम अभ देखते हैं

1457
02:04:28,680 --> 02:04:32,760
जो नहीं देखते उनकी समीक्षा कट दो जाके नाम ले लेकर के

1458
02:04:32,760 --> 02:04:36,800
क्योंकि तुम अभेद देखते हो तो उनका तो कट रहा है

1459
02:04:36,800 --> 02:04:40,920
उनका तो कट रहा है ना सिद्धांत वो समीक्षा क्यों नहीं करते हो

1460
02:04:40,920 --> 02:04:45,160
वा दोगले एक नंबर के दोगले

1461
02:04:45,160 --> 02:04:51,160
हैं बात है बदमा लो बस और कुछ नहीं

1462
02:05:04,360 --> 02:05:08,840
निग्रह प्रवेशिका यह व्यक्ति

1463
02:05:08,840 --> 02:05:12,880
जब से हमने इस पर वो किया ना आक्रामक रवैया अपनाया है

1464
02:05:12,880 --> 02:05:17,040
इसने कम से कम कुछ नहीं तो 50 से 60 बार बोला होगा

1465
02:05:17,040 --> 02:05:23,040
निग्रह प्रवेशिका निग्रह प्रवेशिका बताएंगे निग्रह प्रवेशिका बताएंगे

1466
02:05:36,600 --> 02:05:40,840
बिल्कुल बदल जाएगी शंकर संप्रदाय ही तो है जो धर्म ब्रह्म

1467
02:05:40,840 --> 02:05:45,040
की व्याख्या को ढो रहा है तो अगर व लुप्त

1468
02:05:45,040 --> 02:05:49,400
होगा तो व्याख्या कौन कराएगा कौन देगा प्रमाणिकता

1469
02:05:49,400 --> 02:05:53,920
कौन बताएगा परंपरा प्राप्त आचार्य वंशा वाली वो तो लुप्त करवा रहे हो तुम मैं

1470
02:05:53,920 --> 02:05:57,920
कुछ मालूम ना तालू बस बोलते हो

1471
02:05:57,920 --> 02:06:02,040
को अपने संख्या अरे भाई रुचि है पर

1472
02:06:02,040 --> 02:06:06,080
तू समीक्षा करवाना चाह रहा है चीजों की ठीक

1473
02:06:06,080 --> 02:06:10,080
है रुचि है व गुरुदेव ने बता दिया हमने प्रश्न कर लिया उनसे

1474
02:06:10,080 --> 02:06:14,160
आमना पीठों में रुचि है कपाती जी के शिष्य

1475
02:06:14,160 --> 02:06:18,600
तुम थे कि वो थे गुरु शिष्य परंपरा का कार्य क्या है यही बता दो चलो

1476
02:06:18,600 --> 02:06:22,600
क्यों आवश्यक है गुरु शिष्य परंपरा क्यों प्रमाणिकता गुरु शिष्य परंपरा

1477
02:06:22,600 --> 02:06:26,600
को जांच हैं क्या जरूरत है व यही जरूरत है

1478
02:06:26,600 --> 02:06:31,080
ना कि गुरु ने क्या बताया था वह उनका शिष्य बताएगा

1479
02:06:31,080 --> 02:06:35,160
प्रामाणिक तो कपात जी ने कितनी पीठ स्वीकार की है किस

1480
02:06:35,160 --> 02:06:39,280
रूप में व वोह बताएंगे उनके शिष्य तुम कौन होते हो दाल

1481
02:06:39,280 --> 02:06:45,280
भात में मुसर चंद

1482
02:06:47,320 --> 02:06:51,760
बड़ ब बदल रही है अगर गलत व्यक्ति व्यासपीठ

1483
02:06:51,760 --> 02:06:56,560
बैठेगा तो अपने मन मुताबिक धर्म ब्रह्म की व्याख्या करने लगेगा जैसे की

1484
02:06:56,560 --> 02:07:00,640
धर्म की व्याख्या एक आई सामने के मृत्यु के बाद वह नहीं

1485
02:07:00,640 --> 02:07:05,000
रह जाता है बैर मगर तुम जैसा व्यक्ति बैठ जाएगा तो बताएगा रह जाता है

1486
02:07:05,000 --> 02:07:11,000
मृत्यु के बाद भी रह जाता है व तो अंतिम संस्कार के लिए बोल दिया

1487
02:07:13,040 --> 02:07:17,400
था हा बदल जाएगा प्रामाणिकता

1488
02:07:17,400 --> 02:07:21,560
नहीं रह जाएगी ना तब भी आप अपने धर्म को सिद्ध नहीं कर पाएंगे शाश्वत सिद्ध नहीं

1489
02:07:21,560 --> 02:07:24,240
नहीं कर

1490
02:07:24,240 --> 02:07:30,240
पाएंगे आ तो तुम कभी हवेली बताए

1491
02:07:36,040 --> 02:07:40,080
तुम तो पूरी शंकराचार्य जी बागेश्वर वालों के साथ भी तो इसलिए

1492
02:07:40,080 --> 02:07:44,280
नहीं खड़े हुए थे कि वह दुबई क्यों गया तब क्यों तुमने टोका

1493
02:07:44,280 --> 02:07:48,320
था पूरी शंकराचार्य जी को पूरी शंकराचार्य जी करौली वाले के साथ इसलिए भी तो नहीं खड़े

1494
02:07:48,320 --> 02:07:52,360
हुए थे कि वो जो है कहीं कहीं पर वो शस्त्री वचन जो भी कर

1495
02:07:52,360 --> 02:07:56,400
तब क्यों तुमने ठोका था हम आरएसएस वालों को साथ में इसलिए भी तो नहीं

1496
02:07:56,400 --> 02:08:00,480
ले गए थे कि वो जो है कपाती जी के सिद्धांतों के विरुद्ध

1497
02:08:00,480 --> 02:08:04,760
है या नकली शंकराचार्य खड़ा करते तुम्हारे अनुसार

1498
02:08:04,760 --> 02:08:08,960
तुमने जो बोला हम तो उन्हें दुर्गा मां को गाली

1499
02:08:08,960 --> 02:08:13,080
देने वालों से लड़ने के लिए ले गए थे साथ में तुम अपनी

1500
02:08:13,080 --> 02:08:17,400
चीजों को कस्टमाइज कर लो अपने बात आने पर और दूसरे को कर

1501
02:08:17,400 --> 02:08:21,720
आओ क्योंकि तुम जो है स्वयं भू हो

1502
02:08:21,720 --> 02:08:27,720
तुम्हारा स्वयंभू

1503
02:08:29,490 --> 02:08:35,490
[संगीत]

1504
02:08:36,200 --> 02:08:40,600
पना पूछ लिया ना पूछ लिया कौन बताएगा

1505
02:08:40,600 --> 02:08:44,920
मैंने पूछा कि नहीं पूछा तो गुरुदेव बताएंगे मैं बताऊंगा तुम जाकर गुरुदेव से कलवा

1506
02:08:44,920 --> 02:08:49,000
दो उसने नहीं पूछा अरे भाई तुम्हारा विवाह कब

1507
02:08:49,000 --> 02:08:53,080
हुआ अभी तुमने बताया ना तुम्हारे संबंध क्या है य तुम्हारा आना जाना कौन

1508
02:08:53,080 --> 02:08:57,200
बताएगा तब तो हस रहे थे थाकी लगा रहे थे तु मठ

1509
02:08:57,200 --> 02:09:03,200
में रहते हो

1510
02:09:19,840 --> 02:09:25,840
क्या पर

1511
02:09:39,290 --> 02:09:44,080
[संगीत]

1512
02:09:44,080 --> 02:09:48,120
तुम्हारी किताब कोई वेल नोन किताबे है क्या वेल नन ग्रंथ है

1513
02:09:48,120 --> 02:09:52,400
क्या तुम्हारे तुम कोई क्या ऐसे महान

1514
02:09:52,400 --> 02:09:57,200
आचार्य हो क्या गाली बाज हो तुम गाली बाज हो तुम

1515
02:09:57,200 --> 02:10:01,200
तुम्हारे ग्रंथ तो पढ़े मिलेंगे तो नहीं पढ़ने की कोशिश करेगा कोई ऐसे

1516
02:10:01,200 --> 02:10:04,080
तो गाली बाज हो

1517
02:10:04,080 --> 02:10:08,360
तुम मगर फिर

1518
02:10:08,360 --> 02:10:14,360
भी तुम यह क्यों अपेक्षा कर रहे हो कि पढ़ लिए होते तो यह

1519
02:10:18,480 --> 02:10:22,680
कहते तु हमें मत सिखाओ क जानते तुमरा खंडन

1520
02:10:22,680 --> 02:10:28,680
कैसे होगा आओ तो कभी

1521
02:11:11,440 --> 02:11:14,640
च वही

1522
02:11:14,640 --> 02:11:20,640
लगाना बचाता हैने

1523
02:11:25,080 --> 02:11:29,080
आप य ग शीट यूज करता रहता है पूरा दिन झे

1524
02:11:29,080 --> 02:11:33,120
पता है कितना टाइम वेस्ट होता है शीट में अगर ट के बदले

1525
02:11:33,120 --> 02:11:37,640
अगर एई पावर

1526
02:11:37,640 --> 02:11:43,640
अता श है और है

1527
02:11:46,600 --> 02:11:52,600
भवान बने आदेश दिया

1528
02:11:52,840 --> 02:11:55,640
नाम क्या

1529
02:11:55,640 --> 02:12:00,480
होगा दो ना भाईब तब मुह चलाओ दो पहले

1530
02:12:00,480 --> 02:12:06,240
दो पहले दो

1531
02:12:06,240 --> 02:12:10,280
पहले भाई तुम अपनी थ्योरी तो दो यह सब बोल

1532
02:12:10,280 --> 02:12:14,480
रहे हो ना यह सब पहले अपनी थोरी प्रॉपर बनाओ उसको ग्रंथ में लिखो

1533
02:12:14,480 --> 02:12:18,600
और फिर दो तब हम देखेंगे वह कितना प्रामाणिक चीज है जो बोल रहे

1534
02:12:18,600 --> 02:12:22,800
हो कहां लिखी क्या लिखी थोड़ी सी गरम गरम चीजें

1535
02:12:22,800 --> 02:12:26,960
बोल दो जिससे कि सुनने वाले प्रभावित हो जाए उसके बाद अपनी जो मेन चीज है

1536
02:12:26,960 --> 02:12:30,960
उसको लेकर आगे बढ़ जाओ निग्रह प्रवेशिका में देंगे

1537
02:12:30,960 --> 02:12:35,080
निग्रह प्रवेशिका में देंगे निग्रह प्रवेशिका में देंगे बस

1538
02:12:35,080 --> 02:12:39,400
ये

1539
02:12:39,400 --> 02:12:44,120
है भगवान सिद्धनाथ की पूजा होती तो इसमें क्या दिक्कत है

1540
02:12:44,120 --> 02:12:48,360
प्रॉब्लम यह है कि तुम्हारी गुरु शिष्य परंपरा क्या है तुम

1541
02:12:48,360 --> 02:12:54,360
तक कैसे आ रहे हैं वेद कैसे आ रहे हैं शास्त्र

1542
02:13:09,400 --> 02:13:13,600
अरे मेरे भाई धर्म ब्रह्म सूत्र पर भाष्य किसका

1543
02:13:13,600 --> 02:13:17,600
पढ़ोगे किसका पढ़ोगे ब्रह्म सूत्र पर भाष अगर

1544
02:13:17,600 --> 02:13:21,720
आदि शंकराचार्य जी का पढ़ोगे तो आदि शंकराचार्य जी के अनुग आने वाले शिष्य के वो

1545
02:13:21,720 --> 02:13:25,720
हो जाओगे ना शिष्य या अलग से

1546
02:13:25,720 --> 02:13:30,480
भाष्य लिखा है तुम्हारे पास वो दिखाओ खाली

1547
02:13:30,480 --> 02:13:34,560
खाली गुरुओं के नाम शास्त्र में ढूंढने की बात नहीं है

1548
02:13:34,560 --> 02:13:38,560
जिन गुरुओं के नाम से तुम तक वो आ रहे हैं शास्त्र तात्विक विवेचन भी तो आएगा

1549
02:13:38,560 --> 02:13:44,560
वहीं से कि वो आदि शंकराचार्य से लोगे

1550
02:13:55,240 --> 02:13:59,760
हमको भेजो ना हमको भेजो भाष्य कहां से आ रहा है तात्विक विवेचना

1551
02:13:59,760 --> 02:14:05,760
क्या है

1552
02:14:35,280 --> 02:14:40,000
और कभी अद

1553
02:14:40,000 --> 02:14:44,000
अव्यक्ता दवादी कभी तुम अवती बन जाते हो कभी

1554
02:14:44,000 --> 02:14:49,040
तुम अव्यक्ता दवादी बन जाते

1555
02:14:49,040 --> 02:14:53,880
हो अपने आपता क्यों कह रहे

1556
02:14:53,880 --> 02:14:58,040
हो क्योंकि अपने आप को तुम्हें अलग दिखाना है शंकर संप्रदाय

1557
02:14:58,040 --> 02:15:04,040
से

1558
02:15:25,520 --> 02:15:29,760
अल्लाह अपने बारे में नहीं बताएंगे य घुमा फिरा के यही कह रहे हैं कि हमने मान्य

1559
02:15:29,760 --> 02:15:35,760
आचार्यों को बता दिया मगर हम तुम्हें नहीं बताएंगे

1560
02:15:38,720 --> 02:15:43,040
निग्रह प्रवेशिका निग्रह प्रवेशिका गाना बनाओ भाई

1561
02:15:43,040 --> 02:15:49,040
निग्रह प्रवेशिका मिलेगी तो देखेंगे

1562
02:16:06,160 --> 02:16:10,960
प्रमाणन की ब करते गुव से कभी तो आ

1563
02:16:10,960 --> 02:16:16,680
गुरुजी सा साल गुदव से कभी श्

1564
02:16:16,680 --> 02:16:22,680
किया सा

1565
02:16:45,080 --> 02:16:49,400
समना नहीं तो हम अपने आपको को तो ऐसा

1566
02:16:49,400 --> 02:16:53,560
खपत कर भी नहीं रहे हम बताएंगे कि उनकी शिक्षाएं क्याक है हा

1567
02:16:53,560 --> 02:16:57,560
यह जरूर बता सकते कि हमारे व्यक्तिगत विषय में हमने जो पूछा था तो उन्होंने क्या

1568
02:16:57,560 --> 02:17:01,680
कहा मगर तुम तो ना तो उनकी प्रामाणिक शिक्षाएं बता सकते हो प्रामाणिक

1569
02:17:01,680 --> 02:17:05,840
अधिकृत वो वक्ता बन के उनकी ओर से और ना ही उनकी ओर से य कह सकते

1570
02:17:05,840 --> 02:17:10,240
हो कि इस विषय में उन्होंने हमसे यह कहा हमारे विरोध में

1571
02:17:10,240 --> 02:17:14,680
हमारे बारे में ठीक है पहली बात दूसरी बात यह

1572
02:17:14,680 --> 02:17:18,760
है कि यह व्यक्ति यहां पर देखिए कैसे विषयात कर रहा है मैं जब यह कह

1573
02:17:18,760 --> 02:17:22,800
रहा हूं कि भाई कोई चीज तुम जैसे पूछ रहे हो हमसे योगाचार्य के बारे

1574
02:17:22,800 --> 02:17:26,800
में क्या कहना है पुरी शंकराचार्य जी का तो मैं जब यह कह

1575
02:17:26,800 --> 02:17:31,080
रहा हूं कि तुम कौन होते हु बताने वाले उन्होंने क्या कहा क्या नहीं कहा हमारे विरोध

1576
02:17:31,080 --> 02:17:35,120
में ठीक है हम कह रहे यह कहा तुम कह रहे हो वो कहा तुम उनसे मिलते

1577
02:17:35,120 --> 02:17:39,360
नहीं तुम उनके पास जाते नहीं हम उनसे मिलते हैं उनके पास जाते हैं तो तुम हमारे विरोध

1578
02:17:39,360 --> 02:17:43,400
में और हम उनसे दीक्षित भी है तो हमारे विरोध

1579
02:17:43,400 --> 02:17:47,520
में तुम कहां तुम कौन कहां खड़े होते हो जो ये बोल सको कि ऐसा ऐसा कहा तो

1580
02:17:47,520 --> 02:17:51,640
यह व्यक्ति क्या कर रहा है वहां पर विषय चेंज कर रहा है तुम प्रमाणिक तो

1581
02:17:51,640 --> 02:17:55,800
तुम कभी पूछते क्यों नहीं होय पूछते नहीं हो यह नहीं करते कभी सवाल नहीं करते

1582
02:17:55,800 --> 02:17:59,920
यह कौन सी बात है भाई अपनी बात शास्त्रों के आधार पर बोलना

1583
02:17:59,920 --> 02:18:05,840
चालू

1584
02:18:05,840 --> 02:18:10,040
करो किसने कहा प्रश्न नहीं कर रहे चल मैंने बहुत

1585
02:18:10,040 --> 02:18:14,240
सारे प्रश्न कर रखे हैं गुरुदेव से मैंने पूछा कि भाई

1586
02:18:14,240 --> 02:18:18,760
क्या कहते हैं यह ब्रह्मा विष्णु महेश अलग अलग क्यों

1587
02:18:18,760 --> 02:18:23,640
व्याख्यान हुए तब मुझे वह तत्व प्राप्त हुआ था

1588
02:18:23,640 --> 02:18:27,840
विद्या विद्या का प्रश्न किया था प्रश्न करते हुए देखा नहीं

1589
02:18:27,840 --> 02:18:32,200
तो ठीक है इसके डिस्क्रिप्शन में लगा देंगे यह भी इसका एक झूठ है प्रमाणिक शिष्य

1590
02:18:32,200 --> 02:18:37,080
प्रश्न कहां कर रहे हैं य प्रश्न किया कि नहीं किया मैं दिखाऊंगा

1591
02:18:37,080 --> 02:18:41,240
तो तुम्हारी तरह मैं समझ रहा हूं तुम किस तरह के प्रश्नों की बात कर रहे हो मगर मैं तुम्हारी जुबान

1592
02:18:41,240 --> 02:18:45,480
पकड़ू तुमने यहां क्या कहा कि प्रमाणिक शिष्य प्रश्न कहा कर रहे हैं तो प्रश्न

1593
02:18:45,480 --> 02:18:49,520
करते हुए का मेरा वीडियो है मेरा वीडियो है प्रश्न करते हुए

1594
02:18:49,520 --> 02:18:55,520
का तुम य सिद्ध हुए झूठे असत्य

1595
02:18:55,800 --> 02:19:00,160
वादी नहीं नहीं तुम्हारे शिष्य बढ़िया होंगे सपने में यंत्र

1596
02:19:00,160 --> 02:19:04,480
मिल गया बाइपोलर के टाइम पर यंत्र मिल गया हां मिल गया दीक्षा

1597
02:19:04,480 --> 02:19:08,800
मिल गई हां मिल गई मंत्र मिल गया हा मिल गया यह तुम्हारे शिष्य कहेंगे

1598
02:19:08,800 --> 02:19:12,960
हमारे गुरु को यह मिला पहले सांप जैसा था फिर कुछ हुआ फिर कुछ

1599
02:19:12,960 --> 02:19:17,320
हुआ और सांप से याद आया वो पदार्थ अगर बनाना सीख जाओ

1600
02:19:17,320 --> 02:19:21,480
अगर ना सीख पाओ तो पूरी तुम्हारे अनुसार मट के जो प्रकार

1601
02:19:21,480 --> 02:19:27,480
है वो जानते हैं तो उन्हीं की शरण ले लो सीख लो फिर

1602
02:19:34,360 --> 02:19:38,560
आओ क्या वी इस तरह की डॉक्यूमेंट बनाना

1603
02:19:38,560 --> 02:19:41,440
चाहते

1604
02:19:41,440 --> 02:19:46,040
हो और क्या आप य ए आई और साइजी

1605
02:19:46,040 --> 02:19:50,280
की मदद से ऐसी बनाना चाहते हो जिसकी मदद

1606
02:19:50,280 --> 02:19:56,280
से

1607
02:20:15,320 --> 02:20:21,320
है

1608
02:20:22,200 --> 02:20:26,280
हैको जानते उस

1609
02:20:26,280 --> 02:20:30,400
और उसके बाद शंकराचार्य पहुचने के बाद क्या कर रही है शंकराचार्य को खलेम कना

1610
02:20:30,400 --> 02:20:34,720
पड़ रहा है भायो कप को बसाना बड़ा कठिन है

1611
02:20:34,720 --> 02:20:40,720
तुमको नहीं पता शंकराचार्य को भी नहीं पता है और नहीं पता तो बताओ प्रामाणिक परंपरा

1612
02:20:51,160 --> 02:20:57,160
वि

1613
02:20:57,400 --> 02:21:01,480
नहीं इसका जो महा संग्राम है य वीडियो पूरा हो गया एक भाग इसका

1614
02:21:01,480 --> 02:21:06,120
बधाई और दूसरा है इसका जो महासंग्राम है

1615
02:21:06,120 --> 02:21:10,120
पा पता नहीं कितने बनेगा लेकिन आ

1616
02:21:10,120 --> 02:21:14,240
ज्यादा लंबा नहीं खचा जाएगा क्योंकि उसको इस प्रकार सुनूंगा

1617
02:21:14,240 --> 02:21:18,560
और अ सु उतर देता जानकी नि

1618
02:21:18,560 --> 02:21:22,720
प्रवेशिका का इतजार करते रहो इनकी निग्रह प्रवेशिका का

1619
02:21:22,720 --> 02:21:26,920
इंतजार करते रहो इनके गुणगान गाते रहो इनकी परंपरा की प्रामाणिकता

1620
02:21:26,920 --> 02:21:31,520
य जो है मान्य आचार्यों के कान में बताएंगे हम सबको नहीं बताएंगे सबको

1621
02:21:31,520 --> 02:21:35,560
बताएंगे निग्रह प्रवेशिका के समय और इनका सबसे बड़ा जो झोल है

1622
02:21:35,560 --> 02:21:39,760
वह यही है कि इनकी निग्रह प्रवेशिका आज तक य बता नहीं पा रहे

1623
02:21:39,760 --> 02:21:43,760
हैं चलो र सभी को जय

1624
02:21:43,760 --> 02:21:47,760
श्री राम समय देने के लिए और जल्दी ही इनका जो अंतिम लाइव है

1625
02:21:47,760 --> 02:21:51,920
पांच लाइव के हम उत्तर दे चुके हैं अंतिम लाइव है उसको देकर के इस मामले

1626
02:21:51,920 --> 02:21:56,440
को समाप्त करेंगे जो इन्होंने एक विशेष लाइव करी

1627
02:21:56,440 --> 02:22:00,840
थी आचार्य राम शंकर शुक्ल जी के लिए जो उसमें विशेष बातें थी

1628
02:22:00,840 --> 02:22:04,840
उनका जवाब आज हमने जो पहली लाइव की थी उसमें दे दिया है आने वाले टाइम

1629
02:22:04,840 --> 02:22:09,000
में सबके पोस्टर्स उसके अनुसार कर देंगे जिससे की पोस्टर देख करके और टाइटल देख

1630
02:22:09,000 --> 02:22:12,400
कर के समझ में आ जाए यह किस लाइव का उत्तर है

1631
02:22:12,400 --> 02:22:18,400
ठीक है सभी को जय श्री

1632
02:22:19,520 --> 02:22:23,520
राम i
