1
00:00:01,320 --> 00:00:04,360
तो सभी को जय श्री

2
00:00:04,360 --> 00:00:08,440
राम 20 मिनट से लेट है और कुछ कार्य भी

3
00:00:08,440 --> 00:00:12,480
ऐसे ही है हमारे और स्वास्थ कल आपको आवान

4
00:00:12,480 --> 00:00:17,120
कॉल ऑफ धर्मा वाले चैनल पर बताया था कि थोड़ा स्वास्थ

5
00:00:17,120 --> 00:00:20,040
ठीक नहीं

6
00:00:20,040 --> 00:00:24,360
है तो अभी हमारे साथ

7
00:00:24,360 --> 00:00:28,480
गणेश दास जी है गणेश जी आपके पीछे वो लाइट आ रही है आप

8
00:00:28,480 --> 00:00:32,520
ऐसा करिए अपना फेस है ना साइड घुमा लीजिए उधर लाइट है तो आपका फेस

9
00:00:32,520 --> 00:00:38,520
ठीक से

10
00:00:57,360 --> 00:01:03,360
रहेगा जय श्री कृष्ण नरेश दोराया

11
00:01:18,960 --> 00:01:24,960
जी जी गणेश जी

12
00:01:34,400 --> 00:01:38,840
तो हमारे साथ में एक बताया जाता है

13
00:01:38,840 --> 00:01:43,080
कि प्रमाण और युक्ति के मर्मज्ञ है इस समय गणेश

14
00:01:43,080 --> 00:01:47,320
दास जी करके हैं और वैसे अपना परिचय स्वयं भी देंगे

15
00:01:47,320 --> 00:01:51,760
मगर यह अनन्य भक्त हैं रामपाल

16
00:01:51,760 --> 00:01:54,280
जी

17
00:01:54,280 --> 00:01:58,280
के जय श्री कृष्ण सभी को जय श्री राम सभी

18
00:01:58,280 --> 00:02:04,280
को गणेश जी कोई समस्या है तो रहने

19
00:02:08,320 --> 00:02:12,520
दीजिए हां असल में आपका चेहरा बलर दिखेगा

20
00:02:12,520 --> 00:02:16,640
ना पीछे से रोशनी आ रही है तो इसलिए हमने कहा था कोई बात

21
00:02:16,640 --> 00:02:19,720
नहीं इसी से काम चला

22
00:02:19,720 --> 00:02:21,520
लेंगे तो आप सब

23
00:02:21,520 --> 00:02:25,640
सर्वप्रथम थोड़ा अपने बारे में अपना परिचय दे दीजिए रामपाल जी से किस प्रकार से जुड़े हैं

24
00:02:25,640 --> 00:02:29,920
और कब से जुड़े हैं और थोड़ा

25
00:02:29,920 --> 00:02:33,000
भी आप बताना

26
00:02:33,000 --> 00:02:39,000
चाहेंगे जी सभी को नमस्कार सत

27
00:02:39,000 --> 00:02:43,280
साहेब मेरा नाम गणेश दास है और मैं झारखंड से हूं

28
00:02:43,280 --> 00:02:47,480
गोड्डा जिला पड़ता है मैंने

29
00:02:47,480 --> 00:02:51,760
संत रामपाल जी महाराज से 2014 में नाम दीक्षा

30
00:02:51,760 --> 00:02:54,680
लिया

31
00:02:54,680 --> 00:02:58,040
है

32
00:02:58,040 --> 00:03:02,520
तो 2014 मतलब उनके वो क्या था बरवाला

33
00:03:02,520 --> 00:03:06,720
कांड था बरवाला कांड से ठीक

34
00:03:06,720 --> 00:03:11,560
कर ये बरला कान से पाले लिया है

35
00:03:11,560 --> 00:03:15,760
जी अच्छा ठीक है तो हम लोग ना विस्तार

36
00:03:15,760 --> 00:03:20,000
से बात करेंगे और हो सकता है ये हमारी चर्चा कई एपिसोड्स में हो क्योंकि बहुत सारी

37
00:03:20,000 --> 00:03:24,240
चीजें हम लोग डिस्कस करेंगे आराम आराम से तो

38
00:03:24,240 --> 00:03:28,360
सर्वप्रथम एक यह बात आती है कि रामपाल जी

39
00:03:28,360 --> 00:03:32,760
महाराज की कहानी जो समाज में शुरू होती है वो यहां से होती है

40
00:03:32,760 --> 00:03:37,480
कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों

41
00:03:37,480 --> 00:03:41,560
से खोल खोल कर दिखाकर सिद्ध कर दिया है कि वास्तविक ज्ञान

42
00:03:41,560 --> 00:03:45,760
क्या है वास्तविक ईश्वर कौन है वास्तविक तत्वदर्शी कौन है

43
00:03:45,760 --> 00:03:50,200
है ना जी जी जी तो इसमें तीन

44
00:03:50,200 --> 00:03:54,600
विशेषण आए हैं

45
00:03:54,600 --> 00:03:58,720
धर्म और उसके बाद पवित्र और उसके

46
00:03:58,720 --> 00:04:02,960
बाद अ सद ग्रंथ तो

47
00:04:02,960 --> 00:04:07,240
रामपाल जी महाराज के द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी

48
00:04:07,240 --> 00:04:09,800
को धर्म के रूप में स्वीकार

49
00:04:09,800 --> 00:04:15,800
करने का आधार क्या

50
00:04:24,760 --> 00:04:28,840
है जी एक बार फिर से प्रश्न को राइए मैं समझा नहीं

51
00:04:28,840 --> 00:04:32,880
कि आप कना क्या चा रहे हैं रामपाल जी

52
00:04:32,880 --> 00:04:37,280
महाराज के द्वारा और उनके अनुयायियों के द्वारा आपके जो रामपाल

53
00:04:37,280 --> 00:04:41,480
जी महाराज है उनके द्वारा और आप लोगों के द्वारा एक क्लेम सबसे पहला

54
00:04:41,480 --> 00:04:45,760
जो क्लेम है जिस पर पूरी इमारत खड़ी हुई है है उस

55
00:04:45,760 --> 00:04:49,960
परे यह है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद

56
00:04:49,960 --> 00:04:54,280
ग्रंथों से यह सिद्ध कर दिया है कि परमेश्वर

57
00:04:54,280 --> 00:04:58,400
कबीर है वह तत्वदर्शी है और गीता का ज्ञान

58
00:04:58,400 --> 00:05:02,680
काल ने बोला है यह सब उन्होने बोली तो जी जी

59
00:05:02,680 --> 00:05:07,320
अब जब वो आप लोग जब ये क्लेम कर रहे हो कि सभी धर्मों के यानी

60
00:05:07,320 --> 00:05:11,440
कि जिन जिन बुक्स को उन्होंने यूज किया है उन बुक्स वो

61
00:05:11,440 --> 00:05:15,760
बुक्स जिन आइडियो जीी से जुड़ी जैसे इस्लाम से क्रिश्चियनिटी से

62
00:05:15,760 --> 00:05:20,080
किसी भी आइडल जीी से जुड़ी हुई चीजें हैं तो उनको भी उन्होंने धर्म

63
00:05:20,080 --> 00:05:24,080
माना है क्रिश्चियनिटी को भी धर्म माना है इस्लाम को

64
00:05:24,080 --> 00:05:24,920
भी धर्म माना है

65
00:05:24,920 --> 00:05:28,960
सबको उन्होंने धर्म माना है ठीक है जी जी जी तो

66
00:05:28,960 --> 00:05:33,080
दूसरी बात उनके जो ग्रंथ है स्क्रिप्चर है उनको

67
00:05:33,080 --> 00:05:37,960
उन्होंने पवित्र और सद ग्रंथ भी बोला है ठीक है

68
00:05:37,960 --> 00:05:43,960
तो सबसे पहला सवाल यह है

69
00:05:45,240 --> 00:05:49,360
कि किसी भी विचारधारा को धर्म के रूप में किसी भी

70
00:05:49,360 --> 00:05:53,720
ज्ञान को धार्मिक ज्ञान के रूप में स्वीकार करने का

71
00:05:53,720 --> 00:05:59,720
रामपाल दास जी का आधार क्या है

72
00:05:59,760 --> 00:06:03,840
किसी भी बात को स्वीकार करने का आधार उनके शास्त्र है जैसे हम

73
00:06:03,840 --> 00:06:07,960
हिंदू धर्म की बात करें तो हिंदू धर्म में जो भी शास्त्र है जैसे

74
00:06:07,960 --> 00:06:11,960
हो गया मेरी बात आप समझ नहीं रहे जैसे जैसे कि मैं आपको उदाहरण दे

75
00:06:11,960 --> 00:06:17,960
दू जैसे कि मान लीजिए कि मेरे पास एक बुक है

76
00:06:18,560 --> 00:06:24,560
जी एक मिनट दिखा

77
00:06:30,840 --> 00:06:34,920
मान लीजिए ये है ठीक है इसमें मैंने

78
00:06:34,920 --> 00:06:39,720
कुछ बातें लिखी है जो मुझे ठीक लगी ओके

79
00:06:39,720 --> 00:06:43,800
जी भगवान के बारे में भी लिखा है और भी कुछ

80
00:06:43,800 --> 00:06:47,960
बातें लिखी है इस किताब को कुछ 10 20

81
00:06:47,960 --> 00:06:51,840
लोग मानते भी है

82
00:06:51,840 --> 00:06:56,040
जी और धर्म भी कहते हैं तो क्या इस

83
00:06:56,040 --> 00:07:00,120
किताब को भी आप धर्म मान लेंगे धार्मिक किताब मान लेंगे या कोई कारण

84
00:07:00,120 --> 00:07:04,760
होगा जिस कारण से आप इसको किसी भी किताब को धार्मिक किताब मानेंगे वो

85
00:07:04,760 --> 00:07:08,840
क्या कारण है वो कारण

86
00:07:08,840 --> 00:07:11,680
यही है

87
00:07:11,680 --> 00:07:14,880
कि जो किताब को हम लोग धर्म

88
00:07:14,880 --> 00:07:19,400
के रूप में मानते हैं वो वास्तव में ईश्वर प्रदत है इसीलिए उनको

89
00:07:19,400 --> 00:07:23,520
ग्रंथ माना गया है सद ग्रंथ माना गया है जिसको कि

90
00:07:23,520 --> 00:07:27,640
आप बोल रहे हैं किसी व्यक्ति के द्वारा लिखा गया ऐसा नहीं है जैसे वेद ईश्वर कृत

91
00:07:27,640 --> 00:07:31,680
है गीता भी मैं आपकी बात समझ गया मैं

92
00:07:31,680 --> 00:07:35,960
आपकी बात समझ गया कि जो ग्रंथ ऐसा होगा जो ईश्वर

93
00:07:35,960 --> 00:07:40,600
प्रदत होगा जी उसको आप पवित्र सद ग्रंथ

94
00:07:40,600 --> 00:07:45,000
और धार्मिक मानते हैं जी जी जी

95
00:07:45,000 --> 00:07:49,520
अच्छा तो मैं भी कह रहा हूं किय ईश्वर प्रदत है मुझे

96
00:07:49,520 --> 00:07:53,840
फिर इसको धार्मिक मानेंगे आप नहीं आपके कहने

97
00:07:53,840 --> 00:07:58,120
से केवल नहीं हो जाएगा उसको प्रत करना होगा कि वास्तव ईश्वर प्रदत

98
00:07:58,120 --> 00:08:02,440
है तो तो आपने आपने यह जो

99
00:08:02,440 --> 00:08:08,440
क्रिश्चियन वाला है वो कैसे प्रमाणित किया है व ईश्वर प्रदत्त

100
00:08:12,000 --> 00:08:16,080
है पर जैसा कि आपने शुरुआत में कहा था

101
00:08:16,080 --> 00:08:20,440
कि संत रामपाल जी महाराज ने सर्व धर्म ग्रंथों से

102
00:08:20,440 --> 00:08:24,760
यह प्रमाणित किया कि कबीर साहब भगवान है पूर्ण

103
00:08:24,760 --> 00:08:28,760
परमात्मा है मैं वो नहीं पूछ रहा हूं नहीं सबसे शुरू

104
00:08:28,760 --> 00:08:32,880
में आपने पले इस पर भी आएंगे आपके हर प्रश्न का उतर लेकिन

105
00:08:32,880 --> 00:08:37,000
शुरुआत में जैसा कि आपने कहा कि संत रामपाल जी महाराज सभी धर्म ग्रंथों

106
00:08:37,000 --> 00:08:41,360
को लेकर के ख को खोल के दिखाते हैं और कहते हैं कि कबीर साहब

107
00:08:41,360 --> 00:08:45,880
परमात्मा है तो इस विषय को

108
00:08:45,880 --> 00:08:49,880
आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपका ईश्वर के

109
00:08:49,880 --> 00:08:53,960
विषय में क्या विचार है ईश्वर हो रहा है देखिए

110
00:08:53,960 --> 00:08:58,440
ऐसा है विषयात हो रहा है अभी एक विषय चल रहा है कि अगर

111
00:08:58,440 --> 00:09:02,480
रामपाल अगर रामपाल जी ने किसी आइडल जीी को किसी विचारधारा

112
00:09:02,480 --> 00:09:06,600
को धर्म कहा है तो किसी भी लजी को धर्म के रूप

113
00:09:06,600 --> 00:09:11,160
में स्वीकार करने का आधार आपने बताया कि वो ईश्वर प्रदत होना चाहिए

114
00:09:11,160 --> 00:09:15,400
इसमें हम आपकी ओर से आप नहीं दे रहे मगर आपकी ओर से एक हम तर्क

115
00:09:15,400 --> 00:09:19,960
खुद ले लेते हैं कि भाई आपको विश्वास है कि मोहम्मद साहब ने सही कहा था

116
00:09:19,960 --> 00:09:24,360
आपको विश्वास है ईसा मसीह ने सही कहा था ठीक है

117
00:09:24,360 --> 00:09:27,320
रामपाल जी को विश्वास है अब मुझे

118
00:09:27,320 --> 00:09:31,560
पहले तो एक बात बताइए क्या गीता जी काल के द्वारा

119
00:09:31,560 --> 00:09:35,560
प्रदत है या ईश्वर के द्वारा प्रदत है यह फिर वि

120
00:09:35,560 --> 00:09:39,600
अंतर होने लगा जैसा कि हमने आप जो प्रारंभ में जो

121
00:09:39,600 --> 00:09:43,720
बात शुरू किया था हम उस पर आना चाहेंगे इसके बाद

122
00:09:43,720 --> 00:09:47,920
मेरी बात मैं आपको कनेक्ट बता देता हूं व कनेक्शन क्या है

123
00:09:47,920 --> 00:09:52,000
आपकी जो यह जो लाइन है ना यह गलत लाइन है इसको मैं सिद्ध

124
00:09:52,000 --> 00:09:56,160
करूंगा इसी को सि कर रहा आपने जो यह कहा है कि ईश्वर

125
00:09:56,160 --> 00:10:00,240
द्वारा प्रदत जो धर्म जो शास्त्र होगा वह हमारे

126
00:10:00,240 --> 00:10:04,240
लिए धार्मिक ग्रंथ है तो जो यह जो गीता का ज्ञान

127
00:10:04,240 --> 00:10:08,600
है क्या वह ईश्वर के द्वारा प्रदत है

128
00:10:08,600 --> 00:10:12,680
बिल्कुल अच्छा व स्वयं ईश्वर ने दिया है या

129
00:10:12,680 --> 00:10:18,680
काल ने दिया

130
00:10:20,280 --> 00:10:24,760
है यह तो काल के द्वारा दिया गया है

131
00:10:24,760 --> 00:10:28,840
और ईश्वर श जो है ये हर लिए

132
00:10:28,840 --> 00:10:32,880
प्रयुक्त होता है आम भाषा में ईश्वर भगवान

133
00:10:32,880 --> 00:10:37,600
को भी कहा जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश को भी कुछ लोग ईश्वर कहते हैं ईश्वर शब्द

134
00:10:37,600 --> 00:10:41,640
केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं होता है बल्कि भाई साहब मैं आपसे यह

135
00:10:41,640 --> 00:10:45,640
कह रहा हूं कि आपकी किसी भी शास्त्र को धर्म के रूप में

136
00:10:45,640 --> 00:10:49,920
स्वीकार किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार जो आपका पूर्ण

137
00:10:49,920 --> 00:10:54,240
ब्रह्म है उसके द्वारा प्रदत ज्ञान है किसी किसी को भी जिसको ईश्वर

138
00:10:54,240 --> 00:11:00,240
कहा जाएगा उसके द्वारा जो है आप मान लेंगे कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त है

139
00:11:03,000 --> 00:11:07,200
देखि पूर्ण ब्रम के द्वारा जो ज्ञान प्रदत है उन्हीं से मिलता जुलता

140
00:11:07,200 --> 00:11:11,240
ज्ञान अगर अन्य शास्त्रों में है तो हमारे लिए मान्य है चाहे व कुरान

141
00:11:11,240 --> 00:11:15,280
शरीफ में हो चाहे बाइबल में हो चाहे वेदों में हो कहीं भी हो

142
00:11:15,280 --> 00:11:19,320
तो हमारे लिए मान जिस शास्त्र में

143
00:11:19,320 --> 00:11:23,360
पूर्ण ब्रह्म की बातों के अनुसार बात लिखी होगी कहीं

144
00:11:23,360 --> 00:11:27,760
भी थोड़ी बहुत भी वो आपके लिए धर्म धार्मिक ग्रंथ हो जाए

145
00:11:27,760 --> 00:11:31,840
जी तो ये मैंने लिखा है

146
00:11:31,840 --> 00:11:36,440
पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो दिख रहा है आपको

147
00:11:36,440 --> 00:11:40,480
जी तो क्या अ ये धार्मिक ग्रंथ हो गया आपके

148
00:11:40,480 --> 00:11:44,720
लिए नहीं केवल एक शब्द लिख देने से तो फिर

149
00:11:44,720 --> 00:11:49,080
तो फिर मुझे बताइए कितने शब्द कितने शब्द लिखने पर हो जाएगा बताइए

150
00:11:49,080 --> 00:11:53,200
ग्रंथ के कुछ नियम होते हैं वो क्या है

151
00:11:53,200 --> 00:11:57,240
सिद्धांत होते हैं वो हम वो अलग विषय है अलग विषय नहीं

152
00:11:57,240 --> 00:12:01,240
है आप अलग विषय नहीं है मैं कनेक्ट बता

153
00:12:01,240 --> 00:12:05,320
रहा हूं आपकी बात कट रही है आपने अभी एक बात कही कि जिस ग्रंथ में

154
00:12:05,320 --> 00:12:09,600
थोड़ी बहुत बात भी भगवान से जुड़ी हुई होगी भगवान वो वाले भगवान

155
00:12:09,600 --> 00:12:13,600
नहीं जिनको आप वाइस कैप्टन के रूप में देखते हैं मेन भगवान ठीक

156
00:12:13,600 --> 00:12:17,760
है पूर्ण ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म के अनुसार जिस भी ग्रंथ में कहीं भी लिखा

157
00:12:17,760 --> 00:12:18,260
होगा वो

158
00:12:18,160 --> 00:12:22,160
हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है वो धर्म है तो ये आपका

159
00:12:22,160 --> 00:12:26,240
धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा क्या ये अब आप कह रहे हैं

160
00:12:26,240 --> 00:12:31,480
अब आप कह रहे हैं कि नहीं और भी कुछ होता है वो और भी कुछ क्या है

161
00:12:31,480 --> 00:12:36,160
देखिए उसके विषय में हम आ रहे है उस भी आएंगे कि ग्रंथ क्या होता

162
00:12:36,160 --> 00:12:40,200
है म काव क्या होता है मैंने ग्रंथ नहीं कहा है मैंने कहा

163
00:12:40,200 --> 00:12:44,200
है धर्म धर्म आप किसी को भी

164
00:12:44,200 --> 00:12:48,240
किसी किसी भी बात को समाज में कोई भी संस्था है

165
00:12:48,240 --> 00:12:52,640
कोई भी मत है कोई भी पंथ है उस पंथ मत के द्वारा

166
00:12:52,640 --> 00:12:56,720
दी जाने वाली शिक्षा ज्ञान को आप धर्म जब कब कहते हैं

167
00:12:56,720 --> 00:13:00,760
किस कारण से कहते हैं यह पूछ रहा हूं मैं आपने कहा

168
00:13:00,760 --> 00:13:04,920
कि ईश्वर द्वारा प्रदत ज्ञान से मिलता जुलता होगा उसको हम धर्म कहेंगे तोय

169
00:13:04,920 --> 00:13:10,120
मिलता जुलता है पूर्ण ब्रम की भक्ति करो हा तो इसको

170
00:13:10,120 --> 00:13:14,280
भी जिसमें भी ऐसा कुरान शरीफ है

171
00:13:14,280 --> 00:13:18,560
चाहे बा आपने एक बात कही अभी इसको भी य धार्मिक ग्रंथ

172
00:13:18,560 --> 00:13:24,560
है आपका य ग्रंथ का क्या नाम है बताइए

173
00:13:25,400 --> 00:13:31,400
शकत शिवांक

174
00:13:31,840 --> 00:13:35,920
उसको हम पढ़ेंगे तभी तो हम कुछ क सकेंगे बिना पढ़े आपने

175
00:13:35,920 --> 00:13:40,160
कहा था मिलती जुलती कहीं पर भी बात होती है व धार्मिक ग्रंथ होता है तो यह मिलती जुलती

176
00:13:40,160 --> 00:13:44,920
बात दिखा दी ना पूर्ण ब्रम की भक्ति करो

177
00:13:44,920 --> 00:13:49,400
हम तो नहीं पढ़े है आपके

178
00:13:49,400 --> 00:13:53,640
दिखाने आपको दिख नहीं रहा है क्या दिख नहीं रहा जूम

179
00:13:53,640 --> 00:13:57,640
करू रहा है कि नहीं वो हमको दे दीजिए पूरा हम पढ़

180
00:13:57,640 --> 00:14:01,640
लेंगे इसके बाद निय है कि नहीं है तो वो तो

181
00:14:01,640 --> 00:14:05,640
यानी कि मिलती जुलती बात होने के बावजूद भी कुछ कारण ऐसे होते

182
00:14:05,640 --> 00:14:11,640
हैं जिन कारणों से आप डिसाइड करेंगे वह धार्मिक ग्रंथ है कि नहीं वह कारण क्या

183
00:14:15,160 --> 00:14:19,320
है यानी मेरी बात समझिए देखिए आपसे

184
00:14:19,320 --> 00:14:23,800
शायद आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे इसलिए ऐसा हो रहा है यानी की

185
00:14:23,800 --> 00:14:27,960
सिर्फ मिलती जुलती बात होने का होने से आप किसी को धर्म ग्रंथ नहीं मानेंगे

186
00:14:27,960 --> 00:14:32,040
आप उसम और भी जा करेंगे वो जांच का आधार क्या होगा

187
00:14:32,040 --> 00:14:36,720
यह पूछ रहा

188
00:14:36,720 --> 00:14:41,040
हूं जांच का आधार

189
00:14:41,040 --> 00:14:45,960
होगा वो उनका जो लेखक है वह कौन है

190
00:14:45,960 --> 00:14:50,800
वो कोई प्रमाणित व्यक्ति है अथवा नहीं

191
00:14:50,800 --> 00:14:54,960
इसके कौन लेखक होगा क्या प्रमाणित व्यक्ति किसके

192
00:14:54,960 --> 00:14:59,240
द्वारा प्रमाणित होआ किसी संत महात्मा के द्वारा

193
00:14:59,240 --> 00:15:03,440
लिखा होना चाहिए या जिसके बारे में हम जानते हैं कि वो भगवान का भेजा हुआ है उनके

194
00:15:03,440 --> 00:15:07,600
द्वारा होना चाहिए किसी आम व्यक्ति के लिख देने से

195
00:15:07,600 --> 00:15:11,720
कोई ग्रंथ नहीं हो जाता जैसे हम कोई शिवा आपके बारे में कुछ उल्टा सीधा

196
00:15:11,720 --> 00:15:15,760
या कोई भगवान के बारे में लिख दे तो वो ग्रंथ नहीं माना जाएगा

197
00:15:15,760 --> 00:15:20,480
तो यानी कि अब आपने कहा कि किसी संत कोई संत होना चाहिए

198
00:15:20,480 --> 00:15:24,640
है ना जी तो तो इसका मतलब यह है

199
00:15:24,640 --> 00:15:28,800
कि संत के द्वारा जो लिखा गया होगा वो आपका धार्मिक ग्रंथ

200
00:15:28,800 --> 00:15:30,720
है जी

201
00:15:30,720 --> 00:15:36,720
और संत की परिभाषा क्या है आपके अनुसार संत कौन

202
00:15:38,960 --> 00:15:43,760
है शांति को जो प्राप्त करले वो संत कहलाते

203
00:15:43,760 --> 00:15:48,680
हैं शांति को जो प्राप्त कर ले वह संत कहलाते हैं

204
00:15:48,680 --> 00:15:52,920
तो आज के टाइम में कोई आपके सामने य रामपाल जी को छोड़

205
00:15:52,920 --> 00:15:58,920
कर के संत है क्या

206
00:15:59,680 --> 00:16:03,880
नहीं अच्छा शांति से मतलब है वह युद्ध वगैरा

207
00:16:03,880 --> 00:16:09,080
ना करे नहीं शांति का मतलब होता है

208
00:16:09,080 --> 00:16:13,120
जैसे श्रीमद भगवत गीता अध्याय 18 लोक 6 में कहा गया है

209
00:16:13,120 --> 00:16:17,160
कि भारत सब प्रकाश परमेश्वर की शरण में जा उन्हीं की कृपा से तु

210
00:16:17,160 --> 00:16:21,160
परम शांति को यहां परम शांति जिस परम शांति की

211
00:16:21,160 --> 00:16:26,360
बात हो रही है उनको जो प्राप्त कर ले वो संत होता

212
00:16:26,360 --> 00:16:30,440
है वो संत होता है उसके द्वारा लिखा हुआ कोई भी ग्रंथ आप धार्मिक

213
00:16:30,440 --> 00:16:35,240
मानेंगे जी तो कुरान को किसने लिखा

214
00:16:35,240 --> 00:16:41,240
और क्या वोह शांति को प्राप्त

215
00:16:42,080 --> 00:16:46,560
थे कुरान शरीफ मोहम्मद साहब के

216
00:16:46,560 --> 00:16:51,040
द्वारा लिखा हुआ है और वो भगवान

217
00:16:51,040 --> 00:16:55,640
से मैं पूछ क्या वो शांति को प्राप्त थे

218
00:16:55,640 --> 00:16:59,760
बिल्कुल आपने कहा जो संत जो संत महात्माओं के द्वारा लिखा गया ग्रंथ

219
00:16:59,760 --> 00:17:03,800
होगा वो धार्मिक ग्रंथ है अब उसके बाद आपने बताया कि

220
00:17:03,800 --> 00:17:08,280
संत व है जो शांति को प्राप्त हो चुका हो यानी कि जो परम शांति होती है मोक्ष को

221
00:17:08,280 --> 00:17:12,320
है ना मोक्ष अलग विषय है

222
00:17:12,320 --> 00:17:16,360
शं तव से जान लेना तत्व से जान लेना इतना

223
00:17:16,360 --> 00:17:20,360
ही बहुत है हा तो क्या मोहम्मद साहब आपकी उस संत

224
00:17:20,360 --> 00:17:26,360
की कसौटी पर खरे उतरते हैं [संगीत]

225
00:17:35,600 --> 00:17:41,600
जी नहीं नहीं तो फिर वो आपका धार्मिक ग्रंथ कैसे

226
00:17:41,760 --> 00:17:46,560
हुआ इसलिए हुआ क्योंकि उसमें जो भी ज्ञान दिया गया है

227
00:17:46,560 --> 00:17:50,760
यानी देखिए भाई साहब अब थोड़ा सा मैं अब कहूंगा आपकी बातें बदल रही

228
00:17:50,760 --> 00:17:55,120
है आपने कहा था कि संत के द्वारा जो भी लिखा गया होगा

229
00:17:55,120 --> 00:17:59,160
वो धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा ऐसे किसी के भी लिख देने से नहीं माना जाएगा फिर

230
00:17:59,160 --> 00:18:03,200
मैंने संत की परिभाषा पूछ ली संत के कसौटी पर वो जो है मोहम्मद साहब वो खरे

231
00:18:03,200 --> 00:18:07,400
नहीं उतर रहे मैं जानता हूं कोई नहीं उतरता सिवाय आप आप जिनको मानते

232
00:18:07,400 --> 00:18:11,600
उनके अलावा तो जब वो खरे नहीं उतर रहे हैं संत के द्वारा

233
00:18:11,600 --> 00:18:15,720
जो लिखे हुए जो ये है वो संत है ही नहीं वो शांति को प्राप्त है

234
00:18:15,720 --> 00:18:21,720
ही नहीं तो फिर आप उनके ग्रंथों को धार्मिक ग्रंथ कैसे बोल रहे हैं क्यों बोल रहे

235
00:18:23,140 --> 00:18:27,280
[संगीत] हैं देखिए शांति को उ

236
00:18:27,280 --> 00:18:32,200
प्राप्त है कि नहीं इस विषय पर

237
00:18:32,200 --> 00:18:36,280
विचार करने से पूर्व हम अचानक ऐसा नहीं क सकते हैं कि उन्होंने शांति को प्राप्त कर लिया

238
00:18:36,280 --> 00:18:40,400
कि नहीं क्या ऐसे फिलहाल हमने अभी ये कहा है आपने

239
00:18:40,400 --> 00:18:44,760
मैं आपको क्लियर कर दूं पहली बात तो आपने भी कहा है कि वो संत नहीं थे

240
00:18:44,760 --> 00:18:48,960
क्योंकि वो शांति को प्राप्त नहीं थे दूसरी बात मैं आपके द्वारा बता दूं आपने

241
00:18:48,960 --> 00:18:53,400
एक किताब लिखी है मुसलमान नहीं समझे कुरान का ज्ञान जी

242
00:18:53,400 --> 00:18:57,440
यानी वो तत्व से नहीं जान पाए जी मुसलमान तो

243
00:18:57,440 --> 00:19:00,880
उसमें मोहम्मद भी आते हैं

244
00:19:00,880 --> 00:19:05,040
बिल्कुल आते हैं तो फिर कहां से वो शांति को प्राप्त होने वाले हो जाएंगे

245
00:19:05,040 --> 00:19:09,680
उसमें मतलब कि जो आप वो कह रहे हैं ना कि ऐसा हम लोग

246
00:19:09,680 --> 00:19:14,040
क्लियर नहीं कह सकते वो शांति को प्राप्त है कि नहीं है ये कह रहे हैं आपर

247
00:19:14,040 --> 00:19:18,040
आपकी ओर से क्लियर है कि वो शांति को प्राप्त नहीं है क्योंकि वो जान नहीं

248
00:19:18,040 --> 00:19:22,240
पाए कुरान का ज्ञान ये ये केवल

249
00:19:22,240 --> 00:19:26,920
मोहम्मद साहब के लिए नहीं है ये आम जो मुसलमान है वर्तमान के समय

250
00:19:26,920 --> 00:19:31,040
उनके लिए वो किताब लिखा हुआ है केवल नहीं जो जो आज के

251
00:19:31,040 --> 00:19:35,040
जो मुसलमान है वो मोहम्मद साहब को जो आयत उतरती थी मोहम्मद

252
00:19:35,040 --> 00:19:38,240
साहब अपने लोगों को बताते थे कि आयत का ये मतलब है उस

253
00:19:38,240 --> 00:19:42,360
आयत का वो मतलब है वो आगे चला तो मोहम्मद साहब आपके

254
00:19:42,360 --> 00:19:46,440
अनुसार संत नहीं है मोहम्मद साहब आपके अनुसार जो है वो शांति को प्राप्त नहीं

255
00:19:46,440 --> 00:19:50,440
है मोहम्मद साहब कुरान के ज्ञान को समझने वाले भी नहीं

256
00:19:50,440 --> 00:19:54,760
है तो जब वो नहीं है तो फिर उनके

257
00:19:54,760 --> 00:20:00,280
द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वो आपके लिए

258
00:20:00,280 --> 00:20:04,800
धार्मिक कैसे हुआ असल में बात यह है मैं बताऊ

259
00:20:04,800 --> 00:20:09,040
बात य है कि इसका जो यह प्रश्न चल रहा है

260
00:20:09,040 --> 00:20:13,040
इस प्रश्न में महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रश्न में बात

261
00:20:13,040 --> 00:20:17,080
करने से पहले हमें यह पता होना चाहिए धर्म क्या है जब हम यह

262
00:20:17,080 --> 00:20:21,120
पता कर लेंगे कि धर्म क्या है तो हमारे लिए स्पष्ट हो जाएगा कौन सा धार्मिक

263
00:20:21,120 --> 00:20:25,480
है कौन सा नहीं है धर्म क्या है जीव की चाह का जो वास्तविक

264
00:20:25,480 --> 00:20:29,480
विषय है मैं बोलू धर्म यह है क्योंकि व

265
00:20:29,480 --> 00:20:33,800
वोह प्रश्न छेड़ दूंगा उसमें भी आपको घंटा भर लग जाएगा जीव की चाह

266
00:20:33,800 --> 00:20:38,560
का जो वास्तविक विषय है सच्चितानंद स्वरूप परमेश्वर

267
00:20:38,560 --> 00:20:42,600
को प्राप्त को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा

268
00:20:42,600 --> 00:20:46,920
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताए गई विधि विधान

269
00:20:46,920 --> 00:20:51,520
मर्यादा का नाम धर्म है तो यानी कि जो शास्त्र सच्चिदानंद

270
00:20:51,520 --> 00:20:54,040
स्वरूप परमेश्वर की बात करेंगे

271
00:20:54,040 --> 00:20:58,640
और उसको प्राप्त कराने की बात करेंगे सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करेंगे

272
00:20:58,640 --> 00:21:02,760
वो हमारे लिए और उनके उसको प्राप्त करने के लिए प्रमाण और युक्ति के साथ वो

273
00:21:02,760 --> 00:21:07,040
तर्क के साथ जो परंपरा प्राप्त रूप से प्रा

274
00:21:07,040 --> 00:21:11,240
प्राप्त हुआ होगा तो उन शास्त्रों को हम धार्मिक कहते हैं हमारी परिभाषा

275
00:21:11,240 --> 00:21:15,320
है अब आपकी परिभाषा य किसी संत ने लिखा हो तो आपके ही

276
00:21:15,320 --> 00:21:19,360
अनुसार कोई संत है ही नहीं यहां तक कि व्यास इत्यादि भी संत नहीं

277
00:21:19,360 --> 00:21:23,440
थे महा ऋषि वेदव्यास जी जिनके द्वारा आपको वेद मिल रहे हैं

278
00:21:23,440 --> 00:21:27,640
जिनके द्वारा आपको पुराण मिल रहे हैं वो भी संत नहीं थे क्योंकि उनको भी तत्व

279
00:21:27,640 --> 00:21:32,080
ज्ञान नहीं हुआ था तो फिर य धार्मिक ग्रंथ

280
00:21:32,080 --> 00:21:36,200
कहने का दिखावा क्यों है फ आप सीधे कहिए कि हम कबीर सागर को धार्मिक ग्रंथ

281
00:21:36,200 --> 00:21:40,240
मानते हैं और उसके अनुसार जो होता है उसको हम कह देते हैं य

282
00:21:40,240 --> 00:21:44,320
धार्मिक ग्रंथ है मगर वास्तविकता में वो तत्व ज्ञान को ना जानने वालों

283
00:21:44,320 --> 00:21:48,520
ने लिखे हुए ग्रंथ है इसलिए हम नहीं मानते वास्तव में यह है मगर हम क देते

284
00:21:48,520 --> 00:21:54,520
हैं आपको य मानना पड़ेगा इस चीज

285
00:21:56,200 --> 00:22:00,520
को देखिए आप बोले जा रहे हैं बोले जा रहे हैं

286
00:22:00,520 --> 00:22:04,840
हमने ऐसा कहां कहा कि व्यास जी संत नहीं थे या फिर

287
00:22:04,840 --> 00:22:09,320
गीता जी क्या कता है वेद आदि ये ग्रंथ नहीं है

288
00:22:09,320 --> 00:22:13,400
क्योंकि ये संत के द्वारा लिखा हुआ नहीं ऐसा हमने कहा नहीं य आप पहले पूर्व

289
00:22:13,400 --> 00:22:17,520
में क्या जाने क्याल दास जी ने लिखा है व्यास इत्यादि को भी तत्व

290
00:22:17,520 --> 00:22:21,640
ज्ञान नहीं था ये तो शास्त्रों में भी लिखा

291
00:22:21,640 --> 00:22:25,720
अन ग्रंथों में भी लिखा हुआ है वो ठीक है हम आपकी बात वो बाद

292
00:22:25,720 --> 00:22:30,000
में देखेंगे वो लिखा है उसका मतलब क्या है मगर फिलहाल वह संत नहीं थे उनके द्वारा

293
00:22:30,000 --> 00:22:34,200
दिया गया जो ग्रंथ है वह धर्म ग्रंथ क्यों

294
00:22:34,200 --> 00:22:38,640
उसको जब आपको संत रामपाल जी महाराज ने ऐसा कह दिया

295
00:22:38,640 --> 00:22:42,880
कि व्यास आदि को तत्व ज्ञान नहीं थे यही बात

296
00:22:42,880 --> 00:22:47,160
अगर पुराणों में लिखा हुआ है अय दूसरी बात है

297
00:22:47,160 --> 00:22:51,320
आपका यह मानना है कि व्यास को तत्व ज्ञान नहीं था यह आपका

298
00:22:51,320 --> 00:22:56,080
मानना है वो कारण उसका कुछ भी हो शास्त्र हो या कुछ भी हो

299
00:22:56,080 --> 00:23:00,400
सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए देखिए व्यास

300
00:23:00,400 --> 00:23:04,680
जी को तत्व ज्ञान नहीं था कारण इसका कुछ भी हो

301
00:23:04,680 --> 00:23:08,800
मगर आप तो यह स्वीकार अंततोगत्वा कर रहे हैं कि व्यास जी को तत्व

302
00:23:08,800 --> 00:23:11,360
ज्ञान नहीं था तो जब आप यह स्वीकार कर रहे हैं

303
00:23:11,360 --> 00:23:15,560
तो उनके द्वारा प्राप्त होने वाले जो धर्म ग्रंथ है लिखे गए जो धर्म ग्रंथ है मोहम्मद

304
00:23:15,560 --> 00:23:19,640
को भी मोहम्मद जी को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर

305
00:23:19,640 --> 00:23:23,960
उनके द्वारा मिलने वाला ईसा को ईसा को भी तत्व ज्ञान नहीं था

306
00:23:23,960 --> 00:23:28,000
आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा यह सब मिलने वाले जो धर्म ग्रंथ है

307
00:23:28,000 --> 00:23:32,160
इनको आप धर्म ग्रंथ क्यों कह रहे हो

308
00:23:32,160 --> 00:23:36,280
आप देखिए या तो आप अपनी परिभाषा को चेंज करिए वो सही परिभाषा बताइए जिससे

309
00:23:36,280 --> 00:23:40,400
कि हम इन सबको धर्म ग्रंथ मान सके आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार

310
00:23:40,400 --> 00:23:44,560
ये धर्म ग्रंथ सिद्ध नहीं हो रहे तो फिर आप क्या ढोंग करते हो

311
00:23:44,560 --> 00:23:48,640
बोलने का कि धर्म ग्रंथ सभी धर्मों के ग्रंथों से हमने प्रमाणित कर दिया

312
00:23:48,640 --> 00:23:52,640
वो परिभाषा सही नहीं बताई आपने इसका मतलब आपने कहा कि

313
00:23:52,640 --> 00:23:56,720
जो संत के द्वारा दिया गया होगा ऐसे किसी के भी द्वारा लिख देने पर नहीं माना जाएगा

314
00:23:56,720 --> 00:24:01,200
किसी संत प्रामाणिक अब भाई आपके आपके अनुसार ना व्यास प्रामाणिक

315
00:24:01,200 --> 00:24:05,800
संत है आपके अनुसार ना मोहम्मद प्रामाणिक संत है आपके अनुसार ना

316
00:24:05,800 --> 00:24:09,000
ईसा

317
00:24:09,000 --> 00:24:13,120
यशु आप बो रहे ये मैंने कुछ कहा आपको अरे

318
00:24:13,120 --> 00:24:17,120
भाई आप अच्छा तो मैंने अभी आपसे पूछा अभी चलिए ठीक है आपने

319
00:24:17,120 --> 00:24:21,840
कहा नहीं कि मोहम्मद संत नहीं थे कहा नहीं

320
00:24:21,840 --> 00:24:25,880
ब्यास जी का नाम ले रहे और सब का नाम ले रहे व्यास जी के लिए भी

321
00:24:25,880 --> 00:24:30,120
लिखा है ब्रह्मा जी के लिए भी लिखा है को तत्व ज्ञान नहीं

322
00:24:30,120 --> 00:24:34,240
था सबके लिए लिखा है इनको तत्व ज्ञान नहीं था ये कोई संत सिद्ध

323
00:24:34,240 --> 00:24:38,320
नहीं हुआ आपकी परिभाषा मैं मैं आपकी

324
00:24:38,320 --> 00:24:43,000
बात पर बात कर रहा हूं अच्छा आपको तत्व ज्ञान हुआ

325
00:24:43,000 --> 00:24:47,040
फिर फिर विषयात मैं अभी एक चीज क्लियर कर रहा हूं देखिए

326
00:24:47,040 --> 00:24:51,080
मैं ये क्यों पूछ रहा हूं जिससे जब हम आगे बात करें तो हमें पता हो

327
00:24:51,080 --> 00:24:55,120
कि किस शास्त्र से प्रमाण लेना है समझ

328
00:24:55,120 --> 00:24:59,560
रहे हो इसलिए यह जानना आवश्यक है कि आप जिन को जिन जिन

329
00:24:59,560 --> 00:25:03,680
व्यक्तियों को मानते ही नहीं है कि वो तत्व ज्ञान वाले थे

330
00:25:03,680 --> 00:25:07,720
वो जो है वो संत थे और आपकी परिभाषा है कि जो संत

331
00:25:07,720 --> 00:25:11,880
के द्वारा दिए गए शास्त्र होंगे वो हम मानेंगे कि धार्मिक है ये आपने

332
00:25:11,880 --> 00:25:15,880
कहा तो इसलिए अब हम चेक करेंगे कि भा ये धार्मिक तो सिद्ध

333
00:25:15,880 --> 00:25:19,880
नहीं हो रहे क्योंकि आप ही कह रहे हो कि मोहम्मद वशिष्ठ और जो

334
00:25:19,880 --> 00:25:24,280
ईसा है यशु है ये सब जो है प्रामाणिक संत नहीं थे

335
00:25:24,280 --> 00:25:29,640
हमारे लिए भी नहीं है हमारे लिए व्यास प्रमाणिक संत है आपके लिए व्यास भी नहीं है

336
00:25:29,640 --> 00:25:34,520
और अगर अगर केवल भगवान की बात लिख देने से ही वह

337
00:25:34,520 --> 00:25:38,600
संत होने की आवश्यकता नहीं है प्रामाणिक होने की आवश्यकता नहीं है केवल भगवान

338
00:25:38,600 --> 00:25:42,720
की बात होनी चाहिए तो तो फिर यह भी मान लो इसको भी ग्रंथ

339
00:25:42,720 --> 00:25:48,000
कह दो धार्मिक

340
00:25:48,000 --> 00:25:52,480
ग्रंथ चलिए अब इसमें एक स्टेप इसी का और क्लियर हो

341
00:25:52,480 --> 00:25:56,840
जाएगा मैं यह पूछ रहा था कि

342
00:25:56,840 --> 00:26:01,400
जैसे कोई मातृ शक्ति है स्त्री

343
00:26:01,400 --> 00:26:05,800
तो उसको पवित्र चरित्र वाली कब तक कहा जाएगा

344
00:26:05,800 --> 00:26:11,400
जब तक उसका एक भी बार उसके का उसके द्वारा कोई ऐसा

345
00:26:11,400 --> 00:26:15,440
व्यभिचार सुनि पले आगे बढ़ने

346
00:26:15,440 --> 00:26:19,880
से पहले हम आपसे जानना चा कि आप जो लाइव

347
00:26:19,880 --> 00:26:24,040
डिबेट करते हैं बत अ लोगों के साथ

348
00:26:24,040 --> 00:26:28,320
हो गया आज हमारे साथ हो रहा है तो आप जो लाइव डिबेट कर रहे हैं

349
00:26:28,320 --> 00:26:32,400
इसका उद्देश्य क्या है इसका उद्देश्य है कि

350
00:26:32,400 --> 00:26:36,680
सच्चाई बाहर आए रामपाल का ज्ञान ज्ञान है या अज्ञान

351
00:26:36,680 --> 00:26:40,080
है जी

352
00:26:40,080 --> 00:26:41,080
हम

353
00:26:41,080 --> 00:26:45,400
ठीक है हम तो सबसे पहले हम आपसे

354
00:26:45,400 --> 00:26:49,560
एक आपने एक प्रश्न किया एक मिनट आपने एक प्रश्न किया मैंने बिना

355
00:26:49,560 --> 00:26:53,600
घुमाए फिराय बातों को बदले बिना बिल्कुल सटाक से उत्तर दिया

356
00:26:53,600 --> 00:26:57,800
ठीक है आपको एक मैं प्रश्न करता हूं उसके बाद आपको काफी देर लगती

357
00:26:57,800 --> 00:27:02,200
है उसम आप अपनी बातें कई बार बदल एक मिनट एक मिनट एक मिनट अब मैं पूछ रहा हूं

358
00:27:02,200 --> 00:27:07,080
आपका यह प्रश्न करने का उद्देश्य क्या था

359
00:27:07,080 --> 00:27:11,440
क्या आप जो प्रश्न कर रहे हैं अभी जो आपने एक प्रश्न किया कि आपका उद्देश्य

360
00:27:11,440 --> 00:27:15,640
क्या है लाइव डिबेट करने का तो इस प्रश्न आपका उद्देश क्या

361
00:27:15,640 --> 00:27:20,160
था यही उद्देश्य था कि जो उद्देश्य है उस उद्देश्य को लेकर के

362
00:27:20,160 --> 00:27:24,720
और कुछ उद्देश का पूर्ति हो इसीलिए मैंने आपको प्रश्न

363
00:27:24,720 --> 00:27:29,040
किया यह जानना चाहते थे आप कि मेरा उदेश

364
00:27:29,040 --> 00:27:33,120
जिसे क्या सही उद्देश्य पर चल रहा अगर सही उद्देश्य पर चलूंगा तो

365
00:27:33,120 --> 00:27:37,280
तो आप बात करेंगे अगर नहीं चलूंगा तो आप बात नहीं

366
00:27:37,280 --> 00:27:41,280
करेंगे हा बिल्कुल क्योंकि

367
00:27:41,280 --> 00:27:45,440
अब आपको मेरा उद्देश्य पता चल गया जी अब मैं

368
00:27:45,440 --> 00:27:49,600
आपसे प्रश् एक मिनट तो अब आपको मेरा उद्देश्य

369
00:27:49,600 --> 00:27:54,000
ठीक लगा कि नहीं लगा चलिए वो ठीक है आप अगर

370
00:27:54,000 --> 00:27:56,440
जाच कर रहे हैं तो अच्छी बात है जांचना

371
00:27:56,440 --> 00:27:59,480
चाहिए

372
00:27:59,480 --> 00:28:03,560
मैंने शुरू में मैंने शुरू में जो विषय पूछा था इसलिए पूछा था जिससे कि

373
00:28:03,560 --> 00:28:07,640
देखिए हमारी चर्चा केवल आप ये मत सोचिए कि आज ही हो जाएगी

374
00:28:07,640 --> 00:28:11,760
इसके कई सारे एपिसोड रहेंगे आप एक सभ्य व्यक्ति है और हमारी

375
00:28:11,760 --> 00:28:16,280
आपस में ठीक से बात हो सकती है तो हम कई हिस्सों में बातें कर लेंगे

376
00:28:16,280 --> 00:28:20,600
अभी पहला जो चैप्टर हमने चल रहा है इस समय वो है

377
00:28:20,600 --> 00:28:24,920
सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथ ठीक है अब हमने काफी देर तक धर्म

378
00:28:24,920 --> 00:28:28,960
पर बात कर ली है कि रामपाल जी जी के द्वारा किसी

379
00:28:28,960 --> 00:28:33,240
भी आईडियोलॉजी को या विचारधारा को मत पंथ को संप्रदाय

380
00:28:33,240 --> 00:28:37,720
को धर्म कहने का आधार क्या है उसमें आपने जो वो दिए हैं

381
00:28:37,720 --> 00:28:41,720
और मैंने जो दिए हैं वो जनता ने देखा है वो जो भी देखेगा वो अपना डिसाइड करेगा

382
00:28:41,720 --> 00:28:45,840
अब मैं इसमें जो आगे दो शब्द है उनकी बात कर रहा हूं इसी इसी चैप्टर

383
00:28:45,840 --> 00:28:51,320
का जो अगला भाग है वो भाग यह है कि कोई भी महिला

384
00:28:51,320 --> 00:28:55,360
पवित्र अगर वो उससे देखा जाए चरित्र से चरित्र के

385
00:28:55,360 --> 00:28:59,440
दृष्टिकोण से देखा जाए तो वो महिला कब तक कहलाए गी जब तक

386
00:28:59,440 --> 00:29:04,160
वो एक बार भी उसने व्यभिचार ना किया हो

387
00:29:04,160 --> 00:29:08,280
या अपवित्र कहलाने के लिए उसको कई बार

388
00:29:08,280 --> 00:29:11,680
व्यभिचार करना पड़ेगा तब वह अपवित्र कहलाए गी

389
00:29:11,680 --> 00:29:15,760
जैसे कि थाली होती है थाली वह थाली खाने की थाली

390
00:29:15,760 --> 00:29:20,040
है और हम उसमें वह थाली अपवित्र कब कहलाए

391
00:29:20,040 --> 00:29:24,600
गी जब उसमें पूरी थाली झूठी हो या फिर उसमें केवल एक कौरा

392
00:29:24,600 --> 00:29:28,600
केवल एक कोर रख दो तो वो थाली झूठी हो जाएगी इनमें से कौन सी चीज

393
00:29:28,600 --> 00:29:34,600
को आप मानते

394
00:29:35,200 --> 00:29:39,360
हैं ये तो एक और रख देने मात्र से भी वो जूठी समझी जाती

395
00:29:39,360 --> 00:29:43,640
है पूरा करने का कोई आवश्यकता नहीं है और

396
00:29:43,640 --> 00:29:47,800
स्त्री कई बार उसको व्यभिचार करना होगा अपवित्र कहलाने के लिए या

397
00:29:47,800 --> 00:29:51,880
केवल एक बार व्यभिचार कर देगी तब कहलाए गी या पुरुष पुरुष की भी बात

398
00:29:51,880 --> 00:29:55,960
कर ले कई बार उसको व्यभिचार करना होगा या फिर एक ही बार व्यभिचार

399
00:29:55,960 --> 00:30:00,360
कर लिया तो उसकी पवित्रता भंग हो जाएगी बताइए

400
00:30:00,360 --> 00:30:04,520
एक ही बार करने से पवित्रता भंग हो सकता है अच्छा केवल एक

401
00:30:04,520 --> 00:30:08,760
ची एक बार एक मात्र चिंदी मात्र जो उलट

402
00:30:08,760 --> 00:30:13,040
व्यवहार है उसके कारण वह अपवित्र हो जाएगा है ना जी

403
00:30:13,040 --> 00:30:19,040
अच्छा तो आपके हिसाब से कोई भी शास्त्र पवित्र क्यों

404
00:30:19,480 --> 00:30:24,520
है कोई भी शास्त्र का पवित्रता का आधार क्या

405
00:30:24,520 --> 00:30:28,800
है पवित्रता का आधार है कि वो हमें ईश्वर

406
00:30:28,800 --> 00:30:32,880
का मार्ग प्रदान करते हैं इसीलिए वो हमारे लिए पवित्र है आदरणीय

407
00:30:32,880 --> 00:30:37,040
आदर है अच्छा उसमें एक भी बात अगर ईश्वर

408
00:30:37,040 --> 00:30:41,680
के मार्ग से विरुद्ध जाने वाली होगी तो वो अपवित्र हो जाएंगे कि नहीं

409
00:30:41,680 --> 00:30:47,120
नहीं नहीं नहीं है ना

410
00:30:47,120 --> 00:30:51,240
नहीं तो ये तो आपकी दोहरी बातें हो गई थाली

411
00:30:51,240 --> 00:30:55,920
को अपवित्र करने के लिए पूरी थाली अपवित्र होने की आवश्यकता नहीं है

412
00:30:55,920 --> 00:31:00,840
और ली और पुरुष को अपवित्र कहने के लिए

413
00:31:00,840 --> 00:31:05,520
स्त्री पुरुष का सदैव का व्यभिचारी होना आवश्यक नहीं है मगर

414
00:31:05,520 --> 00:31:09,680
जब बात आप ग्रंथ की कर रहे जिसको आपने पवित्र कहा है उसमें

415
00:31:09,680 --> 00:31:13,760
एक भी बात जो भगवान के विरुद्ध हो रही है उसको हो जाने के बाद भी आप उसको

416
00:31:13,760 --> 00:31:17,760
पवित्र कह रहे तो फिर नियम क्या है तो किसी को पवित्र

417
00:31:17,760 --> 00:31:23,280
कहने का नियम क्या हुआ फिर

418
00:31:23,280 --> 00:31:27,560
आपका थाली में पुरुष में विचार करने की बात

419
00:31:27,560 --> 00:31:31,680
और शास्त्र में दो तरह की बातें करना ये तो शास्त्र में फड़ा

420
00:31:31,680 --> 00:31:36,560
पड़ा है इससे वो श शास्त्र में दो तरह की बातें नहीं कह रहा हूं विरुद्ध

421
00:31:36,560 --> 00:31:40,920
ऐसी बात भगवान को प्राप्त ना कराए वो है हा

422
00:31:40,920 --> 00:31:45,240
तो भरा पड़ा है वो भरा पड़ा है वो ठीक है फिर उसको आप पवित्र क्यों कह रहे हो

423
00:31:45,240 --> 00:31:49,360
जब आपकी पवित्रता की परिभाषा ये है जिसमें चिंदी मात्र

424
00:31:49,360 --> 00:31:53,480
भी अपवित्र नहीं होगी वो पवित्र है वो

425
00:31:53,480 --> 00:31:57,560
पवित्रता वेदा कौन होता है एक मिनट वेदा कौन होता है जिसमें दाग ना

426
00:31:57,560 --> 00:32:02,920
हो वो दा सुनिए सुनिए वे दत किसे कहते

427
00:32:02,920 --> 00:32:07,040
हैं मिनट तो फिर तो फिर वो मुझे सिद्धांत बताइए कि

428
00:32:07,040 --> 00:32:13,040
शास्त्र का सिद्धांत क्या है पवित्र कहने

429
00:32:16,080 --> 00:32:20,160
का जी फिर से बोलिए आपने

430
00:32:20,160 --> 00:32:24,320
कहा कि कोई महिला अथवा पुरुष जरा सा भी व्य विचार करेगा उसकी

431
00:32:24,320 --> 00:32:28,520
पवित्रता भंग हो जाएगी अ पवित्र कहलाएगा आपने कहा कि कोई थाली

432
00:32:28,520 --> 00:32:32,560
जो होगी उसमें एक चिंदी भी झूठी रख दो तो वह थाली झूठी कहलाए

433
00:32:32,560 --> 00:32:36,680
कीी वो पवित्र थाली नहीं कहलाए गी मगर आपने कहा के ग्रंथ में

434
00:32:36,680 --> 00:32:41,040
भले ही भगवान के विरुद्ध बात हो रही हो पूर्ण ब्रह्म के विरुद्ध

435
00:32:41,040 --> 00:32:44,560
फिर भी वो पवित्र कहलाएंगे

436
00:32:44,560 --> 00:32:49,120
क्यों तो पवित्रता का आधार क्या है फिर आपकी

437
00:32:49,120 --> 00:32:53,200
थाली में अपवित्र खाली प मत जाइए आप

438
00:32:53,200 --> 00:32:57,640
ग्रंथों को पवित्र कहने का आधार बताइए क्या है मैं

439
00:32:57,640 --> 00:33:02,520
आपको कही दिया कि जो शास्त्र पवित्र इसलिए है क्योंकि वो हमारे

440
00:33:02,520 --> 00:33:06,640
ईश्वर को प्राप्त कराने का मार्ग प्रदान करते हैं इसलिए व हमारे लिए पवित्र है आदर

441
00:33:06,640 --> 00:33:11,360
है आदरणीय है यानी कि कोई भी ऐसा शास्त्र

442
00:33:11,360 --> 00:33:15,480
जिसमें की ईश्वर को प्राप्त कराने की बात होगी उसको आप पवित्र

443
00:33:15,480 --> 00:33:21,240
कहेंगे भले ही उसमें दूसरे हिस्से में गलत शलत बातें भी लिखी

444
00:33:21,240 --> 00:33:25,400
हो जी ठीक है तो अब यह पवित्र है कि

445
00:33:25,400 --> 00:33:29,880
नहीं पूर्ण ब्रम की भक्ति करो मैं ने लिख दिया ये पवित्र

446
00:33:29,880 --> 00:33:31,400
सद्र ये पवित्र

447
00:33:31,400 --> 00:33:35,520
है कि नहीं भले ही इसमें मैंने पीछे लिखा हो कि रामपाल

448
00:33:35,520 --> 00:33:39,760
चोर है या जेल कट्टू है कुछ भी लिखा हो उससे मतलब नहीं है मैंने तो यहां पर रामपाल

449
00:33:39,760 --> 00:33:45,760
जी की जय भी लिख दूंगा पूर्ण ब्रम की भक्ति भी तो ये पवित्र कहलाएगा कि नहीं

450
00:33:48,880 --> 00:33:53,160
कहलाएगा बिल्कुल नहीं कहलाएगा वो तो इसका

451
00:33:53,160 --> 00:33:57,960
मतलब इसका मतलब कि अपोजिट बात होने की स्थिति में उसकी पवित्रता

452
00:33:57,960 --> 00:34:00,800
हो रही

453
00:34:00,800 --> 00:34:04,880
है जब तक केवल सही सही बातें ही नहीं लिखी

454
00:34:04,880 --> 00:34:09,040
होंगी किसी शास्त्र में तब तक ही उसे पवित्र माना जा सकता है

455
00:34:09,040 --> 00:34:13,400
अगर एक भी बात उलट लिख दी तो उसको पवित्र नहीं माना जा सकता अन्यथा बोल दीजिए शिवांक

456
00:34:13,400 --> 00:34:19,400
जो रचना है यह पवित्र शास्त्र

457
00:34:19,920 --> 00:34:23,960
है आप संत है फिर वही बात

458
00:34:23,960 --> 00:34:28,000
संत वाली बात तो हम पीछे छोड़ आए ना आपने कहा मोहम्मद संत नहीं है फिर भी

459
00:34:28,000 --> 00:34:32,600
उसके ग्रंथों को आपने माना आपको बता दिया

460
00:34:32,600 --> 00:34:36,680
के द्वारा लिखा होना चाहिए तो आप बारबार ल एक मिनट तो पवित्र

461
00:34:36,680 --> 00:34:40,840
एक मिनट सही कर लेते हैं आपने पवित्रता की परिभाषा बताई थी कि जो भी भगवान

462
00:34:40,840 --> 00:34:44,880
की बात करेंगे वो पवित्र है आपने उसम ये नहीं बोला था जो संतों के द्वारा प्रदान

463
00:34:44,880 --> 00:34:48,920
किया गया और भगवान की बात करेंगे तो वो पवित्र है तो अब आप

464
00:34:48,920 --> 00:34:53,160
अपनी परिभाषा एक बार सही करके दोबारा बता दीजिए क्या है पवित्र मानने की

465
00:34:53,160 --> 00:34:57,240
व वो धार्मिक ग्रंथ मानने की बात थी अभी मैं पवित्र पर बात कर रहा हूं

466
00:34:57,240 --> 00:35:01,360
पवित्र मानने की बात का क्या आधार अभी आपने जो परिभाषा बताई

467
00:35:01,360 --> 00:35:05,880
थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी

468
00:35:05,880 --> 00:35:10,080
अभी आपने जो परिभाषा बताई थी उसके अनुसार यह भी पवित्र सद ग्रंथ

469
00:35:10,080 --> 00:35:14,360
सिद्ध हो रहा है जो कि आप मना कर रहे हैं तो अब आप अपनी बदली हुई परिभाषा

470
00:35:14,360 --> 00:35:18,360
बताइए मैंने परिभाषा नहीं बदला है हां पर

471
00:35:18,360 --> 00:35:22,400
आपने कहा जूठा थाली जूठा होने की बात वहां

472
00:35:22,400 --> 00:35:26,480
पर विषय अलग था ग्रंथ को भाई साहब मैंने

473
00:35:26,480 --> 00:35:30,600
कहा आपने जो परिभाषा बताई है ग्रंथ को पवित्र मानने

474
00:35:30,600 --> 00:35:34,600
की भाई साहब ग्रंथ को पवित्र मानने की जो आपने परिभाषा

475
00:35:34,600 --> 00:35:35,100
बताई

476
00:35:35,000 --> 00:35:39,080
है वो परिभाषा आपने यह कही है कि जो भी ग्रंथ भगवान

477
00:35:39,080 --> 00:35:43,160
के र ले जाने की बात करेंगे वह हमारे लिए पवित्र है भले

478
00:35:43,160 --> 00:35:47,480
ही उसमें ठीक उलट बातें भी लिखी हो और यही अंतर है

479
00:35:47,480 --> 00:35:51,480
थाली में स्त्री पुरुष में और सद ग्रंथ में ग्रंथ में

480
00:35:51,480 --> 00:35:55,560
ठीक उलट बातें भी लिखी होंगी तो भी हम उसे पवित्र कहेंगे और थाली में

481
00:35:55,560 --> 00:35:59,600
भले ही ठीक उलट थाली में अगर ठीक उलट झूठा हुआ तो हम उसे पवित्र

482
00:35:59,600 --> 00:36:03,760
नहीं कहेंगे स्त्री पुरुष में ठीक उलट अगर त्रिया चरित्र हुआ तो हम उसे पवित्र

483
00:36:03,760 --> 00:36:07,800
स्त्री पुरुष नहीं कहेंगे मगर ग्रंथ में अगर ठीक उलट भी लिखा हुआ

484
00:36:07,800 --> 00:36:11,840
है फिर भी हम उसे पवित्र ग्रंथ कहेंगे फिर मैंने कहा कि ठीक है

485
00:36:11,840 --> 00:36:16,000
तो मैंने अब यह लिख दिया है तो अब इसके ठीक उलट बातें भी इसमें लिखी

486
00:36:16,000 --> 00:36:20,480
हुई है क्या ये आपके लिए पवित्र कहलाएगा तो आपने कहा कि नहीं कहलाएगा

487
00:36:20,480 --> 00:36:25,560
तो फिर अब आप आपको बदलनी पड़ेगी ना परिभाषा वो बदल के बता दीजिए मुझे क्या

488
00:36:25,560 --> 00:36:29,800
है तो आप तो ग्रंथ नहीं रहे आप तो अपना कुछ डायरी

489
00:36:29,800 --> 00:36:33,840
दिखा रहे हैं वो तो ग्रंथ है ही नहीं पले ग्रंथ है क्या

490
00:36:33,840 --> 00:36:38,240
आपको इतना लंबा चौड़ा करने से पहले हम आपको बता द सीधा सधी बात

491
00:36:38,240 --> 00:36:42,240
अगर जने पहले भी कहा कि हम आगे चर्चा जो करेंगे उसमें कुछ

492
00:36:42,240 --> 00:36:46,280
प्रमाणित लिया जाएगा शास्त्रों से तो कौन सा शास्त्र प्रमाणित है कौन सा

493
00:36:46,280 --> 00:36:50,080
पवित्र है ये कहना चाहता सीधा साफ साफ शब्दों में आप जान लीजिए

494
00:36:50,080 --> 00:36:54,320
कि चारों जितने भी धर्म है जैसे हिंदू है हिंदू का जो वेद

495
00:36:54,320 --> 00:36:58,400
है गीता है पुराण है वो शास्त्र है वो वो धार्मिक

496
00:36:58,400 --> 00:37:02,520
ग्रंथ है मुसलमान अरे भाई आप वो सिद्ध नहीं कर पाए पहली बात तो

497
00:37:02,520 --> 00:37:07,040
यह है कि आप वो सिद्ध ही नहीं कर पाए कि वो धार्मिक ग्रंथ है आपकी परिभाषा के अनुसार

498
00:37:07,040 --> 00:37:11,120
और अभी आपने एक बात कही है कि जिस ग्रंथ में जिस पुस्तक

499
00:37:11,120 --> 00:37:15,160
में आप मुझे दोबारा परिभाषा बता दीजिए किसी भी पुस्तक को पवित्र

500
00:37:15,160 --> 00:37:19,280
पुस्तक मानने का आधार क्या है दोबारा बता दीजिए आप इसीलिए मैं कह रहा

501
00:37:19,280 --> 00:37:25,280
हूं बदल के बता दो

502
00:37:27,800 --> 00:37:32,640
देखि फिर से वही बात होगी जो परिभाषा

503
00:37:32,640 --> 00:37:36,760
बदलना नहीं है जो कि जो बात मैंने बता दिया जब आप

504
00:37:36,760 --> 00:37:40,880
सुनिए आपने जो परिभाषा बताई थी भाई साहब वो यह थी जो जिस

505
00:37:40,880 --> 00:37:45,120
पुस्तक में जरा भी भगवान की ओर जाने की बात होगी भले ही उस पुस्तक में उल्टी

506
00:37:45,120 --> 00:37:49,320
बातें भी हो व हमारे लिए पवित्र है ठीक है तो जब मैंने यह दिखा

507
00:37:49,320 --> 00:37:53,480
दी भगवान की ओर जाने की बात तो आपने कहा ये नहीं है इसका

508
00:37:53,480 --> 00:37:57,680
मतलब कुछ और भी चीज है जो आपने बोला है उससे उल

509
00:37:57,680 --> 00:38:03,680
कुछ और भी चीजें है जो ऐड करनी है वो ऐड करके मुझे बताइए क्या है

510
00:38:04,560 --> 00:38:08,760
वो इसीलिए नहीं है क्योंकि आप जिसको दिखा रहे हो वो तो संत कृत है

511
00:38:08,760 --> 00:38:13,640
नहीं पहले भी बता दिया कि वो ग्रंथ संतों के द्वारा रचित होना चाहिए

512
00:38:13,640 --> 00:38:17,800
यानी कि आपकी परिभाषा यही है पवित्र मानने की कि वो संत कृत

513
00:38:17,800 --> 00:38:21,920
होना चाहिए और वो जो है क्या कहते हैं भगवान की ओर

514
00:38:21,920 --> 00:38:26,560
ले जाने की बात करने वाला होना चाहिए फिर भले ही उस संस्कृत में

515
00:38:26,560 --> 00:38:32,280
उसमें कुछ उलट बातें भी लिखी हो भगवान से दूर ले जाने वाली ठीक

516
00:38:32,280 --> 00:38:36,520
है बिल्कुल हां तो अब बात

517
00:38:36,520 --> 00:38:41,200
फिर से वही आ जाती है कि आपके लिए संत कौन है

518
00:38:41,200 --> 00:38:45,400
हां ये अलग विषय है लेकिन अरे भाई अलग विषय क्यों

519
00:38:45,400 --> 00:38:49,400
है आप जिनको धर्म और ग्रंथ कह रहे हो पवित्र कह रहे हो धर्म कह रहे हो

520
00:38:49,400 --> 00:38:54,000
पवित्र कह रहे हो वो आपके ही अनुसार धर्म और पवित्र सिद्धि नहीं हो रहा है वो

521
00:38:54,000 --> 00:38:58,080
आपकी परिभाषा के अनुसार क्योंकि आप नहीं मानते कि मोहम्मद संत है और

522
00:38:58,080 --> 00:39:02,280
फिर आप कुरान को धार्मिक ग्रंथ कह रहे पवित्र ग्रंथ कह रहे हो तोय

523
00:39:02,280 --> 00:39:08,280
नाटक हुआ ना फि तो ढंग हुआ या तो आपकी परिभाषा और कुछ है वो

524
00:39:15,040 --> 00:39:19,360
बताओ चलो इसमें जो आखरी पॉइंट है

525
00:39:19,360 --> 00:39:23,560
वो दर्शकों ने देख लिया बात होगी इसमें आखरी पॉइंट है सद

526
00:39:23,560 --> 00:39:28,440
ग्रंथ इसका अर्थ क्या होता है सद ग्रंथ का सद ग्रंथ

527
00:39:28,440 --> 00:39:32,600
सत्य बोलने वाले ग्रंथ सच्चा ग्रंथ सच्चा

528
00:39:32,600 --> 00:39:37,120
ग्रंथ अच्छा तो किसी भी ग्रंथ को आप सच्चा ग्रंथ

529
00:39:37,120 --> 00:39:43,120
मानने का आधार क्या है

530
00:39:45,360 --> 00:39:49,360
आपका वो ईश्वर प्रदत है भले ही वो

531
00:39:49,360 --> 00:39:53,960
झूठ हो जी ईश्वर प्रदत होना चाहिए भले ही झूठ

532
00:39:53,960 --> 00:39:58,480
हो जी उसम झूठ है

533
00:39:58,480 --> 00:40:02,520
है अच्छा ठीक है ये बताइए

534
00:40:02,520 --> 00:40:07,400
ये बताइए जो जो गीता है वह आपके अनुसार

535
00:40:07,400 --> 00:40:11,800
धर्म पवित्र ग्रंथ है कि नहीं बिल्कुल है

536
00:40:11,800 --> 00:40:15,960
उसमें झूठ है कि नहीं नहीं उसमें झूठ तो नहीं

537
00:40:15,960 --> 00:40:20,000
है उसमें झूठ नहीं है कहीं कहीं पर झूठ नहीं है ऐसा मेरा मत

538
00:40:20,000 --> 00:40:24,320
है 5 पर काल ने झूठ नहीं बोला है

539
00:40:24,320 --> 00:40:28,920
ये किसने कहा कि 5 पर काल झूठ बोला है रामपाल

540
00:40:28,920 --> 00:40:30,280
ने बोल

541
00:40:30,280 --> 00:40:36,280
दूं दिखा दूं दिखा

542
00:40:39,280 --> 00:40:43,320
दीजिए आपको यह नहीं पता है कि रामपाल नेय कहा है कि गीता में पाच

543
00:40:43,320 --> 00:40:47,960
पर काल का अपना ज्ञान है वो सही नहीं है यह नहीं पता आपको

544
00:40:47,960 --> 00:40:52,120
आप दिखाइए कहां लिखा है आपको पता है तो बता दीजिए पूछ रहा हूं आपको

545
00:40:52,120 --> 00:40:56,480
पता है कि नहीं पता है खामा खा टाइम वेस्ट करा रहे पता है कि नहीं पता मैं दिखा दूंगा

546
00:40:56,480 --> 00:41:00,520
मैं दिखा दूंगा अन्यथा मैं रामपाल की भक्ति करना शुरू कर दूंगा आपको पता है

547
00:41:00,520 --> 00:41:05,400
कि नहीं पता है मैं दिखा दूंगा दिखा दीजिए

548
00:41:05,400 --> 00:41:09,520
आपको पता है कि नहीं पता है मुझे पता है पर

549
00:41:09,520 --> 00:41:13,680
आप जो क ऐसा नहीं कहे उनका कहने का भाव कुछ और था पर आप कुछ

550
00:41:13,680 --> 00:41:19,680
और बता रहे हैं क्या भाव था उनका वो बता दीजिए

551
00:41:20,360 --> 00:41:24,480
दिखा नहीं नहीं दिखा दीजिए क् बोले क्या दिखाने

552
00:41:24,480 --> 00:41:28,600
वाले तो उसको देख ही लेते हैं कहां क्या लिखा है दिखा दे दिखा देते दिखा

553
00:41:28,600 --> 00:41:34,600
देते

554
00:42:01,040 --> 00:42:05,240
यह देखिए यह क्या लिखा है

555
00:42:05,240 --> 00:42:11,240
अंडरलाइन कर देता

556
00:42:19,760 --> 00:42:23,400
हूं गीता अध्याय

557
00:42:23,400 --> 00:42:28,640
छ 10 से 15 श्लोक में

558
00:42:28,640 --> 00:42:32,840
इसके विपरीत यानी ऊपर जो बात चल रही है उसके विपरीत अपना मत यानी

559
00:42:32,840 --> 00:42:38,520
कौन सी चीज है काल के जाल में फसे रहने वाली बात बताई

560
00:42:38,520 --> 00:42:42,600
है और यह कई जगह लिखा है यह तो एक जगह कई जगह

561
00:42:42,600 --> 00:42:46,880
लिखा है अब आप बताइए इसमें क्या दिखाना

562
00:42:46,880 --> 00:42:50,920
चाह रहे थे आप क्या बोले यानी कि इसमें कुछ

563
00:42:50,920 --> 00:42:55,040
ऐसी बातें भी लिखी है जो भगवान के पास नहीं बल्कि भगवान से दूर ले जा रही है काल

564
00:42:55,040 --> 00:42:59,280
के जाल में फसा रही है गीता में तो फिर वह सद ग्रंथ कैसे अगर

565
00:42:59,280 --> 00:43:05,280
सद ग्रंथ व है जो भगवान के पास ले जाने की बात

566
00:43:08,320 --> 00:43:12,680
करे इस जगह संत रामपाल जी महाराज यह बताए हैं

567
00:43:12,680 --> 00:43:16,920
कि गीता में जो पा की बात आप बता रहे हैं इसके विषय में बताया

568
00:43:16,920 --> 00:43:21,160
है कि गीता ज्ञान दाता भगवान अपने

569
00:43:21,160 --> 00:43:25,280
अपने मन से कुछ लोक बताए हैं उसके विषय में उन्होने खुद

570
00:43:25,280 --> 00:43:29,280
कहा है कि यह मेरा मत है अगर उस मत वो जो उनके द्वारा

571
00:43:29,280 --> 00:43:33,600
जो बताया गया ज्ञान है अगर वो वेदों से मिलता है तो उसका पालन करने योग्य

572
00:43:33,600 --> 00:43:38,360
है अगर वह नहीं मिलता है तो फिर वो पालन करने योग्य नहीं है इसी

573
00:43:38,360 --> 00:43:42,520
विषय यानी की उन्होंने ये भी माना ना कि ऐसा कुछ है गीता

574
00:43:42,520 --> 00:43:47,200
में जो पालन करने योग्य नहीं है जी

575
00:43:47,200 --> 00:43:51,800
तो सद ग्रंथ तो व है ना जो पालन करने योग्य हो

576
00:43:51,800 --> 00:43:55,800
फिर उसमें तो कुछ चीज ऐसी है जो पालन करने योग्य नहीं है फिर वो सद

577
00:43:55,800 --> 00:43:59,840
ग्रंथ कैसे फिर भी वो सद ग्रंथ इसका तो निर्णय हो ही

578
00:43:59,840 --> 00:44:03,880
गया उसम दोनों ही बात है यानी कि यानी कि

579
00:44:03,880 --> 00:44:08,200
जिस ग्रंथ में ईश्वर के ओर ले जाने वाली बात होगी

580
00:44:08,200 --> 00:44:12,280
वोह और ईश्वर से दूर ले जाने वाली बातें होंगी दोनों ही सद ग्रंथ आप

581
00:44:12,280 --> 00:44:16,760
मान लोगे दोनों ही बात उसम होता

582
00:44:16,760 --> 00:44:20,960
है और झूठा ग्रंथ किसे मानोगे

583
00:44:20,960 --> 00:44:23,920
झूठा ग्रंथ होता ही नहीं है जिसे

584
00:44:23,920 --> 00:44:28,040
आप कोई झूठा ग्रंथ कोई झूठी बुक नहीं होती कोई झूठी किताब

585
00:44:28,040 --> 00:44:32,400
नहीं होती कोई झूठा शास्त्र नहीं होता कुछ नहीं झूठा होता

586
00:44:32,400 --> 00:44:36,520
लग गया तो तो ग्रंथ ही होता उसम तो दोनों ही बात है

587
00:44:36,520 --> 00:44:42,520
मैं आपसे पूछ रहा हूं झूठी किताब आप किसे

588
00:44:43,200 --> 00:44:47,280
मानोगे झूठी किताब तो वो होगा जिसमें की ईश्वर के बारे में कुछ लिखा हुआ

589
00:44:47,280 --> 00:44:51,360
ही नहीं है वोह झूठी होगी कुछ भी नहीं लिखा है

590
00:44:51,360 --> 00:44:55,040
अगर कुछ भी लिखा है तो

591
00:44:55,040 --> 00:44:59,160
वो अगर जरा सा ईश्वर के बारे में लिखा है तो व सच्ची

592
00:44:59,160 --> 00:45:03,400
हो जाएगी नहीं जरा से क्यों होगा

593
00:45:03,400 --> 00:45:09,400
क्या कितना होना

594
00:45:11,040 --> 00:45:15,040
चाहिए इसका कोई पॉइंट नहीं है कि इतना ही होना चाहिए ऐसा

595
00:45:15,040 --> 00:45:19,040
कुछ नहीं है गीता की बाद मन मर्जी की बात है फिर मन मर्जी की

596
00:45:19,040 --> 00:45:23,040
बात है फिर कितना होना चाहिए मनमर्जी तो

597
00:45:23,040 --> 00:45:27,080
आप लोग कर रहे हैं कि आप कुरान शरीफ को मान बेकार की बात जब मैंने

598
00:45:27,080 --> 00:45:31,280
पूछा कि किसी शास्त्र में कितना ज्ञान होने पर आप उसको कितना

599
00:45:31,280 --> 00:45:35,520
परसेंटेज ज्ञान होने पर आप उसको मान लोगे कि सद ग्रंथ है अब आप मैंने

600
00:45:35,520 --> 00:45:39,800
कहा कि जरा सा भी अगर लिखा होगा तो क्या वो सद ग्रंथ होगा सच्चा ग्रंथ

601
00:45:39,800 --> 00:45:43,800
होगा तो आपने कहा नहीं जरा सा पे

602
00:45:43,800 --> 00:45:47,920
नहीं होगा तो मैंने पूछा कितना पे होगा इसका कुछ नहीं है इसका मतलब कि हम लोग आपके

603
00:45:47,920 --> 00:45:52,000
पीछे पीछे चलते रहे आंखों प पट्टी बांध के आप कह दो ये सद ग्रंथ है तो

604
00:45:52,000 --> 00:45:56,000
हम उसे सद ग्रंथ मान ले आप कह दोय सद ग्रंथ नहीं है झूठा है तो हम

605
00:45:56,000 --> 00:46:02,000
उसे ना माने क्योंकि आधार तो आप बता नहीं रहे हो नियम तो आप बता नहीं रहे

606
00:46:04,200 --> 00:46:08,880
हो चलिए आप बता दीजिए कि ग्रंथ किसे कहा जाता है

607
00:46:08,880 --> 00:46:13,400
सद ग्रंथ सद ग्रंथ दीजिए आप

608
00:46:13,400 --> 00:46:17,560
आप बता दीजिए इसके बाद चर्चा शुरू होगी और े फालतू का इतना लंबा

609
00:46:17,560 --> 00:46:21,680
चौड़ा 40 45 मिनट बवाद हो गया इसके लिए कोई फायदा नहीं हुआ आप बता दो

610
00:46:21,680 --> 00:46:27,480
बात देखिए अ बातें करेंगे तो हमें यही चर्चा समाप्त करनी होगी

611
00:46:27,480 --> 00:46:31,920
आपके हिसाब से फालतू है आपके हिसाब से जो ब फालतू है

612
00:46:31,920 --> 00:46:36,320
वो मेरे हिसाब से नहीं है मेरे हिसाब से जो कचरा है

613
00:46:36,320 --> 00:46:40,360
वह आपके हिसाब से कचरा नहीं है मैं तो नहीं बोल रहा कि रामपाल कचरा है

614
00:46:40,360 --> 00:46:44,440
मैं तो नहीं बोल रहा व संडास है मैंने बोला

615
00:46:44,440 --> 00:46:48,440
क्या आप बोल दीजिए कि मान रख रहा हं मैं

616
00:46:48,440 --> 00:46:53,400
आपका मान रख रहा हूं कि नहीं रख रहा हूं तो आप ये क्यों कर रहे बे फालतू में आपने खर्च कर दिए

617
00:46:53,400 --> 00:46:57,480
आपको लगता है ये बे फालतू में खर्च हुए क्योंकि

618
00:46:57,480 --> 00:47:01,960
आपके पास उत्तर ही नहीं है इन तीनों चीजों में से किसी का भाई धर्म

619
00:47:01,960 --> 00:47:06,080
सुनो धर्म पवित्र सद ये विशेषण आपने जो लगाए

620
00:47:06,080 --> 00:47:10,760
हैं किसी भी शास्त्र को मानने के उसी विशेषण का जो आपका आधार

621
00:47:10,760 --> 00:47:14,760
है उसी विशेषण का जो आधार है आपका और जो आपने बताया

622
00:47:14,760 --> 00:47:18,840
वो खुद कट जाता है आपने कहा कि जो संत के द्वारा होगा वो होगा

623
00:47:18,840 --> 00:47:19,360
मगर

624
00:47:19,360 --> 00:47:23,560
कुरान वाला लिखने वाला स संत नहीं है आपने कहा कि जो

625
00:47:23,560 --> 00:47:27,600
क्या कहते जिसम भगवान की ओर जाने की बात लिखी होगी जरा सी भी भले ही उसम उल्टी

626
00:47:27,600 --> 00:47:31,760
लिखी हो तो वो जो है वो सद ग्रंथ कहलाएगा फिर मैंने दिखा ये सद ग्रंथ है आपने

627
00:47:31,760 --> 00:47:35,880
कहा नहीं आप अपनी मनमर्जी चला रहे जिसको जहा मानना

628
00:47:35,880 --> 00:47:39,920
है मान ले रहे नहीं मानना नहीं मान उसका कोई सिद्धांत नहीं है मैंने आपसे ये

629
00:47:39,920 --> 00:47:43,960
तक पूछा कि कितना परसेंट होने पर आप उसको सद ग्रंथ कह दोगे तो आपने कहा इसका

630
00:47:43,960 --> 00:47:48,160
कोई वो नहीं है हिसाब तो यही हुआ कि जिस पर उंगली रख देंगे ये

631
00:47:48,160 --> 00:47:52,280
बच्चों ये है सद ग्रंथ मान लेंगे और जो बच्चों य

632
00:47:52,280 --> 00:47:55,840
सद ग्रंथ नहीं है नहीं मानेंगे बात

633
00:47:55,840 --> 00:48:01,200
खत्म यही है ना शास्त्र समत

634
00:48:01,200 --> 00:48:05,400
भक्ति चलिए अब मैं आपसे इस चैप्टर को क्लोज

635
00:48:05,400 --> 00:48:09,960
ही कर रहे क्लोजिंग की र है मैं अब आपसे य पूछ रहा

636
00:48:09,960 --> 00:48:14,120
हूं आप इसको क्लियर कर लीजिए कि सद ग्रंथ क्या है

637
00:48:14,120 --> 00:48:18,360
जो आप बताना क् कर वही क्लियर कर रहा हूं

638
00:48:18,360 --> 00:48:22,560
ब मैं वही क्लियर कर रहा हूं कि आपके हिसाब से फिर झूठी

639
00:48:22,560 --> 00:48:27,240
किताब कौन सी होगी अगर जिसमें सच और झूठ

640
00:48:27,240 --> 00:48:33,240
वो भी सद ग्रंथ है तो असद ग्रंथ कौन सा

641
00:48:33,840 --> 00:48:38,440
होगा अब ये बताइए आप अरे

642
00:48:38,440 --> 00:48:42,680
हमने तो कहा जिसका एक एक शब्द बिल्कुल अक्षर सत्य है हमारे लिए वो सद

643
00:48:42,680 --> 00:48:46,960
ग्रंथ है आपके लिए वो भी सद ग्रंथ है जिसम झूठ भी है

644
00:48:46,960 --> 00:48:51,000
यह अंतर है हम हम ढोंग नहीं करते हमारे लिए कुरान

645
00:48:51,000 --> 00:48:55,000
सद ग्रंथ नहीं पवित्र नहीं है संत के द्वारा दिया नहीं है हम ढोंग

646
00:48:55,000 --> 00:48:59,240
नहीं करते अब आप देखिए देखिए मैंने आपको अपनी परिभाषा

647
00:48:59,240 --> 00:49:03,320
कितनी देर लगी मुझे बताने में ना तो मैंने चेंज किया ना उसको बदला

648
00:49:03,320 --> 00:49:07,760
फटाक से बताया अब आप मुझे बता दीजिए कि अगर जिसमें

649
00:49:07,760 --> 00:49:12,680
झूठ और सच दोनों है वह भी सद ग्रंथ है तो असद ग्रंथ किसे

650
00:49:12,680 --> 00:49:17,000
कहेंगे मनुवा स्मृति को आप सद ग्रंथ मानते हैं

651
00:49:17,000 --> 00:49:21,160
ये विषयात मत मैंने अभी आपको आपसे आपकी परिभाषा पूछी आपने मुझसे पूछी

652
00:49:21,160 --> 00:49:26,120
मैंने बता दी आपकी परिभाषा पूछ रहा हूं

653
00:49:26,120 --> 00:49:31,080
आपका उत्तर हम दे रहे हैं आप ये बताइए मन आप

654
00:49:31,080 --> 00:49:35,160
उत्तर दीजिए देखिए जब ट्रेन में कोई व्यक्ति बिना टिकट पकड़ा जाएगा

655
00:49:35,160 --> 00:49:39,160
तो व यह नहीं कहेगा कि भैया वो भी तो बिना टिकट है आप अपना टिकट

656
00:49:39,160 --> 00:49:43,320
बताइए आपकी परिभाषा क्या है वो बताइए आपका टिकट

657
00:49:43,320 --> 00:49:47,400
ही पकड़ रहे हैं हम आप ब क्यों आप मेरा टिकट क्यों पकड़ रहे

658
00:49:47,400 --> 00:49:48,880
अभी आपसे आपका टिकट मांगा जा रहा

659
00:49:48,880 --> 00:49:52,040
है आपके पास टिकट

660
00:49:52,040 --> 00:49:56,680
है सुनिए सुनिए सुनिए ऐसा है ये क्यों हो रहा है

661
00:49:56,680 --> 00:50:01,000
क्यों हो रहा है इसको मैं बता दूं जब हम मनुस्मृति की विवेचना पर जाएंगे

662
00:50:01,000 --> 00:50:05,160
तो क्या होगा कि वो एक अलग ही चैप्टर खुल जाएगा फिर हम उसम उसकी विवेचना करते रहेंगे फिर

663
00:50:05,160 --> 00:50:09,400
हम उसमें जब हम बात एक मिनट जब हम उसम बात कर रहे होंगे

664
00:50:09,400 --> 00:50:13,560
तो फिर उसमें कोई तीसरा अरे भाई सुन लो उसमें फिर कोई

665
00:50:13,560 --> 00:50:17,920
तो ऐसे निर्णय नहीं होगा क्योंकि हम जब भी किसी त

666
00:50:17,920 --> 00:50:22,040
किसी भी विषय को खत्म नहीं कर लेंगे तब तक हम दूसरा विषय खोलते चले जाएंगे

667
00:50:22,040 --> 00:50:26,400
निर्णय कहां से आएगा तो आप मुझे यह बताइए फिलहाल मैंने आपसे आपकी परिभाषा

668
00:50:26,400 --> 00:50:30,560
पूछ आपने मेरे से पूछी मैंने आपको बता दिया हमारे लिए सद ग्रंथ पवित्र ग्रंथ

669
00:50:30,560 --> 00:50:34,680
धर्म ग्रंथ वो है जिसका एक भी जो वो है

670
00:50:34,680 --> 00:50:38,680
शब्द वह गलत ना हो वो झूठ ना हो वह हमारे लिए

671
00:50:38,680 --> 00:50:42,760
सद ग्रंथ है पवित्र ग्रंथ है धर्म ग्रंथ है और वह परमेश्वर की प्राप्ति

672
00:50:42,760 --> 00:50:47,160
कराता हो परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा प्राप्त हुआ

673
00:50:47,160 --> 00:50:49,040
हो एक मिनट स

674
00:50:49,040 --> 00:50:55,040
लाइन परगा

675
00:51:18,640 --> 00:51:19,140
ये

676
00:51:18,920 --> 00:51:23,000
कोई है बार-बार कह रहे हैं कि आप रामपाल के शिष्यों को टारगेट करते हैं

677
00:51:23,000 --> 00:51:27,080
भाई साइंस जर्नी और ह्यूमन विथ साइंस को हमारा नंबर दे दीजिए

678
00:51:27,080 --> 00:51:31,240
वो अगर मनुष्य के मोक्ष की बात करते हैं तो हम उनको अपना सिद्ध

679
00:51:31,240 --> 00:51:35,280
कर देंगे जाकर दे दीजिए एक बार आया था साइंस जर्नी वाला कह रहा था कि मैं चोरों की तरह

680
00:51:35,280 --> 00:51:39,440
कायरता पूर्वक ही बात कर पाऊंगा हमने कहा नहीं अगर माता जी का निष्ठा

681
00:51:39,440 --> 00:51:43,880
पूर्वक दूध पिया है तो आप चेहरे के साथ आक के बात करिए

682
00:51:43,880 --> 00:51:47,920
हमसे फोन मिलाइए हमारे लिए हम बात करेंगे आपसे तो यह संदेश

683
00:51:47,920 --> 00:51:51,800
आप उन्हे दे दीजिए शिवांश जी से आप बात

684
00:51:51,800 --> 00:51:56,120
करिए जब समय मिलेगा तो उनका प्रतिकार भी किया जाएगा

685
00:51:56,120 --> 00:52:00,560
बोलिए गण दा जी हम आपसे जो प्रश्न

686
00:52:00,560 --> 00:52:04,960
किए उसका थोड़ा सा बता दीजिए फिर चर्चा आगे

687
00:52:04,960 --> 00:52:09,160
बढ़ेगा हमने प्रश्न किया जो मनुस्मृति है

688
00:52:09,160 --> 00:52:13,280
उसको आप सथ मानते हैं बिल्कुल उनका लिखा हुआ

689
00:52:13,280 --> 00:52:17,400
सत्य है बिल्कुल तो मनुस्मृति

690
00:52:17,400 --> 00:52:23,400
के अध्याय पा का श्लोक 35 में क्या कहता है

691
00:52:29,400 --> 00:52:33,520
क्या कहता है बताइए पढ

692
00:52:33,520 --> 00:52:37,640
विधि नियुक्त होने पर जो मनुष्य मास नहीं खाता व मरने के 21 जन्म तक

693
00:52:37,640 --> 00:52:40,760
पशु होता

694
00:52:40,760 --> 00:52:45,800
है क्या य लिखा है मा

695
00:52:45,800 --> 00:52:50,200
मेरी बात को समझिए देखिए पहली बात तो यह मैं सिद्ध कर दूंगा कि सही लिखा है

696
00:52:50,200 --> 00:52:54,520
मेरी बात समझिए मेरी बात समझिए भाई साहब मेरी बात समझिए

697
00:52:54,520 --> 00:52:58,640
मैं इसको सही मानता हूं गलत मानता हूं ये एक अलग चीज है और मुझे

698
00:52:58,640 --> 00:53:02,760
इसको सही सिद्ध करना पड़ेगा एक अलग चीज है मैं इसको सद ग्रंथ तब कह रहा हूं

699
00:53:02,760 --> 00:53:06,800
जब इसके एक एक शब्द को मैं सही मानता हूं जी आप सद

700
00:53:06,800 --> 00:53:10,840
ग्रंथ उसको कह रहे हैं जिसमें झूठ भी है गलत भी है उसको भी आप सद ग्रंथ कह रहे हैं मैं इसके

701
00:53:10,840 --> 00:53:14,920
लिए लडूंगा आप लड़ ना उन चीजों सुनिए मैं इसके लिए लडूंगा

702
00:53:14,920 --> 00:53:19,040
हारू या जीत वो एक अलग बात है मैं इसके लिए लडूंगा कि इसमें ये जो बात

703
00:53:19,040 --> 00:53:23,120
है सही लिखी है मैं लडूंगा आप लड़ उन चीजों के लिए जो चीज

704
00:53:23,120 --> 00:53:27,560
आपको झूठ बोलनी पड़ रही है गलत कहनी पड़ र उन चीजों के लिए लड़ यह हमारा

705
00:53:27,560 --> 00:53:31,680
हमारा सुनिए हमारा मानना यह मैंने मैंने आपको यह

706
00:53:31,680 --> 00:53:35,680
नहीं कहा कि मैं मैंने आपको यह नहीं कहा अभी कि मैं सही

707
00:53:35,680 --> 00:53:39,760
हूं या आप सही है क्योंकि उसी बारे में तो हम य आए कौन सही

708
00:53:39,760 --> 00:53:44,360
है सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए भाई साहब सुन

709
00:53:44,360 --> 00:53:45,360
लीजिए

710
00:53:45,360 --> 00:53:49,360
य इसलिए आए कि कौन सही है और कौन गलत है

711
00:53:49,360 --> 00:53:53,360
ठीक है हम लोग यहां पर इसीलिए आए हैं तो

712
00:53:53,360 --> 00:53:57,680
यह बात जिनको जिन ग्रंथों को मैं सही मानता हूं उसमें

713
00:53:57,680 --> 00:54:01,720
मेरा कहना है एक एक शब्द हम सही मानते हैं

714
00:54:01,720 --> 00:54:05,960
भाई मेरा मानना है कि इसमें जो लिखा है वो सब सही है आपका

715
00:54:05,960 --> 00:54:10,040
मानना है कि आप उन ग्रंथों को भी सद ग्रंथ कहते हैं जिसमें की झूठ मिला

716
00:54:10,040 --> 00:54:14,160
हो बात इस पर हो रही है कि हमारा सिद्धांत क्या है किसी

717
00:54:14,160 --> 00:54:18,560
ग्रंथ को सही अथवा गलत मानने का

718
00:54:18,560 --> 00:54:22,560
अब हम आपको प्रमाणित कर रहे जो मैंने कहा था कि ग्रंथ में झूठ भी हो

719
00:54:22,560 --> 00:54:27,360
सकता सही भी हो सकता है जैसे कि इस मनो स्मृति में अध्याय

720
00:54:27,360 --> 00:54:31,520
भाई तो आप ये बोलो आप ये बोलो ना कि हा मैं उसको भी मानता हूं जिसम

721
00:54:31,520 --> 00:54:35,680
झूठ भी होगा उसको भी मैं सद ग्रंथ मानता हूं ये बोलो ना यार पता

722
00:54:35,680 --> 00:54:39,800
नहीं क्यों इधर उधर भाग रहे हो बोल दो ना कि मैं मैं उसको भी

723
00:54:39,800 --> 00:54:44,240
सद ग्रंथ मानता हूं जिसमें सच और झूठ दोनों लिखा हो

724
00:54:44,240 --> 00:54:48,680
सुनिए पर आप हमारी बात को पहले सुन लीजिए बीच में आप नहीं बोलिएगा

725
00:54:48,680 --> 00:54:52,880
थिए बोलिए कहा सद ग्रंथ वो होता

726
00:54:52,880 --> 00:54:57,400
जिसका अक्षर सु अक्षर सत होता है मनुस्मृति

727
00:54:57,400 --> 00:55:00,440
अध्याय पा शलोक 35 में कहा गया है कि जो मांस नहीं खाता

728
00:55:00,440 --> 00:55:04,480
है वो एकही जन्म तक नर्क में जाता है तो आप

729
00:55:04,480 --> 00:55:08,480
मेरे भाई मनुस्मृति में कहां पर गलत है कहां सही

730
00:55:08,480 --> 00:55:12,800
है और वो आपके और मेरे बीच में वो डिबेट का विषय है

731
00:55:12,800 --> 00:55:17,000
अभी मैं बात यह कर रहा हूं कि आपका क्या आधार यही है जिसमें

732
00:55:17,000 --> 00:55:21,320
झूठ और सच दोनों होगा उनको भी आप सद ग्रंथ कहेंगे

733
00:55:21,320 --> 00:55:25,440
मैंने आपसे ये पूछा है मैंने आपसे पूछा है मे मैंने

734
00:55:25,440 --> 00:55:29,520
आपसे पूछा है भाई साहब कि क्या आपकी परिभाषा

735
00:55:29,520 --> 00:55:33,680
किसी को सद ग्रंथ कहने की यह है कि उसमें झूठ और सच

736
00:55:33,680 --> 00:55:37,880
दोनों लिखा होगा वो सद ग्रंथ है क्या आपकी ये परिभाषा है भाई साहब

737
00:55:37,880 --> 00:55:42,280
ये एक अलग विषय है कि मनुस्मृति के एक एक शब्द को मैं सही सिद्ध करूंगा

738
00:55:42,280 --> 00:55:47,240
कि नहीं करूंगा वो एक अलग विषय है मास खाना सही है कि नहीं है

739
00:55:47,240 --> 00:55:51,280
मेरा बात सुन लीजिए हां मैंने कि ग्रंथ

740
00:55:51,280 --> 00:55:55,880
में झूठ और सही दोनों ही बातें लिखी होती है जैसा कि मनुस्मृति

741
00:55:55,880 --> 00:55:59,880
अध्याय पाच लोक 35 में गलत बाद लिखा हुआ है फिर भी वो सद ग्रंथ

742
00:55:59,880 --> 00:56:04,640
ये आपको सुनिए ये आपको गलत लग रही है मुझे गलत नहीं लग रही

743
00:56:04,640 --> 00:56:09,600
दुनिया को गलत लग रहा है मुझे गलत लगवाए मुझे गलत लगवाए

744
00:56:09,600 --> 00:56:13,920
एक ही जन्म तक नरक कैसे जाएगा सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो

745
00:56:13,920 --> 00:56:15,640
सुनो मुझे गलत

746
00:56:15,640 --> 00:56:19,720
नहीं लग रही है उसके पीछे कारण है आपने कभी कोई दवाई

747
00:56:19,720 --> 00:56:23,760
खाई है क्या क्या बोले आपने

748
00:56:23,760 --> 00:56:28,000
कभी कोई दवाई खाई है क्या खाया है

749
00:56:28,000 --> 00:56:32,240
कभी कोई ऐसा कैप्सूल खाया आपको मालूम है कैप्सूल वगैरह बनते टाइम पशुओं

750
00:56:32,240 --> 00:56:36,440
की चर्बी यूज होती है हो रहा उसम

751
00:56:36,440 --> 00:56:40,640
साफ साफ लिखा है खाने आप मेरी बात का जवाब दीजिए आप मेरी

752
00:56:40,640 --> 00:56:44,640
बात का जवाब दीजिए उसम आप मेरी बात का जवाब

753
00:56:44,640 --> 00:56:48,880
दीजिए हमको जवाब दे रहे हैं लेकिन आप जवाब नहीं दे

754
00:56:48,880 --> 00:56:53,120
कैप्सूल प चला गम क्या अरे भाई साहब अच्छा केवल वो श्लोक

755
00:56:53,120 --> 00:56:57,560
पढ़ोगे वो श्लोक पढ़ोगे कि आगे पीछे के सारे श्लोक पढ़ोगे

756
00:56:57,560 --> 00:57:01,920
आगे पीछे काभी पढ़ा दीजिए उसम देखि कहा लिखा कैप्सूल कैप्सूल में मिला कर के जो

757
00:57:01,920 --> 00:57:05,920
उसी शलोक में लिखा हुआ है कि जो मनुष्य विधि युक्त

758
00:57:05,920 --> 00:57:10,480
मास नहीं खाता विधि युक्त मास यानी कि विधि के अनुसार

759
00:57:10,480 --> 00:57:14,560
अब विधि क्या है यानी कि धर्म विधि क्या

760
00:57:14,560 --> 00:57:18,640
है यानी कि धर्म यानी जो धर्म के अनुसार मास नहीं खाता है वो

761
00:57:18,640 --> 00:57:22,640
व्यक्ति नर्क में जाता है यानी कि यानी कि यहां पर यह बताया जा रहा है कि जब

762
00:57:22,640 --> 00:57:26,800
आपको मांस खाने की आवश्यकता भी पड़ी तो आपने अगर धर्म नहीं

763
00:57:26,800 --> 00:57:30,640
खाया अगर आपने धर्म युक्त नहीं खाया तो आप 21 जन्मों तक

764
00:57:30,640 --> 00:57:35,200
ऐसा ऐसा होगा यह मैं सही मानता हूं आप नहीं मानते व आपका आउटलुक

765
00:57:35,200 --> 00:57:39,720
है आप नहीं मानते व आपका आउटलुक है

766
00:57:39,720 --> 00:57:44,120
मेरी बात समझिए इससे विषयात होगा मैं इस चैप्टर को रखूंगा

767
00:57:44,120 --> 00:57:48,360
लिख लीजिए इस चैप्टर को मैं आपके सामने सही सिद्ध करूंगा मुझे आप अपनी

768
00:57:48,360 --> 00:57:52,400
य जो परिभाषा है क्या यही है जिसमें झूठ भी होता है उसको भी आप

769
00:57:52,400 --> 00:57:56,560
सद ग्रंथ मानते हैं आप अपनी परिभाषा बता दीजिए भाई साहब आप अपनी परिभाषा

770
00:57:56,560 --> 00:58:00,880
बता दीजिए आपकी परिभाषा ये है मैं इसको गलत

771
00:58:00,880 --> 00:58:05,480
नहीं मैं इसको मैं इसको गलत नहीं मानता हूं भाई साहब आप विषयात

772
00:58:05,480 --> 00:58:09,520
करेंगे बात आगे नहीं बढ़ पाएगी हम में बहुत अच्छी अच्छी बातें हो सकती

773
00:58:09,520 --> 00:58:13,560
है हम में बहुत अच्छी बात हो सकती है आप विषयात मत

774
00:58:13,560 --> 00:58:17,680
करिए हम इस चैप्टर को लेंगे अभी नहीं क्योंकि अभी

775
00:58:17,680 --> 00:58:22,360
चैप्टर ये चल रहा है क्या आपकी परिभाषा यह है आप अपनी परिभाषा यह बताइए

776
00:58:22,360 --> 00:58:26,520
कि क्या आपकी परिभाषा यह है जिसमें सच और झूठ दोनों होगा

777
00:58:26,520 --> 00:58:30,560
क्या आप उसको मानते हैं कि वह सद ग्रंथ है मैं

778
00:58:30,560 --> 00:58:34,840
क्लियर कर रहा हूं भाई साहब यह हमारे पास बहुत सारे टॉपिक है सारे टॉपिक

779
00:58:34,840 --> 00:58:38,960
को अभी ले आएंगे कोई टॉपिक क्लियर नहीं होगा इसलिए मैं आपसे एक

780
00:58:38,960 --> 00:58:43,080
एक करके चल रहा हूं एक एक करके एक बात पूरी हो फिर हम आगे चले

781
00:58:43,080 --> 00:58:45,760
क्या आपके अनुसार सद ग्रंथ वो है जिसमें झूठ और सच

782
00:58:45,760 --> 00:58:49,760
दोनों लिखा हो यह तो हजार बार बोल

783
00:58:49,760 --> 00:58:54,480
दिया कि हा भा ऐसा भी होता है वय प्रश्न किया

784
00:58:54,480 --> 00:59:00,480
कि तो फिर आपके हिसाब से टी पुस्तक कौन सी

785
00:59:05,600 --> 00:59:10,120
होगी झूठी पुस्तक वही होगी जो आप दिखा रहे थे

786
00:59:10,120 --> 00:59:14,200
अरे उसकी उसका फीचर्स तो बताओ कि उसमें क्या होगा क्या नहीं

787
00:59:14,200 --> 00:59:18,600
होगा जिसके कारण हम उसे झूठी कहेंगे भाई एक

788
00:59:18,600 --> 00:59:22,640
एक जो झूठी गवाही देने वाला चोर है सुन लीजिए

789
00:59:22,640 --> 00:59:26,640
सुन लीजिए उदाहरण बता दूं एक जो झूठी गवाही देने वाला

790
00:59:26,640 --> 00:59:30,960
चोर है वो भी दिन भर में कभी ना कभी कोई ना कोई सच्ची बात कहेगा

791
00:59:30,960 --> 00:59:35,560
तो क्या उसके कारण हम उसको सच्चा सच्चा व्यक्ति माने एक जो व्यभिचार

792
00:59:35,560 --> 00:59:39,840
करने वाली जो स्त्री है वह भी कभी ना कभी कुछ ऐसे कार्य करेगी जो व्यभिचार

793
00:59:39,840 --> 00:59:43,840
ना हो तो क्या हम उसके कारण उसको पवित्र कहे एक जो व्यभिचार

794
00:59:43,840 --> 00:59:48,080
करने वाला पुरुष है वोह भी कभी ना कभी ऐसे कार्य करेगा जो कि व्यभिचार

795
00:59:48,080 --> 00:59:52,200
ना हो तो क्या इसके कारण हम उसे पवित्र पुरुष कहे एक जो झूठी थाली है

796
00:59:52,200 --> 00:59:56,440
जिसमें एक और झूठा डला हुआ है उसमें भी कहीं ना कहीं साफ

797
00:59:56,440 --> 01:00:00,560
सुथरा खाना रखा होगा तो क्या उस कारण से हम उसको पवित्र थाली

798
01:00:00,560 --> 01:00:01,280
कहे

799
01:00:01,280 --> 01:00:05,320
तो मेरा प्रश्न यही है कि अगर सच और झूठ दोनों बातें करने वाला

800
01:00:05,320 --> 01:00:09,360
आपके अनुसार सद ग्रंथ है तो फिर असद ग्रंथ का

801
01:00:09,360 --> 01:00:15,360
परिभाषा क्या है आपकी असद ग्रंथ क्या

802
01:00:17,560 --> 01:00:21,800
है देखिए हम जब बोलेंगे तो हमको बोलने का समय

803
01:00:21,800 --> 01:00:27,800
दीजिएगा बीच में आप बोलने लगते हैं तो हम बोल नहीं पाते हैं बोलिए

804
01:00:28,760 --> 01:00:33,080
मेंही बात होती है धर्म के विरुद्ध होता है

805
01:00:33,080 --> 01:00:37,520
कुछ धर्म के युक्त तो होता ही है क्यक ग्रंथ वही होता जो धर्म

806
01:00:37,520 --> 01:00:41,600
के अनुसार लिखा हो इसी बात को पुष्टि करने के लिए

807
01:00:41,600 --> 01:00:45,800
हमने एक लोक लि मनुस्मृति अध्याय पा शलोक 35 का भाई साहब

808
01:00:45,800 --> 01:00:50,040
देखिए बात ये है कि आप आप जब जब मनुस्मृति बोलते हैं

809
01:00:50,040 --> 01:00:54,280
तो उसम मुझे इंटरप्ट इसलिए करना पड़ता है कि वो चैप्टर ही अलग हो रहा है

810
01:00:54,280 --> 01:00:58,360
मैंने आपसे आपकी परिभाषा परिभाषा आप अपनी अपनी परिभाषा

811
01:00:58,360 --> 01:01:02,440
बताओ अपनी आप क्या मानते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी परिभाषा क्या

812
01:01:02,440 --> 01:01:06,680
है बस वो बता दो उसमें उसम इतनी दिक्कत

813
01:01:06,680 --> 01:01:12,440
क्यों हो रही है आप क्या मानते हो असत ग्रंथ किसे कहोगे

814
01:01:12,440 --> 01:01:16,320
बस पहले सद ग्रंथ किसे कहते इसका तो बोलने ही

815
01:01:16,320 --> 01:01:20,600
नहीं दे रहा है आपने बोल तो दिया स ग्र आपने बोल तो दिया सद ग्रंथ उसे कहते

816
01:01:20,600 --> 01:01:24,600
जिसम सच्ची झूठी दोनों बात हो मगर व भगवान की बात कर रहे हो आप

817
01:01:24,600 --> 01:01:28,760
मनो स्मृति का ख करने लगे ये तो बोलने दिए उसमें क्या खा आप भाई साहब देखिए

818
01:01:28,760 --> 01:01:32,760
विषयात हो जाएगा मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी असद

819
01:01:32,760 --> 01:01:36,760
ग्रंथ की परिभाषा क्या है विषयात आप कर

820
01:01:36,760 --> 01:01:41,000
दीजिए प्रश्न असत ग्रंथ की परिभाषा क्या है भाई साहब भाई साहब असत

821
01:01:41,000 --> 01:01:47,000
ग्रंथ की परिभाषा क्या

822
01:01:48,000 --> 01:01:52,320
है असद ग्रंथ की परिभाषा क्या है भाई साहब

823
01:01:52,320 --> 01:01:56,440
चलिए मैं इसको मैं इसको थोड़ा मैं इसको थोड़ा क्लियर कर दूं

824
01:01:56,440 --> 01:02:00,880
आप एक बा बताइए कि भगवत गीता आपके

825
01:02:00,880 --> 01:02:04,880
लिए सद ग्रंथ है कुरान भी सद ग्रंथ है बाइबल

826
01:02:04,880 --> 01:02:08,920
भी सद ग्रंथ है जी

827
01:02:08,920 --> 01:02:13,560
और यह यह भी सद ग्रंथ है गुड

828
01:02:13,560 --> 01:02:17,720
बहुत बढ़िया अब इसमें कोई बात झूठी लिखी

829
01:02:17,720 --> 01:02:20,960
है

830
01:02:20,960 --> 01:02:26,600
क्या नहीं हा यानी कि

831
01:02:26,600 --> 01:02:30,640
जिसमें केवल सच्ची बातें लिखी है वह भी सद ग्रंथ है

832
01:02:30,640 --> 01:02:34,720
जिसमें झूठ और स दोनों लिखा है वो भी सद ग्रंथ है और असद

833
01:02:34,720 --> 01:02:38,760
ग्रंथ की परिभाषा हम बताएंगे

834
01:02:38,760 --> 01:02:43,080
नहीं जिसमें सारी बात गलत स ग्रंथ है जिसमें

835
01:02:43,080 --> 01:02:47,160
सिर्फ आपके हिसाब से सच लिखा है तो फिर यह भगवत गीता सद ग्रंथ कैसे है

836
01:02:47,160 --> 01:02:51,200
जिसम झूठ भी लिखा है वही तो मैं पूछ रहा हूं इसमें केवल सच

837
01:02:51,200 --> 01:02:55,320
लिखा है तो फिर इसका नाम कुछ और होना चाहिए ना य

838
01:02:55,320 --> 01:02:59,440
सद व ग्रंथ हो गया भगवत गता क्या हुआ

839
01:02:59,440 --> 01:03:03,840
भगवत गीता क्या हुआ कुछ कुछ बात झूठी है

840
01:03:03,840 --> 01:03:07,960
भगवत गीता ग्रंथ य दिखा स ग्रंथ और तो भगवत

841
01:03:07,960 --> 01:03:12,160
गीता या कुरान वगैरा सद ग्रंथ नहीं है

842
01:03:12,160 --> 01:03:16,280
ना एक ही बात तो एक बार एक बार बोलने से कोई

843
01:03:16,280 --> 01:03:20,360
फभ भगवत गीता ग्रंथ है और य सद ग्रंथ है यानी कि भगवत

844
01:03:20,360 --> 01:03:26,360
गीता सद ग्रंथ नहीं है

845
01:03:34,560 --> 01:03:38,880
चलिए अच्छा आपको जो बता रहे थे उस पर क्या

846
01:03:38,880 --> 01:03:44,080
हा बोलिए मिनट जी बोलिए

847
01:03:44,080 --> 01:03:49,040
यह कभी कभी दोरी बात भी कर ले रहे हैं ना इसलिए दिक्कत हो जा

848
01:03:49,040 --> 01:03:53,320
रही बोलिए भाई अनीश जी आप देखो यह व्यक्ति

849
01:03:53,320 --> 01:03:57,480
क्या कह रहे हैं कि यह इसमें बात सच है यह भी सद ग्रंथ

850
01:03:57,480 --> 01:04:02,000
है जिसम मिक्स है वो भी सद ग्रंथ है

851
01:04:02,000 --> 01:04:06,160
अगर य स ग्रंथ है अगर गीता अगर गीता सद ग्रंथ है तो इसका

852
01:04:06,160 --> 01:04:10,640
नाम कुछ और होगा ना फिर जिसम एक एक बात सत्य है य

853
01:04:10,640 --> 01:04:15,000
इनका प्रिया चरित्र जो मैं जनता के सामने लाना चाहता हूं गीता

854
01:04:15,000 --> 01:04:19,120
पुरा वेद बाइबल को य स ग्रंथ नहीं मानते

855
01:04:19,120 --> 01:04:23,320
यह ढ करते मिनट ये दिखावा

856
01:04:23,320 --> 01:04:27,480
करते हैं कि हम उनको भी सद ग्रंथ मान रहे जिसको सद ग्रंथ मानते हैं फिर

857
01:04:27,480 --> 01:04:31,720
उसके एक भी शब्द पर अविश्वास नहीं होता

858
01:04:31,720 --> 01:04:36,000
हैय आप बोले हमको बोलने

859
01:04:36,000 --> 01:04:42,000
दिए जनता ने खद देख लिया भा अब हम आगे

860
01:04:42,560 --> 01:04:46,960
चले बोले जा रहे बोलने का मौका ही नहीं दे

861
01:04:46,960 --> 01:04:51,560
र सुनि आपने क्या क्या बोला मैं आपको याद दिला दू आपने बोला

862
01:04:51,560 --> 01:04:55,960
कि जो संत के द्वारा प्रदत शास्त्र होंगे

863
01:04:55,960 --> 01:05:00,160
वो एक मिनट भाई साहब मैं आपको याद दिला दूं आपने क्या क्या बोला है जो संत

864
01:05:00,160 --> 01:05:04,480
के द्वारा प्रदत शास्त्र होंगे व हमारे लिए

865
01:05:04,480 --> 01:05:08,640
एक मिनट आपने आप जो बोल रहे हो

866
01:05:08,640 --> 01:05:14,640
आपने कुछ बोला नहीं आपको याद दिला रहा आपने क्या क्या बोला है एक

867
01:05:16,240 --> 01:05:20,920
मिनट एक

868
01:05:20,920 --> 01:05:25,000
पॉट तो आप एक बार ही जवाब दे दीजिए ना उसको पलट मत

869
01:05:25,000 --> 01:05:31,000
दोबारा मतलब अलग परिभाषा मत बताइए जो बताना है एक बार बता दीजिए

870
01:05:32,880 --> 01:05:38,880
उनको शायद आपकी आवाज नहीं आ रही

871
01:06:01,840 --> 01:06:07,640
तो

872
01:06:07,640 --> 01:06:10,400
सुनिए ऐसा है कि

873
01:06:10,400 --> 01:06:14,400
यह जो तीन बातें हैं धर्म पत्र और सद यह

874
01:06:14,400 --> 01:06:18,880
तीनों बातों में हमारी बातें डिस्कशन हुआ आपने कुछ बातें कही कुछ हमने कही

875
01:06:18,880 --> 01:06:23,200
जनता ने देखा है अब हम एक बात मुझे समझ में आई उसमें तीनों

876
01:06:23,200 --> 01:06:27,760
में कॉमन थी कि जो भगवा की ओर

877
01:06:27,760 --> 01:06:31,760
पूर्ण ब्रम परम परमेश्वर उसम फिर वो बात आ जाएगी भगवान तो यह भी

878
01:06:31,760 --> 01:06:36,040
है वो भी है वो भी एक विषय है भगवान कैसे हैं मगर फिलहाल हम पूर्ण ब्रम

879
01:06:36,040 --> 01:06:40,160
की बात कर रहे जो पूर्ण ब्रह्म की बात करेंगे वो जो है हमारे

880
01:06:40,160 --> 01:06:42,520
लिए

881
01:06:42,520 --> 01:06:47,000
धर्मशास्त्र पवित्र शास्त्र और सद ग्रंथ हो जाएंगे

882
01:06:47,000 --> 01:06:51,240
तो अब मैं जब हम यह बात बारबार कह रहे हैं कि वही हमारे लिए धर्म है जो पूर्ण

883
01:06:51,240 --> 01:06:55,680
ब्रह्म की बात करे वही हमारे लिए पवित्र है जो पूर्ण ब्रम

884
01:06:55,680 --> 01:06:59,800
बात करे वही हमारे लिए सद है जो मोक्ष पूर्ण ब्रह्म की बात

885
01:06:59,800 --> 01:07:03,840
करे ईश्वर की बात करे तो इसका मतलब ये

886
01:07:03,840 --> 01:07:08,040
है कि क्या आपके अनुसार

887
01:07:08,040 --> 01:07:12,840
जो ईश्वर है वो क्या है उसकी क्या परिभाषा है

888
01:07:12,840 --> 01:07:15,760
ईश्वर

889
01:07:15,760 --> 01:07:20,040
की यही प्रश्न हमने आपसे किया था

890
01:07:20,040 --> 01:07:24,720
कि सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है ईश्वर का क्या स्वरूप है इस

891
01:07:24,720 --> 01:07:28,840
सुनि सुनि सर्व शक्तिमान ईश्वर कौन है यह ऑब्जेक्टिव प्रश्न है

892
01:07:28,840 --> 01:07:33,480
यह ऑब्जेक्टिव अभी मैंने परिभाषा पूछी है ऑब्जेक्टिव देख

893
01:07:33,480 --> 01:07:37,520
सुनि ऑब्जेक्टिव का मतलब क्या है समझ ली ट ऑब्जेक्टिव

894
01:07:37,520 --> 01:07:41,560
का मतलब आवाज कहा से आ रही है ऑब्जेक्टिव का मतलब समझ लीजिए मैंने

895
01:07:41,560 --> 01:07:45,680
कहा कि जो हमें परमेश्वर की प्राप्ति कराएंगे वह शास्त्र हमारे लिए सद

896
01:07:45,680 --> 01:07:49,840
ग्रंथ है यह हो गया सिद्धांत वाला प्रश्न सिद्धांत

897
01:07:49,840 --> 01:07:54,040
सिद्धांत क्या है ये है अब ऑब्जेक्टिव प्रश्न क्या वस्तुनिष्ठ क्या

898
01:07:54,040 --> 01:07:58,080
वो ग्रंथ कौन कन से ये ऑब्जेक्टिव हो गया वो वेद है वो स्मृति

899
01:07:58,080 --> 01:08:02,160
ग्रंथ है ये ऑब्जेक्टिव हो गया अभी मैंने हम लोग बात इस पर कर रहे हैं कि

900
01:08:02,160 --> 01:08:06,360
जब आप बार-बार ईश्वर को प्राप्त कराने वाले शास्त्रों की बात कर रहे हैं कि वही

901
01:08:06,360 --> 01:08:10,440
सद ग्रंथ है वही धर्म ग्रंथ है वही पवित्र ग्रंथ है तो इसका मतलब

902
01:08:10,440 --> 01:08:14,720
आपको मालूम होना चाहिए कि ईश्वर किसे कहते हैं तो आपके अनुसार ईश्वर

903
01:08:14,720 --> 01:08:18,880
कौन है कौन मतलब ऑब्जेक्टिव नहीं उसका नाम नहीं पूछ रहा हूं उसकी परिभाषा पूछ

904
01:08:18,880 --> 01:08:23,160
रहा हूं ईश्वर किसे कहा जा सकता है क्या सिद्धांत

905
01:08:23,160 --> 01:08:27,160
है हां उनका लक्षण बता दीजिए उनका सरल

906
01:08:27,160 --> 01:08:31,040
बात में उनका लक्षण बता दीजिए ईश्वर का क्या लक्षण है परमेश्वर पूर्ण

907
01:08:31,040 --> 01:08:35,200
ब्रम आप फिर इसम हो जाएंगे ईश्वर मैं पूर्ण ब्रम की बात कर रहा

908
01:08:35,200 --> 01:08:39,240
हूं पूर्ण ब्रम का क्या है परमेश्वर परमेश्वर जो

909
01:08:39,240 --> 01:08:43,320
लास्ट है उससे आगे कुछ नहीं है उसका उसकी क्या परिभाषा है

910
01:08:43,320 --> 01:08:46,920
क्या सिद्धांत है

911
01:08:46,920 --> 01:08:50,960
उसका देखि परमेश्वर का सिद्धांत है वो निर्विकार है दयालु है

912
01:08:50,960 --> 01:08:56,520
परम पवित्र है क्या है निर्विकार है हा

913
01:08:56,520 --> 01:09:00,640
सर्वेश्वर है न्याय का है सृष्टिकर्ता है सर्वव्यापक है

914
01:09:00,640 --> 01:09:05,400
सर्वशक्तिमान है सच्चिदानंद है यही उन उनके

915
01:09:05,400 --> 01:09:09,800
लक्षण अच्छा सर्वशक्तिमान अच्छा और सर्वज्ञ

916
01:09:09,800 --> 01:09:14,480
भी है सर्वज्ञ जी सर्वव्यापक

917
01:09:14,480 --> 01:09:19,440
भी है सर्वव्यापक भी है अच्छा तो

918
01:09:19,440 --> 01:09:23,600
सर्वव्यापक का अर्थ क्या होता है भाई साब क्या

919
01:09:23,600 --> 01:09:27,760
लेते हैं आप सर्वव्यापक का अर्थ जो अपने शक्ति से सर्व

920
01:09:27,760 --> 01:09:31,920
व्याप है हर जगह व्यापत है सब

921
01:09:31,920 --> 01:09:36,280
जगह सब जगह कोई भी दुनिया की ऐसी कुछ भी ऐसा कुछ भी

922
01:09:36,280 --> 01:09:40,400
कुछ भी ऐसा नहीं है ज ना हो जो अपने शक्ति से हर

923
01:09:40,400 --> 01:09:44,440
जगह व्याप्त है ठीक है शक्ति सेही सही मगर हर

924
01:09:44,440 --> 01:09:46,480
जगह सब जगह ना सब

925
01:09:46,480 --> 01:09:50,880
जगह सब जगह ठीक है और सर्वज्ञ का क्या मतलब

926
01:09:50,880 --> 01:09:54,920
है जो सब कुछ जानता हो उसे सर्व

927
01:09:54,920 --> 01:09:58,920
कुछ कि वो ना जानता हो यानी कि

928
01:09:58,920 --> 01:10:03,360
सर्व का मतलब है सब कुछ कुछ

929
01:10:03,360 --> 01:10:07,440
शेष ना रह जाए यह सर्व का मतलब है

930
01:10:07,440 --> 01:10:11,480
हा अब मैं आपसे पूछता हूं कि ई साब मेरी बात

931
01:10:11,480 --> 01:10:15,640
अभी पूरी नहीं हुई रुक जाइए मैं आपसे एक बार और क्लियर कर लू कि

932
01:10:15,640 --> 01:10:19,680
आप जब सर्वज्ञ कह रहे एक मिनट एक मिनट जब आप सर्वज्ञ कह रहे हैं

933
01:10:19,680 --> 01:10:23,680
सर्वव्यापक ले कह रहे हैं तो आप सर्व का अर्थ ले रहे हैं कि

934
01:10:23,680 --> 01:10:27,760
जिससे बाहर कुछ भी शेष रह जाए सब कुछ सर्वव्यापक

935
01:10:27,760 --> 01:10:32,160
जो सब जगह व्याप्त हो सर्वज्ञ जो सब कुछ जानता हो

936
01:10:32,160 --> 01:10:36,240
ऐसा कुछ ना हो जो वो ना जानता हो ऐसा ऐसी कोई जगह

937
01:10:36,240 --> 01:10:40,680
ना हो जहा उसकी व शक्ति के रूप में व्याप्त ना हो आपके अनुसार ठीक है

938
01:10:40,680 --> 01:10:44,680
यानी सर्व जो विशेषण लग रहा है सर्व इसका अर्थ आप यह मान

939
01:10:44,680 --> 01:10:48,840
रहे हैं कि सब कुछ जिससे शेष कुछ ना रह जाए ठीक

940
01:10:48,840 --> 01:10:52,960
है जी तो अब बात

941
01:10:52,960 --> 01:10:57,400
आती है कि आपने ईश्वर को सर्वशक्ति मान भी कहा है

942
01:10:57,400 --> 01:11:03,400
बिल्कुल तो सर्वशक्तिमान का अर्थ आप क्या लेते

943
01:11:03,440 --> 01:11:07,760
हैं सर्वशक्तिमान का मतलब हो सबसे सर्व

944
01:11:07,760 --> 01:11:11,800
कुछ करने वाला उसके असंभव कुछ हो या यानी

945
01:11:11,800 --> 01:11:15,840
कि वह सब कुछ कर सकता है जिसके बाहर कुछ भी शेष नहीं रह

946
01:11:15,840 --> 01:11:20,320
जाता ऐसा नहीं कहा जा सकता कि वो फलाना काम नहीं कर सकता हां

947
01:11:20,320 --> 01:11:24,480
लेकिन अब ये आगे बढ़ने से पहले मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्योंकि आपने बहुत

948
01:11:24,480 --> 01:11:28,560
प्रश् पूछ ये प्रश्न मेरा ये चैप्टर क्लोज ही नहीं हुआ तो आप आगे क्यों

949
01:11:28,560 --> 01:11:32,680
जा रहे हैं मैं आपकी सर्वशक्तिमान की परिभाषा परही प्रहार कर रहा हूं एक

950
01:11:32,680 --> 01:11:36,760
मिनट एक मिनट भाई साहब अभी सर्व शक्ति अभी सर्व अभी जो

951
01:11:36,760 --> 01:11:40,800
सर्व वाली बात हो रही है आपने माना सर्वज्ञ वो है

952
01:11:40,800 --> 01:11:45,200
जिससे कोई भी चीज जानने की बाकी ना रह जाए

953
01:11:45,200 --> 01:11:49,320
और सर्वव्यापक वो है जो शक्ति के रूप में हर

954
01:11:49,320 --> 01:11:53,800
जगह व्याप्त हो कहीं भी कोई भी ऐसी चीज ना हो एक मिनट भाई साहब

955
01:11:53,800 --> 01:11:57,920
भाई साहब कैसे कर अब सर्व शक्तिमान की बात आई जो सब

956
01:11:57,920 --> 01:12:02,440
कुछ करने में सामर्थ वान हो और हम भी हम भी यही मानते

957
01:12:02,440 --> 01:12:06,840
गणेश जी दो मिनट दो मिनट दो मिनट आप चुप रहिए दो

958
01:12:06,840 --> 01:12:10,960
मिनट नहीं तो आप जब हम बोलेंगे रुकने के लिए आप रुकवा

959
01:12:10,960 --> 01:12:15,080
उनको शवा भैया को भी ठीक है भैया को आप बो

960
01:12:15,080 --> 01:12:18,440
बोलिए भैया बोलिए जब आपने

961
01:12:18,440 --> 01:12:22,720
आपने सर्वज्ञ उसे माना जिससे जिसको कुछ भी जानना शेष

962
01:12:22,720 --> 01:12:27,400
ना हो आपने सर्वव्यापक उसे माना जिसका कहीं भी

963
01:12:27,400 --> 01:12:31,440
जिसका कहीं भी होना शेष ना हो हर जगह हो शक्ति के रूप

964
01:12:31,440 --> 01:12:35,480
में शक्ति के रूप तो फिर सर्वशक्तिमान का मतलब आपने माना जो

965
01:12:35,480 --> 01:12:35,980
सब कुछ

966
01:12:35,920 --> 01:12:40,000
कर सकता है तो अब मैं पूछ रहा हूं क्या वह माता के गर्भ

967
01:12:40,000 --> 01:12:46,000
से जन्म ले सकता

968
01:12:47,920 --> 01:12:53,920
है आपकी आवाज नहीं आ रही आपकी आवाज नहीं आ रही

969
01:12:55,520 --> 01:12:56,020
अब

970
01:12:55,880 --> 01:12:59,920
आ रहा है इसके पहले हम आपसे

971
01:12:59,920 --> 01:13:04,000
प्रश्न पूछना चाहते हैं कि ईश्वर के विषय में आपका क्या कहना है

972
01:13:04,000 --> 01:13:08,480
ईश्वर कौन है सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है उसका क्या स्वरूप है यह तो विषयात

973
01:13:08,480 --> 01:13:12,640
हो रहा ना भाई साहब जब एक बात

974
01:13:12,640 --> 01:13:16,760
कोई क्रम से जब एक बात कोई क्रम से चल रही है तो उसको खत्म करिए ना भाई

975
01:13:16,760 --> 01:13:20,920
साहब जब आपने कहा धर्म ग्रंथ और धर्म और पवित्र

976
01:13:20,920 --> 01:13:25,240
और सद वो है जो ईश्वर की बात करा तो मैंने आपसे आपके ईश्वर की

977
01:13:25,240 --> 01:13:29,800
भाषा पूछी अब आपने कहा कि भाई हम उसे सद ग्रंथ मानते हैं जो

978
01:13:29,800 --> 01:13:34,200
सर्वशक्तिमान की बात करे सर्वज्ञ की बात करे सर्वव्यापक

979
01:13:34,200 --> 01:13:38,200
की बात करे अब मैं आपसे आपके सर्व शक्तिमान को टटोल रहा

980
01:13:38,200 --> 01:13:42,440
हूं तो आप शास्त्रों को आप जिन शास्त्रों को सद

981
01:13:42,440 --> 01:13:47,000
ग्रंथ कहते हैं भाई साहब आप जिन शास्त्रों को सद ग्रंथ कहते हैं भाई साहब

982
01:13:47,000 --> 01:13:51,320
उन सद ग्रंथों के द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है आपके

983
01:13:51,320 --> 01:13:55,400
अनुसार वह सर्वशक्तिमान आपने माना है तो

984
01:13:55,400 --> 01:14:01,400
अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या वह माता के गर्भ से जन्म ले सकता

985
01:14:02,440 --> 01:14:06,560
है मेरी बात सुनिए भाई साहब मैं अपने आप को सही सिद्ध

986
01:14:06,560 --> 01:14:10,640
कर लूंगा अभी के अभी वो पॉइंट खड़ा करने

987
01:14:10,640 --> 01:14:14,760
पर विषयात होगा नहीं होगा अगर मैं गलत

988
01:14:14,760 --> 01:14:19,200
भी सिद्ध हो जाऊंगा सुनिए अगर मैं गलत भी सिद्ध हो जाऊंगा तो उससे

989
01:14:19,200 --> 01:14:23,520
आपका सही होना सिद्ध नहीं होता अपने आप को सही सिद्ध

990
01:14:23,520 --> 01:14:27,680
करिए भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब

991
01:14:27,680 --> 01:14:32,160
मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब कि क्या आपने कहा सर्वशक्तिमान

992
01:14:32,160 --> 01:14:36,800
का अर्थ जो सब कुछ कर सकता है क्या वह माता के गर्भ से जन्म ले सकता

993
01:14:36,800 --> 01:14:41,120
है इस प्रश्न पर का उत्तर हम देंगे आपको

994
01:14:41,120 --> 01:14:45,160
ले प आप अगर मेरे प्रश्न के जवाब में

995
01:14:45,160 --> 01:14:49,320
मुझसे प्रश्न करेंगे उल्टा सुनिए तो मैं अपने अपने बारे

996
01:14:49,320 --> 01:14:53,360
में कुछ बताऊंगा फिर आप उस पर प्रश्न करेंगे फिर तो वो एक चैप्टर ही खुल

997
01:14:53,360 --> 01:14:57,600
जाएगा ना नया मैं अपने आप सही सिद्ध करूंगा अभी आप रामपाल को सही

998
01:14:57,600 --> 01:15:02,000
सिद्ध कर रहे हैं अभी आप रामपाल को सही सिद्ध

999
01:15:02,000 --> 01:15:06,120
करिए मेरे अगर मैं हार गया अगर मैं अपने पक्ष को सही

1000
01:15:06,120 --> 01:15:10,240
से सिद्ध नहीं कर पाया तो उससे रामपाल सही सिद्ध नहीं होंगे

1001
01:15:10,240 --> 01:15:14,480
रामपाल के सही सिद्ध सुनो रामपाल के सही

1002
01:15:14,480 --> 01:15:17,640
सिद्ध होने से ही रामपाल सही सिद्ध होंगे

1003
01:15:17,640 --> 01:15:21,760
आपकी परिभाषा अगर यह है आपकी परिभाषा अगर यह

1004
01:15:21,760 --> 01:15:25,800
है कि सर्वशक्तिमान का अर्थ है सब कुछ कर

1005
01:15:25,800 --> 01:15:30,040
सकता है भाई साहब मैं देखिए मैं मैं बहुत ज्यादा

1006
01:15:30,040 --> 01:15:34,640
आपसे रिपीटेड नहीं कर सकता हूं मैंने आपको कहा कि आप आराम से वो रखिए

1007
01:15:34,640 --> 01:15:38,680
आप अपने भी सवाल को लिख करके रखिए हमारी डिबेट कई एपिसोड्स

1008
01:15:38,680 --> 01:15:42,920
में होगी हम लोग बात करते रहेंगे भाई साहब अभी बात चल रही है आपने

1009
01:15:42,920 --> 01:15:47,880
सद ग्रंथ उसे माना है जो सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करें

1010
01:15:47,880 --> 01:15:51,880
जी तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपका जो आपके

1011
01:15:51,880 --> 01:15:55,920
अनुसार जो ईश्वर है वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता

1012
01:15:55,920 --> 01:16:00,000
मैं पूछ नहीं सकता क्या मेरा कोई अधिकार नहीं है

1013
01:16:00,000 --> 01:16:04,200
भाई साहब अभी नहीं है अभी आप अपना जवाब दीजिए अभी नहीं है आप अपना

1014
01:16:04,200 --> 01:16:08,680
जवाब दीजिए भाई साहब मेरी बारी आएगी तब मैं आपसे क्वेश्चन नहीं करूंगा

1015
01:16:08,680 --> 01:16:13,000
मैं अपना जवाब दूंगा मैं अपना दूंगा भाई साहब आपके अनुसार

1016
01:16:13,000 --> 01:16:17,280
आंसर दीजिए मेरे गलत होने से आपका सही

1017
01:16:17,280 --> 01:16:21,760
होना सिद्ध नहीं होता आप अपने को सही सिद्ध करिए भाई साहब

1018
01:16:21,760 --> 01:16:25,880
भाई साहब प्लीज भाई साहब मेरे पास इतनी ताकत नहीं है वैसे ही मेरा मेरा

1019
01:16:25,880 --> 01:16:30,040
स्वास्थ्य गड़बड़ है भाई साहब मैं बारबार बोल बोल करके और मैं थक रहा हूं

1020
01:16:30,040 --> 01:16:32,680
आप मेरी बात को समझिए जब आप मुझसे क्वेश्चन

1021
01:16:32,680 --> 01:16:37,600
करेंगे मैं अपना जवाब दूंगा आपको मैं आपसे क्वेश्चन नहीं करूंगा

1022
01:16:37,600 --> 01:16:41,600
इससे विषयात होता है आप आप सुनिए इससे

1023
01:16:41,600 --> 01:16:45,600
विषयात होता है भाई साहब टॉपिक चेंज होता है इससे आप अपना

1024
01:16:45,600 --> 01:16:51,600
जवाब दीजिए आपका ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं

1025
01:16:55,160 --> 01:16:59,320
हो ना कि मैं आपसे पूछ नहीं सकता पूछो जब मेरी बारी आएगी

1026
01:16:59,320 --> 01:17:03,520
तब पूछो जब मैं मेरे को अपना पक्ष सिद्ध करना होगा सही तब

1027
01:17:03,520 --> 01:17:07,720
पूछो अभी आप अपना पक्ष सही सिद्ध कर रहे

1028
01:17:07,720 --> 01:17:12,120
हैं आपने कहा पहले ही आपसे पूछा कि आपका

1029
01:17:12,120 --> 01:17:16,120
उ देख आप जवाब नहीं दे रहे हैं अभी आपने कहा जवाब

1030
01:17:16,120 --> 01:17:20,160
कैसे दूंगा अभी आपने कहा जवाब कैसे दू बोलने दोगे जब जब बोला

1031
01:17:20,160 --> 01:17:24,360
बोलते हो तो जवाब नहीं देते कुछ और बोलते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं

1032
01:17:24,360 --> 01:17:28,640
क्या सर्वशक्तिमान का जो अर्थ है वो सब कुछ कर सकने वाला है

1033
01:17:28,640 --> 01:17:33,600
या कुछ कुछ काम नहीं कर सकने वाला है ये बता दो भाई साहब बता

1034
01:17:33,600 --> 01:17:37,680
दो आप हमको बोलने दीजिए पहले बोलने दीजिएगा कि नहीं

1035
01:17:37,680 --> 01:17:41,960
प्रश्न का उत्तर है ये देना इधर उधर की बात मत करो प्रश्न

1036
01:17:41,960 --> 01:17:46,080
का उत्तर दो भाई साब जिसे हम देखो अभी पिछली कई चीजों में हमारी

1037
01:17:46,080 --> 01:17:47,680
सहमति नहीं हुई नहीं हुई

1038
01:17:47,680 --> 01:17:51,800
ना फिर भी हम लोग बात कर रहे हैं ना हो सकता है कि

1039
01:17:51,800 --> 01:17:55,880
अभी भी हमारी सहमति नहीं हो पाएगी फिर भी हम लोग बात करेंगे तो जब बात करेंगे तो

1040
01:17:55,880 --> 01:17:59,920
आपके प्रश्न भी मैं लूंगा मगर भाई साहब प्रश्न के जवाब में

1041
01:17:59,920 --> 01:18:04,160
प्रश्न करने से वह विषय बदलता है और अगर मान लो

1042
01:18:04,160 --> 01:18:08,200
आपके अनुसार मैं गलत हूं एक मिनट के लिए मान लेते हैं मैं गलत हूं

1043
01:18:08,200 --> 01:18:12,280
मेरा ईश्वर गलत है मैं जिन आचार्यों का शिष्य हूं वो गलत है

1044
01:18:12,280 --> 01:18:16,320
मैं जिन ग्रंथों को एक एक अक्षर मानता हूं सत्य वो सब गलत है मैं गलत हूं

1045
01:18:16,320 --> 01:18:20,480
पूरा मगर मेरे गलत होने से रामपाल जी का सही

1046
01:18:20,480 --> 01:18:24,840
होना सिद्ध नहीं होता है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न

1047
01:18:24,840 --> 01:18:28,960
चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न

1048
01:18:28,960 --> 01:18:33,000
ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है मेरे

1049
01:18:33,000 --> 01:18:37,360
भाई मुझे बोलने दो पूरा अभी प्रश्न ये चल रहा है कि आपने कहा जो सर्वशक्तिमान

1050
01:18:37,360 --> 01:18:41,520
अभी प्रश्न ये चल रहा है मैं पूरी लाइन कहूंगा उसके बाद ही चुप

1051
01:18:41,520 --> 01:18:45,800
होऊंगा मैं पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा

1052
01:18:45,800 --> 01:18:49,840
भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब

1053
01:18:49,840 --> 01:18:53,880
भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा मैं पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब

1054
01:18:53,880 --> 01:18:58,040
भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई

1055
01:18:58,040 --> 01:19:02,760
साहब अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है

1056
01:19:02,760 --> 01:19:08,760
भाग गए भाई साहब भाई साहब भाग गए

1057
01:19:27,820 --> 01:19:33,820
[संगीत]

1058
01:19:40,000 --> 01:19:42,240
हां

1059
01:19:42,240 --> 01:19:46,480
जी व तो चले गए भागेंगे

1060
01:19:46,480 --> 01:19:50,520
भागेंगे ही ना उनके सिद्धांत क्लियर नहीं है उनके

1061
01:19:50,520 --> 01:19:54,720
सिद्धांत क्लियर ही नहीं है भाई हम सही है या

1062
01:19:54,720 --> 01:19:58,800
गलत है हमारी जो विचारधारा वो क्लियर है फट से बोलते है

1063
01:19:58,800 --> 01:20:03,120
कोई भी आंसर हमसे पूछा जाता है फट से बोलते वो

1064
01:20:03,120 --> 01:20:07,200
हम सही मान सही चीजों को सही मान रहे हैं या गलत चीजों को सही

1065
01:20:07,200 --> 01:20:11,680
मान रहे वो एक अलग विषय जैसे उन्होंने मनुस्मृति पर क्वेश्चन किया तो मनुस्मृति

1066
01:20:11,680 --> 01:20:16,040
में यह भी लिखा है कि जो इस जन्म में किसी का मास खाएगा अगले जन्म में वो

1067
01:20:16,040 --> 01:20:18,040
बनेगा है ना

1068
01:20:18,040 --> 01:20:22,640
वो वो उसका मास खाएगा दंड लिखा है मनुस्मृति में यह भी लिखा है

1069
01:20:22,640 --> 01:20:27,200
कि मास खाना छोड़ना 100 वर्षों तक प्रतिवर्ष जब तुम अश्वमेध

1070
01:20:27,200 --> 01:20:31,920
यज्ञ करोगे उसके बराबर का फल देता है अब बोलो

1071
01:20:31,920 --> 01:20:36,000
है ना अब ये कहेंगे कि नहीं ये बात क्यों ले तो जोड़ना पड़ेगा ना

1072
01:20:36,000 --> 01:20:40,080
ये बात का मतलब क्या है ये बात का मतलब क्या तो वहां पर लिखा हुआ है

1073
01:20:40,080 --> 01:20:44,120
जो विधि युक्त यानी आवश्यकता पड़ने पर भी अगर आपको मास खाना पड़ रहा

1074
01:20:44,120 --> 01:20:48,120
है हारी बीमारी में मास जो विषम परिस्थितियां होती है

1075
01:20:48,120 --> 01:20:52,160
उनमें खाने की आज्ञा है उस समय जो विधि का आलंबन नहीं लेता है

1076
01:20:52,160 --> 01:20:56,240
विधि युक्त मास नहीं खाता है वो दंड के लायक है उसको

1077
01:20:56,240 --> 01:21:00,400
नरक मिला है और अगर ऐसे ही

1078
01:21:00,400 --> 01:21:04,800
एक बात को उठाना है तो इनकी जो यह है ज्ञान गंगा

1079
01:21:04,800 --> 01:21:09,040
इसमें 31 में प्रश्न में कबीर ने बोला है कि गीता को बोलने

1080
01:21:09,040 --> 01:21:15,040
वाला कौन है विष्णु के अवतार

1081
01:21:19,680 --> 01:21:25,680
कृष्ण हां भाई साहब कहां गए थे आप

1082
01:21:32,320 --> 01:21:38,320
मत आपको भागना है ऐसे बिना

1083
01:21:39,920 --> 01:21:44,000
बताए अब देखिए मैं आपको अन म्यूट कर रहा हूं भाई साहब अभी आपकी आवाज नहीं

1084
01:21:44,000 --> 01:21:48,120
आ रही है हम लोग दोबारा प्रश्न पर आते फजूल की बातें नहीं करनी है ठीक

1085
01:21:48,120 --> 01:21:52,120
है जी फिजूल की बात नहीं करनी ड खम हो

1086
01:21:52,120 --> 01:21:56,160
गया फिजूल की बात नहीं करनी भाई साहब भाई साहब मैं

1087
01:21:56,160 --> 01:22:00,440
आपसे पूछ रहा हूं क्या आपने जो बताया कि हम उन्हें

1088
01:22:00,440 --> 01:22:04,680
सद ग्रंथ मानते हैं उन्हें धर्म ग्रंथ मानते हैं उन्हें पवित्र ग्रंथ मानते

1089
01:22:04,680 --> 01:22:09,560
हैं जो सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त करने की बात करें आपने

1090
01:22:09,560 --> 01:22:14,120
सर्वज्ञ का अर्थ बताया जो जिससे कुछ भी जानना शेष ना हो

1091
01:22:14,120 --> 01:22:18,120
आपने सर्वव्यापक का अर्थ बताया जिसके द्वारा कोई ऐसी जगह ना

1092
01:22:18,120 --> 01:22:22,320
हो जहां शक्ति के रूप में वो व्याप्त ना हो तो सर्वशक्तिमान का

1093
01:22:22,320 --> 01:22:26,560
मतलब भी यही हुआ ना कि सर्वशक्तिमान

1094
01:22:26,560 --> 01:22:31,040
का अ आपने स्वयं भी बताया जो सब कुछ करने में सामर्थ वान है

1095
01:22:31,040 --> 01:22:35,120
अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपका ईवर सर्वशक्तिमान

1096
01:22:35,120 --> 01:22:39,120
है एक मिनट हम आपसे पूछना चाहेंगे दूसरी बात

1097
01:22:39,120 --> 01:22:43,800
नहीं करनी अभी मुझे मैं थक गया मुझसे मछ ब आछ

1098
01:22:43,800 --> 01:22:48,080
मुझसे मेरी बारी आएगी आप मुझसे अभी अपना जवाब दीजिए

1099
01:22:48,080 --> 01:22:52,240
भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके पास जवाब है तव का दिया

1100
01:22:52,240 --> 01:22:55,040
हुआ

1101
01:22:55,040 --> 01:23:01,040
आपके पास जवाब है सुनने का क्षमता है आप जाइए

1102
01:23:04,120 --> 01:23:08,400
आप आपको जवाब देना है तो ऐसे ऐसे सर हिला दीजिए अन्यथा

1103
01:23:08,400 --> 01:23:14,400
आप जा सकते हैं थक गया

1104
01:23:17,200 --> 01:23:21,200
मैं पीछे से जड़ की बात करना इसलिए आवश्यक है कि इनकी

1105
01:23:21,200 --> 01:23:24,880
जड़ ही गलत है

1106
01:23:24,880 --> 01:23:29,240
जड़ की बात इसीलिए करना आवश्यक है कि इनकी जड़ ही गलत है

1107
01:23:29,240 --> 01:23:33,480
संत के द्वारा प्रदत शास्त्र होना चाहिए फिर वो सद ग्रंथ कैसे कुरान बाइबल और

1108
01:23:33,480 --> 01:23:37,680
इनका ये क्योंकि ना वशिष्ठ ज्ञानी तत्व ज्ञानी ना

1109
01:23:37,680 --> 01:23:42,120
ब्रह्मा विष्णु महेश ज्ञानी सब अज्ञानी थे तो वो संत नहीं थे

1110
01:23:42,120 --> 01:23:46,360
और यहां तक कि यह तक लिखा है कि उनको मोक्ष नहीं मिली उनको शांति नहीं मिली तो आपको

1111
01:23:46,360 --> 01:23:50,920
उनकी भक्ति करने वालों को शांति कहां से मिलेगी यह सब लिखा है इनकी किताबों

1112
01:23:50,920 --> 01:23:55,360
में तो जिसको शांति नहीं है उसको संत क्यों मान रहे हो जो संत नहीं है

1113
01:23:55,360 --> 01:24:00,080
उसके द्वारा प्राप्त ग्रंथों को तुम सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो

1114
01:24:00,080 --> 01:24:04,800
क्योंकि लोगों को बेवकूफ बनाना है ढोंग

1115
01:24:04,800 --> 01:24:08,880
करना है कि हम सबको सद ग्रंथ मानते हैं आ जाओ आ जाओ आ जाओ

1116
01:24:08,880 --> 01:24:14,880
हमारे पास आ जाओ हम तो तुमको भी मानते हैं हम तो तुमको भी मानते

1117
01:24:21,640 --> 01:24:25,800
हैं अनीश जी आप एक काम करिए आप एक यहां पर मैसेज

1118
01:24:25,800 --> 01:24:30,160
कर दीजिए स्ट्रीम का लिंक

1119
01:24:30,160 --> 01:24:34,880
अच्छा आज हमने एक बात प्रूफ की है सैद्धांतिक पटल

1120
01:24:34,880 --> 01:24:39,240
पर आपको मैंने लिंक दिया ना थोड़ी देर के लिए जाइए बाहर और यहां

1121
01:24:39,240 --> 01:24:43,320
नीचे आकर के कमेंट जो मैसेजेस चल रहे है इसम लिंक कर दीजिए

1122
01:24:43,320 --> 01:24:47,440
आप कमेंट कर दीजिए अच्छा अच्छा अच्छा लाइव चैट में शेयर कर देते हैं ना चैट

1123
01:24:47,440 --> 01:24:53,440
में हा लाइ

1124
01:24:54,480 --> 01:24:58,920
तो आज क्या वो हुआ कि इनके द्वारा इनकी ही परिभाषा

1125
01:24:58,920 --> 01:25:03,440
के आधार पर ना तो

1126
01:25:03,440 --> 01:25:07,440
गीता वेद पुराण तो सद ग्रंथ है ही मगर उनकी तो बात

1127
01:25:07,440 --> 01:25:11,800
छोड़ो कुरान और बाइबल की तो बात छोड़ो गीता वेद पुराण

1128
01:25:11,800 --> 01:25:15,880
भी इनकी परिभाषा के अनुसार सद ग्रंथ नहीं है नहीं तो सिद्ध करें

1129
01:25:15,880 --> 01:25:20,040
ये सद ग्रंथ कैसे कह रहे हैं अभी खुद ही इतना बड़ा वीडियो बनाया था इन्होंने

1130
01:25:20,040 --> 01:25:24,080
किसके ग्रंथ अश्लील अब खुद कह रहे हैं कि वो ग्रंथ अश्लील

1131
01:25:24,080 --> 01:25:28,320
है खुद कह रहे हैं और फिर कह रहे वो पवित्र है वो सद ग्रंथ

1132
01:25:28,320 --> 01:25:33,000
है जब अश्लीलता भी है उसमें जो ठीक नहीं है सामाजिक

1133
01:25:33,000 --> 01:25:36,800
उससे ऐसी बातें भी व बता रहे हैं ग्रंथ तो अच्छा फिर

1134
01:25:36,800 --> 01:25:40,800
मैंने पूछा यह प्रमाण के लिए मैंने पूछा कि भाई यह क्या है यह

1135
01:25:40,800 --> 01:25:45,440
भी सद ग्रंथ है अंतर होना चाहिए इसके एक एक शब्द पर आपको विश्वास है

1136
01:25:45,440 --> 01:25:49,440
तो फिर इसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो उसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो जिसमें मिलावट

1137
01:25:49,440 --> 01:25:55,440
है और असद ग्रंथ की परिभाषा ही नहीं है वाह

1138
01:26:01,120 --> 01:26:05,360
दीजिए भाई लिंक दीजिए यहां

1139
01:26:05,360 --> 01:26:09,480
पर देखिए यह जो बातें होती है कोई अगर

1140
01:26:09,480 --> 01:26:13,480
बुद्धिजीवी होता है उसको बिल्कुल समझ में आएगी ना तो

1141
01:26:13,480 --> 01:26:17,480
इनका जो इनके द्वारा इनको सद ग्रंथ मानना वो सिद्ध होता है अब बात

1142
01:26:17,480 --> 01:26:21,600
आती है एक ही चीज कॉमन मिली ईश्वर भगवान परमेश्वर

1143
01:26:21,600 --> 01:26:26,200
पूर्ण ब्रह्म एक कॉमन मिला तीनों पात धर्म में पवित्रता

1144
01:26:26,200 --> 01:26:30,480
में और हमने कहा चलो उसी में बात कर लेते हैं क्या तुम ईश्वर

1145
01:26:30,480 --> 01:26:34,480
की बात कर रहे हो क्या तुम्हारे अनुसार वह शास्त्र ईश्वर की बात कर रहे

1146
01:26:34,480 --> 01:26:38,520
हैं नहीं कर रहे आप खुद मानते हो

1147
01:26:38,520 --> 01:26:42,560
कि ईश्वर गर्भ से जन्म नहीं ले सकता यजुर्वेद में लिखा

1148
01:26:42,560 --> 01:26:47,880
है माता के वो गर्भ में बिचड़ता

1149
01:26:47,880 --> 01:26:52,200
है बस यही 18 62 करते रहो

1150
01:26:52,200 --> 01:26:57,720
आओ आपको आपका वो है क्या कहते

1151
01:26:57,720 --> 01:27:03,720
हैं मैसेज कहां से करते मुझे पता नहीं है पोस्ट

1152
01:27:17,480 --> 01:27:21,600
कमेंट मैंने य कर दिया है कोई जवाइन

1153
01:27:21,600 --> 01:27:26,160
कर लीजिए थोड़ा सा बात कर ले फिर उसके

1154
01:27:26,160 --> 01:27:30,480
यह है इनकी पोल यह खुद को सही करने के लिए इनके लिए आवश्यक

1155
01:27:30,480 --> 01:27:34,680
है कि दूसरा कोई गलत हो तभी तक इनका अस्तित्व है यह तभी तक सही

1156
01:27:34,680 --> 01:27:38,680
है जब तक कोई दूसरा गलत है इनके अनुसार

1157
01:27:38,680 --> 01:27:42,760
अन्यथा यह सही नहीं है यह अपनी बात को सही सिद्ध नहीं करेंगे

1158
01:27:42,760 --> 01:27:47,640
यह दूसरे को गलत सिद्ध करके अपने को सही सिद्ध करेंगे

1159
01:27:47,640 --> 01:27:51,880
व कहते हैं ना कि आदमी आजकल अपने दुख से दुखी नहीं है दूसरे के

1160
01:27:51,880 --> 01:27:57,880
सुख से दुखी है तो यह सुखी तब होंगे जब दूसरा दुखी

1161
01:27:59,000 --> 01:28:03,120
होगा अरे आ जाओ ना भाई माता जी ने निष्ठा पूर्वक

1162
01:28:03,120 --> 01:28:07,600
दूध पिलाया है तो आप आइए जवाइन करिए चेहरे के साथ

1163
01:28:07,600 --> 01:28:13,600
अगर आप हमें जानते हैं

1164
01:28:14,920 --> 01:28:19,200
तो जय श्री राम जय श्री राम गुरुदेव

1165
01:28:19,200 --> 01:28:25,200
जय श्री राम अच्छा एक बात और

1166
01:28:25,520 --> 01:28:29,960
हां ये थोड़ा सा लोक सतलोक करते

1167
01:28:29,960 --> 01:28:35,320
हैं तो सतलोक जो है इन्हीं के ज्ञान गंगा

1168
01:28:35,320 --> 01:28:40,200
में आवाज आ रही है मेरी जी जी आ रही है

1169
01:28:40,200 --> 01:28:44,800
आवाज आ रही है हा तो सतलोक जो बोलते हैं ज्ञान गंगा में

1170
01:28:44,800 --> 01:28:49,480
ही कि सबसे पहले जो लोग था वो अनामी लोग था

1171
01:28:49,480 --> 01:28:53,640
उसके नीचे जो है बाद में बनाया बना जो लोग

1172
01:28:53,640 --> 01:28:57,680
तो अगम लोग उसके नीचे अलख

1173
01:28:57,680 --> 01:29:01,680
लोग और सतलोक चौथा लोग बनाया ठीक है और

1174
01:29:01,680 --> 01:29:06,120
ज जो लोग बाद में बना है व पहले नहीं था तो सनातन कैसे

1175
01:29:06,120 --> 01:29:10,120
हो सनातन लोग नहीं जो लोग बाद में बना के कबीर

1176
01:29:10,120 --> 01:29:14,040
सागर से और जो भी है जन गंगा से है तो जो लोग बाद

1177
01:29:14,040 --> 01:29:19,320
में बना है व सनातन कहा

1178
01:29:19,320 --> 01:29:24,240
देख बाद में बना सनातन भी नहीं सनातन था है और रहेगा

1179
01:29:24,240 --> 01:29:30,240
जी जी तो ये स

1180
01:29:33,120 --> 01:29:37,280
और में जाए थे

1181
01:29:37,280 --> 01:29:41,280
सतलोक के पैगंबर है वो तीन लोग ऊपर अभी य लोग नहीं पहुंच पाएंगे

1182
01:29:41,280 --> 01:29:45,640
इ के कबीर सागर के अनुसार ठीक है और य नाशवान लोग है

1183
01:29:45,640 --> 01:29:51,640
और देखिए एक कहते हैं यजुर्वेद

1184
01:29:52,120 --> 01:29:54,760
[संगीत]

1185
01:29:54,760 --> 01:30:00,760
तो सत क्या है सत क्या है सत सत्य जो माना जाता

1186
01:30:01,240 --> 01:30:05,320
है हा तो सत क्या है सत विष्णु भगवान का गुण

1187
01:30:05,320 --> 01:30:09,400
है और ब्रह्मा जी का और तम शंकर जी का ठीक

1188
01:30:09,400 --> 01:30:13,440
है तो सत भक्ति सत किसको य क्या सूचित

1189
01:30:13,440 --> 01:30:17,640
कर सत गुण है जो सूचित करता है इनको विष्णु भगवान

1190
01:30:17,640 --> 01:30:21,080
तो

1191
01:30:21,080 --> 01:30:25,480
विष्णु सा है तो मतलब विष्णु मतलब परमात्मा विषणु

1192
01:30:25,480 --> 01:30:29,600
को परमात्मा सिद्ध कर रहा है

1193
01:30:29,600 --> 01:30:33,720
जी बिल्कुल बिल्कुल वो ऐसा है नाय सारी बातें हमारी उसमें आ

1194
01:30:33,720 --> 01:30:38,480
सकती है दीपक जी आपकी आवाज नहीं आ रही आप

1195
01:30:38,480 --> 01:30:44,480
य कबी सागर आप

1196
01:30:45,680 --> 01:30:49,840
देख आवाज नहीं आ रही है गड़बड़ हो रहा

1197
01:30:49,840 --> 01:30:54,600
बीच में चलिए वो आ गए थोड़ी सी अपनी चर्चा हम लोग जारी करते हैं

1198
01:30:54,600 --> 01:30:59,360
मैं ये कह रहा हूं भाई साहब आपको अपनी बात को सही सिद्ध करना है क्या

1199
01:30:59,360 --> 01:31:05,360
या आपको अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए मुझे गलत सिद्ध करना आवश्यक

1200
01:31:07,960 --> 01:31:12,080
है यदि आप गलत सिद्ध हो जाएंगे तो स्वाभाविक बात है कि हम ऑटोमेटिक

1201
01:31:12,080 --> 01:31:16,080
सही सिद्ध हो जाएंगे क्योंकि आपका उद्देश्य था कि संत रामपाल जी महाराज गलत है

1202
01:31:16,080 --> 01:31:20,120
साब किसी के गलत सिद्ध होने से किसी का सही सिद्ध होना सिद्ध होता है

1203
01:31:20,120 --> 01:31:25,520
कहां लिखा है कहां का सिद्धांत है व आपस में लड़ रहा हो

1204
01:31:25,520 --> 01:31:29,840
आपके पास आपके पास अपना ज्ञान है कि नहीं सिवाय दूसरे

1205
01:31:29,840 --> 01:31:34,160
का न गलत करने के अपना ज्ञान है

1206
01:31:34,160 --> 01:31:38,520
आप भी तो वही कर रहे है ना अरे भाई तत्व ज्ञान ये है क्या कि दूसरा गलत

1207
01:31:38,520 --> 01:31:44,520
कैसे है बस तत्व ज्ञान ये नहीं है किय सही कैसे

1208
01:31:46,200 --> 01:31:50,760
है तो क्या है तत्व ज्ञान तो मैं आपसे पूछ रहा हूं

1209
01:31:50,760 --> 01:31:54,920
कि क्या आप जिस ईश्वर को जो आप कह रहे थे सद ग्रंथ का वो

1210
01:31:54,920 --> 01:31:59,800
ग्रंथ जो सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करे ठीक है

1211
01:31:59,800 --> 01:32:03,840
अब आपने सर्वज्ञ का अर्थ बताया जो सब कुछ जानता है

1212
01:32:03,840 --> 01:32:08,120
जिससे कुछ भी जानना शेष नहीं है आपने सर्वव्यापी का मतलब

1213
01:32:08,120 --> 01:32:12,120
ये बताया जो शक्ति के रूप में सर्वत्र व्याप्त है जहां जिसका

1214
01:32:12,120 --> 01:32:16,160
की कहीं भी ना होना शेष नहीं है है ना

1215
01:32:16,160 --> 01:32:20,240
तो फिर सर्वशक्तिमान का अर्थ आपने भी बताया कि जो सब कुछ कर सकता है

1216
01:32:20,240 --> 01:32:24,240
ऐसा कुछ नहीं जो वो नहीं कर सकता है तो अब मैं आपसे पूछ रहा

1217
01:32:24,240 --> 01:32:28,840
हूं क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है बिल्कुल ले सकता

1218
01:32:28,840 --> 01:32:32,880
है जब सर सतिमान है तोव कुछ भी कर सकता है ले भी सकते हैं नहीं

1219
01:32:32,880 --> 01:32:38,880
भी ले सकते उसका मर्जी ये आपके उसम कहां लिखा है कि ले सकता

1220
01:32:39,560 --> 01:32:43,720
है रामपाल ने माना

1221
01:32:43,720 --> 01:32:48,120
आपने पूछा कि वो ले सकता है या नहीं ले सकता तो हमने कहा स

1222
01:32:48,120 --> 01:32:52,360
इसका प्रमाण दिखाना पड़ेगा ना जब आपके रामपाल ने कहीं पर ये कहा हो

1223
01:32:52,360 --> 01:32:56,440
क्योंकि हमें यह पता है कि वो एक कहता है कि माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता

1224
01:32:56,440 --> 01:33:00,560
ईश्वर नहीं ले सकता वो दिखाने के लिए फिर विषत होगा कि

1225
01:33:00,560 --> 01:33:04,720
नहीं होगा विषयात कैसे होगा ू बोल रहे अपने गुरु अपने गुरु

1226
01:33:04,720 --> 01:33:08,760
के विरोध में जा रहे हो तुम अपने को जिताने के लिए अपने

1227
01:33:08,760 --> 01:33:12,920
कोरे गुरु ही गु तुम अपने गु के विरोध में जा रहे हो

1228
01:33:12,920 --> 01:33:17,240
नहीं गलत आप हर बात को अपने बिना कुछ

1229
01:33:17,240 --> 01:33:19,880
बात के विरोध कैसे चले गए आपने हमसे पूछा

1230
01:33:19,880 --> 01:33:25,880
वो ईश्वर स शक्तिमान है

1231
01:33:26,200 --> 01:33:30,240
आप हमारी बात सु हमारी बात सुनि

1232
01:33:30,240 --> 01:33:34,320
आपने प्रश्न किया की ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो मां

1233
01:33:34,320 --> 01:33:38,200
के गर्भ में आ सकते हैं कि नहीं मैंने कहा कि व समान व आ

1234
01:33:38,200 --> 01:33:42,280
भी सकते हैं नहीं भी आ सकते हैं अब आप

1235
01:33:42,280 --> 01:33:48,240
बोल ास जी का तत्व ज्ञान है या आपका अपना

1236
01:33:48,240 --> 01:33:52,680
है आपने यह नहीं पूछा वो आप परमात्मा

1237
01:33:52,680 --> 01:33:57,120
मां के गर्भ में है कि नहीं आपने कहा कि आ सकते हैं कि नहीं सकते

1238
01:33:57,120 --> 01:34:01,880
ये आपने प्रश्न किया है आ सकते हैं और आते हैं दोनों में अंतर है

1239
01:34:01,880 --> 01:34:07,880
तो मैं आपसे वही पूछ रहा हूं व आ सकते हैं कि नहीं आ सकते आ सकते

1240
01:34:08,400 --> 01:34:12,480
हैं क आपने कहीं पर माना है

1241
01:34:12,480 --> 01:34:17,320
आपके जो गुरु है उन्होंने आ सकते हैं

1242
01:34:17,320 --> 01:34:21,520
आ सकते हैं लेकिन आते नहीं है आते नहीं है तो मैं पूछ

1243
01:34:21,520 --> 01:34:26,920
रहा आते नहीं है तो मैं पूछ ही नहीं रहा हूं आ सकते हैं कि

1244
01:34:26,920 --> 01:34:31,080
नहीं आ सकते हैं तो ये कहीं पर मेंशन

1245
01:34:31,080 --> 01:34:36,240
है कि वो गर्भ से भी जन्म ले सकता है जी बोलिए दीपक

1246
01:34:36,240 --> 01:34:40,240
श हा कबीर सागर में लिखा है कि जिन साहेब

1247
01:34:40,240 --> 01:34:44,320
संसार किया सो कित जन्म नार ठीक है जिसने

1248
01:34:44,320 --> 01:34:48,440
संसार को किया कबीर सागर में लिखा और फिर ज्ञान गंगा में भी है वो उस टॉपिक

1249
01:34:48,440 --> 01:34:52,560
को उसम रखे हैं तो कभी जो है नारी के गर्भ से गर्भ में नहीं

1250
01:34:52,560 --> 01:34:53,360
आता नहीं जन्मता

1251
01:34:53,360 --> 01:34:58,720
है वो कोई ये कहते हैं आ सकता

1252
01:34:58,720 --> 01:35:02,760
है तो भाई देखिए जब सर्व क्या दिक्कत

1253
01:35:02,760 --> 01:35:06,880
है एक मैं देखिए आप मेरी बात को समझ ले

1254
01:35:06,880 --> 01:35:11,280
कि जैसे कि आपका कहना है कि क्योंकि उसने कहा है वो आता नहीं है

1255
01:35:11,280 --> 01:35:15,280
इसलिए वो नहीं आएगा तो फिर बात ये हो जाती है कि वो

1256
01:35:15,280 --> 01:35:21,280
अपने कहे हुए से मुकर सकता है कि नहीं [संगीत]

1257
01:35:22,160 --> 01:35:25,280
चलो बोलो

1258
01:35:25,280 --> 01:35:29,520
यह तो आपके म मन की भावना है अपने मन

1259
01:35:29,520 --> 01:35:35,520
प्रश्न किया है क्या अपने कहे हुए से मुकर सकता है कि

1260
01:35:36,600 --> 01:35:40,680
नहीं परमात्मा कुछ भी कर सकते हैं मां के घर में आ भी सकते

1261
01:35:40,680 --> 01:35:44,720
जब परमात्मा शास्त्र में लिखा है परमात्मा सबके हृदय में विराजमान है

1262
01:35:44,720 --> 01:35:48,760
तो एक आ आपसे पूछ रहा हूं क्या वो अपनी बात से

1263
01:35:48,760 --> 01:35:53,000
मुक सकते हैं कि नहीं देखिए बार बार विषयात

1264
01:35:53,000 --> 01:35:57,040
करने को आपने प्र नहीं है हम आपकी बात जो आप बात

1265
01:35:57,040 --> 01:36:01,520
बोल रहे आपके गुरु के विरोध में है नहीं हमा गुरु

1266
01:36:01,520 --> 01:36:05,520
रहे आप पक्ष किसके ले रहे

1267
01:36:05,520 --> 01:36:09,680
जब आपका गुरु कह रहा है कि परमात्मा जो है वो उससे नहीं आता

1268
01:36:09,680 --> 01:36:13,720
यह बात परमात्मा ने कही है अब मैं कह रहा हूं परमात्मा अपनी कही हुई बात से

1269
01:36:13,720 --> 01:36:17,720
मुक सकते हैं कि नहीं नहीं नहीं तो

1270
01:36:17,720 --> 01:36:21,960
यानी कि कुछ ऐसा है दुनिया में जो वो नहीं कर सकते नहीं ऐसा क

1271
01:36:21,960 --> 01:36:25,960
कहा हमने अरे तुमने कहा ना नहीं मु कर सकते तुमने कहा

1272
01:36:25,960 --> 01:36:29,960
ना नहीं मुक सकते तुमने कहा नहीं सकते तुमने

1273
01:36:29,960 --> 01:36:34,000
कहा ना नहीं मुक सकते मैं पूछ रहा हूं तुमने कहा ना नहीं

1274
01:36:34,000 --> 01:36:38,040
सकते मैं पूछ रहा हूं तुमने कहा ना नहीं मुक सकते अभी

1275
01:36:38,040 --> 01:36:42,160
कहा कि नहीं पहला प्रश्न

1276
01:36:42,160 --> 01:36:46,240
आपने किया देखिए भाई साहब आप जो है

1277
01:36:46,240 --> 01:36:50,400
आप अगर पॉइंट प रहिए प्लीज बहुत देर हो गई मेरा गला

1278
01:36:50,400 --> 01:36:51,640
बैठ चुका है मैं

1279
01:36:51,640 --> 01:36:55,840
आपसे पूछ रहा हूं वो मुक सकते हैं कि नहीं मुक सकते

1280
01:36:55,840 --> 01:36:59,880
कि नहीं दोबारा बता दीजिए मुक सकते हैं कि

1281
01:36:59,880 --> 01:37:04,080
नहीं दोबारा बता दीजिए नहीं नहीं तो

1282
01:37:04,080 --> 01:37:08,600
यानी कि दुनिया में कुछ काम ऐसा है जो वो नहीं कर सकते

1283
01:37:08,600 --> 01:37:12,760
इससे कैसे य स हो गया कि वो नहीं कुछ कर सकते देख देख

1284
01:37:12,760 --> 01:37:16,800
रहे हो वो अपनी कही हुई बात से

1285
01:37:16,800 --> 01:37:21,200
मुक सकते हैं कि

1286
01:37:21,200 --> 01:37:25,280
नहीं इससे यह सिद्ध नहीं हो परमात्मा अपने कही हु बात

1287
01:37:25,280 --> 01:37:29,280
से मुक सकते हैं कि नहीं हो सकते यह तो आपके मन के फालतू का

1288
01:37:29,280 --> 01:37:33,760
उपज है तत्व ज्ञान लेने बैठा हूं आप मुझे बताइए

1289
01:37:33,760 --> 01:37:37,800
परमात्मा को आप कह रहे हैं सर्व शक्तिमान आपने कहा सर्व का मतलब

1290
01:37:37,800 --> 01:37:41,840
जो कोई भी कार्य ऐसा ना हो जो नहीं कर सकता अब मैं पूछ रहा हूं क्या वो अपनी

1291
01:37:41,840 --> 01:37:46,000
कही हुई बात से मुक सकता है कि नहीं आप कह रहे हो नहीं मुक सकता तोव सर्व

1292
01:37:46,000 --> 01:37:49,160
शक्तिमान नहीं हुआ

1293
01:37:49,160 --> 01:37:54,280
ना सर्व सर्व का मतलब सर्व

1294
01:37:54,280 --> 01:38:00,280
मत कहो उसे सर्वशक्तिमान

1295
01:38:01,240 --> 01:38:05,800
मैं दूसरा मैं दूसरे तरीके से इस बात को क्लियर कर लेता हूं

1296
01:38:05,800 --> 01:38:11,440
कबीर दास जी जिस रूप में वहां पर बैठे हैं उसी रूप में यहां पर आते

1297
01:38:11,440 --> 01:38:16,920
हैं थोड़ा सा अपने अपने रूप को व उसका तेज कम

1298
01:38:16,920 --> 01:38:21,600
करके ये अलग प्रश्न हो गया

1299
01:38:21,600 --> 01:38:25,920
ये प्रश्न अगर रिलेट नहीं करेगा मैं पूरा यहां पर मैं नमन करने लगूंगा

1300
01:38:25,920 --> 01:38:30,120
रामपाल जी को आप मुझे केवल इसका जवाब दीजिए कि वो वहां से जब आते

1301
01:38:30,120 --> 01:38:34,320
हैं तो आते हैं तो वह अपने तेज को कम करके आते हैं कि नहीं वही बॉडी

1302
01:38:34,320 --> 01:38:37,800
लेकर आते हैं कि

1303
01:38:37,800 --> 01:38:42,320
नहीं जी आते

1304
01:38:42,320 --> 01:38:46,600
जी अच्छा तो जब वो आते हैं

1305
01:38:46,600 --> 01:38:50,640
तो पहली बात तो एक ये हो गई कि जब वो आते हैं अपने शरीर के

1306
01:38:50,640 --> 01:38:54,640
साथ यहां पर उसके प्रकाश को कम करके तो क्या

1307
01:38:54,640 --> 01:38:59,000
वह अपने शरीर को बदल सकते हैं यहां आने के

1308
01:38:59,000 --> 01:39:03,280
बाद वो सते वो पहाड़

1309
01:39:03,280 --> 01:39:07,360
बन सकते हैं कुछ भी कर सकते हैं कुछ

1310
01:39:07,360 --> 01:39:11,440
भी कर सकते हैं तो जब वो पहाड़ होते हैं और वह

1311
01:39:11,440 --> 01:39:15,520
दाढ़ी वाले बाबा जी भी होते हैं है ना यानी कि जो

1312
01:39:15,520 --> 01:39:20,040
उनका जो य रूप है यह नित्य रूप नहीं है

1313
01:39:20,040 --> 01:39:26,040
उनका यानी तत्व से वो कुछ और है

1314
01:39:28,840 --> 01:39:33,240
जिस रूप को वो बदल पा रहे हैं वो नित्य नहीं हुआ ना

1315
01:39:33,240 --> 01:39:36,520
शाश्वत नहीं हुआ

1316
01:39:36,520 --> 01:39:42,520
ना यानी कि तत्व से उनका रूप कुछ और

1317
01:39:48,440 --> 01:39:52,880
है चलिए आपने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक

1318
01:39:52,880 --> 01:39:56,240
है ठीक

1319
01:39:56,240 --> 01:40:01,240
है तो मैंने आपसे कहा था

1320
01:40:01,240 --> 01:40:05,480
कि क्या कहते हैं कि जब बीमारी हो जाए और तब

1321
01:40:05,480 --> 01:40:09,520
जो है विधि युक्त मांस खाने वाला जो होता है वो विधि युक्त मांस ना

1322
01:40:09,520 --> 01:40:13,600
खाने वाला होता है तो वो नर्क में जाता है ऐसा

1323
01:40:13,600 --> 01:40:17,800
मनुस्मृति में कहा गया है आपने वहां पर खट से कहा था आपने वहां

1324
01:40:17,800 --> 01:40:22,560
पर खट से कहा था कि वहां पर बीमारी की बात नहीं हुई है

1325
01:40:22,560 --> 01:40:26,720
कहा था ना जी कहा ना हा अब आपने

1326
01:40:26,720 --> 01:40:30,760
एक बात कही है कि सर्वव्यापक का मतलब है जो शक्ति के रूप में सब जगह व्याप्त

1327
01:40:30,760 --> 01:40:35,000
हो तो ये शक्ति की बात कहां हो रही है

1328
01:40:35,000 --> 01:40:41,000
जब ईश्वर को सर्वव्यापक कहा जा रहा है तो वहा शक्ति क्यों घड़ रहे

1329
01:40:45,920 --> 01:40:50,120
हो देखिए ईश्वर की बात हो रहा

1330
01:40:50,120 --> 01:40:54,120
है और ईश्वर हम पहले ही बता

1331
01:40:54,120 --> 01:40:58,480
दिए कि ग्रंथ में ईश्वर के बारे में लिखा हुआ है जो ईश्वर

1332
01:40:58,480 --> 01:41:02,640
को प्राप्त कराता हो ऐसे सद ग्रंथों में लिखा हुआ है इसलिए

1333
01:41:02,640 --> 01:41:05,440
स जो

1334
01:41:05,440 --> 01:41:09,720
आप आपने ईश्वर की परिभाषा जो बताई है उसमें आपने तीन चीजें

1335
01:41:09,720 --> 01:41:13,880
बोली है अनंत सामर्थ्य वान सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान

1336
01:41:13,880 --> 01:41:17,880
सर्वज्ञ अब मैं इसी पर बात कर रहा हूं कि आपने जब

1337
01:41:17,880 --> 01:41:22,600
सर्वव्यापक को तोड़ा तो आपने कहा जो शक्ति के रूप में सब जगह व्याप्त हो

1338
01:41:22,600 --> 01:41:27,040
जबक वहां सर्वव्यापक है शक्ति के रूप में सर्वव्यापक नहीं है

1339
01:41:27,040 --> 01:41:32,080
सर्वव्यापक है जो जो स्वयं सर्वव्यापक है

1340
01:41:32,080 --> 01:41:36,200
कहां सर्वव्यापक है कहां पर स क्या मानते आपका ईश्वर

1341
01:41:36,200 --> 01:41:39,000
सर्वव्यापक नहीं

1342
01:41:39,000 --> 01:41:43,320
है हम नहीं बल्कि वेदों में क्या लिखा है उसको देखिए फिर

1343
01:41:43,320 --> 01:41:47,560
भाई साहब हम लोग हम लोग अभी यह तय कर रहे हैं कि कौन सा ग्रंथ

1344
01:41:47,560 --> 01:41:51,640
मानना है और उसके लिए जांच कर रहे हैं कि क्या आपके

1345
01:41:51,640 --> 01:41:55,640
द्वारा जिन ग्रंथों को मानने का का दावा किया जाता है वो खोखला दावा है

1346
01:41:55,640 --> 01:41:59,720
या वास्तविक है वो वो वास्तविक है

1347
01:41:59,720 --> 01:42:01,280
तो वास्तविक है तो

1348
01:42:01,280 --> 01:42:05,880
आपका कहना है कि जो ग्रंथ परमात्मा परमेश्वर सर्वशक्तिमान

1349
01:42:05,880 --> 01:42:10,160
सर्वज्ञ की बात करेंगे हम उनको धर्म ग्रंथ या सद

1350
01:42:10,160 --> 01:42:14,320
ग्रंथ या वो पवित्र ग्रंथ कहते हैं तो अभी मैं आपके

1351
01:42:14,320 --> 01:42:18,440
ईश्वर की बात जानना चाह रहा हूं क्या आप ईश्वर को कैसा मानते तो आपने

1352
01:42:18,440 --> 01:42:24,440
बताया कि मैं उसको सर्वव्यापक मानता हूं

1353
01:42:24,600 --> 01:42:28,840
सर्वशक्तिमान का आपके पास उत्तर नहीं है सर्वशक्तिमान का आपके पास उत्तर

1354
01:42:28,840 --> 01:42:32,880
नहीं है कैसे उत्तर नहीं है क्यों

1355
01:42:32,880 --> 01:42:37,080
जब मैंने आपसे पूछा कि भाई अगर वो यहां पर आने के बाद

1356
01:42:37,080 --> 01:42:41,200
अपने शरीर को बदल रहा है तो फिर उसका वो जो रूप है दाढ़ी वाला

1357
01:42:41,200 --> 01:42:45,840
व वो नित्य कैसे हुआ तो इसमें आप शांत हो

1358
01:42:45,840 --> 01:42:50,080
गए क्या उत्तर दिया आपने है वो शरीर को बदले

1359
01:42:50,080 --> 01:42:54,400
फिर से उसी रूप में आ जाए वो समर्थ वान का मतलब कुछ भी हो स

1360
01:42:54,400 --> 01:42:58,520
कि कहते कहते सुनिए नित्य

1361
01:42:58,520 --> 01:43:03,480
किसे कहते क नित्य किसे कहते हैं

1362
01:43:03,480 --> 01:43:07,520
शाश्वत किसे कहते हैं जिसका विनाश नहीं होता है वही शाश्वत है

1363
01:43:07,520 --> 01:43:11,680
उसी को नित्य कहते हैं तो उनका जो रूप है जितनी देर वो पहाड़ बने

1364
01:43:11,680 --> 01:43:15,720
उनका विनाश हुआ ना रूप में परिवर्तन हुआ

1365
01:43:15,720 --> 01:43:16,560
तत्व में परिवर्तन

1366
01:43:16,560 --> 01:43:21,080
तो नहीं हुआ ना तो मैं वही तो कह रहा हूं यानी कि उनका वो जो रूप है वो शाश्वत

1367
01:43:21,080 --> 01:43:25,880
रूप नहीं है वो तत्व से शाश्वत है वो जो रूप है वो शाश्वत नहीं है

1368
01:43:25,880 --> 01:43:30,080
क्योंकि जितनी जितनी दे सुनि

1369
01:43:30,080 --> 01:43:34,240
जितनी दे जितनी देर जितनी देर जितनी देर वो पहाड़

1370
01:43:34,240 --> 01:43:38,440
बने जितनी देर वो पहाड़ बने उतनी देर उनके वो जो रूप

1371
01:43:38,440 --> 01:43:42,440
था दाढी वाला उसका विनाश हुआ हमारी बात को सुनिए

1372
01:43:42,440 --> 01:43:46,640
पहले हा परमात्मा जो जिस आपने

1373
01:43:46,640 --> 01:43:51,040
कहा कि उ नित नहीं है मेरी बात समझ लीजिए

1374
01:43:51,040 --> 01:43:55,480
सुनिए या तो परमात्मा ज आता है

1375
01:43:55,480 --> 01:43:59,560
या सुनिए य रूप में आया है यदि वो जिस रूप में आया है

1376
01:43:59,560 --> 01:44:03,880
या तो वो शाश्वत रूप नहीं है और या फिर वो परमात्मा सर्वशक्तिमान नहीं

1377
01:44:03,880 --> 01:44:07,920
दोनों चीज एक साथ नहीं हो सकती अगर व सक्तिमान है

1378
01:44:07,920 --> 01:44:12,320
अगर वो सर्वशक्तिमान है तो अपने रूप को बदल सकता है

1379
01:44:12,320 --> 01:44:16,440
रू बदल सकता है तो उसका व रूप शाश्वत नहीं है आपने एक बात

1380
01:44:16,440 --> 01:44:21,000
कही आपने एक बात कही किमा

1381
01:44:21,000 --> 01:44:24,920
क ई बात से मुक सकता है

1382
01:44:24,920 --> 01:44:29,520
बो बोलना तो हमको था हमने आपको स्पष्ट करना था

1383
01:44:29,520 --> 01:44:32,000
बोलिए

1384
01:44:32,000 --> 01:44:33,000
बोलिए

1385
01:44:33,000 --> 01:44:37,120
जिस समय व रूप को परिवर्तन करता है तो उसमें केवल रूप में परिवर्तन होता

1386
01:44:37,120 --> 01:44:41,520
है त में परिवर्तन होता है हमने

1387
01:44:41,520 --> 01:44:42,760
आपको मैंने

1388
01:44:42,760 --> 01:44:46,800
यही तोहा या की तव कुछ और है रूप उसका फाइनल रूप नहीं

1389
01:44:46,800 --> 01:44:50,880
है मैंने ही की बात

1390
01:44:50,880 --> 01:44:56,880
कर रहा तुम क्यों आ रहे मैं भी य

1391
01:44:57,320 --> 01:45:01,320
कहाने साब भाई साब भी यही

1392
01:45:01,320 --> 01:45:04,040
मिनट

1393
01:45:04,040 --> 01:45:10,040
मिही बात रहे भाई साब मैं वही बात क

1394
01:45:10,160 --> 01:45:14,320
रहा नहीं बदलता है मगर जो उसका रूप होता है

1395
01:45:14,320 --> 01:45:17,800
व बदलता है

1396
01:45:17,800 --> 01:45:18,800
या

1397
01:45:18,800 --> 01:45:24,800
परम परमेश्वर है वो फाइनल रूप नहीं है भगवान का

1398
01:45:28,200 --> 01:45:32,720
जि सम पहाड़ के रूप में आपने कहा पहा

1399
01:45:32,720 --> 01:45:38,720
ट मेरा आवाज नहीं जा रहा

1400
01:45:39,120 --> 01:45:43,720
है आप तब तक बोलिए दीपक जी और जो

1401
01:45:43,720 --> 01:45:47,920
गणेश दास पा मिनट हा

1402
01:45:47,920 --> 01:45:52,320
मैं य बोल रहा हूं कबीर जी को जो कहते है

1403
01:45:52,320 --> 01:45:56,560
कमल हुए थे ऐसा नहीं है ठीक है

1404
01:45:56,560 --> 01:45:59,860
आप यहां पर कबीर

1405
01:45:59,860 --> 01:46:05,860
[प्रशंसा]

1406
01:46:06,080 --> 01:46:11,480
कबीर कहा पर [प्रशंसा]

1407
01:46:11,480 --> 01:46:16,600
है आपको पूरा मिलेगा में

1408
01:46:16,600 --> 01:46:21,120
यह रामानंद रहे जब स्वामी वत निन अंतरजमी

1409
01:46:21,120 --> 01:46:26,040
तिनके ंग विधवा नारी सेवा बड़ो श्रम धारी प्रभु

1410
01:46:26,040 --> 01:46:30,280
ध्यान लगाई विधवा तिनके ई प्रभु कियो बंदन बिन दोष

1411
01:46:30,280 --> 01:46:34,720
प्रभु क पुत्रवती भर घोसा

1412
01:46:34,720 --> 01:46:38,960
स अपने नाम बखाना यह विपरीत दियो वरदाना स्वामी

1413
01:46:38,960 --> 01:46:43,680
क निकस मुख आयो पुत्रवती हरि तोही बनायो

1414
01:46:43,680 --> 01:46:47,920
पुत्र कलंक न लागत है हरि अनुरागी

1415
01:46:47,920 --> 01:46:52,080
त कर फुलका पर आयो कछ में ताते

1416
01:46:52,080 --> 01:46:56,360
सुत आयो ठीक है य आप

1417
01:46:56,360 --> 01:47:00,640
कबीर कबीर जी का मिल जाएगा कबीर जी जो है विधवा से ही

1418
01:47:00,640 --> 01:47:04,760
उत्पन्न हुए हैं ठीक है और वो जो अपना मन गंत बनाकर करते

1419
01:47:04,760 --> 01:47:08,960
हैं कबीर मूल बीजक आप खरीद लीजिए उसम जन्म साखी पढ़िए उनका पूरा

1420
01:47:08,960 --> 01:47:13,160
लिखा हुआ है कबीर जी कैसे पैदा हुए प्रकट हुए ठीक है और फिर कबीर

1421
01:47:13,160 --> 01:47:19,160
जी जन्मते और मरते हैं आपको मैं दिखा

1422
01:47:19,360 --> 01:47:23,400
दू देखिए पर है कबीर बज

1423
01:47:23,400 --> 01:47:28,000
कबीर ज्ञान विजक शब्द 108 साखी एक आप जाकर के चेक कर

1424
01:47:28,000 --> 01:47:32,520
लीजिएगा पूर्व जन्म अब हम बहली बहुरी जलना

1425
01:47:32,520 --> 01:47:37,120
पूर्व जन्म तब का मद कीना मतलब कबीर जी को

1426
01:47:37,120 --> 01:47:41,440
आपकी बात समझ सुनिए ऐसा है यह जहां पर भी इनके

1427
01:47:41,440 --> 01:47:45,520
विरोध में कोई बात होगी ना तो उसमें कहेंगे यह सद ग्रंथ नहीं है यह काल

1428
01:47:45,520 --> 01:47:50,040
ने बोला है यह मिलावट हो गई है इसीलिए तो मैं बेसिक्स क्लियर कर रहा

1429
01:47:50,040 --> 01:47:54,240
हूं बेसिक इसीलिए मैं क्लियर कर रहा हूं इनके विरोध में बहुत

1430
01:47:54,240 --> 01:47:58,400
सारी बातें हैं शास्त्रों में मगर जहां पर भी विरोध आएगा तोय कह

1431
01:47:58,400 --> 01:48:02,760
देंगे काल ने बोला है यह मिलावट है ऋषियों का अपना मत है

1432
01:48:02,760 --> 01:48:06,760
समझ रहे तो फिर मैं इनको चैलेंज कर रहा हूं कि जब आप यह मानते हैं कि

1433
01:48:06,760 --> 01:48:10,840
शास्त्रों में कुछ गड़बड़ भी है तो आप उन्ह सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो

1434
01:48:10,840 --> 01:48:14,840
जो और वो भी तब जब जिसम बिल्कुल गड़बड़ नहीं है उसको भी सद

1435
01:48:14,840 --> 01:48:18,920
ग्रंथ कह रहे हो तोय ढोंग हुआ ना आपके लिए

1436
01:48:18,920 --> 01:48:23,280
सद ग्रंथ की केवल सच बोलने वाला ग्रंथ सद ग्रंथ है परिभाषा

1437
01:48:23,280 --> 01:48:27,520
है उसके बाद जो सच भी बोलता है झूठ भी बोलता है उसकी परिभाषा भी

1438
01:48:27,520 --> 01:48:32,920
उसको भी आप सद ग्रंथ कहते हैं और असद ग्रंथ की परिभाषा तो है

1439
01:48:32,920 --> 01:48:34,640
ही अच्छा

1440
01:48:34,640 --> 01:48:38,640
एक बार कहते हैं हा हां एक बात और य कहते

1441
01:48:38,640 --> 01:48:42,840
हैं लोग कि कबीर या कवि दोनों एक ही है तो ठीक

1442
01:48:42,840 --> 01:48:47,720
है जो क कवि है वही कबीर है कवि कवि है

1443
01:48:47,720 --> 01:48:52,280
10 की 37 में ये जो भाई साहब आज आए हैं ये बढ़िया मतलब इनसे

1444
01:48:52,280 --> 01:48:56,280
बहुत सारी हम लोग आज ही केवल बात नहीं करेंगे ये बात चलती रहेगी हो

1445
01:48:56,280 --> 01:49:00,360
सकता है दो महीने तक चलती रहे थोड़े थोड़े टुकड़ों में दो दो घंटे बात कर लिया

1446
01:49:00,360 --> 01:49:04,840
करेंगे हफ्ते में एक बार दो बार मगर यदि ये कोऑपरेट करें तो है ना

1447
01:49:04,840 --> 01:49:09,080
जैसे अभी बिना बताए चले गए थे उसका कारण क्या था मुझे नहीं पता तो अब हम गणेश

1448
01:49:09,080 --> 01:49:13,240
दास जी के पास वापस आते हैं गणेश दास जी एक तो बात यह

1449
01:49:13,240 --> 01:49:17,400
है कि यदि ईश्वर अपना जो रूप बदल रहा है तो

1450
01:49:17,400 --> 01:49:21,520
इसका मतलब तत्व से उसका वास्तविक रूप जो बदलता ना हो शाश्वत रूप

1451
01:49:21,520 --> 01:49:25,960
वो कुछ और है फिर हम यह चैलेंज नहीं कर सकते कि नहीं यही रूप है उसका वास्तविक

1452
01:49:25,960 --> 01:49:30,240
क्योंकि वो रूप तो बदल रहा है है ना दूसरी

1453
01:49:30,240 --> 01:49:34,600
बात यह है कि हमने यह कहा कि ईश्वर अपनी

1454
01:49:34,600 --> 01:49:38,800
कही हुई बातों से मुकर सकता है झूठ बोल सकता है आपने मान

1455
01:49:38,800 --> 01:49:42,960
लिया वैसे मैं आपको एक बात बताऊं

1456
01:49:42,960 --> 01:49:47,040
कि ये कुछ बातों में आप अपने गुरु के विरोध में चले जाते हैं कहीं

1457
01:49:47,040 --> 01:49:49,800
कहीं पर हो सकता है आपने उनका सारा कुछ नहीं समझा

1458
01:49:49,800 --> 01:49:53,840
हो मगर जैसे आपने ये मान लिया कि वो अपने माता के गर्म में

1459
01:49:53,840 --> 01:49:57,880
आ सकता है तो माता के गर्म में आ सकने वाली बात आपके गुरुदेव

1460
01:49:57,880 --> 01:50:02,000
ने कहीं पर भी स्वीकार नहीं की है आ सकने वाली बात इसलिए मैंने

1461
01:50:02,000 --> 01:50:06,080
आपसे प्रमाण पूछा था मगर अभी आपने मान लि आ सकता है अभी आपने

1462
01:50:06,080 --> 01:50:10,200
मान लिया आ सकता है तो फिर उसके बाद जब हमने यह कहा उसके

1463
01:50:10,200 --> 01:50:14,200
बाद हमने यह कहा कि क्या वह अपनी कही हुई बात से मुकर

1464
01:50:14,200 --> 01:50:18,320
सकता है तो आपने कहा कि हा मुकर सकता है

1465
01:50:18,320 --> 01:50:22,400
ठीक है ठीक है मुक सकता है कि नहीं दोबारा बता

1466
01:50:22,400 --> 01:50:26,400
द हमको थोड़ा बोलने दीजिए बोलिए हमारे

1467
01:50:26,400 --> 01:50:30,400
गुरु जी ने कहा है कि परमात्मा मां के गर्भ में नहीं

1468
01:50:30,400 --> 01:50:34,400
आते और आपने प्रश्न किया कि वो मां के गर्भ में आ सकते

1469
01:50:34,400 --> 01:50:38,440
हैं कि नहीं तो हमने कहा अभी मेरा प्रश्न अभी मेरा प्रश्न य है भाई

1470
01:50:38,440 --> 01:50:42,960
साहब की क्या वो अपनी कही हुई बात से मुक सकते हैं

1471
01:50:42,960 --> 01:50:47,160
जैसे आपने कहा कि वो नहीं आते नहीं आते यानी की यानी

1472
01:50:47,160 --> 01:50:51,440
कि कोई प्रमाण है आपके पास जिसके कारण आप ऐसा कह रहे हैं और वो प्रमाण

1473
01:50:51,440 --> 01:50:55,800
जाहिर सी बात है वो प्रमाण जाहिर सी बात है वो ईश्वर की वाणी है

1474
01:50:55,800 --> 01:50:59,880
ठीक है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या

1475
01:50:59,880 --> 01:51:04,440
वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं

1476
01:51:04,440 --> 01:51:05,000
ये तो उनका

1477
01:51:05,000 --> 01:51:09,920
मर्जी है वो क्या करेंगे नहीं करेंगे मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब

1478
01:51:09,920 --> 01:51:14,120
ये हम फैसला तो नहीं कर सकते हैं कि ईश्वर क्या कर सकते हैं मुक सकते हैं कि नहीं मुक उसका

1479
01:51:14,120 --> 01:51:18,520
मर्जी आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो सर्व

1480
01:51:18,520 --> 01:51:23,720
सर्व में बाधा लग जाएगी अगर आप ये नहीं कहेंगे कि हां वो ये भी कर सकता है

1481
01:51:23,720 --> 01:51:27,800
हां मैंने कहा है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है सर्वज्ञ है परंतु मैं नहीं

1482
01:51:27,800 --> 01:51:33,000
हूं जो हम ईश्वर के बारे में बता सकते हैं कि वो ऐसा

1483
01:51:33,000 --> 01:51:37,560
यानी आप अभी तत्व ज्ञानी की शरण में नहीं गए हा बिल्कुल गए है

1484
01:51:37,560 --> 01:51:42,120
हा तो बताइए ईश्वर अपनी बात से मुक सकता है कि

1485
01:51:42,120 --> 01:51:46,720
नहीं मैंने तो कहा उसका मर्जी व कुछ भी कर सकते हैं

1486
01:51:46,720 --> 01:51:52,720
मैंने कहा सकता है कि नहीं

1487
01:51:56,520 --> 01:52:00,920
बिल्कुल नहीं मुक

1488
01:52:00,920 --> 01:52:05,080
सकते बोलो क्या बोला क्या बोला

1489
01:52:05,080 --> 01:52:09,320
परमात्मा सन है कुछ भी कर सकते हैं मैंने यही मैंने

1490
01:52:09,320 --> 01:52:11,880
कहा आप इसको क्लियर कर दीजिए

1491
01:52:11,880 --> 01:52:16,440
कि वह अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं आप पाखंडी

1492
01:52:16,440 --> 01:52:20,480
है कि नहीं आप जा सकते

1493
01:52:20,480 --> 01:52:25,600
हैं कि नहीं [हंसी]

1494
01:52:25,600 --> 01:52:29,920
आ जा भाई लोग आप लोग आ

1495
01:52:29,920 --> 01:52:34,360
जाइए शेर का बच्चा

1496
01:52:34,360 --> 01:52:40,360
एक नंबर एक नंबर आप जा सकते हैं या

1497
01:52:43,280 --> 01:52:47,520
नहीं बो हर जग र सकते है

1498
01:52:47,520 --> 01:52:53,520
पेट में नहीं रह सकता वहा से त है वो

1499
01:52:54,520 --> 01:52:58,600
कैसे लते हो भई

1500
01:52:58,600 --> 01:53:02,680
आप ऐसा है

1501
01:53:02,680 --> 01:53:06,920
मेरे अच्छी अच्छी ज्ञान चर्चा अच्छा ज्ञान चर्चा हो रहा था मैं

1502
01:53:06,920 --> 01:53:11,800
सोचा कि बीच में आकर थोड़ा सा मैं इंटरफेयर करू और थोड़ा सा मतलब

1503
01:53:11,800 --> 01:53:16,120
संभाव होकर आप लोगों का डिस्कशन कराऊ क्योंकि आप क्षमा करिएगा

1504
01:53:16,120 --> 01:53:20,160
मतलब एक ही बात को बारबार रिपीट करने से थोड़ा सा फ्रस्ट्रेशन होता है आदमी

1505
01:53:20,160 --> 01:53:24,360
के अंदर में तो मैं तो बस कहना चाह कि इनको आराम से आराम से इनको

1506
01:53:24,360 --> 01:53:29,080
छी जैसे कि जो होता है ना जो छ होता है सही क रहे

1507
01:53:29,080 --> 01:53:33,360
बात तो आप सही कह रहे हैं उसम होता क्या है हार हाइपर होने फ

1508
01:53:33,360 --> 01:53:39,160
नहीं कट्टी मुर्गी का दर्द कट्टी मुर्गी जानती

1509
01:53:39,160 --> 01:53:43,280
समझ मैं समझता हूं इन सब चीजों को बट ये एक्सेप्ट

1510
01:53:43,280 --> 01:53:47,800
नहीं करते ना इन सब चीजों को तो मैं यही सोच रहा था कि यहां आकर और बीच में थोड़ा सा संभाव

1511
01:53:47,800 --> 01:53:51,840
होके और आप दोनों का डिस्कशन कराऊ क्योंकि थोड़ा सा बंदा जेनन लग रहा था मेरे को

1512
01:53:51,840 --> 01:53:56,040
मतलब सो है हम लोग हार

1513
01:53:56,040 --> 01:54:00,320
या जीत प नहीं जो बात हमने कर ली काफी देर तक उसके बाद जनता डिसाइड करेगी

1514
01:54:00,320 --> 01:54:04,520
हमले चटर चलते वही ये सब चीज

1515
01:54:04,520 --> 01:54:08,560
आराम से करेंगे लगेगा और जनता को जानने को

1516
01:54:08,560 --> 01:54:09,600
नलेज मिलेगा जन

1517
01:54:09,600 --> 01:54:12,720
बढेगा जनता को

1518
01:54:12,720 --> 01:54:16,720
तो उनके अंदर डर पैदा होता है जहा तक मेरे को य ऐसा फील

1519
01:54:16,720 --> 01:54:20,760
हुआ है वो जो बोलना चाह रहे व बोल भी नहीं पाते नहीं नहीं बात

1520
01:54:20,760 --> 01:54:24,880
य है उनका जो जिसम चोरी है जिस

1521
01:54:24,880 --> 01:54:29,200
सिद्धांत में चोरी है बारबार क्या करते हैं क्लियर बोलने की बजाय

1522
01:54:29,200 --> 01:54:33,280
घुमा फिरा के बात बोलते जिससे मैं उस बात को आधार बना

1523
01:54:33,280 --> 01:54:38,280
के आगे ना बढ़ पाऊ जैसे मैं बारबार पूछ रहा हूं कि

1524
01:54:38,280 --> 01:54:42,960
क्या वह अपनी बात से मुकर सकता है कि नहीं यह बहुत

1525
01:54:42,960 --> 01:54:47,040
आवश्यक क्वेश्चन है क्योंकि हम जो सनातनी है ना हम उन शास्त्रों

1526
01:54:47,040 --> 01:54:51,080
को मानते हैं जिसे ईश्वर ने भी नहीं रचा जैसे ही यह बात य बोलेंगे

1527
01:54:51,080 --> 01:54:55,080
कि ईश्वर अपनी बात से मुकर सकता है तो इनके यहां तो कुछ है नहीं अपोर

1528
01:54:55,080 --> 01:54:59,160
वाला मामला तो इनकी कबीर वाणी पीर वाणी सब नष्ट हो

1529
01:54:59,160 --> 01:55:03,320
जाएगी तुरंत बकुल सही कह रहे हैं उसको

1530
01:55:03,320 --> 01:55:07,440
यस और नो में रिप्लाई करना था बट ये सब उन सब चीजों को नहीं समझ पाते तक

1531
01:55:07,440 --> 01:55:11,560
का मतलब ही नहीं पता इनको मैं आपको सही बताऊं सु जी इनको शास्त्रार्थ डिबेट

1532
01:55:11,560 --> 01:55:15,640
और तर्क क्या होता है इसका मतलब नहीं है इनको बस बता दिया गया है कि

1533
01:55:15,640 --> 01:55:19,680
ये ये चीजें है आपको प्रमाण मिल गई है अब इसी पर आप माथा रगड़

1534
01:55:19,680 --> 01:55:25,680
रहो उसमें कोई दिक्कत नहीं है अब कोई

1535
01:55:26,520 --> 01:55:30,520
उन भी आना चाहता हूं त वो जो प्रमाणों की बात करते हैं मैं उन

1536
01:55:30,520 --> 01:55:34,520
मैं पहले एक बेस क्लियर करता जा रहा हूं कि जो व्यक्ति आगे तक इन

1537
01:55:34,520 --> 01:55:40,520
चर्चाओं को देखे वो शुरू में जान ले कि इनके द्वारा जो शास्त्रों

1538
01:55:41,320 --> 01:55:45,360
को तो वहा पर जो है मैंने उनसे पूछा था कि काल

1539
01:55:45,360 --> 01:55:49,720
का पहचान क्या है ठीक है तो उसने एक जो है

1540
01:55:49,720 --> 01:55:53,800
दिया की सहस्त्र अच्छा काम करते हैं अब

1541
01:55:53,800 --> 01:55:58,600
हम उनको एक बार ले लेते हैं और हम लोग पूछते हैं

1542
01:55:58,600 --> 01:56:02,600
और वत्सल जी और दीपक जी आप लोग अब थोड़ा सा ऑफ

1543
01:56:02,600 --> 01:56:08,600
मतलब हो जाइए रिमूव तो हम उनको ले लेते

1544
01:56:09,400 --> 01:56:13,680
हैं मगर फिलहाल तो ये उस पर आ गए थे अर यादा प

1545
01:56:13,680 --> 01:56:17,840
आप पाखंडी है कि नहीं नहीं कोई बात नहीं वो भी फ्रस्ट्रेट

1546
01:56:17,840 --> 01:56:21,840
हो रहे हैं एक ही सवाल सुन सुन के ना सुनन वो भी फ्रस्ट्रेट हो जाते

1547
01:56:21,840 --> 01:56:25,960
हैं गणेश जी जी गणेश जी एक मिनट मेरी

1548
01:56:25,960 --> 01:56:30,080
बात सुनिए एक मिनट मेरी बात सुनिए आप बहुत सज्जन व्यक्ति लग रहे हैं मेरे को

1549
01:56:30,080 --> 01:56:34,320
मैं आपको सुन भी रहा हूं बैकअप से देखिए जो शास्त्रार्थ

1550
01:56:34,320 --> 01:56:38,320
होता है चाहे डिबेट होताहे तर्क होता है ना वो सद्भाव पूर्ण किया जाता है

1551
01:56:38,320 --> 01:56:42,440
ठीक है कोई भी सवाल जब आपसे पूछा जा रहा है तो अगर वो नहीं आ रहा

1552
01:56:42,440 --> 01:56:46,520
है आपको तो उसको घुमाइए मत प्लीज यस और नो में जवाब देकर आगे बढ़

1553
01:56:46,520 --> 01:56:51,160
है ऐसी बात नहीं है कि शिवांश जी आपको उसका रिप्लाई नहीं करेंगे या रिप्लाई देना नहीं चाहते

1554
01:56:51,160 --> 01:56:55,800
लेकिन उस बात को जो पॉइंट है जो सवाल रखा गया है उसको क्लियर कर दीजिए

1555
01:56:55,800 --> 01:56:59,880
क्लियर करने के बाद जब आपको नहीं आ रहा है तो आप उसे पूछिए कि इसमें आपका मत क्या है

1556
01:56:59,880 --> 01:57:04,040
आप क्या समझते हैं तो आपको रिप्लाई मिलेगा ना आप लोग क्या करते

1557
01:57:04,040 --> 01:57:08,240
हैं कि जो सवाल पूछा जाता है उसको सीधा सधा रिप्लाई ना देकर

1558
01:57:08,240 --> 01:57:12,400
उसको घुमाने लगते हैं खिचड़ी पकाने लग जाते हैं तो खिचड़ी ना पकाए

1559
01:57:12,400 --> 01:57:16,640
प्लीज जो भी सवाल आपके उनसे उनके द्वारा किया जा रहा है

1560
01:57:16,640 --> 01:57:20,720
अगर वो आपको आ रहा है तो आप उसको दीजिए इधर उधर की बातें

1561
01:57:20,720 --> 01:57:24,440
ना करिए और नहीं भी आ रहा है तो उसको आप वहीं पे स्टॉप कर दीजिए

1562
01:57:24,440 --> 01:57:28,680
कि नहीं यह मेरे को नहीं पता चाहे मेरे को इतना नॉलेज नहीं है आप आगे बढ़ी आपका

1563
01:57:28,680 --> 01:57:33,120
इस क्या मत है तो आपको वो मत जान जानने को मिलेगा शिवांश

1564
01:57:33,120 --> 01:57:37,360
जी देंगे चाहे अन्य कोई भी ब्रेक देगा जिससे भी आप चर्चा कर रहे हैं तर्क का मतलब यही

1565
01:57:37,360 --> 01:57:41,480
होता है कि आप कोई बात रख रहे हो और वह बात समझ में नहीं आ रहा है

1566
01:57:41,480 --> 01:57:45,640
तो उसी को आपने अपना तर्क दिया कि इसका मतलब यह क्या हुआ तो उसको

1567
01:57:45,640 --> 01:57:49,680
आप घुमाइए मत प्लीज मैं आपको इसीलिए आप दोनों का चर्चा कंटिन्यू

1568
01:57:49,680 --> 01:57:53,680
करने के लिए मैं थोड़ा सा आया था इसमें कि वो अच्छा लग रहा था मेरे को सद्भाव पूर्ण आप

1569
01:57:53,680 --> 01:57:57,840
बात भी कर रहे हैं तो आप इसको कंटीन्यूअसली आगे बढ़ाइए लोगों को जानने

1570
01:57:57,840 --> 01:58:01,880
को भी मिलेगा कि आपका पक्ष क्या है शिवान जी का पक्ष क्या है चाहे

1571
01:58:01,880 --> 01:58:06,080
अन्य जो धर्मशास्त्र है हमारे उनके क्या मत है आप तो प्लीज आप सद्भाव

1572
01:58:06,080 --> 01:58:10,120
पूर्वक चर्चा करिए शिवान जी से नहीं आ रहा अभी उनका क्वेश्चन है कि

1573
01:58:10,120 --> 01:58:14,160
क्या वह अपनी बातों से मुकर सकता है कि नहीं यस और नो में रिप्लाई करना

1574
01:58:14,160 --> 01:58:18,320
है आपको हां मुक सकता है नहीं मुक सकता है तो नहीं मुकर सकता है तो क्यों नहीं मुकर

1575
01:58:18,320 --> 01:58:22,720
सकता है मुकर सकता है तो इसका रीजन क्या है यही तो करना है ना आपको

1576
01:58:22,720 --> 01:58:26,760
अब ये आप आप पाखंड पाखंडी है कि नहीं आप यह है कि नहीं वो है कि

1577
01:58:26,760 --> 01:58:30,800
नहीं इससे कोई मतलब नहीं नहीं निकल पाता चाहे इसका कोई रिजल्ट नहीं

1578
01:58:30,800 --> 01:58:34,960
निकलेगा आपको चाहे आप कितने दिन भी आप चर्चा करते रहिए ज्ञानवर्धक

1579
01:58:34,960 --> 01:58:38,960
बातें करते रहिए उसका कुछ रिजल्ट निकलना चाहिए तो इसीलिए

1580
01:58:38,960 --> 01:58:39,460
मैं आपसे चाह

1581
01:58:39,440 --> 01:58:43,920
रहा हूं कि जो क्वे जी बताइए

1582
01:58:43,920 --> 01:58:48,600
बोलिए कहा बहुत अच्छा विचार लगा आपका लेकिन शायद आप

1583
01:58:48,600 --> 01:58:53,960
हो सकता है कि देर से आए होंगे इसलिए चर्चा को नहीं सुन पाए थे शुरू

1584
01:58:53,960 --> 01:58:57,960
में शुरू से सुन रहा हूं गनेश जी मैं शुरू से सुन रहा हूं

1585
01:58:57,960 --> 01:59:02,080
जब से लाइव स्टार्ट हुआ है तभी से सुन रहे अभी जब जब

1586
01:59:02,080 --> 01:59:06,080
आपके उसके सद ग्रंथ के बारे में जब टॉपिक चल रहा था ना कि

1587
01:59:06,080 --> 01:59:10,160
सद ग्रंथ किसको बोलते हैं किसको नहीं बोलते हैं चाहे असद ग्रंथ जिसको बोलते

1588
01:59:10,160 --> 01:59:14,320
हैं वहां पर भी आप आपके साइड से कोई इनपुट निकल के नहीं आया

1589
01:59:14,320 --> 01:59:18,680
यह बारबार ये जो बोलते हैं तोय फेट होते हैं उनको बारबार सवाल को रिपीट

1590
01:59:18,680 --> 01:59:22,680
करना पड़ता है आपको सवाल समझ में आ जाता है लेकिन फिर भी

1591
01:59:22,680 --> 01:59:26,800
आप उसका रिप्लाई नहीं करते उसका जवाब नहीं देते अब जाहिर सी बात है

1592
01:59:26,800 --> 01:59:30,840
कि भाई जिसमें सब कुछ सब कुछ सही बातें लिखी हुई है वो भी

1593
01:59:30,840 --> 01:59:34,920
सद ग्रंथ है तो भाई जब वो सब सद ग्रंथ है तो जिसमें झूठी बातें लिखी

1594
01:59:34,920 --> 01:59:39,040
हुई है उसको क्या उसकी क्या परिभाषा है यही तो सवाल था ना आपका तो

1595
01:59:39,040 --> 01:59:43,120
उसका सवाल देना था चाहे देखो हार हार और जीत

1596
01:59:43,120 --> 01:59:47,120
की बात नहीं है बात है अपने सिद्धांत की आप अपना सिद्धांत रखिए

1597
01:59:47,120 --> 01:59:51,240
जैसे शिवान जी कहते कि हम गलत भी साबित हो गए हैं तो उससे आपका सही होना

1598
01:59:51,240 --> 01:59:54,520
साबित नहीं होता ना वो सिद्धांत ही नहीं है आपके पास में जो

1599
01:59:54,520 --> 01:59:59,160
अपना मत है उसको आप सही स्थापित करिए सही से आप उसको रिप्लाई करिए

1600
01:59:59,160 --> 02:00:03,240
ये हमारा मत है इसको आपको मानना है मानना ना मानना वो अलग

1601
02:00:03,240 --> 02:00:07,280
बात है कोई भी किसी की बात नहीं मानेगा चाहे किसी को जबरदस्ती कपट्टी पर

1602
02:00:07,280 --> 02:00:11,440
बंदूक रखवा कर कोई तो बात मनवा नहीं रहा है विचारों का तो आदान प्रदान है ना

1603
02:00:11,440 --> 02:00:15,520
तो आप अपना विचार रखिए अच्छे से रखिए शिवांश जी जो

1604
02:00:15,520 --> 02:00:19,760
क्वेश्चन कर रहे हैं उसको आप रिप्लाई करिए नहीं आ रहा है उसको आप वहीं

1605
02:00:19,760 --> 02:00:23,920
पर क्विट करके दूसरे क्वेश्चन पर आगे बढ़ सिंपल

1606
02:00:23,920 --> 02:00:28,480
सी बात है बहुत बहुत बहुत

1607
02:00:28,480 --> 02:00:32,560
एक मिनट ग एक मिनट जी मेरे हृदय को बड़ी

1608
02:00:32,560 --> 02:00:36,560
तसल्ली मिली किसी ने मेरी बता को समझा और इनको समझाया

1609
02:00:36,560 --> 02:00:41,200
क्योंकि मैं अभी उस हालत में नहीं हूं कि इनको ऐसे समझा पाऊ तो

1610
02:00:41,200 --> 02:00:45,520
गणेश जी आपकी बात को मैं बुला देता हूं कि आपने पाखंडी इत्यादि कहा

1611
02:00:45,520 --> 02:00:49,760
छोड़ देते अभी हम लोग मुख्य टॉपिक पर आ जाते हैं गश जी दोबारा से

1612
02:00:49,760 --> 02:00:53,880
मुझे इस क्षमा चाहते हैं पखी करने का क्योंकि हम इसीलिए

1613
02:00:53,880 --> 02:00:58,240
कहे क्योंकि आप ईश्वर को असमर्थ

1614
02:00:58,240 --> 02:01:02,840
बताने लगे अपने म

1615
02:01:02,840 --> 02:01:05,840
अब जा

1616
02:01:05,840 --> 02:01:09,760
हीय मतलब नहीं हुआना या आप दोस्त

1617
02:01:09,760 --> 02:01:14,400
आप समझने की कोशिश करो आप मेरी बात

1618
02:01:14,400 --> 02:01:19,360
सुनो एक ब हमारे सुन लीजिए जिस समय

1619
02:01:19,360 --> 02:01:23,400
चर्चा शुरू हुई उन्होने कहा कि आगे जाकर के कुछ सद ग्रंथों

1620
02:01:23,400 --> 02:01:27,480
से प्रमाणित करेंगे या फिर उ उस ग्रंथ से विचार करेंगे तो इसके पहले

1621
02:01:27,480 --> 02:01:31,600
हम ये जान लेंगे कि कौन सा ग्रंथ सद ग्रंथ है किको हम ग्रंथ

1622
02:01:31,600 --> 02:01:35,960
मानेंगे किसको नहीं मानेंगे इस विषय पर चर्चा जब हुआ तो हम शिवान

1623
02:01:35,960 --> 02:01:40,160
जी से बोले कि आप ही एक बार ऐसा करिए कि दर्शकों को ये बता दीजिए कि

1624
02:01:40,160 --> 02:01:44,320
सद ग्रंथ का कौन सा होते हैं उसका क्या सिद्धांत है क्या परिभाषा है

1625
02:01:44,320 --> 02:01:48,480
तो वो तो बताए नहीं इसके बा मैंने नहीं बताया

1626
02:01:48,480 --> 02:01:52,560
बताया एक मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट उन्होने बताया था उन्होंने बताया

1627
02:01:52,560 --> 02:01:57,280
था ग जी मेरी बात सुनिए उन्होंने बताया था कि भाई जिस ग्रंथ में सक्षर

1628
02:01:57,280 --> 02:02:01,520
सब सच बात हो जिस पर हमारी आस्था हो जिस पर हम उसको विश्वास रखते हैं

1629
02:02:01,520 --> 02:02:05,560
वोह हमारे लिए सद ग्रंथ है सिंपल सी बात थी उन्होंने ये नहीं

1630
02:02:05,560 --> 02:02:10,200
बोला ना उन्होंने घुमाया नहीं आपको उन्होंने सीधा सीधा आपको तुरंत रिप्लाई किया था

1631
02:02:10,200 --> 02:02:14,360
मैं भी था मैं सुन रहा था कि हमारे लिए वो सारे सारे धर्म ग्रंथ

1632
02:02:14,360 --> 02:02:18,480
सारे धर्म ग्रंथ सद ग्रंथ है जिनमें सब कुछ सच्ची बात लिखी

1633
02:02:18,480 --> 02:02:22,680
हुई हो उनके कहने का मतलब यही था

1634
02:02:22,680 --> 02:02:25,160
हा तो मैंने भी जो स का परिभाषा

1635
02:02:25,160 --> 02:02:29,800
दिया था उसम यही दिया था कि स ग्रंथ में तो सारी बात सची

1636
02:02:29,800 --> 02:02:34,000
है जी िक च हो रहा है टॉपिक फिर चेंज हो रहा

1637
02:02:34,000 --> 02:02:40,000
है व से आ आके

1638
02:02:40,400 --> 02:02:44,560
नहींन बोल प्ली इनको भी बोलने दीजिए

1639
02:02:44,560 --> 02:02:46,800
बा

1640
02:02:46,800 --> 02:02:51,040
रखने हमने एक बात यह कहा था कि सद ग्रंथ में ग्रंथ

1641
02:02:51,040 --> 02:02:55,680
में दोनों में हालाकि अंतर नहीं है दोनों एक ही चीज है

1642
02:02:55,680 --> 02:03:00,000
तो उसमें भी कुछ ऐसी बातें है जो कि नियम के विरोध है

1643
02:03:00,000 --> 02:03:04,520
और ये इसका उदाहरण हमने दिया भी था कि दे इसलिए

1644
02:03:04,520 --> 02:03:08,720
नहीं बोलने दूगा सुनिए एक मिनट मैं इसलिए नहीं बोलने देता हूं क्योंकि अगर

1645
02:03:08,720 --> 02:03:12,720
यहां पर य बात जो बोलने जा रहे हैं बोल देंगे अब मुझे अभी व उस चैप्टर को

1646
02:03:12,720 --> 02:03:16,960
अभी वो विषयात हो जाएगा या तो मैं उस चैप्टर को जो खोल रहे हैं

1647
02:03:16,960 --> 02:03:21,120
या तो मैं अभी के अभी उसको सही सिद्ध करने में लग जाऊ और अगर नहीं

1648
02:03:21,120 --> 02:03:25,360
किया तो चला जाएगा भया मनुस्मृति में फलानी जग गलत र

1649
02:03:25,360 --> 02:03:27,800
है

1650
02:03:27,800 --> 02:03:32,120
मेंब मनु जब मैं मनुम

1651
02:03:32,120 --> 02:03:36,280
कोही सुनि पांडे जी जब मैं मनुस्मृति को

1652
02:03:36,280 --> 02:03:40,400
सही सिद्ध करने के लिए बैठूंगा तब आप मनुस्मृति के सही अथवा गलत

1653
02:03:40,400 --> 02:03:44,480
होने पर क्वेश्चन उठाइए अभी आप रामपाल को सही सिध होने पर बात

1654
02:03:44,480 --> 02:03:48,560
हो रही है तो आप उसकी बात बताइए क्या आपको तत्व से ज्ञात

1655
02:03:48,560 --> 02:03:52,720
है भगवान का जो तात्विक विवेचना है वो रामपाल जी महाराज

1656
02:03:52,720 --> 02:03:57,720
ने आपको दिया है आप फिर विषय को बदल रहे

1657
02:03:57,720 --> 02:04:02,440
हैं पांडे जी मुझे काना इसलिए पड़ता

1658
02:04:02,440 --> 02:04:06,520
है जी जी बोलिए जी मैं बस ये कह रहा हूं

1659
02:04:06,520 --> 02:04:10,640
कि आप गणेश जी आप आपका टॉपिक जो है वह कहां से स्टार्ट

1660
02:04:10,640 --> 02:04:14,840
होना क्योंकि ये सारी बातें हो चुकी थी ऑलरेडी मैं सुन रहा था हमारे

1661
02:04:14,840 --> 02:04:19,320
जो लास्ट क्वेश्चन था कि उन्होंने यह कहा था कि जो सर्वशक्तिमान

1662
02:04:19,320 --> 02:04:23,400
जो ईश्वर है वो अपनी बातों से मुकर सकते कि नहीं ये मेन

1663
02:04:23,400 --> 02:04:27,440
क्वेश्चन था जहां से आपने क्यूट किया आपने मतलब पाखंडी बोलकर आप निकल गए

1664
02:04:27,440 --> 02:04:31,840
तो आप क्या चाहते शुरू से फिर चर्चा हो या फर य से स्ला गया था

1665
02:04:31,840 --> 02:04:37,600
हमको निकाल दिया गया था हम अपने से कुछ नहीं हुए है आप [प्रशंसा]

1666
02:04:37,600 --> 02:04:42,280
पूछ बोलोगे तो तुम्हारी आरती उतारे बैठ

1667
02:04:42,280 --> 02:04:48,280
के आप वैसा कर ही रहेको

1668
02:04:49,360 --> 02:04:53,440
बो प्रामाणिक करने में लग ग बो

1669
02:04:53,440 --> 02:04:57,640
बोमा करिए अरे गणेश जी मेरी बात सुनिए आप ठीक

1670
02:04:57,640 --> 02:05:01,920
है अब ये सब बातें पीछे की जो बातें हो चुकी है उसको आप साइड में रखिए

1671
02:05:01,920 --> 02:05:06,200
ठीक है लेट्स स्टार्ट आप स्टार्ट करिए अभी फ्रेश से बिल्कुल ही कि आपको

1672
02:05:06,200 --> 02:05:10,320
क्या कौन सा टॉपिक है जो पुराना वाला टॉपिक जो खत्म हो चुका है वहीं से स्टार्ट करना

1673
02:05:10,320 --> 02:05:14,360
है या जहां से भी क्यूट किया था कि जो ईश्वर है वह अपनी बातों से

1674
02:05:14,360 --> 02:05:18,680
मुक सकते हैं कि नहीं वहां से स्टार्ट करना है आपका क्या मत है आप बताइए मुझे

1675
02:05:18,680 --> 02:05:21,960
फिर वहां से स्टार्ट करते हैं

1676
02:05:21,960 --> 02:05:26,320
व से स्टार्ट प्लीज यही रिक्वे है

1677
02:05:26,320 --> 02:05:30,360
वि ना हो जो टॉपिक है उस टॉपिक को पहले फिनिश करिए

1678
02:05:30,360 --> 02:05:35,080
खत्म करिए फिर आप दूसरे टॉपिक पर जाइए

1679
02:05:35,080 --> 02:05:39,240
जीय हम लोगों का आखरी जो प्रश्न चल रहा था वो यह था कि

1680
02:05:39,240 --> 02:05:43,440
ईश्वर अपनी बात से मुकर सकते हैं कि नहीं देखि

1681
02:05:43,440 --> 02:05:48,240
ईश्वर के गुणों में से एक गुण है व नित है सत्य है

1682
02:05:48,240 --> 02:05:52,240
इसका मतलब यह हुआ कि उन्होने जो बात कहा दी उस को व सत्य

1683
02:05:52,240 --> 02:05:56,720
करते हैं उसम मु करते नहीं है इसीलिए ईश्वर अपनी बात से मुक्त नहीं मुकता

1684
02:05:56,720 --> 02:06:00,800
मैं समझ गया मैं समझ गया ईश्वर का एक गुण है कि वह नित्य है वो सत्य है

1685
02:06:00,800 --> 02:06:05,040
तो एक गुण ये भी तो है कि वो सर्वशक्तिमान है जी

1686
02:06:05,040 --> 02:06:09,920
अगर सर्वशक्तिमान है और सर्व का अर्थ होता है सब कुछ आपने बोला

1687
02:06:09,920 --> 02:06:14,040
जिसके बाहर कुछ भी ना हो ठीक है तो फिर ये दोनों

1688
02:06:14,040 --> 02:06:18,080
गुण साथ में नहीं हो सकते अगर आप जो है सत्य का मतलब यह मानते हैं कि वो जो

1689
02:06:18,080 --> 02:06:22,240
है अपनी बात से मुकर नहीं सकता है जी सत्य का मतलब

1690
02:06:22,240 --> 02:06:26,520
ये मानते हैं तो फिर ये जो सर्वशक्तिमान है वो साथ में नहीं हो सकता आपको बोलना

1691
02:06:26,520 --> 02:06:30,560
पड़ेगा हमारा ईश्वर सत्य तो है पर वो सर्वशक्तिमान नहीं

1692
02:06:30,560 --> 02:06:34,760
है नहीं ऐसा नहीं हो सकता है हां कैसा

1693
02:06:34,760 --> 02:06:38,880
हो सकता है

1694
02:06:38,880 --> 02:06:42,960
बताइए मुकने का गुण ये मनुष्य में होता है ईश्वर में

1695
02:06:42,960 --> 02:06:48,960
नहीं होता है इसलिए

1696
02:06:49,040 --> 02:06:53,040
वो आपने माना यही बोल रहा

1697
02:06:53,040 --> 02:06:57,040
हूं गणेश जी मैं यही बोल रहा हूं दोहरी बातें नहीं चलेगी ना आप

1698
02:06:57,040 --> 02:07:01,120
आप लोग समझने की कोशिश नहीं करते यार इसमें छोटा बड़ा होने की कोई

1699
02:07:01,120 --> 02:07:05,280
बात ही नहीं है यर मैं आपको यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं अभी आपने बोला कि

1700
02:07:05,280 --> 02:07:09,920
उनका उनका जो स्वभाव है वो कुछ भी कर सकते हैं व

1701
02:07:09,920 --> 02:07:13,920
मुकर भी सकते हैं और फिर आप थोड़ा सा घुमा के फिर आप यही बोल रहे कि नहीं

1702
02:07:13,920 --> 02:07:19,920
वो मुक भी नहीं सकते ऐसा मत कर प्

1703
02:07:22,680 --> 02:07:26,760
एक बात करिए एक बात एक बात स्टैंड रखिए अपना एक बात प

1704
02:07:26,760 --> 02:07:30,240
स्टंड रए बस बिल्कुल

1705
02:07:30,240 --> 02:07:34,560
नहीं नहीं नहीं सकते

1706
02:07:34,560 --> 02:07:38,600
आगे ब यानी यानी की वो सर्व शक्तिमान नहीं

1707
02:07:38,600 --> 02:07:44,600
है शक्तिमान तो है सर्व सर्व शक्तिमान नहीं

1708
02:07:46,400 --> 02:07:52,160
है इसका निर्णय पहले ही हो गया है कि वो सर्वशक्तिमान है

1709
02:07:52,160 --> 02:07:56,440
बदल सकते अपने बात को बदल सकते है कि नहीं इसका उत्तर है

1710
02:07:56,440 --> 02:08:00,480
कि आपको क्लियर कर दू मैं आपको क्लियर कर दूं आपने सर्वशक्तिमान

1711
02:08:00,480 --> 02:08:04,480
का अर्थ बताया था जो सब कुछ कर सकता है मगर आप ये कह रहे कि व अपनी बात से

1712
02:08:04,480 --> 02:08:08,600
मुक नहीं सकता जी तो क्या आप इस

1713
02:08:08,600 --> 02:08:12,960
बात से सहमत है कि मेरी परिभाषा के अनुसार मेरा जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान

1714
02:08:12,960 --> 02:08:16,320
सिद्ध हो रहा

1715
02:08:16,320 --> 02:08:20,320
है क्या ईश्वर सब कुछ कर रहा है आपका कर पा

1716
02:08:20,320 --> 02:08:24,920
रहा है आपने कहा ईश्वर व है जो सब कुछ कर सकता है

1717
02:08:24,920 --> 02:08:30,600
क्या आपका ईश्वर सब कुछ कर स कर सकता है कर पा रहा है

1718
02:08:30,600 --> 02:08:35,840
बसे तो आप ही तो कह रहे कि व अपनी बात से मुकर नहीं

1719
02:08:35,840 --> 02:08:40,120
सकता मुकरे मुक जाता बाने

1720
02:08:40,120 --> 02:08:44,240
दूसरी बा है उसके मुकने से क्या क्या होगा दूसरी

1721
02:08:44,240 --> 02:08:48,440
बात है मुक सता है

1722
02:08:48,440 --> 02:08:52,600
अगर वो मुक जाता तो सक्तिमान भांग हो जाता है शमान नहीं हो सकता है

1723
02:08:52,600 --> 02:08:56,640
क्योंकि जिस बात को उन्होने पहले क दिया है उसका वो बात गलत स हो

1724
02:08:56,640 --> 02:09:00,760
जाता है जिससे व सर्वशक्तिमान नहीं होगा व सत्य नहीं होगा उस ईश्वर का गुण है व गुण

1725
02:09:00,760 --> 02:09:05,480
नष्ट हो जाएगा इसलिए व ऐसा नहीं कर सकते

1726
02:09:05,480 --> 02:09:10,720
भाई साहब सर्व शक्तिमान का आप बदल रहे सर्वशक्तिमान

1727
02:09:10,720 --> 02:09:14,880
अगर वो अपनी बातों से मुकर नहीं सकता तो व सर्वशक्तिमान कैसे

1728
02:09:14,880 --> 02:09:20,040
हो गया क्वेश्चन य है ना आपका

1729
02:09:20,040 --> 02:09:24,240
अगरी बात सु लीजिए उनका कहने का मतलब यह है कि अगर ईश्वर

1730
02:09:24,240 --> 02:09:28,280
अपनी बातों से मुकर भी नहीं सकता तो वो कैसे सर्वशक्तिमान हो गया ये क्वेश्चन

1731
02:09:28,280 --> 02:09:31,320
है आपका और इसको क्लियर

1732
02:09:31,320 --> 02:09:35,400
कर दूं और इसको मैं क्लियर कर दूं आपने ये कहा था कि जो सब

1733
02:09:35,400 --> 02:09:39,440
कुछ करने में सामर्थ्य रखता है ठीक है अब

1734
02:09:39,440 --> 02:09:43,600
आप ये कह रहे हैं कि वो अपनी बातों से मुकर नहीं सकता ठीक है

1735
02:09:43,600 --> 02:09:47,600
ठीक है तो इसका मतलब दुनिया में कुछ कार्य ऐसे हैं जो वो नहीं

1736
02:09:47,600 --> 02:09:52,360
कर सकता नहीं ऐसा नहीं कर सकते हैं

1737
02:09:52,360 --> 02:09:58,360
हर कुछ कर सकते है तो वो अपनी बात से मुक सकते हैं

1738
02:10:00,880 --> 02:10:05,040
क्या अपनी बात से नहीं मुक स

1739
02:10:05,040 --> 02:10:09,560
जी मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनि मेरे मेरी बात सुन लीजिए गणेश जी यही

1740
02:10:09,560 --> 02:10:13,760
यही डिले होता है यह चर्चा इतना अभी दो दो घंटा 12

1741
02:10:13,760 --> 02:10:17,800
मिनट हो गया कोई परिणाम नहीं निकला कोई परिणाम नहीं

1742
02:10:17,800 --> 02:10:22,200
निकला ऐसा प्रश्न ही कर रहे जिससे निकलेगा

1743
02:10:22,200 --> 02:10:26,240
कुछ होने टॉप आए थे वो हो ही नहीं

1744
02:10:26,240 --> 02:10:30,320
रहा है फालतू का प्रश्न कर रहा है क्या होगा नहीं वो

1745
02:10:30,320 --> 02:10:34,440
आपके लिए फालतू है गणेश जी वो आपके लिए फालतू लग रहा है ना

1746
02:10:34,440 --> 02:10:38,800
बेसिक पहले क्लियर तो करिए बेसिक के बाद ही तो आगे बढ़ेंगे ना कि आपका मत के सिद्धांत

1747
02:10:38,800 --> 02:10:42,800
के हिसाब से ये क्वेश्चन जो चाहे जो ज्ञान गंगा आपकी जो पुस्तकें

1748
02:10:42,800 --> 02:10:46,440
हैं उसके ऊपर डिस्कशन होगा ना चाहे हमारे धर्म ग्रंथों के ऊपर डिस्कशन

1749
02:10:46,440 --> 02:10:50,600
होगा ना आपका बेसिक मत क्या है वो जानने की इच्छा

1750
02:10:50,600 --> 02:10:54,720
हो रही है जब तक वो क्लियर नहीं होगा तब तक व आगे नहीं बढ़ सकता ना

1751
02:10:54,720 --> 02:10:58,800
आदमी और उसी उसी को क्लियर करने के लिए आपके द्वारा ये सब

1752
02:10:58,800 --> 02:11:02,840
क्वेश्चन हो रहा है और क्वेश्चन पर आप इतना जब घुमाएंगे ना तो ऐसे ही डिले

1753
02:11:02,840 --> 02:11:06,840
होता जाएगा आपको नहीं आ रहा है आप यही क्यूट कर लीजिए कि सर

1754
02:11:06,840 --> 02:11:10,920
ठीक है मेरे को नहीं समझ में आ रहा आप आगे बढ़ तब जाकर अगला क्वेश्चन होगा आपके

1755
02:11:10,920 --> 02:11:15,120
पास में जब नहीं आ रहा है तो हम भी तो हम

1756
02:11:15,120 --> 02:11:19,240
भी बहुत बड़ा सर्व ज्ञानी थोड़ी है अभी इन्होने एक

1757
02:11:19,240 --> 02:11:23,480
बगा करेगा आएगा तो ठीक है नहीं आएगा तो भाई तू बता दे भाई

1758
02:11:23,480 --> 02:11:27,880
तू ही बता दे तेरा क्या मत है हम तो वही कर देंगे हम

1759
02:11:27,880 --> 02:11:32,160
उसम से दही में से मथा नहीं करने लग जाए ना खिचड़ी नहीं बचाएंगे हमें

1760
02:11:32,160 --> 02:11:36,400
पता है तो ठीक है नहीं पता है तो फिर मेरे को नहीं पता आप बताओ जी यही तो बात

1761
02:11:36,400 --> 02:11:41,360
है ना गणेश जी आगे बढ़ नहीं आ रहा है तो आगे बढ़

1762
02:11:41,360 --> 02:11:45,440
आ ऐसा है गणेश जी ऐसा है अभी थोड़ी देर पहले आपने बोला

1763
02:11:45,440 --> 02:11:49,440
भी था यह भाव प्रकट किया था कि हम नहीं बता सकते हमें नहीं पता

1764
02:11:49,440 --> 02:11:53,440
यह भाव आपने प्रकट किया था मगर फिर मैंने आपको एक क्वेश्चन कर लिया कि

1765
02:11:53,440 --> 02:11:58,240
आप क्या तत्व ज्ञानी की शरण में नहीं है तो आपका ईगो हर्ट हो गया

1766
02:11:58,240 --> 02:12:01,680
ये बात है अच्छा

1767
02:12:01,680 --> 02:12:05,760
सुनिए ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता को हम लोग और भी तरीके

1768
02:12:05,760 --> 02:12:10,360
से जांच सकते हैं जैसे कि आपने कहा सर्वशक्तिमान आपने

1769
02:12:10,360 --> 02:12:16,360
कहा ईश्वर अपनी शक्ति के रूप में सर्वव्यापक

1770
02:12:16,720 --> 02:12:22,080
है जी ठीक है जी कहा था अच्छा

1771
02:12:22,080 --> 02:12:26,080
तो मैं वैसे इसमें आपसे प्रमाण मांग सकता हूं इसका

1772
02:12:26,080 --> 02:12:30,640
प्रमाण कहां है मगर अभी प्रमाण वाले चैप्टर पर हम लोग आएंगे आगे

1773
02:12:30,640 --> 02:12:34,880
तो आपने कहा कि ईश्वर सर्वत्र व्यापक है मगर शक्ति के रूप में वो स्वयं

1774
02:12:34,880 --> 02:12:38,960
नहीं है जी यानी कि

1775
02:12:38,960 --> 02:12:44,960
शक्ति और ईश्वर में थोड़ा बहुत अंतर है

1776
02:12:52,520 --> 02:12:56,720
जी क सकते हैं थोड़ा बहुत अंतर

1777
02:12:56,720 --> 02:13:00,960
है ऐसा समझ लीजिए जैसे रसोई

1778
02:13:00,960 --> 02:13:05,080
घर में मिर्च जब छोक लगाते हैं मिर्च का सब्जी

1779
02:13:05,080 --> 02:13:09,280
में देने के लिए तो उसका जो निराकार शक्ति

1780
02:13:09,280 --> 02:13:13,400
अगल बगल में बैठे लोगों के नाक में जाता है तो सिकता है लेकिन

1781
02:13:13,400 --> 02:13:17,560
मूल रूप में जो मिर्च व रसोई घर में होता है और

1782
02:13:17,560 --> 02:13:21,760
उनका निराकार शक्ति हर जगह व्याप्त हो जाता है ऐसा समझ लीजिए

1783
02:13:21,760 --> 02:13:26,040
तो जो जो स्वयं मिर्च है उसमें और

1784
02:13:26,040 --> 02:13:30,240
उसकी जो गं फैल रही है जी उसम

1785
02:13:30,240 --> 02:13:34,400
अंतर है है ना जो कार्य मिर्च कर सकती

1786
02:13:34,400 --> 02:13:38,400
है वो कार्य वो गंद नहीं कर सकती और हो सकता है कि

1787
02:13:38,400 --> 02:13:43,760
जो कार्य गंद कर सकती हो व कार्य मिर्च ना कर सकती

1788
02:13:43,760 --> 02:13:48,000
हो चलो दूसरी लाइन को हटा देते हैं जो कार्य मिर्च

1789
02:13:48,000 --> 02:13:53,840
कर सकती है वो कार्य गंद नहीं कर सकती ना तो ना पड़ेगा ना

1790
02:13:53,840 --> 02:13:58,120
जी यानी कि मिर्च में और उसकी गंध

1791
02:13:58,120 --> 02:14:02,200
में जिस प्रकार से अंतर है कहीं ना कहीं जो गंध है यानी

1792
02:14:02,200 --> 02:14:06,520
कि कहीं ना कहीं जो शक्ति है वो ईश्वर के सापेक्ष थोड़ी

1793
02:14:06,520 --> 02:14:11,440
कमतर

1794
02:14:11,440 --> 02:14:15,600
है जैसे मिर्च से उसकी जो गंध है वो थोड़ी कमतर

1795
02:14:15,600 --> 02:14:19,600
है जो मिर्च कर लेगी वो गंद नहीं कर

1796
02:14:19,600 --> 02:14:23,720
सकती ठीक है थ क

1797
02:14:23,720 --> 02:14:27,880
निर्णय नहीं कर सकेंगे इस विषय में हम इसका

1798
02:14:27,880 --> 02:14:32,280
भी तत्व ज्ञान नहीं है आपको जी

1799
02:14:32,280 --> 02:14:35,600
जानते श्वर के बारे

1800
02:14:35,600 --> 02:14:39,960
में मिर्च की बात अलग थी तो फिर मिर्च

1801
02:14:39,960 --> 02:14:45,960
का उदाहरण मत दीजिए ऐसा उदाहरण दीजिए जिसकी बात अलग ना हो चलिए

1802
02:14:47,800 --> 02:14:51,840
बताइए देख सेम टू सेम मिर्च की तरह ही

1803
02:14:51,840 --> 02:14:56,040
कार्य करते हैं जैसा आपको अपना

1804
02:14:56,040 --> 02:15:00,080
आपको अपना भाव क्लियर कर द जिसे हमारी जो वो है बात बहुत

1805
02:15:00,080 --> 02:15:04,440
अच्छे से हो रही है हम लोग जल्दी से आगे बढ़ जाएंगे जी क्या भगवान

1806
02:15:04,440 --> 02:15:08,840
यानी पूर्ण ब्रम जो है उसम मुझे दिक्कत हो जाती लोग भगवान ईश्वर

1807
02:15:08,840 --> 02:15:12,920
परम बम पूर्ण ब्रम तो जो पूर्ण ब्रम है उनकी जो शक्ति

1808
02:15:12,920 --> 02:15:17,000
है शक्ति में और पूर्ण ब्रह्म में एक सूत

1809
02:15:17,000 --> 02:15:21,200
का भी अंतर है या नहीं है अंतर है

1810
02:15:21,200 --> 02:15:25,520
तो शक्ति अलग है अंतर नहीं है तो यानी कि हमें मानना पड़ेगा कि ईश्वर

1811
02:15:25,520 --> 02:15:31,280
ही

1812
02:15:31,280 --> 02:15:37,280
है जी अंतर है कि

1813
02:15:38,920 --> 02:15:43,080
नहीं ये तो हम नहीं बता सकेंगे शक्ति में और परमात्मा

1814
02:15:43,080 --> 02:15:47,440
में ईश्वर अंतर है या नहीं है क्योंकि

1815
02:15:47,440 --> 02:15:52,200
परमात्मा शक्ति के रूप में ही विराजमान है

1816
02:15:52,200 --> 02:15:56,200
तो कई देखिए ऐसा है मैं

1817
02:15:56,200 --> 02:16:00,240
ये प्रश्न क्यों कर रहा हूं मैं आपको इसके बारे में बता दूं ऐसा है

1818
02:16:00,240 --> 02:16:04,360
कि जब हम दो एंटिटी मान लेते हैं दो एंटिटी मान लेते हैं

1819
02:16:04,360 --> 02:16:08,400
कि ईश्वर है और उसकी शक्ति है ईश्वर की जब दूसरी एंटिटी मानेंगे

1820
02:16:08,400 --> 02:16:12,800
तो खटा से कहीं ना कहीं जो दूसरी एंटिटी होगी व बाधित

1821
02:16:12,800 --> 02:16:17,040
होगी क्योंकि वह ईश्वर से थोड़ा सा भिन्न है और भिन्न जैसे

1822
02:16:17,040 --> 02:16:21,200
होगी तो श्वर कौन है बाधित नहीं है वो बात अलग है को मानते

1823
02:16:21,200 --> 02:16:25,720
उससे हम आगे आ चुके हैं और उसी को हम क्लियर कर रहे हैं ईश्वर की बाध्यता को

1824
02:16:25,720 --> 02:16:29,800
तो जब हम दो एंटिटी मान लेते हैं कोई दो तत्व मान लेते हैं ईश्वर

1825
02:16:29,800 --> 02:16:33,960
और उसकी शक्ति तो जब हम अलग मान रहे शक्ति को तो हमें शक्ति को कहीं ना

1826
02:16:33,960 --> 02:16:38,200
कहीं कमतर मानना पड़ेगा और जब हम कमतर मान लेते हैं उसकी

1827
02:16:38,200 --> 02:16:42,560
शक्ति को तो फिर सवाल ये उठेगा कि जहां पर ईश्वर है

1828
02:16:42,560 --> 02:16:46,600
जितनी पावरफुल सत्ता वहां पर है ईश्वर की क्या उतनी

1829
02:16:46,600 --> 02:16:50,600
ही पावरफुल सत्ता सब जगह है अगर है तभी

1830
02:16:50,600 --> 02:16:54,600
वो एक रस कहलाएगा जी तभी

1831
02:16:54,600 --> 02:16:59,400
वो सर्वत्र बराबर रूप से सर्वव्यापक कहलाएगा अगर नहीं है

1832
02:16:59,400 --> 02:17:04,520
उसकी सर्वत्र सत्ता समान रूप से तो फिर वो फिर बाधित हो

1833
02:17:04,520 --> 02:17:08,880
गया जी बताइए तो

1834
02:17:08,880 --> 02:17:12,960
इस बारे में आपको जवाब नहीं है हम लोग दूसरा क्लियर कर लेते हैं

1835
02:17:12,960 --> 02:17:17,280
जी दूसरा प दूसरा कर लेते जी ईश्वर की सर्वशक्ति

1836
02:17:17,280 --> 02:17:21,680
मत्ता पही एक बात और है कि जब ईश्वर इस संसार को बनाता

1837
02:17:21,680 --> 02:17:25,760
है आपका कहना है कि वो जो एक आकृति है सफेद

1838
02:17:25,760 --> 02:17:29,920
दाढ़ी वाली जिसको आप कबीर कहते हैं वो उसका परम रूप

1839
02:17:29,920 --> 02:17:33,920
है एक बात हम आपसे पूछना चाह रहे हैं कबीर साहब के विषय में

1840
02:17:33,920 --> 02:17:37,960
आपका क्या विचार है कबीर साहब कबीर साहब एक

1841
02:17:37,960 --> 02:17:42,080
संत थे जहां तक उनकी बातें जो अपय

1842
02:17:42,080 --> 02:17:46,120
ग्रंथ है वेद उनसे मैच खाती है तो हमारे

1843
02:17:46,120 --> 02:17:50,120
लिए वो सब बातें सम्माननीय है ग्रहण करने योग्य है

1844
02:17:50,120 --> 02:17:54,240
यदि वो वेद की सीमा को तोड़ती है यदि उनकी बातों का ऐसा अर्थ कोई

1845
02:17:54,240 --> 02:17:58,480
निकाल रहा है जो वेद की सीमा को तोड़ रहा है सर्वशक्तिमान

1846
02:17:58,480 --> 02:18:01,960
की सर्वशक्ति मत्ता को भंग कर रहा है तो वहां पर व

1847
02:18:01,960 --> 02:18:06,560
हम दूर से हाथ जोड़ लेंगे भैया हमारे लिए ये स्वीकार्य नहीं है

1848
02:18:06,560 --> 02:18:10,880
तो कबीर साहब की जो ऐसी वाणिया है जिनका हमारे जो आचार्य है उन्होंने

1849
02:18:10,880 --> 02:18:14,920
ऐसा अर्थ निकाला है जो कि ग्रहण करने योग्य है मगर

1850
02:18:14,920 --> 02:18:18,920
आपके जो जो गुरु है वो

1851
02:18:18,920 --> 02:18:22,920
ऐसा अर्थ निकालते हैं जो वेदों के बाहर है

1852
02:18:22,920 --> 02:18:27,040
तो फिर हम अगर वो अर्थ आप रखेंगे कबीर का तो व अर्थ हमारे लिए

1853
02:18:27,040 --> 02:18:31,960
स्वीकार नहीं होगा ठीक

1854
02:18:31,960 --> 02:18:37,960
हैय विषयात हो रहा है अभी हम लोग ईश्वर की सर्व

1855
02:18:38,120 --> 02:18:42,240
मता मैं इसीलिए आया था गणेश जी देखिए आपने अपना

1856
02:18:42,240 --> 02:18:46,600
क्वेश्चन भी रखा उनका रिप्लाई भी आ गया जबक वो विषय से हट के था आपका

1857
02:18:46,600 --> 02:18:51,080
विषयात हो रहा था फिर भी उन्होने रिप्लाई किया ठीक है तो

1858
02:18:51,080 --> 02:18:55,440
उस खत्म हो जाने दो ना प्लीज जो चर्चा चल रही है

1859
02:18:55,440 --> 02:18:59,720
जिस क्वेश्चन पर उन्होने अभी होल्ड करके और आपके क्वेश्चन का उन्होने रिप्लाई

1860
02:18:59,720 --> 02:19:03,760
किया था तो फिर आप उसी क्वेश्चन पर उसी सब्जेक्ट पर दूसरा क्वेश्चन रख

1861
02:19:03,760 --> 02:19:07,920
रहे हैं वो इसीलिए कहते हैं कि व विषयात होता चला जाता है जो मेन टॉपिक

1862
02:19:07,920 --> 02:19:12,080
होती है व वही पर होल्ड हो जाती है उसका कोई रिजल्ट नहीं निकलता और दूसरी

1863
02:19:12,080 --> 02:19:17,280
टॉपिक स्टार्ट हो जाती है वहा से तो खिचड़ी बन जाता है उसम

1864
02:19:17,280 --> 02:19:21,440
देखिए आपको कोई करना हैरी बानि गणेश जी अगर

1865
02:19:21,440 --> 02:19:25,600
आपको फिर से उस पर कोई क्वेश्चन करना है तो वो क्वेश्चन रख दीजिए ठीक है

1866
02:19:25,600 --> 02:19:29,680
फिर उसके बाद में मूल प्रश्न पर आ जाइएगा उसके अलावा फिर कोई दूसरा प्रश्न

1867
02:19:29,680 --> 02:19:33,920
नहीं होना चाहिए मैं आपके लिए इतना कह सकता हूं शिवान जी से रिक्वेस्ट करके कि जो भी

1868
02:19:33,920 --> 02:19:38,080
उनका प्रश्न है आपका वह प्रश्न आप रख लीजिए रखने के बाद फिर आप मूल प्रश्न

1869
02:19:38,080 --> 02:19:42,240
पर आ जाइएगा प्रश्न खत्म नहीं हुआ उस

1870
02:19:42,240 --> 02:19:44,880
को रि नहीं

1871
02:19:44,880 --> 02:19:49,160
हु विषय बोलिए पहली बात तो विषय कुछ रखा

1872
02:19:49,160 --> 02:19:53,320
ही नहीं गया जब जिसम प्रारंभ हुआ चर्चा उस समय कुछ विषय विशेष

1873
02:19:53,320 --> 02:19:59,320
था ही

1874
02:20:02,080 --> 02:20:06,080
नहीं सुन सुन लीजिए पहली बात मैंने शुरू में य कहा था कि हमारी

1875
02:20:06,080 --> 02:20:10,160
चर्चा केवल आज नहीं होगी जो आपको मुख्य विषय

1876
02:20:10,160 --> 02:20:14,200
लगते हैं हो सकता आने वाले दिनों में उस पर बात हो हम जो मुख्य

1877
02:20:14,200 --> 02:20:18,400
लगते उस भी तो बात करेंगे ना तो

1878
02:20:18,400 --> 02:20:22,720
श जी आपसे ऐसा करते अगला

1879
02:20:22,720 --> 02:20:27,120
जो टॉपिक्स होगा तो कब होगा हमको बता दीजिए अगला टॉपिक्स में हम लोग

1880
02:20:27,120 --> 02:20:31,920
फिर से चर्चा करेंगे क्योंकि अभी चार बजने वाला है और

1881
02:20:31,920 --> 02:20:35,960
अभी जो एक छोटा सा टॉपिक है वो करते जाइए जिसे सर्वशक्तिमान का चैप्टर हम

1882
02:20:35,960 --> 02:20:40,160
लोग क्लोज कर दे ठीक है एक करते जाइए पा मिनट

1883
02:20:40,160 --> 02:20:44,240
भी हम समय दे सकेंगे पा मिनट के बाद फिर बाद में दूसरे दिन समय

1884
02:20:44,240 --> 02:20:48,280
दिया जाएगा ठीक है ठीक पा नहीं पा मिनट में हो जाएगा मे भी अगर आपने

1885
02:20:48,280 --> 02:20:52,440
कोऑपरेट किया तो जी कह रहा हूं कि जोय कबीर के रूप

1886
02:20:52,440 --> 02:20:56,640
में दिखने वाली जो आकृति है जिसको आप ईश्वर का नित्य

1887
02:20:56,640 --> 02:21:00,680
रूप बोलते हैं सनातन रूप बोलते हैं तो

1888
02:21:00,680 --> 02:21:04,840
क्या ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया है पहले तो ये बता दीजिए सब कुछ

1889
02:21:04,840 --> 02:21:08,920
ईश्वर ने ही बनाया है बिल्कुल कुछ भी ऐसा नहीं है जो

1890
02:21:08,920 --> 02:21:13,360
ईश्वर ने नहीं बनाया नहीं ऐसा कुछ नहीं है सब कुछ बनाया है

1891
02:21:13,360 --> 02:21:17,160
अच्छा तो ये बताइए कि जब वो शुरुआत होती

1892
02:21:17,160 --> 02:21:21,320
है सृष्टि की तो जहां वो खड़े होते हैं आकाश में कहीं पर खड़े

1893
02:21:21,320 --> 02:21:25,440
होते हैं तो उनके जैसे ये लेफ्ट कंधा है और लेफ्ट

1894
02:21:25,440 --> 02:21:29,640
कंधे से लेकर के राइट कंधे के बाद स्पेस होता है खाली

1895
02:21:29,640 --> 02:21:33,680
खाली स्पेस होता है ना कोई भी आकृति तभी बन सकती है जब

1896
02:21:33,680 --> 02:21:37,680
उस आकृति का शुरू हो रही हो और अंत हो रहा हो और उसके अगल बगल खाली

1897
02:21:37,680 --> 02:21:41,840
जगह हो तभी तो आकृति बनेगी जी है

1898
02:21:41,840 --> 02:21:46,040
ना अगर कबीर कबीर जी वो जो परम परमेश्वर

1899
02:21:46,040 --> 02:21:50,200
का परम स्वरूप है परमाथ स्वरूप है तो उनके लेफ्ट

1900
02:21:50,200 --> 02:21:54,240
क उधर और राइट कंधे के उधर जो खाली जगह थी

1901
02:21:54,240 --> 02:21:58,240
वो किसने बनाई जब वह सृष्टि बना रहे

1902
02:21:58,240 --> 02:22:04,000
हैं तब शुरू कर रहे कबीर जी ने बनाई

1903
02:22:04,000 --> 02:22:08,240
थी मतलब वो जब लेफ्ट कंधा और राइट कंधे से पहले

1904
02:22:08,240 --> 02:22:12,240
भी वह किसी रूप में विद्यमान थे तभी उन्होंने बनाई थी उसके बाद व

1905
02:22:12,240 --> 02:22:16,240
अपने साकार स्वरूप में

1906
02:22:16,240 --> 02:22:20,560
आए साकार स्वरूप तभी पॉसिबल है जब साकार के

1907
02:22:20,560 --> 02:22:24,720
आस पास कुछ खाली स्पेस हो अन्यथा आकार का पॉसिबिलिटी

1908
02:22:24,720 --> 02:22:28,760
नहीं है जब इस कंधे के बाहर कुछ खाली होगा जब

1909
02:22:28,760 --> 02:22:32,560
इस कंधे के बाहर कुछ खाली होगा तब य कहा जा सकता है य एक आकृति

1910
02:22:32,560 --> 02:22:36,640
है और सब कुछ एक ही जैसा है तो कही नहीं

1911
02:22:36,640 --> 02:22:40,680
सकते तो जो जगह जहां पर वह खड़े हैं सबसे शुरू

1912
02:22:40,680 --> 02:22:44,920
में सृष्टि रचना वह जगह किसने बनाई

1913
02:22:44,920 --> 02:22:49,160
कबीर जी ने बनाई परमात्मा ने बनाया आप मेरी बात समझ

1914
02:22:49,160 --> 02:22:53,520
नहीं रहे हो अगर वो शुरुआत से ही साकार स्वरूप में है

1915
02:22:53,520 --> 02:22:57,680
तो हमें मानना पड़ेगा कि जहां पर व जहां पर व अंतरिक्ष में होते

1916
02:22:57,680 --> 02:23:01,880
हैं हवा में होते हैं जो उनके आसपास की खाली जगह होती है

1917
02:23:01,880 --> 02:23:06,240
वो उन्होंने नहीं बनाई अगर वह शुरू से साकार

1918
02:23:06,240 --> 02:23:10,280
है तो तो हमें मानना पड़ेगा कि जहां पर व खड़े होकर सृष्टि बनाते

1919
02:23:10,280 --> 02:23:14,760
हैं वह भी शुरू से है वो भी नित्य है यानी कि वह संसार

1920
02:23:14,760 --> 02:23:19,240
जहां पर कबीर जी है वो उन्होंने नहीं बनाया

1921
02:23:19,240 --> 02:23:23,360
[संगीत] यानी कि एक तरीके से कहा जाए तो

1922
02:23:23,360 --> 02:23:28,880
आकाश अंतरिक्ष यह सब उन्होंने नहीं

1923
02:23:28,880 --> 02:23:33,800
बनाया ऐसा नहीं है अगर हम ऐसा मानते हैं

1924
02:23:33,800 --> 02:23:37,880
तो जिस प्रकार हम लोग कहते हैं कि जैसे आप लोगों का विचार

1925
02:23:37,880 --> 02:23:42,520
है कि परमात्मा निराकार है सर्वत्र व्यापक है एक रस एक रस हैने

1926
02:23:42,520 --> 02:23:46,680
नहीं परमात्मा सिर्फ निराकार है मैंने य नहीं कहा मगर जो

1927
02:23:46,680 --> 02:23:50,800
परम स्वरूप है वो व्यवहार में ना आ सकने वाला

1928
02:23:50,800 --> 02:23:55,000
है उसकी अगर हम आकृति डिसाइड कर देंगे तो हमें यह मानना पड़ जाएगा

1929
02:23:55,000 --> 02:23:59,720
कि उससे जो अगल बगल की जगह व उसने नहीं बनाई या

1930
02:23:59,720 --> 02:24:04,520
जिसे हम प्रकृति कहते हैं जी जी हम

1931
02:24:04,520 --> 02:24:09,240
को आपके भगवान बना रहे हैं प्रकृति को

1932
02:24:09,240 --> 02:24:13,440
जी हम इस बात का खंडन करने लग जाए तो हम यह भी जैसा

1933
02:24:13,440 --> 02:24:17,480
कि आपका मत है कि परमात्मा सर्वत्र एक रस

1934
02:24:17,480 --> 02:24:21,520
व्याप्त है निराकार है और हमने ये

1935
02:24:21,520 --> 02:24:25,560
भी सुना है कि ये जो संसार जो दिखाई देता है ये भी

1936
02:24:25,560 --> 02:24:29,840
भगवान का ही स्वरूप है अगर ऐसा है तो जिस

1937
02:24:29,840 --> 02:24:33,960
समय यह धरती आकाश नहीं था उसम परमात्मा

1938
02:24:33,960 --> 02:24:38,760
क्या इस जगह नहीं थे क्या बोल रहे हो भाई

1939
02:24:38,760 --> 02:24:42,800
मेरा यश नहीं था तो सब कुछ भगवान में ही लीन

1940
02:24:42,800 --> 02:24:44,200
होता है भगवान

1941
02:24:44,200 --> 02:24:48,240
ही स्वयं जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट हो जाते हैं

1942
02:24:48,240 --> 02:24:52,560
तो फिर सकार नहीं जब भगवान में सब कुछ भगवान में लीन था

1943
02:24:52,560 --> 02:24:56,800
फिर बाहर हो गया तो जिस समय बाहर नहीं होता उस मैंने कहा तो

1944
02:24:56,800 --> 02:25:01,360
जो उनका परम रूप है वो वो साकार नहीं

1945
02:25:01,360 --> 02:25:05,760
है बनते वो साकार होते हैं

1946
02:25:05,760 --> 02:25:09,880
जो उनका परम परमार्थ का रूप है शाश्वत रूप है वह

1947
02:25:09,880 --> 02:25:13,920
व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है उसके बाद जब वोह

1948
02:25:13,920 --> 02:25:18,400
सृष्टि रचना करते हैं तो वो साकार होते हैं वो सृष्टि बनाते

1949
02:25:18,400 --> 02:25:23,120
हैं आपका कहना शुरू से ही साकार है

1950
02:25:23,120 --> 02:25:27,240
तो जब वो शुरू से साकार है देखिए फिर से वही हो रहा है कि आप जो

1951
02:25:27,240 --> 02:25:31,240
है मेरे से प्रश्न करके अपनी बात को सही सिद्ध करना चाहते हैं सुन लीजिए सुन

1952
02:25:31,240 --> 02:25:35,240
लीजिए रिप्लाई मिलेगा आपको अरे गणेश जी आपके सवालों

1953
02:25:35,240 --> 02:25:39,320
का आंसर वही दे रहे हैं व समझा देंगे उनका एक्चुअली मत क्या है

1954
02:25:39,320 --> 02:25:43,680
वो किस परमेश्वर को मानते हैं उनकी एक्चुअली विचार जान लीजिए फिर आप उसको

1955
02:25:43,680 --> 02:25:47,720
काउंटर करिएगा जी बोलिए

1956
02:25:47,720 --> 02:25:53,320
अपनी अपनी बात क्लियर कर लीजिए मैंने पूछा है अगर

1957
02:25:53,320 --> 02:25:57,560
परमात्मा अगर परमात्मा शुरू से साकार है तो इसका

1958
02:25:57,560 --> 02:25:59,480
मतलब शुरू से शुरू से

1959
02:25:59,480 --> 02:26:04,080
परमात्मा के अगल बगल खाली जगह थी यानी कि परमात्मा

1960
02:26:04,080 --> 02:26:10,080
उस खाली जगह को बनाने वाला नहीं

1961
02:26:13,960 --> 02:26:18,040
है देखिए यह एक तर्क का विषय

1962
02:26:18,040 --> 02:26:22,200
है कि अगर परमात्मा सकार रूप में शुरू से थे तो

1963
02:26:22,200 --> 02:26:26,320
उसके अगल बगल बनाने वाले नहीं है बाद में किसी दूसरे ने बना दिया या पहले जहां पर

1964
02:26:26,320 --> 02:26:30,720
थे वोह किसी दूसरे ने बनाया यह एक अलग विषय है

1965
02:26:30,720 --> 02:26:34,840
लेकिन इसी विषय को लेकर के क्योंकि हमारे पास पा मिनट पहले ही समय

1966
02:26:34,840 --> 02:26:38,880
हम दे चुके थे तो अगला जो हम लोग एक जगह फिर

1967
02:26:38,880 --> 02:26:43,280
से हम लोग इकट्ठा होंगे उसम इसी टॉपिक से हम लोग प्रश्

1968
02:26:43,280 --> 02:26:49,280
को शुरुआत करेंगे ठीक है ठीक है चलिए जय श्री राम

1969
02:26:52,120 --> 02:26:56,120
आपके आने की वजह से काफी सकारात्मक मोड़ आ गया इस तरह से

1970
02:26:56,120 --> 02:27:00,720
एक मॉडरेटर होना चाहिए उनको ऐसा लगता है ना शिवांश जी की

1971
02:27:00,720 --> 02:27:04,800
आप उनको बोलने नहीं देते मैं जहां तक यह रिलाइज किया हूं

1972
02:27:04,800 --> 02:27:09,000
उनको यह उनके मन में य बैठ जाता कि यह बंदा बोलने ही नहीं देता बोलने नहीं देता बोलने

1973
02:27:09,000 --> 02:27:13,000
नहीं देता जबक वो चीज होती है

1974
02:27:13,000 --> 02:27:17,160
हा जनन चीज वो हम लोग समझते हैं जो आम जन

1975
02:27:17,160 --> 02:27:21,160
मानस है जो हमारा सिद्धांत वो आदमी आराम से जाता में

1976
02:27:21,160 --> 02:27:25,320
क्या कहना चाह रहे हैं लेकिन उनको यह लगता है ना कि आप यह बंदा बोलने नहीं

1977
02:27:25,320 --> 02:27:29,400
इससे क्या बात करें तो मैं इसीलिए कह रहा ठीक है कोई बात नहीं आप थोड़ा सा

1978
02:27:29,400 --> 02:27:33,880
आराम से बात करिए बंदा जेनन लग रहा है क्योंकि काफी बंदों से ऐसा

1979
02:27:33,880 --> 02:27:37,880
मतलब सकारात्मक वाली जो बातें होती है हो नहीं पाती है बंद जेनन लग रहा था

1980
02:27:37,880 --> 02:27:42,400
इसलिए बो थोड़ा बात सुनते क्या इसका मत

1981
02:27:42,400 --> 02:27:47,240
हैने इनके जितने भी जेनन बंदे हो ना वो बातें

1982
02:27:47,240 --> 02:27:51,760
जो क्वेश्चन आपका रहता है वो नहीं समझ पाते हैं जितने भी जनन हो अब

1983
02:27:51,760 --> 02:27:55,840
जहां पेड़ ना रुक वहा रेण प्रधान एक कहावत है हमारे यहां प जहां

1984
02:27:55,840 --> 02:28:00,040
पर पेड़ ना रुक वहा रेण प्रधान हो जाता है तो वो वाली बात है इनके अंदर

1985
02:28:00,040 --> 02:28:04,200
में च ठीक है समथिंग इज बेटर देन नथिंग मतलब भाई अच्छा

1986
02:28:04,200 --> 02:28:07,920
तो अच्छा गा का होता हैने ये देखा है

1987
02:28:07,920 --> 02:28:12,080
कि जहां पर कुछ ऐसी बात आती है जो इनको लग रहा है कि भाई इसमें

1988
02:28:12,080 --> 02:28:16,160
मैं या तो जानता नहीं हूं या फिर उनको लग रहा है कि मेरी कोई कही हुई बात जो

1989
02:28:16,160 --> 02:28:20,200
है वो खत्म हो जाएगी तो ये फिर उसमें रुकना

1990
02:28:20,200 --> 02:28:24,640
चुप रहना या फिर मेरे से मेरे बारे में पूछने लगना

1991
02:28:24,640 --> 02:28:28,640
इस तरह से चीजें शुरू कर देते हैं अब उसमें क्या होता है वो देर होती जाती देर होती

1992
02:28:28,640 --> 02:28:32,640
जाती देर हो उसका कुछ निष्कर्ष नहीं भाई सीधे सिंपल क दो

1993
02:28:32,640 --> 02:28:36,760
य तत्व ज्ञान मुझे नहीं है मेरे तत्व ज्ञानी ने नहीं दिया य ज्ञान और नहीं दिया

1994
02:28:36,760 --> 02:28:40,760
है इनकी चीजों में यह तत्व ज्ञान जो वास्तविक है य सब है

1995
02:28:40,760 --> 02:28:46,080
ही नहीं प्रमाण है बस

1996
02:28:46,080 --> 02:28:51,200
बस और उनका अपना मन माना

1997
02:28:51,200 --> 02:28:55,240
तर्क का मतलब नहीं समझते हैं शिवान जी इनको बस यही लगता है कि जो गुरु जी ने मेरे को

1998
02:28:55,240 --> 02:28:59,440
जो प्रमाण दे दिए वही प्रमाण ले जाकर दिखा दूंगा दूसरों को तो दूसरा काउंटर

1999
02:28:59,440 --> 02:29:03,160
नहीं करेगा हा हा ये तो सही लिखा है

2000
02:29:03,160 --> 02:29:07,400
भाई इनके गुरु जी भी तर्क देते हैं बहुत लो लेवल

2001
02:29:07,400 --> 02:29:11,760
के कक देते हैं फिर हम उनसे कहेंगे तुम गुरु तर्क क्यों दे रहे

2002
02:29:11,760 --> 02:29:15,800
हैं केवल प्रमाण की बात करो तक की बात बंद कर दो अभी

2003
02:29:15,800 --> 02:29:20,600
देखो तुम्हारी सारी तावली सब बेकार हो जाएगी तक के बिना

2004
02:29:20,600 --> 02:29:24,680
चलिए दो घंटे 30 मिनट की लाइव है

2005
02:29:24,680 --> 02:29:29,040
चलिए और सब बढ़िया तोय सोच रहा था क गा हो गए

2006
02:29:29,040 --> 02:29:33,720
आप गायब हो गए अचानक से काफी लंबा समय हो गया था आपको देते हु

2007
02:29:33,720 --> 02:29:37,840
बाहर गया कलने लाइव किया एक लाइव किया

2008
02:29:37,840 --> 02:29:43,840
कल आए थे एक दिन एक दिन टीआर पहाड़ी जी वाले चैनल पर भी आप लाइव हुए थे न

2009
02:29:44,280 --> 02:29:48,440
में नहीं उसके पहले की बात

2010
02:29:48,440 --> 02:29:52,560
का जी कुंभ में जाके है

2011
02:29:52,560 --> 02:29:57,240
अब जाऊंगा मैं कुंभ में जाऊंगा आप

2012
02:29:57,240 --> 02:30:01,320
आपका जलवा कुछ अलग है शिवांश जी आपका आपने एक लेबल लगा दिया है मजक नहीं कर

2013
02:30:01,320 --> 02:30:05,480
रहा हूं आपने इन रामपाल जी के चेलो के ऊपर एक लेबल

2014
02:30:05,480 --> 02:30:09,600
लगा दिया ठोक दिया है ठीक है वो लेवल अब नहीं निकलेगा चाहे य

2015
02:30:09,600 --> 02:30:13,680
कितना भी फिनाइल लगा ले चाहे वो लगा ले वो नहीं

2016
02:30:13,680 --> 02:30:18,000
निकलेगा मैं तो मैं तो कभी कभी सोचता हूं भैया कि कहां ने

2017
02:30:18,000 --> 02:30:20,200
टा

2018
02:30:20,200 --> 02:30:24,200
इधर टी आर पहाड़ी जी के भी चैनल देखा था मैंने अभी पहले एल्गोरिदम नहीं

2019
02:30:24,200 --> 02:30:28,440
दिखा रहा था मेरे वाले प ये भी अच्छे से

2020
02:30:28,440 --> 02:30:32,640
अच्छे से इन्होने स्टार्ट किया हुआ है इनका तर्क भी अच्छा है र प तर्क

2021
02:30:32,640 --> 02:30:35,480
अच्छा देते

2022
02:30:35,480 --> 02:30:39,520
हैं अभी टी आर पहाड़ी जी के साथ एक संडे के

2023
02:30:39,520 --> 02:30:43,600
दिन लाइव आने वाला हूं मैं उसम उनके उनके

2024
02:30:43,600 --> 02:30:48,000
चैनल पर आक के कुछ चर्चा होंगी ठीक है ऐसे

2025
02:30:48,000 --> 02:30:52,160
ऐसे ही बनाकर आगे बढ़ना चाहिए हम

2026
02:30:52,160 --> 02:30:56,960
ऐसे सिस्टम की जरूरत है उस दिन जब मैं ट्रेन से जवाइन

2027
02:30:56,960 --> 02:30:59,320
किया अमित दस

2028
02:30:59,320 --> 02:31:02,120
भाग लिए

2029
02:31:02,120 --> 02:31:06,160
त अमित दास जी को देखता अमित दास जी को देखता तो

2030
02:31:06,160 --> 02:31:10,360
हसी आती है मुझे मैं उससे क्या चर्चा कर क्या बातें करें व

2031
02:31:10,360 --> 02:31:15,640
जैसे ही चैनल पर आता है ज मेरे को हसी आती है ऐ रोक नहीं पाता अपने आपको

2032
02:31:15,640 --> 02:31:19,920
म समझ में नहीं आ रहा उसके लिए गुरु

2033
02:31:19,920 --> 02:31:24,120
गोविंद जी जो है ना वो सही बंदे

2034
02:31:24,120 --> 02:31:28,400
गीता किसने बोला काल ने बोला

2035
02:31:28,400 --> 02:31:32,440
ह आ जब काल ने उसम मिलावट

2036
02:31:32,440 --> 02:31:38,440
कर दी है उसम गलत

2037
02:31:39,640 --> 02:31:43,800
बोला उनको क हो जाती है ब हराय बंदा

2038
02:31:43,800 --> 02:31:47,920
हमारे हमारी टॉपिक पर क्यों बात कर रहा है कन्फ्यूजन उनको होता है जबक

2039
02:31:47,920 --> 02:31:52,560
वो भाई हम समझते कि जजह से क्या बोल रहे कालने बोला

2040
02:31:52,560 --> 02:31:56,920
है बात हुई कल वाली लाइव में बात हुई थी भैया ने बोला था

2041
02:31:56,920 --> 02:32:00,920
जबसे प्रश्न सुनते कि य पर खाली जग थी तो य ईश्वर कौन

2042
02:32:00,920 --> 02:32:06,760
था तो चौक जाते क्योंकि कभी सुने नहीं हैने

2043
02:32:06,760 --> 02:32:11,120
प्रश्न पही तत्वदर्शी का जो

2044
02:32:11,120 --> 02:32:15,160
उदाहरण व देते एपल गीता जी में यहा पर लिखा हुआ है

2045
02:32:15,160 --> 02:32:19,200
गीता जी ने तो कालने बोला है काल तो भरता है पॉइंट सही

2046
02:32:19,200 --> 02:32:24,080
है अब वो उनका क से रिप्लाई नहीं बनता उनको

2047
02:32:24,080 --> 02:32:29,000
बिल्कुल चलिए कोई बात नहीं जी काफी लंबा समय हो गया

2048
02:32:29,000 --> 02:32:33,160
जय श्री राम सभी को जय श्री राम हर

2049
02:32:33,160 --> 02:32:37,160
हर महादेव
