1
00:00:02,600 --> 00:00:06,800
तो सभी को जय श्री राम काफी दिनों बाद

2
00:00:06,800 --> 00:00:10,840
मैं आप लोगों के समक्ष लाइव जुड़ा

3
00:00:10,840 --> 00:00:16,840
हूं आशा करता हूं आप सभी लोग कुशल मंगल होंगे

4
00:00:18,160 --> 00:00:23,560
और छोटों को बहुत सारा प्यार आशीर्वाद जो

5
00:00:23,560 --> 00:00:27,600
बराबर के हैं उनको आभार यथोचित उनका भी अभिवादन

6
00:00:27,600 --> 00:00:33,600
और जो बड़े हैं उनको प्रणाम

7
00:00:33,960 --> 00:00:38,240
तो आप लोग कह रहे होंगे कहानी में ट्विस्ट कैसे आ गया अचानक

8
00:00:38,240 --> 00:00:42,480
से रामपाल के ऊपर लगातार चल रहा था

9
00:00:42,480 --> 00:00:45,200
मामला

10
00:00:45,200 --> 00:00:49,760
तो एक सैनिक होता है भाई तो उसके सामने तो जो

11
00:00:49,760 --> 00:00:54,400
भी बात आएगी सामना आएगी सामने आएगी तो उसका

12
00:00:54,400 --> 00:00:58,800
उसे करना ही पड़ेगा किसी भी रूप में अगर धर्म का खंडन हो रहा होगा प्रतिकार

13
00:00:58,800 --> 00:01:04,800
करना पड़ेगा उसे

14
00:01:07,320 --> 00:01:11,880
तो हमारे साथ में एक स्कन के सज्जन है वह आज बात करने वाले

15
00:01:11,880 --> 00:01:15,920
हैंक अभी जो लेटेस्ट मामला चल रहा है वण व्यवस्था का

16
00:01:15,920 --> 00:01:21,920
चल रहा है ठीक है हम उनको जोड़ लेते

17
00:01:24,320 --> 00:01:28,720
हैं जय श्री राम जय श्री राम शिवा जी

18
00:01:28,720 --> 00:01:32,760
हरे कृष्णा

19
00:01:32,760 --> 00:01:36,840
जी आप कहीं पर स्थाई रूप से थोड़ा बैठ जाए बैठ कर के

20
00:01:36,840 --> 00:01:40,960
बात करें चलते फिरते हा हा कोई नहीं मैं एक जगह बैठ

21
00:01:40,960 --> 00:01:45,440
जाता हूं एक [संगीत] सेकंड

22
00:01:45,440 --> 00:01:49,160
जय

23
00:01:49,160 --> 00:01:54,160
श जय श्री कृष्ण नरेश दोराया

24
00:01:54,160 --> 00:01:58,440
जी जन्मा जी श्री गोपाल पांडे

25
00:01:58,440 --> 00:02:01,120
जी

26
00:02:01,120 --> 00:02:05,520
सभी को जय श्री कृष् जय श्री राम हां अजय शर्मा

27
00:02:05,520 --> 00:02:09,960
जी जी हां हम कर सकते हैं बात

28
00:02:09,960 --> 00:02:14,160
जी बैठ गए ना हा जीी हा जीी बैठ ग तो सर्व

29
00:02:14,160 --> 00:02:18,320
प्रथम आप हमारे दर्शकों को थोड़ा सा अपने बारे में अपना परिचय दे दे कि आपका

30
00:02:18,320 --> 00:02:22,360
नाम और आपका जो स्पिरिचुअल ब बैकग्राउंड है वह

31
00:02:22,360 --> 00:02:28,360
क्या है मतलब आपके स्पिरिचुअल गुरु कौन है कहां से जुड़े हुए ये

32
00:02:28,440 --> 00:02:32,560
सब मेरा अजय शर्मा है और मैं चंडीगढ़ में रहता हूं

33
00:02:32,560 --> 00:02:36,600
और मैं मेरा जो पूरा परिवार है वो स्टार्टिंग से श्री

34
00:02:36,600 --> 00:02:40,600
वैष्णव थे हमारे परिवार है व श्री वैष्णव है रामानुजाचार्य के संप्रदाय

35
00:02:40,600 --> 00:02:45,040
में पर जब मैं कॉलेज वगैरह जाना चालू किया फिर उसके बाद

36
00:02:45,040 --> 00:02:49,120
मैं गडिया वैष्णव संप्रदाय जो है गडिया मठन इन सबके साथ में

37
00:02:49,120 --> 00:02:53,440
परिचित हुआ तो उसके बाद मैंने मेरे गुरु भीन के जो संस्थापक आचार्य

38
00:02:53,440 --> 00:02:57,600
श प्रभुपाद उनके अनु ही मेरे गुरु है तो मैं

39
00:02:57,600 --> 00:03:01,800
इस कौन से ह वैष्ण परंपरा डायरेक्टली आप स्कन से जुड़े

40
00:03:01,800 --> 00:03:07,080
हुए हैं जी हा कह सकते स्न से जुड़ा ठीक

41
00:03:07,080 --> 00:03:11,120
है तो हमको वर्ण व्यवस्था पर बात करनी है या पहले

42
00:03:11,120 --> 00:03:15,400
थोड़ा सा प्रीफिक्स ले ले सफिक्स ले ले या डायरेक्ट डायरेक्ट वर्ण व्यवस्था

43
00:03:15,400 --> 00:03:19,640
पर आ जाए आ सकते हैं वैसे तो हम थोड़ा लंबा डिस्कशन

44
00:03:19,640 --> 00:03:23,920
कर लेंगे तो ठीक रहेगा हम मैं आपके शंकर सिद्धांत पर भी काफी चीजें

45
00:03:23,920 --> 00:03:27,960
हम डिस्कस करना चाहते हैं जो मेरे तरफ से जो डाउट है

46
00:03:27,960 --> 00:03:32,160
वो पूछ सकते हैं या जो भी मेरा राय है जितना मैंने पढ़ा है वो शंकर सिद्धांत मेरे को कई

47
00:03:32,160 --> 00:03:36,240
हिसाब से उसमें बहुत सारी कमियां है जो हमारे वैष्णव आचार्यों ने निकाला उसके

48
00:03:36,240 --> 00:03:40,240
बारे में डिस्कस करना चाहूंगा आपसे आप

49
00:03:40,240 --> 00:03:43,640
ऐसा करिएगा कि जो शंकर

50
00:03:43,640 --> 00:03:47,640
सिद्धांत का जो सिद्धांत आपको समझ में नहीं आ रहा है

51
00:03:47,640 --> 00:03:51,800
उसके विरोध में आपका जो सिद्धांत है है ना उसके

52
00:03:51,800 --> 00:03:56,200
विरोध में कुछ ना कुछ होगा वो रखिएगा तो फिर हम अपने दोनों का

53
00:03:56,200 --> 00:04:00,520
वो करेंगे क्लेरिफाई ठीक है ठीक है ठीक है अभी हम वर्ण व्यवस्था

54
00:04:00,520 --> 00:04:04,600
से चालू करते हैं हां वर्ण व्यवस्था से ही चालू करना है या थोड़ा सा

55
00:04:04,600 --> 00:04:08,720
ग्राउंड बना ले हम लोग कि वर्ण व्यवस्था कैसे आती है या वर्ण

56
00:04:08,720 --> 00:04:12,760
व्यवस्था डायरेक्ट कर हां मतलब कर सकते हैं ग्राउंड बना सकते हैं

57
00:04:12,760 --> 00:04:17,800
कोई कोई दिक्कत नहीं

58
00:04:17,800 --> 00:04:21,800
है या रहने देते हैं वो खामा खा दूसरा टॉपिक एक आ

59
00:04:21,800 --> 00:04:25,800
जाएगा उसमें काफी देर लग जाएगी चलिए ठीक है वव

60
00:04:25,800 --> 00:04:30,320
ठीक वर्ण व्यवस्था प ठीक है जी आपके अनुसार जो तो

61
00:04:30,320 --> 00:04:34,480
आपकी जानकारी में शास्त्रों के अनुसार जो वर्ण

62
00:04:34,480 --> 00:04:38,520
व्यवस्था है वो कर्म आधारित है या जन्म आधारित

63
00:04:38,520 --> 00:04:42,720
है देखिए सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरे

64
00:04:42,720 --> 00:04:47,120
में कोई ऐसी काबिलियत नहीं कि मैं शास्त्र को समझ सकूं हमारे जो वैष्णव आचार्यों

65
00:04:47,120 --> 00:04:51,480
ने सिद्धांत प्रस्तुत किया है रामानुजाचार्य हो गए मधवा चार्य हो गए निंबार्काचार्य

66
00:04:51,480 --> 00:04:55,520
हो गए विष्णु स्वामी हो गए हमारे वैष्णव आचार्य चैतन्य महाप्रभु ने जो सिद्धांत

67
00:04:55,520 --> 00:05:00,160
स्थापित किया है उसके आधार आपने जिससे अध्ययन किया

68
00:05:00,160 --> 00:05:04,320
आप उससे बात बोलिए क्योंकि आप अगर रामानुजाचार्य जी का नाम

69
00:05:04,320 --> 00:05:08,400
लेंगे तो रामानुजाचार्य की जो प्रामाणिक जो परंपरा है उस पर

70
00:05:08,400 --> 00:05:12,720
बैठने वाले जो सन्यासी है जो आचार्य है वहां के

71
00:05:12,720 --> 00:05:17,040
वह स्पष्ट कहते हैं कि जन्म से वर्ण होता है जिसका शरीर ब्राह्मण जन्म

72
00:05:17,040 --> 00:05:21,040
में है उसी को करने

73
00:05:21,040 --> 00:05:25,840
आप एक दो किसी पंडित को उठा के आप उसको कोट करके बोलेंगे ये बोलते हैं

74
00:05:25,840 --> 00:05:30,120
एक दो पंडित एक दो पंडित नहीं जो उसके जगतगुरु की गद्दी

75
00:05:30,120 --> 00:05:32,800
पर बैठे हैं परंपरा से समझ रहे

76
00:05:32,800 --> 00:05:36,840
हैं चलो आप चलो हम गौड़ वैष्णव प आ जाते हैं चलो अभी बाकी संप्रदाय को

77
00:05:36,840 --> 00:05:40,880
छोड़ते हैं जने रामानुज का नाम लिया ना रामानुज को अपने से मत

78
00:05:40,880 --> 00:05:44,880
जोड़िए रामानुज पर राघवाचार्य जी महाराज है

79
00:05:44,880 --> 00:05:49,120
और जो और भी अन्य जो जगतगुरु है वहां के उन्होंने स्पष्ट

80
00:05:49,120 --> 00:05:53,920
कहा है कि वर्ण व्यवस्था जो है जन्म से है मेरे पास रामो जाचार्य की गीता भी रखी है

81
00:05:53,920 --> 00:05:58,040
नहीं नहीं आप देखिए रामानुजाचार्य ने खुद एक शूद्र जो वर्ण से शूद्र थे

82
00:05:58,040 --> 00:06:02,600
उनको दीक्षा देके आचार्य बनाया है देखिए

83
00:06:02,600 --> 00:06:06,760
बागा कैसे मैं एक चीज क्लियर कर दूं

84
00:06:06,760 --> 00:06:11,000
आपने यदि रामानुजाचार्य जी का अध्ययन परंपरा से किया है तो क्लेम

85
00:06:11,000 --> 00:06:15,000
करिए कि रामानुजाचार्य ने यह लिखा अगर आपने उनका

86
00:06:15,000 --> 00:06:19,040
उनके परंपरागत आचार्यों से ठप्पा लगवा लिया है तो उनकी

87
00:06:19,040 --> 00:06:23,800
बुक्स में क्या लिखा है बुक्स से आप नहीं समझ सकते यह आपका भी सिद्धांत है

88
00:06:23,800 --> 00:06:27,960
यह मेरा सिद्धांत नहीं है आप भी इसको मानते हैं कि भले ही बुक आपके पास हो मगर

89
00:06:27,960 --> 00:06:32,120
परंपरा प्राप्त आचार्य के पास उसको समझना है तो यदि आप यह

90
00:06:32,120 --> 00:06:36,160
क्लेम कर रहे हैं कि रामन चार परंपरा का यह सिद्धांत है तो

91
00:06:36,160 --> 00:06:40,240
आपको उस पर ठप्पा लगवाना होगा उस परंपरा के किसी आचार्य का तो आपने

92
00:06:40,240 --> 00:06:44,520
किससे ठप्पा लगवाया मुझे बता दीजिए चलो आप चलो गौड़

93
00:06:44,520 --> 00:06:47,880
वैष्णव के परिपेक्ष में देखो नेने

94
00:06:47,880 --> 00:06:53,880
किससे ठप्पा लगवाया मैं आपको बता दू मैं

95
00:06:53,960 --> 00:06:58,280
समता जी है नहीं मैं रामानुजाचार्य के सिद्धांत

96
00:06:58,280 --> 00:07:02,360
की बात कर रहा हूं अभी तो मैंने अगर मैं क्लेम कर रहा हूं कि वो जन्म

97
00:07:02,360 --> 00:07:07,520
से मानते तो मैंने उस पर ठप्पा लगवाया कहां से जो

98
00:07:07,520 --> 00:07:11,720
जगतगुरु स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज उन्होंने ठोक के कहा बिल्कुल

99
00:07:11,720 --> 00:07:15,960
स्पष्ट बताया कि जिसका शरीर ब्राह्मण है उसी को ब्राह्मण

100
00:07:15,960 --> 00:07:20,240
उचित कर्म करने का अधिकार चलो ठीक है

101
00:07:20,240 --> 00:07:24,400
तो इसलिए आप ब्राह्मण चार परंपरा को क्लेम मत करिए कि उन्होंने तो य लिखा था फिर

102
00:07:24,400 --> 00:07:30,280
मैं पूछूंगा आपने उसके किस परंपरा प्राप्त आचार से वो शिक्षा ग्रहण की है

103
00:07:30,280 --> 00:07:34,400
आप आप अपना क्लेम करिए जिसके परंपरा प्राप्त आचार्य से आपने शिक्षा

104
00:07:34,400 --> 00:07:38,720
ली है ठीक है मैं गडिया वैष्णव परंपरा के परिपेक्ष में बोलना चाहूंगा फिर

105
00:07:38,720 --> 00:07:42,800
उसी के सिद्धांत को मैं स्थापित करना चाहूंगा कि जो जन्म के आधार पर

106
00:07:42,800 --> 00:07:46,880
कोई भी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शुद्र नहीं होता है वो सब अपने कर्म और गुण

107
00:07:46,880 --> 00:07:51,120
पर आधारित है य मैं सिद्धांत स्थापित करना चाहूंगा ठीक है

108
00:07:51,120 --> 00:07:55,160
आपने बताया कि आपकी जानकारी में जो वर्ण व्यवस्था

109
00:07:55,160 --> 00:07:59,960
है वो कर्म के ऊपर आधारित है

110
00:07:59,960 --> 00:08:03,440
अब मुझे बताइए सबसे पहला जो विषय आता है

111
00:08:03,440 --> 00:08:07,600
कि इसकी उपयोगिता क्या है आप देखिए

112
00:08:07,600 --> 00:08:11,640
उपयोगिता वर्ण व्यवस्था का मैं आपको बताता हूं ऐसे वैसे

113
00:08:11,640 --> 00:08:15,720
शास्त्र में बोला गया कि जिसका जैसा गुण है उसी हिसाब का उसको कार्य करना चाहिए किसी

114
00:08:15,720 --> 00:08:19,720
के अंदर ब्राह्मण का गुण है तो उसको ब्राह्मण उचित कार्य करने चाहिए अगर किसी में क्षत्रिय

115
00:08:19,720 --> 00:08:23,920
का गुण है तो उसको क्षत्रिय वाले कार्य कर आप समझे नहीं मेरी बात मैंने

116
00:08:23,920 --> 00:08:28,280
आपसे पूछा है कि अगर हमने डिक्लेयर कर दिया कि यह ब्राह्मण

117
00:08:28,280 --> 00:08:32,560
है यह क्षत्रिय है डिक्लेयर हो गया गुण

118
00:08:32,560 --> 00:08:37,000
कर्म के हिसाब से आपने डिक्लेयर कर दिया आपके अनुसार कि यह ब्राह्मण है

119
00:08:37,000 --> 00:08:41,320
यह क्षत्रिय है ये जो है वैश्य

120
00:08:41,320 --> 00:08:45,480
है ये शूद्र है आपने डिक्लेयर कर दिया ठीक है हा जी हाज हा

121
00:08:45,480 --> 00:08:49,520
क्लेयर कर अब ये बताइए कि यह जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र

122
00:08:49,520 --> 00:08:53,520
आपने डिक्लेयर किया है इसकी उपयोगिता क्या है सबसे

123
00:08:53,520 --> 00:08:57,520
बड़ी उपयोगिता तो मैं आपको अभी बताता हूं जो आप लोगों का जो सिद्धांत है

124
00:08:57,520 --> 00:09:01,840
कि जन्म के आधार पर कोई ब्राह्मण है उसने जो हिंदू धर्म का जितना विनाश

125
00:09:01,840 --> 00:09:06,040
किया है आज के समय में भाई साब देखिए अगर आप व की बात करेंगे मुझे चर्चा को स्टॉप

126
00:09:06,040 --> 00:09:10,200
करना पड़ेगा मेरे पास इतना व्यर्थ समय नहीं है मैंने आपसे पूछा उपयोगिता क्या है आप

127
00:09:10,200 --> 00:09:14,360
अपनी उपयोगिता बताइए वो जो उसम वो उसने विनाश

128
00:09:14,360 --> 00:09:18,360
किया है अब मैं मैं हर चीज का फर शास्त्रो प्रमाण पूछूंगा वो

129
00:09:18,360 --> 00:09:18,860
आप

130
00:09:18,480 --> 00:09:21,920
बता नहीं पाओगे

131
00:09:21,920 --> 00:09:26,080
बताओ बताओ य तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय

132
00:09:26,080 --> 00:09:30,200
में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है अब मुझे बताओ कि मानने वालो

133
00:09:30,200 --> 00:09:34,480
ने विनाश किया है यह कहा लिखा है शास्त्र में बताओ यह तो दृश्य

134
00:09:34,480 --> 00:09:38,480
है जन्मन शास्त्र सेय तो दृश्य इतने सारे द लोग हिंदू धर्म को

135
00:09:38,480 --> 00:09:42,600
छोड़ के बाहर निकल रहे इतने जो आप खबर दे रहे

136
00:09:42,600 --> 00:09:47,320
हो व वही खबर एट सत्य है उस पर ठप्पा कौन लगाएगा

137
00:09:47,320 --> 00:09:50,400
ऐसी

138
00:09:50,400 --> 00:09:54,400
बाय आप कह रहे हो भाई साब अभी मैं सिद्ध करूंगा

139
00:09:54,400 --> 00:09:58,400
कि आपने बिगाड़ा फिर इसलिए इसलिए मैं यह

140
00:09:58,400 --> 00:10:02,480
कह रहा हूं ऐसे क्लेम करने से बचे जिनको आप

141
00:10:02,480 --> 00:10:06,520
शास्त्र से सिद्ध ना कर पाए हम लोग यहां पर

142
00:10:06,520 --> 00:10:10,520
हम लोग यहां पर कोर्ट में नहीं खड़े हैं कि इसने खून किया कि नहीं किया कि वो नंगा

143
00:10:10,520 --> 00:10:14,600
पकड़ा गया था कि नहीं पकड़ा गया था इस कन का कोई व्यक्ति हम लोग ये करने के लिए नहीं खड़े

144
00:10:14,600 --> 00:10:18,640
हैं ठीक है जी जी जी इसकन में किसी को ब्राह्मण

145
00:10:18,640 --> 00:10:22,680
बना दिया गया वो नंगा पकड़ा गया यह सब करने के लिए नहीं खड़े हम लोग य शास्त्र पर

146
00:10:22,680 --> 00:10:26,880
बात करने आए हैं जी ठीक है मैं समझ गया आपके

147
00:10:26,880 --> 00:10:31,040
जो नकली शंकराचार्य बन के बैठे उनका भी सब बाही पता है देश में जो नकली शंकराचार्य

148
00:10:31,040 --> 00:10:35,080
बनके आप पूरी में बैठे हैं जो उनका सब बता मैंने क्या कहा मैंने

149
00:10:35,080 --> 00:10:39,440
क्या कहा हम लोग शास्त्र से बात करें जी ठीक है शास्त्र से बात करते

150
00:10:39,440 --> 00:10:43,480
जिससे कि वो जो एक जो आप जो क्लेम कर रहे हो ना उसको मैं मान सकू आपने कुछ

151
00:10:43,480 --> 00:10:47,640
बोला तो उसको मैं मान सकूं मैंने कुछ बोला तो उसको आप मान सको ना मानने

152
00:10:47,640 --> 00:10:51,680
की सूरत में या फिर निरर्थक उसका भाव बदलने की सूरत में जनता

153
00:10:51,680 --> 00:10:56,160
ये देखेगी कि भैया ये जो है क्या कहते हैं इसका आधार गलत है

154
00:10:56,160 --> 00:11:00,200
या मेरा या आपका दोनों में से किसी एक का ठीक है तो शास्त्र को बीच

155
00:11:00,200 --> 00:11:04,520
में रख कर के जो बात बोली जा सकती है वो बोलिए तो ठीक है

156
00:11:04,520 --> 00:11:05,600
तो अभी

157
00:11:05,600 --> 00:11:10,080
आपसे पूछ रहा हूं सवाल दोबारा कहते हैं

158
00:11:10,080 --> 00:11:14,240
कि आपकी जो कर्मण से वर्ण व्यवस्था है आपने घोषित

159
00:11:14,240 --> 00:11:18,280
कर दिया कि ब्राह्मण है ये शूद्र है ये वैश्य क्षत्रिय

160
00:11:18,280 --> 00:11:22,720
है ये जो है इसकी उपयोगिता क्या है

161
00:11:22,720 --> 00:11:26,960
इसकी उपयोगिता यह है शिवांश देखिए मान लो कोई व्यक्ति है अगर कोई व्यक्ति

162
00:11:26,960 --> 00:11:31,360
वैश्य परिवार में उत्पन्न हुआ पैदा हुआ वो पर उसका स्वभाव ब्राह्मणों वाले है

163
00:11:31,360 --> 00:11:35,360
यजन यान पठन पाठन में उसका स्वाभाविक रुचि है तो मैं उसको ब्राह्मण कहने से क्यों

164
00:11:35,360 --> 00:11:39,600
हिकू यही तो उसका सबसे बड़ा फायदा होगा आप उसको ब्राह्मण

165
00:11:39,600 --> 00:11:44,320
कह रहे हैं अब आगे की बात तो करिए अब उसकी उपयोगिता बताइए मुझे

166
00:11:44,320 --> 00:11:48,480
उपयोगिता ये है कि उसका जो स्वाभाविक उसका जो स्वभाव है

167
00:11:48,480 --> 00:11:52,680
उसका जो नेचुरल स्वभाव है उसके उसके हिसाब से वो ब्राह्मणों के कार्य करेगा वो यज्ञ

168
00:11:52,680 --> 00:11:56,880
यजन पठन पाठन करेगा उसके स्वभाव के अनुसार कार्य करेगा तो तभी

169
00:11:56,880 --> 00:12:01,480
वो आगे समाज में कुछ अच्छा कर पाएगा ना अगर उसका स्व ब

170
00:12:01,480 --> 00:12:05,840
मैं अपना सवाल समझा नहीं पा रहा हूं मैं आपको बताता हूं क्लियर करता हूं

171
00:12:05,840 --> 00:12:10,040
कि मान लीजिए कि मेरे चार पुत्र हुए या 10 पुत्र हुए

172
00:12:10,040 --> 00:12:14,280
ठीक है जी अभी मैंने सबके नाम अलग अलग रख

173
00:12:14,280 --> 00:12:18,520
दिए क्यों रखते हैं

174
00:12:18,520 --> 00:12:20,760
दो अल

175
00:12:20,760 --> 00:12:24,880
क्लासिफिकेशन क्यों करते हैं कि यह शिवांश है

176
00:12:24,880 --> 00:12:29,400
ये अजय है यह राम है यह लक्ष्मण है यह भरत

177
00:12:29,400 --> 00:12:33,440
यह शत्रुगन है यह क्लासिफिकेशन क्यों करते

178
00:12:33,440 --> 00:12:37,440
हैं क्योंकि दोनों अलग अलग पर्सनालिटी है इसलिए नाम अलग कर रहे

179
00:12:37,440 --> 00:12:41,720
हैं उसके उसका कोई फायदा नहीं होता है क्लासिफिकेशन

180
00:12:41,720 --> 00:12:45,880
का नहीं होता है उसकी पहचान कर सकते हैं हम अलग से आइडेंटिफिकेशन

181
00:12:45,880 --> 00:12:50,520
कर पहचान का क्या फायदा होता है

182
00:12:50,520 --> 00:12:54,520
उस अगर हम किसी को पहचानते हैं कि य राम है तो फायदा

183
00:12:54,520 --> 00:12:58,760
क्या होगा जब हमें राम को बुलाना होगा जब हमें लक्ष्मण

184
00:12:58,760 --> 00:13:02,880
से होगा जब हमें वैश्य से कार्य होगा जब हमें अजय

185
00:13:02,880 --> 00:13:07,440
से कार्य होगा तो हम जल्दी से जल्दी अजय तक पहुंच पाएंगे

186
00:13:07,440 --> 00:13:11,680
जी और अगर सबको हमने एक जैसा ही कर दिया तो हमें जब अजय से कार्य

187
00:13:11,680 --> 00:13:15,960
होगा तो हम अगर मान लो सबका नाम अजय रख देंगे या कोई

188
00:13:15,960 --> 00:13:20,080
नाम जो क्लासिफिकेशन जो कर रहे वो नहीं करेंगे तो हम अजय तक जल्दी नहीं पहुंच

189
00:13:20,080 --> 00:13:24,200
पाएंगे देखिए देखिए शिवांश जी आप मेरी बात भी सुनिए थोड़ा मैं आपके बात

190
00:13:24,200 --> 00:13:28,240
का खंडन कर रहा हूं आप ऐसा कोई सिद्धांत मैंने प्रस्तुत नहीं किया है जिसम मैंने

191
00:13:28,240 --> 00:13:32,320
ये बोला कि सब एक मैं मानता हूं कि चारों वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय

192
00:13:32,320 --> 00:13:35,960
शूद्र सब अलग है देखिए आप दो कदम आगे बढ़ जाते हैं

193
00:13:35,960 --> 00:13:40,080
आप अपने आप वो लगा रहे हैं कयास मैंने कहां कहा कि आपने

194
00:13:40,080 --> 00:13:44,120
य क्लेम किया है मैंने आपको बता दिया कि क्लासिफिकेशन का यूज

195
00:13:44,120 --> 00:13:48,160
ऐसे करते हैं कि अगर वो हिरो अंडा स्प्लेंडर है वो

196
00:13:48,160 --> 00:13:52,240
पैशन है वो पल्सर है वो बुलेट है तो जब मुझे बुलेट की

197
00:13:52,240 --> 00:13:56,240
लिए जाऊ तो बुलेट मुझे जल्दी मिले ऐसा ना हो कि मैंने कहा

198
00:13:56,240 --> 00:14:01,000
मोटरसाइकिल तो भैया ये वाली ये वाली ये वाली ये वाली तो क्लासिफिकेशन

199
00:14:01,000 --> 00:14:05,320
से हम लोग उस चीज तक जल्दी पहुंचते हैं और इसी को कहते हैं व्यवस्था

200
00:14:05,320 --> 00:14:10,120
क्लासिफिकेशन से क्या आती है व्यवस्था ठीक है ठीक है

201
00:14:10,120 --> 00:14:14,720
तो अब बात ये आती है कि आपने जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश और सूत्र बनाए

202
00:14:14,720 --> 00:14:18,880
हैं क्या यह जो क्लासिफिकेशन आपने किया है

203
00:14:18,880 --> 00:14:23,080
क्या इसकी उपयोगिता वही है या कुछ और है वो बताइए

204
00:14:23,080 --> 00:14:27,200
वही है वही है वही है यही है कि जब हम ब्राह्मण से

205
00:14:27,200 --> 00:14:31,280
कार्य हो तो हम ब्राह्मण तक जल्दी पहुंचे जल्दी पहुंचे जी

206
00:14:31,280 --> 00:14:35,560
बिल्कुल और हमें हमें जब शूद्र से जब हमें शूद्र से कार्य

207
00:14:35,560 --> 00:14:39,720
हो तो हम शूद्र तक जल्दी पहुंचे जी जी जी ठीक है

208
00:14:39,720 --> 00:14:44,000
तो यह जो आपकी जो कर्म के अनुसार वर्ण व्यवस्था है

209
00:14:44,000 --> 00:14:48,320
इसमें कोई ऐसा नियम है कि व्यक्ति के कर्म और जो आपका

210
00:14:48,320 --> 00:14:51,040
गुण है उसके अनुसार एक ही बार

211
00:14:51,040 --> 00:14:55,080
जो है जो वर्ण तय हो जाएगा या जिंदगी में कभी भी कितनी भी बार

212
00:14:55,080 --> 00:15:00,360
बदल सकते हैं नहीं बदलने वाला ऐसा नहीं है अगर बदल

213
00:15:00,360 --> 00:15:05,120
होता है बदलना यली ऐसा नहीं होता एक ही वण पूरा जीवन रहता है

214
00:15:05,120 --> 00:15:09,480
क्यक जो संस्कार होते हैं वरा व एक ही रहता है उसका तो व दोबारा

215
00:15:09,480 --> 00:15:13,800
संस्कार नहीं कर सकता अगर कोई का किसी का स्वाभाविक

216
00:15:13,800 --> 00:15:18,480
है वह वैश्य है अगर उसका नेचर वैश्य वाला है तो ब्रहण क्यों बनेगा

217
00:15:18,480 --> 00:15:23,320
भाई साब कर सकता है कि नहीं क्यों उसको खींच रहे

218
00:15:23,320 --> 00:15:27,400
करने को कर सकता कर सकता है यानी कि आपने जो व्यवस्था

219
00:15:27,400 --> 00:15:31,600
बनाई है उसके अनुसार ब खड़ा हुआ है क्षत्रिय खड़ा हुआ है जब ब्राह्मण

220
00:15:31,600 --> 00:15:35,600
की आवश्यकता होगी तो मैं ब्राह्मण जो पहले से घोषित है

221
00:15:35,600 --> 00:15:41,120
उसके पास जाऊंगा मगर हो सकता है कि वो उस समय ब्राह्मण ना हो व क्षत्रिय बन चुका

222
00:15:41,120 --> 00:15:45,400
हो जी बिल्कुल हो सकता है बिल्कुल हो सकता है तो य वस्था क

223
00:15:45,400 --> 00:15:49,520
हुई आप थोड़ा ध्यान से समझिए आप उसको व्यवस्था की तरफ

224
00:15:49,520 --> 00:15:53,960
लेकर जा रहे मैं बोल रहा हूं आप मेरा सिद्धांत सुनिए मैं बोल रहा हूं

225
00:15:53,960 --> 00:15:58,160
अभी आपने कहा कि आपके द्वारा जो क्लासिफिकेशन हुआ है उसकी उपयोगिता बिल्कुल

226
00:15:58,160 --> 00:16:02,720
वही है जरत पड़ने पर हमें ब्राह्मण की आवश्यकता पड़े तो ब्राह्मण मिल जाए

227
00:16:02,720 --> 00:16:06,280
व की एक मिनट अभी आपने कहा कि व

228
00:16:06,280 --> 00:16:10,520
की आवश्यकता पड़े तो वैश मिल जाए मगर आपकी जो व्यवस्था है व आपकी

229
00:16:10,520 --> 00:16:14,560
इस उपयोगिता को तोड़ रही है क्योंकि जब के

230
00:16:14,560 --> 00:16:19,000
पास जाऊंगा जब मैं ब्राह्मण के पास जाऊंगा तो व यह कह सकता है मैं छत्रिय

231
00:16:19,000 --> 00:16:23,240
के पास जाऊंगा आपकी मुझे आवश्यकता है छत्रिय कह सकता है बस अभी पाच मिनट

232
00:16:23,240 --> 00:16:27,240
पहले मैंने गायत्री मंत्र पढ़कर ब्राह्मण हो गया हूं कैसे हो गया

233
00:16:27,240 --> 00:16:31,320
आप ऐसे सो बातें नहीं कर कैसे हो गया गाय उसका स्वभाव क्षत्रिय वाला है

234
00:16:31,320 --> 00:16:35,960
वो युद्ध में है है ना वो उसका क्षत्रिय स् ब्रहण

235
00:16:35,960 --> 00:16:40,200
ऐसा हाइपोथेटिकल एक मिनट एक मिनट मिनट यानी कि जब भी

236
00:16:40,200 --> 00:16:44,320
आपकी व्यवस्था यह है कि जब भी हम कहीं जाएंगे भले ही वो पहले से ब्राह्मण

237
00:16:44,320 --> 00:16:48,440
घोषित हो क्षत्रिय घोष तो मगर उसके बाद भी हम उसको जीरो से चेक

238
00:16:48,440 --> 00:16:52,160
करना शुरू

239
00:16:52,160 --> 00:16:56,160
करेंगे किस प्रकार आप बताना चाह रहे जीरो से किस तरह चेक

240
00:16:56,160 --> 00:17:00,160
करेंगे स्वभाव है क्या जैसा उस कर्म है क्या क्षत्रिय सा

241
00:17:00,160 --> 00:17:04,320
ये है वो है ये सब आपने बताया ना तो फिर उसका पहले से ब्राह्मण घोषित होने

242
00:17:04,320 --> 00:17:08,400
का कोई फायदा ही नहीं है नहीं

243
00:17:08,400 --> 00:17:12,800
उसका स्वभावी क्त्र तो ब्रहण क्यों घोषित करेंगे उसको

244
00:17:12,800 --> 00:17:17,120
टाइम उसको पूरा का पूरा चेक ही करना है तो

245
00:17:17,120 --> 00:17:21,720
फिर उसका पहले से ब्राह्मण घोषित होना कोई आवश्यक ही नहीं है

246
00:17:21,720 --> 00:17:26,360
नहीं है जन्म ना जाते शुद्र संस्कार द उते वेद पठ

247
00:17:26,360 --> 00:17:30,360
ब्र ब्र कर रहा जो बात चल रही है

248
00:17:30,360 --> 00:17:34,440
उसका उत्तर दीजिए मैं आपको शास्त्र प्रमाण बता रहा था आप तो अभी न्याय में लग

249
00:17:34,440 --> 00:17:38,640
गए हैं मैं थोड़ा शास्त्र के हिसाब से आपको बता रहा था आपसे यह पूछ रहा हूं मैं आपसे

250
00:17:38,640 --> 00:17:42,840
यह पूछ रहा हूं कि जो आपकी व्यवस्था आपने बताई

251
00:17:42,840 --> 00:17:46,840
कि हम ब्राह्मण तक जल्दी पहुंच सके हम शूद्र तक जल्दी पहुंच सके हम

252
00:17:46,840 --> 00:17:51,040
क्षत्रिय तक जल्दी पहुंच सके मगर अभी आप कह रहे हो कि वो जो है कितनी बार बदल

253
00:17:51,040 --> 00:17:55,400
सकता है तो हम जा रहे ब्राह्मण समझ के और वो बदला हुआ है

254
00:17:55,400 --> 00:17:59,640
फ ऐसा नहीं मैंने ऐसा नहीं बोला कि कितनी बार भी ब सकता है

255
00:17:59,640 --> 00:18:03,880
जिस व्यक्ति का स्वभाव क्षत्रिय है मैं बोल रहा हू कि क्यों उसका स्वभाव कभी परिवर्तित नहीं

256
00:18:03,880 --> 00:18:07,920
होता देखिए आप एक बात सुनिए थोड़ा सा स्वभाव परिवर्तित आपने

257
00:18:07,920 --> 00:18:12,040
थोड़ी पहले कहा था बदल सकता है कहा था कि नहीं बदल सकने को

258
00:18:12,040 --> 00:18:16,080
बहुत मुश्किल होता है स्वभाव को बदलना परंतु अगर बदल

259
00:18:16,080 --> 00:18:20,480
सकता है बदल सकता है पर ऐसा नहीं होता 99.99%

260
00:18:20,480 --> 00:18:24,640
केसेस में ऐसा नहीं होता है तो भाई साहब अब मुझे आप दो तीन चीज प्रमाण दिखा

261
00:18:24,640 --> 00:18:28,960
दीजिए कि यह कहा लिखा है कि जो आपने एक ब

262
00:18:28,960 --> 00:18:33,600
जो वो वर्ण धारण कर लिया उसके बाद आप उसको बदल नहीं सकते

263
00:18:33,600 --> 00:18:37,800
क्योंकि भाई साब वो हमारा स्वभाव है स्वभाव कैसे बदलता हैई साब

264
00:18:37,800 --> 00:18:41,960
आप मुझे वर्ण बदल नहीं सकता वो अपने वर्ण को बदल नहीं सकता ये मुझे

265
00:18:41,960 --> 00:18:45,960
बताइए क्योंकि उसका स्वभाव नहीं बदलता क्योंकि उसका जो स्वाभाविक

266
00:18:45,960 --> 00:18:49,960
नेचर है वो नहीं बदलता इसलिए वर्ण नहीं बदलता अगर बदल जाता है अगर वो भक्ति करके

267
00:18:49,960 --> 00:18:54,840
कुछ का स्वभाव मनुष्य का स्वभाव और गुण बदल नहीं सकता

268
00:18:54,840 --> 00:18:58,840
बदल सकता बहुत मुश्किल है बहुत मुश्किल है नेक्स्ट टू पॉसिबल अग को

269
00:18:58,840 --> 00:19:02,880
एक फिक्स चीज बताइए ना हम धर्म की बात कर रहे हैं मर्यादा की

270
00:19:02,880 --> 00:19:06,880
मर्यादा वो बताइए फिक्स क्या है हम हर चीज को एक्स्ट्रीम

271
00:19:06,880 --> 00:19:11,000
नहीं ले सकते शिवम जी देखिए बदलने को बदल सकता है पर यूजुअली ऐसा नहीं होता

272
00:19:11,000 --> 00:19:15,000
मैंने बोला 99.99% केसेस में ऐसा नहीं होता तो यानी कि आपकी

273
00:19:15,000 --> 00:19:19,000
जो व्यवस्था है उसमें यह दिक्कत है कि जब हम लेने जाएंगे ब्राह्मण को

274
00:19:19,000 --> 00:19:23,120
तो उसमें वो बदल बदला हुआ हो सकता है हो सकता है बट

275
00:19:23,120 --> 00:19:27,200
इट इज नेक्स्ट टू इंपॉसिबल ये भी मैंने बोला है बहुत कहीं कहीं केसेस

276
00:19:27,200 --> 00:19:31,280
में ऐसा होता है सकता है बस बट इट इज नेक्स्ट टू इ पॉसिबल ये कौन सी

277
00:19:31,280 --> 00:19:35,440
बात है भाई आप देखिए मैं भगवत गीता का प्रमाण दे बता र सिद्धांत

278
00:19:35,440 --> 00:19:39,440
बता रहे हैं या ये जो प्रासंगिक लोग होते बातें करते जो दोनों तरह

279
00:19:39,440 --> 00:19:43,720
की बातें करते वो कर रहे हैं आप सुनिए मेरी बात सुनिए भगवत गीता से आपको बताऊंगा

280
00:19:43,720 --> 00:19:47,880
देखो मैं कुछ नहीं जो भगवान कृष्ण मेरे जो इष्टदेव है उनके हिसाब से मैं बताना चाहूंगा देखो

281
00:19:47,880 --> 00:19:52,080
भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण बोलते बताइएगा देखिए प्रमाण मेरे पास भी है भाई

282
00:19:52,080 --> 00:19:56,880
साहब प्रमाण मेरे पास भी है मैं अभी आपसे पहले एक वो ले रहा हूं क्या स्टेटमेंट

283
00:19:56,880 --> 00:20:01,080
बदल सकता है वर्ण को नहीं बदल सकता है ये बताइए

284
00:20:01,080 --> 00:20:07,080
जी बदल सकता है पर ऐसा फ्रीक्वेंसी

285
00:20:17,080 --> 00:20:21,280
में जाते थे क्षत्रिय राजा तो बाद में तो फिर तो फिर

286
00:20:21,280 --> 00:20:25,320
तो फिर जब ऐसा हो सकता है तो फिर इस व्यवस्था की उपयोगिता

287
00:20:25,320 --> 00:20:29,320
जो आपने बताई थी वो क्या रह गई देखिए सबसे बड़ी

288
00:20:29,320 --> 00:20:33,880
उपयोगिता तो यह है कि जो पहले क्षत्रिय था वो

289
00:20:33,880 --> 00:20:38,600
वो ऐसा नहीं कि हमेशा ही वो ब्राह्मण बन जाएगा अचानक से

290
00:20:38,600 --> 00:20:42,680
वस्तुत ऐसा होता कि कैसे बनेगा कैसे बनेगा

291
00:20:42,680 --> 00:20:46,680
अरे मैंने बोला कि वो ब्राह्मण अगर पहले कोई क्षत्रिय है तो वो ब्राह्मण मान

292
00:20:46,680 --> 00:20:50,680
लो कोई व्यक्ति है आप सुनिए अगर किसी में अगर वो कोई गुरु के पहले के

293
00:20:50,680 --> 00:20:54,800
समय में क्या होता था जो आप जाति व्यवस्था को आपने वर्ण व्यवस्था के साथ जोड़ दिया है ऐसा

294
00:20:54,800 --> 00:20:59,320
बिल्कुल भी नहीं है जैसे पहले के समय में होता था एक बच्चा है जो जन्म से तो उसको

295
00:20:59,320 --> 00:21:03,320
देखिए देखिए भाई साब देखिए ऐसा है

296
00:21:03,320 --> 00:21:07,800
थोड़ा सा पॉइंट प बात करिए आप ये बताइए कि उसकी उपयोगिता

297
00:21:07,800 --> 00:21:11,880
क्या है क्योंकि आपने जो उपयोगिता बताई थी वो खंडन हो चुका उसका अब आप उसकी

298
00:21:11,880 --> 00:21:15,320
दूसरी उपयोगिता बताइए क्लासिफिकेशन

299
00:21:15,320 --> 00:21:19,360
की दूसरी उपयोगिता यह है मान लो कोई व्यक्ति है

300
00:21:19,360 --> 00:21:23,640
अगर वो ब्राह्मण कुल में पैदा हुआ है सुनिए मैं उपयोगिता बता रहा हूं आप समझने का कोशिश करिए

301
00:21:23,640 --> 00:21:27,920
अगर कोई ब्राह्मण परिवार में उत्पन्न हुआ है पर उसका स्वभाव ब्राह्मण वाला नहीं है उसका स्वभाव

302
00:21:27,920 --> 00:21:32,080
शूद्र वाला है तो जब मेरे को शूद्र को ढूंढना होगा तो मैं बोलूंगा यह देखो

303
00:21:32,080 --> 00:21:36,080
यह जो द्विवेदी का पुत्र है यह शूद्र है इसको बुला के लाओ इसकी सेवा करवानी है तो

304
00:21:36,080 --> 00:21:40,080
मैं यह कर सकता हूं यह सबसे बड़ी उपयोगिता है पर आपने किसी को ब्राह्मण के कुल

305
00:21:40,080 --> 00:21:44,120
में पैदा उसको ब्राह्मण समझ लिया और उसको ब्राह्मण उचित कार्य दे दिया और वो उसको अच्छे

306
00:21:44,120 --> 00:21:48,320
से नहीं कर पाता है तो आपका ही नुक्सान है हाइपर मत होइए मैं

307
00:21:48,320 --> 00:21:52,360
अब एक बार और समझा दीजिए उपयोगिता क्या है क्या बताया आपने

308
00:21:52,360 --> 00:21:56,480
यही उपत कि ऐसे बहुत सारे दृश्य हमें देखने को मिलते हैं जिसमें कोई

309
00:21:56,480 --> 00:22:00,800
ब्राह्मण के कुल में पैदा हुआ है तो उस के पास गुण ब्राह्मणों वाले नहीं है

310
00:22:00,800 --> 00:22:04,800
तो इसका उपयोगिता ये है कि मैं उसको शूद्र बोलूंगा और मैं जब शूद्र

311
00:22:04,800 --> 00:22:08,840
को ढूंढने जाऊंगा तो उसको पहचानू ये जो शूद्र है इसके स्वभाव से य ये

312
00:22:08,840 --> 00:22:13,040
पैदा तो ब्राह्मण के घर में हुआ पर ये इसका स्वभाव शूद्र का है तो शूद्र उसको लाके

313
00:22:13,040 --> 00:22:17,080
मैं अपना कार्य करवा पाऊंगा ये मेरा आप उसे कितनी देर तक वच

314
00:22:17,080 --> 00:22:21,160
करने के बाद तय करेंगे कि ये शूद्र है या ब्राह्मण है आप

315
00:22:21,160 --> 00:22:25,240
देखिए ये जो है उसका जो व्यक्ति है उसका जो नेचुरल स्वभाव है उसका गुरु

316
00:22:25,240 --> 00:22:29,360
पहचानता है पहले के समय में क्या होता था कि सारे गुरुकुल जाते थे और गुरु उसके वर्ण को तय

317
00:22:29,360 --> 00:22:33,360
करता था किय किस वर्ण में जाएगा गुरु तय करता था मतलब की

318
00:22:33,360 --> 00:22:37,720
आप नहीं करेंगे वो सिर्फ गुरु करेगा गुरु करेगा जी

319
00:22:37,720 --> 00:22:42,280
यानी कि अभी दो तीन चीज निकल के आ गई कि वर्ण को डिसाइड केवल गुरु

320
00:22:42,280 --> 00:22:46,360
करेगा और वर्ण जो है कई बार भी बदला जा सकता है

321
00:22:46,360 --> 00:22:47,160
मगर वो

322
00:22:47,160 --> 00:22:51,160
थोड़ा कठिन होता है पर बदला जा सकता है बदला जा सकता है बदला जाता है

323
00:22:51,160 --> 00:22:55,200
हा और दूसरी बात यह कह रहे है कि जो गुरु है

324
00:22:55,200 --> 00:22:59,720
वो देखेगा और उसको बदल देगा गुरु डिसाइड करेगा

325
00:22:59,720 --> 00:23:04,120
हां बदल देगा नहीं बोला उसका जो स्वभाव है उसके अनुसार उसको घोषित करेगा कि ब्राह्मण

326
00:23:04,120 --> 00:23:08,280
क्षत्रिय वैश्य शूद्र है या पंचम है अच्छा तो यह

327
00:23:08,280 --> 00:23:12,360
जो डेडलाइन है कि उम्र के किस पड़ाव तक ऐसा

328
00:23:12,360 --> 00:23:16,480
हो जाना चाहिए जिसके बाद नहीं होगा या ऐसा कुछ नहीं है वस्तुत

329
00:23:16,480 --> 00:23:20,480
25 साल तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं ब्रह्मचारी बनना सबको सबको होता है

330
00:23:20,480 --> 00:23:24,800
तो 25 साल की उम्र तक गुरु बता देता है कि व किस वर्ण में जाएगा मतलब

331
00:23:24,800 --> 00:23:29,320
कि 25 साल के बाद वर्ण नहीं बदला जा सकता

332
00:23:29,320 --> 00:23:33,440
अब उसका जो स्वभाव गुरु ने पहचान लि तो कैसे बदलेगा वो कैसे ऐसे रातो रात थोड़ी क्षत्रीय

333
00:23:33,440 --> 00:23:37,440
बन जाएगा भाई इसका मतलब ये कह रहे कि 25 साल के बाद गुरु भी

334
00:23:37,440 --> 00:23:41,480
वर्ण को नहीं बदल सकता नहीं बदल सकता

335
00:23:41,480 --> 00:23:45,640
उसका स्वभाव अब वही है ना निग्रह किम करिती उसका जो स्वभाव है वो कैसे

336
00:23:45,640 --> 00:23:49,640
बदल सकता है बताइए अगर वो भगवान की ऐसी तीव्र भक्ति करेगा कहने का

337
00:23:49,640 --> 00:23:53,720
मतलब य है स्वभाव व्यक्ति का नहीं बदल सकता बहुत मुश्किल होता

338
00:23:53,720 --> 00:23:58,480
है नहीं बदलता है निग्रह किम करि भगवान भगवत गीता में बोलते है मलब

339
00:23:58,480 --> 00:24:02,360
कोई व्यक्ति अगर स्वभाव से हिंसक है तो भगवान की भक्ति

340
00:24:02,360 --> 00:24:06,520
कर करके कर करके उसका वो हिंसक का स्वभाव नहीं बदल सकता

341
00:24:06,520 --> 00:24:10,560
अब वो ब बहुत मुश्किल कार्य भगवान की शुद्ध भक्ति करना कोई आसान बात

342
00:24:10,560 --> 00:24:14,760
तो नहीं है ना यह बहुत मुश्किल कार्य है वस्तु तो हम आत्मा है हमारा स्वरूप

343
00:24:14,760 --> 00:24:20,320
कभी नहीं बदलता स्वभाव बदल सकता है मैं ऐसा नहीं बोल रहा कि नहीं बदलता

344
00:24:20,320 --> 00:24:24,360
अब आप मुझे इसका प्रमाण दे दीजिए कि कितने वर्ष की आयु से पहले तक

345
00:24:24,360 --> 00:24:28,400
उसका घोषित हो सकता है उसके बाद नहीं होगा

346
00:24:28,400 --> 00:24:32,520
देख मैं आपको इस चीज का प्रमाण दे सकता हूं कि कोई ब्राह्मण के परिवार

347
00:24:32,520 --> 00:24:36,760
में पैदा हुआ तो वो शुद्र हो सकता है और कोई शूद्र के परिवार में पैदा

348
00:24:36,760 --> 00:24:41,000
तो जैसे कोई संस्कार होता है ना संस्कार इत्यादि

349
00:24:41,000 --> 00:24:45,040
होते उनकी चीज डिसाइड होती है इस उम्र तक य होगा इस उम्र तक य होगा होती

350
00:24:45,040 --> 00:24:49,200
है कि नहीं होती है जी जी होती है तो वो आपने जैसे

351
00:24:49,200 --> 00:24:53,240
बताया 25 साल से पहले तक नहीं होता है इसका प्रमाण है आपके

352
00:24:53,240 --> 00:24:57,240
पास 25 साल के बाद नहीं होगा नहीं मैंने ऐसे

353
00:24:57,240 --> 00:25:01,280
नहीं बोला 25 साल के बाद होगा पर उसका स्वभाव नहीं आप उसको संस्कार के साथ क्यों देख

354
00:25:01,280 --> 00:25:05,680
रहे उसका स्वभाव है उसके साथ देखिए ना मदा बदलेगा

355
00:25:05,680 --> 00:25:09,720
कि नहीं बदलेगा दोनों तरह की बातें मत करिए बदलेगा कि नहीं बदलेगा

356
00:25:09,720 --> 00:25:13,760
25 साल के बाद बदलेगा जी बदलेगा बदलेगा मान लो ऐसी

357
00:25:13,760 --> 00:25:17,560
भक्ति करता है कि वो अब मुझे तो वो कोई आयु सीमा है

358
00:25:17,560 --> 00:25:21,800
कि इसके बाद नहीं बदलेगा नहीं ऐसा कोई आयु सीमा नहीं है गुरु

359
00:25:21,800 --> 00:25:26,240
जो 25 साल जब वो ब्रह्मचारी आश्रम में रहता है तो गुरु उसका डिसाइड करता क्या है वैसे सीमा कोई

360
00:25:26,240 --> 00:25:30,240
बा जब वो चला गया उसके बाद ब सकता है हां चला

361
00:25:30,240 --> 00:25:34,560
गया अगर वो गृहस्थ में चला गया ग्रस्त में जाक वो ऐसे आचरण डेवलप कर लेता है तो बदल सकता है

362
00:25:34,560 --> 00:25:39,280
बदल सकता है बिल्कुल ऐसा फगा फिर गुरु के पास

363
00:25:39,280 --> 00:25:43,360
आएगा हां गुरु पहचान लेगा उसका आसपास के आप उसके

364
00:25:43,360 --> 00:25:49,360
स्वभाव को देखिए उसको कोई भी आइडेंटिफिकेशन

365
00:26:01,320 --> 00:26:05,600
गुरु घोषित करता है अब आप कह रहे हो

366
00:26:05,600 --> 00:26:09,800
अरे गुरु घोषित करता है क्योंकि 25 साल तक ब्रह्मचारी जिसके आश्रय में रहा है वो जानता

367
00:26:09,800 --> 00:26:14,080
है उसके स्वभाव को इसलिए घोषित करता कोई यानी कि कोई भी घोषित कर सकता है

368
00:26:14,080 --> 00:26:19,200
कोई भी घोषित कर सकता है इसमें क्या हो गया ओके अभी

369
00:26:19,200 --> 00:26:23,400
आपने मैंने आपसे पूछा था ये व्यक्ति ब्राह्मण या क्षत्रिय

370
00:26:23,400 --> 00:26:27,520
वैश्य या शूद्र है तो इसको आप जो घोषित करेंगे तो कितनी

371
00:26:27,520 --> 00:26:31,680
देर वच कर तो आपने कहा नहीं मैं नहीं गुरु करेगा हा क्योंकि

372
00:26:31,680 --> 00:26:32,880
गुरु उसके साथ मैक्सिमम

373
00:26:32,880 --> 00:26:37,000
समय बताता सुनि अब आपने कहा अब आपने कहा कि नहीं कोई

374
00:26:37,000 --> 00:26:41,000
भी घोषित कर सकता है चलो फिर से आ जाते हैं तो अब आप ये बताइए कि जो

375
00:26:41,000 --> 00:26:45,040
कोई भी घोषित कर सकता है किसी को देख कर के उसको उसे कितनी देर वच

376
00:26:45,040 --> 00:26:49,240
करना है अरे जब तक उसका स्वभाव उसके सामने निखर के नहीं आता

377
00:26:49,240 --> 00:26:53,240
इसमें हम टाइम लिमिट कैसे लगा सकते दो दिन देखना है दो महीना देखना उसका स्वभाव निक

378
00:26:53,240 --> 00:26:57,320
के आने का पैरामीटर होगा ना कुछ एक घंटा देखना है एक साल देखना है

379
00:26:57,320 --> 00:27:02,120
छ महीने देखना है क्या पैरामीटर है उसका उसका पैरामीटर

380
00:27:02,120 --> 00:27:06,720
आप देखि उसका कोई स्वभाव है व एक जैसा ही रहता है हमेशा तो

381
00:27:06,720 --> 00:27:11,000
इसलिए हम लोग शास्त्र पर चलने वाले लोग है तेरे लिए कर्तव्य

382
00:27:11,000 --> 00:27:15,320
अ कर्तव्य में शास्त्र प्रमाण है आप मुझे बताइए कितनी देर देखने

383
00:27:15,320 --> 00:27:19,680
पर यह मान लेना चाहिए कि क्षत्रिय वैश्य शूद्र ब्राह्मण है

384
00:27:19,680 --> 00:27:23,920
जब मान लीजिए कि मैं रास्ते में जा रहा हूं सपोज करिए मैं रास्ते

385
00:27:23,920 --> 00:27:28,440
में जा रहा हूं और मुझे किसी कन्या के लिए

386
00:27:28,440 --> 00:27:32,800
के लिए उत्तम वर्ग की जरूरत है ठीक है तो मैं

387
00:27:32,800 --> 00:27:37,160
ऐसे देखता हुआ जा रहा हूं बस मैंने अब वो मुझे पैरामीटर बताइए

388
00:27:37,160 --> 00:27:41,600
कि क्या देख लू क्या कर रहा हो वो क्या कर रहा हो जिससे तय हो जाए

389
00:27:41,600 --> 00:27:45,840
और वो कितनी देर तक उसको मैं जाचू परखू ये पैरामीटर बताइए

390
00:27:45,840 --> 00:27:48,000
जो मैं उसको पकड़ के ले आऊ चल भाई तू

391
00:27:48,000 --> 00:27:52,200
ठीक है तू ब्राह्मण है तू क्षत्रिय है ठीक है उसके साथ बैठिए

392
00:27:52,200 --> 00:27:56,520
वो देखिए उसका आचरण कैसा है क्या वो सत्व गुणी है रजोगुण है तमोगुण है

393
00:27:56,520 --> 00:28:00,880
गुण को पहचानना कोई ज्यादा मुश्किल बात नहीं मतलब स

394
00:28:00,880 --> 00:28:05,200
मतलब सड़क पर नहीं हो सकती बैठना पड़ेगा हो स नहीं हो स बैठना पड़ेगा उसके गुण को पहचानना

395
00:28:05,200 --> 00:28:09,400
पड़ेगा किस गुण से ज्यादा प्रभावित है व सतोगुण है रग तमग घर से बैठने

396
00:28:09,400 --> 00:28:14,360
के लिए निकलूंगा तो निकलने का पैरामीटर क्या होगा

397
00:28:14,360 --> 00:28:18,640
अरे घर से निकल के उस व्यक्ति का आप आप संग कर उस व्यक्ति का जब संग करेंगे तो देखेंगे

398
00:28:18,640 --> 00:28:22,680
कि कौन सा गुण में सग है मुझे इस व्यक्ति को ही

399
00:28:22,680 --> 00:28:26,800
चेक करना हैई मैं जब घर से निकलूंगा तो

400
00:28:26,800 --> 00:28:30,840
दुनिया में लाखों करोड़ों लोग है तो उन लाखों करोड़ों लोगों में से

401
00:28:30,840 --> 00:28:35,120
मुझे किस व्यक्ति को चेक करना है इसका पैरामीटर क्या होगा अरे

402
00:28:35,120 --> 00:28:39,560
जिसके साथ मेरा मेरी जरूरत है अगर किसी को अपनी बेटी की शादी जिससे करवानी दे

403
00:28:39,560 --> 00:28:43,640
तो घर से निकल रहा हूं कि मुझे एक ब्राह्मण चाहिए कन्या के लिए वर चाहिए तो मेरा

404
00:28:43,640 --> 00:28:48,040
पैरार क्या होगा कि मैं कहां से अपनी खोज शुरू

405
00:28:48,040 --> 00:28:52,080
करूं जिनके साथ वो परिचित है उनसे कर जिनको जानता ही नहीं उसके साथ

406
00:28:52,080 --> 00:28:56,080
संबंध कैसे स्थापित करेगा वो तो जिनके जिनको पहले से जानता हो उसके

407
00:28:56,080 --> 00:29:00,200
आसपास के जो लोग हैं जिनको जान पहले जानता हूं जिनको

408
00:29:00,200 --> 00:29:03,280
मैं पहले से जानता हूं यानी कि मेरे नाते रिश्तेदारों

409
00:29:03,280 --> 00:29:07,360
के यहां पर रिश्तेदार नहीं बोला मैंने पड़ोसी हो सकता

410
00:29:07,360 --> 00:29:11,440
है कोई दूर का हो सकता है कुछ भी हो सकता है जानना मतलब ये थोड़ी कि रिश्तेदारी होना चाहिए जिनको मैं

411
00:29:11,440 --> 00:29:15,480
पहले से जानता हूं तो यहां पर तो जन्मना आ रहा है फिर तो

412
00:29:15,480 --> 00:29:19,640
अरे आप कैसे आ रहे पहले कैसे आ रहा है जिनको मैं पहले

413
00:29:19,640 --> 00:29:23,840
से जानता हूं आवश्यक नहीं कि उनके यहां का व्यक्ति भी वही निकले

414
00:29:23,840 --> 00:29:28,080
तो यहां तो जन्मना रहा है देखो जन्मना

415
00:29:28,080 --> 00:29:32,160
इस कंटेस्ट में तो नहीं बोल रहा जैसे आपको एक उदाहरण दे बताता बो मैं

416
00:29:32,160 --> 00:29:36,200
उदाहरण देके बताता हूं आपकी बा आप बात को घुमा रहे हैं जान बूझ के घुमा रहे मैं समझ रहा

417
00:29:36,200 --> 00:29:40,600
हूं आप देखिए ऐसा कुछ नहीं है ऐसा कुछ नहीं मैं आपको

418
00:29:40,600 --> 00:29:44,600
प्रैक्टिकली वहां पहुंचाना चाहता हूं कि जो जन्मना वर्ण

419
00:29:44,600 --> 00:29:50,600
व्यवस्था उसकी उपयोगिता क्या है मैं आपको प्र व पहुंचाना चाहता

420
00:29:50,640 --> 00:29:54,640
हूं देखि प्रैक्टिकली तो देखो मैं शास्त्र को ही प्रमाण मानता हूं

421
00:29:54,640 --> 00:29:58,640
भगवत गीता भागवत इससे होता है प्रमा आप से माने

422
00:29:58,640 --> 00:30:02,640
हर बार आपने आगे बढ़ा दी बात प्रमाण मेरे पास बहुत

423
00:30:02,640 --> 00:30:06,760
सारे है सुनिए ब्राह्मण का जने कितनी उम्र

424
00:30:06,760 --> 00:30:10,920
तक हो जाना चाहिए ब्राह्मण उचित तरीके से बताइए कहां लिखा

425
00:30:10,920 --> 00:30:15,040
है आपकी जानकारी उसका जब उप जब उसका उपनयन संस्कार होता

426
00:30:15,040 --> 00:30:18,360
तब होता है ना कौन स आयु तक हो जाना चाहिए आपने

427
00:30:18,360 --> 00:30:23,120
कहा 25 वर्ष तक हो जाना चाहिए गलत काहा गलत का

428
00:30:23,120 --> 00:30:27,320
बताइए कहां लिखा है ये अब

429
00:30:27,320 --> 00:30:31,560
इसका कोई स्पेसिफिक प्रूफ तो नहीं दिखा स ऐ छोटी छोटी चीज स्पेसिफिक प्रूफ

430
00:30:31,560 --> 00:30:36,200
मेरे पास है ना मनुस्मृति में लि प्रमाण

431
00:30:36,200 --> 00:30:40,280
शत्र प्रमाण बोल रहा हूं आ से 12 वर्ष के बीच में उपनयन हो जाना चाहिए ब्राह्मण

432
00:30:40,280 --> 00:30:44,520
का 11 से 22 वर्ष के बीच में उपनयन हो जाना चाहिए क्षत्रिय

433
00:30:44,520 --> 00:30:49,440
का 16 से 24 वर्ष की आयु के बीच में हो जाना चाहिए वैश्य का

434
00:30:49,440 --> 00:30:53,520
तो यह जो आयु आपने बताई है 25 वर्ष ये तो गलत बताइए आप

435
00:30:53,520 --> 00:30:58,080
क रहे आप शास्त्र प्रमाण को मानते हैं नहीं संस्कार की बात अरे

436
00:30:58,080 --> 00:31:02,320
उपन संस्कार की बात क क रहा उसके वर्ण को पहचानने की धारा आप ऐसा नहीं उप संस्कार

437
00:31:02,320 --> 00:31:06,720
करके आप बारबार ठे प क्यों जाते श जी

438
00:31:06,720 --> 00:31:10,920
बता अच्छा ण को पहचानने की बात बता द उसम लिखा

439
00:31:10,920 --> 00:31:15,000
है कि ब्राह्मण का जनेऊ आ से 12 तक में

440
00:31:15,000 --> 00:31:19,440
हो जाना चाहिए तो यहां तो उपनयन कैसे हो रहा है ब्राह्मण

441
00:31:19,440 --> 00:31:23,560
को पहचान केही तो हो रहा है जो ब्राह्मण होने जा रहा है उसी का तो उपन

442
00:31:23,560 --> 00:31:28,360
आ से 12 के बीच में कराएंगे नहीं नहीं देखिए ऐसा मैं क नहीं

443
00:31:28,360 --> 00:31:32,400
मान लो किसी का साल की उम तक उप ने शास्त्र

444
00:31:32,400 --> 00:31:33,400
प्रमाण

445
00:31:33,400 --> 00:31:37,520
जानता हूं आप शास्त्र को नहीं मानते मगर क्योंकि आपने कहा है तो मैं आपको शास्त्र

446
00:31:37,520 --> 00:31:41,640
रख रहा हूं सामने जी आप शास्त्र

447
00:31:41,640 --> 00:31:45,760
किसको कोट कर रहे व भी देखि रजोगुण तमोगुण पुराण है

448
00:31:45,760 --> 00:31:49,800
मनुम मनुस्मृति को रख रहे ठीक है मैं मानता हूं आपकी बात मैं भागवत

449
00:31:49,800 --> 00:31:54,240
को प्रमाण मानता हूं भगवत गीता को प्रमाण मानता हूं और वहा से आपको दिखा

450
00:31:54,240 --> 00:31:58,840
द साल की आयु तक हो जाना चाहिए ब्रहण भागवत

451
00:31:58,840 --> 00:32:03,080
खा आप चीज को आप चीज को डेविट कर रहे हैं आप चीज को ना अलग डायरेक्शन में ले जा रहे

452
00:32:03,080 --> 00:32:07,160
जी मेरे भाई अगर फेरे पढ़ रहे हैं तो यहां

453
00:32:07,160 --> 00:32:11,960
पर कौन सा मंत्र बोला जाएगा यह सारे मंत्र भागवत में नहीं है

454
00:32:11,960 --> 00:32:16,080
अगर फेरे पढ़ रहे हैं तो कौन सा मंत्र बोला जाएगा सारे मंत्र जो भगवत गीता में नहीं

455
00:32:16,080 --> 00:32:20,680
है इसलिए हमारे पास जो वैदिक वांगम बहुत बड़ा है

456
00:32:20,680 --> 00:32:24,960
जी तो ये वाला जो संस्कार है कि भाई यहां पर क्या होगा

457
00:32:24,960 --> 00:32:28,960
क्या नहीं होगा यह संस्कार मनुस्मृति में दिया गया अब आप भागवत को ला

458
00:32:28,960 --> 00:32:33,360
रहे तो भागवत को अगर ला रहे हो तो प्रमाण दो

459
00:32:33,360 --> 00:32:38,000
आप देखिए मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूं मान लो किसी का उपनयन संस्कार

460
00:32:38,000 --> 00:32:42,680
अभी आपके पास प्रमाण है क्या 25 वर्ष वाला भागवत से

461
00:32:42,680 --> 00:32:46,880
आप देखिए ऐसा प्रमाण मेरे पास भागवत प नहीं है पर मनुस्मृति के जिस वर्ष को आप कोट

462
00:32:46,880 --> 00:32:48,400
करके बोल रहे हैं अगर

463
00:32:48,400 --> 00:32:52,440
किसी का स्वभाव ब्राह्मण है तो उसका आज से आठ से 12 साल के बीच में उपन संस्कार

464
00:32:52,440 --> 00:32:56,480
करा दो इस बात को आप यर्स ल यानी

465
00:32:56,480 --> 00:33:00,480
कि उसम ये बताया गया ब्राह्मण जो घोषित होगा वो 12 वर्ष की आयु

466
00:33:00,480 --> 00:33:04,920
तक हो जाएगा मगर आप कह रहे 25 वर्ष तक हो सकता है वो कहां लिखा है

467
00:33:04,920 --> 00:33:09,120
सवाल यह नहीं है क्या करना वो अगला स्टेप है आप मुझे बताइए

468
00:33:09,120 --> 00:33:13,320
25 वर्ष तक ब्राह्मण घोषित हो जाएगा कहां लिखा

469
00:33:13,320 --> 00:33:17,560
है देखिए अब ऐसा कोई 25 वर्ष का मेरे पास कोई वर्ष

470
00:33:17,560 --> 00:33:21,880
नहीं है पर मेरे पास ऐसे बहुत सारे श्लोक है जि दिखा दूंगा इसीलिए

471
00:33:21,880 --> 00:33:26,200
कह रहा था जो आपकी वो लाइन है हम तो प्रमाणों पर चलते हैं शास्त्रों पर चलते हैं

472
00:33:26,200 --> 00:33:29,240
उसको थोड़ा साइड में रखिए

473
00:33:29,240 --> 00:33:33,320
ठीक है अभी हम लोग तर्क प ही बात कर लेते हैं कर करिए तर्क

474
00:33:33,320 --> 00:33:37,320
प बात करिए आपका प्रश्न था कहां पे था आपका प्रश्न हां प्रश्न यही

475
00:33:37,320 --> 00:33:41,480
है कि मैं घर से अगर निकल रहा हूं तो क्या किस

476
00:33:41,480 --> 00:33:45,480
पैरामीटर को मन में लेकर के निकलू कि मुझे कहां जाना है जहां से मुझे अपनी

477
00:33:45,480 --> 00:33:49,840
खोज शुरू करनी है ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय अथवा ये वैश

478
00:33:49,840 --> 00:33:53,840
अथवा शूद्र के लिए हां उसके नॉलेज में पहले से उसके स्वभाव से वो पहले से

479
00:33:53,840 --> 00:33:57,920
ही परिचित होना चाहिए अब मैं आपको एक उदाहरण देके बताता हूं मान लो मेरे को अपने घर में

480
00:33:57,920 --> 00:34:02,560
आपका जो परिचित होना चाहिए ना इसी में सारी बात है यही हम भी कहते हैं

481
00:34:02,560 --> 00:34:03,400
ये जो परिचित

482
00:34:03,400 --> 00:34:07,640
है ये जो जन्मना वर्ण व्यवस्था है ये यही है कि वो पहले से परिचित

483
00:34:07,640 --> 00:34:12,000
होना चाहिए अब मैं बताता ह हा जन्मना वर्ण व्यवस्था

484
00:34:12,000 --> 00:34:16,200
का मतलब है कि भाई हम जब ब्राह्मण को ढूंढने निकलेंगे तो ऐसे तो बहुत टाइम

485
00:34:16,200 --> 00:34:20,600
लगेगा तो क्या करें ब्राह्मण के घर जाते हैं जो नोन ब्राह्मण

486
00:34:20,600 --> 00:34:25,040
हो उसके घर जाते हैं तो वहां पर ज्यादा चांसेस है कि उसका बेटा भी ब्राह्मण

487
00:34:25,040 --> 00:34:29,560
जैसे कर्मों वाला निकल आए मगर नहीं निकला तो उसको तिरस्कार करेंगे

488
00:34:29,560 --> 00:34:33,720
यही जन्मना वस्था है की ब्रा हो तिरस्कार

489
00:34:33,720 --> 00:34:38,000
तिरस्कार करने के बाद उसको ब्राह्मण मानते य प्रश्न है

490
00:34:38,000 --> 00:34:42,000
ब्राह्मणो चित कर्मों से तिरस्कृत किया जाएगा मगर उसका जो

491
00:34:42,000 --> 00:34:46,240
टैग है जो उसको शरीर प्राप्त है ब्राह्मण का वो टैग नहीं हटेगा वो पथ

492
00:34:46,240 --> 00:34:49,200
ब्रहण

493
00:34:49,200 --> 00:34:53,560
है मत भाई साब मैं अभी हसा था क्या मैं भी हसा था

494
00:34:53,560 --> 00:34:57,800
आप प्रमाण कहीं नहीं दे पा रहे मैं हसा आपके ऊपर

495
00:34:57,800 --> 00:35:01,800
मैरिटी के साथ आपसे बात कर रहा हूं अगर मैं मैच्योरिटी के साथ आपसे बात कर रहा

496
00:35:01,800 --> 00:35:05,800
हूं तो बचकाना बिहेवियर मत करिए हा जी आप क्या रहे

497
00:35:05,800 --> 00:35:10,280
उसको ब्राह्मण ही मानूंगा कैसे मानेंगे ब्रा प्रमा

498
00:35:10,280 --> 00:35:14,280
द मैंने क्या कहा अगर मैरिटी के साथ आपके साथ पेश आ

499
00:35:14,280 --> 00:35:18,360
रहा हूं तो आप बचकाना बिहेवियर मत करिए ठीक है जी जी बोलिए

500
00:35:18,360 --> 00:35:22,440
बोलिए आपको लग रहा बचकाना मेरे को हसी आ ग आपकी बात सुनके बचकाना नहीं है फिर

501
00:35:22,440 --> 00:35:28,000
भाई बात उसी को बचकाना कह रहा हूं मत करिए व मुझे भी आ रही थ

502
00:35:28,000 --> 00:35:32,040
मैं आपका अपमान नहीं करना चाहता यहां पर इसलिए हां जीी हां जी हा

503
00:35:32,040 --> 00:35:36,160
ठीक है हा हां जी हां जी तो क्या

504
00:35:36,160 --> 00:35:39,240
कहते हैं ये

505
00:35:39,240 --> 00:35:41,520
हम

506
00:35:41,520 --> 00:35:45,880
ये कहां थे हां तो आपने

507
00:35:45,880 --> 00:35:50,080
जो कहा ना कि वो पहले से परिचित होना चाहिए यह जो लाइन है ना यही जन्मना

508
00:35:50,080 --> 00:35:54,320
लाइन है इसी में जन्मना का भाव छुपा है क्यों क्योंकि वो परिचित पहले

509
00:35:54,320 --> 00:35:58,640
से होना चाहिए क्या ये आवश्यक है कि परिचित का जो बेटा होगा वो सही होगा

510
00:35:58,640 --> 00:36:02,800
नहीं मगर एक शुरुआती पैरामीटर है कि खोज चालू करें

511
00:36:02,800 --> 00:36:04,200
तो कहां से करें

512
00:36:04,200 --> 00:36:08,360
जैसे कि घर से निकलते समय हम जो ताला

513
00:36:08,360 --> 00:36:12,560
लगाते हैं ना क अपने घर में यह आवश्यक नहीं

514
00:36:12,560 --> 00:36:16,880
है कि वहां पर चोरी नहीं होगी मगर व सुरक्षा का एक शुरुआती

515
00:36:16,880 --> 00:36:22,000
पैरामीटर है एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है

516
00:36:22,000 --> 00:36:26,240
इस इसी प्रकार से जो जन्मना वर्ण व्यवस्था है वो केवल इतनी

517
00:36:26,240 --> 00:36:30,400
मात्र है यदि हमको खोज स्टार्ट करनी है तो हम सड़क पर नहीं निकल

518
00:36:30,400 --> 00:36:34,400
जाए कि कॉलर पकड़ पकड़ के तू बता तेरे कर्म दिखा

519
00:36:34,400 --> 00:36:38,480
हमको कर्म चेक करने के लिए भी एक शुरुआती पैरामीटर चाहिए तो क्या

520
00:36:38,480 --> 00:36:43,000
है वो पैरामीटर कि भाई किसी ऐसे खानदान को ढूंढते हैं

521
00:36:43,000 --> 00:36:47,240
जो खानदान ब्राह्मण अगर हम ब्राह्मण को ढूंढने जा रहे हैं यही जन्मना वर्ण वस्था है

522
00:36:47,240 --> 00:36:51,680
अगर वहां पर वो ब्राह्मणो चित कर्म नहीं कर रहा होगा तो वो पतित ब्राह्मण

523
00:36:51,680 --> 00:36:56,040
है वो कर्म शंकर है वो कर्महीन है और यदि वो ब्राह्मण

524
00:36:56,040 --> 00:37:01,280
उचित कार्य कर रहा होगा तो वो हमारे लिए उपयोगी है जैसे

525
00:37:01,280 --> 00:37:05,280
गाय अगर दूध देना बंद कर देगी तो ऐसा नहीं है कि

526
00:37:05,280 --> 00:37:09,520
गाय को हम गाय नहीं कहेंगे ठीक है उसी प्रकार

527
00:37:09,520 --> 00:37:13,800
से उसी प्रकार से जो टैग है वो वही रहेगा बस व पतित

528
00:37:13,800 --> 00:37:18,040
हो जाएगा वकत हो जाएगा हिकत हो जाएगा ठीक है

529
00:37:18,040 --> 00:37:19,440
मेरे को कुछ बोलने दीजिए

530
00:37:19,440 --> 00:37:24,040
जी इसी परिपेक्ष में आपको बताता हूं सुनिए इसी का उदाहरण दे बताता हूं मान लो

531
00:37:24,040 --> 00:37:28,280
मेरे को पता है कि आम की जो आम का जो फल है वम की मिलेगा

532
00:37:28,280 --> 00:37:32,280
ठीक है मैं परिचित हूं कि मेरे को आम का फल आम की मंडी में मिलेगा ठीक

533
00:37:32,280 --> 00:37:36,360
है तो मैं मैं इससे परिचित हूं तो मैं आम की मंडी में जाऊंगा

534
00:37:36,360 --> 00:37:40,360
पर अगर मेरे को आम का फल कई और मिल रहा जो आम की मंडी में नहीं सब्जी मंडी में मिलता है मान

535
00:37:40,360 --> 00:37:44,680
लो तो क्या मेरे को सब्जी मंडी से आम प्राप्त नहीं हो सकता मेरा प्रय

536
00:37:44,680 --> 00:37:48,680
क्या हो सकता है हो सकता है मगर आप

537
00:37:48,680 --> 00:37:52,960
जो फल की सब्जी मंडी है वहां पर तब जाओगे जब आम की सब्जी मंडी

538
00:37:52,960 --> 00:37:57,800
आपके लिए सुलभ ना हो आपके जितना सुलभ

539
00:37:57,800 --> 00:38:02,200
सुलभ आपके पास अगर आम की मंडी है तो आपका जो स्टैंडर्ड

540
00:38:02,200 --> 00:38:06,560
प्रोटोकॉल है कि आम की मंडी में पहले जाए और अगर आम की मंडी

541
00:38:06,560 --> 00:38:10,880
आपके लिए सुलभ नहीं है यानी कि अगर इसको अपने उदाहरण से मिलाए अगर

542
00:38:10,880 --> 00:38:14,880
ब्राह्मण मर गए सारे दुनिया के तो फिर अब हरघर में जाकर के आप

543
00:38:14,880 --> 00:38:19,240
चेक करो कौन सा सही वर है मगर अभी ऐसात

544
00:38:19,240 --> 00:38:23,280
नहीं आ सुन लीजिए मेरी बात सुन लीजिए आपातकालीन

545
00:38:23,280 --> 00:38:27,960
धर्म को स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के रूप में यूज नहीं कर सकते

546
00:38:27,960 --> 00:38:32,440
अगर आप फल की सब्जी फल की मंडी में आप अगर जाएंगे तो तब जाएंगे

547
00:38:32,440 --> 00:38:34,680
जब आपके पास फल जो आम की मंडी

548
00:38:34,680 --> 00:38:38,760
है व सुलभ ना हो अन्यथा आपका प्राथमिकता यही होगी

549
00:38:38,760 --> 00:38:42,960
कि मैं भैया सीधे आम में जाऊ क्योंकि फल वाले में मुझे ढूंढना पड़ेगा

550
00:38:42,960 --> 00:38:47,640
देर लगेगी पहुंचना वहा तो आम ही आम है

551
00:38:47,640 --> 00:38:52,080
ठीक है तो यही यही जो है सुन लीजिए

552
00:38:52,080 --> 00:38:56,080
यही यहां पर भी है जो आप कह रहे हो व आपातकालीन स्थिति का

553
00:38:56,080 --> 00:39:00,160
है कि जब मेरे पास पास आम की मंडी है ही नहीं तो मैं

554
00:39:00,160 --> 00:39:04,640
घर से निकला और फल सब्जी मंडी में घुस गया और वहां पर मैं ढूंढने लगा हमम कहां है

555
00:39:04,640 --> 00:39:08,760
मगर अभी ऐसा नहीं है अभी ब्राह्मण है जीवित है क्षत्रिय है जीवित

556
00:39:08,760 --> 00:39:13,080
है परंपरा प्राप्त वैश जीवित है

557
00:39:13,080 --> 00:39:17,400
ठीक है और सुनिए इसमें एक बात और आती है

558
00:39:17,400 --> 00:39:21,400
कि चलो मान लो कि हमने फल में जाना शुरू कर दिया

559
00:39:21,400 --> 00:39:25,400
फल सब्जी मंडी में जाना शुरू कर दिया क्योंकि हमारी मजबूरी है या हमारी कोई

560
00:39:25,400 --> 00:39:29,440
व्यवस्था है हम लोग असमर्थ है आम तक जाने में आम की सब्जी मंडी थोड़ा

561
00:39:29,440 --> 00:39:33,840
दुर्लभ है और फल की मंडी थोड़ा सुलभ है तो हम क्या करेंगे

562
00:39:33,840 --> 00:39:38,760
जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है वो नहीं मना करेंगे जैसे कि

563
00:39:38,760 --> 00:39:42,960
किसी व्यक्ति को उसकी इंद्रियों के वशीभूत होकर के मद्रास

564
00:39:42,960 --> 00:39:46,960
पान करना पड़ रहा है मगर उसके पिता ने यही सिखाया है

565
00:39:46,960 --> 00:39:49,680
कि नहीं बेटा मदरा पान मत करना तो

566
00:39:49,680 --> 00:39:53,880
वशीभूत होने के कारण अगर उसको मदरा पान करना पड़ रहा है मगर वो प्रमाण बुद्धि

567
00:39:53,880 --> 00:39:58,320
है जो पिता की बात में उसको जब तक मना नहीं करेगा तो पिता के लिए

568
00:39:58,320 --> 00:40:02,480
वो जो पुत्र धर्म वाला कहलाएगा क्योंकि उसकी प्रमाण बुद्धि उसी

569
00:40:02,480 --> 00:40:07,440
में है जैसे महाभारत में एक श्लोक आया है

570
00:40:07,440 --> 00:40:12,160
कि हीन आचरण वाला श्रद्धावन हीन

571
00:40:12,160 --> 00:40:16,440
आचरण वाला श्रद्धा वान उससे बेहतर है

572
00:40:16,440 --> 00:40:20,680
जो अच्छे आचरण वाला अ श्रद्धा वान है उससे बेहतर

573
00:40:20,680 --> 00:40:24,800
है क्यों क्योंकि जो हीन आचरण कर रहा है उसकी

574
00:40:24,800 --> 00:40:28,880
प्रमाण बुद्धि किसम है उसको मालो है मैं जो कर रहा हूं

575
00:40:28,880 --> 00:40:33,240
ये गलत कर रहा हूं तो इसी प्रकार से जब आप अपनी

576
00:40:33,240 --> 00:40:37,520
असमर्थता जो आपका जो दोष है कि आप वहां नहीं जा रहे वो उपलब्ध

577
00:40:37,520 --> 00:40:41,640
नहीं जा रहे आप अपनी सुलभता के लिए यहां जा रहे हैं तो फिर इस बात

578
00:40:41,640 --> 00:40:45,800
को आप स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के रूप में खपत नहीं कर सकते कि हम

579
00:40:45,800 --> 00:40:50,160
यही सही है बगल में जाना ही सही है मेहनत करना सही नहीं है

580
00:40:50,160 --> 00:40:54,440
वो आपका चुनाव हो सकता है उसको आप सिद्धांत के रूप में प्रतिपादित

581
00:40:54,440 --> 00:40:58,440
नहीं कर सकते जी बिल्कुल अब मैं अपना तक र शिवा जी आपने बहुत

582
00:40:58,440 --> 00:41:03,160
अच्छा समझाया मेरे को समझ आया बहुत अच्छी चीज आपने बोला आपके तर्क के अनुसार

583
00:41:03,160 --> 00:41:04,680
ठीक है महा जहां तक मैं आपके

584
00:41:04,680 --> 00:41:08,800
तर्क को समझ पाया हूं आपका मतलब यह है कि अगर मैं सब्जी मंडी

585
00:41:08,800 --> 00:41:12,880
में जाकर आम के फल के खरी दू तो वह भी मैं कर सकता हूं वह

586
00:41:12,880 --> 00:41:17,520
तज नहीं है मैं ऐसा नहीं कि सब्जी मंडी से कभी आम खरीद ही नहीं सकता ऐसा आप मानते

587
00:41:17,520 --> 00:41:22,800
शास्त्रों के अनुसार तब है जब आपातकालीन स्थिति

588
00:41:22,800 --> 00:41:26,800
हो शास्त्रों के अनुसार वो स्थिति की अनुमति है मगर

589
00:41:26,800 --> 00:41:30,840
आप कालीन की है के जब ब्राह्मण नहीं मिल रहा

590
00:41:30,840 --> 00:41:35,280
है तो किसी क्षत्रिय क्षत्रिय को ढूंढा गया कौन है भाई ब्राह्मण के लिए उपयोगी

591
00:41:35,280 --> 00:41:39,760
हो सकता है ठीक है तो वह आपातकालीन स्थिति है

592
00:41:39,760 --> 00:41:44,000
जैसे की हमको एक एजाम ले की मान लीजिए

593
00:41:44,000 --> 00:41:48,360
हमको जो है फैक्ट्री की सुरक्षा चाहिए ठीक है अब फैक्ट्री

594
00:41:48,360 --> 00:41:52,760
की सुरक्षा करने के लिए जो ब्रीड है वह ज्यादा उपयोग में आती है रट

595
00:41:52,760 --> 00:41:57,760
वेलर ठीक है अब रट वेलर हमको नहीं मिल रहा है

596
00:41:57,760 --> 00:42:02,000
तो हम क्या करें रोड वेलर खत्म हो गए इस दुनिया से तो हम क्या करें

597
00:42:02,000 --> 00:42:06,880
हम पास में लेब्राडोर वाली लेब्राडोर दूसरा है दूसरी ब्रीड अवेलेबल है डोर

598
00:42:06,880 --> 00:42:11,000
अब हम व देख जी पहले तो आप मुझे

599
00:42:11,000 --> 00:42:15,840
बोलने नहीं देते ऊपर से आपका तर्क बहुत घुमा फिरा जलेबी की तरह घुमा रहे आप

600
00:42:15,840 --> 00:42:19,800
देखिए अगर मेरे पास रट वलर नहीं है तो मैं लेरा के पास जा

601
00:42:19,800 --> 00:42:23,840
रहा छोड़ दीजिए क्योंकि आप बोल रहे थे वो बोलिए अभी इसको बाद में

602
00:42:23,840 --> 00:42:27,840
ले देखिए मैं इससे बड़ा प्रसन्न हुआ जब आपने बोला कि

603
00:42:27,840 --> 00:42:32,080
भाई अगर मेरे को आम मेरे को सब्जी फल की मंडी से नहीं खरीदना है तो मैं सब्जी मंडी

604
00:42:32,080 --> 00:42:36,160
से भी खरीद सकता हूं ये आप मानते हैं ठीक है खरीदना नहीं है गलत बात बोल रहे

605
00:42:36,160 --> 00:42:40,280
हैं जब वो सुलभ नहीं है जब वो सुलभ नहीं

606
00:42:40,280 --> 00:42:44,400
है मतलब वो अवेलेबल नहीं है तब आप ऐसा कर सकते

607
00:42:44,400 --> 00:42:48,440
हैं शास्त्रों के अनुसार फिर भी अगर आप शास्त्रों के विरुद्ध जाकर के कर

608
00:42:48,440 --> 00:42:52,600
भी रहे हैं जबक वो अवेलेबल है तो फिर आपको यह कहना होगा कि भाई

609
00:42:52,600 --> 00:42:56,800
देखो शास्त्र तो यह कहते हैं मगर मैं अपनी मजबूरी में ऐसा कर रहा हूं जी

610
00:42:56,800 --> 00:43:01,000
नहीं ऐसा नहीं ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है देखिए

611
00:43:01,000 --> 00:43:05,000
अग अगर मेरे को सब्जी मंडी में बढ़िया आम मिलता है और फल की

612
00:43:05,000 --> 00:43:09,200
मंडी में खराब आम मिलता है भाई साहब तो मैं सब्जी मंडी से ही खरीदूंगा सब्जी

613
00:43:09,200 --> 00:43:13,320
मंडी से ही खरीदूंगा आप दोबारा आ जाते हैं दोबारा आ जाते हैं आप जब घर

614
00:43:13,320 --> 00:43:17,800
से बाहर निकलेंगे आपके पास आपको अभी नहीं पता है कि कहां पर जो है

615
00:43:17,800 --> 00:43:22,040
आम बढ़िया है आप चेक करेंगे ना जाकर के

616
00:43:22,040 --> 00:43:26,160
हां मैं चेक करूंगा कहां बढ़िया बिल्कुल दोनों जगह चेक करेंगे ना

617
00:43:26,160 --> 00:43:30,240
तो बिल्कुल करेंगे सामने आम भी है और फल जो मिश्रित

618
00:43:30,240 --> 00:43:35,120
फल की सब्जी मंडी दोनों है प्राथमिकता किसे देंगे

619
00:43:35,120 --> 00:43:39,200
प्राथमिक एक केवल आम की मंडी है और एक मिश्रित है किसको

620
00:43:39,200 --> 00:43:43,320
प्राथमिकता देंगे जो मेरे घर के पास होगा उसको दूंगा

621
00:43:43,320 --> 00:43:47,520
प्राथमिकता यानी सुलभ यानी अपना आराम देखेंगे हां

622
00:43:47,520 --> 00:43:51,520
अपना आराम देखूंगा और मैं जब कह रहा हूं दोनों बराबर की दूरी पर

623
00:43:51,520 --> 00:43:55,920
है तब प्राथमिकता किसको देंगे प्राथमिकता

624
00:43:55,920 --> 00:44:00,200
में वो फल की मंडी को दूंगा फिर फल की मंडी को देंगे आम की मंडी

625
00:44:00,200 --> 00:44:04,400
को नहीं देंगे पर हो सकता है कि वहां पर मेरे को सही आम ना मिले शिवांश जी देखिए

626
00:44:04,400 --> 00:44:08,560
मैं फिर आप ये तो फल में हो सकता है ना

627
00:44:08,560 --> 00:44:13,000
ये फल में नहीं हो [संगीत]

628
00:44:13,000 --> 00:44:17,120
सकता फल की मंडी में मैं बोल रहा हूं कि वहां पर सही आम क्या पता मुझे

629
00:44:17,120 --> 00:44:21,400
ना मिले तो मैं सब्जी मंडी से ले लूंगा मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब

630
00:44:21,400 --> 00:44:25,840
कि आपके सामने अब चलो तीन ले लेते हैं एक सब्जी मंडी है बराबर दूरी पर

631
00:44:25,840 --> 00:44:29,840
एक फल मंडी है बराबर दूरी पे एक आम की मंडी है बराबर दूरी प

632
00:44:29,840 --> 00:44:33,920
आप आम लेने के लिए प्राथमिकता किसको दोगे मैं आम की मंडी

633
00:44:33,920 --> 00:44:37,920
को दूंगा यही जन् बना है अगर वहां नहीं मिलता

634
00:44:37,920 --> 00:44:41,960
है तोब आप जो है सब्जी में जाएंगे वहां नहीं मिलता है फल में जा वो फल

635
00:44:41,960 --> 00:44:46,000
में जाएंगे या जो भी एक्स वाई जड जो आपका प्रोसेस करें मगर वहां पर

636
00:44:46,000 --> 00:44:50,200
प्राथमिक इसी प्राथमिकता को जन्मना वर्ण व्यवस्था कहते हैं

637
00:44:50,200 --> 00:44:54,480
जिस दिन सारे ब्राह्मण मर जाए जिस दिन सारे ब्राह्मण लुप्त

638
00:44:54,480 --> 00:44:58,640
हो जाए जन्म से और कर्म से दोनों जन्म

639
00:44:58,640 --> 00:45:03,120
और कर्म दोनों से यानी कि वो जन्म से भी ब्राह्मण हो और कर्महीन भी ना हो

640
00:45:03,120 --> 00:45:07,760
जिस दिन ऐसा हो जाए उस दिन ये प्रोटोकॉल लागू होगा यह आपातकालीन

641
00:45:07,760 --> 00:45:11,840
धर्म है इस आपातकालीन धर्म को आप जो है सामान्य

642
00:45:11,840 --> 00:45:16,000
स्थिति में लागू नहीं कर सकते और दूसरी बात आपको प्रचार तो यही

643
00:45:16,000 --> 00:45:20,280
करना होगा कि भाई वास्तविक धर्म क्या है हमको उस स्थिति को वापस

644
00:45:20,280 --> 00:45:24,920
लाना है जब जन्म से ब्राह्मण मिलने लगे जैसे कि

645
00:45:24,920 --> 00:45:29,080
गर्मी के महीने में हमको मालूम कि बहुत गर्मी लगने वाली

646
00:45:29,080 --> 00:45:33,080
है सर्दी के महीनों में हमको मालूम है कि बहुत

647
00:45:33,080 --> 00:45:37,120
सर्दी होने वाली है फिर भी हम सर्दी और गर्मी से बचने

648
00:45:37,120 --> 00:45:41,640
का उपाय करना बंद नहीं करते इसी प्रकार से आपातकालीन

649
00:45:41,640 --> 00:45:46,120
स्थिति में जो आपातकालीन धर्म आप अपना रहे हैं उसको अपनाते

650
00:45:46,120 --> 00:45:50,320
हुए भी वापस अपनी जो सही स्थिति है उसको लाने के लिए

651
00:45:50,320 --> 00:45:54,800
प्रयास करना बंद नहीं करते ठीक है शिवा जी आप सुनिए आपके

652
00:45:54,800 --> 00:45:58,880
हिसाब से मतलब अगर मैं सब्जी मंडी से खरीदता हूं तो मैं अपराधी हूं मैं

653
00:45:58,880 --> 00:46:03,680
धर्म के विपरीत कार्य कर आपका कहने का मतलब यही है मतलब मैं खरी नहीं सकता

654
00:46:03,680 --> 00:46:05,840
अगर कोई मे को गर्दन द

655
00:46:05,840 --> 00:46:10,480
आप अगर आपने खुद कहा है कि मैं जो है आम की उसम जाऊंगा

656
00:46:10,480 --> 00:46:14,880
मेरी प्राथमिकता ये है तो आप तो हमारी साइड आ गए आप पहले बोलो तो

657
00:46:14,880 --> 00:46:18,960
आपकी आपकी जो ये जो वो है ना क्या कहते कुत

658
00:46:18,960 --> 00:46:23,480
इसको दुनिया देखे पहले आप पहले बोलो के बराबर दूरी पर फल

659
00:46:23,480 --> 00:46:27,560
सब्जी और आम तीनों है मगर मैं फल में जाऊंगा मैं नहीं जाऊंगा

660
00:46:27,560 --> 00:46:31,560
ये बोलो दुनिया को दिखाओ दिखाओ बोलो कि मैं

661
00:46:31,560 --> 00:46:35,680
मैं फल में जाऊंगा क्योंकि मुझे अपनी बात को ऊंचा रखना है मैं आम

662
00:46:35,680 --> 00:46:40,000
में नहीं जाऊंगा इस दुनिया को दिखाइए बोलिए अरे भाई साहब

663
00:46:40,000 --> 00:46:44,000
मैं ये बोल रहा हूं कि मैं आम आपने बोला था कि मैं आम में जाऊंगा यही स्टैंडर्ड

664
00:46:44,000 --> 00:46:48,320
प्रोटोकॉल है नहीं मेरे को आम में ही जाना पड़ेगा

665
00:46:48,320 --> 00:46:52,440
इसका कोई अनिवार्यता है मुझे आम में ही जाना इसकी कोई अनिवार्यता है

666
00:46:52,440 --> 00:46:56,640
वैसे मैं आम में जाऊंगा पर अगर मैं सब्जी मंडी में जाकर आम खरीदता हूं तो इसमें क्या गलत है ये बताइए

667
00:46:56,640 --> 00:46:59,240
मुझे

668
00:46:59,240 --> 00:47:03,440
बता रहा हू मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं इसकी अनिवार्यता क्यों है

669
00:47:03,440 --> 00:47:09,240
वर्ण के आगे अगला शब्द क्या लगा हुआ है जिस टॉपिक पर हम बात कर रहे हैं

670
00:47:09,240 --> 00:47:13,600
आश्रम वन व्यवस्था व्यवस्था

671
00:47:13,600 --> 00:47:18,240
तो जब एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल जो हमें मिला हुआ है

672
00:47:18,240 --> 00:47:20,840
और हमारे पास फल की जो आम

673
00:47:20,840 --> 00:47:25,040
की जो मंडी है वो अवेलेबल है ठीक है उसके बावजूद

674
00:47:25,040 --> 00:47:29,080
भी यदि हम जानबूझकर उसमें जाएंगे

675
00:47:29,080 --> 00:47:33,400
सब्जी मंडी में और फल मंडी में तो हमारा टाइम पहले

676
00:47:33,400 --> 00:47:37,440
से निर्धारित है ज्यादा चांसेस है कि ज्यादा खर्च होगा हमारा

677
00:47:37,440 --> 00:47:41,840
समय हमारा श्रम ज्यादा खर्च होगा तो क्या होगा

678
00:47:41,840 --> 00:47:46,200
या आप मानते कि वहा से भी आ मिल सकता है मैं बहुत खुश हूं

679
00:47:46,200 --> 00:47:50,400
मानते अपनी लाइन पूरी करने दीजिए मुझे अपनी लाइन

680
00:47:50,400 --> 00:47:54,520
पूरी करने दीजिए तो जब ज्यादा खर्च होगा तो जो हम व्यवस्था बनाना चाहते

681
00:47:54,520 --> 00:47:58,720
हैं ना राम राज्य वाली हवा उतनी ही चलनी चाहिए

682
00:47:58,720 --> 00:48:03,400
जितनी हवा उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए

683
00:48:03,400 --> 00:48:07,440
पढ़ी आपने रामायण नहीं पढ़ी होगी मुझे मालूम है

684
00:48:07,440 --> 00:48:11,840
ज्यादातर आपके य भागवत और वो ब्रह्म समता और गीता

685
00:48:11,840 --> 00:48:16,600
य ये पाठ ज्यादा रामायण नहीं पढ़ते आप लोग कम पढ़ते हैं पड़ी होगी थोड़ी बहुत

686
00:48:16,600 --> 00:48:21,040
तो जो राम राज्य है ना हवा उतनी ही चलनी

687
00:48:21,040 --> 00:48:25,240
उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए यह सिस्टम

688
00:48:25,240 --> 00:48:29,440
आपके यह जो बचकानी हरकत करोगे कि आम की मंडी

689
00:48:29,440 --> 00:48:33,600
अवेलेबल है फिर भी हमारे मन कर रहा है क्य हमें तो उसको तोड़ना है व्यवस्था

690
00:48:33,600 --> 00:48:36,240
को उसी उसी विप्लव

691
00:48:36,240 --> 00:48:40,240
का नाम है आज का जो य अधर्म फैल रहा है उसी

692
00:48:40,240 --> 00:48:44,240
विपलव का नाम है जो गे सेक्स मैरिज हो रही है जो नास्तिक हो रहे

693
00:48:44,240 --> 00:48:48,280
हैं लोग उसी विप्लव का नाम है उसी के कारण क्योंकि मुझे फल की मंडी मगर

694
00:48:48,280 --> 00:48:52,560
मुझे उसका विरोध करना है वो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल प्राप्त है मगर उसको मुझे ब्रेक

695
00:48:52,560 --> 00:48:57,000
करना है उसी को विप्लव कहते हैं तब प्रलय आती है

696
00:48:57,000 --> 00:49:01,200
सुनामी आती है रामराज नहीं होता अगर मैं बोलू अगर मैं बोलू शिवांश

697
00:49:01,200 --> 00:49:05,320
सुनिए अगर मैं बोलू कि फल के मंडी में बीमारी फैल गई है फल के मंडी में मेरे को आम मिल

698
00:49:05,320 --> 00:49:09,320
ही नहीं रहा है वहा सारे आम खराब है कचड़े हो गए ये बात तो मैंने

699
00:49:09,320 --> 00:49:13,520
भी कहा कि जब मंडी बीमारी फैल गई यानी आम लुप्त

700
00:49:13,520 --> 00:49:17,560
हो गा आम लुप्त हो गया य पर य बात अभी ऐसे अभी

701
00:49:17,560 --> 00:49:21,680
ऐसा ही है समझ लीजिए अभी अभी का जो परिपेक्ष है वो ऐसा ही है ऐसा ही

702
00:49:21,680 --> 00:49:25,720
है आप मान लीजिए अच्छा अभी का जो परिपेक्ष है वो ऐसा ही है कि

703
00:49:25,720 --> 00:49:29,880
जन्म से कोई ब्राह्मण ही नहीं है ही नहीं सब शुद्र है

704
00:49:29,880 --> 00:49:34,360
सब शूद्र य राघवाचार्य जी कौन है आप

705
00:49:34,360 --> 00:49:40,360
राघवाचार्य जी को कोई प्रमाण नहीं मानता मैं राघवाचार्य

706
00:49:41,800 --> 00:49:45,800
कोने पूछा

707
00:49:45,800 --> 00:49:50,280
आपसे जन्म से सब शूद्र है जन्म से सभी शूद्र है ज

708
00:49:50,280 --> 00:49:55,080
उस अच्छा यह बताइए कृष्ण भगवान जन्म से क्या थे

709
00:49:55,080 --> 00:49:59,080
अरे भगवान को हमारे साथ जोड़ेंगे तो ऐसे कैसे चलेगा भाई

710
00:49:59,080 --> 00:50:03,240
साहब भगवान तो नित्य मुक्त व्यक्ति है और हम नित्य बध है तो आप भगवान को मत लाइए

711
00:50:03,240 --> 00:50:07,560
भगवान का कटेक्स मत दीजिए भगवान चलो ठीक है राम को लाएंगे रामो

712
00:50:07,560 --> 00:50:11,680
विग्रहवां धर्म राम ने जैसा किया वैसा हमें करना

713
00:50:11,680 --> 00:50:15,160
है अब राम कौन

714
00:50:15,160 --> 00:50:19,240
थे राम कौन थे राम परम भगवान है परम भगवान है वो और कौन

715
00:50:19,240 --> 00:50:23,320
है अरे भाई राम ने जैसा जैसा किया हमको करना है यानी कि

716
00:50:23,320 --> 00:50:27,760
राम ने मानव रूप में मर्यादा की स्थापना की मनुष्य रूप में कर

717
00:50:27,760 --> 00:50:32,520
तो राम जी का तो हम लोग जीवन देखेंगे ना उदाहरण के लिए

718
00:50:32,520 --> 00:50:37,760
हा देख सकते हैं देख सकते हैं हा तो बताइए राम कौन थे जन्म

719
00:50:37,760 --> 00:50:41,920
से राम जन्म से क्षत्रिय परिवार में पैदा हुए थे वो क्षत्रिय

720
00:50:41,920 --> 00:50:47,920
थे गु भी उन बोलो उनको

721
00:50:49,480 --> 00:50:53,480
अरे शूद्र होते हैं अरे मैं अभी कलयुग की बात कर रहा

722
00:50:53,480 --> 00:50:57,920
हूं आप बात कर रहे हैं सतयुग की आप देखिए मैं कलयुगी अभी अभी के कांटेस्ट

723
00:50:57,920 --> 00:51:02,000
में बात करें ना आप या तो भगवान प ले जाते एक्स्ट्रीम चले जाते बकुल एक् च जाते

724
00:51:02,000 --> 00:51:06,080
मान कलयुग में जो राम ने सिखाया वो नहीं करना राम का

725
00:51:06,080 --> 00:51:10,120
उदाहरण नहीं लेना है नहीं ऐसा तो नहीं बोला मैंने पर राम ने

726
00:51:10,120 --> 00:51:14,840
कहीं नहीं सिखाया कि कोई ब के घर में पैदा ना क्यों कर रहे हो

727
00:51:14,840 --> 00:51:18,840
पर राम जी ने ऐसा कहीं नहीं सिखाया कि जहां पर ब्राह्मण जो मान लो कोई वैश्य

728
00:51:18,840 --> 00:51:22,960
परिवार में कोई पैदा हुआ उसको ब्राह्मण नहीं क्या है कोई एक बात चल रही होती

729
00:51:22,960 --> 00:51:27,200
आप खुक जाते दूसरे टॉपिक पर प्लीज मैं आपसे पूछा राम जी

730
00:51:27,200 --> 00:51:31,400
जन्म से कौन थे बोलिए राम जी जन्म

731
00:51:31,400 --> 00:51:35,520
थे राम जी वैसे तो राम जी परम भगवान है उनको हम अपने साथ कंपेयर नहीं कर सकते लीला

732
00:51:35,520 --> 00:51:39,560
के लिए वो क्षत्रिय थे लीला के लिए ली िक स्वरूप है वो उनका आध्यात्मिक

733
00:51:39,560 --> 00:51:43,560
स्वरूप है मानवो चित मानव दृष्टि से राम कौन

734
00:51:43,560 --> 00:51:47,800
थे जन्म से लीला के मानव

735
00:51:47,800 --> 00:51:52,360
मत बोलिए लीला की दृष्टि से वो क्षत्रिय थे लीला की दृष्टि से अब आपको पता कि जो

736
00:51:52,360 --> 00:51:57,080
मनुष्य लीला मनुष्य लीला भगवान कैसे मनुष्य हो

737
00:51:57,080 --> 00:52:01,200
जिसका हमें अनुकरण करना है

738
00:52:01,200 --> 00:52:04,680
जिसका हमें अनुकरण करना है ठीक है

739
00:52:04,680 --> 00:52:09,040
जी जी भगवान राम का जो शरीर है भगवान राम का जो शरीर है सच्चिदानंद

740
00:52:09,040 --> 00:52:13,120
है तो लीला के हिसाब से चलो आप बोल देते वो क्षत्रिय थे ठीक है

741
00:52:13,120 --> 00:52:17,480
क्त्र यानी की जन्म से सब लोग शूद्र नहीं होते

742
00:52:17,480 --> 00:52:21,760
अरे आप भगवान के कांटेस्ट में अभी कलयुग की बात कर रहा हूं न

743
00:52:21,760 --> 00:52:27,000
उनकी बात कर रहा हूं जिनके अनुसार हमें जीवन जीना है रामो विग्रहवां

744
00:52:27,000 --> 00:52:31,120
धर्म वो हमारे लिए एग्जांपल है अभी

745
00:52:31,120 --> 00:52:35,400
आप मुझे बताइए वो जन्म से शूद्र थे कि नहीं थे नहीं

746
00:52:35,400 --> 00:52:39,440
थे हा तो य जो जन्म शूद्र

747
00:52:39,440 --> 00:52:43,680
वाला लोक है इसका अर्थ यह होता है कि जो जन्म

748
00:52:43,680 --> 00:52:47,760
से होता है वो शूद्र वत होता है शूद्र ही नहीं होता सुन लीजिए

749
00:52:47,760 --> 00:52:51,880
सुन लीजिए सुन लीजिए जो जन्म से होता

750
00:52:51,880 --> 00:52:56,040
है वो शूद्र वत होता है वो शूद्र ही नहीं होता जैसे की

751
00:52:56,040 --> 00:53:00,400
जैसे किसी व्यक्ति ने पशु पशु वाला कार्य

752
00:53:00,400 --> 00:53:05,080
किया ठीक है रमना पशु भी समाना और

753
00:53:05,080 --> 00:53:09,080
जिसका गुरु नहीं वह पशु है यह शास्त्र में लिखा है तो क्या उसकी

754
00:53:09,080 --> 00:53:13,160
योनि भी पशु की हो गई नहीं वह

755
00:53:13,160 --> 00:53:17,160
पशु वत है पशु वत उसकी योनि मनुष्य की ही

756
00:53:17,160 --> 00:53:19,840
रहेगी इसी प्रकार से जन्म से सभी

757
00:53:19,840 --> 00:53:23,880
लोग शूद्र वत होते हैं जो उसकी योनि है जो उसका शरीर है

758
00:53:23,880 --> 00:53:27,920
वो वही रहेगा अच्छा शिवा जी आप तो

759
00:53:27,920 --> 00:53:32,320
तर्क तो आपने बहुत सारे दे दिए देखो आप कोई एक मटेरियल एजाम को लेकर सिद्धांत

760
00:53:32,320 --> 00:53:36,720
को स्थापित नहीं कर सकते आम का एपल लेले

761
00:53:36,720 --> 00:53:40,800
सिद्धांत को स्थापित कर रहे हमने आपसे बहुत सारे प्रमाण मांगे आपकी जोरी

762
00:53:40,800 --> 00:53:46,800
कल्पना है उसके लिए आपने प्रमाण नहीं दिया हमने प्रमाण दिए

763
00:53:47,680 --> 00:53:51,920
आपने आपने बताया 2 साल की आयु तक ब्राह्मण को घोषित

764
00:53:51,920 --> 00:53:56,440
किया जा सकता है जबक प्रमाण य कहता है से की आयु के बाद

765
00:53:56,440 --> 00:54:01,080
ब्राह्मण घोषित नहीं किया जाएगा आप

766
00:54:01,080 --> 00:54:05,160
होने का है और उसके बाद और तो और आप तो कह रहे हो आगे भी बदल सकता है वो

767
00:54:05,160 --> 00:54:09,880
प्रमाण दिखाइए हमारे पास प्रमाण है कि आ से 12 के बाद कुछ नहीं

768
00:54:09,880 --> 00:54:14,000
जी प्रमाण में दिखाता हूं ठीक है प्रमाण आपसे आप चलो अब बात आ

769
00:54:14,000 --> 00:54:18,360
बहुत हो गया तर्क और बहुत हो गया यह सब न्याय चीज आप देखिए अब हम प्रमाण पर आते हैं

770
00:54:18,360 --> 00:54:22,480
पर प्रमाण लाने से पहले मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूं आप ध्यान से सुनिए प्रश्न

771
00:54:22,480 --> 00:54:26,680
को दे दीजिए मेरे को आज कोई व्यक्ति मिलता है जो म

772
00:54:26,680 --> 00:54:31,080
परिवार में पैदा हुआ है शूद्र भी छोड़ दीजिए मल परिवार में पैदा हुआ है

773
00:54:31,080 --> 00:54:35,000
है ना अगर वो म ठीक है पर उसका गुण ब्राह्मणों वाला है उसका

774
00:54:35,000 --> 00:54:39,000
आदर्श उसका जो उसका जो करने का तरीका है वो ब्राह्मणों वाला है तो क्या मैं

775
00:54:39,000 --> 00:54:43,160
उसको गुरु बना सकता हूं मैं आपसे मैं आपसे इसीलिए पूछ रहा हूं

776
00:54:43,160 --> 00:54:47,320
कि कितनी देर तक किसी को वच करने के बाद यह तय करेंगे कि हा

777
00:54:47,320 --> 00:54:52,280
इसको हम लोग ब्राह्मण मान सकते हैं बताइए मैं देखूंगा अरे

778
00:54:52,280 --> 00:54:56,440
आप करेंगे हो सकता है वो जाकिर नायक जैसा कोई दल बदलू हो

779
00:54:56,440 --> 00:55:00,440
पया हो जो आपको मूर्ख बनाने आया है तो आप मुझे बताइए कि

780
00:55:00,440 --> 00:55:04,480
उसके गुण और कर्म और स्वभाव को आप कितनी देर तक वच करेंगे जिसके

781
00:55:04,480 --> 00:55:08,960
बाद ये डिसाइड हो जाएगा कि हां इसको जो है ब्राह्मण माना जा सकता

782
00:55:08,960 --> 00:55:13,040
है वो जितना मेरे को कविंस होने में लगेगा जितना टाइम

783
00:55:13,040 --> 00:55:17,120
मुझे कविंस होने में लगेगा मतलब इसमें कोई शास्त्र प्रमाण नहीं

784
00:55:17,120 --> 00:55:21,320
है जो आप कह रहे हैं इसका शास्त्र प्रमाण

785
00:55:21,320 --> 00:55:25,440
है कि वो गुरु बन सकता है वो ब्राह्मण सुनिए पहली बात

786
00:55:25,440 --> 00:55:29,480
किसी का जो ण है व कोई भी घोषित कर सकता है इसका

787
00:55:29,480 --> 00:55:35,480
कोई शास्त्र प्रमाण नहीं

788
00:55:36,720 --> 00:55:41,000
दूसरी मिनट दूसरी बात उसका वण जो है किस आयु

789
00:55:41,000 --> 00:55:45,000
तक घोषित हो सकता है इसका कोई वो नहीं अब तीसरी बात आपके

790
00:55:45,000 --> 00:55:49,000
पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि अगर व्यक्ति की अपनी इच्छा

791
00:55:49,000 --> 00:55:53,040
है उसको 10 मिनट देखे या एक घंटा दे यही

792
00:55:53,040 --> 00:55:57,320
तो होता है विपलव का कारण आप आपने मन चाहा

793
00:55:57,320 --> 00:56:01,360
आपको कोई भा गया कि भैया मैंने तोसे 15 मिनट देखा 15 मिनट में मुझे

794
00:56:01,360 --> 00:56:05,480
छत्रिया की फीलिंग आ गई मैंने सेसे एक घंटा देखा मेरे को जो

795
00:56:05,480 --> 00:56:09,720
ब्राह्मण की फीलिंग आ गई मैंने उसको 15 मिनट देखा शूद्र की फीलिंग आ गई आपकी

796
00:56:09,720 --> 00:56:13,840
फीलिंग के अनुसार धर्म चलता है है ना शास्त्र पर नहीं चलता

797
00:56:13,840 --> 00:56:17,920
है अच्छा आप धर्म को ऐसे डिसाइड करेंगे अरे आप तो

798
00:56:17,920 --> 00:56:20,440
एक ऐसा हाइपोथेटिकल

799
00:56:20,440 --> 00:56:26,440
केसने प्रश्न का उत्तर नहीं दिया आपने मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया

800
00:56:27,040 --> 00:56:31,040
किनी देर तक एक मिनट कितनी देर तक किसी को वच करने

801
00:56:31,040 --> 00:56:35,320
के बाद ये डिसाइड हो जाएगा कि वो ब्राह्मण है और फिर ब्राह्मण

802
00:56:35,320 --> 00:56:39,600
उचित कर्म भी करना है जैसे आपको देखना है तो ब्राह्मणो चित फर आप ब्राह्मणो

803
00:56:39,600 --> 00:56:44,080
चित कर्म भी उसका करवाएंगे

804
00:56:44,080 --> 00:56:48,200
हां अब ऐसा कोई टाइम देके थोड़ी बता सकते हैं इसमें कि कितने देर तक देखना

805
00:56:48,200 --> 00:56:52,240
भाई साहब आप कैसे यहां प ऐसा हाइपोथेटिकल सा केस लेके आप बात करें मैं शास्त्र प्रमाण दिखाने के

806
00:56:52,240 --> 00:56:57,000
तैयार हूं मैंने आपसे प्रश्न पूछा उसका उत्तर नहीं दिया

807
00:56:57,000 --> 00:57:01,000
एक मिनट रुक जाइए रुक जाइए एक मिनट एक मिनट रुक जाइए विराम ले लीजिए थोड़ा सा एक मिनट हां

808
00:57:01,000 --> 00:57:07,000
जी हां

809
00:57:29,680 --> 00:57:33,680
बोलिए हा जी मैंने पहली बात तो आपसे जो

810
00:57:33,680 --> 00:57:38,040
प्रश्न पूछा उतर नहीं दिया प्रश्न के परर एक और प्रश्न दे दिया मेरे को वा

811
00:57:38,040 --> 00:57:44,040
ठीक है प्र मैं समझ श जी आपकी बात को

812
00:57:48,640 --> 00:57:52,840
प्रमाने उदाहरण दिया था उसम आपने यह नहीं बताया कि मैं अगर किसी

813
00:57:52,840 --> 00:57:57,400
को एक घंटा डिसाइड करने के बाद एक साल डिसाइड करने के बाद

814
00:57:57,400 --> 00:58:01,520
पूरा जन्म डिसाइड करने के बाद अगर किसी को गुरु बनाना चाह तो बना सकता हूं कि नहीं

815
00:58:01,520 --> 00:58:05,800
आपने मुझे ये चीज नहीं बताई ये मिसिंग है जब ये बताएंगे तो मैं आपको

816
00:58:05,800 --> 00:58:09,920
बताऊंगा आप कारण बताइए उसका आप उसको ब्राह्मण जो मान रहे

817
00:58:09,920 --> 00:58:14,000
हैं वो कितनी देर तक उसके बाद मान रहे हैं अरे

818
00:58:14,000 --> 00:58:18,400
जब तक मेरे को उसम ब्राह्मण के गुण नहीं दिख रहे वहां प जो अगर ब्राह्मण के गुण है तो वो स्वाभाविक दिखाएगा

819
00:58:18,400 --> 00:58:22,760
ना तो इसका मतलब कौन ब्राह्मण है कौन वैश्य है कौन क्षत्रिय

820
00:58:22,760 --> 00:58:26,880
पर्टिकुलर अलग-अलग लोगों की फीलिंग के आधार पर तय होगा

821
00:58:26,880 --> 00:58:31,040
किसको किस ब अरे ब्राह्मण के क्या कर्तव्य है क्षत्रिय

822
00:58:31,040 --> 00:58:35,280
के क्या कर्तव्य है वश्य का क्या कर्तव्य है शूद्र का क्या कर्तव्य है भगवत गीता में लिखा है जो व्यक्ति

823
00:58:35,280 --> 00:58:38,560
जिस कर्तव्य को कर रहा

824
00:58:38,560 --> 00:58:43,440
है वो कर्तव्य कितनी देर तक देखने

825
00:58:43,440 --> 00:58:44,800
पड़ेंगे उन

826
00:58:44,800 --> 00:58:48,800
कर्तव्यों को कितनी देर तक देखना पड़ेगा अगर कोई

827
00:58:48,800 --> 00:58:52,800
व्यक्ति आपके सामने ब्राह्मण बनना चाहता है नकली वो किसी

828
00:58:52,800 --> 00:58:56,880
फ्रॉड करने आया है तो वो एक घंटे तक ब्राह्मण ऐसे कर्म कर

829
00:58:56,880 --> 00:59:01,320
सकता है आपके सामने दो घंटे तक भी कर सकता है

830
00:59:01,320 --> 00:59:05,600
आपके सामने एक दिन तक भी कर सकता है आपके सामने तो

831
00:59:05,600 --> 00:59:09,920
निश्चित पैरामीटर बताइए कि किसी के कर्तव्य या आचरण

832
00:59:09,920 --> 00:59:15,920
कितनी देर तक देखने हैं प्रमाण बताइए

833
00:59:16,280 --> 00:59:20,280
आप आप देखिए इसका अ स्पेसिफिक प्रमाण मेरे पास नहीं होगा जब

834
00:59:20,280 --> 00:59:24,360
तक मैं कन्विंस्ड नहीं होता जब तक देखता नहीं उसके आचरण में ना भाई साहब इसमें जब तक

835
00:59:24,360 --> 00:59:28,440
उसके आचरण में नहीं देखता मैं उसके आचरण देखे जैसे मान लो कि हमने कहा

836
00:59:28,440 --> 00:59:32,560
कि वो राम बोलता हो अब वो दवे फ्रड करने आया है मैं

837
00:59:32,560 --> 00:59:38,560
आया हूं आपके पास फ्रड करने देखि आप तो ऐ बात को

838
00:59:40,160 --> 00:59:44,640
ले पू डिस आपकी बात समझ रही है पूरी डियस ऐसे बेतक

839
00:59:44,640 --> 00:59:48,680
वाली बात कर रहे हैं किसी एक चीज को बना के बस वही बताइए वही बताइए

840
00:59:48,680 --> 00:59:52,720
वही बताइए वही बता क्या समझ रही है भाई साहब सुनिए ऑडियंस क्या

841
00:59:52,720 --> 00:59:56,840
समझ रही है क्या नहीं समझ रही वो तय कर लेगी आप अपनी बात बताइए आप

842
00:59:56,840 --> 01:00:00,920
प्रमाण दिखाइए कि 25 साल की आयु के बाद भी ब्राह्मण कोई

843
01:00:00,920 --> 01:00:05,320
व्यक्ति बन सकता है 25 साल तक मैंने आपको प्रमाण मनुप से दे दिया

844
01:00:05,320 --> 01:00:09,360
आप मेरे को प्रमाण दिखाइए आप मेरे को प्रमाण दिखाइ कोई शूद्र घर में

845
01:00:09,360 --> 01:00:13,720
पैदा हुआ है तो व ब्राह्मण से श्रेष्ठ हो सकता है कि नहीं हो सकता है मैं बोल रहा हूं हो सकता है

846
01:00:13,720 --> 01:00:17,800
हो सकता है बकल बिल्कुल अगर वो भगवत भक्त है तो व श्रेष्ठ हो

847
01:00:17,800 --> 01:00:22,200
सकता है उसकी उपयोगिता ज्यादा हो सकती है समाज में अगर एक ब्राह्मण

848
01:00:22,200 --> 01:00:26,280
है जो अपने कर्मों से हीन हो गया और एक शूद्र है जो अपने क को

849
01:00:26,280 --> 01:00:30,440
यथावत कर रहा है भगवत भक्त भी है तो व श्रेष्ठ क्यों नहीं माना जाए मगर

850
01:00:30,440 --> 01:00:34,600
उसको ब्राह्मण वाले क्या वो गुरु दीक्षा दे सकता है अगर कोई शूद्र

851
01:00:34,600 --> 01:00:38,800
परिवार में पैदा हुआ पर उसके गुण ब्राह्मणों वाले हैं भगवत भक्त क्या व गुरु

852
01:00:38,800 --> 01:00:43,000
बन के ब्राह्मणों को दीक्षा दे सकता है इसका आसर

853
01:00:43,000 --> 01:00:47,120
नहीं देंगे इसका उत्तर नहीं देने वाले इसका उतर नहीं आपको इसका उत्तर दूंगा

854
01:00:47,120 --> 01:00:51,320
ना मैं आपको इसका उत्तर दूंगा मगर मुझे आप ये बताइए कि उसके जो

855
01:00:51,320 --> 01:00:55,160
कर्म है वो ब्राह्मणों वाले है ये हम कितनी देर तक देखने के बाद डिसाइड

856
01:00:55,160 --> 01:00:59,280
करेंगे और इसका एक ही चीज केना आप एक

857
01:00:59,280 --> 01:01:03,480
ही पूछ को लेके बैठ गए बस पहले ये बताइए ये बता कर रहे हो जो

858
01:01:03,480 --> 01:01:07,720
आपने सवाल किया था मैंने तभी जवाब दिया था आप मुझे निश्चित पैरामीटर तो बताओ

859
01:01:07,720 --> 01:01:12,000
भाई मेरे को अगर किसी को कोई शूद्र घर में जन्मा है और उसको

860
01:01:12,000 --> 01:01:17,000
ब्राह्मण के रूप में स्वीकार करना है तो मैं उसको कितनी देर तक चेक

861
01:01:17,000 --> 01:01:21,160
करूंगा आपने बोला कि अगर कोई भगवत भक्त शूद्र के घर में पैदा होता

862
01:01:21,160 --> 01:01:25,240
तो आप कितनी देर तक चेक करेंगे भगवत भक्त है आप बता सकते श जी कितनी देर तक चेक करेंगे कि वो भगवत

863
01:01:25,240 --> 01:01:29,280
भक्त है कितने देत चक कर भगत हो सता ह कृष्ण हरे कृष्ण कर रहा

864
01:01:29,280 --> 01:01:33,880
है जैसे अगर वो हरे कृष्ण हरे कृष्ण कर रहा है तो हा वो भगवत भक्त है

865
01:01:33,880 --> 01:01:38,120
इसलिए यहां पर इसलिए तुरंत कर लिया क्योंकि हमें उसको सेंसिटिव

866
01:01:38,120 --> 01:01:42,520
मैटर्स में उपयोग में नहीं लेना है वो भगवत भक्त है उसके स्वांता

867
01:01:42,520 --> 01:01:46,760
सुखाय के लिए वो भगवत भक्त है अपने मोक्ष

868
01:01:46,760 --> 01:01:51,240
के लिए अपने उधार के लिए हमें उसको अपने किसी सेंसिटिव

869
01:01:51,240 --> 01:01:55,280
मैटर्स में इवॉल्व नहीं करना है इसलिए हम तुरंत मान लेंगे हां भगवत

870
01:01:55,280 --> 01:01:59,800
भक्त है जैसे कि आज भी राष्ट्रपति

871
01:01:59,800 --> 01:02:04,080
इत्यादि की जो सिक्योरिटी होती है व यह देख कर के देखी

872
01:02:04,080 --> 01:02:10,080
जाती है कि इसके दूर दूर रिश्तेदारी में कोई कभी जेल ना गया

873
01:02:10,320 --> 01:02:14,440
हो एक मिनट भाई साहब अब अगर किसी के खानदान में कोई

874
01:02:14,440 --> 01:02:19,160
जेल चला गया इसका मतलब य क्या वो क्रिमिनल है

875
01:02:19,160 --> 01:02:23,600
ऐसा नहीं बोला मगर मगर जब सेंसिटिव मैटर्स में जब सेंसिटिव

876
01:02:23,600 --> 01:02:28,560
मैटर्स में किसी को इवॉल्व करना होता है तो हम उसको अच्छे से चेक करेंगे

877
01:02:28,560 --> 01:02:32,720
और अगर सेंसिटिव मैटर्स में इवॉल्व नहीं करना है तो हम कोई दिक्कत नहीं है

878
01:02:32,720 --> 01:02:36,760
भगवत है जा आपके कहने का मतलब हमें पता नहीं हम नहीं जानते तो

879
01:02:36,760 --> 01:02:40,960
हमें क्या करना हम नहीं जानते तो हमें क्या करना मैं यही बोल रहा हूं अगर आप ये मानते

880
01:02:40,960 --> 01:02:45,080
हैं कि वो भगत भक्त है वो भक्ति करके मुक्त हो सकता है तो

881
01:02:45,080 --> 01:02:49,160
इसमें क्या दिक्कत है वो जनू पहन के संन्यास धारण करे उसमें क्या दिक्कत है आप बताइए

882
01:02:49,160 --> 01:02:53,160
ना क्या दिक्कत हैम दिक्कत ये है कि जब हम उसका भगवत भक्त

883
01:02:53,160 --> 01:02:57,720
जब हम उसको भगवत भक्त के रूप में स्वीकार कर रहे हैं मगर पिक पार्टिकुलरली

884
01:02:57,720 --> 01:03:01,800
अपने य की जो ऑथराइज सीट है या ऑथराइज जो हमारी जगह है वो

885
01:03:01,800 --> 01:03:05,800
उसके हवाले नहीं कर रहे हैं तो हम उसको क्या कहते प्रायोरिटी से

886
01:03:05,800 --> 01:03:09,920
मान सकते बक्त है मगर जब उसको इवॉल्व करना होगा तो हम

887
01:03:09,920 --> 01:03:13,920
उसे अच्छे से चेक करना होगा कि जाकिर यक जो है हरे कृष्ण का जाप कर

888
01:03:13,920 --> 01:03:17,920
करके सेद लगाने तो नहीं आया है अब मैं आपको प्रमाण

889
01:03:17,920 --> 01:03:21,920
दिखाता हूं चलो आइए प्रमाण प आते हैं प्रमाण प आ बात आई अल्टीमेटली प्रमाण

890
01:03:21,920 --> 01:03:25,400
प ही आई है ना अल्टीमेटली तो प्रमाण प आ गया आपके सारे तक

891
01:03:25,400 --> 01:03:31,400
जो है सि हो गए

892
01:03:33,400 --> 01:03:39,400
औरक आपका गलत है आप

893
01:03:40,760 --> 01:03:45,040
गलमा कितनी बार मना किया आप अपनी मना कपित

894
01:03:45,040 --> 01:03:48,080
दुनिया

895
01:03:48,080 --> 01:03:51,960
को शिवांश जी मैं प्रमाण दिखाने को तैयार हूं

896
01:03:51,960 --> 01:03:56,080
कोई शूद्र में घर में पैदा हुआ तो ब्राह्मण को दीक्षा दे सकता है सन्यास धारण कर सता

897
01:03:56,080 --> 01:03:58,520
है मैं प्रमाण दिखाने को तैयार हूं दिखाइए

898
01:03:58,520 --> 01:04:02,720
दिखाइए ठीक है जी अब देखिए

899
01:04:02,720 --> 01:04:06,760
मैं स्क्रीन शेयर कर पा कर सकता हूं य पर शिवांश

900
01:04:06,760 --> 01:04:12,760
जी अगर आपको कोई ऑप्शन दिख रहा हो तो [संगीत]

901
01:04:14,840 --> 01:04:19,120
करिए य पर रिकॉर्डिंग आ रहा है नहीं आ रहा स्क्रीन का कोई शेयर नहीं आ रहा है

902
01:04:19,120 --> 01:04:23,280
आप मुझे बता दीजिए कहां पर लिखा है अब

903
01:04:23,280 --> 01:04:27,800
देखिए क्योंकि मैं गड़िया वैष्णव हूं ठीक है आप

904
01:04:27,800 --> 01:04:32,040
देखिए प्रमाण दिखाइएगा अपनी मान्यता नहीं शास्त्र

905
01:04:32,040 --> 01:04:36,200
काही प्रमाण दिखा रहा हं चैतन्य तामृत को शास्त्र प्रमाण मानता चैत

906
01:04:36,200 --> 01:04:40,280
चरता मत सरियन ग्रंथ है गीता

907
01:04:40,280 --> 01:04:44,400
भागवत पुराण यह सब दिखाइए अच्छा शिव पुराण भी तो वैसे

908
01:04:44,400 --> 01:04:49,280
शक् है फिर जो गणेश पुराण है

909
01:04:49,280 --> 01:04:53,560
क्योंकि शिव पुराण की प्रामाणिकता भागवत पुराण में भी दी गई है

910
01:04:53,560 --> 01:04:57,960
देवी भागवत में भी दी गई है चैत की प्रमाणिकता कहा दी गई है

911
01:04:57,960 --> 01:05:02,040
बताइए अगर आप अगर आप प्रमाणिकता की बात करते हैं तो ऐसे शास्त्र में बोला

912
01:05:02,040 --> 01:05:07,000
गया कि शिव पुराण तो तमोगुण पुराण है तो ऐसे मनुष्य के लिए जो रण करते हैं

913
01:05:07,000 --> 01:05:11,000
शास्त्र में प्रमाण दिखा सकता हूं जिसम बोला गया है देखो

914
01:05:11,000 --> 01:05:13,680
हम वैष्णव लोग हम शिव पुराण को प्रमाण नहीं मानते

915
01:05:13,680 --> 01:05:17,880
हम व िव पुराण को प्रमाण नहीं मानते शास्त्र में विष्णु भगवान वाले

916
01:05:17,880 --> 01:05:22,120
जो वो है उनको भी वो बोला गया है आप अपनी जो परंपरा

917
01:05:22,120 --> 01:05:26,320
से अपने आचार्यों के द्वारा लिखे गए ग्रंथ है वो मत दिखाइए ग्रंथ

918
01:05:26,320 --> 01:05:30,560
से हमको दीजिए आ ग्रंथ ठीक है

919
01:05:30,560 --> 01:05:34,640
जी आप चैतन्य तामृत में वैसे सीधा लिखा है कि आप

920
01:05:34,640 --> 01:05:38,840
अगर चैतन्य प्रमाण नहीं चाहिए भाई साहब उसम मिलावट भी कहते

921
01:05:38,840 --> 01:05:43,200
हैं बहुत सारे जो लोग है अभी स्वामीनारायण वाले आ जाएंगे कि मैं स्वामी नारायण

922
01:05:43,200 --> 01:05:47,280
का हूं तो मैं स्वामी नारायण का लिखा हुआ मानूंगा आर्य समाज वाला

923
01:05:47,280 --> 01:05:51,760
आ जाएगा वो कहेगा कि भाई मैं दयानंद जी से जुड़ा हुआ ह तो मैं दयानंद जी का मानूंगा

924
01:05:51,760 --> 01:05:56,800
तो आप मानेंगे क्या उनके उन प्रमाणों को

925
01:05:56,800 --> 01:06:00,880
आप आप उन ग्रंथों से दिखाइए जो ग्रंथ

926
01:06:00,880 --> 01:06:04,920
आपके और मेरे दोनों के लिए मान्य हो ठीक

927
01:06:04,920 --> 01:06:09,720
है चलो ठीक है मैं आप सुनिए अब श्रीमद् भागवत श्रीमद् भागवत

928
01:06:09,720 --> 01:06:14,560
तीसरा स्कंध 3 वा अध्याय श्लोक संख्या सात

929
01:06:14,560 --> 01:06:19,400
यहां पर क्या बोला गया है आप सुनिए एक बार अहो तम सो पतो गरिया

930
01:06:19,400 --> 01:06:23,560
यवाग वर्तते नाम तुभयम ते पुप

931
01:06:23,560 --> 01:06:28,200
जरार बणा च गण ब्रहमान चू गणय

932
01:06:28,200 --> 01:06:32,200
इस बोल र अरे क्या आश्चर्य की बात है स पतो

933
01:06:32,200 --> 01:06:36,320
गरिया अगर कोई ऐसे परिवार में पैदा जो कुत्ते का मास खाता है य तो शूद्र से भी गुर

934
01:06:36,320 --> 01:06:40,440
है स्प परिवार में पैदा हुआ है य फिल्मी

935
01:06:40,440 --> 01:06:44,600
शूटिंग नहीं कर रहा हूं आप सीधे सधे अपनी बात बोलिए

936
01:06:44,600 --> 01:06:48,920
उसम से एक्टिंग को हटा दीजिए नहीं एक्टिंग को क्या आप देखिए

937
01:06:48,920 --> 01:06:53,040
सुन लीजिए सुन ली य फिल्म नहीं चल रही है आप बिल्कुल

938
01:06:53,040 --> 01:06:57,280
अपनी बात को सहजता के साथ सीधे सधे बोलिए उसम से एक्टिंग

939
01:06:57,280 --> 01:07:01,800
जो है ना और गायन वादन इसको एक साइड रख दीजिए

940
01:07:01,800 --> 01:07:06,680
वव लोग श्रीमद भागवत ते हम लोग माते

941
01:07:06,680 --> 01:07:10,720
तो अपने मंच पर जाइए गाने के लिए भाई साब हाज

942
01:07:10,720 --> 01:07:11,800
अरेने के

943
01:07:11,800 --> 01:07:15,960
लिए अरे मंच श्रीमद भागवत के श्लोक को गाया जाता है मायावादी

944
01:07:15,960 --> 01:07:21,880
मर्ख लोग जो नहीं गा पाते उसके बाद भी आपकी एक्टिंग जारी

945
01:07:21,880 --> 01:07:26,400
है ठीक है उसम बोला गया है वर्तते

946
01:07:26,400 --> 01:07:31,280
नाम अहो बता सो पतो गरिया य

947
01:07:31,280 --> 01:07:35,480
बताया आपने 3 अध्याय खोलिए 3 अध्याय

948
01:07:35,480 --> 01:07:39,640
खोलिए लोक संख्या सा आप इसका ट्रांसलेशन भी नहीं बताने दे रहे मेरे

949
01:07:39,640 --> 01:07:45,640
को आपका प्लेटम

950
01:07:47,490 --> 01:07:53,490
[संगीत]

951
01:07:57,080 --> 01:08:02,120
चवा अध्याय चवा अध्याय [संगीत]

952
01:08:02,120 --> 01:08:08,120
नहीं तीसरे स्कंद का 33 वा अध्याय श्लोक संख्या सात

953
01:08:20,430 --> 01:08:26,200
[संगीत]

954
01:08:26,200 --> 01:08:30,600
आप अनुवाद बताइए तब तक हां अनुवाद बता रहे हैं

955
01:08:30,600 --> 01:08:32,000
इसमें बोला गया है

956
01:08:32,000 --> 01:08:36,000
कि अहो बता सो पतो गरिया अगर कोई स्प परिवार में भी पैदा होता है जहां

957
01:08:36,000 --> 01:08:40,000
पर कुत्ते का मास खाया जाता है यवा अग्र वर्तते नाम तुगर जीव के

958
01:08:40,000 --> 01:08:44,080
अग्र भाग से भगवान का नाम लेता है आगे सुनिए ते पुस तपस

959
01:08:44,080 --> 01:08:48,560
ज शरार ब्रह्माणु चरणाम गरण उसने सारी तपस्या

960
01:08:48,560 --> 01:08:52,560
कर ली है ज उसने सारे यज्ञ कर लिए हैं जो

961
01:08:52,560 --> 01:08:56,960
ब्राह्मणों के कार्य होते हैं सारे यज्ञ कर लिए हैं सारे पवित्र नदियों

962
01:08:56,960 --> 01:09:01,240
में स्नान कर लिया है और सारे वेद को वो बिल्कुल अच्छे तरीके से समझ

963
01:09:01,240 --> 01:09:05,560
चुका है तो क्या ये ब्राह्मण वाले गुण उसने कर लिए कि नहीं कर लिए

964
01:09:05,560 --> 01:09:06,060
तो

965
01:09:05,800 --> 01:09:10,280
वो ब्राह्मण है भाई तो ये तो ये जो तपस्या उसने जो कर ली है

966
01:09:10,280 --> 01:09:14,920
ये तो उसके अपने स्वांता उद्धार के लिए उसकी उपयोगिता

967
01:09:14,920 --> 01:09:19,560
ब्राह्मण के रूप में ली जा सकती है यह प्रमाण दिखाइए भाई साहब शिवांस

968
01:09:19,560 --> 01:09:23,960
जी मतलब आप क्या रहे कि उसका खुद का उद्धार हो गया तो लोगों का उद्धार नहीं कर सकता आपसे मैं एक्सपेक्ट

969
01:09:23,960 --> 01:09:28,240
नहीं बिल्कुल बिलकुल जो कबीर दास थे

970
01:09:28,240 --> 01:09:32,720
जो ये वो थे ये कभी भी आचार गद्दी प नहीं बैठे

971
01:09:32,720 --> 01:09:36,600
अरे आप क

972
01:09:36,600 --> 01:09:41,520
बा सुन लीजिए सुन लीजिए ये लोग भगवत भक्त बने

973
01:09:41,520 --> 01:09:45,600
क्या कहते हैं ये रसखान और ये ये सब आचार गति पर नहीं

974
01:09:45,600 --> 01:09:49,720
बैठे कभी होप फुली आप सु

975
01:09:49,720 --> 01:09:53,840
सुनिए आपका कहने का मतलब है डिस जो समझ रहे एक

976
01:09:53,840 --> 01:09:58,040
मिनट एक मिनट सी प्रामाणिक जो परंपरा है

977
01:09:58,040 --> 01:10:02,480
उसमें ये रसखान और यह सब जो भक्त हुए हैं यह कभी भी आचार्य

978
01:10:02,480 --> 01:10:06,600
गद्दी पर नहीं बैठे हैं ये भगवत भक्त हुए मान और अपना मोक्ष

979
01:10:06,600 --> 01:10:10,760
प्राप्त किया वो आदर्श के रूप में स्थापित सुनो आदर्श के रूप

980
01:10:10,760 --> 01:10:14,760
में स्थापित हुए उनके कर्म अगर सही थे जो परंपरा प्राप्त आचार्यों की

981
01:10:14,760 --> 01:10:18,920
सीमा में थे तो उनको फॉलो भी किया मगर प्रमाण के रूप में उनको

982
01:10:18,920 --> 01:10:20,880
ब्राह्मण के रूप में उनको यज्ञ

983
01:10:20,880 --> 01:10:24,880
करने वाले ब्राह्मण के रूप में या आचार्य गद्दी पर बैठने वाले ब्राह्मण

984
01:10:24,880 --> 01:10:29,040
के रूप में या राज करने वाले क्षत्रिय के रूप में स्वीकार नहीं किया

985
01:10:29,040 --> 01:10:34,600
गया शिवांश जी आपने जिस हिसाब का मेरे सामने तर्क प्रस्तुत

986
01:10:34,600 --> 01:10:39,520
किया कब तक हो जाएगा या बारबार होता रहेगा इसका प्रमाण दिखाए

987
01:10:39,520 --> 01:10:43,600
मैंने आपको प्रमाण बता दिया मनु अनक से

988
01:10:43,600 --> 01:10:47,640
कर अनक उधर चले गए अरे जो तर्क चल रहा था

989
01:10:47,640 --> 01:10:51,920
आपका क अभी तक जो आप तक जी सुनिए एक बार सुनिए मेरे हिसाब से सारी डियस

990
01:10:51,920 --> 01:10:56,120
भी समझ पा रही है समझ पा रही है मेरे हिसाब से डि फिर आप ऑडियंस

991
01:10:56,120 --> 01:11:00,120
की बात ले रहे हैं वो बात बोलो देखिए आप में और मुझ में एक

992
01:11:00,120 --> 01:11:04,400
अंतर बता दूं मैं बात वही बोलता हूं जो कि

993
01:11:04,400 --> 01:11:08,680
आपके और मेरे बीच में दोनों तरफ से मान्य हो सके आप अपने मन

994
01:11:08,680 --> 01:11:12,920
कल्पित पूर्वाग्रह भी थोपते हैं जैसे मैंने आपसे

995
01:11:12,920 --> 01:11:17,200
मैंने आपसे पूछा आपने मेरे सामने तक रखा था जी सुनि

996
01:11:17,200 --> 01:11:21,360
आपने मेरे सामने तक र थाब एक मिनट एक मिनट

997
01:11:21,360 --> 01:11:25,640
मैंने आपसे सबसे पहले पूछा था कि आपके द्वारा स्वीकार की

998
01:11:25,640 --> 01:11:30,000
वर्ण व्यवस्था है उसकी उपयोगिता क्या है आपने कोई उपयोगिता

999
01:11:30,000 --> 01:11:34,240
उसकी अभी तक सिद्ध की क्या नहीं की उपयोग मैंने आपसे

1000
01:11:34,240 --> 01:11:35,880
पूछा मैंने आपसे पूछा कि

1001
01:11:35,880 --> 01:11:40,080
जब आपके पास तीनों अवेलेबल होंगे फल सब्जी और

1002
01:11:40,080 --> 01:11:46,080
क्या कहते हैं आम तो आपकी प्राथमिकता क्या होगी आपने कहा

1003
01:11:46,080 --> 01:11:52,080
फल ठीक है यही था ना

1004
01:11:52,920 --> 01:11:56,920
आपका के दवारा से पूछा कि ब्राह्मण का

1005
01:11:56,920 --> 01:12:01,000
जनय किस उम्र तक हो जाना चाहिए इसका प्रमाण

1006
01:12:01,000 --> 01:12:05,160
क्या है अगर बदला जाएगा तो इसका प्रमाण क्या है अगर गुरु घोषित करेगा

1007
01:12:05,160 --> 01:12:09,480
तो केवल इसका प्रमाण क्या है और अगर और अगर राह

1008
01:12:09,480 --> 01:12:13,520
चलते कोई भी घोषित करेगा तो इसका प्रमाण क्या है कोई प्रमाण नहीं है उसके

1009
01:12:13,520 --> 01:12:17,520
बाद फिर मैंने पूछा कि चलो राह चलते मान लिया जाए दुर्जन तोष

1010
01:12:17,520 --> 01:12:21,720
न्याय से कि राह चलते कोई भी घोषित कर सकता है तो उसको

1011
01:12:21,720 --> 01:12:26,240
कितनी देर तक उस व्यक्ति को जांचना पखना होगा उसका प्रमाण क्या है आप देखिए

1012
01:12:26,240 --> 01:12:30,560
अब सुनिए आप ऐसा हाइपोथेटिकल केस लेकर बोल रहे हैं अभी आपने जो तर्क

1013
01:12:30,560 --> 01:12:34,680
में स्थापित किया जो बात बोली जिसने अपना उधार कर लिया व लोगों का उधार नहीं कर सकता

1014
01:12:34,680 --> 01:12:38,800
य आपका बता कैसा तक है मान लो कोई व्यक्ति डॉक्टर है तो व खुद का ही इलाज

1015
01:12:38,800 --> 01:12:44,800
कर सकता इला नहीं कर सकता बात कर

1016
01:12:48,680 --> 01:12:53,240
रहे उ कर ठीक आप

1017
01:12:53,240 --> 01:12:57,400
बोल रहे ुद का उ सता व सबका उद्धार कर सकता है यह

1018
01:12:57,400 --> 01:13:01,720
आप इसके लिए प्रमाण दीजिए चलिए तेरे कर्तव्य

1019
01:13:01,720 --> 01:13:06,000
और कर्तव्य की उसमें शास्त्र प्रमाण है मुझे

1020
01:13:06,000 --> 01:13:12,000
शास्त्र से दीजिए अपनी बातें

1021
01:13:32,800 --> 01:13:37,200
चले ग चलिए आज की चर्चा काफी देर

1022
01:13:37,200 --> 01:13:40,800
हुई

1023
01:13:40,800 --> 01:13:45,000
और आशा करता हूं आप लोगों को कुछ समझ में आया हो जो

1024
01:13:45,000 --> 01:13:49,160
सकारात्मकता से सुनेंगे समझने की कोशिश करेंगे उनको जरूर

1025
01:13:49,160 --> 01:13:53,240
समझ में आएगा यह कोई उसकी बात

1026
01:13:53,240 --> 01:13:57,240
नहीं है कि हमें जो है उस पर रहना है यह बात है

1027
01:13:57,240 --> 01:14:01,480
व्यवस्था की हमको चाहिए क्या हमको राम राज्य जैसी व्यवस्था चाहिए चाहे जितना

1028
01:14:01,480 --> 01:14:06,320
कलयुग आ जाए हमको राम राज्य के लिए प्रयत्नशील होना

1029
01:14:06,320 --> 01:14:10,680
है ठीक है और डॉक्टर स्वयं का इलाज नहीं कर सकता है

1030
01:14:10,680 --> 01:14:14,800
जो दूसरों का इलाज कर सकता है वह स्वयं का नहीं कर सकता है और जो स्वयं इलाज

1031
01:14:14,800 --> 01:14:20,800
जिसका हो रहा है वह जरूरी नहीं कि सबकी चिकित्सा कर सके

1032
01:14:25,800 --> 01:14:30,400
हरे कृष्णा माफ कीजिए इंटरनेट चला गया था

1033
01:14:30,400 --> 01:14:34,480
हा जी बोलिए हां तो जैसा आप बोल रहे

1034
01:14:34,480 --> 01:14:39,320
हैं कि भाई अगर कोई डॉक्टर है कौन सा बताया आपने

1035
01:14:39,320 --> 01:14:45,320
श्लोक संख्या

1036
01:14:51,230 --> 01:14:55,240
[संगीत] साथ ये आश्चर्य की की

1037
01:14:55,240 --> 01:14:59,400
बात है कि जिसके जीवा के अग्र भाग में आपका

1038
01:14:59,400 --> 01:15:03,640
नाम विद्यमान है व चांडाल महान है जो लोग आपके

1039
01:15:03,640 --> 01:15:07,720
नामों का उच्चारण करते हैं उन लोगों ने ही तप

1040
01:15:07,720 --> 01:15:11,840
किया है होम किया है और तीर्थों में जाकर स्नान किया है उन्ही

1041
01:15:11,840 --> 01:15:15,920
पू तो लोगों से भी करवा सकते हैं शवा जी लोगों से भी करवा

1042
01:15:15,920 --> 01:15:20,280
सकते हैं क्या लोगों से भी करवा सकते हैं मतलब लोगों से करवा

1043
01:15:20,280 --> 01:15:24,480
सकता सुनिए मेरी बात सुनिए इसमें ब्राह्मण के रूप में उपयोग

1044
01:15:24,480 --> 01:15:28,840
करने वा कोई बात नहीं लिखी हुई है दूसरी बात मैं आपसे बार-बार पूछ

1045
01:15:28,840 --> 01:15:32,960
रहा हूं कि जो संस्कार आदि नियम होते हैं उनके

1046
01:15:32,960 --> 01:15:37,120
कुछ सिद्धांत होते हैं सब हमारे पास ग्रंथ है उसमें लिखे हुए हैं आप अपना

1047
01:15:37,120 --> 01:15:41,080
वो ग्रंथ निकालिए कि ब्राह्मण का जनेह कौन सी आयु तक होगा

1048
01:15:41,080 --> 01:15:45,200
या बारबार होगा तो वह कहां लिखा है या राह चलता व्यक्ति घोषित कर

1049
01:15:45,200 --> 01:15:49,720
देगा तो वह कहां लिखा है आप मनुस्मृति को मानते हैं कि नहीं मानते

1050
01:15:49,720 --> 01:15:54,000
हैं बिल्कुल मानता हूं जी मानते हैं तो उसमें

1051
01:15:54,000 --> 01:15:58,120
लिखा हुआ है ब्राह्मण का जन आ से 12 वर्ष की आयु के बीच में हो जाना

1052
01:15:58,120 --> 01:16:02,160
चाहिए इसका क्या करेंगे मान लो कोई ब्राह्मण है ब्राह्मण है उसका

1053
01:16:02,160 --> 01:16:06,360
जन हुआ तो को मानते हो कि नहीं विरोध

1054
01:16:06,360 --> 01:16:11,200
कर रहे हो नहीं शीम भागत को मानते आप श्रीमद भागवत को मानते

1055
01:16:11,200 --> 01:16:15,320
आयु लिखी है क्या भागवत में आयु का प्रमाण लाओ आप

1056
01:16:15,320 --> 01:16:19,360
आयु को लेके बैठ गए आयु की पूछ पक आपको आयु

1057
01:16:19,360 --> 01:16:23,720
बता रहा हूं जब मैं आपको मनुस्मृति से आयु बता रहा हूं और आपको

1058
01:16:23,720 --> 01:16:27,960
वो नहीं मानना है तो भागवत से आपको आयु देनी होगी ना और दूसरी

1059
01:16:27,960 --> 01:16:32,400
बात सबसे पहले तो आप यह स्वीकार करिए कि मनुस्मृति को मैं नहीं मान रहा

1060
01:16:32,400 --> 01:16:36,840
हूं अरे किसने बोला नहीं मान रहा हूं मनुष

1061
01:16:36,840 --> 01:16:41,320
मानता मनु का सामना भागवत से क्यों करा रहे हो फिर

1062
01:16:41,320 --> 01:16:45,320
जब मनुस्मृति कह रही है कि ब्राह्मण का जने आ से 12 में होना है तो

1063
01:16:45,320 --> 01:16:49,760
आप फिर क्यों कह रहे हो भगवा तुमको ला रहा हूं मैं यानी कि

1064
01:16:49,760 --> 01:16:52,880
मनुस्मृति को नहीं

1065
01:16:52,880 --> 01:16:56,200
मानते अगर मैं आ से 12 के बीच

1066
01:16:56,200 --> 01:17:00,520
में ब को प्रमाण मानते हो कि नहीं मानता

1067
01:17:00,520 --> 01:17:04,880
हूं हा तो उसमें दिया गया है आयु ब्राह्मण

1068
01:17:04,880 --> 01:17:09,200
का जने आ से 12 वर्ष की आयु में हो जाना चाहिए अब इसके

1069
01:17:09,200 --> 01:17:13,400
इसको आप मानोगे कि नहीं मानोगे ठीक

1070
01:17:13,400 --> 01:17:17,440
है मानने में क्या दिक्कत है मान लेंगे इसमें क्या है तो फिर आप

1071
01:17:17,440 --> 01:17:22,440
बए जो आप 25 और 12 बार बदलने वाली बातें कर रहे हो वो आयु कहां पर लिखी हुई

1072
01:17:22,440 --> 01:17:27,120
है आप उस बात को लेकर बैठ गए मान लिया मैंने इससे क्या साबित

1073
01:17:27,120 --> 01:17:31,360
होता शास्त्र को ही तो लेके बैठना है

1074
01:17:31,360 --> 01:17:35,560
और किसको लेके बैठे आपको लेके बैठू शास्त्र

1075
01:17:35,560 --> 01:17:39,840
को शास्त्र को इसमें कहीं नहीं लिखा है

1076
01:17:39,840 --> 01:17:45,400
उसका उपयोग ब्राह्मण के लिए हो सकता

1077
01:17:45,400 --> 01:17:49,560
है ठीक है इसमें भक्त की मानता बताई

1078
01:17:49,560 --> 01:17:53,720
जा रही है कि कोई अगर भक्त हो गया तो वो कितना महान है

1079
01:17:53,720 --> 01:17:57,920
ठीक है की महानता जैसे कि अगर

1080
01:17:57,920 --> 01:18:02,280
कोई स्त्री है वह भी भगवत भक्त हो गई आपके य स्त्रियों का भी जन

1081
01:18:02,280 --> 01:18:06,360
हो जाता है क्या नहीं होता नहीं होता नहीं

1082
01:18:06,360 --> 01:18:10,880
होता तो उसकी जीवा पर भगवान का नाम आ गया उसने वेदों का पाठ नहीं किया क्या

1083
01:18:10,880 --> 01:18:15,720
उसको ब्राह्मण उसको जने क्यों नहीं करा रहे हो

1084
01:18:15,720 --> 01:18:16,220
अच्छा

1085
01:18:16,080 --> 01:18:20,280
शिवांश जी अगर मैं आपको यह बोलू

1086
01:18:20,280 --> 01:18:23,040
का

1087
01:18:23,040 --> 01:18:27,040
ज मिनट अभी मैंने आपसे पूछा कि

1088
01:18:27,040 --> 01:18:31,040
स्त्री का जनेऊ क्यों नहीं करा रहे हो अगर उसकी नाम पर भगवान उसकी

1089
01:18:31,040 --> 01:18:37,040
जीवा पर भगवान का नाम

1090
01:18:37,200 --> 01:18:41,400
है इसका मतलब जिसकी जीवा प भगवान का नाम

1091
01:18:41,400 --> 01:18:46,280
हो जरूरी नहीं उसका भी यज्ञ पवित

1092
01:18:46,280 --> 01:18:50,840
हो हो गया अच्छा नहीं नहीं ऐसा नहीं है

1093
01:18:50,840 --> 01:18:54,960
हा अब मैं आपसे वापस पूछ रहा हूं मनुस्मृति कह रही है

1094
01:18:54,960 --> 01:18:59,000
से 12 के बाद ब्राह्मण का जने नहीं होगा आप कह रहे हो कि 25 तक

1095
01:18:59,000 --> 01:19:05,000
होगा आप कह रहे हो कि बार बार होगा तो यह सारे प्रमाण कहां

1096
01:19:08,360 --> 01:19:12,760
है चलिए अब मैं अब मैं आपको एक और आधार

1097
01:19:12,760 --> 01:19:16,960
दे देता हूं सोचने का सोचिए विचार करिए

1098
01:19:16,960 --> 01:19:21,160
यह बताइए जब कर्म और गुण सेको सलेक्शन करना है

1099
01:19:21,160 --> 01:19:25,880
का कौन ब्राह्मण होगा और कौन क्षत्रिय होगा कौन व होगा कौन शद होगा

1100
01:19:25,880 --> 01:19:30,040
तो इसका मतलब है हम लोग जो इलेक्शन होता है उस

1101
01:19:30,040 --> 01:19:35,440
व्यवस्था को मान रहे हैं आप इलेक्शन चुनावी प्रक्रिया राजा कौन

1102
01:19:35,440 --> 01:19:39,600
बनेगा क्योंकि भाई राजा कौन बनेगा तो इसका चुनाव

1103
01:19:39,600 --> 01:19:43,880
करेंगे ना गुण कर्म देखेंगे सबके जांचें प्रतियोगिता कराई जाएगी

1104
01:19:43,880 --> 01:19:48,440
कौन कूदा कौन फंदा उसको ही जो है राजा बनाया जाएगा ऐसा कुछ है ना

1105
01:19:48,440 --> 01:19:52,440
जी जी जी जी तो आप इलेक्शन वाली व्यवस्था को मान

1106
01:19:52,440 --> 01:19:56,680
रहे हैं ना जी

1107
01:19:56,680 --> 01:20:01,640
जो आज जो लागू है उस व्यवस्था को मान रहे हैं आप

1108
01:20:01,640 --> 01:20:05,800
इलेक्शन राजा कौन बनेगा इलेक्शन से होगा क्योंकि गुण कर्म सबके चेक होंगे

1109
01:20:05,800 --> 01:20:11,800
चार पांच लोगों के उनमें से जो योग्य होगा जो ज्यादा श्रेष्ठ होगा उसको राजा बनाया

1110
01:20:13,200 --> 01:20:17,400
जाएगा जी देखिए अरे मैं पूछ रहा

1111
01:20:17,400 --> 01:20:21,600
बता दीजिए मान रहे हैं ना नहीं आज के डेमोक्रेसी को मैं नहीं मानता

1112
01:20:21,600 --> 01:20:25,600
हूं मैं मोनार्की हूं जो वैदिक सिस्टम है जो राजा हुआ करते थे उ को ही मानता हूं

1113
01:20:25,600 --> 01:20:29,880
ठीक है तो वैदिक तो वैदिक सिस्टम ये है कि आप ये बताइए

1114
01:20:29,880 --> 01:20:34,360
कि श्री राम को राजा बनाने से पहले उनके कौन सी प्रतियोगिता

1115
01:20:34,360 --> 01:20:38,360
हुई थी कौन सा जांचा गया था कि भैया ऐसा तो नहीं कि

1116
01:20:38,360 --> 01:20:42,360
सब वो जो फल मंडी है उसमें कोई और बढ़िया आम निकल आए या सब्जी

1117
01:20:42,360 --> 01:20:46,920
मंडी है उसमें कोई और बढ़िया राम निकल आए जांचा गया था

1118
01:20:46,920 --> 01:20:51,240
या सीधे घोषित किया था मेरा बेटा है क्षत्रिय है वो बनेगा

1119
01:20:51,240 --> 01:20:55,600
राजा अच्छा ऐसा कोई उदाहरण मैं पेश कर दूं अगर आप सामने जिस

1120
01:20:55,600 --> 01:20:59,720
क् नहीं

1121
01:20:59,720 --> 01:21:03,920
था अगर राम के जीवन में कोई अगर एक चीज हो रही है अगर उसके अलावा

1122
01:21:03,920 --> 01:21:07,960
ऐसे तो भवान कैसे लोग हो तुम लोग कितने निकट तरीके

1123
01:21:07,960 --> 01:21:11,240
से देखते हो राम जी

1124
01:21:11,240 --> 01:21:15,440
कोसे करज हो रही है व हो रहा है ऐसे करते हो राम जी के

1125
01:21:15,440 --> 01:21:19,640
लिए मायावादी लोग जो भगवान राम के शरीर को भौतिक

1126
01:21:19,640 --> 01:21:25,640
मानते ऐसे तु मायावादी ऐसे शास्त्र बोते तुमसे मावा

1127
01:21:27,320 --> 01:21:31,400
बाय बाय और किसी दिन इस बात

1128
01:21:31,400 --> 01:21:37,400
पर चर्चा करनी हो ना तो आ जाना ठीक है अभी आप जा सकते

1129
01:21:42,560 --> 01:21:46,720
हो तो ठीक है आशा करते हैं आज कीय जो वह है अगले कुछ

1130
01:21:46,720 --> 01:21:50,880
क्वेश्चन आने वाले थे जो एक एक करके मैं लाने वाला था मगर

1131
01:21:50,880 --> 01:21:55,040
वो जानते ही आप कि ये लोग गाली गलोज प आ जाते गाली बाज है हमने

1132
01:21:55,040 --> 01:21:59,080
अभी थोड़े दिन पहले एक वीडियो डाला है उसमें आप देख सकते हैं इनकी

1133
01:21:59,080 --> 01:22:03,320
गालियां तो वो आ गया उस पर तुच्छ मायावादी ये

1134
01:22:03,320 --> 01:22:07,360
है वो है इसपे आ गया

1135
01:22:07,360 --> 01:22:11,440
वो अच्छा यह जो है इसमें ये लोग एक उतरक

1136
01:22:11,440 --> 01:22:15,600
कर सकते हैं कि तुमने भी तो उसको निकृष्ट उससे देखा निकृष्ट बोला तो इसका

1137
01:22:15,600 --> 01:22:19,720
जवाब मैं देता जाऊं कि मैंने उसको अभी राइट नाउ वो

1138
01:22:19,720 --> 01:22:23,920
जो कर रहा है उसके लिए बोला कि जितनी बार राम की बातें आ रही मनुस्मृति

1139
01:22:23,920 --> 01:22:27,960
की बातें आ रही वो सब हल्की है फालतू है क्योंकि इनके पास भागवत और

1140
01:22:27,960 --> 01:22:32,320
वो भी भागवत का वो भाष्य जो क्या कहते हैं उनको

1141
01:22:32,320 --> 01:22:36,560
जो हमारे पूज्या आचार्य श्री हैं सीदर स्वामी जी उनके विरुद्ध भी जो भाष्य

1142
01:22:36,560 --> 01:22:40,600
लिखा गया भले ही डंका बजाते चेतन महाप्रभु को मानते मगर चेतन महाप्रभु

1143
01:22:40,600 --> 01:22:45,400
को मानते नहीं क्योंकि जो श्रीधर स्वामी जी का भाष्य है व नहीं मानते तो

1144
01:22:45,400 --> 01:22:49,520
श्रीधर स्वामी जी के भाष्य के विरुद्ध जाकर के जो इनका जो भगवतम भाष्य

1145
01:22:49,520 --> 01:22:53,560
लिख दिया गया या जो भगवत गीता

1146
01:22:53,560 --> 01:22:57,560
का ट्रांसलेशन इनके जो इनके स्कोन द्वारा कर दिया गया

1147
01:22:57,560 --> 01:23:01,800
वो जरूरी नहीं है प्रभुपाद जी ने किया हो किसने कौन कर रहा है वो वही जाने कोई

1148
01:23:01,800 --> 01:23:06,120
आजकल सुनने में ज्यादा आ रहा है मलेच्छ राज कर रहा है निगरा चार्य जी बता रहे हैं अपने वीडियोस

1149
01:23:06,120 --> 01:23:10,200
में है ना तो य ये मलेच्छ राज की साजिश

1150
01:23:10,200 --> 01:23:14,200
है वो सब कुछ नहीं पता मगर जब मनुस्मृति की

1151
01:23:14,200 --> 01:23:18,560
बात आती तो ये लोग मानता हूं मगर उस उसको कांटे की नोक पर स्वीकार

1152
01:23:18,560 --> 01:23:22,560
करने में दिक्कत है यह मानते हैं और मानेंगे

1153
01:23:22,560 --> 01:23:26,800
किसको जो अपने हिसाब से मैंने जो मैनिपुलेटिव टाइप से जो

1154
01:23:26,800 --> 01:23:31,080
ये श्लोका जो कर रखे हैं उसको मानेंगे और उसमें भी अपने मन

1155
01:23:31,080 --> 01:23:35,120
मन माना कहीं भी कुछ भी निकाल लेंगे अब जब इन्होंने बताया कि जिसकी जीवा

1156
01:23:35,120 --> 01:23:39,440
के अग्र भाग में राम का नाम हो या भगवान का नाम हो वोह जो है सारे यज्ञ

1157
01:23:39,440 --> 01:23:43,480
कर चुका है तो इस हिसाब से तो स्त्रिया भी कर चुकी है हरे कृष्ण हरे राम इन क्या कर रही है

1158
01:23:43,480 --> 01:23:47,480
फ उनको क्यों नहीं जने पहना रहे थोड़ा बहुत धर्म बच गया है थोड़ा

1159
01:23:47,480 --> 01:23:51,480
बहुत धर्म बच गया है है ना वो भी थोड़े दिनों में नष्ट होगा वो जो

1160
01:23:51,480 --> 01:23:55,560
गे सेक्स मैरिजस हो रही है इधर उधर सबको अलाउ

1161
01:23:55,560 --> 01:24:01,560
करते जा रहे हैं वो भी नष्ट होगा थोड़े बहुत

1162
01:24:06,080 --> 01:24:10,160
दिनों अगला सवाल यह था कि आज तक आपने शूद्र

1163
01:24:10,160 --> 01:24:14,520
कितने घोषित किए इस कन ने है ना

1164
01:24:14,520 --> 01:24:18,600
अच्छा सवाल था ना पर उससे पहले ही उन्होंने अपने आप को अयोग्य कर

1165
01:24:18,600 --> 01:24:24,600
लिया ठीक है तो अब हम लोग फिर किसी दिन बात करते हैं

1166
01:24:28,960 --> 01:24:34,960
एक कोई बोल रहे थे कि मेरा क्वेश्चन ले लीजिए वह कौन

1167
01:24:39,360 --> 01:24:43,640
थे रावण वर्ण शंकर नहीं था द्वापर तक

1168
01:24:43,640 --> 01:24:47,840
जो है ब्राह्मण जो है क्षत्रिय से क्षत्रिय

1169
01:24:47,840 --> 01:24:52,640
वैश्य से वैश्य जो है अपने से दूसरे

1170
01:24:52,640 --> 01:24:56,880
उसमें जो है वर्ण में विवाह कर सते थे मगर प्रज्ञा शक्ति

1171
01:24:56,880 --> 01:25:01,480
जो है उस समय इतनी ज्यादा थी कि वह जो बीज था ना बच जाता था

1172
01:25:01,480 --> 01:25:05,480
और जैसे जैसे वो युग बदल रहे हैं जो कलयुग का वो है उसमें

1173
01:25:05,480 --> 01:25:09,480
ये चीज भी बैन हो गई है कि ब्राह्मण ज जब

1174
01:25:09,480 --> 01:25:14,000
जो महिला होगी वो मान लीजिए ब्राह्मण है और जो

1175
01:25:14,000 --> 01:25:18,520
पुरुष है वह मान लीजिए क्षत्रिय वैश्य है तब तो वर्ण शंकर ही है

1176
01:25:18,520 --> 01:25:21,800
मगर यदि पिता जो है ब्राह्मण है और

1177
01:25:21,800 --> 01:25:25,840
क्या कहते हैं जो माता है वो जो है किसी और वर्ण से आई है तो

1178
01:25:25,840 --> 01:25:30,120
उसमें उस समय तक प्रज्ञा शक्ति इतनी थी जो बच जाता था बीज मगर कलयुग

1179
01:25:30,120 --> 01:25:34,440
में तो वो भी नहीं है ठीक है तो रावण जो है वह ब्राह्मण ही

1180
01:25:34,440 --> 01:25:38,520
था अगर वर्ण शंकर बोल रहे हो तो फिर बताओ कहां

1181
01:25:38,520 --> 01:25:44,520
पर लिखा है वर्ण शंकर रावण के लिए ठीक

1182
01:25:44,600 --> 01:25:48,680
है द्रोणाचार्य अभी

1183
01:25:48,680 --> 01:25:52,720
वो राघवाचार्य जी महाराज जी का वीडियो आएगा उसमें देखिएगा उन्होंने खूब धारा प्रवाह बोला ये

1184
01:25:52,720 --> 01:25:56,800
सब द्रोणा जी को कहां माना गया कहीं

1185
01:25:56,800 --> 01:26:01,000
पर भी ब्राह्मण सो क्षत्रिय संबोधित किया गया क्या क्योंकि

1186
01:26:01,000 --> 01:26:05,080
उनका शरीर उन्हें प्राप्त था ब्राह्मण का तो ब्राह्मण ही रहे हालांकि

1187
01:26:05,080 --> 01:26:09,840
उन्होंने कुछ कार्य ऐसे किए जो कि ब्राह्मण उचित नहीं थे

1188
01:26:09,840 --> 01:26:14,520
आपातकालीन स्थिति में भी उन्होंने कहीं ना कहीं वह जैसे अश्वथामा थे

1189
01:26:14,520 --> 01:26:18,560
उन्होंने तो पांच पुत्रों को मार डाला था तब भी द्रौपदी ने कहा कि नहीं

1190
01:26:18,560 --> 01:26:22,960
वो ब्राह्मण के पुत्र है वो जो हमारे लिए पूजनीय है य सब बोला राघवाचार्य

1191
01:26:22,960 --> 01:26:28,960
जी महाराज जी ने अभी सुनिए आने वाले टाइम

1192
01:26:29,600 --> 01:26:33,600
में ठीक है तो आज की चर्चा सार्थक रही

1193
01:26:33,600 --> 01:26:37,600
मेरे जानकारी में और भी कुछ चीजें थी जो हो सकती थी

1194
01:26:37,600 --> 01:26:42,640
उनसे बातें हो सकती थी और यह मायावादी हो सकती

1195
01:26:42,640 --> 01:26:46,680
थी मगर क्या कहते हैं यह

1196
01:26:46,680 --> 01:26:51,120
उन्होंने इस तरह की बातें शुरू कर दी कि बात खत्म हो ग ठीक है

1197
01:26:51,120 --> 01:26:57,120
चलिए सभी को जय श्री राम

1198
01:26:58,520 --> 01:27:03,160
यह हमारा संडे को आने वाला है आवान कॉल ऑफ धर्म पर आप

1199
01:27:03,160 --> 01:27:07,200
देखिए इसमें राघवाचार्य जी महाराज जी ने इनकी बातें कितनी बार खंडित

1200
01:27:07,200 --> 01:27:11,480
हुई है शुरू में अपने आप को रामानुजाचार्य जी से जोड़ रहे थे वहां इनको मुकी खानी

1201
01:27:11,480 --> 01:27:15,760
पड़ी प्रमाण प्रमाण के लिए कई बार पूछा गया वहां इनको मुकी

1202
01:27:15,760 --> 01:27:19,840
खानी पड़ी हर बात को छोड़ छोड़ करके इनको इनकी जो है जो यह

1203
01:27:19,840 --> 01:27:24,160
जो कर्मणा वण व्यवस्था उसकी कोई उपयोगिता ही नहीं है क्लासिफिकेशन करा

1204
01:27:24,160 --> 01:27:28,400
लिए जाता है कि क्लासिफिकेशन के अनुसार व्यवस्था बन पाए समय बच

1205
01:27:28,400 --> 01:27:32,600
पाए श्रम बच पाए अर्थ बच

1206
01:27:32,600 --> 01:27:36,840
पाए तो यहां कोई क्लासिफिकेशन

1207
01:27:36,840 --> 01:27:40,840
की उपयोगिता ही नहीं है किसी को भी कभी भी कुछ भी मान

1208
01:27:40,840 --> 01:27:44,640
लो भगवान श्री कृष्ण तर्क हीन बात करने वाले इनके

1209
01:27:44,640 --> 01:27:49,160
अनुसार क्यों क्योंकि वह किसी क्षत्रिय को कह रहे हैं कि हे अर्जुन तेरा

1210
01:27:49,160 --> 01:27:53,200
धर्म है युद्ध लड़ना युद्ध लड़ भाई जो धर्म

1211
01:27:53,200 --> 01:27:57,320
बदला जा सकता उसके लिए हम बाद नहीं कर सकते किसी को

1212
01:27:57,320 --> 01:28:01,320
अगर कोई किसी का पुत्र है तो यह चीज बदल नहीं सकती है कि वो

1213
01:28:01,320 --> 01:28:05,360
उसका पुत्र नहीं है तो हम उससे कह सकते हैं कि भाई तू उनका पुत्र

1214
01:28:05,360 --> 01:28:09,720
है तेरा धर्म है उनकी सेवा करना है उनके लिए उनकी आज्ञा का पालन

1215
01:28:09,720 --> 01:28:13,760
करना तो धर्म है ही इसलिए कि किसी को उसका धर्म याद

1216
01:28:13,760 --> 01:28:17,800
दिला कर के बाध्य किया जाए उसको मानवता के दारे में

1217
01:28:17,800 --> 01:28:22,160
लाया जाए शास्त्र शास्त्र सतता के दायरे में लाया जाए

1218
01:28:22,160 --> 01:28:26,240
तो जब कोई जो वर्ण है वर्णो चित जो वो है व बदल सकता है

1219
01:28:26,240 --> 01:28:30,320
तो वहां पर उसको बाध्य थोड़ी ना कर सकते फिर यहां पर श्री कृष्ण भगवान अर्जुन को बाध्य

1220
01:28:30,320 --> 01:28:34,400
कैसे कर रहे हैं और करें तो करें अर्जुन भी तो तर्क के साथ कह सकता है वो तो बहुत सारे

1221
01:28:34,400 --> 01:28:39,280
प्रश्न पूछ रहे थे अर्जुन वो कह सकता है कि मैं जो है

1222
01:28:39,280 --> 01:28:43,480
वो जा रहा हूं मैंने राम बोल दिया य सारे यज्ञ

1223
01:28:43,480 --> 01:28:48,160
कर दिए मैंने हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

1224
01:28:48,160 --> 01:28:52,600
य इसी से मानेंगे ये राम से नहीं मानेंगे वो सारी तपस्या वगैरह यसे

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01:28:52,600 --> 01:28:56,960
ही मानेंगे केवल मंत्र भी बोल देंगे वो उससे भी नहीं मानेंगे भले

1226
01:28:56,960 --> 01:28:59,840
ही श्री कृष्ण भगवान ने कहा हो कि छंदों

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01:28:59,840 --> 01:29:03,880
में मैं गायत्री हूं वो नहीं मानेंगे हर जगह आप देखिए

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01:29:03,880 --> 01:29:08,040
कि प्रमाण की जब बात आती है तो मजबूत प्रमाण जब इनके आगे रखे जाते हैं

1229
01:29:08,040 --> 01:29:13,000
तो कैसे अपनी बातों को बदलते हैं कैसे भागते हैं

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01:29:13,000 --> 01:29:19,000
ठीक है तो सभी को जय श्री

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01:29:20,520 --> 01:29:24,840
राम जिसका जिने समय पर नहीं हुआ है उसके लिए वो व्रत

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01:29:24,840 --> 01:29:29,240
दोष तो आ गया है जो बिल्कुल जो उत्कृष्ट

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01:29:29,240 --> 01:29:33,280
श्रेणी के ब्राह्मण वाले जो वो हैं उनमें उसको शामिल नहीं किया जाएगा

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01:29:33,280 --> 01:29:37,440
मगर वह अपने स्वतः उद्धार के लिए वह अपना जीवन

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01:29:37,440 --> 01:29:41,600
व्यतीत कर सकता है प्रश्चित पूर्वक जो है

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01:29:41,600 --> 01:29:45,720
गुरु मुख से आप जो है नाम सुन कर के उसका एक निश्चित सीमा में नाम जप किया

1237
01:29:45,720 --> 01:29:50,080
जाता है और अभी हमारा जो हंस तीर्थ क्षेत्र है उस पर जो है माफियाओं

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01:29:50,080 --> 01:29:54,320
ने कब्जा कर रखा है अन्यथा वहां पर जो

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01:29:54,320 --> 01:29:58,520
जो वट वृक्ष है और जो वहां पर जो हंस कूप है उसमें स्नान

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01:29:58,520 --> 01:30:03,240
कर लेने से व्राप्त दोष से मुक्ति मानी जाती है है ना

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01:30:03,240 --> 01:30:07,360
तो यह सब चीजें हैं तो उसके लिए

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01:30:07,360 --> 01:30:11,880
भी आवाज उठाए आप लोग हंस तीर्थ क्षेत्र को मुक्त कराने के लिए उस पर

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01:30:11,880 --> 01:30:15,080
जो है भू माफियाओं ने कब्जा कर रखा

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01:30:15,080 --> 01:30:19,080
है सभी को जय श्री राम
