1
00:00:00,780 --> 00:00:05,080
[संगीत] सभी को जय श्री राम आशा

2
00:00:05,080 --> 00:00:09,240
करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

3
00:00:09,240 --> 00:00:13,600
और महाशिवरात्रि का पर्व आप लोगों ने

4
00:00:13,600 --> 00:00:17,680
अच्छे से मनाया होगा और शास्त्र सम्मत विधान

5
00:00:17,680 --> 00:00:21,840
का आलंबन लेते हुए बनाया होगा

6
00:00:21,840 --> 00:00:26,080
आप लोगों को पता ही होगा कि कुछ रात्रिया ऐसी की गई

7
00:00:26,080 --> 00:00:30,400
ऐसी बताई ग है जिसमें की शयन

8
00:00:30,400 --> 00:00:34,480
जो है निषेध किया गया है उसम महाशिवरात्रि

9
00:00:34,480 --> 00:00:38,480
है और जो

10
00:00:38,480 --> 00:00:43,000
जन्माष्टमी होती है वह है दीपावली है

11
00:00:43,000 --> 00:00:47,560
और एक और थी याद नहीं आरही

12
00:00:47,560 --> 00:00:51,800
तो आशा करते हैं अगर इस बार पूरा मतलब इस

13
00:00:51,800 --> 00:00:56,040
इस मर्यादा का पालन ना भी कर पाए हो तो अगली बार से अवश्य

14
00:00:56,040 --> 00:01:00,320
करें और इसमें इन रात्रि हों में शयन नहीं किया

15
00:01:00,320 --> 00:01:04,440
बल्कि भगवान भगवन नाम का जप किया जाता है मंत्र है तो मंत्र का ज्यादा

16
00:01:04,440 --> 00:01:08,600
से ज्यादा जप किया जाता है जिसे की उस

17
00:01:08,600 --> 00:01:12,040
मंत्र आपको सिद्ध हो

18
00:01:12,040 --> 00:01:15,200
जाए

19
00:01:15,200 --> 00:01:19,920
तो एक भाई साहब है वीर प्रताप करके नाम है इनका

20
00:01:19,920 --> 00:01:24,000
और यह हमसे रिसेंटली जो हमारा एक आने वाला

21
00:01:24,000 --> 00:01:28,240
वीडियो है उसमें उसका जो एक रील

22
00:01:28,240 --> 00:01:32,200
हमने रिलीज किया है

23
00:01:32,200 --> 00:01:36,400
जी जी सभी को जय श्री राम और

24
00:01:36,400 --> 00:01:40,880
जितने भी छोटे हैं उन सबको ेर सारा प्रेम स्नेह आशीर्वाद

25
00:01:40,880 --> 00:01:45,400
और जो बड़े हैं उनको अभिवादन

26
00:01:45,400 --> 00:01:50,560
प्रणाम उनको और जो समकक्ष है उनको यथोचित

27
00:01:50,560 --> 00:01:54,720
अभिवादन और एक बात और मैं बता दूं कि शुरू

28
00:01:54,720 --> 00:01:58,720
कर रहे हैं जब हम तो शुरू में बता दूं कि हमें कुछ संसाधनों की आवश्यकता

29
00:01:58,720 --> 00:02:03,000
पड़ रही है तो जो भी कुछ अर्थ से अगर सहायता करने के इच्छुक

30
00:02:03,000 --> 00:02:07,000
है वह हमसे इसके लिए संपर्क कर सकते हैं मैं

31
00:02:07,000 --> 00:02:11,320
कुछ ऐसी चीजें हैं जो जुटाने है अभियान के लिए

32
00:02:11,320 --> 00:02:15,600
तो उसमें आप एक एक एक एक चीज का अगर भार अलग-अलग लोग

33
00:02:15,600 --> 00:02:19,800
ले लेंगे तो सारी चीजें अरेंज हो जाएंगी

34
00:02:19,800 --> 00:02:23,880
तो यह जो भाई साहब है जो आज हमारे साथ लाइव चर्चा में जुड़ने

35
00:02:23,880 --> 00:02:28,200
वाले हैं यह हमसे एक रिसेंटली एक हमने ल

36
00:02:28,200 --> 00:02:30,280
रिलीज की थी आने वाला एक

37
00:02:30,280 --> 00:02:34,320
वीडियो है स्न के महानुभाव है ब्रह्मचारी उनके साथ हमारी चर्चा

38
00:02:34,320 --> 00:02:38,520
हुई थी तो उसका एक अंश हमने रिलीज किया था तो उसी अंश

39
00:02:38,520 --> 00:02:42,640
को लेकर के इनको कुछ आपत्तियां थी तो इन्होंने वहां पर कुछ टिप्पणियां

40
00:02:42,640 --> 00:02:46,840
की थी जिनका हमने यथा सामर्थ उत्तर देते हुए इनको

41
00:02:46,840 --> 00:02:51,520
जो है आमंत्रित किया और अब वह आज यहां पर उपस्थित है

42
00:02:51,520 --> 00:02:57,520
तो हम उनको ले लेते हैं सर्वप्रथम नमस्कार

43
00:03:01,440 --> 00:03:05,520
जी जय श्री राम जय श्री राम अवान जी

44
00:03:05,520 --> 00:03:09,720
जी तो आ जी जी

45
00:03:09,720 --> 00:03:13,800
जी बताए आप क्या कह रहे हैं जी मैं कह रहा

46
00:03:13,800 --> 00:03:18,000
हूं अवान जी हमारी य टिप्पणी टिप्पणियां का वार्तालाप होने

47
00:03:18,000 --> 00:03:22,280
से पहले मैं कुछ चीजें बताना चाहूंगा कि मैं चाहता हूं कि एक पॉइंट

48
00:03:22,280 --> 00:03:26,280
आप दीजिएगा एक पॉइंट मैं दीजिएगा मैं यह नहीं चाहता हू कि हम दोनों एक दूसरे

49
00:03:26,280 --> 00:03:30,320
के बोलने के बीच में ही टकरा जाए तो काफी मीनिंगफुल डिस्कशन हो

50
00:03:30,320 --> 00:03:34,720
तो इसके लिए मैं चाहता हूं एक पॉइंट आप दें और एक पॉइंट मैं दूं

51
00:03:34,720 --> 00:03:39,360
जी जी बताएं कुछ शायद नेटवर्क इशू हो गया था बताइए

52
00:03:39,360 --> 00:03:43,440
जी मैं कह रहा हूं कि ताकि हमारी डिस्कशन मीनिंगफुल जाए अवान

53
00:03:43,440 --> 00:03:45,800
जी मैं चाहता हूं कि हमारे जो कन्वर्सेशन

54
00:03:45,800 --> 00:03:49,960
होगी एक पॉइंट आप दीजिएगा अपनी साइड से एक पॉइंट मैं दीजा ताकि जब

55
00:03:49,960 --> 00:03:53,960
हम दोनों की बीच में बात हो रही है तो हम एक दूसरे को काटे ना बीच में क्योंकि बुरा लगता

56
00:03:53,960 --> 00:03:58,040
है जब कोई अपनी टिप्पणी दे रहा होता है उसके बीच में ही बोलना बुरा लगता है तो मैं चाहता हूं कि एक जब

57
00:03:58,040 --> 00:04:02,760
मैं बोल रहा हूं तब आप ना बोले जब आप बोल रहे हो तो मैं ना बोल ये ठीक

58
00:04:02,760 --> 00:04:07,040
है मैं प्रयास करूंगा असल में देखिए

59
00:04:07,040 --> 00:04:11,080
हो सकता है कि सामने से देखने में ऐसा लगता हो कि मैं

60
00:04:11,080 --> 00:04:15,120
बोलने नहीं देता हूं सामने वाले कोर

61
00:04:15,120 --> 00:04:20,680
सुन लीजिए सुन लीजिए अब देखिए अभी आपने काटा अभी आपने

62
00:04:20,680 --> 00:04:24,760
काटा अभी आपने काटा ना बस यही होता होता क्या है कि जिस

63
00:04:24,760 --> 00:04:28,760
संदर्भ में हम बात कर रहे हैं सामने वाला व्यक्ति उस संदर्भ में बात ना

64
00:04:28,760 --> 00:04:32,840
करके कुछ और बात कर कर रहा होता है तो उसको बताना पड़ता है कि यह विषय नहीं

65
00:04:32,840 --> 00:04:36,920
है यह विषय है जैसे अभी आपने बताने के लिए मुझको कहा नहीं नहीं

66
00:04:36,920 --> 00:04:40,960
है ना बस इतना सा अंश है विषयात होने से बचाने के लिए याद

67
00:04:40,960 --> 00:04:46,960
दिलाने के लिए बोलते हैं फिर भी प्रयास करूंगा कि आपकी पूरी बात

68
00:04:47,800 --> 00:04:52,040
सुनू तो अ सबसे

69
00:04:52,040 --> 00:04:56,880
पहले आप अपना एक संक्षिप्त परिचय दे दीजिए कि आप

70
00:04:56,880 --> 00:05:01,240
मतलब कहां से जुड़े हुए हैं इस कौन को किस प्रकार से

71
00:05:01,240 --> 00:05:05,320
आप जानते हैं और उ उसमें कहा किस कौन से जुड़े हैं वहा

72
00:05:05,320 --> 00:05:09,640
गुरु कौन है आपके थोड़ा सा अपने बारे में बता द जी मैं

73
00:05:09,640 --> 00:05:13,760
आपको बताना चाहूंगा कि मेरा नाम वीर प्रताप सिंह चाणक है अपनी

74
00:05:13,760 --> 00:05:17,960
आयु में डिस्क्लोज नहीं करना चाहूंगा वो तो अच्छा ही रहेगा मैं आपको बताना चाहता

75
00:05:17,960 --> 00:05:22,160
था कि मैं इसकन का मेंबर नहीं हूं ना मैं इसकन से अभी जुड़ा हुआ

76
00:05:22,160 --> 00:05:26,200
हूं मैं इसकन की कही हुई बातें जो श्रीला प्रभुपाद ने अपनी किताबों

77
00:05:26,200 --> 00:05:29,960
में कही थी जैसे कि

78
00:05:29,960 --> 00:05:34,200
न मोस्ट फेमस बुक्स उसको पढ़कर काफी ज्यादा प्रभावित हुआ था

79
00:05:34,200 --> 00:05:38,680
और उन्होंने अपने जीवन काल में जितनी भी बातें की है मैं

80
00:05:38,680 --> 00:05:42,680
यह देखकर बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ हूं कि उन्होंने कैसे वेस्ट में इन्फ्लुएंस किया था और मैं

81
00:05:42,680 --> 00:05:46,360
उसी के ऊपर आज

82
00:05:46,360 --> 00:05:50,440
आपसे कर ऐसा है शील प्रभुपाद जी

83
00:05:50,440 --> 00:05:54,840
अपनी कमेंट्री में बताते हैं कि अगर आपने

84
00:05:54,840 --> 00:05:58,840
बुक ले भी ली है परंतु आपने

85
00:05:58,840 --> 00:06:03,040
उस परंपरा किसी आचार्य या गुरु से जाकर के उसको

86
00:06:03,040 --> 00:06:07,040
वेरीफाई नहीं किया है तो आपकी वह पढ़ाई व्यर्थ जाएगी

87
00:06:07,040 --> 00:06:11,200
ना जी हो सकता है कि वो दृष्टांत कुछ और बताना चाह रहे

88
00:06:11,200 --> 00:06:15,280
हैं अर्थ कुछ और बताना चाह रहे हैं तो आपने कन्फर्म कहां से

89
00:06:15,280 --> 00:06:19,560
किया कि इनकी बुक का जो अर्थ मैं समझ रहा हूं वही अर्थ है सपोज

90
00:06:19,560 --> 00:06:25,560
ट आज आप यह कहेंगे कि यहां पर यह लिखा

91
00:06:25,560 --> 00:06:31,560
है आपकी आवाज नहीं आ रही है

92
00:06:32,680 --> 00:06:36,960
मेरी आवाज आ रही है ना सबको जी बोलिए बोलिए अब र तो उसके

93
00:06:36,960 --> 00:06:41,120
मान लीजिए दो मीनिंग निकल सकते हैं जो प्रभुपाद जी ने अपनी बुक में लिखा है ठीक

94
00:06:41,120 --> 00:06:46,040
है अब उस बात का एक मीनिंग आपने पकड़ लिया

95
00:06:46,040 --> 00:06:50,080
और हमें उसके दूसरे मीनिंग से दिक्कत है जो आपने पकड़ा है

96
00:06:50,080 --> 00:06:54,320
उससे दिक्कत नहीं है हमें उसके दूसरे मीनिंग से दिक्कत है मगर

97
00:06:54,320 --> 00:06:58,400
आप कहेंगे नहीं तो यहां पर तो यह वाला मीनिंग है मगर

98
00:06:58,400 --> 00:07:02,400
वो जो मीनिंग आप जो बताएंगे वो आपने कहीं से वेरीफाई नहीं किया

99
00:07:02,400 --> 00:07:06,600
है कि प्रभुपाद जी की बात का जो मीनिंग मैं बता रहा हूं वही

100
00:07:06,600 --> 00:07:10,680
मीनिंग यहां पर लेकर चलना है या फिर वो मीनिंग जिस पर

101
00:07:10,680 --> 00:07:14,920
हमको आपत्ति है तो इसमें तो फिर हम आपस में बात

102
00:07:14,920 --> 00:07:19,400
ही नहीं कर पाएंगे ना जब तक आपने प्रभुपाद जी की बातों को

103
00:07:19,400 --> 00:07:23,600
कहीं से वेरीफाई नहीं किया है उनके जो बोनाफाइड डिसिप

104
00:07:23,600 --> 00:07:27,640
है है ना डिसाइल्स मेरी अंग्रेजी

105
00:07:27,640 --> 00:07:32,240
थोड़ी उतनी खतरनाक नहीं है त्रुटिया हो सकती है

106
00:07:32,240 --> 00:07:36,440
तो जो उनके जो प्रामाणिक शिष्य है जिन्होने उनसे शिक्षा

107
00:07:36,440 --> 00:07:40,520
ली है उनके उनके शिष्यों से शिक्षा ली है

108
00:07:40,520 --> 00:07:44,600
तो आपको उनकी बात को वेरीफाई करवाना होगा ना कि यह बात जो मैं ले रहा

109
00:07:44,600 --> 00:07:47,760
हूं इनका अर्थ जो ले रहा हूं वही अर्थ स्कोन

110
00:07:47,760 --> 00:07:52,000
को मान्य है कि नहीं मालूम पड़ा आप यहां पर दूसरा अर्थ लेकर के उसको डिफेंड

111
00:07:52,000 --> 00:07:56,040
कर रहे हैं मगर स्कोन के द्वारा दूसरा ही अर्थ स्वीकार है फॉर एग्जांपल एक बात

112
00:07:56,040 --> 00:08:00,280
मैं आपको बताऊ जैसे कि प्रभुपाद जी ने

113
00:08:00,280 --> 00:08:05,360
एक जगह कह दिया कि कृष्ण इज रास्कल

114
00:08:05,360 --> 00:08:09,440
आवाज कट रही है वापस आवाज कट रही है मेरी कोई

115
00:08:09,440 --> 00:08:14,040
कमेंट करके बता दे भाई आपकी आवाज कट रही है हवान

116
00:08:14,040 --> 00:08:18,160
जी मेरी आवाज कट रही है कोई कमेंट करके बता दे हवान जी आपकी आवाज

117
00:08:18,160 --> 00:08:22,200
कट रही है मेरी आवाज नहीं कट रही है आपको कोई

118
00:08:22,200 --> 00:08:26,640
शायद आपके नेटवर्क इशू है लोग

119
00:08:26,640 --> 00:08:31,120
आप एक बार जाकर पुन वापस आ जाइए

120
00:08:31,120 --> 00:08:37,120
आज्ञाकारी जी आप सुन पा रहे हैं इंटरनेट मेरी इंटरनेट सेवा कुछ अच्छी नहीं

121
00:08:37,200 --> 00:08:43,200
है आवाज नहीं कट रही है सभी लोग बता रहे

122
00:08:49,960 --> 00:08:55,960
हैं आप एक बार ना डिस्कनेक्ट हो कर के वापस आ जाइए

123
00:09:01,880 --> 00:09:06,760
आप डिस्कनेक्ट होकर वापस आ जाइए जी ठीक है

124
00:09:06,760 --> 00:09:10,920
जी जी ठीक है हा तो मैं आपको एग्जांपल दे रहा था कि जैसे कि उन्होंने एक जगह

125
00:09:10,920 --> 00:09:15,040
पर भगवान श्री कृष्ण को भी रासकल कहा है अब एक

126
00:09:15,040 --> 00:09:19,400
अर्थ यह है कि उन्होंने रासकल कहते हुए यह बताया है कि दुनिया में अगर रासकल

127
00:09:19,400 --> 00:09:23,600
डम है जो कि वहा उन्होने तर्क भी लिखा है तो जिस

128
00:09:23,600 --> 00:09:27,800
भी चीज का कोई अस्तित्व है तो उसका मूल कारण कृष्ण ही है तो

129
00:09:27,800 --> 00:09:31,920
यदि दुनिया में राल है तो उसका मूल कारण रास्कल जो है

130
00:09:31,920 --> 00:09:36,040
वो कृष्ण को भी मानना पड़ेगा कि उनमें वो चीज है अगर उनमें कोई चीज

131
00:09:36,040 --> 00:09:40,760
नहीं है तो उसका दुनिया में अस्तित्व नहीं हो सकता यह बात समझ में आती

132
00:09:40,760 --> 00:09:45,400
है मगर अब मान लीजिए स्कोन वाले यह कहे कि

133
00:09:45,400 --> 00:09:46,400
नहीं

134
00:09:46,400 --> 00:09:50,520
रास्कल उन्होंने इसलिए कहा था क्योंकि रासकल का ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में कुछ अलग

135
00:09:50,520 --> 00:09:54,560
अर्थ है उसका बहुत अच्छा अर्थ है तो उस पर हमें आपत्ति हो

136
00:09:54,560 --> 00:09:58,600
जाएगी हम कहेंगे फिर अपने पिता को रास्कल कहो हम कहेंगे कि

137
00:09:58,600 --> 00:10:02,840
अपने गुरुओ को रासकल कहो अगर वो अच्छा शब्द है तो समझ रहे

138
00:10:02,840 --> 00:10:06,920
अब आप यहां पर डिफेंड करेंगे कि नहीं रासकल का वो वाला तर्क लेंगे जो

139
00:10:06,920 --> 00:10:11,160
अगर दुनिया में रास्कल डम है तो इसका अर्थ

140
00:10:11,160 --> 00:10:15,360
है कि वो जो चीज है वो जो तत्व है वो आया तो कृष्ण से ही है तो

141
00:10:15,360 --> 00:10:19,600
हमें मानना पड़ेगा कृष्ण में भी वो है है ना आप यहां पर वो पक्ष

142
00:10:19,600 --> 00:10:23,600
लेंगे और स्कोन वाले कहेंगे नहीं नहीं वो सब नहीं है बल्कि

143
00:10:23,600 --> 00:10:28,560
सीधे सधे ये है कि रास्कल का तो अच्छा अर्थ है तो फिर हम

144
00:10:28,560 --> 00:10:32,560
अगर आपने ने अपनी बातों को इस कन से वेरीफाइड नहीं करवाया है

145
00:10:32,560 --> 00:10:36,720
डायरेक्टली किसी परंपरा में उनकी जो परंपरा वो मानते

146
00:10:36,720 --> 00:10:40,840
हैं उसमें जाकर के आपने वेरीफाई नहीं कराया तो आपके अर्थ को

147
00:10:40,840 --> 00:10:45,280
हम कैसे मान लेंगे कि य स् कन का ही अर्थ है यह प्रॉब्लम

148
00:10:45,280 --> 00:10:49,400
है जी मैं बोलू जी बोलिए

149
00:10:49,400 --> 00:10:53,600
जी जो इनकी बुक मिलती है सेफ रिलाइजेशन

150
00:10:53,600 --> 00:10:58,080
आप बोल रहे हैं कि उनकी जो डिसाइल सक्सेशन आती है उनके बोनाफाइड स्पिरिचुअल

151
00:10:58,080 --> 00:11:01,600
मास्टर होते हैं उनके ही कहे हुए मान्यता

152
00:11:01,600 --> 00:11:05,960
के वर्ड को हम मान्य रखते हैं उनके अ सही कह रहे कि उनके वर्ड को मिसइंटरप्रेट

153
00:11:05,960 --> 00:11:09,840
किया जाता है

154
00:11:09,840 --> 00:11:15,840
परंतु बात करते तो नीचे चीज

155
00:11:18,440 --> 00:11:24,440
च अब

156
00:11:26,800 --> 00:11:31,240
अभी जी जी थोड़ा सा इशू है जी

157
00:11:31,240 --> 00:11:35,440
शीला प्रभुपाद जब भी अपनी कोई किताब लिखते हैं और जब भी व कोई वर्ष डालते

158
00:11:35,440 --> 00:11:39,440
हैं अपने कोई टिप्पणी देते हैं कोई आपत्ति जनक कुछ भी चीज बोलते हैं एक

159
00:11:39,440 --> 00:11:43,800
नीचे दे देते जिसका नाम होता है परपट परपट का मतलब होता है

160
00:11:43,800 --> 00:11:47,920
उस चीज से उनका एजट मतलब क्या था तो जो भी

161
00:11:47,920 --> 00:11:51,920
नया व्यक्ति इकन से जुड़ना चाहता है भगवान की लीलाओं से जुड़ना चाहता

162
00:11:51,920 --> 00:11:55,920
है जब व यह परपट पड़ता है उसम कोई प्रॉब्लम ही नहीं आ सकती है इट

163
00:11:55,920 --> 00:12:00,040
एस इ अगर आप खुद एक बोना स्पिरिचुअल मास्टर से पढ़ रहे सर सेकंड

164
00:12:00,040 --> 00:12:04,120
ऑफ ल आपने कहा कि रास्कल डम वाला कहा था ये मैंने पढ़ी है

165
00:12:04,120 --> 00:12:08,400
वो मैंने वो मैंने एग्जांपल के लिए बताया है वो टॉपिक आप बाद में ले लीजिएगा

166
00:12:08,400 --> 00:12:12,480
वो एग्जांपल के लिए बताया वो टॉपिक आप बाद में ले लीजिएगा आपने बताया

167
00:12:12,480 --> 00:12:16,680
कि बुक से हम समझ सकते हैं बुक में परपट है आपको क्या लगता

168
00:12:16,680 --> 00:12:20,760
है कि उनसे पहले के जो आचार्य गण आए हैं उनको नहीं पता

169
00:12:20,760 --> 00:12:24,800
था कि व्यक्ति कैसे समझेगा

170
00:12:24,800 --> 00:12:29,640
जैसे भगवत पाद रामन चार आए थे भगवत पाद

171
00:12:29,640 --> 00:12:33,800
जो शंकराचार्य महा भाग आए थे इन सबको नहीं पता था कि व्यक्ति कैसे

172
00:12:33,800 --> 00:12:37,880
समझ पाएगा तो अगर बुक से ही काम चल जाना था तो फिर परंपरा प्राप्त

173
00:12:37,880 --> 00:12:41,880
शिष्यों की आवश्यकता क्या थी बुक से समझ लेगा व्यक्ति

174
00:12:41,880 --> 00:12:45,920
उसमें दिक्कत अच्छा वो सब छोड़ दीजिए ईश्वर क्या

175
00:12:45,920 --> 00:12:50,000
ईश्वर को नहीं पता था कि व्यक्ति कैसे समझेगा तो वह उसी रूप में देते

176
00:12:50,000 --> 00:12:54,040
ना उसको जिस रूप में ईश्वर समझ सकता है तो

177
00:12:54,040 --> 00:12:58,200
कहने का मतलब यह है यह प्रश्न से यह बनता है कि जो देश

178
00:12:58,200 --> 00:13:02,640
काल परिस्थिति हो है उसमें प्रज्ञा शक्ति घटती बढ़ती है

179
00:13:02,640 --> 00:13:07,320
तो उस समय देश काल परिस्थिति के अनुसार तो आचार्य

180
00:13:07,320 --> 00:13:11,560
बल्कि ईश्वर भी अपनी बात कह के चले जाते हैं जैसे जो सतयुग के ऋषि

181
00:13:11,560 --> 00:13:15,680
महा ऋषि थे व वेद से डायरेक्ट समझ लेते थे बातों को मगर उसके बाद फिर

182
00:13:15,680 --> 00:13:20,000
उसकी कमेंट्री चाहिए थी उन्हें तो कमेंट्री करने के लिए

183
00:13:20,000 --> 00:13:24,120
बाद में आचार्य गण आए उन्होंने कमेंट्री की विस्तार किया उनको खोला और

184
00:13:24,120 --> 00:13:28,280
समय समय पर हमें प्रामाणिक आचार्यों की जरूरत इसलिए ही पड़ती रहेगी क्योंकि

185
00:13:28,280 --> 00:13:32,280
देश काल परिस्थिति के अनुसार हमारी प्रज्ञा शक्ति समझने की शक्ति

186
00:13:32,280 --> 00:13:37,240
घटती जाएगी घटती जाएगी बल्कि भाषा में विकृति आती जाएगी

187
00:13:37,240 --> 00:13:41,520
तो भाषा में विकृति आ जाने के कारण भी हमको उसका जो एजेक्ट मीनिंग

188
00:13:41,520 --> 00:13:45,520
उन्होंने क्या कहा था यह जानने के लिए उसका सत्यापन कराने के लिए

189
00:13:45,520 --> 00:13:49,560
हमें सदैव पर उसी परंपरा जिस परंपरा की हम बुक पढ़ रहे हैं जिस

190
00:13:49,560 --> 00:13:53,960
परंपरा का हम ग्रंथ पढ़ रहे हैं उसी परंपरा के किसी जो परंपरा

191
00:13:53,960 --> 00:13:58,040
से प्राप्त जो शिष्य मंडली है शिष्य गण है उनसे उसको पढ़ने के लिए

192
00:13:58,040 --> 00:14:02,040
आवश्यक होगा अब मैं एग्जांपल बता दूं आपको इसके लिए

193
00:14:02,040 --> 00:14:06,560
भी जैसे कि वेदों ने कह दिया नाथस प्रतिमा स्ती अवान

194
00:14:06,560 --> 00:14:10,760
जी अवान जी अवान जी मुझे लग रहा है आप थोड़ा

195
00:14:10,760 --> 00:14:15,120
पॉइंट से हट रहे जो मैं कहना चाहता हूं उस चीज पर बात नहीं कर आपको

196
00:14:15,120 --> 00:14:19,120
थोड़ा थो गल एक मिनट पूरा कर लू मैं एक मिनट पूरा कर लू

197
00:14:19,120 --> 00:14:23,160
य बात जैसे की एग्जांपल ले लीजिए वेदों ने कह दिया नात

198
00:14:23,160 --> 00:14:27,240
प्रस्ती तो उस समय के जो ऋषि महा ऋषि गण थे उन्होंने तो

199
00:14:27,240 --> 00:14:31,400
समझ लिया नात प्रतिमा का मतलब प्रतिमान मेरे जैसा

200
00:14:31,400 --> 00:14:35,760
मान मेरे जैसी वैल्यू किसी की नहीं है मगर समय के साथ

201
00:14:35,760 --> 00:14:40,120
उसी शब्द के अर्थ में कई और शब्द आ गए क्योंकि

202
00:14:40,120 --> 00:14:44,160
मूर्ति किसी के समान होती है देखने में तो प्रतिमा का अर्थ मूर्ति भी

203
00:14:44,160 --> 00:14:47,320
आ गया तो इस चीज का फिर लोग फायदा उठाने लगे कि वेद में भगवान ने

204
00:14:47,320 --> 00:14:51,320
कह दिया नात प्रस्ती मेरी कोई मूर्ति नहीं हो सकती

205
00:14:51,320 --> 00:14:55,480
मेरी कोई मूर्ति नहीं है इसलिए भगवान की मूर्ति पूजा गलत है तो भाषा में

206
00:14:55,480 --> 00:14:59,520
चेंजेज आते हैं और चेंजेज आने के कारण कृति आ

207
00:14:59,520 --> 00:15:03,760
जाती है उस शब्द के सही अर्थ को समझने में हमें आवश्यकता

208
00:15:03,760 --> 00:15:07,800
होती है कि परंपरा प्राप्त उस ग्रंथ के जोला

209
00:15:07,800 --> 00:15:12,080
वो चेन ऑफ नरेशन से जुड़े हुए लोग हैं उनसे उसको जानने की जैसे कि

210
00:15:12,080 --> 00:15:16,240
तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है अब इसमें बेर शब्द

211
00:15:16,240 --> 00:15:20,360
का उपयोग दो बार हो रहा है तो हमें जानना

212
00:15:20,360 --> 00:15:24,720
पड़ेगा कि बेर शब्द का उपयोग दो बार किया दोनों बार अलग-अलग अर्थ है तो अलग-अलग है

213
00:15:24,720 --> 00:15:28,720
नहीं है क्या लिख रहा है लिखने वाला क्या बताना चाहता है तो इसलिए हमें

214
00:15:28,720 --> 00:15:33,800
उस उसके परंपरा प्राप्त शिष्य के पास जाना

215
00:15:33,800 --> 00:15:35,960
होगा

216
00:15:35,960 --> 00:15:40,040
जी अगर भवान जी देखिए आप अगर

217
00:15:40,040 --> 00:15:44,120
अगर हम बुक पर ही डिपेंड करने लग जाएंगे तो फिर जाकिर नायक भी आके

218
00:15:44,120 --> 00:15:48,640
कहेगा कि ठीक है मैं बुक में इसमें परपट लिखा तो है शंकराचार्य जी ने रामानुजाचार्य

219
00:15:48,640 --> 00:15:53,120
जी ने मैं बता तो रहा हूं आपके राघवाचार्य जी की क्या आवश्यकता

220
00:15:53,120 --> 00:15:57,960
है वासुदेवाचार्य जी की क्या आवश्यकता है

221
00:15:57,960 --> 00:16:02,560
जो वर्तमान संक उनकी क्या आवश्यकता है मैं बता रहा हूं आप मुझसे पढ़ो आ

222
00:16:02,560 --> 00:16:07,960
कर

223
00:16:07,960 --> 00:16:13,400
जी हवान जी आपकी आवाज नहीं आ रही अभी

224
00:16:13,400 --> 00:16:18,160
जी मुझे लगता है आपके य पर नेटवर्क का इशू है जी हवान

225
00:16:18,160 --> 00:16:23,920
जीकी हा मैं बोलू जी

226
00:16:23,920 --> 00:16:28,200
बोलिए जी हवान जी आपकी बात से मैं बिल्कुल सत हूं बिल्कुल एग्री

227
00:16:28,200 --> 00:16:32,280
करता आप आपने जो बात कही डिसाइल सक्सेशन होनी बहुत जरूरी है किसी

228
00:16:32,280 --> 00:16:36,560
भी पुराने ग्रंथों को पढ़ने से आते आते सतयुग से पहुंचते पहुंचते

229
00:16:36,560 --> 00:16:42,320
जब हम कलयुग में पहु तो इंसान का बुद्धि

230
00:16:42,320 --> 00:16:46,720
ट करता है आप ड्यूरेशन

231
00:16:46,720 --> 00:16:50,720
ज्यादा ले रहे हैं शंकराचार्य जी के ग्रंथों का भी

232
00:16:50,720 --> 00:16:53,760
मिसयूज कर रहा है

233
00:16:53,760 --> 00:16:59,000
रामपाल 500 साल पहले लिखे गए ग्रंथों का भी मिसयूज हो रहा है

234
00:16:59,000 --> 00:17:03,120
तो आप इस पर मत जाइए सग आप इस पर मत जाइएगा कि सतयुग

235
00:17:03,120 --> 00:17:07,200
से कलयुग में आते आते तो डिफरेंस हो सकता है मगर 100 साल पहले लिखी

236
00:17:07,200 --> 00:17:11,240
हुई किताब या 50 साल पहले लिखी हुई किताब में डिफरेंस नहीं हो सकता इस पर

237
00:17:11,240 --> 00:17:16,000
मत जाइएगा जी जी

238
00:17:16,000 --> 00:17:20,280
जी जैसे मैं आपको कह रहा था कि इन किताबों मेंट दिया है

239
00:17:20,280 --> 00:17:23,800
सर वो आप मानने से वो

240
00:17:23,800 --> 00:17:28,040
कि वो श्लोकों का परपट नहीं दिया है वो परपट दिया है जो चीज शीला

241
00:17:28,040 --> 00:17:32,120
प्रभुपाद खुद व्यक्त करना चाहते थे अपने खुद के अंतर मन से व्यक्त करना चाहते थे

242
00:17:32,120 --> 00:17:36,280
व हमें ब में ये नहीं बताते थे कि श्लोक में क्या लिखा है वो कृष्ण

243
00:17:36,280 --> 00:17:41,280
भगवान मे भा आप सुनिए

244
00:17:41,280 --> 00:17:45,760
परपट परपट लिखने वाले प्रभुपाद जी पहले नहीं है

245
00:17:45,760 --> 00:17:49,880
परपट शंकराचार्य जी ने भी लिखा है रामानुजाचार्य जी ने भी लिखा है मधवा चार्य जी ने

246
00:17:49,880 --> 00:17:54,000
भी लिखा है वह पहले नहीं है परपट लिखने वाले कमेंट्री देने

247
00:17:54,000 --> 00:17:58,000
वाले भाष्य देने वाले स अनुवाद के अलावा कमेंट्री देने

248
00:17:58,000 --> 00:18:02,000
वाले व पहले नहीं है फिर भी आवश्यकता है उनके ग्रंथों को

249
00:18:02,000 --> 00:18:08,000
समझने के लिए उनके प्रामाणिक शिष्यों की

250
00:18:08,320 --> 00:18:12,560
तोरने खुद अपनी किताब मेंहा है कोई बोना

251
00:18:12,560 --> 00:18:17,880
स्पिरिचुअल गुरु नहीं मिलता है

252
00:18:17,880 --> 00:18:22,080
साइंस एक बार कट कर दीजिए दोबारा लीव करके दोबारा आ जाइए क्योंकि आपकी आवाज

253
00:18:22,080 --> 00:18:28,080
बारबार ब्रेक हो रही है जी जी

254
00:18:56,800 --> 00:19:01,120
हम इनका कहना कि अगर आपका

255
00:19:01,120 --> 00:19:05,240
ज्ञान श्रेष्ठ है तो आपसे जुड़े लोग संत

256
00:19:05,240 --> 00:19:09,480
रामपाल जी महाराज की शरण में कैसे जा रहे हैं अगर

257
00:19:09,480 --> 00:19:13,680
कबीर का ज्ञान श्रेष्ठ था तो कबीर की आत्माएं काल के शरण

258
00:19:13,680 --> 00:19:18,440
में क्यों जाने लगी भाई चौरसिया

259
00:19:18,440 --> 00:19:22,640
जी कबीर का ज्ञान श्रेष्ठ था तो सतलोक

260
00:19:22,640 --> 00:19:23,400
में वो क्यों जाने

261
00:19:23,400 --> 00:19:27,560
लगी काल के जाल में क्यों उनका मन करने लगा हम इसके इसके पीछे

262
00:19:27,560 --> 00:19:33,480
जाए

263
00:19:33,480 --> 00:19:37,640
है ना जी जी मत प चकर में कितनी बार

264
00:19:37,640 --> 00:19:42,840
एक मिनट मिनट कितनी बार आप लोगों को समझाया है राम

265
00:19:42,840 --> 00:19:46,920
पालियो मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में फिर भी चले

266
00:19:46,920 --> 00:19:51,880
जाते हो मु उठा के जी

267
00:19:51,880 --> 00:19:55,160
आ गया कर

268
00:19:55,160 --> 00:19:59,120
बताइए जीवा जी

269
00:19:59,120 --> 00:20:03,280
जी अवान जी जैसे बात कर रहे थे आपकी आप कैसे जान सकते हैं इन विषयों

270
00:20:03,280 --> 00:20:07,400
में आपने विषय में बात जो की थी डील की में उस मध्य नजर में उसको

271
00:20:07,400 --> 00:20:11,840
लाना चाहता हूं जो मेन जिस वजह से आया था

272
00:20:11,840 --> 00:20:16,000
मैं मुख्य टॉपिक पर आना चाह रहा हूं मैं मुख्य टॉपिक पर आऊंगा ऐसा नहीं है कि मुख्य टॉपिक

273
00:20:16,000 --> 00:20:20,000
जो हमारा जिसके लिए हम यहां आए हैं उस पर हम लोग बात नहीं करेंगे मगर मैं

274
00:20:20,000 --> 00:20:25,000
आपको आपकी एक कमी बता रहा हूं कि

275
00:20:25,000 --> 00:20:29,160
आप आपके साथ ट्रांसलेशन ऑफ वर्सेस प जो श्लोक

276
00:20:29,160 --> 00:20:33,280
दिए गए हैं उनके ऊपर अगर मैं आपसे सा चर्चा करता तो वहा मैं आपके साम

277
00:20:33,280 --> 00:20:37,280
स्टंड नहीं करता क्यों मेरे गुरु नहीं है मैं किसी इसकन संस्था से नहीं

278
00:20:37,280 --> 00:20:41,400
आर्य समाज से नहीं किसी संप्रदाय से नहीं मेरे भाव को आप समझ

279
00:20:41,400 --> 00:20:45,520
नहीं पा रहे हैं आप मेरे भाव को समझ नहीं पा रहे

280
00:20:45,520 --> 00:20:49,720
जैसे कि मैं कह रहा हूं कि प्रभुपाद जी मानते हैं कि ईश्वर अल्लाह

281
00:20:49,720 --> 00:20:53,800
एक है वाकई में मानते हैं अब आप कहोगे नहीं एक

282
00:20:53,800 --> 00:20:57,840
मिनट एक मिनट अब आप कहोगे वाकई में नहीं मानते हैं ठीक है अब

283
00:20:57,840 --> 00:21:02,000
उनके जो परंपरा प्राप्त शिष्य है वो कह रहे कि मानते हैं

284
00:21:02,000 --> 00:21:06,480
तो फिर हम अब यहां जब आप यह कह दोगे कि नहीं मानते हैं तो हम आपकी बात मानेंगे

285
00:21:06,480 --> 00:21:10,760
उनके परंपरा प्राप्त शिष्यों की बात माने जी आहवान

286
00:21:10,760 --> 00:21:15,840
जी मेरे को एक लिखित हुई चीज दिखा दीजिए जहां पर उन्होंने बोला है कि

287
00:21:15,840 --> 00:21:19,880
अल्लाह भी दिखाऊंगा मैं वो भी दिखाऊंगा आपको मैं वो भी

288
00:21:19,880 --> 00:21:24,040
दिखाऊंगा उनके परंपरा प्राप्त जो शिष्य हैं जो मंदिरों

289
00:21:24,040 --> 00:21:28,160
में बैठे हैं जो उनके द्वारा चुने गए उसमें लिख रहे

290
00:21:28,160 --> 00:21:32,280
हैं यह नहीं कह रहा हूं कि प्रभुपाद जी कुछ लिख के गए मेरी मेरा

291
00:21:32,280 --> 00:21:36,360
जो संघर्ष है व स्कन से है मैं तो खुद कहता हूं प्रभुपाद

292
00:21:36,360 --> 00:21:40,680
जी के नाम पर बहुत कुछ उल्टा सीधा हो रहा है मैंने व

293
00:21:40,680 --> 00:21:44,800
पर कहना चाहते आप कहना चाहते अगर एक संस्था का मान

294
00:21:44,800 --> 00:21:48,840
लीजिए आपने कोई संस्था शुरू की है उसका कोई मेंबर आके आपका

295
00:21:48,840 --> 00:21:52,880
चन मेंबर आके अगर कुछ गलत फैमिली गलत व फैला रहा है तो आप

296
00:21:52,880 --> 00:21:58,880
सीधे जा

297
00:22:09,200 --> 00:22:13,640
कहां चले

298
00:22:13,640 --> 00:22:19,640
गए एक बार दोबारा जाकर वापस आइए भाई

299
00:22:32,600 --> 00:22:38,360
प्रीफिक्स जो होता है वह भी बड़ा आवश्यक होता

300
00:22:38,360 --> 00:22:40,600
है

301
00:22:40,600 --> 00:22:45,000
क्योंकि आपने देखा कैसे आई वह बात

302
00:22:45,000 --> 00:22:50,000
हर हर महादेव पड़ी जी कैसे हैं आप मैं आपको फोन मिलाने ही वाला था आजकल

303
00:22:50,000 --> 00:22:56,000
में कहां पर है कुंभ में स्नान कर लिया कि नहीं

304
00:23:00,040 --> 00:23:04,120
हर हर महादेव जी अवान

305
00:23:04,120 --> 00:23:08,560
जी अब नहीं शायद से अब ठीक कनेक्शन अब नहीं जाएगा शायद से हा

306
00:23:08,560 --> 00:23:12,800
तो अहवान जी मैं आपसे कह रहा हूं कि आप मेरे को बताइए कि अगर आपने संस्था

307
00:23:12,800 --> 00:23:17,160
खोली है कोई भगवान का नाम आगे बढ़ाने के लिए संस्था खोली है उसमें से आपके कोई चोजन

308
00:23:17,160 --> 00:23:21,640
डिसाइल आगे आकर कोई मिस इमेशन फैला देते हैं कल को तो हम क्या

309
00:23:21,640 --> 00:23:25,880
आकर आपको कहेंगे कि नहीं आवान जी आपने ही ऐसा कहा है आपके कहने

310
00:23:25,880 --> 00:23:29,920
पर उस डिसाइल ने इन इन गलत चीजों का प्रयोग किया है देखिए मैं ये

311
00:23:29,920 --> 00:23:34,080
नहीं कह रहा हूं कि इसको आपने एक सवाल किया है अब आप जवाब सुनिए

312
00:23:34,080 --> 00:23:38,280
सवाल किया जवाब सुनिए भवान जी मैं अपने पॉइंट

313
00:23:38,280 --> 00:23:42,280
यहां बात किसी भी डिसाइल की नहीं हो रही है यहां बात ऑथेंटिक गद्दी

314
00:23:42,280 --> 00:23:46,320
प जो कि किसी ऑथेंटिक व्यक्ति के द्वारा ही नियुक्त होता है और वो

315
00:23:46,320 --> 00:23:50,360
जो ऑथेंटिक होता है वह शील प्रभुपाद जी के द्वारा नियुक्त है

316
00:23:50,360 --> 00:23:54,440
जी उसके द्वारा कही जा रही वो बात है दूसरी बात अगर वो गलत बात बोल

317
00:23:54,440 --> 00:23:58,440
रहे हैं तो जो ऑथेंटिक बॉडी है स्कोन की

318
00:23:58,440 --> 00:24:02,440
जीबीसी है वो मना करे ना कि वो व्यक्ति गलत बोल रहा है उतने अंश में

319
00:24:02,440 --> 00:24:06,440
हम उसके साथ नहीं है गलत बोले उसको मंचों पर आक के खंडन कर दे उस बात

320
00:24:06,440 --> 00:24:10,920
का कि हम नहीं मानते ईश्वर कृष्ण और अल्लाह एक है अहवान

321
00:24:10,920 --> 00:24:15,040
जी मैं आपसे पहले तो पूछना चाह इसका मतलब ये है कि उनको फॉलो

322
00:24:15,040 --> 00:24:19,080
करने वाले किसी भी व्यक्ति की बात नहीं हो रही ऑथराइज पर्सन की बात हो रही है

323
00:24:19,080 --> 00:24:23,560
और इसकन की बुक में भी हम आपको दिखा देते हैं

324
00:24:23,560 --> 00:24:28,800
ईश्वर अल्ला एक लिखा हुआ है जी दिखाइए

325
00:24:28,800 --> 00:24:32,920
कृष्णा बुक है आपके पास जी कृष्णा बुक नहीं है मेरे

326
00:24:32,920 --> 00:24:37,160
पास मेरे पास एसएसआर और बाकी सारी किताबें चलिए

327
00:24:37,160 --> 00:24:41,200
मैं दिखा देता हूं कृष्णा आप मेरे को बता भी दीजिए

328
00:24:41,200 --> 00:24:47,200
मैं पेज नंबर भी खोल देता हूं उसका

329
00:24:56,340 --> 00:25:02,340
[संगीत]

330
00:25:09,160 --> 00:25:13,680
यह है कृष्णा बुक जी ठीक

331
00:25:13,680 --> 00:25:16,880
है

332
00:25:16,880 --> 00:25:22,880
और यह

333
00:25:23,080 --> 00:25:27,080
देखिए अल्लाह जवा यह

334
00:25:27,080 --> 00:25:31,920
सभी श्री कृष्ण

335
00:25:31,920 --> 00:25:36,280
है जी अहवान जी अब आपकी बहुत अब बताइए

336
00:25:36,280 --> 00:25:40,400
न ध्यान से सुनिए मैं आपकी बहुत बड़ी मिसकनसेप्शन दूर करने वाला हूं ध्यान

337
00:25:40,400 --> 00:25:44,400
से सुनिए फर्स्ट ऑफ ल यहां पर अगर आप ध्यान से देखेंगे तो

338
00:25:44,400 --> 00:25:48,520
जीसस क्राइस्ट का नाम श्री कृष्ण के साथ कंपेयर नहीं किया है मैंने

339
00:25:48,520 --> 00:25:52,600
जीसस क्राइस्ट को नहीं कहा है जी जी जी रुकिए रुकिए आप

340
00:25:52,600 --> 00:25:57,080
मुझे क्यों बता रहे हैं मैंने कब कहा कि मोहम्मद और जीसस को उन्होने कहा

341
00:25:57,080 --> 00:26:01,480
मैंने कहा रुकिए रुक अवान जीन जी रुकिए आपके

342
00:26:01,480 --> 00:26:05,560
जो लाइव स्ट्रीम का वो है कृष्णा इ इक्वल टू क्राइस्ट मैं आपको पहले ही बता रहा

343
00:26:05,560 --> 00:26:09,560
हूं ऐसा कुछ नहीं यवा सुनिए सुनिए सुनि समझ लीजिए समझ लीजिए पहले

344
00:26:09,560 --> 00:26:14,280
जान लीजिए आपकी जानकारी का भाव है यहां पे क्राइस्ट जो है

345
00:26:14,280 --> 00:26:18,400
बाइबल के ईश्वर का नाम है उनके ईश्वर का नाम यवे

346
00:26:18,400 --> 00:26:22,520
भी है क्या है उनके ईश्वर का नाम यवे

347
00:26:22,520 --> 00:26:24,240
भी है उनके क का नाम

348
00:26:24,240 --> 00:26:28,400
क्राइस्ट यवा उसको क्राइस्ट भी कहते हैं

349
00:26:28,400 --> 00:26:32,520
कस्ट भी कहते तो हम वो जो जीसस जो सन ऑफ गॉड बता रहे

350
00:26:32,520 --> 00:26:36,880
हैं उसके साथ कंपेयर नहीं कर रहे हैं ये नहीं कह रहे प्रभुपाद जी ने

351
00:26:36,880 --> 00:26:40,920
वो जो जीसस क्राइस्ट के और कृष्ण को एक कहा है नहीं

352
00:26:40,920 --> 00:26:45,120
बाइबल का ईश्वर वो जिसको अपना जिसको अपना पिता बता रहे हैं जीसस

353
00:26:45,120 --> 00:26:49,240
क्राइस्ट जिसको अपना पिता बता रहे जवा क्राइस्ट उस उसके

354
00:26:49,240 --> 00:26:53,400
साथ कंपेयर किया है उन्होंने कहा है कि अल्लाह क्राइस्ट और

355
00:26:53,400 --> 00:26:57,480
कृष्ण एक है जी अवान जी

356
00:26:57,480 --> 00:27:01,520
देखिए अब मैं आपकी बहुत बड़ी इस पर प्रभुपाद जी ने काफी बारी बात

357
00:27:01,520 --> 00:27:06,320
भी की थी जब उनसे पूछा गया था कि आप ऐसा क्यों बोलते हैं कि करके चते

358
00:27:06,320 --> 00:27:10,520
एक एक करके चलते हैं पहला है कि आपने कहा कि लिखा दिखा

359
00:27:10,520 --> 00:27:14,640
दीजिए कहां पर इस कन की किताबों में लिखा हुआ है कि अल्लाह

360
00:27:14,640 --> 00:27:19,280
और जो है कृष्ण एक है तो हमने आपको लिखा दिखा दिया

361
00:27:19,280 --> 00:27:23,320
जी हा अब आप बताइए जी अब मैं आपकी

362
00:27:23,320 --> 00:27:27,680
इस गलतफहमी को दूर करना चाहता हूं जैसे आपने कहा था कि आपने ली

363
00:27:27,680 --> 00:27:31,800
इस के किसी डिसाइल सशन से ये बात नहीं पढ़ी है तो आपको ये गलत फैमिली यहां

364
00:27:31,800 --> 00:27:35,800
प क्रिएट हो गई है एक बात हमने पढ़ी है आपने नहीं पढ़ी है हमने

365
00:27:35,800 --> 00:27:39,320
पढ़ है हा आपने पढ़ी है पर आपने किसी डिसाइल

366
00:27:39,320 --> 00:27:43,720
सशन से नहीं पढ़ी प्रभुपाद डिसाइल से पढ़ी है और बताइए

367
00:27:43,720 --> 00:27:47,960
नाम बताइए कौन से डिसाइल सक्सेशन से पढ़ी परम श्याम दास 500 लोगों

368
00:27:47,960 --> 00:27:52,160
की भगवत गीता क्लासेस लेते हैं हर संडे को लखनऊ स्कन

369
00:27:52,160 --> 00:27:56,240
प्रेसिडेंट अब मैं बताता हूं उनका मतलब क्या था मैं आपको श्रीला

370
00:27:56,240 --> 00:27:58,360
प्रभुपाद

371
00:27:58,360 --> 00:28:02,840
बात ले चलिए आपने जो कहा है गलत कहा ना आपने किसी डिसाइल

372
00:28:02,840 --> 00:28:06,840
से नहीं लिया है लखन वड को गलत

373
00:28:06,840 --> 00:28:11,000
लिया है मैं यह कहना चाहता हूं आपको आपने मिसइंटरप्रेट किया है जी

374
00:28:11,000 --> 00:28:15,240
अरे ठीक है वो मिसइंटरप्रेट देखिए अभी आपने यह कहा था कि आपने किसी डिसाइल

375
00:28:15,240 --> 00:28:19,400
से नहीं पढ़ा अब आप बदल रहे हैं य आप बदल रहे बात को आपने

376
00:28:19,400 --> 00:28:23,440
कहा था आपने किसी डिपल से नहीं पढ़ सुन लीज सुन

377
00:28:23,440 --> 00:28:27,600
लीजिए मैं आपकी बात सुनूंगा आपकी बात सुनूंगा पहले मैं आपको एक चीज क्लियर कर दू

378
00:28:27,600 --> 00:28:31,760
आपने प पहले कहा था कि आपने प्रभुपाद जी की बात पढ़ी है मगर किसी

379
00:28:31,760 --> 00:28:35,800
डिसाइल से जाकर नहीं पढ़ी तो मैंने आपको बता दिया कि फिर

380
00:28:35,800 --> 00:28:39,840
आपने पूछा भी किस किस दिशा यानी कि आपको डाउट था

381
00:28:39,840 --> 00:28:44,080
कि मैंने नहीं पढ़ी है इससे क्लियर हो गया आपने पूछा भी किससे पढ़ी है फिर मैंने

382
00:28:44,080 --> 00:28:48,880
आपको बताया कि इकोन के विषय में सबसे पहला वीडियो उठाकर देख लीजिएगा

383
00:28:48,880 --> 00:28:53,240
उन्होंने ठोक बजा के कहा था इकोन प्रेसिडेंट लखनऊ ने

384
00:28:53,240 --> 00:28:54,480
कि

385
00:28:54,480 --> 00:28:58,520
कृष्ण क्राइस्ट यानी यहोवा और अल्लाह ये तीनों

386
00:28:58,520 --> 00:29:02,640
एक है इनमें कोई भेद नहीं है जी ठीक है अब मैं अब अब

387
00:29:02,640 --> 00:29:06,760
उनकी बात का जो अर्थ है वो आप हमें सही से बताएंगे जो कि कभी

388
00:29:06,760 --> 00:29:11,240
डिसाइल के पास नहीं गए पढ़ने के लिए नहीं मैं शीला

389
00:29:11,240 --> 00:29:15,280
प्रभुपाद की कही हुई खुद के वर्ड से कहना चाहता हूं जो उन्होंने खुद

390
00:29:15,280 --> 00:29:19,600
हमारे यहां पे आपको ये स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है जी

391
00:29:19,600 --> 00:29:24,160
जी यही है अपर में श्यामदास जी

392
00:29:24,160 --> 00:29:28,360
कच्ची गोलियां नहीं खेलते हम लिए अवा

393
00:29:28,360 --> 00:29:32,760
अवान जी सुनिए चलिए बताइए

394
00:29:32,760 --> 00:29:36,800
पेज नंबर 136 जब हम खोलते हैं साइंस ऑफ सेल्फ

395
00:29:36,800 --> 00:29:41,240
रिलाइजेशन का तो वहां पर श्रीला प्रभुपाद एक क्रिश्चियन मिशनरी

396
00:29:41,240 --> 00:29:45,280
क्रिश्चन फादर से बात कर रहे होते हैं वो क्राइस्ट और कृष्ण

397
00:29:45,280 --> 00:29:49,400
जी के बारे में बात करते हैं वो बोलते हैं क्राइस्ट और कृष्ण सेम कैसे हो सकते

398
00:29:49,400 --> 00:29:53,400
हैं उनकी सिखाई हुई बातें तो अलग अलग है ना उनके बातें सिखाई हुए लगे

399
00:29:53,400 --> 00:29:57,520
वो बोलते हैं कि 10 10 कमांडमेंट द श

400
00:29:57,520 --> 00:30:01,720
नॉ किल रिस्पेक्ट ू नेबर कोई क्रश्न फॉलो नहीं करता है

401
00:30:01,720 --> 00:30:06,320
जिसका मतलब है क्रश्न हवान जी

402
00:30:06,320 --> 00:30:09,680
मैं सुन रहा हं आवाज आ रही आपको जी

403
00:30:09,680 --> 00:30:14,360
आ रही है आपकी फोटो रुक गई है अवान जी मेरी आवाज आ रही

404
00:30:14,360 --> 00:30:19,040
है हा अब आपकी ठीक से दोनों चित्र और

405
00:30:19,040 --> 00:30:21,920
धनि

406
00:30:21,920 --> 00:30:27,920
दोनों अवान जी हा हा बोलिए

407
00:30:30,570 --> 00:30:36,570
[संगीत]

408
00:30:38,360 --> 00:30:43,080
बोलिए हवान जी बोलिए

409
00:30:43,080 --> 00:30:47,160
बोलिए जी देखिए तो क्राइस्ट है द सन ऑफ

410
00:30:47,160 --> 00:30:51,160
गॉड मोहम्मद है द मेसेंजर ऑफ गॉड जब श्रीला प्रभुपाद जी से य

411
00:30:51,160 --> 00:30:55,240
बात की गई कि उन्होंने मोहम्मद अल्लाह को और जीसस क्राइस्ट को कृष्ण

412
00:30:55,240 --> 00:30:59,560
के बराबर क्यों बताया है उन्होंने यह कार्न क्राइस्ट को

413
00:30:59,560 --> 00:31:03,600
जो जीसस क्राइस्ट के फादर होते

414
00:31:03,600 --> 00:31:08,400
प पंक्ति देखि आपने गलत पंक्ति बोली हमने कभी नहीं कहा कि उन्होंने

415
00:31:08,400 --> 00:31:12,760
कृष्ण और मोहम्मद और जीसस क्राइस्ट को एक बताया है

416
00:31:12,760 --> 00:31:17,480
हमने कहा कि उन्होंने सुन लीजिए अभी आपने एक लाइन बोली है

417
00:31:17,480 --> 00:31:21,800
कि जब य पूछा जाता है कि आपने मोहम्मद और जीसस क्राइस्ट

418
00:31:21,800 --> 00:31:24,720
और कृष्ण को बराबर क्यों बता दिया हमने एक क्लेम कभी

419
00:31:24,720 --> 00:31:28,760
नहीं किया आप पता नहीं कहां से कर रहे हैं हमने क्लेम

420
00:31:28,760 --> 00:31:32,760
किया है कि आपने सनातन शास्त्रों के द्वारा

421
00:31:32,760 --> 00:31:36,800
प्रतिपादित होने वाला ईश्वर कृष्ण और बाइबल के

422
00:31:36,800 --> 00:31:41,200
द्वारा प्रतिपादित होने वाला यहोवा और

423
00:31:41,200 --> 00:31:45,240
कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला अल्लाह इन तीनों को एक कैसे

424
00:31:45,240 --> 00:31:49,760
कह दिया हमारा प्रश्न य है जी जी जी

425
00:31:49,760 --> 00:31:53,760
अहवान जी जब वो कार्डिनल से बात करते हैं तो उसमें उनको पता

426
00:31:53,760 --> 00:31:58,000
लगता है कि वो उनसे पूछते हैं श्रील प्रभुपाद से कि ये

427
00:31:58,000 --> 00:32:02,040
जीसस क्राइस्ट और अल्लाह सेम कैसे हैं तो वो बोलते हैं मोहम्मद जो आए

428
00:32:02,040 --> 00:32:06,480
थे द मेसेंजर ऑफ गॉड उन्होंने काफी अच्छी अच्छी चीजें बताई काफी बुरी चीज भी

429
00:32:06,480 --> 00:32:10,640
जीसस क्राइस्ट जब नीचे आए भन के बारे में बात बताया और काफी अच्छी चीजें

430
00:32:10,640 --> 00:32:15,160
बताई जो लोग फॉलो नहीं करते उन्होंने कहा द मेसेंजर ऑफ गॉड ने जो असली

431
00:32:15,160 --> 00:32:19,200
मैसेज लाया था भगवान के लिए जो सन ऑफ गॉड जीसस

432
00:32:19,200 --> 00:32:23,760
क्राइस्ट ने जो मैसेज लाया था भगवान के लिए वो लोगों

433
00:32:23,760 --> 00:32:28,200
नेते जैसे आप कह रहे थे डिसाइल सशन ना होने की वजह से

434
00:32:28,200 --> 00:32:32,440
और भी काफी ज्यादा फैक्टर्स ना होने की वजह से मिस इंटरप्रेट करते आए हैं

435
00:32:32,440 --> 00:32:36,920
बात उन्होंने की एक ही भगवान की थी श्री कृष्ण की विष्णु जी की

436
00:32:36,920 --> 00:32:39,720
इंफिनिट अवतारों की बात की थी परंतु लोगों

437
00:32:39,720 --> 00:32:43,760
ने इस तरीके से मिस इंटरप्रेट किया है कि वह सारे भगवानों में अंतर करने लगे

438
00:32:43,760 --> 00:32:47,760
हैं व डिवीजन करने लगे हैं जैसे हमें पता लगता है कि विष्णु जी

439
00:32:47,760 --> 00:32:52,160
और श्री शिव जी के बीच में अंतर करते हैं लोग बट हरी हरा स्कन

440
00:32:52,160 --> 00:32:56,680
जी स्कन खुद कहते हैं कि हरी हरा एक है परंतु लोगों को मिस इंटरप्रिटेशन

441
00:32:56,680 --> 00:33:00,720
की वजह से लगता है विष्णु जी और शिव जी अलग है उसी

442
00:33:00,720 --> 00:33:04,800
तरीके से लोग आते हुए समय में उनको लगता था कि जीसस क्राइस्ट के बताए हुए

443
00:33:04,800 --> 00:33:08,920
भगवान और मोहम्मद के बताए हुए अल्लाह और हमारे विष्णु जी

444
00:33:08,920 --> 00:33:13,240
तीनों अलग है जबकि सब एक थे लोगों की आई हुई बातें

445
00:33:13,240 --> 00:33:17,320
जो मिस इंटरप्रेट होते उन्होने खुद से भगवान बना लिए तो

446
00:33:17,320 --> 00:33:21,680
श्रीला प्रभुपाद और उनकी जो डिसाइल क्लेम करते है अल्लाह

447
00:33:21,680 --> 00:33:25,880
कयाई विष्णु जी सेम है व कहना चाहते हैं भगवान एक है

448
00:33:25,880 --> 00:33:31,880
उनका मैसेज एक है श्रीला प्रभु

449
00:33:34,080 --> 00:33:38,160
शीला प्रभुपाद कहते हैं कि आप किसी भी धर्म में जाक देख लीजिए

450
00:33:38,160 --> 00:33:42,240
भाई आपका इंटरनेट गड़बड़ हो रहा है आप प्लीज अपने

451
00:33:42,240 --> 00:33:46,320
इंटरनेट को सही कर नहीं आप दिक्कत आ रही

452
00:33:46,320 --> 00:33:50,360
है आपका चित्र रुक रहा है आप आपका इंटरनेट क्या स्पीड नहीं आ रही कहां

453
00:33:50,360 --> 00:33:56,000
पर है आप गांव में है क्या किसी गांव गाव में है क्या

454
00:33:56,000 --> 00:34:02,000
आप हेलो

455
00:34:26,720 --> 00:34:30,920
बोलिए

456
00:34:30,920 --> 00:34:35,000
हां हां बिल्कुल सही कह रहे हैं आप गांव में भी अच्छा नेटवर्क आता है पता

457
00:34:35,000 --> 00:34:41,000
नहीं इनके यहां क्यों नहीं आ रहा है हो सकता है कोई समस्या

458
00:34:44,960 --> 00:34:50,960
होगी सनातन सोल आप स्कन की तरफ

459
00:34:53,480 --> 00:34:57,760
से आर्टिस्ट एच के कच्ची गोलिया

460
00:34:57,760 --> 00:35:01,840
नहीं खेलते हम नहीं खेलते भाई पहले जाके ठप्पा लगाते

461
00:35:01,840 --> 00:35:05,880
हैं कि अगर कोई आपत्तिजनक बात है तो मंदिर में जाएंगे उनसे पूछेंगे कि जो

462
00:35:05,880 --> 00:35:10,080
हम समझ रहे हैं वही सही है या कुछ और मतलब

463
00:35:10,080 --> 00:35:14,160
अभी ये जो भाई साहब बोल रहे हैं जब ये रुकेंगे

464
00:35:14,160 --> 00:35:18,200
तो इनको इनकी सारी बातों का उत्तर दिया जाएगा वो मुझे आज पहली बार

465
00:35:18,200 --> 00:35:22,320
नहीं देना पड़ रहा है आप थोड़ा सा इंटरनेट का इशू अपना ठीक रखना चाहिए

466
00:35:22,320 --> 00:35:26,640
था ना जब आज आपको लाइव आना था तो माफ कीजिएगा

467
00:35:26,640 --> 00:35:30,800
मेरे थोड़ा सा नहीं यहां अच्छा दिक्कत हो रही है जी ज और दूसरी

468
00:35:30,800 --> 00:35:34,880
बात आप बोल रहे हैं आप जो बोल रहे हैं उसमें थोड़ा सा बनावट

469
00:35:34,880 --> 00:35:39,000
सी कर रहे हैं ना वो मत करिए नॉर्मली बोलिए ऐसा हो रहा था और

470
00:35:39,000 --> 00:35:43,120
ऐसा चल रहा था यह सब करने की जरूरत नहीं है सीधे सीधे अवान जी अगर

471
00:35:43,120 --> 00:35:46,120
आपको मेरी मीडियम ऑफ लैंग्वेज नहीं समझ आ रही तो उसम मेरी गलती

472
00:35:46,120 --> 00:35:50,320
नहीं है मैं कोशिश करता हूं नहीं नहीं अभी आप अभी आप नॉर्मल बोल रहे हैं अभी आप नॉर्मल

473
00:35:50,320 --> 00:35:54,640
बोल रहे हैं इसके बाद जब अभी आपने व्याख्या करना शुरू की थी तो वो ड

474
00:35:54,640 --> 00:35:58,720
लग रहा था टोन ऑफ वॉइस है मेरी अलग है सुनिए

475
00:35:58,720 --> 00:36:03,040
हवान जी टोन ऑफ व अलग अभी तो नहीं है ना अभी

476
00:36:03,040 --> 00:36:07,320
अभी नॉर्मल बोल रहे हैं आप वैसे ही बोलिए नर्मल बोली सामान्य तरीके

477
00:36:07,320 --> 00:36:11,400
से जी तो जब श्रीला प्रभुपाद यह कहते हैं कि

478
00:36:11,400 --> 00:36:15,480
अल्लाह बकुल बत बढिया और कृष्ण एक

479
00:36:15,480 --> 00:36:19,520
है तो वह यह नहीं कहना चाहते हैं कि जीसस क्राइस्ट के बताए हुए बाइबल में लिखे हुए

480
00:36:19,520 --> 00:36:23,520
भगवान या फिर कुरान में लिखे हुए भगवान विष्णु जी या फिर शिव जी के बराबर

481
00:36:23,520 --> 00:36:27,560
है वे कहना चाहते हैं कि जो एक भगवान जिसकी परंपराओं में अलग

482
00:36:27,560 --> 00:36:31,640
अलग जगहों पर बात चलते हुए आई है जैसे हमें पता लगता है कि बाइबल में जो

483
00:36:31,640 --> 00:36:36,200
थोड़ी बहुत मिस ट्रांसलेशन बच गई है उससे हमें पता लगता है कि द फास्टेस्ट वे टू हेवन

484
00:36:36,200 --> 00:36:40,200
भगवान के पास जल्द से जल्द जाने का तरीका क्या है भगवान का नाम ंट करना

485
00:36:40,200 --> 00:36:44,240
भगवान के नाम की रोजमेरी बीड्स लेकर उनके ंट करना

486
00:36:44,240 --> 00:36:48,400
कुरान में भी जाकर अगर आप देख लेंगे तो मोहम्मद ने क्या कहा था अल्लाह का नाम ले गया

487
00:36:48,400 --> 00:36:52,640
अल्लाह कौन है विष्णु जी ही तो है अब अगर आप मिस इंटर श्रीला

488
00:36:52,640 --> 00:36:56,960
प्रभुपाद कहते हैं कि आते आते लोगों ने इतना मिस इंटरप्रेट कर दिया है कि जो असली

489
00:36:56,960 --> 00:37:01,520
भगवान है विष्णु जी उनको मिस

490
00:37:01,520 --> 00:37:05,880
संक्षिप्त में आपकी बात समझ गया मैं उसको क्लियर कर देता हूं कि मैं क्या समझाऊ

491
00:37:05,880 --> 00:37:10,400
आपका कहने का अर्थ है कि जो यह जो बुक्स है

492
00:37:10,400 --> 00:37:14,600
यह आई कृष्ण जी के द्वारा ही है मगर आते आते उसमें मिस

493
00:37:14,600 --> 00:37:18,640
इंटरप्रिटेशन हुआ और जो उसम एक भगवान द

494
00:37:18,640 --> 00:37:23,600
नहीं कृष्ण जी के द्वारा नहीं आई है जैसे

495
00:37:23,600 --> 00:37:27,640
ही वा सन ऑफ गड तो वो सन ऑफ गड थे व हम

496
00:37:27,640 --> 00:37:31,680
सब की तरह ही थे तो उनको कृष्ण ने भेजा था ना उनको कृष्ण जी नेही

497
00:37:31,680 --> 00:37:35,760
भेजा था ना कि जाओ जाके बाइबल में अपना ज्ञान दो क्या सकते है

498
00:37:35,760 --> 00:37:40,000
ना ब और जो वो थे मेसेंजर ऑफ गॉड मोहम्मद उनको भी कृष्ण

499
00:37:40,000 --> 00:37:44,920
नहीं भेजा था कि जाओ अल्लाह के नाम से मेरी बातें बताओ लोगों को

500
00:37:44,920 --> 00:37:49,000
जी इस मोहम्मद वाले वर्ड प मैं क्लियर नहीं क्योंकि श्रीला प्रभुपाद ने ये कभी क्लेम

501
00:37:49,000 --> 00:37:53,160
कि क्लियर बात होनी चाहिए भैया भाई साहब देखिए क्लियर बात कांटे की नोट की बातें किया

502
00:37:53,160 --> 00:37:57,240
करिए ऐसे नहीं होता है कह सकते नहीं है क्लियर है कि नहीं

503
00:37:57,240 --> 00:38:01,320
है जी क्लियर क्लियर है ना

504
00:38:01,320 --> 00:38:06,040
हा जी जी तो यानी कि यह जो दोनों बुक्स है

505
00:38:06,040 --> 00:38:10,240
बाइबल और कुरान यह दोनों कृष्ण भगवान नेही भेजी थी मगर मिस इंटरप्रिटेशन

506
00:38:10,240 --> 00:38:14,280
और जो प्रक्षिप्त इत्यादि जोड़ जोड़ के उसम यह भी

507
00:38:14,280 --> 00:38:16,640
हुआ होगा कि कुछ बातें उन्होंने नहीं भेजी वो

508
00:38:16,640 --> 00:38:20,680
भी जोड़ दी गई और आते आते आज य हो गया कि दोनों देखने में एक दूसरे से

509
00:38:20,680 --> 00:38:25,320
भिन्न भिन्न जो है वो लगने लगे ठीक है

510
00:38:25,320 --> 00:38:29,520
अब यहां पर जो प्रामाणिक शिष्य जो देते यह तो आपकी अपनी व्याख्या है जोक

511
00:38:29,520 --> 00:38:33,560
जिसको भी मैं काउंटर करूंगा मगर जो प्रामाणिक शिष्य गण जो व्याख्या देते

512
00:38:33,560 --> 00:38:37,600
व यह देते हैं कि नहीं वो जो है व वही है जो दी गई

513
00:38:37,600 --> 00:38:41,760
थी उसमें कुछ मिस इंटरप्रिटेशन नहीं हुआ था बल्कि

514
00:38:41,760 --> 00:38:46,200
उस समय की देश काल परिस्थिति के अनुसार कुछ बातें ऐसी थी जो अवैध

515
00:38:46,200 --> 00:38:50,200
थी व उसमें डालना आवश्यक थी इसलिए डाली गई

516
00:38:50,200 --> 00:38:54,240
मिस मिस इंटरप्रिटेशन नहीं हुआ बाइबल और कुरान की

517
00:38:54,240 --> 00:38:58,400
बात कर रहे हैं हा जो आपके जो शिष्य गण है है परंपरा

518
00:38:58,400 --> 00:39:02,760
प्राप्त प्रामाणिक वो यह कहते हैं कि उसमें कुछ भी चीजें

519
00:39:02,760 --> 00:39:06,960
गलत जोड़ी नहीं गई है वो गलत दी ही गई थी क्योंकि उतने लोगों

520
00:39:06,960 --> 00:39:11,040
को वह चीजें ही समझ में आ सकती थी तो कुछ चीजें अवैध भी इसलिए दी

521
00:39:11,040 --> 00:39:15,360
गई जो वेदों से मैच नहीं खाती है वो चीजें भी इसलिए दी गई क्योंकि उस देश

522
00:39:15,360 --> 00:39:19,800
काल परिस्थिति की व आवश्यकता थी जी

523
00:39:19,800 --> 00:39:25,800
तो अब इसमें से कौन सी डेफिनेशन को मान के मैं काउंटर करूं आपकी कि उनकी

524
00:39:28,920 --> 00:39:32,240
अवान जी अवान जी

525
00:39:32,240 --> 00:39:36,320
हिस्टोरिकल श प्रभुपाद ऐसे मत

526
00:39:36,320 --> 00:39:40,440
किया करिए देखि आपने दो बातें हो गई शिष्य गण कुछ बता रहे आप कुछ बता रहे हो

527
00:39:40,440 --> 00:39:45,480
मैं आपकी बात को ही मैं उसका उत्तर दे रहा हूं आपको आपने कहा कि

528
00:39:45,480 --> 00:39:49,640
वो द आपने कहा कि कृष्ण भगवान के द्वारा

529
00:39:49,640 --> 00:39:53,680
मोहम्मद को भी भेजा गया और जीसस

530
00:39:53,680 --> 00:39:57,680
क्राइस्ट को भी भेजा गया और वो जो ज्ञान उन्होने दिया व कृष्ण के

531
00:39:57,680 --> 00:40:01,800
भेजा गया था मगर उसमें जो है प्रक्षिप्त के प्रक्षिप्त चीज जोड़ते चले

532
00:40:01,800 --> 00:40:06,280
गए मिस इंटरप्रिटेशन करते चले गए तो आज जो है ये दिख रहा है कि

533
00:40:06,280 --> 00:40:10,560
जो है अलग अलग ईश्वर दिख रहे हैं ठीक है जी

534
00:40:10,560 --> 00:40:14,560
तो इसमें सबसे पहली बात य आपने कहा कि अल्लाह कौन है विष्णु ही है

535
00:40:14,560 --> 00:40:18,600
एक तो यह वाली बात आ गई अल्लाह विष्णु है तो जब हम कहते हैं

536
00:40:18,600 --> 00:40:22,760
कि अल्लाह कुरान में जो अल्लाह बताया गया वो विष्णु ही है तो

537
00:40:22,760 --> 00:40:26,800
कहीं पर हमारे शास्त्रों में भी लिखा हा हा

538
00:40:26,800 --> 00:40:31,000
कुरान में बताया हुआ है अल्लाह विष्णु नहीं है मैं मैंने मेरा पॉइंट ही यही था हवान

539
00:40:31,000 --> 00:40:35,000
जी कि कुरान और बाइबल की मिस इंटरप्रिटेशन की वजह से उसके

540
00:40:35,000 --> 00:40:39,080
गलत अनुवाद की वजह से सबको ऐसा लगा पता लगा मगर अल्लाह तो

541
00:40:39,080 --> 00:40:43,080
विष्णु ही है ना जी भगवान के नाम अनेक हैं

542
00:40:43,080 --> 00:40:44,160
भगवान के नाम अनंत

543
00:40:44,160 --> 00:40:48,400
है भगवान को आप अल्लाह कज भगवान देखिए पहले आप डिसाइड कर लीजिए आप

544
00:40:48,400 --> 00:40:52,480
अल्लाह और विष्णु को एक मानते हैं या भगवान के नाम अनंत है तो कोई भी नाम

545
00:40:52,480 --> 00:40:55,440
ले

546
00:40:55,440 --> 00:40:59,600
लेंगे क्योंकि अगर भगवान के नाम अनंत है तो क्या

547
00:40:59,600 --> 00:41:03,640
भगवान का नाम मल भी रख देंगे के अकॉर्डिंग क्लिटी

548
00:41:03,640 --> 00:41:07,800
है वही माने क्या भगवान के नाम अनंत है तो क्या

549
00:41:07,800 --> 00:41:11,960
भगवान का नाम मैं आपसे एक चीज पूछ रहा हूं क्या भगवान

550
00:41:11,960 --> 00:41:16,360
के नाम अनंत है तो क्या आप भगवान का नाम मूत्र भी रख देंगे मल भी रख देंगे

551
00:41:16,360 --> 00:41:20,440
शौच भी रख देंगे शौचालय भी रख देंगे

552
00:41:20,440 --> 00:41:24,640
क्योंकि भगवान के नाम अनंत है देख देखिए देख

553
00:41:24,640 --> 00:41:28,880
और दूसरा प्रश्न आगा

554
00:41:28,880 --> 00:41:33,240
अगम का भगवान के नाम के रूप मेंप करेंगे जी अवान

555
00:41:33,240 --> 00:41:37,240
जी सुन लीजिए जैसे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण होता है तो क्या आप

556
00:41:37,240 --> 00:41:41,280
हरे अल्लाह हरे अल्लाह करेंगे हवान जी

557
00:41:41,280 --> 00:41:45,480
मेरी बात सुनिए जैसे जिस प्र मुरली धार

558
00:41:45,480 --> 00:41:50,240
मुरली धार कहते श्री कृष्ण जी का एक नाम है अब अगर उसको इंग्लिश में ट्रांसलेट

559
00:41:50,240 --> 00:41:54,600
द वन हु है बासरी वन प्ले भाई साहब मैंने आपसे

560
00:41:54,600 --> 00:41:58,680
सवाल कुछ और पूछा है आप दूसरी सेम बात हो हवान

561
00:41:58,680 --> 00:42:02,720
जी आप दूसरी चीज मुझे बता रहे हैं मैंने आपसे आप कह रहे भगवान

562
00:42:02,720 --> 00:42:07,360
के नाम अनंत है तो इसलिए कोई भी नाम भगवान का स्वीकार किया जा सकता है

563
00:42:07,360 --> 00:42:11,400
जी बिल्कुल नहीं कहा मैंने ऐसा मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा तो फिर

564
00:42:11,400 --> 00:42:15,520
किसी भी नाम को भगवान के नाम के रूप में स्वीकार करने का आधार क्या

565
00:42:15,520 --> 00:42:19,840
है आधार यह नहीं है कि अनंत है तो मैं इस फोन को थोड़ी

566
00:42:19,840 --> 00:42:23,840
बोलूंगा यह श्री कृष्ण जी है इसका मतलब यह है कि अनंत

567
00:42:23,840 --> 00:42:27,960
होने का मतलब यह नहीं है कि हर एक चीज का नाम आ जाए अनंत होने

568
00:42:27,960 --> 00:42:32,000
का मतलब किस चीज का नाम मैंने आपसे पूछा तो फिर मैंने

569
00:42:32,000 --> 00:42:36,040
आपसे पूछा है कि तो फिर किस चीज का नाम आप स्वीकार करेंगे

570
00:42:36,040 --> 00:42:40,120
किस चीज का स्वीकार नहीं करेंगे इसका आधार क्या है इसका

571
00:42:40,120 --> 00:42:44,080
आधार क्या है जो वेदों में बताया गया है जितने नाम हम वेदों में बताए गए हैं

572
00:42:44,080 --> 00:42:48,080
हा तस्मा शास्त्रम प्रमाणम तेरे

573
00:42:48,080 --> 00:42:52,480
लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है

574
00:42:52,480 --> 00:42:56,720
तो भगवान का कौन सा नाम ग्रहण करना है कौन सा नहीं अनंत नाम है

575
00:42:56,720 --> 00:43:00,840
मगर हमें किस नाम के द्वारा मुक्ति मिल सकती है हमें कौन सा नाम उनका ग्रहण

576
00:43:00,840 --> 00:43:05,200
करना है यह हमें कौन बताएंगे शास्त्र तो आपने कहा कि अल्लाह जो है विष्णु

577
00:43:05,200 --> 00:43:09,280
ही है यह कहां लिखा है वेदों में वेदों

578
00:43:09,280 --> 00:43:13,280
में नहीं लिखा है परंतु मैं आपको कह रहा हूं मिस ट्रांसलेशन की वजह से नहीं

579
00:43:13,280 --> 00:43:17,480
हुआ है नहीं अल्लाह नाम अल्लाह जो है वो विष्णु ही है यह कहां

580
00:43:17,480 --> 00:43:23,480
लिखा है वेदों में तो आप क्यों कह रहे

581
00:43:24,360 --> 00:43:28,600
हैं जीरी बात मैं आपको य समझाने की कोशिश

582
00:43:28,600 --> 00:43:34,600
कर रहा हूं कि भगवान को जिसको वो मानते है जिन्होने दुनिया को

583
00:43:34,880 --> 00:43:39,280
बना आप एक बार जाके फिर आइए हवान

584
00:43:39,280 --> 00:43:43,480
जी मेरी आवाज आ रही है आ रही है

585
00:43:43,480 --> 00:43:47,720
अब मेरे को बताइए अल्लाह को वो क्या मानते हैं व मानते हैं कि जिसने

586
00:43:47,720 --> 00:43:52,160
दुनिया बनाई क्या दुनिया किसी अलग अलग भगवान ने बनाई एक ही बात को बदलिए

587
00:43:52,160 --> 00:43:56,200
नहीं एक एक बात करके चलिए पहले बात हो रही है क्या हमारे शास्त्रों में

588
00:43:56,200 --> 00:44:01,320
कहीं पर कहा अल्ला है विष्णु

589
00:44:01,320 --> 00:44:05,480
है जी कॉमन थिंकिंग स्किल से नहीं

590
00:44:05,480 --> 00:44:09,520
मैंने कहा 16 24 को कहां ले जाएंगे तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य

591
00:44:09,520 --> 00:44:15,520
के विषय में शास्त्र प्रमाण है देखि गलत बात करेंगे तो

592
00:44:16,680 --> 00:44:19,040
थोड़ा

593
00:44:19,040 --> 00:44:23,080
देखिए मैं आपको इसका बड़ा स कमेंट किया है आपने जो

594
00:44:23,080 --> 00:44:27,120
एक वक्तव्य दिया है स्टेटमेंट दिया है कि जो अल्लाह है व

595
00:44:27,120 --> 00:44:31,120
तो विष्णु ही ये हमको शास्त्र से तो दो अन्यथा फिर मैं

596
00:44:31,120 --> 00:44:37,120
पूछ रहा हूं कि शौचालय भी बोलोगे क्या मोबाइल भी बोलोगे

597
00:44:37,720 --> 00:44:41,800
क्या अहवान जी अब मैं आपको एक नर्मल सी चीज बोलूंगा

598
00:44:41,800 --> 00:44:46,160
सुनिए सुनिए

599
00:44:46,160 --> 00:44:50,280
जी क्या आप क्या आप क्या आप

600
00:44:50,280 --> 00:44:55,240
श्री कृष्ण जी के श्री कृष्ण जी के माता-पिता का नाम जानते हैं

601
00:44:55,240 --> 00:44:58,600
हां जानता हूं

602
00:44:58,600 --> 00:45:02,960
तो आपको जानकर यह हैरानी होगी कि उस नाम को जब कुरान

603
00:45:02,960 --> 00:45:07,280
जिस लैंग्वेज में लिखी गई थी अरेबिक उस लैंग्वेज में जब उनके माता-पिता का

604
00:45:07,280 --> 00:45:11,280
नाम को अरेबिक में ट्रांसलेट किया जाता है तो वह मोहम्मद के माता-पिता के

605
00:45:11,280 --> 00:45:15,360
नाम में आता है तो बात उससे

606
00:45:15,360 --> 00:45:19,520
क्या मतलब है ये एक संयोग मात्र हो सकता हैवान

607
00:45:19,520 --> 00:45:23,640
जी जी क्या है देखि मैं क्यों ऐसा

608
00:45:23,640 --> 00:45:27,720
बारबार टोक रहा हूं आपको क्योंकि मैं किसी और मुख्य पॉइंट पर आना चाह

609
00:45:27,720 --> 00:45:31,880
मगर आप इसी में इतना देर लगा रहे हैं इसी को इतना खींच रहे

610
00:45:31,880 --> 00:45:36,320
हैं आपने ये लाइन गलत कही कि अल्लाह विष्णु ही है

611
00:45:36,320 --> 00:45:40,400
क्योंकि अगर भगवान के अनंत नामों के कारण आप विष्णु विष्णु

612
00:45:40,400 --> 00:45:44,480
भगवान के लिए अल्लाह को ग्रहण करेंगे तो दो क्वेश्चन उठ जाएंगे कि

613
00:45:44,480 --> 00:45:48,680
अनंत नाम है तो क्या मल मूत्र भी कहेंगे और अगर अल्लाह भी उनका

614
00:45:48,680 --> 00:45:52,680
नाम है तो क्या आप हरे अल्लाह हरे अल्लाह करेंगे दोनों ही चीजें पॉसिबल नहीं

615
00:45:52,680 --> 00:45:53,560
होगी

616
00:45:53,560 --> 00:45:57,760
आपने खुद स्वीकार किया कि हम किसी भी नाम को तब स्वीकार करेंगे जब वो

617
00:45:57,760 --> 00:46:02,000
हमारे शास्त्रों द्वारा स्वीकार किया गया हो तो आपको

618
00:46:02,000 --> 00:46:06,040
यह प्रमाण देना पड़ेगा जब आप यह कहेंगे कि विष्णु जो है वह अल्ला

619
00:46:06,040 --> 00:46:10,120
ही है तो आपको य प्रमाण देना होगा कि कहां पर लिखा

620
00:46:10,120 --> 00:46:14,240
है और अगर नहीं है तो आप अपने वक्तव्य को वापस

621
00:46:14,240 --> 00:46:18,920
ले लीजिए कि अल्ला जो है व विष्णु ही है नहीं नहीं

622
00:46:18,920 --> 00:46:22,920
मेरी बात सुनिए प्रभुपाद श्रीला प्रभुपाद जी ने

623
00:46:22,920 --> 00:46:27,440
अपनी किताब में कहा है कृष्णा कृष्णा

624
00:46:27,440 --> 00:46:31,760
ग्रीक इज नोन एस क्रिस्टस एंड क्रिस्टस सुनिए सुनि मैंने अभी आपको दिखाया

625
00:46:31,760 --> 00:46:35,760
ना कृष्ण और अल्लाह एक है मैंने अभी देखिए आप दूसरी जगह क्यों

626
00:46:35,760 --> 00:46:40,080
जा रहे हैं मैंने आपको सीधे-सीधे दिखा दिया कि अल्लाह कृष्ण ही है

627
00:46:40,080 --> 00:46:44,240
तो आप उस पर बात करिए ना उसको उसको खामा खा टाइम टेकिंग चीज

628
00:46:44,240 --> 00:46:48,320
क्यों बना रहे हैं जब मैंने आपको शॉर्ट में दिखा दिया चीवान जी अवान जी

629
00:46:48,320 --> 00:46:52,320
भगवान को किस चीज से पहचाना जा सकता है उन उनकी खूबियों से व ल

630
00:46:52,320 --> 00:46:56,400
अट्रैक्टिव है व ऑल पावरफुल है जैसे वेदों ने बताया थाने आपको

631
00:46:56,400 --> 00:47:00,600
क्या कहा मैंने मैंने आपकी बात को स्वीकार किया है मैंने

632
00:47:00,600 --> 00:47:04,920
मैंने आपकी बात को स्वीकार किया भाई साहब मैंने आपसे पूछा है भगवान

633
00:47:04,920 --> 00:47:08,600
के अनंत नाम है बल्कि इस दुनिया में जो भी कुछ शब्द है वह भगवान का ही

634
00:47:08,600 --> 00:47:13,320
नाम है मगर हमें हां बिल्कुल इस

635
00:47:13,320 --> 00:47:17,440
दुनिया में जो भी कुछ नाम कल को ऑक्सफ डिक्शनरी में नया नाम बना दूंगा

636
00:47:17,440 --> 00:47:21,560
वो भगवान का नाम थोड़ी होगा कैसी बातें कर रहे देखिए ये मैं क्या

637
00:47:21,560 --> 00:47:25,880
मैं अपनी धारणा बता रहा हूं इस दुनिया में कोई भी शब्द है कोई भी शब्द

638
00:47:25,880 --> 00:47:29,960
वो भगवान का ही शब्द है भगवान का ही प्रतीक है क्योंकि भगवान

639
00:47:29,960 --> 00:47:34,080
के बिना उस तो पॉसिबल नहीं है सुन लीजिए मेरी बात सुन लीजिए मेरी

640
00:47:34,080 --> 00:47:38,200
बात सुन लीजिए मैं अपनी धारणा बताई अब उसके बाद मैं फिर

641
00:47:38,200 --> 00:47:42,200
भी मैं जानता हूं कि सब कुछ भगवान का ही नाम है हर शब्द भगवान का

642
00:47:42,200 --> 00:47:46,360
ही है मगर हम भगवान के किस नाम रूप को ग्रहण करेंगे

643
00:47:46,360 --> 00:47:51,120
जो शास्त्र में बताया होगा वही मुक्ति दायक है जैसे कि पानी

644
00:47:51,120 --> 00:47:55,120
नमी इत्यादि के रूप में सर्वत्र व्याप्त है सुन लीजिए

645
00:47:55,120 --> 00:47:59,360
सुन लीजिए जैसे कि पानी नमी इत्यादि के रूप में सर्वत्र व्याप्त

646
00:47:59,360 --> 00:48:03,480
है मगर हम पानी के उस रूप को ग्रहण करते हैं

647
00:48:03,480 --> 00:48:07,480
जो हमारे व्यवहार का विषय बन जाए गिलास में चुल्लू में आ जाए

648
00:48:07,480 --> 00:48:11,480
उसी को हम ग्रहण करते हैं हम हवा में हाथ नहीं मारते कि भैया यहां

649
00:48:11,480 --> 00:48:15,560
भी पानी होगा उसी तरीके से भगवान के अनंत नाम है भगवान सर्वत्र व्याप्त

650
00:48:15,560 --> 00:48:19,800
है तो भगवान के अनंत नाम है मगर हमें वही नाम स्वीकार रहे हैं जो शास्त्रों

651
00:48:19,800 --> 00:48:23,680
में दिए गए हैं अब आपका कहना है क्योंकि वहां पर गुण मिल

652
00:48:23,680 --> 00:48:27,680
रहे हैं देखने में भगवान के जो गुण है वो मिल रहे हैं इसलिए वहां का

653
00:48:27,680 --> 00:48:31,760
नाम भगवान पर फिट बैठता है ठीक है यानी कि आप

654
00:48:31,760 --> 00:48:35,920
जो है कुरान मैं करेक्ट करना चाहूंगा मेरी मेरे को प्लीज बोलने

655
00:48:35,920 --> 00:48:40,040
का मौका दीजिए मैं आपको करेक्ट करना चाहूंगा भगवान का मैं

656
00:48:40,040 --> 00:48:44,320
आपको यह कह रहा हूं कि जो अल्लाह वो समझते हैं जिस भगवान को वो समझते हैं

657
00:48:44,320 --> 00:48:48,640
व है असली में विष्णु जब श्रीला प्रभुपाद जी से ये एक बात की थी बीटल्स

658
00:48:48,640 --> 00:48:52,680
के एक मेंबर ने कि फिर तो हम क्राइस्ट का ही नाम ले लेते हैं फिर

659
00:48:52,680 --> 00:48:56,760
तो हम अल्लाह का ही नाम लेते का नाम क्यों नहीं लेते जैसे आपने कहा था अल्ला

660
00:48:56,760 --> 00:49:00,760
हला बोल ते हैं जब जब श्रीला प्रभुपाद जी

661
00:49:00,760 --> 00:49:04,840
से इस बात पर बात की गई उन्होंने बोला नहीं हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्ण

662
00:49:04,840 --> 00:49:09,080
कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे जो यह महामंत्र

663
00:49:09,080 --> 00:49:13,320
दिया गया था इस मंत्र में सबसे ज्यादा पोटेंसी है अगर हम कोई दूसरा

664
00:49:13,320 --> 00:49:17,440
नाम लेते हैं अल्लाह

665
00:49:17,440 --> 00:49:22,360
बम से हम भगवान के पास पहु सते इसका मतलब

666
00:49:22,360 --> 00:49:26,840
अब इसका मतलब हमें किसी भी नाम को ग्रहण करने से पहले शास्त्रों को खंगालना

667
00:49:26,840 --> 00:49:31,440
हो कि वह शास्त्रोक्त है कि नहीं हा

668
00:49:31,440 --> 00:49:35,560
तो हम डायरेक्ट य नहीं कह सकते कि अल्लाह विष्णु ही है पहली बात आपने कही

669
00:49:35,560 --> 00:49:38,840
है ठीक है आपने श प्रमाण र

670
00:49:38,840 --> 00:49:43,040
अल्ला आपको कह रहा जिस अल्ला को समझते हैं

671
00:49:43,040 --> 00:49:49,040
होना असली में विष्णु चाहिए था पर उनके मिस ट्रांसलेशन की वजह से

672
00:49:50,120 --> 00:49:54,200
उनके किया है तो प्रभुपाद जी को अगर मिस ट्रांसलेशन किया

673
00:49:54,200 --> 00:49:58,360
है तो प्रभुपाद जी को अपनी बुक में लिखना चाहिए था

674
00:49:58,360 --> 00:50:02,480
कि अल्लाह जो है वो विष्णु का भ्रामक नाम है मगर

675
00:50:02,480 --> 00:50:06,720
वह प्रचारित किया गया वस्तुतः अल्लाह नाम से गलत प्रचार किया गया है वहां

676
00:50:06,720 --> 00:50:12,720
पर विष्णु की बात हो रही है यह सब लिखना चाहिए

677
00:50:13,080 --> 00:50:17,080
थाने दूसरी अब दूसरी एक बात आपसे पूछ रहा हूं

678
00:50:17,080 --> 00:50:21,400
यह अल्लाह शब्द जो है

679
00:50:21,400 --> 00:50:25,880
आपको एजिस्ट कहां से किया

680
00:50:25,880 --> 00:50:31,720
कहां से इसकन के पास अल्ला शब्द आया कहां

681
00:50:31,720 --> 00:50:35,920
से अल्ला शब्द आया इसकन के पास

682
00:50:35,920 --> 00:50:40,440
मिडिल ईस्ट के जो वहा पर रिलीजन चला था इस्लाम का वहां से आया

683
00:50:40,440 --> 00:50:44,960
मतलब की कुरान से आया ना जी आप

684
00:50:44,960 --> 00:50:49,920
कुरान तो नहीं कह सकते तो क्या कहेंगे उसे

685
00:50:49,920 --> 00:50:55,920
पीछे उनके परपरा

686
00:50:58,120 --> 00:51:04,120
मिडिल ईस्ट में वह अल्लाह शब्द कहां से आया

687
00:51:04,400 --> 00:51:10,400
चलिए एक सेकंड

688
00:51:10,640 --> 00:51:14,800
जी जी मिडिल ईस्ट से उनके

689
00:51:14,800 --> 00:51:20,040
पास आया तो मिडिल ईस्ट में वह अल्ला शब्द कहां से आया

690
00:51:20,040 --> 00:51:24,160
कुरान से कुरान से ना तो

691
00:51:24,160 --> 00:51:28,360
हमें मानना पड़ेगा ना कि अंतिम रूप से कुरान से उनके पास अल्लाह

692
00:51:28,360 --> 00:51:32,360
आया ठीक है यानी कि अल्लाह शब्द जो एस्ट करता

693
00:51:32,360 --> 00:51:36,360
हैम आया हा अल्लाह शब्द

694
00:51:36,360 --> 00:51:40,480
जो एजिस्ट करता है उनके लिए वोह अल्लाह

695
00:51:40,480 --> 00:51:46,480
शब्द के एक्जिस्टेंस को स्वीकार करने के लिए वह कुरान पर निर्भर

696
00:51:46,800 --> 00:51:51,040
है वापस बोलिएगा अल्लाह शब्द

697
00:51:51,040 --> 00:51:55,120
के अस्तित्व को स्वीकार करने के लिए इस दुनिया में अल्लाह नाम की

698
00:51:55,120 --> 00:52:01,120
कोई एंटिटी है उसको स्वीकार करने के लिए वह कुरान पर निर्भर

699
00:52:02,040 --> 00:52:06,880
है देखिए अवान जीवा जी

700
00:52:06,880 --> 00:52:11,000
आपको बात देखिए य पर चर्चा बदल रही है

701
00:52:11,000 --> 00:52:15,240
बहुत स्पष्ट स्पष्ट बातें करता हूं मैं और आप देखिए अवान जी

702
00:52:15,240 --> 00:52:19,360
देखिए अवान जी ऐसे कर कर के जो है दूसरी बात चालू करते मैंने आपसे

703
00:52:19,360 --> 00:52:23,400
पूछा अल्लाह शब्द के अस्तित्व को स्वीकार

704
00:52:23,400 --> 00:52:28,120
करने के लिए किस पर निर्भर है कुरान

705
00:52:28,120 --> 00:52:32,160
पर कुरान प तो फिर अल्लाह के

706
00:52:32,160 --> 00:52:36,360
बारे में क्या बताया गया है और क्या नहीं बताया

707
00:52:36,360 --> 00:52:40,400
गया यह कौन बताएगा उन्हें क्या बताया गया

708
00:52:40,400 --> 00:52:44,400
क्या नहीं बताया गया कुरान कुरान बताएगी तो

709
00:52:44,400 --> 00:52:48,440
कुरान में जो अल्लाह के लिए लिखा हुआ है वह कह रहे हैं कि वह गलत है यह

710
00:52:48,440 --> 00:52:52,920
आप बता रहे हो वह मिस इंटरप्रिटेड कर दिया गया है ठीक है

711
00:52:52,920 --> 00:52:56,920
बक तो अब जो सही बात है सही

712
00:52:56,920 --> 00:53:01,120
बात है वो कुरान का जो सही अर्थ है वह

713
00:53:01,120 --> 00:53:05,400
इनके पास कहां से आया किस

714
00:53:05,400 --> 00:53:09,760
पर जी जी जी जैसे आपको पता होगा

715
00:53:09,760 --> 00:53:13,840
श पता होगा शीला प्रभुपाद ने वेदिक नॉलेज का

716
00:53:13,840 --> 00:53:17,600
प्रयोग करके वेस्ट में गए थे जहां पर उन्होने लोगों को इलस

717
00:53:17,600 --> 00:53:19,960
किया

718
00:53:19,960 --> 00:53:24,560
था होता है मैंने आपसे सवाल पूछ

719
00:53:24,560 --> 00:53:29,440
आप देखिए दूसरी जगह बात को ले जाते की वजह से क्या होता है जो मुख्य विषय होता है बहुत देर में आता

720
00:53:29,440 --> 00:53:33,600
है आप पहले बताइए तो कि उनके पास जो कुरान की

721
00:53:33,600 --> 00:53:37,720
वो नॉलेज है जो कुरान वाले जो दे रहे हैं वो ना होकर के कुछ और नॉलेज

722
00:53:37,720 --> 00:53:42,480
है वो नॉलेज उनके पास कहां से आई किस परंपरा से आई व

723
00:53:42,480 --> 00:53:46,680
वेदिक नॉलेज को मानते थे कि वैदिक नॉलेज सर्वो परे है जो हमको भी पता है जब उन्होंने

724
00:53:46,680 --> 00:53:50,760
वैदिक नॉलेज को कुरान की नॉलेज से कंपेयर किया तो उनको पता चला कि कुरान में क्या-क्या

725
00:53:50,760 --> 00:53:55,000
खामियां है वेदिक नॉलेज को एज अ एंकर पॉइंट मान के उन्होंने देखब

726
00:53:55,000 --> 00:53:59,120
ये कह रहा मेरा सवाल मेरा सवाल आप समझ नहीं रहे आप

727
00:53:59,120 --> 00:54:03,120
दूसरा जवाब दे रहे मैंने आपसे पूछा है जैसे उनके

728
00:54:03,120 --> 00:54:07,200
पास भगवत गीता का जो अर्थ है वोह मधवा चार परंपरा से चेतन

729
00:54:07,200 --> 00:54:11,520
महाप्रभु से होते हुए उनके पास तक आया जो श्री भागवत श्रीमद्

730
00:54:11,520 --> 00:54:15,840
भागवत का जो अर्थ है वो इकोन के अनुसार उसमें भी कई सारी दिक्कत

731
00:54:15,840 --> 00:54:19,920
है मगर फिलहाल मान लेते कि स्कोन के अनुसार मधवा चार से होते

732
00:54:19,920 --> 00:54:24,040
हुए और जो है चेतन महाप्रभु जी से होते हुए उनके पास तक आया अब मैं पूछ रहा

733
00:54:24,040 --> 00:54:29,240
हूं कुरान का अर्थ उनके पास कहा से होते हुए

734
00:54:29,240 --> 00:54:32,920
आया कुरान का अर्थ उन्होंने हवान

735
00:54:32,920 --> 00:54:37,000
जी सबसे पले जब वेस्ट गए थे तो वेस्ट नॉलेज में वेस्ट गए थे अपना

736
00:54:37,000 --> 00:54:41,440
प्रचार फैलाने के लिए उन्होने पास नाम नहीं है क्या

737
00:54:41,440 --> 00:54:45,480
मैंने आपसे पूछा कि किस परंपरा से उनके पास कुरान की नॉलेज आई है कुरान

738
00:54:45,480 --> 00:54:49,760
का वो अर्थ जो कुरान वाले जो बता रहे उसके विरुद्ध है अवान

739
00:54:49,760 --> 00:54:54,120
जी देखिए नॉलेज क्या है द ट्रुथ क्या है सच क्या है वेद

740
00:54:54,120 --> 00:54:58,480
उन्होने वेदों को कुरान के साथ मैं आपसे भाई साब आप बोल दोना

741
00:54:58,480 --> 00:55:02,720
किसी परंपरा से नहीं आया सुनि भाई साहब सुनिए

742
00:55:02,720 --> 00:55:07,200
तो मेरी बात सुनिए आप ये बोल दो ना परंपरा से नहीं आया सीधे

743
00:55:07,200 --> 00:55:11,720
बोलो पर दिया नहीं जाता कुरान तो पढ़ने के लिए

744
00:55:11,720 --> 00:55:15,880
बोरान का जन बोलो उ कुरान का ज्ञान उन्होने अपने

745
00:55:15,880 --> 00:55:20,200
अपने हिसाब से व व्याख्या अपने हिसाब से उन्होंने की

746
00:55:20,200 --> 00:55:24,440
नहीं हा तो बोलो फिर कहां से आई

747
00:55:24,440 --> 00:55:28,520
बोलो कहां से आई आवान जी कुरान और

748
00:55:28,520 --> 00:55:32,760
बाइबल को समझने के लिए पढ़ने के लिए पारंपरिक डिसाइल

749
00:55:32,760 --> 00:55:37,000
सक्सेशन की जरूरत नहीं पड़ती है उन्होंने सुनिए मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनिए

750
00:55:37,000 --> 00:55:41,120
मेरी बात उन्होंने कुरान और बाइबल को पढ़ा उनको पता

751
00:55:41,120 --> 00:55:45,360
जरूरत पड़ती है कि नहीं पड़ती है सुनिए सवाल ये नहीं है जरूरत पड़ती

752
00:55:45,360 --> 00:55:48,000
है कि नहीं पड़ती है मेरी बात सुनिए भाई आप जो

753
00:55:48,000 --> 00:55:52,360
है भटक रहे हैं मैंने प्रश्न पूछा है अगर परंपरा से आया है तो परंपरा

754
00:55:52,360 --> 00:55:56,560
का नाम बताएं परंपरा से नहीं आया है तो आप बोलिए कि नहीं परंपरा

755
00:55:56,560 --> 00:56:00,600
नहीं आया मुझे नहीं जानना है मैं आपसे पूछ लूंगा आपकी बात सुन लूंगा

756
00:56:00,600 --> 00:56:04,760
मगर अभी प्रश्न यह किया जा रहा है कि परंपरा से आया है या अपने

757
00:56:04,760 --> 00:56:08,760
मन से किया है अगर आप यह कह रहे हैं उसम परंपरा

758
00:56:08,760 --> 00:56:12,840
की आवश्यकता नहीं होती तो बोल दो ना कि अपने मन से किया है मैं

759
00:56:12,840 --> 00:56:16,880
अभी आपको पाच मिनट में बताता हूं उन्होने परंपरा से किया है या नहीं किया बस दो मिनट

760
00:56:16,880 --> 00:56:22,880
गा

761
00:56:36,200 --> 00:56:40,440
सत्य की खोज किसका पक्ष

762
00:56:40,440 --> 00:56:46,440
रखना चाहते हैं

763
00:56:53,040 --> 00:56:57,600
आप इसीलिए मैंने व आपको कमेंट में भी कहा पूरा वडियो

764
00:56:57,600 --> 00:57:01,600
आने उनको परंपरा से नहीं मिला है क्योंकि कुरान जैसे पता लग

765
00:57:01,600 --> 00:57:05,600
रहा है हमें परंपरा नहीं है उन्होने खुद से ही पढ़ के बताई है खुद सही किया

766
00:57:05,600 --> 00:57:10,480
ना ठीक है जी अब बात ये आती है

767
00:57:10,480 --> 00:57:14,680
कि कुरान उन्हें मिल कहां से रही है

768
00:57:14,680 --> 00:57:19,280
अवान जी आप ऐसे बात कर रहे हैं जैसे कुरान

769
00:57:19,280 --> 00:57:23,640
मिलती नहीं है खरीदने के लिए जैसे भगवत गीता नहीं मिल रही खरीदने के

770
00:57:23,640 --> 00:57:27,760
सुनिए सुनिए मैं बता दूं अगर हम ये मान अगर हम इस चीज

771
00:57:27,760 --> 00:57:31,760
को स्वीकार कर लेंगे कि हमारे यहां का कोई भी व्यक्ति जाकर के कुरान का जो चैन

772
00:57:31,760 --> 00:57:36,040
ऑफ नरेशन से जो अर्थ आ रहा है जो उनकी जहां से मोहम्मद साहब ने अपने डिसाइल्स

773
00:57:36,040 --> 00:57:40,120
को बताया उसके बाद उनकी चन ऑफ रेशन से जो कुरान आ रही है उनके अर्थ

774
00:57:40,120 --> 00:57:44,400
को अस्वीकार करते हुए अगर हम अपना अर्थ बताने लगे नहीं नहीं तुमने मिस इंटरप्रेट

775
00:57:44,400 --> 00:57:48,480
कर दिया है और जो हम जो बता रहे सही है तो फिर हमें जाकिर नायक के अर्थ वो जो वेदों

776
00:57:48,480 --> 00:57:51,440
का करता है वो भी स्वीकार करना पड़ेगा

777
00:57:51,440 --> 00:57:55,480
वो भी कह देगा कि मेरा अथ क्यों नहीं माना जाएगा सुन लीजिए

778
00:57:55,480 --> 00:57:59,680
सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए अगर परंपरा से ज्ञान

779
00:57:59,680 --> 00:58:03,920
आता है तो आपको परंपरा से ज्ञान को लेना पड़ेगा

780
00:58:03,920 --> 00:58:08,080
दूसरी बात अगर आपको उन पर विश्वास नहीं है जो कुरान

781
00:58:08,080 --> 00:58:12,280
आपको दे रहे हैं आपके पास कुरान कहां से आ रही है उनकी परंपरा से

782
00:58:12,280 --> 00:58:16,480
मोहम्मद के नीचे जो डिसाइल्स हुए होंगे उनके उसके बाद उनकी

783
00:58:16,480 --> 00:58:20,680
परंपरा से जो उन्होंने छापा छापते छापते छापते छापते तब आकर के मार्केट

784
00:58:20,680 --> 00:58:24,960
में आपको आज कुरान मिलती है तो कुरान के विषय में

785
00:58:24,960 --> 00:58:29,480
अंतिम वक्तव्य किसका का मान होगा जो डायरेक्ट उनकी लाइनेज से जुड़ा हुआ

786
00:58:29,480 --> 00:58:33,760
होगा क्योंकि अगर हम उन पर विश्वास नहीं करते तो हमें

787
00:58:33,760 --> 00:58:37,800
कुरान पर विश्वास कुरान नाम की चीज एजिस्ट करती है

788
00:58:37,800 --> 00:58:42,120
उस पर भी विश्वास होना हमारा सिद्ध नहीं होगा यह तर्क हम किसको देते हैं आर्य

789
00:58:42,120 --> 00:58:46,120
समाज यों को या मुस्लिमों को जब वोह अपना मन गणन अर्थ करने लगते

790
00:58:46,120 --> 00:58:50,720
हैं वेदों का तो हम उनसे पूछते हैं कि तुम्हारे पास वेद कहां से आए

791
00:58:50,720 --> 00:58:54,880
तो हम वो कहते भैया वो तो परंपरा प्राप्त आचार्यों से ही आएंगे तो

792
00:58:54,880 --> 00:58:59,200
फिर जब आप को परंपरा प्राप्त आचार्यों पर विश्वास नहीं है तो उनसे

793
00:58:59,200 --> 00:59:03,200
मिलने वाले वेद पर विश्वास कैसे और जब आपको वेद पर विश्वास है

794
00:59:03,200 --> 00:59:06,720
तो वो जिससे मिल रहे हैं उन परंपरा प्राप्त आचार्यों पर विश्वास

795
00:59:06,720 --> 00:59:10,800
क्यों नहीं है इसी तरीके से अगर कुरान हम मानते

796
00:59:10,800 --> 00:59:14,920
हैं कि कुरान नाम की कोई चीज एजिस्ट करती है तो वह जहां से हमको मिल

797
00:59:14,920 --> 00:59:19,040
रही है उन पर हमें उन पर हमें विश्वास मानना पड़ेगा और अगर हम उन

798
00:59:19,040 --> 00:59:23,760
पर विश्वास नहीं है तो हो सकता है वो कुरान नाम की चीज कोई मोहम्मद साहब ने लिखी ना हो

799
00:59:23,760 --> 00:59:27,960
कुछ भी उसमें तो नर गल लो वो तो फिर हमारे लिए कुछ मायने नहीं रखती उसकी बात भी करना

800
00:59:27,960 --> 00:59:30,240
बेकार

801
00:59:30,240 --> 00:59:34,400
है क्योंकि जिसे वो हमको मिली उस पर हमको विश्वास

802
00:59:34,400 --> 00:59:38,400
नहीं है बोलिए अन जी आपको इस बात से

803
00:59:38,400 --> 00:59:42,720
तो ज्ञात है ना कि शीला प्रभुपाद ने कभी यह नहीं बोला कि कुरान और बाइबल

804
00:59:42,720 --> 00:59:46,840
मेरी बात सुनिए मैं दो पॉइंट उठाऊंगा कुरान और बाइबल में जो बताया गया

805
00:59:46,840 --> 00:59:50,880
है उसी चीज को हमने फॉलो करना है उन्होने बस दो चीज एक चीज देखिए ये

806
00:59:50,880 --> 00:59:55,040
विष हो रहा हैलिए मुझे ना

807
00:59:55,040 --> 00:59:59,400
पड़ता टॉपिक ये नहीं है कि उन्होने क्या ये बोला है कि नहीं बोला है कि

808
00:59:59,400 --> 01:00:03,640
कुरान में जो बोला गया उसको ही फॉलो करना है हम एक एक करके हर पन्ने को खोलेंगे

809
01:00:03,640 --> 01:00:09,200
एक एक परके अभी टॉपिक ये चल रहा

810
01:00:09,200 --> 01:00:13,240
है हाब आप बदलते जैसे ही आप जैसे

811
01:00:13,240 --> 01:00:17,360
ही आपकी बात कटती है तो आप जो है विषयात करते दूसरी बात ले आते

812
01:00:17,360 --> 01:00:21,400
हैं अभी बात ये चल रही है कि जहां से आपको कुरान मिल

813
01:00:21,400 --> 01:00:25,600
रही है जहां से आपको कुरान मिल रही है यदि

814
01:00:25,600 --> 01:00:29,640
उस ोत पर जो उसका पॉइंट है जहां से आपको मिल रही है उस पर

815
01:00:29,640 --> 01:00:33,720
विश्वास नहीं है तो इसका मतलब है आपको कुरान पर विश्वास भी नहीं है

816
01:00:33,720 --> 01:00:38,000
कुरान किसी ने किसी लड़के ने चार साल के लड़के ने लिख दी है

817
01:00:38,000 --> 01:00:42,280
या क्या लिखा है आपको कुछ नहीं पता क्योंकि जिससे आप कुरान ले रहे हो उस पर आपका भरोसा

818
01:00:42,280 --> 01:00:46,440
होना सिद्ध नहीं हो रहा है और यदि उस पर भरोसा है यदि

819
01:00:46,440 --> 01:00:50,680
आपको कुरान पर भरोसा है तो आपको उस पर भी भरोसा करना होगा जिससे आपको कुरान

820
01:00:50,680 --> 01:00:54,680
मिल रही है सिंपल इसी बात से तो हम लोग

821
01:00:54,680 --> 01:00:59,160
अगर कोई हमारे ग्रंथों गलत अर्थ करके करने लगेगा तो इसी बात से तो उह पटक

822
01:00:59,160 --> 01:01:04,640
के और आप उसी बात का खुद ही खंडन कर रहे

823
01:01:04,640 --> 01:01:07,040
हो

824
01:01:07,040 --> 01:01:11,320
प्रभ तो इसका मतलब य क्लेम करना कि हमको ज्यादा पता है कुरान

825
01:01:11,320 --> 01:01:15,480
का अर्थ और जो कुरान वाले हैं जो कुरान हमको दे रहे हैं इसका

826
01:01:15,480 --> 01:01:19,600
मतलब की कुरान का अर्थ हमको ज्यादा पता है और जो कुरान वाले जो हमको कुरान

827
01:01:19,600 --> 01:01:24,920
का अर्थ बता रहे उनको कुछ नहीं पता है यह क्लेम करना गलत

828
01:01:24,920 --> 01:01:28,960
है कभी क्लेम ही नहीं किया ये इसकन ने कभी क्लेम नहीं किया ये

829
01:01:28,960 --> 01:01:33,200
आप क्लेम कर रहे हो ना आप अभी कह तो रहे होट

830
01:01:33,200 --> 01:01:37,280
किया गया क्लेम कर रहा हू अरे भाई तुम आए क्यों हो जब तुम्ह प्रभुपाद जी का

831
01:01:37,280 --> 01:01:41,400
पक्ष नहीं रखना है स्कन का पक्ष नहीं रखना है तो आए क्यों हो फिर क्या

832
01:01:41,400 --> 01:01:45,520
करने आ मैं आपके आपको जो गलतफहमी हुई

833
01:01:45,520 --> 01:01:49,520
है वो दूर कर तो तुम कह रहे हो ये तो मैं कह रहा हूं प्रभुपाद जी ने

834
01:01:49,520 --> 01:01:54,240
थोड़ी ना कहा है तो फिर क्यों आए हो भाई जब प्रभुपाद जी की चीजों को डिफेंड नहीं कर रहे हो

835
01:01:54,240 --> 01:01:59,880
तुम जी

836
01:01:59,880 --> 01:02:04,400
एक पॉट दूंगा उसके बाद मेरा भी समय हो रहा है जाने का मैं आपको एक पॉइंट दूंगा प्लीज

837
01:02:04,400 --> 01:02:08,840
आप अपने सुनिए बात यह है कि

838
01:02:08,840 --> 01:02:13,000
कि इनका प्रभुपाद जी का किसी भी ग्रंथ को एक

839
01:02:13,000 --> 01:02:17,000
धार्मिक या ईश्वर के द्वारा भेजे गए ग्रंथ के रूप में स्वीकार करने का आधार

840
01:02:17,000 --> 01:02:21,840
क्या है इस कन का

841
01:02:21,840 --> 01:02:25,880
जी किसी भी ग्रंथ को किसी भी पुस्तक को

842
01:02:25,880 --> 01:02:30,800
धार्मिक ग्रंथ के रूप में स्वीकार करने का आधार क्या है इसकन

843
01:02:30,800 --> 01:02:35,520
का इसने स्वीकार किया ही नहीं हा

844
01:02:35,520 --> 01:02:39,840
इसको ने स्वीकार किया ही नहीं किसी दूसरे धार्मिक ग्रंथ को

845
01:02:39,840 --> 01:02:44,240
अरे भाई आप यहां क्या डिफेंड करने आए हो कि भैया जो कुरान है वो उसम मिसइंटरप्रेट

846
01:02:44,240 --> 01:02:48,400
कर दिया उनके लोगों ने और और जो प्रभुपाद जी उनको सही अर्थ पता

847
01:02:48,400 --> 01:02:52,640
है तो इसका मतलब वो कुरान को धार्मिक ग्रंथ के रूप में स्वीकार कर रहे ना शुरू

848
01:02:52,640 --> 01:02:57,240
में आपने कहा भी वो श्री कृष्ण के द्वारा भेजे गए ग्रंथ है

849
01:02:57,240 --> 01:03:01,280
श्री कृष्ण जी के भेजे द्वारा भेजे गए ग्रंथ नहीं श्री कृष्ण जी

850
01:03:01,280 --> 01:03:05,440
के द्वारा भेजे गए लोग थे जिन्होंने यह मैसेज लाना चाहा परंतु

851
01:03:05,440 --> 01:03:09,440
एट द एंड वो ग्रंथ जो ग्रंथ उन लोगों के द्वारा आ रहा है उनको श्री कृष्ण

852
01:03:09,440 --> 01:03:13,560
नहीं तो भेजा था वो चाहते थे ना तुम मेसेंजर ऑफ गड क है ना मेसेंजर ऑफ गड

853
01:03:13,560 --> 01:03:14,960
तो गड का ही संदेश दे

854
01:03:14,960 --> 01:03:18,960
रहे है ना वो आपको के द लोगों ने खुद से

855
01:03:18,960 --> 01:03:23,120
ए ने तो वो अगर आप यह

856
01:03:23,120 --> 01:03:27,160
मानते हो कि वो कृष्ण के द्वारा भेजा गया ग्रंथ था मगर उसम मिलावट हो गई

857
01:03:27,160 --> 01:03:31,240
है तो इसका मतलब आप ये कह रहे हो कि जिस व्यक्ति से आपको

858
01:03:31,240 --> 01:03:35,400
वो ग्रंथ मिल रहा है वो व्यक्ति झूठ है तो

859
01:03:35,400 --> 01:03:39,560
जब वो जब उस जब उस व्यक्ति से आपको झूठा अर्थ निकल

860
01:03:39,560 --> 01:03:43,600
सकता है दे सकता है वो झूठा व्यक्ति आपको तो व आपको झूठी किताब

861
01:03:43,600 --> 01:03:47,720
क्यों नहीं दे सकता वो झूठ नाम क्यों नहीं दे सकता अवन जी आप

862
01:03:47,720 --> 01:03:53,080
क्या मानना चाहते हैं कि भगवत गीता की जो पहले परंपरा आई थी वो खंडित हो चुकी थी या नहीं

863
01:03:53,080 --> 01:03:57,560
नहीं नहीं हो चुकी थी कर र हां

864
01:03:57,560 --> 01:04:01,680
जब विष्णु जी नेलिया नहीं खेलते बताते तो बताया तो है सब तैयारी

865
01:04:01,680 --> 01:04:05,960
करके बैठते भग वो जो श्लोक में आया है प्राय

866
01:04:05,960 --> 01:04:10,160
लुत हो गया है उसका अर्थ ये होता है कि प्राय लोगों में उतना ज्यादा

867
01:04:10,160 --> 01:04:14,480
प्रासंगिक नहीं रहा है मगर ये नहीं कि बिल्कुल खत्म ही हो गया है

868
01:04:14,480 --> 01:04:18,480
उतना लोग नहीं जानते प्राय प्राय लुप्त सा हो गया है वो

869
01:04:18,480 --> 01:04:22,480
खत्म नहीं हो गया नष्ट नहीं हो गया अगर नष्ट हो गया था

870
01:04:22,480 --> 01:04:26,480
अगर नष्ट हो गया था अगर नष्ट हो गया था एक मिनट मिनट

871
01:04:26,480 --> 01:04:31,360
अगर नष्ट हो गया था श्री कृष्ण

872
01:04:31,360 --> 01:04:35,440
बताते मैं वही उसी का जवाब दे रहा हूं मैं उसी का जवाब दे रहा हूं

873
01:04:35,440 --> 01:04:39,560
आपको भगवत गीता चार दो का ही जवाब दे रहा हूं महा भगवान ने कहा है

874
01:04:39,560 --> 01:04:43,880
प्राय लुप्त हो गया है प्राय लुप्त से उनका मतलब है

875
01:04:43,880 --> 01:04:47,960
कि उतना ज्यादा समाज में प्रासंगिक नहीं है लुप्त जैसा हो जाना मतलब

876
01:04:47,960 --> 01:04:52,000
खोता जा रहा है तमाज से लुप्त सा

877
01:04:52,000 --> 01:04:56,120
हो गया है यह उनका कहने का मतलब है अगर हम ये मान लेंगे कि लुप्त बिल्कुल

878
01:04:56,120 --> 01:05:00,200
नष्ट ही हो गया था खो गया था ठीक है तो फिर आपकी

879
01:05:00,200 --> 01:05:04,280
जो परंपरा है वो खंडित हो जाएगी क्योंकि आपकी परंपरा द्वाप से

880
01:05:04,280 --> 01:05:08,960
हो चाहिए अरे मेरे भाई सुन तो लो मेरी बात सुन लो

881
01:05:08,960 --> 01:05:13,040
मैं जो कह रहा हूं वो सुन तो लो अगर आप आपका ज्ञान वहां

882
01:05:13,040 --> 01:05:17,080
तक नष्ट हो गया और श्री कृष्ण से चालू हो रहा है तो फिर आपको यह

883
01:05:17,080 --> 01:05:21,080
मानना पड़ेगा कि द्वापर से आपकी गुरु परंपरा शुरू हो रही है ना कि वो

884
01:05:21,080 --> 01:05:25,120
जो सृष्टि का निर्माण काल था वहां से शुरू नहीं हो रही फिर

885
01:05:25,120 --> 01:05:29,840
परंपरा द्वापर से शुरू हुई मानी जाएगी तो पूछो

886
01:05:29,840 --> 01:05:34,200
से क्या मानते द्वापर से शुरू होना परंपरा

887
01:05:34,200 --> 01:05:38,200
तो श्री कृष्ण के द्वारा ही शुरू हुई थी श्री कृष्ण के द्वारा मगर द्वापर

888
01:05:38,200 --> 01:05:42,440
से नहीं सृष्टि के निर्माण काल से शुरू हुई बताते

889
01:05:42,440 --> 01:05:46,360
हैं के निर्माण काल से शुरू ही बताते हैं पर यह भी बोलते हैं

890
01:05:46,360 --> 01:05:50,560
कि बीच में खंडित हो गई थी इसलिए श्री वापस आ उनसे प्रश्न

891
01:05:50,560 --> 01:05:54,720
कर वही उनके ऊपर क्लेम है कि अगर वो खंडित होना स्वीकार करते हैं तो

892
01:05:54,720 --> 01:05:58,640
उनके पास

893
01:05:58,640 --> 01:06:03,120
मेरा प अरे भाई पहले सुन लो ये उनकी

894
01:06:03,120 --> 01:06:07,160
ये उनकी परंपरा के ऊपर एक ये उनकी

895
01:06:07,160 --> 01:06:11,520
परंपरा के ऊपर एक क्लेम है कि अगर आप यह मानते हो कि जो ज्ञान

896
01:06:11,520 --> 01:06:15,520
है व खंडित हो गया तो फिर आप यह क्यों बता रहे हो कि सृष्टि के निर्माण काल से मेरे

897
01:06:15,520 --> 01:06:19,720
पास ज्ञान आया आप बताओ द्वापर से आया मेरे पास ज्ञान क्योंकि

898
01:06:19,720 --> 01:06:24,000
सृष्टि के निर्माण काल में भी कृष् ही

899
01:06:24,000 --> 01:06:28,080
आप टॉपिक चेंज कर रहे मैं आपको अरे नहीं मानते भाई वायु का अवतार मानते हैं

900
01:06:28,080 --> 01:06:32,200
कि नहीं एक मिनट एक मिनट वायु का अवतार मानते हैं कि नहीं मधवा

901
01:06:32,200 --> 01:06:36,480
चार्य जी को जी तो भगवान

902
01:06:36,480 --> 01:06:42,360
ने वायु वायु को कब वो दिया था

903
01:06:42,360 --> 01:06:46,720
ज्ञान देख लेंगे अवान जी अगर आप श्री कृष्ण से ब्रह्मा

904
01:06:46,720 --> 01:06:50,880
से नीचे जाते जाते देख लेंगे तो आपको पता लग जाएगा मेरे भाई जो भगवान

905
01:06:50,880 --> 01:06:55,160
श्री कृष्ण जी ने जो मधुवा चार के बीच की जो लाइनेज है

906
01:06:55,160 --> 01:06:59,160
उसम में जो क्या कहते हैं वायु जी और

907
01:06:59,160 --> 01:07:03,360
जो ब्रह्मा जी जो आ रहे हैं नाम ये ज्ञान कौन से कालखंड

908
01:07:03,360 --> 01:07:07,400
में दिया जा रहा है बताइए अवान जी अगर आपको ये

909
01:07:07,400 --> 01:07:11,520
डिसा सक्सेशन की बातें करनी है तो इस बारे में यहां पर बात नहीं

910
01:07:11,520 --> 01:07:15,800
करने आया हूं मैं बात करने आया हूं जीसस इ इक्वल टू क्रिश्चन और नॉट

911
01:07:15,800 --> 01:07:19,800
मैं उस बारे में बात करने आया और आप मेरे को मेरी बात कंप्लीट करने का मौका ही नहीं दे रहे जैसे

912
01:07:19,800 --> 01:07:23,880
ही मैं कोई पॉइंट बनाने जा रहा हूं आप टॉपिक ही चेंज कर रहे हैं आप इस कन के ऊपर सवाल उ

913
01:07:23,880 --> 01:07:28,000
टॉपिक भाई साहब आप चेंज कर रहे हैं जब मैंने आपसे परंपरा पूछा तो आप यह

914
01:07:28,000 --> 01:07:32,720
बता रहे हो कि परंपरा की आवश्यकता नहीं आप बोलो परंपरा नहीं है उसके बाद आगे बढ़ो

915
01:07:32,720 --> 01:07:36,760
परंपरा क चज करते हवान जी परंपरा क्यों नहीं

916
01:07:36,760 --> 01:07:40,880
है परंपरा खंडित हो गई थी आपसे पूछा भाई साहब मैंने

917
01:07:40,880 --> 01:07:45,080
आपसे पूछा था देखो अभी भी टॉपिक चेंज करर मैंने क्या बोला मैंने आपसे

918
01:07:45,080 --> 01:07:49,240
बोला था कुरान का ज्ञान किस परंपरा से आया आपने कहा

919
01:07:49,240 --> 01:07:53,240
कि परंपरा की आवश्यकता आप यह बोलो ना पहले कि नहीं परंपरा से नहीं आया उसके

920
01:07:53,240 --> 01:07:57,560
बाद बताओ परंपरा की आवश्यकता है कि नहीं कुरान का ज्ञान

921
01:07:57,560 --> 01:08:01,720
परंपरा से नहीं आया इसलिए खंडित था क्रिश्चन बाइबल का गुरान उससे नहीं आया

922
01:08:01,720 --> 01:08:05,720
इसलिए मैं आपसे ये कह रहा हूं मैं आपसे यह कह रहा हूं भाई साहब यदि

923
01:08:05,720 --> 01:08:09,800
आपके पास कुरान का ज्ञान कुरान के मूल स्रोत से परंपरा से

924
01:08:09,800 --> 01:08:13,920
नहीं आ रहा है तो आप कुरान को लेकर क्लेम नहीं कर सकते हो कि

925
01:08:13,920 --> 01:08:17,920
हम जो कह रहे हैं उसका अर्थ वो है तुम जो कह रहे हो वो नहीं क्योंकि

926
01:08:17,920 --> 01:08:22,520
जहां से आपको कुरान मिल रही है वो कोई और है

927
01:08:22,520 --> 01:08:26,640
और वो परंपरा से जुड़ा हुआ है तो कुरान को लेकर आप का क्लेम नहीं माना जाएगा

928
01:08:26,640 --> 01:08:30,680
जो गुरु शिष्य परंपरा से अपनी कुरान से जुड़ा हुआ होगा उसका क्लेम

929
01:08:30,680 --> 01:08:34,720
मान्य होगा और अगर हम ऐसा करेंगे कि उनकी किताबों का जाकर के

930
01:08:34,720 --> 01:08:38,760
अपना मन गंत अर्थ करेंगे तो फिर उनको भी छूट मिल जाएगी कि वो अपना मन

931
01:08:38,760 --> 01:08:42,960
गणन अर्थ हमारी किताबों का करें फिर तो परंपरा

932
01:08:42,960 --> 01:08:47,640
का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा अहवान

933
01:08:47,640 --> 01:08:51,800
जी अवान जी मेरी बात सुनिए को एक पॉइंट बनाने दीजिए फिर

934
01:08:51,800 --> 01:08:55,920
और ये भी बातें तब हो रही है इतनी लंबी बातें तब हो रही है जब आप वो अर्थ

935
01:08:55,920 --> 01:09:00,000
बता रहे हो जो अर्थ उनके जो बोनाफाइड जो क्या कहते हैं जो

936
01:09:00,000 --> 01:09:04,000
शील प्रभुपाद जी के जो ऑथेंटिक वो शिष्य है वो कुछ और व्याख्या देते

937
01:09:04,000 --> 01:09:08,080
हैं हालांकि उसका भी काउंटर है मगर जो जो आपने व्याख्या दिया जो

938
01:09:08,080 --> 01:09:12,120
अप्र माणिक है शील प्रभुपाद जी की तरफ से अप्र माणिक उस पर भी हम लोग बात कर

939
01:09:12,120 --> 01:09:18,120
रहे

940
01:09:20,360 --> 01:09:24,400
हैं ठीक है अवान जी अभी मेरे को जाने का

941
01:09:24,400 --> 01:09:30,400
वो बुला रहे हैं चलिए जय श्री राम श्री

942
01:09:31,880 --> 01:09:36,000
राम कोई और आया है अगर इसी विषय को आगे बढ़ाते

943
01:09:36,000 --> 01:09:40,200
हुए बात करना चाहता है तो ठीक है अपना फेस दिखाए और हम उसे ऊपर

944
01:09:40,200 --> 01:09:46,200
ले लेंगे अन्यथा फिर हम लाइव सेशन को अभी ऑफ करने वाले

945
01:09:51,040 --> 01:09:55,040
हैं आप आएंगे बात करने के लिए थोड़ा अकल चाहिए

946
01:09:55,040 --> 01:09:59,040
सो ने के लिए प्रभुपाद ने ऐसा क्यों कहा कुतर्क ना करें

947
01:09:59,040 --> 01:10:03,840
हमें अलग-अलग लोग अलग अलग बातें बताते हैं कुछ लोग कहते हैं

948
01:10:03,840 --> 01:10:08,040
कि मुस्लिमों को हिंदू धर्म में मिलाने के लिए या

949
01:10:08,040 --> 01:10:12,280
ईसाइयों को हिंदू धर्म में मिलाने के लिए कहा यह बताया जाता है

950
01:10:12,280 --> 01:10:16,520
तो इस बात पर हम भरोसा कैसे करें भाई कोई ऑथेंटिक

951
01:10:16,520 --> 01:10:20,640
बॉडी भी तो बोले ना इस बात को यह तो आप बोल रहे हो मंच पर जाकर बोल दे हमने

952
01:10:20,640 --> 01:10:24,640
ऐसा इसलिए कहा दूसरी बात अगर केवल उनको

953
01:10:24,640 --> 01:10:29,160
मिलाने के लिए कहा था तो अब ये चीजें यहां क्या कर रही है हिंदुओं के बीच में

954
01:10:29,160 --> 01:10:33,440
क्यों पढ़ाया जा रहा है हिंदुओं को य ये ज्ञान

955
01:10:33,440 --> 01:10:35,720
जब यह सनातन ज्ञान नहीं है तो सनातन

956
01:10:35,720 --> 01:10:40,360
ज्ञान वाली किताबों के साथ इसको क्यों जोड़ दिया गया है

957
01:10:40,360 --> 01:10:44,680
है ना तो देश काल परिस्थिति से जो प्रभावित है वो सनातन नहीं है

958
01:10:44,680 --> 01:10:48,600
और आप आ जाइए ऊपर आपसे बात करते

959
01:10:48,600 --> 01:10:52,600
हैं हटा दीजिए भैया इनका

960
01:10:52,600 --> 01:10:56,920
कमेंट हम कोई चेहरा नहीं दिखा रहा है हम लोग राम पांडे

961
01:10:56,920 --> 01:11:02,920
जी हैं यहां पर जय श्री

962
01:11:13,080 --> 01:11:19,080
रामम बहुत दिन बहुत दिनों

963
01:11:19,200 --> 01:11:23,200
बाद क्या हां पहले कुंभ और कुंभ

964
01:11:23,200 --> 01:11:29,200
के बाद आप देख ही रहे होंगे ल चीज आ रही है

965
01:11:30,920 --> 01:11:36,920
सामने नमस्कार सभी [संगीत]

966
01:11:36,920 --> 01:11:39,880
को

967
01:11:39,880 --> 01:11:44,840
हेलो नमस्कार आवाज आ रही

968
01:11:44,840 --> 01:11:49,720
है राम पांडे जी चले गए दिख नहीं रहे जी आदित्य जी बताए

969
01:11:49,720 --> 01:11:53,960
हां तो उसी कमेंट आगे डिस्कस

970
01:11:53,960 --> 01:11:58,240
करना था किस बारे में कृष्णा इक्वल्स

971
01:11:58,240 --> 01:12:02,280
टू अल्ला या कृष्णा इक्वल टू क्राइस्ट प्रभुपाद ने क्यों कहा कन का पक्ष रखना है इस

972
01:12:02,280 --> 01:12:06,280
कन को डिफेंड करना है आपको यस इस कन नहीं पर्टिकुलर प्रभुपाद ने जो

973
01:12:06,280 --> 01:12:10,880
कहा उसको ये हमारा ये लाइव आने वाला है व

974
01:12:10,880 --> 01:12:14,920
लाइव नहीं सॉरी सेशन हुआ था इनके साथ आर्य समाज के विवाह को

975
01:12:14,920 --> 01:12:19,000
लेकर के बात हुई थी आर्य समाज में जो विवाह कराया जाता है उसको लेकर के

976
01:12:19,000 --> 01:12:23,000
बात हुई थी उसके दो वो थे पर्सपेक्टिव

977
01:12:23,000 --> 01:12:27,800
एक तो कि आर्य समाज जो विवाह कराया जा रहा है

978
01:12:27,800 --> 01:12:31,920
वो जब मुस्लिम से करा दिया जाता है तो उसका आधार क्या होता है किसी भी मुस्लिम को यह मान

979
01:12:31,920 --> 01:12:34,360
लेना कि बढ़िया वाला हिंदू हो गया

980
01:12:34,360 --> 01:12:38,360
विश्वास प्रद हिंदू हो गया भाई मुस्लिम कोई अगर बदल रहा है तो उसका विवाह अगर आपको

981
01:12:38,360 --> 01:12:42,440
कराना है तो कोई बदली हुई मुस्लिम जो महिला उससे

982
01:12:42,440 --> 01:12:48,280
कराओ एक तो ये टॉपिक था दूसरा फिर उसमें और भी चीज है

983
01:12:48,280 --> 01:12:52,400
कि जब व्यक्ति आपकी धारणाओं को आपकी मान्यताओं को मानने वाला नहीं

984
01:12:52,400 --> 01:12:57,000
है एक साधारण हिंदू परिवार से मूर्ति पूजक है तो आप

985
01:12:57,000 --> 01:13:01,200
उसका विवाह अपने य क्यों करा दे रहे हो उसको उसके भ्रम को तोड़ क्यों नहीं रहे हो कि यहां पर भैया

986
01:13:01,200 --> 01:13:05,320
मूर्ति पूज का विवाह नहीं होता उसको बताओ ना मूर्ति पूजा

987
01:13:05,320 --> 01:13:09,520
मूर्ति पूजा हमारे लिए अधर्मी है तो अधर्म का विवाह अपने य क्यों करा रहे

988
01:13:09,520 --> 01:13:13,520
हो ये भी उसमें पॉइंट बोला गया उस

989
01:13:13,520 --> 01:13:17,600
उस व्यक्ति की विडंबना यह हो जाती है कि वो यह सोच के जाता है

990
01:13:17,600 --> 01:13:22,200
कि मेरा जो विवाह है वो अच्छा है वो यह सोच के जीवन जीता है

991
01:13:22,200 --> 01:13:26,240
और अपना भगवान के कृष्ण के अवतार की पूजा करता है राम की

992
01:13:26,240 --> 01:13:30,320
पूजा करता है मगर जितनी बार वह राम की पूजा कर रहा है राम के अवतार को मान रहा

993
01:13:30,320 --> 01:13:35,080
है उतनी बार व अपने विवाह को नहीं मान रहा है अपने विवाह को अ वैदिक मान रहा है व खुद ही

994
01:13:35,080 --> 01:13:39,120
और जितनी बार व अपने विवाह को वैदिक मान रहा है उतनी बार व राम के कृष्ण के अस्तित्व

995
01:13:39,120 --> 01:13:43,120
को नहीं मान रहा है भगवान के स्वरूप में

996
01:13:43,120 --> 01:13:47,520
ईश्वर के स्वरूप में यह सब दिक्कत तो इसको जरूर देखिएगा

997
01:13:47,520 --> 01:13:50,600
काफी अच्छी रोचक चर्चा

998
01:13:50,600 --> 01:13:54,640
है राम पांडे जी आप

999
01:13:54,640 --> 01:13:58,760
चले थे

1000
01:13:58,760 --> 01:14:03,920
जी आवाज क्यों आ रही है बंद करो आ

1001
01:14:03,920 --> 01:14:08,360
रही जी जी राम पांडे

1002
01:14:08,360 --> 01:14:13,160
जी चर्चा होसे आज्ञाकारी जी

1003
01:14:13,160 --> 01:14:18,080
से किनसे आज्ञाकारी

1004
01:14:18,080 --> 01:14:24,080
हा आज्ञाकारी जी चले गए

1005
01:14:28,960 --> 01:14:33,040
आपका नेटवर्क बहुत डाउन है तब तक गौरव पांडे जी

1006
01:14:33,040 --> 01:14:38,000
से बात कर लेते हैं जी गौरव पांडे नमस्कार भैया

1007
01:14:38,000 --> 01:14:42,960
जी जय श्री राम बड़ेन बाद आपके दर्शन हुए लाइव

1008
01:14:42,960 --> 01:14:47,400
में आज का जो आज का जो विषय है व क्या है कि इसकन द्वारा

1009
01:14:47,400 --> 01:14:51,480
भगवान कृष्ण को अल्लाह और जीसस क्राइस्ट के समकक्ष कहा

1010
01:14:51,480 --> 01:14:55,600
जा रहा है

1011
01:14:55,600 --> 01:14:58,600
हरि ओम

1012
01:14:58,600 --> 01:15:03,200
नारायण तो इस विषय

1013
01:15:03,200 --> 01:15:07,240
में शिवांश भैया कहां गए हां आज का विषय

1014
01:15:07,240 --> 01:15:11,360
क्या है कि प्रभुपाद के साहित्य में भगवान कृष्ण

1015
01:15:11,360 --> 01:15:16,320
को अल्लाह और जीजस के समकक्ष किया जा रहा है

1016
01:15:16,320 --> 01:15:20,600
समकक्ष बताया गया है ना जी चर्चा

1017
01:15:20,600 --> 01:15:25,160
का विषय यह है तो इससे पहले अगर वो ऐसा कोई दावा करते

1018
01:15:25,160 --> 01:15:29,360
दलील देते हैं तो हमें उनके ही शास्त्रों को देखना पड़ेगा कि वो किन शास्त्रों

1019
01:15:29,360 --> 01:15:33,400
के आधार पर अपनी संस्था संचालित करते हैं तो मेन जो उनका शास्त्र है

1020
01:15:33,400 --> 01:15:37,680
वो यथारूप यथार्थ यथारूप करके जो भगवत गीता बेचते है उनकी

1021
01:15:37,680 --> 01:15:41,880
श्रीमद भागवत है जो प्रभुपाद के द्वारा कमेंट्री लिखी गई है उसका

1022
01:15:41,880 --> 01:15:46,200
आधार मान के अपनी संस्था को संचालित करते हैं तो अगर उसके मूल

1023
01:15:46,200 --> 01:15:50,280
श्लोकों का हम हिंदू अनुवाद करें कुछ जो मूल श्लोक है तो उनकी धारणा

1024
01:15:50,280 --> 01:15:54,440
का खंडन हो जाता है जैसे कि एक श्लोक

1025
01:15:54,440 --> 01:15:58,960
है शास्त्रम प्रमाणम ते कार्या कार्य व्यवस्थित ज्ञात

1026
01:15:58,960 --> 01:16:02,960
शास्त्र विधान उतम कर्म करतु महार हसी य कर्तव्य और अ

1027
01:16:02,960 --> 01:16:07,000
कर्तव्य की परंपरा में क्या करना है क्या नहीं करना है

1028
01:16:07,000 --> 01:16:11,520
क्या मानना है क्या नहीं मानना है इस सब चीजों में भगवान कृष्ण ने

1029
01:16:11,520 --> 01:16:15,720
भगवत गीता में किसको माना प्रमाण माना है वेद शास्त्र

1030
01:16:15,720 --> 01:16:21,720
को ही प्रमा

1031
01:16:22,760 --> 01:16:28,760
जी मुझे लगता है सभी का नेटवर्क में कोई गड़बड़ी

1032
01:16:30,640 --> 01:16:34,720
है राम जी आप भी अपनी बात बोले फिर उनको ले लेते हैं जो भाई साहब

1033
01:16:34,720 --> 01:16:39,440
आए थे इसकन के पक्ष को रखने आप अपनी बात बोले जय श्री राम सर

1034
01:16:39,440 --> 01:16:43,760
जय श्री राम आप अपना चेहरा दिखा

1035
01:16:43,760 --> 01:16:49,760
दीजिए जी

1036
01:16:51,640 --> 01:16:55,680
बोलिए बोलिए राम जी मेरा फेस दिख रहा है क्या

1037
01:16:55,680 --> 01:17:00,440
आपको जी दिख रहा है शिश जी मतलब

1038
01:17:00,440 --> 01:17:04,760
इसी के लिए आया जो ये क्वेश्चन था ना की क्या बोलते हैं कृष्णा

1039
01:17:04,760 --> 01:17:10,000
ला उसको मलब उसके रिगार्डिंग आप डिफेंड करने आए

1040
01:17:10,000 --> 01:17:16,000
क्या आई मीन के पक्ष में हा मतलब ये सोच

1041
01:17:16,720 --> 01:17:20,840
आ मेरा क्या है कि मैंने काफी देर हो गई है अपना

1042
01:17:20,840 --> 01:17:25,320
कुछ भोजन प्राप्त नहीं किया है काफी लंबा समय हो गया है

1043
01:17:25,320 --> 01:17:29,680
तो बहुत लोगों ता नहीं कर पाने के में सामर्थ मतलब संभव

1044
01:17:29,680 --> 01:17:32,320
नहीं हो पा रहा

1045
01:17:32,320 --> 01:17:36,600
है आप ऐसा करिए कि अगर इच्छुक है आदित्य

1046
01:17:36,600 --> 01:17:40,640
जी आपसे भी कह रहा हूं तो कल क्या है शनिवार है कल शाम का

1047
01:17:40,640 --> 01:17:44,640
कर लेते हैं कल शाम को आप दोनों ही आ जाइए एक के बाद एक दोनों से

1048
01:17:44,640 --> 01:17:48,720
बात करले ठीक है अभी क्वेन आपसे

1049
01:17:48,720 --> 01:17:53,400
एक क्वेश्चन था पूछना था अगर आप उसका उत्तर देते तो अच्छा

1050
01:17:53,400 --> 01:17:58,360
कनेक्ट होते होते हो जाएगा चलिए बोलिए

1051
01:17:58,360 --> 01:18:02,920
हा मतलब मेरा ए एक फ्रेंड है जो कि एस्ट है मतलब

1052
01:18:02,920 --> 01:18:07,040
उसने ऐसा म ऐसा क्वेश्चन करा था तो मतलब मैं आंसर नहीं कर पाया था जो

1053
01:18:07,040 --> 01:18:11,160
आपने जसे आप क्वेश्चन करते हैं ना कि जो ईश्वर है अगर वह सर्वशक्ति मान

1054
01:18:11,160 --> 01:18:15,200
है तो क्या वह अपने शरीर का नाश कर सकता है तो फिर इसमें मतलब

1055
01:18:15,200 --> 01:18:18,640
प्रॉब्लम हो जाती

1056
01:18:18,640 --> 01:18:22,920
है बोलिए क्वेश्चन क्या

1057
01:18:22,920 --> 01:18:27,760
है मतलब इसका जानना चाह रहा था मैं

1058
01:18:27,760 --> 01:18:31,760
इसका आंसर यह है कि वो लीला में आकर के व्यवहार में आकर के कुछ

1059
01:18:31,760 --> 01:18:36,440
भी करके दिखा सकते हैं लोग कहते हैं अपने जैसा ईश्वर बना सकता है बना सकता

1060
01:18:36,440 --> 01:18:40,760
है अपने जैसे पांच ईश्वर खड़े कर सकता है वो भी कृष्ण

1061
01:18:40,760 --> 01:18:44,760
वो भी क वो भी कृष्ण वो भी कृष्ण है ना वो कुछ भी

1062
01:18:44,760 --> 01:18:49,360
कर सकता है व्यवहार में आकर के अच्छा आप कहो कि वास्तविक जो दुनिया है परमार्थ

1063
01:18:49,360 --> 01:18:53,640
क्या उसमें कर सकता है तो उसमें करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ईश्वर

1064
01:18:53,640 --> 01:18:58,960
के अस्तित्व को सिद्ध करना के लिए उसका व्यवहार में कुछ भी कर सकने वाला होना आवश्यक है

1065
01:18:58,960 --> 01:19:03,040
क्यों क्योंकि अगर तुमने मान लिया कि इस व्यवहारिक दुनिया के अलावा भी

1066
01:19:03,040 --> 01:19:07,120
पार मार्थी सत्ता है तो तुमने ईश्वर को अस्तित्व को मान लिया और

1067
01:19:07,120 --> 01:19:11,280
अब अगर तुम उसका खंडन करते हो कि नहीं नहीं वह परमार्थ में जो है अपने जैसा

1068
01:19:11,280 --> 01:19:15,280
दूसरा ईश्वर नहीं बना सकता स्वयं को नष्ट नहीं कर सकता अगर आप

1069
01:19:15,280 --> 01:19:19,360
यह प्रश्न करते हैं तो आप ईश्वर का खंडन कर देते हैं तो जब खंडन कर देते हैं

1070
01:19:19,360 --> 01:19:23,520
तो आपके द्वारा परमार्थ की दुनिया को स्वीकार किया जाना भी सिद्ध नहीं होता

1071
01:19:23,520 --> 01:19:27,720
तो फिर से सवाल य आज जाता है भा ईश्वर कहां पर कुछ नहीं कर पा रहा वो बताओ तुम

1072
01:19:27,720 --> 01:19:31,760
कहोगे परमार्थ परमार्थ की दुनिया तो है ही नहीं परमार्थ की दुनिया तो तब है

1073
01:19:31,760 --> 01:19:33,840
जब ईश्वर है

1074
01:19:33,840 --> 01:19:38,360
इस बात पर बातें की है आप हमारी सीरीज है सनातन सिद्धांत

1075
01:19:38,360 --> 01:19:42,480
तो उसमें एक वीडियो मिलेगा आपको ईश्वर क्या ईश्वर ऐसा पत्थर

1076
01:19:42,480 --> 01:19:46,560
बन सकता है जिसे वह खुद ना उठा पाए उस वीडियो को देखिएगा

1077
01:19:46,560 --> 01:19:50,880
उसमें चर्चा है और एक है कि ईश्वर ने सृष्टि क्यों बनाई

1078
01:19:50,880 --> 01:19:54,880
उसमें आप देखिएगा ये सब बातें की गई है आदित्य जी आपको कु

1079
01:19:54,880 --> 01:19:59,040
कहना चाहते हो तो बता दीजिए वरना फिर आज की जो लाइव है उसको ऑफ करें

1080
01:19:59,040 --> 01:20:03,040
हा शवा जी मेरा एक एक्सटेंसिव डिबेट करने का

1081
01:20:03,040 --> 01:20:07,120
तो मतलब इंटेंशन नहीं था वो लग रहा है आप

1082
01:20:07,120 --> 01:20:11,680
जिस तरह से बात कर रहे हैं व लग रहा है कि आप जो है भिड़ने नहीं आए

1083
01:20:11,680 --> 01:20:15,880
हा हा नहीं मतलब अगर डिस्कशन चाहे को और

1084
01:20:15,880 --> 01:20:20,040
डिक कर सते आप कल आ जाइए कल शाम का रख ले 8 बजे का राम जी आप

1085
01:20:20,040 --> 01:20:24,120
भी बता दे मुझे क्लियर कर दे तो हम कल शाम का रख लेते हैं हमारा नंबर नोट

1086
01:20:24,120 --> 01:20:28,160
कर लीजिए 7408 30169 इस पर अपना एक

1087
01:20:28,160 --> 01:20:32,280
फोटो भेज दीजिए तो हम लोग कल का एक शेड्यूल कर लेंगे और भी कोई

1088
01:20:32,280 --> 01:20:36,400
व्यक्ति यदि आना चाहता है किसी विषय में डिस्कशन

1089
01:20:36,400 --> 01:20:42,400
करने के लिए तो वो आ सकता है इस नंबर पर हमसे संपर्क करे

1090
01:20:46,360 --> 01:20:50,480
74836 बोलिए बोलिए बोलिए पॉइंट पुट करना था कि

1091
01:20:50,480 --> 01:20:54,920
मतलब जब आप कोई फॉरेन कंट्री में प्रीज करते हो

1092
01:20:54,920 --> 01:20:59,120
तो मतलब वहा लोग को धर्म का ध भी पता नहीं है आप

1093
01:20:59,120 --> 01:21:03,160
सीधे उनको जाकर नहीं बता सकते हो कि नहीं य मैं आपके देखिए मैं यह

1094
01:21:03,160 --> 01:21:07,280
सारी चीजें लेकर बैठा हूं मैं यह सारी चीजें लेकर बैठा हूं

1095
01:21:07,280 --> 01:21:11,440
अभी मैंने योगा ऑफ लव जी ने योगा ऑफ

1096
01:21:11,440 --> 01:21:15,440
लव वाले जो भाई साहब है उन्होंने हमसे कांटेक्ट किया था उन्होंने हमसे कहा

1097
01:21:15,440 --> 01:21:20,120
था कि स्कन को लेकर क्या क्या आपके वो है प्रश्न वो आप बता दीजिए

1098
01:21:20,120 --> 01:21:24,640
उसमें ही मैंने आपके सारे चीजों को पूर्व पक्ष के रूप में लिया है अगर

1099
01:21:24,640 --> 01:21:28,720
आप कह रहे कि हमने फॉरेन कंट्रीज में धर्म को फैलाने के लिए ऐसा किया सबसे

1100
01:21:28,720 --> 01:21:33,160
पहली बात आती है अभी भाई साहब बोल रहे थे 16 24 कि धर्म

1101
01:21:33,160 --> 01:21:37,160
को फैलाने के लिए अगर हम धर्म का अर्थ ही बदल दे रहे हैं तो हम धर्म का अ बदल के जो

1102
01:21:37,160 --> 01:21:41,320
अर्थ कर रहे हैं उसका अर्थ है कि हम धर्म को नहीं फैला रहे हम धर्म के बदले

1103
01:21:41,320 --> 01:21:45,320
हुए अर्थ यानी अधर्म को फैला रहे पहली बात ठीक है शास्त्र का

1104
01:21:45,320 --> 01:21:49,440
प्रमाण चाहिए एक मिनट एक मिनट शास्त्र का प्रमाण चाहिए कि भाई

1105
01:21:49,440 --> 01:21:53,520
कहां कहता है कहां कहता है धर्म ये कि आप धर्म

1106
01:21:53,520 --> 01:21:57,720
को फैलाने के लिए धर्म का अर्थ बदल दो पहली बात अगर आप ले भी आएंगे

1107
01:21:57,720 --> 01:22:01,640
कहीं से के शास्त्र इसका कहते हैं ठीक है

1108
01:22:01,640 --> 01:22:05,680
तो उसमें फिर दूसरी बात आती है कि अगर आपने फलाने फलाने लोगों के

1109
01:22:05,680 --> 01:22:09,720
लिए वो स्पेसिफाई तरीके से वो बातें कही है तो आप हिंदुओं को

1110
01:22:09,720 --> 01:22:13,720
वो बातें क्यों पढ़ा रहे हैं आप बंद कर दीजिए फॉरेन इंडिया

1111
01:22:13,720 --> 01:22:17,960
में बंद करिए वो किताब बैन करिए उन किताबों को और फॉरेन कंट्रीज में जाकर के करिए दूसरी

1112
01:22:17,960 --> 01:22:22,040
बात अगर पढ़ा भी रहे तो कम से कम उसमें छापी ये सनातन धर्म ग्रंथ नहीं

1113
01:22:22,040 --> 01:22:26,120
है ये किसी विशेष देश काल परिस्थिति में विशेष देश काल परिस्थिति के लोगों

1114
01:22:26,120 --> 01:22:30,160
को समझाने के लिए लिखी गई किताबें है यह धार्मिक ग्रंथ नहीं है वैदिक

1115
01:22:30,160 --> 01:22:34,240
ग्रंथ नहीं है लिखो उसम और तीसरी बात चौथी

1116
01:22:34,240 --> 01:22:38,320
बात आ जाती है कि अगर आप लोगों को समझाने के लिए अपने में

1117
01:22:38,320 --> 01:22:42,320
लय कराने के लिए लोगों को यह बोल देते हो कि कृष्ण अल्ला एक है कृष्ण

1118
01:22:42,320 --> 01:22:46,360
क्राइस्ट एक है तो फिर लोगों को अपने में लय कराने के लिए क्यों नहीं बोलते

1119
01:22:46,360 --> 01:22:50,480
हो कि शिव और कृष्ण एक है मनुस्मृति

1120
01:22:50,480 --> 01:22:54,720
जो कह रही है कि वेद विरोधी नास्तिक पुरान में

1121
01:22:54,720 --> 01:22:58,960
नहीं छोड़ी गई है कि भैया वो जो है उस उससे जो है

1122
01:22:58,960 --> 01:23:03,200
वेदों तक आते क्योंकि कुरान में यह कहा गया है कि मेरे अलावा जितनी भी किताबें वो सब गलत

1123
01:23:03,200 --> 01:23:07,720
है मैं उनका सत्यापन करूंगी तो यहां सब समाप्त हो गया

1124
01:23:07,720 --> 01:23:11,880
यह जगह उसने खुद खत्म कर दी अच्छा तो

1125
01:23:11,880 --> 01:23:15,880
जो जो हमारे वैदिक सिद्धांतों के अनुरूप जो ग्रंथ है

1126
01:23:15,880 --> 01:23:16,640
शिव पुराण

1127
01:23:16,640 --> 01:23:20,640
उसके द्वारा स्कंद पुराण उसके द्वारा पूजित होने वाला ईश्वर तो

1128
01:23:20,640 --> 01:23:24,800
शिव वो कृष्ण के बराबर नहीं है मगर जो हमारे सन

1129
01:23:24,800 --> 01:23:29,200
सिद्धांतों के विरुद्ध जो अवैध किताब है नास्तिक किताब है

1130
01:23:29,200 --> 01:23:33,280
उसको जो उनके लोगों से हम इतना प्रेम है उन लोगों को अपने में ल कराने के लिए हम

1131
01:23:33,280 --> 01:23:37,480
य बोल देंगे कि जो है कृष्ण क और यह सब बातें

1132
01:23:37,480 --> 01:23:41,520
भी इन ऑथेंटिक तरीके से बोली जा रही है भाई कोई आचार आ

1133
01:23:41,520 --> 01:23:46,480
कर के मंच पर तो कहे किसी किताब में छाप तो कि भैया इसलिए बोली गई

1134
01:23:46,480 --> 01:23:50,520
जो वास्तविक लोग है प्रामाणिक लोग है जीबीसी इत्यादि वो

1135
01:23:50,520 --> 01:23:54,640
लोग तो यही कहते नहीं नहीं नहीं वो उनका वो एक ही है वो इसलिए वो

1136
01:23:54,640 --> 01:23:58,760
तो वहां प्रेज करते हैं मोहम्मद को और जीसस को

1137
01:23:58,760 --> 01:24:03,040
ये तो आप और हम जैसे लोग जो किसी तरीके से इस कौन का खंबा

1138
01:24:03,040 --> 01:24:07,320
बचाना चाहते हैं डूबता हुआ जहाज बचाना चाहते हैं वो लोग प्रयास करते हैं

1139
01:24:07,320 --> 01:24:11,440
वास्तविक लोग नहीं कहते ये बातें जो आप कह रहे हैं तो ये सब चीजें है आप

1140
01:24:11,440 --> 01:24:15,480
कल आ जाइए हम लोग अच्छे से डिस्कस करेंगे मेरे को भूख लग

1141
01:24:15,480 --> 01:24:19,480
रही है अभी और मैंने काफी समय से कुछ खाया नहीं है और ये जो बालक

1142
01:24:19,480 --> 01:24:23,480
आए थे अभी इन्होंने भी अ

1143
01:24:23,480 --> 01:24:27,480
क्या कहते हैं ये इन्होने भी अचानक से मुझे बताया था कि इन्होंने काफी

1144
01:24:27,480 --> 01:24:31,720
दिन से पीछे पड़े थे मतलब हम लोगों में कन्वर्सेशन हो रहा था तो ये आना चाह रहे थे अचानक

1145
01:24:31,720 --> 01:24:35,920
से इन्होने बताया तो मैंने मतलब मैं जा ही रहा था कि मैं भोजन कर लू भोजन भोजन

1146
01:24:35,920 --> 01:24:39,960
प्रसाद जो भगवान उसको मतलब घर जाकर के प्राप्त कर लू

1147
01:24:39,960 --> 01:24:44,040
उससे पहले इनका आ गया तो मैंने कहा चलो इनसे बात कर लेते हैं तो विलंब हो चुका

1148
01:24:44,040 --> 01:24:48,360
है ऑलरेडी आप कल आ जाइए और नंबर है हमारा

1149
01:24:48,360 --> 01:24:52,920
740819 इस पर आप संपर्क करें और कल हम लोग बैठ कर के अच्छे से तां

1150
01:24:52,920 --> 01:24:56,920
के साथ चर्चा करते हैं ठीक है और सभी भाई बंधुओं को

1151
01:24:56,920 --> 01:25:01,000
समय देने के लिए धन्यवाद आशा करते हैं कि

1152
01:25:01,000 --> 01:25:05,680
आज की जो लाइव हुई है उससे आपको काफी कुछ जानने को मिला हो

1153
01:25:05,680 --> 01:25:09,800
जितने भी य तर्क दिए जाते हैं पक्ष को लेने के संबंध में

1154
01:25:09,800 --> 01:25:14,040
आप प्रामाणिक रूप से ही सही उन सबका अच्छे से माथा मथ या करके बैठे

1155
01:25:14,040 --> 01:25:16,280
हुए

1156
01:25:16,280 --> 01:25:20,280
हैं और मैंने शुरू में कहा था वीडियो के कि हमको कुछ

1157
01:25:20,280 --> 01:25:24,560
संसाधनों की आवश्यकता पड़ रही है कुछ यात्राएं हैं जो इस अभियान के निमित्त कर

1158
01:25:24,560 --> 01:25:28,960
है और भी कुछ प्रकल्प है तो अर्थ की दृष्टि से जो लोग भी

1159
01:25:28,960 --> 01:25:33,320
सहायता करना चाहते हैं वह हमें संपर्क कर सकते हैं और

1160
01:25:33,320 --> 01:25:37,600
छोटा छोटा एक एक छोटा मोटा कारभार अगर सब लेते जाएंगे तो

1161
01:25:37,600 --> 01:25:41,600
काफी सारी चीजें होंगी यह नंबर है हमारा यहां पर आप संपर्क कर सकते हैं

1162
01:25:41,600 --> 01:25:44,720
सभी को जय श्री

1163
01:25:44,720 --> 01:25:48,720
राम हर हर महादेव
