1
00:00:01,760 --> 00:00:05,840
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं

2
00:00:05,840 --> 00:00:09,920
आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और एक ही हैं

3
00:00:09,920 --> 00:00:14,520
मार्केट टाइम जी जो शायद जुड़े हुए

4
00:00:14,520 --> 00:00:19,440
हैं। कोई नहीं कर्मन निवादी कारस्ते माफ सुदाच

5
00:00:19,440 --> 00:00:23,440
तो देखते हैं भाई अपने चौथे लाइव में यह

6
00:00:23,440 --> 00:00:26,840
भगवतानंद क्या कह रहे

7
00:00:26,840 --> 00:00:32,200
हैं। बता दिया उसको बता दे।

8
00:00:32,200 --> 00:00:36,800
तो चलिए ध्वनि इत्यादि आ रही है

9
00:00:36,800 --> 00:00:41,040
मैं भी जिस स्थान पर बैठकर रिकॉर्ड कर रहा हूं हो सकता है आपको मेरे पीछे

10
00:00:41,040 --> 00:00:45,360
उस घर से जुड़े हुए कुछ लोग आते जाते घर उनका है तो

11
00:00:45,360 --> 00:00:49,440
आते जाते रहेंगे छत पर शिकायत जैसे आप लोग सब करेंगे और

12
00:00:49,440 --> 00:00:53,600
दोनों की ओर चलते हैं चलने से पहले थोड़ा सा मैं आपको एक और विषय बता दूं क्या आप जानते हैं

13
00:00:53,600 --> 00:00:59,600
कल रात को बजे से पता नहीं उसके

14
00:01:00,320 --> 00:01:05,360
सबसे पहले कह रहे हैं स्पीड वही

15
00:01:05,360 --> 00:01:09,440
बोला कर दिया लेकिन आपने नहीं किया आपने ये पूरा दो सेकंड

16
00:01:09,440 --> 00:01:13,520
में बना दिया अब जब मैं देना चाह रहा हूं तब भी आप इस बात की प्रतीक्षा किए बिना एक

17
00:01:13,520 --> 00:01:18,400
बात है क्योंकि हमने बोला आपको कर दिया अगर आप चाहते मुझे कर सकते है लेकिन आपने नहीं किया

18
00:01:18,400 --> 00:01:22,880
बता दूंगा और हम अपने मुख्य विषय की ओर चलते है मुख्य विषय

19
00:01:22,880 --> 00:01:26,960
से पहले थोड़ा सा मैं आपको एक विषय तो सबसे पहले इन्होंने कहा है

20
00:01:26,960 --> 00:01:31,120
रात के बजे से शिव नारायण लाइव अपने पता नहीं इसको फर्क

21
00:01:31,120 --> 00:01:35,360
चैनल ग्रो करना चाहते होंगे हमारे चैनल पर बोलने के साथ चैनल ग्रो

22
00:01:35,360 --> 00:01:39,600
नहीं करना चाहते थे क्योंकि आह्वान कॉल ऑफ Dharma

23
00:01:39,600 --> 00:01:43,760
पर हमारे ज्यादा जो फॉलोअर्स हैं वो ज्यादा सक्रिय हैं और

24
00:01:43,760 --> 00:01:47,840
सर्वशक्तिमान पर सक्रिय इस समय कम है तो आहान पर

25
00:01:47,840 --> 00:01:51,840
इसलिए किया था लाइव क्योंकि रात में जितनी ऑडियंस

26
00:01:51,840 --> 00:01:55,920
मतलब जितने दर्शक हमें वहां मिलेंगे उतने यहां नहीं मिलेंगे अगर वहां पर 10 मिलेंगे

27
00:01:55,920 --> 00:02:00,000
तो यहां पांच ही मिलेंगे ठीक है इसलिए गौतम पांडे जी

28
00:02:00,000 --> 00:02:04,160
जय श्री राम या फिर कोई और वो अपना समझे

29
00:02:04,160 --> 00:02:08,160
लेकिन ये निश्चित रूप से और समाज को

30
00:02:08,160 --> 00:02:12,400
रखने का एक बोला अगर आप चाहते

31
00:02:12,400 --> 00:02:15,360
थे नहीं हमने जो बोला आपने उत्तर

32
00:02:15,360 --> 00:02:19,880
दिया अगर आप चाहते तो लाइव में बुलाकर हमें उत्तर दे सकते थे। पहली

33
00:02:19,880 --> 00:02:23,920
बात कि आप जैसे लाइव बना रहे हैं, आप भी एक

34
00:02:23,920 --> 00:02:28,160
कम्युनिटी पोस्ट डालकर उत्तर दे सकते थे। मगर आपने भी तो नहीं दिया।

35
00:02:28,160 --> 00:02:32,320
जब आप हमने लास्ट एट द एंड एट द

36
00:02:32,320 --> 00:02:36,400
एंड जब हमने आपके बारे में वीडियो बना के कहा था

37
00:02:36,400 --> 00:02:40,480
कि भाई हम जो है व्यक्तिगत चर्चा को समर्थन देते हैं। तो आप

38
00:02:40,480 --> 00:02:44,640
कह देते कि क्या कहते हैं? व्यक्तिगत

39
00:02:44,640 --> 00:02:48,960
चर्चा नहीं लाइव ही चाहिए। नहीं तो स्वीकार करो कि तुम गलत हो। ये है वो है

40
00:02:48,960 --> 00:02:53,200
तो ऐसे बहुत से विकल्प है जो जो तुम जवाब दे रहे हो वो

41
00:02:53,200 --> 00:02:57,440
हम भी दे सकते हैं। हां मगर आपका ये जो

42
00:02:57,440 --> 00:03:01,680
चौथी लाइन में मतलब जब से वो हमने जब आक्रामक

43
00:03:01,680 --> 00:03:05,760
रूप अपनाया तब से जो है आपका जो बात करने का

44
00:03:05,760 --> 00:03:09,760
ढंग है वो ठीक लग रहा है अब हम ठीक है नहीं पहले जो है ऐसा

45
00:03:09,760 --> 00:03:14,080
लगता था कि हम ही हम है बस तुरम खान लगता था पहले

46
00:03:14,080 --> 00:03:18,240
चलो ठीक है डाउन टू अर्थ भी थोड़ा अच्छा लग रहा गुड 12 घंटे का आपने दो

47
00:03:18,240 --> 00:03:22,880
वीडियो बना लिया। जब मैं सोच देना चाहता हूं तब भी आप इस बात की भाई

48
00:03:22,880 --> 00:03:27,440
मेरा सवा घंटे का वीडियो है तो आप सवा

49
00:03:27,440 --> 00:03:30,480
चार घंटे सवा चार घंटे का वीडियो बनाओगे तो

50
00:03:30,480 --> 00:03:34,560
आपके सवा चार घंटे का वीडियो मेरे मेरे वीडियो का लगभग चार गुना

51
00:03:34,560 --> 00:03:38,640
बड़ा वीडियो आप बनाओगे तो आपके वीडियो का लगभग दो गुना बड़ा वीडियो मैं

52
00:03:38,640 --> 00:03:42,800
नहीं बना सकता तो इसमें ये 8 घंटे वाली जो बात डालना है ना

53
00:03:42,800 --> 00:03:46,880
ये भी अपने आप में एक खंडनार्थ है। कोशिश यह की जा रही है कि हर

54
00:03:46,880 --> 00:03:51,120
बात का हम खंडन करेंगे। चाहे उससे कोई मतलब हो चाहे ना हो।

55
00:03:51,120 --> 00:03:55,360
कोशिश यह की जा रही है। तो फिर हम जब तुम ये करोगे ऐसी

56
00:03:55,360 --> 00:03:59,440
प्रक्रिया चलाओगे कि एक भी शब्द का हालांकि कर नहीं पाते हो वो

57
00:03:59,440 --> 00:04:03,520
बात अलग है। मगर प्रयास तो करते हो तो फिर हम भी उत्तर देंगे तुम्हारे हर

58
00:04:03,520 --> 00:04:08,080
बात का। चलो जैसे आपने देखा तो नहीं

59
00:04:08,080 --> 00:04:13,360
आपको समझ लीजिए।

60
00:04:13,360 --> 00:04:17,760
फाइनल डिसीजन इस बात में कि आपने हमें

61
00:04:17,760 --> 00:04:21,760
लाइव स्ट्रीम के लिए बुलाया था। इस बात में नहीं कि अब हम आइंदा कभी निग्रचार के बारे

62
00:04:21,760 --> 00:04:25,760
में निग्राचार चैनल के बारे में भगवत आनंद के बारे में कोई बात ही नहीं

63
00:04:25,760 --> 00:04:30,240
करेंगे। फाइनल डिसीजन इस बारे में नहीं उसमें नीचे नीचे

64
00:04:30,240 --> 00:04:36,240
लिखा होगा देखना।

65
00:04:36,240 --> 00:04:42,240
कोई बात

66
00:04:58,080 --> 00:05:02,240
बने रहो पगला काम करेगा कॉर्पोरेट में अगर करोड़ों

67
00:05:02,240 --> 00:05:06,280
रुपए कमाना है तो भाई साहब ये पहला रुको दूसरा भी बता जो

68
00:05:06,280 --> 00:05:10,400
काम और आपने सम स्थापित कर दिया था आपकी इच्छा लेकिन

69
00:05:10,400 --> 00:05:15,320
एक जो व्यक्ति मुझे सुनने का ध्यान नहीं कर पाएगा

70
00:05:15,320 --> 00:05:19,360
ना ये केवल तुमने ऐसे बहुत से कार्य

71
00:05:19,360 --> 00:05:23,360
किए हैं जिससे प्रकट होता है कि तुम दूसरे को सुनते ही नहीं हो और ना ही

72
00:05:23,360 --> 00:05:27,440
समझते हो। बकवास करो वैसे

73
00:05:27,440 --> 00:05:28,920
8 घंटे वीडियो

74
00:05:28,920 --> 00:05:33,200
बनाएंगे आप उनकी बातों को कैसे आ सकते?

75
00:05:33,200 --> 00:05:37,200
अगर आप चाहते थे कि मैं आपके साथ लाइव ही करूं या आप

76
00:05:37,200 --> 00:05:41,680
जो है लाइव में इंटरेस्ट रखते थे तो आप यह कहते कि नहीं

77
00:05:41,680 --> 00:05:45,680
यदि अगर तुम्हें वो करना है लाइव

78
00:05:45,680 --> 00:05:49,680
क्या कहते हैं तुम जो है लाइव चर्चा करो या स्वीकार करो ऐसा

79
00:05:49,680 --> 00:05:54,080
वैसा ये सब भी कह सकते थे मगर छ 4 घंटे का वीडियो तुमने भी बनाया था ना

80
00:05:54,080 --> 00:05:58,400
रेलवे स्टेशन पे जहां व्यक्तिगत भी हो गए थे

81
00:05:58,400 --> 00:06:02,560
सोचता था इसीलिए कॉलेज से और आपका कहना है अब मंशा स्पष्ट

82
00:06:02,560 --> 00:06:08,560
पहले से किसकी क्या है वो तो हम भी कह सकते हैं। बनाया

83
00:06:10,600 --> 00:06:15,440
था पहली बात तो यह है कि यह बात हम कह रहे हैं कि

84
00:06:15,440 --> 00:06:19,840
हमने आपको लेकर के वीडियो नहीं बनाया। मगर यदि बनाया

85
00:06:19,840 --> 00:06:24,080
भी है तो इसमें कौन सी बहुत बड़ी बात हो गई? जबकि आप हमें

86
00:06:24,080 --> 00:06:28,080
लेकर के वीडियो बना रहे हो। आप एक ऐसे व्यक्ति के

87
00:06:28,080 --> 00:06:32,560
बारे में बोल रहे हो जिसको डायरेक्टली मैंने ही जोड़ा है म से

88
00:06:32,560 --> 00:06:36,640
उसको लेकर के वीडियो बना रहे हो उसके बारे में झूठ बोल रहे हो अपने वीडियो में कि वो मंच

89
00:06:36,640 --> 00:06:41,520
पर बैठा उसके बारे में गंदी गंदी फक्तियां कस रहे हो

90
00:06:41,520 --> 00:06:45,600
बोल भी रहे हो कि शिवश नारायण द्विवेदी ठीक से जानते हैं यह भी बोल रहे हो कि वो वो

91
00:06:45,600 --> 00:06:49,600
क्यों गई थी क्यों नहीं गई थी मैं नहीं जानता फिर भी उसको जानने वाला होने का

92
00:06:49,600 --> 00:06:53,760
दावा क्यों कर रहे हो जब जानते नहीं हो तो जानने वाला होने का दावा

93
00:06:53,760 --> 00:06:56,760
क्यों कर रहे हो

94
00:06:56,760 --> 00:07:00,960
और तुम्हारे लिए नहीं था औरों के लिए था क्योंकि उसमें

95
00:07:00,960 --> 00:07:04,960
तुम्हारा भी अंश था तो तुमसे जुड़ा हुआ थोड़ा सा अंश वहां पर लिखा भी गया और

96
00:07:04,960 --> 00:07:09,120
उसको उस उस अंश को भी लिखते हुए यह प्रकट करने का प्रयास किया

97
00:07:09,120 --> 00:07:13,360
गया कि मलेच्छराज यदि कोई नकारात्मक सत्ता इस दुनिया

98
00:07:13,360 --> 00:07:17,440
में है तो उसका उसकी नकारात्मकता फैल रही

99
00:07:17,440 --> 00:07:21,520
है जो दिशाहीन लोग जब दिशावान बनना चाह रहे हैं तो

100
00:07:21,520 --> 00:07:26,520
उनको रोक रही तुम इस बात से कभी मुंह नहीं फेर पाओगे

101
00:07:26,520 --> 00:07:30,560
भगवतानंद कि विजय श्री सही

102
00:07:30,560 --> 00:07:34,560
महिला है। तुम इस बात को कभी सिद्ध नहीं कर पाओगे भगवत

103
00:07:34,560 --> 00:07:39,440
आनंद कि वो गलत महिला है। करते रहो चलते रहो आगे

104
00:07:39,440 --> 00:07:43,520
और तुम्हारा जो नाश हो रहा है ये जो भी इधर से किया जा

105
00:07:43,520 --> 00:07:47,520
रहा है वो भी उसका भी कारण वही बनी। तुम कर तो बहुत कुछ रहे थे

106
00:07:47,520 --> 00:07:51,600
पर हम कभी बोल नहीं रहे थे पहले। मगर फिर तुमने कुछ

107
00:07:51,600 --> 00:07:55,680
ऐसा किया जो शंकराचार्य का एक सैनिक आ गया तुम्हारे

108
00:07:55,680 --> 00:08:01,680
साथ तो निपटो अब उससे

109
00:08:03,360 --> 00:08:07,920
कौन क्या बना घूमता है इसमें कोई क्या करे तुम कहते हो

110
00:08:07,920 --> 00:08:12,080
कि तुम्हारे पिता पर ज्योतिर मठ के लोगों के द्वारा दबाव डाला

111
00:08:12,080 --> 00:08:16,240
गया इसलिए आपके पिता ने बयान बदल लिया

112
00:08:16,240 --> 00:08:20,320
तो फिर तुम आज क्यों जा रहे हो ज्योति मठ में भागीदारी निभाना

113
00:08:20,320 --> 00:08:24,320
भाई तुम्हारे पिता के ऊपर दबाव डाला गया है। बयान पलटने

114
00:08:24,320 --> 00:08:28,800
पर उन्हें विवश किया गया है। तुम क्यों जाते घूम रहे हो उनके साथ?

115
00:08:28,800 --> 00:08:33,040
इतने हद तक बात चली गई और तुम उनके साथ बैठे हो। तो क्या माना जाएगा? कौन

116
00:08:33,040 --> 00:08:38,920
किसका क्या है? क्या माना जाए? तुम टॉमी हो क्या

117
00:08:38,920 --> 00:08:42,960
उनके? और यह बात भी आपके आपकी बात पर बोल रहा हूं मैं कि

118
00:08:42,960 --> 00:08:47,120
उनके द्वारा दबाव डाला गया कि नहीं। इस बात का चवा उड़ाने लगो। ज्योतिर्म

119
00:08:47,120 --> 00:08:51,200
के बारे में ऐसा बोल हम नहीं मानते कि ज्योतिर्मठ

120
00:08:51,200 --> 00:08:55,440
ने ऐसा किया। मगर तुम अगर यह बोल रहे हो कि उन्होंने दबाव

121
00:08:55,440 --> 00:08:59,680
डाला तो तुम्हारा क्या व्यवहार बनता है उनके ऊपर? उनके साथ जो आपके पिता

122
00:08:59,680 --> 00:09:03,760
के ऊपर दबाव डाल रहा है। अपने पिता पर क्यों

123
00:09:03,760 --> 00:09:08,120
नहीं वीडियो बनाते? उनके दृश्य लगा

124
00:09:08,120 --> 00:09:10,360
करके

125
00:09:10,360 --> 00:09:14,640
खंडनार्थ का बना चुके हैं।

126
00:09:14,640 --> 00:09:20,640
सोने को दीजिए। उसकी बात हो चुकी है। उन बातों को होने दीजिए।

127
00:09:24,840 --> 00:09:29,560
नहीं लोगों की घटनाओं का

128
00:09:29,560 --> 00:09:34,000
वर्णन उस विषय को बिलकुल पीछे विजय को है क्या

129
00:09:34,000 --> 00:09:38,320
होते कौन है इस विषय में विजय को तुमने डाला है इस विषय में

130
00:09:38,320 --> 00:09:42,560
ठीक है विजय को तुमने डाला है वो तुम्हारे दिन पूरे हो गए

131
00:09:42,560 --> 00:09:47,040
थे इसलिए तुमने डाल दिए तुमको पंगा लेना था

132
00:09:47,040 --> 00:09:51,040
राम के भक्त से इसलिए तुमने वो हो जाती है ना मिस्टेक

133
00:09:51,040 --> 00:09:55,200
जब विनाश काली विपरीत बुद्धि जब व्यक्ति घूम रहा है रावण घूम

134
00:09:55,200 --> 00:09:59,680
रहा है मुझे मोक्ष चाहिए मुझे मरना है मुझे मरना है तो क्या करेगा विष्णु

135
00:09:59,680 --> 00:10:03,920
के अवतार से दुश्मनी ले लेगा ऐसे

136
00:10:03,920 --> 00:10:08,320
ही तुम्हारे अंत के दिन निकट आ गए थे तो तुमने क्या किया

137
00:10:08,320 --> 00:10:12,480
इसी कारण से किसी ऐसे व्यक्ति को टच कर दिया जो डायरेक्ट तुम

138
00:10:12,480 --> 00:10:16,480
और मैं आज आमने-सामने हो गए और अभी तो क्या है अभी तो

139
00:10:16,480 --> 00:10:20,920
अंगड़ाई आगे बहुत लड़ाई तो

140
00:10:20,920 --> 00:10:25,480
शुरुआत

141
00:10:25,480 --> 00:10:29,600
को उसकी गतिविधियां चल रही थी तो किस किसी की

142
00:10:29,600 --> 00:10:33,600
भी गतिविधियां कहीं ना कहीं चलेंगी। तुम्हारी गतिविधियां इस समय छत पे चल रही है। पीछे रबड़ पड़ी हुई

143
00:10:33,600 --> 00:10:38,040
है। वो सीढ़ी रखी हुई है। गतिविधियां तो तुम्हारी चल रही है ना। ये क्या

144
00:10:38,040 --> 00:10:42,240
मतलब? जब तक तुम्हारे पास किसी के विरुद्ध विरोध में

145
00:10:42,240 --> 00:10:46,320
ठोस चीजें नहीं है। तो कुछ मत बोलो। बल-ब बल्कि उसके

146
00:10:46,320 --> 00:10:50,400
उलट जो चीजें उसकी है ही नहीं जो तुम भी जानते हो वो

147
00:10:50,400 --> 00:10:54,560
भी तुम बोल रहे हो। हम्म एक तरफ कह रहे हो कि

148
00:10:54,560 --> 00:10:58,800
अशास्त्रीयता दिखा रहे हो एक तरफ कह रहे हो वाकस्लन हो गया। अशास्त्रीयता

149
00:10:58,800 --> 00:11:02,880
दिखा रहे हो तो वाकलन क्यों बोल रहे हो?

150
00:11:02,880 --> 00:11:07,440
अशास्त्रीयता दिखा रहे हो तो वाकलन क्यों बोल रहे हो? और वाकलन था तो वाकलन

151
00:11:07,440 --> 00:11:12,520
क्यों नहीं? नीचे डिस्क्रिप्शन में लिखा है। क्यों रावण हो

152
00:11:12,520 --> 00:11:16,480
क्या? रावण हो क्या?

153
00:11:16,480 --> 00:11:20,480
कि वह जो है भाई हमसे एक जगह गलती से निकल

154
00:11:20,480 --> 00:11:24,640
गया मुख से कि लास्ट में विजय श्री का वीडियो बोल देते डिस्क्रिप्शन में क्यों

155
00:11:24,640 --> 00:11:29,040
नहीं बोला जब उस बात को पकड़ लिया गया

156
00:11:29,040 --> 00:11:35,040
तब तुम बोल रहे हो छोटू

157
00:11:36,800 --> 00:11:41,200
योगाचार वाले विषय पर पूरी शंकराचार्य जी आपत्ति कर चुके हैं वो लोग जो

158
00:11:41,200 --> 00:11:45,360
योग को आजकल ऋषिकेश में या इधरउधर रह के

159
00:11:45,360 --> 00:11:49,440
ऐसा भी हो रहा है कि बिजनेस चला रहे हैं और पूरी शंकराचार्य जी की

160
00:11:49,440 --> 00:11:53,520
कई दीक्षित शिष्याएं हैं जो योग

161
00:11:53,520 --> 00:11:57,600
को व्यायाम के रूप में भी सिखाती हैं। योग शिक्षिका के

162
00:11:57,600 --> 00:12:00,120
रूप में

163
00:12:00,120 --> 00:12:04,160
तो पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्य हम हैं। तुम

164
00:12:04,160 --> 00:12:08,240
नहीं हो। तो पूरी के शंकराचार्य जी क्या कह रहे हैं, क्या नहीं कह

165
00:12:08,240 --> 00:12:12,480
रहे हैं? वो हमें पता है ना। तुम कौन होते बताने वाले कि उन्होंने क्या कहा,

166
00:12:12,480 --> 00:12:16,640
क्या नहीं कहा। दूसरी बात यह अगर तुम यह कहो कि तुम पूछ क्यों नहीं लेते उनसे जाकर

167
00:12:16,640 --> 00:12:20,720
के तो तो पूछ लिया भाई तुमको हम थोड़ी ना

168
00:12:20,720 --> 00:12:24,960
वीडियो फिल्म बना के दिखाएंगे और जब अब ये बात तुमने इतनी व्यंगम कर दी है

169
00:12:24,960 --> 00:12:28,960
तो पूछेंगे किसी दिन और वीडियो भी बना के दिखा देंगे अब बात ऐसी

170
00:12:28,960 --> 00:12:33,120
है कि तुम्हारे गुरु ने तुमको मंत्र दिया कि नहीं दिया हम कह रहे हैं नहीं

171
00:12:33,120 --> 00:12:37,440
दिया तो तुम कहोगे ना कि भैया तुम तुम दिखा दो नहीं दिया हम तुम्हें प्रमाण

172
00:12:37,440 --> 00:12:41,520
क्यों दें ये भी कह दोगे तुम क्योंकि तुम्हारे गुरु है नहीं अब इस

173
00:12:41,520 --> 00:12:45,680
समय जो तुम प्रकट करके करके उनसे गवाही दिलवा तुमने मंत्र दिया है कि नहीं तो बहुत

174
00:12:45,680 --> 00:12:50,000
सी ऐसी चीजें गुरु अगर तुम उनसे दीक्षित हो उनसे संपर्क में हो

175
00:12:50,000 --> 00:12:52,320
उनके पास उठते बैठते हो जाते हो

176
00:12:52,320 --> 00:12:56,320
तो तुम ये दावा कर सकते हो कि भाई और तुमने जब उनसे पूछ लिया कंफर्म

177
00:12:56,320 --> 00:13:00,560
कर लिया कि नहीं विजयश्री जो है ऐसेसे नहीं मगर

178
00:13:00,560 --> 00:13:04,720
यदि तुमने नहीं पूछा है तुमने ऐसा कुछ किया नहीं है तो तुम आरोप कैसे

179
00:13:04,720 --> 00:13:08,960
लगा रहे हो भाई हमने तो पूछ लिया और जिस समय पूछा था कि

180
00:13:08,960 --> 00:13:13,200
योग योगाचार या इत्यादि के बारे में उस समय हमें नहीं पता था कि कोई प्रसंग बनेगा

181
00:13:13,200 --> 00:13:17,520
आगे चलकर के जो उस वीडियो को हम लोग रखते संभाल

182
00:13:17,520 --> 00:13:21,600
के और फिर उसके बाद जो है उसको पब्लिक करते समय आने पर हमें थोड़ी ना पता था हम

183
00:13:21,600 --> 00:13:25,680
तो उसको चीज को पूछ के आश्वस्त हो चुके थे अब अगर तुम चाहते हो कि

184
00:13:25,680 --> 00:13:29,920
पूरी शंकराचार्य जी से क्यों नहीं पूछते तो हम भाई जाएंगे वो कहां होंगे हम कहां है

185
00:13:29,920 --> 00:13:33,920
हमारा कार्य कैसा है जाएंगे पूछेंगे ऐसा तो नहीं पूछेंगे जब बात

186
00:13:33,920 --> 00:13:37,920
इतनी बढ़ गई है तो पूछेंगे इसलिए नहीं कि हमें नहीं पता है हमें

187
00:13:37,920 --> 00:13:42,160
पता है कि उन्होंने क्या कहा था पूछेंगे इसलिए कि दौरान

188
00:13:42,160 --> 00:13:46,600
वीडियो रिकॉर्ड हो सके और तुम्हारे मुंह पर एक तमाचा मारा जा

189
00:13:46,600 --> 00:13:50,880
सके। मगर जब तक नहीं भी पूछ ले पूछ लेते तब तक भी तुम्हारा

190
00:13:50,880 --> 00:13:55,600
पक्ष कमजोर है क्योंकि हम उनके शिष्य हैं और तुम

191
00:13:55,600 --> 00:13:59,840
एक बाहर के व्यक्ति हो। तो यदि उनके शिष्य

192
00:13:59,840 --> 00:14:03,840
गण ये बोल रहे हैं कि पूरी शंकराचार्य जी ने ये बोला यह जो वीडियो में बोला है यह

193
00:14:03,840 --> 00:14:07,360
तो बोला है इसके अलावा यह बोला तो वह बात माननी पड़ेगी ना गुरु

194
00:14:07,360 --> 00:14:12,680
शिष्य परंपरा का वो क्या है? महत्व क्या है? है

195
00:14:12,680 --> 00:14:16,880
ना? कम से कम इतना तो है कि हमारे विरोध में किसी ऐसे व्यक्ति

196
00:14:16,880 --> 00:14:21,640
की बात तो नहीं मानी जाएगी जो उनका शिष्य नहीं है। ठीक

197
00:14:21,640 --> 00:14:27,640
है? पहले से किसी

198
00:14:29,440 --> 00:14:33,840
ऐसा कुछ नहीं है। ये क्या बोले? हां।

199
00:14:33,840 --> 00:14:38,000
उससे भटका नहीं रहे। हम उसको भी पकड़े हैं और जो अन्य विषय तुमने

200
00:14:38,000 --> 00:14:42,880
खदेड़े हैं उनको भी पकड़ लिया है। तुम जो जो विषय पकड़ोगे उस सबको पकड़ेंगे।

201
00:14:42,880 --> 00:14:48,550
मगर अच्छा लगा तुम्हारा जो टोन है वो बदल गया

202
00:14:48,550 --> 00:14:54,200
[संगीत]

203
00:14:54,200 --> 00:14:58,560
थोड़ा। हम जब कुछ बोल रहे थे तो तुम्हारी एक पोस्ट आई थी कि ये इसीलिए

204
00:14:58,560 --> 00:15:02,640
मुझे लाइव में नहीं जोड़ रहा है क्योंकि मैं इसकी हर बात का मुंहतोड़ जवाब दे दूंगा।

205
00:15:02,640 --> 00:15:06,720
तो हमने तो तुमसे नहीं कहा था कि तुम हस्तक्षेप कर रहे हो। तो हम जब तुमसे ये

206
00:15:06,720 --> 00:15:11,640
कह रहे हैं कि लाइव आ जाओ तो तुम ये क्यों कह रहे हो कि हस्तक्षेप कर रहे हो।

207
00:15:11,640 --> 00:15:17,640
क्या बेस पैर की बात नहीं

208
00:15:24,160 --> 00:15:28,320
फाइनल डिसीजन इस बारे में कि हमें तुम्हारे साथ लाइव

209
00:15:28,320 --> 00:15:34,320
चर्चा करनी है या नहीं।

210
00:15:35,840 --> 00:15:41,000
इस व्यक्ति ने जो कमेंट

211
00:15:41,000 --> 00:15:45,600
किया कर दूंगा बस इसकी जो है

212
00:15:45,600 --> 00:15:48,400
औकात

213
00:15:48,400 --> 00:15:52,400
औकात औकात बताएगा ये इसने उस

214
00:15:52,400 --> 00:15:56,640
पोस्ट में वो वीडियो में इसने आधे बोल क्या ये व्यक्ति उस

215
00:15:56,640 --> 00:16:00,720
लाइव के वीडियो के बाद लिखा है कि सेक

216
00:16:00,720 --> 00:16:05,550
हम नहीं चाहते साध क्यों नहीं चाहते शादी कर मैं निकला

217
00:16:05,550 --> 00:16:10,920
[संगीत]

218
00:16:10,920 --> 00:16:16,920
ओके

219
00:16:18,120 --> 00:16:22,200
छोड़

220
00:16:22,200 --> 00:16:26,240
दिसू 10 लेटेस्ट

221
00:16:26,240 --> 00:16:30,880
ट्रेडिशनल

222
00:16:30,880 --> 00:16:35,040
तुम करेंगे सार्वजनिक कर भी रहे हैं आज भी किए आगे भी करेंगे बहुत सी

223
00:16:35,040 --> 00:16:39,440
चीजें आएंगी। तुम्हारी प्रेमिका को भी ढूंढेंगे तब सार्वजनिक करेंगे।

224
00:16:39,440 --> 00:16:43,440
प्रेमिका शायद मिल जाए जिसके लिए तुमने गीत लिखे हैं। जिसके

225
00:16:43,440 --> 00:16:47,840
प्यार में तुम परेशान थे वो भी हो सकता है मिल जाए। करेंगे

226
00:16:47,840 --> 00:16:53,840
सार्वजनिक चीजें हैं। कुछ चल रहा है चीजें। है

227
00:16:55,320 --> 00:16:59,360
ना? रिकॉर्डिंग करो। इनका संप्रदाय लुप्त

228
00:16:59,360 --> 00:17:04,600
है भैया। इनका जो संप्रदाय है वह लुप्त है

229
00:17:04,600 --> 00:17:08,720
और यह स्वषित आचार्य है

230
00:17:08,720 --> 00:17:14,120
और जिस दिन ये मेरे पल्ले पड़ गए उस दिन इनकी धज्जियां उड़ जाएंगी परंपरा

231
00:17:14,120 --> 00:17:20,120
की बात है समझ बात

232
00:17:21,800 --> 00:17:25,600
है ऐसे बात

233
00:17:25,600 --> 00:17:29,680
ऐसे ही बात को घुमाने के लिए कहीं से कहीं जोड़ने की बात थी वो भी हम

234
00:17:29,680 --> 00:17:35,560
भी कहते थे मत जोड़ो कहीं से कहीं जोड़ने की बात

235
00:17:35,560 --> 00:17:41,560
और हमने रिकॉर्डिंग किसी ने रिकॉर्ड

236
00:17:44,200 --> 00:17:48,480
नहीं कॉल रिकॉर्डिंग प्रमाण नहीं होती भगवतानंद

237
00:17:48,480 --> 00:17:53,040
ये मैं फिर बता रहा हूं है ना इनके ऊपर आधार पर तुम

238
00:17:53,040 --> 00:17:59,040
वो नहीं कर सकते कुछ भी सिद्ध नहीं कर सकते

239
00:18:00,440 --> 00:18:04,560
जिसकी बात तो ऐसी कम्युनिकेटेड बातें तुम मुझे बदनाम करने के लिए पूरी की पूरी

240
00:18:04,560 --> 00:18:08,640
का जामीन लिखी बना सकते हो

241
00:18:08,640 --> 00:18:12,640
बदनाम करने के लिए नहीं तुमको यह बताने के

242
00:18:12,640 --> 00:18:16,720
लिए कि जैसे आधी अधूरी सामग्री के

243
00:18:16,720 --> 00:18:21,000
आधार पर गंभीर आरोप नहीं लगाने चाहिए उसी प्रकार

244
00:18:21,000 --> 00:18:25,840
से हम यह जो सामग्री लाएंगे तुम्हारे सामने वो तुमको बताएंगे

245
00:18:25,840 --> 00:18:30,240
आधी अधूरी चीजों के ऊपर बात नहीं करनी करनी चाहिए। गंभीर विषय तो बिल्कुल नहीं छेड़नी

246
00:18:30,240 --> 00:18:35,440
चाहिए। पहले स्वयं उसकी तहकीकात करनी चाहिए।

247
00:18:35,440 --> 00:18:40,160
और अगर तुम अन्यों से चाहते हो कि तहकीकात करें तो फिर ये

248
00:18:40,160 --> 00:18:44,240
ये क्या कहते हैं ये सार्वजनिक तमाशा नहीं करना चाहिए। अन्यों से अगर

249
00:18:44,240 --> 00:18:50,240
तुम ये अपेक्षा करते हो तो

250
00:18:51,280 --> 00:18:55,440
ये तो तुम कह रहे हो ना अन्य कई लोग तो यह कह रहे हैं ना कि रहा अस्तित्व

251
00:18:55,440 --> 00:18:59,520
जानवी का फिर क्या करें? तुम्हारी बात क्यों माने?

252
00:18:59,520 --> 00:19:03,520
ये तो तुम कह रहे हो। अरे भाई जिसके ऊपर तुम आक्षेप लगा रहे

253
00:19:03,520 --> 00:19:07,520
हो तरह तरह के यह किया वो किया वो भी तो ये यही कहेगा ना कि नहीं

254
00:19:07,520 --> 00:19:11,680
मैंने ये नहीं किया तो तुम्हारी बात क्यों मान ली जाए? उसकी बात क्यों

255
00:19:11,680 --> 00:19:15,680
नहीं मानी जाए? इसीलिए कहते हैं ना कि निराधार केवल मुंह की बातों पे

256
00:19:15,680 --> 00:19:19,760
वो नहीं होता है। या तो तुम ऐसे प्रमाण हो।

257
00:19:19,760 --> 00:19:23,840
अब तुम बन गए हो स्वाघोषित आचार्य तो हम हम क्या करें? हमारे लिए तो दो कौड़ी

258
00:19:23,840 --> 00:19:29,840
के हो। क्या करें? घूम बने घूमते रहो

259
00:19:39,240 --> 00:19:43,520
अफलातून मतलब ये कहां का सिद्धांत है कि जो चीज पहले से सर्कुलेट

260
00:19:43,520 --> 00:19:47,760
हो रही थी वही चीज मान्य होगी जो अचानक से आएगी वो मान्य नहीं होगी।

261
00:19:47,760 --> 00:19:51,760
ये कौन सा सिद्धांत है भाई? ये कौन सा

262
00:19:51,760 --> 00:19:55,920
सिद्धांत है? हो सकता है कि कोई चीज रही हो मगर सर्कुलेट नहीं हुई हो।

263
00:19:55,920 --> 00:20:00,240
किसी एक दो के पास ही रही हो। तो फिर अच्छा तुमने

264
00:20:00,240 --> 00:20:05,800
तुमने ये जो वीडियो दिखाया है ये कहां सर्कुलेट हो रहा

265
00:20:05,800 --> 00:20:11,800
था? ये बेस पैर की बात है।

266
00:20:23,760 --> 00:20:28,000
सत्यापित करके नहीं डालेंगे ना तुमको हम अब ये दिखाएंगे कि बिना सत्यापन

267
00:20:28,000 --> 00:20:32,080
के अगर चीजें सामग्री डाली जाती है तो उससे कैसा कष्ट

268
00:20:32,080 --> 00:20:36,080
होता है कैसा दुख होता है बिना सत्यापित सामग्री के चीजें

269
00:20:36,080 --> 00:20:40,240
जब डाल दी जाती हैं तो क्या उनके आधार पर उसमें

270
00:20:40,240 --> 00:20:44,400
लगाए जा रहे आरोपों को सच समझना चाहिए कि नहीं समझना चाहिए

271
00:20:44,400 --> 00:20:48,400
अगर नहीं समझना चाहिए तो क्यों नहीं समझना चाहिए? अगर कोई वजह है तो

272
00:20:48,400 --> 00:20:52,400
उसकी यही वजह हो सकती है कि उसकी जांच होनी चाहिए। तो जब तुम अपने ऊपर कोई

273
00:20:52,400 --> 00:20:56,480
आंच आती है तो उसके लिए यह मानते हो स्वीकार करते हो

274
00:20:56,480 --> 00:21:00,640
कि किसी भी सामग्री का की जांच करने के बाद

275
00:21:00,640 --> 00:21:04,640
ही उसमें ध्यान दिलाए जाने वाले बिंदुओं

276
00:21:04,640 --> 00:21:08,880
को सत्य मानना चाहिए। संकेत किए जाने वाले बिंदुओं को सत्य

277
00:21:08,880 --> 00:21:12,960
के रूप में स्वीकार करना चाहिए। तो फिर तुम औरों के लिए वो व्यवहार क्यों नहीं

278
00:21:12,960 --> 00:21:17,360
करते? तुमको यह बात ध्यान दिलाने के लिए तुम्हारे

279
00:21:17,360 --> 00:21:21,520
ही मुख से वह सारे तथ्य निकलेंगे जो हम सुना रहे

280
00:21:21,520 --> 00:21:25,840
थे। बस अब हमारे पक्ष में तुम खड़े दिखाई दो जब तुम अपने

281
00:21:25,840 --> 00:21:31,840
ऊपर होने वाले प्रहार के लिए वह बातें बोलोगे जो हम बोल रहे थे उसमें

282
00:21:32,260 --> 00:21:38,260
[संगीत] बात नहीं कितना

283
00:21:38,600 --> 00:21:42,720
काम होना चाहिए था जो सत्य स्वीकारते

284
00:21:42,720 --> 00:21:46,800
मरदित रूप से संवाद कर सकते थे मगर जो विषय आपने चुना था वो विषय हमारे

285
00:21:46,800 --> 00:21:51,120
लिए सहज नहीं था किसी के लिए किसी की निजी जीवन

286
00:21:51,120 --> 00:21:55,200
की चीर फाड़ करनी थी उसमें। ठीक है? वो विषय ऐसा है

287
00:21:55,200 --> 00:21:59,440
ही नहीं जिस पर कि सार्वजनिक चर्चाएं की जाए। अब जैसे

288
00:21:59,440 --> 00:22:04,000
तुम कहते हो कि भाई मुक्तेश्वर जी के बारे में

289
00:22:04,000 --> 00:22:08,080
पूरी के शंकराचार्य जी ने यह कहा मगर हमको सदैव मना किया कि

290
00:22:08,080 --> 00:22:12,240
इस बारे में तुम लोगों को कोई भी समीक्षा नहीं देनी है। हमेशा कहा कि आपको

291
00:22:12,240 --> 00:22:16,520
कभी भी अपमानजनक कोई वक्तव्य नहीं देना है। यह कहा। दूसरी

292
00:22:16,520 --> 00:22:22,240
बात कि

293
00:22:22,240 --> 00:22:26,400
यह बिंदु उठाना है। मगर इस बारे में कि वह क्या था, क्या नहीं था,

294
00:22:26,400 --> 00:22:30,960
यह वह उनके अंतरंग मामलों पर कभी भी चर्चाएं तो नहीं की गई। उनके अंदर

295
00:22:30,960 --> 00:22:35,120
अपना वक्तव्य दे दिया। जैसे तुमने दे दिया कि भाई ऋषिकेश ब्रह्मचारी के ऊपर

296
00:22:35,120 --> 00:22:39,360
यह आरोप है। यह तुमने दिया। निर्लानंद जी के ऊपर यह आरोप

297
00:22:39,360 --> 00:22:43,920
है। यह तुमने वक्तव्य दिया। ठीक है? मगर

298
00:22:43,920 --> 00:22:47,920
अब उसके बारे में चर्चा होनी है। मैं कहूंगा नहीं है। तुम कहोगे है

299
00:22:47,920 --> 00:22:52,000
फिर वहां पर यह होगा। यह फोन में यह क्यों है? यह वाला फोटो क्यों है? ये

300
00:22:52,000 --> 00:22:56,240
इस फोटो में ऐसा हो रहा है। तो यह सब बहुत उसकी चीरफाड़ है

301
00:22:56,240 --> 00:23:00,320
उनके निजी जीवन की। भले ही वो उससे जुड़े हुए हैं कि नहीं

302
00:23:00,320 --> 00:23:04,480
है? यह अलग बात है। हो सकता है वो उसके बाद निर्दोष ही सिद्ध हो।

303
00:23:04,480 --> 00:23:08,560
मगर उस दौरान उनका क्या मजाक बनेगा? क्या उनकी वो होगी

304
00:23:08,560 --> 00:23:12,560
हानि इससे तुम्हें कोई मतलब नहीं। क्योंकि तुमने उनको पहले से

305
00:23:12,560 --> 00:23:16,560
ही दोषी मान रखा है और तुमने अपना निर्णय कर ही

306
00:23:16,560 --> 00:23:20,880
रखा है तो तुम्हें कोई सौहार्दपूर्ण चर्चा की वो तुम्हें मंतव्य

307
00:23:20,880 --> 00:23:25,760
नहीं है। तुम्हें केवल अपना वो सिद्ध करना है वर्चस्व

308
00:23:25,760 --> 00:23:29,840
और एक बात और वर्चस्व ध्यान आया। जिस व्यक्ति को कोई चर्चा

309
00:23:29,840 --> 00:23:34,000
करनी होती है कोई निराकरण के लिए वो व्यक्ति बिना बात को सुने समझे

310
00:23:34,000 --> 00:23:37,680
सोचे पोस्ट नहीं डाला करता है। ऋषिकेश ब्रह्मचारी

311
00:23:37,680 --> 00:23:41,680
जी की आईडी से पोस्ट नहीं की गई थी। कमेंट नहीं किया गया था। मगर

312
00:23:41,680 --> 00:23:45,680
तुमने बिना जांचे उस कमेंट का स्क्रीनशॉट लेके अपने

313
00:23:45,680 --> 00:23:49,680
उस पर डाल दिया कम्युनिटी पोस्ट पे। और अब हटा भी लिया

314
00:23:49,680 --> 00:23:53,680
है। क्यों हटाया? क्या दिक्कत थी? तो इससे तुम्हारी चोरी भी सिद्ध

315
00:23:53,680 --> 00:23:58,000
हो गई हटाने से। जैसा कि तुमने वो बताया था निग्गू निग्गू क्यों हटाया?

316
00:23:58,000 --> 00:24:02,440
हटाने से चोरी सिद्ध होती है ना? तो ये हटाने से तुम्हारी चोरी भी शुद्ध

317
00:24:02,440 --> 00:24:08,440
हुई। तो नहीं कर सकते हो।

318
00:24:11,640 --> 00:24:15,680
मुसलमान ऑनलाइन से जल्दी जल्दी में फ्रूट्स एंड वेज ऑर्डर किया तो

319
00:24:15,680 --> 00:24:19,760
ये कोई केला पीला तो कोई फ्रेश

320
00:24:19,760 --> 00:24:23,760
यहां मिले फार्मर से सोर्स फ्रूट और वि फोर स्टेप

321
00:24:23,760 --> 00:24:29,760
क्वालिटी Amazon फ्रेश से ग्रोसरी लाओगे तो महंगा पड़ेगा

322
00:24:38,320 --> 00:24:41,640
शत्रु है बिलकुल

323
00:24:41,640 --> 00:24:47,280
है नहीं मानते हो

324
00:24:47,280 --> 00:24:51,600
प्रभुपाद ने कृपात्री को कृपात्री जी को राकल

325
00:24:51,600 --> 00:24:56,080
कहा था वो तब कहा था जब वो जीवित था मृत्यु

326
00:24:56,080 --> 00:25:00,480
के उपरांत किसी का कोई बैर नहीं बचता है यह कहां गया सिद्धांत

327
00:25:00,480 --> 00:25:05,400
कहां कहां चला जाए? राजकल दोबारा जीवित हो जाए। शत्रु

328
00:25:05,400 --> 00:25:09,600
है। सिद्धांत पर बात नहीं करोगे ना। तुम्हारे सिद्धांत कमजोर है।

329
00:25:09,600 --> 00:25:15,560
प्रॉब्लम यही है। तुम सपोर्ट मान सकते हो। केवल

330
00:25:15,560 --> 00:25:20,760
इसलिए रास्ता कमा दिया। उसके सपोर्ट मान सकते हो। केवल इसलिए क्या हो

331
00:25:20,760 --> 00:25:25,360
गया? रास्ता कमा दिया। उसके सपोर्ट मान सकते हो। केवल इसलिए क्या मर गया?

332
00:25:25,360 --> 00:25:29,360
सपोर्ट नहीं मानते हो। हां मर गया। केवल इसलिए हां केवल इसलिए कि वो मर

333
00:25:29,360 --> 00:25:33,440
गया। क्यों? क्यों? क्योंकि मरने के बाद बैर किसी प्रकार का बैर नहीं रहता।

334
00:25:33,440 --> 00:25:37,520
ये श्री राम ने सिखाया है। राम जी ने सिखाया राम

335
00:25:37,520 --> 00:25:41,640
ने। राम राम जानते हो ना कौन है? हमारे

336
00:25:41,640 --> 00:25:47,640
तुम्हारे बाप।

337
00:25:49,600 --> 00:25:53,840
क्यों नहीं लड़ सकते भाई? मृत्यु को प्राप्त हो गया है ना।

338
00:25:53,840 --> 00:25:59,840
लड़ना किससे है? जीवित से लड़ना है ना। क्या बकवास बातें हैं ये?

339
00:26:00,000 --> 00:26:04,240
वैसे यहां तक आते-आते इसका वो चैप्टर खुल गया था ना वो ये सब

340
00:26:04,240 --> 00:26:08,400
चैप्टर खुल गए थे जानवी इत्यादि के तो ये थोड़ा सा

341
00:26:08,400 --> 00:26:14,400
कमजोर सा हो गया था

342
00:26:16,800 --> 00:26:21,680
शत्रु तुम भी नहीं थे शत्रु तुम भी नहीं हो

343
00:26:21,680 --> 00:26:26,160
और हो सकता है कि कोई बदलाव हो जाए

344
00:26:26,160 --> 00:26:30,400
कुछ ऐसी चीजें हो जाए जो शत्रुता मिट जाए शत्रुता जैसी

345
00:26:30,400 --> 00:26:35,240
जो चीजें हो रही है वह खत्म हो जाए।

346
00:26:35,240 --> 00:26:37,400
मगर

347
00:26:37,400 --> 00:26:41,760
शत्रु तुम भी नहीं हो। हमारे हिसाब

348
00:26:41,760 --> 00:26:46,000
से तो छोटे भाई हो जो भटक गए हो। घमंड में लोकेशना के चक्कर

349
00:26:46,000 --> 00:26:50,160
में और अहंकार के नशे में भूल गए हो कि बड़े लोगों से कैसे

350
00:26:50,160 --> 00:26:54,320
बात करते हैं और बड़ों का सम्मान कैसे होता है।

351
00:26:54,320 --> 00:26:58,560
यह सब भूल गए हो तो तुम्हारे कान मरोड़ के तुम्हें याद दिलाएंगे। बड़े

352
00:26:58,560 --> 00:27:02,640
जो ठहरे कर्तव्य है हमारा है ना शत्रु तो तुम भी

353
00:27:02,640 --> 00:27:07,160
नहीं हो

354
00:27:07,160 --> 00:27:11,200
चलो है मानते कोई नहीं

355
00:27:11,200 --> 00:27:15,920
मानते हमारे लिए अरे यार तुम इतना लंबा क्यों बोल रहे हो

356
00:27:15,920 --> 00:27:20,320
राम की बात तो लाओ ना मरने

357
00:27:20,320 --> 00:27:24,320
के बाद बैर मिट जाता है किसी प्रकार का ये कहां जाएगा भाई इसपे क्यों

358
00:27:24,320 --> 00:27:30,320
नहीं बोल रहे हो अजीब बात अजीब बात व्यक्ति है यार

359
00:27:35,280 --> 00:27:39,440
सपोर्ट अरे तो तुमने तब क्यों नहीं कहा था पिछली वाली लाइव में मैं कौन सा उनको

360
00:27:39,440 --> 00:27:43,440
उठा के निकाल के कब्र से मार रहा हूं वहां पे भी यही कहते हैं ना तुम

361
00:27:43,440 --> 00:27:47,640
अपनी बात पलटते हो फंस जाते हो फिर अपनी पुरानी बात पे आते हो ये वो है त्रिया

362
00:27:47,640 --> 00:27:52,280
चरित्र वो दोगलापन

363
00:27:52,280 --> 00:27:58,280
खैर इन सब में तुम राम श्री राम के बारे में बोल ही नहीं रहे हो

364
00:28:01,760 --> 00:28:06,920
अब तो कहोगे ही ना तुम्हारे थे और

365
00:28:06,920 --> 00:28:11,040
रहेंगे। ये तुमने जो शत्रुता दिखाई है वो यही है ना कि अपने घर में बैठ के

366
00:28:11,040 --> 00:28:15,920
बंद कमरे में वीडियोस बना लिए। हम उनके गढ़ में गए हैं।

367
00:28:15,920 --> 00:28:20,000
निर्भीक होकर गए। घर में घुस के

368
00:28:20,000 --> 00:28:24,680
उनको पर्दाफाश किया है। तुम्हारी तरह बंद कमरे में बैठकर के शत्रुता नहीं निभाई

369
00:28:24,680 --> 00:28:28,080
है। और हां

370
00:28:28,080 --> 00:28:32,080
हम शत्रुता के मन से नहीं गए। सच बात है।

371
00:28:32,080 --> 00:28:36,480
सुधार के मन से गए। तुम जाना तुम शत्रु

372
00:28:36,480 --> 00:28:40,480
शत्रु हो ना? जाओ लगा दो एक दो बम हम तो तुम्हारी शत्रुता

373
00:28:40,480 --> 00:28:46,280
देख ले। कर दो फायर। बात करते

374
00:28:46,280 --> 00:28:50,560
हैं। तुम शत्रु बने फिरते हो। यही शत्रुता है। बंद

375
00:28:50,560 --> 00:28:54,640
कमरे में लाल रोशनी करके मिस्टर इंडिया वाली मुगंबो नहीं लगाता

376
00:28:54,640 --> 00:28:58,640
है। मिस्टर इंडिया को पकड़ने के लिए लालाल बल्ब जला देता है। सारी

377
00:28:58,640 --> 00:29:02,640
लाल बत्तियां ऑन करो। वही तुम करते हो। लाल

378
00:29:02,640 --> 00:29:08,640
बत्तियां ऑन करके और वीडियो बना दो। यही सबता है

379
00:29:10,040 --> 00:29:14,160
हमारी। मुगैंबो मुगैंबो वाला कम जो अड्डा

380
00:29:14,160 --> 00:29:18,160
था ना मिस्टर इंडिया को पकड़ने के लिए। लाल रोशनी कर दो सब

381
00:29:18,160 --> 00:29:22,240
जगह मिस्टर इंडिया दिखाई देने लगेगा। वही लाल रोशनी तुम करते हो अपने

382
00:29:22,240 --> 00:29:28,240
यहां।

383
00:29:47,840 --> 00:29:51,960
वाणी से मार रहे हो मगर वाणी में तुम गाली दे रहे

384
00:29:51,960 --> 00:29:56,240
हो वाणी में तुम गाली दे रहे हो अश्लील शब्दों का उपयोग

385
00:29:56,240 --> 00:30:00,880
कर रहे हो और तुम व्यक्ति व्यक्ति पर बात कर रहे हो

386
00:30:00,880 --> 00:30:04,880
तुम उसके द्वारा निर्गत होने वाली शिक्षा का खंडन नहीं कर रहे हो।

387
00:30:04,880 --> 00:30:08,880
तुम व्यक्ति पर आरोप लगा रहे हो। और वो आरोप जिनका कोई आधार नहीं है।

388
00:30:08,880 --> 00:30:12,960
यानी गाली गाली उसी को कहते हैं ना किसी पागल को

389
00:30:12,960 --> 00:30:18,120
पागल कहो। व्यभचारी को व्यभचारी

390
00:30:18,120 --> 00:30:22,560
कहो। तुम गाली दे रहे हो, हंसी उड़ा रहे हो। व्यक्तिगत उसमें

391
00:30:22,560 --> 00:30:28,560
ऐसा होगा वैसा होगा।

392
00:30:30,800 --> 00:30:36,760
वहां उन्होंने ये कहा था

393
00:30:36,760 --> 00:30:40,960
कि मृत्यु के बाद किसी प्रकार का वर नहीं रह जाता

394
00:30:40,960 --> 00:30:45,040
है। उसके बाद उन्होंने कहा कि हमारा प्रयोजन सिद्ध हो चुका

395
00:30:45,040 --> 00:30:49,040
है। अब तुम इसका अंतिम संस्कार करो। यह दोनों अलग-अलग बातें हैं। मृत्यु

396
00:30:49,040 --> 00:30:53,840
के बाद किसी प्रकार का बैर नहीं रह जाता। यह पंक्ति है वहां पर पढ़ो दोबारा।

397
00:30:53,840 --> 00:30:58,080
ठीक है? अंतिम संस्कार के लिए नहीं कहा है कि किसी प्रकार का बैर नहीं ले जाता

398
00:30:58,080 --> 00:31:02,320
और किसी प्रकार का बैर नहीं रह जाता तो किसी प्रकार का बैर नहीं रह जाता।

399
00:31:02,320 --> 00:31:07,400
उसका तो मतलब ही है ना किसी प्रकार का बैर नहीं रह जाता।

400
00:31:07,400 --> 00:31:13,400
[संगीत]

401
00:31:13,600 --> 00:31:17,680
अरे तो तुम तो तुम शास्त्र शास्त्र बात ले आओ ना कि

402
00:31:17,680 --> 00:31:23,680
मृत्यु के बाद भी जो है दुश्मनी रहती है। तुम क्यों नहीं ला रहे?

403
00:31:24,480 --> 00:31:28,640
वैसे बड़े बनोगे यहां यह खाना चाहिए। इसमें यह शास्त्र का प्रमाण है।

404
00:31:28,640 --> 00:31:32,640
यहां वो खाना चाहिए। उसमें शास्त्र का प्रमाण है। अब यहां क्यों नहीं ला रहे हो?

405
00:31:32,640 --> 00:31:36,640
शास्त्र का प्रमाण दो यहां पर। यही तो मैं कहता हूं। सिद्धांतिक चर्चा

406
00:31:36,640 --> 00:31:40,640
में बिल्कुल नगण्य हो। भाई जब मैं राम

407
00:31:40,640 --> 00:31:44,640
का वक्तव्य दे रहा हूं और वहां पर तुम्हारे अनुसार अनुकूल वक्तव्य

408
00:31:44,640 --> 00:31:48,800
नहीं है। मान लो तो तुम ऐसा कोई वक्तव्य लाओ ना जिससे वो बात

409
00:31:48,800 --> 00:31:52,800
तुम्हारी फिट हो जाए कि हां ये राम की बात भी रह जाए और वो जो तुम कहना चाह रहे हो वो

410
00:31:52,800 --> 00:31:57,200
भी हो जाए। हम मृत्यु के बाद शत्रुता

411
00:31:57,200 --> 00:32:03,200
नहीं रह जाती।

412
00:32:07,680 --> 00:32:10,760
थोड़ा जल्दी जल्दी करेंगे

413
00:32:10,760 --> 00:32:14,800
भाई आगे और दो वीडियो

414
00:32:14,800 --> 00:32:17,680
और है

415
00:32:17,680 --> 00:32:23,680
तुम्हें भी फन चाहिए [संगीत]

416
00:32:23,920 --> 00:32:27,600
कह रहे हैं स्पीक संस्कृत

417
00:32:27,600 --> 00:32:31,720
अरे

418
00:32:31,720 --> 00:32:34,680
नहीं

419
00:32:34,680 --> 00:32:40,680
अरे

420
00:32:55,640 --> 00:33:00,080
कैसे सर नहीं पता चल रहा है कि तुम क्या बोल रहे हो। हमने

421
00:33:00,080 --> 00:33:04,080
कहा कि मैं अगर किसी को हाथ पैर से मारूंगा तभी शत्रुता होगी। ऐसी थोड़ी है।

422
00:33:04,080 --> 00:33:08,400
अगर उसने सनातन के कहा क्या बोल रहे हो? डाउनलोड करके लाओ।

423
00:33:08,400 --> 00:33:12,400
उठा कैसे नहीं मानते? बोलूंगा आप क्या कौन उसको उठा के

424
00:33:12,400 --> 00:33:16,400
मारते? अरे नहीं है। तुम सपना नहीं मानते उसे। अरे भैया उठा के नहीं मारते। जिसका

425
00:33:16,400 --> 00:33:20,560
थोड़ी तुम हक कैसे मारेंगे? तुम

426
00:33:20,560 --> 00:33:23,520
उसके मुर्दे कहां से

427
00:33:23,520 --> 00:33:27,600
यह क्या कह रहे हो कि मतलब हम कौन सा उसको उठा के मार रहे हैं? तुमने यह

428
00:33:27,600 --> 00:33:31,680
कहा था जब मैंने ये कहा था नहीं राम ने कहा है कि शत्रुता नहीं रह जाती।

429
00:33:31,680 --> 00:33:35,840
तुमने पहले कहा था मेरे तो शत्रु हैं। फिर मैंने श्री राम का प्रमाण दे

430
00:33:35,840 --> 00:33:39,840
दिया। फिर तुमने बाद में कहा कि नहीं शत्रु नहीं है। नहीं तुमने ये कहा कि मैं

431
00:33:39,840 --> 00:33:44,320
कौन सा उसको उठा के मार रहा हूं। तुम्हें वहां यह कहना था कि नहीं मेरे शत्रु हैं

432
00:33:44,320 --> 00:33:48,480
और अब तुम कह रहे हो कि मैं उठा के मार नहीं सकता हूं और मार

433
00:33:48,480 --> 00:33:52,840
ना मारने से कौन सा वो हमारा मित्र हो जाता है क्या कह रहे हो यहां

434
00:33:52,840 --> 00:33:55,240
पर

435
00:33:55,240 --> 00:34:01,240
एक बात

436
00:34:01,840 --> 00:34:06,160
दोगली बात ये कर रहे हो कि जब तुम पहले कह चुके हो कि वो मेरे शत्रु

437
00:34:06,160 --> 00:34:10,160
ही है और जब मैं राम जी को लाकर के यह बोल रहा हूं कि

438
00:34:10,160 --> 00:34:14,320
मृत्यु के बाद वर जो है मिट जाता है। तो तुम्हें

439
00:34:14,320 --> 00:34:18,400
यहां पर यह कहना चाहिए नहीं नहीं मैं तो शत्रु ही मानता हूं। तुम वहां पर अपने

440
00:34:18,400 --> 00:34:22,400
आप को जस्टिफाई कर रहे हो। मेरे से मिलान कर रहे हो कि

441
00:34:22,400 --> 00:34:26,480
जैसे तुम वाणी से मारते हो वैसे ही तो मैं भी वाणी से मारता हूं। यानी तुम

442
00:34:26,480 --> 00:34:30,480
इस इस समय खुद को मेरी जगह पर खड़ा कर रहे हो कि अगर तुम जैसा व्यवहार करते हो

443
00:34:30,480 --> 00:34:34,720
वैसा ही तो मैं भी कर रहा हूं तो मुझे शत्रु क्यों कह रहे हो? बस उसमें वो लाइन मिसिंग है।

444
00:34:34,720 --> 00:34:38,880
मुझे शत्रु क्यों कह रहे हो? वाली। बाकी तुम अपने उदाहरण को मुझसे

445
00:34:38,880 --> 00:34:43,040
मैच करा रहे हो ना और मैं यह कह रहा हूं कि मैं शत्रु नहीं मानता तो मेरे

446
00:34:43,040 --> 00:34:47,200
से मैच कराने में तुम अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर रहे हो वहां पर यह कहते

447
00:34:47,200 --> 00:34:52,080
हुए कि मैं कौन सा उसको खड़ा करके मारता हूं। मुर्दे को निकाल के मारता हूं।

448
00:34:52,080 --> 00:34:56,160
मैं भी तो यही करता हूं। वाणी से ही तो मारता हूं।

449
00:34:56,160 --> 00:35:00,320
वाणी से ही तो उसका खंडन करता हूं। प्रतिकार करता हूं। विचार वाला ही तो प्रतिकार करता हूं।

450
00:35:00,320 --> 00:35:04,480
मारता नहीं हूं। जो वैचारिक प्रतिकार है वही तो करता हूं।

451
00:35:04,480 --> 00:35:08,560
ये तुम वहां पे कह रहे हो। इसलिए तुम्हारी बात दोगली हो रही है। तुम्हें यहां पर ठोक के कहना

452
00:35:08,560 --> 00:35:12,720
चाहिए मेरा शत्रु है और वहां तुम्हें यह व्याख्या करनी चाहिए थी जो तुम अब कर रहे हो

453
00:35:12,720 --> 00:35:17,440
कि अंतिम संस्कार के लिए कहा था श्री राम ने शत्रुता तो रहती है।

454
00:35:17,440 --> 00:35:21,600
शत्रुता रहती है तो इसमें कोई और प्रमाण ले आओ ना जब वहां पर एक लाइन आ रही

455
00:35:21,600 --> 00:35:25,760
है कि मृत्यु के बाद किसी प्रकार का बैर नहीं होता है। सभी प्रकार

456
00:35:25,760 --> 00:35:29,840
के बैर मिट जाते हैं। सभी प्रकार के सभी प्रकार तो अगर तुम्हें

457
00:35:29,840 --> 00:35:34,480
यहां से ये चीज संतुष्टि नहीं हो रही है।

458
00:35:34,480 --> 00:35:37,800
कौन सी टिप्पणी पढ़नी

459
00:35:37,800 --> 00:35:42,960
है? कौन सी टिप्पणी पढ़नी है? खैर

460
00:35:42,960 --> 00:35:48,960
अगर तुम वो नहीं करते

461
00:35:55,960 --> 00:35:58,520
हो

462
00:35:58,520 --> 00:36:02,560
अगर अगर तुम उन उनसे शत्रुता रखते हो तो यहां पर

463
00:36:02,560 --> 00:36:06,640
तुम्हारा यह कहना नहीं बनता है कि मैं मैं कौन सा उनको उठा के मार

464
00:36:06,640 --> 00:36:10,880
रहा हूं और अगर शत्रुता कर रहे हो तो तुम्हारा यहां पर यह कहना कहना

465
00:36:10,880 --> 00:36:15,040
बनता है कि भैया मैं मेरा तो शत्रु है। अपने पक्ष को वहां पर

466
00:36:15,040 --> 00:36:19,040
लेके चलो। मेरे अनुसार मेरा उदाहरण देते हुए यह

467
00:36:19,040 --> 00:36:23,040
मत कहो कि मैं भी तो तुम्हारी तरह ही हूं। तो फिर मेरे में क्या दिक्कत? दिक्कत यह है कि तुम अपने पिछले

468
00:36:23,040 --> 00:36:27,240
कमेंट में कह चुके हो कि मेरे लिए वो शत्रु

469
00:36:27,240 --> 00:36:33,240
हैं। गुरुदेव को अब तक पता नहीं है। संभवत अब पता चलेगा।

470
00:36:38,240 --> 00:36:42,240
समझ में आ रहा है। तुम क्या बोल रहे हो? तुमको स्वयं नहीं पता चल रहा है कि तुम तुमको नहीं

471
00:36:42,240 --> 00:36:46,400
पता चल रहा है तुम बालक हो अभी छोटे हो सनातन के विरुद्ध

472
00:36:46,400 --> 00:36:50,720
कार्य किया तुम मेरा शत्रु है शत्रु का थोड़ी है कि मारे चला के उसको पीटो तब शत्रु

473
00:36:50,720 --> 00:36:55,080
तुम्हारे अंदर तथा भी नहीं है तुम्हारे अंदर पीटने की तथा भी नहीं

474
00:36:55,080 --> 00:36:59,120
है तुम क्या मारोगे किसी को थैले में डाल के कोई

475
00:36:59,120 --> 00:37:05,120
ले जाएगा

476
00:37:08,120 --> 00:37:12,160
तुम्हें बस मुंह मुंह के बड़बड़िया हो। कहीं छुप छुपा के अपना

477
00:37:12,160 --> 00:37:16,240
मुंह का बड़बड़ कर लो। कई लोग ऐसे ही फेमस हुए

478
00:37:16,240 --> 00:37:20,320
हैं। तुम भी उनमें से एक हो। तो तुमको

479
00:37:20,320 --> 00:37:24,640
कह रहे हम शत्रु मानते शत्रु माने भी उसे

480
00:37:24,640 --> 00:37:28,960
के कारण उसे शत्रु कह रहे हम शत्रु मानते

481
00:37:28,960 --> 00:37:33,360
माने उसे एक के कारण उसे अप सिद्धांत के कारण सनातन की हानि हो रही है

482
00:37:33,360 --> 00:37:37,440
हां जिसके अप सिद्धांत के कारण सनातन की हानि हो रही है तो मगर अब वो नहीं

483
00:37:37,440 --> 00:37:41,520
है ना अब तो उसका अप सिद्धांत है तो अप सिद्धांत शत्रु है जो जिनके

484
00:37:41,520 --> 00:37:47,320
रूप में वो ख्यापित हो रहा है जिनके द्वारा वो प्रचारित हो रहा है वो शत्रु

485
00:37:47,320 --> 00:37:51,480
है साहब ने सोचा

486
00:37:51,480 --> 00:37:55,680
कोई अप्रासंगिक नहीं है। जो मर

487
00:37:55,680 --> 00:37:59,760
गया है उसके प्रति हीनता का भाव, नफरत का भाव, द्वेष का

488
00:37:59,760 --> 00:38:03,840
भाव जो मर गया है उसके प्रति रखना गलत है। उसके

489
00:38:03,840 --> 00:38:07,840
द्वारा चीजें जो की गई है उन चीजों के प्रति वो अभी भी अस्तित्व में है तो

490
00:38:07,840 --> 00:38:11,920
उनके लिए भाव अपना रखना सही है। तो यदि जो मर गया है उसको

491
00:38:11,920 --> 00:38:16,080
तुम गाली दे रहे हो। उस दांत पीस रहे हो उसके लिए तो यह सब तुम्हारे

492
00:38:16,080 --> 00:38:20,240
द्वेष को प्रकट करता है। तो इसका मतलब है उसको

493
00:38:20,240 --> 00:38:24,240
व्यक्तिगत गाली दे रहे हो। उसके सिद्धांत को कुछ कह रहे हो तो वो तो बात अलग है।

494
00:38:24,240 --> 00:38:28,480
मगर उसको व्यक्तिगत गाली दे रहे हो। दांत पीस रहे हो या कुछ भी कर रहे हो। गंदासंधा

495
00:38:28,480 --> 00:38:32,560
बोल रहे हो अश्लील अश्लील भाषा बोल रहे हो तो यह तुम्हारे द्वेष को प्रकट करता

496
00:38:32,560 --> 00:38:36,800
है। तुम्हारी शत्रुता को प्रकट करता है। और अगर करता है तो शत्रुता नहीं होनी

497
00:38:36,800 --> 00:38:42,800
चाहिए।

498
00:39:01,800 --> 00:39:06,560
अग पहली बात तो यह है कि अग्नि में उठने की ही बात नहीं है।

499
00:39:06,560 --> 00:39:11,080
तुमने

500
00:39:11,080 --> 00:39:15,120
स्वयं तुमने स्वयं अपने मुख से ऐसी ऐसी

501
00:39:15,120 --> 00:39:19,200
भाषा ऐसी ऐसी वाणी ऐसी ऐसी शब्द निर्गत किए हैं

502
00:39:19,200 --> 00:39:23,200
जो अत्यंत अशोभनीय है और अगर ऐसी बात है अगर

503
00:39:23,200 --> 00:39:27,280
हगना भूतना इतना ही आसान है तो तुम अपनी सभी कथाओं में अग्ना

504
00:39:27,280 --> 00:39:32,000
मूतना वो कर दो सामान्यकरण है ना

505
00:39:32,000 --> 00:39:36,160
जाके कथाओं में ये सब बोलना सामान्य कोई दिक्कत नहीं है बोला

506
00:39:36,160 --> 00:39:40,240
जा सकता है बोलना ठीक है बंद बंद कमरे में क्यों बोल रहे हो? अकेले में

507
00:39:40,240 --> 00:39:44,240
क्यों बोल रहे हो? सबके बीच में बोलो ना जिससे तुम्हें अगली बार बुलाना है

508
00:39:44,240 --> 00:39:48,480
कि नहीं बुलाना है? कथाएं करानी है कि नहीं करानी सोचेगा नहीं अग्ना मूतना

509
00:39:48,480 --> 00:39:54,480
करो अग्ना मूतना सब वहां

510
00:39:57,720 --> 00:40:01,920
हां यही अगे करना बताना

511
00:40:01,920 --> 00:40:05,920
भागवत करने जाओ तो वहां पर एक विशेष चैप्टर रखो जो जो भी शब्द

512
00:40:05,920 --> 00:40:09,920
ऐसे हैं जो अशोभनीय माने जाते हैं समाज में अब देखो

513
00:40:09,920 --> 00:40:14,160
ये व्यक्ति कितना निर्लज है कितना निर्लज है स्वयं को सही सिद्ध

514
00:40:14,160 --> 00:40:18,240
करने के अब इन सब चीजों का गालियों का अग्ना मूतना

515
00:40:18,240 --> 00:40:24,240
इन सब बातों का सामान्यकरण करने

516
00:40:25,400 --> 00:40:29,520
लगा। अब वो जो है तब ये सब

517
00:40:29,520 --> 00:40:33,760
चीजें इसके लिए सामान्य हो जाएंगी। क्या भैया?

518
00:40:33,760 --> 00:40:38,240
ठीक है। करना अपने घर में भी ऐसे ही करते हो क्या? कोई

519
00:40:38,240 --> 00:40:42,240
वहां गया है, शौच के लिए गया है तो वह हग रहा है। वह

520
00:40:42,240 --> 00:40:46,400
हग रही है। ऐसे ही करते हो क्या घर में? मुझे

521
00:40:46,400 --> 00:40:50,560
नहीं लगता है कि करतेगे और करना भी नहीं। नहीं तो मिलोगे तो कान मरोड़

522
00:40:50,560 --> 00:40:54,920
दूंगा तुम्हारे। ऐसे नहीं करते घर में। हां। समझे ना

523
00:40:54,920 --> 00:40:59,200
छोटू? और अगर यह सब सामान्य है तो फिर करो। थोड़ा बताओ

524
00:40:59,200 --> 00:41:05,200
कहां कर रहे हो?

525
00:41:18,960 --> 00:41:22,960
ये पोस्ट में कह रहे थे शत्रु है पर तुमने जब वीडियो बनाया

526
00:41:22,960 --> 00:41:27,200
तो उसमें तुमने यह नहीं कहा हां शत्रु है। तुमने उसमें ये कहा कि मैं

527
00:41:27,200 --> 00:41:31,200
अगर तुम उसको केवल विचारों से उसके विचारों को प्रतिकार कर रहे हो तो मैं

528
00:41:31,200 --> 00:41:35,440
कौन सा उसे गड़े मुर्दे को उठा करके मार रहा हूं। यानी वहां पर तुमने मेरी की

529
00:41:35,440 --> 00:41:39,600
मेरे द्वारा की जाने वाली चीज का समर्थन किया। वहां पर तुमने अपने शत्रुत्व

530
00:41:39,600 --> 00:41:45,600
को प्रकट नहीं किया।

531
00:41:49,800 --> 00:41:53,920
आपके विषय में किसी को इतना विषय

532
00:41:53,920 --> 00:41:59,760
समझ में नहीं आ रहा इसको किसी के विषय में

533
00:41:59,760 --> 00:42:03,760
विंडा का लक्षण किसका है ये पता चल गया बहुत सी बात है

534
00:42:03,760 --> 00:42:09,760
तुम्हारी वो पांच घंटे वाली लाइव देखना उसमें पता चल जाएगा

535
00:42:12,640 --> 00:42:16,640
वाह इंडिया कंप्लीट मसाला बनाया स्पेशल तैयार मसाला ये

536
00:42:16,640 --> 00:42:20,800
डाला पूरा खा इंडिया कंप्लीट मसाले जो

537
00:42:20,800 --> 00:42:25,360
रेस्टोरेंट जैसा स्वाद लाए मिटो में वाह इंडिया कंप्लीट मसाले

538
00:42:25,360 --> 00:42:29,440
आपके घर का शेयर एनएफ एक्सेल का पूरा यूज़

539
00:42:29,440 --> 00:42:33,520
करना बहुत ही कम लोगों को आता है और उसके साथ एआई और चैट जीपीटी

540
00:42:33,520 --> 00:42:37,600
को यूज़ करके एक हाई पेन जॉब पाना और भी कम लोगों को आता है।

541
00:42:37,600 --> 00:42:42,120
दोस्तों अगर आप भी कॉम्प्लेक्स डेटा को एनालाइज करना

542
00:42:42,120 --> 00:42:48,120
चाहते उपकार खंडन करने को राम के खंडन से हो रहा है।

543
00:42:50,880 --> 00:42:55,120
दयानंद का खंडन करने को राम जी के खंडन से नहीं जोड़

544
00:42:55,120 --> 00:42:59,200
रहा हूं। राम जी कह रहे हैं कि मृत्यु के बाद किसी

545
00:42:59,200 --> 00:43:05,200
प्रकार का मैर नहीं रह जाता। मैं दिखा देता

546
00:43:06,680 --> 00:43:10,800
हूं। जब रावण

547
00:43:10,800 --> 00:43:16,080
मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

548
00:43:16,080 --> 00:43:20,080
तो उसके बाद श्री राम कहते

549
00:43:20,080 --> 00:43:26,080
हैं कि भाई

550
00:43:43,600 --> 00:43:48,320
असल में इसने क्या है बाकी मेरे ख्याल से वो तंत्र इत्यादि वाले तो अच्छे से पढ़े

551
00:43:48,320 --> 00:43:54,320
मगर रामायण गीता अच्छे से नहीं पढ़ पाया यह व्यक्ति

552
00:43:56,520 --> 00:44:02,520
इसलिए ऐसा हो रहा है इसके साथ

553
00:44:03,040 --> 00:44:09,040
रावण का वध

554
00:44:55,920 --> 00:44:59,560
ये ये

555
00:44:59,560 --> 00:45:04,400
देखो वैर जो है ये क्या वचन है?

556
00:45:04,400 --> 00:45:09,520
वैर जीवन काल तक ही रह जाता है। दिख रहा है ना?

557
00:45:09,520 --> 00:45:14,080
मरने के बाद वैर का अंत हो जाता है।

558
00:45:14,080 --> 00:45:18,080
और इससे पहले भी रावण के लिए उन्होंने

559
00:45:18,080 --> 00:45:22,640
बहुत सी चीजें कही है। मरने के बाद

560
00:45:22,640 --> 00:45:27,120
हम बहुत महिमा मंडन भी हुआ है रावण का।

561
00:45:27,120 --> 00:45:31,280
तो यह यही दर्शा रहा है। यह एक

562
00:45:31,280 --> 00:45:35,440
अलग सिद्धांत है कि वर मरने के बाद वर का वैर का

563
00:45:35,440 --> 00:45:39,440
अंत हो जाता है और वैर जो है जीवन काल तक ही

564
00:45:39,440 --> 00:45:43,520
रहता है। एक सिद्धांत है। इसके बाद फिर वो अपनी बात बता रहे हैं आगे की कि अब

565
00:45:43,520 --> 00:45:47,520
क्या-क्या करना है। तो अब हमारा यहां का काम भी हो चुका है। अब जो है

566
00:45:47,520 --> 00:45:52,160
आप जो है यह सिद्धांत बता के इस सिद्धांत के

567
00:45:52,160 --> 00:45:56,320
उपयोग को आलंबन में लेते हुए भी और अब आगे के कार्य करने तुम्हारा

568
00:45:56,320 --> 00:46:00,400
प्रयोजन हो चुका है और अब तुम इसका संस्कार करो इस समय ये जैसे

569
00:46:00,400 --> 00:46:04,600
तुम्हें तुम्हारे स्नेह का पात्र है वैसे ही मेरे भी स्नेह का पात्र है

570
00:46:04,600 --> 00:46:08,920
ना तो स्नेह का पात्र क्या हुआ

571
00:46:08,920 --> 00:46:13,160
मतलब स्नेह का पात्र है

572
00:46:13,160 --> 00:46:14,640
मतलब तुम्हारी

573
00:46:14,640 --> 00:46:18,960
अगर उस किसी शत्रु शत्रुता होगी मरने के बाद भी तो उसका

574
00:46:18,960 --> 00:46:23,920
वो तुम्हारे लिए स्नेह का पात्र होगा क्या शत्रुता के समय

575
00:46:23,920 --> 00:46:27,920
यह लाइन क्यों नहीं बताते कामा का फस गए हो तो अब

576
00:46:27,920 --> 00:46:32,080
इधर-उधर की बातें कर रहे हो तंत्र इत्यादि वाले तुमने पढ़ रखे

577
00:46:32,080 --> 00:46:36,160
हैं नाग आग का तुम लिए घूमते हो रामायण गीता नहीं पढ़

578
00:46:36,160 --> 00:46:40,640
पाए ठीक से और पढ़ भी लिया होगा तो सिद्धांतों को उतार नहीं पाए

579
00:46:40,640 --> 00:46:46,640
अपने जीवन में

580
00:46:48,400 --> 00:46:52,560
राम जी का खंडन तो तुम कर ही रहे हो ना। राम कह रहे हैं कि मरने के बाद मर जीवन काल

581
00:46:52,560 --> 00:46:56,560
तक रहता है बैर। तुम कह रहे हो मेरे शत्रु है दयानंद जी प्रभुपाद

582
00:46:56,560 --> 00:47:02,560
जी

583
00:47:05,920 --> 00:47:10,160
प्रभुपाद का खंडन नहीं प्रभुपाद को व्यक्तिगत गालियां देना व्यक्तिगत

584
00:47:10,160 --> 00:47:15,120
उनके बारे में अश्लील बातें बोलना गलत बातें बोलना वो गलत

585
00:47:15,120 --> 00:47:19,120
दयानंद जी दयानंद जी के बारे में व्यक्तिगत

586
00:47:19,120 --> 00:47:24,160
रूप से गलत बातें बोलना निराधार

587
00:47:24,160 --> 00:47:28,320
निराधार मतलब वह उसकी जो जानकारी है गवाह नहीं है साक्ष्य नहीं है कुछ नहीं है

588
00:47:28,320 --> 00:47:32,320
और तुम बोल रहे हो केवल तुम्हें मन

589
00:47:32,320 --> 00:47:38,320
कर रहा है रोस्ट करने का इसलिए कैरी मिनाटी बनने का धार्मिक कैरी

590
00:47:45,720 --> 00:47:49,920
मिनाटी भाई तू अपने तू तड़ाक को सही सिद्ध करो ना पूरी मठ में विकृति

591
00:47:49,920 --> 00:47:53,920
समाप्त हो गई या हो गई नहीं हुई यह क्या जैसे ही फंसते हो तो फिर

592
00:47:53,920 --> 00:47:57,920
भागते क्यों हो यार विषय छोड़कर? सबकी यही आदत है। जिसके

593
00:47:57,920 --> 00:48:02,000
जो भी अधर्मी है वह विषय से भागता है। भाई बात ये चल रही है तू

594
00:48:02,000 --> 00:48:06,000
इतनी निर्लज्जता से बातें क्यों करता है? तो कह रहा है हमारे तू

595
00:48:06,000 --> 00:48:10,400
तड़ाक करने से क्या हो गया? अरे भाई ठेस पहुंची। कोई

596
00:48:10,400 --> 00:48:14,400
बड़ा व्यक्ति अपने आप को बड़ा समझता है। तूने तू तड़ाक कर दिया। जैसे मेरे तू तड़ाक करने

597
00:48:14,400 --> 00:48:18,720
से तुझे ठेस पहुंच रही होगी। तेरे अनुगत लोगों को ठेस पहुंच रही होगी।

598
00:48:18,720 --> 00:48:22,720
है ना? मैं तो कर भी सकता हूं। तेरे से बड़ा हूं। सात

599
00:48:22,720 --> 00:48:26,960
आठ साल छोटा है मुझसे। छोटू है। तुझे कोई मारने पीटने

600
00:48:26,960 --> 00:48:32,960
आएगा तो मुझे को आना पड़ेगा बचाने के लिए।

601
00:48:39,800 --> 00:48:43,840
चल क्या बोला इसने दोगलेपन की निशानी देखो

602
00:48:43,840 --> 00:48:49,040
अब फसेगा ये

603
00:48:49,040 --> 00:48:53,120
मेरे सामने आके ऐसे बोल लेना चल

604
00:48:53,120 --> 00:48:57,600
मेरे सामने आ तू दोगला है

605
00:48:57,600 --> 00:49:01,920
तू केवल अपने छुपे हुए कमरे में अकेले में ऐसा बोल पाता

606
00:49:01,920 --> 00:49:06,000
है तू जा ना दयानंद दयानंद जी के लिए वहां पर उनके

607
00:49:06,000 --> 00:49:10,160
उसमें जा आर्य समाज मंदिर में बोल वहां पर तू तड़क हगना मूत

608
00:49:10,160 --> 00:49:14,840
नाना तेरा मूत निकल जाएगा

609
00:49:14,840 --> 00:49:19,080
बोल ये सब बोल वहां जाके

610
00:49:19,080 --> 00:49:23,800
डोगले मैं वो बोलता हूं जो यहां बोलूंगा वही वहां बोलूंगा

611
00:49:23,800 --> 00:49:27,840
रामो भाषते क्रिया चरित्र नहीं

612
00:49:27,840 --> 00:49:33,840
हूं तेरी तरह जो यहां बोलूंगा वही वहां बोलूंगा

613
00:49:42,240 --> 00:49:46,400
तू जितनी देर अकेले कमरे में होता है उतनी देर वह सब वाणी बोलता है

614
00:49:46,400 --> 00:49:50,400
ना तू अपनी कथा में बोलता है और ना तू उन लोगों के समक्ष होता है तब बोलता है

615
00:49:50,400 --> 00:49:56,400
जिन लोगों के लिए तूने ये सब बोला

616
00:49:56,760 --> 00:50:02,760
है दोगला कहीं

617
00:50:03,320 --> 00:50:06,960
का पैसा देता

618
00:50:06,960 --> 00:50:11,200
झूठ बोल बोल रहा है तू झूठ बोल रहा है पूरी

619
00:50:11,200 --> 00:50:15,280
के शंकराचार्य जी के पास जाना तो बोलना गुदा वाली बात और

620
00:50:15,280 --> 00:50:21,280
अभी वो जो चीजें निकालूंगा वो चार करोड़ चार शंकराचार्य ये सब बातें

621
00:50:21,560 --> 00:50:26,600
बोलना तू तड़ाक वाली भाषा बोलना अग्ना मूत ना बोलना तब पता

622
00:50:26,600 --> 00:50:30,760
चलेगा और मेरे सामने बोलना तू यही भाषा

623
00:50:30,760 --> 00:50:34,800
बोलना विजयश्री जो है लिफ्ट टू लिफ्ट किस कर रही थी कुत्ते

624
00:50:34,800 --> 00:50:40,800
को बोलना तब देखूं कुत्ता किसे बनाया जाता

625
00:50:42,200 --> 00:50:46,240
है? मैं जो मैं जो तुमसे बोल रहा हूं वही सबको बोलूंगा। नहीं

626
00:50:46,240 --> 00:50:52,240
बोलेगा क्योंकि तू चोर है।

627
00:50:58,720 --> 00:51:03,320
तेरे से तो वाकई में कोई परिवर्तन नहीं

628
00:51:03,320 --> 00:51:07,440
आएगा। मुद्दे पर क्या भाई? जब मैं ये कह रहा हूं कि

629
00:51:07,440 --> 00:51:11,440
तुमने गुरुदेव की अवमानना की है इसलिए मैं तुम्हारे साथ

630
00:51:11,440 --> 00:51:15,440
मंच साझा नहीं कर सकता। तो जब मैं यह कह रहा हूं तो तुम ये

631
00:51:15,440 --> 00:51:19,600
कह रहे हो हमने कब की? तो मैं बता रहा हूं कि तुमने ऐसेसे बातें की है। और

632
00:51:19,600 --> 00:51:24,080
उनके साथ क्या अन्यों के साथ भी की है। तो तुम कह रहे हो मैं भटका रहा हूं।

633
00:51:24,080 --> 00:51:28,080
भाई मैं तुम्हें शुरू ही यही से हुआ था कि मैं तुम्हारे साथ मंच साझा क्यों नहीं करना चाहता हूं। दूरी

634
00:51:28,080 --> 00:51:32,480
बना मैं तुम्हारे साथ लड़ना नहीं चाहता था। मगर मेरी मजबूरी

635
00:51:32,480 --> 00:51:36,560
है कि मैं जब तुमसे मिलूंगा तो मुझे तुमसे लड़ना पड़ेगा। इसलिए मैं दूर

636
00:51:36,560 --> 00:51:40,640
रहना चाहता था कि ना मिलो ना तो मिलने की

637
00:51:40,640 --> 00:51:44,720
नौबत है ना लड़ने की नौबत है जो मैं तुम्हारे साथ लड़ते हुए देखूं। लोग तो

638
00:51:44,720 --> 00:51:48,720
क्या है तुम अब कह रहे हो कि भाई कौन सा वो आ गया परिवर्तन आ गया

639
00:51:48,720 --> 00:51:52,800
ये क्या बकवास है ये सब तुम ही तो ला रहे हो ये सब चीजें तुम

640
00:51:52,800 --> 00:51:56,880
ना करते पुरी मट के बारे में इतना दुष्प्रचार जो कर रहे थे ना हम लाते

641
00:51:56,880 --> 00:51:57,600
तुम विजयश्री

642
00:51:57,600 --> 00:52:03,600
को बीच में ना मैं आता ना ये सब होता अब देखो तुम क्या-क्या

643
00:52:05,560 --> 00:52:11,560
होगा क्या वीडियो एडिटिंग सीख इस तरह की डॉक्यूमेंट्री

644
00:52:13,680 --> 00:52:17,840
और क्या आप न्यू एज एआई और साइकोलॉजी की मदद

645
00:52:17,840 --> 00:52:23,840
से ऐसी इंगेजिंग वीडियोस बना

646
00:52:38,320 --> 00:52:41,640
कहां किया बोलो इस वीडियो

647
00:52:41,640 --> 00:52:45,880
में करो ये तुमने शब्द का प्रयोग

648
00:52:45,880 --> 00:52:49,920
किया नहीं करेंगे इस वीडियो में इस समझ में कोई बोला

649
00:52:49,920 --> 00:52:53,160
मैं

650
00:52:53,160 --> 00:52:57,280
क्या चलो ठीक है इसका कहना है कि भाई कोट

651
00:52:57,280 --> 00:53:01,360
करो कि यहां पे ये ये बोला तुमने तो मैं तुम्हें बताऊंगा कि कोड करो।

652
00:53:01,360 --> 00:53:05,840
फिलहाल एक बता देता हूं। तुमने बोला कि चार शंकराचार्यों

653
00:53:05,840 --> 00:53:09,920
को चार करोड़ देकर के मंगा लो। बुला लो। पर मेरे में नाच गाना मत

654
00:53:09,920 --> 00:53:13,920
करो। तुमने एक तो यह कहा एक तो तुमने ये सिद्ध करने का प्रयास

655
00:53:13,920 --> 00:53:17,920
किया कि शंकराचार्यों के वहां पर जब कथा होती है तो उसमें नाच गाना

656
00:53:17,920 --> 00:53:21,920
होता है जो तुम्हारे यहां पे हुआ था। दूसरा तुमने यह भी सिद्ध करने का प्रयास

657
00:53:21,920 --> 00:53:26,000
किया कि वो लोग चार एक एक करोड़ लेते आने। इसका वहां

658
00:53:26,000 --> 00:53:30,240
पर कोई संबंध नहीं था। शंकराचार्य की कोई बात नहीं चल रही थी। यह

659
00:53:30,240 --> 00:53:34,560
ठीक इस प्रकार से है जैसे कि प्रभुपाद ने अपने उसमें खंडन

660
00:53:34,560 --> 00:53:38,640
करते समय वहां पर कोई बात नहीं चल रही 262 में भगवान शंकर

661
00:53:38,640 --> 00:53:42,960
की। मगर क्योंकि उसको सामने वालों पाठकों के मन में

662
00:53:42,960 --> 00:53:47,040
भगवान शिव के लिए द्वेष भरना था लिखने वाले को। तो

663
00:53:47,040 --> 00:53:51,040
इसलिए वहां पर उन्होंने क्या किया कि शंकराचार्य

664
00:53:51,040 --> 00:53:55,520
ध्यान में मग्न थे। पर पार्वती को उकसाने पर मान गए। वहीं पर हरिदास

665
00:53:55,520 --> 00:53:59,760
ठाकुर एक माया देवी के रूप में आई थी। एक तो उसके उसाने

666
00:53:59,760 --> 00:54:04,080
पर नहीं माना। वह वैश्या थी। तो क्या हुआ यहां पर शंकर

667
00:54:04,080 --> 00:54:08,560
भगवान की कोई बात नहीं चल रही भगवत गीता दो 62 में। मगर क्योंकि वो एक एजेंडा

668
00:54:08,560 --> 00:54:12,560
है ना शंकर भगवान को विष्णु भगवान से निम्न दिखाने का

669
00:54:12,560 --> 00:54:17,200
वो ले चलना है। ऐसे ही तुम्हारा एजेंडा है कि स्वयं को शंकराचार्य

670
00:54:17,200 --> 00:54:21,760
से बड़े धर्मज्ञ के रूप में धर्माचार्य के रूप में ख्यापित करने

671
00:54:21,760 --> 00:54:25,760
तो वह तुम ले चल रहे हो। और और भी है

672
00:54:25,760 --> 00:54:29,760
बता दूंगा अलग से वीडियो बनाएंगे

673
00:54:29,760 --> 00:54:35,240
बन रहा है आने लगे हैं

674
00:54:35,240 --> 00:54:41,240
चलो तुम्हारे बता क्या

675
00:54:45,560 --> 00:54:49,080
है कोई जानता

676
00:54:49,080 --> 00:54:53,040
है भाई

677
00:54:53,040 --> 00:54:57,200
कैसा व्यवहार करते हैं? बाकी तीन के साथ हम कैसा व्यवहार करते हैं?

678
00:54:57,200 --> 00:55:01,440
भाई कोई तट पुंजिया या गलत व्यक्ति होगा जो गलत व्यवहार

679
00:55:01,440 --> 00:55:05,840
करता होगा। हम तो अच्छा व्यवहार करते हैं बाकी तीन के साथ। हमारे

680
00:55:05,840 --> 00:55:10,000
लिए तो जो भी जो जो भी मठ से है जो भी परंपरा से जुड़ा हुआ व्यक्ति वही मान्य

681
00:55:10,000 --> 00:55:14,000
है। वो तो तब भी बहुत शीर्ष पर है। अरे शंकराचार्य नहीं

682
00:55:14,000 --> 00:55:19,120
है तो क्या उनका सम्मान नहीं होगा?

683
00:55:19,120 --> 00:55:24,000
अगर गुरुदेव ने उनका उनको शंकराचार्य केवल नहीं स्वीकारा तो सम्मान नहीं होगा।

684
00:55:24,000 --> 00:55:29,640
क्यों नहीं होगा

685
00:55:29,640 --> 00:55:32,440
भाई?

686
00:55:32,440 --> 00:55:36,560
बाकी कैसे हो सकता है? अब जैसे अभी-अभी तुमने

687
00:55:36,560 --> 00:55:40,560
कोट किया कि निम्न स्तर पर है। ठीक है? तुम्हारा व्यवहार है।

688
00:55:40,560 --> 00:55:44,560
तो वो सिद्ध करो ना वो वो जगह बताओ ना कहां पे हमने निम्न स्तर का

689
00:55:44,560 --> 00:55:48,640
व्यवहार किया उनके साथ। तुम हमें कह रहे हो कि तुम्हारा व्यवहार निम्न स्तर का है।

690
00:55:48,640 --> 00:55:52,640
बाकी तीनों के साथ तो कोट करो ना। हम तो अभी कुंभ में तीनों के यहां

691
00:55:52,640 --> 00:55:57,440
गए थे। तीनों को प्रणाम करके आए थे।

692
00:55:57,440 --> 00:56:01,520
तो वो कोट करो ना। क्यों नहीं कोट कर रहे हो? कोट करो। कहां पे हमने निम्न स्तर का व्यवहार

693
00:56:01,520 --> 00:56:07,520
किया?

694
00:56:09,520 --> 00:56:13,600
भाई ये क्या कर रहे हो बकवास वोट करो कब हुआ

695
00:56:13,600 --> 00:56:19,600
कहां हुआ तब हम बताएंगे क्या हुआ था किसका निम स्तर का व्यवहार

696
00:56:24,360 --> 00:56:28,480
था तो हमने भी समर्थन किया तुम्हारी कुछ चीजों का

697
00:56:28,480 --> 00:56:32,640
और तुम अंधे हो अहंकार के नशे में चूर हो जो देख नहीं पा रहे हो और

698
00:56:32,640 --> 00:56:37,360
समर्थन कर देने से तुम्हें अधिकार प्राप्त नहीं हो गया कि तुम अपमान करने लग जाओ

699
00:56:37,360 --> 00:56:41,520
ठीक है समर्थन करो करोगे तो वह तुम्हारा कर्तव्य

700
00:56:41,520 --> 00:56:45,520
है। सच बोलना धर्म है। उससे उसको

701
00:56:45,520 --> 00:56:49,680
कर देने से वो अपमान कर देने का अधिकार प्राप्त

702
00:56:49,680 --> 00:56:53,760
नहीं होता है। जैसे पेड़ का धर्म होता है झुकना। वैसे ही

703
00:56:53,760 --> 00:56:58,080
समर्थन करना धर्म है तुम्हारा क्योंकि वो सत्य है। वो धर्माचार्य

704
00:56:58,080 --> 00:57:02,080
हैं। उनके सिद्धांत का समर्थन की तुम्हें समर्थन की आवश्यकता

705
00:57:02,080 --> 00:57:06,080
थोड़ी ना है। उनके समर्थन का आलम उनके सिद्धांत का आलंबन लेकर के अपनी

706
00:57:06,080 --> 00:57:10,240
बात कहोगे। उनके सिद्धांत का प्रचार करोगे और वह तुम्हारा धर्म है

707
00:57:10,240 --> 00:57:15,120
क्योंकि उनका सिद्धांत धर्म है। धर्म का प्रचार धर्म है।

708
00:57:15,120 --> 00:57:19,200
ये क्या है? मगर धर्म का तुमने प्रचार

709
00:57:19,200 --> 00:57:23,360
कर दिया। सैद्धांतिक बात का प्रचार कर दिया। वो भी तुम्हारे काम आ रही है। कहीं पे

710
00:57:23,360 --> 00:57:24,560
तुम्हें कोई युक्ति चाहिए। कहीं

711
00:57:24,560 --> 00:57:29,040
पे तुम्हें किसी का कोई आंसर देना है। तुम्हारे भी तो काम आ रही है व्यक्तिगत।

712
00:57:29,040 --> 00:57:33,120
तुम्हारी भी तो प्रसिद्धि हो रही है। वाक्य इतनी अच्छी बात बताई है।

713
00:57:33,120 --> 00:57:35,520
हम्म

714
00:57:35,520 --> 00:57:41,520
वो तुम्हारे

715
00:57:47,480 --> 00:57:51,840
को 220 नोट करिए शंकराचार्य के मठ में

716
00:57:51,840 --> 00:57:57,840
को लाकर बिठा

717
00:58:24,040 --> 00:58:30,040
वैश्य इन्होंने

718
00:58:33,040 --> 00:58:37,120
क्या बोल रहे हो कि भाई पूरी शंकराचार्य के मठ में एक बार

719
00:58:37,120 --> 00:58:43,120
सुन लेते हैं।

720
00:58:51,040 --> 00:58:55,080
पूरी शंकराचार्य जी के मठ में हम तुम जैसे लोगों की माताओं और बहनों को भी लाते

721
00:58:55,080 --> 00:58:59,120
हैं। वही है क्या तुम्हारे हिसाब से तुम्हारी माताएं और

722
00:58:59,120 --> 00:59:03,520
बहनें ये सब जो तुम बोल रहे हो। है ना?

723
00:59:03,520 --> 00:59:07,680
तुम्हारे जैसे तुम जैसे तुम्हारी तुम ही जैसे लोग हैं। उनकी माताओं और बहनों

724
00:59:07,680 --> 00:59:11,840
को भी बुलाते हैं। उनका आशीर्वाद प्रदान कराते हैं। तो तुम्हारे हिसाब से वो

725
00:59:11,840 --> 00:59:17,840
वही है। हम

726
00:59:20,920 --> 00:59:26,920
सही विद्यालय वहां पर हो रहा था तो कंसेंट

727
00:59:27,800 --> 00:59:31,920
था वहां पर हो रहा था तो तुम कोर्ट जाते क्यों हो

728
00:59:31,920 --> 00:59:36,000
जब तुम पे कोई बात आती है तो और तुम तो बड़ी ताल ठोक रहे थे तुम कोर्ट में ये है

729
00:59:36,000 --> 00:59:40,160
ये मुकदमे लड़ चुके हो ये कर चुके हो तो मतलब यहां कर क्या रहे हो अपने कोर्ट

730
00:59:40,160 --> 00:59:44,240
जाने का जस्टिफिकेशन कर रहे हो कि मैं कोर्ट जा सकता हूं वो

731
00:59:44,240 --> 00:59:48,320
मैं कोर्ट नहीं जाऊंगा या फिर पहले कह चुके हो कि मैं कोर्ट लड़

732
00:59:48,320 --> 00:59:54,320
चुका हूं। ये क्या कर रहे हो तुम? पागल हो गए हो क्या?

733
01:00:04,240 --> 01:00:08,480
सरस्वती जी के लिए जो भी बात है उस सब के बाद पूरी के शंकराचार्य

734
01:00:08,480 --> 01:00:12,560
जी ने एक वक्तव्य जरूर दिया था कि मैं उन्हें शंकराचार्य नहीं मानता। मगर हमें

735
01:00:12,560 --> 01:00:16,720
यह कभी नहीं सिखाया गया कि उनका जो है अपमान हो

736
01:00:16,720 --> 01:00:20,960
और उनका जो है तिरस्कार हो।

737
01:00:20,960 --> 01:00:25,360
अब यह अगर कुछ दंभी गुरु द्रोही अगर कर रहे हैं उस वक्तव्य

738
01:00:25,360 --> 01:00:29,440
का गलत अर्थ निकालते हुए। क्यों आचार्य रामशंकर शुक्ल जी का हम वो नहीं

739
01:00:29,440 --> 01:00:34,400
करते। करपात्री जी महाराज का सम्मान नहीं करते। वह क्या शंकराचार्य थे?

740
01:00:34,400 --> 01:00:38,560
तो शंकराचार्य होगा तभी वह हमारे लिए प्रणम में होंगे। कोई व्यक्तित्व

741
01:00:38,560 --> 01:00:42,800
ऐसा कोई सिद्धांत है क्या? अरे पूरी के शंकराचार्य जी ने अगर उन्हें

742
01:00:42,800 --> 01:00:47,480
शंकराचार्य नहीं माना तो एक संरक्षक के रूप में तो है ना उसी पीठ

743
01:00:47,480 --> 01:00:51,480
के हम लोगों के लिए जिनके गुरु हैं पूरी के शंकराचार्य

744
01:00:51,480 --> 01:00:55,760
जी तो संरक्षक के रूप में प्रणम में है। सनातन

745
01:00:55,760 --> 01:01:00,080
परंपरा के रूप में वो प्रणम में है। शंकराचार्य के

746
01:01:00,080 --> 01:01:04,960
शंकर परंपरा के होने के कारण प्रणम में है। और

747
01:01:04,960 --> 01:01:10,960
तुम जो कह रहे हो कि हम उनके साथ गलत व्यवहार करते हैं। बताओ कहां गलत व्यवहार

748
01:01:11,320 --> 01:01:15,680
किया? अगर हमारे आचार्य ने जो हमारे गुरु हैं

749
01:01:15,680 --> 01:01:19,360
उन्होंने कुछ कहा है किसी के लिए

750
01:01:19,360 --> 01:01:23,360
तो उनकी बात का खंडन ना करना क्योंकि खंडन करने के

751
01:01:23,360 --> 01:01:27,760
लिए हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं जो हम खंडन करें। उनका

752
01:01:27,760 --> 01:01:31,760
शब्द ही प्रमाण है शिष्य के लिए। शब्द भी प्रमाण है

753
01:01:31,760 --> 01:01:35,840
ना। क्योंकि वह शास्त्रोक्त बातें तो है नहीं

754
01:01:35,840 --> 01:01:40,240
कि कौन क्या है कौन क्या नहीं है सब प्रासंगिक विषय है

755
01:01:40,240 --> 01:01:44,320
उसमें तो वो अगर कह रहे हैं कि मैंने देखा मैंने ये देखा वो देखा और हमारे वो गुरु

756
01:01:44,320 --> 01:01:48,480
है तुम्हारा धर्म है ना वहां पर उनकी बात स्वीकार करना उन्होंने कहा

757
01:01:48,480 --> 01:01:52,480
मैंने देखा फिर भी उन्होंने हमें कभी समीक्षा करने के

758
01:01:52,480 --> 01:01:56,720
लिए नहीं कहा कि तुम जाके समीक्षा करो कौन शंकराचार्य है कौन नहीं है आचार्य के स्तर का मामला

759
01:01:56,720 --> 01:02:00,720
है वो देख लेंगे भाई और इससे हमारे धर्म ब्रह्मों को

760
01:02:00,720 --> 01:02:04,800
क्या फर्क पड़ेगा अगर कोई हमसे आगे पूछेगा कि वो शंकराचार्य है कि नहीं इससे क्या मतलब

761
01:02:04,800 --> 01:02:09,200
वो आचार्य परंपरा वो परंपरा प्राप्त आचार्य है कि नहीं परंपरा

762
01:02:09,200 --> 01:02:13,280
से जुड़े हुए हैं कि नहीं उनको जो महान हमारे संत गण

763
01:02:13,280 --> 01:02:17,280
है आचार्य गण है उनको हमसे हमारे गुरुदेव का भी सानिध्य

764
01:02:17,280 --> 01:02:21,440
हमसे कहीं ज्यादा प्राप्त है कि नहीं इतना ही बहुत है उनको प्रणाम

765
01:02:21,440 --> 01:02:26,200
करने के

766
01:02:26,200 --> 01:02:32,200
लिए खैर चलो आगे चलते हैं

767
01:02:34,400 --> 01:02:38,400
व्यक्तिगत चर्चा नहीं कर पाए, कोर्ट नहीं जा पाए। पहली बात तो यह है जब तुम

768
01:02:38,400 --> 01:02:42,640
हमें कोर्ट जाने की बात कहते हो तो हम बताते हैं कि भाई हम जो है हिंदू

769
01:02:42,640 --> 01:02:46,880
राष्ट्र की बात करते हैं। तुम क्या करते हो?

770
01:02:46,880 --> 01:02:51,040
तुम्हारे कौन से विकल्प है इस संबंध में? भाई कोर्ट हम ललकार तो रहे हैं ना

771
01:02:51,040 --> 01:02:55,520
शासन तंत्र को। चैलेंज कर रहे हैं ना? गुरुदेव

772
01:02:55,520 --> 01:03:00,320
कर रहे हैं ना चैलेंज शासन तंत्र को। तुम क्या कर रहे हो?

773
01:03:00,320 --> 01:03:04,320
तो कोर्ट जाने वाले मामले में अगर हमें शासन तंत्र से

774
01:03:04,320 --> 01:03:08,760
दिक्कत है, अगर हमें वहां से न्याय की उम्मीद नहीं है, तो हम कर तो रहे हैं

775
01:03:08,760 --> 01:03:14,760
व्यवस्था कि हमारे अनुसार जो है शासन तंत्र हमें प्राप्त हो पाए।

776
01:03:49,440 --> 01:03:52,080
कुछ भी नहीं

777
01:03:52,080 --> 01:03:56,080
नहीं नहीं रिकॉर्डिंग आज सार्वजनिक कर दी है मगर रिकॉर्डिंग से पहले भी तुम्हारे

778
01:03:56,080 --> 01:04:00,760
अच्छे-अच्छे फोटो दिखाए हैं ना गोरे-गोरे मुखड़े पे काला-काला

779
01:04:00,760 --> 01:04:05,000
चश्मा देवत्व दिव्य योजना के द्वारा उत्पन्न

780
01:04:05,000 --> 01:04:09,200
बालक इस तरह से उसमें घूम रहा है तेरे नाम

781
01:04:09,200 --> 01:04:12,680
सांवरिया वाले लोक में

782
01:04:12,680 --> 01:04:18,160
हम मलेच्छ मलेच्छों के फैन रहे हो लगता है

783
01:04:18,160 --> 01:04:24,040
में कितनी सारी ऐसे हां

784
01:04:24,040 --> 01:04:30,040
हां तो दोस्तों इस जन्म में कौन गया ये

785
01:04:33,560 --> 01:04:38,160
तो अपना नाम समझ जाना चाहता हूं दोस्तों इस जन्म में कब गया हां

786
01:04:38,160 --> 01:04:42,160
अपनी बात आई तो क्या बोले बताओ ना मैं जोधपुर

787
01:04:42,160 --> 01:04:45,800
इस जन्म में कब गया

788
01:04:45,800 --> 01:04:49,800
हम अब मैं पूछ रहा हूं बता ना तूने तुमने कब देखा

789
01:04:49,800 --> 01:04:53,840
व्यभचार? बताओ ना। बताओ ना वहां

790
01:04:53,840 --> 01:04:58,400
पर तुमने कब देखा? व्यभचार होता हुआ। बताओ ना

791
01:04:58,400 --> 01:05:03,120
तुमने पिज़्ज़ा की डिलीवरी कब देखी? होती हुई कहां देखी?

792
01:05:03,120 --> 01:05:07,200
कौन सी जगह पे देखी थी? अपने पे बात आई तो मैं कब गया?

793
01:05:07,200 --> 01:05:11,560
बताओ इस जन्म में नहीं गया। दूसरे पे बात आई तो कुछ भी बोल दो।

794
01:05:11,560 --> 01:05:15,760
निराधार तब क्यों नहीं पूछा था वहां पर? क्यों नहीं बताया

795
01:05:15,760 --> 01:05:19,840
था तब वहां पर? कि तूने कब देख लिया पिज़्ज़ा खाता हुआ? क्यों

796
01:05:19,840 --> 01:05:24,840
नहीं वहां पर आंकड़े बताए थे? वस्तुनिष्ठ जानकारियां क्यों नहीं बताई थी? ऑब्जेक्टिव

797
01:05:24,840 --> 01:05:29,200
चीजें जब तूने बदनाम किया था लोगों

798
01:05:29,200 --> 01:05:33,360
को और मैं यही कह रहा था कि निराधार चीजें मत बोलो। तब क्या

799
01:05:33,360 --> 01:05:37,360
बोल रहे थे? कि नहीं नहीं

800
01:05:37,360 --> 01:05:39,200
है जो हम बोल रहे हैं वही सही है।

801
01:05:39,200 --> 01:05:43,520
अब क्यों आ गए पूछने? कब गया? नाम बताओ।

802
01:05:43,520 --> 01:05:49,520
यह देखो कैसे कर रहा है।

803
01:05:50,280 --> 01:05:54,440
और बहुत ज्यादा नहीं घूमेगा

804
01:05:54,440 --> 01:05:58,800
और साक्षी है शिवश मैं अपने समानु

805
01:05:58,800 --> 01:06:02,800
सभी को साक्षी हाथ देखिए कह

806
01:06:02,800 --> 01:06:07,320
रहा हूं कि मेरे अंदर कभी मेरी

807
01:06:07,320 --> 01:06:11,600
जानकारी किसी डॉक्टर से कहिए किसी डॉक्टर के

808
01:06:11,600 --> 01:06:17,600
आया हो सत्य है ये आज तक गया नहीं

809
01:06:18,560 --> 01:06:24,560
चलो ठीक है। अब ये

810
01:06:25,320 --> 01:06:29,400
बताओ सुनो ऐसा

811
01:06:29,400 --> 01:06:33,440
है ऐसा है कि पहली बात तो

812
01:06:33,440 --> 01:06:37,680
तुम्हारा ये जो अंदाज है अंदाज़ बयां ये पसंद आया हमको। मुगम

813
01:06:37,680 --> 01:06:40,800
मुगमबू खुश हुआ।

814
01:06:40,800 --> 01:06:44,800
पसंद इसलिए आया क्योंकि कहीं ना कहीं इसमें मुझे यह दिखाई दिया कि तुम

815
01:06:44,800 --> 01:06:48,800
लड़ तो रहे हो अपनी वर्चस्वता के लिए मुझसे पर कहीं ना

816
01:06:48,800 --> 01:06:52,800
कहीं तुम्हें भी मालूम है तो मतलब कहीं ना कहीं सम्मान भी कर

817
01:06:52,800 --> 01:06:56,960
रहे हो इसलिए तुमने इतनीेंस दी कि शिवांश मैं

818
01:06:56,960 --> 01:07:01,280
तुम्हें और इससे ज्यादा नहीं दे सकता हूं इतनी बड़ी-बड़ी बातें मगर देखो भाई

819
01:07:01,280 --> 01:07:05,680
यहां पर बात सिद्धांत की है धर्म की है पूरी

820
01:07:05,680 --> 01:07:10,080
भावुकता के वशीभूत होकर के चीजें नहीं लड़ी जाती और तुम्हारे अंदर सिद्धांतों

821
01:07:10,080 --> 01:07:14,360
की अत्यंत कमी है। अत्यंत अभाव है सिद्धांतों। सिद्धांतवादी हो ही नहीं

822
01:07:14,360 --> 01:07:18,960
तुम। तुम वस्तुनिष्ठ जानकारी अवश्य रखते हो धर्म की। मगर सिद्धांतवादी

823
01:07:18,960 --> 01:07:23,120
व्यक्ति नहीं। अब सिद्धांत पे आते हैं। तो यह

824
01:07:23,120 --> 01:07:27,200
कौन से शास्त्र का सिद्धांत है कि यदि कोई जिस

825
01:07:27,200 --> 01:07:31,280
व्यक्ति पर हमें विश्वास ना हो वह व्यक्ति हमको जनेऊ हाथ

826
01:07:31,280 --> 01:07:34,240
में लेकर के और जो है

827
01:07:34,240 --> 01:07:40,240
क्या क्या बोला है तुमने देख ले।

828
01:07:43,640 --> 01:07:49,640
आज सेगा

829
01:07:54,320 --> 01:07:58,320
भगवान सूर्य आकाश में है। भगवती कामाख्या का शिकार और जनेऊ हाथ

830
01:07:58,320 --> 01:08:02,560
में है। ये तीन चीजें लेकर अगर कोई बोल देगा कि ये बात

831
01:08:02,560 --> 01:08:07,040
है तो मान लिया जाए।

832
01:08:07,040 --> 01:08:11,200
यह कौन सा सिद्धांत है? तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में

833
01:08:11,200 --> 01:08:15,520
शास्त्र प्रमाण है। अगर तुम्हारे जैसे लोगों पर हम लोग टिक जाए ना

834
01:08:15,520 --> 01:08:20,000
तो हो चुका। हर दूसरा चोर अपने आप को वो

835
01:08:20,000 --> 01:08:24,240
वो निर्दोष सिद्ध करेगा ऐसे ही कि मेरा जन्म हाथ में है वह कामाख्या

836
01:08:24,240 --> 01:08:28,560
का शिखर है और ऊपर सूर्य है और दूसरी बात

837
01:08:28,560 --> 01:08:32,960
यही तीनों चीजें कर करके कर करके तू बोल सब विजय श्री के बारे में

838
01:08:32,960 --> 01:08:37,760
सबके बारे में बोल जितने आक्षेप लगाए कि हां ऐसा है बोल

839
01:08:37,760 --> 01:08:43,480
जिससे तेरा यह निश्चित हो जाए कि तुझे अपने जनों की कितनी फिक्र है

840
01:08:43,480 --> 01:08:47,680
बोल बोल कि तूने विषवृत्ति देखी है बोल

841
01:08:47,680 --> 01:08:51,680
कि वो व्यापार करने आई थी। बोल कि यह सब

842
01:08:51,680 --> 01:08:56,320
चीजें जो जिनके आधार पर तू यह कह रहा है कि वह यहां यह हो रहा है, वहां हो रहा है वो सब बोल।

843
01:08:56,320 --> 01:09:00,400
यही यही तीन चीजों के आधार बोल। उनके लिए क्यों नहीं बोल रहा है?

844
01:09:00,400 --> 01:09:04,480
अपने लिए क्यों बोल रहा है? और जब तू यह

845
01:09:04,480 --> 01:09:09,040
चाहता है, जब तुम ये चाहते हो कि जो सामग्री

846
01:09:09,040 --> 01:09:13,120
तुम्हारे ऊपर आरोप लगाते टाइम आए, जो वक्तव्य आए,

847
01:09:13,120 --> 01:09:17,400
उसकी जांच हो। उसमें तुम्हें बोलने का अवसर दिया

848
01:09:17,400 --> 01:09:22,320
जाए। है ना? तुम यही चाहते हो ना यहां पर एक्सप्लेनेशन दे रहे हो ना?

849
01:09:22,320 --> 01:09:26,560
और फिर अपना वक्तव्य भी दे रहे हो। जब तुम ये चाहते हो कि तुम्हारे ऊपर कोई आरोप

850
01:09:26,560 --> 01:09:31,200
लगे तो उसकी जांच हो। उसमें तुम्हें तुम्हारा पक्ष रखने का वो दिया जाए।

851
01:09:31,200 --> 01:09:35,200
तो फिर तुमने क्यों नहीं दिया था? तुम तो न्यायप्रिय थे ना। तुमने क्यों

852
01:09:35,200 --> 01:09:39,840
नहीं दिया था ये किसी को अवसर? इस प्रकार का?

853
01:09:39,840 --> 01:09:44,080
क्यों उससे पहले उसकी इज्जत को उछाल दिया? यह

854
01:09:44,080 --> 01:09:48,760
भी एक न्याय की कमी है ना। न्याय का

855
01:09:48,760 --> 01:09:53,760
अभाव कि कहां से वह होता है।

856
01:09:53,760 --> 01:09:59,760
ठीक

857
01:10:06,120 --> 01:10:12,120
है। हां जी कर रहे हैं। वह चल रही है चीजें। आप चिंता ना करें।

858
01:10:16,080 --> 01:10:22,080
चलिए चलते हैं।

859
01:10:23,360 --> 01:10:27,440
बता रहा हूं जोधपुर में जाकर किसी डॉक्टर के साथ जाइए किसी डॉक्टर के पास अगर मैंने कोई याद

860
01:10:27,440 --> 01:10:31,680
कराया हो

861
01:10:31,680 --> 01:10:35,840
यही था इनका विधवा विलाप जो ये बड़े टोन में रहते

862
01:10:35,840 --> 01:10:39,920
थे ना आज देख लो इनका रोने लग गए जब

863
01:10:39,920 --> 01:10:44,360
वास्तविक शिवश नारायण द्विवेदी से सामना हुआ रोने लग

864
01:10:44,360 --> 01:10:50,360
गए जाइए वाली पैसे लेकर आ

865
01:10:53,040 --> 01:10:57,120
बाकी के पर्पस अरे आपने तो 250 एमl मांगी थी ना सर तो बाकी की 150

866
01:10:57,120 --> 01:11:03,120
मैं भी गया में अब

867
01:11:11,880 --> 01:11:15,920
400 चलो ठीक है तो मेरा स्वास्थ ज्यादा गिराता है क्योंकि मन जो

868
01:11:15,920 --> 01:11:21,920
है वो शरीर मन की जो स्थिति है उसे अच्छा उन्होंने ये सलाह दीजिए

869
01:11:33,120 --> 01:11:39,120
ज्यादा आगे

870
01:11:39,280 --> 01:11:43,280
यही विधवा विलाप है ना अब तो भाई चोर कौन है कौन नहीं है इसी आधार पर

871
01:11:43,280 --> 01:11:47,280
निर्णय होगा कौन अपना जनेऊ हाथ में लेकर के कसम खाएगा इसी पर निर्णय

872
01:11:47,280 --> 01:11:51,800
होगा अब तो ऐसे नहीं होता है ना

873
01:11:51,800 --> 01:11:56,240
निग्रांद जब हमें तुम्हारे ऊपर डाउट है तो हम तुम्हारी वाणी को थोड़ी नवा

874
01:11:56,240 --> 01:12:01,720
तुम उल्टे खड़े हो

875
01:12:01,720 --> 01:12:05,920
जाओ अच्छा चल एक काम करते हैं चल ठीक है

876
01:12:05,920 --> 01:12:10,320
नहीं वो विधवा विलापी ही तो है चल चल ठीक है एक काम चल

877
01:12:10,320 --> 01:12:14,480
ये मेरा जनेऊ हाथ में है ठीक है

878
01:12:14,480 --> 01:12:18,480
उपमन्य गोत्र है मेरा और मेरे मेरे प्रभु

879
01:12:18,480 --> 01:12:22,640
श्री राम के जो वाल्मीकि रामायण है ये सामने है। मैं इनको साक्षी

880
01:12:22,640 --> 01:12:27,200
मानकर बोल रहा हूं कि विजय श्री

881
01:12:27,200 --> 01:12:32,000
प्रीमेशंस की कार्यकर्ता नहीं है।

882
01:12:32,000 --> 01:12:36,080
विजय श्री ने कोई व्यभचार इत्यादि इस तरह का दुष् दुष्कर्म

883
01:12:36,080 --> 01:12:41,040
नहीं किया है।

884
01:12:41,040 --> 01:12:46,280
अब बोल मानेगा पलटेगा क्षमा

885
01:12:46,280 --> 01:12:50,320
मांगेगा और मैं बोल रहा हूं कि मठ के बारे

886
01:12:50,320 --> 01:12:54,320
में जो बातें फैलाई जा रही हैं वो सब असत्य है मेरी जानकारी में

887
01:12:54,320 --> 01:12:58,840
कुछ नहीं है अब बोल

888
01:12:58,840 --> 01:13:02,960
मानेगा बदल देगा अपनी कार्य प्रणाली और अगर नहीं

889
01:13:02,960 --> 01:13:07,120
बदलेगा जब तुम हमारे इस पे प्रतिज्ञा पे

890
01:13:07,120 --> 01:13:11,200
शपथ पे स्वीकार नहीं करते हो तो तुम ये अपेक्षा कैसे कर

891
01:13:11,200 --> 01:13:17,200
सकते हो? ये हम करेंगे।

892
01:13:25,960 --> 01:13:30,160
हां। तुमने क्या आरोप लगाया कि हम प्लांटेड हैं। मैं

893
01:13:30,160 --> 01:13:34,400
दोबारा करूं? प्लांटेड नहीं हूं। मैं चल

894
01:13:34,400 --> 01:13:39,360
एक सीधे-सीधे एक ही बात बोल देता हूं। यह मेरा जनू मेरे हाथ में है।

895
01:13:39,360 --> 01:13:44,000
यह रामायण मेरे सामने है। प्रभु श्री राम

896
01:13:44,000 --> 01:13:49,280
मेरे इष्ट है। उनकी रामायण मेरे सामने है। और

897
01:13:49,280 --> 01:13:53,360
ये जिन्हें हाथ में लेकर के रामायण हाथ में लेकर के मैं बोल

898
01:13:53,360 --> 01:13:57,680
रहा हूं। अपने जीवन का एक एक अंश

899
01:13:57,680 --> 01:14:01,920
एक एक कतरा मेरा मैंने धर्म को देने के लिए निर्णय

900
01:14:01,920 --> 01:14:07,680
लिया है। धर्म को बचाने के लिए निर्णय लिया है।

901
01:14:07,680 --> 01:14:10,840
अब

902
01:14:10,840 --> 01:14:15,040
मानेगा और अगर तुम नहीं मानोगे तो तुम अपेक्षा कैसे करते हो कि दूसरा

903
01:14:15,040 --> 01:14:21,040
मान

904
01:14:26,600 --> 01:14:29,160
ले

905
01:14:29,160 --> 01:14:33,200
₹1000 क्यों बता ताकि समझे कि किस प्रकार से अलग-अलग पड़ाव में व्यक्ति

906
01:14:33,200 --> 01:14:37,440
के मन में अलग-अलग प्रकार के विचार आते हैं। संघर्ष करता है हर व्यक्ति के साथ ऐसा है किसी ना किसी

907
01:14:37,440 --> 01:14:41,920
से मेरे आपके या किसी और के साथ में छोड़ दो

908
01:14:41,920 --> 01:14:44,280
व्यास

909
01:14:44,280 --> 01:14:48,840
पर बता रहा हूं क्यों बता रहा हूं ताकि वो समझे कि किस प्रकार से

910
01:14:48,840 --> 01:14:54,840
अलग कह रहा हूं कि मेरे प्रश्न को मैं आज तक गया

911
01:14:57,960 --> 01:15:02,240
नहीं लिखा है कि जब मैं दसवीं कक्षा में था मैंने डिसऑर्डर

912
01:15:02,240 --> 01:15:07,000
के पुस्तक में क्या लिखा मैंने क्या लिखा है जब मैं कक्षा में था तो एक हजार

913
01:15:07,000 --> 01:15:11,120
बात जो रहा की बात मैं स्वयं पढ़कर बताता हूं प्रीवियस

914
01:15:11,120 --> 01:15:15,200
क्या लिखा मूर्खता कर रहा है ना इस बात को तुम कह रहे हो ना की जो जाके इलाका है अगर वो सच भी

915
01:15:15,200 --> 01:15:19,360
किसी के जीवन में होता तो भी उसको अर्निंग करना कोर्ट के लिए गलत होता लेकिन यहां पर वो सिचुएशन भी नहीं है तो ये सीधेसीधे

916
01:15:19,360 --> 01:15:23,360
मैनपुलेट करके आउट कराना होगा तुम समझ नहीं पा रहे हो अर्निंग करना कोर्ट के लिए गलत होता मतलब जिस

917
01:15:23,360 --> 01:15:27,440
बात को तुम कह रहे हो ना की जो मेरा इतिहास करा रहा है अगर वो सच भी किसी के जीवन में होता तो भी उसको अर्निंग करना कोर्ट के लिए गलत

918
01:15:27,440 --> 01:15:30,600
होता लेकिन यहां पे वो सिचुएशन

919
01:15:30,600 --> 01:15:34,960
हमने आरोप नहीं लगाया है हमने ये बोला है

920
01:15:34,960 --> 01:15:39,280
कि हमें ऐसा बताया गया है कि तुम जोधपुर जाते हो इलाज

921
01:15:39,280 --> 01:15:44,440
कराते हो

922
01:15:44,440 --> 01:15:48,480
और हमने आरोप नहीं लगाया है।

923
01:15:48,480 --> 01:15:52,480
हमने तुम्हें यह बताया है कि कुछ

924
01:15:52,480 --> 01:15:56,560
लोग ऐसा बता रहे हैं। ऐसा सुनने में आ रहा है कि तुम जोधपुर जाते हो

925
01:15:56,560 --> 01:16:00,800
और तुम हस्तमैथुन की आदत से ग्रसित हो और वहां पर जाकर

926
01:16:00,800 --> 01:16:05,520
के इस आदत से छुटकारा पाने का प्रयास कर रहे हो,

927
01:16:05,520 --> 01:16:09,600
इलाज करवा रहे हो तो वह भी इस तो

928
01:16:09,600 --> 01:16:13,760
अब हमारा यह पूछना है तुमसे कि क्या ये सुनी सुनाई बातों को हमें

929
01:16:13,760 --> 01:16:18,160
मानना चाहिए? हमारे पास भी मैसेजेस आ रहे हैं। क्या हमें मानना चाहिए इन मैसेजेस

930
01:16:18,160 --> 01:16:22,920
को सब ये बात ठीक है। नहीं तो ये

931
01:16:22,920 --> 01:16:27,200
सीधेसीधे समझ नहीं पा रहे हो। जिसको तुम नाम ले रहे हो तुम कितने बड़े बन सकते हो।

932
01:16:27,200 --> 01:16:31,200
हालांकि समाज जिसका व्यापार अच्छा काम करात्मा सुरक्षित आशा करते परेशान करने के

933
01:16:31,200 --> 01:16:35,280
लिए डाल नहीं कृपा करो कानूनी गतिविधि

934
01:16:35,280 --> 01:16:39,280
में डाल नहीं रहे हो भाई हमने कानूनी गतिविधि में डालने वाला काम

935
01:16:39,280 --> 01:16:43,280
किया नहीं ना गुरुदेव समझाते हैं ना हमेशा दर्शन विज्ञान और

936
01:16:43,280 --> 01:16:47,280
व्यवहार को साध के अपनी बात बोलो डाल दो तुम अगर तुम्हें लगता

937
01:16:47,280 --> 01:16:51,280
है कि ऐसा है तो तुम डाल दो कानूनी गतिविधि की बात की

938
01:16:51,280 --> 01:16:55,440
बात जो तुम कर रहे हो हमने ऐसा बोला ही नहीं है जाके सुनो दोबारा ध्यान

939
01:16:55,440 --> 01:16:59,440
से हमने बोला बोला है कि जिस प्रकार से तुम आधी

940
01:16:59,440 --> 01:17:03,600
अधूरी सामग्री के ऊपर निर्णय किसी पर आरोप लगा

941
01:17:03,600 --> 01:17:07,600
देते हो काम तुमने किया है कानूनी गतिविधि में फंसने का

942
01:17:07,600 --> 01:17:11,600
अभी मठ ने कभी कुछ बोला नहीं है नहीं तुम इतनी पर्याप्त सामग्री दे चुके हो

943
01:17:11,600 --> 01:17:15,600
कि मठ की ओर से तुम्हें बिल्कुल नाश

944
01:17:15,600 --> 01:17:19,680
कर दिया जाए पर मठ कभी बोला नहीं और जिसने

945
01:17:19,680 --> 01:17:23,680
बोला है वो भी महिला है एक

946
01:17:23,680 --> 01:17:27,760
जिससे सहा नहीं गया उसने ऐसा बोला बोला जो किया

947
01:17:27,760 --> 01:17:33,000
है उसने मगर क्या है

948
01:17:33,000 --> 01:17:35,960
कि

949
01:17:35,960 --> 01:17:40,160
जो हमने अपनी बात को ऐसे नहीं रखा कि तुम जाते ही हो।

950
01:17:40,160 --> 01:17:44,160
हमने वहां यह कहा है कि हमें भी ऐसा सुनने में आया। हमें भी चीजें

951
01:17:44,160 --> 01:17:48,240
प्राप्त हो रही है कि तुम ऐसा करते हो। तुम ऐसी बीमारी से ग्रसित हो।

952
01:17:48,240 --> 01:17:52,240
ठीक है? और तुम्हारे अनुसार यह

953
01:17:52,240 --> 01:17:56,240
जो इस तरह से सामग्री प्राप्त होती है इस तरह की सामग्री को सच मान

954
01:17:56,240 --> 01:18:00,400
लेना चाहिए। उनसे द्वारा मिलने वाली जो चीजें उनको सच मान लेना चाहिए। तुम्हारे अनुसार

955
01:18:00,400 --> 01:18:04,400
तुम्हारे जिस तरह से तुम मानते हो। तो हमने वहां पर कहा है कि क्या

956
01:18:04,400 --> 01:18:08,400
ये सब चीजों को सच मान ले और सच मान ले तो फिर यदि तुम ऐसा है

957
01:18:08,400 --> 01:18:12,480
तो ऐसा कर रहे हो। फिर हमने आगे उसको हमने यह नहीं कहा कि तुम जाते

958
01:18:12,480 --> 01:18:16,560
ही हो। ठीक है? और यह जाते ही हो वाला काम तुम कर रहे हो। तो तुम

959
01:18:16,560 --> 01:18:20,440
नहीं समझ रहे हो तुम कहां फसोगे जाकर

960
01:18:20,440 --> 01:18:26,040
के बुक में लिखा

961
01:18:26,040 --> 01:18:30,440
क्या जानवी वाले विषय को ले हमने क्या मूर्खता बताई

962
01:18:30,440 --> 01:18:34,800
तुमने सचिव जी वाले मामले में क्या मूखता दिखाई तुमने

963
01:18:34,800 --> 01:18:38,880
ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी वाले मामले में क्या मूर्खता दिखाई पूरा तुमने पूरे

964
01:18:38,880 --> 01:18:42,960
मठ के बारे में जगुरु शंकराचार्य भगवान के बारे में क्या मूर्खता दिखाई

965
01:18:42,960 --> 01:18:47,760
तुम हमें क्या मूर्खता बता रहे हो

966
01:18:47,760 --> 01:18:51,840
अगर आपके फोन में मल्टीपल फोर मल्टीपल से मल्टीपल 8 आ रहे

967
01:18:51,840 --> 01:18:56,000
मान ही नहीं सकता आप लाइफ के सॉफ्ट फेस ना कर मैं मान ही नहीं सकता क्योंकि ये

968
01:18:56,000 --> 01:19:00,280
सारी चीजें जो

969
01:19:00,280 --> 01:19:04,320
आपके मेरे दादा जी दादा की अवस्था कौन है

970
01:19:04,320 --> 01:19:08,600
अब यहां पर ये अपनी आपबीति सुनाएंगे बाईपोलर वाली किताब में जो इन्होंने लिखी

971
01:19:08,600 --> 01:19:13,200
है है ना तो उसको हम थोड़ा सा स्किप करेंगे

972
01:19:13,200 --> 01:19:17,200
और उसमें सिर्फ एक ही चीज कहेंगे कि आप यदि अपनी ऊपर लगने

973
01:19:17,200 --> 01:19:21,200
वाले आरोपों के लिए अपना एक्सप्लेनेशन चाहते

974
01:19:21,200 --> 01:19:25,200
हो कि तभी माना जाए उनको जब मेरा एक्सप्लेनेशन गलत

975
01:19:25,200 --> 01:19:29,200
साबित हो जाए। तुम चाहते हो ना? अभी यहां पर मैं बोल दूं तुम जो भी कहानी बता

976
01:19:29,200 --> 01:19:35,200
रहे हो सब झूठ है। क्या मतलब रह जाएगा?

977
01:19:35,480 --> 01:19:39,600
तो अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारे बोले हुए को ही तुम्हारे संबंध

978
01:19:39,600 --> 01:19:43,760
में सत्य माना जाए तो सचिव जी बोल देंगे कि भैया हमने ऐसा

979
01:19:43,760 --> 01:19:47,760
कुछ नहीं किया ये सब झूठ है ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी बोल रहे हैं हमने ऐसा कुछ

980
01:19:47,760 --> 01:19:52,480
नहीं किया सब झूठ है तो वो क्यों मानोगे वो क्या मान लोगे तुम

981
01:19:52,480 --> 01:19:56,480
तो तुम अपने बारे में चाहते हो कि मेरे विपरीत जो भी समाचार आए उन पर मैं

982
01:19:56,480 --> 01:20:00,640
एक वक्तव्य दूं और फिर उस वक्तव्य के आधार पर मुझे जो है निर्दोष मान

983
01:20:00,640 --> 01:20:05,720
लिए जाए मगर दूसरों के बारे

984
01:20:05,720 --> 01:20:10,000
में मगर दूसरों के बारे में तुम यह मानते

985
01:20:10,000 --> 01:20:14,760
हो कि क्या कहते

986
01:20:14,760 --> 01:20:18,800
हैं ये दूसरों के बारे में मानते हो कि उनके

987
01:20:18,800 --> 01:20:23,360
बारे में जो मैं समाचार दे दूं वो सत्य मान लिया जाए। बिना उनके एक्सप्लेनेशन

988
01:20:23,360 --> 01:20:28,240
सुने बिना उनके कुछ कहे। तो ये तुम्हारी क्या है? दोगलापन

989
01:20:28,240 --> 01:20:33,120
और क्या है ये? करके गोली करने की व्यवस्था किया था हमारी शिक्षक

990
01:20:33,120 --> 01:20:37,120
से निकल कर बिना किसी नशेबाजी और मेरी माता की

991
01:20:37,120 --> 01:20:41,680
मन को हटा से हटा दे रहा है तो कभी वो व्यक्ति बहुत अधिक बहुत अधिकता

992
01:20:41,680 --> 01:20:45,840
है बहुत अधिक काम हो सकता है बहुत अधिक इसमें बहुत सारी

993
01:20:45,840 --> 01:20:50,000
इसमें सेक्सुअल डिसऑर्डर भी हो सकता है जैसे कोई व्यक्ति बहुत अधिक अगले दिन में एक

994
01:20:50,000 --> 01:20:50,880
कहा था कि

995
01:20:50,880 --> 01:20:55,280
रोटी खाए का बेटा डिसऑर्डर है और उसको मैंने इसी पुस्तक

996
01:20:55,280 --> 01:20:59,360
आपने ये माना कि भैया मैं डिसऑर्डर से ग्रसित था मगर अगर आपका

997
01:20:59,360 --> 01:21:03,680
एक तरफ यह भी कहना है कि आपका जो बचपन है वो सुधरा हुआ है बचपन

998
01:21:03,680 --> 01:21:08,320
से। अब भले ही किसी बीमारी के कारण है उसमें दिक्कतें तो है ना।

999
01:21:08,320 --> 01:21:13,000
मानसिक रोग तो आ रहा है ना। क्यों आ रहा है? बचपन से ही सुधरे हुए

1000
01:21:13,000 --> 01:21:19,000
हो। हां उसके बाद

1001
01:21:28,800 --> 01:21:32,800
समझे लेकिन क्या समस्या है और जो लोग इससे लड़ते हैं वैसे नहीं

1002
01:21:32,800 --> 01:21:37,200
ये समस्या तुमको हो कैसे गई जब सात आठ वर्ष की आयु में तुमको वो देवताओं

1003
01:21:37,200 --> 01:21:41,280
के दर्शन होने लगे थे इधर देवता इधर दिव्य जीवन

1004
01:21:41,280 --> 01:21:45,320
और उधर रोगी मानसिक

1005
01:21:45,320 --> 01:21:51,320
रोगी

1006
01:21:53,400 --> 01:21:57,600
किसी बता रहा हूं इंस्ट्रक्शन है माय

1007
01:21:57,600 --> 01:22:01,760
मैं बोला है उसके पहले परीक्षा में लिखा है आई ऑलवेज मॉनिटर मसेल्फ और मैं अपना

1008
01:22:01,760 --> 01:22:05,840
डेवलप टू और अपनी मन इसको आप विवेक कर सकते हो इसको

1009
01:22:05,840 --> 01:22:11,400
अच्छे नहीं है और पर्सनल और क्या होना चाहिए

1010
01:22:11,400 --> 01:22:13,880
क्या

1011
01:22:13,880 --> 01:22:17,240
बोल लिखा है

1012
01:22:17,240 --> 01:22:21,600
ये क्या लिखा है अभी अरे भाई तुम्हारे

1013
01:22:21,600 --> 01:22:25,920
Facebook पर कमेंट मिल रहे हैं शायरियां मिल रही है लड़कियों के लिए गालियां

1014
01:22:25,920 --> 01:22:30,400
मिल रही हैं हमें क्या करना तुम्हारी बायपोलर की पुस्तक

1015
01:22:30,400 --> 01:22:34,640
वो पढ़ के पूरी हमें बायपोलर थोड़ी ना है हमें

1016
01:22:34,640 --> 01:22:38,640
तो वहां से इतना है कि भैया तुम्हारे बारे में जो दो प्रेम प्रसंग मिल रहे हैं

1017
01:22:38,640 --> 01:22:42,840
उसका जिक्र तुमने अपनी बुक में भी किया है

1018
01:22:42,840 --> 01:22:48,840
बस और क्या

1019
01:22:49,880 --> 01:22:55,400
है वो नहीं बता देता

1020
01:22:55,400 --> 01:22:59,520
हूं वो फैक्ट नहीं बता प्योर है एंड

1021
01:22:59,520 --> 01:23:03,600
मोटिव ओनली मेक मैच हो रहा है हाउ एग्जांपल गिव हियर

1022
01:23:03,600 --> 01:23:07,840
प्योर वर्क पर हाउसिलिटी उसका लिख सपोज

1023
01:23:07,840 --> 01:23:12,240
सिचुएशन आपको सिचुएशन का बता

1024
01:23:12,240 --> 01:23:16,240
क्या लिखा हुआ है क्लियर इसका समझते हो अभी तक

1025
01:23:16,240 --> 01:23:20,320
सपोज कर लो ओनली मेन द टॉपिक मैं जो उदाहरण देने जा रहा हूं वो

1026
01:23:20,320 --> 01:23:24,640
सिचुएशन है सपोज करो ऐसी सिचुएशन आई तब मैं क्या कर है

1027
01:23:24,640 --> 01:23:29,200
वाली पुस्तक में इस पे दिखाइए बता वो क्यों नहीं

1028
01:23:29,200 --> 01:23:33,280
लिखा है यहां पर तुम्हारा झूठ बता गया को मालूम

1029
01:23:33,280 --> 01:23:37,800
को मालूम और बाकी लोग देखे अभी तो ऐसे

1030
01:23:37,800 --> 01:23:41,920
ही मैं आगे आपको बता रहा हूं मैं दे हैव

1031
01:23:41,920 --> 01:23:45,920
बीन टाइम्स आई हैव टू सी एडवाइस टू माय माय पेरेंट्स फ्रेंड्स एट सम टाइम्स फॉर अदर्स बट सच सिचुएशन

1032
01:23:45,920 --> 01:23:50,000
आर वेरी रेयर अवश्य मेरे जीवन में ऐसे अवसर आते है जब मुझे अपने माता पिता से या मित्रों से यानी लोगों से प्यार की आवश्यकता

1033
01:23:50,000 --> 01:23:54,000
पड़ती है लेकिन ऐसा कम होता है क्यों क्योंकि अक्सर दो मेंटल पर्सनालिटी

1034
01:23:54,000 --> 01:23:58,080
अनोइंग रूप से काम कर लेती है सपोर्ट अ सिचुएशन ऑफ़ ब्रेन आप इग्नोर का सिचुएशन करे हाउ

1035
01:23:58,080 --> 01:24:02,160
मैं परफॉर्म सेल्फ कंट्रोल में मैं सेल्फ कंट्रोल कैसे करता हूं हाउ द एक्स गिवन हियर प्योर वर्क

1036
01:24:02,160 --> 01:24:04,960
ऑफ़ फिक्शन एंड द मोटिव इस टू ओनली मेक द टॉपिक क्लियर मैं स्पष्ट किया

1037
01:24:04,960 --> 01:24:09,200
मैं जो उदाहरण देने जा रहा हूं वो प्योर वर्क फिक्शन है सपोज कर लो देख लो

1038
01:24:09,200 --> 01:24:13,280
निकाल लो उसको डाउनलोड कर हाउ एवर द एक्स अंग्रेजी तो

1039
01:24:13,280 --> 01:24:17,360
आती है तो नहीं आती तो बहुत अच्छी अंग्रेजी टू ओनली मेक द टॉपिक बनाने के लिए

1040
01:24:17,360 --> 01:24:21,360
मान लो मेरे जीवन में ऐसी प्रेफर करती जा रही है सपोज की किसी व्यक्ति ने मुझे कोई ड्रग ऑफर किया

1041
01:24:21,360 --> 01:24:25,440
टोल्ड मी अबाउट द रैकेट एंड इट्स मेकिंग मी सम फॉर ट्रक अब उसने मुझे बताया की ड्रग

1042
01:24:25,440 --> 01:24:29,520
क्या करेगा और जैसे मैंने कहा माय वाइपल इस बर्न टू स्पेसिफिक जनरल ये मैंने

1043
01:24:29,520 --> 01:24:34,480
किया अब क्या हुआ एस यू नो दैट ड्यूरिंग द पोटेशन

1044
01:24:34,480 --> 01:24:38,480
जो मेरी फॉलोवर्ड पर्सनालिटी है और जो मेरी मोमेंटल पर्सनालिटी है ये दोनों आपस में मन में क्या बातें करेंगे कैसे

1045
01:24:38,480 --> 01:24:42,640
बात करेंगे क्या न्यूरो कन्वर्सेशन करेंगे ऐसी सिचुएशन में इसका एक एग्जांपल देता हूं मैं एक एग्जांपल भी लिखा है अब इस एग्जांपल

1046
01:24:42,640 --> 01:24:47,120
को पढ़ के ये मत बहना इट्स अ प्योर वर्क ये तो क्या भाई बात

1047
01:24:47,120 --> 01:24:51,200
वर्क ऑफ नहीं है सर मैं समझता हूं देखो मैंने ऐसा किया है पूछने

1048
01:24:51,200 --> 01:24:55,520
वाले मैंने नहीं कहा है हां लेकिन इसीलिए मैंने अपने वाक्य में लिखा है क्या लिखा है की अगर किसी को व्यक्ति और

1049
01:24:55,520 --> 01:24:59,520
आपत्ति है वैसे शिष्य को लगता है वो आशा है तो वो सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करण ले स्वतंत्र जो है उसको ज्ञान मैंने

1050
01:24:59,520 --> 01:25:04,000
दिया है मैंने ये नहीं कहा कि भाग यहां से कौन होते है ये मैंने नहीं कहा हां लेकिन आपके

1051
01:25:04,000 --> 01:25:08,320
वास्तविक होनी चाहिए ये मना करना कमेंट किए जा रहे है वास्तविक होनी चाहिए उद्देश्य को समझ में आना चाहिए

1052
01:25:08,320 --> 01:25:12,800
अब क्या है सेइंग दैट यू आर नॉट गेट द पुलिस एंड लीडर में

1053
01:25:12,800 --> 01:25:16,960
मनी तुमसे सार्वजनिक रूप से प्रश्न कर तो रहे हैं

1054
01:25:16,960 --> 01:25:20,720
राजेंद्र दास जी के जो शिष्य गण है क्यों नहीं जा रहे हो

1055
01:25:20,720 --> 01:25:24,880
सनार्ग वाले सार्वजनिक प्रश्न कर तो रहे हैं क्यों नहीं जा रहे एवरीथिंग

1056
01:25:24,880 --> 01:25:29,040
इन लाइफ में पूछेगा व्हाट्स ग्रेटर देन मनी एंड लाइफ से पैसा

1057
01:25:29,040 --> 01:25:33,120
पैसा जीवन नहीं रखा है और मुझे कोई अवसर मिला

1058
01:25:33,120 --> 01:25:37,600
में पैसा कमाने का ड्रग हो वो मेंटर बोलेगा ना उसको

1059
01:25:37,600 --> 01:25:41,840
और ड्रग होता है कि नॉर्मल कवच का काम कर

1060
01:25:41,840 --> 01:25:46,240
ऐसा नहीं कि दवा

1061
01:25:46,240 --> 01:25:50,400
तो अपनी आप बीती सुना रहे हैं भाई अपनी बुक को पढ़ रहे हैं तो हमारा उसमें कोई इंटरेस्ट

1062
01:25:50,400 --> 01:25:54,560
नहीं है क्योंकि अगर इनकी ही वाणी मान्य

1063
01:25:54,560 --> 01:25:58,640
हो जाएगी तो सामने वाले की वाणी मान क्यों मान्य क्यों नहीं होगी? खैर वो

1064
01:25:58,640 --> 01:26:02,640
बुक में लिखा हुआ उसका अर्थ पढ़ के उसको एक्सप्लेनेशन कर रहे हैं। उससे हमारा कोई औचित्य

1065
01:26:02,640 --> 01:26:07,440
नहीं है। ऐसा लोगों की जल्दी इट विल मेक हमारी कोशिश समाप्त हो जाए। यू आर स्टंग

1066
01:26:07,440 --> 01:26:11,440
बाय लॉ मेकिंग लगे। इट विल मेक फ्री गिल्टी फॉर लाइफ

1067
01:26:11,440 --> 01:26:15,600
एंड इवन आफ्टर दिस। और मुझे जीवन की और मरने के मजबूती के साथ बस

1068
01:26:15,600 --> 01:26:19,920
आई डिसाइडेड टू द वैसे मैं करूंगा। कैन बी लड और एंगल दूसरा

1069
01:26:19,920 --> 01:26:24,000
इट नेवर और इसमें क्या बात है मेंटल के विरुद्ध जा काम नहीं

1070
01:26:24,000 --> 01:26:28,000
हो सकता है और दूसरा बात दूसरी तीसरी बात इफ अ रोंगों डीड इस डन इट एक्सेप्ट्स द गिल एंड

1071
01:26:28,000 --> 01:26:32,000
नॉट टाइप ऐसे मैंने समझाया है सारी बात वो तो मेरी फॉर्मल पर्सन है सामाजिक उसके तीन

1072
01:26:32,000 --> 01:26:36,400
विशेषता मैंने लिखी है इसको लोभ आ सकता है बोल आ सकता है काम आ सकता है अंधकार आ सकता है कुछ भी आ सकता है कविता

1073
01:26:36,400 --> 01:26:40,720
है और देखिए इसमें क्या बात है मेंटल के विरुद्ध जाकर काम नहीं कर सकता है और कुछ दूसरी

1074
01:26:40,720 --> 01:26:45,360
तीसरी बात ये डीड इसको प्रयास से नहीं किया जा सकता है क्योंकि शास्त्री विवेक का हमारा

1075
01:26:45,360 --> 01:26:49,840
जो नहीं लिखे उसका दावा करते लेकिन कहां नीचे इसको आगे नहीं बात करो

1076
01:26:49,840 --> 01:26:55,280
ये बात क्यों नहीं बता रहे सेलेक्टिव बातें क्यों बता रहे हो

1077
01:26:55,280 --> 01:27:00,840
सेलेक्टिव

1078
01:27:00,840 --> 01:27:05,280
बातें श्री राम जी को मैंने जी नहीं लगाया राम बोला

1079
01:27:05,280 --> 01:27:09,360
ये सेलेक्टिव होना नहीं है तुमको नहीं पता है कि राम को राम

1080
01:27:09,360 --> 01:27:13,360
भी बोला जा सकता है यह सेलेक्टिव होना नहीं है

1081
01:27:13,360 --> 01:27:17,840
सेलेक्टिव बातें तुम कितनी जगह सेक्टिव हो जाते

1082
01:27:17,840 --> 01:27:22,400
अपने मनपसंद अपने टॉपिक को उठा लेते हो। जब मैं कहता हूं विरोधाभासी

1083
01:27:22,400 --> 01:27:26,560
तो तुम कहते हो कि अ

1084
01:27:26,560 --> 01:27:30,560
इसने वीडियो देखा नहीं तो एक विरोधाभासी कैसे कर रहा है? तो ये कैसे

1085
01:27:30,560 --> 01:27:36,280
तुम बोल रहे हो? सेलेक्टिव बातें। खुद खुद भी तो तुम सेलेक्टिव ही होते

1086
01:27:36,280 --> 01:27:41,240
हो। इसमें देखो भाई क्या हो गया?

1087
01:27:41,240 --> 01:27:47,240
हेलो देखो इसमें।

1088
01:28:00,960 --> 01:28:06,960
जुड़े रहने के लिए

1089
01:28:25,020 --> 01:28:31,020
[संगीत]

1090
01:28:37,120 --> 01:28:41,360
तुमने भी बहुत से झूठ बोले हैं। तुमने भी कहा कि जो है

1091
01:28:41,360 --> 01:28:46,520
शिवश जो है क्या कहते हैं

1092
01:28:46,520 --> 01:28:50,880
वह वो है प्लांटेड है तुमने कहा ना ये प्लांटेड

1093
01:28:50,880 --> 01:28:55,040
है अपना धंधा चलाना चाहता है ये सब तुमने कहा है ना ये

1094
01:28:55,040 --> 01:28:59,200
क्या है इसमें भी अब जनेऊ को हाथ में लेकर कर दो तो तुम्हारे पता

1095
01:28:59,200 --> 01:29:05,200
चल जाए तुम कितना जनेऊ को मानते हो

1096
01:29:09,360 --> 01:29:15,360
चलो खैर चलते

1097
01:29:18,190 --> 01:29:24,190
[संगीत]

1098
01:29:24,600 --> 01:29:28,720
हैं। बहुत ज्यादा नहीं इनसे ये

1099
01:29:28,720 --> 01:29:32,800
कोई प्रश्न नहीं पूछेगा क्या कि देवताओं के द्वारा दिव्य प्रयोजन द्वारा जो है

1100
01:29:32,800 --> 01:29:38,800
जन्मा है।

1101
01:29:48,840 --> 01:29:54,400
और मैंने बहुत सारे झूठ बोले हैं।

1102
01:29:54,400 --> 01:29:58,480
तो इसका मतलब मैंने मान लिया। मैंने जो झूठ बोलने का जो मुझ

1103
01:29:58,480 --> 01:30:02,560
पर वो लगाया जा रहा है आरोप उसका निराकरण प्रस्तुत

1104
01:30:02,560 --> 01:30:06,560
कर दिया। उसके बाद दुर्जन तोष न्याय से बोल रहा हूं कि यदि मान भी

1105
01:30:06,560 --> 01:30:10,640
लिया जाए कि मैंने भी बहुत मैंने बहुत सारे झूठ बोले हैं तो तुमने भी बोले हैं ना

1106
01:30:10,640 --> 01:30:15,680
उसका क्या करें पढ़ो उनसे जाकर के अपने

1107
01:30:15,680 --> 01:30:21,680
भगवत आनंद है कि गदानंद है

1108
01:30:40,440 --> 01:30:44,480
मैं आई वा क्लास निकाल ले और वहां

1109
01:30:44,480 --> 01:30:47,560
से

1110
01:30:47,560 --> 01:30:52,120
आप तो मैंने क्या लिखा उसके सामने कक्षा

1111
01:30:52,120 --> 01:30:58,120
मेंटेड आवर मैटिकुलेशन क्लास और उसी तरह से

1112
01:30:58,480 --> 01:31:02,480
क्यों विश्वास करें भाई क्यों विश्वास करें तुम्हारी

1113
01:31:02,480 --> 01:31:06,480
वो Facebook की जीवन को देखा है ना किस तरह से गाली गलौज ये सब

1114
01:31:06,480 --> 01:31:12,480
करते हो जब तुम्हारे मुख की बातें

1115
01:31:18,760 --> 01:31:23,520
हैं ये भाई साहब लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य

1116
01:31:23,520 --> 01:31:27,840
विवाह से पूर्व प्रेम करने को भी अब धीरे-धीरे जस्टिफाई

1117
01:31:27,840 --> 01:31:33,840
कर रहे

1118
01:31:38,040 --> 01:31:42,360
हैं। अचानक से मेरे जीवन में हो गया स्कूल को उस स्कूल

1119
01:31:42,360 --> 01:31:46,480
से पास आउट हो गया लेकिन दोस्तों से कोई पर नहीं कोई नहीं समझ नहीं आ रहा कि जाएगा

1120
01:31:46,480 --> 01:31:50,640
क्या होता है मैंने लेखक प्राप्त किया उसको लिखा क्या होगा आदमी केवल एक

1121
01:31:50,640 --> 01:31:54,640
लेखक को सोने के लिए उसको दिया जा रहा है

1122
01:31:54,640 --> 01:31:58,800
मैंने ये बताया की वो मेरे छप डिप्रेशन में मैं उस नदी किनारे

1123
01:31:58,800 --> 01:32:02,840
बैठा था बैकग्राउंड म्यूजिक में एक उसने ओल्ड नाम का एक ट्रैक ओल्ड

1124
01:32:02,840 --> 01:32:07,040
जिस वो बड़ा एकदम सैड बहुत ज्यादा उस पर श्रृंगार नहीं बिना

1125
01:32:07,040 --> 01:32:11,200
रस में और रस में ये सब जो बात कारण ये सब मेरा अच्छा लगता है

1126
01:32:11,200 --> 01:32:15,360
तो मैं इतना आवश्यकता की मैंने बताया

1127
01:32:15,360 --> 01:32:20,520
नहीं आवश्यकता तो नहीं थी सही बात है मुझे समझाया

1128
01:32:20,520 --> 01:32:24,800
नहीं उसको सामने से किया उसको बताया कि मेरे मन में

1129
01:32:24,800 --> 01:32:29,000
उसने कहा कि मुझे कहा

1130
01:32:29,000 --> 01:32:33,560
नहीं मेरे मन में आ गया उसको अच्छा लगा

1131
01:32:33,560 --> 01:32:37,600
देखो अशास्त्रीय तो है ही तुम्हारे मन में किसी के लिए इस

1132
01:32:37,600 --> 01:32:41,600
तरह का भाव आना वो गलत है। क्षमा मांग ली अच्छी बात है। वो भी एक एक

1133
01:32:41,600 --> 01:32:45,600
बात है कि भाई तुम चाह रहे हो कि तुम्हारा पक्ष जब तुम बताओ तो

1134
01:32:45,600 --> 01:32:50,000
तुमको तुमको सब सच मान लें। ठीक है? मगर जहां तक

1135
01:32:50,000 --> 01:32:53,120
बात है कि पूरी मटके लोग या विजय श्री विजयश्री आकर

1136
01:32:53,120 --> 01:32:57,120
के बोल रही है कि ऐसा-सा था तो तुम नहीं मानोगे। विजय श्री के बारे

1137
01:32:57,120 --> 01:33:01,200
में तुम नहीं मानोगे। मटके परिकरों के बारे में तुम नहीं मानोगे। मगर अपने बारे में

1138
01:33:01,200 --> 01:33:05,360
जो तुम बोल दो लोगे वो मानोगे। दूसरों के बारे में जो तुम बोलोगे वही माना जाएगा।

1139
01:33:05,360 --> 01:33:09,600
अपने बारे में जो तुम बोलोगे वही माना जाएगा। यह कहां का न्याय है भाई?

1140
01:33:09,600 --> 01:33:15,600
कैसा न्याय है? ठीक है। आगे

1141
01:33:19,320 --> 01:33:23,000
चलो।

1142
01:33:23,000 --> 01:33:28,760
लगा अभ्यास के

1143
01:33:28,760 --> 01:33:32,200
कारण

1144
01:33:32,200 --> 01:33:36,320
बताओ। दोस्तों क्या आपके एमएस ऑफिस सॉफ्टवेयर के अंदर ये वाला ऑप्शन

1145
01:33:36,320 --> 01:33:40,320
है? ध्यान से देख इसे कहते हैं कोपायलेट मैं गारंटी

1146
01:33:40,320 --> 01:33:45,560
के साथ बोल रहा हूं कि आपके पास नहीं होगा ये आपके पास कब आएगा और अभी

1147
01:33:45,560 --> 01:33:49,560
और हां उसमें पर्सन

1148
01:33:49,560 --> 01:33:54,600
नॉर्मल आपको कोई सोचा नहीं कि मेरे जीवन में आया और मैंने ऐसे उस दौर

1149
01:33:54,600 --> 01:33:58,160
से कहीं से

1150
01:33:58,160 --> 01:34:02,160
अच्छा एक चीज और है यहां पर देखिए कि मन में पाप आना मन में किसी के

1151
01:34:02,160 --> 01:34:06,400
लिए प्रेम आना ये एक अलग बात है वो नहीं आना चाहिए था अविवाहित उसमें जीवन

1152
01:34:06,400 --> 01:34:10,480
में और शायद ये ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे थे। उस समय की बात है जब इनका

1153
01:34:10,480 --> 01:34:15,880
ऐसा आया। अच्छा दूसरी एक बात है

1154
01:34:15,880 --> 01:34:20,000
कि इनका जो जीवन था वो दिव्य प्रयोजन से युक्त

1155
01:34:20,000 --> 01:34:24,160
था। ये बचपन से ही सुधरे हुए थे। तो ये क्या है? सुधरे

1156
01:34:24,160 --> 01:34:28,320
हुए नहीं थे क्या? 16 साल की आयु में जो प्रेम आ रहा है किसी के मन में?

1157
01:34:28,320 --> 01:34:32,960
ये भी एक बात है। सोचने वाली है।

1158
01:34:32,960 --> 01:34:37,120
ऐसा किया क्यों किया? क्योंकि वो आपस में एक

1159
01:34:37,120 --> 01:34:43,120
किया है संख्या में क्या

1160
01:34:49,800 --> 01:34:54,720
है उसे अंतिम में पढ़ा था

1161
01:34:54,720 --> 01:34:59,560
मैंने पूछा है

1162
01:34:59,560 --> 01:35:03,760
ना बताचारी औरचारी नहीं बता रहा हूं मैं सिचुएशन

1163
01:35:03,760 --> 01:35:08,000
बता रहा हूं उस सिचुएशन से लड़ने के बाद बता रहा हूं मनो में मन का कैसे किया जाए ऐसे विवेक

1164
01:35:08,000 --> 01:35:14,000
का प्रयोग करके किया जाता है तो क्या

1165
01:35:19,320 --> 01:35:25,320
हुआ की आवाज आ रही है क्या आप लोगों

1166
01:35:25,560 --> 01:35:29,920
को कमेंट कर दीजिए

1167
01:35:29,920 --> 01:35:33,920
की आवाज आ रही है क्या डिवाइन कंसीडर फॉर्म

1168
01:35:33,920 --> 01:35:37,920
कृष्ण क्या काम सद है ना

1169
01:35:37,920 --> 01:35:43,920
क्या कर लोग सीखने को मिलेगा ना

1170
01:35:49,440 --> 01:35:53,440
लोगों को सीखने को मिलेगा लोगों को सीखने को मिलेगा कि

1171
01:35:53,440 --> 01:35:57,680
यदि तुम ब्रह्मचर्य आश्रम में हो तो तुम प्रेम प्रसंग में पढ़ सकते हो

1172
01:35:57,680 --> 01:36:01,680
या फिर उससे निकल सकते हो और या फिर निकलने के बाद भी दोषी नहीं

1173
01:36:01,680 --> 01:36:07,680
माने जाओगे। भले ही तुम दिव्य योजना के तहत जन्म लिया हो

1174
01:36:08,360 --> 01:36:12,640
तुमने। इसको कोई दिमाग मानता ही नहीं। मैं तो भगवती की कृपा मानता हूं। जीवन

1175
01:36:12,640 --> 01:36:17,560
कैसे है खत्म। ऐसे मिला। अभी तीन दिन पहले जैसे पुराना मिला

1176
01:36:17,560 --> 01:36:21,680
तो और उसी प्लेग्राउंड में चर्चा करना चाहता हूं। उससे अखाड़े में खेलना चाहता हूं जो खास क्लास से तैयार

1177
01:36:21,680 --> 01:36:25,760
किया। लेकिन कहां तक करूंगा? जहां तक फार्म पे कम से कम है। फिर वो अपना इलाके उससे

1178
01:36:25,760 --> 01:36:29,760
मुझे कोई मतलब नहीं है। बस ये बता दूंगा कैसे मेरे जीवन से जुड़ी घटना हो। का वीडियो करके मुझे नोटियस

1179
01:36:29,760 --> 01:36:33,760
बनाया जाता है। मेरे साथ जो खास क्लास से आ गया। लेकिन कहां तक जहां पे फाइनल

1180
01:36:33,760 --> 01:36:38,440
कॉल के दो भाग कल बनाए थे। फिर वो अपना उससे

1181
01:36:38,440 --> 01:36:42,640
मुझे फाइनल कॉल के दो भाग उसने कल बनाए थे। फिर वो लाइव

1182
01:36:42,640 --> 01:36:46,640
करता जाए फिर कोई मतलब नहीं है। इसका मतलब आगे अब हमारा अब हम

1183
01:36:46,640 --> 01:36:50,800
जो लाइव कर रहे हैं उसका ये उत्तर नहीं देगा। ठीक है? इसने बोला है भाई नोट कर

1184
01:36:50,800 --> 01:36:55,520
लेना। इसने अपने फोर्थ लाइव में बोला है 16

1185
01:36:55,520 --> 01:37:00,240
45 के आसपास कि इसके बाद यह उत्तर नहीं देगा।

1186
01:37:00,240 --> 01:37:06,240
ठीक

1187
01:37:06,680 --> 01:37:11,200
है। अबे भाई तुझे अगर दिक्कत है तू आजा।

1188
01:37:11,200 --> 01:37:15,200
लिंक दे दूं आजा। निष्ठा पूर्वक

1189
01:37:15,200 --> 01:37:19,200
माता जी ने दूध पिलाया तो प्रत्यक्ष सामना करो। अन्यथा मुंगेरी लाल के हसीन

1190
01:37:19,200 --> 01:37:23,440
सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए तुम स्वतंत्र हो। आ रहे हो? हां

1191
01:37:23,440 --> 01:37:28,640
बोलो। लिंक देता हूं। आ जाओ।

1192
01:37:28,640 --> 01:37:33,560
ठीक है।

1193
01:37:33,560 --> 01:37:38,920
चलो अखाड़े के लिए तो तुम्हारा भी

1194
01:37:38,920 --> 01:37:43,040
धन्यवाद। तुम्हारी असलियत जान गया मैं। बस ये बता दूंगा कैसे

1195
01:37:43,040 --> 01:37:49,040
मेरे जीवन से करना कुछ। हां सदैव बोले भाई।

1196
01:37:51,040 --> 01:37:57,040
वैसे भावनात्मक क्या होता

1197
01:37:58,120 --> 01:38:02,920
है सभी सुनते हैं जल्दी

1198
01:38:02,920 --> 01:38:08,000
सोएगा बिलकुल धन्यवाद टीना जीने

1199
01:38:08,000 --> 01:38:11,600
वहां से निकाल

1200
01:38:11,600 --> 01:38:15,000
हां सही कह रही

1201
01:38:15,000 --> 01:38:19,120
है तो लिखो पढ़ो देखा

1202
01:38:19,120 --> 01:38:23,840
कर गए करने के लिए दो फिल्म देख लिया फिर गए आराम

1203
01:38:23,840 --> 01:38:29,840
तो अलग-अलग इसको मैंने लिखा और भी कोई व्यक्ति अगर ऐसा फसा हुआ

1204
01:38:32,080 --> 01:38:38,080
अरे ये सब तुमसे कौन पूछ रहा है यार भाई क्या होता है कैसे

1205
01:38:42,080 --> 01:38:46,160
वही वाली बात है अपना मुख्य विषय

1206
01:38:46,160 --> 01:38:50,400
पर बात करने के लिए ज्यादा कुछ है नहीं। पर इतना प्रभाव उत्पन्न करना है जनेऊ इत्यादि

1207
01:38:50,400 --> 01:38:55,040
दिखा के और यह सब करके इतना प्रभाव उत्पन्न करना है

1208
01:38:55,040 --> 01:38:59,200
कि वो जो है जो मुख्य बात है उस वो इतनी गौ

1209
01:38:59,200 --> 01:39:04,880
हो जाए उस पर ध्यान ही ना जाए व्यक्ति का।

1210
01:39:04,880 --> 01:39:10,880
अरे अलग से वीडियो बनाता ना तू।

1211
01:39:11,760 --> 01:39:15,920
लार्ज नहीं इसलिए आई एबल टू फॉरगेट भाई तुझे

1212
01:39:15,920 --> 01:39:20,000
प्रेम हुआ था ना दो बार तूने स्वीकार किया ना उस पर

1213
01:39:20,000 --> 01:39:26,000
बात करेंगे प्रेम हुआ कि नहीं

1214
01:39:32,040 --> 01:39:36,920
हुआ मत कीजिए तेरे दिमाग का कोई नशा

1215
01:39:36,920 --> 01:39:41,440
नहीं समझ मैं उसको से दीवार हटा देता हूं। लेकिन

1216
01:39:41,440 --> 01:39:45,440
आई ट्राई कंट्रोलिंग मसेल्फ आंट आल्सो शोर दैट शी विल ट्राई टू हैव द गर्ल

1217
01:39:45,440 --> 01:39:49,600
अबाउट मी ओवर दिस लेकिन वो मांगी नहीं करना चाहिए उन लोग की मांग कहा कोई बात नहीं

1218
01:39:49,600 --> 01:39:53,600
मैं उस लड़की से बात करूंगी उसके साथ बात करूंगी

1219
01:39:53,600 --> 01:39:57,600
मत कीजिए लेकिन मेरी स्थिति बिगड़ती है टेक द टाइम फ्रॉम

1220
01:39:57,600 --> 01:40:01,760
बाय कंडीशन स्थिति कैसे बिगड़ रही है भाई

1221
01:40:01,760 --> 01:40:05,840
जिनको 2017 में यंत्र मिल रहा है निग्रह परंपरा

1222
01:40:05,840 --> 01:40:10,960
का 2016 है पता नहीं कौन सा ईयर चल रहा है स्थिति कैसे बिगड़ रही है

1223
01:40:10,960 --> 01:40:15,160
आपको संभालने

1224
01:40:15,160 --> 01:40:21,160
की एनीवे पूछा है आप सबका आ

1225
01:40:23,000 --> 01:40:27,120
जाते ध्यान से सुनो अपने जीवन में अपने कैसे

1226
01:40:27,120 --> 01:40:31,400
आर गोइंग टू समझ नहीं चाहिए जितने भी डिप्रेशन

1227
01:40:31,400 --> 01:40:36,680
था सपने सब

1228
01:40:36,680 --> 01:40:40,960
कुछ सपने जो रेगिस्तान को गुलिस्तान बनाने की

1229
01:40:40,960 --> 01:40:45,120
जरूरत करते हैं। अंग्रेजी में बुक है इनकी बायपोलर की। सपनों के साथ जुड़ा

1230
01:40:45,120 --> 01:40:49,120
है। बायपोलर नाम की बीमारी से ग्रसित का सामना कर सके और

1231
01:40:49,120 --> 01:40:55,120
दुनिया को। धन्यवाद

1232
01:41:03,160 --> 01:41:07,280
भाई। जी महाराज ने बोला था पूरी दुनिया भी तुम्हारे

1233
01:41:07,280 --> 01:41:11,760
विरुद्ध हो जाए ना। तब भी धर्म के पक्ष में खड़े रहना

1234
01:41:11,760 --> 01:41:17,360
और हम खड़े रहेंगे।

1235
01:41:17,360 --> 01:41:21,440
इसने बस यही किया है कि ये सब करके जो है अच्छा खासा मसाला दे दिया। इसमें

1236
01:41:21,440 --> 01:41:26,200
हमारी जो क्षति है ना वो बस यही है। इतनी सी क्षति है कि इससे

1237
01:41:26,200 --> 01:41:30,400
जो सनातन का चोला ओढ़कर सनातन विरुद्ध संस्थाएं जो काम

1238
01:41:30,400 --> 01:41:34,840
कर रही हैं जो हमारा अभियान चल रहा था

1239
01:41:34,840 --> 01:41:39,600
वह जो है

1240
01:41:39,600 --> 01:41:43,600
हां सही कहा आपने। विजय जी ओरिजिनल वाली है

1241
01:41:43,600 --> 01:41:49,600
क्या? चेक करो जरा। कमेंट कमेंट हो रहा

1242
01:42:02,440 --> 01:42:04,760
है।

1243
01:42:04,760 --> 01:42:09,560
नो डिस्कस कर सकता हूं। लेता है कि बात नहीं

1244
01:42:09,560 --> 01:42:14,880
किया मेरा दांत तोड़ दिया सामने वाला ऐसा नहीं काफी अच्छा पढ़ता था

1245
01:42:14,880 --> 01:42:19,560
हमने आपके ऊपर दांत टूटने वाला आरोप नहीं लगाया

1246
01:42:19,560 --> 01:42:23,920
है मेंटल और बीच में फसोगे वचन देता हूं

1247
01:42:23,920 --> 01:42:27,480
औरता का उदाहरण दे रहा हूं इसलिए कहा

1248
01:42:27,480 --> 01:42:31,520
है कैसे बचाता है का उदाहरण दे रहा हूं इसलिए कहा था अपने

1249
01:42:31,520 --> 01:42:35,520
धर्मों का निष्ठा होंगे माया में कसोगे भी तो होने से पहले भगवान हाथ से निकाल कौन

1250
01:42:35,520 --> 01:42:39,520
थे पति मेरा नहीं होता पाएगा ये मैं तुमको वचन देता हूं ऐसे

1251
01:42:39,520 --> 01:42:44,160
कृपा करके इस मेरे जीवन से लिख सकते हो फॉलो ठीक है डन ठाकुर

1252
01:42:44,160 --> 01:42:48,560
सभी गर्ल फॉर्म्स आउटसाइड ऑफ़ दुनिया बिलकुल गर्ल

1253
01:42:48,560 --> 01:42:52,640
मैंने कहा यस गेट बता रहे है और अदर आल्सो थिंक नो

1254
01:42:52,640 --> 01:42:54,880
इन बिक इसीलिए क्योंकि जिस लड़की

1255
01:42:54,880 --> 01:42:58,880
है लेकिन इस समय अभी मैं पर्सनली जानता हूं मैंग एनी सिचुएशन दे

1256
01:42:58,880 --> 01:43:02,960
मैंने कहा इसीलिए क्योंकि जिस लड़के से वो प्रेम करता है उसको मैं पर्सनली जानता हूं लेकिन वो नहीं करता वो

1257
01:43:02,960 --> 01:43:07,040
लव ट्रायंगल चल रहा है उससे हुआ भी नहीं दिव्य प्रयोजन से जन्मे हुए जो

1258
01:43:07,040 --> 01:43:10,520
आचार्य है लुप्त संप्रदाय के

1259
01:43:10,520 --> 01:43:14,560
गुप्ताचार्य इनकी लव ट्रायंगल चल रही है और उसको इसको

1260
01:43:14,560 --> 01:43:19,040
ये अपना प्रस्तुतीकरण दे के जो है सामान्य

1261
01:43:19,040 --> 01:43:23,320
सिद्ध करने का प्रयास कर रहे

1262
01:43:23,320 --> 01:43:27,520
हैं समझ जाओ तुम देवर

1263
01:43:27,520 --> 01:43:31,600
यू डू डायरेक्ट भाई एक बार देखो यह

1264
01:43:31,600 --> 01:43:36,960
व्यक्ति कह रहा है कि

1265
01:43:36,960 --> 01:43:41,040
यह व्यक्ति यह कह रहा है कि देखो उन्होंने प्रायश्चित किया है, यह

1266
01:43:41,040 --> 01:43:45,120
किया है, वह किया है। तो तुमने जो अन्यों

1267
01:43:45,120 --> 01:43:49,200
ने जो कुछ किया है जो तुम्हारे हिसाब से किया है। तुम्हारे हिसाब से

1268
01:43:49,200 --> 01:43:53,640
नहीं उनसे पूछा है क्या प्रायश्चित किया है कि नहीं किया

1269
01:43:53,640 --> 01:43:57,760
है? उनके बारे में इतना प्रोपेगेंडा चला दिया। यह है वो है।

1270
01:43:57,760 --> 01:44:02,240
पूछा था उनसे प्रायश्चित किया है कि नहीं किया है?

1271
01:44:02,240 --> 01:44:06,240
और दूसरी बात यह है यह बचपन से ही सुधरे हुए हैं। इनके जीवन में कभी कुछ ऐसा नहीं

1272
01:44:06,240 --> 01:44:10,400
हुआ है। मुझसे पूछा था क्या मेरा उपवास उड़ाने से पहले मैंने व्रात संध्या

1273
01:44:10,400 --> 01:44:14,800
का वो जो है प्रायश्चित किया है कि नहीं किया है? और दूसरी बात यह

1274
01:44:14,800 --> 01:44:18,960
जो बचपन से सुधरे पैदा हुए हैं इनके जीवन में कभी कुछ दोष

1275
01:44:18,960 --> 01:44:23,040
नहीं आया और यह आचार्य हैं। ब्रह्मचर्य

1276
01:44:23,040 --> 01:44:27,440
आश्रम में इनको जो है प्रेम हो रहा है। इनके जीवन में लव ट्रायंगल चल रहा है।

1277
01:44:27,440 --> 01:44:31,840
सामान्य व्यक्ति की बात नहीं हो रही है। चलो

1278
01:44:31,840 --> 01:44:36,680
सोसाइटी वहां पर 2016 में इनको प्रेम प्रसंग हो रहा

1279
01:44:36,680 --> 01:44:40,720
है। बायपोलर डिसऑर्डर है। 2017 में इनको जो है यंत्र

1280
01:44:40,720 --> 01:44:44,800
मिल रहा है। दिव्य योजना के तहत अंतर्गत और 2021 तक ये वो बन

1281
01:44:44,800 --> 01:44:49,040
जा रहे हैं। जाते पता नहीं किस तक कौन लुप्त

1282
01:44:49,040 --> 01:44:52,080
संप्रदाय के गुप्ताचार्य

1283
01:44:52,080 --> 01:44:56,240
लेकिन करने से पहले अपने बड़ों से लेकर करना क्योंकि तुम्हारी सॉरी समाज

1284
01:44:56,240 --> 01:45:02,240
में आदर्श

1285
01:46:19,440 --> 01:46:25,160
हां

1286
01:46:25,160 --> 01:46:29,520
जी बड़ा अच्छे से प्रस्तुत किया भाई हम चलो

1287
01:46:29,520 --> 01:46:35,520
आगे चलते हैं।

1288
01:46:40,480 --> 01:46:43,000
पहले बात बता

1289
01:46:43,000 --> 01:46:47,360
दे लिखा हुआ है क्या कहा और कहा

1290
01:46:47,360 --> 01:46:53,360
है मुझे नहीं लगता सामाजिक मानसिक के माध्यम

1291
01:46:53,880 --> 01:46:58,200
से

1292
01:46:58,200 --> 01:47:03,320
उंगलीस बन रही लेकिन समस्या की आपकी प्रतिष्ठा में

1293
01:47:03,320 --> 01:47:08,440
है आपके यहां आपकी कुंडली में रहा है और

1294
01:47:08,440 --> 01:47:12,480
ऐसा बन रही लेकिन समस्या की प्रतिष्ठा में

1295
01:47:12,480 --> 01:47:16,480
बन सकता है आई मिस यू इन

1296
01:47:16,480 --> 01:47:20,480
फर्स्ट लेट्स गो टू नारद घाट गंगा स्नान उससे पहले हम आपके साथ है आपके साथ कोई दिक्कत

1297
01:47:20,480 --> 01:47:25,960
हो आपके साथ लेकिन सबसे पहले नारद घाट जा रहे है गंगा स्नान

1298
01:47:25,960 --> 01:47:31,960
समय में स्थिति में क्या

1299
01:47:34,280 --> 01:47:38,320
है अपनी बात बता पूरा इसलिए

1300
01:47:38,320 --> 01:47:42,320
हम साथ साथ हम आपके अकाउंट डीडी एलजे सब एक साथ बना दिए

1301
01:47:42,320 --> 01:47:47,000
तुमको ना भूल पाएंगे तेरे नाम और वो थी ना वो

1302
01:47:47,000 --> 01:47:51,600
क्योंकि सब एक साथ कर दिए और उसको मंच बना

1303
01:47:51,600 --> 01:47:55,760
भाव से अवगत हो जाइए वहां पे हम लोग गांजा को नहीं बैठे दारू नहीं बैठे वहां बोले तब

1304
01:47:55,760 --> 01:48:00,440
तक हम क्या करें आपके मन को शांति मिले इसमें चलिए महादेव क्या

1305
01:48:00,440 --> 01:48:04,560
होता यही सिचुएशन है उन्होंने काम कर दिया महादेव लर्न

1306
01:48:04,560 --> 01:48:08,560
नेचुरल पीस एंड द नेक्स्ट मॉर्निंग वी विजिटेड द टप टू द साइट ऑफ़ देयर डिजायर्ड मैं

1307
01:48:08,560 --> 01:48:14,560
क्रिएटेड महादेव फुल फिट

1308
01:48:14,760 --> 01:48:19,480
कर्ट मैं इसके भाव से स्वयं को बाहर नहीं निकाल पाऊंगा ओनली ग्रेट

1309
01:48:19,480 --> 01:48:23,520
सोच काम मेरे सहयोग किया

1310
01:48:23,520 --> 01:48:28,160
डॉक्टर सिंह आप लोग लेकर आई आल्सो भैया हाकि

1311
01:48:28,160 --> 01:48:32,800
अभी की आई सेंड द रिक्वेस्ट टू द ग मदर थ्रू सम फीमेल रिलेटिव एंड

1312
01:48:32,800 --> 01:48:36,800
मेरे ने आंसू थे लेकिन क्वेश्चन बताइए हर्ट एंड फेज भैया

1313
01:48:36,800 --> 01:48:40,880
अदर वाइफ हाकि जो आपको बाद में किया अभी की आई सेंट रिक्वेस्ट टू द गर्ल्स मदर

1314
01:48:40,880 --> 01:48:44,960
थ्रू सम फीमेल रिलेटिव एंड टू टाइम फिजिकली मेंटली थोड़ा समय

1315
01:48:44,960 --> 01:48:49,520
लगा जिसके कारण थोड़ा सा स्वास्थ में था उस समय

1316
01:48:49,520 --> 01:48:54,320
सहयोग किया सहयोग किया तो उसके विषय में पिछले वीडियो में हमने देखा

1317
01:48:54,320 --> 01:48:58,560
मैंने कर दिया है तो दे वन लेटर रणबीर

1318
01:48:58,560 --> 01:49:02,640
हु लव न्यू बट रणबीर आल्सो

1319
01:49:02,640 --> 01:49:05,160
बट

1320
01:49:05,160 --> 01:49:09,280
ट्विस्ट से इस बात तुम नहीं छोड़ा भगवान

1321
01:49:09,280 --> 01:49:13,280
मुझे सांस निकाला मैं क्यों छिपाऊं देखो मेरे जीवन की घटना है कौन घटना मैं

1322
01:49:13,280 --> 01:49:17,600
कहां कह रहा हूं छिपाने के लिए भाई अच्छा है छिपाओ मत

1323
01:49:17,600 --> 01:49:21,840
मैं तो ये बता रहा हूं लोगों को कि तुम्हारे दो बार प्रेम प्रसंग चल चुके हैं जिनको

1324
01:49:21,840 --> 01:49:26,080
तुम भी एडमिट कर रहे हो तुम्हारी गंदी गंदी अश्लील बातें अश्लील

1325
01:49:26,080 --> 01:49:29,760
चीजें अश्लील वक्तव्य वहां पड़े हैं तुम अपने वीडियोस में

1326
01:49:29,760 --> 01:49:33,760
खुल के कह रहे हो कि मैं गाली दूंगा

1327
01:49:33,760 --> 01:49:37,920
है ना मैं उस तुम्हारी उस सच्चाई को सामने ला रहा हूं। तुम क्यों अपना

1328
01:49:37,920 --> 01:49:42,000
यह दिखा के अपनी महानता को प्रूव कर रहे हो? इसके बारे में तो मैंने पूछा भी

1329
01:49:42,000 --> 01:49:46,320
नहीं है। हम भाई

1330
01:49:46,320 --> 01:49:50,400
मैं खुद जब लोगों को ये बता रहा हूं कि तुमने बायपोलर नाम की किताब लिखी तो मुझे नहीं

1331
01:49:50,400 --> 01:49:54,400
पता कि बायपोलर में तुमने अपने आप को हीरो बताया होगा।

1332
01:49:54,400 --> 01:49:59,520
हां फिल्म का। मुझे नहीं पता है क्या?

1333
01:49:59,520 --> 01:50:03,680
मैं तो उसके उस पक्ष को प्रकाश में ला रहा हूं कि तुमने भी स्वीकार किया दो

1334
01:50:03,680 --> 01:50:07,680
कि तुम्हारे जो है तुम्हारे प्रेम प्रसंग चले और

1335
01:50:07,680 --> 01:50:13,680
तुम बचपन से सुधरे हुए हो हमारे नहीं चले

1336
01:50:15,480 --> 01:50:19,840
समझे का साथ नहीं हुआ

1337
01:50:19,840 --> 01:50:25,840
अभ्यास

1338
01:50:26,600 --> 01:50:30,720
और ऐसा बोलो टॉप

1339
01:50:30,720 --> 01:50:36,360
पूरा वीडियो बकवास हो गया। अगला वीडियो लगाओ

1340
01:50:36,360 --> 01:50:40,600
इनका। तो फोर्थ वीडियो कंप्लीट हो गया है। उसमें इन्होंने अपनी बायपोलर

1341
01:50:40,600 --> 01:50:46,600
के बुक को जो है खोल करके और वो किया है।

1342
01:50:52,760 --> 01:50:57,680
तो हां अगला लगाओ। कौन सा है?

1343
01:50:57,680 --> 01:51:01,760
फिफ्थ है ना ये 1 मिनट 1 2 3 4

1344
01:51:01,760 --> 01:51:07,760
5

1345
01:51:08,960 --> 01:51:12,960
जो टॉपिक नए होंगे उन्हीं पे बात करेंगे। वैसे हम दाया था के बहुत सारे टॉपिक कवर

1346
01:51:12,960 --> 01:51:18,960
कर चुके हैं। अगर आपको आवाज आ रही है ठीक से बता दीजिए

1347
01:51:19,800 --> 01:51:23,840
और अब हम फिफ्थ फिफ्थ बात फिफ्थ वाली

1348
01:51:23,840 --> 01:51:29,840
जो लाइव की है भगवत आनंद ने उस पर बात कर रहे हैं।

1349
01:51:34,960 --> 01:51:38,960
मजा आएगा सब जो

1350
01:51:38,960 --> 01:51:42,600
खाना कभी

1351
01:51:42,600 --> 01:51:46,960
बात समझ सारी समझ समझा कि

1352
01:51:46,960 --> 01:51:51,160
ये हाइपरसेक्सुअल है तो

1353
01:51:51,160 --> 01:51:55,760
हाइपरसेक्सुअल है ये बाइपोलर बुक से ही नहीं बाइपोलर

1354
01:51:55,760 --> 01:52:00,160
बुक में तो यह है कि वो हाइपर सेक्सुअलिटी भी उसका एक सिम्टम

1355
01:52:00,160 --> 01:52:04,160
है मगर तुम्हारे बारे में लोग यह बता रहे हैं

1356
01:52:04,160 --> 01:52:08,800
कि तुम्हें इस इस तरह का गुप्त रोग है हस्तमैथुन का

1357
01:52:08,800 --> 01:52:12,800
वह है उससे तुम इतना पीड़ित हो कि तुम जो है यहां

1358
01:52:12,800 --> 01:52:16,800
वहां इलाज ढूंढते फिर रहे हो विवाह के बाद भी तुम्हारा जो है

1359
01:52:16,800 --> 01:52:20,880
स्वयं पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। ठीक है चलते

1360
01:52:20,880 --> 01:52:25,280
हैं व्यक्ति का सबसे चैप्टर कहीं भी लिखा है। हाइपर सेक्सुअल

1361
01:52:25,280 --> 01:52:29,680
व्यक्ति व्यक्ति का मैंने प्रमाण नहीं दिया है। वहां पर वो शब्द है। मैंने इंगित

1362
01:52:29,680 --> 01:52:33,680
जरूर किया है। मगर वहां से सिर्फ इस बात की पुष्टि की है कि बायपोलर नाम की

1363
01:52:33,680 --> 01:52:39,280
बीमारी जिसको होती है वो तुमने माना है। उसमें हाइपर सेक्सुअलिटी भी होती है।

1364
01:52:39,280 --> 01:52:44,440
ठीक है? और 100 की सीधी एक बात भगवत

1365
01:52:44,440 --> 01:52:48,640
आनंद जब तुम ये चाह रहे हो कि तुम्हारा एक्सप्लेनेशन लोग सुन

1366
01:52:48,640 --> 01:52:52,800
ले तो तुम दूसरों का एक्सप्लेनेशन क्यों नहीं सुन रहे हो? तुम जब ये

1367
01:52:52,800 --> 01:52:56,800
चाह रहे हो कि तुम्हारे बारे में कोई भी बात बताई जाए तो उसका तुम जो बोल रहे हो वही मानी

1368
01:52:56,800 --> 01:53:00,800
जाए। तो दूसरा जब बोल रहा है आ के यहां पर अपनी बातें बता

1369
01:53:00,800 --> 01:53:04,800
रहा है तो उसको क्यों नहीं मान रहे हो? नहीं मान रहे हो

1370
01:53:04,800 --> 01:53:06,240
तो फिर अपेक्षा क्यों कर रहे हो कि

1371
01:53:06,240 --> 01:53:12,240
मेरी बात मानी

1372
01:53:19,240 --> 01:53:25,240
जाए? क्रिकेट बंद है।

1373
01:53:40,800 --> 01:53:44,840
ठीक है भाई कनेक्शन हो गया चालू हो

1374
01:53:44,840 --> 01:53:50,840
गया तो म्यूट हो गया

1375
01:53:51,960 --> 01:53:56,640
अच्छा चलेगा वही भाई

1376
01:53:56,640 --> 01:54:00,720
जी नहीं मैंने समझाया के विषय में हमने

1377
01:54:00,720 --> 01:54:05,400
तीन बार ये कह दिया उसका नाम उठा

1378
01:54:05,400 --> 01:54:10,320
कैसे डॉक्टर से व्यक्ति सारी ऊपर

1379
01:54:10,320 --> 01:54:16,320
मैं

1380
01:54:32,720 --> 01:54:36,880
ये देखो यहां पर ये फिर कह रहे हैं कि डॉक्टर का नाम बताओ। तुम बताओ ना उस उसका

1381
01:54:36,880 --> 01:54:40,880
नाम पिज़्ज़ा डिलीवरी वाले बॉय का नाम बताओ। उस व्यक्ति

1382
01:54:40,880 --> 01:54:45,280
का नाम बताओ जो तुम कह रहे हो जिनका ऋषिकेश जी के साथ

1383
01:54:45,280 --> 01:54:49,280
ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के साथ संबंध है। क्यों नहीं बता रहे हो? अपनी बारी आती है

1384
01:54:49,280 --> 01:54:53,360
तो तुम्हें प्रमाण चाहिए। ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन करने लगते हो। दूसरों

1385
01:54:53,360 --> 01:54:57,520
की बारी आती है तो मन कुछ भी जोड़ देते हो। फ्री मेंशन के लिए कार्य करता है। बताओ

1386
01:54:57,520 --> 01:55:01,680
ना कब लिया फ्री मिशन से? पैसा कब लिया विजय श्री ने? मुझे बताओ ना प्लांटेड

1387
01:55:01,680 --> 01:55:05,920
किया गया है। कब पैसा मिला मुझे प्लांटेड होने का? हां।

1388
01:55:05,920 --> 01:55:06,960
या कौन सा वो

1389
01:55:06,960 --> 01:55:11,280
किया है जो भी लेन देन है हमारा वो बताओ। जब बोल दूसरे

1390
01:55:11,280 --> 01:55:15,440
के बारे में कुछ भी बोल दोगे। अपने बारे में वो तथ्य मांगोगे। वही तथ्य

1391
01:55:15,440 --> 01:55:19,840
मैं मांगूंगा तो कहोगे अकाट प्रमाण साल हिंदू राष्ट्र मधुमक्खी की सेना

1392
01:55:19,840 --> 01:55:23,840
क्या यार अजीब व्यक्ति हो तुम थोड़ा तर्कशीलता से भी

1393
01:55:23,840 --> 01:55:29,840
तो सोचो भगवतानंद कहां गई तुम्हारी तर्क शक्ति

1394
01:55:33,520 --> 01:55:39,520
मैं प्लांटेड होके बैठा हूं मुझे ही नहीं पता ये देखो यहां क्या बोल रहे है

1395
01:55:43,040 --> 01:55:47,200
तुमने बताया क्या कभी उस व्यक्ति व्यक्ति का नाम जिसका संबंध तुम बताना चाहते हो

1396
01:55:47,200 --> 01:55:51,440
ब्रह्मचारी जी से। अब यह बात भी जब जब मैं बोल रहा हूं तो मेरे मन में ग्लानी

1397
01:55:51,440 --> 01:55:55,520
आ रही है कि मैं क्यों बोल रहा हूं सार्वजनिक हो। इसीलिए मैं इस चर्चा को

1398
01:55:55,520 --> 01:55:59,680
वहां नहीं करना चाहता। उससे वो सही सिद्ध हो रहे हैं। उनके

1399
01:55:59,680 --> 01:56:03,800
पक्ष में है। फिर भी बोलने में गंदा लग रहा है। और

1400
01:56:03,800 --> 01:56:07,920
तुम्हारे पास ऐसे संस्कार है कि नहीं? हमारे

1401
01:56:07,920 --> 01:56:12,000
पास है। जेनेट से हुआ था। मगर यह सब संस्कार हमारे

1402
01:56:12,000 --> 01:56:16,080
हमें प्राप्त है हमारे माता पिता से। कहां पर किस तरह से कौन

1403
01:56:16,080 --> 01:56:22,080
सी बात बोलनी चाहिए समझे

1404
01:56:28,000 --> 01:56:33,960
पिग्जा डिलीवरी हुई थी तब डेट थी कि नहीं थी बोल रहे डेट तो होगी

1405
01:56:33,960 --> 01:56:38,000
ना कुछ भी बोलते जाओ तुमसे प्रश्न पूछा जाए तो तुम बस

1406
01:56:38,000 --> 01:56:42,800
दो ही चीजें ले आओ 3 वर्ष हिंदू राष्ट्र मधुमक्खी की सेना

1407
01:56:42,800 --> 01:56:48,800
ये हमारा वो है एक्सप्लेनेशन और तुम अपना एक्सप्लेनेशन ये

1408
01:56:50,600 --> 01:56:54,960
दो। तुम्हारी कही हुई बातें अभी पिछली उसमें काफी झूठ हो गई है।

1409
01:56:54,960 --> 01:56:59,040
तो ये बात क्यों मान ली जाए तुम्हारी? तुमने कहा हमने तुम्हारा कभी समर्थन नहीं

1410
01:56:59,040 --> 01:57:04,360
किया। तुम्हारी एफबी की जो पोस्ट है जिसमें तुमने

1411
01:57:04,360 --> 01:57:08,480
स्वामी जो राघवाचार्य जी महाराज जी और जो

1412
01:57:08,480 --> 01:57:12,720
वासुदेव वासुदेवानंद जी महाराज जी वासुदेवाचार्य जी महाराज

1413
01:57:12,720 --> 01:57:16,720
उन दोनों का जो तुमने पोस्ट डाला है वीडियो लगा के उसके

1414
01:57:16,720 --> 01:57:20,720
नीचे हमने उसमें लाइक किया है झूठे हो कि नहीं तुम

1415
01:57:20,720 --> 01:57:25,200
झूठ बोला कि नहीं बोला और झूठ बोला तो यहां क्यों मान ले तुम्हारी बात कि तुम नहीं गए

1416
01:57:25,200 --> 01:57:29,280
हो गया बस बात खत्म जैसे तुम बता रहे हो कि तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र तुम्हारे

1417
01:57:29,280 --> 01:57:34,480
हिसाब से गलत है। नहीं हुआ तो वो सारी बातें गलत हो गई।

1418
01:57:34,480 --> 01:57:38,560
भाई तुम्हें जो बोलना है जो तुम क्लेम कर रहे हो उसके पक्ष में तुम्हें सामग्री

1419
01:57:38,560 --> 01:57:42,640
देनी होगी। वो सामग्री तुम्हारे पास नहीं है। जैसे तुम हमसे

1420
01:57:42,640 --> 01:57:43,140
सामग्री

1421
01:57:43,120 --> 01:57:47,120
मांग रहे हो और अगर बिना सामग्री के बिना अगर सामग्री के अभाव में भी

1422
01:57:47,120 --> 01:57:51,200
तुम किसी भी आरोप को सत्य मान लेते हो तो इसके लिए सामग्री क्यों मांग रहे हो? जब

1423
01:57:51,200 --> 01:57:57,200
तुम पर आरोप लग रहे हैं।

1424
01:57:59,280 --> 01:58:01,720
हां

1425
01:58:01,720 --> 01:58:06,320
तो वैसे डिस्कस नहीं कर सकते हो

1426
01:58:06,320 --> 01:58:10,320
कोई गुप्त रोगी नहीं है फिर भी तुम उसकी मेडिकल चीजों को टेस्ट नहीं कर

1427
01:58:10,320 --> 01:58:15,120
सकते हो कोई समलैंगिक है कि नहीं है

1428
01:58:15,120 --> 01:58:19,600
किसके रिश्ते किसके साथ है कि नहीं है ये चीजें तुम डिस्कस कर सकते हो वाह

1429
01:58:19,600 --> 01:58:23,600
क्या बात तालियां तालियां हो जाए भाई

1430
01:58:23,600 --> 01:58:28,480
आप

1431
01:58:28,480 --> 01:58:32,640
मतलब सोच के देखो व्यक्ति बोल क्या रहा है कि कोई व्यक्ति को कोई

1432
01:58:32,640 --> 01:58:37,040
डिसऑर्डर है कि नहीं है गुप्त रोग है कि नहीं है तुम सबके सामने डिस्कस नहीं कर सकते

1433
01:58:37,040 --> 01:58:41,040
मगर किसी व्यक्ति को ये इस तरह का संबंध है

1434
01:58:41,040 --> 01:58:47,040
कि नहीं किसी के साथ ये डिस्कस कर सकते हैं बहुत बढ़िया

1435
01:58:47,040 --> 01:58:53,040
एक तो उसके बाद फसेगा दूसरे के

1436
01:58:53,440 --> 01:58:56,960
एक तो कौन कौन सा केस फटेगा?

1437
01:58:56,960 --> 01:59:00,960
एक तो वाला केस बनेगा। तुम पे भी बहुत से केस बनते

1438
01:59:00,960 --> 01:59:04,960
हैं। पहली बात तो ये सुन लो मठ की ओर से बोला नहीं जा

1439
01:59:04,960 --> 01:59:09,200
रहा है। बात अलग है। तुम पे भी बहुत से केस बनते हैं जो

1440
01:59:09,200 --> 01:59:13,200
फंस रहे हो तुम। और दूसरी बात मैं फिर बता दूं। पिछले वाले लाइन में भी बोला

1441
01:59:13,200 --> 01:59:17,360
है कि मैंने तो यह क्लेम किया ही नहीं ना। दोबारा सुनो जाकर के।

1442
01:59:17,360 --> 01:59:21,600
मैंने यह बोला है कि हमें भी ऐसा सुनाई दे रहा है। हमें भी हमारे

1443
01:59:21,600 --> 01:59:25,680
पास भी इस तरह की सामग्री आ रही है जिसमें यह बताया जा रहा है

1444
01:59:25,680 --> 01:59:29,840
कि तुम फलाने फलाने रोग से ग्रसित हो। हस्तमैथुन के रोग

1445
01:59:29,840 --> 01:59:33,840
से ग्रसित हो। आदत से ग्रसित हो और उससे पीछा छुड़ाने के लिए तुम कहीं

1446
01:59:33,840 --> 01:59:37,840
पर जाते हो। ऐसा हमको भी बताया जा रहा है। तो जिस

1447
01:59:37,840 --> 01:59:42,440
तरह से तुम सुनी सुनाई बातों पर किसी का

1448
01:59:42,440 --> 01:59:44,000
समलैंगिक संबंधों

1449
01:59:44,000 --> 01:59:48,000
में लिप्त होना स्वीकार कर लेते हो या व्यभचार में लिप्त होना स्वीकार कर

1450
01:59:48,000 --> 01:59:52,560
लेते हो केवल सुनने पर किसी ने कह दिया इसलिए तो क्या

1451
01:59:52,560 --> 01:59:56,640
क्या कहते हैं क्या इस बात पे भी हम इस बात को

1452
01:59:56,640 --> 02:00:00,720
भी सही मान ले यदि तुम जा रहे हो तो प्रत्येक शुक्रवार को जा रहे हो कि नहीं

1453
02:00:00,720 --> 02:00:04,720
हमने तो यह बोला है हमने तो आरोप लगाया ही नहीं है और दूसरी बात ये

1454
02:00:04,720 --> 02:00:10,440
है कि तुमने इतनी चीजें करके रखी है कि पूछो नहीं।

1455
02:00:10,440 --> 02:00:14,480
खैर अगर स्वयं को निग्रह आचार्य कहते हो तो स्वयं पर निर्ग्रह

1456
02:00:14,480 --> 02:00:18,640
रखो। कम से कम जो तुमने स्वीकार किया है तुम्हारे मन में ऐसा दोष नहीं आना

1457
02:00:18,640 --> 02:00:23,360
चाहिए था।

1458
02:00:23,360 --> 02:00:29,360
कम से कमपुलेशन का केस मैंने कहा है किस

1459
02:00:31,040 --> 02:00:35,120
मैनपुलेशन का केस तो तुम्हारे ऊपर इतने बनेंगे कि पूछो

1460
02:00:35,120 --> 02:00:39,520
नहीं।

1461
02:00:39,520 --> 02:00:43,240
बता रहा हूं बता रहा

1462
02:00:43,240 --> 02:00:48,160
हूं पीडीएफ पढ़ पढ़ के बता रहे हो मैनपुलेशन

1463
02:00:48,160 --> 02:00:52,560
क्यों भाई तुमने वहां पर प्रमाण डाला है ना ये प्रमाण

1464
02:00:52,560 --> 02:00:57,040
ले लो वो क्या है और ठीक है तुम अपना

1465
02:00:57,040 --> 02:01:01,360
समझते रहो अपने विचार उसमें तुम कौन-कौन से केस है वो क्या बनाओगे

1466
02:01:01,360 --> 02:01:07,360
वो स्वतंत्र हो उसमें क्या ही किया जाए

1467
02:01:08,640 --> 02:01:14,640
तो हमें भी जो सूचनाएं प्राप्त हो रही है उनहीं को प्रस्तुत किया है

1468
02:01:15,240 --> 02:01:20,840
हमने ये बात

1469
02:01:20,840 --> 02:01:26,600
मैंने ये समुद्री

1470
02:01:26,600 --> 02:01:30,800
वाक उसी ताल दिया मैंने एक गीत बताया था

1471
02:01:30,800 --> 02:01:35,360
जो की उसी ताल ठीक

1472
02:01:35,360 --> 02:01:39,360
कह दिया

1473
02:01:39,360 --> 02:01:45,360
जा 250 ml वाली पेप्सी लेकर आ

1474
02:01:47,040 --> 02:01:51,040
बाकी की पेप्सी अरे आपने तो 250 ml ही मांगी थी ना सर तो बाकी की रेट्स

1475
02:01:51,040 --> 02:01:57,040
तो मैं भी लिया में 400 पेप्सी

1476
02:01:57,520 --> 02:02:03,520
और किसी प्रकार से

1477
02:02:03,840 --> 02:02:08,160
अरे मेरे भाई जब तुम अपने बारे में सब एक्सप्लेनेशन दे रहे हो

1478
02:02:08,160 --> 02:02:12,480
तो दूसरे के बारे में एक्सप्लेनेशन क्यों नहीं सुन रहे हो उसकी

1479
02:02:12,480 --> 02:02:16,560
वहां पे क्यों भिड़े पड़े हो ये है फ्री मिशनंस

1480
02:02:16,560 --> 02:02:20,640
है ये है वो है तुम आओ यार किसी दिन कब आओगे ये

1481
02:02:20,640 --> 02:02:25,440
बताओ

1482
02:02:25,440 --> 02:02:27,880
स्वयं

1483
02:02:27,880 --> 02:02:33,800
स्वयं जा

1484
02:02:33,800 --> 02:02:39,240
रहा मेरे पिताजी तो साल

1485
02:02:39,240 --> 02:02:44,360
से केस नहीं

1486
02:02:44,360 --> 02:02:50,360
किया किस नहीं लड़के का

1487
02:02:51,000 --> 02:02:55,520
किया था उसके को मिल सकती है। लोग ये भी कह रहे थे

1488
02:02:55,520 --> 02:02:59,520
सलीम खान ऐसा हुआ तो मेरे बारे में आपको कभी भी कुछ सुनने मिल सकता है। जितने

1489
02:02:59,520 --> 02:03:03,920
मैंने छात्र भी अच्छा करने के लिए अच्छा लगता है। तुम्हारे

1490
02:03:03,920 --> 02:03:07,920
बारे में कभी भी सुनने को कुछ भी मिल सकता है। उसको सच नहीं मानना चाहिए।

1491
02:03:07,920 --> 02:03:12,640
तो दूसरों के बारे में कभी भी सुनने को कुछ भी मिल जाता है। उसको सच क्यों मानना चाहिए?

1492
02:03:12,640 --> 02:03:16,880
हम्म आज वही वाणी बोल रहे हो तुम। भगवतानंद

1493
02:03:16,880 --> 02:03:21,520
जो मैं समझाना चाहता था तुम्हें।

1494
02:03:21,520 --> 02:03:26,240
चलो ऐसा करते हैं इनकी फिफ्थ लाइव का

1495
02:03:26,240 --> 02:03:32,240
कोई है नहीं उसमें खास

1496
02:03:46,000 --> 02:03:50,080
नहीं हमें राम ने गाली देना नहीं सिखाया राम ने गाली कहां दी

1497
02:03:50,080 --> 02:03:54,320
ये बताओ रामो विग्रहान धर्मा भगवतानंद विग्रहान

1498
02:03:54,320 --> 02:03:58,400
धर्मा नहीं है ठीक है तो राम ने गाली देना सिखाया है वह

1499
02:03:58,400 --> 02:04:02,720
बताओ फालतू की बातों में उलझाओ मत तेरे लिए कर्तव्य

1500
02:04:02,720 --> 02:04:07,200
अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है शास्त्र प्रमाण दो

1501
02:04:07,200 --> 02:04:11,520
कि तुम्हें गाली कब और किस किस स्थिति में देनी चाहिए।

1502
02:04:11,520 --> 02:04:15,600
शास्त्र प्रमाण अपने मनमुखी व्याख्या मत दो। वैसे तुम शास्त्र

1503
02:04:15,600 --> 02:04:21,600
ले चलते हो तो यहां शास्त्र क्यों नहीं दे रहे?

1504
02:04:26,640 --> 02:04:30,880
ये तो तुम तुम्हारे लिए भी कहा जा सकता है ना कि जब सैद्धांतिक रूप से तुम चीजें

1505
02:04:30,880 --> 02:04:34,960
प्रतिकार नहीं कर सकते हो तो तुम यह सब कर रहे हो। पूरी के शंकराचार्य जी के लिए उनके

1506
02:04:34,960 --> 02:04:39,560
परिकों के लिए गोवर्धन मठ के लिए मेरे

1507
02:04:39,560 --> 02:04:41,800
लिए

1508
02:04:41,800 --> 02:04:46,360
हां पिछवा देख सकते

1509
02:04:46,360 --> 02:04:50,480
हैं ये पीछे वाला देख सकते हैं बहुत विस्तार से एक पंक्ति पर ये

1510
02:04:50,480 --> 02:04:56,480
सब बता सकते

1511
02:05:01,320 --> 02:05:05,560
है इस प्रकार के ठीक है मैंने लिखा

1512
02:05:05,560 --> 02:05:10,960
ये उस पंक्ति विशेष मैंने कहा

1513
02:05:10,960 --> 02:05:15,120
ना उसको था ठीक है

1514
02:05:15,120 --> 02:05:19,800
ये

1515
02:05:19,800 --> 02:05:24,040
जो डॉक्टर का नाम क्यों बताया डॉक्टर का

1516
02:05:24,040 --> 02:05:28,080
नाम तुम उस जगह का नाम बताओ

1517
02:05:28,080 --> 02:05:32,400
उस दिनांक बताओ कब हुआ था क्या हुआ था कौन सा जनता जब तुमने

1518
02:05:32,400 --> 02:05:36,400
चार में पकड़ा पूरी पीठ के किसी परिकर को जब अपने बारे में

1519
02:05:36,400 --> 02:05:40,640
तुम्हें ये सब जानकारियां चाहिए तो दूसरे दूसरे के बारे में क्यों नहीं चाहिए

1520
02:05:40,640 --> 02:05:46,640
यही है तुम्हारा दोगलापन यही है तुम्हारा

1521
02:05:48,360 --> 02:05:52,480
अन्याय बस ये है कि अभी इसमें तुम्हारे ऊपर आक्रमण हो गया तो उसमें

1522
02:05:52,480 --> 02:05:58,480
सीधे हो गए हो भीगी बिल्ली की तरह

1523
02:06:12,240 --> 02:06:18,240
एक चैप्टर

1524
02:06:26,520 --> 02:06:32,520
ये जाएगा

1525
02:06:36,900 --> 02:06:39,520
[संगीत]

1526
02:06:39,520 --> 02:06:45,520
यहां पे मैं [संगीत]

1527
02:06:45,960 --> 02:06:51,960
क्या किया

1528
02:06:57,090 --> 02:07:00,200
[संगीत]

1529
02:07:00,200 --> 02:07:04,240
को व्यक्तिगत चर्चा तुम यहां कर रहे हो तो लाइफ के लिए तुम ही मना

1530
02:07:04,240 --> 02:07:08,480
कर रहे हो ना लाइफ के लिए तुम मना कर रहे हो तभी तो तुम लिखा पा मसाला

1531
02:07:08,480 --> 02:07:12,640
मिल जाएगा तो हुआ तो लाइफ के लिए मना व्यक्तिगत चर्चा में तो

1532
02:07:12,640 --> 02:07:17,040
मसाला नहीं तो तुम मुझे दोस्त कर रहे हो तो तुम्हारी दोगली खुद दिख रही है

1533
02:07:17,040 --> 02:07:21,200
तो पोस्ट डाली थी दूरी बनाए रखना धर्म और विरोधियों

1534
02:07:21,200 --> 02:07:25,280
को मसाला यहां पे तुम मेरी बात समझ नहीं पाए भगवत आनंद

1535
02:07:25,280 --> 02:07:29,280
अब सुनो ध्यान से जब तुमने लाइव के लिए कहा तो मैंने

1536
02:07:29,280 --> 02:07:33,520
एक उत्तर दिया कि हमारे हमने तुम्हें अपनी चीजें बताई हमारी स्थिति क्या है

1537
02:07:33,520 --> 02:07:37,680
निर्णय नहीं बताया हर लाइन में निर्णय नहीं था हमने अपनी स्थितियां बताई कि तुमसे

1538
02:07:37,680 --> 02:07:41,760
दूर रहना हमारा धर्म है या विरोधियों को मसाला मिल जाएगा फिर तीसरी बात यह

1539
02:07:41,760 --> 02:07:45,840
है कि फिर भी एट दी एंड अगर हम सोचे भी लाइव चर्चा के विषय में तो

1540
02:07:45,840 --> 02:07:50,120
क्या कि भैया विषय ही ऐसा है जिस पे हम लाइव नहीं जा सकते। ठीक

1541
02:07:50,120 --> 02:07:55,560
है? तो क्या है

1542
02:07:55,560 --> 02:07:59,840
उसमें? तो क्या है उसमें कि

1543
02:07:59,840 --> 02:08:04,200
लाइव नहीं जा सकते। तो उसमें हमने फिर हमने ये कहा था

1544
02:08:04,200 --> 02:08:08,240
जब फिर उसके बाद तुमने जो वीडियो बनाया था जिसमें तुमने

1545
02:08:08,240 --> 02:08:14,240
कॉल रिकॉर्डिंग डाली थी।

1546
02:08:32,480 --> 02:08:38,480
चलो कोई बात नहीं वो सहायक है। खड़ी है यहां पर।

1547
02:08:45,200 --> 02:08:49,200
इसको बंद करके दोबारा अगली लाइव ले लेते हैं।
