1
00:00:00,320 --> 00:00:04,720
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी

2
00:00:04,720 --> 00:00:08,440
लोग कुशल पूर्वक

3
00:00:08,440 --> 00:00:12,840
होंगे। छोटे भाइयों को ढेर सारा प्रेम,

4
00:00:12,840 --> 00:00:18,440
स्नेह और शुभकामनाएं,

5
00:00:18,440 --> 00:00:23,240
आशीर्वाद। बड़ों को सादर

6
00:00:23,240 --> 00:00:27,360
प्रणाम और जो समकक्ष है उन्हें भी

7
00:00:27,360 --> 00:00:33,360
यथोचित अभिवादन।

8
00:00:34,280 --> 00:00:38,920
तो हमारे

9
00:00:38,920 --> 00:00:44,280
साथ बात करने आने वाले हैं। आज

10
00:00:44,280 --> 00:00:48,400
एक सज्जन है और कहीं

11
00:00:48,400 --> 00:00:52,920
ना कहीं वो दयानंद जी की जो शिक्षाएं हैं, फिलॉसफीस

12
00:00:52,920 --> 00:00:57,320
हैं उनको जो है वरीयता देते हैं।

13
00:00:57,320 --> 00:01:01,400
तो आज हम उनसे बात करने वाले हैं उन विषयों

14
00:01:01,400 --> 00:01:05,520
में। काफी दिन से हमारे बीच में

15
00:01:05,520 --> 00:01:09,600
Instagram के माध्यम से बातचीत

16
00:01:09,600 --> 00:01:13,600
हो रही थी। बातचीत नहीं हो रही थी। मतलब

17
00:01:13,600 --> 00:01:17,600
वो अपने मैसेजेस भेजते रहते थे। तो कभी-कभी इधर से मैं भी कुछ रिप्लाई देता था

18
00:01:17,600 --> 00:01:21,840
इसी संबंध में कि यहां कब आ रहे हो।

19
00:01:21,840 --> 00:01:26,880
तो देखते हैं आज शायद वह आएंगे। अभी तक नहीं जुड़े हैं।

20
00:01:26,880 --> 00:01:31,200
तब तक हम कुछ क्वेश्चन ले सकते हैं। एक

21
00:01:31,200 --> 00:01:35,680
भाई साहब है जो अभी कुछ देर पहले तक क्वेश्चन कर रहे थे

22
00:01:35,680 --> 00:01:39,680
कि क्या ईश्वर अपने जैसा दूसरा ईश्वर बना सकता

23
00:01:39,680 --> 00:01:42,400
है?

24
00:01:42,400 --> 00:01:46,560
तो अगर हम प्रपंच रूपी संसार की बात करें, यहां की बात करें तो हां

25
00:01:46,560 --> 00:01:50,560
ईश्वर कुछ भी कर सकता है। मगर

26
00:01:50,560 --> 00:01:55,200
हम कहें कि वास्तविक जो परमार्थ है उसमें भी क्या ईश्वर

27
00:01:55,200 --> 00:02:00,000
अपने जैसा दूसरा ईश्वर बना सकता है? तो नहीं।

28
00:02:00,000 --> 00:02:04,000
ये संभव नहीं है। क्या ईश्वर वेद धर्म पर चलने वाले के साथ अन्याय

29
00:02:04,000 --> 00:02:08,240
कर सकता है? नहीं। कहां? परमार्थ में। जो यह व्यवहारिक

30
00:02:08,240 --> 00:02:12,400
सत्य है, जो अविद्या रूपी संसार है, इसमें वह कासता है।

31
00:02:12,400 --> 00:02:16,760
इसमें वह किसी ऐसे रूप में आएगा। यह सब जितने भी अन्याय हो रहे

32
00:02:16,760 --> 00:02:21,200
हैं, ये सब भी ईश्वर की सत्ता के बाहर तो नहीं है ना।

33
00:02:21,200 --> 00:02:25,200
तो हां यहां वो कर सकता है। मगर यहां जो वास्तविक जो परमार्थ है

34
00:02:25,200 --> 00:02:29,200
उसमें नहीं कर सकता है। अब बात आती है कि परमार्थ में तो वो नहीं कर

35
00:02:29,200 --> 00:02:34,560
सकता तो फिर वो सर्वशक्तिमान कैसे हुआ?

36
00:02:34,560 --> 00:02:39,520
तो परमार्थ में यदि वह नहीं कर सकता तो सर्वशक्तिमान कैसे हुआ?

37
00:02:39,520 --> 00:02:43,680
तो परमार्थ में प्राप्त जानकारी के आधार पर आप ईश्वर

38
00:02:43,680 --> 00:02:47,920
को नकार नहीं सकते। व्यवहार में प्राप्त

39
00:02:47,920 --> 00:02:52,320
जानकारी के आधार पर आप ईश्वर को नकार सकते हैं। क्योंकि

40
00:02:52,320 --> 00:02:56,400
व्यवहार की जो जानकारी है वो आपको डायरेक्ट आपकी चीजों

41
00:02:56,400 --> 00:03:00,640
के द्वारा प्राप्त हो रही है। मगर परमार्थ की जो दुनिया

42
00:03:00,640 --> 00:03:05,520
है उसको आप जान ही तभी रहे हो जब आपने ईश्वर को ईश्वर मान लिया।

43
00:03:05,520 --> 00:03:10,520
ईश्वरीय सत्ता को स्वीकार किए बिना पारमार्थिक सत्ता का

44
00:03:10,520 --> 00:03:15,280
आपके समक्ष कोई अस्तित्व नहीं है। जब तक आपने

45
00:03:15,280 --> 00:03:19,920
ईश्वरीय आध्यात्मिक सत्ता को स्वीकार नहीं किया है तब तक परमार्थ है ही नहीं।

46
00:03:19,920 --> 00:03:24,080
तो होगा क्या? यदि आपने यह कह दिया कि नहीं परमार्थ के परमार्थ में

47
00:03:24,080 --> 00:03:28,080
ईश्वर फलाने फलाने कार्य नहीं कर सकता। इसलिए मैं उसको नहीं मानता।

48
00:03:28,080 --> 00:03:32,640
तो जैसे ही आपने कहा नहीं मानते तो वैसे ही परमार्थिक

49
00:03:32,640 --> 00:03:36,640
जो दुनिया है उसका अस्तित्व मिट गया और जैसे ही वह मिट

50
00:03:36,640 --> 00:03:40,640
गया तो फिर से आपके पास परमार्थिक सत्ता ना का

51
00:03:40,640 --> 00:03:44,880
बोध ना होने के कारण परमार्थिक सत्ता का अस्तित्व ना होने

52
00:03:44,880 --> 00:03:49,360
के कारण वो जो है

53
00:03:49,360 --> 00:03:50,080
परमार्थिक

54
00:03:50,080 --> 00:03:54,520
सत्ता का अस्तित्व ना होने के कारण वो

55
00:03:54,520 --> 00:03:59,360
अह आप यह नहीं कह सकते कि परमार्थ में क्योंकि वो बाधित हुआ था। इसलिए

56
00:03:59,360 --> 00:04:03,360
मैं ईश्वर को नहीं मानता क्योंकि ईश्वर को मानने के कारण आप परमार्थ को जान

57
00:04:03,360 --> 00:04:07,360
पाए थे। है ना? अगर आप ईश्वर को नहीं मानते तो

58
00:04:07,360 --> 00:04:11,680
आप परमार्थ को जानते ही नहीं है। ये भाई साहब कह रहे हैं क्या ईश्वर ऐसा परमत

59
00:04:11,680 --> 00:04:15,680
बना सकता है जिसे वह खुद नहीं बना सकता। इन सब बातों का जवाब दिया है

60
00:04:15,680 --> 00:04:21,560
हमने। अर्श गुरुकुल खेड़ा वाले भाई

61
00:04:21,560 --> 00:04:26,240
साहब व्यवहार में ईश्वर कुछ भी कर सकता है

62
00:04:26,240 --> 00:04:30,800
और दिक्कत तब आती है जब आप व्यवहार में ही ईश्वर को बाधित कर देते हो

63
00:04:30,800 --> 00:04:34,960
ये आर्य समाज इस जितना भी सनातन

64
00:04:34,960 --> 00:04:38,960
विरुद्ध तंत्र है इस्लाम क्रिश्चियनिटी ये सब

65
00:04:38,960 --> 00:04:42,960
ये सब संसार में भी ये जो प्रपंच रूपी संसार है विद्या रूपी संसार

66
00:04:42,960 --> 00:04:47,120
है जिसके अंदर सारी चीजें नकली हो रही है।

67
00:04:47,120 --> 00:04:51,200
उस नकलीपन में भी ईश्वर को आप बाधित कर देते हैं। यह वाला नकली काम

68
00:04:51,200 --> 00:04:55,440
नहीं कर सकता। अजीब बात है। तो व्यवहार

69
00:04:55,440 --> 00:04:59,680
में ईश्वर को आप बाधित कर देते हैं। और आपने जैसा कि कहा कि पर्वत

70
00:04:59,680 --> 00:05:04,120
बना सकता है कि नहीं? तो पर्वत जैसी स्थितियां मैं आपको बता देता हूं।

71
00:05:04,120 --> 00:05:05,120
जैसे

72
00:05:05,120 --> 00:05:09,160
विष्णु भगवान के कान के मैल से मधुकैट उत्पन्न होते

73
00:05:09,160 --> 00:05:14,400
हैं। मगर विष्णु भगवान स्वयं ही उनका नाश नहीं कर पाते।

74
00:05:14,400 --> 00:05:18,560
तो नहीं असमर्थता आ गई ना यहां पर नहीं कर पाए

75
00:05:18,560 --> 00:05:22,560
वैसे ही तो स्थिति हो गई उनहीं से उत्पन्न मगर नहीं कर पाए मगर दुर्गा

76
00:05:22,560 --> 00:05:26,800
माता के रूप में कर दिया तो फिर इसका मतलब

77
00:05:26,800 --> 00:05:30,880
क्या है कि ईश्वर ने ऐसी कोई चीज

78
00:05:30,880 --> 00:05:34,960
बनाई जिसको उठा पाने में या जिसको कुछ कर पाने में वह

79
00:05:34,960 --> 00:05:38,960
खुद बाधित हो गया नहीं कर पाया मगर इसके बावजूद

80
00:05:38,960 --> 00:05:42,960
भी ईश्वर दूसरे स्वरूप में आकर के उसको नष्ट कर सकता है अब आप कहोगे कि

81
00:05:42,960 --> 00:05:47,400
नहीं ऐसा पत्थर बनना चाहिए जिसके बाद ईश्वर

82
00:05:47,400 --> 00:05:51,440
का जिसको जिसके सामने असमर्थ सिद्ध होने

83
00:05:51,440 --> 00:05:55,440
के बाद ईश्वर का कोई दूसरा अस्तित्व शेष ना रह जाए। यानी

84
00:05:55,440 --> 00:05:59,680
कि आपने माना कि इसके अलावा भी कुछ

85
00:05:59,680 --> 00:06:03,760
उसका अस्तित्व हो सकता है जिसका नाम ईश्वर है। मतलब जो हम

86
00:06:03,760 --> 00:06:07,760
देख रहे हैं जो हम अपनी भौतिक इंद्रियों से उसे देख पा रहे हैं उसके अलावा

87
00:06:07,760 --> 00:06:11,840
भी उसका कोई स्वरूप हो सकता है। उसका नाम ईश्वर है। आपने मान लिया

88
00:06:11,840 --> 00:06:15,920
उसको ईश्वर ईश्वर को ईश्वर मान लिया। जब आपने ईश्वर को ईश्वर मान लिया तो

89
00:06:15,920 --> 00:06:20,160
फिर आप फिर यह क्लेम नहीं कर सकते कि दूसरा रूप रह नहीं

90
00:06:20,160 --> 00:06:24,240
वह ऐसा नहीं कर सकता जिसके कारण से हम उसे नकार रहे हैं। तो

91
00:06:24,240 --> 00:06:28,480
ईश्वर का वही परमार्थ वाली बात यहां पर भी आ जाएगी।

92
00:06:28,480 --> 00:06:33,280
तो ईश्वर का सब कुछ कर सकने वाला व्यवहार में होना आवश्यक है।

93
00:06:33,280 --> 00:06:37,760
प्रॉब्लम तब आती है जब आप व्यवहार में भी ईश्वर को बाधित कर देते हैं।

94
00:06:37,760 --> 00:06:40,720
क्योंकि करना

95
00:06:40,720 --> 00:06:44,880
ईश्वर क्या कर सकता है? क्या नहीं कर सकता यह सब जानने का विषय तब

96
00:06:44,880 --> 00:06:48,880
तक है जब तक व्यक्ति मुक्त नहीं है। उसको ईश्वर को जानना है। फिर ईश्वर को प्राप्त

97
00:06:48,880 --> 00:06:52,960
करना है। प्राप्त होने वाली दुनिया में ईश्वर क्या कर सकता है? क्या नहीं कर सकता है?

98
00:06:52,960 --> 00:06:57,320
वहां से कोई मतलब नहीं है। जब व्यक्ति मुक्त हो गया तभी तो वहां पहुंच रहा

99
00:06:57,320 --> 00:07:01,760
है। तो यहां पर उसको ईश्वर को जानना आवश्यक है। उसकी सर्वशक्तिमत्ता

100
00:07:01,760 --> 00:07:05,840
को जानना आवश्यक है। तो यहां के जो ये

101
00:07:05,840 --> 00:07:09,920
जो संसार है इसमें ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं? बात यह है

102
00:07:09,920 --> 00:07:13,920
तो हां वह ऐसा पत्थर बना सकता है जिसको स्वयं ना उठा सके और

103
00:07:13,920 --> 00:07:18,000
फिर दूसरा रूप लेकर के उसको उठा भी सकता है। तो उसने ऐसा पत्थर बना दिया

104
00:07:18,000 --> 00:07:22,400
जिसको उठाने में वह असमर्थ था और समर्थ भी था अगली बार।

105
00:07:22,400 --> 00:07:26,560
तो जब वो असमर्थ होगा तो वो आपकी जो पंक्ति है वो क्लियर हो जाएगी।

106
00:07:26,560 --> 00:07:30,640
क्या वो ऐसा पत्थर बना सकता है जिसको वो स्वयं नहीं उठा पाया? मगर जब आप ईश्वर का

107
00:07:30,640 --> 00:07:34,960
खंडन करने चलोगे तो ईश्वर दूसरे रूप में आकर के उसको उठा देगा।

108
00:07:34,960 --> 00:07:35,460
तो

109
00:07:35,280 --> 00:07:39,600
क्वेश्चन आपका यह होना चाहिए कि क्या ईश्वर मर सकता है उस पत्थर को ना उठाने

110
00:07:39,600 --> 00:07:43,760
के बाद उसका अस्तित्व शेष ना रह जाए। उससे भिन्न कोई अस्तित्व ना हो।

111
00:07:43,760 --> 00:07:47,840
तो क्वेश्चन यही हो गया। आपने मान लिया कि जो दिखाई देने

112
00:07:47,840 --> 00:07:51,920
वाली चीज है उससे इत भी एंटिटी एक्सिस्ट करती है। यानी आपने ईश्वर

113
00:07:51,920 --> 00:07:57,440
के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया। तो यह ईश्वर का सब कुछ कर पाने वाला होना

114
00:07:57,440 --> 00:08:01,440
ईश्वर का अस्तित्व स्वीकार कराने के लिए है। अगर आप ईश्वर की

115
00:08:01,440 --> 00:08:05,440
सर्वशक्तिमत्ता को सिद्ध नहीं कराओगे तो वो ईश्वर को नकार दिया

116
00:08:05,440 --> 00:08:09,000
जाएगा।

117
00:08:09,000 --> 00:08:13,200
सिंपल वो एक वीडियो पड़ा है सनातन सिद्धांत में वहां आप जाकर के

118
00:08:13,200 --> 00:08:19,200
देख लीजिएगा।

119
00:08:19,600 --> 00:08:24,200
दूसरी बात एक और है कि ईश्वर पत्थर नहीं उठा

120
00:08:24,200 --> 00:08:28,320
पाया। इसको भी आपको देखना चाहिए। मगर उसको असमर्थ सिद्ध

121
00:08:28,320 --> 00:08:32,400
किसने किया? किसी दूसरे ने किया। नहीं

122
00:08:32,400 --> 00:08:36,200
उसी ने किया।

123
00:08:36,200 --> 00:08:40,320
जिसने जो खुद ईश्वर है उसी ने अपने आप को बाध्य किया। तो कोई और

124
00:08:40,320 --> 00:08:44,320
दूसरे से तो वो नहीं हारा ना। ठीक है? यह सब चीजें

125
00:08:44,320 --> 00:08:48,400
आपको सोचनी चाहिए। और तब यह सब उतर के लाने चाहिए।

126
00:08:48,400 --> 00:08:54,400
हम लोग इन सब बातों पर चर्चाएं कर चुके

127
00:08:56,840 --> 00:09:01,160
हैं। और इसमें एक और फैक्ट है कि

128
00:09:01,160 --> 00:09:05,200
आप कार्य कर पाने की बात करें। जब आप यह

129
00:09:05,200 --> 00:09:09,360
कहते हैं कि क्या ईश्वर मर सकता है? वास्तविकता में व्यवहार में तो ईश्वर मर

130
00:09:09,360 --> 00:09:13,920
सकता है। आएगा अपने शरीर का नाश करके दिखा देगा। जो आप जिसको आप

131
00:09:13,920 --> 00:09:18,200
वो मानते हैं। क्या कहते

132
00:09:18,200 --> 00:09:23,400
हैं? जिसको आप मरना मानते हैं, नाश होना मानते हैं, करके दिखा

133
00:09:23,400 --> 00:09:27,520
देगा। प्रॉब्लम यह है कि ये जो जो लोग ईश्वर को बाधित करते

134
00:09:27,520 --> 00:09:31,520
हैं ना ये अपने ईश्वर को सिद्धि नहीं कर सकते हैं। ये

135
00:09:31,520 --> 00:09:35,520
क्या करते हैं? परसा परसाई जो थाली है उसमें अपनी रोटियां सेकते हैं। ब्रह्मा

136
00:09:35,520 --> 00:09:39,680
कुमारी को देख लो। आर्य समाज को देख लो। ये उन लोगों की उन

137
00:09:39,680 --> 00:09:43,680
लोगों को समझा सकते हैं जो लोग ईश्वर को मानते हो। उन लोगों

138
00:09:43,680 --> 00:09:48,080
को अपने ईश्वर से जोड़ सकते हैं। यह मगर

139
00:09:48,080 --> 00:09:54,080
ईश्वर को ईश्वर मानने के लिए जो शुरुआती पैराटर्स हैं वो देते हैं

140
00:09:54,120 --> 00:09:58,160
शंकराचार्य। जब उन्होंने किसी को आस्तिक बना दिया तो तुम अपने अपने घर ले जाओ।

141
00:09:58,160 --> 00:10:02,480
भाई चलो तुम हमारे ब्रह्मा कुमारी चलो तुम्हारे आर्य समाज चलो तुम्हारे

142
00:10:02,480 --> 00:10:06,560
इस चलो। जब आस्तिक बन गया व्यक्ति उसके बाद

143
00:10:06,560 --> 00:10:11,120
जो है अपनीपनी चीजें लाद दो उसके ऊपर। और जो शुरुआती वह पैराटर्स

144
00:10:11,120 --> 00:10:11,840
थे

145
00:10:11,840 --> 00:10:15,920
जो ईश्वर के लिए आवश्यक थे वह खत्म कर दो। व्यक्ति उस ओर ध्यान

146
00:10:15,920 --> 00:10:20,000
ही नहीं देता है कि भाई मैं जो है आस्तिक हुआ ही इसलिए हूं। ईश्वर को ईश्वर मानता

147
00:10:20,000 --> 00:10:25,040
ही इसलिए हूं क्योंकि वो परम स्वतंत्र मोक्ष देता है। शाश्वत धर्म देता है या सर्वशक्तिमान

148
00:10:25,040 --> 00:10:29,040
ईश्वर देता है। वो सोचना ही बंद कर देता क्योंकि वो तो यह जान लेता

149
00:10:29,040 --> 00:10:33,040
है मैं आस्तिक हूं। उसके बाद वो अपना किसी मेंटालिटी से जुड़

150
00:10:33,040 --> 00:10:39,040
जाता है।

151
00:10:39,120 --> 00:10:43,120
तो क्या हुआ ईश्वर ऐसा पत्थर बना सकता है वाली बात हां बना सकता है

152
00:10:43,120 --> 00:10:47,200
इसको ना उठा पाए बना दिया अब ईश्वर बाधित हो गया क्योंकि वो

153
00:10:47,200 --> 00:10:51,200
पत्थर नहीं उठा पाया तो नहीं जब तुम ये बात बोलोगे तो

154
00:10:51,200 --> 00:10:55,200
जैसे ही बोलोगे वैसे ही जब आप यह सेंटेंस बोलोगे क्या ईश्वर ऐसा पत्थर बना

155
00:10:55,200 --> 00:10:59,360
सकता है तो बना दिया जब आप ये सेंटर सेंटेंस बोलोगे अगले ही पल

156
00:10:59,360 --> 00:11:03,760
कि ईश्वर बाधित हो गया तो वो आकर के उठा देगा दूसरे रूप में

157
00:11:03,760 --> 00:11:07,920
तो वो उठाने वाला भी हो और ना उठाने वाला भी हो गया। आपका

158
00:11:07,920 --> 00:11:12,800
स्टेटमेंट यह होना चाहिए कि उसका अस्तित्व शेष ना रह जाए।

159
00:11:12,800 --> 00:11:16,880
तो अस्तित्व शेष नहीं रह जाने के पीछे फिर वो वाली बात आ जाएगी।

160
00:11:16,880 --> 00:11:21,040
क्या ईश्वर स्वयं को मार सकता है? वास्तविक दुनिया में क्या उसका ऐसा हो सकता है कि उसका

161
00:11:21,040 --> 00:11:25,520
अस्तित्व शेष ना रह जाए। तो फिर वही बात आ जाएगी

162
00:11:25,520 --> 00:11:26,880
कि वो व्यवहार में आकर

163
00:11:26,880 --> 00:11:30,960
सब कुछ कर सकता है। मगर परमार्थ में उसकी इस सीमा के कारण

164
00:11:30,960 --> 00:11:34,960
आप उसे नकार नहीं सकते। आप ये बताओ क्या मुक्ति में जाकर के भी

165
00:11:34,960 --> 00:11:39,040
आपको ईश्वर की चीजों को जानना आवश्यक है कि आपको और कोई मुक्ति चाहिए जिसे जानने

166
00:11:39,040 --> 00:11:43,320
के बाद

167
00:11:43,320 --> 00:11:47,600
बताइए भाई साहब लेट कर रहे हैं आ नहीं रहे हैं

168
00:11:47,600 --> 00:11:51,760
ये वीडियो है आपके सामने देख लीजिएगा क्या ईश्वर ऐसा पत्थर

169
00:11:51,760 --> 00:11:57,760
बना सकता है यह सीरीज है यह वाली

170
00:12:04,080 --> 00:12:08,080
क्या हुआ ऑपरेटर महोदय वो भाई साहब आए नहीं अभी तक आर्य

171
00:12:08,080 --> 00:12:14,080
समाज वाले जो आने वाले

172
00:12:20,760 --> 00:12:24,880
थे एक वो कुतर्क

173
00:12:24,880 --> 00:12:30,880
भी आ रहा है क्या ईश्वर वेद के विरुद्ध सृष्टि कर सकता है

174
00:12:31,320 --> 00:12:35,360
तो व्यवहार में कर सकता है। भाई रावण जैसे लोगों ने क्या करने

175
00:12:35,360 --> 00:12:37,880
की कोशिश

176
00:12:37,880 --> 00:12:41,920
की और जो ये जो मलेच राज है या जो भी है आजकल

177
00:12:41,920 --> 00:12:45,920
जो एक नया संसार बनाने की कोशिश कर रहे हैं वो

178
00:12:45,920 --> 00:12:50,920
सब क्या है? वेद विरुद्ध ही तो बना रहे हैं संसार

179
00:12:50,920 --> 00:12:54,960
सृष्टि तो व्यवहार में कर सकता है। परमार्थ

180
00:12:54,960 --> 00:12:57,440
में नहीं

181
00:12:57,440 --> 00:13:01,600
और परमार्थ के आधार पर आप ईश्वर को नकार नहीं सकते। मगर व्यवहार में यदि

182
00:13:01,600 --> 00:13:05,600
ईश्वर को बाधित कर दोगे तो नकार दिया जाएगा। तो ऐसा ईश्वर मत दो संसार

183
00:13:05,600 --> 00:13:10,960
को जिसको नकारा जा सके। दोगे तो नास्तिकता आएगी अधर्म आएगा।

184
00:13:10,960 --> 00:13:15,040
ठीक है? एक्चुअली है क्या? प्रॉब्लम यह है कि

185
00:13:15,040 --> 00:13:19,200
व्यक्ति जब जो आस्तिक है वह इन सब धारणाओं से वो हो सकता

186
00:13:19,200 --> 00:13:23,360
है। आर्य समाज से स्क से जो आस्तिक है

187
00:13:23,360 --> 00:13:26,760
थोड़ा बहुत

188
00:13:26,760 --> 00:13:30,960
नास्तिक एक जो नास्तिक में जो बुद्धिमत्ता रखता

189
00:13:30,960 --> 00:13:34,960
है उसको यह सब लोग नहीं इम्रेस कर पाएंगे। उनको आस्तिक नहीं बना पाएंगे। आस्तिक

190
00:13:34,960 --> 00:13:39,680
बनने के लिए पहले शंकराचार्य के पास जाना होगा। करपात्री जी के पास जाना होगा।

191
00:13:39,680 --> 00:13:43,840
पहले इनको आस्तिक बना दो फिर हम ले जाएंगे आर्य समाज में। फिर हम दे देंगे

192
00:13:43,840 --> 00:13:49,840
ब्राह्मण दीक्षा इस में।

193
00:13:53,240 --> 00:13:57,440
तो यह बात समझने की है। पहले अब जो

194
00:13:57,440 --> 00:14:01,600
आस्तिक है वो आस्तिक में आस्तिकता में उनकी इतनी ज्यादा वो होती

195
00:14:01,600 --> 00:14:05,680
है निष्ठा कि वो जब ऐसे किसी सेक्स में फंस रहे होते हैं तो

196
00:14:05,680 --> 00:14:10,080
वो ये भूल जाते हैं कि जहां जो ईश्वर जो मोक्ष में मुझे मिल रहा है

197
00:14:10,080 --> 00:14:15,680
वो तो वो है ही नहीं जिसके कारण मैं आस्तिक हूं।

198
00:14:15,680 --> 00:14:19,680
सर्व सामर्थ्यवान यह है

199
00:14:19,680 --> 00:14:23,760
वह चीज जिसके कारण एक नास्तिक आस्तिक बनता है। क्या

200
00:14:23,760 --> 00:14:29,240
बनना चाहता है? सच्चिदानंद स्वरूप। तो ईश्वर कौन होगा?

201
00:14:29,240 --> 00:14:33,800
सच्चिदानंद। मोक्ष क्या होगा?

202
00:14:33,800 --> 00:14:37,920
सच्चिदानंद। अब आज व्यक्ति बना है सच्चिदानंद के

203
00:14:37,920 --> 00:14:42,000
लिए और उसको वहां कह रहे हो तुम ऐसे लोक में पहुंच जाओगे। वहां से फिर वापस आ जाओगे। ऐसा

204
00:14:42,000 --> 00:14:46,880
ही लोक तो है इस का। वहां से फिर वापस आते हैं।

205
00:14:46,880 --> 00:14:52,440
बैकुंठ है मगर कुंठा नहीं है मगर वहां से लोग वापस आ जाते

206
00:14:52,440 --> 00:14:56,720
हैं। बहुत विलंब हो रहा है आने में। आशा

207
00:14:56,720 --> 00:15:00,880
करते हैं आपको समझ में आई हो चीजें। अब

208
00:15:00,880 --> 00:15:05,040
एक तर्क आया था। हालांकि उस पर ज्यादा विचार नहीं कर पाए। तर्क

209
00:15:05,040 --> 00:15:09,120
आया था कि भाई ईश्वर में वह सब सामर्थ्य है। ईश्वर का

210
00:15:09,120 --> 00:15:14,680
ईश्वर का सर्वशक्तिमान होने का मतलब यह नहीं है।

211
00:15:14,680 --> 00:15:20,680
कि ईश्वर का सर्वशक्तिमान होने का मतलब यह नहीं है।

212
00:15:44,000 --> 00:15:48,160
बस आ रहे हैं वो आ गए शायद चर्चा आरंभ करते

213
00:15:48,160 --> 00:15:54,160
हैं।

214
00:16:05,600 --> 00:16:09,760
जी तो ईश्वर का सर्वशक्तिमान होने का अर्थ यह नहीं है। बस

215
00:16:09,760 --> 00:16:14,320
मैं आपको ले रहा हूं कुलदीप जी बस एक बात मेरी पूरी हो जाए।

216
00:16:14,320 --> 00:16:18,400
तो ईश्वर को सर्वशक्तिमान

217
00:16:18,400 --> 00:16:22,800
होने का अर्थ यह नहीं है कि वह जो है ऐसे सामर्थ्य

218
00:16:22,800 --> 00:16:27,760
को भी रखता हो जिसका अस्तित्व ना हो। ठीक है?

219
00:16:27,760 --> 00:16:31,320
जिन जिन सामर्थ्यों का अस्तित्व

220
00:16:31,320 --> 00:16:35,600
है वही ईश्वर जो है रखता है। तो अब प्रॉब्लम

221
00:16:35,600 --> 00:16:39,600
ये आएगी। पहली बात तो अनंत सामर्थ्यवान वाली बात हटा दे। उसमें

222
00:16:39,600 --> 00:16:43,880
ये भी कहा गया है कि इनफिनिट इनफिनाइट नहीं है उसका सामर्थ। अनंत नहीं है उसका

223
00:16:43,880 --> 00:16:48,160
सामर्थ। दूसरी बात यह भी आ जाएगी

224
00:16:48,160 --> 00:16:52,400
कि इसका अर्थ यह हुआ कि जिनका जिन कार्यों

225
00:16:52,400 --> 00:16:56,640
को करने का उदाहरण हमें प्राप्त है वही कार्य ईश्वर कर सकता है।

226
00:16:56,640 --> 00:17:00,680
जबकि ईश्वर कौन है? जो कोई नहीं कर सकता वो कर सकता है। वो और

227
00:17:00,680 --> 00:17:04,880
फिर जन्म लेने का सामर्थ्य तो प्राप्त है। जीव

228
00:17:04,880 --> 00:17:08,960
ले रहा है ना जन्म। जीव शरीर धारण

229
00:17:08,960 --> 00:17:13,520
कर रहा है ना। इस सामर्थ का एक्सिस्टेंस है ना? अस्तित्व है ये शरीर धारण करना

230
00:17:13,520 --> 00:17:17,520
तो फिर शरीर धारण क्यों नहीं करते तो ये सब छोटी-छोटी बातें हैं। चलिए उनको ले लेते

231
00:17:17,520 --> 00:17:23,520
हैं। आ तो गए थे अभी चले गए क्या?

232
00:17:38,640 --> 00:17:43,200
अपशब्दों का उपयोग ना करें। बिगिनर्स

233
00:17:43,200 --> 00:17:47,800
के लिए ज्ञानेश्वरी गीता रामचरितमानस

234
00:17:47,800 --> 00:17:51,920
और ज्ञानेश्वरी गीता रामचरितमानस और दास

235
00:17:51,920 --> 00:17:57,920
बोध

236
00:18:00,160 --> 00:18:05,080
बी के वाले जल्दी मिलते नहीं है। वो

237
00:18:05,080 --> 00:18:11,080
एक्सपर्ट्स जल्दी नहीं मिलते हैं। मुश्किल से मिलते हैं

238
00:18:15,960 --> 00:18:21,960
वो। आप शब्दों का उपयोग ना करें। कोई भी किसी के लिए भी।

239
00:18:36,760 --> 00:18:42,760
रामचरितमानस

240
00:18:44,840 --> 00:18:48,960
पढ़िए। रामचरितमानस भी अपने धर्म को समझने के

241
00:18:48,960 --> 00:18:52,960
लिए पर्याप्त है। पर प्रॉब्लम यह है कि जो

242
00:18:52,960 --> 00:18:57,040
विकृतियां फैला रहे हैं, गलत बातें फैला रहे हैं। उसके लिए आवश्यक होता है क्या?

243
00:18:57,040 --> 00:19:01,200
व्यक्ति को दूसरी चीजें भी जाननी हो। मगर यदि व्यक्ति को किसी का सामना

244
00:19:01,200 --> 00:19:07,200
करने नहीं जाना है तो आपके लिए रामचरितमानस भी पर्याप्त

245
00:19:09,560 --> 00:19:13,640
है। अब वो कितनी देर में आएंगे? आर्ट विद

246
00:19:13,640 --> 00:19:17,760
कुणाल। आपने हमें शायद फॉर्म दिया था। फॉर्म भरा

247
00:19:17,760 --> 00:19:21,840
था वो इस पर डिस्कस करने के लिए। आपसे बात करेंगे।

248
00:19:21,840 --> 00:19:26,920
थोड़ा समय निकाल करके बात करेंगे आपसे। जी पढ़ सकते

249
00:19:26,920 --> 00:19:32,760
हैं। पढ़ सकते

250
00:19:32,760 --> 00:19:38,760
हैं। समय व्यर्थ जा रहा है। नष्ट हो रहा है।

251
00:20:07,920 --> 00:20:12,240
आभार आपका रिसर्च वाले जो महानभाव

252
00:20:12,240 --> 00:20:18,240
है उनका आ

253
00:20:19,600 --> 00:20:24,400
जी जय श्री राम कुलदीप जी आपका स्वागत है। कैसे हैं आप?

254
00:20:24,400 --> 00:20:30,160
धन्यवाद आप सुनाइए। बस बस

255
00:20:30,160 --> 00:20:34,240
प्रॉब्लम रही जो दूसरे वाले डिवाइस से जुड़ रहा था वो नहीं कनेक्ट हो पाया।

256
00:20:34,240 --> 00:20:38,320
काफी देर लगी। अच्छा इसलिए मैं आपको बोल रहा था कि पहले जब आपसे मैंने

257
00:20:38,320 --> 00:20:42,560
मांगा था ना लिंक उसी समय आप भेज देते तो मैं एक बार चेक कर लेता। कोई

258
00:20:42,560 --> 00:20:45,920
बात नहीं। अब तो ठीक है ना सब?

259
00:20:45,920 --> 00:20:50,480
अब तो ओके है ना? हां अभी आप देखो जरा आवाज ठीक आ रही है?

260
00:20:50,480 --> 00:20:54,640
हां बहुत अच्छी आ रही है। आपको ठीक आ रही है मेरी आवाज?

261
00:20:54,640 --> 00:20:59,120
हां आपकी आवाज ठीक आ रही है। कहां पे लाइव चल रहा है आपका ये?

262
00:20:59,120 --> 00:21:03,200
यह हमारे YouTube चैनल पर भी चल रहा है और

263
00:21:03,200 --> 00:21:08,280
फिर ऑपरेटर महोदय को पता होगा कहां-कहां और चल रहा

264
00:21:08,280 --> 00:21:12,160
है। तो

265
00:21:12,160 --> 00:21:16,280
थोड़ा सा हमारे दर्शकों को आप अपना एक संक्षिप्त में परिचय दे दें

266
00:21:16,280 --> 00:21:20,640
तो जिससे कि वो जान जाए कि हमारी बात किससे हो रही है। इंस्टा

267
00:21:20,640 --> 00:21:24,880
पर भी चल रहा है, एफबी पर भी चल रहा है और YouTube

268
00:21:24,880 --> 00:21:30,000
पर भी चल रहा है। जी जी

269
00:21:30,000 --> 00:21:35,200
YouTube पर नहीं है। YouTube पर नहीं चल रहा है।

270
00:21:35,200 --> 00:21:39,440
नहीं YouTube पर चल रहा है ना? नहीं मैं दूसरा चैनल है आान

271
00:21:39,440 --> 00:21:43,520
वो हमारा दूसरा चैनल है सर्वशक्तिमान धर्म उस पर चल रहा है। नहीं आप मुझे

272
00:21:43,520 --> 00:21:47,840
लिंक भेजिए ना उसको क्योंकि बहुत सारे लोग बैठे हैं देखने के लिए। अच्छा

273
00:21:47,840 --> 00:21:51,840
जी जी जी ऑपरेटर महोदय इनको लिंक भेज दीजिए भाई दूसरे वाले मुझे उसी

274
00:21:51,840 --> 00:21:57,120
पे भेज दीजिए आप। मैं कुछ लोगों को भेज दूंगा।

275
00:21:57,120 --> 00:22:01,280
हां जाने दीजिए कोई बात नहीं एक दो मिनट की बात है आने दीजिए मैं भेज

276
00:22:01,280 --> 00:22:05,360
देता हूं ऊपर तब तक आप अपना एक

277
00:22:05,360 --> 00:22:09,520
संक्षिप्त परिचय दे देते तो ठीक रहता जस्ट एक एक मिनट लगेगी उसके जरा

278
00:22:09,520 --> 00:22:15,520
सा जरा सा समय लगेगा मैं

279
00:22:17,520 --> 00:22:21,760
क्या इंस्टा पे भेज रहे हैं कहां पे भेज रहे हैं ऑपरेटर मोड नहीं इन्होंने मुझे इंस्टा

280
00:22:21,760 --> 00:22:27,760
पे भेजा है भेज दिया हां भेज दिया इन्होने

281
00:22:29,040 --> 00:22:33,440
इन्होंने मुझे भेज दिया एक बार चेक करके

282
00:22:33,440 --> 00:22:37,840
इंस्टा पे इसी पे चल रहा है आहान पे आपका

283
00:22:37,840 --> 00:22:43,840
हां इंस्टा पे आान पे ही चल रहा है इंस्टा पे आान लाइव है

284
00:22:44,240 --> 00:22:48,480
मैं शायद पहली बार इंस्टा पर लाइव हूं अच्छा नहीं हुए आपसे

285
00:22:48,480 --> 00:22:52,640
पहले ना आपने कहा कि इंस्टा वो दूसरे

286
00:22:52,640 --> 00:22:56,720
प्लेटफॉर्म्स पर भी करिए तो मैंने कहा ठीक है कर लेते हां देखो जहां से आप बहुत सारे

287
00:22:56,720 --> 00:23:01,280
लोगों को जोड़ करके रखे हो जहां से बहुत सारी बातें आ रही है निकल कर के सामने है ना

288
00:23:01,280 --> 00:23:06,720
तो मेरा मानना है कि वहां लोग बैठे हैं हां

289
00:23:06,720 --> 00:23:10,720
जी प्रारंभ करें जी तो आप सर्वप्रथम

290
00:23:10,720 --> 00:23:14,560
अपना एक संक्षिप्त परिचय दे दीजिए

291
00:23:14,560 --> 00:23:18,880
जी मैं परिचय दे देता हूं मेरा नाम कुलदीप

292
00:23:18,880 --> 00:23:22,960
विद्यार्थी है और पिछले लगभग 18

293
00:23:22,960 --> 00:23:27,680
वर्षों से हम हम लोग सनातन को प्रोटेक्ट करने के लिए काम कर रहे हैं।

294
00:23:27,680 --> 00:23:31,680
जौनपुर धर्मांतरण में जो 12 गांव क्रिश्चियन बने थे 2018 में आपको शायद

295
00:23:31,680 --> 00:23:36,480
याद होगा वो 12 गांव में से

296
00:23:36,480 --> 00:23:40,640
आठ गांव हम लोगों के द्वारा वापस हुए थे। वो मेरी टीम ने उसमें काम

297
00:23:40,640 --> 00:23:44,720
किया और अब तक 1 लाख से ज्यादा लोगों की हम लोग घर वापसी कर चुके

298
00:23:44,720 --> 00:23:48,800
हैं। जो ईसाइयत में कन्वर्ट हो चुके थे। 96 गांव की हमारे पास में

299
00:23:48,800 --> 00:23:52,960
इस समय पर लिस्ट है। जिन लोगों को हमने धर्मांतरित होने से बचाया या

300
00:23:52,960 --> 00:23:57,200
शुद्धि की उनकी एक बड़े स्तर पर और इस्लाम में भी बहुत सारी बहन

301
00:23:57,200 --> 00:23:59,680
बेटियां हमारी जो चली जाती हैं बहला

302
00:23:59,680 --> 00:24:03,840
फुसला करके कुछ लोग ले आते हैं तो उसको भी हम लोगों ने वापस किया। एक बड़े स्तर पर हमने

303
00:24:03,840 --> 00:24:07,840
सनातन धर्म के लिए घर वापसी का अभियान चलाया है और उसको निरंतर हम

304
00:24:07,840 --> 00:24:11,840
लोग चला रहे हैं। हम तो आपके ये

305
00:24:11,840 --> 00:24:15,840
जो अभियान है इसका कुछ नाम आर्य समाज या किसके

306
00:24:15,840 --> 00:24:20,080
अंतर्गत आप ये कार्य कर रहे हैं? हां मैं बताता हूं आपको स्वामी दयानंद सरस्वती

307
00:24:20,080 --> 00:24:24,240
जी से प्रेरित होकर के इस काम को हम लोग कर रहे हैं। क्योंकि स्वामी दयानंद

308
00:24:24,240 --> 00:24:28,240
सरस्वती जी ने घर वापसी की जो सबसे पहली बात गई आपको याद

309
00:24:28,240 --> 00:24:32,240
होगा कि हमारे बहुत सारे लोग कश्मीर में मुसलमान

310
00:24:32,240 --> 00:24:36,320
बन गए थे। अगर आपने हिस्ट्री पढ़ी हो उसका कारण क्या था?

311
00:24:36,320 --> 00:24:40,400
छुआछूत भेदभाव, जातपात, ऊंचनीच इस सब को लेकर के बहुत बड़े सारे

312
00:24:40,400 --> 00:24:44,480
लोग वहां पर मुसलमान बने। तो स्वामी दयानंद सरस्वती

313
00:24:44,480 --> 00:24:48,640
जी ने एक बहुत बड़ा अभियान इस क्षेत्र में चलाया कि भाई घर वापसी होनी

314
00:24:48,640 --> 00:24:52,800
चाहिए। जो लोग हमारे मुसलमान या ईसाई बन जाते हैं तो वो वापस होने चाहिए।

315
00:24:52,800 --> 00:24:56,960
उसके लिए तो हम लोग प्रेरित हुए स्वामी दयानंद सरस्वती जी को उस विचारधारा से और

316
00:24:56,960 --> 00:25:01,040
हमने इस क्षेत्र में काम किया। पूरी तरीके से आर्य समाज को नहीं मानते हैं। स्वामी दयानंद

317
00:25:01,040 --> 00:25:05,200
मैं मानता हूं पूरा पूरा मानता हूं। आर्य समाज को पूरा मानता हूं। लेकिन एक बात मैं स्पष्ट करना

318
00:25:05,200 --> 00:25:09,360
चाहता हूं कि मैं आर्य समाज का ना तो कोई प्रतिनिधि हूं। ना आर्य

319
00:25:09,360 --> 00:25:13,440
समाज का कोई बहुत बड़ा विद्वान हो ना नेता हूं। आर्य समाज का एक छोटा सा

320
00:25:13,440 --> 00:25:14,720
छोटा सा सिपाही बन

321
00:25:14,720 --> 00:25:18,720
के मैं काम करता हूं। जी ठीक है। ठीक है। वो कोई बात नहीं मानते तो

322
00:25:18,720 --> 00:25:22,720
हैं। ये तो बात है। हां मानता हूं क्यों? देखो एक संस्था है आर्य समाज। आर्य समाज धर्म

323
00:25:22,720 --> 00:25:26,880
नहीं है। आर्य समाज धर्म संप्रदाय नहीं है। आर्य समाज एक

324
00:25:26,880 --> 00:25:30,960
एक संस्था है। जैसे आरएसएस है जैसे विश्व हिंदू परिषद है। ये लोग

325
00:25:30,960 --> 00:25:35,360
सनातन को प्रोटेक्ट करने का काम करते हैं। आर्य समाज भी वैसे ही करता है। क्या

326
00:25:35,360 --> 00:25:40,240
आरएसएस के अपने वो सब है संस्कार विधि

327
00:25:40,240 --> 00:25:44,640
या वेदों का भाष्य या मनुस्मृति का भाष्य ये सब है आरएसएस

328
00:25:44,640 --> 00:25:48,880
का। नहीं हो वह एक संस्था है अपना कितना प्रगति कर पाती है किस रास्ते

329
00:25:48,880 --> 00:25:52,960
पर कितने लोग चल पाते हैं वह विषय नहीं है तुलनात्मक अध्ययन हम लोग जाने

330
00:25:52,960 --> 00:25:57,760
आपके पर्टिकुलर अपने भाष्य है आपके पर्टिकुलर अपने धर्म ग्रंथ है

331
00:25:57,760 --> 00:26:01,920
आपका अपना भाष्य है उन पर धर्म ग्रंथ धर्म ग्रंथ अपने धर्म ग्रंथ

332
00:26:01,920 --> 00:26:06,000
नहीं है आप भूल कर रहे हो सनातन की सनातन की जो

333
00:26:06,000 --> 00:26:10,400
डूबती नाव थी ना उसको बचाने का काम स्वामी दयानंद ने किया जो जो धर्म ग्रंथ हमारे ऐसे

334
00:26:10,400 --> 00:26:14,400
थे जहां जहां पर कमी हो गई थी अपने

335
00:26:14,400 --> 00:26:18,400
ऐसे हैं कि जो धर्म ग्रंथ आपके पास है वही धर्म ग्रंथ आवश्यक

336
00:26:18,400 --> 00:26:22,600
नहीं है कि सबके पास हो। तो यानी कि

337
00:26:22,600 --> 00:26:26,640
आपके आपके कुछ सेलेक्टिव धर्म ग्रंथ लेकिन वो हमारे धर्म ग्रंथ नहीं

338
00:26:26,640 --> 00:26:29,840
है। आप आप शब्दों को अपने को ठीक कीजिए। वो हमारे धर्म

339
00:26:29,840 --> 00:26:34,080
ग्रंथ नहीं है। वो जो है जो पुस्तकें हैं ना वो सनातन को बचाने के लिए धर्म

340
00:26:34,080 --> 00:26:38,240
ग्रंथ है। वो सनातन के धर्म ग्रंथ है। वो आर्य समाज के नहीं मैं मैं आपकी बात

341
00:26:38,240 --> 00:26:42,240
मान लेता हूं। वो सनातन को बचाने के लिए धर्म ग्रंथ है। मगर आरएसएस

342
00:26:42,240 --> 00:26:46,240
से आर्य समाज की तुलना इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि आर जो

343
00:26:46,240 --> 00:26:51,120
आर्य समाज है वो एक धार्मिक विचारक के रूप में भी आता है। आरएसएस

344
00:26:51,120 --> 00:26:55,440
का कोई अपना अलग से एक धार्मिक विचार नहीं है। एक यूनिक मगर आर्य

345
00:26:55,440 --> 00:27:00,160
समाज का है। आर्य समाज का अपना एक स्पेसिफिक

346
00:27:00,160 --> 00:27:04,480
विचार है। जो आरएसएस है उसमें आर्य समाजी भी है। पुराणों

347
00:27:04,480 --> 00:27:08,720
को मानने वाला भी है। उसका कोई स्पेसिफिक धार्मिक विचार नहीं है। ठीक है?

348
00:27:08,720 --> 00:27:12,720
मगर आर्य समाज का है। इसलिए आर्य समाज की तुलना आरएसएस वगैरह जैसी संस्थाओं

349
00:27:12,720 --> 00:27:16,800
से नहीं की जा सकती। हां, मैं भी कह रहा हूं आपसे तुलनात्मक अध्ययन यहां नहीं

350
00:27:16,800 --> 00:27:20,960
कर सकते हम लोग। वो एक व्यवस्था है अपनी। कोई संस्था कितनी प्रगति कर पाई किसने

351
00:27:20,960 --> 00:27:24,960
क्या संस्था है जैसे आरएसएस है तो उस तरह से हम नहीं देख सकते क्योंकि

352
00:27:24,960 --> 00:27:28,960
आर्य समाज का अपना एक सिद्धांतों का वो है। क्या कहते

353
00:27:28,960 --> 00:27:32,960
हैं जमावाड़ा है ना? हां। जमावाड़ा सिद्धांतों की एक

354
00:27:32,960 --> 00:27:37,120
बात और मैं आपको सुनिश्चित कर दूं। बड़ी सारी चीजें मैं देखता रहता हूं। आर्य

355
00:27:37,120 --> 00:27:41,200
समाज की जो बातें है ना आर्य समाज की नहीं है। स्वामी दयानंद की भी नहीं है।

356
00:27:41,200 --> 00:27:45,240
अगर आपने सत्यार्थ प्रकाश पढ़ा हो बड़ी सारी पुस्तक आपके पास शायद आपने पढ़ा

357
00:27:45,240 --> 00:27:49,280
के मेरी बात मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए। मेरी बात पूरी हो

358
00:27:49,280 --> 00:27:53,600
जाने दीजिए। आर्य समाज जिस विचारधारा को लेकर चलता है। ब्रह्मा से लेकर जैवनी

359
00:27:53,600 --> 00:27:57,600
पर्यंत ऋषियों का जो मंतव्य है उस मंतव्य को स्वामी दयानंद सरस्वती ने लोगों

360
00:27:57,600 --> 00:28:02,000
के बीच में रखा। अपना कोई मत मजहब संप्रदाय नहीं चलाया। जी। ठीक है।

361
00:28:02,000 --> 00:28:06,160
मैं अभी तीन बातें मुझे अब याद रहेगी। बातें होती है ना बहुत सारी बातें हो जाती तो

362
00:28:06,160 --> 00:28:10,160
हम लोग चर्चा में हम लोग चर्चा में एंट्री कर गए हैं। मैं माफ़ कीजिएगा मैं आपसे भी

363
00:28:10,160 --> 00:28:14,240
अपना आपका परिचय जानना चाहता हूं। मेरा नाम शिवश नारायण द्विवेदी है।

364
00:28:14,240 --> 00:28:18,840
पूरी के शंकराचार्य जी का एक अल्पज्ञ शिष्य हूं। श्री राम का एक साधारण सा भक्त

365
00:28:18,840 --> 00:28:23,120
हूं। और पिछले करीब दो वर्षों

366
00:28:23,120 --> 00:28:27,200
से आवाहन के माध्यम से जो वैचारिक क्रांति है

367
00:28:27,200 --> 00:28:32,160
वो लाने का प्रयास कर रहे हैं समाज में। जिस वैचारिक क्रांति के अंतर्गत

368
00:28:32,160 --> 00:28:36,240
हमारा जो सनातन समाज है वह संगठित हो पाए

369
00:28:36,240 --> 00:28:40,400
और जो सनातन विरोधी शक्तियां हैं उनसे लड़ पाए

370
00:28:40,400 --> 00:28:44,640
है ना जी सुसंस्कृत सुशिक्षित स्वस्थ संपन्न सेवा

371
00:28:44,640 --> 00:28:49,040
परायण व्यक्ति और समाज की संरचना के लिए प्रयासरत है।

372
00:28:49,040 --> 00:28:53,040
जी जी ठीक है। और अब जैसे

373
00:28:53,040 --> 00:28:57,040
अगर मैं अपनी अलग से बात करूं तो भाई विगत चार पांच वर्षों में मैंने

374
00:28:57,040 --> 00:29:00,320
क्या किया होगा? स्कूलों में जाकर के बच्चों को पढ़ाया होगा

375
00:29:00,320 --> 00:29:04,880
या हिंदू राष्ट्र गोष्ठियां की होंगी या मोर्चे निकाले होंगे वो सब ठीक है।

376
00:29:04,880 --> 00:29:09,200
मगर यह मेरी व्यक्तिगत बात है। वो इतनी बड़ी मैं नहीं मानता कि वो बताने

377
00:29:09,200 --> 00:29:13,360
लायक है। मगर अगर शंकराचार्य नाम जुड़ जाए कि शंकराचार्य

378
00:29:13,360 --> 00:29:17,440
ने क्या-क्या किया है तो मेरे ख्याल से वो कुछ बताने की आवश्यकता

379
00:29:17,440 --> 00:29:19,360
ही नहीं है। आज अगर आज

380
00:29:19,360 --> 00:29:23,600
हिंदू धर्म का अस्तित्व है तो शंकराचार्य नाम के कारण है। यह बात एक तो आप बार-बार

381
00:29:23,600 --> 00:29:27,840
बार-बार जो हिंदू शब्द को बोल रहे हो ना आप यह मुझे चुभ रहा है।

382
00:29:27,840 --> 00:29:32,000
देखिए इसलिए चुभ रहा है कि सुनिए आप सनातन की बात करें आप सनातन

383
00:29:32,000 --> 00:29:36,160
की बात करें जब मैं बोल रहा हूं जब मैं आप बोल रहे थे तो मैंने आपको बोलने

384
00:29:36,160 --> 00:29:40,320
दिया था। अब जब मैं बोल रहा हूं तो मुझे बोलने दीजिए। ठीक। दूसरी बात यह है कि

385
00:29:40,320 --> 00:29:44,400
एक के बाद एक इतनी सारी पॉइंट्स हैं कि अगर ऐसे हर एक

386
00:29:44,400 --> 00:29:48,480
पॉइंट को हम लोग निकालने लग जाएंगे कि मैंने कुछ बोला उसी में बात होने लगी तो

387
00:29:48,480 --> 00:29:52,720
विषयंतर होता है। जैसे हिंदू शब्द पर भी हम बात कर सकते हैं।

388
00:29:52,720 --> 00:29:56,800
घर वापसी पर भी हम बात कर सकते हैं। आर्य समाज के अपने आर्य समाज

389
00:29:56,800 --> 00:30:00,880
के अपने ग्रंथ है कि नहीं उस पर भी हम बात कर सकते हैं। मगर जैसे ही अगर हर

390
00:30:00,880 --> 00:30:05,040
बात मैं बोलूंगा उस हर बात पे आप जो है पकड़ करके एक विषय खोल देंगे तो सारे

391
00:30:05,040 --> 00:30:09,120
विषय पीछे चलते चले जाएंगे। हम लोग आगे बढ़ते जाएंगे। अब आप आप आज आप

392
00:30:09,120 --> 00:30:13,840
जो विषय मैं अपनी बात बोल मैं अपनी बात बोल शंकराचार्यों

393
00:30:13,840 --> 00:30:18,000
ने क्या किया है तो इसको मुझे नहीं लगता कि बताने की बहुत आवश्यकता है

394
00:30:18,000 --> 00:30:22,320
वो भले ही बौद्धों का खंडन करके सनातन धर्म की स्थापना हो वैदिक धर्म की स्थापना

395
00:30:22,320 --> 00:30:26,640
हो जिसको आर्य समाज ने भी अपने ग्रंथों में माना जगह दी भले ही नास्तिकों

396
00:30:26,640 --> 00:30:30,640
का जो अकाट्य खंडन हो वो हो वो भले ही हरिहर बुक्का को खड़ा

397
00:30:30,640 --> 00:30:34,640
करना हो वो भले ही अंग्रेजी शासन के रहते हुए

398
00:30:34,640 --> 00:30:38,720
भी अंग्रेजी शासन के दबाव में ना आते हुए भी धर्म को यथा वत रखने का पालन करने

399
00:30:38,720 --> 00:30:43,160
का प्रयास करने करवाने वाला हो और

400
00:30:43,160 --> 00:30:47,200
अनेकानेक और जो संप्रदायों में बिखरा हुआ समाज उसको

401
00:30:47,200 --> 00:30:51,200
एक करने के लिए चार जो ये सारी व्यवस्था वो मैं समझता हूं

402
00:30:51,200 --> 00:30:55,440
सुनिए आप मैं शंकराचार्य जी के विषय में मैं पढ़ता रहता हूं। आप सीधा विषय पर आ जाइए।

403
00:30:55,440 --> 00:30:59,440
ठीक है? क्योंकि हमें थी सुनिए। आपने

404
00:30:59,440 --> 00:31:03,440
जब कश्मीर के बारे में बताया था तो मैंने आपको कहा था कि दयानंद जी के बारे में जानता हूं।

405
00:31:03,440 --> 00:31:07,440
आपको आपको बड़ी सारी बातें चुभ रही है। मैं समझ रहा हूं कि आपको बहुत बातें चुभ

406
00:31:07,440 --> 00:31:11,840
रही है। सुनो शिवश जी पर आइए। विषय विषय

407
00:31:11,840 --> 00:31:16,160
पे नहीं विषय पे मैं आ रहा हूं। जैसे आपने बताया कश्मीर में ये किया वो किया तो

408
00:31:16,160 --> 00:31:20,160
अगर आप जैसे जैसे आप बोल रहे हो ना शंकराचार्य जी की बहुत सारी बातें सब

409
00:31:20,160 --> 00:31:24,800
बातों से सहमत ना तो आप हो मेरी से ना मैं आपकी से हूं। ठीक है ना? अगर

410
00:31:24,800 --> 00:31:28,880
आप जैसे सहमत नहीं है मगर मैंने आपको बोलने दिया ना।

411
00:31:28,880 --> 00:31:33,040
जी जी बोल बोलने दिया मैं बोल रहा हूं तो आप मुझसे ये मत कहिए कि विषय

412
00:31:33,040 --> 00:31:37,120
पे आइए आप विषय पे आ जाओ ना आप सीधे विषय पे आ जाओ कश्मीर की बात बोली

413
00:31:37,120 --> 00:31:41,600
थी तो मैंने आपको कहा था ये सब बातें छोड़ो सीधे विषय पे आओ आ गया ना

414
00:31:41,600 --> 00:31:45,680
आप नहीं मैंने आपको मैंने आपको बोलने दिया था मैंने आपको काटा नहीं था

415
00:31:45,680 --> 00:31:49,760
आप काट रहे हो मैं आप नहीं आप इतना लंबा तो नहीं बोला ना मैंने आप तो

416
00:31:49,760 --> 00:31:54,000
चार पांच सात मिनट बोलते चले जाओगे बोला था कौन डिसाइड करेगा आपने नापा

417
00:31:54,000 --> 00:31:58,080
मैं कर रहा हूं ना मैं देख रहा हूं ना टाइम देख रहा हूं ना क्या टाइम देखा बताइए

418
00:31:58,080 --> 00:31:58,960
बताइए

419
00:31:58,960 --> 00:32:03,280
बोलो ना आपने कितना लंबा परिचय दिया था अपना चलिए टाइम बताइए आपका

420
00:32:03,280 --> 00:32:07,280
आपने मेरे से बोला था कि कितने मिनट का देना है अरे तो आप अब

421
00:32:07,280 --> 00:32:11,440
मेरे से आप बोल रहे हो ना कि आप लंबा जा रहे हो मेरा टाइम आप निर्धारित

422
00:32:11,440 --> 00:32:15,440
कर रहे हो अच्छा और निर्धारित नहीं होगा इसमें एक विषय जो विषय

423
00:32:15,440 --> 00:32:19,440
आप लेकर के बैठे हो उसप कोई चर्चा नहीं भाई आपको बता रहा हूं मैंने अभी आपसे कम टाइम

424
00:32:19,440 --> 00:32:23,760
लिया परिचय देने में आप नाप सकते हैं

425
00:32:23,760 --> 00:32:27,920
आप विषय पर आ जाइए इसलिए आपको काटना नहीं चाहिए था

426
00:32:27,920 --> 00:32:32,240
आप विषय पर आ जाए। हां। तो अब विषय पर आते हैं

427
00:32:32,240 --> 00:32:36,400
कि आपने कहा कि घर

428
00:32:36,400 --> 00:32:40,600
वापसी कराते हैं और उनके हमारी बेटियां चली जाती हैं। ठीक

429
00:32:40,600 --> 00:32:44,960
है? ये दो चीजें आपने अपने उसमें कही। अच्छा

430
00:32:44,960 --> 00:32:49,120
ऐसा ऐसे में क्या किया जाए? जब कोई व्यक्ति हमारी बेटी

431
00:32:49,120 --> 00:32:53,120
को ले जाने के लिए कहे कि मैं हिंदू हो रहा हूं। मैं सनातनी

432
00:32:53,120 --> 00:32:57,280
हो रहा हूं और हमारी बेटी को जो है ले जाए लव जिहाद में। फिर क्या किया जाए?

433
00:32:57,280 --> 00:33:01,280
ऐसे ऐसे लोग जो करवाते हैं उनके लिए क्या किया जाए? वो मेरे

434
00:33:01,280 --> 00:33:05,440
को पता है आप क्या प्रश्न पूछोगे और क्या उत्तर दोगे? सुनो मेरी बात। हम क्यों दे देंगे उसको अपनी

435
00:33:05,440 --> 00:33:09,520
बेटी? क्यों दे देंगे? किस लिए देंगे? दी जा रही है। कहां दी

436
00:33:09,520 --> 00:33:13,760
जा रही है? आर्य समाज मंदिरों के द्वारा दी जा रही है। आर्य समाज में कोई भी बेटी नहीं दी जाती। झूठ

437
00:33:13,760 --> 00:33:14,960
बोलना।

438
00:33:14,960 --> 00:33:19,040
आप दो ना प्रमाण। प्रमाण दिखाओ भैया। प्रमाण दिखाओ।

439
00:33:19,040 --> 00:33:23,920
दिखाओ। प्रमाण दिखाओ। दिखाते हैं रुको। जी। प्रमाण दिखाइए।

440
00:33:23,920 --> 00:33:29,920
दिखाते दिखाओ भैया कोर्ट के प्रमाण दिखाइए।

441
00:33:31,200 --> 00:33:35,200
एक और बात सुनिएगा जो आप प्रमाण मुझे दिखा रहे हो ना आर्य

442
00:33:35,200 --> 00:33:39,760
समाज के नाम से नकली नकली आर्य समाज की संस्था बना बना करके लोग काम कर रहे हैं।

443
00:33:39,760 --> 00:33:43,840
बहुत सारे लोग हैं जो पैसा कमाते हैं शादियों में। सुनो मेरी बात। जो शादी

444
00:33:43,840 --> 00:33:47,920
करा करके पैसा कमा रहे हैं। नकली आर्य समाज का गठन कर रहे हैं। नकली आर्य समाज बन

445
00:33:47,920 --> 00:33:51,920
रहा है। आप उनके उनके खिलाफ क्या कर रहे हैं? कर रहे हैं ना हम। सुनो मेरी

446
00:33:51,920 --> 00:33:55,920
बात। क्या एक मैं बताता हूं सनातन आर्य समाज के नाम से किसी ने

447
00:33:55,920 --> 00:34:00,000
रजिस्ट्रेशन करा लिया आप उसको खारिज कर दोगे मैं आपसे पूछ रहा

448
00:34:00,000 --> 00:34:04,160
हूं कि आप इस नकली आर्य समाज के बनकर के जो लोग कार्य

449
00:34:04,160 --> 00:34:08,160
कर रहे हैं शादियां करवा रहे हैं उसके लिए आप कर क्या रहे हैं कर रहे हैं

450
00:34:08,160 --> 00:34:12,240
ना हमने हमने एक्शन लिया हमने बंद कराई ना आप जाओ ना दिल्ली चांदनी चौक पे चार आर्य

451
00:34:12,240 --> 00:34:16,240
समाजें बनी थी जो यही काम करते थे रात की शादी में और सुनो मेरी बात

452
00:34:16,240 --> 00:34:20,320
और सुनो सारे सारे जन्मजात ब्राह्मण थे सारे जहां ब्राह्मण बने हुए घूम

453
00:34:20,320 --> 00:34:24,560
रहे थे हां भाई थे की बात मत करिए।

454
00:34:24,560 --> 00:34:28,560
चार तरीके की बात मत करिए। अभी मैंने आपसे यह पूछा है कि आप उन

455
00:34:28,560 --> 00:34:30,080
नकली आर्य समाजों को

456
00:34:30,080 --> 00:34:34,160
बंद करने के लिए क्या कर रहे हैं? दूसरी बात कि आर्य समाज कोई

457
00:34:34,160 --> 00:34:38,240
नकली है और कोई असली है। इसका फैसला किस आधार पर होता है? क्या

458
00:34:38,240 --> 00:34:42,320
हम कह रहे हैं ना जो हमारी आर्य प्रतिनिधि सभा है जो उसको सुनो जो रजिस्ट्रेशन

459
00:34:42,320 --> 00:34:48,320
देती वो असली है जो आर्य प्रतिनिधि सभा जिसको रजिस्टर नहीं देती वो असली नहीं है

460
00:34:48,720 --> 00:34:53,120
मुझे आप ये बताइए ये सिद्धांत कहां का सिद्धांत है कि आर्य समाज प्रतिनिधि

461
00:34:53,120 --> 00:34:57,200
सभा जिसको रजिस्ट्रेशन देगी वही आर्य समाज असली है हां मैं बताता हूं सुनो

462
00:34:57,200 --> 00:35:01,680
ना मेरी बात सुनो ना आप जैसे आप जैसे शंकराचार्य जी की बात कर रहे हो पूरी शंकराचार्य

463
00:35:01,680 --> 00:35:05,680
जी की उन्होंने जो संस्थान खोले हैं तो वही तो वही तो वेरीफाई करेंगे आप

464
00:35:05,680 --> 00:35:09,840
करोगे या कोई भी बैठ कोर्ट कर देगा बैठ के जो शंकराचार्य वही तो वेरीफाई

465
00:35:09,840 --> 00:35:13,920
करेंगे कौन है संस्था उनके कौन है उनके वेरीफाई करने के पीछे सनातन

466
00:35:13,920 --> 00:35:18,320
शास्त्रों का सिद्धांत है जो वह लोग मानते हैं अरे हम हम हमारी

467
00:35:18,320 --> 00:35:22,560
हम वैसे ही किसी को रजिस्ट्रेशन नहीं देते आर्य समाज का रजिस्ट्रेशन होता है वो व्यवस्था

468
00:35:22,560 --> 00:35:26,720
से होता है पूरी जानकारी शंकराचार्य जी को शंकराचार्य सुन

469
00:35:26,720 --> 00:35:30,960
लीजिए अगर शंकराचार्य अंतिम निर्णायक है

470
00:35:30,960 --> 00:35:35,200
एक मिनट पॉज करिए भैया पॉज करिए एक मिनट अगर शंकराचार्य

471
00:35:35,200 --> 00:35:39,280
अंतिम निर्णायक है तो उनके अंतिम निर्णायक होने के

472
00:35:39,280 --> 00:35:43,520
लिए वह शास्त्र बोल रहे हैं जो शास्त्र वहां पर प्रमाणिक

473
00:35:43,520 --> 00:35:45,520
हैं। आप जब प्रतिनिधि

474
00:35:45,520 --> 00:35:49,760
सभा के किसी अध्यक्ष को अंतिम निर्णायक बता रहे हैं तो क्या

475
00:35:49,760 --> 00:35:53,840
आपके द्वारा स्वीकार किए गए जो शास्त्र है उनमें वो

476
00:35:53,840 --> 00:35:57,840
सिद्धांत है कि प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष को अंतिम निर्णायक माना जाए कि नहीं माना

477
00:35:57,840 --> 00:36:01,920
जाए? प्रतिनिधि सभा का आपको जानकारी नहीं है। अध्यक्ष

478
00:36:01,920 --> 00:36:06,080
बैठकर के वेरीफाई नहीं करता है उसको। वो नीचे से पूरी एक व्यवस्था होती

479
00:36:06,080 --> 00:36:10,160
है। व्यक्ति का साल भर तक सत्संग चलता है। ऐसे थोड़ी होता है। डिक्टेटर

480
00:36:10,160 --> 00:36:14,400
नहीं है। समाज में शिवश जी डिक्टेटरशिप नहीं है।

481
00:36:14,400 --> 00:36:18,560
जो आप सोच रहे हो कोई भी करेगा उसको बैठ भाई साहब। मैं आपसे प्रश्न क्या पूछ रहा हूं?

482
00:36:18,560 --> 00:36:22,560
मुझे लग रहा था स्वहार पूर्ण चर्चा होगी मगर आप लड़ने आए ऐसा लग रहा है। अरे लड़ने नहीं आए

483
00:36:22,560 --> 00:36:26,560
भैया। आप अपनी भाषा देखो ना। आप जो आप जो अपनी मेरी भाषा ऐसी

484
00:36:26,560 --> 00:36:30,560
है। मैंने क्या देखा? क्या कहा बताइए? मेरी भाषा ऐसी है। शिवा जी मेरी बात

485
00:36:30,560 --> 00:36:34,720
सुनो ना। आप जो वीडियो बना करके डालते हो ना उसकी एक बार भाषा चेक करना मेरी

486
00:36:34,720 --> 00:36:38,720
करना मेरी बातों को स्पष्ट तरीके से आपसे

487
00:36:38,720 --> 00:36:42,800
आपसे कौन सी चीज गलत तरीके से कही है वो बताइए मुझे कोई गलत नहीं

488
00:36:42,800 --> 00:36:46,960
बोला मैंने क्या गलत मेरे पास भी है आपको कैसे स्वहार खराब होता

489
00:36:46,960 --> 00:36:50,960
दिखाई दे रहा है आपको स्वार्ह कैसे खराब होता दिखाई दे रहा है आप जो है

490
00:36:50,960 --> 00:36:54,960
चढ़ चढ़ के और अग्रेसिव मोड पे आकर मैं मोबाइल में से निकल

491
00:36:54,960 --> 00:36:59,440
कर के आ गया हूं क्या नहीं मानसिक आप ऐसा आचरण

492
00:36:59,440 --> 00:37:00,720
कर रहे हैं जो चढ़

493
00:37:00,720 --> 00:37:05,200
बार-ब बात को काटना आचरण आप अपना आचरण देखिएगा

494
00:37:05,200 --> 00:37:09,280
आपने मुझे लिख के क्या भेजा था किस विषय पे चर्चा करेंगे आप आपने

495
00:37:09,280 --> 00:37:13,760
लिख के क्या भेजा आज किस विषय पर किस विषय आपने क्या विषय आप

496
00:37:13,760 --> 00:37:18,000
ना आप आपको याद होना चाहिए ना मुझे मेरे तो ऑपरेटर मेरे तो ऑपरेटर

497
00:37:18,000 --> 00:37:23,040
महोदय ने भी आपसे बात की है ना मैंने पूरी बात नहीं की आपसे जी

498
00:37:23,040 --> 00:37:27,520
अरे मुझे नहीं पता ऑपरेटर ने की आपने की आप बहुत बड़े व्यक्ति हो सकते हैं मैं तो सीधी बात कर रहा था

499
00:37:27,520 --> 00:37:31,920
आप बताइए ना कि क्या विषय दिया था मैं दिखा देता हूं आपको।

500
00:37:31,920 --> 00:37:35,920
हां ऑपरेटर से पूछ लीजिए। ऑपरेटर कोई बहुत

501
00:37:35,920 --> 00:37:39,960
दूर नहीं बैठा आपका। पास में आप बहुत बड़े व्यक्ति मुझे पता है ना।

502
00:37:39,960 --> 00:37:44,160
अरे आपका तो ऑपरेटर बात करता है। हम लोग तो सीधी बात करते

503
00:37:44,160 --> 00:37:48,880
हैं। शिवास जी सीधी बात करते हैं हम। क्या बात सीधी बात ही तो नहीं कर रहे हो आप?

504
00:37:48,880 --> 00:37:53,200
हां सीधी करो। नहीं कर रहे हैं। मैंने प्रश्न पूछा

505
00:37:53,200 --> 00:37:57,360
है कि शंकराचार्य अगर ये निर्णय लेंगे ये कौन सी हमारी संस्था

506
00:37:57,360 --> 00:38:01,360
है और कौन सी नहीं है? तो शंकराचार्य के निर्णायक होने के संबंध

507
00:38:01,360 --> 00:38:05,360
में वो शास्त्र बोलते हैं जिन शास्त्रों को वहां पर प्रामाणिक माना जाता

508
00:38:05,360 --> 00:38:09,360
है। आपके यहां पर जिन शास्त्रों को प्रमाणिक माना जाता है उसमें

509
00:38:09,360 --> 00:38:13,440
उसके आधार पर आपकी व्यवस्था है जो लागू है ये निर्णय करने के लिए कि

510
00:38:13,440 --> 00:38:15,840
कौन सी संस्था आर्य समाजी है और कौन सी

511
00:38:15,840 --> 00:38:20,000
नहीं है। मेरी बात सुनो आप शंकराचार्य

512
00:38:20,000 --> 00:38:24,080
जी की जिस बात को लेकर के आप बात कर रहे हो ना शंकराचार्य जी एक मिनट

513
00:38:24,080 --> 00:38:28,080
भाई साहब यह देख लीजिए आपकी चैट आप मुझे बताइए हमने आपसे कौन से विषय पर

514
00:38:28,080 --> 00:38:32,320
बात करने गई थी और हम अपनी बात से मुकर रहे हैं वो जरा क्या आर्य समाज के द्वारा परिभाषित

515
00:38:32,320 --> 00:38:36,640
होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है पढ़ो एक बार

516
00:38:36,640 --> 00:38:41,040
यही लिखा है ना हां तो मैंने क्या दिया है

517
00:38:41,040 --> 00:38:45,040
हां जी तो इसी विषय पर बात करनी है आपने जैसे अपना जो परिचय

518
00:38:45,040 --> 00:38:49,120
दिया है उसके बारे में हम नहीं पूछ सकते ना पूछो आपको आपको अधिकार है

519
00:38:49,120 --> 00:38:53,200
लेकिन उस विषय पर तो चर्चा कर लो पहले जो विषय आप लेकर के घूम रहे हो पूरा

520
00:38:53,200 --> 00:38:57,200
मैं बता देता हूं विषय घूम जो पूरा घूम रहे हैं लेकर के जैसे अभी मैंने हिंदू

521
00:38:57,200 --> 00:39:01,360
शब्द का उपयोग किया था जी ठीक है तो जब मैंने

522
00:39:01,360 --> 00:39:06,000
मुझे लिख करके दिया पहले सीधे आप वहां आ जाइए मैं आऊंगा मैं आऊंगा

523
00:39:06,000 --> 00:39:10,080
मेरे को बोलने दीजिए मैं आऊंगा आपने मुझे आप जब मैं बोल

524
00:39:10,080 --> 00:39:14,080
रहा था हिंदू शब्द का उपयोग कर रहा था तो आपको यह लगा कि भाई

525
00:39:14,080 --> 00:39:18,160
हिंदू शब्द से मेरे को बात करनी है वह विषय तो नहीं था।

526
00:39:18,160 --> 00:39:22,400
फिर भी आपको लगा ना कि इस पर बात की जाए। इसी तरीके से जब आपने

527
00:39:22,400 --> 00:39:26,480
यह कहा ताल ठोक करके कि भैया हमारी बेटियां जा रही हैं। ये हो

528
00:39:26,480 --> 00:39:30,560
रहा है, वो हो रहा है। तो हम मेरे को भी लगा कि मैं उस बारे में दो बातें

529
00:39:30,560 --> 00:39:31,720
पूछ लूं।

530
00:39:31,720 --> 00:39:35,840
भाई है ना? तो अभी मैंने जो एक बात पूछी है इसका

531
00:39:35,840 --> 00:39:40,080
जवाब आप देंगे या बाद में रख लें। बाद में करें कि आर्य समाज

532
00:39:40,080 --> 00:39:44,080
के द्वारा यह निर्धारित किया जाएगा। किस आर्य समाज की किस

533
00:39:44,080 --> 00:39:48,400
पॉइंट के द्वारा यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन सा आर्य समाज असली है या नकली

534
00:39:48,400 --> 00:39:52,480
है। यह आर्य समाज के द्वारा प्रामाणिक माने जाने वाले शास्त्रों में कहां पर

535
00:39:52,480 --> 00:39:56,480
दी गई है यह व्यवस्था जिसके कारण हम सामने वाले को मनवा सके कि

536
00:39:56,480 --> 00:40:01,040
नहीं ये आर्य समाज नहीं है। ये देख शास्त्रों में लिखा है।

537
00:40:01,040 --> 00:40:05,280
जैसे अगर शंकराचार्य उत्तर देना होगा तो उत्तर दे इसका।

538
00:40:05,280 --> 00:40:09,280
उत्तर दे दूं आपको मैं समझ गया आपकी बात। आप शंकराचार्य जी का वो विषय

539
00:40:09,280 --> 00:40:13,360
ले लीजिए। आप उत्तर ले लीजिए मेरे से। आर्य समाज ने अपना एक नियम बनाया हुआ

540
00:40:13,360 --> 00:40:17,520
है। अपना एक लॉ है आर्य समाज का और वो लॉ कहता है कि भाई कितने समय

541
00:40:17,520 --> 00:40:22,000
तक कहां सत्संग होना चाहिए। कौन व्यक्ति को संध्या हवन के मंत्र आने चाहिए।

542
00:40:22,000 --> 00:40:26,160
किस व्यक्ति को ये सारे मंत्र याद है या नहीं है? उसका पूरा

543
00:40:26,160 --> 00:40:30,160
की पूरी परीक्षा हो। दूसरी बात साप्ताहिक सत्संग होता है कि

544
00:40:30,160 --> 00:40:34,160
नहीं होता? कितने साल तक होता रहा? कितने लोग सदस्य हैं? सदस्य इस विचारधारा

545
00:40:34,160 --> 00:40:38,240
को मानते हैं कि नहीं मानते? यह सब पूरा पैरामीटर है नापने का। इस पैरामीटर को

546
00:40:38,240 --> 00:40:42,240
जो क्वालीफाई करेगा वो आर्य समाज आर्य समाज उसको रजिस्ट्रेशन देता है।

547
00:40:42,240 --> 00:40:46,240
आर्य समाज ऐसे किसी को रजिस्ट्रेशन दे प्रश्न उठ जाता है। इसमें फिर

548
00:40:46,240 --> 00:40:46,880
एक प्रश्न उठ

549
00:40:46,880 --> 00:40:51,040
जाता है। उठाओ ये व्यवस्था पहली बात तो दयानंद जी ने बनाई है।

550
00:40:51,040 --> 00:40:55,280
जाहिर सी बात है आप कह रहे हैं तो बनाई होगी। जी बनाई है ना। कौन से ग्रंथ

551
00:40:55,280 --> 00:40:59,360
में लिखा उन्होंने ये सब? क्या? ये जो व्यवस्था आपने अभी

552
00:40:59,360 --> 00:41:03,360
बोली है ये उन्होंने किस ग्रंथ में? आप आप सब आप पूरी बात सुन नहीं

553
00:41:03,360 --> 00:41:07,520
रहे ना। आपको क्या है ना क्लू ढूंढने का काम कर आप पूरी बात समझ लीजिए

554
00:41:07,520 --> 00:41:11,680
आर्य समाज का एक नियम बना मुंबई के गिरगांव में स्वामी

555
00:41:11,680 --> 00:41:15,760
दयानंद सरस्वती जी ने जब आर्य समाज की स्थापना की तो वहां पर नियम बनाए आर्य समाज

556
00:41:15,760 --> 00:41:19,920
के वहां बैठकर के पूरे नियम बनाए नियम किसी बुक में लिखे होंगे

557
00:41:19,920 --> 00:41:24,000
ना आर्य समाज का अपना लॉ है अपना कानून है बुक का

558
00:41:24,000 --> 00:41:28,000
नाम होगा ना उसका कोई आर्य समाज का अपना लॉ है आर्य समाज

559
00:41:28,000 --> 00:41:32,000
के सारे जितने भी हमारे कार्यालय हैं सब कार्यालय में उपलब्ध

560
00:41:32,000 --> 00:41:36,000
होता है सबको दिया जाता है वो उस बुक का नाम है कोई आर्य समाज

561
00:41:36,000 --> 00:41:40,160
के नियम ही नाम है उसका ऐसे लिखा है आर्य समाज के नियम आर्य समाज

562
00:41:40,160 --> 00:41:44,960
के नियम और दयानंद जी दयानंद जी द्वारा कृत

563
00:41:44,960 --> 00:41:49,760
दयानंद जी द्वारा ठीक है दूसरी बात ये

564
00:41:49,760 --> 00:41:53,920
अब दूसरी बात ये आती अब दूसरी बात ये आती है जैसे कि आपने बताया कि

565
00:41:53,920 --> 00:41:57,920
भाई हमने कई आर्य समाज मंदिर बंद कराए नकली वाले तो

566
00:41:57,920 --> 00:42:02,000
आपने बंद कराने से पहले क्या वहां पर ये सब देखा था कि इसको मंत्र

567
00:42:02,000 --> 00:42:06,480
आते हैं कि नहीं यहां सत्संग होता है कि नहीं या यह सब ऐसा कुछ

568
00:42:06,480 --> 00:42:10,560
चेक किया था। जो आपने प्रश्न उठाया था ना जो लोग गलत काम कर रहे थे

569
00:42:10,560 --> 00:42:14,640
हमारी बहन बेटियों को दूसरे मजहब वालों के साथ में भेज रहे थे वो यही गंदा काम कर

570
00:42:14,640 --> 00:42:18,720
रहे थे। नहीं वो तो वो तो ये कहते हम तो हिंदू पर शुद्धि

571
00:42:18,720 --> 00:42:22,880
आंदोलन करा करके हिंदू में कन्वर्ट करके तब भेज रहे हैं। कौन बोल रहा है आपसे?

572
00:42:22,880 --> 00:42:26,880
वो गलत साबित कैसे करोगे? आप तो किसी आपको कौन बोल रहा है? आपको कौन बोल रहा

573
00:42:26,880 --> 00:42:30,960
है? क्यों? आपने इंटरव्यू नहीं देखा अभी। रिसेंट वाला दिखाएं आपको

574
00:42:30,960 --> 00:42:34,960
इंटरव्यू भाई वो तो किसी किसी मुस्लिम के साथ वो ये वो ये

575
00:42:34,960 --> 00:42:39,120
तर्क देते हैं कि आर्य समाज के द्वारा सर्टिफिकेट दिया जा सकता है किसी

576
00:42:39,120 --> 00:42:43,120
मुस्लिम को हिंदू बनने का और हम तो हिंदू के साथ भेजते हैं अपनी लड़की को

577
00:42:43,120 --> 00:42:46,960
हम मुस्लिम के साथ थोड़ी ना भेजते हैं

578
00:42:46,960 --> 00:42:51,120
आपको किसने बोल दिया सब बातें कहां से ले लिया आपने इंटरव्यू आर्य समाज मंदिर

579
00:42:51,120 --> 00:42:55,120
में बैठे हुए व्यक्ति ने आर्य समाज आर्य समाज का एक छोटे से व्यक्ति

580
00:42:55,120 --> 00:42:59,120
को उठा के आप उसके साथ डिबेट करके डाल दोगे कल को मैं कोई शंकराचार्य जी का

581
00:42:59,120 --> 00:43:04,160
चेला मुझे आपने कोई आपको नियम दिया

582
00:43:04,160 --> 00:43:08,400
वो कोई वेरीफाई व्यक्ति था जिससे आपने उठा के बात कर ली आर्य समाज

583
00:43:08,400 --> 00:43:12,480
संस्था के द्वारा नियुक्त वो वेरीफाई व्यक्ति है जो धर्माचार्य के पद पर

584
00:43:12,480 --> 00:43:16,480
बैठा हुआ है आप नहीं कौन है मुझे बताओ ना कौन व्यक्ति था किसने आपको बोल दिया रायपुर के

585
00:43:16,480 --> 00:43:17,040
आर्य समाज

586
00:43:17,040 --> 00:43:21,120
मंदिर का वो अध्यक्ष है धर्माचार्य है वो अध्यक्ष नहीं होता आर्य समाज

587
00:43:21,120 --> 00:43:25,120
के अध्यक्ष से बात ही नहीं की आपने अरे धर्माचार्य भाई अरे आप यार छोटे से आदमी को उठा

588
00:43:25,120 --> 00:43:29,120
करके कुछ भी बात बोल दोगे उसको डाल दोगे तो भाई साहब

589
00:43:29,120 --> 00:43:33,360
मैंने आपसे पहले जब आपसे मैंने बात की ना बात को बदल रहे हैं। विषय

590
00:43:33,360 --> 00:43:39,360
हो रहा है। आप बदलते हैं बात को मैंने बदलते हैं। आपने

591
00:43:40,440 --> 00:43:44,480
छोटेोटे कि जब आपने चार चार आर्य समाज के नकली मंदिरों को

592
00:43:44,480 --> 00:43:48,720
बंद करवाया तो वहां पे आपने चेक किया ये वास्तव में आर्य समाजी है

593
00:43:48,720 --> 00:43:53,200
या आर्य समाजी का इन्होंने यूं ही रजिस्ट्रेशन ले लिया। कैसे चेक किया था?

594
00:43:53,200 --> 00:43:57,440
चार दिन उसकी तहकीकात की थी क्या? क्यों तहकीकात के बिना

595
00:43:57,440 --> 00:44:01,920
से बंद कर दिया उसको तो आपके आपने ये सब तहकीकात

596
00:44:01,920 --> 00:44:04,560
की

597
00:44:04,560 --> 00:44:08,880
नहीं मैं कौन होता हूं तहकीकात करने वाला मैं अकेला व्यक्ति हूं कि आर्य समाज में कितनी बड़ी व्यवस्था

598
00:44:08,880 --> 00:44:13,440
समाज ने बंद करवाया उसने तहकीकात की क्यों नहीं की

599
00:44:13,440 --> 00:44:17,520
अब ये अब ये बताइए कि जिसने तहकीकात की तो उसके कुछ आधार होंगे ना

600
00:44:17,520 --> 00:44:21,680
उसने क्या तहकीकात की क्या नहीं की कि इतने दिन तक चेक करेंगे आपको

601
00:44:21,680 --> 00:44:25,760
कितनी बार बताऊं मैं कितनी बार बताऊं मैं आपको जब आर्य समाज के व्यक्ति नहीं आर्य

602
00:44:25,760 --> 00:44:29,760
समाज के व्यक्ति से जब हम पूछते हैं कि उसका पैरामीटर क्या है नापने

603
00:44:29,760 --> 00:44:32,160
का? वो संध्या हवन करता है कि नहीं करता? उसको

604
00:44:32,160 --> 00:44:36,160
ये मंत्र आते हैं कि नहीं आते? वो तार्किक व्यक्ति है कि नहीं? वो ईश्वर को एक मानता

605
00:44:36,160 --> 00:44:40,160
है या नहीं मानता? ईश्वर को निराकार मानता है या नहीं मानता है? यज में श्रद्धा रखता

606
00:44:40,160 --> 00:44:44,200
है कि नहीं रखता है? वो पैरामीटर है नापने का। ये

607
00:44:44,200 --> 00:44:48,320
सब ये सब आपके आर्य समाजी लोग जब उनको पता चलता है कि यहां

608
00:44:48,320 --> 00:44:52,400
मुस्लिमों के साथ मुस्लिमों का धन कर्म करा के हमारी बेटियों को ब्याह हो जाता

609
00:44:52,400 --> 00:44:56,400
है तो जो ये वाला आर्य समाज है जाकर के चेक करता है कि यज्ञ में विश्वास

610
00:44:56,400 --> 00:45:00,640
रखता है कि नहीं ये केवल निराकार ईश्वर को मानता है कि नहीं या संध्या वंदन करता है कि नहीं

611
00:45:00,640 --> 00:45:04,800
और जो है वो और भी जो बातें आपने बोली ये सब वो चेक करता है वहां पर रह

612
00:45:04,800 --> 00:45:09,040
के है ना कहां पे रह के उसके साथ आसपास

613
00:45:09,040 --> 00:45:13,120
रहता होगा ना दूरबीन लगा के चेक करता होगा ये सब वो दूरबीन लगा के नहीं

614
00:45:13,120 --> 00:45:17,280
रहता दूरबीन लगा के नहीं रहता जहां जहां से जहां से शिकायत मिलती

615
00:45:17,280 --> 00:45:21,520
है वहां जा के किया जाता है यह सब काम तो फिर वह कैसे करता है उसको कैसे ऑब्जर्व

616
00:45:21,520 --> 00:45:25,600
करता है कितनी बार बताऊं तुम्हें ऐसे ही तो बताया तो है आपको पैरामीटर यही है हमारे पास

617
00:45:25,600 --> 00:45:29,840
में क्योंकि ये जो बात बता रहे हैं ये अव्यवहारिक बात है कि हमने

618
00:45:29,840 --> 00:45:34,400
चेक किया में श्रद्धा रखता है कि नहीं नहीं

619
00:45:34,400 --> 00:45:38,480
तो नहीं वो एक व्यक्ति से मैंने पूछा कि वो यज में श्रद्धा रखता है कि नहीं रखता तो

620
00:45:38,480 --> 00:45:42,640
उसे पूछूंगा ना कैसे होता है बताना उसने अपनी जानकारी छुपा

621
00:45:42,640 --> 00:45:47,120
पाने के लिए आपसे किसी कारणवश बोल दिया कि मैं श्रद्धा नहीं रखता तो हो गया फैसला

622
00:45:47,120 --> 00:45:47,620
हां

623
00:45:47,440 --> 00:45:51,440
बिल्कुल होगा ना फैसला क्यों नहीं होगा उसको तो नहीं बताना मैं किसी कोर्ट के सामने

624
00:45:51,440 --> 00:45:55,520
बैठा हुआ हूं कहीं बैठा हो उससे कोई लेना देना नहीं असत्य

625
00:45:55,520 --> 00:45:59,680
का आचरण करेगा वो व्यक्ति हमारा नहीं हो सकता असत्य आचरण करने वाला व्यक्ति हमारा

626
00:45:59,680 --> 00:46:03,920
नहीं हो सकता असत्य का आचरण नहीं होता यहां यहां सत्य बोला जाता है असत्य

627
00:46:03,920 --> 00:46:07,920
का यहां सत्य बोला जाता यहां गंगाशियार नहीं होता आदमी क्या अभी

628
00:46:07,920 --> 00:46:12,080
मैं चंदन लगा कर के बैठ जाऊं पूरे शरीर में कुर्ता पजामा पहनूंगा

629
00:46:12,080 --> 00:46:16,240
और बढ़ जाते एक कदम और बढ़ जाते हैं। यह बताइए कि उसने असत्य

630
00:46:16,240 --> 00:46:21,120
बोला या वह सत्य संध्या वंदन करता है कि नहीं करता है? यह निर्णय

631
00:46:21,120 --> 00:46:25,120
लेने वाला यह जानकारी करने वाला और इस जानकारी

632
00:46:25,120 --> 00:46:29,440
के आधार पर यह घोषित करने वाला कि वो नकली आर्य समाज है। यह कौन होगा

633
00:46:29,440 --> 00:46:33,680
ये कौन डिसाइड करेगा? आपको बता नहीं दिया मैंने। प्रतिनिधि सभा

634
00:46:33,680 --> 00:46:38,000
डिसाइड करेगी इसको। और कौन अरे मेरे भाई जैसे

635
00:46:38,000 --> 00:46:42,400
कोई व्यक्ति संध्या वंदन कर रहा है कि नहीं कर रहा है यह सारा ऑब्जरवेशन करके एक जासूस

636
00:46:42,400 --> 00:46:46,480
गया आर्य समाजी वो जो आपने कहा नकली वंदन करने मात्र

637
00:46:46,480 --> 00:46:51,200
से नहीं होता आपको शायद इस विषय की जानकारी नहीं है मंत्र

638
00:46:51,200 --> 00:46:55,440
जो प्रतिदिन करता होगा उसको मंत्र तो याद होंगे कि नहीं होंगे बिना मंत्र याद

639
00:46:55,440 --> 00:46:59,520
होगा कुछ भी आपने बताई है आपने चार पांच चीजें बताई

640
00:46:59,520 --> 00:47:02,480
है मैं एक चीज को उदाहरणार्थ बोल रहा हूं मैं एक चीज को

641
00:47:02,480 --> 00:47:06,480
उदाहरणार्थ बोल रहा हूं कि आपके आपके यहां से जब कोई नकली आर्य समाज

642
00:47:06,480 --> 00:47:10,480
मंदिर एक्टिवेट होता है तो आपके यहां से कोई जासूस जाता है।

643
00:47:10,480 --> 00:47:14,480
वो वहां जाकर के निगरानी करता है कि ये से विषय नहीं है।

644
00:47:14,480 --> 00:47:19,760
सामने बैठेगा बिल्कुल सामने सामने बैठ के चर्चा होंगी। जासूस से क्या मतलब है?

645
00:47:19,760 --> 00:47:23,840
कहने का मतलब है कि जिसको जो नकली आर्य समाज मंदिर है उसको यह पता

646
00:47:23,840 --> 00:47:28,000
है कि मेरी जांच करने आया है। वह तब भी वही कार्य करता है जो वो

647
00:47:28,000 --> 00:47:32,000
करता है। वह अपने आप को परिवर्तित करके पेश नहीं करता वहां पर। कैसे कर

648
00:47:32,000 --> 00:47:36,000
लोगे तुम? सारे मंत्र याद कर लोगे। जब पूछे जा सारे प्रश्नों के उत्तर दे

649
00:47:36,000 --> 00:47:41,120
दोगे थोड़ी देर में होने चाहिए वही मंदिर में होगा

650
00:47:41,120 --> 00:47:45,520
एक केवल मंत्र नहीं है यहां मंत्र के साथ साथ नियम भी होने चाहिए

651
00:47:45,520 --> 00:47:49,600
यहां व्यक्ति को जानकारी होनी चाहिए मंदिर में वही

652
00:47:49,600 --> 00:47:53,600
होगा जिसको सारे मंत्र याद होंगे विषय मंदिर में रहने का

653
00:47:53,600 --> 00:47:57,920
नहीं पद पर वो व्यक्ति होगा जिसको जानकारी होगी वैसे नहीं होगा सारे मंत्र सारे

654
00:47:57,920 --> 00:48:02,000
मंत्र कितने मंत्र याद होने चाहिए बताइए पद पर पद पर वो व्यक्ति

655
00:48:02,000 --> 00:48:06,400
होगा जिसको जो पद पर वो होगा व्यक्ति जिसको ये सब याद याद होगा

656
00:48:06,400 --> 00:48:10,560
जिसको सारा विषय पता होगा जिसको तर्क आता होगा वो पद पर होगा जिसको तर्क

657
00:48:10,560 --> 00:48:14,560
नहीं आता जो एक ईश्वर को नहीं मानता जो संध्या हवन को नहीं मानता वो पद पे नहीं

658
00:48:14,560 --> 00:48:17,600
रह सकता यहां पे जिसके पास सामान्य व्यक्ति रह सकता है नहीं रह

659
00:48:17,600 --> 00:48:21,600
सकता नहीं रहेगा पद पे

660
00:48:21,600 --> 00:48:25,680
कैसे रहेगा देखिए तो आपने बातें ये कही कि अब मैं थोड़ा

661
00:48:25,680 --> 00:48:29,840
सा समझ लेता हूं कि जो आर्य समाज के नकली नकली नाम से चलने वाले

662
00:48:29,840 --> 00:48:33,920
मंदिर है वहां आपका जो पॉजिटिव वाला वाइट वाला आर्य समाज

663
00:48:33,920 --> 00:48:37,920
है जो असली है। वहां से एक टीम जाती है। वह उसके

664
00:48:37,920 --> 00:48:42,000
मंदिर में जाती है। उससे सवाल करती है। शास्त्रार्थ करती है। यहां

665
00:48:42,000 --> 00:48:46,080
तक कि उसके साथ दिन भर रहती है कि तू संध्या वंदन कर रहा है कि नहीं हम देखेंगे।

666
00:48:46,080 --> 00:48:50,080
हां पूरा पहले तो स्पष्ट कीजिए। सुनिए मेरी बात। पहले तो आप आप ज्यादा है

667
00:48:50,080 --> 00:48:54,080
ना एडवांस बहुत ज्यादा बनते हो आप। आपसे पूरे दिन का विषय नहीं है। सुनो

668
00:48:54,080 --> 00:48:58,080
पूरे दिन की जासूसी की बात थोड़ी हुई है। पूरे दिन की जासूसी की बात है। सुनो

669
00:48:58,080 --> 00:49:02,400
जरा एक मिनट सुनो बात। एडवांस बनता हूं कि नहीं बनता हूं? एडवांस तो नहीं रहे आप।

670
00:49:02,400 --> 00:49:06,560
एक बात अगली फालतू बोलते आपने व्यक्तिगत मैंने व्यक्तिगत टिप्पणी

671
00:49:06,560 --> 00:49:10,800
की है क्या आपसे मैं व्यक्तिगत कर ही नहीं रहा मैंने व्यक्तिगत टिप्पणी की है क्या मैं व्यक्तिगत

672
00:49:10,800 --> 00:49:15,120
नहीं कर रहा हूं मैं व्यक्तिगत नहीं कर रहा हूं आप एक बात बोलते हो ये क्यों कहा आपने

673
00:49:15,120 --> 00:49:19,280
ऐसे बोल रहा हूं आप एक बात फालतू क्यों बोल रहे हो मैं समझना चाह रहा हूं कि भैया जब कोई नकली आर्य

674
00:49:19,280 --> 00:49:23,360
समाज मंदिर है तो आप जब मैंने 20 बार आपको बोल दिया 20 बार मैंने बोल

675
00:49:23,360 --> 00:49:27,520
दिया आपकी समझ में बात नहीं आ रही कि एक व्यक्ति दिन भर नहीं रहेगा सामने जाके बात होंगी

676
00:49:27,520 --> 00:49:31,840
बात खत्म हो जाएगी आप तो कह रहे पूरे दिन रहेगा जांच करेगी क्या

677
00:49:31,840 --> 00:49:32,720
20 बार 20 बार

678
00:49:32,720 --> 00:49:36,720
बोलने पे इतना मंदबुद्धि तो कोई भी समझ जाता है। 20 बार बोलने पे समझ में नहीं आ रहा।

679
00:49:36,720 --> 00:49:40,720
यह कहां लिखा हुआ है? चलिए ये बताइए। क्या? यह कहां लिखा हुआ है?

680
00:49:40,720 --> 00:49:44,880
कितनी बार बोलने में कौन समझ जाएगा? बताइए कहां लिखा है? कहीं मैं

681
00:49:44,880 --> 00:49:49,360
यही तो बोल रहा हूं आपको। आप तो पूरी पूरे जहां तहां घूमते हो। अपने आप को दिमागदार

682
00:49:49,360 --> 00:49:53,520
घोषित करते हो। सबको नीचा दिखाने का प्रयास करते हो।

683
00:49:53,520 --> 00:49:57,600
पांच छ बार बोल और कर्तव्य के विषय में एकमात्र

684
00:49:57,600 --> 00:50:01,760
शास्त्र प्रमाण है। आप मुझे सनातन सिद्धांत दीजिए। रखिए एक तरफ

685
00:50:01,760 --> 00:50:05,840
उठा व्यवहारिक बात मेरे से सीधी व्यवहारिक बात कीजिए शास्त्रों को

686
00:50:05,840 --> 00:50:10,320
उठा के रखिए एक तरफ बाद में करेंगे शास्त्र की बात पहले व्यवहारिक बात करो

687
00:50:10,320 --> 00:50:14,400
सुनिए अगर व्यवहारिक बात करनी है तो आपकी बात को मैं स्वीकार कैसे कर लूंगा आप जो

688
00:50:14,400 --> 00:50:18,480
कह रहे हो कि 20 बार बोलने पर तो मधुबद्धि भी समझ जाएगा ये आपके आपकी सोच है

689
00:50:18,480 --> 00:50:22,640
मेरी सोच नहीं है ये मेरी सोच नहीं है मैं देख रहा हूं ना सामने मैं आप जब

690
00:50:22,640 --> 00:50:26,720
वीडियो बना करके डालते हो जिस समय पर तो एक एक बात की बाल की खाल निकालते

691
00:50:26,720 --> 00:50:31,800
हो तब तो दूसरे को समझाने का प्रयास करते हो और आप एक एक प्रश्न को 20

692
00:50:31,800 --> 00:50:36,000
उलट समझाने पे भी नहीं समझ में आ रही भाई आप इस आप

693
00:50:36,000 --> 00:50:41,120
इस नियम को सार्वभौम सिद्ध करिए फिर मैं कर रहा हूं नाभ

694
00:50:41,120 --> 00:50:45,280
मैं सार्वभौम सिद्ध कर रहा हूं आप जानब पूछ के एक प्रश्न को 20

695
00:50:45,280 --> 00:50:47,720
बार उठा रहे हो आप फिर

696
00:50:47,720 --> 00:50:51,760
आप बोलो ना फिर हाथ जोड़ के आप हाथ

697
00:50:51,760 --> 00:50:55,920
जोड़ के बोलो कि मैं अल्पमती हूं मेरी एक आध बार में समझ में बात नहीं आती आप

698
00:50:55,920 --> 00:50:59,920
चार पांच बोलिए मैं पांच बार बोलूंगा आप यह सिद्ध करिए कि 20 बार बोलने के

699
00:50:59,920 --> 00:51:03,920
बात आपकी आप कुछ भी बोलते रहो सामने वाले को समझ में ना आए तो पूछ नहीं सकता।

700
00:51:03,920 --> 00:51:08,000
आप यह सिद्ध करिए कहां लिखा है? यह आपका अपना नियम है। हमारा नियम नहीं

701
00:51:08,000 --> 00:51:12,200
है। मेरा नियम नहीं है। मैं देख रहा हूं ना आपको बहुत देर से। आप एक ही बात को

702
00:51:12,200 --> 00:51:16,240
20 एक बात आपको बोल दी गई। आपको समझा दी गई। आपकी समझ में बात

703
00:51:16,240 --> 00:51:21,080
नहीं आ रही है। मैं उसको खोलूंगा। नहीं आ रही तो आप सुनिए।

704
00:51:21,080 --> 00:51:25,200
आप शिव सुनो मेरी बात सुनो। मैं उसे मेरी बात

705
00:51:25,200 --> 00:51:29,280
सुनो। मेरी बात सुनो। आप इस बात को आप मुझे एक बात बताओ। सुनो

706
00:51:29,280 --> 00:51:33,360
मेरी बात एक बात आपको कोई राइट नहीं है बोलने का आपको समझाना है आप थोड़ी कुछ

707
00:51:33,360 --> 00:51:37,360
भी बोलते चले जाओगे बात चलती चली आप सुनो मेरी बात मैं पूछ रहा हूं मैं कुछ नहीं हूं कुछ भी

708
00:51:37,360 --> 00:51:41,440
आप बोल रहे हो आप मुझसे बचने के लिए आप कुछ भी आप एक

709
00:51:41,440 --> 00:51:45,520
बार पहले ये बोलो मुझे एक बार ये बोलो कि मेरी एक बार में समझ में बात नहीं आती आप

710
00:51:45,520 --> 00:51:51,520
चार बार प्रश्न पूछता हूं तो चार बार उत्तर दीजिए आप सनातन सिद्धांत दिखाओ

711
00:51:52,560 --> 00:51:56,560
आप मुझे एक बार बताओ ना कि एक बार में मेरी समझ में नहीं आता चार पांच बार बोलो

712
00:51:56,560 --> 00:52:00,640
आपको यदि मैं आपकी बात को समझना चाह रहा हूं तो उत्तर देना है या हम लोग दूसरा

713
00:52:00,640 --> 00:52:05,040
वो मेन विषय पे आ जाए आ जाओ वही आ जाओ आप आप मैं उत्तर दे चुका

714
00:52:05,040 --> 00:52:09,200
चार बार सुनने वाले सुनने वाले सारे लोग सुन चुके हैं समझ

715
00:52:09,200 --> 00:52:13,280
चुके हैं आप व आ जाओ नोट करके ये बताइए ये बात जो आपने कही सुनने

716
00:52:13,280 --> 00:52:17,520
वाले सारे लोग सुन चुके हैं समझ चुके हैं ये बात क्या मुझे नहीं मालूम है चलिए

717
00:52:17,520 --> 00:52:22,400
आपको मालूम है तभी तो आप आप जानबूझ कर के इसी को तो

718
00:52:22,400 --> 00:52:26,400
आप आप आपको अगर यह बात समझ में नहीं आई होती ना तो आपको अगर

719
00:52:26,400 --> 00:52:30,480
यह बात समझ में नहीं कि हमने बहुत बड़ा झंडा गाड़ लिया जबरदस्ती काहे

720
00:52:30,480 --> 00:52:34,560
का झंडा गाड़ लिया अरे जो सुनने वाले सब समझ चुके हैं हंसते

721
00:52:34,560 --> 00:52:38,560
हुए क्या झंडा है ये और 20 बार बोली जा चुकी

722
00:52:38,560 --> 00:52:42,720
है एक बार आप बोल रहे हो क्या पैरामीटर होगा क्या पैरामीटर

723
00:52:42,720 --> 00:52:47,040
होगा बार-बार एक ही बात बोलते रहते हो जा के वहां नकली आर समाज मंदिर

724
00:52:47,040 --> 00:52:51,200
में आपकी एग्जैक्ट गतिविधि क्या होगी वो आपने क्लियर नहीं

725
00:52:51,200 --> 00:52:55,200
बताया बता दिया मैंने वो जाकर के टीम हमारी जांच करेगी उस

726
00:52:55,200 --> 00:52:59,360
चीज से भाग रहे हैं आप भाग नहीं रहा हूं सुनिए आपके पास

727
00:52:59,360 --> 00:53:03,600
कोई पैरामीटर है ही नहीं टाइम पास करना आपको करना

728
00:53:03,600 --> 00:53:07,680
टाइम पास मेरी बात सुनो आप टाइम पास करने के लिए

729
00:53:07,680 --> 00:53:11,840
आपने जब ये बताया से बात करते हैं

730
00:53:11,840 --> 00:53:16,080
तो मैं उसको समझना समझना चाहता हूं कि आप जाकर के करते क्या है

731
00:53:16,080 --> 00:53:20,080
क्या एक्सजेक्टली आप करते हैं वो आप बताना नहीं चाह रहे मैंने भी

732
00:53:20,080 --> 00:53:24,880
एक बार बता दिया मैंने भी एक बार बता दिया अरे भाई वो सुनना है

733
00:53:24,880 --> 00:53:29,120
अब सुनना है क्या सुनना है तो चुप हो जाइए पहले सुनना है तो सुनिए नहीं पहले मुझे अपनी भड़ास

734
00:53:29,120 --> 00:53:33,200
निकालने दीजिए आपने जो अभी तक आप निकालो ना भड़ास निकालो निकालो

735
00:53:33,200 --> 00:53:37,760
निकालो सुनो मेरी बात सुनने के लिए नहीं बैठा

736
00:53:37,760 --> 00:53:42,160
सुनने के लिए थोड़ी बैठा हूं इतना टाइम नहीं है मेरे पास तो

737
00:53:42,160 --> 00:53:46,320
तुम्हारे पास कोई काम नहीं है घोषित करो ये

738
00:53:46,320 --> 00:53:50,560
बात है और कौन होता है अल्पमति अल्पमति किसको कहेंगे

739
00:53:50,560 --> 00:53:54,560
अल्पमति किसको कहेंगे अल्पमति किसको

740
00:53:54,560 --> 00:53:59,200
कहेंगे अल्पमति किसको कहेंगे फालतू चलाने

741
00:53:59,200 --> 00:54:03,440
थोड़ी नीचे बात करना चाहिए और अकर्तव्य

742
00:54:03,440 --> 00:54:07,760
के विषय में एक बात शास्त्र प्रमाण है वो बात कर पाओ

743
00:54:07,760 --> 00:54:11,920
शास्त्र तक तो पहुंच ही नहीं पा रहे हो शास्त्र तक तो पहुंच ही नहीं पा रहे हो शास्त्र कहां

744
00:54:11,920 --> 00:54:16,000
गए थे तुम्हारे जब इस्लाम को स्वीकार कर लेती जब पूरा

745
00:54:16,000 --> 00:54:20,320
कश्मीर तुम लोगों ने जब तुम्हारा पूरा कश्मीर इस्लाम में कन्वर्ट

746
00:54:20,320 --> 00:54:23,000
करा दिया तब शास्त्र कहां थे जब

747
00:54:23,000 --> 00:54:27,920
जातिपात के नाम पर तुम लोगों ने गरीब हमारे हिंदुओं

748
00:54:27,920 --> 00:54:32,000
तब शास्त्र जिसके भाग रहे हैं तब

749
00:54:32,000 --> 00:54:36,400
धर्म शास्त्र व्यवहारिकता नहीं आएगी

750
00:54:36,400 --> 00:54:41,040
और कोई किसी क्षेत्र में काम करके राजी नहीं हो

751
00:54:41,040 --> 00:54:43,720
जाओगे शास्त्रों

752
00:54:43,720 --> 00:54:48,640
को शास्त्र की शोर मचाते हुए चर्चा करते रहो शास्त्र

753
00:54:48,640 --> 00:54:53,120
के अलावा व्यवहारिक बात भी तो होनी चाहिए व्यवहारिकता तो दिखाओ

754
00:54:53,120 --> 00:54:57,680
व्यवहारिकता दिखाइए व्यवहारिकता है आपका आपका

755
00:54:57,680 --> 00:55:01,760
व्यवहार क्या शास्त्रों से भिन्न चलता है क्या मेरे को तो पूरी निंदा करो पूरी

756
00:55:01,760 --> 00:55:06,000
दुनिया में मैं तो कह रहा हूं क्या मेरा व्यवहार गलत है मैं तो सिद्ध आपको सिद्ध करना

757
00:55:06,000 --> 00:55:10,000
गलत है ना है क्या आप व्यवहार को पूरा गलत सिद्ध

758
00:55:10,000 --> 00:55:14,160
करो मेरे मैं तो कह रहा हूं हां मैं गलत हूं पर वो गलत होने का कारण भी तो है

759
00:55:14,160 --> 00:55:18,320
व्यवहार है वो शास्त्रों से इतर चलता है क्या किसका व्यवहार

760
00:55:18,320 --> 00:55:22,480
आपका मेरा क्यों चलता है शास्त्र से अलग मैं तो शास्त्र आप

761
00:55:22,480 --> 00:55:26,640
भाई साहब आप जब ये मुझसे कह रहे हैं अपने आप को अल्पमति घोषित करो करो क्योंकि आपने

762
00:55:26,640 --> 00:55:30,720
ऐसासा किया तो आपको मुझे कुछ ऐसा देना पड़ेगा ना जो मैं भी मानता

763
00:55:30,720 --> 00:55:35,120
हूं कि आपने कहा इसलिए मान लूं। आपने बोला

764
00:55:35,120 --> 00:55:38,080
अल्पमति किसको कहेंगे इसकी परिभाषा सुन लो जरा मेरे से अगर

765
00:55:38,080 --> 00:55:42,080
आपको नहीं आती हो तो एक व्यक्ति को एक व्यक्ति को एक बार में बोल

766
00:55:42,080 --> 00:55:46,400
दिया गया बुद्धि सद्बुद्धि मेधा बुद्धि प्रजाज बुद्धितांबरा प्रज्जा बुद्धि

767
00:55:46,400 --> 00:55:50,560
ये बुद्धि के प्रकार हैं। समझ गए आप? और जब व्यक्ति एक बार में

768
00:55:50,560 --> 00:55:54,800
बोलने से सुन के समझ लेता है और जो बुद्धिमान बोलते हैं जब एक

769
00:55:54,800 --> 00:55:59,120
बार बोलने से नहीं समझ में आता। कई कई बार बोलना उसको अल्पमति बोलते हैं और क्या बोले?

770
00:55:59,120 --> 00:56:03,600
ठीक है। ठीक है। अब मैं आपसे जो प्रश्न कर रहा हूं इसके उत्तर में

771
00:56:03,600 --> 00:56:07,760
आप वही बात बोलिएगा जो आपने पहले बोली है। एक तो आपकी बात बीच में कट

772
00:56:07,760 --> 00:56:11,840
जाती है। आपका आपका आपका नेटवर्क चला जाता। कोई बात नहीं।

773
00:56:11,840 --> 00:56:15,840
सुनिए सुनिए। अब मुझे बोलने दीजिए। मैंने अभी आपको सुना है। अगर मेरे

774
00:56:15,840 --> 00:56:20,000
प्रश्न के उत्तर में आपको नहीं नया शब्द बोलना पड़ा तो इसका मतलब आपका

775
00:56:20,000 --> 00:56:24,640
ये कथन गलत हो जाएगा कि मैं आपकी बात को समझ नहीं पाया था।

776
00:56:24,640 --> 00:56:28,720
ठीक है। मेरा प्रश्न आपसे यह है कि एग्जजेक्टली वो

777
00:56:28,720 --> 00:56:33,120
व्यक्ति वहां जाकर क्या करता है? उसका सबसे पहला प्रश्न क्या होता है उससे?

778
00:56:33,120 --> 00:56:37,280
मैं यहां से आया हूं। मैं बैठ रहा हूं। मुझे आपसे सवाल करने हैं। मुझे

779
00:56:37,280 --> 00:56:41,280
पता लगाना है कि आप आर्य समाजी हैं कि नहीं? उसकी क्या

780
00:56:41,280 --> 00:56:45,600
वो कारवाही होती है? वो गतिविधि क्या होती है? एग्जैक्ट। वो वो

781
00:56:45,600 --> 00:56:49,840
पूरी गतिविधि जो निर्णायक मंडल जाता है वो निर्णायक मंडल व्यवस्थित जाकर

782
00:56:49,840 --> 00:56:53,200
के वहां पर जांच करता है। उस व्यक्ति को पूछता है जो व्यक्ति

783
00:56:53,200 --> 00:56:57,280
वहां का अध्यक्ष है या उस जांच

784
00:56:57,280 --> 00:57:01,440
करने की व्यवहारिक विधि पूछ रहा हूं आपसे। क्या प्रश्न करोगे उससे जाकर

785
00:57:01,440 --> 00:57:05,520
के? मैंने आप मेरे सवाल का उत्तर नहीं है। आपके

786
00:57:05,520 --> 00:57:09,760
आपके सवाल का ही उत्तर दे रहा हूं। सुनो जरा। आप अगर सुनने की हिम्मत रखते हो सुनो ना।

787
00:57:09,760 --> 00:57:14,160
बीच में नहीं टोकना आप बीच में नहीं टोकना। बोलिए। एक प्रतिनिधि मंडल जाता है। प्रतिनिधि

788
00:57:14,160 --> 00:57:18,400
मंडल जाकर के वहां के अधिकारियों को, पुरोहित को सबको इकट्ठा करके बैठता है। उनकी

789
00:57:18,400 --> 00:57:22,480
जांच करता है। जांच करने के बाद में वो पूछता है उनसे प्रश्न भाई साहब जांच

790
00:57:22,480 --> 00:57:26,480
करने के लिए कुछ चीजें होंगी वो बताइए क्या-क्या करता है। वही बता सुनते

791
00:57:26,480 --> 00:57:30,760
सुनते तो हो नहीं आप बीच में बोल पड़ते हो। आप इसलिए सुनिए आप आप सुनिए पहले।

792
00:57:30,760 --> 00:57:34,960
बोलिए वो जाकर के उन लोगों से पूछता है। प्रश्न पूछता है। प्रतिनिधिमंडल

793
00:57:34,960 --> 00:57:40,240
कोई मूर्खों का नहीं। प्रतिमंडल विद्वानों का एग्जांपल देते चलिए।

794
00:57:40,240 --> 00:57:44,240
फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल जैसे आप आपने गलत गलत गतिविधि

795
00:57:44,240 --> 00:57:48,720
चला रखी है। आपके पास एक टीम आएगी। टीम आ के आपसे प्रश्न पूछेगी।

796
00:57:48,720 --> 00:57:52,800
प्रश्न पूछेगी कि आप आर्य समाज चलाते हैं और आप अगर आर्य समाज में कुछ गलत काम

797
00:57:52,800 --> 00:57:56,880
करते हैं तो आर्य समाज का नियम कायदा कानून ये नहीं कहता कि हम गलत रास्ते पर चलेंगे।

798
00:57:56,880 --> 00:58:01,040
हम सनातन के विरोध में कोई काम करेंगे। तो व्यक्ति आपसे प्रश्न पूछेंगे।

799
00:58:01,040 --> 00:58:05,280
जो प्रतिनिधि मंडल है वो उसका पहला प्रश्न यही होगा क्या आप आर्य समाज को जानते

800
00:58:05,280 --> 00:58:08,320
हैं? अगर जानते हैं तो आर्य समाज के विषय में पूछेगा कि

801
00:58:08,320 --> 00:58:12,400
कितने नियम है? अगर नियम है तो किस-किस नियम का क्या अर्थ

802
00:58:12,400 --> 00:58:16,640
निकलता है? वो सब आपसे पूछा जाएगा और अगर आप वो बता पाते हो

803
00:58:16,640 --> 00:58:20,640
आपसे पूछा आप संध्या करते हो कि नहीं करते हवन करते हो कि नहीं करते। अगर यह काम व्यक्ति

804
00:58:20,640 --> 00:58:24,720
करता होगा तो वो गलत काम नहीं करेगा। समझ गए ये हमारा पैरामीटर है।

805
00:58:24,720 --> 00:58:28,800
और अगर वो ये सब काम नहीं करता। आप सुनिए मैं आपकी बात समझ गया। बहुत बढ़िया बात

806
00:58:28,800 --> 00:58:32,880
बताई आपने। इसमें भी कुछ क्वेश्चन है। इसमें भी कुछ क्वेश्चन है। पर

807
00:58:32,880 --> 00:58:36,960
मैं अभी एक बात बताऊं। आपने जो ये सारी विधि बताई जो अब मुझे समझ में आई क्या

808
00:58:36,960 --> 00:58:41,680
ये विधि आप पहले बता चुके हैं? किसको?

809
00:58:41,680 --> 00:58:47,080
अभी जो आपने खोल के बताया है कि वो ऐसे ऐसे

810
00:58:47,080 --> 00:58:51,120
आपको ये शब्द पहले यूज़ किए थे क्या? आप रिपीट कर लीजिए। आप

811
00:58:51,120 --> 00:58:55,760
रिपीट कर लीजिए। रिपीट कर लीजिए ना। रिपीट कर लीजिए। रिपीट कर लीजिए। क्या रिपीट कर लूं?

812
00:58:55,760 --> 00:58:59,840
जो मैंने बोला था पहले और यह वाला। हां कर लीजिए भैया इनका पहले का

813
00:58:59,840 --> 00:59:04,080
लगाओ जो मैंने पूछा है क्या इन्होंने वाली यह वाला जो इनका क्लिप है यह दिखाओ और इन्होंने

814
00:59:04,080 --> 00:59:08,240
पहले जो आंसर दिया है वो दिखाओ दिखाओ इनको दिखाओ जरा

815
00:59:08,240 --> 00:59:14,240
एक बार

816
00:59:15,800 --> 00:59:19,840
हम अभी आपने जो ये सब बातें कही है कि हम उससे बात करेंगे

817
00:59:19,840 --> 00:59:23,840
तुम ये जो गतिविधियां कर रहे हो और तुम आर्य समाज के 10 नियम जानते

818
00:59:23,840 --> 00:59:29,840
हो कि नहीं जानते हो ये सब बातें आपने पहले बोल दी है उससे

819
00:59:30,320 --> 00:59:34,320
करते हो कि नहीं आपने कहा करता है

820
00:59:34,320 --> 00:59:37,400
कि नहीं आपने

821
00:59:37,400 --> 00:59:41,680
कहा करता है कि नहीं जानबूझकर

822
00:59:41,680 --> 00:59:46,000
जानबूझ के जानबूझ के आप रिपीट

823
00:59:46,000 --> 00:59:50,320
करो ना आप दिखाओ ना मेरे पास रिकॉर्डिंग है मेरे पास रिकॉर्डिंग

824
00:59:50,320 --> 00:59:54,400
है मेरे पास रिकॉर्डिंग है मेरे पास रिकॉर्डिंग है मेरे पास रिकॉर्डिंग है

825
00:59:54,400 --> 00:59:58,480
मेरे पास रिकॉर्डिंग है आप उसका ढिंढोरा मत पीतो। अभी हम दिखा

826
00:59:58,480 --> 01:00:03,600
रहे हैं आपको। आपने पहले दिखाओ। दिखाओ जरा।

827
01:00:03,600 --> 01:00:07,840
इनका दिखाइए। जब मैंने पूछा था कि ये निर्णय कैसे होता है कि आर्य समाज नकली

828
01:00:07,840 --> 01:00:12,000
है कि असली तो इन्होंने क्या बताया था वहां पर और मैं पूछ रहा हूं कि आप जाकर

829
01:00:12,000 --> 01:00:18,000
के वहां क्या करेंगे एक्सैक्टली वो क्या-क्या चीजें होंगी?

830
01:00:18,080 --> 01:00:22,240
वॉल्यूम भेजना। बुक का नाम होगा ना उसका कोई? आर्य समाज

831
01:00:22,240 --> 01:00:26,640
का अपना लॉ है। आर्य समाज के सारे जितने भी हमारे कार्यालय

832
01:00:26,640 --> 01:00:30,960
हैं सब कार्यालय में उपलब्ध होता है। सबको दिया जाता है। नाम है कोई

833
01:00:30,960 --> 01:00:35,040
आर्य समाज के नियम ही नाम है उसका। ऐसे लिखा है आर्य समाज के नियम।

834
01:00:35,040 --> 01:00:39,040
आर्य समाज के नियम और दयानंद जी दयानंद जी द्वारा कृत

835
01:00:39,040 --> 01:00:43,200
दयानंद जी द्वारा ठीक है। दूसरी बात अब दूसरी बात

836
01:00:43,200 --> 01:00:47,440
है। अब दूसरी बात ये आती है जैसे कि आपने बताया कि भाई हमने कई आर्य समाज मंदिर बंद कराए नकली वाले।

837
01:00:47,440 --> 01:00:51,520
तो आपने बंद कराने से पहले क्या वहां पर ऐसा देखा था कि इसको मंत्र आते हैं कि नहीं यहां सत्संग होता

838
01:00:51,520 --> 01:00:55,520
है कि नहीं या ये सब ऐसा कुछ चेक किया था ने प्रश्न उठाया था ना जो लोग

839
01:00:55,520 --> 01:00:59,600
गलत काम कर रहे थे हमारी बहन बेटियों को दूसरे मजहब वालों के साथ में भेज रहे थे वो यही गंदा काम कर रहे थे

840
01:00:59,600 --> 01:01:04,080
नहीं वो तो वो तो ये कहते हैं हम तो हिंदू शुद्धि आंदोलन करा करके हिंदू में भेज रहे

841
01:01:04,080 --> 01:01:08,160
एक मिनट एक मिनट इन्होने यहां पर क्या बताया कि वो लोग

842
01:01:08,160 --> 01:01:12,480
गंदा काम कर रहे थे ठीक है इनका

843
01:01:12,480 --> 01:01:16,480
पैरामीटर ये था वो लोग गंदा काम वो बहन बेटियों की शादी उनके साथ करते हैं कि

844
01:01:16,480 --> 01:01:20,640
नहीं करते हैं। यह पैरामीटर इन्होंने यहां पे बताया है। अभी इन्होंने लास्ट में जब मैं खोल

845
01:01:20,640 --> 01:01:24,720
के इनको पूछना चाह रहा हूं तो इन्होंने क्या-क्या बताया?

846
01:01:24,720 --> 01:01:28,960
दिखाओ इनको लास्ट वाला। लास्ट वाला दिखाओ इन्होंने क्या-क्या बताया?

847
01:01:28,960 --> 01:01:33,600
दिखाओ जरा। क्या बोला?

848
01:01:33,600 --> 01:01:37,760
जब ये मुझसे कह रहे हैं अपने को क्या प्रश्न करोगे उससे

849
01:01:37,760 --> 01:01:41,840
जा के? जा के वहां के अधिकारियों को, पुलिस को सबको इकट्ठा करके बैठता है। भैया एक ही

850
01:01:41,840 --> 01:01:45,920
बात है क्या? मैं नहीं सुनो मेरी बात। सुनो मेरी बात सुनो ना। एक

851
01:01:45,920 --> 01:01:50,320
एक बात को एक जो आप ना आप आप यही चतुराई दिखाते हो हर बार

852
01:01:50,320 --> 01:01:55,040
आप जो चतुराई दिखाते हो ना शिवश यही चतुराई दिखाते हो हर जगह

853
01:01:55,040 --> 01:01:59,120
सुनो मेरी बात ये एक बार एक बार नहीं बोला कई बार बोला गया है

854
01:01:59,120 --> 01:02:03,680
सब आगे का विषय को लो यहां से आगे का विषय यहां से आगे का विषय लीजिए ना

855
01:02:03,680 --> 01:02:07,920
यहां से आगे का विषय लो यहां से आगे का विषय लो यहां से आगे का विषय लीजिए आगे

856
01:02:07,920 --> 01:02:12,000
लीजिए आगे आगे लीजिए आगे बोलो ना मैंने बोला

857
01:02:12,000 --> 01:02:17,360
है ना आगे लो ना इससे उन 20 बारों में लो

858
01:02:17,360 --> 01:02:21,840
अरे इससे आगे लो आगे क्या बोला मैंने आगे लो ना इससे इसे आगे बढ़ाओ जरा

859
01:02:21,840 --> 01:02:25,840
इसी से और आगे दिखाओ जरा आगे चलाओ इसको क्या लेकिन

860
01:02:25,840 --> 01:02:30,320
ये कुछ आगे बताइए क्या सुनते सुनते तो सुनिए

861
01:02:30,320 --> 01:02:34,400
सुनिए पहले वो जा के हम लोगों से पूछता है प्रश्न पूछता है प्रतिनिधि मंडल का मूल होता है

862
01:02:34,400 --> 01:02:40,400
ममंडल विद्वानों का देते

863
01:02:41,240 --> 01:02:45,520
चलिए जो अभी पहले सुनाया था

864
01:02:45,520 --> 01:02:49,600
हिंदू शब्द से मेरे को बात करनी है। वो विषय तो नहीं था। फिर भी आपको लगा ना कि इस पर बात

865
01:02:49,600 --> 01:02:53,680
की जाए। इसी तरीके हो। दूसरी बात साप्ताहिक सत्संग होता है कि नहीं होता। कितने साल तक

866
01:02:53,680 --> 01:02:58,080
होता रहा? कितने लोग सदस्य हैं? सदस्य कि आर्य समाज के द्वारा ये निर्धारित

867
01:02:58,080 --> 01:03:02,240
किया जाएगा किस आर्य समाज की किस पॉइंट के द्वारा ये निर्धारित किया जाएगा कि कौन सा आर्य समाज असली

868
01:03:02,240 --> 01:03:06,240
या नकली है। ये आर्य समाज के द्वारा प्रमाणिक माने जाने वाले शास्त्रों में कहां पर दी गई है ये व्यवस्था।

869
01:03:06,240 --> 01:03:10,320
उसके कारण हम सामने वाले को मनवा सके कि नहीं ये आर्य समाज नहीं है। ये देख शास्त्रों में लिखा

870
01:03:10,320 --> 01:03:14,480
है। जैसे अगर मनवाना होगा आर्य समाज ने अपना एक नियम बनाया

871
01:03:14,480 --> 01:03:18,560
हुआ है अपना एक लॉ है आर्य समाज का और वो लॉ कहता है कि भाई कितने समय तक कहां सत्संग होना चाहिए कौन

872
01:03:18,560 --> 01:03:22,560
व्यक्ति को संध्या हवन के मंत्र आने चाहिए किस व्यक्ति को ये सारे मंत्र याद है या नहीं है

873
01:03:22,560 --> 01:03:26,640
उसका पूरा की पूरी परीक्षा हो दूसरी बात साप्ताहिक सत्संग होता है कि नहीं होता कितने साल तक

874
01:03:26,640 --> 01:03:31,320
होता रहा कितने लोग सदस्य बोल रहा

875
01:03:31,320 --> 01:03:32,560
है मैं

876
01:03:32,560 --> 01:03:36,800
पूछ रहा हूं एक्सजेक्टली वहां पे जो परीक्षा होगी किस प्रकार से होगी मेरा प्रश्न

877
01:03:36,800 --> 01:03:40,880
ये है तो आप बता रहे हो कि हम उससे पूछेंगे परीक्षा ऐसे भी ली जा सकती

878
01:03:40,880 --> 01:03:44,880
है कि हम छुप के जासूसी कर रहे हैं करता कि नहीं करता है। यह आप कह रहे थे। आप कह

879
01:03:44,880 --> 01:03:48,880
रहे यह आप बोल रहे थे कि परीक्षा कैसे ली जाएगी? मैं बोल रहा था यह परीक्षा का

880
01:03:48,880 --> 01:03:53,040
यह कोई व्यवस्था नहीं। सीधे जाने बता दी वो बात मेरा

881
01:03:53,040 --> 01:03:57,040
प्रश्न नया है। मेरा उत्तर नया है। तो क्यों कह रहे हो? 20

882
01:03:57,040 --> 01:04:01,200
बार हम दे चुके आपके प्रश्न। अरे सुनो मेरी बात। जब आप जब आपको समझ में नहीं

883
01:04:01,200 --> 01:04:05,280
आ रहा एक बात मैंने मोटा-मोटी बोल दी। आपकी समझ में नहीं आ रहा तो मुझे तो गहराई से बताना पड़ेगा

884
01:04:05,280 --> 01:04:09,360
ना। फिर एक एक बात खोल करके पत्ते बताने पड़ेंगे ना। जब

885
01:04:09,360 --> 01:04:14,320
आपको मैंने बोल दी आपकी समझ में नहीं आया। फिर आप बार-बार

886
01:04:14,320 --> 01:04:18,400
निकालना पड़ेगा। मुझे समझाने का दूसरा तरीका निकालना पड़ेगा। जब आप

887
01:04:18,400 --> 01:04:22,640
समझने को तैयार नहीं हो। आपको समझाने का मुझे दूसरा तरीका

888
01:04:22,640 --> 01:04:26,720
निकालना पड़ेगा। अगर आप समझने को तैयार नहीं हो तो जब आप

889
01:04:26,720 --> 01:04:30,880
नहीं समझोगे तो जब आप जांच करने की बात करते

890
01:04:30,880 --> 01:04:34,880
हो तो उसका अर्थ यह भी हो सकता है कि हम दूरबीन लेकर के चेक कर

891
01:04:34,880 --> 01:04:39,280
रहे हैं। यह जरूरी नहीं कि हम उससे पूछे। पूछेंगे, पूछेंगे,

892
01:04:39,280 --> 01:04:42,080
पूछेंगे, पूछेंगे।

893
01:04:42,080 --> 01:04:46,160
आपने अब कहा है 21वीं बार में मैं बोल

894
01:04:46,160 --> 01:04:47,600
चुका हूं पहले भी जब

895
01:04:47,600 --> 01:04:51,600
आपकी समझ में बात नहीं आती है तो मुझे बार-बार तरीके से समझाना

896
01:04:51,600 --> 01:04:55,680
पड़ता है और गहराई में और गहराई में जाके समझाना पड़ रहा है

897
01:04:55,680 --> 01:04:59,680
एक बात को खोल खोल करके आपको इसलिए समझाना पड़ रहा है क्योंकि आप समझने को

898
01:04:59,680 --> 01:05:03,760
तैयार नहीं है जो गोलगोल वाली बातें हैं उनको गुर्दा पुआ खा के सामने

899
01:05:03,760 --> 01:05:07,920
वाला चल दे और ऐसे करता रहे आपके पीछे पीछे चल दे

900
01:05:07,920 --> 01:05:11,920
मेरे पीछे क्यों चलते हो शंकराचार्य जी के पीछे चलो शंकराचार्य जी के

901
01:05:11,920 --> 01:05:15,920
पीछे चलो मेरे पीछे चलोगे तो मेरे पीछे चलोगे तो बहिष्कृत हो जाओगे स्वामी

902
01:05:15,920 --> 01:05:20,200
दयानंद मैं दयानंद के पीछे चलता हूं आप मेरे पीछे चलोगे तो बहिष्कृत हो जाओगे

903
01:05:20,200 --> 01:05:24,720
गोलगोल गोलगोल खा नहीं चलता हरि समाज का जो व्यक्ति है

904
01:05:24,720 --> 01:05:28,760
समाज का व्यक्ति गोलगोल खा के नहीं चलता समाज

905
01:05:28,760 --> 01:05:33,440
का वो आपने पिछले 20 बार में नहीं बताई

906
01:05:33,440 --> 01:05:37,440
आपने 21वीं बार में जो बात बताई वो आपने पिछले 20 बार

907
01:05:37,440 --> 01:05:41,600
में नहीं बताई तो आपका यह कहना है आपको इसलिए समझा रहा हूं जब एक बात आपको

908
01:05:41,600 --> 01:05:45,760
समझाई गई मुझे तरीका बदलना पड़ेगा मुझे

909
01:05:45,760 --> 01:05:50,840
तरीका तब बदलना पड़ता है जब आप समझते नहीं

910
01:05:50,840 --> 01:05:55,120
सामरे स्यम समाचार आप सुना है आपने एक वाक्य

911
01:05:55,120 --> 01:06:00,080
है घोषित करो और किसको अल्पमति बोलेंगे

912
01:06:00,080 --> 01:06:02,720
अल्पमति किसको बोलेंगे मैंने बोल दिया आर्य

913
01:06:02,720 --> 01:06:06,960
समाज के दुनिया नियम के अनुसार जा के जांच करेंगे बात खत्म हो गई आपने

914
01:06:06,960 --> 01:06:11,040
कहा और बताइएगा और बताइएगा समझाया वो ये

915
01:06:11,040 --> 01:06:15,520
समझाया कि जांच होती है उसका एमलीफाई कैसे करते हैं इंप्लीमेंटेशन

916
01:06:15,520 --> 01:06:19,600
कैसे होता है व्यवहारिक स्वरूप क्या है वो आपने 21वीं बार में आपने एक

917
01:06:19,600 --> 01:06:23,600
ही प्रश्न बार-बार किया कि नहीं किया आप बोलो आपने एक ही प्रश्न बार-बार किया

918
01:06:23,600 --> 01:06:27,600
कि नहीं किया आपने भाई एक ही प्रश्न नहीं किया मैं उसको

919
01:06:27,600 --> 01:06:32,000
आगे आपने किया आप एक ही प्रश्न करते रहे कि उसका क्या

920
01:06:32,000 --> 01:06:36,320
जांच करेंगे मैं कर रहा हूं आप कह रहे हैं जांच होती है जांच

921
01:06:36,320 --> 01:06:40,560
करने के कई तरीके हैं छुप के सामने से

922
01:06:40,560 --> 01:06:44,560
आप कह रहे हो वो आप कह रहे हो छुप के जांच करने का मैंने कोई छुप के जांच का

923
01:06:44,560 --> 01:06:48,560
विषय नहीं दिया यहां छुप के जासूसी नहीं होती आर्य समाज में

924
01:06:48,560 --> 01:06:52,560
आपने यह भी नहीं बताया था 20 बार आपने यह भी नहीं बताया था 20 बार कि मुझसे

925
01:06:52,560 --> 01:06:56,560
जाकर मैं बता चुका हूं आपको आपको मैंने बोला प्रतिनिधि मंडल जाएगा

926
01:06:56,560 --> 01:07:00,640
वो जांच करेगा वहां बताया था भाई साहब आपने नहीं बताया भाई बताएं आप

927
01:07:00,640 --> 01:07:04,720
आप क्या बात नहीं बताया मैं कई बार बोल चुका हूं इस विषय को पूरा वीडियो

928
01:07:04,720 --> 01:07:08,800
दिखा दो इनको पीछे से के इन्होंने पीछे से क्या बोला बाद

929
01:07:08,800 --> 01:07:12,800
में क्या बोला है और दोनों लाइनों में अंतर है कि नहीं दिखाओ अंतर तो आपकी भाषा

930
01:07:12,800 --> 01:07:17,360
में भी होगा आप जो सेंटेंस बोल रहे हो क्या एक ही शब्द बोलोगे बार-बार

931
01:07:17,360 --> 01:07:17,860
नहीं होगा

932
01:07:17,760 --> 01:07:22,000
शब्द क्या टाइमिंग वही होगी शब्द की आप जबरदस्ती जड़ खोद करके

933
01:07:22,000 --> 01:07:26,160
जो आप विषय से भटक रहे हो शिवश आप विषय से भटक

934
01:07:26,160 --> 01:07:31,040
रहे हो आपको आप विषय से भटक रहे हो जब जानबूझ कर

935
01:07:31,040 --> 01:07:35,120
आप जान के विषय से भटक रहे हो आपके जो शब्द है जो सेंटेंस

936
01:07:35,120 --> 01:07:39,120
आप बोलते हो क्या उसी सेंटेंस को आप 20 बार में लगातार वैसे मैं भाई साहब नहीं कह रहा मैं

937
01:07:39,120 --> 01:07:43,200
कह रहा हूं जो आपकी भावना मैं भी यही कह रहा हूं मेरी भाषा बदलेगी अगर आप

938
01:07:43,200 --> 01:07:49,120
एक ही क्वेश्चन बार-बोगे बार में नई भावना थी

939
01:07:49,120 --> 01:07:53,520
आप जब एक ही क्वेश्चन को बार-बार करोगे तो मुझे समझाने का तरीका बदलना पड़ेगा

940
01:07:53,520 --> 01:07:57,640
ऐसा नहीं है मैंने मैंने ऐसा ही होता

941
01:07:57,640 --> 01:08:01,680
है आप लोग क्या करते हैं वहां जाकर के बात सुनो क्लास में जब

942
01:08:01,680 --> 01:08:05,840
टीचर पढ़ाता है ना और एक जगह पढ़ाता है 50 स्टूडेंट बैठे होते

943
01:08:05,840 --> 01:08:11,840
हैं सबकी समझ में आ जाता है क्या

944
01:08:13,400 --> 01:08:19,240
बात कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी समझ में नहीं आता है उनको

945
01:08:19,240 --> 01:08:23,360
बुलाए आपने जो 20 बार मुझे आंसर दिया था वो 21वीं

946
01:08:23,360 --> 01:08:28,160
बार में नहीं दिया आपने नया नहीं दिया ना दिया बच्चा सुनो

947
01:08:28,160 --> 01:08:32,320
इनको चला के आंसर दे दो आंसर दे दूं आपको

948
01:08:32,320 --> 01:08:36,400
आंसर देता हूं सुनो अभी मैं समझ दूंगा आपको इनको चला के आपको

949
01:08:36,400 --> 01:08:40,560
आप इनको आप आंसर इसको मत दिखाइए। आप मेरा आंसर सुनिएगा जरा। मैं आपको आंसर दे रहा हूं।

950
01:08:40,560 --> 01:08:44,800
सुनो मेरे पास इतना समय नहीं है। एक ही बात को 2020 बार घोटा जाए।

951
01:08:44,800 --> 01:08:48,880
मेरी बात सुनिएगा जरा। आप अभी भी आपकी बात में आपको उत्तर

952
01:08:48,880 --> 01:08:52,960
दे रहा हूं। ये ध्यान रखिएगा। आपने किसी बार में

953
01:08:52,960 --> 01:08:57,040
आंसर दिया है। वो भी कंप्लीट नहीं है। मैं उसको फिर खोलूंगा। आप इस बार

954
01:08:57,040 --> 01:09:01,040
क्वेश्चन कीजिए। अब मेरी बात सुनिएगा। अब मैं उत्तर दे रहा हूं। बोलिए मत। अब

955
01:09:01,040 --> 01:09:04,160
उत्तर दे रहा हूं। सुनिए। एक अध्यापक ने 50 स्टूडेंट

956
01:09:04,160 --> 01:09:08,320
की क्लास में पढ़ाया। दो चार स्टूडेंट की उत्तर समझ में आया। कुछ

957
01:09:08,320 --> 01:09:12,640
की नहीं आया। फिर उन्होंने दोबारा पढ़ाया। फिर कुछ की समझ में आया। फिर तीसरी बार पढ़ाया।

958
01:09:12,640 --> 01:09:16,800
फिर कुछ की समझ में आया। फिर कुछ बच्चे ऐसे थे जो कई बार पढ़ाने पे भी समझ नहीं आया।

959
01:09:16,800 --> 01:09:20,960
क्लास में टीचर ने उनको अलग किया। अलग-अलग करके बहुत तरीके से बड़े

960
01:09:20,960 --> 01:09:24,960
डीपली उनको गहराई से टीचर ने पढ़ाया। उनकी समझ में आया। ऐसा ही

961
01:09:24,960 --> 01:09:29,120
होता है। और वो टीचर टीचर से वो बच्चे प्रश्न करें कि गुरु जी

962
01:09:29,120 --> 01:09:33,120
आपने जब पहले क्लास में पढ़ाया था तो आपने ये उत्तर दिया था। अब जो

963
01:09:33,120 --> 01:09:37,200
पढ़ा रहे हैं आप यह उत्तर दे रहे हो। पहले तो आपने यह बताया था। उन बच्चों को यह

964
01:09:37,200 --> 01:09:41,600
बताया था। मुझे यह बता रहे हो। तो आपका प्रश्न वो वाला है।

965
01:09:41,600 --> 01:09:45,600
समझने का प्रयास करो अपने को। इसका अब आप उत्तर सुनिए इसका।

966
01:09:45,600 --> 01:09:49,600
उन बच्चों को ये नहीं कहा जाता है कि तुम मूर्ख हो। इसलिए हम

967
01:09:49,600 --> 01:09:53,680
तुम्हें अलग से बता रहे हैं। समझे? उनको यह नहीं कहा जाता। आवाज कट जाती है।

968
01:09:53,680 --> 01:09:57,920
बीच में तो आपकी आवाज कट आपकी आवाज रिपीट कर दीजिए। क्या बोला? सुनिए। क्या बोला रिपीट?

969
01:09:57,920 --> 01:10:02,240
जी जो आपने पीछे से बताया है वह यह बताया है कि हमारे हमारा

970
01:10:02,240 --> 01:10:06,320
सिद्धांत क्या है? जांच होती है मगर जांच होने का अर्थ

971
01:10:06,320 --> 01:10:10,320
यह भी हो सकता है कि जासूसी हो और जांच होने का अर्थ यह भी हो सकता

972
01:10:10,320 --> 01:10:14,320
है कि सामने बैठ के कोई रिटन टेस्ट हो। जांच होने का अर्थ यह भी हो सकता है

973
01:10:14,320 --> 01:10:18,320
कि सामने बैठ के कोई ओरल टेस्ट हो। तो अगर इसमें मुझे समझना है

974
01:10:18,320 --> 01:10:19,520
कि ओरल होता है, रिटन

975
01:10:19,520 --> 01:10:23,600
होता है कि जासूसी होती है तो मैं प्रश्न कर रहा हूं। ये एक नया प्रश्न

976
01:10:23,600 --> 01:10:27,680
है अपने आप में। ठीक है? तो आप यह नहीं कह सकते कि वही बात समझाई जा

977
01:10:27,680 --> 01:10:31,680
रही है। जब आपने कहा जांच करते हैं तो जांच करने का मतलब यह

978
01:10:31,680 --> 01:10:35,840
भी हो सकता है रिटन टेस्ट हो। अब आप मुझे या तो शास्त्रों से दिखा दीजिए कि

979
01:10:35,840 --> 01:10:39,840
जांच करने का अर्थ वही होता है जो आपने 21वीं बार में बताया। तो

980
01:10:39,840 --> 01:10:43,920
यह माना जाएगा कि मैं समझ नहीं पाया था। मैं अल्पबुद्धि हूं। या फिर आप मुझे

981
01:10:43,920 --> 01:10:48,080
बताइए कि आपने ऐसा क्यों कहा कि मैं अल्पबुद्धि हूं। आप अल्प

982
01:10:48,080 --> 01:10:52,560
बुद्धि पर टिके रहना चाहते हैं। आप यही घोषित होना चाहते हैं सुनो ना मेरी।

983
01:10:52,560 --> 01:10:56,560
अगर आप सुनो ना मेरी बात। अरे शिवश सुनो यार आप आप अगर अपने आप को

984
01:10:56,560 --> 01:11:00,720
यह बुद्धिमान मानना चाहते हो ना कि आप बुद्धिमान हो इसीलिए आप दर्शन कर रहे हो

985
01:11:00,720 --> 01:11:04,720
तो आप आपको मैं बुद्धिमान घोषित कर दूं मेरा टंका लगाने से आप बुद्धिमान थोड़ी हो

986
01:11:04,720 --> 01:11:08,800
जाओगे मैं अगर एक बार आपको बोल दूं कि आप बुद्धिमान हो तो मेरे मेरे बुद्धिमान

987
01:11:08,800 --> 01:11:12,960
कहने मात्र से आप बुद्धिमान थोड़ी हो जाओगे ये तो आप आप जो

988
01:11:12,960 --> 01:11:17,520
सबके कमेंट पढ़ लीजिए आप आप कमेंट पढ़ लीजिए आप जो लोग जुड़े हैं उनको पढ़ लीजिए

989
01:11:17,520 --> 01:11:22,160
आपकी समझ में आ जाएगा पूरा मैं आपको

990
01:11:22,160 --> 01:11:26,400
जो विषय आप आप जो बार-ब एक ही विषय को रहे हैं ना आपको यही तो चाहते

991
01:11:26,400 --> 01:11:30,480
मैं आपको बुद्धिमान कह देता हूं मेरे बुद्धिमान कहने मात्र से अगर

992
01:11:30,480 --> 01:11:34,640
आप बुद्धिमान होते तो आप तो महाुद्धिमान हो

993
01:11:34,640 --> 01:11:39,840
गए आपने कहा कि आपकी टीम जाती है उससे पूछती है 10 नियम

994
01:11:39,840 --> 01:11:44,000
ठीक है आर्य समाज के 10 नियम उसे आते हैं कि नहीं यह पूछती है

995
01:11:44,000 --> 01:11:48,000
और यह पूछती है कि तुम संज्ञा वंदन करते हो कि नहीं तो

996
01:11:48,000 --> 01:11:52,080
थोड़ी देर के लिए मान लीजिए कि मैं वो व्यक्ति हूं जिसने नकली आर्य समाज खोल रखा है

997
01:11:52,080 --> 01:11:58,080
आप मुझसे पूछिए अब मैंने आपको 10 नियम भी बता दिए। बता

998
01:11:58,440 --> 01:12:03,800
दिए ऐसे थोड़ी होगा। ऐसे परीक्षा नहीं होती। आप बताओ ना नियम

999
01:12:03,800 --> 01:12:08,480
पूरा मेरा प्रश्न पूरा होने दीजिए। बोलिए बोलिए बोलिए

1000
01:12:08,480 --> 01:12:12,800
बोलो। अगर मैंने आपको 10 नियम बता दिए। आपने पूछा कि

1001
01:12:12,800 --> 01:12:16,800
मैं संध्या वंदन करता हूं कि नहीं। मैंने आपको बोल दिया कि हां मैं करता हूं।

1002
01:12:16,800 --> 01:12:20,960
तो हो गया मैं। ओके हो गया। क्या विद्वान व्यक्ति गलत

1003
01:12:20,960 --> 01:12:24,360
काम नहीं कर

1004
01:12:24,360 --> 01:12:28,400
सकता? जिसको वेद जिसको वेद मंत्र रटे हो

1005
01:12:28,400 --> 01:12:32,720
जिसको आपके 10 वो नियम रटे हो वो गलत काम नहीं कर सकता।

1006
01:12:32,720 --> 01:12:36,800
क्या वो जो गलत काम करने वाला है वो आपसे झूठ नहीं बोल सकता कि

1007
01:12:36,800 --> 01:12:40,240
मैं संध्या वंदन करता हूं।

1008
01:12:40,240 --> 01:12:44,320
आपका प्रश्न पूरा हो गया। उत्तर दे दूं। हां बोलिए। आप बोलिए मत बीच में। आप

1009
01:12:44,320 --> 01:12:48,400
बोल बोलिए। आप सुनो जरा उत्तर बोलिए। आर्य समाज के आर्य समाज के उसने

1010
01:12:48,400 --> 01:12:52,480
नियम बता दिए। उसने बोला कि मैं संध्या वंदन करता हूं। उसने बोल

1011
01:12:52,480 --> 01:12:56,800
दिया तो संध्या के मंत्र सुना दीजिए जरा और संध्या के मंत्र सुना दीजिए।

1012
01:12:56,800 --> 01:13:01,440
अगर सुनो मंत्रों का भाव क्या है? अर्थ सुना दीजिएगा।

1013
01:13:01,440 --> 01:13:05,600
मतलब आपका कहने का मतलब ये है कि जो विद्वान व्यक्ति होता है वो गलत काम

1014
01:13:05,600 --> 01:13:09,600
नहीं करता। जो अगर मंत्रों का अर्थ

1015
01:13:09,600 --> 01:13:13,600
सहित जो जो मंत्र जानता होगा वो जो है गलत काम नहीं करेगा।

1016
01:13:13,600 --> 01:13:18,000
ये मैंने नहीं बोला है आपको। तो मैंने दुनिया का ठेका नहीं लिया। पर मेरी आर्य समाज में अगर व्यक्ति

1017
01:13:18,000 --> 01:13:22,000
यह काम कर रहा है तो उसको निष्कासित किया जाएगा।

1018
01:13:22,000 --> 01:13:26,000
किसको निष्कासित किया जाएगा? आर्य समाज से उसको निकाला जाएगा। पूरी दुनिया में

1019
01:13:26,000 --> 01:13:30,080
मंत्र बोल के गलत करेगा कि नहीं करेगा? कितने पर आधारित

1020
01:13:30,080 --> 01:13:34,320
है यह बात। कितने पोंगे पंडे कितने ऐसे धूर्त बन के

1021
01:13:34,320 --> 01:13:38,480
लोगों को रोजग रहे हैं। लोगों के साथ में लोग गड़बड़

1022
01:13:38,480 --> 01:13:39,520
काम कर रहे हैं। वो

1023
01:13:39,520 --> 01:13:43,600
मंत्र बोल के कर रहे हैं। तो उसको मैं लगा दूं कि वो सारे ठीक

1024
01:13:43,600 --> 01:13:47,840
करते हैं। ये कहां पे लिखा है आर्य

1025
01:13:47,840 --> 01:13:52,240
समाज के आर्य समाज है वो सनातन शास्त्रों पर आधारित है कि अपना मनगढ़ंत

1026
01:13:52,240 --> 01:13:56,400
है मनगढ़ंत नहीं है सनातन शास्त्रों पर आधारित है तो आप मुझे बताइए

1027
01:13:56,400 --> 01:14:00,480
ये कहां लिखा है कि जिसको मंत्र रटे होंगे उनका अर्थ भी जानता होगा

1028
01:14:00,480 --> 01:14:04,480
वो जो है अपराधी नहीं हो सकता ये मैंने कब बोला आपको

1029
01:14:04,480 --> 01:14:08,480
आपको मैंने कब बोला आपको मैंने कब बोला

1030
01:14:08,480 --> 01:14:12,560
नहीं लिया है अभी तो अभी तो अभी तो अभी तो

1031
01:14:12,560 --> 01:14:17,400
एक शंकराचार्य और अभी एक

1032
01:14:17,400 --> 01:14:21,520
और विद्वान आदमी और मुसलमानों का समर्थन कर रहा

1033
01:14:21,520 --> 01:14:25,600
मुसलमानों का समर्थन कर रहा तो मैं मंत्र मंत्र बोलने वालों के मंत्र के अर्थ वालों

1034
01:14:25,600 --> 01:14:29,600
का समर्थन नहीं करता सुनो मेरी बात कोई मंत्र याद होगा उसको

1035
01:14:29,600 --> 01:14:33,840
तो होगा ये मैंने नहीं बोला ये आप अपनी मर्जी से व्याख्या

1036
01:14:33,840 --> 01:14:37,920
कर रहे हो शिवश ये तो मौलानाओं का मुल्लाओं का समर्थन कर रहा है शंकराचार्य जाओ ना

1037
01:14:37,920 --> 01:14:42,080
एक बार देखो ये आप बता दीजिए आपकी व्याख्या

1038
01:14:42,080 --> 01:14:46,160
क्या है यह आप बता दीजिए जी मैं बता चुका आपको व्याख्या मैंने बता

1039
01:14:46,160 --> 01:14:50,160
दिया एक बार दोबारा दोबारा मेरे पास मैं बार-बार बार-बार इन सब चीजों को

1040
01:14:50,160 --> 01:14:54,160
रिपीट नहीं करता अगले विषय पर आइए मेरे पास इतना समय नहीं है

1041
01:14:54,160 --> 01:14:54,720
मैं आपसे

1042
01:14:54,720 --> 01:14:58,720
अगला प्रश्न कर रहा हूं अगला प्रश्न वो कीजिए जो आपने लिख करके दिया था बातों

1043
01:14:58,720 --> 01:15:03,840
को घोट मत हलवे की तरह ये बात

1044
01:15:03,840 --> 01:15:08,080
ये बात नहीं करनी ना वाला विषय नहीं करना मैं बोल उत्तर दे चुका हूं

1045
01:15:08,080 --> 01:15:12,080
उत्तर दे चुका हूं उत्तर दे चुका हूं उसमें जड़ बाकी है आप संतुष्ट नहीं हो

1046
01:15:12,080 --> 01:15:16,080
20 दिन तक 20 दिन थोड़ी डिबेट चलेगी। आपको संतुष्ट करने का ठेका नहीं

1047
01:15:16,080 --> 01:15:20,400
है। आपको संतुष्ट करने का ठेका नहीं लेकर के बैठा के संतुष्ट करूंगा।

1048
01:15:20,400 --> 01:15:26,000
आपको प्रश्न किया मैंने उत्तर दिया। बाकी है।

1049
01:15:26,000 --> 01:15:30,080
अभी बहुत से क्वेश्चन उसमें बाकी है। अरे हजार प्रश्न बाकी

1050
01:15:30,080 --> 01:15:34,160
होंगे। उस विषय पर डिबेट कर लीजिए। नहीं तो आपके नहीं तो आपके मन की बात मन

1051
01:15:34,160 --> 01:15:40,160
में रह जाएगी। जिस बात आपके मन की बात मन में रह जाएगी।

1052
01:15:40,360 --> 01:15:44,400
आप लगा और श्स डालते हो श्स

1053
01:15:44,400 --> 01:15:48,400
डालते हो श्स छोटे-छोटे शते हो ना उसपे आ रहा हूं

1054
01:15:48,400 --> 01:15:52,400
जो आपको लिख करके वो लिखा गया था मैं उसपे आ रहा हूं उसपे आ जाइए जरा उसी पे आ

1055
01:15:52,400 --> 01:15:56,720
जाइए हम्म जी तो बताइए क्या आर्य समाज

1056
01:15:56,720 --> 01:16:01,040
के द्वारा प्रतिपादित परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है वो

1057
01:16:01,040 --> 01:16:06,880
सर्वशक्तिमान अनंत सामर्थ्यवान है कि नहीं?

1058
01:16:06,880 --> 01:16:10,960
ठीक है उत्तर ले लीजिए आप बताइए एक तो आप जब बोलते हैं ना तो आपकी आवाज

1059
01:16:10,960 --> 01:16:14,960
कट जाती है बीच में आपका नेटवर्क चला जा रहा है तो अभी जो आपने सेंटेंस बोला ना

1060
01:16:14,960 --> 01:16:19,520
ये आधा मुझे समझ में आया बाद में आपने क्या बोला ये मुझे समझ में नहीं आया

1061
01:16:19,520 --> 01:16:23,520
बोल देता हूं दोबारा एक मिनट आपने एक दोबारा

1062
01:16:23,520 --> 01:16:29,520
बोल दीजिए आप एक बार आप

1063
01:16:34,960 --> 01:16:39,320
हम अभी आ रही है आवाज हां अब आ रही है

1064
01:16:39,320 --> 01:16:43,360
हां तो पहले बताना चाहिए था ना आवाज वो हो रही है मिस

1065
01:16:43,360 --> 01:16:47,360
ठीक है कोई बात नहीं मैंने कई बार बोला भी है आपने हां

1066
01:16:47,360 --> 01:16:51,680
बोलिए तो क्या है क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित

1067
01:16:51,680 --> 01:16:55,920
परिभाषित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान अनंत सामर्थ्यवान

1068
01:16:55,920 --> 01:17:00,080
है कि नहीं है बताइए

1069
01:17:00,080 --> 01:17:04,080
क्या वह अवतार ले सकता है?

1070
01:17:04,080 --> 01:17:08,600
अब मेरा आपसे प्रश्न है कि अवतार लेने की जरूरत क्या है? और बता दीजिए

1071
01:17:08,600 --> 01:17:13,000
जरा। अंगूर

1072
01:17:13,000 --> 01:17:16,720
अंगूर अंगूर मतलब

1073
01:17:16,720 --> 01:17:20,720
भाई मैंने जो प्रश्न किया उस प्रश्न का उत्तर ना देके आपने कुछ और बात कही। तो

1074
01:17:20,720 --> 01:17:22,080
आपने जो प्रश्न किया उसका उत्तर

1075
01:17:22,080 --> 01:17:26,160
ना देके मैं कुछ और बोल रहा हूं। कुछ और नहीं मैंने प्रश्न किया

1076
01:17:26,160 --> 01:17:31,880
आपने पूछा है अनंत अवतार

1077
01:17:31,880 --> 01:17:36,000
नहीं आपके आपका पिक्सल फिक्स हो गया उसका

1078
01:17:36,000 --> 01:17:40,240
उत्तर दिया क्या आपने दे रहा हूं ना उसी का उत्तर दे रहा हूं धैर्य

1079
01:17:40,240 --> 01:17:44,240
जरूरत क्या है धर्म का धर्म का पहला लक्षण है शिवश धैर्य धैर्य

1080
01:17:44,240 --> 01:17:48,240
रखो धैर्य धैर्य रखो एक मिनट नेट कट रहा है आपका नेट कट रहा है चेक

1081
01:17:48,240 --> 01:17:52,400
करें नहीं आपका कट रहा है आपका नेटवर्क गया है मेरा नहीं आपका नेट

1082
01:17:52,400 --> 01:17:57,040
कट रहा है आपका साहब आपका पिक्चर हमारा नेट ठीक है।

1083
01:17:57,040 --> 01:18:03,040
हमारा नेट ठीक

1084
01:18:17,560 --> 01:18:23,560
है। लड़ने बैठे हुए हैं भाई।

1085
01:18:27,520 --> 01:18:33,520
अच्छा दादा

1086
01:18:43,800 --> 01:18:47,840
अंगूर इसीलिए कहते हैं आहान का कोर्स करिए।

1087
01:18:47,840 --> 01:18:53,840
यह सब चीजें आएंगी प्रैक्टिस में।

1088
01:19:01,040 --> 01:19:07,040
रामपाली भी है क्या देख रहे हैं

1089
01:19:09,160 --> 01:19:13,200
जो लड़ने बैठे हुए हैं भाई मौका मिल

1090
01:19:13,200 --> 01:19:19,200
जाए तो

1091
01:19:20,320 --> 01:19:24,680
आ जाओ भैया कुलदीप

1092
01:19:24,680 --> 01:19:28,800
जी आ जाइए आप भी आ जाइए आपको भी दे दे बैंगन

1093
01:19:28,800 --> 01:19:32,840
अंगूर कुछ दे दे

1094
01:19:32,840 --> 01:19:37,160
आपको भी आ जाइए कुछ आपको भी दे

1095
01:19:37,160 --> 01:19:41,440
दे पूछा है उसका उत्तर कुछ और बोल रहे हैं

1096
01:19:41,440 --> 01:19:47,440
तो हम भी कुछ और बोलेंगे ना

1097
01:20:21,360 --> 01:20:27,360
आ जाइए भैया कहां चले गए?

1098
01:20:39,360 --> 01:20:45,360
अंगूर वाला कैसा लगा सभी

1099
01:20:54,520 --> 01:20:58,640
को? जब भी किसी से पूछोगे

1100
01:20:58,640 --> 01:21:04,640
तो यही होता है विषयंतर। जी

1101
01:21:22,200 --> 01:21:26,360
हां विषय पर आने के लिए बोल रहे थे

1102
01:21:26,360 --> 01:21:32,360
भैया तैयारी की होगी। [संगीत]

1103
01:21:40,640 --> 01:21:44,720
आ जाइए कुलदीप जी नेट खत्म हो गया

1104
01:21:44,720 --> 01:21:50,720
क्या आपका

1105
01:22:08,800 --> 01:22:13,480
हां जी बताइए

1106
01:22:13,480 --> 01:22:19,480
भाई आपका पिक्चर जो है फ्रीज है वो भी

1107
01:22:23,120 --> 01:22:27,280
मेरे तो प्रॉब्लम नहीं है आपका

1108
01:22:27,280 --> 01:22:31,360
शायद फोन हीट हो गया होगा ज्यादा देर वॉइस आवाज आ रही

1109
01:22:31,360 --> 01:22:35,440
है पर कट रही है आपका नेट या तो खत्म हो गया है या आपका जो फोन

1110
01:22:35,440 --> 01:22:41,120
है वो हीट हो गया शायद जिस कारण से ऐसा हो रहा है

1111
01:22:41,120 --> 01:22:45,200
ना हीट हुआ है नेट खत्म हुआ है

1112
01:22:45,200 --> 01:22:49,560
आवाज

1113
01:22:49,560 --> 01:22:55,560
आपको आवाज कट रही है आपकी

1114
01:23:24,400 --> 01:23:28,400
तब तक इनके के उसकी विवेचना कर ले जो इन्होंने उत्तर दिया है

1115
01:23:28,400 --> 01:23:32,880
क्योंकि आने में उनको समय लग रहा है। इन्होंने बताया

1116
01:23:32,880 --> 01:23:36,960
कि जो इनका वाइट कॉलर आर्य समाज

1117
01:23:36,960 --> 01:23:42,680
है वह ब्लैक कॉलर आर्य समाज वालों को जाकर के प्रश्न करता है

1118
01:23:42,680 --> 01:23:46,800
और वो ये चेक करता है कि उसको वेद मंत्र आते हैं कि नहीं। वो संध्या

1119
01:23:46,800 --> 01:23:50,800
वंदन करता है कि नहीं। क्योंकि ऐसा करने वाला जो है गलत व्यक्ति नहीं हो

1120
01:23:50,800 --> 01:23:54,880
सकता। मगर मेरे ख्याल से मुझे नहीं लगता फिर यह रावण को जो

1121
01:23:54,880 --> 01:23:59,800
है मानते हैं कि वह विद्वान था शास्त्रों का

1122
01:23:59,800 --> 01:24:04,920
हम वो तो गलत व्यक्ति था फिर

1123
01:24:04,920 --> 01:24:08,960
कैसे वो भी संध्या वंदन भी करता था यहां तो झूठ भी बोल सकते हैं वो तो

1124
01:24:08,960 --> 01:24:14,960
संध्या वंदन करता था

1125
01:24:15,560 --> 01:24:19,920
तो ये एक दिक्कत है। दूसरी बात प्रॉब्लम ये है कि

1126
01:24:19,920 --> 01:24:24,080
निर्णय लेने वाला कौन होगा? ये भी एक प्रॉब्लम है।

1127
01:24:24,080 --> 01:24:28,240
निर्णय कौन लेगा? भाई वो ये कहेगा मैं मैं क्यों मानू कि इसने मेरी जांच

1128
01:24:28,240 --> 01:24:32,880
की और इसने अपनी जांच में ये पाया कि मैं गलत हूं। ये कौन होता है?

1129
01:24:32,880 --> 01:24:36,960
ये निर्णय लेने वाला कौन होगा? मैं एक्चुअली मैं इनकी

1130
01:24:36,960 --> 01:24:40,960
जो विकृति है सिस्टम में वो सामने लाने का प्रयास कर रहा हूं। क्योंकि इनके

1131
01:24:40,960 --> 01:24:45,040
यहां परंपरा नहीं है। उत्तराधिकारी बैठेगा वो अगला बताएगा कौन

1132
01:24:45,040 --> 01:24:49,040
होगा क्या नहीं। उस परंपरा के सिद्धांत के अभाव में आप

1133
01:24:49,040 --> 01:24:53,200
किसी को बाउंट नहीं कर सकते। यही सही है। निर्णायक कोई हो ही नहीं सकता।

1134
01:24:53,200 --> 01:24:57,760
सब लोकतंत्र चलेगा और लोकतंत्र चलेगा तो नकली आर्य समाज को लेंगे आराम से।

1135
01:24:57,760 --> 01:25:01,760
विकृति फैलाएंगे और आप कुछ नहीं कह सकते। ये जो है नकली है

1136
01:25:01,760 --> 01:25:05,840
और ये हमारा नहीं है। कुछ नहीं चल रहा है। अभी जाएंगे कवर करने। रायपुर

1137
01:25:05,840 --> 01:25:10,480
उसको वेद मंत्र भी आते सब आता है। तो चल रहा है वहां पर

1138
01:25:10,480 --> 01:25:16,480
आर्य समाज छत्तीसगढ़ में।

1139
01:25:18,160 --> 01:25:22,880
और भाई इनके यहां पर तो आर्य समाज

1140
01:25:22,880 --> 01:25:27,440
को मानने वाले लोग भी ऐसा करवा रहे हैं ना। अच्छा अच्छा तब क्या करोगे?

1141
01:25:27,440 --> 01:25:32,160
वास्तव में कोई जब मुस्लिम तुम्हारा बनाया हुआ जो मुस्लिम से हिंदू है वो

1142
01:25:32,160 --> 01:25:36,160
आ जाएगा जब शादी करने तब क्या करोगे? बहुत सी दिक्कत

1143
01:25:36,160 --> 01:25:40,160
है भाई। वो बात खत्म। अभी ऐसे कैसे हो जाएगी? मोटा मोटा हमने बता दिया। मान

1144
01:25:40,160 --> 01:25:44,160
लो मोटा मोटा हमने बता दिया। परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण

1145
01:25:44,160 --> 01:25:48,320
में आ जाओ मुक्ति हो जाएगी और उनके विरुद्ध बातें मत फैलाओ

1146
01:25:48,320 --> 01:25:52,280
मान लो तब बाल की खाल निकालोगे

1147
01:25:52,280 --> 01:25:56,320
ना निकाली तो है सत्यार्थ प्रकाश में अपने जो कुतर्क है उनको

1148
01:25:56,320 --> 01:26:02,320
दिया तो है

1149
01:26:08,880 --> 01:26:14,880
चार्जर

1150
01:26:15,280 --> 01:26:19,440
मुझे लगा था कि इनसे बड़ी वैसी चर्चा होगी। असल में जब वहां

1151
01:26:19,440 --> 01:26:23,600
बात कर रहे थे तो मित्र मित्र करके बात कर रहे थे और

1152
01:26:23,600 --> 01:26:27,600
आज तक जब भी इनसे कभी बात हुई तो बहुत लाइट सी बात हुई है।

1153
01:26:27,600 --> 01:26:33,600
मगर यह तो उतना ही उसमें आए हैं। अग्रेसिव मोड

1154
01:26:33,720 --> 01:26:39,720
में चलिए फिर किसी दिन रखते हैं क्योंकि काफी देर हो चुकी है ऑलरेडी।

1155
01:26:40,960 --> 01:26:46,960
आए नहीं वह दोबारा अंगूर सुन के या शायद उनको कोई परेशानी हो रही है आने

1156
01:26:47,880 --> 01:26:51,000
में। विकास

1157
01:26:51,000 --> 01:26:55,440
दास जल्दी देख लीजिए भाई। डेढ़ घंटा हो चुका है ऑलरेडी।

1158
01:26:55,440 --> 01:27:01,440
किसी और दिन दोबारा कर ले आयोजित।

1159
01:27:20,720 --> 01:27:25,720
इस दुनिया में जो लोग जन्म लेते हैं ना इन्हीं के

1160
01:27:25,720 --> 01:27:30,400
अकॉर्डिंगली इनके अकॉर्डिंगली वो इसलिए लेते हैं क्योंकि उनका जो सच्चिदानंद

1161
01:27:30,400 --> 01:27:34,680
वाला मोक्ष का समय है उससे मन ऊब जाता है। इसलिए वो धरती में आते

1162
01:27:34,680 --> 01:27:39,480
हैं मन ऊब जाने के कारण। ठीक

1163
01:27:39,480 --> 01:27:43,600
है? भोग के लिए आते हैं।

1164
01:27:43,600 --> 01:27:47,840
तो शंकराचार्यों की शरण छोड़ के जो लोग भाग रहे हैं वो भोग

1165
01:27:47,840 --> 01:27:51,920
के लिए भाग रहे हैं। हमको वहां भोग मिल जाए। हमको वो मिल

1166
01:27:51,920 --> 01:27:56,320
जाए। वो नियम मर्यादा थोड़ी कम हो जाए। उसके लिए भाग है। तो सूर्य

1167
01:27:56,320 --> 01:28:01,200
के प्रकाश जो जुगनू और उल्लू होते हैं वो

1168
01:28:01,200 --> 01:28:02,960
सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित

1169
01:28:02,960 --> 01:28:07,600
नहीं होते हैं। टिमटिमाते हुए दिए इत्यादि की ओर आकर्षित होते हैं।

1170
01:28:07,600 --> 01:28:11,760
तो जुगनू और उल्लूओं का सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित

1171
01:28:11,760 --> 01:28:15,840
ना होने में सूर्य के सामर्थ्य का दोष नहीं है। जुगनू और उल्लू के

1172
01:28:15,840 --> 01:28:21,840
असमर्थ का दोष है।

1173
01:28:28,720 --> 01:28:34,720
विकास दास आप आना चाहते हैं क्या?

1174
01:28:45,040 --> 01:28:49,040
मतलब आप आ के कुछ भी व्यक्तिगत होते चले जाओ पर्सनल होते चले

1175
01:28:49,040 --> 01:28:53,200
जाओ कि आप अपने आप को मूर्ख कहो मंदबुद्धि कहो मंदबुद्धि घोषित

1176
01:28:53,200 --> 01:28:57,280
कर दो सामने वाले को हम आपसे नहीं व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं कर रहे कि आप

1177
01:28:57,280 --> 01:29:01,280
ये कर रहे हो एडवांस कर रहे हो ये कर रहे हो वो कर रहे हो हम तो यह नहीं कर रहे सवाल

1178
01:29:01,280 --> 01:29:05,440
जवाब सिंपल आपको सवालों से दिक्कत

1179
01:29:05,440 --> 01:29:09,520
हो रही है क्योंकि मैं कुरद रहा हूं उसको खोल रहा हूं एक एक परत आपको परत

1180
01:29:09,520 --> 01:29:15,520
नहीं खुलने देनी है। छुपाना है उस बात

1181
01:29:17,800 --> 01:29:22,040
को। आपकी बात का जवाब दे दिया गया अजनेश

1182
01:29:22,040 --> 01:29:26,080
जी और आपको कोई आपत्ति है तो आ जाइए

1183
01:29:26,080 --> 01:29:32,080
इसी दिन।

1184
01:29:37,920 --> 01:29:41,920
काफी देर हो रही है। अब रहने देते हैं। वो आए

1185
01:29:41,920 --> 01:29:44,280
नहीं

1186
01:29:44,280 --> 01:29:48,880
है। लिंक दे दीजिए। विकास दास आना चाहे तो आ जाए।

1187
01:29:48,880 --> 01:29:54,880
केवल विकास दास के लिए दिया जा रहा है। और कोई नहीं आए।

1188
01:30:00,640 --> 01:30:05,720
वो आ रहे हैं। ठीक

1189
01:30:05,720 --> 01:30:11,720
है। जय श्री राम।

1190
01:30:27,840 --> 01:30:32,080
लगातार यूं ही चर्चा हो रही है आज बढ़िया सी प्यारी सी सॉफ्ट सॉफ्ट

1191
01:30:32,080 --> 01:30:36,240
वाली जैसे एक बार एक हरे

1192
01:30:36,240 --> 01:30:42,240
कृष्णा मूवमेंट को मानने वाले एक सज्जन आए थे

1193
01:30:43,400 --> 01:30:47,600
ना मुझे लगा था कि उनके साथ हो रही हो उनके इनके जैसी वार्ता

1194
01:30:47,600 --> 01:30:51,680
होगी आज। ये तो एकदम खोखियाए

1195
01:30:51,680 --> 01:30:57,680
बैठे

1196
01:31:06,680 --> 01:31:10,800
थे। वो किस-किस को मजा आया था। उसमें वो आनंद आया

1197
01:31:10,800 --> 01:31:13,880
आप लोगों को

1198
01:31:13,880 --> 01:31:18,160
जब क्या वो क्या वो अवतार ले सकता है उसको

1199
01:31:18,160 --> 01:31:24,160
जरूरत क्या है

1200
01:31:24,440 --> 01:31:28,800
अंगूर जब भी इन लोगों से बात करो तो यही करते जरूरत क्या है

1201
01:31:28,800 --> 01:31:33,520
ये नहीं बोलेंगे उसको वो नहीं ले सकता

1202
01:31:33,520 --> 01:31:39,520
विज्ञान दर्शन छोटा बच्चा जैसा है उससे डरना कैसा

1203
01:31:39,680 --> 01:31:44,440
आपको डर लगता होगा इसलिए आपको लगता है कि मुझे भी डर लगता

1204
01:31:44,440 --> 01:31:48,960
है। उसने कार्य ही ऐसा कर दिया है वहां जाके

1205
01:31:48,960 --> 01:31:53,320
बैठ बैठ गया जाकर के वहां जहां पर व्यक्तिगत कटाक्ष हो रहे थे।

1206
01:31:53,320 --> 01:31:58,360
हम उस चर्चा में ऐसी चर्चाओं से दूर रहना

1207
01:31:58,360 --> 01:32:02,600
चाहिए। अब उसके साथ हम मंच कैसे साझा करें? कैसे कहे? आइए

1208
01:32:02,600 --> 01:32:08,000
आइए। आइए बात करते हैं। सम्मान नहीं दे सकते ना।

1209
01:32:08,000 --> 01:32:12,080
क्षमा मांगी नहीं। हमने कहा क्षमा मांग लो कर

1210
01:32:12,080 --> 01:32:16,080
लेते हैं चर्चा। तो क्षमा तभी मांग लेंगे जब

1211
01:32:16,080 --> 01:32:20,880
चर्चा हो रही होगी। अरे भाई जैसे तुमने बिना किसी

1212
01:32:20,880 --> 01:32:25,040
चर्चा होने के ही और जाकर के तुमने गलत कार्य किया तो वैसे ही

1213
01:32:25,040 --> 01:32:29,760
चर्चा से अलग क्षमा मांगो पहले। फिर बात होती है।

1214
01:32:29,760 --> 01:32:33,840
तो फिर वो जो आज आचार्य प्रशांत शर्मा जी हैं उन्होंने लिख दिया कि मेरे

1215
01:32:33,840 --> 01:32:38,000
बहुत कहने पर वो आया नहीं। आए नहीं। शिवश जो है आप लोग निर्णय कर

1216
01:32:38,000 --> 01:32:40,160
ले मैं बार-बार नहीं बोलूंगा। वाह

1217
01:32:40,160 --> 01:32:44,720
खुद ही जज खुद ही जल्लाद सब कुछ खुद ही बन जाओ।

1218
01:32:44,720 --> 01:32:48,880
अपने मन से सब डिसाइड कर लो। जैसे इन्होंने अभी डिसाइड कर लिया था कि मैंने 20 बार

1219
01:32:48,880 --> 01:32:52,960
बता दिया है। 20 बार नहीं बताया था। आपको 21वीं बार में उसे और खोलना

1220
01:32:52,960 --> 01:32:58,960
पड़ा। अभी और खोलना पड़ेगा। अगर बात हो जाती तो।

1221
01:33:01,200 --> 01:33:07,200
वरना अगर वो टॉपिक चलता रहेगा तो उसे और खोलना

1222
01:33:09,080 --> 01:33:13,920
पड़ेगा। चलिए अब फिर कभी करेंगे। हो गया टाइम। काफी टाइम हो चुका है।

1223
01:33:13,920 --> 01:33:19,920
है

1224
01:33:19,960 --> 01:33:24,240
ना? फिर कभी कर लेंगे। उनसे बात हो जाएगी। दोबारा कभी शेड्यूल

1225
01:33:24,240 --> 01:33:30,240
कर लेंगे।

1226
01:33:30,510 --> 01:33:36,510
[संगीत]

1227
01:33:48,480 --> 01:33:54,480
ठीक है भाई 5 साल तक रुकते हैं।

1228
01:33:58,870 --> 01:34:04,870
[संगीत]

1229
01:34:09,440 --> 01:34:13,600
समाजी लोग आना चाह रहे हैं क्या? अरे भाई

1230
01:34:13,600 --> 01:34:19,600
डेढ़ घंटा ऑलरेडी हो चुका है।

1231
01:34:34,240 --> 01:34:40,240
जिन्हें जल्दी थी वो चले गए। हां सनातनी

1232
01:34:43,560 --> 01:34:47,600
जी सूरज सनातनी हां

1233
01:34:47,600 --> 01:34:51,920
अभी देखते हैं 5:40 तक यदि वो नहीं आए तो इनको ले लेंगे सूरज सनात

1234
01:34:51,920 --> 01:34:56,160
आप किस आर्य समाज के पक्ष को रखने आ रहे हैं

1235
01:34:56,160 --> 01:35:02,160
बता दीजिए

1236
01:35:06,000 --> 01:35:10,480
एक ही मैसेज बार-बार ना करें अन्यथा वो बैन कर दिया जाएगा।

1237
01:35:10,480 --> 01:35:16,480
एक मैसेज कर चुके बार-बार एक ही रिपीट मत करिए।

1238
01:35:28,240 --> 01:35:34,200
आप अपनी बात बताएं। आपका आने का उद्देश्य क्या

1239
01:35:34,200 --> 01:35:40,200
है? किस विषय पर बात करनी है आपको?

1240
01:35:52,340 --> 01:35:58,340
[संगीत]

1241
01:36:03,600 --> 01:36:09,600
हम समझे नहीं। आपका कोई मत है उसका नाम बताइए। आपका पक्ष क्या

1242
01:36:10,760 --> 01:36:16,760
है? सनातन के अंतर्गत कौन सा पक्ष है?

1243
01:36:38,000 --> 01:36:42,360
ज्ञान गंगा फ्री में मिल रही है। किसी ने मैसेज दिया है। ज्यादातर समर्थकों

1244
01:36:42,360 --> 01:36:46,560
से निवेदन है कि इनकी ज्ञान गंगा मंगवाइए खींच के एक-एक

1245
01:36:46,560 --> 01:36:51,240
व्यक्ति 10-10 ज्ञान गंगा मंगवाए कम से कम और फिर क्या करना

1246
01:36:51,240 --> 01:36:55,360
है समाजियों के यज्ञ में डालना है किसके यज्ञ में डालना है क्या

1247
01:36:55,360 --> 01:37:00,000
करना है वो आप लोग देख ले मंगाइए किसी ने मैसेज किया नंबर वंबर भी दिया है

1248
01:37:00,000 --> 01:37:04,200
एक एक व्यक्ति 10 10 20 से कम ना मंगाए ठीक

1249
01:37:04,200 --> 01:37:10,200
है यह मैं दे दे रहा हूं आपको नंबर और लिंक

1250
01:37:25,360 --> 01:37:29,520
कहां गया? वो हटा दिया। डिलीट

1251
01:37:29,520 --> 01:37:35,520
कर दिया क्या?

1252
01:37:37,600 --> 01:37:42,200
वह वाला जरा दिखा

1253
01:37:42,200 --> 01:37:46,400
दीजिए। चलिए सभी को जय श्री राम। जुड़ने के लिए

1254
01:37:46,400 --> 01:37:50,480
आभार आप सभी का। वो आएंगे नहीं अभी शायद कोई तकनीकी दिक्कत आ

1255
01:37:50,480 --> 01:37:54,720
गई है। और फिर किसी दिन हम लोग बात करेंगे। क्या

1256
01:37:54,720 --> 01:38:00,720
प्रश्न है आपका?

1257
01:38:02,720 --> 01:38:06,280
चलिए जय श्री राम सभी

1258
01:38:06,280 --> 01:38:10,400
को और मैं निवेदन करूंगा कि कोई आर्य समाज आए

1259
01:38:10,400 --> 01:38:14,640
तो प्रश्न का उत्तर दें ना कि विषयंतर करें। जरूरत क्या है? अलग विषय

1260
01:38:14,640 --> 01:38:19,040
है। आप यह बोल दीजिए कि इसका उत्तर नहीं है हमारे पास। फिर आप पूछिए कि

1261
01:38:19,040 --> 01:38:24,160
वह क्या कहते हैं वह उसकी जरूरत क्या है उसको लेने की?

1262
01:38:24,160 --> 01:38:28,160
ठीक है। जय श्री राम।
