1
00:00:01,840 --> 00:00:06,080
सभी को जय श्री राम जैसा कि हमने अभी

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,360
एक लाइव की थी पिछले में और उसी का अगला

3
00:00:10,360 --> 00:00:16,360
भाग वैसे यह जो लाइव हम कर रहे हैं

4
00:00:16,680 --> 00:00:21,520
यह भगवता आनंद के द्वारा जो एक

5
00:00:21,520 --> 00:00:25,560
लाइव निर्गत किया गया था जब वो रेलवे स्टेशन बैठ के उसने एक बड़ा लंबा

6
00:00:25,560 --> 00:00:29,800
सा लाइव बनाया था हमारे वीडियो को चला चलाकर सुन सुनकर जवा

7
00:00:29,800 --> 00:00:34,080
आप दे रहा था तो उसके बाद से एक सीरीज जैसी है कि उसने

8
00:00:34,080 --> 00:00:38,400
जो जो कहा वो उसका हमने भी एक एक बात पर जो जो बात प हम गौर कर सकते

9
00:00:38,400 --> 00:00:43,200
उस पर ध्यान दिया इसकी अलग से प्लेलिस्ट बना देंगे

10
00:00:43,200 --> 00:00:48,280
अभी हम लोग जो उसको उत्तर दे रहे हैं उसने

11
00:00:48,280 --> 00:00:52,520
जो पहली लाइव के बाद जो दूसरी और तीसरी लाइव की थी उसमें से दूसरी लाइव

12
00:00:52,520 --> 00:00:56,640
का उत्तर हम दे चुके हैं अभी तीसरी लाइव का उत्तर दे रहे हैं फिर भी हम उत्तर देते

13
00:00:56,640 --> 00:01:00,680
हुए बता रहे कि भाई तुम साथ लाइव

14
00:01:00,680 --> 00:01:05,160
चर्चा करना चाहते थे और हम लाइव चर्चा के लिए तैयार हैं

15
00:01:05,160 --> 00:01:09,400
तुम बस अपनी ढपली बजाओ और बताओ कि तुम कब आ रहे

16
00:01:09,400 --> 00:01:14,120
हो क्योंकि तुम्हें

17
00:01:14,120 --> 00:01:18,120
जो सामंजस्य की भाषा थी वह पसंद नहीं आई

18
00:01:18,120 --> 00:01:22,200
फिलहाल व तीसरी वाली की हम बात कर ले हां जो अभी इससे जस्ट पहले जो लाइव हमने

19
00:01:22,200 --> 00:01:26,720
की है उसमें हमने जो इन्होंने एक

20
00:01:26,720 --> 00:01:30,800
विधवा विलाप चालू किया ना कि अरे तुम खाले तू जल उठा

21
00:01:30,800 --> 00:01:34,920
के कह दे बचपन में ऐसे करते थे कि तू जल ले ले हाथ में तू

22
00:01:34,920 --> 00:01:39,680
कसम खा ले तू जो सौगं खा ले वो बच्चों वाली बात विधवा विलाप

23
00:01:39,680 --> 00:01:43,760
हर जगह बारबार अब कुछ रह नहीं गया बचने को तो सौगंध खाओगे तभी वो

24
00:01:43,760 --> 00:01:47,880
होगा फिर सौगंध वाली बात में भी जब इनसे पूछा जाता है तो इनके

25
00:01:47,880 --> 00:01:52,000
पास उत्तर नहीं होते हैं जैसे कि एक उत्तर के प्रसंग

26
00:01:52,000 --> 00:01:56,000
भले ही हमें ठीक से मालूम है या ना मालूम हो इतना पक्का है इन्होंने

27
00:01:56,000 --> 00:02:00,040
यह अपनी लाइफ में कहा कि भाई मेरे पिता के ऊपर दबाब डाला गया

28
00:02:00,040 --> 00:02:03,400
अमुक अमुक की ओर से जो कि

29
00:02:03,400 --> 00:02:07,960
जोते मट से जुड़ा हुआ व्यक्ति है उनका शिष्य है और

30
00:02:07,960 --> 00:02:12,160
मेरी उनकी ओर से दबाब डाला गया तो मेरे पिताजी ने एक वक्तव्य दिया

31
00:02:12,160 --> 00:02:16,360
तो हमने पूछा है कि

32
00:02:16,360 --> 00:02:20,480
यह कब अपने पिताजी के साथ जो है वह हाथ में शालिग्राम भगवान लेकर

33
00:02:20,480 --> 00:02:24,680
के सौगं खाने वाला है कि ऐसा सच है जोति

34
00:02:24,680 --> 00:02:28,840
मठ के लोगों के द्वारा इन पर दबाब डाला गया इनके पिताजी

35
00:02:28,840 --> 00:02:33,000
पर दूसरी एक बात आती है कि जो पिछले वाले उससे हमें

36
00:02:33,000 --> 00:02:37,120
पता चली जो मुख्य तथ्य है वो क्या है आज हमने एक

37
00:02:37,120 --> 00:02:41,840
कॉल रिकॉर्डिंग डाली थी जिस पर सच सत्य अथवा असत्य होने

38
00:02:41,840 --> 00:02:46,600
का विषय विचाराधीन है और

39
00:02:46,600 --> 00:02:50,640
तो हम यह तथ्य उससे निकल के आता है कि यदि

40
00:02:50,640 --> 00:02:54,760
आप किसी की कॉल रिकॉर्डिंग को जांच के अधीन मानते हैं उसके

41
00:02:54,760 --> 00:02:59,120
आधार पर कोई निर्णय नहीं लेते हैं तो ऐसा ही आपको दूसरों के साथ भी करना चाहिए

42
00:02:59,120 --> 00:03:03,440
सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए और अगर विश्वास हो भी रहा है

43
00:03:03,440 --> 00:03:07,800
तो उसे पब्लिक में सार्वजनिक रूप से अपने जो अपना

44
00:03:07,800 --> 00:03:11,840
जो विचार है जो आपका व्यक्तिगत है सैद्धांतिक नहीं है वो उस विचार

45
00:03:11,840 --> 00:03:15,920
को पब्लिकली प्रस्तुत करते हुए और किसी

46
00:03:15,920 --> 00:03:18,840
के ऊपर गंभीर आरोप नहीं लगाने चाहिए

47
00:03:18,840 --> 00:03:23,120
दूसरा तीसरा ये कि अगर अ शपथ

48
00:03:23,120 --> 00:03:27,360
लिए जाने के अभाव में इनके लिए आचार्य राम शंकर शुक्ल

49
00:03:27,360 --> 00:03:31,440
जी की वाणी प्रमाण नहीं थी तो फिर

50
00:03:31,440 --> 00:03:35,640
और य पहले भी कह चुके कई बार उनके लिए बहुत सारे अभद्र आपत्ति

51
00:03:35,640 --> 00:03:41,200
जनक शब्द भी कह चुके हैं तो जब किसी व्यक्ति की वाणी आपके

52
00:03:41,200 --> 00:03:45,280
लिए वो नहीं है मान्य नहीं है शपथ के अभाव में

53
00:03:45,280 --> 00:03:49,280
तो फिर तुम्हें दोगलापन नहीं दिखाना चाहिए कि अपनी बातों

54
00:03:49,280 --> 00:03:53,280
को सिद्ध करने के लिए उसी व्यक्ति की वाणी को आप मान्य कर

55
00:03:53,280 --> 00:03:57,440
दूस बा वो बात और है कि हमारे लिए उनका एक एक अक्षर

56
00:03:57,440 --> 00:04:01,480
जो है अक्षरस सत्य है और एक बात और निकल के आई थी पिछली वाली

57
00:04:01,480 --> 00:04:05,840
लाइव में कि जो गुरु द्रोही है नीच

58
00:04:05,840 --> 00:04:09,840
है जो इसके समर्थक हैं जो यह सोच रहे हैं कि मठ का शोधन कर रहे हैं

59
00:04:09,840 --> 00:04:13,840
वो उसका साथ देक के और जबकि इसके जो वास्तविक

60
00:04:13,840 --> 00:04:17,880
कर्म है यह केवल पूरी पीठ के परेकर का द्रोह नहीं कर रहा है यह

61
00:04:17,880 --> 00:04:21,880
गुरुदेव भगवान का ज्योतिर मठ वाले अनंद सरस्वती

62
00:04:21,880 --> 00:04:26,200
जी का सभी शंकर परंपरा से जुड़े हुए जितने भी गद्दी

63
00:04:26,200 --> 00:04:30,360
से जुड़े हुए व्यक्तित्व हैं य उनका भी विरोध

64
00:04:30,360 --> 00:04:33,960
कर रहा है उन्हें भी धर्म द्रोही सिद्ध कर रहा है अशा स्त्रीय सिद्ध कर रहा है इसका

65
00:04:33,960 --> 00:04:38,480
अर्थ है कि अप्रत्यक्ष रूप से यह शंकर संप्रदाय

66
00:04:38,480 --> 00:04:42,520
का नाश कर रहा है नाश करने का प्रयास कर रहा है नाश तो

67
00:04:42,520 --> 00:04:48,520
क्या ही कर पाएंगे य इनसे बड़े-बड़े तुर्रम खा आ के चले

68
00:04:49,120 --> 00:04:52,320
गए

69
00:04:52,320 --> 00:04:56,560
और यह सब चीज हमें पिछली वाली लाइव से पता चली अब हम इनकी

70
00:04:56,560 --> 00:05:00,840
लाइव के कुछ पॉइंट्स है जो हमारे एक गुरु है

71
00:05:00,840 --> 00:05:04,320
उन्होंने तैयार किए हैं

72
00:05:04,320 --> 00:05:08,760
और उन पर हम एक एक करके बात

73
00:05:08,760 --> 00:05:12,920
करेंगे इनका पहला जो इनकी तीसरी लाइव रात

74
00:05:12,920 --> 00:05:17,560
के समय हुई थी जो इसने अपनी तीसरी लाइव में क्या कहा है

75
00:05:17,560 --> 00:05:23,160
हम लोग वहां से बात करते

76
00:05:23,160 --> 00:05:27,880
हैं अद्वैत विशिष्टा द्वैत

77
00:05:27,880 --> 00:05:31,880
कौन बण संप्रदाय ने तुम्ह प्रमाण के रूप में

78
00:05:31,880 --> 00:05:35,880
तुम्हारे संप्रदाय को प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है उसके ऊपर कहता

79
00:05:35,880 --> 00:05:41,880
है कि पहले तुम कितने

80
00:05:44,520 --> 00:05:48,520
संपका एक इसका पहला जो प्रश्न आया था वह यह

81
00:05:48,520 --> 00:05:52,640
था कि तुम कितने संप्रदाय ज हमने संप्रदाय पर प्रश्न किया

82
00:05:52,640 --> 00:05:56,680
है परंपरा पर प्रश्न किया है तो यह भगवता अंद का कहना है कि तुम

83
00:05:56,680 --> 00:06:01,000
कितने संप्रदायों को प्रमाणिक मानते हैं तो तात्विक विवेचना

84
00:06:01,000 --> 00:06:05,120
का भेद अवश्य है वरना जितने भी यह परंपरा प्राप्त

85
00:06:05,120 --> 00:06:09,360
परंपराएं हैं जैसे श्री संप्रदाय है मद्व परंपरा

86
00:06:09,360 --> 00:06:11,560
है

87
00:06:11,560 --> 00:06:15,600
और और भी अनेक परंपराएं हैं विशिष्टा दव

88
00:06:15,600 --> 00:06:19,800
द्वैत द्वैता द्वैत शुद्ध द्वैत इन सब सभी परंपराओं

89
00:06:19,800 --> 00:06:23,800
को प्रामाणिक माना जाता है तात्विक भेद है

90
00:06:23,800 --> 00:06:28,440
और दूसरी एक बात और है कि

91
00:06:28,440 --> 00:06:32,720
तुमने भी अपने ही वीडियो में हमसे ही बात करते

92
00:06:32,720 --> 00:06:37,160
समय कहीं एकद जगह य बोला है कि भाई जितने

93
00:06:37,160 --> 00:06:38,720
भी परंपरा

94
00:06:38,720 --> 00:06:42,880
प्राप्त जो संत हैं जो आचार्य गण है मैं उनका खंडन नहीं कर रहा

95
00:06:42,880 --> 00:06:47,080
हूं मेरी बात केवल शास्त्रों के लिए है इस तरह की वाणी तुमने बोली

96
00:06:47,080 --> 00:06:51,200
है तो यदि जो अन्य संप्रदाय

97
00:06:51,200 --> 00:06:55,320
हैं अद्वैत से भिन्न वह प्रामाणिक नहीं है तो फिर

98
00:06:55,320 --> 00:06:59,360
जो तुमने अपना वक्तव्य दिया वो भी कट जाता है तुमने भी यही कहा ना

99
00:06:59,360 --> 00:07:03,480
कि वो सब संप्रदाय जितने भी परंपरा वाले हैं वो सब

100
00:07:03,480 --> 00:07:07,680
तुम्हारे लिए जो है प्रणम में है ऐसा भाव प्रस्तुत किया

101
00:07:07,680 --> 00:07:11,760
है तो तात्विक विवेचना का

102
00:07:11,760 --> 00:07:15,880
भेद अवश्य है मगर ऐसा नहीं है कि शंकराचार्य जी ने जो रामानु

103
00:07:15,880 --> 00:07:21,040
संप्रदाय है उसे अप्र माणिक माना है क्योंकि वेद में प्रमाण बुद्धि वर्णाश्रम धर्म

104
00:07:21,040 --> 00:07:25,160
परंपरा है ना और दूसरी बात यह है

105
00:07:25,160 --> 00:07:29,320
कि ब्रह्म की ब्रह्म जो तत्व है उसमें जरूर थोड़ा

106
00:07:29,320 --> 00:07:35,320
सा भेद है तात्विक विवेचना में मगर धर्माचक्र

107
00:08:00,560 --> 00:08:03,800
मब इस ऐसा

108
00:08:03,800 --> 00:08:08,520
कना मब इस ऐसा कना

109
00:08:08,520 --> 00:08:12,680
है अब ये हमारे गुरु भाई है इन्होंने पॉइंट

110
00:08:12,680 --> 00:08:18,680
नोट करके बताया कि इसने अगला जो पॉइंट दिया है वो यह है कि

111
00:08:19,760 --> 00:08:23,800
क्या इसने यह बोला है जब हमने यह बोला कि भाई तुम्हारा

112
00:08:23,800 --> 00:08:27,800
तत्व तात्विक वो कहां से आया कि तुम्हारा अव्यक्ता द्वत कहां से

113
00:08:27,800 --> 00:08:32,200
आया तो इसने बोल कि भैया द्वैता द्वैत विशिष्टा द्वैत

114
00:08:32,200 --> 00:08:36,600
ये सब एक है द्वैत एक ही है मतलब सारे एक ही है

115
00:08:36,600 --> 00:08:40,840
अच्छा जब एक ही है तो जब तुम

116
00:08:40,840 --> 00:08:44,880
एक मानते हो यदि तो तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था कि तुमको कितनी

117
00:08:44,880 --> 00:08:49,240
संप्रदायों ने प्रमाणिक माना है स्वीकार किया है प्रमाणिक रूप से

118
00:08:49,240 --> 00:08:53,520
यह कोई परंपरा है ठीक है और

119
00:08:53,520 --> 00:08:57,800
अगर तुम एक ही नहीं मानते हो तो यहां पर क्यों कह रहे हो कि सब एक ही है

120
00:08:57,800 --> 00:09:02,080
दूसरी बात क्या जो परम तत्व की विवेचना हुई

121
00:09:02,080 --> 00:09:06,200
है क्या जो परम तत्व की विवेचना हुई है उसको जो तुम

122
00:09:06,200 --> 00:09:10,240
बता रहे हो कि विशिष्टा द्वैत अद्वैत एक ही है तुमने इस

123
00:09:10,240 --> 00:09:14,320
बात को कंफर्म करा लिया है अन्य जो आचार्य गण गद्दी पर बैठे हुए हैं उनके

124
00:09:14,320 --> 00:09:16,000
मुख से

125
00:09:16,000 --> 00:09:20,200
ठीक है तो पहली बात तो यही है कि तुम खुद ही कह रहे हो कि

126
00:09:20,200 --> 00:09:24,560
अलग-अलग है क्योंकि अलग-अलग संप्रदायों ने

127
00:09:24,560 --> 00:09:28,760
मतलब तुमय वहां पर भाव प्रकट कर रहे हो कि सभी संप्रदायों ने उसको

128
00:09:28,760 --> 00:09:32,960
माना है कि नहीं माना है तुम्हारे संप्रदाय को प्रामाणिक या तुमने उनको प्रामाणिक माना

129
00:09:32,960 --> 00:09:37,040
है कि नहीं माना है यानी कि तुम अलग अलग होना मान रहे हो फिर यहां पर

130
00:09:37,040 --> 00:09:41,280
व तात्विक विवेचना को एक मान ले जब तात्विक विवेचना भी एक है जो एक

131
00:09:41,280 --> 00:09:45,440
मुख्य अंतर है संप्रदायों में तो तात्विक विवेचना भी एक ही तुम मान रहे

132
00:09:45,440 --> 00:09:49,800
हो तो फिर तुम क्यों कह रहे हो कि अन्य संप्रदायों को तुम प्रमाणिक मानते हो कि नहीं या

133
00:09:49,800 --> 00:09:54,640
या अन्य संप्रदायों के द्वारा तुम्हारा प्रमाणिक माना जाता है कि नहीं

134
00:09:54,640 --> 00:10:00,640
तो यह बात अब सुनते हैं आगे

135
00:10:07,410 --> 00:10:12,160
[संगीत] अ

136
00:10:12,160 --> 00:10:15,960
क्या

137
00:10:15,960 --> 00:10:20,040
माछ कबीर पंथ को जगतगुरु शंकराचार्य

138
00:10:20,040 --> 00:10:24,720
भगवान ने अपने मंच से उनका उनके किसी कार्य

139
00:10:24,720 --> 00:10:28,760
का अप्रिशिएट किया उस कार्य को जैसे कि ब्रह्मा कुमारी

140
00:10:28,760 --> 00:10:32,800
को भी किया है उनके किसी कार्य को अप्रिशिएट किया है गायत्री

141
00:10:32,800 --> 00:10:36,920
परिवार के कार्य को भी अप्रिशिएट किया है वही तो बात है

142
00:10:36,920 --> 00:10:41,000
यही बात तो तुम्हें समझा नहीं है कि तुम यह बागेश्वर करौली इन सब को लेकर के जो

143
00:10:41,000 --> 00:10:45,320
तुम दंब भरते हो अपने जो अंध भक्त है अपन उनको सुनाने

144
00:10:45,320 --> 00:10:49,720
के लिए यही तो क्वेश्चन तुमसे है जब तुमने कहा कि मैंने जो

145
00:10:49,720 --> 00:10:53,880
मैं पुरी शंकराचार्य के पास गया था शिक्षा लेने मगर उनकी आशा स्त्रता

146
00:10:53,880 --> 00:10:58,080
का समर्थन नहीं किया था मैंने एक विदेश गामी के द्वारा स्वागत सत्कार स्वीकार

147
00:10:58,080 --> 00:11:02,120
किया था मगर उसकी अ जो विदेश विदेश गमन यात्रा उसका

148
00:11:02,120 --> 00:11:06,120
समर्थन नहीं किया इसी प्रकार से गुरुदेव अगर बागेश्वर वालों

149
00:11:06,120 --> 00:11:10,240
से मिल रहे या किसी करौली वाले से मिल रहे तो किसी एक्स वाई जड से भी मिल

150
00:11:10,240 --> 00:11:14,240
रहे हैं मगर उसकी अशा स्त्रीय का व समर्थन नहीं कर रहे उतने ही

151
00:11:14,240 --> 00:11:18,360
अंश में मिल रहे हैं जितने अंश में उसकी कोई सही चीज है

152
00:11:18,360 --> 00:11:22,480
तो तुम अपने लिए दूसरा सिद्धांत और दूसरे के लिए दूसरा सिद्धांत जैसा

153
00:11:22,480 --> 00:11:26,560
कि मैंने बताया कि जब मैं रामपाल से लड़ रहा हूं उस समय आरएसएस से प्रभावित

154
00:11:26,560 --> 00:11:30,560
लोगों को अगर मैंने साथ में लिया है तो तुम्हारा कहना है कि आरएसएस का

155
00:11:30,560 --> 00:11:34,880
आदमी है उस हिसाब से तुम भी विदेश विदेश गमन को

156
00:11:34,880 --> 00:11:39,000
समर्थन करते हो तुम अपनी बात को खुद ही काट रहे हो और ना जाने कितनी बार काटा

157
00:11:39,000 --> 00:11:43,080
है क्योंकि तुम छोटे बच्चे हो संकीर्ण विचारधारा वाले चलो फर

158
00:11:43,080 --> 00:11:45,400
आगे सुनते

159
00:11:45,400 --> 00:11:51,400
हैं क कोने

160
00:11:53,560 --> 00:11:59,560
से उस

161
00:12:17,080 --> 00:12:21,240
अब इसमें यह कह रहा है इसने क्या किया कि मठाधीश की बात आई कि तुम

162
00:12:21,240 --> 00:12:25,360
मठाधीश बनना चाह रहे हो तो इसने अनावश्यक प्रलाप करते हुही अपनी बात

163
00:12:25,360 --> 00:12:29,360
को वजन देने के लिए तमाम सारे इधर उधर के प्रमाण की मठा मठ क्या

164
00:12:29,360 --> 00:12:33,360
होता है ये वो इस संबंध में बहुत सारी चीजें इसने कर दी

165
00:12:33,360 --> 00:12:37,560
और उसके बाद बताया उसके बाद अंत में बताया हमने तो कभी कहा ही नहीं कि हमें मठा दीज बनना

166
00:12:37,560 --> 00:12:41,720
है तुम हमारे ऊपर क्यों थोप रहे हो क्यों मैंने

167
00:12:41,720 --> 00:12:45,720
बहुत सी ऐसी बातें जो तुमने मेरे ऊपर थोपी है पूरी शंकराचार्य जी के ऊपर थोपी

168
00:12:45,720 --> 00:12:49,760
है पूरी पीठ पूरी परक पर थोपी है जा ना जाने

169
00:12:49,760 --> 00:12:54,000
कितनों पर थोपी है विजया श्री और मेरे को लेकर के तुम अनावश्यक

170
00:12:54,000 --> 00:12:59,240
प्रलाप करते हो यह क्या है मैंने कहा है क्या ये सब

171
00:12:59,240 --> 00:13:01,520
तो

172
00:13:01,520 --> 00:13:05,680
मेरे तुम्हारे मानने से ही मुझे कोई चीज प्रतीत होगी

173
00:13:05,680 --> 00:13:10,000
या नहीं होगी तो तुम डिसाइड नहीं करोगे और वह भी तब जब तुम सब लोगों

174
00:13:10,000 --> 00:13:14,120
के लिए जो तुम्हें प्रतीत हो रहा है उसको निर्णय निर्णय के रूप में प्रस्तुत

175
00:13:14,120 --> 00:13:19,360
कर रहे हो यह क्या दोगलापन है

176
00:13:19,360 --> 00:13:25,360
आगे सुनते हैं य क्या

177
00:13:35,680 --> 00:13:39,760
वो तुम्हें बनना इसलिए नहीं है क्योंकि तुम्हारे पास मठ है नहीं और मट

178
00:13:39,760 --> 00:13:44,000
इसलिए नहीं है क्योंकि तुम आचार खुद को कहते हो मगर तुम्हारे जो कार्य

179
00:13:44,000 --> 00:13:48,200
है वो है दुराचार दुराचार वाले कार

180
00:13:48,200 --> 00:13:52,520
चोरों की तरह फिरना है अपनी आइडेंटिटी को छुपा के रखना है अपनी

181
00:13:52,520 --> 00:13:56,520
स्थान को छुपा के रखना है इसलिए यह सब करना है

182
00:13:56,520 --> 00:14:00,800
कि मैं कुछ भी करता रहूं कोई मेरे ऊपर सवाल ना कर पाए और

183
00:14:00,800 --> 00:14:06,200
लोग कुछ भी कर रहे तो मैं सब में जो है सवाल कर चकू कौन क्या कर रहा

184
00:14:06,200 --> 00:14:10,840
है यह सिद्धांत भी दिखाना जब परंपरा का वो दोगे ना प्रमाण

185
00:14:10,840 --> 00:14:15,680
कि तुम्हारी परंपरा परंपरा क्या है य सिद्धांत भी

186
00:14:15,680 --> 00:14:19,800
दिखाना चलो और आगे चलते हैं थोड़ा

187
00:14:19,800 --> 00:14:24,320
सा काम को हल्का कर दिया हमारे गुरु भाई ने

188
00:14:24,320 --> 00:14:30,320
वरना बहुत लंबा हो जाता हैय

189
00:14:33,160 --> 00:14:39,160
ये है क्या कौन सा है कहां

190
00:14:40,000 --> 00:14:46,000
गया सारे मैसेजेस क अच्छा ये अच्छा

191
00:14:59,280 --> 00:15:05,280
औरता

192
00:15:06,160 --> 00:15:10,200
है अच्छ य पर फस गए यहां

193
00:15:10,200 --> 00:15:16,200
पर क्या हुआ

194
00:15:30,040 --> 00:15:34,760
अब इसने यहां पर एक एक आपत्ति जनक बात कही है

195
00:15:34,760 --> 00:15:39,120
जब मैंने मठ के ऊपर वो उठाया तो वो कहते ना कि अपनी बात को वजन कैसे डाले

196
00:15:39,120 --> 00:15:43,320
लोगों का ध्यान दूसरी तरफ कैसे ले जाए तो जब मैंने मठ वाली बात कही

197
00:15:43,320 --> 00:15:47,360
इसको तो यह बोलता है कि तुम्हें इस बात की जलन हो रही है कि कुत्ते के स्थान पर तुम

198
00:15:47,360 --> 00:15:51,400
क्यों नहीं हो है ना

199
00:15:51,400 --> 00:15:55,400
तो फिर इस तरीके से अगर देखा जाए तो बहुत सी चीजें ऐसी कही जा सकती

200
00:15:55,400 --> 00:15:59,480
है मतलब ये कुल मिलाकर य बातें वाली है ना

201
00:15:59,480 --> 00:16:03,520
जो लुगाइयां नहीं करती है आपस में जब कुछ नहीं बचा तो

202
00:16:03,520 --> 00:16:07,520
गालियां देने लगो कुछ भी निराधार बातें करने लगो पतिया कसने लगो

203
00:16:07,520 --> 00:16:13,000
चिढ़ाने लगो और क्या है ये अब इसमें मैं क्या

204
00:16:13,000 --> 00:16:17,200
कहूं कुत्ते के स्थान पर तुम नहीं

205
00:16:17,200 --> 00:16:21,320
हो और मैं कहूंगा कि अगर तुम्हारे बारे

206
00:16:21,320 --> 00:16:25,400
में बोला जाए कि तुम होना चाहते हो कुत्ते के स्थान पर पर तुम तो

207
00:16:25,400 --> 00:16:29,480
उस योग्य भी नहीं हो जैसा कि वीडियो रिकर्ड जो ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग

208
00:16:29,480 --> 00:16:33,480
के माध्यम से और लोग हमें बता रहे हैं उनको अगर सच

209
00:16:33,480 --> 00:16:37,480
मान लिया जाए तो तुम तो योग्य भी नहीं हो कुत्ते के स्थान पर होने के लिए उसके लिए

210
00:16:37,480 --> 00:16:42,000
वजन चाहिए धातु चाहिए पर तुम तो हर शुक्रवार को बाहर जा रहे हो इलाज

211
00:16:42,000 --> 00:16:45,400
कराने तो तुम कुत्ते के स्थान पर कैसे होगे

212
00:16:45,400 --> 00:16:49,480
यह भी सोचने वाली बात री तो धातु ही कंट्रोल में नहीं हो रही सारी

213
00:16:49,480 --> 00:16:55,480
वही जा रही है शरीर से निकल कर के

214
00:17:23,240 --> 00:17:29,240
क्या

215
00:17:52,040 --> 00:17:56,080
हमने यह कबका अच्छा

216
00:17:56,080 --> 00:18:02,080
पुलक शास्त्री जी का नाम आ रहा है यहां पर एक बार और सुनते

217
00:18:25,760 --> 00:18:30,240
हैं हा बिल्कुल माना जाएगा क्योंकि जो

218
00:18:30,240 --> 00:18:34,640
सार्वभौम गुरु गद्दी है उसने कहा है कि भैया

219
00:18:34,640 --> 00:18:38,960
इनका कहना है कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी

220
00:18:38,960 --> 00:18:43,080
की बात की जितना विपरीत पुलक शास्त्री जी की बात जाएगी

221
00:18:43,080 --> 00:18:47,080
वह मान्य नहीं है और जो आचार्य

222
00:18:47,080 --> 00:18:51,200
राम शंकर शुक्ल जी के जितना समर्थन में होगी जितना सामंजस्य होगा

223
00:18:51,200 --> 00:18:55,640
उतनी मान्य इसलिए मान्य है कि जो हमारे निर्णायक हैं

224
00:18:55,640 --> 00:18:59,760
गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य जी उनके द्वारा कहा गया है

225
00:18:59,760 --> 00:19:04,000
कि भाई अपनी विधि विषयक जो आपकी जो वो होती है जानकारिया उनको

226
00:19:04,000 --> 00:19:07,320
आप यहां से स्टॉट आउट करें तो वो प्रामाणिक

227
00:19:07,320 --> 00:19:11,640
है गुरु गद्दी के द्वारा आचार्य गद्दी के द्वारा और वह अपिक आचार्य

228
00:19:11,640 --> 00:19:16,120
गद्दी के द्वारा व घोषित नहीं किए गए ऐसे में उनकी जो वाणी

229
00:19:16,120 --> 00:19:20,200
इस प्रमाणिक आचार्य को काट रही होगी वो वाणी इसकी नहीं मानी जाएगी और

230
00:19:20,200 --> 00:19:24,400
तुम तुम यह कहते हो कि हमारे जो गुरु है वो

231
00:19:24,400 --> 00:19:28,800
शास्त्र से भी मतलब जो शास्त्र ऊपर है गुरु

232
00:19:28,800 --> 00:19:33,000
इसमें बात यह है कि गुरु अगर कोई ऐसी शिक्षा दे रहा है

233
00:19:33,000 --> 00:19:37,080
जो उसके द्वारा प्रमाणित किए गए शास्त्रों के विपरीत जा रही है शिक्षा दे

234
00:19:37,080 --> 00:19:41,160
रहा है तो वहां पर आप गुरु का गुरु से क्या

235
00:19:41,160 --> 00:19:45,200
कहते शास्त्रोक्त पक्ष रखने के लिए गुरु के समक्ष खड़े हो

236
00:19:45,200 --> 00:19:49,400
मगर यदि गुरु के द्वारा कोई प्रमाण

237
00:19:49,400 --> 00:19:53,560
माना ही नहीं गया किसी शास्त्र को और उस शास्त्र के आधार पर लाकर के

238
00:19:53,560 --> 00:19:57,720
या फिर उसके उस अर्थ को प्रमाण नहीं माना गया जो तुम मान रहे हो जैसा

239
00:19:57,720 --> 00:20:02,200
संभवत मुझे पूरी तरी से मालूम नहीं है वो सबरी वाले मामले में आएंगे

240
00:20:02,200 --> 00:20:06,840
जो सुंड रामायण है उसके बारे में आएंगे बाद में मगर

241
00:20:06,840 --> 00:20:11,080
कि उसके उस अर्थ को नहीं माना जो तुम मान रहे हो तो वहां

242
00:20:11,080 --> 00:20:15,120
पर भी आपका गुरु के प्रति जो विरोध करना है वह व्यर्थ हो

243
00:20:15,120 --> 00:20:19,400
जाएगा क्योंकि जैसा कि मैंने पीछे पूछा कि तुम्हारे लिए गुरु

244
00:20:19,400 --> 00:20:23,240
के रूप में प्रमाण कौन है जो सही सही व्याख्या करता है

245
00:20:23,240 --> 00:20:27,640
मतलब कहने का यह है कि अगर यदि वो अपने ही द्वारा स्वीकार

246
00:20:27,640 --> 00:20:32,480
किए गए शास्त्रों के विरोध में शिक्षा दे

247
00:20:32,480 --> 00:20:36,520
तो वहां पर हम उसको उसका प्रतिकार कर सकते उसके उसमें खड़े हो

248
00:20:36,520 --> 00:20:40,520
सकते कि गुरुदेव आपने य शास्त्र दिए और करपात्री जी ने ऐसी आज्ञा

249
00:20:40,520 --> 00:20:44,880
दी भी है मगर तुम कोई नया शास्त्र ले आओ जो गुरुदेव

250
00:20:44,880 --> 00:20:48,960
ने स्वीकार किया ही नहीं है और उसके आधार पर या नई व्याख्या ले आओगे जो

251
00:20:48,960 --> 00:20:53,080
गुरुदेव ने स्वीकार की नहीं है उसके आधार पर तुम अपने व अंतिम

252
00:20:53,080 --> 00:20:57,320
निर्णय गुरु के प्रतिकार स्वरूप खड़े नहीं हो सकते प्रतिकार स्वरूप गुरु

253
00:20:57,320 --> 00:21:01,680
के तभी खड़े हो सकते हो जो गुरु के द्वारा स्वीकार शास्त्र

254
00:21:01,680 --> 00:21:05,760
और व्याख्या है शास्त्र की उसके विपरीत जब गुरु तभी

255
00:21:05,760 --> 00:21:09,880
खड़े हो सकते हो वरना गुरु द्रोह होगा तुम्हारे पास शब्द प्रमाण

256
00:21:09,880 --> 00:21:14,000
होगा नहीं कि तुम जिन शास्त्रों को शास्त्र मान रहे हो वो शास्त्र तुम्हारे पास आए

257
00:21:14,000 --> 00:21:18,040
कैसे यह सारी चीजें तुरंत हो जाएंगी व्याख्या और शास्त्र

258
00:21:18,040 --> 00:21:22,200
गुरु के द्वारा स्वीकार होने चाहिए उनके विपरीत अर्थक स्थिति में अगर

259
00:21:22,200 --> 00:21:26,360
गुरु हैं तो उनके उनका प्रतिकार आप कर सकते हो कई बार ऐसा

260
00:21:26,360 --> 00:21:30,600
भी हो जाता है कि गुरु स्वयं कह देते हैं कि जितने अंश मैं शास्त्र का

261
00:21:30,600 --> 00:21:34,800
अनुकरण करता ना दिखाई करूं उतने उतने अंशों में मेरा

262
00:21:34,800 --> 00:21:38,320
भी मत लेना मगर वहां पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप कोई भी शास्त्र ले

263
00:21:38,320 --> 00:21:42,360
आओ यह गुरु गुरु इसके विरोध में जा रहा है और या कोई भी व्याख्या ले आओ

264
00:21:42,360 --> 00:21:46,360
किसी की भी की हुई और गुरु इसके विरोध में जा रहा है अगर आपको गुरु

265
00:21:46,360 --> 00:21:50,360
की व्याख्या पर या गुरु के यह बताने पर विश्वास

266
00:21:50,360 --> 00:21:54,560
नहीं है कि कौन सा शास्त्र मान्य है कौन सा शास्त्र मान्य नहीं है

267
00:21:54,560 --> 00:21:58,640
तो आपका गुरु पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता फिर वही वाली बात आ जाएगी कि जिससे

268
00:21:58,640 --> 00:22:02,680
वेद मंत्र लिए यदि उस पर विश्वास नहीं है तो फिर आपका वेद

269
00:22:02,680 --> 00:22:06,680
मंत्रों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता और यदि वेद मंत्रों पर विश्वास है तो

270
00:22:06,680 --> 00:22:11,040
गुरु पर अविश्वास होना सिद्ध नहीं होता तो यानी कि गुरु की क्रेडिबिलिटी पर

271
00:22:11,040 --> 00:22:15,720
आप उंगली नहीं उठा सकते कि उसकी व्याख्या गलत है या

272
00:22:15,720 --> 00:22:20,480
उसके द्वारा यह बताया जाना कौन सा शास्त्र स्वीकार्य है कौन सा स्वीकार्य नहीं है

273
00:22:20,480 --> 00:22:24,560
यह बताया जाना में गुरु त्रुटि कर रहा है अगर यह दोष

274
00:22:24,560 --> 00:22:28,680
आप लगा देंगे उसके ऊपर गुरु के ऊपर तो फिर आप आपकी अपनी

275
00:22:28,680 --> 00:22:32,680
क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाएगी ठीक है तो यहां पर वही हो

276
00:22:32,680 --> 00:22:36,840
रहा है व्याख्या में आप उंगली उठा रहे

277
00:22:36,840 --> 00:22:41,080
हैं तो इसलिए मैंने आपसे पूछा था कि आपका गुरु कौन है जिसके

278
00:22:41,080 --> 00:22:45,760
द्वारा जिसके भले ही आचरण हो सकता है आपके हिसाब से विपरीत हो गए हो

279
00:22:45,760 --> 00:22:49,800
मगर उसकी व्याख्या और शास्त्र शास्त्र की प्रमाणिकता

280
00:22:49,800 --> 00:22:53,760
पर आपको विश्वास हो इसने य व्याख्या ठीक की है बिल्कुल गुरु

281
00:22:53,760 --> 00:22:58,160
ने सारी व्याख्या ठीक की है गुरु ने जो शास्त्र चयन किए है य

282
00:22:58,160 --> 00:23:04,160
जो प्रामाणिक है वो बिल्कुल ठीक है ठीक

283
00:23:04,600 --> 00:23:10,440
है तो

284
00:23:10,440 --> 00:23:14,880
यदि तो अब जो गुरु है

285
00:23:14,880 --> 00:23:19,080
हमारे जो गुरु है जो निर्णायक अंतिम निर्णायक पद पर है

286
00:23:19,080 --> 00:23:23,360
जैसे तुमने एक बार मुझसे कहा था कि तुम्हारी

287
00:23:23,360 --> 00:23:27,600
तुम हमारे साथ बैठने के लायक नहीं हो अ तुम हो पूरी शंकराचार्य

288
00:23:27,600 --> 00:23:31,600
जी के विरुद्ध में बोल रहे हो तुम सन्यासी हो क्या सन्यासी है वो

289
00:23:31,600 --> 00:23:36,000
परंपरा प्राप्त आचार्य है तुमने तुम आज तक अपने गुरुओं

290
00:23:36,000 --> 00:23:40,120
के नाम बताने में तुम्हें शर्म आती है भागते फिर रहे हो मैं किताब लिखूंगा

291
00:23:40,120 --> 00:23:44,320
तब आऊंगा तो तुम कौन से एंगल से उनके

292
00:23:44,320 --> 00:23:48,440
समक्ष स्टैंड करते हो अब तुम अगर कहो कि शास्त्र तो वो शास्त्र तुम्हारे

293
00:23:48,440 --> 00:23:52,640
पास कहां से आए यह बात आ जाएगी उनकी क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न उठ जाएगा

294
00:23:52,640 --> 00:23:56,920
यदि तुम्हें पीछे के आचार्यों पर भरोसा नहीं है तो तो ये चीजें

295
00:23:56,920 --> 00:24:01,000
गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु भी नहीं गुरु

296
00:24:01,000 --> 00:24:05,480
गोविंद और ग्रंथ अब ये ग्रंथ कहां से आ रहे है गुरु से गुरु कहां से आ रहा है ग्रंथ

297
00:24:05,480 --> 00:24:09,120
इसमें तुम ग्रंथ को ऊपर नहीं कर दोगे

298
00:24:09,120 --> 00:24:13,280
ग्रंथ को तब ऊपर करोगे जब गुरु के द्वारा वह ग्रंथ और उसकी व्याख्या

299
00:24:13,280 --> 00:24:17,560
स्वीकार रहे हो और यदि तुम गुरु की व्याख्या को चैलेंज कर दोगे

300
00:24:17,560 --> 00:24:21,800
या ग्रंथ की प्रामाणिकता को चैलेंज कर दोगे जो गुरु ने स्वीकार किया

301
00:24:21,800 --> 00:24:25,920
तो फिर तुम्हारा गुरु पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होगा और जब ऐसा करोगे तो तुम्हारा

302
00:24:25,920 --> 00:24:30,120
वैदिक होना ही सिद्ध नहीं होगा वे कहां से आए पता

303
00:24:30,120 --> 00:24:34,720
नहीं ठीक है तो ये बात है जैसे मान लो

304
00:24:34,720 --> 00:24:38,800
कि एक एग्जांपल के लिए बता रहा हूं वो हमारे लिए

305
00:24:38,800 --> 00:24:43,040
प्रणम है तुम्हारे पिताजी विद्वान है उन्होंने तुम्हें

306
00:24:43,040 --> 00:24:47,080
गायत्री मंत्र दिया ऐसा शायद तुम्हारा कहना मुझे पता

307
00:24:47,080 --> 00:24:51,840
नहीं ठीक से कंफर्म कर लेना उन्होंने गायत्री मंत्र दिया

308
00:24:51,840 --> 00:24:56,600
अब उन्हो वो यदि यह व्याख्या कर रहे हैं यदि वो यह व्याख्या कर रहे हैं

309
00:24:56,600 --> 00:25:01,040
कि जो व्यास गद्दी पर बैठ सकती है तो तुम्हारा गायत्री मंत्र निरर्थक हो

310
00:25:01,040 --> 00:25:05,080
गया खत्म हो गया क्योंकि तुम्हें उनकी व्याख्या

311
00:25:05,080 --> 00:25:09,160
पर विश्वास नहीं है जब उनसे मिली हुई व्याख्या पर विश्वास नहीं

312
00:25:09,160 --> 00:25:13,400
है तो उनके मिले उनसे मिले हुए अगर वोह अपनी व्याख्या पर डटे

313
00:25:13,400 --> 00:25:17,480
हुए हैं ये भी बात है जैसा कि तुमने कहा कि उन्होंने वो दबाब में आके कह दिया

314
00:25:17,480 --> 00:25:22,440
था बात तो अलग है दबाब में आके कह दिया था मगर

315
00:25:22,440 --> 00:25:24,160
यदि वो अपनी व्याख्या पर डटे हुए

316
00:25:24,160 --> 00:25:28,360
हैं कि नहीं महिला जो है व्यास गद्दी पर बैठ सकती तो क्या हो

317
00:25:28,360 --> 00:25:32,560
हुआ अब तुम्हें अपने जिन्होंने तुम्हें गायत्री मंत्र दिया है उनकी व्याख्या

318
00:25:32,560 --> 00:25:37,400
पर विश्वास नहीं है तो फिर उनसे मिले हुए मंत्र पर विश्वास कैसे

319
00:25:37,400 --> 00:25:41,680
फिर किसी और से मंत्र लेना पड़ेगा दिक्कत आएगी तो

320
00:25:41,680 --> 00:25:46,200
इसलिए गुरु में अविश्वास की दृष्टि नहीं रख

321
00:25:46,200 --> 00:25:50,240
सकते क्योंकि अगर अविश्वास गुरु में करोगे

322
00:25:50,240 --> 00:25:54,600
अविश्वास मतलब उनकी व्याख्या में अविश्वास और उनके वो जो शास्त्रों

323
00:25:54,600 --> 00:25:58,680
को स्वीकार करने की प्रामाणिकता है उसमें अविश्वास अगर तुम

324
00:25:58,680 --> 00:26:03,000
वो उसमें अविश्वास करोगे तो तुम्हारा उनके द्वारा तुम्हें

325
00:26:03,000 --> 00:26:07,360
दिया हुआ जो वैदिक वांगम है उस पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होगा

326
00:26:07,360 --> 00:26:11,400
तो इस बात को समझना वो कभी लाइव होगी ना तो अच्छे से

327
00:26:11,400 --> 00:26:15,520
जब मैं प्रश्न पूछूंगा तुम्हारी परंपरा के बारे में तब फस होगे

328
00:26:15,520 --> 00:26:19,640
जिस दिन लाइव होग और तैयारी के साथ आना ये

329
00:26:19,640 --> 00:26:23,920
ध्यान रखना अब तुम्हें वो शिवांश नारायण द्विवेदी मिलेगा जो आर्य

330
00:26:23,920 --> 00:26:28,320
समाज यों को मिला जो इस पनियों को मिला जो हर धर्म के दुश्मन को मिला

331
00:26:28,320 --> 00:26:32,400
तुम्हें वो तुम्हारा वो क्या कहते हैं उदारवादी

332
00:26:32,400 --> 00:26:37,200
और सामंजस्य के लिए प्रयास करने वाला वो शिवांश नारायण द्विवेदी नहीं मिलेगा

333
00:26:37,200 --> 00:26:40,040
अब बाल की खाल निकालेगा

334
00:26:40,040 --> 00:26:44,760
बाल की खाल तो लेके आना अपनी वो परंपरा

335
00:26:44,760 --> 00:26:49,680
फिर करेंगे उस उड़ाएंगे उसकी धज्जिया तुम्हारी परंपरा

336
00:26:49,680 --> 00:26:54,120
की लुप्त संप्रदाय का गुप्ता आचार

337
00:26:54,120 --> 00:27:00,120
चलो अगला प्रश्न लेते हैं

338
00:27:25,840 --> 00:27:30,520
चलो खैर तार्किक दृष्टि से तो उस बात को कोई मतलब नहीं है इसने कहा कि

339
00:27:30,520 --> 00:27:34,760
इस हिसाब से अमुक अमुक व्यक्ति को डेढ़ क्विंटल का होना चाहिए

340
00:27:34,760 --> 00:27:40,760
था क्योंकि हमारे शरीर से धातु निकलने के कारण

341
00:27:42,040 --> 00:27:46,200
यदि हमारा वजन कम हो रहा है तो अमुक अमुक व्यक्ति

342
00:27:46,200 --> 00:27:50,600
का वजन जो है वह धातु अधिक होने के कारण धातु

343
00:27:50,600 --> 00:27:55,280
आने के कारण जो है ज्यादा वजन का होता

344
00:27:55,280 --> 00:27:59,800
तो यह तो खैर इसकी नीचता है और कुछ नहीं है इसमें क्या कहा जाए मगर अगर

345
00:27:59,800 --> 00:28:03,920
तार्किक रूप से अगर देखा जाए

346
00:28:03,920 --> 00:28:07,920
तो किसी परेशानी के आने के बहुत सारे कारण हो

347
00:28:07,920 --> 00:28:12,160
सकते हैं मगर

348
00:28:12,160 --> 00:28:16,240
प्राथमिकता से जो कारण हमारे सामने ही है तो

349
00:28:16,240 --> 00:28:20,240
उसको तो भूला जाएगा ना कहीं इस वजह से तो नहीं है तो जब प्राथमिकता से ऐसा

350
00:28:20,240 --> 00:28:24,800
है कि तुम हर शुक्रवार को कहीं जा रहे हो इलाज कराने है ना

351
00:28:24,800 --> 00:28:28,800
तुम्हारे सिद्धांतों के अनुसार और जो प्राप्त होने वाली कोई भी कही सुनी

352
00:28:28,800 --> 00:28:33,440
बातों विश्वास कर लेना चाहिए तो उसके अनुसार तुम्हारा टिकट कट रहा है ना हर बार राजस्थान

353
00:28:33,440 --> 00:28:37,760
का राजस्थान का जब टिकट कट रहा है या राजस्थान की यात्राएं तुम्हारी

354
00:28:37,760 --> 00:28:41,800
हो रही है तुम्हारे सिद्धांतों के अनुसार प्रत्येक शुक्रवार को कहीं किसी

355
00:28:41,800 --> 00:28:46,240
डॉक्टर के पास जा रहे हो तो यह दिखाई दे रहा है ना

356
00:28:46,240 --> 00:28:50,840
तो इसके आधार पर क्यों ना माना जाए कि तुम्हारा वजन रुक गया है

357
00:28:50,840 --> 00:28:56,640
खैर करो

358
00:28:56,640 --> 00:29:02,640
नीचता और

359
00:29:16,480 --> 00:29:20,680
और एक बात और तुम्हें बता दूं धातु क्षीण हो जाने से

360
00:29:20,680 --> 00:29:24,720
वजन का गिरना यह साइंटिफिक है

361
00:29:24,720 --> 00:29:28,920
धातु अधिक हो जाने से वजन का बढ़ना साइंटिफिक नहीं धातु क्षीण

362
00:29:28,920 --> 00:29:33,080
हो जाने से वजन का गिरना सामान्य है धातु अधिक

363
00:29:33,080 --> 00:29:37,200
हो जाने से वजन का बढ़ना सामान्य नहीं है ठीक है फॉर योर

364
00:29:37,200 --> 00:29:41,280
काइंड इंफॉर्मेशन और सुनो तुम्ह वजन वजन बढ़ाना हो थोड़ा बल प्राप्त

365
00:29:41,280 --> 00:29:45,480
करना हो शारीरिक वाला भी जो ठीक ठाक व्यक्ति

366
00:29:45,480 --> 00:29:49,840
से थोड़ा सामना कर पाओ तो बताना कुछ खुराक खुराक तुम्ह भी बता देंगे

367
00:29:49,840 --> 00:29:53,880
इतने निर्दय नहीं है हम धातु निकल गई तो क्या हो गया

368
00:29:53,880 --> 00:29:58,320
दोबारा खा पी के मुंडे हो जाओगे कोई दिक्कत नहीं है

369
00:29:58,320 --> 00:30:02,400
बताना निशुल्क निशुल्क देंगे तुम्हें हां और

370
00:30:02,400 --> 00:30:06,600
वो पदार्थ बना लो तो बता देना वो वाला पदार्थ जिससे तुम मुझे

371
00:30:06,600 --> 00:30:10,640
वशीकरण वश में कर पाओ बना लेना तुम तो ज्यादा सिद्ध होगे पुरी के परिकर

372
00:30:10,640 --> 00:30:11,880
से तो

373
00:30:11,880 --> 00:30:16,000
मुझे वश में करने में क्या दिक्कत है कर लेना बस सामना हो जाएगा

374
00:30:16,000 --> 00:30:20,320
एक तंत्र वादी एक तंत्र वाले का जो तंत्रों के नाम पर जो प्रमाद

375
00:30:20,320 --> 00:30:24,480
फैलाता है सामना हो जाएगा एक तंत्र के नाम पर प्रमाद फैलाने

376
00:30:24,480 --> 00:30:28,600
वाले का एक राम के भक्त से कर लेना तुम्हें

377
00:30:28,600 --> 00:30:32,640
भी याद रहेगा किसी राम के भक्त से सामना हुआ था तो बना

378
00:30:32,640 --> 00:30:36,640
लो पदार्थ क्या है वो क्या चूना उना मिलाते हो क्या

379
00:30:36,640 --> 00:30:40,880
क्या मिलाते हो वश में करने वाला बनाते हो तो

380
00:30:40,880 --> 00:30:45,440
उसी से वश में किया दो चार जो इधर उधर खड़े रहते हैं शूटिंग करते टाइम

381
00:30:45,440 --> 00:30:49,440
हसते हैं जो उसी से वश में किया है क्या क्योंकि वैसे तुम्हारी बातें सुन

382
00:30:49,440 --> 00:30:53,560
कर के वश में होने वाले कम लोग होंगे तो ऐसा

383
00:30:53,560 --> 00:30:57,600
कोई पदार्थ बनाओ मुझे भी वस में कर लो कहां मिलना है तय

384
00:30:57,600 --> 00:31:02,280
करते बया तुम्हारा चना उना मिला के लाओ कुछ खाएंगे

385
00:31:02,280 --> 00:31:08,280
तुम्हारा ठीक बताना और

386
00:31:29,640 --> 00:31:35,640
कुछ

387
00:32:03,440 --> 00:32:07,440
अब इसका कहना है मटके परक के बारे में अगर तुम्हें लाइव रिकॉर्डिंग दिखा देंगे तो तुम

388
00:32:07,440 --> 00:32:11,720
क्या करोगे हमने तो बोला था ना पहली बात तो

389
00:32:11,720 --> 00:32:15,760
यह तुम्हारे सब प्रलाप है तुम्हारे पास कुछ है नहीं जैसे कि तुमने एक झूठ बोला था

390
00:32:15,760 --> 00:32:19,960
ने क्या झूठ बोला था कि भाई आचार्य राम शंकर

391
00:32:19,960 --> 00:32:24,120
शुक्ल जी की मेरे पास ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग है

392
00:32:24,120 --> 00:32:28,160
ठीक है यह तुमने बोला था ना य आचार्य के लक्षण क्या

393
00:32:28,160 --> 00:32:32,480
झूठ बोलने के तुमने बोला था आचार्य

394
00:32:32,480 --> 00:32:36,680
राम शंकर शुक्ल जी की तुम्हारे पास वीडियो रिकॉर्डिंग वो ऑडियो रिकॉर्डिंग है कॉल

395
00:32:36,680 --> 00:32:40,840
रिकॉर्डिंग और तुमने य भी यह भी पूछा था कि अगर तुम कहो डालोगे

396
00:32:40,840 --> 00:32:44,640
अगर तुम वचन दो डालने का तो तुम भेज दोगे

397
00:32:44,640 --> 00:32:48,920
और जब जब आचार्य श्री का वक्तव्य आ गया तो तुम विधवा

398
00:32:48,920 --> 00:32:53,040
विलाप करने लगे रोने लगे काश मेरे पास वो रिकॉर्डिंग

399
00:32:53,040 --> 00:32:58,120
होती आज मैंने देख लिया कि विश्वास

400
00:32:58,120 --> 00:33:02,160
का मूर्तिमान रूप कैसा होता है यही कर रहे थे

401
00:33:02,160 --> 00:33:06,240
ना विधवा विलाप तुमने जब ये सब किया था तब किसी

402
00:33:06,240 --> 00:33:10,320
ने किया था क्या मैंने विश्वास त मैंने ये वो हाथ

403
00:33:10,320 --> 00:33:14,400
में गंगाजल ले लो यह करो वो करो

404
00:33:14,400 --> 00:33:18,400
और जब शब्द प्रमाण है ही नहीं तो गंगाजल का वो हाथ में लेकर

405
00:33:18,400 --> 00:33:22,960
के सामने वाला बोल देगा तो क्या तुम्हारे लिए प्रमाण रह जाएगा और तुम्हारे लिए होगा

406
00:33:22,960 --> 00:33:27,160
हमारे लिए होगा मगर तुम जैसे जो टचे

407
00:33:27,160 --> 00:33:31,440
लोग हैं उनका हमारे लिए कोई वो नहीं है हम

408
00:33:31,440 --> 00:33:36,320
ये उम्मीद नहीं कर सकते कि तुम हाथ में लेकर के बोलोगे तो वो सही बोलोगे

409
00:33:36,320 --> 00:33:40,720
जो व्यक्ति हर शुक्रवार को जिसके बारे में लोग कह रहे हैं कि हर शुक्रवार

410
00:33:40,720 --> 00:33:45,040
को व अपनी धातु बचाने के लिए यात्राएं करता है वह कितना

411
00:33:45,040 --> 00:33:49,120
स्तर का गिरा हुआ व्यक्ति होगा कितना नीच होगा कैसे विचार उसके लगातार चलते होंगे

412
00:33:49,120 --> 00:33:53,240
मन में और वो फिर आ कर के रो

413
00:33:53,240 --> 00:33:59,000
रहा है कि इधर वो है इधर वो है ये है

414
00:33:59,000 --> 00:34:05,000
मैं उसकी सौगंध खा रहा

415
00:34:08,240 --> 00:34:12,400
हूं प्रशांत मिश्र जी की बात से याद आया इस आदमी

416
00:34:12,400 --> 00:34:16,760
ने वैसे तो ज्यादातर रिकॉर्डिंग जो दिखाई है जो ट मैसेजेस दिखाए

417
00:34:16,760 --> 00:34:20,960
हैं परिक को गुरुदेव को मठ को

418
00:34:20,960 --> 00:34:25,400
धर्म को बदनाम करने के लिए उन सभी रिकॉर्डिंग्स

419
00:34:25,400 --> 00:34:29,680
में ज्यादातर इसने मैं हाथ लगा रहा हूं यह र भाई हम भी ये सब ऐसे मैसेज

420
00:34:29,680 --> 00:34:34,680
तुम्हें 50 पढवा सकते हैं और अगर तुम शांत नहीं हुए तो

421
00:34:34,680 --> 00:34:39,120
पढवा ध्यान रख मगर बात यह

422
00:34:39,120 --> 00:34:42,960
है कि इनकी क्या वैल्यू

423
00:34:42,960 --> 00:34:47,040
है और अगर वैल्यू है तो जैसे तुम आचार्य राम

424
00:34:47,040 --> 00:34:51,240
शंकर शुक्ल जी से मा मांग रहे हो कि शपथ खाओ हाथ में शालिग्राम भगवान

425
00:34:51,240 --> 00:34:55,440
लेकर के जितने लोग तुम्हें भेजते हैं उनसे शपथ लेवाया करो उसके बाद आया करो यहां

426
00:34:55,440 --> 00:35:01,440
विधवा विलाप करने

427
00:35:03,560 --> 00:35:09,240
तो तुमने प्रशांत मिश्र जी का नाम लिया उन्होंने तो तुम्हें रेल

428
00:35:09,240 --> 00:35:13,280
दिया एफबी में पोस्ट डाली ना उन्होंने मुझसे भी कहा हम उनका

429
00:35:13,280 --> 00:35:19,280
समर्थन नहीं करते भाई इन सब चीजों का जो बोल रहे हमारे नाम से क्या हुआ फिर

430
00:35:41,520 --> 00:35:45,560
य क्या अजीब उल्टी सीधी बातें कर रहा है मैंने बोला कि

431
00:35:45,560 --> 00:35:49,640
भाई तू अपने जीवन को सार्वजनिक कर तू किसी पर टिप्पणी कब कर पा रहा

432
00:35:49,640 --> 00:35:53,760
है जब वह कहां जा रहा है क्या कर रहा है सब कुछ वो बारबार आपको दिख

433
00:35:53,760 --> 00:35:58,080
रहा है तभी तो टिप्पणी कर पा रहा है तो तू अपने उस जीवन को सार्वजनिक

434
00:35:58,080 --> 00:36:02,800
करना जो सामान्य है तू केवल तभी तो दिख रहा है लोगों को

435
00:36:02,800 --> 00:36:07,000
जब तू चाहता है जब जिस मामले में तू बोलना चाहता

436
00:36:07,000 --> 00:36:11,120
है त अगर जिन आचार्यों की जिन संतों की तू समीक्षा

437
00:36:11,120 --> 00:36:15,200
कर रहा है तो उन लोगों ने अपना जीवन सार्वजनिक कर रखा है कि हम कहां क्या कर रहे

438
00:36:15,200 --> 00:36:18,680
हैं क्या है ज्यादा से ज्यादा उनके जीवन की अपडेट्स आ रही है तभी

439
00:36:18,680 --> 00:36:22,800
तो तू टिप्पणी कर रहा है तो मैंने तुझे यह ललकार

440
00:36:22,800 --> 00:36:26,880
दी है कि तू अपने जीवन को सार्वजनिक कर दो तीन दिन लगेंगे तेरा जीवन अशा स्त्रीय

441
00:36:26,880 --> 00:36:30,520
सिद्ध करने में

442
00:36:30,520 --> 00:36:34,960
तू नहीं करेगा फोटो डाल अपने चैनल पर कौन-कौन तेरे सहायक है

443
00:36:34,960 --> 00:36:39,000
नाम पता तो डाल अभी कहां रुखा है ये तो डाल कितने

444
00:36:39,000 --> 00:36:43,200
दिन तक काम्या में है इसके बाद तेरा अगला ट्रिप क्या है गुरुदेव और

445
00:36:43,200 --> 00:36:47,240
पूरी मटके जो लोग हैं वो कहां जा रहे हैं कहां जा रहे हैं सब पता चलता रहता है

446
00:36:47,240 --> 00:36:51,280
भाई चल तू म मूविंग पे वो भी तो मूविंग पे है वो भी तो मूव कर

447
00:36:51,280 --> 00:36:55,480
रहे हैं पर उनका तो पता चलता रहता है अब कहां है अब कहां है अब कहां है तेरा

448
00:36:55,480 --> 00:36:59,560
क्यों नहीं पता है क्योंकि तू चोर है अपने जीवन को

449
00:36:59,560 --> 00:37:05,560
चुराना चाहता है छुपाना चाहता है लोगों

450
00:37:12,760 --> 00:37:17,240
से और जहा इंपोर्टेंट बात होती है जहां तुम फस रहे होते हो

451
00:37:17,240 --> 00:37:21,840
वहां पर कह देते हो मैं दिखाऊंगा मैं यह करूंगा मैं वह करूंगा

452
00:37:21,840 --> 00:37:26,280
ये करूंगा पर बातें चलती है क्या

453
00:37:26,280 --> 00:37:32,280
ये सारी चीजें करूंगा प है

454
00:37:34,560 --> 00:37:38,640
क्या मैं भी एक दिन मैं भी एक दिन जो

455
00:37:38,640 --> 00:37:43,000
है निग्रह संप्रदाय का गुप्ता आचार्य

456
00:37:43,000 --> 00:37:47,040
होगा ना उसको गुप्त करके दिखाऊंगा मैं

457
00:37:47,040 --> 00:37:51,080
भी एक दिन लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य को इस

458
00:37:51,080 --> 00:37:55,720
दुनिया से गायब भी करके दिखाऊंगा ये क्या मेरा कहना ठीक है क्या

459
00:37:55,720 --> 00:38:00,080
उचित है क्या हैं उठा के पटक के दिखाऊंगा

460
00:38:00,080 --> 00:38:04,640
क्या मेरा कहना ठीक है क्या धोबी के कुत्ते की तरह पीटू

461
00:38:04,640 --> 00:38:08,800
क्या मेरा कहना ठीक है क्या कहने को कोई कुछ भी कह सकता है

462
00:38:08,800 --> 00:38:12,960
भाई कुछ भी है जुबान दी है मुंह चला लो जितना

463
00:38:12,960 --> 00:38:17,240
है भगवान ने दी है जवान और वैसे भी जवान

464
00:38:17,240 --> 00:38:21,480
चलाने का कार्य वो ज्यादातर वही लोग करते हैं जो कुछ वास्तविकता

465
00:38:21,480 --> 00:38:27,480
में नहीं कर पाते

466
00:39:23,240 --> 00:39:27,880
पूरी पीठा श्वर जी का तुमने बहिष्कार किया या अपमान किया या

467
00:39:27,880 --> 00:39:32,040
हास्य किया उनके ऊपर हम यह दिखाएंगे

468
00:39:32,040 --> 00:39:36,680
जहां पर तुमने उन पर अनावश्यक चीजें कही अनावश्यक

469
00:39:36,680 --> 00:39:40,760
केवल शास्त्र का खंडन नहीं था शास्त्रोक्त

470
00:39:40,760 --> 00:39:44,800
पक्ष नहीं था वहां अनावश्यक कोई बात ना चीत

471
00:39:44,800 --> 00:39:48,800
और जिसमें से एक उदाहरण तुम्हें दे चुके हैं जिसमें की तुमने चारों

472
00:39:48,800 --> 00:39:53,040
शंकराचार्य को बुला लो एक करोड़ रुपए के आधार पर क्या इसमें पक्ष है

473
00:39:53,040 --> 00:39:57,160
तुम्हारा सिद्ध करोगे एक करोड़ रुपए लेते हैं हर बार हमें

474
00:39:57,160 --> 00:40:01,600
तो पता है कई बार निशुल्क जाते हैं कई जगह और अगर लेते हैं तो लेना भी

475
00:40:01,600 --> 00:40:06,160
चाहिए तुम्हारे खुद के हम फेसबुक पर कमेंट दिखा देंगे जिसमें तुम कह रहे हो

476
00:40:06,160 --> 00:40:10,480
यहां बिल्कुल उनके पास होना चाहिए धन

477
00:40:10,480 --> 00:40:14,760
कार्य कैसे करेंगे तो ये तो रही बाद की बात

478
00:40:14,760 --> 00:40:19,280
मगर एक करोड़ रुपए देखकर मतलब चार शंकराचार्य चार करोड़ में आते हैं

479
00:40:19,280 --> 00:40:23,320
वहां क्या संदर्भ था उनका आराम

480
00:40:23,320 --> 00:40:27,320
लेने का खुद को बला बड़ा दिखाने का क्योंकि

481
00:40:27,320 --> 00:40:31,440
व्यूज चाहिए अं भक्त चाहिए बिना बात के किसी

482
00:40:31,440 --> 00:40:35,640
को कहीं पर भी खींच कर के नीचा दिखा दो फिर कहो जो है हम जो है

483
00:40:35,640 --> 00:40:38,480
पूरी मट की रक्षा करना चाहते हैं फिर कहो हम संप्रदाय

484
00:40:38,480 --> 00:40:42,680
की रक्षा करना चाहते हैं फिर कहो हम धर्म की रक्षा करना चाहते हैं वास्तविकता में

485
00:40:42,680 --> 00:40:46,680
तुम्हे धर्म की कोई चिंता नहीं है तुम्हें संप्रदाय की परंपरा

486
00:40:46,680 --> 00:40:50,880
की कोई चिंता नहीं है एट द एंड तुम्हें पूरी मठ की कोई चिंता नहीं है तुम अपने

487
00:40:50,880 --> 00:40:55,000
आप को खपत करने में लगे हो और सच कहूं तो अपने आप को भी ख्या पित नहीं करने

488
00:40:55,000 --> 00:40:59,440
में लगे हो तुम ध्यान ही नहीं दे रहे हो कि हो क्या रहा है

489
00:40:59,440 --> 00:41:03,520
तुम केवल यट को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हो

490
00:41:03,520 --> 00:41:07,560
तुम्हारा इस पर भी ध्यान नहीं है कि तुम आगे बढो क्योंकि तुम जिस तरह से गाली

491
00:41:07,560 --> 00:41:11,800
गलोज करते हो तो तुम्हारा एक संत की भूमिका में भी कोई रोल नहीं रह जाएगा

492
00:41:11,800 --> 00:41:16,360
आने वाले कुछ दिन कि लोग तुम्हें एक संभ्रांत जगह पर जो है सम्मान पूर्वक

493
00:41:16,360 --> 00:41:20,440
एक संत के रूप में बिठाए वरना वहां बैठ के देना मां बहन की गाली जो तुम कहते हो मैं

494
00:41:20,440 --> 00:41:24,560
गाली दूंगा मैं गाली दूंगा वहां बैठ के देना गाली और तुम

495
00:41:24,560 --> 00:41:29,360
अपनी माताओं बहनों के बीच में भी बैठ कर के देते होगे सदाचरण है ना गाली

496
00:41:29,360 --> 00:41:33,720
देना सदाचरण है गाली देना तो क्योंकि जब तुम धार्मिक

497
00:41:33,720 --> 00:41:38,000
बातें कर रहे हो धार्मिक व्याख्यान कर रहे हो तो धार्मिक व्याख्यान तो सभी के लिए है

498
00:41:38,000 --> 00:41:42,040
उसमें तो ये चुनाव है नहीं कि अमुक अमुक के लिए नहीं है

499
00:41:42,040 --> 00:41:46,160
तो उसके बीच में बैठकर गाली देना तुमने ऐसा देते होगे शायद हमें

500
00:41:46,160 --> 00:41:50,360
तो नहीं सिखाया गया भाई खर उस पर तब आएंगे जब वो प्रकरण आएगा

501
00:41:50,360 --> 00:41:53,720
जो तुम कहते हो कि हां वो गाली मैं इसलिए देता हूं

502
00:41:53,720 --> 00:41:58,160
क्योंकि श्री राम श्री राम और श्री कृष्ण की तरह मेरे पास वो नहीं

503
00:41:58,160 --> 00:42:02,320
इसलिए गाली देते हो अच्छा कोई अगर यह कह दे कि तुमने जितने आरोप लगाए

504
00:42:02,320 --> 00:42:06,440
वो यह करता है वो यह करता है क्योंकि उसके पास ऐसा नहीं था इसलिए उसने काम करने के लिए ऐसा किया

505
00:42:06,440 --> 00:42:10,480
हो गया कम तो तुम अपने वाले पक्ष के लिए तो मान

506
00:42:10,480 --> 00:42:14,640
लोगे मैंने गाली इसलिए दी भाई तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य

507
00:42:14,640 --> 00:42:18,680
के विषय में शास्त्र प्रमाण है शास्त्र कहां

508
00:42:18,680 --> 00:42:22,800
है अगर कहीं पर शास्त्रों ने आपातकालीन धर्म की व्यवस्था

509
00:42:22,800 --> 00:42:27,320
की है तो उसमें भी बताया कि तुम्हें करना क्या है तुम तो मर्म

510
00:42:27,320 --> 00:42:31,440
हो ना तुमने ये वाला पार्ट जाना ही नहीं है तुमने यही

511
00:42:31,440 --> 00:42:35,520
जाना है जो व्यक्तिगत जो धर्म है वही जाना है तुमने ये

512
00:42:35,520 --> 00:42:39,880
नहीं जाना कि समाज के प्रति कैसा व्यवहार होना चाहिए इसी कारण से तुम्हारी

513
00:42:39,880 --> 00:42:44,520
ये हालत है ना धर्म को तुमने धारण किया

514
00:42:44,520 --> 00:42:48,520
है नहीं तो तुम्हारे हिसाब से जो पूरी मट के जो परिकर है

515
00:42:48,520 --> 00:42:52,520
उनके पास तंत्र है पदार्थ बनाने का और

516
00:42:52,520 --> 00:42:56,560
तुम उनसे बड़े सिद्ध हो बना लेना पदार्थ और मुझे बताना मेरा नंबर

517
00:42:56,560 --> 00:43:00,560
याद है ना 7408 30169 उस पर

518
00:43:00,560 --> 00:43:04,640
कॉल करना ट करना या किसी

519
00:43:04,640 --> 00:43:08,680
बिचौलियों को भेजना क्योंकि तुम में साहस तो है नहीं बिचौलियों

520
00:43:08,680 --> 00:43:09,180
को

521
00:43:08,840 --> 00:43:14,840
भेज देना भाई

522
00:43:24,150 --> 00:43:30,150
[संगीत]

523
00:43:35,360 --> 00:43:41,360
ब

524
00:44:02,200 --> 00:44:06,400
तो यहां पर मुझे बताया जा रहा है कि तुम्हारा जो लाइव था उसमें तुमने

525
00:44:06,400 --> 00:44:10,440
क्या किया था कि जब मैंने यह वाला प्रश्न उठाया था कि तुम खुद

526
00:44:10,440 --> 00:44:14,520
कह रहे हो तुमने मेरे वीडियोस को पूरा देखा नहीं चार घंटे वाले को पूरा नहीं देखा

527
00:44:14,520 --> 00:44:18,600
और उसके बावजूद भी तुम उसका मर्म निकाल रहे हो कि हमने

528
00:44:18,600 --> 00:44:22,840
जो वीडियोस बनाए थे वह तुम्हारे विरोध में बनाए थे तो इसका मतलब और तुम

529
00:44:22,840 --> 00:44:23,960
यह भी बोल रहे हो कि मेरे

530
00:44:23,960 --> 00:44:28,120
समर्थकों ने मुझे बताया तो मैंने एक कटा किया था इसका मतलब

531
00:44:28,120 --> 00:44:32,200
तुम अपने समर्थको के अनुग हो रहे हो ना अगर तुम पूरा वीडियो

532
00:44:32,200 --> 00:44:36,840
देख नहीं रहे हो और तुम एक मर्म बता रहे हो उस वीडियो का पूरा का पूरा

533
00:44:36,840 --> 00:44:40,920
तो तुम वहां परर समर्थको के अनुग हो जा रहे हो और जबक सामने वाला बता भी

534
00:44:40,920 --> 00:44:45,360
रहा है भाई मैंने आप मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे विरोध में वीडियो नहीं बनाया है

535
00:44:45,360 --> 00:44:49,480
वह प्रकरण पिछले कई दिनों से 20 दिनों से इग्रा पर चल रहा था

536
00:44:49,480 --> 00:44:53,480
टांग खींची जा रही थी विजया श्री की तो वहां पर उठने वाले सभी

537
00:44:53,480 --> 00:44:57,640
सवालों को क्रमबद्ध से हमने यहां पर लिया था और क्योंकि तुमने ने भी उस दिन

538
00:44:57,640 --> 00:45:01,960
सेम डे ही वो वीडियो बना दिया था जिसमें तुमने दो बातें कुछ अलग हटके

539
00:45:01,960 --> 00:45:06,080
कही थी वो दो बातें थी एक फ्री मिशन

540
00:45:06,080 --> 00:45:10,800
और एक तुमने कही थी वो क्या कहते हैं

541
00:45:10,800 --> 00:45:14,880
वो व्यापार के लिए वहां गई यही दो बातें अलग हट के कही थी

542
00:45:14,880 --> 00:45:18,960
ना पुरी मिट में व्यापार के लिए गई तो उन बातों

543
00:45:18,960 --> 00:45:23,120
को हमने य लिया था हां वो वो व्यापार के लिए गई

544
00:45:23,120 --> 00:45:27,560
है नहीं वो पूरी मंच पर वो बैठी हुई है उन बातों को मैंने यहां

545
00:45:27,560 --> 00:45:31,640
ठीक है तो यहां पर जब यह वाली बात

546
00:45:31,640 --> 00:45:35,680
आती है तो य भाई साहब आगे बढ़ जाते हैं कोई जवाब ना देकर क्योंकि जवाब है भी नहीं

547
00:45:35,680 --> 00:45:41,680
तो क्या करें तो ब दिखाते हैं

548
00:45:59,200 --> 00:46:03,240
हां लागू है लागू है कि अगर किसी

549
00:46:03,240 --> 00:46:07,240
की गुरु की निंदा की जाएगी व्यक्तिगत निंदा व्यक्तिगत

550
00:46:07,240 --> 00:46:11,480
निंदा मतलब समझते हो कि कोई बात ना चीत कोई गाली बग

551
00:46:11,480 --> 00:46:16,240
दी कोई गाली बकना यह व्यक्तिगत निंदा है

552
00:46:16,240 --> 00:46:20,280
व्यक्तिगत हो जाना शास्त्र की बात चल रही है शास्त्र से खंडन हो रहा है

553
00:46:20,280 --> 00:46:24,600
मगर व्यक्तिगत हो जाना कि भैया जैसे तुम गालियां

554
00:46:24,600 --> 00:46:29,280
देते हो वो व्यक्तिगत बात जब होने लगती है

555
00:46:29,280 --> 00:46:33,440
संदर्भ से अलग हट कर के तो वो निंदा है और

556
00:46:33,440 --> 00:46:38,040
वो निंदा यदि तुमको लगती है कि कोई कर रहा है तो तुम उससे दूर ही रहो

557
00:46:38,040 --> 00:46:42,040
ये बात बिल्कुल सही है और तुम हमेशा बचने के लिए जब तुमको

558
00:46:42,040 --> 00:46:46,560
कुछ कहा जाता है तो तुम ये क्यों ले आते हो कि यह बात पुरी शंकराचार्य जी पर लागू होती है कि नहीं

559
00:46:46,560 --> 00:46:50,680
यहां पर क्या तुम शास्त्र को नहीं मानते हो क्या अगर पुरी शंकराचार्य जी पर लागू नहीं हो रही

560
00:46:50,680 --> 00:46:54,680
है तो इस पूरी शंकराचार्य जी पर भी लागू होती है परंतु वहां पर कोई

561
00:46:54,680 --> 00:46:58,680
फॉलो नहीं कर रहा है उसको तो इसका मतलब तुम्हारे यहां पर फॉलो ना करना उचित मान

562
00:46:58,680 --> 00:47:02,680
लिया जाए तुम्हारे धर्म और अधर्म का निर्णय क्या इसी बात पर होता है कि पुरी

563
00:47:02,680 --> 00:47:06,680
शंकराचार्य जी जो कि तुम्हारे अनुसार ठीक नहीं है पूर्णतया उनके यहां क्या

564
00:47:06,680 --> 00:47:11,040
होता है क्या नहीं होता है तुम अपना पक्ष रखो ना

565
00:47:11,040 --> 00:47:14,400
भाई तुम्हारा पक्ष कहां

566
00:47:14,400 --> 00:47:18,480
है अगर किसी को पुरी शंकराचार्य जी ऐसा लग रहा है कि वो

567
00:47:18,480 --> 00:47:22,560
उसके गुरु की निंदा कर रहे हैं बिल्कुल वो आदमी दूर रहेगा

568
00:47:22,560 --> 00:47:26,560
शास्त्र का सिद्धांत भी है और उसके मन में अपने आप ही रहेगा कई

569
00:47:26,560 --> 00:47:31,920
लोग गलत फहम पालते हुए रहते भी

570
00:47:31,920 --> 00:47:35,960
है अगर वह सिद्धांत रख रहे होंगे या कोई बात रख

571
00:47:35,960 --> 00:47:40,480
रहे होंगे जो कि वेल नोन है तो वहां पर अगर वह चीज वो बात

572
00:47:40,480 --> 00:47:44,880
किसी ने निंदा समझ ली तो वो दूर रहेगा बिल्कुल निंदा

573
00:47:44,880 --> 00:47:49,080
परख अर्थ अगर उसने लिया है तो वो दूर रहेगा और

574
00:47:49,080 --> 00:47:53,440
दूर रहना भी चाहिए मगर तुम व्यक्तिगत होते

575
00:47:53,440 --> 00:47:57,600
हो गंदी बातें करते हो अश्लील बातें करते हो

576
00:47:57,600 --> 00:48:02,440
हो फिर क्यों गूद में चिंगारियां लग रही है ये सब बातें करने लगते हो

577
00:48:02,440 --> 00:48:07,320
उन्हीं आचार्यों के लिए क्या कहते हैं गुरुओं के लिए

578
00:48:07,320 --> 00:48:11,360
ये अंतर है उसका कोई संदर्भ नहीं होता है जैसे

579
00:48:11,360 --> 00:48:16,600
मान लीजिए कि किसी का कोई ये सोचता है कि प्रभुपाद मेरा गुरु

580
00:48:16,600 --> 00:48:20,800
है कोई ये मानता है कि प्रभुपाद जो जो इसके

581
00:48:20,800 --> 00:48:25,760
संस्थापक है प्रभुपाद जी वो मेरा वो मेरे गुरु हैं

582
00:48:25,760 --> 00:48:29,600
तो वहां पर जो पूज्य गुरुदेव है

583
00:48:29,600 --> 00:48:33,600
वो अगर यह कह रहे हैं कि भैया मैं प्रभुपाद उनको जानता

584
00:48:33,600 --> 00:48:37,920
हूं प्रभुपाद जी को या जिसने इस कन की संस्था संस्थापन

585
00:48:37,920 --> 00:48:42,080
किया था मैं उनको जानता हूं क्या क्या हुआ था मैं ये जानता हूं और यह

586
00:48:42,080 --> 00:48:46,120
जानते हुए वो कह रहे हैं कि उनके द्वारा जो बनाया गया तंत्र है वो गलत है सिद्धांत

587
00:48:46,120 --> 00:48:50,320
गलत है तो यह तो एक अलग बात है और वो

588
00:48:50,320 --> 00:48:54,560
यूं कहने लगे कि वो तो चोर है वो धूर्त है वो पाखंडी

589
00:48:54,560 --> 00:48:59,200
है इस रूप में गालियां देने लगे

590
00:48:59,200 --> 00:49:03,880
यह निंदा है य तो शा ये तो पक्ष रख रहे हैं वो अपना

591
00:49:03,880 --> 00:49:07,960
उसका सोर्स भी बता रहे हैं वो अब जिसको उन पर विश्वास है वो

592
00:49:07,960 --> 00:49:11,680
माने जिसको उन पर विश्वास नहीं नहीं

593
00:49:11,680 --> 00:49:16,360
माने नहीं मानेगा वो दूर रहेगा अगर वो कोई व्यक्ति अपने को

594
00:49:16,360 --> 00:49:20,480
प्रभुपाद जी का वो समझता होगा कि मैं उनका शिष्य हूं तो वो दूर रहेगा उनसे और रहते

595
00:49:20,480 --> 00:49:24,680
हैं दूर रहते भी है दूर ऐसा

596
00:49:24,680 --> 00:49:29,000
समझ के निंदा परक अर्थ निकाल कर मगर तुम क्या करते हो

597
00:49:29,000 --> 00:49:33,160
ऐसी बातें बोलते हो जिसके लिए तुम खुद ही खड़े नहीं होगे कि हां

598
00:49:33,160 --> 00:49:37,160
ये है ऐसा बोलो जो गालियां तुम देने की बात करते

599
00:49:37,160 --> 00:49:41,200
हो अपनी भागवत कथा में बैठ के दो गुरुदेव जो बात करते हैं वह सब जगह

600
00:49:41,200 --> 00:49:44,680
देंगे मैं जो बात करता हूं व सब जगह कहूंगा तुम जो बात

601
00:49:44,680 --> 00:49:49,280
करते हो वह सब जगह नहीं करोगे वीडियो बनाते समय करो

602
00:49:49,280 --> 00:49:54,360
भागवत कथा में कहो अपनी माताओं बहनों के बीच में कहो जाकर के

603
00:49:54,360 --> 00:49:59,280
जो नहीं कहोगे पलट जाओ वहां पर मृद भासी बन जाओगे

604
00:49:59,280 --> 00:50:02,680
गाली तो नहीं दोगे कम से

605
00:50:02,680 --> 00:50:06,800
कम तो ये जो गाली देने का हुंकार भरते हो खत्म हो गया

606
00:50:06,800 --> 00:50:10,880
रामो रना भी भाषित तुम दो प्रकार के व्यक्तित्व लेकर

607
00:50:10,880 --> 00:50:14,920
चल रहे हो ना ये थोड़ी ना होता एक ही

608
00:50:14,920 --> 00:50:19,600
प्रकार का व्यक्तित्व होता वरना कम से कम खुद को आचार्य तो मत कहो कहे

609
00:50:19,600 --> 00:50:25,600
क्या आचार्य थू ऐसे आचार्य रोने पर

610
00:50:29,240 --> 00:50:35,240
मां बहन की गालिया दोगे लोगों के और संत बने फिरो ग

611
00:51:05,760 --> 00:51:09,960
अब यहां पर फिर वही बात आ गई जब मैंने बताया कि

612
00:51:09,960 --> 00:51:14,560
भैया जो रामपाल के मामले में हम लोग धरातल पर जो कार्य किया था

613
00:51:14,560 --> 00:51:19,160
तुमने उसम फिर मैंने उसम अपना पक्ष भी बता दिया

614
00:51:19,160 --> 00:51:23,320
कि पहली बात तो यह है कि जो लोग मेरे साथ गए थे व आरएसएस

615
00:51:23,320 --> 00:51:27,720
से जुड़े हुए थे वोह स्वयं आरएसएस नहीं थे

616
00:51:27,720 --> 00:51:31,880
और मैंने कोई ऑफिशियल आरएसएस का साथ नहीं लिया था

617
00:51:31,880 --> 00:51:36,240
मेरे घर के आसपास हिंदू रहते हैं उनमें से कुछ आरएसएस

618
00:51:36,240 --> 00:51:40,520
से जुड़े हुए हैं कुछ विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हुए हैं यदि मेरे आसपास

619
00:51:40,520 --> 00:51:44,360
मेरी मां की घरमा बंग हो रही होगी और मैं किसी का साथ लूंगा तो वहां

620
00:51:44,360 --> 00:51:48,360
पहले पूछूंगा क्या तू आरएसएस से तो नहीं है वरना मत चल मेरे साथ और अगर

621
00:51:48,360 --> 00:51:52,440
आरएसएस से तो सुन करपाती जी ने उसका खंडन किया है पूज्य शंकराचार्य

622
00:51:52,440 --> 00:51:57,760
जी ने आरएसएस के सिद्धांतों का खंडन किया ये बोलूंगा

623
00:51:57,760 --> 00:52:01,840
तो तुमने मेरे इस पक्ष पर ध्यान नहीं दिया और फिर भाई तुम

624
00:52:01,840 --> 00:52:05,960
तो अपने गुरु के द्रोहियों से हाथ मिलाते हुए वो है अरे मेरे

625
00:52:05,960 --> 00:52:10,000
भाई तू कौन होता है डिसाइड करने वाला मैं किससे हाथ मिला रहा हूं कि नहीं मिला

626
00:52:10,000 --> 00:52:14,480
रहा हूं गुरु गुरु के विपरीत जाकर के ये तो गुरु तय करेंगे

627
00:52:14,480 --> 00:52:18,600
ना किसके विपरीत रहना है किसके विपरीत नहीं रहना है

628
00:52:18,600 --> 00:52:22,600
अभी तूने अपने वो पिताजी वाले वीडियो में कहा कि ना वो आयोजक थे ना वो

629
00:52:22,600 --> 00:52:26,680
वक्ता थे ना वो श्रोता थे फिर भी 500 किलोमीटर दूर से वो

630
00:52:26,680 --> 00:52:30,680
बातें छोक रहे हैं यही तो कहा था ना तने तो यहां पर क्या हो गया भूल

631
00:52:30,680 --> 00:52:35,240
गया क्या अपने तर्क मान ना मान मैं तेरा

632
00:52:35,240 --> 00:52:39,320
मेहमान तू होता कौन है बताने वाला कि गुरुदेव हमारे क्या शिक्षा दे रहे हैं

633
00:52:39,320 --> 00:52:43,320
क्या रणनीति बता रहे हैं उन्होने तो कहा है कि भैया कुछ मामलों

634
00:52:43,320 --> 00:52:47,440
में आरएसएस भी सीखने वाली बात है कि कोई संस्था कैसे चलाई

635
00:52:47,440 --> 00:52:51,520
जाती संगठन कैसे तैयार किया जाता है तो और तू

636
00:52:51,520 --> 00:52:55,520
खुद कह रहा है कि मैं मैं जब विदेश गमन के विदेश

637
00:52:55,520 --> 00:52:59,440
गमन व्यक्ति से जब मैं मिला मैंने उसका आतिथ्य स्वीकार

638
00:52:59,440 --> 00:53:03,480
किया तो मैंने उसका विदेश गमन स्वीकार नहीं कर लिया तो यदि तू ऐसा

639
00:53:03,480 --> 00:53:07,600
कर सकता है कि एक ही व्यक्ति की दो अलग अलग चीजों में एक चीज के लिए अलग व्यवहार

640
00:53:07,600 --> 00:53:11,640
दूसरी चीज के लिए अलग व्यवहार तो मैं नहीं कर सकता वो भी तेरी कोई मजबूरी

641
00:53:11,640 --> 00:53:16,080
नहीं है तेरी कोई मजबूरी नहीं है अतिथ स्वीकार करने की भगवता

642
00:53:16,080 --> 00:53:20,240
आनंद मेरी तो मजबूरी है ना मेरी मां की गरिमा

643
00:53:20,240 --> 00:53:24,720
भं की जा रही है ना तेरी मां तो है नहीं वो नाटक करता है तू कामख्या

644
00:53:24,720 --> 00:53:28,120
में बैठ कर के

645
00:53:28,120 --> 00:53:32,280
दिखावे बाज

646
00:53:32,280 --> 00:53:36,840
पाखंडी दोगला कहीं का दिखावा करता है इधर कामख्या

647
00:53:36,840 --> 00:53:41,480
उधर धवज इधर जने है मैं सौगंध खाक कह रहा हूं विधवा विलाप

648
00:53:41,480 --> 00:53:46,000
और जो मां की रक्षा में जाता है तो उसका विरोध करता है

649
00:53:46,000 --> 00:53:50,000
पाखंडी कहीं ना अपना पदार्थ लेकर वश

650
00:53:50,000 --> 00:53:54,560
में करने वाला और सुन उसमें एक सर्त रख

651
00:53:54,560 --> 00:53:58,600
लेंगे कि तूने मुझे पदार्थ खिलाया उसके बाद मैं वश में हो जाना चाहिए

652
00:53:58,600 --> 00:54:02,640
हूं अगर मैंने उसके बाद दो चार थप्पड़ लगा दिए तो मैं

653
00:54:02,640 --> 00:54:06,640
जीता और दो चार थप्पड़ नहीं लगाए तो तू जीता

654
00:54:06,640 --> 00:54:11,880
ठीक है पदार्थ खिला और फिर देख तमाशा

655
00:54:11,880 --> 00:54:16,000
और दो चार थप्पड़ के लिए कोई वो शिकायत इयत मत करना नहीं तो तू नाटक करता है कि

656
00:54:16,000 --> 00:54:20,600
वो मैं जो है कोर्ट जाता नहीं मगर चला भी जाता तो वो मत करना पदार्थ

657
00:54:20,600 --> 00:54:24,600
खिलाने के बाद यदि हाथ पैर पड़ जाए तो उसको उसमें ही पर्या अवसान उसमें

658
00:54:24,600 --> 00:54:28,840
लेना कि प्रतियोगिता का एक हिस्सा है ठीक है उसको वो मत मानना

659
00:54:28,840 --> 00:54:32,840
कि द्वेष वस मारा गया है पर पदार्थ मैं

660
00:54:32,840 --> 00:54:36,920
जब तुम्हारा खा लूंगा जो तुम बना के लाओगे तंत्रोक्त पदार्थ उसको मैं खाने

661
00:54:36,920 --> 00:54:41,840
के बाद तुमको पीटू अगर तो इस ये दिखाने के लिए पीटू

662
00:54:41,840 --> 00:54:46,200
कि मैं तुम्हारे वश में नहीं हूं समझ रहे हो आ

663
00:54:46,200 --> 00:54:47,280
ना यही

664
00:54:47,280 --> 00:54:51,400
शर्त रखेंगे पदार्थ खिलाओ वश में हो गया नहीं

665
00:54:51,400 --> 00:54:55,400
पीटू बस में नहीं हुआ पीटू

666
00:54:55,400 --> 00:55:01,400
बढ़िया है ना

667
00:55:05,560 --> 00:55:09,800
तूने रुला दिया काशीनाथ तूने रुला दिया सात भाई थे सातों

668
00:55:09,800 --> 00:55:13,960
के साथ शेर से कोई कुछ नहीं कर पाया पर तूने

669
00:55:13,960 --> 00:55:19,840
रुला

670
00:55:19,840 --> 00:55:23,880
दिया हां भाई कब ला रहा है पदार्थ बता तो सही कम्युनिटी पोस्ट

671
00:55:23,880 --> 00:55:27,960
डाल जल्दी से डालता है ना तू बना गोल चूना मिला पिंट मिला कुछ

672
00:55:27,960 --> 00:55:32,520
मिला उसमें कुछ जहर वहर सब

673
00:55:32,520 --> 00:55:36,560
मिला जहर नहीं नहीं तो फिर कुछ हो गया

674
00:55:36,560 --> 00:55:40,160
तो फिर बाद में तू कहेगा इसी ने कहा था

675
00:55:40,160 --> 00:55:44,680
जर वशीकरण वाला पदार्थ लेके आ वशीकरण वाला

676
00:55:44,680 --> 00:55:49,640
ठीक

677
00:55:49,640 --> 00:55:54,160
है क्या है वो हीलियम है क्या है वो कौन सा पदार्थ है

678
00:55:54,160 --> 00:55:58,200
प्रोटीन तो नहीं लाओगे वे प्रोटीन बस करने के लिए इसको

679
00:55:58,200 --> 00:56:02,240
बॉडी बनानी है तो प्रोटीन लेक चलता हूं तो

680
00:56:02,240 --> 00:56:08,240
बस में हो

681
00:56:24,920 --> 00:56:29,080
जाएगा य फोटो जो तुमने यहां पर यह कह रहा है

682
00:56:29,080 --> 00:56:34,080
कि इसने किसी मातृ शक्ति को गाली दी है इसका बात इस बात का प्रमाण

683
00:56:34,080 --> 00:56:38,240
दिखाओ तो वो हमने जो हमें प्राप्त हुआ था इस

684
00:56:38,240 --> 00:56:42,480
रूप में कि इसने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से कितना अश्लीलता

685
00:56:42,480 --> 00:56:46,720
फैला रखी है इससे बात नहीं कर सकते सब भ्रांत परिवार के लोग

686
00:56:46,720 --> 00:56:50,960
इतना बड़ा गाली बाज है तो

687
00:56:50,960 --> 00:56:55,080
उसके बारे में कह रहा है कि प्रमाण दिखाओ तो वो हमारी पिछली लाइव है उसमें देख लेना

688
00:56:55,080 --> 00:57:01,080
प्रमाण दिखाए गए हैं रे फेसबुक के और

689
00:57:28,080 --> 00:57:32,600
यहां पर तुम्हारी एक अच्छे श्रोता नहीं हो यह बात

690
00:57:32,600 --> 00:57:36,640
यहां पर आ रही है तुमने कहा जब मैंने यह कहा

691
00:57:36,640 --> 00:57:42,640
कि रामपाल हमारी मां को गाली दे रहा है है

692
00:57:52,040 --> 00:57:56,320
ना तो हमने ये कहा था कि भा रामपाल ने हमारी मां को गाली

693
00:57:56,320 --> 00:58:00,360
दी है जो हमारी मां को गाली देगा उसके साथ हम ऐसा ही करेंगे रामपाल

694
00:58:00,360 --> 00:58:04,600
के विषय में मैंने कहा था तो यह व्यक्ति इतना जल्दी सुनने

695
00:58:04,600 --> 00:58:09,440
और उस पर प्रतिक्रिया देने पर अमादा रहता है इसको भूख है इतनी

696
00:58:09,440 --> 00:58:14,800
जो वर्चस्व का चूर है उसकी इतनी चाटने की इसको भूख है

697
00:58:14,800 --> 00:58:18,840
कि यह जो है अपने चाटने के चक्कर में य भूल जाता

698
00:58:18,840 --> 00:58:23,000
है कि व्यक्ति सामने वाला कह क रहा है मैं कह रहा हूं कि रामपाल ने हमारी मां को गाली

699
00:58:23,000 --> 00:58:27,000
दी है तो यह कह रहा है कि मैंने अभी तक किसी की मा को कहां गाली दी

700
00:58:27,000 --> 00:58:31,920
भाई तो ये इसका प्रमाद है उसका क्या ही उत्तर दे

701
00:58:31,920 --> 00:58:37,920
चूर चाटने की भूक है

702
00:59:21,160 --> 00:59:26,080
पहली बात तुम्हारा यह कहना है कि पूरी के शंकराचार्य जी ने अमुक अमुक बातों में

703
00:59:26,080 --> 00:59:30,200
त चर्चा के लिए चर्चा की थी क्या तो पहली बात है अगर चर्चा

704
00:59:30,200 --> 00:59:34,240
नहीं की थी तो उन्होंने कोई बहुत बड़ा केस जैसा भी नहीं चलाया कि यहां ये हो रहा

705
00:59:34,240 --> 00:59:39,800
है वहां वो हो रहा है दूसरी बात व्यक्तिगत चर्चा हुई है कि नहीं हुई है तुम्हें कैसे

706
00:59:39,800 --> 00:59:43,840
पता व्यक्तिगत चर्चा हुई है कि नहीं हुई है यह तुम्हे कैसे पता जब

707
00:59:43,840 --> 00:59:47,880
कोई चीज गुप्त ही है तो उसके बारे में तुम ये निर्णय कैसे दे सकते हो जब कोई

708
00:59:47,880 --> 00:59:51,880
चीज इस बारे में ही है कि वो होगी भी तो गुप्त रूप से

709
00:59:51,880 --> 00:59:56,440
तो इस बारे में तुम निर्णय कैसे दे सकते हो कि वो नहीं हुई और

710
00:59:56,440 --> 01:00:00,480
दूसरी बात कि व्यक्तिगत चर्चा के लिए सामने वाला खुद तुमको

711
01:00:00,480 --> 01:00:04,880
कह रहा है याद दिला रहा है स्थान दे रहा है

712
01:00:04,880 --> 01:00:09,080
कि भाई यह बात ऐसे नहीं ऐसे होनी चाहिए तुम्हारे

713
01:00:09,080 --> 01:00:13,200
ललकारे जाने पर तुमको याद दिला रहा है कि यह विषय पर ऐसी

714
01:00:13,200 --> 01:00:17,480
बात ना हो फिर तुम कहते हो कि तुम हो क्या पुरी मट की ओर से तुमसे क्यों की जाए

715
01:00:17,480 --> 01:00:21,800
तो क्यों आ रहे हो लालची कुत्तो की तरह तो तुम ही ने मुझे कहा था

716
01:00:21,800 --> 01:00:26,200
ना कि आ जाओ आ जाओ लाइव कर ले लाइव कर ले तुम्हारे अंदर लोकेश

717
01:00:26,200 --> 01:00:30,320
का लालच था ना किसने कहा था आ

718
01:00:30,320 --> 01:00:34,480
जाओ आज जाओ लाइव कर ले उनको अनुकूल लगे मुझे पता नहीं है क्या तुम्ह मसाला चाहिए था

719
01:00:34,480 --> 01:00:36,720
तुम्हें लगता था इसको हम खा जाएंगे

720
01:00:36,720 --> 01:00:41,160
तुम्हें लगता था इसका शास्त्र का अध्ययन कमजोर है शास्त्र का अध्ययन भले ही तुमसे

721
01:00:41,160 --> 01:00:45,400
थोड़ा बहुत कम होगा और सिद्धांतों में आगे होंगा

722
01:00:45,400 --> 01:00:49,440
ये जो वस्तुनिष्ठ चीज तो मैं ज्यादा बताऊंगी र सिद्धांत मेरे

723
01:00:49,440 --> 01:00:53,440
पक्के होंगे ये मुझे मैं अब तक के अवलोकन से समझ

724
01:00:53,440 --> 01:00:57,560
चुका हूं तो मगर मेरे पास पीछे

725
01:00:57,560 --> 01:01:01,560
गुरु गोविंद ग्रंथ है और तुम्हारे पास पीछे जो है तुम्हारा स्वा अध्यन है

726
01:01:01,560 --> 01:01:05,680
बस कुछ नहीं तुम्हारा गुरु कोई है ही नहीं कोई

727
01:01:05,680 --> 01:01:10,480
है तुम्हारे ऊपर जिसको तुम कहते हो कि यह मेरे से ऊपर है

728
01:01:10,480 --> 01:01:15,160
इनकी बात मेरे लिए प्रमाण है मेरे पास तो है मेरे गुरु प्रमाण है मेरे लिए

729
01:01:15,160 --> 01:01:19,320
है कोई तुम्हारे पीछे कोई नहीं जब गुरु नहीं है तो

730
01:01:19,320 --> 01:01:23,480
ग्रंथ कहां से हुआ भाई होगा तो तीनों होंगे नहीं होंगे तो एक भी नहीं होगा जब

731
01:01:23,480 --> 01:01:27,560
गुरु नहीं है तो ग्रंथ कहां से हुआ जब ग्रंथ नहीं है तो गोविंद कहां

732
01:01:27,560 --> 01:01:31,600
से हुआ सब खत्म

733
01:01:31,600 --> 01:01:35,880
तुम्हारा समा जीयों का ईश्वर ईश्वर क्यों नहीं है गुरु परंपरा

734
01:01:35,880 --> 01:01:39,960
को नहीं मानते तो तुम जब स्वा अध्यन स्वघोषित आचार्य हो तो तुम्हारे पास

735
01:01:39,960 --> 01:01:44,320
गुरु कहां है कौन है तुम्हारे गुरु बताओ

736
01:01:44,320 --> 01:01:48,600
आओ परंपरा को लेकर पहली बात तो यह है

737
01:01:48,600 --> 01:01:52,000
कि लालच लोके शना का तुम्हारे अंदर था तुम्हें

738
01:01:52,000 --> 01:01:56,040
ट हिट होना था तुम्हें प्रसिद्धि प्राप्त करनी थी इसलिए

739
01:01:56,040 --> 01:02:00,640
तुम ही तो ला लालचि की तरह आए थे लाल टपका हुए

740
01:02:00,640 --> 01:02:04,880
मैं आया था क्या तुम आए थे क्यारे साथ चर्चा कर लो क्यों

741
01:02:04,880 --> 01:02:10,280
तब याद नहीं था कि मैं पूरी मट की ओर से अधिकृत व्यक्ति नहीं हूं

742
01:02:10,280 --> 01:02:14,400
यानी कि मैंने तुम्हें अपने आप को ऐसा प्रस्तुत किया जिसके साथ

743
01:02:14,400 --> 01:02:18,440
तुम्हारे मन में चर्चा करने की भावना उत्पन्न की मैंने तुम्हें विवश किया

744
01:02:18,440 --> 01:02:22,840
उस भावना उस भावना को उत्पन्न किया तुम्हारे अंदर यानी कि मैं कुछ हूं

745
01:02:22,840 --> 01:02:28,120
भगवत कृपा से तब ऐसा हुआ

746
01:02:28,120 --> 01:02:32,760
ठीक है ना तुम सिद्धांत में हो ना तुम युक्ति में हो

747
01:02:32,760 --> 01:02:37,320
तुम खाली श्लोकों को रट लियो इस मामले में हो

748
01:02:37,320 --> 01:02:41,440
यहां तक कि उनका उपयोग कहां करना है इसमें भी नहीं हो प्रसंग प्रसंग

749
01:02:41,440 --> 01:02:44,240
भी तुम्हारा ऐसे ही

750
01:02:44,240 --> 01:02:48,240
है तो तुम यह सोचना बंद कर दो

751
01:02:48,240 --> 01:02:52,480
कि जो है शिवांश को मैं खा जाऊं

752
01:02:52,480 --> 01:02:56,680
केवल उदारता के कारण आज जो ये समाजी और ये स्न

753
01:02:56,680 --> 01:03:00,720
वाले सब जो कर रहे हैं ना इसी सीन से डरता था क्योंकि मुझे चिंता धर्म की थी

754
01:03:00,720 --> 01:03:04,720
तुम्हे हो ना तो मैं अपनी उसकी प् उसकी चिंता है तभी तो क्रेडिट लेते

755
01:03:04,720 --> 01:03:08,720
घूमते हो तभी क्रेडिट लेते घूमते हो ना कि तुमने आवाज उठाई

756
01:03:08,720 --> 01:03:13,200
तो आज जगह जगह से आवाज उठ रही है तुमने नहीं उठाई भाई

757
01:03:13,200 --> 01:03:17,400
तुम जब मुन्ना गिरी कर रहे थे तब से आवाज उठा रहे हो

758
01:03:17,400 --> 01:03:21,560
तुम जब बाइपोलर में फसे हुए थे तब से आवाज उठा रहे

759
01:03:21,560 --> 01:03:26,080
हैं ठीक है उने नहीं आवाज उठाई तुम्हारे कारण

760
01:03:26,080 --> 01:03:30,120
कोई दो ढेले का वो नहीं हुआ प्रेरित हुआ होगा मैं

761
01:03:30,120 --> 01:03:36,120
नहीं हुआ मैं अपनी बात वो अपने लिए कह रहा हूं

762
01:04:20,720 --> 01:04:26,720
अा उतर क्या

763
01:04:42,360 --> 01:04:48,360
क्या कर

764
01:05:18,320 --> 01:05:22,320
जब भी जब भी कभी हम यह बताते हैं कि

765
01:05:22,320 --> 01:05:26,880
इसने गुरु द्रोह किया तो यह सिद्ध करने का प्रयास करता है

766
01:05:26,880 --> 01:05:31,040
कि मैं तो जो है वह परिकर का विरोध कर रहा हूं वहां की अशा स्त्रता

767
01:05:31,040 --> 01:05:35,080
का विरोध कर रहा हूं मैं जो है पुरी के शंकराचार्य जी का विरोध नहीं कर रहा

768
01:05:35,080 --> 01:05:35,760
फिर जब उस

769
01:05:35,760 --> 01:05:40,560
मामले में इससे भिड़ो ग तो य पुरी शंकराचार्य जी का विरोध करेगा

770
01:05:40,560 --> 01:05:45,080
मैं करपात्री जी का खंडन कर चुका हूं काक भुशुंडीर मायण के आधार पर

771
01:05:45,080 --> 01:05:49,280
है ना मैं जो है पूरी शंकराचार्य जी

772
01:05:49,280 --> 01:05:53,600
का विरोध कर चुका हूं चारों शंकराचार्य जो है पैसे लेकर चलते हैं

773
01:05:53,600 --> 01:05:58,200
शंकराचार्य के गूद में ये क्यों हो रहा है क्यों हो रहा है है ना और

774
01:05:58,200 --> 01:06:02,760
मैं जो है उनकी अ मानना नहीं कर रहा मैं जो है मठ में शोधन करना चाहता हूं

775
01:06:02,760 --> 01:06:08,400
मैं जो है पूरी पीठ को बचाना चाहता हूं झूठे

776
01:06:08,400 --> 01:06:12,560
दोगले बात को पलटना यह तो मैं अब मतलब थोड़ा

777
01:06:12,560 --> 01:06:18,560
सा मैं चीजों का अभ्यस्त हो गया हूं कि जो

778
01:06:20,520 --> 01:06:25,800
अधार्वा कट टू कट नहीं होता है

779
01:06:25,800 --> 01:06:29,920
से आज मैं जान गया अभी तक मैं यही समझता था कि यार समाजी स्कोन वाले ही

780
01:06:29,920 --> 01:06:34,080
ऐसा करते हैं मगर मैं यह समझ गया कि जो भी व्यक्ति

781
01:06:34,080 --> 01:06:38,440
उसके विरुद्ध जाएगा सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत

782
01:06:38,440 --> 01:06:43,080
धर्म के विरुद्ध वह ऐसे ही करेगा तू भी शाश्वत धर्म के विरुद्ध है

783
01:06:43,080 --> 01:06:47,080
क्योंकि यह जो धर्म है ना कि मैं गाली देता हूं और इस तरीके की और बात

784
01:06:47,080 --> 01:06:51,400
है मनम कीी यह शाश्वता नहीं है

785
01:06:51,400 --> 01:06:57,400
य तूने अपने मन से इजाद की ठीक है

786
01:07:24,520 --> 01:07:28,720
श बोल रहे स्वयं कमेंट कर रहे है तुमों

787
01:07:28,720 --> 01:07:33,600
पछ रहे हो हम तुम्ह बता रहे अव्यवस्था है ये है वो है

788
01:07:33,600 --> 01:07:38,600
तो उनसे भी बात करलो ऐसा क रहा है किसी लाइव में आ कर

789
01:07:38,600 --> 01:07:42,920
के कमेंट ऐ कहा

790
01:07:42,920 --> 01:07:46,920
अब इसका क्या ही करें इसका कहना है कि किसी ने हमारी लाइव में आकर के ऐसा कहा

791
01:07:46,920 --> 01:07:50,920
है जो आरोप य लगा रहा है वो किसी और ने भी लगाए उसका

792
01:07:50,920 --> 01:07:55,640
क्या ही करें भेजो उसको कौन है और तूने

793
01:07:55,640 --> 01:07:59,640
उनकी बातों पर विश्वास कैसे किया अब तो भाई किसी की बात पर विश्वास

794
01:07:59,640 --> 01:08:03,680
तब होगा ना जब तुझको कम से कम जब वो हाथ में वो

795
01:08:03,680 --> 01:08:07,760
लेकर के शाली राम भगवान का विग्रह लेकर के हाथ

796
01:08:07,760 --> 01:08:11,880
में जब वो शपथ खा लेगा सिद्धांत कमजोर है भाई

797
01:08:11,880 --> 01:08:17,880
तेरे इसम कह रहा है

798
01:08:19,280 --> 01:08:25,280
े क रहे कुछ नहीं

799
01:08:41,040 --> 01:08:45,360
इसका कहना है कि तुम्हें निराकरण से कोई मतलब नहीं है तुम्हें केवल विजया

800
01:08:45,360 --> 01:08:49,760
श्री की उससे मतलब है पहली बात तो यह है कि निराकरण मुझे

801
01:08:49,760 --> 01:08:53,960
निराकरण से मतलब है कि नहीं यह सनातन सिद्धांत

802
01:08:53,960 --> 01:08:58,640
है यह श का वचन है कोई शिवांस द्विवेदी को निराकरण

803
01:08:58,640 --> 01:09:03,520
से मतलब नहीं है तो कैसे कह रहा है तेरा शब्द भी प्रमाण नहीं है

804
01:09:03,520 --> 01:09:07,680
चलो जगतगुरु शंकराचार्य जी गए तो प्रमाण मान लिए जाए और तेरे

805
01:09:07,680 --> 01:09:11,880
खुद के लोगों को तेरे शब्द में वो नहीं होगा क्योंकि तू बहुत जूठ बोल चुका

806
01:09:11,880 --> 01:09:15,920
है जब भी तू गाली देता है किसी को वह झूठ होता है

807
01:09:15,920 --> 01:09:19,960
गाली क्या होती है किसी के लिए कोई अश्लील फती कसना

808
01:09:19,960 --> 01:09:23,960
जिसका सच्चाई से कोई मतलब नहीं होता यही गाली है ना और तू खुद

809
01:09:23,960 --> 01:09:28,200
कह रहा है कि मैं गाली देता हूं तो असत्य भाषण करता है दिन दिन भर में जाने

810
01:09:28,200 --> 01:09:32,240
जाने कितनी बार गाली देते हुए तो

811
01:09:32,240 --> 01:09:34,280
जो असत्य भाषण तू करता है

812
01:09:34,280 --> 01:09:38,040
उसके बाद तेरा शब्द प्रमाण कहां

813
01:09:38,040 --> 01:09:42,280
रहा तेरा भी शब्द प्रमाण नहीं है और झूठ तो तेरे पकड़े ही गए हैं

814
01:09:42,280 --> 01:09:46,600
शिवांश ने कभी मेरा जो है वो नहीं किया समर्थन हमने लाइव में दिखाया

815
01:09:46,600 --> 01:09:50,840
कि कहां हमने समर्थन किया 18 फरवरी को तेरी वो जो पोस्ट

816
01:09:50,840 --> 01:09:55,160
थी वो लाइक की थी जबकि तूने उसमें भी एक अपना वो जो गोटी

817
01:09:55,160 --> 01:09:59,320
है खेली थी उसमें भी तूने अपना दंब भरा था कि मेरे

818
01:09:59,320 --> 01:10:03,360
कारण ऐसा हो रहा है कि जगह जगह से आवाज उठ रही है उसमें भी बड़पन

819
01:10:03,360 --> 01:10:07,360
दिखाते हुए तेरी उस पोस्ट को लाइक किया था तू क्या सोचता

820
01:10:07,360 --> 01:10:11,080
है तू ही है क्या दुनिया

821
01:10:11,080 --> 01:10:17,080
में कोई बात नहीं जयकांत

822
01:10:19,320 --> 01:10:24,160
सिकरे और दूसरी बात एक और है

823
01:10:24,160 --> 01:10:28,680
कि तुझे केवल मतलब है विजया श्री की

824
01:10:28,680 --> 01:10:32,800
सम्मान से वो पहले तूने इज्जत बोला फिर ठीक कर दिया कोई बात नहीं तो क्यों

825
01:10:32,800 --> 01:10:36,800
नहीं होना चाहिए भाई पहले तो सिर्फ अगर मतलब मुझे

826
01:10:36,800 --> 01:10:41,360
है तो य सिद्ध कर कि विजय श्री के सम्मान से ही मुझे मतलब है

827
01:10:41,360 --> 01:10:45,480
और फिर क्यों नहीं होना चाहिए उससे वह इंपॉर्टेंट क्यों

828
01:10:45,480 --> 01:10:49,600
नहीं है यह बता एट द एंड

829
01:10:49,600 --> 01:10:53,440
धर्म और धर्म का आधार क्या

830
01:10:53,440 --> 01:10:57,760
है तो अगर कोई हमारे घर की स्त्री है या हमारे सामने

831
01:10:57,760 --> 01:11:01,800
किसी स्त्री के साथ अन्याय हो रहा है तो तू चुप रह सकता है मैं

832
01:11:01,800 --> 01:11:06,400
नहीं भगवान ना करे तेरे घर की स्त्री के साथ कल को अगर कुछ होगा

833
01:11:06,400 --> 01:11:10,800
तो भगवता अंद तू चुप रहना पर मैं तो बोलूंगा

834
01:11:10,800 --> 01:11:16,800
मैं लड़ूंगा समझा

835
01:11:25,720 --> 01:11:30,680
न बार बार और तीन बार कह रहा

836
01:11:30,680 --> 01:11:34,960
साढ़े तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र वाली बात का जवाब हम दे चुके हैं आज पिछली

837
01:11:34,960 --> 01:11:40,960
जो लाइव हुई थी उसमें सबसे पहले उसको जाकर देख सकते

838
01:11:41,920 --> 01:11:46,440
हैं यहां पर भी ये जो हिंदू राष्ट्र पर उंगली उठाई है

839
01:11:46,440 --> 01:11:50,720
हिंदुओं की आस्था के साथ यह हुआ है वो हुआ है यहां पर भी

840
01:11:50,720 --> 01:11:54,840
ऐसे कई शब्द है जो अपमान जनक है आपत्ति जनक

841
01:11:54,840 --> 01:11:58,960
है और उनके बिला बिना भी तू अपनी बात रख सकता था मगर

842
01:11:58,960 --> 01:12:03,200
तूने नहीं रखा क्योंकि तू केवल तेरा कोई

843
01:12:03,200 --> 01:12:07,600
मतलब नहीं है कि तुझे ये करना है वो करना है तुझे तो पूरी

844
01:12:07,600 --> 01:12:13,280
पूरी पीठ का ही नहीं तुझे संप्रदायों का सभी सब सब परंपराओं का नाश करना

845
01:12:13,280 --> 01:12:17,520
है और मैं तो कह रहा हूं सबसे बड़ा अगर तू सबको मलेच्छ

846
01:12:17,520 --> 01:12:23,000
राज बता रहा है ना तो सबसे बड़ा मले राज तो तू ही दिखने

847
01:12:23,000 --> 01:12:28,360
लगा यह सब करके

848
01:12:28,360 --> 01:12:32,360
ऐसा ही दिखाई देता है तेरे आचरण से तो यही लगने लगा है मलेच्छ राज का

849
01:12:32,360 --> 01:12:36,400
जीता जागता स्वरूप तही हां उतना पावरफुल नहीं है क्योंकि मुझे लगता है

850
01:12:36,400 --> 01:12:40,760
कि मले राज ऐसा तो कम से कम होगा जो शिवांश नारायण द्विवेदी के

851
01:12:40,760 --> 01:12:44,840
सामर्थ से बाहर हो कम से कम भाई उसम बड़े आचार्यों की आवश्यकता पड़े पर

852
01:12:44,840 --> 01:12:47,640
तू तो टट पंजियन

853
01:12:47,640 --> 01:12:51,800
है तू तो मेरे जैसे एक वो क्या कहते

854
01:12:51,800 --> 01:12:55,920
हैं नगन व्यक्ति के द्वारा भी मा खा रहा है और खाएगा ज्यादा

855
01:12:55,920 --> 01:13:01,920
अगर बीच में पड़ा तो खाएगा ठीक

856
01:13:02,720 --> 01:13:08,720
है ब

857
01:13:29,600 --> 01:13:32,480
इसके पर

858
01:13:32,480 --> 01:13:37,280
क उनके बण म क्या

859
01:13:37,280 --> 01:13:41,280
पहली बात तो यह है कि बारबार जब भी इससे कुछ पूछा जाता है

860
01:13:41,280 --> 01:13:45,440
जैसे हमने कहा कि भाई किसी के निजी विषय को लेकर हम सार्वजनिक मंच

861
01:13:45,440 --> 01:13:49,600
पर चर्चा नहीं करना चाहते तो इसका कहना

862
01:13:49,600 --> 01:13:53,800
है कि क्या अभ मुक्तेश्वर जी का मामला निजी

863
01:13:53,800 --> 01:13:57,840
नहीं था था तो किसने किया वीडियो

864
01:13:57,840 --> 01:14:02,000
कैमरे के सामने य सब विवेचना किसने की उसका कौन था क्या था बस ये कह दिया गया

865
01:14:02,000 --> 01:14:06,000
कि हमने शंकराचार्य नहीं मानते पूरी पूरी

866
01:14:06,000 --> 01:14:10,000
शंकराचार्य जी के द्वारा किसने की विवेचना भाई

867
01:14:10,000 --> 01:14:14,320
वोह इस तरीके से जो वक्तव्य देना वो तो तू भी दे चुका है कि मेरे पास

868
01:14:14,320 --> 01:14:17,760
पुरी मट के लोगों के लिए जो है मेरे पास वो है स्क्रीन रिकॉर्डिंग अब

869
01:14:17,760 --> 01:14:21,840
तो विवेचना होनी है ना एक एक सीन की एक एक

870
01:14:21,840 --> 01:14:26,520
अंग की ऐसे कहां कौन कैमरा विवेचना करता पुरी मट

871
01:14:26,520 --> 01:14:30,560
ने ज्योति मट के अक्त सरस्वती जी के

872
01:14:30,560 --> 01:14:34,600
लिए कहां की कहां कर रोड़ा रोज

873
01:14:34,600 --> 01:14:38,720
भानुमति का कुनबा जोड़ा इसीलिए तो तू सामने

874
01:14:38,720 --> 01:14:44,720
होता ना तब तुझे पता चलता यह विषय अतर ना करने देता

875
01:14:49,600 --> 01:14:54,000
मुझे और इसके आगे कहता है कि अभी

876
01:14:54,000 --> 01:14:58,960
जो ये थ लाइव है इसके बाद इसने और

877
01:14:58,960 --> 01:15:03,600
थ लाइव के बादला तो आपका जो बड़ा है

878
01:15:03,600 --> 01:15:09,600
दो भाग में जो ब

879
01:15:19,000 --> 01:15:23,960
हैके

880
01:15:23,960 --> 01:15:28,480
बाका उस व के बारे में कह रहा है न लाइव होने के बाद मब चौथा पाचवा छ

881
01:15:28,480 --> 01:15:33,640
इसके बाद हम केपर या जो भी लाइ बना उस

882
01:15:33,640 --> 01:15:37,880
न य को पट नहीं

883
01:15:37,880 --> 01:15:43,480
है और इसके आगे कहता

884
01:15:43,480 --> 01:15:49,480
है बो इन सब चीजों के बारे च

885
01:15:51,360 --> 01:15:56,960
नहीं य कोई पॉट नहीं

886
01:15:56,960 --> 01:16:01,320
मालूम हम इस हरा छ हो जाने के बाद

887
01:16:01,320 --> 01:16:03,960
दूसरा भी

888
01:16:03,960 --> 01:16:09,400
दोने ता हैके बाद आपका हमारा

889
01:16:09,400 --> 01:16:13,520
आया तो उस के बारे में कह रहा है न लाइने के बाद मतलब

890
01:16:13,520 --> 01:16:18,240
चौथा पाचवा छ इसके बाद हम आ केपर या अति जो भी लाइ बना

891
01:16:18,240 --> 01:16:22,480
उस न य कोई पॉट

892
01:16:22,480 --> 01:16:27,760
नहीं है मालूम होना चाहिए उसने ऐसा कहा अभी हम

893
01:16:27,760 --> 01:16:31,800
इसरा इसने अपने लाइव में एक बात और कह दी है कि अब मैं जो भी लाइव

894
01:16:31,800 --> 01:16:35,800
करूंगा इसको उत्तर देने के लिए तो उस

895
01:16:35,800 --> 01:16:39,880
पर अब वो ध्यान नहीं देगा तो ध्यान रहे कि अगर वो अब अब यहां

896
01:16:39,880 --> 01:16:44,040
से पिछले वाले से आगे जो अगर वह बनाता है तो

897
01:16:44,040 --> 01:16:48,120
वह जो है अपनी बात का अपनी बात के विरोध में जाते हुए वह सब

898
01:16:48,120 --> 01:16:52,280
करेगा कता है अभी जोका

899
01:16:52,280 --> 01:16:58,280
थड लाइ है इसके बाद इसने

900
01:16:58,800 --> 01:17:04,800
आपका ब दो भाग में है

901
01:17:33,000 --> 01:17:37,400
अब इसका एक तर्क आया है कि यदि

902
01:17:37,400 --> 01:17:42,320
जो पुरी मट के जो परिकर है वो

903
01:17:42,320 --> 01:17:46,720
निर्दोष है तो एक दूसरे से पूर्णतया अपरिचित

904
01:17:46,720 --> 01:17:51,200
व्यक्ति एक बात क्यों कह रहे हैं तो भाई वो तू देख रहा है ना

905
01:17:51,200 --> 01:17:56,920
वो तू देख रहा है और तेरी वाणी हमारे लिए प्रमाण नहीं है

906
01:17:56,920 --> 01:18:01,040
तू तो हाथ में तू ऐसा व्यक्ति है जो प्रत्येक शुक्रवार को अपना

907
01:18:01,040 --> 01:18:05,520
इलाज कराता है तो तेरे हाथ में तो वह शज गराम भगवान भी ठीक नहीं लगेंगे

908
01:18:05,520 --> 01:18:09,640
और तू अगर उनको हाथ में लेकर के कह भी देगा मैं सच बोल रहा हूं कि मुझसे अलग

909
01:18:09,640 --> 01:18:14,480
अलग व्यक्तियों ने कहा यही तो दिक्कत है ना सोचना नहीं

910
01:18:14,480 --> 01:18:18,800
है रट्टू तोते हो तुम केवल

911
01:18:18,800 --> 01:18:24,800
उसके अर्थ में जाने का गुर्दा नहीं है तुम्हारे अंदर

912
01:18:26,320 --> 01:18:30,520
क्यों तुम यह कह रहे हो कि तुमसे अलग-अलग लोगों ने कहा है

913
01:18:30,520 --> 01:18:34,600
हम कैसे मान ले तुमसे कहा है तुमको भगा दिया गया

914
01:18:34,600 --> 01:18:38,920
था मट से अधिकार छीन लिए गए थे तुमसे इसलिए तुम बड़बड़ा

915
01:18:38,920 --> 01:18:43,280
हुए हो यह क्यों ना माने तुम गाली बाज हो रोज 100 झूठ बोलते

916
01:18:43,280 --> 01:18:47,280
हो तुम्हारे मुंह से य कैसे मान ले कि तुमसे बहुत सारे अलग अलग

917
01:18:47,280 --> 01:18:51,520
लोगों ने कहा है भाई कोई व्यक्ति ऐसा ऐसी गरिमा

918
01:18:51,520 --> 01:18:55,680
रखता होगा जिस जिसकी बात को हम प्रमाण मान सके माना जाएगा

919
01:18:55,680 --> 01:19:00,480
तुम हो कौन गली के टचे हो तुम

920
01:19:00,480 --> 01:19:03,880
और मेरे तो छोटू

921
01:19:03,880 --> 01:19:09,880
हो

922
01:19:19,160 --> 01:19:23,720
मुन्ना व केवल मुला कान करवा सती है

923
01:19:23,720 --> 01:19:27,800
में अब यहां अभद्र टिप्पणी कर रहा है तो ठीक है

924
01:19:27,800 --> 01:19:31,840
क्या करें उसका विजया के साथ जोड़ कर के बोल रहा

925
01:19:31,840 --> 01:19:35,960
है इसका ज्ञान करा सकती है उसका ज्ञान करा सकती है उससे आगे का जो

926
01:19:35,960 --> 01:19:41,960
ज्ञान है वो हम करवाएंगे

927
01:19:42,800 --> 01:19:46,880
जब आपने कहा कि हमें पता है

928
01:19:46,880 --> 01:19:51,680
तुम इतने ये क हो तुम्हारी सब क च

929
01:19:51,680 --> 01:19:56,320
तो उसके ऊपर य कहता है क्या वही र

930
01:19:56,320 --> 01:20:00,360
यह कहां का सिद्धांत है यह कहां का सिद्धांत

931
01:20:00,360 --> 01:20:05,320
है कि जो धातु तुम्हारे शरीर से निकली है वही धातु मेरे शरीर में घुग तो वजन

932
01:20:05,320 --> 01:20:09,520
बढ़ेगा धातु के निकलने से वजन कम होता है

933
01:20:09,520 --> 01:20:13,720
यह सिद्धांत है विज्ञान का भी और संभवत आयुर्वेद इत्यादि

934
01:20:13,720 --> 01:20:18,240
का भी मगर धातु के बढ़ने से वजन

935
01:20:18,240 --> 01:20:23,000
बढ़ेगा वजन बढ़ेगा ही सामान्य व्यक्ति का भी बढ़ जाएगा

936
01:20:23,000 --> 01:20:26,760
यह कहीं का सिद्धांत नहीं

937
01:20:26,760 --> 01:20:30,840
साइंस का तो नहीं है आयुर्वेद का मुझे पता नहीं है कि

938
01:20:30,840 --> 01:20:35,160
एक्स्ट्रा हो जाएगा धातु अगर आ जाएगी ज्यादा धातु अगर ज्यादा आ जाएगी तो एक्स्ट्रा

939
01:20:35,160 --> 01:20:39,360
हो जाएगा और इतनी फिक्र है तो मिल लो

940
01:20:39,360 --> 01:20:43,440
धातु का पता चल जाएगा किसमें कितनी है वो पदार्थ लेके

941
01:20:43,440 --> 01:20:47,440
मिलो पदार्थ है ना वो तंत्रोक्त वाला वो तुम नाक जैसा

942
01:20:47,440 --> 01:20:52,000
कुछ लेके डंडा टहलते हो ना कुछ कुछ टहलते हो ना हाथ में क्या है वो दंड

943
01:20:52,000 --> 01:20:56,760
है हां सांप जैसा वो उसको लेकर

944
01:20:56,760 --> 01:21:01,560
मिलो तो प्रतियोगिता ये वाली रख लेना कि अगर

945
01:21:01,560 --> 01:21:05,680
मैं जो है तुम्हारे वश में हो गया अगर

946
01:21:05,680 --> 01:21:10,200
तुमने मुझे वो पिलाया पदार्थ और मैं तुम्हारे वश में हो गया तो तुम्हे

947
01:21:10,200 --> 01:21:14,680
कुछ नहीं कर पाऊंगा वरना तुम्हारा वही डंडा लेकर के

948
01:21:14,680 --> 01:21:19,000
देश रेलम पेल दे रेलम पेल देश सुताई देश सुताई

949
01:21:19,000 --> 01:21:23,920
कर दूंगा पर उसकी कहीं शिकायत मत करना क्योंकि वो प्रतियोगिता का एक हिस्सा होगा

950
01:21:23,920 --> 01:21:29,280
ठीक है व अपना सांप ले आना साथ में डंडे वाला जो लेकर आजकल टहल रहे

951
01:21:29,280 --> 01:21:34,120
हो सांप जैसा ही है ना वो स सर्प दंड क्या है वो

952
01:21:34,120 --> 01:21:38,280
सर्प वाला स्पेशल लगता है अभी कौन सा लेकर टल लो पता नहीं है पर वही वाला

953
01:21:38,280 --> 01:21:41,800
ले आना तो बढ़िया रहेगा प्रतियोगिता में य तुम्हारा पदार्थ जो है

954
01:21:41,800 --> 01:21:45,960
वशीकरण वाला मेरे ऊपर काम कर गया तो ठीक है बढ़िया बात है तुम

955
01:21:45,960 --> 01:21:50,040
तुम पीट लेना तुम पीट लेना तुम्हारी इच्छा निकल जाएगी तुम

956
01:21:50,040 --> 01:21:55,080
पीट लेना और अगर मैं बस में नहीं हुआ भगवता अंद

957
01:21:55,080 --> 01:21:59,800
तो कम से कम 15 20 मिनट की मुझे छूट देना कि मैं सुताई कर सकू री

958
01:21:59,800 --> 01:22:05,800
ठीक

959
01:22:17,680 --> 01:22:22,080
है मेरे अंदर वजन क्यों आया यह तो तुम ही मान चुके हो

960
01:22:22,080 --> 01:22:26,800
लो अब चलो इसी में पकड़ ले लेते तुमको

961
01:22:26,800 --> 01:22:31,480
तुम्हारा कहना है कि भाई तुम्हारे अंदर से धातु क्षीण हुई तो

962
01:22:31,480 --> 01:22:35,720
मेरा जो मेरा वजन ज्यादा है तो क्या वो तो मेरे अंदर आ गया

963
01:22:35,720 --> 01:22:39,720
पर तुमने ही तो मूर्ख अपने ही वीडियो में कहा है कि मैंने जो है प्रोटीन पाउडर खा

964
01:22:39,720 --> 01:22:45,040
कर के बॉडी बनाइए मजाक में भी दोगलापन

965
01:22:45,040 --> 01:22:49,960
और मजाक में भी पकडा मैं तर्क से

966
01:22:49,960 --> 01:22:54,200
है ना तुम मजाक में भी झूठ मक्कारी करोगे विनोद

967
01:22:54,200 --> 01:22:57,560
में टोंट में तंज में

968
01:22:57,560 --> 01:23:01,840
और मैं उसमें भी तर्क से तुम्हें पकड़ लूंगा तो तुमने

969
01:23:01,840 --> 01:23:06,200
ही अपने वीडियो में कहा ना कि तुम य मानते हो कि प्रोटीन पाउडर से बॉडी बनी है प्रोटीन

970
01:23:06,200 --> 01:23:10,680
पाउडर उसका कारण है वे प्रोटीन पाउडर उसका कारण है

971
01:23:10,680 --> 01:23:15,760
तो फिर क्यों अब अपनी कथनी को झुठला रहे हो

972
01:23:15,760 --> 01:23:20,600
क्योंकि तुम हो ही झूठे तुम्हें मिला ही दोगलापन है

973
01:23:20,600 --> 01:23:24,640
तुम्ह सिखाने वाले लोग ही दोगले हैं जो पहले कुछ

974
01:23:24,640 --> 01:23:28,960
कह देंगे फिर उसके पलट जाएंगे ऐसे ही लोगों ने तुम्हें तैयार किया होगा सांप

975
01:23:28,960 --> 01:23:33,080
देकर के हाथ में सर्व दंड है ले

976
01:23:33,080 --> 01:23:37,160
आना इंदौर में मिल लेना इंदौर में इंदौर में मिल

977
01:23:37,160 --> 01:23:41,400
लेंगे लखनऊ आ जाना या कहीं मिल लेंगे खिलाओ

978
01:23:41,400 --> 01:23:47,400
अपना वशीकरण वाला फिर देखो

979
01:23:49,480 --> 01:23:53,600
तमाशा थोड़ा उसको लचीला करके लाना खाल खाल हमारी

980
01:23:53,600 --> 01:23:57,800
हड्डी हड्डी तुम्हारी ठीक है मतलब वो जो अपना डंडा

981
01:23:57,800 --> 01:24:02,560
है ना सांप जैसा उसको थोड़ा फ्लेक्सिबल करके लाना फ्लेक्सिबल मतलब

982
01:24:02,560 --> 01:24:06,640
वो ऐसा ना हो हड्डी तोड़ दे पड़े तो खाल पही खाल पही असर

983
01:24:06,640 --> 01:24:10,720
हो अंदर ना हो हड्डी ना टूट जाए कहीं चपाक यह

984
01:24:10,720 --> 01:24:15,160
चीज हो होस ना पड़ जाए कहीं हड्डी बड्डी टूट जाए ऐसा लाना

985
01:24:15,160 --> 01:24:21,160
ठीक है खाल खाल हमारी हड्डी हड्डी तुम्हारी

986
01:24:28,680 --> 01:24:33,160
बचपन में हम जिस एक स्कूल में थे

987
01:24:33,160 --> 01:24:37,560
वहां के जो अध्यापक गण थे वह ऐसे ही बोलते थे

988
01:24:37,560 --> 01:24:41,560
बच्चा बहुत कोई शरारत कर रहा है उसके माता पिता आए तो बोले कि

989
01:24:41,560 --> 01:24:45,760
अरे उसको बोले वो कि तुम्हारा जो बेटा है बहुत शरारत

990
01:24:45,760 --> 01:24:49,880
करता है तो उसके माता-पिता ग्रामीण

991
01:24:49,880 --> 01:24:54,480
उससे थे पर्यावरण से तोव बोले

992
01:24:54,480 --> 01:24:58,600
मास्टर साहब खाल खाल तुम्हारी हड्डी हड्डी हमारी

993
01:24:58,600 --> 01:25:02,760
हड्डी छोड़ देना बस हड्डी ना टूटे खूब मारना

994
01:25:02,760 --> 01:25:08,760
खाल पूरी उध लेना बस हड्डी ना

995
01:25:21,800 --> 01:25:26,000
टूटे व खुद के ब ये सब चर्चा

996
01:25:26,000 --> 01:25:30,360
हो जाने के बाद परि

997
01:25:30,360 --> 01:25:34,520
चलते गम पानी प बात बता रहा था तो ये आपको

998
01:25:34,520 --> 01:25:38,680
बताने का उद्देश्य इतना है कि कभी कभी वो क रहा था कभी

999
01:25:38,680 --> 01:25:42,840
कभी कुछ व्यक्ति बहुत खा नहीं लेते बहुत बड़े दिखते है और

1000
01:25:42,840 --> 01:25:47,000
खेतो में काम करने वाले मजूर होते हैं

1001
01:25:47,000 --> 01:25:51,640
कम ये बात सही है कि कई बार बिना वजह के कोई व्यक्ति

1002
01:25:51,640 --> 01:25:55,760
दुबला दिखता है और कोई कोई व्यक्ति तगड़ा दिखता

1003
01:25:55,760 --> 01:25:59,800
है बिना वजह के उसके जेनेटिक्स ऐसे होते हैं परंतु यदि उसके

1004
01:25:59,800 --> 01:26:03,920
साथ में एक खबर जुड़ जाए कि उसकी धातु छी हो रही है

1005
01:26:03,920 --> 01:26:08,160
प्रत्येक शुक्रवार वाली बात अगर यदि जुड़ जाए तो फिर इसको

1006
01:26:08,160 --> 01:26:12,160
भी एक घटक माना जाता है कि ऐसा भी हो सकता है कि उसका वजन

1007
01:26:12,160 --> 01:26:16,200
इस कारण से रुका हुआ है ठीक है

1008
01:26:16,200 --> 01:26:20,240
और इसमें एक य भी बात जांच का जांच का

1009
01:26:20,240 --> 01:26:24,360
विषय है कि वो

1010
01:26:24,360 --> 01:26:28,440
बढ़ाने का प्रयत्न किए जाने पर वजन बढ़ रहा है कि नहीं धातु जहां

1011
01:26:28,440 --> 01:26:32,480
छड़ हो जाती है वहां बढ़ाने का प्रयत्न जब करते हैं सामान्य तो उसमें वजन

1012
01:26:32,480 --> 01:26:38,480
नहीं बढ़ता है

1013
01:27:20,000 --> 01:27:26,000
इसके सामने

1014
01:27:32,680 --> 01:27:36,840
अच्छा यानी कि जो जो सचिव जी के सामने

1015
01:27:36,840 --> 01:27:41,120
इसका कहना है इसका कहना है मुझसे कि अगर मैं ठोस

1016
01:27:41,120 --> 01:27:45,680
प्रमाण लाकर तुम्हें दे भी दूंगा तो तुम क्या खड़े रह पाओ खड़े हो

1017
01:27:45,680 --> 01:27:49,680
पाओगे जो पूज पूरी शंकराचार्य जी के जो

1018
01:27:49,680 --> 01:27:53,800
सचिव है उनके आगे स्वामी जी के आगे इसका कहना

1019
01:27:53,800 --> 01:27:57,960
है तुम्हारी औकात नहीं है तुम्हारी क्या आचार्य श्री का नाम भी लिया यहां पर आचार्य

1020
01:27:57,960 --> 01:28:01,960
श्री की भी वो नहीं है सामर्थ्य इसका मतलब है

1021
01:28:01,960 --> 01:28:06,120
कि जो उनके सामने खड़ा नहीं हो पाता है वह औकात से हीन

1022
01:28:06,120 --> 01:28:10,160
इंसान है तुम्हारे अनुसार है ना तो इसका

1023
01:28:10,160 --> 01:28:14,960
मतलब तुम्हारी भी औकात नहीं है क तुम भी तो खड़े नहीं हो पा रहे हो

1024
01:28:14,960 --> 01:28:19,280
तो तुम्हारी भी औकात नहीं है और यह बात सत्य है औकात

1025
01:28:19,280 --> 01:28:23,280
नहीं है तुम्हारी उनके सामने खड़े होने की है क्या पतलून

1026
01:28:23,280 --> 01:28:29,280
गीली हो जाती होगी जिस दिन भगाया गया

1027
01:28:39,680 --> 01:28:45,680
होगा इसके क र है

1028
01:29:07,880 --> 01:29:12,160
गु क्यों सब गुरु भाइयों को एकत्रित करके खड़ा हो

1029
01:29:12,160 --> 01:29:16,240
क्यों उसका कारण क्या है मुझे बिलीव तो हो कि तुम जो

1030
01:29:16,240 --> 01:29:20,280
कह रहे हो लांछन लगा रहे हो वो सत्य है कि

1031
01:29:20,280 --> 01:29:25,080
तुम ने आका बनने का ठेका ले लिया है सारी दुनिया का

1032
01:29:25,080 --> 01:29:29,160
इनका कहना है कि भैया तुम जो

1033
01:29:29,160 --> 01:29:33,160
है तुम अगर इतने बड़े गुरु भक्त हो तो सब गुरु भाइयों को लेकर के खड़े

1034
01:29:33,160 --> 01:29:37,160
हो जाओ अपने गुरु के सामने तो क्यों

1035
01:29:37,160 --> 01:29:41,160
हो जाए भाई पहले ऐसा कुछ हो तो हमें तो

1036
01:29:41,160 --> 01:29:45,280
लग रहा है ठीक है सब और हमें क्या करना है तुम

1037
01:29:45,280 --> 01:29:49,680
क्यों बता रहे हो तुमको नहीं जाने दिया जा रहा था ना गुरुदेव

1038
01:29:49,680 --> 01:29:53,760
के पास तुम क्यों नहीं जा रहे हो 10 20 लोग नहीं तुम्हारे पास क्यों

1039
01:29:53,760 --> 01:29:55,440
नहीं जा रहे हो

1040
01:29:55,440 --> 01:29:59,560
तुम हां तुमने बताया था तुम्हारे पास हथियार नहीं इसलिए तुम जबान चलाते

1041
01:29:59,560 --> 01:30:03,920
हो वो पागल हो जाती ना औरत सड़क पर व भी यही करती है

1042
01:30:03,920 --> 01:30:08,840
उनके पास हथियार नहीं होता है वो भी जवान चलाती है

1043
01:30:08,840 --> 01:30:13,120
देखा है ना सब मर गए तू भी मरेगा ऐसे करा करती

1044
01:30:13,120 --> 01:30:18,080
ना महिला सड़क पर कभी कभी मिल जाती होगी वही तुम हो ना

1045
01:30:18,080 --> 01:30:22,560
जिसके पास सामर्थ्य नहीं होता मुंह चलाता है चलाओ

1046
01:30:22,560 --> 01:30:28,200
हमने तो अपनी ही स कर दिया तुम्हारे अंदर औकात नहीं

1047
01:30:28,200 --> 01:30:32,800
है कोई तंत पानी थोड़ी ना इन सब बातो में जो कर रहे हो तकन

1048
01:30:32,800 --> 01:30:38,800
बात

1049
01:30:54,840 --> 01:30:59,480
दिसंबर तक क्यों पहले ही आ जाओ ना

1050
01:30:59,480 --> 01:31:05,480
पहले आ जाओ अपना पदार्थ लेने

1051
01:31:07,640 --> 01:31:13,640
सामने तोसे करया

1052
01:31:28,800 --> 01:31:34,680
तो इससे आ

1053
01:31:34,680 --> 01:31:39,360
करया कहीं कहीं पर जहा इसके पास उत्तर नहीं होता वहा य क्या करता है

1054
01:31:39,360 --> 01:31:43,560
भगतान कहता हैरे इस पर क्या ही कहे अभी तो फालतू की बात है विषय

1055
01:31:43,560 --> 01:31:49,560
से हटके है कुछ भी

1056
01:31:54,000 --> 01:31:58,080
अरे मैं क कह रहा हूं सामने ना आए मैं तो यह कह रहा हूं तू विजय श्री

1057
01:31:58,080 --> 01:32:02,080
से चालू किया है मैंने वीडियो मैंने तुझे जो जवाब

1058
01:32:02,080 --> 01:32:06,320
दिया था विजया स से दिया था विजया स पर बात कर फिर परिक

1059
01:32:06,320 --> 01:32:10,560
पर बात कर और फिर मैं तेरी परंपरा पूछूंगा उससे और

1060
01:32:10,560 --> 01:32:15,320
हां वो अपना वो सार्वजनिक कर जो तूने वो किया है ना व

1061
01:32:15,320 --> 01:32:19,400
तेरा दावा है ना तूने करपात्री जी महाराज का खंडन किया है वो पीडीएफ

1062
01:32:19,400 --> 01:32:24,400
वगैरह जरा कम्युनिटी पोस्ट पर डाल अपनी यह है मेरा खंडन

1063
01:32:24,400 --> 01:32:28,440
फिर देखें में क्या है क्या नहीं है कितनी दम

1064
01:32:28,440 --> 01:32:32,680
है उन पर भी बात करेंगे फिर उसके बाद वैसे

1065
01:32:32,680 --> 01:32:36,840
मेरा यह उद्देश्य था नहीं कि तुझसे इस रूप में आकर

1066
01:32:36,840 --> 01:32:41,280
के मैं ये सब बातें करूं मगर ठीक है तुझे यही पसंद है तो यही

1067
01:32:41,280 --> 01:32:45,400
सही वोह पदार्थ खिलाते समय जो दंड लेकर आना

1068
01:32:45,400 --> 01:32:49,480
वह थोड़ा लचीला लाना कामा का हड्डी तोड़ने का आरोप

1069
01:32:49,480 --> 01:32:49,980
लग

1070
01:32:49,680 --> 01:32:52,840
जाए मेरे

1071
01:32:52,840 --> 01:32:57,680
ऊपर चल रहा है और यदि ना भी आगे लोगों को दिवा

1072
01:32:57,680 --> 01:33:01,680
दो और इससे बीच में सब

1073
01:33:01,680 --> 01:33:06,080
निकल और आगे उसने कहा भी है एक घंटे का वीडियो बचा

1074
01:33:06,080 --> 01:33:11,040
उसने कहा भी है मैंने बोलिया तो प्रोजेक्ट किया गया

1075
01:33:11,040 --> 01:33:15,720
विय वा वो सामने पहले तो ऐसे दिखा दो लोगों को

1076
01:33:15,720 --> 01:33:20,000
और मेरा चल रहा है इसमें भी आप जो

1077
01:33:20,000 --> 01:33:25,920
से कह रहे हो हम साथ आ सकते थे हो सकते थेवा आशय है

1078
01:33:25,920 --> 01:33:31,920
उसको ना समझते क रहा हम तुम्ह और हम साथ आना नहीं

1079
01:33:32,200 --> 01:33:36,880
चाहिए य रे साथ

1080
01:33:36,880 --> 01:33:40,960
जा यहां पर य कह रहा है कि हमें और तुम्हे मैं यह

1081
01:33:40,960 --> 01:33:45,120
कह रहा हूं कि भाई मनोवा दियों को हम लोगों को साथ आना चाहिए था

1082
01:33:45,120 --> 01:33:49,400
तो कह रहा है कि भाई हमें और तुम्हें साथ आने की

1083
01:33:49,400 --> 01:33:53,960
आना भी नहीं चाहिए क्योंकि तुम सिंडिकेट हो और हम एक परंपरा

1084
01:33:53,960 --> 01:33:58,040
के आचार्य और वो कौन सी परंपरा है वो परंपरा अभी मैं ढूंढ रहा

1085
01:33:58,040 --> 01:34:02,960
हूं फिर मैं लिखूंगा वो परंपरा तब पता चलेगी बेवकूफ

1086
01:34:02,960 --> 01:34:06,960
तू ही तो कई जगह पर आशय प्रकट कर चुका है कि हम तेरे हम तेरा समर्थन क्यों नहीं

1087
01:34:06,960 --> 01:34:10,960
कर रहे तूने वहा फेसबुक पर भी लिखा कि शिवांश नारायण

1088
01:34:10,960 --> 01:34:14,960
द्विवेदी मेरा मेरा मेरे लिए कभी नहीं बोलेगा भले ही हम उसके लिए कितना भी बोल

1089
01:34:14,960 --> 01:34:19,760
दे तू तो इसका भूखा है लोकेश ना का

1090
01:34:19,760 --> 01:34:23,800
तू तो भूखा था थोड़े दिन पहले लाड़ टपका ता फिर रहा था

1091
01:34:23,800 --> 01:34:28,760
आज जब युद्ध की स्थिति आई तो हमें साथ में नहीं आना चाहिए यहां तक कि

1092
01:34:28,760 --> 01:34:33,480
लाइव का प्रस्ताव भी तूने रखा चटोरे

1093
01:34:33,480 --> 01:34:37,480
लोकेश ना के लोकेश णा का चूर चाटना है ना तुझे रोज

1094
01:34:37,480 --> 01:34:43,480
सुबह

1095
01:34:44,520 --> 01:34:50,520
उठके औरता हैगा

1096
01:34:57,240 --> 01:35:03,240
ये मैंने आपको

1097
01:35:03,920 --> 01:35:07,920
भे हम परक का विषय कहां नहीं आने दे रहे भाई हम तो

1098
01:35:07,920 --> 01:35:12,480
कह रहे हैं ना आजा लाइव परिक वाले पर बात होगी विजय श्री पर बात होगी

1099
01:35:12,480 --> 01:35:16,840
आजा लाइव यही तो यही तो है मूल कारण आजा लाइव

1100
01:35:16,840 --> 01:35:22,840
कब आ रहा है बता

1101
01:35:47,120 --> 01:35:51,320
हो यह बता तू एक काम कर तुझे ऐसा लगता

1102
01:35:51,320 --> 01:35:55,520
है ना कि विजय श्री के लिए मैं विजय के नाम पर मैं विषय डायवर्ट

1103
01:35:55,520 --> 01:36:00,440
कर रहा हूं परक को छोड़ कर के पहली बात तो ऐसा है नहीं पर तू एक काम कर

1104
01:36:00,440 --> 01:36:04,480
तू अपनी सारी बातें वापस ले ले क्षमा मांग ले चल केवल पररो

1105
01:36:04,480 --> 01:36:08,520
पर ही बात करेंगे विजय श्री पर नहीं करेंगे बना वीडियो

1106
01:36:08,520 --> 01:36:12,560
विजय श्री के लिए जो भी मैंने कहा उसका मुझे दुख है एक आचार्य होते हुए

1107
01:36:12,560 --> 01:36:16,880
मैंने य सब बातें कही मैं निर्लज हूं या जो भी तुझे लगता

1108
01:36:16,880 --> 01:36:21,000
है और अपनी बातों को गलत बोल मैंने

1109
01:36:21,000 --> 01:36:25,120
गलती की यह बोल के ऐसा ऐसा मु कम का आरोप लगा के

1110
01:36:25,120 --> 01:36:29,440
जिनका आधार मेरे पास नहीं था यह बोल दे

1111
01:36:29,440 --> 01:36:33,520
फिर केवल परग पर बात करेंगे मैं तो केवल विजया श्र की बात नहीं कर रहा

1112
01:36:33,520 --> 01:36:37,760
हूं मगर तू ऐसा जनता को दिखा रहा है कि मैं तू केवल परग पर बात कर रहा है

1113
01:36:37,760 --> 01:36:41,920
क्यों क्योंकि तुझे लगता है तू परिक वाले में जीत जाएगा मगर भगवता अंद

1114
01:36:41,920 --> 01:36:47,720
मैं वहां भी तुझे पटकूंगा मैं उस मैटर में भी तुझे पटकूंगा

1115
01:36:47,720 --> 01:36:51,840
वाणी वो वक्तव्य के द्वारा

1116
01:36:51,840 --> 01:36:56,480
उठा के नहीं पटकूंगा वो उठा पटकने का सीन अलग है वो

1117
01:36:56,480 --> 01:37:00,480
तब है जब वो अपनी प्रतियोगिता होगी ना वो पदार्थ वाली

1118
01:37:00,480 --> 01:37:02,640
उसमें ऐसा रख लेंगे कोई

1119
01:37:02,640 --> 01:37:06,880
मैं तेरा अनुग हुआ कि नहीं अनगतला तू मुझे पटक लेना

1120
01:37:06,880 --> 01:37:11,440
पीट लेना मेरे को तो होश होगा ही नहीं तू गगा मार का मार काऊंगा अनगतला

1121
01:37:11,440 --> 01:37:15,520
और अगर अनगतला

1122
01:37:15,520 --> 01:37:19,560
मैं बच गया उसके

1123
01:37:19,560 --> 01:37:24,240
बाद क्या होगा

1124
01:37:24,240 --> 01:37:28,360
वही कि बाप बन के बेटी को विदा कर दो वरना आज

1125
01:37:28,360 --> 01:37:34,360
अगर य जट बिगड़ गया तो सैकड़ों कोले मरेगा वही होगा

1126
01:38:06,600 --> 01:38:10,640
पर

1127
01:38:10,640 --> 01:38:14,920
य क्या क पले

1128
01:38:14,920 --> 01:38:20,920
मल स पने र

1129
01:38:23,840 --> 01:38:27,920
तुमने केवल सार्वजनिक चीजों को नहीं रखा था तुमने मैंने बताया

1130
01:38:27,920 --> 01:38:31,960
ना दो चीजें तुमने अलग की थी दो चीजें अलग

1131
01:38:31,960 --> 01:38:35,960
की थी तुम्हारा कहना है कि हमने उन्हीं चीजों को रखा जो सार्वजनिक

1132
01:38:35,960 --> 01:38:40,080
थी नहीं तुमने फ्री मशस का नाम लिया और तुमने पूरी

1133
01:38:40,080 --> 01:38:44,080
पूरी पीठ के मंच पर विजया शी के बैठे होने का दावा करते हुए किसी

1134
01:38:44,080 --> 01:38:48,280
अनत महिला को दिखाकर उससे विजया श्री को जोड़ दिया यह तुमने

1135
01:38:48,280 --> 01:38:52,400
गलत किया अलग किया दूसरी बात जो

1136
01:38:52,400 --> 01:38:56,400
इा पर चल रही थी उसमें से और भी कई पहली बात तो

1137
01:38:56,400 --> 01:39:00,840
ज्यादातर लोग ऐसे थे जिनका ना शक्ल थी ना सूरत थी सब आप पमाण

1138
01:39:00,840 --> 01:39:04,920
लोग थे और तुमने वहां पर अपना चेहरा

1139
01:39:04,920 --> 01:39:09,320
दिखाया तुमको लोग जानते हैं तुम कौन हो तब तुमने वह बातें

1140
01:39:09,320 --> 01:39:13,320
बोली वो लोग अनाधिकृत लोग कौन है क्या है हो सकता है

1141
01:39:13,320 --> 01:39:17,440
कोई मुस्लिम ही हो हो सकता है कोई आर्य समाजी हो हो सकता है

1142
01:39:17,440 --> 01:39:21,840
कोई क्रिश्चियन हो हो सकता है कोई क्या कहते स्कन वाला हो

1143
01:39:21,840 --> 01:39:26,640
ऐसे लोगों के द्वारा कैंपेन चल बातें उठ रही

1144
01:39:26,640 --> 01:39:30,760
थी और तुमने नई बातें की

1145
01:39:30,760 --> 01:39:34,920
तो वो वीडियो बना था तो उस वीडियो के उसमें तुम्हारा

1146
01:39:34,920 --> 01:39:38,960
वो था और बात यहां यह नहीं हो रही है तुम जिस प्रश्न के जवाब में अपनी बात बोल

1147
01:39:38,960 --> 01:39:43,080
रहे हो इसको कहते हैं विषयात बात यह हो रही है कि हमने तुम्हारे विरोध

1148
01:39:43,080 --> 01:39:47,280
में वीडियो बनाया था कि नहीं बनाया था तो हम वहां कह रहे हैं कि हमने उस संबंध में वीडियो बनाया

1149
01:39:47,280 --> 01:39:51,960
था जिसमें ्र पर पहले से बातें चल रही थी ठीक है

1150
01:39:51,960 --> 01:39:56,800
तो तुमको यहां यह सिद्ध हमने तुम्हारे लिए ही व चार घंटे की लाइव की थी

1151
01:39:56,800 --> 01:40:00,880
तुमने क्या किया तुरंत उस विषय को छोड़ दिया चार घंटे की लाइ तुम्हारे लिए हुई थी

1152
01:40:00,880 --> 01:40:06,880
नहीं हुई थी इसका मतलब हमने वही बातें की जो पहले से सार्वजनिक यह है

1153
01:40:22,320 --> 01:40:26,680
विषयात कि को भी आगे क्या

1154
01:40:26,680 --> 01:40:32,680
होगा

1155
01:40:35,520 --> 01:40:39,520
इसका आगे क्या होगा किसी को भी पूर्वानुमान नहीं है तुम तो कह

1156
01:40:39,520 --> 01:40:43,720
रहे हो पूर्वा पूर्वानुमान है तुम्हें यह होगा पूरी पीठ

1157
01:40:43,720 --> 01:40:48,600
में वो होगा पूरी पीठ में य सब बातें कौन कह रहा है तुम बक रहे हो

1158
01:40:48,600 --> 01:40:52,640
य इनका यह कहना है कि हमने जो वो वाली बात की थी कि तुम्हारे व मंच में

1159
01:40:52,640 --> 01:40:57,560
नाचे थे लोग जिस पर तुमने जो है लोगों की डांट लगाई थी

1160
01:40:57,560 --> 01:41:01,600
इसका कहना है कि पहली बात तो हम वो आरोप के रूप में नहीं प्रस्तुत कर

1161
01:41:01,600 --> 01:41:05,640
रहे मगर फिर भी अगर तुमने उसको आरोग के रूप में लिया भी है तो तुम वहां

1162
01:41:05,640 --> 01:41:09,880
पर ये कह रहे हो कोई भी होगा उसको पूर्वानुमान नहीं हो सकता है अरे भाई

1163
01:41:09,880 --> 01:41:14,200
तो फिर तुम ही तो दिन और रात ये कर रहे हो यहां ये होगा व वो होगा

1164
01:41:14,200 --> 01:41:18,760
दम भर रहे हो भविष्य वक्ता बन रहे हो

1165
01:41:18,760 --> 01:41:24,760
तुम ही तो दिन और रात कर रहे हो ये सब

1166
01:41:46,760 --> 01:41:51,120
अगर यह दिखाने के लिए इसका कहना है कि हमने मले राज का शब्द का उपयोग

1167
01:41:51,120 --> 01:41:53,880
किया

1168
01:41:53,880 --> 01:41:58,000
इसका कहना है कि हमने अगर मलीच राज शब्द का उपयोग किया तो यह दिखाने के लिए क्या किय

1169
01:41:58,000 --> 01:42:02,880
संघर्ष मेरे और तुम्हारे बीच है

1170
01:42:02,880 --> 01:42:06,920
तो ऐसा नहीं है और अगर संघर्ष ही दिखाना होता तो फिर

1171
01:42:06,920 --> 01:42:11,160
मैं फोटो ही क्यों ना दिखाता मुझे केवल तुम्हारी उस बात का प्रतिकार

1172
01:42:11,160 --> 01:42:15,560
करना था जो तुमने विजया श्री के बारे में मिथ्या जनक बातें कही थी दुष्प्रचार

1173
01:42:15,560 --> 01:42:19,560
किया था तुम्हारे तुमने जो उस वीडियो में

1174
01:42:19,560 --> 01:42:23,840
तुमने वो पीडीएफ पढ़ी थी उस पीडीएफ में बहुत सी बातों को मैंने बिल्कुल वर्ड

1175
01:42:23,840 --> 01:42:27,840
कट टू कट नहीं लिया था हां मैंने परिकर के बारे में एक बात जरूर कह दी थी

1176
01:42:27,840 --> 01:42:32,120
मैं अकाट्य प्रमाण दो क्योंकि मैं मैं जो चीज तु

1177
01:42:32,120 --> 01:42:36,400
उसके बाद में जो अपनी लाइव में दिखाई है वीडियो में दिखाया है वह चीजें

1178
01:42:36,400 --> 01:42:40,600
मैं पहले से जानता हूं देख चुका हूं मगर

1179
01:42:40,600 --> 01:42:44,760
हमें अगर कहीं पर युद्ध स्तर पर उतरना है तो

1180
01:42:44,760 --> 01:42:48,920
हमें ठोस चीजें चाहिए होंगी जैसे आज की वो जो कॉल रिकॉर्डिंग डाली गई

1181
01:42:48,920 --> 01:42:52,960
है उसके आधार पर इस बात की लड़ाई नहीं की जा सकती कि

1182
01:42:52,960 --> 01:42:57,360
नहीं भगतान जो है प्यार में पड़ा नहीं नहीं भगवता अंद जो है व हस्तमैथुन

1183
01:42:57,360 --> 01:43:01,480
का इलाज कराने जाता ही जाता है लड़ाई के लिए नहीं उतरा जाता कहने

1184
01:43:01,480 --> 01:43:01,980
सुनने

1185
01:43:01,760 --> 01:43:05,800
की बातें जिसको उसको सुनके बिलीव हो जाए बिलीव हो

1186
01:43:05,800 --> 01:43:11,320
जाए नहीं हो नहीं हो ठीक है

1187
01:43:11,320 --> 01:43:15,520
देख लेना रामपाल के द्वारा जाकर के रामपाल के लोगों के द्वारा रामपाल की आवाज

1188
01:43:15,520 --> 01:43:19,560
का रोज एआई से ऑडियो निकाला जाता है यह

1189
01:43:19,560 --> 01:43:23,600
सब बातें थी मेरे ख्याल से जो इनकी जो दो लाइव

1190
01:43:23,600 --> 01:43:27,680
में जो रात में दो

1191
01:43:27,680 --> 01:43:33,680
वो हुई थी

1192
01:43:34,000 --> 01:43:38,320
लाइव उनका ये एंड हो गया है बातों का और

1193
01:43:38,320 --> 01:43:42,440
हो सकता है कि अभी मैं दोबारा से जुडू या फिर सुबह जुडू

1194
01:43:42,440 --> 01:43:46,600
क्योंकि मुझे चैप्टर बंद जल्दी पूरा बंद करना है य जो इसने

1195
01:43:46,600 --> 01:43:51,760
लाइव में जो वेगला है उसको

1196
01:43:51,760 --> 01:43:55,960
तो य तो एक अलग बात है मगर तीन

1197
01:43:55,960 --> 01:44:00,400
चीजें मैं तुमसे कहूंगा पहली तुमने जो बौद्ध का और

1198
01:44:00,400 --> 01:44:04,560
बौद्ध वाले प्रकरण में और शबरी वाले प्रकरण

1199
01:44:04,560 --> 01:44:09,200
में तुमने जो वो है ना जिसको तुम सो कॉल्ड खंडन कहते हो

1200
01:44:09,200 --> 01:44:13,920
उसको सार्वजनिक करो सुलभ करो लोगों के लिए सुलभ तो

1201
01:44:13,920 --> 01:44:16,960
तुम अपने कम्युनिटी पोस्ट में उसको ड्राइव पर डाल के उसका लिंक उपलब्ध

1202
01:44:16,960 --> 01:44:21,320
कराओ ठीक है पहला और

1203
01:44:21,320 --> 01:44:26,200
बौद्ध का थोड़ा बहुत है भी मुझे लगता है वेबसाइट पर है

1204
01:44:26,200 --> 01:44:30,320
तो अगर तुम्हें लगता है कि वहां पर कंप्लीट नहीं है फिर भी कंप्लीट हो भी फिर

1205
01:44:30,320 --> 01:44:34,400
भी एक पीडीएफ के रूप में उपलब्ध कराओ जिससे कि लोग उस पर

1206
01:44:34,400 --> 01:44:38,400
विवेचना अपनी अपनी कर सके कि तुम कहते क्या हो है

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ना तुमने कपाती जी का वो किया ना खंडन

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देखे भैया कौन आ गया माइका लाल करपाती जी का खंडन करता है

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और दो पहली बात तोय हो गई य उपलब्ध कराओ सार्वजनिक

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करो इसको

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दूसरी बात ये हो गई कि यदि माता जी ने निष्ठा पूर्वक

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दूध पिलाया है और तुमको लगता है कि तुम्हारे अंदर सामर्थ्य

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है तुम्हारे पास ज्यादा सिद्धियां है पूरी मट के परक से ज्यादा

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क्योंकि तुम्हारे अनुसार वो एक वशीकरण कर लेने वशी

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वश में कर लेने वाला पदार्थ बनाना जानते हैं यदि तुमको

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लगता है कि तुम्हारे पास उनसे ज्यादा सिद्धियां हैं और तुम्हारे पास ज्यादा

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यह सब विधियां है विद्या हैं

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तो अगर वशीकरण वाला मन ऐसा कोई पदार्थ बना सकते हो

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जिसको खिलाकर तुम मुझ जैसे साधारण व्यक्ति

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को वश में कर सको तो बनाओ और मुझे खिला के

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दुनिया को वश में करके दिखा दो ठीक है और वह

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प्रतियोगिता कैसे होगी व तो मैंने तुम्हे बता ही दिया है और कोई उसका रूप भी हो सकता है

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यह मेरा सुझाव है तुम्हे अगर वो पिटाई

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वाला पार्ट हटाना है तो तुम दूसरा कुछ दे देना दूसरी कोई

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अपना ली जाएगी और तीसरा

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कि कब तक ये सब खींचा तानी चलती रहेगी आ जाओ सामना कर लो सीधे-सीधे

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लाइव प जुड़ जाओ तुमने कहा था ना मैं लाइव पे आना चाहता हूं आ

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जाओ तो इस मैसेज के साथ इस लाइव को हम ऑफ कर रहे हैं

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अभी और हो सकता है कि हम दोबारा ऑन करें क्योंकि हमको ये चीजें

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पूरी करनी है जल्दी-जल्दी तब तक के लिए जय श्री राम और

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हो सकता है सुबह भी करें तो कुछ कह नहीं सकते

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जो भी करेंगे अभी 15 20 मिनट में आधे घंटे में यहां पर अपडेट आ जाएगा

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य चैनल पर जय श्री राम सभी को
