1
00:00:01,360 --> 00:00:05,600
सभी को जय श्री राम और आशा करते हैं आप सभी

2
00:00:05,600 --> 00:00:10,520
कुशल पूर्वक

3
00:00:10,520 --> 00:00:14,720
होंगे। सभी छोटे भाइयों को ढेर सारा

4
00:00:14,720 --> 00:00:19,440
स्नेह, प्रेम, आशीर्वाद और जो बड़े हैं

5
00:00:19,440 --> 00:00:22,920
उनका यथोचित

6
00:00:22,920 --> 00:00:27,720
सम्मान। आज का जो विषय है वो

7
00:00:27,720 --> 00:00:31,840
काफी अ हास्यास्पद है। आपने

8
00:00:31,840 --> 00:00:37,040
टाइटल देख ही लिया होगा कि

9
00:00:37,040 --> 00:00:41,120
एक महानुभाव हैं जिनसे आजकल हमारा 36 का आंकड़ा चल

10
00:00:41,120 --> 00:00:45,200
रहा है। तो अब वो जो है विधवा विलाप

11
00:00:45,200 --> 00:00:49,200
पर आ गए हैं। हालांकि जैसे ही हमने अपना थोड़ा

12
00:00:49,200 --> 00:00:53,360
सा ऑफेंसिव रूप दिखाया था आक्रामक रूप।

13
00:00:53,360 --> 00:00:59,280
तो उसके बाद ही अगले ही दिन से वह उसमें आ गए थे विधवा विलाप में।

14
00:00:59,280 --> 00:01:03,440
तो अभी क्या है वो सब ज्यादा कर रहे हैं

15
00:01:03,440 --> 00:01:07,880
तो उसको भी हम लोग लेंगे एक-ए

16
00:01:07,880 --> 00:01:12,080
करके सबसे पहले आज आप लोगों ने

17
00:01:12,080 --> 00:01:16,080
एक कॉमेडी शो देखा होगा टिकट

18
00:01:16,080 --> 00:01:20,720
फॉर टैट वाला कॉल रिकॉर्डिंग सुनी होगी

19
00:01:20,720 --> 00:01:25,120
जिसमें कि जो तथाकथित स्वषित

20
00:01:25,120 --> 00:01:29,120
लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य हैं उनके

21
00:01:29,120 --> 00:01:33,680
बारे में कुछ लोग बातें कर रहे हैं। मेरे बारे में भी कर रहे हैं।

22
00:01:33,680 --> 00:01:38,320
उनके बारे में भी कर रहे हैं। और

23
00:01:38,320 --> 00:01:43,720
कुछ ऐसे मध्यस्थ हैं जिनके बारे में भी उसमें नाम लिया गया।

24
00:01:43,720 --> 00:01:47,920
तो अब क्या है यहीं से शुरू करते हैं। जिसने वह कॉल रिकॉर्डिंग ना सुनी

25
00:01:47,920 --> 00:01:51,920
हो तो हमारा जो आहान वाला चैनल है आान कॉल ऑफ D उस पर

26
00:01:51,920 --> 00:01:56,080
वो कॉल रिकॉर्डिंग अवेलेबल है। जिसने

27
00:01:56,080 --> 00:02:02,080
ना देखी हो वो देख आए। ठीक है?

28
00:02:03,840 --> 00:02:07,920
अब बात आती है सबसे पहली कि कई

29
00:02:07,920 --> 00:02:12,080
लोग उसमें उसमें इनके बारे में बातें हुई है कि ये जो

30
00:02:12,080 --> 00:02:16,480
खुद को निगराचार्य कहने वाले हैं भगवतानंद इनकी कुछ पर्सनल

31
00:02:16,480 --> 00:02:20,840
लाइफ पर आक्षेप लगाए गए हैं कि ये ऐसा चल रहा है या वैसा चल रहा है

32
00:02:20,840 --> 00:02:25,200
और अ कुछ और भी बात है कि इनका प्रेम प्रसंग

33
00:02:25,200 --> 00:02:30,000
चला था जो इन्होंने जिसके बारे में वहां बताया है।

34
00:02:30,000 --> 00:02:34,160
अ क्या कहते हैं अपनी बुक में? तो सबसे पहली बात है कुछ

35
00:02:34,160 --> 00:02:38,320
लोग ये आरोप लगा रहे हैं कि वो जो रिकॉर्डिंग

36
00:02:38,320 --> 00:02:42,400
है वो स्क्रिप्टेड है। स्क्रिप्ट करके बनाई

37
00:02:42,400 --> 00:02:46,560
गई है। और जो वो स्क्रिप्टेड है ये किस प्रकार से है? इसका आधार दो

38
00:02:46,560 --> 00:02:51,040
हो सकते हैं कि क्या कहते हैं? उसमें

39
00:02:51,040 --> 00:02:55,120
जो बोल बात करने वाले जो लोग हैं वो शायद ऐसा लग रहा है सुनने वालों को कि वो

40
00:02:55,120 --> 00:02:58,720
एक्टिंग कर रहे हैं। ठीक है?

41
00:02:58,720 --> 00:03:04,720
तो एक एक

42
00:03:07,080 --> 00:03:09,720
मिनट

43
00:03:09,720 --> 00:03:13,760
तो क्या है कि वैसे मैं प्रयास करता हूं बार-बार

44
00:03:13,760 --> 00:03:17,840
कि भाई मैं अपने कैमरे के द्वारा लाइव आऊं। कैमरे से लाइव ना

45
00:03:17,840 --> 00:03:21,840
आकर के मोबाइल से ही आना पड़ता है क्योंकि कैमरे की कुछ टेक्निकल चीजें

46
00:03:21,840 --> 00:03:25,920
हैं। वह अभी मैं सीख नहीं पाया हूं ठीक से। साथ वाले भी हैं तो वह

47
00:03:25,920 --> 00:03:29,920
भी अह उनका भी स्तर कुछ हमारे ही जैसा है। तो

48
00:03:29,920 --> 00:03:33,920
प्रयास करते हैं कि कैमरे से आ जाए लाइव तो मोबाइल का उपयोग हो

49
00:03:33,920 --> 00:03:38,000
सके उतनी देर मगर आ नहीं पा रहे। भविष्य में कभी होता तो आएंगे। तो ये

50
00:03:38,000 --> 00:03:42,080
जो लेट होने वाली प्रक्रिया आजकल जो चल रही है 7:00 बजे जाना 7:15 बजे

51
00:03:42,080 --> 00:03:46,880
तो वो कैमरे से कैमरे के कारण ही चल रही है। कैमरे से लाइव होने लगते हैं फिर उसमें कुछ टेक्निकल

52
00:03:46,880 --> 00:03:50,960
आ जाते हैं। तो आप सभी को मेरी आवाज वगैरह अगर स्पष्ट सुनाई ना दे

53
00:03:50,960 --> 00:03:54,960
रही हो तो वो मुझे बता दीजिए। अब बात आती है कि हमने कुछ कॉल

54
00:03:54,960 --> 00:04:00,960
रिकॉर्डिंग डाली जिसमें कि

55
00:04:01,000 --> 00:04:05,520
यह बातें हो रही हैं जिसमें भगतानंद के बारे में बातें हो रही है कि वो जो

56
00:04:05,520 --> 00:04:09,680
राजस्थान जाता है इलाज कराने के लिए और बहुत सी चीजें अब

57
00:04:09,680 --> 00:04:13,840
कुछ लोगों का कहना है कि वो स्क्रिप्टेड है। तो सबसे पहली बात तो ये आती है कि

58
00:04:13,840 --> 00:04:18,240
स्क्रिप्टेड है। इसका आधार क्या है? दो आधार हो सकते हैं। या तो आपको भगवतानंद

59
00:04:18,240 --> 00:04:22,800
पर बहुत विश्वास है इसलिए और या फिर आपको जो है

60
00:04:22,800 --> 00:04:27,200
यह क्या कहते हैं? वह जो एक्टिंग है उससे ऐसा लग रहा है कि बात स्क्रिप्टेड

61
00:04:27,200 --> 00:04:31,440
है। तो अगर भगवतानंद पर आपको विश्वास है तो ये आपकी

62
00:04:31,440 --> 00:04:35,680
अपनी चीजें हैं। ये सनातन सिद्धांत नहीं है कि सभी को भगवतानंद पर

63
00:04:35,680 --> 00:04:39,840
विश्वास होना चाहिए। भगवतानंद जो बोल देगा वही सत्य है और बाकी सब

64
00:04:39,840 --> 00:04:43,920
असत्य है। इस पर हम लोग आगे बात करेंगे। और दूसरी बात अब बात आती है कि

65
00:04:43,920 --> 00:04:48,080
भाई वह एक्टिंग आपको ऐसी लग रही है तो इसका मतलब यह है कि आपको और अच्छी एक्टिंग

66
00:04:48,080 --> 00:04:52,480
करके अगर दिखाया जाए और अच्छी एक्टिंग करके कोई ये प्रस्तुत

67
00:04:52,480 --> 00:04:57,400
प्रस्तुतीकरण और बढ़िया अच्छे से हो जाए तो फिर आप लोग भगवत आनंद को भी गाली देने

68
00:04:57,400 --> 00:05:01,440
लगोगे है ना अगर वो व्यक्ति जो बोलने

69
00:05:01,440 --> 00:05:05,680
वाला है वह अपनी पहचान ना बताए उसकी केवल आप आवाज सुन रहे हो वह और आपके

70
00:05:05,680 --> 00:05:09,680
अनुसार अच्छी एक्टिंग नहीं हुई है तो इसका मतलब यह है कि जब वो और अच्छी एक्टिंग करने

71
00:05:09,680 --> 00:05:14,440
लगेगा तो आप भगवानंद के भी दुश्मन बन जाओगे हमने

72
00:05:14,440 --> 00:05:16,440
अपने शायद एक

73
00:05:16,440 --> 00:05:20,640
दो दो तीन लाइव पहले जो बात बताई थी भगवतानंद के बारे में ऐसी

74
00:05:20,640 --> 00:05:25,120
ऐसी बातें सुनाई दे रही है तो उसमें भी हमने ये कहा था कि अगर उसको हस्तमैथुन

75
00:05:25,120 --> 00:05:29,600
का रोग है हमने ये नहीं कहा था उसको है हमने यही कहा था कि अगर

76
00:05:29,600 --> 00:05:33,840
अगर उसका जो आधार है चीजों को मानने का उसका आधार क्या है इसने कहा

77
00:05:33,840 --> 00:05:37,840
उसने कहा ये कहा वो कहा उसकी कॉल रिकॉर्डिंग आई उसका WhatsApp मैसेज

78
00:05:37,840 --> 00:05:42,000
आया वो मैंने नाम छुपा करके दिखा दिया अगर ये सब आधार

79
00:05:42,000 --> 00:05:46,000
है तो ऐसे अगर वो 100 दिखाएगा तो हम 500 दिखाएंगे। आने वाले

80
00:05:46,000 --> 00:05:50,080
टाइम में दिखाएंगे। अगर वो 100 दिखाएगा तो हम 500

81
00:05:50,080 --> 00:05:54,240
दिखा सकते हैं। भाई ये आधार नहीं होते। हम कहते रहे पर वो नहीं माना।

82
00:05:54,240 --> 00:05:58,320
वो कॉल रिकॉर्डिंग डालता रहा। है ना? तो कॉल रिकॉर्डिंग अगर तुम

83
00:05:58,320 --> 00:06:02,320
डालोगे और कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर तुम ये सिद्ध करना चाहोगे कि पूरी मठ में ये

84
00:06:02,320 --> 00:06:06,880
हो रहा है, वो हो रहा है। तो कॉल रिकॉर्डिंग आज तुम्हारे विरोध में भी डल गई।

85
00:06:06,880 --> 00:06:11,040
तो क्या इसको तुम मानोगे? और यही हमने पूछा था कि तुम्हारे बारे में भी हमें

86
00:06:11,040 --> 00:06:15,680
ऐसी सामग्रियां प्राप्त हो रही है जिसमें बताया जा रहा है कि तुमको अस्तमैथुन कर अस्तमैथुन

87
00:06:15,680 --> 00:06:20,080
की इतनी इतने प्रचंड आदत है कि विवाह के बाद भी

88
00:06:20,080 --> 00:06:24,240
उसकी आपूर्ति तुम्हें अलग से करनी पड़ रही है और उससे छुटकारा पाने

89
00:06:24,240 --> 00:06:28,400
के लिए तुम्हें जो है राजस्थान इत्यादि जाना पड़ रहा है डॉक्टरों के यहां प्रत्येक शुक्रवार तो

90
00:06:28,400 --> 00:06:31,600
हमारा प्रश्न यही था और आज भी है कि यदि इस प्रकार

91
00:06:31,600 --> 00:06:35,600
की जो सुनी सुनाई बातें हैं इस प्रकार की रिकॉर्डिंग्स है इस प्रकार के मैसेजेस है

92
00:06:35,600 --> 00:06:39,600
अगर इनको आधार मान करके हम किसी भी तथ्य को

93
00:06:39,600 --> 00:06:43,600
सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं तो क्या इस तथ्य को भी स्वीकार

94
00:06:43,600 --> 00:06:47,840
करना गलत वो सही है कि तुम्हें हस्तमैथुन

95
00:06:47,840 --> 00:06:52,480
का करोगे तुम्हारे प्रेम प्रसंग हो चुके तुम गिर गए थे किसी के प्यार के उसमें नहीं

96
00:06:52,480 --> 00:06:56,480
तुम्हारे अनुसार अब जब तुम्हारे ऊपर बात आई तो तुम कहोगे नहीं नहीं इस

97
00:06:56,480 --> 00:07:00,480
आधार पे तो नहीं माना जा सकता फिर तुम उसमें एक्सप्लेनेशन पे जाओगे तो तुम दूसरों के

98
00:07:00,480 --> 00:07:04,560
एक्सप्लेनेशन पे क्यों नहीं गए ये सुनी सुनाई

99
00:07:04,560 --> 00:07:08,560
बातें जब दूसरों के लिए आई तो तुमने एज इट इज स्वीकार क्यों क्यों कर ली और रही

100
00:07:08,560 --> 00:07:12,640
बात अगर तुमको वो एक्टिंग आपके अनुसार वो एक्टिंग गड़बड़ हो रही है

101
00:07:12,640 --> 00:07:16,880
तो भविष्य में अच्छी एक्टिंग आ जाएगी तो मान लोगे क्या और अच्छी एक्टिंग

102
00:07:16,880 --> 00:07:21,120
आएगी अच्छा थाने में कई बार झूठी रिपोर्ट लिखाने जाते हैं लोग लड़ते

103
00:07:21,120 --> 00:07:25,120
हैं ये होता है वो होता है बाद में तथ्य निकल के आता है तो पूरी एक्टिंग कर रहा था तो फिर

104
00:07:25,120 --> 00:07:29,200
आपके हिसाब से वो सब चीजें सही मान लेनी चाहिए प्रारंभिक स्तर पर ही जो

105
00:07:29,200 --> 00:07:33,200
एक्टिंग करते हैं जाकर के तो ये आधार नहीं होता है कि

106
00:07:33,200 --> 00:07:37,280
हमने किसी से कॉल रिकॉर्डिंग सुन ली और हमने जो है मान लिया कि उस कॉल रिकॉर्ड

107
00:07:37,280 --> 00:07:42,040
िंग में जो बोला जा रहा है वो संदर्भ दिए जा रहे हैं वो सब कुछ सही

108
00:07:42,040 --> 00:07:46,320
है और अगर ऐसा आधार मान करके किया जा सकता है तो फिर तुम्हारी

109
00:07:46,320 --> 00:07:47,120
एक्सप्लेनेशन

110
00:07:47,120 --> 00:07:51,120
क्यों सुनी जाए जब तुम पर आरोप लग रहा है तो यह क्यों सुना जाए

111
00:07:51,120 --> 00:07:55,120
कि तुम उस आरोप को खंडन करने के लिए क्या-क्या कहते हो तुमने अन्य को मौका दिया

112
00:07:55,120 --> 00:07:59,280
था आरोप लगाने से पहले तुमने भी तो सुनी सुनाई बातों के आधार पर ही आरोप

113
00:07:59,280 --> 00:08:03,600
लगाया था हम भी अपने WhatsApp में मैसेजेस करवाएंगे या

114
00:08:03,600 --> 00:08:07,760
हो सकता है आ जाएंगे और नाम छुपा के आपको दिखा देंगे ये देखो हमारे पास मैसेज आए।

115
00:08:07,760 --> 00:08:11,920
यह प्रमाण होता है। तो सबसे पहली बात

116
00:08:11,920 --> 00:08:16,000
है कि जिनको जो इसको स्क्रिप्टेड कह रहे हैं, जो उस ऑडियो

117
00:08:16,000 --> 00:08:20,840
रिकॉर्डिंग को स्क्रिप्टेड कह रहे हैं तो उनसे मेरा प्रश्न है

118
00:08:20,840 --> 00:08:25,040
कि क्या और अच्छी एक्टिंग और अच्छी स्क्रिप्ट लिखवाई

119
00:08:25,040 --> 00:08:29,040
जा सकती है कि नहीं? हो सकती है कि नहीं? और हो जाएगी तो क्या वो

120
00:08:29,040 --> 00:08:33,200
यह मानने लगेंगे कि भगवत आनंद को यह फलानी चीजें भगवत आनंद के

121
00:08:33,200 --> 00:08:37,600
सच है उसमें बहुत सी जानकारियां सच्ची भी है जो जिनको आप भी मानते हो

122
00:08:37,600 --> 00:08:41,600
ठीक है कुछ कुछ जानकारियां ऐसी है जो विवादास्पद है जिन पर संशय है जिन

123
00:08:41,600 --> 00:08:45,680
पर प्रश्न है मगर भगवत आनंद के अकॉर्डिंग तो क्या है कि आपके पास

124
00:08:45,680 --> 00:08:49,680
अगर इस तरह की कोई सूचना आई है कोई रिकॉर्डिंग आई है तो अकॉर्डिंग

125
00:08:49,680 --> 00:08:53,760
टू भगवतानंद का सिद्धांत उसको मान लो फिर उसमें कोई एक्सप्लेनेशन की जगह

126
00:08:53,760 --> 00:08:57,840
नहीं बचती है किसी के और ये तो उन उन लोगों के लिए

127
00:08:57,840 --> 00:09:01,840
जिन्होंने आंखों पर पट्टी बांध ली है। अच्छा हम लोग उस रिकॉर्डिंग को हम

128
00:09:01,840 --> 00:09:02,560
लोग खुद

129
00:09:02,560 --> 00:09:06,880
ऐसे नहीं ले रहे थे। देखो इंपॉर्टेंट मगर हमें दिखाना जरूरी है।

130
00:09:06,880 --> 00:09:10,880
हमें ये दिखाना था यह चीज महसूस करवानी थी सामने वाले को

131
00:09:10,880 --> 00:09:14,960
कि क्या केवल सुनी सुनाई बातों को आधार मान करके आप निर्णय

132
00:09:14,960 --> 00:09:19,880
ले सकते हैं। गंभीर बड़े निर्णय।

133
00:09:19,880 --> 00:09:24,400
तो अब सामने वाला खुद एक्सप्लेनेशन देने पर आ रहा है। तो जब

134
00:09:24,400 --> 00:09:28,400
एक्सप्लेनेशन के अभाव में तुम किसी भी तथ्य को स्वीकार नहीं करते

135
00:09:28,400 --> 00:09:32,560
हो तो तुमने अन्यों के लिए जो चीजें की है जो आरोप

136
00:09:32,560 --> 00:09:36,920
लगाए हैं उसमें तुमने अन्यों का एक्सप्लेनेशन क्यों नहीं सुना

137
00:09:36,920 --> 00:09:41,040
था? क्यों नहीं उनसे पूछा था कि भाई ये तुम्हारी स्क्रीन रिकॉर्डिंग आई है। इसमें

138
00:09:41,040 --> 00:09:45,120
तुम क्या कहना चाहते हो? क्यों उनको अवसर नहीं दिया था? उससे पहले अपना मंतव्य

139
00:09:45,120 --> 00:09:49,200
अपना निर्णय क्यों सिद्ध कर दिया था? यहां पर तुम्हारा अन्याय पूर्ण होना सिद्ध होता

140
00:09:49,200 --> 00:09:53,280
है। तुम्हारा दोगलापन सिद्ध होता है कि दूसरों के साथ जब तुम कर रहे हो तो

141
00:09:53,280 --> 00:09:57,280
बिना एक्सप्लेनेशन जो हम हमको हम अपने हम अपनी श्रेष्ठता

142
00:09:57,280 --> 00:10:01,520
के लिए वर्चस्वता के लिए जो कहना चाहते हैं वो हम कहेंगे

143
00:10:01,520 --> 00:10:05,600
और उसको ही निर्णय के रूप में स्वीकार करेंगे। मगर जब हम पर आक्षेप आएगा तो हम

144
00:10:05,600 --> 00:10:09,760
उससे रिलेटेड एक्सप्लेनेशन डालेंगे। अभी मैं आगे देखूंगा जो तुमने एक्सप्लेनेशन

145
00:10:09,760 --> 00:10:13,760
दिए और उसमें भी बाल की खाल निकाली जाएगी। है ना?

146
00:10:13,760 --> 00:10:17,680
यह तो पहली बात है। तो इसमें क्या हुआ कि

147
00:10:17,680 --> 00:10:21,680
महाभारत में एक सिद्धांत कहा गया है कि अन्यों के लिए जिस व्यवहार अन्यों से हम

148
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अपने लिए जिस व्यवहार की अपेक्षा करते हैं वही व्यवहार हमें अन्यों के

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00:10:25,680 --> 00:10:29,920
साथ करना चाहिए वही धर्म होता है तो यहां भगवतानंद ने व्यवहार क्यों नहीं किया अन्यों

150
00:10:29,920 --> 00:10:34,720
के साथ और जो प्रबुद्ध लोग हैं जो न्याय

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00:10:34,720 --> 00:10:39,120
को पहले रखते हैं धर्म को पहले रखते हैं जो व्यक्ति निष्ठ नहीं है

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00:10:39,120 --> 00:10:43,360
जो शास्त्र निष्ठ है धर्मनिष्ठ है ईश्वर निष्ठ है

153
00:10:43,360 --> 00:10:47,600
मैं उनका ध्यान इस तरफ केंद्रित करना चाहता ूंगा कि यह जो ऑडियो रिकॉर्डिंग

154
00:10:47,600 --> 00:10:51,600
है यह सच है कि झूठ है स्क्रिप्टेड है। एक्टिंग अच्छी है कि बुरी है वो एक तरफ है ये

155
00:10:51,600 --> 00:10:55,760
सब बातें। मगर आपको जरूर सोचना है जो प्रबुद्ध

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00:10:55,760 --> 00:10:59,840
लोग हैं जो न्याय को प्रिय जो न्याय से प्यार करते हैं, धर्म से प्यार

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00:10:59,840 --> 00:11:03,840
करते हैं। यह एक उदाहरण नहीं है इस ओर

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00:11:03,840 --> 00:11:08,480
कि ऐसे सुनी सुनाई बातों पर हमको विश्वास नहीं करना चाहिए।

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00:11:08,480 --> 00:11:12,480
उसकी जांच करनी चाहिए। उसकी जांच के लिए जाना

160
00:11:12,480 --> 00:11:17,440
चाहिए। किसी ने हमको फोन पर कुछ कह दिया वो वो व्यक्ति खुद कितना

161
00:11:17,440 --> 00:11:21,520
क्रेडिबल है या यह है वह है यह जाने बिना ही

162
00:11:21,520 --> 00:11:25,520
बस मठ में ऐसी बातें हो रही है तो मान लो ऐसा है ये

163
00:11:25,520 --> 00:11:29,680
सिद्धांत है क्या और अगर है तो फिर ऐसी बातें हो रही है लो

164
00:11:29,680 --> 00:11:32,960
रिकॉर्डिंग मान लो और रिकॉर्डिंग आएंगी और दे देंगे

165
00:11:32,960 --> 00:11:36,960
अभी इसमें आपको एक्टिंग अच्छी नहीं लग रही है आगे और अच्छी एक्टिंग मिल जाएगी स्क्रिप्ट अच्छी

166
00:11:36,960 --> 00:11:41,040
नहीं लग रही है और अच्छी स्क्रिप्ट मिल जाएगी क्या दुनिया में एक से बढ़कर एक एक्टर

167
00:11:41,040 --> 00:11:45,200
नहीं है से नहीं होता है। यह सिद्धांत

168
00:11:45,200 --> 00:11:49,600
गलत है। अच्छा दूसरी एक बात है

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00:11:49,600 --> 00:11:53,680
और यही यही चीज हमने पूछी भी थी कि भाई तुम्हारे बारे में भी लोग ऐसा

170
00:11:53,680 --> 00:11:57,680
कह रहे हैं कि तुम हस्तमैथुन के इलाज के लिए प्रत्येक शुक्रवार यहां जाते

171
00:11:57,680 --> 00:12:02,360
हो वहां जाते हो तो तुमने आके सौगंध खा ली। वो हमारा अगला चैप्टर सौगंध वाला गंगा की

172
00:12:02,360 --> 00:12:06,640
सौगंध है ना सौगंध खाएंगे अब सब। तो वो ठीक है। सौगंध

173
00:12:06,640 --> 00:12:11,920
वाले पर हम आएंगे। मगर बात यह है कि

174
00:12:11,920 --> 00:12:16,600
अच्छा एक लोग यह कह रहे हैं कि आपने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।

175
00:12:16,600 --> 00:12:20,720
स्पष्टीकरण क्यों दें? स्पष्टीकरण

176
00:12:20,720 --> 00:12:24,720
एक अलग। अच्छा स्पष्टीकरण दे देंगे तो मान लोगे। क्या उससे सिद्ध

177
00:12:24,720 --> 00:12:28,720
हो जाएगा? तुम्हारी सारी बातें गलत हो जाएंगी। भाई कैमरे में आकर के कोई व्यक्ति

178
00:12:28,720 --> 00:12:33,880
अगर यह कह देगा जिस पर आरोप लग रहा है कि मैंने ऐसा नहीं किया। बस इतना काफी

179
00:12:33,880 --> 00:12:37,920
है। ये कोई बात होती है क्या? कोई गली

180
00:12:37,920 --> 00:12:42,160
का कुत्ता कोई गली का कुत्ता जिसको खाज

181
00:12:42,160 --> 00:12:46,240
है वह अगर कोई आरोप लगाने लगेगा किसी के ऊपर एक

182
00:12:46,240 --> 00:12:50,240
सभ्रांत व्यक्ति के ऊपर तो हर गली के कुत्ते के लिए अगर उसने आवाज उठाई है

183
00:12:50,240 --> 00:12:54,240
तो वो आकर के स्पष्टीकरण दे क्यों दे भाई कोई ऐसा आधार

184
00:12:54,240 --> 00:12:58,240
तो हो कोई ऐसी ठोस बात तो हो जिसके लिए बोलने जाया जाए

185
00:12:58,240 --> 00:13:02,320
रामपाल ने भी तो शंकराचार्य को बुलाने का दिखावा किया था तब वहां पर क्यों नहीं बोलते हो

186
00:13:02,320 --> 00:13:07,760
जाकर के तब तो रामपाल के विरोध में शंकराचार्य का पक्ष लेते

187
00:13:07,760 --> 00:13:12,240
तो दोगलापन है ना रामपाल ने भी कहा है कि मैंने चारों शंकराचार्य

188
00:13:12,240 --> 00:13:16,240
को बुलाया पर यही सिद्धांत है कि हर गली को कुत्ते के भोकने पर हम नहीं जा सकते

189
00:13:16,240 --> 00:13:20,800
भैया स्पष्टीकरण देने तो क्योंकि शंकराचार्य

190
00:13:20,800 --> 00:13:25,040
ने स्पष्टीकरण नहीं दिया गए नहीं तो तुम मान लो रामपाल ने जो भी थ्योरी

191
00:13:25,040 --> 00:13:27,440
लिखी है वो सही है

192
00:13:27,440 --> 00:13:32,000
मान लोगे तुम्हारे जैसे लोग जो है ना

193
00:13:32,000 --> 00:13:36,000
तुम्हारे जैसे लोगों के गाल पर तमाचा है तो मैं

194
00:13:36,000 --> 00:13:40,160
प्रबुद्ध लोगों से कुछ बातें कर रहा था। जो प्रबुद्ध लोग हैं जो समझदारी से

195
00:13:40,160 --> 00:13:44,320
ध्यान देते हैं बिंदुओं पर मैं उनसे यह कहना चाहता हूं कि आपको

196
00:13:44,320 --> 00:13:48,320
मैंने उदाहरण प्रस्तुत किया है। ये रिकॉर्डिंग स्क्रिप्टेड

197
00:13:48,320 --> 00:13:52,720
है वगैरह वगैरह जो भी चीजें हैं इसके बारे में वो सब बातें एक तरफ है। मगर

198
00:13:52,720 --> 00:13:56,880
हम इस और प्रभुत्व लोगों का जो न्यूट्रल है जो ये कहते हैं कि हम

199
00:13:56,880 --> 00:14:00,960
हमारे लिए शिवश भी अच्छा है और हमारे लिए निगराचार्य जी और

200
00:14:00,960 --> 00:14:04,960
जो ये कहते हैं कि क्या कहते हैं जो

201
00:14:04,960 --> 00:14:09,040
जो प्रमाद फैला हुआ है जल्दी से जल्दी जो यह चाहते हैं कि धर्म का उत्थान हो धर्म की

202
00:14:09,040 --> 00:14:13,440
रक्षा हो जिनके लिए धर्म पहले है जिनके लिए यह नहीं है कि मुझे भगवतानंद

203
00:14:13,440 --> 00:14:17,440
को बचाना है या जिनके लिए ये नहीं है कि मुझे शिवश नारायण द्विवेदी को

204
00:14:17,440 --> 00:14:21,520
बचाना है या मुझे मठ को बचाना है जिनके लिए ये नहीं

205
00:14:21,520 --> 00:14:25,800
या मुझे निग्रह संप्रदाय को बचाना है जिनके लिए नहीं है मुझे धर्म को बचाना

206
00:14:25,800 --> 00:14:30,720
है मुझे ईश्वर के अस्तित्व को बचाना है

207
00:14:30,720 --> 00:14:34,880
वेद को बचाना है जिनके लिए यह है मैं उनका उनका इस ओर ध्यान

208
00:14:34,880 --> 00:14:39,040
खींचना चाह रहा हूं कि विदाउट एक्सप्लेनेशन या जो भी

209
00:14:39,040 --> 00:14:42,480
चीजें यहां प्रस्तुत की जा रही है कि भैया मैसेज मैंने दिखा

210
00:14:42,480 --> 00:14:46,560
दिया या फलाने ने ये मैसेज किया था फलाने ने मुझे ये किया

211
00:14:46,560 --> 00:14:50,880
था वो किया था क्या इनको आधार बना करके हम किसी

212
00:14:50,880 --> 00:14:55,120
पर गंभीर आरोप लगा सकते हैं हम जा करके उसकी जांच पड़ताल

213
00:14:55,120 --> 00:14:59,200
अवश्य कर सकते हैं उनके आधार पर वो भी हमारे ऊपर है कि हमारे पास समय

214
00:14:59,200 --> 00:15:03,200
है कि नहीं है मगर हम उसके आधार पर किसी को निर्णायक रूप में गलत तो

215
00:15:03,200 --> 00:15:07,520
नहीं कह सकते ठीक है

216
00:15:07,520 --> 00:15:11,760
और बाकी ये जो श्रंखला है इसमें और भी काफी

217
00:15:11,760 --> 00:15:15,920
सारी सामग्रियां हैं क्योंकि उनका सिद्धांत है कि कहीं से कोई भी सामग्री

218
00:15:15,920 --> 00:15:19,920
आती है तो उसके आधार पर सामने वाला आरोपी है तो उन्हीं के सिद्धांत को फॉलो करते

219
00:15:19,920 --> 00:15:23,920
हुए ये सब चीजें डाली जाएंगी और वो स्वीकार करते जाए अपने लिए

220
00:15:23,920 --> 00:15:28,000
है ना वरना वो इस चीज को स्वीकार करें कि ऐसे सुनी सुनाई बातों पर

221
00:15:28,000 --> 00:15:32,000
विश्वास नहीं किया जा सकता ठीक है अब दूसरी बात

222
00:15:32,000 --> 00:15:36,400
यह है कि जो लोग खुद को

223
00:15:36,400 --> 00:15:40,400
और इस बारे में मैंने वह भी इसी इसी चीज को वो

224
00:15:40,400 --> 00:15:44,400
करने के लिए मैंने बताया था कि कुछ लोग आपके बारे में कह रहे हैं तुम्हारे बारे

225
00:15:44,400 --> 00:15:48,640
में कह रहे हैं कि तुम हस्तमैथुन के आदतन वो हो शिकार और उसका इलाज

226
00:15:48,640 --> 00:15:52,720
करा रहे हो। तो क्या इस तरह की बातें हमें जो सुनाई दे रही है तो हम

227
00:15:52,720 --> 00:15:56,800
लोगों को क्या ये मान लेना चाहिए? कुछ लोग ऐसी बातें कह रहे हैं कि तुमने

228
00:15:56,800 --> 00:15:57,760
वो उसमें

229
00:15:57,760 --> 00:16:01,760
बहुत ही वैसे आशिक थे सरफिरे टाइप के अपने उसमें पीछे की ऐज

230
00:16:01,760 --> 00:16:04,280
में या

231
00:16:04,280 --> 00:16:08,400
फिर या फिर हाइपर सेक्सुअलिटी थी तुम्हारे बारे में ऐसी बातें भी हो

232
00:16:08,400 --> 00:16:12,400
रही है और भी चीजें हैं और गाली तो तुमने खुद स्वीकार किया ही है

233
00:16:12,400 --> 00:16:16,480
कि तुम देते हो आगे उस पर बात करेंगे कि गाली तुम्हारा देना कहां तक सही

234
00:16:16,480 --> 00:16:21,480
है जो तुमने ताल ठोकी है गाली देने की और उसमें एक कुतर्क भी किया है

235
00:16:21,480 --> 00:16:25,960
तो यह तो बात एक ये उनके गाल पर तमाचा

236
00:16:25,960 --> 00:16:31,000
पड़ा

237
00:16:31,000 --> 00:16:35,120
कि ये तो बात एक रही कि उनके गाल पर तमाचा

238
00:16:35,120 --> 00:16:39,280
है जो ऐसी सुनी सुनाई बातों का आधार बना करके अपनी चीजें कहना चाहते

239
00:16:39,280 --> 00:16:43,360
हैं। और ये ये जो सामग्री है ये केवल हमारे पास नहीं

240
00:16:43,360 --> 00:16:47,360
आ रही है। ये चीजें ये बातें तुम्हारे Facebook के कमेंट्स में भी लोग कर

241
00:16:47,360 --> 00:16:49,960
रहे

242
00:16:49,960 --> 00:16:54,280
हैं। और जो लोग बुलाने की बात को नहीं जानते हैं जब

243
00:16:54,280 --> 00:16:58,400
हमने आक्रमण चालू किया जब पहले हम क्या कर रहे थे कि हम हाथ

244
00:16:58,400 --> 00:17:03,000
जोड़ रहे थे हम हाथ जोड़ रहे थे मत करो इसको मत खींचो

245
00:17:03,000 --> 00:17:07,200
मत एक भयंकर युद्ध को तुम आमंत्रित करो

246
00:17:07,200 --> 00:17:11,680
इशारा कर रहे थे मगर नहीं समझे

247
00:17:11,680 --> 00:17:13,120
तो ठीक है तुम्हें

248
00:17:13,120 --> 00:17:17,520
युद्ध चाहिए तो युद्ध ही सही तो जब हमने ऐसा किया

249
00:17:17,520 --> 00:17:21,600
जब हमने ऐसा किया था तभी तभी हमने ये कह दिया था

250
00:17:21,600 --> 00:17:26,160
कि भगवत आनंद जिस दिन तुम्हारे अंदर सामर्थ्य हो उस दिन आप लाइव के लिए बता देना हमको

251
00:17:26,160 --> 00:17:31,600
कब करना है। ठीक है? तो

252
00:17:31,600 --> 00:17:35,840
लाइव के लिए हमने बोल चुके हैं भगवत आनंद कब बता रहे हैं आना चाहते हैं लाइव

253
00:17:35,840 --> 00:17:39,840
आप बताएं और करो लाइव पता चलेगा फिर

254
00:17:39,840 --> 00:17:43,840
दूध का दूध और पानी का पानी और कई

255
00:17:43,840 --> 00:17:49,440
बार कह चुके हैं आज भी कह रहे हैं दोबारा। ये तो रही ये बात।

256
00:17:49,440 --> 00:17:54,000
अब बात करते हैं कि कुछ कुतर्की गुरु द्रोही हैं।

257
00:17:54,000 --> 00:17:58,160
उनकी एक लिस्ट तैयार हो रही है अच्छे से जो जो गुरुद्रोही

258
00:17:58,160 --> 00:18:02,400
है जो हमारे संज्ञान में है और जो इंटरनेट के माध्यम

259
00:18:02,400 --> 00:18:08,400
से उपद्रव कर रहे हैं या जो भी कर रहे हैं उन सब पर भी कारवाई तो होगी होनी

260
00:18:10,600 --> 00:18:15,040
है। फिलहाल बात यह है कि जो नीच

261
00:18:15,040 --> 00:18:19,040
गुरु द्रोही है जो भगवतानंद को पूज रहे उसके

262
00:18:19,040 --> 00:18:23,520
चरणों को पूज रहे यह कहते हुए की भगवतानंद शोधन कर रहा है

263
00:18:23,520 --> 00:18:29,320
मठ का भगवतानंद शोधन कैसे कर रहा है भाई

264
00:18:29,320 --> 00:18:33,680
भगवतानंद शंकराचार्य जो है पूरी के वो शास्त्रोक्त

265
00:18:33,680 --> 00:18:37,760
खंडन एक तरफ मगर पूरी के शंकराचार्य जी को भगवतानंद

266
00:18:37,760 --> 00:18:42,320
गुरु द्रोही सिद्ध कर चुका अशास्त्रीय सिद्ध कर चुका

267
00:18:42,320 --> 00:18:46,680
करपात्री जी महाराज को वो अपनी वाणी के द्वारा सिद्ध नहीं कर

268
00:18:46,680 --> 00:18:50,720
चुका। उसने वो जो गिलहरी प्रयास होते हैं ना वो

269
00:18:50,720 --> 00:18:55,080
किए हैं। वो प्रयास किए

270
00:18:55,080 --> 00:18:59,200
उसने। तो अपनी वाणी के द्वारा उसने ना

271
00:18:59,200 --> 00:19:03,200
जाने कितनी बार पूरी के शंकराचार्य

272
00:19:03,200 --> 00:19:07,280
जी जो है वर्तमान के उनको उसने अशास्त्रीय

273
00:19:07,280 --> 00:19:11,280
सिद्ध कर चुका। अशास्त्रीय का मतलब अधर्म। अशास्त्री

274
00:19:11,280 --> 00:19:15,920
का मतलब अधर्म कि उन्होंने वो कहीं-क पर अधर्मी भी है।

275
00:19:15,920 --> 00:19:20,400
करपात्री जी महाराज को गुरु द्रोही सिद्ध कह चुका है। करपात्री

276
00:19:20,400 --> 00:19:24,960
जी महाराज जैसे सर्वभूत हृदय धर्म सम्राट

277
00:19:24,960 --> 00:19:25,680
करपात्री

278
00:19:25,680 --> 00:19:29,840
जी महाराज को भी यह जो है अधर्मी सिद्ध करने का प्रयास

279
00:19:29,840 --> 00:19:34,000
कर चुका है। कह चुका है कि भैया वो भी गुरु द्रोही किए गुरुद्रोह किए फलाने

280
00:19:34,000 --> 00:19:38,160
फलाने चीज को लेकर के और केवल उन

281
00:19:38,160 --> 00:19:43,120
विषयों में ही नहीं जो शास्त्र का कहीं पर वो हो रहा है। ये ध्यान रखिएगा

282
00:19:43,120 --> 00:19:47,120
अलग दूसरे विषयों में भी जिसका शास्त्र से कोई मतलब नहीं है। उसमें भी प्रयास कर

283
00:19:47,120 --> 00:19:51,200
चुका है कि ये गलत लोग हैं। शंकराचार्य गलत लोग हैं। शंकराचार्य

284
00:19:51,200 --> 00:19:55,360
की गद्दी पर यह कह रहा है ना कि मैं मठ की रक्षा कर रहा हूं। मठ का शोधन कर रहा हूं। अबे तू शंकराचार्य

285
00:19:55,360 --> 00:20:00,880
को भी तो गलत ही कह रहा है ना। तो काहे का शोधन है?

286
00:20:00,880 --> 00:20:05,600
यह शोधन है तेरा और ये नीच गुरु द्रोही ये अपने

287
00:20:05,600 --> 00:20:09,600
किराए के बाप से पूछे जाकर के ये मठ

288
00:20:09,600 --> 00:20:13,000
का शोधन किस प्रकार से

289
00:20:13,000 --> 00:20:17,040
है किस प्रकार से मटका शोधन है जिसमें तुम मठ का जो जो

290
00:20:17,040 --> 00:20:21,040
सबसे बड़ी गद्दी है उसी को तुम वो

291
00:20:21,040 --> 00:20:25,360
करना चाह रहे हो बदनाम कि ये भी अधर्म का आलंबन

292
00:20:25,360 --> 00:20:29,360
ले रही है कई जगह ठीक है अधर्मी अधर्मी कह रहे हो उसको को

293
00:20:29,360 --> 00:20:33,400
तुम तो कौन सा मठ? अच्छा ठीक

294
00:20:33,400 --> 00:20:37,920
है। पूरी के शंकराचार्य जी को तो कर ही रहे हैं।

295
00:20:37,920 --> 00:20:40,800
ज्योति मठ वाले जो हैं मुक्तेश्वर जी क्या उसके

296
00:20:40,800 --> 00:20:44,800
विरुद्ध उसने नहीं बोला? उनके विरुद्ध उसने नहीं बोला। उस गद्दी के विरुद्ध उसने

297
00:20:44,800 --> 00:20:49,120
नहीं बोला। ज्योतिर मठ के विरुद्ध उसने नहीं बोला। वहां के परिकों

298
00:20:49,120 --> 00:20:53,360
के विरुद्ध उसने नहीं बोला। बोला है। तो पूरी की

299
00:20:53,360 --> 00:20:59,360
व्यवस्था गई और ज्योतिर्मठ की व्यवस्था गई।

300
00:20:59,360 --> 00:21:03,360
और मुझे पता नहीं है कि यह द्वारका वालों के लिए कुछ

301
00:21:03,360 --> 00:21:07,360
बोला है कि नहीं बोला है। मगर ऐसा नहीं है कि भविष्य में कभी

302
00:21:07,360 --> 00:21:11,360
बोलेगा भी नहीं। वो भी कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। बोल देगा और श्रृंगेरी

303
00:21:11,360 --> 00:21:15,520
के लिए भी बोल चुका है। तो इसका मतलब क्या है कि तुम ये सोच

304
00:21:15,520 --> 00:21:19,680
रहे हो कि धर्म की रक्षा कर रहा है। तुम ये सोच रहे हो पहले तो मठ पे आ जाओगे। पूरी मठ

305
00:21:19,680 --> 00:21:23,760
की रक्षा कर रहा है। तो पूरी मठ की रक्षा कर रहा है तो केवल परिकरों तक सीमित

306
00:21:23,760 --> 00:21:27,920
रहता ना। यह तो हम अनेकानेक जगह पर

307
00:21:27,920 --> 00:21:32,080
जगतुगुरु शंकराचार्य जो वर्तमान पूरी पीठाधीश्वर जिनके

308
00:21:32,080 --> 00:21:36,080
आगे इसकी दो ढेले की दो ढेले का कोई

309
00:21:36,080 --> 00:21:40,160
अस्तित्व नहीं है। दो कौड़ी का मगर

310
00:21:40,160 --> 00:21:44,240
ये उनकी उनकी भी अवमानना कर रहा है। उनका भी उपहास उड़ा रहा है। उनके बारे

311
00:21:44,240 --> 00:21:48,480
में भी चारों शंकराचार्यों के लिए बना रहा है। तो

312
00:21:48,480 --> 00:21:52,560
ये तो केवल मठ ही नहीं पूरी परंपरा को ही लुप्त कर देना चाहता

313
00:21:52,560 --> 00:21:56,560
है। तो नीच गुरु द्रोहियों तुम्हें यह दिखाई नहीं पड़ रहा

314
00:21:56,560 --> 00:22:00,880
जो तुम इसको पूज रहे हो। तुम यह मानते हो ना कृपात्री

315
00:22:00,880 --> 00:22:05,520
जी गुरु द्रोही थे। तुम्हारा गुरु गुरु द्रोही था। क्योंकि ये तो यही बोल रहा है।

316
00:22:05,520 --> 00:22:09,680
तो ये सबसे बड़े नीच गुरु द्रोही है जो इसको इसका समर्थन करते हैं।

317
00:22:09,680 --> 00:22:13,080
इसको इसकी पूजा करते

318
00:22:13,080 --> 00:22:17,240
हैं। तुम इसका समर्थन कर रहे हो ना? जो है थोड़े

319
00:22:17,240 --> 00:22:21,360
बहुत पूरे मठ में जो कुछ एक दो%

320
00:22:21,360 --> 00:22:25,440
इसके प्रभाव में आकर के ऐसा कर रहे हैं क्योंकि इसके अपने तो शिष्य है नहीं ये बोलता

321
00:22:25,440 --> 00:22:29,440
है इसकी क्या मंडली है जिस दिन मंडली होगी और इसने सार्वजनिक कर दी

322
00:22:29,440 --> 00:22:33,600
सूचना उस दिन क्या होगा फिर वहीं पे इसका रोल इसकी

323
00:22:33,600 --> 00:22:37,680
फिल्म में जाकर के मैं निभाऊंगा जिस दिन ये अपना

324
00:22:37,680 --> 00:22:42,280
जीवन सार्वजनिक करेगा तो उस दिन जो

325
00:22:42,280 --> 00:22:46,440
है इसकी फिल्म में जाकर इसका रोल तो फिर मैं

326
00:22:46,440 --> 00:22:50,560
निभाऊंगा। तो ये बिल्कुल ठीक वही मैंने अभी पहले कहा ना ये बिल्कुल

327
00:22:50,560 --> 00:22:54,800
ठीक उसी तरीके से है जैसे कोई अपना बाप बदल लेता है। वैसे ही

328
00:22:54,800 --> 00:22:58,880
इन लोगों ने कहने को ये गुरु गुरु के

329
00:22:58,880 --> 00:23:02,960
वो है शिष्य हैं। मगर जो गुरु का खंडन मैं तो कह रहा हूं अपमान तो

330
00:23:02,960 --> 00:23:07,760
बाद की बात है। जो गुरु का खंडन कर रहा है तुम उसके पीछे कैसे हो सकते हो?

331
00:23:07,760 --> 00:23:11,680
उसके तुम अनुयाई कैसे हो सकते हो? समर्थन कैसे हो सकते हो? जो गुरु को यह

332
00:23:11,680 --> 00:23:15,760
कह रहा है कि भैया तुम गुरु द्रोही हो। जो गुरु के गुरु को यह कह रहा है कि तुम

333
00:23:15,760 --> 00:23:20,520
गुरु द्रोही हो और ऐसा कहने वाले के

334
00:23:20,520 --> 00:23:24,560
जो समर्थक हैं और वो

335
00:23:24,560 --> 00:23:28,640
भी अपने आप को शिष्य कह रहे हैं अजीब है। आ जाना किसी

336
00:23:28,640 --> 00:23:32,920
दिन आमने सामने ऐसा कोई हो तो उस दिन बात हो

337
00:23:32,920 --> 00:23:37,760
जाएगी। तो यह सारी बातें एक तरफ ही हो गई।

338
00:23:37,760 --> 00:23:41,760
अब एक बात आती है कि मैं कुछ मैं कुछ

339
00:23:41,760 --> 00:23:45,760
दिनों से देख रहा हूं। कि भगवतानंद का जो वो था ना

340
00:23:45,760 --> 00:23:50,240
सिग्मा एटीट्यूड वो थोड़ा प्रभावित हो गया।

341
00:23:50,240 --> 00:23:54,480
थोड़ा बदला मैंने अपनी लास्ट लाइव में भी कहा था बहुत बढ़िया है।

342
00:23:54,480 --> 00:24:00,080
अच्छा अच्छा है। थोड़ा

343
00:24:00,080 --> 00:24:05,320
थोड़ा डाउन हुआ मामला। ठीक

344
00:24:05,320 --> 00:24:10,000
है? तो अभी क्या है? मैंने अगर हम लोग एक सिनेरियो में देखें

345
00:24:10,000 --> 00:24:14,880
तो भगवतानंद ने विधवा विलाप कैसे किया है रोया कैसे वो देखो

346
00:24:14,880 --> 00:24:18,880
उसका एक सीन है जब बिल्कुल पॉइंट की बात आई थी ना कुछ चीजें

347
00:24:18,880 --> 00:24:22,960
ऐसी जो बिल्कुल अकाट थे उसमें कुछ कर ही नहीं सकते तो ऐसी एक नब्ज़ है भगवत

348
00:24:22,960 --> 00:24:27,600
आनंद इस पूरे सिनेरियो में वो नब्ज़ क्या है कि इसने बोला

349
00:24:27,600 --> 00:24:31,760
कि लास्ट में वीडियो के लास्ट में जो

350
00:24:31,760 --> 00:24:35,760
विजय श्री है वह देखिए किस तरीके से पूरी शंकराचार्य जी के मंच

351
00:24:35,760 --> 00:24:39,840
पर बैठी है। और आगे उसी क्रम में यह भी बोला है कि वह अपने व्यापार

352
00:24:39,840 --> 00:24:44,000
को बढ़ावा दे रही है। ठीक है? अब इसने अपने

353
00:24:44,000 --> 00:24:48,080
डिस्क्रिप्शन में बाद में शायद इसने उसको बदनाम करने के लिए

354
00:24:48,080 --> 00:24:52,720
कहा। विजय श्री को बदनाम करने के लिए कहा। अब उसके बाद

355
00:24:52,720 --> 00:24:57,040
इसने अपने डिस्क्रिप्शन में अपना सेफ साइड रखने के लिए यह भी लिख दिया

356
00:24:57,040 --> 00:25:01,200
कि भाई वह जो अंत में सब लोग उसको यह समझ रहे हैं वह यह नहीं है। वह वो

357
00:25:01,200 --> 00:25:06,640
है और वह हमने अशास्त्रीयता दिखाई है।

358
00:25:06,640 --> 00:25:10,640
ठीक है। हमने जो है मंच की अशास्त्रीयता दिखाई है। इसलिए जो है

359
00:25:10,640 --> 00:25:14,640
हमने उस वीडियो को लगाया है। वो बात और है कि उसको लगाते हुए उन्होंने

360
00:25:14,640 --> 00:25:15,280
उसने उसमें

361
00:25:15,280 --> 00:25:19,280
बीच-बीच में क्लिम्स में विजय श्री के ही फोटो लगाए हैं। अब प्रॉब्लम

362
00:25:19,280 --> 00:25:23,440
क्या है? इसने बोला कि वो मैंने वाकलन

363
00:25:23,440 --> 00:25:28,160
से बोल दिया था बाद के वीडियोस में। तो वाकलन

364
00:25:28,160 --> 00:25:32,320
से बोला है। तो लोग समझ रहे हैं भैया डिस्क्रिप्शन में जो लिखा

365
00:25:32,320 --> 00:25:36,440
है वह बात सही है। तो यह उलझ गया। यह है ना

366
00:25:36,440 --> 00:25:40,640
कि जो रावण भी था उसकी भी एक चीज हो गई थी उससे।

367
00:25:40,640 --> 00:25:44,640
तो यह इस रावण की गलती है जिसमें ये

368
00:25:44,640 --> 00:25:48,640
फंसेगा और फंसा है। अब दूसरी बात ये आती

369
00:25:48,640 --> 00:25:52,880
है कि हंसी इस बात की है कि आप देखिएगा जब इसने इस पॉइंट

370
00:25:52,880 --> 00:25:56,960
पर बात की है वाक स्कलन वाली तो ये अटक रहा है। उसमें मतलब जो वो था

371
00:25:56,960 --> 00:26:00,960
ना उसका वो ओरा कि सबको सुनाता था। सबकी जो है निग्रह करने

372
00:26:00,960 --> 00:26:05,280
आया। वो ओरा देखिएगा। इसका देखिए कैसे चेंज हो रहा है।

373
00:26:05,280 --> 00:26:09,360
वह हमारा वाक स्कलन से हो गया था। ऐसा वैसा यह भी वाकलन से हो गया। यह होता

374
00:26:09,360 --> 00:26:13,760
है। तो वहां पर इसको देखना कि ये अटक रहा है।

375
00:26:13,760 --> 00:26:18,000
घबरा रहा है। और गलती है घबराएगा ये आदमी। तो

376
00:26:18,000 --> 00:26:22,960
उसको एक एट ए ग्लांस इन दो तीन सीन्स को आप रखिए कि उसको रखिए।

377
00:26:22,960 --> 00:26:27,040
और फिर दूसरा एक सीन रखिए। कौन सा? जिसमें हाथ जोड़ के कह

378
00:26:27,040 --> 00:26:30,480
रहा है कि मैं उस ध्वज का ध्वज की सौगंध खा रहा हूं। गंगा की सौगंध

379
00:26:30,480 --> 00:26:34,560
मैं ध्वस्त की सौगंध खा रहा हूं। मैं जो है जनेऊ

380
00:26:34,560 --> 00:26:38,560
की सौगंध खा रहा हूं। मैं अपने पीछे कामाख्या मंदिर है उसकी सौगंध खा

381
00:26:38,560 --> 00:26:42,720
रहा हूं। मेरा कोई गुप्त रोग का उपचार नहीं चल

382
00:26:42,720 --> 00:26:47,280
रहा है। शिवश ठीक है। आप देखिए

383
00:26:47,280 --> 00:26:52,720
वो रावण अहंकारी वो कैसे उसका ओरा चेंज हो रहा है। फिर

384
00:26:52,720 --> 00:26:57,280
तीसरे वाले में क्या हो रहा है? तीसरे वाले में विधवा विलाप हो रहा है

385
00:26:57,280 --> 00:27:01,360
क्या आचार्य रामशंकर शुक्ल जी वो जो है मैं

386
00:27:01,360 --> 00:27:05,520
जो है शालिग्राम भगवान को हाथ में लेकर के शपथ खा लूंगा

387
00:27:05,520 --> 00:27:10,080
मेरे पास इससे ज्यादा और कुछ नहीं है

388
00:27:10,080 --> 00:27:14,320
तो इन तीन चार सीन्स को आप एक ग्लांस में देखेंगे ना ऑब्जर्व

389
00:27:14,320 --> 00:27:18,800
करेंगे एट ए ग्लांस तो वो सीन याद आ जाएगा

390
00:27:18,800 --> 00:27:23,680
घातक नाम की एक मूवी थी उसमें जब कातिया के सारे

391
00:27:23,680 --> 00:27:28,000
भाई खत्म हो जाते हैं। कुछ एक दो ही रह जाते हैं। तो कातिया एक डायलॉग मारता

392
00:27:28,000 --> 00:27:32,320
है कि सात भाई थे हम सात।

393
00:27:32,320 --> 00:27:37,280
सातों के साथ शेर थे शेर। कोई कुछ नहीं कर पाया। काशीनाथ

394
00:27:37,280 --> 00:27:41,360
पर तूने रुला दिया। पर तूने रुला दिया।

395
00:27:41,360 --> 00:27:45,360
तो ये जो रुला देने वाली नौबत है ना ये अब इनकी दिख

396
00:27:45,360 --> 00:27:45,860
रही

397
00:27:45,600 --> 00:27:49,600
है। ए ग्लास ये एक जोक था। अब थोड़ा पॉइंट्स पर आ

398
00:27:49,600 --> 00:27:53,360
जाते हैं।

399
00:27:53,360 --> 00:27:57,760
तो पहली बात है कि

400
00:27:57,760 --> 00:28:02,400
उसने एक बात कही है रोतेरोते विधवा विलाप के समय कि आचार्य रामशंकर

401
00:28:02,400 --> 00:28:07,480
शुक्ल जो हैं वो हाथ में शालिग्राम को लेकर के

402
00:28:07,480 --> 00:28:11,520
ये पहले एक बात एक संक्षिप्त में मैं आपको जो भी

403
00:28:11,520 --> 00:28:15,600
व्यक्ति इसको देख रहा है लाइव को उसको मैं याद दिला दूं कि

404
00:28:15,600 --> 00:28:19,760
तुम्हारा जो अगर तुम ऐसा समझ रहे हो कि जो निग्रचार है वह शोधन

405
00:28:19,760 --> 00:28:23,840
की दृष्टि से कर रहा है जो कर रहा तो यह बहुत बड़ा

406
00:28:23,840 --> 00:28:28,240
तमाचा है ये सच्चाई तुम जैसे लोगों के मुंह पर क्योंकि

407
00:28:28,240 --> 00:28:33,120
वह शोधन की दृष्टि से अगर कर रहा होता तो वो केवल परिकरों तक सीमित रहता।

408
00:28:33,120 --> 00:28:37,120
उसने अनेकानेक जगह शंकराचार्यों को

409
00:28:37,120 --> 00:28:41,320
भी गलत सिद्ध किया है। सिद्ध करने का प्रयास किया

410
00:28:41,320 --> 00:28:45,440
है। उसने अनेकानेक जगह जो गुरु गद्दी पर

411
00:28:45,440 --> 00:28:49,440
बैठे हैं जो निर्णायक है धर्म और अधर्म के उनको भी उसने

412
00:28:49,440 --> 00:28:53,600
गलत कहा है। उनका भी उपहास उड़ाया है। अवमानना की

413
00:28:53,600 --> 00:28:58,080
है। अपमान किया है। तो अगर अवमानना अपमान तिरस्कार

414
00:28:58,080 --> 00:29:00,720
बहिष्कार इन सबको छोड़ भी दिया जाए।

415
00:29:00,720 --> 00:29:04,880
फिर भी ऐसे आक्षेप लगाए हैं जो वापस नहीं हो सकते। करपात्री

416
00:29:04,880 --> 00:29:08,960
जी ने अगर भगवतानंद की जानकारी सही माने तो करपात्री

417
00:29:08,960 --> 00:29:13,040
जी ने अगर पांच पीठे कही तो शंकराचार्य जी गुरु द्रोही है क्योंकि वो चार पीठे

418
00:29:13,040 --> 00:29:17,200
कहते कहते ये इसकी जानकारी है वो उसका जो उदाहरण है उसका

419
00:29:17,200 --> 00:29:21,920
जो निराकरण है वो कई बार हम लोग दे चुके हैं मगर ये इसकी जानकारी

420
00:29:21,920 --> 00:29:26,080
तो ये केवल ये नहीं है कि मुझे पूरी मठ की चिंता है इसको

421
00:29:26,080 --> 00:29:30,160
अपने लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य के रूप में ख्यापित होना है तो इसलिए

422
00:29:30,160 --> 00:29:34,160
इसे अन्य जो सबसे स्ट्रांग जगह हैं उन सबको जो है

423
00:29:34,160 --> 00:29:38,240
बाहर करना है और वो कर रहा है और तुम इसके समर्थक होते

424
00:29:38,240 --> 00:29:42,400
हुए भी खुद को गुरु द्रोही या धर्मनिष्ठ सोच रहे हो तो ये तुम्हारी

425
00:29:42,400 --> 00:29:46,560
सबसे बड़ी बेवकूफी है अगर बात मठ के परिकों की होती तो मठ के

426
00:29:46,560 --> 00:29:50,640
परिकों तक सीमित रहता ना वो नहीं रहा उसने

427
00:29:50,640 --> 00:29:53,480
एन केन

428
00:29:53,480 --> 00:29:57,600
प्रकानन जगतगुरु शंकराचार्य को पूरी वाले हो या ज्योतिर मठ

429
00:29:57,600 --> 00:30:01,920
हो सबको गलत साबित किया है तो ना तो वो मठ का चिंतक है

430
00:30:01,920 --> 00:30:05,920
ना ही वो परंपरा का चिंतक ना ही वह परंपरा का चिंतक

431
00:30:05,920 --> 00:30:09,920
है और अंतत गत्वा जब वो परंपरा का चिंतक नहीं है तो वह धर्म का भी

432
00:30:09,920 --> 00:30:14,400
चिंतक नहीं है क्योंकि धर्म का चिंतक होता

433
00:30:14,400 --> 00:30:16,400
तो हमने उसको

434
00:30:16,400 --> 00:30:20,880
अनेक प्रकार से कहा कि भाई इस तरह के जो

435
00:30:20,880 --> 00:30:24,880
वो है विषय इनको आप ऑनलाइन पर डिस्कस मत

436
00:30:24,880 --> 00:30:28,960
करो। ये किसी के निजी जीवन से जुड़ी हुई बातें हैं। आप जो है

437
00:30:28,960 --> 00:30:32,960
उसमें आ जाओ। तो इसने जो है उदारता को कायरता समझ लिया। इसको धर्म

438
00:30:32,960 --> 00:30:36,960
की चिंता होती तो आता ना यह। इसको तो मसाला चाहिए था। इसको व्यूज

439
00:30:36,960 --> 00:30:40,960
चाहिए थे। आज से कुछ समय पूर्व इसके जिन वरिष्ठ

440
00:30:40,960 --> 00:30:44,960
लोगों के साथ ये जीवन यापन करता था। अ

441
00:30:44,960 --> 00:30:49,040
उनमें से एक वो भी है क्या कहते थे प्रशांत मिश्र जी जिसका इन्होंने अपनी

442
00:30:49,040 --> 00:30:53,040
उसमें नाम लिया है। उनका उन्होंने बताया कि यह

443
00:30:53,040 --> 00:30:57,040
बोल रहा इनसे बोला गया किसी ने कि भाई तुम जो अपना पक्ष प्रस्तुत

444
00:30:57,040 --> 00:31:01,280
करते हो शास्त्र की बातों में वो जो पक्ष प्रस्तुत करते हो तो

445
00:31:01,280 --> 00:31:05,440
तुम एक काम किया करो किसी का नाम ले मत प्रस्तुत किया। मतलब खंडन जो करते हो

446
00:31:05,440 --> 00:31:09,560
किसी मिथ्या का तो तुम नाम ले मत किया करो। तुम जो

447
00:31:09,560 --> 00:31:13,760
है केवल अपना पक्ष प्रस्तुत कर दिया करो। ऐसा किसी ने कहा

448
00:31:13,760 --> 00:31:17,920
तो इसका जवाब था कि व्यूज नहीं आते। व्यूज

449
00:31:17,920 --> 00:31:22,240
नहीं आते। यह जवाब था इसका। तो

450
00:31:22,240 --> 00:31:26,320
इसका अर्थ क्या हुआ कि इसका जो ताना बना है यह धर्म का कैरी

451
00:31:26,320 --> 00:31:30,800
मिनाटी बनना चाहता है। और जो प्रबुद्ध जन है जो न्यूट्रल

452
00:31:30,800 --> 00:31:31,520
लोग हैं जो

453
00:31:31,520 --> 00:31:35,520
निष्पक्ष दृष्टि से देखेंगे तो क्या होगा? उनको सच्चाई समझ

454
00:31:35,520 --> 00:31:39,920
में आएगी कि आज देख और भी आएंगी रिकॉर्डिंग्स और भी WhatsApp चैट इत्यादि

455
00:31:39,920 --> 00:31:44,720
आएंगे। तो ये सारी चीजें हैं। अब इसने एक बात कही

456
00:31:44,720 --> 00:31:48,720
कि भाई जो रोतेरोते

457
00:31:48,720 --> 00:31:52,720
एक बात कही है कि भाई वो जो आचार्य राम शंकर पहले तो यह बोला कि आज

458
00:31:52,720 --> 00:31:57,360
विश्वासघात विश्वासघात का मूर्तिमान जो वो है

459
00:31:57,360 --> 00:32:01,600
वो साक्षात वो देख लिया मूर्तिमान रूप देख लिया विश्वासघात का मैंने

460
00:32:01,600 --> 00:32:05,760
ये सब विधवा विलाप इसने किया अगर तेरे अनुसार

461
00:32:05,760 --> 00:32:10,080
ये विश्वासघात है और आचार्य रामशंकर शुक्ल जी जो है वो

462
00:32:10,080 --> 00:32:14,080
असत्य भाषण कर रहे हैं तो क्या तूने विश्वास विश्वासघात नहीं

463
00:32:14,080 --> 00:32:18,080
किया था पूरी मठ में जब तू शास्त्रज्ञ शाखा का मेंबर

464
00:32:18,080 --> 00:32:22,160
था तूने खुद कहा तो तूने जब पूरी म से तुझे निकाल दिया गया धक्के

465
00:32:22,160 --> 00:32:26,400
मार करके तो फिर तूने बाहर जाकर के ये चीज जो चीज तूने छिपाई

466
00:32:26,400 --> 00:32:30,560
थी शास्त्रज्ञ तेरे अनुसार तूने छिपाई थी ये चीज

467
00:32:30,560 --> 00:32:34,920
कि जो प्रश्नों के उत्तर है वो भाई और कोई नहीं

468
00:32:34,920 --> 00:32:39,040
देता जबकि ये सब झूठ है क्या है क्या नहीं है

469
00:32:39,040 --> 00:32:43,040
क्या आवश्यकता अपनी वर्चस्वता को स्थापित करने के लिए बोलता है कि पूरी

470
00:32:43,040 --> 00:32:46,560
मठ से होने वाले जो प्रश्न थे उनके के उत्तर में देता था। तो इस

471
00:32:46,560 --> 00:32:50,560
बात को तू छुपाता था। दूर जाकर के तूने इस बात का ढेरा

472
00:32:50,560 --> 00:32:54,960
क्यों पीटा? तो ये विश्वासघात नहीं है क्या? तो विश्वासघात का मूर्तिमान

473
00:32:54,960 --> 00:32:59,000
रूप तू नहीं है क्या? तू भी है। अगर तेरे

474
00:32:59,000 --> 00:33:03,200
अनुसार हमारी हमारे अनुसार जो है आचार्य रामशंकर शुक्ल

475
00:33:03,200 --> 00:33:07,360
असत्य भाषण नहीं कर रहे हैं। असत्य भाषण नहीं कर सकते। मगर अगर तेरी जानकारी

476
00:33:07,360 --> 00:33:11,920
को तेरी जानकारी के अनुसार चला जाए तो तू खुद स्वयं मूर्तिमान

477
00:33:11,920 --> 00:33:17,920
विश्वासघात का रूप है।

478
00:33:18,000 --> 00:33:22,080
तो अब इसने कहा भाई कि अगर आचार्य रामशंकर

479
00:33:22,080 --> 00:33:27,720
शुक्ल जी जो हैं वो हाथ में शालिग्राम लेकर के

480
00:33:27,720 --> 00:33:31,840
और यह सौगंध खा लेंगे या शपथ ले लेंगे कि

481
00:33:31,840 --> 00:33:35,920
वो सत्य बोल रहे हैं तो मैं मान लूंगा। तो पहली तू

482
00:33:35,920 --> 00:33:39,920
यह बता कि विजय श्री फ्री मेंशनंस के

483
00:33:39,920 --> 00:33:44,160
लिए कार्यरत हैं। ठीक है? तूने जिसजिस

484
00:33:44,160 --> 00:33:48,320
को इसका आधार बनाया है उसको बुला। किसी को आधार बनाया

485
00:33:48,320 --> 00:33:52,480
ना किसी कहीं से साक्ष्य मिला ना उसको बुला और तू और

486
00:33:52,480 --> 00:33:56,800
वह दोनों मिलके हाथ में जल लेकर के शालिग्राम

487
00:33:56,800 --> 00:34:01,080
भगवान का वो लेकर के विग्रह लेकर के और यह शपथ

488
00:34:01,080 --> 00:34:02,080
ले

489
00:34:02,080 --> 00:34:06,080
सौगंध खा कि हां विजय श्री जो है फ्री मेंशन

490
00:34:06,080 --> 00:34:11,480
के लिए कार्यरत है। बोल खाएगा

491
00:34:11,480 --> 00:34:17,000
खा और शपथ खा

492
00:34:17,000 --> 00:34:21,360
कि पीडीएफ वाले को बुला जिसने तुझे पीडीएफ

493
00:34:21,360 --> 00:34:25,520
भेजी है। पीडीएफ वाले को बुला और उसके साथ

494
00:34:25,520 --> 00:34:29,600
लेकर के हाथ में शालिग्राम भगवान लेकर के शपथ खा

495
00:34:29,600 --> 00:34:33,600
कि उसके और तेरे पास प्रमाण है जो आक्षेप उस पीडीएफ

496
00:34:33,600 --> 00:34:38,160
के द्वारा लगाए गए। बोल खाएगा शपथ

497
00:34:38,160 --> 00:34:41,320
और शपथ खा

498
00:34:41,320 --> 00:34:45,600
कि जिस तरह से तू फतिया कस रहा है मेरे

499
00:34:45,600 --> 00:34:49,600
और विजय श्री को लेकर के तू शपथ कहा हाथ में

500
00:34:49,600 --> 00:34:53,680
लेकर के और जो जहां जिनके आधार पर तू ये बोलता है चीजें क्योंकि तू तो वहां

501
00:34:53,680 --> 00:34:57,760
है नहीं ना तूने अपने तूने अपने एक वीडियो में ऐसा तर्क दिया

502
00:34:57,760 --> 00:35:02,000
ना अपने पिता पिताजी के लिए अपने पिताजी के लिए तूने एक तर्क दिया है

503
00:35:02,000 --> 00:35:06,160
कि ये भाई साहब 400 500 किलोमीटर दूर बैठे हैं ना ये ना वहां वहां

504
00:35:06,160 --> 00:35:10,240
कथा सुन रहे थे, ये कर रहे थे, वो कर रहे थे। मगर वकालत इनहीं को करनी सबसे

505
00:35:10,240 --> 00:35:14,320
ज्यादा। इस तरह का तर्क दिया है कि जो दूर बैठा हुआ आदमी है वो ना बोले, जो

506
00:35:14,320 --> 00:35:17,720
वहां पर हो वही बोले। ऐसा तर्क तूने दिया है।

507
00:35:17,720 --> 00:35:21,760
तो तू तो दूर बैठा है इन मामलों में भी। तुझे कोई बता

508
00:35:21,760 --> 00:35:25,920
रहा है ना उनको साथ में ले। उनको साथ में ले और फिर

509
00:35:25,920 --> 00:35:30,000
शालिग्राम भगवान को हाथ में ले शपथ खा। कहां शपथ?

510
00:35:30,000 --> 00:35:34,400
कहां सौगंध? कि अवैध रिश्ता है या

511
00:35:34,400 --> 00:35:38,560
वो जो है मठ में जो है वह उनका कोई कुछ जो

512
00:35:38,560 --> 00:35:43,040
भी तूने आक्षेप लगाए अश्लील अभद्र

513
00:35:43,040 --> 00:35:47,680
नीचता वाले नीचता की पराकाष्ठा तो

514
00:35:47,680 --> 00:35:53,160
सब खा विजय श्री जो है व्यापारी है

515
00:35:53,160 --> 00:35:57,200
बोला व्यापार करने पहुंची है तो उसका भी तुझे कहीं से वो मिला है

516
00:35:57,200 --> 00:36:01,360
ना तू तो था नहीं तो वो जो मिला है तुझे वो उस व्यक्ति को मिला

517
00:36:01,360 --> 00:36:07,360
दोनों हाथ में शपथ खाओ और

518
00:36:11,800 --> 00:36:16,400
जितने जितने जो ये झूठ

519
00:36:16,400 --> 00:36:21,400
तूने बोले हैं जितने उसमें लोगों के नाम मेंशन किए हैं ज्यादातर

520
00:36:21,400 --> 00:36:25,520
तो नाम मेंशन नहीं करता है तू मगर जितने लोगों के तूने नाम

521
00:36:25,520 --> 00:36:29,760
मेंशन किए ज्यादातर तो तेरे को नकार चुके हैं। आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने नकार

522
00:36:29,760 --> 00:36:35,120
ही दिया। जो प्रशांत मिश्रा जी का तूने नाम लिया था उन्होंने नकार दिया।

523
00:36:35,120 --> 00:36:39,280
कि मैं इस बात के फेवर में नहीं जो मेरे नाम से इसने यह चक्र चलाया

524
00:36:39,280 --> 00:36:45,280
है। और क्या

525
00:36:55,880 --> 00:37:00,080
था? और क्या था? मैंने

526
00:37:00,080 --> 00:37:04,240
यह बात लाइव में भी स्वीकार की है कि

527
00:37:04,240 --> 00:37:08,240
मैंने तेरी वेबसाइट देखी है और शुरुआत के

528
00:37:08,240 --> 00:37:12,720
उसमें जो तुझे रास नहीं आया वह सम्मान भी तुझे दिया था।

529
00:37:12,720 --> 00:37:17,520
फिर भी तूने क्या पोस्ट बना के डाली?

530
00:37:17,520 --> 00:37:21,520
तूने पोस्ट क्या बना के डाली? कि शिवश का कहना है कि

531
00:37:21,520 --> 00:37:25,520
मैं संस्कृत ज्ञान से हीन हूं। तू वही बच्चा है जो वर्चस्व का

532
00:37:25,520 --> 00:37:27,440
भूखा है। बस

533
00:37:27,440 --> 00:37:31,440
बच्चे ने इज जिद पकड़ ली है ना जो कि मुझे जो है ये चाहिए वर्चस्वता

534
00:37:31,440 --> 00:37:35,600
चाहिए। वैसा ही एक बच्चा है। अब तू शपथ खा कि मैं

535
00:37:35,600 --> 00:37:40,440
तुझे संस्कृत ज्ञान से ही नहीं मानता हूं। खा

536
00:37:40,440 --> 00:37:44,720
शपथ जिन जिन लोगों के आधार पर तुझे चीजें मिल रही है उनके साथ मिलकर

537
00:37:44,720 --> 00:37:49,200
के शपथ खा। ये सारे जो आक्षेप तुझे प्राप्त हो रहे हैं।

538
00:37:49,200 --> 00:37:55,200
बोल किस-किस की शपथ खाने वाला है लाइन में?

539
00:38:00,280 --> 00:38:04,320
बता। अगर वैसे मेरी जानकारी में मैंने यह

540
00:38:04,320 --> 00:38:08,400
बात कही ही नहीं थी कि संस्कृत का ज्ञान नहीं है भगवत

541
00:38:08,400 --> 00:38:12,560
आनंद को फिर भी क्या है इसने आप ना देखा था कहीं की कहीं का रोड़ा

542
00:38:12,560 --> 00:38:16,640
भानुमती का क्योंकि इसको पब्लिसिटी चाहिए फेम चाहिए तो क्या करता है आधी अधूरी

543
00:38:16,640 --> 00:38:21,120
जानकारियों को लेकर के भी डाल देता है जैसे इसने क्या किया था

544
00:38:21,120 --> 00:38:25,440
ऋषिकेश ब्रह्मचारी के जी के नाम से एक फेक आईडी बनाई गई और कमेंट

545
00:38:25,440 --> 00:38:29,920
किया गया तो इसने क्या किया तुरंत वहां से स्क्रीनशॉट

546
00:38:29,920 --> 00:38:34,240
लिया बिना जानकारी ये वही है। आधी अधूरी जानकारी

547
00:38:34,240 --> 00:38:38,720
पर बात करने वाले आचार्य गण होते हैं।

548
00:38:38,720 --> 00:38:42,480
अरे कोई काफी लंबे समय से भी अगर वो जानकारी प्राप्त हो रही

549
00:38:42,480 --> 00:38:46,640
हो तब भी बात है। आधी अधूरी जानकारी विजयश्री की फोटो विजय

550
00:38:46,640 --> 00:38:50,800
श्री वीडियो में नहीं है मगर हमने डाल दिया और फिर उसको कवर अप कर रहे हैं।

551
00:38:50,800 --> 00:38:55,120
ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी का वो आईडी नहीं है। फिर भी हमने स्क्रीनशॉट लिया और डाल दिया।

552
00:38:55,120 --> 00:38:59,120
फिर उसको मिटा दे रहे हैं। यह आचार्य होते हैं। यह आचार्य नहीं

553
00:38:59,120 --> 00:39:03,680
होते हैं। यह वो लोग होते हैं जो इलाज कराने के लिए जाते हैं।

554
00:39:03,680 --> 00:39:07,680
प्रत्येक शुक्रवार प्रज्ञा शक्ति मिट

555
00:39:07,680 --> 00:39:11,840
जाती है ना धातु निकल जाने से। वजन रुक जाता है। 47

556
00:39:11,840 --> 00:39:15,960
किलो 50 किलो पे। इतने

557
00:39:15,960 --> 00:39:20,080
वजन इतने वजन वाले व्यक्ति को ऐसे हवा में उठा के टांग सकने वाला।

558
00:39:20,080 --> 00:39:24,320
इतना वजन बस थैले में डाल के ले जाओ कहीं। वो

559
00:39:24,320 --> 00:39:30,320
धातु के रुक जाने से ऐसा होता है। क्षीण हो जाने

560
00:39:35,160 --> 00:39:39,280
से अगर मैंने मान लो किसी बात से मेरे किसी बात से

561
00:39:39,280 --> 00:39:43,360
अर्थ निकल भी सकता होगा तो वो उस उसी में उसका अर्थ लिया जा सकता

562
00:39:43,360 --> 00:39:48,000
है कि भाई तेरे से भी बड़े-बड़े जो है वो संस्कृतज्ञ

563
00:39:48,000 --> 00:39:52,320
हैं। अभी वृंदावन की बात मुझे बताई थी प्रशांत

564
00:39:52,320 --> 00:39:56,480
मिश्र जी ने कि कोई आचार्य थे उनका एक शिष्य आ गया था 13

565
00:39:56,480 --> 00:40:00,480
वहां पर वह चल रहा था कथा चल रही थी और उसमें भगवतानंद से

566
00:40:00,480 --> 00:40:05,280
उस शिष्य ने एक सवाल पूछ लिया संस्कृत का जिसके पास उत्तर नहीं था

567
00:40:05,280 --> 00:40:09,360
तो ऐसा नहीं है कि तुम अंतिम हो ठीक है

568
00:40:09,360 --> 00:40:13,520
तो उस सापेक्ष में भी उसका अर्थ निकाला वैसे मेरी जानकारी में तो मैंने ऐसा बोला ही नहीं

569
00:40:13,520 --> 00:40:17,520
है जहां तक मुझे याद है कहीं किसी बात में अर्थ

570
00:40:17,520 --> 00:40:21,600
निकल सकता है जैसे वो मेरी एक बात थी ना कि विरोधाभासी वीडियो डाल दिया। तो

571
00:40:21,600 --> 00:40:25,760
इसका इसने क्या अर्थ निकाला? मैंने कहा विरोधाभासी वीडियो डाल

572
00:40:25,760 --> 00:40:29,920
दिया। तो इसने अर्थ निकाला कि इसने अभी 10 मिनट पहले कहा इसने वीडियो देखा ही नहीं।

573
00:40:29,920 --> 00:40:34,080
फिर इसको ये कैसे पता ये वीडियो विरोधाभासी है?

574
00:40:34,080 --> 00:40:38,240
मैं कह रहा हूं कि तूने मेरे विरोध में वीडियो क्यों डाला? और यह कह रहा है कि शिवश

575
00:40:38,240 --> 00:40:42,240
का यह कहना है कि मैंने ऐसा वीडियो डाला है जिसमें दो तरह की बातें

576
00:40:42,240 --> 00:40:46,360
हो रही

577
00:40:46,360 --> 00:40:50,400
है। ये सब ये कल रात को जो विधवा विलाप इसने किया है

578
00:40:50,400 --> 00:40:54,400
सौगंध खा रहा हूं। खैर विधवा विलाप इसका पहले से ही चालू है। जैसे ही हमने

579
00:40:54,400 --> 00:40:59,880
आक्रामकता दिखाई है वहीं से इनका विधवा विलाप चालू हो गया।

580
00:40:59,880 --> 00:41:04,560
तो यह सब विधवा विलाप करने के बाद भी इसको रात में जब

581
00:41:04,560 --> 00:41:08,560
सपना चैन की नींद नहीं आई होगी तो सुबह उठते ही फिर एक वीडियो

582
00:41:08,560 --> 00:41:12,560
डाल दिया। फिर वीडियो डाला

583
00:41:12,560 --> 00:41:16,840
सुबह उठ के कुछ कहा होगा कि मैंने रात को सभी बातों का खंडन कर दिया।

584
00:41:16,840 --> 00:41:21,280
अरे तू कह रहा है कि आचार्य रामशंकर

585
00:41:21,280 --> 00:41:26,160
शुक्ल जी ने ये ये बात मेरे से कही। आचार्य रामशंकर शुक्ल जी कह रहे हैं नहीं कही।

586
00:41:26,160 --> 00:41:30,320
अब तू इसमें क्या खंडन करेगा? क्या

587
00:41:30,320 --> 00:41:34,480
खंडन करा तूने? रो रहा है तू। और उसके अलावा

588
00:41:34,480 --> 00:41:38,680
अपनी वजन को अपनी बात को वजन देने के लिए तूने जो है वो शबरी वाला

589
00:41:38,680 --> 00:41:42,800
मामला उठा लिया। शबरी वाला मामले से मुझे याद

590
00:41:42,800 --> 00:41:47,040
आया कि तूने अपनी वो पीडीएफ बना करके कहीं उपलब्ध कराया है क्या?

591
00:41:47,040 --> 00:41:51,280
अगर उपलब्ध कराया है तो उसको सार्वजनिक कर। बता जैसे बात में पोस्ट

592
00:41:51,280 --> 00:41:55,440
डालता है वैसे पोस्ट डाल। उसका लिंक डाल। भाई हमें पता तो चले कि तूने शबरी

593
00:41:55,440 --> 00:41:59,440
के विषय में ऐसा क्या कहा है जो तेरा दावा है कि हमने खंडन कर दिया।

594
00:41:59,440 --> 00:42:01,600
हम जवाब देंगे कहां से? जब हमें क्वेश्चन

595
00:42:01,600 --> 00:42:05,680
तेरे क्वेश्चन का ही नहीं पता है। दोनों का

596
00:42:05,680 --> 00:42:10,040
पीडीएफ बना के डाल। बुद्ध वाले मामले का भी वो तेरी वेबसाइट के अलावा और कहीं नहीं

597
00:42:10,040 --> 00:42:14,160
मिला। तो जो इसके शुभचिंतक है उनको मैं कह रहा हूं या स्वयं भगवत

598
00:42:14,160 --> 00:42:18,520
आनंद सुन ले। तेरा कहना है ना कि तूने करपात्री जी का खंडन किया

599
00:42:18,520 --> 00:42:22,880
या जो पूज्य गुरुदेव पुरी के शंकराचार्य जी उनका खंडन किया तूने। इतनी

600
00:42:22,880 --> 00:42:27,520
दम है ना तेरी सॉरी इतनी औकात है ना तेरी

601
00:42:27,520 --> 00:42:32,480
ऐसे ही वर्ड्स तू यूज़ करता है ना ये वर्ड्स तेरे अनुसार सही है

602
00:42:32,480 --> 00:42:37,920
खैर मुझे ठीक नहीं लग रहा है मैं नहीं कहूंगा तो

603
00:42:37,920 --> 00:42:42,000
क्या है कि वो तू अपना जो थ्योरी है ना तेरी

604
00:42:42,000 --> 00:42:46,480
ये शबरी माता को लेकर और बुद्ध को लेकर ये सार्वजनिक तो कर

605
00:42:46,480 --> 00:42:50,480
तू जो डंका पीट रहा है जो तू ड्रम बजा रहा है

606
00:42:50,480 --> 00:42:54,640
क्योंकि अच्छे वाले जो ढोल है वो वो तो तुझे मिलेंगे नहीं तो तू ड्रम ही होंगे पानी

607
00:42:54,640 --> 00:42:59,120
के तो उनको ही बजाएगा तो जो जो तू ड्रम बजा रहा है

608
00:42:59,120 --> 00:43:04,520
तो वो इसलिए बजा पा रहा है कि

609
00:43:04,520 --> 00:43:08,720
तुझे करपात्री जी महाराज ने क्या कहा है वो

610
00:43:08,720 --> 00:43:12,720
पता है वो सार्वजनिक है अवेलेबल है तूने अपनी चीजें अवेलेबल कराई

611
00:43:12,720 --> 00:43:16,880
है क्या अगर कराई है तो उसको बता कहां

612
00:43:16,880 --> 00:43:20,960
है शबरी वाला प्रकरण तो मैं ढूंढ ही रहा हूं कहीं कहीं मिल ही नहीं रहा कहां कौन

613
00:43:20,960 --> 00:43:24,960
से जगह पे तूने दो इसको सार्वजनिक कर फिर मिलेंगे शबरी माता

614
00:43:24,960 --> 00:43:28,960
वाले में और बुद्ध वाले में हालांकि

615
00:43:28,960 --> 00:43:32,960
शबरी वाले मामले में सनार्ग वाले तुझे बुला रहे हैं क्यों नहीं जाता वहां

616
00:43:32,960 --> 00:43:36,960
उनके सवालों का उत्तर देने दे दे उनको चैलेंज कि सनार्ग वाले मुझसे

617
00:43:36,960 --> 00:43:42,040
शास्त्रार्थ करें वो आ जाएंगे कर लेंगे तुझसे शास्त्रार्थ कब दे रहा है

618
00:43:42,040 --> 00:43:46,080
चैलेंज और बाकी उपलब्ध करा मैं जानू तो तूने कहा क्या है

619
00:43:46,080 --> 00:43:50,720
भाई तेरे जैसे जो छद्म वाले वो है इन सबके वो

620
00:43:50,720 --> 00:43:54,840
थोड़ी ना सुना करते हैं कि किसने क्या लिखा है, किसने क्या कह दिया

621
00:43:54,840 --> 00:43:58,880
है। तेरे जैसे जो आचार्य स्वषित आचार्य

622
00:43:58,880 --> 00:44:03,040
गली गली घूमते हैं। तो चल अब तेरे को अगर सुनना

623
00:44:03,040 --> 00:44:07,280
ही है कि भैया कृपात्री जी महाराज के बारे में तेरा कहना है कि तूने खंडन

624
00:44:07,280 --> 00:44:11,440
किया है और तुझे ये सुनना है कि हम कैसे तेरा खंडन करते हैं तो अपने वो लेख

625
00:44:11,440 --> 00:44:16,320
को सार्वजनिक तो कर। उसमें क्या लिखा है तूने?

626
00:44:16,320 --> 00:44:21,840
खैर

627
00:44:21,840 --> 00:44:25,920
वैसे चलते रहेंगे। मेरा किसी ने जवाब नहीं दिया। जवाब नहीं दिया। और

628
00:44:25,920 --> 00:44:30,160
अपनी चीज छुपा के रखी है कि मेरा ये पक्ष है सबरी वाले मामले

629
00:44:30,160 --> 00:44:34,400
में या बुद्ध वाले मामले। बुद्ध वाले का तो शायद उसमें लिखा है। मगर वो पूरा

630
00:44:34,400 --> 00:44:38,400
है कि नहीं पूरा है ये भी तो सोचने की बात है। हम उसी पर वर्क करें कि बाकी भी

631
00:44:38,400 --> 00:44:42,520
है कुछ

632
00:44:42,520 --> 00:44:46,760
और। वहां क्या करता है? सन्मार्ग वालों के यहां जाता है। जब पक्ष

633
00:44:46,760 --> 00:44:51,640
कमजोर पड़ने लगता है तो वहां से अपने कमेंट डिलीट करके भागता है।

634
00:44:51,640 --> 00:44:55,760
यही यही जिसको प्यार से उसके समर्थक निकू

635
00:44:55,760 --> 00:45:01,360
कहते हैं।

636
00:45:01,360 --> 00:45:05,520
जो भी दर्शक है ना वहां पर जाके जो

637
00:45:05,520 --> 00:45:09,680
जानना चाहते हैं कि इनका क्या पक्ष है जो आधा अधूरा वो वहां

638
00:45:09,680 --> 00:45:13,680
अगर वहां समय निकाले वहां सनार्ग वाले पेज पर जाए हम लोग अपने डिस्क्रिप्शन

639
00:45:13,680 --> 00:45:17,840
में और शायद कम्युनिटी पोस्ट में भी उसको डाल देंगे लिंक उनका पेज उनको

640
00:45:17,840 --> 00:45:22,840
सुने ओ इनको भगाया गया दौड़ा दौड़ा के वहां पीटा गया

641
00:45:22,840 --> 00:45:27,920
है शास्त्र उसमें व्याख्या

642
00:45:27,920 --> 00:45:31,920
तो क्यों भाग रहा है भाई? क्यों नहीं चुनौती दे

643
00:45:31,920 --> 00:45:36,640
रहा है उनको? शास्त्रार्थ की

644
00:45:36,640 --> 00:45:40,040
राघवाचार्य जी महाराज

645
00:45:40,040 --> 00:45:46,040
ने तेरे अनुसार राघवाचार्य जी महाराज ने तेरे

646
00:45:46,120 --> 00:45:50,640
अनुसार गलत किया है। शायद वो आरोप एक लगाया था कि बागेश्वर

647
00:45:50,640 --> 00:45:54,720
वालों के साथ में बैठकर के वो जो है भोजन कर लिया। अभक्ष

648
00:45:54,720 --> 00:45:58,880
का भक्ष कर लिया। ठीक है। तो तूने उनके साथ बैठने से पहले उनसे शपथ

649
00:45:58,880 --> 00:46:02,880
दिलाई क्या कि वह आगे भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे। क्यों नहीं दिलाई? खेल शपथ शपथ

650
00:46:02,880 --> 00:46:08,880
खेल सौगंधन

651
00:46:24,120 --> 00:46:28,160
सौगंध अब तेरा एक एक कहना और है आचार्य रामशंकर शुक्ल जी के बारे

652
00:46:28,160 --> 00:46:32,560
में कि मठ से उन्हें जो है धमकी मिली है इसलिए लिए उन्होंने अपना

653
00:46:32,560 --> 00:46:36,800
बयान दिया है वो वक्तव्य दिया है या उन्हें जो प्रताड़ित

654
00:46:36,800 --> 00:46:40,880
किया गया अब तू इस बारे में तू जो

655
00:46:40,880 --> 00:46:44,880
कह रहा है कि धमकी मिली है शपथ खा और जिसने तुझे

656
00:46:44,880 --> 00:46:48,960
बताया कि धमकी मिली है क्योंकि तू तो उनके साथ रह नहीं रहा है जिसने तुझे बताया

657
00:46:48,960 --> 00:46:52,960
है कि धमकी मिली है उनसे शपथ खिलवा तू और वो दोनों मिलकर के

658
00:46:52,960 --> 00:46:57,200
शपथ खाओ शालिग्राम भगवान को हाथ में लेकर के रो वही विधवा

659
00:46:57,200 --> 00:47:01,520
विलाप था ना कल पूरा उसमें वही था विधवा विलाप

660
00:47:01,520 --> 00:47:06,000
और कुछ नहीं था। रो रहे हैं। यह क्या हो गया? यह क्या हो गया?

661
00:47:06,000 --> 00:47:10,080
मेरा जो ताश के पत्तों का महल था उसको किसी ने छू दिया। वही

662
00:47:10,080 --> 00:47:14,080
है तुम्हारा। और अभी जिस दिन तुम परंपरा में बात करोगे उस दिन और मजा

663
00:47:14,080 --> 00:47:18,160
आएगा। लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य। तुमको मैंने सरलता

664
00:47:18,160 --> 00:47:24,160
से लिया। तुम्हारे प्रति उदारता दिखाई। तो तुम समझने लगे अपने आप को फन्ने

665
00:47:26,920 --> 00:47:31,680
कहा। चौराया बनाया जाएगा तुम्हारे नाम का। बहुत जल्द

666
00:47:31,680 --> 00:47:35,920
लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य का चौराहा ऐसे

667
00:47:35,920 --> 00:47:40,040
बनेगा

668
00:47:40,040 --> 00:47:44,160
कोई वो अच्छा एक एक सोचने वाली बात और है

669
00:47:44,160 --> 00:47:48,320
कि उनको अगर मठ से प्रताड़ित किया जाता तो वो जाते क्या

670
00:47:48,320 --> 00:47:52,320
दोबारा वहां पर दिखते क्या वो तो अभी मंच पर बैठते जाकर के आदर सम्मान के साथ

671
00:47:52,320 --> 00:47:56,600
वहां बैठते हैं तो ये सब खोखली बातें हैं तेरी है

672
00:47:56,600 --> 00:48:00,800
ना और सुन मैं तुझसे से तू तड़ा कर भी सकता

673
00:48:00,800 --> 00:48:04,880
हूं। छोटा भी है मुझसे। आयु में भी और बुद्धि में भी। तेरी

674
00:48:04,880 --> 00:48:09,840
बुद्धि देख ली। बुद्धि की संकीर्णता देख ली तेरी।

675
00:48:09,840 --> 00:48:15,840
तो ये तू तड़ाक तेरे साथ बिल्कुल परफेक्ट

676
00:48:18,680 --> 00:48:23,280
है। अच्छा अब एक एक चीज और बात आती है

677
00:48:23,280 --> 00:48:27,440
इस सब में कि भाई हमारे अनुसार आचार्य रामशंकर शुक्ल

678
00:48:27,440 --> 00:48:32,160
जी की बहुत वैल्यू है। बहुत वो असत्य भाषण नहीं करेंगे।

679
00:48:32,160 --> 00:48:37,160
ठीक है? अब बात यह आती है कि तेरे

680
00:48:37,160 --> 00:48:41,280
अनुसार शपथ के अभाव में उनकी बात मान्य नहीं

681
00:48:41,280 --> 00:48:45,360
है। तेरे अनुसार क्योंकि तू नहीं मान रहा है। तो अगर तेरे

682
00:48:45,360 --> 00:48:49,440
अनुसार वो असत्य भाषण कर सकते हैं और शपथ के अभाव में उनकी बातें मान्य नहीं

683
00:48:49,440 --> 00:48:53,520
है तो अगर तेरे अनुसार उन्होंने तुझसे कहा भी था

684
00:48:53,520 --> 00:48:57,760
तो तूने क्यों मटकी बदनामी की? क्यों तूने पूरी शंकराचार्य जी के परिकों के ऊपर उंगली

685
00:48:57,760 --> 00:49:02,080
उठाई? क्योंकि तेरा पूरी के शंकराचार्य का पूरी के शंकराचार्य जी के परिकरों

686
00:49:02,080 --> 00:49:06,080
का शोधन करना उद्देश्य है ही नहीं। मठ का शोधन करना उद्देश्य है ही नहीं। वरना

687
00:49:06,080 --> 00:49:10,160
तू सा तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र के मामले में फक्तिया

688
00:49:10,160 --> 00:49:14,440
थोड़ी ना कसता। हास्यासत वक्तव्य थोड़ी ना

689
00:49:14,440 --> 00:49:18,720
देता। तू अपनी भागवत की कथा करते हुए अगर वहां पर

690
00:49:18,720 --> 00:49:22,800
नाच नचाया जाता है तो तू वहां पर पूरी शंकराचार्य जी को पूरी शंकराचार्य

691
00:49:22,800 --> 00:49:28,720
जी नहीं चारों शंकराचार्य को नीचा थोड़ी ना दिखाता।

692
00:49:28,720 --> 00:49:32,800
अब तेरा कहना है तेरा कहना है कि भैया

693
00:49:32,800 --> 00:49:37,680
जब हमारे पास ताकत नहीं होती है इसलिए हम गाली दे देते हैं।

694
00:49:37,680 --> 00:49:41,920
इस पर भी बात करेंगे कि ताकत नहीं होती है तो उस पर गाली देना कितना

695
00:49:41,920 --> 00:49:45,920
सही है। मगर अभी मैं बता दूं कोई अगर यह कह दे कि हमारे पास ताकत नहीं है इसलिए हम एक

696
00:49:45,920 --> 00:49:49,920
करोड़ लेते हैं जिससे हम काम कर पाए। वो गलत है।

697
00:49:49,920 --> 00:49:54,000
तू जब अपना बहाना लगा के शास्त्रों से बाहर जाएगा तो

698
00:49:54,000 --> 00:49:58,080
कोई दिक्कत नहीं है। और दूसरा गया है कि

699
00:49:58,080 --> 00:50:02,120
नहीं गया है क्या है क्या नहीं है मगर उसको दिखा के शास्त्रों से बाहर गया यह

700
00:50:02,120 --> 00:50:06,160
गलत तेरे पंडित नहीं आएंगे तेरा वो नहीं होगा

701
00:50:06,160 --> 00:50:10,320
कौन सी ऐसी आकस्मिक स्थितियां हो जाएंगी तो तू खुद शादी के फेरे पढ़ लेगा

702
00:50:10,320 --> 00:50:14,960
फेरे के मंत्र पढ़ लेगा तो कोई दिक्कत नहीं है मगर

703
00:50:14,960 --> 00:50:19,120
वृंदावन में जहां पर वो लोग पले बड़े हैं वहां पर उनकी जो मातृ शक्तियां

704
00:50:19,120 --> 00:50:23,200
है जो मां समान है वहां पर वो उन पर अचानक से उनके साथ इस

705
00:50:23,200 --> 00:50:27,560
तरह से होली खेल लेंग तो उसका बड़ा राई का पहाड़

706
00:50:27,560 --> 00:50:32,200
बनाएगा हम तो पहली बात यह है

707
00:50:32,200 --> 00:50:36,240
कि जो हम विषय पे चल रहे थे वो क्या था कि आचार्य रामशंकर शुक्ल

708
00:50:36,240 --> 00:50:40,480
जी की बात का शपथ के अभाव में मान्य नहीं है तो तूने

709
00:50:40,480 --> 00:50:43,760
उस समय शपथ क्यों नहीं खिलाई थी या खिलाई थी

710
00:50:43,760 --> 00:50:47,760
बता तू शपथ खा के बता क्यों नहीं

711
00:50:47,760 --> 00:50:51,760
खिलाई थी तो ये तेरे दोगलेपन है दोगलापन जहां पे

712
00:50:51,760 --> 00:50:55,760
अपना काम हो रहा है वहां इस तरह से चलेंगे जहां काम नहीं हो रहा वहां यही तो

713
00:50:55,760 --> 00:50:59,840
दिखा रहे थे। यही दिखा रहा था मैं और तेरा दोगलापन

714
00:50:59,840 --> 00:51:04,200
दिखाता हूं। सुन तूने क्या कहा कि

715
00:51:04,200 --> 00:51:08,240
भाई मैंने जो है जब मैं विदेशगामी के साथ खड़ा हुआ था

716
00:51:08,240 --> 00:51:12,400
तो मैंने उसके विदेश गमन का वो नहीं किया था। पक्ष नहीं लिया था। हां

717
00:51:12,400 --> 00:51:16,400
वो क्योंकि एक अच्छे इंसान थे। वो ये थे वो फलाने थे तो उनका स्वागत स्वीकार

718
00:51:16,400 --> 00:51:20,560
किया था। अबे तो ये वाला कानून वहां क्यों नहीं लागू करता है?

719
00:51:20,560 --> 00:51:24,560
जब तू कहता है बागेश्वर वालों से क्यों मिल रहे हैं? जब तू कहता है फलाने

720
00:51:24,560 --> 00:51:28,720
से क्यों मिल रहे हैं शंकराचार्य वहां यह बात क्यों नहीं लागू

721
00:51:28,720 --> 00:51:32,800
करता है कि जो

722
00:51:32,800 --> 00:51:36,800
पक्ष जो जितने संदर्भ में वो वहां खड़े हैं बागेश्वर वाले वालों के साथ तो

723
00:51:36,800 --> 00:51:40,960
उतना पक्ष उनका वो वाला है जिसमें वो क्रिश्चियंस को हिंदू कर बना रहे हैं या घर

724
00:51:40,960 --> 00:51:45,200
वापसी करा रहे हैं या जो भी करा रहे हैं वो उसके

725
00:51:45,200 --> 00:51:49,440
उन बातों का वो नहीं करते समर्थन जो बातें अशास्त्रीय

726
00:51:49,440 --> 00:51:53,440
है वहां यह सिद्धांत कहां चला जाता है खुद

727
00:51:53,440 --> 00:51:58,840
के लिए जो सिद्धांत है वही सिद्धांत दूसरे के लिए नहीं

728
00:51:58,840 --> 00:51:59,840
है।

729
00:51:59,840 --> 00:52:03,840
तो यह सब सोचने वाली बात है। इसके दोगलेपन को देखो और यहां पर

730
00:52:03,840 --> 00:52:08,360
शास्त्र का भी खंडन है। दोगलापन महाभारत का सिद्धांत

731
00:52:08,360 --> 00:52:12,520
है। अगर मैं आरएसएस वालों आरएसएस से जुड़े हुए

732
00:52:12,520 --> 00:52:16,640
लोग वो भी जिस समय वो मेरे साथ जा रहे हैं वो आरएसएस का बन के

733
00:52:16,640 --> 00:52:20,640
नहीं जा रहे हैं। वो एक सामान्य हिंदू बनके जा रहे हैं। अगर मैं उनका उस संदर्भ में

734
00:52:20,640 --> 00:52:24,720
कि वहां मां को गाली दी जा रही है और उनका साथ ले लेता हूं तो यह कैसे प्रस्तुत

735
00:52:24,720 --> 00:52:29,080
करता है आरएसएस का साथ लेने वाला आरएसएस का साथ लेने

736
00:52:29,080 --> 00:52:33,120
वाला अरे तो तू भी तो विदेशगामी का साथ लेने वाला तो तूने क्या जवाब

737
00:52:33,120 --> 00:52:37,400
दिया कि विदेश गमन का पक्ष नहीं लिया तो मैंने कहा आरएसएस के सिद्धांतों का पक्ष नहीं ले लिया

738
00:52:37,400 --> 00:52:42,520
मैंने जितने अंश में वो मेरे साथ गए हैं वहां रक्षा

739
00:52:42,520 --> 00:52:46,760
करने रामपाल का विरोध करने उतने अंश में साथ

740
00:52:46,760 --> 00:52:51,280
है और तू अपनी लिस्ट तो बता तेरे साथ है कौन-कौन

741
00:52:51,280 --> 00:52:55,280
फिर देखेंगे कौन कितने पानी में है भाई तूने मेरे बारे में

742
00:52:55,280 --> 00:52:59,360
जो ये बोला कि भाई तूने आरएसएस का साथ लिया तब बोला जब तुझे

743
00:52:59,360 --> 00:53:03,760
पता चला तो तू बता तो सही

744
00:53:03,760 --> 00:53:08,000
तेरे साथ है कौन अपनी अपनी लाइफ को थोड़ा प्रदर्शित तो कर

745
00:53:08,000 --> 00:53:14,000
सिवाय वो गुप्ताचार बनके घूमने से चोरों की

746
00:53:15,480 --> 00:53:20,000
तरह ये जो सड़े हुए लोग कमेंट कर रहे हैं।

747
00:53:20,000 --> 00:53:24,800
आरएसएस का साथ लेने वाला मोहन भागवत का साथी है। नीचों

748
00:53:24,800 --> 00:53:29,040
पहली बात तो हो सकता है कोई वही हो बिना बाप के घूमते

749
00:53:29,040 --> 00:53:33,760
हैं जो हो सकता है समाजी हो सकता है इस वाले यहां भिड़ाने आए हैं।

750
00:53:33,760 --> 00:53:38,480
और पता नहीं कौन मगर यदि ये वास्तव में

751
00:53:38,480 --> 00:53:43,880
भगवतानंद के या पुरी शंकराचार्य जी के समर्थक है तो क्या

752
00:53:43,880 --> 00:53:48,000
है तो तुम्हारी मां को कोई गाली दे रहा है उसके साथ बलात्कार

753
00:53:48,000 --> 00:53:52,160
हुआ तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ना उन किताबों को हटाया गया नष्ट

754
00:53:52,160 --> 00:53:56,320
किया गया इन सब बातों से नहीं पड़ता होगा तुम लोग शायद

755
00:53:56,320 --> 00:54:00,400
अपनी मां के प्रति ऐसी भावना रखते होगे मैं नहीं रखता मैं तुम्हारी

756
00:54:00,400 --> 00:54:04,440
मां के लिए भी लडूंगा भगवतानंद की मां के लिए भी लडूंगा। ऐसे

757
00:54:04,440 --> 00:54:08,880
ही जैसे दुर्गा मां के लिए लड़ा।

758
00:54:08,880 --> 00:54:12,040
तुम लोग बनो

759
00:54:12,040 --> 00:54:16,080
ऐसे तो एक बात तो ये तुम्हारे दोगलेपन की हो गई।

760
00:54:16,080 --> 00:54:22,080
और क्या है?

761
00:54:23,640 --> 00:54:27,760
अच्छा ये जितने भी दोगलापन क्या है? अपने पे

762
00:54:27,760 --> 00:54:32,320
बात आई तो शपथ खाओ। अरे जितने तेरे पास ऑडियो वाले आए

763
00:54:32,320 --> 00:54:36,480
ये WhatsApp मैसेजेस आए इन सब इन सब से तूने शपथ खिलवाई थी

764
00:54:36,480 --> 00:54:42,480
ये शपथ खा के बोलो जो भी बोलना है कब खिलवाई थी

765
00:54:47,080 --> 00:54:51,200
शपथ और कुछ ढूंढ लाना आगे यही ढूंढते रहना कि मेरे

766
00:54:51,200 --> 00:54:55,440
पास ये मैसेज आया उंगली रख के दिखाते रहना शपथ मत खिलवाना

767
00:54:55,440 --> 00:54:59,920
उनसे ला चैनल पर उनको सबके सामने

768
00:54:59,920 --> 00:55:04,080
और जितने लोग हैं जो उसका समर्थन करते हैं उनको खुला निमंत्रण

769
00:55:04,080 --> 00:55:08,440
है आ जाइए अपना मुंह काला करवाना हो

770
00:55:08,440 --> 00:55:12,560
तो और मैं तो कह ही रहा हूं कि तुम क्यों वीडियो वीडियो खेल रहे

771
00:55:12,560 --> 00:55:16,560
हो जब मैं तैयार हूं क्यों लाइव लाइव खेल रहे हो आ जाओ कर लो दो

772
00:55:16,560 --> 00:55:20,800
दो हाथ वाणी के द्वारा

773
00:55:20,800 --> 00:55:24,880
वैसे करना है तो वह भी बता देना भाई उसके लिए मैं आपको व्यक्तिगत

774
00:55:24,880 --> 00:55:30,000
तौर पर परामर्श नहीं दूंगा उपयुक्त नहीं है आप

775
00:55:30,000 --> 00:55:34,080
है ना तो आ जाओ कोई समर्थक है जिनका मुंह काला होने

776
00:55:34,080 --> 00:55:38,640
से बच गया हो जो अपना मुंह दिखा सकते हो समर्थक है या वो स्वयं

777
00:55:38,640 --> 00:55:44,120
निक्गू जो उसको उसके चाहने वाले कहते हैं

778
00:55:44,120 --> 00:55:50,120
या भगवतानंद स्वयं आ जाए

779
00:55:54,560 --> 00:55:58,640
थोड़े दिन पहले मैंने बताया था एक जगह पे इसको उसको किसी ने कुछ बोल दिया था

780
00:55:58,640 --> 00:56:02,880
तो ये कोर्ट चला गया था और जबकि दूसरी तरफ क्या कहता है क्यों कोर्ट जाए क्योंकि

781
00:56:02,880 --> 00:56:07,120
दम नहीं ना बातों में तो कोर्ट कैसे जाएगा जहां दम दिखी वहां कोर्ट चला गया दूसरी

782
00:56:07,120 --> 00:56:11,200
तरफ कहता है क्यों कोर्ट जाए शासकों शासक बैठे हैं अरे भाई चलो यहां

783
00:56:11,200 --> 00:56:15,280
पूरी वाले शंकराचार्य जी से तुझे मिलने नहीं दिया जाता दोगले अन्यों

784
00:56:15,280 --> 00:56:21,280
से तो मिलता है ना वहां से करा लेता अपना फैसला क्यों कोर्ट गया

785
00:56:24,920 --> 00:56:29,040
था इन सारे जो बातें हैं इसमें इस

786
00:56:29,040 --> 00:56:33,880
सब के बाद मैं अब एक बहुत मुख्य बात बोलने वाला हूं। सब लोग ध्यान से

787
00:56:33,880 --> 00:56:38,080
सुनो कि पूरी शंकराचार्य जी को खाने

788
00:56:38,080 --> 00:56:42,080
में मिलाकर कुछ ऐसे तत्व दिया जाता है, पदार्थ दिया जाता है

789
00:56:42,080 --> 00:56:46,320
जिससे कि उन पर वश किया जा रहा है। इस सारे बखेड़े में किसी ने इस

790
00:56:46,320 --> 00:56:51,560
ओर तो ध्यान ही नहीं दिया कि वो पदार्थ कौन सा

791
00:56:51,560 --> 00:56:55,600
है? दिव्य पदार्थ है या साइंटिफिक पदार्थ? साइंटिफिक रूप से

792
00:56:55,600 --> 00:56:59,680
तैयार किया गया पदार्थ है जो किसी को अपने वश में करने के लिए दिया

793
00:56:59,680 --> 00:57:05,680
जाता है या

794
00:57:09,080 --> 00:57:13,440
फिर दिव्य पदार्थ है या

795
00:57:13,440 --> 00:57:17,680
मतलब यह जो अनुष्ठान इत्यादि से तंत्र इत्यादि से तैयार

796
00:57:17,680 --> 00:57:21,680
किया गया पदार्थ है या साइंटिफिक रूप से

797
00:57:21,680 --> 00:57:26,080
तैयार किया गया पदार्थ है वह क्या है?

798
00:57:26,080 --> 00:57:30,640
भाई जहर दिया जा रहा तो जहर तो दो साल से बात सुनी थी।

799
00:57:30,640 --> 00:57:35,560
जहर की बात इन्होंने सुनी तो दो साल से थी

800
00:57:35,560 --> 00:57:39,640
ना।

801
00:57:39,640 --> 00:57:44,000
हम तो वो पदार्थ है कौन सा जिसके बारे में बात कर रहे हो आचार्य रामशंकर

802
00:57:44,000 --> 00:57:48,160
शुक्ल जी ने रिकॉर्डिंग के ऊपर तुम लोग और मुख्य बात तो यही

803
00:57:48,160 --> 00:57:52,320
है कि रिकॉर्डिंग के आधार पर यदि तुम लोग यह मानते

804
00:57:52,320 --> 00:57:57,040
हो रिकॉर्डिंग के आधार पर यह मानते हो

805
00:57:57,040 --> 00:58:01,120
कि भैया रिकॉर्डिंग के आधार पर अगर कोई बात आई तो वह सत्य है।

806
00:58:01,120 --> 00:58:05,160
तो इसको भी मान लो जो आज रिकॉर्डिंग डाली

807
00:58:05,160 --> 00:58:09,360
है। कुछ लोग उसे स्क्रिप्टेड कह रहे हैं। कुछ लोग उसे कह रहे हैं कि वो प्रथम

808
00:58:09,360 --> 00:58:13,440
ने क्या कहते हैं? उसमें कोई प्रथम

809
00:58:13,440 --> 00:58:17,440
है। कोई हमारे साथ हमारे साथ वाला कोई व्यक्ति एक तो ये भी कह रहा था कि उसमें मैं

810
00:58:17,440 --> 00:58:21,440
ही बोल रहा हूं। इसीलिए कहते हैं

811
00:58:21,440 --> 00:58:24,080
बात वो करो जो अकाट हो अभी अकाट पर

812
00:58:24,080 --> 00:58:28,840
भी आऊंगा। अकाट से मुझे कुछ याद आ रहा है। पर पहले उस पदार्थ की बात कर

813
00:58:28,840 --> 00:58:33,200
ले तो पदार्थ की बात क्या है? और ये लोग उसे पहचान

814
00:58:33,200 --> 00:58:37,280
गए हैं। कोई कह रहा है वो प्रथम है। कोई कह रहा है मैं हूं। ये पहचानने वाली

815
00:58:37,280 --> 00:58:41,360
बात भी कर रहे हैं। तो ऐसे बातें नहीं होती है। यही ध्यान दिलाने

816
00:58:41,360 --> 00:58:45,600
के लिए ही हमने वो एक रिकॉर्डिंग मुख्य रूप से डाली है। कि तुमको

817
00:58:45,600 --> 00:58:49,600
पता चले। तुम किस भाषा में बात कर रहे हो वह भाषा सुनो।

818
00:58:49,600 --> 00:58:53,680
कभी कभी कुछ लोग ऐसा होता है ना लातों के भूत बातों से नहीं मानते।

819
00:58:53,680 --> 00:58:57,760
सामने वाली पार्टी इस बार वही है तो ठीक है ऐसे ही सही। तो मैं कह

820
00:58:57,760 --> 00:59:01,920
रहा था कि भाई किसी ने ये जानने की कोशिश की कि

821
00:59:01,920 --> 00:59:06,200
वो पदार्थ है कौन

822
00:59:06,200 --> 00:59:10,800
सा? वो पदार्थ कौन सा है? जो पूरी के शंकराचार्य

823
00:59:10,800 --> 00:59:14,960
जी को ऐसा मिलाकर कुछ दिया जा रहा है। तो अब इसमें मेरी

824
00:59:14,960 --> 00:59:19,040
एक घोषणा है। सुनो सब लोग। जिसकी मां ने

825
00:59:19,040 --> 00:59:23,360
निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। आई रिपीट। जिसकी

826
00:59:23,360 --> 00:59:27,360
मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वो ऐसा

827
00:59:27,360 --> 00:59:32,280
पदार्थ तैयार करे और मुझे खिला के अपने वश में करके

828
00:59:32,280 --> 00:59:37,520
दिखाए। पिलाया है किसी की मां ने ऐसा निष्ठा पूर्वक दूध?

829
00:59:37,520 --> 00:59:41,840
जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वह वश

830
00:59:41,840 --> 00:59:46,160
में करने वाला पदार्थ तैयार करे और मुझको खिलाए

831
00:59:46,160 --> 00:59:50,200
और मुझे अपने वश में करके

832
00:59:50,200 --> 00:59:54,800
दिखाए। कौन करेगा? भगवतानंद करेगा।

833
00:59:54,800 --> 00:59:58,800
अच्छा भगवतानंद ज्यादा सिद्ध व्यक्ति है कि पूरी

834
00:59:58,800 --> 01:00:03,760
पीठ के परिकर यह भी सोचने वाली बात है। अगर भगवत आनंद नहीं कर सकता

835
01:00:03,760 --> 01:00:08,120
तो उसे यह मानना पड़ेगा भाई पूरी पीठ के जो परिक्र है वह ज्यादा सिद्ध लोग

836
01:00:08,120 --> 01:00:12,240
हैं और या फिर तू कर तू

837
01:00:12,240 --> 01:00:16,320
कर ऐसा पदार्थ तैयार कर मुझे बता

838
01:00:16,320 --> 01:00:22,320
कि तैयार हो गया है फिर मिल और खिला मैं

839
01:00:22,440 --> 01:00:26,560
खाऊंगा और कर तू मुझे वश में

840
01:00:26,560 --> 01:00:30,800
वश में होना चाहिए जैसे जो पूरी के शंकराचार्य जी है

841
01:00:30,800 --> 01:00:34,880
गर्व वश में मुझे मैं तो बहुत हल्के से हो जाऊंगा ना पूरी के

842
01:00:34,880 --> 01:00:38,600
शंकराचार्य जी तो सिद्ध व्यक्ति

843
01:00:38,600 --> 01:00:42,720
महापुरुष तो अगर तू कर सकता है जो ये

844
01:00:42,720 --> 01:00:47,040
दावा कर रहा है कि भैया वो पदार्थ मिला के खिलाया

845
01:00:47,040 --> 01:00:51,400
जा सकता है अगर तू कर सकता

846
01:00:51,400 --> 01:00:55,440
है तो मुझे वश में करना

847
01:00:55,440 --> 01:00:59,440
तो बहुत आसान होगा और अगर तू नहीं कर सकता तो

848
01:00:59,440 --> 01:01:03,600
सोच और नहीं कर पाया तो सोचने वाली बात है कि वो लोग तो तुझसे

849
01:01:03,600 --> 01:01:07,920
बहुत बड़े सिद्ध हो गए। उन्होंने तो शंकराचार्य को वश में किया है। कर ले।

850
01:01:07,920 --> 01:01:12,560
बता पोस्ट करके कब बता रहा है? तू कम्युनिटी पोस्ट बहुत जल्दी करता है।

851
01:01:12,560 --> 01:01:17,080
द एक्सपर्ट ऑफ कम्युनिटी पोस्ट मिस्टर भगवत आनंद एवरी

852
01:01:17,080 --> 01:01:20,840
फ्राइडे।

853
01:01:20,840 --> 01:01:26,640
खैर अब आती है बात अकाट्य की। एक शब्द है अकाट्य।

854
01:01:26,640 --> 01:01:30,920
इसी पर आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने भी अभी बातें की थी उसमें

855
01:01:30,920 --> 01:01:35,160
कि आधी अधूरी बातों को ले बीड़ा नहीं बचाना

856
01:01:35,160 --> 01:01:39,360
चाहिए। अच्छा अकाट की बात आती है तो ये क्या

857
01:01:39,360 --> 01:01:43,360
करता है भगवतानंद विषय को बदलता है। अकाट्य की जब बात

858
01:01:43,360 --> 01:01:48,160
आती है और इसके लोग भी विषय को बदलने का प्रयास करते हैं। मेरे फोन करते हैं।

859
01:01:48,160 --> 01:01:52,240
जब मैं कहता हूं कि भाई अकाट्य वो दो प्रमाण। ठीक है? तो

860
01:01:52,240 --> 01:01:56,240
यह कहता है कि तुम्हारे पूरी के शंकराचार्य जी ने तीन वर्ष की भविष्यवाणी की थी वो अकाट

861
01:01:56,240 --> 01:02:00,480
है क्या? पहली बात यह है कि

862
01:02:00,480 --> 01:02:04,560
क्या पूरी के शंकराचार्य जी की वाणी अगर सही सिद्ध नहीं हुई या वो अकाट

863
01:02:04,560 --> 01:02:09,400
नहीं थी। इससे तुम जो भी बोल रहे हो वो सही सिद्ध हो

864
01:02:09,400 --> 01:02:13,840
गया। ये कहां से आई? ये बातें आती ही इसलिए

865
01:02:13,840 --> 01:02:17,920
क्योंकि इसको मालूम है मेरी चीजें जो है निराधार है। तो इसलिए मैं

866
01:02:17,920 --> 01:02:22,240
क्या करूंगा? बचने के लिए ये बोलूंगा पूरी के शंक अरे भाई पूरी के शंकराचार्य

867
01:02:22,240 --> 01:02:26,640
जी की वाणी थी कि नहीं थी इससे तेरी बात कैसे सही हो रही सिद्ध

868
01:02:26,640 --> 01:02:30,720
मतलब तू ये चाहता है और इसके लोग भी फोन करके बोलते हैं कि उन्होंने

869
01:02:30,720 --> 01:02:35,080
फलानी बात कही थी वो अकाट थी क्या वो किस आधार पर कही

870
01:02:35,080 --> 01:02:36,080
थी

871
01:02:36,080 --> 01:02:40,080
फोन करके बोलते हैं मुझसे तो तुम लोगों का कहने का मतलब यह

872
01:02:40,080 --> 01:02:44,320
है कि अगर पूरी के शंकराचार्य जी की कोई वाणी है जो तुम्हारे अनुसार अकाट्य

873
01:02:44,320 --> 01:02:50,320
सिद्ध नहीं हो रही तो अब तुम कुछ भी बोलोगे वो हम लोग बिना सोचे समझे मान

874
01:02:51,160 --> 01:02:55,600
ले अकल से पैदल हो तुम लोग पैर ऊपर है तुम्हारे और वो

875
01:02:55,600 --> 01:03:00,840
हाथ नीचे हैं हाथ के बल चल रहे हो ऐसे मूर्ख हो

876
01:03:00,840 --> 01:03:05,200
तुम जो लोग ऐसे तर्क देते हैं

877
01:03:05,200 --> 01:03:09,200
और हिंदू राष्ट्र से मुझे एक बात याद आई हिंदू राष्ट्र की बात है

878
01:03:09,200 --> 01:03:13,680
जो लोग ये कहते हैं हिंदू राष्ट्र तीन साल ती तीन वर्ष जो है मैं हालांकि

879
01:03:13,680 --> 01:03:17,680
इस बारे में बोलना नहीं चाहता हूं क्योंकि ऐसी कुछ विषय ऐसे

880
01:03:17,680 --> 01:03:23,680
होते हैं जो संतों के मुख से ही निकले तभी वो अच्छे लगते हैं। उनका प्रभाव होता

881
01:03:24,200 --> 01:03:28,480
है। हिंदू राष्ट्र कौन कह देगा

882
01:03:28,480 --> 01:03:32,960
जो मान लिया जाएगा? मोदी के कहने से मान लोगे हिंदू राष्ट्र हो गया।

883
01:03:32,960 --> 01:03:37,280
अच्छा मोदी अगर कह दे और वो इस और ध्यान ना दे कि मनुवाद का मनुवाद

884
01:03:37,280 --> 01:03:41,280
की स्थापना हो। मोदी अगर कह दे तो तुम लोगों को संतुष्ट

885
01:03:41,280 --> 01:03:45,880
केवल इतना बोल दे आज से हमारा हिंदू राष्ट्र हो गया। हो गया हिंदू

886
01:03:45,880 --> 01:03:50,080
राष्ट्र तो किसकी घोषणा ऐसी हो सकती

887
01:03:50,080 --> 01:03:55,000
है जो हिंदू राष्ट्र को हिंदू राष्ट्र माना जाए कि हां हिंदू राष्ट्र घोषित हो

888
01:03:55,000 --> 01:03:59,120
गया कभी सोचा है

889
01:03:59,120 --> 01:04:03,280
गुप्ता आचार्य के जो वो है फॉलोअर्स उन्होंने कभी सोचा है कि कौन

890
01:04:03,280 --> 01:04:07,280
सी ऐसी चीज होगी जैसे तुम लोगों ने अपने आप को स्वतंत्र मान लिया था मगर आज

891
01:04:07,280 --> 01:04:12,320
भी कई उसमें आप पूर्णतया स्वतंत्र नहीं हो

892
01:04:12,320 --> 01:04:16,640
देश का विभाजन हो ही रहा है तो हिंदू राष्ट्र तुम मानोगे

893
01:04:16,640 --> 01:04:21,280
कैसे कि घोषित हो गया तो

894
01:04:21,280 --> 01:04:25,880
बात आएगी कि जो सबसे वरिष्ठ पद होगा हिंदुओं

895
01:04:25,880 --> 01:04:30,920
का उसी की घोषणा करने से माना जाएगा ना कि हिंदू राष्ट्र घोषित

896
01:04:30,920 --> 01:04:34,920
हुआ कि किसी और के मेरे ख्याल से

897
01:04:34,920 --> 01:04:39,120
जो कुछ लोग हैं वो शायद जो हर फ्राइडे को अपना इलाज

898
01:04:39,120 --> 01:04:39,620
कराने

899
01:04:39,440 --> 01:04:43,680
जाता है उस अपने सिद्धांतों के अनुसार तो उसके सिद्धांतों के अनुसार तो ये जानकारी

900
01:04:43,680 --> 01:04:48,000
सही है। अपने अनुसार जो प्रत्येक शुक्रवार को अपने गुप्त रोगों

901
01:04:48,000 --> 01:04:52,000
का इलाज कराने जाता है उसके कह देने से मानोगे

902
01:04:52,000 --> 01:04:56,160
ना हिंदू राष्ट्र घोषित हो गया। तो सबसे वरिष्ठ

903
01:04:56,160 --> 01:05:00,240
पद जो होगा उसके कहने से माना जाएगा। तो

904
01:05:00,240 --> 01:05:04,720
कौन है सबसे वरिष्ठ पद पर? सबसे

905
01:05:04,720 --> 01:05:08,960
वरिष्ठ पद पर है शंकराचार्य। और शंकराचार्य

906
01:05:08,960 --> 01:05:13,040
लगभग एक वर्ष पूर्व से अपने उसमें

907
01:05:13,040 --> 01:05:17,280
जो उनका जितने भी प्रव होते हैं शिविर प्रवचन जहां भी उनका पड़ाव

908
01:05:17,280 --> 01:05:21,520
होता है वहां पर वो इसको हिंदू राष्ट्र ही कह रहे हैं हमारे

909
01:05:21,520 --> 01:05:25,840
भारतवर्ष को पहली बात घोषणा की परिवर्तन

910
01:05:25,840 --> 01:05:30,080
की बात क्या है घोषित होगा

911
01:05:30,080 --> 01:05:34,080
अब जो कटनी छटनी होगी अब जो आगे की प्रक्रिया है वह

912
01:05:34,080 --> 01:05:38,080
द्वितीय चरण चालू हो चुका है नेपाल

913
01:05:38,080 --> 01:05:42,640
में क्या हो रहा है? जहां के लिए गुरुदेव ने बोला था नेपाल से शुरू होगा।

914
01:05:42,640 --> 01:05:46,880
हमारे आसपास के पर्यावरण को देखिए, वातावरण को देखिए, प्रकृति को देखिए

915
01:05:46,880 --> 01:05:50,880
तो आपको इस बात का एहसास हो जाएगा कि घोषणा के बाद का जो द्वितीय चरण है

916
01:05:50,880 --> 01:05:54,560
वो चालू हो चुका है। और केवल घोषणा की बात

917
01:05:54,560 --> 01:05:58,640
है तो गुरुदेव ने जो माघ में माघ में

918
01:05:58,640 --> 01:06:02,640
उनका जो पट्टा अभिषेक वाला समारोह हुआ था वो राष्ट्रीय अधिवेशन

919
01:06:02,640 --> 01:06:06,640
कौन सा था वो नहीं मालूम है। मगर वहां से यह घोषित करना यह घोषणा

920
01:06:06,640 --> 01:06:10,800
कर दिया है। हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की जय। अब यह बोला जाता

921
01:06:10,800 --> 01:06:12,960
है

922
01:06:12,960 --> 01:06:17,360
तो घोषणा में अलग बात है और प्रैक्टिकली उसकालीफाई

923
01:06:17,360 --> 01:06:21,760
जो है व्यवहारिक रूप दिखना अलग बात है।

924
01:06:21,760 --> 01:06:25,920
तो ये दोनों ही चीजें जो उन्होंने तीन वर्ष वाली बात पे जो फक्तियां

925
01:06:25,920 --> 01:06:29,080
कसी जाती है वो हो चुकी

926
01:06:29,080 --> 01:06:33,200
है। हम नेपाल की उन्होंने घोषणा की है।

927
01:06:33,200 --> 01:06:38,000
नेपाल की भी घोषणा की थी। नेपाल में हो रहा है ना। तो

928
01:06:38,000 --> 01:06:42,840
अब बात आती है अकाट वाली बात मैं कर रहा था कि जब भी यह

929
01:06:42,840 --> 01:06:47,040
लोग इनकी बात कहीं फसती है इनसे तथ्य माना जाता है प्रमाण मांगा

930
01:06:47,040 --> 01:06:51,120
जाता है तो ये क्या करते हैं ये

931
01:06:51,120 --> 01:06:55,440
इस पर ले आते हैं कि तुमने वो बात बोली थी उसका क्या प्रमाण है तो ये तो आर्य समाजी

932
01:06:55,440 --> 01:07:00,160
भी तो यही करते हैं उनको इस बात पर नहीं जाना है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान

933
01:07:00,160 --> 01:07:04,400
है कि नहीं वो आपसे प्रश्न पूछ लेंगे दूसरा दूसरे प्रश्न

934
01:07:04,400 --> 01:07:08,400
का उत्तर दिया जा सकता है उसमें जाया जा सकता है। मगर उसमें

935
01:07:08,400 --> 01:07:09,760
जाएंगे तो यह प्रश्न

936
01:07:09,760 --> 01:07:14,000
छूट जाएगा। विषय छूट जाएगा। और जब उसमें जाएंगे और सामने वाला प्रश्न दूसरा

937
01:07:14,000 --> 01:07:18,200
करके विषय कर ही रहा है। तो जब उसमें जाएंगे उसमें भी यही

938
01:07:18,200 --> 01:07:22,720
करेगा। उसमें भी यही करेगा। फिर वो विषयांतर होगा। फिर विषयंतर

939
01:07:22,720 --> 01:07:26,960
होगा। यही विषय करते करते कभी निष्कर्ष पर पहुंचोगे ही नहीं।

940
01:07:26,960 --> 01:07:30,960
तो इनका कहने का मतलब होता है कि भाई उनकी यह बात भी तो गलत है। वहां क्यों नहीं तूने

941
01:07:30,960 --> 01:07:35,920
अकाट प्रमाण मांगा? तो पहली बात तो यही है कि भैया उससे

942
01:07:35,920 --> 01:07:40,400
जो तीन वर्ष की जो अवधि है उससे

943
01:07:40,400 --> 01:07:44,560
मेरा जो धर्म ब्रह्म है वह प्रभावित नहीं हो रहा है

944
01:07:44,560 --> 01:07:48,880
वो किसी के ऊपर कोई आक्षेप नहीं है कि किसी को

945
01:07:48,880 --> 01:07:53,400
किसी की अपमान हो रही हो या किसी के लिए वो जो

946
01:07:53,400 --> 01:07:57,440
है किसी की छवि बिगड़ रही हो मगर तुम तो

947
01:07:57,440 --> 01:08:01,680
ऐसे वक्तव्य दे रहे हो ना जो छवि बिगाड़ने वाले है तो उसके संबंध में तुमसे

948
01:08:01,680 --> 01:08:06,080
कुछ ना पूछा जाए और अगर छवि बिगाड़ने वाले वक्तव्यों

949
01:08:06,080 --> 01:08:10,160
की भी बात कर रहे और यह बात कर ले दुर्जन तोष न्याय

950
01:08:10,160 --> 01:08:14,320
से मान लिया जाए कि भाई मेरा वक्तव्य गलत है या पूरी के शंकराचार्य जी का वक्तव्य

951
01:08:14,320 --> 01:08:18,640
गलत है तो इसका अर्थ है कि अब तुम्हें अधिकार

952
01:08:18,640 --> 01:08:22,720
मिल गया है किसी के बारे में कुछ भी बोलने का तुमसे हम प्रश्न करेंगे तो तुम कहोगे

953
01:08:22,720 --> 01:08:25,640
तुम्हारी वो तीन वर्ष वाली बात भी तो वो

954
01:08:25,640 --> 01:08:29,840
थी अगर तुम नहीं मानते हो उसकी जो एक्सप्लेनेशन वो दे रहे हैं हम दे

955
01:08:29,840 --> 01:08:34,160
रहे हैं उसको तुम नहीं मानते हो तो तुम

956
01:08:34,160 --> 01:08:38,240
एक तरीके से यही हुआ ना कि हमसे थोड़ी देर के लिए अगर मान भी ले कि हमसे कोई

957
01:08:38,240 --> 01:08:42,240
गलती हुई है। इसका मतलब अब तुम तुम कोई भी पाप करने के लिए

958
01:08:42,240 --> 01:08:46,400
छूट गए तो ऐसा नहीं होगा ना। ऐसा नहीं होगा।

959
01:08:46,400 --> 01:08:51,040
छूटे की हद तक और चोर के घर तक पीछे पड़े रहेंगे।

960
01:08:51,040 --> 01:08:55,120
तो अकाट्य प्रमाण वाली बात यही है कि जब भी इनसे बोला जाता

961
01:08:55,120 --> 01:08:59,120
है कि अकाट्य तो ये करते हिंदू राष्ट्र मधुमक्खी की सेना और

962
01:08:59,120 --> 01:09:03,680
ये और वो फलाना ढिमका। इनको भी तो बहुत सारे देवताओं ने दर्शन दिए हैं।

963
01:09:03,680 --> 01:09:07,880
इन्होंने क्या कर लिया? क्या कर लिया देश के

964
01:09:07,880 --> 01:09:12,000
लिए? मैं तो पूरी के शंकराचार्य जी की कई बातें गिनवा दू। करपात्री जी महाराज

965
01:09:12,000 --> 01:09:16,200
जी की कई बातें गिनवा दू। अपनी गिनवा दूं। तूने क्या कर

966
01:09:16,200 --> 01:09:20,480
लिया? बता कुछ व्यवहारिक रूप से कुछ तेरी

967
01:09:20,480 --> 01:09:24,600
चीज कोई पकड़ में आई हो तेरे को। बता क्या कर लिया

968
01:09:24,600 --> 01:09:28,720
तूने? बोला है तूने बस। उस बोलने के द्वारा क्या

969
01:09:28,720 --> 01:09:32,240
तूने उखाड़ लिया?

970
01:09:32,240 --> 01:09:36,480
पूरी के शंकराचार्य जी ने बोला भी है और उनके द्वारा उनके नेतृत्व

971
01:09:36,480 --> 01:09:42,480
में बहुत सारी चीजें हुई है जो आज हमें प्राप्त हुई

972
01:09:46,440 --> 01:09:51,080
है। तो ये इनके कुतर्क होते हैं अकाट्य प्रमाण। अकाट्य

973
01:09:51,080 --> 01:09:55,360
प्रमाण। अकाट्य प्रमाण नहीं लाएंगे क्योंकि पूरी के शंकराचार्य

974
01:09:55,360 --> 01:09:59,440
जी ने कुछ ऐसी बात कही है जो इनकी समझ में नहीं आएगी। मगर ये अपने

975
01:09:59,440 --> 01:10:03,520
देवताओं के दर्शन लेने वाली बात समझ जाएंगे। दर्शन के बावजूद

976
01:10:03,520 --> 01:10:07,600
भी यह 16 की आयु में 18 की आयु में प्रेम में पड़

977
01:10:07,600 --> 01:10:11,760
जाएंगे। है ना? देवताओं के द्वारा देवताओं का सानिध्य प्राप्त

978
01:10:11,760 --> 01:10:16,720
होने पर भी इनको बायपोलर जैसी बीमारियां हो जाएगी। ये सब हो जाएगा।

979
01:10:16,720 --> 01:10:21,240
वाक स्कलन भी हो जाएगा इनका। देवताओं की कृपा होने के बाद

980
01:10:21,240 --> 01:10:26,600
भी सब हो जाएगा इनके साथ।

981
01:10:26,600 --> 01:10:30,640
मगर दूसरा व्यक्ति यदि कोई ऐसी बात बोल दे जो इनकी समझ में नहीं

982
01:10:30,640 --> 01:10:35,040
आ रही है इनको नहीं माननी उसके आधार पर ये अपने पाप को पुण्य

983
01:10:35,040 --> 01:10:41,040
सिद्ध

984
01:10:48,120 --> 01:10:54,120
करेंगे अब जरा

985
01:10:54,960 --> 01:11:00,960
कुल मिलाकर के अगर सीधी सीधी बात

986
01:11:05,080 --> 01:11:09,280
देखोगे कुल मिलाकर के सीधी-सीधी बात देखोगे कोई भी अगर निष्पक्षता

987
01:11:09,280 --> 01:11:13,280
के साथ भगवतानंद के जो कृत उनको देख ले तो इसका और

988
01:11:13,280 --> 01:11:17,280
कोई काम नहीं है। इसको शंकराचार्य परंपरा को ही नष्ट करना

989
01:11:17,280 --> 01:11:21,280
है। और मैं तो यहां तक बता दूं कि ये सारे संप्रदायों को भी आपस में

990
01:11:21,280 --> 01:11:23,640
भिड़वाना

991
01:11:23,640 --> 01:11:27,680
है। और कोई चेला अगर आना चाहे

992
01:11:27,680 --> 01:11:31,680
भगवत आनंद स्वयं आना चाहे तो आ सकता है अभी और आगे

993
01:11:31,680 --> 01:11:35,680
भी मुझे बता सकता है वो कब आना चाहता है। लोग अभी भी कह रहे हैं तुमको मालूम

994
01:11:35,680 --> 01:11:39,840
ही नहीं है। तुम्हारे बॉस को हमने कब से इनवाइट कर रखा है। आओ भैया। अब

995
01:11:39,840 --> 01:11:43,920
तुम्हारा बॉस बचता फिर रहा है क्योंकि उसको यह एहसास नहीं था

996
01:11:43,920 --> 01:11:48,080
कि सामने वाला आक्रामक भी हो सकता है। उसको यह लगता था ज्यादा

997
01:11:48,080 --> 01:11:53,320
से ज्यादा क्या होगा? मैं जाके सवाल करूंगा उत्तर दे देगा। मान लूंगा चला हूं ज्यादा से

998
01:11:53,320 --> 01:11:57,360
ज्यादा। मगर अभी उसको पता चला खेल अच्छा खेला है पर

999
01:11:57,360 --> 01:12:02,200
आदमी गलत चुन लिया है। अब इनका वो वीडियो लगाओ जरा इनके पिताजी

1000
01:12:02,200 --> 01:12:06,960
वाला। वीडियो दिखाओ।

1001
01:12:06,960 --> 01:12:11,160
कहते हैं ना सूट बूट में आया कन्हैया बैंड बजाने

1002
01:12:11,160 --> 01:12:17,160
को हम लगाओ वीडियो लगाओ

1003
01:12:17,640 --> 01:12:21,840
वाला ये जो एक ही कमेंट बार-बार करे बहुत बार

1004
01:12:21,840 --> 01:12:27,840
करे उसको जो है आप बैन कर

1005
01:12:28,200 --> 01:12:32,720
दीजिए और किसी भी गुरु द्रोही को

1006
01:12:32,720 --> 01:12:36,640
गुप्त आचार्य के समर्थक को

1007
01:12:36,640 --> 01:12:40,720
प्रत्येक शुक्रवार डॉक्टर से मिलने वाले के समर्थकों को किसी प्रकार

1008
01:12:40,720 --> 01:12:45,600
का कोई आपत्ति हो वह सामना कर सकता है।

1009
01:12:45,600 --> 01:12:46,100
सीने

1010
01:12:46,000 --> 01:12:51,240
पर जो घाव है वो फूलों के गुच्छे हैं। हमें पागल ही रहने दो। हम पागल ही अच्छे

1011
01:12:51,240 --> 01:12:52,240
हैं।

1012
01:12:52,240 --> 01:12:58,240
आओ कौन है भाई सामना करने के लिए।

1013
01:13:04,960 --> 01:13:08,960
कोई है सामना करने आए तो इनके पिताजी वाला

1014
01:13:08,960 --> 01:13:13,680
वो लगाए वीडियो और हां

1015
01:13:13,680 --> 01:13:18,000
भगवत आनंद जी के पिताजी के बारे में बात होने जा रही है तो इस बात का बहुत

1016
01:13:18,000 --> 01:13:22,320
सख्ती से ध्यान रखें वह समर्थक हो विशेष रूप से मैं अपने समर्थकों

1017
01:13:22,320 --> 01:13:26,800
को ही कहूंगा कि उनके लिए किसी प्रकार की कोई अपमानजनक बात

1018
01:13:26,800 --> 01:13:30,960
गलती से भी ना लिखें गलती से भी ध्यान

1019
01:13:30,960 --> 01:13:36,960
रखना

1020
01:13:42,440 --> 01:13:46,240
हम चलो

1021
01:13:46,240 --> 01:13:50,880
इन लोगों के पक्ष में जाकर महिला कथा वाचिका का समर्थन किया

1022
01:13:50,880 --> 01:13:54,960
और उन्होंने गलत अब देखिए पहला तो सीन

1023
01:13:54,960 --> 01:13:59,440
ये है कि मेरे पिताजी ने भी इनका

1024
01:13:59,440 --> 01:14:03,440
कहना है इस वीडियो में पहले चला दीजिए थोड़ा चला दीजिए इन लोगों के पक्ष

1025
01:14:03,440 --> 01:14:07,520
में जाकर महिला कथा वाचिका का समर्थन किया। पॉज करिए।

1026
01:14:07,520 --> 01:14:13,520
उन्होंने गलत किया। पॉज करिए। ये नहीं पॉज

1027
01:14:13,560 --> 01:14:17,600
करिए। इनके पिताजी ने महिला

1028
01:14:17,600 --> 01:14:22,400
कथावाचक का समर्थन किया।

1029
01:14:22,400 --> 01:14:25,680
ठीक है?

1030
01:14:25,680 --> 01:14:30,280
इन्होंने नाम लेकर उनके लिए उनके संबंध

1031
01:14:30,280 --> 01:14:34,640
में पतियां कसते हुए टांग

1032
01:14:34,640 --> 01:14:38,800
खींचते हुए तू तड़ा की भाषा में जैसे सबका करते हैं।

1033
01:14:38,800 --> 01:14:42,880
क्यों नहीं किया? ये तो निग्रह करने वाले हैं ना। एक

1034
01:14:42,880 --> 01:14:47,520
जैसा ही करेंगे। सबके साथ व्यवहार या अलग-अलग करेंगे।

1035
01:14:47,520 --> 01:14:50,480
क्यों नहीं किया?

1036
01:14:50,480 --> 01:14:54,600
अपने पिताजी की जब बात आई तो यहां पर दोगलापन

1037
01:14:54,600 --> 01:14:58,640
क्यों उनका बाकायदा नाम लिखते मैं किसके बारे में बात करने जा रहा

1038
01:14:58,640 --> 01:15:02,960
हूं फोटो लगाते और तो और उसके

1039
01:15:02,960 --> 01:15:07,120
बाद इनके पिताजी का क्या पक्ष है इस वीडियो के बाद वो

1040
01:15:07,120 --> 01:15:12,000
पक्ष सुधर ना जाने पर बार-बार वीडियो बनाते

1041
01:15:12,000 --> 01:15:16,360
क्यों नहीं बनाया पहली

1042
01:15:16,360 --> 01:15:21,520
बार चलिए आगे बढ़ाइए

1043
01:15:21,520 --> 01:15:25,800
कि मेरे पिताजी है तो मेरे साथ समस्या ये हो जाती है कि जो धर्म के द्रोही

1044
01:15:25,800 --> 01:15:29,880
है धर्म को बेच खाने वाले लोग

1045
01:15:29,880 --> 01:15:34,320
हैं। मैं किसी आचार्य या पीठ को नहीं कह रहा हूं।

1046
01:15:34,320 --> 01:15:38,320
पीठ के नाम पर उछलने वालों को कह रहा हूं। हम तो वे मेरे

1047
01:15:38,320 --> 01:15:42,320
पिताजी को ही मेरे विरुद्ध करके उनके ही माध्यम

1048
01:15:42,320 --> 01:15:46,400
से कुछ वक्तव्य निकलवाकर मेरे ही विरोध में मेरा ही दुष्प्रचार करते हैं।

1049
01:15:46,400 --> 01:15:50,480
तो मैं तो ना पिता के विरोध में जा सकता हूं ना शास्त्र के विरोध में जा सकता

1050
01:15:50,480 --> 01:15:51,920
हूं। हम

1051
01:15:51,920 --> 01:15:56,160
पिता के विरोध में जाने पर ये लोग मुझे पितृद्रोही कहेंगे और शास्त्र

1052
01:15:56,160 --> 01:16:00,800
के विरोध में जाने पर शास्त्रदोही कहेंगे। क्यों भाई

1053
01:16:00,800 --> 01:16:04,880
और क्यों भाई पितृद्रोही पितृद्रोही क्यों कहेंगे? वहां पर तो

1054
01:16:04,880 --> 01:16:09,520
समष्टि के रूप से देखा जाएगा ना। कहां गया सिद्धांत?

1055
01:16:09,520 --> 01:16:14,760
समष्टि के रूप से देखा जाएगा ना। सम जब आपका व्यक्तिगत धर्म जो है

1056
01:16:14,760 --> 01:16:19,120
जो सामाजिक रूप से दिखाई देने वाले धर्म के विरोध में हो गया

1057
01:16:19,120 --> 01:16:23,520
तो वहां तो उसकी प्रधानता हो जाएगी ना। ऐसे तो प्रह्लाद जी को पितृ

1058
01:16:23,520 --> 01:16:27,760
पितृ कहा जाएगा। पितृद्रोही प्रह्लाद

1059
01:16:27,760 --> 01:16:31,760
जी ने क्या किया था? श्री राम जी ने क्या किया

1060
01:16:31,760 --> 01:16:36,000
था? पत्नी द्रोही कहा जाएगा उन्हें अगर इस तरह से देखोगे तो अगर समष्टि के धर्म

1061
01:16:36,000 --> 01:16:40,080
को देखना पड़ेगा ना यह सिद्धांत नहीं जानते क्या भगवत आनंद

1062
01:16:40,080 --> 01:16:44,160
क्यों कहा जाएगा तुम्हें पितृ द्रोही तुम तो शास्त्र निष्ठा दिखाओगे वहां पर

1063
01:16:44,160 --> 01:16:48,600
तो ये इनका अपने पिता के प्रति विरोध प्रकट करने का

1064
01:16:48,600 --> 01:16:52,640
बहाना विरोध प्रकट ना करने का या धीमी आवाज में करने का

1065
01:16:52,640 --> 01:16:57,040
मीठी आवाज में करने का कर्कस तरीके से ना करने का रोस्ट

1066
01:16:57,040 --> 01:17:02,800
करते हुए ना करने का कैरी मिनाटी बनते हुए ना करने का

1067
01:17:02,800 --> 01:17:07,560
बहाना ना यह है तुम्हारा दोगलापन भगवत आनंद

1068
01:17:07,560 --> 01:17:11,840
कहा मुझे अपनी प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय

1069
01:17:11,840 --> 01:17:16,480
है किंतु अन्य मान्य जनों ने कहा

1070
01:17:16,480 --> 01:17:20,480
और हमें सूचना मिली कि पिताजी का उत्तर था कि मठ

1071
01:17:20,480 --> 01:17:25,320
और एक मिनट पॉज करो एक मिनट पॉज करो इससे मुझे एक बात याद आई

1072
01:17:25,320 --> 01:17:29,320
भगवतानंद के जीवन में शब्द प्रमाण कौन

1073
01:17:29,320 --> 01:17:34,600
है किसका इसका शब्द प्रमाण है भगवतानंद के जीवन

1074
01:17:34,600 --> 01:17:38,880
का। ये जो इसने कहा ना मान्य लोग वो आधार

1075
01:17:38,880 --> 01:17:42,960
क्या है मान्य लोगों का? ये आधार

1076
01:17:42,960 --> 01:17:46,960
है कि वो भगवतानंद के समर्थन में कब तक बोलते रहेंगे? भगवतानंद को अच्छी

1077
01:17:46,960 --> 01:17:52,960
लगने वाली बातें कब तक बोलते रहेंगे?

1078
01:17:53,480 --> 01:17:57,520
हम या यह आधार है कि

1079
01:17:57,520 --> 01:18:02,320
उनका वो परंपरा से है कि नहीं। उनके लक्षण वो संबंध सन्यासी है कि नहीं

1080
01:18:02,320 --> 01:18:06,400
वो प्रामाणिक आचार्य है कि नहीं तो क्या है मानने का वो क्या है क्योंकि तुमने

1081
01:18:06,400 --> 01:18:11,200
तो किसी भी हमारी जानकारी में तुमने किसी भी

1082
01:18:11,200 --> 01:18:15,360
प्रामाणिक आचार्य को प्रमाणिक माना ही नहीं है उसको शब्द प्रमाण

1083
01:18:15,360 --> 01:18:20,000
माना नहीं है तो तुम्हारे जीवन का शब्द प्रमाण क्या है

1084
01:18:20,000 --> 01:18:24,160
भाई शास्त्र प्रमाण है तो शास्त्र भी तो इस पर टिके हैं कि उसको गुरु

1085
01:18:24,160 --> 01:18:29,040
परंपरा से कोई गुरु जो है वेरीफाई कर दे

1086
01:18:29,040 --> 01:18:33,040
उसकी उसके भाई गुरु गोविंद और ग्रंथ इनमें सामंजसता

1087
01:18:33,040 --> 01:18:37,120
होगी ना नहीं तो शास्त्र केवल शास्त्र कर दोगे बिना गुरु के तो

1088
01:18:37,120 --> 01:18:41,520
शास्त्र कोई भी ले आएगा तो क्या है वो आपके शब्द

1089
01:18:41,520 --> 01:18:45,600
वही तो ऐसा होगा ना जो साक्षी होगा आपके जीवन में वो है

1090
01:18:45,600 --> 01:18:51,120
नहीं खैर चलो आगे चलो

1091
01:18:51,120 --> 01:18:55,600
के पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग जुड़े हुए हैं एक मिनट वेठा

1092
01:18:55,600 --> 01:18:59,600
के अपनी परंपरा अपनी परंपरा ये बताता नहीं है ठीक

1093
01:18:59,600 --> 01:19:04,160
से स्पष्ट रूप से अपनी परंपरा के बारे में आज तक नहीं बोला

1094
01:19:04,160 --> 01:19:08,400
और यह कहता है कि मैं निवेशिका लिखूंगा तो आज क्यों ताल ठोक रहा है मैं निग्र आचार्य हूं निग्र

1095
01:19:08,400 --> 01:19:14,400
आचार्य हूं जब लिख ले तब बताना तू कौन है

1096
01:19:17,600 --> 01:19:21,680
ठीक है तो भाई इसके जैसे इसने कहा कि

1097
01:19:21,680 --> 01:19:26,320
तुम्हारे गुरु के तुम्हारे गुरु में इतनी औकात नहीं है ये है वो है ये सब इसने कहा

1098
01:19:26,320 --> 01:19:30,480
तो इसके गुरु गुरु के बारे में कोई बात कहां से करे तो चोरों की तरह घूमता है अपनी

1099
01:19:30,480 --> 01:19:34,560
चीजों को छुपा करके तो इसका वो गुरु कौन

1100
01:19:34,560 --> 01:19:38,560
है जिस पर इसे अंतिम रूप से विश्वास हो के आए सच बोल रहा है

1101
01:19:38,560 --> 01:19:43,440
ऐसा कोई है जीवन में इसके

1102
01:19:43,440 --> 01:19:47,520
ये एक सोचने वाली बात है एक सवाल है ठीक

1103
01:19:47,520 --> 01:19:52,000
है आगे बढ़िए पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग

1104
01:19:52,000 --> 01:19:56,240
पिताजी का उत्तर था कि मठ और

1105
01:19:56,240 --> 01:20:00,560
आचार्य के पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग जुड़े हुए हैं वे

1106
01:20:00,560 --> 01:20:04,560
व्यक्ति निष्ठा के चक्कर में मेरे पुत्र का कुछ अहित ना कर दे

1107
01:20:04,560 --> 01:20:06,240
यही कारण है कि मुझे अपने पुत्र के

1108
01:20:06,240 --> 01:20:10,400
विरोध में बयान देना पड़ता है तो पीछे करिए जरा

1109
01:20:10,400 --> 01:20:14,400
पीछे करिए हल्का सा पीछे करिए पिताजी का ये इसको

1110
01:20:14,400 --> 01:20:18,400
पता चला कि पिताजी ने ऐसा इसलिए कहा है जितनी संपदा

1111
01:20:18,400 --> 01:20:22,520
प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है पीछे करिए

1112
01:20:22,520 --> 01:20:26,720
थोड़ा पिता के विरोध में जाने पर ये लोग मुझे पितोही चलने

1113
01:20:26,720 --> 01:20:31,200
दीजिए और शास्त्र के विरोध में जाने पर शास्त्रदोही कहेंगे

1114
01:20:31,200 --> 01:20:32,320
तो मैं थोड़ा फस जाता

1115
01:20:32,320 --> 01:20:36,480
हूं और मौन हो जाता हूं। मौन हो जाते हैं। कुछ नहीं कहा पिताजी

1116
01:20:36,480 --> 01:20:37,280
को।

1117
01:20:37,280 --> 01:20:41,360
एक मिनट ये आचार्यों के लिए बोलते समय मौन नहीं

1118
01:20:41,360 --> 01:20:45,760
होते हैं। एक मिनट। यह आचार्यों के लिए प्रामाणिक

1119
01:20:45,760 --> 01:20:49,760
आचार्यों के लिए बोलने के लिए मौन नहीं होते हैं। यह जिनके प्रति गुरु भाव

1120
01:20:49,760 --> 01:20:53,840
रखते हैं, गुरु मानते हैं, उनके लिए बोलने के लिए मौन नहीं होते हैं। प्रमाणिक

1121
01:20:53,840 --> 01:20:57,920
परंपराओं के बारे में बोलने के लिए मौन नहीं होते हैं। मगर अपने पिता के

1122
01:20:57,920 --> 01:21:03,920
बारे में बोलते समय मौन हो जाते हैं।

1123
01:21:04,120 --> 01:21:08,640
चलिए तो मैंने तो कुछ नहीं कहा पिताजी को। मुझे

1124
01:21:08,640 --> 01:21:13,360
अपनी प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। किंतु

1125
01:21:13,360 --> 01:21:17,360
अन्य मान्य जनों ने कहा और हमें सूचना मिली कि

1126
01:21:17,360 --> 01:21:21,600
पिताजी का उत्तर था कि मठ और

1127
01:21:21,600 --> 01:21:25,680
आचार्यों के पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग इनको सूचना मिली कि

1128
01:21:25,680 --> 01:21:30,320
पिताजी ने ये कहा है में मेरे पुत्र का कुछ

1129
01:21:30,320 --> 01:21:34,480
अित एक मिनट इनके इनके इनको

1130
01:21:34,480 --> 01:21:40,480
जो है सूचना मिली कि इनके पिताजी ने यह कहा है सूचना

1131
01:21:42,960 --> 01:21:47,040
इनको सूचना मिली है कि इनके पिताजी ने यह कहा है कि मठ के लोग

1132
01:21:47,040 --> 01:21:51,040
मठ की प्रतिष्ठा के लिए कहीं मेरे बेटे का अहित ना

1133
01:21:51,040 --> 01:21:57,040
कर दें। इसलिए इनके पिताजी ने यह कहा

1134
01:21:58,760 --> 01:22:02,400
है। चलाइए।

1135
01:22:02,400 --> 01:22:06,480
कारण है कि मुझे अपने पुत्र के विरोध में बयान देना पड़ता है।

1136
01:22:06,480 --> 01:22:10,480
तो यदि पिताजी ने महिला कथा वाचिका का समर्थन किया है

1137
01:22:10,480 --> 01:22:15,000
किसी आशंका से भयभीत होकर तो वो भी गलत

1138
01:22:15,000 --> 01:22:19,200
है। धर्म निर्भयता से चलता है। आप कितनों से आशंकित

1139
01:22:19,200 --> 01:22:23,280
होते रहेंगे? कितनों से डरते रहेंगे? मुगल काल में तोड़कर

1140
01:22:23,280 --> 01:22:29,280
आपका माथा काट दिया।

1141
01:22:49,520 --> 01:22:53,800
तो देखिए प्रकरण क्या है पूरा वो मैं बता दूं। कुछ झलकियां आपने सुन ली

1142
01:22:53,800 --> 01:22:58,280
है। प्रकरण पूरा यह है

1143
01:22:58,280 --> 01:23:02,640
कि ज्योतिर मठ की ओर से कोई आयोजन हुआ होगा

1144
01:23:02,640 --> 01:23:07,280
जहां पर संभवत कुछ ऐसा अर्थ निकल रहा है कि महिला कथावाचक

1145
01:23:07,280 --> 01:23:11,800
को समर्थन मिला व्यास गद्दी का बैठने का।

1146
01:23:11,800 --> 01:23:15,920
तो इन्होंने संभवत उस बात

1147
01:23:15,920 --> 01:23:20,200
का विरोध किया हो, प्रतिकार किया हो ज्योतिर्मठ का

1148
01:23:20,200 --> 01:23:24,560
और इनके पिताजी ने इनका विरोध

1149
01:23:24,560 --> 01:23:28,720
करते हुए वक्तव्य दे दिया। उसके बाद इन्होंने कहा है कि सूचना मिलने

1150
01:23:28,720 --> 01:23:33,960
पर हमें पता लगा कि पिताजी ने ऐसा क्यों कहा था?

1151
01:23:33,960 --> 01:23:38,360
क्योंकि मठ के द्वारा इन पर दबाव डाला गया था

1152
01:23:38,360 --> 01:23:43,120
और उनके पिताजी पर और वो कहीं इनका

1153
01:23:43,120 --> 01:23:47,280
अहित ना कर दे इसलिए इनके पिताजी ने वो गलत बयान

1154
01:23:47,280 --> 01:23:52,560
दिया। अब मैं पूछना चाहता हूं।

1155
01:23:52,560 --> 01:23:56,120
अब मैं पूछना चाहता

1156
01:23:56,120 --> 01:24:00,640
हूं जबकि उनके पिताजी का कोई मामला नहीं था वहां पर जो ज्योतिमठ

1157
01:24:00,640 --> 01:24:06,640
में वो चीजें हुई जो बस उन्होंने केवल एक वक्तव्य दिया

1158
01:24:11,080 --> 01:24:15,360
संभवत इस ये सोचते हुए कि वहां के जो

1159
01:24:15,360 --> 01:24:20,080
परिकरों द्वारा मठ के द्वारा इनके उनके पुत्र का इनका इसका भगवतानंद

1160
01:24:20,080 --> 01:24:26,080
का अहित ना हो

1161
01:24:29,640 --> 01:24:33,840
जाए तो अब इनका कहना है कि क्योंकि उन पर दबाव था

1162
01:24:33,840 --> 01:24:38,640
अपने पुत्र को बचाने के लिए निगराचार्य का

1163
01:24:38,640 --> 01:24:44,640
निग्राचार्य को नाम लेते

1164
01:24:44,920 --> 01:24:49,280
हुए तो अब इनका कहना है पूरा मामला

1165
01:24:49,280 --> 01:24:53,360
यही है कि कहीं किसी प्रकार से जो ज्योतिर मठ है

1166
01:24:53,360 --> 01:24:57,680
उनके वहां पर किसी प्रकार से ऐसा अर्थ प्रकट होता है कि महिला

1167
01:24:57,680 --> 01:25:01,760
कथा वाचिका को समर्थन मिला और यह उसका विरोध करते

1168
01:25:01,760 --> 01:25:05,920
हैं तो इनके पिता का इनके विरोध में एक वक्तव्य जाता है।

1169
01:25:05,920 --> 01:25:10,080
उसके बाद जब ये पिताजी के इनको पता चलता है कि इनके पिताजी ने ऐसा वक्तव्य क्यों

1170
01:25:10,080 --> 01:25:14,240
दिया है तो इनको पता चलता है कि भाई उन पर दबाव था इस बात का कि उनके

1171
01:25:14,240 --> 01:25:18,400
पुत्र का जो है किसी प्रकार से अहित ना हो जाए। तो अब

1172
01:25:18,400 --> 01:25:23,280
सबसे यहां पर बड़ी बात है क्या यह भगवतानंद

1173
01:25:23,280 --> 01:25:27,440
ने अपने पिताजी से यह कहा था कि तुम शालिग्राम

1174
01:25:27,440 --> 01:25:31,680
पर हाथ शालिग्राम को हाथ में लेकर के जो है शपथ लो कि

1175
01:25:31,680 --> 01:25:35,680
तुम्हारे ऊपर दबाव आया है ज्योतिर मठ

1176
01:25:35,680 --> 01:25:40,280
से मेरा विरोध करने का शपथ

1177
01:25:40,280 --> 01:25:44,480
लो दबाव आया है कि नहीं क्या इसने ऐसा किया

1178
01:25:44,480 --> 01:25:48,760
था और नहीं किया था तो क्यों नहीं किए किया

1179
01:25:48,760 --> 01:25:53,000
है और अगर कर सकता है तो कब करेगा

1180
01:25:53,000 --> 01:25:57,120
ऑनलाइन वीडियो बना कि मेरे पिताजी हाथ

1181
01:25:57,120 --> 01:25:59,920
में शालिग्राम भगवान को लेकर ये

1182
01:25:59,920 --> 01:26:04,560
शपथ खाते हैं कि उन्होंने जो महिला

1183
01:26:04,560 --> 01:26:08,880
कथावाचक का समर्थन कर दिया था ज्योतिर मठ के समर्थन में

1184
01:26:08,880 --> 01:26:13,320
वो ज्योतिर्मठ द्वारा डाले गए दबाव के कारण किया था का

1185
01:26:13,320 --> 01:26:17,600
शपथ शपथ वाला है ना तू गंगा की सौगंध

1186
01:26:17,600 --> 01:26:21,240
वाला है ना तू

1187
01:26:21,240 --> 01:26:26,160
खा और अगर किसी का शब्द प्रमाण हो सकता है

1188
01:26:26,160 --> 01:26:30,440
तो फिर आचार्य रामशंकर शुक्ल जी का प्रमाण क्यों

1189
01:26:30,440 --> 01:26:34,640
नहीं तो ये सब सोचने वाली बात है जो प्रबुद्ध जन है उनको जरूर

1190
01:26:34,640 --> 01:26:38,800
समझ में आएंगी ये सब बातें और ये बताएं बहुत बड़े तीसार

1191
01:26:38,800 --> 01:26:43,160
खान है जो पन्ने खान है बहुत बड़े वो हैं निग्र

1192
01:26:43,160 --> 01:26:47,360
आचार्य तो ये बताएं कब खा रहे हैं शपथ अपने पिताजी को साथ

1193
01:26:47,360 --> 01:26:51,520
में लेकर के कब शपथ दिखा रहे हैं? वीडियो फिल्म बनाएं उसकी उसको डालें

1194
01:26:51,520 --> 01:26:55,600
शपथ खाते हुए कि मेरे ऊपर ज्योतिर मठ से दबाव डाला गया इसलिए मैंने

1195
01:26:55,600 --> 01:27:01,600
महिला कथावाचक के समर्थन में वक्तव्य दिया था।

1196
01:27:04,040 --> 01:27:08,240
हम तो ये सब बातें हैं और यह पूरा जो वीडियो है पूरा प्रकरण है एफबी

1197
01:27:08,240 --> 01:27:12,320
पर अपलोडेड भी है। वहां पर जाकर के आप देख सकते हैं। और

1198
01:27:12,320 --> 01:27:16,320
यह पिता का विरोध इतना छुपा कर क्यों? इतना छुपा

1199
01:27:16,320 --> 01:27:20,120
हुआ विरोध क्यों पिता

1200
01:27:20,120 --> 01:27:24,480
का? तो यह दोगलापन है। जैसा व्यवहार

1201
01:27:24,480 --> 01:27:28,560
हम अन्यों के साथ अन्यों से अपने लिए अपेक्षा करते हैं। वैसा

1202
01:27:28,560 --> 01:27:32,640
ही व्यवहार हमें अन्यों के साथ करना चाहिए। यह है दोगलेपन की पराकाष्ठा।

1203
01:27:32,640 --> 01:27:36,920
अपने पिता के लिए मीठी आवाज, धीमी

1204
01:27:36,920 --> 01:27:42,000
आवाज और अन्यों के पिता के लिए

1205
01:27:42,000 --> 01:27:47,240
अवमानना अपमान।

1206
01:27:47,240 --> 01:27:51,440
गाली अपने पिता से अपने पिता को कुछ नहीं कहा कि

1207
01:27:51,440 --> 01:27:55,840
खाओ शालिग्राम भगवान को हाथ में ले सौगंध

1208
01:27:55,840 --> 01:28:00,000
मगर अन्यों के पिता को ऐसे ललकारोगे उनका शब्द यही प्रमाण है उन्हें

1209
01:28:00,000 --> 01:28:04,240
किसी टच्चे के लिए सौगंध खाने की आवश्यकता नहीं है और अगर खानी

1210
01:28:04,240 --> 01:28:08,800
है ना तो खाकर बोल पहले जाकर के अभी मुक्तेश्वर

1211
01:28:08,800 --> 01:28:14,800
जी के लिए ज्योतिर्मठ के लिए बोल

1212
01:28:17,360 --> 01:28:23,360
इनके पिता से हमारा कोई द्वेष नहीं है। वो सच में विद्वान

1213
01:28:23,400 --> 01:28:27,520
है। उनको सम्मान है। मगर यहां पर बात है प्रकरण

1214
01:28:27,520 --> 01:28:33,240
की, सिद्धांत की दोगलापन

1215
01:28:33,240 --> 01:28:37,440
क्यों? ये स्वयं उनका सम्मान

1216
01:28:37,440 --> 01:28:41,680
कम करवा रहे हैं। और अगर ये जो शपथ में

1217
01:28:41,680 --> 01:28:45,840
शपथ हाथ में लेकर के बात कर शालिग्राम भगवान को हाथ में लेकर

1218
01:28:45,840 --> 01:28:50,160
शपथ लेने वाली बात है तो मुझे बताएं भगवत आनंद कि वो अपने पिता के साथ

1219
01:28:50,160 --> 01:28:54,240
शपथ लेते हुए वीडियो कब बना रहा है ज्योतिर मठ के बारे में जो

1220
01:28:54,240 --> 01:28:58,240
ये मिथ्या प्रलाप किया है। अब मुक्तेश्वरानंद जी के लिए जो ये बोल रहा है कि वहां

1221
01:28:58,240 --> 01:29:02,680
से समर्थन ये है वो है वो क्या संदर्भ है वो एक अलग बात

1222
01:29:02,680 --> 01:29:06,800
है। मगर ज्योतिर मठ के

1223
01:29:06,800 --> 01:29:10,800
बारे में जो मिथ्या प्रलाप किया गया है। मैं तो मिथ्या ही कहूंगा भाई कि

1224
01:29:10,800 --> 01:29:15,520
भैया वह जो है उनसे दबाव डाला गया इन पर तब ऐसा वक्तव्य दिया

1225
01:29:15,520 --> 01:29:21,480
है ना तो शपथ खा के बोलो ज्योति त्रिमठ के द्वारा दबाव डाला गया

1226
01:29:21,480 --> 01:29:25,840
बुलवाओ अब हम इससे आगे अ

1227
01:29:25,840 --> 01:29:29,920
थोड़ी देर बाद अभी उसको बता दिया जाएगा कितने बजे हम लोग दोबारा से लाइव

1228
01:29:29,920 --> 01:29:34,240
होंगे और अब एक साथ लाइव करते हुए इनके वह सारे जितने वीडियोस

1229
01:29:34,240 --> 01:29:39,200
अभी तक आए हैं कोशिश करेंगे उसकी संक्षिप्त में

1230
01:29:39,200 --> 01:29:43,440
बात करने की उस सारे मामले पर और फिलहाल

1231
01:29:43,440 --> 01:29:47,600
इस लाइव को स्थगित कर रहे हैं। अगर कोई सामना करना चाहता है किसी

1232
01:29:47,600 --> 01:29:48,800
में दम हो

1233
01:29:48,800 --> 01:29:52,880
सामना करने की फिलहाल वो आ सकता है। अन्यथा लाइव को कुछ

1234
01:29:52,880 --> 01:29:56,960
देर के लिए स्थगित करते हुए हम लोग दोबारा

1235
01:29:56,960 --> 01:30:00,200
से लाइव शुरू करेंगे

1236
01:30:00,200 --> 01:30:04,560
और क्या कहते हैं उसमें जितने भी अभी तक वो सब किया गया है ना ये प्रलाप

1237
01:30:04,560 --> 01:30:08,640
विधवा विलाप इत्यादि उस सब पर बात करेंगे। कुछ देर बाद कोई

1238
01:30:08,640 --> 01:30:14,640
आना चाहता है तो हम रुके हुए

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01:30:23,320 --> 01:30:27,840
हैं। चलिए सभी को जय श्री राम।

1240
01:30:27,840 --> 01:30:31,840
मतलब सब लोग ये समझ गए कि किसी को पड़ना नहीं है चक्कर में

1241
01:30:31,840 --> 01:30:35,920
और कोई है नहीं टक्कर में। और हां बार-बार कह रहा हूं भगवत

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01:30:35,920 --> 01:30:39,920
आनंद को मैंने कई बार बोल दिया है कि तुझे कब

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01:30:39,920 --> 01:30:44,640
आना है यह बता सामना करने।

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01:30:44,640 --> 01:30:48,640
थोड़ी देर बाद मिलते हैं लाइव में। जय श्री राम।
