1
00:00:00,000 --> 00:00:02,240
[प्रशंसा]

2
00:00:02,240 --> 00:00:06,320
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं

3
00:00:06,320 --> 00:00:11,280
सभी कुशल मंगल होंगे। और

4
00:00:11,280 --> 00:00:15,520
जैसा कि आप लोग जानते हैं कि भगवत आनंद

5
00:00:15,520 --> 00:00:19,680
के विषय में आज की हमने लाइव रखी

6
00:00:19,680 --> 00:00:24,720
है। कल उन्होंने एक बहुत लंबी चौड़ी सी एक लाइव की है जिसमें कि

7
00:00:24,720 --> 00:00:29,680
ढेर सारा अनावश्यक प्रलाप किया है। तो आज हम थोड़ा सा

8
00:00:29,680 --> 00:00:34,320
उनके प्रलाप का प्रति उत्तर प्रस्तुत करेंगे और फिर

9
00:00:34,320 --> 00:00:38,440
अंत में कुछ एक विशेष बात भी है वह करते हुए फिर लाइव

10
00:00:38,440 --> 00:00:42,960
को पूर्ण करेंगे। तो

11
00:00:42,960 --> 00:00:48,960
सबसे पहले तो जिस तरीके

12
00:00:49,800 --> 00:00:53,920
से उन्होंने प्रलाप किया है। उस पर चालू करने

13
00:00:53,920 --> 00:00:59,920
से पहले इनकी आज एक पोस्ट भी आ गई है। इस संबंध में

14
00:01:02,360 --> 00:01:06,480
कि हमारी जो यह लाइव होने जा रही थी 7:00 बजे उस संबंध में इनकी

15
00:01:06,480 --> 00:01:10,680
पोस्ट आ गई है। तो भैया पोस्ट में इन्होंने लिखा

16
00:01:10,680 --> 00:01:15,120
है जिन अनेकानेक विषयों पर हमने स्वामी करपात्री

17
00:01:15,120 --> 00:01:19,320
जी श्रीधर स्वामी और

18
00:01:19,320 --> 00:01:23,440
गुरुदेव पूज्य पूरी पीठाधीश्वर इन्होंने पूज्य नहीं

19
00:01:23,440 --> 00:01:27,680
लिखा है। इन्होंने उनका नाम लिखा है। है ना? जी लगा

20
00:01:27,680 --> 00:01:32,080
के मगर हमारे गुरु का नाम है तो हम लेने से बचते हैं। तो आदि

21
00:01:32,080 --> 00:01:36,080
के सम्मान और समर्थन में मुखर होकर बड़े-बड़े हस्तियों

22
00:01:36,080 --> 00:01:40,800
को फटकार लगाई। उसमें तो कभी शिवश का हमें

23
00:01:40,800 --> 00:01:45,120
समर्थन ऐसे नहीं लिखा।

24
00:01:45,120 --> 00:01:49,120
तो आपका कहने का मतलब है कि दुनिया में संसार में

25
00:01:49,120 --> 00:01:53,600
जहां भी कुछ भी हो रहा हो अच्छा तो वहां पर शिवश

26
00:01:53,600 --> 00:01:58,000
कुछ ना कुछ किसी ना किसी रूप में कर कर वाला होना चाहिए

27
00:01:58,000 --> 00:02:02,080
और जहां पर दुनिया में कहीं भी कुछ भी गलत

28
00:02:02,080 --> 00:02:06,080
हो रहा हो तो वहां पर किसी ना किसी रूप में शिवश रोकने वाला होना चाहिए। यह

29
00:02:06,080 --> 00:02:11,560
कुछ कुतर्क आपके आगे के लाइव में भी मुझे देखने को मिले जो अभी हम

30
00:02:11,560 --> 00:02:16,320
देखेंगे है ना समर्थन विवेकानंद

31
00:02:16,320 --> 00:02:20,480
को मैक्स मूलर में महर्षि वशिष्ठ

32
00:02:20,480 --> 00:02:24,720
दिख रहे थे। एक शिवश है जिनको रिदमम कपूर की वाणी में करपात्री स्वामी ध्वनित

33
00:02:24,720 --> 00:02:29,360
हो रहे हैं। हां हो रहे हैं और वो इसलिए हो रहे हैं कि उसको

34
00:02:29,360 --> 00:02:33,440
वो जो धर्म की परिभाषा है ना कि जीव की चाह का

35
00:02:33,440 --> 00:02:37,520
वास्तविक विषय उसी का नाम ईश्वर है और उसे प्राप्त कराने वाली विधि का

36
00:02:37,520 --> 00:02:41,520
नाम धर्म है। वो परिभाषा मैंने सिखाई थी

37
00:02:41,520 --> 00:02:46,240
और वो परिभाषा मुझे मेरे गुरुदेव ने सिखाई थी। आया

38
00:02:46,240 --> 00:02:50,240
समझ में कुछ और वह परिभाषा गुरुदेव को करपात्री

39
00:02:50,240 --> 00:02:54,480
जी महाराज ने सिखाई थी नास्तिक भी आस्तिक में सिखाई थी करपात्री जी महाराज

40
00:02:54,480 --> 00:02:58,560
है वो परिभाषा वो परिभाषा जब वो लड़की मेरी सिखाई मेरे द्वारा सिखाई

41
00:02:58,560 --> 00:03:00,160
गई लड़की वहां जाकर के बोल रही

42
00:03:00,160 --> 00:03:04,560
है तो मैंने उसका प्रोत्साहन किया अप्रिशिएट किया

43
00:03:04,560 --> 00:03:08,880
और बिल्कुल भी मुझे नहीं पता था कि आपको प्रोत्साहन की आवश्यकता

44
00:03:08,880 --> 00:03:12,960
होती है धर्म पथ पर आगे बढ़ने के लिए है ना समर्थन की आवश्यकता होती है मुझे

45
00:03:12,960 --> 00:03:17,040
तो कोई आवश्यकता नहीं है मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है कि मुझे किसी ने समर्थन किया है

46
00:03:17,040 --> 00:03:19,720
कि नहीं किया

47
00:03:19,720 --> 00:03:23,920
है। मुझे ऐसा लगता था कि आप भी ऐसे ही चट्टानी व्यक्तित्व वाले

48
00:03:23,920 --> 00:03:28,000
होंगे जिसको किसी के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी धर्म पथ पर आगे बढ़ने के

49
00:03:28,000 --> 00:03:32,000
लिए। धर्म को यथावत उस रूप में रखने के लिए जिस रूप में धर्म

50
00:03:32,000 --> 00:03:36,360
को रखना चाहिए। हां

51
00:03:36,360 --> 00:03:40,680
मगर मगर जो ऐसे युवा हैं

52
00:03:40,680 --> 00:03:44,800
जिनको हम भी दिशाहीन थे कभी ना कभी। हम वो आपने

53
00:03:44,800 --> 00:03:48,880
कहा है ना अपनी लाइफ में हम तो शुद्ध ही जन्मे हैं। हम

54
00:03:48,880 --> 00:03:52,960
नारा तो जन्म से ही हम शुद्ध हैं। है ना? हम वैसे नहीं थे भाई।

55
00:03:52,960 --> 00:03:57,400
वो आगे बहुत सारी बातें होंगी। मगर जब

56
00:03:57,400 --> 00:04:01,600
हमारे सापेक्ष कोई वहां पर ऐसा है जो अभी दिशाहीनता

57
00:04:01,600 --> 00:04:05,240
से अभी दिशावान हो रहा है

58
00:04:05,240 --> 00:04:09,520
और जब हमारी चीजें हमारे द्वारा बताए गए मार्ग

59
00:04:09,520 --> 00:04:13,600
पर चलते हुए जो हम निमित्त रूप से बन जाते हैं गुरुदेव और भगवान

60
00:04:13,600 --> 00:04:15,360
के बारे में बताने वाले कुछ

61
00:04:15,360 --> 00:04:19,920
छोटे-मोटे निमित्त के भूमिकाएं निभा देते हैं। तो अगर

62
00:04:19,920 --> 00:04:23,920
उस पथ पर उस मार्ग पर कोई आगे बढ़ रहा है तो उसको हम प्रोत्साहन करने

63
00:04:23,920 --> 00:04:28,560
जाएंगे। और तुम्हें प्रोत्साहन करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि

64
00:04:28,560 --> 00:04:32,560
ऐसा नहीं है कि तुम्हारे बारे में बात नहीं की है। आगे देखते हैं कब

65
00:04:32,560 --> 00:04:38,280
की है। क्या कहा है

66
00:04:38,280 --> 00:04:42,320
तुमने? आज रिदमम कपूर की वाणी मैं कर पाती। स्वामी ध्व

67
00:04:42,320 --> 00:04:46,320
ध्वनित हो रहे हैं। हां। जब जब जीव की चाह का वास्तविक

68
00:04:46,320 --> 00:04:50,400
विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर बताया जाएगा तो जिसकी वाणी से

69
00:04:50,400 --> 00:04:55,600
बताया जाएगा तो उसकी वाणी से कृपात्री जी महाराज बोल रहे होंगे।

70
00:04:55,600 --> 00:04:59,760
है ना करपाती जी महाराज के उनस्तिकों को हराने वाले सिद्धांत बोल

71
00:04:59,760 --> 00:05:03,800
रहे होंगे इसलिए ध्वनित हो रही है

72
00:05:03,800 --> 00:05:07,840
हम और मुझे पता नहीं था कि आपको हमारे प्रोत्साहन की

73
00:05:07,840 --> 00:05:12,240
बड़ी चिंता होती है नहीं तो बहुत भरभर के प्रोत्साहन

74
00:05:12,240 --> 00:05:16,760
आपको भेजता मुझे नहीं पता था कि आपको जो

75
00:05:16,760 --> 00:05:20,800
है बड़ा आवश्यकता है हमारे प्रोत्साहन की उसके

76
00:05:20,800 --> 00:05:25,040
बिना आपका काम नहीं चलता है और दूसरी दूसरी बात यह है कि दुनिया

77
00:05:25,040 --> 00:05:29,280
में कहीं भी कोई अच्छा कार्य हो रहा है तो हमारे लिए संभव नहीं है। सब जगह पहुंच के उसका

78
00:05:29,280 --> 00:05:30,560
प्रोत्साहन करना और

79
00:05:30,560 --> 00:05:34,560
दुनिया में कहीं भी कोई गलत कार्य हो रहा है तो हमारे लिए संभव नहीं है

80
00:05:34,560 --> 00:05:38,560
कि सब वहां पर जाकर के सबको रोक देना। यह

81
00:05:38,560 --> 00:05:42,560
ठीक उस प्रकार से है कि यदि कोई बिना टिकट यात्रा कर

82
00:05:42,560 --> 00:05:46,720
रहा है ना ट्रेन में और टीसी ने उसको उसको पकड़ लिया है फिर भी ट्रेन

83
00:05:46,720 --> 00:05:50,720
में और भी ऐसे यात्री हैं जो बिना टिकट यात्रा

84
00:05:50,720 --> 00:05:54,800
कर रहे हैं तो क्योंकि टीसी ने उन्हें पकड़ा नहीं है। टीसी ने इसको पकड़ा है तो

85
00:05:54,800 --> 00:05:59,640
इसका अर्थ यह नहीं है कि टीसी का उन सबको समर्थन प्राप्त है कि

86
00:05:59,640 --> 00:06:05,360
घूमो। तो ये दोनों चीजें दोनों जगह लागू हो जाएगा।

87
00:06:05,360 --> 00:06:10,080
अच्छा फिर आगे आप क्या लिख रहे हैं? मतलब हम

88
00:06:10,080 --> 00:06:14,440
मतलब हम इसके समान खाली बैठे हैं। क्या जो रोज रोज कहता है

89
00:06:14,440 --> 00:06:18,640
रहे तो काम छोड़कर YouTube खोले रहे। हमने कब कहा

90
00:06:18,640 --> 00:06:22,720
भाई? हमने फोन किया। अरे हमने तो तुमको यह

91
00:06:22,720 --> 00:06:26,880
भी नहीं कहा कि हमसे लाइव कर लो। हम तुमने कहा हमसे?

92
00:06:26,880 --> 00:06:30,880
हम तो हम खाली बैठे थे नहीं बैठे थे। तुमने पूछा हमसे

93
00:06:30,880 --> 00:06:34,880
तुमने ही तो कहा था 5:00 बजे से पहले कर लो। तो तुमको ऐसा क्यों लग रहा

94
00:06:34,880 --> 00:06:40,200
है कि हमें लगता है कि तुम खाली बैठे हो या तुमको ऐसा क्यों लग रहा है कि हम खाली बैठे

95
00:06:40,200 --> 00:06:44,720
हैं? अकाट बातें बोला करो। इधर उधर की बातें बोलने से बचा करो।

96
00:06:44,720 --> 00:06:45,600
आज मैं

97
00:06:45,600 --> 00:06:49,800
यही बताने आया हूं। आगे क्या लिख रहे हो?

98
00:06:49,800 --> 00:06:54,160
हमें जब समय था तो कहा दो-दो बार अवसर दिया।

99
00:06:54,160 --> 00:06:59,040
लेकिन इसने मना कर दिया। अब यहां तू तड़ाक पे आ गए। तो अब अपेक्षा मत करना।

100
00:06:59,040 --> 00:07:03,440
तुम और आपकी तू तड़ाक पर आ गए। वैसे तुमने कल काफी कुछ कर दिया है।

101
00:07:03,440 --> 00:07:07,520
ठीक है? तो लेकिन इसने मना कर दिया। फिर हमने

102
00:07:07,520 --> 00:07:11,760
समय निकाल कर स्वयं ही सब बताया। तो अब कहता है कि फाइनल कॉल

103
00:07:11,760 --> 00:07:16,080
है। अरे भाई फाइनल कॉल का अर्थ क्या तुम्हारे अनुसार

104
00:07:16,080 --> 00:07:20,160
ही माना जाएगा? फाइनल कॉल का मतलब है कि

105
00:07:20,160 --> 00:07:24,680
होने वाली चर्चा के संबंध में हमारा

106
00:07:24,680 --> 00:07:28,800
फाइनल जो कथन है वो क्या है? इसका

107
00:07:28,800 --> 00:07:32,960
मतलब यही नहीं है कि हम आपको आहान कर रहे हैं बुलाने के लिए।

108
00:07:32,960 --> 00:07:37,280
हमारा क्या डिसीजन है वो फाइनल डिसीजन वो उसको हमने फाइनल

109
00:07:37,280 --> 00:07:41,360
कॉल कहा। हम तो आपका यही

110
00:07:41,360 --> 00:07:45,520
तो है कि बिना सोचे समझे सामने वाले

111
00:07:45,520 --> 00:07:49,520
की दृष्टि समझे बिना सामने वाले का अर्थ जाने बिना पर

112
00:07:49,520 --> 00:07:53,760
ले घोड़ा चाबुक घुमाना चालू कर दिया। ले घोड़ा चाबुक यही किया है। कल

113
00:07:53,760 --> 00:07:57,760
की वीडियो में भी यही किया है। हजारों बार पता नहीं हजार बार

114
00:07:57,760 --> 00:08:00,960
तो नहीं कहा होगा। अतिशक्ति हो जाएगी।

115
00:08:00,960 --> 00:08:05,120
मगर कई बार ऐसी चीजें थी जो हम कुछ और कह रहे हैं। आप कुछ और

116
00:08:05,120 --> 00:08:10,680
कर रहे हो। आप कुछ और उसका अर्थ लेकर के चल रहे हो। यहां पर भी वही है

117
00:08:10,680 --> 00:08:14,880
कि हमारा जो सम्मान नहीं किया। अरे भाई हमें नहीं पता चला

118
00:08:14,880 --> 00:08:19,040
कि तुमने ऐसा ऐसा किया और जब तुम्हारा मुंह बिगाड़

119
00:08:19,040 --> 00:08:23,200
रहे थे, कुत्ते का मुंह लगा रहे थे। तुम्हारे मुंह के साथ तो हमने बोला था ना

120
00:08:23,200 --> 00:08:27,760
इस वालों को तुमने नहीं देखा तो हम क्या करें

121
00:08:27,760 --> 00:08:31,760
अगर इस दुनिया में जापान नहीं है अगर इस

122
00:08:31,760 --> 00:08:32,880
दुनिया में आपने जापान

123
00:08:32,880 --> 00:08:35,360
नहीं देखा है तो इसका अर्थ ये नहीं है कि इस दुनिया में जापान है

124
00:08:35,360 --> 00:08:39,520
ही नहीं ठीक है आपके देखने

125
00:08:39,520 --> 00:08:43,840
ना देखने से सत्य का वो बदल नहीं जाता है अगर तुमने कह दिया

126
00:08:43,840 --> 00:08:47,840
कि जापान हमने नहीं देखा तो मतलब जापान है ही नहीं तो

127
00:08:47,840 --> 00:08:51,920
देखो पहले और भी बहुत सी बातें हैं जो तुमने बिना देखे जाने सोचे समझे

128
00:08:51,920 --> 00:08:56,000
कह दिया और कहते चले आ रहे हो। हमारी बात भी यहीं से शुरू हुई थी।

129
00:08:56,000 --> 00:09:00,000
मैं बताऊंगा अभी कैसे शुरू हुई थी। लाइव का विषय है।

130
00:09:00,000 --> 00:09:04,240
अब फिर क्या बोल रहा है कि मानो इसने पहले से

131
00:09:04,240 --> 00:09:08,240
अवसर दिया था। अरे भाई हमने ना तुम्हें पहले से अवसर दिया

132
00:09:08,240 --> 00:09:12,240
था और ना हमने तुम्हें बुलाया था। ना हम अवसर देने

133
00:09:12,240 --> 00:09:16,560
वाले हैं ना बुलाने वाले हैं और ना आज जो है यह जो

134
00:09:16,560 --> 00:09:20,720
तुमको बुलाने के लिए लाइव वीडियो बनाया है अपना डिसीजन अपना

135
00:09:20,720 --> 00:09:24,800
कथन अपना वक्तव्य देने के लिए वीडियो बनाया है और उसका नाम रखा है

136
00:09:24,800 --> 00:09:29,600
कॉल तो पहले समझ तो लो भाई हं

137
00:09:29,600 --> 00:09:34,000
कि एक ही शब्द के कई अर्थ निकल सकते हैं तो विरोधाभासी

138
00:09:34,000 --> 00:09:38,640
अर्थ को लेकर के और चाबुक लेकर के घोड़ा दौड़ाना बंद करो

139
00:09:38,640 --> 00:09:42,800
पहले सामने वाले को पूछो सुनो धैर्य रखो तब

140
00:09:42,800 --> 00:09:47,040
तो तरतड़ी रहती है तुरंत और पोस्ट डालने की

141
00:09:47,040 --> 00:09:50,560
उसी तरतड़ी में ही तो तुमने डाला रिदमम कपूर

142
00:09:50,560 --> 00:09:54,800
के नाम से जो तुमने वीडियो डाला है जिसका तुमको वो मानना का दावा

143
00:09:54,800 --> 00:09:58,960
प्राप्त हुआ है वो तरतड़ी में ही डाला था तुमने आ मिल

144
00:09:58,960 --> 00:10:03,040
गया मसाला हम चलो जल्दी से डाल देते

145
00:10:03,040 --> 00:10:07,040
हैं और मैं इस तरह से

146
00:10:07,040 --> 00:10:11,200
प्रतिकार प्रतिकार नहीं करना चाहता था जैसे आज होगा।

147
00:10:11,200 --> 00:10:15,280
ऐसे नहीं करना चाहता था। मैं ऐसे नहीं करना चाहता था। मैं

148
00:10:15,280 --> 00:10:19,960
मैं बचता रहा। मैं कहता रहा भाई मत कर मत कर मत कर मत कर। मगर

149
00:10:19,960 --> 00:10:24,160
नहीं तुमको धर्म से मतलब नहीं है। वो

150
00:10:24,160 --> 00:10:28,320
अभी बताऊंगा कैसे? सब सब कर्मबद्धता से चलेगा। धर्म

151
00:10:28,320 --> 00:10:32,320
से मतलब नहीं है। तुम्हें करियर से मतलब है। करियर खाने आए हो ना मेरा। मैं इसका करियर खा

152
00:10:32,320 --> 00:10:36,720
जाऊंगा। लोगों से कहते घूम रहे हो। मैं इसका करियर खा जाऊंगा।

153
00:10:36,720 --> 00:10:40,720
तुम्हें एक करियर दिख रहा है ना यह? धर्म की रक्षा करना यह सब

154
00:10:40,720 --> 00:10:45,360
तुम्हारे लिए करियर है। हमारे लिए नहीं है। हमारे लिए धर्म है।

155
00:10:45,360 --> 00:10:49,080
करियर

156
00:10:49,080 --> 00:10:51,880
खाओगे।

157
00:10:51,880 --> 00:10:56,240
तो हम इसने स्वभोषित आचार्य

158
00:10:56,240 --> 00:11:00,320
शब्द लिखा तो क्या करें? क्या करें? भाई जब

159
00:11:00,320 --> 00:11:04,320
तुम हमें विमर्श कर रहे हो। हमें जो चीजें तुम्हारे बारे में हम नहीं बोलना चाहते

160
00:11:04,320 --> 00:11:08,560
जो सत्य है जो सत्य हैं नहीं बोलना चाहते

161
00:11:08,560 --> 00:11:12,560
थे क्यों वर्णाश्रमी हो क्यों क्योंकि परंपरा से नहीं

162
00:11:12,560 --> 00:11:16,640
हो वो देखेंगे परंपरा जो है अभी आपकी सत्यापन

163
00:11:16,640 --> 00:11:20,840
के अधीन है वो ठीक है उस पर मीमांसा होगी आगे

164
00:11:20,840 --> 00:11:25,120
मगर परंपरा निष्ठ तो हो

165
00:11:25,120 --> 00:11:29,840
गुरु गोविंद और ग्रंथ में बात करने वाले तो हो

166
00:11:29,840 --> 00:11:33,840
ठीक है थोड़े बहुत वस्तुनिष्ठ कहीं पर भेद है गुरुदेव के साथ है कृपाती

167
00:11:33,840 --> 00:11:38,200
जी महाराज के साथ है मगर ऐसे तो राघवाचार्य जी महाराज के साथ भी है

168
00:11:38,200 --> 00:11:42,720
मतभेद रामानंदियों के साथ भी है तो ठीक है तुम्हारे साथ भी हो गया

169
00:11:42,720 --> 00:11:46,800
मगर जब तक वर्णाश्रमी हो जब तक वेद में प्रमाण बुद्धि

170
00:11:46,800 --> 00:11:50,800
वाले हो जब तक परंपरावादी हो तब तक हम तुम्हें अपने साथ अपने

171
00:11:50,800 --> 00:11:55,040
भाई के रूप में देखते हैं वो बात और है कि अंदरूनी रूप से तुमने कितनी क्षति

172
00:11:55,040 --> 00:11:59,160
पहुंचाई क्या क्या किया गुरु निंदा की मगर गुरुदेव ने ही सिखाया

173
00:11:59,160 --> 00:12:03,440
था कि अंदरूनी कोई मामला हो

174
00:12:03,440 --> 00:12:04,160
तो वो

175
00:12:04,160 --> 00:12:08,320
तो वह 100 हम पांच मगर बाहर का कोई आ जाए तो हम 105

176
00:12:08,320 --> 00:12:12,320
तो उस दृष्टिकोण से हमें हमने सदा जो है एक भाई के रूप

177
00:12:12,320 --> 00:12:16,320
में देखा कि भाई ठीक है दूर ही दूर से हम दूर रहे साथ में

178
00:12:16,320 --> 00:12:20,800
ना दिखे दूर रह के इन अ धर्मियों की खाल उधेड़ते रहे सनात सनातना

179
00:12:20,800 --> 00:12:24,800
भाषियों की खाल उधेड़ते रहे मगर तुमको जैसे ही

180
00:12:24,800 --> 00:12:29,040
एक मौका मिला जैसे कि आगे तुमने लिखा है लाइव का विषय

181
00:12:29,040 --> 00:12:33,520
जानबूझकर घुमा रहा यह जबकि बात परिकरों के दुराचरण

182
00:12:33,520 --> 00:12:37,760
और अभियान में विकृति की चल रही है। नहीं चल रही थी। तुमने

183
00:12:37,760 --> 00:12:41,760
पहले पहला वीडियो बनाया था क्या जिस दिन हमने वो लाइव बनाई थी जो चार

184
00:12:41,760 --> 00:12:46,160
घंटे की लाइव तुम अपने वीडियो में रो रहे हो। चार घंटे की लाइव चार घंटे की लाइव चार घंटे की लाइव

185
00:12:46,160 --> 00:12:50,320
तो उस दिन तुमने पहली बार परिकरों के बारे में बात की थी क्या?

186
00:12:50,320 --> 00:12:54,560
कितनी बार बात कर चुके हो परिकरों के बारे में? हमने कभी तुम्हारा

187
00:12:54,560 --> 00:12:58,640
विरोध किया सामने से आकर के क्योंकि हमें मालूम था जिनके बारे में

188
00:12:58,640 --> 00:13:02,720
तुम बात कर रहे हो वह समर्थवान है अगर उनको लगेगा कि तुम्हारा प्रति उत्तर

189
00:13:02,720 --> 00:13:06,960
देना है वो देंगे मगर मुझे मैदान में तब उतरना

190
00:13:06,960 --> 00:13:11,520
पड़ा वो भी तुम्हारे लिए नहीं उतरा था

191
00:13:11,520 --> 00:13:15,520
जो तुमने वीडियो बनाया है विजय श्री पर

192
00:13:15,520 --> 00:13:19,520
विजय श्री पर जो तुमने वीडियो बनाया था वो उस संबंध

193
00:13:19,520 --> 00:13:23,600
में बातें उससे करीबन 10 दिन पूर्व से फैल रही थी।

194
00:13:23,600 --> 00:13:27,680
Instagram इत्यादि पर हमारी रील देखना। तुमसे चालू नहीं हुआ है। विजय

195
00:13:27,680 --> 00:13:31,840
श्री का पक्ष समाज के सामने रखना तुम्हारी वीडियो से चालू

196
00:13:31,840 --> 00:13:35,920
नहीं हुआ है कि तुम्हारी वीडियो बनी उसके बाद हमने वीडियो बनाया। नहीं वीडियो बन

197
00:13:35,920 --> 00:13:40,320
चुकी थी पहले। इसलिए कहते हैं के ले घोड़ा ले चाबुक

198
00:13:40,320 --> 00:13:44,760
नहीं दौड़ना चाहिए। पहले पहले क्या करना

199
00:13:44,760 --> 00:13:49,200
चाहिए? पहले पहले रिसर्च करनी चाहिए। जांच करनी चाहिए। कौन

200
00:13:49,200 --> 00:13:53,600
है? क्या है? क्यों कर रहा है? क्यों कह रहा है? कुछ नहीं। मसाला चाहिए,

201
00:13:53,600 --> 00:13:57,800
करियर बनाना है ना। करियर लुप्त संप्रदाय का

202
00:13:57,800 --> 00:14:02,040
आचार्य मैं हूं निग्रह आचार्य। कौन सा निग्रह

203
00:14:02,040 --> 00:14:06,840
आचार्य? कौन से प्रामाणिक आचार्य ने स्वीकार किया

204
00:14:06,840 --> 00:14:11,120
है? अभी आना किसी दिन तब बात होगी। अभी बात होगी।

205
00:14:11,120 --> 00:14:16,200
इसमें आगे सब बातें हैं। ठीक

206
00:14:16,200 --> 00:14:20,640
है? हम फिर क्या है आगे? कि लाइव का विषय जानबूझकर

207
00:14:20,640 --> 00:14:24,640
घुमा रहा है। परिककरों के दुराचरण और अभियान में वह जो पूरा

208
00:14:24,640 --> 00:14:28,880
चार घंटे का वीडियो था उसमें जो आक्षेप जिस पर हमने बात की

209
00:14:28,880 --> 00:14:32,960
थी उस पूरे चार घंटे के वीडियो में से तुम्हारे लिए जो बोला

210
00:14:32,960 --> 00:14:37,040
गया अंश था वो केवल मुश्किल से 15 मिनट या आधे घंटे का अंश

211
00:14:37,040 --> 00:14:41,040
होगा। मुश्किल से चार घंटे का अंश नहीं था तुम्हारे लिए। जो

212
00:14:41,040 --> 00:14:45,600
तुमने विजय सिंह का वीडियो दिखाया था वह और तुमने जो विजय सिंह को प्रीिशन

213
00:14:45,600 --> 00:14:49,680
से जोड़ने का प्रयास किया था वो उस पर जो बातें हुई थी

214
00:14:49,680 --> 00:14:53,840
केवल वो तुम्हारे वीडियो के निमित्त था और

215
00:14:53,840 --> 00:14:58,000
उसमें भी हमने इतनी मर्यादा रखी क्योंकि हम तुमसे दूर रहते हुए

216
00:14:58,000 --> 00:15:02,000
भी तुम्हारे साथ शत्रुता नहीं करना चाहते थे। इसका कारण

217
00:15:02,000 --> 00:15:06,240
तुमने समझा डर कायर है ना

218
00:15:06,240 --> 00:15:10,400
अभी आगे बहुत सी बातें होनी है इसका कारण तुमने समझ लिया डर हम नहीं

219
00:15:10,400 --> 00:15:15,280
दिखाना चाहते थे परंपरा विरोधियों को कि

220
00:15:15,280 --> 00:15:19,360
हमारे बीच में भी वैमनसता है। हम तुम्हारी परंपरा का खंडन कर रहे

221
00:15:19,360 --> 00:15:23,440
हैं। तुम जाकर के बोल रहे हो कि भैया उन्होंने वो स्पॉन वालों

222
00:15:23,440 --> 00:15:27,600
ने जो है शीशे में देखकर तस्वीर के सामने अपने आप को दीक्षा दी। तुम

223
00:15:27,600 --> 00:15:31,520
उनको यह नहीं फिर तुम उनको यह कैसे बताओगे कि हमने तो स्वप्न में दीक्षा

224
00:15:31,520 --> 00:15:35,880
ली है अपने संप्रदाय की है

225
00:15:35,880 --> 00:15:38,200
ना

226
00:15:38,200 --> 00:15:42,320
अच्छा फिर क्या है और स्वप्न में ली तो

227
00:15:42,320 --> 00:15:46,400
ली फिर उस दीक्षा को कौन से परंपरा प्राप्त आचार्य से आपने जाकर के वो

228
00:15:46,400 --> 00:15:50,720
कर लिया कौन से परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्य

229
00:15:50,720 --> 00:15:55,160
ने आपकी ये निग्रह निग्रह संप्रदाय को प्रमाणिकता दे दी है

230
00:15:55,160 --> 00:15:59,520
बोलो साथ में उठ उठना बैठने से प्रमाणिकता नहीं हो जाती। वो तो तुमने भी विदेश

231
00:15:59,520 --> 00:16:03,600
विदेशगामी व्यक्ति के साथ में उसके द्वारा जो है खुद को माला वाला पहना करके

232
00:16:03,600 --> 00:16:07,920
और जो है हमारा स्वागत हुआ है। खड़े हुए ना तो हो गया वो प्रमाणिक।

233
00:16:07,920 --> 00:16:11,920
उसकी जो द्विजता भंग हुई है विदेश विदेश गमन करके वो हो गई। सही हो

234
00:16:11,920 --> 00:16:16,040
गई क्योंकि निग्राचार उसके साथ में खड़ा है भाई। तो ऐसे नहीं होता है

235
00:16:16,040 --> 00:16:20,320
ना। क्या प्रमाणिकता है? कौन से प्रामाणिक संप्रदाय तुमको मानते

236
00:16:20,320 --> 00:16:24,400
हैं? निग्रह संप्रदाय और उसी में तुम लगे हो। उसी

237
00:16:24,400 --> 00:16:28,400
में लगे हो। मठाधीश बनने के लिए और मठ का

238
00:16:28,400 --> 00:16:32,400
अता पता नहीं है। अभी इस पर भी बात होगी। सारी

239
00:16:32,400 --> 00:16:37,000
बातों पर बात होगी। क्या

240
00:16:37,000 --> 00:16:41,200
है? विकृति चल रही है लेकिन ये कभी विजय श्री को ले आता है।

241
00:16:41,200 --> 00:16:45,360
तो विजय श्री को कौन लाया था? अरे तुमने तुमको परिकरों पर वीडियो बनाना

242
00:16:45,360 --> 00:16:47,040
था ना।

243
00:16:47,040 --> 00:16:51,120
परिकरों पर वीडियो बनाते हैं। विजय श्री को कौन लाए थे? तुम

244
00:16:51,120 --> 00:16:55,440
लाए थे। उल्टी सीधी बातें किसने की थी? तुमने

245
00:16:55,440 --> 00:16:59,440
की थी लिप टू लिप किस करती है तुम्हारे घर की

246
00:16:59,440 --> 00:17:03,440
स्त्री के बारे में जब ऐसा बोला जाएगा तो तुम्हें अच्छा लगेगा अब तुम यह कहोगे कि मेरी

247
00:17:03,440 --> 00:17:08,080
घर की स्त्रियों की तुलना विजय श्री जैसी स्त्रियों से मत करो

248
00:17:08,080 --> 00:17:12,560
तो सुनो जब कोई व्यक्ति वापस आ जाता है दिशाहीन

249
00:17:12,560 --> 00:17:16,560
व्यक्ति वापस दिशा में आ जाता है तो क्या उसको बार-बार टोच मारते रहोगे यही

250
00:17:16,560 --> 00:17:20,800
है तुम्हारी धर्म स्थापना उसको बार बार यही टांग खींचते रहोगे

251
00:17:20,800 --> 00:17:26,720
नहीं नहीं तुम्हारी पुरानी फोटो ऐसी है इसलिए अब तू साड़ी नहीं पहन सकती

252
00:17:26,720 --> 00:17:30,960
यही है तुम्हारी धर्म स्थापना। भाई किसी धर्म से दूर रहने

253
00:17:30,960 --> 00:17:34,960
वाले को ही धर्म में लाने के लिए निकले हो या धर्म वालों को ही धर्म में लाने

254
00:17:34,960 --> 00:17:38,960
के लिए निकले हो? जो धर्म को

255
00:17:38,960 --> 00:17:44,960
मान रहे हैं उन्हीं को धर्म उन्हीं को धर्म में रखने के लिए निकले हो क्या?

256
00:17:46,320 --> 00:17:50,400
तो अगर कोई व्यक्ति वापस आ चुका है, अपनी चीजों को स्वीकार

257
00:17:50,400 --> 00:17:54,400
कर चुका है और प्रयास कर रहा है जितना ज्यादा से

258
00:17:54,400 --> 00:17:58,720
ज्यादा हो सके अपने शास्त्रों के आलंबन का। हम सभी

259
00:17:58,720 --> 00:18:03,040
पूर्णतया ये जो संक्रमण काल है इसमें क्या पूर्णतया शास्त्रों

260
00:18:03,040 --> 00:18:07,040
का आलंबन ले पाते मगर हमारी प्रमाण्य बुद्धि रहती है।

261
00:18:07,040 --> 00:18:11,120
हम लोग वो नहीं है जो यह कहते हैं कि भैया हम जो

262
00:18:11,120 --> 00:18:15,120
वो नहीं कर पा रहे ना क्या कहते हैं? हम जो

263
00:18:15,120 --> 00:18:21,080
है शास्त्रों का आलंबन नहीं ले पा रहे तो आज जो हम कर रहे हैं वही धर्म है। हम यह नहीं

264
00:18:21,080 --> 00:18:25,120
कहते क्योंकि अगर हम ऐसा कहना चालू कर देंगे तो धर्म का मूल स्वरूप

265
00:18:25,120 --> 00:18:31,080
तो खो ही जाएगा। तो हम फिर लड़ किसके लिए रहे हैं? जितना बदलता जा बदलते जाओ, बदलते जाओ, बदलते

266
00:18:31,080 --> 00:18:35,840
जाओ। तो धर्म की परिभाषा के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाती है।

267
00:18:35,840 --> 00:18:40,000
ये अंतर है। ठीक है? अब इसमें से भी कुछ निकाल

268
00:18:40,000 --> 00:18:41,920
लेना अपने लिए कि उसने हम पर ऐसा आरोप

269
00:18:41,920 --> 00:18:46,000
लगाया। जो हम बोलना चाह रहे हैं, जो हम कहना चाह रहे हैं, उसको ना समझना।

270
00:18:46,000 --> 00:18:50,160
उसमें से अपने लिए निकाल लेना कि उसने मेरा ऐसे विरोध किया। अब लो मैं बम लेकर के आऊंगा,

271
00:18:50,160 --> 00:18:54,320
उड़ा दूंगा सबको। बहुत बड़े बमबाज हो, बहुत बड़े तुर्रम खान

272
00:18:54,320 --> 00:18:58,320
हो तुम। दुनिया तुमसे थर थर थर-थर कांपती है। है ना? ऐसा ही

273
00:18:58,320 --> 00:19:01,160
सोचते हो।

274
00:19:01,160 --> 00:19:05,200
चलो। अरे भैया हमने कितना कहा मान जाओ मान जाओ

275
00:19:05,200 --> 00:19:09,280
मान जाओ भाई। मत विवश करो। हां। हम तुम्हें विवशता की याद

276
00:19:09,280 --> 00:19:13,680
दिला रहे तो तुम वजन की बात कर रहे हो। कहा तुम्हारा वजन कहां निकल गया वो पता है हमें

277
00:19:13,680 --> 00:19:17,680
क्यों नहीं तुम्हारा वजन बढ़ पाया कहां तुम्हारा वजन स्टक हो गया वो

278
00:19:17,680 --> 00:19:22,600
पता है

279
00:19:22,600 --> 00:19:26,720
हमें जब शरीर की सारी धातु निकाल दोगे तो कहां से

280
00:19:26,720 --> 00:19:30,800
आएगा वजन हार्ड मास में तो दूसरों का वजन तो तुम्हें ज्यादा लगेगा

281
00:19:30,800 --> 00:19:35,160
ही खराब लगेगा ही तो उस पर टोंड कसोगे प्रोटीन पाउडर की

282
00:19:35,160 --> 00:19:39,200
बॉडी हम प्रोटीन पाउडर का प्रचार करने निकला

283
00:19:39,200 --> 00:19:45,200
था क्या मैं आर्य समाज में जाके ये कहता हूं तुम प्रोटीन पाउडर क्यों नहीं खाते

284
00:19:51,240 --> 00:19:55,440
हो? फिर क्या बोल रहे हो? आरोपियों की

285
00:19:55,440 --> 00:20:00,080
ओर से लोगों का ध्यान हट जाए। हमने तुमसे कितनी बार कहा?

286
00:20:00,080 --> 00:20:04,160
भाई तुमको लगता है कि जो जो तुम्हारे पास जो वह है क्या

287
00:20:04,160 --> 00:20:08,240
कहते हैं यह जो साक्ष्य तुम

288
00:20:08,240 --> 00:20:12,240
दिखाते हो जो तुम्हारे हिसाब से साक्ष्य है वो कुछ नहीं है।

289
00:20:12,240 --> 00:20:16,240
तुमको लगता है कि हम उसको उसके आधार पर किसी को दोषी सिद्ध कर

290
00:20:16,240 --> 00:20:20,240
लेंगे। हमें नहीं लगता है। तो अगर हम यह कह रहे

291
00:20:20,240 --> 00:20:25,040
हैं कि हमें अकाट्य प्रमाण लाओ तो तुम हमको यह क्यों सोच रहे हो कि हम विरोधी हैं।

292
00:20:25,040 --> 00:20:29,040
भाई हमें किसी युद्ध में कूदने के लिए वो ठोस चीजें

293
00:20:29,040 --> 00:20:33,280
चाहिए जिनके आधार पर हम लड़ सके। वो आप

294
00:20:33,280 --> 00:20:37,280
उपलब्धि नहीं करा रहे हो। और अगर वो ठोस चीजें होती तो तुम

295
00:20:37,280 --> 00:20:37,780
स्वयं

296
00:20:37,760 --> 00:20:41,840
युद्ध लड़ रहे होते। आज ये मदद को नहीं घूम रहे होते कि मेरा समर्थन नहीं हो रहा है।

297
00:20:41,840 --> 00:20:46,000
मुझे जाने नहीं दिया जा रहा है। आज लोगों को तुम इंस्टिगेट नहीं कर रहे होते कि जाओ

298
00:20:46,000 --> 00:20:50,080
जाकर के उसके हाथ पैर पकड़ लो। ये कर लो वो कर लो। ये नहीं कर रहे होते

299
00:20:50,080 --> 00:20:54,160
तुम। खुद जाकर के कर लेते वो काम। तुम्हारे मन

300
00:20:54,160 --> 00:20:58,480
में खुद चोर है ना। तुम दुनिया को भड़काना चाह रहे हो। करियर बना रहे हो ना तुम अपना।

301
00:20:58,480 --> 00:21:02,560
करियर बिल्ड कर रहे हो। लुप्त संप्रदाय के नाम पे। अपने आप को

302
00:21:02,560 --> 00:21:08,240
उपाधि दे दी। बचपन में मंत्र हो गया। है ना?

303
00:21:08,240 --> 00:21:12,240
2017 में मंत्र प्राप्त हो जाता है और 2018 में 16 में

304
00:21:12,240 --> 00:21:16,600
तुम्हारे प्रेम प्रसंग चलते हैं विवाह से पूर्व

305
00:21:16,600 --> 00:21:21,280
ऐसे ऐसे जो क्या कहते हैं दिव्य

306
00:21:21,280 --> 00:21:25,360
जिनको वो बचपन से ही शुद्ध थे जन्म लेने से

307
00:21:25,360 --> 00:21:29,440
पहले जो है वो हमारे माता-पिता ने जो वो किया था

308
00:21:29,440 --> 00:21:34,000
और वो संतान जो है कितनी गाली गलौज कर रही है वो सब दिख रहा है

309
00:21:34,000 --> 00:21:38,680
Facebook पर जाकर के

310
00:21:38,680 --> 00:21:43,000
हम अगर तुम्हारे हिसाब से कोई पूरी मठ

311
00:21:43,000 --> 00:21:47,280
में लंपट है तुम्हारे हिसाब से

312
00:21:47,280 --> 00:21:51,960
तो लंपट से बचने के लिए हम दूसरे लंपट के पास

313
00:21:51,960 --> 00:21:57,960
जाएं तुम्हारे पास

314
00:22:00,120 --> 00:22:04,280
आए पिछले

315
00:22:04,280 --> 00:22:08,600
यदि पहले बोल दिया कि मसाला मिलेगा इसलिए लाइव नहीं

316
00:22:08,600 --> 00:22:12,640
करेंगे। तुमको यही लगता है तुम इस गलतफहमी

317
00:22:12,640 --> 00:22:17,720
थे। तुम इस गलतफहमी में थे अह भगवतानंद

318
00:22:17,720 --> 00:22:22,040
कि शिवांश हमसे डरता है। डरता नहीं

319
00:22:22,040 --> 00:22:26,240
हूं। मेरे को अभियान की चिंता है। धरातल की चिंता

320
00:22:26,240 --> 00:22:30,400
है और तुम्हें किसी की चिंता नहीं है। तुम कहां रहते

321
00:22:30,400 --> 00:22:34,480
हो? तुम्हारा मठ कहां है? मंदिर कहां है? तुमने सार्वजनिक किया है? क्यों

322
00:22:34,480 --> 00:22:38,640
नहीं किया है? तुम जिनकी समीक्षा करते हो उनकी सब चीजें सार्वजनिक है।

323
00:22:38,640 --> 00:22:42,720
तभी तो वो कर पाते हो। मैंने तुमसे कहा तुम जहां भागवत कथा कराने जा रहे हो मुझे उनका

324
00:22:42,720 --> 00:22:47,960
परिचय दे दो। निकाल दूंगा उसमें 50 कमियां गिन के लिख के और

325
00:22:47,960 --> 00:22:52,400
बोलो दो। अपनी कॉल रिकॉर्डिंग दो।

326
00:22:52,400 --> 00:22:53,920
अपनी जो जीवन शैली

327
00:22:53,920 --> 00:22:58,400
है उसको सार्वजनिक कर दो ना भाई। क्यों छुपे छुपे घूम रहे हो?

328
00:22:58,400 --> 00:23:04,240
क्योंकि तुम्हें मालूम है जिस दिन मेरी चीजें सार्वजनिक हो उस दिन मेरा भेद खुल जाएगा।

329
00:23:04,240 --> 00:23:08,400
तो मैंने इस भाव में कहा था कि आपका धरातल

330
00:23:08,400 --> 00:23:12,480
पर कुछ नहीं है। इसलिए आप सबकी समीक्षा कर पा

331
00:23:12,480 --> 00:23:16,480
रहे हो। धरातल पे जिनके प्रकल्प चल रहे हैं।

332
00:23:16,480 --> 00:23:20,680
फिर उनकी तुलना कर रहे हो कौन से और फिर मेरी तुलना कर रहे

333
00:23:20,680 --> 00:23:24,960
हो। फिर क्या है? आगे यदि स्वषित

334
00:23:24,960 --> 00:23:29,040
ही मानता था तो अपने ही पिछले लाइव में बार-बार निगराचार शब्द

335
00:23:29,040 --> 00:23:33,120
का प्रयोग करना ही नहीं था। हमने उस

336
00:23:33,120 --> 00:23:37,360
तथाकथित स्वसित आचार्य प्रशांत को कई बार आचार प्रशांत भी कहा है

337
00:23:37,360 --> 00:23:41,360
तो हो गया आचार्य प्रशांत हमने मान लिया उसको आचार प्रशांत भाई

338
00:23:41,360 --> 00:23:45,440
जिस नाम से लोग उसे जानते हैं उस नाम को भी लेना पड़ता

339
00:23:45,440 --> 00:23:49,520
है ना और लिया पर तुम्हें खराब लगा

340
00:23:49,520 --> 00:23:53,920
तुम्हारे लिए वो निगराचार शब्द लेना ही गलत है तुम भगवत आनंदी

341
00:23:53,920 --> 00:23:57,920
ठीक हो अब लोकाचार की दृष्टि से भी तुम्हें निग्राचार नहीं

342
00:23:57,920 --> 00:24:02,360
कहेंगे ठीक है हमने बहुतों को कहा

343
00:24:02,360 --> 00:24:06,640
है हमारे हिसाब से तो अलंकार समाज है। मगर लोकाचार की दृष्टि

344
00:24:06,640 --> 00:24:09,040
से बोलना पड़ता है आर्य समाज क्योंकि बना लिया उन्होंने आर्य

345
00:24:09,040 --> 00:24:13,280
समाज से अपना अपनी पहचान हम मेंशन

346
00:24:13,280 --> 00:24:17,440
करना पड़ेगा ना टैग लगाना पड़ेगा आर्य समाज नहीं है आर्य समाज अलंकार

347
00:24:17,440 --> 00:24:21,520
समाज है हमारे हिसाब से वो तो लोकाचार

348
00:24:21,520 --> 00:24:25,600
की दृष्टि से कहना पड़ता है

349
00:24:25,600 --> 00:24:29,680
निगराचार गुरु निंदा नहीं हो क्या तुम दूर बैठकर

350
00:24:29,680 --> 00:24:33,840
के बहाने बना लेना जिस दिन आमना सामना होगा तो अब मैं अलग से एक वीडियो

351
00:24:33,840 --> 00:24:38,240
बना देंगे तुम्हारे लिए कि तुमने कहां कहां उपहास उड़ाया है गुरुओं

352
00:24:38,240 --> 00:24:42,600
का और विशेष तौर पर पूज्य गुरुदेव पूरी पीठाधीश्वर

353
00:24:42,600 --> 00:24:46,720
का बस बना देंगे वीडियो कोई बात नहीं भी

354
00:24:46,720 --> 00:24:50,880
चल रही होगी उनकी संभावना व्यक्त करने के लिए तू तड़ाक वाली बातें कर लोगे उनके

355
00:24:50,880 --> 00:24:54,960
लिए कि बोल दो नागपुरी का शंकराचार्य को हमने गुलाम बना लिया है गुलाम

356
00:24:54,960 --> 00:24:59,760
है तेरा यह है वो उनके लिए तू तड़ाक हल्की हल्की बातें

357
00:24:59,760 --> 00:25:04,480
अपने एक इंटरव्यू में तुम कह रहे थे ना कि वाणी जो है वो

358
00:25:04,480 --> 00:25:08,480
वो होनी चाहिए। एक इंटरव्यू दिया था ना

359
00:25:08,480 --> 00:25:12,920
तुमने वो रिलीजन वर्ल्ड वालों को

360
00:25:12,920 --> 00:25:17,040
हम रिलीजन वर्ल्ड को तुमने एक इंटरव्यू दिया था। उसमें तुम खुद कह

361
00:25:17,040 --> 00:25:21,040
रहे हो कि आचार्य की वाणी होनी चाहिए। ऐसा होना चाहिए वैसा होना चाहिए।

362
00:25:21,040 --> 00:25:24,080
तुम्हारी वाणी क्या है? आदर मादर किया करते हो जो Facebook पे जाकर

363
00:25:24,080 --> 00:25:28,480
के। देखा है तुम्हारे चीजें। और तू तड़ाक अश्लील

364
00:25:28,480 --> 00:25:31,840
भाषा तो अभी भी तुम कर रहे हो।

365
00:25:31,840 --> 00:25:35,840
अरे मेरा यही यही तो कहना था कि भैया

366
00:25:35,840 --> 00:25:39,920
तुम्हें खंडनार्थ जो बोलना है बोलो किसी के लिए शास्त्रोक्त पक्ष में

367
00:25:39,920 --> 00:25:44,480
तुम्हारा कोई मतभेद हो रहा है तो बोलो हम मगर नहीं

368
00:25:44,480 --> 00:25:48,920
हमें उसके साथ साथ उसके व्यक्तिगत भी होना है जो तुमने और तुम्हारा

369
00:25:48,920 --> 00:25:53,040
दोगलेपन तुम्हारा दोगलापन क्या था तुम बड़ा सम्मान प्रकट

370
00:25:53,040 --> 00:25:57,440
कर रहे थे मैं यही चाहता था मैं चाहता था कि तुम्हारे अंदर की जो असली

371
00:25:57,440 --> 00:26:01,840
असली सूरत है वो बाहर आ जाए जिससे कि मैं जब अपना वो

372
00:26:01,840 --> 00:26:06,160
शुरू करूं ना तुमने क्या कहा था ऑफेंस

373
00:26:06,160 --> 00:26:11,720
तो मेरे पास मुझसे कोई यह ना कहे भैया तुमने शुरुआत की

374
00:26:11,720 --> 00:26:15,760
हम इनका भैया वीडियो चालू करो वो वाला

375
00:26:15,760 --> 00:26:20,000
इनका वीडियो देख के अब इनको उत्तर दिया जाए

376
00:26:20,000 --> 00:26:24,400
इसकी स्वयं ही ये तीनों बातें हैं और कारण एक दूसरे के सापेक्ष अकाट

377
00:26:24,400 --> 00:26:28,560
है क्या अब निग्रह प्रवेशिका के ही समय इस पर बोलेंगे

378
00:26:28,560 --> 00:26:32,560
आवश्यकता नहीं पड़ेगी निग्रह प्रवेशिका आ जाना किसी दिन

379
00:26:32,560 --> 00:26:36,640
कर लेंगे सामने से चर्चा ठीक है बहुत जो खुजली

380
00:26:36,640 --> 00:26:39,200
है सामना करने की वो मिटा देंगे

381
00:26:39,200 --> 00:26:43,360
आ जाइएगा और शुरुआत वहीं से करिएगा

382
00:26:43,360 --> 00:26:47,360
रिदमम कपूर फ्री मेसेंस की कैसे और वो जो

383
00:26:47,360 --> 00:26:51,520
रिदमम कपूर है उस पर जो आपने वो लगाए हैं वह सिद्ध करिए

384
00:26:51,520 --> 00:26:56,120
फिर पूरी के जो परिकर हैं उन पर सिद्ध करिए जो आपने बोला

385
00:26:56,120 --> 00:27:01,360
है आ जाइएगा

386
00:27:01,360 --> 00:27:06,520
चलो आओ

387
00:27:06,520 --> 00:27:10,560
भैया और YouTube के जन्म में भी पहली बार YouTube लाइव आया हूं

388
00:27:10,560 --> 00:27:14,560
तो मुझे इस बात का अनुभव नहीं है कि ये तकनीक ठीक से काम कर रही है कि नहीं क्योंकि इससे पहले YouTube लाइव आने का

389
00:27:14,560 --> 00:27:18,880
मेरा कोई अनुभव नहीं है तो ट्यूटोरियल देखकर मैंने रखिएगा डेढ़ की कम से कम 1.5

390
00:27:18,880 --> 00:27:23,200
की और आगे बढ़ाइए

391
00:27:23,200 --> 00:27:27,440
जाता है Facebook का तो अनुभव था तो यदि आप सब को हमारी ध्वनि और वीडियो स्पष्ट आ रहे हो तो एक

392
00:27:27,440 --> 00:27:31,760
बार आप बता दें और इसे हम विषय पर आते हैं। कोई भी एक व्यक्ति कमेंट कर दें।

393
00:27:31,760 --> 00:27:35,760
जहां तक मैं देख पा रहा हूं कि मेरी जो वीडियो है वो तो दिख रही है। एक बार मैं ऑडियो

394
00:27:35,760 --> 00:27:40,000
चेक कर लेता हूं। मुझे लगता था एक बार मैं ऑडियो एक मिनट

395
00:27:40,000 --> 00:27:44,000
करो। मुझे लगता था कि भैया कोई भी बात

396
00:27:44,000 --> 00:27:48,240
ऐसी बोलो जो कटनी ना जो कट ना सके उसी

397
00:27:48,240 --> 00:27:52,240
बात को ही बोलो। दूसरी बातें बोलो ही नहीं। मगर मुझे इनका

398
00:27:52,240 --> 00:27:56,560
कल का वीडियो देख करके पता लगा कि कुछ भी बोलो। जनता सबसे

399
00:27:56,560 --> 00:28:00,680
खुश होती है। कुछ भी बोलो कोई मतलब नहीं है कि

400
00:28:00,680 --> 00:28:04,680
वो अकाट्य तथ्य है कि नहीं।

401
00:28:04,680 --> 00:28:08,720
बस कुछ भी बोलो जो जो अंधी भेड़े हैं वो कुछ

402
00:28:08,720 --> 00:28:14,520
भी सुन लेंगी और वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह करने

403
00:28:14,520 --> 00:28:18,560
लगेंगी। हां चलो आओ भैया। हां ऑडियो वीडियो

404
00:28:18,560 --> 00:28:22,800
तो मेरी दृष्टि से ठीक है और अगर कोई स्कैनर की समस्या होगी तो उस पर तो मेरा कोई अंतरण नहीं रहा

405
00:28:22,800 --> 00:28:26,800
और प्रयास करूंगा कि जितने भी महत्वपूर्ण विषय है उन पर हम चर्चा व्यक्त करें और

406
00:28:26,800 --> 00:28:30,960
आवश्यक विषय को उपेक्षित करें तो आप

407
00:28:30,960 --> 00:28:34,960
सभी जो टिप्पणियां कर रहे हैं लाइव चैट में उसको मैं साथ-साथ देख नहीं पाऊंगा क्योंकि इसका कारण क्या है कि

408
00:28:34,960 --> 00:28:38,400
मैं इधर देखूंगा तो विषय पर बोल नहीं पाऊंगा तो आप लोग अपने इधर

409
00:28:38,400 --> 00:28:42,400
जो वार्तालाप है पक्षपक्ष से उसको मर्यादित शैली में बिना किसी व्यक्ति के प्रति किसी

410
00:28:42,400 --> 00:28:46,400
अनुचित शब्दावली का प्रयोग किए भी आप लोग कर सकते हैं हम एक मिनट

411
00:28:46,400 --> 00:28:49,200
पॉज करिए

412
00:28:49,200 --> 00:28:53,360
अब तक क्या उनके प्रश्नों का उत्तर नहीं दे रहे थे?

413
00:28:53,360 --> 00:28:57,600
उनके प्रश्नों का उत्तर ही दे रहे थे। उन्होंने जो कम्युनिटी पोस्ट की है

414
00:28:57,600 --> 00:29:02,160
उनके ही प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। बस जो उन्होंने कल अपना वास्तविक

415
00:29:02,160 --> 00:29:06,160
स्वरूप दिखाया है। अब उस उनको उस अंदाज में दे

416
00:29:06,160 --> 00:29:10,320
रहे थे। अब तक हम क्या कर रहे थे कि भाई किसी तरीके से टल जाए, टल जाए,

417
00:29:10,320 --> 00:29:14,480
टल जाए। ना हमें इस तरह का प्रतिकार करना पड़े। मगर तुम तो

418
00:29:14,480 --> 00:29:18,640
सोच रहे हो कि भैया यह जो है कायर है। यह हमारे साथ ऐसे ही करता

419
00:29:18,640 --> 00:29:22,720
रहेगा। हम इसको ऐसे ही करते रहेंगे। इसको दबाते रहेंगे। हम अभी

420
00:29:22,720 --> 00:29:26,800
सारे प्रश्नों के उत्तर आ रहे हैं। आप ज्यादा बौखलाए ना और धैर्य रखें।

421
00:29:26,800 --> 00:29:30,920
चलिए भैया चलाइए। शिवशु नारायण द्विवेदी के

422
00:29:30,920 --> 00:29:35,280
द्वारा अनुग्रहचार्य का वीडियो अनुग्रह करी कर रहा है। गुवाहाटी

423
00:29:35,280 --> 00:29:39,600
तो शिवशु नारायण द्विवेदी का जो वीडियो है कृपया ध्यान दीजिए। न्यू

424
00:29:39,600 --> 00:29:43,600
गांव से आने वाली गुवाहाटी। उस वीडियो को हमने अभी तक देखा नहीं है। कौन वाला वीडियो? पहला वाला

425
00:29:43,600 --> 00:29:47,680
भी, दूसरा वाला भी, तीसरा वाला भी। लेकिन हमने लाइव चैट्स की टिप्पणियां कुछ पढ़ी और

426
00:29:47,680 --> 00:29:51,760
हमारे शुभचिंतकों ने उसके महत्वपूर्ण अंशों को हमें भेजा। उसको हमने सुना।

427
00:29:51,760 --> 00:29:53,440
मतलब सिंहावलोकन किया। सनातन धर्म

428
00:29:53,440 --> 00:29:57,520
में एक शब्दावली बड़ी प्रचलित है जिसको रोक दो। रोक

429
00:29:57,520 --> 00:30:01,600
दो। यही आपने बहुत बड़ी भूल की। आपने स्वयं कोई

430
00:30:01,600 --> 00:30:05,880
रिसर्च नहीं की जो आपके चिलांटू टपोरी टाइप के

431
00:30:05,880 --> 00:30:10,560
जो अ कचरे समर्थक हैं।

432
00:30:10,560 --> 00:30:14,640
उनके द्वारा दिए गए जो कुछ तथ्य थे

433
00:30:14,640 --> 00:30:18,720
आधे अधूरे उन पर आपने प्रतिक्रिया व्यक्त की वह अभी आगे मैं बताऊंगा कैसे

434
00:30:18,720 --> 00:30:22,720
व्यक्त की वैसे बता भी चुका हूं अब जरा क्रम क्रम में चलेंगे

435
00:30:22,720 --> 00:30:26,880
अब यही आपकी गलती हुई हमसे हमसे

436
00:30:26,880 --> 00:30:30,880
भिड़ंत नहीं होती आपकी ठीक है हम और आप इस तरह

437
00:30:30,880 --> 00:30:35,120
से आमने सामने ना होते मगर यही आपकी गलती थी कि

438
00:30:35,120 --> 00:30:39,280
आपके लोगों ने आपके समर्थकों ने जितना अंश आपको दिखा दिया

439
00:30:39,280 --> 00:30:44,280
उतना नहीं आपने देखा। अरे क्यों भाई मेंढक हो गए कुएं

440
00:30:44,280 --> 00:30:48,560
के बाहर निकलो कुएं से अपने समर्थकों द्वारा बनाए गए कुएं

441
00:30:48,560 --> 00:30:52,720
से बाहर निकलते पूरे पूरे वीडियोस देखते जाकर के कि शिवश

442
00:30:52,720 --> 00:30:57,040
ने वो चार घंटे सबसे बड़ा तुम्हारा जो वो है ना

443
00:30:57,040 --> 00:31:01,200
गलतफहमी का पिटारा वो यही है जो तुम्हारे ईगो का हर्ट

444
00:31:01,200 --> 00:31:05,200
हो गया जयकांत सिकरे का ईगो हर्ट हो गया लाइफ में कुछ भी करने

445
00:31:05,200 --> 00:31:08,560
का जयकांत सिकरे का ईगो हर्ट नहीं करने का तो

446
00:31:08,560 --> 00:31:13,520
सुन मैं हूं इस गांव का बाजीराव सिंघम।

447
00:31:13,520 --> 00:31:17,960
सुना अगर तुम अपने आप को जयगान सिगरे मानते हो तो मैं सिंघम

448
00:31:17,960 --> 00:31:22,160
हूं। समझ गए? अब सिंघम से मिलो। तो क्या था

449
00:31:22,160 --> 00:31:26,160
इनका मामला? कि भैया मुझे मेरे मैंने पूरे वीडियोस देखे नहीं

450
00:31:26,160 --> 00:31:30,240
है। मगर वो जो है मेरे समर्थकों ने जितना दे दिया

451
00:31:30,240 --> 00:31:34,480
उतना हमने बोल दिया। अरे क्यों भाई? देखो ना पूरा वीडियो। पूरा मामला

452
00:31:34,480 --> 00:31:38,480
देखो ना कौन क्या कर रहा है? कैसे कर रहा है? क्या कहना चाहता है कि

453
00:31:38,480 --> 00:31:42,480
जो भड़काऊ चीजें जो अंश काट काट के तुमको दिखा दिए जाएंगे उनप तुम

454
00:31:42,480 --> 00:31:46,720
बलबली लेके निकल जाओगे। हमने तो ऐसा नहीं किया। कितना

455
00:31:46,720 --> 00:31:51,360
मौका दिया? कितना अवसर दिया कि ये ये दिन ना आए।

456
00:31:51,360 --> 00:31:56,080
ठीक है। अब अब आपको प्रसन्नता हो जाएगी। संभवत

457
00:31:56,080 --> 00:32:00,080
चलाओ भैया। हम स्थाई पुला न्याय का अर्थ है कि जैसे आपने

458
00:32:00,080 --> 00:32:04,480
चावल में पानी डाला उसको बर्तन में रखा। उसको आपने चूल्हे पर चढ़ाया

459
00:32:04,480 --> 00:32:08,720
तो चावल पके या नहीं पके इसका परीक्षण करने के लिए एक एक दाने को नहीं देखा जाता तो उसी

460
00:32:08,720 --> 00:32:12,720
पात्र में से कुछ महत्वपूर्ण भाग को लेकर मतलब जो ऊपरी भाग है उसको आपने देख लिया

461
00:32:12,720 --> 00:32:16,720
मसल लिया यहां पर गया है इसलिए करो

462
00:32:16,720 --> 00:32:20,720
करो अब इनका कहने का मतलब है कि मेरे जो बड़े-बड़े वीडियोस

463
00:32:20,720 --> 00:32:24,320
हैं उसमें से ये सब नहीं देखेंगे बल्कि

464
00:32:24,320 --> 00:32:28,320
वो जो समर्थक इनको चावल के रूप में कटिंग पकड़ा रहे हैं ये उससे ही देख

465
00:32:28,320 --> 00:32:32,640
लेंगे कि वो पक गया कि नहीं पक गया तो इसका मतलब निर्णय

466
00:32:32,640 --> 00:32:37,120
कौन हुआ? इसका मतलब निर्णायक तुम नहीं हो।

467
00:32:37,120 --> 00:32:41,280
तुम अपने समर्थकों के अनुगत हो। क्योंकि वो चावल को देख के

468
00:32:41,280 --> 00:32:45,440
ला के दे रहे हैं। ये पका हुआ है। ये देखो भैया पक गया। तुमने कैसे

469
00:32:45,440 --> 00:32:49,600
पता किया कि कौन सा वाला पार्ट जो है वो सही वही पार्ट है जो मेरे लायक होना

470
00:32:49,600 --> 00:32:53,760
चाहिए। क्योंकि तुमने तो पूरा वीडियो देखा नहीं। तुमने चेक किया

471
00:32:53,760 --> 00:32:57,840
कि जो चावल के चावल पकने चावल मुझे पकड़ाया जा रहा है। वह उसी कुकर

472
00:32:57,840 --> 00:33:03,840
से आ रहा है। तुमने यह सब चीजें चेक की?

473
00:33:03,840 --> 00:33:08,080
ऐसा तो नहीं पहले से पका पकाया चावल मुझे पकड़ा दिया जा रहा हो

474
00:33:08,080 --> 00:33:12,080
तो तुम अपने समर्थकों के अनुगत चल रहे हो ना तभी तुम्हारी बुद्धि इस

475
00:33:12,080 --> 00:33:16,560
तरह से भ्रष्ट हुई और किन-किन कारणों से भ्रष्ट हुई है वो भी बताएंगे ठीक है

476
00:33:16,560 --> 00:33:20,560
अपने जो मतलब जो समर्थक हैं जो तुम्हारे

477
00:33:20,560 --> 00:33:24,640
फॉलोअर्स हैं जो तुमसे सीख रहे हैं तुम उनसे सीख रहे हो कि कौन

478
00:33:24,640 --> 00:33:28,800
से अंश का जवाब देना है कौन से अंश का बोलना है कौन से अंश का नहीं बोलना

479
00:33:28,800 --> 00:33:33,040
है क्यों भाई तुम उनको सिखा सिखाते हो कि वो तुम्हें सिखाते हैं।

480
00:33:33,040 --> 00:33:37,120
चलो भैया जो स्थाई

481
00:33:37,120 --> 00:33:41,120
पुलाक है वो कहता है कि चावल के तने जो पके हैं उसको परीक्षण करने के लिए कुछ सैंपल पर्याप्त है। तो हमने जो वीडियो

482
00:33:41,120 --> 00:33:45,280
का सिंहावलोकन किया था उससे हम विषय का बोर हो गया कि क्या कहना चाहते हैं तो पहला और दूसरा वीडियो

483
00:33:45,280 --> 00:33:49,360
तो इन्होंने शिवश नारायण द्विवेदी धर्मरक्षक बनकर नहीं अपितु शिवश नारायण

484
00:33:49,360 --> 00:33:53,360
द्विवेदी अधिवक्ता बनकर निर्गत हमने इस विषय पर कहा कि भाई आप जो बातें कह रहे हैं और जिस

485
00:33:53,360 --> 00:33:57,360
प्रकार के बचाव ये देखिए ये एक अंतर है ये अंतर है जिसको

486
00:33:57,360 --> 00:34:01,760
लड़ना है पॉज करिए पॉज करिए जिसको लड़ना है

487
00:34:01,760 --> 00:34:05,920
जिसको कोई धर्म स्थापना से मतलब नहीं है जिसको कोई शांति वार्ता

488
00:34:05,920 --> 00:34:10,160
से मतलब नहीं है जिसको लड़ना है वो क्या करता है आगे

489
00:34:10,160 --> 00:34:15,960
से आगे ऐसी चीजें करता है जिससे सामने वाला इंस्टगेट हो

490
00:34:15,960 --> 00:34:21,960
भाई उपाधि दी

491
00:34:30,040 --> 00:34:34,400
क्या है जो ये कह रहा है अभी अगर हम कह दे

492
00:34:34,400 --> 00:34:40,240
कि तुम कचरा बिनने वाले के रूप में थे तो क्या मानोगे नहीं मानोगे

493
00:34:40,240 --> 00:34:44,320
तो फिर क्यों दे रहे हो उपाधि? क्योंकि तुम्हें इंस्टिगेट करना है। तुम्हें

494
00:34:44,320 --> 00:34:49,240
मतलब नहीं है सामंजस्य से। तुम्हें मतलब नहीं है धर्म रक्षा

495
00:34:49,240 --> 00:34:53,360
से। है ना? उससे मतलब नहीं है। कैरियर बिल्डिंग से मतलब

496
00:34:53,360 --> 00:34:57,440
है। तभी तो लोगों कहते फूल फिर रहे हो कि मैं तुम्हारा करियर

497
00:34:57,440 --> 00:35:01,880
खा जाऊंगा। मैं इसका ये कर दूंगा, वो कर दूंगा। हम

498
00:35:01,880 --> 00:35:06,080
चलो प्ले करो इनका। लुप्त संप्रदाय

499
00:35:06,080 --> 00:35:10,320
के आचार्य। में बहुत सारे लोगों को निमंत्रण देते हैं कि लाइव आ जाओ इस पर चर्चा कर

500
00:35:10,320 --> 00:35:14,320
लाइव आ जाओ इस पर चर्चा कर लेते हैं। तो हमने एक प्रस्ताव रखा था जिसके विषय में हमने लिखित रूप से और वीडियो बनाकर

501
00:35:14,320 --> 00:35:18,400
मौखिक रूप से भी कहा कि हम लाइव आएंगे तो इन्होंने अस्वीकार कर दिया। अब जब अस्वीकार किया तो इन्होंने

502
00:35:18,400 --> 00:35:22,880
क्या लिखा था जरा मैं उसको देख लूं एक बार थोड़ा सा मुझे समय दीजिएगा

503
00:35:22,880 --> 00:35:26,960
सनातन धर्म का इनका चैनल है सर्वशक्तिमान धर्म इस चैनल पर भी इन्होंने स्पष्टीकरण दिया था और

504
00:35:26,960 --> 00:35:31,040
दूसरा एक इन्होंने किया था आह्वान वाला जिनका चैनल है जो इनका छोटा चैनल है उस पर भी किया था तो पोस्ट मैं जरा निकाल लू

505
00:35:31,040 --> 00:35:37,040
इनके और

506
00:35:37,200 --> 00:35:41,360
कहां गई पोस्ट? एक दिन पहले वाला जो है इन्होंने लिखा है उसको मैं पढ़ के सुना देता हूं जैसा कि आप लोग पढ़ भी चुके होंगे

507
00:35:41,360 --> 00:35:45,720
लेकिन हम विषय को साबित कर दें। अब देखिए इनके ये समर्थक पहले

508
00:35:45,720 --> 00:35:50,240
बता बता पॉज करो पॉज करो। ये हैं आपके दोगले

509
00:35:50,240 --> 00:35:55,040
समर्थक। इनसे इनसे ही आप वो चावल के दाने ले रहे हो ना।

510
00:35:55,040 --> 00:35:59,200
अभी कल तक यही समर्थक कह रहे थे कि लाइव क्यों नहीं कर रहे? लाइव से क्यों डर रहे हो?

511
00:35:59,200 --> 00:36:03,360
अब जब आज लाइव के लिए कह दिया तो इन्होंने तुरंत पलटी मारी।

512
00:36:03,360 --> 00:36:07,520
यह है आपके दोगले समर्थक। इनके ऊपर डिपेंड करके आप

513
00:36:07,520 --> 00:36:12,160
किसी मनुवादी से भिड़ने जा रहे हो। हम

514
00:36:12,160 --> 00:36:16,400
आप किसी मनुवादी से भिड़ने जा रहे हो। किसी भेद में प्रमाण बुद्धि रखने वाले बुद्धि

515
00:36:16,400 --> 00:36:21,040
रखने रखने वाले से लड़ने जा रहे हो। ऐसे सिद्धांत

516
00:36:21,040 --> 00:36:25,120
हीन दिशाहीन लोगों के आधार पे आप चल रहे हो। वो आपको चला रहे हैं। आप नहीं

517
00:36:25,120 --> 00:36:29,120
चल रहे हो। क्योंकि आपने तो पूरे वीडियो देखे ही नहीं। आपने तो समझा ही नहीं शिवश कहना

518
00:36:29,120 --> 00:36:33,120
क्या चाहता है। क्या नहीं वो क्या करना चाहता है। आपने खुद अपनी कोई रिसर्च ही नहीं

519
00:36:33,120 --> 00:36:37,360
की। आपको जो लाके दिखा दिया गया उसके ऊपर आप बन गए कि अरे ये क्या हुआ जयकार

520
00:36:37,360 --> 00:36:41,880
शिखरे के ईगो को हल्ट कर दिया मेरे ऊपर वीडियो बना

521
00:36:41,880 --> 00:36:47,640
दिया तुम्हारा चेहरा लगाया था क्या तुम्हारा नाम लिखा था क्या

522
00:36:47,640 --> 00:36:51,760
उसमें और तुम जब किसी स्त्री के बारे में अनावश्यक

523
00:36:51,760 --> 00:36:52,320
निराधार

524
00:36:52,320 --> 00:36:56,880
प्रलाप करोगे तो क्या उसका तुम्हारा बिना नाम लिए लिया

525
00:36:56,880 --> 00:37:01,040
बिना नाम लेते हुए भी निराकरण प्रस्तुत नहीं कर सकता कोई

526
00:37:01,040 --> 00:37:05,360
उसमें भी तुम्हारा ईगो हर्ट हम इतने

527
00:37:05,360 --> 00:37:11,360
बड़े फन्ने खाओ क्या बात है भाई क्या बात है

528
00:37:13,280 --> 00:37:18,480
लोगों को कहते घूम रहे हो कि मैं शिवश का करियर खा जाऊंगा हम

529
00:37:18,480 --> 00:37:22,480
यही तुम्हारे अंदर की मंशा थी और ये जो कल तुम जो व्यक्तिगत हुए

530
00:37:22,480 --> 00:37:26,480
और जो आज तुमने इसका उसका शुरू किया यही तुम्हारा वास्तविक

531
00:37:26,480 --> 00:37:30,600
स्वरूप है भगवतानंद वो जो तुम्हारा वो जो

532
00:37:30,600 --> 00:37:35,120
मरदित वो चरित्र चित्रण है ना वो दोगलापन

533
00:37:35,120 --> 00:37:39,200
है कुछ देर के लिए है वो बस तुम्हारा वास्तविक

534
00:37:39,200 --> 00:37:43,360
चरित्र चित्रण वही है जो तुम्हारे एफबी एफबी अकाउंट से प्राप्त

535
00:37:43,360 --> 00:37:47,440
होता है जिसमें तुम मातृशक्तियों के लिए

536
00:37:47,440 --> 00:37:53,440
एक तरफ से गालियों की बौछार करते दिख नहीं रहे हो

537
00:37:56,600 --> 00:38:00,880
क्या लेता हूं आपको मैं Facebook

538
00:38:00,880 --> 00:38:05,960
निकाल लेता हूं अपना

539
00:38:05,960 --> 00:38:10,240
और अच्छा हां Facebook निकाला तो मुझे एक बात याद आ गई बता ही देता हूं शुभ समाचार है

540
00:38:10,240 --> 00:38:14,240
हमारे ऊपर एक और लीगल नोटिस जारी हुआ है तो क्या बड़ी देरी कर रही हो मैं तो सोच रहा था कि

541
00:38:14,240 --> 00:38:18,240
मैंने अपने पिताजी को बताया कि भाई लीगल नोटिस जारी हुआ है पिताजी तो पिताजी डांट रहे ऐसा थर्ड क्लास वीडियो बनाया था कि अभी

542
00:38:18,240 --> 00:38:22,400
तक एक ही जारी हुआ है वीडियो बना रहे हैं रश को जारी होने चाहिए थे क्या

543
00:38:22,400 --> 00:38:26,560
थर्ड क्लास वीडियो बना रहे हो कि लोग एक ही लीगल नोटिस जारी कर पा रहे हैं वो भी लेट से तो मैंने कहा कीजिए पिताजी आ जाके

544
00:38:26,560 --> 00:38:30,560
प्रयास करेंगे कि कुछ ऐसा ठोस वीडियो बनाया जाए कि तीसरी संपर्क में तो चले

545
00:38:30,560 --> 00:38:33,040
पॉज करो।

546
00:38:33,040 --> 00:38:37,280
अब यह यहां पर कहने की क्या आवश्यकता है पता है?

547
00:38:37,280 --> 00:38:41,520
कुछ नहीं। केवल वर्चस्व केवल वर्चस्व

548
00:38:41,520 --> 00:38:45,520
है। सामने वाला सौहार्दपूर्ण तरीके से बात

549
00:38:45,520 --> 00:38:49,600
कर रहा है। विनम्रता से बात कर रहा है। मगर इनको दिखाई नहीं दे

550
00:38:49,600 --> 00:38:53,840
रहा है। क्योंकि इन्होंने पूरे वीडियो देखे नहीं। तो मैं तो बेनिफिट ऑफ डाउट दूंगा।

551
00:38:53,840 --> 00:38:58,240
मगर ऐसी मूर्खता क्यों कर रहे हो? जब तुम अपने आप को किसी महान संप्रदाय

552
00:38:58,240 --> 00:39:02,400
के निग्रह करने वाले आचार्य कह रहे हो भगवतानंद तो फिर

553
00:39:02,400 --> 00:39:06,800
ऐसी मूर्खता क्यों कर रहे हो कि जो तुम्हारे अनुगत हैं उनके अनुगत

554
00:39:06,800 --> 00:39:11,040
हो के तुम संसार को देख रहे हो लोगों को देख रहे हो उनके वीडियोस देख रहे हो क्यों

555
00:39:11,040 --> 00:39:12,680
कर रहे हो ऐसी

556
00:39:12,680 --> 00:39:16,800
मूर्खता और करोगे तो फिर भना पड़ेगा कोई नहीं

557
00:39:16,800 --> 00:39:21,160
भिड़ा नहीं भिड़ा नहीं भिड़ा सर फिरा कोई सर फिरा मिलेगा भी

558
00:39:21,160 --> 00:39:25,920
फिर चलो भाई

559
00:39:25,920 --> 00:39:30,080
नोटिस आया कहां से आया अभिषेक द्विवेदी नाम के कोई अधिवक्ता है प्रयागराज में वहां से उन्होंने

560
00:39:30,080 --> 00:39:34,080
भेजा है किसके बिहाफ पे किसके ओर से विजयश्री और प्रीदम कपूर से और

561
00:39:34,080 --> 00:39:38,240
उसमें जो बातें कही गई है मुख्य बात है एक करोड़ मानहानि का है ना मनी डिगिंग का काम है और कुछ नहीं एक करोड़

562
00:39:38,240 --> 00:39:42,240
मानहानि का इन्होंने ठोका है दावा ₹1 करोड़ मानहानि का दावा मतलब कि अब जीवन भर के लिए तो करियर

563
00:39:42,240 --> 00:39:46,320
बन गया ना खैर कोई बात नहीं उसका जो विषय है वो लीगल तरीके से जो भी फॉर्मेट में लाए हैं

564
00:39:46,320 --> 00:39:50,320
उसको हमने ऐसे पढ़ लिया है ऊपर ऊपर से लेकिन जो उसको गहराई से पढ़ना समझना हो प्रति तैयार करना

565
00:39:50,320 --> 00:39:54,320
ये सब जब हो जाएगा तो फिर हम उसको सार्वजनिक कर देंगे जैसा कि हम पहले करते रहे हैं बहुत से मामलों में जो हिंदी हिंदी नोटिस आती है उसको

566
00:39:54,320 --> 00:39:58,480
हम हिंदी में कर देते है जो अंग्रेजी में आती है उसको अंग्रेजी में देते है अभी तक संस्कृत में किसी ने भेजा नहीं है तो संस्कृत में नहीं दिया है तो वो

567
00:39:58,480 --> 00:40:02,480
भी हम साल कर लेंगे कुछ दिनों के अंदर ही जैसे ही हम उसको पढ़ते है समझते है फिर उस पर हम लेखन करने के लिए समय

568
00:40:02,480 --> 00:40:06,720
निकालेंगे फिर उत्तर देंगे खैर तो मैं अपना फेस बुक निकाल चुका हूं और मैंने क्या लिखा था शिवश

569
00:40:06,720 --> 00:40:11,400
नारायण द्विवेदी को यदि अनुकूलता हो तो हम उनके साथ कल साम 5:00 बजे जो कि बीत

570
00:40:11,400 --> 00:40:15,440
गया लिखित समय भविष्य काल था अभी वर्तमान में वाचिक समय भूतल हो चुका है साम 5:00

571
00:40:15,440 --> 00:40:19,600
बजे से पहले तक उनके YouTube चैनल पर लाइव आकर उनके साथ वर्तमान विषय पर चर्चा कर सकते है इस ग्रह के साथ की उसकी वीडियो

572
00:40:19,600 --> 00:40:23,600
भी अपने चैनल से डिलीट या प्राइवेट नहीं करेंगे तो हमने ये शर्त रखी थी ग्रह मतलब शर्त

573
00:40:23,600 --> 00:40:27,600
ही मान लीजिए शर्त का पर्यायवाची शब्द है गह दाव लगाने को भी गला कहा जाता है लेकिन लेकिन लेकिन लेकिन लेकिन गलत से कहते है शर्त इस शर्त के

574
00:40:27,600 --> 00:40:28,100
साथ

575
00:40:27,920 --> 00:40:31,920
की उस वीडियो को प्राइवेट नहीं करेंगे जो हम गलत रखेंगे या जो हम चर्चा करेंगे और डिलीट भी

576
00:40:31,920 --> 00:40:35,920
नहीं करेंगे थोड़े मच्छर है लेकिन ठीक है और इस प्रसम नशित भगवान का निर्देश है की उड़ते हुए

577
00:40:35,920 --> 00:40:40,000
मच्छर को भी नहीं मारना चाहिए संत पुराण में दोष बताया है खैर और मारना भी तो मच्छर को मार क्या होगा

578
00:40:40,000 --> 00:40:44,000
मच्छर मारने से कहीं से बनेगा नहीं ना तो इन्होने अपने द्विवेदी जी

579
00:40:44,000 --> 00:40:48,000
ने मेरे इस बात पर जो लिखा है वो मैं पढ़ के सुना देता हूं ये कहते है जैसा की सर्वता की निग्रचार ने हमारे साथ चर्चा

580
00:40:48,000 --> 00:40:52,240
का प्रस्ताव रखा है हम उनकी ओर से किए गए इस सकारात्मक प्रयास की प्रशंसा करते है परंतु इसके साथ ही साथ

581
00:40:52,240 --> 00:40:56,400
वह यह भी जानते वह मतलब यह भी जानते हैं कि युद्ध प्रतिस्पर्धा द्वंद

582
00:40:56,400 --> 00:41:00,480
हालाकि द्वंद नहीं लिखा है इन्होने द्वंद लिखा है लेकिन ठीक है वो डिजिटल टाइप्सिंग्स है तो डिजिटल टाइपिंग में कई बार क्या होता है

583
00:41:00,480 --> 00:41:04,640
की टंकल दोष हो जाता है तो कहते है की आदि कारणों को छोड़कर उनके साथ एक निश्चित

584
00:41:04,640 --> 00:41:08,640
दूरी बनाए रखना भी हमारा धर्म है फिर भी जिन अत्यंत संवेदनशील विषयों पर उन्होंने चर्चा का प्रस्ताव रखा

585
00:41:08,640 --> 00:41:12,640
है उन विषयों पर सार्वजनिक चर्चा ना होकर व्यक्तिगत रूप से चर्चा होना ही नीतिपूर्ण एवं अपेक्षित भी है क्योंकि हम

586
00:41:12,640 --> 00:41:16,720
अपनी ओर से अधर्मियों को किंचित माध्यम की सामग्री प्रदान करना उचित नहीं समझते है इन्होंने लिखा अब हम इस

587
00:41:16,720 --> 00:41:20,880
पोस्ट का पोस्टमार्टम करेंगे क्या हुआ कि इन्होंने क्या

588
00:41:20,880 --> 00:41:24,880
लिखा पहले अन प्रशंसा करते हैं कि आप लाइव आना चाहते हैं लेकिन हम आपकी इस को स्वीकार

589
00:41:24,880 --> 00:41:28,960
नहीं करेंगे। क्यों नहीं करेंगे? तो पहले इन्होंने बताया कि उनके साथ एक निश्चित दूरी बनाए रखना भी हमारा

590
00:41:28,960 --> 00:41:32,960
धर्म है। मेरे साथ वो एक निश्चित दूरी बनाए रखना चाहते हैं। इन्होंने पहले ही मन स्पष्ट कर दिया कि मेरे साथ लाइव नहीं आना चाहते।

591
00:41:32,960 --> 00:41:37,480
मुझे लोगों ने बताया इन्होंने उत्तर दिया कि गुरु

592
00:41:37,480 --> 00:41:41,560
निंद निश्चित दूरी तुम्हारे साथ क्यों क्यों ना बनाई जाए ये बताओ

593
00:41:41,560 --> 00:41:43,040
ना। निश्चित

594
00:41:43,040 --> 00:41:47,120
दूरी बनाने वाले तुमने काम किए ना। तुमने

595
00:41:47,120 --> 00:41:51,200
आचार्यों की निंदा की ना। तुमने उनका शास्त्रोक्त

596
00:41:51,200 --> 00:41:55,280
खंडन नहीं किया। तुमने उनकी निंदा की। तू तड़ाक

597
00:41:55,280 --> 00:42:00,000
में बात की। हल्के शब्दों में बात की। फिर तुम कहते हो तुम्हारी वाणी बहुत अच्छी होनी चाहिए।

598
00:42:00,000 --> 00:42:04,320
श्री राम की वाणी ऐसी थी क्या? ऐसी वाणी

599
00:42:04,320 --> 00:42:09,040
थी श्री राम की जैसी तुम्हारी है।

600
00:42:09,040 --> 00:42:13,480
राम से भी ऊपर हो गए

601
00:42:13,480 --> 00:42:17,760
तुम। तो तुमने ऐसे कार्य किए भगवतानंद

602
00:42:17,760 --> 00:42:21,840
जो तुम्हारे से निश्चित दूरी बनाने के लिए मेरे पास

603
00:42:21,840 --> 00:42:26,000
पर्याप्त कारण दिए तुमने और वो विषय

604
00:42:26,000 --> 00:42:30,080
आएगा और मैं इधरउधर से बहुत सारी चीजें इकट्ठा करके तुम्हें

605
00:42:30,080 --> 00:42:34,320
दे मारूंगा जिसमें कि तुम्हें पता चलेगा कि तुमने

606
00:42:34,320 --> 00:42:38,560
कितनी सारी चीजें की है। तो निश्चित दूरी बनाना

607
00:42:38,560 --> 00:42:43,360
बिल्कुल सही है। क्योंकि तुम्हारे साथ सौहार्दपूर्ण चर्चा हो ही नहीं पाएगी।

608
00:42:43,360 --> 00:42:47,680
तुमने की है आचार्य निंदा और हम तुम्हें दे सम्मान। इसलिए

609
00:42:47,680 --> 00:42:52,640
दूर रहना ठीक था। तो हमने ये लाइन लिखी तो क्या गलत लिखा?

610
00:42:52,640 --> 00:42:56,640
शास्त्रों में वचन है कि गुरुदेव की निंदा करने वाले की

611
00:42:56,640 --> 00:42:58,240
जीवा ना काट सको

612
00:42:58,240 --> 00:43:02,960
तो उसे वहां से भगा दो। भगा ना सको तो

613
00:43:02,960 --> 00:43:07,200
खुद वहां से चले आओ। तो हमने तो वही किया ना। निश्चित

614
00:43:07,200 --> 00:43:11,120
दूरी और वो तुम्हारे गुरु नहीं है। तुम्हारे गुरु हो

615
00:43:11,120 --> 00:43:15,200
या ना हो। भले ही तुमने उनसे जाकर के ज्ञान प्राप्त किया हो या ना किया

616
00:43:15,200 --> 00:43:15,840
हो वो

617
00:43:15,840 --> 00:43:20,320
नहीं है मगर हमारे तो हैं और तुमने

618
00:43:20,320 --> 00:43:24,320
केवल बात वही आएगी बार-बार कि शास्त्र का ही खंडन नहीं किया है

619
00:43:24,320 --> 00:43:29,120
कि किसी शास्त्रों विषय में तुमने अपना पक्ष रख दिया हो तुमने

620
00:43:29,120 --> 00:43:33,120
उनको व्यक्तिगत टिप्पणियां की है। अनगिनत की है। अनेकानेक जगह

621
00:43:33,120 --> 00:43:37,200
की है। चलिए

622
00:43:37,200 --> 00:43:43,200
चलाइए।

623
00:43:43,360 --> 00:43:47,440
कोई तकनीकी वो है तब तक हम

624
00:43:47,440 --> 00:43:53,440
यहां पे

625
00:43:55,640 --> 00:43:59,920
जो आप किसे क्या देखते हैं डजंट मैटर

626
00:43:59,920 --> 00:44:04,320
आपको वेद मंत्र कहां से प्राप्त हुए यह मैटर करता है। ठीक है?

627
00:44:04,320 --> 00:44:08,400
जिनसे प्राप्त हुए उनका खंडन करते हुए उनका

628
00:44:08,400 --> 00:44:12,960
विरोध करते हुए आप कुछ भी बोलेंगे तो अवैदिक होंगे।

629
00:44:12,960 --> 00:44:17,360
यही पक्ष वो भी कहते हैं आर्य समाज के हमारे लिए सबसे बड़े वैदिक

630
00:44:17,360 --> 00:44:20,880
वही है।

631
00:44:20,880 --> 00:44:26,280
ठीक है? और क्या

632
00:44:26,280 --> 00:44:30,480
है? नहीं आएंगे। ये तो बहाना है केवल। इन्होंने अपनी मनुष्य को

633
00:44:30,480 --> 00:44:34,560
स्पष्ट कर दी है कि युद्ध प्रतिस्पर्धा द्व अधिकारों को छोड़कर उनके साथ और

634
00:44:34,560 --> 00:44:38,800
मेरे साथ एक निश्चित दूरी बनाए रखा हमारा करिए करिए आपको

635
00:44:38,800 --> 00:44:42,960
ये अंतर होता है ये अंतर होता

636
00:44:42,960 --> 00:44:46,960
है धर्म की चिंता करने वाले को जिसको वैमनसता

637
00:44:46,960 --> 00:44:52,120
नहीं फैलानी होती है वो अपना निर्णय नहीं देता

638
00:44:52,120 --> 00:44:56,400
है आप इसको सिद्ध कर लोगे कि ये बहाना था जो

639
00:44:56,400 --> 00:45:00,480
आपने वक्तव्य दिया वही बात बोलो जिसको सिद्ध करो मत बोलो

640
00:45:00,480 --> 00:45:04,640
ऐसी बातें इसी के पीछे पड़ जाऊंगा तो सिद्ध

641
00:45:04,640 --> 00:45:08,640
नहीं कर पाओगे इसको कि भैया वो जो है क्या कहते

642
00:45:08,640 --> 00:45:11,520
हैं वो तो बहाना था

643
00:45:11,520 --> 00:45:15,840
बहाना नहीं था बस इस तरह की स्थितियों से बचना चाहते

644
00:45:15,840 --> 00:45:19,840
थे कि तुम्हारे साथ में

645
00:45:19,840 --> 00:45:24,080
इस तरह के दृश्यों को हम नहीं लाना चाहते थे समाज के सामने और जो

646
00:45:24,080 --> 00:45:30,080
तुम अभी आगे बोलो मैं उत्तर दूंगा चलो चलो आओ

647
00:45:30,640 --> 00:45:34,720
से निश्चित दूरी बनाए रखने में कोई रुचि नहीं है। तब धर्म आपको नहीं याद आता। आपको या रामपाल

648
00:45:34,720 --> 00:45:38,800
वालों के साथ निश्चित दूरी नहीं बनाए रखनी। आपको एक वर्णाश्रम समर्थक अद्वैत मतावलंबी

649
00:45:38,800 --> 00:45:43,560
व्यक्ति से निश्चित दूरी बनाए रखने की क्या व्यवस्था है? फोकस

650
00:45:43,560 --> 00:45:48,000
करो। जो भी आर्य समाजी हमारी जानकारी में व्यक्तिगत

651
00:45:48,000 --> 00:45:52,040
रूप से कोई गाली गलौज कर देता है। यही तो दिक्कत है

652
00:45:52,040 --> 00:45:56,160
तुम्हारी। यही समस्या यही है शुरू से।

653
00:45:56,160 --> 00:46:00,240
हम और तुम एक साथ हो सकते थे। मगर दिक्कत यह है कि तुम्हारे

654
00:46:00,240 --> 00:46:04,560
अंदर जो तुम्हारा उबाल है बलबली है करियर बनाने की

655
00:46:04,560 --> 00:46:08,640
या अपना जो लुप्त संप्रदाय है उसमें अपने आप को

656
00:46:08,640 --> 00:46:13,120
ख्यापित करने की अपने आप को प्रामाणिक सिद्ध करने की इतनी जल्दी है तुम्हें

657
00:46:13,120 --> 00:46:17,920
कि तुम्हें कुछ भी क्या कहते हैं तथ्यात्मक

658
00:46:17,920 --> 00:46:22,400
विवेचना करनी ही नहीं है जाके

659
00:46:22,400 --> 00:46:26,640
देखो हमारे चैनल पर मना किया है हमने जिस

660
00:46:26,640 --> 00:46:30,720
किसी आर्य समाजी ने व्यक्तिगत रूप से कोई अश्लील

661
00:46:30,720 --> 00:46:34,800
भाषा तू तड़ाक वाली बातें कर दी। हमने उसको दरकिनार किया। चाहे वो स्पॉन

662
00:46:34,800 --> 00:46:38,960
का था और चाहे वो आर्य समाज का था। अरे कम से कम अपने

663
00:46:38,960 --> 00:46:44,760
समर्थकों से ही यहां पर पूछ लेते क्योंकि जो तुम्हारे समर्थक है वो हमारे भी समर्थक

664
00:46:44,760 --> 00:46:48,960
हैं। पूछ लेते कि क्या उसने कभी

665
00:46:48,960 --> 00:46:53,160
ऐसा और भी कई ऐसी गलतफहमियां जो तुम पाले बैठे हो। भगवत

666
00:46:53,160 --> 00:46:57,200
आनंद बहुत सी गलतफहमियां है जो तुम्हारे वीडियो में तुमने

667
00:46:57,200 --> 00:47:01,280
पाली हुई है। ऐसा नहीं है। जिस किसी व्यक्ति

668
00:47:01,280 --> 00:47:05,280
ने शास्त्र की बात ना करते हुए व्यक्तिगत टिप्पणियां की

669
00:47:05,280 --> 00:47:09,600
और उसमें भी वो एक मर्यादा से बाहर गया तो हमने उससे

670
00:47:09,600 --> 00:47:13,960
बात करना बंद कर दिया। उससे दूरी बना ली। जाके

671
00:47:13,960 --> 00:47:18,000
देखो। जब कृतेश पटेल की ओर से वह जो ऋषिवाच नाम का

672
00:47:18,000 --> 00:47:22,560
चैनल चलता है। है ना?

673
00:47:22,560 --> 00:47:27,040
जब उसकी ओर से हमको बुलाया गया था कि

674
00:47:27,040 --> 00:47:31,120
यहां आ जाओ गुजरात आ जाओ यह है वह है और उन्होंने बता दिया था कि जो

675
00:47:31,120 --> 00:47:35,520
है हमारी संस्था का एक मेंबर है वो ऋषिवाच

676
00:47:35,520 --> 00:47:39,920
तो हमने कह दिया था पहले आप अपनी संस्था की ओर से लिखित में माफी मांगो जाके

677
00:47:39,920 --> 00:47:41,680
देखो ना क्यों नहीं

678
00:47:41,680 --> 00:47:47,680
देखना चाहते हो समय नहीं है कोई बात नहीं तो बोलो

679
00:47:47,880 --> 00:47:52,480
मत भेड़ चाल मत चलो ना निग्रह

680
00:47:52,480 --> 00:47:56,640
वो तुम पर कर रहे हैं कि तुम उन पर कर रहे हो।

681
00:47:56,640 --> 00:48:01,120
तुम तो फिर अनिग्रहचार्य हो गए। तुम्हारे ऊपर तो कोई और निग्रह

682
00:48:01,120 --> 00:48:05,120
कर रहा है। कहां से तुम निग्रहचार्य हो रहे हो? वो लोग तुमको कंट्रोल कर रहे

683
00:48:05,120 --> 00:48:09,120
हैं। वो जितनी दुनिया तुम्हें दिखा रहे हैं उतनी दुनिया तुम देख रहे हो। वो जितनी खबरें

684
00:48:09,120 --> 00:48:13,520
तुम्हें दिखा रहे हैं उतनी खबरें तुम देख रहे हो। पूछ लेते

685
00:48:13,520 --> 00:48:17,600
कि ऐसा तो नहीं शिवश ने अन्य को भी मना किया है। मना किया है। इस

686
00:48:17,600 --> 00:48:21,760
वालों को भी किया है। अभद्र टिप्पणियां अभद्र आचरण

687
00:48:21,760 --> 00:48:26,040
करने वाले करने पर इस वालों से भी निश्चित दूरी बनाई है।

688
00:48:26,040 --> 00:48:30,240
और इनसे भी निश्चित दूरी बनाई है। आर समाजियों से भी और जो जो

689
00:48:30,240 --> 00:48:34,320
करता जाएगा उन सब से निश्चित दूरी बनाएंगे। क्योंकि जब

690
00:48:34,320 --> 00:48:39,280
कोई आपकी मां को गाली दे देता है उसके प्रति अवमानना

691
00:48:39,280 --> 00:48:43,360
आपत्तिजनक तरीके से बोलता है तो उसके साथ फिर आप चर्चा

692
00:48:43,360 --> 00:48:47,520
नहीं करते दोद हाथ करते हैं तो हमें ना आपके साथ

693
00:48:47,520 --> 00:48:51,520
तो क्योंकि आपने ऐसा आपत्तिजनक आचरण किया तो हम आपके साथ चर्चा

694
00:48:51,520 --> 00:48:56,400
नहीं करनी थी और दोद हाथ हमें करने नहीं है आपके साथ

695
00:48:56,400 --> 00:48:56,900
वही

696
00:48:56,800 --> 00:49:00,960
कारण है दूसरा अब इसमें तुम ये सोच लो कि वो कायर है तो तुम

697
00:49:00,960 --> 00:49:05,120
ऐसा सोच सकते हो स्वतंत्र ंत्र हो अपना निर्णय लेने के लिए। मगर यदि हम

698
00:49:05,120 --> 00:49:09,120
आपके साथ चर्चा करने से बच रहे हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हमें

699
00:49:09,120 --> 00:49:13,360
आपसे डर लगता है। जिनको धरातल पर कार्य

700
00:49:13,360 --> 00:49:17,680
करने होते हैं उनको यह सब सोचना पड़ता है।

701
00:49:17,680 --> 00:49:21,760
कि निग्रचार्य ने निग्रचार के नाम से जो जाना जा रहा है

702
00:49:21,760 --> 00:49:25,760
जो भगवत आनंद नाम का व्यक्ति उसने उनहीं लोगों का वो किया

703
00:49:25,760 --> 00:49:29,760
है। प्रतिकार जिनका मैं भी करता हूं। तो हम लोग एक होकर के प्रतिकार

704
00:49:29,760 --> 00:49:34,080
करें भले ही दूर रहे। हम लोग एक दूसरे की टांगी खींचने

705
00:49:34,080 --> 00:49:38,240
से बचे जिससे कि उनको बल मिले

706
00:49:38,240 --> 00:49:42,400
सामने वाले को जिससे हमारा प्रतिकार है पुरजोर

707
00:49:42,400 --> 00:49:46,280
और फिर तुम यहां कह क्या रहे हो

708
00:49:46,280 --> 00:49:50,560
अद्वैतानुगामी तुमने तो अपनी साइट में लिख रखा है कि मैं अव्यक्ता

709
00:49:50,560 --> 00:49:55,720
द्वैतवादी हूं क्यों भाई अब

710
00:49:55,720 --> 00:50:01,120
तुम अपनी बात को रखने के लिए कितना दोगलापन है भाई यह

711
00:50:01,120 --> 00:50:05,200
अगर तुम अद्वैतवादी हो तो अद्वैत का ज्ञान कैसे आ रहा है तुम्हारे पास?

712
00:50:05,200 --> 00:50:09,680
कौन से ब्रह्म सूत्र आए तुम्हारे पास? कौन से भाष्य तुम्हारे पास?

713
00:50:09,680 --> 00:50:12,160
अद्वैत वाला

714
00:50:12,160 --> 00:50:16,480
कहां है भाष्य आपके? प्रस्थान त्रय के भाष्य कहां है आपके?

715
00:50:16,480 --> 00:50:20,640
क्योंकि आप तो अव्यक्तान वो द्वैतवादी हो ना।

716
00:50:20,640 --> 00:50:24,800
कहां है? और दूसरी बात यहां झूठ क्यों बोल रहे हो? कि

717
00:50:24,800 --> 00:50:28,880
हम अद्वैत वाले हैं। तो यह

718
00:50:28,880 --> 00:50:33,040
तो कुछ ठीक नहीं है ना। आपने अपनी वेबसाइट में कुछ और लिख रखा है।

719
00:50:33,040 --> 00:50:37,360
इनकी वेबसाइट खोल के दिख सकती हो तो दिखा दीजिए। ऑपरेटर मोड है। फ्रंट

720
00:50:37,360 --> 00:50:41,360
पेज पे ही लिखा है। अद्वैत गामी बोल रहे हो।

721
00:50:41,360 --> 00:50:45,360
समय पड़ने पर कुछ भी बोलने लगो। और अगर यह कहो कि नहीं नहीं उसमें अद्वैत

722
00:50:45,360 --> 00:50:49,600
ही है तो फिर इस तरीके से तो विशिष्टाद्वैत भी अलग नहीं है। सुद्धा द्वैत

723
00:50:49,600 --> 00:50:53,680
भी अलग नहीं है। है ना? द्वैताद्वत भी अलग नहीं है। कुछ भी अलग

724
00:50:53,680 --> 00:50:58,760
है ही नहीं। सब अद्वैत है। तो फिर क्यों परंपराएं अलग-अलग

725
00:50:58,760 --> 00:51:02,880
है? तो एक तो वो बात अलग रही कि तुम्हारा तुम्हारी जो

726
00:51:02,880 --> 00:51:06,960
परंपरा है आपका जो ज्ञान है अद्वैत का वो कहां से स्फुटित हो रहा है? आपको

727
00:51:06,960 --> 00:51:11,200
कैसे प्राप्त हो रहा है भैया? है ना? वो बताएं अपनी परंपरा।

728
00:51:11,200 --> 00:51:15,520
कौन से प्रस्थान के भाष्य आपके अवक्ता अव्यक्ता

729
00:51:15,520 --> 00:51:21,520
द्वैत वाले चलिए भाई प्ले करिए।

730
00:51:21,520 --> 00:51:25,600
कारण है कि आप मुझसे निश्चित बुरी बनाए रखना चाहते। यही आपने स्पष्ट कर दिया कि आप लाइव नहीं आना चाहते। तो वो बहाना बाद में क्यों

731
00:51:25,600 --> 00:51:29,600
बना रहे हैं कि तुमने कॉल रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की इसलिए हम लाइव नहीं आना चाहते हैं। जनता

732
00:51:29,600 --> 00:51:34,600
पॉज करो। अरे पॉज करो पॉज करो। ये भी तुम्हारी

733
00:51:34,600 --> 00:51:38,720
जल्दबाजी। ये भी तुम्हारी फवड़ता। ये भी तुम्हारी

734
00:51:38,720 --> 00:51:42,720
जल्दबाजी। कुछ देखना नहीं है। हमने बाद

735
00:51:42,720 --> 00:51:46,800
में जब तुमने कॉल रिकॉर्डिंग वाला वीडियो डाला तो यह नहीं कहा कि हम इसलिए नहीं

736
00:51:46,800 --> 00:51:51,680
आ रहे हैं क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग तुमने डाल दी है। ध्यान से देखो।

737
00:51:51,680 --> 00:51:55,760
हमने तुम्हारे उत्तर में ये कहा था कि जिस विषय पर फिर भी तुम चर्चा करना चाह

738
00:51:55,760 --> 00:51:59,760
रहे हो तो उसके लिए व्यक्तिगत चर्चा अपेक्षित है। क्यों नहीं कर सकते

739
00:51:59,760 --> 00:52:03,840
तुम व्यक्तिगत चर्चा? भाई तुम्हें मटकी चिंता है कि तुम्हें शो दिखाना

740
00:52:03,840 --> 00:52:08,640
है लोगों को। मटकी फिक्र है ना तो गोष्ठी क्यों नहीं कर सकते तुम?

741
00:52:08,640 --> 00:52:12,880
गोष्ठी गोष्ठी हमसे आकर के करने में क्या दिक्कत हमें बता देते हम आते

742
00:52:12,880 --> 00:52:17,200
हमने व्यक्तिगत चर्चा का तो समर्थन किया था ना

743
00:52:17,200 --> 00:52:22,600
क्योंकि तुम्हें करियर बिल्डिंग करनी है मैं इसका करियर खा

744
00:52:22,600 --> 00:52:26,760
जाऊंगा हमने अपने जीवन का त्याग कर दिया

745
00:52:26,760 --> 00:52:30,800
है तुमको नहीं मालूम होगा क्योंकि तुमने

746
00:52:30,800 --> 00:52:34,960
वो कुएं के मेंढक की तरह जो तुम्हारे लोगों ने तुमको दिखाया उसके

747
00:52:34,960 --> 00:52:36,560
अलावा तुमने कुछ देखना पसंद नहीं

748
00:52:36,560 --> 00:52:41,360
किया

749
00:52:41,360 --> 00:52:45,360
अरे कितने भावनाएं भावुक तरीके से मैंने अपने वो चीजें रखी

750
00:52:45,360 --> 00:52:49,360
थी। कुछ देख दिखाया ही नहीं मुझे लगता है तुम्हारे समर्थकों ने तुम्हें

751
00:52:49,360 --> 00:52:53,440
इसीलिए तुम्हारे बलबली सवार है। उसने वही पार्ट उतार के दिखा दिया। ये देखो तुम्हारा खंडन

752
00:52:53,440 --> 00:52:57,840
कर रहे हैं। अरे ये तो सोचना चाहिए था। अगर हमें तुम्हारा खंडनार्थ

753
00:52:57,840 --> 00:53:02,000
कोई चीज करनी थी तो हम तुम्हारा चेहरा लगाते वहां। उस वीडियो में तुम्हारा

754
00:53:02,000 --> 00:53:08,000
कहीं चेहरा लगाया था।

755
00:53:09,120 --> 00:53:13,360
हमें तुम्हारा खंडन नहीं करना था। हमें केवल जो निर्दोष

756
00:53:13,360 --> 00:53:17,440
था उसके पक्ष को रखना था। और वो भी वो चार घंटे का

757
00:53:17,440 --> 00:53:21,520
जो वीडियो था उसमें से तीन घंटे तुम्हारे लिए थे ही

758
00:53:21,520 --> 00:53:25,760
नहीं। यह जो दंभी सेना है, गुरुदेव

759
00:53:25,760 --> 00:53:29,920
के जो दंभी शिष्य हैं, गुरु द्रोही हैं। इन्होंने कैंपेन चला

760
00:53:29,920 --> 00:53:33,920
करके उसको परेशान कर रखा था Instagram पर

761
00:53:33,920 --> 00:53:38,240
और ये सारे जो प्रश्न हमने लिए थे, तुम्हारी पीडीएफ से नहीं लिए थे। जिस पीडीएफ

762
00:53:38,240 --> 00:53:42,640
को तुमने वहां पढ़ा है अपने वीडियो में।

763
00:53:42,640 --> 00:53:47,200
ये सारे प्रश्न वहां Instagram पर दौड़ रहे थे और Instagram

764
00:53:47,200 --> 00:53:51,360
पर हमने उस कैंपेन का प्रतिकार शुरू कर दिया था। बस अब हमने YouTube

765
00:53:51,360 --> 00:53:51,860
पर भी

766
00:53:51,680 --> 00:53:55,680
उसको लाने का प्रयास किया था। मगर जिस दिन हम लाने वाले थे

767
00:53:55,680 --> 00:53:59,760
संयोग से दिन में उसी दिन तुम्हारा भी वीडियो आ गया। तुमने

768
00:53:59,760 --> 00:54:03,760
फ्री मेंशन जोड़ दिया। तुमने वहां पर लिप टू लिप किस जोड़ दी।

769
00:54:03,760 --> 00:54:08,000
तुमने वहां पर जो है वो क्या कहते हैं? एक किसी अन्यत्र किसी

770
00:54:08,000 --> 00:54:12,000
मातृशक्ति को कह दिया ये देखो वही बैठी अपना बिजनेस चला रही है।

771
00:54:12,000 --> 00:54:16,080
है ना? गलत बात है ना। सिद्ध करो अब आ के

772
00:54:16,080 --> 00:54:20,240
कि तुमने नहीं कहा उसमें और दोगलेपन की पराकाष्ठा सीधे कह देते भाई वो गलती

773
00:54:20,240 --> 00:54:25,040
से हमने जल्दबाजी में देखा नहीं तुम्हें तुम्हारी जल्दबाजी ही ले डूब रही है भगवतानंद

774
00:54:25,040 --> 00:54:29,200
मैं तो यही देख रहा हूं ता ना देखा ता कौन दोस्त है

775
00:54:29,200 --> 00:54:33,760
कौन दुश्मन है कुछ भी सोचे समझे बिना अपने आप को बहुत बड़ा

776
00:54:33,760 --> 00:54:37,840
हितषी तुम प्रूफ करना चाहते हो अरे तुम सामने वाले का प्रयास देख रहे

777
00:54:37,840 --> 00:54:42,000
हो क्या पूर्णतया तुम तो अपने समर्थकों का चश्मा लगा

778
00:54:42,000 --> 00:54:46,080
के देख रहे हो तुम तो उनके गुलाम हो।

779
00:54:46,080 --> 00:54:50,080
तुम तुम कहते हो परिकर जो है परिकर जितना बताते हैं उतनी खबरें

780
00:54:50,080 --> 00:54:54,320
पहुंचती है उनके पास। तुमने भी तो कहा कि हालांकि हमारे समर्थकों

781
00:54:54,320 --> 00:54:58,560
ने जो लाकर दिखा दिया हमने पूरा वीडियो नहीं देखा। क्यों नहीं देखा? तो तुम भी तो उसी पोजीशन

782
00:54:58,560 --> 00:55:03,120
में आ गए। तुम्हारे समर्थकों के तुम गुलाम बने बैठे हो।

783
00:55:03,120 --> 00:55:06,880
अगर तुम्हारी भाषा का उपयोग किया जाए तो उस हिसाब

784
00:55:06,880 --> 00:55:12,880
से तुम गुलाम हो उनके। ठीक है?

785
00:55:13,760 --> 00:55:16,760
चलाइए

786
00:55:16,760 --> 00:55:20,880
भैया जिन अत्यंत संवेदनशील विषय पर उन्होंने चर्चा का प्रस्ताव रखा है। उन विषयों पर सार्वजनिक चर्चा

787
00:55:20,880 --> 00:55:25,280
ना होकर व्यक्तिगत रूप से चर्चा होना ही नहीं अपेक्षा है हम अपनी ओर से

788
00:55:25,280 --> 00:55:29,360
याद आ गया ये अच्छा है चला चला करके जो बोलते हैं उसमें ये अच्छी

789
00:55:29,360 --> 00:55:33,440
चीज है कि हम कोई भी पॉइंट भूलते नहीं है। हां तो क्या कह रहे

790
00:55:33,440 --> 00:55:37,440
थे यह कि तुमने तो पहले ही कह दिया था कि हमें जो है चर्चा नहीं करनी है तो फिर

791
00:55:37,440 --> 00:55:41,840
बाद में यह नाटक क्यों अब तुमने वीडियो डाल दिया है जब वीडियो तुमने डाला

792
00:55:41,840 --> 00:55:46,000
तो हमारा जो एक व्यक्तिगत एक जो सॉफ्ट कॉर्नर था कि भाई व्यक्तिगत चर्चा करके

793
00:55:46,000 --> 00:55:50,080
कुछ गोष्ठी करके और ये जो समस्या बार-बार उठ रही है इसका कुछ

794
00:55:50,080 --> 00:55:55,640
निराकरण करेंगे भगवत आनंद निराकरण लड़ेंगे

795
00:55:55,640 --> 00:56:00,080
नहीं इसलिए हमने इशारा किया था कि इसके लिए व्यक्तिगत चर्चा अपेक्षित

796
00:56:00,080 --> 00:56:04,880
है कुछ समस्या का समाधान निकलेगा। मगर नहीं

797
00:56:04,880 --> 00:56:09,040
ना तो उस इशारे पर ध्यान दिया, उस संकेत पर ध्यान

798
00:56:09,040 --> 00:56:13,600
दिया और ना ही तुमने यह देखा कि जब तुमने वो

799
00:56:13,600 --> 00:56:17,600
क्या कहते हैं? जब तुमने वो कॉल रिकॉर्डिंग वाला

800
00:56:17,600 --> 00:56:21,600
वीडियो डाल दिया तो हमने यह नहीं कहा कि अब हम इनके साथ लाइव चर्चा

801
00:56:21,600 --> 00:56:22,400
नहीं करेंगे।

802
00:56:22,400 --> 00:56:26,560
हमने यह कहा व्यक्तिगत का भी इन्होंने मामला बंद कर दिया। क्यों मिले भाई?

803
00:56:26,560 --> 00:56:30,640
तुम्हारे अंदर कोई सौहार्द की भावना है ही नहीं। जब सामंजस्यता की

804
00:56:30,640 --> 00:56:34,720
भावना है ही नहीं। तुम तो अपना जयकांत सिखरे का ईगो लेकर के घूम रहे हो

805
00:56:34,720 --> 00:56:40,440
कि शिवश नारायण द्विवेदी ने हमारा नाम कैसे ले

806
00:56:40,440 --> 00:56:44,640
दिया? तुम किसी के साथ कुछ भी करते रहो बिना आधार के।

807
00:56:44,640 --> 00:56:48,800
किसी को भी फ्री मेंशन वाला सिद्ध कर दो। किसी की भी किसी के भी

808
00:56:48,800 --> 00:56:53,200
एक क्या कहते हैं? वो अस्पर्श है। जो स्ान

809
00:56:53,200 --> 00:56:57,920
है वो अस्पर्श है। मगर वो जो व्यक्ति उसको छू रहा है वो दिशाहीन है। मगर दिशाहीनता

810
00:56:57,920 --> 00:57:02,000
में इतना तो विवेक उसका नहीं खोया हुआ है कि तुम वो तुम उसके जो

811
00:57:02,000 --> 00:57:08,000
है उसको जो प्यार कर रही है वो लड़की उसको तुम लिफ्ट टू लिप किस कह रहे हो।

812
00:57:10,040 --> 00:57:14,160
हम और फिर मैं कह रहा हूं तुम बताओ कहां

813
00:57:14,160 --> 00:57:18,240
पर कथा कर की थी तुमने तुम्हारे तुम जहां जिनसे जुड़े हुए हो वो

814
00:57:18,240 --> 00:57:22,280
तो वो लोग तो भागवत में नाच नचा रहे हैं क्यों

815
00:57:22,280 --> 00:57:26,480
भाई और नाच नचाया गया तो तुमने उनको डांटा ना

816
00:57:26,480 --> 00:57:30,560
तो तुमने चेक किया कि जहां पर विजय श्री की गलती हुई वहां पर उसको

817
00:57:30,560 --> 00:57:36,560
कहा गया कि नहीं उसके बाद बदलाव हुआ कि नहीं तुमने यह सब कहा

818
00:57:36,880 --> 00:57:42,880
मेरा वीडियो अटक रहा हो तो कोई बता

819
00:57:44,440 --> 00:57:48,560
दे। अगर वीडियो अटक रहा है तो कोई बता दे

820
00:57:48,560 --> 00:57:54,560
कमेंट

821
00:57:54,840 --> 00:58:00,080
करके। ये देखो। ये देखो तुम्हारे अंधे समर्थक।

822
00:58:00,080 --> 00:58:04,480
यह देखो क्या कह रहे हैं इधर उधर की बात करके

823
00:58:04,480 --> 00:58:08,960
अरे मेरे भाई जो तुम्हारे तथाकथित स्वभूषित

824
00:58:08,960 --> 00:58:12,960
आचार्य बात कर रहे हैं उसी पर तो बात कर रहा हूं अब क्यों कह

825
00:58:12,960 --> 00:58:17,040
रहे हो इधर उधर की बातें तुम्हें तो यही रवैया चाहिए था तुम

826
00:58:17,040 --> 00:58:21,360
यही चाहते थे कि तुम्हारे गुरु के साथ यही किया जाए यही चाहते

827
00:58:21,360 --> 00:58:26,760
थे ना और अब जब वो हो रहा है तो तुम्हें परेशानी हो रही

828
00:58:26,760 --> 00:58:31,040
होगी तुम यही चाहते थे इसीलिए के लिए तुमने भिड़वाया है। तुमने उनको

829
00:58:31,040 --> 00:58:35,760
हमारे सभी पक्षों को नहीं दिखाया। इसमें तुम्हारे गुरु से ज्यादा

830
00:58:35,760 --> 00:58:40,160
तुम लोगों की गलती है। तुम लोगों ने फंसवाया है।

831
00:58:40,160 --> 00:58:44,160
तुम लोगों ने ये सीन दुनिया को दिखाने पर जो है एक

832
00:58:44,160 --> 00:58:48,160
सीन क्रिएट करवाया है तुम लोगों ने।

833
00:58:48,160 --> 00:58:52,560
अब दिखाना अच्छे से कि अब तो उसने अच्छे से कर दिया है।

834
00:58:52,560 --> 00:58:58,560
अभी तक तो बड़े रेस्पेक्ट के साथ बात कर रहा था।

835
00:58:59,760 --> 00:59:03,840
नहीं समझते ऐसा इन्होंने कहा है तो के लिए बोल दिया है एक

836
00:59:03,840 --> 00:59:08,160
मिनट लाइव के लिए बोल दिया है बुला लो अपने स्वषित

837
00:59:08,160 --> 00:59:12,240
आचार्य को सिद्ध करवाओ जो प्रमाण उसने दिखाए हैं उनके आधार

838
00:59:12,240 --> 00:59:16,320
पर मटका कौन सा परिकर क्या सिद्ध हो रहा है जो प्रमाण उसने दिखाए हैं

839
00:59:16,320 --> 00:59:21,120
वहां पर विजय श्री सिद्ध हो जाएगी मैं उसका शिष्य बन जाऊंगा

840
00:59:21,120 --> 00:59:25,680
बुलाओ उसको लाइव में ठीक है

841
00:59:25,680 --> 00:59:29,760
शिष्य शिष्य घोषित करूंगा। निग्रचार्य के संप्रदाय को मानूंगा। भगवत

842
00:59:29,760 --> 00:59:34,000
आनंद के संप्रदाय को मानूंगा। बुलाओ उसको और वो

843
00:59:34,000 --> 00:59:40,000
अभी आगे और भी कुछ तथ्य और प्रमाण रखूंगा। उनको भी सिद्ध

844
00:59:40,600 --> 00:59:45,040
करें। चलिए चलाइए। दो वीडियो बना चुके थे।

845
00:59:45,040 --> 00:59:49,040
बना चुके थे ना एक तो इन्होंने कोलबेशन किया था वीर के साथ और एक कोई और बंधु थे पंडित डॉट

846
00:59:49,040 --> 00:59:53,200
कुछ उनका था हैंडल का नाम। मैं उनको व्यक्त के रूप से जानता नहीं हूं। लेकिन उन्होंने

847
00:59:53,200 --> 00:59:57,200
जो बातें उस लाइव में कही पौने

848
00:59:57,200 --> 01:00:01,200
चार घंटे तक उन्होंने जो बातें रखी क्या वो बातें सार्वजनिक नहीं थी क्या व्यक्तिगत रूप

849
01:00:01,200 --> 01:00:06,280
से चर्चा की जा रही थी ऐसा तो नहीं है ना तो जिस विषय पर आप करिए करिए सार्वजनिक

850
01:00:06,280 --> 01:00:10,320
थी ऐसा नहीं है कि सार्वजनिक थी नहीं थी मगर हम सिर्फ

851
01:00:10,320 --> 01:00:14,480
उत्तर दे रहे थे डिफेंस कर रहे थे मगर जब हम और आप सामने आमने

852
01:00:14,480 --> 01:00:18,560
सामने होते तो लड़ाई जैसा माहौल होता तू तड़ाक

853
01:00:18,560 --> 01:00:23,600
वाला माहौल हो सकता था चिल्लम चिल्ली दिल्ली का माहौल हो सकता था।

854
01:00:23,600 --> 01:00:27,680
झगड़े जैसा माहौल हो सकता था और यहां पर हम शांतिपूर्ण ढंग

855
01:00:27,680 --> 01:00:31,760
से अपने पक्ष को रख रहे थे और वो पक्ष रखने के लिए भी तुम

856
01:00:31,760 --> 01:00:35,760
ही हमको मजबूर कर रहे थे। अगर तुमको नहीं पता है कि वो

857
01:00:35,760 --> 01:00:39,760
जो महिला है वो विजय श्री नहीं है जो मंच पर आ रही तो तुम मत बोलो

858
01:00:39,760 --> 01:00:44,320
कि विजय श्री ने मंच साझा किया अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए।

859
01:00:44,320 --> 01:00:48,960
तुम भगवान नहीं हो और ना ही कोई प्रामाणिक आचार्य हो।

860
01:00:48,960 --> 01:00:53,040
समझे? और आज के बाद यह बिगुल बज चुका

861
01:00:53,040 --> 01:00:55,840
है ना। अब तुम्हारी प्रामाणिकता पर भी बात होगी।

862
01:00:55,840 --> 01:01:00,960
कितने प्रामाणिक हो। चलो भैया

863
01:01:00,960 --> 01:01:04,960
तब आप क्या कह रहे हैं कि सार्वजनिक चर्चा नहीं तो व्यक्तिगत चर्चा होनी चाहिए। नीति पूर्ण है। अपेक्षित है।

864
01:01:04,960 --> 01:01:08,960
लेकिन उससे पहले घोषित कर चुके हैं कि आपके साथ एक निश्चित दूरी बनाए रखना हमारा धर्म है। ऐसा क्या छूट हो गया हमारे

865
01:01:08,960 --> 01:01:12,960
जीवन में कि आप ऐसी दूरी बनाना चाहते हैं कि लाइफ खा भी नहीं पाते। अच्छा ठीक है। कारण बता रहे हैं कि हम

866
01:01:12,960 --> 01:01:17,120
अपनी ओर से अधर्मियों को किंचित मात्र भी सामग्री प्रदान करना नहीं। पीछे

867
01:01:17,120 --> 01:01:23,120
करना और दूसरा लाइव सवा घंटा पीछे करो जरा पीछे करो हल्का

868
01:01:23,880 --> 01:01:27,920
सा आ भी नहीं पाते अच्छा ठीक है नहीं नहीं थोड़ा और

869
01:01:27,920 --> 01:01:32,000
पीछे करो इन्होंने एक सार्वजनिक नहीं थी क्या व्यक्तिगत रूप से चर्चा की जा रही थी

870
01:01:32,000 --> 01:01:36,080
ऐसा नहीं है जिस विषय पर बात कर रहे हैं जब हम लाइव आना चाहे तब आप क्या कह रहे हैं कि सार्वजनिक चर्चा

871
01:01:36,080 --> 01:01:40,240
नहीं तो व्यक्तिगत चर्चा होनी चाहिए नीतिपूर्ण है अपेक्षित है लेकिन उससे पहले घोषित कर चुके हैं कि आपके साथ ये निश्चित

872
01:01:40,240 --> 01:01:44,240
दूरी बनाए रखना हमारा धर्म है ऐसा क्या छूट हो गया हमारे जीवन में कि आप कुछ ऐसी दूरी बनाना चाहते हैं कि लाइव आ भी नहीं

873
01:01:44,240 --> 01:01:48,560
पाते हमने आपको पहली बात तो यह है हमने

874
01:01:48,560 --> 01:01:53,360
आपको सभी स्थितियों से अपनी अवगत कराया था कि तुम एक बुद्धिजीवी हो।

875
01:01:53,360 --> 01:01:57,760
हमने तुम्हें प्रबुद्ध समझा था तो हमने अपनी स्थितियों से तुमको अवगत कराया

876
01:01:57,760 --> 01:02:01,760
कि तुम धर्म को अगर जानने वाले हो तो तुम्हें पता होगा कि एक शिष्य का धर्म क्या होता

877
01:02:01,760 --> 01:02:05,840
है? जब उसके गुरु के प्रति ऐसी चीजें बोली जाती है

878
01:02:05,840 --> 01:02:10,640
किसी के द्वारा तो उससे उसके क्या धर्म होता है? दूर रहने का धर्म होता है कि नहीं होता है?

879
01:02:10,640 --> 01:02:11,140
और

880
01:02:10,880 --> 01:02:15,120
अगर नहीं रहेगा और मिलेगा तो वह तो उठाकर पटकेगा।

881
01:02:15,120 --> 01:02:19,200
वो तो उठा के पटकेगा भाई। इसलिए निश्चित दूरी

882
01:02:19,200 --> 01:02:23,280
आवश्यक थी। मगर फिर भी क्योंकि अत्यंत संवेदनशील

883
01:02:23,280 --> 01:02:27,280
मामला है। धर्म स्थापना की चिंता है। तो जब तुमने आगे

884
01:02:27,280 --> 01:02:31,280
से प्रस्ताव रखा तो हमने एक बात कही कि भैया जिस विषय पर तुम गोष्ठी

885
01:02:31,280 --> 01:02:35,520
करना चाहते हो। यदि तुम्हारा यदि तुम्हारा उद्देश्य

886
01:02:35,520 --> 01:02:39,760
शोधन है। यदि तुम्हारा उद्देश्य यह नहीं है

887
01:02:39,760 --> 01:02:44,160
कि मैं जो है तमाशा करूं तो तुम आकर के

888
01:02:44,160 --> 01:02:48,480
एक व्यक्तिगत चर्चा कर सकते थे। हम योजना कोई बना सकते थे। किसी एक

889
01:02:48,480 --> 01:02:52,640
निष्कर्ष पर हम निकल पहुंच सकते थे। मगर तुम्हारा वो उद्देश्य है ही नहीं। भगवत

890
01:02:52,640 --> 01:02:57,120
आनंद वो वो तो एक बेनिफिट ऑफ डाउट दिया था मैंने।

891
01:02:57,120 --> 01:03:01,200
मैं पहले से भी जानता हूं। तुम्हारा वो है ही नहीं। क्योंकि जब

892
01:03:01,200 --> 01:03:05,280
तुम अपने वीडियो में लोगों को यह बता रहे हो कि जाओ जाकर

893
01:03:05,280 --> 01:03:09,280
के 10 लोग उसके उनके हाथ पकड़ लो। यह पकड़ लो। तो तुम

894
01:03:09,280 --> 01:03:15,280
क्यों नहीं गए? तुमको 10 आदमी नहीं मिले क्या?

895
01:03:15,280 --> 01:03:19,280
तुम क्यों नहीं गए हम

896
01:03:19,280 --> 01:03:23,280
चलाई भैया कारण बता रहे हैं कि हम अपनी ओर से अधर्मियों को किंचित मात्र भी

897
01:03:23,280 --> 01:03:27,440
सामग्री प्रदान करना उचित नहीं समझते तो भैया मेरे जो पहला लाइफ पौने चार घंटे का किया और दूसरा लाइफ सवा

898
01:03:27,440 --> 01:03:31,520
घंटे से अधिक का किया अब मिला के पांच घंटे का तो पूरा कंटेंट आपने बना दिया उससे अधर्मी को सामग्री नहीं मिल रही

899
01:03:31,520 --> 01:03:35,760
थी ये ये है जयकांत सिगरे का ईगो कि

900
01:03:35,760 --> 01:03:39,840
तुमने मेरे नाम पे 4 घंटे का लाइव बना दिया उसमें कहां पे तुम्हारा लाइव

901
01:03:39,840 --> 01:03:43,920
लिया गया था मूर्ख देखो तुम अगर यह तो सोचते हो

902
01:03:43,920 --> 01:03:48,080
कि वो चार घंटे का लाइफ तुम्हारे लिए था। वो चार घंटे का लाइफ तुम्हारे

903
01:03:48,080 --> 01:03:52,160
लिए नहीं था। वो उन दबी गुरु द्रोहियों के लिए था

904
01:03:52,160 --> 01:03:56,240
जो उस लड़की के पीछे Instagram इत्यादि पर चार पांच दिन से पड़े हुए

905
01:03:56,240 --> 01:04:00,240
थे। उसकी फोटो के साथ अनर्गल प्रलाप कर रहे थे।

906
01:04:00,240 --> 01:04:04,240
उसको धमकियां दे रहे थे। कि चार दिन में तुम्हारे साथ यह कर

907
01:04:04,240 --> 01:04:08,920
देंगे। पांच दिन में यह कर देंगे। तुम्हें वहां से उठवा

908
01:04:08,920 --> 01:04:14,920
लेंगे। उसके लिए था वो।

909
01:04:20,080 --> 01:04:24,160
और तुमको लगा कि तुम्हारे लिए था तो तुम्हें या तो तुम्हें

910
01:04:24,160 --> 01:04:28,320
पता है कि तुम्हारे लिए नहीं था और तब तुम ये बोल रहे हो कि तुम्हारे लिए था तो

911
01:04:28,320 --> 01:04:32,600
तुम्हें जंग चाहिए तुम्हें युद्ध चाहिए तुम्हें करियर

912
01:04:32,600 --> 01:04:37,360
चाहिए तुम्हें संशोधन नहीं चाहिए

913
01:04:37,360 --> 01:04:41,520
और अगर तुम्हें नहीं पता है कि तुम्हारे लिए था कि नहीं तो

914
01:04:41,520 --> 01:04:45,920
ऐसे में ऐसे संवेदनशील मामलों पर बोलने

915
01:04:45,920 --> 01:04:50,560
वाले तुम कौन हुए? मूर्ख नहीं हुए तो कौन हुए?

916
01:04:50,560 --> 01:04:54,640
अभी भी देख लो। अभी भी ये मेरे गुरु द्वारा सिखाई गई

917
01:04:54,640 --> 01:04:58,640
मर्यादा है कि मैं तुमको मूर्ख बोलने से बचने का प्रयास कर रहा

918
01:04:58,640 --> 01:05:02,960
हूं। बार-बार मूर्ख हो निर्णय नहीं दे रहा हूं। कोशिश

919
01:05:02,960 --> 01:05:07,200
कर रहा हूं बार-बार कि मेरे मुख से निर्णय ना निकले। मैं तुमको याद

920
01:05:07,200 --> 01:05:11,200
दिलाऊं कि तुम कौन साबित हो रहे हो अगर तुम बिना जाने ताने लड़ने निकल

921
01:05:11,200 --> 01:05:14,360
रहे हो किसी से

922
01:05:14,360 --> 01:05:17,320
तो

923
01:05:17,320 --> 01:05:21,520
हम चलो भैया चलो आने का प्रस्ताव

924
01:05:21,520 --> 01:05:25,520
रखे वैसे आप निश्चित दूरी भी बनाने लग गए और सार्वजनिक चर्चा ना करके व्यक्तिगत चर्चा करना

925
01:05:25,520 --> 01:05:29,520
पूर्ण हो गया और अपनी और को सामग्री मिल जाएगी ऐसी आशंका बताने लग गए इसका अर्थ

926
01:05:29,520 --> 01:05:33,600
क्या आप कभी लाइन चर्चा व्यक्तिगत चर्चा और क्यों नहीं और क्यों नहीं

927
01:05:33,600 --> 01:05:38,240
हो सकती है ये हमने नहीं बताया क्या अपने में क्यों होनी चाहिए थी रोक दीजिए

928
01:05:38,240 --> 01:05:42,320
व्यक्तिगत चर्चा और क्यों होनी चाहिए थी हमने अपने वीडियो में नहीं बताया

929
01:05:42,320 --> 01:05:46,400
बताया था क्योंकि यह ऐसा मामला नहीं है जिस

930
01:05:46,400 --> 01:05:51,280
पर की व्यक्तिगत सार्वजनिक चर्चा की जाए

931
01:05:51,280 --> 01:05:55,520
धर्म और ब्रह्म के सिद्धांतिक चर्चाएं जो होती है पहली बात तो हमारी आपकी

932
01:05:55,520 --> 01:05:59,760
कोई सार्वजनिक चर्चा का जगह ही नहीं है मगर फिर भी किसी तरीके

933
01:05:59,760 --> 01:06:03,760
से किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है

934
01:06:03,760 --> 01:06:07,760
अगर हमारा आपसे जो है गोष्ठी करना करना तो उसमें आपने

935
01:06:07,760 --> 01:06:11,760
जो है यह समझ लिया जो है हम आपसे बच रहे हैं इसलिए ऐसे कुतर्क कर रहे

936
01:06:11,760 --> 01:06:15,840
हैं। तो हमने आपको उसका भी कारण बताया था ना कि

937
01:06:15,840 --> 01:06:20,080
भैया यह किसी की निजता का मामला है। भले ही परिणाम

938
01:06:20,080 --> 01:06:24,240
यह निकले कि तुम यह सिद्ध ना कर पाओ कि मठ के परिककर

939
01:06:24,240 --> 01:06:28,560
निर्दोष है। उस स्क्रीन रिकॉर्डिंग के आधार

940
01:06:28,560 --> 01:06:32,720
पर उन्हें दोषी सिद्ध नहीं किया जा सकता। भले ही परिणामी ये निकले मगर

941
01:06:32,720 --> 01:06:37,880
उनके निजता का कितना खिलवाड़ होता सार्वजनिक चर्चा

942
01:06:37,880 --> 01:06:41,920
में इसलिए उस विषय पर सार्वजनिक चर्चा क्यों करनी

943
01:06:41,920 --> 01:06:45,920
है हां रिकॉर्ड कर लो

944
01:06:45,920 --> 01:06:50,000
बाद में उसे लाइव कर दो भैया जब अगर वो दोषी सिद्ध हो गया तो हमने दोषी कैसे

945
01:06:50,000 --> 01:06:54,000
सिद्ध किया चलो ऐसा कर लेते

946
01:06:54,000 --> 01:07:00,000
और अगर दोषी सिद्ध नहीं हुआ तो ठीक है उसको हटाओ

947
01:07:03,440 --> 01:07:07,680
अगर वह दोषी है तब तो उस दौरान जो उसे पीड़ा

948
01:07:07,680 --> 01:07:11,840
होगी अगर बाद में कोई व्यक्ति दोषी निकलता है और

949
01:07:11,840 --> 01:07:15,920
उस दौरान उसे कोई पीड़ा होती है तो फिर वो उस पीड़ा का तब भी

950
01:07:15,920 --> 01:07:20,640
उसको सहने के लिए वो वो है अधिकारी

951
01:07:20,640 --> 01:07:24,720
मगर यदि वो अगर निर्दोष सिद्ध हो जाए तो उनका जो यहां पर हमने

952
01:07:24,720 --> 01:07:29,080
जो खिलवाड़ किया उनकी निजता के साथ उसका उसकी भरपाई कौन

953
01:07:29,080 --> 01:07:33,280
करेगा तो क्यों करें हम जब हमें पूरा विश्वास है कि वो

954
01:07:33,280 --> 01:07:35,400
निर्दोष

955
01:07:35,400 --> 01:07:41,400
है हम

956
01:07:41,880 --> 01:07:46,080
लड़ेंगे इसलिए हमने कहा था जो तुम्हें लगा कि हम जो है सार्वजनिक

957
01:07:46,080 --> 01:07:50,440
चर्चा से बच रहे हैं। जिन सिद्धांतों पे

958
01:07:50,440 --> 01:07:54,640
जिन अह उद्देश्यों पे हमें दृढ़ विश्वास

959
01:07:54,640 --> 01:07:58,800
होता है उस पे हम निर्भीकता के साथ खड़े रहते हैं। और आज भी इन

960
01:07:58,800 --> 01:08:03,040
मामलों में इसलिए खड़े हैं निर्भीकता से क्योंकि हमें पता है

961
01:08:03,040 --> 01:08:07,200
हमें ज्ञात है कि हम जीतेंगे। इसमें कहीं भी दूसरी वो है ही नहीं

962
01:08:07,200 --> 01:08:09,360
सिचुएशन।

963
01:08:09,360 --> 01:08:13,520
ठीक है? और तुम आना सिद्ध करना। विजय श्री

964
01:08:13,520 --> 01:08:17,600
के बारे में जो जो बोला है वहां से शुरू करो और फिर चीजें सिद्ध करो। तुम्हारे पास जो प्रमाण

965
01:08:17,600 --> 01:08:23,600
है उनके आधार पर चीजें सिद्ध

966
01:08:24,840 --> 01:08:30,840
करो। चलाइए भैया। जो उन्होंने लिखा

967
01:08:33,720 --> 01:08:39,160
है दो प्रमाणों

968
01:08:39,160 --> 01:08:43,200
का मर्यादा का ध्यान ये तो बाद में आऊंगा इसके बाद आऊंगा मैं वीडियो इधर का इधर आऊंगा तब

969
01:08:43,200 --> 01:08:47,360
इस पर बाद में आऊंगा मुख्य बात ये है कि इन्होंने जो लाइव वाली बात से मना किया था मैंने

970
01:08:47,360 --> 01:08:51,360
दूसरा अभी तक नहीं देखा है जो इनका पहला दूसरा वीडियो वो भी नहीं देखा लेकिन जिस

971
01:08:51,360 --> 01:08:55,440
वीडियो में मैं लाइव आना चाहता था जहां पर आमने सामने चर्चा करके हम इनको मुंह तोड़ कर देना चाहते थे ये मुंह तोड़ वाले शब्द लिखा

972
01:08:55,440 --> 01:08:59,440
है ना राम जी दुवा दे रहे हैं राम जी जो सुमित शत्रु के साथ व्यवहार करते थे। भैया हमने कभी नहीं कहा कि मुर्दा की

973
01:08:59,440 --> 01:09:03,600
लाश उखाड़ कर उनको पीट डालो। हां वो तो केवल अंतिम संस्कार वाली बात है ना जब रावण का अंतिम संस्कार विष्णु जी

974
01:09:03,600 --> 01:09:08,360
नहीं करना चाहते थे कि दुरात्मा है महाराज पापी है राम जी बोले मर गया मर गया उसमें क्या मुद्दे

975
01:09:08,360 --> 01:09:12,760
से पॉज करिए जब हमने वहां पर डाला था कि

976
01:09:12,760 --> 01:09:16,960
भैया मृत्यु के बाद बैर नहीं रहता है तो इनका पोस्ट आया

977
01:09:16,960 --> 01:09:21,040
था उसमें क्या लिख रहे हैं कि हमारे तो

978
01:09:21,040 --> 01:09:25,200
शत्रु हैं। प्रभुपाद और दयानंद हमारे तो शत्रु हैं।

979
01:09:25,200 --> 01:09:29,280
उस पोस्ट में ये लिख रहे हैं। जब हमने कहा था कि

980
01:09:29,280 --> 01:09:33,280
भाई मृत्यु के बाद कोई बैर नहीं होता है। हम लोग शास्त्रों उनका पक्ष

981
01:09:33,280 --> 01:09:37,520
खंडन करें। हम लोग उनके ऊपर व्यक्तिगत टीका टिप्पणी ना करें। और ये पूरा समाज

982
01:09:37,520 --> 01:09:39,920
जानता है। तुम खुद जानते हो। तुम

983
01:09:39,920 --> 01:09:44,000
अपनी वास्तविकता से भाग रहे हो। अगर तुम ये कह रहे हो कि तुमने व्यक्तिगत टीका टिप्पणी नहीं की

984
01:09:44,000 --> 01:09:49,160
है। क्यों कर रहे हो? शास्त्रों उनका खंडन करके रख

985
01:09:49,160 --> 01:09:53,200
दो। मगर व्यक्तिगत टी टीका टिप्पणी करने से मसाला

986
01:09:53,200 --> 01:09:57,280
मिलेगा ना पब्लिक को। उसके कारण तुम्हारे जो

987
01:09:57,280 --> 01:10:01,280
अनुगामी है वह बढ़ेंगे। मसालेदार

988
01:10:01,280 --> 01:10:05,720
कंटेंट देना है ना इसलिए व्यक्तिगत टीका टिप्पणी पर जाते हो

989
01:10:05,720 --> 01:10:09,800
तुम। तू तड़ाक व्यक्तिगत कटाक्ष कितना किया है

990
01:10:09,800 --> 01:10:14,000
तुमने? और यह बताओ कि किसी से शत्रुता निभाने

991
01:10:14,000 --> 01:10:18,240
का मतलब यही होता है कि उसको जो है हाथ से हाथ पैर से मारो। वाणी

992
01:10:18,240 --> 01:10:22,320
से नहीं मारा जा सकता। तो वाणी से नहीं मारा जा सकता। तुम अपने इंटरव्यू में क्यों कह रहे हो कि वाणी

993
01:10:22,320 --> 01:10:26,880
जो है जो आचार्य होते हैं श्रेष्ठ होते हैं उनकी वाणी अच्छी होनी चाहिए

994
01:10:26,880 --> 01:10:31,760
क्योंकि वाणी से तो तुम किसी को चोट पहुंचा नहीं रहे हो

995
01:10:31,760 --> 01:10:36,240
हम तो या तो तुम अपना स्टैंड क्लियर कर लो कि वो तुम्हारे शत्रु

996
01:10:36,240 --> 01:10:40,240
थे कि नहीं थे और या फिर यहां पर कहो कि

997
01:10:40,240 --> 01:10:44,800
हां शत्रु हैं और मैं ऐसे ही बोलूंगा। आप क्यों वहां पर ड्यूल दूसरी

998
01:10:44,800 --> 01:10:48,880
डोगलेपन की बात कर रहे हो कि हम कौन सा उसको उठाकर मारते हैं। यानी कि यहां पर तुमने

999
01:10:48,880 --> 01:10:52,960
मान लिया शत्रु नहीं है। तुम शत्रुता नहीं निभाते हो उसके साथ और

1000
01:10:52,960 --> 01:10:55,080
वहां पर तुम मान रहे हो कि नहीं हमारे शत्रु

1001
01:10:55,080 --> 01:10:59,200
हैं। ये तो दोगलापन हो गया ना। यहां पे तुमने

1002
01:10:59,200 --> 01:11:03,200
ये नहीं बोला कि वो मेरे शत्रु हैं। मैं तो उन्हें ऐसे ही बोलूंगा। यहां

1003
01:11:03,200 --> 01:11:07,280
तुमने कहा हम भी कौन सा वो कर रहे हैं। हम भी कौन सा उसको लाश को उठा करके

1004
01:11:07,280 --> 01:11:12,240
मार रहे हैं। चलाइए। देखिए क्या बोल रहे हैं आगे।

1005
01:11:12,240 --> 01:11:16,320
जिसने अपकार किया उसको दंड मिला हो गया खत्म अभी सब संस्कार करो इतना अवधारित तो भगवान सिंह

1006
01:11:16,320 --> 01:11:20,560
ने भी गुरु कार्य प्रद जी को निर्देश किया है भागवत पुराण हम थोड़े कह रहे हैं कि जितने भी हमारे विपक्षी

1007
01:11:20,560 --> 01:11:24,800
है सब जो गुजर गए हैं उनके सबके साथ दुर्व्यवहार करो और उनको जो है सो मुंह करो निकाल निकाल के पीो ऐसा हमने कहा गया

1008
01:11:24,800 --> 01:11:29,200
यहां पर ये वाला अप्रासंगिक संदर्भ दे रहे हैं ऐसा तो नहीं है तो

1009
01:11:29,200 --> 01:11:33,360
गुजर गए हैं पॉज करो जो अप्रासंगिक नहीं है जो गुजर गए हैं उनके ऊपर

1010
01:11:33,360 --> 01:11:37,520
तुम अनावश्यक रूप से टीका टिप्पणी करते हो तू तड़ाक

1011
01:11:37,520 --> 01:11:42,400
में बात करते हो अग्ने मूतने जैसे शब्दों का उपयोग करते हो

1012
01:11:42,400 --> 01:11:46,800
क्यों कर रहे हो भाई यह सब क्या बहुत सभ्यता

1013
01:11:46,800 --> 01:11:50,880
वाली चीजें हैं जो ये सब बातें तुम करते हो उनके लिए जो गुजर गए अपने घर

1014
01:11:50,880 --> 01:11:54,880
में भी ऐसे ही करते हो और अगर अपने घर में नहीं

1015
01:11:54,880 --> 01:11:58,880
करते हो तो कहो कि हां ये शत्रु है एक तरफ तो रहो ना भाई

1016
01:11:58,880 --> 01:12:02,960
पोस्ट में कह रहे हो शत्रु है यानी वहां तुम ये प्रकट कर रहे हो कि जिनके साथ मैं

1017
01:12:02,960 --> 01:12:06,960
ऐसा ही व्यवहार करूंगा तो फिर यहां क्यों नहीं कह रहे हो यहां

1018
01:12:06,960 --> 01:12:10,160
भी कहो क्योंकि अब राम का विरोध हो जाएगा तो

1019
01:12:10,160 --> 01:12:14,320
यहां नहीं कह कह पाएंगे। है ना? राम का विरोध कैसे

1020
01:12:14,320 --> 01:12:18,320
करें? मगर सच कहे तो भैया आज के टाइम में तो अगर

1021
01:12:18,320 --> 01:12:23,000
राम भी आ जाए तो आप उनका भी निग्रह करेंगे। है ना?

1022
01:12:23,000 --> 01:12:25,240
चलिए

1023
01:12:25,240 --> 01:12:29,440
चलाइए। हम कौन सा लाठी उठाकर किसी पीट रहे हैं भाई? अगर तुम उनका विरोध विचारधारा

1024
01:12:29,440 --> 01:12:33,440
के नाम पर कर रहे हो। तो हमारा कौन सा मत का झगड़ा है कि जमीन का झगड़ा है कि प्रॉपर्टी का केस चल रहा है। हमारा भी तो विचारधारा का ही संघर्ष है

1025
01:12:33,440 --> 01:12:37,520
ना। तुम केवल विचारधारा का नहीं करते हो। तुम तूतक

1026
01:12:37,520 --> 01:12:41,600
करते हो। हल्के शब्दों का प्रयोग करते हो अमर्यादित बातें

1027
01:12:41,600 --> 01:12:45,840
करते हो खामाखा की टीका टिप्पणी करते हो

1028
01:12:45,840 --> 01:12:49,920
जिसकी उसमें आवश्यकता ना भी हो वो भी करते हो चलो वो टिप्पणी भी करो

1029
01:12:49,920 --> 01:12:54,360
विनोद भी हो मगर उसमें एक मर्यादा तो

1030
01:12:54,360 --> 01:12:58,400
हो चलो मैं इनका वीडियो चलाऊंगा

1031
01:12:58,400 --> 01:13:02,480
आपके सामने क्योंकि मैंने स्वयं भी नहीं देखा है आप लोगों ने तो देख लिया है लेकिन अभी पूरा का पूरा वीडियो हमने भी नहीं

1032
01:13:02,480 --> 01:13:06,560
देखा है और ये वीडियो हम स्वयं आपके साथ साथ देखेंगे और इस वीडियो के साथ साथ उन बातों का उत्तर भी देंगे

1033
01:13:06,560 --> 01:13:11,200
जो बातें साथ अब फॉरवर्ड करते जाओ मेरा वीडियो जो है

1034
01:13:11,200 --> 01:13:15,200
चलाना जो उसका उत्तर देंगे वो चलाना उसको करेंगे क्योंकि

1035
01:13:15,200 --> 01:13:19,280
मैं चाहता था कि करते हैं कॉपीराइट स्ट्राइक मैंने क्यों कहा कि संघर्ष है

1036
01:13:19,280 --> 01:13:23,760
और यही कारण है कि आपके असंख्य प्रायण आचार्य नारायण भी लिखा है इन्होंने

1037
01:13:23,760 --> 01:13:25,200
और हमने कहा वहां पर कि हम नहीं ले

1038
01:13:25,200 --> 01:13:29,440
रहे ये भाई साहब ले रहे ये पूरी की गौरी महात्मा कह रहे हैं जबकि

1039
01:13:29,440 --> 01:13:34,280
हां इन्होने कर्म की रक्षा के बंधन में आपको सुनते है आपका क्या कथन तो मैंने वही कहा

1040
01:13:34,280 --> 01:13:38,320
एंटरटेनमेंट आप ही मुझे बताइए जो आपको जिस पर स्वय विश्वास नहीं है

1041
01:13:38,320 --> 01:13:42,480
ऐसे वीडियोस को डालने का क्या अच्छा ऐसा नहीं है हमने कई बार कुछ

1042
01:13:42,480 --> 01:13:46,480
लोग लोगों को बुलाया अपने चैनल पर उन्होंने कुछ सामग्री प्रस्तुत की वो लोग कम से कम ये

1043
01:13:46,480 --> 01:13:50,480
क्लेम कर रहे है की सामग्री का सत्यापन का सत्यापन की जिम्मेदारी मैं ले

1044
01:13:50,480 --> 01:13:54,560
और हमने कहा वहां पर की हम नहीं ले रहे ये भाई साहब ले रहे है जो भी दिखा रहे है तो वहां पर ऐसा भी

1045
01:13:54,560 --> 01:13:58,800
कुछ नहीं है आप जो ये कॉल रिकॉर्डिंग आपने दिखाई दिन में तो उसमें उन्होंने कॉल रिकॉर्डिंग सत्यापन

1046
01:13:58,800 --> 01:14:02,800
की जिम्मेदारी तो ये क्या है खेल ही तो है अरे भाई मेरा वाला मेरा वाला

1047
01:14:02,800 --> 01:14:06,880
मत सुनाइए आप केवल इनका वाला सुनाइए मेरी आवाज निकालते जाइए नहीं तो बहुत

1048
01:14:06,880 --> 01:14:10,960
लंबा और हो जाएगा। धर्म है पीठ है ना करें। धर्म के विवेक

1049
01:14:10,960 --> 01:14:15,120
के दृष्टिकोण से जब सन्यास ले एक कोर्ट में कभी जाते चिंता है ना मुकदमा

1050
01:14:15,120 --> 01:14:19,680
लगा लूं हम उस मुकदमे को लड़ने में मैं भी आपका सहयोग कर दूंगा लगा लूंगा

1051
01:14:19,680 --> 01:14:23,760
नहीं नहीं मेरा ये प्रश्न है कि हम क्यों मुकदमेबाजी में जा रहे जब

1052
01:14:23,760 --> 01:14:27,840
हमारे पास शासकों के शासक पूरी के शंकराचार्य

1053
01:14:27,840 --> 01:14:31,920
जी स्वस्थ और जीवित उपलब्ध है धरती पर तो ये हमको कोर्ट जाने के लिए क्यों कह रहे हैं कहां जाने

1054
01:14:31,920 --> 01:14:36,320
के लिए कहां जाने के लिए पीछे

1055
01:14:36,320 --> 01:14:40,480
करिए भैया अंकुशान सरस्वती को भाट कह रहे थे वो चाहे रामदेव चाहे मोहन

1056
01:14:40,480 --> 01:14:44,480
भागवत जैसे तमाम असांतिक लोगों को आपके साथ घंटों में बैठाकरण फिर उस दिन इन्होने मैसेज किया है 30 अगस्त

1057
01:14:44,480 --> 01:14:49,040
2023 को मैसेज किया है तो और भी बस इन्होंने बताया मुझे और फिर बाकी की

1058
01:14:49,040 --> 01:14:53,600
गुल भागवत कथा को चैनल पर अपलोड करें सब कुछ कुछ पूछती रहती है और स्त्री के व्यासपीठ

1059
01:14:53,600 --> 01:14:57,600
वाले विषय पर पूछती रहती है कि क्या उसका शास्त्री है प्रकरण ये सब पूछती रहती है तो मेरा ये

1060
01:14:57,600 --> 01:15:01,600
कहने का अर्थ है कि ये स्त्री तो किसी प्रकार से ऑडियो कॉलर से संबंधित नहीं है लेकिन

1061
01:15:01,600 --> 01:15:05,600
वो भी एक बात कह रही है और ये भी एक बात कह रहे है वहां के रहने वाले अन्य संप्रदाय के बात कह रहे है वहां पढ़ाने

1062
01:15:05,600 --> 01:15:09,680
वाले आचार्य भी यही बात कर रहे है ये पूरी के ही ग लाभ नहीं होना है तो आप जो कह रहे हैं कि

1063
01:15:09,680 --> 01:15:13,680
ये पूरी के क्या सत्यापन तुम कर रहे हो तो हम कैसे समझ में नहीं

1064
01:15:13,680 --> 01:15:19,680
आ रहा है स्पीड धीमी करिए स्पीड धीमी करिए वो क्या कह रहे हैं समझ में नहीं आ रहा है

1065
01:15:21,200 --> 01:15:25,280
के बाद कभी भी हमें उनसे मिलने नहीं दिया गया घटनाओं का सत्यापन

1066
01:15:25,280 --> 01:15:29,440
तो पर उन्होंने कुछ सामग्री प्रस्तुत की पर

1067
01:15:29,440 --> 01:15:33,760
उन्होंने कुछ सामग्री प्रस्तुत की इसके अलावा और कानून की धारा के अनुसार

1068
01:15:33,760 --> 01:15:38,400
जब धरातल पे आई हुई चीजें तो कुछ भी सिद्ध होने वाली बात ही नहीं

1069
01:15:38,400 --> 01:15:42,400
अब ये क्या हो रहा है? कुछ तकनीकी तकनीकी खराबी

1070
01:15:42,400 --> 01:15:48,160
आ रही है क्या?

1071
01:15:48,160 --> 01:15:53,040
दे कैन नॉट इवन स्पीक व्हेन दे आर हंग्री दे कैन नॉट इवन

1072
01:15:53,040 --> 01:15:57,840
ये तो विज्ञापन आने जाते हैं बीच में।

1073
01:15:57,840 --> 01:16:02,320
जैसे मैं इसको और थोड़ा सा आगे ले जाऊंगा। जैसे आपको चिंता है पीठ संस्थाएं

1074
01:16:02,320 --> 01:16:06,480
हैं जो कि ब्रह्मचारी भी होते हैं। उसमें ब्रह्मचारिणी भी होते

1075
01:16:06,480 --> 01:16:12,480
हैं। कहेगी ना कोर्ट। तो स्त्रियां जब सन्यास ले

1076
01:16:13,000 --> 01:16:17,120
ब्रह्मचारी ना कोर्ट क्योंकि कानून की धारा के अनुसार हम निर्णय

1077
01:16:17,120 --> 01:16:21,520
देंगे अपना पक्ष रखे तथ्यों को अरे भाई समझ में नहीं आ रहा

1078
01:16:21,520 --> 01:16:27,400
कैसे क्या हो रहा है क्या बोल रहे

1079
01:16:27,400 --> 01:16:31,680
हैं आप कीबोर्ड से आगे पीछे करिए

1080
01:16:31,680 --> 01:16:37,640
माउस से ना करिए आप

1081
01:16:37,640 --> 01:16:41,040
[संगीत]

1082
01:16:41,040 --> 01:16:45,320
से डाल केवल एंटरटेनमेंट या फिर केवल

1083
01:16:45,320 --> 01:16:49,520
वो संभावना द नेक्स्ट स्टेप

1084
01:16:49,520 --> 01:16:53,520
या अविश्वास पुष्प करना इसके अलावा भाई यहां पर इनका वीडियो अटक

1085
01:16:53,520 --> 01:16:59,520
रहा है। ये क्या कह रहे हैं कोई बताएगा?

1086
01:17:16,240 --> 01:17:22,240
पे आएगी चीजें तो कुछ भी सिद्ध होने वाली बात ही नहीं है। अब

1087
01:17:23,360 --> 01:17:27,520
दे कैन नॉट इवन स्पीक व्हेन दे आर हंग्री। दे कैन नॉट इवन स्पीक व्हेन दे।

1088
01:17:27,520 --> 01:17:32,160
ये तो विज्ञापन आने जाते हैं बीच में। तो हम

1089
01:17:32,160 --> 01:17:36,160
जैसे मैं इसको और थोड़ा सा आगे ले जाऊंगा। जैसे आपको चिंता है पीठ

1090
01:17:36,160 --> 01:17:39,760
की

1091
01:17:39,760 --> 01:17:43,920
और पीठ में स्वयं को ब्रह्मचारी डिक्लेअर करने वाला आपके अनुसार

1092
01:17:43,920 --> 01:17:49,120
के आचरण जो है ब्रह्मचारी के अनुसार नहीं है। नहीं ठीक है। तो आप कोर्ट में क्यों नहीं जाते?

1093
01:17:49,120 --> 01:17:53,120
आपको चिंता है ना? हम तो आप मुकदमा लगा दो। हम

1094
01:17:53,120 --> 01:17:58,320
उस मुकदमे को लड़ने में मैं भी आपका सहयोग कर दूंगा। लगा दो मुकदमा।

1095
01:17:58,320 --> 01:18:03,480
नहीं नहीं मेरा यह प्रश्न

1096
01:18:03,480 --> 01:18:07,600
है कि हम क्यों मुकदमेबाजी में जावे

1097
01:18:07,600 --> 01:18:12,160
जब हमारे पास शासकों के शासक

1098
01:18:12,160 --> 01:18:16,400
हम पूरी के शंकराचार्य जी स्वस्थ और जीवित उपलब्ध है धरती पर

1099
01:18:16,400 --> 01:18:22,200
तो हमको कोर्ट जाने के लिए क्यों कह रहे हैं हम और हश

1100
01:18:22,200 --> 01:18:26,520
ब्रह्मचारी सरस्वती करो इनका उत्तर सुनो इनका उत्तर सुनो

1101
01:18:26,520 --> 01:18:30,720
क्यों यह पूरी के शंकराचार्य जी

1102
01:18:30,720 --> 01:18:34,880
शासकों के शासक उपलब्ध है तो उनका

1103
01:18:34,880 --> 01:18:39,400
अपमान कर लेंगे। उनके लिए

1104
01:18:39,400 --> 01:18:43,920
अनावश्यक अनाप सनाप ढेर सारा सारा प्रलाप

1105
01:18:43,920 --> 01:18:47,920
कर लेंगे। मगर एक ऐसा तरीका नहीं

1106
01:18:47,920 --> 01:18:52,720
अपनाएंगे जिसमें कि उनकी अवमानना भी ना हो।

1107
01:18:52,720 --> 01:18:58,560
उनको बुरा भला ना कहना पड़े। उनका उपहास ना उड़ाना पड़े।

1108
01:18:58,560 --> 01:19:02,720
तो यह तो अच्छा क्यों करें अब आपने कहा क्यों

1109
01:19:02,720 --> 01:19:06,880
करें अभी आप ही तो ताल ठोक रहे हो ना धर्म की कि हम

1110
01:19:06,880 --> 01:19:11,200
पूरी के शंकराचार्य के मठ को बचाना चाहते हैं तो अगर जिस रास्ते

1111
01:19:11,200 --> 01:19:15,200
को हमने चुना है वो रास्ता उपयोगी सिद्ध नहीं हो रहा है और दूसरा विकल्प भी

1112
01:19:15,200 --> 01:19:18,640
है तो क्यों नहीं जा रहे हो उस रास्ते पर

1113
01:19:18,640 --> 01:19:22,720
क्योंकि तुमको निराकरण से मतलब नहीं है

1114
01:19:22,720 --> 01:19:26,800
भगवत आनंद तुमको तमाशे से मतलब है और

1115
01:19:26,800 --> 01:19:30,800
तमाशा तो तभी होगा जब हम यहां से बैठ बैठ के बोलते

1116
01:19:30,800 --> 01:19:35,200
रहेंगे। वहां तो कोर्ट में जाना पड़ेगा ना। कचहरी में अपने बाल नचवाने

1117
01:19:35,200 --> 01:19:39,480
पड़ेंगे ना। चक्कर लगाने पड़ेंगे ना। केस लड़ना पड़ेगा

1118
01:19:39,480 --> 01:19:43,520
ना। है ना? मेहनत करनी पड़ेगी

1119
01:19:43,520 --> 01:19:47,520
और यहां तमाशा करना है। हमारा उद्देश्य है ही नहीं कि हमको

1120
01:19:47,520 --> 01:19:51,680
जो है वास्तव में वहां का शोधन करना है। अगर वहां पे ऐसा कुछ है तो हमारा उद्देश्य

1121
01:19:51,680 --> 01:19:55,760
नहीं है। अरे भाई तुम कितने साल से कर रहे हो? तुम्हें अगर शंकराचार्य

1122
01:19:55,760 --> 01:20:00,360
से ही न्याय चाहिए तो तुम कितने साल से अपनी बकबक कर रहे

1123
01:20:00,360 --> 01:20:04,680
हो और मैंने अभी तुमने जब ये वाली बात कही थी मैं कहना भूल

1124
01:20:04,680 --> 01:20:08,960
गया दोबारा से कि अभी लाइव नहीं कर रहे हो तुमने अगर

1125
01:20:08,960 --> 01:20:13,320
तुमको अगर चर्चा व्यक्तिगत करनी थी तो तुमने चार घंटे की लाइव क्यों बना

1126
01:20:13,320 --> 01:20:17,520
डाली चार घंटे की लाइव पहली बार तुम्हारे लिए बनाई नहीं थी बनाई नहीं

1127
01:20:17,520 --> 01:20:21,680
थी और अगर बनानी होती तो बताओ कि मैं उसी

1128
01:20:21,680 --> 01:20:25,920
दिन क्यों बनाता क्या उससे पहले तुमने मठ के परिककरों के बारे में कुछ नहीं कहा

1129
01:20:25,920 --> 01:20:30,400
है। मठ के बारे में कुछ नहीं कहा है।

1130
01:20:30,400 --> 01:20:33,760
तो तुम्हें सोचना चाहिए था कि मेरी वो लाइफ तो पहली

1131
01:20:33,760 --> 01:20:38,000
बात तुम्हारे लिए थी नहीं। और तुम्हारे से अगर मुझे वो कटुता दिखानी

1132
01:20:38,000 --> 01:20:42,080
होती तुम्हारा प्रतिकार करना होता या तुम्हें अपना जयकार शिकरे

1133
01:20:42,080 --> 01:20:47,520
का ईगो हर्ट करना होता। तो मैं पहले कर चुका होता।

1134
01:20:47,520 --> 01:20:51,520
तो तुमने जरा भी नहीं सोचा कि जो मुझे धर्मज्ञ दिख रहा है जो मुझे धर्म के

1135
01:20:51,520 --> 01:20:55,520
लिए कार्य करने वाला दिख रहा है दर जाना जाने वाला दिख रहा है उसने

1136
01:20:55,520 --> 01:20:59,680
ऐसा क्यों किया कि मैं आज उसने वीडियो बनाया इस बात पर मेरे

1137
01:20:59,680 --> 01:21:03,760
विरोध में चलो बेनिफिट ऑफ डाउट है कि चलो वो विजय श्री नहीं

1138
01:21:03,760 --> 01:21:08,000
मैंने तो परिकरों के लिए ही बनाया था मगर उसने विजय श्री के नाम पर मेरा खंडन किया

1139
01:21:08,000 --> 01:21:12,000
ऐसा तुम्हें लगा ये हमने बेनिफिट ऑफ डाउट दिया मगर

1140
01:21:12,000 --> 01:21:16,000
तुमको एक ध्यान देना चाहिए था अगर तुम कहीं पर कहीं पर भी तुम थोड़ा बहुत भी

1141
01:21:16,000 --> 01:21:20,000
यह सोच सोच रहे हो कि शिवश भी लड़ रहा है धर्म स्थापना के लिए

1142
01:21:20,000 --> 01:21:24,080
तो अगर इसको मेरा खंडन करना होता या मेरी मेरे साथ इसको कटता

1143
01:21:24,080 --> 01:21:28,080
करनी होती प्रतिकार करना होता या लड़ते हुए दिखना होता समाज

1144
01:21:28,080 --> 01:21:32,640
को जन्म में भी पहली बात

1145
01:21:32,640 --> 01:21:37,360
तो क्या है तो यह

1146
01:21:37,360 --> 01:21:41,520
और बहुत पहले वीडियो बना चुका होता यह मेरी फोटो

1147
01:21:41,520 --> 01:21:45,640
लगा के वीडियो बनाता मैंने तो ऐसा नहीं

1148
01:21:45,640 --> 01:21:49,600
किया मगर तुमको तो हदब के लड़ना था

1149
01:21:49,600 --> 01:21:53,600
हम और क्या था मामला अभी जो चल

1150
01:21:53,600 --> 01:21:57,760
रहा था कि क्यों जाए हम कोर्ट धर्म के लिए भाई

1151
01:21:57,760 --> 01:22:02,000
तुमने शंकराचार्य के से के के द्वारा न्याय पाने का

1152
01:22:02,000 --> 01:22:06,000
जो न्याय पाने की जो प्रतीक्षा है वो कर ली ना दो ढाई वर्ष कितने वर्षों

1153
01:22:06,000 --> 01:22:10,400
से कर रहे हो उनके द्वारा न्याय पाने की प्रतीक्षा और तुमको

1154
01:22:10,400 --> 01:22:14,480
जो उनका न्याय है वो न्याय नहीं लग रहा है तुमको

1155
01:22:14,480 --> 01:22:18,640
क्या कहते ये लग रहा है कि वो न्याय कर पाने में असमर्थ

1156
01:22:18,640 --> 01:22:22,800
है। उनकी दृष्टि नहीं है। नहीं देख पा रहे वो चीजें। तुम्हारे पास विकल्प है। मैं विकल्प

1157
01:22:22,800 --> 01:22:26,880
दे रहा हूं। सहयोग भी कर रहा हूं। तो तुम्हें तो तमाशा करना है। इसलिए तुम

1158
01:22:26,880 --> 01:22:31,040
पूछ रहे हो क्यों जाए भाई? चलो भाई।

1159
01:22:31,040 --> 01:22:35,760
आगे बढ़ो।

1160
01:22:35,760 --> 01:22:39,840
अभी हमारे पास भी सामग्री आ गई है। हमारे पास भी एक रिकॉर्डिंग आ

1161
01:22:39,840 --> 01:22:44,680
गई है। जो तुम्हारी जो प्रेम प्रसंग है

1162
01:22:44,680 --> 01:22:49,040
ना व्यक्तिगत हुए थे ना अब लो व्यक्तिगत

1163
01:22:49,040 --> 01:22:55,040
यहां प्रेम प्रसंग फिर मैं एक मिनट एक मिनट

1164
01:22:55,520 --> 01:23:00,240
एक मिनट हाइपर सेक्सुअलिटी डिसऑर्डर से आप ग्रस्त

1165
01:23:00,240 --> 01:23:04,240
यह हो रहा है लुप्त निग्रह संप्रदाय में भैया जिसको

1166
01:23:04,240 --> 01:23:08,560
देवता आकर के मंत्र दे रहे हैं। जो बचपन से शुद्ध है

1167
01:23:08,560 --> 01:23:12,640
वह जो है 16 साल की उम्र आयु में एक बार फिर 18 साल की

1168
01:23:12,640 --> 01:23:16,880
आयु में दूसरी बार प्रेम जाल में फंसता है। विफल होता

1169
01:23:16,880 --> 01:23:21,040
है। हां और बाईपोलर नामक रोग से

1170
01:23:21,040 --> 01:23:25,520
लड़ वो ग्रस्त है। उसको दी जा रही है। 2017 में निग्रह

1171
01:23:25,520 --> 01:23:29,760
लुप्त संप्रदाय का वो दिया जा रहा है। क्या यंत्र

1172
01:23:29,760 --> 01:23:35,120
2017 में

1173
01:23:35,120 --> 01:23:39,200
रिकॉर्डिंग में तो यहां तक भी बोला जा रहा है। यह तक बताने का प्रयास किया

1174
01:23:39,200 --> 01:23:43,360
जा रहा है कि इनको हस्तमैथुन का वो है रोग है।

1175
01:23:43,360 --> 01:23:47,840
हस्तमैथुन हस्तमैथुन से ग्रस्त है ये और राजस्थान के किसी डॉक्टर के

1176
01:23:47,840 --> 01:23:52,000
जो जोधपुर के पता नहीं आसपास के डॉक्टर के द्वारा इनका गुप्त रूप से वो चल

1177
01:23:52,000 --> 01:23:56,240
रहा है। विवाह हो जाने के बाद भी इनको नियंत्रण

1178
01:23:56,240 --> 01:24:01,920
नहीं है अपने उस पर। यह सब भी बताया जा रहा है।

1179
01:24:01,920 --> 01:24:06,080
और एफबी के अकाउंट के चित्र तो इन्होंने देखे ही है सबके जो अपनी

1180
01:24:06,080 --> 01:24:10,560
जानवी के लिए वो गा रहे हैं।

1181
01:24:10,560 --> 01:24:15,840
विवाह भैया ऐसे होते हैं क्या

1182
01:24:15,840 --> 01:24:19,920
यही होते हैं क्या निग्रह संप्रदाय के जो आचार्य होते हैं जिनको जिनको

1183
01:24:19,920 --> 01:24:24,400
बचपन से जो है वो मिला होता है।

1184
01:24:24,400 --> 01:24:28,880
क्या कहते हैं चार साल की आयु से ही हमें सब कुछ हो गया था और बिल्कुल

1185
01:24:28,880 --> 01:24:33,280
बिल्कुल बात है भैया दिव्य दंपत्ति रहे होंगे साधना की होगी

1186
01:24:33,280 --> 01:24:37,360
मगर उसके बाद करने के बाद आपको देवताओं के दर्शन होने लगे 10 साल की

1187
01:24:37,360 --> 01:24:41,880
आयु में और आप आगे चलकर के जो

1188
01:24:41,880 --> 01:24:46,400
है 2017 में यंत्र प्राप्त कर रहे हो और

1189
01:24:46,400 --> 01:24:50,800
और यहां निग्रह नहीं कर पा रहे हो यदि वह अष्टमैथुन

1190
01:24:50,800 --> 01:24:55,200
की पीड़ा से पीड़ित हो तो इसका निग्रह नहीं हो पा रहा है।

1191
01:24:55,200 --> 01:24:59,600
प्रेम प्रसंग में गिर जा रहे हो। ब्रह्मचर्य आश्रम में बिना विवाह के

1192
01:24:59,600 --> 01:25:03,920
कैसे गिर जा रहे हो भाई? हां बिना

1193
01:25:03,920 --> 01:25:08,480
किसी आधार पर नहीं है। सामग्री है हमारे पास

1194
01:25:08,480 --> 01:25:12,800
वो डाली जाएगी। जो इस तरह का अंदेशा उत्पन्न

1195
01:25:12,800 --> 01:25:17,040
करने वाले तथ्य हैं वो है हमारे पास। डाल दिए जाएंगे।

1196
01:25:17,040 --> 01:25:21,200
एक दो दिन में आ चुके हैं। भैया इनकी वो इनकी

1197
01:25:21,200 --> 01:25:24,480
वह दिखाइए जरा।

1198
01:25:24,480 --> 01:25:28,560
वो दिखाइए फोटो इनकी बुक है जो कौन

1199
01:25:28,560 --> 01:25:30,960
सा डिसऑर्डर है वह

1200
01:25:30,960 --> 01:25:34,920
जिससे ग्रस्त थे

1201
01:25:34,920 --> 01:25:38,960
दिखाइए लगातार व्यक्तिगत होगे ना नहीं चाहता

1202
01:25:38,960 --> 01:25:43,080
था मैं यह सब करना

1203
01:25:43,080 --> 01:25:49,080
यही हम दिखाओ

1204
01:25:53,680 --> 01:25:57,840
यह है इनकी किताब पढ़ लेना आर्काइव पर डली हुई

1205
01:25:57,840 --> 01:26:02,000
है। ठीक है? इसी में इन्होंने बताया है

1206
01:26:02,000 --> 01:26:07,200
कि हमें कब कब किस-किस के साथ प्रेम प्रसंग हुआ था।

1207
01:26:07,200 --> 01:26:11,280
बड़ा कर दीजिए। इस समय बुक को बड़ा करिए।

1208
01:26:11,280 --> 01:26:17,280
आपको चित्र अलग से भेजे गए थे ना। वह दिखा दीजिए ना सीधे।

1209
01:26:19,680 --> 01:26:24,080
अच्छा अगर इसको खोल ही लिया है तो यह दिखाइए

1210
01:26:24,080 --> 01:26:28,400
32 नंबर और उसमें वो निकालिए

1211
01:26:28,400 --> 01:26:34,400
जरा वो निकालिए वो इन्होंने जहां कहा हाइपर सेक्सुअलिटी

1212
01:26:35,080 --> 01:26:39,440
डिसऑर्डर व्यक्ति खुद बता रहा है किसी और की आवश्यकता

1213
01:26:39,440 --> 01:26:45,440
ही कहां है?

1214
01:26:52,560 --> 01:26:56,720
जनेऊ लेट हुआ है। गोलगप्पे खा रहे हो और तुम

1215
01:26:56,720 --> 01:27:01,040
इलाज करवा रहे हो जाकर के। निग्रह

1216
01:27:01,040 --> 01:27:07,040
नहीं कर पा रहे हो अपने रोग का।

1217
01:27:07,680 --> 01:27:11,680
झारखंड से राजस्थान की यात्रा हो रही है।

1218
01:27:11,680 --> 01:27:17,680
चलिए भाई।

1219
01:27:25,920 --> 01:27:30,160
हमसे भी बहुत से लोग कह रहे हैं ये सब बातें जैसे तुम आप तुमसे

1220
01:27:30,160 --> 01:27:34,240
कहा जाता है ना ये भी बोल रहा है वो भी बोल रहा है ऐसे ही बोल रहे हैं

1221
01:27:34,240 --> 01:27:38,760
चलो ये ठीक है इसको हम किसी और समय देखेंगे

1222
01:27:38,760 --> 01:27:43,040
अभी उस पर रहे हम लोग विषय पर हो गया।

1223
01:27:43,040 --> 01:27:48,320
चलिए।

1224
01:27:48,320 --> 01:27:52,640
तो मुझे इस बात का अनुभव नहीं है कि यह तकनीक ठीक से काम कर रही है।

1225
01:27:52,640 --> 01:27:56,880
क्योंकि इससे पहले YouTube लाइव देखने का कोई अनुभव नहीं है। तो ट्यूटोरियल देखकर मैंने

1226
01:27:56,880 --> 01:28:02,880
समझा कि कैसे आया जाता है। Facebook का तो अनुभव था।

1227
01:28:07,600 --> 01:28:12,080
कहते हैं कि इस समय जो लाइव वीडियो इन्होंने

1228
01:28:12,080 --> 01:28:16,400
तीसरा भाग चलाया उसमें ये कह रहे हैं कि व्यक्तिगत चर्चा की कोई स्थिति नहीं बची है

1229
01:28:16,400 --> 01:28:20,400
तो भैया मेरे आप ये बताइए जब

1230
01:28:20,400 --> 01:28:25,040
स्थिति नहीं बची है तो आपने आज हमको WhatsApp मैसेज क्या भिजवाया है?

1231
01:28:25,040 --> 01:28:29,680
जरा मैं एक बार इस मैसेज को देख लूं। एक मिनट और करो

1232
01:28:29,680 --> 01:28:35,680
नहीं पाएगा। देखो इनका यहां पे दोगलापन पता चलता

1233
01:28:46,280 --> 01:28:50,480
है। तो यहां पर यह कह रहे हैं कि व्यक्तिगत चर्चा

1234
01:28:50,480 --> 01:28:54,560
की भी जगह नहीं बची है। यानी इनको पता था कि व्यक्तिगत चर्चा के लिए

1235
01:28:54,560 --> 01:28:58,720
हमने बोला है। जबकि शुरू में क्या बोल रहे थे? कि वह इनको

1236
01:28:58,720 --> 01:29:03,480
शुरू में यह बोल रहे थे जब हमने इनको क्लियर किया

1237
01:29:03,480 --> 01:29:07,680
था जब हमने इनको क्लियर किया था कि

1238
01:29:07,680 --> 01:29:11,680
क्या कहते हैं हमने व्यक्तिगत चर्चा के लिए मना किया आपकी रिकॉर्डिंग आने के बाद

1239
01:29:11,680 --> 01:29:15,760
हमने लाइव चर्चा के लिए तो पहले भी हम वो नहीं थे तैयार मगर

1240
01:29:15,760 --> 01:29:20,160
जो व्यक्तिगत चर्चा का समर्थन हमने दिखाया था वो आपकी रिकॉर्डिंग

1241
01:29:20,160 --> 01:29:24,320
आने के बाद उसकी भी जगह नहीं रह जाती है तो इन्होंने शुरू में क्या कहा था शुरू

1242
01:29:24,320 --> 01:29:28,320
में इन्होंने ऐसा प्रकट किया कि इनको पता ही नहीं है कि हमने व्यक्तिगत चर्चा के लिए

1243
01:29:28,320 --> 01:29:33,040
मना किया। लाइव के लिए नहीं। मगर यहां पर स्पष्ट हो गया कि ये

1244
01:29:33,040 --> 01:29:37,200
जानबूझकर ऐसा बोले वहां पर और यहां पर स्वीकार कर रहे हैं कि इनको पता

1245
01:29:37,200 --> 01:29:41,360
था कि व्यक्तिगत चर्चा के लिए हमने मना किया है। तो वहां पर ये झूठ

1246
01:29:41,360 --> 01:29:47,360
बोल रहे थे और अभी इनका ये दोगलापन पकड़ा गया। चलिए

1247
01:29:48,200 --> 01:29:52,240
चलाइए कि स्क्रीन पर क्या दिख रहा है। लेकिन मैं प्रयास करूंगा

1248
01:29:52,240 --> 01:29:56,240
कि वो आप देख एक बार मुझे निकालने दीजिए वो क्योंकि नंबर बहुत सारे संदेश

1249
01:29:56,240 --> 01:30:01,720
आते हैं ना तो सेफ तो है नहीं नंबर इनका लेकिन मिल जाएगा

1250
01:30:01,720 --> 01:30:05,920
कहीं मिल गया जरा देखिए

1251
01:30:05,920 --> 01:30:10,640
अगर आपको स्क्रीन में दिख रहा हो तो नहीं दिख रहा होगा तो मैं

1252
01:30:10,640 --> 01:30:14,960
थोड़ा सा दिखा देता हूं कृपया

1253
01:30:14,960 --> 01:30:19,520
ध्यान दीजिए से आने वाली न्यू हफ

1254
01:30:19,520 --> 01:30:24,000
के रास्ते को जाने वाली गाड़ी संख्या

1255
01:30:24,000 --> 01:30:29,200
भाई क्या है इनकी स्क्रीन

1256
01:30:29,200 --> 01:30:33,600
इनकी पढ़ के बता दे रहे हैं वो नहीं

1257
01:30:33,600 --> 01:30:38,040
वो खोलो लाइव

1258
01:30:38,040 --> 01:30:42,160
हम चलो इनहीं को पढ़ के बता देने दो इनहीं को पढ़ के बना देने दो

1259
01:30:42,160 --> 01:30:46,160
प्ले करो प्लेटफार्म नंबर तीन

1260
01:30:46,160 --> 01:30:50,320
देखिए मुझे लाइव करने का अभ्यास नहीं है कैसे स्क्रीन कास्टिंग की जाती है इसलिए मैं पढ़ के बता दे रहा हूं ये

1261
01:30:50,320 --> 01:30:53,840
कहते हैं यदि यदि आपको लगता है कि आप सत्य के

1262
01:30:53,840 --> 01:30:57,840
पक्षधर हैं तो प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करें। अन्यथा मुंगेरी लाल के

1263
01:30:57,840 --> 01:31:02,000
हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए आप स्वतंत्र हैं। प्रत्यक्ष वार्ता होगी

1264
01:31:02,000 --> 01:31:04,560
तो दृश्य बदल जाएगा।

1265
01:31:04,560 --> 01:31:08,720
ये उन्होंने किसी व्यक्ति के माध्यम से मुझे भिजवाया है। नीचे लिखा है। ये उन्हें भेज दो। ऐसे करके

1266
01:31:08,720 --> 01:31:12,720
इन्होंने कहा है। ये नहीं कि कोई कॉल चैट हम लीक कर रहे हैं। चैट कोई लीक नहीं

1267
01:31:12,720 --> 01:31:17,120
कर रहे हैं। ये कोई दोगला व्यक्ति है।

1268
01:31:17,120 --> 01:31:21,360
ठीक है भगवतानंद हमें जो करना होगा हम सामने

1269
01:31:21,360 --> 01:31:26,160
से करेंगे। तुमको ऐसा लगता है कि हमें ये तुच्छ वाला रास्ता अपनाएंगे।

1270
01:31:26,160 --> 01:31:30,400
उसने हमसे कोई और नाम लेकर के संपर्क किया होगा।

1271
01:31:30,400 --> 01:31:34,400
अब नहीं चाहिए। उसने हमसे कोई और नाम लेकर के संपर्क किया होगा। अगर वो

1272
01:31:34,400 --> 01:31:38,800
यह बताता कि ये भगवतानंद ऐसा कह रहा है।

1273
01:31:38,800 --> 01:31:42,960
अगर वो हमको यह बताता कि भगवतानंद ऐसा कह रहा है तो हम आप ये उसको

1274
01:31:42,960 --> 01:31:47,120
ये उत्तर कभी ना देते। उसने हमसे आके पूछा होगा वो ऐसा

1275
01:31:47,120 --> 01:31:51,360
कह रहा है। ऐसा कह रहा है और उसने कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ ये सब

1276
01:31:51,360 --> 01:31:55,520
किया होगा कि कोई ऐसा जवाब मांग रहा है। इस बात का जवाब मांग रहा है। क्या दें?

1277
01:31:55,520 --> 01:31:59,600
तो हमने समय बचाने के लिए हम यही कह देते हैं। हम बहुतों

1278
01:31:59,600 --> 01:32:04,080
से कहते हैं। हमारे कमेंट सेक्शन जाकर के आप चेक करिए। बहुतों से कहते हैं।

1279
01:32:04,080 --> 01:32:08,240
तो यह हमने तुम्हारे लिए नहीं कहा। तुम अंधे हो गए हो जो अपने

1280
01:32:08,240 --> 01:32:12,320
समर्थकों के अनुगत हो के चल रहे हो। उससे कहते

1281
01:32:12,320 --> 01:32:16,760
नंबर दे मेरा नंबर दे मुझे फोन कर लेते मुझे स्पष्ट हो

1282
01:32:16,760 --> 01:32:20,000
जाता। हमने नहीं कहा है ये तुम्हारे लिए।

1283
01:32:20,000 --> 01:32:24,160
और जो तुमको ये भेज रहा है उसको अगर वो थोड़ा बहुत

1284
01:32:24,160 --> 01:32:28,480
भी धर्म को मानने वाला है उसको जल हाथ में लेकर गया। जो भी तुम धर्म की

1285
01:32:28,480 --> 01:32:32,720
व्याख्या जानते हो उसके अनुसार उससे प्रतिज्ञा करवाओ। शपथ दिलवाओ,

1286
01:32:32,720 --> 01:32:36,880
संकल्प दिलवाओ कि बोल क्या तूने शिवश नारायण

1287
01:32:36,880 --> 01:32:41,680
द्विवेदी को यह बताया था कि यह मैसेज जो

1288
01:32:41,680 --> 01:32:45,920
जो भी तू वहां पर वार्तालाप कर रहा है वो मेरी ओर से कर रहा है और क्या

1289
01:32:45,920 --> 01:32:50,640
शिवश नारायण द्विवेदी को ये पता था कि वो ये मैसेज

1290
01:32:50,640 --> 01:32:54,720
भगवत आनंद को भेज रहा है। अरे बीच में

1291
01:32:54,720 --> 01:33:00,720
कलह करवाने वाले कर देंगे नाश।

1292
01:33:02,880 --> 01:33:07,880
इनकी बातों में आने से बचो। भगवत

1293
01:33:07,880 --> 01:33:11,720
आनंद अनुगत हो चुके

1294
01:33:11,720 --> 01:33:15,840
हो। प्रज्ञा शक्ति क्षीण हो गई होगी। अगर वो

1295
01:33:15,840 --> 01:33:20,080
सब बातें ठीक है जो हमें रिकॉर्डिंग हमें मिली है। अभी डालेंगे कल परसों

1296
01:33:20,080 --> 01:33:24,880
में रिकॉर्डिंग जिसमें यही सब बातें हो रही हैं।

1297
01:33:24,880 --> 01:33:30,800
चलिए बताइए।

1298
01:33:30,800 --> 01:33:35,520
कहा कि उन्हें भेज दो तो बताइए

1299
01:33:35,520 --> 01:33:41,520
जी स्वस्थ और हम यहां पर है धरती

1300
01:33:42,760 --> 01:33:46,800
पर चलो चलो तो ये हमको कोर्ट जाने के

1301
01:33:46,800 --> 01:33:51,280
लिए क्यों कह रहे हैं और हर्षेष ब्रह्मचारी

1302
01:33:51,280 --> 01:33:55,280
जब अमुतेश्वरानंद सरस्वती जी को भाट कह रहे थे तब क्यों

1303
01:33:55,280 --> 01:33:59,600
कोर्ट नहीं गए थे कोर्ट जाना चाहिए था ना क्योंकि उनकी वजह से तो अधिवक्ता करो

1304
01:33:59,600 --> 01:34:04,000
करो पहुंच करो हम क्या लड़ने निकले

1305
01:34:04,000 --> 01:34:08,160
कि उन्हें भाट मानो भाट वो भाट हैं हमने

1306
01:34:08,160 --> 01:34:13,080
ऐसे वीडियोस बनाए क्या आचार स्तर का मामला है वो अपना तय

1307
01:34:13,080 --> 01:34:17,600
करेंगे हमने बनाए क्या वीडियोस हमने तो सदैव

1308
01:34:17,600 --> 01:34:21,840
मुक्तेश्वर सरस्वती जी के अगर विरोध में कोई बात हुई तो हमने वहां पर

1309
01:34:21,840 --> 01:34:25,920
स्टैंड लिया क्योंकि कहीं ना कहीं वह हमारे शंकर

1310
01:34:25,920 --> 01:34:29,680
संप्रदाय के हैं।

1311
01:34:29,680 --> 01:34:33,680
आचार्य तो है ही। गुरुदेव ने भी

1312
01:34:33,680 --> 01:34:38,400
नहीं कहा कि उनका अपमान करो जाकर के। उनकी समीक्षा करो जाकर के।

1313
01:34:38,400 --> 01:34:42,960
हमने अपने आान चैनल को इसलिए खोला है क्या

1314
01:34:42,960 --> 01:34:47,200
कि आचार स्तर के मामले को हम देखें जाकर के या जो

1315
01:34:47,200 --> 01:34:51,280
गुरुदेव ने अगर कोई वचन कहा है तो हम उसको जाकर के लेकर के जाके भिड़ भिड़ रहे

1316
01:34:51,280 --> 01:34:55,600
हैं। हम कब गए? हम कब गए ज्योतिर्मठ

1317
01:34:55,600 --> 01:34:59,880
में? यह कहने कि तुम जो है यह ऐसा है तुम शंकराचार्य नहीं हो उतरो

1318
01:34:59,880 --> 01:35:04,000
नीचे हमने तो नहीं की जाके समीक्षा ना ही हमें समीक्षा

1319
01:35:04,000 --> 01:35:08,240
करने की अनुमति मिली है ना ही निर्देश मिला है तो ये प्रश्न हमसे

1320
01:35:08,240 --> 01:35:12,480
क्यों किया जा रहा है क्योंकि तुमको वो नहीं चाहिए समाधान

1321
01:35:12,480 --> 01:35:17,480
नहीं चाहिए तुमको केवल वो चाहिए

1322
01:35:17,480 --> 01:35:21,840
मसाला जयकांत सिगरे का ही वो हर्ट हो गया

1323
01:35:21,840 --> 01:35:26,720
क्योंकि मुझे अपना वो बनाना है झूठा एक संप्रदाय

1324
01:35:26,720 --> 01:35:30,720
मुझे अपना वो वर्चस्व दिखाना है दुनिया को कोई बात

1325
01:35:30,720 --> 01:35:34,800
ना चीज भिड़ने चले आए चलो

1326
01:35:34,800 --> 01:35:39,320
ठीक है चलाओ

1327
01:35:39,320 --> 01:35:43,600
भैया सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भाई जो कि

1328
01:35:43,600 --> 01:35:47,760
ब्रह्मचारी भी अनुशासन मर्यादा है उस मर्यादा

1329
01:35:47,760 --> 01:35:51,840
के अंतर तो जो ये

1330
01:35:51,840 --> 01:35:55,840
शास्त्री व्यवस्था के आधार पर अगर कहेगी तो शंकराचार्य ही उसका निर्णय कर सकते हैं कि

1331
01:35:55,840 --> 01:35:59,840
हां इस अनुशासन मर्यादा में बहिष्कार है कि प्रायश्चित है कि यह शास्त्र प्रमाण

1332
01:35:59,840 --> 01:36:03,920
स्वीकार ये नहीं होगा कुछ तो कहेंगे ना तो जब शासकों के शासक शंकराचार्य विद्यमान

1333
01:36:03,920 --> 01:36:08,320
है तो शंकराचार्य से इस विषय पर क्यों नहीं परामर्श किया जाए तो शंकराचार्य जब शासकों

1334
01:36:08,320 --> 01:36:12,320
के शासक हैं तो शंकराचार्य जब कह रहे हैं तो उस शासन को मान रहे

1335
01:36:12,320 --> 01:36:16,480
हो तुम तब तो तुम कह रहे हो कि हम निग्रह करने आए हैं

1336
01:36:16,480 --> 01:36:21,200
और फिर जब कोर्ट जाने की बात आ रही तो कह रहे हो हम शंकराचार्य से कराएंगे

1337
01:36:21,200 --> 01:36:25,280
तो यह दोगलापन क्यों तुम कहां

1338
01:36:25,280 --> 01:36:30,000
मान रहे हो शंकराचार्य की आवाज को अंतिम आवाज

1339
01:36:30,000 --> 01:36:34,000
ना कोई परंपरा ना कुछ ना शास्त्रों का कहां

1340
01:36:34,000 --> 01:36:39,480
से मिला ना अद्वैत कहां से मिला कुछ आधार

1341
01:36:39,480 --> 01:36:43,600
नहीं और समय आने पर शंकराचार्य जो है वो हैं शासकों

1342
01:36:43,600 --> 01:36:49,600
के शासक और समय आने पर जो है हम उनके ऊपर निग्रह करने आए

1343
01:36:50,680 --> 01:36:54,800
हैं हम बताइए चलिए कोर्ट में इस बात

1344
01:36:54,800 --> 01:36:58,960
को ले जाएंगे तो क्या बात सार्वजनिक प्रमाण कर प्रवत्त से पूछ

1345
01:36:58,960 --> 01:37:03,160
ले कि क्या सत्य है हो पाए मगर आप इसलिए नहीं

1346
01:37:03,160 --> 01:37:07,640
लगाओगे क्योंकि आप गुरु

1347
01:37:07,640 --> 01:37:12,000
शिष्य चल रहा है आप यह निर्णय देंगे किस भरोसे

1348
01:37:12,000 --> 01:37:16,240
से आपके पास व्यक्ति जाएगा इसीलिए हम विवश है इन सब बातों पर सार्वजनिक

1349
01:37:16,240 --> 01:37:20,560
चर्चा करने के लिए ताकि किसी व्यक्ति विशेष की निजी महत्वाकांक्षा

1350
01:37:20,560 --> 01:37:24,800
और निजी पद प्रतिष्ठा के चक्कर में एक विशुद्ध सनातन वैदिक मर्यादा क्षतिग्रस्त

1351
01:37:24,800 --> 01:37:29,880
ना हो पाए। नहीं लगाओगे। निग्रह

1352
01:37:29,880 --> 01:37:34,560
संप्रदाय एक लुप्त संप्रदाय जो कि तुम्हारे द्वारा उद्भाषित

1353
01:37:34,560 --> 01:37:38,640
होता है और तुम अपने आप को उसका जो है निग्रचार के रूप में ख्यापित

1354
01:37:38,640 --> 01:37:42,800
करने का प्रयास करने लगते हो। ठीक है? तो तुम्हारी चीजों को

1355
01:37:42,800 --> 01:37:46,880
लेकर के भी बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिसमें कि सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए।

1356
01:37:46,880 --> 01:37:51,680
बताओ कब हो रही है? बताओ कब हो रही है?

1357
01:37:51,680 --> 01:37:54,640
हम पूछेंगे भैया आपसे भी कि कहां

1358
01:37:54,640 --> 01:37:58,640
से क्या है आपका मैटर कैसे कौन सा मंत्र कहां से वेरीफाई हो रहा है

1359
01:37:58,640 --> 01:38:04,640
सबको पूछेंगे कोई मिला नहीं ना अब तक पूछने वाला

1360
01:38:06,040 --> 01:38:10,160
इसीलिए हम पूछेंगे चलाओ इनका

1361
01:38:10,160 --> 01:38:14,160
सार्वजनिक चर्चा करनी है आप स्वयं जानते हैं कि ये

1362
01:38:14,160 --> 01:38:18,480
वो प्रमाण और तथ्य नहीं है जिनके आधार पर लड़ा जा और आपको

1363
01:38:18,480 --> 01:38:22,560
लगता है कि इनके आधार पर वो दोषी सिद्ध हो सकते हैं। चाहे तो

1364
01:38:22,560 --> 01:38:26,880
विद्या श्री चाहे तो परिकर तो आप आ जाइए।

1365
01:38:26,880 --> 01:38:31,280
हो गया। चलिए भाई बताइए।

1366
01:38:31,280 --> 01:38:35,520
ठीक है। तदर्थम सोवाते पापी

1367
01:38:35,520 --> 01:38:39,600
पुरुष को समर्थ होने पर भी जो प्रतिकार पूर्वक वद शास्त्रहित दंड

1368
01:38:39,600 --> 01:38:43,600
अधिकृत पुरुष नहीं देता है। वह भी उसके पाप में भागीदार बन

1369
01:38:43,600 --> 01:38:47,600
जाता है। हिस्सा बन जाता है। और दंड देने का अधिकार तीन ही लोगों को है।

1370
01:38:47,600 --> 01:38:52,160
गुरु आत्मता शास्त्रा राजा चोतगा

1371
01:38:52,160 --> 01:38:56,800
तथा प्रक्ष पाना शास्त यम

1372
01:38:56,800 --> 01:39:00,800
पहले दंडाधिकारी होते हैं गुरु गुरु में माता पिता इत्यादि बड़े

1373
01:39:00,800 --> 01:39:04,960
भाई सभी सम्मिलित हो जाते हैं से वरिष्ठ हो शास्त्रज्ञता की दृष्टि

1374
01:39:04,960 --> 01:39:09,280
से दंडाधिकारी होते हैं करो गुरु सबके गुरु

1375
01:39:09,280 --> 01:39:10,560
होते हैं दंडाधिकारी

1376
01:39:10,560 --> 01:39:14,640
बस तुम्हारे नहीं है क्योंकि तुम्हारा कोई गुरु नहीं है तुम्हारे गुरु तुम स्वयं हो या फिर तुमने

1377
01:39:14,640 --> 01:39:18,800
अपने गुरुओं को ऐसा बताया जो है नहीं

1378
01:39:18,800 --> 01:39:21,920
प्ले करो भैया

1379
01:39:21,920 --> 01:39:26,560
इसीलिए प्रथम दंडाधिकारी गुरुजन हम ऊपर

1380
01:39:26,560 --> 01:39:31,360
तुम अच वेदाभेद मानते हो मानते हैं तो अब अच वेदाभेद पे हम बात कर रहे हैं

1381
01:39:31,360 --> 01:39:35,680
ये अच वेदाभेद मानना इस का सत्यापन के अधीन नहीं है

1382
01:39:35,680 --> 01:39:39,840
मगर ऐसे विषय मेंचार

1383
01:39:39,840 --> 01:39:44,160
जी के यहां ये हो गया या भागवत कथा कर रहे थे तो वहां पर जो

1384
01:39:44,160 --> 01:39:48,400
गाना हो गया बढ़ा दो

1385
01:39:48,400 --> 01:39:52,560
शंकराचार्य विरोध वाली पंक्ति गई थी। मैं उस नहीं जाऊंगा। अगर ऐसा

1386
01:39:52,560 --> 01:39:56,560
हो गया तो ये वाली चीजें जो सत्यापन के अधीन है। नहीं नहीं आप नहीं जाएंगे

1387
01:39:56,560 --> 01:40:00,560
लेकिन हम चले जाते हैं क्योंकि आपने वो विषय उठा दिया। यही है ना कि हमने कहा था कि तुम एक एक करोड़ दे

1388
01:40:00,560 --> 01:40:04,640
के चारों शंकराचार्य को बुला लो लेकिन ग्रहचार्य को नहीं बुला सकते। इसका कारण क्या है? इसका कारण आप ही

1389
01:40:04,640 --> 01:40:08,720
के जैसे जो शिष्य हैं परिकर हैं जो अर्थ लोपता के कारण मठ से जुड़े हुए होते

1390
01:40:08,720 --> 01:40:13,560
हैं और सिद्धांत ये

1391
01:40:13,560 --> 01:40:17,600
देखो अर्थ लोलुपता के कारण मठ से जुड़े हुए होते

1392
01:40:17,600 --> 01:40:21,840
हैं सिद्ध कर दिया हो गया

1393
01:40:21,840 --> 01:40:25,760
क्या तुम इस जीवन में सिद्ध कर पाओगे क्या अर्थ लोलुपता के कारण

1394
01:40:25,760 --> 01:40:30,640
मैं जुड़ा हुआ हूं नहीं सिद्ध कर पाओगे

1395
01:40:30,640 --> 01:40:34,640
तो फिर क्यों बोल ऐसे स्टेटमेंट्स देते हो जो तुम सिद्ध नहीं कर

1396
01:40:34,640 --> 01:40:37,280
पाओ।

1397
01:40:37,280 --> 01:40:41,560
यही अंतर है तुम में और मुझ में।

1398
01:40:41,560 --> 01:40:45,680
चलो शंकराचार्यों को भी पता नहीं चलेगा कि परिक कितने में उनके कार्यक्रम के डीलर

1399
01:40:45,680 --> 01:40:49,680
कहां करके बैठा हुआ है। आप बताएं शंकराचार्य क्यांद

1400
01:40:49,680 --> 01:40:54,880
सरस्वती को कहेंगे कि अमो कार्यक्रम से हमको 5 लाख देना, 10 लाख देना, 20 लाख देना। ऐसा तो नहीं कहेंगे।

1401
01:40:54,880 --> 01:40:58,880
यह सारे जितने पादुका पूजन का पैसा उठाते हैं और जितना डोनेशन प्राप्त करते

1402
01:40:58,880 --> 01:41:03,160
हैं और शंकराचार्य को हम स्थान पर ले जाने के लिए डील करते हैं कि हमको बुला देंगे तो इतना पैसा हमको

1403
01:41:03,160 --> 01:41:07,360
चाहिए। ये आप नहीं जान रहे हैं क्या? एक बार आप शंकराचार्य

1404
01:41:07,360 --> 01:41:11,440
जी का आयोजन अपने यहां कर लीजिए। दूसरी बार करने की हिम्मत नहीं पड़ेगी आपको। अगर आप बने ठाने संपन्न व्यक्ति

1405
01:41:11,440 --> 01:41:15,520
नहीं है तो। ये हाल है। ये हाल है। मैं बताऊं

1406
01:41:15,520 --> 01:41:19,600
छत्तीसगढ़ में मेरा प्रवेश ही हुआ है। इसी कारण से क्योंकि बजट की कमी के

1407
01:41:19,600 --> 01:41:23,600
कारण पूरी के शंकराचार्य जी नहीं आएंगे। ऐसा स्पष्ट उनके छत्तीसगढ़ प्रभारी ने

1408
01:41:23,600 --> 01:41:27,680
उस समय कह दिया था और मठ से भी यही बात कही गई थी हम उसमें 5

1409
01:41:27,680 --> 01:41:32,000
लाख कुछ की बात कही गई थी कब की बात है मार्च 2017 की बात है तब हम पहली बार छत्तीसगढ़

1410
01:41:32,000 --> 01:41:36,160
में प्रवचन करने गए थे विकल्प स्वरूप तो परिकर आप कहते

1411
01:41:36,160 --> 01:41:42,000
हैं हम तो कहते हैं एक करोड़ में चारों शंकराचार्य आ जाएंगे परिकर ही पैसा ले

1412
01:41:42,000 --> 01:41:46,480
चार करोड़ देके चारों शंकराचार्य को बुला लो मगर ये बताओ पहले

1413
01:41:46,480 --> 01:41:50,480
कि वहां पर इस बात का संबंध क्या था तुम तो वहां

1414
01:41:50,480 --> 01:41:54,720
पर जिन लोगों तुम्हारी भागवत कथा में नाचा था,

1415
01:41:54,720 --> 01:41:59,040
नाच नचाया था। उन लोगों को सुधार रहे थे ना।

1416
01:41:59,040 --> 01:42:03,120
वहां पर शंकराचार्यों को दिखाने का अपने सापेक्ष

1417
01:42:03,120 --> 01:42:07,280
क्या आवश्यकता थी? और तुम तो वही हो

1418
01:42:07,280 --> 01:42:11,760
जो शंकराचार्य का समर्थन करते हो। जो भी उस जो उनके आर्थिक

1419
01:42:11,760 --> 01:42:15,840
कार्य है उनमें जो तुम बता रहे हो कि मैं विकल्प के रूप में गया था छत्तीसगढ़

1420
01:42:15,840 --> 01:42:20,160
में। तुम तो वही हो। तुम्हें तो कोई आपत्ति नहीं है उससे

1421
01:42:20,160 --> 01:42:24,560
और या फिर तुम वही हो जो जब तक हम साथ में हैं तो हम साथ साथ

1422
01:42:24,560 --> 01:42:28,560
हैं और उसके बाद जरा सी कोई खटपट हो गई तो हम आपके हैं कौन तो हम

1423
01:42:28,560 --> 01:42:32,880
जब हम साथ साथ हैं तब हम सारी वो निभाएंगे

1424
01:42:32,880 --> 01:42:37,600
सारी कसमें वो करेंगे और जब हम आपके हैं कौन हो गए तो सारे भेद खोलेंगे

1425
01:42:37,600 --> 01:42:41,600
यही तो था इसीलिए मैंने तुमसे व्यक्तिगत संपर्क नहीं किया कभी भी क्योंकि

1426
01:42:41,600 --> 01:42:47,600
तुम उस योग्य नहीं हो तुम इस योग्य नहीं हो

1427
01:42:47,600 --> 01:42:51,640
तुमने धर्म को जाना है मगर धारण नहीं

1428
01:42:51,640 --> 01:42:55,840
किया। तुम्हारी वाणी में धर्म नहीं है।

1429
01:42:55,840 --> 01:42:57,200
मैंने धर्म को तुमसे कम

1430
01:42:57,200 --> 01:43:01,440
जाना होगा। मगर जितना जाना उतना धारण करने का प्रयास करता हूं।

1431
01:43:01,440 --> 01:43:05,800
तुम्हारी तरह अपने से बड़ों

1432
01:43:05,800 --> 01:43:10,640
को अपने लिए जो सम्माननीय लोग हैं

1433
01:43:10,640 --> 01:43:16,480
उन पर व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं करता। उनका अनादर करते हुए।

1434
01:43:16,480 --> 01:43:20,560
चारों शंकराचार्य को बुला लो चार करोड़ देकर के। अरे भैया

1435
01:43:20,560 --> 01:43:25,320
अर्थ लगता है तो इसलिए लगता है कि जगह-जगह गौशाला

1436
01:43:25,320 --> 01:43:29,360
है। पूरे भारतवर्ष में जगह-जगह पर देख रहे हो क्या

1437
01:43:29,360 --> 01:43:33,440
हालात है? और तुम भी तो थे उसी व्यवस्था का

1438
01:43:33,440 --> 01:43:37,520
एक हिस्सा तो फिर शिकायत क्यों कर रहे हो? क्योंकि आज तुम अलग

1439
01:43:37,520 --> 01:43:41,600
हो इसलिए शिकायत कर रहे हो। जब तक उसके साथ थे उसी व्यवस्था के तो वो वो व्यवस्था

1440
01:43:41,600 --> 01:43:46,080
ठीक थी। और अगर नहीं ठीक थी तो उस समय प्रतिकार क्यों नहीं कर रहे थे समर्थन

1441
01:43:46,080 --> 01:43:49,000
करने की

1442
01:43:49,000 --> 01:43:53,400
बजाय चलाओ

1443
01:43:53,400 --> 01:43:57,440
भैया परिकरों का 55 लाख 10 लाख 15 लाख

1444
01:43:57,440 --> 01:44:01,440
एक एक परिकर ले लेंगे गुरु जी से निवेदन करेंगे गुरु जी वहां चलना है गुरु जी चलना है ये धार्मिक धर्म

1445
01:44:01,440 --> 01:44:05,440
सभा करनी है गुरु तो गुरु जी क्या कहेंगे नहीं जाएंगे गुरु जी तो जाएंगे और गुरु जी क्या कहेंगे कितने में बात किए

1446
01:44:05,440 --> 01:44:09,520
हो हमको इतना कमीशन दो ऐसा तो होता नहीं है ना कारण क्या है मठों की जो संपदा है मठों

1447
01:44:09,520 --> 01:44:13,600
की जो प्रतिभा है उसको जब नीलाम किया जाता है परिकों के द्वारा परिक्रमों को खरीद कर

1448
01:44:13,600 --> 01:44:17,840
आयोजक शंकराचार्य को बुलाते हैं। यह आयोजन का तथ्य है और अगर किसी व्यक्ति को इस बात में संदेह लगता

1449
01:44:17,840 --> 01:44:22,080
हो तो एक बार आप स्वयं आमना पीठों से संपर्क करें कि मैं शंकराचार्य

1450
01:44:22,080 --> 01:44:26,160
का कार्यक्रम कराना चाहता हूं। क्या बात है? क्या व्यवस्था है? अब लोग यह कहेंगे कि

1451
01:44:26,160 --> 01:44:30,160
भाई कार्यक्रम की तो तुम भी दक्षिणा लेते हो। तो पहली बात कि मैं सन्यासी नहीं हूं। दूसरी बात

1452
01:44:30,160 --> 01:44:34,880
कि मैं कार्यक्रमों की दक्षिणा निश्चित नहीं रखता हूं। नारायण

1453
01:44:34,880 --> 01:44:38,960
मैंने स्पष्ट कहा है कि जो व्यक्ति जितना सामर्थ्य रखता है वो व्यक्ति

1454
01:44:38,960 --> 01:44:43,040
उस अनुसार दक्षिणा देगा। हां ये जरूर है ये अवश्य है

1455
01:44:43,040 --> 01:44:47,040
कि जिस व्यक्ति का सामर्थ्य 10 लाख का है उसको मैं 10,000 नहीं कहूंगा और जिसका सामर्थ 10,000 का है उसको मैं 10

1456
01:44:47,040 --> 01:44:51,120
लाख नहीं कहूंगा। हां मेरे पास समय होना चाहिए। साल में कितने ऐसे कार्यक्रम होते हैं जो मैं निशुल्क करता

1457
01:44:51,120 --> 01:44:55,120
हूं। साल में कितने ऐसे कार्यक्रम होते हैं जो मैं कहता हूं जो इच्छा हो दे दीजिएगा। और साल में कितने ऐसे कार्यक्रम

1458
01:44:55,120 --> 01:44:59,440
होते हैं जहां मैं साल में ऐसे कई कार्यक्रम होते हैं जो शंकराचार्य

1459
01:44:59,440 --> 01:45:03,520
के भी निशुल्क होते हैं। और

1460
01:45:03,520 --> 01:45:07,640
मैं गिनवा दूंगा। चलना तुमको

1461
01:45:07,640 --> 01:45:08,640
केवल

1462
01:45:08,640 --> 01:45:13,520
वैमनसता और नकारात्मकता फैलानी है शंकराचार्यों के प्रति

1463
01:45:13,520 --> 01:45:17,600
अगर वो वहां पर अच्छा तुमने भी माना कि हम तो लेते हैं

1464
01:45:17,600 --> 01:45:23,600
बस जिसकी जिसका सामर्थ 10 लाख है उससे 10,000 नहीं यानी तय तो तुम भी करते हो

1465
01:45:24,280 --> 01:45:28,400
ना और अगर तुम गस्थ गृहस्थ हो तुम सन्यासी नहीं

1466
01:45:28,400 --> 01:45:32,560
हो तो उनके पास उनके पास वो भी तो है उत्तरदायित्व

1467
01:45:32,560 --> 01:45:36,960
तुम्हारे पास क्या उत्तरदायित्व सिवाय तुम्हारे रे अपने परिवार के कौन सी गौशालाएं

1468
01:45:36,960 --> 01:45:41,120
तुमने कर रखी है कौन सा क्या कर रखा है पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्यों

1469
01:45:41,120 --> 01:45:45,400
के साथ तुम कंबल बांट देते हो तो अपनी वाहवाही करवाते

1470
01:45:45,400 --> 01:45:50,040
हो चलो

1471
01:45:50,040 --> 01:45:54,080
चलो बताऊं कि तुम्हारा ये सामर्थ है तो इतना देने में समर्थ तुम लो दो और ये बात

1472
01:45:54,080 --> 01:45:58,320
जान लीजिए कि बाकी कार्यक्रमों के समान हमारे कार्यक्रम में दक्षिणा में कोई कमी

1473
01:45:58,320 --> 01:46:02,320
नहीं होती तो सिद्ध त्रिकालदर्शी साक्षात हरिहर के तेज संयुक्त महाराज जी जो है वो

1474
01:46:02,320 --> 01:46:06,480
3 साल की बात कहे थे कि नहीं कह थे और बाद निष्क ब्रह्मचारी ही और निर्कल्पनंद सरस्वती गुरु

1475
01:46:06,480 --> 01:46:10,640
भाइयों को कहने लगे कि नहीं व्यक्तिगत रूप से तुम्हारे ही निकटवर्ती

1476
01:46:10,640 --> 01:46:14,880
गुरु भाई इनको कहे थे कि हिंदू राष्ट्र प्रकल्प की चर्चा अधिक नहीं करनी है अब इस विषय में हमसे मत पूछो कहीं बात मत हो गई सब भी तो

1477
01:46:14,880 --> 01:46:18,880
कही हुई है ना बात वृंदावन में और उज्जैन में और उज्जैन वाले जो शर्मा जी

1478
01:46:18,880 --> 01:46:22,880
है उनसे जरा बात कर लेना कि जो तीन चार साल से लगे हुए थे इस अभियान में उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया है आपके

1479
01:46:22,880 --> 01:46:26,960
तो परिचित होंगे ना उज्जैन वाले शर्मा जी उनसे बात कर लेना अभी हाल फिलहाल का मामला है बहुत पुराना भी नहीं इसी महीने की

1480
01:46:26,960 --> 01:46:31,360
घटना है ना आगे पीछे तुमको जो है

1481
01:46:31,360 --> 01:46:35,840
सात आठ वर्ष की आयु से देवताओं ने दर्शन देना शुरू कर दिया था।

1482
01:46:35,840 --> 01:46:39,840
हां। तुम एफबी पे क्या कर रहे हो वहां पर? गालियां दे दे के।

1483
01:46:39,840 --> 01:46:44,280
वो कहां गया फिर तुम्हारा देवत्व? तुमको जो

1484
01:46:44,280 --> 01:46:48,400
है 2017 में यंत्र प्राप्त हो गया था। तुम्हारे कहां प्रेम प्रसंग

1485
01:46:48,400 --> 01:46:53,200
चल रहे हैं। तुम जानवी को लेकर के गाना गा रहे हो। दिखाओ भैया इनका गाना जरा।

1486
01:46:53,200 --> 01:46:59,200
दिखाओ इनका गाना।

1487
01:47:02,080 --> 01:47:08,080
दिखाओ

1488
01:47:15,080 --> 01:47:19,920
गाना अरे बाद में क्यों?

1489
01:47:19,920 --> 01:47:24,000
ठीक है। आगे पीछे वो गाना भी दिखा दिया जाएगा। चैनल पर डाल दिया जाएगा

1490
01:47:24,000 --> 01:47:28,640
जो प्रेम प्रसंग में जो ये गा रहे हैं

1491
01:47:28,640 --> 01:47:32,960
एक तरफ तुम्हें यंत्र मिल रहा है देवताओं का वहां देवत्व चला गया

1492
01:47:32,960 --> 01:47:38,160
जो तुम गाना गाते फिर रहे हो अविवाहित होते हुए

1493
01:47:38,160 --> 01:47:42,320
और या तो कह दो कि नहीं गाया कह देना फिर

1494
01:47:42,320 --> 01:47:48,320
उसके बाद दिखा देंगे और क्या

1495
01:47:49,960 --> 01:47:54,480
था वो क्या बोल कि वो

1496
01:47:54,480 --> 01:47:58,640
तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र पहली बात तो तुम गलत जगह आ जाते हो। प्रॉब्लम

1497
01:47:58,640 --> 01:48:02,640
यही है। प्रॉब्लम यही है। क्या हम इस चीज को लेकर

1498
01:48:02,640 --> 01:48:06,960
के भिड़ते हैं? किसी से किसी से बात करने जाते हैं कि तीन

1499
01:48:06,960 --> 01:48:11,040
वर्ष की बात मान नहीं तो तू जो है जा यहां से या जो भी है

1500
01:48:11,040 --> 01:48:15,440
तेरी चीजें ठीक छोटी है ये वो है एक प्रकल्प पकड़ा था

1501
01:48:15,440 --> 01:48:19,680
कि सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म हमें एक कर सकता है

1502
01:48:19,680 --> 01:48:23,840
ये वो चीजें हैं जो हमें मिलवा सकती हैं जो असंगठित हिंदुओं को

1503
01:48:23,840 --> 01:48:28,000
संगठित कर सकती है आचार्यों ने किस परिपेक्ष में क्या बोला है

1504
01:48:28,000 --> 01:48:32,160
यह सब चीजें आचार्यों से जाकर पूछिए हम तो इस चीज को लेकर के नहीं निकल

1505
01:48:32,160 --> 01:48:36,320
रहे आगे कि उन्होंने भाट क्यों बोला? उन्होंने मधुमक्खियों की सेना क्यों बोली?

1506
01:48:36,320 --> 01:48:40,560
मगर आप जब आपका जो पक्ष है, जिस पक्ष में आप निरुत्तर होने लगेंगे

1507
01:48:40,560 --> 01:48:44,560
तो आप बार-बार तीन वर्ष लाएंगे। अरे हम आए थे क्या आपके पास तीन वर्ष

1508
01:48:44,560 --> 01:48:48,640
की बात लेकर के? हम तो नहीं लेकर के निकल रहे हैं।

1509
01:48:48,640 --> 01:48:52,720
नहीं नहीं इसको मानो। शंकराचार्य शंकराचार्य इसलिए नहीं

1510
01:48:52,720 --> 01:48:56,920
है कि उन्होंने तीन वर्ष की में हिंदू राष्ट्र की घोषणा की

1511
01:48:56,920 --> 01:49:02,520
है। उनके शंकराचार्य होने के लिए पर्याप्त कारण है

1512
01:49:02,520 --> 01:49:04,960
शास्त्रोक्त इसलिए वो शंकराचार्य

1513
01:49:04,960 --> 01:49:09,120
हैं। अब जो उन कारणों से उनके अनुगत हो गया,

1514
01:49:09,120 --> 01:49:15,120
उनमें निष्ठावान हो गया। वह अपने आचार्य की वाणी को जाने देखे

1515
01:49:17,720 --> 01:49:22,080
समझे। कि उन्होंने ये क्यों कहा, उन्होंने वो क्यों कहा? मतलब जहां तुम हारने

1516
01:49:22,080 --> 01:49:26,240
लगो, जहां तुम असफल होने लगो, जहां तुम्हारी बात कटने लगे, वहां तुम ये सब

1517
01:49:26,240 --> 01:49:30,480
करने लगो। तुम्हारे आचार्य की बात कैसे खाली जा रही है? अरे भैया आचार्य

1518
01:49:30,480 --> 01:49:34,800
ने कब क्यों किस परिपेक्ष में कहा? हम आचार्य की वाणी का

1519
01:49:34,800 --> 01:49:38,800
तुमको हम व्याख्या करके बताएं। आचार्य ने जो हमें

1520
01:49:38,800 --> 01:49:42,800
सिद्धांत दिए उनकी उनका प्रचार प्रसार कर रहे हैं। और

1521
01:49:42,800 --> 01:49:46,880
हम किसी को भी नहीं कहते कि नहीं जा तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र होना

1522
01:49:46,880 --> 01:49:51,040
है मान ले। हम भी तो

1523
01:49:51,040 --> 01:49:55,040
गुरुदेव जब से ये चैनल चल रहा है। हमने कितनी बार लोगों के यहां जाकर

1524
01:49:55,040 --> 01:49:59,200
के चर्चा करी। अह 3 वर्ष में हिंदू राष्ट्र होने वाला है।

1525
01:49:59,200 --> 01:50:03,360
मान लो नहीं तो तुम जो है आर्य समाजी हो। यह है वह है अहिू

1526
01:50:03,360 --> 01:50:07,440
हो, अप्रामाणिक हो, परंपरा प्राप्त आचार्यों के द्रोही हो। ये वो सिद्धांत

1527
01:50:07,440 --> 01:50:11,440
तो नहीं है। ये तो आचार्यों की वाणी है। उन्होंने किस परिपेक्ष में क्यों कही

1528
01:50:11,440 --> 01:50:15,520
आचार्यों का मामला है। उनसे जाकर के आप समझिए। हमसे जब भी

1529
01:50:15,520 --> 01:50:20,000
बात करने आएंगे जब जब अटकने लगेंगे सा वर्ष मधुमक्खी की सेना

1530
01:50:20,000 --> 01:50:23,640
ये सब क्या

1531
01:50:23,640 --> 01:50:29,200
है? चलिए

1532
01:50:29,200 --> 01:50:33,360
तुम उनके उस अनुभव को सार्वजनिक लाने का साहस करोगे हम लाएंगे तो कहोगे कहोगे सत्यापित करो

1533
01:50:33,360 --> 01:50:37,520
सत्यापन नहीं करते तो जो सत्यापन नहीं करते तो क्यों देखें और आपने मेरी कॉल रिकॉर्डिंग वाली वीडियो इसीलिए

1534
01:50:37,520 --> 01:50:41,520
नहीं देखी क्योंकि मैंने उसका सत्यापन नहीं किया और इतने और लेकिन आपने स्वयं नहीं सुनी

1535
01:50:41,520 --> 01:50:45,520
है ऐसा इसी लाइव हिस्ट्री में आप पहले स्वीकार कर चुके हैं अभी 10 ही मिनट हुए हैं इस वीडियो को हम देखते

1536
01:50:45,520 --> 01:50:49,520
हुए तो 10 मिनट के हैं उसमें आप क्या कह चुके हैं कि हम इस बात को स्वीकार नहीं

1537
01:50:49,520 --> 01:50:53,600
करते सत्यापित नहीं करते इस वजह से निग्रहाचार्य इस ऑडियो में कही गई

1538
01:50:53,600 --> 01:50:57,600
बातों का सत्यापन नहीं करते इस वजह वजह से आपने वो कॉल रिकॉर्डिंग वाली बात देखी ही नहीं है। तो

1539
01:50:57,600 --> 01:51:02,280
भैया जब आप देखे ही नहीं थे उस समय तक तो आप कैसे कह [संगीत]

1540
01:51:02,280 --> 01:51:08,280
दिए रुक जा फिर बताता हूं। [प्रशंसा]

1541
01:51:15,620 --> 01:51:21,620
[संगीत]

1542
01:51:29,280 --> 01:51:33,640
कोई चिंता की बात नहीं आधी रात तक का परमिशन है अपने पास आधी रात तक का समय है अपने

1543
01:51:33,640 --> 01:51:39,640
पास खैर मुझे लगा की आवाज आ रही है तो ये बात है

1544
01:51:39,880 --> 01:51:44,000
कि इसी लाइव स्ट्रीम में अभी 10 मिनट तक का ही भाग मैं देख

1545
01:51:44,000 --> 01:51:48,000
पाया हूं हूं। आपने कहा है पहले ही कॉल रिकॉर्डिंग वाले विषय में किक क्योंकि मैंने यह कहा

1546
01:51:48,000 --> 01:51:52,320
था कि मैं इस ऑडियो को सत्यापित नहीं करता। इसीलिए आपने वो कॉल रिकॉर्डिंग नहीं सुनी

1547
01:51:52,320 --> 01:51:56,400
और अभी पांच छ मिनट बढ़े ही है हम आपकी वीडियो में कि आप कह रहे हैं कि उस कॉल रिकॉर्डिंग में विरोधाभासी बातें थी।

1548
01:51:56,400 --> 01:52:00,560
तो ऐसा क्या हुआ आपके साथ कि 5 सात मिनट पहले आप इसी लाइव स्ट्रीम में कहे टोटल

1549
01:52:00,560 --> 01:52:05,120
तो 10 मिनट 16 सेकंड तक अभी तक हम पहुंचे हैं। इसमें 10 मिनट 16 सेकंड तक पहुंचे हैं।

1550
01:52:05,120 --> 01:52:09,280
आप टाइम स्टैंप देख सकते हैं यहां पर। 10 मिनट 16 सेकंड

1551
01:52:09,280 --> 01:52:13,280
तक हम पहुंचे हैं और इसी में आप दो चार पांच मिनट पहले कह चुके हैं

1552
01:52:13,280 --> 01:52:17,280
कि आपने मेरी कॉल रिकॉर्डिंग वाली वीडियो इसीलिए नहीं देखी क्योंकि मैंने उसका सत्यापन नहीं किया और इतने ही पांच सात

1553
01:52:17,280 --> 01:52:21,800
मिनट के बाद आप फिर कह रहे हैं कि उसमें विरोधाभासी बातें थी

1554
01:52:21,800 --> 01:52:26,000
क्या दोनों में से क्या बातें सत्य है और अगर आपने लाइफ में चलते-चलते

1555
01:52:26,000 --> 01:52:32,000
देख ली तो ये तो संभव नहीं है ना कि आपने कि

1556
01:52:34,680 --> 01:52:39,040
आपने कि आपने 55 मिनट की वीडियो जो है वो बिलकुल पांच मिनट में देख

1557
01:52:39,040 --> 01:52:43,200
50 मिनट वीडियो जो भी है या उसको रिकॉर्डिंग का हिस्सा भी मान ले तो वो लगभग लगभग

1558
01:52:43,200 --> 01:52:47,480
कितना नहीं इनका कहने का पीछे से पीछे करो

1559
01:52:47,480 --> 01:52:52,440
दोबारा पीछे करो

1560
01:52:52,440 --> 01:52:56,480
दोबारा खैर तो मुझे लग रहा है कि आवाज ठीक से आ रही है तो ये बात है कि

1561
01:52:56,480 --> 01:53:00,560
इसी लाइव स्ट्रीम में अभी 10 मिनट तक का ही भाग मैं देख पाया हूं आपने कहा है पहले ही कॉल

1562
01:53:00,560 --> 01:53:04,640
रिकॉर्डिंग वाले विषय में कि मैंने यह कहा था कि मैं इस ऑडियो को सत्यापित नहीं करता इसीलिए आपने

1563
01:53:04,640 --> 01:53:08,800
वो कॉल रिकॉर्डिंग नहीं सुनी और अभी 5 6 मिनट बढ़ ही है हम आपके वीडियो में कि आप कह रहे हैं कि उसके

1564
01:53:08,800 --> 01:53:12,800
अकॉर्डिंग में विरोधाभासी बातें थी तो ऐसा क्या हुआ आपके साथ कि 5 सात मिनट पहले

1565
01:53:12,800 --> 01:53:16,960
आप इसी लाइव स्ट्रीम में कहें टोटल तो 10 मिनट 16 सेकंड तक अभी तक हम पहुंचे हैं इसमें 10 मिनट

1566
01:53:16,960 --> 01:53:22,960
16 सेकंड तक पहुंचे

1567
01:55:39,520 --> 01:55:45,400
तो कॉल रिकॉर्डिंग वाली वाली जो बात है वह हमने अभी भी नहीं सुनी है

1568
01:55:45,400 --> 01:55:49,440
और यह कहीं पर कोई या तो हमसे कुछ कहने में गलती

1569
01:55:49,440 --> 01:55:53,520
हुई होगी या फिर आपके समझने में इतने इससे ज्यादा इसका इसके बारे में हम

1570
01:55:53,520 --> 01:55:57,600
और कुछ नहीं कह पाएंगे। आपकी वो कॉल रिकॉर्डिंग आज की डेट तक भी हमने नहीं सुनी

1571
01:55:57,600 --> 01:56:01,760
है। यही सच्चाई है। बोलिए भाई

1572
01:56:01,760 --> 01:56:05,920
आप टाइम उस टाइम देख सकते हैं यहां पर। 10 मिनट 16 सेकंड

1573
01:56:05,920 --> 01:56:09,920
तक हम पहुंचे हैं और इसी में आप दो चार पांच मिनट पहले कह चुके हैं

1574
01:56:09,920 --> 01:56:13,920
कि आपने मेरी कॉल रिकॉर्डिंग वाली वीडियो इसीलिए नहीं देखी क्योंकि मैंने उसका सत्यापन नहीं किया और इतने ही पांच सात

1575
01:56:13,920 --> 01:56:19,520
मिनट के बाद आप फिर कह रहे हैं कि उसमें विरोधाभासी बातें थी क्या

1576
01:56:19,520 --> 01:56:23,920
भाई क्या बात है मेरा वो लाइव आप चला सकते हैं क्या एक ऑपरेटर ऑपरेटर

1577
01:56:23,920 --> 01:56:28,000
महोदय ये जो टाइम स्टैंप बता रहे हैं उस टाइम स्टैंप

1578
01:56:28,000 --> 01:56:32,160
पे मेरा वो लाइव चला सकते हैं क्या

1579
01:56:32,160 --> 01:56:36,240
तो मुझे बताएं अगर सहज हो आपके आपके लिए जरा देख लें हमने क्या बोला था

1580
01:56:36,240 --> 01:56:40,480
क्योंकि ये आधा आधी अधूरी बात लेकर के और

1581
01:56:40,480 --> 01:56:46,480
उस पर जो है चाबुक लेकर के घोड़े को दौड़ाते हैं।

1582
01:56:51,030 --> 01:56:57,030
[संगीत]

1583
01:57:04,880 --> 01:57:09,240
चलो अच्छा इसी को प्ले करो अगर वो नहीं हो पा रहा है

1584
01:57:09,240 --> 01:57:13,920
तो चलते चलते देख ली तो ये तो संभव नहीं है ना कि आपने

1585
01:57:13,920 --> 01:57:19,480
या

1586
01:57:19,480 --> 01:57:23,840
आपने कि आपने 55 मिनट की वीडियो जो है वो बिल्कुल 5 मिनट में देख

1587
01:57:23,840 --> 01:57:27,840
50 मिनट की वीडियो जो भी है या उसमें कॉल रिकॉर्डिंग का हिसाब भी मान ले तो वो लगभग कितना होगा कॉल रिकॉर्डिंग

1588
01:57:27,840 --> 01:57:31,840
का हिसाब 45 मिनट का होगा 42 47 मिनट का होगा तो आप क्या 10 गुनी गति से उसको देख

1589
01:57:31,840 --> 01:57:35,840
रहे थे जो आपको पता चल गया बातें थी और कॉल रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने के

1590
01:57:35,840 --> 01:57:39,840
कारण यदि आप ये कहते हैं कि हम लाइव में नहीं आना चाहते आपके साथ के बारे

1591
01:57:39,840 --> 01:57:44,560
में हमने निग्रचार की कॉल रिकॉर्डिंग के बारे में

1592
01:57:44,560 --> 01:57:48,640
विरोधाभासी बातें थी उसमें ऐसा नहीं कहा होगा

1593
01:57:48,640 --> 01:57:52,640
और अगर कहा होगा तो वो कोई ना कोई शाब्दिक गलती रही

1594
01:57:52,640 --> 01:57:56,720
होगी होगी या तो हमने कहा नहीं होगा ये 100% श्योर है।

1595
01:57:56,720 --> 01:58:00,960
एक मिनट रुको जरा कितना बता रहे हैं जरा मोबाइल खोलना जरा लाइव

1596
01:58:00,960 --> 01:58:04,720
वो लाइव जो मैंने

1597
01:58:04,720 --> 01:58:10,720
लास्ट लाइव की है

1598
01:58:16,120 --> 01:58:22,120
जो कितना टाइम स्ट बता रहे हैं वहां लाना जरा क्या बोल रहा है

1599
01:58:26,860 --> 01:58:29,520
[संगीत]

1600
01:58:29,520 --> 01:58:32,600
आशा करते हैं आप सभी

1601
01:58:32,600 --> 01:58:37,560
को एक तरफचार्य जी प्रपोजल देते

1602
01:58:37,560 --> 01:58:42,280
हैं जो इस विषय पर चर्चा जो है व्यक्तिगत

1603
01:58:42,280 --> 01:58:46,400
का है लोगों से और वो जरा पर बात

1604
01:58:46,400 --> 01:58:50,400
करते वो जरा बोलना जरा वो इनका बुलवाना वो टाइम स्टैंप अभी दिखा रहे है हल्का

1605
01:58:50,400 --> 01:58:55,060
सा पीछे करके प्ले करो।

1606
01:58:55,060 --> 01:59:01,060
[प्रशंसा]

1607
01:59:02,880 --> 01:59:06,880
कोई चिंता की बात नहीं। आधी रात तक का परमिशन है अपने पास। आधी रात तक का समय है

1608
01:59:06,880 --> 01:59:11,040
अपने पास। चार पांच घंटे की परमिशन हमने ले रखी है। तो

1609
01:59:11,040 --> 01:59:15,280
मेरे पास कोई दिक्कत नहीं है। आप लोग भी अपना बाद में भी डाउनलोड करके देख सकते हैं। लेकिन

1610
01:59:15,280 --> 01:59:21,280
ये लाइव तो मैं पूरा का पूरा पोस्ट का पोस्टमार्टम करूंगा।

1611
01:59:34,480 --> 01:59:38,480
खैर तो मुझे लग रहा है कि आवाज ठीक से आ रही है। तो ये बात है कि इसी लाइव स्ट्रीम

1612
01:59:38,480 --> 01:59:42,480
में अभी 10 मिनट तक का ही भाग मैं देख पाया हूं। आपने कहा है पहले ही कॉल रिकॉर्डिंग वाले विषय में

1613
01:59:42,480 --> 01:59:46,480
कि क्योंकि मैंने ये कहा था कि मैं इस ऑडियो को सत्यापित नहीं करता। इसीलिए आपने वो कॉल रिकॉर्डिंग

1614
01:59:46,480 --> 01:59:50,800
नहीं सुनी। और अभी 5- 6 मिनट बढ़े ही है हम आपके वीडियो में कि आप कह रहे हैं कि उस कॉल रिकॉर्डिंग में विरोधाभासी

1615
01:59:50,800 --> 01:59:55,760
बातें तो ऐसा क्या हुआ आपके साथ कि पांच सात मिनट पहले आप इसे

1616
01:59:55,760 --> 02:00:00,160
पीछे करो कौन सी टाइमिंग बता रहे हैं हल्का

1617
02:00:00,160 --> 02:00:04,640
सा पीछे करो है अपने पास आधे रात तक का समय है अपने पास

1618
02:00:04,640 --> 02:00:08,640
चार पांच घंटे की परमिशन हमने ले रखी है तो मेरे पास कोई दिक्कत

1619
02:00:08,640 --> 02:00:10,080
नहीं है आप लोग भी अपना बाद में

1620
02:00:10,080 --> 02:00:14,320
डाउनलोड करके देख सकते हैं लेकिन ये लाइव तो मैं पूरा का पूरा पोस्ट का पोस्टमार्टम

1621
02:00:14,320 --> 02:00:20,320
करूंगा

1622
02:00:22,400 --> 02:00:26,400
कि हम इस बात को स्वीकार नहीं करते। सत्यापित नहीं करते। इस वजह से

1623
02:00:26,400 --> 02:00:30,640
निग्रचार इस ऑडियो में कही गई बातों का सत्यापन नहीं करते। इस वजह से आपने वो कॉल रिकॉर्डिंग

1624
02:00:30,640 --> 02:00:34,640
वाली बात देखी ही नहीं है। तो भैया जब आप देखे ही नहीं थे उस समय। दूसरी बात ये

1625
02:00:34,640 --> 02:00:40,640
भी है। अच्छा जब हमने चर्चा के लिए प्रस्ताव रखा था। उस प्रस्ताव

1626
02:00:41,000 --> 02:00:47,000
को आप इसको दोबारा एक बार और पीछे करिए।

1627
02:00:47,680 --> 02:00:51,680
तो सत्यापन के अधीन नहीं है कि तुम अचक से विषय के में ये हो

1628
02:00:51,680 --> 02:00:55,920
गया आचारों के विरोध वाली पंक्ति गई थी मैं उस नहीं जाऊंगा मगर

1629
02:00:55,920 --> 02:00:59,920
ऐसा हो गया तो ये बात हमें इससे बुलवाए उससे बुलवाए ऐसी चीजों पे हम

1630
02:00:59,920 --> 02:01:03,920
लोग बात नहीं करते हम लोग आदत की चीजों पर बात करते तो उसप

1631
02:01:03,920 --> 02:01:08,000
हम बात तो पहली बात तो ये है कि आपके एक तरफ आप प्रपोजल

1632
02:01:08,000 --> 02:01:12,160
रखते हैं चर्चा का दूसरी ओर क्या कहते

1633
02:01:12,160 --> 02:01:16,520
हैं आप विरोधाभासी वीडियो डाल

1634
02:01:16,520 --> 02:01:20,640
देखा यह है मैं कह रहा हूं

1635
02:01:20,640 --> 02:01:25,120
विरोधाभासी वीडियो डालना और यह कह रहे हैं कि उस कॉल रिकॉर्डिंग

1636
02:01:25,120 --> 02:01:29,600
में विरोधाभास है। वाह बहुत बढ़िया

1637
02:01:29,600 --> 02:01:34,360
यही तो है। अभी एक दोगलापन तुम्हारा पहले बताया और अब फिर बता रहे हैं।

1638
02:01:34,360 --> 02:01:38,480
सुनो विरोधाभासी वीडियो मतलब तुम हमसे चर्चा करने आ

1639
02:01:38,480 --> 02:01:43,080
रहे हो। और दूसरा हमारे ही विरोध में विरोधाभासी

1640
02:01:43,080 --> 02:01:47,280
ऐसा ऐसा वीडियो डाल रहे हो जिससे हमारे विरोध का आभास

1641
02:01:47,280 --> 02:01:51,440
हो रहा है। उस उसमें जो कंटेंट है वो विरोध उसमें

1642
02:01:51,440 --> 02:01:55,720
कंटेंट विरोधाभासी नहीं है। ये सब हमने नहीं कहा। हमने क्या

1643
02:01:55,720 --> 02:02:00,400
कहा? इसीलिए हम उस पर अड़ते हैं।

1644
02:02:00,400 --> 02:02:02,760
यही अंतर है तुम में और हम में भगवत

1645
02:02:02,760 --> 02:02:06,800
आनंद। मैं अड़ा क्यों? क्योंकि मुझे अपने ऊपर विश्वास था कि मैंने कहा ही

1646
02:02:06,800 --> 02:02:10,800
नहीं। का ही मैंने कहा ही नहीं होगा ये कहीं ना कहीं कोई गलती हो

1647
02:02:10,800 --> 02:02:16,200
रही है और देख लो मैं कह रहा हूं कि

1648
02:02:16,200 --> 02:02:20,400
हम जो तुम चर्चा के लिए हमसे प्रस्ताव रखते हो

1649
02:02:20,400 --> 02:02:24,800
एक तरफ तो इस चर्चा जब तुम कहते हो तो हम सोचते हैं कि तुम एक सामंजस्य

1650
02:02:24,800 --> 02:02:28,800
बिठाना चाहते हो तुम एक सौहार्दपूर्ण चर्चा करना चाहते हो तुम

1651
02:02:28,800 --> 02:02:32,800
लड़ने भिड़ने नहीं आ रहे हो आ रहे हो ठीक है तुम

1652
02:02:32,800 --> 02:02:36,800
जीतने नहीं आ रहे हो तुम निराकरण के लिए आ रहे हो तो जब एक तरफ

1653
02:02:36,800 --> 02:02:40,880
जब ऐसा करते हो कि शिवश नारायण द्विवेदी के को यदि अनुकूल

1654
02:02:40,880 --> 02:02:44,960
लगे तो वो हमसे कल शाम 5:00 बजे से पहले तक चर्चा कर सकते हैं। जब तुम यह

1655
02:02:44,960 --> 02:02:49,360
बोलते हो जिसका हम वहां पर प्रोत्साहन भी करते हैं उसको एप्रिशिएट

1656
02:02:49,360 --> 02:02:53,680
भी करते हैं तो दूसरी तरफ तुम जब हमारे विरोध में वीडियो डालते हो

1657
02:02:53,680 --> 02:02:58,080
भाई जिस पक्ष को लेकर के हम खड़े हुए हैं उसी पक्ष पर तो हमारी चर्चा होने वाली है

1658
02:02:58,080 --> 02:03:02,240
और उसी पक्ष से संबंधित तुम वीडियो डाल देते हो विरोधाभासी। अब हमने

1659
02:03:02,240 --> 02:03:06,400
कहा वीडियो विरोधाभासी है तो आपने उसका अर्थ निकाल लिया कि उस वीडियो

1660
02:03:06,400 --> 02:03:10,120
के अंदर का कंटेंट विरोधाभासी

1661
02:03:10,120 --> 02:03:14,240
है। क्यों ऐसा कर रहे हो भाई? पहले पूरा देख तो लो। क्या

1662
02:03:14,240 --> 02:03:17,920
बोल रहा है सामने वाला व्यक्ति? तुम तो बड़े मर्मज्ञ हो। तुम तो बड़े

1663
02:03:17,920 --> 02:03:21,920
वाकपटु हो। तुम तो बड़े भाषाओं के धनी हो। तो क्या

1664
02:03:21,920 --> 02:03:26,240
हो गया? समझ नहीं पा रहे थे। क्या बोला हमने?

1665
02:03:26,240 --> 02:03:30,240
लो सुन लो भैया। हमने कहा इसमें वीडियो के अंदर की जो

1666
02:03:30,240 --> 02:03:34,480
सूचना है वह विरोधाभासी है। यह कह रहे हैं कि या वो वीडियो

1667
02:03:34,480 --> 02:03:39,640
मेरे विरोध में है। यह कह रहे हैं। ये सब लोग सुनो मैं सुनाता

1668
02:03:39,640 --> 02:03:44,240
हूं। ये के अधीन है। किसने देखा? डांस हुआ था।

1669
02:03:44,240 --> 02:03:48,320
किसने? बात आई थी ना कि डांस हुआ था। किसने देखा? तो सत्यापन के अधीन है। उसमें फिर

1670
02:03:48,320 --> 02:03:54,320
हमें जाना पड़ेगा कि हमें इससे बुलवाया उसने बुलवाया।

1671
02:03:59,680 --> 02:04:03,920
ये क्या है? एक मिनट ज्ञापन के अधीन है। उसमें फिर हमें जाना

1672
02:04:03,920 --> 02:04:08,160
पड़ेगा कि हमें इससे बुलवाए उससे बुलवाए। ऐसी चीजों पे हम लोग बात नहीं करते। हम लोग अकाद

1673
02:04:08,160 --> 02:04:12,160
की चीजों पर बात करते हैं। जो अकाट हो गया तो उसप हम बात करते हैं। तो पहली बात तो

1674
02:04:12,160 --> 02:04:16,720
ये है कि आपके एक तरफ आप प्रपोजल करते हैं चर्चा का।

1675
02:04:16,720 --> 02:04:20,880
दूसरी ओर अह क्या कहते हैं आप विरोधाभासी वीडियो डालना

1676
02:04:20,880 --> 02:04:24,880
रोकते नहीं है। हां। तो विरोधा देखो। हम यहां बता रहे

1677
02:04:24,880 --> 02:04:28,960
हैं। एक तरफ आप चर्चा का प्रपोजल रखते हैं और दूसरी ओर आप

1678
02:04:28,960 --> 02:04:33,120
विरोधाभासी वीडियो डालना बंद नहीं करते हैं। हमारे विरोध में वीडियो डालना

1679
02:04:33,120 --> 02:04:37,680
बंद नहीं करते हैं। तो काहे की चर्चा हो रही है। वो तो प्रतिस्पर्धा

1680
02:04:37,680 --> 02:04:41,760
हो रही है ना द्वंद हो रहा है। और द्वंद से ही हम दूर रहना चाह

1681
02:04:41,760 --> 02:04:46,080
रहे तुम्हारे साथ क्योंकि हम लोगों को नहीं दिखाना चाह रहे तुम्हारे साथ लड़ते

1682
02:04:46,080 --> 02:04:50,160
हुए। यह दृश्य भी तुमने विवश किया है। अब वो तुम वजन वाला जो तुमने

1683
02:04:50,160 --> 02:04:54,480
आगे कुतक किया है उसको हम आगे ही देखेंगे। मगर यहां तुम्हारी बात झूठी

1684
02:04:54,480 --> 02:04:58,560
पड़ गई। और जितने इनके फॉलोअर्स हैं वो भी देखें

1685
02:04:58,560 --> 02:05:03,760
कि कितना झूठ बोलते हैं।

1686
02:05:03,760 --> 02:05:07,760
झूठ बोला ना। हम कह रहे हैं हमारे विरोध में वीडियो बनाया। तुम कह

1687
02:05:07,760 --> 02:05:12,000
रहे हो कि उस वीडियो के अंदर विरोधाभासी बातें हैं। वाह! अकल

1688
02:05:12,000 --> 02:05:16,800
से पैदल हो क्या भाई? चलो चलाओ।

1689
02:05:16,800 --> 02:05:20,880
बात तो आपने क्या कहा? हालांकि जिसमें हम वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे उस समय तक आपका नहीं आया था वो विषय तो

1690
02:05:20,880 --> 02:05:24,960
एक और आप अभी इसीलिए लाइफ में कह चुके हैं कि हमने वो कॉल रिकॉर्डिंग वाली वीडियो नहीं देखी है

1691
02:05:24,960 --> 02:05:29,200
क्योंकि आपने कहा कि सत्यापन हम नहीं करते तो जो सत्यापन नहीं करते तो क्यों देखें और लोगों को कह दिया कि एंटरटेनमेंट

1692
02:05:29,200 --> 02:05:33,200
के लिए देखो एक तो आपने ये बात कह दी और लेकिन

1693
02:05:33,200 --> 02:05:37,440
आपने स्वयं नहीं सुनी है ऐसा इसी

1694
02:05:37,440 --> 02:05:41,440
लाइव स्ट्रीम में आप पहले स्वीकार कर चुके हैं। अभी 10 ही मिनट हुए हैं इस वीडियो को हम देखते हुए तो 10

1695
02:05:41,440 --> 02:05:45,680
मिनट के हैं। उसमें आप क्या कह चुके हैं कि हम इस बात को स्वीकार नहीं करते। अह

1696
02:05:45,680 --> 02:05:49,680
सत्यापित नहीं करते। इस वजह से निग्रचार्य इस ऑडियो में कही गई बातों का सत्यापन नहीं

1697
02:05:49,680 --> 02:05:53,760
करते। इस वजह से आपने वह कॉल रिकॉर्डिंग वाली बात देखी ही नहीं है। तो भैया जब आप देख ही

1698
02:05:53,760 --> 02:05:57,920
नहीं हो गया हो गया। आगे बढ़ाओ। तो आपका

1699
02:05:57,920 --> 02:06:01,920
शर्ट की वीडियो जो है वो बिलकुल पांच मिनट में देख ली। 50 मिनट की वीडियो जो भी है या

1700
02:06:01,920 --> 02:06:06,160
उसमें कॉल रिकॉर्डिंग का हिस्सा भी मान ले तो लगभग कितना होगा? कॉल रिकॉर्डिंग का हिस्सा। 45 मिनट का होगा। 42 45

1701
02:06:06,160 --> 02:06:10,400
मिनट का होगा। तो आप क्या दशगुनी गति से उसको देख रहे थे जो आपको पता चला विरोधाभासी बातें थी

1702
02:06:10,400 --> 02:06:14,480
और कॉल रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने के कारण यदि आप ये कहते हैं कि हम लाइव में नहीं आना

1703
02:06:14,480 --> 02:06:18,560
चाहते आपके साथ क्योंकि आपका स्टैंड क्लियर है तो फिर आपने उससे पहले ये क्यों लिखा था इस

1704
02:06:18,560 --> 02:06:19,060
लाइव

1705
02:06:18,800 --> 02:06:22,880
स्ट्रीम से पहले कि आपके साथ एक निश्चित दूरी बनाना हमारा धर्म है और वो

1706
02:06:22,880 --> 02:06:27,360
पोस्ट में आपने ये क्यों लिखा था कि हम लाइव आएंगे नहीं हम सार्वजनिक चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि

1707
02:06:27,360 --> 02:06:31,360
लोगों को विरोधियों को अधर्मियों को मसाला मिल जाएगा मौका मिल जाएगा और लाभ लोग उठाने

1708
02:06:31,360 --> 02:06:35,360
लगेंगे इस प्रकार के भाव को आपने क्यों व्यक्त किया था कहीं आप स्टैंड है आपका

1709
02:06:35,360 --> 02:06:39,520
कहीं कुछ पता पता चल रहा है कि आप किस स्थान पर खड़े हैं, क्या बोल रहे हैं, आपका क्या पक्ष है। हमारा तो क्लियर

1710
02:06:39,520 --> 02:06:43,520
है स्टैंड। आपका स्टैंड कब क्लियर होगा? एक और आप कहते

1711
02:06:43,520 --> 02:06:47,960
हैं कि हमने कॉल

1712
02:06:47,960 --> 02:06:52,000
रिकॉर्डिंग नहीं सुनी। सेम लाइव स्ट्रीम में पांच

1713
02:06:52,000 --> 02:06:56,080
मिनट के बाद आप कह देते हैं कि उस कॉल रिकॉर्डिंग में विरोधाभासी बातें थी। तो आपका स्टैंड क्लियर था। इसीलिए हम लाइव नहीं करेंगे

1714
02:06:56,080 --> 02:07:00,240
आपके साथ। पूरी लाइव से पहले पंक्तियां देखो कैसे बनाना हमारा धर्म

1715
02:07:00,240 --> 02:07:04,320
है। पता नहीं क्या धर्म इनकी पंक्तियां इनकी पंक्तियां देखो। तो मैंने यह कहा

1716
02:07:04,320 --> 02:07:08,320
है कि उस वीडियो में विरोधाभासी बातें हैं या यह कहा है कि

1717
02:07:08,320 --> 02:07:12,400
आप विरोधाभास एक तरफ आप चर्चा के लिए कहते हैं और दूसरी तरफ

1718
02:07:12,400 --> 02:07:16,640
विरोधाभासी वीडियो डाल देते हैं। ये कैसे

1719
02:07:16,640 --> 02:07:20,640
बात को घुमा रहे हैं अपनी कि विरोधाभासी वीडियो भाई समझने का

1720
02:07:20,640 --> 02:07:24,720
प्रयास करो। मैं बेनिफिट ऑफ डाउट ही दूंगा यहां पर तुम्हें कि तुमने यहां

1721
02:07:24,720 --> 02:07:28,720
जानने का प्रयास ही नहीं किया कि हम किस विरोधाभास की बात कर

1722
02:07:28,720 --> 02:07:34,720
रहे हैं।

1723
02:07:35,760 --> 02:07:39,840
प्ले करो हो गया और सार्वजनिक विषय

1724
02:07:39,840 --> 02:07:43,840
पर हम चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि विरोधियों को मौका मिलेगा तो

1725
02:07:43,840 --> 02:07:47,840
आप तो पढ़ ही नहीं क्योंकि लाइव नहीं करेंगे तो ये बहाना क्यों बनाए हम कॉल रिकॉर्डिंग विरोधाभासी बातों के कारण लाइव नहीं करेंगे और

1726
02:07:47,840 --> 02:07:52,080
विरोधाभासी बातें अगर ये आपको पता था मतलब आप सुने थे और अगर सुने

1727
02:07:52,080 --> 02:07:56,080
थे तो फिर आप ये अभी पांच मिनट पहले क्यों कहे कि हम आप क्योंकि सत्यापन नहीं करते थे इसलिए हम

1728
02:07:56,080 --> 02:08:00,160
सुने नहीं और लोगों को कह दिया कि तुम एंटरटेनमेंट के लिए सुनना चाहो तो सुन लो क्या चल रहा है

1729
02:08:00,160 --> 02:08:04,240
खैर आगे सुनते के आप क्या कह रहे हैं? इसीलिए इसी डर से आप हमको लाइफ पर नहीं बुलाना चाहते थे। आपका

1730
02:08:04,240 --> 02:08:08,240
करियर खा जाते हम। जा अगर मेरे मुंह पर बोल देता तो करियर खा जाते आपका। फिर आगे सुनते हैं। ऐसा विषय

1731
02:08:08,240 --> 02:08:12,400
नहीं है। इसके ऊपर ये देखो

1732
02:08:12,400 --> 02:08:15,960
ये देखो करियर खा

1733
02:08:15,960 --> 02:08:20,800
जाते। ये करियर की जो भूख है ना ये वही है।

1734
02:08:20,800 --> 02:08:26,280
करियर की जो प्रतिस्पर्धा है ना वही है। वही बोल रही है। वही

1735
02:08:26,280 --> 02:08:30,240
है। करियर खा जाते।

1736
02:08:30,240 --> 02:08:35,720
आ जाना खा लेना करियर लाइव में

1737
02:08:35,720 --> 02:08:39,920
चलो करियर खाएंगे चाचा की जैसे हमारी बातेंगे तो पहली

1738
02:08:39,920 --> 02:08:44,160
बात तो ये होगी ये करियर है तुम्हारे लिए ये

1739
02:08:44,160 --> 02:08:48,400
तुम्हारे लिए करियर है मठ पर मठ पर उंगली उठाना तुम्हारे लिए करियर

1740
02:08:48,400 --> 02:08:50,960
है शास्त्रों वचनों का प्रचार प्रसार

1741
02:08:50,960 --> 02:08:54,680
करना तुम्हारे लिए करियर

1742
02:08:54,680 --> 02:09:00,240
है ये सब चीजें करियर है तुम्हारे लिए

1743
02:09:00,240 --> 02:09:04,320
आना खा लेना करियर मेरा मेरे लिए करियर नहीं है धर्म

1744
02:09:04,320 --> 02:09:08,560
है तुम्हारे लिए करियर है ये चलाओ करियर

1745
02:09:08,560 --> 02:09:12,640
खाएंगे अगर है जो सामग्री आपके पास है वो पर्याप्त

1746
02:09:12,640 --> 02:09:16,640
है तो आप कोर्ट चले जाइए कोर्ट में कर दीजिए भाई कोर्ट

1747
02:09:16,640 --> 02:09:20,640
वाला विषय प्रथम पहले ही उत्तर दे चुके हैं भैया कोर्ट भारत की ऐसी है ना कि कोई मर्डर भी करके चला जावे

1748
02:09:20,640 --> 02:09:24,720
तो कह दे कि भैया निबंध लिखो और निकलो यहां से हमारे पास उतना टाइम नहीं है तुमको दंड देते

1749
02:09:24,720 --> 02:09:28,800
वो हाल है कोर्ट का कोर्ट तो वो जगह है जहां पर यह कह दिया जाता है कि दादादी अपने

1750
02:09:28,800 --> 02:09:33,640
पोते के लिए अनजान व्यक्ति हैं। कोर्ट तो वो जगह है जहां पर

1751
02:09:33,640 --> 02:09:37,920
ये कह दिया जाता है निर्णय में कि मृत शरीर के साथ संभोग करना गैर कानानूनी

1752
02:09:37,920 --> 02:09:42,160
नहीं है। बहुत करो। तुम्हारे हिसाब से जहां पर

1753
02:09:42,160 --> 02:09:46,400
जहां से न्याय मिलना चाहिए वहां से न्याय मिल रहा है क्या? तो

1754
02:09:46,400 --> 02:09:51,240
दूसरा विकल्प नहीं अपनाओगे। गीता का सिद्धांत नहीं

1755
02:09:51,240 --> 02:09:55,360
अपनाओगे। कर्मवादी कारस फले कदाचना

1756
02:09:55,360 --> 02:09:59,400
अपना प्रयास तो जारी रखोगे ना। हमें मालूम

1757
02:09:59,400 --> 02:10:03,440
है कि सर्दी का मौसम है, सर्दी तो पड़ेगी

1758
02:10:03,440 --> 02:10:06,400
तो क्या सर्दी से बचने का उपाय बंद कर दोगे?

1759
02:10:06,400 --> 02:10:10,400
उपाय सर्दी से बचने का प्रयास बंद कर दोगे? हमें मालूम है कि

1760
02:10:10,400 --> 02:10:14,480
गर्मी का मौसम है, गर्मी तो पड़ेगी तो क्या गर्मी से बचने का प्रयास

1761
02:10:14,480 --> 02:10:18,480
बंद कर दोगे? हां। अगर तुम दो

1762
02:10:18,480 --> 02:10:22,640
साल एक ऐसी जगह पर दे चुके जहां जहां की तुमने खूब निंदा

1763
02:10:22,640 --> 02:10:26,960
की कि भैया यहां से न्याय नहीं हो रहा है। यहां से शासन तंत्र नहीं हो रहा है। इनकी भविष्यवाणियां

1764
02:10:26,960 --> 02:10:31,200
झूठी हो रही है। इनकी मधुमक्खियों की सेना नहीं आ रही है। हां तो दूसरा

1765
02:10:31,200 --> 02:10:35,200
विकल्प अपनाओगे ना। क्यों नहीं अपना रहे?

1766
02:10:35,200 --> 02:10:39,360
तमाशा करने की बजाय? और जब तुम्हें मालूम है

1767
02:10:39,360 --> 02:10:43,840
कि कहीं कुछ होना ही नहीं है तो तमाशा कर क्यों रहे हो? तमाशे

1768
02:10:43,840 --> 02:10:47,440
से क्या हो रहा है? चलो बताओ।

1769
02:10:47,440 --> 02:10:53,440
करियर बिल्डिंग हो रही है।

1770
02:10:53,720 --> 02:10:59,720
करियर

1771
02:11:00,440 --> 02:11:04,800
चलो भारतीय न्यायपालिका की हालत क्या है? भारतीय न्यायपालिका जो है

1772
02:11:04,800 --> 02:11:09,120
वो लतखोरी के उच्च शिखर पर लेटी हुई है। मैं रिपीट करता हूं। भारत के न्यायपालिका

1773
02:11:09,120 --> 02:11:13,440
की जो है वो लखोरी के उच्च शिखर पर स्थित

1774
02:11:13,440 --> 02:11:17,520
पालन करें या ना करें आ जा सकता है कहीं भी आपने ये कहा कि भाई हम नहीं करेंगे तो ठीक है और

1775
02:11:17,520 --> 02:11:21,520
नहीं दिख रहा है तो मैं पढ़कर बता दूंगा और नहीं और भी ऐसा था और भी कई लोग हैं जिन्होंने

1776
02:11:21,520 --> 02:11:25,680
जैसे एक वो लड़का था इस का तो उसमें

1777
02:11:25,680 --> 02:11:29,840
क्या लिखा हुआ है दीन बंधु जी महाराज श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर जगत प्रकाश

1778
02:11:29,840 --> 02:11:33,920
त्यागी महाराज श्री श्री 108 स्वामी राम जी दास भोपाल श्री श्री 108 जब

1779
02:11:33,920 --> 02:11:38,080
भगवान सूर्य का मंदिर वहां बनवाया उन लोगों ने तो प्रतिष्ठा करवाने के लिए लोगों को बुलाया ऐसे खूनी संघर्ष

1780
02:11:38,080 --> 02:11:42,400
वाले जगह पर जहां बात और पर गोली चली और बम फूटे वहां पर कौन यज्ञ करवाए तो हम गए यज्ञ करवाने

1781
02:11:42,400 --> 02:11:46,480
हम चलेंगे हम गए तो हमारे पिताजी भी गए और भी बहुत सारे लोग गए

1782
02:11:46,480 --> 02:11:50,480
वहां पर उन लोगों ने क्या कर दिया साध्वी सरस्वती को भी बुला लिया कि एक लेडीज कथा वाचिका रहेगी तो

1783
02:11:50,480 --> 02:11:55,040
थोड़ा और भीड़ आएगी उनकी तो

1784
02:11:55,040 --> 02:11:59,920
और हमने तो नियमावली स्पष्ट कर रखी है इफ यू आर समोस्ट

1785
02:11:59,920 --> 02:12:03,920
अ लॉट मैटर हाउ हार्ड यू ट्राई बट यू कैन नॉट गेट थिंग्स हम उन गुरु भाग देखते हैं

1786
02:12:03,920 --> 02:12:07,920
उनमें से कईयों में और लेकर पूरे शंकराचार्य जी क्यों विरोध करते आप

1787
02:12:07,920 --> 02:12:09,440
उनका खंडन करें।

1788
02:12:09,440 --> 02:12:13,880
आप उनका खंडन करते थे। मगर आपने तू के वो अरे भाई आयु में बड़े

1789
02:12:13,880 --> 02:12:17,920
होंगे। आपसे अनेक संतों का सानिध्य

1790
02:12:17,920 --> 02:12:22,560
प्राप्त करने वाले होंगे। क्या बोला ना

1791
02:12:22,560 --> 02:12:26,640
आपसे बड़े होंगे। तो उसी का ध्यान रखते मगर आपने उसमें भी ऐसे

1792
02:12:26,640 --> 02:12:31,600
कई संत जो संत के रूप में जाने जाते हो आप ये काउंटर करेंगे। वो संत तो हो

1793
02:12:31,600 --> 02:12:35,680
वो संत तो हो ये काउंटर करेंगे। तो मैं कह रहा हूं कि आपके लिए वो संत होने चाहिए। हम आपके

1794
02:12:35,680 --> 02:12:39,680
लिए वो संत नहीं है। डजंट मैटर मगर मेरी नजर में उनका सम्मान है। मेरी नजर में

1795
02:12:39,680 --> 02:12:43,920
वो संत है या मेरी नजर में वो आचार्य है और मैं इन सब बातों का जवाब दूंगा।

1796
02:12:43,920 --> 02:12:48,000
ठीक है। आप कैसे हर एक की समीक्षा करते हैं और निराचार कहते हर एक

1797
02:12:48,000 --> 02:12:52,240
की समीक्षा बोले हुए कथन का ही संदर्भ देकर उन्हीं की विचारधारा को अनुसरण करके सनातन धर्म के मूलभूत

1798
02:12:52,240 --> 02:12:56,240
सिद्धांतों को विकृत किया जाए तो उनको क्यों छोड़ेंगे हम? सिर्फ इसलिए वो मर गए। अगर वो मर गए

1799
02:12:56,240 --> 02:13:00,240
और उनकी विचार सनातन को विकृत कर रहा है। मेरे वो आचार्य हैं। मैं इस बात

1800
02:13:00,240 --> 02:13:03,200
का जवाब दूंगा।

1801
02:13:03,200 --> 02:13:07,400
वो मर गए हैं। उनके साथ उन पर व्यक्तिगत टी टीका टिप्पणी

1802
02:13:07,400 --> 02:13:11,760
करना अश्लील बातें बोला बोलना और अमर्यादित

1803
02:13:11,760 --> 02:13:17,080
शब्दों का व्यवहार करना वो उसके लिए हमने कहा है जो तुम करते हो अपने वीडियोस

1804
02:13:17,080 --> 02:13:21,200
में। समझे? उसके विचारधारा खंडन करने के

1805
02:13:21,200 --> 02:13:24,280
लिए नहीं रोक रहे

1806
02:13:24,280 --> 02:13:25,280
हैं।

1807
02:13:25,280 --> 02:13:29,680
अपनी बात को अपनी चीजों को बचाने के लिए मिक्स करते हो तुम।

1808
02:13:29,680 --> 02:13:33,680
पहले कह दोगे वह हमारे शत्रु ही है। फिर कह दोगे यहां पर

1809
02:13:33,680 --> 02:13:37,920
आओगे तो यह नहीं कहोगे शत्रु हैं। यहां पर आओगे तो कहोगे हम कौन सा उनको

1810
02:13:37,920 --> 02:13:43,440
कब्र से निकाल के मार रहे हैं। चलो

1811
02:13:43,440 --> 02:13:47,520
ठीक है। ठीक है। आप कैसे हर एक की समीक्षा करते हैं और कैसे हर

1812
02:13:47,520 --> 02:13:51,600
की समीक्षा कर पाते हैं। है ना? सवेरे तो इंदिरा गांधी का है। भौतिक दृष्टि से तो दोनों जा चुके।

1813
02:13:51,600 --> 02:13:55,600
लेकिन सुकरात्री जी के कर्म के प्रभाव के कारण तुम उनके लिए सम्मानजनक समर्थनात्मक

1814
02:13:55,600 --> 02:13:59,840
शब्दावली का प्रयोग करते हो। इंदिरा गांधी का विरोध करते हो। क्यों करते हो? क्योंकि उनके कृत उनके व्यक्तित्व

1815
02:13:59,840 --> 02:14:03,920
उनके विचारधारा का प्रभाव पड़ रहा है। सकारात्मक या नकारात्मक अलग-अलग पक्ष हो। बहुत ग्रो

1816
02:14:03,920 --> 02:14:08,000
बहुत ग्रो बहुत गर्व तो यहां पे इसका मतलब

1817
02:14:08,000 --> 02:14:12,720
तुम राम का सिद्धांत नहीं मानते हो क्योंकि वहां पर सकारात्मक

1818
02:14:12,720 --> 02:14:16,720
चीजें हैं। राम को मना कर दो। राम ने

1819
02:14:16,720 --> 02:14:21,000
जो कहा है कि मृत्यु के बाद कोई बैर नहीं

1820
02:14:21,000 --> 02:14:25,680
रहता। और हम कहां कह रहे हैं कि उनका सम्मान करने लग जाओ। भाई

1821
02:14:25,680 --> 02:14:30,400
सम्मान भी मत करो। मगर कम से कम अपमान तो मत करो।

1822
02:14:30,400 --> 02:14:34,560
क्यों कर रहे हो अपमान? वो तू तड़ाक और यह हगना

1823
02:14:34,560 --> 02:14:40,560
ये वो मूतना ये सब क्यों कर रहे

1824
02:14:42,840 --> 02:14:47,560
हो? चलो

1825
02:14:47,560 --> 02:14:51,960
भैया। तो जब वो कर रहे हो तो सुन लो।

1826
02:14:51,960 --> 02:14:56,160
वैराल नाम कल जो है तुम्हारे ऊपर इतने लोग आ जाएंगे कि तुम निग्रचार तो हो नहीं कि सबको

1827
02:14:56,160 --> 02:15:00,800
एक साथ संभाल के रखोगे यहां लीगल नोटिस तो लीगल नोटिस हां हमला तो आओ हम लोग हां गाली तो वहां आओ गाली

1828
02:15:00,800 --> 02:15:05,200
ऐसा सबको थोड़ी तुम संभाल लोगे इसीलिए शिवश

1829
02:15:05,200 --> 02:15:09,440
प्रेमानंद बाबा के लिए हमने जो शब्दावली का प्रयोग किया है अगर ऐसी बकवास

1830
02:15:09,440 --> 02:15:13,520
वो फिर से करते रहे जैसे अभी सूत जी वाले प्रकरण में किया है ना शंकर और ब्राह्मण वाले

1831
02:15:13,520 --> 02:15:17,600
कथा वाचन वाले विषय में नहीं सुना है सुन लेना डॉक्टर ज्ञानेंद्र शर्मा जी ने उनका खंडन भी बहुत अच्छा किया अगर ऐसा वो

1832
02:15:17,600 --> 02:15:21,680
करते रहे ये सब अनजाने जो मीडिया टीआरपी के बाबा है ना उनको तो माने रहो संत और माथे में बैठा

1833
02:15:21,680 --> 02:15:25,840
घूमते रहो। ये सारे लाल बाबा और पीले बाबा की हैसियत हम सबको पता है। ये जो सेलिब्रिटी वर्शिपिंग

1834
02:15:25,840 --> 02:15:29,840
चल रही है ना यही सेलिब्रिटी वर्शिपिंग की पैदाइश कृपालू भी था। यही सेलिब्रिटी पैदाइश कभी निर्मल

1835
02:15:29,840 --> 02:15:33,840
का भी हुआ करता था निर्मल बाबा का। और यही सेलिब्रिटी वर्शिपिंग की पैदाइश में पूरा का पूरा एक नया किन्नर अखाड़ा चल रहा

1836
02:15:33,840 --> 02:15:37,840
है। इसलिए सेलिब्रिटी वर्शिंग वालों को मत बताओ। हां राजेंद्र दास देवाचार्य की बात रही

1837
02:15:37,840 --> 02:15:41,840
तो उनका तुमने नाम लिया है। अगर आगे फिर से उनका वर्णन करोगे तो फिर हम बताएंगे कि हम क्यों उनके विषय में विरुद्ध

1838
02:15:41,840 --> 02:15:45,840
बोले थे। टॉपिक तो बताओ कि क्या बोले थे हम? किस टॉपिक में बोले थे? क्यों बोलना पड़ा था? अगर तुम नहीं

1839
02:15:45,840 --> 02:15:49,840
बताते तो फिर हम बताएंगे वो विषय आने दो अभी। दयानंद जी को नहीं छोड़ा प्रभुपाद जी को। प्रभुपाद जी और दयांद

1840
02:15:49,840 --> 02:15:53,920
जी क्या मैंने सुन लिया क्या सुन लिया मैंने फिर से आप अगर बोले कोई बात तो बात ठीक

1841
02:15:53,920 --> 02:15:57,840
है आपने मरे हुए लोगों को नहीं छोड़ा नहीं छोड़ा आपने

1842
02:15:57,840 --> 02:16:01,920
दयानंद जी को नहीं छोड़ा जी को नहीं छोड़ा तुम डिप्लोमेट हो भैया हम डिप्लोमेट

1843
02:16:01,920 --> 02:16:06,400
नहीं है हम निग्रचार्य है निग्रह शब्द का अर्थ हम निग्रहचार्य

1844
02:16:06,400 --> 02:16:10,480
है अपनी बारी आने पर दोगलापन दिखाते हैं हम निग्रचार्य

1845
02:16:10,480 --> 02:16:14,800
हैं। हम विदेशगामी के साथ खड़े हो जाते हैं। और विदेशगामी

1846
02:16:14,800 --> 02:16:19,040
से अपना स्वागत सत्कार आतित स्वीकार करवाते हैं। हम निग्रचार

1847
02:16:19,040 --> 02:16:23,120
हैं। जब सनार्ग पेज पर हमसे कहा जाता है कि यह बातें तुमने

1848
02:16:23,120 --> 02:16:27,440
क्यों बोली? तुमने मत्स्य पुराण में भक्ष अभक्ष के संबंध में जो सिद्धांत

1849
02:16:27,440 --> 02:16:31,440
दिया गया उसको क्यों नहीं मान रहे? आकर के सिद्ध करो तो हम दुम के

1850
02:16:31,440 --> 02:16:36,680
वहां से भाग लेते हैं। हम निग्रह आचार्य हैं। हम जाते हैं जब

1851
02:16:36,680 --> 02:16:40,720
राम श्री संप्रदाय के आचार्य के यहां तो वहां पर किए

1852
02:16:40,720 --> 02:16:45,040
गए जो स्वागत सत्कार है उसकी फोटो डालते हैं कि देखो देखो वो हमारे अनुगत हो गए।

1853
02:16:45,040 --> 02:16:49,920
रूप में व्यक्त करते हैं। हम निगराचार्य हैं। है ना?

1854
02:16:49,920 --> 02:16:55,160
और अभी दो दोगले पद तो तुम्हारे यही दिखा दिए। इसी

1855
02:16:55,160 --> 02:16:59,280
में चलो प्ले करो। देख लो मेदनी कोष

1856
02:16:59,280 --> 02:17:04,080
देख लो। निग्रहो भरना भिक्षो मर्यादाया बंधने

1857
02:17:04,080 --> 02:17:08,080
मर्यादा में बांधने के कर्म को निग्रह कहते हैं। भरना को निग्रह

1858
02:17:08,080 --> 02:17:12,240
कहते हैं। निग्रह शब्द की पहले शब्दार्थवली तुम समझ लो। निग्रह शब्द

1859
02:17:12,240 --> 02:17:12,960
के क्या तात्पर्य

1860
02:17:12,960 --> 02:17:18,200
है? क्या व्याप्ति है? चलो इनकी थोड़ा आगे बढ़ो आगे बढ़ो

1861
02:17:18,200 --> 02:17:22,400
थोड़ा हिंदू बना रहे हैं जिनेवा में क्या बोल बोलो कोई दिक्कत

1862
02:17:22,400 --> 02:17:26,600
नहीं होती ऐसे लोगों के साथ तो लाइव कर ही चुका है वीडियो कर ही चुका है लेकिन हमारे

1863
02:17:26,600 --> 02:17:31,280
साथ में या लाइव आकर मरे हुए लोगों को नहीं छोड़ा आपने

1864
02:17:31,280 --> 02:17:35,440
ऐसे किसी को भी नहीं छोड़ा तो जब आपके आपके द्वारा ऐसी चीजें निर्गत

1865
02:17:35,440 --> 02:17:39,600
हो रही है आपके मुख से क्योंकि हमारे धर्म की सीमा में हमें ये आज्ञा नहीं दे रही

1866
02:17:39,600 --> 02:17:44,000
कि हम आपके साथ किसी मंच को साझा करते हुए दिखे किसी मंच

1867
02:17:44,000 --> 02:17:48,000
मंच को हाल तो यह है कि जिस प्रकार के लोगों के साथ तुम्हारे गुरुओं का

1868
02:17:48,000 --> 02:17:52,160
उठना बैठना है तुम्हारे गुरुओं के साथ हम मन साझा करने को निरस्त करते जा रहे हैं। यह

1869
02:17:52,160 --> 02:17:56,640
वाला है मेरे साथ जब हमारे साथ

1870
02:17:56,640 --> 02:18:01,720
करो कोर्ट ना जाने से बचना है तो शासकों के शासक

1871
02:18:01,720 --> 02:18:05,760
शंकराचार्य कोर्ट ना जाने की कवायद से बचना है तो शासकों के

1872
02:18:05,760 --> 02:18:07,960
शासक

1873
02:18:07,960 --> 02:18:12,000
शंकराचार्य और जब बात कोई फंस

1874
02:18:12,000 --> 02:18:16,400
रही है किसी कारण से पहली बात तो यह है कि तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जिसको

1875
02:18:16,400 --> 02:18:21,040
किसी निकृष्टता के कारण हमने मना किया कि तुम अछूत हो

1876
02:18:21,040 --> 02:18:25,200
या तुम ऐसे व्यक्ति से हमें दूर रहना है। भाई किसी बात को

1877
02:18:25,200 --> 02:18:28,000
लेकर के ऐसा तुम अगर तुम निग्र आचार्य

1878
02:18:28,000 --> 02:18:32,080
हो तुम धर्म की परिभाषा जानते हो तो तुम ये नहीं जानते हो कि गुरु के प्रति क्या कर्तव्य

1879
02:18:32,080 --> 02:18:36,320
होता है शिष्य का। और तुमने गुरु निंदा

1880
02:18:36,320 --> 02:18:40,320
की है।

1881
02:18:40,320 --> 02:18:44,320
ठीक है? तुमको अगर अंदर नहीं जाने दिया गया तो इसका मतलब ये नहीं

1882
02:18:44,320 --> 02:18:49,680
हो गया है कि तुमको अधिकार प्राप्त हो गया बाहर से कुछ भी कहते रहने का।

1883
02:18:49,680 --> 02:18:53,920
तुमने कहा है कुछ भी और मैं एक अलग से एक वीडियो

1884
02:18:53,920 --> 02:18:58,320
बना दूंगा तुमने कहां कहां पर कहां कहां पर कहां-कहां पर अना

1885
02:18:58,320 --> 02:19:02,360
अनावश्यक रूप से और वो किया है

1886
02:19:02,360 --> 02:19:06,480
अपमान उनका पूज्य गुरुदेव का और

1887
02:19:06,480 --> 02:19:10,560
दूसरी बात यह भी है कि मठ का विजय श्री जैसे

1888
02:19:10,560 --> 02:19:14,800
लोगों का भी तुमने निराधार अपमान किया है। अगर तुम्हारे पास ठोस सबूत

1889
02:19:14,800 --> 02:19:20,800
नहीं है तो तुम्हें नहीं बोलना चाहिए और अगर बोलोगे तो फिर

1890
02:19:20,840 --> 02:19:24,960
सुनोगे कोर्ट में जाने से बचना है तो शासकों के शासक हम

1891
02:19:24,960 --> 02:19:29,120
क्यों जाए कोर्ट हम तो वही जाएंगे और अब हम उनके साथ

1892
02:19:29,120 --> 02:19:33,320
नहीं बैठेंगे ये है अपमान सुना और ये है

1893
02:19:33,320 --> 02:19:39,320
दोगलापन

1894
02:19:39,560 --> 02:19:43,600
चलो को देखना पड़ेगा बोले नहीं नहीं अब नहीं आप करौली सर के साथ मत साझा कीजिए

1895
02:19:43,600 --> 02:19:47,600
आप कबीर पंथियों के साथ मत साझा कीजिए आप मुरारी रामदेव के साथ मत साझा कीजिए अभी अपने निग्रचार के साथ

1896
02:19:47,600 --> 02:19:52,440
मत साझ करने नहीं हुए अब ये हल आने वाला है

1897
02:19:52,440 --> 02:19:56,640
जिस अब यहां पर ये खैर एक का ईगो हर्ट हो रहा है

1898
02:19:56,640 --> 02:20:00,800
क्योंकि हमारी वो भाव उसमें जो मानवता

1899
02:20:00,800 --> 02:20:04,880
है जो अपने गुरु के प्रति जो समर्पण भाव है

1900
02:20:04,880 --> 02:20:09,440
सिद्धांतों के प्रति जो समर्पण भाव है उसको तुम देख नहीं पाओगे। तुम अपने

1901
02:20:09,440 --> 02:20:13,520
घमंड के नशे में और करियर के नशे में चूर हो चुके

1902
02:20:13,520 --> 02:20:17,760
हो। यह कहते हुए कि हम तुम्हारे साथ मंच

1903
02:20:17,760 --> 02:20:21,920
साझा नहीं करेंगे। भगवत आनंद हमने तुम्हारे अपमान के लिए नहीं कहा था।

1904
02:20:21,920 --> 02:20:26,080
हमने अपनी व्यवस्था व्यक्त की थी कि तुमने इतना

1905
02:20:26,080 --> 02:20:30,160
प्रतिकार इस तरीके तुम प्रतिकार किया होता तो बात अलग थी। मगर तुमने

1906
02:20:30,160 --> 02:20:34,560
कई जगह इस तरह से किया है जो हमें हमारे हृदय को चुभा।

1907
02:20:34,560 --> 02:20:38,560
तुमने व्यक्तिगत व्यक्तिगत टीका टिप्पणी की। केवल

1908
02:20:38,560 --> 02:20:42,320
खंडरार्थ नहीं बोले हो तुम।

1909
02:20:42,320 --> 02:20:46,480
ठीक है? केवल खंडनार्थ नहीं बोले हो और इसको हम दिखाएंगे

1910
02:20:46,480 --> 02:20:51,360
तुमने कहां कहां व्यक्तिगत टीका टिप्पणी की है अनावश्यक

1911
02:20:51,360 --> 02:20:54,800
वो बनाएंगे हम दे देंगे तुम्हारे और फिर तुमसे

1912
02:20:54,800 --> 02:20:58,880
पूछेंगे बताओ इसमें कौन सा तुम शास्त्र शास्त्र की मर्यादा याद दिला

1913
02:20:58,880 --> 02:21:02,280
रहे हो इस पंक्ति

1914
02:21:02,280 --> 02:21:04,680
से

1915
02:21:04,680 --> 02:21:08,720
और जो तुम यह समझ रहे हो कि हमने तुमको जो है हीन

1916
02:21:08,720 --> 02:21:13,600
दिखाने के लिए यह कहा मंच साझा नहीं कर पाएंगे तो यही तुम्हारा वो है

1917
02:21:13,600 --> 02:21:18,560
वो अंधकार वो अहंकार के नशे में तुम चूर हो चुके हो।

1918
02:21:18,560 --> 02:21:23,040
तुमको दिख नहीं रहा है कौन अपना है कौन पराया है। नहीं दिख रहा है तुमको।

1919
02:21:23,040 --> 02:21:27,280
हमने नहीं तुम्हारे अपमान के लिए कहा था। अपनी व्यवस्था व्यक्त की थी कि

1920
02:21:27,280 --> 02:21:32,000
तुमने ऐसी चीजें की है जिसके कारण हम तुम्हारे साथ मंच साझा नहीं कर सकते।

1921
02:21:32,000 --> 02:21:36,160
हमारी वो मर्यादा है। नहीं कर सकते। मगर

1922
02:21:36,160 --> 02:21:40,320
तुमने उसको अपने अपमान पर ले लिया। बौखला गए। बौखला जाओ।

1923
02:21:40,320 --> 02:21:43,520
चलो

1924
02:21:43,520 --> 02:21:48,000
इस प्रकार के लोगों का उठाना मठ में बढ़ रहा है। तुमसे मन कौन सा करेगा? जी तुम हो कौन?

1925
02:21:48,000 --> 02:21:52,160
अरे तुम करो। अब बात अगर ईगो पे ही आ रही है तो तुम

1926
02:21:52,160 --> 02:21:57,160
इस गांव के जयकांत सिगरे तो मैं इस गांव का बाजीराव सिंघम। ठीक

1927
02:21:57,160 --> 02:22:01,360
है। अब बात ईगो पे आ रही है। तुमने कहा हमको लाइव आ जाओ।

1928
02:22:01,360 --> 02:22:05,440
लाइव आ जाओ। हमने थोड़ी ना कहा। हमने कहा था क्या? तुम अपनी ही

1929
02:22:05,440 --> 02:22:09,520
बात को ठुकरा रहे हो। तुमसे कौन मन से साझा करेगा? करने को कहा तो तुमने।

1930
02:22:09,520 --> 02:22:13,520
किसने कहा था? तुम ही ने तो कहा था अरे झूठे भी हो

1931
02:22:13,520 --> 02:22:17,520
क्या साथसा तुम दोगले हो तुम मूर्खों जैसी बात करते

1932
02:22:17,520 --> 02:22:21,640
हो तुम कि भैया मैं जो है अपने समर्थकों ने जो दिखा दिया वो

1933
02:22:21,640 --> 02:22:26,160
देखूंगा और अब तुम झूठे भी हो रहे हो

1934
02:22:26,160 --> 02:22:32,160
भाई तुम ही ने तो मुझे लाइव चर्चा के लिए बोला

1935
02:22:32,680 --> 02:22:36,720
था और अब तुम कह रहे हो कि तुमसे कौन मंच साझा करेगा

1936
02:22:36,720 --> 02:22:40,720
या तो तुम्हारा वो जो क्या क्या शब्द था

1937
02:22:40,720 --> 02:22:44,800
वह बायो क्या था बाईपोलर वो अभी तुम्हारा

1938
02:22:44,800 --> 02:22:49,760
खत्म नहीं हुआ उसकी वजह से जो दिमाग पर असर पड़ता है

1939
02:22:49,760 --> 02:22:52,760
चलो

1940
02:22:52,760 --> 02:22:56,800
भाई जिस व्यक्ति का जननी विवाह के बाद हुआ हो जिस

1941
02:22:56,800 --> 02:23:00,800
व्यक्ति को सड़क के ठेला से चार फुचका खाने से फुर्सत नहीं हो जो

1942
02:23:00,800 --> 02:23:06,000
व्यक्ति प्रोटीन पाउडर खा के जीवन में बॉडी बना के स्वयं को है क्या

1943
02:23:06,000 --> 02:23:10,360
तुमको हस्तमैथुन से फुर्सत है क्या जो इलाज कराने घूम रहे हो राजस्थान

1944
02:23:10,360 --> 02:23:14,920
स्थान तुमको जानवी के प्यार में गाना बनाने से फुर्सत थी

1945
02:23:14,920 --> 02:23:19,800
क्या? हां और सुनो भगवतानंद

1946
02:23:19,800 --> 02:23:24,080
अगर हमने चाट फुल्का खाया तो हमने

1947
02:23:24,080 --> 02:23:28,400
कभी अपने आप को आचार्य नहीं कहा। हमने

1948
02:23:28,400 --> 02:23:32,480
कभी आपको अपने आप को ब्राह्मण के रूप में पुजवाने की भी

1949
02:23:32,480 --> 02:23:36,560
नहीं सोची। और ना कभी सोचेंगे क्योंकि हम आए ही

1950
02:23:36,560 --> 02:23:40,560
गुरु की शरण में तब थे जब तक हमें पता चल चुका था कि हमारा जीवन भ्रष्ट हो

1951
02:23:40,560 --> 02:23:44,880
चुका है। ठीक है?

1952
02:23:44,880 --> 02:23:47,760
मगर तुम तो आचार्य हो। तुम क्यों दारू को

1953
02:23:47,760 --> 02:23:52,120
प्रमोट कर रहे हो? तुम क्यों विद्या बालन को विद्या बेलन कह रहे हो?

1954
02:23:52,120 --> 02:23:56,240
ह तुम क्यों वहां पर जो है वो गालियां भरी

1955
02:23:56,240 --> 02:24:00,480
बातें आदर मादर ये सब लिख रहे हो? तुम्हारा निग्रह

1956
02:24:00,480 --> 02:24:04,720
क्यों नहीं हो रहा है तुम्हारी इंद्रियों पर? जो विवाह के बाद भी तुम हस्तु के

1957
02:24:04,720 --> 02:24:09,040
हस्तमैथुन से परेशान हो। तुम क्यों जान

1958
02:24:09,040 --> 02:24:13,040
विवाह से पूर्व जो मातृ शक्तियां उनके प्रति मोह वश

1959
02:24:13,040 --> 02:24:19,040
जो है गाने बना रहे हो। [संगीत]

1960
02:24:28,360 --> 02:24:32,880
चलो रक्षक मान रहा हो जिसको स्वशाखा सूत्र का ज्ञान नहीं हो जिसके यज्ञ

1961
02:24:32,880 --> 02:24:37,400
में ही दोष हो वो व्यक्ति हमारे साथ साझा किस है से कर रहा है नहीं करना

1962
02:24:37,400 --> 02:24:41,640
हैुन वालों से दूर रहना है भाई नहीं करना

1963
02:24:41,640 --> 02:24:46,240
है चलो

1964
02:24:46,240 --> 02:24:50,320
भाई पोलर की बीमारी है विवाह से विवाह से

1965
02:24:50,320 --> 02:24:55,000
दोनों तुम्हारे प्रेम प्रेम चल रहे हैं। हमारा

1966
02:24:55,000 --> 02:24:59,280
सुनो के साथ हमारा जो है पॉज करो इसको हमारा

1967
02:24:59,280 --> 02:25:03,360
यज्ञ पवित नहीं हुआ समय पर और आचार्यों की शरण में आने

1968
02:25:03,360 --> 02:25:07,440
पर जो प्रात संध्या का दोष होता है वो हमने किया मगर तब भी हम कभी अपने आप

1969
02:25:07,440 --> 02:25:11,600
को श्रेष्ठ ब्राह्मण नहीं मानेंगे क्योंकि हमें पता

1970
02:25:11,600 --> 02:25:14,680
है हम पतित

1971
02:25:14,680 --> 02:25:18,800
हैं। केवल जैसे तैसे अपनी बीज की रक्षा करेंगे आजीवन

1972
02:25:18,800 --> 02:25:23,040
जो हमारी आगे अगली होने वाली संतान हो किसी तरीके से उसमें बीज

1973
02:25:23,040 --> 02:25:27,440
आ जाए मगर तुमने क्या किया

1974
02:25:27,440 --> 02:25:31,760
तुम तो दरवे हो रहे हो हां क्या क्या

1975
02:25:31,760 --> 02:25:35,760
नहीं कर रहे हो तुम दरवे नहीं हो

1976
02:25:35,760 --> 02:25:39,920
रहे हो क्या तुम हस्तमैथुन से परेशान नहीं हो क्या तुम जानवी

1977
02:25:39,920 --> 02:25:44,480
के लिए तुमने गाने नहीं बनाए क्या ब्रह्मचर्य आश्रम में

1978
02:25:44,480 --> 02:25:49,960
बोल देना नहीं बनाया उसके बाद हम देंगे

1979
02:25:49,960 --> 02:25:54,080
प्रमाण। चलिए बोलिए। हो सकता

1980
02:25:54,080 --> 02:25:58,240
है मंच अधोजनंद तक के साथ तुम साझा कर सकते हो

1981
02:25:58,240 --> 02:26:03,520
लाइव में आकर मतलब अधोजनंद जो स्वयं को डायरेक्ट पूरी शंकराचार्य

1982
02:26:03,520 --> 02:26:07,920
अधोक छजानंद अधोग छजानंद के पास में क्या पूरी के शंकराचार्य

1983
02:26:07,920 --> 02:26:12,320
जी का शिष्य बन के गया था? शिवश नारायण द्विवेदी बन के गया था।

1984
02:26:12,320 --> 02:26:16,800
अरे भष बदल के गया था। उसकी बाहर निकालने गया था। उसकी वास्तविकता

1985
02:26:16,800 --> 02:26:20,960
को समाज में दिखाने के लिए गया था।

1986
02:26:20,960 --> 02:26:25,080
और अगर या तो अगर तुम्हें ये चीज नहीं मालूम है तो तुम मूर्ख

1987
02:26:25,080 --> 02:26:29,120
हो। और अगर तुम्हें ये चीज मालूम है तो भी तुम

1988
02:26:29,120 --> 02:26:33,360
मूर्ख हो। अगर तुम्हें मेरा वहां जाने का निमित्त मालूम है,

1989
02:26:33,360 --> 02:26:37,440
कारण मालूम है कि मैं वहां क्यों गया था और तब तुम ये सब बातें

1990
02:26:37,440 --> 02:26:41,200
कर रहे हो तो तुम मूर्ख हो।

1991
02:26:41,200 --> 02:26:46,040
तुम्हारे साथ मुझे शिवश नारायण द्विवेदी के रूप में आना था

1992
02:26:46,040 --> 02:26:50,400
ना। वहां मैं शिवश नारायण द्विवेदी के रूप में नहीं गया था। अपनी

1993
02:26:50,400 --> 02:26:56,400
पहचान को बदल कर गया था।

1994
02:26:58,360 --> 02:27:02,480
चलो कोई आपत्ति नहीं है। मतलब अधुक्तानंद के

1995
02:27:02,480 --> 02:27:06,480
लेवल तक भी अगर हम होते तो इसको आपत्ति नहीं। मतलब अगर छोड़ो हम खुद को निग्राचार्य बोलने के स्थान पर सीधे

1996
02:27:06,480 --> 02:27:10,480
पूरी का शंकराचार्य भी घोषित कर देते ना तब भी ये बंदा आ जाता। जैसे 200 के पास जा चुका था।

1997
02:27:10,480 --> 02:27:14,560
हालांकि पश्चाता छुप कर गया था लेकिन गया था ना भाई। उसको एक्सपोज करने ही तो गया था। वहां तक

1998
02:27:14,560 --> 02:27:18,560
भी इसको दिक्कत नहीं होती। वहां तक भी इसको आपत्ति नहीं होती। लेकिन हमसे इसको आपत्ति हो गई कि तुम मंच

1999
02:27:18,560 --> 02:27:22,560
साझा करने लायक या लाइफ में आने लायक नहीं हो। अगर हम किसी कुत्ते को किसी कुत्ते को

2000
02:27:22,560 --> 02:27:26,800
ऐसे पकड़ के मुंह में मुंह लगाकर फोटो डालते या आपत्तिजनक वस्त्रों में फोटो सार्वजनिक

2001
02:27:26,800 --> 02:27:30,960
करते या छोड़ो सीधे-सीधे खुद को पूरे का शंकराचार्य ही घोषित कर देते तब भी इसको दिक्कत

2002
02:27:30,960 --> 02:27:35,040
नहीं होती। ऐसे लोगों के साथ तो लाइव कर ही चुका है। वीडियो कर ही चुका है। लेकिन हमारे

2003
02:27:35,040 --> 02:27:39,120
साथ वीडियो करने में या लाइव आकर धर्म शास्त्र पर विमर्श करने या प्रासंगिक जो

2004
02:27:39,120 --> 02:27:43,200
धर्म शास्त्र संबंधित है प्रासंगिक विषयों में धर्म का अनुशासन और अनुशासन हीनता पर चर्चा करने में ये कह

2005
02:27:43,200 --> 02:27:47,280
रहा है कि मंच साझा नहीं करेंगे। मतलब अधु सजनंद तक के साथ जो

2006
02:27:47,280 --> 02:27:51,280
लाइव आ सकता है लाइव मतलब रिकॉर्डिंग कर सकता है। उसके उसको एक्सपोज करने के लिए सही। तो हमको एक्सपोज करने के लिए हमारे

2007
02:27:51,280 --> 02:27:55,680
साथ आ। पहले तुम निग्रह तुम भगवतानंद

2008
02:27:55,680 --> 02:27:59,760
पहले अपनी जानकारी पूरी करो। जो व्यक्तिगत टीका टिप्पणी करने

2009
02:27:59,760 --> 02:28:04,240
लगते हैं गुरुदेव के प्रति उसके साथ हम मंच साझा नहीं करते हैं।

2010
02:28:04,240 --> 02:28:08,280
हमारे वीडियोस हैं इस बारे

2011
02:28:08,280 --> 02:28:14,280
में। जाकर के देखना चाहिए तुम्हें।

2012
02:28:22,640 --> 02:28:26,640
चलो जो व्यक्ति भगवान श्री रामचंद्र जी को ना

2013
02:28:26,640 --> 02:28:30,960
भगवान कह रहा है ना श्री कह रहा है ना जी कह रहा है केवल राम कह रहा है लेकिन जिन

2014
02:28:30,960 --> 02:28:34,960
लोगों ने रामो बॉस करो ना

2015
02:28:34,960 --> 02:28:38,960
राम कह रहा है ना श्री कह रहा है ना भगवान कह रहा है क्योंकि जो राम है

2016
02:28:38,960 --> 02:28:42,960
ना वही मेरे लिए पर्याप्त है क्योंकि मैं

2017
02:28:42,960 --> 02:28:47,040
राम नाम का ही जप करता हूं तो मेरी जो प्रीति ती है

2018
02:28:47,040 --> 02:28:51,040
वह राम शब्द इसमें ही है। जिस समय मैं राम

2019
02:28:51,040 --> 02:28:55,280
कहता हूं उसी समय मेरे हृदय को ठंडक मिलती है।

2020
02:28:55,280 --> 02:28:58,520
तो इसलिए मुझे राम

2021
02:28:58,520 --> 02:29:02,640
कहना गर्व का विषय लगता है। अन्य जो नाम है

2022
02:29:02,640 --> 02:29:06,640
उनके साथ जी लगाना ये करना बोल करना उसमें भावना ऐसा नहीं

2023
02:29:06,640 --> 02:29:10,640
है कि श्री राम कहना गलत है। ये नहीं है। अगर

2024
02:29:10,640 --> 02:29:14,800
ऐसा है कि राम जो है अपने आप में पूर्ण नहीं है तो क्या

2025
02:29:14,800 --> 02:29:19,280
पूरी के शंकराचार्य जी की व्याख्या आपने नहीं सुनी राम शब्द पर

2026
02:29:19,280 --> 02:29:23,360
अब तो यहां से सिद्ध हो गया कि तुमको धर्म स्थापना से

2027
02:29:23,360 --> 02:29:27,360
शोधन से कोई मतलब नहीं है तुमको लड़ना है तुमको मुद्दा

2028
02:29:27,360 --> 02:29:31,440
बनाना है और अगर तुम मुद्दा बनाने के लिए

2029
02:29:31,440 --> 02:29:36,000
निकले हो भगवत आनंद तो हम तैयार है आ जाना

2030
02:29:36,000 --> 02:29:41,680
बता देना कब आना है चलो

2031
02:29:41,680 --> 02:29:45,760
चलो और गालियां दी राम जी को भगवान ही नहीं माना राम जी

2032
02:29:45,760 --> 02:29:49,840
को मतलब एक मनुष्य के अतिरिक्त या एक थोड़ा विशेष प्रतिभा ऐश्वर्य या पराक्रम

2033
02:29:49,840 --> 02:29:54,080
को मनुष्य के अलावा कुछ नहीं माना उन लोगों को भी जी लगाकर कह रहा है स्वयं वो शंकराचार्य

2034
02:29:54,080 --> 02:29:58,320
जी का शिष्य बता रहा है लेकिन भगवान का सामान्य शाब्दिक सम्मान भी नहीं कर सकता वो व्यक्ति

2035
02:29:58,320 --> 02:30:02,400
हमें कह रहा है कि तुम मंच साझा करने योग्य नहीं चलो क्या

2036
02:30:02,400 --> 02:30:06,480
वाला अरे भगवतानंद कितना नीचे गिरोगे कितना

2037
02:30:06,480 --> 02:30:09,440
नीचे गिरोगे

2038
02:30:09,440 --> 02:30:13,440
अरे भगवतानंद मैंने मैंने किस कारण से कहा है

2039
02:30:13,440 --> 02:30:17,600
यह तुम भी समझ रहे हो। तुमको बस बातें छोंकनी है।

2040
02:30:17,600 --> 02:30:21,680
तुम अच्छी तरह समझ रहे हो कि मैंने क्यों कहा है? मैंने एक अच्छी भाषा में

2041
02:30:21,680 --> 02:30:25,840
तुमको धर्म को जानने वाला होते हुए यह भी कहा कि यह भी आप जानते हैं कि आपसे एक निश्चित

2042
02:30:25,840 --> 02:30:29,920
दूरी बनाना मेरा धर्म है। क्यों कहा? क्योंकि तुम जानते हो कि धर्म क्या है।

2043
02:30:29,920 --> 02:30:34,080
मगर तुम नहीं जानते हो या फिर तुम्हें धर्म से कोई मतलब नहीं है।

2044
02:30:34,080 --> 02:30:37,280
समझे?

2045
02:30:37,280 --> 02:30:43,280
मैंने अपनी व्यवस्था व्यक्त की है और तुम कह रहे हो कि मैंने तुम्हारा अपमान

2046
02:30:43,720 --> 02:30:48,240
किया। अगर तुम्हारा कोई अपमान करेगा ना अनावश्यक

2047
02:30:48,240 --> 02:30:52,480
तो मैं तुम्हारे लिए भी खड़ा होऊंगा और हुआ था। इसके

2048
02:30:52,480 --> 02:30:57,200
बावजूद कि मैंने देखा था कि तुम जो गुरुदेव के लिए जो है आपत्तिजनक

2049
02:30:57,200 --> 02:31:01,600
चीजें बोले हो। तुम नहीं हुए थे।

2050
02:31:01,600 --> 02:31:06,280
मेरे अपमान के लिए तुम खड़े नहीं हुए व्यक्तिगत तौर की अगर बात करें हम हुए

2051
02:31:06,280 --> 02:31:10,640
हैं। अब तुम्हारे वह जो कुएं के मेंढक वाले चश्मा वाला

2052
02:31:10,640 --> 02:31:14,720
जिसका जिनका तुमने चश्मा लगा रखा है उन्होंने वो रील तुम्हें नहीं दिखाई तो मत

2053
02:31:14,720 --> 02:31:18,840
देखो भाई

2054
02:31:18,840 --> 02:31:23,560
लड़ो

2055
02:31:23,560 --> 02:31:28,360
चलो इसको इंटरनेट फॉर टुडे वाला हाल हो गया

2056
02:31:28,360 --> 02:31:32,480
इसका अगर विचार करे उस पर समर्थन देता भी हूं स्वत

2057
02:31:32,480 --> 02:31:36,480
संज्ञान लेकर और उनके मठ में भी मैं गया हूं हमारे मंच पर भी वो आए हैं। हम

2058
02:31:36,480 --> 02:31:40,480
उनके मंच पर भी गए हैं और लगभग प्रतिदिन ही WhatsApp के माध्यम

2059
02:31:40,480 --> 02:31:44,480
से कभी वो कभी हम अपने अपने विषयों का अवगत कराते रहते हैं। तो हमारी जानकारी में ऐसा

2060
02:31:44,480 --> 02:31:48,560
कोई भी राघवाचार्य जी का चेला तो नहीं है जो कि हमें किसी विषय

2061
02:31:48,560 --> 02:31:52,560
में शास्त्रार्थ या इस प्रकार की कोई विवादित विषय पर चर्चा के लिए बुलाया हो। हां मलूक

2062
02:31:52,560 --> 02:31:56,800
मिश वाले के शिष्य ने बुलाया था। राम स्नेही राम स्नेही है। स्नेही

2063
02:31:56,800 --> 02:32:00,960
है कि स्नेही है क्या लिखता है? स्नेही स्नेही लिखता है राम स्नेही मिश्र

2064
02:32:00,960 --> 02:32:05,120
जो भी है स्नेही शब्द अधिक उत्तम है गुरु चरण दास तो गुरु चरण दास और स्नेही राम

2065
02:32:05,120 --> 02:32:09,120
स्नेही की तो बात है तो प्रभुपाद के चरणों में लोट लोट कर खूब यशोगान करने

2066
02:32:09,120 --> 02:32:13,120
वाला जो गुरु चरण दास है जो प्रभुपाद को परम वैष्णव

2067
02:32:13,120 --> 02:32:17,200
बता रहा है उससे हम क्या चर्चा करें दूसरी बात राम स्नेही

2068
02:32:17,200 --> 02:32:21,360
जो गधी का दूध पीने वाले रामदेव के चरणों में बैठकर स्वामी जी स्वामी जी कर रहा है और उसके गुरु ऊपर बैठे

2069
02:32:21,360 --> 02:32:25,360
हुए हैं सामान्य वर्णाश्रम मर्यादा का बोध नहीं है रामदेव की चापलूसी एकदम ऑन टेलीकास्ट

2070
02:32:25,360 --> 02:32:29,680
कर रहा है जो व्यक्ति तुम लोग हमसे ने मना क्यों किया पीठों के प्रधान श्रृंगेरी

2071
02:32:29,680 --> 02:32:35,680
और पूरी उत्तर और पश्चिम नहीं एक मिनट पीछे करो जरा

2072
02:32:37,040 --> 02:32:41,120
यहां पर ये नहीं कहूंगा कि निगराचार्य डरपोक है भाग गए हां ये तो नहीं कहा तुमने

2073
02:32:41,120 --> 02:32:45,280
क्योंकि मैं संभावनाओं के ऊपर बात नहीं करता हां बिल्कुल करो पीछे करो पीछे करो

2074
02:32:45,280 --> 02:32:51,080
भाई जाएगा समय कहां आएगा ऐसे तो सब आदमी है अगर

2075
02:32:51,080 --> 02:32:55,200
तुमको वहां पे पहुंचो

2076
02:32:55,200 --> 02:33:01,200
नहीं भैया ना भैया ना भैया जागृत है कुंडली चिंता मत करो आगे डाल लिया कोई बात नहीं

2077
02:33:01,520 --> 02:33:06,160
इन सब बातों में तो बात कर ही चुके वो वीडियो कितना है हां बिल्कुल बात कर चुके हैं अच्छा

2078
02:33:06,160 --> 02:33:10,240
अब ये जो आचार्य गण है राघवाचार्य जी महाराज राजेंद्र दास जी

2079
02:33:10,240 --> 02:33:14,760
महाराज ये सब आचार्य गणों में से ऐसे कई आचार्य गण है इनके शिष्यों ने

2080
02:33:14,760 --> 02:33:18,800
आपको निमंत्रण दिया आपको बुलाया प्रस्ताव रखा कि आओ हमसे

2081
02:33:18,800 --> 02:33:22,880
चर्चा कर लो और वो कौन थे कारण थे कि आप नहीं जा पाए जा पाए वो आप ही जानते

2082
02:33:22,880 --> 02:33:26,880
हैं अब देखिए ये मेरा बात करने का तरीका है पहली

2083
02:33:26,880 --> 02:33:31,200
बात स्वामी राघवाचार्य जी के किसी शिष्य ने हमको चर्चा के लिए कहीं नहीं बुलाया

2084
02:33:31,200 --> 02:33:35,280
है। स्वामी राघवाचार्य जी के जिस शिष्य ने हमको चर्चा के लिए जहां बुलाया है उसका नाम सार्वजनिक

2085
02:33:35,280 --> 02:33:39,280
करें आप। दूसरी बात स्वामी राघवाचार्य जी से हमारा निजी संपर्क लगभग बना ही रहता है।

2086
02:33:39,280 --> 02:33:43,360
गलत करने पर मैं टोकता भी हूं। सही करने पर समर्थन देता भी हूं स्वतः संज्ञान लेकर और

2087
02:33:43,360 --> 02:33:47,760
उनके मठ में भी मैं गया हूं। हमारे मंच पर भी वो आए हैं। हम उनके मंच पर भी गए हैं

2088
02:33:47,760 --> 02:33:52,080
और लगभग प्रतिदिन ही WhatsApp के माध्यम से कभी वो कभी हम अपने अपने

2089
02:33:52,080 --> 02:33:56,080
विषयों का अवगत कराते रहते हैं। तो हमारी जानकारी में ऐसा कोई भी राघवाचार्य जी का चेला तो नहीं

2090
02:33:56,080 --> 02:34:00,400
है जो कि हमें किसी विषय में शास्त्रार्थ या इस प्रकार की कोई विवादित

2091
02:34:00,400 --> 02:34:04,560
विषय पर चर्चा के लिए बुलाया हो। हां मलूक पिछवाले के शिष्य ने बुलाया था। राम

2092
02:34:04,560 --> 02:34:08,560
स्नेही राम स्नेही है। स्नेही है कि स्नेही है क्या लिखता है? स्नेही

2093
02:34:08,560 --> 02:34:12,640
स्नेही लिखता है राम स्नेही मिश्र जो भी है स्नेही शब्द अधिक उत्तम है गुरु

2094
02:34:12,640 --> 02:34:16,640
चरण दास तो गुरु चरण दास और स्नेही राम स्नेही की तो बात है तो प्रभुपाद के

2095
02:34:16,640 --> 02:34:20,960
चरणों में लोट लोट कर खूब यशोगान करने वाला जो गुरु चरण

2096
02:34:20,960 --> 02:34:25,440
दास है जो प्रभुपाद को परम वैष्णव बता रहा है उसे हम क्या चर्चा

2097
02:34:25,440 --> 02:34:29,520
दूसरी बात राम स्नेही जो गधे का दूध पीने वाले रामदेव के चरणों में बैठकर

2098
02:34:29,520 --> 02:34:33,520
स्वामी जी एक मिनट एक मिनट पहली बात तो ये है भाई चर्चा होती

2099
02:34:33,520 --> 02:34:37,600
किससे है ये भी तो विषय है चर्चा होती

2100
02:34:37,600 --> 02:34:41,920
किससे है? जिससे आपका मतांतर होगा उसी से चर्चा होगी या

2101
02:34:41,920 --> 02:34:46,920
मतांतर नहीं होगा उससे चर्चा होगी। किससे चर्चा

2102
02:34:46,920 --> 02:34:50,960
होगी? हां चर्चा होती किससे है? अरे भाई वो

2103
02:34:50,960 --> 02:34:55,120
गलत कर रहा है तो तुम निग्रचार्य हो ना। तुम जाके रोको उसको

2104
02:34:55,120 --> 02:34:59,840
उसको बताओ। उसको सिद्ध करो। इसके लिए तुम चर्चा करो।

2105
02:34:59,840 --> 02:35:03,840
क्या तुम्हारा अपना बचने का नाटक है भैया? और तुम्हारे

2106
02:35:03,840 --> 02:35:07,520
हिसाब से तो मैं भी वो फचके खाने वाला हूं। जेनेट

2107
02:35:07,520 --> 02:35:11,680
हुआ है। अरे तुम्हारे हिसाब से तो दुनिया में किसी से चर्चा ही नहीं होगी।

2108
02:35:11,680 --> 02:35:16,640
तुम्हारे हिसाब से दुनिया के सब गलत है। जहां तक मेरी जानकारी है।

2109
02:35:16,640 --> 02:35:20,640
तुम राघवाचार्य जी के मंच पे काहे क्यों चले जा रहे हो? भाई राघवाचार्य जी

2110
02:35:20,640 --> 02:35:25,040
भी तो वहां उनके यहां पर गए थे। तुम्हारे जानकारी

2111
02:35:25,040 --> 02:35:29,040
में तुमने टोका भी था। राघवाचार्य जी महाराज भी तो वहां गए थे।

2112
02:35:29,040 --> 02:35:33,040
तुम क्यों जा रहे हो उनके मंच पर? भाई और जब उनके मंच पर जा रहे हो जहां

2113
02:35:33,040 --> 02:35:37,040
रागवाचार्य जी वहां क्या कहते हैं प्रभुपाद जी के वहां

2114
02:35:37,040 --> 02:35:41,280
पर गए थे इस वालों के यहां पर गए थे तो

2115
02:35:41,280 --> 02:35:45,280
तुमको इनके यहां जाने में क्या दिक्कत है क्या वो अगर लौट रहा है किसी के

2116
02:35:45,280 --> 02:35:49,280
चरणों में क्या तुम्हें भी लौटने को कह रहा है क्या कि चर्चा का

2117
02:35:49,280 --> 02:35:53,280
तुम्हारा यह सिद्धांत है कि वो जो जहां पर तुम जाओगे तो वह जो कर रहा होगा

2118
02:35:53,280 --> 02:35:59,280
वो तुम्हें भी करना होगा

2119
02:36:00,840 --> 02:36:05,640
हां तो सुनो

2120
02:36:05,640 --> 02:36:09,760
भगवतानंद ये ड्रामेबाजी कहीं और करना

2121
02:36:09,760 --> 02:36:13,760
कि जहां मन आया वहां पे खड़े हो गए और जहां

2122
02:36:13,760 --> 02:36:17,840
मन आया कि वो ऐसा कर रहा था उससे कौन चर्चा करे सनातन

2123
02:36:17,840 --> 02:36:22,080
सिद्धांत ले आओ फिर अब यहां नहीं लाओगे आगे लाओगे कि तुम्हारे

2124
02:36:22,080 --> 02:36:26,160
पीछे विभव रखी है ये ग्रंथ रखा है वो ग्रंथ रखा है यहां

2125
02:36:26,160 --> 02:36:31,840
नहीं लाओगे सनातन सिद्धांत की चर्चा किससे करनी है?

2126
02:36:31,840 --> 02:36:35,840
जिसने सीता माता का हरण कर रखा था उससे

2127
02:36:35,840 --> 02:36:41,000
तक चर्चा करने के लिए श्री राम जी ने उनको भेज दिया था अंगद को कि

2128
02:36:41,000 --> 02:36:47,000
जाओ तो तो चर्चा क्यों नहीं कर रहे हो जब वो बुला रहे

2129
02:36:47,160 --> 02:36:50,840
तो

2130
02:36:50,840 --> 02:36:54,960
चलिए स्वामी जी कर रहा है और उसके गुरु ऊपर बैठे हुए हैं। सामान्य वर्णाश्रम मर्यादा का बोध

2131
02:36:54,960 --> 02:36:58,960
नहीं है। रामदेव की चापलूसी एकदम ऑन टेलीकास्ट कर रहा है जो व्यक्ति गुरु चरण

2132
02:36:58,960 --> 02:37:03,040
दास जो रामभद्राचार्य की खूब तारीफ कर रहा है ये जानते हुए प्रभु कि रामभद्राचार्य

2133
02:37:03,040 --> 02:37:07,120
जो है वो उत्तरकांड को प्रमाणिक नहीं मानते हैं तो उस व्यक्ति से हम क्या

2134
02:37:07,120 --> 02:37:11,120
चर्चा करें अरे भाई उसको उसको सिद्ध करो ना जाके कि

2135
02:37:11,120 --> 02:37:15,360
वो गलत कह रहा है ये कौन सी बात हुई

2136
02:37:15,360 --> 02:37:19,840
अपने सिलेक्टिव हो गए अरे भाई जब मैं तुम्हारे अनुसार

2137
02:37:19,840 --> 02:37:24,000
कार्य बहुत सारे नहीं कर रहा हूं तो मुझसे चर्चा करने के लिए क्यों तुम तैयार हो गए और

2138
02:37:24,000 --> 02:37:28,000
जब विरोध तो तुम्हारे अनुसार कार्य ना करने वाले

2139
02:37:28,000 --> 02:37:32,080
के साथ भी तुम चर्चा करने के लिए तैयार हो जाते हो तो तुम्हारे अनुसार कार्य ना करने वाले के

2140
02:37:32,080 --> 02:37:38,080
साथ तुम चर्चा करने के लिए क्यों नहीं तैयार हो रहे हो? ये क्या डुअल स्टैंडर्ड

2141
02:37:38,840 --> 02:37:43,680
है? हम चलाओ भैया।

2142
02:37:43,680 --> 02:37:47,920
गुरु चरण दास आनंद भाष्य को प्रमाणिक मानते हैं। एक और गुरु चरण दास आनंद

2143
02:37:47,920 --> 02:37:52,000
भाष्य को प्रमाणिक मानते हैं। कर दे और हम सबकी चुनौती ऐसे ही स्वीकार कर ले तो पूरे भारत में हम साल भर घूमेंगे

2144
02:37:52,000 --> 02:37:56,240
और कोई नहीं मिलेगा। नहीं मिलेगा ना? अरे क्यों स्वीकार करोगे

2145
02:37:56,240 --> 02:38:00,240
भाई जाके निग्रह करो ना निग्रह करो

2146
02:38:00,240 --> 02:38:04,880
भाई निग्रह कहां गया क्यों स्वीकार कर लोगे

2147
02:38:04,880 --> 02:38:09,040
चर्चा करो सिद्ध करो यहां तो यहां तो भगवान

2148
02:38:09,040 --> 02:38:13,040
भगवतानंद यहां आप जो है बिल्कुल स्पष्ट रूप से अब यहां आपका

2149
02:38:13,040 --> 02:38:19,040
पक्ष जो है साफ दिखाई पड़ रहा है कि चर्चा करने के विषय में आपका क्या स्टैंड

2150
02:38:19,560 --> 02:38:23,680
है तुम चर्चा करने जा ही उससे रहे हो

2151
02:38:23,680 --> 02:38:27,760
जो तुम्हारे तुम्हारे जानकारी में जो धर्म है उसका पालन नहीं कर

2152
02:38:27,760 --> 02:38:31,960
रहा है तो फिर तुम सिलेक्टिव क्यों हो रहे हो कि वहां मैं नहीं जाऊंगा चर्चा

2153
02:38:31,960 --> 02:38:36,000
करने हां उसने तुम्हारा व्यक्तिगत तुम पर आघात पहुंचा दिया हो

2154
02:38:36,000 --> 02:38:42,000
तुमको मां बहन की गाली कुछ दे दी हो कुछ कर दिया हो तो बात अलग

2155
02:38:44,040 --> 02:38:48,240
है पर ऐसा तो मेरी जानकारी में कुछ है नहीं व्यक्तिगत

2156
02:38:48,240 --> 02:38:52,320
कोई टिप्पा टीका टिप्पणी कर दी हो कोई अश्लील भाषा बोल दी हो कुछ अपशब्द

2157
02:38:52,320 --> 02:38:58,320
बोल दिया हो

2158
02:39:06,440 --> 02:39:10,880
चलिए इनके निमंत्रण बजाते जाए फिजिकली एक एक जगह पर

2159
02:39:10,880 --> 02:39:14,880
यहां तुम्हारे जो त्रिकालदर्शी जगुरु शिवा अवतवतार साक्षात हर के संयुक्त सर्वोच्च धर्म गुरु पूरी

2160
02:39:14,880 --> 02:39:18,960
के माननीय शंकराचार्य स्वामी श्री निशानंद सरस्वती जी महाभाग ने नाग लोक सेना

2161
02:39:18,960 --> 02:39:23,360
बुलाकर तीसरे आंख खोलकर सा तीन साल में हिंदू राष्ट्र बना देने का जो उद्घोष किया था वो अदा

2162
02:39:23,360 --> 02:39:27,600
था कि कात्य था ये भी समय मिले तो बना देना हम बना

2163
02:39:27,600 --> 02:39:32,560
देंगे बना देंगे और गुरुदेव से इसका उत्तर दिलवाएंगे

2164
02:39:32,560 --> 02:39:36,640
अकाट्य है हां अकाट है शंकराचार्य अकाट्य है तो

2165
02:39:36,640 --> 02:39:40,720
शंकराचार्य जी जो है अकाट्य जब है तो ये बताओ तीन वर्ष में

2166
02:39:40,720 --> 02:39:45,520
हिंदू राष्ट्र बनेगा ये तुम्हारे विरोध में है क्या

2167
02:39:45,520 --> 02:39:49,520
इससे तुम्हें दिक्कत है क्या हम

2168
02:39:49,520 --> 02:39:53,600
तुम्हारे से उन तथ्यों के बारे में पूछ रहे हैं जिनसे तुम किसी का

2169
02:39:53,600 --> 02:39:57,680
विरोध कर रहे हो तो कह दो कि हां हिंदू राष्ट्र मेरे विरोध में है

2170
02:39:57,680 --> 02:40:01,680
तो तुम्हारी असलियत सामने आए तुम्हारे

2171
02:40:01,680 --> 02:40:05,840
विरोध में है क्या ये इसके लिए हमें सिद्ध करने की आवश्यकता पड़े

2172
02:40:05,840 --> 02:40:10,080
कि नहीं इससे बड़ी दिक्कत है क्या तुम्हें हिंदू राष्ट्र बन जाएगा तो

2173
02:40:10,080 --> 02:40:14,080
अगर साढ़े तीन वर्ष में बन जाएगा तो तुम्हें दिक्कत है क्या उससे जो हमें उसको

2174
02:40:14,080 --> 02:40:18,080
सिद्ध करना पड़े ये केवल किसी को नीचा

2175
02:40:18,080 --> 02:40:21,840
दिखाने का तरीका है भगवत आनंद

2176
02:40:21,840 --> 02:40:25,920
और कुछ नहीं है। और अगर नीचा दिखाने का तरीका यह है कि

2177
02:40:25,920 --> 02:40:30,000
उसकी किसी वक्त वक्तव्य का अपने अनुसार जो है अर्थ निकाल करके कुछ

2178
02:40:30,000 --> 02:40:34,160
भी जो है उससे बिना पूछे बिना किए तुम तो कह रहे थे ना

2179
02:40:34,160 --> 02:40:38,240
मैं तो अपने शिष्य का कर्तव्य निभा रहा हूं। तो क्यों नहीं जाते हो? पूछ

2180
02:40:38,240 --> 02:40:42,240
लो जाके साढ़े तीन वर्षों में क्यों नहीं हुआ? नागोक से सेना क्यों

2181
02:40:42,240 --> 02:40:46,240
नहीं आई? भाई मैं कहीं जाकर के ये नहीं कहता हूं कि

2182
02:40:46,240 --> 02:40:51,760
शंकराचार्य को तुम इसलिए मानो क्योंकि वहां पर नागोक की सेना है।

2183
02:40:51,760 --> 02:40:55,840
मैं किसी से यह नहीं कहता हूं कि शंकराचार्य को इसलिए मानो क्योंकि उन्होंने तीन

2184
02:40:55,840 --> 02:41:00,000
वर्ष में हिंदू राष्ट्र की भविष्यवाणी की है। मैं किसी से यह कहता

2185
02:41:00,000 --> 02:41:04,320
हूं कि शंकराचार्य को इसलिए मानो क्योंकि वो परंपरा प्राप्त आचार्य हैं।

2186
02:41:04,320 --> 02:41:08,480
उनसे हमें मिलता है सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष

2187
02:41:08,480 --> 02:41:12,640
और शाश्वत धर्म। तुम लोगों से कहते हो कि मुझे इसलिए निग्रचार मानो

2188
02:41:12,640 --> 02:41:16,800
क्योंकि मेरे पास सपने में मंत्र आया था। तुम लोगों से कहते

2189
02:41:16,800 --> 02:41:20,880
हो चाहे भले ही तुम्हारा हर साल दंड बदलता रहे चाहे भले ही हर साल

2190
02:41:20,880 --> 02:41:25,520
तुम्हारा टीका बदलता रहे तुम तो बड़े शुद्ध ब्राह्मण हो ना बचपन से शुद्ध थे ना

2191
02:41:25,520 --> 02:41:29,520
सब कुछ शुद्ध शुद्ध था तुम्हारा तुम

2192
02:41:29,520 --> 02:41:33,920
कहते हो अपने चमत्कारों के नाम पे कि मैं हूं निगराचार्य

2193
02:41:33,920 --> 02:41:37,040
तुम मनवाना चाहते हो

2194
02:41:37,040 --> 02:41:41,680
शंकराचार्य को शंकराचार्य होने के लिए

2195
02:41:41,680 --> 02:41:45,840
इन चमत्कारों की आवश्यकता नहीं है पर तुम जैसे निगराचार्य

2196
02:41:45,840 --> 02:41:49,640
बनने वालों को तथाकथित

2197
02:41:49,640 --> 02:41:54,080
स्वषित बनने वालों को चमत्कार

2198
02:41:54,080 --> 02:41:58,080
की आवश्यकता है कि मुझे यहां यंत्र मिल गया। फिर

2199
02:41:58,080 --> 02:42:02,080
जो है मुझे जो मुझे देवता ने मंत्र दिया था। फिर मैं जो

2200
02:42:02,080 --> 02:42:06,160
है उस मंत्र को वेरीिफाइड कराने वहां एक उसके पास गया। आचार्य के पास गया।

2201
02:42:06,160 --> 02:42:10,240
फिर उन्होंने आचार्य ने भी अपने तपोबल से एक और आचार्य के दर्शन किए। फिर

2202
02:42:10,240 --> 02:42:14,320
उनसे लेकर के आया। और यह सब होने के बाद मैं शंकराचार्य के पास गया।

2203
02:42:14,320 --> 02:42:18,680
क्या हमें जो है देवता दर्शन दे सकते

2204
02:42:18,680 --> 02:42:24,680
हैं? फिर मैं शंकराचार्य से पूछने

2205
02:42:25,400 --> 02:42:30,840
गया।

2206
02:42:30,840 --> 02:42:34,960
चलो शंकराचार्य काट्य हैं। ये चारों शंकराचार्य काट्य होते हैं। ये बता

2207
02:42:34,960 --> 02:42:35,840
दो शिवश

2208
02:42:35,840 --> 02:42:39,760
लाइव बुलाता भैया तो तेरा करियर खा जाते हो हम। तुम लाइव नहीं बुलाया। ये तुम ग्रह

2209
02:42:39,760 --> 02:42:44,000
कुछ तुम्हारी अच्छी थी। शंकराचार्य तो वर्तमान

2210
02:42:44,000 --> 02:42:47,840
वालेगा

2211
02:42:47,840 --> 02:42:52,400
यदि तुम कहो कि केवल बताओ इतनी

2212
02:42:52,400 --> 02:42:56,400
नीच सोच है करियर खा जाते यहां करियर की

2213
02:42:56,400 --> 02:43:02,280
होड़ लगी है इतनी गिरी हुई सोच

2214
02:43:02,280 --> 02:43:06,400
है ये होड़ लगी है प्रतिस्पर्धा है ये एक ये एक

2215
02:43:06,400 --> 02:43:10,400
वो है प्रोफेशन का सेक्टर तुम्हारे लिए तेरा

2216
02:43:10,400 --> 02:43:15,640
मेरा करियर खा जाते हैं हम। मेरा करियर कौन

2217
02:43:15,640 --> 02:43:19,800
खाएगा? मुझे निग्रह निगरा इन सब का भय नहीं है।

2218
02:43:19,800 --> 02:43:23,840
समझे? हमारे पास गुरु है। तुम्हारे पास कौन है? कौन है तुम्हारा

2219
02:43:23,840 --> 02:43:28,080
गुरु? कहां से आया द्वैत? वक्त

2220
02:43:28,080 --> 02:43:32,240
आने पे अव्यक्ता द्वैत बन जाओ। फिर बन जाओ। अद्वैती जहां जिससे

2221
02:43:32,240 --> 02:43:37,400
काम चल जाए भाई। इस वालों जैसा दोगला

2222
02:43:37,400 --> 02:43:41,480
व्यवहार कि मैं अद्वैती भी हूं। मैं अव्यक्ता द्वैती भी

2223
02:43:41,480 --> 02:43:45,600
हूं। मैं जो है शंकराचार्य वो है शासकों शासक

2224
02:43:45,600 --> 02:43:51,400
भी हैं। उनसे न्याय लूंगा और मैं उसके साथ बैठूंगा भी नहीं थोड़े दिन

2225
02:43:51,400 --> 02:43:55,160
बाद।

2226
02:43:55,160 --> 02:44:00,000
हम क्या है परंपरा तुम्हारी? पूछूंगा। अब आना

2227
02:44:00,000 --> 02:44:04,920
पकड़ के। बताना मुझे

2228
02:44:04,920 --> 02:44:09,040
परंपरा जो तुमने वह खिचड़ी पकाई है ना मेरे सामने

2229
02:44:09,040 --> 02:44:13,040
पकाना खिचड़ी परंपरा की तब पूछूंगा यहां कैसे

2230
02:44:13,040 --> 02:44:17,400
क्या

2231
02:44:17,400 --> 02:44:22,480
हुआ कहां से आया अद्वैत का ज्ञान

2232
02:44:22,480 --> 02:44:27,360
आओ चलो आपस में टकराओ

2233
02:44:27,360 --> 02:44:31,840
कलह नहीं चाहिए थी ठीकठाक चल रहा था

2234
02:44:31,840 --> 02:44:35,840
समझे सब नहीं चाहिए थी कल इसीलिए मना कर रहा

2235
02:44:35,840 --> 02:44:39,920
था मत करो मत करो मत करो मत करो मत करो मगर उस

2236
02:44:39,920 --> 02:44:44,000
वीडियो के अच्छे वाले पार्ट्स को ना लेकर के केवल उसमें

2237
02:44:44,000 --> 02:44:48,000
जो विरोध विरोध करने वाले जो पार्ट विरोधाभासी यही विरोधाभासी अब

2238
02:44:48,000 --> 02:44:52,080
इसको कर लेना कि विरोधाभासी का दूसरा अर्थ ले लेना जो तुम्हारे

2239
02:44:52,080 --> 02:44:56,480
विरुद्ध में जो तुमको पार्ट मिल गए उसमें इतना खिन्न हो गए तुम अहंकार

2240
02:44:56,480 --> 02:45:02,480
के नशे में चूर करियर देखते

2241
02:45:03,720 --> 02:45:07,840
हो मुझे लगा था धार्मिक युद्ध करने

2242
02:45:07,840 --> 02:45:12,320
निकला हुआ एक योद्धा है अगर उससे मैं हारूंगा भी तो भी

2243
02:45:12,320 --> 02:45:16,600
मुझे अच्छा लगेगा मगर मुझे नहीं पता था तुम इतने गिरे हुए

2244
02:45:16,600 --> 02:45:21,880
हो जो करियर शब्द का इस्तेमाल कर रहे हो यहां

2245
02:45:21,880 --> 02:45:26,160
पर अरे तुमने यही देख लिया होता कि इस व्यक्ति का

2246
02:45:26,160 --> 02:45:31,000
थोड़ा अवलोकन कर लिया होता और अगर तुम्हें करियर ही दिख रहा है यहां पर

2247
02:45:31,000 --> 02:45:35,120
मेरा तो क्यों तुमने अपने वहां पर कर अगर तुम मानते हो कि

2248
02:45:35,120 --> 02:45:39,360
धर्म के नाम पर बिजनेस करना गलत है मानते हो कि नहीं मानते हो अगर तुम्हारे

2249
02:45:39,360 --> 02:45:43,720
हिसाब से मैं करियर पर ध्यान देने वाला व्यक्ति हूं तो तुमने क्यों तुम

2250
02:45:43,720 --> 02:45:47,760
क्यों प्रशंसा कर रहे हो कहीं पर क्यों नाम ले रहे हो क्यों प्रोत्साहन

2251
02:45:47,760 --> 02:45:53,480
दे रहे

2252
02:45:53,480 --> 02:45:57,680
हो या तो तुम भी उसी पटरी पर चल रहे हो जिस जैसा मुझे

2253
02:45:57,680 --> 02:46:03,680
समझ रहे हो तो भगवतानंद मैं इसलिए नहीं निकला हूं।

2254
02:46:04,080 --> 02:46:08,160
ठीक है? ये सब बहुत देख लिया जीवन

2255
02:46:08,160 --> 02:46:13,320
में। कुछ नहीं रखा

2256
02:46:13,320 --> 02:46:17,440
है। राम जी नहीं बोला, श्री नहीं लगाया। तो

2257
02:46:17,440 --> 02:46:21,520
जो लोग राम राम जपते थे, जो लोग राम राम कह के अपने आप को बल

2258
02:46:21,520 --> 02:46:25,600
देते थे, वो सब गलत थे। वाल्मीकि गलत थे।

2259
02:46:25,600 --> 02:46:29,840
पूरी के शंकराचार्य गलत है। जिनकी भी राम शब्द में आस्था

2260
02:46:29,840 --> 02:46:34,000
है, केवल राम शब्द में आस्था वो सब गलत है। जहां जैसी

2261
02:46:34,000 --> 02:46:38,000
बातें झोंकनी हो छोंक लो। चार तरह की बातें कर लो। मुझे थोड़ा मैं

2262
02:46:38,000 --> 02:46:42,400
तुम्हारी रिस्पेक्ट करता था। सच बताऊं तो अरे बढ़िया

2263
02:46:42,400 --> 02:46:46,720
अपने बात को सही से रखने वाला व्यक्ति है। चलो थोड़े बहुत उसमें मतभेद

2264
02:46:46,720 --> 02:46:51,400
है। ठीक

2265
02:46:51,400 --> 02:46:56,000
है। और तुम जब इन सब चीजों पर चलते थे। हालांकि वो मलेचराज

2266
02:46:56,000 --> 02:47:00,280
वाली सीरीज मुझसे कोई पूछता था भैया मलेचराज है कि

2267
02:47:00,280 --> 02:47:04,720
नहीं? वास्तविकता है कि नहीं? तो मैं यही कहता था कि

2268
02:47:04,720 --> 02:47:09,200
भाई अगर किसी सिद्धांत को कोई एक सम्मानित व्यक्ति कह रहा है

2269
02:47:09,200 --> 02:47:13,600
तो उसको तुम्हें तब तक मानने से क्या हर्ज है जब तक वो वेदों का खंडन ना हो

2270
02:47:13,600 --> 02:47:19,080
और अगर उसको मानते हुए तुम वेदों की रक्षा कर पा रहे

2271
02:47:19,080 --> 02:47:23,280
हो और तुम्हारे अंदर ये गिरे हुए ख्यालात चल रहे मैं तुम्हारा करियर

2272
02:47:23,280 --> 02:47:27,760
खा जाता खा लेना करियर तुम्हारा

2273
02:47:27,760 --> 02:47:31,840
करियर खाऊंगा तुम आओ विजय श्री को

2274
02:47:31,840 --> 02:47:35,960
दिखाएगा प्रमाणों के आधार पर सिद्ध करो कि उसने पूरी मठ में जो है व्यापार

2275
02:47:35,960 --> 02:47:40,320
किया और दिखाए गए प्रमाणों के आधार पर पीठ

2276
02:47:40,320 --> 02:47:46,280
के परिककरों के लिए जो तुमने बोला उसको सिद्ध करो

2277
02:47:46,280 --> 02:47:50,480
आओ और अपनी परंपरा सिद्ध करो अद्वैत

2278
02:47:50,480 --> 02:47:56,480
कहां से आया सिद्ध करो करियर खाएंगे ये

2279
02:47:56,840 --> 02:48:00,960
आना इतनी गिरी हुई बातें तो मैंने सुना ही नहीं था कि इस

2280
02:48:00,960 --> 02:48:04,080
वीडियो में भी बोला

2281
02:48:04,080 --> 02:48:08,160
है ना? किस माध्यम से ये सिद्ध होता है? किस प्रमाण से सिद्ध होता है

2282
02:48:08,160 --> 02:48:12,160
कि केवल पूरी के शंकराचार्य ही अकाट्य होते हैं। बाकी तीन पीठ के शंकराचार्य अकाट्य नहीं होते हैं।

2283
02:48:12,160 --> 02:48:16,160
और अगर ये कहो कि चारों पीठों के शंकराचार्य अकाट्य होते हैं। तो केवल

2284
02:48:16,160 --> 02:48:21,400
दो बातों पर तुम निर्णय पॉज कर दो। पॉज कर दो।

2285
02:48:21,400 --> 02:48:25,520
जो जब मेरे पास ये वाला प्रश्न आता है तो मेरा

2286
02:48:25,520 --> 02:48:30,160
जवाब सुन लो।

2287
02:48:30,160 --> 02:48:34,320
कि जिस विषयों में धर्म और ब्रह्म प्रभावित होता है उन

2288
02:48:34,320 --> 02:48:38,960
विषयों में चारों पीठ के शंकराचार्य मत एक्य है

2289
02:48:38,960 --> 02:48:43,440
और शंकराचार्य जैसे आध्यात्मिक पद पर बैठने के साथसाथ

2290
02:48:43,440 --> 02:48:49,440
वो एक मनुष्य देह में भी है तो मनुष्यगत भेद भी

2291
02:48:50,280 --> 02:48:54,760
है। जब भगवान विष्णु में भगवान शिव में युद्ध

2292
02:48:54,760 --> 02:48:59,960
हुआ वह तो स्वयं भगवान

2293
02:48:59,960 --> 02:49:04,080
थे। ठीक है? तो तुम कह दो कि वो विष्णु जो

2294
02:49:04,080 --> 02:49:08,320
है अकाट नहीं थे। शिव जो है अकाट नहीं थे। या तुम दोनों को मानने

2295
02:49:08,320 --> 02:49:11,080
वाले नहीं हो। कह

2296
02:49:11,080 --> 02:49:15,360
दो। कह दो तुम हमें चाहिए

2297
02:49:15,360 --> 02:49:20,000
धर्म और ब्रह्म। परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान

2298
02:49:20,000 --> 02:49:25,120
ईश्वर शाश्वत धर्म चारों से एक मिलता है

2299
02:49:25,120 --> 02:49:29,200
और बाकी उनके अपने अपने जो मनुष्यगत जो भेद है

2300
02:49:29,200 --> 02:49:33,280
किसी का दृष्टिकोण कुछ है जो जिसका अनुयाई हो जिसकी जिसमें श्रद्धा हो

2301
02:49:33,280 --> 02:49:37,280
जिसका विवेक जिसके अनुगत उसको रहने को कहे वो उसमें अपना श्रद्धा रख

2302
02:49:37,280 --> 02:49:41,360
करके उनके अनुसार चले अपने गुरु वचनों के अनुसार मैं तो यही

2303
02:49:41,360 --> 02:49:45,200
कहता हूं कि अगर चारों शंकराचार्य में ये ये चीजें अगर

2304
02:49:45,200 --> 02:49:49,280
अलग-अलग है इससे तुम्हारे धर्म ब्रह्म पे क्या असर पड़ रहा है? क्या ब्रह्म की व्याख्या बदल

2305
02:49:49,280 --> 02:49:55,280
गई है? क्या धर्म की व्याख्या बदल गई

2306
02:50:00,120 --> 02:50:04,240
है? चलो दे दो कि

2307
02:50:04,240 --> 02:50:08,320
पीठ कितने हैं? और आदि शंकराचार्य जी कब हुए थे? ये बता

2308
02:50:08,320 --> 02:50:12,400
दो। अगर तुम ये कहते हो कि आदि शंकराचार्य जी पांचवी शताब्दी ईसा

2309
02:50:12,400 --> 02:50:16,640
पूर्व हुए थे। जी को खत्म

2310
02:50:16,640 --> 02:50:20,640
हुए थे तुम इनहीं में पड़े रह जाना बौद्ध कितने हुए थे तुम

2311
02:50:20,640 --> 02:50:25,800
इनहीं में पड़े रह जाना वस्तुनिष्ठता में पड़े रह

2312
02:50:25,800 --> 02:50:31,800
जाना इससे धर्म और ब्रह्म पे क्या फर्क पड़ रहा है किसी

2313
02:50:37,560 --> 02:50:42,000
के तुम्हारे पड़ रहा होगा तुम बताओ ना ये अद्वैत

2314
02:50:42,000 --> 02:50:46,080
का ज्ञान कहां से आया सपने में दिया है। ब्रह्म सूत्र याद है क्या जो देवता देके गए थे

2315
02:50:46,080 --> 02:50:50,280
पूरा ब्रह्म सूत्र सुना देना भगवान ने दिया ना तुम्हें

2316
02:50:50,280 --> 02:50:54,320
सीधे कहां से मिला अद्वैत आज तुमने

2317
02:50:54,320 --> 02:50:58,880
कहा ना मैं अद्वैती हूं झूठ बोला अद्वैती

2318
02:50:58,880 --> 02:51:03,120
नहीं हो तो अव्यक्ता द्वैती हो तो उसमें

2319
02:51:03,120 --> 02:51:06,920
भाष्य कहां है

2320
02:51:06,920 --> 02:51:10,600
अपना

2321
02:51:10,600 --> 02:51:14,800
चलाओ पड़ेगा श्रृंगेरी की बात को खंडित करना पड़ेगा तो तुम गुरु निंदक

2322
02:51:14,800 --> 02:51:18,960
हो जाओगे कि नहीं हो जाओगे तुम्हारे श्री के बात कटेगी

2323
02:51:18,960 --> 02:51:21,560
कि नहीं

2324
02:51:21,560 --> 02:51:25,600
कटेगी और तुम्हारा तो खुद भी संपर्क है नाचार्य जी

2325
02:51:25,600 --> 02:51:30,320
से पूछेंगे पूछ तुम्हारा का कितनी बार

2326
02:51:30,320 --> 02:51:34,480
तुम्हारी तो इतनी इतनी सारी चीजें हैं कि तुम्हारा पूरा तुम अगर इसको

2327
02:51:34,480 --> 02:51:38,560
करियर कहते हो तो उसका तो बिल्कुल वो लुप्त हो जाएगा और करियर की बात

2328
02:51:38,560 --> 02:51:42,640
तो छोड़ो अभी जो संप्रदाय लुप्तता में ही था वो लुप्तता नहीं रह

2329
02:51:42,640 --> 02:51:47,720
जाएगा। तुम्हें इसकी चिंता होनी

2330
02:51:47,720 --> 02:51:52,320
चाहिए। परंपरा प्राप्त आचार्यों पर तुम वो बात करोगे।

2331
02:51:52,320 --> 02:51:56,400
तुम्हारा क्या हैसियत है? उनहीं के पास चरणों में बैठकर के तो

2332
02:51:56,400 --> 02:52:00,520
तुम ज्ञान प्राप्त करते हो। फिर कह देते हो कि हमें जो सपने में आकर के दे गया

2333
02:52:00,520 --> 02:52:04,640
कोई। अपने सिद्धांत बताओ कहां से आए तुम्हारी परंपरा के?

2334
02:52:04,640 --> 02:52:10,640
शंकराचार्यों से अलग बताओ।

2335
02:52:12,240 --> 02:52:16,400
है ना? तो उन्होंने कहा था काशी

2336
02:52:16,400 --> 02:52:20,560
सुमेरू पीठ के विषय में पूरे के वर्तमान शंकराचार्य जी के एकांत में कि हमारे जाने के बाद इस पीठ

2337
02:52:20,560 --> 02:52:24,560
का विलय कर देना मतलब इसको क्लोज कर देना ये नहीं टिकेगी। तो पूरे के शंकराचार्य तो वो

2338
02:52:24,560 --> 02:52:28,560
भी नहीं कर रहे हैं। बल्कि वो तो नए शंकराचार्य का अभिषेक पर अभिषेक किए जा रहे हैं। ऊपर से कह देते

2339
02:52:28,560 --> 02:52:32,640
हैं कि चार पीठ चार ही आचार्य होते हैं। मतलब आपके गुरु शंकराचार्य

2340
02:52:32,640 --> 02:52:36,800
जी गलत थे तो कब गलत थे? और अगर गलत

2341
02:52:36,800 --> 02:52:41,080
थे तो तुम क्या कर रहे थे उनके चरणों में बैठकर के पहली

2342
02:52:41,080 --> 02:52:45,440
बात और दूसरी बात किसने किसके कान में क्या कहा

2343
02:52:45,440 --> 02:52:51,160
तुम कौन होते हो पूछने वाले तुम उनके परंपरा प्राप्त शिष्य हो

2344
02:52:51,160 --> 02:52:55,280
क्या तुमने दीक्षा ली है तुमने शंकर परंपरा का ज्ञान

2345
02:52:55,280 --> 02:52:59,280
शंकर परंपरा से प्राप्त किया है क्या बोल दो मैं शंकर परंपरा का हूं

2346
02:52:59,280 --> 02:53:03,360
निग्रह परंपरा का नहीं हूँ तुमको क्या मालूम एक आचार्य ने

2347
02:53:03,360 --> 02:53:07,600
अपने शिष्य से क्या कहा पूरी के शंकराचार्य

2348
02:53:07,600 --> 02:53:11,680
जी से पूछा था कि पांच है कि चार हैं। लोग कहते हैं

2349
02:53:11,680 --> 02:53:15,680
पांच कह के गए कृपात्री जी उन्होंने सीधे कह दिया मैं उनका शिष्य हूं। मुझे मुझे बताया

2350
02:53:15,680 --> 02:53:19,720
उन्होंने कोई क्लेम कैसे कर परंपरा की आवश्यकता क्या है

2351
02:53:19,720 --> 02:53:23,840
भाई? जो ये बताएगा कि पीछे वाले आचार्य क्या कह

2352
02:53:23,840 --> 02:53:27,920
के गए? तुम कौन होते उनके कहे हुए क्लेम

2353
02:53:27,920 --> 02:53:32,160
करने वाले? कहां से आ गए तुम? तुम्हारी

2354
02:53:32,160 --> 02:53:36,160
कोई परंपरा नहीं। अपनी परंपरा तुम्हारी सिद्ध नहीं है। उसको तुम परंपरा

2355
02:53:36,160 --> 02:53:40,240
मान नहीं रहे हो। तुम क्लेम कैसे कर दोगे कि शंकराचार्य जी जो बोल

2356
02:53:40,240 --> 02:53:46,240
रहे हैं उनके पूर्वाचार्यों ने नहीं

2357
02:53:50,280 --> 02:53:54,320
बोला। हम इनका कितना हो

2358
02:53:54,320 --> 02:54:00,320
गया है यहां तक भाई?

2359
02:54:12,120 --> 02:54:16,240
हम चलाओ ये वाला चैप्टर क्लोज कर ले और टाइम मार्क

2360
02:54:16,240 --> 02:54:20,720
लगा लेना कल सुबह जो है 12:00 बजे स्वामी जी का खंडक कौन हुआ मैं नहीं पूरे के शंकराचार्य

2361
02:54:20,720 --> 02:54:25,520
हुए अपने गुरु का निंदा कौन हुआ हम नहीं क्योंकि हम तो दीक्षा भी नहीं दिए स्वामी कृपात्री जी से हम तो दीक्षा भी नहीं

2362
02:54:25,520 --> 02:54:30,000
ली किससे है एक मिनट ली किससे से

2363
02:54:30,000 --> 02:54:35,640
कभी तुम अद्वैती बन जाते

2364
02:54:35,640 --> 02:54:39,840
हो। पूरी के शंकराचार्य जी के गुरु ने क्या-क्या शिक्षाएं

2365
02:54:39,840 --> 02:54:44,000
दी है, किस रूप में दी है ये क्लेम करने वाला उनका जो प्रामाणिक शिष्य होगा

2366
02:54:44,000 --> 02:54:48,000
वो हो सकता है। कोई एरा नत्थू कह रहा आ करके ये

2367
02:54:48,000 --> 02:54:52,400
नहीं बता सकता। नहीं करपात्री जी ने ये कहा था आप गलत कह रहे हो। जो उनका प्रामाणिक

2368
02:54:52,400 --> 02:54:56,560
शिष्य होगा वह कह सकता है। तो पहले तुम अपने आप को या तो प्रामाणिक

2369
02:54:56,560 --> 02:55:02,560
शिष्य घोषित करो या फिर दूर

2370
02:55:02,600 --> 02:55:08,280
रहो। कितना टाइम हो गया यहां

2371
02:55:08,280 --> 02:55:12,400
पर? कोशिश थी मेरी कि 6:00 बजे से ही बैठ जाऊं क्योंकि मुझे पता

2372
02:55:12,400 --> 02:55:17,360
था कि लंबा हो लंबा हो जाएगा यह। पर

2373
02:55:17,360 --> 02:55:21,160
लास्ट मोमेंट पर

2374
02:55:21,160 --> 02:55:25,800
यह जो वाईफाई था वह काम करना बंद कर दिया

2375
02:55:25,800 --> 02:55:30,240
था। है ना? उसके बाद वाईफाई

2376
02:55:30,240 --> 02:55:34,320
का इंतजाम किया गया। 2 घंटा 43 मिनट का

2377
02:55:34,320 --> 02:55:38,400
हो गया है। 2 घंटा 43 मिनट का

2378
02:55:38,400 --> 02:55:42,480
कहां से हो गया होगा? हमारा वीडियो हो

2379
02:55:42,480 --> 02:55:48,480
गया। नहीं इनका कहां तक पहुंच गया है?

2380
02:55:48,640 --> 02:55:53,160
स्वषित आचार्य भगवतानंद का कहां तक

2381
02:55:53,160 --> 02:55:58,080
पहुंचा? हम यह सब नहीं चाहते थे भगवतानंद।

2382
02:55:58,080 --> 02:56:02,640
और तुमने हमें विवश इसलिए किया क्योंकि तुमने प्रतिकारात्मक

2383
02:56:02,640 --> 02:56:06,640
वीडियोस बनाना बंद नहीं किए। हमने तुम्हारा

2384
02:56:06,640 --> 02:56:10,640
खंडन नहीं करना चाहा था। नहीं कर था। हमने केवल जिस

2385
02:56:10,640 --> 02:56:15,400
स्त्री को हम जानते हैं जो हमारी बहन जैसी है, बेटी जैसी है, घर की

2386
02:56:15,400 --> 02:56:19,440
है, जिसको हम जानते हैं उसकी कहानी तुम्हें पता नहीं है। वो

2387
02:56:19,440 --> 02:56:23,600
कैसे पहुंची है शंकराचार्य जी के मठ। अपना

2388
02:56:23,600 --> 02:56:27,680
अच्छा भला वो Instagram चला रही थी। अपने उसके जो

2389
02:56:27,680 --> 02:56:32,280
भौतिकवाद में जो उसके उद्देश्य थे वो चल रहे थे

2390
02:56:32,280 --> 02:56:36,400
उसके। हमने चाहा कि हमारे गुरु हमारे गुरु के प्रति आस्था

2391
02:56:36,400 --> 02:56:40,480
हो। भी सब चाहते हैं कि

2392
02:56:40,480 --> 02:56:44,480
सनातन के संविधान की ओर आकर्षित हो। हमने

2393
02:56:44,480 --> 02:56:48,560
उनके मन में भाव जगाया सर्वशक्तिमान

2394
02:56:48,560 --> 02:56:52,720
परमेश्वर का सनातन धर्म का धीरे-धीरे करके

2395
02:56:52,720 --> 02:56:56,880
उनको निष्ठावान बनाया सिद्धांत उनके अंदर थे गुण पर जो

2396
02:56:56,880 --> 02:57:01,200
यह जो मूलभूत सिद्धांत है इनको हमने इनसे उनको परिचित कराया

2397
02:57:01,200 --> 02:57:03,760
और वो हुई और अपने आप

2398
02:57:03,760 --> 02:57:08,160
एक दिन उनके मन में वो आया उनको कोई ऐसी भौतिक

2399
02:57:08,160 --> 02:57:12,880
आवश्यकता नहीं थी। पर जब वो धीरे-धीरे परंपरा प्राप्त आचार्य

2400
02:57:12,880 --> 02:57:16,880
इन सब चीजों को जान गई तो उनके मन में

2401
02:57:16,880 --> 02:57:22,200
अपने आप ये आया कि मैं जो है मेरे को अगर दीक्षा लेनी है, मेरे को अगर कोई

2402
02:57:22,200 --> 02:57:26,240
गुरु किसी को गुरु मानना है तो मैं पूरी के शंकराचार्य जी को गुरु मानूंगी।

2403
02:57:26,240 --> 02:57:31,120
ये सब मैंने अपनी आंखों से देखा था। साक्षी हूं मैं इसका।

2404
02:57:31,120 --> 02:57:35,280
मैं जानता हूं उसमें कोई दोष नहीं है। तो

2405
02:57:35,280 --> 02:57:39,600
अगर कोई उसकी इस तरह से अनादर करेगा उसका

2406
02:57:39,600 --> 02:57:43,840
जिसको मैंने परिवर्तन भगवत

2407
02:57:43,840 --> 02:57:47,920
कृपा से जिसका परिवर्तन मैंने किया। हृदय परिवर्तन उसका

2408
02:57:47,920 --> 02:57:52,160
मैंने किया। भगवत कृपा से गुरु कृपा से मैं

2409
02:57:52,160 --> 02:57:58,160
जानता हूं।

2410
02:57:59,000 --> 02:58:03,040
ना अगर मैं किसी की सच्चाई जानता हूं और वह

2411
02:58:03,040 --> 02:58:09,040
मेरे कारण कहीं से कहीं पहुंचा वहां पे उसको अकेला छोड़

2412
02:58:11,880 --> 02:58:17,840
दूं तो मैं खड़ा रहूंगा।

2413
02:58:17,840 --> 02:58:21,840
ठीक है? तुम ऐसा करना कि जहां पर अनुकूलता हो वहां खड़े

2414
02:58:21,840 --> 02:58:26,960
हुआ करो लोगों के साथ। तुम ऐसा कर सकते हो शायद।

2415
02:58:26,960 --> 02:58:30,960
अरे विदेशगामी है तो कौन सा उसको आचार्य की पदवी पर बिठा रहे हैं या

2416
02:58:30,960 --> 02:58:35,920
कौन सा उसको वहां के जो संवेदनशील जगह होती है वहां पहुंचाया जा रहा है

2417
02:58:35,920 --> 02:58:40,320
और अगर हम लोग अपने धर्म को ऐसा बना देंगे कि विदेशगामी

2418
02:58:40,320 --> 02:58:44,480
है छी छी छीची आ ही नहीं सकता तो कौन आएगा और विदेशगामी

2419
02:58:44,480 --> 02:58:48,680
वो भी था जिससे तुमने अपना आतित स्वीकार किया था

2420
02:58:48,680 --> 02:58:53,160
भगवतानंद वहां तो तुमने नहीं सोचा है ये विदेशगामी

2421
02:58:53,160 --> 02:58:58,640
है तो मीठामीठा गपगप कड़वा कड़वा थू

2422
02:58:58,640 --> 02:59:02,880
ठीक है कल मिलते हैं 12:00 बजे इसको स्थगित किया जाए यहीं पर

2423
02:59:02,880 --> 02:59:08,880
टाइम स्टैंप ले लिया

2424
02:59:11,160 --> 02:59:15,160
जाए जय श्री राम सभी को
