1
00:00:03,000 --> 00:00:06,680
सभी को जय श्री राम

2
00:00:06,680 --> 00:00:11,920
और आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक

3
00:00:11,920 --> 00:00:17,160
होंगे जो भी समर्थक हैं वह मर्यादा में रहे और जो भी विरोधी

4
00:00:17,160 --> 00:00:21,480
हैं वह अच्छे से रिसर्च करें

5
00:00:21,480 --> 00:00:27,000
उसके बाद कोई बात

6
00:00:27,000 --> 00:00:31,320
बोले अब जो है बात आती है कुछ के जो हमने

7
00:00:31,320 --> 00:00:36,200
लाइव किया उसमें सबसे पहली बात तो यह है कि

8
00:00:36,200 --> 00:00:40,760
एक गौरी करके एक मातृ शक्ति है जो ा

9
00:00:40,760 --> 00:00:44,880
पर मुझे फॉलो करती है कि नहीं ये नहीं पता और मुझे ये भी नहीं पता ठीक

10
00:00:44,880 --> 00:00:49,120
से कि वो समर्थन देती है कि नहीं और ऐसा कुछ लास्ट के कुछ

11
00:00:49,120 --> 00:00:53,160
वीडियोस वगैरह में शायद उसने विरोध भी किया था मगर उसने मुझे बताया था कि पुरी

12
00:00:53,160 --> 00:00:58,920
के शंकराचार्य जी हैं वो किसी प्रकार से उसके दादा लगते हैं

13
00:00:58,920 --> 00:01:02,920
और उस उन्हीं को वो गुरु रूप में देखती है

14
00:01:02,920 --> 00:01:06,920
तो उस उस तरीके से मेरा बहन के जैसा एक छोटी बहन के

15
00:01:06,920 --> 00:01:11,120
जैसा उसके प्रति भाव था और वो यदा कदा

16
00:01:11,120 --> 00:01:15,960
कुछ ऐसी चीजें भी करती रहती थी जिससे मैं सहमत नहीं हूं जैसे कि

17
00:01:15,960 --> 00:01:18,080
इसकन को लेकर के ऐसी

18
00:01:18,080 --> 00:01:23,080
बातें बोल देना जो मतलब मर्यादा की लाइन को क्रॉस

19
00:01:23,080 --> 00:01:27,400
करना या किसी को भी लेकर के बोलना तो वो करती रहती थी वहां

20
00:01:27,400 --> 00:01:32,000
पर वो मुझसे व के जरिए कनेक्ट थी

21
00:01:32,000 --> 00:01:36,040
और जिस दिन मुझे

22
00:01:36,040 --> 00:01:40,560
दिन का एजेक्ट याद नहीं मगर मुझे बहुत सारे लोग ज हमने लाइव की थी

23
00:01:40,560 --> 00:01:44,600
भगवता अंद के बारे में तो उस लाइव के बाद बहुत सारे

24
00:01:44,600 --> 00:01:48,920
लोग मुझे जो है मैसेजेस कर रहे थे ट

25
00:01:48,920 --> 00:01:54,760
बहुत सारे और वैसे भी करते हैं उसके बाद और भी कर

26
00:01:54,760 --> 00:01:58,800
रहे तो फिर क्या है कि जब यह

27
00:01:58,800 --> 00:02:02,800
सब कर रहे थे तो बीच इसका भी मैसेज आया और मुझे मालूम था कि यह

28
00:02:02,800 --> 00:02:07,080
भगवता नंद को भी सपोर्ट करती है और करना चाहिए भाई जहां जिस अंश

29
00:02:07,080 --> 00:02:11,240
में जहां जिस जिस अंश में कोई व्यक्ति धार्मिक कार्य

30
00:02:11,240 --> 00:02:15,320
कर रहा है उसका सपोर्ट करना चाहिए तो ये करती थी मगर यह अपेक्षा करती थी

31
00:02:15,320 --> 00:02:19,480
कि मैं भी उनका वैसे ही सपोर्ट करू जैसे वो कर रही तो मेरा मामला अलग था

32
00:02:19,480 --> 00:02:23,520
क्योंकि उसने इधर मैंने कई बार बताया गुरुदेव के लिए ऐसी

33
00:02:23,520 --> 00:02:27,560
चीजें की है भगवता आनंद ने जिसके कारण से मुझे एक निश्चित दूरी

34
00:02:27,560 --> 00:02:31,560
बनाना उचित लगा ये इससे बेटर कि मैं आके आक के

35
00:02:31,560 --> 00:02:35,880
तुमसे भीड़ू पहले तुम ऐसा कैसे बोल रहे हो वैसा कैसे बोल रहे हो जय श्री राम

36
00:02:35,880 --> 00:02:40,000
हर्षित जी है ना तो इसलिए मैंने उससे निश्चित दूरी बनाना ही

37
00:02:40,000 --> 00:02:44,160
उचित समझा तो इनका एक मैसेज उस दिन जिस दिन

38
00:02:44,160 --> 00:02:48,240
मुझे इनसे रिलेटेड भ भगवता अंद से रिलेटेड बहुत सारे मैसेजेस

39
00:02:48,240 --> 00:02:53,160
आ रहे थे तो उस दिन

40
00:02:53,160 --> 00:02:57,160
गौरी का भी एक मैसेज आया उस मैसेज को मैंने पूरा नहीं देखा बहुत सारे

41
00:02:57,160 --> 00:03:01,760
मैसेज आते सबको मैं इतनी जल्दी जल्दी नहीं पढ़ सकता था तो मैंने नहीं देखा

42
00:03:01,760 --> 00:03:05,760
मगर उसमें मुझे ऐसा लगा ये मुझे गलत फहमी हो गई यह मेरी

43
00:03:05,760 --> 00:03:09,760
त्रुटि है दोष है कि मैंने उसको मैसेज को पूरा नहीं

44
00:03:09,760 --> 00:03:14,080
पढ़ पाया और यह नहीं देख पाया कि ये मैसेज जो है

45
00:03:14,080 --> 00:03:18,240
भगवता अंद की ओर से मुझे भेजा गया है और उसमें मुझे

46
00:03:18,240 --> 00:03:22,520
ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे अन्य सारे लोग अब रिए मेरा कहना होता है कि सत्य

47
00:03:22,520 --> 00:03:26,720
के यदि प्रदर हैं तो प्रत्यक्ष वार्ता करें अन्यथा मुगरी लाल

48
00:03:26,720 --> 00:03:31,040
के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहे तो मेरा एक यह मैं देता र

49
00:03:31,040 --> 00:03:35,040
जो भी लिखित में चर्चा करने के लिए प्रयास करता है परेशान करता है तो

50
00:03:35,040 --> 00:03:39,200
मैं उसको यही कहता हूं तो उसकी तरफ से जो सवाल वगैरह

51
00:03:39,200 --> 00:03:43,280
आए थे कुछ वो ठीक से ना देखते हुए किसने भेजा यह भी ठीक से

52
00:03:43,280 --> 00:03:47,640
ना समझते हुए और मैंने

53
00:03:47,640 --> 00:03:53,640
जो

54
00:03:53,920 --> 00:03:58,000
है ठीक से ना देखते हुए मैंने उसको वही डायलॉग

55
00:03:58,000 --> 00:04:02,120
दे दिया कि भाई सत्य के पक्ष हो तो प्रत्यक्ष वार्ता करू तो अब पहली

56
00:04:02,120 --> 00:04:07,000
बात तो यह है कि प्रत्यक्ष वार्ता के लिए भगवता अंद मुझे ऑलरेडी

57
00:04:07,000 --> 00:04:11,040
वो कर चुके वो कर चुके थे इनवाइट ठीक है कि भाई लाइव चर्चा

58
00:04:11,040 --> 00:04:15,160
करिए तो इससे ही पता लग जाता है कि

59
00:04:15,160 --> 00:04:19,320
मैंने यह समझते हुए वो बात नहीं कही है कि यह बात भगवता आनंद को जा रही

60
00:04:19,320 --> 00:04:23,560
है मैंने कल के लाइव में भी कहा था कि मुझे नहीं पता है कि मैंने किसको क्या भेजा है उसको देखना

61
00:04:23,560 --> 00:04:27,600
भी पड़ेगा तो मैंने ये मैसेज भेजा था इस बात

62
00:04:27,600 --> 00:04:31,640
को भगतान ने अपनी वीडियो में उठाया है कि देखिए मुझको ये कह रहा

63
00:04:31,640 --> 00:04:35,800
है सत्य के पक्षधर हो तो प्रत्यक्ष वार्ता करो भाई जब तुम मुझको ऑलरेडी भेज

64
00:04:35,800 --> 00:04:39,960
चुके हो तो तुम्हें समझना चाहिए कि इसमें कुछ ना कुछ शाब्दिक फेर है और सबसे बड़ी बात

65
00:04:39,960 --> 00:04:44,160
है कि तुम मेरा नंबर सर्वित है

66
00:04:44,160 --> 00:04:48,200
अगर तुमको अपने मैसेजेस व के द्वारा मुझे भेजने हैं तो डायरेक्ट भेजो

67
00:04:48,200 --> 00:04:52,440
यह मध्यस्थ की बात क्यों कर रहे हो सीधे भेजो मैं

68
00:04:52,440 --> 00:04:56,480
भगवता अंद मैं मैसेज भेज रहा हूं ऐसा ऐसा होना चाहिए जो भी है

69
00:04:56,480 --> 00:05:00,880
तो तुम एक दूस किसी दूसरे के द्वारा क्यों भिजवा रहे हो और जो गौरी है वो

70
00:05:00,880 --> 00:05:05,080
मेरे साथ ऐसे नहीं है कि लगातार संपर्क में रहती हो बहुत डेली बात होती रहती

71
00:05:05,080 --> 00:05:09,040
हो छ महीने में एक बार बात हुई थी उसके बाद अचानक से उसका एक वो आ

72
00:05:09,040 --> 00:05:13,200
गया मैसेज इस तरह से उसके साथ वो है कि संपर्क है

73
00:05:13,200 --> 00:05:17,400
तो बहुत सारे मैसेजेस जब आ रहे हैं तो वहां पर सभी मैसेजेस को पूरा पढ़ना

74
00:05:17,400 --> 00:05:21,400
संभव नहीं है मगर हां दोष यह है कि जब पूरा पढ़ा नहीं है तो

75
00:05:21,400 --> 00:05:25,520
फिर वहां पर अपना वो नहीं देना चाहिए फिर निर्णय नहीं देना चाहिए जब

76
00:05:25,520 --> 00:05:30,720
आपने पूरा पढ़ा नहीं तो मैंने वहां पर यह कहा यह समझते हु

77
00:05:30,720 --> 00:05:34,760
की सत्य के पक्ष यह समझते हुए कि कोई मुझे लिखित में चर्चा के लिए

78
00:05:34,760 --> 00:05:39,000
परेशान कर रहा है तो मैंने ये लिख दिया तो इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी

79
00:05:39,000 --> 00:05:43,080
हूं कि मैंने उस मैसेज को पूरा नहीं देखा था नहीं तो अगर देखा होता तो

80
00:05:43,080 --> 00:05:47,320
मैं यही कहता कि भाई आपके जो जो मैंने कम्युनिटी पोस्ट में जवाब दिया तो वही

81
00:05:47,320 --> 00:05:51,400
जवाब में वहा देता मुझसे पूछा जा रहा था कि भाई आर्य समाज

82
00:05:51,400 --> 00:05:55,400
जैसे लोग और यह इस तरह के लोग तुम जो है अक्ष

83
00:05:55,400 --> 00:05:59,400
जनं के पास चले जाते हो अनंद वाली बात मैंने कल भी बताई थी

84
00:05:59,400 --> 00:06:03,600
वहां पूरी के शंकराचार्य के शिष्य के रूप में नहीं गया था शश नारायण द्वेदी के रूप में नहीं गया था

85
00:06:03,600 --> 00:06:08,280
मगर तुम जिस चर्चा के लिए मुझे बुला रहे हो वहां पर मुझे उसी रूप में आना है ठीक है

86
00:06:08,280 --> 00:06:12,560
और दूसरी बात क्या है हां अगर

87
00:06:12,560 --> 00:06:16,560
ऐसी बात है अगर तुम तुमको दूसरे रूप में मिलना है तो क्या मैं पहली बात तो

88
00:06:16,560 --> 00:06:20,720
ये है कि अय पॉसिबल नहीं है मगर मैं प्रयास करूंगा किसी दिन कोई मास्क वास्क लगा

89
00:06:20,720 --> 00:06:24,040
के अपना चेहरा मुखो खोटा लगा के पहचान क्योंकि तुम उससे तुलना कर रहे

90
00:06:24,040 --> 00:06:28,720
हो ना पहचान बदल करके तुमसे मिलूंगा तब तुम तब तुम्हें ठीक लगेगा

91
00:06:28,720 --> 00:06:32,720
तो ऐसा कुछ करने का या कहने का

92
00:06:32,720 --> 00:06:36,760
आधार ही नहीं बनता है कि तुम वहां पर भले ही पहचान बदल के गए

93
00:06:36,760 --> 00:06:40,920
थे कौन सी बात है भाई जब वहां पर मैं शंकराचार्य जी का शिष्य बनक नहीं गया तो

94
00:06:40,920 --> 00:06:45,000
वहां पर व वाली चीज खत्म हो गई कि उसने गुरु के लिए यह कहा या वो कहा या वो गुरु निंदक

95
00:06:45,000 --> 00:06:49,160
है गुरु विरोधी है मैं तो वहां पर जा ही रहा हूं एक

96
00:06:49,160 --> 00:06:53,320
भेजे गए दूध के रूप में अच्छा ठीक है दूसरी बात

97
00:06:53,320 --> 00:06:59,320
क्या है कि

98
00:07:00,840 --> 00:07:04,840
ये हां अब तुम्हारा कहना है कि तुम जो है वो

99
00:07:04,840 --> 00:07:08,840
आर समाज यों के साथ मंच साझा कर लेते हो हां कर लेते हैं जब तक

100
00:07:08,840 --> 00:07:12,840
उसने मेरी जानकारी में व्यक्तिगत टिप्पणियां ना की जो शास्त्रोक्त

101
00:07:12,840 --> 00:07:17,520
वो चल रहा है वोह ठीक है व तो ही है अरे भैया वह लोग

102
00:07:17,520 --> 00:07:21,640
अगर ऐसे देखा जाएगा तो उन्होंने अपने शास्त्रों के आधार पर बहुत कुछ कर रखा

103
00:07:21,640 --> 00:07:25,760
है तो इस हिसाब से आर समाजी से कभी चर्चा ही नहीं हो सकती कभी उनका मुह बंद नहीं कराया

104
00:07:25,760 --> 00:07:29,760
जा सकता है ना तो ये भी

105
00:07:29,760 --> 00:07:35,760
आपका जो तर्क है वो गलत है फिर भी मैं दिखा देता हूं कि मैं किन लोगों के साथ चर्चा नहीं करता

106
00:07:37,520 --> 00:07:41,640
हूं और मैंने कल के वीडियो में बताया था कि तुम नए

107
00:07:41,640 --> 00:07:45,720
नहीं हो कोई जब व्यक्तिगत हो जाता है चर्चा में

108
00:07:45,720 --> 00:07:49,720
जो शास्त्र है उनके आधार पर उसका कुछ भाष्य लिखा है उसके आधार पर बात

109
00:07:49,720 --> 00:07:53,840
कर रहा है वो बातें बोल रहा है और कोई होता है जो कि तुम्हारे

110
00:07:53,840 --> 00:07:58,680
यहां ये होता है तुम अब यह कर रहे हो वो कर रहे हो तो यह वाली बातें जब ले आने लगता है

111
00:07:58,680 --> 00:08:02,720
व्यक्तिगत पढ़िया वो भी अमर्यादित होते हुए तो

112
00:08:02,720 --> 00:08:08,720
उसके साथ में चर्चा नहीं

113
00:08:16,730 --> 00:08:21,160
[संगीत] करता इनकी अभी एक पोस्ट आई है

114
00:08:21,160 --> 00:08:25,200
सुना है शिवांश ने मुझे संस्कृत ज्ञान से भीन बताया है अभी का तो

115
00:08:25,200 --> 00:08:29,200
खैर रहने दीजिए मैं कुछ पेपर कटिंग उदाहरण दे दू भाई कहां से सुन लेते

116
00:08:29,200 --> 00:08:33,880
हो तुम क्यों सुनी हुई बातों पर विश्वास करते हो सुना है सुना है

117
00:08:33,880 --> 00:08:37,880
कहां लिखा मैंने सुना है दिखाओ मुझे मैंने तुम्हें संस्कृत ज्ञान से विहीन बोला

118
00:08:37,880 --> 00:08:42,120
हो तो जबरदस्ती अपने लिए वो बनाते हो तुम

119
00:08:42,120 --> 00:08:46,280
क्या कहते हैं अपने लिए

120
00:08:46,280 --> 00:08:50,280
मुद्दा तैयार करते हो कि मैं किस पर बोलू क्योंकि तुम्हें बोलना

121
00:08:50,280 --> 00:08:52,680
है तुम्हें करियर बनाना है अपना है ना ये सब करियर

122
00:08:52,680 --> 00:08:58,680
है तुम्हारे लिए धर्म युद्ध नहीं है ये करियर है

123
00:08:59,960 --> 00:09:04,200
उधार ट पोस्ट कर रहे हैं उन्हें पढ़ ले आप सब टिप्पणी में दिए गए लिंक को ध्यान

124
00:09:04,200 --> 00:09:08,400
से सुन ले बाकी बातें तो लाइव में उत्तर देंगे

125
00:09:08,400 --> 00:09:12,800
शिवांश ने बोकला में बहुत भारी भूल कर दी है और तुमने नहीं की

126
00:09:12,800 --> 00:09:16,800
तुमने बोकला में भूल नहीं की है कल ही तुम्हारा दिखाया था कि जहां

127
00:09:16,800 --> 00:09:20,800
मैं कह रहा हूं एक तरफ चर्चा के लिए वो दे रहे हो और दूसरी तरफ जो है विरोधाभासी

128
00:09:20,800 --> 00:09:24,920
वीडियो डाल रहे हो तो तुम वहां पर यह क्लेम कर रहे हो कि मैं उस वीडियो के

129
00:09:24,920 --> 00:09:29,080
अंदर के कंटेंट में दी जाने वाली जानकारी के लिए विरोधाभास शब्द का यूज

130
00:09:29,080 --> 00:09:34,000
कर तो ये तुम्हारी बौखलाहट है जो वीडियो

131
00:09:34,000 --> 00:09:38,040
मैं जिस मातृ शक्ति को भली भात जानता हूं उसके पक्ष

132
00:09:38,040 --> 00:09:44,040
को रखने के लिए वह भी उनके प्रति उत्तर में जो गुरु द्रोही नीच

133
00:09:44,680 --> 00:09:49,320
दंभी वहां इग्राम पर कैंपेन उसके लिए चला रहे हैं

134
00:09:49,320 --> 00:09:53,440
उनको उनके प्रति उत्तर में जहां पर मैं वीडियो बना रहा हूं और

135
00:09:53,440 --> 00:09:57,480
उस वीडियो में तुम दाल भात में मुसर चंद वाले काम कर रहे हो कि नहीं नहीं

136
00:09:57,480 --> 00:10:01,560
ये मेरे लिए है पूरा वीडियो चार घंटे का उसमें से कितनी देर

137
00:10:01,560 --> 00:10:06,120
तुम्हारे लिए बोला गया संयोग था कि उस दिन तुमने वो कर दिया

138
00:10:06,120 --> 00:10:10,280
उसी दिन तुमने भी विजया श की बात उठा दी सिर्फ संयोग और तो और उठाई

139
00:10:10,280 --> 00:10:14,720
तो उठाई दो चीजें की दो चीजें क्या की दो चीजें

140
00:10:14,720 --> 00:10:18,800
एक तो उसका मंच पर होना और एक फ्री मिशन से जोड़ना यह दो चीजें तुमने एक्स्ट्रा

141
00:10:18,800 --> 00:10:23,480
की थी उन्हीं दो चीजों के लिए केवल मैंने वहां पर बोला

142
00:10:23,480 --> 00:10:27,560
जो चीजें तुमने एक्स्ट्रा बोली और क्योंकि तुमने उसी वीडियो में परिक

143
00:10:27,560 --> 00:10:31,600
की बात की थी तो फिर उसको मैंने बत बत संक्षिप्त में कहा कि भाई प्रमाण

144
00:10:31,600 --> 00:10:36,640
लाइए चीजों का ठीक

145
00:10:36,640 --> 00:10:40,880
है और कुछ लोग यह

146
00:10:40,880 --> 00:10:45,000
अज्ञानता वश कमेंट कर रहे हैं पहली बात तो

147
00:10:45,000 --> 00:10:49,160
यह कि अगर तुम्हें ऐसा लगता है कि तुम सत्य के पक्षधर हो तो तुम लाइव आ जाओ दूसरी बात यह

148
00:10:49,160 --> 00:10:53,360
है कि उसके साथ भगवता अंद के साथ लाइव के लिए कल हमने बोल दिया

149
00:10:53,360 --> 00:10:57,400
है कि वो आए और जो उसने विजय श्री के बारे में बोला है उसको सिद्ध

150
00:10:57,400 --> 00:10:59,680
करे जो उसने मट के पर

151
00:10:59,680 --> 00:11:05,400
आरोप लगाए वो उसको सिद्ध करें ठीक है

152
00:11:05,400 --> 00:11:09,520
और अभी कुछ चीजें और है वो अपनी गुरु परंपरा सिद्ध करे कहां

153
00:11:09,520 --> 00:11:13,680
से ज्ञान आया वो सिद्ध करे ये सब चीजें भी है ना वो आचार्य तो वो है ना उसको

154
00:11:13,680 --> 00:11:17,960
सिद्ध करना है अब कि वो कौन सी परंपरा से परंपरा प्राप्त आचार्य है

155
00:11:17,960 --> 00:11:22,280
कहां से उनका वेद भाष्य आया है कहां से उनका वो आया है ब्रह्म

156
00:11:22,280 --> 00:11:26,680
सूत्र भाष्य कहां से भगवत गीता भाष्य आया उनका वो सब बताएं

157
00:11:26,680 --> 00:11:32,680
कौन सी परंपरा चल रही है ठीक है अच्छा दूसरी बात यह

158
00:11:33,760 --> 00:11:39,160
है हां तो मैं आपको वो दिखा रहा

159
00:11:39,160 --> 00:11:43,240
था हमने कहीं भी अपने वीडियो में जिस शब्द का

160
00:11:43,240 --> 00:11:47,480
उपयोग ही नहीं किया उसको अपने अनुसार अपने मन के अनुसार समझ करके अपने

161
00:11:47,480 --> 00:11:52,400
अनुसार वह दाल भात में मुसर चंद वाला कार्य

162
00:11:52,400 --> 00:11:56,600
क्यों अरे भाई मैंने कहीं पर जिस शब्द का उपयोग ही नहीं किया तुम्हारे लिए

163
00:11:56,600 --> 00:12:01,160
कि लोग मुझे वो शिवांश का कहना है कि आपको संस्कृत का ज्ञान नहीं है

164
00:12:01,160 --> 00:12:07,160
बकवास और कुछ नहीं है

165
00:12:07,960 --> 00:12:13,840
ये

166
00:12:13,840 --> 00:12:18,320
हम कल कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही थी जिसके कारण कुछ सब्जेक्ट

167
00:12:18,320 --> 00:12:22,720
मिस भी हो गए वो कोशिश की है

168
00:12:22,720 --> 00:12:26,760
कि मैं जो है उनका उत्तर भी आज दूं तो वो जो मिस हुए

169
00:12:26,760 --> 00:12:30,920
हैं स्किप हो गए हैं उनका भी आज उत्तर देंगे और मैं बार-बार कह रहा हूं कि

170
00:12:30,920 --> 00:12:35,040
अब भाई बिना ना मान जल्दी जड़ गए तीन दिन

171
00:12:35,040 --> 00:12:39,040
भीत बोले राम सोप त भन होए ना प्रीत ठीक है तो आइए

172
00:12:39,040 --> 00:12:45,040
आप कहां आना है आपको लाइव

173
00:12:47,320 --> 00:12:51,440
में उसको लड़ाई करनी थी भगवता अंद

174
00:12:51,440 --> 00:12:55,600
का मामला यह था कि उसको सभी पीठ में सभी जगह पर प्रश्रय

175
00:12:55,600 --> 00:12:59,920
मिल रहा है थोड़ा बहुत उसका होना मतलब चीजें चल रही है उसका

176
00:12:59,920 --> 00:13:03,920
है ना केवल एक पूरी पीठ से ही उसको प्रश्रय नहीं मिल रहा है तो ऐसा भी

177
00:13:03,920 --> 00:13:08,000
एक प्रतीत होता है कि इसका उद्देश्य यही है कि पूरी पीठ से प्रश्रय प्राप्त करना जो

178
00:13:08,000 --> 00:13:12,080
अपना नया संप्रदाय खड़ा करना है उसके लिए भैया जो आज के सबसे

179
00:13:12,080 --> 00:13:16,080
प्रामाणिक आचार्य हैं उनसे अपनी प्रामाणिकता को सिद्ध

180
00:13:16,080 --> 00:13:20,320
करवाना जबकि जिनके साथ वह बैठे दिख रहे हैं उन्होंने भी

181
00:13:20,320 --> 00:13:24,880
यह ताल ठोक करके नहीं बोला कि निग्रह चार्य व निग्रह कोई संप्रदाय

182
00:13:24,880 --> 00:13:30,120
है कोई प्रमाणिकता नहीं है बने निग्रह

183
00:13:30,120 --> 00:13:34,120
घूमो कहां मठ है कहां मंदिर है अन्यों के बारे में टिप्पणी

184
00:13:34,120 --> 00:13:38,160
कैसे करते हो समीक्षात्मक क्यों होते हो मैंने बताया ना आपका कुछ अता पता

185
00:13:38,160 --> 00:13:42,360
है कहां आपका मठ है कहां आपका गुरुकुल है कहां आपकी गौशाला है

186
00:13:42,360 --> 00:13:46,520
जो बात करते हो दान लिया अरे कितने प्रकल्प चल रहे हैं जिसमें की अर्थ

187
00:13:46,520 --> 00:13:50,640
का उपयोग होगा ठीक है और दूसरी बात क्या है कि

188
00:13:50,640 --> 00:13:54,760
आपने अपनी लाइफ को तो छुपा के रखा हुआ है

189
00:13:54,760 --> 00:13:59,200
जंगल में से निकल के आते हो रेलवे स्टेशन पर बैठ के वीडियो बना देते हो

190
00:13:59,200 --> 00:14:02,720
और दूसरे जि जिन्होंने अपनी लाइफ में ट्रांसपेरेंसी अधिकतम

191
00:14:02,720 --> 00:14:07,080
रखी हुई है उनकी ट्रांसपेरेंसी से उठाई हुई बातों का बातों

192
00:14:07,080 --> 00:14:11,280
पर व्यक्तिगत टिप्पणी देते हो अरे तुम्हें विरोध करना है तो व जहां पर शास्त्र

193
00:14:11,280 --> 00:14:15,360
का विरोध करें वहां शास्त्र का विरोध करके खत्म करो और फिर

194
00:14:15,360 --> 00:14:19,600
चर्चा करने की बारी आती है तो तुम कह रहे हो कि जो ऐसा शास्त्र का विरोध कर रहा है उससे

195
00:14:19,600 --> 00:14:23,600
चर्चा क्यों करूंगा तो फिर मेरे से चर्चा क्यों कर रहे

196
00:14:23,600 --> 00:14:28,080
हो मैं भी तो शास्त्र का विरोधी हूं शंकराचार्य जी के पास ज्ञान लेने क्यों जा रहे हो

197
00:14:28,080 --> 00:14:34,080
तुमने अपने वो मैं बताऊंगा

198
00:14:36,080 --> 00:14:42,080
चीजें अभी बताते हैं

199
00:14:53,880 --> 00:14:59,120
अ ये कहानी शुरू हुई है जब हमने

200
00:14:59,120 --> 00:15:03,400
क्यों खुल जाता है

201
00:15:03,400 --> 00:15:08,720
बार यह देखो ये दिख रही

202
00:15:08,720 --> 00:15:12,720
प्लेलिस्ट क्या लिखा है टाइटल में मर्यादा का उल्लंघन करने

203
00:15:12,720 --> 00:15:17,560
पर चर्चा नहीं युद्ध होता है यह आर्य समाजी को कहा है मैंने

204
00:15:17,560 --> 00:15:21,960
ठीक है किसको कहा है आर्य

205
00:15:21,960 --> 00:15:25,440
समाजी को कहा है ना

206
00:15:25,440 --> 00:15:29,440
यह क्यों आ रहा है यह देख लो

207
00:15:29,440 --> 00:15:33,520
तो यहां तुम्हारी अधूरी रिसर्च का परिणाम है तुम्हें जो देखना पड़ रहा है

208
00:15:33,520 --> 00:15:37,760
तुम अकेले नहीं हो जिसको मैंने चर्चा के लिए मना किया है जो व्यक्तिगत हो

209
00:15:37,760 --> 00:15:41,760
गया है उसको मैंने कई बार चर्चा के लिए मना किया है तुमने अपने वीडियो में एक बात और

210
00:15:41,760 --> 00:15:46,000
कही थी कि तुमने गाली देने वाले को कभी रोका अन्यों

211
00:15:46,000 --> 00:15:50,120
को जो गाली दे रहे हैं अन्यों का जो विरोध कर रहे हैं उनको कभी रोका जब तुम

212
00:15:50,120 --> 00:15:54,360
पर बात आएगी तो तुम बोलोगे तुम पर बात नहीं आएगी तो नहीं बोलोगे नहीं मेरी जानकारी

213
00:15:54,360 --> 00:15:58,440
में जब बात आएगी तो मैं बोलूंगा रोकूंगा जैसे मेरी जानकारी में

214
00:15:58,440 --> 00:16:02,680
बात आए वो जो गौरी है उसके लिए मैंने गलत सूचना

215
00:16:02,680 --> 00:16:07,160
दे दी कल तो मैंने माफी का पोस्ट कम्युनिटी पोस्ट भी डाला और यहां भी बोला

216
00:16:07,160 --> 00:16:11,280
क्योंकि मुझे उसके भी सम्मान की चिंता है वह भले ही तुम्हारी

217
00:16:11,280 --> 00:16:15,320
पक्षधर हो वो भले ही मेरी पूर्ण समर्थक ना हो उसको लेकर

218
00:16:15,320 --> 00:16:19,320
के मेरे मन में संशय बना हुआ हो कि भैया इसने जो बात कही है

219
00:16:19,320 --> 00:16:23,880
कि पुरी के शंकराचार्य जी के प्रति निष्ठा भाव रखती है कि नहीं रखती है क्या है गुरु भाव रखती

220
00:16:23,880 --> 00:16:27,880
है परंतु मेरे द्वारा निर्गत की गई जो जानकारी थी उसके

221
00:16:27,880 --> 00:16:31,960
विषय में उस पर दोष आ रहा था कि उसने आपको गलत सूचना दी

222
00:16:31,960 --> 00:16:35,960
तो वहां पर मैं स्पष्ट हुआ हाथ जोड़ के माफी मांगी

223
00:16:35,960 --> 00:16:40,160
क्षमा मांगा क्योंकि मुझे उसके सम्मान की भी चिंता है

224
00:16:40,160 --> 00:16:41,120
ठीक है

225
00:16:41,120 --> 00:16:45,560
मगर आपको जब पता चला तो आपने वहा बातों की जलेबिया बनाई

226
00:16:45,560 --> 00:16:50,000
जब आपको पता चला मैंने गलत मातृशक्ति का व वीडियो दिखा दिया है

227
00:16:50,000 --> 00:16:54,520
मंच पर तो आपने नीचे डिस्क्रिप्शन में अपना वो चीज डाल दी वहां

228
00:16:54,520 --> 00:16:59,000
आपने य नहीं की वो गलती से हो गया है और उसको हम कट कर रहे हैं उस पार्ट को

229
00:16:59,000 --> 00:17:03,080
जो भी है जो भी उसका वो हो सकता था

230
00:17:03,080 --> 00:17:07,560
तो अब ठीक है अब दूसरा दो दूसरा देखो यह देखो एक वीडियो य दिख रहा

231
00:17:07,560 --> 00:17:11,720
है डोंट डू दिस दिख

232
00:17:11,720 --> 00:17:16,400
रहा है ये डोंट डू दिस इसमें हमने यही बोला इस वीडियो में जाकर देख लेना

233
00:17:16,400 --> 00:17:20,720
क्या बोला है कि आप जो है इनको गालियां ना दे व्यक्तिगत यह

234
00:17:20,720 --> 00:17:25,000
सब मजाक उ पास ना उड़ाए हमने तो अनार्य

235
00:17:25,000 --> 00:17:29,040
समाज बोलते थे पूरे लोग अनार्य समाज या

236
00:17:29,040 --> 00:17:33,040
वो भी बोलते थे आर्य नमाज अनार्य नमाजी

237
00:17:33,040 --> 00:17:37,200
यह सब बोलते थे तो अनार्य नमाजी में क्या हो रहा है कि वह हिंदू धर्म

238
00:17:37,200 --> 00:17:41,240
से या सनातन धर्म से दूर जाने वाली बात हो रही है तो हमने उनको एक नया

239
00:17:41,240 --> 00:17:45,280
नाम दिया अलंकार समाज क्योंकि उन्होंने जहां पर भी

240
00:17:45,280 --> 00:17:49,480
वेदों में ईश्वर के अवतार का वर्णन चमत्कार का वर्णन आता है तो अपने अनुसार वहां

241
00:17:49,480 --> 00:17:53,920
पर अलंकार लगा दिया कि यहां तो अलंकारिक बात है

242
00:17:53,920 --> 00:17:56,600
उस हिसाब से अलंकार समाज नाम दिया क्योंकि

243
00:17:56,600 --> 00:18:00,640
हम यह नहीं बता ना चाहेंगे लोगों को

244
00:18:00,640 --> 00:18:04,920
कि भाई यह जो है सनातन से दूर ही हो गए चले गए

245
00:18:04,920 --> 00:18:09,000
बात ठीक है वो है उनकी शिक्षा ऐसी जो सनातना

246
00:18:09,000 --> 00:18:13,240
भासी है सनातन विरोधी है तो उसी बात पर तो हम बातें करेंगे चर्चा

247
00:18:13,240 --> 00:18:17,480
करेंगे मगर उनको हम गैर सिद्ध गैर नहीं कर देंगे कि जाओ तुम उनमें मिल गए

248
00:18:17,480 --> 00:18:21,800
मुस्लिम हो गए तुम हम उनको याद दिला रहे हैं कि तुम्हारी जो शिक्षाए

249
00:18:21,800 --> 00:18:25,800
मुस्लिमों जैसी हो रही है मगर उनको यह नहीं कह देंगे तुम मुस्लिम

250
00:18:25,800 --> 00:18:31,800
ही हो इसलिए हमने इन शब्दों का यूज नहीं किया उनके लिए कभी

251
00:18:32,640 --> 00:18:36,960
ऑपरेटर मुझे बताएं अच्छा एक चीज और है जो

252
00:18:36,960 --> 00:18:41,000
शास्त्रोक्त तुमने वो किया है जैसे कि एक करपात्री जी

253
00:18:41,000 --> 00:18:45,400
वाला मुझे मालूम है वो जो

254
00:18:45,400 --> 00:18:49,720
सबरी माता के बारे में बात थी वो और जो बुद्ध

255
00:18:49,720 --> 00:18:53,720
वाली बुद्ध वाला मामला शास्त्रो हालांकि इनसे भी हमारे धर्म

256
00:18:53,720 --> 00:18:58,120
ब्रह्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है वस्तुनिष्ठ जानकारियां

257
00:18:58,120 --> 00:19:02,120
है ये से कुछ भाषा नहीं बदल जाती कि तत्व बदल जाता हो

258
00:19:02,120 --> 00:19:06,240
धर्म की परिभाषा बदल जाती हो कुछ नहीं मगर फिर भी इसके बारे में

259
00:19:06,240 --> 00:19:10,600
निराकरण तुमको प्राप्त कराया गया सनमार्ग फेसबुक पर पेज है

260
00:19:10,600 --> 00:19:15,400
तुमको आचार्य ने उत्तर दिए और तुम वहां से भागे

261
00:19:15,400 --> 00:19:19,720
जब तुमने कहा कि जो भक्ष भक्ष के संबंध

262
00:19:19,720 --> 00:19:23,720
में जो दंड नहीं दिया जाता है दंड देने

263
00:19:23,720 --> 00:19:27,920
वाला जो है प्रलाप कर रहा है जबकि मत्स पुराण में वेदव्यास जी स्वयं लिख रहे हैं तो एक तरीके

264
00:19:27,920 --> 00:19:32,440
से तुमने तुम्हारे वो जो वेद व्यास जी को भी

265
00:19:32,440 --> 00:19:36,640
तुमने कुछ कहा है आपत्ति जनक शब्द वो आचार्य जी ने बताया

266
00:19:36,640 --> 00:19:40,680
था खैर सन्मार्ग से तुम्हें शास्त्रोक्त खंडन प्राप्त हुआ तो तुम

267
00:19:40,680 --> 00:19:44,760
वहां से भाग निकले वहां से तुम दिखे नहीं सन्मार्ग पेज है

268
00:19:44,760 --> 00:19:47,840
जो फेसबुक पर है ना तो वहां पर तुम शास्त्रों के खंडन

269
00:19:47,840 --> 00:19:51,920
से बचते नजर आए मगर फिर भी जो यह वाले विषय है

270
00:19:51,920 --> 00:19:56,200
इन पर हम जो हमारा पक्ष है गुरुदेव ने गुरुदेव जो बताएंगे

271
00:19:56,200 --> 00:20:00,280
जो उस तरह का जो कपाती जी का पक्ष होगा हम रख देंगे अभी आने वाले अलग

272
00:20:00,280 --> 00:20:04,320
से ठीक है जो बताया गया है गुरुदेव के द्वारा कपाती जी के द्वारा

273
00:20:04,320 --> 00:20:08,760
आचार्य के द्वारा वो पक्ष हम रख देंगे मगर हमारे और आपके बीच में

274
00:20:08,760 --> 00:20:13,000
जो बात शुरू बात है वो इसलिए नहीं है

275
00:20:13,000 --> 00:20:17,520
कि क्या कहते हैं शास्त्र के मामले कहां पर उलझन हो रही है

276
00:20:17,520 --> 00:20:21,640
इस बारे में नहीं है बात है इस बारे में कि आपने अधूरी जानकारियों

277
00:20:21,640 --> 00:20:26,200
के ऊपर जो है गंभीर आरोप लगाए हैं

278
00:20:26,200 --> 00:20:30,360
अधूरे तथ्य वो संभाव संभावनाए उत्पन्न करने वाली चीजों

279
00:20:30,360 --> 00:20:34,560
के ऊपर आपने जो है आरोप लगाए हैं तो संभावनाएं उत्पन्न करने

280
00:20:34,560 --> 00:20:39,240
वालों पर करने वाले सामग्री के आधार पर अगर गंभीर आरोप आप लगाएंगे

281
00:20:39,240 --> 00:20:44,120
तो फिर हम अगर कह देंगे कि आपने जानवी के लिए गाना बनाया तो उसमें क्या दिक्कत है

282
00:20:44,120 --> 00:20:48,160
मैं क्या दिक्कत है जानवी के लिए गाना बनाया कह रहे हैं लोग आपको

283
00:20:48,160 --> 00:20:52,200
जानने वाले बहुत से लोग कह रहे हैं आपके ्र की बातें चल रही है

284
00:20:52,200 --> 00:20:56,960
कि आप जो है पुराने टाइम में क्या-क्या करते थे हम

285
00:20:56,960 --> 00:21:01,000
जानवी से प्रेम करते थे या कोई आपकी वो थी जिसमें

286
00:21:01,000 --> 00:21:03,520
आपने उसम अपनी बुक में भी लिखा है बाइपोलर

287
00:21:03,520 --> 00:21:07,600
में लोगों से फिर कहते हो कि मेरा पास्ट था तो दूसरे का पास्ट उठा

288
00:21:07,600 --> 00:21:11,640
के क्यों दिखा रहे हो कि कुत्ते के साथ वो चुंबन हो रहा है और वो भी जो नहीं हो

289
00:21:11,640 --> 00:21:14,920
रहा है वो बोल रहे हो उसमें

290
00:21:14,920 --> 00:21:19,320
भी तानाशाही ना स्वयंभू भगवान

291
00:21:19,320 --> 00:21:23,440
अहंकार ऐसा ही रावण को भी हुआ था किसी

292
00:21:23,440 --> 00:21:28,080
एक नारी का ऐसा अपमान शुरू किया उसने जिसके कारण नष्ट हो गया

293
00:21:28,080 --> 00:21:32,240
वही तुम्हारा भी होगा तुमने गलती

294
00:21:32,240 --> 00:21:36,600
कर दी उस पर वीडियो बनाकर उस उस उस

295
00:21:36,600 --> 00:21:40,680
झमेले को आगे बढ़ा करके वो गलती कर दी तुमने बहुत भारी भूल

296
00:21:40,680 --> 00:21:45,040
कल बथे भूल हमने नहीं की है भूल तुमने की है तुमने भारी भूल कर

297
00:21:45,040 --> 00:21:49,160
दी विजया श्री पर व्यक्तिगत चीजें करके तुमने भूल कर दी

298
00:21:49,160 --> 00:21:53,360
और उसी वही कारण होगा तुम्हारे नाश का ठीक है

299
00:21:53,360 --> 00:21:58,800
करियर एंड कर रहे हो लोगों का है ना करियर है ये सब तुम्हारे लिए धर्म

300
00:21:58,800 --> 00:22:04,320
चीजें करना है करियर है अरे करियर या बना के खूब छोड़ चुके

301
00:22:04,320 --> 00:22:10,320
हैं देख चुके हैं कुछ नहीं है दिशाहीन जीवन

302
00:22:13,440 --> 00:22:19,360
है हम फिर क्या

303
00:22:19,360 --> 00:22:23,000
है

304
00:22:23,000 --> 00:22:27,840
हम अच्छा एक चीज और है ये क्या कर रहे हैं

305
00:22:27,840 --> 00:22:31,960
कि अपने कमजोर पक्ष की कमजोरी को छिपाने

306
00:22:31,960 --> 00:22:35,960
के लिए बार-बार दूसरे ऐसे जुलत कारी मुद्दे ला रहे जहां पर इनको लगता

307
00:22:35,960 --> 00:22:40,200
है कि इनका पक्ष बहुत मजबूत है विजया श्री पर जब हमने

308
00:22:40,200 --> 00:22:44,680
अच्छा चलो ठीक है जैसे हमने जो पहला लाइव किया था

309
00:22:44,680 --> 00:22:48,760
विजय सी को लेकर के उस लाइव में हमने तुम्हारा नाम नहीं लिखा मले राज

310
00:22:48,760 --> 00:22:52,840
जरूर लिखा क्योंकि हम मले राज से प्रभावित बता रहे थे कि भाई

311
00:22:52,840 --> 00:22:56,960
यह एक हमने उसमें भी कहा था कि इसमें कहीं मले राज का खंडन

312
00:22:56,960 --> 00:23:01,080
नहीं है उस द भाषा में लोगों को यह भी बताया था कि इसमें निगरा चार का खंडन

313
00:23:01,080 --> 00:23:05,480
नहीं यह भी बताने का प्रयास किया था मगर पहली बात तो यह कि वो

314
00:23:05,480 --> 00:23:09,640
वर्ड यूज करना इसलिए भी था कि तुमने जो मिथ्या फैलाई थी अपने

315
00:23:09,640 --> 00:23:13,640
वीडियो से विजय श्री को लेकर के और फिर साथ ही साथ वो अधूरी जानकारियों

316
00:23:13,640 --> 00:23:17,800
के आधार पर जो परिक को लेकर उस मिथ्या का भी हमें

317
00:23:17,800 --> 00:23:21,920
अपना पक्ष रखना था कि तुम्हारे लोग जान ले मगर वह पूरा का पूरा वीडियो तुम्हारे

318
00:23:21,920 --> 00:23:26,800
खंडन में नहीं था जो तुम बोल रहे हो चार घंटे की लाइफ तुमने बना दी चार घंटे की लाइफ बना दी

319
00:23:26,800 --> 00:23:28,520
उसमें हमने इंडिकेशन दिया था

320
00:23:28,520 --> 00:23:32,560
और दूसरी बात अगर मामला वहीं से शुरू है चार घंटे की लाइव से चार

321
00:23:32,560 --> 00:23:36,720
घंटे की लाइव से तो उसमें जो प्रतीकात्मक जो चित्र है वो

322
00:23:36,720 --> 00:23:41,040
प्रतीकात्मक चित्र है विजया श्री का तो विजया श्री के मुद्दे से भागो

323
00:23:41,040 --> 00:23:45,080
मत सिद्ध करो उस पर रहो जितनी बार तुम्हारे कमजोर

324
00:23:45,080 --> 00:23:49,280
पक्ष को टटोला जाएगा उतनी बार सुमेरू पीठ उतनी बार तुम

325
00:23:49,280 --> 00:23:53,360
कहोगे कि भैया वो पुरी के शंकराचार्य जी ने ये किया वो किया यहां

326
00:23:53,360 --> 00:23:57,400
ये हुआ भाई जब मुद्दा तुमने विजया श्री का उठाया है तो पहले उसको

327
00:23:57,400 --> 00:24:01,400
बिल्कुल पाताल तक सिद्ध करो और सिद्ध नहीं कर पा रहे हो तो

328
00:24:01,400 --> 00:24:05,480
क्षमा मांगो फिर दूसरा मुद्दा उठाओ यही करते हैं आर

329
00:24:05,480 --> 00:24:09,880
समाजी क्या ईश्वर अवतार ले सकता है लेने की जरूरत क्या है

330
00:24:09,880 --> 00:24:13,920
वही कर रहे हो तुम भी उठाना सारे मुद्दे सारे मुद्दों का

331
00:24:13,920 --> 00:24:17,920
उत्तर मिलेगा सबका एक एक मुद्दा मगर पहले विजया श्री

332
00:24:17,920 --> 00:24:22,000
को गलत सिद्ध करो जो आरोप तुमने लगाए कि मंच पर

333
00:24:22,000 --> 00:24:26,160
बैठी है मंच पर बैठी हुई सिद्ध करो व्यापार चला रही है व्यापार चलाना सिद्ध

334
00:24:26,160 --> 00:24:30,480
करो प्री मिशंस के द्वारा कार्यरत प्रमेश

335
00:24:30,480 --> 00:24:34,520
के अनुसार उसको कार्यरत सिद्ध करो और अगर नहीं सिद्ध करते तो पहले माफी

336
00:24:34,520 --> 00:24:39,480
मांगो फिर करना है सुमेरू पीठ और ये पीठ और वो

337
00:24:39,480 --> 00:24:42,720
पीठ

338
00:24:42,720 --> 00:24:46,920
समझे उसके बाद जो तुमने यह प्रयास किया मठ

339
00:24:46,920 --> 00:24:51,760
के परक पर तुमने जो हंगामा मचा रखा है वह सिद्ध करो

340
00:24:51,760 --> 00:24:57,760
और फिर हमारे भी सवाल है अपनी अपनी परंपरा सिद्ध करो

341
00:25:02,520 --> 00:25:06,880
ठीक है प्ले करिए इसको प्ले

342
00:25:06,880 --> 00:25:10,880
करिए जितनी बार जिस मुद्दे पर दबने लगेंगे उससे उसको छोड़ ग

343
00:25:10,880 --> 00:25:15,080
आगे निकल गए वाह जितनी बार जिस मुद्दे पर इनके पास जवाब नहीं होगा

344
00:25:15,080 --> 00:25:19,160
उससे छोड़ के आगे निकल गए कब आ र हो लाइव विजया श्री को फ्री

345
00:25:19,160 --> 00:25:22,800
मिशंस के द्वारा

346
00:25:22,800 --> 00:25:26,960
कार्यरत निर्देशों के अनुसार फी मिशन का कार्यकर्ता कार्य

347
00:25:26,960 --> 00:25:31,200
करने वाला सिद्ध करो ठीक है और विजया

348
00:25:31,200 --> 00:25:35,200
श्री मंच पर बैठी थी सिद्ध करो

349
00:25:35,200 --> 00:25:39,200
और विजया श्री ने वहां पर अपना व्यापार चलाया है सिद्ध करो यहां तो तुम खुद

350
00:25:39,200 --> 00:25:43,360
ही फस रहे हो एक तरफ कह रहे हो फ्री मिशन के लिए कार्य करने आई

351
00:25:43,360 --> 00:25:49,360
है दूसरी तरफ कह र वो अपना व्यापार चला रही

352
00:25:49,680 --> 00:25:55,000
है ये दोगलापन नहीं है तो और क्या है

353
00:25:55,000 --> 00:26:00,160
हम ठीक है प्ले प्ले कहां से

354
00:26:00,160 --> 00:26:04,840
हमारे जाने के बाद का ल कर देना म इसको क्लोज कर देना य नहीं

355
00:26:04,840 --> 00:26:08,880
तो शंकराचार्य भी नहीं कर बल्कि व तो न शंकराचार्य

356
00:26:08,880 --> 00:26:13,600
कि जा रहे पर परर से क देते

357
00:26:13,600 --> 00:26:19,080
उतर दिया है अब इस पर हम उत्तर एक देते हैं आपको

358
00:26:19,080 --> 00:26:25,080
इसका उत्तर देते हैं आपको एक ठीक

359
00:26:25,240 --> 00:26:31,240
है वाला ग्रुप

360
00:26:53,840 --> 00:26:59,320
यह देखिए इनकी पोस्ट है 2016 की

361
00:26:59,320 --> 00:27:03,520
यह 2016 की पोस्ट है इनकी ठीक है अबे सत्यापन

362
00:27:03,520 --> 00:27:07,920
का वो देख लेना अपना हम इसकी वो सत्यापन वो नहीं लेते

363
00:27:07,920 --> 00:27:12,240
यह बिल्कुल सही है मगर इनके नाम से पोस्ट हमें प्राप्त हुई है और आपकी भाषा में गए

364
00:27:12,240 --> 00:27:16,360
तो अकाट्य तथ्य जो है नहीं उनके आधार पर भी हम निर्णय ले सकते हैं तो अब

365
00:27:16,360 --> 00:27:20,400
जो यह पोस्ट प्राप्त हुई है जो सत्यापन के अधीन है इसमें

366
00:27:20,400 --> 00:27:24,560
क्या लिख रहे हैं यह आज किसी 2016

367
00:27:24,560 --> 00:27:29,080
यानी कि इनको जो निग्रह संप्रदाय का यंत्र प्राप्त हुआ है

368
00:27:29,080 --> 00:27:33,400
उससे एक साल पहले लिख रहे हैं क्या लिख रहे हैं आज किसी सज्जन

369
00:27:33,400 --> 00:27:38,160
ने कहा कि शंकराचार्य जी अरबपति बनकर बैठे हैं कुछ करते धरते

370
00:27:38,160 --> 00:27:42,440
नहीं यदि अब इनका उत्तर है यदि जगतगुरु शंकराचार्य

371
00:27:42,440 --> 00:27:46,440
जी अरबपति हैं तो उन्हें होना भी चाहिए वैसे भी वह

372
00:27:46,440 --> 00:27:50,520
संपत्ति पीठ की है उनकी निजी नहीं और ना इसका उपयोग उनके निजी कार्य

373
00:27:50,520 --> 00:27:54,920
में हो रहा है शंकराचार्य मात्र चार है

374
00:27:54,920 --> 00:27:59,080
इसके अलावा यदि कोई इस पद का स्वयं के लिए उपयोग कर रहा है तो जी है

375
00:27:59,080 --> 00:28:03,120
पूर्वा मनाय दक्षिणामनय पश्चिमा मनाय और उत्तराम नाय

376
00:28:03,120 --> 00:28:07,440
अर्थात गोवर्धन संगरी द्वारिका और ज्योतिष पीठ के

377
00:28:07,440 --> 00:28:11,480
अलावा इसके अलावा बाद

378
00:28:11,480 --> 00:28:14,880
में कार्य की अधिकता के

379
00:28:14,880 --> 00:28:18,880
कारण दक्षिणाम नाय और पूर्वा मनाय ने दो उप पीठ

380
00:28:18,880 --> 00:28:23,440
की स्थापना अलग से की यह क्या लिख रहे हैं उप

381
00:28:23,440 --> 00:28:27,680
पीठ ठीक है यह देख लो ये लिख रहे हैं दिखा रहा हूं

382
00:28:27,680 --> 00:28:31,680
देखलो लो ठीक है उप

383
00:28:31,680 --> 00:28:35,800
पीठ की स्थापना अलग से की यह लिख रहे हैं दो उप पीठ

384
00:28:35,800 --> 00:28:40,840
की स्थापना अलग से की जिसमें सर्वमान्य काची काम

385
00:28:40,840 --> 00:28:46,200
कोटी कांची काम कोटी और उवा

386
00:28:46,200 --> 00:28:50,280
मनाए काशी सुमेरू उप पीठ बने ठीक

387
00:28:50,280 --> 00:28:54,280
है कुछ लोग उप पीठों की मान्यता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं पर

388
00:28:54,280 --> 00:28:58,560
ऐसा वही करते हैं जिन्हें मठा मना मनु शस जानकारी

389
00:28:58,560 --> 00:29:02,720
नहीं है हर पीठ अपना एक और उप पीठ सर्व सम्मति

390
00:29:02,720 --> 00:29:07,080
से बना सकता है यदि उसे आवश्यक लगे तो ठीक है

391
00:29:07,080 --> 00:29:11,160
तो यहां इन्होंने क्या कहा है कि

392
00:29:11,160 --> 00:29:15,440
उप पीठ बना सकता है यह कह रहे हैं भगवता अंद 2016

393
00:29:15,440 --> 00:29:19,720
में 30 अगस्त को और उसके बाद फिर पुरी के शंकराचार्य

394
00:29:19,720 --> 00:29:23,720
जी का महिमा गान भी हो रहा है क्या हो रहा है अब आप थोड़ा सा विचार करिए भगवान शंकर

395
00:29:23,720 --> 00:29:28,120
को एक बार वि पान करना पड़ा था शीतलता के लिए गंगा एवं चंद्रमा

396
00:29:28,120 --> 00:29:30,040
को धारण करना पड़ा आपके

397
00:29:30,040 --> 00:29:34,240
समक्ष भगवान शंकर के स्थान पर जो पूज्य शंकराचार्य जी दिखते हैं उनमें

398
00:29:34,240 --> 00:29:38,440
से एक जगतगुरु पूर्वा मनाय ऋग्वेदी महामहिम

399
00:29:38,440 --> 00:29:42,560
श्री जो पुरी शंकराचार्य जी महाराज ने अपने

400
00:29:42,560 --> 00:29:46,760
जीवन में तीन बार विषपान किया है 25 बार शीशे का पानी दिया गया उन्हें

401
00:29:46,760 --> 00:29:50,920
पांच बार मांत्र नागों से डस वाया गया है अलकायदा उल्फा समेत विश्व के सात

402
00:29:50,920 --> 00:29:54,960
कुंकार संगठनों के सर्वोच्च श्रेणी के ट लिस्ट में जगतगुरु का नाम

403
00:29:54,960 --> 00:29:58,960
है फिर भी सामान्य तरीके से बिना कोई सुरक्षा लिए रते

404
00:29:58,960 --> 00:30:03,160
हुए ट्रेन में पूरे देश में धर्म की ध्वजा

405
00:30:03,160 --> 00:30:07,480
को लहरा लहरा धर्म की ध्वजा को लेकर अपनी बोटी बोटी गलाते हुए

406
00:30:07,480 --> 00:30:13,360
फहरा रहे हैं हमारे धर्म के सर्वोच्च पद पर विद्यमान

407
00:30:13,360 --> 00:30:17,400
सर्वोच्च मतलब उनका निग्रह करने के लिए फिर ईश्वर

408
00:30:17,400 --> 00:30:21,680
है ठीक है सनातन धर्म के सर्वोच्च

409
00:30:21,680 --> 00:30:25,920
पद पर विद्यमान इसका मतलब य इन्होंने अपने निग्रह जो लुप्त

410
00:30:25,920 --> 00:30:30,160
संप्रदाय निग्रह करने आए हैं हम शंकरा पर है ना निग्रह

411
00:30:30,160 --> 00:30:35,600
करोगे तुम सर्वोच्च पद पर

412
00:30:35,600 --> 00:30:41,600
विद्यमान फिर क्या

413
00:30:41,880 --> 00:30:46,040
है लेकर अपनी हमारे धर्म के सर्वोच्च पद

414
00:30:46,040 --> 00:30:50,320
पर विराजमान है 13 घंटे लेखन का काम करते हैं दो दो से तीन घंटे ही निद्रा

415
00:30:50,320 --> 00:30:54,720
लेते हैं 73 वर्ष की भौतिक अवस्था में हजारों युवाओं की ऊर्जा से समन्वित

416
00:30:54,720 --> 00:30:58,720
वाणी बोलते हैं ऐसी कोई साधारण व्यक्ति ऐसे कोई

417
00:30:58,720 --> 00:31:03,240
साधारण व्यक्ति हो सकता है क्या यानी कि उनकी असाधारण

418
00:31:03,240 --> 00:31:07,960
जो तत्व है उनका उसका इन्होंने स्वयं

419
00:31:07,960 --> 00:31:12,560
ही इन्होंने उसका स्वयं ही क्या कहते

420
00:31:12,560 --> 00:31:16,640
हैं स्वीकार्य यहां पर किया और

421
00:31:16,640 --> 00:31:20,960
फिर अगले में क्या कह रहे हैं

422
00:31:20,960 --> 00:31:25,640
य फिर इनका अगला वचन जो प्राप्त होता है वो यह है

423
00:31:25,640 --> 00:31:29,760
यह देखो बहुत अच्छा बोला बहुत अच्छा बोला भैया

424
00:31:29,760 --> 00:31:34,480
अच्छा लगा बहुत बढ़िया मगर दोगलापन नहीं होना चाहिए ना

425
00:31:34,480 --> 00:31:40,480
कभी कुछ और कभी कुछ और तो फिर देखो अभी इन्होंने

426
00:31:43,720 --> 00:31:47,880
देखो अब इन्होंने क्या कहा उप पीठ

427
00:31:47,880 --> 00:31:52,400
का खंडन किया देखो गलत बात

428
00:31:52,400 --> 00:31:58,160
कांची किसकी

429
00:31:58,160 --> 00:32:03,960
स्थापन कैसे होता है उप पीठ है तो शंकराचार्य उपाधि

430
00:32:03,960 --> 00:32:08,080
क्यों खुद ही कह रहे हो उपीट है उपीट हो सकती है फिर कह र

431
00:32:08,080 --> 00:32:14,080
हो अगर उपीट है तो शंकराचार्य उपाधि [संगीत]

432
00:32:14,800 --> 00:32:18,800
क्यों तो और अगर तुम यह मानते

433
00:32:18,800 --> 00:32:23,200
हो कि वह पीठ के रूप में है जो तुम खुद

434
00:32:23,200 --> 00:32:27,320
फेवर कर रहे हो शंकराचार्य का तो इसमें तुम्हें बताना चाहिए

435
00:32:27,320 --> 00:32:33,040
कि फिर क्यों कर रहे हो बाद में उ पीठ के रूप में अगर उसे देखा जा सकता है

436
00:32:33,040 --> 00:32:35,240
तो

437
00:32:35,240 --> 00:32:39,280
और हमें नहीं पता गुरुदेव इस बारे में क्या बताएंगे क्योंकि सारे प्रश्न

438
00:32:39,280 --> 00:32:43,320
हमने उनसे नहीं पूछ लिए मगर शंकराचार्य लोकाचार्य की दृष्टि से भी

439
00:32:43,320 --> 00:32:47,760
बोला जा सकता है जैसे तुमको निग्रह चार बोला गया जैसे आचार प्रशांत

440
00:32:47,760 --> 00:32:51,960
से बात करने जब हम जाएंगे तो उस चर्चा में अगर आचार प्रशांत लिखा होगा तो हमें उस

441
00:32:51,960 --> 00:32:56,760
हमें उससे कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि उसने अपनी अपने को आचा

442
00:32:56,760 --> 00:33:00,840
आचार्य प्र के रूप में ख्या पित कर लिया है फिर हम उसके उस आचार

443
00:33:00,840 --> 00:33:05,000
तत् पर बात करेंगे और फिर लोगों को य बताएंगे वो आचार्य नहीं है

444
00:33:05,000 --> 00:33:09,320
उसने आचार्य गलत लिखा हुआ है मगर जब तक यह सब चीजें वो नहीं होती

445
00:33:09,320 --> 00:33:13,280
तो लोकाचार की दृष्टि से यदि व्यक्ति कोई ऐसी चीजें

446
00:33:13,280 --> 00:33:17,600
नहीं कर रहा है जो अशा स्त्रीय तो लोकाचार की दृष्टि से व जिस नाम से खपत है

447
00:33:17,600 --> 00:33:22,160
उस नाम से उसे बुला सकते हैं और बुलाया जा रहा

448
00:33:22,160 --> 00:33:26,760
है जिससे कि लोग समझ पाए कि किसके बारे में बात हो रही

449
00:33:26,760 --> 00:33:30,880
है ठीक है चलो अब आगे चलते हैं

450
00:33:30,880 --> 00:33:36,880
और इन सब चीजों से पहले हम मैं कुछ और भी चीजें दिखा

451
00:33:37,120 --> 00:33:41,560
दूं यह है निग्रह लुप्त जो

452
00:33:41,560 --> 00:33:46,080
निग्रह संप्रदाय है इसको पहचान पा रहे हैं आप लोग

453
00:33:46,080 --> 00:33:50,120
गोरे गोरे मुखड़े पर काला काला चश्मा कौन है

454
00:33:50,120 --> 00:33:54,240
ये पहचानिए आप लोग हो सकता है समझ पाए ठीक है

455
00:33:54,240 --> 00:33:59,040
तो ये है लुप्त संप्रदाय के

456
00:33:59,040 --> 00:34:03,120
कुलदीपक यह देखिए यह सब सत्यापन के अधीन जानकारी है

457
00:34:03,120 --> 00:34:07,360
पर हम आपको दिखा रहे हैं क्योंकि सत्यापन के अधीन जो जानकारी

458
00:34:07,360 --> 00:34:11,800
होती है उससे कोई दिक्कत नहीं होती है उस पर हम निर्णय दे सकते हैं इनके अनुसार

459
00:34:11,800 --> 00:34:16,480
मगर देखिए यह क्या है ए हुस्ने बेपरवाह

460
00:34:16,480 --> 00:34:20,640
तुझे सबनम कहूं सो कहूं फूलों में भी सोखी

461
00:34:20,640 --> 00:34:24,800
है किसको मगर तुझसा कहूं यह 2017

462
00:34:24,800 --> 00:34:28,320
वो इन्होंने भयंकर तपस्या की है बचपन से सात आठ वर्ष

463
00:34:28,320 --> 00:34:32,720
की आयु से इनको देवताओं के दर्शन प्राप्त हो रहे हैं और ये

464
00:34:32,720 --> 00:34:36,800
शायरिया कर रहे हैं अपनी जाने तमन्ना के लिए

465
00:34:36,800 --> 00:34:40,360
तो देखिए क्या लिखा

466
00:34:40,360 --> 00:34:44,600
है ऐ हुस्ने बेपरवाह तुझे शनम कहूं

467
00:34:44,600 --> 00:34:49,320
सोला कहूं फूलों में भी सोखी तो है किसको मगर तुसा

468
00:34:49,320 --> 00:34:53,400
कहूं मैं सोचता था मैं ही अच्छा कवि मुझसे बड़े कवि है

469
00:34:53,400 --> 00:34:58,040
ये गेसू उड़े महकी फिजा

470
00:34:58,040 --> 00:35:02,200
जादू करे आंखें तेरी सोया हुआ मंजर कहू या जागता सपना कहूं चंदा

471
00:35:02,200 --> 00:35:06,280
की तू है चांदनी लहरों की तू है रागिनी जाने तमन्ना मैं तुझे

472
00:35:06,280 --> 00:35:10,560
क्या कहूं क्या क्या कहूं क्या ना कहूं वाह बहुत बढ़िया

473
00:35:10,560 --> 00:35:14,560
बहुत बढ़िया यह देखिए जो स्त्रियां हो

474
00:35:14,560 --> 00:35:19,080
और जो बच्चे हो वह ना देखें

475
00:35:19,080 --> 00:35:24,120
यह देखिए यह आपके लुप्त संप्रदाय के

476
00:35:24,120 --> 00:35:28,320
कुलदीपक क्या लिख रहे हैं

477
00:35:28,320 --> 00:35:32,720
शेयर करने के लिए कोई माफी नहीं मांगी जाएगी और सभ्यता

478
00:35:32,720 --> 00:35:37,320
का उपदेश देने वालों को ब्लॉक कर दिया जाएगा सभ्यता का उपदेश

479
00:35:37,320 --> 00:35:41,400
वै श्याओ को दे हमने पहले ही चरित्र का ओवरडोज

480
00:35:41,400 --> 00:35:43,360
ले रखा है अब इन्होंने जो

481
00:35:43,360 --> 00:35:47,680
पोस्ट जो शेयर की है उसमें क्या लिखा है देखिए जरा सबसे

482
00:35:47,680 --> 00:35:51,920
पहले तो मैं आपको अपने से नमस्कार करना चाहता

483
00:35:51,920 --> 00:35:56,600
हूं यह विद्या जो अभिनेत्री है विद्या बालन

484
00:35:56,600 --> 00:36:01,360
उसके लिए शायद पोस्ट है

485
00:36:01,360 --> 00:36:05,640
और है ना ये है निग्रह

486
00:36:05,640 --> 00:36:09,840
संप्रदाय के कुल दीपक और यह तो कोई कहे ना कि यह सिद्ध करो वो सिद्ध करो सिद्ध

487
00:36:09,840 --> 00:36:14,040
करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है है ना भाई अब यहां

488
00:36:14,040 --> 00:36:18,440
पर अगर कोई कहे कि फेक आईडी है ये वो ये तो इससे क्या मतलब है

489
00:36:18,440 --> 00:36:22,440
अकाट्य सत नहीं चाहिए ना अकाट्य ना होते हुए भी

490
00:36:22,440 --> 00:36:26,600
केवल संभावना उत्पन्न करने वाली चीजों को भी हम प्रस्तुत कर सकते हैं यह भी लोग

491
00:36:26,600 --> 00:36:31,000
कहेंगे ना यह देखो अब कोई अनावश्यक

492
00:36:31,000 --> 00:36:35,120
बंधन नहीं बहुत सह चुका मर्यादा उनके लिए जो स्वयं मर्यादित

493
00:36:35,120 --> 00:36:39,240
है जिनके व्यवहार में मर्यादा नहीं हम क्यों

494
00:36:39,240 --> 00:36:43,280
रखें लोग तो फिर भी सब्य गाली देते हैं यह

495
00:36:43,280 --> 00:36:48,160
सब लोग यह देख लो क्या लिख रहे हैं आपके ठीक है

496
00:36:48,160 --> 00:36:54,160
आगे देख लीजिए क्या लिख रहे हैं आदर मादर सब कर रहे

497
00:36:54,840 --> 00:36:59,240
हैं और यह वही वर्ष है इसमें जो शायरियां

498
00:36:59,240 --> 00:37:04,000
कही गई वही वर्ष जो इन्होंने अपनी किताब में कमिट किया है कि मेरी

499
00:37:04,000 --> 00:37:09,920
स्थिति थी मैं प्यार में लफड़ा हो गया था विफल हो गया था बाइपोलर जिसमें हा

500
00:37:09,920 --> 00:37:14,280
हाइपर सेक्सुअलिटी का वो होता है डिसऑर्डर

501
00:37:14,280 --> 00:37:18,440
सब उसमें लिखा हुआ है यह वही वर्ष है समझ में नहीं आ रहा भाई लुप्त संप्रदाय का अचानक

502
00:37:18,440 --> 00:37:23,080
व 2017 में उसके बाद भी एक प्रेम प्रसंग इन्होने स्वीकारा है

503
00:37:23,080 --> 00:37:27,160
है ना तो मुझे लगता है कि और दिखाने की

504
00:37:27,160 --> 00:37:31,520
आवश नहीं है और सुनो भगवता अंद तुमने

505
00:37:31,520 --> 00:37:35,760
अपने आप को बचपन से तुमने अपने बारे में बताया है कि मेरा जो जन्म

506
00:37:35,760 --> 00:37:40,080
हुआ है वह भी बहुत सारे धार्मिक संस्कार

507
00:37:40,080 --> 00:37:44,160
संस्कारों से युक्त हुआ बिल्कुल हुआ होगा इसमें कोई दोराय नहीं है वो मेरे लिए

508
00:37:44,160 --> 00:37:48,720
पूज्य है जो माता पिता जिन्होंने आपको जन्म दिया है मगर

509
00:37:48,720 --> 00:37:52,840
आपने अपनी उसको जन्म को ही बहुत दिव्य बताया है उसके बाद

510
00:37:52,840 --> 00:37:56,920
आपने सात आठ वर्ष की आयु से बताया कि देवताओं के दर्शन होने लगे आपको

511
00:37:56,920 --> 00:38:01,040
पता लग लगा कि फलाने फलाने देवताओं को आपने

512
00:38:01,040 --> 00:38:05,120
सत्यापित भी कर लिया कि आपको देवताओं के दर्शन हो रहे थे

513
00:38:05,120 --> 00:38:09,440
और आगे 2016 17 इत्यादि में

514
00:38:09,440 --> 00:38:09,940
17

515
00:38:09,920 --> 00:38:14,200
में आपको जो है आपके संप्रदाय लुप्त संप्रदाय का यंत्र प्राप्त हुआ फिर आगे

516
00:38:14,200 --> 00:38:18,280
अमुक अमुक चमत्कारी चमत्कारिक वर्णन के आधार पर आपने उसका यह किया

517
00:38:18,280 --> 00:38:22,520
वो किया ठीक है मगर जिस समय आपको यह सब हो रहा है ऐसा व्यक्ति जो बचपन

518
00:38:22,520 --> 00:38:26,560
से ही दिव्य मय है हम तो बचपन से सुधरे हुए हैं य कहा

519
00:38:26,560 --> 00:38:30,760
था ना हम तो बचपन से सुधरे हुए हैं तुम तो अब आए हो

520
00:38:30,760 --> 00:38:35,000
तुम्हारा जने हुए नहीं हुआ है तुम तो वो खाते हो गोलगप्पे

521
00:38:35,000 --> 00:38:39,280
खाते हो है ना हम तो बचपन से सुधरे हुए हैं

522
00:38:39,280 --> 00:38:44,280
तो जब तुम बचपन से सुधरे हुए हो तो ये 2016 में तुम्हारे साथ क्या हो रहा

523
00:38:44,280 --> 00:38:48,600
है तुम सबनम में शायरिया लिख रहे हो लोगों

524
00:38:48,600 --> 00:38:52,920
को बिना विवाह के उनके संपर्क में आ रहे हो

525
00:38:52,920 --> 00:38:57,520
गालियां ये वाणी है तुम्हारी गालिया देना और यह जो

526
00:38:57,520 --> 00:39:01,520
भाषा शैली है ना जस यह भाषा शैली तुम्हारी है

527
00:39:01,520 --> 00:39:05,520
व उसम दिख रहा है भाषा शैली तो हो गया

528
00:39:05,520 --> 00:39:09,800
और और क्या है जिसको यंत्र प्राप्त हो रहा है जिसने देवताओं के दर्शन

529
00:39:09,800 --> 00:39:13,840
किए

530
00:39:13,840 --> 00:39:18,840
हैं उसके शरीर में इतनी विकृतियां क्योंकि

531
00:39:18,840 --> 00:39:22,880
सत्यापन के अधीन है पर मुझे भी सुनाई दिया है कि भैया तुम्हारा

532
00:39:22,880 --> 00:39:26,920
इलाज चल रहा है राजस्थान में कहीं से अजमेर से जयपुर से

533
00:39:26,920 --> 00:39:31,200
जोधपुर से यह सब सुनाई दिया है उसमें

534
00:39:31,200 --> 00:39:35,680
प्रवृत्ति हो गई है विवाह के बाद भी व चीजें नहीं छूट रही है

535
00:39:35,680 --> 00:39:39,800
यह सब दौड़ रहा है तुम्हारे बारे में पता है लोगों को

536
00:39:39,800 --> 00:39:44,760
जो नजदीक से तुम्हारे से जुड़े हुए हैं है ना तो

537
00:39:44,760 --> 00:39:48,760
व जो हस्त मैथुन की रोग की बात आ रही है

538
00:39:48,760 --> 00:39:52,760
तो अब सत्यापन का कोई मामला है ही नहीं अकाट्य चीजों से मतलब है नहीं अका नहीं

539
00:39:52,760 --> 00:39:56,760
होना चाहिए कुछ भी कहते रहो कहीं से भी कुछ भी सुन लिया बोल दो

540
00:39:56,760 --> 00:40:00,840
तो य चीज आपके बारे में भी है और आपका तो इतना दिव्य मय जीवन

541
00:40:00,840 --> 00:40:05,680
है तो कहां से आएगा उसमें हस्त मैथुन और कैसे आएगा उसमें

542
00:40:05,680 --> 00:40:09,840
दो दो मातृ शक्तियों के साथ प्रेम प्रसंग एक के बाद

543
00:40:09,840 --> 00:40:14,200
एक कैसे आएगा उसमें बाइपोलर है ना

544
00:40:14,200 --> 00:40:18,800
कैसे आएगा उसमें हाइपर सेक्सुअलिटी डिसऑर्डर ये

545
00:40:18,800 --> 00:40:22,880
सब प्रश्न और वो फिर शास्त्रोक्त

546
00:40:22,880 --> 00:40:26,960
वर्णन तो अलग है कि भैया मर्यादा क्या है वो परंपरा क्या है कहां

547
00:40:26,960 --> 00:40:30,960
से आया ज्ञान

548
00:40:30,960 --> 00:40:35,000
और मेरी भी रिसर्च कर लेना मेरी भी रिसर्च कर

549
00:40:35,000 --> 00:40:39,160
लेना मेरे बारे में अगर कुछ प्राप्त हो जाए वैसे

550
00:40:39,160 --> 00:40:43,320
तो जो जो है वह आर समाज ने कर रखा है जो थोड़ा बहुत

551
00:40:43,320 --> 00:40:47,560
प्राप्त ता मगर हो जाए और कुछ जो है मैंने खुद बता रखा

552
00:40:47,560 --> 00:40:51,640
है अपनी पुरानी फोटो डाल रखी है मगर मेरे बारे में यह भी निकाल

553
00:40:51,640 --> 00:40:55,720
लेना मैं डकैत था बहुत बड़ा डकैत था

554
00:40:55,720 --> 00:40:59,760
मगर मैं आचार्य नहीं ह प्रामाणिक संप्रदाय का मैं

555
00:40:59,760 --> 00:41:04,160
अपने आप को आचार्य नहीं बोल रहा हूं तुम बोल रहे हो पहले तो संप्रदाय कोही प्रामाणिक

556
00:41:04,160 --> 00:41:08,880
बोल रहे हो फिर उसका स्वयं को आचार बोल रहे हो और तुम्हारे य कर्म है

557
00:41:08,880 --> 00:41:13,320
जिन पर बात हो रही है ठीक है

558
00:41:13,320 --> 00:41:18,640
गोलगप्पे खाता है इसलिए वह किसी मातृ शक्ति का पक्ष नहीं रख सकता यह सिद्धांत

559
00:41:18,640 --> 00:41:22,920
है और तुम क्योंकि निग्रह चार्य हो लुप्त संप्रदाय

560
00:41:22,920 --> 00:41:27,520
के हो भले ही तुम भले ही तुम

561
00:41:27,520 --> 00:41:31,800
मैथुन से पीड़ित हो मगर तुम किसी की किसी भी स्त्री के बारे में कोई भी अपमान

562
00:41:31,800 --> 00:41:36,000
जनक टिप्पणी कर सकते हो किसी को भी फ्री मेशन से जोड़ सकते हो मगर कोई गोलगप्पे

563
00:41:36,000 --> 00:41:40,640
खाता है इसलिए व अपने घर की स्त्री का पक्ष नहीं रख सकता यह सिद्धांत है सनातन

564
00:41:40,640 --> 00:41:44,640
यह सिखाओ तुम धर्म लोगों को यह तुम धर्म बताओगे आने वाली

565
00:41:44,640 --> 00:41:46,080
पीढ़ी को इसकी रक्षा

566
00:41:46,080 --> 00:41:48,720
करेगी

567
00:41:48,720 --> 00:41:54,600
पीढ़ी तानाशाही

568
00:41:54,600 --> 00:42:00,600
की मातृ शक्ति के बारे में वही बोले जो गोलगप्पे नाना खाता

569
00:42:04,520 --> 00:42:08,520
हो तुम्हारे जैसे लोगों की वजह से गलत मैसेजेस जाते हैं तुम्हारे

570
00:42:08,520 --> 00:42:13,600
जैसे लोगों की वजह से तुम जैसे कुछ लोग बदनाम करते हो और भुगतना

571
00:42:13,600 --> 00:42:17,800
पूरे उसको पड़ता है कम्युनिटी

572
00:42:17,800 --> 00:42:22,000
को तुम जैसे ी अहंकारी तुम्हारी वजह से गलत

573
00:42:22,000 --> 00:42:26,680
मैसेज जाते हैं यही तो सिद्धांत

574
00:42:26,680 --> 00:42:30,920
कर र ना तुम कि मैं अगर अपने घर की स्त्री के लिए आ कर के बोलूंगा

575
00:42:30,920 --> 00:42:34,920
मैं अगर ऐसे किसी निर्दोष के बारे में बोलूंगा जिसका अभी तक कोई प्रूफ ही नहीं

576
00:42:34,920 --> 00:42:38,960
हुआ और तुम उसका मजाक उड़ा रहे हो मैं अगर उसके बारे में पक्ष रखूंगा तुम कहोगे

577
00:42:38,960 --> 00:42:43,280
तुमने डोसा क्यों खाया तुमने जो है वो प्रोटीन क्यों पिया इसका मतलब अगर

578
00:42:43,280 --> 00:42:47,760
कोई प्रोटीन पी रहा है तो उसके घर की मातृ शक्तियों के बारे में कोई कुछ भी बोलता रहे कुछ भी करता

579
00:42:47,760 --> 00:42:52,120
रहे यही मैसेज दे ना तुम्हारा यही सिद्धांत

580
00:42:52,120 --> 00:42:56,680
है तुम्हारा और तुम भले ही कुछ भी कर रहे हो

581
00:42:56,680 --> 00:43:00,760
भले तुम चोरी छुपे गुप्त रूप से इलाज चला रहे हो भले ही यह जानकारी अभी

582
00:43:00,760 --> 00:43:01,280
सत्यापन

583
00:43:01,280 --> 00:43:05,520
के अधीन है मगर सत्यापन की आ अधीन जानकारियों के आधार पर तुम प्रमाणिक

584
00:43:05,520 --> 00:43:11,200
तथ्य प्रस्तुत करते हुए लोगों को बदनाम

585
00:43:11,200 --> 00:43:15,320
करोगे गंभीर आरोप लगाओगे लोगों के ऊपर और जब तुमसे पूछा जाएगा तो

586
00:43:15,320 --> 00:43:21,320
विषयात करोगे

587
00:43:29,960 --> 00:43:34,120
एक मिनट आप लोग वेट करिए जिससे कि मैं उन विषयों

588
00:43:34,120 --> 00:43:40,120
को निकाल लूं जो विषय अ

589
00:45:22,280 --> 00:45:28,280
हां

590
00:45:30,480 --> 00:45:36,480
तो कुछ लोगों कीय शिकायत आ रही थी

591
00:45:37,400 --> 00:45:41,480
कि एक कोई कह रहा है कि मैं तेरे नाम से अगर फर्जी

592
00:45:41,480 --> 00:45:46,000
अश्लील शायरियां लिखूं तो स्वीकार करेगा बोल तो फिर

593
00:45:46,000 --> 00:45:50,000
मैं तेरे एआई से तेरी आवाज रिकॉर्ड करके कुछ का कुछ संदेश दे दूं तो

594
00:45:50,000 --> 00:45:54,120
तू स्वीकार करेगा बोल मतलब अपने पर जब बात आई तो

595
00:45:54,120 --> 00:45:58,200
अकाट्य बातों की ओर जाने लगे और जब मैंने चलाया था कि अकाट्य

596
00:45:58,200 --> 00:46:04,200
काट अकाट्य बड़ी तकलीफ थी तब इससे

597
00:46:05,320 --> 00:46:10,160
ना हां पता है वो फर्जी आईडी है उनके नाम से

598
00:46:10,160 --> 00:46:14,480
इसीलिए टू तड़ाक में बात कर रहा हूं अगर सुनी सुनाई चीजें

599
00:46:14,480 --> 00:46:19,160
ही हमारे निर्णय का आधार होंगी तो लो सुनी सुनाई

600
00:46:19,160 --> 00:46:23,200
चीजें चलो मैंने कहा था ना डाल डाल पात पात

601
00:46:23,200 --> 00:46:27,280
भगवता अंद मैंने कहा था खेल इस बार भी बहुत

602
00:46:27,280 --> 00:46:32,120
अच्छा था तू तेरा बहुत अच्छा खेल था तुम्हारा

603
00:46:32,120 --> 00:46:36,320
खेल बहुत बढ़िया खेला था तुमने इस बार क्योंकि तुमने अपना प्रायोजक जो

604
00:46:36,320 --> 00:46:40,560
वो करना है ना अपना करियर बिल्डिंग तो करियर बिल्डिंग बनाने

605
00:46:40,560 --> 00:46:44,720
का तुमने एक आधार सोचा उस आधार में तुमने गलती से

606
00:46:44,720 --> 00:46:48,760
विजया श्री का नाम लिया यह तुमसे गलती हो

607
00:46:48,760 --> 00:46:53,040
गई खेल इस बार भी तुम्हारा बहुत अच्छा था भगवता अंद

608
00:46:53,040 --> 00:46:58,760
आदमी गलत चुन लिया गलत आदमी चुन लिया तुमने

609
00:46:58,760 --> 00:47:03,040
अब खेलो चलो डाल डाल पात

610
00:47:03,040 --> 00:47:07,200
पात तुम्हारी तुम लोग तुम क्या करोगे जो

611
00:47:07,200 --> 00:47:11,200
जो जिनका सत्यापन नहीं हुआ है ये है वो है

612
00:47:11,200 --> 00:47:15,520
उसको भी दिखाओगे और कहोगे इसके ऊपर ये गलत है वो गलत है य ये फ्री मेशन की

613
00:47:15,520 --> 00:47:19,560
हो गया और जब तुम्हारे से पूछा जाएगा तो तुम ये मैसेज

614
00:47:19,560 --> 00:47:20,480
भिजवा होगे मैं तेरे

615
00:47:20,480 --> 00:47:25,360
नाम से अगर यह कर दूं तो तू मानेगा मैं भी तो वही कह रहा हूं

616
00:47:25,360 --> 00:47:29,480
कि मैं तुम्हारे नाम से तरह से संदिग्ध वीडियो

617
00:47:29,480 --> 00:47:33,640
स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर कुरा के डाल दूं कहीं पर जिसमें कि

618
00:47:33,640 --> 00:47:37,800
उसमें भी जो चीजें हो रही है वो भी चीज प्रकट नहीं कर पा रही सिद्ध

619
00:47:37,800 --> 00:47:41,920
नहीं कर पा रही तो उसके नाम पर तुम तुम चवा उड़ाओ ग कि भैया

620
00:47:41,920 --> 00:47:46,080
पूरी मट के परिकर जो ऐसे हैं मैं भी तो यही

621
00:47:46,080 --> 00:47:50,160
कह रहा हूं और तो और सीधे सीधे ू

622
00:47:50,160 --> 00:47:55,120
मंच पर व स्त्री बैठी नहीं सीधा सधा झूठ

623
00:47:55,120 --> 00:47:57,800
चलो

624
00:47:57,800 --> 00:48:01,840
अभी मैं उन प्रश्नों पर जा रहा हूं मतलब अपनी

625
00:48:01,840 --> 00:48:04,600
बारी आएगी तो

626
00:48:04,600 --> 00:48:08,680
अकाट्य और दूसरे की बारी आएगी तो कुछ भी कहते रहो यहां वाले 50

627
00:48:08,680 --> 00:48:13,480
लोग कह रहे हैं वह 50 लोग कह रहे हैं यह कह रहे हैं अच्छा एक बात और थी

628
00:48:13,480 --> 00:48:17,680
किसी शायद इस्लाम वाले ने इसके

629
00:48:17,680 --> 00:48:21,760
प्रति कुछ बात कर दी थी तो यह भगवता नंद ने कोर्ट में शायद केस

630
00:48:21,760 --> 00:48:25,920
बस किया है ठीक है तो इसका कहना

631
00:48:25,920 --> 00:48:30,920
है कि जब शंकराचार्य स्वयं है शासकों के

632
00:48:30,920 --> 00:48:35,040
शासक तो हम कोर्ट क्यों जाएं जब शासकों

633
00:48:35,040 --> 00:48:35,540
के शासक

634
00:48:35,480 --> 00:48:39,480
स्वयं है तो तुम कोर्ट क्यों गए थे

635
00:48:39,480 --> 00:48:43,800
क्यों गए थे कोर्ट और चलो इन इन शंकराचार्य के पास पुरी

636
00:48:43,800 --> 00:48:48,400
वालों के पास तुम्हें जाने नहीं दिया जा रहा है अन्य तीन शंकराचार्य तो

637
00:48:48,400 --> 00:48:52,680
थे उनके पास चले जाते सासु के शासक है ना वो तुम्हारे

638
00:48:52,680 --> 00:48:58,680
अनुसार प्रामाणिक भी है चले जाते उनके पास क्यों नहीं गते

639
00:49:00,120 --> 00:49:06,120
और तुम्हें उम्मीद नहीं है क्या कहते हैं

640
00:49:10,600 --> 00:49:16,000
कि तुमने क बताया था

641
00:49:16,000 --> 00:49:20,080
कि तुमने बताया था तुम्हें उम्मीद नहीं है कि कोर्ट से

642
00:49:20,080 --> 00:49:24,080
कुछ होगा तो कोर्ट क्यों गए थे न्यायालय क्यों गए थे भारतीय

643
00:49:24,080 --> 00:49:28,680
संविधान के अनुसार जो है तो यह सब दो मुही बातें हैं

644
00:49:28,680 --> 00:49:32,800
जैसे पुरी के शंकराचार्य जी पुरी मठ के विरुद्ध किसी का कोई

645
00:49:32,800 --> 00:49:36,880
पत्र मिला उसमें वो ये लिख रहा है वो मिल रहा है फिर तुम बता रहे हो वो गुहार लगा रहा है

646
00:49:36,880 --> 00:49:41,160
प्रशासन से ऐसा ऐसा मूक अमू चीजों को लेकर के

647
00:49:41,160 --> 00:49:45,400
तो उसको तुम ये क्यों नहीं बता रहे हो कि तुम कहां गुहार लगा रहे हो प्रशासन से तुम

648
00:49:45,400 --> 00:49:49,840
शंकराचार्य के पास जाओ शासन जो शासकों

649
00:49:49,840 --> 00:49:54,000
के शासक उनके पास जाओ मतलब मीठा मठा

650
00:49:54,000 --> 00:50:00,000
गब गब और कड़वा कड़वा थू

651
00:50:02,480 --> 00:50:06,800
मीठा मठा गब गब और कड़वा कड़वा थू अब मैं वह एक

652
00:50:06,800 --> 00:50:11,040
एक समस्या हुई थी कल तकनीकी असुविधा के कारण जो है बहुत

653
00:50:11,040 --> 00:50:15,200
सी चीजें जो कुछ ऐसी चीजें थी जो स्किप हो गई थी फॉरवर्ड

654
00:50:15,200 --> 00:50:19,400
करने के कारण तो कुछ हमने जो कल कल

655
00:50:19,400 --> 00:50:24,600
जहां तक हमने उत्तर देने का प्रयास किया था वहां

656
00:50:24,600 --> 00:50:30,600
तक उसके बीच में जो पहले हम उनको ले

657
00:50:34,120 --> 00:50:37,280
रहे गपाल

658
00:50:37,280 --> 00:50:43,280
महात्र लोग

659
00:50:45,400 --> 00:50:48,120
है

660
00:50:48,120 --> 00:50:52,200
उस लेकिन मैं य सपन नहीं

661
00:50:52,200 --> 00:50:56,680
कर रहा बातो का फ भी अ समाज के लोग

662
00:50:56,680 --> 00:51:02,680
समाझ के अने लोग तो कर रहे

663
00:51:08,200 --> 00:51:12,680
हैं खराब हो जाए इनका

664
00:51:12,680 --> 00:51:16,680
कहना है कि मैं यदि सत्यापन नहीं कर रहा हूं तो समाज के अन्य लोग तो

665
00:51:16,680 --> 00:51:20,760
कर रहे पहले तुम डिसाइड कर लो कि तुम उसको प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत कर

666
00:51:20,760 --> 00:51:24,880
रहे हो या किस रूप में प्रस्तुत कर रहे हो अगर अन्यों के सत्यापन की बात

667
00:51:24,880 --> 00:51:29,240
है तो तुम अपने यहां से क्यों उसको डाल तुम्ह उसको लेकर शक है कि नहीं

668
00:51:29,240 --> 00:51:33,280
कहना क्या चाहते हो और दूसरी बात है तो

669
00:51:33,280 --> 00:51:37,440
रिकॉर्डिंग ना अगर इस तरह से सब प्रमाणिक

670
00:51:37,440 --> 00:51:41,560
मान लिया जाए तो ठीक है चलो अभी ए आई से कितनी आवाज बन जाएगी

671
00:51:41,560 --> 00:51:45,560
तुम्हारी और

672
00:51:45,560 --> 00:51:49,600
मेरी रामपाल के विरुद्ध ऐसा षडयंत्र चल ही रहा

673
00:51:49,600 --> 00:51:53,640
है उसका एआई से बना बना करके ही उसके जो आज नए भक्त जुड़

674
00:51:53,640 --> 00:51:59,640
रहे हैं उनको वीडियो दिखाया जाता है एआई से बनाकर ऑडियो सुनाया जाता

675
00:52:03,880 --> 00:52:08,560
है य

676
00:52:08,560 --> 00:52:11,000
बात

677
00:52:11,000 --> 00:52:15,080
लेकिन स कर

678
00:52:15,080 --> 00:52:21,080
का समाज के लोग समाज के अन लोग तो कर

679
00:52:21,160 --> 00:52:25,240
रहे पंडित दीनदयाल त्रिपाठी जी ने एक

680
00:52:25,240 --> 00:52:29,680
वो दिया था

681
00:52:29,680 --> 00:52:33,800
और ये जितनी भी पंडित दीनदयाल त्रिपाठी जी ने

682
00:52:33,800 --> 00:52:37,320
एक इनको फोटो दिया

683
00:52:37,320 --> 00:52:41,360
था ऐसा मुझे संज्ञान में आया है मैं फिर

684
00:52:41,360 --> 00:52:45,480
कह रहा हूं सारी सामग्री जो है सत्यापन मैं नहीं करता हूं मगर ठीक है बात

685
00:52:45,480 --> 00:52:51,480
तो करेंगे उसके आधार पर क्या है वोह

686
00:52:52,080 --> 00:52:56,520
बात कि उन्होंने जो इनको वीडियो फोटो दिया था वह यू

687
00:52:56,520 --> 00:53:00,600
उसमें वैष्णव तिलक लगा हुआ था इनकी पेंटिंग में और

688
00:53:00,600 --> 00:53:04,680
इन्होंने पोस्ट किया था उसमें वैष्णव तिलक हटा कर के उसमें जो है सूर्य

689
00:53:04,680 --> 00:53:08,840
का तिलक लगा कर के और आज इनका तिलक संभवत कुछ और है तिलक

690
00:53:08,840 --> 00:53:14,840
क्यों बदल रहा है दंड क्यों बदल रहा है यह देख

691
00:53:15,520 --> 00:53:19,520
लो यह नहीं चाहता था भगवता नंद में यह नहीं

692
00:53:19,520 --> 00:53:23,600
चाहता था इसलिए मैं मना करता था मत करो मत

693
00:53:23,600 --> 00:53:27,320
करो ठीक है

694
00:53:27,320 --> 00:53:31,400
और जिस चीज जिस चीज के लिए आपके मन में संशय है उस चीज

695
00:53:31,400 --> 00:53:35,440
को आप उस चीज के आधार पर गंभीर आरोप मत लगाओ पहले स्वयं

696
00:53:35,440 --> 00:53:39,600
उसको जांच करो और उसके बाद गंभीर आरोप लगाइए किसी के ऊपर जब

697
00:53:39,600 --> 00:53:44,720
आप बिल्कुल सत्यापित हो जाए कि हा इस पर बात कर सकते हैं

698
00:53:44,720 --> 00:53:48,720
और यह कुछ कमेंट कर रहे हैं यह भाई यह फेक आईडी बनाई गई है

699
00:53:48,720 --> 00:53:52,960
मट के परिकर के नाम से वह सावधान हो जाए

700
00:53:52,960 --> 00:53:58,960
उन पर कारवाही हो सकती है और कईयों पर कारवाही चल रही है

701
00:54:01,120 --> 00:54:06,320
ये असली आईडी से आए

702
00:54:06,320 --> 00:54:11,000
क्या निग्रह चार्य भगतान गुरु हां

703
00:54:11,000 --> 00:54:15,360
यह मैं जो तुमने यह सब किया है ना कचरा उस कचरे का

704
00:54:15,360 --> 00:54:19,960
सारा मैं दे दूं उसके बाद हम लोग बैठ कर के बात करेंगे

705
00:54:19,960 --> 00:54:24,120
अभी पहले मैं जो तुमने कचरा किया है सब पहले

706
00:54:24,120 --> 00:54:30,120
उसको जो मेरा

707
00:54:31,200 --> 00:54:36,880
अच्छा फेक आईडी य भी फेक आईडी

708
00:54:36,880 --> 00:54:40,960
है बताइए नकली का जमाना हद होती है जिसका पक्ष

709
00:54:40,960 --> 00:54:45,240
लेने आ रहे उसकी भी नकली आईडी बना ली चलो खैर

710
00:54:45,240 --> 00:54:50,120
अगला सवाल लेते हैं जो स्किप हो गया

711
00:54:50,120 --> 00:54:54,400
है आगे व कह रहे

712
00:54:54,400 --> 00:54:58,440
से अलग बात और उससे आगे ऐ

713
00:54:58,440 --> 00:55:02,520
क रहे गु

714
00:55:02,520 --> 00:55:08,120
हमारे गुरुदेव ऐसा कह रहे हमारे

715
00:55:08,120 --> 00:55:14,120
सब और

716
00:55:26,840 --> 00:55:32,840
दोन में से

717
00:55:45,880 --> 00:55:50,000
कोई पहली बात तो मैं यह कहूंगा यह सारे विषय आ कहां

718
00:55:50,000 --> 00:55:54,280
से गए क्या पुरी के शंकराचार्य जी को तुम प्रमाणिक

719
00:55:54,280 --> 00:55:58,400
आचार्य नहीं मानते हो

720
00:55:58,400 --> 00:56:02,400
यह सारे विषय है क्या हमारे बीच में हमारे बीच में विषय कौन सा चल रहा है पुरी के

721
00:56:02,400 --> 00:56:06,640
परकर जिस आधार पर तुम गलत साबित करना चाहते हो उन आधारों के द्वारा

722
00:56:06,640 --> 00:56:10,760
गलत साबित हो रहे हैं कि नहीं विजय श्री के ऊपर

723
00:56:10,760 --> 00:56:14,960
जो तुमने आक्षेप लगाए हैं वह सिद्ध हो रहे हैं कि नहीं पहली बात अब

724
00:56:14,960 --> 00:56:20,960
मैं सुन लेता हूं क्या है इसमें ये

725
00:56:24,760 --> 00:56:29,280
जो हम कितना तुम यार बातों का बतंगड़

726
00:56:29,280 --> 00:56:33,760
बनाते हो मुझे यह अपेक्षा नहीं थी सच बता रहा हूं तुम्हारा सम्मान अब जा चुका है

727
00:56:33,760 --> 00:56:38,520
अब जा चुका है तुमने वो सम्मान खो दिया था तुम्हारी रेस्पेक्ट तुम्हारे लिए रेस्पेक्ट थी

728
00:56:38,520 --> 00:56:43,200
मगर जब मैं वो होते हैं ना कि पानी में कूदने के बाद ही तैरा की आती है

729
00:56:43,200 --> 00:56:47,480
जब तक किसी से सामना नहीं होता तबक तब तक उसकी बिल्कुल वास्तविकता नहीं आती सामने

730
00:56:47,480 --> 00:56:51,600
तुम्हारी वास्तविकता आ रही है जैसे तुम मेरी बातों का गलत अर्थ बना कर के वहां मुद्दा बना

731
00:56:51,600 --> 00:56:55,600
रहे हो कि मैंने तुम्हें संस्कृत हीन कह दिया संस्कृत को ना जानने वाला कह दिया यहां

732
00:56:55,600 --> 00:56:59,640
भी वही कह रहे हो हमें योग्य व्यक्ति नहीं मिल रहे

733
00:56:59,640 --> 00:57:04,400
हो हमारे परिकर दिव्य हैं इसमें तुम आ जाना

734
00:57:04,400 --> 00:57:08,560
गुरुदेव के पास चलना पूछ लेना वो किस बारे में कह रहे हैं क्या

735
00:57:08,560 --> 00:57:12,600
केवल परिकर बनाएंगे हिंदू राष्ट्र

736
00:57:12,600 --> 00:57:16,680
योग्य व्यक्तियों को ढूंढा जा रहा है और जिस समय नहीं मिल रहे

737
00:57:16,680 --> 00:57:21,320
हैं उस समय कहा जा रहा है कि नहीं इससे परिक का दिव्य होने का क्या मतलब है

738
00:57:21,320 --> 00:57:25,320
अच्छा श्री राम जी स्वयं दिव्य हैं दिव्य

739
00:57:25,320 --> 00:57:29,320
क्या वो स्वयं ब्रह्म है परम ब्रह्म है और वो

740
00:57:29,320 --> 00:57:33,720
ढूंढ रहे हैं माता सीता को ठीक है

741
00:57:33,720 --> 00:57:37,840
और वो और भी कार्य ढूंढ रहे हैं वानर वानरों को

742
00:57:37,840 --> 00:57:40,080
एकत्रित कर रहे हैं और वानरों को एकत्रित

743
00:57:40,080 --> 00:57:44,080
करने के बीच में यदि किसी स्थिति में वो ये कहे कि हमारी

744
00:57:44,080 --> 00:57:48,160
यह कार्य रुके हुए हैं यह कार्य नहीं हो रहे हैं है ना जबकि उनके साथ दिव्य

745
00:57:48,160 --> 00:57:52,280
हनुमान जी खड़े हुए हैं उनके साथ हैं तो हमें दिव्य वो

746
00:57:52,280 --> 00:57:56,400
नहीं मिल रहे हैं अगर इस तरह से कहे हमें साथ निभाने वाले जो दिव जो लोग

747
00:57:56,400 --> 00:58:00,800
है वो नहीं मिल रहे हैं योग्य लोग नहीं मिल रहे हैं साथ निभाने वाले अगर वो ये बात कहे

748
00:58:00,800 --> 00:58:04,960
तो आप उनसे कहोगे तुम्हारे साथ तो हनुमान जी खड़े तु तुम ये कैसे कह रहे हो तुम तो स्वयं ही परम

749
00:58:04,960 --> 00:58:09,160
ब्रह्म हो तुम ये कैसे कह रहे हो यह कहोगे तुम उनसे अगर वो वानर सेना

750
00:58:09,160 --> 00:58:13,200
बना रहे हैं सेना बना रहे हैं और उनके साथ हनुमान जी खड़े हुए हैं और

751
00:58:13,200 --> 00:58:17,280
वह सेना के लिए निकले हुए हैं और उस बीच अगर वो यह कहते हैं कि हम

752
00:58:17,280 --> 00:58:21,560
लोग ढूंढ रहे हैं मगर हमें योग्य लोग नहीं मिल रहे

753
00:58:21,560 --> 00:58:25,560
हैं तो तुम यह कहोगे तुम्हारे पास तो योग्य लोग है तुमने यह कैसे कहा कि

754
00:58:25,560 --> 00:58:29,800
योग्य लोग नहीं मिल रहे हैं क्या तुम्हारा मतलब कुछ

755
00:58:29,800 --> 00:58:34,200
भी बात लेकर के लीपापोती करके अपने हिसाब से बात करने लगते हो क्या

756
00:58:34,200 --> 00:58:40,200
कहां की कहीं की ईट कहीं का रोड़ा भानुमति का कुनबा

757
00:58:40,240 --> 00:58:44,400
जोड़ा चलो ठीक

758
00:58:44,400 --> 00:58:49,120
है दोनों में से कोई भी पक्ष

759
00:58:49,120 --> 00:58:55,040
होगा इस

760
00:58:55,040 --> 00:58:59,080
क को जत है यात है पक्ष है दोनों में से कोई भी

761
00:58:59,080 --> 00:59:03,280
पक्ष होगा दोनों पक्ष मेंको दोष लग रहा है एक शब

762
00:59:03,280 --> 00:59:07,760
प्रग किया ठीक है

763
00:59:07,760 --> 00:59:13,760
अगला लेते

764
00:59:15,560 --> 00:59:20,600
हैं का तो इसके

765
00:59:20,600 --> 00:59:25,160
र जो सब चीज य बता जा रही है

766
00:59:25,160 --> 00:59:31,160
उ सबज का

767
00:59:39,800 --> 00:59:44,000
हा परिस्थिति जन्य प्रूफ दिए जाएंगे उससे आगे बात बढ़ेगी तो

768
00:59:44,000 --> 00:59:48,080
क्या आगे बात बढ़ी कुछ और रिसर्च ले आए तुम यह कह

769
00:59:48,080 --> 00:59:52,160
रहे हैं कि परिस्थिति जनने वाले प्रूफ तो दिए जाएंगे वो तो दो साल से दे रहे

770
00:59:52,160 --> 00:59:56,160
हो ना तुम परिक जो मठ के मठ में जो हो

771
00:59:56,160 --> 01:00:00,200
रहा है उसके संबंध में तुम बहुत सारे प्रूफ पहले से दे रहे हो दो साल से

772
01:00:00,200 --> 01:00:04,360
वही प्रूफ है तीन साल से तुम्हारे पास वही प्रूफ है परिस्थिति

773
01:00:04,360 --> 01:00:09,320
जन्य अगर वो प्रूफ है तो उससे आगे तो बढ़ो अब तो लाओ अकाट्य प्रमाण

774
01:00:09,320 --> 01:00:13,840
और बात ये है भगतान बात क्या है इस पर ध्यान

775
01:00:13,840 --> 01:00:17,880
दो बात यह है कि तुम किसी और से कह रहे हो

776
01:00:17,880 --> 01:00:22,160
कि मेरे इन परिस्थिति जन्य जो वो

777
01:00:22,160 --> 01:00:26,280
है सामग्री इन पर जाकर के जान हथेली पर लग कर के रख

778
01:00:26,280 --> 01:00:31,240
करके और जो है युद्ध में कूद जाओ खुद नहीं कूद रहे हो

779
01:00:31,240 --> 01:00:35,400
तो कोई कोई ऐसी मूर्खता क्यों करे परिस्थिति जन्य जब तुम उसे

780
01:00:35,400 --> 01:00:39,720
मान रहे हो सामग्री को तो उसमें या तो किसी से अपेक्षा

781
01:00:39,720 --> 01:00:43,720
मत करो कि उसके आधार पर कोई कूद जाए और वरना शांत रहो

782
01:00:43,720 --> 01:00:47,760
क्यों कह रहे हो किसी और को कूदने को खुद जब कुद नहीं कूद

783
01:00:47,760 --> 01:00:52,280
रहे जब परिस्थिति जन्य सामग्री है वो हा

784
01:00:52,280 --> 01:00:55,040
यहां पर तुमने अपना ही खंडन कर लिया कि वो परिस्थिति

785
01:00:55,040 --> 01:00:59,520
जन्य सामग्री है है सिद्ध नहीं होता

786
01:00:59,520 --> 01:01:03,600
तो फिर तुम क्यों लोगों से अपेक्षा कर रहे हो कि जाकर के हाथ पैर पकड़ लो और जो है अपनी बात

787
01:01:03,600 --> 01:01:07,680
सुना दो ये कर दो वो कर दो यह युद्ध है क्यों तुम

788
01:01:07,680 --> 01:01:12,800
जो जो युद्ध खुद नहीं चुन रहे हो वो दूसरों को दे रहे हो

789
01:01:12,800 --> 01:01:16,960
मुझसे भी तो य यही अपेक्षा कर रहे हो अरे भाई मैंने

790
01:01:16,960 --> 01:01:21,080
देखे जो सामग्री बहुत पहले देखी थी मगर इनसे सिद्ध

791
01:01:21,080 --> 01:01:25,080
नहीं होगा कुछ भी तो मैं क्यों क्यों गंभीर तरीके से युद्ध लड़ने

792
01:01:25,080 --> 01:01:28,080
लग जाऊं भाई

793
01:01:28,080 --> 01:01:32,200
और तुमने तुम तो पहले से उस पर कार्य कर रहे हो तुम तो अब कहीं पर पहुंचे होगे

794
01:01:32,200 --> 01:01:36,760
तुम्हारी रिसर्च कहीं पहुंची होगी कहां पहुंची आए कुछ

795
01:01:36,760 --> 01:01:40,760
साक्ष आए कुछ और नहीं आए तो फिर तुम इस तरीके से मंचन क्यों कर रहे

796
01:01:40,760 --> 01:01:44,760
हो बातों का और अगर मैं कर रहा हूं तो

797
01:01:44,760 --> 01:01:49,000
अब मुझे कुछ कहना नहीं परिस्थिति जन्य वाले मैंने तुम्हारे दिखा दिए हैं

798
01:01:49,000 --> 01:01:53,760
सबनम कहू और सुनो सच के आसपास वाला

799
01:01:53,760 --> 01:01:57,800
झूठ तुमने तो अपनी भा वा बुक में भी लिखा है

800
01:01:57,800 --> 01:02:00,640
मेरे प्रेम प्रेम प्रसंग

801
01:02:00,640 --> 01:02:05,680
है शिवांश की लाइव लाइव जो है बोरिंग

802
01:02:05,680 --> 01:02:11,680
थी अगला सुनते हैं

803
01:02:27,920 --> 01:02:32,160
अच्छा आचार्य राम शंकर शुक्ल जी से हम बात कर रहे हैं वो आके यहां लाइव

804
01:02:32,160 --> 01:02:36,200
में बोलेंगे तुम्हारी पोल पट्टी खोलेंगे आचार्य राम शंकर शुक्ल जी की बात की

805
01:02:36,200 --> 01:02:40,400
है ना ये पॉज क्यों नहीं हो रही है हो

806
01:02:40,400 --> 01:02:44,600
गई आचार्य रामशंकर शुक्ल जी की बात बात की है ना तुमने उनको

807
01:02:44,600 --> 01:02:48,640
लाएंगे यहां पर आने वाले हैं वो और नहीं आएंगे तो उनका जो वक्तव्य है

808
01:02:48,640 --> 01:02:52,720
वो आप तक पहुंचाएंगे उसको भी सार्वजनिक करेंगे उनके उसी वक्तव्य को

809
01:02:52,720 --> 01:02:57,720
सार्वजनिक क्यों करें जो तुम्हारे फोन के माध्यम से हमें प्राप्त होगा

810
01:02:57,720 --> 01:03:01,880
हम उस वक्तव्य को सार्वजनिक करेंगे जो प्रामाणिक रूप से सीधे दिखाएंगे राम शंकर

811
01:03:01,880 --> 01:03:07,880
शुक्ल जी कॉल रिकॉर्डिंग वाला खेल नहीं खेलेंगे ठीक

812
01:03:09,200 --> 01:03:13,320
है में आ बोलता है और

813
01:03:13,320 --> 01:03:17,720
यहां पर तुम्हारे विरुद्ध कारवाई भी हो सकती है

814
01:03:17,720 --> 01:03:22,120
यह भी समझो राम शंकर शुक्ल जी की उनकी आज्ञा के बिना कॉल रिकॉर्डिंग

815
01:03:22,120 --> 01:03:27,000
करना और उस कॉल रिकॉर्डिंग के बारे में एडमिट किया तुमने

816
01:03:27,000 --> 01:03:31,200
यह कॉल रिकॉर्डिंग की है चलती

817
01:03:31,200 --> 01:03:35,280
लाइव में कि हां कॉल रिकॉर्डिंग है मेरे पास उनकी मेरी उनसे जो बात हुई थी उस बारे

818
01:03:35,280 --> 01:03:39,280
में और तो ये इस तरह

819
01:03:39,280 --> 01:03:43,280
के चीजें भी बनती है किसी की कॉल रिकॉर्डिंग करना उनकी आज्ञा के बिना और फिर यह

820
01:03:43,280 --> 01:03:47,280
बताना कि मैं डाल दूंगा यह सब बातें करना रामशंकर शुकल जी से संपर्क नहीं हो

821
01:03:47,280 --> 01:03:51,920
पाया कल फोन किया था तो व कहीं पर अपने गुरुकुल के किसी कार्य में व्यस्त

822
01:03:51,920 --> 01:03:56,000
थे तो बात नहीं हो पाई मगर होगी

823
01:03:56,000 --> 01:04:00,680
इस पर भी बात होगी जो तुम किसी

824
01:04:00,680 --> 01:04:04,680
प्रतिष्ठित व्यक्ति का इस तरह से सम्मान

825
01:04:04,680 --> 01:04:09,240
अपनी करियर की भूख में दाप पर लगाते हो

826
01:04:09,240 --> 01:04:15,240
ठीक है लाएंगे राम शंकर शुकल जीम

827
01:04:26,640 --> 01:04:31,200
अरे क्या बकवास है तुम जान को लेकर कोर्ट क्यों नहीं जाते हैं

828
01:04:31,200 --> 01:04:36,160
क्या ये सब कर रहे हो अरे बहुत से ऐसे कार्य जो होने चाहिए

829
01:04:36,160 --> 01:04:40,360
जो नहीं कर पा रहे क्योंकि सामर्थ्य नहीं है जितना

830
01:04:40,360 --> 01:04:44,520
सामर्थ्य जहां पर जानकारी मिल जाएगी जितना सामर्थ होगा करेंगे भाई तुम कौन होते

831
01:04:44,520 --> 01:04:48,680
हो यह बोलने वाले तुमने ये क्यों नहीं वही वाली बात एक जगह किसी को बिना

832
01:04:48,680 --> 01:04:52,960
टिकट पकड़ा है तो भैया आपने उसको क्यों नहीं पकड़ा आपने उसको क्यों नहीं पकड़ा

833
01:04:52,960 --> 01:04:58,400
और दूसरा क्योंकि नहीं पकड़ा तो हमें क्यों पकड़ रहे हो

834
01:04:58,400 --> 01:05:02,440
यह कहां का यह तो महिलाओं वाली बातें हो गई ना कोई बात

835
01:05:02,440 --> 01:05:06,920
ना चीत कि उस दिन केवल

836
01:05:06,920 --> 01:05:11,080
आवाज उठाना जिस दिन सबके साथ सबके पास सबका

837
01:05:11,080 --> 01:05:15,200
विरोध करो वरना मत करना दुनिया में अभी भी ऐसे कई तत्व होंगे जिनका

838
01:05:15,200 --> 01:05:19,560
विरोध तुमने नहीं किया होगा धार्मिक होंगे अधर्मी होंगे

839
01:05:19,560 --> 01:05:25,560
तो मैं तुमसे कहूंगा कि उनके लिए तुमने वीडियो क नहीं बनाया उनका विरोध क्यों नहीं किया

840
01:05:32,040 --> 01:05:36,120
वो बोलेगा हम

841
01:05:36,120 --> 01:05:40,200
कि तुमने वीडियो क्यों बनाया तुमने वीडियो क्यों नहीं बनाया यह

842
01:05:40,200 --> 01:05:43,560
है वो

843
01:05:43,560 --> 01:05:48,440
है तो इसका मतलब तुम भी गलत हो

844
01:05:48,440 --> 01:05:52,480
दूसरे के गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है और यदि

845
01:05:52,480 --> 01:05:57,000
कहीं पर हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो इसलिए हमारा जो करना है वो गलत सिद्ध नहीं होता है

846
01:05:57,000 --> 01:06:01,280
अगर हम किसी का समर्थन कर रहे हैं अच्छे व्यक्ति का तो इस उसी समय दूसरे

847
01:06:01,280 --> 01:06:05,600
व्यक्ति का नहीं कर रहे हैं तो हम क्योंकि यहां समर्थन कर रहे हैं तो उसका विरोध सिद्ध नहीं होता

848
01:06:05,600 --> 01:06:10,280
है क्योंकि हम पूर्ण नहीं है और सुनो

849
01:06:10,280 --> 01:06:14,520
कि विरोध नहीं कर रहे हैं क्या हिंदू राष्ट्र क्या है हिंदू

850
01:06:14,520 --> 01:06:18,640
राष्ट्र की आवाज तो उठा रहे हैं गोठिया कर रहे हैं लोगों को हिंदू राष्ट्र के लिए प्रेरित कर रहे

851
01:06:18,640 --> 01:06:22,720
हैं उसका क्या अर्थ है जो सनातन

852
01:06:22,720 --> 01:06:27,200
वैदिक आर्य हिंदू धर्म है परम प प्राप्त आचार्यों के द्वारा

853
01:06:27,200 --> 01:06:31,960
उसके निर्मित संविधान के आधार पर जो देश चलना चाहिए वैसे चलेगा सब आ गया उसमें

854
01:06:31,960 --> 01:06:36,680
अक्ष जैसे लोग नहीं रहेंगे स्वघोषित आचार्य नहीं रहेंगे

855
01:06:36,680 --> 01:06:40,720
और तुम्हारे भी ु लुप्त संप्रदाय की समीक्षा होगी उसमें

856
01:06:40,720 --> 01:06:45,400
उसको आचार्य पद मिलेगा कि नहीं मिलेगा वो भी समीक्षा हो

857
01:06:45,400 --> 01:06:49,760
जाएगी तो हिंदू राष्ट्र के लिए कार्य कर तो रहे

858
01:06:49,760 --> 01:06:54,000
हैं उसमें हो तो रहा है अक्ष का विरोध

859
01:06:54,000 --> 01:07:00,000
पूरी दुनिया के हर सनातन विरोध तत्व का उसम विरोध हो रहा

860
01:07:02,680 --> 01:07:06,880
है और और जो अभी मैंने रिकॉर्डिंग वाली बात की है ना राम

861
01:07:06,880 --> 01:07:11,080
शंकर शुक्ल जी की जो बात है पहली बात है कि हम अगर किसी

862
01:07:11,080 --> 01:07:15,240
की रिकॉर्डिंग हमसे भी कहा जा सकता है ना कि आप भी तो रिकॉर्ड करते हो

863
01:07:15,240 --> 01:07:19,760
हम किसी की भी रिकॉर्डिंग अगर दिखाते हैं तो वहा यह नहीं कहते फलाने की रिकॉर्डिंग

864
01:07:19,760 --> 01:07:25,760
आप तो वहां खुद कह रहे हो ऐसा करने से बचना चाहिए आपको

865
01:07:26,160 --> 01:07:30,200
तुम स्वयं वहां पर कह रहे हो कि क्या कहते य आचार्य राम

866
01:07:30,200 --> 01:07:34,440
शंकर शुक्ल जी की रिकॉर्डिंग है मेरे पास में भेजूंगा तुम्हे ये सब कर रहे हो ना तो वहा एडमिट

867
01:07:34,440 --> 01:07:38,680
कर रहे हो तुम मैंने किसकी रिकॉर्डिंग हैय सत्यापन

868
01:07:38,680 --> 01:07:43,000
सत्यापित कर रहे हो उसे तुम ठीक

869
01:07:43,000 --> 01:07:49,000
है का प्रयोग किया उस वीडियो के लिए इस वीडि का

870
01:07:49,040 --> 01:07:53,840
ले करने

871
01:07:53,840 --> 01:07:59,840
वा इसमें कता है

872
01:08:14,440 --> 01:08:18,520
अब इनका कहना है कि तुमने मले राज शब्द का उपयोग क्यों

873
01:08:18,520 --> 01:08:22,760
किया और यह एल्गोरिदम बढ़ाने के लिए किया और य टीआरपी

874
01:08:22,760 --> 01:08:26,760
बढ़ाने के लिए पहली बात तो इससे पता यह समझ में आ

875
01:08:26,760 --> 01:08:31,160
रहा है कि तुम अच्छे से अपने करियर पर ध्यान दे रहे हो और अच्छे से ध्यान रख रहे हो कि एल्गोरिथम

876
01:08:31,160 --> 01:08:37,160
मेरे चैनल का कैसे बढ़ना चाहिए और यह सारी

877
01:08:39,000 --> 01:08:43,320
चीज पहली बात तो यह है दूसरी बात यह है

878
01:08:43,320 --> 01:08:48,040
कि हमारा मोटिव यह था कि जो जितने अंश में वह जो मिथ्या

879
01:08:48,040 --> 01:08:52,080
फैलाई है जितने अंश में उस मिथ्या का वहां पर हम

880
01:08:52,080 --> 01:08:56,320
लोग प्रस्तुत कर दे मर वो खंड नहीं था व मिथ्या फैलाई

881
01:08:56,320 --> 01:09:00,760
गई थी तो हम अपना पक्ष रखेंगे अपने घर की स्त्रियों का पक्ष रखेंगे और

882
01:09:00,760 --> 01:09:04,840
फिर क्योंकि वहां पर परिक की बात भी थी तो हम परिक का भी रक्षा करेंगे क्योंकि

883
01:09:04,840 --> 01:09:09,240
परिक के बारे में भी आपके पास कोई ठोस तथ्य नहीं है

884
01:09:09,240 --> 01:09:13,680
वो लोग निर्दोष है तो हम उनके निर्दोष ता निर्दोष होने के लिए भी कहेंगे

885
01:09:13,680 --> 01:09:17,760
और मैंने तुमसे भी कोई लड़ाई नहीं कही थी मैंने तुमको भी यही

886
01:09:17,760 --> 01:09:22,160
दिखा याद दिलाया था परिस्थिति जन्य सबूत ना लाना परिस्थिति

887
01:09:22,160 --> 01:09:26,320
जन्य सबूत ना लाना ठोस सबूत लाना स्थिति जन्य तो वो तीन

888
01:09:26,320 --> 01:09:30,280
साल से है उसका क्या

889
01:09:30,280 --> 01:09:34,600
करें ठीक है संभावना वाले वो मैंने कहा ना

890
01:09:34,600 --> 01:09:38,720
तो टीआरपी बढ़ाने के लिए और यह सब के लिए हम नहीं करते हैं

891
01:09:38,720 --> 01:09:43,200
हम करते हैं धर्म के लिए धर्म का जो पक्ष है जो रखा जाना चाहिए वो रखा जाएगा

892
01:09:43,200 --> 01:09:47,280
और वोह मातृशक्ति जो निर्दोष है जितने अंश में उसकी रक्षा की जाएगी फिर

893
01:09:47,280 --> 01:09:51,680
वो भले ही विजया श्री हो मेरी माताएं हो मेरी बहने हो

894
01:09:51,680 --> 01:09:54,040
या फिर वो गौरी हो जो तुम्हारी

895
01:09:54,040 --> 01:09:58,240
दूध बन के इधर उधर घूमती वो कोई भी हो जितने

896
01:09:58,240 --> 01:10:02,600
अंश में जो निर्दोष होगी मातृ शक्ति तो उसकी उसकी गरिमा के लिए

897
01:10:02,600 --> 01:10:07,600
उसके सम्मान के लिए लड़ा

898
01:10:07,600 --> 01:10:11,720
जाएगा खड़े होना पड़ेगा तुम्हारी तरह नहीं कि गलती

899
01:10:11,720 --> 01:10:16,520
से वीडियो लगा दिया जल्दबाजी में और उसके बाद लीपा पोती कर रहे हो अपने डिस्क्रिप्शन में

900
01:10:16,520 --> 01:10:22,520
ठीक है

901
01:10:38,360 --> 01:10:42,440
नहीं अगर तुमने किसी को चर्चा के लिए पहली बात तो य

902
01:10:42,440 --> 01:10:46,920
मेरी यहां पर मेरा दोष है इनका कहना है कि भगवता

903
01:10:46,920 --> 01:10:51,000
ंद ने अगर मुझे यह कहा कि हमने अगर तुम्हें लाइव का प्रपोजल दे

904
01:10:51,000 --> 01:10:55,600
दिया है तो शिवांश तुम यह कह रहे हो कि हमने विरोधाभासी भी

905
01:10:55,600 --> 01:10:59,720
विरोध में वीडियो क्यों डाला है ना तो हम अपना

906
01:10:59,720 --> 01:11:03,760
चैनल थोड़ी ना बंद कर देंगे पहली बात तो यह है कि पुरी के विरोध

907
01:11:03,760 --> 01:11:08,120
में और एक बात और हां याद आ गया आपने कहा ना टीआरपी बढ़ाने के लिए एल्गोरिथम

908
01:11:08,120 --> 01:11:09,160
बढ़ाने के लिए तो

909
01:11:09,160 --> 01:11:13,480
क्या मैं भी यह कह सकता हूं कि तुम अपना टीआरपी बढ़ाने के लिए एल्गोरिथम बढ़ाने के लिए

910
01:11:13,480 --> 01:11:17,520
जो सर्वमान्य गद्दिया है उनका तुम समीक्षा करते रहते

911
01:11:17,520 --> 01:11:21,520
हो अपने चैनल पर क्या ये कहना उचित नहीं होगा तुम जब यह कह रहे हो कि

912
01:11:21,520 --> 01:11:25,960
मैंने टीआरपी बढ़ाने के लिए एल्गोरिदम बढ़ाने के लिए मले चराज शब्द का उपयोग किया

913
01:11:25,960 --> 01:11:30,040
तो क्या मैं यह नहीं कह सकता हूं तुम पुरी मट का उपयोग इसलिए करते हो कि तुम्हें टीआरपी बढ़ानी

914
01:11:30,040 --> 01:11:34,560
है तुम राजें दास जी का उपयोग इसलिए करते हो तुम्ह टीआरपी बढ़ानी है तुम राघवाचार्य

915
01:11:34,560 --> 01:11:38,600
जी का उपयोग इसलिए करते हो तुम्ह टीआर बढ़नी है मैं ये सब

916
01:11:38,600 --> 01:11:42,840
नहीं बोलता हूं क्योंकि इसके दोनों पक्ष है इसका

917
01:11:42,840 --> 01:11:46,880
यह पक्ष भी है कि तुम्हें धर्म का पक्ष रखना है और हो सकता है उससे टीआरपी बढ़ रही

918
01:11:46,880 --> 01:11:51,000
हो उससे डन मैटर तो यह

919
01:11:51,000 --> 01:11:55,240
आप निर्णायक जो बनते हो ना स्वयंभू इसमें फसते हो

920
01:11:55,240 --> 01:11:59,280
इसके दोनों पक्ष इस बात को बोलने को कोई अर्थ ही नहीं है टीआरपी बढ़ानी तुम

921
01:11:59,280 --> 01:12:03,680
भी तो बढ़ा रहे हो टीआरपी तुम पुरी बट में बोल बोल के अपनी टीआरपी

922
01:12:03,680 --> 01:12:07,720
तो बढ़ा रहे हो और क्या कर रहे हो शंकराचार्य के ऊपर बोल बोल के तुम टीआरपी

923
01:12:07,720 --> 01:12:11,920
बढ़ा रहे हो अन्य जो फेमस आचार्य

924
01:12:11,920 --> 01:12:16,320
जो संत है उनके ऊपर बोल बोलक टीआरपी बढ़ा रहे हो

925
01:12:16,320 --> 01:12:20,400
और जिनका तुम विरोध कर रहे हो राजेंद्र दास जी वही बाद में

926
01:12:20,400 --> 01:12:24,440
आके तुम्हारे साथ तुम उनके साथ मंच साझा कर रहे हो क्यों कर रहे हो

927
01:12:24,440 --> 01:12:28,440
व तो गलत ना तुम तुमने तो उनको इतना भला बुरा कह रखा है

928
01:12:28,440 --> 01:12:32,560
तुम उनके साथ मंच साझा कर रहे हो तो मैंने

929
01:12:32,560 --> 01:12:36,680
ये जो कहावत कही थी ना मिल जाते हैं सारे रंग किसी मिट्टी के रंग में मिल जा गिरते

930
01:12:36,680 --> 01:12:40,960
हैं वीर जार ही मैदानी जंग में मैंने इसीलिए कही थी कि जिनके धरती पर प्रकल्प

931
01:12:40,960 --> 01:12:45,200
चल रहे होते उनके सामने कई जगह रणनीति उपयोग में लाने की आवश्यकता

932
01:12:45,200 --> 01:12:49,440
पड़ती है और उसके लिए अमुक अमुक चीजें उन्हें करनी पड़ती है मगर वहां भी

933
01:12:49,440 --> 01:12:53,480
शास्त्र के विधान को कहने की बात आती है तो वो ये नहीं कहते कि कृष्ण और

934
01:12:53,480 --> 01:12:58,320
अल्लाह एक है ये अंतर है रणनीति का उपयोग करने में

935
01:12:58,320 --> 01:13:02,520
प्रासंगिक विषयों में उन्होंने कहीं पर कुछ फैसला लिया कहीं पर कुछ कहा वो अलग

936
01:13:02,520 --> 01:13:06,560
बात हैर धर्म धर्म की व्याख्या के साथ छेड़छाड़ नहीं करते और

937
01:13:06,560 --> 01:13:10,720
अगर करे तो आप उनका शास्त्रोक्त खंडन कर दो फिर भी व्यक्तिगत

938
01:13:10,720 --> 01:13:15,200
मत हो मगर तुम जो यह धरातल

939
01:13:15,200 --> 01:13:19,280
पर की जाने वाली चीजों की समीक्षा कर पाते हो इसलिए क्योंकि तुम्हारा अपना धरातल

940
01:13:19,280 --> 01:13:23,400
पर कुछ नहीं है तुमने उस दिन वीडियो बना कर के यह कहा कि मैंने बचपन से य कहा वोहा

941
01:13:23,400 --> 01:13:27,800
वो धरातल का नहीं है तुमने वक्तव्य दिए वीडियोस है

942
01:13:27,800 --> 01:13:31,920
नव मार्गी है उस पर जाकर के बस तुम वक्ता बने हो

943
01:13:31,920 --> 01:13:36,000
धरातल पर नहीं चले गए तुम किसी दो दो हाथ नहीं कर लिए तुमने किसी से या तुम्हारे

944
01:13:36,000 --> 01:13:40,200
से जुड़े हुए लोगों ने तुम्हारे कहे कहे के कारण

945
01:13:40,200 --> 01:13:45,040
धरातल पर कुछ नहीं किया ठीक है

946
01:13:45,040 --> 01:13:49,040
तुमने वह सारी चीजें अन्य आचार्य भी कर रहे जो तुमने की है जो

947
01:13:49,040 --> 01:13:53,280
तुम उस दिन कह रहे थे कि हमने बचपन सेय किया वो किया है तुम तो अभी आए हो

948
01:13:53,280 --> 01:13:57,800
वो धरातल नहीं है जिनके प्रकल्प धरातल पर चलाने पड़ेंगे जिन

949
01:13:57,800 --> 01:14:01,880
संतों का यही कार्य है कि वो केवल वक्तव्य दे वो निर्देश दे आचार्य गणों

950
01:14:01,880 --> 01:14:06,000
का यही कार्य है वो शास्त्र के पक्ष को बताए और उस दिन मैंने

951
01:14:06,000 --> 01:14:10,040
इस और भी संकेत किया था इंगित किया था कि आज

952
01:14:10,040 --> 01:14:14,080
जो है आचार्यों को ई क्षत्रियों वाले कार्य भी करने पड़ रहे हैं धरातल पर उतरना

953
01:14:14,080 --> 01:14:19,440
पड़ रहा है तो वहां क्षत्रियों का कार्य करते समय रणनीति का उपयोग भी करना पड़ रहा

954
01:14:19,440 --> 01:14:23,640
है इसलिए और क्योंकि उनकी जो जीवन

955
01:14:23,640 --> 01:14:27,640
है उनकी व्यवस्था वो सब ट्रांसपेरेंट है सबको दिख रही है

956
01:14:27,640 --> 01:14:31,800
तो जहां जिसको अपने अनुसार जो मिल गया तो बैठ के समीक्षा करने लगा तुम्हारे जैसा

957
01:14:31,800 --> 01:14:35,880
व्यक्ति अरे कुछ करो तो जाकर के धरातल

958
01:14:35,880 --> 01:14:40,000
पर कुछ दिखाओ तो करके फिर देखो तुम्हें उससे दिक्कत है बजरंग

959
01:14:40,000 --> 01:14:44,000
दल वालों के साथ आरएसएस वालों के साथ गुरुदेव विरोध करते तुम्हारे गुरु है क्या तुम

960
01:14:44,000 --> 01:14:48,000
उनसे दीक्षित हो क्या कैसे बोल रहे हो कि उन्होंने बजरंग

961
01:14:48,000 --> 01:14:52,240
आरस बजरंग दल आरएसएस वालों का साथ लेने से मना किया है अच्छा

962
01:14:52,240 --> 01:14:55,320
यह बताओ जब सबसे पहला हिंदू तुम्हें

963
01:14:55,320 --> 01:14:59,320
कौन सा मिलेगा जो धर्म की रक्षा जिसके द्वारा धर्म रक्षा का तुम्हारे मन में

964
01:14:59,320 --> 01:15:03,480
आ सकता है जो लोग परंपरा प्राप्त आचार्यों से जुड़े हैं

965
01:15:03,480 --> 01:15:07,640
उनके परिकर है या वो लोग है वो तो है ही

966
01:15:07,640 --> 01:15:11,760
तो तुम सुधार करने किसका निकल रहे हो सबसे पहला हिंदू

967
01:15:11,760 --> 01:15:16,120
तो बजरंग दल आरएसएस वाला ही मिलेगा ना इसी तरीके के जो पहले से दिशाहीन

968
01:15:16,120 --> 01:15:20,600
सही मगर उनमें अपने धर्म के लिए बुद्धि हो थोड़ी बहुत

969
01:15:20,600 --> 01:15:24,600
उन्हीं का ही साथ पकड़ोगे ना अरे एक

970
01:15:24,600 --> 01:15:30,600
मिनट

971
01:16:01,480 --> 01:16:05,680
तो इसीलिए मैंने कहा था धरातल पर क्या कर रहे हो जो निर्देश

972
01:16:05,680 --> 01:16:09,800
वाला कार्य है संतों का आचार्यों का तुम केवल उस चैप्टर को पकड़े हुए उसमें भी तुम्हारी

973
01:16:09,800 --> 01:16:13,880
लाइफ छुपी हुई है जो मले राज वाली जो दृष्टि है ना तुम्हारे

974
01:16:13,880 --> 01:16:18,120
वो वो वास्तविकता है वैसी लाइफ है तुम्हारी तुमर तुमने कौन सा

975
01:16:18,120 --> 01:16:22,120
मैंने कहा ना जहां पर कथा करने जाते हो उनका नाम पता मुझे बता दो सार्वजनिक

976
01:16:22,120 --> 01:16:26,320
करो उनको थोड़ा पता लगे तो उन लोगों में दोष निकाल दूंगा

977
01:16:26,320 --> 01:16:30,600
तु उनके साथ बैठ रहे हो मिल जाएंगे दोष अशा

978
01:16:30,600 --> 01:16:34,680
स्त्रीय निकाल दूंगा फिर पूछूंगा यहां कथा करने कैसे गए थे क्यों गए थे

979
01:16:34,680 --> 01:16:38,880
हम तो तुमने अपनी अपने जीवन को तो छुपा के रखा हुआ है और जिनका

980
01:16:38,880 --> 01:16:43,000
जीवन ज्यादा से ज्यादा लोगों को दिख रहा है उनके संप्रदाय उनका बड़ा है फैला

981
01:16:43,000 --> 01:16:47,080
हुआ है उधर उधर कहीं ना कहीं कोई ना कोई क्योंकि रणनीति है तो कुछ ना कुछ दोष

982
01:16:47,080 --> 01:16:51,080
तो दिखाई दे ही जाएगा उस परे तो आ करके बोल लो यहां ये क्यों किया वहा वो क्यों किया वहा ये

983
01:16:51,080 --> 01:16:55,200
क्यों किया और तो और फिर तुम्हें अब तु अपनी

984
01:16:55,200 --> 01:16:59,840
सामंजस के अनुसार वहां जाकर के मंच भी साझा कर लो चाहे भले

985
01:16:59,840 --> 01:17:03,920
ही जो मुक्त जी जटर मठ वाले चाहे वो

986
01:17:03,920 --> 01:17:07,920
भले ही बौद्धों के बीच में बैठे हुए दिख जाए उनका खंडन कर दो उनका जो है उनके बारे

987
01:17:07,920 --> 01:17:11,960
में कुछ भी पोस्ट डाल दो यह है वो है उनकी पुरानी फोटो उठा कर

988
01:17:11,960 --> 01:17:16,760
के और फिर उनके बुलाए जाने पर उनके यहां पर चले भी

989
01:17:16,760 --> 01:17:17,760
जाओ

990
01:17:17,760 --> 01:17:21,920
राघवाचार्य जी महाराज के लिए भी यही है कि क्या कहते

991
01:17:21,920 --> 01:17:25,920
हैं आप वहां चले जाओ उनका वो प्रभुपाद के यहां

992
01:17:25,920 --> 01:17:30,080
क्यों गए थे ये क्यों हुआ था वो क्यों हुआ था और फिर उसके बाद जो है उनके साथ हमारा तो बड़ा

993
01:17:30,080 --> 01:17:34,280
अच्छा संबंध चल रहा है है ना तो वही है मीठा

994
01:17:34,280 --> 01:17:38,600
मीठा गप गप कड़वा कड़वा थू और जहां हम फस वहां

995
01:17:38,600 --> 01:17:43,360
करेंगे दूसरी बातें बदल देंगे टॉपिक

996
01:17:43,360 --> 01:17:47,560
चेंज विषयात तुम भी वही निकले

997
01:17:47,560 --> 01:17:51,760
जो आर समाजी करते हैं कौन वाले करते हैं

998
01:17:51,760 --> 01:17:55,760
वही तुम कर रहे हो अपने कमजोर पक्ष को छिपाने के लिए दूसरे

999
01:17:55,760 --> 01:18:01,760
ऐसे पक्ष जिन पर तुम्ह सहजता है बस वही

1000
01:18:04,680 --> 01:18:10,680
है आगे क्या है चलो सुनते

1001
01:18:19,080 --> 01:18:23,240
हैं हमारे बारे में अगर कुछ कह रहे हो हमारे बारे में अगर

1002
01:18:23,240 --> 01:18:26,600
कुछ कह रहे हो

1003
01:18:26,600 --> 01:18:30,720
तो तुम्हारा चैनल बंद हो जाएगा तुमने कहा कि हम अपना

1004
01:18:30,720 --> 01:18:34,960
चैनल थोड़ी ना बंद कर देंगे हमें तो जो कहना है कहते रहेंगे मगर

1005
01:18:34,960 --> 01:18:39,120
मेरा यहां पर दोष क्या है जो मैं पहले य

1006
01:18:39,120 --> 01:18:43,120
था कि मैंने तुम्हारी जो चर्चा का

1007
01:18:43,120 --> 01:18:47,240
जो तुम्हारा वह था ना प्रस्ताव उसको सौहार्द

1008
01:18:47,240 --> 01:18:51,280
पूर्ण चर्चा समझ लिया यह दोष था मेरा मुझे

1009
01:18:51,280 --> 01:18:55,320
लगा कि व्यक्ति कोई शोधन के निमित्त बात करना चाहता और हम लोग

1010
01:18:55,320 --> 01:18:59,640
कुछ व्यक्तिगत इस चर्चा को सार्वजनिक ना करके व्यक्तिगत रूप से

1011
01:18:59,640 --> 01:19:03,960
इसका समाधान निकाल निकालने का प्रयास करें जो परिस्थिति जन्य वाली चीज

1012
01:19:03,960 --> 01:19:08,240
है ना उसको किसी प्रामाणिक चीज की ओर ले जाए निष्कर्ष

1013
01:19:08,240 --> 01:19:12,440
निकले कुछ प्रामाणिक है ना उसकी ओर ले जाए मुझे लगा यह व्यक्ति ऐसा

1014
01:19:12,440 --> 01:19:16,520
चाह रहा है यह मेरा दोष था तो जब मुझे य पता

1015
01:19:16,520 --> 01:19:20,440
लगा कि तुमने तब भी विरोधाभासी वीडियो डाला मैं फिर कह रहा हूं विरोधाभासी

1016
01:19:20,440 --> 01:19:24,760
तो मैंने कहा कि तुमने क्यों डाला तो मुझे मैंने वो इसलिए कहा था कि एक तरफ

1017
01:19:24,760 --> 01:19:28,840
चर्चा के लिए कह रहे हो और उसमें शैली भी तुम्हारी जो है ठीक है

1018
01:19:28,840 --> 01:19:32,920
जो चर्चा की बात कर रहे हो तो उस

1019
01:19:32,920 --> 01:19:37,200
शैली के कारण मुझे लगा कि तुम ये जो वार्ता है यह वो

1020
01:19:37,200 --> 01:19:41,200
विरोधाभासी वार्ता ना हो करर के उसमें कहीं ना कहीं वो है कि

1021
01:19:41,200 --> 01:19:45,400
कोई सामंजस्य पूर्ण चर्चा हो तो इसलिए

1022
01:19:45,400 --> 01:19:49,400
मैंने कहा था जब अगर तुम चर्चा चाह रहे हो तो फिर

1023
01:19:49,400 --> 01:19:53,400
तुम क्या कहते हैं विरोधाभासी वीडियो नहीं डालना चाहिए था यह तो मेरा पक्ष

1024
01:19:53,400 --> 01:19:57,480
है कि मेरा दोष क्या था मैंने ऐसा समझ लिया दूसरी बात यह

1025
01:19:57,480 --> 01:20:01,880
है कि तुम्हारा कहना है कि हम तो अब जैसे तुम जो बातों का बतंगड़ बनाते हो मैं भी बना रहा हूं

1026
01:20:01,880 --> 01:20:06,080
हा बातों का बतंगड़ सुनो तुमने

1027
01:20:06,080 --> 01:20:10,240
वहां पर यह कहा कि भैया अगर तुम्हारे साथ चर्चा

1028
01:20:10,240 --> 01:20:14,320
होगी कि नहीं होगी वह बात अलग है मगर हम तो अपने जो कहना कहते रहेंगे अपना चैनल

1029
01:20:14,320 --> 01:20:18,400
थोड़ी ना बंद कर देंगे तो मतलब तुम्हारा चैनल इसी बात से चलता है ना

1030
01:20:18,400 --> 01:20:22,680
कि शिवांश का पुरी मट का विरोध कैसे करें

1031
01:20:22,680 --> 01:20:26,920
उसी से चल रहा है दूसरा नहीं वरना

1032
01:20:26,920 --> 01:20:31,120
चैनल बंद हो जाएगा अगर तुमय कंटेंट नहीं डालोगे तुम कह रहे हो तुमरा कंटेंट

1033
01:20:31,120 --> 01:20:37,120
बंद हो जाएगा चलो ठीक है आगे बढ़ते

1034
01:20:49,360 --> 01:20:53,720
हैंको तुमको जो है व चाहिए ही नहीं था

1035
01:20:53,720 --> 01:20:58,480
तुमको कोई स्वार्थ पूण चर्चा नहीं चाहिए थी वही तुमने

1036
01:20:58,480 --> 01:21:02,520
जो किया स्वार्थ पूण चर्चा नहीं चाहिए कोई वो नहीं

1037
01:21:02,520 --> 01:21:06,720
था कि तुम्हें शोधन करना है कुछ करना है तुम्हे बड़बड़ी सवार है करियर का बनाना

1038
01:21:06,720 --> 01:21:11,040
है और करियर बिगाड़ना यह तुम्हारा वह है

1039
01:21:11,040 --> 01:21:17,040
यह तुम्हारा उद्देश्य है लुप्त संप्रदाय

1040
01:21:19,440 --> 01:21:25,440
का अरे सीधी बात है

1041
01:21:29,000 --> 01:21:33,520
सीधी बात है कि जिस पर तुम बात कर रहे हो उनका

1042
01:21:33,520 --> 01:21:37,520
नाम पता सब कुछ सार्वजनिक है तुमने अपना मठ अपना

1043
01:21:37,520 --> 01:21:41,720
मंदिर अपना गुरुकुल या जो भी तुम्हारा है उसको सार्वजनिक क्यों नहीं किया है तुम

1044
01:21:41,720 --> 01:21:47,720
आचार्य हो तो क्यों छुपा के बैठे हुए हो

1045
01:22:08,920 --> 01:22:14,920
हमारे

1046
01:22:17,880 --> 01:22:22,160
पताला इनका कहना है

1047
01:22:22,160 --> 01:22:26,720
कि इनका कहना है कि हमें

1048
01:22:26,720 --> 01:22:30,840
जो भी हमें सोर्स से पता चला है तो उसमें हमारी शैली निर्णायक रहेगी और

1049
01:22:30,840 --> 01:22:34,840
दूसरी तरफ खुद ही कह रहे हैं कि इनके पास जो सामग्री है वह परिस्थिति

1050
01:22:34,840 --> 01:22:38,880
जन्य है संभावना उत्पन्न करने वाली इनकी सामग्री

1051
01:22:38,880 --> 01:22:42,960
है खुद कह रहे हैं और बोलेंगे क्या निर्णायक यह खुद कह रहे

1052
01:22:42,960 --> 01:22:47,120
हैं खुद ही फस रहे हो अपनी बातों में खुद ही कह रहे

1053
01:22:47,120 --> 01:22:52,040
हो व सामग्री जो है परिस्थिति जन्य सामग्री है

1054
01:22:52,040 --> 01:22:56,080
वो ठोस प्रमाण नहीं है खुद ही है सब वो कर रहे हो और फिर

1055
01:22:56,080 --> 01:23:00,840
कह रहे हो हम तो उसमें शैली हमारी निर्णायक रहेगी कैसे रहेगी

1056
01:23:00,840 --> 01:23:05,040
भाई कहां का सिद्धांत है कि जो संभावनाए प्रकट करने

1057
01:23:05,040 --> 01:23:09,160
वाले जो सामग्री होगी उसके आधार पर कि किसी को वो

1058
01:23:09,160 --> 01:23:15,160
कहा जाए उसने यह किया

1059
01:23:15,920 --> 01:23:21,920
है और क्या कहा

1060
01:23:26,400 --> 01:23:29,720
आपने

1061
01:23:29,720 --> 01:23:34,320
ता चहा पता चलाते

1062
01:23:34,320 --> 01:23:38,840
अब मेरे को किसी ने बताया कि तुमने जानवी के ऊपर गाना बनाया है

1063
01:23:38,840 --> 01:23:42,960
ठीक है तो मैं उसमें यह ना कहूं कि भैया यह सत्यापन के अधीन

1064
01:23:42,960 --> 01:23:47,040
है जो भी है ऐसा कुछ ना कहूं मैं और जो है यह कहूं कि हां इसने बनाया है यह

1065
01:23:47,040 --> 01:23:51,120
गाना जो है दौड़ रहा है जो वो एआई से नहीं बनाया गया कुछ नहीं है उसमें उसका कोई

1066
01:23:51,120 --> 01:23:55,280
और अर्थ भी नहीं है जान भी नहीं जान दी है यह सब नहीं है वो तो वही है

1067
01:23:55,280 --> 01:23:59,440
जानवी नाम की प्रेमिका के लिए ही गाया गया है मेरे को मेरी सोर्सेस

1068
01:23:59,440 --> 01:24:03,720
से अगर कोई मुझे बता रहा है कि तुमने जो है वेद मंत्रों पर रैप सॉन्ग बनाया

1069
01:24:03,720 --> 01:24:08,160
है पुराने ग्रुप्स में वो सब आएंगी धीरे धीरे अभी तुम चलते जाओ तुम्हारा

1070
01:24:08,160 --> 01:24:12,360
पूरा तैयार हो रहा है समता जाएगा धीरे धीरे तुम आगे बढ़ते जाओ

1071
01:24:12,360 --> 01:24:16,800
डाल डाल पात पात कहा था ना मैंने बढ़ते जाओ आज शाम को लाइव करना और बढ़ाना

1072
01:24:16,800 --> 01:24:21,000
चल रहा है वो पूरा पूरा पीछे पोस्टमार्टम जो तुम पोस्टमार्टम उसका

1073
01:24:21,000 --> 01:24:25,440
करोगे ना तो सब आएगा तुम्हारा निग्रह संप्रदाय क्या है तुम निग र का के

1074
01:24:25,440 --> 01:24:30,640
सब निकल के आएगा तुम्हारा चल रहा है एक एक चीज

1075
01:24:30,640 --> 01:24:31,140
इसीलिए

1076
01:24:31,120 --> 01:24:35,680
कहा था मत बढ़ाओ इस बात को वर्णाश्रम धर्म की रक्षा करते रहो

1077
01:24:35,680 --> 01:24:39,960
और जो शास्त्रो खंडन है वो प्रस्तुत करते रहो अच्छी चीज है वो करते रहो व्यक्तिगत

1078
01:24:39,960 --> 01:24:44,160
मत हो और फिर भी हुए भी तो मैंने कहीं नहीं कह दिया मैं

1079
01:24:44,160 --> 01:24:48,920
आके तुम व्यक्तिगत हुए भी थे तो मैंने कहीं तुम्हारे विरोध में वीडियो नहीं बना दिया

1080
01:24:48,920 --> 01:24:53,160
था मगर जब बात रखने की आएगी तो वहां पर तो बताना

1081
01:24:53,160 --> 01:24:57,520
पड़ेगा ना कि सिद्धांत क्या है सिद्धांत तो यही है कि मृत्यु के बाद वैर

1082
01:24:57,520 --> 01:25:01,680
नहीं रहता और तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए राम से बड़े हो नहीं और

1083
01:25:01,680 --> 01:25:05,840
हां ये श्री राम कहने में कहने से भी अधिक मेरा मुझे रस आता है मेरा

1084
01:25:05,840 --> 01:25:10,520
भक्ति रस राम राम बोलने से ही मुझे बल प्राप्त होता है

1085
01:25:10,520 --> 01:25:14,520
इसीलिए राम बोलता हूं और राम बोलना अगर

1086
01:25:14,520 --> 01:25:18,640
सनातन सिद्धांत के अनुसार गलत है तो व बता देना गलत है बता

1087
01:25:18,640 --> 01:25:24,640
दो

1088
01:25:32,040 --> 01:25:36,640
अब इनका कहना था पुरी के शंकराचार्य जी ने छत्र का त्याग किया हुआ है

1089
01:25:36,640 --> 01:25:40,480
हा भाई किया हुआ है

1090
01:25:40,480 --> 01:25:44,760
तो क्या कहते तो फिर व वहा जो सम्मेलन हुआ था उसम छत्र पर क्यों

1091
01:25:44,760 --> 01:25:48,760
बैठे यह सब तुम्हारी बातें है नाय इससे पता लगता है कि तुम्हारा जो

1092
01:25:48,760 --> 01:25:53,520
बौद्धिक स्तर है व नि निम्न है अब वो क्या कहते वो

1093
01:25:53,520 --> 01:25:57,600
धातु हो जाने की वजह से काहे की वजह से वजन तो कम है ही जो तुमने

1094
01:25:57,600 --> 01:26:01,600
भी स्वीकार किया वजन कम है तो धातु चली जाने की वजह से काहे

1095
01:26:01,600 --> 01:26:06,760
की वजह से वो तो बात की बात है मगर वो वो बिल्कुल निम्न हो चुका

1096
01:26:06,760 --> 01:26:10,800
है अरे भाई पुरी के शंकराचार्य जी जहां पर बैठे हैं उनके साथ

1097
01:26:10,800 --> 01:26:14,880
बाकी के शंकराचार्य भी हैं तो वहां पर वो

1098
01:26:14,880 --> 01:26:19,040
उनको यह दिखाए देखो देखो हमें धर्म की ज्यादा चिंता है और

1099
01:26:19,040 --> 01:26:23,160
इनको नहीं है उनका अपमान करें

1100
01:26:23,160 --> 01:26:28,120
तो उनका सम्मान रखने के लिए वहां पर उन्होंने वो बैठे उस पर

1101
01:26:28,120 --> 01:26:33,320
और दूसरी बात कि पुरी के शंकराचार्य जी

1102
01:26:33,320 --> 01:26:37,520
अपने जीवन में एक दिन

1103
01:26:37,520 --> 01:26:41,720
चांदी के छत्र पर बैठ जाते हैं चांदी के छत्र को ले लेते हैं सिंहासन

1104
01:26:41,720 --> 01:26:45,840
पर बैठ जाते हैं और बाकी के जीवन में वह बिना चांदी का

1105
01:26:45,840 --> 01:26:47,520
छत्र लिए और सिंहासन

1106
01:26:47,520 --> 01:26:51,520
लिए ही चलते हैं तो क्योंकि वो उस एक दिन बैठे थे तो यह माना

1107
01:26:51,520 --> 01:26:55,680
जाएगा कि उन्होंने त्याग नहीं किया क्योंकि वो बिना उसके आजीवन चल रहे हैं यह

1108
01:26:55,680 --> 01:26:59,720
नहीं माना जाएगा कि त्याग किया है ना यह बहुत निम्न

1109
01:26:59,720 --> 01:27:03,960
स्तर के कुत कैसे कर रहे हो मुझे यह उम्मीद नहीं थी आपके पिताजी

1110
01:27:03,960 --> 01:27:08,520
ने आपको कहा था कि केस कम आ रहे हैं ज्यादा आने

1111
01:27:08,520 --> 01:27:12,720
चाहिए मुझे तो मुझे लगता था कि आपकी तरफ से अच्छे ठोस

1112
01:27:12,720 --> 01:27:16,840
चीज कही जाएंगी क्या कुतर्क कर रहे हो आनंद नहीं

1113
01:27:16,840 --> 01:27:20,880
आ रहा अभी मुझे लगा था कि चलो एक जो

1114
01:27:20,880 --> 01:27:24,960
वो वाली बात है ना योद्धा किसी योद्धा से वो होगा तो

1115
01:27:24,960 --> 01:27:28,480
कुतर की से हो रहा है

1116
01:27:28,480 --> 01:27:33,440
सामना एक जो भाव था कि भाई चलो किसी

1117
01:27:33,440 --> 01:27:37,520
बलवान व्यक्ति से विडंत होगी ठीक है भाई चलो यही सही मगर अब दिख रहा

1118
01:27:37,520 --> 01:27:43,520
है कि बलवान नहीं कुतर कुतर की कुतर कर रहा

1119
01:27:48,400 --> 01:27:54,400
हैक उसका भी

1120
01:27:54,680 --> 01:27:58,720
काकम सत इसका जवाब इनका कहना है कि जिस

1121
01:27:58,720 --> 01:28:02,720
कार्यक्रम में फर्जी वो है ये है वहां वो कैसे जा सकते हैं

1122
01:28:02,720 --> 01:28:08,000
तो भाई गुरुदेव बीजेपी का खंडन करते हैं

1123
01:28:08,000 --> 01:28:12,160
खूब जो बीजेपी की नीतियां उनका खंडन करते हैं

1124
01:28:12,160 --> 01:28:16,320
आरएसएस की नीतियों का खंडन करते हैं फिर भी वो

1125
01:28:16,320 --> 01:28:20,520
लोग मिलने आते हैं तो ना मिला जाए अपनी बात कहेंगे कब और कहां

1126
01:28:20,520 --> 01:28:26,280
से मिलकर ही तो कहेंगे हा

1127
01:28:26,280 --> 01:28:30,320
राघवाचार्य जी महाराज वहां गए इसकन

1128
01:28:30,320 --> 01:28:34,560
बेंगलोर में खंडन तो किया ना इसकन वालों का

1129
01:28:34,560 --> 01:28:40,560
जो सन्यास इत्यादि में उन्होंने विधि निषेध इत्यादि के बारे में

1130
01:28:48,200 --> 01:28:54,160
बताया य क

1131
01:28:54,160 --> 01:29:00,160
के मिला

1132
01:29:08,520 --> 01:29:12,680
तोय अरे पहली बात है

1133
01:29:12,680 --> 01:29:16,760
कि प्रेमानंद का तुम विरोध करोगे प्रेमानंद बाबा

1134
01:29:16,760 --> 01:29:20,800
का क्योंकि तुमने तुम्हारे पास सब अधिकार तुमको जो ईश्वर

1135
01:29:20,800 --> 01:29:25,800
से प्राप्त हो गए हैं व बात अलग है कि प्रेम प्रसंगों में तुम सफल नहीं हो पाए

1136
01:29:25,800 --> 01:29:29,840
मगर उनका वो वीडियो मुझे याद नहीं है मैं इस पर एक शॉर्ट अलग से

1137
01:29:29,840 --> 01:29:33,920
बना दूंगा उनका पक्ष मुझे समझ में आ गया था कि वो क्या कहना चाह रहे हैं बस

1138
01:29:33,920 --> 01:29:38,600
वो जो गुरुदेव का एक वो है ना वाक्य के पूरा घी एक ही दिन में मत पिलाओ

1139
01:29:38,600 --> 01:29:42,640
और सामने वाले के प्रज्ञा शक्ति को देखते हुए उसे उत्तर

1140
01:29:42,640 --> 01:29:46,640
दो उसके अनुसार वो वहां पर उनका कुछ वाक्य

1141
01:29:46,640 --> 01:29:50,680
था मैंने वो मुझे ध्यान नहीं उनका पक्ष जब आपकी य बात आई थी और किसी ने मुझसे लाइव चलती

1142
01:29:50,680 --> 01:29:54,680
हुई वीडियो में बात पूछ ली थी तो मैंने आप का खंडन नहीं

1143
01:29:54,680 --> 01:29:58,720
किया था मैंने कहा था यह भी हो सकता है उनकी बात का मतलब यह भी हो सकता है ऐसे

1144
01:29:58,720 --> 01:30:02,760
करके मैं आपसे यह विरोधाभास की जो इस समय की

1145
01:30:02,760 --> 01:30:06,800
जो स्थिति है इससे दूर रहने के लिए मैंने आपका खंडन नहीं किया था मगर

1146
01:30:06,800 --> 01:30:11,040
प्रेमानंद जी की महाराज जी की बात का भी कोई सही मतलब निकल सकता है

1147
01:30:11,040 --> 01:30:15,080
और मेरा कार्य ऐसा ही है कि मैं उस व्यक्ति के लिए तब तक लड़ता रहता हूं

1148
01:30:15,080 --> 01:30:19,160
जब तक उसका एक भी अंश ऐसा है जिसके कारण उसे हम सही

1149
01:30:19,160 --> 01:30:23,280
कह सकते हैं क्योंकि मैं सिद्धांत का अनुगमन करता हूं कि जब

1150
01:30:23,280 --> 01:30:23,780
प

1151
01:30:23,520 --> 01:30:27,680
को जब तक कोई स्त्री चरित्र चरित्रहीन सिद्ध ना हो

1152
01:30:27,680 --> 01:30:31,680
जाए केवल वो संभावनाएं उसकी ऐसी हो रही है तब

1153
01:30:31,680 --> 01:30:36,800
तक उसे चरित्रहीन नहीं कहा जा सकता बल्कि कोई भी स्त्री

1154
01:30:36,800 --> 01:30:41,480
को चरित्रवान होने के

1155
01:30:41,480 --> 01:30:45,600
लिए सिद्ध करने के लिए उसकी लाइफ

1156
01:30:45,600 --> 01:30:49,760
को चेक करने की आवश्यकता नहीं होती है कि हमने तो देखा नहीं जैसे किसी की भी माता या बहन के लिए

1157
01:30:49,760 --> 01:30:54,040
कहा जा सकता है भैया हमने उसकी बहन को देखा है क्या हमने उसकी माता जी को देखा है क्या

1158
01:30:54,040 --> 01:30:58,200
क्या कर रही है क्या नहीं कर रही हम कैसे कहते तो क्या है किसी

1159
01:30:58,200 --> 01:31:02,920
भी स्त्री को चरित्रवान बोलने के लिए सब करने की जरूरत नहीं है

1160
01:31:02,920 --> 01:31:06,920
तो कोई भी स्त्री तब तक चरित्रवान है जब तक वह चरित्रहीन सिद्ध ना हो

1161
01:31:06,920 --> 01:31:11,880
जाए तो मैं इस सिद्धांत का अनुगमन करता हूं

1162
01:31:11,880 --> 01:31:16,040
जब तक वह चरित्र हीन सिद्ध नहीं हुई तब तक वह चरित्रवान

1163
01:31:16,040 --> 01:31:20,360
है सिद्ध नहीं हुई तब तक ठीक

1164
01:31:20,360 --> 01:31:25,120
है तो तब तक उसे हम चरित्रवान ही बोल बोलते हैं

1165
01:31:25,120 --> 01:31:29,280
तो इसी प्रकार से जो प्रेमानंद जी महाराज है उनकी बात का अगर सही

1166
01:31:29,280 --> 01:31:33,360
अर्थ निकाल सकते निकाल सकते जो कि निकाल सकते हैं मैं उस वीडियो में बोलूंगा अलग से मैं

1167
01:31:33,360 --> 01:31:37,520
रील बनाऊंगा वो प्रकरण मुझे नहीं याद है उनका जो शब्द क्या था तुम तो शब्द

1168
01:31:37,520 --> 01:31:38,680
के साथ तोड़ मरोड़ के अपने

1169
01:31:38,680 --> 01:31:42,720
अनुसार उसका अर्थ निकालते हो ना तो मैं वो मुझे कोई मेरा

1170
01:31:42,720 --> 01:31:46,840
जो समर्थक हो या इनका भी समर्थक हो भगवता नंद का तो

1171
01:31:46,840 --> 01:31:50,920
वो मुझे लिंक भेजे प्रेम प्रेम जी ने कौन से उसम वीडियो में ऐसा

1172
01:31:50,920 --> 01:31:55,000
कहा था तो मैं उसका सही अर्थ बता दूंगा जो उनके पक्ष से प्रस्तुत किया जा

1173
01:31:55,000 --> 01:32:01,000
सकता

1174
01:32:02,960 --> 01:32:08,960
है उस

1175
01:32:10,000 --> 01:32:16,000
कर व

1176
01:32:20,680 --> 01:32:24,840
सब अब देखो मट के परिक

1177
01:32:24,840 --> 01:32:28,960
पर लांछन लगा रहे हो तुम और उससे कुछ

1178
01:32:28,960 --> 01:32:32,960
सिद्ध नहीं हो रहा है फिर हमसे कह रहे हो कि तुम य सिद्ध कर दो ऐसा नहीं है

1179
01:32:32,960 --> 01:32:37,280
अभी मेरे को कुछ लोगों ने बताया है कि तुम जो है नाली से कुत्तों

1180
01:32:37,280 --> 01:32:41,360
के पिल्ले को निकालने का काम करते हो तोब मेरा

1181
01:32:41,360 --> 01:32:46,200
कार्य य नहीं है कि मैं सिद्ध करूं तुम ऐसा करते हो बल्कि तुम्हारा कार्य हो जाएगा

1182
01:32:46,200 --> 01:32:50,640
तुम यह सिद्ध करो कि तुमने कुत्ते के पिल्लो को नाली से निकालने का ठेका नहीं लिया है

1183
01:32:50,640 --> 01:32:54,720
क्या ये कहना सही है मुझसे मुझे कुछ

1184
01:32:54,720 --> 01:32:58,760
लोग बता रहे हैं कि तुम तुम्हारी एक नाई की दुकान भी है

1185
01:32:58,760 --> 01:33:02,920
तो मेरा यह काम नहीं है कि मैं तुम्हारी नाई की दुकान जो है सिद्ध करूं बल्कि

1186
01:33:02,920 --> 01:33:07,120
तुम्हारा यह काम हो जाएगा कि तुम तुम्हारी तुम सिद्ध करो कि वो नाई की दुकान

1187
01:33:07,120 --> 01:33:11,520
है कि नहीं यह है तुम्हारे

1188
01:33:11,520 --> 01:33:15,800
तर्क यह है तुम्हारी तर्क शक्ति हम क्यों सिद्ध

1189
01:33:15,800 --> 01:33:20,040
करें भाई तुम तो अभी कल को फिर कुछ ले आओगे फिर कुछ ले आओगे तुम लेकर आए हो तुम्हारा

1190
01:33:20,040 --> 01:33:24,160
काम है ना सिद्ध करना और मैंने तो भगवता अंद य ही

1191
01:33:24,160 --> 01:33:28,640
नहीं था पहला वीडियो दोबारा देखना मैंने तो यह कहा था कि मैं युद्ध लडूंगा

1192
01:33:28,640 --> 01:33:34,640
मुझे ठोस प्रमाण दो

1193
01:33:38,280 --> 01:33:42,320
बस हम सिद्ध करें अब कोई भी व्यक्ति हमारे

1194
01:33:42,320 --> 01:33:46,480
बारे में यह बोलते हुए कि 50 लोगों ने मुझसे कहा है 50 लोग बुलाने पर जब आएंगे

1195
01:33:46,480 --> 01:33:50,480
ना साइन करवाओ एफी डेविड पे कि मैंने मैं ऐसा ऐसा आरोप लगा

1196
01:33:50,480 --> 01:33:54,920
रहा हूं भाग जाएंगे वो सभी 50 एक दो रह जाएंगे 50 में से तो मैं ऐसे

1197
01:33:54,920 --> 01:33:59,000
ऐसे सुनी सुनाई बातों पर गंभीर आरोप लगाता रहू और उसके बाद मैं

1198
01:33:59,000 --> 01:34:03,000
कह द तुम सिद्ध करो तुम्हारी नाई की दुकान नहीं है तुम सिद्ध करो तुम कुत्ते

1199
01:34:03,000 --> 01:34:07,000
के पिल्ले को नाली से निकालने का बिजनेस नहीं कर रहे हो तुम सिद्ध करो क्योंकि

1200
01:34:07,000 --> 01:34:11,000
मुझसे तो 50 लोगों ने कहा है और तुम्हारे आसपास वालों ने

1201
01:34:11,000 --> 01:34:13,520
ही कहा

1202
01:34:13,520 --> 01:34:17,000
है और इस

1203
01:34:17,000 --> 01:34:23,000
औरता है

1204
01:34:28,880 --> 01:34:34,880
उनका जा

1205
01:34:37,600 --> 01:34:41,720
बा जब कह देने से सत्य गलत नहीं हो जाता है तो जब मैंने

1206
01:34:41,720 --> 01:34:45,800
उनका तुमने लिया क्या तुम कह रहे हो कि उनका पुत्र ही उनको ऐसा

1207
01:34:45,800 --> 01:34:49,880
कहता है तुम उनका जाकर के इंटरव्यू ले लो पहली बात तो यह

1208
01:34:49,880 --> 01:34:54,040
है कि भाई हमारे पास और भी कार्य है करने के लिए जो

1209
01:34:54,040 --> 01:34:58,480
आवश्यक है मां दुर्गा के साथ बलात्कार हुआ

1210
01:34:58,480 --> 01:35:03,120
यह कहता है रामपाल जैसा निशाचर

1211
01:35:03,120 --> 01:35:07,200
उससे लड़ने का कार्य भी है सिर्फ एक यही कार्य

1212
01:35:07,200 --> 01:35:11,280
नहीं है कि तुम जो है बैठ करके अनन्य

1213
01:35:11,280 --> 01:35:15,440
आचार्यों के मठ में क्याक हो रहा है उसकी समीक्षा कर रहे हो और तुमने आरोप लगा

1214
01:35:15,440 --> 01:35:19,800
दिया तो हम जाकर के अपना समय नष्ट करें कि यह करने लग जाए फिर भी

1215
01:35:19,800 --> 01:35:24,080
जब तुमने खुद नहीं किया जब मैंने नहीं किया तो आरोप क्यों लगा रहे हो

1216
01:35:24,080 --> 01:35:28,440
अगर उसका आधार आरोप यही है कि वो इंटरव्यू लिया जाना है तो पहले

1217
01:35:28,440 --> 01:35:32,600
पहले संपर्क करो पहले फोन करो पहले बताओ संदेश बजवा क्यों जैसे उससे संदेश

1218
01:35:32,600 --> 01:35:36,800
भिजवाया तुमने गौरी से तुमने संदेश भिजवाया

1219
01:35:36,800 --> 01:35:40,840
जिसकी वजह से वो मिसकनसेप्शन फैला वहीं से संदेश भिजवा सकते थे ना कि

1220
01:35:40,840 --> 01:35:45,720
भाई ये है ये डिटेल है आप इस पर जाकर पूछिए फिर देखिए क्या है

1221
01:35:45,720 --> 01:35:50,080
यह तो किया नहीं तो जब वो चीज हुई नहीं है जिसके आधार पर कुछ सिद्ध होना है

1222
01:35:50,080 --> 01:35:54,160
तो फिर आरोप क्यों लगा रहे हो क्यों उसको मंचों से उसका वो कर रहे

1223
01:35:54,160 --> 01:35:58,800
हो

1224
01:35:58,800 --> 01:36:03,000
प्रवाह जब तुम्हारी चीजें तुमने तुम्हारे ही अनुसार तुमने पूर्ण रूप

1225
01:36:03,000 --> 01:36:07,800
से नहीं की है तो फिर उसको लेकर के बदनामी पहले से क्यों कर रहे हो किसी की

1226
01:36:07,800 --> 01:36:11,960
पहले इंटरव्यू हो जाने दो अगर अगर जिनके

1227
01:36:11,960 --> 01:36:15,960
साथ उनका किसी का तुम संबंध बता रहे हो मट के किसी परिकर

1228
01:36:15,960 --> 01:36:19,960
का संबंध किसी के साथ अगर तुम बता रहे हो और तुम्हारा यह कहना है कि तुम जाकर

1229
01:36:19,960 --> 01:36:24,640
के उनसे उनके बेटे से पूछ लो जो उनको ऐसा ऐसा कह है

1230
01:36:24,640 --> 01:36:29,520
यानी कि उनके बेटे किससे पूछ करके यह हो जाएगा कि उनके बीच में संबंध है पहली

1231
01:36:29,520 --> 01:36:33,520
बात पहली बात तो वो भी एक चीज है कि उनका

1232
01:36:33,520 --> 01:36:37,640
बेटा हो सकता है किसी द्वेष वश ऐसा कह रहा हो कर रहा हो यह भी तर्क है ना जब तक

1233
01:36:37,640 --> 01:36:42,040
कोई बच सकता है हम उसे बचाएंगे हम नकारात्मकता

1234
01:36:42,040 --> 01:36:48,040
का चश्मा लेकर के दुनिया को नहीं देखते

1235
01:36:49,600 --> 01:36:53,720
हैं और जब वो कारवाई हुई नहीं है पहली बात तुम यह कारवाई

1236
01:36:53,720 --> 01:36:57,920
हमको भेजो हमको बताओ कि यहां से जाकर के संपर्क करो इनसे लो और

1237
01:36:57,920 --> 01:37:02,120
हम अपने समय अनुसार जाएंगे ऐसे नहीं कहते ली में सरसों

1238
01:37:02,120 --> 01:37:06,760
जमा देंगे फ्री नहीं बैठे

1239
01:37:06,760 --> 01:37:11,080
हैं धरातल पर कार्य कर रहे हैं केवल वीडियो

1240
01:37:11,080 --> 01:37:14,280
नहीं बना रहे हैं ट

1241
01:37:14,280 --> 01:37:18,480
पर ठीक है और मैं जानता

1242
01:37:18,480 --> 01:37:22,560
हूं कि तु तुम्हारे पास भी कार्य है समय समय पर राजस्थान जाना पड़ता

1243
01:37:22,560 --> 01:37:26,640
होगा परिस्थिति जन्य जो सामग्री उसके आधार पर

1244
01:37:26,640 --> 01:37:30,840
है ना इलाज के लिए तुम्हारे पास भी समय कम होगा तो ठीक है जब तुमने

1245
01:37:30,840 --> 01:37:35,240
अगर उस चीज की जांच नहीं की जो जांच अभी होनी चाहिए और

1246
01:37:35,240 --> 01:37:39,400
तुमने जब मेरे को भी यह नहीं बताया कि ऐसा होना चाहिए तो

1247
01:37:39,400 --> 01:37:44,280
उससे पहले तुमने गंभीर आरोप क्यों लगा दिए क्यों बदनाम करना शुरू कर दिया

1248
01:37:44,280 --> 01:37:48,320
ठीक है अब मैंने कहा कि तुम्हारी नाई

1249
01:37:48,320 --> 01:37:52,400
की दुकान है और तुम वहां पर लोगों के बाल जो है छील हो ठीक

1250
01:37:52,400 --> 01:37:56,480
है अब मैं कह रहा हूं कि तुम्हारा अमुक अमुक

1251
01:37:56,480 --> 01:38:01,400
जगह पर घर है वहां जाकर के देख लो ऐसा है कि नहीं

1252
01:38:01,400 --> 01:38:04,840
और यह करने से पहले ही मैं यहां पर बोल दूं

1253
01:38:04,840 --> 01:38:10,320
कि तुम नवा हो तो क्या यह ठीक

1254
01:38:10,320 --> 01:38:14,480
है परिस्थिति जन्य जो सामग्री है संभावनाए

1255
01:38:14,480 --> 01:38:18,520
उत्पन्न करने वाली सामग्री है उसके आधार पर तुम तुम्हारी बदनामी कराना श कर

1256
01:38:18,520 --> 01:38:22,720
दू तो क्या उचित मान रहे हो अभी मैंने तुम्हारे ऊपर वही है

1257
01:38:22,720 --> 01:38:27,040
ऐसी जानकारी के आधार पर है ना तुम हस्त मैथुन का जो है इलाज करवाने

1258
01:38:27,040 --> 01:38:31,360
जा रहे हो वहां पर राजस्थान तो जिन

1259
01:38:31,360 --> 01:38:35,520
जिन चीजों के सत्यापन के आवश्यकता है इस मामले में वोह है

1260
01:38:35,520 --> 01:38:39,600
नहीं व मैं तुमसे तुमसे कह दूं नहीं नहीं तुम तो हस्त मैथुन करते हो भाई

1261
01:38:39,600 --> 01:38:43,920
तुम्हारा है ही है तुमसे रहा नहीं जाता है

1262
01:38:43,920 --> 01:38:48,080
तुमने इतना सब यह सब किया है सोशल मीडिया पर य गल

1263
01:38:48,080 --> 01:38:52,080
पे उसके कारण तुम्हारी मानसिकता ही ऐसी हो गई कि विवाह के

1264
01:38:52,080 --> 01:38:56,480
बाद भी तुम अपनी उस आदत को छोड़ नहीं पा रहे

1265
01:38:56,480 --> 01:39:02,480
हो तो क्या यह सही होगा ऐसा

1266
01:39:10,640 --> 01:39:14,720
कहना ना तो बाकी न

1267
01:39:14,720 --> 01:39:18,760
शकरा श उनसे प्र आया

1268
01:39:18,760 --> 01:39:24,760
चला मान कर दिया नब

1269
01:39:25,480 --> 01:39:29,600
पहली बात तो ये है कि पुरी के शंकराचार्य जी जब तुम्हारी ओर से अशा स्त्रीय

1270
01:39:29,600 --> 01:39:33,720
व्यक्ति है झूठ बोलने वाले हैं तुम्हारे

1271
01:39:33,720 --> 01:39:38,280
अनुसार उनका जो है वो जो मोह माया है वो निकला नहीं है

1272
01:39:38,280 --> 01:39:42,600
तुम्हारे अनुसार क्योंकि वो अपनी बातों को बदल रहे हैं वो सिंहासन का उपयोग

1273
01:39:42,600 --> 01:39:46,600
कर लेते हैं फिर तुम्हारा यहां पर कहना है कि वहां पर उन्होंने बाकी के दो शंकराचार्य

1274
01:39:46,600 --> 01:39:51,200
को क्यों मान लिया कोर्ट में जब गवाही देनी थी फिर वैसे क्यों नहीं मांगा

1275
01:39:51,200 --> 01:39:55,200
माना था हम तो पहली बात तो यह जब तुम्हें

1276
01:39:55,200 --> 01:39:59,240
उनसे इतनी अशा स्त्रीय या उनके आचरण में इतना सारा दोष देख रहे

1277
01:39:59,240 --> 01:40:03,840
हो तो फिर क्यों उनको तुम प्रमाणिक शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो

1278
01:40:03,840 --> 01:40:08,040
कहो नहीं भैया वो भी अ शस्त्री है क्यों उनके पास ज्ञान लेने जा रहे हो बैठे

1279
01:40:08,040 --> 01:40:12,120
हो तो तो अपना खुद का जब निग्रह संप्रदाय और क्यों उस मठ की

1280
01:40:12,120 --> 01:40:16,760
सहायता कर रहे हो कि उनके कहे जाने पर तुमने कहा कि तुम विकल्प के रूप में भेजे गए थे छत्तीसगढ़

1281
01:40:16,760 --> 01:40:20,880
क्यों भाई और तब तक तुम कुछ ये सब चीजों पर ध्यान नहीं दे रहे थे क्यों

1282
01:40:20,880 --> 01:40:25,600
भाई देवताओं ने नहीं बताया था ये सब य दोष पहली बात

1283
01:40:25,600 --> 01:40:26,100
और

1284
01:40:25,840 --> 01:40:29,560
दूसरी बात यह है

1285
01:40:29,560 --> 01:40:34,160
कि यह धार्मिक पक्ष है कि

1286
01:40:34,160 --> 01:40:38,240
जो क्या कहते हैं वोह दो पीठ के शंकराचार्य नहीं है

1287
01:40:38,240 --> 01:40:42,400
मगर यदि उसके कारण धर्म की स्थापना के लिए वहां पर जिस

1288
01:40:42,400 --> 01:40:46,560
रूप में वह जाने जा रहे हैं वही वाली बात जिस रूप में व जाने जा रहे हैं उस रूप का प्रयोग

1289
01:40:46,560 --> 01:40:50,600
हो सकता है तो किया जाएगा उस का धर्म की स्थापना के लिए

1290
01:40:50,600 --> 01:40:54,840
धर्म की रक्षा के लिए प्रयोग किया जाएगा शंकराचार्य के

1291
01:40:54,840 --> 01:40:59,200
पद को बचाने के लिए व प्रयोग किया जाएगा क्यों नहीं किया जाएगा

1292
01:40:59,200 --> 01:41:03,320
क्यों तुम नहीं प्रयोग कर रहे हो अशा स्त्रीय चीजों का तुम

1293
01:41:03,320 --> 01:41:07,400
ट्रेन में नहीं बैठते हो तुम उस तंत्र की सहायता के बिना कार्य कर

1294
01:41:07,400 --> 01:41:12,520
रहे हो जो अशा स्त्रीय है रेल मंत्रालय का उपयोग नहीं कर रहे हो

1295
01:41:12,520 --> 01:41:17,160
तुम ट का उपयोग नहीं कर रहे हो तुम गल का उपयोग नहीं कर रहे हो तुम

1296
01:41:17,160 --> 01:41:21,720
छोड़ दो इन सब तंत्रों को स शस्त्री

1297
01:41:21,720 --> 01:41:25,880
है और इसी तरीके से जो आरएसएस बजरंग कल वाली बात आती

1298
01:41:25,880 --> 01:41:29,880
है जिनका तुम गुरुदेव खंडन करते तुम उनके शिष्य नहीं हो तुम क्यों बता रहे

1299
01:41:29,880 --> 01:41:34,480
हो वो क्या कहते क्या नहीं कहते हम तो उनके पास बैठ के उनके प्रवचन सुनते हैं ना

1300
01:41:34,480 --> 01:41:39,400
तुम नहीं सुनते हो तुम्हे तो दोष दिखता है उनके अंदर

1301
01:41:39,400 --> 01:41:43,400
तो तुम शिष्य नहीं हो उनके जो तुम बताओगे तुम्हारे गुरुदेव य कहते

1302
01:41:43,400 --> 01:41:47,680
तो यह करो वो हमें बता देंगे हम शिष्य उनके

1303
01:41:47,680 --> 01:41:51,680
तुम कौन होते हो बोलने वाले तो गुरुदेव अगर उनका

1304
01:41:51,680 --> 01:41:55,840
खंडन करते हैं तो उनकी प्रशंसा भी करते हैं इस संस्था का जो कार्य

1305
01:41:55,840 --> 01:42:00,480
है वह करने की जो शैली है आरएसएस से किसी को सीखनी चाहिए प्रवचन नहीं दिखे

1306
01:42:00,480 --> 01:42:04,680
तुम्हें मोदी योगी घर भरने वाले तो नहीं है यह प्रवचन तुम्हें नहीं

1307
01:42:04,680 --> 01:42:08,720
दिखे क्योंकि तुम तो उस गिद की तरह उड़ते हो कि कहां

1308
01:42:08,720 --> 01:42:13,080
पर बोटी दिखे उसी की तरह ना अपने मतलब की चीज जहा दिखेगी दूसरे प्रवचन

1309
01:42:13,080 --> 01:42:17,320
नहीं सुने अभी किसी ने पू गुरुदेव से पूछा था जगतगुरु शंकराचार्य

1310
01:42:17,320 --> 01:42:21,480
जी से सभा में पूछा था कि जो ऐसे आचरण

1311
01:42:21,480 --> 01:42:25,560
कर रहे हैं ना बाबा या बाबा बन गए

1312
01:42:25,560 --> 01:42:29,920
हैं और ऐसे आचरण कर रहे हैं चिलम पी रहे हैं वो पी रहे हैं तो गुरुदेव

1313
01:42:29,920 --> 01:42:34,400
ने क्या कहा था कि बाबरी मस्जिद का जब ढांचा टूटा था

1314
01:42:34,400 --> 01:42:36,960
तो वहां पर कोई त्रिकाल संध्या करने वाले ही नहीं पहुंचे

1315
01:42:36,960 --> 01:42:41,360
पहुंच गए थे सबसे पहले सब ऐसे ही थे

1316
01:42:41,360 --> 01:42:45,600
जो लखनऊ में बंधु चौराहा

1317
01:42:45,600 --> 01:42:49,640
बना हुआ है वोह लोग त्रिकाल संध्या करने वाले नहीं थे जो

1318
01:42:49,640 --> 01:42:53,680
मार दिए गए थे उसमें तो सबका अपना अपना उपयोग विनियोग

1319
01:42:53,680 --> 01:42:57,680
है वहां कह दे बाबरी मस्जिद का ढांचा जब तोड़ा जा रहा है तो वहां

1320
01:42:57,680 --> 01:43:01,800
पर जाकर कह दे चलो चलो तुम तुम अ शस्त्री हो तुम त्रिकाल संध्या वाले हो तुम्हारा साथ नहीं लिया

1321
01:43:01,800 --> 01:43:05,360
जाएगा यह कह दे

1322
01:43:05,360 --> 01:43:09,360
ना और लेते तो तुम भी हो बताओ

1323
01:43:09,360 --> 01:43:13,760
कहां कहां कथा कथा होने वाली है बताओ अभी देखो डाल देंगे

1324
01:43:13,760 --> 01:43:17,760
अशा स्त्रीय लोगों का हम तो अशा स्त्रीय कोई

1325
01:43:17,760 --> 01:43:21,960
है और उनको हम सही करने का प्रयास कर रहे हैं तो इस बीच इस यात्रा

1326
01:43:21,960 --> 01:43:26,080
के दौरान जब तक वो सही नहीं हो चुके अगर कहीं पर उनका उपयोग विनियोग हो रहा है

1327
01:43:26,080 --> 01:43:30,160
तो उनका उपयोग विनियोग नहीं ले सकते और सुनो

1328
01:43:30,160 --> 01:43:34,320
हां आरएसएस संस्था से कोई जुड़ा हुआ है और आरएसएस संस्था ने ऐसा

1329
01:43:34,320 --> 01:43:38,480
ऐसा अमुक अमुक कार्य किया है स्कन से कोई जुड़ा हुआ है स्कोन संस्था ने ऐसा ऐसा अम

1330
01:43:38,480 --> 01:43:42,840
मगर जिस व्यक्ति से के साथ चर्चा हो रही है वो

1331
01:43:42,840 --> 01:43:46,920
व्यक्तिगत रूप से उसने कोई बात ऐसी नहीं की और जो आरएसएस और बजरंग दल के लोग

1332
01:43:46,920 --> 01:43:50,920
हमारे साथ रामपाल वाले उसमें खड़े हुए कंधे से कंधा मिलाकर

1333
01:43:50,920 --> 01:43:52,000
बल्कि हमसे आगे

1334
01:43:52,000 --> 01:43:55,160
रहे जो

1335
01:43:55,160 --> 01:43:59,680
उन लोगों ने कहीं पर कोई व्यक्तिगत हमारा विरोध थोड़ी ना कर दिया था गुरुदेव

1336
01:43:59,680 --> 01:44:03,840
का व्यक्तिगत रूप से खंडन थोड़ी ना कर रहे थे कि नहीं नहीं शंकराचार्य ऐसे

1337
01:44:03,840 --> 01:44:07,960
हैं वैसे हैं नहीं नहीं कर रहे थे करते तो हम उनको वही टोक वही

1338
01:44:07,960 --> 01:44:11,960
उनको कहते नहीं कह सकते हमारे सामने आप नहीं बल्कि व तो

1339
01:44:11,960 --> 01:44:15,960
सम्मान प्रकट करते हैं हां जिस संस्था से वो जुड़े हुए हैं जिस संस्था

1340
01:44:15,960 --> 01:44:20,240
के अंतर्गत व धर्म का कार्य कर रहे हैं उस संस्था

1341
01:44:20,240 --> 01:44:24,320
के सिद्धांतों से ऐसा हो रहा है या फिर शीर्ष के लोगों के ऐसा हो रहा

1342
01:44:24,320 --> 01:44:28,680
और अगर हम बात ही नहीं करेंगे कहीं पर भी खड़े ही नहीं होंगे तो पहली बात तो वर्तमान में सारे

1343
01:44:28,680 --> 01:44:33,000
प्रकल्प बंद हो जाएंगे और दूसरी बात फिर समझाए किसको

1344
01:44:33,000 --> 01:44:37,040
क्योंकि तुम्हारा तो कहना जो शस्त्री उससे क्या चर्चा करे तो फिर चर्चा जब

1345
01:44:37,040 --> 01:44:41,120
होनी नहीं किसी को धर्म के बारे में बताना नहीं है तो दिशाहीन

1346
01:44:41,120 --> 01:44:47,120
को दिशा वान बनाना नहीं

1347
01:44:47,400 --> 01:44:53,400
है और

1348
01:44:57,120 --> 01:45:01,560
ठीक है अब इतना हो

1349
01:45:01,560 --> 01:45:06,280
गया अब आगे चलते हैं

1350
01:45:06,280 --> 01:45:12,280
जी का खंडक कौन हुआ मैं नहीं शंकराचार्य

1351
01:45:12,720 --> 01:45:15,320
हम

1352
01:45:15,320 --> 01:45:20,280
नहीं के प के विय में क्या कहते

1353
01:45:20,280 --> 01:45:26,280
शकरा पछ को हु

1354
01:45:30,520 --> 01:45:36,520
लिए जी

1355
01:45:36,780 --> 01:45:42,780
[हंसी]

1356
01:45:44,600 --> 01:45:48,640
को तो यह वाला प्रकरण हो ही चुका है कल हमने जवाब दे दिया

1357
01:45:48,640 --> 01:45:53,000
कि हमारी परंपरा के कौन से आचार्य क्या कह रहे हैं आप हमें आके ना बताए क्योंकि आप

1358
01:45:53,000 --> 01:45:59,000
परंपरा प्राप्त आचार्य नहीं है ठीक है

1359
01:45:59,400 --> 01:46:03,480
और अगर आपको कुछ कहना है तो आकर पहले तो यह

1360
01:46:03,480 --> 01:46:07,720
प्रमाणिकता दिखाइए कि आपको उनका ज्ञान कहां से मिल रहा है बिना परंपरा

1361
01:46:07,720 --> 01:46:11,720
के मिल रहा है परंपरा से मिल रहा है परंपरा से मिल रहा है तो कैसे आया आप तक तो

1362
01:46:11,720 --> 01:46:15,760
उस आधार पर आप हमारी परंपरा में किस आचार्य ने क्या कहा वहां पर उनका खंडन हो

1363
01:46:15,760 --> 01:46:19,840
रहा है कि नहीं ये मत बताओ आप अपना पक्ष रखो कि वो सबरी माता भीलनी थी कि नहीं

1364
01:46:19,840 --> 01:46:24,040
थी उसका हम उत्तर प्रस्तुत कर देंगे और बुद्ध वाले मामले

1365
01:46:24,040 --> 01:46:30,040
का भी कर

1366
01:46:37,240 --> 01:46:41,240
देंगे हम तो सीधे जब तुम यह कहोगे कहां माना तो हम सीधे कह देंगे

1367
01:46:41,240 --> 01:46:45,600
किससे पता लगा कैसे आए ज्ञान तुम्हारे पास

1368
01:46:45,600 --> 01:46:49,720
किस प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार से जो तुम कह रहे हो कि उन्होंने

1369
01:46:49,720 --> 01:46:53,760
जो पूर्वा चार्य उन्होंने उन्ह भील नहीं माना है तो फस

1370
01:46:53,760 --> 01:46:58,440
जाओगे यहां पर परंपरा की आवश्यकता ही इसलिए है कि

1371
01:46:58,440 --> 01:47:02,480
गुरु ने क्या कहा वो उनका शिष्य बताएगा उनका प्रामाणिक शिष्य

1372
01:47:02,480 --> 01:47:06,480
बताएगा तुम प्रामाणिक शिष्य नहीं हो शंकर परंपरा के तो तुम ये

1373
01:47:06,480 --> 01:47:10,840
क्लेम मत करो कि उन्होंने ये कहा था तुम्हारे पूर्वा चार्य ने तो कपाती जी कैसे खंडन कर रहे हैं

1374
01:47:10,840 --> 01:47:15,000
ठीक है और या कपाती जी ने फलानी पीठ को पांचवी पीठ पंचम

1375
01:47:15,000 --> 01:47:19,080
पीठ माना था तो तुम्हारे वो जो पुरी के शंकराचार्य कपाती जी का खंडन कर तुम

1376
01:47:19,080 --> 01:47:23,320
मत बताओ गुरु शिष्य परंपरा का जो उपयोग

1377
01:47:23,320 --> 01:47:27,320
विनियोग है वो इसी बात में है कि उस गुरु ने पीछे गुरुओं ने क्या कहा यह

1378
01:47:27,320 --> 01:47:31,400
उनका उत्तराधिकारी या उनका प्रामाणिक शिष्य बताएगा तो पहले प्रामाणिक

1379
01:47:31,400 --> 01:47:35,600
शिष्य बनो अगर तुम्हें पूर्वा चार्य के नाम पर उनके शिष्यों

1380
01:47:35,600 --> 01:47:39,960
का खंडन करना है तो और वरना केवल अपना पक्ष रखो लनी नहीं है

1381
01:47:39,960 --> 01:47:43,960
बुद्ध दूसरा अवतार है ये वो अपना पक्ष रखो यह मत बताओ शंकर परंपरा में

1382
01:47:43,960 --> 01:47:47,960
क्या कहा गया क्या नहीं कहा गया वरना प्रश्न होगा क्या तुम्हे तुम जो बात कह

1383
01:47:47,960 --> 01:47:52,080
रहे हो उसको तुमने कि शंकर परंपरा में यह कहा है पूर्वा चार्य

1384
01:47:52,080 --> 01:47:52,580
ने

1385
01:47:52,560 --> 01:47:56,960
तो तो क्या तुमने उसको उस परंपरा के प्रामाणिक शिष्यों के पास जाकर प्रामाणिक

1386
01:47:56,960 --> 01:48:01,240
आचार्यों के पास जाकर के उसको सत्यापित करा

1387
01:48:01,240 --> 01:48:05,640
लिया तो कराओ पहले और उसमें भी यदि वह

1388
01:48:05,640 --> 01:48:09,760
बात उस परंपरा की जो सार्वभौम गद्दी है

1389
01:48:09,760 --> 01:48:14,160
उसका विरोध कर रही तो वहां पर अगर वो प्रामाणिक आचार्य भी होंगे मगर उनकी बात मानी जाएगी

1390
01:48:14,160 --> 01:48:18,160
क्योंकि वो सर्वोच्च गुरु है उस परंपरा के सर्वोच्च पद पर बैठे

1391
01:48:18,160 --> 01:48:22,400
हैं नहीं तो अगर सबकी बात अगर ऐसे मानी जाएगी तो फिर उस पद की आवश्यकता

1392
01:48:22,400 --> 01:48:27,280
ही क्या अंतिम निर्णायक पद की आवश्यकता क्या है

1393
01:48:27,280 --> 01:48:31,520
फिर जिससे कि जब किसी विषय में दिक्कत आ रही हो सबके

1394
01:48:31,520 --> 01:48:36,120
अलग अलग मत हो रहे हो तो जो सर्वोच्च गद्दी है वह बता दे यह है

1395
01:48:36,120 --> 01:48:40,120
इसीलिए सर्वोच्च पद होता है आज जो य लोकतंत्र व क्या है क्यों

1396
01:48:40,120 --> 01:48:44,160
फेल है क्योंकि सर्वोच्च पद नहीं है सब एक दूसरे के ऊपर

1397
01:48:44,160 --> 01:48:50,160
निर्भर है निर्णय देने के लिए

1398
01:49:03,600 --> 01:49:09,600
ब

1399
01:49:40,280 --> 01:49:44,960
[हंसी]

1400
01:49:44,960 --> 01:49:49,120
स्वामी कपा त के लिए हमने कहा भी नहीं है तुम स्वामी कपा

1401
01:49:49,120 --> 01:49:53,120
जी के लिए तत नहीं किया मगर उपहास तुम के शंकराचार्य क बार कर

1402
01:49:53,120 --> 01:49:57,120
चुके हो और इस पर मैं एक अलग से वीडियो बनाऊंगा तुमने कहां कहा उनका उपवास किया है

1403
01:49:57,120 --> 01:50:01,680
कहां कहा प्रत्यक्ष रूप से भीनी भीनी से उनकी निंदा की है सब

1404
01:50:01,680 --> 01:50:05,720
बनाऊ जहां पर जिन बातों का अच्छा अर्थ निकाल करके बात

1405
01:50:05,720 --> 01:50:09,800
करने की आवश्यकता नहीं भी थी वहां पर भी तुमने उसका गलत अर्थ निकाल करके बात की जैसे

1406
01:50:09,800 --> 01:50:14,280
यह छत्र वाली बात उसका सही अर्थ निकाल करके भी बात रख सकते थे

1407
01:50:14,280 --> 01:50:20,280
मगर उसका गलत अर्थ निकाल करके उनका विरोधी तो है और क्या है

1408
01:50:20,400 --> 01:50:25,120
ये साम के र निर्णय दे देना ये हो रहा है वो रहा है

1409
01:50:25,120 --> 01:50:30,560
ऐसी स्कार

1410
01:50:30,560 --> 01:50:34,600
नहीं अब क्या है ये सबके बाद भी

1411
01:50:34,600 --> 01:50:38,680
जब उन्होंने एक बार बट चेक करो

1412
01:50:38,680 --> 01:50:43,440
सब की बात भी आपके साथ मंच साझा हो सकता था मर जो

1413
01:50:43,440 --> 01:50:47,880
आपने मतलब हम विचार हम ये नहीं कर सकते कि आपके साथ हम म से साझा कर पाए

1414
01:50:47,880 --> 01:50:52,000
कत जब तक आप अपने अमर्यादित जो चीजें है ये सब चीज करना नहीं चाहता था

1415
01:50:52,000 --> 01:50:58,000
आपने विवश किया

1416
01:51:01,800 --> 01:51:05,960
मैंने बडी कि

1417
01:51:05,960 --> 01:51:10,000
और 88 किलो का प्रोटीन का पाउडर खाके बॉडी

1418
01:51:10,000 --> 01:51:14,480
बनाई है सरकार इनसे आधे भजन के हम और हम जो है इनका व

1419
01:51:14,480 --> 01:51:18,640
कर दे रहे हैं तुम्हारा आधा वजन क्यों

1420
01:51:18,640 --> 01:51:23,920
है राजस्थान से इलाज चल रहा है वजन बढ़ाने के लिए

1421
01:51:23,920 --> 01:51:28,080
इसीलिए आधा वजन है वजन से नफरत है वजन से द्वेष है

1422
01:51:28,080 --> 01:51:32,880
सुनो प्रोटीन पाउडर खाकर जो बॉडी बनाई थी व बाद में बनाई

1423
01:51:32,880 --> 01:51:37,000
थी भिगो के हम चने खाते थे और दूध रोटी मील के खाते

1424
01:51:37,000 --> 01:51:41,240
थे हमारा जो 70 75 किलो का वजन बना था उसी से बना

1425
01:51:41,240 --> 01:51:45,600
था और वह हमने 18 वर्ष की आयु से लेकर के

1426
01:51:45,600 --> 01:51:49,600
और करीब 22 वर्ष की आयु तक व्यायाम के साथ-साथ दौड़ना

1427
01:51:49,600 --> 01:51:53,800
यह सब करके जो हमारे को पता था वो सब

1428
01:51:53,800 --> 01:51:58,360
करके वो शरीर हमने प्राप्त किया था और सुनो

1429
01:51:58,360 --> 01:52:03,160
उसके बाद मेरे ख्याल से

1430
01:52:03,160 --> 01:52:07,240
छ साल का गैप रहा छ वर्ष का गैप रहा जब

1431
01:52:07,240 --> 01:52:11,480
बीच में हम अपने शरीर शारीरिक व्यायाम से नहीं जुड़े रहे बस पढ़ाई की

1432
01:52:11,480 --> 01:52:15,680
वो भी आधुनिक शिक्षा वाली तो छ साल का उसमें अंतर रहा

1433
01:52:15,680 --> 01:52:16,800
उस छ साल की

1434
01:52:16,800 --> 01:52:20,960
अवधि के बाद दोबारा पुनः जब एक व्यस्त जीवन में आए जब

1435
01:52:20,960 --> 01:52:25,240
हमें अ उतनी नेचुरल चीजें हमें प्राप्त नहीं है

1436
01:52:25,240 --> 01:52:29,600
उस वजह से जो प्रोटीन के सोर्स के रूप में वे प्रोटीन का उपयोग किया बिल्कुल किया

1437
01:52:29,600 --> 01:52:33,680
पहली बात तो यह है कि मैं उसको धार्मिक पक्ष के अनुसार प्रामाणिक नहीं कह रहा हूं मुझे अभी भी नहीं

1438
01:52:33,680 --> 01:52:37,920
पता उसके बारे में अगर मैं गुरुदेव से पूछूंगा तो क्या बताएंगे मगर तुमने

1439
01:52:37,920 --> 01:52:42,240
हमारा एक वीडियो देखा होगा जिसमें हमने जिम के बारे में बताया ना देखा हो तो देख लेना

1440
01:52:42,240 --> 01:52:46,520
उसमें पहला ही दृश्य है उसमें मैं कह रहा हूं कि गुरुदेव गुरुदेव से क्षमा

1441
01:52:46,520 --> 01:52:50,760
मांग रहा हूं कि गुरुदेव आज के वातावरण के कारण मुझे जो है बचपन से शिक्षा

1442
01:52:50,760 --> 01:52:54,760
प्राप्त नहीं हो पाई कि मुझे क्या करना है मतलब यह कैसा होना चाहिए था

1443
01:52:54,760 --> 01:52:58,920
इस बारे में शास्त्र क्या कहता है मगर यदि मेरे को यही प्राप्त

1444
01:52:58,920 --> 01:53:02,960
है और मुझे इसी पर ही आगे बढ़ना पड़ेगा

1445
01:53:02,960 --> 01:53:06,960
यह मैंने क्षमा मतलब उसमें दोष दृष्टि रखते हुए अपने इन चीजों में

1446
01:53:06,960 --> 01:53:11,640
कि मैं जिम क्यों करता हूं इस दोष दृष्टि को रखते हुए ही

1447
01:53:11,640 --> 01:53:15,640
मैंने अपनी इन चीजों को सदैव पहली बात तो उसको कभी अपने मंच से उसका मंचन ही

1448
01:53:15,640 --> 01:53:20,600
नहीं किया मगर अब जब बात तुमने कर दी है तो बताना जरूरी है उसको कभी भी मैंने

1449
01:53:20,600 --> 01:53:24,640
दोष रहित दृष्टि उसके प्रति मैंने नहीं बताई लोगों को दोष

1450
01:53:24,640 --> 01:53:29,000
दृष्टि के साथ ही उसको रखा दूसरी बात अब सुनो

1451
01:53:29,000 --> 01:53:32,720
प्रोटीन पाउडर खा कर के जो बॉडी बनाई थी

1452
01:53:32,720 --> 01:53:36,880
ना वह बनाई थी 78 केजी वेट था

1453
01:53:36,880 --> 01:53:40,960
और सिक्स पैक एब्स थे ठीक है मेहनत लगती

1454
01:53:40,960 --> 01:53:45,520
है हालाकि उसमें भी और आपने भी कुछ मेहनत वाले कार्य किए हैं

1455
01:53:45,520 --> 01:53:49,720
और राजस्थान जाने में मेहनत लगती है बात ठीक है

1456
01:53:49,720 --> 01:53:55,720
तो सिक्स पैक एप्स थे अब जब बात होई रही है बॉडी की तो बता दे

1457
01:53:56,200 --> 01:54:00,640
तो सिक्स पैक एप्स थे और अच्छी खासी बॉडी थी

1458
01:54:00,640 --> 01:54:04,720
और चाहते तो मॉडलिंग भी कर सकते थे भैया अब बहुत तुम

1459
01:54:04,720 --> 01:54:09,080
तो वो कह रहे हो ना कैरियर बनाने आए तो अच्छा खासा सब कुछ था

1460
01:54:09,080 --> 01:54:13,080
शरीर भी सुंदर था जैसा कि आजकल के लोगों को भौतिकवादी लोगों को

1461
01:54:13,080 --> 01:54:17,080
लगता है मगर आज हमारे में जो बॉडी फैट जो बॉडी

1462
01:54:17,080 --> 01:54:21,120
फैट परसेंटेज कितना था मालू है बॉडी फैट परसेंटेज

1463
01:54:21,120 --> 01:54:25,280
हमारा सिंगल डिजिट था सा आ परसेंट

1464
01:54:25,280 --> 01:54:29,760
मगर आज हमारा जो वेट है वो वेट हो गया 90

1465
01:54:29,760 --> 01:54:33,920
केजी और हम यह जो धर्म रक्षा

1466
01:54:33,920 --> 01:54:37,960
का कार्य है इसको करने के कारण व्यायाम भी नहीं कर पा रहे प्रोटीन पाउडर

1467
01:54:37,960 --> 01:54:42,160
की तो दूर की बात है आज करीबन

1468
01:54:42,160 --> 01:54:46,520
एक साल हो गया उसके बाद एक हफ्ते पहले कोशिश की थी कि व्यायाम कर लू

1469
01:54:46,520 --> 01:54:48,000
वरना कब सोते

1470
01:54:48,000 --> 01:54:52,560
कब जागते उठना बैठना कुछ नहीं पता है और सबसे पहले

1471
01:54:52,560 --> 01:54:57,360
जब हमें धन कम पड़ रहा था इन सब कार्यों में जुटने के

1472
01:54:57,360 --> 01:55:01,520
लिए

1473
01:55:01,520 --> 01:55:05,960
तो सबसे पहले जब हमें धन कम पड़ रहा था इन सब कार्यों में

1474
01:55:05,960 --> 01:55:10,000
जुटने के लिए तो हमने अपनी छोटी-छोटी चीजें

1475
01:55:10,000 --> 01:55:14,080
जो हमारी जानकारी में शाखा आ रही थी और दवाई नहीं थी ड्रग्स नहीं

1476
01:55:14,080 --> 01:55:18,440
थे ऐसी सभी चीजों को हमने कटिंग करना शुरू किया और

1477
01:55:18,440 --> 01:55:23,200
उनमें सबसे पहला त्याग था वे प्रोटीन पाउडर काको बंद किया

1478
01:55:23,200 --> 01:55:27,320
कि अगर हमें धर्म रक्षा करनी है वहां पर अर्थ चाहिए तो हमें अपनी ऐसी

1479
01:55:27,320 --> 01:55:31,440
चीजें जिनके बिना हमारे जीवन का निर्वाह हो सकता है उसका

1480
01:55:31,440 --> 01:55:35,800
करेंगे और जो आज के समय अनुसार जो एक

1481
01:55:35,800 --> 01:55:40,280
गौरवशाली जो फिजिक होती है जो काया होती है

1482
01:55:40,280 --> 01:55:44,280
भौतिक वादियों के अनुसार उस काया का

1483
01:55:44,280 --> 01:55:48,480
हमने त्याग कर दिया आज वो काया नहीं है जो हमने

1484
01:55:48,480 --> 01:55:52,600
बनाई थी प्रोटीन पाउडर खाके वो धर्म रक्षा के लिए उसका त्याग

1485
01:55:52,600 --> 01:55:57,400
किया समय नहीं मिलता था व्यायाम करने का अर्थ नहीं होता था

1486
01:55:57,400 --> 01:56:01,920
प्रोटीन पाउडर खाने का समझे

1487
01:56:01,920 --> 01:56:04,080
जो उसका तुमने उ पास

1488
01:56:04,080 --> 01:56:08,520
उड़ाया चलो र कोई बात

1489
01:56:08,520 --> 01:56:13,040
नहीं और वो जो

1490
01:56:13,040 --> 01:56:17,080
खुल के खाने वाली बात है ना जो तुमको बताई बताई है किसी ने जो

1491
01:56:17,080 --> 01:56:21,160
भी है कहीं पर देखा होगा किसी ने तो हम बाहर की सामग्री का

1492
01:56:21,160 --> 01:56:25,240
उपयोग तभी करते हैं जब हम अत्यंत उसकी आवश्यकता पड़ती है वो भी यह

1493
01:56:25,240 --> 01:56:31,240
देख कर के कि कम से कम वह व्यक्ति मलेच्छ ना

1494
01:56:34,560 --> 01:56:40,000
हो अा अब यहीं पर चलेगा क्या चलाइए

1495
01:56:40,000 --> 01:56:44,720
भैया यह पहुंच गए हम लोग इनके वीडियो में तीन

1496
01:56:44,720 --> 01:56:49,640
3 ब सा मिनट तक पहुंच गए चलाइए इसके

1497
01:56:49,640 --> 01:56:54,240
आगे बड़ा द्वेष है आज तुम्ह वजन बढ़ाना हो तो आ जाना

1498
01:56:54,240 --> 01:56:58,240
फ्री ऑफ कॉस्ट वो उसमें जो इस तरह का जो

1499
01:56:58,240 --> 01:57:02,680
कार्य है जो हमारे पास जो शिक्षा प्राप्त है तो उसका शुल्क लेना बंद कर

1500
01:57:02,680 --> 01:57:06,800
दिया जब से हम इस पथ पर निकले जो हम शुल्क लेते

1501
01:57:06,800 --> 01:57:11,000
थे ख महंगा महंगा किसी का डाइट चार्ट बनाने का न्यूट्रिशन उसको बताने का वह शुल्क

1502
01:57:11,000 --> 01:57:15,200
लेना बंद कर दिया प्रोटीन पाउडर का सेवन करना बंद

1503
01:57:15,200 --> 01:57:19,320
कर दिया इसलिए नहीं कि वो अशा स्त्रीय है इसलिए हमारे पास पैसे नहीं थे जो

1504
01:57:19,320 --> 01:57:23,920
अन्य जो शाकाहार के रूप में सप्लीमेंट्स आते का सेवन बंद कर दिया

1505
01:57:23,920 --> 01:57:28,000
आज कब खाते हैं कब पीते कुछ नहीं पता है सुबह होती है सुबह

1506
01:57:28,000 --> 01:57:32,200
से लेकर कब रात हो जाती नहीं पता है घर में कितना

1507
01:57:32,200 --> 01:57:36,440
समय दे पाते हैं नहीं पता है सदैव अपने मन में यही विचार चला

1508
01:57:36,440 --> 01:57:41,240
करते हैं ग्राउंड पर क्या करना है और

1509
01:57:41,240 --> 01:57:45,720
सनातना भाषियों को क्या कहना है सनातन विरोधियों

1510
01:57:45,720 --> 01:57:49,920
को क्या कहना है और तुम जैसे अहंकार

1511
01:57:49,920 --> 01:57:55,920
हों को क्या कहना है यो को क्या कहना है

1512
01:57:58,880 --> 01:58:04,880
चलो प्ले

1513
01:58:05,920 --> 01:58:11,920
करिए आवाज नहीं आ रही

1514
01:58:12,120 --> 01:58:16,520
भाई आवाज नहीं आ रही

1515
01:58:16,520 --> 01:58:22,520
स्पीकर बंद कैसे है एक मिनट एक मिनट

1516
01:58:30,080 --> 01:58:36,080
हां चलिए चलाइए अब आ रही

1517
01:58:37,400 --> 01:58:41,560
है प्ले करिए अरे अभी

1518
01:58:41,560 --> 01:58:45,080
भी आवाज

1519
01:58:45,080 --> 01:58:51,080
बंद अब आप प्ले करिए

1520
01:59:00,960 --> 01:59:04,960
क्या हां और तुम्हें अगर बॉडी बनानी हो जो तुम्हें दिक्कत हो रही है बॉडी

1521
01:59:04,960 --> 01:59:08,960
से है ना तो बॉडी बनानी हो तो

1522
01:59:08,960 --> 01:59:13,120
तुम आ जाना तुम निशुल्क तुम्ह वो परामर्श दे देंगे वो चीज बता देंगे जो तुम खा

1523
01:59:13,120 --> 01:59:17,360
पी करके अपनी बॉडी बना सकते हो और जो धातु का क्षय हो गया उसके निवारण के लिए भी चीजें है

1524
01:59:17,360 --> 01:59:21,480
अगर तुम संपर्क करना चाहो तो कर लेना और

1525
01:59:21,480 --> 01:59:25,680
बाकी है कि जो भी है जैसा भी है तुम्हारे जैसों के लिए पर्याप्त है

1526
01:59:25,680 --> 01:59:31,680
थोड़ा का है पूरा समझ लेना

1527
01:59:32,680 --> 01:59:36,720
चलो चलो भैया प्ले करो बात की है

1528
01:59:36,720 --> 01:59:42,720
डाल ड पाहा बिल्कुल हम तो चाह रहे हैं बिल्कुल आओ ना तुम 20

1529
01:59:43,240 --> 01:59:47,560
मिनट गई आगे जितना बोलोगे उतना तुम ही फसगे तो ऐसा

1530
01:59:47,560 --> 01:59:52,080
होगा ऐसा ना समझा जाए उसने क्या किया है ना

1531
01:59:52,080 --> 01:59:56,440
करो पॉज करो इसने क्या किया है

1532
01:59:56,440 --> 02:00:00,440
कि हमारी वो जो सै सुणता थी ना उदारता थी उसका

1533
02:00:00,440 --> 02:00:05,120
मजाक उड़ाया है जो हम यह करना चाह रहे

1534
02:00:05,120 --> 02:00:09,120
थे कि तुम्हारे साथ यह दृश्य ना दिखे लोगों

1535
02:00:09,120 --> 02:00:13,680
को तुम्हारा बैकग्राउंड जो भी हो तुम्हारा आधार जो भी हो परंपरा जो भी

1536
02:00:13,680 --> 02:00:18,120
हो मगर ऐसे लोग कम है

1537
02:00:18,120 --> 02:00:22,640
पहली बात तो आते ही नहीं है लोग डर के मारे मनुवाद के लिए बोलने के लिए

1538
02:00:22,640 --> 02:00:26,680
और जो आ जाते तो उनको आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है तो ऐसे लोग कम है जो

1539
02:00:26,680 --> 02:00:31,320
ख्याति जो जिनके बारे में लोगों को पता भी चल रहा है जो आगे बढ़ रहे हैं

1540
02:00:31,320 --> 02:00:35,760
इसलिए हम नहीं चाहते थे तुम्हारे साथ इस तरह का मगर तुमने

1541
02:00:35,760 --> 02:00:39,760
तुम्ह तुम्हारा उद्देश्य य है कि तुम हमारे जैसे लोगों के साथ ही भिड़

1542
02:00:39,760 --> 02:00:43,800
करके अपना वो आगे बढ़ाओ ग ख्याति बढ़ाओ ग तुम्हारा यह है

1543
02:00:43,800 --> 02:00:49,800
उद्देश्य चलो

1544
02:00:56,120 --> 02:01:00,360
हमको है हमको जो है धमकी मिल रही है कि तुम्हारे ऊपर मारण का तंत्र

1545
02:01:00,360 --> 02:01:04,360
करवा रहे हैं यह करवा रहे वो करवा रहे हमें चिंता नहीं है करवा

1546
02:01:04,360 --> 02:01:08,600
लो मारण का तंत्र कर दो यह कर दो वो कर दो बहुत बहुत देखे तुम जसे हमारे

1547
02:01:08,600 --> 02:01:13,080
पीछे गुरु गोविंद ग्रंथ का बल है तुम्हारी तरह बिना गुरु के नहीं

1548
02:01:13,080 --> 02:01:17,520
है कहीं का ट कहीं का रोड़ भानुमति का कुबा जोड़ा

1549
02:01:17,520 --> 02:01:23,520
यह सब नहीं है हमारा चलो

1550
02:01:24,040 --> 02:01:28,280
वो वाली बात हमारी उदारता को काता समझा काता को ही काता समझ रहे उदारता

1551
02:01:28,280 --> 02:01:32,280
टॉपिक नहीं आगे बढ़ेंगे कायरता को य यही मजाक

1552
02:01:32,280 --> 02:01:36,360
उड़ाया है चलो चलो चलाओ ऐ

1553
02:01:36,360 --> 02:01:40,360
ऐसे ग पढ थे हमने तो पहली बात

1554
02:01:40,360 --> 02:01:44,360
ये हो ग जबक आप पश्चाताप प्रकट नहीं करते तो इस तरह का मंचन लोग देख पाए मुझे कल से

1555
02:01:44,360 --> 02:01:48,360
कई सारे वो मिल रहे थे पर लोग मुझे टैक कर रहे हैं आप दोनों साथ में देखेंगे तो

1556
02:01:48,360 --> 02:01:52,560
हमारे लिए बड़ा सौभाग्य का दिन होगा मुझे भी अच्छा लग रहा था ऐसा चाह रहे मेरी

1557
02:01:52,560 --> 02:01:56,640
मर्यादा है मेरी गुरु की नि मैंने सुनी है आपके मु से कहा कि आपके गुरु

1558
02:01:56,640 --> 02:02:00,720
ऐसा काम किए थे नहीं करना चाहिए था ना अल

1559
02:02:00,720 --> 02:02:04,880
अलग प्रकरणों में जैसे शबरी जी का हमने प्रकरण बताया आपके गुरुजी क्या कहे विधियों ने शबरी

1560
02:02:04,880 --> 02:02:09,080
जी को भल बताने का षडयंत्र किया है इसका अर्थ विधर्मी यरी थे इसका अर्थ है किय

1561
02:02:09,080 --> 02:02:11,200
जो स्वामी थे व त्रका

1562
02:02:11,200 --> 02:02:17,200
थे चलो चलो एक य प एक तर्क में दे ही देता हूं चलो

1563
02:02:20,840 --> 02:02:26,840
सुनो एक मिनट के लिए मान लेते हैं

1564
02:02:27,680 --> 02:02:31,920
कि शंकर परंपरा के आचार्यों ने जो तुम बता रहे हो शंकर

1565
02:02:31,920 --> 02:02:36,880
परंपरा के आचार्यों ने जो है भीलनी

1566
02:02:36,880 --> 02:02:40,960
बताया शबरी माता ठीक है श बात तो फिर हो

1567
02:02:40,960 --> 02:02:45,400
जाएगी मगर एक तर्क में अभी यही प्रस्तुत कर दे

1568
02:02:45,400 --> 02:02:49,400
तो गुरुदेव कह रहे हैं कि विधियों ने सबरी

1569
02:02:49,400 --> 02:02:53,640
को भीलनी बताया तो इसका अर्थ यह क्यों नहीं निकाला

1570
02:02:53,640 --> 02:02:58,120
जा सकता कि विधर्मी शबरी को भीलनी बताकर अपना

1571
02:02:58,120 --> 02:03:02,320
उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं यह उन विधियों

1572
02:03:02,320 --> 02:03:06,600
उन विधियों की बात हो रही है यहां पर उनके वक्तव्य में उन विधियों

1573
02:03:06,600 --> 02:03:10,720
की बात हो रही है जो शबरी माता के भीलनी होने का

1574
02:03:10,720 --> 02:03:14,840
आलंबन लेकर अपना काम करना चाह रहे हैं

1575
02:03:14,840 --> 02:03:18,840
लो क्यों नहीं निकाल रहे अर्थ क्योंकि तुम्हें

1576
02:03:18,840 --> 02:03:22,880
उनके अवमानना करनी है निकालो ना अर्थ

1577
02:03:22,880 --> 02:03:26,400
निकल तो रहाय अर्थ और इसम बाकी हम जो शास्त्रोक्त बात

1578
02:03:26,400 --> 02:03:30,960
हैं वह अलग से वीडियो बनाएंगे तुम्हारे मेरे बीच में

1579
02:03:30,960 --> 02:03:35,320
इस बात को लेकर के यह सब विवाद शुरू नहीं हुआ था भगवता नंद

1580
02:03:35,320 --> 02:03:39,440
जो तुम रुख मोड़ रहे हो पहले तुम विजया श्री को व्यापार

1581
02:03:39,440 --> 02:03:43,720
करने वाला सिद्ध करना मंच पर बैठी थी सिद्ध करना

1582
02:03:43,720 --> 02:03:48,640
वरना दोनों हाथ जोड़ कर के माफी मांगना सर झुका कर के मुझसे गलती हो

1583
02:03:48,640 --> 02:03:52,760
गई वीडियो डिलीट करना वो

1584
02:03:52,760 --> 02:03:56,880
तुम्हारे अहंकार को चोट पहुंचाई थी ना मैंने वो वीडियो बना कर के तुम्हारे अनुसार मैंने

1585
02:03:56,880 --> 02:04:01,000
गुरु द्रोहियों को गुरु द्रोहियों के लिए वीडियो बनाया था और वोह जो सारे

1586
02:04:01,000 --> 02:04:05,200
प्रश्न जिनका उत्तर दिया था वह सारे प्रश्न क्या तुमने देखे तुमने अपने

1587
02:04:05,200 --> 02:04:09,520
वीडियो में बोले थे क्या वो सारे प्रश्न घूम रहे थे वहां

1588
02:04:09,520 --> 02:04:13,600
पर इा पर

1589
02:04:13,600 --> 02:04:17,720
और यही बात ये कि यह वाली

1590
02:04:17,720 --> 02:04:22,880
बात जो तुम कह रहे हो कि उन्होंने अपने गुरु के लिए विधर्मी कहा ठीक है

1591
02:04:22,880 --> 02:04:27,040
उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी यहां पर भी नहीं कही है तुमने व्यक्तिगत टिप्पणियां

1592
02:04:27,040 --> 02:04:29,800
की

1593
02:04:29,800 --> 02:04:35,800
है अनेकानेक

1594
02:04:37,840 --> 02:04:41,840
उनके पास परंपरा का ज्ञान कैसे आ रहा है कपात

1595
02:04:41,840 --> 02:04:46,000
जी से कपात जी शबरी माता को ब्राह्मण बोल रहे हैं तुम कौन होते

1596
02:04:46,000 --> 02:04:50,160
हो शंकर परंपरा में क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा कौन क्या कह रहा है बताने वाले तुम्हारे पास

1597
02:04:50,160 --> 02:04:55,920
शंकर परंपरा से ज्ञान आ रहा है क्या

1598
02:04:55,920 --> 02:04:59,960
और अगर कोई संशय आ रहा है तो गुरुदेव के शरणागत होकर के वहां जाकर के बैठो

1599
02:04:59,960 --> 02:05:04,120
गुरुदेव मुझे समझ में नहीं आ रहा पूर्वा चार ने यह कहा आपने यह कहा शरणागत का कहा गया

1600
02:05:04,120 --> 02:05:08,120
ना छंद उपनिषद में कहां चला जाएगा शरणागत होना

1601
02:05:08,120 --> 02:05:12,160
कब गए तुम पूछने गुरुदेव पूर्वा चार्य ने यह

1602
02:05:12,160 --> 02:05:16,440
कहा उसने यह कहा और रही बात यह कि उनका जो वक्तव्य है

1603
02:05:16,440 --> 02:05:20,520
भील वो विधर्मी हों ने चबरी को भील नहीं कहा है तो इसका यह अर्थ भी लिया जा

1604
02:05:20,520 --> 02:05:24,680
सकता है शरी शबरी को भीलनी बताकर विधर्मी अपना उल्लू सीधा

1605
02:05:24,680 --> 02:05:28,720
करना चाह रहे हैं यहां पर उनको विधर्मी कहा जा रहा है जो शबरी माता

1606
02:05:28,720 --> 02:05:32,760
के भीलनी होने का फायदा उठा रहे हैं अगर वह भीलनी

1607
02:05:32,760 --> 02:05:38,400
है तो

1608
02:05:38,400 --> 02:05:42,320
लो ठीक

1609
02:05:42,320 --> 02:05:46,760
है यहां पर कोई प्रश्न कर रहा है कि तुम मधवा संप्रदाय

1610
02:05:46,760 --> 02:05:50,920
के हो क्या हां सही बात है तो हम

1611
02:05:50,920 --> 02:05:55,000
प्रश्न उन बातो पर कर रहे हैं जो जो इकन क्लेम कर रहा

1612
02:05:55,000 --> 02:05:59,960
है कि हां हमारा संप्रदाय मानता है तब हम प्रश्न उठा रहे हैं

1613
02:05:59,960 --> 02:06:04,080
हमारा संप्रदाय उसकी जो गुरु गद्दी है उस पर बैठने वाला यह कह रहा है तब हम उस

1614
02:06:04,080 --> 02:06:08,120
पर क्वेश्चन कर रहे हैं मगर तुम यहां पर उस बा उस तत् को उ भाषित कर

1615
02:06:08,120 --> 02:06:12,200
रहे हो जिस तत्व को उस परंपरा का जो जगतगुरु है सार्वभौम

1616
02:06:12,200 --> 02:06:16,680
गद्दी है सर्वोच्च गद्दी है व स्वीकार नहीं कर रहा है समझ ग ये अंतर

1617
02:06:16,680 --> 02:06:20,880
है हम उन त पर बात नहीं करते ईश्वर कृष्ण

1618
02:06:20,880 --> 02:06:25,640
और अल्लाह एक तो उनके अधिकृत व्यक्ति के पास गए जाकर के कमिट कराया

1619
02:06:25,640 --> 02:06:29,640
तुम जाकर अपनी इन शिक्षाओं को कमिट कराओ ना शंकरा शंकराचार्य के पास जाकर के

1620
02:06:29,640 --> 02:06:35,640
ये पूर्वा चार्य ने ऐसा कहा है वो भीलनी नहीं थी कराया तुमने

1621
02:06:42,480 --> 02:06:46,720
कमिट हम अरे हम नहीं चाहते थे

1622
02:06:46,720 --> 02:06:50,920
गजेंद्र सिंह जी हम नहीं चाहते थे और ये ये पता नहीं

1623
02:06:50,920 --> 02:06:54,960
सुनिए इसका कहना है कि हमने टीआरपी बढ़ाई या इसका कहना है

1624
02:06:54,960 --> 02:06:59,040
कि हमने जो है इसके विरोध में वीडियो बनाया इसने एक बार

1625
02:06:59,040 --> 02:07:03,120
भी यह नहीं सोचा इस व्यक्ति ने कि इसने जो है मट के मट के बारे में अभी

1626
02:07:03,120 --> 02:07:07,120
बोल रहा है पहले इतने दिनों से बोल रहा है इसमें इतनी बुद्धि नहीं है

1627
02:07:07,120 --> 02:07:11,240
कि मैंने कभी इसका ऐसे अलग से वीडियो बना कर के विरोध क्यों नहीं किया था पहली

1628
02:07:11,240 --> 02:07:15,240
बात कि वहां पर जिनके बारे में बोल रहे हैं और व्यक्तिगत

1629
02:07:15,240 --> 02:07:19,240
वो शास्त्रोक्त बातें नहीं है यह सब चल रहा है वहां क्या चल रहा

1630
02:07:19,240 --> 02:07:23,600
है क्या नहीं चल रहा है तो इस बारे में वही व्यक्ति अपना पक्ष प्रस्तुत करें

1631
02:07:23,600 --> 02:07:27,880
जो जिसके बारे में बात हो रही है और अगर वो नहीं कर रहे तो इसमें भी कारण होगा उनका

1632
02:07:27,880 --> 02:07:31,880
अपना क्यों नहीं कर रहे हैं कि वो इनको जो है नहीं देना चाहते हैं

1633
02:07:31,880 --> 02:07:36,160
भाव क्यों नहीं कर रहे हैं कि उनके पास दूसरे कार्य है वो सब सामर्थ

1634
02:07:36,160 --> 02:07:41,080
वान है व अपना करेंगे तो इसको इतनी बुद्धि इसने नहीं लगाई

1635
02:07:41,080 --> 02:07:45,160
कि आज इसने जो विजय श्री के लिए ही बनाया मेरे खंडन के रूप में नहीं टीआरपी के लिए

1636
02:07:45,160 --> 02:07:49,440
नहीं और उसके बाद भी मैंने इसको बारबार अच्छा उसम इसका फेस

1637
02:07:49,440 --> 02:07:53,720
नहीं दिखाया कि वला आवाज चलाई उसके बाद भी मैंने कहा

1638
02:07:53,720 --> 02:07:57,960
उसके बाद भी मैंने कहा भाई मत बढ़ आगे मत बढ़ मत बढ़ मगर नहीं

1639
02:07:57,960 --> 02:08:03,960
इन्हो तो यही चाहिए

1640
02:08:06,560 --> 02:08:10,720
था हो रहा था फी बात बता रहे थे होते शंकराचार्य जी

1641
02:08:10,720 --> 02:08:14,960
तो बताइए साल पले कैसे लगा था और यही सा

1642
02:08:14,960 --> 02:08:18,960
मिनट एक मिनट अभी यहां पर फिर वही बात हो गई अका होते

1643
02:08:18,960 --> 02:08:23,120
शंकराचार्य जी इससे किसी पर कोई नकारात्मक असर पड़ रहा

1644
02:08:23,120 --> 02:08:27,280
है क्या पहली बात इससे तुम केवल यह

1645
02:08:27,280 --> 02:08:31,280
सिद्ध करना चाह रहे हो कि शंकराचार्य कहां कहा गलत है इन सब बातों

1646
02:08:31,280 --> 02:08:35,440
से किसके धर्म ब्रह्म पर फर्क पड़ रहा है किसकी

1647
02:08:35,440 --> 02:08:39,480
निष्ठा खत्म हो जाएगी अगर यह जो तथ्य है कुछ और

1648
02:08:39,480 --> 02:08:43,960
तथ्य हुआ तो 144 नहीं 143 हुआ

1649
02:08:43,960 --> 02:08:48,760
तो तुम गलतिया तुम गलतियां ढूंढ कर के वो बता रहे हो

1650
02:08:48,760 --> 02:08:52,760
कि देखो ये नीचा कैसे है ऊपर कैसे है और गलतियां तुम्हारे अंदर

1651
02:08:52,760 --> 02:08:56,840
भी 50 है और सुनो यह तो पहली बात है दूसरी बात

1652
02:08:56,840 --> 02:09:01,800
है कि शंकराचार्य जी ने वो कहा कि

1653
02:09:01,800 --> 02:09:06,040
वो क्या कहते हैं अपनी ओर से प्रमाणित किया है या कोई चीज पहले से

1654
02:09:06,040 --> 02:09:10,280
फैली हुई है वही वाली बात कि हमने तुम्हें निगरा चार कह दिया तो तुमने मान लिया कि शिवांश

1655
02:09:10,280 --> 02:09:13,040
ने तो हमें प्रामाणिक मान लिया नहीं माना

1656
02:09:13,040 --> 02:09:17,200
भैया प्रमाणिक लोकाचार की दृष्टि से कहा था कि लोग तुम्हें निगरा

1657
02:09:17,200 --> 02:09:21,560
चार के रूप में जानते हैं तो इसलिए कि लोग जान सके मैं किसके बारे में बात करर

1658
02:09:21,560 --> 02:09:25,600
तो मैंने रा चार कहा था और लो उसी तरीके

1659
02:09:25,600 --> 02:09:31,600
से जो चीज फैली हुई है समाज में लोग जो बोल रहे हैं वही उस शब्द का उपयोग

1660
02:09:34,760 --> 02:09:40,760
किया ठीक

1661
02:09:41,440 --> 02:09:45,480
है चलो बढ़ाओ भैया आगे फ कै लग गया साल

1662
02:09:45,480 --> 02:09:49,520
बाद वाला और 2013 वाला 144 साल बाद तो सरकार का रेगुलेट किया हु उत्तर प्रदेश सरकार

1663
02:09:49,520 --> 02:09:53,560
का अधिकार डॉक्यूमेंट कह रहा है कि 2013 वाला भी था क्या था महाकथा 144 साल

1664
02:09:53,560 --> 02:09:58,160
वाला महा श बाकी बा ी और 192 में भी कहा गया था

1665
02:09:58,160 --> 02:10:01,400
साल

1666
02:10:01,400 --> 02:10:05,680
लगा इसी से निष्ठा बढ़ेगी लोगों की सनातन

1667
02:10:05,680 --> 02:10:09,680
के सिद्धांतों में के कुंभ 144 वाला है 143 वाला है

1668
02:10:09,680 --> 02:10:14,920
कि कैसा वाला है इसी से वो क्या कहते हैं निष्ठा भरेगी

1669
02:10:14,920 --> 02:10:18,960
सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म से नहीं बढ़ेगी ईश्वर वही

1670
02:10:18,960 --> 02:10:22,520
है जो कुछ भी कर सकता है से नहीं बढ़ेगी

1671
02:10:22,520 --> 02:10:27,480
संसार का कोई व्यक्ति नास्तिक नहीं है फिर वो भले ही संसार का प्रत्येक मनुष्य

1672
02:10:27,480 --> 02:10:31,600
भगवान कोई ढूंढ रहा है फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक क्यों ना हो इस इन

1673
02:10:31,600 --> 02:10:35,920
इन सिद्धांतों से निष्ठा नहीं बढ़ेगी इससे बढ़ेगी कि 143

1674
02:10:35,920 --> 02:10:39,960
का 144 वा है इससे बढ़ेगी

1675
02:10:39,960 --> 02:10:44,440
निष्ठा उसी में विवाद करो कि बुद्ध

1676
02:10:44,440 --> 02:10:48,840
वो वो भी बुद्ध विष्णु भगवान के थे कि नहीं थे इससे बढ़ेगी

1677
02:10:48,840 --> 02:10:52,880
निष्ठा इससे बढ़ेगी निष्ठा कि क्या कहते हो सबरी माता ब्राह्मण

1678
02:10:52,880 --> 02:10:57,440
थी की भीलनी इससे बढ़ेगी निष्ठा उनसे उन बातों पर बात करो

1679
02:10:57,440 --> 02:11:01,440
इन बातों से तुम केवल लोगों को लोगों के खंड आर्थ बोलते हो और

1680
02:11:01,440 --> 02:11:05,920
कुछ नहीं और यह बातें आ क्यों रही है हमारे बीच में क्यों आ रही भाई

1681
02:11:05,920 --> 02:11:10,080
तुमने शंकराचार्य जी के लिए जब यह कहा कि चारों शंकराचार्य को ले आओ

1682
02:11:10,080 --> 02:11:14,160
उनके य नाच नचा लोर भगवता अंद की उसमें नहीं होगा यह सब तो क्यों कहा

1683
02:11:14,160 --> 02:11:20,160
था वहा शंकराचार्य ने क्या गलत किया था उस समय

1684
02:11:21,800 --> 02:11:25,840
तुमने तो पूरे शंकराचार्य यानी शंकर संप्रदाय पर उंगली उठाई थी

1685
02:11:25,840 --> 02:11:31,840
वहा तो केवल पुरी वालों की बात नहीं

1686
02:11:32,960 --> 02:11:37,200
थी जो बारबार उसको प्र कर रहे थे को और क गुरुजी की

1687
02:11:37,200 --> 02:11:41,360
म कर मत निदा नहीं कर रहे भाई अधर्म को र् को र् सत्य को सत्य कना असत्य

1688
02:11:41,360 --> 02:11:45,800
को असत्य निदा नहीं होती न होता है औरन है

1689
02:11:45,800 --> 02:11:50,240
आ पुरुष को य थ ल के माध्यम होता है

1690
02:11:50,240 --> 02:11:54,320
थ श को प्राप्त करवाता है यव का चचन था

1691
02:11:54,320 --> 02:11:57,320
12 12 144

1692
02:11:57,320 --> 02:12:01,520
था अगर 12 12 है तो 144 है

1693
02:12:01,520 --> 02:12:06,320
यह बोलते हुए बोला

1694
02:12:06,320 --> 02:12:10,440
ना चलो कहा जाता है और आत वाक्य को प्रमाण माना जाता

1695
02:12:10,440 --> 02:12:14,560
है आगे सुनते है क्या है सुनिए अगर ऐसी

1696
02:12:14,560 --> 02:12:18,600
बात करेंगे तो अी बना बना एकदम और सुनिए आप लि बना तो ऐी

1697
02:12:18,600 --> 02:12:24,600
मत बनाएगा आप लिस्ट में बोलते जाइएगा हम लाइ में साथ रखिएगा फिर साथ बोलते एक बार प्रयास करके

1698
02:12:28,000 --> 02:12:32,160
देखिए लाइव आ जाना ठीक है

1699
02:12:32,160 --> 02:12:36,800
लिस्ट तो बनाएंगे ही वो अलग से एक वीडियो बनाएंगे बाकी लाइव आ

1700
02:12:36,800 --> 02:12:40,880
जाना चलो कोई शबद नहीं बोलेंगे बक समता से बात करेंगे

1701
02:12:40,880 --> 02:12:45,000
कोशिश कीजिए हम अपने आप से आपको पूराम देते बनाइए लेकिन सुनिए लिस्ट

1702
02:12:45,000 --> 02:12:49,080
पर वीडियो मत बनाएगा लिस्ट को रखिएगा हमको लाइव बुलाएगा और सीधे-सीधे बोलते जाइएगा लिस्ट

1703
02:12:49,080 --> 02:12:53,080
बताएगा ये टॉपिक है आपने कहा उतर दे ड

1704
02:12:53,080 --> 02:12:57,160
बिल्कुल लाइव होगा जो अन्य जो ऐसे मेरे लिए सम्माननीय है उ आचार्यों

1705
02:12:57,160 --> 02:13:01,080
की निंदा भी मैंने आपके मुख से सुनी निंदा का मतलब है ंड

1706
02:13:01,080 --> 02:13:06,480
नहीं छोटी उम्र के छोटी आयु है आपकी अरे छोटी आयु केलत

1707
02:13:06,480 --> 02:13:10,480
वाल्डर मर्ख व्यक्ति भी बूढ़े होते हैं शराबी भी बूढ़ा होता है जुवारी भी बूढ़ा होता

1708
02:13:10,480 --> 02:13:14,560
है बचारी भी बूढ़ा होता है ब्रह्मचारी भी बूढ़ा होता है अग्निहोत्री भी बूढ़ा होता है जुवारी भी बूढ़ा होता है उम्र से कुछ

1709
02:13:14,560 --> 02:13:18,640
नहीं होता है और ही बात छोटी उम्र वाली ना तो स्वामी कत्र जी जिस समय से शास्त्र कर रहे थे अपने से बड़ी उम्र वालो

1710
02:13:18,640 --> 02:13:21,320
से कर रहे थे तुम्हारे पुरी के शंकराचार्य जी जिस समय

1711
02:13:21,320 --> 02:13:26,080
श कर रहे थे ना तो वो तूतक नहीं बोल रहे थे

1712
02:13:26,080 --> 02:13:30,600
शास्त्रार्थ कर रहे थे ना तो वो लोकाचार को भूल नहीं गए

1713
02:13:30,600 --> 02:13:34,880
थे समझे जो तुम करते हो अगना मतना सब कुछ अपने वीडियो

1714
02:13:34,880 --> 02:13:39,280
में चलो शंकराचार्य बैठे हुए थे

1715
02:13:39,280 --> 02:13:43,720
का कर रहे थे आयु वाली बात है वो भी सुन लो आयु

1716
02:13:43,720 --> 02:13:48,480
वाली बात को ही आधार बनाकर नहीं बोला है दूसरी चीजें भी बोली

1717
02:13:48,480 --> 02:13:52,520
है आयु वाली बात को भी सोचा जा सकता है हमने यह

1718
02:13:52,520 --> 02:13:56,520
कहा है आयु वाली बात हम भी जानते

1719
02:13:56,520 --> 02:14:00,640
हैं कि कितने वर्ष का जो सूद है वो कितने छोटे छोटी आयु वाले

1720
02:14:00,640 --> 02:14:04,720
ब्राह्मण के समान होता है मगर वह भी एक बात हो

1721
02:14:04,720 --> 02:14:08,760
सकती है और दूसरी बात अगर वो लोग ऐसे हैं तो तुम मंच क्यों

1722
02:14:08,760 --> 02:14:12,880
साझा कर रहे हो उनके साथ जाकर के वहा और जब जा रहे हो तो क्यों नहीं कह रहे हो किय

1723
02:14:12,880 --> 02:14:16,920
जो है गधी का दूध पीने वालों के पैरों में जो है लटता है इसलिए मैं य मंच साझा

1724
02:14:16,920 --> 02:14:22,920
नहीं करूंगा मीठा मीठा गब गब कड़वा कड़वा थू

1725
02:14:23,400 --> 02:14:28,280
यह कह रहे हैं लाइव कर लो उनसे

1726
02:14:28,280 --> 02:14:32,400
हां लाइव कर लेंगे ना हमने कह तो दिया है कल कि

1727
02:14:32,400 --> 02:14:37,080
आओ जहां से शुरू हुआ है वहीं से शुरू करो करेंगे लाइव अब

1728
02:14:37,080 --> 02:14:41,160
चलो भैया ओ में बड़े होने की बात य नहीं चल रही है वोटर

1729
02:14:41,160 --> 02:14:45,160
का राजसभा का चुनाव नहीं लड़ना कि 25 साल नहीं हु 35 साल नहीं हुआ और से

1730
02:14:45,160 --> 02:14:49,240
बात करना मरे हुए लोगों के लिए जो मर चुके हैं मरने के बाद कोई बैर नहीं रह जाता फिर भी ये सब

1731
02:14:49,240 --> 02:14:53,680
निने सुनी करो रहे के आधार पर

1732
02:14:53,680 --> 02:14:57,800
तो पहली बात तोय हो आप इन सब चीजों के लिए अगर पश्चा प्रकट

1733
02:14:57,800 --> 02:15:03,400
करते तो हमारी चर्चा देखने लोग को मिल

1734
02:15:03,400 --> 02:15:07,560
पाए हम इधर अ प नि मम केज में है और भाई

1735
02:15:07,560 --> 02:15:12,040
साब हमसे पश्चाताप कर माफी मंगवा रहे सबसे बा

1736
02:15:12,040 --> 02:15:18,040
आ स्वामी जी की जय हो अरे नहीं भैया रही

1737
02:15:18,680 --> 02:15:23,040
है विज्ञापन किसका रहा है शाम को लीगल नोटिस मिला है विज्ञापन ऑनला legal.com

1738
02:15:23,040 --> 02:15:27,080
रहा है जिस विषय पर आपने हम लोग चर्चा करेंगे तो ये चर्चा का वो

1739
02:15:27,080 --> 02:15:31,120
विषय हो ही नहीं सकता जिस पर हम लोग सार्वजनिक रूप से बात करें ये मैं आगे भी बताऊंगा इसको

1740
02:15:31,120 --> 02:15:35,240
थोड़ा सा ज्यादा फास्ट कर द क्या बहुत लेट कर रहा है बंदा इसको कितने में स्पीड में चलाऊ मैं सवा

1741
02:15:35,240 --> 02:15:39,520
गुना अधिक में चलाता हूं सनिक मंच किया च करता

1742
02:15:39,520 --> 02:15:43,600
यदि आपको शंकर परंपरा के सिद्धांतों द्वारा प्रचारित होने वाला विषय

1743
02:15:43,600 --> 02:15:49,600
है यानी आ मल है सर्वशक्ति

1744
02:15:51,820 --> 02:15:57,820
[हंसी]

1745
02:16:00,520 --> 02:16:04,600
सता का रहा हैय हैय ये नहीं

1746
02:16:04,600 --> 02:16:08,600
क रहेर प्रमान कर बड़े

1747
02:16:08,600 --> 02:16:12,680
नामना य निर क्या कर उनके शिष्य से बात कर उस ले

1748
02:16:12,680 --> 02:16:18,680
नहीं हैलो बासे चक में सब

1749
02:16:21,040 --> 02:16:25,160
करो तो फिर जब तुम आचार्यों से शास्त्रार्थ करने के

1750
02:16:25,160 --> 02:16:30,320
ही योग्य हो तो क्यों उनके शिष्यों को कह रहे हो कि भैया लाइव चर्चा कर लो

1751
02:16:30,320 --> 02:16:34,440
फिर और जब अगर कह रहे हो तो फिर जो दूसरे आचार्यों के शिष्य तुम्हे

1752
02:16:34,440 --> 02:16:38,680
ललकार रहे हैं तो बहाने क्यों बना रहे हो कमजोर पक्ष

1753
02:16:38,680 --> 02:16:42,840
है ना इसलिए

1754
02:16:42,840 --> 02:16:46,840
चलो चलो श से बात करर से बात नहीं करेंगे चलो भैया ठीक

1755
02:16:46,840 --> 02:16:51,280
है निग चार्य से बात नहीं करेंगे क्योंकि निर योग्य नहीं गाली बगता है ना भैया लेकिन निर श से बात करेंगे

1756
02:16:51,280 --> 02:16:54,200
अच्छा ठीक

1757
02:16:54,200 --> 02:16:58,840
है निगरा चार को अयोग्य कहां कहा

1758
02:16:58,840 --> 02:17:03,440
है और अगर कहा भी है तो क्या हीनता के उसमें कहा

1759
02:17:03,440 --> 02:17:07,760
है यही तो हम लोग दिन और रात इन लोगों को बताते रहते हैं जो वर्णाश्रम

1760
02:17:07,760 --> 02:17:11,920
धर्म के ऊपर कटाक्ष करने आते हैं कि नीच शब्द का जो उपयोग

1761
02:17:11,920 --> 02:17:16,240
है वह व्यवस्था मूलक है घृणा मूलक

1762
02:17:16,240 --> 02:17:18,600
नहीं

1763
02:17:18,600 --> 02:17:22,800
है हमारी स्थिति नहीं आपने इतना

1764
02:17:22,800 --> 02:17:27,200
पर्याप्त कर दिया था गुरु का विरोध कि हमारी स्थिति नहीं थी कि हम आपके साथ मंचन

1765
02:17:27,200 --> 02:17:31,880
करें और हम किसी को दिखाना यह चाहते थे कि अगर कभी

1766
02:17:31,880 --> 02:17:36,160
भगवता अंद और शिवांस द्विवेदी एक मंच पर आए तो सौहार्द पूर्ण

1767
02:17:36,160 --> 02:17:41,080
आए लड़ने ना आए और यदि

1768
02:17:41,080 --> 02:17:45,080
लड़ाई का लड़ाई की चीज है प्रतिस्पर्धा की चीज है तो फिर वह एक

1769
02:17:45,080 --> 02:17:51,080
साथ ना दिखाई दे यह भाव था हमारा

1770
02:17:54,960 --> 02:17:59,040
चलो वि पर हमारी क्यों आप हो इ विश् पर हमारी आपत्ति क्यों होगी या क्या

1771
02:17:59,040 --> 02:18:03,200
इ विषयों परही आपके बनाए है क्या आपने

1772
02:18:03,200 --> 02:18:07,720
सबरी वाला मामला है सुनि सबरी वाला मामला है याद आया

1773
02:18:07,720 --> 02:18:11,840
फेसबुक के जो आचार्य हैं फेसबुक पर जो आचार्य हैं सनमार्ग

1774
02:18:11,840 --> 02:18:15,960
वाले वहां से क्यों भाग निकले क्यों उत्तर नहीं दिया अभी वो वाला स सारी

1775
02:18:15,960 --> 02:18:20,120
चीज आएंगी अब चलते रहो आगे यह

1776
02:18:20,120 --> 02:18:24,320
भी तो सोचो यहां शंकर संप्रदाय है पूरा और तुम

1777
02:18:24,320 --> 02:18:28,600
हो लुप्त अप प्रामाणिक चीजों को प्रामाणिक सिद्ध

1778
02:18:28,600 --> 02:18:31,920
करने में लगे हो

1779
02:18:31,920 --> 02:18:37,260
ना

1780
02:18:37,260 --> 02:18:43,260
[हंसी]

1781
02:18:44,160 --> 02:18:48,240
चलो वीडियो की स्पीड जो है नॉर्मल कर दो क्योंकि

1782
02:18:48,240 --> 02:18:54,040
ये कुछ कम कर दो डेढ़ की स्पीड कर कितनी है

1783
02:18:54,040 --> 02:19:00,040
अभी लगा भाई सेट आपका यही थाना तो ये वाला

1784
02:19:00,920 --> 02:19:05,440
च है श्वर धर्म विषय पर चर्चा तो ये नहीं क रहे

1785
02:19:05,440 --> 02:19:09,640
नि कर निर प्रमान से सा कर बड़बड़े

1786
02:19:09,640 --> 02:19:13,840
नामना ये निहार क्या करें उनके शिष्य से बात कर मर उस लेवल

1787
02:19:13,840 --> 02:19:17,600
के नहीं

1788
02:19:17,600 --> 02:19:22,200
है और पतो के चरण में ल रहते र एक मिनट कहां

1789
02:19:22,200 --> 02:19:26,560
कौन सा कौन सी गद्दी है कौन सी परंपरा है इससे पहले कौन से आचार्य

1790
02:19:26,560 --> 02:19:30,800
ने कौन सा वो कर दिया प्रस्थानत्रई पर भाष्य इनके भाष्य क्या है इनका

1791
02:19:30,800 --> 02:19:34,800
वो सिद्धांत क्या है वो सब कुछ नहीं है निगरा चार बहुत बड़े लेवल के

1792
02:19:34,800 --> 02:19:38,840
है वो सिर्फ आचार्यों से शास्त्रार्थ करेंगे और उनके शिष्यों को उनके

1793
02:19:38,840 --> 02:19:42,960
ऐसे शिष्यों को जो गोलगप्पे खाते हैं ऐसे शिष्यों को जिन पर ात

1794
02:19:42,960 --> 02:19:47,000
सधा का दोष है ऐसे शिष्यों को जिनका जो जने क्या

1795
02:19:47,000 --> 02:19:51,120
कहते विवाह के समय हुआ है उनको कहेंगे कि हम लाइव करना चाहते हैं

1796
02:19:51,120 --> 02:19:55,560
हमसे लाइव कर लीजिए हमसे लाइव कर ले उनको कह दोगे

1797
02:19:55,560 --> 02:19:59,760
है ना जो गुरुकुल में जिन्होंने पढ़ाई नहीं की उनको लाइव

1798
02:19:59,760 --> 02:20:04,520
क दोगे हमसे लाइव कर लो

1799
02:20:04,520 --> 02:20:09,160
चलो बात नहीं करलो ठीक है निचा से बात नहीं करेंगे योग नहीं ता

1800
02:20:09,160 --> 02:20:13,200
लेकिन बात करेंगे अच्छा ठीक है अगर आप इ विश्

1801
02:20:13,200 --> 02:20:17,320
पर तो तो इ विश् पर हमा क्यों आति होग इ विषयों पर हमारी आपत्ति क्यों होगी या क्या इ

1802
02:20:17,320 --> 02:20:21,400
विषयों परही आप बनाए है क्या आपने रावा का इंटर लिया था ईश्वर वाले विषय

1803
02:20:21,400 --> 02:20:26,240
पर लिया थान का इंटरव्यू लिया स शक्तिमान और ये सब ब्रम के अवतार पर लिया था

1804
02:20:26,240 --> 02:20:30,360
और विजया किस धर्म के सिद्धांत पर आप चर्चा कर रहे थे उस इमेज क्लिनिंग आपने सवा प घंटे की लाइव

1805
02:20:30,360 --> 02:20:35,200
निकाल दी थी वहा कौन से ब्रम स प करो पॉज करो पॉज करो पॉज

1806
02:20:35,200 --> 02:20:39,280
करो अगर वीडियो लिया था तो हमने ऐसा तो

1807
02:20:39,280 --> 02:20:43,840
नहीं है कि हमने अन्य विषयों को छोड़ ही दिया है हम तो यह बता रहे हैं कि

1808
02:20:43,840 --> 02:20:48,120
यह हमारे मूल जो वो है जो जिसमें से आप चुन सकते हो अगर इसके इतर

1809
02:20:48,120 --> 02:20:52,120
भी अगर कोई और ऐसा विषय है जिसको को सार्वजनिक रूप से दिखाना गलत

1810
02:20:52,120 --> 02:20:56,680
नहीं है तो वो भी लेंगे मगर हमने आपको विकल्प दिए थे जो हमारी जानकारी में थे

1811
02:20:56,680 --> 02:21:00,760
मूल इसका मतलब यह थोड़ी ना कि अगर और कोई बात आप लाओगे तो उस

1812
02:21:00,760 --> 02:21:04,760
पर चर्चा नहीं होगी व चर्चा करने योग्य

1813
02:21:04,760 --> 02:21:09,160
नहीं है क्यों हमने काफी सारी चीजों पर बात की है क्यों हमने क्या

1814
02:21:09,160 --> 02:21:13,240
गोपाष्टमी के पूजन की बात नहीं की गोपाष्टमी को सेलिब्रेट करने के लोगों

1815
02:21:13,240 --> 02:21:16,280
को नहीं

1816
02:21:16,280 --> 02:21:20,560
सिखाया इस पर हमने बात नहीं की एक वो भाई साहब आए थे कोल

1817
02:21:20,560 --> 02:21:24,720
ता से जो एक

1818
02:21:24,720 --> 02:21:28,840
इकोनॉमिकली कुछ उन्होंने व्याख्या बताई थी कुछ अच्छी चीजें बताई थी उन्होंने धर्म की

1819
02:21:28,840 --> 02:21:33,040
और वर्णाश्रम के संबंध में भी तो उन्होंने भी कुछ अलग हट कर के बातें

1820
02:21:33,040 --> 02:21:37,080
थी वोह वीडियो अलग हट कर के था हमने बातें की ऐसा

1821
02:21:37,080 --> 02:21:41,120
नहीं है कि अगर हम यह कह रहे सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और

1822
02:21:41,120 --> 02:21:45,160
शाश्वत धर्म तो इन विषयों में यदि आपको हमसे चर्चा करनी

1823
02:21:45,160 --> 02:21:49,200
हो तो आप आ जाइए तो ऐसा नहीं है कि यदि आप कोई और विषय

1824
02:21:49,200 --> 02:21:53,240
अगर दो हमें विकल्प के रूप में तो वह

1825
02:21:53,240 --> 02:21:57,320
नहीं लिया जाएगा मगर आप जो विषय रख रहे हैं वह विषय ऐसा नहीं

1826
02:21:57,320 --> 02:22:01,560
है जिस पर सार्वजनिक चर्चा की जाए तब हम आपको विकल्प हमारे पास जो उपलब्ध

1827
02:22:01,560 --> 02:22:05,800
है वह दे रहे हैं कि भैया यह मेरे यह मूल है

1828
02:22:05,800 --> 02:22:09,840
बाकी इस और राघवाचार्य जी के य अगर हम बात कर रहे हैं

1829
02:22:09,840 --> 02:22:14,120
तो क्या सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म में से एक बात नहीं है

1830
02:22:14,120 --> 02:22:18,120
क्या वर्णाश्रम धर्म पर बात नहीं हुई राघवाचार्य जी के वीडियो में लो

1831
02:22:18,120 --> 02:22:22,360
आ गया विषय वर्णाश्रम धर्म की तो व्याख्या हुई है

1832
02:22:22,360 --> 02:22:26,360
वहां तो शाश्वत धर्म की व्याख्या हुई ना कि तुम शाश्वत जो धर्म चला आ

1833
02:22:26,360 --> 02:22:30,240
रहा है उसको बदलने की कोशिश क्यों कर रहे

1834
02:22:30,240 --> 02:22:31,680
हो

1835
02:22:31,680 --> 02:22:35,680
हां और जो ये

1836
02:22:35,680 --> 02:22:40,080
क्या कहते हैं अक्षज गंद है वहां धर्म की व्याख्या नहीं हुई पूछा नहीं

1837
02:22:40,080 --> 02:22:45,000
कि वो जो अद्वैत में भक्ति नहीं है सब क्या है धर्म की व्याख्या ही तो हो रही है

1838
02:22:45,000 --> 02:22:49,840
कैसी बातें कर रहे हो मन चले हो क्या

1839
02:22:49,840 --> 02:22:54,080
पता नहीं चलो

1840
02:22:54,080 --> 02:23:00,080
भाई च नहीं आया टाम गा थाय

1841
02:23:01,400 --> 02:23:05,200
वाला आवान का

1842
02:23:05,200 --> 02:23:09,360
लिए चैनल लेकि आया जान

1843
02:23:09,360 --> 02:23:12,320
गलत

1844
02:23:12,320 --> 02:23:16,680
होगा होगा तो कोई बता दीजिएगा यह तरीका सही होता है

1845
02:23:16,680 --> 02:23:20,960
यह तरीका सही होता है यह है संभावना संभावना

1846
02:23:20,960 --> 02:23:24,960
जन्य बातें जब हम करते हैं तो हमें यह तरीका अपनाना चाहिए ना कि आरोप

1847
02:23:24,960 --> 02:23:29,040
लगाना चाहिए गंभीर मा मामले तो उस पर तो बोलना ही नहीं चाहिए तब तक जब तक

1848
02:23:29,040 --> 02:23:33,360
हमनी जांच पूरी ना कर ले यह तरीका है ऐसा तरीका अपनाना

1849
02:23:33,360 --> 02:23:37,920
चाहिए जो अहंकार वश तुम नहीं अपना पाए या फिर लोभ वश करियर बनाना है ना

1850
02:23:37,920 --> 02:23:43,200
टीआरपी एल्गोरिदम चलो प्ले करो

1851
02:23:43,200 --> 02:23:47,240
उ बात कर लीजिए जिस आधार पर आपने अपने मूल उद्देश्य

1852
02:23:47,240 --> 02:23:51,840
से इ जाते न का इंटर राघवाचार्य जी का लिया और विजया ब दिया है

1853
02:23:51,840 --> 02:23:55,880
व हमसे संपर्क कर ले और जो है लाइव कर ले ठीक है हमने कल भी

1854
02:23:55,880 --> 02:24:00,120
बता दिया था हमने कल भी बता दिया

1855
02:24:00,120 --> 02:24:04,120
था चलो हमारा भी कर लीजिए इस पॉलिसी भंग नहीं

1856
02:24:04,120 --> 02:24:09,760
होगी ना तो आप उसको सकते मतलब

1857
02:24:09,760 --> 02:24:13,760
कोके साथ कर सते

1858
02:24:13,760 --> 02:24:17,760
उस लिए होगा

1859
02:24:17,760 --> 02:24:22,000
सते

1860
02:24:22,000 --> 02:24:26,280
अभी देखो क्या कह रहा था रोको जरा एक मिनट अभी क्या कह रहा था

1861
02:24:26,280 --> 02:24:32,280
निगरा चार अन्यों के शिष्यों के साथ क्यों करे आचार्यों के साथ

1862
02:24:32,440 --> 02:24:36,720
करेंगे तो पहली बात तो य शिष्य के साथ क्यों कर रहे हो दूसरी

1863
02:24:36,720 --> 02:24:40,760
बात कि तुमने अपना कोई शिष्य

1864
02:24:40,760 --> 02:24:44,840
नहीं बनाया क्या जो खड़ा होकर के तुम्हारी ओर से बात कर सके तुम

1865
02:24:44,840 --> 02:24:48,960
तो राजेंद्र दास जी महाराज के सरीखे हो तुम तो शंकराचार्य

1866
02:24:48,960 --> 02:24:53,120
के सरीखे हो कोई शिष्य बनाया होगा ना तुमने

1867
02:24:53,120 --> 02:24:57,720
जो तुम्हारी तरफ से बात कर ले तो सैद्धांतिक चर्चा के लिए भेज देते

1868
02:24:57,720 --> 02:25:02,920
कोई अगर दिक्कत है वैसे मुझे पता नहीं है दिक्कत है कि

1869
02:25:02,920 --> 02:25:07,120
नहीं ठीक है तो मुझे तो लगता नहीं है तुम्हारा

1870
02:25:07,120 --> 02:25:11,640
कोई ऐसा शिष्य जिसमें इतना दम खम हो है क्या

1871
02:25:11,640 --> 02:25:15,680
कोई पूरी के शंकराचार्य जी के तो बहुत शिष्य जो तुमसे डायरेक्ट बात कर

1872
02:25:15,680 --> 02:25:19,920
सकते हैं बहुत से शिष्य है फिलहाल

1873
02:25:19,920 --> 02:25:24,120
तो मैं ही करूंगा आ जाओगे तो अबब लाइव वाइव मत करना

1874
02:25:24,120 --> 02:25:28,120
ड्रामा बाजी मत करना अब तो सीधे आओ कह दिया ना इसमें भी तुमने

1875
02:25:28,120 --> 02:25:32,000
कहा है कि लाइव में ले लेना

1876
02:25:32,000 --> 02:25:36,000
मुझे यह पाखंड का खंडन जो जन्म दिया है पाखंड के

1877
02:25:36,000 --> 02:25:40,240
खंडन को इसको भेजो क्या इसमें नहीं है क्या

1878
02:25:40,240 --> 02:25:45,480
तुम्हारा तुम्हारे ज्ञान से संतुष्ट नहीं है क्या य व्यक्ति जो केवल कमेंट कर रहा है इसको भेज

1879
02:25:45,480 --> 02:25:49,840
दो ये आ भाई तुम्हारे

1880
02:25:49,840 --> 02:25:54,000
तुम अपने आचार्य से क्यों मुझे बात करवाना चाहते हो हालांकि उसके लिए मैं तैयार हो गया हूं

1881
02:25:54,000 --> 02:25:58,200
मगर आचार्य से क्यों बात करवाना चाहते हो आचार्य खुद कह रहा है मैं शिष्य से बात नहीं करता तुम

1882
02:25:58,200 --> 02:26:02,240
उसके शिष्य हो ना आ जाओ और नाम क्यों छुपा रहे हो मुह

1883
02:26:02,240 --> 02:26:06,440
काला है क्या बचपन में कुछ ऐसा हो गया था क्या

1884
02:26:06,440 --> 02:26:10,560
या माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूर नहीं पिलाया जो आ नहीं रहे हो मुह

1885
02:26:10,560 --> 02:26:16,560
क्यों छुपाया हुआ है डर है ना

1886
02:26:16,760 --> 02:26:20,800
डर अच्छा ये डर होना चाहिए मगर फिर उनसे मत बड़ो जा

1887
02:26:20,800 --> 02:26:24,920
कर के जो अपने जो अपना

1888
02:26:24,920 --> 02:26:28,960
सब कुछ त्याग करके अपना बिल्कुल पूरा सब समर्पण भाव समर्पण भाव के साथ बाहर

1889
02:26:28,960 --> 02:26:33,400
निकले हैं उनको ही ढूंढो अपने लिए और वरना हो

1890
02:26:33,400 --> 02:26:38,360
जिगरा हो तो हो निगरा चार के असली शिष्य मैं निगरा चार है ना

1891
02:26:38,360 --> 02:26:42,600
भगवता अंद हो ना असली शिष्य आ

1892
02:26:42,600 --> 02:26:46,680
जाना अब तो खैर तुम्हें शर्म आनी

1893
02:26:46,680 --> 02:26:50,760
चाहिए कि तुम्हारे जो आचार्य हैं वो कह रहे हैं कि हम जो है है

1894
02:26:50,760 --> 02:26:55,000
शिष्यों से वो नहीं करेंगे तुमको शर्म आनी चाहिए जो ये बोल रहे होगे हमारे आचार्य तुमसे

1895
02:26:55,000 --> 02:27:00,120
चर्चा करेंगे तुम्हारे आचार्य खुद कह रहे हैं शिष्यों के साथ चर्चा नहीं

1896
02:27:00,120 --> 02:27:04,160
करता तुम अपने आचार का ही खंडन कर रहे हो और

1897
02:27:04,160 --> 02:27:10,160
बोलो और तुम क्यों नहीं आ

1898
02:27:10,760 --> 02:27:15,600
रहे आजा अभी

1899
02:27:15,600 --> 02:27:19,600
आ करूं तेरा पाखंड का खंडन और वरना

1900
02:27:19,600 --> 02:27:22,520
एक काम कर

1901
02:27:22,520 --> 02:27:27,160
विषय ले ले और अपने आचार्य के पास चला जा और बैठ जा

1902
02:27:27,160 --> 02:27:31,320
अभी तक तू तैयार नहीं हुआ पाया हो पाया होगा तो बैठ जा और

1903
02:27:31,320 --> 02:27:35,360
भगतान से कहूंगा कि अपने शिष्यों को खड़ा करो ऐसा

1904
02:27:35,360 --> 02:27:39,560
बनाओ जिससे कि कोई निगरा चार्य जैसा कोई

1905
02:27:39,560 --> 02:27:44,520
लुप्त संप्रदाय का भगतान है

1906
02:27:44,520 --> 02:27:48,800
ना जो अपना बहुत बड़ा अहंकार रखता हो उसके मन में भी यह भावना

1907
02:27:48,800 --> 02:27:51,400
पैदा कर दे

1908
02:27:51,400 --> 02:27:55,400
कि भाई मैं मैं तुमसे चर्चा करना चाहता हूं ऐसे शिष्य बनाओ तब

1909
02:27:55,400 --> 02:27:59,640
करना आचार्य से जाकर शास्त्रार्थ जेब

1910
02:27:59,640 --> 02:28:05,640
में नहीं है टला टिल्ला मांग र लाल किल्ला

1911
02:28:17,000 --> 02:28:22,760
[हंसी]

1912
02:28:22,760 --> 02:28:27,000
करो जिसको भी आना है ना जो भी ये सब बात कर रहे हैं

1913
02:28:27,000 --> 02:28:31,360
कि क्या मुझे जो है तुम यह हो जाए वो तुम लोग संतुष्ट

1914
02:28:31,360 --> 02:28:36,480
हो ना उसके सिद्धांतों से उस व्यक्ति के वक्तव्य

1915
02:28:36,480 --> 02:28:40,640
से तो आ जाओ तुम क्यों नहीं आ रहे

1916
02:28:40,640 --> 02:28:44,680
हो संतुष्टि नहीं है क्या डाउट है क्या आ जाओ कर लो अभी के

1917
02:28:44,680 --> 02:28:48,760
अभी वो तो जब करेगा तब करेगा वो भी अपनी बात का खंडन करते हुए

1918
02:28:48,760 --> 02:28:54,760
करेगा वो शिष्यों के साथ वो नहीं करेगा

1919
02:28:56,400 --> 02:29:00,760
चर्चा अजीब बात है भाई

1920
02:29:00,760 --> 02:29:05,480
अभी नंबर लो नंबर दो इनको 7408 30169

1921
02:29:05,480 --> 02:29:11,480
कब आ रहा है बता पाखंड का खंडन तू है ना भगवता आनंद का शिष्य

1922
02:29:12,000 --> 02:29:18,000
आजा आजा

1923
02:29:23,880 --> 02:29:28,080
आओ किसको आना है

1924
02:29:28,080 --> 02:29:32,120
यह नंबर ले लो 74836 इस पर संपर्क कर लो

1925
02:29:32,120 --> 02:29:36,400
चर्चा सुनिश्चित कर लो जितने लुप्त संप्रदाय के कुल दीपक हैं

1926
02:29:36,400 --> 02:29:40,400
वह सब क्योंकि तुम्हारे आचार्य जो है शिष्यों के साथ चर्चा नहीं

1927
02:29:40,400 --> 02:29:46,400
करते नंबर दो

1928
02:29:48,000 --> 02:29:52,880
74836 संपर्क करो

1929
02:29:52,880 --> 02:29:58,880
चलो प्ले

1930
02:30:13,440 --> 02:30:18,960
करो क्या बोले पीछे करो

1931
02:30:18,960 --> 02:30:23,040
थोड़ा लिंक इसलिए नहीं दे रहे हैं कि पहले जो ये लाइव है

1932
02:30:23,040 --> 02:30:27,040
ना इसका पोस्टमार्टम कर रहे हैं और उसके बाद

1933
02:30:27,040 --> 02:30:31,240
अगर ये तीन घंटे हो चुके चार घंटे हो चुके तो लगातार नहीं करेंगे फिर

1934
02:30:31,240 --> 02:30:35,440
अगली बार करेंगे तो आ जाए पाखंड का खंडन यदि आना चाहता

1935
02:30:35,440 --> 02:30:39,800
है तो बताए कमेंट में उसको हम ले लेंगे अभी के अभी

1936
02:30:39,800 --> 02:30:44,080
समझ गए यह उसके लिए स्पेशल ऑफर है

1937
02:30:44,080 --> 02:30:48,320
वो कमेंट करके बता दे मैं आ रहा हूं उसने

1938
02:30:48,320 --> 02:30:52,640
तो इतने कुकर्म कर रखे होंगे अपने जीवन में जिस कारण से व अपना चेहरा तक नहीं दिखा

1939
02:30:52,640 --> 02:30:56,680
सकता ऐसे तो कुलदीपक है लुप्त संप्रदाय के तो

1940
02:30:56,680 --> 02:31:00,680
लुप्त क्यों नहीं होगा संप्रदाय ऐसे शिष्य खड़ा

1941
02:31:00,680 --> 02:31:05,960
कर रहे हो जो अपना चेहरा ही नहीं कहीं दिखा पा रहे

1942
02:31:05,960 --> 02:31:10,600
हैं सब ऐसे ही है क्या

1943
02:31:10,600 --> 02:31:14,680
कुपोषित अच्छा जिनका धातु निकल चुका है सारा इलाज सब

1944
02:31:14,680 --> 02:31:20,680
लोग करा रहे हैं क्या जो मुंह छुपाए घूम रहे हैं चलो

1945
02:31:20,920 --> 02:31:24,960
कलेजा इतनी देरी से आया कोई व्यक्ति कह रहा है रुको कलेजा इतनी देरी

1946
02:31:24,960 --> 02:31:29,120
से आया मैंने क्या कहा था कम्युनिटी पोस्ट

1947
02:31:29,120 --> 02:31:33,480
में की प्रतिस्पर्धा द्वंद युद्ध

1948
02:31:33,480 --> 02:31:37,760
इत्यादि के बिना आपके साथ दिखना ना दिखना

1949
02:31:37,760 --> 02:31:42,600
निश्चित दूरी बनाना मेरा धर्म है यह बात आप जानते हैं पढ़ो

1950
02:31:42,600 --> 02:31:46,920
संदीप छापोला और तुम आ जाओ अगर तुम हो

1951
02:31:46,920 --> 02:31:52,000
असली तो तुम आ जाओ तुम्हारा तो चेहरा भी दिख रहा है तुम आ

1952
02:31:52,000 --> 02:31:56,200
जाओ फोन नंबर पर व करो फॉर्म भरो और आ जाओ

1953
02:31:56,200 --> 02:32:02,200
और पाखंड के खंडन को अभी भेजो आजा

1954
02:32:06,000 --> 02:32:12,000
भाई हमा बा है संघ कर

1955
02:32:13,720 --> 02:32:17,760
रहे वैचारिक मतभेद नहीं है तुम्हारे तुम व्यक्तिगत होते

1956
02:32:17,760 --> 02:32:21,840
होसे जैसे य देखो जैसे तुम्हारा शिष्य भी

1957
02:32:21,840 --> 02:32:26,040
हो रहा है व्यक्तिगत देखो बताता हूं

1958
02:32:26,040 --> 02:32:32,040
तुम्हें कहां गया अभी एक अश्लील शब्द कहा है किसी

1959
02:32:33,120 --> 02:32:37,800
ने यह देखो यह है तुम्हारे शिष्य

1960
02:32:37,800 --> 02:32:41,880
अब यह यह यहां पर इसने क्या शब्द का उपयोग कर दिया अब

1961
02:32:41,880 --> 02:32:47,680
इसको मैं लाइव लू और इसके साथ सामान्य व्यवहार

1962
02:32:47,680 --> 02:32:51,800
करूं है ना यह तुम्हारा तरीका होगा हमारा नहीं

1963
02:32:51,800 --> 02:32:57,440
भगवता आनंद समझ गए

1964
02:32:57,440 --> 02:33:03,440
चलो चलो

1965
02:33:04,690 --> 02:33:10,690
[हंसी]

1966
02:33:14,240 --> 02:33:18,320
भया पहली बात व औरंगजेब की अगर बात वहां से हो रही है कि शत्रुता

1967
02:33:18,320 --> 02:33:22,320
मट जाती है वो बात के बारे में हम बोल चुके हैं और

1968
02:33:22,320 --> 02:33:26,520
दूसरी बात है कि अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं

1969
02:33:26,520 --> 02:33:30,640
करेगा और फिर वह भले ही शास्त्रों में उसका हमसे मतभेद

1970
02:33:30,640 --> 02:33:34,680
होगा व अपने यहां के शास्त्रों को रखते हुए बात करेगा तो हम उसके साथ

1971
02:33:34,680 --> 02:33:39,480
बात करेंगे मगर तुमने व्यक्तिगत रूप से बहुत सारी टिप्पणियां की है

1972
02:33:39,480 --> 02:33:43,560
और ऐसी कई चीजें की है जिसके कारण हमारा तुम्हारे साथ किसी भी

1973
02:33:43,560 --> 02:33:47,640
तरीके से मंच पर खड़े होना ठीक नहीं है होंगे तो

1974
02:33:47,640 --> 02:33:51,720
विरोध करना चाहिए मुझे अपने कर्तव्य अनुसार मगर क्योंकि विरोध करने

1975
02:33:51,720 --> 02:33:56,040
से दूसरी चीजें प्रभावित होंगी हमारा जो अभियान है वो प्रभावित होगा इसलिए

1976
02:33:56,040 --> 02:34:00,080
उस स्थिति से बचना हमने उचित समझा तो उसको तुमने हमारी कायरता का नाम दिया

1977
02:34:00,080 --> 02:34:02,760
उपहास उड़ाया हमारे मैत्री पूर्ण

1978
02:34:02,760 --> 02:34:06,880
वक्तव्य का तुमने उपास उड़ाया हमारी भावनाओं को तुमने नजर अंदाज किया

1979
02:34:06,880 --> 02:34:11,040
अहंकार में अपनी नशे में चूर कि कोई तुम्हें आज तक

1980
02:34:11,040 --> 02:34:15,040
कुछ बोला नहीं है तोय तुम्हारी भूल

1981
02:34:15,040 --> 02:34:19,080
है ठीक है ये तुम्हारी भूल है तु अपने आप

1982
02:34:19,080 --> 02:34:23,600
को समझते हो ना कि तुम ही हो

1983
02:34:23,600 --> 02:34:27,720
उसने मले राज का नाम लेते हुए मेरा खंडन किया है हमने तुम्हारा खंडन

1984
02:34:27,720 --> 02:34:32,760
नहीं किया था अब करेंगे अब करेंगे नाम

1985
02:34:32,760 --> 02:34:35,040
लेके

1986
02:34:35,040 --> 02:34:39,080
चलो और हा अब लाइव बनाना छोड़ो और

1987
02:34:39,080 --> 02:34:43,360
एक दो दिन में चर्चा सुनिश्चित करो ठीक है लाइव बनाना छोड़ो

1988
02:34:43,360 --> 02:34:47,640
तुमने कह दिया ना हमको लाइव में ले लेना हम लाइव में लेंगे तुम्हें चर्चा सुनिश्चित

1989
02:34:47,640 --> 02:34:53,520
करो अब और आओ विजय से शुरू करो बात

1990
02:34:53,520 --> 02:34:55,720
चलो

1991
02:34:55,720 --> 02:34:59,360
कोने नहीं लेना चा

1992
02:34:59,360 --> 02:35:03,480
र लोग कमेंट करने वाले क्या मूर्ख है क्या सबका

1993
02:35:03,480 --> 02:35:07,720
धातु निकल गया है क्या बाइपोलर के कारण मूर्ख हो क्या

1994
02:35:07,720 --> 02:35:12,960
बोल दिया ना डिबेट के लिए डिस्कशन के लिए बोल दिया

1995
02:35:12,960 --> 02:35:18,000
ना और कैसे बोले कितनी बार बोले

1996
02:35:18,000 --> 02:35:22,280
चलो

1997
02:35:22,280 --> 02:35:28,280
चा आर्य समाज वालो ने तफ शंकराचार्य परंपरा को गाली

1998
02:35:29,480 --> 02:35:34,440
देना तुम्हा गुरु रे गुरु प के गुरु को गाली देनारा

1999
02:35:34,440 --> 02:35:38,440
करियर बना लिया है लेकिन मेरा एक उदाहरण दे दो जब हमने तुम्हारे वर्तमान प आचार्य के

2000
02:35:38,440 --> 02:35:42,760
कुछ एक ब का शास्त्र प्रमाण पूर्वक खंडन या उनकी तात्कालिक भना करने के इ

2001
02:35:42,760 --> 02:35:47,280
जाकर परपरा को गलत निदा न करने प्रस

2002
02:35:47,280 --> 02:35:52,240
करने प्रयास किय बता कि है

2003
02:35:52,240 --> 02:35:56,320
अभी हमने बता दिया ना चारों शंकराचार्य को बुला लो चार करोड़

2004
02:35:56,320 --> 02:35:59,600
रुपए देकर ये क्या है

2005
02:35:59,600 --> 02:36:03,840
ये य क्या है तो तुमने वर्तमान में पूरे शंकर संप्रदाय

2006
02:36:03,840 --> 02:36:07,960
पर ही आक्षेप लगा दिया ना क्या है ये और

2007
02:36:07,960 --> 02:36:12,160
तुम जब मांगा जा रहा है तुम बात केवल पूरी पीठ की कर रहे हो उसमें भी कारण है

2008
02:36:12,160 --> 02:36:17,000
अर्थ लेने के यही तुम्हारी बात गलत सिद्ध हो जाती

2009
02:36:17,000 --> 02:36:21,080
है क्यों अपमान कर रहे हो जब तुम नाचने वालों को सुना रहे

2010
02:36:21,080 --> 02:36:25,160
हो तो दुनिया को यह संदेश क्यों दे रहे हो कि शंकराचार्य की कार्यक्रम

2011
02:36:25,160 --> 02:36:29,200
में नाच गाना हो सकता है मेरे

2012
02:36:29,200 --> 02:36:33,240
कार्यक्रम में नहीं अपने आप को वर्चस्व अपनी अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने की

2013
02:36:33,240 --> 02:36:37,400
कोशिश क्यों कर रहे हो तुलनात्मक वहां दिखाते हुए तुम कह दो नाच

2014
02:36:37,400 --> 02:36:41,440
गाना मत करो सही है गलत बात है मगर तुम्हें

2015
02:36:41,440 --> 02:36:44,840
अपने आप को शंकराचार्य शंकर संप्रदाय से

2016
02:36:44,840 --> 02:36:48,880
ऊपर स्थापित करना है इसलिए ऐसा कर

2017
02:36:48,880 --> 02:36:51,320
रहे हो

2018
02:36:51,320 --> 02:36:57,320
और फिर कह रहे हो शासको के शासक

2019
02:37:00,000 --> 02:37:04,080
है चलो प्ले करो पू

2020
02:37:04,080 --> 02:37:08,160
श शंकर परंपरा को गाली देने का उनके साथ लाइव करने में उनके साथ वीडियो बनाने में उनके साथ डिबेट करने में तुमको कोई

2021
02:37:08,160 --> 02:37:12,360
डर नहीं लगता कोई गुदा भी नहीं लगती कोई संकोच भी नहीं होता कोई सिद्धांत की बात भी आ नहीं आती और उसके

2022
02:37:12,360 --> 02:37:16,480
साथ इतना छोड़ दो सीधे स गुरु अद की बात छोड़ो जो व्यक्ति सीधा सधा

2023
02:37:16,480 --> 02:37:20,560
शंकराचार्य बताकर घूम रहा है वो व्यक्ति अन तुम्हा नहीं माना जा सकता बस

2024
02:37:20,560 --> 02:37:24,960
निचा समस्या तु नि क्या तुमरा सिधांत है भाई प्रकार अ भाई

2025
02:37:24,960 --> 02:37:29,040
अनंद के साथ क्या चर्चा करने गए थे उसको चर्चा

2026
02:37:29,040 --> 02:37:35,040
कहेंगे क्या स्टिंग ऑपरेशन कहेंगे क्या कहेंगे

2027
02:37:35,720 --> 02:37:40,320
उसे यानी कि जो गुप्तचर विभाग होता है वह विभाग

2028
02:37:40,320 --> 02:37:44,480
और जो कोऑर्डिनेटर वाला विभाग होता है वह विभाग दोनों

2029
02:37:44,480 --> 02:37:50,240
एक है

2030
02:37:50,240 --> 02:37:54,240
गुप्तचर का विभाग अलग होता है ठीक है थोड़ी

2031
02:37:54,240 --> 02:37:58,480
सी जानकारिया अपने शोधन करो वो चर्चा करने नहीं गए

2032
02:37:58,480 --> 02:38:02,600
थे वो उसकी सच्चाई लोगों को दिखाने गए थे कि इसकी वास्तविकता

2033
02:38:02,600 --> 02:38:08,160
क्या है और चर्चा वो होती है इसमें दो पक्ष अपने अपने पक्ष रखते

2034
02:38:08,160 --> 02:38:12,400
हैं अगर वहां पर वो स्टिंग ऑपरेशन के दौरान दिखाई

2035
02:38:12,400 --> 02:38:16,560
देने वाला दृश्य चर्चा जैसा दिख रहा है तो वो हो सकता है मगर

2036
02:38:16,560 --> 02:38:22,320
वो है स्टिंग ऑपरेशन चर्चा नहीं

2037
02:38:22,320 --> 02:38:27,880
स्वतंत्र रूप से वो चर्चा नहीं है

2038
02:38:27,880 --> 02:38:31,880
चलो चलो भाई और भदौरिया को बुला रहा है लाइव में आने

2039
02:38:31,880 --> 02:38:35,880
के लिए आ जाओ लाइ आ जाओ ला आ जाओ ला हमको क रहा नहीं तुम तो गाली देते हो तुम हमारे निंदा

2040
02:38:35,880 --> 02:38:40,000
करते हो लेकिन एक व्यक्ति की निंदा से ज्यादा बड़ा है पूरे संप्रदाय की निंदा करना पूरे संप्रदाय को गा बकने वाले समाज

2041
02:38:40,000 --> 02:38:46,000
सेको दिक्कत नहीं हैको दिक्कत

2042
02:38:47,200 --> 02:38:51,440
नहीं या तो यह व्यक्ति मूर्ख है या फिर मेरी भाषा

2043
02:38:51,440 --> 02:38:55,720
जो है ऐसी है जो यह समझ नहीं पा

2044
02:38:55,720 --> 02:38:59,960
रहे मैंने अपने सभी वीडियोस में बताया कि क्या

2045
02:38:59,960 --> 02:39:04,800
क्या परिस्थिति है कि हमारे बीच में विरोधाभासी जो स्थितियां उत्पन्न

2046
02:39:04,800 --> 02:39:09,480
होंगी उसके कारण हमारा साथ में आना

2047
02:39:09,480 --> 02:39:13,480
जो हमारे विरोधी है मेरे और तुम्हारे दोनों के जो ऐसे विरोधी है जो

2048
02:39:13,480 --> 02:39:17,800
सेम है उनको बल मिल जाएगा और मिल रहा है जो तुमने किया

2049
02:39:17,800 --> 02:39:22,440
उसके कारण अभी तक हमारे विरोध में उनको बल मिल रहा था अब

2050
02:39:22,440 --> 02:39:26,960
अब तुम्हारे विरोध में भी मिलना शुरू हो गया

2051
02:39:26,960 --> 02:39:31,240
ठीक है वो जरा इनके वो दिखा दीजिए दोबारा

2052
02:39:31,240 --> 02:39:36,320
से इनका वो वाला तो फेसबुक का जो सामग्री प्राप्त हुई

2053
02:39:36,320 --> 02:39:40,320
थी चलो इस बार और छोड़ देते हैं क्योंकि इस बार मोबाइल से

2054
02:39:40,320 --> 02:39:44,400
दिखाया तो शायद उसका उतना उपयोग नहीं कर पाएंगे छोड़

2055
02:39:44,400 --> 02:39:49,440
देते हैं छोड़ो रहने देते हैं अभी

2056
02:39:49,440 --> 02:39:55,440
राब हुई श्री राम का सिद्धत है अभ

2057
02:39:55,560 --> 02:40:01,400
श तो दया

2058
02:40:01,400 --> 02:40:07,400
उ ऐसा नहीं

2059
02:40:08,960 --> 02:40:12,960
बे अच्छा सुनि सुनि सु सुनि शि अच्छा आप लाइव नहीं क्या सुनि आपके लख की

2060
02:40:12,960 --> 02:40:17,040
बात इस व घर बल में टाटल है ठीक है ना नहीं बता जा जाभ नहीं कर रहा बरा

2061
02:40:17,040 --> 02:40:21,160
बया बा बना है ठीक है तो ये जो है स्

2062
02:40:21,160 --> 02:40:25,080
कर होगा

2063
02:40:25,080 --> 02:40:29,480
ले बना पो न र

2064
02:40:29,480 --> 02:40:33,960
कर सते क्या लिखता है और आपका और आना जाना भी है

2065
02:40:33,960 --> 02:40:39,720
क्या लिखता है

2066
02:40:39,720 --> 02:40:43,880
अता

2067
02:40:43,880 --> 02:40:49,880
मेंगे बता

2068
02:40:50,800 --> 02:40:55,040
बरास सभी से माल बना कता का आज प् च जाए

2069
02:40:55,040 --> 02:40:59,760
गब अ उ हो गया

2070
02:40:59,760 --> 02:41:03,800
तो क्या कह रहा हैय अरे आपको एक मस्त बात बताते हैं

2071
02:41:03,800 --> 02:41:07,920
गुरुदेव काब गु तु शक जब प्रवास होता किसी घर

2072
02:41:07,920 --> 02:41:12,000
को कामने बते सम आता ह को

2073
02:41:12,000 --> 02:41:18,000
बुलाते दूसरे बचा मस्त आराम से बजे उठते कते कन करते पता

2074
02:41:19,360 --> 02:41:24,000
जिस व्यक्ति को किसी बात से समस्या है जो धर्म का पक्षधर है और तुम्हारे

2075
02:41:24,000 --> 02:41:28,120
रूप में वो पुरी के शंकरा तुम्हारी जानकारी में पुरी के शंकराचार्य जी

2076
02:41:28,120 --> 02:41:32,400
का शिष्य है और उसको अधर्म का बोध हो रहा है और उसके अंदर इतनी

2077
02:41:32,400 --> 02:41:36,520
तथा नहीं है कि उस बोध का वो जब आपको बात कह

2078
02:41:36,520 --> 02:41:41,080
रहा है तो आप उसका नंबर वगैरह दिखा सको वो इसकी आपको अनुमति दे दे

2079
02:41:41,080 --> 02:41:45,160
ऐसे व्यक्ति से ऐसे व्यक्ति के वक्तव्य को आप साक्षी के रूप

2080
02:41:45,160 --> 02:41:49,920
में इस्तेमाल कर रहे हो जिसकी क्रेडिबिलिटी नहीं है

2081
02:41:49,920 --> 02:41:53,960
किसी भी प्रकार से जिस जिसका धर्म का पक्ष ही सिद्ध नहीं हो

2082
02:41:53,960 --> 02:41:58,280
रहा है और उसकी वाणी को आप साक्ष के रूप में उपयोग कर रहे हो

2083
02:41:58,280 --> 02:42:02,640
यही तो कहता हूं संभावना जन्य जो तथ्य

2084
02:42:02,640 --> 02:42:07,400
होते हैं जो सामग्री होती है उनको आप जो उनके आधार पर निर्णय लेते हो

2085
02:42:07,400 --> 02:42:11,440
उससे कहो सामने आकर करे ना उसको धर्म की चिंता है

2086
02:42:11,440 --> 02:42:15,240
और धर्म का बोध है

2087
02:42:15,240 --> 02:42:19,520
तो जब ऐसी व्यक्ति को जिसकी आप बात कर रहे ऐसी व्यक्ति को बलाया

2088
02:42:19,520 --> 02:42:23,640
जाएगा कि निगरा चार ने ऐसा ऐसा बोला है कि तुमने ऐसा ऐसा बोला

2089
02:42:23,640 --> 02:42:28,560
है तो आएगा क्या वो तो तुम्हें निगरा चार मानता होगा

2090
02:42:28,560 --> 02:42:32,760
ना शंकराचार्य ने तुम्हे निगरा चार नहीं माना वो तुम्हें निगरा

2091
02:42:32,760 --> 02:42:36,800
चार मानता है कि वो भगवता नंद मानता है क्या कहना है इस

2092
02:42:36,800 --> 02:42:41,080
बारे में उसका क्या कहता है निग

2093
02:42:41,080 --> 02:42:45,120
तो नहीं कहता कहीं मेरे ख्याल से जिस मिश्रा

2094
02:42:45,120 --> 02:42:49,560
की तुम बात कर रहे हो व तुम्हें निगूदा

2095
02:42:49,560 --> 02:42:53,560
है ना

2096
02:42:53,560 --> 02:42:59,560
निग्गी बात स्वीकार रहे हो उसकी तुम्हें

2097
02:43:01,760 --> 02:43:06,680
चलो ऐसा थोड़ी ना है कि सिर्फ तुम्हारे ही पास व मैसेजेस आते

2098
02:43:06,680 --> 02:43:11,520
हैं चलो डाल डाल पात पात चलो भाई आगे चलो

2099
02:43:11,520 --> 02:43:15,720
संख्या में यवा बटोरे गए थे लेकिन ये दो लोग पूरे अभियान को कुचल के धर दिए और अभी कोई आ वाहिनी के अतिरिक्त

2100
02:43:15,720 --> 02:43:20,520
अपने नाम से कुछ करे उसम भी आपत्ति करते हैं कि आपने कैसे कर दिया

2101
02:43:20,520 --> 02:43:24,640
तो आपके गु ने लिखा आपका पड़ोसी है टाइटल से मिश्र है और

2102
02:43:24,640 --> 02:43:28,880
नहीं बताओगे जो हम उसकी प्रमाणिकता को जा चेक करें पॉज करो नाम नहीं बताओगे

2103
02:43:28,880 --> 02:43:34,880
जो हम उसकी प्रमाणिकता को जाकर चेक करें और उसकी धर्मजयगढ़

2104
02:43:49,200 --> 02:43:53,280
भया इनको सब क्योंकि जो व्यक्ति आपको कह रहा है ना वही

2105
02:43:53,280 --> 02:43:59,280
तुमको निग कहता है हमें भी पता है कुछ चीज

2106
02:44:15,000 --> 02:44:21,000
चलो सत्य को छिपाना गलत नहीं होता है ये व कने का भा ति का नियम है

2107
02:44:24,560 --> 02:44:29,040
झूठ बोलना धर्म नहीं है भैया झूठ बोलना निंदनीय नहीं य बात

2108
02:44:29,040 --> 02:44:34,480
है करो ब करो पहले तो पहले तो तुम अपनी प्रमाणिकता

2109
02:44:34,480 --> 02:44:38,600
बताना धर्म क्या है

2110
02:44:38,600 --> 02:44:43,280
धर्म क्या है जिन कार्यों को करने

2111
02:44:43,280 --> 02:44:47,280
से मोक्ष की प्राप्ति होगी जिस विधि विधान का आलंबन लेने से

2112
02:44:47,280 --> 02:44:51,560
वही तो धर्म है तो जब हम डाकुओं की रक्षा

2113
02:44:51,560 --> 02:44:55,680
वो डाकुओं से मातृ शक्तियों की रक्षा करने के लिए झूठ बोल रहे

2114
02:44:55,680 --> 02:44:59,720
होंगे तो वो वो विधि है कि नहीं वहां पर वो धर्म के रूप में उसको लिया जाएगा कि

2115
02:44:59,720 --> 02:45:04,240
नहीं और सुनो हमने अपने मन से नहीं बोला है कपात

2116
02:45:04,240 --> 02:45:08,280
जी ने यह ग्रंथ में लिखा है और इस

2117
02:45:08,280 --> 02:45:12,640
विषय पर आप आप तो शिष्यों से करते नहीं हो शंकराचार्य

2118
02:45:12,640 --> 02:45:16,720
से जाक शास्त्रार्थ करो चुनौती दे दो उनको मैं चुनौती देता हूं क्यों

2119
02:45:16,720 --> 02:45:21,000
नहीं दी आज तक तुमने चुनौती तुम बहुत चुनौती जो दे

2120
02:45:21,000 --> 02:45:25,280
दो कल चुनौती जाकर के जगतगुरु शंकराचार्य को

2121
02:45:25,280 --> 02:45:29,440
क्या है पूरी पीठाधीश्वर मुझ से शास्त्रार्थ करें अमुक अमुक बिंदुओं पर

2122
02:45:29,440 --> 02:45:34,760
खंडन करता हूं मैं

2123
02:45:34,760 --> 02:45:38,880
उनका तब क्या हुआ था मगर तुम अब

2124
02:45:38,880 --> 02:45:43,160
तुम्हारी भाषा में कहे तो तुम टट कुंजियां को जाकर

2125
02:45:43,160 --> 02:45:47,240
के है ना जो तुम्हारी नजरों में जो होंगे उनको

2126
02:45:47,240 --> 02:45:51,600
यह करोगे वो करोगे वरना फिगे दे दो फेसबुक

2127
02:45:51,600 --> 02:45:55,760
पर डाल दो अपने श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य को

2128
02:45:55,760 --> 02:46:01,120
मैं चुनौती देता हूं शास्त्रार्थ की खंडन करता हूं मैं उनका

2129
02:46:01,120 --> 02:46:05,200
मैं लुप्त संप्रदाय का कुलदीपक जिसकी धातु

2130
02:46:05,200 --> 02:46:09,440
क्षीण हो चुकी है वजन 47 47 किलो पर अटक गया है धातु

2131
02:46:09,440 --> 02:46:13,440
का छीन हो जाने के कारण मैं चुनौती

2132
02:46:13,440 --> 02:46:19,440
देता हूं

2133
02:46:20,680 --> 02:46:24,920
करपात्री जी ने लिखा है वहां पर करपात्री

2134
02:46:24,920 --> 02:46:29,040
जी ने लिखा है वहां पर वो भी धर्म है ठीक है आचार वाणी

2135
02:46:29,040 --> 02:46:35,040
है उसका हमने प्रचार किया है

2136
02:46:35,160 --> 02:46:39,240
चलो का दोष नहीं लगेगा कर बोना र् नहीं

2137
02:46:39,240 --> 02:46:45,240
अ ठ बोलने में अस भाषण का दोष लगता

2138
02:46:46,680 --> 02:46:50,400
गा य बात है

2139
02:46:50,400 --> 02:46:54,440
दोष नहीं लगेगा की बात नहीं है सुनो दोष लगेगा की

2140
02:46:54,440 --> 02:46:58,480
बात नहीं है वहां पर आपको वह करना

2141
02:46:58,480 --> 02:47:02,480
ही है इसलिए वह धर्म है साध्य कोटि का धर्म है वह

2142
02:47:02,480 --> 02:47:06,600
क्योंकि वह आपको करना ही है केवल दोष ना लगने की बात

2143
02:47:06,600 --> 02:47:10,800
नहीं है व आपने अच्छा कार्य किया है वहां

2144
02:47:10,800 --> 02:47:14,880
पर सही कार्य किया है धर्म धर्म आपको जो बताया गया वो

2145
02:47:14,880 --> 02:47:17,840
आपने किया

2146
02:47:17,840 --> 02:47:23,480
है

2147
02:47:23,480 --> 02:47:27,560
चलो ये बात क उसको फिर भी झूठ ही सच नहीं कर देंगे उसको और

2148
02:47:27,560 --> 02:47:31,720
उससे भी सत्यवादी का रास होता है ये तथ है सत्यवा बिल्कुल अलग विषय है असत्य भाषण

2149
02:47:31,720 --> 02:47:36,080
बिल्कुल अलग विषय है लेकिन वहां पर उस असत्य भाषण के परिणाम स्वरूप जो प्राप्त होने वाला दंड है वो दंड निभावी हो जाता है पारिस्थितिक

2150
02:47:36,080 --> 02:47:40,960
धर्म के आधार पर हालांकि उससे भी वाणी में सत्य की प्रतिष्ठा जो है वाणी में स की प्रतिष्ठा सरस्वती

2151
02:47:40,960 --> 02:47:44,960
है ना और इसकी हानि तो होती ही है लेकिन

2152
02:47:44,960 --> 02:47:49,080
विकल्प दिया गया है ये बात है खर आगे बोलो मैं

2153
02:47:49,080 --> 02:47:53,080
एक बात और बोल दूं कि तुम जो जरा जरा सी बातों में कर

2154
02:47:53,080 --> 02:47:57,280
रहे हो ना ऐसे तुम्हारी भी कुछ बातें हैं जो हमने पीछे से ले ली जैसे

2155
02:47:57,280 --> 02:48:01,360
तुमने वहां पहले कहा कि वोह मेरे लिए तो दयानंद और

2156
02:48:01,360 --> 02:48:05,560
वोह जो है शत्रु ही है जब तुमने उसमें देख लिया पहले नहीं ध्यान रहा

2157
02:48:05,560 --> 02:48:11,160
होगा मन में नहीं रहा होगा कि क्या कहते

2158
02:48:11,160 --> 02:48:15,240
हैं मृत्यु के बाद जो है बैर मिट जाता है नहीं

2159
02:48:15,240 --> 02:48:19,280
रहा होगा ध्यान तो तुमने पहले बोखला में जाकर के पोस्ट दिया उसम

2160
02:48:19,280 --> 02:48:23,680
लिख दिया कि दयानंद दयानंद जी और मैं तो मेरे लिए तो दयानंद और प्रभुपाद

2161
02:48:23,680 --> 02:48:27,800
जो है वह जो है शत्रु ही है फिर तुमने बाद

2162
02:48:27,800 --> 02:48:31,800
में जब लाइव की है तो वहां पर यह पक्ष नहीं रखा कि मेरे लिए दयानंद और प्रभुपाद

2163
02:48:31,800 --> 02:48:35,880
शत्रु ही है तुमने पक्ष य रखा तो हम भी तो उनका वैचारिक खंडन

2164
02:48:35,880 --> 02:48:38,720
कर रहे हैं हम थोड़ी ना उनको बाहर निकाल करके

2165
02:48:38,720 --> 02:48:43,200
जो है मार रहे हैं तो शत्रु ही है तो सिद्ध करो

2166
02:48:43,200 --> 02:48:47,240
और ऐसे बात को तुमने जो पकड़ा है मैं भी वहां पर वही बात बोल रहा हूं तुम उसको

2167
02:48:47,240 --> 02:48:51,360
बात को पकड़ के लोग य दिखाने का प्रस्तुत कर रहे हो कि देखो हमने

2168
02:48:51,360 --> 02:48:55,400
इसका शास्त्रो खंडन किया है खंडन तो तुम्हारा भी है राम कह

2169
02:48:55,400 --> 02:48:59,600
रहे हैं बैर के बाद जो मृत्यु होती है उसके बाद बैर मिट जाता है प्रेम नहीं मिटता

2170
02:48:59,600 --> 02:49:02,560
क्योंकि प्रेम सात्विकता

2171
02:49:02,560 --> 02:49:08,560
है बैर मिट जाता है क्योंकि बैर तामसिक का

2172
02:49:08,800 --> 02:49:13,000
है ठीक है जो तुम कहो कपाती जी का सम्मान क्यों कर रहे हो जाने

2173
02:49:13,000 --> 02:49:17,040
के बाद भी क्योंकि उनका सम्मान हम

2174
02:49:17,040 --> 02:49:21,240
उस रूप में कर पा रहे हैं जब वो हम जीव उनको देख रहे अपने पास

2175
02:49:21,240 --> 02:49:25,840
और सुनो कि बात मैंने भी वही बोली है

2176
02:49:25,840 --> 02:49:29,840
भाई कुछ ना कुछ हमने किया ना वहां पर तो की जाने

2177
02:49:29,840 --> 02:49:33,960
वाली जो क्रिया थी वह शास्त्रोक्त में आया कि

2178
02:49:33,960 --> 02:49:38,920
नहीं आया अगर शास्त्रोक्त में आया तो शास्त्रोक्त तो धर्म है

2179
02:49:38,920 --> 02:49:43,000
शास्त्रोक्त कार्य करना धर्म है ना तो शास्त्र की सीमा में आया

2180
02:49:43,000 --> 02:49:47,080
कि नहीं आया तुम केवल यह सब बातें करके यह जो तुम

2181
02:49:47,080 --> 02:49:51,240
श्लोक पढ़ रहे हो और का प्रमाण दिखा रहे हो इस सब से क्या सिद्ध कर रहे

2182
02:49:51,240 --> 02:49:53,880
हो पता है एक फिल्म देखी होगी

2183
02:49:53,880 --> 02:49:57,880
तुम लोग तुमने पिक्चर तो देखते ही थे अपनी पोस्ट

2184
02:49:57,880 --> 02:50:02,000
में बातें करते हो टोनी स्टार्क और मैट्रिक्स इत्यादि की तो एक फिल्म

2185
02:50:02,000 --> 02:50:06,840
लेखी होगी दीवानगी उस फिल्म में क्या होता है

2186
02:50:06,840 --> 02:50:11,800
कि अभिनेता के ऊपर आरोप लगता है मर्डर

2187
02:50:11,800 --> 02:50:16,120
का केस शुरू होता है शुरू होने से पहले ही एक व्यक्ति

2188
02:50:16,120 --> 02:50:20,560
जो होता है जो सामने उसको जो दोषी सिद्ध करना चाहता था वो

2189
02:50:20,560 --> 02:50:26,560
खामखा अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए फोटोज दिखाता

2190
02:50:27,560 --> 02:50:31,920
है फोटोज में क्या दिखाता है कि देखो कितना घिनौने तरीके से मर्डर

2191
02:50:31,920 --> 02:50:34,560
हुआ

2192
02:50:34,560 --> 02:50:38,880
है यह जितने भी लोग हैं ना ये उछल कूद मचा रहे हैं

2193
02:50:38,880 --> 02:50:43,240
ये सब लोगों को नंबर दे दिया है आना लाइव में मिलेंगे तुमसे

2194
02:50:43,240 --> 02:50:47,680
तुम्हारे आचार्य तो शिष्यों से बात करने में शायद पीछे हट जाए अब

2195
02:50:47,680 --> 02:50:52,480
क्योंकि वो शिष्य से क्यों बात करेंगे जगतगुरु शंकराचार्य को चुनौती क्यों नहीं देते भाई

2196
02:50:52,480 --> 02:50:56,600
तुम्हारे पास उनका खंडन है निकालो आए दिन प्रेस में अपने वो

2197
02:50:56,600 --> 02:51:01,080
जो वो हो गुर्गे उनको कहो छापे अखबार

2198
02:51:01,080 --> 02:51:05,840
में क्यों नहीं तुमने आज तक चुनौती दी शंकराचार्य को शास्त्रार्थ

2199
02:51:05,840 --> 02:51:09,960
की कि आपका यहां पर शास्त्रीय पक्ष नहीं है गलत है

2200
02:51:09,960 --> 02:51:15,040
दे दो

2201
02:51:15,040 --> 02:51:19,200
चुनौती और बाकी जो इनके जो गुरुगे हैं इनका

2202
02:51:19,200 --> 02:51:23,560
स्वागत है फॉर्म भरो आ जाओ कर लो दो दो हाथ वाणी

2203
02:51:23,560 --> 02:51:27,720
के द्वारा और क्या था यह

2204
02:51:27,720 --> 02:51:31,920
हां धर्म है एट दी एंड उसने जो किया वह शास्त्रोक्त

2205
02:51:31,920 --> 02:51:36,200
कर्म है कि नहीं है तो उस दृष्टि

2206
02:51:36,200 --> 02:51:40,240
से देखेंगे तो उसको धर्म कहा जाएगा कि नहीं कहा जाएगा शास्त्र की सीमा के

2207
02:51:40,240 --> 02:51:44,960
अंदर का कर्म हुआ कि नहीं हुआ खामा खा तो क्या था वो दीवानगी में

2208
02:51:44,960 --> 02:51:48,960
ऐसी फोटोज दिखाना केस चालू होने से पहले ही जिसमें बहुत ही

2209
02:51:48,960 --> 02:51:53,360
ब्रूटली मर्डर हुआ है किसी व्यक्ति का क्यों दिखा रहे हो भाई प्रभाव

2210
02:51:53,360 --> 02:51:57,680
उत्पन्न करना है प्रभाव उसकी आवश्यकता नहीं है वहां पर दिखाने की

2211
02:51:57,680 --> 02:52:01,680
भाई अभी तो हम यह तय कर रहे हैं कि एक व्यक्ति मरा है वो जो

2212
02:52:01,680 --> 02:52:06,320
मरा है उसको इसने मारा है कि नहीं मारा है

2213
02:52:06,320 --> 02:52:10,480
मगर हम यह दिखा रहे हैं कि वो कितनी बेरहमी से मरा है बेरहमी के मरने

2214
02:52:10,480 --> 02:52:14,560
से यह कैसे साबित होगा इसने मारा है तो हमें पहले उस पर बात करनी है

2215
02:52:14,560 --> 02:52:18,960
ना वही तुमने अपनी इस लाइन में किया था पीछे भागवत सुधा रखी है

2216
02:52:18,960 --> 02:52:23,200
यह रखा है वो रखा उसको उठाओ खोलो यह

2217
02:52:23,200 --> 02:52:28,360
धर्म मांसा नामक ग्रंथ

2218
02:52:28,360 --> 02:52:34,000
[संगीत]

2219
02:52:34,000 --> 02:52:38,080
है य धर्म मानसा नामक ग्रंथ है कपा जी का

2220
02:52:38,080 --> 02:52:42,360
इसमें वचन है उनका तो इस वचन के ऊपर शास्त्र लकार

2221
02:52:42,360 --> 02:52:46,600
लो धर्म की सीमा में नहीं है वो भाई धर्म क्या है शास्त्र की सीमा

2222
02:52:46,600 --> 02:52:50,680
में हो जो कर्म धर्म है और जो शास्त्र की सीमा से बाहर

2223
02:52:50,680 --> 02:52:54,720
हो धर्म नहीं है तो धर्म नहीं हुआ तुमने अगर उसकी

2224
02:52:54,720 --> 02:52:58,840
बड़ी व्याख्या कर दी तो धर्म के बाहर हो गया अधर्म हो गया अच्छा

2225
02:52:58,840 --> 02:53:03,280
तुमने यह बताया कि वो जो है उस परे दोष नहीं लगेगा अच्छा ठीक है दोष नहीं लगेगा

2226
02:53:03,280 --> 02:53:09,280
तो इसका मतलब क्या हुआ अधर्म

2227
02:53:12,040 --> 02:53:16,040
है इसको पढ़ लेना इसमें लिखा है उन्होंने कृपा जी

2228
02:53:16,040 --> 02:53:20,440
ने चलो और बताओ भाई और

2229
02:53:20,440 --> 02:53:24,640
सुनो एक बार की मैं बात बताऊं रुक जाओ

2230
02:53:24,640 --> 02:53:29,200
एक बार कोई मामला हो गया एक व्यक्ति के साथ तो मुझे जो है

2231
02:53:29,200 --> 02:53:33,480
पुलिस स्टेशन बुलाया गया कि भाई इन्होंने आपके खिलाफ यह जो है कंप्लेन की है

2232
02:53:33,480 --> 02:53:37,480
मैं गया वहां पर अपना पक्ष रखने के लिए तो तब तक मैंने

2233
02:53:37,480 --> 02:53:41,600
कभी भी उस व्यक्ति को संयोग

2234
02:53:41,600 --> 02:53:46,560
से व एक प्रेस वाला कार्ड होता है ना वो डाले देखा नहीं था

2235
02:53:46,560 --> 02:53:50,680
तो मैंने उस दिन उसको वहा थाने जब वो मेरा विरोध करने आया था प्रेस का कार्ड डाले

2236
02:53:50,680 --> 02:53:54,760
बैटा तो जब वहां पर चीटा कसी हुई तो मैंने उसको पूछा

2237
02:53:54,760 --> 02:53:58,840
कि तुम यह प्रेस का कार्ड लेकर क्यों आए हो आज क्यों यहां पर इसकी

2238
02:53:58,840 --> 02:54:02,840
जरूरत है जबकि तुम यूजुअली यह प्रेस कार्ड डाल कर

2239
02:54:02,840 --> 02:54:06,880
के नहीं घूमते हो तो उसके पास जवाब नहीं था वह इसलिए प्रेस का कार्ड

2240
02:54:06,880 --> 02:54:11,160
लेकर के आया था कि जो पुलिस वाले हैं वह न्याय

2241
02:54:11,160 --> 02:54:15,320
का पक्ष देखने से पहले यह देखे कि प्रेस प्रेस वाला कौन

2242
02:54:15,320 --> 02:54:19,320
है इसी तरीके से जहां पर की इनकी

2243
02:54:19,320 --> 02:54:23,320
आवश्यकता है भी नहीं वहा तुम प्रमाण बोल करके यह सिद्ध करना चाह रहे

2244
02:54:23,320 --> 02:54:27,640
हो देखो मैं कितना ज्ञानी हूं मैं कितना शास्त्रों को जानने वाला हूं

2245
02:54:27,640 --> 02:54:33,480
तो इसलिए सामने वाला कुछ भी बोल रहा है व असत्य

2246
02:54:33,480 --> 02:54:37,600
है चलो पाखंड का खंडन भाग गया क्या अब नहीं खंडन

2247
02:54:37,600 --> 02:54:43,600
करेगा कल

2248
02:54:46,760 --> 02:54:51,080
से क्या सामान्य सी बातों पर जो सार्वजनिक रूप से ल और फोटो में पहले से अवेलेबल

2249
02:54:51,080 --> 02:54:56,080
है उसी के हजारों फलो से जुड़े हुए अकाउंट में वहां पर पहले से सार्वजनिक बात हैं उसी को तो पूछ रहे

2250
02:54:56,080 --> 02:55:00,680
हैं रो रो रोको रोको

2251
02:55:00,680 --> 02:55:05,080
रोको अगर कोई बालक है

2252
02:55:05,080 --> 02:55:09,120
जिसने पूरे साल पढ़ाई नहीं की है तो जिस समय उसका एग्जाम

2253
02:55:09,120 --> 02:55:13,160
का टाइम आएगा वह पढ़ने बैठेगा तो तुम्हारे जैसी माता होगी तो

2254
02:55:13,160 --> 02:55:17,240
उससे कहेगी जाके दूध लेके आ और वो कहेगा कि मां मेरे पास समय नहीं

2255
02:55:17,240 --> 02:55:23,040
है तो उससे ये कहेगी पूरे साल तो तू खेला है अब क्या कर लेगा पढ़

2256
02:55:23,040 --> 02:55:27,200
के अरे भाई हमें मालूम है कि गर्मी का मौसम

2257
02:55:27,200 --> 02:55:31,280
है फिर भी हम गर्मी से बचने का प्रयास करेंगे हमें मालूम है कि कलयुग है अधर्म

2258
02:55:31,280 --> 02:55:35,400
फैले ही फिर भी हम अधर्म को रोकने का प्रयास करेंगे उसी

2259
02:55:35,400 --> 02:55:39,520
उसी प्रकार से हमें मालूम है कि यह सब चीजें फैली हुई है

2260
02:55:39,520 --> 02:55:42,920
फिर भी हम कोशिश करेंगे कि और ना फैले कैसे कैसे तर्क

2261
02:55:42,920 --> 02:55:46,960
देते हो हमें मालूम है कि उसने पूरी साल पढ़ाई नहीं की है फिर भी हम कोशिश

2262
02:55:46,960 --> 02:55:51,520
करेंगे कि इस समय उस ऐसा ना बीते जिसमें वो पढ़ाई ना

2263
02:55:51,520 --> 02:55:57,400
करे ये तर्क है तुम्हारे

2264
02:55:57,400 --> 02:56:01,440
चलो इसलिए कहता हूं इसलिए कहता हूं कमेंट कर इसने

2265
02:56:01,440 --> 02:56:05,520
वा होते हैं भाई हां आपने शास्त्र में कोई बात थी कोई चचन लिया उसकी रक्षा के लिए ड़ होने

2266
02:56:05,520 --> 02:56:09,760
पीछ फ करूंगा तो ठीक है क्या कहते है ये कमेंट चाहते

2267
02:56:09,760 --> 02:56:11,920
हमारी

2268
02:56:11,920 --> 02:56:17,240
और फिर से सुनेंगे फिर सुनेंगे शिवादी सोया बसेर है जाग गया तो

2269
02:56:17,240 --> 02:56:21,280
ला बारबार कह रहा हूं बारबार मैं कह रहा हूं कि शराय एक सोया

2270
02:56:21,280 --> 02:56:25,320
हुआ शर है सोया हुआ तो नहीं दिख रहा है म में क्या

2271
02:56:25,320 --> 02:56:29,960
चल रहा है शर को थोड़ा जगाओ पानी छटा मारो एक देश शेर है लोग क रहे थे शेर जब

2272
02:56:29,960 --> 02:56:35,200
छला मारता दो कदम पीछे लेता है 12 साल से शेर पीछे ही ले रहा है कदम तो ये जो

2273
02:56:35,200 --> 02:56:39,320
है साल से अप एक मिनट 12 साल से जो

2274
02:56:39,320 --> 02:56:43,720
अपनी ग्रंथ लिख रहा है ये कर रहा है वो कर रहा है और प्रेम प्रसंग

2275
02:56:43,720 --> 02:56:47,760
में बाई पोलर पर अपनी किताबें लिख रहा है जानवी के लिए शायरिया लिख रहा

2276
02:56:47,760 --> 02:56:51,920
है गीत लिख रहा है वो जो है जिनका खंडन

2277
02:56:51,920 --> 02:56:56,200
कर रहा है उनको शास्त्रार्थ के लिए ललकार नहीं पा रहा उसके

2278
02:56:56,200 --> 02:56:59,000
अंदर इतना गुर्दा नहीं

2279
02:56:59,000 --> 02:57:03,160
है क्यों नहीं है भाई एक एक

2280
02:57:03,160 --> 02:57:07,560
जगह दिखा दो तुमने लड़का रहा हो शंकराचार्य को शास्त्र के लिए मालूम

2281
02:57:07,560 --> 02:57:11,640
है हवा टाइट हो जाएगी वहां तो जो

2282
02:57:11,640 --> 02:57:15,840
तुम्हारे लिए तुमको लगता है कि यह मेरी उसमें आ जाएंगे सीमा में वहां अपना खड़े हो जाते हो सीना

2283
02:57:15,840 --> 02:57:20,560
तान के वरना भागते फिरते हो चाहे वो समाग वाले हो चाहे वो

2284
02:57:20,560 --> 02:57:24,600
राम द्विवेदी जी हो और चाहे वो राजें दास जी के शिष्य हो फिर वहा

2285
02:57:24,600 --> 02:57:28,680
बहाने बनाते हो उनके साथ क्या चर्चा करे अरे फुलके खाने वाले के साथ चर्चा क्यों

2286
02:57:28,680 --> 02:57:34,440
कर रहे थे

2287
02:57:34,440 --> 02:57:38,720
तुम्हारे और क्या कह रहे हो तुम वो

2288
02:57:38,720 --> 02:57:43,240
पीछे करना जरा सा चलाना फिर से

2289
02:57:43,240 --> 02:57:48,200
नाम पर क्या हो रहा है क्या ो क्या पाखंड क्या फल रहा है आप जगे होते ना उ जागत

2290
02:57:48,200 --> 02:57:52,800
ने बोवा जी उठ जाइए अधर्म करना प्रभ कीजिए

2291
02:57:52,800 --> 02:57:56,880
तुम क्यों कह पा रहे हो य य पॉइंट है मैंने यही बात कही है तुम्हारी समीक्षा क

2292
02:57:56,880 --> 02:58:00,880
यह तुम क्यों कह पा रहे हो पहली बात तो जो जग जाते हम जगे हुए हैं हमने

2293
02:58:00,880 --> 02:58:04,880
कर लिया चेक नहीं है कुछ और बोलो दूसरी बात यह

2294
02:58:04,880 --> 02:58:09,000
है तो यहां पर तुम्हारी बात खत्म हो गई अगर तुमको हमारा

2295
02:58:09,000 --> 02:58:13,080
सोना सिद्ध करना है तो तुम्हें उनका वो सिद्ध करना होगा जो कि

2296
02:58:13,080 --> 02:58:17,080
तुम कर नहीं सकते हो उसमें तुम ढीले हो इसलिए इधर उधर की बातें

2297
02:58:17,080 --> 02:58:21,280
कर रहे हो जो प्रसंग से रिलेटेड बात है वह कम करके इधर उधर की बातें

2298
02:58:21,280 --> 02:58:27,280
ज्यादा कर रहे हो पहली बात पीछे करो जरा

2299
02:58:33,160 --> 02:58:37,200
दोबारा दूसरी बात दूसरी बात क्या चल रही है कि

2300
02:58:37,200 --> 02:58:41,320
तुम्हारी इस तरह की समीक्षा क्यों नहीं हो पा रही कि तुम्हारे मठ में क्या चल रहा है अरे

2301
02:58:41,320 --> 02:58:45,400
मठ हो त तो जेब में नहीं है टला

2302
02:58:45,400 --> 02:58:49,960
टिल्ला माग रहे लाल किल्ला तुम्हारी कैसे होगी समीक्षा

2303
02:58:49,960 --> 02:58:54,000
तुम्हारा पता नहीं है कि आज तुम्हारे य यह हुआ आज तुम्हारे य वो हुआ आज यहां

2304
02:58:54,000 --> 02:58:58,120
यात्रा करोगे आज महा यात्रा करोगे खुफिया मुजरिम की तरह तुम घूम

2305
02:58:58,120 --> 02:59:02,160
रहे हो खुद को आचार्य कहते हो

2306
02:59:02,160 --> 02:59:06,360
तुम्हारी यह समीक्षा होने लगेगी अपनी ये सब चीज सार्वजनिक करो

2307
02:59:06,360 --> 02:59:10,480
ना आज तुम्हारे तुम इससे मिले आज तुम इससे मिले आज तुम्हारे मठ

2308
02:59:10,480 --> 02:59:14,680
में ये हुआ वो हुआ सब सार्वजनिक करो अभी तो यही हमने भाव

2309
02:59:14,680 --> 02:59:20,680
रखा था कि तुम्हारी समीक्षा इसलिए नहीं हो रही है तुमने ट्रांसपेरेंसी नहीं की आचार्य

2310
02:59:24,480 --> 02:59:29,000
वाली चलो खुद को आचार कह रहे हो तो आचार वाली ट्रांसपेरेंसी

2311
02:59:29,000 --> 02:59:33,440
भी रखो ना थोड़ी अपने बारे में बताओ ना लोगों को हम इससे मिले आज उससे मिले आज

2312
02:59:33,440 --> 02:59:37,640
हमारे साथ में साथ यह देता है वह देता है यह पाखंड का खंडन मेरा भाई

2313
02:59:37,640 --> 02:59:41,760
है कि मेरा बेटा है या मेरे द्वारा तैनात

2314
02:59:41,760 --> 02:59:46,120
किया हुआ कोई भाड़े का टट्टू है सबब बताओ ना लोगों को तब समीक्षा

2315
02:59:46,120 --> 02:59:52,120
होगी ना तुमसे जुड़े हुए लोगों की

2316
02:59:55,320 --> 02:59:59,480
चलोर ब था बहुत सार लोग कर रहे थे शेर बच् ब

2317
02:59:59,480 --> 03:00:04,120
अच्छा शेर ग्रम शेर है ग्राम सि है सि है ये जरा बता दिया जाता

2318
03:00:04,120 --> 03:00:08,520
मेरा ड बोल र है मत पढ़ो चक्कर में कोई टक्क बताओ शेर का बच्चा एक

2319
03:00:08,520 --> 03:00:12,760
अच्छा बा आ हैब ये बनाने पले कु लोग

2320
03:00:12,760 --> 03:00:16,880
कट किया तो ठीक है क्या कहते कट लाइ

2321
03:00:16,880 --> 03:00:21,800
करने पहने लाइक कैसे किया

2322
03:00:21,800 --> 03:00:25,960
ऐसा नहीं करना चाहिए मैनेजर से बात की है सड़क चलते लोगों से बात की

2323
03:00:25,960 --> 03:00:30,040
है तुम इसकन समाज के द्वारा या रामपाल के द्वारा थरा रूप से अत किसी व्यक्ति

2324
03:00:30,040 --> 03:00:34,080
से बात करो ना तुम ऐसे लोगों से स बात करते रहे हो जो लोग तुम्हारे ऊपर हावी नहीं

2325
03:00:34,080 --> 03:00:38,200
हो सकते हैं ये समस्या है या जिन लोगों की कोई विशेष पज करो

2326
03:00:38,200 --> 03:00:43,600
पॉज करो ये तो सबसे पहले मैं भी कह

2327
03:00:43,600 --> 03:00:49,600
दूंगा तुम आज तक उन लोगों से बात करते रहे हो जो तुम्हारे ऊपर हावी नहीं हो सकते

2328
03:00:51,640 --> 03:00:55,920
तुमने क्यों नहीं शंकराचार्य अगर शंकराचार्य की बात में व तुम्हें दोष दिख रहा है तो क्यों नहीं उनको

2329
03:00:55,920 --> 03:00:59,920
ललकार दिया क्यों नहीं उनसे बात कर ली जाकर के अन्य शंकराचार्य को ललकार

2330
03:00:59,920 --> 03:01:05,920
दो कपाती जी के जो अन्य शिष्य उनको ललकार

2331
03:01:06,760 --> 03:01:11,360
लो पहली बात दूसरी बात यह है

2332
03:01:11,360 --> 03:01:15,680
कि यह फिर तुम्हारी अधूरी जानकारी है तुम्हारी

2333
03:01:15,680 --> 03:01:19,680
अधूरी जानकारी है इस कौन के हमने प्रामाणिक

2334
03:01:19,680 --> 03:01:23,720
लोगों से बात नहीं की है पहली बात तो यह है कि इस

2335
03:01:23,720 --> 03:01:27,720
कोन में जितने भी लोग तुमको मिलेंगे वह किसी ना किसी अंग्रेजी की पोस्ट पर ही

2336
03:01:27,720 --> 03:01:31,760
होंगे तो क्या करें कोई उनके य वो गुरु वाले पद

2337
03:01:31,760 --> 03:01:35,840
है ही नहीं उनके ऐसे ही चल रहा है ये प्रेसिडेंट है य ये है

2338
03:01:35,840 --> 03:01:40,080
ये वो है ऐसे ही चल रहा है हमने उन लोगों से बात

2339
03:01:40,080 --> 03:01:44,120
भी की है जो लोग अपना गीता का सेशन चला रहे हैं

2340
03:01:44,120 --> 03:01:48,800
गीता का ज्ञान दे रहे हैं लोगों को तो गुरु पद में स्थापित है

2341
03:01:48,800 --> 03:01:52,880
अब वह मैनेजर का पोस्ट लिखा हुआ उनके आगे तो हम क्या करें

2342
03:01:52,880 --> 03:01:57,560
वह गुरु नहीं है तुम सिद्ध करो लोगों के दीक्षा दे रहे हैं वो लोगों को

2343
03:01:57,560 --> 03:02:03,000
जो लखनऊ स् कन प्रेसिडेंट है वो दीक्षा दे रहा है लोगों

2344
03:02:03,000 --> 03:02:07,880
को और जो वहां के व है वोह भी ऐसे ही है इंदौर

2345
03:02:07,880 --> 03:02:11,880
के और जो उनके यहां शिक्षा की ट्रेनिंग

2346
03:02:11,880 --> 03:02:16,080
दी जाती है ब्रह्मचार्य की उनसे कई बार हमारी बातें हुई है और

2347
03:02:16,080 --> 03:02:20,280
आर समाज के जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के विदूषक है

2348
03:02:20,280 --> 03:02:22,040
उनसे बात हुई है गुरुकुल के आचार्य

2349
03:02:22,040 --> 03:02:28,040
उनसे बात हुई है और क्या करे भाई किसे बात करे

2350
03:02:29,400 --> 03:02:33,400
जाकर और जो अभद्र आचरण करने लगता है उससे हम दूर रहते हैं

2351
03:02:33,400 --> 03:02:39,400
नहीं करेंगे

2352
03:02:40,160 --> 03:02:44,520
चर्चा जिन लोगों ने विधि अपने

2353
03:02:44,520 --> 03:02:48,560
सबसे बड़ी एक बात मैं बताऊ जो तुम शब्दावली यूज

2354
03:02:48,560 --> 03:02:52,920
करते हो हगना मतना यह सब जो तुम करते हो

2355
03:02:52,920 --> 03:02:56,320
जाओ उनके जाकर मुंह पर बात

2356
03:02:56,320 --> 03:03:01,720
करो क्यों नहीं करते रामो दना भी

2357
03:03:01,720 --> 03:03:05,880
भाष मैं दोहरा व्यवहार नहीं करना चाहता हूं

2358
03:03:05,880 --> 03:03:10,360
इसलिए मैं तुम्हारे साथ मंच साझा नहीं करना चाहता था क्योंकि जो

2359
03:03:10,360 --> 03:03:14,840
तुमने स्थितियां स्थितियों को जन्म दे रखा है उसमें यही व्यवहार था तुम्हारे

2360
03:03:14,840 --> 03:03:19,040
लिए जो अभी हो रहा है और इस तरह

2361
03:03:19,040 --> 03:03:23,080
से मैं तुम्हारे साथ बात करता हुआ लोगों को नहीं दिखना चाहता था तो

2362
03:03:23,080 --> 03:03:27,120
तुमने मेरी उस उदारता को कायरता समझ लिया उपास बना रहे हो

2363
03:03:27,120 --> 03:03:31,280
अब यह बता कि तुम अगर जाओगे वहां जाओगे क्या कहते

2364
03:03:31,280 --> 03:03:36,200
हैं दयानंद के लोगों के पास वहीं बोलो बोलना य अगना मतना

2365
03:03:36,200 --> 03:03:38,000
तब वो चालू करेंगे

2366
03:03:38,000 --> 03:03:42,120
सूतना वही सब बोलना वहा जाके करो चर्चा भया

2367
03:03:42,120 --> 03:03:46,160
तो चर्चा करो ही मत जिसको जो करना है करते रहो बस अपना वीडियो य

2368
03:03:46,160 --> 03:03:50,400
चैनल चलाओ और बढ़िया उसम कर बना तुमको इस मतलब थोड़ी ना है चर्चाओं

2369
03:03:50,400 --> 03:03:54,600
से गोष्ठी से इससे मतलब थोड़ी ना तुम्ह और जाओ

2370
03:03:54,600 --> 03:03:59,240
करो जा करके वहां पर बोलना हगना मतना दयानंद का

2371
03:03:59,240 --> 03:04:04,920
फिर वो तुम्हें चालू करेंगे सूतना

2372
03:04:04,920 --> 03:04:09,080
चलो तुम करो ना जाकर के भाई हम हम उस भाषा का उपयोग

2373
03:04:09,080 --> 03:04:14,960
करते हैं वह बोलते हैं जो हम उनके मुंह पर बोल

2374
03:04:14,960 --> 03:04:19,200
पाए हम ये ऐसा चरित्र नहीं बनाते कि हम जब अकेले

2375
03:04:19,200 --> 03:04:24,200
होंगे तो अगना मतना बोलेंगे वहां जाकर हम शिष्ट व्यवहार करेंगे

2376
03:04:24,200 --> 03:04:28,640
इसलिए हमें तुम हमने तुमसे दूरी

2377
03:04:28,640 --> 03:04:34,120
बनाई हमने तुम्हें नीच नहीं कहा अयोग्य नहीं कहा हीन नहीं

2378
03:04:34,120 --> 03:04:36,320
कहा

2379
03:04:36,320 --> 03:04:40,600
चलो या संप्रदाय या गल्ट प्रवर्तक के गिरोह प्रवर्तक के पुस्तकों को नहीं पढ़ा है

2380
03:04:40,600 --> 03:04:44,760
ये तुम्हारा है इसी प्रकार के लोगों से जाकर तुम भरते हो जहां पर तुम करो लेकिन हम किनसे भड़े अरे हमने जिन

2381
03:04:44,760 --> 03:04:48,760
जिन लोगों का नाम लेकर उनको रगड़ा है और 100 100 प्रमाण से उनका खंडन किया है क्या तुम कर पाओगे

2382
03:04:48,760 --> 03:04:53,120
तुम्हारी आवाज त नहीं निकली तुम्हा र के

2383
03:04:53,120 --> 03:04:59,120
बुलाकर तुम्हारे ही शकरा स्वामी जी की नि कर प

2384
03:05:00,920 --> 03:05:05,800
न मिनट मिनट पज करो

2385
03:05:05,800 --> 03:05:10,200
स्वमत की पुष्टि के लिए क्या आचार्य गण अपने जो उनके परंपरा

2386
03:05:10,200 --> 03:05:14,240
का जो तात्विक तत्व है वो नहीं रखते हैं सभी आचार्य गण

2387
03:05:14,240 --> 03:05:18,480
स्मत की पुष्टि के लिए और अगर व्यक्तिगत

2388
03:05:18,480 --> 03:05:22,560
रूप से उन्होंने ऐसा किया तो हमारे तो संज्ञान में नहीं है भैया बहुत

2389
03:05:22,560 --> 03:05:26,680
सी जगह ऐसा हुआ हैसे तुम्हारे संज्ञान में नहीं है हम तुम्हारे लिए भी बोले हैं

2390
03:05:26,680 --> 03:05:30,920
तो हमारे जो बात हमारे संज्ञान में ही नहीं है अगर ऐसा हुआ है कि वहां नाम

2391
03:05:30,920 --> 03:05:35,080
लेकर और जो है वो हो रहा है व्यक्तिगत टिप्पणी कोई हो रही

2392
03:05:35,080 --> 03:05:39,120
है क्योंकि राम भद्राचार्य जी ऐसा कर देते कहीं

2393
03:05:39,120 --> 03:05:43,840
कहीं पर व्यक्तिगत हो जाते अगर उन्होंने ऐसा किया है तो हम बिल्कुल वहां खड़े हैं आपके साथ

2394
03:05:43,840 --> 03:05:48,320
पहली बात अगर उन्होंने ऐसा किया है तो

2395
03:05:48,320 --> 03:05:52,320
दूसरी बात स्वमत की अगर पुष्टि होगी तो कौन नहीं करते

2396
03:05:52,320 --> 03:05:56,440
क्या राघवाचार्य जी महाराज नहीं करते तो क्या तुम उनके साथ क्यों बैठते

2397
03:05:56,440 --> 03:06:00,840
हो तुम तो अद्वैत हो हालांकि तुम अद्वैत नहीं हो तुम तो

2398
03:06:00,840 --> 03:06:05,000
व्यक्ता द्वैत वादी हो वोह बात और है कि तुम्हारा

2399
03:06:05,000 --> 03:06:09,080
भाष्य इत्यादि वो सब कहां से आया वोह सब विचारणीय बिंदु है वो सब

2400
03:06:09,080 --> 03:06:12,640
अभी पता चलेगा आगे

2401
03:06:12,640 --> 03:06:16,080
मगर आपके प्रियजनों के हिसाब से जो आपको

2402
03:06:16,080 --> 03:06:21,520
ये सूचनाएं भेजते हैं रूप से

2403
03:06:21,520 --> 03:06:26,200
निग्ज यह बताइए कि यह

2404
03:06:26,200 --> 03:06:32,200
जो क्या कहते हैं थोड़ा पीछे करो क्या बात चल रही

2405
03:06:33,200 --> 03:06:37,920
थी चालू करो अरे भैया सुनो तुमने किन लोगों से बात की है

2406
03:06:37,920 --> 03:06:42,360
तुमने मैनेजर से बात की है सड़क चलते लोगों से बात की है आ च

2407
03:06:42,360 --> 03:06:46,520
समाज के द्वारा या रामपाल के द्वारा थरा रूप से अधिक किसी व्यक्ति से बात करो ना तुम ऐसे लोगों

2408
03:06:46,520 --> 03:06:50,800
से कर कर प अरे ब कर

2409
03:06:50,800 --> 03:06:55,000
ये कुछ तो सोचा करो रामपाल के द्वारा

2410
03:06:55,000 --> 03:06:59,120
अधिकृत रूप से रामपाल के द्वारा अधिकृत रूप से कोई संस्था तक नहीं

2411
03:06:59,120 --> 03:07:03,720
है जो उसके अधिकृत व्यक्ति से बात की जाएगी

2412
03:07:03,720 --> 03:07:08,120
सब कुछ इल्लीगल चल रहा है उसके उसको भी तुमने इनके साथ खड़ा कर

2413
03:07:08,120 --> 03:07:12,120
दिया पता तो कर लो पहले क्या बोल रहे हो क्या नहीं बोल रहे हो

2414
03:07:12,120 --> 03:07:16,120
रामपाल का अधिकृत व्यक्ति रामपाल खुद अधिकृत नहीं है जेल

2415
03:07:16,120 --> 03:07:20,240
में उसके अधिकृत व्यक्ति को कहां से ढूंढेगा कोई भाई

2416
03:07:20,240 --> 03:07:24,440
उसका पूरा कल्ट ही उस पर चल रहा है लीगली चल रहा है

2417
03:07:24,440 --> 03:07:28,840
पूरा इलीगल चल रहा है व उसको तुम यह कह रहे हो अधिकृत

2418
03:07:28,840 --> 03:07:34,840
व्यक्ति चलो आगे बढ़ चालू

2419
03:07:37,400 --> 03:07:41,720
करो प करो प करो तो अगर उन्होंने

2420
03:07:41,720 --> 03:07:45,960
अपने स्मत की पुष्टि की होगी तो उसमें हम क्या करें भाई वो तो उनके परंपरा

2421
03:07:45,960 --> 03:07:50,000
का सिद्धांत है व अपने स्म की करेंगे व्यक्ति व्यक्तिगत टिप्पणी की होगी

2422
03:07:50,000 --> 03:07:54,080
अनादर किया होगा तो हम आपके साथ है देखूंगा वो प्रकरण दूसरी बात

2423
03:07:54,080 --> 03:07:58,200
यह है कि अगर स्वमत की मत की पुष्टि

2424
03:07:58,200 --> 03:08:02,440
की जा रही है वहा ताली बजाई जा रही है स्वमत की पुष्टि पर ठीक है

2425
03:08:02,440 --> 03:08:07,240
तो क्या राघवाचार्य जी महाराज और जो उनके गुरु हैं

2426
03:08:07,240 --> 03:08:11,800
वासुदेवाचार्य जी महाराज व अपने स्वमत की पुष्टि नहीं करते अपने मंचों

2427
03:08:11,800 --> 03:08:17,800
पर तो उनके साथ क्यों खड़े हो

2428
03:08:21,000 --> 03:08:25,080
चलो और यही कारण है कि आप जब इस आ समाज या लोगों से रामपाल लोगों

2429
03:08:25,080 --> 03:08:29,160
से शास्त्र चचा करते थे उनको एक्सपोज करते थे तो हम भी मुखर होकर कई बार आपके वीडियो को साझा करते थे लोगों

2430
03:08:29,160 --> 03:08:33,240
तक भेजते थे आपकी सराहना करते थे आपको बधाई देते थे यहां तक वाले प्रकरण में राघवाचार्य जी की वीडियो

2431
03:08:33,240 --> 03:08:37,360
की ट्रेलर क्लिप हमने पर सा नहीं करके कही हम चैनल पर आपकी वीडियो की पूरी लिंक डाली इस चैनल पर जा इस वीडियो को देख अच्छा

2432
03:08:37,360 --> 03:08:41,640
किया प्रयास अच्छा काम किया है हमने क्या सम नहीं किया हमने क्या आपको प्रोत्साहित नहीं किया अ

2433
03:08:41,640 --> 03:08:45,720
को लेकिन आप पॉज करो हमने भी समर्थन किया है हमने भी

2434
03:08:45,720 --> 03:08:49,880
प्रखर हो करके आपकी जो सही चीज उनको इधर उधर भेजा है हमने

2435
03:08:49,880 --> 03:08:53,920
भी आपकी चीजों को अपनी स्टोरी पर लगाया है जानकारी

2436
03:08:53,920 --> 03:08:56,440
पूरी

2437
03:08:56,440 --> 03:09:00,480
लो और अन्यों को प्रेरित किया है यही नहीं हम भी प्रेरित हुए

2438
03:09:00,480 --> 03:09:04,760
हैं कुछ मामलों में पूरी जानकारी लो

2439
03:09:04,760 --> 03:09:07,400
और

2440
03:09:07,400 --> 03:09:11,560
सुनो क्या कहते हैं यह समर्थन

2441
03:09:11,560 --> 03:09:15,760
आप हमारी लाइव चर्चाएं कभी देखिएगा वैसे बहुत मुश्किल है

2442
03:09:15,760 --> 03:09:20,200
लंबी लंबी उतनी लाइव चर्चा दे तना मगर

2443
03:09:20,200 --> 03:09:24,200
कई बार ऐसा हुआ जब लोगों ने तुम्हारे बारे में आकर के वहां पर हमको टोका

2444
03:09:24,200 --> 03:09:28,280
बोला कुछ किया ये कहा तो हमने सदैव वहां तुम्हारी

2445
03:09:28,280 --> 03:09:32,400
गरिमा का गरमा की रक्षा

2446
03:09:32,400 --> 03:09:36,000
की वहां कभी भी तुम्हारी कर्मा को भंग नहीं होने दिया कि तुम्हारा

2447
03:09:36,000 --> 03:09:40,080
खंडन कर दे व विरोध में बोल दे कई बार ऐसा हुआ लोगों ने आकर के तुम्हारा नाम

2448
03:09:40,080 --> 03:09:44,200
लिया इसी से पता चल जाता

2449
03:09:44,200 --> 03:09:49,120
है यह है कि हम हाथी पर बैठ के चिल्लाते नहीं है और

2450
03:09:49,120 --> 03:09:53,120
सुनो अब जब बात छिड़ी गई है तो देख वो बता देते

2451
03:09:53,120 --> 03:09:57,920
हैं चलो तुम्हारी जो लोकेश है उसकी भूक है अब उसकी बात हो जाए

2452
03:09:57,920 --> 03:10:02,400
करियर की भूख सुनो तुम्हारी मलेच्छ

2453
03:10:02,400 --> 03:10:06,520
राज वाली सीरीज में तुम स्कोन पर कब बोलने वाले हो तुमने हमें तो नहीं पता

2454
03:10:06,520 --> 03:10:10,840
था तुमने ना ही कोई सार्वजनिक किया था कि स्कोन पर तुम कब बोलोगे या क्या बोलोगे

2455
03:10:10,840 --> 03:10:15,560
ठीक है हम जिस समय कुंभ में थे

2456
03:10:15,560 --> 03:10:19,680
उस बीच हमने राघवाचार्य जी महाराज का इंटरव्यू लिया

2457
03:10:19,680 --> 03:10:24,280
था उसमें कहीं पर भी तुमसे कोई प्रेरणा नहीं थी उस बात के लिए

2458
03:10:24,280 --> 03:10:28,520
हमारा अपना कर्म था जो हम पिछले दो साल से कर रहे हैं तीन साल से

2459
03:10:28,520 --> 03:10:33,760
ठीक है व्यवहारिक रूप में दिख रहे हैं बाकी कर तो बहुत समय से

2460
03:10:33,760 --> 03:10:36,560
रहे

2461
03:10:36,560 --> 03:10:40,600
तो जब ऐसा था तो हमने लिया तो उसमें तुम्हारी प्रेरणा कहीं भी

2462
03:10:40,600 --> 03:10:44,640
नहीं थी उसके बावजूद तुमने अपने फेसबुक

2463
03:10:44,640 --> 03:10:48,880
अकाउंट पर राघवा चार जी महाराज द्वारा जो वक्तव्य

2464
03:10:48,880 --> 03:10:53,080
दिया गया जो हमने जो प्रयास किया उसको दिखाया और उसमें वहां

2465
03:10:53,080 --> 03:10:57,120
एक टिप्पणी लिखी बल्कि तुमने अपने जो यह जो गुर्गे

2466
03:10:57,120 --> 03:11:01,200
हैं इनको भी सिखाया क्या सिखाया

2467
03:11:01,200 --> 03:11:05,840
कि निग्रह चार्य की प्रेरणा से यह सब चालू हुआ है

2468
03:11:05,840 --> 03:11:10,120
निग्रह चार ने जब बोलना शुरू हुआ है तब यह चीज हुई है सालू

2469
03:11:10,120 --> 03:11:14,560
तुम्हारे बोलने से हम लोग शुरू किए थे क्या ये सब क्रेडिट

2470
03:11:14,560 --> 03:11:18,800
क्रेडिट लेना है ले लो तुमने जो क्रेडिट लिया

2471
03:11:18,800 --> 03:11:22,920
कहीं पर भी हमने उसका किसी भी प्रकार से हमने उसका खंडन नहीं किया

2472
03:11:22,920 --> 03:11:27,200
चुप रहे ठीक है कोई बात नहीं तुमने क्रेडिट लिया है कि नहीं फेसबुक

2473
03:11:27,200 --> 03:11:31,240
पर कि हमारी प्रेरणा के कारण आजय आवाज उठने लगी है यह सब भाषा बोली

2474
03:11:31,240 --> 03:11:35,320
है कि नहीं वहा तुम्हारे कारण हम बोल रहे हैं क्या हम रोए हैं

2475
03:11:35,320 --> 03:11:39,400
रात रात भर खून के आंसू

2476
03:11:39,400 --> 03:11:44,000
शंकर भगवान के बारे में आपत्ति जनक चीजें सुनके शब्द

2477
03:11:44,000 --> 03:11:48,000
सुनके और तुमने कहा तुमने हमारा वहा समर्थन नहीं किया

2478
03:11:48,000 --> 03:11:52,600
तुमने रामपाल के विषय में हमारा समर्थन क्यों नहीं किया हम लड़े इस बात पर

2479
03:11:52,600 --> 03:11:56,600
तुमसे भाई रामपाल ने जिस मां को गाली दी है वह तो तुम्हारी भी

2480
03:11:56,600 --> 03:12:00,600
मां है ना क्यों नहीं तुमने समर्थन बना दिया वीडियो और

2481
03:12:00,600 --> 03:12:04,600
यदि नहीं बनाया तो तुम हो गए दोषी तो मैं सोचूंगा भाई तुम सब कुछ

2482
03:12:04,600 --> 03:12:10,600
नहीं कर सकते तो तुम्हें भी यह सोचना चाहिए कि हम सब कुछ नहीं कर

2483
03:12:11,000 --> 03:12:15,240
सकते हमारी हर चीज में तुमने समर्थन नहीं दिया है जिस जहां पर तुम्हारा

2484
03:12:15,240 --> 03:12:19,440
समर्थन होना चाहिए मगर तुम्हारी भी एक सीमा है ना कुछ कार्य

2485
03:12:19,440 --> 03:12:23,480
कर पाने की उसी तरह हमारी है तो अपने लिए सोच लोगे जो सिद्धांत

2486
03:12:23,480 --> 03:12:27,560
वो दूसरे के लिए नहीं सोचोगे ये तो महाभारत का खंडन है महाभारत

2487
03:12:27,560 --> 03:12:31,840
में तो लिखा है कि अन्यों से जिस व्यवहार की वो करो

2488
03:12:31,840 --> 03:12:36,480
अपने लिए अपेक्षा वही व्यवहार धर्म है

2489
03:12:36,480 --> 03:12:40,480
तो हमसे तुम जिस व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हो कि तुम्हारा जहां जहां जितने जितने

2490
03:12:40,480 --> 03:12:44,520
पॉइंट में भी तुमने अच्छे कार्य किए हो सबका समर्थन हमसे हमारे द्वारा हो

2491
03:12:44,520 --> 03:12:48,520
ये अपेक्षा कर रहे हो तो हमने जहां जहां जितने जितने पॉइंट में

2492
03:12:48,520 --> 03:12:52,520
अच्छे कार्य किए हैं उनका समर्थन तुमने क्यों नहीं किया हम इसका

2493
03:12:52,520 --> 03:12:56,800
हम हम इस बात की तुमसे शिकायत नहीं कर रहे तुम्हारे

2494
03:12:56,800 --> 03:13:01,000
सिद्धांत को तुम्हें याद दिला रहे हैं कि हमने कपाती जी का वो किया था तो

2495
03:13:01,000 --> 03:13:05,200
तुम तुमने हमारा समर्थन क्यों नहीं किया अरे हमने तो दुर्गा माता के लिए कार्य

2496
03:13:05,200 --> 03:13:07,640
किया है

2497
03:13:07,640 --> 03:13:12,320
तुमने क्यों नहीं समर्थन कर दिया उन लोगों ने ऐसा वीडियो बनाया

2498
03:13:12,320 --> 03:13:16,440
अपना पूरा तंत्र जाल फैला कर के सबसे बड़ा कोई खतरा है सोशल

2499
03:13:16,440 --> 03:13:21,160
मीडिया पर तो व रामपाल है देखो जाकर के सबसे ज्यादा उसके फॉलोअर्स है

2500
03:13:21,160 --> 03:13:25,480
तुमने क्यों नहीं समर्थन किया उस विषय में हमारा

2501
03:13:25,480 --> 03:13:30,760
जब हम धरातल पर और क्या कहते हैं शास्त्रोक्त तरीके से और

2502
03:13:30,760 --> 03:13:34,920
जो ये बाहुबल वाले तरीके दोनों तरीको से उससे जब जूझ रहे थे तुमने क्यों

2503
03:13:34,920 --> 03:13:39,160
नहीं समर्थन किया और तुम कह रहे हो रामपाल के अधिकृत लोगों

2504
03:13:39,160 --> 03:13:45,080
से बात नहीं की वाह अजीब तो

2505
03:13:45,080 --> 03:13:49,280
चाहिए रामपाल के अध लोगों को ढूंढे अब यह दिन

2506
03:13:49,280 --> 03:13:53,640
आ

2507
03:13:53,640 --> 03:13:59,080
गए तो आज तक बहुस

2508
03:13:59,080 --> 03:14:03,960
गु तो क्या है

2509
03:14:03,960 --> 03:14:07,960
की यह जो समर्थन वाली बात है जिसका जहां जिसकी जानकारी होगी

2510
03:14:07,960 --> 03:14:12,160
जितना जिसका होगा उसकी जितनी सामर्थ्य होगी वह करेगा यह होता है

2511
03:14:12,160 --> 03:14:18,160
ऐसे नहीं होता है तुमने हमारी हर बात का समर्थन क्यों नहीं किया

2512
03:14:19,480 --> 03:14:23,480
और तुम वहां पर फेसबुक पर अपने आप को महामहिम क्यों दिखा रहे हो इस

2513
03:14:23,480 --> 03:14:27,760
अभियान का बताओ लोकेश ना के होना शिकार

2514
03:14:27,760 --> 03:14:31,840
क्यों दिखा रहे हो क्या तुम्हारे तुम्हारे बोलने के बाद हमने वह चैनल चालू किया था

2515
03:14:31,840 --> 03:14:35,840
तुम्हारे बोलने के बाद हम लखनौ कन प्रेसिडेंट के पास गए थे तुम्हारे

2516
03:14:35,840 --> 03:14:39,920
बोलने के बाद हमने इतने लोगों को पकड़ पकड़ के जो है उनके साथ बातचीत

2517
03:14:39,920 --> 03:14:44,320
की चर्चा की तुम्हारे बोलने के बाद तुम्हारे

2518
03:14:44,320 --> 03:14:48,360
मलेक राज वाले स्कन वाले एपिसोड से पहले हमारा वो शूट हो चुका था राघवा

2519
03:14:48,360 --> 03:14:52,360
चार का यानी कि तुम मलेच्छ राज वाले एपिसोड से उस वीडियो की प्रेरणा नहीं

2520
03:14:52,360 --> 03:14:56,720
ली गई है कुंभ में थे हम नेटवर्क तक नहीं आता है तुम्हारी

2521
03:14:56,720 --> 03:15:00,760
सीरीज में तुम क्या कर रहे थे क्या नहीं कर रहे थे नहीं पता बस जो शुभचिंतक

2522
03:15:00,760 --> 03:15:04,800
है जो तुम्हारे भी समर्थक है मेरे भी समर्थक है उन लोगों ने मुझे सूचना दी कि अच्छा हो रहा

2523
03:15:04,800 --> 03:15:08,800
है दयानंद की आज पोल खोली वो भी बाद में वह शूट हो चुका है

2524
03:15:08,800 --> 03:15:13,040
उसके बाद में मगर तुमने उसका क्रेडिट खुद को दे दिया

2525
03:15:13,040 --> 03:15:17,040
तुम्हारे अंदर घमंड है लोकेश ना है फिर भी हमने

2526
03:15:17,040 --> 03:15:21,320
तुम्हारा इस बात को लेकर के खंडन नहीं किया कि तुमसे हमें प्रेरणा मिली है

2527
03:15:21,320 --> 03:15:26,320
तुमने कहा कि हमारे आवाज उठाने के कारण अब जगह-जगह से आवाजें उठने लगी

2528
03:15:26,320 --> 03:15:30,320
है तुमने कहा ये निराधार तुम्हारे कारण आवाज

2529
03:15:30,320 --> 03:15:34,480
नहीं उठी थी वो पर तुमने जबरदस्ती आधी रोटी

2530
03:15:34,480 --> 03:15:39,080
पर डाल ली वहां हम तब भी चुप रहे

2531
03:15:39,080 --> 03:15:43,280
समझे इसीलिए कहते हैं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में जब बोलोगे

2532
03:15:43,280 --> 03:15:47,360
तो फिर सुनोगे चलो डाल डाल हम आ रहे हैं पीछे पात

2533
03:15:47,360 --> 03:15:51,200
चलो भाई

2534
03:15:51,200 --> 03:15:55,360
बोलो बोलो चालू करो य तक राम मंदिर वाले प्रक

2535
03:15:55,360 --> 03:15:59,400
में आपके गुरु जी के साथ खड़े थे पूरे भारत में कोई नहीं खड़ा था पूरे देश में आप नकर पठ

2536
03:15:59,400 --> 03:16:04,240
भी आपके सम नहीं बोल पा रही थी उस समय आपके गुरुजी के साथ खड़े बात और

2537
03:16:04,240 --> 03:16:08,320
बात और या तुमने अपने गुरुग को क्या सिखाया है

2538
03:16:08,320 --> 03:16:12,440
क्या सिखाया कि यह बात तुमने

2539
03:16:12,440 --> 03:16:17,520
पहले बोली है कि आर समाज जैसे जो तंत्र उन्होंने शूद्र कितने बनाए नहीं बोली तुमने

2540
03:16:17,520 --> 03:16:22,400
पहले तुमने नहीं बोली तुम्हारी जानकारी में हो या ना हो वह नहीं पता

2541
03:16:22,400 --> 03:16:26,480
हमने गुरुदेव के मुख से सुनी है तुमसे पहले वाले किसी व्यक्ति

2542
03:16:26,480 --> 03:16:31,360
को हम जानते हैं ठीक है

2543
03:16:31,360 --> 03:16:35,400
तो तुम क्यों सिखा रहे हो लोगों को यह बात तुमने ही छेड़ी है हम तो तुम्हें

2544
03:16:35,400 --> 03:16:39,640
तुम्हारे वक्तव्य को सुन ही नहीं पाते थे तब हमने य बात बोल दी थी अपने एक साल पुराने वीडियो

2545
03:16:39,640 --> 03:16:44,000
में क्योंकि हमने गुरुदेव से सुना था

2546
03:16:44,000 --> 03:16:48,240
ये जो जितने भी वर्णाश्रम विरोधी है यह सबको ब्राह्मण बना आते हैं जो कर्मणा

2547
03:16:48,240 --> 03:16:54,240
वर्ण व्यवस्था वाले

2548
03:17:04,160 --> 03:17:06,320
हैं

2549
03:17:06,320 --> 03:17:10,360
और तुमने पक्ष लिया था तो क्या कोई एहसान किया था

2550
03:17:10,360 --> 03:17:14,360
हमने भी तो तुम्हारा पक्ष लियाब तुम्हारे तुम्हारे शकल के साथ

2551
03:17:14,360 --> 03:17:18,600
कुते की शकल को जोड़ कर के प्रचारित किया जा है जब तुम्हारे चेहरे

2552
03:17:18,600 --> 03:17:24,600
के साथ कुत्ते की शक्ल को जोड़ करके लोग बना रहे हैं तो हमने वहा विरोध किया

2553
03:17:27,440 --> 03:17:31,480
ना चलो बताओ यह आपकी कता है य

2554
03:17:31,480 --> 03:17:37,480
आपका सिद्धांत

2555
03:17:43,040 --> 03:17:49,040
है को

2556
03:18:00,480 --> 03:18:05,120
वित तुमने किया हमने कुछ नहीं किया हमने बात की है हम बचारी

2557
03:18:05,120 --> 03:18:10,040
बात की है औरस विने बच लेकर आ हो और

2558
03:18:10,040 --> 03:18:14,120
किया करो प करो ठीक है विजय श्री को

2559
03:18:14,120 --> 03:18:18,200
मैं बीच में लेकर आया तुम्हारे हिसाब से तो फिर तुम जब तुमने विजया श्री

2560
03:18:18,200 --> 03:18:22,440
पर बात नहीं कि तो तुम क्या के लिए आ गए यही फस गए तुम

2561
03:18:22,440 --> 03:18:26,680
तुम्हारे हिसाब से विजय श्री पर तुमने बात नहीं की विजय स तुम्हारा मुद्दा नहीं

2562
03:18:26,680 --> 03:18:30,840
था और मैं विजय सह को लेकर आया वो मुद्दे में था ही नहीं

2563
03:18:30,840 --> 03:18:35,040
तो फिर तुम क्यों आ गए अगले दिन वीडियो बनाने

2564
03:18:35,040 --> 03:18:39,520
बताओ तुम्हारी बातों से ही तुम्हारी बातें कट रही है

2565
03:18:39,520 --> 03:18:43,520
विजय सी को तुम बीच में लाए बोले तुम विजय स पे

2566
03:18:43,520 --> 03:18:48,280
और मट पर भी बोले एक सीमा तक मैं सुनता आ जाकर के मैं बोलता

2567
03:18:48,280 --> 03:18:52,480
भी मगर मैं चुप था क्योंकि तुम अच्छे कार्य भी कर रहे थे साथ

2568
03:18:52,480 --> 03:18:58,480
की

2569
03:18:58,600 --> 03:19:03,240
साथ ऐसे अच्छे कार्य ऐसे अच्छे कार्य

2570
03:19:03,240 --> 03:19:07,280
ऐसे अच्छे कार्य जिनसे धर्म की ध्वजा लहर सकती

2571
03:19:07,280 --> 03:19:11,280
थी और तुम्हारे जैसे लोगों की आवश्यकता थी उन अच्छे कार्यों

2572
03:19:11,280 --> 03:19:15,520
को करने वाले के रूप में तो इसलिए लेट गो लेट

2573
03:19:15,520 --> 03:19:20,680
गो छोड़ो लेट गो यह कर रहे थे

2574
03:19:20,680 --> 03:19:26,680
हम और जिनके लिए तुम बोल रहे थे वह स्वयं सामर्थ्य वान

2575
03:19:26,760 --> 03:19:31,040
थे

2576
03:19:31,040 --> 03:19:35,040
चलो अभी तक आप नहीं सो पाए में आपको आना है या नहीं आना

2577
03:19:35,040 --> 03:19:40,400
बा आपको बता

2578
03:19:40,400 --> 03:19:44,560
रहा है टाइम बताया जाए कितनी देर का बाकी

2579
03:19:44,560 --> 03:19:50,560
है इनका

2580
03:19:55,600 --> 03:20:01,600
कितनी देर का बाकी है इनका टाइमिंग आ सकती है

2581
03:20:05,880 --> 03:20:09,920
क्या जाता जाता वैसे

2582
03:20:09,920 --> 03:20:14,200
ही हम लोग को जानते जिन लोग उ लिए भी लड़ेंगे

2583
03:20:14,200 --> 03:20:18,240
तो तुम तुम उनके लिए लड़ो ग जिनको जानते हो किके लिए लड़ रहे हो तुम तुम

2584
03:20:18,240 --> 03:20:22,400
किसी को दोषी सिद्ध करने के लिए लड़ रहे हो

2585
03:20:22,400 --> 03:20:28,400
हम किसी को निर्दोष सिद्ध करने के लिए लड़ रहे हैं ये अंतर

2586
03:20:30,600 --> 03:20:34,760
है चलो विजया श्री मुद्दा नहीं था

2587
03:20:34,760 --> 03:20:38,760
विजया श्री को इन्होंने झूठा वहां पर प्रचार नहीं किया था कि मंच पर बैठी

2588
03:20:38,760 --> 03:20:44,760
है कि नहीं विजया श्री को इन्होंने फ्री मेशन से नहीं जोड़ा था विजय श्री मुद्दा नहीं था

2589
03:20:48,120 --> 03:20:52,160
और यह तो तो ये तो खैर शुरुआत की केवल बात है कि चलो अब

2590
03:20:52,160 --> 03:20:56,520
उसी बहाने से शुरुआत हो गई तो हो गई मगर अब मुद्दा यह भी है मट के परिक

2591
03:20:56,520 --> 03:21:02,400
को भी आप सिद्ध करिए आइए

2592
03:21:02,400 --> 03:21:06,480
लाइव हम भी उन लोग भी उन लोगों के साथ है जिनको हम जानते हैं

2593
03:21:06,480 --> 03:21:10,520
विजया स का नाम है उन लोगों का नाम बताओ वो आके बोली

2594
03:21:10,520 --> 03:21:14,840
है बोलिए यहां पर ले आओ अपने लाइव में उन लोगों को

2595
03:21:14,840 --> 03:21:19,520
गुरुदेव के शिष्य आओ बोलो चल के दिखाओ कौन ककन है

2596
03:21:19,520 --> 03:21:23,560
तुम्हारी बातें क्यों मान ले तुम होगे

2597
03:21:23,560 --> 03:21:29,240
अपने लुप्त संप्रदाय के जिसकी धातु छीन हो चुकी है

2598
03:21:29,240 --> 03:21:33,640
आचार्य 47 किलो वजन पर जिसका वजन रुक गया धातु छी होने के कारण

2599
03:21:33,640 --> 03:21:38,320
हमारे लिए नहीं हो तुम्हारा शब्द हमारे लिए प्रमाण नहीं है

2600
03:21:38,320 --> 03:21:42,400
तो लेके आओ उनको जो ये सब बोलते हैं करो लाइव उनके साथ बैठ

2601
03:21:42,400 --> 03:21:45,680
कर के मैं जिसके लिए खड़ा हुआ हूं वो अपना चेहरा दिखा कर के वो

2602
03:21:45,680 --> 03:21:49,760
पक्ष प्रस्तुत कर आया जो वो कह रहा है जिसके आधार पर हम बात कर रहे हैं तुम

2603
03:21:49,760 --> 03:21:53,760
जिसके आधार पर बात कर रहे हो सब अदृश्य लोग हैं बुलाने जाओगे सब छोड़ के भाग

2604
03:21:53,760 --> 03:21:57,760
जाएंगे तुमको और छोड़ के

2605
03:21:57,760 --> 03:22:00,480
भागे हुए

2606
03:22:00,480 --> 03:22:05,520
हैं ना मिश्रा जी आएंगे निग निग करने वाले ना कोई और आएगा

2607
03:22:05,520 --> 03:22:10,160
बुलाओ कौन लोग है जो यह सब कर रहे हैं

2608
03:22:10,160 --> 03:22:16,160
दिखाओ बस तुमने कह दिया मान ले

2609
03:22:19,000 --> 03:22:24,320
चलो प्ले

2610
03:22:24,320 --> 03:22:28,520
करो ये सब बातों का पहले

2611
03:22:28,520 --> 03:22:33,480
से ही बात हुई है तुम जिन लोगों के लिए खड़े हो रहे हो

2612
03:22:33,480 --> 03:22:37,640
पहली बात तो वह किसी पर किसी को दोषी सिद्ध करना करना चाहते हैं तुम

2613
03:22:37,640 --> 03:22:41,640
उनके लिए खड़े नहीं हो रहे हो उनके तरफ से कोई दोषी जिसको सिद्ध करना है

2614
03:22:41,640 --> 03:22:45,680
उनके लिए खड़े हो रहे हो और दूसरी बात वो सब अदृश्य है ना नाम है ना

2615
03:22:45,680 --> 03:22:49,960
पता है ना कुछ है बताओ उनकी पहचान क्या है और अब फिर पहचान

2616
03:22:49,960 --> 03:22:54,000
के साथ उनको खड़ा करो और बोले य आ कर के ऐसा ऐसा हम आरोप

2617
03:22:54,000 --> 03:22:58,040
लगाते हैं सिंपल फिर लड़ा

2618
03:22:58,040 --> 03:23:02,160
जाएगा युद्ध बुलवा उनको खड़े करके

2619
03:23:02,160 --> 03:23:06,280
हमने तो बुलवाया हम उसका पक्ष ले रहे हैं जो आ कर के बोल रहा है

2620
03:23:06,280 --> 03:23:10,360
ऐसा ऐसा हो रहा है मेरे साथ तुम झूठा आरोप लगा रहे हो

2621
03:23:10,360 --> 03:23:14,560
उसके ऊपर विजय स से विजय स से किसको दिक्कत हो गई थी

2622
03:23:14,560 --> 03:23:18,880
किसका वहां पर चलो तुम ने बताया कि तुम्हारे अनुसार परकर प

2623
03:23:18,880 --> 03:23:23,120
जो पीठ के जो परिकर है उन्होंने किसी को मारा तुम उसके पक्ष में खड़े हो हैं विजय

2624
03:23:23,120 --> 03:23:27,800
सिंह ने किसको किसकी ठुकाई कर दी थी ऐसे लोगों के साथ रहते हो ना तुम

2625
03:23:27,800 --> 03:23:33,800
महिलाएं जिनकी ठुकाई कर देती है पीट के भगा देती

2626
03:23:34,480 --> 03:23:40,480
है करियर करियर खेल रहे हैं

2627
03:23:42,400 --> 03:23:47,280
चलो मैं जानता हूं अगर मेरे अ आत्मा कह रही है गलत नहीं है तो

2628
03:23:47,280 --> 03:23:51,360
तो मैं भी तो जो वही बात कर रहा हूं भाई जिन लोगों के प्रति मुझे विश्वास है जिन लोगों के प्रति मैं निज रूप से अवगत हूं मैं भी उनके

2629
03:23:51,360 --> 03:23:55,680
लिए खड़ा हूं मैं भी भाई तो तुम्हारा शब्द हमारे लिए प्रमाण नहीं है उन लोगों को दिखाओ

2630
03:23:55,680 --> 03:23:59,800
ना जिनके लिए तुम खड़े हो और जो पूरी पीठ को दोषी सिद्ध करना

2631
03:23:59,800 --> 03:24:04,120
चाहते हैं कि उनको पीटा गया

2632
03:24:04,120 --> 03:24:08,400
है यह तो चोर है जो हमारे

2633
03:24:08,400 --> 03:24:13,120
तुम्हारे जैसे लोगों के बीच में कले करवा कर के आएंगे नहीं कल को

2634
03:24:13,120 --> 03:24:17,120
और तुम्हारे जिन लोगों को जिन लोगों को जिन लोगों के तुम खड़े हो रहे हो

2635
03:24:17,120 --> 03:24:23,120
विजय श को भी उससे दिक्कत थी विजय श से भी उसको कोई व्यक्तिगत दिक्कत थी

2636
03:24:24,280 --> 03:24:28,400
क्या बुलाना उन चोरों को गुरु द्रोहियों को जोय

2637
03:24:28,400 --> 03:24:31,760
सब आग लगवा रहे हैं

2638
03:24:31,760 --> 03:24:36,840
चलो क गलत हो ग तुम सही हो

2639
03:24:36,840 --> 03:24:42,800
गए बता दिया हम कहां से सही हो गए तुम कहां से गलत हो गए

2640
03:24:42,800 --> 03:24:46,800
चलो अरे बात विज नहीं चल रही थी बात चल रही थी जिसम द्वारा

2641
03:24:46,800 --> 03:24:50,840
तुम्हारे जैसे लोगों के द्वारा अयोग लोग को मठ में घुसा करर वहां से अपना जो है मैनिपुलेशन

2642
03:24:50,840 --> 03:24:55,560
का काम पूरा करना ये मुख्य उद्देश्य है य पर बात चल रही मैनिपुलेशन का काम और मास्टरबेशन

2643
03:24:55,560 --> 03:25:00,480
का काम कौन-कौन कर रहा है यह पता चल रहा है ठीक है

2644
03:25:00,480 --> 03:25:04,480
कौन कौन मत्स पुराण लिखने वालों को वेदव्यास को भी

2645
03:25:04,480 --> 03:25:10,480
कह दे रहा है आपत्ति जनक शब्द चलो प्ले

2646
03:25:13,240 --> 03:25:17,360
करो या को तो महिला होने का तुम सामने प्रमोट कर रहे हो लेकिन महिला हो चाहे पुरुष

2647
03:25:17,360 --> 03:25:21,400
सेवा बराबर करेंगे कानून इक्ली सबको ट्रीट करता है छोड़ा किसी को नहीं जाएगा जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं कहे

2648
03:25:21,400 --> 03:25:25,560
महिला कहेगा पुरुष चाहे आए ता चाहे बास हम भी हम भी किसी को

2649
03:25:25,560 --> 03:25:29,960
हम भी किसी को छेड़ते नहीं कोई छेड़ दे तो छोड़ते नहीं ठीक है और

2650
03:25:29,960 --> 03:25:34,800
तू लाइव आना ना तो अपने उनको साथ लाना जिनके साथ तू खड़ा है

2651
03:25:34,800 --> 03:25:39,440
साथ में लाना लाइव आना तो जिनके साथ तू खड़ा

2652
03:25:39,440 --> 03:25:43,800
है चल भाई

2653
03:25:43,800 --> 03:25:47,960
चलो उसको भी लाना वो जिसका जिसका जिसका जिसका जिसके तुम

2654
03:25:47,960 --> 03:25:52,960
निग हो निग उसको भी लाना साथ में मिश्रा जी

2655
03:25:52,960 --> 03:25:58,960
को

2656
03:26:04,160 --> 03:26:08,160
चलो सब बात हो गई थोप करो हो गई सब बातें

2657
03:26:08,160 --> 03:26:14,160
पहले ही इनके उत्तर दे

2658
03:26:15,240 --> 03:26:19,360
दिए विजा श्री है हम तो स्वयं उसी वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखे हैं और

2659
03:26:19,360 --> 03:26:25,000
डिस्क्रिप्शन लोग ना पढ़ पाए तो पिंट कमेंट में उसको लिखे हैं

2660
03:26:25,000 --> 03:26:29,720
किजो पॉज करो तुम फस गए हो

2661
03:26:29,720 --> 03:26:33,960
झूठ बोल रहे हो यहां पे तुम फस करके कि तुमने शास्त्रीय पक्ष

2662
03:26:33,960 --> 03:26:38,400
तुम्हारी वो क्लिप काट ली गई है और वो हमने दिखाई थी

2663
03:26:38,400 --> 03:26:42,520
उसी क्लिप को हमने दिखाया था जिसमें तुमने कहा है इस वीडियो के अंत में एक वीडियो दिखाया

2664
03:26:42,520 --> 03:26:46,680
जाएगा जिसमें आप देखिएगा विजया श्री कैसे पुरी के शंकराचार्य जी जी के मंच

2665
03:26:46,680 --> 03:26:50,840
पर बैठी हुई है और तुम आओ और इस चीज

2666
03:26:50,840 --> 03:26:54,880
को गलत सिद्ध करो जो मैंने अभी ये बोली है और उनको लेके आना जिनके साथ

2667
03:26:54,880 --> 03:26:59,000
तुम खड़े हुए हो जिनके साथ तुम खड़े हुए हो उनको

2668
03:26:59,000 --> 03:27:03,400
लेके आओ उनकी पहचान के साथ

2669
03:27:03,400 --> 03:27:07,720
चलो व साी प्रेम भाई सा और साी प्रेम भाई सा भी इसी प्रकार से

2670
03:27:07,720 --> 03:27:13,720
अ शस्त्री गतिविधियों में अस्त्रीय के साथ मर्यादित रूप

2671
03:27:14,120 --> 03:27:18,200
से चलो यहां यही तुमने भारी भूल कर दी भगवता

2672
03:27:18,200 --> 03:27:22,360
अंद यही कर दी थी भारी भूल कमेंट पढ़ पहली बात तो तुमने जो

2673
03:27:22,360 --> 03:27:26,440
है किसी निर्दोष मातृ शक्ति के संदर्भ

2674
03:27:26,440 --> 03:27:30,440
को अपनी रोटियां सेकने के लिए उपयोग में लेना यही पे

2675
03:27:30,440 --> 03:27:36,440
भारी भूल कर दी यही तुम्हारे नाश का कारण

2676
03:27:36,440 --> 03:27:40,440
बनेगी रावण के नाश का कारण भी एक मात्र शक्ति थी ना तुम

2677
03:27:40,440 --> 03:27:44,840
जैसे अहंकारी के नाश का कारण भी एक मात्र शक्ति बनेगी यही मात्र शक्ति बनेगी

2678
03:27:44,840 --> 03:27:49,320
यही भारी भूल कर दी तुमने कि तुमने अपने उसमें अहंकार

2679
03:27:49,320 --> 03:27:54,400
के नशे में चूर होकर एक निर्दोष के बारे में गलत चीज बोल

2680
03:27:54,400 --> 03:27:56,800
दी

2681
03:27:56,800 --> 03:28:00,920
चलो फ उस पर लीपा पोती कर रहे हो अपने उसम जाके

2682
03:28:00,920 --> 03:28:06,920
डिस्क्रिप्शन में जाकर

2683
03:28:10,000 --> 03:28:15,120
के चलो

2684
03:28:15,120 --> 03:28:20,640
चलो क्यों अे हो ग

2685
03:28:20,640 --> 03:28:24,960
क्या वो वीडियो है क्या अभी कटिंग किया हुआ ऑपरेटर

2686
03:28:24,960 --> 03:28:29,080
वो वाला वीडियो उसमें बोल रहे थे कि

2687
03:28:29,080 --> 03:28:33,200
वीडियो के अंत में जो है वह लास्ट में वह है जिसमें वो

2688
03:28:33,200 --> 03:28:39,200
कर रही है मंच साझा है क्या अभी अपने

2689
03:28:40,240 --> 03:28:45,040
पास है तो मुझे

2690
03:28:45,040 --> 03:28:49,960
बताएं हम देखिए देखिए ये तो अपने खुद की बात कर रहा है

2691
03:28:49,960 --> 03:28:54,640
सवा करो पोना चाहि

2692
03:28:54,640 --> 03:28:58,760
अरे भैया उस स्त्री का चेहरा और विज श्री का चेहरा दोनों वही

2693
03:28:58,760 --> 03:29:03,200
सामने समझ नहीं दोन अलग अलग लोग इसलिए में कहा

2694
03:29:03,200 --> 03:29:09,200
करो लीपा पोती करो लीपा पोती

2695
03:29:13,440 --> 03:29:17,800
करो को अपने भक्तो को अपने इन कुतर्कों

2696
03:29:17,800 --> 03:29:22,080
से संतुष्ट करा सकते हो समझे हमको नहीं करा पाओगे

2697
03:29:22,080 --> 03:29:28,080
आना लाइव में तब पूछेंगे तुमको तुम्हारा वीडियो दिखा

2698
03:29:29,440 --> 03:29:34,040
कर

2699
03:29:34,040 --> 03:29:38,080
है हा एक व्यक्ति ये कह रहा है आपने बोला था विजया कीड

2700
03:29:38,080 --> 03:29:42,160
करूंगा वालन से हो गया होगा सेने स्क्रीन शड कि नहीं वो बोलने के समय अलग

2701
03:29:42,160 --> 03:29:46,240
अलग विषयो में गब हो गई थ मान सुधार लेते हैं लेकिन उसे त्र

2702
03:29:46,240 --> 03:29:50,560
के कारण बोने हो गया था जैसे उ वीडियो में आगे पीछे क अनंद का नाम हमने ले लिया

2703
03:29:50,560 --> 03:29:54,600
बोलने के चकर में और डी श उचार कर लि बोलकर उस दि बहुत अधिक रे पर पड़ रही थी और आप गौ

2704
03:29:54,600 --> 03:29:59,440
करेंगे त जदा रही बिक थी उसके कारण क बार आख बंद हो रही थी और क

2705
03:29:59,440 --> 03:30:05,440
ब पीछे

2706
03:30:08,240 --> 03:30:13,800
करो कहना

2707
03:30:13,800 --> 03:30:17,840
है हा एक व्यक्ति ये कह रहा है कि आपने बोला था विजया

2708
03:30:17,840 --> 03:30:22,960
की क्लिप ड करूंगा वालन से हो गया होगा वाने स्क्रीनशॉट शड कि

2709
03:30:22,960 --> 03:30:28,920
नहीं क्या कह रहे समझ नहीं आ

2710
03:30:28,920 --> 03:30:31,040
रहा

2711
03:30:31,040 --> 03:30:35,080
हा घोषित कर दिया वाह जी वाह तो य तो वही हो गई बर्मा के घर

2712
03:30:35,080 --> 03:30:39,640
में नोट की गड निकली तो कोर्ट ने कहाया ज साब आपको दंड दिया जाता है आप य के जर

2713
03:30:39,640 --> 03:30:44,200
रहेंगे आप ऐसा कर देते क्या बो हो था जैसे उ

2714
03:30:44,200 --> 03:30:50,200
में आ पछ आपको द दिया य रहे ऐसा कर देते

2715
03:30:53,560 --> 03:30:59,560
क्याय सम

2716
03:31:12,520 --> 03:31:18,520
हा कहना हैदा

2717
03:31:20,480 --> 03:31:24,480
एक व्यक्ति ये कह रहा है कि आपने बोला था विजया की क्लिप

2718
03:31:24,480 --> 03:31:29,680
ड करूंगा वाकल से हो गया होगा वाकल से मैंने स्क्रीनशॉट

2719
03:31:29,680 --> 03:31:33,680
कि बताते क्या कहा इन्होने विजया विजया जी

2720
03:31:33,680 --> 03:31:38,000
के लिए क्या क्या बोल रहे

2721
03:31:38,000 --> 03:31:42,600
हैं क्या बोला भगवता आनंदने कोई लिख के बता दे कमेंट

2722
03:31:42,600 --> 03:31:48,600
करके या अगर आपको समझ में आ रहा है तो

2723
03:31:50,600 --> 03:31:54,640
वाघ दोष से हो गया वोह ठीक है मगर वह क्या बोला था वो पूछ रहा

2724
03:31:54,640 --> 03:31:58,840
हूं वाक थलन से क्या था कमेंट

2725
03:31:58,840 --> 03:32:01,800
किया है

2726
03:32:01,800 --> 03:32:05,920
क्या वाक स्लन से हो गया होगा मगर क्या हो गया होगा क्या

2727
03:32:05,920 --> 03:32:11,920
था वो

2728
03:32:16,840 --> 03:32:22,840
वाक स्खलन से हो गया

2729
03:32:26,280 --> 03:32:30,600
होगा हां अच्छा लन से हो गया होगा

2730
03:32:30,600 --> 03:32:35,480
ऐसे नहीं होता है ना पहली बात तो यह कि वाक स्खलन से हो गया होगा

2731
03:32:35,480 --> 03:32:39,680
तो तुम्हारे एडिटर ने या तुमने ही एडिटिंग की होगी तो तुमने

2732
03:32:39,680 --> 03:32:43,760
देखा होगा ना वीडियो को और वा किस स्खलन से हो

2733
03:32:43,760 --> 03:32:47,840
गया होगा तो वो क्यों डाल दिया वीडियो आज भी पड़ा

2734
03:32:47,840 --> 03:32:52,040
हुआ है क्यों नहीं उतना हिस्सा कट करवा दिया वीडियो अपलोड हो जाने के बाद

2735
03:32:52,040 --> 03:32:56,120
भी कट हो जाता है तुमको जब एल्गोरिथम मालूम है टीआरपी मालूम है तो ये नहीं मालूम

2736
03:32:56,120 --> 03:33:00,240
है क्या आज भी वो वीडियो पड़ा हुआ है नोटिस जाने के बाद भी आपको

2737
03:33:00,240 --> 03:33:05,480
वो पड़ा हुआ है सोचना

2738
03:33:05,480 --> 03:33:09,560
चाहिए यह सब थोड़ी ना देखा जाएगा और अगर हो गया तो

2739
03:33:09,560 --> 03:33:13,960
माफी मांगो विजय श्री मैं आपसे माफी मांगता हूं बनाओ वीडियो

2740
03:33:13,960 --> 03:33:18,360
वा किस खलन से हो गया हो अच्छा

2741
03:33:18,360 --> 03:33:22,400
चलो गड़बड़ हो गई थी इस मानवी सुधार लेते हैं

2742
03:33:22,400 --> 03:33:26,920
लेकिन उस त्रुटी के कारण बोलने में हो गया था जैसे

2743
03:33:26,920 --> 03:33:32,080
वीडियो में आगे पीछे कहीं का नाम हमने ले

2744
03:33:32,080 --> 03:33:37,960
लिया कर

2745
03:33:37,960 --> 03:33:42,360
बोनो वालन से हो गया होगा तो सुनो जो तुमने

2746
03:33:42,360 --> 03:33:46,520
अपने वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा है वो तुमने बोला है क्या वाक

2747
03:33:46,520 --> 03:33:50,720
स्खलन से हो गया तुमने वीडियो किसके बारे में लगाया है यह तुमने

2748
03:33:50,720 --> 03:33:54,920
बोला है क्या जो तुमने डिस्क्रिप्शन में लिखा है बोला है वो मैं अंत में वीडियो

2749
03:33:54,920 --> 03:33:58,960
लगाऊंगा पूरी शंकराचार्य की पूरी शंकराचार्य के मंच की

2750
03:33:58,960 --> 03:34:03,120
अ शस्त्री दिखाने के लिए

2751
03:34:03,120 --> 03:34:07,160
यहां फसे ना तुम फस गए ना मैंने कहा है तुम यहां फस गए वीडियो

2752
03:34:07,160 --> 03:34:12,040
बना के और वाक स् कलन से अगर हुआ तो वाक उस वाक्य को काट दो ना

2753
03:34:12,040 --> 03:34:15,880
अंत में उसका वीडियो काटो

2754
03:34:15,880 --> 03:34:20,560
या तो बोलो य किसका वीडियो है मैं क्या दिखा रहा हूं इस वीडियो के माध्यम से

2755
03:34:20,560 --> 03:34:24,640
कुछ वा वाक स्खलन नहीं हुआ है तुमने वह जल्दबाजी में वीडियो अधूरी जानकारी

2756
03:34:24,640 --> 03:34:28,640
पर लगा दिया है और उसके बाद अब तुम इससे बचना चाहते हो

2757
03:34:28,640 --> 03:34:33,040
इसीलिए तुम्हारी जो जवान है व लड़खड़ा

2758
03:34:33,040 --> 03:34:39,040
रही है आ बा बा

2759
03:34:39,160 --> 03:34:42,480
चलो चलो

2760
03:34:42,480 --> 03:34:46,600
भाई उसके कारण कई बार आंखें बंद हो रही थी और क मन इधर

2761
03:34:46,600 --> 03:34:50,920
उधर भटक रहा था धूप के कारण तो इसीलिए हमारे मुख से ऐसा निकल गया होगा बिल्कुल निकला होगा

2762
03:34:50,920 --> 03:34:54,920
लेकिन वहा वन स्क्रीन बोलना चाहते होंगे वीडियो इत्यादि अटच हो

2763
03:34:54,920 --> 03:35:00,920
गया होगा शीम

2764
03:35:02,560 --> 03:35:07,080
नारायण चोर की दाढ़ी में तिनका

2765
03:35:07,080 --> 03:35:12,360
जब झूठ बोलने प आता

2766
03:35:12,360 --> 03:35:16,520
हैया अगर कोई हो रहा है हो

2767
03:35:16,520 --> 03:35:20,680
जाए अगर रावण ने मोरी का हरण किया है र रावण ने सीता का हरण किया

2768
03:35:20,680 --> 03:35:24,920
है जैसे एक भी हो गया मंदोदरी के विषय में म

2769
03:35:24,920 --> 03:35:29,040
नहीं करेंगे क्यों वो राम सुनो सुनो सुनो

2770
03:35:29,040 --> 03:35:33,080
सुनो पॉज करो हमसे हुआ मंदोदरी के विषय में तो हमने उसको तुरंत

2771
03:35:33,080 --> 03:35:37,160
सुधारा ना वही उसी वीडियो में अगर तुम कुछ और कहना चाह रहे थे

2772
03:35:37,160 --> 03:35:41,280
और कुछ और और तुमसे कुछ और निकल गया तो तुमने वो कुछ और क्यों नहीं कहा जो तुम कहना

2773
03:35:41,280 --> 03:35:45,800
चाह रहे थे वो कहां है हस गए ना

2774
03:35:45,800 --> 03:35:50,640
यही फसे तुम मैंने कहा ना यह करके तुमने भारी भूल कर दी

2775
03:35:50,640 --> 03:35:54,720
यह करके तुमने भारी भूल कर दी एक स्त्री की गर्मा सम्मान पर

2776
03:35:54,720 --> 03:35:58,720
जो बात कर दी तुमने अपने धे के चक्कर में उसको

2777
03:35:58,720 --> 03:36:02,920
बीच में तुम जो घसीट लाए व तुमने भूल की है अरे

2778
03:36:02,920 --> 03:36:07,120
भाई जैसे तुमने मेरा य उदाहरण लिया कि मैंने मंदोदरी मंदोदरी जो शब्द

2779
03:36:07,120 --> 03:36:13,120
का उपयोग किया उसम भूल से निकल गया तो मैंने तुरंत उसको सुधारा सुधारा

2780
03:36:13,400 --> 03:36:19,400
मैंने और जो सही बात थी वो भी वही प्रस्तुत कर

2781
03:36:19,640 --> 03:36:23,640
दी तुमने तुम तुम जो कहना चाह रहे थे वो

2782
03:36:23,640 --> 03:36:27,760
ना कह कर के तुम्हारे मुख से अगर और कुछ निकल गया था तो जैसे मेरे मुख से यहां

2783
03:36:27,760 --> 03:36:31,920
पर जब और कुछ निकल गया तुम मेरा उदाहरण दे रहे हो तो मैंने जो मैं कहना चाह रहा था वो कहा

2784
03:36:31,920 --> 03:36:36,960
ना फिर तुमने कहां कहा यहां पर भी तुम फसे

2785
03:36:36,960 --> 03:36:41,480
चलो आओ उसी बात पर आओ

2786
03:36:41,480 --> 03:36:45,720
अब एक बात यथ वो जो कैसे इतनी समीक्षा करते बहुत बढ़िया य तो

2787
03:36:45,720 --> 03:36:51,720
एक बात ये है कि इसको शुरू ऐसे कर सकते हैं मिल जाते हैं सारे रंग

2788
03:36:53,280 --> 03:36:57,480
मि साथ बोलेंगे पहले बात ये है इसको शुरू

2789
03:36:57,480 --> 03:37:02,320
ऐसे कर सकते है मिल जाते हैं सारे रंग मि के रंग में

2790
03:37:02,320 --> 03:37:05,920
अभी भी बोली है थोड़ी देर पहले

2791
03:37:05,920 --> 03:37:10,080
कि यह जो बात है इसलिए कही है कि भाई जब कोई व्यक्ति

2792
03:37:10,080 --> 03:37:14,840
का मठ है जब कोई व्यक्ति के य बहुत सारे लोग हैं तब तो वहां की कोई समीक्षा करेगा

2793
03:37:14,840 --> 03:37:19,120
कि उससे जुड़े हुए लोग क्या कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे हैं वो क्या हो रहा है ये क्या हो रहा है जिसकी

2794
03:37:19,120 --> 03:37:23,280
जिसका जो जीवन होगा समाज के सामने दिखेगा ट्रांसपेरेंट तरीके

2795
03:37:23,280 --> 03:37:27,720
से हम तुम्हारा तो

2796
03:37:27,720 --> 03:37:32,400
लुप्त संप्रदाय के गुप्त संप्रदाय वाला जीवन

2797
03:37:32,400 --> 03:37:36,440
है और गुप्त रोग भी है लोगों के द्वारा बताया गया है

2798
03:37:36,440 --> 03:37:41,200
और तुम्हारा सिद्धांत है कि लोगों के द्वारा बताई जाने वाली बात तुम लड़ने मरने

2799
03:37:41,200 --> 03:37:46,080
लगोगे तो लुप्त संप्रदाय गुप्त संप्रदाय और गुप्त रोग

2800
03:37:46,080 --> 03:37:48,800
और उसका गुप्त

2801
03:37:48,800 --> 03:37:53,680
इलाज हर शुक्रवार मिलो चलो भाई मतलब

2802
03:37:53,680 --> 03:37:59,680
सुनाओ जितने लोगों की समीक्षा की जा रही

2803
03:38:00,760 --> 03:38:04,800
है और अगर ये कहा जाए कि इस पुरे के शंकराचार्य ने छत्र सिंहासन

2804
03:38:04,800 --> 03:38:09,160
छोड़ दिया है गौ हत्या के विरोध में तो हमारे पास तो

2805
03:38:09,160 --> 03:38:13,280
चतुष्पथी के शंकरा

2806
03:38:13,280 --> 03:38:17,440
बात कही है इन्होने एक बात कही है यहां पर एक बात कहिए मैं उसका उत्तर

2807
03:38:17,440 --> 03:38:21,520
दे दूं स्कोन वाले भी यही कहते दयानंद वाले भी यही कहते हम तो अच्छा कार्य

2808
03:38:21,520 --> 03:38:25,840
कर रहे हैं वह अच्छा कार्य करते समय धर्म

2809
03:38:25,840 --> 03:38:30,040
की व्याख्या को बदल के प्रस्तुत करते हैं

2810
03:38:30,040 --> 03:38:34,240
तो अगर कोई धर्म की व्याख्या को गलत रूप में प्रस्तुत कर रहा हो तो तुम बोलो

2811
03:38:34,240 --> 03:38:38,280
उनको मगर तुम जो समीक्षा कर रहे हो उनके उनके कार्यों

2812
03:38:38,280 --> 03:38:42,400
की कर रहे हो जो रणनीति के तहत होते हैं उनका कार्य नहीं है वो

2813
03:38:42,400 --> 03:38:46,840
सब करना वो सब क्षत्रियों का का कार्य है क्षत्रिय

2814
03:38:46,840 --> 03:38:52,120
उपलब्ध नहीं है मगर तुम उनके कार्यों की समीक्षा कर रहे

2815
03:38:52,120 --> 03:38:56,240
हो कि वहां पर यह क्यों हुआ वो क्यों हुआ य ये यहां

2816
03:38:56,240 --> 03:39:00,480
क्यों खड़ा है यह है वो है उनकी धर्म की व्याख्या की समीक्षा नहीं कर रहे हो तुम

2817
03:39:00,480 --> 03:39:05,120
और हम इन लोगों के धर्म की व्याख्या की समीक्षा कर रहे हैं यह अंतर है

2818
03:39:05,120 --> 03:39:09,480
धर्म की व्याख्या को ही व अपने जो चीजें उन्हें रणनीति के तहत करने पड़ रही है

2819
03:39:09,480 --> 03:39:15,480
उनको वो धर्म की व्याख्या से जोड़ दे रहे हैं धर्म को मिलावट कर दे रहे मैनिपुलेट कर दे रहे हैं

2820
03:39:16,400 --> 03:39:20,400
यह अंतर है छत्र वाली

2821
03:39:20,400 --> 03:39:24,800
बात मैंने पहले ही बोल द है कि अन्य जो मान तीन शंकरा

2822
03:39:24,800 --> 03:39:28,800
जो तीन वहां पर सिंहासन थे इन जो

2823
03:39:28,800 --> 03:39:33,200
जिसमें से दो के रूप में एक बैठे हुए

2824
03:39:33,200 --> 03:39:37,280
थे उनके सम्मान के लिए

2825
03:39:37,280 --> 03:39:40,880
उन्होंने वहां पर व धारण नहीं किया

2826
03:39:40,880 --> 03:39:45,000
मगर मूर्खता की पराकाष्ठा तब है जब व्यक्ति एक दिन

2827
03:39:45,000 --> 03:39:49,480
उसका धारण करता तो उसके बिहाव पर यह हो जाएगा कि चांदी का छत्र और जो है सिंहासन

2828
03:39:49,480 --> 03:39:53,520
धारण करने वाला है ये त्याग करने वाला नहीं है और जो बाकी के

2829
03:39:53,520 --> 03:39:57,600
आजीवन वो त्याग करके घूम रहा है उससे सिद्ध नहीं होगा वही वाली

2830
03:39:57,600 --> 03:40:01,640
बात जो व्यक्ति मनुवाद का प्रचार करते हुए दिख

2831
03:40:01,640 --> 03:40:05,880
रहा है आज के इस भीषण वातावरण में वह दोनों

2832
03:40:05,880 --> 03:40:10,040
जगह से कनेक्टेड है जैसे कि यहां पर गुरुदेव दोनों

2833
03:40:10,040 --> 03:40:14,080
जगह से कनेक्टेड है तुम्हारे अनुसार त्याग करने वाले और

2834
03:40:14,080 --> 03:40:18,240
त्याग ना करने वाले मगर क्योंकि उन्होंने एक दिन अन्यों का सम्मान की रक्षा के

2835
03:40:18,240 --> 03:40:22,840
लिए उसका त्याग नहीं किया उसको धारण कर लिया तो इसलिए

2836
03:40:22,840 --> 03:40:27,040
वह त्याग ना करने वाले

2837
03:40:27,040 --> 03:40:33,040
त्याग करने वाले नहीं है तुम्हारे रसों के हिसाब से

2838
03:40:35,240 --> 03:40:39,360
चलो शंकराचार्य के साथ छत्र सिंहासन युक्ता पर बैठे हुए हैं

2839
03:40:39,360 --> 03:40:43,480
रिपीट करता हूं दर्शक फिर से सुन ले 2007 में बेंगलोर

2840
03:40:43,480 --> 03:40:47,640
में जो चतुष्पथी वहां पर जो शंकराचार्य जिसमें दो पीठ

2841
03:40:47,640 --> 03:40:52,440
की ओ से स्वरूपानंद सरस्वती जी थे वहां पर तो पूरे के शंकराचार्य जी हमको दिख रहे हैं

2842
03:40:52,440 --> 03:40:56,560
और सुनिए आपके पास पोस्ट केवल आपके पास ही वो चित्र नहीं है सबने

2843
03:40:56,560 --> 03:41:00,760
देखिए और जहां तक मेरी मेरी जानकारी है गोवर्धन

2844
03:41:00,760 --> 03:41:05,200
मट के ऑफिशियल चैनल पर पर भी उस फोटो का वो लगा हुआ है थंबनेल

2845
03:41:05,200 --> 03:41:09,320
तो आप यह दिखाने की कोशिश ना करें कि आपके पास को बहुत बड़ी ऐसी

2846
03:41:09,320 --> 03:41:13,480
जानकारी जो लोगों को पता नहीं है चलो यहां

2847
03:41:13,480 --> 03:41:17,360
पर लोग बकवास भी कर रहे हैं अलग मुद

2848
03:41:17,360 --> 03:41:21,440
यहां पर यहां पर कुछ लोग ये कह रहे हैं एक मिनट यहां पे कुछ

2849
03:41:21,440 --> 03:41:25,560
लोग ये कह रहे हैं कि यह देखो ये ये क्या कह

2850
03:41:25,560 --> 03:41:29,600
रहे असल मुद्दे पर पर बात नहीं कर रहा है सिर्फ बकवास और मैं

2851
03:41:29,600 --> 03:41:33,960
किस मुद्दे पर बात कर रहा हूं जो मिश्रा जी के

2852
03:41:33,960 --> 03:41:38,160
रहे हैं है ना तो इसका मतलब

2853
03:41:38,160 --> 03:41:42,200
ये जो बकवास कहा जा रहा है जिन मुद्दों को वो उनको बकवास कहा जा रहा

2854
03:41:42,200 --> 03:41:46,320
है जो भगवता नंद जी प्रस्तुत कर रहे हैं तो

2855
03:41:46,320 --> 03:41:50,640
ना करें और हां यह जो निग शब्द है

2856
03:41:50,640 --> 03:41:54,920
इसका कोई मैं वो नहीं देता हूं भैया कि आज से मैं निग ही कहूंगा यह तुम्हारे उसी

2857
03:41:54,920 --> 03:41:58,920
मिश्रा ने ही तुमको नाम दिया है जिसको तुम प्रमाण रूप में प्रस्तुत कर रहे

2858
03:41:58,920 --> 03:42:03,120
हो पूरी पीठ के परिक के विरुद्ध उसके छुपे

2859
03:42:03,120 --> 03:42:07,400
हुए मैसेज को उसी नेही तुमको एक नाम दिया

2860
03:42:07,400 --> 03:42:11,480
है ठीक है तो

2861
03:42:11,480 --> 03:42:17,480
मैं केवल उसको बता रहा हूं और सुनो

2862
03:42:19,680 --> 03:42:23,800
तो यह जो व्यक्ति कह रहा है ना कि ये व्यर्थ के मुद्दों

2863
03:42:23,800 --> 03:42:27,960
पर बात कर रहा है तो इसका मत कह तो वो सही रहा है क्योंकि हमारा और तुम्हारा

2864
03:42:27,960 --> 03:42:32,000
जो मुद्दा था भगवता अंद वो यह था कि विजया श्री के बारे में बोली गई हर बात

2865
03:42:32,000 --> 03:42:36,200
तुम्हारी सही है कि नहीं जिसमें से अभी एक बात प तुमने लीपापोती करी है आगे

2866
03:42:36,200 --> 03:42:41,160
भी करोगे मगर सामने से करोगे तो फसो दूर रह के करते रहो

2867
03:42:41,160 --> 03:42:45,280
ऐसे ही और बियाबान रेलवे स्टेशन ढूंढो वहां बैठो आराम से तब करते रहो

2868
03:42:45,280 --> 03:42:50,080
सामने करोगे तो दिक्कत आएगी ठीक

2869
03:42:50,080 --> 03:42:53,040
है

2870
03:42:53,040 --> 03:42:57,320
और बाकी मुद्दे तो तुम्हारे जो समर्थक है वो सही कह रहे मुद्दों

2871
03:42:57,320 --> 03:43:01,360
से भटका जा रहा है तुम वही कर रहे हो समय चलो लिखा

2872
03:43:01,360 --> 03:43:05,400
हुआ है जो वहा मंच पर उपस्थित लोग उनमें से नाम भी लिखा है वहां पर

2873
03:43:05,400 --> 03:43:09,400
नीचे पारित प्रस्ताव में सबका सिग्नेचर भी है उस फोटो को मैं अटैच कर चुका

2874
03:43:09,400 --> 03:43:13,520
हूं अपने पिछले कॉल रिकॉर्डिंग वाले वीडियो में जो दो लोगों की बात थी ना उसम

2875
03:43:13,520 --> 03:43:16,240
जहां पर वो टॉपिक

2876
03:43:16,240 --> 03:43:22,080
किसके हस्ताक्षर है क्या है पीछे करो

2877
03:43:22,080 --> 03:43:26,080
जरा आया है चतु सम्मेलन में कि पहले मैं डोसा खाऊंगा

2878
03:43:26,080 --> 03:43:30,400
और मैं 10 बजे उठूंगा सोकर वाली बात है तो वहां पर मैंने

2879
03:43:30,400 --> 03:43:34,400
राम मंदिर के समय पर वह जो चित्र है जो आप दावा कर रहे हो मेरे पास है

2880
03:43:34,400 --> 03:43:38,440
वह सबने देखा है राम मंदिर के समय राम मंदिर वाले प्रकरण में सब

2881
03:43:38,440 --> 03:43:41,840
देखा है चलिए

2882
03:43:41,840 --> 03:43:47,840
बोलिए आप देख लीजिए एक बत और मुझे बताइएगा मैं सही

2883
03:43:49,520 --> 03:43:53,640
गलत ही तक देते है की शिवा नारायण ने जितना काम नहीं किया उससे तो लाख

2884
03:43:53,640 --> 03:43:57,160
गुना

2885
03:43:57,160 --> 03:44:01,520
काम शिवांश कुछ नहीं कर रहे साल

2886
03:44:01,520 --> 03:44:05,120
काम कर रहे थे धरातल पर

2887
03:44:05,120 --> 03:44:08,840
जाकर

2888
03:44:08,840 --> 03:44:13,320
बना कार करना य है क्या अपना वक्तव्य देना प्रवचन देना

2889
03:44:13,320 --> 03:44:16,240
समीक्षा करना

2890
03:44:16,240 --> 03:44:20,560
धरातल पर कार्य करना है कि घर-घर जा रहे हैं लोगों को एकत्रित

2891
03:44:20,560 --> 03:44:24,680
कर रहे हैं दलबल के साथ कहीं पर कोई यात्रा निकाल रहे हैं किसी

2892
03:44:24,680 --> 03:44:29,320
का विरोध प्रकट कर रहे हैं शारीरिक रूप से

2893
03:44:29,320 --> 03:44:33,520
यह तो वैचारिक वह है जो क्रांति आप जिसको आप लाने का

2894
03:44:33,520 --> 03:44:37,720
प्रयास कर रहे हैं वैचारिक है य तो य धरातल नहीं है

2895
03:44:37,720 --> 03:44:41,760
जो आप कह रहे हम भी कर रहे थे धरातल पर नहीं है धरातल धरातल

2896
03:44:41,760 --> 03:44:46,080
वो है जो हमने रामपाल वालों का विरोध किया धरातल पर जाकर के उन की जो किताबें

2897
03:44:46,080 --> 03:44:52,080
थी उनको वहां से स्टॉल हटवाया उसमें सिर्फ मेरी मां को गाली नहीं दी गई

2898
03:44:55,040 --> 03:44:59,040
थी वो धरातल पर कार्य नहीं है वो धरातल पर कार्य सब कर रहे

2899
03:44:59,040 --> 03:45:03,080
हैं वो वो जो अगर तुम उसको धरातल का कार्य कह रहे हो तो वह

2900
03:45:03,080 --> 03:45:07,480
सब कर रहे हैं शंकराचार्य जी भी कर रहे

2901
03:45:07,480 --> 03:45:11,840
हैं राजें दस जी महाराज भी कर रहे हैं सभी कर रहे हैं राघवाचार्य

2902
03:45:11,840 --> 03:45:16,480
जी महाराज भी कर रहे हैं हमने उस धरातल के कार्य की बात की है जिसको

2903
03:45:16,480 --> 03:45:20,800
आप छात्र धर्म का जो हिस्सा है यह ब्राह्मण

2904
03:45:20,800 --> 03:45:25,120
धर्म का हिस्सा है जो आप कर रहे हैं आपके पास

2905
03:45:25,120 --> 03:45:29,200
छात्र धर्म के कौन से प्रकल्प हैं

2906
03:45:29,200 --> 03:45:33,840
बताइए इनके पास है प्रकल्प छात्र धर्म

2907
03:45:33,840 --> 03:45:37,920
के इसलिए जब छात्र धर्म का आलंबन लेने वाली जो लोग

2908
03:45:37,920 --> 03:45:42,040
है जिनके जिनके द्वारा निर्देशित छात्र धर्म का पालन लेने वाले खड़े

2909
03:45:42,040 --> 03:45:46,240
हो रहे हैं खड़े होंगे तो फिर वहां पर समीक्षा

2910
03:45:46,240 --> 03:45:50,760
आप जैसे लोग कर पाएंगे क्योंकि छात्र धर्म में वो दोष आता है

2911
03:45:50,760 --> 03:45:54,760
ब्राह्मण से जो थोड़ा नीचे आते ठीक

2912
03:45:54,760 --> 03:46:00,760
है र रजोगुण आ जाता है वही मैं कह रहा

2913
03:46:02,440 --> 03:46:06,520
था और ये जो स्कन और आर्य समाज वाले लोग है

2914
03:46:06,520 --> 03:46:10,560
इनके बारे में मैंने बता दिया यह लोग छात्र धर्म

2915
03:46:10,560 --> 03:46:15,360
का पालन तो करते ही नहीं है बल्कि ये तो वो अगर करते भी है तो

2916
03:46:15,360 --> 03:46:21,360
यह धर्म की व्याख्या पर ही प्रहार कर देते

2917
03:46:21,480 --> 03:46:24,680
हैं

2918
03:46:24,680 --> 03:46:28,680
चलिए इस मामले में विध तो ज्यादा आगे चल रहे तुमसे चावल बाटने में

2919
03:46:28,680 --> 03:46:32,920
और य सब करने में अच्छा धर्मं

2920
03:46:32,920 --> 03:46:37,080
की तुलना हमसे क होगी एक मिनट धर्मिल हमसे क्यों

2921
03:46:37,080 --> 03:46:41,280
होगी तब हमसे क्यों होगी

2922
03:46:41,280 --> 03:46:46,040
शंकर मत से करो वि धर्मिल ना

2923
03:46:46,040 --> 03:46:50,480
रामानुज संप्रदाय से करो ना विधर्मी हों की तुलना

2924
03:46:50,480 --> 03:46:56,480
ना तुम जिनकी समीक्षा कर रहे हो व मैं हूं

2925
03:46:57,560 --> 03:47:03,560
क्या राजेंद्र दास जी महाराज से करो ना उनकी तुलना ना धर्मयोद्दा

2926
03:47:15,120 --> 03:47:19,320
भी करते तुम दिखाओ तुम्हारे द्वारा निर्देशित कौन से छात्र धर्म का पालन करने वाली टीम

2927
03:47:19,320 --> 03:47:23,360
खड़ी हो गई है और फिर मैं देखो उसमें दोष निकालू यहां यह

2928
03:47:23,360 --> 03:47:27,480
किया यहां वो किया यहां देखो गुटखा खाने वाला तुम्हारी टीम में चल रहा है

2929
03:47:27,480 --> 03:47:32,760
यहां देखो शाम को पौआ पीने वाला तुम्हारी टीम में चल रहा है दिखा दूंगा

2930
03:47:32,760 --> 03:47:37,000
चलो यह है आपका छात्र धर्म वाला कोई कार्य

2931
03:47:37,000 --> 03:47:41,720
नहीं है आप जो बता रहे हो वह सब ब्राह्मण धर्म वाले कार्य

2932
03:47:41,720 --> 03:47:45,520
चलो

2933
03:47:45,520 --> 03:47:50,200
अपनी वर्तमान आयु का आधा सम बन

2934
03:47:50,200 --> 03:47:54,640
बचपन की आपकी जो अखबार कटिंग है वो सब देखी है

2935
03:47:54,640 --> 03:47:58,880
चलो हम चार साल की उम्र से इसी काम में लगे हुए हैं हा

2936
03:47:58,880 --> 03:48:03,040
च साल की उ किताब में आग लगवाई है ना रामपाल की कितने केस

2937
03:48:03,040 --> 03:48:07,280
लड़े तुमने धर्म के पक्ष से राम मंदिर के लिए केस लड़ा

2938
03:48:07,280 --> 03:48:11,600
शंकराचार्य ने तुमने कितने मुकदमे लगा दिए जाओ लगा दो रामपाल के विरुद्ध

2939
03:48:11,600 --> 03:48:16,920
सबूत में दूंगा चलो चलो लड़ो केस चल कर के

2940
03:48:16,920 --> 03:48:21,120
लड़ो ग 6 साल से यह है छात्र धर्म पर कार्य करने वाली बात

2941
03:48:21,120 --> 03:48:25,760
और फिर जब लड़ रहे होगे तो मैं पूछूंगा इस वकील का शास्त्रो तो वो देख लिया तुमने

2942
03:48:25,760 --> 03:48:29,400
जो तुमने वकील हायर किया

2943
03:48:29,400 --> 03:48:35,160
है जो भी तुम्हारा साथ देगा वह सही होना चाहिए ना बिल्कुल

2944
03:48:35,160 --> 03:48:39,880
उसका पुराना कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए उसमें

2945
03:48:39,880 --> 03:48:44,080
जीवन में करो केस

2946
03:48:44,080 --> 03:48:48,520
लड़ो केस कितने केस लड़े तुमने राम सेतु के पक्ष से कितना लड़े हो

2947
03:48:48,520 --> 03:48:52,640
बने बने निगरा चार बनते फिरते हो क्या लड़ा है तुमने धर्म

2948
03:48:52,640 --> 03:48:57,800
के लिए कौन सी लड़ाई लड़ी है तुमने धर्म के लिए

2949
03:48:57,800 --> 03:49:01,720
लड़ने से मेरा मतलब यहां पर है छात्र धर्म का आलंबन

2950
03:49:01,720 --> 03:49:05,840
धर्म की व्याख्या बताना छात्र धर्म का आलंबन नहीं है धरातल पर

2951
03:49:05,840 --> 03:49:09,880
कार्य करना नहीं है और आज के समय

2952
03:49:09,880 --> 03:49:14,120
की स्थिति ऐसी हो गई है कि क्षत्रिय जब अपना कार्य नहीं कर रहे हैं तो हमारे आचार्यों

2953
03:49:14,120 --> 03:49:18,120
को ही उतर करना पड़ रहा है उन्हीं को छात्र धर्म का आलंबन लेना

2954
03:49:18,120 --> 03:49:23,040
पड़ रहा है और इस कारण से तुम जैसे लोग उनकी समीक्षा कर

2955
03:49:23,040 --> 03:49:27,040
पाओगे हम अगर कोई कार्य करता है आर्य समाज करता है

2956
03:49:27,040 --> 03:49:31,040
स् कन करता है अगर करता है पहली बत कन जैसी संस्था है ब्रह्मा कुमारी जैसी संस्था

2957
03:49:31,040 --> 03:49:35,120
कितनी बार आंदोलन करने खड़ी हुई है हा आर्य समाज आर समाज

2958
03:49:35,120 --> 03:49:39,120
जरूर दिखाए थोड़ा बहुत तो हमने कभी

2959
03:49:39,120 --> 03:49:43,320
भी इनके धरातल वाले कार्यों की समीक्षा नहीं की है छात्र धन वाले कार्यों की समीक्षा

2960
03:49:43,320 --> 03:49:47,400
नहीं की है हमने सदैव जो

2961
03:49:47,400 --> 03:49:52,520
ब्राह्मण धर्म के अनुसार जो य गलत व्याख्या करते हैं उनकी समीक्षा

2962
03:49:52,520 --> 03:49:57,160
की यह अंतर है

2963
03:49:57,160 --> 03:50:01,280
चलो टीवी पर 6 साल उम से चैनल

2964
03:50:01,280 --> 03:50:05,480
वाला इंटरव्यू अपलोड है मेरे इसी चैनल पर चलो

2965
03:50:05,480 --> 03:50:09,560
चलो हमने अपना जीवन नहीं हम

2966
03:50:09,560 --> 03:50:13,720
बिगड़े फिर सुधरे हम सुधरे ही पैदा हुए तुम्हारे समान

2967
03:50:13,720 --> 03:50:18,040
नहीं कि बा इसको फिर से प्ले करो एक बार

2968
03:50:18,040 --> 03:50:22,720
हम सुधरे ही पैदा हुए

2969
03:50:22,720 --> 03:50:26,800
थे किसको बता रहे हो माफी मांगो आरएसएस से समस्या

2970
03:50:26,800 --> 03:50:30,960
नहीं है कि वो नकली संकराचार्य खड़ा कर दे व अरे वो बताओ ना सुद्र ही पैदा

2971
03:50:30,960 --> 03:50:35,240
हुए थे वो सुनाना है ज्यादा पीछे चले गए क्या सहयोग

2972
03:50:35,240 --> 03:50:39,320
हम उसे ले लेंगे ये शिवांश की पॉलिटिक्स है अब रही बात धरातल पर काम करने की ना

2973
03:50:39,320 --> 03:50:43,400
तो स्कन वाले यही तर्क देते हैं कि शिवांस नारायण ने जितना काम नहीं किया उससे तो लाख गुना

2974
03:50:43,400 --> 03:50:47,560
काम इकन वाले कर रहे हैं ऐसे देखा जाए तो कि हरे राम हरे राम करवा रहे

2975
03:50:47,560 --> 03:50:51,880
भंडारा करवा रहे य करवा रहे

2976
03:50:51,880 --> 03:50:56,000
करन की तुलना होगी अगर इस कन से तुलना कर रहे हो

2977
03:50:56,000 --> 03:51:00,840
अगर इस कन से तुलना कर रहे हो तो इस कन की तुलना फर शंकर संप्रदाय से होगी ना

2978
03:51:00,840 --> 03:51:05,240
किससे होगी स्कोन से तुलना करोगे तो शिवांश

2979
03:51:05,240 --> 03:51:09,360
की करोगे या शंकर संप्रदाय की करोगे हा उसके य की किसी

2980
03:51:09,360 --> 03:51:13,200
व्यक्ति से तुलना कर सकते हो तुम

2981
03:51:13,200 --> 03:51:17,400
मेरी इसको कौन एक तंत्र है और मैं एक व्यक्ति हूं एक

2982
03:51:17,400 --> 03:51:21,400
पहली बात और दूसरी बात क्या है कि शंकर

2983
03:51:21,400 --> 03:51:25,440
संप्रदाय ने क्या किया उसकी तुलना हो सकती है कभी स्कोन जैसी संस्थाओं से तुम

2984
03:51:25,440 --> 03:51:29,720
ही बता दो तुम ही बता दो आज तुम आदि

2985
03:51:29,720 --> 03:51:35,720
शंकराचार्य के भी विरोधी बन जाओ जिनके कारण आज धर्म प्राप्त

2986
03:51:36,600 --> 03:51:40,760
है शिवास नारायण की तुलना में तो हमने लाखों क्विंटल अधिक अनाज बांट दिया

2987
03:51:40,760 --> 03:51:44,800
फ्री में लोगों को अच्छी एजुकेशन पॉलिसी दी अच्छी हॉस्पिटल पॉलिसी दी ये

2988
03:51:44,800 --> 03:51:48,920
सब वो भी क सकते हैं अपने क्षेत्र में उसे छोड़ो ना शासन

2989
03:51:48,920 --> 03:51:53,240
तंत्र ही कितना कुछ कह देगा तुमको 80 करोड़ लोगों को फ्री मनाज दे दिए जाओ सिवास

2990
03:51:53,240 --> 03:51:57,320
कर लेंगे क्या अगर यही सब तुलना करनी है धरातल पर तंत्र की तुलना व्यक्ति से

2991
03:51:57,320 --> 03:52:01,920
कर रहे हैं ये इनके तक तर्क शलता है चलो

2992
03:52:01,920 --> 03:52:06,000
आगे चल रहे हैं इस मामले में विधर्मी तो ज्यादा आगे चल रहे हैं तुमसे चावल बांटने में और

2993
03:52:06,000 --> 03:52:10,680
ये सब करने में चलो चलो और सार्वजनिक किया है जब हमने उनका समर्थन किया था तब

2994
03:52:10,680 --> 03:52:14,840
हम कब की बात है सोच लो जय ललिता के सरकार के समय की बात है

2995
03:52:14,840 --> 03:52:18,840
उस समय शिवांश कुछ नहीं कर रहे थे जो काम

2996
03:52:18,840 --> 03:52:23,200
हम कर रहे थे ना धरातल पर जाकर प कर रहे थे

2997
03:52:23,200 --> 03:52:27,360
तुम्हें कैसे पता कुछ नहीं कर रहे थे तुमने जापान नहीं देखा तो दुनिया

2998
03:52:27,360 --> 03:52:29,040
में जापान नहीं है

2999
03:52:29,040 --> 03:52:33,480
क्या क्रिश्चन मिशनरी स्कूल में रहते थे वहां पर

3000
03:52:33,480 --> 03:52:37,600
भी जब विरोध होता था धर्म का छोटे थे

3001
03:52:37,600 --> 03:52:41,200
तो वहां हाथ खड़ा करते

3002
03:52:41,200 --> 03:52:47,160
थे विरोध करते थे अपनी सामर्थ्य के अनुसार

3003
03:52:47,160 --> 03:52:51,160
हम वीडियो बना फ रोड प चलते फिरते रामपाल जैसे लोग

3004
03:52:51,160 --> 03:52:55,480
मिल जाते थे विरोध करते थे धरातल पर आग लगवा देते

3005
03:52:55,480 --> 03:52:59,480
थे स्कूटर से उनकी किताबें गिरवा दी थी एक बार कर

3006
03:52:59,480 --> 03:53:03,640
रहे थे हम हमने वीडियो कैमरे से शूट करा करके तुम्हें दिखाया नहीं है तो इसका मतलब वो कुछ

3007
03:53:03,640 --> 03:53:07,840
नहीं कर रहे थे और यह धरातल

3008
03:53:07,840 --> 03:53:13,000
है ये छात्र धर्म वाले कार्य हम कर रहे

3009
03:53:13,000 --> 03:53:17,240
थे चलिए या हम कम से कम

3010
03:53:17,240 --> 03:53:21,360
तो बाद में आए ना लेकिन उससे पहले हम लगभग 100 मंच अपने

3011
03:53:21,360 --> 03:53:25,640
तैयार कर चुके थे 100 मंचों के माध्यम से धर्म उपदेश लोग कर रहे थे वर्णाश्रम

3012
03:53:25,640 --> 03:53:30,080
से जोड़ रहे थे सुधार रहे थे लोग को उपदेश

3013
03:53:30,080 --> 03:53:35,720
रको य उपदेश की बात कर ली ना यह धरातल का कार्य नहीं है उपदेश

3014
03:53:35,720 --> 03:53:40,000
करना धरातल का कार्य वह है जिसमें आपको रणनीति की आवश्यकता

3015
03:53:40,000 --> 03:53:45,520
पड़ती है चलिए छात्र

3016
03:53:45,520 --> 03:53:49,600
जिसमें रजो गुण आता हैब र आता है तोर ब्रा ब्राह्मण

3017
03:53:49,600 --> 03:53:53,720
धर्म के अनुसार अगर उसकी समीक्षा होगी ब्राह्मण के हिसाब से क्योंकि

3018
03:53:53,720 --> 03:53:57,840
वो ब्राह्मण है जिसने छात्र धर्म का आरंभन लिया है ब्राह्मण है तो

3019
03:53:57,840 --> 03:54:02,320
जब उसकी ब्राह्मण धर्म के हिसाब से उसकी समीक्षा करने बैठोगे तो दोष निकलेंगे

3020
03:54:02,320 --> 03:54:07,160
करो मुकदमा लड़ो चलो शंकराचार्य ने तो इतने मुकदमे लड़े

3021
03:54:07,160 --> 03:54:11,480
तुम लड़ लो जा कर के रामपाल का मुकदमा पूरा डिटेल में दे रहा हूं लगा दो पूरा इलीगल

3022
03:54:11,480 --> 03:54:15,800
तंत्र है लगाओ चलो दोनों भाई मिलकर के ते रामपाल का मुकदमा

3023
03:54:15,800 --> 03:54:19,360
लड़ेंगे चलो लगा दो

3024
03:54:19,360 --> 03:54:23,680
मुकदमा चलो भाई क्या के बाद आए

3025
03:54:23,680 --> 03:54:27,680
और इस प्रकार के वीडियो में तो हम कब आए 2019 20 के बाद से आए लगभग ऐसे थोड़े

3026
03:54:27,680 --> 03:54:31,800
एक दो वीडियो बनाते थे वीडियो बनाकर इन्होंने धरातल पर कार्य

3027
03:54:31,800 --> 03:54:37,720
किया है चलो आगे

3028
03:54:37,720 --> 03:54:43,720
बढ़ो कहां चले गए

3029
03:54:48,440 --> 03:54:54,080
यह

3030
03:54:54,080 --> 03:54:58,080
देखिए हां यह कर रहे

3031
03:54:58,080 --> 03:55:02,080
थे 201 18 में

3032
03:55:02,080 --> 03:55:06,280
नियर डेथ का एक्सपीरियंस हुआ था

3033
03:55:06,280 --> 03:55:10,760
इह क्या था भाई जरा पढ़े द सेकंड

3034
03:55:10,760 --> 03:55:14,840
एपिसोड ऑफ हां आई

3035
03:55:14,840 --> 03:55:18,840
फेल इन लव बट फेल्ड टू

3036
03:55:18,840 --> 03:55:23,000
सक्ड और आगे नियर डेथ की सिचुएशन थी

3037
03:55:23,000 --> 03:55:27,040
इनकी यह था इनका धरातल का कार्य 2018

3038
03:55:27,040 --> 03:55:31,200
में 2018 में इनके धरातल के कार्य देख

3039
03:55:31,200 --> 03:55:35,440
लिए प्रेम में फस गए थे बाइपोलर

3040
03:55:35,440 --> 03:55:39,640
नामक जो बीमारी उससे वो

3041
03:55:39,640 --> 03:55:44,360
थे बाइपोलर नामक बीमारी से इफेक्टेड

3042
03:55:44,360 --> 03:55:48,680
जो हाइपरसेक्सुअल सिमटम्स होते हैं उसमें और

3043
03:55:48,680 --> 03:55:52,720
सेकंड टाइम ये प्रेम में गिरे थे धरातल पर गिरे थे धरातल पर गिर गए

3044
03:55:52,720 --> 03:55:56,840
थे प्रेम में गिर गए थे ना आई फेल इन लव तो धरातल पर

3045
03:55:56,840 --> 03:56:00,880
गिर गए थे है ना 2018 में यह इनके

3046
03:56:00,880 --> 03:56:04,880
धरातल के कार्य प्रेम में गिरना धरातल

3047
03:56:04,880 --> 03:56:10,880
पर गिरते हैं प्रेम में

3048
03:56:11,040 --> 03:56:15,280
चलिए दसवी की परीक्षा लिखने से पहले डे मंचों से अधिक

3049
03:56:15,280 --> 03:56:19,400
हम तैयार कर चुके थे लोगों को प्रेम प्रसंग कैसे करना है बाइपोलर

3050
03:56:19,400 --> 03:56:23,720
में क्या क्या होता है हाइपर सेक्सुअलिटी कैसे होती है उसके बाद

3051
03:56:23,720 --> 03:56:27,800
संभवत राजस्थान से इलाज मिलेगा हर शुक्रवार को गुप्त रोगी मिल सकते

3052
03:56:27,800 --> 03:56:32,400
हैं यह सब धरातल के कार अच्छे है आपके बढ़िया

3053
03:56:32,400 --> 03:56:36,680
है विषयों पर जिसम से बहुत से पेपर कटिंग इत्यादि उपलब्ध

3054
03:56:36,680 --> 03:56:40,800
भी है उसम हमारे पास वीडियो ग्राफिक सुविधा नहीं थ इसलिए नहीं लेकिन एक उसम से इंटरव्यू हमारा

3055
03:56:40,800 --> 03:56:45,320
सहारा चैनल वालों ने अपने आर्काइव से निकाल कर दिया था और पेपर तो बहुत सारे

3056
03:56:45,320 --> 03:56:49,320
6 साल च साल पा साल 6 साल सा साल आ साल 9 साल 10 साल 11

3057
03:56:49,320 --> 03:56:53,880
साल का बच्चा इस प्रकार कर रहा है शिवास है कहा किस रेस में हमारे सामने

3058
03:56:53,880 --> 03:56:58,200
जने उधार में आप हमसे जने धरण तक में प्रतियोगिता नहीं कर सकते भाई

3059
03:56:58,200 --> 03:57:02,200
अरे आप किस मामले प्रतियोगिता नहीं कर सकते मेरे भाई

3060
03:57:02,200 --> 03:57:06,240
तो हम आचार थोड़ी ना बन गए हम अपने अपने आप को पुजवा

3061
03:57:06,240 --> 03:57:07,800
थोड़ी ना लगे व्यासपीठ

3062
03:57:07,800 --> 03:57:11,880
पर थोड़ी ना बैठ गए तुम तो व्यासपीठ पर बैठे हो हम हमें थोड़ी

3063
03:57:11,880 --> 03:57:15,920
ना देवताओं ने दर्शन दे दिए सा आ साल की आयु में तुमको

3064
03:57:15,920 --> 03:57:20,520
दिए हमें थोड़ी ना 2017 में यंत्र प्राप्त हुआ तुमको हुआ तो 2018

3065
03:57:20,520 --> 03:57:24,920
में तुम धरातल पर गिर कैसे रहे हो आई फेल इन लव

3066
03:57:24,920 --> 03:57:29,400
हा 2016 में गिर रहे हो पहले धरातल पर फिर यंत्र मिल गया 2016

3067
03:57:29,400 --> 03:57:33,480
से पहले तुमको देवता मिल गए 2017 में तुम तुमको वो मिल गया

3068
03:57:33,480 --> 03:57:38,200
आई फैल फिर भी तुम आई फैलन लव हो रहे हो तो तुम्हारी तो बात की जाएगी ना

3069
03:57:38,200 --> 03:57:42,320
और हम प्रतिस्पर्धा वाला भाव कभी आता ही नहीं है सबसे निकृष्ट कोटि के उसमें

3070
03:57:42,320 --> 03:57:46,360
गिनते हैं हमको हमेशा यही लगा रहता है कि हम कभी

3071
03:57:46,360 --> 03:57:50,520
मंदिर भी जाते हैं गुरुदेव के आसपास भी जाते हैं ग्रंथों के पास भी जाते हैं तो ऐसा लगता

3072
03:57:50,520 --> 03:57:54,600
है कि मैं कुछ गलत कर रहा हूं उसको छूने में यह भाव है अब वो कैसे उत्पन्न

3073
03:57:54,600 --> 03:57:58,680
हुआ नहीं मालूम है यह अपने लिए हम सोचते हैं मगर तुम तो

3074
03:57:58,680 --> 03:58:02,880
आचार्य हो तुम्हारे अनुसार तुम कैसे

3075
03:58:02,880 --> 03:58:07,040
गिर रहे हो अपने विवाह से पूर्व स्त्रियों के मोह में कैसे फस रहे हो गिर

3076
03:58:07,040 --> 03:58:13,040
रहे हो यह धरातल का तुम्हारा कार्य था

3077
03:58:14,640 --> 03:58:18,680
और यह जो भाव है ऐसा संतों की वाणी से सुनाया गया ऐसा भाव होना

3078
03:58:18,680 --> 03:58:22,800
चाहिए एक भक्त के मन में हम बहुत गलत है भाव है सदैव है

3079
03:58:22,800 --> 03:58:27,120
है भी और भाव भी है तुम्हारे

3080
03:58:27,120 --> 03:58:31,200
मन में तो तुम तो आचार बनते हुए सब काम करतूत करते हुए तुम्हारे मन

3081
03:58:31,200 --> 03:58:35,280
में कोई भाव नहीं नजर आता है

3082
03:58:35,280 --> 03:58:41,280
धरातल पर गिरते हैं हेल इन लव होते हैं य

3083
03:58:41,600 --> 03:58:45,680
चलिए इस काम को करने के लिए हमने किसी भी धर्मी संस्था का सहयोग नहीं लिया

3084
03:58:45,680 --> 03:58:49,880
ना कि आरस का सहयोग लिया ना किसी बजरंग दल का लिया ना किसी इसका लि जाओ

3085
03:58:49,880 --> 03:58:54,000
और ना किसी के बैनर का आश सहयोग की बात कर रहे हो भगवता

3086
03:58:54,000 --> 03:58:58,040
अंद ये तुम इस समय जो य पर लाइव चला रहे हो संस्था का सहयोग

3087
03:58:58,040 --> 03:59:02,480
नहीं है और तुम नाम तो बताओ कौन-कौन है तुम्हारे साथ

3088
03:59:02,480 --> 03:59:07,440
फिर उनकी शास्त्रीय देख लेंगे

3089
03:59:07,440 --> 03:59:11,440
हम नाम तो बताओ अपनी लिस्ट जारी करो ना जैसे राजेंद्र

3090
03:59:11,440 --> 03:59:15,680
दास जी महाराज के परिकर कौन-कौन है तुम जानते हो पूरी पीठ के परिकर कौन-कौन

3091
03:59:15,680 --> 03:59:19,800
है तुम जानते हो तुम्हारे परिकर कौन है पहले तो तुम्हारा

3092
03:59:19,800 --> 03:59:24,520
मठी लुप्त है स्थानी गुप्त है पता ही गुप्त

3093
03:59:24,520 --> 03:59:28,640
है हो तुम बन के घूमते हो जैसे कोई बहुत

3094
03:59:28,640 --> 03:59:32,840
बड़े किसी र के एजेंट हो और तुम

3095
03:59:32,840 --> 03:59:37,120
कहते हो तुलना अपनी करते हो आचार्यों से

3096
03:59:37,120 --> 03:59:40,160
तो अपने दिखाओ

3097
03:59:40,160 --> 03:59:44,320
तो कि तुम्हारे कौन-कौन लोग है फिर देखेंगे उनमें से किसकी सहायता तु

3098
03:59:44,320 --> 03:59:48,080
नहीं लेनी चाहिए तुम्हारे सिद्धांतों के

3099
03:59:48,080 --> 03:59:52,480
अनुसार

3100
03:59:52,480 --> 03:59:56,520
चलो के कृपा पात्र शिष्य प से संबंधित है कुछ नहीं स्वतंत्र

3101
03:59:56,520 --> 04:00:00,840
का साल सा साल स्त्र काम पिताजी साथ में

3102
04:00:00,840 --> 04:00:05,160
स् स् न यात्रा स्वतंत्र प्रेम

3103
04:00:05,160 --> 04:00:09,160
में गिरना स्वतंत्र रूप से स्वतंत्र रूप से

3104
04:00:09,160 --> 04:00:14,280
बाइपोलर किताब लिखना चलिए

3105
04:00:14,280 --> 04:00:18,280
बनर का नाम जो तुलनात्मक चीज है ना ये लाए बिना भी जिन

3106
04:00:18,280 --> 04:00:22,400
मुद्दों पर हम लोग बात कर रहे थे उन पर बात कर सकते मगर तुम व्यक्तिगत होते

3107
04:00:22,400 --> 04:00:28,400
हो तुम व्यक्तिगत होते हो हो व्यक्तिगत

3108
04:00:29,240 --> 04:00:33,480
स्ले का एक डायलॉग है व या याद आता है सोले का एक डायलॉग

3109
04:00:33,480 --> 04:00:38,040
है गब्बर सिंह तुम एक मारोगे

3110
04:00:38,040 --> 04:00:44,040
हम दो मारेंगे याद रखना डाल डाल पात पात चलो

3111
04:00:46,240 --> 04:00:51,080
हम ना किसी का म का सांप्रदायिक मठ का भी बैनर इस्तेमाल नहीं किए ना किसी

3112
04:00:51,080 --> 04:00:55,160
असपिक संस्था का हमने आश्रय लिया अरे है ही नहीं

3113
04:00:55,160 --> 04:00:59,960
अरे सांप्रदायिक सांप्रदायिक मठ का बैनर तुम्हे देगा कौन

3114
04:00:59,960 --> 04:01:04,000
अरे पहले जाओ तो पहले जुड़ तो किसी से कहां से लोगे तुमको

3115
04:01:04,000 --> 04:01:08,120
तो अपना संप्रदाय खड़ा करना है और हमने किया भाई हम

3116
04:01:08,120 --> 04:01:12,120
तो उनके चरणों की धूल है र रज भी नहीं है हम तो करेंगे

3117
04:01:12,120 --> 04:01:16,400
और उनका बैनर इस्तेमाल करके हम अपने ये सब कार्यों को य जो समर्थक

3118
04:01:16,400 --> 04:01:20,560
है जो देख रहे वो भी जहां पर उनके द्वारा निर्देशित चीजें हैं जितने ं

3119
04:01:20,560 --> 04:01:25,120
में वो कर रहे होते हैं केवल उसी में उनका वो लगा होता है चीज

3120
04:01:25,120 --> 04:01:29,160
और जितने अंश में ऐसी चीजें नहीं है जिसमें अभी जो अनुमति है

3121
04:01:29,160 --> 04:01:33,320
वह प्राप्त नहीं हुई है या फिर हमें र तुरंत कुछ करना है तो

3122
04:01:33,320 --> 04:01:37,360
हम कभी भी अपने कार्यों को उनसे जोड़कर नहीं दिखाते हैं जैसे रामपाल के

3123
04:01:37,360 --> 04:01:41,360
यहां जब हम गए तो हम व झंडा लेकर नहीं गए थे गोवर्धन मठ का कि हम गोवर्धन

3124
04:01:41,360 --> 04:01:46,840
मठ से आए ठीक है

3125
04:01:46,840 --> 04:01:50,840
और वोह लड़ाई लड़ी तो हमने उसमें गोवर्धन म मठ या पुरी शंकराचार्य जी के बैनर

3126
04:01:50,840 --> 04:01:55,000
त नहीं लड़ी क्योंकि उसके लिए एक लंबी प्रक्रिया होगी गुरुदेव के पास जाना उसकी

3127
04:01:55,000 --> 04:01:59,040
परमिशन लेना तब तक उनका व जो स्टॉल है व ड़ के चला भी जाएंगे लोग

3128
04:01:59,040 --> 04:02:03,720
हमने तो नहीं लिया उनके बैनर का आलंबन इन सब चीजों के लिए मगर हां

3129
04:02:03,720 --> 04:02:07,880
ऐसा भी नहीं है कि हमें लेने की आवश्यकता नहीं मिलेगा तो बल मिलेगा हमें कोई अहंकार

3130
04:02:07,880 --> 04:02:13,880
नहीं है समझे चलो

3131
04:02:15,960 --> 04:02:20,080
लोग मतलब क्या जनी जनी पापा पढ़ते हैं उसम

3132
04:02:20,080 --> 04:02:24,320
में गीता और रामायण व्याख्यान देते थे चलो

3133
04:02:24,320 --> 04:02:30,320
मुझे लग

3134
04:02:30,480 --> 04:02:34,520
नहीं कोया का कोई

3135
04:02:34,520 --> 04:02:40,520
मर व आराम से समक्ष कर रहा है कर सकता है

3136
04:02:44,280 --> 04:02:49,000
भाई आदि गुरु शंकराचार्य जी ने कहा है कि अनथा ठ

3137
04:02:49,000 --> 04:02:53,200
मनाम और मनीष व्यक्तियों में हम अपने बुद्धि से स्वयं को गणित

3138
04:02:53,200 --> 04:02:57,240
परिगत करते हैं आप ही के कई गुरु भाई करते हैं ऐसा आप लोग

3139
04:02:57,240 --> 04:03:01,480
नहीं भी करते हैं ऐसा तो आप तो खर बहुत से लोगों को

3140
04:03:01,480 --> 04:03:05,840
शंकराचार्य भी नहीं मान रहे हैं ज्योतिष पीठ वालो को नहीं मान रहे द्वारिका वालो को नहीं मान रहे लेकिन शरी

3141
04:03:05,840 --> 04:03:10,360
वाले तो मान रहे हैं तो क्या वो शंकराचार्य नहीं वो अकाट्य नहीं है उनका शंकर

3142
04:03:10,360 --> 04:03:14,360
अकाट्य नहीं है ये थोड़े ज्यादा वाले शंकराचार्य व थोड़े कम वाले ऐसी

3143
04:03:14,360 --> 04:03:19,600
बात है क्या हमको पूरे के शंकराचार्य ने किसी काम

3144
04:03:19,600 --> 04:03:24,280
के एक मिनट एक मिनट एक मिनट इस पर मैं एक बात बताता

3145
04:03:24,280 --> 04:03:28,880
हूं कि

3146
04:03:28,880 --> 04:03:32,880
क्योंकि चारों में से एक शंकराचार्य ने किसी की

3147
04:03:32,880 --> 04:03:36,880
प्रमाणिकता सिद्ध की है तो वह सिद्ध मानी जानी चाहिए

3148
04:03:36,880 --> 04:03:40,880
यह बात ठीक है है ना यह इनका कहना है ऐसा होना

3149
04:03:40,880 --> 04:03:44,880
चाहिए यह ठीक है इनका कहना है शकर द्वारा प्रमाणित को

3150
04:03:44,880 --> 04:03:49,200
प्रमाणित माना जाना चाहिए फिर अगर

3151
04:03:49,200 --> 04:03:53,280
शंकराचार्य की वाणी तुम्हारे लिए प्रमाण है

3152
04:03:53,280 --> 04:03:58,080
तो पूरी पीठ के शंकराचार्य जब ये बोल रहे मेरे जो परिकर है वो सभी

3153
04:03:58,080 --> 04:04:02,080
दिव्य है तो वहां पर तुम क्यों नहीं प्रमाण में ले रहे हो प्रमाण

3154
04:04:02,080 --> 04:04:06,680
के रूप में उनकी वाणी को यानी कि प्रमाण नहीं है अन्य कारणों से मानोगे

3155
04:04:06,680 --> 04:04:11,080
तो फिर अन्य कारण जब हो सकते हैं किसी को मानने और ना मानने के विषय में

3156
04:04:11,080 --> 04:04:15,120
जब अन्य कारण भी होने चाहिए जब इस सिद्धांत को तुम अपना

3157
04:04:15,120 --> 04:04:19,320
रहे हो तो फिर यह क्यों कह रहे हो कि अगर संगरी वालों ने उनको कह दिया

3158
04:04:19,320 --> 04:04:23,320
या इसने उसको कह दिया तो क्यों नहीं मान रहे हो अपनी बात का खंडन तो तुम स्वयं कर

3159
04:04:23,320 --> 04:04:27,680
रहे हो अगर शंकराचार्य का शब्द प्रमाण है होना भी

3160
04:04:27,680 --> 04:04:31,960
चाहिए तो फिर तुम उनके परिक के ऊपर दोष कैसे लगा रहे हो उनके कहने के बावजूद

3161
04:04:31,960 --> 04:04:36,360
भी उसमें जांच क्यों नहीं कर रहे हो जांच नहीं कर रहे हो तो बोलो

3162
04:04:36,360 --> 04:04:40,440
मत जांच नहीं कर रहे हो अगर अपने स्तर पर तो बोलो

3163
04:04:40,440 --> 04:04:46,280
मत

3164
04:04:46,280 --> 04:04:50,440
और यदि उनका शब्द प्रमाण नहीं है तो तुम फिर

3165
04:04:50,440 --> 04:04:54,440
यह अपेक्षा क्यों कर रहे हो कि जो है अगर

3166
04:04:54,440 --> 04:04:59,320
कहीं के किसी शंकराचार्य ने कुछ कह दिया है तो उसको माना जाए

3167
04:04:59,320 --> 04:05:03,400
मानना चाहिए बिल्कुल मानना चाहिए मगर तुम जब एक जगह खंडन तो दूसरी जगह

3168
04:05:03,400 --> 04:05:07,560
पर प्रमाण शब्द प्रमाण पर क्यों जा रहे हो तो क्या होगा यहां पर फिर

3169
04:05:07,560 --> 04:05:11,720
से वही बात आ गई महाभारत का जो सिद्धांत है कि अन्यों से जो अपेक्षा करते

3170
04:05:11,720 --> 04:05:16,160
हैं हम अपने अपने लिए जिस व्यवहार की अपेक्षा करते हैं

3171
04:05:16,160 --> 04:05:20,360
वही धर्म है और वही व्यवहार

3172
04:05:20,360 --> 04:05:24,760
करना चाहिए तो तुम अपनी जहां पर सिद्धि हो रही है जहां अपने मंतव्य

3173
04:05:24,760 --> 04:05:28,800
की पूर्ति हो रही है वहां पर शंकराचार्य के शब्द को प्रमाण के रूप में यूज कर

3174
04:05:28,800 --> 04:05:33,160
रहे हो और जहां पर अपने मंत्र की मंतव्य की सिद्धि नहीं हो रही है

3175
04:05:33,160 --> 04:05:37,320
वहां शंकराचार्य के शब्द को नहीं मान रहे हो इसका मतलब

3176
04:05:37,320 --> 04:05:41,320
दूसरा आधार है तो जब तुम खुद ही कह रहे हो दूसरे आधार भी हैं किसी

3177
04:05:41,320 --> 04:05:45,600
को कुछ मानने अथवा ना मानने में तो फिर हम हम से य अपेक्षा मत करो कि दूसरे

3178
04:05:45,600 --> 04:05:51,600
आधारों को ना देख ठीक

3179
04:05:52,000 --> 04:05:54,520
है

3180
04:05:54,520 --> 04:05:58,680
और आप जाकर के उनसे शास्त्रार्थ करिए

3181
04:05:58,680 --> 04:06:03,080
जो ज्योतिर मट से पूज्य अ मुक्तेश्वर सरस्वती

3182
04:06:03,080 --> 04:06:07,320
जी महाराज उनसे जाकर आप शास्त्रार्थ करिए वो भी गौतम बुद्ध को विष्णु का अवतार

3183
04:06:07,320 --> 04:06:13,320
नहीं मानते यह वाले गौतम बुद्ध को करो शास्त्र जा कर के

3184
04:06:13,680 --> 04:06:18,000
और गलत अगर अगर गलत बयान दे रहे हैं तो खंडन करो उनका

3185
04:06:18,000 --> 04:06:21,920
नाम ले ले करर के वीडियो बनाओ

3186
04:06:21,920 --> 04:06:26,080
उनके जी चलाइए लेकिन आप क्योंकि कर रहे

3187
04:06:26,080 --> 04:06:31,040
हैं तो आपकी स्वतंत्रता है और हम तो अपने संप्रदाय

3188
04:06:31,040 --> 04:06:35,080
जैसे पद पर बैठे प्रतिष्ठित व्यक्ति के प्रति इस प्रकार के अ शब्दावली का प्रयोग नहीं कर सकते

3189
04:06:35,080 --> 04:06:39,240
मा बहन की गालिया हो या उनको नकली या पाखंडी या धूत कहा गया हो इस प्रकार से जहा

3190
04:06:39,240 --> 04:06:43,720
भी कहा गया मैंने सर्वत्र कहा है आप गलत कर रहे हैं आप ऐसा नहीं करें और क

3191
04:06:43,720 --> 04:06:48,240
उन कमेंट को डिलीट भी किया है और बा बोल रहे

3192
04:06:48,240 --> 04:06:52,440
होहा है पर अच्छा इस कमेंट आपने लगाया

3193
04:06:52,440 --> 04:06:56,840
क्या आपको लगता है आपने जिनरो बना वहा पर

3194
04:06:56,840 --> 04:07:02,640
आपको हमको

3195
04:07:02,640 --> 04:07:06,840
लिस ने हज कमेंट हो रहे तो हज कमेंट पढ़ पाऊंगा ना हज

3196
04:07:06,840 --> 04:07:10,960
कमेंट का जवाब दे पागा लेन जब भी मेरी दृष्टि ऐसे किसी आपत्ति जनक वक्त पर गई

3197
04:07:10,960 --> 04:07:15,360
हमने विरोध किया आप गलत कर रहे आप किसी प्रतिस करके शंकराचार्य

3198
04:07:15,360 --> 04:07:19,920
जसे पद पर बैठे प्रित व्यक्ति के प्रति इस प्रकार की शब्दा का प्रयोग नहीं कर सकते

3199
04:07:19,920 --> 04:07:24,000
की गालिया होक पाखंड कहा गया इस प्रकार से जहा भी कहा

3200
04:07:24,000 --> 04:07:28,040
गया मैंने सर्वत्र कहा आप गलत कर रहे हैं आप ऐसा नहीं करें और कई बार उन

3201
04:07:28,040 --> 04:07:32,080
कमेंट को डिलीट भी किया है और चार पा बार रिपीट करने पर मैंने उस

3202
04:07:32,080 --> 04:07:38,080
ति को बलक

3203
04:07:40,800 --> 04:07:44,880
किया लेकर कद शंकराचार्य जी

3204
04:07:44,880 --> 04:07:48,880
ने द्वार किम नरस नारी अरे

3205
04:07:48,880 --> 04:07:53,760
भाद शंकराचार्य जी ने क्या कहा ये मत बताओ

3206
04:07:53,760 --> 04:07:58,440
पहले उनके परंपरा प्राप्त आचार्य सार्वभौम है उनके शरणागत हो

3207
04:07:58,440 --> 04:08:04,200
फिर क्लेम करना शंकर परंपरा क्या कहती

3208
04:08:04,200 --> 04:08:08,440
है ठीक है चलो भगवान

3209
04:08:08,440 --> 04:08:12,600
कपिल ने भी कहा आदि शंकराचार्य जी और कपिल जी क्या मनुवादी

3210
04:08:12,600 --> 04:08:16,760
नहीं थे अरे भैया नारी का सम्मान हम भी करते हैं लेकिन नारी

3211
04:08:16,760 --> 04:08:21,040
अगर कुता को मुंह में मुह ऐसे लगाकर और करे और स्वयं को योगाचार्य बताते

3212
04:08:21,040 --> 04:08:25,080
हुए योग बोता एक मिनट अब क्यों बोल

3213
04:08:25,080 --> 04:08:29,240
रहे हो कुत्ता को मुह में वही बोलो वही बोल लिफ

3214
04:08:29,240 --> 04:08:33,320
ट लिफ वही बोल बारबार बोल सही था ना

3215
04:08:33,320 --> 04:08:37,600
वोह सही बोला था ना वही बोल

3216
04:08:37,600 --> 04:08:41,960
लिफ टू लिप किस अब शर्म आ रही है क्या

3217
04:08:41,960 --> 04:08:46,080
यह है रामो दुर नावी भाष राम दो प्रकार की बातें

3218
04:08:46,080 --> 04:08:50,160
नहीं करता अरे तुम जैसे लोग जब धर्म धर्म

3219
04:08:50,160 --> 04:08:54,560
सिखाओ ग दुनिया को गड्ढे में जाएगी दुनिया

3220
04:08:54,560 --> 04:08:55,800
शर्म आ रही ना अपने वक्तव्य

3221
04:08:55,800 --> 04:09:01,360
को दोबारा रिपीट करने में डर लग रहा है ना भय हो रहा है ना एक

3222
04:09:01,360 --> 04:09:06,040
मिनट शब्दावली क्यों बदल दी वही बोल बारबार

3223
04:09:06,040 --> 04:09:11,120
बारबार वही बोल लिपटो लिप केस कुत्ते के साथ वो मत कर

3224
04:09:11,120 --> 04:09:15,560
तू तुम जाकर के इलाज करा हर शुक्रवार

3225
04:09:15,560 --> 04:09:20,520
तुम जाकर के धरातल पर गिरो धरातल पर कार्य करने जाओ तो गिरो

3226
04:09:20,520 --> 04:09:26,040
मातृ शक्तियों के मोह

3227
04:09:26,040 --> 04:09:28,440
में

3228
04:09:28,440 --> 04:09:32,640
चलो से लोगों कोयोग की ओर ले जावे तो उसका भी सम्मान

3229
04:09:32,640 --> 04:09:36,720
करना वांछित नहीं है हम कोई गाली नहीं दे रहे बस अधर्म को अधर्म कह रहे हैं और

3230
04:09:36,720 --> 04:09:41,000
अधर्म को अध नहीं तुमने

3231
04:09:41,000 --> 04:09:45,160
आपत्ति जनक शब्दों का उपयोग किया है हगना

3232
04:09:45,160 --> 04:09:51,160
मतना यह सब व सब आपत्ति

3233
04:09:52,520 --> 04:09:57,160
जनकन तुमने गालिया भी दी है

3234
04:09:57,160 --> 04:10:01,160
यह जो संभावित वाले तथ है उनके अनुसार भी हम लोग निकाल वो जो

3235
04:10:01,160 --> 04:10:05,360
बनाएंगे त और जाने क्या क्या निकल के आएगा व गालिया

3236
04:10:05,360 --> 04:10:09,760
भी उपयोग में ली है तुमने किसको पता नहीं जूतो से मारने की बात की है

3237
04:10:09,760 --> 04:10:15,760
यह शास्त्र खंडन है तुम्हारा जूतो से मारना

3238
04:10:19,840 --> 04:10:24,480
अनाव रूप से किसी ना के गा तो

3239
04:10:24,480 --> 04:10:28,640
मारूंगा उघार देंगे कितना बचा है 11 प्र दूसरी

3240
04:10:28,640 --> 04:10:32,760
बात अगर बात है जगतगुरु शंकराचार्य के अपमान की ऐसे तो आप अमोग लीला जी से बहुत

3241
04:10:32,760 --> 04:10:36,760
बार चर्चा करने का प्रयास करते हैं बल्कि वो तो भगवान शंकराचार्य का हर वीडियो में अपमान करते रहते

3242
04:10:36,760 --> 04:10:40,920
हैं देखिए शिवा भैया हम थोड़ा सा भी आपको नीचे झुकना नहीं देख सकते वो भी ऐसे व्यक्ति

3243
04:10:40,920 --> 04:10:44,920
से जो बे बुनियादी बातो पर बहस कर रहा है और जैसा आपने पार्ट वन में कहा था कि कोई

3244
04:10:44,920 --> 04:10:49,120
अपना बन के आएगा तो उसको ढेर करने में भले ही थोड़ा ज्यादा समय लगे लेकिन

3245
04:10:49,120 --> 04:10:53,360
कोई विरोधी बन के आएगा तो पाच मिनट में फरियाद दिया जाएगा तो आप अब इन लोगों को अपना

3246
04:10:53,360 --> 04:10:57,400
क्यों समझ रहे हैं भैया जब आप इन लोगों के साथ विरोधी जैसा व्यवहार क्यों नहीं कर रहे हैं थोड़ा

3247
04:10:57,400 --> 04:11:01,560
सा आप अपने पुराने वाले रूप में क्यों वापस नहीं आ जाते हमें आपका वही निडर निर्भीक

3248
04:11:01,560 --> 04:11:05,600
रूप पसंद है भैया शायद मुझे पूरा आंतरिक संदर्भ ना पता हो और मैंने कोई अनर्गल बात

3249
04:11:05,600 --> 04:11:07,520
बोल दी हो तो मैं क्षमा चाहूंगा पर आखिरी

3250
04:11:07,520 --> 04:11:11,600
में फिर से वह कहूंगा कि हमें शिवांश भैया का वही पुना रूप देखना है जो बेखौफ लोगों

3251
04:11:11,600 --> 04:11:15,960
को निरुत्तर करते थे अच्छे-अच्छे लोगों के प छुड़वा देते थे क्या अलंकार समाज क्या क्रष्ण क्या

3252
04:11:15,960 --> 04:11:20,440
रामपाल और अब मैं चाहता हूं क्या निग्रह चार्य क्या गुरु द्रोही क्या अवान द्रोही क्या भगवान शंकराचार्य द्रोही

3253
04:11:20,440 --> 04:11:24,440
सब के लंका लगा दीजिए सबको लाइन से फरयाद दीजिए बस यही चाहता हूं जय श्री राम

3254
04:11:24,440 --> 04:11:28,520
तो भैया आप ही के भूतपूर्व समर्थक लोग आपके विरुद्ध कैसे होने लगे ऐसा

3255
04:11:28,520 --> 04:11:32,640
तो नहीं होना चाहिए था क्योंकि समर्थकों में और जिसका

3256
04:11:32,640 --> 04:11:37,400
वह समर्थन कर रहे हैं उसमें अंतर होता है अभी समर्थक

3257
04:11:37,400 --> 04:11:41,440
वो पूर्ण रूप से नहीं जान गए हैं जो मैं बताना चाहता हूं और

3258
04:11:41,440 --> 04:11:45,680
मैं वो पूर्ण रूप से नहीं जान गया हूं जो गुरु गुरुदेव बताना चाहते हैं जगतगुरु शंकराचार्य

3259
04:11:45,680 --> 04:11:49,720
बताना चाहते हैं तो इसलिए मेरी वाणी हो सकता है कहीं पर ऐसी

3260
04:11:49,720 --> 04:11:54,480
कुछ हो जो उनके बिल्कुल उनके जै उनकी बात ना रख रही हो यथावत इसी

3261
04:11:54,480 --> 04:11:58,680
तरीके से इनकी हो गई मैं इसकन का विरोध करना बंद

3262
04:11:58,680 --> 04:12:02,720
नहीं किया है इसकन का शोधन का जो कार्य है वो करना बंद नहीं किया है प्रतिकार

3263
04:12:02,720 --> 04:12:06,720
करना बंद नहीं किया है मैंने केवल इतना कहा कि

3264
04:12:06,720 --> 04:12:10,800
वो लोग जो जिन व्यक्तियों की मृत्यु हो

3265
04:12:10,800 --> 04:12:14,920
चुकी है उनसे हमारा कोई बैर नहीं है वो अब और वह भी श्री राम

3266
04:12:14,920 --> 04:12:19,520
के सिद्धांत पर और अगर इस सिद्धांत का हम खंडन करेंगे तो फिर हम रक्षा किसकी करेंगे

3267
04:12:19,520 --> 04:12:22,680
और क्यों विरोध करेंगे किसी का जब रक्षा नहीं है तो श्री

3268
04:12:22,680 --> 04:12:28,680
राम के कहे हुए वाक्य की रक्षा नहीं है

3269
04:12:31,880 --> 04:12:37,520
तो तुम्हारे भी तो समर्थक कर रहे हैं तुम्हारा

3270
04:12:37,520 --> 04:12:41,600
विरोध तो य ठीक है वो किसी ने कोई हमारे

3271
04:12:41,600 --> 04:12:47,560
विचार को नहीं समझ पाया तो ऐसे कह रहा है चलो प्ले

3272
04:12:47,560 --> 04:12:52,000
करो राम जी का आपने नाम लिया भगवान श्री रामचंद्र जी का वचन क्या है

3273
04:12:52,000 --> 04:12:56,080
जवाली वाले प्रसंग में देखिए महर्षि जावा के साथ वार्ता करते हुए भगवान ने कहा

3274
04:12:56,080 --> 04:13:00,360
है चित्रकूट वाले प्रसंग में नि निर्मल याद स्तु पुरुष पापा आचार

3275
04:13:00,360 --> 04:13:04,440
समन्वित मानम न लभते सत सु भिन्न चारित्र दर्शन जो

3276
04:13:04,440 --> 04:13:08,760
व्यक्ति मर्यादा विहीन है पापा आचार से लिप्त है वो सभ्य लोगों के सभा

3277
04:13:08,760 --> 04:13:13,160
में सम्मान नहीं प्राप्त करता है इसीलिए हमने जिन लोगों के विरुद्ध बहुत करो

3278
04:13:13,160 --> 04:13:17,640
शब्दावली का प्रयोग किलिए किया पॉज करो सम्मान

3279
04:13:17,640 --> 04:13:22,240
ना करना और अपमान करने में अंतर है पहली बात

3280
04:13:22,240 --> 04:13:26,360
और जो व्यक्ति की बात हो रही है वह व्यक्ति

3281
04:13:26,360 --> 04:13:30,400
मर भी चुका है मरने के बाद तो उन्हीं रामचंद्र ने कहा ना

3282
04:13:30,400 --> 04:13:34,600
उन्हीं श्री रामचंद्र जी ने कहा ना कि व मरने के बाद कोई बैर

3283
04:13:34,600 --> 04:13:37,880
नहीं होता है तुमने फिर क्यों य अगना मतना जोड़ जोड़ दिया

3284
04:13:37,880 --> 04:13:42,040
नंद जी इत्यादि

3285
04:13:42,040 --> 04:13:44,560
से

3286
04:13:44,560 --> 04:13:49,120
और जो श्री रामचंद्र जी इत्यादि जी

3287
04:13:49,120 --> 04:13:53,960
हैं श्री रामचंद्र भगवान है उन्होंने जो यह कहा

3288
04:13:53,960 --> 04:13:58,160
कि जो पापा चारी होता है यह होता है वो होता है

3289
04:13:58,160 --> 04:14:02,280
उसका जो है उसके साथ वह सम्मान का पात्र नहीं है तो

3290
04:14:02,280 --> 04:14:06,640
हां नहीं है सम्मान का पात्र कहां सम्मान देते हैं

3291
04:14:06,640 --> 04:14:11,000
इसको सम्मान देते हैं उसको हम कोई सम्मान नहीं देते

3292
04:14:11,000 --> 04:14:15,040
हां मगर लोक व्यवहार तो करना पड़ेगा ना यदि लोक व्यवहार

3293
04:14:15,040 --> 04:14:19,240
ही नहीं होगा तो चर्चा ही समाप्त हो जाएगी लोक व्यवहार तो करना पड़ेगा

3294
04:14:19,240 --> 04:14:23,360
ना हनुमान जी जब ब्राह्मण के यहां पर गए थे हनुमान जी जब रावण के यहां गए

3295
04:14:23,360 --> 04:14:27,400
थे तो वहां लोक व्यवहार तो किया था ना कि तुरंत गाली वाली देना शुरू कर

3296
04:14:27,400 --> 04:14:31,920
दिया था हगना मतना शुरू कर दिया था क्या वहां उन्होंने शब्दों में

3297
04:14:31,920 --> 04:14:36,080
यह सब भाषा शैली उपयोग करने लगे थे वहां जाकर के जो तुम करते हो

3298
04:14:36,080 --> 04:14:40,080
तुम खुद अपने आप को देख लो तुम क्या करते हो और श्री राम जी के वचनों से

3299
04:14:40,080 --> 04:14:45,040
कितना मैच खाती है रावण तो पापा चारी था

3300
04:14:45,040 --> 04:14:51,040
फिर भी उनके पास उन्होंने उसके पास उन्होंने वो भेजा था अंगत को भी भेजा था बाद

3301
04:14:51,280 --> 04:14:53,000
में तुम तो ना खुद

3302
04:14:53,000 --> 04:14:57,120
गए ना किसी को भेजा और तुम तू तड़क में बात कर रहे हो वो भी उनके

3303
04:14:57,120 --> 04:15:01,160
लिए जो जो जा चुके हैं और जिनके लिए तुम कर रहे हो

3304
04:15:01,160 --> 04:15:05,440
वह छात्र धर्म का आलंबन ले रहे हैं और तुम ब्राह्मणो चित चश्मा लगाकर उनके

3305
04:15:05,440 --> 04:15:09,440
छात्र धर्म का वो कर रहे हो समीक्षा ये

3306
04:15:09,440 --> 04:15:13,240
अंतर है

3307
04:15:13,240 --> 04:15:17,320
ठीक है और बाकी हम कोई व्यक्तिगत रूप से सम्मान देने की बात नहीं करते जो पापा

3308
04:15:17,320 --> 04:15:20,320
चारी

3309
04:15:20,320 --> 04:15:25,200
है और सुनो पापा चारी की बात से याद

3310
04:15:25,200 --> 04:15:30,400
आया कि महाभारत में लिखा हुआ है

3311
04:15:30,400 --> 04:15:34,480
कि जो श्रद्धा विहीन है व भले ही ठीक ठाक

3312
04:15:34,480 --> 04:15:38,560
कर्म कर रहा हो मगर तब भी जो ठीक

3313
04:15:38,560 --> 04:15:43,000
ठाक कर्म नहीं कर रहा मगर उसकी प्रमाण बुद्धि है श्रद्धावन है वसे

3314
04:15:43,000 --> 04:15:47,400
श तो उस रूप में तो उसको कहा जाएगा ना मलेच्छ

3315
04:15:47,400 --> 04:15:51,800
से तुलनात्मक देखेंगे तो यह आर्य समाज कन अच्छे नहीं

3316
04:15:51,800 --> 04:15:56,000
है नास्तिकों की तुलना में आर समाज

3317
04:15:56,000 --> 04:16:00,200
स्कोन ठीक नहीं है और फिर तुम हिंदू बनाओगे

3318
04:16:00,200 --> 04:16:06,200
किसको

3319
04:16:13,040 --> 04:16:17,360
चार भगवान जी ने तो कैसे तर्क है तुम्हारे

3320
04:16:17,360 --> 04:16:21,440
ये कोई तर्क है क्या भाई जिसके साथ तुम चर्चा करने जा रहे हो कि वह

3321
04:16:21,440 --> 04:16:25,440
तुम्हारी बात सुने तो उस चर्चा के लिए आपको उसके साथ लोक व्यवहार करना पड़ेगा

3322
04:16:25,440 --> 04:16:31,440
वरना वो चर्चा होगी

3323
04:16:33,840 --> 04:16:39,840
नहीं नकली आईडी दिखाओ

3324
04:16:45,880 --> 04:16:50,000
यह देखो यह जो है नकली

3325
04:16:50,000 --> 04:16:54,240
आईडी से किया जा रहा है यह सब बंद करिए जो भी कर रहे हैं नहीं इस पर कारवाई होगी

3326
04:16:54,240 --> 04:16:59,120
संवैधानिक आज का जो संविधान है लोग जो लोकतंत्र के अनुसार

3327
04:16:59,120 --> 04:17:03,480
विधिक कारवाई होगी इसीलिए यह प्रूफ

3328
04:17:03,480 --> 04:17:07,640
करने के लिए यह चाल जो चली जा रही है उसको बंद

3329
04:17:07,640 --> 04:17:13,320
कर दो चलो

3330
04:17:13,320 --> 04:17:17,360
क्योंकि ऐसे लोगों के कृत्य और वक्तव्य से सनातन धर्म का सीधा सधा रास

3331
04:17:17,360 --> 04:17:21,360
और मूल सैद्धांतिक पतन हो रहा था न्यायपालिका वाले विषय

3332
04:17:21,360 --> 04:17:25,600
पर बता ही चुका हूं और श्रीमद भागवत के दवाद स्क में यही बात है कि धर्म

3333
04:17:25,600 --> 04:17:30,320
क् धर्मत मासनम जो अधर्म

3334
04:17:30,320 --> 04:17:35,200
म में रहने लगेंगे और मठ कैसा होना चाहिए मकार कलम प्रकार

3335
04:17:35,200 --> 04:17:40,280
निवार सेवागम में देखलो शिवा अवतार है ना शंकराचार्य जी सेवागम में देख

3336
04:17:40,280 --> 04:17:44,440
लो मकार कलम

3337
04:17:44,440 --> 04:17:48,560
अब यहां वही कार्य कर रहे हैं आवश्यकता कुछ नहीं है

3338
04:17:48,560 --> 04:17:52,960
जबरन श्लोक पढ़ के दिखा रहे हैं जिससे जो दंभी

3339
04:17:52,960 --> 04:17:57,120
जो लोग हैं इनके अंद भक्त खुश हो जाए वा वा वा वा बढ़िया श्लोक

3340
04:17:57,120 --> 04:18:01,160
हमने कितने दिखा बोल दिए एक वो आया था स्कन वाला वो गा रहा था तुम तो बोल

3341
04:18:01,160 --> 04:18:05,840
रहे हो वो गा रहा था तो हमने कहा था ये

3342
04:18:05,840 --> 04:18:09,880
गायन वादन जो है अलग करके अपना कार्य जो पॉइंट

3343
04:18:09,880 --> 04:18:14,000
कट टू पॉइंट है वो बोलो ठीक है यहां भी आप वही

3344
04:18:14,000 --> 04:18:18,000
कर रहे हैं व्यर्थ के लिए वो लोक पढ़ पढ़ के बता रहे जिनकी आवश्यकता है

3345
04:18:18,000 --> 04:18:22,160
ही नहीं भाई अगर कोई व्यक्ति

3346
04:18:22,160 --> 04:18:26,200
ऐसा आचरण कर रहा है जिसके साथ हमें चर्चा करके कुछ भी प्राप्त नहीं करना

3347
04:18:26,200 --> 04:18:28,360
है तो हमें कोई जरूरत नहीं है कि हम

3348
04:18:28,360 --> 04:18:32,600
उसका सम्मान करें मगर जिसके साथ चर्चा करनी है

3349
04:18:32,600 --> 04:18:37,200
उसके साथ चर्चा करने के लिए स्थान तो बना के रखना पड़ेगा ना

3350
04:18:37,200 --> 04:18:41,480
अगर अपमान ही कर देंगे तो चर्चा कहां से होगा चर्चा कहां से होगी उसकी

3351
04:18:41,480 --> 04:18:44,920
अपमान ही कर देंगे तो

3352
04:18:44,920 --> 04:18:49,400
फिर तो व सिद्धांत को सुनेगा ही नहीं भाग य से अगना

3353
04:18:49,400 --> 04:18:53,640
मतना पता नहीं क्या क्या मुझे वही याद है बाकी हम लोग वीडियो बनाएंगे

3354
04:18:53,640 --> 04:18:57,880
तो अपमान वाली क्लिप लगा देंगे उसम चलो कते पाप

3355
04:18:57,880 --> 04:19:02,840
को कते निवारण को बनाते वीडियो भाई

3356
04:19:02,840 --> 04:19:07,880
अन्य पीठों के सम्मान के लिए क्यों खड़ा नहीं होते आप क्योंकि वहा आपको इंटरेस्ट नहीं

3357
04:19:07,880 --> 04:19:12,800
है गलत बात अधूरी जानकारी पूरी करो

3358
04:19:12,800 --> 04:19:17,040
अन्य पीठों के सम्मान के लिए हम खड़े होते हैं इनको जरा हमारी अगर वो लिस्ट

3359
04:19:17,040 --> 04:19:23,040
दिख पाए तो दिखाना जरा मोबाइल

3360
04:19:23,880 --> 04:19:29,880
लाना अन्य पीठों के सम्मान के लिए क्यों नहीं खड़े

3361
04:19:31,400 --> 04:19:35,440
होते तुम अन्य पीठों से जाकर के शास्त्रार्थ क्यों नहीं लड़ते

3362
04:19:35,440 --> 04:19:39,640
बुद्ध वाली बात पर जाओ जाओ वहां जाकर के

3363
04:19:39,640 --> 04:19:43,720
मुक्ति शरण जी को चैलेंज करो क्यों उनके जाकर म मत को सा कर र जब वो इस वाली भ्रांति

3364
04:19:43,720 --> 04:19:48,600
को मान तुम्हारे हिसाब से भ्रांति है कि वो बुद्ध का अवतार नहीं थे

3365
04:19:48,600 --> 04:19:52,800
तो जाओ क्योंकि तुम्हें यहीं से वो मिलना

3366
04:19:52,800 --> 04:19:58,800
है ना प्रमाणिकता प्राप्त करनी है अपने लुप्त संप्रदाय

3367
04:20:06,120 --> 04:20:10,280
की अधूरी जानकारी तुम्हारे झूठ कितने कल की उसमें

3368
04:20:10,280 --> 04:20:14,400
और आज की इसमें कितने तो चलती उसमें ही

3369
04:20:14,400 --> 04:20:20,400
पकड़े गए हैं ये देखो

3370
04:20:44,280 --> 04:20:49,080
यह देखो यह जो वीडियो है

3371
04:20:49,080 --> 04:20:54,160
शंकराचार्य ने आखिर किया क्या है अरे

3372
04:20:54,160 --> 04:20:59,480
या यह जो वीडियो

3373
04:20:59,480 --> 04:21:03,680
है यह शंकराचार्य ने किया क्या इसको सुन

3374
04:21:03,680 --> 04:21:07,680
लेना यह उस समय का वीडियो है जब

3375
04:21:07,680 --> 04:21:11,760
शंकराचार्य के विरोध में बहुत आवाजें आ रही थी तो उस

3376
04:21:11,760 --> 04:21:15,880
समय एक व्यक्ति के साथ बातचीत है और यह व्यक्ति पूज

3377
04:21:15,880 --> 04:21:20,040
मुक्तेश्वर जी का अपमान कर रहा था उनका विरोध कर रहा था और इनके लिए

3378
04:21:20,040 --> 04:21:24,040
हम खड़े हुए ठीक है तो अधूरी जानकारी

3379
04:21:24,040 --> 04:21:28,400
है तुम्हारी और अन्य पीठों की बात सुनो और दिखाता हूं फिर

3380
04:21:28,400 --> 04:21:33,040
से बोलना और सुनो अन्य पीठों की बात है तो सुन

3381
04:21:33,040 --> 04:21:37,120
लो झूठ की लड़ाई लड़ो ग मैं कह रहा

3382
04:21:37,120 --> 04:21:42,800
हूं ना इस बार आदमी गलत मिल गया तुमको

3383
04:21:42,800 --> 04:21:48,800
यह देखो और अन्य पीठों की बात सुनो

3384
04:22:25,640 --> 04:22:30,800
यह जो वीडियो बनाए है ना

3385
04:22:30,800 --> 04:22:34,880
ये ये इसमें संगरी के

3386
04:22:34,880 --> 04:22:38,920
संगरी पीठ के शंकराचार्य के लिए क्या कहा था आर समाज यों

3387
04:22:38,920 --> 04:22:43,160
ने कि टीपू सुल्तान को उन्होंने प्रश्र दिया ये दिया वो दिया

3388
04:22:43,160 --> 04:22:47,400
ठीक है यह किया था जाकर सुन लेना उसके लिए

3389
04:22:47,400 --> 04:22:51,520
भी खड़े हुए हमारी जानकारी में हमारे सामर्थ्य

3390
04:22:51,520 --> 04:22:55,720
के सीमा में जब भी आएगा और ऐसा नहीं है

3391
04:22:55,720 --> 04:23:00,280
राघवाचार्य जी महाराज जी के लिए भी काफी सारी अपमानजनक बातें उनके लिए भी हमने

3392
04:23:00,280 --> 04:23:04,360
बोला वो तो शंकर परंपरा भी नहीं है

3393
04:23:04,360 --> 04:23:10,360
और जहां जो सुनाई देता है जितना हमारी जानकारी में आ जाता है उतना हम खड़े होते

3394
04:23:10,880 --> 04:23:16,720
हैं चलो

3395
04:23:16,720 --> 04:23:20,880
नहीं दिख ही है क रूप से आपकी बनावटी है और शास्त्र अकेले

3396
04:23:20,880 --> 04:23:25,240
पढ़ने पर भी कल्याण नहीं है भारद्वाज संहिता से देखिए शास्त्रास सुद

3397
04:23:25,240 --> 04:23:29,280
सांग फलो दया न प्रस विद्या विना सद उपदेश जब तक

3398
04:23:29,280 --> 04:23:33,560
गुरु सद उपदेश ना करे केव शास्त्र पढ़ लेने से समझ में नहीं आता विषय और गुरु

3399
04:23:33,560 --> 04:23:37,640
भी क्या बताएंगे शास्त्र बना गुरु गुरु गुरु क्यों बने

3400
04:23:37,640 --> 04:23:41,800
शास्त्र के कारण बने शास्त्र के बिना गुरु भी किसी भी व्यक्ति को उपदेश

3401
04:23:41,800 --> 04:23:45,800
करने में समर्थ नहीं होते इसीलिए शास्त्र और गुरु का ऐसा अभिन संबंध

3402
04:23:45,800 --> 04:23:51,400
होना चाहिए बैठ बहुत देर से बोल रहा इसलिए

3403
04:23:51,400 --> 04:23:55,480
पानी और अगर गुरु शास्त्र से विरुद्ध हो जाए तो क्या होगा

3404
04:23:55,480 --> 04:23:59,640
असत कार्य निता गुरु प्र शुक्र निति कहते

3405
04:23:59,640 --> 04:24:03,640
हैं असत कार्य को करने के लिए प्रेरित करने वाले गुरु

3406
04:24:03,640 --> 04:24:07,800
को भी प्रबोध करे सतर्क करे जगाए गुरु जी आप गलत कर रहे हैं

3407
04:24:07,800 --> 04:24:12,000
और सुनो अगर तुम गुरु द्रोही गुरु द्रोही कहते हो तो गुरु द्रो अधिक बड़ा शास्त्र

3408
04:24:12,000 --> 04:24:16,200
द्रो पुराण देख लो अध्याय 18

3409
04:24:16,200 --> 04:24:20,360
लोक माना जाएगा ना जब वो शास्त्र द्रोह सिद्ध कर दो तो ये

3410
04:24:20,360 --> 04:24:25,240
क्यों बता रहे हो कि शास्त्र द्रो बड़ा होता है गुरु द्रोह

3411
04:24:25,240 --> 04:24:26,240
से

3412
04:24:26,240 --> 04:24:31,120
यह क्यों बता रहे हो भाई शास्त्र द्रोह सिद्ध करोगे ना तब होगा ना

3413
04:24:31,120 --> 04:24:35,120
और शास्त्र द्रोह करने के दुस में आप जो है व्यक्तिगत टिप्पणियां

3414
04:24:35,120 --> 04:24:39,160
थोड़ी ना

3415
04:24:39,160 --> 04:24:43,160
करोगे चलो यही है यही है इनका

3416
04:24:43,160 --> 04:24:47,600
तरीका बात प्रभाव लो आ

3417
04:24:47,600 --> 04:24:51,960
मैं मैं प्रेस वाला हूं इसलिए जो पुलिस वाले व मुझे प्रायोरिटी से

3418
04:24:51,960 --> 04:24:56,040
देखें और मैं श्लोक बोलने वाला हूं इसलिए जनता मुझे प्रायोरिटी

3419
04:24:56,040 --> 04:25:00,200
से सुने है ना मैं संस्कृत ज्ञ हूं

3420
04:25:00,200 --> 04:25:04,200
इसलिए जनता मुझे प्रायोरिटी से सुने वो इस बात को भूल जाए

3421
04:25:04,200 --> 04:25:08,200
भैया पहले यह निर्णय होगा कि वो शास्त्र का द्रोह है

3422
04:25:08,200 --> 04:25:12,320
कि नहीं अभी तो उसी की बात चल रही है ना शास्त्र का द्रोह कहां है

3423
04:25:12,320 --> 04:25:16,600
कहा नहीं है और सुनो तुमने

3424
04:25:16,600 --> 04:25:20,760
गुरु द्रोह की बात की है जो तो गुरु द्रोह मैं उस

3425
04:25:20,760 --> 04:25:24,920
बारे में नहीं बार-बार बता रहा हूं मैं तुम्हारे दो प्रकार के द्रोह

3426
04:25:24,920 --> 04:25:28,920
है एक तुमने शास्त्र बाद का पक्ष रखते हुए वो

3427
04:25:28,920 --> 04:25:32,920
जो विरोधाभासी चीजें तो उसका तो मैंने नहीं कहा मगर जो तुमने

3428
04:25:32,920 --> 04:25:37,240
उपहास उड़ाया जो तुमने हल्के शब्द कहे

3429
04:25:37,240 --> 04:25:41,400
जो शंकराचार्य के लिए नहीं कहे जाने चाहिए मैं उसकी बात कर रहा

3430
04:25:41,400 --> 04:25:45,480
हूं मैं तुम्हें दिखाऊ मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि तुमने

3431
04:25:45,480 --> 04:25:49,760
क्या क्या किया है ठीक है क्योंकि

3432
04:25:49,760 --> 04:25:53,960
मैंने तुम्हारे वीडियो ज्यादा देखे नहीं है मगर जो देखे उसमें मैं समझ गया तुमने किया है जो

3433
04:25:53,960 --> 04:25:58,280
जो चीज और अब निकालेंगे एक एक वीडियो से खोल खोल कि तुमने

3434
04:25:58,280 --> 04:26:02,840
क्याक कहा है और फिर तुम्हें दिखाएंगे क्या शास्त्रोक्त

3435
04:26:02,840 --> 04:26:07,160
खंडन करने के लिए इस पंक्ति की आवश्यकता थी क्या

3436
04:26:07,160 --> 04:26:12,560
जो तुमने उपास पूर्वक बोली जो तुमने अवमानना पूर्वक बोली

3437
04:26:12,560 --> 04:26:16,600
जो तुमने हीन दिखाने के लिए बोली

3438
04:26:16,600 --> 04:26:20,720
वहां पर कौन सा शास्त्रों का खंडन था जब तुमने चारों शंकराचार्य को

3439
04:26:20,720 --> 04:26:24,880
बदनाम किया कि तुम चार करोड़ रुपए देकर के चारों शंकराचार्य को बुला

3440
04:26:24,880 --> 04:26:29,080
लो उनके उनके कार्यक्रम में यह सब कर लो पर निकरा आचार के उसमें

3441
04:26:29,080 --> 04:26:33,200
नहीं होगा बड़े बड़े भारी वो बन रहे थे

3442
04:26:33,200 --> 04:26:37,440
नेता वहां कौन सा शास्त्र का खंडन किया था शंकराचार्य

3443
04:26:37,440 --> 04:26:41,920
ने दुश्मन हो क्या चारों शंकराचार्य के क्यों की थी अमानना

3444
04:26:41,920 --> 04:26:47,920
क्यों य संदेश दिया था कि वो जो है एक करोड़ रुपए लेते कहीं भी जाने

3445
04:26:48,280 --> 04:26:52,320
का अनादर किया था तुमने वहा तुमने

3446
04:26:52,320 --> 04:26:56,320
अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने के लिए यह किया था हम शंकराचार्य

3447
04:26:56,320 --> 04:27:00,080
से भी ऊपर की चीज

3448
04:27:00,080 --> 04:27:04,520
है चलो

3449
04:27:04,520 --> 04:27:08,600
बढ़ाओ अपवाद नास्ति

3450
04:27:08,600 --> 04:27:12,880
तब तो आपको कोई दिक्कत नहीं हो और हमने तो विरोध या कई बिंदुओं

3451
04:27:12,880 --> 04:27:17,320
पर कुछ बिंदुओ पर पूरी शंकराचार्य परंपरा को गाली दे रहे ऐसे

3452
04:27:17,320 --> 04:27:22,040
और आर्य समाज से चर्चा करने के सम ला बता चुके भैया बता चुके हैं

3453
04:27:22,040 --> 04:27:26,400
बता चुके हैं जो व्यक्तिगत नहीं हो रहा है उसके साथ हम चर्चा

3454
04:27:26,400 --> 04:27:30,560
का पहली बात तो उसके साथ हम व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करेंगे

3455
04:27:30,560 --> 04:27:34,680
और चर्चा करेंगे जिससे कि उसका वह बाहर

3456
04:27:34,680 --> 04:27:38,760
आए जनता उसकी सच्चाई को जाने

3457
04:27:38,760 --> 04:27:43,000
और गाली बाजी तो कभी भी नहीं करेंगे

3458
04:27:43,000 --> 04:27:49,000
ठीक है यह अंतर है तुम में और हम में

3459
04:27:49,280 --> 04:27:53,280
चलो कई मुद्दों पर शंकराचार्य की ओ आती गालियों को अपनी ओर मोड़ा है उनके

3460
04:27:53,280 --> 04:27:57,760
लिए खड़े रहे हैं उनके सिद्धांत का मंच से प्रचार किया है आप

3461
04:27:57,760 --> 04:28:01,800
उसके लिए तुम्हारा अभिवादन है अगर किया है तो मैं जितना जानता हूं उसमें भी

3462
04:28:01,800 --> 04:28:05,960
मैंने तुम्हारा समर्थन किया पहले भी बताया मगर इसका मतलब यह थोड़ी ना है

3463
04:28:05,960 --> 04:28:10,000
सुनो शास्त्र का वो भी सुन लो व थोड़ा बहुत मैं दे देता संस्कृत के श्लोक नहीं याद

3464
04:28:10,000 --> 04:28:14,720
रहते मगर संदर्भ याद रहता है आवश्यकता अनुसार

3465
04:28:14,720 --> 04:28:18,960
कि जो दमयंती थी ना उसको अजगर जो है निकल

3466
04:28:18,960 --> 04:28:23,400
जाने वाला था किसी ने उसकी रक्षा की अजगर

3467
04:28:23,400 --> 04:28:27,480
को मार के उसके बाद उसी की कुदृष्टि हो गई

3468
04:28:27,480 --> 04:28:31,720
दमयंती प तो अगर तुम्हारे कहने

3469
04:28:31,720 --> 04:28:36,160
का अर्थ है कि अगर उसने अ शिकारी

3470
04:28:36,160 --> 04:28:40,560
ने अजगर से देवंती के प्राणों की रक्षा की थी तो इसलिए अब उसके

3471
04:28:40,560 --> 04:28:44,760
साथ जो देवंती है दुरा चरण

3472
04:28:44,760 --> 04:28:48,960
करना देवंती के साथ वो न्याय पूर्ण है क्योंकि उसी ने प्राणों

3473
04:28:48,960 --> 04:28:52,960
की रक्षा की है तो तुमय अपना क्या साबित करना चाह रहे हो कि हमने यह किया हमय खड़े

3474
04:28:52,960 --> 04:28:56,960
रहे ये है वो उसके लिए हमने कहा कि तुमने गलत किया

3475
04:28:56,960 --> 04:29:01,160
है और अगर तुमने वह किया तो इसका मतलब जहां अब तुम्हें छूट मिल गई

3476
04:29:01,160 --> 04:29:03,880
कुछ भी करने

3477
04:29:03,880 --> 04:29:04,880
की

3478
04:29:04,880 --> 04:29:09,960
करोगे तो रोकेंगे ना रोकेंगे जब तक

3479
04:29:09,960 --> 04:29:14,200
है सांस तो हम अपना प्रयत्न करेंगे जीत

3480
04:29:14,200 --> 04:29:18,320
और हार तो ईश्वर के हाथ में है कर्मन वादी कार से मा फले सुदा

3481
04:29:18,320 --> 04:29:22,680
चना लो जी तो राज ईश्वर

3482
04:29:22,680 --> 04:29:26,920
के हाथ में चलो प्रब किया है उनका संदर्भ

3483
04:29:26,920 --> 04:29:31,000
दे देकर अनेक प्रसंग में उनके शिष्य को समय अनुसार शास्त्र से धन

3484
04:29:31,000 --> 04:29:35,120
से कुछ है नहीं लगभग सभी वो ले लिए है स्किप करिए थोड़ा सा

3485
04:29:35,120 --> 04:29:38,600
टाइम बहुत हो

3486
04:29:38,600 --> 04:29:42,880
गया आदि शंकराचार्य को पूरे 14 शिष्य मिले इनको

3487
04:29:42,880 --> 04:29:47,520
लाखों मिल रहे हैं फिर भी काम नहीं बन पा

3488
04:29:47,520 --> 04:29:51,600
रहा ये है ये है व्यक्तिगत विरोध इनको लाखों मिल

3489
04:29:51,600 --> 04:29:55,720
रहे हैं 7 शिष्य मिले योग्य

3490
04:29:55,720 --> 04:29:59,760
और 72 जगतगुरु रामानुजर तो हर साल लोग मा मेला

3491
04:29:59,760 --> 04:30:04,000
बना दे रहे कु में बना दे रहे ा तुमको

3492
04:30:04,000 --> 04:30:08,000
क्यों नहीं मिल रहे तुमको शिष्य क्यों नहीं मिल

3493
04:30:08,000 --> 04:30:12,040
र तुम कहते हो कि उनके

3494
04:30:12,040 --> 04:30:16,160
पास जितने शिष्य फिर वो ऐसा वही वाला दोष वाली बात भी आ गई किस

3495
04:30:16,160 --> 04:30:20,360
में किसको किसका कार्य किसको कहां पर उपयोग में लिया जाना

3496
04:30:20,360 --> 04:30:24,440
चाहिए उस कार्य के अनुसार यदि कोई नहीं मिल रहा है और उसके संदर्भ में वो

3497
04:30:24,440 --> 04:30:28,520
कह रहे हैं कि हमें नहीं मिल रहे हैं तो इसका मतलब मिल ही नहीं रहा कुछ

3498
04:30:28,520 --> 04:30:32,680
हो ही नहीं रहा अगर सीता माता का अपहरण हो गया तो राम

3499
04:30:32,680 --> 04:30:36,800
जी गलत हो गए सीता माता का अपहरण कैसे हो गया उनके रहते भाई

3500
04:30:36,800 --> 04:30:40,960
यह नहीं देखेंगे कि आज भी धर्म की जो धर्म का अस्तित्व तो वो कैसे है

3501
04:30:40,960 --> 04:30:45,280
उन्हीं आचार्य के कारण है कि तुम्हारे कारण यही आचार्य

3502
04:30:45,280 --> 04:30:49,400
तो अपने खून से सीच रहे हैं ना धर्म को आज भी यहां तक

3503
04:30:49,400 --> 04:30:53,520
लेक आए जिस पर तुम उदक रहे हो अपना लुप्त संप्रदाय

3504
04:30:53,520 --> 04:30:54,020
खड़ा

3505
04:30:53,800 --> 04:30:58,000
कर रहे हो कहां से मिले ग्रंथ जिन ग्रंथों के आधार पर तुम

3506
04:30:58,000 --> 04:31:02,600
बोल रहे हो ग्रंथ मिले कैसे देवताओं ने दिए थे

3507
04:31:02,600 --> 04:31:08,600
या शुक्रवार को दिए जाते राजस्थान

3508
04:31:09,200 --> 04:31:13,240
में इन ग्रंथों को तुम आधार बना के बात कर रहे हो वो इन्हीं

3509
04:31:13,240 --> 04:31:17,960
आचार्य उसी इन्हीं आचार्य परंपराओं से आए हैं तुम्हारे पास में

3510
04:31:17,960 --> 04:31:22,080
तो यह नहीं देखोगे जो नहीं हो रहा है उसके कारण वो दोषी है जो हो रहा है उसके

3511
04:31:22,080 --> 04:31:28,080
कारण वह प्रशंसा के पात्र नहीं

3512
04:31:29,680 --> 04:31:33,960
है चलाओ यो को योग्य समझकर दीक्षा

3513
04:31:33,960 --> 04:31:38,120
दोगे तो क्या होगा योग्यता तो रहेगी नहीं तुम्हारे हाथ निराशा

3514
04:31:38,120 --> 04:31:42,120
ही आएगी ना तुम कहते हो गुरु से

3515
04:31:42,120 --> 04:31:46,360
बात नहीं करेंगे जक्ष संहिता का वचन बता रहा हूं सुनो सुनो सुनो

3516
04:31:46,360 --> 04:31:51,040
योग योग योग उसकी बात करे जो योग्य की बात करे

3517
04:31:51,040 --> 04:31:55,640
तुम्हारा जो पाखंड का खंडन अगर तुम्हारा शिष्य है

3518
04:31:55,640 --> 04:32:00,120
वो तो योग्य होगा तुमने योग्य को दीक्षा दी होगी है ना

3519
04:32:00,120 --> 04:32:04,280
तो क्या है उसने एक रील काट के डाली

3520
04:32:04,280 --> 04:32:08,600
उसने रील काटी तुम्हारे इशारे पर काटी या कैसे काटी वो नहीं

3521
04:32:08,600 --> 04:32:12,720
पता उसने रील बनाई उसमें वक्तव्य बताया देखो

3522
04:32:12,720 --> 04:32:17,000
यहां पर विजया श्री कह रही है कि मुझे नहीं पता फ्री मशन क्या

3523
04:32:17,000 --> 04:32:21,360
है उसके थोड़ी देर बाद वह कह रही है कि तुमने डीप स्टडी

3524
04:32:21,360 --> 04:32:25,640
की थी तुमने अपने वीडियो में बताया था कि ऐसे पीछे से कनेक्टेड है ऐसे पीछे से कनेक्टेड

3525
04:32:25,640 --> 04:32:29,880
है ऐसे पीछे से कनेक्टेड है तो एक उसने

3526
04:32:29,880 --> 04:32:33,880
तो विजया स ने डीप स्टडी वाले में क्या कहा सबसे पहली बात तो इस बात

3527
04:32:33,880 --> 04:32:38,160
को तुम्हारे शिष्य ने तुम्हारा योग शिष्य है ना उसने क्या किया

3528
04:32:38,160 --> 04:32:42,160
उसने रील बनाने के लिए पाखंड खंड के

3529
04:32:42,160 --> 04:32:44,680
खंडन ने यह दिखाया देखो यहां पर विजया श्री कह रही है उसको

3530
04:32:44,680 --> 04:32:48,880
फीमस नहीं मालूम और बाद में कह रही है डीप स्टडी

3531
04:32:48,880 --> 04:32:53,200
उसको मालूम है कि भगवता अंद ने

3532
04:32:53,200 --> 04:32:57,280
इस पर डीप स्टडी की है ठीक है डीप स्टडी वाले शब्द

3533
04:32:57,280 --> 04:33:01,320
को भगवता नंद की फ्री मेशन के संबंध में की गई डीप स्टडी से

3534
04:33:01,320 --> 04:33:05,680
जोड़ दिया ठीक जबकि वास्तविकता क्या थी

3535
04:33:05,680 --> 04:33:09,800
कि विजया श्री ने जो य डीप स्टडी कहा था व इस बारे में कहा था कि विजया

3536
04:33:09,800 --> 04:33:14,120
श्री को कने विजया श्री का कने तुमने कैसे निकाला वो फ्री मेशन

3537
04:33:14,120 --> 04:33:18,280
तक पहुंचता है तो डीप स्टडी उसने इस कनेक्शन के लिए

3538
04:33:18,280 --> 04:33:22,360
यूज किया था कि आपने डीप स्टडी की है क्योंकि आपने जिस वीडियो में

3539
04:33:22,360 --> 04:33:26,840
विजय स को फी मेशन के साथ संबंधित बोला है उस

3540
04:33:26,840 --> 04:33:31,040
वीडियो में आपने फ्री मेसस क्या है इस बारे में कोई स्टडी

3541
04:33:31,040 --> 04:33:35,360
प्रस्तुत नहीं की है ना जहा तक मेरी जानकारी है हां आपने उसका कनेक्शन

3542
04:33:35,360 --> 04:33:39,600
विजया श्री का कनेक्शन फ्री मिशन तक कैसे पहुंचता है यह बताया है

3543
04:33:39,600 --> 04:33:43,680
इस कनेक्शन को बताने को ने कहा था डीप स्टडी मगर

3544
04:33:43,680 --> 04:33:48,040
आपके योग्य शिष्य ने आपका योग्य शिष्य वो झूठ

3545
04:33:48,040 --> 04:33:52,200
प्रलाप करने वाला शिष्य और और तुमने

3546
04:33:52,200 --> 04:33:56,480
खड़े किए कि नहीं योग्य कुछ तो होंगे ना दो चार तो होंगे ना

3547
04:33:56,480 --> 04:34:00,320
लाओ दिखाओ भेजो कितने योग्य शिष्य तुम्हारे

3548
04:34:00,320 --> 04:34:04,520
भेज दो क्योंकि तुम तो आचार्यों के साथ ही बैठोगे शायद अब आओगे

3549
04:34:04,520 --> 04:34:08,520
नहीं लाइव में और ना ही तुम्हारे पास वो लोग है जिनके

3550
04:34:08,520 --> 04:34:12,520
साथ तुम खड़े हो चर्चा में वो भी नहीं आएंगे तुम्हारी सवना लग नहीं रही

3551
04:34:12,520 --> 04:34:16,680
है तुम अपने योग्य शिष्य को तो भेजो तुम्हारे तो योग्य शिष्य होंगे शंकराचार्य

3552
04:34:16,680 --> 04:34:20,840
के पास योग्य शिष्य नहीं है तुम्हारे पास तो होंगे भेजो

3553
04:34:20,840 --> 04:34:24,840
उनको और इसने पाखंड के खंडन ने क्या किया

3554
04:34:24,840 --> 04:34:28,960
जो विजया श्री ने जो यह लाइन बोली कि आपने डीप स्टडी

3555
04:34:28,960 --> 04:34:33,160
की तो उसको उसने दिखा दिया फ्री मेशन के संबंध में व जानती

3556
04:34:33,160 --> 04:34:37,240
है आपने क्या डीप स्टडी की है तभी व कह रही ट जबकि उसने

3557
04:34:37,240 --> 04:34:41,720
विजया श जी ने इस बारे में बोला था कि आपने जोय कनेक्शन निकाला

3558
04:34:41,720 --> 04:34:45,880
इसने इस कनेक्शन की आपने डीप स्टडी की है तो

3559
04:34:45,880 --> 04:34:50,200
वो वहां पर प्रस्तुत करने की कोशिश करने लगा अपनी रील के माध्यम से

3560
04:34:50,200 --> 04:34:54,320
कि विजया श्री फ्री मेसस को जानने वाली है

3561
04:34:54,320 --> 04:34:58,480
पर फिर भी वह ना जानने वाली होने का नाटक कर रही है पहली बात जब

3562
04:34:58,480 --> 04:35:03,000
हमने यह बात वहां पर जाकर के पाखंड के खंडन को बताई कमेंट के जरिए

3563
04:35:03,000 --> 04:35:07,240
तो पाखंड के खंडन ने आज तक वह जो हमारा कमेंट है

3564
04:35:07,240 --> 04:35:11,240
वही डिलीट कर रखा है शो ही नहीं हो रहा वो

3565
04:35:11,240 --> 04:35:15,480
जिससे उसकी जोय यह जो उसका जो अब महिमा

3566
04:35:15,480 --> 04:35:19,720
हो चुकी है जैसे तुम लोकेश णा के भूखे हो ऐसे वो भी लोकेश णा का भूखा

3567
04:35:19,720 --> 04:35:23,720
होगा है ना तुम्हारा योग्य शिष्य

3568
04:35:23,720 --> 04:35:27,760
तो उसको यह लग रहा है कि हमारा खंडन ना दिख जाए किसी को तो हमारे कमेंट को डिलीट

3569
04:35:27,760 --> 04:35:31,880
कर रहा है और अगर तुम हो सत्यवादी तो मिटवा दो ना पाखंड के अपने

3570
04:35:31,880 --> 04:35:36,000
अयोग्य शिष्य के अयोग्य चलचित्र को क्यों झूट

3571
04:35:36,000 --> 04:35:42,000
झूठ मिलावट कर रहा है मगर झूठ मिलावट तो तुम खुद कर रहे हो तो उसको क्या कहोगे

3572
04:35:42,440 --> 04:35:46,560
ठीक है ये है योग्य शिष्य और तुम्हारे योग्य शिष्य

3573
04:35:46,560 --> 04:35:51,040
कहां है जरा मिलाओ तो फिर देखें उनके योग्यता भेजो

3574
04:35:51,040 --> 04:35:55,240
उनको और तुम तुम तुमको तो हमने बता ही दिया है तुम भी आ सकते हो

3575
04:35:55,240 --> 04:35:59,600
विजया सी के बारे में जो जो कहा है उस पर बात से चालू करेंगे मट के परक को

3576
04:35:59,600 --> 04:36:03,600
सिद्ध करो जो तुमने अधूरे और हल्के प्रमाणों के

3577
04:36:03,600 --> 04:36:07,680
आधार पर गंभीर निर्णय दिए हैं लेके आओ और जिनके साथ तुम

3578
04:36:07,680 --> 04:36:13,040
खड़े हो उनको लेकर आओ हम जिनके साथ खड़े उनको लेकर आते

3579
04:36:13,040 --> 04:36:17,200
तुम जिनके साथ खड़े हो संभवत जब तुम कहोगे चलो मेरे साथ लाइव पर

3580
04:36:17,200 --> 04:36:21,440
अब मेरी आज जो है गरमा का सम्मान की बात है चलो आओ लाइव

3581
04:36:21,440 --> 04:36:26,760
में चलकर बोलो कि तुम लोगों नेय बातें मुझसे बोली है देखना कितने

3582
04:36:26,760 --> 04:36:30,680
आएंगे और फिर यह मत समझना कि उनके कह देने पर तुरंत निर्णय

3583
04:36:30,680 --> 04:36:34,760
हो जाएगा फिर देखेंगे जांच होगी कि उनका कहना कितना सही हो सकता

3584
04:36:34,760 --> 04:36:38,880
है कितना गलत हो हो सकता है मगर अभी तो तुम यह दिखाओ कि जिनके

3585
04:36:38,880 --> 04:36:43,520
साथ तुम खड़े हो व अस्तित्व रखते भी हैं कि नहीं

3586
04:36:43,520 --> 04:36:48,120
कौन है जो धर्म की रक्षा के लिए आगे आना चाहता है विजय श्री के लिए

3587
04:36:48,120 --> 04:36:52,280
अपना चेहरा दिखाना दिखा कर के धर्म का पक्ष रखना चाहता है जिस धर्म की रक्षा

3588
04:36:52,280 --> 04:36:58,280
करने की जिन सिद्धांतों की रक्षा करने की बात कर रहा है चलो

3589
04:37:00,560 --> 04:37:04,880
दिखाओ

3590
04:37:04,880 --> 04:37:09,560
चलो प्ले करो

3591
04:37:09,560 --> 04:37:14,120
भैया गुरु और निंदा शास्त्र नार

3592
04:37:14,120 --> 04:37:18,320
नस्त न क जिन लोगों के द्वारा शास्त्र की और गुरु की निंदा

3593
04:37:18,320 --> 04:37:22,760
की गई उनसे बैठे नहीं बात नहीं करे इसलिए तुम मेरे साथ बात नहीं करना चाहते हो

3594
04:37:22,760 --> 04:37:27,400
तो राम भद्राचार्य का सपोर्ट लेने गए

3595
04:37:27,400 --> 04:37:31,680
ते राम भद्राचार्य का सपोर्ट लेने कब गए हालाकि जा भी सकते हैं

3596
04:37:31,680 --> 04:37:35,960
पर कब कब गए कब गए लेने राम भद्राचार्य का

3597
04:37:35,960 --> 04:37:41,960
सो राम भद्राचार्य का सपोर्ट लेने कब गए बताओ ना

3598
04:37:43,640 --> 04:37:47,640
भाई गुरुदेव बताते हैं कि जब वो वानप्रस्थ में थे तो

3599
04:37:47,640 --> 04:37:51,720
उनको क्रिश्चियन मिशनरीज से लोहा लेने वाले कौन दिखे थे गायत्री

3600
04:37:51,720 --> 04:37:57,720
परिवार के तो उनका वहां पर खंडन कर

3601
04:37:58,560 --> 04:38:03,280
दे सांप और बिच्छू भी कभी-कभी कार रा जाते हैं तो क्या करें

3602
04:38:03,280 --> 04:38:07,600
और अगर कार रा रहे है तो उनकी उनके विष का जो है वो करने लगे बढ़ाई

3603
04:38:07,600 --> 04:38:12,520
उन बताए ना के विष है इसमें ऐसे नहीं होता है ना

3604
04:38:12,520 --> 04:38:16,720
कठिन है धर्म का पथ कठिन है चुनाव कठिन है क्या करें

3605
04:38:16,720 --> 04:38:21,000
और क्या ना करें इसीलिए तो धर्म मानसा लिखा कर पाती जी महाराज ने

3606
04:38:21,000 --> 04:38:25,240
तुम्हारी तो आस्था है ना तुम तो दिखाते हो ना हम आस्थावान है पढ़ना इसको इससे तुम्हें

3607
04:38:25,240 --> 04:38:29,360
पता चलेगा कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए तुमने

3608
04:38:29,360 --> 04:38:34,480
शास्त्रों को रटा तो अच्छे से मगर एमप्लीफाई नहीं होता है तुम्हारे

3609
04:38:34,480 --> 04:38:38,800
उसमें एमप्लीफाई नहीं है एमप्लीफाई शायद वो विधि निषेध इत्यादि

3610
04:38:38,800 --> 04:38:43,000
होगा विधि निषेध इत्यादि होगा एमप्लीफाई

3611
04:38:43,000 --> 04:38:47,320
सच इत्यादि हो सकता है एमप्लीफाई हो वो भी तब था कि नहीं जब

3612
04:38:47,320 --> 04:38:51,360
वोह प्रेम प्रसंगों में गिरे थे तब था कि नहीं था यह नहीं पता मगर

3613
04:38:51,360 --> 04:38:55,560
यह सब होगा मगर जो यह साध्य कोटि का य जो धर्म

3614
04:38:55,560 --> 04:38:58,840
है यह सब दिखाई नहीं दे रहा है आपके

3615
04:38:58,840 --> 04:39:04,840
द्वारा जो आप कर रहे हो उससे

3616
04:39:06,040 --> 04:39:10,040
चलो यदि तुमको ये सब मठ की विकृतियां पहले से पता थी तोब तक चुप क्यों

3617
04:39:10,040 --> 04:39:14,160
थे तुम कहते हो पुराना वीडियो तो पता थ तो चुप क्यों थे और अगर तब चुप थे

3618
04:39:14,160 --> 04:39:18,240
तो बाकियों को चुप क्यों कर भाई जब उससे कुछ सिद्ध ही नहीं हो रहा है तो क्या

3619
04:39:18,240 --> 04:39:22,320
करें उस पर तुम ही ना कहाना परिस्थिति जन्य

3620
04:39:22,320 --> 04:39:24,840
प्रमाण

3621
04:39:24,840 --> 04:39:30,840
है संभावना को उत्पन्न करने वाले प्रमाण

3622
04:39:32,200 --> 04:39:36,240
है चलो प्ले करो

3623
04:39:36,240 --> 04:39:40,360
मठ के शंकराचार्य के शिष्य होने का टैग लगाकर केवल अपनी रोजी चमकाने वाले जाने

3624
04:39:40,360 --> 04:39:44,360
अनजाने तुम लोग सब के पतन के निमित्त बन रहे हो गुरु ग्रंथ गोविंद तीन

3625
04:39:44,360 --> 04:39:48,680
है भाई गुरु अकेला नहीं तुम लोग जैसे सुनो

3626
04:39:48,680 --> 04:39:53,640
तुम जैसे दंभी शास्त्र को रट रट लेने वाले

3627
04:39:53,640 --> 04:39:57,680
तुम जैसे दंभी जो है वह धर्म के पतन का कारण बनते

3628
04:39:57,680 --> 04:40:02,520
हैं खुद आई फेल इन लव करके तो आ जाओगे निग्रह चार्य

3629
04:40:02,520 --> 04:40:06,560
बनने मगर दूसरा कोई अगर वापस आना चाहे और आचार्य बनने

3630
04:40:06,560 --> 04:40:10,880
नहीं सामान्य हिंदू के रूप में मगर सनातन वैदिक आर हिंदू में

3631
04:40:10,880 --> 04:40:15,040
प्रमा बुद्धि रखने वाला तो तुम उसकी टांग खींचो ग उसके

3632
04:40:15,040 --> 04:40:19,400
पुराने जीवन को लेकर के लोगों के मन में उसके प्रति अवमानना का भाव

3633
04:40:19,400 --> 04:40:24,080
उत्पन्न करोगे तुम जैसे लोग धर्म का पतन का कारण बनते

3634
04:40:24,080 --> 04:40:28,760
हैं धर्म के पतन का कारण बनते हो तुम जैसे

3635
04:40:28,760 --> 04:40:34,760
लोग करना धरना कुछ है नहीं समीक्षा करनी

3636
04:40:35,400 --> 04:40:41,400
है चलो बताओ भाई

3637
04:40:48,160 --> 04:40:52,440
समाज के भी गुरु है इसको मैं कह रहा हूं तुम क्यों चुप थे इतने दिनों

3638
04:40:52,440 --> 04:40:56,480
से तुम तो मठ में रहे हो और जिसका

3639
04:40:56,480 --> 04:41:00,720
आचरण खराब था तब भी रहा होगा जब तुम मठ में रहे होगे

3640
04:41:00,720 --> 04:41:04,720
तब तुम्हें सही लगा जब तुम्हें मठ से अलग कर दिया गया है तब तुम्ह विरोध

3641
04:41:04,720 --> 04:41:08,840
आ रहा है और तुम दो तीन साल से अगर इन सब बातों को जानते

3642
04:41:08,840 --> 04:41:12,880
हो जब तुम्हें पता लग गया कुछ हो नहीं रहा है तो फिर दूसरे रास्ते

3643
04:41:12,880 --> 04:41:16,240
क्यों नहीं

3644
04:41:16,240 --> 04:41:20,320
अपनाए चुप क्यों थे अरे जिस बात से कोई अर्थ ही नहीं निकल

3645
04:41:20,320 --> 04:41:25,560
रहा उसका हंगामा करें

3646
04:41:25,560 --> 04:41:30,080
क्या े गुरु नि करते नहीं बात करेंगे तुमसे

3647
04:41:30,080 --> 04:41:34,920
माम में हमारी गति नहीं है उस बारे में हम क्या

3648
04:41:34,920 --> 04:41:39,080
बोले और जब हमने जानना चाहा पता लग गया वो जो

3649
04:41:39,080 --> 04:41:42,360
वो जो क्या कहते हैं

3650
04:41:42,360 --> 04:41:46,800
2023 की बात है माघ में शायद वो

3651
04:41:46,800 --> 04:41:50,840
यह मामला आया था सामने हा तभी हमने देख लिया था

3652
04:41:50,840 --> 04:41:55,640
तो भाई अच्छा जैसे अभी तुम्हारा वह वीडियो है

3653
04:41:55,640 --> 04:42:00,000
जानवी और जान दी ठीक है उसी वीडियो को प्रचारित

3654
04:42:00,000 --> 04:42:04,000
किया जाए तुम्हारे विरोध में तो तुम कहोगे ना इससे कहां सिद्ध हो रहा है कि

3655
04:42:04,000 --> 04:42:08,720
मैंने जानवी के लिए गाना बनाया है यही कहोगे ना

3656
04:42:08,720 --> 04:42:12,920
तो कुछ भी कोई सोचना समझना नहीं है बस हम अगर किसी कोई भी चीज प्रमाण

3657
04:42:12,920 --> 04:42:18,920
के रूप में पकड़ा दी गय प्रमाण है देखो उसे सिद्ध कहां क्या हो रहा

3658
04:42:21,000 --> 04:42:26,160
है

3659
04:42:26,160 --> 04:42:28,840
चलो

3660
04:42:28,840 --> 04:42:33,200
ले बना रहे आपकी स्वतंत्र पहचान ही कुछ नहीं है पूरे शंकराचार्य

3661
04:42:33,200 --> 04:42:38,120
के शिष्य है ठीक है और इसके अलावा क्या नहीं है आपको बनर

3662
04:42:38,120 --> 04:42:42,160
है और उसकी ना उसकी वो है उसके

3663
04:42:42,160 --> 04:42:46,800
लिए कोई लोलुपता है यही पहचान है अल्पज्ञ शिष्य

3664
04:42:46,800 --> 04:42:50,880
अल्पज्ञ साधारण भक्त और यही

3665
04:42:50,880 --> 04:42:54,880
सबसे ऊंची पहचान है दुनिया में कोई निग्रह चान नहीं

3666
04:42:54,880 --> 04:42:59,200
है यही सबसे ऊंची पहचान अल्पज्ञ शिष्य

3667
04:42:59,200 --> 04:43:04,160
साधारण भक्त कोई नहीं है इससे श्रेष्ठ

3668
04:43:04,160 --> 04:43:08,160
सबसे ऊंची पहचान शंकराचार्य

3669
04:43:08,160 --> 04:43:12,200
का प्रमाणिक आचार्य का अल्पज्ञ शिष्य साधार भक्त कोई

3670
04:43:12,200 --> 04:43:16,520
नहीं चाहिए कोई आकर्षण नहीं है स्वतंत्र

3671
04:43:16,520 --> 04:43:21,480
उसका स्वतंत्र पहचान का थूकता हूं मैं स्वतंत्र पहचान

3672
04:43:21,480 --> 04:43:25,480
पर मैं थूकता हूं ऐसी पहचान पर

3673
04:43:25,480 --> 04:43:30,400
जो प्रमाणिक आचार्य से स्वतंत्र होकर मुझे मिले

3674
04:43:30,400 --> 04:43:34,400
थूकता हूं ऐसी पहचान पर जो श्री राम के भक्त होने से स्वतंत्र

3675
04:43:34,400 --> 04:43:36,800
होकर मुझे मिले

3676
04:43:36,800 --> 04:43:42,800
नहीं बनानी ऐसी कोई पहचान तुम बनाओ लुप्त संप्रदाय के गुप्त

3677
04:43:44,600 --> 04:43:49,000
चलो नि गचार को बैनर और गड फादर की जरूरत नहीं पड़ती सुन लो पूरे

3678
04:43:49,000 --> 04:43:53,040
के शंकराचार्य जी के शुभचिंतकों की अगर सूची बनाई जाए ना तो टॉप पर

3679
04:43:53,040 --> 04:43:57,080
मेरा नाम आएगा क्योंकि एक तो हमने

3680
04:43:57,080 --> 04:44:01,160
पुरी के शंकराचार्य जी यह नहीं बताएंगे मेरा शुभचिंतक कौन

3681
04:44:01,160 --> 04:44:05,560
है यह बताएंगे और यही इनका सनातन

3682
04:44:05,560 --> 04:44:09,360
सिद्धांत

3683
04:44:09,360 --> 04:44:13,600
हैका जन्म हुआ है क्योंकि वो बड़े उससे हुआ है दिव्य प्रयोजन

3684
04:44:13,600 --> 04:44:18,440
से देवताओं ने इनको दर्शन दिया है प्रेम प्रसंगों में गिरे हैं

3685
04:44:18,440 --> 04:44:23,360
हर शुक्रवार को मिलते हैं इसलिए

3686
04:44:23,360 --> 04:44:27,360
यह बताएंगे कि पुरी शंकराचार्य जी का शुभचिंतक कौन है पुरी शंकराचार्य

3687
04:44:27,360 --> 04:44:32,120
जी नहीं बताएंगे कि उनका शुभचिंतक कौन है

3688
04:44:32,120 --> 04:44:36,200
है ना और वह बताएंगे जो आकर के वो वो शुभ

3689
04:44:36,200 --> 04:44:40,400
चिंतक है पुरी शंकराचार्य जी एक तो तुम हो और एक वो है जो अपना

3690
04:44:40,400 --> 04:44:44,640
चेहरा तक नहीं दिखा पा रहे अपने कायरता के कारण जो तुम्हारे बुलाने पर सामने

3691
04:44:44,640 --> 04:44:48,760
नहीं आएंगे साक्ष देने कि

3692
04:44:48,760 --> 04:44:53,040
हा मैं यह बोल रहा हूं तुम्हारे बुलाने पर नहीं

3693
04:44:53,040 --> 04:44:59,040
आएंगे सुधरे हुए तुम जन्म लिए

3694
04:45:04,200 --> 04:45:08,200
थे सी प्रकल्प से एक पैसा नहीं लिया पूरे शंकराचार्य

3695
04:45:08,200 --> 04:45:12,600
जी या स्वामी कपात जी के नाम और बैनर का कभी अपने इस्तेमाल नहीं किया

3696
04:45:12,600 --> 04:45:16,640
कभी भी पुरी शंकराचार्य जी के अभियान में ज धर्म

3697
04:45:16,640 --> 04:45:20,720
सवात है उसका जो है हमने विरोध नहीं किया प्रसार कि संदर्भ देते हुए

3698
04:45:20,720 --> 04:45:25,440
किया चलो इन सब बातो का जवाब दे चुके और कुछ है नहीं

3699
04:45:25,440 --> 04:45:31,440
आगे ब असत्य का निर्भयता पूर्वक विरोध किया धर्म का विरोध

3700
04:45:34,240 --> 04:45:38,600
किया गलत थे तो क्यों उनके साथ मंच साझा

3701
04:45:38,600 --> 04:45:42,680
किए ज्योतिर मट वाले मुक्त श जी महाराज जी है वो भी गलत

3702
04:45:42,680 --> 04:45:46,800
थे क्यों उनके बुलाने पर धर्म संसद में गए थे

3703
04:45:46,800 --> 04:45:51,160
कुंभ में वीडियो प्रसारण किया था इसको भी बना लेना

3704
04:45:51,160 --> 04:45:55,640
कि शिवांश नारायण द्विवेदी जो है ये तुमने बड़ी भारी भूल कर दी हम कुम गए

3705
04:45:55,640 --> 04:46:01,480
नहीं क्योंकि मैंने ये कह दिया गए थे यही करो

3706
04:46:01,480 --> 04:46:06,160
बस यही किया तुमने पूरी लाइफ में

3707
04:46:06,160 --> 04:46:10,200
और हमें स्वतंत्र नहीं चाहिए स्वतंत्र स्वतंत्र पहचान नहीं

3708
04:46:10,200 --> 04:46:14,600
चाहिए तुम बनो लुप्त संप्रदाय के गुप्ता

3709
04:46:14,600 --> 04:46:19,000
आचार्य तुम बनो हमें नहीं चाहिए स्वतंत्र पहचान

3710
04:46:19,000 --> 04:46:19,560
हम मृत्यु

3711
04:46:19,560 --> 04:46:23,680
को गले लगाना पसंद करेंगे मगर इस शंकराचार्य से भिन्न हमें कोई

3712
04:46:23,680 --> 04:46:27,840
स्वतंत्र पहचान नहीं चाहिए कीड़े बनकर

3713
04:46:27,840 --> 04:46:32,040
रहेंगे कीड़े और कोई उससे निकृष्ट शब्द मिल सकता

3714
04:46:32,040 --> 04:46:36,160
हो तो वो दे देना वह बन के रहेंगे मगर हमें स्वतंत्र पहचान नहीं

3715
04:46:36,160 --> 04:46:41,040
चाहिए हमें राम चाहिए हमें शंकराचार्य चाहिए

3716
04:46:41,040 --> 04:46:46,160
हमें स्वतंत्र पहचान नहीं

3717
04:46:46,160 --> 04:46:50,400
चाहिए तुम बनाओ करियर तुम बनाओ

3718
04:46:50,400 --> 04:46:53,560
एल्गोरिदम

3719
04:46:53,560 --> 04:46:59,560
टीआरपी यह सब तुम बनाओ गुरु द्रोही कहते हो

3720
04:46:59,960 --> 04:47:04,560
हमको हो गया चलो ठीक है भैया समय देने के लिए सभी का

3721
04:47:04,560 --> 04:47:08,680
आभार और मैं फिर कह रहा हूं

3722
04:47:08,680 --> 04:47:12,680
आओ विजय श्री के लिए जो जो बातें कही है सिद्ध करो परि के लिए जो

3723
04:47:12,680 --> 04:47:17,320
जो बातें सिद्ध कई है सिद्ध करो

3724
04:47:17,320 --> 04:47:21,400
और उसके बाद फिर तुम्हारी ये तुम निगरा

3725
04:47:21,400 --> 04:47:25,480
चार कैसे हो फिर परंपरा उसको सिद्ध करते हैं ठीक

3726
04:47:25,480 --> 04:47:29,680
है और उसी क्रम में आगे जिन लोगों

3727
04:47:29,680 --> 04:47:33,680
के साथ तुम खड़े हो उनको लेकर आओ

3728
04:47:33,680 --> 04:47:38,080
और तुम्हारे योग्य शिष्यों की सूची

3729
04:47:38,080 --> 04:47:42,080
बताओ है ना योग्य शिष्यों

3730
04:47:42,080 --> 04:47:46,200
की सूची एक जारी करो य मेरे योग्य शिष्य है फिर हम उनको चेक करेंगे

3731
04:47:46,200 --> 04:47:50,480
कौन-कौन है कितने और यह तुम्हारा

3732
04:47:50,480 --> 04:47:54,920
जो जीवन है उसको थोड़ा दिखाओ जीवन को उसको सार्वजनिक

3733
04:47:54,920 --> 04:47:59,080
करो अपने जीवन को थोड़ा सा कहां रहते हो कहां

3734
04:47:59,080 --> 04:48:03,240
तुम्हारा मठ है कहां तुम्हारी लुप्त गद्दी है गुप्त गद्दी सॉरी कहां

3735
04:48:03,240 --> 04:48:07,240
जा रहे हो क्या कर रहे हो सब सार्वजनिक करो फिर उसकी समीक्षा कर

3736
04:48:07,240 --> 04:48:08,560
की जाएगी ना जैसे

3737
04:48:08,560 --> 04:48:12,560
तुम सबकी समीक्षा कर रहे हो दिखाओ मैं अब यहां जा रहा हूं इस ट्रेन से जा

3738
04:48:12,560 --> 04:48:16,720
रहा हूं गुरुदेव जाते तो समीक्षा

3739
04:48:16,720 --> 04:48:20,720
तब कर पाते हो ना जब राजेंद्र दास जी महाराज राघवाचार्य जी महाराज कहां जा रहे हैं क्या कर

3740
04:48:20,720 --> 04:48:24,720
रहे हैं सब कुछ पता चल रहा है तुम तो एकदम से आते हो और फिर गायब

3741
04:48:24,720 --> 04:48:29,480
फिर आए फिर गायब ये सब करो समीक्षा की

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04:48:29,480 --> 04:48:34,080
जाए चलो सभी का सभी का आने के लिए आभार

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04:48:34,080 --> 04:48:38,080
और जय श्री राम
