1
00:00:02,640 --> 00:00:06,720
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी

2
00:00:06,720 --> 00:00:10,360
कुशल मंगल होंगे

3
00:00:10,360 --> 00:00:14,560
और आज एकादशी भी है। एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं

4
00:00:14,560 --> 00:00:18,720
सभी को। एक वीडियो आ

5
00:00:18,720 --> 00:00:23,120
गया है भगवतानंद जी के द्वारा।

6
00:00:23,120 --> 00:00:28,520
अ हमारे संबंध में बना। उन्होंने कुछ वक्तव्य दिए

7
00:00:28,520 --> 00:00:32,560
हैं। तो सबसे पहले जो लोग नहीं जानते हैं

8
00:00:32,560 --> 00:00:36,720
वो पिछला वीडियो देख आए और मैं कहूंगा कि उनका वीडियो देख लें।

9
00:00:36,720 --> 00:00:40,880
हमारा वीडियो देख लें। तो जो लोग नहीं जानते हैं तो क्योंकि पीछे

10
00:00:40,880 --> 00:00:45,120
से हर बार पूरा बताने में थोड़ा

11
00:00:45,120 --> 00:00:48,680
समस्या

12
00:00:48,680 --> 00:00:52,720
है। तो सबसे पहले तो मैं यह कहूंगा भगवतानंद जी को उन्होंने

13
00:00:52,720 --> 00:00:56,800
कहा है अपने वीडियो में जो भी कुछ कहा

14
00:00:56,800 --> 00:01:00,800
है उसके लिए मैं यह कहूंगा कि आपके लिए हमने वह लाइव किया ही

15
00:01:00,800 --> 00:01:05,040
नहीं था और हम नहीं चाहते थे इस तरह से

16
00:01:05,040 --> 00:01:09,200
आपके बारे में हम वीडियो बनाएं या आप हमारे बारे में वीडियो बनाएं

17
00:01:09,200 --> 00:01:13,280
उसके कई कारण है कुछ रणनीति है जो हो

18
00:01:13,280 --> 00:01:17,280
सकती है जो कभी शायद हमारी आपसे बात हो पाती तो हम

19
00:01:17,280 --> 00:01:21,440
बता पाते और शायद आप भी उससे सहमत होते पर वह संभव

20
00:01:21,440 --> 00:01:26,000
नहीं हुआ और इस तरह से

21
00:01:26,000 --> 00:01:30,320
आपके साथ आना पड़ रहा है। तो ऐसा बिल्कुल भी हमारा मन नहीं था और इसीलिए

22
00:01:30,320 --> 00:01:34,640
वीडियो बनाते समय हमने आपकी पहचान

23
00:01:34,640 --> 00:01:39,520
को जितना हो सका छुपा कर रखा और

24
00:01:39,520 --> 00:01:43,600
जिससे कि वही लोग उस चीज को जान सके जो लोग आपको पहले से

25
00:01:43,600 --> 00:01:47,840
जानते हैं। कोई भी अन्य तीसरा पक्ष इस विवाद का

26
00:01:47,840 --> 00:01:51,920
उपयोग ना कर सके। हम नहीं चाहते थे कि कोई इस विवाद

27
00:01:51,920 --> 00:01:56,120
का उपयोग कर सके।

28
00:01:56,120 --> 00:02:00,320
और क्योंकि कहीं ना कहीं हमें ऐसा लगता है कि एक

29
00:02:00,320 --> 00:02:04,960
ही पथ पर चल रहे हैं। हो सकता है थोड़ा सा वैचारिक मतभेद है

30
00:02:04,960 --> 00:02:09,200
जिसके कारण कुछ चीजें हैं जो कभी ना कभी लगता था कि सॉर्ट आउट

31
00:02:09,200 --> 00:02:13,440
हो जाएंगी बात करके और पर

32
00:02:13,440 --> 00:02:18,240
अब जब मैदान में उतर ही आए हैं और आप माने नहीं

33
00:02:18,240 --> 00:02:22,400
आपका नाम भी नहीं लिया आपका चित्र भी नहीं लिखा है मगर आपने आपको

34
00:02:22,400 --> 00:02:26,560
शायद नहीं लगा ठीक अच्छा दूसरी एक बात है कि उसमें

35
00:02:26,560 --> 00:02:30,800
हमने जो प्रमाण भी मांगे हैं जिस पर हम आगे बात करेंगे जो आपने दिए हैं वो

36
00:02:30,800 --> 00:02:34,960
प्रमाण भी हमने हमने उन लोगों से मांगे हैं जिन लोगों ने आपको पीडीएफ दी है।

37
00:02:34,960 --> 00:02:39,040
हमने आपको कहीं भी नहीं ललकारा कि भाई वो प्रमाण दो। आपको शायद ऐसा लग गया

38
00:02:39,040 --> 00:02:43,200
होगा क्योंकि बहुत सारी बहुत लंबी चर्चा थी तो उसमें ऐसा आपको

39
00:02:43,200 --> 00:02:47,520
लग गया हो शायद। मगर हमने आपको कहीं भी ऐसा नहीं

40
00:02:47,520 --> 00:02:52,320
कोई ललकार इत्यादि ऐसी बोली कि

41
00:02:52,320 --> 00:02:56,400
मतलब आप ये लाकर दो तो आप पर विश्वास करेंगे। ये वो सब

42
00:02:56,400 --> 00:03:00,800
वो शायद आपने अपने ऊपर ले लिया। खैर अब जब ले ही लिया है

43
00:03:00,800 --> 00:03:04,800
और चालू चालू हो ही गया है तो गुरुदेव ने ही सिखाया

44
00:03:04,800 --> 00:03:09,280
है और हम सब उनहीं के शिष्य हैं कि जो उदारता आपके अस्तित्व

45
00:03:09,280 --> 00:03:11,360
और आदर्श को नष्ट करने

46
00:03:11,360 --> 00:03:15,360
के लिए बाध्य करे उदारता नहीं कायरता होती

47
00:03:15,360 --> 00:03:19,440
है। तो बस इसी संबंध में अभी वीडियो

48
00:03:19,440 --> 00:03:24,600
हमें बनाना पड़ रहा है। इसको कहीं भी व्यक्तिगत रूप से ना लेकर के

49
00:03:24,600 --> 00:03:28,640
सैद्धांतिक और एक अपनेप धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई

50
00:03:28,640 --> 00:03:34,640
आप समझे। अपने धर्म की रक्षा के लिए कही जाने वाली बात

51
00:03:35,480 --> 00:03:39,680
है। सबसे पहला पॉइंट है आपका जो आपने बोला है जो मुझे याद

52
00:03:39,680 --> 00:03:43,680
है क्योंकि मैं अच्छे तरीके से नहीं देख पाया हूं वीडियो अभी भी। तो

53
00:03:43,680 --> 00:03:47,680
मुझे जो याद है उस पर मैं बात करूंगा। शायद कुछ छूट जाए तो आगे बताया ही जाएगा

54
00:03:47,680 --> 00:03:52,320
क्योंकि आप तो रुकने वाले हैं नहीं आप बनाएंगे। ठीक है कोई बात नहीं।

55
00:03:52,320 --> 00:03:56,600
तो सबसे पहला पॉइंट है आपका कि

56
00:03:56,600 --> 00:04:00,720
भाई किसी संस्था के लिए कार्य

57
00:04:00,720 --> 00:04:04,720
जो उससे जुड़ा है वही तो करेगा। जो उससे जुड़ा नहीं

58
00:04:04,720 --> 00:04:08,800
है वो थोड़ी ना करेगा। यह आपका वो मर्म था प्रीशंस से विजय श्री को जोड़

59
00:04:08,800 --> 00:04:13,200
के दिखाने का। पूरा जो आपने वक्तव्य दिया उसका मर्म यही था लास्ट में।

60
00:04:13,200 --> 00:04:17,360
तो आपने शायद हमारी कल की वार्ता देखी है कि नहीं देखी आपको देखनी चाहिए।

61
00:04:17,360 --> 00:04:21,360
हमने उसमें केवल यह नहीं कहा है कि वो जुड़ी है कि नहीं जुड़ी। हमने यह कहा है कि

62
00:04:21,360 --> 00:04:25,600
अगर जिस आधार पर आप उनका जुड़ा हुआ होना मान रहे हैं तो आप

63
00:04:25,600 --> 00:04:26,640
सबका जुड़ा हुआ

64
00:04:26,640 --> 00:04:30,640
होना मानना पड़ेगा आपको। सब लोग जुड़े हैं किसी ना किसी प्रकार से। जो एमएसी

65
00:04:30,640 --> 00:04:34,720
कंपनीज में काम कर रहा है जो किसी का सेल्स एग्जीक्यूटिव है ये है वो बहुत सारे उदाहरण

66
00:04:34,720 --> 00:04:38,800
आपको मिल जाएंगे। वो सब हिंदू होंगे। शास्त्रनिष्ठ

67
00:04:38,800 --> 00:04:43,320
होंगे। राघवाचार्य जी में आस्था रखते होंगे। शंकराचार्य जी में आस्था रखते होंगे।

68
00:04:43,320 --> 00:04:47,360
मगर वह लोगों का कनेक्शन भी क्योंकि भाई वह किसी पोस्ट पर है।

69
00:04:47,360 --> 00:04:52,080
आपने उसमें आगे कहा है कि भाई कोई सी ऐसी वैसी पोस्ट पर थोड़ी ना है।

70
00:04:52,080 --> 00:04:56,240
हम बात कर रहे हैं उस व्यक्ति की जो फ्री में जो संस्था के किसी अच्छे पद

71
00:04:56,240 --> 00:05:00,920
पर बैठा हुआ है। तो भगवतानंद जी यहां प्रॉब्लम ये आएगी

72
00:05:00,920 --> 00:05:04,960
कि कोई किसी संस्था से जुड़ा हुआ है क्योंकि एन केन

73
00:05:04,960 --> 00:05:09,520
प्रकार सब इधर-उधर से जुड़े हुए हैं। जिस जिस तरीके से आपने जुड़ाव निकाला

74
00:05:09,520 --> 00:05:13,600
तो प्रॉब्लम यह आएगी कि अगर कोई किसी

75
00:05:13,600 --> 00:05:17,600
संस्था से जुड़ा कोई भी किसी संस्था से जुड़ा हुआ है तो उसमें वो

76
00:05:17,600 --> 00:05:21,760
किस पद पर कार्यरत होना चाहिए। यह कहां पर सिद्धांत मिलेगा

77
00:05:21,760 --> 00:05:25,760
कि भगवतानंद जी के द्वारा डिक्लेअ कर देने पर मान लिया जाए कि इस

78
00:05:25,760 --> 00:05:29,840
पद पर यदि उस संस्था के द्वारा नियुक्त होगा व्यक्ति तो यह मान लिया जाए

79
00:05:29,840 --> 00:05:33,840
कि वो उसी के लिए कार्यरत कर रहा है और उससे थोड़ा सा नीचे वाले पद पर जैसे

80
00:05:33,840 --> 00:05:37,840
आपने उदाहरण दिया कि वो कोई उसका रिसेप्शनिस्ट थोड़ी ना है। वो कोई उसका यह

81
00:05:37,840 --> 00:05:41,920
थोड़ी ना है। तो थोड़ा सा उससे नीचे वाले पद पर अगर कार्यरत होगा तो

82
00:05:41,920 --> 00:05:46,080
वो उसके लिए कार्य नहीं कर रहा है। यह सिद्धांत कहां से प्रतिपादित होता है? इसको

83
00:05:46,080 --> 00:05:50,240
हम कैसे मान ले? तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र

84
00:05:50,240 --> 00:05:54,240
प्रमाण है। आपको लगता है कि अगर उस संस्था से कनेक्टिंग

85
00:05:54,240 --> 00:05:58,320
किसी संस्था के द्वारा किसी पद पर जो आपके अनुसार है

86
00:05:58,320 --> 00:06:02,480
वो पद वो क्या था स्पोर्ट्स प्रेसिडेंट या योग योग प्रेसिडेंट मुझे याद

87
00:06:02,480 --> 00:06:06,560
नहीं उस पद का नाम तो आपके अनुसार उस पद पर अगर कोई बैठा है

88
00:06:06,560 --> 00:06:10,880
तो वो प्रीमेशंस के लिए कार्य कर रहा है। मगर उसी संस्था के रिसेप्शन

89
00:06:10,880 --> 00:06:14,960
पर कोई अगर बैठा है तो वह उस संस्था का एजेंट नहीं है। तो यह सनातन

90
00:06:14,960 --> 00:06:19,080
सिद्धांत नहीं है। अगर है तो आप मुझे दे दीजिए मैं मान

91
00:06:19,080 --> 00:06:20,080
लूंगा।

92
00:06:20,080 --> 00:06:24,920
सनातन सिद्धांत नहीं है। निग्रचार्य जी की अपनी मनो की व्याख्या है। यह तो

93
00:06:24,920 --> 00:06:29,200
कि हमने भी किसी पद पर बैठे हुए व्यक्ति की बात की है। हमने किसी

94
00:06:29,200 --> 00:06:33,280
रिसेप्शनिस्ट की बात थोड़ी ना की है। है ना? यह सनातन सिद्धांत नहीं

95
00:06:33,280 --> 00:06:37,440
है। तो पहली बात तो एन केन प्रकारन अगर जिस तरीके से आपने

96
00:06:37,440 --> 00:06:41,440
कहा तो सब लोग जुड़े हुए हैं तो उसमें फिर आपके अनुसार यह

97
00:06:41,440 --> 00:06:45,520
माना जाए कि जिस पद पर बैठकर आप व्यक्ति को फ्री

98
00:06:45,520 --> 00:06:49,680
मिशनंस के लिए कार्य करने वाला मान रहे हैं। है ना? उस

99
00:06:49,680 --> 00:06:53,680
पद को ही वो क्यों माना जाए कि फ्री मिशनंस अगर इस पद पर व्यक्ति बैठा होगा तो

100
00:06:53,680 --> 00:06:57,760
उसको फ्री मिशंस पर के लिए कार्य करने वाला मान लिया जाएगा। और भले ही वह

101
00:06:57,760 --> 00:07:01,760
दूसरे और वह भले ही दूसरे पद पर नियुक्त होते हुए उसी

102
00:07:01,760 --> 00:07:07,760
संस्था से जुड़ा हो तो उसको नहीं माना जाएगा। और

103
00:07:07,960 --> 00:07:12,400
अ ऐसी बहुत सी चीजें अगर आप अपने बारे में हमें थोड़ा बहुत बता देंगे

104
00:07:12,400 --> 00:07:16,400
जैसे आप कहीं कथा करने गए उन लोगों के बारे में आपने बता दिया तो ऐसी

105
00:07:16,400 --> 00:07:20,560
बहुत सी चीजें हैं जो आपके बारे में भी निकल आएंगी। फिर मेरे बारे में निकल आएंगी।

106
00:07:20,560 --> 00:07:24,640
कल जो हमसे बात कर रहे हैं उनके बारे में निकल आएंगी। तो अब उसमें हम यह

107
00:07:24,640 --> 00:07:28,720
कह देंगे कि हम भैया फलाने पद पर नहीं है। प्रेसिडेंट के पद पर नहीं है। तो यह

108
00:07:28,720 --> 00:07:32,720
जो यह जो लाइन आई है ना यह मर्यादा कि नहीं प्रेसिडेंट के पद पर ही

109
00:07:32,720 --> 00:07:35,360
होना चाहिए या फलाने पद पर ही होना चाहिए।

110
00:07:35,360 --> 00:07:39,520
तभी उसको फ्री मेंशन के लिए कार्यरत करने वाला है। माना जाएगा तो

111
00:07:39,520 --> 00:07:43,760
यह मर्यादा आपने कहां से प्रतिपादित की है? हम कैसे माने इस मर्यादा को?

112
00:07:43,760 --> 00:07:47,840
पहली बात। अब दूसरी बात यह है कि यदि किसी व्यक्ति का

113
00:07:47,840 --> 00:07:52,000
लिंक निक दिखाई दे रहा है फ्री मेंशन से कि वह भैया प्रीशन

114
00:07:52,000 --> 00:07:56,240
से जुड़ा हुआ है। ठीक है? जब तर्क

115
00:07:56,240 --> 00:08:01,920
की बात है तो तर्क से ही करते हैं ना कार्य है ना?

116
00:08:01,920 --> 00:08:06,000
तो दूसरा पक्ष सुनिए कि यदि

117
00:08:06,000 --> 00:08:10,240
कोई व्यक्ति फ्री मिशनंस से जुड़ा हुआ दिख रहा है। जैसे आपने लास्ट में कहा कि भाई कोई फ्री

118
00:08:10,240 --> 00:08:14,400
मिशनंस से जुड़ा हुआ व्यक्ति जो है अ फ्री

119
00:08:14,400 --> 00:08:18,640
मिशन से जुड़ा हुआ व्यक्ति ही तो फ्री मिशनंस के लिए काम करेगा। फ्री मिशन

120
00:08:18,640 --> 00:08:22,640
से ना जुड़ा हुआ व्यक्ति थोड़ी ना करेगा। तो पहली बात तो यह है कि इस जिस तरीके से

121
00:08:22,640 --> 00:08:26,720
आपने उनको विजय श्री को फ्री मिशन से जुड़ा हुआ बताया है। उस तरीके से

122
00:08:26,720 --> 00:08:30,800
इनके प्रकांड हम सब लोग जुड़े हुए निकल आएंगे। इस वीडियो को देखने वाले

123
00:08:30,800 --> 00:08:35,040
90% लोग निकल आएंगे। अरे फ्री मेंशन से नहीं तो कम से कम किसी ना किसी सनातन

124
00:08:35,040 --> 00:08:39,200
विरोधी तंत्र से जुड़े हुए निकल आएंगे। जिस तरह से आपने करा है

125
00:08:39,200 --> 00:08:43,440
उस तरीके से। मगर फिर वो पद

126
00:08:43,440 --> 00:08:47,440
की बात मैंने आपको बता दी कि वो पद कौन डिसाइड करेगा कि इस पद पर कार्य करने

127
00:08:47,440 --> 00:08:50,400
वाला तो आप वो व्यक्ति नहीं है जो ये डिसाइड करेंगे कि इस पद पर

128
00:08:50,400 --> 00:08:55,040
कार्य करने वाला होगा तो मान लिया जाएगा। कार्य कर रहा है फ्री मेंशनंस के लिए और इससे

129
00:08:55,040 --> 00:08:59,280
अमुक अमुक पदों पर होगा तो नहीं माना जाएगा। तो यह डिसाइड आप करेंगे या

130
00:08:59,280 --> 00:09:03,280
आप करेंगे तो क्यों करेंगे या आप नहीं करेंगे तो कौन करेगा फिर यह सब

131
00:09:03,280 --> 00:09:07,280
चीजें आपको बतानी ठीक है अब इसका दूसरा पक्ष यह

132
00:09:07,280 --> 00:09:11,440
है कि जब आपको कोई फ्री मिशनंस से काम करने वाला दिख रहा है और वो

133
00:09:11,440 --> 00:09:15,680
आपको फ्री मिशनंस के अनुरूप कार्य करता हुआ नहीं दिख रहा है जैसे कि बम

134
00:09:15,680 --> 00:09:19,840
लगाना सनातन विरोधी नारे लगाना सनातन विरोधी उद्घोष

135
00:09:19,840 --> 00:09:23,920
करना या फिर कुछ और ऐसी आपत्तिजनक गतिविधि जिसको हम

136
00:09:23,920 --> 00:09:28,080
सनातन विरोधी गतिविधि मान सके ठीक है?

137
00:09:28,080 --> 00:09:32,160
सार्वजनिक दृष्टि से तो जब हमें

138
00:09:32,160 --> 00:09:36,240
वो यह दिख रहा है कि वह प्रीमेशन से जुड़ा हुआ है। मैं भी दिख रहा हूं और मेरे साथ

139
00:09:36,240 --> 00:09:40,800
में बहुत सारे जो कार्यकर्ता हैं आह्वान के वो वो भी दिखेंगे।

140
00:09:40,800 --> 00:09:45,680
आप भी दिख जाओगे। आपके साथ जुड़े हुए कई लोग दिख जाएंगे इस

141
00:09:45,680 --> 00:09:49,840
पडकास्ट को इस ये जो हो रहा है स्ट्रीमिंग इसको देखने वाले कई

142
00:09:49,840 --> 00:09:53,920
लोग दिख जाएंगे। फेमेशन से जैसा आधार आपका है उनको बताने का

143
00:09:53,920 --> 00:09:57,920
विद्या को बताने का तो वो दिख जाएंगे। मगर अभी बात ये

144
00:09:57,920 --> 00:10:01,520
आती है कि

145
00:10:01,520 --> 00:10:06,080
जिस व्यक्ति का आप फ्री मिशन से होना सिद्ध कर रहे हो नकारात्मक

146
00:10:06,080 --> 00:10:10,480
रूप में। ठीक है? उस व्यक्ति का सनातन

147
00:10:10,480 --> 00:10:14,720
परंपरा प्राप्त आचार से जुड़ा होना भी तो सिद्ध है। तो

148
00:10:14,720 --> 00:10:18,720
यदि वह सनातन विरुद्ध कार्य करते हुए नहीं दिख रहा है तो यह क्यों ना माना

149
00:10:18,720 --> 00:10:23,360
जाए कि वो शंकर परंपरा के द्वारा फ्री मेंशन में भेजा गया एजेंट है।

150
00:10:23,360 --> 00:10:27,520
भाई वो फ्री मेंशनंस में आपने जोड़ दिया उसको तो हो सकता है वो शंकराचार्य के द्वारा

151
00:10:27,520 --> 00:10:32,320
भेजा गया कोई सिपाही है जो फ्रीशंस में सेंध लगा रहा है। इसलिए

152
00:10:32,320 --> 00:10:36,320
इन सब चीजों को जब हम टटोलेंगे ऐसे हिलाएंगे ना तर्कों को तो फिर

153
00:10:36,320 --> 00:10:40,400
हमें मानना पड़ेगा कि हमें कोई ठोस आधार चाहिए होगा जिस व्यक्ति

154
00:10:40,400 --> 00:10:44,880
को हम फ्री मेशंस का बता रहे हैं उस व्यक्ति का प्रीमेशन से होने वाला

155
00:10:44,880 --> 00:10:48,960
उसको सिद्ध करने के लिए समझ रहे वही वाली बात कि

156
00:10:48,960 --> 00:10:53,040
जिस गीता को पढ़ के कोई व्यक्ति

157
00:10:53,040 --> 00:10:57,200
क्रिश्चियन से हिंदू बन सकता है इसको ये दावा करते हैं ना जिस गीता को पढ़

158
00:10:57,200 --> 00:11:01,200
के कोई व्यक्ति क्रिश्चियन से हिंदू बन सकता है तो उसी गीता

159
00:11:01,200 --> 00:11:05,200
को पढ़ के कोई हिंदू भी क्रिश्चियन बन सकता है। तो फिर आप ये डिसाइड कैसे

160
00:11:05,200 --> 00:11:09,280
कर रहे हैं कि वो फ्री मिशनंस के लिए ही काम करने वाला है। क्योंकि उसके दोनों पक्ष दिख

161
00:11:09,280 --> 00:11:13,520
रहे हैं ना। दिख तो ये भी रहा है कि वो शंकराचार्य जी के लिए शंकराचार्य

162
00:11:13,520 --> 00:11:17,760
जी की से दीक्षित है। दिख तो ये भी रहा है कि वो जो मनुवाद के सिद्धांत

163
00:11:17,760 --> 00:11:22,000
है उनका प्रचार प्रसार कर रहा है। जबकि फ्री मेशंस के लिए वो सनातन विरोधी

164
00:11:22,000 --> 00:11:26,080
कंटेंट नहीं दिख रहा है। आज की तारीख वर्तमान में तो हम ये क्यों माने

165
00:11:26,080 --> 00:11:30,160
कि वो फ्री मेशंस का एजेंट है जो यहां आया। हम ये क्यों ना माने वो शंकराचार्य का एजेंट

166
00:11:30,160 --> 00:11:34,240
है जो फ्री में मिशनंस गया है। ये सोचने वाली बात है। अब जो दूसरी

167
00:11:34,240 --> 00:11:36,600
एक बात

168
00:11:36,600 --> 00:11:38,480
है वृंदावन में

169
00:11:38,480 --> 00:11:42,640
बहुत सी प्रॉपर्टी स्कॉन की है। बहुत सी प्रॉपर्टी मतलब ऐसे

170
00:11:42,640 --> 00:11:46,640
लोगों की है जिनका कनेक्शन कहीं ना कहीं से प्रीमेशन से निकल ही आएगा।

171
00:11:46,640 --> 00:11:50,640
तो ऐसे में क्या होगा कि राघवाचार्य जितने लोग

172
00:11:50,640 --> 00:11:54,880
भी वहां पर हैं वृंदावन में राघवाचार्य प्रेमंद जी महाराज

173
00:11:54,880 --> 00:11:58,880
या अनिरुद्धचार्य या वहां पर गड या वैष्णव संप्रदाय

174
00:11:58,880 --> 00:12:02,960
इवन वहां पर शंकराचार्य जी का मठ है इन सबके कनेक्शन फ्री मिशनंस

175
00:12:02,960 --> 00:12:07,040
से निकल आएंगे तो क्या आप इन सबको फ्री

176
00:12:07,040 --> 00:12:11,280
मिशनंस का घोषित करेंगे अरे मैंने एक

177
00:12:11,280 --> 00:12:16,800
वीडियो देखा था जिसमें आप सहारा न्यूज़ वाले

178
00:12:16,800 --> 00:12:20,880
आपका इंटरव्यू ले रहे थे। आपके बचपन का है तो वह सहारा का भी

179
00:12:20,880 --> 00:12:24,960
कनेक्शन किसी ना किसी सनातन विरोधी तंत्र से निकल आएगा। मैं आज की तारीख में कह रहा हूं ना मेरा

180
00:12:24,960 --> 00:12:29,760
कनेक्शन निकल आएगा तो मैं भी फ्री मिशनंस का हो गया। तो

181
00:12:29,760 --> 00:12:33,920
अगर इस तरह से हम सभी लोग कहीं ना कहीं गलत और सनातन

182
00:12:33,920 --> 00:12:37,920
विरोधी तंत्रों से जुड़े हुए हैं तो फिर

183
00:12:37,920 --> 00:12:42,000
यह कैसे डिसाइड होगा कि कौन से जुड़े हुए व्यक्ति को वाकई में माना जाए कि वो उसके

184
00:12:42,000 --> 00:12:46,000
लिए कार्यरत है और कौन से जुड़े हुए व्यक्ति को वाकई में ना माना जाए कि उसके लिए

185
00:12:46,000 --> 00:12:50,320
कार्यरत है। तो इसके बारे में कोई आपने सनातन सिद्धांत नहीं दिया। कोई ऐसा

186
00:12:50,320 --> 00:12:53,520
ठोस सिद्धांत आपने नहीं दिया कि भाई इसको मान लो।

187
00:12:53,520 --> 00:12:57,840
आपने वहां पर यही कहा कि बड़ा पद है। एक बार में क्या हुआ था?

188
00:12:57,840 --> 00:13:02,120
मैं अपना एक्स अनुभव बता रहा हूं। मैं बैठा हुआ था मुफ्ती के

189
00:13:02,120 --> 00:13:06,400
सामने और वहां पर मुफ्ती को मैंने एक बात पूछी कि भाई ईश्वर

190
00:13:06,400 --> 00:13:10,720
सर्वशक्तिमान है और तुम्हारा ईश्वर बाधित है। हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान

191
00:13:10,720 --> 00:13:14,960
है। ठीक है? उसने कहा कैसे कि तुम्हारा ईश्वर अवतार नहीं ले सकता।

192
00:13:14,960 --> 00:13:19,560
ही कांट डू इट। और हमारा ईश्वर अवतार ले सकता है। तो उसने

193
00:13:19,560 --> 00:13:23,680
कहा कि आर्य समाज तो ये नहीं मानता। तो मैंने कहा भाई

194
00:13:23,680 --> 00:13:27,840
तुम्हारे कुरान के विषय में कौन था? सैटेनिक वर्सेस

195
00:13:27,840 --> 00:13:32,080
करके किसी ने कोई किताब लिखी थी जिसको 30 साल बाद मार

196
00:13:32,080 --> 00:13:36,240
दिया गया। तो सैनिक वर्सेस वाले को लिखने वाले का मैंने नाम दिया नाम लिया

197
00:13:36,240 --> 00:13:40,480
कि भाई तुम्हारे यहां भी तो कुछ लोग ऐसे हैं जो वो नहीं मानते जो तुम नहीं मानते जो

198
00:13:40,480 --> 00:13:44,560
तुम मानते हो। तुम्हारे यहां भी कुछ लोग ऐसे हैं जो तुम मानते हो वो नहीं मानते। तो तुमको

199
00:13:44,560 --> 00:13:49,040
मानूं कि उसको मानूं। तो वो अपने आप ही हंसने लगा। वो कहने लगा अरे आप

200
00:13:49,040 --> 00:13:53,120
अब आप जो है सैटेनिक वर्सेस को लिखने वाले जैसे तुच्छ व्यक्ति की

201
00:13:53,120 --> 00:13:57,120
तुलना जो है वो आर्य समाज जैसे आपके यहां का इतना बड़ा तबका है उससे

202
00:13:57,120 --> 00:14:01,600
करोगे दयानंद जी से करोगे दयानंद जी का सम्मान दिखाने लगे तो ये सिद्धांत

203
00:14:01,600 --> 00:14:06,320
कहां से आया कि जो मुफ्ती साहब तय कर रहे हैं वो व्यक्ति तो वैलुएबल है

204
00:14:06,320 --> 00:14:08,960
और जो मैं बता रहा हूं वो चीजें

205
00:14:08,960 --> 00:14:12,960
वो जो पद है वो जो व्यक्ति है वो वैलुएबल नहीं है तो

206
00:14:12,960 --> 00:14:16,960
ये सिद्धांत कहां से आया कि जिस पद को निग्रचार जी वैलुएबल बता बता

207
00:14:16,960 --> 00:14:21,120
रहे हैंेंस दे रहे हैं वो तोेंस है वो तो वैलुएबल है मगर

208
00:14:21,120 --> 00:14:25,680
जिसको मैं बता रहा हूं वो वैलुएबल नहीं है ये सिद्धांत कहां से आया

209
00:14:25,680 --> 00:14:29,560
मुझे उसको बताएं कृपा

210
00:14:29,560 --> 00:14:33,840
करके राजेंद्र दास जी महाराज ये सब

211
00:14:33,840 --> 00:14:37,840
लोग आपको कहीं ना कहीं आपने बोला भी

212
00:14:37,840 --> 00:14:42,080
है खैर इनके अलग-अलग परिपेक्ष में सबके लिए बोला है और ये सभी

213
00:14:42,080 --> 00:14:46,160
लोग आपको जो है फ्री मिशनंस से कनेक्टेड

214
00:14:46,160 --> 00:14:50,560
मिल जाएंगे। जाएंगे तो उस हिसाब से दुनिया में कोई भी फ्री मिशनंस से

215
00:14:50,560 --> 00:14:54,560
डिस्कनेक्टेड मिलेगा ही नहीं। तो उस हिसाब से फिर देखा जाए तो एक

216
00:14:54,560 --> 00:14:58,720
तरीके से वो अधर्म हो चुका है और धर्म का नाश हो चुका है क्योंकि

217
00:14:58,720 --> 00:15:02,880
आप और मैं भी फ्री मिशन से जुड़ चुके हैं। YouTube का इस्तेमाल कर रहे हैं और YouTube

218
00:15:02,880 --> 00:15:06,960
को खगोलेंगे तो बहुत सारे सनातन विरोधी तंत्रों के साथ इसका मिल जाएगा।

219
00:15:06,960 --> 00:15:10,960
ठीक है? YouTube के पार्टनर है हम लोग। वो पार्टनर नहीं थी जिस संस्था

220
00:15:10,960 --> 00:15:15,840
में वो काम कर रही थी। पार्टनर नहीं थी। ठीक है? हम पार्टनर हैं।

221
00:15:15,840 --> 00:15:21,160
तो ये एक बात है कि

222
00:15:21,160 --> 00:15:25,280
अ कि प्रीिशन से किसी को जुड़ा हुआ माना

223
00:15:25,280 --> 00:15:29,760
जाए तो किस आधार पर माना जाए?

224
00:15:29,760 --> 00:15:33,640
इसके

225
00:15:33,640 --> 00:15:38,080
बाद पूरी दुनिया में मलेच्छराज एक तरीके से अगर देखा जाए तो

226
00:15:38,080 --> 00:15:42,320
हो चुका है। अब इसके बाद एक दूसरा

227
00:15:42,320 --> 00:15:46,960
विषय आया था। वो ₹55,000

228
00:15:46,960 --> 00:15:52,960
वाला तो मेरे पास अभी पीडीएफ नहीं है। मैं आपको

229
00:15:53,240 --> 00:15:59,240
दिखाता वो पीडीएफ थोड़ा सा दिखा दीजिए।

230
00:16:04,000 --> 00:16:08,320
जितने भी आधुनिक पढ़ाई करने वाले लोग हैं जो बड़े-बड़े कॉलेजेस

231
00:16:08,320 --> 00:16:12,400
में पढ़ रहे हैं, प्राइवेट कॉलेज है, आईआईटी कर रहे हैं, ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। वो सब फ्री मेंशन

232
00:16:12,400 --> 00:16:16,640
से जुड़े हुए हैं। ठीक है? तो आपको यह सिद्धांत बताना

233
00:16:16,640 --> 00:16:20,640
चाहिए समाज को कि किसके द्वारा माना जाएगा कि

234
00:16:20,640 --> 00:16:24,640
यह पद पर कार्य करने वाला वाकई में फ्री मेंशन का है। और दूसरा पक्ष भी मैंने दे दिया

235
00:16:24,640 --> 00:16:28,640
कि जो व्यक्ति फ्री मेशंस में आपको दिखाई दे रहा है वो व्यक्ति

236
00:16:28,640 --> 00:16:32,720
शंकर के मठ में भी आपको दिखाई दे रहा है तो उसको फ्री मेशंस का एजेंट शंकर के मठ

237
00:16:32,720 --> 00:16:36,720
में क्यों माना जाए। शंकर का एजेंट फ्री मेशंस के मठ में क्यों ना माना जाए।

238
00:16:36,720 --> 00:16:40,800
इस बारे में शास्त्रों सिद्धांत या कोई ऐसा सिद्धांत, कोई ऐसा तर्क, कोई

239
00:16:40,800 --> 00:16:45,200
ऐसी बात जो हम भी मान सके सिवाय इसके कि वो आपने बोला है।

240
00:16:45,200 --> 00:16:50,200
ठीक है? पहली बात। अब इनको जरा पीडीएफ दिखाइए

241
00:16:50,200 --> 00:16:54,320
वो 55,000 में जो बेचा गया है। यह वो

242
00:16:54,320 --> 00:16:58,640
पीडीएफ है जो इन्होंने शेयर की थी अपने Facebook

243
00:16:58,640 --> 00:17:02,720
आईडी पर प्रचार प्रसार किया गया था और इस पीडीएफ की प्रमाणिकता

244
00:17:02,720 --> 00:17:07,400
आपको मिल जाएगी। जब आप विजय सुई की आईडी पर जाएंगे

245
00:17:07,400 --> 00:17:11,440
और आईडी पर जाने के बाद मतलब आप पीछे स्क्रॉल करेंगे तो

246
00:17:11,440 --> 00:17:15,920
शायद इसकी कुछ पोस्ट वोस्ट आपको मिल जाएंगी। उन्हीं तारीखों में यही सब मटेरियल

247
00:17:15,920 --> 00:17:19,160
वहां पर

248
00:17:19,160 --> 00:17:23,280
अ आपका जो मटेरियल है ये मटेरियल आपको

249
00:17:23,280 --> 00:17:26,960
वहां पर मिल जाएगा।

250
00:17:26,960 --> 00:17:31,080
तो अब इसमें देखिए सबसे पहले तो यह फ्रंट पेज है उसका

251
00:17:31,080 --> 00:17:35,200
जो प्रचार किया जा रहा है। पहली बात तो यह है कि ₹55,000 जो

252
00:17:35,200 --> 00:17:39,200
लिए जा रहे हैं आप पहले चेक करें कि ये किसके द्वारा लगाया गया

253
00:17:39,200 --> 00:17:44,080
कैंप है। इसमें नीचे डिटेल्स हैं। यह देखिए डिटेल्स

254
00:17:44,080 --> 00:17:48,240
है ना? एक मिनट ऊपर जाइए। ऊपर जाइए। ऊपर जाइए। कंपनी वगैरह का नाम वगैरह दिया है क्या?

255
00:17:48,240 --> 00:17:52,240
बड़ा करिए। यह बड़ा करिए। ऑरेंज

256
00:17:52,240 --> 00:17:58,240
वाली पट्टी है जो

257
00:17:59,040 --> 00:18:03,520
इसमें देखिए कहां पर लिखा है

258
00:18:03,520 --> 00:18:07,600
शंकराचार्य को कहां शंकराचार्य का आलंबन लेकर के स्वयं को

259
00:18:07,600 --> 00:18:11,600
कहां प्रमोट किया गया है बताइए

260
00:18:11,600 --> 00:18:15,600
यही तो है जिसको देख के लोगों ने इनका वो पैकेज खरीदा होगा इस कंपनी का जिससे

261
00:18:15,600 --> 00:18:19,760
इनका जिसके साथ ये एसोसिएटेड हैं और इस और हां एक बात और इस

262
00:18:19,760 --> 00:18:24,080
कंपनी का भी आप रिकॉर्ड वगैरह कुछ चेक करिएगा शायद किसी ना किसी सनातन विरो विरोधी

263
00:18:24,080 --> 00:18:28,600
तंत्र से निकल आएगा उनका कनेक्शन। ठीक

264
00:18:28,600 --> 00:18:32,640
है? तो फिर इस हिसाब यहां से भी वह फ्री मिशनंस की सिद्ध हो

265
00:18:32,640 --> 00:18:36,960
जाएंगी। तो आपको यह सब देखना चाहिए और इसमें

266
00:18:36,960 --> 00:18:40,960
मुझे बताएं इस पूरी पीडीएफ में जिसका प्रचार किया गया है उन वो जो कैंप

267
00:18:40,960 --> 00:18:44,960
लगे थे उनको बता बनाने के लिए। यह मैं इसका लिंक नीचे डाल दूंगा और

268
00:18:44,960 --> 00:18:49,040
जिसको इनकी आईडी पर जाकर के देखना हो वह भी देख सकते हैं। भाई इन्होंने

269
00:18:49,040 --> 00:18:53,120
तो यह किया कि यह जिस माध्यम से आजीव को पार्जन करती हैं उसमें

270
00:18:53,120 --> 00:18:57,120
भी अपने मनुवादी गुरु की गुरु का प्रचार

271
00:18:57,120 --> 00:19:01,440
करती रही। जिसका वो है कि उन

272
00:19:01,440 --> 00:19:05,600
उन चार लोगों में से आने वाले एक व्यक्ति ने गुरुदेव से दीक्षा

273
00:19:05,600 --> 00:19:09,920
ली। तो यह हमारे लिए एक अचीवमेंट है। शायद आपके लिए ना हो। हमारे लिए एक अचीवमेंट

274
00:19:09,920 --> 00:19:14,080
है। अच्छा इसमें एक चीज और है कि आपको जो

275
00:19:14,080 --> 00:19:18,160
इसमें 55000 55000 वाला जो वक्तव्य आप प्रस्तुत कर रहे हैं तो आपको

276
00:19:18,160 --> 00:19:22,400
इसमें वक्तव्य प्रस्तुत करना चाहिए था किसी व्यक्ति को पकड़ते उन

277
00:19:22,400 --> 00:19:26,640
चारों में से उसको गवाह के रूप में बुलाते उससे बुलवाते पहली बात तो

278
00:19:26,640 --> 00:19:30,720
कि भैया तुझको क्या-क्या बताया गया था और उससे साक्ष्य पूछते

279
00:19:30,720 --> 00:19:36,480
तुझको कौन-कौन सी चीजें दी गई थी तो ऐसा कुछ नहीं हुआ

280
00:19:36,480 --> 00:19:41,320
ठीक है तो यह सारी चीजें मिल

281
00:19:41,320 --> 00:19:45,680
गई। यह हो गया आपका वो जो आपने 55,000

282
00:19:45,680 --> 00:19:49,680
वाली बात कही ये है। तो मैं वही कह रहा हूं पूरी

283
00:19:49,680 --> 00:19:53,920
तैयारी के साथ अपनी बात को रखें। पूरी रिसर्च करके आए

284
00:19:53,920 --> 00:19:58,720
अच्छे से कि मतलब अकाट चीजें बोले। ऐसी ऐसी चीजें ना बोले

285
00:19:58,720 --> 00:20:02,880
जो कि आराम से वो उनका जो है प्रतिकार हो सके। ऐसी चीजें

286
00:20:02,880 --> 00:20:06,880
ना बोले। उसको बोलने से बचें। हालांकि हम आपका नाम लेकर के इस

287
00:20:06,880 --> 00:20:11,400
तरह से आपके सामने नहीं क्या कहते हैं आना चाहते थे।

288
00:20:11,400 --> 00:20:15,520
मगर आपने विवश किया ऐसा करने के लिए तो

289
00:20:15,520 --> 00:20:19,840
हम कभी नहीं देखते थे इस रूप में आपके साथ। उसका कारण है

290
00:20:19,840 --> 00:20:24,360
और वो शायद आप भी समझ रहे होंगे। उसका कारण यही है

291
00:20:24,360 --> 00:20:28,640
कि हम और आप कहीं ना कहीं परंपरा

292
00:20:28,640 --> 00:20:29,200
विरोधियों

293
00:20:29,200 --> 00:20:33,280
का जो परंपरा प्राप्त आचार्य गण हैं उनके

294
00:20:33,280 --> 00:20:37,760
साथ हैं और परंपरा के विरोधियों के विरुद्ध हैं।

295
00:20:37,760 --> 00:20:41,760
तो हम नहीं चाहते थे कि उनको ऐसा मसाला मिले कि भाई मैं कुछ

296
00:20:41,760 --> 00:20:46,080
कह रहा हूं फिर आप कुछ कह रहे हैं। फिर आप कुछ कह रहे हैं तो वह इस तरीके का

297
00:20:46,080 --> 00:20:50,240
मगर ठीक है। अब जब हो ही गया है तो फिर वही वाली बात है कि कहां

298
00:20:50,240 --> 00:20:52,720
तक

299
00:20:52,720 --> 00:20:58,720
वो चीज है उसको संभाला जाएगा। है

300
00:20:59,160 --> 00:21:03,760
ना? अब दूसरी बात आ जाती है योग की। तीसरी बात

301
00:21:03,760 --> 00:21:08,400
योगाचार्य के लिए आपने वीडियो दिखाया। पहली बात तो यह है जब आपने

302
00:21:08,400 --> 00:21:12,480
योगाचार्य के संबंध में वीडियो देखा है तो इसका

303
00:21:12,480 --> 00:21:16,640
मतलब आपके अनुसार गुरुदेव जानते हैं और गुरुदेव

304
00:21:16,640 --> 00:21:20,640
उन्हीं की बात कर रहे हैं योग के बारे में बताते हुए और यह वीडियो जाहिर सी बात है पुराना

305
00:21:20,640 --> 00:21:24,720
है और इसके बाद आपने ही अपने वीडियो में कहा वो गलती से कहा

306
00:21:24,720 --> 00:21:28,720
वो बात बाद की है गलती से कहा कि सही से कहा आपने ही अपने वीडियो

307
00:21:28,720 --> 00:21:32,880
में कहा कि वो महिला गुरुदेव के साथ मंच साझा कर रही है यानी

308
00:21:32,880 --> 00:21:36,960
कि आप एक तरफ ये जानते हैं आप एक तरफ ये कह कह रहे हैं कि गुरुदेव उनका खंडन करते

309
00:21:36,960 --> 00:21:40,960
हैं। वो गलत है। उनको योग नहीं सिखाना चाहिए। उनको व्यायाम

310
00:21:40,960 --> 00:21:44,240
योग वाला जो व्यायाम है वो नहीं बताना चाहिए। मगर दूसरी तरफ

311
00:21:44,240 --> 00:21:48,960
आप ये कह रहे हैं कि वो गुरुदेव के साथ मंच साझा कर रही है। गुरुदेव होने दे रहे हैं। पहली बात।

312
00:21:48,960 --> 00:21:53,200
दूसरी बात यह है कि आपने अगर गुरुदेव का वक्तव्य

313
00:21:53,200 --> 00:21:57,280
ध्यान से सुना हो तो उसमें उन्होंने कहा कि

314
00:21:57,280 --> 00:22:01,360
वह पूरी में आती हैं। आती हैं।

315
00:22:01,360 --> 00:22:05,760
तो यह क्या हो गया? प्रेजेंट इनडेफिनेट। कोई

316
00:22:05,760 --> 00:22:10,400
जो कार्य हो रहा होता है बार-बार होता है उसको कहा जाता है कि आती हैं।

317
00:22:10,400 --> 00:22:14,480
ठीक है? जबकि विजय श्री जी जो अभी

318
00:22:14,480 --> 00:22:18,640
चातुर्मास लगा था उस चातुर्मास में पहली बार वो अभी

319
00:22:18,640 --> 00:22:22,800
तक वहां गई है। तो अगर वो जो वक्तव्य है गुरुदेव का

320
00:22:22,800 --> 00:22:26,800
वो विजय श्री जी के लिए ही है। तो गुरुदेव कहेंगे कि

321
00:22:26,800 --> 00:22:31,040
पूरी में एक आई थी। गुरुदेव ये नहीं कहेंगे आती हैं। जब जब

322
00:22:31,040 --> 00:22:35,360
आप ऐसे बाल की खाल निकाल रहे हो तो ऐसी बाल की खाल निकाली जाती है। फिर

323
00:22:35,360 --> 00:22:39,360
ठीक है तो तो क्या हुआ? गुरुदेव ने क्या बोला? आती हैं।

324
00:22:39,360 --> 00:22:43,440
गुरुदेव ये नहीं कहा कि वो आई थी। इस बार के चातुर्मास में आई थी। तो

325
00:22:43,440 --> 00:22:47,520
यह वक्तव्य उनका सिद्ध नहीं हुआ। दूसरी बात आपने भी अपने वीडियो में माना कि

326
00:22:47,520 --> 00:22:51,840
उनका उन्होंने नाम नहीं लिया है। यदि मैंने आपको ऐसे नाम बता दिए

327
00:22:51,840 --> 00:22:55,920
कि गुरुदेव के शिविर में कई ऐसी अन्य वह आई हैं

328
00:22:55,920 --> 00:22:59,440
महिलाएं जिन्होंने जो योग भी सिखाती है,

329
00:22:59,440 --> 00:23:03,440
योगा योग अभ्यास भी कराती हैं। ठीक है? और वह आई हैं।

330
00:23:03,440 --> 00:23:08,480
तो गुरुदेव उनके बारे में यह वक्तव्य क्यों नहीं हो सकता? दूसरी बात गुरुदेव ने बोला आचार्य।

331
00:23:08,480 --> 00:23:12,640
योग आचार्य। आप मुझे उनकी आईडी खोल के बताइए कि उन्होंने कहां स्वयं

332
00:23:12,640 --> 00:23:16,960
को योग आचार्य लिखा।

333
00:23:16,960 --> 00:23:21,120
ठीक है? तो ये त्रुटि है थोड़ी सी। जब

334
00:23:21,120 --> 00:23:25,520
बात करते हैं ना कि बिल्कुल कांटे की बात तो बिल्कुल कांटे की बात ही करनी चाहिए।

335
00:23:25,520 --> 00:23:29,760
बचना चाहिए ऐसे वक्तव्य निर्गत करने से जिन जो वक्तव्य काटे

336
00:23:29,760 --> 00:23:33,960
जा सकते हैं। अकाट्य बातें नहीं है। यह तो यह बात हो गई।

337
00:23:33,960 --> 00:23:38,240
एक अब इसके बाद क्या है कि एक पक्ष और

338
00:23:38,240 --> 00:23:43,080
है इसमें एक पक्ष और लिया जा सकता है पूर्व पक्ष के रूप में

339
00:23:43,080 --> 00:23:47,120
कि क्या कहते हैं वो

340
00:23:47,120 --> 00:23:51,520
गुरुदेव जो है दुलार में। ठीक है? गुरुदेव

341
00:23:51,520 --> 00:23:55,600
कई बार जिनसे वह स्नेह रखते हैं जिनके प्रति उनके

342
00:23:55,600 --> 00:23:59,760
मन में थोड़ा सा करुणा का अलग सा भाव होता है तो उनके

343
00:23:59,760 --> 00:24:03,760
उनकी भी कई बार वो दुलार में टांग खींचते हैं जो

344
00:24:03,760 --> 00:24:07,920
एक विनोद होता है वो करते हैं वात्सल्य भाव से तो

345
00:24:07,920 --> 00:24:12,080
वो वात्सल्य भाव वाला वक्तव्य भी होता है जबकि यह

346
00:24:12,080 --> 00:24:14,640
जो योगाचार्य वाली बात है इस पर

347
00:24:14,640 --> 00:24:18,720
हमने आपने शायद वो वीडियो हमारा देखा नहीं इसी वजह से आपसे चीजें हो रही है हम फिर

348
00:24:18,720 --> 00:24:22,720
से वो कहेंगे बेनिफिट ऑफ डाउट देंगे। आपने वीडियो

349
00:24:22,720 --> 00:24:26,800
पूरा नहीं देखा जाहिर सी बात है वो तीन घंटे का है। आपने कहा भी है तो

350
00:24:26,800 --> 00:24:31,120
आप उसको देखें। यह योगाचार वाली बात हम बता चुके हैं कि गुरुदेव ने ऐसे

351
00:24:31,120 --> 00:24:35,120
ऐसे योगाचार तो गुरुदेव ने उनके लिए नहीं कहा। इसके कई कारण हो सकते

352
00:24:35,120 --> 00:24:39,280
हैं। पहली बात उनका खंडन नहीं था कि वो विनोद हो सकता है उनके लिए। दूसरी बात कि

353
00:24:39,280 --> 00:24:43,280
वहां आने वाली कई अन्य महिलाएं हैं। कई अन्य मात्र शक्तियां हैं। तो वो

354
00:24:43,280 --> 00:24:47,440
उनके लिए हो सकता है क्योंकि उसमें नाम नहीं है। तीसरी बात जब बाल की खाल निकालने बैठे

355
00:24:47,440 --> 00:24:51,600
हो तो फिर निकालो। गुरुदेव ने कहा आती है। गुरुदेव

356
00:24:51,600 --> 00:24:55,680
गुरुदेव ने यह नहीं कहा इस बार के चातुर्मास में आई थी। गुरुदेव ने कहा

357
00:24:55,680 --> 00:24:59,680
आती हैं। तो इसका मतलब वो कई वो ऐसे किसी के बारे में

358
00:24:59,680 --> 00:25:03,680
बात कर रहे हैं जो कई बार आती हैं। आ चुकी है। कई बार आती रहती है।

359
00:25:03,680 --> 00:25:07,760
जबकि विजय श्री पहली बार पूरी गई है। उससे पहले वो कभी नहीं

360
00:25:07,760 --> 00:25:11,840
गई। तो यह भी कट हो रहा है। अब इसके बाद 100 की

361
00:25:11,840 --> 00:25:15,840
सीधी एक बात है कि अगर इस संबंध में कोई प्रमाण

362
00:25:15,840 --> 00:25:19,840
हो सकता है कि गुरुदेव ने उनका खंडन किया है कि नहीं क्योंकि अब

363
00:25:19,840 --> 00:25:23,920
इसका वीडियो हो सकता है निकल आए क्योंकि वीडियो बनता है जो भी क्योंकि सभा में पूछा गया

364
00:25:23,920 --> 00:25:28,080
प्रश्न है तो हम देख रहे हैं कि वो वीडियो अगर मिल जाए बहुत सारे वीडियो होते हैं। गुरुदेव

365
00:25:28,080 --> 00:25:29,680
की डेली जितनी भी वह होती है

366
00:25:29,680 --> 00:25:33,760
सभाएं उन सबका रिकॉर्डिंग होती है। तो हो सकता है कि वह

367
00:25:33,760 --> 00:25:39,280
वीडियो निकल आए जिसमें कि विजय जी ने गुरुदेव से वह प्रश्न किया था। ठीक है?

368
00:25:39,280 --> 00:25:44,040
निकल आएगा तो हम लोग प्रयास कर रहे हैं उसको दिखा देंगे।

369
00:25:44,040 --> 00:25:48,680
मगर मगर बात ये है

370
00:25:48,680 --> 00:25:52,880
कि ये जो वीडियो है इसमें उन्होंने गुरुदेव ने

371
00:25:52,880 --> 00:25:57,440
विजय श्री का नाम नहीं लिया तो ये अकाट्य

372
00:25:57,440 --> 00:26:01,440
तथ्य नहीं है। आप ही तो सोचो जब हमारे आचार्य गण कोई

373
00:26:01,440 --> 00:26:05,440
बात करने बैठते हैं तो ऐसे बैठते हैं कि हमको क्या लगता है। ऐसे

374
00:26:05,440 --> 00:26:09,600
करते हैं। सोचिए ना उसमें कितनी तरीके से मार मारते हैं उसको सिद्धांत

375
00:26:09,600 --> 00:26:14,800
को प्रतिपादित करने से पहले। आप तो इतने शास्त्रज्ञ हैं।

376
00:26:14,800 --> 00:26:18,960
कितनी तरीके से शंकराचार्य जी जब अपनी गीता भाष्य लिखते हैं, ब्रह्म सूत्र

377
00:26:18,960 --> 00:26:23,040
पर भाष्य लिखते हैं तो वो कितने तरीके से पूर्व पक्ष ले ले ले

378
00:26:23,040 --> 00:26:27,120
लेके जो जो आर्य समाज सोच नहीं सकता वो सारे पूर्व पक्ष ले ले के बात की

379
00:26:27,120 --> 00:26:31,360
जाती है। कोई सोच विरोधी सोच नहीं सकता। ऐसी ऐसी चीजें तो क्या

380
00:26:31,360 --> 00:26:35,360
ऐसे बात करते हैं जब मतलब हमें क्या लगता है? हमने अगर डिसाइड कर लिया कि

381
00:26:35,360 --> 00:26:39,600
उसका पद ये होना चाहिए। वो कार्य करने वाला माना जाएगा। तो ऐसे नहीं चलता है।

382
00:26:39,600 --> 00:26:43,760
बचाएं अपने आप को इस चीज से। अब तीसरी

383
00:26:43,760 --> 00:26:45,240
बात आती

384
00:26:45,240 --> 00:26:50,120
है प्रमाण की। प्रमाण की बात आती

385
00:26:50,120 --> 00:26:54,480
है। सबसे जो इस वीडियो का इंटरेस्टिंग

386
00:26:54,480 --> 00:26:58,480
और मेरे ख्याल से सभी को जिस पर बात करनी

387
00:26:58,480 --> 00:27:03,120
होती है वो बात करनी होगी। जिसका इंतजार होगा वह सब यही है।

388
00:27:03,120 --> 00:27:07,760
इसी प्रमाण वाले सेक्शन का इंतजार है। ठीक है?

389
00:27:07,760 --> 00:27:12,240
तो पहली बात तो यह है कि हमारी बात शुरू होती है

390
00:27:12,240 --> 00:27:16,280
जो कल की लाइव का भी हमारा जो मुख्य बिंदु था वो

391
00:27:16,280 --> 00:27:20,560
था विजय श्री को लेकर और कहीं भी हमने आपको नहीं ललकारा

392
00:27:20,560 --> 00:27:24,800
था कि आप हमें प्रमाण लाके दो हम उन वो

393
00:27:24,800 --> 00:27:29,600
जो वो है ना क्या कहते हैं क्या कहेंगे उनको गुरुद्रोही

394
00:27:29,600 --> 00:27:33,600
हम उनको ललकार रहे थे कि आप हमें प्रमाण लाके दो मगर आपने अपने ऊपर ले लिया और आपने

395
00:27:33,600 --> 00:27:37,920
उन्हीं से प्राप्त होने वाली चीजों को ये कर दिया मगर कोई बात नहीं

396
00:27:37,920 --> 00:27:42,200
एक ना एक दिन होना ही था तो आपने कर दिया कोई दिक्कत नहीं है तो पहली बात

397
00:27:42,200 --> 00:27:46,800
है कि यह वीडियो जो आपने अपने उसमें दिखाए हैं

398
00:27:46,800 --> 00:27:50,960
ये कब के हैं आज

399
00:27:50,960 --> 00:27:54,960
2025 के हैं 2024 के हैं कब के हैं आप

400
00:27:54,960 --> 00:27:59,280
जानते हैं कि वो वीडियो तीन से चार साल पुराने हैं।

401
00:27:59,280 --> 00:28:00,400
है ना? लगभग

402
00:28:00,400 --> 00:28:04,480
3 साल तो होंगे। मेरे ख्याल से 22 के अगर लास्ट में करेंगे तो 3 साल तो हो ही गए।

403
00:28:04,480 --> 00:28:08,560
23 हो गया, 24 हो गया और 25 नहीं 2 साल पुराने। ठीक है? 2 साल

404
00:28:08,560 --> 00:28:12,800
से ऊपर पुराने वीडियोस हैं। तो पहली बात है क्या आपको ये लगता है कि ये वीडियोस

405
00:28:12,800 --> 00:28:16,800
हमने नहीं देखे होंगे? आपको क्यों

406
00:28:16,800 --> 00:28:20,720
लगता है कि ये वीडियोस हमने नहीं देखे होंगे।

407
00:28:20,720 --> 00:28:24,960
ठीक है? आपको ऐसा नहीं लगना चाहिए कि ये वीडियोस हमने नहीं देखे होंगे। तो

408
00:28:24,960 --> 00:28:29,680
पहली बात तो है कि जैसे विजय श्री व्यापार कर रही है।

409
00:28:29,680 --> 00:28:33,760
इस संबंध में आपने क्या प्रमाण दिया? आपने वक्तव्य दिया। मगर आपने प्रमाण क्या

410
00:28:33,760 --> 00:28:38,080
दिया? कोई प्रमाण नहीं दिया। विजय श्री फ्री मिशनंस के लिए कार्य

411
00:28:38,080 --> 00:28:42,160
कर रही है। कार्य कर रही है। क्योंकि जुड़े हुए हम सभी हैं। ठीक है?

412
00:28:42,160 --> 00:28:46,400
आपके आपके अनुसार तो कार्य कर रही है। इस संबंध में आपने प्रमाण दिया।

413
00:28:46,400 --> 00:28:50,400
कोई प्रमाण नहीं दिया। अच्छा और भी चीजें हैं वह

414
00:28:50,400 --> 00:28:54,400
जो पीडीएफ आपने पढ़ी थी उसमें वैश्य इत्यादि का नाम भी आया था तो इस

415
00:28:54,400 --> 00:28:58,480
संबंध में उन्होंने आपको प्रमाण दिया कि नहीं दिया आपने प्रमाण नहीं

416
00:28:58,480 --> 00:29:02,960
दिया तो ये सब चीजें एक कोने हो गई ठीक

417
00:29:02,960 --> 00:29:06,960
अब क्या बचा तीन साल पहले के जो वीडियोस है जो पहले ही मठ

418
00:29:06,960 --> 00:29:10,960
में सभी लोग देख चुके हैं ये वही है इस पर भी जांच का विषय

419
00:29:10,960 --> 00:29:15,120
है कि उसमें वो कौन सी डेट पर क्या हो रहा है जो व्यक्ति कुलदीप शर्मा

420
00:29:15,120 --> 00:29:15,620
का नाम

421
00:29:15,520 --> 00:29:19,600
है वो जांच जांचने का विषय कि कुलदीप शर्मा जो कि

422
00:29:19,600 --> 00:29:23,600
ब्रह्मचारी जी को ऋषिकेश ब्रह्मचारी को जानने वाला होना चाहिए। वो यह कैसे कह

423
00:29:23,600 --> 00:29:27,680
रहा है कि आप कहां के हो? 2022 में

424
00:29:27,680 --> 00:29:31,760
जो कि बहुत बहुत समय से जुड़ा हुआ है। तो ये कुछ बातें हैं। वो जांच

425
00:29:31,760 --> 00:29:35,840
का विषय है। मगर पहली बात तो यह है कि आपने इन सभी बातों को छोड़ दिया। आपने

426
00:29:35,840 --> 00:29:39,920
इस बात को भी छोड़ दिया कि आपने अपने वीडियो में किस अधिकार से यह कहा

427
00:29:39,920 --> 00:29:44,320
कि मंच पर विजय श्री बैठी हुई है। अपने व्यापार को पोषित कर रही हैं।

428
00:29:44,320 --> 00:29:48,320
यह किस अधिकार से आपने कहा? जबकि आपने जो वीडियो संलग्न किया वो

429
00:29:48,320 --> 00:29:52,560
उनका नहीं था। बाद में आपने हमारे लिए कहा कि शंकराचार्य

430
00:29:52,560 --> 00:29:56,560
के चेले लीपापोती कर रहे हैं। लीपापोती आपने की है अपने डिस्क्रिप्शन

431
00:29:56,560 --> 00:30:00,720
में जाकर के कि जो आपसे गलती हो गई है उसको आपने वहां सुधारा

432
00:30:00,720 --> 00:30:05,040
और वहां पर भी आप पता नहीं वो क्या बात है कोई दबाव है कि अहंकार है वो कौन सी

433
00:30:05,040 --> 00:30:09,040
वजह है जो आप वहां पर अपनी गलती को स्वीकार नहीं कर पाए। वहां पर भी

434
00:30:09,040 --> 00:30:13,040
आपने अपने आप को फसाया ही है। आपने यह स्वीकार नहीं

435
00:30:13,040 --> 00:30:17,040
किया कि वो हम पहचान नहीं पाए थे। हमने उसको विजय श्री बोल दिया। बल्कि आप यह

436
00:30:17,040 --> 00:30:21,040
बोल रहे हो कि हमने वहां पर शास्त्री मर्यादा दिखाई है। जबकि आपके वीडियो में आप स्पष्ट बोल

437
00:30:21,040 --> 00:30:25,040
रहे हैं। आपने आज का वीडियो निर्गत करते समय अपने इस कमजोर पक्ष को

438
00:30:25,040 --> 00:30:29,040
छोड़ दिया। और ये जो कि बहुत महत्वपूर्ण पक्ष

439
00:30:29,040 --> 00:30:30,640
है। इन सभी पक्षों

440
00:30:30,640 --> 00:30:34,800
को आपने दरकिनार कर दिया। अब आप आए किस पे? जो

441
00:30:34,800 --> 00:30:39,880
तीन साल पहले से हमने देखा हुआ है। अब वो जो देखा हुआ है उसकी बात अगर

442
00:30:39,880 --> 00:30:44,000
करें। तो मैंने कहा कि भाई मैं अपनी जान हथेली पर रख

443
00:30:44,000 --> 00:30:48,000
कर गया। आपने जैसे साहस की बात की थी ना एक बार मैंने

444
00:30:48,000 --> 00:30:52,000
आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आप बोल रहे थे कि मैं तो

445
00:30:52,000 --> 00:30:56,080
शिष्य होने का कर्तव्य निभा रहा हूं। ठीक है? आप कहीं ना

446
00:30:56,080 --> 00:31:00,160
कहीं गुरु भाव रखते हैं पूरी के शंकराचार्य जी के प्रति। तो आपने उस वीडियो

447
00:31:00,160 --> 00:31:04,240
में कहा था कि मैं तो पूरी के मैं तो शिष्य होने का वो निभा रहा हूं। कर्तव्य मगर गुरु

448
00:31:04,240 --> 00:31:09,040
भी तो अपनी ओर से निभाए। तो आपने

449
00:31:09,040 --> 00:31:13,520
यानी कि एस ए शिष्य जब आप कल के वीडियो में परसों की वीडियो में

450
00:31:13,520 --> 00:31:17,600
यह लोगों को कह रहे हैं कि आप जाइए वहां पर हाथ पैर पकड़ लीजिए पांच मिनट

451
00:31:17,600 --> 00:31:21,840
के लिए। ऐसा साहस आपने क्यों नहीं दिखाया? अगर आपको

452
00:31:21,840 --> 00:31:26,080
गुरुदेव गुरु भाव है। आप कह रहे हैं आप कर्तव्य निभा रहे। जबकि आप जब दूसरे को कर्तव्य दिखा

453
00:31:26,080 --> 00:31:30,240
रहे हैं तो आप बता रहे हैं वहां जाइए दलबल के साथ और वहां पांचप मिनट के लिए सबका

454
00:31:30,240 --> 00:31:34,320
हाथ पैर पकड़ लीजिए। अपनी बात बोल डालिए। ये साहस आपने क्यों नहीं दिखाया?

455
00:31:34,320 --> 00:31:38,640
आप भी तो वही चीज कह रहे हैं ना कि मैं गुरुदेव से मिलना चाहता था पर मिलने नहीं दिया गया।

456
00:31:38,640 --> 00:31:43,560
मैं तो अपने शिष्य का कर्तव्य निभा रहा हूं। यह सब आप आपके डायलॉग्स हैं जो आपने बोले।

457
00:31:43,560 --> 00:31:45,680
तो ये गुरुदेव से मिलने

458
00:31:45,680 --> 00:31:49,760
वाली बात आपने नहीं दिखाई। तो ये कुछ वो

459
00:31:49,760 --> 00:31:53,840
है कमजोर पक्ष जिसको आप छोड़ देते हैं। इसको ना छोड़े।

460
00:31:53,840 --> 00:31:58,160
फिर एक-एक पॉइंट को लेकर के चले चल रहे हैं तो तभी आनंद आता है

461
00:31:58,160 --> 00:32:02,320
चीजों में। ठीक है? अब आप अब बात करते

462
00:32:02,320 --> 00:32:07,200
हैं आपके द्वारा निर्गत किए गए जो प्रसारित किए गए जो दो मुख्य वो हैं

463
00:32:07,200 --> 00:32:11,360
क्या कहते हैं तो पहले पहली बात तो यह है कि

464
00:32:11,360 --> 00:32:15,440
आपने तब से अब तक ये जो 2023 के वीडियोस है तब से अब तक आपके

465
00:32:15,440 --> 00:32:19,440
पास रखे थे आज की डेट में पहुंचे हैं क्या है इसकी स्थिति सोचने वाली बात

466
00:32:19,440 --> 00:32:23,440
है अगर आपको धर्म की चिंता है वास्तविकता में सनातन धर्म

467
00:32:23,440 --> 00:32:27,520
की चिंता है और आप मानते हैं कि इससे सनातन धर्म को हानि है तो आज से पहले आप क्या कर

468
00:32:27,520 --> 00:32:31,520
रहे थे अगर आप कहें कि हम बदनामी नहीं कराना चाहते थे।

469
00:32:31,520 --> 00:32:35,520
ठीक है? हम बदनामी नहीं कराना चाहते थे। तो आज तो आपने वही किया। अगर आपके

470
00:32:35,520 --> 00:32:39,600
हिसाब से इन वीडियोस के द्वारा बदनामी हो रही है। और अगर आप

471
00:32:39,600 --> 00:32:43,760
कहें कि हम विवश हो गए क्योंकि हमारा प्रतिकार किया गया तो इसका

472
00:32:43,760 --> 00:32:47,920
मतलब आपके लिए आपकी जो वर्चस्वता है या जो भी है वो ऊपर

473
00:32:47,920 --> 00:32:52,160
है और सनातन धर्म की रक्षा जो है पीछे है। क्योंकि बदनामी से आप

474
00:32:52,160 --> 00:32:56,320
तीन साल तक रुके रहे बताने से और आज बताया। ठीक है। तब बात

475
00:32:56,320 --> 00:33:00,600
कर लेते हैं कि उसमें दिखाया गया क्या गया गया क्या गया क्या गया क्या गया क्या गया है दिखाया गया है कि

476
00:33:00,600 --> 00:33:01,600
जो

477
00:33:01,600 --> 00:33:05,760
मठ के परिकर हैं उनके फोन में कुछ ऐसे

478
00:33:05,760 --> 00:33:10,160
लोगों की फोटो हैं जिन्हें हम सामान्य नहीं कह सकते। उनसे

479
00:33:10,160 --> 00:33:14,240
वो यह कह रहे हैं किसी व्यक्ति से वो ये कह रहे हैं अपनी चैट में कि मुझे

480
00:33:14,240 --> 00:33:19,200
तुमसे अकेले में मिलना है। यही तो है। यही उसका मन में और ज्यादा मैं देख नहीं पाया।

481
00:33:19,200 --> 00:33:23,760
वो तो आप कुछ और वो तो बताइएगा। अभी तो ये सिलसिला चल चलेगा।

482
00:33:23,760 --> 00:33:29,200
मुझे ऐसा लगता है। चाहता नहीं हूं। मुझे ऐसा लगता है। तो

483
00:33:29,200 --> 00:33:35,200
तो यह चीजें हैं। अब पहली बात यह आती है

484
00:33:35,240 --> 00:33:39,280
कि क्या किसी के फोन में ऐसे व्यक्ति की फोटो हो सकती है

485
00:33:39,280 --> 00:33:43,280
जिससे उसका संबंध ना हो बल्कि विरोध हो? क्या हम किसी

486
00:33:43,280 --> 00:33:47,600
व्यक्ति से ऐसा कह सकते हैं कि नहीं कि मुझे तुमसे अकेले में मिलना है।

487
00:33:47,600 --> 00:33:51,840
ठीक है? पहली बात। अभी ये सब जांच का विषय है कि वो जो वो है स्क्रीन

488
00:33:51,840 --> 00:33:55,840
रिकॉर्डिंग वगैरह वो सब उन्हीं के मोबाइल से है या एडिटिंग है या क्या है वो

489
00:33:55,840 --> 00:33:59,920
सब चीजें अलग है। सब जांच का विषय है। मगर अगर उनको

490
00:33:59,920 --> 00:34:05,920
मान भी लिया

491
00:34:14,760 --> 00:34:20,760
जाए। मगर अब उनको अगर मान भी लिया जाए

492
00:34:21,960 --> 00:34:26,080
कि यह क्या कहते हैं? यह जो चीजें हैं तो मैं

493
00:34:26,080 --> 00:34:30,080
उस पर बात कर रहा हूं कि

494
00:34:30,080 --> 00:34:34,160
अ क्या कहते हैं क्या हमारे फोन में किसी विरोधी की

495
00:34:34,160 --> 00:34:38,320
या अज्ञात व्यक्ति की फोटो हो सकती है? क्या इस वजह से हमारे फोन में फोटो आ सकती है कि

496
00:34:38,320 --> 00:34:42,800
नहीं कि भैया हमको जो है हमारे बारे में व्यक्ति दुष्प्रचार

497
00:34:42,800 --> 00:34:47,120
कर रहा है। क्या इस बारे में हम बात कर सकते हैं कि कि हमें अभियान

498
00:34:47,120 --> 00:34:51,600
के निमित्त कोई गंभीर बात करनी है। हमें आपसे अकेले मिलना है। ये सब चीजें हैं। तो

499
00:34:51,600 --> 00:34:55,600
ये सब चीजें मैंने ये जो चीजें हैं अच्छे से 2000 जब

500
00:34:55,600 --> 00:34:59,680
जब 22 या 23 में जो ये चीजें निर्गत हुई थी तभी मेरे सामने आ गई थी और

501
00:34:59,680 --> 00:35:03,920
मैंने इनको अच्छे से देखा था। अच्छे से देखा था। और

502
00:35:03,920 --> 00:35:08,080
आज दोती साल बाद आपने फिर से देखा है तो इसमें इस बीच के अंतर में

503
00:35:08,080 --> 00:35:12,160
थोड़ा कुछ भूल गया हूं कि उसमें और क्या-क्या है तो आज आपने जो दिखाया है उस

504
00:35:12,160 --> 00:35:16,320
समय मैंने देख लिया था हर एंगल से मेरा तरीका है कि यदि किसी के

505
00:35:16,320 --> 00:35:20,480
ऊपर मुझे दोष लगाना है और मैं आपको कारण बता रहा हूं। जैसा कि

506
00:35:20,480 --> 00:35:24,480
मैंने कहा कि जैसे आपने बताया कि साहस होना चाहिए। कि वहां पे 10

507
00:35:24,480 --> 00:35:28,560
20 50 लोग जाओ। उनके हाथ पैर पकड़ लो। या जो साहस आपको पूरी

508
00:35:28,560 --> 00:35:30,240
के शंकराचार्य जी में

509
00:35:30,240 --> 00:35:34,480
नहीं दिखा। पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्यों में नहीं दिखा जिस पर आपने उनको सुनाया

510
00:35:34,480 --> 00:35:38,480
आपने परसों के वीडियो में और जो जो साहस मुझे आप में नहीं दिखा

511
00:35:38,480 --> 00:35:42,480
क्योंकि आप भी उन तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं मगर आप नहीं गए और

512
00:35:42,480 --> 00:35:46,560
मैं मैं ईश्वर साक्षी है मैं अपने मन में आपसे प्रश्न करता

513
00:35:46,560 --> 00:35:50,560
रहता था सच बता रहा हूं कि अगर निग्रचार्य जी को ऐसी ऐसी

514
00:35:50,560 --> 00:35:54,800
चीजें हैं जो कुछ कहनी है तो क्यों नहीं जाते वो लाउडस्कर लेकर के क्यों नहीं उनको

515
00:35:54,800 --> 00:35:58,800
10 20 लोग नहीं है उनके साथ जो जाकर के वो जो चलती हुई सभा है उसमें 10

516
00:35:58,800 --> 00:36:02,880
20 लोग अपने बैठा दे और पहले वह कोशिश करे फिर दूसरा कोशिश करे वह बैठ जाए

517
00:36:02,880 --> 00:36:07,040
तो तीसरा कोशिश करे चौथा कोशिश करे करत करत अभ्यास ते जड़मती होत सुजान

518
00:36:07,040 --> 00:36:11,120
रसिया आप जात सिर पर परत निशान ये प्रयास

519
00:36:11,120 --> 00:36:15,200
क्यों नहीं किया गया तो जो साहस आपको शंकराचार्य जी के शिष्यों में नहीं दिखा वो शंकराचार्य

520
00:36:15,200 --> 00:36:19,440
जी के शिष्य जो मठ के अनुसार गुरुदेव के अनुसार हमारी जानकारी

521
00:36:19,440 --> 00:36:23,440
में गुरु द्रोही है ठीक है उनमें आपको वो साहस नहीं दिखा तो

522
00:36:23,440 --> 00:36:29,440
वही साहस आप में भी मुझे नहीं दिखा और मुझ जैसे कई

523
00:36:38,080 --> 00:36:41,400
अब बात करते हैं

524
00:36:41,400 --> 00:36:47,080
मेरी मेरी आवाज ठीक आ रही है

525
00:36:47,080 --> 00:36:51,120
ना? आवाज ठीक आ रही है?

526
00:36:51,120 --> 00:36:55,200
हां। अब बात करते हैं कि भाई

527
00:36:55,200 --> 00:36:59,280
यह

528
00:36:59,280 --> 00:37:03,360
अब बात करते हैं कि मैं क्यों कह रहा हूं कि मुझे अकाट्य प्रमाण

529
00:37:03,360 --> 00:37:07,360
चाहिए। आपने जो प्रमाण दिखाए हैं हो सकता है। हां, यह

530
00:37:07,360 --> 00:37:11,360
बात सही है कि इससे अमुक अमुक व्यक्ति के ऊपर किसी को शक हो

531
00:37:11,360 --> 00:37:15,440
सकता है। ठीक है? पर सिद्ध कुछ नहीं

532
00:37:15,440 --> 00:37:19,440
किया जा सकता। देखिए एक जो अभी मैं बात बता रहा

533
00:37:19,440 --> 00:37:24,000
था इनका एक वक्तव्य है निग्रहाचार्य जी का। इस

534
00:37:24,000 --> 00:37:28,040
वक्तव्य में कोई इनको कह रहा है कि अब शीघ्र ही पूरी पीठ

535
00:37:28,040 --> 00:37:32,680
और पूरी पीठ और महात्मा स्वतः

536
00:37:32,680 --> 00:37:36,720
ही श्रीमान निग्रचार्य श्री

537
00:37:36,720 --> 00:37:41,600
भगवतानंद जी गुरु को से संपर्क निश्चित रूप से करेंगे।

538
00:37:41,600 --> 00:37:45,600
तो अब देखिए जब वैसे आप आपका कहना है कि हमको मिलने नहीं दिया

539
00:37:45,600 --> 00:37:50,160
जा रहा है। मगर जब मिलने की बात आ रही है तो आपका एक भाव वहां से प्रकट हो रहा है

540
00:37:50,160 --> 00:37:53,400
कि वो क्या करने के लिए संपर्क करेंगे गाली देने के लिए या

541
00:37:53,400 --> 00:37:57,680
धमकी मतलब आपको मिलने में एक नकारात्मकता की भावना यहां पे आपके वक्तव्य

542
00:37:57,680 --> 00:38:02,480
से प्रदर्शित हो रही है। तो एक ये बात भी है। अब

543
00:38:02,480 --> 00:38:06,680
दूसरी बात यह है मैं अपने पॉइंट से बार-बार थोड़ा

544
00:38:06,680 --> 00:38:11,360
सा बात करते करते इधर उधर हो जाता हूं। बहुत सारी बातें लेनी है।

545
00:38:11,360 --> 00:38:15,640
तो क्या है कि मैं क्यों कहता हूं कि मुझे प्रमाण दो मगर

546
00:38:15,640 --> 00:38:20,160
अकाट्य क्योंकि जो आपने प्रमाण दिखाए हैं इनसे

547
00:38:20,160 --> 00:38:24,480
किसी पर डाउट हो सकता है। आज का वातावरण ऐसा है।

548
00:38:24,480 --> 00:38:28,800
आज आश्रमों में कई आश्रमों में हो रहा है। दोष हो रहे हैं। ये है वो है।

549
00:38:28,800 --> 00:38:34,800
तो इनसे किसी पर डाउट हो सकता है।

550
00:39:21,280 --> 00:39:27,280
हां कुछ नेटवर्क का ये

551
00:39:37,760 --> 00:39:38,260
आपने

552
00:39:38,160 --> 00:39:42,240
जो प्रमाण दिखाए हैं इससे हम किसी के ऊपर शक कर सकते हैं। बिल्कुल बात

553
00:39:42,240 --> 00:39:46,480
सही है। शक जा सकता है। डाउट हो सकता है मगर सिद्ध

554
00:39:46,480 --> 00:39:50,720
कुछ नहीं हो सकता। ठीक है? और

555
00:39:50,720 --> 00:39:54,800
जब हम फिर चीजों को जोड़ेंगे कि हम वहां जा रहे हैं। हम स्वयं वहां

556
00:39:54,800 --> 00:39:58,960
रह रहे हैं। और भी लोग वहां रह पर स्त्री भी रह रही हैं। हम

557
00:39:58,960 --> 00:40:03,120
लोग कुंभ में रह रहे हैं। हम लोग वहां पर रह रहे हैं। हमको ऐसी चीजें जब नहीं दिख रही

558
00:40:03,120 --> 00:40:07,920
और जब हमारे पूज्य गुरुदेव जो है जो हमारे लिए प्रमाण है वो

559
00:40:07,920 --> 00:40:09,360
उनके द्वारा संरक्षित

560
00:40:09,360 --> 00:40:13,600
है जो उनके परिकर और सबसे बड़ी बात कि गुरुदेव की दिनचर्या

561
00:40:13,600 --> 00:40:17,600
का ध्यान रखने वाले वही है। हमारे गुरुदेव की जो सेवा आज हम नहीं

562
00:40:17,600 --> 00:40:21,920
कर पा रहे वो वही कर रहे हैं। आप नहीं कर पा रहे वो वो कर रहे हैं और जितने

563
00:40:21,920 --> 00:40:25,920
गुरु द्रोही हैं यह नहीं कर पा रहे वो वो कर रहे हैं। पहली बात

564
00:40:25,920 --> 00:40:29,920
और ऐसा भी नहीं कर सकते कि आज कोई जाकर के वहां कह दे कि मुझे परिककर बना लो तो बना लिया

565
00:40:29,920 --> 00:40:33,920
जाए। समय बिताना होगा। निष्ठा दिखानी होगी। कई

566
00:40:33,920 --> 00:40:38,000
कई वर्षों का अनुशासन दिखाना होगा। तब जाकर के उस पर विश्वास होगा कि हां भाई

567
00:40:38,000 --> 00:40:42,080
इसको जो है मुख्य परिककरों में वो किया जा सकता

568
00:40:42,080 --> 00:40:46,160
है। तो कई और चीजें हैं। पहली बात कि वो जो आपने

569
00:40:46,160 --> 00:40:50,640
जो चीजें दिखाई है उससे डाउट हो सकता है मगर सिद्ध कुछ नहीं हो सकता।

570
00:40:50,640 --> 00:40:54,720
अब बात जब ये आती है कि हम लड़ने मरने निकले हैं। जान देने

571
00:40:54,720 --> 00:40:58,800
निकले हैं। कुछ भी हो जाए हम ये बात पहुंचा कर ही रहेंगे। तो हम

572
00:40:58,800 --> 00:41:02,880
ऐसी चीज के लिए लड़ते मरते हैं जो अकाट्य हो। और

573
00:41:02,880 --> 00:41:06,960
यही गलती की थी इन लोगों ने भी जो यह गुरुद्रोही है ऊपर ऊपर की

574
00:41:06,960 --> 00:41:10,960
अगर यह मुझसे मिले होते मैं इनको रोक देता कि भैया इन चीजों में दम नहीं है आप

575
00:41:10,960 --> 00:41:15,040
और ठोस सबूत निकालिए अगर कोई व्यक्ति गलत है

576
00:41:15,040 --> 00:41:19,120
तो उसके लिए आप ठोस सबूत लाइए ठोस अकाट्य सबूत मगर वो

577
00:41:19,120 --> 00:41:23,280
नहीं है काम चलाओ चीजें जिससे आप

578
00:41:23,280 --> 00:41:27,520
हाहाकार तो मचवा दोगे जिससे आप जो पहले से ही

579
00:41:27,520 --> 00:41:31,600
आपके वचनों से प्रभावित होने वाली जनता है उसको अपनी बातों को

580
00:41:31,600 --> 00:41:35,600
मन मनवा लोगे। मगर जब हम कहीं वास्तविकता में उन सबूतों के

581
00:41:35,600 --> 00:41:39,840
आधार पर लड़ने खड़े होंगे तो हमें पराजय का मुख देखना पड़ेगा।

582
00:41:39,840 --> 00:41:40,340
इसलिए

583
00:41:40,240 --> 00:41:44,720
मैं कहता हूं मुझे अकाट्य प्रमाण दीजिए। आपने अकाट्य प्रमाण नहीं दिए। पहला

584
00:41:44,720 --> 00:41:48,720
ये जो ऋषिकेश जी ब्रह्मचारी वाली वो है वीडियो और दूसरी बात कर लेते हैं

585
00:41:48,720 --> 00:41:53,880
कीचड़ वाली होली। उसके मुझे बहुत मैसेजेस

586
00:41:53,880 --> 00:41:58,000
आए। पहली बात तो मैं यह कहूंगा कि आपने

587
00:41:58,000 --> 00:42:02,080
आरोप कितने लगाए हैं? पिज़्ज़ा खाते हैं।

588
00:42:02,080 --> 00:42:06,080
वो वहां पर वैश्यागमन होता है। यह है

589
00:42:06,080 --> 00:42:10,480
वह है। बहुत सारे आरोप लगाओगे 50

590
00:42:10,480 --> 00:42:14,720
और जब आपसे वो मांगा जाएगा प्रमाण तो आप

591
00:42:14,720 --> 00:42:19,040
3 साल पहले का प्रमाण दोगे दो। क्यों? बाकी के 48

592
00:42:19,040 --> 00:42:23,040
बातों का कोई प्रमाण नहीं है। ये सोचने वाली बात है। और

593
00:42:23,040 --> 00:42:27,040
अभी जो आपने कुछ और अनावश्यक प्रमाण जोड़े हैं उनपे भी बात करेंगे। ठीक

594
00:42:27,040 --> 00:42:29,320
है?

595
00:42:29,320 --> 00:42:33,440
तो प्रमाण की जो बात है कि आपने जो प्रमाण

596
00:42:33,440 --> 00:42:37,440
के रूप में प्रस्तुत किया है वह प्रमाण डाउट पैदा कर सकते

597
00:42:37,440 --> 00:42:41,600
हैं। सिद्ध कुछ नहीं कर सकते। जब मीमांसा करने बैठेंगे एक एक वर्ड

598
00:42:41,600 --> 00:42:45,920
की एक एक शब्द की तो कुछ नहीं होगा उससे। तो ऐसी

599
00:42:45,920 --> 00:42:50,160
स्थिति में वो भी तब जब हम स्वयं भी मठ में जाकर रह रहे हैं।

600
00:42:50,160 --> 00:42:55,360
ऐसी स्थिति में हम लड़ने मरने कटने नहीं जा सकते।

601
00:42:55,360 --> 00:42:55,860
आप

602
00:42:55,680 --> 00:43:00,320
भड़काइए लोगों को और आप भेजिए या आप स्वयं जाइए

603
00:43:00,320 --> 00:43:04,320
कि आपको लगता है कि बिल्कुल अकाट प्रमाण है और यदि कोई

604
00:43:04,320 --> 00:43:08,560
है जो इसको सिद्ध कर सके कि इससे जो है ये सिद्ध हो रहा है सिद्ध हो रहा है

605
00:43:08,560 --> 00:43:12,600
डाउट नहीं सिद्ध तो वो आए बताएं कौन कर रहा

606
00:43:12,600 --> 00:43:16,800
है क्योंकि मुझे अभी एक फोन आया था एक व्यक्ति का

607
00:43:16,800 --> 00:43:20,960
उसने कहा कि मैं आपके साथ लाइव आ जाऊंगा भाई जो प्रमाण

608
00:43:20,960 --> 00:43:25,200
आप प्रस्तुत कर रहे हो उससे उसमें कुछ भी ऐसा सिद्ध नहीं हो पाएगा आएगा। आप

609
00:43:25,200 --> 00:43:29,280
सोच सोच के देखो। आप न्यायालय में खड़े हो। आपको सिद्ध करना है कि

610
00:43:29,280 --> 00:43:33,360
उनका किसी के साथ संबंध है अमुक अमुक व्यक्ति का। तो क्या दिखाओगे कि उन्होंने ये बोला

611
00:43:33,360 --> 00:43:37,440
कि मेरा जो मुझसे जो है एकांत में मिलो। क्या दिखाओगे कि उनके फोन

612
00:43:37,440 --> 00:43:41,440
में एक फोटो है। क्या दिखाओगे बताओ? तो

613
00:43:41,440 --> 00:43:45,520
ये चीज है कि वो जो प्रमाण है उसके लिए युद्ध नहीं

614
00:43:45,520 --> 00:43:49,520
लड़ा जा सकता। उसके आधार पर। इसलिए मैं कहता हूं कि प्रमाण लाओ जो कि मैंने आपसे

615
00:43:49,520 --> 00:43:53,520
नहीं कहा था। मैंने कहा था उन गुरु द्रोहियों से जिन्होंने आपके पास पीडीएफ

616
00:43:53,520 --> 00:43:58,680
भेजी है जिसको आपने

617
00:43:58,680 --> 00:44:01,240
पढ़ा।

618
00:44:01,240 --> 00:44:05,360
अब कीचड़ वाली होली की बात करते हैं। वो

619
00:44:05,360 --> 00:44:09,840
भी वही काफी साल। भाई जब पूरी मठ में इतना सब कुछ हाहाकार

620
00:44:09,840 --> 00:44:13,840
हो रहा है तो आप ले दे के वही प्रमाण क्यों ला रहे हो जो दो तीन साल पहले एक

621
00:44:13,840 --> 00:44:17,840
बार हो चुका है सर्कुलेट। नए प्रमाण नहीं आ रहे क्या? और नए प्रमाण नहीं

622
00:44:17,840 --> 00:44:21,920
आ रहे तो आप क्यों कह रहे हो? हो रहा है। आप कहो हुआ था। यह

623
00:44:21,920 --> 00:44:25,920
सब चीजों का ध्यान रखो ना। गलत वक्तव्य क्यों दे रहे हो? जिसका आधार नहीं है

624
00:44:25,920 --> 00:44:30,000
वह वक्तव्य क्यों दे रहे हो? हो रहा है। जिस व्यक्ति ने आपको वो एप्लीकेशन

625
00:44:30,000 --> 00:44:34,160
दी है ना जिसने थाने में एप्लीकेशन दी थी उस व्यक्ति की सच्चाई सुन लीजिए जिसकी आपने पोस्ट

626
00:44:34,160 --> 00:44:38,160
डाली थी। हालांकि मैंने कभी कहा नहीं अपनी उसमें जिस व्यक्ति ने थाने में

627
00:44:38,160 --> 00:44:42,400
एप्लीकेशन लिखाई थी। वो व्यक्ति इतना विवादास्पद व्यक्ति था। वही कुंभ

628
00:44:42,400 --> 00:44:46,480
में मैं भी था और मैं मिला था उस व्यक्ति से और मुझे खुद मन कर

629
00:44:46,480 --> 00:44:50,560
रहा था। कई कई ऐसे समय आया था कि मुझे खुद

630
00:44:50,560 --> 00:44:54,640
मन कर रहा था उस व्यक्ति के चार थप्पड़ लगाने का। तो मेरे मन में तो आया था कि उसमें अगर

631
00:44:54,640 --> 00:44:59,320
उसके मार पड़ा लिखा हुआ है तो वो सही पड़ी है मार।

632
00:44:59,320 --> 00:45:04,000
क्यों? एक मोटा मोटा आपको कारण दे दूं।

633
00:45:04,000 --> 00:45:08,640
स्वामी नारायण वाले आए थे वो मठ में एंट्री ले रहे थे

634
00:45:08,640 --> 00:45:13,040
और वो उनकी चापलूसी कर रहा था।

635
00:45:13,040 --> 00:45:17,120
स्वामी नारायण वाले जो आपत्ति वाले हैं वह लोग मठ में घुस

636
00:45:17,120 --> 00:45:21,120
रहे थे और वह उनकी चापलूसी कर रहा था। पैर छू रहा था जाते समय सब

637
00:45:21,120 --> 00:45:25,360
कार्य कर रहा था। मैंने उसको टोका तो वो मुझसे ही बिगड़ने लगा।

638
00:45:25,360 --> 00:45:29,360
तो थोड़ा ठस बुद्धि था वो और उसके अपने अलग ख्यालात

639
00:45:29,360 --> 00:45:33,440
थे जो कहना चाहिए कि किसी और की किसी

640
00:45:33,440 --> 00:45:37,440
और के अनुगत कार्य ना कर पाने वाली एक सोच होती है ना कि मैं स्वयंभू बन के ही

641
00:45:37,440 --> 00:45:41,600
काम कार्य करूं। कभी अपने पास बुला लीजिएगा। रख के देखिएगा क्या वह

642
00:45:41,600 --> 00:45:45,600
किसी और की कैप्टनशिप स्वीकार कर सकता है। तो जब आप

643
00:45:45,600 --> 00:45:49,920
किसी बड़े किसी कैप्टन के यहां पर पहुंचोगे ना जो शास्त्रों के हिसाब से कैप्टन

644
00:45:49,920 --> 00:45:54,400
है और उसके यहां भी आप उसकी कैप्टनशिप ना स्वीकार करके अपनी कैप्टनशिप चलाओगे

645
00:45:54,400 --> 00:45:58,480
तो ऐसी चीजें हो सकती है। मुझे नहीं पता कि उसके मार पड़ी कि नहीं पड़ी वो एक अलग विषय है। मगर

646
00:45:58,480 --> 00:46:04,480
पड़ी तो बिल्कुल सही पड़ी। ये सब सबूत नहीं होते

647
00:46:05,160 --> 00:46:09,200
हैं। यह सब हो रहा है। अरे भाई हो रहा है तो

648
00:46:09,200 --> 00:46:13,240
प्रेजेंट कंटीन्यूस वाले वो दो ना प्रमाण हुआ

649
00:46:13,240 --> 00:46:17,280
था वही दो तीन साल पहले की एक ही चीज है हमारे पास ऋषिकेश

650
00:46:17,280 --> 00:46:21,680
ब्रह्मचारी जी के स्क्रीन रिकॉर्डिंग और कीचड़ वाली होली बाकी

651
00:46:21,680 --> 00:46:26,080
पहली बात तो बाकी के प्रमाण कौन देगा 48 वाले दूसरी

652
00:46:26,080 --> 00:46:30,160
बात जो आज हो रहा है उनके प्रमाण कहां है और आज अगर नहीं हो रहा है उसका प्रमाण नहीं

653
00:46:30,160 --> 00:46:34,640
है तो बोलना बंद कर दीजिए अकाट चीजें बोलिए अकाट

654
00:46:34,640 --> 00:46:39,360
भगवतानंद जी मेरा मेरा निवेदन है आपसे

655
00:46:39,360 --> 00:46:43,360
अकाट्य चीजें बोलिए अकाट्य अच्छा अब बात करते हैं

656
00:46:43,360 --> 00:46:48,080
कीचड़ वाली होली कीचड़ वाली होली खेली जा रही है

657
00:46:48,080 --> 00:46:53,160
वहां पर जो होली खेलने वाली मातृ शक्तियां है वो कौन

658
00:46:53,160 --> 00:46:57,280
है उनकी माताएं और उनकी बहने और

659
00:46:57,280 --> 00:47:01,760
तो और पूज्य गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य

660
00:47:01,760 --> 00:47:07,760
वहां पर स्वयं विराजमान है उनको उसमें दोष नहीं लगा

661
00:47:07,840 --> 00:47:12,000
ठीक है? मगर अन्यों को उसमें लगा और आज

662
00:47:12,000 --> 00:47:16,000
तीन साल से वह प्रेजेंट कंटीन्यूस में बनकर चल ही रहा है। यह कीचड़ वाली होली बंद नहीं हुई है।

663
00:47:16,000 --> 00:47:20,000
तब से अब तक लगातार चल रही है। यही तो है। मठ में यही हो रहा है। वो स्क्रीन

664
00:47:20,000 --> 00:47:20,500
रिकॉर्डिंग

665
00:47:20,480 --> 00:47:24,560
लगातार चल रही है। वो जो चैट है वो लगातार चल रहा है। वो जो कीचड़

666
00:47:24,560 --> 00:47:28,560
वाली होली है वो लगातार चल रही है। तभी तो आप कह रहे हो पूरी मठ में

667
00:47:28,560 --> 00:47:32,640
ये हो रहा है। क्योंकि हो रहा है के संबंध में आपने कुछ नहीं दिखाया। हुआ था के संबंध में

668
00:47:32,640 --> 00:47:36,640
आपने कुछ दिखाया। तो अगर हुआ था के संबंध में आपके पास प्रमाण है तो

669
00:47:36,640 --> 00:47:40,960
हुआ था बोलिए। हो रहा है मत बोलिए। ठीक?

670
00:47:40,960 --> 00:47:45,280
अब हो रहा है के संबंध में आपने कुछ चीजें बोली है। उसको भी ले लेते हैं।

671
00:47:45,280 --> 00:47:50,440
वो क्या बोला है आपने? आपने बोला

672
00:47:50,440 --> 00:47:54,440
है कि गुरुदेव के यहां पर करौली सरकार

673
00:47:54,440 --> 00:47:59,040
आए। बागेश्वर वाले आए जो दुबई जा चुके हैं। ये सब बातें

674
00:47:59,040 --> 00:48:04,120
आपने भूल। ठीक

675
00:48:04,120 --> 00:48:08,160
है। पहली बात जो मुझे याद है वह मैं बता दूं। आपने

676
00:48:08,160 --> 00:48:12,720
एक पोस्ट डाली थी अपने उसमें आपने बताया था मुक्तेश्वरानंद

677
00:48:12,720 --> 00:48:16,800
जी जो बौद्ध हैं बौद्ध मलेच हो गए क्योंकि

678
00:48:16,800 --> 00:48:20,880
वो मलेच वहां गए थे जब आपने उनको मलेच आप मलेच मानते हो इतना तो है

679
00:48:20,880 --> 00:48:24,960
बौद्धों को तो अब मुक्तेश्वर आनंद जी जब जो

680
00:48:24,960 --> 00:48:28,960
अभी जो उनके उत्तराधिकारी के रूप में ख्यापित हैं वो

681
00:48:28,960 --> 00:48:33,040
जब उत्तरा ये ज्योतिर मठ के संरक्षक

682
00:48:33,040 --> 00:48:37,040
संरक्षक और शंकराचार्य के रूप में जाने जा रहे हैं। वह जब इस रूप में नहीं

683
00:48:37,040 --> 00:48:41,240
जाने जाते थे। वह जब केवल दंडी सन्यासी थे। वह जब

684
00:48:41,240 --> 00:48:45,680
केवल स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज जी के ब्रह्मलीन पूज्य

685
00:48:45,680 --> 00:48:49,680
श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी के शिष्य थे। उस समय वह

686
00:48:49,680 --> 00:48:54,000
बौद्धों से मिलने गए और उनके बीच में बैठे हुए

687
00:48:54,000 --> 00:48:58,080
फोटो लेकर के आपने एक अपने किसी प्लेटफार्म से निर्गत की थी

688
00:48:58,080 --> 00:49:02,560
और आपने बताया था देखो देखो वो जो है मच्छों के बीच में बैठे हुए हैं देखिए

689
00:49:02,560 --> 00:49:06,560
है ना मुक्तेश्वर जी की तो मच्छो के साथ

690
00:49:06,560 --> 00:49:10,720
बैठने वाला तो हमारा विरोधी हो गया उनके कुंभ

691
00:49:10,720 --> 00:49:15,040
में लगे हुए वो मंच पर आपका वक्तव्य क्यों प्रसारित

692
00:49:15,040 --> 00:49:19,200
हो रहा है आपकी उनसे साठगाठ क्यों हो रही है यह

693
00:49:19,200 --> 00:49:23,360
करौली वाले जो है यह जो करौली वाला व्यक्ति है यह कई जगह

694
00:49:23,360 --> 00:49:27,720
ऐसी जगह गया जिनसे आपका वो है संबंध क्यों

695
00:49:27,720 --> 00:49:32,040
है नहीं होना चाहिए वही फ्री मेंशन से ऐसा हो जाएगा

696
00:49:32,040 --> 00:49:36,160
ना सब जुड़े हुए हैं आपस में अरे मैं तो कह रहा हूं

697
00:49:36,160 --> 00:49:40,320
आप मुझे दो चार वो नेम एड्रेस दे दीजिए जहांजहां आपने कथा की है

698
00:49:40,320 --> 00:49:45,120
बस दे दीजिए देखिए निकाल दूंगा 50ों

699
00:49:45,120 --> 00:49:49,120
अशास्त्रीय चीजें धर्म विरुद्ध चीजें हो सकता है फ्रीमेशन से

700
00:49:49,120 --> 00:49:53,120
कनेक्शन निकल आए। कम से कम सनातन विरुद्ध तंत्रों से तो कर ही दूंगा। आपके

701
00:49:53,120 --> 00:49:57,240
अनुसार मेरे अनुसार नहीं सिद्ध हो जाएगा।

702
00:49:57,240 --> 00:50:01,520
तो आप जो है स्वामी श्री राघवाचार्य जी का विरोध

703
00:50:01,520 --> 00:50:05,680
भी कर चुके हैं कि उन्होंने बंगाल में ये क्यों किया? है ना? और आप उन्हीं

704
00:50:05,680 --> 00:50:09,920
के गुरु के साथ उनके साथ जो है दिखाई देते हैं उनके साथ। क्यों?

705
00:50:09,920 --> 00:50:14,160
भाई जो व्यक्ति गलत कर रहा है उसके साथ आप क्या कर रहे हैं?

706
00:50:14,160 --> 00:50:18,160
और ऐसा कई बार देखा गया है आपके ही द्वारा जिनका खंडन हुआ

707
00:50:18,160 --> 00:50:22,560
है आपने खंडन करने का प्रयास मुझे नहीं पता वह हुआ कि नहीं हुआ मगर

708
00:50:22,560 --> 00:50:26,640
जिनका खंडन करने का प्रयास आपके द्वारा किया गया उनके साथ

709
00:50:26,640 --> 00:50:30,880
भी आपका आपकी चीजें देखी गई क्यों तो यदि

710
00:50:30,880 --> 00:50:34,400
आप जिनका खंडन करने का प्रयास या जिनके प्रति आप विरोधाभास

711
00:50:34,400 --> 00:50:38,960
रखते हैं उनके साथ आप खड़े हो सकते हैं तो वो सही है

712
00:50:38,960 --> 00:50:43,120
मगर शंकराचार्य यदि जिसको कहेंगे कि तूने जातिवाद

713
00:50:43,120 --> 00:50:47,200
के ऊपर जो ये बात कही है ना जातिवादी होने के नाते

714
00:50:47,200 --> 00:50:51,600
तूने ये बात कही है ना वो

715
00:50:51,600 --> 00:50:55,920
क्या था बटेंगे तो कटेंगे वाली यात्रा निकाली थी ना बागेश्वर

716
00:50:55,920 --> 00:51:01,320
जी ने बागेश्वर वालों ने वो निकाला था क्या कहते हैं

717
00:51:01,320 --> 00:51:05,640
अ जातपात की करो विदाई हम हिंदू

718
00:51:05,640 --> 00:51:09,680
वो सारे भाई भाईाई हम सब हम सब भाई भाईाई और जातपात

719
00:51:09,680 --> 00:51:13,760
की करो विदाई वो निकाली थी तो गुरुदेव का जो वक्तव्य है वो क्या

720
00:51:13,760 --> 00:51:17,840
आया था कि मैं उसके यहां पर पानी भी नहीं पऊंगा। आया

721
00:51:17,840 --> 00:51:21,960
ना विरोध किया ना? मगर गुरुदेव उनके मंच पर भी गए थे।

722
00:51:21,960 --> 00:51:26,160
तो गुरुदेव जिनका खुलेआम खंडन कर रहे हैं विभव

723
00:51:26,160 --> 00:51:30,400
रूप से खंडन कर रहे हैं उनके साथ यदि गुरुदेव खड़े दिख जाएंगे तो ये मठ

724
00:51:30,400 --> 00:51:34,720
में जो है वो हो रहा है अधर्म आचरण अधर्मी

725
00:51:34,720 --> 00:51:38,960
लोग घुस रहे हैं और आपके द्वारा जो

726
00:51:38,960 --> 00:51:43,360
ठीक नहीं है जो धार्मिक नहीं हो रहा है अशास्त्रीय

727
00:51:43,360 --> 00:51:47,440
हो रहा है मगर आप उनके साथ उनका मन साझा करते हुए खड़े मिल जाएंगे

728
00:51:47,440 --> 00:51:49,440
वो गलत नहीं तो जितने

729
00:51:49,440 --> 00:51:53,600
अंश में जो गलत होता है उसको को कहा जाता है। जितना अंश जिसका जहां

730
00:51:53,600 --> 00:51:57,840
पड़ जाएगी बात वहां उनका कहा जाएगा और जितने अंश में जहां जो

731
00:51:57,840 --> 00:52:02,160
गलत नहीं होगा उसकी कोई प्रोत्साहन वाली चीजें होंगी उसका एप्रिशिएशन भी करा जाएगा।

732
00:52:02,160 --> 00:52:06,240
ये आपसे भी सीखा है। ये मैंने आपसे भी सीखा है।

733
00:52:06,240 --> 00:52:10,560
आज आप पता नहीं क्यों अपने सिखाए हुए से ही विमुख हो रहे हैं।

734
00:52:10,560 --> 00:52:16,560
ठीक है? तो एक रही ये बात।

735
00:52:17,200 --> 00:52:21,200
अच्छा एक यहां पर सोचने वाली बात है। आपका कहना है कि

736
00:52:21,200 --> 00:52:25,280
जो पूरी मठ के जो परिककर हैं वो बागेश्वर वालों

737
00:52:25,280 --> 00:52:29,440
जैसों से साठगाठ बनाकर चलना चाहते हैं। ये आपने सबूत दिया कि वो इनके

738
00:52:29,440 --> 00:52:33,440
साथ खड़े हैं। मैंने भी सबूत दे दिया आप इनके साथ खड़े हो। मलेच्छों के साथ वालों के साथ आप

739
00:52:33,440 --> 00:52:37,440
खड़े हो। तो आप भी उसी के साथ शामिल हो रहे हो। तो यह तो फिर आपके यहां

740
00:52:37,440 --> 00:52:41,440
भी वही चल रहा है जो आप जिसका आरोप लगा रहे हैं। या फिर हमें मानना पड़ेगा कि जितने अंश

741
00:52:41,440 --> 00:52:45,520
में जिसकी जहां जो बात है जो शास्त्री होती है उस पर वो कहा जाता है। भाई जैसे राम

742
00:52:45,520 --> 00:52:49,760
श्री राम जी ने कम रामायण के अनुसार उनको बुला लिया था रावण को

743
00:52:49,760 --> 00:52:53,760
और वो पुरोहित बनाया था। ठीक है पूजन ने आप

744
00:52:53,760 --> 00:52:58,920
आपको ज्यादा ज्ञात होगा। शास्त्रों के मर्मज्ञ हैं आप।

745
00:52:58,920 --> 00:53:02,960
तो एक तो यह बात हो गई कि आपने यह कहा कि वह बनाकर

746
00:53:02,960 --> 00:53:04,640
चलना चाहते हैं। ठीक है। वो

747
00:53:04,640 --> 00:53:09,040
वो डाउटफुल चीजें हो सकती हैं। आपके अनुसार जिस तरह से आप जिस

748
00:53:09,040 --> 00:53:13,360
ग्लांस से जिस नजर से आप देख रहे हैं उस नजर से अगर देखा जाए तो डाउट

749
00:53:13,360 --> 00:53:18,280
हो सकते हैं। मगर बात यह है कि जब बना के चलना चाहते

750
00:53:18,280 --> 00:53:22,320
हैं तो फिर गुरुदेव ने तो वक्तव्य दे दिया था। मैं उसकी

751
00:53:22,320 --> 00:53:26,400
मां के हाथ का पानी भी नहीं पूंगा। फॉर एग्जांपल बोल रहा हूं

752
00:53:26,400 --> 00:53:30,800
मैं। गुरुदेव ने नहीं कहा था कि इसको YouTube पर डालो।

753
00:53:30,800 --> 00:53:34,800
किसने डलवाया? उनहीं परिककरों ने ना जो बागेश्वर

754
00:53:34,800 --> 00:53:39,200
वालों के साथ साठगांठ करना चाहते हैं। उसका जो थंबनेल

755
00:53:39,200 --> 00:53:43,360
था उस वीडियो का वो इतना ज्यादा वैसा था कि

756
00:53:43,360 --> 00:53:47,440
हम लोगों को फोन करना पड़ा कि वो अच्छा नहीं लग रहा। गोवर्धन मटके YouTube चैनल

757
00:53:47,440 --> 00:53:51,440
पर के कि वो धीरेंद्र शास्त्री को शंकराचार्य का तमाचा ऐसा

758
00:53:51,440 --> 00:53:56,080
कुछ थंबनेल बना था। किसने बनवाया? गुरुदेव ने कहा

759
00:53:56,080 --> 00:54:00,080
कि ऐसा थंबनेल बनाओ। कहीं ना कहीं वर्णाश्रम से

760
00:54:00,080 --> 00:54:04,160
प्यार था ना। वर्णाश्रम के पक्षधर थे ना जिन्होंने वो बनाया

761
00:54:04,160 --> 00:54:08,160
वो थंबनेल। उस वीडियो को डाला कि मैं उसकी मां के

762
00:54:08,160 --> 00:54:12,400
हाथ का पानी भी नहीं पूंगा। ये सब

763
00:54:12,400 --> 00:54:16,400
सोचने वाली बात है। अकाट्य तथ्य नहीं और इससे मैं दुखी

764
00:54:16,400 --> 00:54:19,760
हुआ हूं। सच बताऊं। अकाट चीजें नहीं बोली आपने और

765
00:54:19,760 --> 00:54:23,760
मैं नहीं चाहता हूं कि यह चीजें आगे बढ़े। आप चाहे तो इसको रोका जा सकता

766
00:54:23,760 --> 00:54:27,840
है। रोक दीजिए। हमारी जो कल की लाइव थी वो

767
00:54:27,840 --> 00:54:30,360
अपने

768
00:54:30,360 --> 00:54:34,480
उन गुरु भाई तो क्या ही कहूं। गुरु द्रोहियों

769
00:54:34,480 --> 00:54:38,480
के बारे में थी जो इस तरह की पीडीएफ को निर्गत कर रहे हैं, बना रहे हैं, लिख रहे हैं।

770
00:54:38,480 --> 00:54:42,640
आपके प्रति कोई द्वेष भावना नहीं कहीं ना कहीं मन में आपके लिए प्रशंसा

771
00:54:42,640 --> 00:54:47,440
ही है कि आपने अभी वो मलेचराज वाली सीरीज बनाई और यह सब किया और

772
00:54:47,440 --> 00:54:51,600
सच कहूं तो मेरे पास समय नहीं मिल रहा था मुझे अ

773
00:54:51,600 --> 00:54:55,600
रामपाल वालों ने मेरे विरुद्ध एक मेरा चेहरा बिगाड़

774
00:54:55,600 --> 00:54:59,680
कर उसे राक्षस का बना करके और एक

775
00:54:59,680 --> 00:55:03,680
अपने YouTube चैनल पर एक लाइव किया था लाइव नहीं था

776
00:55:03,680 --> 00:55:08,160
वो प्रीमियर लगाया था तो उसमें उन्होंने कुछ आक्षेप लगाए थे उन आक्षेप

777
00:55:08,160 --> 00:55:12,240
के वह प्राप्त है मतलब शिव जी ने यह किया वो किया वो जो

778
00:55:12,240 --> 00:55:16,320
पौराणिक व्याख्याओं पर जो बातें होती है तो मेरे मन

779
00:55:16,320 --> 00:55:20,320
में यह भाव आया कि निग्राचार्य जी इस

780
00:55:20,320 --> 00:55:24,800
मामले को देख ले तो हम दो लोग हो जाएंगे मतलब उस समय बहुत ज्यादा उनका

781
00:55:24,800 --> 00:55:29,040
मतलब हो रहा था हर आए दिन मेरे ऊपर दोद हर आए दिन मतलब 10-10

782
00:55:29,040 --> 00:55:34,680
चैनल्स जो है वीडियोस बना रहे थे क्योंकि हमने उनकी किताबें किताबें जला दी थी

783
00:55:34,680 --> 00:55:35,680
और

784
00:55:35,680 --> 00:55:40,000
क्या कहते हैं आए दिन विरोध हमने किताबें

785
00:55:40,000 --> 00:55:44,160
तो क्या ही चलाई थी जो आयत मतलब हमने विरोध

786
00:55:44,160 --> 00:55:48,240
पुरजोर किया था उनका जो वो था वहां जाकर के छापा मारा जहां नकली

787
00:55:48,240 --> 00:55:52,240
प्रेस थी उनकी आपने देखा नहीं होगा ये सब मगर ऐसा मेरे मन में

788
00:55:52,240 --> 00:55:56,240
भाव आया कि भाई निग्राचार्य जैसे जो मेरा भाई है वो

789
00:55:56,240 --> 00:56:00,880
जो है आकर के इसमें वो हो जाए निगराचार्य

790
00:56:00,880 --> 00:56:05,120
के रूप में जो है एक व्यक्ति और मनुवादी खड़ा हो जाए और रामपाल वालों को चटनी

791
00:56:05,120 --> 00:56:09,280
चटाए क्योंकि मैं थोड़ा सा धरातल पे सक्रिय हो रहा था पुलिस पुलिस

792
00:56:09,280 --> 00:56:13,600
थाना कोर्ट कचहरी ये सब तो उधर उन लोगों ने मेरा चेहरा राक्षस

793
00:56:13,600 --> 00:56:18,240
का बना के गुरुदेव के बारे में अंट शंट लिख के और हमारे जो

794
00:56:18,240 --> 00:56:22,640
ईस्ट हैं शिवजी हैं और जो और पौराणिक अन्य मान्यताएं

795
00:56:22,640 --> 00:56:26,640
हमारी उस पर आक्षेप किया था। हालांकि उसका वो है मगर

796
00:56:26,640 --> 00:56:30,720
मैं चाहता था कि कोई नाम लेकर के दोबारा से वीडियो बनाए। तो मेरे मन

797
00:56:30,720 --> 00:56:34,880
में एक ही विकल्प आ रहा था उस समय कि निग्रचार्य जी तक ये बात

798
00:56:34,880 --> 00:56:38,880
पहुंचे और वो इस युद्ध में कूद पड़े। वह जो है रामपाल वाले

799
00:56:38,880 --> 00:56:43,040
उसमें मामले में साथ दें। पर

800
00:56:43,040 --> 00:56:47,120
वो मेरा जो भाव था भाव मन में ही रह गया और किसी प्रकार से आप तक नहीं

801
00:56:47,120 --> 00:56:50,920
पहुंचा। क्यों नहीं पहुंचा उसको मैं अभी आगे

802
00:56:50,920 --> 00:56:56,920
बताऊंगा। क्यों नहीं पहुंचा?

803
00:56:57,880 --> 00:57:03,440
तो ये बात हो गई।

804
00:57:03,440 --> 00:57:07,520
तो वही रामपाल वाला बात मैं बता दूं कि

805
00:57:07,520 --> 00:57:11,520
उसमें मुझे यह मालूम था कि आप अगर वीडियो बनाओगे तो वो बिल्कुल अकाट्य

806
00:57:11,520 --> 00:57:15,520
टाइप से होगा क्योंकि शास्त्रों के मर्मज्ञ हो तो और मेरे पास समय नहीं मिल रहा

807
00:57:15,520 --> 00:57:20,160
था कि मैं ऐसा बनाऊं वो आज भी पेंडिंग ही है वो जो उन्होंने एक लाइव किया है वो

808
00:57:20,160 --> 00:57:24,240
रामपाल वालों ने मेरे ऊपर वो आज भी मेरे उसमें जो मैं लिखता रहता हूं ना कौन-कौन

809
00:57:24,240 --> 00:57:28,320
से टॉपिक्स हैं जिन पर बनाना आवश्यक है तो उसमें आज भी वो पेंडिंग

810
00:57:28,320 --> 00:57:32,440
ही डला है मैं उसको आप तक पहुंचा नहीं पाया

811
00:57:32,440 --> 00:57:36,800
और आज जब आपसे वह हुआ इंटरेक्शन

812
00:57:36,800 --> 00:57:40,880
तो इस तरह से हुआ तो वो मुझे अच्छा नहीं लगा। खैर

813
00:57:40,880 --> 00:57:45,480
आ जाते हैं अपने अपने धर्म के पालन पर है ना

814
00:57:45,480 --> 00:57:49,760
स्वधर्म। अब भले ही आप मुझे अर्जुन समझे या

815
00:57:49,760 --> 00:57:53,840
खुद को भीष्म या खुद को अर्जुन और मुझको भीष्म। अब हम लोग हो

816
00:57:53,840 --> 00:57:57,840
तो गए हैं आमनेसामने।

817
00:57:57,840 --> 00:58:02,000
पर मैं ये चाहता नहीं हूं कि ये सब ऐसे इस क्रम

818
00:58:02,000 --> 00:58:06,080
में आगे बढ़े। मेरा यही है कि आप

819
00:58:06,080 --> 00:58:10,160
मुझे प्रमाण दीजिए। मैं लड़ने मरने को तैयार हूं। जैसे आपने बताया आप

820
00:58:10,160 --> 00:58:14,480
नहीं है। वो शिष्य नहीं है जो अपने आप को शिष्य कहते हैं। मगर हमारे

821
00:58:14,480 --> 00:58:18,480
जानकारी के अनुसार वो गुरु द्रोही है। मगर मैं तैयार हूं। मगर मुझे ऐसे प्रमाण

822
00:58:18,480 --> 00:58:22,800
दीजिए जिसके लिए मैं लड़मड़ सकूं ना। ऐसे प्रमाण मत दीजिए जो हल्के

823
00:58:22,800 --> 00:58:27,680
हो जिससे कि बात कट सके। अकाट प्रमाण दे दीजिए मैं जाऊंगा।

824
00:58:27,680 --> 00:58:31,680
ठीक है? और थोड़ा सा कोशिश करिए कि आपकी भाषा कहीं-कहीं

825
00:58:31,680 --> 00:58:35,680
पर थोड़ी अपमानजनक जैसी दिखने लगती है। जैसे आपने अपना

826
00:58:35,680 --> 00:58:39,840
थंबनेल लगाया तो उस पर लिख दिया चेले। हमने आपके लिए जब बातें

827
00:58:39,840 --> 00:58:44,600
की थी तो बहुत इस बात का ध्यान रखा था कि आपके

828
00:58:44,600 --> 00:58:49,200
उसमें संबंध में कोई भी अनावश्यक बात ना बोली जाए। अनावश्यक आपत्तिजनक

829
00:58:49,200 --> 00:58:53,280
शब्द ना बोला जाए। इवन आज भी जो थंबनेल बना है मैं बताऊं

830
00:58:53,280 --> 00:58:57,280
तो उसमें दो बार मैंने उसको करेक्ट किया। उसमें जो टाइटल डाला जा रहा

831
00:58:57,280 --> 00:59:01,280
था उसको मैंने करेक्ट करवाया कि यह कहीं टाइटल मतलब जो भी चीज है ऐसा ना हो

832
00:59:01,280 --> 00:59:05,280
कि हम उनको ये नाम दे रहे हैं जो टाइटल लिखा जा रहा है वो हम

833
00:59:05,280 --> 00:59:09,360
नाम जो है भगवत आनंद जी को दे रहे हैं। नहीं हमने दोनों को इधर उधर किया कि भाई

834
00:59:09,360 --> 00:59:12,960
हम दोनों के बीच की बात है और विषय क्या है वो ये है तो वो

835
00:59:12,960 --> 00:59:16,960
भी करेक्ट किया तो ऐसी कुछ चीजें हैं वो शायद आप कभी जानना चाहते हैं कि

836
00:59:16,960 --> 00:59:22,000
नहीं चाहते हैं मैं नहीं जानता हूं

837
00:59:22,000 --> 00:59:27,160
अ ठीक है। अब आ जाते हैं अपने धर्म के पालन पर।

838
00:59:27,160 --> 00:59:31,600
तो वो भीष्म और अर्जुन की बात नहीं जाएगी। सही वो मेरे ख्याल से अर्जुन

839
00:59:31,600 --> 00:59:37,600
और कर्ण की बात ठीक रहेगी क्या? देख देख लीजिएगा।

840
00:59:46,440 --> 00:59:50,880
अ बात एक आ जाती है कि पहली

841
00:59:50,880 --> 00:59:55,280
बात तो उनका कहना है

842
00:59:55,280 --> 00:59:59,280
मैंने इस बारे में बात की थी। आपने एक बात कही है सीता माता वाली बट मैं रह

843
00:59:59,280 --> 01:00:03,320
सकती है कि नहीं। तो पहली बात तो ये आ जाती

844
01:00:03,320 --> 01:00:07,000
है कि

845
01:00:07,000 --> 01:00:11,120
अ ये प्रश्न गुरुदेव से किया गया था कि कोई स्त्री

846
01:00:11,120 --> 01:00:15,120
मठ में रह सकती है कि नहीं? तो आक्षेप क्या है? सबसे पहले उस पे ध्यान दीजिए।

847
01:00:15,120 --> 01:00:19,360
आक्षेप यह नहीं है कि एक अविवाहिता जो

848
01:00:19,360 --> 01:00:23,440
विदेश गमन कर चुकी है जो क्या

849
01:00:23,440 --> 01:00:28,400
कहते हैं अपने आजीव कोपार्जन के लिए योग सिखाती है

850
01:00:28,400 --> 01:00:33,040
ठीक है और क्या हो सकता है इसमें और क्या ऐड कर सकते हो और जिसकी पुरानी कुछ आपत्तिजनक

851
01:00:33,040 --> 01:00:37,040
फोटो ये भी जोड़ देते हैं और आपके अनुसार वो जो लिप टू लिपो वाला

852
01:00:37,040 --> 01:00:41,040
जो वक्तव्य है वह भी अच्छा नहीं है उसको चेंज कर सकते हैं आप लिप

853
01:00:41,040 --> 01:00:45,200
टू लिप वाला भी ठीक नहीं है तो यह

854
01:00:45,200 --> 01:00:49,440
तो आक्षेप यह नहीं था कि ऐसी ऐसी ऐसी ऐसी स्त्री

855
01:00:49,440 --> 01:00:53,520
जो है मठ में रह सकती है कि नहीं रह सकती। आक्षेप ये

856
01:00:53,520 --> 01:00:57,600
था कि स्त्री मठ में रह सकती है कि नहीं? उसका जवाब निकल दिया था कि गुरुदेव

857
01:00:57,600 --> 01:01:01,840
ने सीता माता का उदाहरण दिया तपाक से। ठीक है? दूसरी बात यह आती

858
01:01:01,840 --> 01:01:06,000
है कि कैसी कैसी रह सकती है। अब जैसे सीता माता जैसी

859
01:01:06,000 --> 01:01:10,160
अब जैसे मान लीजिए किसी भी स्त्री को हम जब सीता माता के उदाहरण

860
01:01:10,160 --> 01:01:14,560
देते हुए उस नियम सिद्धांत का प्रतिपादन करेंगे

861
01:01:14,560 --> 01:01:18,640
तो उसकी कोई ना कोई चीज तो ऐसी होगी जो सीता माता जैसी नहीं होगी। तो हम कह

862
01:01:18,640 --> 01:01:22,880
देंगे कि भैया सीता माता तो क्या

863
01:01:22,880 --> 01:01:27,120
कहते हैं? राम के द्वारा हटाई गई थी। अपने पति के द्वारा हटाई गई थी।

864
01:01:27,120 --> 01:01:31,120
मगर यह स्त्री थोड़ी ना हटाई गई है। सीता माता ने तो फलाने कलर की साड़ी पहनी थी।

865
01:01:31,120 --> 01:01:35,360
इसने थोड़ी है वो साड़ी पहनी है। सिद्धांत यह है कि पिता

866
01:01:35,360 --> 01:01:39,600
पति भाई के बिना कोई स्त्री आश्रम में रह सकती है कि नहीं? तो वो रही थी सीता

867
01:01:39,600 --> 01:01:43,760
माता। ये मैंने नहीं कहा है। मैं तो जिज्ञासु वश पूछने गया गुरुदेव से। गुरुदेव

868
01:01:43,760 --> 01:01:48,080
ने दिया और ऐसा सिद्धांत देते हैं गुरुदेव जो अकाट्य हो। इसीलिए

869
01:01:48,080 --> 01:01:52,240
वो जगतुगुरु है। वो मिली मिलाई बातें नहीं बोलते। तो उन्होंने वही

870
01:01:52,240 --> 01:01:56,320
सिद्धांत दिया कि सीता माता रही तो उन्होंने कहा कि जो व्यभचारी ना हो वो रह

871
01:01:56,320 --> 01:02:00,640
सकती ये उनका सिद्धांत है। यह उन्होंने बोला जो व्यभचारी ना हो किसने बोला?

872
01:02:00,640 --> 01:02:04,840
परंपरा प्राप्त जगतगुरु शंकराचार्य ने। ठीक

873
01:02:04,840 --> 01:02:08,880
है? कि जो व्यभचारी ना हो वो

874
01:02:08,880 --> 01:02:12,880
रह सकती है। तो अगर आपको यह

875
01:02:12,880 --> 01:02:17,200
दावा करना है कि मठ में स्त्री नहीं रह सकती है। विजयश्री जैसी।

876
01:02:17,200 --> 01:02:21,520
अगर शंकराचार्य जी को आप मानते हैं कि वह जगत गुरु शंकराचार्य हैं

877
01:02:21,520 --> 01:02:25,520
तो आपको विजय श्री कोचारी सिद्ध करना होगा। ठीक है? और अगर

878
01:02:25,520 --> 01:02:29,680
यह कह देंगे कि सीता माता से तो ये चीज नहीं मिलती है। सीता माता से तो वो चीज नहीं मिलती

879
01:02:29,680 --> 01:02:33,680
तो वस्तुनिष्ठ चीजें फिर तो हम सीता माता का उदाहरण कहीं ले ही नहीं सकते। फिर तो हम

880
01:02:33,680 --> 01:02:37,760
किसी का भी उदाहरण कहीं भी नहीं ले सकते। कोई ना कोई चीज तो अलग हो ही जाएगी

881
01:02:37,760 --> 01:02:42,240
ना। तो फिर ये कैसे तय होगा कि कौन सी स्त्री रह सकती है और कौन सी स्त्री

882
01:02:42,240 --> 01:02:46,320
नहीं रह सकती। तो इस संबंध में आपने अपने वीडियो में अकाट्य बात नहीं बोली।

883
01:02:46,320 --> 01:02:50,400
गुरुदेव ने अपने वक्तव्य में अकाट्य बात बोली हम सबके

884
01:02:50,400 --> 01:02:54,480
गुरु है आपके भी है बोल सकते हैं ऐसी चीजें जो हम नहीं जानते हम नहीं बोलते तो

885
01:02:54,480 --> 01:02:58,480
गुरुदेव ने बोला जो व्यभचारी ना हो फिर उसमें उन्होंने ये नहीं बोला

886
01:02:58,480 --> 01:02:58,980
वो अपने

887
01:02:58,880 --> 01:03:03,280
पति द्वारा निष्कासित निष्कासित की गई हो ये सब नहीं बोला उन्होंने अकाट सिद्धांत

888
01:03:03,280 --> 01:03:07,720
दिया वस्तुनिष्ठता पे नहीं गए जो व्यभचारी ना हो वो रह सकती

889
01:03:07,720 --> 01:03:11,760
है तो यह निर्णय कौन करेगा कोई स्त्री विभचारी है

890
01:03:11,760 --> 01:03:15,920
कि नहीं आप करिए सिद्ध ठीक है

891
01:03:15,920 --> 01:03:19,960
दूसरी बात आपने पता नहीं कल का वो वीडियो देखा कि नहीं

892
01:03:19,960 --> 01:03:24,320
देखा। हमने उसमें एक चीज और बताई है कि विजय

893
01:03:24,320 --> 01:03:28,800
श्री मठ में नहीं रह रही हैं। जैसे अन्य 2000

894
01:03:28,800 --> 01:03:33,200
लोग कुंभ में जाकर के वास करते हैं कल्पवास में

895
01:03:33,200 --> 01:03:37,680
रुके थे वहां पर गुरुदेव के शिविर में बहुत सारे लोग तरह-तरह के लोग

896
01:03:37,680 --> 01:03:42,160
ठीक है। दुबई से आने वाले लोग दुबई से आए हुए वो लोग भी उस उनके

897
01:03:42,160 --> 01:03:46,520
वहां जो उनका प्रवास था गुरुदेव का वहां पर रुके थे उनके शिविर

898
01:03:46,520 --> 01:03:50,720
में तो और उनके साथ उनकी वो भी थी

899
01:03:50,720 --> 01:03:54,880
हर और अभी भी मैं आपसे आप कहोगे तो मैं उनको लाइव ले लूंगा एक दो दिन में रुके

900
01:03:54,880 --> 01:03:58,960
थे दुबई से आने वाले है ना तो बहुत

901
01:03:58,960 --> 01:04:03,200
सारे लोग रुके थे उनमें से एक ये विजय श्री

902
01:04:03,200 --> 01:04:07,200
भी थी वो मठ में रहती नहीं है ये बात हमने कल बताई है मुझे मालूम है

903
01:04:07,200 --> 01:04:11,280
आपने पूरा वीडियो नहीं देखा है बस मैं यही निवेदन है कि पूरा पूरा पूरी जानकारी

904
01:04:11,280 --> 01:04:14,320
करिए और अकाट्य तत्वों के साथ अपना वक्तव्य

905
01:04:14,320 --> 01:04:18,640
निर्गत करिए और मैं तो कहूंगा कि मत करिए। ये हमारी

906
01:04:18,640 --> 01:04:22,640
और जो वो जो गुरु निंदक वो जो गुरुद्रोही है उनके बीच की

907
01:04:22,640 --> 01:04:26,720
बातें हैं। है ना? आप इसमें मत पढ़िए। दूर रहिए।

908
01:04:26,720 --> 01:04:31,040
और जो आपका जो मुख्य कार्य है पाखंड के खंडन का उसमें

909
01:04:31,040 --> 01:04:35,120
आगे बढ़िए। हम लोग उस मत में जाकर के एक

910
01:04:35,120 --> 01:04:39,360
मत हैं तो उसमें आप आगे बढ़िए। फिर भी अगर

911
01:04:39,360 --> 01:04:43,360
करेंगे तो धर्म जैसे आपका धर्म है यदि आपको आपका धर्म लगता

912
01:04:43,360 --> 01:04:48,360
है तो फिर मुझे भी अपना धर्म निभाना पड़ेगा। है ना?

913
01:04:48,360 --> 01:04:52,560
अ तो क्या है कि विजय श्री

914
01:04:52,560 --> 01:04:56,640
मठ में रहती नहीं है। सवाल ये है कि एक स्त्री मठ में रह क्यों रही है? उस

915
01:04:56,640 --> 01:05:00,640
संबंध में गुरुदेव ने बता दिया कि यदि वैभचारी नहीं है तो रह सकती है। आपने नहीं

916
01:05:00,640 --> 01:05:04,880
बताया कि कौन रह सकती है, कौन नहीं रह सकती है। ठीक है? सीता माता के उदाहरण

917
01:05:04,880 --> 01:05:09,320
और दूसरी बात यह है कि विजय श्री मठ में रह ही नहीं रही

918
01:05:09,320 --> 01:05:13,440
है। आज इस समय भी विजय श्री ऋषिकेश में है। वो क्यों नहीं

919
01:05:13,440 --> 01:05:17,520
रह रही मठ में? मठ में रहने के लिए उनका मठ में रहना सिद्ध

920
01:05:17,520 --> 01:05:21,520
करना होगा ना। तो वो सिद्ध करिए ना। कहीं पे कोई आयोजन हुआ उस समय वो

921
01:05:21,520 --> 01:05:25,680
गई। हां इतना है कि जब वह जाती है तो वहां पर सक्रिय रहती

922
01:05:25,680 --> 01:05:30,240
है। जैसे मैं जाता हूं तो मैं भी थोड़ा सक्रिय रहता हूं कि भाई मैं जब

923
01:05:30,240 --> 01:05:34,400
मैं क्या कहते हैं शुद्ध अवस्था में हूं तो मैंने वहां पर अगर भोजन बांटा

924
01:05:34,400 --> 01:05:38,440
जा रहा है तो मैंने भोजन बंटवा दिया जो सामान्य लोग बैठते

925
01:05:38,440 --> 01:05:42,640
हैं। हालांकि मैं स्वयं को बड़ा वो मानता हूं तो मैं दूर रख दूर

926
01:05:42,640 --> 01:05:46,720
रखता हूं थोड़ा सा अपने आप को स्वयं ही एक भाव रहता है कि ऐसा जो ज्ञान का

927
01:05:46,720 --> 01:05:50,720
पुंज है, शक्ति का पुंज है, शुद्धता का पुंज है, मैं थोड़ा उससे दूर रहूं। तो

928
01:05:50,720 --> 01:05:54,720
मैं थोड़ा दूर रहता हूं और सामान्य जो बिल्कुल चीजें कर सकता हूं वो

929
01:05:54,720 --> 01:05:58,720
करता हूं। तो जैसे मैं वहां जाकर के सक्रिय हो जाता हूं वैसे ही वो वहां

930
01:05:58,720 --> 01:06:02,720
जाकर के सक्रिय हो जाती है। मगर वो मठ में रह नहीं रही है। शी इज नॉट ए पार्ट

931
01:06:02,720 --> 01:06:07,120
ऑफ गोवर्धन मठ। शी इज ए फॉलोअर ऑफ गोवर्धन

932
01:06:07,120 --> 01:06:10,000
मठ।

933
01:06:10,000 --> 01:06:14,000
ठीक है? तो आपको आपको अगर इस चीज

934
01:06:14,000 --> 01:06:18,800
से आपत्ति है तो आपको उनका व्यभचारी होना सिद्ध करना पड़ेगा।

935
01:06:18,800 --> 01:06:22,960
आपको उनका मठ में रहना सिद्ध करना पड़ेगा। तो यह सब अकाट बातें

936
01:06:22,960 --> 01:06:27,920
नहीं है। सब बस बातें हैं। बढ़िया बढ़िया अच्छे तरीके से

937
01:06:27,920 --> 01:06:32,080
थोड़ा सा गंभीर तरीके से या क्या कहते हैं थोड़ा ऐसे तरीके से कि वो

938
01:06:32,080 --> 01:06:37,000
ज्यादा प्रभावशाली हो जाए। हो जाता है। सच के आसपास वाला

939
01:06:37,000 --> 01:06:41,080
झूठ। सच के आसपास वाला झूठ क्या होता है? कि

940
01:06:41,080 --> 01:06:45,280
हमने 50 आरोप लगाए। 50 में से दो

941
01:06:45,280 --> 01:06:49,280
के हमारे पास तीन साल पुराने चीजें हैं जो अकाट नहीं

942
01:06:49,280 --> 01:06:53,440
है। थोड़ा थोड़ा डाउट पैदा करने वाले हैं। उस पर बात हो सकती है। जांच

943
01:06:53,440 --> 01:06:58,200
का विषय मगर उनके चक्कर में हमने 48 वक्तव्य और दे

944
01:06:58,200 --> 01:07:02,480
मारे। हमारा वो व्यक्ति गया था। उसको मार पड़ी। वो जो क्षतिजमानी

945
01:07:02,480 --> 01:07:06,480
है वो पहले मठ में ही रहता था। और उसने कुछ ऐसी

946
01:07:06,480 --> 01:07:10,560
चीजें की जिसकी वजह से आज वो नहीं है वहां। और यह कोई प्रमाण

947
01:07:10,560 --> 01:07:14,560
नहीं है। आपका वक्तव्य है केवल। अरे भाई आपके

948
01:07:14,560 --> 01:07:18,560
फॉलोअर्स को आप में आस्था हो सकती है। भगवतानंद जी हमें हमारे

949
01:07:18,560 --> 01:07:22,640
गुरु में आस्था है। हमारे गुरु नहीं कह रहे हैं कि वहां किसी को मार पड़ी। आप कह

950
01:07:22,640 --> 01:07:25,040
रहे हो तो आपकी कही हुई बात कोई

951
01:07:25,040 --> 01:07:29,760
कैसे मान ले? हमको लड़ने मरने के लिए प्रमाण चाहिए।

952
01:07:29,760 --> 01:07:34,000
हम ऐसे ही जाकर के नहीं लड़ मर जाएंगे। प्रमाण चाहिए

953
01:07:34,000 --> 01:07:38,000
ठोस प्रमाण। कि जब हम वो खोले जब हम वो दिखाएं तो कोई

954
01:07:38,000 --> 01:07:42,720
उसमें चू चाचा ना कर सके।

955
01:07:42,720 --> 01:07:46,720
समझने का प्रयास करिए। ऐसी चीजों के लिए युद्ध

956
01:07:46,720 --> 01:07:51,040
होता है जो चीजें ठोस हो। और जो लोग बिना

957
01:07:51,040 --> 01:07:55,600
ठोस चीजों के लिए युद्ध करते हैं वो आप भी जानते हो क्या होंगे।

958
01:07:55,600 --> 01:07:59,680
मूर्ख ही तो कहलाएंगे। तो मैं तो वो नहीं हूं। कम से कम

959
01:07:59,680 --> 01:08:05,680
मैं स्वयं को मूर्ख नहीं समझता। ठीक है?

960
01:08:05,840 --> 01:08:09,840
अब मेरे ख्याल से सभी चीजें हो गई हैं। मैं एक बार देख लूं

961
01:08:09,840 --> 01:08:15,840
क्या-क्या मैंने देखा

962
01:08:18,120 --> 01:08:22,240
था। हां, एक वो वाली बात आ जाती है कि आपने जो

963
01:08:22,240 --> 01:08:26,240
यह वाली बात कही कि कोई कहीं से जुड़ा हुआ है। इस तरीके से हर कोई व्यक्ति जुड़ा हुआ निकल

964
01:08:26,240 --> 01:08:30,240
सकता है। हां। तो और उस चीज से हमें दूर हो

965
01:08:30,240 --> 01:08:34,400
जाना चाहिए। तो यह सब चीजें अभी देखिए थोड़े दिन पहले पूज्य राघवाचार्य

966
01:08:34,400 --> 01:08:38,840
जी महाराज के साथ हमारा जो इंटरव्यू हुआ था उसमें राघवाचार्य जी ने मलेच कहा

967
01:08:38,840 --> 01:08:43,560
था उनको क्या कहते हैं

968
01:08:43,560 --> 01:08:47,680
अ जो विदेशों से आकर के दंड सन्यास इत्यादि ले लेते हैं। जब

969
01:08:47,680 --> 01:08:52,080
उनको मलेच कहा था तो इस धनबाद

970
01:08:52,080 --> 01:08:56,240
से एक वीडियो बनाया गया और उसमें कहा गया

971
01:08:56,240 --> 01:09:00,240
कि भाई अगर मलेच्छों का फोन है तो क्यों

972
01:09:00,240 --> 01:09:04,720
यूज़ कर रहे हो? अगर मलेच्छों का द्वारा YouTube बनाया गया तो क्यों यूज़ कर रहे हो?

973
01:09:04,720 --> 01:09:08,840
तो इस तरह से तो कोई कुछ करेगा ही नहीं। ना मलेच्छ कुछ करेंगे ना हम कुछ

974
01:09:08,840 --> 01:09:13,600
करेंगे। ऐसे अगर कनेक्शन देखेंगे तो सबका कनेक्शन निकल आएगा।

975
01:09:13,600 --> 01:09:17,600
तो कनेक्शन पर हम लोग बात कर चुके हैं। यह वाली बात भी

976
01:09:17,600 --> 01:09:23,600
हो गई

977
01:09:25,800 --> 01:09:30,000
है। ये जो गुरु द्रोही है ये पता है ये वो

978
01:09:30,000 --> 01:09:34,080
लोग भी है जो आपको भी गाली देते हैं। जिन जो ये भारत ये ये

979
01:09:34,080 --> 01:09:38,160
सब जो प्रचार प्रसार प्रकल्प इत्यादि जो बिना ये जो

980
01:09:38,160 --> 01:09:42,240
बता रहे हैं ना कि गुरुदेव के ही वो है। यह गुरुदेव के द्वारा मठ के द्वारा कोई

981
01:09:42,240 --> 01:09:46,400
ऑथराइज ग्रुप नहीं है। WhatsApp ग्रुप जिस पीडीएफ के बारे में यह बताया

982
01:09:46,400 --> 01:09:50,720
गया है कि यह पीडीएफ पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्यों का एक ग्रुप है

983
01:09:50,720 --> 01:09:55,120
हिंदू राष्ट्र प्रचार प्रसार प्रकल्प वहां से निकल के आई है। तो वो कोई ऑथराइज

984
01:09:55,120 --> 01:09:59,960
ग्रुप नहीं है। किसी लड़के ने लड़कपन में अपना बनाया हुआ है

985
01:09:59,960 --> 01:10:04,080
ग्रुप। आपके नाम से भी कई ऐसी कई YouTube चैनल खुल

986
01:10:04,080 --> 01:10:08,080
गए हैं। वो सब आप देखते हो क्या? उसमें क्या निर्गत हो रहा है? आपकी ओर से

987
01:10:08,080 --> 01:10:12,160
क्या नहीं हो रहा है। तो वह कोई ऑथेंटिक ग्रुप नहीं है।

988
01:10:12,160 --> 01:10:16,240
वह लोग आपको भी गाली देते हैं।

989
01:10:16,240 --> 01:10:20,320
तो कल तक आप उनके साथ नहीं थे। आज

990
01:10:20,320 --> 01:10:24,320
आप अब आपके पास वो चीज आप एक तरीके से कमकक्षी हो गए।

991
01:10:24,320 --> 01:10:28,320
तो ये तो वही वाली बात हो गई ना कि वो बागेश्वर वाले उनके पास क्यों जा

992
01:10:28,320 --> 01:10:33,680
रहे हैं? वो क्यों उनके पास जा रहे हैं? आप भी तो अपने विरोधियों के साथ खड़े दिख रहे हो।

993
01:10:33,680 --> 01:10:37,680
जो आपका खंडन कर रहे हैं वह भी तो अपने विरोधी के साथ खड़े दिख

994
01:10:37,680 --> 01:10:40,880
रहे हैं। जिसको वो गाली दे रहे हैं सुबह शाम ये सोचने

995
01:10:40,880 --> 01:10:46,880
वाली बात है। विचारणीय है

996
01:10:49,880 --> 01:10:54,000
और तो कौन सा वक्तव्य गुरुदेव किसके बारे में कब कह रहे

997
01:10:54,000 --> 01:10:58,080
तो इसके लिए आपको फिर अगर आपको यही सिद्ध करना है कि गुरुदेव ने रिदमम

998
01:10:58,080 --> 01:11:02,400
कपूर का विजयश्री का खंडन किया तो आपको फिर गुरुदेव से स्पष्ट

999
01:11:02,400 --> 01:11:06,400
कहलवाना चाहिए जो आपने नहीं कहलवाना है और जो आपने वीडियो वगैरह दिखाया

1000
01:11:06,400 --> 01:11:10,480
वो हमने देखा हुआ है ऐसा नहीं है उसके बारे में बात भी की है तो वो अकाट चीजें नहीं

1001
01:11:10,480 --> 01:11:14,480
है अकाट सिद्ध करिए अकाट्य अकाट्य ये शब्द

1002
01:11:14,480 --> 01:11:18,480
को जो दर्शक है हमारे वो रटे वो बात

1003
01:11:18,480 --> 01:11:22,480
करें जो अकाट्य हो जो अकाट्य ना हो उन बातों को करने से

1004
01:11:22,480 --> 01:11:26,480
बचे समय व्यर्थ होता है सनातन वो है

1005
01:11:26,480 --> 01:11:31,200
जो अकाट्य है मनुवादी वो है जो अकाट्य है

1006
01:11:31,200 --> 01:11:35,280
अकाट्य बातें करिए अकाट्य मलेच्छों की जैसी यह जो

1007
01:11:35,280 --> 01:11:39,760
चीजें आप लोग पीडीएफ के द्वारा फैला रहे हो यह गुरुदेव के लिए बोल रहा हूं

1008
01:11:39,760 --> 01:11:44,120
यह जो चीजें आप फैला रहे हो आप ले आओ ना अकाट्य प्रमाण

1009
01:11:44,120 --> 01:11:50,120
भाई मैंने कहा ना चलेंगे हम आपके

1010
01:11:52,920 --> 01:11:58,040
साथ

1011
01:11:58,040 --> 01:12:02,160
हम रिसर्च थोड़ी करनी चाहिए थी। वीडियो पूरा नहीं देखा था तो जल्दी

1012
01:12:02,160 --> 01:12:07,120
से वीडियो नहीं बनाना चाहिए था।

1013
01:12:07,120 --> 01:12:11,200
थोड़ा सा वो जो लिप टू लिप वाली वो बहुत थोड़ा निम्न

1014
01:12:11,200 --> 01:12:15,440
स्तर का शब्द हो गया वो नहीं बोलना चाहिए था थोड़ा बचें ऐसा

1015
01:12:15,440 --> 01:12:20,280
करने से निवेदन पूर्वक ही कहूंगा

1016
01:12:20,280 --> 01:12:24,560
मैं क्योंकि आपका सम्मान भी है और

1017
01:12:24,560 --> 01:12:28,720
मैंने जैसा कि बताया कि इस रूप में आपके साथ आप नहीं

1018
01:12:28,720 --> 01:12:32,720
दिखना चाहता था मैं किसी को भी

1019
01:12:32,720 --> 01:12:36,880
तो गुरुदेव कहां किस किस परिपेक्ष में किससे क्या कह रहे हैं तो फिर हमें उसमें चीजें बिल्कुल

1020
01:12:36,880 --> 01:12:41,280
मीमांसा करनी चाहिए। ऐसे ही नहीं किसी कहीं का ईंट कहीं का रोणा भानुमती

1021
01:12:41,280 --> 01:12:47,280
का कुरमा जोड़ा ये सब नहीं करना

1022
01:12:49,000 --> 01:12:53,120
चाहिए। अब एक बात आती है कि कुछ लोग कहते

1023
01:12:53,120 --> 01:12:57,120
हैं कि मुझे आपसे सौहार्दपूर्ण चर्चा करनी चाहिए थी। ये मैंने

1024
01:12:57,120 --> 01:13:01,760
क्यों नहीं की? और मेरा वह जो भाव था रामपाल के विषय में आपका

1025
01:13:01,760 --> 01:13:06,640
साथ प्राप्त करने का कि मुझे एक मनुवादी ऐसा चाहिए था जो

1026
01:13:06,640 --> 01:13:10,640
थोड़ा सफक्त व्यक्तित्व वाला हो है ना जो

1027
01:13:10,640 --> 01:13:14,720
रामपाल से लड़े लोहा ले क्योंकि रामपाल का क्या है अभी वो मेरे को समय

1028
01:13:14,720 --> 01:13:18,800
नहीं मिल पा रहा है मुझे बाहर चालू करना है उधर मैं उसके केस भी

1029
01:13:18,800 --> 01:13:23,520
करने हैं मतलब केसेस की भी कुछ तैयारियां है मगर बात ये है कि

1030
01:13:23,520 --> 01:13:27,600
मैं उस समय मनुवादियों की तरफ से प्रखर होके बोलने वालों

1031
01:13:27,600 --> 01:13:32,080
मैं थोड़ा कम पड़ रहा था और मुझे चाहिए था कोई अपना मनुवादी भाई

1032
01:13:32,080 --> 01:13:36,080
तो मुझे आपकी याद आई उस समय मगर मैं आप तक अपना वो

1033
01:13:36,080 --> 01:13:40,400
भाव क्यों नहीं पहुंचा पाया इसका एक कारण है इसलिए

1034
01:13:40,400 --> 01:13:44,400
नहीं पहुंचा पाया कि कहीं क्योंकि

1035
01:13:44,400 --> 01:13:49,200
आपको लेकर के थोड़ा सा विश्वास जो है वो डामाडोल है। सीधी बात

1036
01:13:49,200 --> 01:13:53,440
वो क्यों है वो मैं बताता हूं। हालांकि थोड़ा यह विनोद पूर्ण बात

1037
01:13:53,440 --> 01:13:57,440
है, फनी है। मगर वह इसलिए है कि यदि

1038
01:13:57,440 --> 01:14:01,440
मैं आपके पास आऊं यह कहने कि आप इसमें

1039
01:14:01,440 --> 01:14:04,160
साथ निभाइए तो पता नहीं आप उसको

1040
01:14:04,160 --> 01:14:08,320
किस रूप में दूसरे दिन वीडियो बना दें। उसको

1041
01:14:08,320 --> 01:14:12,480
यह मुझे अपनी बात को रखने का, अपनी रणनीतियों को आपके साथ साझा करने

1042
01:14:12,480 --> 01:14:16,880
में भय है। और यह भय आपने बनाया।

1043
01:14:16,880 --> 01:14:21,120
यह भय आपने बनाया। क्यों बनाया? भाई

1044
01:14:21,120 --> 01:14:25,120
मैंने कोई गुप्त बात आकर आपको शेयर करी। हो सकता है कि आप उससे सहमत नहीं

1045
01:14:25,120 --> 01:14:29,200
है। वो मेरी रणनीति है। तो मुझे इस बात का भय

1046
01:14:29,200 --> 01:14:33,360
है कि अगर हम में वो बात नहीं बनी तो आप उसको अगले दिन निर्गत

1047
01:14:33,360 --> 01:14:37,360
कर देंगे। प्रचारित प्रसारित कर देंगे। उसका भय क्यों है?

1048
01:14:37,360 --> 01:14:42,480
अब वो मैं आपको बताता हूं। मैंने आपका एक वीडियो देखा था

1049
01:14:42,480 --> 01:14:46,640
जिसमें आपने बताया था कि पहले पूरी मठ

1050
01:14:46,640 --> 01:14:52,640
में जो सवाल आते थे प्रश्न आते थे सामान्य जनों के ठीक

1051
01:14:53,160 --> 01:14:57,200
है उनके प्रश्नों के जवाब आप भी देते थे एक टीम थी

1052
01:14:57,200 --> 01:15:01,440
कोई दो तीन लोगों की उसमें से एक आप भी थे और जो लोग पूरी

1053
01:15:01,440 --> 01:15:05,520
प्रश्न पूरी पूरी पीठ में अपने प्रश्न भेजते थे कि हमको

1054
01:15:05,520 --> 01:15:09,840
यह सवाल दो हमको इस सवाल का जवाब दो विधि विषय या दर्शन विषयक शास्त्र

1055
01:15:09,840 --> 01:15:14,000
के सवाल होते थे तो वह पूरी मठ में भेजे जाते थे और आपका उस वीडियो में कहना

1056
01:15:14,000 --> 01:15:18,160
था कि मैं भी वो जो लोगों के सवाल आते थे उनके जवाब मैं भी देता

1057
01:15:18,160 --> 01:15:23,120
था। ठीक है? फिर आपने कहा

1058
01:15:23,120 --> 01:15:27,200
कि लोगों को यह पता नहीं था कि उनके सवालों के जवाब कौन

1059
01:15:27,200 --> 01:15:31,200
दे रहा है। लोगों को लगता था कि उनके सवालों के जवाब शंकराचार्य दे

1060
01:15:31,200 --> 01:15:35,680
रहे हैं। ये आपका कहना था उस वीडियो में। ठीक?

1061
01:15:35,680 --> 01:15:39,680
तो अब क्या हुआ? कि जिस समय आपका पूरी

1062
01:15:39,680 --> 01:15:43,840
मठ के साथ अपनत्व था, एकत्व था तो आपने उसके राज

1063
01:15:43,840 --> 01:15:48,160
को राज रखा आपके अनुसार और आज आप ही

1064
01:15:48,160 --> 01:15:52,240
जब आपकी वैमनसता है, कुछ दूरियां है, बात पटरी नहीं खा रही है

1065
01:15:52,240 --> 01:15:56,240
तो वो जो आपने साथ में मिलकर मित्रता पूर्ण जो चीजें की है आप उनको खोल

1066
01:15:56,240 --> 01:16:01,280
रहे हैं। यह वह वाली बात हो गई जैसे

1067
01:16:01,280 --> 01:16:05,840
दो लोगों ने मिलकर के कोई खुरापात की मान लीजिए

1068
01:16:05,840 --> 01:16:08,240
दो बच्चों ने मिलकर के कोई खुरापात की

1069
01:16:08,240 --> 01:16:12,560
और उसके बाद जब एक लड़का मतलब

1070
01:16:12,560 --> 01:16:16,720
किसी बात से आपस में लड़ाई हो गई तो उन दोनों में से एक जाके पिता को शिकायत

1071
01:16:16,720 --> 01:16:20,720
कर रहा है या किसी को भी शिकायत कर रहा है कि देखो देखो वो मुझे मेरा हिस्सा

1072
01:16:20,720 --> 01:16:24,880
नहीं दे रहा है जुरापात की कुछ मिठाई ले ली या कुछ भी करी

1073
01:16:24,880 --> 01:16:29,040
तो यहां इसकी वजह से आपका जो व्यक्तित्व है मेरे मन में यह

1074
01:16:29,040 --> 01:16:33,360
बना कि मैं आपसे कोई रणनीति वाली बात करूं तो कैसे करूं?

1075
01:16:33,360 --> 01:16:37,440
मैं आपके पास जाऊं किसी और उद्देश्य से और आप उसको दूसरे दिन चर्च

1076
01:16:37,440 --> 01:16:41,440
से वीडियो बना दें कि देखो देखो या तो आपको मेरी बात समझ में आ जाए तो तो ठीक

1077
01:16:41,440 --> 01:16:45,600
है। अगर समर्थन नहीं है तो तुरंत आप उस बात का वीडियो बना देंगे।

1078
01:16:45,600 --> 01:16:49,760
आप बोल देंगे ऐसा ऐसा है वैसा वैसा है। तो यह कारण रहा

1079
01:16:49,760 --> 01:16:54,160
कि मैं आप तक अपने भाव को पहुंचा नहीं पाया। और यह भाव मुझे आपने दिया

1080
01:16:54,160 --> 01:16:58,160
क्योंकि आपने ऐसा किया था कि आपने

1081
01:16:58,160 --> 01:17:02,400
जो चीजें अच्छा अगर वह कार्य गलत था पूरी मठ से सवाल पूछे

1082
01:17:02,400 --> 01:17:07,200
जाते थे। ठीक है? पूरी मठ से

1083
01:17:07,200 --> 01:17:11,200
सवाल पूछे जाते थे और आपने कहा कि भैया मैं भी उन सवालों का जवाब देता

1084
01:17:11,200 --> 01:17:15,520
था। मगर लोगों को मैंने कभी उस समय आपने उस राज को राज रखा। आपने

1085
01:17:15,520 --> 01:17:19,920
कभी नहीं बताया कि ये जो जवाब है वो शंकराचार्य जी नहीं दे रहे। ये मैं दे रहा हूं।

1086
01:17:19,920 --> 01:17:23,280
हो सकता है मेरी जानकारी में कुछ अधूरापन हो या आक्षेप नहीं है।

1087
01:17:23,280 --> 01:17:27,280
एक अपना मनोभाव है वो प्रकट कर रहा हूं। मैंने बहुत समय पहले वो वीडियो

1088
01:17:27,280 --> 01:17:31,280
देखा था। अगर कुछ कहीं इसमें यह जो चीजें

1089
01:17:31,280 --> 01:17:35,360
हैं तो आप उसमें संशोधित करके बता सकते हैं। वैसे

1090
01:17:35,360 --> 01:17:41,360
मैं नहीं चाहूंगा कि उत्तर प्रत की ये श्रृंखला आगे चले। चलिए ठीक

1091
01:17:42,440 --> 01:17:46,560
है। तो कहने का मतलब यह है कि अगर वो कार्य

1092
01:17:46,560 --> 01:17:50,560
गलत था तो आपने उस समय लोगों से उसे क्यों छुपाया? और

1093
01:17:50,560 --> 01:17:54,640
यदि वह कार्य छुपाना सही था तो आज आप उसको

1094
01:17:54,640 --> 01:17:58,960
लोगों को क्यों बना रहे क्योंकि आपकी बनी नहीं इसलिए

1095
01:17:58,960 --> 01:18:02,960
मैं अपनी चीजें आप तक नहीं पहुंचा पाया। तो यह सब

1096
01:18:02,960 --> 01:18:07,680
चीजें थी और रही बात वह योग सिखाने वाली तो

1097
01:18:07,680 --> 01:18:11,760
वह एक व्यायाम प्रशिक्षिका है जिसको आप योगा

1098
01:18:11,760 --> 01:18:15,840
प्रशिक्षिका कह सकते हैं और इसकी अनुमति अपने आजीवोजन

1099
01:18:15,840 --> 01:18:19,840
के निमित्त उन्होंने गुरुदेव से ली है और हो सकता है आने वाले

1100
01:18:19,840 --> 01:18:24,160
कुछ दिनों में हम गुरुदेव के पास जाएं और गुरुदेव से एक साक्षात्कार

1101
01:18:24,160 --> 01:18:28,160
या उनके वक्तव्य को प्राप्त कर ले उससे आपका ये जो

1102
01:18:28,160 --> 01:18:32,240
चीजें हैं शायद आपको संतोष मिल जाए तो ये सारी सारी चीजें थी।

1103
01:18:32,240 --> 01:18:36,480
मैं कुछ अगर सारे आपके विषय

1104
01:18:36,480 --> 01:18:38,440
नहीं लिए हैं

1105
01:18:38,440 --> 01:18:42,960
तो और मैं वैसे इस श्रंखला को नहीं बढ़ाना चाहता हूं।

1106
01:18:42,960 --> 01:18:47,040
मुझे लगता है कि एक मनुवाद की सेना के रूप में हमें आगे

1107
01:18:47,040 --> 01:18:51,720
आना चाहिए और उस रूप में हमें समाज को दिखना चाहिए ना कि एक दूसरे

1108
01:18:51,720 --> 01:18:55,840
को उत्तर प्रतितर देते हुए और कुछ किसी अंशों

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01:18:55,840 --> 01:19:00,000
में जाकर के अगर वैचारिक मतभेद हैं तो वह सौहार्दपूर्ण

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01:19:00,000 --> 01:19:04,000
चर्चा से निपट सकते हैं। उसके लिए सार्वजनिक मंचों पर आकर

1111
01:19:04,000 --> 01:19:08,160
के भिड़ने की आवश्यकता नहीं है। सम्मान के साथ मैं

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01:19:08,160 --> 01:19:12,160
इस लाइव को विराम देता हूं। जय श्री राम।
